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अन्तर्वासना के सभी पाठकों और गुरूजी को मेरा नमस्कार! Antarvasna

मैं प्रतीक, मध्यप्रदेश का Antarvasna रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का पिछले एक वर्ष से नियमित पाठक हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैं भी आप सबसे अपना अनुभव बांटना चाहता हूँ।

मैं ऍमबीए का छात्र हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं ऍमबीए करने के लिए नया-नया इंदौर आया था। इंदौर आने पर मेरी सबसे पहली समस्या यह थी कि मुझे एक अच्छे कमरे की तलाश करनी थी। मेरे कुछ दोस्त पहले से इंदौर में पढ़ाई कर रहे थे इसलिए उन्होंने मुझे जल्दी ही एक अच्छा कमरा दिलवा दिया।

मेरी जिन्दगी अच्छी तरह से चल रही थी। मैं जहाँ पर रहता था, उस कालोनी में बहुत सी सुन्दर महिलाएं और लड़कियां रहती थी। मैं कॉलेज में व्यस्त होने क कारण किसी पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देता था।

मैंने एक दिन देखा कि मेरे पास वाले कमरे में कुछ नए लोग रहने के लिए आये हैं। वो कुल मिलकर तीन लोग थे- पति, पत्नी और उन भाभी की छोटी बहन!

भाभी देखने में बहुत ही सुन्दर थी, भाभी का जिस्म 34-28-36 का होगा। उनकी नई-नई शादी हुई थी।

एक दो बार कॉलेज आते जाते हुए ऐसे ही हम दोनों ने एक दूसरे को देखा था। दो एक महीने तो ऐसे ही गुजर गए, मैं भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया।

एक दिन जब मैं अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अचानक मेरे कमरे की घंटी बजी, मैंने जब दरवाज़ा खोला तो देखा कि पास वाली भाभीजी सामने खड़ी थी।
मैंने उनको हेल्लो कहा और अन्दर आने को कहा।

उन्होंने मुझसे कहा- आज तुम्हारे भैया बाहर गए हुए हैं, मुझे बाज़ार से कुछ चीजें मंगवानी हैं, क्या आप मेरी चीजें कॉलेज से आते वक़्त ले आयेंगे?
मैंने कहा- ठीक है मैं ले आऊंगा!
क्योंकि जहाँ से मुझे उनकी चीजें लेनी थी वो मेरे कॉलेज के रास्ते में ही है।
वो मुझे धन्यवाद कहकर अपने घर चली गई…

मैं भी तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया और लौटते समय उनका सामान ले आया। मैं अपने कमरे पर नहाकर, कपड़े बदलकर भाभी के घर सामान देने गया।

भाभी ने मुझे अन्दर बुलाया, उन्होंने अपनी बहन से मेरा परिचय कराया। उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा, मेरे बारे में बहुत सी बातें पूछी जैसे कि मैं कहाँ का रहने वाला हूँ, मेरा नाम क्या है, मैं क्या करता हूँ….

कुछ देर बात करने के बाद मैं अपने कमरे पर वापिस आ गया।

कुछ दिन ऐसे ही निकल जाने के बाद मेरी और भाभी की अच्छी दोस्ती हो गई।

मैंने भाभी से भैया के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया- वो एक कंपनी में काम करते हैं और इस कारण अधिकतर घर से बाहर ही रहते हैं।

अब भाभी मेरे से पूरी तरह से खुल गई थी, मैं भी उन्हें सारी बातें बताता था।
एक बार भाभी ने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड हैं?
मैंने कहा- नहीं हैं!
उन्होंने कहा- क्यों ? तुम तो बहुत ही अच्छे और स्मार्ट लड़के हो!
तो मैंने उनसे कहा- मुझे पढ़ाई से ही समय नहीं मिलता है!
वो यह सुनकर थोड़ी खुश दिखी। मुझे उस वक़्त तक नहीं मालूम था कि क्यों!

कुछ दिन निकल जाने के बाद मैंने देखा कि भाभी उदास-उदास सी रहने लगी हैं। पहले तो मुझे लगा कि शायद अपने घर वालों की याद आ रही होगी लेकिन एक दिन मैंने देखा कि वो बहुत ज्यादा उदास हैं। वो मेरे कमरे पर यूँ ही आई थी, मैंने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं!

पर मैंने उनसे कहा- अगर आप मुझे अपना अच्छा दोस्त समझती हैं तो मुझे अपनी दिक्कत बताओ!
तो उन्होंने कहा- मुझे तुम्हारे भैया की बहुत याद आ रही है!
तो मैंने कहा- उनसे बात कर लो फ़ोन पर!
तो उन्होंने कहा- मुझे जो चाहिए वो बात करने से नहीं मिलेगा!
मैंने कहा- मैं समझा नहीं?
उन्होंने कहा- शादी के बाद मुझे तुम्हारे भैया से पूरा सुख नहीं मिला है!

पहले तो मैं समझा नहीं, पर एक दम मुझे लगा कि शायद भाभी प्यासी हैं, उनकी बहुत दिन से चुदाई नहीं हुई है।
मैंने भाभी से कहा- तो फिर आप भैया को कुछ दिन के लिए यहीं पर बुला लीजिये!
उन्होंने बताया कि भैया के ऑफिस में काम बहुत है और अगले 20-25 दिन वो घर नहीं आयेंगे।
तो मैंने भाभी को समझाया और उनके घर भेज दिया।

पर भाभी की तन की प्यास बढ़ती जा रही थी।
वो एक दिन मेरे पास आई और उन्होंने मुझसे कहा- प्रतीक तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो!
मैंने कहा- भाभी आप भी मुझे अच्छी लगती हैं!
उन्होंने एकदम से मुझे अपने गले लगा लिया।

मैंने भाभी को दूर करते हुए कहा- भाभी, यह आप क्या कर रही हैं?
भाभी ने कहा कि वो मुझे बहुत पसंद करती हैं और मुझसे प्यार करती हैं।
मैंने कहा- भाभी, यह गलत है!
तो उन्होंने कहा- कुछ गलत नहीं है! अगर उन्हें प्यार नहीं मिला तो वो मर जाएँगी!
मैंने भाभी से कहा- भाभी! आप अभी अपने घर चली जाएँ!

