Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
दोस्तों मेरा Antarvasna यानि की रोशन गिल का अन्तर्वासना के सभी पाठकों को प्रणाम !मैं भी अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसिका हूँ, हर रोज़ लोग-इन करते ही सबसे पहले अन्तर्वासना की साईट खोल के नई कहानियों को मजा ले ले कर पढ़ने के बाद मुझे ऊँगली भी करनी पड़ती है।
मैं एक बहुत बड़े बिजनेस-मैन की बेटी हूँ, जब मेरी मध्यम-वर्गीय लड़कियों से दोस्ती हुई। जब उनके घर में कोई नहीं होता था तो उनके साथ फिल्में देखती थी। कच्ची उमर में ही मुझे चुदवाई का चस्का लग गया, 18 साल की थी जब मैंने चुदाई का मजा लिया, उसके बाद मैं एक बिगड़ी हुई अमीर लड़की के लेबल से जानी जाने लगी।
मैं कई लड़कों के साथ मैं हमबिस्तर हुई हूँ। पापा बिजनस-टूअर पे ही रहते, मॉम किट्टी पार्टियों में लगी रहती और मैं लड़कों में !
मुझे संगीत का बहुत शौक है क्यूंकि मुझे संगीत वाले सर बहुत पसंद थे, जो चीज़ रोशन को अच्छी लगे, रोशन उसको पाने के बाद ही दम लेती है।
कॉलेज में पहुँच कर मैंने संगीत को एक विषय के रूप में ले लिया। सर की उम्र 34-35 साल होगी, लेकिन उनका व्यक्तित्व देख सभी लड़कियाँ उन पे फ़िदा थी।
संगीत की क्लास कॉलेज लगने से एक घंटा पहले सुबह लगती थी। सर जल्दी आ जाते थे। 6 फ़ुट लंबे, मजबूत शरीर, चौड़ी छाती देख मैं पागल हुई पड़ी थी। मैं जानबूझ कर उनके सामने झुक जाती, उनको अपने अनारों के दर्शन करवाती। धीरे धीरे वो मेरी तमन्ना समझने लगे। मैंने क्लास से आधा घंटा पहले आना शुरू कर दिया।
एक रोज़ मैं कॉलेज पहुँची, सर की कार नीचे खड़ी थी, सर कमरे में नहीं थे, मैं उनको देखने नीचे गई, दुबारा कमरे में आ गई। सोचा था आज सर को सब कह दूंगी क्यूंकि आज कॉलेज में छुट्टी थी, सिर्फ़ संगीत की क्लास के लिए ही सर ने बुलाया था।
आज ड्रेस में नहीं आना था इसलिए में कसा हुआ लाल रंग का टॉप जो लगभग मेरे बदन से चिपका हुआ था वो भी सिर्फ़ नेवेल तक जिस से पेट साफ़ दिख रहा था मैंने जींस भी नीचे बांधी थी, उनकी नज़र सुरों में कम मेरे चिकने पेट पे ज्यादा थीं , कसी जीन से चूतड साफ़ दिख रहे थे।
मैंने देखा- सर बार बार मेरी ब्रेस्ट को देखते। सर पता नहीं किस ख्याल में खोये हुए थे। मैंने कुछ पू्छना था, मैंने अपना हाथ उनकी जाँघ पे रखते हुए कहा- किन ख्याल में खो गए सर?
वो बोले- कुछ नहीं ! तुम करो !
मैंने हाथ ऊपर सरकाते हुए उनके लण्ड वाली जगह पे फेरते हुए कहा- बता दो न !
जवान लड़की, वो भी ऐसे लिबास में अकेली, कोई मर्द भी डोल जाये !
मैंने उनके लण्ड को मसल दिया उन्होंने मेरी कमर में हाथ डालते हुए मेरे पेट को सहला दिया।
कमरे में सिर्फ़ शांति थी। ना वो बोले, न मैं !
वो मुझे बाँहों में समेटे हुए मेरे होंठ चूसने लगे। साथ में मेरी टॉप में हाथ डाल मम्मों को दबाने लगे। मेरी सिसकियाँ पूरे कमरे में गूंज उठी।
सर बोले- इसी लिए तुम्हें अकेली को बुलाया था।
मैंने उनकी शर्ट के बटन खोल कर उनकी चौड़ी छाती पे होंठ रगड़ते हुए कहा- सर, मैं आपको बहुत चाहती हूँ !
उन्होंने मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा खोल कर मेरे दोनों मम्मे चूसने लगे। मैं आहें भरने लगी। मैंने भी अपनी बेल्ट खोल फ़िर जीन खोल उतार डाली ख़ुद ही। अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।
सर मुझ पर छाने लगे। मैंने उनके कच्छे में से लण्ड निकाल कर सहलाया, कितना बड़ा था ! सांवला, मोटा, ताज़ा लण्ड देख मेरे मुहं में पानी आ गया। मैंने झट से उस पर जुबान फेरते हुए मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने बहुत लण्ड चूसे थे लेकिन इसको चूसने में दिक्कत आने लगी क्योंकि यह तो बहुत मोटा था। फ़िर भी मैंने 69 में होकर लण्ड चूसना जारी रखा, सर मेरी चिकनी चूत चाटने लगे, मेरे दाने को मसलने लगे।
मैंने कहा- सर, अब चोद डालो मुझे !
वो मेरी नंगी टांगों के बीच में आकर आसन लगा कर लण्ड को चूत पे रख कर रगड़ने लगे। फ़िर एक धक्का मारा और उनका आधा लण्ड मेरी गीली चूत में घुस गया, थोड़ा दर्द हुआ लेकिन सह लिया।
सर बोले- तुम पहले से ही चुदी हुई हो?
मैंने कहा- जी !
उन्होंने एक और धक्का लगाकर अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। लण्ड काफी बड़ा था, इसीलिए बहुत कसा हुआ अन्दर जा रहा था। सर धक्के मारने लगे।
उईईईइऽऽऽ सीईईईऽऽ चोदो सर ! मुझे दबा दबा के चोदो !
मैं ज़न्नत की सैर करने लगी, मैंने सब कुछ बक डाला- हाय ! ऐसा मजा अभी तक मेरे 5 बॉय-फ़्रेन्ड्स ने भी कभी नहीं दिया ! सर चोदो ! फाड़ डालो इस कमीनी को ! ऐसा ही लण्ड चाहती थी मैं ! भोंसड़ा बना डालो इसका !
तभी उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाल लिया और सीधे लेटते हुए मुझे ऊपर आने को बोले। मैं उनके लण्ड पर बैठ गई, पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी चूत की गहराइयों में उतर गया। मैं उछलने लगी, मेरे बड़े बड़े मम्मे हिलने लगे। सर बोले- अभी +1 में हो और इतने बड़े करवा लिए ! तू सच में रंडी है ! ले खा मेरा लण्ड !
सर नीचे से उठ उठ के चोदने लगे मुझे।
हाय सर ! मेरा बस चलता तो पहले दिन ही आपके नीचे लेट जाती ! पहले मिले होते तो किसी और का लण्ड न खाती ! आपकी पत्नी धन्य है उसको यह निराला लण्ड मिला !
मैं एक बार स्खलित हो चुकी थी, लेकिन क्या ताकत थी सर में ! वो फ़िर मुझे पलट नीचे डाल बोले- टांगों को मेरी कमर से लपेट दे !
मेरी गाण्ड के नीचे गद्दी लगा मेरे ऊपर लेट के मुझे चोदते हुए बोले- साली ! औरत को नीचे लिटा के ही असली चुदाई मिलती है !
सर ने मेरे मम्मे खूब दबाये, चूसे।
जब सर झड़ने वाले थे तो मेरी चुदाई और तेज़ हो गई, लण्ड मेरे अन्दर थोड़ा चुभने लगा लेकिन मैं चुप रही और उसका साथ देती रही।
तभी तेज़ी से गरम गरम माल मेरी बच्चेदानी के आस पास निकलना शुरू हुआ, मैं फ़िर झड़ गई।
हम दोनों नंगे एक दूसरे से लिपटे रहे। मैंने दिल में कहा- रोशन, आज फ़िर तू जीत गई ! जो चाहा, आज पा के ही दम लिया।
उसके बाद हर शनिवार वो मुझे कॉलेज बुलाते। एक रोज़ हम चुदाई में मशगूल थे, पूरी दुनिया से बेखबर, हमें खेल-शिक्षक ने पकड़ लिया। वो जानता था कि मैं बहुत अमीर घर से हूँ। धमकी वो दे नहीं सकता था, इसी बीच सर वहां से रफ़ूचक्कर हो गए, मानो सब पहले से तय हुआ हो, मैं खेली खाई थी। खेल-शिक्षक उससे भी हट्टे-कट्टे थे, उनकी आयु 49-50 साल होगी, फ़िर भी वो बोले- रोशन ! एक बार मेरे नीचे लेट जा ! याद किया करेगी कि कभी किसी ने चोदा था !
