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Massage Girl in Loni: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Loni who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Loni that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Loni massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Loni who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Loni massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Loni massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Loni who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Loni employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Loni helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Loni

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Loni at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

दोस्तो, मेरा नाम सुजीत है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं|आज आप सभी को मैं अपनी जिन्दगी का सबसे हसीन वाकिया बताना चाहता हूं जिसको पढ़ कर लड़कियों की चूत और लड़कों के लंड से पानी की फुहार निकल जाएगी| ये कहानी मेरी पड़ोसन ज्योति मैडम की है जिनसे मै बचपन में पढता था | वो पड़ोस में रहती थी तो मेरे घर से अच्छा लगाव रहता था लेकिन उनकी फिगर इतनी अच्छी थी की मेरा मन उनको हमेशा से चोदने का करता था और फिर एक समय ऐसा आया जिसमें मैंने अपनी एक ज्योति मैडम की जमकर चुदाई की| ज्योति मैडम के चूचे खरबूजे के जैसे थे और मस्त गांड थी; एकदम दूध सा गोरा बदन और काले लंबे बाल| वैसे तो ज्योति मैडम दो लड़कियों की मां थीं पर हर कोई उनका दीवाना था| मैं अक्सर ज्योति मैडम को देखकर मुठ मारा करता था| हुआ यूं कि जब मेरे नाना जी की तबीयत खराब हो गई तो मेरे घर वालों को मुझे छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि मेरे 12वीं कक्षा की प्रैक्टिकल थे| तो मेरे घरवालों ने मेरी पड़ोसन ज्योति मैडम को मेरी जिम्मेवारी दी| मेरे घर वालों के जाने के बाद मैं ज्योति मैडम के घर खाना खाता और रोज की तरह स्कूल जाता| दो दिन तक ऐसे ही चलता रहा| तीसरे दिन मैं प्रैक्टिकल देकर स्कूल से जल्दी घर आ गया| मैंने अपने घर आकर कपड़े बदले और दोपहर का खाना खाने के लिए ज्योति मैडम के घर चला गया| वैसे तो मैं उनके घर आवाज लगाकर जाता था लेकिन उस दिन मैं उनके घर में ऐसे ही चला गया| मैंने देखा ज्योति मैडम के घर में कोई नहीं है, तो मैंने आवाज लगाई- ज्योति मैडम जी, कहां हो? बाथरूम से आवाज आई- , खाना गर्म करना पड़ेगा, तुम बैठ जाओ| मैं आती हूँ| जैसे ही मैं बैठा मैंने बाथरूम के बाहर की दीवार पर टंगी हुई एक लाल रंग की पैंटी और सफ़ेद ब्रा देखी| ज्योति मैडम की ब्रा पैंटी देख कर मैं अपने होश खो बैठा| मैं अपने आप पर पूरी तरह से कंट्रोल नहीं कर पा रहा था| ज्योति मैडम की ब्रा पैंटी को देखकर ही मेरे लंड ने लोअर में तम्बू तान दिया था|मेरा लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था और मैं नहीं चाहता था कि ज्योति मैडम मुझे इस हालत में देखें|मैंने झट से हैंगर से ज्योति मैडम की पैंटी उतारी और उसको अपने साथ घर ले गया| अपने घर जाकर मैं बेड पर लेट गया और ज्योति मैडम की पैंटी को चूत की तरह गद्दे तकिया के बीच में सैट कर दिया|फिर अपने लंड को उनकी पैंटी में घुसेड़ दिया| मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं ज्योति मैडम की चुदाई कर रहा हूँ| कसम से दोस्तो, मैंने दो बार जल्दी जल्दी ज्योति मैडम की पैंटी में अपने लंड का पानी गिराया और इसके बाद मैं उनके घर चला गया|मेरी जेब में ज्योति मैडम की गंदी हो चुकी पैंटी थी|लेकिन जैसे ही उनके घर में पहुंचा, मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं क्योंकि ज्योति मैडम पूरी तरह से सिर्फ एक तौलिए में लिपटी हुई थीं| शायद ज्योति मैडम अपनी पैंटी को ढूँढ रही थीं| मैंने ज्योति मैडम को देखा तो मैं सकपका सा गया| शायद उनको भी शक हो गया था कि उनकी पैंटी गायब होने में मेरा हाथ है| चूंकि उनके घर में मेरे सिवाए कोई नहीं गया था| ज्योति मैडम की दोनों बेटियां हॉस्टल में पढ़ती थीं और मैडम के पति जी डॉक्टर थे, वो शाम को घर आते थे| जब ज्योति मैडम ने मुझसे कुछ नहीं कहा, तो मैंने समझ लिया कि सब कुछ ठीक है| फिर मैं खाना खाने के बाद वापस आ गया और उनकी पैंटी को वहीं ज्योति मैडम के घर में छिपा कर रख आया| शाम के समय मैंने ज्योति मैडम के घर जाकर खाना खाया और उसके बाद मैं वहीं गहरी नींद में सो गया| मैं रात को ज्योति मैडम के घर में सोता था क्योंकि मुझे अकेले घर में डर लगता था| रात में मैंने अजीब सी आवाजें सुनी तो देखा कि मैडम के पति और ज्योति मैडम सेक्स कर रहे थे, पागलों की तरह एक दूसरे में लगे हुए थे| उन दोनों का सेक्स देख कर मैं पागल हो गया| मैंने देखा ज्योति मैडम पति के बालों को पकड़कर उनका मुँह अपनी चूत में घुसाए जा रही थीं|वो उनको गालियां दे रही थीं- चाट मेरी चूत को आज खा जा … मेरी चूत को जल्दी जल्दी से चाट साले| ज्योति मैडम ने अब अपनी चूत अलग हटाई और उस पर लिक्विड चॉकलेट गिराकर पति को इशारा किया| मैडम के पति ज्योति मैडम की चूत से लग गए और ज्योति मैडम ने उन्हें अपनी चूत से चिपका लिया था| मैडम के पति को ज्योति मैडम की चूत चाटते देखकर मैं भी गर्म हो गया|मैंने अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया; अपने हाथ से तेज तेज हिलाते हुए लंड की मुट्ठी मारी|आज मैंने पहली बार ज्योति मैडम को इस हालत में देखा था| वैसे तो ज्योति मैडम साड़ी में बड़ी शरीफ लगती थीं लेकिन सारे मोहल्ले वाले उनके दीवाने थे; ज्योति मैडम की मटकती गांड को हर कोई चोदना चाहता था| अगली सुबह जब मैं उठा, तो मैं नहाकर स्कूल आ गया| उधर अपना प्रैक्टिकल देने लगा| लेकिन मैं वह दृश्य भुला नहीं पा रहा था| सोच रहा था कि किस तरह से ज्योति मैडम चूत चुसवा रही थीं| मेरे मुँह में पानी आ रहा था| मैं स्कूल से फ्री हुआ और तेज कदमों से अपने घर आ गया| जल्दी से अपनी ड्रेस चेंज की और ज्योति मैडम के घर आ गया| मैंने उनके घर में छिपाई हुई ज्योति मैडम की पैंटी उठाई और अपने घर आकर बैठ कर कल के जैसे नंगा होकर फिर से ज्योति मैडम की पैंटी को ज्योति मैडम समझ कर चोदने लगा| इतने में मेरे घर में ज्योति मैडम आ गईं और उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया| वैसे तो ज्योति मैडम गुस्सा थीं लेकिन कुछ हंस भी रही थीं| उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारी मम्मी को मैं सब बताऊंगी| मैंने दोनों हाथ जोड़ कर ज्योति मैडम से कहा- प्लीज़ माफ़ कर दीजिए, आप जो कहेंगी, मैं करूंगा| ठीक है … चलो अभी घर आकर खाना खाओ| बाद में सोचती हूँ कि क्या करना है|” मैं खाना खाने आ गया लेकिन मुझसे खाना नहीं खाया गया क्योंकि मैं काफी डर गया था| शाम को भी मेरा ज्योति मैडम के घर जाने का दिल नहीं कर रहा था, मुझे बेहद डर लग रहा था| जब मैं शाम को नहीं गया, तो वो मेरे घर आईं और मुझे अपने साथ ले गईं| उसी वक्त अचानक से ज्योति मैडम के फोन पर मैडम के पति का फोन आया| उन्होंने हैलो कहा| तो मैडम के पति ने कहा- हां, मैं जरा देरी से वापस आऊंगा| तुम दोनों खाना खाकर सो जाना| यदि मैं ग्यारह बजे तक नहीं आया, तो फिर मैं कल आऊंगा| अब ज्योति मैडम ने मेरी तरफ देखा और होंठ दबा कर हल्का सा मुस्कुरा दी| लेकिन मैंने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया| मैंने और ज्योति मैडम ने खाना खाया और टीवी देखने आ गए| हम दोनों ने 11:00 बजे तक टीवी देखा| फिर ज्योति मैडम बाथरूम में नहाने चली गईं| आज भी उनकी पैंटी और ब्रा वहीं दरवाजे के पीछे की दीवार पर टंगी हुई थी| मेरा अभी फिर से मन हुआ कि ज्योति मैडम की पैंटी को चोदने के लिए उठा लूं लेकिन मुझे ज्योति मैडम का डर था| मुझे नहीं पता था कि आज ज्योति मैडम का क्या इरादा है| ज्योति मैडम ने मुझे आवाज लगाई और बोलीं- बेटा, बाहर मेरी पैंटी और ब्रा टंगी है, उसे लेकर देना| मैं डरते डरते वॉशरूम के पास आ गया| तभी झटके से दरवाजा खुला और मैंने देखा कि ज्योति मैडम पूरी नंगी खड़ी थीं| मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं| ज्योति मैडम की नंगी चूत को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया था| तभी उनकी मस्त उठी हुई गांड हिली, जिससे चूत ने मुँह चलाया| मैं नजारा देखने लगा| फिर ज्योति मैडम मादक आवाज में बोलीं- क्या देख रहे हो? अन्दर आ जाओ| जैसे ही मैं अन्दर जाने लगा तो सहमा हुआ था| मेरी सांसें तेज चल रही थीं| मैं कुछ भी करने से डर रहा था| मैंने कहा- ज्योति मैडम, मुझे माफ़ कर दीजिए| कैसा काम? उन्होंने मेरे बालों को पकड़ा और मुझे नीचे कर दिया| अपनी एक टांग को कमोड पर रखी और मेरे सामने ज्योति मैडम की गुलाबी और रसभरी चूत खुल गई थी| उन्होंने मेरा सर अपनी चूत में दबा दिया|मैंने भी चूत को देखा और ज्योति मैडम की चूत में मुँह लगा दिया| ज्योति मैडम की चूत में रस ही रस भरा था| नमकीन सफ़ेद अमृत का स्वाद जैसे ही मेरी जीभ पर लगा, मैं निहाल हो गया ‘उफ्फ … उम्महा …’ मैंने आज पहली किस उनकी चूत की फांकों पर की थी| उनके मुँह से मुझे वासना से लबरेज सिसकारियां निकलती सुनाई देने लगीं| मैंने जीभ चूत पर चलाने शुरू कर दी| शुरूआत में तो चूत चाटने में बहुत अजीब सा लगा| मगर चपर चपर करके मैं ज्योति मैडम की चूत चाटने लगा| तभी उन्होंने अपनी चूत पर लिक्विड चॉकलेट टपकानी शुरू कर दी| मुझे ज्योति मैडम की चूत मीठी लगने लगी| उन्होंने एक पल के लिए मुझे हटाया औरलिक्विड चॉकलेट की शीशी को अपनी चूत में लगा कर दबा दिया| उनकी चूत में लिक्विड चॉकलेट भर गई| अब ज्योति मैडम बोलीं- अगर तुम ये पूरी चॉकलेट खा लोगे, तो मैं तुमको स्पेशल गिफ्ट दूंगी| मैंने ज्योति मैडम की चूत को चाटा, उनकी चूत में जीभ डालकर मजा लेने लगा| ज्योति मैडम सेक्स की उत्तेजना में बोलने लगी- उफ्फ आंह … चाट ले साले … हिलाने से क्या होगा, आज चूत में घुस जा | ज्योति मैडम की गालियां और कामुक सिसकारियों से मेरा लंड तनता जा रहा था| फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी चूत को खोला और जीभ को नुकीला करके अन्दर डाल दी| जीभ अन्दर हुई और हाथ फ्री हो गए| मैंने हाथों से ज्योति मैडम की गांड को पकड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत को गपागप चोदने लगा| मैं पागलों के जैसे लगा हुआ था| वो भी मेरे बालों को पकड़कर मेरा साथ दे रही थीं|ज्योति मैडम बोलीं- तुम आज अपने मैडम के पति का काम कर रहे हो, इतनी मस्ती से तो पति भी नहीं चूसते हैं| आंह लगे रहो मेरी जान| चूसो , आंह जब तक मेरी चूत का पानी तुम्हारे मुँह में नहीं आ जाता, चूत चूसते रहो| कुछ देर बाद मुझे लगा कि बहुत अजीब सा नमकीन पानी मेरे मुँह आने लगा है| मैं हटने को हुआ, लेकिन उन्होंने मुझे हटने ही नहीं दिया| ज्योति मैडम बोलीं- आंह … साले पी जा ,आज अगर आज तूने मेरी चूत से मुँह हटाया, तो मैं तुम्हारी मम्मी को सारी बात बता दूंगी| मुझे डर लगा और बिना मुँह हटाए उनकी चूत को चूसना पड़ा|चूत चूसते हुए ही मुझे उनका सारा नमकीन पानी पीना पड़ा| फिर ज्योति मैडम ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर टूट पड़ीं| ज्योति मैडम ने मेरे होंठों को चूस चूस कर अपनी चूत का सारा रस साफ़ कर दिया| फिर वो मुझे अपने साथ पकड़ कर अपने रूम में ले आईं| अब मेरे लंड की गर्मी बढ़ चुकी थी और मुझे लग रहा था कि मैं जल्द से जल्द मुठ मार लूं| मतलब सामने चुदासी ज्योति मैडम नंगी थी और मैं चूतिया मुठ मारने की सोच रहा था| गांड फटने पर यही हाल होता है| फिर जब ज्योति मैडम ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए, तब ख्याल आया कि लंड के लिए चूत तो सामने ही है, मुठ क्या मारना| मैं पूरा नंगा हो गया| ज्योति मैडम ने मेरा लंड देखा और मुस्कुरा दीं| अब हम दोनों बेड पर आ गए और मैं चित लेट गया| ज्योति मैडम मेरे ऊपर चढ़ गईं और वो मेरे होंठों को किस करने लगीं| एक मिनट बाद ज्योति मैडम बोलीं- आज तुझे पति का काम करना है, करेगा ना!