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Massage Girl in Kheri: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kheri who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kheri that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kheri massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kheri who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kheri massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kheri massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kheri who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kheri employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kheri helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kheri

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kheri at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

बेटी को धन की सुख देने के लिए मेरी Antarvasna बाप ने मेरी शादी एक ५० बरस के मर्द के साथ कर दी. मेरे पति की मुझसे उनकी दूसरी शादी थी. पहली की मौत हो चुकी थी. उनका एक लड़की थी जिसकी शादी हो चुकी थी. शादी के पहले मुझे उनके और परिवार के बारे मे अधिक जानकारी नही थी.

सुहाग रात मे मैं उनको देखकर हैरान रह गई. वे देखने मे ही बहुत कमज़ोर दिख रहे थे. मेरी उमर उस समय सिर्फ़ १८ बरस थी. वे आते ही दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरी बगल मे बैठ गए. वे मुझे पकड़ कर चूमा लेने लगे. कुछ् इधर उधर के बाते करने के बाद वे मेरी ब्लाउज खोल दिए. मैं ब्रा पहन रखी थी. कुछ देर उपर से ही सहालाने के बाद ब्रा भी खोल दिए. उसके बाद मेरी चुची को चूसने लगे. मुझे अब अच्छा लगने लगा था.

मैने धीरे से अपनी हाथ उनके लंड तरफ़ बढ़ाया. अभी तक कुछ भी नही हुआ था. वे अपने कपड़े खोल दिए और सहालाने के लिए बोलने लगे. मैने भी कुछ देर तक हाथ से सहलाती रही. खड़ा नही होने पर मुख मे खाने के लिए कहने लगे. क़रीब १० मिनट के बाद भी जब नही खड़ा हो पाया तो मैं निराश हो गई. उनके लंड मे नाम मात्र का ही कडापन आया था. अब वे मेरी साडी खोल दिए और अपने मुरझाए हुए लंड से मेरी बुर रगड़ने लगे. मैं तो उनके लंड के तैयार होने का इंतज़ार कर री थी. वे मेरी बुर को अब जीभ से चूसने लगे. अभी भी उनका लंड बहुत नरम था. मैं मन ही मन अपने को कोसती रही और बाप को शराप्ती रही. वे मेरी बुर चूसने मे और मैं उनका लंड चूसने मे मशगुल थी. मुझे अब सह पाना मुश्किल था. जैसा था वैसा ही मैंने उनको चोदने के लिए कहने लगी. वे अपना नरम नरम लंड मेरी गरम गरम बुर मे प्रवेश करने लगे .मगर प्रवेश करने से पहले ही वे गिर गाये.मैं तड़पती रह गई . मैं सोचने लगी कि पहले रात के चलते ऐसे होगया. मैं चुप चाप रह गई. वे भी ऐसे ही कह रहे थे.

दूसरी रात भी मैंने बहुत कोशिश की मगर सब बेकार गया. इसी तरह महीनो बीत गाये. मैं जब भी बिस्तर पर तडपती रही. मेरी बड़ी बहन जीजाजी के साथ तबादला होकर उसी शाहर मे आ गयी. एक दिन मेरी बहन मुझसे मिलने मेरी घर पर आ गई. वे मेरा हाल ख़बर पूछने लगी. मैं चुप हो गई. जब वे ज़िद करने लगी तो मुझे सबकुझ बताना ही पड़ा. वे निराश हो गई और कुछ सोचने लगी. मैंने पूछने लगी तुम कैसी हो. जीजाजी कैसे हैं. वे कह रही थी की तुम्हारे जीजाजी तो बहुत तगडे है. वे मुझे बहुत मज्जे देते हैं. मान ही मान मैं इर्ष्या करने लगी .वे बोलने लगी की मैं कल तक कुछ सोचती हू. कल १२ बजे मेरी घर आजाना. वही पैर बैठ कर बाते करेंगे. मुझे कुछ आशा दिखाई देने लगी.

सुबह होते ही मैं जल्दी जल्दी काम निपटा कर तैयार हो गाई. ठीक १२ बजे मैं दीदी के घर पहौच गई. वे मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. वे मुझे अपने बेड रूम मे ले गई .दीदी अपने रूम मे टीवी चला रही थी. वे बोलने लगी की तुम कुछ देर तक वीडियो देखो मैं काम निपटा कर आती हूँ. एक सीडी वही पर रखा हुआ था जिसपर लिखा हुआ था हम दोनो. मैंने उसी सीडी को लगा कर देखने लगी. सीडी देखते ही मैं घबरा गई और दरवाज़े की तरफ़ देखी. दीदी बाथरूम मे थी. मुझे और अधिक देखने का इच्छा जागृत होगई. इस सीडी मे तो जीजाजी और दीदी का रंगीन खेल भरा हुआ था. जीजाजी का लंड तो देखते ही बनता था. लग रहा था की दीदी बहुत रोएगी .मगर वा तो मज़े ले रही थी. मैं सोचने लगी काश मुझे कोई ऐसे चोदने वाला मिलता.

उसी समय दीदी अंदर आ गई और कहने लगी तुम को यह कैसा लग रहा है. मैंने सीडी बंद करदी. उसी समय जीजाजी भी आगये. मुझे देखते ही वे मुस्कुरा दिए. दीदी कहने लगी अरे साली तरफ़ भी तो देखो. वह बेचारी शादी होने के बाद भी कुँवारी है. दीदी कहने लगी आज तुम्हारे जीजाजी को तुम्हारे लिए ही मैंने बुलाया है . कल तुमसे मिलने के बाद मैने इनको सब कुछ बता दिया था. दीदी कहने लगी अब तुम लोग अपना काम करो मैं बाहर देखती हूँ. जीजाजी कह रहे थे तुम तो बहुत सेक्सी लगती हो. तुम्हारे स्तन तो काफ़ी बड़े है और वे दीदी के जाने के बाद बिना रूम बंद किए ही मेरी स्तन दबाने लगे.वह कह रहे थे की जब तुम्हारे दीदी ही है तो उससे छिपाना क्या. ऐसे तो साली तो आधी घर वाली होती ही हैं. लेकिन मैं तुम्हारे इच्छा के बिपरीत कुछ नही करूँगा.

मैं चुप चाप थी. मैं सोचने लगी की कही वे चले ना जाए. इससे अच्छा मौक़ा अब नही आने वाला मैं मुसकुराने लगी.जीजाजी समझ गए की मैं सहमत हू. वे अब मेरा ब्लोउज और ब्रा खोल दिए . मेरे चुचि को मसलने लगे . मैं भी अब सहयोग करने लगी थी. जीजाजी के लॅंड का उभार अब पैंट पैर दिखाई देने लगा था. मैंने उनका पैंट पैर हाथ डाला तो वे पैंट खोल दिए. अब उनका लॅंड बाहर निकल चुका था. मैं अपने हाथ से उनके लॅंड को सहालाने लगी. अपने पति का लॅंड से जीजाजी का लॅंड को तुलना कर रही थी. मन ही मन मैं सोचने लगी की मेरी दीदी कितनी लॅकी है की उसे ऐसे लॅंड वाला पति मिला है. कुच्छ देर तक मैं उनके लॅंड को देखती रही. इतने मे जीजा जी कहने लगे कैसा है मेरा हथियार. तुम्हारे पति का कैसा हैं. मैं कहने लगी, जीजाजी उनका तो खडा ही नही होता हैं. मैं महीनो से तरप रही हू. आपका लॅंड तो काफ़ी मोटा और बड़ा है. दीदी को तो बहुत दुखता होगा. उसी समय दीदी आगई. बोलने लगी अरे केवल देखते ही रहोगी.

मैं बोलने लगी दीदी इनका तो बहुत मोटा है, मैं नही सह पाऊँगी. दीदी कहने लगी हा, मोटा तो है लेकिन सहना ही पड़ेगा. पहली बार मुझे भी बहुत दर्द हुआ था. लेकिन अब तो मजा आता है. जीजाजी को दीदी कहने लग
बेचारी तुम्हारा घोड़ लॅंड देख कर डर गई है. मेरे बहन को मत रूलाना. बेचारी अभी तक तो कुँवारी जैसे ही तो है.इतन कह कर वा फिर चली गई. जीजाजी अब मेरी साड़ी और पेटी कोट भी खोल दिए .वे मेरे बुर को चटने लगे. मुझे बेड पैर सूता दिए और अपना लॅंड मेरे बुर मे डाल कर चूसने के लिए कहने लगे. वे मेर उपर चढ़े हुये थे . अपनी जीभ से मेरी टिट चाट रहे थे. मुझे काफ़ी मजा आरहा था. मैंने भी दोनो हाथो से उनका सिर पाकर कर दबाने लगा. ज़ोर ज़ोर से लॅंड चूसने के लिए कह रहे थे. उनका लॅंड का स्वाद लेने मे मुझे भी मजा आरहा था.

