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Massage Girl in Kaushambi: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kaushambi who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kaushambi that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kaushambi massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kaushambi who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kaushambi massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kaushambi massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kaushambi who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kaushambi employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kaushambi helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kaushambi

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kaushambi at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

दोस्तो! मेरा नाम आरव है।

मैं एक बार अपने एक दोस्त अरमान के घर गया हुआ था.

वहां उसकी कोई दूर के रिश्ते में दो लड़कियां आईं हुईं थीं।

वहां एक मेला लगता था तो मैं और मेरा दोस्त मेला देखने गए।
हमारे साथ उसकी वह दोनों रिश्तेदार लड़कियां भी थीं।
वे दोनों आपस में बहनें थीं।

उनमें से एक का नाम पलक था जो उस वक्त करीब उन्नीस साल की होगी।
यह न्यू चूत सेक्सी कहानी इसी पलक की है.

हम लोगों ने वहां पर बहुत मस्ती की।

इस दौरान मैंने महसूस किया कि इस पलक का ध्यान मेरी तरफ ही रहा और वह बार-बार मेरी तरफ देखकर अजीब से अंदाज में मुस्कुरा रही थी।

बहरहाल रात करीब साढ़े बारह बजे हम लोग घर वापस आए तो इतना थक गए थे कि एक बजे तक हम सोने के लिए लेट चुके थे।

मैं काफी दिन बाद यहां आया था तो हम सब सोने के लिए एक ही कमरे में लेट गए कि कुछ बातें और कर लेंगे।

अब स्थिति यह थी कि एक तरफ अरमान की चारपाई थी, उसके बाद मेरी और मेरे साथ वाली चारपाई पर पलक और महक की चारपाई थी।

हम लोग कुछ देर बातें करते रहे.

और इसी दौरान मैंने देखा कि पलक और महक सो गई हैं और अरमान भी ऊंघने लगा था.

तो मैंने कहा- अरमान यार, बाकी बातें सुबह करेंगे. अभी तो मुझे भी नींद आ रही है।
अरमान ने कहा- हां यार, मुझे भी नींद महसूस हो रही है। ठीक है सुबह बात करेंगे।
और वह दूसरी तरफ मुंह करके लेट गया।

अभी पांच मिनट ही हुए होंगे कि मुझे ऐसे लगा जैसे पलक की चारपाई हिली है।

मैंने आंखें खोलकर देखा तो पलक उठकर लाईट बंद करने जा रही थी।

लाईट बंद करके जब वह अंधेरे में वापस अपनी चारपाई पर आई तो मैंने पूछा- पलक, लाईट क्यों बंद करदी?
उसने कहा- मुझे रोशनी में नींद नहीं आती।
मैंने कहा ‘चलो ठीक है’ और में भी आंखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगा।

अभी कुछ देर ही हुई थी कि मुझे अपने जिस्म पर किसी का हाथ महसूस हुआ जोकि धीरे-धीरे मेरी पिंडली पर से फिसलता हुआ मेरी जांघों की तरफ जा रहा था।

मैंने अंधेरे में उस हाथ पर हाथ रखा तो पता चला कि वह पलक का हाथ है।

उसने मेरा हाथ दबाकर मुझे खामोश रहने का इशारा किया।

मैं हैरान था कि ये लड़की क्या कर रही है?

पलक का हाथ फिसलता हुआ मेरे लंड तक पहुंच गया।
उसने बहुत प्यार से मेरे अकड़ते हुए लंड को अपने हाथ में लिया और उसके सुपारे को सहलाने लगी।

करीब पंद्रह मिनट तक वह मेरे लंड से खेलती रही जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो गया।

इसी दौरान मैंने भी अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और पहले धीरे-धीरे पलक के पेट पर फेरा और फिर उसके बाद उसकी छाती तक पहुंच गया।

पलक ने अपनी बत्तीस साइज की चूचियों पर फोम वाली ब्रा पहनी हुई थी।

मैंने भी ब्रा के ऊपर से ही पलक की नर्म और गर्म चूचियों को दबाना शुरू कर दिया।

उसे लंड से खेलते और मुझे चूचियों को सहलाते हुए करीब आधा घंटा गुजर चुका था।

अचानक ही पलक अपनी चारपाई से उठी और धीरे से मेरे बराबर में आकर लेट गई।
आते ही उसने मेरे चेहरे पर अपने होंठों से चुम्मियों की बौछार कर दी।

एक तो उसका नर्म और गर्म जवानी से भरपूर जिस्म मेरे जिस्म के साथ लिपटा हुआ था जो मेरे अंदर आग लगा रहा था और दूसरी तरफ उसके रसीले और गुदाज होंठ मेरे गालों और होंठों को चूम रहे थे।

मैंने पलक के कान के बिल्कुल करीब जाकर कहा- पलक, कहीं अरमान और महक जाग ना रहे हों!
इस पर उसने भी इसी तरह धीरे से मेरे कान में जवाब दिया- नहीं कोई बात नहीं; अरमान तो काफी गहरी नींद सोता है, इसको तो अब तक होश भी नहीं होगा. तुम बेफिक्र हो जाओ।

मैंने कहा- पलक, क्या ये सब ठीक रहेगा जो हम कर रहे हैं?
तो वह बोली- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो और मैं कब से तुम्हें इस तरह प्यार करने और तुमसे प्यार करवाने के लिए बेताब थी। आज सब कुछ भूल जाओ और बस ऐसे मुझसे प्यार करो जैसे कोई अपनी बीवी से करता है।

पलक ने यह बात कह तो दी मगर मुझे डर लग रहा था कि अगर अरमान जाग गया और उसको ये सब पता चल गया तो क्या होगा.

जब मैंने पलक से ये सब कहा तो वह बोली- चलो फिर चुपके से छत पर चलते हैं. और इस बात से तो बेफिक्र हो जाओ कि घर में से कोई उठ जाएगा और हम पकड़े जाऐंगे।
यह कहकर पलक मेरे पास से उठी और अंधेरे में गायब हो गई।

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि कमरे का दरवाजा खुला और पलक मुझे पीछे-पीछे आने का इशारा करके दरवाजे से हट गई।

मैं समझ गया कि वह छत पर गई है तो मैं भी हिम्मत सी करके उठा और उसके पीछे-पीछे छत पर चला गया।

छत पर एक स्टोररूम बना हुआ था।
चांद की हल्की-हल्की रोशनी में मैंने देखा कि पलक स्टोररूम के दरवाजे पर खड़ी थी और उसने अपनी कमीज उतार दी थी।
अब वह सिर्फ सलवार और ब्रा पहने हुए थी।

चांद की रूमानी रोशनी में पलक का रूप बहुत भला लग रहा था।
चन्द्रमा की हल्की-हल्की चांदनी में उसका गोरा जिस्म मेरे अंदर आग सी लगा रहा था।

जैसे ही में पलक के करीब पहुंचा, उसने मुझे जोर से अपनी तरफ खींचा और मुझे बांहों में लेकर अपने होंठों से मेरे होंठों को कस लिया।

पलक बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी और खड़े-खड़े ही अपने जिस्म को इस तरह हरकत दे रही थी कि मेरा खड़ा हुआ लंड बार-बार उसकी चूत के साथ रगड़ खा रहा था।

मैंने एक हाथ में उसकी गर्म गुदाज चूची पकड़ी हुई थी जिसको मैं धीरे-धीरे दबा और मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गोल और नर्म गांड से खेल रहा था।

उसने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थामा हुआ था और हम दोनों एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूस रहे थे।

तभी मैंने पलक की चूचियों पर से अपना हाथ हटाया और धीर-धीरे उसकी सलवार में डाल दिया।
जहां मेरा स्वागत चूत पर आए हुए बालों के गुच्छे ने किया.