पर भाभी एकदम मेरे पास आ गई और उन्होने मुझे बाहों में भर लिया। पहले तो मैं उन्हें दूर करने लगा पर थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। भाभी के बड़े बड़े स्तन मेरे सीने से टकराने लगे।

मैंने भाभी को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें चूमने लगा। मैंने अपने होंठ उनके रसीले होंठों पर रख दिए, मैं ऐसे ही उनके होंठ चूसने लगा। क्या रसीले होंठ थे उनके!

10-15 मिनट उनके होंठों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ भाभी की चूचियों पर रख दिया और दूसरा उनकी गांड पर रख दिया। मैं भाभी की चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा। वो आह आह की सिसकारियाँ निकालने लगी।

मैंने धीरे से भाभी की साड़ी खोल दी और अलग फ़ेंक दी। मैंने धीरे-धीरे भाभी का ब्लाउज़ और पेटीकोट भी निकाल कर अलग कर दिए। अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। क्या गज़ब की लग रही थी- लग रहा था जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा सामने खड़ी हो!

मैं फिर से भाभी को चूमने लगा। भाभी ने मेरे कपड़े भी निकाल दिए। फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमते-चूमते बिस्तर पर आ गए। मैंने अब भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया। अचानक उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सामने आ गई। उनकी चूचियां बहुत ही गोरी थी। मैं उनकी एक चूची अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चूची दबाने लगा। भाभी अलग तरह की आवाजें निकालने लगी। मैंने इसी बीच भाभी की पैंटी भी निकाल दी और दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में घुसा दी। वो सिसकारियाँ भरने लगी।

फिर भाभी के पूरे बदन को चूसता हुआ उनकी चूत चाटने लगा। वो अजीब तरह की आवाजें निकलने लगी। मैं उनकी चूत बहुत तेजी से चाट रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसा दी। भाभी को अब बहुत मज़ा आने लगा था, वो मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में और अन्दर तक दबाने लगी।

मैं भी मज़ा ले लेकर उनकी चूत चाट रहा था। आधा घंटा चूत चाटने के बाद भाभी ने सारा पानी में मेरे मुंह में ही छोड़ दिया। मैंने उनका सारा पानी पी लिया। अब मैं भाभी की चूत में दो ऊँगलियाँ डालकर अन्दर बाहर कर रहा था। उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अपना आठ इंच का लंड उनके मुँह के पास रख दिया और उनसे कहा- आप इसे चूसो!

भाभी ने बिना संकोच किये मेरा पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक चुदक्कड़ की तरह चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रहा हूँ। कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने भाभी के मुँह में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। वो मेरा सारा का सारा वीर्य पी गई और मेरे लंड को भी चाट कर साफ़ कर दिया।

अब मैं और भाभी दोनों ही बहुत गर्म हो गये थे। मैंने भाभी को बिस्तर पर सीधा लेटाकर अपने लंड का अग्र भाग उनकी चूत के मुख पर रखा और भाभी के होंठो को चूमते हुए एक जोर का धक्का लगाया। मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ आधा उनकी चूत में घुस गया। भाभी के मुँह से एक तेज़ चीख निकली पर मैंने अपने होंठों से उनकी चीख दबा ली। भाभी की चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। शायद भैया का लंड बहुत छोटा था जिसके कारण भाभी की चूत की झिल्ली अभी तक टूटी नहीं थी।

मैंने जब भाभी से पूछा तो उन्होंने कहा- मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तुम अभी जरा भी हिलना मत!

उन्होंने मुझे साथ ही यह भी बताया कि तुम्हारे भैया का लण्ड केवल तीन इंच का है और वो भी पतला!

कुछ ही देर में भाभी का दर्द थोड़ा कम हुआ। उन्होंने मुझे इशारा करते हुए अपने चूतड़ ऊपर उठाने लगी। मैंने इशारा देखकर एक और तेज झटका मारा, इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में प्रवेश कर चुका था। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उन्होंने मुझे फिर रुकने के लिए कहा लेकिन इस बार मैंने उनकी नहीं सुनी और अपना लंड अन्दर बाहर करता रहा। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उनके आंसू तक निकल गए।

थोड़ी देर ऐसे ही करते रहने के बाद उनका दर्द कम हुआ और वो भी मज़े लेने लगी। अब मैं उनको बहुत तेजी से चोद रहा था, वो भी अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

अचानक भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपना पानी छोड़ दिया लेकिन मेरा लंड अभी भी पूरे जोश में था। मैं उनको चोदता रहा! उनको बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी को उठाकर कुतिया की तरह बनने को कहा। वो आगे की तरफ झुककर कुतिया की तरह पलंग पर बैठ गई। मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। इस बार एक ही बार में मेरा पूरा लंड उनकी चूत की अंतिम सीमा तक घुस गया। अब मैं उनको बहुत जंगली तरीके से तेज़ तेज़ चोद रहा था।

अचानक मुझे लगा कि मेरा पानी छुटने वाला है। तब मैंने भाभी से पूछा- मेरा वीर्य निकलने वाला है, कहाँ पर निकालूँ?
तो उन्होंने मुझे कहा- मेरी चूत के अन्दर ही छोड़ दो!
मैंने कहा- ठीक है!
और मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में ही छोड़ दिया और उनके ऊपर चूत में लंड डालकर लेट गया।

उसके थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में एक साथ चले गए और भाभी ने मेरा लंड मुँह से चाट कर साफ़ किया और मैंने उनकी चूत चाट कर साफ़ की। हम दोनों ने एक साथ शावर लिया और नहाते हुए ही हमने एक बार और सेक्स किया।

मैंने भाभी को चोदते हुए कहा- मैं आपकी गांड भी मरना चाहता हूँ!
तो भाभी ने कहा- अब तो मैं पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ! तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो!