इतने ही मे अपना पूरा लॅंड मुख मे अंदर तक धकेलने लगे. मुझे तो पहली बार इतना तगड़ा लॅंड मिला था. मैं मज़े से उनका लॅंड चुस रही थी और जीजाजी मेरे बुर चुस रहे थे. उसी समय मुख मे गरम गरम और नमकीन टेस्ट आने लगा. वे और ज़ोर से लॅंड अंदर किए. मुझे तो मजे का स्वाद आ रहा था. कुछ देर तक और चूसती रही. वे बाहर लिए और बाथरूम मे चले गए. बाथ रूम से आने के बाद वे फिर मुझसे अपना लॅंड सहलवाने लगे. क़रीब ५ मिनट के बाद वे फिर तैयार होगए. जीजा जी का लॅंड फिर से पहले जैसे ही कठोर और मोटा होचुका था. इस बार वे मुझे पट सूता दिए. मेरे गाड़ मे थोडा थूक लगाए और एक अंगुली घुसा कर बाहर भीतर करने लगे. मैंने कहने लगी जीजाजी इसमे भी करोगे क्या. इसमे तो नही सहा जायगा. आज बुर मे ही कर लो. फिर कभी इसमे. जीजाजी नही माने और कहने लगे गाड़ लिए बिना मैं तुम्हारा बुर नही लूंगा. अगर मेरा शर्त मंज़ूर है तो बोलो नही तो छोड़ देता हूँ. मुझे तो आज चुदाई का भरपूर मजा लेना था. मैं चुप रही. मैं मुसकूरा दी और कहने लगी आप बहुत बदमश हो, आज मैं सब कुछ सहने को तैयार हूँ. जीजाजी Antarvasna

Sex Stories

ट्रेन के डिब्बे में माहॉल शांत होता जा रहा था Sex Stories क्योंकि रात काफ़ी हो चली थी और अधिकतर लोग सोने लगे था या सोने की तैयारी कर रहे थे। मैं भी सोने की कोशिश करने लगा पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही उधर लॅंड कुछ देर पहले के सीन को याद कर के टनटनाता जा रहा था। फिर धीरे धीरे मेरी भी पलकें भारी होने लगी। जैसे ही नींद का झोंका आया तभी लगा कि किसी ने मुझे उठा दिया है। आँखे खोली तो आंटी सामने खड़ी थी और फिर वो बाथरूम की तरफ चली गयी। मैं उसे देखता ही रहा, समझ मैं नही आ रहा था कि क्या करना चाहिए। तभी उसने पलट कर देखा और मुझे पीछे आने का इशारा किया। मैं उसके पीछे पीछे टाय्लेट में जा घुसा। शुक्र था किसी ने देखा नहीं। उसने मेरे अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और झट से मेरा लंड पकड़ लिया। लंड तो पहले से टनटनाया हुआ था। उसने मेरी पैंट खोल कर नीचे खिसका दिया और गीला अंडरवेयर भी नीचे कर दिया। फिर उसे कसके पकड़ के उपर नीचे करने लगी पर मुझे कभी कभी दर्द भी होता क्योंकि लौड्‍ा तो खड़ा होने के बाद बिल्कुल पेट से जा लगता था। और किसी ने उसकी इस तरह मालिश नहीं की थी। आंटी ने अब अपना चेहरा मेरे लंड पर झुकाया तो मैं बोला कि ये गंदा हो रहा है मैने अभी इससे नही धोया है।

वो कहने लगी –अरे इसको गंदा नहीं कहते। इसमें ही तो सारा मज़ा है। कितनी प्यारी गंध आ रही है इसमें से। ऐसा कहते हुए उसने मेरे लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं बड़ी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ने लगा। मैने कहा- आंटी रुक जाओ नहीं तो मेरा माल फिर से निकल जाएगा। आंटी ने लोड्‍ा चूसने की रफ़्तार तो कम कर दी पर चूसना जारी रखा। वो इस तरह चूस रही थी कि मुझे लगा कि मैं ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाऊंगा। जब मेरा स्खलन नज़दीक आ गया तो मैंने चाहा कि उसके मुँह से लंड निकाल लूं पर उसने दाँत से हल्के से काट कर इशारा किया कि ऐसे ही रहो। इससे पहले कि मैं कहता कि निकलने वाला है उसे पहले ही लंड ने रस की बौछार करनी शुरू कर दी।

आंटी तो एक नम्बर की लंड चूसक्कर थी। एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी। मैं लंबी लंबी साँसें ले रहा था और उसने अपना मुँह खोल कर मेरा रस मुझे दिखाया फिर उसने गले के नीचे उतार लिया। कैसा टेस्ट था- मैंने कहा। कहने लगी बहुत अच्छा तुम भी चाखोगे क्या। अपना नहीं पर आपका। मैंने कह दिया कि जो होगा देख जाएगा पर अगर इसने चूत दिखा दी तो जिंदगी की पहली चूत के दर्शन हो जाएँगे। फिर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा कि यहाँ जगह नहीं है और वक़्त भी। फिर कभी देखेंगे, मन वहाँ से जाने का बिल्कुल ही नहीं हो रहा था। लंड ने इस बार खड़ा होने में थोड़ी देर लगाई पर फिर पहले की तरह टनटना गया।

मेरे उछलते हुए लंड को देख कर आंटी ने कहा कि उसे कम उमर के लड़के इसीलये तो ज़्यादा पसंद हैं क्योंकि कई बार झड़ने के बाद भी उनका लंड ज़रा सा हाथ लगते ही खड़ा हो जाता है। फिर वो झुक कर खड़ी हो गयी और कहा कि पीछे से डालो। मैंने पीछे से लंड सटा कर धक्का मारा तो उसके गांड के छेद से रगड़ ख़ाता हुआ चूत को रगड़ता हुआ निकल गया। वो समझ गयी कि लाड़ला बहुत ही अनाड़ी है।

उसने हाथ नीचे से लगा कर अपने चूत के छेद पर भिड़ाया और कहने वाली थी कि अब डालो पर सुनने की फुरसत किसे थी।ये डर था कि कहीं चूत में घुसने से पहले ही मामला खराब न हो जाए। लेकिन जैसे ही आंटी ने अपने छेद पर रखा । लौड्‍ा सरसराता हुआ चूत को चीरता हुआ जड़ तक समा गया। इतना अनुभवी होने के बावजूद उसके मुँह से कराह निकल गयी। मार डाला। धीरे डाल।। फाड़ेगा क्या।

मैं अपनी धुन में धक्के पर धक्के लगाया जा रहा था। अब मेरे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था कि मैं इतनी उमर की औरत को इतनी अच्छी तरह चुदाई कर रहा हूं। मैं और कस कस कर धक्के मार रहा था। तभी आंटी का शरीर अकड़ने लगा। पूछा कि क्या हुआ आंटी तो कहने लगी गयी … गयी … आज तो मधु … समझ में नहीं आ रहा था कि अब ये मधु कौन है और कहाँ गयी।

मेरा ध्यान चोदने पर नहीं था पर मैं कस कस कर धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था। तभी आंटी के शरीर ने झटका लिया और वो शांत पड़ गयी। चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया था जिसे पूरी चूत बुरी तरह फिसल रही थी। तभी मैंने ज़ोर ज़ोर से झटके मार मार के अपना ढेर सारा रस भी उसकी चूत में डाल दिया। हम दोनो हाँफ रहे थे। जैसे तैसे साँसों पर काबू पाया और फिर मुँह धोते हुए कहने लगी कि अब तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है। मेरी भी टाँगों में सिहरन हो रही थी। फिर ये कहती हुई कि थोड़ी देर बाद आना वो दरवाज़ा खोल कर निकल गयी।

२ मिनिट बाद मैं निकला। आस पास सब सोए पड़े थे । शुक्र मनाता हुआ अपनी सीट पर जा कर लेट गया।

आगे की कहानी अगले पार्ट में लिखूंगा । Sex Stories

Antarvasna Sex Stories

नई जवानी थी … कुछ Antarvasna Sex Stories ही देर में वो फिर से तरोताज़ा था।

मेरी चूत को अब उसका लंबा और मोटा लौड़ा चाहिये था। उसके लिये मुझे अधिक इन्तज़ार नहीं करना पड़ा।