तो मैंने पलक से पूछा- यार, तुम चूत के बाल साफ नहीं करती हो क्या?
तो पलक ने कहा- मेरी जान, अगर मुझे पता होता कि ये सब होने वाला है तो मैं अपनी चूत को मक्खन की तरह मुलायम कर लेती। मगर ये सब हुआ ही अचानक है।

बालों के ऊपर से गुजर कर जब मेरी उंगलियां उसकी चूत के दाने तक पहुंचीं तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

जब मैंने उसकी चूत के दाने को छुआ तो पलक का जिस्म एकदम से कांप सा गया और वह नशीली सी आवाज में सिसकारी भरकर बोली- जान, तुम्हारी उंगलियों में जादू है। मेरी चूत जलने लगी है। प्लीज कुछ करो … मुझे और मत तड़पाओ।

अब हम स्टोर रुम के दरवाजे से हटकर अंदर आ गए।
वहां पर एक पुराना सोफा पड़ा हुआ था।

पलक सोफे के पास जाकर खड़ी हो गई और मुझे दरवाजा बंद करने का इशारा किया।

मैंने दरवाजा बंद करके उस के आगे एक कुर्सी रख दी क्योंकि दरवाजे को अंदर से बंद करने के लिए कोई कुंडी या चिटकनी नहीं थी।

अंदर एक बल्ब जल रहा था जिसकी वजह से स्टोर में अच्छी खासी रोशनी हो रही थी।

पलक ने अपनी सलवार भी उतारकर सोफे पर रख दी और अपनी टांगें खोलकर सोफे पर इस तरह बैठ गई कि उसकी चूत पूरी तरह खुलकर मेरे सामने आ गई।
मैं भी नजदीक आकर उसकी चूत के सामने पैरों के बल बैठ गया।

पलक की चूत बाहर से गोरी थी और उसकी चूत का रंग गुलाबी था।

मैंने पहले धीरे-धीरे उसकी चूत को हाथ से सहलाया और इसके बाद दो उंगलीयों से उसकी चूत को खोलकर अंदर के गुलाबी हिस्से पर जीभ से मसलना शुरू कर दिया और कहा- पलक तुम्हारी चूत की खुशबू बहुत अच्छी है और ये कुछ ज्यादा ही गर्म हो रही है।
इस पर पलक ने हंसते हुए कहा- इसकी सारी खुबसूरती सिर्फ तुम्हारे लिए है मेरी जान! खा जाओ मेरी चूत को … ये इसलिए गर्म हो रही है ताकि इसकी गर्मी से तुम भी गर्म हो जाओ और मेरी चूत को खा जाओ।

पलक के मुंह से इस तरह के गंदे-गंदे लफ्ज सुनकर आज मुझे पता नहीं क्यों लेकिन बहुत मजा आ रहा था।

मैं दीवानों की तरह पलक की कुंआरी चूत को चाटता रहा।
दो बार पलक की चूत ने चिकना-चिकना सा पानी छोड़ा जो सब का सब मैंने चाट लिया।

अब पलक ने अपनी ब्रा भी उतारकर फैंक दी और वह सिसकारियां भरते हुए अपनी चूचियों को दबा और सहलाने लगी।
इधर मैं दीवानों की तरह उसकी चूत की भूल-भुलैया में घूम रहा था।

थोड़ी देर बाद पलक ने कहा- चलो कुछ और ट्राई करते हैं।
तो मैं बोला- ठीक है, मैं बताता हूं कि अब हमें क्या करना है।

मैंने उसे सोफे पर लेटने को कहा और जल्दी-जल्दी अपने सारे कपड़े उतार कर खुद उसके ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गया।

अब मेरा लंड बिल्कुल पलक के होंठों के करीब था और उसकी चूत मेरे मुंह के पास!
बस फिर क्या था?

मैं फिर से भूखों की तरह उसकी चूत के साथ चिपक गया और उसकी चूत के अंदर जीभ डालकर जीभ से चोदने लगा।

पलक ने मेरा लंड देखा तो कहने लगी- जान, ये तो बहुत मोटा है।
उसकी गर्म-गर्म सांसें मुझे अपने लंड पर महसूस हो रही थीं।

उसने पहले मेरे लंड के सुपारे को हल्का सा चूमा और फिर एक हाथ से लंड और एक हाथ से मेरे टट्टे पकड़कर धीरे से लंड को पूरा मुंह में ले लिया और जीभ से लंड की मालिश सी शुरू कर दी।

शायद पलक को बहुत मजा आ रहा था क्योंकि वह लंड चूसने के साथ-साथ अपनी चूत को मेरे होंठों पर धीरे-धीरे हिला भी रही थी।

लगभग 10 मिनट तक मैं उसकी चूत चाटता रहा और वह मेरा लंड चूसती रही।
उसकी चूत से बार-बार चिकना-चिकना पानी निकल रहा था जिसे चाटना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

लगभग 10 मिनट बाद हम उठ गए और मैंने पलक को इस तरह लिटा लिया कि मैं उसकी चूत में लंड डाल सकूं।

पलक ने पूछा- जान क्या अब तुम मुझे चोदोगे?
तो मैंने कहा- हां पलक, अब मैं खुद को तुम्हें चोदने से नहीं रोक सकता।
पलक ने कहा- हां मेरी जान, मैं तो खुद चाहती हूं कि तुम अपने इस तने हुए लंड से मेरी चूत मारो।

अब मैंने लंड के सुपारे को पलक की चूत पर रगड़कर थोड़ा सा चिकना किया और उसे चूत के मुंह पर रखा.
तो पलक ने मस्ती में आकर आंखें बंद कर लीं और दोनों हाथों से अपनी छोटी-छोटी कड़क चूचियों को दबाते हुए मस्ती भरी आवाज में सिसकारी भरती हुई बोली- जान, अपना लंड मेरी चूत में डालो ना! क्यों तरसा रहे हो मेरी इस मासूम चूत को?

