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मैं एकदम चौंक पड़ी। अभी Hindi Porn Stories कुछ बोलती ही कि एक हाथ आकर मेरे मुँह पर बैठ गया। कान में कोई फुसफुसाया- जानेमन, मैं हूँ, सुरेश। कितनी देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।
मैं चुप !
सुरेश, वही स्मार्ट-सा छोरा जो लड़कियों के बहुत आगे पीछे कर रहा था। मैं दम साधे लेटी रही। कमरे के अंधेरे में वह मुझे स्वीटी समझ रहा है।
“मुझे यकीन था कि तुम आओगी। एक एक पल पहाड़ सा बीत रहा था तुम्हारे इंतजार में। तुमने मुझे कितना तड़पाया !”
मेरा कलेजा जोरों से धड़क रहा था। कुछ बोलना चाहती थी मगर बोल नहीं फूट रहे थे।
स्वीटी गुपचुप यह किसके साथ चक्कर चला रही है?
मुझे तो वह कुछ बताती नहीं थी !
मेरे सामने तो वह बड़ी अबोध और कड़ी बनती थी।
इस कमरे में आज उसे सोना था। मगर वह दूल्हे को देखने मंडप चली गई थी। मुझे नींद आ रही थी और रात ज्यादा हो रही थी इसलिए उसके कमरे में आकर सो गई थी।
चादर ढके बिस्तर पर दूसरा कौन सो रहा है देखा नहीं।
सोचा कोई होगी।
शादी के घर में कौन कहाँ सोएगा निश्चित नहीं रहता। अभी लेटी ही थी कि यह घटना !
“स्वीटी जानेमन, तुम कितनी अच्छी हो जो आ गई।” उसका हाथ अभी भी मेरा मुँह बंद किए था।
“आइ लव यू।” उसने मेरे कान में मुँह घुसाकर चूम लिया।
चुंबन की आवाज सिर से पाँव तक पूरे बदन में गूँज गई। मैं बहरी-सी हो गई। कलेजा इतनी जोर धड़क रहा था कि उछलकर बाहर आ जाएगा।
मन हो रहा था अभी ही उसे ठेलकर बाहर निकल जाऊँ। मगर डर और घबराहट के मारे चुपचाप लेटी रही।
वह मेरी चुप्पी को स्वीकृति समझ रहा था। उसका हाथ मेरे मुँह पर से हट गया।
उसने अपनी चादर बढ़ाकर मुझे अंदर समेट लिया और अपने बदन से सटा लिया। उसके सीने पर मेरे दिल की घड़कन हथौड़े की तरह बजने लगी।
“बाप रे कितनी जोर से धड़क रहा है।” उसने मानों खुद से ही कहा। मुझे आश्वस्त करने के लिए उसने मुझे और जोर से कस लिया- जानेमन आई लव यू, आई लव यू ! घबराओ मत।
मेरा मन कह रहा था- जूली, अभी समय है, छुड़ाओ खुद को और बाहर निकल जाओ। शोर मचा दो। तब यह समझेगा कि चुपचुप लड़की को छेड़ने का क्या नतीजा होता है। शादी अटेन्ड करने आया है या यह सब करने ?
मगर अब उससे जोर लगाकर छुड़ाने के लिए हिम्मत चाहिए थी। एक तरफ निकल जाने का मन हो रहा था दूसरी तरफ यह भी लग रहा था कि देखूँ आगे क्या करता है ! डर, घबराहट और उत्सुकता के मारे मैं जड़ हो रही।
उसका हाथ मेरी पीठ पर घूम रहा था। गालों पर उसकी गर्म साँसें जल रही थीं। मुझे पहली बार किसी पुरुष की साँस की गंध लगी। वह मुझे अजीब सा लगी। हालाँकि उसमें कुछ भी नहीं था। पर वह मुझे वह बुरी भी नहीं लगी। वह मेरी किंकर्तव्यमूढ़ता का फायदा उठा रहा था और मुझे आश्चर्य हो रहा था कि मैं कुछ कर क्यों नही रही। मुझे उसे तुरंत धक्का देकर बाहर निकल जाना चाहिए था और उसकी करतूत की अच्छी सजा देनी चाहिए।
मैंने सोच लिया अब और नहीं रुकूंगी। मैं छूटने के लिए जोर लगाने लगी। अब चिल्लाने ही वाली थी … कि तभी उसके होंठ ढूंढते हुए आकर मेरे मुँह पर जम गए।
मैं कुछ बोलना चाह रही थी और वह मेरे खुलते मुँह में से मेरी साँसें खींचते मुझे चूम रहा था। मेरी ताकत ढीली पड़ने लगी। दम घुटने लगा।
मुझे निकलना था मगर लग रहा था मैं उसकी गिरफ्त में आती जा रही हूँ। मेरे दोनों हाथ उसकी हाथों के नीचे दबे कमजोर पड़ने लगे। मैं छूटना चाहती थी मगर अवश हो रही थी।
उसका हाथ पीछे मेरी पीठ पर ब्रा के फीते से खेल रहा था। कब उसने पीछे मेरे फ्रॉक की जिप खोल दी थी मुझे पता नहीं चला।
उसका हाथ मेरी नंगी पीठ पर घूम रहा था और ब्रा के फीते को खींच रहा था। पहली बार पुरुष की हथेली का एक रूखा और ताकत भरा स्पर्श महसूस हुआ।
मैं जड़ रहकर अपने को अप्रभावित रखना चाह रही थी मगर उसके घूमते हाथों का सहलाव और बदन पर बाँहों के बंधन का कसाव मुझे अलग रहने नहीं दे रहे थे। मुझे यह सब बहुत बुरा लग रहा था मगर अस्वीकार्य भी नहीं।
मैं सोच भी नहीं सकती थी कि कभी यह सब मैं अपने साथ होने दूंगी। मगर …
वह मेरे ब्रा के फीते को खोलने की कोशिश कर रहा था मगर हुक खुल नहीं रहा था। बेसब्र होकर उसने दोनों तरफ से पकड़कर जोर से झटके से खींच दिया। हुक टूट गया और फीते अलग हो गए। मुझे अपने बगलों और छाती पर ढीलेपन का, मुक्ति का एहसास हुआ। अभी तो वह बस पीठ छूकर ही पागल हो रहा था। आगे क्या होगा !