मैंने उसे अपनी चूंचियाँ दर्शा कर प्यार से फिर उकसाया। उसका नंगा बदन मुझे बार बार चुभ रहा था … मेरी चूत उसका लण्ड देख कर बार बार फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पर मन की बात कैसे कह दूँ … स्त्री सुलभ लज्जा के कारण बस मैं उसके लण्ड को बड़ी तरसती हुई नजरों से देख रही थी।

“भाभी आपने तो कपड़े पहन लिये … ये क्या … मुझे देखो … मेरा तो लण्ड … ” मैंने शरम के मारे उसके मुख पर अंगुली रख दी, पर वो तो मेरी अंगुली ही चूसने लगा।

“आह्ह्ह सुनील, ऐसा मत बोल … तूने तो मेरी पिछाड़ी को आज मस्त कर दिया … अब और क्या मुझे पूरी नंगी करेगा … “

“देखो अगर नहीं हुई तो ,मैं जबरदस्ती नंगी कर दूंगा … तुम्हें एक बार तो दबा के चोदना तो है ही !” मेरा मन एक बार फिर से उसके हाथों नंगा होने को और चुदने को मचल उठा।

“देखो बात तो बस छूने तक ही थी ना … ये और कुछ करोगे तो मैं मारूंगी … हांऽऽऽऽऽ !”

मुझे पता था कि अब वो मुझ पर लपकेगा। ऐसा ही हुआ … उसने मुझे हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लिया और एक झटके में मेरा टॉप उतार दिया। मेरा पतला और झीना सा पजामा उतारने में भी उसे कोई परेशानी नहीं हुई, क्योंकि मैं स्वयं भी तो चुदना चाह रही थी … वो भी पूरी नंगी हो कर, मस्ती से शरीर को उसके हवाले करके … अब हम दोनों कुछ ही पलों में पूरे नंगे थे। मेरा दिल फिर से लण्ड के चूत में घुसने के अहसास से धड़क उठा … उसने मुझे अपनी बाहों में कस कर ऊपर उठा लिया, और अब … … मैंने भी शरम छोड़ दी … अपनी दोनों टांगे उसकी कमर से लपेट ली। उसका लण्ड मेरी गाण्ड पर फिर से छूने लगा। उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया। मैंने उसे झटके से पलट कर नीचे कर दिया और उस चढ़ बैठी और अपनी चूंचियाँ उसके मुख में ठूंस दी।

“मेरे सुनील … मेरा दूध पी ले … जरा जोर से चूस कर पीना … !” मैंने उसके बालों को जोर से पकड़ लिया और चूंचियां उसके मुँह में दबाने लगी। उसका मुख खुल गया और मेरे कठोर निपलों को वो चूसने लगा।

मेरा हाल बुरा होता जा रहा था। चूत बेहाल हो चुकी थी और लण्ड लेने को लपलपा रही थी। पानी की बूंदें चूत से रिसने लग गई थी। लण्ड को निगलने के लिये चूत बिलकुल तैयार थी।

उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ भींच लिये। मेरी चूत के आस पास उसका लण्ड तड़पने लगा। मैं थोड़ा सा नीचे सरक गई … और लण्ड को चूत के द्वार पर अड़ा लिया। अब देर किस बात की बात की … उसके लण्ड ने एक ऊपर की ओर उछाल मारी और मेरी चूत ने उसके लण्ड को लीलते हुये, नीचे लण्ड पर दबा दिया … फ़च की आवाज के साथ भीतर तक रास्ता बनाता हुआ जड़ तक बैठ गया।

मैंने अपनी चूंचियाँ उसके मुख से निकाली और अपने होंठ से उसके होंठ दबा लिए।

“आह्ह्ह्ह् … ठोक दिया ना … ईह्ह्ह्ह्ह … साला अन्दर मुझे गुदगुदा रहा है !” मुझे चूत में उसके लण्ड का मीठा मीठा अहसास होने लगा था।

“मुझे भी भाभी … आपका जिस्म कितना मस्त है चोदने लायक …! ” उसके मुँह से चोदना शब्द बड़ा प्यारा लगा। मुझे लगा कि सुनील मुझसे इसी भाषा में मुझसे बोले …

पति के सामने ये सब नहीं कह सकते थे ना। सो मैंने भी जानकर ऐसी भाषा प्रयोग की।

“तेरा लण्ड भी सॉलिड है … मेरी गाण्ड भी कितनी प्यारी मारी थी … सुनील !”

मैं उसके लण्ड पर अपनी चूत मारने लगी। लण्ड बहुत ही प्यारी रग़ड़ मार रहा था। मुझे चूत घर्षण करते चुदाने में आनन्द आ रहा था। कुछ देर ऐसे ही चुदने के बाद मुझे जाने क्या लगा कि मैं उस के ऊपर सीधी बैठ गई और धच से उसके लण्ड पर चूत मारी और खुद ही चीख पड़ी … भूल गई थी कि उसका लण्ड मेरे पति से पूरे एक इन्च अधिक लंबा था। वो तो मेरी बच्चेदानी से जोर से टकरा गया था। पर दर्द के साथ बहुत ही जोर का आनन्द भी आया।

” सुनील … उईईईईई चुद गई, तेरे लण्ड का तो बहुत मजा आ रहा है … तू भी नीचे से मार ना … चोद दे राजा … मेरी चूत को फ़ाड़ दे … !”

“भाभी … मेरा लण्ड भी तो चुद गया … आह्ह आपकी प्यारी चूत … मादरचोद इस चूत को चोद डालूँ … “

“तेरी मां की चूत … भेन चोद … तू मुझे आज चोद चोद कर निहाल कर दे … !” मैं गालियां बोल बोल कर अपनी मन की भड़ास निकाल रही थी। मेरे दिल को ऐसा करने से बहुत सुकून आ रहा था। मैंने कुछ रुक कर फिर से ऊपर से चूत को फिर से जोर से मारी … एक नया और सुहाना मजा … लम्बे लण्ड का … फिर तो ऊपर से धचा धच लण्ड के ऊपर अपने आप को पटकते चली गई ।

” आप गालियाँ देती हुई बहुत प्यारी लग रही हैं … आजा अब मैं तेरी मां चोद देता हूँ … भोसड़ी की … रण्डी … कुतिया … फ़ुड़वा दे अपनी भोसड़ी को … दे चूत … चुदवा ले मस्त हो कर … !”

“मेरे प्यारे हरामी … मादरचोद … मेरी भोसड़ी चोद दे … बस अब मुझे नीचे दबा ले और साली चूत की चटनी बना दे …! ” कहते हुये हम दोनों ने पलटी मार ली और वो मेरे ऊपर सवार हो गया। उसकी कमर, मैंने सोचा भी नहीं था, ऐसी जोर जोर से चलने लगी, कि मुझे आनन्द आ गया। मैं तबियत से चुदने लगी।

“हाय मेरे चन्दा, चोद दे मुझे … राजा … मेरी फ़ुद्दी को मसल डाल … तेरा लौड़ा … तेरी मां की … चूत फ़ाड़ दे मेरी … !” मैं अनाप शनाप गालियाँ देकर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी।

“आह, मेरी रानी … तेरी चूत का चोद्दा मारूँ … भोसड़ी की मदरचोद … चुदा ले जी भर के … मेरी कुतिया … छिनाल … साली रण्डी … आह्ह्ह्हऽऽ !” उसकी प्यारी सी मीठी गालियाँ जैसे मेरे कानो में शहद घोल रही थी, मेरे शरीर में तरावट आने लगी, सारा जिस्म मीठे जहर से भर गया। लग रहा था मैं कभी ना झड़ूँ … बस जिन्दगी भर चुदाती ही रहूँ … ये मजा पति की चुदाई से अलग था … कुछ जवानी का अल्हड़पन … थोड़ा सा जंगलीपना … मीठी मीठी गालियोँ की मीठी चुभन … मैंने भी आज जी खोल कर सारी गन्दी से गन्दी गालियाँ मन से निकाली … और एक जबरदस्त सुकुन महसूस किया … ।