अब मैं भाभी को जब चाहता हूँ चोद देता हूँ। वो भी मुझसे चुदने का मौका देखती रहती हैं। अब हमारे सम्बन्ध के बारे में भाभी की छोटी बहन को भी पता चल गया है।

भाभी ने मुझे एक दिन चुदाई करते वक़्त बताया- मेरी बहन को सब मालूम पड़ गया है और वो भी चुदना चाहती है तुम से!
मैं तो यह सुनकर खुश हो गया और भाभी की बहुत तेज़ चुदाई करने लगा।

मैंने भाभी की गांड भी मारी और उनकी छोटी बहन की सील भी तोड़ी, यह सब मैं अपनी अगली कहानी में बताऊंगा। Antarvasna

प्रेषक : अमन Hindi Sex Stories

मेरा नाम अमन Hindi Sex Stories है। अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ते-2 मैंने सोचा कि मैं भी पाठकों के समक्ष अपनी कहानी रखता हूँ।

यह मेरी सच्ची कहानी है। कंचन जिसे मैं पिछले चार साल से जानता हूँ, मेरे साथ ही मेरे ऑफिस में काम करती है। मैं ऑफिस का प्रबन्धन करता हूँ और वो मेरी सहयोगी है। हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और गहरे दोस्त हैं। हम एक दूसरे के साथ अपनी हर एक बात शेयर करते हैं। मैं शुरू से ही उसे मन ही मन चाहता था पर वो किसी और को चाहती थी। यह बात उसने मुझे बताई थी, इसलिए मैं उसे कभी भी नहीं बता पाया कि मैं उसे चाहता हूँ।

खैर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसकी शादी उस लड़के से न हो कर किसी और के साथ हो गई। जिसके साथ वो खुश तो थी पर सुखी नहीं थी।

यह तो था कहानी का एक हिस्सा ! अब चलते हैं असली कहानी की तरफ !

कंचन जो एक खूबसूरत और भरे हुए बदन वाली लड़की है जिसे देख कर कोई भी उसकी तरफ आकर्षित हो जाए। शादी के बाद वो कुछ परेशान सी रहती थी और मुझे कुछ बता भी नहीं पा रही थी क्योंकि शादी के बाद मैंने उससे कुछ दूरी सी बना ली थी। हम बात तो करते थे पर इतना खुल कर नहीं कर पाते थे।

शायद मैं सोचता था कि मेरी वजह से उसकी ज़िन्दगी में कोई समस्या न हो।

पर एक दिन ऑफिस में शाम को जब सारे चले गए तो मैंने उसको बुलाया और पूछा कि क्या कोई समस्या है? आजकल तुम कुछ परेशान सी रहती हो !

इतना कहते ही वो रोने लगी और कहा- आप को आज समय मिला है मेरा हाल पूछने का?

मैंने उसे गले लगाया और उसको चुप कराने लगा। उसने बताया कि उसके पति उसके साथ सेक्स तो करते हैं पर वो इतनी जल्दी और इस तरह से करते हैं कि मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता और मैं उनका साथ नहीं दे पाती और उनको बीच में ही रोक देती हूँ। क्या करुँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

मैंने उसे कहा- क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?

तो उसने हाँ कह दिया। फिर मैंने उसके आंसू पौंछ कर उसको चुप कराया और उसको कहा- पुरानी परेशानी भूल जाओ। नई के लिए तैयार हो जाओ।

इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए उसने विरोध करने की कोशिश की पर मैंने उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको किस करने लग गया।

मैंने महसूस किया कि उसके बदन में जैसे सनसनी सी दौड़ गई हो। अब वो भी मेरा साथ देने लगी। कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने धीरे से उसके स्तन पकड़ लिए और उनको कमीज के ऊपर से ही दबाने लग गया।

वो मुझे और कस के चूमने लगी। कुछ देर बाद मैंने उसे कहा- चलो दूसरे कमरे में चलते हैं।

फिर हम दूसरे कमरे में चले गए, वहाँ पर वो एक मेज के सहारे खड़ी हो गई। हम फिर से एक दूसरे को चूमने लगे। धीरे-2 मैंने उसकी कमीज में नीचे से हाथ डाल दिए और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तन पकड़ के दबाने लगा।

वो सिसकारने लग पड़ी। फिर मैंने धीरे से उसकी ब्रा खोल दी और उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरे हाथों में आ गए। इतने बड़े स्तन पकड़ के दबाने बहुत मजा आ रहा था।

वो भी मजा ले कर आवाज करने लगी और कहने लगी- धीरे करो ! कुछ हो रहा है।

मैंने उसे कमीज खोलने को कहा। जैसे उसने कमीज उतारी, वाह ! क्या नजारा था ! उसके बड़े-बड़े स्तन मेरे सामने थे। मैं एक को पकड़ के चूसने लगा और दूसरे को दबाता रहा।

अब वो धीरे-धीरे गर्म होने लगी थी। उसका हाथ मेरे लण्ड की तरफ जाने लगा। उसने मेरी जिप खोल दी और मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ लिया और उसको दबाने और आगे पीछे करने लगी।

मैं भी उसके स्तनों को चूसता और दबाता रहा। फिर मैं एक हाथ से उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा अब वो और गरर्म हो गई थी उसके हाथ की हरकतें बढ़ रही थी और वो तेजी से मेरा लण्ड आगे पीछे कर रही थी।

मैंने धीरे से उसकी सलवार खोल दी और उसकी पैंटी भी उतार दी। फिर मैं उसकी चूत को सहलाने लगा। वो और ज्यादा सिसकारने लगी और कहने लगी- धीरे करो ! कुछ हो रहा है।

मैंने उसे पूछा- तुम तो कहती हो कि मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता पर अभी तो तुम को कुछ कुछ हो रहा है।

वो बोली- मेरे पति ऐसा कुछ नहीं करते, वो तो सीधा ही डाल देते हैं और करने लग जाते हैं।

फिर मैंने उसे पूछा- क्या मैं हद से आगे तो नहीं जा रहा हूँ?