उसके होंठ मेरे होंठों से उतरकर गले पर आ रहे थे। उसके सांसों की सोंधी गंध दूर चली गई। वह फ्राक को कंधों पर से छीलने की कोशिश कर रहा था।
उसने मेरी एक बांह फ्राक से बाहर निकाल दी और उसे सिर के ऊपर उठाकर उस हाथ को ऊपर से सहलाते हुए नीचे उतरकर मेरे बगल को हथेली में भर लिया।
गर्म और गीली काँख पर उसका भरा भरा कसाव मादक लग रहा था।
मुझसे अलग रहा नहीं जा रहा था। पहली सफलता से उत्साहित होकर उसने मुझे बाँहों में लपेटे हुए ही थोड़ा दूसरे करवट पर लिया और थोड़ी कोशिश से फ्राक की दूसरी बाँह भी बाहर निकाल दी।
मेरे दोनों हाथों को ऊपर उठाकर उसने अपने हाथों में बांध लिया और मेरे बगलों को चूमने लगा। उसके गर्म नमकीन पसीने को चूसने चाटने लगा।
उसकी इस हरकत पर मुझे घिन आई मगर मुझे गुदगुदी हो रही थी और नशा-सा भी आ रहा था। मुझे नहीं मालूम था कि बगलों का चूमना इतना मादक हो सकता है।
मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश बंद कर दी। मेरी सासें तेज होने लगीं।
वह खुशी से भर गया। उसे यकीन हो गया कि अब मैं विरोध नहीं करूंगी।
उसने मुझे सहारा देकर बिठाया और फ्राक सिर के ऊपर खींच लिया। ब्रा मेरी छाती पर झूल गई। उसने उसके फीते कंधों पर से सरकाकर ब्रा को निकालना चाहा मगर मैंने स्तनों को हाथों से दबा लिया। हाथों पर ब्रा के नीचे मुझे अपनी चूचियों की चुभन महसूस हुई।
मेरी चूचियाँ टाइट होकर होकर खड़ी हो गई थीं। मैं शर्म से गड़ गई।
उसने मुझे धीरे धीरे लिटा दिया। मेरे हाथ छातियों पर दबे रहे। वह अब ऊपर से ही मेरे मेरे छातियों पर दबे हाथों को और ऊपर नीचे की खुली जगह को इधर से उधर से चूमने लगा। दबकर मेरे उभारों का निचला हिस्सा हाथों के नीचे थोड़ा बाहर निकल आया था। उसने उसमें हलके से दाँत गड़ा दिया।
चुभन के दर्द के साथ एक गनगनाहट बदन में दौड़ गई और छातियों पर हाथों का दबाव ठहर नही सका। तभी उसने ब्रा नीचे से खीच ली और मेरे हाथों को सीधा कर दिया।
अब मैं कमर के ऊपर बिल्कुल नंगी थी। गनीमत थी कि अंधेरा था और वह मुझे देख नहीं सकता था। उसके हाथ मेरी छातियों पर घूमने लगे। उसने चूचियों को चुटकी में लेकर हलके से मसल दिया।
आह, ये क्या हो रहा था! यह सब इतना विह्वल कर देने वाला क्यों था! मैं कराह रही थी और वह फिर मुझे बार बार मुँह पर चूम रहा था। मुझे उसके होठों पर अपने बगलों के नमकीन पसीने का स्वाद आया। मैंने उसके होठों को चाट लिया।
वह अब नीचे उतरा और मेरी एक चूची को मुँह में भरकर चूसने लगा। मैं गनगना उठी।
एक क्षण के लिए वह एक बच्चे का सा खयाल मेरे मन में घूम गया और मैंने उसका सिर अपने स्तन पर दबा लिया। लग रहा था चूचियों से तरंगें उठकर सारे बदन में दौड़ रही हैं। वह कभी एक चुचूक को चूसता कभी दूसरे को।
मुँह के हटते ही उस चुचूक पर ठंडक लगती और उसी समय दूसरी चूची पर गर्माहट और होंठों के कसाव का एहसास मिलता। मैं अपने जांघों को आपस में रगड़ने लगी। जोर से चलती सांसों से ऊपर नीचे होती मेरी छातियाँ मानों खुद ही उसे उठ उठकर बुला रही थीं।
अब वह मेरी नाभि को चूम रहा था। मानो उसके छोटे से छेद के भीतर से किसी को बुला रहा हो। इच्छा हो रही थी वहीं से उसे अपने भीतर उतार लूँ। अपने बहुत भीतर, गर्भ के अंदर में सुरक्षित रख लूँ। मुझे एकाएक भीतर बहुत खाली सा लगा- आओ, मुझे भर दो।
उसने बिना भय के मेरी सलवार की डोरी खींच ली और ढीली सलवार के भीतर हाथ डालकर मेरे फूले उभार को दबाने लगा। मेरी पैंटी गीली हो रही थी।
उसने पैंटी के उपर से भीतर के कटाव को उंगलियों से ढूंढा और कटाव की लम्बाई पर उंगली रखकर भीतर दबा दिया। मैं सिहर उठी। बदन में बिजली की तरंगें दौड़ रही थीं। उसने पैंटी के भीतर हाथ घुसेड़ा और मेरे चिपचिपाते रस भरे कटाव में उंगली घुमाने लगा। उंगली घुमाते घुमाते उसने कटाव के शिखर पर सिहरती नन्ही कली को जोर से दबाकर मसल दिया।
मैं ओह ओह कर हो उठी।
मेरी वह कली उसकी उंगली के नीचे मछली सी बिछल रही थी। मैं अपने नितंब उचकाने लगी। उसने एक उंगली मेरी छेद के भीतर घुसा दी और एक से वह मेरी कली को दबाने लगा। छेद के अंदर की दीवारों को वह जोर जोर से सहला रहा था।
अब उसकी हरकतों में कोमलता समाप्त होती जा रही थी। बदन पर चूँटियाँ रेंग रही थीं। लगता था तरंगों पर तरंगें उठा उठाकर मुझे उछाल रही हैं।
योनि में उंगलियाँ चुभलाते हुए उसने दूसरे हाथ से मेरे उठते गिरते नितंबों के नीचे से सलवार खिसका दी। उसके बाद पैंटी को भी बारी बारी से कमर से दोनों तरफ से खिसकाते हुए नितम्बों से नीचे सरका दिया।
उंगलियाँ मेरे अंदर लगातार चलाते हुए उसने मेरी पैंटी भी खींचकर टांगों से बाहर कर दी। कहाँ तो मैंने उसे अपने स्तन उघाड़ने नहीं दिया था कहाँ अब मैं खुद अपनी योनि खोलने में सहयोग दे रही थी। मैं चादर के भीतर मादरजाद नंगी थी।
अब मुझे लग रहा था वह आएगा। मैं तैयार थी। मगर वह देरी करके मुझे तड़पा रहा था। वह मुझे चूमते हुए नीचे खिसक रहा था। नाभि से नीचे।
कूल्हों की हडिडयों के बीच, नर्म मांस पर। वहाँ उसने हौले से दांत गड़ा दिए। मैं पागल हो रही थी। वह और नीचे खिसका। नीचे के बालों की शुरूआत पर।