पर ये आनन्द कब तक बरकरार रहता …! मेरी चूत और जिस्म जिस तरह से रगड़े और मसले जा रहे थे … उसका असर चूत पर ही तो हो रहा था। मेरा जिस्म ऐंठने लगा और आनन्द को मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकी … मेरी चूत जोर से झड़ने लगी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी … तभी सुनील ने मेरे ऊपर अपने आपको बिछा लिया और लण्ड को चूत में भीतर तक दबा लिया। उसके कड़कते लण्ड ने मेरी बच्चादानी को रगड़ मारा … और चूत में उसका वीर्य छूट पड़ा। वो अपने लण्ड को बार बार वीर्य निकालने के लिये दबाने लगा। वीर्य से मेरी चूत लबालब भर चुकी थी। वो निढाल हो कर एक तरफ़ लुढ़क पड़ा। मैंने भी मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली थी। सारा सुख और आनन्द अपने में समेट लेना चाहती थी।

रात के बारह बजने को थे … मैंने अपनी एक टांग सुनील की कमर में डाल दी और जाने कब मेरी आंख लग गई। हम दोनों नंगे ही लिपटे हुये सो गये।

मेरी आंख सुबह ही खुली। उजाला हो चुका था। सुनील सो रहा था। मैंने उसके लण्ड को और उसके आण्ड को सहलाना शुरू कर दिया। वह नींद में सीधा लेट गया।

उसके लण्ड में तनाव आने लगा था। उसकी नींद भी उचटती जा रही थी। अब उसका लण्ड पूरा खड़ा हो गया था … मैं धीरे से उठ कर दोनों पांव इधर उधर करके उसके लण्ड के पास सरक आई। मैंने अपनी चूत के दोनों पटो को खोला और उसके लाल सुपाड़े पर रख दिया। मेरी गुलाबी चूत और उसका गुलाबी सुपाड़ा, लगता था कि दोनों एक दूजे के लिये ही बने हैं। मैंने सुपाड़ा अपनी चूत में डाल कर थोड़ा सा दबाव डाल कर उसे भीतर समा लिया। फिर सुनील पर झुकते हुये उस पर लेट गई। चूत को और दबा कर लण्ड को भीतर तक समेट लिया। सुनील जाग उठा था।

उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे चिपका लिया। मैं उसे चूमने लगी। उसकी कमर अब हौले हौले नीचे से चलने लगी और अपनी कमर भी ऊपर से चूतड़ दबा दबा कर मैं चलाने लगी। मैं फिर से चुदने लगी … एक दूसरे में समाये हुये फिर से आनन्द में भर उठे … मैंने झुक कर उसकी गर्दन के पास अपना चेहरा छुपा लिया और अपनी जुल्फ़ों को उसके चेहरे पर बिछा दिया, और आंखे बंद करके चुदाई का मधुर आनन्द लेने लगी … । हम दोनों नंगे जिस्म की रगड़ का मद भरा अनोखा आनन्द लेने लगे …

पाठको से भी मेरा निवेदन है कि उन्हें भी जब चुदाई का ऐसा सुनहरा मद भरा मौका मिले तो उसका लुफ़्त नजाकत से पूरा पूरा उठाईये … क्योंकि ऐसे सुनहरे मौके जिन्दगी में कम ही आते हैं … शादी-शुदा को दूसरों से चुदाने का कोई हक नहीं है ऐस ना सोचें ! … यह तो बस दो पल का मधुर आनन्द है … किसी को पता भी नहीं चल पायेगा … ये छोटे छोटे पल ही आपकी जिन्दगी की खुशी हैं … ये आपको भविष्य में भी सोच सोच कर गुदगुदाती रहेंगी … Antarvasna Sex Stories

प्रेषक : राजेश Hindi Sex Stories

मित्रो, अंतर्वासना के लिए यह मेरी पहली Hindi Sex Stories कहानी है। यूं तो मैं अंतर्वासना की कहानियों को पिछले दो सालों से पढ़ रहा हूं। बहुत समय तक सोचने के बाद आज मैं अपनी एक सच्‍ची कहानी आप सब के साथ शेयर करना चाहता हूं। यद्यपि इस वाकये को दस बरस का लंबा समय बीत चुका है। मगर, गर्मी की उस रात का एक-एक अहसास आज भी मेरे जेहन में दर्ज है।

बात है 1999 की है, तब बारिश का मौसम चल रहा था।। तब मैं 22-23 बरस का नवजवान था। 18 साल की एक प्‍यारी से लड़की से मेरा प्रेम संबंध चल रहा था।

सही मायनों में पहले मुझे उससे प्‍यार नहीं था, मैं तो बस उसे चोदना चाहता था। योजना बनाकर मैंने उसे लाईन मारना शुरू कर दिया। उसके कालेज आने जाने के वक्‍त मैं रास्‍ते में खड़े होकर उसका इंतजार करता था। वह भी मुझमें शुरू से बराबर रूचि ले रही थी।

बात आगे बढ़ी और हम दोनों के बीच प्‍यार की शुरूआत हो गई। धीरे-धीरे ठंठ का मौसम आने तक हमारे संबंधों में इतनी प्रगाढ़ता आ चुकी थी, कि एक दूसरे पर गहरा विश्‍वास कायम हो गया था। एकांत में मिलने पर मैं उसके स्तन दबाता और निप्‍पल चूसता !

वह काफी सेक्‍सी थी। किस करते समय जब मैं गर्म व गहरी सांस छोड़ता, तो वह तड़फ जाती थी। हम 15-15 मिनट के लंबे समय तक प्रगाढ़ चुम्बन करते रहते थे। यकीन मानिये आज मेरी शादी हो गई, मगर उसके अधरों से निकलने वाले उस अमृत का स्‍वाद कहीं और नहीं मिल पाया।

और इस तरह गर्मी का दिन आ गया। उसकी परीक्षाएं शुरू हो गई। वह अपने कमरे में अकेली सोती थी। मैं देर रात उसके कमरे की खिडकी में कंकड मारकर उसे अपने आने का इशारा करता था। वह छत पर आ जाती थी। मै भी बाहर से ही छत पर चढ़ जाता था। फिर हम दोनों एक-दूसरे में घंटों तक खोए रहते थे।

एक दिन मैंने उसे कहा- चल तेरे कमरे में चलते है।

उसने हां कहा और उसके कमरे में हम पहुंच गए। उसका बिस्‍तर कम चौड़ाई का और छोटा सा था। सामने कूलर चल रहा था। हमने कई घंटों तक एक-दूसरे से प्‍यार किया। पूरी तरह निर्वस्‍त्र हो जाने के बावजूद उसने मेरा लंड अपने अंदर नहीं घुसाने दिया। मैने फोर्स किया, मगर उसने मेरे उस वादे की दुहाई देकर मुझे शांत करा दिया, जिसमें मैंने उससे वादा किया था, कि उसकी मर्जी के बगैर में उससे सेक्‍स संबंध स्‍थापित नहीं करूंगा। यद्यपि उस रात मैं दो बार झड़ा भी, और शायद वह भी झड़ी मगर अंदर घुसाने नहीं दिया। मैने भी जिद नहीं की।

मित्रो, 2003 तक हमारे बीच प्‍यार चलता रहा। फिर उसकी शादी हो गई और कहानी का समापन हो गया। मगर बाद में कभी उस तरह का मौका मुझे नहीं मिल सका। वे रातें अक्‍सर मुझे याद आती है। मैं चाहता तो उसे चोद भी सकता था। किंतु मैने ऐसा नहीं किया। अब कभी कभी मुझे रंज होता है कि काश उस रात मैंने उसका काम तमाम कर दिया होता, तो वह मुझे छोड़ कर दूसरे से शादी नहीं रचाती। किंतु मेरे मन में एक संतोष भी है कि मैंने उससे सच्‍चा प्‍यार किया है। वह आज भी जब मुझे याद करती होगी तो इज्‍जत व सम्‍मान के साथ करती होगी। क्‍योंकि मैंने उसका नाजायत फायदा नहीं उठाया था।

दोस्‍तो, अब मैं आप सब से पूछना चाहता हूं कि मेरा वह फैसला सही था अथवा नहीं। प्‍लीज मुझे मेल करें Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

प्रीती अब बहुत खुश थी कि उसने Hindi Sex Stories महेश से अपना बदला ले लिया था। एक दिन उसने मुझसे कहा, “सुनील! मुझे अब एम-डी से बदला लेना है, लेकिन कोई उपाय नहीं दिख रहा।”

“तुम रजनी को सीढ़ी क्यों नहीं बनाती?” मैंने सलाह देते हुए कहा, “एम-डी उसे अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है।”

“हाँ!!! मैं भी यही सोच रही थी”, प्रीती ने जवाब दिया।

“लेकिन एक चीज़ ध्यान में रखना, वो पढ़ी लिखी और समझदार लड़की है, मीना और मेरी बहनों की तरह बेवकूफ़ नहीं।”