तो उसने न में जवाब दिया।

फिर मैंने उसे सीधे लिटा दिया और टाँगे खुली कर के उसकी चूत पर चूम लिया। उसकी चूत एकदम गुलाबी रंग की थी और उससे बहुत ही भीनी-2 महक आ रही थी। मैं उसकी चूत को चूमने लगा और वो मजा लेने लगी।

वो अब पूरी गर्म हो गई थी और उसके मुँह से आवाजें निकलने लगी थी। मैं उसकी चूत को चूमते जा रहा था और अपनी जीभ उसकी चूत में डाल रहा था, यह सब अब उससे सहन नहीं हो रहा था।

वो एकदम से उठी और मेरे लण्ड को पकड़ कर अपने मुँह में डाल लिया और उसको चूसने लगी।

फिर मैंने उसको पूछा- क्या मैं आगे भी कुछ कर सकता हूँ?

तो उसने खुद ही मेरा लण्ड अपनी चूत पर लगा दिया। उसकी चूत पूरी गीली हो गई थी, मैंने लण्ड को धीरे से धक्का दिया तो वो थोड़ा सा उसकी चूत में चला गया। उसके मुँह से आह निकल गई। वो नीचे से जोर लगा के लण्ड को अन्दर डालने में मेरी मदद करने लगी।

दो तीन धक्कों में ही पूरा लण्ड अन्दर चला गया। मैं धीरे-2 लण्ड अन्दर बाहर करने लगा और उसके वक्ष को भी दबाने लगा।

वो पूरा मजा लेने लगी और कहने लगी- ऐसा मुझे कभी भी महसूस नहीं हुआ ! सच बहुत अच्छा लग रहा है।

हम दोनों बातें भी करते रहे और अपना काम भी ! उसने मेरा पूरा साथ दिया। वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर पूरा लण्ड अन्दर लेने लगी। मैंने धीरे-2 अपनी स्पीड तेज कर दी। वो भी मजा लेती हुई मेरा पूरा साथ देने लगी।

उसने कहा- जल्दी करो ! अब मैं झड़ने वाली हूँ।

मैंने भी अपना काम जारी रखते हुए पूछा- कहाँ निकालूँ?

उसने कहा- मेरे अन्दर ही निकालो ! मैं दवाई ले लूंगी।

हम दोनों एक साथ ही झड़े और कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे। उसने मुझे कस के गले लगा लिया और रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और हम दोनों ने एक दूसरे के चूत और लण्ड को साफ़ कर के अपने कपड़े पहन लिए।

दोस्तो, वो एक कमजोर पल था। जो हम दोनों को ख़ुशी के कुछ पल दे गया।

अपनी प्रतिक्रिया मुझे जरूर मेल करें। Hindi Sex Stories

Hindi Porn Stories

मैं पहली बार अन्तर्वासना में अपनी Hindi Porn Stories कहानी भेज रहा हूँ। मैं एक ३३ साल का लड़का हूँ और सभी की तरह मेरे अन्दर भी सेक्स करने की बहुत इच्छा थी। मेरा नाम टॉम है (बदला हुआ नाम) मेरा शरीर गठीला और लण्ड ९ इंच लंबा और २.५ इंच मोटा है।

यह उस वक्त की बात है जब मैं २५ साल का था और मेरे ऑफिस में एक लड़की की नई नई आई। वो लड़की हमारे शहर की नहीं थी इसलिए एक कमरा लेकर दो और लड़कियों के साथ पेइंग गेस्ट की तरह रहती थी। मेरी शादी अभी नहीं हुई थी, इसलिए मुझे सेक्स करने की कुछ ज्यादा ही इच्छा होती थी पर कोई लड़की हो तो ही न सेक्स करे !

कुछ महीने बीत गए और उस लड़की और मुझ में दोस्ती हो गई। फिर हम कभी होटल में काफ़ी पीने तो कभी खाना खाने जाने लगे। इसी बीच मेरा प्रमोशन हो गया और इसी प्रमोशन की खुशी में मैं और पारो एक दिन आउटिंग के लिए गाँव चले गए।

हम गाँव जाने के लिए स्कूटर पर निकल पड़े। गाँव के नजदीक आते ही पारो को मस्ती सूझी उसने मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया और उसके छूने से मेरा लण्ड तुंरत ही खड़ा हो गया। उसने अपने मुम्मे मेरी पीठ पर इस तरह से चिपकाये थे कि मेरा लण्ड एकदम कड़क हो गया। अब मुझसे बिल्कुल रहा नहीं गया।

मैंने गाड़ी नहर के किनारे लगा दी और पारो को लेकर झाड़ी की आड़ में ले गया और उसे इस तरह लिटाया के कोई हमें देख न सके। फिर मैंने उसे चूमना शुरू किया और ऐसा करने की वजह से वो पूरी तरह से गरम हो गई और उसने मुझे अपने नीचे लेकर ख़ुद ऊपर की पोज़िशन ले ली।