उसकी बात सुनकर मैंने पलक के ऊपर लेटकर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए और धीरे-धीरे लंड को उसकी सेक्सी चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया।

पलक की चूत बहुत टाइट और गर्म थी।
उसकी नर्म नर्म और टाइट चूत में मेरा लंड धीरे-धीरे घुस रहा था और तकलीफ की वजह से उसने अपनी आंखें कसके बंद की हुईं थीं।

पलक की न्यू चूत के अंदर आधा लंड घुस गया तो उसने मुझे रुकने को कहा।
मैंने लंड को वहीं रोक लिया और उसकी 32 साइज की चूचियों पर अपने होंठ रख दिए।

उसके छोटे-छोटे निप्पल चुदाई की आग में जलकर काफी कड़े हो गए थे।

मैं थोड़ी देर तक उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी चूमता और चूसता रहा तो थोड़ी देर बाद पलक ने नीचे से अपनी चूत को हरकत देना शुरू कर दी।

मैंने भी लंड को धीरे-धीरे और अंदर करना शुरू कर दिया था।
इस बार शायद उसे दर्द कम हो रहा था क्योंकि जैसे-जैसे लंड चूत में घुसता जा रहा था वह अपनी टांगों को और ज्यादा खोलती जा रही थी।

जब लंड पूरा अंदर चला गया तो पलक के मुंह से दर्द भरी सिसकारी निकल गई।

मैं फिर से रूक गया और उसकी जबरदस्त चूचियों से खेलना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर बाद फिर से पलक की सेक्सी चूत ने नीचे से हरकत शुरू कर दी तो मैंने भी लंड को धीरे-धीरे बाहर खींचा और पूरा लंड बाहर आने से पहले ही दोबारा उसकी चूत में धकेल दिया।

पलक के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई ‘हाय मेरी चूत!’

मेरा लंड एक ही झटके में पूरे का पूरा उसकी न्यू चूत में स्थापित हो गया।

पलक ने कहा- जान, तुम्हारा लंड बहुत जालिम है। इससे तो मेरी चूत फटती हुई सी महसूस हो रही है।
मैंने कहा- मेरी जान, मेरा लंड मोटा नहीं है बल्कि तुम्हारी चूत ही बहुत टाइट है।

अब मैंने धीरे-धीरे पलक की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
मैं धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था और पलक चुदाई के मजे में सिसकारियां भर रही थी- आह आह आह … हाय मेरी चूत … धीरे-धीरे चोदो … आह आह … मेरी चूत फट रही है। आह प्लीज जान धीरे चोदो … मेरी चूत फट जाएगी।
उसके मुंह से ऐसी सेक्सी सिसकारियां सुनकर मेरे अंदर और भी आग धधकने लगी तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से चूत में धक्के मारने लगा।

दस मिनट की इस चुदाई ने हम दोनों को पसीने में सराबोर कर दिया क्योंकि स्टोर में कोई पंखा नहीं था।
मेरा लंड कस-कस के पलक को चोद रहा था।

मैं अपने लंड को उसकी चूत से निकालता और फिर से एकदम उसको चूत में धकेल देता जिसकी वजह से पलक की चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी।

उसकी चूत से पचक-पचक की आवाजें आ रही थीं।
पलक की चूत इतनी टाइट और जिस्म इतना सेक्सी था कि कुछ ही देर में मुझे लगा कि मैं छूटने वाला हूं।

अब मैंने लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसे घोड़ी बनने को कहा तो वह उठी और सोफे पर इस तरह घोड़ी बन गई कि मैं जमीन पर खड़ा होकर उसको चोद सकता था।

मैंने पहले डोगी स्टाइल में ही उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया जो कि मेरे लंड और उसकी चूत के पानी से चिकनी हो रही थी।

तब मैंने उसकी चूत को चाटकर खूब साफ किया और फिर उसकी गोल-मटोल छोटी सी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा ही था कि पलक ने पीछे को एक धक्का मारा.
जिसकी वजह से मेरा पूरे का पूरा लंड पलक की चूत में घुस गया और उसके मुंह से चीख निकल गई- हाय मैं मर गई … आह … मेरी चूत फट गई … आह आह!

और फिर कुछ देर रुके रहने के बाद उसने खुद ही धीरे-धीरे से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

जब उसके धक्कों की स्पीड कुछ कम हुई तो मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए उसकी चूत में लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

घोड़ी बनने की वजह से उसकी चूत और भी टाइट महसूस हो रही थी।

अभी इस तरह चुदाई करते हुए कुछ पांच मिनट ही हुए होंगे कि मुझे लगा कि किसी भी लम्हे मेरा लंड उसकी चूत में अपना लावा उगल देगा.
तो मैंने पलक को कहा- जान, मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है।
उसने कहा- मेरी चूत में मत झड़ना प्लीज!

लेकिन मुझ पर तो जैसे जुनून सवार था; मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था और कब मेरे लंड ने पलक की चूत में गर्म-गर्म पानी छोड़ दिया मुझे पता भी नहीं चला।

मैं लंड को उसकी चूत में ही रखकर उसके ऊपर पसर गया.

और जब हमारी हालत कुछ संभली तो मैंने अपने लंड को पलक की चूत से बाहर निकाला और अपनी बनियान से अपने लंड और पलक की चूत को साफ किया.

तब पलक को अपने सामने खड़ा करके मैं उसको अपने सीने से लगाकर उसके होंठों पर किस करने लगा।

कुछ देर बाद हमने कपड़े पहने और फिर से कमरे में आकर लेट गए।

जब मैं बिस्तर पर लेट गया तो पलक ने लाईट जलाई और महक और अरमान को चैक किया तो वे दोनों बेखबर सो रहे थे।

पलक मेरे साथ ही मेरे बिस्तर पर लेट गई और थोड़ी देर हम एक-दूसरे को चूमते रहे और फिर मैंने उसको अपने बिस्तर पर जाने को कहा।

वह उठी और अपने बिस्तर पर जाकर महक के साथ लेट गई.
और मैं पलक के सेक्सी जिस्म और अपनी इस चुदाई के बारे में सोचता हुआ जाने कब सो गया पता ही नहीं चला।

Antarvasna Sex Stories

अंतर्वासना पढ़ने Antarvasna Sex Stories वाले हर शख्स को मेरी तरफ से बहुत बहुत प्यार !

मैं इस अन्तर्वासना की एक-एक कहानी को तहे-दिल से पढ़ती हूँ और अपनी कक्षा में जाकर अपनी सहेलियों को भी सुनाती हूँ, फ्री पीरियड में बैठ कर हम यह सब एक दूसरी से शेयर करती और एक दूसरी के मम्मे वगैरा भी दबाती हैं, हल्की-फुल्की छेड़खानी !

हम तीन सहेलियाँ हैं रोज़ी, पिंकी और मैं पायल !