“क्या तुम उसे प्यार करते हो?” उसने पूछा।

“बिल्कुल भी नहीं! पर हाँ मुझे उससे हमदर्दी जरूर है, वो मेरी पहली कुँवारी चूत थी।” मैंने जवाब दिया।

“ठीक है… मैं चाँस लेती हूँ! लगता है मैं उसे समझाने में और मनाने में कामयाब हो जाऊँगी”, प्रीती ने कहा।

प्रीती के बुलाने पर एक दिन शाम को रजनी हमारे घर आयी। मैंने देखा कि वो बातें करने में झिझक रही थी ।

“रजनी! इसके पहले कि मैं तुम्हें बताऊँ कि मैंने तुम्हें यहाँ क्यों बुलाया है और मैं तुमसे क्या चाहती हूँ, ये जान लो कि मुझे तुम्हारे और सुनील के बारे में सब मालूम है और मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा।”

रजनी कुछ बोली नहीं और चुप रही।

“लेकिन एक बात मुझे पहले बताओ, क्या सुनील के बाद तुमने किसी से चुदवाया है?” प्रीती ने पूछा।

रजनी ने झिझकते हुए मेरी ओर देखा और मैंने गर्दन हिला कर उसे सहमती दे दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“प्रीती, अगर तुम इतने खुले रूप में पूछ रही हो तो मैं बताती हूँ कि मैंने अपने कॉलेज के दो लड़कों से चुदवाया है पर सुनील जैसा कोई नहीं था।”

“मैं जानती हूँ! सुनील से चुदवाने में जो मज़ा आता है वो किसी से भी नहीं आता”, प्रीती ने जवाब दिया।

“अच्छा… अब मुझे बताओ तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया है?” रजनी ने पूछा।

प्रीती भी सीधे विषय पर आते हुए बोली, “रजनी! मैं चाहती हूँ कि तुम एम-डी से चुदवा लो?”

“तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया है? तुम चाहती हो कि मैं अपने अंकल के साथ सोऊँ???” रजनी अपनी जगह से उठते हुए बोली।

“रजनी रुको! एक बार हमारी बात तो सुन लो”, मैंने उसे रोकना चाहा।

“ठीक है सुनील! तुम कहते हो तो मैं रुक जाती हूँ। अब बताओ, तुम क्या कहना चाहते हो?” रजनी अपनी जगह पर बैठते हुए बोली। रजनी के बैठते ही प्रीती ने पूरी दास्तान रजनी को सुना दी और ये भी बता दिया कि किस तरह महेश और एम-डी ने ऑफिस की सभी लड़कियों और औरतों को चोदा है।

सारी बात सुनने के बाद रजनी बोली, “मैं इसमें कुछ गलत नहीं मानती, वो पैसे वाले हैं और उन्होंने इंसान की कमजोरियों का फ़ायदा उठाया है, किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की। गल्ती उनकी है जो राज़ी हो गये।”

“तुम नहीं जानती हो रजनी! एम-डी ने कैसे कुँवारी चूत को चोदने के लिये कई लोगों को फंसाया और धमकाया है!” प्रीती बोली।

“मैं नहीं मानती कि अपनी हवस मिटाने के लिये मेरे अंकल किसी भी हद तक गिर सकते हैं।”

“ठीक है! मैं तुम्हें विस्तार में बताती हूँ। तुम असलम को तो जानती होगी, हमारे ऑफिस में पियन का काम करता था।”

“वही असलम ना जिसे चोरी के इल्ज़ाम में पकड़ा गया था और फिर छूट गया था?”

“हाँ वही! लेकिन तुम्हें हकीकत नहीं मालूम?” प्रीती ने कहा।

“मैं और माँ जानते थे कि असलम निर्दोष है, इसलिये हमने अंकल से रिक्वेस्ट भी की थी कि उसे छोड़ दें।”

प्रीती रजनी की बात सुन कर हंसने लगी। “मैं तुम्हें हकीकत बताती हूँ”, प्रीती ने कहा, “एक दिन तुम्हारे अंकल ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया और कहा कि प्रीती, मैं असलम पर से सारे इल्ज़ाम वापस ले लूँगा अगर उसकी बेटी आयेशा चुदवाने को तैयार हो जाये। मुझे बुरा लगा और मैंने एम-डी को मना करना चाहा, तो उन्होंने गुस्से में कहा, तुम्हें ये काम करना है तो करो नहीं तो मैं किसी और से करवा लूँगा। उसकी चूत किसी ना किसी दिन तो फटनी ही है तो मैं क्यों ना करूँ। एम-डी मुझे इन सब काम के लिये पैसे दिया करता था तो मैंने सोचा क्यों ना मैं भी पैसा कमा लूँ”, प्रीती आगे बोली।

“मैं दूसरे दिन आयेशा को समझा बुझा कर और अच्छे कपड़ों और मेक-अप में तैयार करके तुम्हारे अंकल के सूईट, होटल शेराटन में लेकर पहुँच गयी। तुम्हारे अंकल और महेश ने बुरी तरह उसकी चूत को चोदा और उसकी गाँड भी फाड़ दी और वो बेचारी अपने बाप को बचाने के लिये हर ज़ुल्म सहती गयी।”

“प्लीज़ प्रीती! मुझे और नहीं सुनना है”, रजनी ने अपने हाथ अपने कान पर रखते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“नहीं! तुम्हें पूरी बात सुननी होगी। तुम्हें नहीं मालूम महेश और एम-डी ने कितनी लड़कियों को अपने जाल में फंसाया है?”

“नहीं!!! मुझे और नहीं सुनना और मैं तुम पर अब विश्वास करती हूँ, मैं तुम्हारा साथ देने को तैयार हूँ, मुझे बताओ मुझे क्या करना है?” रजनी बोली।

“ये मैंने पहले ही सोच रखा है, मैं एम-डी से कहुँगी कि तुम एक गरीब घर की गाँव की रहने वाली लड़की हो और तुम्हें अपनी विधवा माँ के इलाज के लिये पैसे चाहिये, तुम पैसों की तंगी की वजह से अपनी चूत तो दे चुकी हो लेकिन तुम्हारी गाँड अभी भी कुँवारी है।”

“वो तो अब भी है!” रजनी ने हँसते हुए कहा।

“मैं जानती हूँ, इसलिये जानती हूँ कि एम-डी तैयार हो जायेगा। मैं ये भी शर्त रखुँगी कि तुम अंधेरे में चुदवाना चाहती हो”, प्रीती ने कहा।

“ये सब तो ठीक हो जायेगा पर क्या सुनील ने आयेशा को चोदा था?”

“हकीकत में हाँ! लेकिन ये अलग कहानी है”, प्रीती ने जवाब दिया।

“बताओ मुझे, मैं जानना चाहती हूँ”, रजनी बोली।

“करीब पंद्रह दिन के बाद आयेशा मेरे घर आयी और बोली कि वो प्रेगनेंट है। मैंने उससे कहा कि अगर वो इस मुश्किल से बचना चाहती है तो उसे सुनील से चुदवाने पड़ेगा। वो मान गयी क्योंकि उसके पास दूसरा चारा नहीं था”, प्रीती ने कहा, “सुनील ने उस दिन उसे बड़े ही प्यार से चार बार चोदा। पहले तो वो उसका लौड़ा देख कर डर ही गयी थी, दीदी! इनका लंड तो कितना मोटा और लंबा है….. मैं तो मर ही जाऊँगी? मैं भी तो इनसे रोज़ चुदवाती हूँ और अभी तक जिंदा हूँ मैंने जवाब दिया। सुनील ने उसे बहुत ही नाजुक्ता और प्यार से चोदा, ऐसा चोदा कि वो इसके लंड कि दिवानी हो गयी। दूसरे दिन मैंने उसे डॉक्टर के पास ले जा कर उसका अबार्शन करा दिया। वो सुनील के लंड कि इतनी दिवानी हो गयी कि बराबर हमारे घर सुनील से चुदवाने के लिये आने लगी। इसी बीच सुनील ने उसकी गाँड का भी उदघाटन कर दिया।”

“क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि सुनील दूसरी लड़कियों को चोदता है?” रजनी ने पूछा।

“नहीं, जब तक वो मुझे बताकर करता है, मैं जानती हूँ वो मुझे भी चुदाई का मज़ा दे सकता है और दूसरों को भी और फिर मैं भी तो दूसरे मर्दों से चुदवाती हूँ”, प्रीती बोली।

“फिर तो मैं भी अपनी गाँड का उदघाटन सुनील से ही करवाना चाहुँगी!” रजनी उत्सुक्ता से बोली।

