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अंकल उठकर Sex Stories पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।
मौसी मुस्कराई और अंकल से बोली- यह जानी है ! विदेशी हथियार की स्मगलिंग करता है, तुम्हारे साथ धंधा करना चाहता है ! क्यों पसंद है?
मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था। मैं लंगड़ाते हुए चल रही थी। मैंने तीन ग्लास में दारू की बोतल से दारू डाली और एक एक अंकल मौसी और जानी की तरफ बढ़ा दिए। जानी कामुक नज़रों से मुझे देखे जा रहा था। उसने मेरे चूतड़ों पर दो तीन बार हाथ भी फेर दिया था। मौसी ने हम दोनों रंडियों को आँख मारी। मौसी ने मेरे को जानी की सेवा करने का इशारा किया। मोंटी अंकल नंगे थे ही ! शोभा मोंटी साहब का लंड चूसने लगी। मैंने पैंट खोल कर जानी का लंड निकाल लिया और चूसने लगी। जानी और मोंटी कुछ कोड भाषा में बातें करने लगे। कुछ देर बाद दोनों काफी खुश नज़र आ रहे थे, उनकी धंधे की बातें ख़त्म हो गई थीं जानी ने एक पांच की गद्दी मौसी को दी और बोला- मौसी तुम्हारा इनाम।
दोनों के लंड चूसने से खड़े हो गए थे।
मोंटी और जानी में कुछ इशारों इशारों में बात हुई। अंकल ने शोभा को उठा दिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं कुतिया बनी बिस्तर पर बैठे जानी का लंड चूस रही थी और अंकल मेरी पीछे से चूत मार रहे थे। मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, मौसी मुस्करा रही थी और चिल्ला रही थी- अंकल, साली को आज इतना चोदना कि ये दस दस लंड आगे से एक रात में खा सके। टॉप की रंडी बनाना है मुझे इसको। कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया। अंकल का लंड लोहे की राड की तरह खड़ा हुआ था। जानी ने भी अपना लंड निकाल लिया था। जानी ने मुझे उठाया और पलंग पर उल्टा करके मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया अंकल ने मेरी गांड पहले ही फाड़ रखी थी इसलिए एक झटके में जानी का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था।
मैं चिल्ला रही थी, जानी ने मेरी गांड में जोर के 10-15 शोट मारे उसके बाद जानी नीचे था और मैं उसके ऊपर सीधी लेटी थी उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा रखा था। उसने मेरी टाँगें फ़ैला दी और नीचे से धीरे धीरे गांड में धक्के मारने लगा। अंकल अपना लंड पकड़े सामने मुस्करा रहे थे। उन्होंने मेरी चौड़ी टांगों के बीच अपना सुपारा रख दिया और मेरी चूत में ऊपर से अपना लंड पेल दिया। अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड घुसे हुए थे, मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी।
मौसी ताली बजा रही थी और बोल रही थी- अंकल, मज़ा आ गया ! वाकई साली कुतिया लग रही है ! चोद साली को ! याद रखेगी कि मौसी के कोठे पर चुदी थी !
मेरी गाड़ी बनी हुई थी, मेरे दोनों छेदों में लंड सरपट दौड़ रहे थे। अब मुझे पता चल रहा था कि कोठे की चुदाई क्या होती है। मैं अब पूरी तरह से कोठे की कुतिया बनी हुई थी। दस मिनट दोनों ने एक साथ मेरी चूत और गांड बजाई उसके बाद जानी ने मेरी चूत में और अंकल ने मेरी गांड में लंड घुसा कर मुझे सैंडविच बनाया और दुबारा मुझे दस मिनट तक चोदा। मौसी मेरी चुदाई का आनंद सिगरेट पीते हुए ले रही थी। इसके बाद दोनों ने एक एक करके पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं बिस्तर पर लुढ़क गई थी, मेरी चूत अब बुरी तरह से सूज रही थी और गांड भी बहुत दुःख रही थी।
रात के चार बज़ रहे थे। मौसी, जानी और मोंटी दारू पीने लगे, थोड़ी देर बाद दोनों नशे में झूम रहे थे। जानी मौसी से बोला- मौसी, साली की चूत कितनी सुंदर है, सूजी हुई तो और सुंदर लग रही है, एक चुम्मा लेकर आता हूँ !