मैंने सर हां में हिला दिया|ज्योति मैडम मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच दबाने और चूसने लगीं, मेरे लंड को अपने हाथों से दबाने लगीं| लंड पर उनका हाथ लगते ही लंड एकदम कड़क हो गया था|आह आह साली ज्योति मैडम, किसी रंडी के जैसे मेरे लंड को मसल रही थी| कुछ पल बाद वो अपनी चूत से मेरे लंड को रगड़ने लगीं| लंड को चूत का चुम्बन मिला तो मैं चूत का कायल हो गया; लंड चूत के अन्दर घुसने को लालायित हो गया| हम दोनों ही पागल हो चुके थे| मैं नहीं चाहता था कि ज्योति मैडम मुझे चोदें, इसलिए मैंने उनको धक्का दे दिया और उनके ऊपर आ गया| मैं भी गर्म हो चुका था| मैंने भी उनके गोरे-गोरे चूचों को मसलना और दबाना शुरू कर दिया| एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा| पागलों के जैसे उनके निप्पल को दाँतों से खींच कर काटा| दूसरे हाथ से उनके दूसरे निप्पल को मसल दिया| ज्योति मैडम एकदम से चिल्ला उठीं- आंह साले काट मत , प्यार से चूस न|फिर मुझको पता ही नहीं चला कि मैं कब उनके चूचों से उनकी चूत पर आ गया| मुझे भी ज्योति मैडम की चूत चूसने का मजा आने लगा था क्योंकि वह चॉकलेट और शहद टपका कर मुझे पागल कर रही थीं|अबकी बार मैं ज्योति मैडम की चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे मलाई खाता है| उन्होंने अपनी दोनों टांगों को खोलकर मुझसे अपनी चूत खूब चुसवाई|ज्योति मैडम बोलीं- तुम मेरे हो और चाटो|सच कहा था उन्होंने , आज असल में ज्योति मैडम का ही बन गया था| फिर ज्योति मैडम बोलीं- चल आ जा , अब आज मैं तुझको कुछ और देना चाहती हूँ|अब ज्योति मैडम ने मुझको अपने नीचे लेटाया और मेरे मुँह पर आकर बैठ गईं| ज्योति मैडम बोलीं- चूत चूसते जाओ बस, मरी तरफ मत देखो, और जो भी परसाद मिले, उसे खा जाना| मैं ज्योति मैडम की चूत चूसने लगा| कुछ मिनट के बाद ज्योति मैडम का रज मेरे मुँह में निकल गया| मैंने उस दिन उनका 3 बार पानी चूस लिया था| फिर ज्योति मैडम बोलीं- आज तुझे तेरे किए की सजा भी मिलेगी| तेरे लिए मेरी चूत से अभी कुछ और भी आएगा| चुत से धीरे धीरे नमकीन पानी आने लगा , शुरू में कुछ नमकीन सा स्वाद आया , वो बोली कैसा लगा , मैंने कहा बहुत अच्छा लेकिन ये क्या है वो बोली पेशाब है , रुको मत ज्योति मैडम ने मेरा सर थामा और बोलीं- तुम्हें तुम्हारी मम्मी की कसम, पी ल | कुछ ही पलों में मुझको उनका गर्म-गर्म मूत बहुत मस्त लगने लगा| मैं ज्योति मैडम का सारा मूत पी गया| उनकी चूत से मूत निकलना बंद हो गया जबकि मैं चाह रहा था कि वो मुझे और पिलाएं| वह समझ गईं और बोलीं- आज तूने मेरे मन की इच्छा पूरी कर दी| बोलो तुमको क्या चाहिए? मैंने भी बोल दिया- आपकी चूत को चोदना चाहता हूँ|उन्होंने ओके कहा और मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया|वो पागलों के जैसे लंड चूमने लगीं| जैसे ही मैं अपना लंड उनके होंठों पर रखा, मेरे लंड ने हार मान ली| लंड का रस उनके मुँह में निकल गया| ज्योति मैडम ने सारा रस खा लिया|साली के मुँह से एक भी बूंद बाहर नहीं गिरी| आज पहली बार मेरे लंड से इतनी क्रीम निकली थी कि ज्योति मैडम का मुँह अच्छे से भर गया था| ज्योति मैडम हंसती हुई बोलीं- इतनी सारी क्रीम मत जमा किया करो, इसके अन्दर कीड़े पड़ जाएंगे|मैंने कहा- निकालता तो आपकी पैंटी में हूँ| ज्योति मैडम हंसने लगीं और बोलीं- अब तड़पाओ मत … मेरी चुदाई करो| मैंने कहा- लंड तो खड़ा करो| उन्होंने दोबारा से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक मिनट में ही चूस कर खड़ा कर दिया| लंड देख कर ज्योति मैडम बोलीं- चल अब असली काम पर लग जा| मुझे ज्यादा मत तड़पा| डाल दे जल्दी से मेरी चूत में| मैंने भी उनको कुतिया बनाया और पीछे से लंड लगा और उनकी चूत पर लंड रगड़ा| ज्योति मैडम अपनी गांड हिलाकर बोलीं- कुत्ते ऐसे मत तड़पा , डाल देना अन्दर अपना लंड मेरी चूत को रगड़ दे| मैंने भी लंड को सैट किया, उनकी गांड को पकड़ा और जोर से धक्का दे मारा|मेरा पूरा लंड ज्योति मैडम की चूत में अन्दर तक समा गया था| वो एकदम से चिल्ला उठीं और बोलीं- इतना लंबा लंड तो तेरे मैडम के पति का भी नहीं है|मैंने कहा- ज्योति मैडम, तुम्हारी पैंटी पर लंड को रगड़ रगड़ कर इतना लंबा किया है| वो हंसने लगीं और गांड हिलाने लगीं| मैं जोर जोर से धक्के देने लगा और उनके चूचों को पकड़कर चूत को फाड़ता रहा| ज्योति मैडम भी अपनी गांड को उठा उठा कर साथ दे रही थीं, मुझे गालियां दे देकर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा रही थीं| वो मुझे जोश दिला रही थीं लेकिन मैं भी कहां थकने वाला था, मैंने भी ज्योति मैडम को ऐसा चोदा कि वो थरथरा उठीं| ज्योति मैडम बोली- तू तो बड़ा मर्द निकला| मैंने कहा- बस आपके मूत की वजह से ही ये सब कुछ हुआ| लगभग दस मिनट की चुदाई के बाद ज्योति मैडम की चूत से पानी की फुहार छूटने लगी| अब उन्होंने धक्का देकर मुझे हटाया और मुझे बेड पर गिरा दिया| वो फिर से मेरे होंठों पर बैठ कर बोलीं- फिर से चूस मेरी चूत को , मुझे आज तुझे सजा देनी है| मैं भी चूत चूसने लगा क्योंकि उनकी चूत में से मस्त खुशबू आ रही थी| कुछ देर बाद ज्योति मैडम लंड पर चूत फंसा कर चुदवाने लगीं| आधा घंटा की चुदाई में हम दोनों संतुष्ट हो गए| कुछ देर आराम करने के बाद ज्योति मैडम बोलीं- अब तुम मेरी गांड की चुदाई करो| मैं तो ज्योति मैडम का गुलाम था| मैंने उनकी गांड की चुदाई करने के लिए इस बार उनको बेड के एक सिरे पर लेटा दिया | उनकी टांगों को फैलाया और उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया| फिर अपने लंड पर थूक गिरा कर लंड को ज्योति मैडम की गांड में सैट कर दिया| ज्योति मैडम ने मुस्करा कर देखा, तो मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर जोर से झटका दे दिया| लंड गांड में घुसता चला गया| ज्योति मैडम की चीख निकल गई|मैंने झट से उनके होंठों को लॉक किया और अपने लंड से फिर से धक्के देने शुरू कर दिए| मेरे धक्के इतने जोर से लग रहे थे | कि ज्योति मैडम की गांड के अंतिम छोर पर लग रहे थे| ज्योति मैडम पागलों के जैसे चिल्ला रही थीं| मैंने अपने लंड से धक्के मार मार कर उनकी गांड सुजा दी| कुछ देर बाद मैंने कहा- मेरा रस निकलने वाला है| ज्योति मैडम ने कहा- आज तुम अपनी बना लो| बोलो कहां निकालने का मन है!मैंने भी बोल दिया- आपके मुँह में| वो बैठकर मेरे लंड को चूसने लगीं|मेरे माल की पिचकारी निकली तो उनकी आंखों में, बालों में, होंठों पर जा गिरी| वो हंसने लगीं| फिर हम दोनों शांत होकर वहीं लेट गए और सो गए| सुबह जब उठे तो ज्योति मैडम ने एक प्यारी सी किस मेरे होंठों पर कर दी और बोलीं- यदि आज रात को भी तुम्हारे मैडम के पति नहीं आए, तो तुम्हारे लिए एक और चीज भी है, जो तुम्हें चाटनी है| ये ज्योति मैडम ने अपनी गांड की तरफ इशारा करते हुए कहा| मेरी सुबह खराब हो गई| वो सब क्या था , ये अगली कहानी में लिखूंगा| मेरी यह ज्योति मैडम की सेक्स कहानी आपको कैसी लगी? आप मेल करना न भूलें|
पहले भाग से आगे : Sex Stories