“नहीं रजनी! तुम्हारी गाँड तुम्हारे अंकल के लिये ही रहने दो… हाँ तुम सुनील से अपनी चूत चुदवा सकती हो! एक शर्त पर कि, मेरे सामने चुदवाओ!” प्रीती ने जवाब दिया।

“ये तो बहुत ही अच्छी बात है, हाँ अगर तुम हमारा साथ दो तो और मज़ा आयेगा”, रजनी ने कहा।

थोड़ी ही देर में मैं दो सुंदर औरतों के साथ नंगा बिस्तर पर था जिनकी चूत का उदघाटन मैंने ही किया था।

जैसे ही मेरा लंड रजनी की चूत में दाखिल हुआ, वो कामुक्ता भरी आवाज़ में बोल उठी, “ओहहहहहह सुनील तुम्हारा लंड कितना अच्छा है।” प्रीती हमें देख रही थी और उसने अपने हाथों को रजनी की चूत के पास रखा हुआ था, जिससे मेरा लंड उसके हाथों से होकर रजनी की चूत में जा रहा था।

थोड़ी ही देर में रजनी मस्ती में आ गयी थी। वो अपने कुल्हे उछाल कर मेरी थाप से थाप मिला रही थी। उसके मुँह से उन्माद भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाँआँआआआ सुनील!!! ऐसे ही चोदते जाओ, और तेजी से राआआआजा हाँआँ मज़ाआआआआ आ रहा है…… और जोर से।”

उसकी कामुक्ता भरी बातें सुन कर मेरे लंड में भी उबाल आने लगा। मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी कर दी। तभी उसने कहा, “ओहहहहह सुनील रुको मत….. मेरा थोड़ी देर में ही छूटने वाला है, हाँआँआँ सुनीला और जोर से, प्लीज़ और जोर से…… कितना मज़ा आ रहा है।” यह कहते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने भी दो चार धक्के लगा कर अपना वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और हम अपनी अपनी साँसें संभालने लगे।

“तुम दोनों की चुदाई देख कर अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज़ सुनील! मेरी चूत की भी प्यास बुझा दो।” प्रीती ने मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा।

“जान मेरी! थोड़ा वक्त तो दो…. फिर मैं तुम्हारी अभी की प्यास तो क्या….. जनमों की प्यास बुझा दूँगा”, मैंने जवाब दिया।

प्रीती मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर से चूसने लगी। जब मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया तो मैंने इतनी जोर से उसे चोदा कि वो तीन बार झड़ गयी।

हम लोग अपनी उखड़ी हुई साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे कि रजनी ने अपने होंठ प्रीती की चूचियों पर रख कर चूसना शुरू कर दिया।

“ऊऊऊऊहहहहह ये क्या कर रही हो?” प्रीती बोली, लेकिन उसकी बातों को अनसुना कर के रजनी नीचे की ओर बढ़ती हुई अपनी जीभ को उसकी चूत पर रख कर चाटने लगी।

प्रीती कि सिसकरियाँ तेज हो रही थी, “हाँआआआआआ ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआआआआआआ ये तुम क्या कर रही हो रजनी…… हाँ और जोर से चाटो”, कहते हुए प्रीती ने अपना पानी रजनी के मुँह में छोड़ दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

इन दोनों की हरकत देख कर मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया। “तुम में से पहले कौन इसका मज़ा लेना चाहेगा?” मैंने अपना लंड हिलाते हुए कहा।

“पहले प्रीती को चोदो”, कहकर रजनी ने मेरे लंड को प्रीती की चूत के छेद पर लगा दिया।

उस दिन मैंने कई बार बदल-बदल कर दोनों को चोदा।

“तो फिर कब मिलना है?” रजनी ने कपड़े पहनते हुए कहा।

“शनिवार की रात को, क्यों ठीक रहेगा ना?”

“ठीक है! शनिवार को मिलेंगे”, कहकर रजनी अपने घर चली गयी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

शनिवार की शाम को मैंने सूईट के सब बल्ब निकाल दिये और खिड़की पर काले पर्दे चढ़ा दिये जिससे कमरे में अंधेरा हो और एम-डी रजनी को पहचान नहीं पाये।

“सर! आप अपने कपड़े उतार कर रूम में जा सकते हैं, नयी चूत आपका इंतज़ार कर रही है!” प्रीती ने एम-डी से कहा।

अपने कपड़े उतार कर एम-डी बेडरूम में दाखिल हो गया। “सुनील! मैं सब सुनना चाहती हूँ और रिकॉर्ड भी करना चाहती हूँ”, प्रीती ने अपने लिये एक बड़ा पैग ले कर सोफ़े पर बैठते हुए कहा।

मैंने टीवी का स्विच ऑन किया और देखने लगा। एम-डी अपना लंड रजनी की चूत में घुसा चुका था। “मैं तुम्हारी चूत के भी पैसे दे देता अगर तुम मेरे पास पहले आ जाती”, कहते हुए एम-डी रजनी की चूत को चोद रहा था।

रजनी के मुँह से कामुक सिसकरियाँ निकल रही थी। एम-डी अपना पूरा जोर लगा कर रजनी की चूत को चोद रहा था।

“तुझे चुदाई अच्छी लग रही है ना?” एम-डी ने पूछा।

“हाँआँआआ”, रजनी बोली।

“लगता है रजनी को मज़ा आ रहा है!” मैंने प्रीती से कहा।

“हाँ! एम-डी चुदाई बहुत अच्छे तरीके से करता है”, प्रीती ने सिगरेट का कश लेकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाते हुए कहा।

टीवी पर रजनी की सिसकरियाँ गूँज रही थी, “ओहहहहहहह हाँआँआआआआआ जोर से… हाँआँआँ ऐसे ही।”

थोड़ी देर बाद कमरे में एक दम खामोशी सी छा गयी थी। सिर्फ़ उन दोनों की साँसों की आवाज़ आ रही थी।

“लगता है दोनों का काम हो गया है!” प्रीती बोली। प्रीती का तीसरा पैग चल रहा था और वो चेन स्मोकर की तरह लगातार सिगरेट पे सिगरेट फूँक रही थी।

इतने में एम-डी ने कहा, “काश तुम मेरे पास पहले आ जाती तो मैं तुम्हारी कुँवारी चूत चोद पाता, फिर भी तुम्हारी चूत अभी भी कसी हुई है। कोई बात नहीं….. चलो अब घोड़ी बन जाओ, अब मैं तुम्हारी गाँड मारूँगा।”

“म….म…म..म…म नहीं!!” रजनी ने थोड़ा विरोध किया।

“तुम डरो मत! मैं धीरे-धीरे करूँगा…… तुम्हें तकलीफ नहीं होगी”, एम-डी ने रजनी की चूचियों को सहलाते हुए कहा।

रजनी घोड़ी बन गयी और एम-डी ने अपना लंड उसकी कुँवारी गाँड में डाल दिया।

“ओहहहहहहह मर गयीईईईईई, निकालो बहुत दर्द हो रहा है, ऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआ”, रजनी की चींख सुनाई दी।

“सुनील! एम-डी ने रजनी की कुँवारी गाँड फाड़ दी लगता है!” अपनी सिगरेट एश-ट्रे में टिका कर और ग्लास टेबल पर रख कर प्रीती मेरे लंड को पैंट में से निकालते हुए बोली। “तुम्हारा लंड कितना तन गया है और मेरी भी चुदाई की इच्छा हो रही है…. मुझे चोदो ना…. देखो मेरी चूत कैसे बह रही है।”

मैं प्रीती को सोफ़े पर लिटा कर, कसके उसकी चुदाई करता रहा।

दो घंटे के बाद एम-डी बेडरूम से बाहर आया और अपने कपड़े पहन लिये। “प्रीती! तुम भी कमाल की औरत हो, कहाँ कहाँ से ढूँढ के लाती हो इतनी कुँवारी चूतों को? मज़ा आ गया!” एम-डी ने कहा, “उससे पूछो कि क्या वो और दस हज़ार कमाना चाहेगी?”

“आप अपने आप क्यों नहीं पूछ लेते?” रजनी ने कमरे में नंगे ही आते हुए पूछा।

“ओह गॉड! ये तुम थीं!” एम-डी ने रजनी को देखते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँ मेरे प्यारे अंकल! ये सुन कर अच्छा लगा कि आपको मुझे चोदने में मज़ा आया…. मैं फिर से चुदवाना चाहती हूँ”, रजनी ने हँसते हुए कहा।

एम-डी धम से सोफ़े पर बैठ गया और अपने आपको कोसने लगा, “ये मैंने क्या किया? अपनी बेटी समान भतीजी को ही चोद दिया, हे भगवान मुझे माफ़ कर देना।” फिर वो प्रीती पर गुस्से से चिल्लाया, “ये सब तुम्हारा किया धरा है…. तुम क्या ये सब मज़ाक समझती हो?”

