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करीब आधे घण्टे बाद हम Antarvasna दोनों जागे … दिन भर की बेताबी तो निकल चुकी थी, हम दोनों को होटल पहुँच कर फ़्रेश होने तक का ख्याल नहीं रहा, उस वक्त नौ बज चुके थे, हम दोनों बारी-2 से बाथरूम गये, चाय मँगाई, फ़िर सलाद और चिकेन चिल्ली, सोडा आदि का आर्डर किया, साथ ही डिनर भी मँगा लिया ताकि डिस्टर्ब न हों। मेरे पास एक अच्छे ब्राण्ड की व्हिस्की थी, हमने पैग बनाये और आपस में जाम टकराये … बातें करते रहे और दूसरा पैग भी खत्म कर दिये हमने आधे-पौन घण्टे में … अब तक शरीर में गरमाहट आ चुकी थी तथा पहली चुदाई की खुमारी भी उतर चुकी थी। नीलम मेरी गोद में आ के बैठ गई और लगी मेरा गाल सहलाने … छाती सहलाने और चूमने … दो पैग व्हिस्की उसकी आँखों से बोलने लगी थी … हम दोनों एक दूजे के होठों को किस करने लगे, हमारी गरमागरम साँसें आपस में टकराने लगी और वो बेतहाशा मेरे होठों को चूसने लगी … ओह्ह्ह्ह्ह्ह् … क्या मस्त होके मुझे प्यार कर रही थी नीलम … मेरा तो लौड़ा फ़िर फ़नफ़नाने लगा और मैं भी उसे जोर-2 से चूमने लगा और उसके होठों को चूसने और दाँतो से काटने लगा।
उसका एक हाथ मेरे लण्ड को सहलाने लगा और मैं उसकी चूँचियों को दबाते हुए बुर पर हाथ फ़ेरने लगा … और वह अपनी दोनों जाँघो के बीच मेरे हाथ को दबाने लगी … मैंने उसके निप्पल को मुँह में लिया तो वह उछल पड़ी और मुझे जोर से जकड़ लिया … उईईईईइ … राजा क्या करते हो??? मार ही डालोगे आज इस प्यासी आत्मा को ? … ओह्ह्ह्ह … क्या जादू है तुम्हारे मुँह में लेते ही मैं बेकाबू हो जाती हूँ मेरे दोस्त … मेरे सनम … काश मैं तुम्हारी बाँहो में हमेशा-2 के लिये कैद हो जाती ! पर जानती हूँ तुम बीबी-बच्चे वाले हो, तुम और तुम्हारा घर सलामत रहे ! मैं तो इतने प्यार से ही खुश हूँ मेरे राजा … फ़िर वह अचानक ही मेरे लण्ड को अपने मुँह के पास ले जाकर टिप को अपने मुँह में डालकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी … ओऽऽऽहऽऽह् … मैं तो बेहाल होने लगा, फ़िर वो मेरे लण्ड को अपने मुँह में पूरा भर कर जीभ से चाट-2 कर रस ले-ले कर चूसने लगी और मेरी आँखों में आँखें डाल कर नशीले अन्दाज में बोली- आप भी मेरी चूसिये ना प्लीज …
चूँकि वो बहुत सुन्दर नहीं थी अतः मेरा मन उसकी चूत चाटने का नहीं हुआ पर मैंने कहा- मुझे यह अच्छा नहीं लगता और मैंने आज तक किसी की चूत पर मुँह नहीं लगाया है, बस मैं लण्ड से चुदाई करता हूँ और मस्ती अनलिमिटेड … इस बार मैं तुम्हारे हवाले हूँ जैसे मर्जी हो वैसे चुदाओ ! समझी जानेमन …
इस पर वो बोली- अच्छा तो अब आप मेरे हवाले हैं ना ?
मैंने कहा- हाँ।
ठीक है जानू अब आप नहीं चोदियेगा मुझे ! मैं ही आपकी चुदाई करूँगी ! मन्जूर है?
मैंने कहा- चाहे छुरी खरबूजे पर चले या खरबूजा छुरी पर … कटना तो खरबूजे को ही है नीलम रानी !
इस पर उसने एक मोहक मुस्कान फ़ेंकते हुये मुझे लिटा दिया तथा मेरे लण्ड को सहलाते हुये अपनी चूत को मेरे लण्ड पर टिका कर दबाई तो थोड़ा सा अन्दर गया … उसने और दबाया तो आधा लण्ड उसकी बुर में घुस गया …
फ़िर उसने मेरे ऊपर झुक कर मेरे गालों पर एक जोरदार चुम्मा देते हुए मेरे होठों को चूसना शुरु किया और फ़िर एक जोर का धक्का मार कर मेरा पूरा लण्ड अपनी बुर में ले लिया …
मैंने भी उत्तेजना में उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और जोर-2 से उसके होठ चूसने लगा …
ओऽऽहऽ साली क्या चुम्मा लेती थी ओह … पूरी जीभ अन्दर डालकर जोर-2 से चूसते हुए वो लगी धका-धक अपने चूतड़ ऊपर-नीचे करने और कमरे में फ़च-फ़च-फ़च-फ़च की रसीली आवाज गूँजने लगी …
यारों क्या कमर हिला-2 के वो मुझे चोद रही थी और बीच-2 में झुक कर मेरे होठ चूसने लगती ! ओऽहह् … मैं भी उसकी चूँचियों को मसल रहा था … उसके चूतड़ सहला रहा था … कमर सहला रहा था और नीचे से धक्का भी मार रहा था, वाह क्या मस्ती और रिदम था नीलम की चुदक्करी में ! मुझे कभी लगता कि मैं लड़की हूँ और मुझे कोई लड़का उचक-उचक के चोद रहा है।
बहुत देर तक वो यूँ ही मुझे पेलती रही और मैं नीचे से धक्का लगाता रहा। एकाएक वो गनगना गई और जोर से मुझ पर गिर के मुझसे चिपक गई और बोलने लगी … आऽआऽ आऽहहह मेरे राजा आपकी नीलम तो गई काम से … ओह राजाऽ आऽऽऽआ आपने तो मेरा सोया हुआ नारित्व जगा दिया आज तो मैं झरने की तरह झर रही हूँ … ओऽह आपने तो मेरा मन मोह लिया जानू … आई लव यू … मैं तो बिन मोल बिक गई मेरे राजा ! आज तो आपने जिन्दगी में पहली बार इतना मजा दिया कि मन कर रहा है कि सारी जिन्दगी आपके लण्ड को अपनी बुर में ही रखे रहूँ मेरे सनम … मेरे दोस्त … उसने मेरे दोनों गालों पर बारी-2 से चुम्मा लिया … बल्कि यूँ कहिये कि दाँतो से काटा। फ़िर मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे प्यार करने लगी और कहने लगी- आप कहें तो मैं सारी जिन्दगी आपकी सेवा करने को तैयार हूँ, मैं खुद अपने लिये कमा लूँगी, बस आप मुझे कभी-2 प्यार करते रहा करिये।