वो पास आए और मुझे बाँहों में ले लिया। उसकी लड़की मेरी हम-उमर थी और उसी कॉलेज में पढ़ती थी। मैं बिल्कुल नंगी थी इसलिए क्या कहती !
ऊपर से जब उसने लण्ड निकाल के दिखाया तो मैं रोक नहीं पाई- 10 इंच का लण्ड था !!!
कैसी लगी चुदाई की दास्ताँ !
उसके बाद उसने मुझे कैसे कहाँ चोदा फ़िर बताऊंगी आपके जवाब पढ़ने के बाद !!
इंतजार करो !
अगर अन्तर्वासना ने मेरी कहानी नहीं छापी तो मैं वेबसाइट देखना छोड़ दूंगी। Antarvasna
मेरा नाम राजेश है। सबसे Antarvasna पहले मैं सभी लंडों और प्यारी चूतों को सलाम कहता हूँ।
यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी कक्षा की एक लड़की जिसका नाम किरण था, दिखने में बहुत सुन्दर थी। उसे देखकर किसी भी लड़के का लण्ड खड़ा हो सकता था।
हम दोनों में अच्छी दोस्ती थी। हम लोग कक्षा में आगे-पीछे ही बैठते थे। हम दोनों एक-दूसरे को खूब चिढ़ाते थे। मैंने कभी भी उसे उस नज़र से नहीं देखा था, पर एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि…
हुआ यह कि उसकी तबीयत ख़राब हो गई थी। डॉक्टर ने उसे २ हफ्ते तक आराम करने की सलाह दी थी। इसी कारण उसका स्कूल का काम छूट गया था। लगभग २ हफ्तों के बाद जब वह स्कूल आई तो उसने मुझसे कहा कि मेरा काम अधूरा है और उसे मेरी मदद चाहिए, क्योंकि मैं अपनी कक्षा का सर्वश्रेष्ठ पढ़ाकू भी था, साथ ही उसका घर मेरे घर के समीप भी था। मैंने भी उससे कह दिया कि आज स्कूल के बाद साथ में ही चलेंगे मेरे घर, वहीं तुम काम कर लेना।
छुट्टी के बाद हम दोनों घर जा रहे थे। चूँकि वह जुलाई का महीना था, अचानक बारिश शुरु हो गई। उसके सारे कपड़े गीले हो गए, जिससे उसकी चूचियाँ साफ दिख रहीं थीं।
ज़्यादा भीग जाने के कारण मैंने उससे कहा- जाओ अपने घर जाकर कपड़े बदल लो।
पर उसने कहा- मेरे घर पर आज कोई नहीं होगा और ताला लगा होगा।
मैंने कहा, ठीक है, चलो फिर मेरे घर।
मैं पहले बता दूँ कि मैं लगभग रात के ८ बजे तक अकेले रहता हूँ, क्योंकि मेरे मम्मी, पापा और दीदी तीनों ही नौकरी पर चले जाते हैं।
घर पहुँच मैंने उसे अपनी बहन के कपड़े दे दिए। चूँकि दोनों लगभग बराबर ही थीं उसे मेरी बहन के कपड़े ठीक-ठाक आ गए। उसने मुझसे कहा कि अपना मोबाईल दे दो, मैं अपनी मम्मी को बता दूँ कि मैं तुम्हारे घर पर हूँ। मैंने उसे मोबाईल दे दिया और ख़ुद कपड़े बदलने चला गया।
मैं जब १५ मिनटों के बाद आया तो मैंने देखा कि वह मेरे मोबाईल में ब्लू-फिल्म की क्लिप देख रही है। मैं डर गया कि कहीं वह गुस्सा ना हो जाए।
मुझे देखकर उसने जल्दी से वीडियो बन्द कर दी। मैंने उससे पूछा कि क्या देख रही थी, तो वह शरमा गई।
मैंने हिम्मत से काम लेते हुए उससे कहा- इसमें शरम की क्या बात। ब्लू-फिल्म देखकने में कोई बुराई नहीं।
मैं उससे पूछा – “मज़ा आया?”
तो उसने धीरे से हाँ कहा।
मैंने कहा- चलो साथ में देखते हैं। मोबाईल पे तो छोटी है, चलो कम्प्यूटर पर दिखाता हूँ।
मैंने कम्प्यूटर चालू करके उसपर एक ब्लू-फिल्म चालू कर दी। हम लोग साथ में लेट कर ब्लू-फिल्म देखने लगे।
वह गरम होने लगी। उसकी चूचियाँ एकदम कड़ी हो गईं थीं, मैं ग़ौर कर रहा था। मैंने धीरे से उसके पैरों पर हाथ रख दिया और वह कुछ ना बोली।
यह देख मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसकी चूचियाँ दबा दीं, और उसके होठों पर चुम्बन ले लिया। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, वह उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। इधर साथ में मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा था। मेरा लण्ड उसकी चूत पर टकरा कर एक रॉड की तरह कड़क हो गया था और जीन्स फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था।
मैंने उसकी टॉप उतार दी। उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ देखकर मैं पागल हो गया। मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रहीं थीं। मैंने अपना हाथ जब उसकी स्कर्ट में डाला तो जाना कि उसकी पैन्टी पूरी गीली थी। वह शायद झड़ चुकी थी। मैंने उसकी स्कर्ट और पैन्टी उतार दी और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत एकदम गुलाबी और बिना बालों की थी।
उसे बहुत मज़ा आ रहा था, वह कहे जा रही थी, “और ज़ोर से चूस… और ज़ोर से…”
मैंने चूसना बन्द कर दिया। वह गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज़ चूसो…
मैंने कहा कि उसके लिए तुम्हे मेरा लंड चूसना पड़ेगा तो उसने हमी भर दी। मैंने उससे कहा कि मेरा लण्ड निकाल लो। उसने मेरी जीन्स और अण्डरवियार निकाल दी और मेरे लण्ड को चूसने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम 69 की मुद्रा में आ गए।
जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने उसके मुँह को चोदना शुरु कर दिया। इतने में वह झड़ गई। मैं भी झड़ गया, उसका पूरा मुँह मेरे जूस से भर गया।
थोड़ी देरे में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने उसे लिटा दिया और उसके पैर फैला दिए। मेरा लण्ड हल्का सा ही घुसा था कि वह चिल्लाने लगी कि छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है और वह रोने लगी। पर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ देर के बाद उसे भी मज़ा आने लगा था और वह कह रही थी – “फक मी राजेश… फक मी… फक मी हार्डर…”
थोड़ी देर में हम दोनों साथ में झड़ गए।
मैंने उसेक बाद उसे खूब चूमा, और फिर से उसकी चूत मारी।
मैंने उसकी गाँड भी मारी
अपनी टिप्पणियाँ मुझे जरूर लिखें Antarvasna
मैं आपका रोहित फिर से Hindi Porn Stories आपके लिए लेकर आ गया हूँ एक चटपटी लेकिन सच्ची कहानी…
आज मैं अपनी कहानी शुरू करने से पहले में कुछ बातें जो लड़कियाँ, औरतें सेक्स के बारे में सोचती हैं वो बताना चाहूँगा…
मैं आज तक कई लड़कियों से मिल चुका हूँ और कई औरतों से भी …
मैंने उनसे बात करने पर यह पाया कि अधिकतर लड़कियाँ और औरतें यौन-सम्बन्ध बनाना चाहती हैं लेकिन फिर भी डरती हैं कि किसी को भी पता चल गया तो क्या होगा…???
वो हमेशा दूसरों के बारे में ही सोचती हैं… वो कभी यह नहीं सोचती कि मेरी यौन-सम्बन्ध बनाने की भूख कब और कैसे शांत होगी !