“हाँ! ये सब मैंने ही किया है। मैंने ही रजनी को तुमसे चुदवाने के लिये तैयार किया। जिस तरह तुमने मुझे चोदने के लिये मेरे पति को ब्लैकमेल किया था…. ये उसका बदला है”, प्रीती जोर जोर से हँस रही थी।

एम-डी प्रीती को गालियाँ दे रहा था, “कुतिया….. रंडी….. साली….. तूने ऐसा क्यों किया?” फिर रजनी की तरफ पलटते हुए बोला, “मैंने तुम्हारे साथ ऐसा क्या किया जो तुम इसके लिये तैयार हो गयी?”

“मेरे साथ नहीं किया, पर दूसरों के साथ तो करते आये हो! असलम को भूल गये? कैसे उसे चोरी के इल्ज़ाम में फँसा कर उसकी बेटी आयेशा को आपने और महेश ने चोदा था”, रजनी खीझती हुई बोली।

“ये सब झूठ है, इन्होंने तुम्हें बहकाया है”, एम-डी ने कहा।

“आप रहने दें, झूठ बोलने से कोई फ़ायदा नहीं है, मुझे सचाई का पता है, आप यहाँ से प्लीज़ जायें, मुझे आपको अपना अंकल कहते हुए भी शरम आ रही है।”

एम-डी चुपचाप उठा और धीमे कदमों से सूईट से बाहर चला गया।

“हम लोगों ने कर दिखाया”, रजनी खुशी से चिल्लाते हुए बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँ कर तो लिया…. पर तुमने देखा एम-डी का चेहरा कैसे उतर गया था, मुझे दुख है लेकिन उसे सबक भी सिखाना जरूरी था”, प्रीती अपना ग्लास हवा में लहराते हुए बोली, “रजनी ये पैसे तुम रख लो… तुम्हारे हैं जो एम-डी ने तुम्हें चोदने के लिये दिये थे।”

“नहीं मुझे इनकी जरूरत नहीं है….. इसे तुम ही रखो”, रजनी ने पैसे लौटाते हुए कहा।

“तो फिर इनका क्या करें, ऐसा करते हैं ये पैसे असलम को दे देते हैं, कहेंगे आयेशा की शादी में काम आयेंगे”, प्रीती ने कहा।

“हाँ! ये ठीक रहेगा! लेकिन अब क्या करें?” रजनी बोली।

“तुम लोगों को जो करना है करो….. मुझे तो एम-डी पर दया आती है, मैं घर जाकर सोना चाहता हूँ।”

“ठीक है”, कहकर प्रीती ने रजनी को भी घर भेज दिया और हम लोग घर आकर सो गये।

दूसरे दिन एम-डी ऑफिस में नहीं आया। घर फोन करने पर पता लगा कि उनकी तबियत खराब है। एम-डी की तबियत दिन पर दिन खराब रहने लगी और उन्हें हॉसपिटल में भरती करना पड़ा।

ऑफिस का काम मैंने संभल लिया था। इसी तरह महीना गुजर गया। सब कुछ वैसे ही चल रहा था। मैं ऑफिस की औरतों को चोदता और प्रीती भी क्लबों और पार्टियों में दूसरे मर्दों से चुदवा कर ऐश कर रही थी।

एक दिन मैंने एम-डी को फोन किया, “सर! मैं सुनील बोल रहा हूँ, अब आपकी तबियत कैसी है?”

“मैं ठीक हूँ सुनील! एक काम करो… आज रात आठ बजे तुम मुझे मेरे सूईट में मिलो? ठीक टाईम पर पहुँच जाना, तुम आओगे ना?” एम-डी ने कहा।

“बिल्कुल पहुँच जाऊँगा सर”, मैंने जवाब दिया।

ठीक टाईम पर मैं सूईट में दाखिल हुआ तो क्या देखता हूँ कि एम-डी एकदम नंगा सोफ़े पर बैठा था, और दो औरतें, जो कि बिल्कुल नंगी थीं, उसके लंड को चूस और चूम रही थी।

“आओ सुनील!” एम-डी ने मेरी तरफ हाथ हिलाते हुए कहा।

एम-डी को बोलते सुन दोनों औरतें अपना नंगा बदन छुपाने के लिये सोफ़े के पीछे जा छुपीं। उनका सिर्फ़ चेहरा दिखायी दे रहा था। मैंने उन दोनों को पहचान लिया। एक एम-डी की पत्नी मिली थी और दूसरी रजनी कि मम्मी, मिसेज योगिता थी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“रजनीश! ये कौन है और यहाँ क्यों आया है? इसे फ़ौरन यहाँ से जाने को बोलो!” मिसेज मिली चिल्लाते हुए बोली और मिसेज योगिता ने शरमा कर अपनी गर्दन झुका रखी थी।

उसकी बातों को अनसुना कर के एम-डी ने कहा “सुनील! तुम इन दोनों से पहले भी मिल चुके हो….. लेकिन फिर भी मैं इनसे तुम्हारा परिचय कराता हूँ। ये मेरी बीवी मिली है और बिस्तर में भी उतना ही मिल जाती है, और ये मेरी दूर की कज़िन योगिता है…… ये थोड़ी शर्मिली है, लेकिन इसकी चूत एक दम आग का गोला है….. योगिता ये मिस्टर सुनील हैं…… हमारे अकाऊँट्स के जनरल मैनेजर।”

“आप दोनों से मिलकर खुशी हुई”, मैंने कहा।

दोनों औरतों ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप रही।

एम-डी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “सुनील! मैंने तुम्हारी पत्नी और बहनों को चोदा है, आज मैं हिसाब बराबर कर देना चाहता हूँ। मैं जानता हूँ कि मेरी पत्नी और बहन तुम्हारी बीवी और बहनों जितनी यंग तो नहीं है, लेकिन जैसी हैं तुम्हारी हैं। तुम चाहो जैसे इन्हें चोद सकते हो।”

“तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है? तुम अपने नौकर से अपनी बीवी और बहन को चुदवाना चाहते हो?” मिली चिल्लाते हुए बोली। उसकी आवाज से साफ ज़ाहिर था कि उसने शराब पी रखी थी।

“इसके नौकर होने की तुम्हें तकलीफ हो रही है तो ठीक है….. इसे मैं आज से डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करता हूँ, अब तो तुम्हें तकलीफ नहीं?” एम-डी ने हँसते हुए कहा।

“नहीं! मैं तैयार नहीं हूँ!” मिली वापस चिल्लायी। इतनी देर योगिता चुपचाप सब सुन देख रही थी।

“तुम तैयार हो कि नहीं…… बाद में देखेंगे।” एम-डी हँसा, “सुनील जरा इन्हें अपना लंड तो दिखाना!”

दोनों औरतें ४० साल के ऊपर थीं, फिर भी उनका बदन गदराया हुआ था और उन्हें चोदने को मेरा दिल मचल उठ था। मैंने अपने कपड़े उतारते हुए अपना लंड दिखाया।

“ओह गॉड! कितना मोटा और लंबा लौड़ा है तुम्हारा”, मिली ने अब आगे आकर मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ते हुए कहा। “तुम्हारा लंड तो महेश से भी लंबा है।”

“साली कुत्तिया! मेरे पीछे तुम महेश से चुदवाती रही हो?” एम-डी ने हँसते हुए कहा।

“हाँ… उसी तरह जैसे तुम उसकी बीवी को चोदते रहते थे”, कहकर मिली मेरे लंड को हिलाने लगी।

“योगिता क्या तुम इसके लिये तैयार हो?”