मैं बोला- अभी आज की बात करो यार … तुम तो दो बार झड़ चुकी हो, मेरा तो अभी एक ही बार गिरा है।
वह बोली- जानू चिन्ता मत करो ! अभी थोड़ी मोहलत दे दीजिये ठाकुर साहब … जल्दी ही मेरी मुनिया आपसे तिबारा चुदवाने को तैयार हो जायेगी … इस बार उसका कचूमर निकाल दो यार … फ़ाड़ डालो साली को … मुझे बड़ा तंग करती है, आज ऐसा चोदो कि फ़िर महीनो नाम ना ले चुदवाने का … मैं देखने में दुबली पतली जरूर हूँ पर हूँ बड़ी सेक्सी।
वह मुझसे चिपक कर मेरे बगल में लेट गई और दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे। मेरा लण्ड तो तना ही था वह उससे खेलने लगी … और मैं उसके होठो तथा निप्पल को चूसने लगा। अहिस्ता-2 नीलम फ़िर उत्तेजित होने लगी … उसकी साँसे तेज होने लगी, वो मेरे लण्ड को दबाते हुए अपनी बुर पर रगड़ने लगी।
अब मुझसे रहा नहीं गया और एक झटके में उसे पटक के मैं उस पर चढ़ गया और दोनों टाँगो को फ़ैला कर उसकी बुर को आसमान की ओर करके मुहाने पर लण्ड टिका कर तत्काल एक ही बार में पूरा लण्ड नीलम की बुर में पेल दिया … वह तड़प उठी और चिल्लाई … उईऽऽऽमाँऽऽऽ अरे आपने तो मार ही डाला … कहते हुए उसने मुझे जकड़ लिया और आँखें बन्द कर ली तथा अपनी बुर को इतना टाइट कर लिया क्या बताऊँ … लगा कि मेरे लण्ड का दम निकल जायेगा … ओऽह क्या सुखद अनुभूति थी ! लगा कि उसने मेरे लण्ड को लॉक कर दिया हो।
वह मुझे झुका कर धीरे से बोली- राजा थोड़ी देर इसे यूँ ही पड़ा रहने दो … अच्छा लगता है।
मैं भी उसी हालत में उसकी छाती आहिस्ता-2 सहलाने लगा, फ़िर दोनों चूँचियों को हौले-2 दबाने लगा, वह और उत्तेजित होने लगी … उसके काले चने के बराबर निप्पल कड़े हो गये और भाले के नोक की तरह तन गये … ओऽओऽहऽऽह् … पिया … ओऽ मेरे रंगीले साँवरिया … अब अपने इस मूसल से मेरी ओखली में दनादन कूटो मेरे राजा … वैसे ही जैसे हमारे क्षेत्र में धान कूटा जाता है, ऐसी कुटाई करो बलमू कि मेरी बुर से मांड़ का सोता बह निकले !!!!!!
अब क्या था … ऐसा खुला आमन्त्रण पाकर सिंह इज किंग हो गया और मेरा शेरू फ़ुफ़कारते हुये दे दनादन नीलम के बिल में अन्दर-बाहर करने लगा … नीलम भी मुझे ललकार रही थी और नीचे से अपनी चूतड़ उछाल-2 कर मेरे हर धक्के का इमानदारी से जवाब देने लगी एकदम एक लय-ताल में … बस हमारी आह-ऊह … ओह … फ़च् … फ़च् … फ़च् … फ़चा-फ़च … की सेक्सी आवाजें गूँज रही थी कमरे में, हम दोनों बस एक दूसरे में डूबकर अपने आप को भूल चुके थे … तकरीबन आधे घण्टे बाद सिर्फ़ उस जन्नत की मन्जिल पर पहुँच कर ही थोड़ा थमें जिसे आचार्य रजनीश ने “सम्भोग से समाधि” की अवस्था कहा है।
मैं तो लगा कि नीलम की बुर में अपना सर्वस्व ही बहा रहा हूँ एक गरम लावे के रूप में, और उसकी बुर स्खलित होने की प्रक्रिया में लगातार संकुचित और फ़ैल रही थी, उसने मुझे चिपक के जकड़ा हुआ था ऐसा कि साँस लेना भी मुश्किल था …
लगभग 10 मिनट तक हम यूँ ही पड़े रहे समाधि की अवस्था में, फ़िर अलग हुए तो देखा कि बिस्तर पर अच्छा खासा दाग लग गया है और नीलम की बुर से अभी भी मेरा वीर्य चू रहा था, उसने तौलिये से पौंछा और फ़िर मुझसे चिपट गई और प्यार से चूमने लगी और बोली- मैं तो कई साल से चुदवा रही हूँ, 4-5 लोगो से चुदाई हूँ, उनमें से एक का लण्ड आपसे भी बड़ा और मोटा था पर कसम खा के कहती हूँ जो आनन्द आपसे मुझे मिला वह कभी नहीं मिला … यह रात मुझे जीवन भर याद रहेगी, आज लगता है मैं सुहागिन बन गई और ये मेरी सुहागरात है … आपको मैं अपना पति मानती हूँ ऐसा कहते हुये वह मेरे पैरों पर अपना सिर रखकर प्रणाम करने लगी।
जब मैंने उसे उठाया तो देखा उसकी आँखे गीली हैं …
मैं भी भावुक होने लगा। फ़िर अपने को सम्भालते हुए व्यवहारिक बनते हुए बोला- पगली तुम जानती हो कि मैं एक शादी-शुदा बाल-बच्चेदार सम्मानित व्यक्ति हूँ, ऐसा सपना पूरा हो ही नहीं सकता, इसलिये यह सब सोचो ही मत, हाँ दुबारा मौका मिला तो फ़िर कभी मज़ा ले लेंगे।
मुझे बड़े जोर की भूख लग आई थी, देखा खाना ठण्डा हो चुका था, होता भी क्यों नही, रात के दो बज चुके थे। हम दोनों ने गरम-2 चुदाई के बाद ठण्डा-2 खाना खाया और नंग-धड़ंग कम्बल में घुस कर एक दूसरे को बाहों में ले के सो गये तो सुबह 8 बजे ही नींद खुली।
जागने पर वो फ़िर मुझसे चिपटने लगी, गरमाहट तो मुझमें भी आने लगी पर 9 बजे डी पी ने जगतगंज बस स्टैण्ड पर पहुँचने को कहा था ताकि नीलम और उसके भाई को चन्दौली की बस पर बैठा कर विदा किया जा सके।
मैंने कहा- जल्दी से तैयार हो जाओ ! चुदी हुई मत दिखो।
करीब नौ बजे हमने होटल छोड़ा, रास्ते में वह बोली- अभी जी नहीं भरा है, 2-3 दिन साथ रहते तो शायद मुझे भरपूर मस्ती मिलती।
और यह भी कहा कि मैं बस से नहीं जाऊँगी, जैसे इज्जत से लाये थे वैसे इज्जत से कार से ही छोड़िये।
मैंने हँस के कहा- तुम्हारी इज्जत अब बची कहाँ? रात भर तो मुझे लुटाती रही.