अंकल उठकर Sex Stories पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।

मौसी मुस्कराई और अंकल से बोली- यह जानी है ! विदेशी हथियार की स्मगलिंग करता है, तुम्हारे साथ धंधा करना चाहता है ! क्यों पसंद है?

मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था। मैं लंगड़ाते हुए चल रही थी। मैंने तीन ग्लास में दारू की बोतल से दारू डाली और एक एक अंकल मौसी और जानी की तरफ बढ़ा दिए। जानी कामुक नज़रों से मुझे देखे जा रहा था। उसने मेरे चूतड़ों पर दो तीन बार हाथ भी फेर दिया था। मौसी ने हम दोनों रंडियों को आँख मारी। मौसी ने मेरे को जानी की सेवा करने का इशारा किया। मोंटी अंकल नंगे थे ही ! शोभा मोंटी साहब का लंड चूसने लगी। मैंने पैंट खोल कर जानी का लंड निकाल लिया और चूसने लगी। जानी और मोंटी कुछ कोड भाषा में बातें करने लगे। कुछ देर बाद दोनों काफी खुश नज़र आ रहे थे, उनकी धंधे की बातें ख़त्म हो गई थीं जानी ने एक पांच की गद्दी मौसी को दी और बोला- मौसी तुम्हारा इनाम।

दोनों के लंड चूसने से खड़े हो गए थे।

मोंटी और जानी में कुछ इशारों इशारों में बात हुई। अंकल ने शोभा को उठा दिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं कुतिया बनी बिस्तर पर बैठे जानी का लंड चूस रही थी और अंकल मेरी पीछे से चूत मार रहे थे। मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, मौसी मुस्करा रही थी और चिल्ला रही थी- अंकल, साली को आज इतना चोदना कि ये दस दस लंड आगे से एक रात में खा सके। टॉप की रंडी बनाना है मुझे इसको। कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया। अंकल का लंड लोहे की राड की तरह खड़ा हुआ था। जानी ने भी अपना लंड निकाल लिया था। जानी ने मुझे उठाया और पलंग पर उल्टा करके मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया अंकल ने मेरी गांड पहले ही फाड़ रखी थी इसलिए एक झटके में जानी का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था।

मैं चिल्ला रही थी, जानी ने मेरी गांड में जोर के 10-15 शोट मारे उसके बाद जानी नीचे था और मैं उसके ऊपर सीधी लेटी थी उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा रखा था। उसने मेरी टाँगें फ़ैला दी और नीचे से धीरे धीरे गांड में धक्के मारने लगा। अंकल अपना लंड पकड़े सामने मुस्करा रहे थे। उन्होंने मेरी चौड़ी टांगों के बीच अपना सुपारा रख दिया और मेरी चूत में ऊपर से अपना लंड पेल दिया। अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड घुसे हुए थे, मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी।

मौसी ताली बजा रही थी और बोल रही थी- अंकल, मज़ा आ गया ! वाकई साली कुतिया लग रही है ! चोद साली को ! याद रखेगी कि मौसी के कोठे पर चुदी थी !

मेरी गाड़ी बनी हुई थी, मेरे दोनों छेदों में लंड सरपट दौड़ रहे थे। अब मुझे पता चल रहा था कि कोठे की चुदाई क्या होती है। मैं अब पूरी तरह से कोठे की कुतिया बनी हुई थी। दस मिनट दोनों ने एक साथ मेरी चूत और गांड बजाई उसके बाद जानी ने मेरी चूत में और अंकल ने मेरी गांड में लंड घुसा कर मुझे सैंडविच बनाया और दुबारा मुझे दस मिनट तक चोदा। मौसी मेरी चुदाई का आनंद सिगरेट पीते हुए ले रही थी। इसके बाद दोनों ने एक एक करके पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं बिस्तर पर लुढ़क गई थी, मेरी चूत अब बुरी तरह से सूज रही थी और गांड भी बहुत दुःख रही थी।

रात के चार बज़ रहे थे। मौसी, जानी और मोंटी दारू पीने लगे, थोड़ी देर बाद दोनों नशे में झूम रहे थे। जानी मौसी से बोला- मौसी, साली की चूत कितनी सुंदर है, सूजी हुई तो और सुंदर लग रही है, एक चुम्मा लेकर आता हूँ !

जानी उठा और उसने मेरी चूत पे एक चुम्मा लिया और बोला- मोंटी साले, चुम्मा ले ! क्या स्वाद आता है !

मोंटी ने भी उठ कर एक चुम्मा मेरी चूत पर लिया। दोनों फिर मौसी के पास जाकर बैठ गए, इस तरह 10-12 बार उन्होंने कभी मेरी चूत पर कभी चुचकों पर चुम्मे लिए। कुछ देर बाद दोनों बोले- मौसी बजा तो बहुत लिया पर बजते हुए नहीं देखा। कुछ ब्लू सीन बनवाओ और जानी ने एक 100 की गडी मौसी के हाथ में दे दी। अंकल और जानी मेरे गले में हाथ डालकर बिस्तर पर बैठ गए। मौसी ने सोफा बिस्तर के पास खींच लिया। दोनों मेरी एक एक चूची पकड़े हुए थे और मसल रहे थे।

मौसी ने कमरे की घंटी बजा दी और राजू को कुछ कहा। थोड़ी देर में राजू, कालू, भूरा और टीनू कमरे में थे। मौसी उठी और शोभा से बोली- चल नंगी हो ! तेरी चुदाई का मुजरा कराती हूँ !