“नहीं! बिल्कुल नहीं!” योगिता बोली।

“योगिता प्लीज़ मान जाओ! नहीं तो मुझे सुनील के लिये किसी और चूत का इंतज़ाम करना होगा, रजनी की चूत कैसी रहेगी? मुझे मालूम है कि सुनील को रजनी की कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आयेगा।” एम-डी हँसते हुए बोला।

“मेरी बेटी को इन सबसे दूर रखो! समझे?” योगिता जोर से चिल्लायी।

“तुम सोच लो, या तो तुम्हारी चूत या फिर रजनी की चूत, फैसला तुम्हारे हाथ में है।”

एम-डी की बात सुन कर योगिता भी सोफ़े के पीछे से बाहर आ गयी। सिर्फ काले रंग के हाई हील के सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी, योगिता बहुत ही सैक्सी लग रही थी। एम-डी उसे देख कर बोला, “अच्छा अब तुम मान ही गयी हो तो सुनील का जरा अलग अंदाज़ में स्वागत करो।”

योगिता घुटने के बल मेरे पास बैठ गयी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगी।

“चलो अब बेडरूम में चलते हैं”, एम-डी सोफ़े पर से उठते हुए बोला। हम चारों बेडरूम में आ गये। पहले हम सबने दो-दो पैग पीये और फिर मैंने दोनों को खूब चोदा। इतनी उम्र होने के बाद भी दोनों में सैक्स की आग भरी हुई थी। एम-डी सब कुछ देखता रहा। फिर एम-डी के कहने पर मैंने उन दोनों की गाँड भी मारी।

मैंने रात को घर पहुँच कर प्रीती को सब बताया तो वो खुश हुई और बोली, “अच्छा है! आज से एम-डी तुम्हें अपने बराबर समझेगा….. नौकर नहीं।”

एम-डी जब बिमार था तो रजनी बराबर आती रहती थी और मैं प्रीती के साथ उसकी भी जम कर चुदाई करता था, लेकिन जबसे मैंने उसकी माँ योगिता को चोदा, उसने आना बंद कर दिया था। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

एक दिन मैं घर पहुँचा तो देखता हूँ कि रजनी और प्रीती शराब की चुस्कियाँ लेती हुई बातें कर रही हैं।

“हाय सुनील! कैसे हो और आज कल क्या कर रहे हो…. मेरी मम्मी को चोदने के अलावा?” रजनी बोली।

“तो तुम्हें पता चल गया”, मैंने कहा।

“तुम्हें कैसे पता चला?” प्रीती ने पूछा।

“वही तो बताने आयी हूँ, सुनील का ही इंतज़ार कर रही थी”, रजनी बोली।

“अब तो सुनील आ गया है….. चलो शुरू हो जाओ।”

“कुछ दिनों से मैं देख रही थी कि मम्मी कुछ खोयी-खोयी सी रहती थी। अब ना तो वो पहले के जैसे हँसती थी और ना ही उनका काम में मन लगता था। पहले वो कभी-कभी ही, पार्टी वगैरह में ड्रिंक करती थीं पर अब कुछ दिनों से रोज़ ड्रिंक करने लगी थीं।”

“मेरे बहुत जोर देने पे वो बोलीं, रजनी मेरी बातें सुनकर हो सके तो मुझे माफ़ कर देना….. रजनी! मैं बचपन से ही बहुत सैक्सी थी, मुझे सैक्स हमेशा चाहिये होता था, तुम्हारे पिताजी के मरने के बाद मैं अकेली पड़ गयी और मेरी सैक्स की भूख शाँत नहीं होती थी। एक दिन मेरी एक सहेली ने मुझे रबड़ का नकली लंड खरीद कर लाके दिया।”

“मम्मी! आपके पास क्या नकली लंड है? मुझे दिखाओ ना! मैं बीच में बोली।”

“अभी नहीं बाद में, मम्मी बोली पर मैंने जोर दिया तो मम्मी बेडरूम से नकली लंड ले आयी…. प्रीती! पूरा दस इंच का काला और मोटा लंड है, अच्छा है पर सुनील के असली लंड जैसा नहीं।”

“आगे क्या हुआ, वो बता”, प्रीती सिगरेट का धुँआ छोड़ती हुई रजनी से बोली।

“मम्मी ने बताया कि एक दिन शाम को वो अपने नकली लंड से मज़े ले रही थी कि मेरी आँटी मिली ने उन्हें देख लिया और बोली, ‘योगिता नकली लंड से कुछ नहीं होगा, मेरे पास आओ मैं तुम्हें असली मज़ा दूँगी।’ उसकी बातें सुन कर मम्मी आगे बढ़ी तो उसने उन्हें बाँहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया। मम्मी को भी मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में दोनों एक दूसरे की चूत चाट रही थीं, जब उनका पानी छूट गया तो मम्मी ने मिली आँटी से पूछा, ‘मिली! तुम्हें भी चुदाई का बड़ा शौक है ना?’ ‘हाँ! योगिता बहुत है लेकिन रजनीश मुझे कभी-कभी ही चोदता है।’ उस दिन के बाद से वो दोनों रोज़ एक दूसरे को नकली लंड से चोद कर मज़ा लेतीं और एक दूसरे की चूत को खूब चाटतीं।”

“एक दिन मम्मी बिस्तर पर आँखें बंद किये लेटी थी। उनकी टाँगें हवा में उठी हुई थी और मिली आँटी के चोदने का इंतज़ार कर रही थी। ‘मिली! अब जल्दी भी करो मेरी चूत में आग लगी हुई है…. मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।’ मम्मी की बात सुन कर मिली आँटी ने नकली लंड उनकी चूत में घुसा दिया, लेकिन जैसे ही लंड घुसा कि मम्मी समझ गयी कि नकली नहीं असली लंड है। मम्मी ने आँखें खोली तो देखा कि रजनीश अंकल अपना लंड घुसाये उन्हें चोद रहे थे। मम्मी ने बिस्तर से उठना चाहा तो अंकल ने उन्हें कस कर बाँहों में पकड़ कर चोदते हुए कहा, ‘योगिता! जब ये असली लंड है तो तुम्हें नकली लंड से चुदवाने की क्या जरूरत है?’ मम्मी ने भी कई दिनों से असली लंड का मज़ा नहीं लिया था। मम्मी भी उनका साथ देने लगी और मस्ती में चुदवाने लगी। बाद में मम्मी को पता लगा कि ये दोनों की मिली भगत थी। मम्मी ने बुरा नहीं माना। उस दिन से रजनीश अंकल मम्मी को अकसर चोदने लगे।”

“एक दिन अंकल मम्मी और मिली आँटी को होटल के सूईट में ले आये और बोले कि आज यहाँ मज़े करेंगे। अंकल ने मम्मी और मिली आँटी को खूब शराब पिलायी। मम्मी ने मुझे आगे बताया कि हम लोग मस्ती कर रहे थे कि हमारी कंपनी से कोई सुनील आया और तुम्हारे अंकल ने हम दोनों को उसे सौंप दिया…. चोदने के लिये क्योंकि तुम्हारे अंकल ने उसकी बीवी और बहन को चोदा था। मैं साथ नहीं देना चाहती थी लेकिन जब मिली ने सुनील के लंड को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। मैंने मना करना चाहा तो तुम्हारे अंकल ने कहा कि या तो मैं मन जाऊँ नहीं तो वो तुम्हारी चूत सुनील को दे देंगे। फिर मैं भी मान गयी और सुनील ने एम-डी के सामने ही हम दोनों को चोदा, उसने हमारी गाँड भी मारी। बस उस दिन से मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं रंडी बन गयी हूँ।”

“मम्मी! सुनील का लंड बहुत मोटा और लंबा है ना? चुदवाने में बहुत मज़ा आता है ना? मैंने मम्मी से कहा। तुमने सुनील का लंड कब देखा और चखा? मम्मी ने पूछा। तब मैंने मम्मी को पूरी कहानी सुनाई, सुनील से चुदवाने से लेकर अंकल से चुदवाने तक। मेरी कहानी सुन कर मम्मी बोल पड़ी कि काश मैं भी प्रीती कि तरह तुम्हारे अंकल से बदला ले सकूँ। ‘मम्मी! आप चिंता ना करें….. मैं आपके साथ हूँ’, ‘मगर हम किस तरह बदला लेंगे?’ मम्मी ने पूछा। अंकल की दोनों बेटियाँ है ना! ६ महीने बाद बड़ी बेटी इक्कीस साल की हो जायेगी और छोटी वाली एक साल के बाद। उनके इक्कीस्वें जन्मदिन पर उनका तोहफा होगा….. मोटा और लम्बा लंड उनकी चूत और गाँड में।”

“तुम्हारे दिमाग में कोई इंसान है? मम्मी ने पूछा। हाँ! मैं सुनील को तैयार कर लूँगी…. अब तुम लोग समझ गये होगे कि मुझे कैसे पता चला और क्या तुम दोनों मेरा साथ दोगे?”

“रजनी! एम-डी से बदला लेने में हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे…..” मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

“तुम्हारा प्लैन क्या है?” प्रीती ने पूछा।

“मेरा प्लैन ये है कि….” Hindi Sex Stories

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