इस पर वह बनावटी गुस्से से मुझे मुक्के मारने लगी।
मैंने कहा- मेरा लखनऊ जाना आवश्यक है, रिजर्व आटो कर देता हूँ तुम दोनों चले जाओ।
फ़िर वो मान गई। बस स्टैण्ड पर डी पी उसके भाई के साथ इन्तजार करता मिला, हमने एक आटो तय किया और उसे किराया देकर नीलम को कार से निकालने मैं अकेला ही गया, चूँकि उसका भाई पास ही में खड़ा था अतः वह सिर्फ़ मेरा हाथ जोर से दबा कर उतर गई और आटो में बैठकर बोली- फ़िर मिलियेगा और अगली बार डी एम साहब से जरूर मुलाकात करवा दीजियेगा और धीरे से एक आँख मार कर मुस्करा दी … टा-टा करते हुए चल दी।
मेरी सत्यकथा आपको कैसी लगी, जरूर बताइयेगा. Antarvasna
हमारे यहाँ एक नौकरानी है गंगू बाई नाम की. उसकी उमर भी 20 साल की Sex Stories है. उसका रंग साँवला है और फ़ेस कटिंग एकदम अमीशा पटेल की तरह है। उसके बूब्स एकदम बड़े है और उसकी गांड है एकदम बाहर है. मैं उसको चोदने का ख्वाब बहुत पहले से देखता हूं.
मेरा ये सपना पूरा हुआ जब मेरी मम्मी औस्ट्रेलिया मेरे पापा के पास गयी।
उस दिन मैं घर में था सुबह गंगू बाई आयी तो मैंने दरवाज़ा खोल दिया.
वो अपना काम करने लगी.
मैं तभी अपने बेडरूम में जा के एकदम नंगा हो गया. उसको चोदने का ख्याल आते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं रात में ही वियाग्रा की गोली लाया था, मैंने उसको खा लिया।
फिर मैंने गंगू बाई को आवाज़ मारी.
वो जब मेरे बेडरूम में आयी तो हैरान हो गयी. मुझे नंगा देख कर हँस के वो किचन में भाग गयी.
मैं उसके पीछे गया. जैसे ही मैं किचन में गया तो वो मुझसे बोली- तुम्हारा इरादा क्या है?
मैं बोला- गंगू बाई रानी, मुझे तेरी चूत को चोदना है.
यह सुनते ही वो मेरी तरफ़ आयी और बोली- इतना कहने में इतने दिन लगा दिये?
मैं उसको फिर गोद में उठा के बेडरूम में ले गया. वहाँ मैंने उसको नंगा कर दिया. उसके बूब्स एकदम पिंक और रसीले थे. मैं झट से उसके बूब्स अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक बूब को अपने हाथ से मसलने लगा.
वो आह्ह उह्ह कर रही थी.
मैंनेदस मिनट तक उसके दोनों बूब्स को चूस के और मसल के लाल कर दिया.
तभी मुझे मेरे लंड पे कुछ गीला लगा. मैंने देखा तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था।
मैं झट से उसकी चूत पे मुँह डाल के चाटने लगा उसकी चूत के दाने (क्लिट) को अपनी जीभ से चाटने लगा तो वो जोर जोर से चिल्लाने लगी और तड़पने लगी।
अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत एकदम टाइट थी। जैसे ही मैं उंगली अंदर बाहर कर रहा था तभी उसका पानी निकल गया.
मैंने सारा पानी चाट लिया और फिर उठ गया.
उसकी गांड के नीचे मैंने दो तकिये रख दिये और उससे कहा- देख आज़ इस लंड से तेरी चूत को चोदूँगा. तूने कभी ऐसी चुदाई करवाई है?
उसने कहा- नहीं.
तो मैंने कहा- तुझे दर्द होगा, सहन करना, फिर बहुत मज़ा आयेगा.
यह कह के मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत में डालने लगा वो बहुत ही टाइट थी जैसे ही मैंने एक धक्का लगाया वो जोर जोर से रोने लगी।
एक और धक्का लगाया मैंने तो वो चिल्लाने लगी और कहने लगी- छोड़ दो मुझे, मुझे नहीं चुदवाना।
मैंने एक और धक्का लगाया तो मुझे लगा कोई चीज़ मेरे लंड को उसकी चूत में रोक रही है.
मैं समझ गया कि उसकी सील है.
मैंने दोनों हाथों से उसके कंधों को पकड़ा और एक जोरदार धक्का लगाया. मेरा लंड उसकी चूत की सील फाड़ते हुए ४ इंच अंदर चला गया.
उसकी चूत से खून आने लगा और पानी भी.
मैं रुक गया.
वो बहुत ही जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी.
मैंने उसके बूब्स को मसलना चालू किया. दस मिनट के बाद वो शांत हो गयी, मैं फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।
दस मिनट तक मैं धीरे धीरे धक्के लगा रहा था, जब मुझे लगा उसे मज़ा आ रहा है.
तभी मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया.