अरे उधर कहाँ। मैंने रोकना चाहा। मगर विरोध की सभावना कहां थी। सहना मुश्किल हो रहा था। वह उन बालों को चाट रहा था और बीच बीच में उन्हें मुँह में लेकर दांतों से खींच रहा था। फिर उसने पूरे उभार के मांस को ही मुँह फाड़कर भीतर लेते हुए उसमें दांत गड़ा दिये।
मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। दर्द और पीड़ा की लहर एक साथ। ओह ओह। अरे यह क्या! मुझे कटाव के शिखर पर उसकी सरकती जीभ का एहसास हुआ।
मैंने जांघों को सटाकर उसे रोकना चाहा। मगर वह मेरे विरोध की कमजोरी को जानता था। उसने कुछ जोर नहीं लगाया, सिर्फ ठहर गया।
मैंने खुद ही अपनी टांगें फैला दी। वह मेरी फाँक को चाटने लगा। कभी वह उसे चूसता कभी चाटता। कभी जीभ की नोक नुकीली और कडी क़रके कटाव के अंदर घुसाकर ऊपर से नीचे तक जुताई करता।
कभी जीभ सांप की तरह सरकती कभी दबा दबा कर अपनी खुरदरी सतह से रगड़ती।
उसके तरकस में तीरों की कमी नहीं थी। पता नहीं किस किस तरह से वह मुझे पागल और उत्तेजित किए जा रहा था। अभी वो जीभ चौड़ी करके पूरे कटाव को ढकते हुए उसमें उतरकर चाट रहा था।
मेरे दोनों तरफ के होंठ फैलकर संतरे की फांक की तरह फूल गए थे। वह उन्हें बारी बारी से मुँह में खींचकर चूस रहा था, उन पर अपने दांत गड़ा दिए। दांत का गड़ाव से दर्द और दर्द पर उमड़ती आनंद की लहर में मैं पछाड़ खाने लगी।
मेरा रस बह बह कर निकल रहा था और वह उसके चूसते मुँह में उतर रहा था। उसने मेरे कटाव के ऊपर थरथराती नन्हीं कली को हांठों में कस लिया और चूसने लगा।
उसे कभी वह दांतों से कभी होंठों से कुचलता। उसने उस कली को भीतर खींचकर चूसा और उसे दाँतो के बीच होठों से मसलने लगा।
आह आह आ: जा जा जा। मैं बांध की तरह फूट पड़ी। अब तक किसी जोर से रोक रखा झरना फूट पड़ा। सदियों से जमी हुई देह मानो धरती की तरह भूकंप में हिचकोले खाने लगी। उसने उंगलियों से खींच कर छेद को दोनों तरफ से फैला दिया और उसमें भीतर मुँह घोप कर चूस चूसकर मेरा रस खींचने लगा।
कुंआरी देह की पहली रस-धार। सूखी धरती पर पहली बारिश सी। वह योनि के भीतर जीभ घुसाकर घुमा घुमाकर चाट रहा था। मानों कहीं उस अनमोल रस की एक बूंद भी नहीं छोड़ना चाहता हो।
मैं अचेत सी हो गई।
कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने अपने पर उसका वजन महसूस किया। मैंने हाथों से उसे टटोला। वह मुझ पर चढ़ा हुआ था। मेरी हाथों की हरकत से उसे मेरे होश में आने का पता चला। उसने मेरे मुँह पर अपने मुँह रख दिया। एक तीखी गंध मेरे नथुनों में भर गई। उसके होठों पर मेरा लिसलिसा रस लगा था।
मैंने खुद को चखा। एक अजीब सा स्वाद था- नमकीन, तीखा, बेहद चिकना। मैं उसकी गंध में डूब गई। उसने सराबोर होकर मुझे पिया था। कोई हिचक नहीं दिखाई थी कि उस जगह कैसे मुँह ले जाए।
मेरा एक एक पोर उसके लिए प्यार के लायक था। एक कृतज्ञता से मैं भर उठी। मैंने खुद उसे विभोर होकर चूमा और उसके होठों को गालों को अगल बगल सभी को चाटकर साफ कर दिया। अंधेरे में मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया था।
मुझे कोई दुविधा नहीं थी। वह मुझे स्वीटी समझकर कर रहा था। मैं उसका आनंद बिना किसी डर के ले रही थी। मैंने उसे बाँहों में कस लिया।
इस कहानी का अगला व अन्तिम भाग आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर शीघ्र ही पढ़ पाएंगे!
स्वीटी-2 Hindi Porn Stories
मेरा नाम अंजना वर्मा है! मैं दिल्ली Antarvasna की रहने वाली हूँ और मैं ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ! मेरी उम्र १८ साल है। मेरे पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी करते हैं, एक बहु-राष्ट्रीय कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर हैं! पर उनके पास मेरे लिए बिलकुल भी समय नहीं है! क्योंकि शायद मैं गोद ली हुई हूँ इसलिए !
और बाद में उन को एक लड़का हो गया, इसलिए अब वो मुझे बोझ समझते हैं! उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं घर आऊँ या ना आऊँ. . . . बस समाज को दिखाने के लिए मुझे रखना मजबूरी है उनकी !
खैर अब मैं भी सब समझती हूँ और उनकी परवाह नहीं करती ! अब मैं भी जिन्दगी के मज़े लेती हूँ!
मेरा कद ५ फीट ३ इंच, मेरा फिगर बड़ा ही सेक्सी है! गोल और कसी हुई चूचियाँ जो ज्यादा बड़ी नहीं पर मस्त दिखती हैं ! चूत मैं हमेशा साफ़ ही रखती हूँ! क्या पता कहाँ कोई लण्ड मिल जाये….. रंग मेरा ऐसा जैसे कि दूध में गुलाब डाल दिया हो! मैं भी एकदम बिंदास रहती हूँ!
मेरा २-३ लड़कों से शारीरिक रिश्ता भी रह चुका है जो मेरी माँ की रिश्ते में ही हैं.. शायद कम उम्र में ही सेक्स करने से अब मुझे लण्ड बहुत अच्छे लगने लगे हैं! लण्ड के बारे में सोचते ही मेरी चूत में पानी आने लगता है!
अब मैं अपनी कहानी बताती हूँ! मैं रोज सुबह बस से स्कूल जाती थी और शाम को वापिस आती थी! कई बार शाम को थोड़ा लेट हो जाती थी! क्योंकि मेरा घर पर मन ही नहीं लगता था! आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली की बसों में कितनी भीड़ रहती है! पर मैं पहले स्टाप से ही बैठती हूँ सो सीट मिल जाती है!