मैं अपनी दोनों सहेलियों से एक साल बड़ी हूँ, बीमार होने की वजह से मेरी एक क्लास ड्राप हो गई थी। मुझे समय से पहले ही जवानी आने लगी है, अब तो मैं काफी बड़ी लगने लगी हूँ।

मैं अक्सर शाम को रोज़ी के घर चली जाती हूँ, उसमें अभी भी बचपना सा है। हम एक साथ खेलती, कूदती हैं। उसने घर की पीछे के हिस्से में बेडमिंटन का जाल लगा रखा है। राजेश अंकल रोज़ी के पापा हैं, वो देखने में ही ठरकी किस्म के हैं, उनकी नज़रें मेरी छातियो पर ज्यादा टिकती हैं और अब मैं यह जान चुकी थी कि वो मुझ में कुछ ज्यादा ध्यान देने लगे, मैं सब समझती थी क्यूंकि मैं भी रोज़ रात को कंप्यूटर पर बैठ चेटिंग,सर्फिंग, वेबसाइट्स देखती और पढ़ती हूँ, मुझे सब चीज़ों का पता है, हिंदी में इन सबको क्या कहते हैं, मैं सब नेट से जान चुकी हूँ।

मैं भी शाम को स्कर्ट पहन कर जाती थी, जब मैं उछलती तो स्कर्ट उड़ती, अंकल अखबार सामने रख चोरी-चोरी मेरी चिकनी जांघें देख अपना लौड़ा खुजलाते। वैसे अब बाहर भी कई लड़के मेरे चारों तरफ मंडराने लगे हैं, फिर तो अंकल बढ़ने लगे और मुझे कहते- तुझे खेलना सिखाता हूँ !

मुझे मालूम था कि वो क्या खेल सिखाना चाहते थे। बहाने से मुझे छूते। उनके स्पर्श से मुझे कुछ होने लगता। कभी रैकट पकड़ना सिखाने के बहाने पीछे से मेरी गांड पर अपना लौड़ा रगड़ते, अंकल को मालूम था कि मैं सब जानती हूँ क्यूंकि एक दिन जब वो मेरे पीछे आये थे तो मैंने खुद गांड पीछे दबा दी थी।

एक दिन शाम को जब मैं वहां गई तो रोज़ी घर पर नहीं थी, ना ही उसकी मम्मी और उसका छोटा भाई !

शनिवार था, वो अपने नानी के घर गई हुई थी, मैं वापस आने लगी तो अंकल बोले- आ जा ! मेरे साथ खेल ले बेडमिन्टन !

न जाने मुझे क्यूँ लगा कि अंकल ने आज जानबूझ कर सब को घर से भेजा है ताकि वो मुझ से मजे कर सकें !

नहीं अंकल ! कल आऊँगी ! कहकर मैं मुड़ने लगी ही थी कि उन्होंने मेरी कलाई पकड़ मुझे अपनी तरफ खींच लिया। एक झटके में मैं उनकी बाँहों में थी, मेरा चेहरा उनके चेहरे के बहुत करीब था, अंकल ने ताज़ी शेव की थी, उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए !

मैं भी उनके चुम्बन का प्रत्युत्तर देने लगी। नीचे से उनका दूसरा हाथ मेरी स्कर्ट में था। मुझे बहुत मजा आ रहा था, अंकल ने मेरे होंठ छोड़ते हुए कहा- चल, बिस्तर में चलते हैं !

मैंने थोड़ा ड्रामा करते हुए कहा- नहीं ! यह सब ठीक नहीं है, मुझे जाने दो !

मुझे कस कर बाँहों में भर अंकल बोले- आज मौका है रानी, तुझे जन्नत दिखाता हूँ !

मुझे बाँहों में उठा अपने बेडरूम में ले गए और मेरी स्कर्ट खोल दी और पैंटी नीचे करते ही अपने होंठ मेरी कुंवारी चूत पर रख दिए।

बहुत ठरकी थे वो !

मुझे मजा आने लगा. वो इस तरह चूत चाट रहे थे जैसे बहुत मीठी हो ! मैं पूरी गर्म हो चुकी थी। अंकल ने ने अपना सब कुछ उतार दिया मुझे 69 की अवस्था में आने को कहा। मैं उनके ऊपर थी, उन्होंने पकड़ कर लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया और मैं चूसने लगी। बहुत मजेदार लौड़ा था उनका ! जो मैंने इन्टरनेट पर देखा था, सब वही खेल मेरे सामने था। अंकल की पूरी जुबान मेरी चूत में घुस जाती, जब वो अन्दर घुमाते तो मैं पागल होकर उनका लौड़ा चूसती !

कुतिया मज़ा आ रहा है? कभी पहले किसी ने चूसी है तेरी?

नहीं अंकल !

कोई यार बनाया है अभी तक तुम दोनों ने ?

क्या ऊँगली डालती हो तुम सहेलियाँ एक दूसरी की चूत में ?

नहीं अंकल ! नहीं डालती !

लौड़ा डलवाएगी मेरा ?

हाँ अंकल !

कुछ कुछ हो रहा है !

हाय मेरी जान ! देख बुड्ढे का लौड़ा है ! पसंद है तुझे ?

हां पसंद है जानू ! फक मी ! अब कुछ करो !

मैंने अब खुद पकड़कर मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।

वाह मुन्नी वाह ! अंकल बोले- चल कर टांगें चौड़ी कर और देख जलवा !

अंकल ने लौड़ा चूत पर रखते हुए झटका दिया, उसका टोपा मेरी चूत की फांको में फंस गया।

दर्द से हिल गई मैं !

छोड़ दो अंकल ! अभी छोटी है मेरी ! यह नहीं सहेगी !

चल कुतिया ! रंडी साली ! मुझे सब मालूम है- एक साथ तीनों कमरे में घुस कर इन्टरनेट पर क्या क्या देखती हो !

थोड़ा तेल लगा अंकल ने झटका मारा, उनका आधा लौड़ा चूत में फंस गया। मैं बेहोश होने लगी। खून से उनका लौड़ा लथपथ हो चुका था, झिल्ली फट चुकी थी एक और झटके में पूरा जड़ तक घुस गया। अंकल ने मेरे होंठ नहीं छोड़े ताकि आवाज़ न निकले !

फिर सारा लौड़ा निकाल कर साफ़ किया, चूत को साफ़ किया, तेल लगाया और फिर से घुसा दिया !

अब थोड़ा आराम से घिसता हुआ चला गया। फिर निकाला और फिर से थोड़ा तेल लगा कर डाला और अब मजे से आगे पीछे होने लगा। मुझे अब सब दर्द भूल गया। नीचे से गांड अपने आप उठने लगी झटकों के साथ साथ !

वो कभी एक चुचूक चूसते कभी दूसरा ! कभी कभी पूरा मम्मा मुँह में डाल लेते ! मेरी आंखें मस्ती से बंद होने लगी ! अंकल की रफ़्तार बढ़ने लगी। मैं एक बार झड़ चुकी थी। मेरी गर्मी से उनका भी पिघल गया और तेज़ तेज़ झटकों के साथ उन्होंने मेरी चूत अपने रस से भर दी और मुझे चुदाई का सुख दिया। मैं मस्ती में इतनी पागल हो चुकी थी कि आंखें नहीं खुल रही थी। वो काफी देर मेरे नंगे जिस्म को सहलाते, दबाते रहे। उसके बाद अगले दिन सुबह ही आने को कहा।

उसके बाद क्या-क्या हुआ। यह जानने के लिए मेरे साथ जुड़े रहो और मुझे मेल करो !