जानी उठा और उसने मेरी चूत पे एक चुम्मा लिया और बोला- मोंटी साले, चुम्मा ले ! क्या स्वाद आता है !
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मौसी ने कमरे की घंटी बजा दी और राजू को कुछ कहा। थोड़ी देर में राजू, कालू, भूरा और टीनू कमरे में थे। मौसी उठी और शोभा से बोली- चल नंगी हो ! तेरी चुदाई का मुजरा कराती हूँ !
थोड़ी देर में शोभा पूरी नंगी थी।
मौसी गुंडों से बोली- अब तुम सब सोफे पर इसकी गाड़ी चलाओ !
राजू सोफे पर जाकर बैठ गया। उसका लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हुआ था, शोभा उसके लौड़े के ऊपर जाकर बैठ गई और पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लिया। राजू सोफे पर उछल उछल कर उसकी चूत चोदने लगा और उसकी गांड का छेद दोनों ऊँगली से चौड़ा कर दिया, जिसमें पीछे से भूरा ने अपना लंड घुसा दिया।
अब शोभा को राजू और भूरा साथ साथ चोद रहे थे। शोभा की ऊहं आह से कमरा गूंज रहा। शोभा पुरानी रांड थी, मज़े ले ले कर चुद रही थी और ऊहं आह की आवाज़ निकाल रही थी। शोभा का मुँह सोफे से बाहर निकल रहा था। टीनू ने पीछे जाकर अपना लौड़ा शोभा के मुँह में डाल दिया और उसे चुसवाने लगा। शोभा की चूत गांड और मुँह में धक्के जोरों से चल रहे थे। कालू अपना लंड निकाल कर सहला रहा था।मौसी ने शोभा का एक हाथ खींच कर कालू का लंड शोभा के हाथ में पकड़ा दिया दिया। चार चार लौड़ों से शोभा खेल रही थी। जानी ने मुझे पलंग पर अपने लौड़े पर बैठा लिया। अंकल ने मेरे हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा दिया। मैं बेहोशी की सी हालत में थी और अंकल का लौड़ा धीरे धीरे मसल रही थी। अंकल ने पलंग पर खड़े होकर मेरे बाल जोर से खींच डाले और चिल्लाये भोसड़ी की, तुझे बड़ी नींद आ रही है? साली अभी तुझे भी इस रांड की जगह बैठाता हूँ ! ले पहले मेरा लौड़ा चूस।
उन्होंने मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूंस दिया। शोभा की गाड़ी जोरों से चल रही थी, गुंडे बार बार जगह बदल कर शोभा को चोद रहे थे। शोभा की चुदाई देखकर अंकल और जानी गरम हो रहे थे, उनके लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। कमरे की सारी लाइट जल रही थी और कमरा रौशनी से भरा हुआ था।
थोड़ी देर बाद अंकल और जानी ने अपने रस एक एक करके मेरे मुँह में उतार दिए और नशे में झूमते हुए कोठे से बाहर चले गए।
सुबह के पाँच बज़ रहे थे लेकिन मेरी तो अभी गाड़ी और बजनी थी। मौसी जाते जाते राजू से बोली- मैं तो सोने जा रही हूँ राजू, कालू को बुला ला और इसे बजाना हो तो तुम दोनों बजा लो ! जब से यह नई रांड आई है अपने लंड सहला रहे हो। जितना मन हो उतना चोदो कुतिया को, रांड तो अब यह बन ही गई है लेकिन नीचे मेरे पास वाले कमरे में चोदना।
राजू मुझे गोद में उठाकर नीचे कमरे में ले आया, जहाँ जमीन पर पुराने गद्दे पड़े हुए थे। थोड़ी देर में कालू भी उधर आ गया, राजू ने पीछे से मेरी फटी गांड में लंड घुसा दिया और कालू ने आगे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। मैं अधमरी हालत में दोनों से चुदने लगी सुबह सात बजे तक दोनों ने मुझे बुरी तरह से नोचा और चोदा, उसके बाद मैं गहरी नींद में सो गई।
अगले दिन रात को नौ बजे मेरे चूतड़ों पर मौसी ने जोर से हाथ मारा और बोली- रंडी रानी ! उठ जाओ और कितनी देर तक लेटोगी।
मैं घबरा कर उठ गई। मौसी बोली- थोड़े कपड़े पहन लो और खाना खा लो।
मुझसे उठा नहीं जा रहा था, किसी तरह मैं उठी और मौसी से बोली- मौसी, मुझे वापस भेज दो !