मैं समझ गया कि आज अपनी निकल पड़ी है। पारो ने मेरी पैन्ट उतारी और मेरा लण्ड मुँह में लेकर खूब जोर जोर से चूसने लगी। मैंने तुंरत अपनी पोजिशन बदली, उसका कुरता ऊपर सरकाया और उसके मुम्मे मुँह में लेकर खूब जोर जोर से चूसने लगा। उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो सिसकारियाँ भरके मुझे जवाब दे रही थी। फिर हम दोनों ही एक दूसरे को चूसना चाहते थे इसलिए हमने 69 में हो कर एक दूसरे के गुप्तांग मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और हमें मज़ा भी बहुत आ रहा था।

मगर असली मज़ा तो लण्ड और चूत के मिलन के बाद ही आने वाला था। थोड़ी देर में हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए।

पारो उठ कर खड़ी हो गई और उसने फिर एक बार मुझे किस करते हुए मेरे कानों में कहा- क्या बात हैं ! मैं तो जानती ही नहीं थी कि असली मज़ा तो मेरी चूत को चूसनेवाला ही मुझे दे सकता है !

वो मेरे चुसाई की दीवानी हो गई थी और इसका सबूत यह है कि उसने आव देखा न ताव ! वो सीधा मेरे मुँह पर आकर बैठ गई और अपनी चूत को फ़ैला फैला कर उसे चूसने के लिए मेरी मिन्नतें करने लगी। उधर मेरा लण्ड अभी तक सोया हुआ ही था इसलिए मैंने भी पारो की चूत के अन्दर अपना मुँह घुसेड़ दिया और पागलों की तरह उसकी चूत को चाटने और चूसने लगा। इसी दौरान उसकी टांगों में अकड़न आ गई और मैं समझ गया कि वो अब झड़ने वाली हैं।

वो मेरे मुँह में ही झड़ गई और शांत होने के बाद उसने मेरे मुँह में अपनी जुबान डालकर मुझसे खेलने लगी। उसने अपने हाथ को मेरे लण्ड के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया। अब मेरा लण्ड धीरे धीरे अपनी सीमाएं तोड़ रहा था। वो अपनी पूरी मस्ती में आ गया था। मुझसे भी अब रहा नहीं गया और मैंने पारो को जल्दी से अपने नीचे लिटाकर उसकी टाँगें ऊपर उठा ली। मैंने पारो को अपने हाथ से लण्ड को अपनी चूत पर लगाने को कहा और उसने बिना वक्त गंवाए ऐसा ही किया। उसने धीरे से अपनी कमर उठाकर मेरे लण्ड को अपनी चूत में समां लेना चाहा मगर मेरा विशाल लण्ड अन्दर लेने में उसे बहुत दिक्कत आ रही थी क्योंकि उसकी चूत बहुत ही नाजुक थी।

अब मैंने एक तरकीब लगाने की सोची, इससे पारो को दर्द तो होगा मगर उसे समझ नहीं आएगा कि कब मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर चला जाएगा।

मैंने पारो को पीठ के बल लेटने को कहा और अपनी टांगें मेरे कन्धों पर रखने को कहा, उसने ऐसा ही किया। फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पे रखकर एक हल्का सा धक्का लगाया, उसके मुँह से जोर से आवाज़ आई- उई उइ माँ मर गयी मैं ! क्या करते हो बहुत मोटा लण्ड है तुम्हारा !

उसे बहुत जोर से दर्द हुआ। अब मैंने सोचा जब दर्द हो ही रहा है तो क्यों न दो चार और धक्को में अपना पूरा लण्ड अन्दर कर दूँ। मैंने अपनी पूरी ताकत से पारो को और दो धक्के दिए और मेरा पूरा लण्ड पारो की चूत को चीरता हुआ अपनी मंजिल तक पहुँच गया। अब पारो चिल्ला रही थी- प्लीज़ ! मेरी चूत को फाड़ दो ! और जोर जोर से नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

मुझे भी अब मज़ा आने लगा था और मैंने भी पारो की खूब अच्छी तरह से गहराइयाँ नापने की ठान ली। मैंने पारो को कभी कुतिया की तरह खड़ा करके तो कभी कामसूत्र वाली पोज़िशंस में, खूब अल्टा पलटा कर चोदा। पारो भी अब चुदने का मज़ा उठा रही थी। करीब आधे घंटे के बाद जब मैंने अपना पानी बाहर निकलने की इच्छा ज़ाहिर की तो पारो ने बिना वक्त गंवाए मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया और कहने लगी आज मुझसे यह मज़ा मत छीनो !

फिर मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और विश्वास कीजिये कि आज से पहले मुझे झड़ने में कभी इतना मज़ा नहीं आया।

मैं अब शांत हो चुका था मगर पारो अभी भी झड़ी नहीं थी उसने एक बार फिर मेरे मुँह पर बैठने की इच्छा जताई और मैंने हां कह दिया। फिर पारो मेरे मुँह पर बैठ गई और उसकी चूत की खुजली मिटाने में मैंने उसकी मदद की और कुछ ही पलों में वो भी झड़ गई।

इतने में हमें एक काला साँप वहाँ पर दिखाई पड़ा और हम दोनों अपने कपड़े ठीक कर के वहाँ से चल दिए।

बाद में हमने कभी ऑफिस में, तो कभी होटल के रूम में, तो कभी डैम के किनारे, पर तो कभी रास्ते में कई बार चुदाई की। पर वो कहानियाँ अलग है और वो मैं आपको अगली बार की कहानी में बताऊंगा। Hindi Porn Stories

Antarvasna

आपकी कुसुम का Antarvasna चौड़ी टांगों, मदहोश जवानी से अंतर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से प्यार एंड नमस्कार ! अपने बारे में ज्यादा न बताती हुई क्यूंकि अपनी कहानी के पहले भाग में मैंने अपना पूरा ब्यौरा दे दिया था।

सो दोस्तो, पति के ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद किस तरह मेरा रिश्ता अपने ससुर जी से बन गया, यह आपने पढ़ लिया। अब तो मानो मैं उनकी दूसरी बीवी की तरह रहती ! हैरानी वाली बात थी कि ससुर जी में इस उम्र में एक जवान लड़के से ज्यादा जोर, दम था कि उन्होंने एक कमसिन, कामुक, आग जैसी जवान बहू को संभाल रखा था।

दोस्तो, जेठ जी को भनक पड़ गई और फिर उनकी मेरे ऊपर निगाहें टिक चुकी थी। ऊपर से जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा ! लेकिन मुझे तो ससुर जी ही नहीं छोड़ते थे लेकिन मेरा झुकाव अब जेठ जी की तरफ भी था, चाहती थी कि उनकी प्यास बुझाऊँ ! आखिर मौका मिल गया !