जल्दी ही अगले भाग के साथ आपके सामने हाज़िर हूँगी ! Antarvasna Sex Stories

मेरा नाम देवांग है, मैं 27 साल का कुंवारा लड़का हूँ। Antarvasna

जब मैं 18 साल का Antarvasna था, मेरे पिताजी ट्रांसपोर्ट में काम करते थे। उनकी आमदनी बहुत कम थी। तब हमारा खुद का घर भी नहीं था, हम किराये के मकान में रहते थे।

वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरे भाई थे। उनकी एक लड़की थी, क्या बताऊँ आपको, वो इतनी सेक्सी थी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी।

हमारे उनके सम्बन्ध बहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठ कर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता था क्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुत ही नर्म थे।

एक दिन की बात है, मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई के साथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आंटी को कहकर गई थी कि मेरा खाना बनाकर घर भिजवा दें।

दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर आ गई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जो सफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।

मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।
वो बोली- तुम खाना खा लो!
मैंने कहा- आप प्यार से खिलाओ!

वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वो बोली- गर्मी ज्यादा है, पंखा चला दो!

मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और आंटी के सामने बैठ गया। तभी उनका आँचल पंखे की हवा से उड़ा और आंटी के दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझे साफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा।

वो मुझे खिलाती गई और मेरी नजर उनके वक्ष पर टिक गई।
अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझ गई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरा तन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी, वो हंसने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानी लेकर वापस आई तो मैंने पूछा- आप क्यों हंस रही थी?

तो वो बोली- तेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया!

मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है, मैंने आंटी से कहा- क्या मैं आपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?

तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी, मुझसे कहा- बाकी ब्लाऊज़ और ब्रा तू निकाल ले।
मैं झट से उनके बोबे दबाने लगा- अआह… क्या मुलायम बोबे थे!

मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंने उनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में!

मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।
वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ… जैसी आवाजें निकालने लगी। 5 मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह! क्या बोबे थे! जैसे दूध की डेयरी!

मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबू के बाहर हो गया था।

अचानक आंटी बोली- बस! अब मेरी बारी!

मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दी, फिर पैंट ही निकाल दी, मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली- वाह, क्या लण्ड है! कम से कम सात इंच का होगा!
और उसे पकड़ कर हिलाने लगी।
मुझे अच्छा लगने लगा।

अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती ही रही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहा- छुट रहा है!

वो बोली- छोड़ दे मेरे मुँह में!

और मैं झड़ गया।
वो बोली- क्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का!

मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोली- चल एक काम कर! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।

मैंने पूछा- कैसे?
तो बोली- तू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है?
मैंने कहा- नहीं!
तो बोली- चल मैं तुझे बताती हूँ!

और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तो देखता ही रह गया।

वो बोली- अब नीचे मेरी चूत में ऊँगली डाल!

मैंने वैसा ही किया।

वो चिल्लाने लगी- एक नहीं तीन ऊँगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर कर!

मैंने वैसा ही किया।

वो आहें भरने लगी- आह्ह्ह… ऊऊ ऊऊउह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ… चु हूउदूऊ ऊउ…

मैंने लगभग 15 मिनट तक ऊँगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत से पानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर से तन गया था तो मैंने भी आंटी से कहा- आंटी, अब मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो! वो फिर से तन गया है!

वो बोली- चोदू! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा?

मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाई, उनकी चूत पर अपना लण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।

आंटी चिल्ला उठी- लौड़े! धीरे से डाल! बेनचोद! 6 महीने के बाद इतना बाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है?

मैं उनके बोबे दबाने लगा, फिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी की चूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगी- निकाल बाहर! फाड़ दी मेरी चूत! निकाल बाहर!

मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगा कि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।

उनको मजा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थी- आः ह ह्ह्ह्ह! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़! आऽऽ आऽ ई ईऽऽए चोद…जोर से! मज़ा आ गया! जैसी आवाजें निकाल रही थी।

मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा है, तो मैं आंटी से बोला- आंटी मेरा निकलने वाला है!

तो वो बोली- अंदर ही निकाल दे!

और मैं अंदर ही झड़ गया।

उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेरा खाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।

मैंने उसको भी चोदने का कार्यक्रम बना लिया जो मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगा। Antarvasna