उसकी चूत से पानी निकलने लगा. जैसे ही मैंने थोड़ा लंड को बाहर निकाला उसकी चूत से खून निकलने लगा.
मैं रुक गया. दस मिनट के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये.
मैंने उसे पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- दर्द तो कम हुआ है पर मज़ा नहीं आ रहा!
यह सुन के मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. थोड़ी देर में उसकी चूत का पानी गिर गया.
मैंने उसे और जोर से चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने वियाग्रा खाया था. तो मुझे मालूम था कि मेरा पानी लेट गिरेगा.
मैं उसको और 30 मिनट तक चोदता रहा.
वो भी बोलती रही- चोद मुझे शान … चोद मुझे … और जोर से आहह उहह शान. हह चोद रे चोद मुझे रंडी बना दे रे चोद मुझे. आह्हह मेरा पानी निकल रहा है आहह उहह!
और उसकी चूत का पानी ४ बार निकल गया।
तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसे उठने को कहा.
वो उठ नहीं पा रही थी.
उसको मैंने अपनी गोद में लिया और दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. उसकी चूत से खून और पानी टपक रहा था. उसके झांट के बाल एकदम गीले हो गये थे.
मैंने उसको खड़ा किया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुँह पर रख के उसके पैर अपने हाथ में ले लिये।
अभी वो पूरी तरह से हवा में थी।
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मैंने उसको आधा घंटा वैसे ही चोदा. मैं पूरा पसीना हो गया था. वो कम से कम 8 बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी.
तभी मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है. मैंने अपने लंड निकाल के उसके मुँह में डाल दिया. वो उसे एकदम लोलीपोप की तरह चूसने लगी. तभी मेरा माल उसके मुँह में निकल गया और उसने उल्टी कर दी.
मैं उसको गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और उसके साथ नहाने लगा. मेरा लंड एकदम टाइट था वियाग्रा की वजह से।
उसके बाद मैंने उसको बाथरूम में भी चोदा पर यह अगली बार में। Sex Stories
भरी जवानी में मैं Sex Stories अपनी क्लास के एक सुन्दर से लड़के से प्यार कर बैठी। झिझक तो खुलते खुलते ही खुलती है। पहले तो हम क्लास में ही चुपके से प्रेम-पत्र का आदान प्रदान करते रहे। एक दिन प्रतीक ने मुझे वहाँ के एक गार्डन में शाम को बुलाया। मैं असमंजस में थी कि जाऊं अथवा ना जाऊं। फिर सोचा कि इसमें डरने की क्या बात है … वहाँ तो और लोग भी होंगे। पर किसी ने पहचान लिया तो फिर … ? चलो मुँह पर कपड़ा बांध लेंगे।
मैंने हिम्मत की और शाम को बगीचे में पहुंच गई। वो मोटर साईकल स्टेण्ड पर ही मेरा इन्तज़ार कर रहा था। हम दोनों उस शाम को बहुत देर तक घूमे। खूब बातें की, पर प्यार की नहीं, बस यूँ ही इधर उधर की। मेरा डर मन से निकलता गया और अब मुझे उसके साथ घूमना-फ़िरना अच्छा लगने लगा। धीरे धीरे हम प्यार की बातें भी करने लगे।
पहले तो मुझे बहुत शरम आती थी, पर मैं अपना चेहरा हाथों से छिपा कर बहुत कुछ कह जाती थी। वो एक बहुत ही शरीफ़ लडका था, उसने मुझे अकेला पा कर भी कोई भी अश्लील हरकत नहीं की। पर मुझे यह अजीब लगता था। मेरी मन की इच्छा तो यह थी कि हम दोनों अकेले में एक दूसरे के यौन-अंगों से छेड़छाड़ करें, कुछ रूमानी माहौल में जाये। कुछ ऐसा करें कि मन की आग और भड़क जाये …
यानि … यानि …
एक दिन मैंने ही पहल कर दी। एकान्त पा कर मैंने अपना चेहरा हाथों में छिपा कर कह ही दिया,”प्रतीक … एक बात कहूँ … ?”
“हां अंजली … कहो …!”
“बस एक बार … एक बार … यानि कि … ” मैं नहीं कह पाई। पर दिल ने सब कुछ समझ लिया। उसने चेहरे पर से हाथ हटाया और मेरे होंठों को चूम लिया।
“हाय … और करो ना … !”
उसने ज्योंही मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे, मैंने जोर से उसे भींच लिया और बेतहाशा चूमने लगी। प्रतीक ने मेरे बालों में हाथ डाल कर सहला दिया। मेरी गुलाबी आंखें उस एकटक निहारने लगी। मेरी नजरें स्वतः ही झुक गई।
इसी तरह एक दिन मैंने उसके हाथों को मेरे सीने पर रख कर स्तनों को दबाने को कह दिया।
उसने बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहलाये और दाबे … । अब मुझे प्यार में सेक्स का भी मजा आने लगा था। फिर वो घड़ी भी आई जब मैंने उसका हाथ मेरा कुर्ता ऊपर करके अपनी चूत पर रख दिया। वो उसे सहला कर मेरे नक्शे का जायजा लेने लगा। मेरी गीली चूत का भी उसे अहसास हो गया।
मैंने भी हिम्मत करके उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।
अब अधिकतर यही होने लगा था कि हम किसी कोने या अंधेरी जगह को तलाशते और एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते और वासना में लिप्त हो जाते।
एक दिन प्रतीक ने मुझसे चुदवाने को कहा। मैं डर गई, मुझे तो इसी खेल में मजा आने लगा था। पर चुदना, मतलब उसके लण्ड को मेरी चूत में घुसवाना पड़ेगा। जाने क्या होगा … ? मैं उसे टालती रही। यूँ हम सालभर तक ऐसे ही वासना भरा, अंगों की छेड़छाड़ का खेल खेलते रहे। हां अब हम कभी कभी अपना यौवन रस भी निकालने लगे थे। उसका तो वीर्य भी ढेर सारा निकलता था। उसका लण्ड वास्तव में मोटा था। उसका सुपाड़ा भी मैंने देख लिया था, बड़ा सा फ़ूला हुआ लाल टमाटर जैसा था, पर उस समय वो उत्तेजित था।