एक दिन ऐसा जरूरी काम पड़ा कि ससुर जी को सासू माँ के साथ बाहर जाना ही पड़ा और दोपहर को मैं घर में अकेली थी। लेकिन जेठ जी सुबह से घर नहीं थे, शायद उन्हें मालूम नहीं था कि मैं अकेली हूँ, वरना वो मौका कहाँ छोड़ते ! कोशिश ज़रूर करते !

मैंने उनके मोबाइल पर मिस-कॉल दे दी। उसके बाद वो फ़ोन पर फ़ोन करने लगे लेकिन मैंने नहीं उठाया। आधे घंटे के अंदर मेरा अंदाजा और तीर सही जगह लगा और वो घर आ पहुंचे। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी सर्फिंग कर रही थी, बारीक सफ़ेद नाइटी अंदर काली ब्रा-पेंटी पहन रखी थी।
कुसुम ! तुमने कॉल की थी?
मैं पलटी- नहीं तो ! वो गलती से पॉकेट में बटन दब गया होगा !
ठीक है ! कहाँ हैं सब? अकेली हो आज?
जी हाँ अकेली हूँ ! बैठो ! अभी चाय लेकर आती हूँ !
नहीं भाभी !

उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली, खींच कर मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे गुलाबी होंठों का रसपान करने लगे। मेरी और से ज़रा सा विरोध ना देख उनकी हिम्मत बढ़ चुकी थी।

बहुत सुन्दर हो भाभी जान ! बहुत आग है आप में ! बहुत तड़पाया है आपने अपनी जवानी से मुझे ! हर पल गोली मारती रहती हो !

मैं भी तो आपकी वासना आपकी आँखों में पढ़ती रही हूँ, लेकिन पहल नहीं कर पा रही थी !

ओह मेरी जान ! मुझे भी सब मालूम था ! मैं भी थोड़ा सा झिझक रहा था ! मुझे मालूम है तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे मिस-कॉल दी थी !

और यह कहते ही वो मुझ पर सवार होने लगे। मैंने एक पल में उनके बटन खोल उनकी कमीज़ अलग कर दी और उन्होंने मेरी नाईटी उतार फेंकी और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं अश अश कर रही थी। मैंने उनकी बेल्ट भी खोल दी, अपने हाथों से जींस का बकल खोल नीचे कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उनके लौड़े को मसलने लगी। उनकी आग बढ़ने लगी, लौड़ा तन कर डण्डा बन चुका था, कितना बड़ा हथियार था !

मेरी चूत में कुछ-कुछ होने लगा। सिहरन सी उठने लगी, जवानी बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा उतार मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी खूब चूसा। मैं नीचे बैठ गई, उनकी पूरी जींस शरीर से अलग कर उनके लौड़े को आराम से चूसने लगी।

कितना बड़ा है जेठ जी !
हां रानी ! इसको तेरे जैसी रांड पसंद है ! तेरी जेठानी तो ठंडी औरत है !

वो मेरे चूसने के अंदाज़ से बहुत खुश थे, मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर डाल लिया और मेरी टाँगें चौड़ी करवा ली। बीच में बैठ कर पहले प्यार से मेरी पूरी चूत पर हाथ फेरा, फिर मेरे दाने से थोड़ी छेड़छाड़ करने लगे। मैं बेकाबू हो रही थी, जल्दी ही उन्होंने लगाम लगा ली और अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में डालकर मुझे चोदने लगे।

अह अह और तेज़ करो जेठ जी ! जोर जोर से मारो ! अपनी जवान भाभी की जवान जवानी लूट लो !

यह ले यह यह साली कुतिया कब से तेरा आशिक हूँ ! तू है कि मेरे बाप से चुदवाती है !

क्या करूँ ! वो नहीं छोड़ते मुझे ! तेरे बाप में तेरे जितना दम ही है !

यह ले कमीनी ! अब से मुझे भी दिया करेगी?
हाँ दूंगी ! लो मेरी और मजे से लो !
चल घोड़ी बन ! तेरी फाड़ता हूँ गांड !

घोड़ी बना मेरी गांड मारने लगे !
हाय दुखती है !

तब फिर से चूत में डाल मेरी लेने लगे। पच्चीस मिनट की लम्बी चुदाई के बाद उनका घोड़ा छूट गया और हांफने लगा।

पूरी दोपहर जेठ से चुदवाया और फिर दोनों के साथ में अपनी जवानी लूटने लगी। अगले बार मुझे मासिक-धर्म नहीं हुआ। ससुर जी ने मुझे पेट से कर दिया।
सासू माँ बहुत खुश हैं !

उसके बाद मेरे अपने पड़ोसी के लड़के से संबंध बने !
वो अगली बार बताउंगी। Antarvasna

Sex Stories

मैं गुप्ता बहुत समय से Sex Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ. कई बार सोचा कि अपने जीवन की घटनाओं के बारे में लिखूँ. पर पता नहीं हिम्मत नहीं हो रही थी. आज जब एक बार फिर से मैं अन्तर्वासना की साईट पर गया तो फ़ैसला किया कि एक बार तो अपना अनुभव मैं भी लिखूँ.