मेरी पहली चुदाई प्रीति के साथ दोस्तो, अन्तर्वासना में Antarvasna Stories मैंने जब कहानियाँ पढ़ी तो मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपने बारे में अन्तर्वासना के पाठकों को बताऊँ! मेरा नाम राज है तथा मेरी उम्र 26 साल है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ. बात अब से कई साल पहले की है जब मैं सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानता था. मैंने बारहवीं कक्षा पास की थी तथा कॉलेज में प्रवेश लिया था. अभी कॉलेज जाते जाते एक महीना ही गुजरा था कि मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की शादी हुई जिसका नाम विक्की था. वो उम्र में मुझसे चार साल बड़ा था. मैं भी उसकी शादी में गया, खूब मज़े किए तथा जब जयमाला का वक़्त आया तो उसकी बीवी को देख कर आँखें खुली रह गई. उसका नाम प्रीति था, वो गज़ब की सुंदर थी, गोरा बदन, उठी हुई चूचियाँ, उभरी हुई गांड, मानो कि स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो. उसकी नशीली आँखें जिसकी तरफ भी देखती थीं वो उसका दीवाना हो जाता था. उसके बॉब-कट बाल उसके चेहरे पर गजब के सुंदर लगते थे. खैर उसकी शादी से में लगभग रात में तीन बजे वापस घर आया पर आँखों से नींद गायब थी. सारी रात उसके बारे में सोच कर गुजार दी, मन में तरह तरह के ख्याल आए कि काश वो मेरी होती. यही सब सोचते सोचते पता नहीं कब नींद आई. सुबह नौ बजे मैं सो कर उठा तो थोड़ा शोर सुन कर मैं बाहर आया. तो देखा कि विक्की अपनी बीवी को घर लेकर आ गया था. मन हुआ कि एक बार उसकी सूरत देखने को मिल जाये, पर औरतों की भीड़ के कारण मैं उसको देख नहीं पाया. दो दिन रहने के बाद वो अपने मायके चली गई और मैंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया. लगभग दस दिन बाद विक्की ने मुझे अपनी सुसराल चलने के लिए कहा, बोला कि तेरी भाभी को लेने चलना है! मेरे मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे. मैंने तुरंत हाँ कही और तैयार होकर विक्की के साथ चला गया. उसकी ससुराल ज्यादा दूर नहीं थी, हम वहाँ पहुँचे तो वहाँ हमारा खूब स्वागत हुआ और लगभग दो घंटे बाद हम अपने घर के लिए चल दिए. उस दिन मैंने उसे ‘भाभी, नमस्ते!’ कहा और कोई ज्यादा बात नहीं हुई. कुछ दिन बीतने के बाद हमारी बातें होनी शुरू हो गई, वो मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछती थी या कोई छोटा मोटा काम बता दिया करती थी, पर मेरा मन तो हमेशा भाभी की चूचियों पर अटका रहता था और हमेशा उसको चोदने के बारे में सोचता था. पर मुझे लगता था कि उसकी चूत के दर्शन शायद कभी नहीं होंगे. एक दिन किस्मत ने साथ दिया, मैं घर पर अकेला था, घर के लोग शादी में गए हुए थे जो कि रात में करीब 11 बजे से पहले वापस आने वाले नहीं थे. अचानक दरवाजे की घंटी बजी दरवाजा खोला तो प्रीति भाभी दरवाजे पर थी. मैं उसको देखता ही रहा, उसने टोका- अन्दर नहीं आने दोगे क्या? मैं शरमा कर पीछे हो गया और वो अन्दर आ गई. उस समय शाम के लगभग छः बजे थे. वो अन्दर आकर सोफे पर बैठ गई, मैं सामने वाले सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर हम दोनों चुप रहे, फिर वो बोली- क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो? मैंने शरमा कर ना कह दिया. वो मेरी घबराहट समझ गई और मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछने लगी. उसने मुझसे पूछा कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या? मैंने मना कर दिया तो वो चौंक कर बोली- मैं यह बात नहीं मान सकती! आजकल कोई लड़का इतना शरीफ नहीं हो सकता! मैंने फिर मना किया तो वो बोली- क्या कभी किसी लड़की को किस किया है? मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया क्योंकि वो पहली बार मुझसे इस तरह से बात कर रही थी. मैंने जब मना किया तो वो बोली- अगर मैं तुम्हें यह सब सिखा दूँ तो कैसा रहेगा? मैं उसकी बातें सुन कर कुछ भी नहीं बोल पा रहा था, बात घुमा कर मैंने उसे कोल्ड ड्रिंक के लिए पूछा तो वो बोली- जैसे मैं चाहूंगी, वैसे ही पिलानी पड़ेगी! मैंने हाँ कह दी. फिर मैं दो गिलास में कोल्ड ड्रिंक लेकर आया, उसे एक गिलास दिया तो वो बोली- ऐसे नहीं! कोल्ड ड्रिंक अपने मुँह में लो और मुझे पिलाओ! मैंने मना किया तो वो बोली- वैसे ही पिलानी है तो पिलाओ, नहीं तो मैं जा रही हूँ! मैंने हाँ कही और कोल्ड ड्रिंक अपने मुँह में भर ली. फिर उसने अपना मुँह मेरे मुँह से लगाया और सारी कोल्ड ड्रिंक पी गई. उसके होंट जैसे ही मेरे होंटों से लगे, मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी फ़ैल गई और मैंने उसे हटा दिया. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिसके बारे में सिर्फ सपने में सोचता था वो अचानक मेरी होने वाली थी. फिर उसने मुझे बिस्तर पर चलने के लिए कहा, मैं कुछ नहीं बोला और उसके साथ बिस्तर पर चला गया. उसके बाद खुद ही उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे कपड़े उतारने लगी और बोली- मैं आज तुमको वो सब कुछ सिखा दूँगी जो एक मर्द और औरत के बीच में होता है! मैं कुछ भी नहीं बोला और मन ही मन में बहुत खुश हो रहा था लो आज मुझे वो सब कुछ मिलने वाला है जिसके बारे में सिर्फ सपने में ही सोचता था. वो मेरे पूरे कपड़े उतार कर मेरे बराबर में लेट गई और अपने हाथों से मेरे पूरे बदन को सहलाने लगी. उसका हाथ लगने से मेरा लण्ड एकदम टाइट होने लगा, जैसे ही उसके हाथ ने मेरे लण्ड को छुआ, मेरे पूरे बदन में सनसनी सी दौड़ गई और वो मेरा लण्ड पकड़ के एकदम बैठ गई और बोली- हाय! तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है? आज सही मायने में मेरी चूत की प्यास बुझेगी! मैंने कहा- विक्की का लण्ड इतना बड़ा नहीं है क्या? तो वो बोली- यदि विक्की का लंड इतना बड़ा होता तो मुझे तुम्हारे पास आने की क्या जरूरत थी! मैं समझ गया कि वो उसकी प्यास नहीं बुझा पाया है. उसके बाद उसने आधे घंटे तक मेरे लण्ड को मुँह से चूसा. मुझे लगा कि कुछ निकलने वाला है. जब मैंने उससे कहा तो वो बोली- मेरे मुँह में ही निकाल दो! और मैंने उसके मुँह में सारा माल निकाल दिया और वो सारा का सारा माल पी गई, फिर भी उसने मेरे लंड को चूसना बंद नहीं किया. दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैं बोला- इस बार भी मुँह में निकालने का इरादा है? तो वो शरमा कर बोली- नहीं! इस बार मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगी! और उसने मेरे पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. मेरा लण्ड आपे से बाहर हो रहा था तो मैंने कहा- और कण्ट्रोल नहीं होता तो वो नीचे लेट गई और अपनी टांगें फैला दी और मुझे ऊपर आने को कहा. मैं ऊपर आ गया, उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया तथा लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और थोड़ा जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी पानी से भरी हुई चूत में बस एक इंच अन्दर गया और मुझे दर्द होने लगा. मैं रुक गया तो वो बोली- क्या हुआ? मैंने कहा- दर्द हो रहा है! वो बोली- पहली बार तो थोड़ा दर्द होगा ही! दुबारा कोशिश करो! मैंने हिम्मत करके दुबारा लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया. इस बार लंड 4-5 इंच अन्दर चला गया पर मुझे दर्द होने लगा. मैंने जैसे ही लण्ड बाहर निकालना चाहा तो उसने मुझे कस के पकड़ लिया और अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होटों को चूसने लगी. थोड़ी देर में मुझे मजा आने लगा, मेरा दर्द कम हो गया और मैं धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा. 5-6 धक्कों में लंड पूरा अन्दर चला गया और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- हाय मैं मर गई! मुझे और तेज चोदो! मुझे भी मजा आने लगा और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. लगभग 15 मिनट बाद मैं झड़ गया और सारा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया. वो धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी और बोली- आज मुझे असली मजा आया है! आज के बाद मैं तुम्हारी हूँ! तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो! मेरी चूत हर वक़्त तुम्हारी राह देखेगी!

और उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और अपनी हालत ठीक करके चली गई. जाते-जाते उसने मुझे एक बहुत लम्बी किस करी और बोली- मैं हर वक़्त तुम्हारे लण्ड का इन्तजार करुँगी. उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और सोचने लगा- क्या सच में मैंने उसे चोदा है? मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने प्रीति को चोदा है. उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता था, हम एक दूसरे में खो जाते थे. सैकड़ों बार मैंने उसकी चुदाई की. आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं!
आपका अपना मित्र-साथी राज Antarvasna Stories Visit - callgirl4u.com

मेरा नाम साधना है और मेरी उम्र 23 साल है. मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ.