यूँ ही करते करते मेरी शादी भी पक्की हो गई। शादी का समय भी आ गया और फिर देखते ही देखते शादी भी हो गई। हम दोनों इस बार बहुत ही फ़ूट फ़ूट कर रोये थे। हम में भाग कर शादी करने की भी हिम्मत नहीं थी। हमारी कसमें, वादे सभी कुछ किताबी बातें बन कर रह गये थे। तारे तोड़ कर लाना बस मुहावरा बन कर ही रह गया था।
मेरे पति बंसी लाल की एक बड़ी दुकान थी, जो बहुत अच्छी चलती थी। वो अधिकतर दिल्ली या कलकत्ता आता जाता रहता था। मेरे लिये बहुत सी चीज़ें लाया करता था। मुझे वो बहुत प्यार करता था। चुदाई भी बहुत बढ़िया करता था। हां, गालियां वगैरह नहीं देता था। जब भी बंसी लाल शहर से बाहर जाता तो मैं प्रतीक के कमरे पर चली जाती थी।
उन दिनों मेरी जिन्दगी रंगो से भरी हुई थी। मुझे सब कुछ सुहाना और सुन्दर सा लगता था। मेरा मन खिला खिला सा रहता था। मेरा पति मुझे बहुत प्यार करता था और मेरा प्रेमी मुझ पर अब भी जान छिड़कता था। दोनों ही मुझे बहुत खुश रखते थे। आज भी मैं अपनी स्कूटी से प्रतीक के घर आ गई थी। प्रतीक हमेशा की तरह अपनी पढ़ाई में लगा था। मुझे देखते ही वो खुश हो गया और मुझे अपने आलिंगन में जकड़ लिया। सदा की तरह उसका लण्ड खड़ा हो गया और मेरी गाण्ड की दरार में घुसने लगा। मुझे बस रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ नजर आने लगी।
कुछ देर तक तो हम चूमा-चाटी करते रहे … फिर मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। आज उसने अपना पजामा उतार दिया और अपना नंगा लण्ड मेरे हाथों में थमा दिया। उसका मोटा लण्ड मेरे दिल में पहले ही बसा हुआ था, सो उसे मैंने हौले हौले रगड़ना चालू कर दिया। उसने भी आज पहली बार मेरी साड़ी उतार दी और हाथ ब्लाऊज में घुसा दिया। मुझे इस से थोड़ी तकलीफ़ हुई फिर मैंने उसका हाथ हटा दिया।
“ऐसे मत करो, लगती है … बस अब मैं चलती हूँ !”
पर प्रतीक ने मेरी एक ना सुनी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
“ये मत करो, पति के अलावा दूसरा कोई नहीं … !!” मैं कुछ आगे कहती, प्रतीक ने चुप करा दिया,”मैं दूसरा नहीं हूँ, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ, आज मुझे सब करने दो … “
“नहीं प्रतीक, बस ऊपर ही ऊपर से कर लो … “
“प्लीज बस एक बार चुदा लो … देखो मैं तो तुमसे कब से प्यार करता हूँ, मेरी कसम है तुम्हें … देखो तुमने मेरा क्या हाल कर दिया है … प्लीज अंजली … “
उसका यह हाल देख कर मुझे भी ठीक नहीं लगा। सोचा किसको पता मालूम चलेगा, सच है ये कब से तड़प रहा है … मैं पिघलने लगी। मैंने अपनी साड़ी ऊंची कर ली।
“तुम्हारी कसम अंजली … तुमने तो आज मेरा दिल जीत लिया … ” और वो मुझ पर झुक गया, मुझे प्यार से चूमने लगा, उसका लण्ड मेरी चूत में घुसने लगा। मुझे लगा उसका लण्ड मेरे पति से बहुत मोटा है … कसता हुआ सा भीतर जाने लगा।
आनन्द से मेरी आंखें बंद होने लगी। उसने धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी चूत में पूरा उतार ही दिया। दूसरा लण्ड, नया लण्ड … अलग ही आनन्द दे रहा था। मैंने प्यार से प्रतीक को देखा और अपनी ओर खींच लिया।
“प्रतीक … बहुत मजा आ रहा है … अब तक क्यों नहीं चोदा तुमने !”
“तुम ही दूर रही मुझसे … तुम तो मेरी जान हो … आह्ह्ह … !”
वो मेरे से प्यार से लिपट गया और उसके चूतड़ मेरी चूत के ऊपर भचाभच चलने लगे। मैं भी उसे प्यार से चूमने चाटने लगी। मैं अब पलट कर उसके ऊपर आ गई और उसके लण्ड पर बैठ कर चुदने लगी। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था।
उसका लण्ड मेरी चूत को मस्ती से चोद रहा था। कितनी खुशी लग रही थी मुझे।
उसका मोटा लण्ड मेरी योनि में अब भी कसता हुआ आ जा रहा था। मीठी सी गुदगुदी तेज हो गई। मुझे लगा कि मैं चरम बिन्दु तक पहुंच गई हूँ और अब मुझे नहीं सहा जायेगा। तभी मेरा रज छूट गया। प्रतीक ने झट से पोज बदला और मुझे घोड़ी बना दिया और देखते ही देखते उसका लण्ड मेरी गाण्ड में फ़ंस चुका था। मेरी गाण्ड खासी चिकनी थी और खुली हुई थी। उसने लण्ड को भीतर घुसा दिया और आगे पीछे करने लगा। मुझे फिर से आनन्द आने लगा। उसका ये सब इतने प्यार से करना मुझे बहुत पसन्द आया। उसका तरीका इतना अच्छा था कि कोई एक बार चुद जाये तो बार बार लण्ड खाने की इच्छा हो !
मैंने उसे कहा,”प्रतीक, एक बार और मेरी चूत चोद डालो, प्लीज !”
उसने जल्दी से लण्ड बाहर निकाल कर चूत में घुसेड़ दिया। मुझे फिर से असीम आनन्द की दुनिया में पहुँचा दिया। सच में कुतिया के पोज में ज्यादा मस्त चुद रही थी। धक्के अन्दर तक ठोक रहे थे। मधुर चुदाई ने फिर रंग दिखाया और मैं फिर से झड़ने के कगार पर थी। मस्त चूत की उसने जम कर ठुकाई की उसने और मेरा रस फिर से चू पड़ा। तभी उसका वीर्य भी निकल पड़ा। मेरी चूत उसके वीर्य से लबालब भर गई और फिर उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आता प्रतीत हुआ।
उसने जल्दी से अपनी कमीज को मेरी चूत पर लगा दिया और उसे साफ़ करने लगा।
मैने पीछे मुड़ कर उसे प्यार से देखा। वो बड़े अच्छे तरीके से मेरी चूत को साफ़ करने में लगा था।
“प्रतीक, तुमने मुझे ये सुख पहले क्यों नहीं दिया … ?”