यह एक साल पहले की बात है, ऐसे ही एक दिन मैं बस में जा रही थी! बस में बहुत भीड़ थी! मेरे पास ही एक बड़ी उम्र का आदमी धोती कुर्ता पहने खड़ा था! कद करीब ५ फीट १० इंच होगा! रंग थोड़ा सावंला पर था हट्टा कट्टा ! बड़ी रौबदार मूछें !
मैंने सामने वाली सीट को हाथ से पकड़ा था इसलिए शायद गलती से मेरा हाथ उसके लण्ड से लग गया था, मुझे अच्छा लगा। बस फिर मेरा तो पूरा ध्यान ही वहीं अटक गया! वो बेचारा पीछे हटने की कोशिश करता हर बार! मुझे मज़ा आने लगा, और थोड़ी हंसी भी आ रही थी! मैं अब मज़े लेने के मूड में आ गई थी!
मैंने पूरी बस में देखा- आस पास सभी औरतें ही थी, बहुत भीड़ थी, शायद सभी के पास आज सामान कुछ ज्यादा ही था! मेरे बाजू वाली सीट पर एक लड़की बहुत सारा सामान ले कर बैठी थी!
मैंने अपना बैग अपनी टांगों पे रख लिया! अ़ब मैं आगे झुक के सोने का नाटक करने लगी और हाथ को आगे वाली सीट के पाइप पे रख के जरा बाहर निकाल लिया, पर वो थोड़ा पीछे हो गया! पर झटकों से कभी कभी उसका लण्ड मेरी उंगलियों से छू जाता था!
अब मुझे मज़ा आने लगा.. मेरी चूत में खुजली होने लगी थी! मैंने नीचे ही नीचे अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल लिए ओर पीछे हो कर बैठ गई!
अब ऊपर से मेरी सफ़ेद ब्रा और गोल गोल चूचियां साफ़ दिख रही थी! मैंने अपने बैग को पेट से चिपका लिया ताकि मेरी चूचियां थोड़ी और ऊपर उठ जाएँ और बाहर ज्यादा नज़ारा दिख सके.. मैं नोट कर रही थी कि वो आदमी मुझे देख रहा है पर जब भी मैं ऊपर देखती हूँ तो वो नज़रें घूमा लेता है! शायद उसे अपनी बड़ी उम्र का अहसाह था!
पर मुझे तो मस्ती सूझ रही थी! मुझे और शरारत सूझी और मैं बाहर स्टैंड देखने के लिए थोड़ा उठी और चुपके से साइड से अपनी स्कर्ट सीट के पीछे अटका दी और बैठ गई! जैसे ही मैं बैठी, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी पैंटी दिखने लगी, जो कि बहुत पतली थी! पैंटी में से मेरे चूत के होंट साफ़ दिखाई देते थे!
मैं झट से दोबारा उठी और स्कर्ट ठीक कर के बैठ गई, जैसे गलती से स्कर्ट अटक गई हो.. पर जो मैं दिखाना चाहती थी, वो उस आदमी ने देख लिया था!
मैंने उपर देखा और हल्के से मुस्करा दी! मैंने महसूस किया कि उस आदमी का लण्ड टाइट होने लगा था। वो अब भी कुछ शरमा रहा था पर मैंने हाथ को सामने वाली सीट पे ही लगा के रखा था! जब भी कोई उतरता था तो उसे आगे होना पड़ता था ओर मेरा हाथ उसके लण्ड से छू जाता था!
तभी बस में और भीड़ चढ़ गई! अब तो बस खचखच भरी थी! तभी मैंने देखा के पास में एक औरत सामान के साथ खड़ी थी! मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसे अपनी सीट दे दी! अब मैं उस आदमी के सामने खड़ी हो गई! मेरी सीट पे वो औरत बैठ गई, उसकी गोद में सामान था और उसने मेरा बैग भी अपनी गोद में रख लिया था! बस फिर चल पड़ी!
अब मेरा ध्यान उस आदमी के लण्ड पे था! मुझे उस आदमी का लण्ड अपनी गांड के थोड़ा ऊपर महसूस हो रहा था! मैंने एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा लिया ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! वाह… क्या लण्ड था उसका!
मैं उसके लण्ड का जायजा लेने लगी..जिससे मेरी चूत में पानी आने लगा था! पर वो आदमी कोई हरकत नहीं कर रहा था! अब मुझे उस पे गुस्सा आ रहा था! अ़ब मैं काफी गरम हो चुकी थी!
तब मैंने थोड़ी हिम्मत करके हाथ धीरे से पीछे ले जाकर उसके लण्ड को छुआ! मैं उसे सहलाने लगी जिससे वो और कड़क हो गया! मुझे मज़ा आने लगा। मैं उसके लण्ड को हल्के- हल्के से सहला रही थी, पर तभी उसने मेरा हाथ अपने लण्ड से हटा दिया! मैंने पीछे मुड़ के देखा, वो चुपचाप था पर आगे की ओर आ गया था! अब वो अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में दबा रहा था! मुझे खुशी हुई कि वो अब मेरा साथ दे रहा था!
मेरी स्कर्ट में साइड में चैन थी! सो मैंने धीरे धीरे स्कर्ट घुमाना शुरु कर दिया! मैं साथ साथ बस में भी नज़र मार रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है! पर शायद भीड़ होने की वज़ह से कोई नहीं देख पा रहा था!
अब मेरी स्कर्ट की जिप पीछे थी जो मैं पहले ही खोल चुकी थी! उसका लण्ड अ़ब मैं और अच्छे से महसूस कर सकती थी! कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, हर झटके के साथ वो अपने लण्ड का दबाव और बढ़ा देता! मुझे मज़ा आ रहा था! मैंने पीछे मुड़ के देखा पर वो ऐसे देख रहा था जैसे कुछ हो ही नहीं रहा था!
मैं अ़ब और आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए अ़ब मैंने पीछे हाथ कर के उसकी धोती में हाथ डाल दिया और उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा पर उसने मेरा हाथ झटक दिया! मैंने उसकी ओर देखा, वो हल्के से मुस्कराया और उसने बस में होने का अहसास कराया!
मैंने धीरे से पीछे हट के उसके कान में कहा,”इतनी भीड़ में कोई नहीं देख रहा, अभी भीड़ कम नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी, मैं रोज़ इसी बस मैं जाती हूँ, तुम बस मज़ा लो !”
और मैं उसकी तरफ मुस्करा दी.. जवाब में उसने भी एक प्यारी से मुस्कराहट दी.. .
वो थोड़ा शरमाया और ऐसे ही लण्ड को दबाता रहा! मैंने सोचा- चलो कोई नहीं ! इतना मज़ा तो आ रहा है! पर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो अपनी धोती में हाथ डाल रहा है! तभी मैंने अपनी पैंटी पे उसका लण्ड उठा हुआ महसूस किया! मैं फिर से ऊपर उठ गई ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! मैं बार बार ऊपर उठ रही थी, यह बात उसने भांप ली, सो उसने मेरी एड़ियों के नीचे अपने पैर लगा दिए, जिससे वो मेरे और पास आ गया और मैं ऊपर उठ गई!