मैं अपने जिस्म की बात करूँ तो मेरे बूब्स 36 इंच के एकदम टाइट हैं, मेरी कमर 30 की है और गांड 38 इंच की है, जो चलते समय बहुत मटकती है.
मेरा जिस्म किसी पेप्सी की 300 एमएल की बोतल के जैसे है.

ये सेक्स कहानी मेरी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड की चुदाई की तो है ही, पर उसके बाद भी मैंने इसमें चुदाई की दुनिया के कुछ और सच भी उजागर किए हैं, उनका आनन्द लीजिए.

मेरे घर में मैं, मेरी मॉम, डैड और एक भाई है … जो मुझसे बड़ा है.
भाई की शादी हो चुकी है.

मेरी भाभी बहुत अच्छी हैं, वे मेरे साथ सहेली की तरह रहती हैं.

मैं एक कंपनी में जॉब करती हूँ और मेरा ब्वॉयफ्रेंड मेरे ऑफिस की सामने वाली बिल्डिंग में जॉब करता है.

हमेशा की तरह मैं सुबह तैयार होकर लैगिंग्स और टॉप पहन कर अपने घर से निकली.

घर से बाहर निकल कर कुछ ही दूर मुझे मेरा ब्वॉयफ्रेंड अपनी कार से लेने आया हुआ था.
वह रोज ही आ जाता था और हम दोनों साथ में ऑफिस जाते थे.

हम दोनों ऑफिस के लिए निकल गए.
थोड़ी ही देर में हम ऑफिस पहुंच गए.

अपनी टेबल पर आकर मैं अपना काम करने लगी.

मैं अपना काम कर रही थी कि तभी मेरा बॉस मेरे पास आया और उसने मुझसे अपने केबिन में आने के लिए कहा.

मैं कुछ पल बाद उनके केबिन में गई और मैंने बाहर से ही उनसे अन्दर आने की आज्ञा मांगी.
उन्होंने सर हिला कर अन्दर आने का इशारा कर दिया.

मैं अन्दर गई और उनसे पूछा कि क्या बात है सर?
उन्होंने मुझे एक नए प्रोजेक्ट के बारे में बताया और कहा- ये प्रोजेक्ट तुम्हें पूरा करना है.

मैंने ‘ओके सर’ बोल कर पेपर्स ले लिए और बाहर आ गई.

अब मैंने उस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया.

काम करते करते दो बज गए.

मैं काम रोक कर लंच करने चली गई.
हमारा एक घंटे का लंच होता है.

मैं दस मिनट में खाना खाकर बाहर निकली और तभी ब्वॉयफ्रेंड की कॉल आ गई.

मैंने कॉल उठाई तो उसने कहा- जहां हम मिलते हैं, वहां आ जाओ.
मैं कॉल कट करके वहां जाने लगी.

मैं वहां पहुंच कर अपने ब्वॉयफ्रेंड से मिली.
हमने साथ में सिगरेट पी और फिर हम दोनों घूमने निकल गए.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड के ऑफिस से थोड़ी ही दूर पर एक टॉयलेट है, जो हमेशा खाली रहता है.
वहां कोई नहीं आता है.

हम दोनों घूम ही रहे थे कि उसने मुझसे कहा- चलो ना बेबी, आज इसके अन्दर चलते हैं.
मैंने उसे मना किया पर वह जिद करने लगा.

उसकी काफी जिद के बाद मैं उसके साथ जाने को रेडी हो गई.

हम दोनों अन्दर गए.
वहां हम दोनों एक खाली वाशरूम में घुस गए.

उसने डोर लॉक किया और मुझसे लिपट कर मुझे चूमने लगा.
मैं एक Xxx लड़की हूँ, उसका साथ देने लगी.

चूमते चूमते उसने मेरा टॉप उतार दिया और मैंने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए.

उसने मुझे दीवार से चिपकाया और मेरी ब्रा के हुक खोल कर उतार कर एक तरफ लटका दी.
अब वह मेरे मोटे मोटे बूब्स पर टूट पड़ा.

मैं उसके बाल सहलाने लगी और एक हाथ से उसके पैंट की जिप खोल कर उसका लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगी.

वह पागलों की तरह मेरे बूब्स चूस रहा था.
कभी वह निप्पल पर काट लेता तो कभी दूध को पूरा मुँह में भरने की कोशिश करने लगता.

मैं भी वासना में मदहोश हो गई और कामुक सिसकारियां लेती हुई जोर जोर से उसका लंड हिला रही थी- उम्म्म्म सीसीई आह अह्ह्ह्ह ओह गॉड बेबी … खा जाओ … इन्हें चूसो!

थोड़ी देर बाद वह मुझसे अलग हुआ और उसने नीचे बैठने को कहा.

मैं झट से नीचे बैठ गई और उसका लंड हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी, उसके पूरे लंड पर जीभ फिराने लगी.

‘उम्म्म उम्मम्म आह बेबी…’ वह पागल होने लगा और मेरे बाल पकड़ सहलाता हुआ सिसकारियां भरने लगा.
‘आह्ह्हह साधना चूसो बेबी … ओह तुम कितना मस्त लंड से खेलती हो यार!’

उसके लंड को जीभ से चाटने के बाद एक ही झटके में मैंने उसका पूरा लंड मुँह में भर लिया और तेज तेज चूसने लगी.
‘ऑव्व गुओ गुओ गाफ़ गाफ़ ग्लो ग्लो …’

वह भी मेरे बालों को पकड़ कर तेज तेज झटके देने लगा.
पांच मिनट तक ऐसे ही लंड चूसने के बाद उसने मुझे खड़ा कर दिया.

मैं वहीं दीवार पर हाथ रख कर घोड़ी बन गई और वह मेरे पीछे आ गया.
उसने तुरंत मेरी लैगी खींच कर घुटनों तक उतार दी और पैंटी भी नीचे कर दी.

अब उसने मेरी चूत पर अपना लंड रखा और जोर जोर से रगड़ने लगा.
मैं Xxx लड़की मचलने लगी- सी सी आआह बेबी प्लीज डाल दो ना!

मुझे ऐसे तड़पती हुई देख उसने मेरी कमर पकड़ी और पूरी दम से एक झटका लगा कर लंड चूत में घुसा दिया.
मैं चिल्ला पड़ी- आआहह आह आह्ह मेरी चूत फट गई … मैं तुमसे कहती हूँ ना कि पहले मेरी चूत चाट लिया करो!