लड़की सोचती हैं कि शादी के बाद मेरे पति को पता चल जायेगा कि उसकी चूत फटी हुई है जिस कारण वो मुझे छोड़ देगा।
या कोई शादीशुदा औरत होगी तो बदनामी के डर से अपनी इच्छा होने के बावज़ूद यौन समबन्ध नहीं बनाती है…
अगर कोई लड़की किसी लड़के से चुदवाना चाहती है तो वो उस लड़के को कभी चुदाई के लिए नहीं कहेगी क्योंकि वो चाहती है कि पहले लड़का उसे चुदाई के लिए कहे …
और लड़का यह सोचता है कि लड़की कहे क्योंकि अगर उसने यह बात कह दी और लड़की बुरा मान गई तो वो उसकी दोस्ती से भी हाथ धो बैठेगा।
मेरा मानना है कि लड़की को कह देना चाहिए कि वो उस लड़के से यौन-तृप्ति चाहती है…
अगर किसी लड़की को लगता है कि उसकी शादी के बाद उसकी योनिच्छेदन का पता उसके पति को लग जायेगा तो उन्हें ऐसा करना चाहिए कि अपने पति को सुहागरात के दिन अपनी चूत दिखाये नहीं सीधे चुदवाये …इससे उसका पति जोश में तेजी से चोद देगा और उसे कुछ पता नहीं चलेगा।
मेरी तो सभी लड़कियों और औरतों को यही सलाह है कि उन्हें जिसके साथ यौन सम्बन्ध बनाने की इच्छा हो उनके साथ खुल कर सेक्स करें…
मैं ये सब बातें ऐसे ही नहीं कह रहा, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को चोदा है … उनसे हुई बातों के आधार पर ही कह रहा हूँ।
मैंने कई लड़कियों और औरतों से मेल से बातें भी की हैं ….
आज की मेरी कहानी भी ऐसी ही एक शादीशुदा औरत की है जिसे चुदवाने की तो बड़ी इच्छा होती है लेकिन वो कभी किसी से भी बात नहीं कह सकी …. उसका पति भी उसे सिर्फ तीन-चार मिनट चोदता, फिर सो जाता ! वो लम्बी चुदाई चाहती थी… उसकी चूत की प्यास कभी शांत ही नहीं होती थी…. उस औरत का नाम था दीपाली …
उसने मेरी पहली कहानी “मैं और मेरी भाभी जयपुर में” पढ़ते ही मुझे मेल किया- मैं एक शादीशुदा 33 साल की औरत हूँ, मेरी शादी को सात साल हो चुके हैं। मेरा पाँच साल का एक बेटा भी है। मेरे पति कभी मेरी चूत को शांत नहीं कर पाए हैं। मैं भी आप ही के शहर जयपुर में रहती हूँ। मैंने जब आपकी कहानी पढ़ी तो मुझे लगा कि आप ही मेरी चूत को शांत कर सकते हैं। आपने जब अपनी भाभी को चोदा तो मुझे भी चोद सकते हैं। अतः आप से मेरी विनती है कि आप मुझे चोदें। मेरा मोबाइल नंबर *********** है, आप मुझे अपना नंबर दे दे या मुझे फ़ोन करें।
उसने साथ में अपनी दस सेक्सी फोटो भी मुझे भेजी। वो साड़ी में और जींस दोनों में ही सेक्सी लग रही थी।
मैंने तो मेल पढ़ते ही उसे चोदने का मन बना लिया, फिर मुझे लगा कहीं यह कोई लड़का मेरे साथ शरारत तो नहीं कर रहा, इसलिए मैंने अपना दूसरा फ़ोन नंबर जिसे मैं साल में तीन-चार बार बदल लेता हूँ, वो मेल किया। मेल करने के डेढ़ घंटे बाद उसका फ़ोन आया। तब मैं बाहर था इसलिए मैंने बाद में बात फ़ोन करने के लिए कहा।
फिर जब मैं घर आया तो मैंने अपने असली नंबर से फ़ोन किया और ढेर सारी बातें की।
हमने अगले दिन मिलने की योजना बनाई। हम एक रेस्टुरेंट में गए, वहाँ खाना कम, बातें ज्यादा की।
फिर हमने चुदाई का कार्यक्रम भी बनाया।
मैंने उससे पूछा कि वो घर में कब अकेली रहती है?
तो बोली- मैं सुबह साढ़े नौ से डेढ़ बज़े तक अकेली रहती हूँ।
मैं बोला- बहुत बढ़िया है.. अब 5-6 घंटे चुदाई करने में बहुत मजा आएगा…
फिर हमने सोमवार को साढ़े दस बजे उसके घर चुदाई का कार्यक्रम बनाया।
सोमवार के दिन मैं सुबह से ही तैयार हो कर जाने की तैयारी करने लगा। मैं दस बजे घर से निकल गया और दस बज़ कर बीस मिनट पर ही दीपाली के घर पहुँच गया।
उसका घर काफी बड़ा था। उसने पहले मुझे अपना पूरा घर दिखाया फिर अपने बेडरूम में ले गई। मैंने उसे वहाँ जबरदस्त चुम्बन दिया। उसे बाहों में लेकर उसे और जबरदस्त किस दिया … और साथ साथ उसके स्तन दबाने लगा..
दीपाली के होंठ बहुत रसीले थे… मुझे सबसे ज्यादा मजा उसके होंठों को चूमने में आया।
फिर मैं उसके चुचे दबाने लगा। उसके स्तन बहुत बड़े थे और मुझे भी बड़े ही पसंद हैं ..इसलिए मैंने उसके स्तनों का खूब मजा लिया।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया..और उसे चूमते हुए उसके वक्ष को ब्रा से आजाद कर दिया। फिर मैंने उसके चुचूकों को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
वो मुँह से आह निकलने लगी..
मुझे बड़ा मजा आ रहा था..
उसने कहा- जान, मैं तुम्हारा लंड मुँह में लेना चाहती हूँ..
मैं बोला- जरुर लो मेरी जान …
फिर मैं खड़ा हुआ, उसने मेरा टी-शर्ट उतारा और और मेरे सीने को चाटने लगी। इसमें बड़ा मजा आ रहा था..
फिर उसने मेरी जींस उतारी और मेरे लंड को मुँह में लेने लगी..
थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया जिससे अब वो सिर्फ पैंटी में थी। उसका फिगर बढ़िया होने से पैंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी..
फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी और चूत को चाटने लगा। चूत से मस्त वाली खुशबू आ रही थी।
मैंने कारण पूछा तो बोली- परफ्यूम लगाया है ..
फिर वो परफ्यूम मैंने भी ले लिया..
फिर उसका पानी आ गया जिसे मैं पी गया..
बहुत अच्छा लगा ..
फिर मैं खड़ा हुआ और अपना साढ़े सात इंच लम्बा लौड़ा उसकी चूत में घुसाया। ३-4 इंच तो आसानी से घुस गया, फिर उसकी चूत थोड़ी टाइट लगी.. मैंने एक धक्का मारा और पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर ..
अन्दर घुसते ही दीपाली के मुँह से- आह ! मार डाला ! आवाज आई।
लेकिन मुझे पता था यह तो होगा ही ! इसलिए मैंने अपनी स्पीड कायम रखी ..थोडी देर बाद वो सामान्य हो कर बोली- अब बड़ा मजा आ रहा है।
फिर मैं अपनी मस्त चाल में उसे चोदता रहा …
करीब पच्चीस मिनट की चुदाई में हमने बहुत मजे किये..
मैंने कभी बेड पर लिटा कर चोदा तो कभी उसे घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत में अपना बड़ा लंड डाला फिर उसकी गांड में अपना लंड डाला। उसने आज से पहले कभी गांड नहीं मरवाई थी इसलिए उसकी गांड टाइट थी। मैंने पहले तो थोड़ा धक्का मारा जिससे मेरा आधा लंड उसकी गांड के अन्दर चला गया। फिर मैंने अपनी गति बढ़नी शुरू की जिससे उसकी गांड का छेद खुलता गया ..
फिर मैंने मजे से उसके साथ चुदाई की…
उसे पहली बार गांड चुदाने में बड़ा मजा आया …
हमने उस दिन तीन बार चुदाई की।
मैं साढ़े बारह पर उसके घर से निकल गया क्योकि उसका बेटा आने वाला था..