थोड़ी देर में शोभा पूरी नंगी थी।

मौसी गुंडों से बोली- अब तुम सब सोफे पर इसकी गाड़ी चलाओ !

राजू सोफे पर जाकर बैठ गया। उसका लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हुआ था, शोभा उसके लौड़े के ऊपर जाकर बैठ गई और पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लिया। राजू सोफे पर उछल उछल कर उसकी चूत चोदने लगा और उसकी गांड का छेद दोनों ऊँगली से चौड़ा कर दिया, जिसमें पीछे से भूरा ने अपना लंड घुसा दिया।

अब शोभा को राजू और भूरा साथ साथ चोद रहे थे। शोभा की ऊहं आह से कमरा गूंज रहा। शोभा पुरानी रांड थी, मज़े ले ले कर चुद रही थी और ऊहं आह की आवाज़ निकाल रही थी। शोभा का मुँह सोफे से बाहर निकल रहा था। टीनू ने पीछे जाकर अपना लौड़ा शोभा के मुँह में डाल दिया और उसे चुसवाने लगा। शोभा की चूत गांड और मुँह में धक्के जोरों से चल रहे थे। कालू अपना लंड निकाल कर सहला रहा था।मौसी ने शोभा का एक हाथ खींच कर कालू का लंड शोभा के हाथ में पकड़ा दिया दिया। चार चार लौड़ों से शोभा खेल रही थी। जानी ने मुझे पलंग पर अपने लौड़े पर बैठा लिया। अंकल ने मेरे हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा दिया। मैं बेहोशी की सी हालत में थी और अंकल का लौड़ा धीरे धीरे मसल रही थी। अंकल ने पलंग पर खड़े होकर मेरे बाल जोर से खींच डाले और चिल्लाये भोसड़ी की, तुझे बड़ी नींद आ रही है? साली अभी तुझे भी इस रांड की जगह बैठाता हूँ ! ले पहले मेरा लौड़ा चूस।

उन्होंने मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूंस दिया। शोभा की गाड़ी जोरों से चल रही थी, गुंडे बार बार जगह बदल कर शोभा को चोद रहे थे। शोभा की चुदाई देखकर अंकल और जानी गरम हो रहे थे, उनके लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। कमरे की सारी लाइट जल रही थी और कमरा रौशनी से भरा हुआ था।

थोड़ी देर बाद अंकल और जानी ने अपने रस एक एक करके मेरे मुँह में उतार दिए और नशे में झूमते हुए कोठे से बाहर चले गए।

सुबह के पाँच बज़ रहे थे लेकिन मेरी तो अभी गाड़ी और बजनी थी। मौसी जाते जाते राजू से बोली- मैं तो सोने जा रही हूँ राजू, कालू को बुला ला और इसे बजाना हो तो तुम दोनों बजा लो ! जब से यह नई रांड आई है अपने लंड सहला रहे हो। जितना मन हो उतना चोदो कुतिया को, रांड तो अब यह बन ही गई है लेकिन नीचे मेरे पास वाले कमरे में चोदना।

राजू मुझे गोद में उठाकर नीचे कमरे में ले आया, जहाँ जमीन पर पुराने गद्दे पड़े हुए थे। थोड़ी देर में कालू भी उधर आ गया, राजू ने पीछे से मेरी फटी गांड में लंड घुसा दिया और कालू ने आगे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। मैं अधमरी हालत में दोनों से चुदने लगी सुबह सात बजे तक दोनों ने मुझे बुरी तरह से नोचा और चोदा, उसके बाद मैं गहरी नींद में सो गई।

अगले दिन रात को नौ बजे मेरे चूतड़ों पर मौसी ने जोर से हाथ मारा और बोली- रंडी रानी ! उठ जाओ और कितनी देर तक लेटोगी।

मैं घबरा कर उठ गई। मौसी बोली- थोड़े कपड़े पहन लो और खाना खा लो।

मुझसे उठा नहीं जा रहा था, किसी तरह मैं उठी और मौसी से बोली- मौसी, मुझे वापस भेज दो !

मौसी मुस्कराई और बोली- वापस जाकर क्या करोगी? अभी तो तुम चल भी नहीं पा रही हो, ऊपर से तुम्हारी चूत और सूज रही है ! थोड़ी ठीक हो जाओ तब जाना। चल अच्छा फ्रेश हो, फिर बात करती हूँ।

किसी तरह मैं उठी और खाना खाया। उसके बाद दुबारा सो गई। मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। खा पीकर मुझे नींद आ गई। अगले दिन सुबह दस बजे मौसी आई उनके साथ छोटा खलील भी था। मौसी बोली- क्यों, बॉम्बे नहीं जाना है। ये छोटा खलील बॉम्बे जा रहा इसकी गाड़ी में चली जा। तुझे अपनी चंपा बार में नचवाएगा। नाच भी करियो और धंधा भी बहुत मज़ा आएगा। साले ने तुझे 5 लाख में खरीदा है।

छोटा खलील मुस्करा रहा था, मौसी से बोला- मौसी, दो घंटे साली को चोद लूँ फिर डालकर ले जाऊंगा।

मौसी मुस्कराई और बोली- लोंडी अब तेरी है दो क्या दस घंटे चोद ! तेरे गुरु मोंटी ने कल इसकी गांड और चूत दोनों सुजा दी हैं।

खलील मुस्कराया और उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। खलील ने दो बार मेरी चूत और दो बार मेरी गांड मारी। साथ ही साथ बोला- हरामजादी मौसी ने भी एक दिन में अच्छी खासी चूत का भोंसड़ा बना दिया है, डांस शो में कितना मज़ा आ रहा था तेरी मारने में और आज तेरी भोंसड़ी बनी हुई है।

बारह बजे तक उसने चोद चोद कर मुझे अधमरा कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे गाड़ी में बांधकर डाला और मुंबई लेकर चल गया।

खलील ने मुझे चंपा बार में नाचने के लिए छोड़ दिया। मजबूर होकर मुझे यहाँ नाचना पड़ा। रात बारह बजे तक नाचती थी। उसके बाद एक-एक घंटे की मेरी चार बुकिंग होती थीं और सुबह छः बजे तक मैं चुदवाई जाती थी।

चार दिन बाद खलील और उसका एक साथी मुझे और दो लड़कियों को मस्ती के लिए खंडाला ले जा रहे थे, रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सब लोग दारू पीने लगे और हम लड़कियों से अपने लंड चुसवाने लगे। थोड़ी देर बाद दूसरी पार्टी के लोग आ गये और गोलीबारी शुरू हो गई। खलील और उसके साथी को गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गए। मैं गाडी के नीचे छुप गई। मेरे साथ वाली लड़की को दूसरी पार्टी के लोग उठा के ले गए। थोड़ी देर बाद मैं बाहर निकल कर आ गई और बस पकड़ के वापस अपने गाँव चली गई। आज मैं एक खुशहाल जिन्दगी जी रही हूँ। मेरी आप सबसे यह प्रार्थना है

“धंधे से नफरत करो, धंधे वाली से नहीं” Sex Stories

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एक शानदार वेबसाइट Sex Stories लॉन्च करने पर अन्तर्वासना के सभी कर्ता-धर्ता, समूचे स्टाफ व गुरु जी को सबसे ज्यादा प्यार और बधाई!