मैंने आगे देखा तो मेरे सामने सामान ही सामान था, मैंने चुपके से अपनी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरु कर दी पर एक लिमिट से ज्यादा नहीं उठा सकती थी, नहीं तो किसी को पता चल जाता! इसलिए स्कर्ट को वापिस नीचे ही कर दिया! पर मेरा मन तो पूरे मज़े लेने का था!
मैं थोड़ा आगे की तरफ हो गई ताकि उसके और मेरे बीच कुछ गैप बन जाए। मैंने अपनी टांगो को थोड़ा फैला लिया! अब मैंने पीछे हाथ ले जा कर उसके लण्ड को अपने स्कर्ट की जिप से दोनों टांगो के बीच में फंसा लिया! यार क्या गरम लण्ड था…….स्स्स्स्स्स्स्स्स्स……म्मम्मम………..
मैं उसका लण्ड अपनी दोनों टांगो पे महसूस कर रही थी! ऐसा लगता था कि मैं किसी बड़ी मोटी गरम रॉड पे बठी हूँ! मैंने अपनी गाण्ड थोड़ा पीछे धकेल दी और वो भी थोड़ा आगे आ गया! उसका लण्ड मेरी टांगों पे रगड़ता हुआ आगे आ गया! अब उसके लण्ड का आगे वाले हिस्से का उभार स्किर्ट पे आगे की साइड दिख रहा था, इसलिए मैं थोड़ा आगे झुक गई ताकि स्कर्ट ऊपर उठ जाये!
“म्मम्मम्म………
उसका गरम लण्ड मैंने टांगों के बीच दबा रखा था जो कि हर झटके में आगे पीछे हो रहा था! एक तरह से वो मेरी टांगों को चोद रहा था, मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी! मेरा मन हो रहा था कि अपनी पैंटी को हाथ डाल के हटा दूँ ताकि उसके लण्ड की गर्मी अपनी चूत पर महसूस कर सकूँ! पर शायद बस में यह नहीं हो सकता था!
मैं पीछे मुड़ी और उसके कान में धीरे से कहा,” अपने हाथ से मेरी पैंटी साइड में कर दो प्लीज़…!” और वापिस आगे देखने लगी।
उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर स्कर्ट की जिप से २ उँगलियाँ अंदर डाली ओर मेरी पैंटी को साइड में कर दिया!
मैं तो जैसे ……… अपने होश ही खो बैठी थी! उसका गरम लण्ड मेरी चूत पे लगा हुआ था। अब उसका लण्ड मेरी चूत पे रगड़ खा रहा था, शायद चूत के पानी की वज़ह से जो मेरी टांगों तक आ गया था, वो अ़ब आराम से आगे पीछे जा रहा था! मेरी आँखे बंद हो रही थी!
मेरा चेहरा लाल हो गया था पर मैं सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी! मैंने आस पास देखा पर कोई भी हमारी तरफ नहीं देख रहा था! बस के हर झटके के साथ वो मेरी टांगों में झटके मार रहा था! उसका गरम लण्ड जब भी आगे या पीछे होता मेरी चूत में आग बढ़ जाती!
तभी एक तेज़ झटका लगा और उसका लण्ड पीछे चला गया, आगे से मेरी पैंटी थोड़ा अपनी जगह पर वापिस आ गई! जब उसने लण्ड वापिस आगे किया तो वो मेरी पैंटी में चला गया म्म्म्म्म्म्म्म………………………………..
अब उसका लण्ड मेरी पैंटी में था और चूत के होठों के बीच में ….. ऊपर नीचे हो रहा था……….! मुझे और मज़ा आने लगा, … और मैंने एड़ियों को और ऊपर उठा लिया। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसलिए उसने झटके बढ़ा दिए। तभी बस रेड लाइट पे रूक गई और झटके बंद हो गए! मैंने पेट के नीचे खुजली करने के बहाने से हाथ स्कर्ट पे ले जा के उसके लण्ड के सुपाड़े को मसलने लगी! मैंने पीछे मुड़ के देखा तो उसका पूरा चेहरा पसीने से गीला हो गया था!
तभी बस चल पड़ी पर मेरे मसलने से शायद वो झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी गाण्ड को हल्के हल्के ऊपर नीचे करने लगी! स्स्स्स्स्स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ मज़ा बढ़ने लगा था… मेरी चूत में कैसे खलबली मच गई थी…… तभी मैंने एड़ियों को ऊपर उठा लिया और मेरा शरीर टाइट हो गया !
मैं …..में…….झड़ने वाली थी, और ….औ ..औम्मम्मम… औ..आह्ह्ह्छ ….. में उसके ऊपर झड़ गई और मेरा सारा जूस उसके लण्ड पे आ गया! और मैं ढीली होती चली गई! उसने भी एक दो झटके लगाये और सारा वीर्य मेरी पैंटी में छोड़ दिया, जिसे में अपनी जांघों तक महसूस कर रही थी!
२-३ मिनट तक हम ऐसे ही रहे और फ़िर वो अपना लण्ड बाहर निकलने लगा। मैंने अपना हाथ पीछे लगा लिया ताकि उसके वीर्य से मेरी स्कर्ट ख़राब न हो! सारा वीर्य मैंने अपने हाथ से पौंछ लिया और उसने अपना लण्ड वापिस अपनी धोती में कर लिया! तभी एक स्टाप आया और मैं उतर गई, पता चला कि ४ स्टाप आगे आ गई हूँ पर इस स्टाप पे ज्यादा लोग नहीं होते क्योंकि यह दिल्ली का बाहरी इलाका था,
और आज तो ये स्टाप बिल्कुल खाली था, पता नहीं क्यों… शायद हमारी किस्मत………
वो आदमी भी वहीं उतर गया! मैंने इधर उधर देखा, फिर उसकी तरफ देख के अपने हाथों को चूसने लगी चाट -चाट के सारा हाथ साफ़ कर लिया!
तब थोड़ी देर बात करने के बाद उसने बताया कि वो यहाँ से ८० किलोमीटर दूर गाँव में रहता है, यहाँ अपने बेटे के पास आया है, पूरा दिन खाली रहता है इसलिए सोचा आज एक दोस्त से मिल आऊँ, उसका नाम महादेव सिंह है।
मेरा भी स्कूल मिस हो गया था सो हम बस स्टाप के साथ में बने पार्क में गए और एक पेड़ों से घिरी जगह बैठ गए! वहाँ पहले तो मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाल के सारा वीर्य हाथों से साफ़ किया और हाथों को चटकारे ले ले कर चूसना शुरु कर दिया..! पर किसी के आने की आहट से हम सतर्क हो गए, वहाँ पार्क में कुछ दूर कुछ लोग आ के बैठ गए थे और शायद उनका लम्बे समय तक बैठने का कार्यक्रम था!