यारो, मुझे इतने मजे कभी नहीं आये जितने दीपाली को चोदने में आये …क्योंकि दीपाली का फिगर शानदार है…
आप लोगों को मेरी कहानी और सलाह पसंद आये तो मुझे मेल करना मत भूलना ! Hindi Porn Stories
यह तब की कहानी है Hindi Sex Stories जब मैं २४ साल का था। घर वालों ने मेरी शादी एक शहर की लड़की से तय की जिस शहर में मैं काम कर रहा था। लड़की के पिता साठ साल के थे और वो बीमार थे, माता सैंतालीस साल की थी और काफी सेहदमंद थी, बड़ी बहन माया सत्ताइस साल की शादीशुदा थी, उसकी शादी को तीन साल हुए थे लेकिन अभी उसकी कोई संतान नहीं थी और सबसे छोटी बहन अट्ठारह साल की थी जो पढ़ रही थी।
शादी के बाद मैं उन्हीं लोगों के साथ रहने लगा, क्योंकि घर में कोई जवान पुरुष नहीं था और पिताजी की देख-भाल के लिए वहाँ होना जरूरी था।
बड़ी साली माया दिखने में काफी सुन्दर थी लेकिन हमेशा चुपचाप रहती थी, उसके पति गाँव में अध्यापक थे और वो महीने में तीन या चार दिन ही आते थे।
मेरे साथ वो घुल मिल के रहती थी लेकिन कुछ पूछ्ने पर नहीं बताती थी। एक दिन दोपहर मैं घर पे अकेला था तो मैंने खिड़की से देखा कि माया स्कूल से घर आ रही थी, वो भी स्कूल टीचर थी, उसे देखते ही मुझे एक कल्पना सूझी और मैंने उसे पटाने की तरकीब निकाली।
मैंने अपनी चड्डी निकाल के सिर्फ लुंगी पहनी जोकि सामने से खोल सकते थे, और बेडरूम में सो गया। उसके विचार से मेरा लण्ड तन के दस इंच का हो गया था और लुंगी में खडा हुआ था।
थोड़ी देर में माया ताला खोल कर अन्दर आई और मुझे अन्दर उस स्थिति में देखकर मुस्कुराई। वो बड़े प्यार से मेरे तने हुए लिंग को देख रही थी। शायद उसने पहली बार इतना बड़ा हथियार देखा था।
अब उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किये। उसने अपनी साड़ी उतार कर बाजू में रखी और फिर ब्लाऊज़ निकाला। वो मुझे सोया हुआ समझकर बिंदास अपने कपड़े बदल रही थी या सब कुछ जानते हुए अनजान बन रही थी।
फिर उसने पेटीकोट उठाकर अंदर से अपनी चड्डी निकाल कर बाजू में रखी। उसी कारण मुझे उसके बड़े बड़े गोरे कूल्हे नजर आये और मेरा लंड और तन गया।
फिर उसने अपनी ब्रा भी निकाली और वो घर में पहनने के कपड़े लेने के लिए मुड़ी तब मैंने उसके बड़े-बड़े गोरे आम जैसे स्तनों के दर्शन किये। उसका पेटीकोट आगे से थोड़ा फटा हुआ था इसलिए पेट के नीचे के बाल भी साफ़ नजर आ रहे थे।
अब मैंने आहिस्ते से अपनी लुंगी सरका दी ताकि मेरा पूरा का पूरा लंड उसको दिखे। जब उसने मेरा दस इंच का लंड खुला देखा तो उसके होश उड़ गए। लगता है उसको नजदीक से देखने की उसको लालसा हुई और वो थोड़ा नीचे झुक गई।
मैं उसी वक़्त उठकर खड़ा हुआ जैसे कि मुझे बाथरूम जाना है। सामने ही उसे देखकर मैंने आश्चर्य से उसे पूछा कि वो कब आई। लेकिन वो बिना कुछ बोले अपनी छाती पर हाथ रखकर खड़ी थी और मेरे नीचे वाले को देखकर मुस्करा रही थी।
मैंने नीचे देखा और उसे कहा- माफ़ करना, सपना देख रहा था, इसीलिए यह हालत हुई है।
तो उसने हंसते हुए कहा- कौन है वो जो सपने में इस सुन्दर चीज से खेल रही थी?
तो मैंने उससे कहा- बुरा नहीं मानना लेकिन वो तुम्हीं हो जो सपने में मुझे सताती हो !
ऐसा कहते हुए मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके मुख को चूमा और उसके स्तन अपने हाथ में लेकर कुचलने लगा। लेकिन उसने मुझे जोर का धक्का देकर दूर धकेला और बेड पर बैठकर रोने लगी और कहने लगी- नहीं, मुझे माफ़ करो लेकिन मैं ये सब तुम्हारे साथ नहीं कर सकती, यह पाप है, तुम मेरे बहन के पति हो, यह पाप मैं नहीं कर सकती।
थोड़ी देर उसको रोने देने का बाद मैंने उसे कहा- कैसा पाप ? तुम तो मेरी साली हो और साली तो आधी घरवाली होती है और क्या मुझे मालूम नहीं कि शादी को तीन साल होने के बाद भी तुम्हारी संतान नहीं है क्योंकि तुम्हारा पति तुम्हें यह सुख नहीं दे पाता। क्या तुम नहीं चाहती कि तुम मेरे इस लंड की मालकिन बनो और इसका मजा लूटो ! क्या तुम मुझसे संतान होना पसंद नहीं करोगी? अगर मेरी शादी छाया (मेरी पत्नी) के बजाए तुम से हो जाती तो कितना अच्छा होता ! तुम्हें पता है कि मेरा ये दस इंच का हथियार छाया नहीं पेल पाती और वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाती।
वो मेरी तरफ देखने लगी, मेरी नजर में अपार करुणा थी, मैंने उसे कहा- क्या महाभारत में कितनी औरतों के दो या पाँच पति नहीं थे? कितनी औरतों ने दूसरे पुरुष से संतान नहीं पाई थी? यहां तो मैं तुम्हारे घर का पुरुष हूँ और अगर तुम्हारा पति तुम्हें यह सुख और सन्तान नहीं दे पाता तो सबसे पहले ये मेरा अधिकार और कर्त्तव्य है कि मैं तुम्हें यह सुख और संतान दे दूँ ! अब यह तुम्हारे हाथ में है कि हम सब दुखी रहे या तुम मेरी पत्नी बन के यह सुख भोगो और मुझसे संतान प्राप्त करो ! इस कारण मैं छाया को भी ज्यादा परेशान नहीं करुंगा और वो भी सुखी रहेगी। क्या तुम नहीं चाहती कि तुम, मैं, तुम्हारी बहन और संतान पाकर तुम्हारे पति सब खुश हो और घर ही घर में तुम्हें यह सुख मिले?
उसको चुपचाप खड़ी पाकर मैं समझ गया और उसको अपनी ओर खींचकर उसके चुम्बन लेने लगा और उसके बड़े बड़े आम जैसे उरोज कुचलने लगा।
अब वो मेरी बदन से चिपक गई। मैंने बिना समय गँवाए उसको बेड पे डाला और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसे दूर फेंक दिया। अब वो पूरी नंगी मेरे नीचे थी और मैं उसके पूरे बदन को चूम रहा था।
फिर मैंने 69 की पोजीशन ली और अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और मैं उसकी चूत को अन्दर जीभ डालकर चूसने लगा। मुझे औरतो की चूत चूसना बहुत पसंद है, उनकी चूत से बहता हुआ पानी मुझे बहुत अच्छा लगता है।
दस मिनट तक एक दूसरे की चाटने के बाद मैं उसकी टाँगों के बीच में आया और उसकी एक टांग अपने कंधे पर लेकर अपना लंड का सुपारा उसकी चूत की दरार पे टिका दिया. और एक जोर का धक्का दिया।
वो जोर से चिल्लाई तो मैंने अपने हाथ से उसका मुँह बंद किया। वो रोने लगी और मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत में से खून बह रहा था। मैं जान गया कि उसकी चूत की झिल्ली मैंने तोड़ दी है।
शादी के तीन साल बाद भी वो कुंवारी ही थी। मैंने उसके पति को मन ही मन धन्यवाद दिया कि उसका सील तोड़ने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने दूसरा जोर का धक्का दिया और इस बार मेरा पूरा दस इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लंड उसकी चूत में घुस गया।
फिर आहिस्ते- आहिस्ते मैं लंड को अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी। दस मिनट बाद उसने मुझे जोर से पकड़ लिया मैं समझ गया कि उसने अपना पानी छोड़ दिया है।
लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था और 15 मिनट तक लगातार धक्के मारने के बाद मेरा लावा गिरने को आया तो मैंने उसको पूछा कि वो क्या चाहती है, मैं मेरा वीर्य उसकी चूत में गिराऊं या वो उसे अपने मुँह में लेना पसंद करेगी?