उसने लंड दबाते हुए कहा- बाबू तुम्हें पता तो है कि मुझे उसे चाटना पसंद नहीं है.
वह मेरी कमर पकड़ कर लौड़े के झटके दिए जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मैं अपनी गांड आगे पीछे करती हुई उसका साथ देने लगी- आह आआह आआह … फक चोदो चोदो मुझे … आह और तेज … और तेज बेबी आह्ह साले मां के लौड़े चोद मादरचोद मेरी चूत … साले बहन के लौड़े!

वह भी पूरे जोश में मेरी चूत में झटके देने लगा- आआआह आह आआ आह ले साली कुतिया रंडी साली … तू Xxx लड़की कितनी बड़ी रांड है मादरचोद पब्लिक टॉयलेट में मेरा लंड ले रही है छिनाल! कुतिया गंदा सेक्स कर रही है!

मैं भी गांड आगे पीछे करती हुई उसका पूरा साथ दे रही थी- आआ आह … आआह चोद … साले चोदता रहे साले … फाड़ दे मेरी चूत रंडी के जने!
हम दोनों चुदाई में मगन ऐसे ही सिसकारियां लेते हुए मजा लेने लगे.

फिर पांच मिनट बाद ही वह जोर जोर से झटके देता हुआ मेरी चूत में झड़ने लगा.
मैंने जैसे ही उसके माल का अहसास किया, अपने मुँह को पीछे करके उसे देखने लगी.

मैं गुस्से में बोली- बहन के लौड़े ने आज फिर इतनी जल्दी रस छोड़ दिया. साले … हरामी की औलाद … हमेशा तू ऐसे ही करता है!

उसने लंड झाड़ कर उसे चूत से बाहर निकाल लिया.

मैं झट से नीचे बैठी और उसका लंड मुँह में भर कर चूसने लगी.

‘आआह आआह साले इसे खड़ा कर भोसड़ी के … मेरी चूत की प्यास अभी नहीं बुझी … पहले मेरा पानी निकाल कुत्ते.’
मैं तेज तेज लंड को चूस रही थी.

तभी उसने लंड निकाल लिया और बोला- बेबी अब बस … अब ये खड़ा नहीं होगा.
इतना बोल उसने लंड चड्डी के अन्दर किया और पैंट पहनने लगा.

उसने पैंट के हुक लगा कर दरवाजा खोला और बोला- मैं जा रहा हूँ, तुम भी कपड़े पहन कर आ जाओ.
वह निकल गया.

मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया.
वह हमेशा मुझे बिना झड़े छोड़ देता है.

मैंने दरवाजा बंद किया और अपनी चूत में तेज तेज उंगली करने लगी- आह आआअह आआआह मेरी चूत कोई चोदो … इसे शांत कर दो … आह!
मैं अपनी आंखें बंद किए हुई अपने मम्मों को मसलती हुई चूत में उंगली किए जा रही थी.

पांच मिनट के बाद मेरी जांघें कांपने लगीं और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेती हुई झड़ने लगी.
मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी.

‘आआअह आआअह ओह माय गॉड मेरी चूत … आह आआअह आआहह.’
मैं चिल्लाती हुई झड़ गई.

फिर मैंने अपनी चूत से उंगलियां निकालीं और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगी- उम्म्म्म उम्मम्म सो टेस्टी!

यही बुदबुदाती हुई मैंने खुद को साफ किया और कपड़े पहनने लगी.
फिर बाल ठीक करके लिपस्टिक लगाई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई.

जैसे ही मैं बाहर निकली, मैंने देखा कि एक काला सा आदमी गंदे फटे कपड़ों में खड़ा पेशाब कर रहा है.
वह एक भिखारी था.

मैं Xxx लड़की उसे देखने लगी.
वह अपनी आंखें बंद करके मस्ती से मूत रहा था.

मेरी नजर उसके लंड पर गई और मैं लंड देखती ही रह गई.
इतना बड़ा और इतना मोटा लंड … मैंने आज तक नहीं देखा था.

मेरी नजरें उसके लंड से हट ही नहीं रही थीं.
तभी उसने आंखें खोल दीं और मुझे लंड को घूरते हुए देख लिया.

वह दांत निकाल कर बोला- क्या चाहिए मैडम?
उसकी आवाज सुन कर मैं डर गई और वहां से तुरंत निकल गई.

मैं अपने ऑफिस में आ गई और प्रोजेक्ट पर काम करने लगी.

मुझे काम करते करते 5 बज गए.
मैंने अपने लिए एक कॉफी मगायी और तसल्ली से पी.

उस समय मेरे दिमाग में अपनी प्यासी चूत और उस भिखारी का मोटा लंड ही घूम रहा था.

कॉफी खत्म करके मैं दोबारा काम में लग गई.
धीरे धीरे स्टाफ जाने लगा.

मैंने घड़ी की तरफ देखा तो 7 बज चुके थे.
तब मैंने लैपटॉप बंद करके बैग में रखा और घर के लिए बाहर निकल गई.

बाहर आकर मैंने ब्वॉयफ्रेंड को कॉल की.
उसने कहा- मैं बस पांच मिनट में आ रहा हूँ.

मैं वहीं खड़ी हो गई और सिगरेट पीती हुई उसका इंतजार करने लगी.

करीब दस मिनट बाद ब्वॉयफ्रेंड आया.
मैं कार में बैठ गई और हम दोनों घर के लिए निकल गए.

आज मैं थका थका फील कर रही थी.
मेरी आंख लग गई और मैं सो गई.

पांच मिनट बाद मुझे ब्वॉयफ्रेंड ने उठाया और कहा- हम पहुंच गए बेबी.
मैं अपने अपार्टमेंट के बाहर पहुंच गई थी.

मैंने ब्वॉयफ्रेंड को हग किया और बाई बोल कर उतर कर घर आने लगी.

मैं घर पहुंची और डोर बेल बजाई.
मॉम ने दरवाजा खोला और बोली- अरे बेटी आ गई तू!

मैं हां कह कर अन्दर आई और अपने रूम में आकर बेड पर बैग फेंक कर सीधा बेड पर गिर गई.
मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला.

मेरी आंख खुली जब मेरा दरवाजा खटखटाया गया.

मैंने आंखें खोलीं तो बाहर भाभी आवाज लगा रही थीं- साधना साढ़े आठ बज गए हैं, उठो खाना खाने आ जाओ.

इसका मतलब था कि मैं करीब आधा घंटा सो चुकी थी.
मैंने कहा- ओके भाभी, आती हूँ.

मैं अपने बेड से उठी और अपने सारे कपड़े उतार नंगी हो गई और शॉवर लेने चली गई.
मैं शॉवर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी और जल्दी से नहा कर बाहर आ गई.

फिर बिना ब्रा पैंटी के एक शॉर्ट्स और टी-शर्ट डाल कर बाहर आ गई.
बाहर देखा तो सब डिनर टेबल पर बैठे थे.

मैं अपनी जगह पर जाकर बैठ गई.

भाभी ने मुझे खाना सर्व किया और मैं खाना खाने लगी.

थोड़ी देर में ही मैंने खाना खत्म किया और उठ कर अपने कमरे में आ गई.

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