इसलिए हम कल फिर वहीं मिलने का वादा कर के वापिस चल पड़े क्योंकि उसे भी कुछ जल्दी थी! वो शायद अपने दोस्त के घर के लिए चला गया और मैं अपनी बस की प्रतीक्षा करने लगी..
और बस पकड़ के अपने घर आ गई………………….
आगे क्या हुआ बाद में…. Antarvasna
मैं एक २६ साल का लड़का Antarvasna हूँ। पाठको ! मै आप लोगों को अपने जीवन की पहली चुदाई की असली कहानी बताता हूँ।
जब मैं कॉलेज़ का छात्र था कहानी तब की है।
एक दिन मैं अपने घर में बैठा था। तभी मेरे घर पर मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी मेरे घर पर आई और उनके साथ में उनकी भांजी भी थी। वह भी मेरी ही उम्र की थी।
सभी लोग बैठे बात कर रहे थे, मेरा मन उसकी ओर लगा हुआ था। उसका भी मन शायद मेरी तरफ खिंचा हुआ था।
कुछ देर बाद सभी लोग कमरे से निकल कर बाहर चले गये। कमरे में केवल वह लड़की और मैं ही बचे थे। वह मेरे पास आकर बैठ गई और बातें करने लगी।
अचानक मेरे दिल में पता नहीं कहाँ से विचार आया और मैंने उसको खींच कर अपने घुटनों पर बैठा लिया, वह कुछ नही बोली और उसने आँखें बन्द कर ली। वह स्कर्ट व टी-शर्ट पहने हुए थी। मैंने उसके टी-शर्ट में हाथ डाल दिया और उसके उभारों को दबाने लगा। वह आँखें बन्द करके चुपचाप बैठी रही, मैं उसकी चूचियाँ दबाता रहा।
वह सिसकियाँ लेनी लगी। करीब १५ मिनट तक मैं उसकी चुचियाँ मसलता रहा, वह सिसकियाँ लेती रही। मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जो उसकी गांड में गड़ने लगा था। सिसकियाँ लेते हुए उसने कहा- नीचे कुछ गड़ रहा है !
मैने कहा कि यह मेरा लौड़ा है जो आपके अन्दर घुसना चाहता है !
उसने कहा- डाल दो, मै बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ !
यही मेरा हाल था, लेकिन डर भी लग रहा था कि कोई आ न जाये। यह सोच कर मैने कहा कि कुछ देर बाद हम लोग मिलते हैं। वह चली गई।
करीब दो घंटे बाद जब अंधेरा हो गया, तब वह फिर आई, मैं चुपके से उसको लेकर छत पर चला गया।
छत पर जाते ही उसको जमीन पर ही लिटाकर मैंने उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैटी उतार दी और अपना लण्ड उसकी बुर पर रख कर चोदने की कोशिश करने लगा। उसकी बुर बिल्कुल बद थी, चूत के होंठ आपस में चिपके हुए थे। वो शायद कभी चुदी नहीं थी।
मेरा लण्ड बुर में घुस नहीं रहा था और मै जबरदस्ती घुसेड़ने में लगा हुआ था, वह दर्द से कराहने लगी। मैं उसकी चूचियाँ दबा-दबा कर चोदने की कोशिश कर रहा था।
कुछ देर बाद मेरा लण्ड उसकी बुर को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। वो बड़ी जोर से चीखी, मगर मैंने उसके होंठ अपने हाथ से दबा दिए और उसकी आवाज़ घुट कर रह गई। मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा। हम लोग मदहोश हो गए और चुदाई करते रहे।
यह मेरी पहली चुदाई थी, अतः मै कितना मस्त था बता नहीं सकता। जब हम लोग निबट कर खड़े हुए तो देखा कि उसकी योनि से खून बह रहा है। खून मेरे लण्ड से भी बह रहा था क्योंकि मेरे लण्ड में नीचे की तरफ लगी हुई खाल फट गई थी और उसकी बुर की भी सील टूट गई थी। Antarvasna
मुझे जॉन ने अपने गांव में छुट्टी Hindi Porn Stories मनाने के लिये बुला लिया था। आज शाम को डिनर पर वो मुझे बता रहा था कि उसके पुराने मकान पर भूतों का निवास है, और वहां जाने पर वो उत्पात मचाते हैं। मैं हमेशा उसकी बातों पर हंसता था। मेरी हंसी सुन कर वो बड़ा निराश हो जाता था। उसका मन रखने के लिये मैंने उससे कह दिया कि अगले दिन अपन वहां चल कर देखेंगे।
दूसरे दिन शाम को वो चलने को तैयार था। मैं उसे टालने के चक्कर में था पर एक नहीं चली… हम दोनों डिनर करके कार में बैठ कर चल दिये। गांव की आबादी से थोड़ी ही दूर पर यह मकान था।
जॉन ने कार रोक दी और बताया कि यही मकान है। मैंने उसे समझाया कि देखो ये भूत वगैरह कुछ नहीं होता है… तो उसने मेरी तरफ़ देखा और कहा कि चलो वापस लौटते हैं… मैंने उसके दिल से वहम निकालने के लिये उसे कहा कि अब आये है तो अन्दर चल कर देख लेते हैं।
जॉन अब झुन्झला गया- अच्छा चलो… अपनी आंखों से देखोगे तो पता चलेगा.
मैंने उसकी बात हंसी में उड़ा दी।
हम दोनों उस मकान में दाखिल हो गये। तभी एक जवान लड़का दौड़ता हुआ आया और पूछा- साब… कौन हैं आप… ओह… जॉन साब…आप… आईये!
“सब यहां ठीक तो है…” जॉन ने पूछा।
“हां मालिक… मैं यहां की रोज सफ़ाई करता हूँ… अब मैं ही ध्यान रखता हूँ यहां का… आईये…!” लड़के ने कहा।
मैं हंसा- ये लड़का यहां रहता है… तेरा नौकर है ना?
“ह… आ… हां ये तो कालू है…”
हम अन्दर मकान में चले आये। पुराना मकान था… कालू और उसका परिवार वहां रहता था। उसने हमे बड़े आदर के साथ अन्दर बैठाया।
मैंने कहा- अरे भाई कालू मुझे मकान तो दिखाओ?
“हां साब… जब तक चाय बनती है, आपको मकान दिखाता हूँ!”
“और जॉन… तुम मुझे भूत दिखाओ…” मैंने जॉन का मजाक बनाया, कालू थोड़ा सहम गया।
हम दोनों कालू के पीछे चल दिये… वो एक एक कमरा बताता जा रहा था।
मैंने एक जगह रुक कर पूछा- इस कमरे में क्या है?