वैसे मैं अपने वीर्य को बहुत कीमती मानता हूँ और उसे जमीन पे गिराना मुझे पसंद नहीं है। लेकिन उसने कहा कि वो मेरे वीर्य को पवित्र मानती है और वो उसे अपनी चूत में लेना चाहती है ताकि उसे संतान प्राप्त हो। वो चाहती है कि छाया की बड़ी बहन होने के नाते वो उससे पहले माँ बनना चाहती है।
मैंने भी उसे कहा कि मैं उसे अब मेरी बड़ी पत्नी के रूप में देखता हूँ और मेरे बच्चे की माँ बनना उसका ही पहला अधिकार है और मैं उसे पूरा करूँगा।
ऐसा कहकर मैंने 10-12 पिचकारी वीर्य उसकी चूत में छोड़ा और फिर हम दोनों उसी पोजीशन में दस मिनट तक पड़े रहे। फिर बाथरूम जाकर हमने एक दूसरे को साफ़ किया और भगवान की तस्वीर के सामने खड़े होकर मैंने उसके साथ गन्धर्व विवाह किया।
जिंदगी भर मैंने उसे पत्नी मानने की कसम खाई और उसे बच्चे देने का अधिकार प्राप्त किया।
उसके दो दिन बाद मेरे जीवन में क्या तूफ़ान आया ये आप सोच भी नहीं सकते !
वो सब अगली कहानी में बताऊंगा, मेरी अगली कहानी का इंतजार करिए। तब तक के लिए नमस्कार ! Hindi Sex Stories
बाबू लाल जी बीकानेर से १२० किलो Hindi Sex Stories मीटर दूर बिहार के राजपुर गाँव के हाई स्कूल में हेडमास्टर थे, पढाने में बड़े तेज थे और उन्हें गोल्ड मैडल मिला था। वो कहीं भी और अच्छी नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्हें अपने गाँव से बहुत प्यार था, और वहीं वो कुछ करना चाहते थे। २२ साल की उमर में उनकी शादी १७ साल की एक बड़ी सुंदर लड़की कमला से हुई।
उन दोनों की जोड़ी बड़ी अच्छी लगी सबको। बाबू लाल जी कद के थोड़े छोटे थे- ५ फीट ३ इंच के, लेकिन कमला शादी के समय उनसे १ इंच छोटी थी। कमला का बदन शादी के समय तक भरा नहीं था। शादी के बाद भी उसका कद बढ़ता गया और साल भर में अपने बेटे राहुल को जन्म देने के समय तक वो करीब ५ फीट ४ इंच की हो गई और उसका बदन भी गदरा गया। उनकी दूसरी संतान दीपा राहुल के ८ साल बाद पैदा हुई, लेकिन उसके जन्म के समय कमला को शारीरिक समस्या हो गई और उसका ऑपरेशन करना पड़ा, जिसकी वजह से वो फिर कभी माँ नहीं बन सकती थी।
तो फिलहाल अभी बाबू लाल जी ४४ साल के थे और कमला ३ महीने में ४० की होने वाली थी। बाबू लाल जी जैसे तेज थे, उनका बेटा राहुल भी उतना ही तेज निकला और २१ साल की उमर मे आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस के आखिरी साल में था उनकी १३ साल की बेटी दीपा बड़ी सुंदर मासूम कली थी।
हर इन्सान की कोई न कोई कमजोरी होती है। बाबू लाल जी को हाई स्कूल में ही बीड़ी सिगेरेट की लत लग गई थी, जो कभी नहीं गई। कॉलेज में पीते रहे क्योंकि उससे वो रात भर जग कर पढ़ाई करने में मदद मिलती थी। खैर ! ४ साल पहले बाबू लाल जी को काफी तेज़ दमा शुरू हुआ। दमे ने उन्हें अशक्त कर दिया, लेकिन कम से कम जान लेवा नहीं था। लेकिन अभी ३ महीने पहले डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टी बी भी हो गई है और उन्हें किसी सैनेटोरियम में दाखिल कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर में सभी आस लगाये बैठे थे कि जब राहुल को नौकरी मिलेगी तो सब ठीक हो जाएगा।
बाबू लाल जी ने अपने ख़राब सेहत की वजह से स्कूल जाना भी बंद कर दिया था, लेकिन सरकार ने कुछ मदद की जिससे घर का काम काज चलता था। पति, पत्नी और बेटी, तीनों बाबू लाल जी के घर के पहले मंजिल पर रहते थे और ऊपर के मंजिल पर सिर्फ़ १ कमरा था जो स्टोर के जैसे इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन पैसे की तंगी की वजह से बाबू लाल जी उसे अब खाली कर के किराये पर लगाने की सोच रहे थे।
जब राहुल आखिरी परीक्षा देकर आया तो उसने ऊपर के कमरे को खाली किया और जब तक वो किराये पे नहीं लगता तब तक उसे अपना कमरा बना लिया। रिजल्ट निकलने से पहले ही राहुल को कई नौकरियों के प्रस्ताव आए थे, जिसमे कई बहु-राष्ट्रीय कम्पनियाँ और अच्छी कम्पनियाँ थी। राहुल ने एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी की नौकरी स्वीकार कर ली थी, क्योंकि उसे यहाँ २ हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद उस कंपनी के ऑफिस में काम करने का मौका मिलेगा। कंपनी ने राहुल को सिर्फ़ २ हफ्ते का समय दिया काम पर आने के लिए। राहुल के लिए भी अच्छा था कि जल्दी नौकरी मिलने से जल्दी पैसा भी आना शुरू हो जाएगा।
पहली सुबह राहुल की नींद पानी के हैन्ड-पम्प की आवाज़ से खुली। उसने खिड़की से नीचे जो देखा, वो दृष्य देखकर अवाक रह गया।
आंगन के एक कोने में हैन्ड-पम्प एक हौज़ में था और उसके तीन ओर दीवार डाल कर एक बाथरूम जैसा बनाया हुआ था और बाथरूम के दरवाज़े पर एक कपड़े का पर्दा था। लेकिन बाथरूम के ऊपर कोई छत नहीं थी।
राहुल ने देखा कि उसकी माँ बिल्कुल मादर जात नंगी पानी का हैण्ड पम्प चला रही थी। गेहुआं गदराया बदन और उसके उठे हुए मांसल चूतड़ हैण्ड-पम्प चलने से थिरक रहे थे और उसकी बड़ी बड़ी आजाद चूचियां भी पेंग मार रही थी। राहुल यह दृश्य एक टक देखता ही रह गया, जैसे उसकी आँखें पथरा गई हों।
इसके पहले राहुल ने कई बार माँ को नहाने के बाद देखा था लेकिन कमला हमेशा पेटीकोट को अपनी चूची के ऊपर बाँध कर नहाने जाती थी या फिर नहा के निकलती थी लेकिन आज की तरह बिल्कुल नंगी कभी नहीं देखा था।
कमला को शायद इस बात की ख़बर नहीं थी कि ऊपर के कमरे में राहुल है और वहां से सब कुछ दिख सकता है। हौज में पानी भरने के बाद वो मग से पानी लेकर नहाने लगी। नहाना क्या, ज्यादा पानी वो अपनी खड़ी चूचियों की घुंडी पर डालती थी। आज कल उसका सारा बदन जैसे हमेशा जलता रहता था। उसने लेडी डॉक्टर को बताया, तो लेडी डॉक्टर ने कहा कि इस उम्र में ऐसा ही होता है, इसे हॉट फ्लैश कहते हैं।
लेडी डॉक्टर ने ही बताया कि जब ज्यादा जलन हो तो ठंडे पानी से नहा लो। लेडी डॉक्टर को भी बाबू लाल जी के सेहत के बारे में मालूम था, इसलिए उसने हिचकिचाते हुए कमला को बताया कि जब ज्यादा गर्मी लगे तो ऊँगली से अपने को शांत कर लिया करो। कमला अब हर रोज तीन बार नहाने लगी और लेडी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जब भी वो नहाती, वो ऊँगली से अपने को झाड़ लेती। उसे कुछ रहत तो मिलती थी, लेकिन कहाँ ऊँगली और कहाँ एक मुस्टंड लंड। कोई तुलना नहीं।