मौसी मुस्कराई और बोली- वापस जाकर क्या करोगी? अभी तो तुम चल भी नहीं पा रही हो, ऊपर से तुम्हारी चूत और सूज रही है ! थोड़ी ठीक हो जाओ तब जाना। चल अच्छा फ्रेश हो, फिर बात करती हूँ।
किसी तरह मैं उठी और खाना खाया। उसके बाद दुबारा सो गई। मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। खा पीकर मुझे नींद आ गई। अगले दिन सुबह दस बजे मौसी आई उनके साथ छोटा खलील भी था। मौसी बोली- क्यों, बॉम्बे नहीं जाना है। ये छोटा खलील बॉम्बे जा रहा इसकी गाड़ी में चली जा। तुझे अपनी चंपा बार में नचवाएगा। नाच भी करियो और धंधा भी बहुत मज़ा आएगा। साले ने तुझे 5 लाख में खरीदा है।
छोटा खलील मुस्करा रहा था, मौसी से बोला- मौसी, दो घंटे साली को चोद लूँ फिर डालकर ले जाऊंगा।
मौसी मुस्कराई और बोली- लोंडी अब तेरी है दो क्या दस घंटे चोद ! तेरे गुरु मोंटी ने कल इसकी गांड और चूत दोनों सुजा दी हैं।
खलील मुस्कराया और उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। खलील ने दो बार मेरी चूत और दो बार मेरी गांड मारी। साथ ही साथ बोला- हरामजादी मौसी ने भी एक दिन में अच्छी खासी चूत का भोंसड़ा बना दिया है, डांस शो में कितना मज़ा आ रहा था तेरी मारने में और आज तेरी भोंसड़ी बनी हुई है।
बारह बजे तक उसने चोद चोद कर मुझे अधमरा कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे गाड़ी में बांधकर डाला और मुंबई लेकर चल गया।
खलील ने मुझे चंपा बार में नाचने के लिए छोड़ दिया। मजबूर होकर मुझे यहाँ नाचना पड़ा। रात बारह बजे तक नाचती थी। उसके बाद एक-एक घंटे की मेरी चार बुकिंग होती थीं और सुबह छः बजे तक मैं चुदवाई जाती थी।
चार दिन बाद खलील और उसका एक साथी मुझे और दो लड़कियों को मस्ती के लिए खंडाला ले जा रहे थे, रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सब लोग दारू पीने लगे और हम लड़कियों से अपने लंड चुसवाने लगे। थोड़ी देर बाद दूसरी पार्टी के लोग आ गये और गोलीबारी शुरू हो गई। खलील और उसके साथी को गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गए। मैं गाडी के नीचे छुप गई। मेरे साथ वाली लड़की को दूसरी पार्टी के लोग उठा के ले गए। थोड़ी देर बाद मैं बाहर निकल कर आ गई और बस पकड़ के वापस अपने गाँव चली गई। आज मैं एक खुशहाल जिन्दगी जी रही हूँ। मेरी आप सबसे यह प्रार्थना है
“धंधे से नफरत करो, धंधे वाली से नहीं” Sex Stories
एक शानदार वेबसाइट Sex Stories लॉन्च करने पर अन्तर्वासना के सभी कर्ता-धर्ता, समूचे स्टाफ व गुरु जी को सबसे ज्यादा प्यार और बधाई!
जबसे मेरी दीदी रेखा मेहरा के ज़रिये मुझे इस वेबसाइट का पता चला, मैंने उनकी बताई साईट खोली. जब कहानियाँ पढ़ी तो लोगों की बिस्तर की बातें इसमें देख मेरी तो चूत गीली हो गई थी. मैं भी अपनी जिन्दगी का पहला सेक्स आपके सामने लाकर शुरुआत करने जा रही हूँ, उम्मीद से दुनिया कायम है, मुझे आशा है कि मेरी यह चुदाई जल्द ही आप सबके सामने अन्तर्वासना के ज़रिये आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी.
मेरा नाम सुलेखा, 5 फुट 5 इंच कद, गुन्दाज़ बदन, गोरे-चिट्टे मखमल जैसे वक्ष! मैं बारहवीं जमात की छात्रा हूँ. पहले हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे, चाचू-चाची, बुआजी, ताया-ताई, घर इतना बड़ा नहीं था, इसलिए मैं चुदाई के लाइव सीन देख देख बड़ी हुई.