मैं आज चालीस साल का हूँ पर सेक्स का खुमार तो अभी भी बहुत है. एक तो वैसे ही मेरा जॉब घूमने वाला है और मैं भारत में घूमता रहता हूँ और हफ्ते में केवल दो तीन दिन के लिए ही घर जा पाता हूँ इसलिए जब घर जाता हूँ तो मेरी बीबी तो थक ही जाती है.

अब मैं अपनी पहली चुदाई के बारे में बताता हूँ.

उस समय मैं 18 साल का था, मेरी दूर की नज़र थोड़ी कमजोर थी. उस समय दिल्ली में एक डॉक्टर आया जो इलाज से चश्मा उतरवा देता था. बस मैं भी उसके पास पहुच गया. वहाँ पर एक हफ्ते तक रहना था. मेरे साथ वाले पलंग पर एक छोटी लड़की भी इलाज़ करवा रही थी. मेरे चश्मे का नंबर तो केवल -1 था पर उसका नंबर उस समय -3.5 था. उसके साथ उसकी मम्मी रहती थी.

यह दूसरी रात की बात है, जब सब सो रहे थे कि अचानक मुझे अपने पैर पर किसी का हाथ महसूस हुआ. मैंने धीरे से आँख खोल कर देखा तो पता चला कि लड़की की माँ जो मेरे पैरों की तरफ मुँह करके सो रही थी वो मेरे पैरों को सहला रही थी.

मैं कुछ नहीं बोला, चुपचाप सोने का बहाना करता रहा. हम दोनों के पलंग में केवल 6′ का फासला था. थोड़ी देर में उसने मेरा पैर पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने सीने पर दबा दबा कर रगड़ने लगी. अब मेरा लंड भी खड़ा हो गया लेकिन मैं फिर भी आराम से लेटा रहा क्योंकि यह मेरा पहला मौका था इसलिए मेरी गांड फट रही थी.

पर थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपने पैर के अंगूठे से उसके मोमों को रगड़ना शुरु कर दिया. इतने में अचानक उसने अपना ब्लाऊज़ ऊपर करके अपने मोमे बाहर निकाल लिए. उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी. इस अचानक हुए परिवर्तन ने मेरी हवा निकाल दी. मुझे डर लग रहा था कि अगर कोई आ गया या कोई उठ गया तो क्या होगा!
पर वो आराम से मेरे पैर से अपने मम्मे मलवा रही थी.

धीरे धीरे मेरे हिम्मत भी बढ़ गई और मैं थोड़ा नीचे को सरक गया और पूरा जोर लगा कर अपने पैरों से उसके स्तन मलने लगा. उसने धीरे से अपना हाथ आगे करके मेरे लंड को पकड़ लिया और जोर से मलने लगी. मेरी तो जैसे जान ही निकल गई. फिर मैंने अपनी साइड बदल कर उसकी तरफ मुँह कर लिया और उसके मोमे जोर जोर से दबाने लगा. उसके मोमे बहुत ही नर्म-मुलायम थे. फिर धीरे से मैंने आगे को झुक कर उसके चुचूक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा. मैंने इतनी जोर से चूसा कि उसकी आह निकल गई. मैंने पहली बार किसी के मोमे चूसे थे इसलिए मैं तो पागल हुआ जा रहा था.

फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं चूसने के साथ साथ उसके मोम्मों को कस कस कर दबाने लगा.
वो बोलने लगी- और दबा जोर जोर से!

दस मिनट तक हम ऐसे ही मजे लेते रहे. वो मेरा लंड दबा रही थी और मैं उसके मोमे चूस रहा था और दबा रहा था. लेकिन जगह कम होने की वजह से हम और कुछ नहीं कर सकते थे. फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी चूत में उंगली डाल दी और जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा और वो मस्ती में मेरे लंड को रगड़ने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों का माल निकल गया.

कुछ देर तो हम दोनों आराम से लेटे रहे, फिर वो बोली- मजा आया?
मैंने कहा- बहुत मजा आया!
तो वो बोली- कभी किसी को चोदा है?
मैंने कहा- नहीं!
तो वो बोली- कभी मेरे घर आना, तो बहुत मजे दूँगी और तुम्हें चोदना भी सिखा दूँगी.

अगले दिन जब मैं, वो उसकी बेटी सब एक साथ बैठे थे, तो उसने सेब निकाले और सब को काट कर खिलाने लगी. बाद में जब सब अपने पलंग पर चले गये तो मैंने उससे कहा- ये क्या छोटे छोटे सेब खिला रही हो!

तो वो बोली- अगर बड़े सेब खाने हैं तो घर आना पड़ेगा! फिर तुम्हें असली मुलायम और बड़े सेब खिलाऊँगी.
मैंने कहा- फिर तो पक्का तुम्हारे घर आना ही पड़ेगा.
उसने अपना पता और फोन नम्बर मुझे दे दिया. फिर कुछ दिनों के बाद हम अस्पताल से अपने अपने घर चले गये.

एक दिन मैंने सोचा कि चलो देखे कि वो कितना सच बोल रही थी और मैंने उसे फोन किया तो उसने मुझे अपने घर पर आने के लिये बोला.
वो बोली- सुबह 11 बजे मेरे पति काम पर चले जाते हैं, फिर घर पर अकेली हूंगी.

अगले दिन मैं ठीक 11 बजे उसके घर पर पहुँच गया. मैंने उसके घर की घन्टी बजाई तो उसने ही दरवाजा खोला. उस समय उसने गाउन पहाना हुआ था. मुझे देखते ही वो बहुत खुश हुई और जोर से बोली- वेलकम.