खैर, सारी दुनिया से बेख़बर, ठंडे पानी से नहाने के बाद कमला ने अपनी ऊँगली से अपनी चूत पर साबुन लगा के दाने को मसलना शुरू किया। उसकी आँखें बंद हो गई और वो अपने होंठ काटने लगी। यह देख कर राहुल का लण्ड भी खड़ा हो गया, और वो हलके हलके मूठ मारने लगा। जिस एंगल से राहुल देख रहा था, माँ की काले काले घुंघराले बाल से ढकी चूत देखने में कोई मुश्किल नहीं हुई। ५-७ मिनट के बाद उसकी माँ के बदन में कम्पन हुई, और वो शांत हो गई। राहुल समझ गया कि उसकी माँ झड़ गई, और यह सब देख कर मूठ मारते हुए राहुल का भी निकल गया।
जब तक राहुल वहां रहा, २ हफ्ते उसने दिन में तीन बार यही दृश्य देखा और मूठ मारा। वास्तव में वो दिन में भी इंतज़ार में रहता था कि उसकी माँ कब नहाने जायेगी। जब भी उसकी माँ घर में चलती, वो उसके चूतड़ और चूचियों कि थिरकन देखता ही रह जाता। कई बार तो राहुल ने माँ को सुबह मैं जबरदस्ती चोदने की भी ठानी। एक बार तो वो बाथरूम के पास जा कर लौट आया, यह सोच कर कि उसे इतना गरम करूँगा कि ख़ुद चुदाने आ जाएगी तब उसे कोई ग्लानि नहीं होगी।
२ हफ्ते के बाद राहुल अपनी नौकरी पे चला गया, और फिर वहां से अमेरिका। लेकिन वह मन से माँ का नंगा रूप कभी नहीं भूल पाया। राहुल को अपनी माँ की इस दशा पर तरस भी आता था, कि ऐसी मस्त औरत को ऐसे कम उमर में पूरी चुदाई का सुख नहीं मिल पाया।
उसने जब अमेरिका से पैसे भेजने शुरू किए तो घर की हालत भी ठीक होने लगी। राहुल ने माँ को एक सेल फ़ोन लेने को भी कहा, और वो अपनी माँ से हर हफ्ते बात करता था। फिर एक दिन उसने एक योजना बनाई और माँ से राय मांगी। योजना यह थी कि राहुल ६ महीने के बाद भारत आकर पिताजी को सैनेटोरियम में भरती करा देगा, और दीपा को कुरसेओंग के पब्लिक स्कूल में, और माँ को अमेरिका ले आएगा जिससे उसके खाने पीने का हिसाब भी ठीक हो जाएगा।
माँ क्या करती, घर का सब कुछ तो राहुल की वजह से ही चल रहा था, लेकिन वो बोली कि इस सब में तो बहुत खर्च होगा। राहुल ने कहा कि माँ मुझे जितना मिलता है उसमें कोई मुश्किल नहीं होगी। माँ ने पूछा, घर का क्या करेंगे ? राहुल ने कहा, अभी किसी को किराये पर दे देंगे, और जब कोई खरीद डर मिल जाए तो बेच देंगे। बाबू लाल जी का सारा परिवार राहुल की सलाह से बहुत खुश हुआ। बेटा हो तो ऐसा – श्रवण कुमार के जैसा।
६ महीने के बाद राहुल भारत आया, और योजना के मुताबिक पिता जी को सैनेटोरियम में और दीपा को बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया। इत्तेफाक से स्कूल के नए हेडमास्टर ने उनका घर किराये पर ले लिया तो वो भी समस्या हल हो गई। यह सब काम करने के बाद राहुल ट्रेन से माँ को लेकर दिल्ली चला। कार्यक्रम ऐसा था कि दिल्ली में वीसा के लिए १ हफ्ता लगेगा, और तब तक वो माँ को दिल्ली भी घुमा देगा। बेचारी कमला दिल्ली तो क्या, सिर्फ़ १ बार बीकानेर गई थी जब बाबू लाल जी को राज्य के सबसे अच्छे हेडमास्टर का इनाम मिला था। कमला थोड़ी घबरा रही थी कि वो जब बीकानेर और दिल्ली से डरती है तो अमेरिका में कैसे काम चलाएगी। राहुल ने उसे समझाया कि माँ तुम बड़ी तेज हो, सब कर लोगी, और मैं जो हूँ।
राहुल ने ट्रेन में वातानुकूलित श्रेणी में आरक्षण करवाया था, और उसकी माँ ट्रेन की सफाई देख कर अवाक् हो गई। राहुल और उसकी माँ को दोनों नीचे के बर्थ मिले थे, और ऊपर सिर्फ़ एक आदमी था, और चौथा बर्थ अलाहाबाद के कोटे में था। जब वो तीसरा आदमी शाम को बाथरूम गया तो राहुल ने माँ को एक नाईट गाऊन दिया, और बोला कि ये सोने के लिए है, पहन लो। माँ को समझ नहीं आया कि उसे पहने कैसे, तो राहुल ने कहा कि वो बाहर जाएगा तब सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ नाईट गाऊन इस तरह पहन लो, राहुल ने माँ को उसकी साड़ी ब्लाउज के ऊपर से ही नाईट गाऊन पहना कर दिखाया।
फिर राहुल बाहर चला गया, और २ मिनट के बाद आया तो देखा कि उसकी माँ राहुल की ओर पीठ कर के खड़ी थी। माँ ने कहा कि इसमे तो सामने से बिल्कुल खुला है, तो राहुल ने बताया कि इसमें बेल्ट है ना बांधने के लिए। राहुल ने बेल्ट के दोनों छोर पकड़ के पीछे से ही बेल्ट को बांधा और माँ को घूम कर सामने से दिखाने को कहा।
राहुल ने जान बूझ कर ही ऐसा नाईट गाऊन ख़रीदा था जिसका गला काफ़ी नीचे तक कटा था, और वह घुटने से ४ इंच ऊपर तक ही था। कमला ऐसे कपड़े पहन कर बड़े पशोपेश में थी, और राहुल ने यह भाँपते हुए कहा कि माँ तुम अमेरिका में लोगों को जैसा कपड़ा पहनते देखोगी उसके मुकाबले ये कुछ नहीं है। घबराओ नहीं, तुम इन सबकी आदि हो जाओगी। अब सो जाओ। कमला ने एक हाथ से गाऊन से अपनी चूची को ढकने की कोशिश की और दूसरे से जाँघों के पास के खुले हुए गाऊन को साथ कर के पकड़ा, और कम्बल में घुस कर सो गई। राहुल भी अपने बर्थ पर सो गया।
सुबह ट्रेन दिल्ली पहुँची और राहुल और कमला एक होटल पहुंचे जहाँ राहुल ने पहले से आरक्षण करवा रखा था, लेकिन उसने १ हफ्ते का सिर्फ़ १ बेड का आरक्षण करवाया था कि तब उन दोनों को साथ सोने और करीब आने का मौका भी मिलेगा।
होटल देख कर माँ की आँखें चौंधिया गई। लेकिन सबसे पहले वो नहाना चाहती थी, सिर्फ़ नहाना ही नहीं, अपने जलते बदन को ठंडा करना चाहती थी। गाँव से चले उसे पूरा १ दिन हो गया था और उसके बदन में जैसे आग लगी थी। राहुल को सब मालूम था, इसलिए उसने अपना कैमरा फ़ोन बाथरूम के सिंक के नीचे लगा कर चालू कर दिया और माँ को नहाने जाने को बोला, उसने फव्वारे को चला के दिखाया। बाथरूम का दरवाजा बंद करते ही कमला ने फव्वारे से ठंडा पानी चला कर पूरे बदन पर साबुन लगाया और चूत मल कर अपने को झाड़ा।
इसके बाद राहुल नहाने गया और कैमरा फ़ोन की रिकॉर्डिंग देख कर मन ही मन मुस्कुराया – क्या मस्त चुदासी चीज़ है ?
राहुल ने माँ को कहा कि सबसे पहले वो उसे एक सैलून ले जा कर उसकी ऐसी काया पलट करवा देगा कि वो ख़ुद को पहचान नहीं पायेगी। और उसके बाद उसके लिए कुछ कपड़े भी खरीदेगा क्योंकि वो कपड़े यहाँ सस्ते मिलेंगे। उसने एक माँ का साइज़ नापने के लिए एक टेप निकला और माँ को सामने खड़ी होने को बोला और नापने लगा। चूतड़-४१, सीना-४०, कमर-३४। नापने के बहाने उसने कई बार माँ की चूची, चूतड़ और नंगी कमर को भी हलके से छू लिया।
इसके बाद उसने माँ को टैक्सी में सैलून ले जा कर उसके बाल ठीक कराये, और फेशियल करवा के उसका चेहरा और चमकने लगा। वापस टैक्सी में बैठते ही राहुल ने माँ को बाँहों में भर कर उसके गाल चूम लिए और बोला- माँ तू तो क्या मस्त सुंदर लग रही है !