एक दिन चाचू-चाची अकेले थे. मैं तबीयत ठीक न होने की वजह से पहले घर आ गई. चाचू के कमरे से सिसकी की आवाज़ सुन मैं पिछली खिड़की की ओर बढ़ी. मैं जब मॉम-डैड के बीच सोती थी तो कई बार डैड को मॉम पर सवार होते देखा था, लेकिन अच्छी तरह से नहीं देख पाई. आज मौका था, अन्दर चाचू बेड के किनारे बैठे थे नंगे, चाची फर्श पर घुटनों के बल बैठी चाचू के लौड़े को मजे ले ले कर चूस रहीं थी. फिर चाची बिस्तर पर आई. नंगी चाची को चाचू ने लिटा अपना लौड़ा चाची की चूत में घुसा दिया. यह देख मेरी पेंटी भी गीली हो गई.
फिर डैड ने शहर में आकर अपना बढ़िया मकान बनाया और हम शहर आकर बस गए. गाँव में पंजाबी मीडियम से सातवीं जमात तक पढ़ी, वो एक कन्या-विद्यालय था. यहाँ आकर मैंने एक प्राइवेट और अंग्रेजी मीडियम लड़के-लड़कियों के स्कूल में मैंने आठवीं में दाखला लिया और मेरी सहेलियाँ भी बन गई. हमारा चार लड़कियों का ग्रुप बन गया. श्वेता, मरियम, नूरी और मैं!
उनका अभी से लड़कों में ध्यान था, नूरी का तो अफेअर भी चल निकला था. हमारे ग्रुप की चर्चा चालू लड़कियों में होती थी. अब मेरी जवानी भी अंगड़ाई लेने लगी. सबमें से मेरी जवानी की बातें लड़कों में ज्यादा होने लगी. सब जब घर से निकलती तो लड़कों की निगाहें मेरी छातियों पर रहने लगी. देख देख मुझे मजा आने लगा. तभी मुझे मेरे ही स्कूल में पढ़ने वाले अमृत नाम के एक लड़के ने मुझे परपोज़ किया. उसको मैंने कोई जवाब नहीं दिया.
जब मैं स्कूल से घर जाती तो मेरे पीछे होंडा सिटी कार में एक दूसरा लड़का आने लगा हर रोज़ सुबह और स्कूल के बाद! बहुत हैण्डसम था, बड़े घर का लड़का था. उसने मुझे एक दो बार कार पास लाकर अपना मोबाइल नंबर दिया, मेरे साथ नूरी भी रहती थी, उसने नंबर पकड़ के रख लिया और मुझे कहने लगी- पटा ले मेरी जान! और क्या चाहिए!
मैंने कहा- जो अमृत ने परपोज़ किया उसका क्या?
उसको स्कूल तक सीमित रख!
मैंने नूरी से नंबर लिया, दोनों पास की एस.टी.डी पर गई और कॉल की. उसने अपना नाम करण बताया और मुझे कहा- मैं आप पर फ़िदा हूँ प्लीज़!
मैंने उसको हाँ कर दी.
वो बोला- मैं इसी मार्केट में ही हूँ! चलिए मैं आपको घर छोड़ देता हूँ, प्लीज़ मना मत करना! मुड़ कर देखो!
मैंने केबिन से देखा, उसने हाथ हिलाया. नूरी का घर पास था, वो पैदल चली गई. मैं उसकी कार में बैठ गई. कुछ देर ऐसे ही घूमते रहे. उसने मेरा हाथ पकड़ा- आप बहुत सेक्सी हो, बहुत सुन्दर हो!
उसने हाथ पर किस किया- आई लव यू सो मच!
मैंने कहा- आई लव यू टू!
उसने पास खींचते हुए मेरे होंठों पे किस कर दी, मुझे करंट सा लगा. उसने कार साइड पर कर मेरे होंठ चूसने शुरु किये.
मैंने कहा- प्लीज़ छोड़ो न!
वो बोला- कितने दिन से आपके इन होंठों का रसपान करने का दिल था! आप कहती हैं छोड़ो!