“इसे रहने दो मालिक… ये कमरा मनहूस है!”
“मैंने कहा था ना… अब चलो यहां से…” जॉन ने मुझे खींचा।
“क्या मनहूस है… खोलो इसे…”
“वहां चलते हैं…” कालू बात पलटता हुआ बोला।
“नहीं रुको… इसे खोलो…” मैंने ज़िद की…
“जी चाबी नहीं है इसकी…”
मुझे गुस्सा आ गया… मैंने दरवाजे पर एक लात मारी… दरवाजा खुल गया… वह एक सजा सजाया कमरा था।
“तो यह है शानदार कमरा… यानि भूतों वाला… तुम इसे मनहूस कहते हो?” मैंने व्यंग्य से कहा- जॉन को बेवकूफ़ बनाते हो?
तभी वहां दो जवान लड़कियाँ नजर आई.
मैंने उनसे पूछा,”आप लोग कौन हैं…?”
वो दोनों लड़कियाँ घबरा गई.
उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा- हम तो छुप कर यहां रहती है… ये कालू हमारी मदद करता है.
“तो जनाब ये है आपके भूत बंगले का राज़… जॉन निकालो इन्हें यहां से…”
“साब आप हमे मत निकालिये… हम आप को खुश कर देंगी…” एक मेरे पांव पर झुक गई।
उसके बड़े बड़े बोबे उसकी कमीज में से छलक पड़े।
मैं ललचा गया उसकी जवानी देख कर।
“जॉन खुश होना है क्या…” पर मैंने देखा जॉन वहां से शायद घबरा कर जा चुका था।
दूसरी ने विनती की- आप जॉन साब से कहेंगे तो वो मान जायेंगे… प्लीज़ साब…
उसने भी अपने स्तनों को थोड़ा सा झटका दिया।
मैंने पहली वाली से कहा- तुम्हारा नाम क्या है?
“जी मैं ईवा… ये जूही…!”
जूही मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई… दोनों लड़कियाँ अब मुझे सेक्सी लगने लगी थी… मुझे उनके कपड़ों में उनका बदन महसूस होने लगा था, मुझे एकाएक लगा कि कहीं जॉन की भूतों वाली बात सच तो नहीं है।
मैंने अपना संशय दूर करने के लिये पूछ ही लिया- अ…आप दोनों कौन हैं… सच बतायें…
“बता दें क्या… हम तो बस आपके लन्ड की प्यासी हैं… और मत पूछो… और हम यहाँ पर इसका धन्धा करती हैं…” ईवा ने मुझे उत्तेजित करते हुए कहा- आपको भी हम खुश कर देंगी… पर प्लीज़ हमें मत निकालना…!
“नहीं नहीं… मैं कुछ नहीं कहूँगा… आप झूठ बोल रही हैं !” मैं कुछ विस्मित होता हुआ बोला- आप जरूर कोई प्रेत-आत्मा हैं.
ईवा पीछे से मुझसे लिपटने लगी… उसके उरोज मेरी पीठ पर गड़ने लगे।
जूही मेरे सामने आ कर सट गई- आप ऐसे क्यों सोचते हैं… कालू कहता है इसलिये… वो तो हमारी खातिर करता है…” जूही ने कालू की पोल खोलते हुए कहा।
मुझे लगा ये दोनों सच बोल रही है… पर मुझे इससे क्या मतलब था… मुझे तो दो हसीनायें मिल रही थी।
मैंने जूही को अपने में समेटते हुए उसके स्तन दबा दिये.
“हाय… सीऽऽऽ और दबाओ मेरे राजा…” उसकी सिसकारी से मैं उत्तेजित हो गया.
ईवा ने पीछे से हाथ बढ़ा कर मेरे लन्ड को पकड़ लिया… मेरा लन्ड अभी ढीला ही था… पर स्पर्श पा कर उसने भी अब अंगड़ाई ली… और धीरे धीरे खड़ा होने लगा।
आगे से जूही के होंठ मेरे होंठो से सट गये और मेरे नीचे के होंठ को चूसने लगी।
“जो सर… आओ बिस्तर पर मजा करते हैं…”
मैं उनके साथ बिस्तर के पास आ गया.
ईवा और जूही ने मेरे कपड़े उतार दिये और फिर वो दोनों भी नंगी हो गई… कम उमर और भरपूर जवानी के उभार… कटाव… गहराईयाँ… मेरा लन्ड तन्ना उठा।
ईवा ने मेरी हालत देखी और मेरा लन्ड अपने मुँह में भर लिया, जूही ने मेरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया… ईवा कभी मेरी गोलियों को सहलाती फिर तेजी से लन्ड को मुठ मारती… मेरा सुपाड़ा उसके मुख में खेल रहा था। अब ईवा खड़ी हो चुकी थी…और तन कर मेरे आगे खड़ी हो गई… जैसे उसके बोबे मेरे हाथों से मसलने के लिये ललकार रहे थे… उसने अपनी चूत मेरे लन्ड से यूं अड़ा कर खड़ी हो गई कि मानो लन्ड घुसेड़ने की हिम्मत हो तो घुसेड़ लो।
मेरे कन्धे जूही ने अपने बोबे से चिपका रखे थे। ईवा के सामने तने हुए बोबे मुझसे सहे नहीं गये… मैंने तुरन्त ही हाथ बढा कर उसके बोबे दबा दिये और अपनी और उसे खींच लिया… उसने भी अपनी व्यापारिक अदाएँ दिखाते हुए चूत को भी झटका देते हुए लन्ड अपनी चूत में फंसा लिया।
मेरा सुपाड़ा चूत में जा चुका था… उसने भी जोर से सिसकारी भरी… और मेरे से चिपक गई।
“जो… बिस्तर पर लिटा कर मुझे चोद दो ना… हाय ऐसा लन्ड तो पहले नहीं घुसा कभी…हाय जूही…मुझे चुदवा दे रे…”
जूही भी उतावली हो उठी…”दीदी पहले मुझे चुदवा दो ना…” मैंने ईवा को दबोच कर बिस्तर पर पटक दिया और उस पर चढ़ गया। उसकी बुर पर लन्ड जमाया और दबा कर लन्ड घुसेड़ दिया।
“मैं मर गई… हाय्…” ईवा जोर से चीख उठी… सारे कमरे में उसकी चीख गूंज उठी… उसकी तड़पन देख कर मेरी वासना और भड़क उठी…
इतने में चीख सुन कर जॉन और कालू वहां पर आ गये। पर ये नजारा देख कर जॉन भी भड़क उठा… उसने भी फ़टाफ़ट अपने कपड़े उतार दिये और जूही को पकड़ लिया… कालू वहां से चला गया। अब जॉन ने अपना लन्ड जूही की चूत में घुसा डाला। अब ये दूसरी जबरदस्त चीख थी जिससे सारा घर ही गूंज उठा था…
मेरे धक्कों की रफ़्तार तेज हो गई थी… उसी के हिसाब से दोनों लड़कियाँ भी जोर से चीख चीख कर मजा ले रही थी… शायद उनकी चीखों में ही उनकी वासना और उत्तेजना थी.