मेरी तो गान्ड फट रही थी, क्योंकि यह मेरी पहली बार थी. खैर मैं उसके घर के अन्दर चला गया. जैसे ही मैं अन्दर गया उसने दरवाजा बन्द कर दिया.क्योंकि मैं डर रहा था इसलिये पहले मैंने पूरे घर का एक चक्कर लगाया यह कह कर कि पहले तुम्हारा घर तो देख लूँ. फिर जैसे ही मैं उसके बेडरूम में पहुँचा, उसने कहा- देख लिया! घर पर कोई नहीं है.

मैं कुछ नहीं बोला, बस उसकी तरफ देख कर मुस्करा दिया. तो वो हंसने लगी और मुझे पकड़ कर एक जोरदार पप्पी कर दी.

बस फिर क्या था, मैंने भी उसे कस कर पकड़ लिया और चूमने लगा. उसने एक दम से मुझे पलंग पर गिरा दिया, मेरे ऊपर लेट गई और कहने लगी- तुझे बड़े बड़े सेब खाने थे ना? ले आज जी भर कर खा ले!

और उसने अपना गाउन नीचे को करके अपना एक मोमा मेरे मुँह में दे दिया जिसे मैं कस कर चूसने लगा. वो जोर जोर से आह आह करने लगी. उसकी आह सुन कर मेरा लन्ड जोर जोर से फड़कने लगा. मैंने एकदम से पल्टी ली और उसको नीचे दबा लिया और एक हाथ से उसके एक मोमे को कस कर दबाने लगा और दूसरे को चूसते हुए नीचे कपड़ों के ऊपर से ही लन्ड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा.

वो भी एकदम गरम हो गई और उसने मेरे सारे कपड़े एक मिनट में उतार दिये और अपना गाउन भी उतार दिया. जैसे ही उसने अपना गाउन उतारा, मेरी तो हालत ही खराब हो गई क्योंकि मैं पहली बार किसी औरत को एकदम नंगा देख रहा था. मेरा लन्ड फटने को तैयार था. इतने में ही उसने मेरे लन्ड को पकड़ कर दबा दिया. मेरी हालत बिल्कुल पागलों वाली हो रही थी.

उसने मुझे पलंग पर गिरा दिया और एकदम से मेरे लन्ड पर बैठ गई और पूरा का पूरा लन्ड अन्दर ले लिया.
लन्ड अन्दर जाते ही क्या सकून मिला… बता पाना बहुत मुशकिल है! पहली बार मेरा लन्ड किसी चूत में गया था. मैं तो बस स्वर्ग में पहुँच गया था और मेरे साथ साथ उसे भी शायद मजा आया. मैं नहीं जानता था कि ऐसा मजा भी होता है! मैं तो बस उड़ रहा था और यह शायद उसे भी समझ आ रहा था इसलिये वो बस आराम से बैठी थी.

फिर एक मिनट के बाद वो बोली- क्या हुआ रा…जा? यह तो बस शुरुआत है!
अब तक मैं भी अपने होश में वापस आ चुका था. मैंने कहा- चिन्ता मत करो और शुरु हो जाओ.

बस फिर क्या था, उसने ऊपर से धक्के लगाने शुरु कर दिये. मैं तो बस मजे से लेटे लेटे मजे ले रहा था, कि वो एकदम से बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लन्ड पर कस लिया.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली- मैं तो गई!
इस पर मैंने कहा- अभी तो शुरुआत है!
तो वो हंसने लगी और बोली- अब तू धक्के लगा!

फिर क्या था, मैंने पल्टी लगाई और उसको नीचे दबा लिया. अब तक मैं भी समझ चुका था कि चुदाई कैसे होती है.

बस सबसे पहले तो उसके मोटे मोटे मोमों को दबाने लगा फिर एक एक को मुँह में ले कर बारी बारी से चूसने लगा. वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!

मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. वो आ…ह कर उठी और बोली- चू…स खा…ली कर दे! काट! सेब क्या इतने आराम से काटते हैं?

यह सुन कर मुझे भी जोश चढ़ गया और मैं जोर जोर से उसके मोमों को चूसने और काटने लगा. इधर मेरे लन्ड की हालत खराब हो रही थी. तभी वो बोली- अपना लन्ड भी घुसा दे और फाड़ दे मेरी चूत!

बस फिर मैंने एकदम से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा. अभी दस मिनट ही हुए थे, कि वो बोली- तेज और तेज!

मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिये. तेज और तेज कहते कहते उसने मेरा सर अपने मोमों पर जोर से दबा दिया और अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस ली और नीचे से उछल उछल कर धक्के लगाने लगी.
इस जोरदार चुदाई से 5 मिनट में हम दोनों स्खलित हो गये और मैं उसके ऊपर लेट गया. हम दोनों अपनी सांसों को सम्भाल कर कुछ देर बाद उठे तब तक बारह बज चुके थे.

वो बोली- अब मेरी बेटी स्कूल से आने वाली है इसलिए फिर कभी!

हम उठ गये और अपने कपड़े पहनने लगे तो वो बोली- मजा आ गया! मेरा पति तो बस 20-25 धक्कों में ही झड़ जाता है. फिर कब मिलोगे?

मैंने कहा- तुमने मुझे पहला सेक्स अनुभव कराया है! तुम जब बोलोगी, मैं हाजिर हो जाऊँगा.

अब तक हम अपने कपड़े पहन चुके थे और वो बाहर जाने के लिये तैयार थी. ज़ब हम गेट के पास पहुँचे तो उसने फिर से मुझे पकड़ लिया और एक प्यारी सी पप्पी दी और बोली- अगली बार और मजे करेंगे.

उसके बाद हम और भी कई बार मिले और सेक्स किया. अगर वक्त मिला तो बाकी के किस्से भी लिख़ूंगा. Sex Stories

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