जबसे मेरी दीदी रेखा मेहरा के ज़रिये मुझे इस वेबसाइट का पता चला, मैंने उनकी बताई साईट खोली. जब कहानियाँ पढ़ी तो लोगों की बिस्तर की बातें इसमें देख मेरी तो चूत गीली हो गई थी. मैं भी अपनी जिन्दगी का पहला सेक्स आपके सामने लाकर शुरुआत करने जा रही हूँ, उम्मीद से दुनिया कायम है, मुझे आशा है कि मेरी यह चुदाई जल्द ही आप सबके सामने अन्तर्वासना के ज़रिये आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी.

मेरा नाम सुलेखा, 5 फुट 5 इंच कद, गुन्दाज़ बदन, गोरे-चिट्टे मखमल जैसे वक्ष! मैं बारहवीं जमात की छात्रा हूँ. पहले हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे, चाचू-चाची, बुआजी, ताया-ताई, घर इतना बड़ा नहीं था, इसलिए मैं चुदाई के लाइव सीन देख देख बड़ी हुई.

एक दिन चाचू-चाची अकेले थे. मैं तबीयत ठीक न होने की वजह से पहले घर आ गई. चाचू के कमरे से सिसकी की आवाज़ सुन मैं पिछली खिड़की की ओर बढ़ी. मैं जब मॉम-डैड के बीच सोती थी तो कई बार डैड को मॉम पर सवार होते देखा था, लेकिन अच्छी तरह से नहीं देख पाई. आज मौका था, अन्दर चाचू बेड के किनारे बैठे थे नंगे, चाची फर्श पर घुटनों के बल बैठी चाचू के लौड़े को मजे ले ले कर चूस रहीं थी. फिर चाची बिस्तर पर आई. नंगी चाची को चाचू ने लिटा अपना लौड़ा चाची की चूत में घुसा दिया. यह देख मेरी पेंटी भी गीली हो गई.

फिर डैड ने शहर में आकर अपना बढ़िया मकान बनाया और हम शहर आकर बस गए. गाँव में पंजाबी मीडियम से सातवीं जमात तक पढ़ी, वो एक कन्या-विद्यालय था. यहाँ आकर मैंने एक प्राइवेट और अंग्रेजी मीडियम लड़के-लड़कियों के स्कूल में मैंने आठवीं में दाखला लिया और मेरी सहेलियाँ भी बन गई. हमारा चार लड़कियों का ग्रुप बन गया. श्वेता, मरियम, नूरी और मैं!

उनका अभी से लड़कों में ध्यान था, नूरी का तो अफेअर भी चल निकला था. हमारे ग्रुप की चर्चा चालू लड़कियों में होती थी. अब मेरी जवानी भी अंगड़ाई लेने लगी. सबमें से मेरी जवानी की बातें लड़कों में ज्यादा होने लगी. सब जब घर से निकलती तो लड़कों की निगाहें मेरी छातियों पर रहने लगी. देख देख मुझे मजा आने लगा. तभी मुझे मेरे ही स्कूल में पढ़ने वाले अमृत नाम के एक लड़के ने मुझे परपोज़ किया. उसको मैंने कोई जवाब नहीं दिया.

जब मैं स्कूल से घर जाती तो मेरे पीछे होंडा सिटी कार में एक दूसरा लड़का आने लगा हर रोज़ सुबह और स्कूल के बाद! बहुत हैण्डसम था, बड़े घर का लड़का था. उसने मुझे एक दो बार कार पास लाकर अपना मोबाइल नंबर दिया, मेरे साथ नूरी भी रहती थी, उसने नंबर पकड़ के रख लिया और मुझे कहने लगी- पटा ले मेरी जान! और क्या चाहिए!

मैंने कहा- जो अमृत ने परपोज़ किया उसका क्या?
उसको स्कूल तक सीमित रख!
मैंने नूरी से नंबर लिया, दोनों पास की एस.टी.डी पर गई और कॉल की. उसने अपना नाम करण बताया और मुझे कहा- मैं आप पर फ़िदा हूँ प्लीज़!
मैंने उसको हाँ कर दी.
वो बोला- मैं इसी मार्केट में ही हूँ! चलिए मैं आपको घर छोड़ देता हूँ, प्लीज़ मना मत करना! मुड़ कर देखो!

मैंने केबिन से देखा, उसने हाथ हिलाया. नूरी का घर पास था, वो पैदल चली गई. मैं उसकी कार में बैठ गई. कुछ देर ऐसे ही घूमते रहे. उसने मेरा हाथ पकड़ा- आप बहुत सेक्सी हो, बहुत सुन्दर हो!
उसने हाथ पर किस किया- आई लव यू सो मच!
मैंने कहा- आई लव यू टू!

उसने पास खींचते हुए मेरे होंठों पे किस कर दी, मुझे करंट सा लगा. उसने कार साइड पर कर मेरे होंठ चूसने शुरु किये.
मैंने कहा- प्लीज़ छोड़ो न!
वो बोला- कितने दिन से आपके इन होंठों का रसपान करने का दिल था! आप कहती हैं छोड़ो!

मुझे भी कुछ होने सा लगा- मैं भी लिप-किस में उसका साथ देने लगी. पता ही नहीं चला कब उसका हाथ मेरी शर्ट में घुसता हुआ मेरे मम्मों तक पहुँच गया. उसने सीट पीछे कर दी और मेरे ऊपर बैठ गया. एक हाथ उसने मेरी स्कर्ट में डाल मेरी जांघें सहलाने लगा. मैं इतनी गरम हो गई कि सब भूल गई. बस दोनों जवानी के जोश में एक दूसरे में खोने लगे.उसने बटन खोल मेरा मम्मा ब्रा से निकाल लिया और उसको मसलने लगा. मुझे तब होश आया जब मैंने उसका हाथ अपनी पेंटी पर महसूस किया. एकदम से अलग होकर हाँफने लगी.

वो बोला- क्या हुआ?
“प्लीज़! हम सड़क पर हैं, कोई पकड़ लेगा तो आफत आ जायेगी!”
बोला- इसको तो छोड़ो!

एकदम से मैं चौंक गई, मेरा हाथ उसके लौड़े पर था. मैं शरमा सी गई.
उसने कहा- कोई नहीं आयेगा! इतनी कड़ी गर्मी में कौन आएगा!

फिर भी उसने मुझे घर छोड़ दिया. बाथरूम में जाकर अपनी पेंटी देखी जो गीली हो गई थी. अपने मम्मे पर जब उसके दांत का निशान देखा तो मुझे अजीब सी हलचल हुई. उसके बाद कुछ दिन ऐसे ही कार में मिलते रहे. घूमने के बहाने चूमा-चाटी चलती रही.

एक रोज़ जब मैंने शाम को उसको कॉल किया. उसने कहा- आज ट्यूशन मिस कर दो, एअरपोर्ट रोड की तरफ घूमने जायेंगे. वहाँ सुनसान सी एक सड़क है.
मैंने कहा- ठीक है! मुझे पिक कर लो!

हम निकल पड़े. वहाँ एक रेस्तराँ था, बिल्कुल एअरपोर्ट के कार्नर पर था, वहाँ कई लोग अपनी अपनी कार में ही बैठे थे. आज वो अपनी बड़ी कार लाया था. उसने पार्किंग की बजाये वो साथ वाली खाली सड़क पर कार मोड़ ली और रेस्तराँ के पीछे ले गया. वहीं वेटर आया. उसने अपने लिए चिल्ड बियर ली, मैंने कोल्ड काफी आर्डर की.