मुझे भी कुछ होने सा लगा- मैं भी लिप-किस में उसका साथ देने लगी. पता ही नहीं चला कब उसका हाथ मेरी शर्ट में घुसता हुआ मेरे मम्मों तक पहुँच गया. उसने सीट पीछे कर दी और मेरे ऊपर बैठ गया. एक हाथ उसने मेरी स्कर्ट में डाल मेरी जांघें सहलाने लगा. मैं इतनी गरम हो गई कि सब भूल गई. बस दोनों जवानी के जोश में एक दूसरे में खोने लगे.उसने बटन खोल मेरा मम्मा ब्रा से निकाल लिया और उसको मसलने लगा. मुझे तब होश आया जब मैंने उसका हाथ अपनी पेंटी पर महसूस किया. एकदम से अलग होकर हाँफने लगी.
वो बोला- क्या हुआ?
“प्लीज़! हम सड़क पर हैं, कोई पकड़ लेगा तो आफत आ जायेगी!”
बोला- इसको तो छोड़ो!
एकदम से मैं चौंक गई, मेरा हाथ उसके लौड़े पर था. मैं शरमा सी गई.
उसने कहा- कोई नहीं आयेगा! इतनी कड़ी गर्मी में कौन आएगा!
फिर भी उसने मुझे घर छोड़ दिया. बाथरूम में जाकर अपनी पेंटी देखी जो गीली हो गई थी. अपने मम्मे पर जब उसके दांत का निशान देखा तो मुझे अजीब सी हलचल हुई. उसके बाद कुछ दिन ऐसे ही कार में मिलते रहे. घूमने के बहाने चूमा-चाटी चलती रही.
एक रोज़ जब मैंने शाम को उसको कॉल किया. उसने कहा- आज ट्यूशन मिस कर दो, एअरपोर्ट रोड की तरफ घूमने जायेंगे. वहाँ सुनसान सी एक सड़क है.
मैंने कहा- ठीक है! मुझे पिक कर लो!
हम निकल पड़े. वहाँ एक रेस्तराँ था, बिल्कुल एअरपोर्ट के कार्नर पर था, वहाँ कई लोग अपनी अपनी कार में ही बैठे थे. आज वो अपनी बड़ी कार लाया था. उसने पार्किंग की बजाये वो साथ वाली खाली सड़क पर कार मोड़ ली और रेस्तराँ के पीछे ले गया. वहीं वेटर आया. उसने अपने लिए चिल्ड बियर ली, मैंने कोल्ड काफी आर्डर की.
उसने मुझे बाँहों में लिया. अब तो हम दोनों घुल मिल चुके थे, उसने फोर्ड एंडवर की सीट फ्लैट की. लग्ज़री कार किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं थी. मैंने उसका साथ देते हुए खुद ही उसके होंठ चूसने शुरु किये. वो मेरे मम्मों को बेरहमी से मगर मजा आने वाले अंदाज़ में मसल रहा था. मैं गरम होने लगी और उसने मेरा टॉप उतार दिया. मैंने अपनी ब्रा की स्ट्रिप खोल दी जिससे मेरे दोनों कबूतर आज़ाद हो गए. उसने उड़ते कबूतर पकड़ने में वक्त न लगाया और टूट पड़ा मुझे पर. मैं भी पूरी गर्म हो चुकी थी, मैं लगातार उसके लौड़े को मसल रही थी. उसने मेरी जींस खोल कर घुटनों तक सरका दी और आज खुल कर मेरी जांघें सहलाने लगा.
उसने स्पोर्ट्स ड्रेस डाली थी, मैंने भी लोअर खींच के नीचे करके उसके लौड़े को हाथ में पकड़ लिया, पहली बार इतना खुलकर पकड़ा था. मेरे हाथ लगते ही फनफ़ना उठा उसका लौड़ा! इतने में वेटर आया. उसने कहा- खुद पी ले और बिल ले जाना! वेटर बोला- जी साहिब!
स्टार्ट कार, ए.सी ओन किया हुआ था, फिल्मिंग वाले शीशे थे, उसने सीट पूरी फ्लैट कर दी, बिस्तर सा बन गया. खींच कर मेरी जींस उतार दी और अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रगड़ने लगा. मैंने झट से उसके लौड़े को मुँह में डाल लिया और अच्छी तरह चूसने लगी. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उसने थोड़ा चुसवाने के बाद मुझे पीछे लिटाते हुए बीच में बैठ अपना लौड़ा मेरी सील बंद चूत पे रखा. एक बार सोचा कि पता नहीं कैसे यह घुसेगा?