कमला को राहुल का इस तरह करना अच्छा ही लगा, लेकिन उसने राहुल को इशारा किया कि टैक्सी वाला शीशे में देख रहा है। फ़िर टैक्सी से वो माँ को एक मॉल ले गया और माँ के लिए १ सलवार-कमीज़, १ स्कर्ट -ब्लाउज, और २ जींस-टॉप माँ के आकार के ख़रीदे। इसके बाद उसने माँ के लिए २ ऊंची ऐड़ी के सैंडल, और कई नकली सोने के माडर्न दिखने वाले कानों की बालियाँ, गले के हार और चूड़ियाँ आदि बहुत कुछ खरीदा और दोनों लौट कर होटल आ गए।
अपने ऊपर इतना खर्च करते देख कर कमला अपने बेटे के ऐहसान में डूबती गई। टैक्सी में एक बार माँ ने राहुल को कहा भी कि उस पर इतना खर्च करने की क्या जरूरत है तो राहुल ने माँ की जांघ पर हाथ मार कर कहा- माँ तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ मैं !
राहुल हमेशा माँ को छूने या पकड़ने का मौका कभी नहीं चूकता था, गाड़ी से उतरते, या किसी सीढ़ी पर चढ़ते, उतरते वो कभी माँ का हाथ तो कभी बांह पकड़ लेता था। कभी उसकी कमर पर हाथ रख देता था तो कभी हल्के से माँ के चूतड़ पर इस तरह से छू लेता था जैसे अनजाने में हाथ लग गया हो।
होटल आ कर उसने माँ को कपड़े पहन कर देखने के लिए कहा। शुरूआत हुई सलवार-कुर्ते से, और फ़िर स्कर्ट-ब्लाऊज़। दोनों बिल्कुल ठीक थे। जब कमला जींस पहन कर आई तो उसकी सेक्सी फ़िटिन्ग देख कर राहुल के लण्ड में हरकत होने लगी, लेकिन कमला ने कहा कि वो बड़ा कसा लग रहा है उसे।
राहुल ने समझाया कि माँ यह जींस ऐसी ही होती है कि उभार ठीक से दिख सकें, और तुम्हारे तो हैं भी इतने सुन्दर !
यह कहते हुए उसने कमला के चूतड़ों पर हाथ रख कर उसकी गोलाइयों को एक बार सहला दिया और कहा कि पहनने लगोगी तो अच्छा लगने लगेगा। राहुल के इस तरह करने पर कमला थोड़ी चौंकी, लेकिन जब तक वो कुछ सोचती, राहुल ने उसकी कमर पकड़ कर अपने सामने कर उसकी चूत की ओर नज़र डाली और कहा- वाह ! क्या फ़िट बैठी है यहाँ सामने भी ! राहुल ने जानबूझ कर माँ के लिए पैंटी नहीं खरीदी और कमला ने कभी पैंटी कभी पहनी भी नहीं थी तो उसे यह मालूम नहीं था कि पैंटी पहनना जरूरी है।
हाँ ! मॉल में उसने अच्छी अच्छी ब्रा देखी थी लेकिन शर्म के मारे वो राहुल से ब्रा के लिए कह नहीं पाई।
कमला ने राहुल से पूछा- आज कितना खर्चा हुआ?
तो राहुल ने जब सारा खर्च बताया तो कमला ने कहा कि टैक्सी की जगह हम लोग बस में नहीं ज सकते क्या?
राहुल ने कहा कि हाँ, पैसे तो बचेंगे, लेकिन भीड़ में थोड़ी परेशानी होगी तुम्हें।
कमला ने कहा कि जैसे इतने सारे लोग बस लेते हैं, हम भी ले लेंगे।
इसके बाद कमला और राहुल सोने की तैयारी करने लगे। कमला ने अपना नाईट-गाऊन पहना और राहुल पायज़ामा-बनियान में।
लेकिन आज़ कमला नाईट-गाऊन पहनने में नहीं शरमा रही थी जबकि उसकी चूचियों उभार और उसकी नंगी जांघें राहुल को दिख रही थी। यही नहीं, जब वो बाथरूम से नाईट-गाऊन पहन कर निकली तो पीछे से रोशनी होने की वज़ह से उसका शरीर राहुल को करीब करीब नंगा ही लग रहा था। रात भर माँ बेटे होटल में साथ सोए और राहुल ने माँ के ऊपर कई बार हाथ भी रखा, लेकिन इसके अलावा और कुछ नहीं हुआ।
दूसरे दिन राहुल और कमला बस से दिल्ली घूमने निकले। कमला ने सलवार-कुर्ता पहना था। पहली बार ही बस में चढ़ते हुए वो समझ गई कि राहुल क्यों बोल रहा था कि भीड़ भाड़ में मुश्किल होती है बस में। वो चारों ओर से मर्दों से घिरी हुई थी। कई लोगों के हाथ उसने अपने स्तनों और चूतड़ों पर महसूस किए। कुछ लोगों ने कमला के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड रगड़ा। कई तो सिर्फ़ एक दो बार छू या दबा कर वहाँ से खिसक जाते थे, लेकिन कई तो ऐसे निडर थे कि हाथ हटाने का नाम नहीं लेते थे।
एक ने जब ऐसा किया तो कमला पूरा घूम गई, लेकिन तब उसने कमला की जांघों के बीच उसकी चूत पर ही हाथ रख दिया। कमला थोड़ा घबरा गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे।
राहुल पास ही खड़ायह सब देख रहा था। उसने एक सीट के पास थोड़ी जगह बनाई और कमला को कहा- आप यहाँ बगल में आ जाओ। कमला को अब थोड़ी राहत मिली। कम से कम वो चारों ओर से लोगों से घिरी नहीं थी। उसने एक हाथ से ऊपर का डण्डा पकड़ा और दूसरे हाथ से सीट को। अब भी उसके पीछे खड़े और आते जाते लोगों का हाथ वो कभी कभी अपने चूतड़ों पर महसूस कर रही थी। अब उसे डर या इतना बुरा नहीं लग रहा था।
लेकिन तभी उसे लगा कि सामने से कोई हाथ बड़े हल्के से सलवार के ऊपर से उसकी जांघ सहला रहा है। उसे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि वो हाथ किनारे वाली सीट पर बैठे एक लड़के का था।
हे भगवान ! आजकल इस उम्र के लड़के भी ऐसे बेधड़क हो गए हैं ! कमला ने सोचा कि देखें यह लड़का किस हद तक बढ़ता है और वो उसकी उंगलियों की हरकत को अपनी जांघों पर महसूस कर रही थी लेकिन बस की खिड़की के बाहर ऐसे देख रही थी जैसे बिल्कुल बेखबर हो। उस लड़के की उँगलियाँ कमला की जाँघों पर सलवार के ऊपर धीरे धीरे ऊपर रेंगने लगी और कमला को ऐसे लगा जैसे उसकी दोनों जाँघों से उसकी चूत तक कोई करंट मार रहा हो और उसकी चूत गीली होने लगी। उस हिम्मती लड़के ने आख़िर कमला की चूत पर अपनी हथेली रख दी और धीरे धीरे मसलने लगा। कमला ने अपनी टांगों को और थोड़ा खोल लिया जिससे लड़के को अपना काम करने में आसानी हो। उसका सर हल्का होने लगा, वो झड़ना चाहती थी, इसी बस में लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बस रुकी और वो लड़का सीट से उठा, उसका स्टाप आ गया था। लेकिन जाते हुए उसने कमला से कहा- आंटी ! मेरा नाम अनिल है, कल सलवार की सिलाई खोल कर आना तो और मजा दूँगा !