उसने मुझे बाँहों में लिया. अब तो हम दोनों घुल मिल चुके थे, उसने फोर्ड एंडवर की सीट फ्लैट की. लग्ज़री कार किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं थी. मैंने उसका साथ देते हुए खुद ही उसके होंठ चूसने शुरु किये. वो मेरे मम्मों को बेरहमी से मगर मजा आने वाले अंदाज़ में मसल रहा था. मैं गरम होने लगी और उसने मेरा टॉप उतार दिया. मैंने अपनी ब्रा की स्ट्रिप खोल दी जिससे मेरे दोनों कबूतर आज़ाद हो गए. उसने उड़ते कबूतर पकड़ने में वक्त न लगाया और टूट पड़ा मुझे पर. मैं भी पूरी गर्म हो चुकी थी, मैं लगातार उसके लौड़े को मसल रही थी. उसने मेरी जींस खोल कर घुटनों तक सरका दी और आज खुल कर मेरी जांघें सहलाने लगा.

उसने स्पोर्ट्स ड्रेस डाली थी, मैंने भी लोअर खींच के नीचे करके उसके लौड़े को हाथ में पकड़ लिया, पहली बार इतना खुलकर पकड़ा था. मेरे हाथ लगते ही फनफ़ना उठा उसका लौड़ा! इतने में वेटर आया. उसने कहा- खुद पी ले और बिल ले जाना! वेटर बोला- जी साहिब!

स्टार्ट कार, ए.सी ओन किया हुआ था, फिल्मिंग वाले शीशे थे, उसने सीट पूरी फ्लैट कर दी, बिस्तर सा बन गया. खींच कर मेरी जींस उतार दी और अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रगड़ने लगा. मैंने झट से उसके लौड़े को मुँह में डाल लिया और अच्छी तरह चूसने लगी. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उसने थोड़ा चुसवाने के बाद मुझे पीछे लिटाते हुए बीच में बैठ अपना लौड़ा मेरी सील बंद चूत पे रखा. एक बार सोचा कि पता नहीं कैसे यह घुसेगा?

कार के आस पास दूर तक कोई न दिख रहा था. उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था खुद नीचे घुटनों तक!
मैंने सोचा- चल सुलेखा! आज तेरी लाडो रानी का उदघाटन समारोह कैसा रहेगा?!

उसने झटका दिया और लौड़े का सर मेरी चूत में फंस गया. उसको भी तकलीफ हो रही थी. मैंने कस के सीट के कपड़े को पकड़ रखा था. उसने दूसरे झटके में आधा लौड़ा अन्दर डाल दिया. मेरी जान निकल गई- निकाल लो प्लीज़! यहाँ अच्छे से नहीं होगा! जगह कम है, बहुत तकलीफ होगी! दोनों का ही पहली बार है. लेकिन उसने तीसरा ऐसा झटका मारा कि लौड़ा पूरा घुस गया. मेरी चीख निकल गई. खून टपकने लगा! आँखों में आंसू आ गए!

उसने मेरे होंठ अपने होंठो में ले रखे थे ताकि चीख न निकले. उसने फिर सारा निकाल के डाला ऐसे तीन चार बार जब किया तो दर्द की जगह मजे ने ले ली. आंखें खुद ब खुद बंद होने लगीं. उसके एक एक झटके का मुझे इतना मजा आया कि सिसकारी ले ले कर मैं चुदवाने लगी- हाय और करो! और करो!

अचानक मुझे अपने अन्दर से कुछ गरम गरम सा पानी महसूस हुआ, मैं झड़ गई और मेरी चूत की गर्मी में तीन चार मिनट बाद ही करण भी झड़ गया. दोनों हाँफने लगे. उसने कार में पड़ा एक कपड़ा मुझे दिया, जिससे मैंने अपनी चूत को साफ़ कर लिया, खून साफ़ किया!

दोनों ने कपड़े पहन लिए और सामान्य होकर एक दूसरे की बाँहों में लिपट गए. उसने मेरे होंठ चूमते हुए कहा- कैसा लगा?
बहुत अच्छा लगा!

सुबह उठने पर चूत पर सूजन सी थी, चलने में थोड़ी सी अजीब लग रही थी. नूरी इन कामों में से कई बार निकली थी, उसने मुझसे सब कुछ बकवा लिया. अन्तर्वासना पर इसके छपते ही मैं अपनी करण के अलावा किसी से चुदवाई लेकर सबके लौड़ों पर बैठने आऊँगी. Sex Stories

Antarvasna

इस घटना ने शिल्पा को Antarvasna भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था. शिल्पा शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे. इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये. मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे.

“ओफ्फो… तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो!” मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा.
वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया?
“इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन शिल्पा आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी!” मैंने हंसते हुए कहा.
“क्या!? क्या शिल्पा को भी यह सब पसंद है?” उन्हें आश्चर्य हुआ.
“फिर क्या हुआ?” उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा.

मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे.
“साथ साथ नहा रहे थे… तब तो बड़ा मजा आ रहा होगा! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा.

मजा तो आना ही था…! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया. मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची. दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये शिल्पा खड़ी थी.

मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर… फिर क्या हुआ… कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो!

इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया. मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे.

शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ… उफ… शिल्पा ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुए जा रहे हैं… उफ… मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियाँ फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है.

मैंने उत्तेजना से उत्पन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- शिल्पा को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो… क्या कर रहे हैं आप…? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की… आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज…
मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ.

“मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ. ठीक है तुम ऐसे ही चूसो!” मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा.

“तुम शिल्पा वाली बात तो बताओ…” उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे.

मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली- फिर एक ओह्ह.. उफ… ऊई… फिर हाँ मैं..उफ… मैं कह रही थी कि शिल्पा को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहाँ पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनन्द लेती है. मेरी… उफ… ओह… अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ… ये शावर तो खोल लो… नहाना भी साथ साथ हो जायेगा!

मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई- मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, शिल्पा द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था. उसे तब तक पता नहीं था… उफ… ओह… ओफ…
मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे.

मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े.

“सुनाओ न आगे क्या हुआ…?” मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा.
“तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ…” अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली.
“ओफ़्फ़… फिर शिल्पा के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था. शिल्पा की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह… उफ आउच… ओह…

इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे.

मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी.

मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा- स्टोरी का क्या बना…! आगे क्या तुमने अपने भाई से शिल्पा की प्यास बुझवा दी?… ओह… कितना मजा आ रहा है!
शावर के नीचे मैथुन करने में… उफ… वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले. उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी.

“हाँ… उफ… ओह… ऊई मां… तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को… इससे आज ज्यादा ही आनन्द मिल रहा है…” मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई- बड़ा मजा आया था… शिल्पा को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था… खूब जोर जोर के धक्के मारे थे… मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी.

थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई, अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ लिया, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे. गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी.

फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे.

कहानी जारी है. Antarvasna

लेखक : सुरेश Antarvasna

मेरी एक एक कहानी Antarvasna को दिल से पसंद करके मुझे अपना अपना प्यार खुले दिल से दिया, और दोगे हर कोई मुझे कह रहा है कि गांडू अपनी चुदाई ज़रा जल्दी जल्दी भेजा कर !

अब कब भेजेगा ?