कार के आस पास दूर तक कोई न दिख रहा था. उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था खुद नीचे घुटनों तक!
मैंने सोचा- चल सुलेखा! आज तेरी लाडो रानी का उदघाटन समारोह कैसा रहेगा?!
उसने झटका दिया और लौड़े का सर मेरी चूत में फंस गया. उसको भी तकलीफ हो रही थी. मैंने कस के सीट के कपड़े को पकड़ रखा था. उसने दूसरे झटके में आधा लौड़ा अन्दर डाल दिया. मेरी जान निकल गई- निकाल लो प्लीज़! यहाँ अच्छे से नहीं होगा! जगह कम है, बहुत तकलीफ होगी! दोनों का ही पहली बार है. लेकिन उसने तीसरा ऐसा झटका मारा कि लौड़ा पूरा घुस गया. मेरी चीख निकल गई. खून टपकने लगा! आँखों में आंसू आ गए!
उसने मेरे होंठ अपने होंठो में ले रखे थे ताकि चीख न निकले. उसने फिर सारा निकाल के डाला ऐसे तीन चार बार जब किया तो दर्द की जगह मजे ने ले ली. आंखें खुद ब खुद बंद होने लगीं. उसके एक एक झटके का मुझे इतना मजा आया कि सिसकारी ले ले कर मैं चुदवाने लगी- हाय और करो! और करो!
अचानक मुझे अपने अन्दर से कुछ गरम गरम सा पानी महसूस हुआ, मैं झड़ गई और मेरी चूत की गर्मी में तीन चार मिनट बाद ही करण भी झड़ गया. दोनों हाँफने लगे. उसने कार में पड़ा एक कपड़ा मुझे दिया, जिससे मैंने अपनी चूत को साफ़ कर लिया, खून साफ़ किया!
दोनों ने कपड़े पहन लिए और सामान्य होकर एक दूसरे की बाँहों में लिपट गए. उसने मेरे होंठ चूमते हुए कहा- कैसा लगा?
बहुत अच्छा लगा!
सुबह उठने पर चूत पर सूजन सी थी, चलने में थोड़ी सी अजीब लग रही थी. नूरी इन कामों में से कई बार निकली थी, उसने मुझसे सब कुछ बकवा लिया. अन्तर्वासना पर इसके छपते ही मैं अपनी करण के अलावा किसी से चुदवाई लेकर सबके लौड़ों पर बैठने आऊँगी. Sex Stories
इस घटना ने शिल्पा को Antarvasna भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था. शिल्पा शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे. इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये. मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे.
“ओफ्फो… तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो!” मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा.
वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया?
“इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन शिल्पा आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी!” मैंने हंसते हुए कहा.
“क्या!? क्या शिल्पा को भी यह सब पसंद है?” उन्हें आश्चर्य हुआ.
“फिर क्या हुआ?” उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा.
मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे.
“साथ साथ नहा रहे थे… तब तो बड़ा मजा आ रहा होगा! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा.
मजा तो आना ही था…! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया. मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची. दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये शिल्पा खड़ी थी.
मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर… फिर क्या हुआ… कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो!
इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया. मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे.
शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ… उफ… शिल्पा ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुए जा रहे हैं… उफ… मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियाँ फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है.
मैंने उत्तेजना से उत्पन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- शिल्पा को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो… क्या कर रहे हैं आप…? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की… आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज…
मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ.
“मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ. ठीक है तुम ऐसे ही चूसो!” मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा.
“तुम शिल्पा वाली बात तो बताओ…” उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे.
मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली- फिर एक ओह्ह.. उफ… ऊई… फिर हाँ मैं..उफ… मैं कह रही थी कि शिल्पा को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहाँ पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनन्द लेती है. मेरी… उफ… ओह… अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ… ये शावर तो खोल लो… नहाना भी साथ साथ हो जायेगा!
मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई- मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, शिल्पा द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था. उसे तब तक पता नहीं था… उफ… ओह… ओफ…
मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे.
मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े.
“सुनाओ न आगे क्या हुआ…?” मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा.
“तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ…” अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली.
“ओफ़्फ़… फिर शिल्पा के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था. शिल्पा की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह… उफ आउच… ओह…
इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे.
मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी.
मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा- स्टोरी का क्या बना…! आगे क्या तुमने अपने भाई से शिल्पा की प्यास बुझवा दी?… ओह… कितना मजा आ रहा है!
शावर के नीचे मैथुन करने में… उफ… वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले. उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी.
“हाँ… उफ… ओह… ऊई मां… तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को… इससे आज ज्यादा ही आनन्द मिल रहा है…” मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई- बड़ा मजा आया था… शिल्पा को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था… खूब जोर जोर के धक्के मारे थे… मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी.
थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई, अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ लिया, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे. गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी.
फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे.
कहानी जारी है. Antarvasna
मेरी एक एक कहानी Antarvasna को दिल से पसंद करके मुझे अपना अपना प्यार खुले दिल से दिया, और दोगे हर कोई मुझे कह रहा है कि गांडू अपनी चुदाई ज़रा जल्दी जल्दी भेजा कर !
अब कब भेजेगा ?
अब आगे बढ़ते हुए गुरु जी और सभी पाठकों को बहुत बहुत प्यार ! आज यह सनी एक और चुदाई के बारे में लिखने जा रहा है, पढ़ना और मुझे याहू पर मेरी गाण्ड का वेबकैम पर लुत्फ उठाएँ।
हाल के ही दिनों की बात करने जा रहा हूँ, प्रेस वाले से मैने चुदवाया सो चुदवाया, हमारे घर में ऊपर की बिलडिंग डबल स्टोरी में पत्थर लग रहा है। दो बन्दे रगड़ाई करने आते हैं, दो बन्दे पत्थर लगाने !
एक दिन में याहू पर बैठ कर चेट का लुत्फ उठा रहा था कि मेरी चेट विनोद नाम के बन्दे से जो दिल्ली से है, देश की राजधानी में बैठ मुझे चोदने की योजना बना रहा था। तभी वो बोला- सनी यार ! अपना वेबकैम चला ! मुझे तेरी चिकनी गांड देख कर मुठ मारनी है। अपने गुलाबी होंठ दिखा, उनमें होंठ डालने हैं।
लेकिन मेरे लिंक्ड बाथरूम में ही रगड़ाई चल रही थी, मैंने उसको अपनी स्थिति बताई कि मैं नंगा नहीं हो पाउँगा। उसको वजह बताई तो वो बोला- साले गांडू ! मौका है उससे गांड मरवा ले ! पटा ले साले को ! तेरा दिल तो ज़रूर करता होगा ?
मैंने कहा- मेरा उनमें बिलकुल ध्यान नहीं था, मैं तो उनको अपनी आजादी में बाधा समझ रहा था।
उसकी यह बात मेरे दिमाग में घर कर गई, बस फिर क्या था, मैंने सोच लिया कि अब इसको पटाना ही है।
मैंने अपना पजामा उतार दिया और फ्रेंची में मेरे गोलमोल चिकने चूतड़ किसी का भी लौड़ा खड़ा कर सकते थे। मैंने सामने ब्लू फिल्म चला ली और बेड पर उल्टा लेट गया तकिये को बाँहों में लेकर उल्टा लेट गया जिससे मेरे चूतड़ साफ़ दिखने लगे और सामने शीशे में मेरी एक नज़र उस पर थी। वो अपने ध्यान लगा हुआ था। मैंने सोचा अब क्या करूँ यार? कैसे इसका धयान अपने पर लेकर आऊँ?
पास के मेज से मैंने एक ग्लास उठाया और उसको फर्श पर फेंक दिया, जैसे ग्लास गिरा उसने मुड़ कर देखा। मेरी साँसे तेज़ होने लगी कि अब वो क्या करेगा। चोरी-चोरी से मैं शीशे में देखता। अब उसका ध्यान मेरी तरफ था, वो ब्लू फिल्म देखता तो कभी मेरी गांड देखता।
वो अपना लंड पकड़ कर मसल रहा था, मैंने जानबूझ कर गांड थोड़ी ऊपर उठाई। उसकी मशीन बंद हो गई थी, मैंने खुद ही चूतड़ हिलाए उसको यह शो कर दिया कि मैं खुद सब कुछ कर रहा हूँ।
उसने मुझे उसकी रर शीशे में देखते हुए देख लिया। वो कमरे में आया और बाथरूम के दरवाज़े की कुण्डी चढ़ा दी। बिस्तर के करीब आते ही उसने अपना हाथ मेरे चूतड़ पर रखते हुए सहला दिया। मेरा बदन कांप उठा। वो मेरे दोनों चूतड़ मसलने लगा, मैंने आखें मूँद ली।
वो मेरी बगल में लेट गया और मेरी फ्रेंची को गांड के चीर में घुसा छेद पर ऊँगली फेरते हुए मेरे गाल को चूम लिया, अपना दूसरा हाथ मेरी कमर से लपेटते हुए शर्ट में डाल मेरे मम्मे दबाने लगा। मैं गर्म होकर अपने को रोक नहीं पाया और उसकी ओर चेहरा करके उसके साथ चिपक गया और झट से उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और मसलने लगा उसके विकराल लिंग को ! क्या लिंग था साले का ! जो मैंने पजामे के ऊपर से सोचा था उस से भी बड़ा था उसका लिंग ! हाँ, मोटा कम था ! मतलब गांड के लिए बना था समझो !