कमला को अब तक लग नहीं रहा था कि वो इस दुनिया में थी, लेकिन लड़के की ऐसी बात सुन कर एकाएक चौंक कर फिर वापिस इस दुनिया में आ गई और उस लड़के की खाली की हुई सीट पर बैठ गई। कमला को ये नहीं मालूम था कि राहुल बस में दूर था लेकिन वो कमला के साथ की सारी हरकतें गौर से देख रहा था।
थोड़ी देर के बाद राहुल उसके पास आया और बोला कि उनका भी स्टाप आ गया है। वो दोनों होटल के पास बस से उतर गए। बस में इतने लोगों के उसके अंग अंग के साथ खेलने से कमला के बदन में आग लग गई थी। उसे सिर्फ़ लण्ड चाहिए था, किसी का लण्ड।
होटल आते ही वो नहाने के बहाने बाथरूम भागी और ऊँगली से अपने को झाड़ा और आकर बिस्तर पर राहुल की ओर अपने चूतड़ कर के सो गई। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। राहुल भी कमला की हरकतों से बेखबर नहीं था और उसके अन्दर मन में एक गुदगुदी सी हो रही थी। वो चित्त लेटा था, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अपनी माँ की ओर घूम कर माँ से सट गया और अपना एक हाथ माँ के ऊपर इस तरह रखा कि उसकी उंगलियाँ कमला की चूची को छूने लगी। राहुल ने इस हरकत को इस तरह किया जैसे वो नींद में हो।
कमला ने नाईट-गाऊन की बेल्ट नहीं बांधी थी इसलिए वो सामने से बिल्कुल नंगी ही थी। राहुल का सीना कमला की पीठ से सटा हुआ था और उसकी जांघ अपनी मां के चूतड़ से। राहुल से हाथ में नींद में फ़िर हरकत हुई और कमला की चूची की घुण्डियों को हल्के से रगड़ते हुए उसका हाथ कमला की नाभि और चूत के ऊपर आकर ठहर गया। लेकिन उसके बाद राहुल के हाथों में कोई हरकत नहीं हुई तो कमला ने सोचा कि राहुल ने सोचा की राहुल नींद में ऐसा कर रहा है।
राहुल ने ऐसा करने के साथ अपनी जांघें माँ के चूतड़ से इतनी सटा दी कि उसका लण्ड कमला के चूतड़ को छू गया। कमला को फिर अपनी चूत में ऊँगली डाल कर झड़ने की इच्छा हुई, लेकिन उसके दोनों जांघ सटे हुए थे और राहुल का हाथ उसके पेट पर इस तरह था कि वो अभी ऐसा नहीं कर सकती थी। वो अगर चित्त हो जाए तो दोनों टांग खोल कर वो ऊँगली कर सकती थी। लेकिन जब वो चित्त हुई तो राहुल के हाथ खिसक कर उसकी नंगी चूत के ऊपर बाल पर आ गए।
अपने चूत की जलन चुदासी माँ नहीं सहन कर पाई और सारी लाज और शर्म छोड़ कर, दोनों टांग फैला कर अपनी ऊँगली से चूत के दाने को सहलाने लगी, और कभी कभी ऊँगली को चूत के अन्दर बाहर करने लगी। राहुल से भी नहीं रहा गया। अपनी माँ को ऊँगली करते देख वोह चित्त हो गया और बेधड़क एक हाथ से अपनी माँ का हाथ उसकी चूत से हटा कर अपने लण्ड खड़े फनफनाते लण्ड पर रखा, और दूसरे हाथ की हथेली को माँ की चूत पर रखा।
दोनों अब समझ गए कि वो एक दूसरे के साथ क्या करना चाहते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। एक ओर राहुल कमला की गीली चूत के दाने को सहलाने लगा, साथ ही कमला धीरे धीरे राहुल के लण्ड को जड़ से टोपी तक सहला कर उसके लण्ड की लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने लगी।
हे भगवन, क्या लण्ड दिया तूने मेरे बेटे को, ७ से ८ इंच का लगा उसे। कमला ने सिर्फ़ बाबू लाल जी का ५ इंच के लण्ड का स्वाद लिया था और उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि लण्ड इतना लंबा मोटा भी होता है।
राहुल ने सोचा कि अब लोहा गरम हो चुका है और वो घड़ी आ गई है जिसका इंतज़ार था। वो उठा और पजामे को उतार फेंका और नीचे से बिल्कुल नंगा हो कर अपनी माँ की टांगों को बेड के किनारे तक इस तरह खींचा कि उसकी माँ की गांड बेड के किनारे आ गई। इसके जवाब में कमला ने अपनी टांगें जितनी खुल सकती थी खोल कर फैला दी। अब राहुल ने माँ की गरम और रसीली चूत की दरार में अपना सुपाड़ा रख कर हलके से दबाया। उसका लण्ड २ इंच माँ की चूत के अन्दर घुस गया। तब उसने माँ के दोनों मांसल चूतड़ के नीचे दोनों हाथ रख एक जोर दार धक्का लगाया। घच की आवाज के साथ राहुल का पूरा लण्ड जड़ तक अपनी माँ की चूत में चला गया, और कमला के मुंह से एक आह निकल पड़ी। अब राहुल ने घच घच अपनी माँ की चूत को चोदना शुरू किया और आनंद से उसकी माँ बड़बड़ा रही थी– चोदो मेरे लाल, मेरे श्रवण कुमार, चोदो आज अपनी चुदासी माँ को ! कई साल से भूखी है तुम्हारी माँ ! आज सारी भूख मिटा दो !
राहुल माँ को घच घच चोदते हुए बोल रहा था- ये ले, और ले माँ। तुम्हारी सालों की चुदाई की कसर अब पूरी हो जायेगी। चोदने के साथ राहुल माँ की चूचियां बेरहमी से मसल रहा था और माँ के मुंह और गले को चूम रहा था। कमला भी अब नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर राहुल के धक्के का जवाब देने लगी। लगता था कि कमरे में भूचाल आ गया हो।
कमला के मुंह से अजब गजब की आवाज निकलने लगी, और एक बार तो उसके मुंह से चीख जैसी निकल पड़ी तो राहुल ने उसका मुंह दबा दिया ताकि होटल वाले ये सब सुन कर कहीं वहां न आ जाएँ। तभी कमला के बदन में बड़ी जोर की सिहरन हुई, और राहुल समझ गया की उसकी माँ अब झड़ने वाली है। उसने कमला के मुंह को तकिये से ढक दिया ताकि वोह चीखे तो उसकी आवाज कम हो जाए, और उसके ५ -७ करारे धक्के लगाते ही उसकी माँ झड़ने लगी। राहुल और कमला दोनों ने एक दूसरे के चूतड पकड़ कर अपने लण्ड और चूत को इस तरह एक दूसरे से दबाया कि लगा कि उनकी हड्डी टूट जायेगी। तभी राहुल के लण्ड से उसके रस की १०-१२ पिचकारी छूटी और कमला की चूत के हर कोने को रसदार कर दिया .राहुल अपनी माँ की चूत में लण्ड डाले हुए उसके ऊपर पड़ा रहा।
कमला को बड़ा आश्चर्य हुआ कि झड़ने के बाद भी राहुल का लण्ड पूरा ढीला नही हुआ। वास्तव में १५ मिनट के बाद उसे लगा कि राहुल का लण्ड उसकी चूत में धीरे धीरे फड़क रहा है और फिर से लोहे की तरह कड़ा होता जा रहा है। कमला भी फिर से चुदाने के लिए तैयार थी, लेकिन राहुल ने बिस्तर से उठ कर बिजली जलाई और अपनी मस्त नंगी माँ का हाथ पकड़ बिस्तर से उठाया और कहा – अभी तो शुरुआत हुई है, अभी देखो रात भर क्या करता हूँ।
वो अपनी माँ को बाथरूम ले गया और साबुन लगा कर उसकी चूत और बगल के बाल को साफ़ कर के चिकना कर दिया और फिर माँ बेटे नंगे बिस्तर पर आए। राहुल ने अपनी माँ को बिस्तर पर चित्त लिटा कर उसकी चिकनी चूत चाटते हुए उसे झाड़ा और फिर अपना लण्ड माँ के मुंह में डाल कर उसे सिखाया कि लण्ड कैसे चूसते हैं।
रात की तीसरी चुदाई में राहुल ने माँ को कुटिया जैसी बना कर पीछे से चोदा। कमला आज तक कभी पीछे से ऐसे नहीं चुदी थी, लेकिन उसे लगा कि ऐसे में लण्ड और गहराई तक जाता है।
राहुल ने माँ को कहा कि कल दिन में वे साइबर कैफे चलेंगे और वहां तरह तरह की चुदाई की फ़िल्म देखेंगे !
अगले दिन क्या हुआ? कहानी के दूसरे भाग में शीघ्र ही… Hindi Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.