अब आगे बढ़ते हुए गुरु जी और सभी पाठकों को बहुत बहुत प्यार ! आज यह सनी एक और चुदाई के बारे में लिखने जा रहा है, पढ़ना और मुझे याहू पर मेरी गाण्ड का वेबकैम पर लुत्फ उठाएँ।

हाल के ही दिनों की बात करने जा रहा हूँ, प्रेस वाले से मैने चुदवाया सो चुदवाया, हमारे घर में ऊपर की बिलडिंग डबल स्टोरी में पत्थर लग रहा है। दो बन्दे रगड़ाई करने आते हैं, दो बन्दे पत्थर लगाने !

एक दिन में याहू पर बैठ कर चेट का लुत्फ उठा रहा था कि मेरी चेट विनोद नाम के बन्दे से जो दिल्ली से है, देश की राजधानी में बैठ मुझे चोदने की योजना बना रहा था। तभी वो बोला- सनी यार ! अपना वेबकैम चला ! मुझे तेरी चिकनी गांड देख कर मुठ मारनी है। अपने गुलाबी होंठ दिखा, उनमें होंठ डालने हैं।

लेकिन मेरे लिंक्ड बाथरूम में ही रगड़ाई चल रही थी, मैंने उसको अपनी स्थिति बताई कि मैं नंगा नहीं हो पाउँगा। उसको वजह बताई तो वो बोला- साले गांडू ! मौका है उससे गांड मरवा ले ! पटा ले साले को ! तेरा दिल तो ज़रूर करता होगा ?

मैंने कहा- मेरा उनमें बिलकुल ध्यान नहीं था, मैं तो उनको अपनी आजादी में बाधा समझ रहा था।

उसकी यह बात मेरे दिमाग में घर कर गई, बस फिर क्या था, मैंने सोच लिया कि अब इसको पटाना ही है।

मैंने अपना पजामा उतार दिया और फ्रेंची में मेरे गोलमोल चिकने चूतड़ किसी का भी लौड़ा खड़ा कर सकते थे। मैंने सामने ब्लू फिल्म चला ली और बेड पर उल्टा लेट गया तकिये को बाँहों में लेकर उल्टा लेट गया जिससे मेरे चूतड़ साफ़ दिखने लगे और सामने शीशे में मेरी एक नज़र उस पर थी। वो अपने ध्यान लगा हुआ था। मैंने सोचा अब क्या करूँ यार? कैसे इसका धयान अपने पर लेकर आऊँ?

पास के मेज से मैंने एक ग्लास उठाया और उसको फर्श पर फेंक दिया, जैसे ग्लास गिरा उसने मुड़ कर देखा। मेरी साँसे तेज़ होने लगी कि अब वो क्या करेगा। चोरी-चोरी से मैं शीशे में देखता। अब उसका ध्यान मेरी तरफ था, वो ब्लू फिल्म देखता तो कभी मेरी गांड देखता।

वो अपना लंड पकड़ कर मसल रहा था, मैंने जानबूझ कर गांड थोड़ी ऊपर उठाई। उसकी मशीन बंद हो गई थी, मैंने खुद ही चूतड़ हिलाए उसको यह शो कर दिया कि मैं खुद सब कुछ कर रहा हूँ।

उसने मुझे उसकी रर शीशे में देखते हुए देख लिया। वो कमरे में आया और बाथरूम के दरवाज़े की कुण्डी चढ़ा दी। बिस्तर के करीब आते ही उसने अपना हाथ मेरे चूतड़ पर रखते हुए सहला दिया। मेरा बदन कांप उठा। वो मेरे दोनों चूतड़ मसलने लगा, मैंने आखें मूँद ली।

वो मेरी बगल में लेट गया और मेरी फ्रेंची को गांड के चीर में घुसा छेद पर ऊँगली फेरते हुए मेरे गाल को चूम लिया, अपना दूसरा हाथ मेरी कमर से लपेटते हुए शर्ट में डाल मेरे मम्मे दबाने लगा। मैं गर्म होकर अपने को रोक नहीं पाया और उसकी ओर चेहरा करके उसके साथ चिपक गया और झट से उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और मसलने लगा उसके विकराल लिंग को ! क्या लिंग था साले का ! जो मैंने पजामे के ऊपर से सोचा था उस से भी बड़ा था उसका लिंग ! हाँ, मोटा कम था ! मतलब गांड के लिए बना था समझो !

उसने मुझे नंगा कर दिया, तभी दरवाजा खटका।

कौन? उसने कह दिया।

मैं राजू ! काम क्यों रोक दिया रे?

उसने बिना पूछे दरवाज़ा खोल दिया, मैंने चादर लपेट ली।

क्या कर रहे हो दोनों दरवाज़ा बंद करके?

बोला- आजा, मजे कर रहे हैं दोनों ! फिल्म देख रहे हैं और इसकी गांड से खेल रहा हूँ, साला गांडू निकला !

वो बोला- फिर तो आज पाँचों उंगलियाँ आज घी में हैं !

मैं तो था ही बेशर्म, मैंने कहा- साले देख क्या रहा है? सभी घर आ जायेंगे ! मादरचोदो, पकड़ लो मुझे !

उसने अपनी लुंगी उतार दी। उसका बम्बू घाट तम्बू की तरह तन चुका था। मैंने उसको ऊँगली के इशारे से पास बुलाया और उसके अंडरवियर में हाथ डालते हुए उसके खड़े लिंग को सहलाने लगा। उसका अंडरवियर उतार दिया, उसका लिंग इतना मस्त निकला, काले नाग जैसा लिंग देख मैं बेकाबू होने लगा। मेरे मुँह में लेते ही वो अपने उफान पर आ चुका था। वो सांस खींचता तो मेरे मुंह में ही हिलने लगता, दूसरे को पास बुलाया और उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगा। फिर कभी उसका कभी उसका !

चूस चूस कर, चाट चाट कर दोनों को इतना पागल कर दिया कि दोनों ने मुझे नंगा कर दिया।

चल लेट ! चल !

राजू ने अपना लिंग आगे से आकर मेरे मुँह में दिया और दूसरे ने थूक लगाते हुए गांड पर टिका दिया।

मैंने कहा- पहले उंगलियाँ डाल कर खोल ले इसको ! चाट !

वो मेरी गांड चाटने लगा। मेरा इशारा पाते ही उसने लिंग अन्दर डाल दिया। थोड़ी सी चुभन के बाद वो आराम से चोदने लगा। मेरा कौन सा पहला मौका था ! मुझे चुदवाने का पूरा तजुर्बा था। वो मेरी गांड की दीवारों की गर्मी सह नहीं पाया और उसने मुझे जोर से भींच लिया और अपने गर्म-गर्म लावा से मेरी खुजली ख़त्म कर दी।

राजू जल्दी से पीछे आया, टाँगें खुलवा अपने कन्धों पर टिकाते हुए अपना लिंग को प्रवेश करवा दिया और उसके झटके मुझे मजा देने लगे। तेजी से करते हुए उसने भी अपना माल निकाल दिया और मेरे ऊपर गिर गया।

दूसरे वाले का मन नहीं भरा था तो उसने फिर से मुँह में डाल दिया उसका नमकीन लिंग चूसना मुझे भी अच्छा लगा। वो तैयार हो गया और उसने मुझे बीस-पच्चीस मिनट चोदा।

और फिर जब तक पत्थर का काम पूरा नहीं हुआ, हर दोपहर उनका लंच मेरी गांड होती !

काम के बाद मैंने दोनों को मुँह लगाना छोड़ दिया।

यह मेरी एक और सच्ची कहानी है।

अन्तर्वासना के ज़रिये मैं आप लोगों को ऐसे ही मजे देता रहूँगा ! Antarvasna

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