“यह तो सब समय की बात है, तुमने मुझे हाथ लगाने दिया तो मेरी किस्मत खुल गई।”
“हाय राम, अपन इतने दिनों तक बेकार ही यूँ ही मसला-मसली करते रहे, चुदाई कर लेते तो कितना आनन्द आता … ! है ना ?… अपन तो अपने आप को वासना की आग में जलाते रहे … मुठ मारते रहे … प्रतीक, साले तुमने मुझे जबरदस्ती क्यों नहीं चोद दिया?”
“मैं तुम्हें प्यार करता हूँ … कोई जानवर तो नहीं हूँ … “
“कसम खाओ, अब रोज ही ये सब करेंगे … तुम्हारा लण्ड मुझे बहुत ही अच्छा लगा !”
“बस जान लो … आज से ये लण्ड तुम्हारा ही है।”
हम दोनों एक बार फिर से लिपट गये और अब मुझे चोदने वाला पति के अलावा प्रतीक भी था। एक बार फिर से हमने मरने जीने की कसमे खाने लगे, चांद तारे तोड़ कर लाने की बातें करने लगे … मरने जीने की कसमें खाने लगे … आह्ह्ह्ह्ह … … Sex Stories
मैंने बहुत सारी कहानियाँ Antarvasna अन्तर्वासना पर पढ़ी, सभी कहानियाँ मुझे अच्छी लगी. खास तौर से अगम्यागमन भाग पसंद है.
मैं भी अन्तर्वासना डॉट कॉम के माध्यम से अपना अनुभव आप के सामने रखता हूँ.
सबसे पहले मैं आप लोगों को पात्र-परिचय करा दूँ!
संजय : 25 साल, शादीशुदा युवक
मनोहर : संजय के पिताजी
सीता देवी : संजय की माताजी
सुष्मिता : संजय की बुआ
सुरेन्द्र : संजय के फ़ूफ़ा (सुष्मिता बुआ के पति)
सविता : 22 साल, संजय की बहन
निर्मला : 22 साल, संजय की बुआ की लड़की
अशोक : 27 साल का संजय की बुआ का लड़का
सुधा : 26 साल की संजय की भाभी (अशोक की बीवी)
सब लोग मुंबई में ही रहते हैं : संजय का परिवार मीरा रोड पर और बुआ का परिवार रहता है अंधेरी वेस्ट पर!
यह बात छः महीने पहले की है जब संजय के पिताजी मनोहर ने सुरेन्द्र से दो लाख रुपए कुछ महीने पहले उधार लिए थे.
तो एक दिन पिताजी ने संजय को दो लाख रुपए से भरा बैग देकर कहा- ज़ाओ अपनी बुआ के घर जा कर यह दे आओ.
संजय नाश्ता करके बैग लेकर सीधा अपनी बुआ के घर पहुँच गया. समय दोपहर का एक बजा होगा.
आगे की कहानी संजय की जुबानी!
मैंने डोर-बेल बजाई लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला. मैंने 3 बार कोशिश की लेकिन किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला. मैंने दरवाज़े को धक्का दिया तो दरवाज़ा खुल गया, मैं जूते निकाल कर दरवाज़े को बंद करके सीधा अंदर गया और बुआ को आवाज़ देने लगा.
फिर मैं सीधा किचन में गया. वहाँ पर भी कोई नहीं था. फिर मैंने बुआ के बेडरूम के पास जा कर देखा कि बेड रूम लॉक है. मैं वहाँ से निर्मला के बेडरूम के पास गया और दरवाज़े को धकेला, दरवाज़ा खुला ही था. मैं अंदर गया और देखा कि निर्मला सिर्फ़ लाल रंग की पेंटी पहने हुए थी और अपने बाल तौलिये से सुखा रही थी.
वाह! क्या नज़ारा था! क्या मम्मे-चूची थी- एकदम दूध की तरह सफेद और गोल-गोल और कड़क और उसका फिगर- वाऽऽह! 32-34 मम्मे, 25 कमर और 34 गाण्ड!
और मेरा लंड पैन्ट में खड़ा होने लगा. मेरे अंदर की वासना जाग गई क्योंकि मैंने एक महीने से चुदाई नहीं की थी क्योंकि मेरी पत्नी की तबीयत खराब चल रही थी और डॉक्टर ने साफ मना किया था.
मैंने सोचा- मस्त माल है क्यों ना मजा ले लूं! मैंने बैग को नीचे रखा और सीधा निर्मला के पीछे गया और चूचियों पर हाथ रख कर गर्दन पर चुम्बन करने लगा.
निर्मला एक दम घबरा गई और मेरा हाथ पकड़ कर चिल्लाई- कौन हो तुम? यह क्या कर रहे हो? निकल ज़ाओ मेरे कमरे से बाहर!!
तो मैंने उसके कान में धीरे से कहा- मैं हूँ तुम्हारा संजू! ( सब लोग मुझे संजू कहकर बुलाते थे)
संजू!! (उसने मेरी आवाज़ से पहचान लिया था) तुम यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
तुम अंदर कैसे आए?
मैंने कहा- दरवाज़ा खुला था और मैंने जब बुआ और तुमको आवाज़ लगाई तो किसी ने जवाब नहीं दिया तो मैं तुम्हारे कमरे में देखने आया कि तुम हो या नहीं! और अंदर आकर देखा तो तुम नंगी खड़ी हो.
इतना कहते ही मैंने फिर निर्मला को अपनी बाहों में लिया और चूची पर हाथ रख कर धीरे धीरे मसलने लगा और उसकी तारीफ करने लगा- तुम कितनी सुंदर हो! ऐसी सुंदर लड़की मैंने आज तक नहीं देखी. गले पर चूमने लगा और लंड को उसकी गाण्ड पर रगड़ने लगा.
निर्मला छटपटाने लगी और बोली- मुझे छोड़ दो भैया!
मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़!
और एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी पेंटी में डालने लगा और बोला- निर्मला तुम असल में अप्सरा से भी बहुत सुंदर हो! अगर तुम मेरी पत्नी होती तो मैं तुमसे ही चिपका रहता! एक पल भी अलग नहीं होता.
इतने में निर्मला ने मुझे धक्का दिया और कहने लगी- नहीं भैया! यह पाप है आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते! तुम अपनी बहन के साथ ऐसा नहीं कर सकते!
मैंने कहा- मैं तुम्हारा भाई नहीं हूँ, हम आज से हम दोस्त हैं बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड की तरह! और दोस्ती में यह सब ज़ायज़ है.
मैं अपने दोनों हाथों से निर्मला के चेहरे को पकड़ कर चूमने लगा और एक हाथ से बाईं बूब को मसलने लगा. मैंने फिर निर्मला को बेड पर लिटा लिया और निर्मला के उपर आकर चूची को मुँह में लेकर को चूसने लगा और एक हाथ को चूत के ऊपर रख कर मसलने लगा.
दोस्तो, अब निर्मला ने साथ देना शुरू कर दिया और धीरे धीरे बोलने लगी- नहीं भैया! प्लीज़ मत करिए!
और मैंने खड़े होकर जल्दी से अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो गया. फिर मैं निर्मला के ऊपर आया और उसको बाहों में लेकर आंख से आंख मिलाकर कहने लगा- वास्तव में तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो! आई लव यू! निर्मला आई लव यू! निर्मला आज मैं बहुत खुश हूँ कि एक अप्सरा जैसी लड़की के साथ मस्ती कर रहा हूँ!
वो अपनी आँखें बंद करके बोली- भैया आप बहुत गंदे हो! मैं आपके साथ कभी भी बात नहीं करूंगी!
मैंने कुछ नहीं कहा और एक हाथ से चूची की घुंडी को ज़ोऱ-ज़ोऱ से मसलने लगा और वो छटपटाने लगी और सिसकारी निकालने लगी- ओइए माआआआ ओइए! माआआआआआ!
मैंने भी उसे चूमना चालू कर दिया और वो भी साथ देने लगी. मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली तो वो भी मेरी जीभ को चूसने का प्रयास करने लगी. करीब 5 मिनट के बाद मैंने उस का हाथ लेकर मेरे लंबे और मोटे लंड पर रख कर कहा- लो मेरे लंड से खेलो!
वो शरम के मारे आंख बंद करते हुए हाथ छुड़ाकर बोली- नहीं! मैं नहीं खेलूंगी, तुम मुझे छोड़ दो!
मैंने कहा- एक बार हाथ में लोगी तो फिर कभी नहीं छोड़ोगी!
और उसको ज़बरदस्ती हाथ में पकड़ा दिया और उसका हाथ पकड़ कर हिलाने लगा. मेरा लंड करीब 9 इंच का है और हाथ लगने से और भी टाइट और लंबा होकर तड़पने लगा. निर्मला उसको देख कर घबरा गई और बोली- यह तो बहुत ही बड़ा है! मैं नहीं लूंगी अपने हाथ में! मुझे डऱ लगता है!
मैंने कहा- कैसा डर? तुम एक जवान लड़की हो! इस लंड को आज कल की लड़कियाँ अपनी चूत में लेने के लिए तड़पती हैं तुम इतनी बड़ी हो कर भी डरती हो? कल जब तुम्हारी शादी होगी और तुम्हारा पति तुमको सुहागरात में चोदेगा तो तुम क्या करोगी? डर के मारे तुम वापस अपने मायके आओगी या फिर पति से चुदवाओगी?
निर्मला बोली- तुम इतनी गन्दी बात क्यों कर रहे हो? मुझे तो बहुत शरम आ रही है, प्लीज़ ऐसी गंदी बात मत कऱो!
मैंने कहा- निर्मला तूने कभी अपनी मम्मी और डैडी की चुदाई देखी है?
दोस्तो, मैं उसकी शरम को हटाना चाहता था और उसको पूरी तरह से उकसा रहा था और मैं उसका हाथ अपने लंड पर रख कर धीरे धीरे से सहलाने लगा था.
तो वो बोली- नहीं!
इसलिए तो तुम को मालूम नहीं है कि चुदाई करते समय किस किस तरह की बातें होती हैं!
उसने मुझसे पूछा- भैया, आप भी भाभी के साथ ऐसे ही बातें करते हो?
मैंने कहा- हाँ! इससे भी ज्यादा गंदी!
तो वो आश्चर्य-चकित होते हुए बोली- आपको शरम नहीं आती?
मैंने कहा- पहले बहुत शरम आती थी, अब नहीं! क्योंकि हम लोगों आदत पड़ गई है और हमको सिखाने वाली कौन है, तुमको पता है? नहीं? अगर बता दिया तो तुम पागल हो जाओगी सुन कर! और शायद तुम मेरा विश्वास भी नहीं करोगी!
तो वो बोली- कौन है?
मैंने कहा- पहले तुम अन्दाज़ा करो! बाद में मैं तुम्हें बताऊँगा!
वो बोली- तुमको बताना हो तो बताओ, नहीं तो भाड़ में जाओ!
मैंने कहा- बताता हूँ.
और बोल पड़ा- तुम्हारी मम्मी! मेरा मतलब- बुआ!
तो बोली- मेरी मम्मी?
मैंने कहा- हाँ! तेरी मम्मी!
मैं नहीं मानती!
मैंने कहा- मत मानो! लेकिन मैंने तुम्हें अगर सबूत दिया तो तुम मुझे क्या दोगी?
वो बोली- पहले सबूत, बाद में मैं तुझे क्या दूँगी, तुम को बाद में पता चल जाएगा!
तो मैंने कहा- तुम को एक काम करना पड़ेगा!
क्या, कैसा काम? मैं कोई काम नहीं करूंगी!
मैंने कहा- ऐसा वैसा कुछ नहीं बस मेरी आइडिया मानो और मैं जो कहूँ, तुम वैसा करो!
दोस्तो, मैं बातें करते हुए उसकी चूत में अंगूठाअ और उंगली डाल कर दाने को मसलने लगा था, वो बातें करते हुए तड़प रही थी और मेरे को बोल रही थी कि छोड़ दो भैया प्लीज़! आप ऐसा मत करो! मुझे बहुत दर्द हो रहा है! आप बहुत खराब हैं!