उसने मुझे नंगा कर दिया, तभी दरवाजा खटका।
कौन? उसने कह दिया।
मैं राजू ! काम क्यों रोक दिया रे?
उसने बिना पूछे दरवाज़ा खोल दिया, मैंने चादर लपेट ली।
क्या कर रहे हो दोनों दरवाज़ा बंद करके?
बोला- आजा, मजे कर रहे हैं दोनों ! फिल्म देख रहे हैं और इसकी गांड से खेल रहा हूँ, साला गांडू निकला !
वो बोला- फिर तो आज पाँचों उंगलियाँ आज घी में हैं !
मैं तो था ही बेशर्म, मैंने कहा- साले देख क्या रहा है? सभी घर आ जायेंगे ! मादरचोदो, पकड़ लो मुझे !
उसने अपनी लुंगी उतार दी। उसका बम्बू घाट तम्बू की तरह तन चुका था। मैंने उसको ऊँगली के इशारे से पास बुलाया और उसके अंडरवियर में हाथ डालते हुए उसके खड़े लिंग को सहलाने लगा। उसका अंडरवियर उतार दिया, उसका लिंग इतना मस्त निकला, काले नाग जैसा लिंग देख मैं बेकाबू होने लगा। मेरे मुँह में लेते ही वो अपने उफान पर आ चुका था। वो सांस खींचता तो मेरे मुंह में ही हिलने लगता, दूसरे को पास बुलाया और उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगा। फिर कभी उसका कभी उसका !
चूस चूस कर, चाट चाट कर दोनों को इतना पागल कर दिया कि दोनों ने मुझे नंगा कर दिया।
चल लेट ! चल !
राजू ने अपना लिंग आगे से आकर मेरे मुँह में दिया और दूसरे ने थूक लगाते हुए गांड पर टिका दिया।
मैंने कहा- पहले उंगलियाँ डाल कर खोल ले इसको ! चाट !
वो मेरी गांड चाटने लगा। मेरा इशारा पाते ही उसने लिंग अन्दर डाल दिया। थोड़ी सी चुभन के बाद वो आराम से चोदने लगा। मेरा कौन सा पहला मौका था ! मुझे चुदवाने का पूरा तजुर्बा था। वो मेरी गांड की दीवारों की गर्मी सह नहीं पाया और उसने मुझे जोर से भींच लिया और अपने गर्म-गर्म लावा से मेरी खुजली ख़त्म कर दी।
राजू जल्दी से पीछे आया, टाँगें खुलवा अपने कन्धों पर टिकाते हुए अपना लिंग को प्रवेश करवा दिया और उसके झटके मुझे मजा देने लगे। तेजी से करते हुए उसने भी अपना माल निकाल दिया और मेरे ऊपर गिर गया।
दूसरे वाले का मन नहीं भरा था तो उसने फिर से मुँह में डाल दिया उसका नमकीन लिंग चूसना मुझे भी अच्छा लगा। वो तैयार हो गया और उसने मुझे बीस-पच्चीस मिनट चोदा।
और फिर जब तक पत्थर का काम पूरा नहीं हुआ, हर दोपहर उनका लंच मेरी गांड होती !
काम के बाद मैंने दोनों को मुँह लगाना छोड़ दिया।
यह मेरी एक और सच्ची कहानी है।
अन्तर्वासना के ज़रिये मैं आप लोगों को ऐसे ही मजे देता रहूँगा ! Antarvasna
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