मैंने उसे कहा- आज रात को जब सब लोग सो जाए तो तुम बिना आवाज़ किए ही मम्मी के कमरे के दरवाजे पर अपना कान लगा कर उनकी बातें सुनना! तभी तुम को पता चलेगा कि कौन सच्चा है और कौन झूठा है!
तो बोली- ठीक है! मैं आज ही पता कर लूंगी!
मैं चूत में उंगली डाल कर चूत के दाने को मसलने लगा और अब वो मेरे काबू में आने लगी और मीठी मीठी सिसकारी लेने लगी. उसकी चूत से पानी भी बहने लगा था. मैंने अब नीचे आकर उसकी चूत को हाथों से खोला और चूत के पास मुँह रख कर चूत को सूंघने लगा.
वाह! क्या मीठी सुगंध थी! ऐसी सुगंध तो मोंट ब्लांक के पर्फ्यूम में भी नहीं आती होगी! मैं तो पूरा मदहोश हो गया और स्वर्गलोक के कमल के फूल की कल्पना करने लगा.
तभी निर्मला बोली- भैया, वहाँ मुँह लगाकर क्या कर रहे हो?
मैंने कोई ध्यान नहीं दिया और मैं चूत सूंघने में मस्त था. तो निर्मला मेरे बाल खींच कर बोली- भैया, क्या कर रहे हो?
मैंने सिर उठा कर कहा- कुछ नहीं डार्लिंग! तुम्हारी चूत ने तो मुझे पागल कर दिया है! यह कह कर मैं उसकी चूची चूसने लगा और उंगली को चूत में डाल कर आगे पीछे करने लगा. तभी वो बोली- भैया, मुझे कुछ हो रहा है! प्लीज़ आप मुझे छोड़ दो!
मैंने कहा- क्या हो रहा है?
तो बोली- मेरी चूत से कुछ आने वाला है!
मैंने कहा- प्लीज़ रुको! और मैं मुँह को नीचे ले कर चूत में जीभ डाल कर चूत को चाटने लगा औऱ एक हाथ से उसकी चूची को मसलने लगा और वो पूरी पागलों की तरह होकर बोली- प्लीज़ भैया! जल्दी कऱो! नहीं तो मैं मर जाऊँगी!
मैं जल्दी जल्दी उसकी चूत को चाटने लगा और हाथ से उसकी चूची मसलने लगा. करीब पाँच मिनट में ही वो ज़ोऱ से आऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ कर के झड़ गई और सारा चूतरस (प्रेमरस) मेरे मुँह में छोड़ दिया. मैंने पूरा माल चाट चाट कर साफ किया.
तभी मैंने उससे पूछा- मजा आया या नहीं?
तो शरमाते हुए बोली- भैया प्लीज़!
मैंने कहा- अब आगे का खेल खेलें या नहीं?
तो बोली- इससे आगे का खेल कौन सा है?
मैंने उसे सीधे ही कहा- अब मैं तुझे चोदूँगा!
तो बोली- कैसे?
मैंने लंड हाथ में लेकर हिलाते हुए उसकी चूत पर हाथ रखकर कहा- मैं इसे तुम्हारी चूत में डाल कर ज़ोऱ से चोदूँगा!
तो बोली- भैया, प्लीज़ आप अभी मुझे छोड़ दो! आप कल कर लेना!
मैंने कहा- क्यों?
तो बोली- मुझे कहीं जाना है! और मैं पहले ही लेट हो गई हूँ! प्लीज़ मुझे जाने दें, मैं आपसे वादा करती हूँ!
तो दोस्तो, मैंने भी कोई जबरदस्ती न करते हुए उसके चूचुक को मुँह में लेकर हल्का सा काट कर कहा- मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ, मैं तेरे साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करूंगा! तुम जब तुम्हारी मर्जी हो, मुझे बुला लेना, मैं हाज़िर हो जाऊँगा!
मैंने अपने कपड़े पहने और बाहर आकर हाल में बैठ कर टीवी. चला कर सोफ़ा पर बैठ गया. तभी वो पाँच मिनट के बाद निर्मला बाहर आई, मुझसे बोली- तुम आए क्यों थे?
मैं भी भूल गया था कि मेरे पास कैश का बैग था. मैंने कहा- तुम्हारे कमरे में मेरा कैश का बैग पड़ा है, मैं कैश देने आया था. लेकिन बुआ घर में नहीं थी तो मैंने सोचा कि तुम को दे दूँ. तो बोली- बैग कहाँ है?
मैंने कहा- तुम्हारे कमरे में कुर्सी के पास रखा है, तुम मुझे बैग ला कर दे दो.
निर्मला बैग लेने कमरे में गई. मैं भी पीछे गया और निर्मला को पकड़ कर घुमाया और उसके वक्ष मसलते हुए चूमने लगा. वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर घुमाने लगी. करीब़ पाँच मिनट के बाद हम अलग हुए और मैंने बैग निर्मला के हाथ में देकर कहा- यह बैग अपने पापा को दे देना और सेल पर बात करा देना! और मैंने अपना सेल नम्बर उसे दे दिया.
और मैंने भी उसका सेल नम्बर ले लिया. उसको कहा- यह बात तुम किसी से मत करना और मैं भी किसी से नहीं कहूँगा, क्योंकि इसमें तुम्हारी और मेरे खानदान का इज़्ज़्त का सवाल है.
निर्मला बोली- मैं नहीं कहूँगी!
मैंने कहा- तुम्हारी फ्रेंड्स को भी नहीं बताना!
वो बोली- नहीं बताऊँगी भैया! आप मुझे इतना भी बेवकूफ़ मत समझो!
मैंने कहा- ठीक है! तुम मुझे फोन करोगी या मैं तुझे फोन करूँ?
तो बोली- मैं तुझे फोन करूंगी!
मैंने कहा- प्रॉमिस?
तो बोली- प्रॉमिस!
मैंने कहा- बाय!
और मैं घर से निकल गया और सीधा घर आकर सो गया. कब रात के नौ बजे, मुझे पता ही नहीं चला. मम्मी ने मुझे जगाया. मैं खाना खाकर घूमने चला गया, रात को ग्यारह बजे घर आकर सो गया.
अगले दिन मैं फोन का इन्तज़ाऱ करने लगा.
कहानी के अगले भाग की प्रतीक्षा करें! शीघ्र ही अन्तर्वासना पर प्रकाशित होगी. Antarvasna
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