मैं ईवा के बोबे दबा दबा कर चोद रहा था… बदले में वो भी अपने मस्त चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी। उसका कसा हुआ शरीर मुझे तेजी से चरम-सीमा की ओर ले जा रहा था.
ईवा भी प्रोफ़ेशनल ढंग से सिसकारियाँ भरी चीखें निकाल कर… और बहुत ही उत्तेजित तरीके अपनी चूत को घुमा घुमा कर चुदवा रही थी… सच में वो एक वेश्या ही थी जो मर्द को पूर्ण रूप से सन्तुष्ट करना जानती थी।
मेरे धक्के बढ़ते जा रहे थे… मैं चरमसीमा तक पहुंच चुका था…मैं और मजे लेना चाहता था… देर तक चोदना चाहता था… पर ईवा की चूत की अदाएँ… मरोड़ना और दीवारों को सिकोड़ना और चूत का लन्ड को पकड़ने की कला ने मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया।
मैं अन्त में शिखर पर पहुंच ही गया और मेरी पिचकारी छूट पड़ी। मेरी पिचकारी के साथ ही ईवा फिर से चीख उठी- हाय जो… तुमने मुझे चोद डाला… मैं गई…हाय… मेरी तो निकल पड़ी.
और हम दोनों ही आपस में जोर से चिपक गये… मेरा लन्ड जोर लगा कर वीर्य निकालने में लगा था… और ईवा अपने चूत सिकोड़ कर मेरे लन्ड से पूरा रस निकालने में लगी थी।
कुछ ही देर में हम शान्त हो गये थे.
जॉन और जूही अभी भी जबरदस्त चुदाई में लगे थे…
ईवा ने कहा- जो… बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ?
“हां… हां जरूर कहो…” मैंने प्यार से कहा।
“प्लीज़ मेरी चूत चूस लो…और मुझे झड़ा दो… मैं झड़ी नहीं हूँ…प्लीज़…” मैंने विस्मय से उसे देखा… वास्तव में मैं आज जल्दी झड़ गया था… पर ईवा की अदाओं से मुझे लगा था कि झड़ गई है.
“नहीं हम लोग कितनी ही बार नहीं झड़ते हैं… पर ग्राहक को संतुष्टि के लिये यह महसूस कराना पड़ता है कि आपसे हमें बहुत मजा आया है, हमें पैसे इसी बात के मिलते हैं…”
मैंने ईवा के दोनों पांव ऊंचे कर दिये और उसके दाने को चाटने लगा… वो उछल पड़ी और एक बार फिर मस्ती की चीखों से कमरा गूंज उठा। ये वास्तविक मस्ती की चीखें थी. बीच बीच में मेरी जीभ उसकी चूत को भी चोद रही थी। झड़ते झड़ते ईवा ने अपनी दोनों टांगों से मेरा चेहरा दबा लिया और झड़ने लगी… उसकी चूत अब लगा कि पानी छोड़ रही है… मैं उसका सारा गीलापन चाटने लगा।
अब वो शान्त लग रही थी। उसने मुझे प्यार से देखा और सोते सोते ही अपनी बांहें फ़ैला दी… मैं धीरे से उसकी बाहों में समा गया, उसके प्यार भरे आलिंगन ने मुझे नींद के आगोश में ले लिया। मैंने धीरे से आंखे खोली… तो देखा कि जूही और जॉन आपस में प्यार कर रहे थे और उनका दौर भी समाप्त हो चुका था.
हम सभी अब बिस्तर पर बैठे हुए थे… कालू कोफ़ी ले कर आ गया और पास टेबल रख दी और जॉन के पांव पर झुक गया… और रोने लगा- जॉन साब… मुझे माफ़ कर दो… ये दोनों गरीब लड़कियाँ है, इन दोनों को मैं शैतानों के चन्गुल से जान पर खेल कर बचा कर लाया हूँ… इन दोनों का दुनिया में कोई नहीं है… इन्हें मत निकालना… मैं चला जाता हूँ साब… मैंने आपसे झूठ बोला!
“जॉन यार, माफ़ कर दो इसे… इसने अपने लिये नहीं… इन दो गरीबों के लिये किया है…” मैं कॉफ़ी पीने लगा।
“पर यार मैं इसके कारण पिछले एक साल से किराये के मकान में रह रहा हूँ… कोई बात है ये?”
ईवा और जूही दोनों उठी और और एक पोटली उठा लाई… और हमारे सामने रख दी।
“बाबू जी…ये हमारी शरीर की कमाई है… चोरी की नहीं है… ये आप रख लीजिये और कालू को हम अपने साथ सवेरे ले जायेंगे… जानते हो साब! कालू ने हमें हाथ तक नहीं लगाया है… यह तो हमारे भाई की तरह है… हम रोते हैं तो ये रोता है… बस हमें पुलिस में मत देना…”
उन दोनों ने कालू की बांह पकड़ी और कमरे से बाहर चली गई।
“ले भाई जॉन… तेरी प्रोबलम भूतों वाली तो समाप्त हो गई… बस…”
मन में बेचैनी लिये मैं जाने के लिये उठ खड़ा हुआ… जॉन पोटली को एकटक देख रहा था… एकाएक उसने पोटली ली और कालू के पास नीचे आया.
ईवा और जूही का चेहरा आंसुओं से तर था… पर कालू के चेहरे पर मर्दानापन था- साब ये तो मेरी कुछ नहीं लगती… पर आज मुझे इन्होंने भाई का दर्जा दे दिया… ये अब मेरे साथ ही रहेंगी!
“मेरा किराया दो सौ रुपये हर महीने का निकाल दो… और हर महीने देते रहना… तुम्हारा कमरा वही है… भूतों वाला…!” जॉन ने अपना फ़ैसला सुनाया।
कालू सुन कर देखता रह गया… और जॉन के कदमों में झुक गया।
ईवा और जूही प्यार से हमसे लिपट पड़ी। मैंने जॉन का मन बदलता हुआ देखा और अपने भगवान को धन्यवाद दिया… उनकी मजबूरी मेरे मन को छू गई… जाने मेरी आंखों से आंसू कब निकल पड़े… Hindi Porn Stories
दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।
एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।
रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।
मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!
और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।
सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।
मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!
फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।
मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!
पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!
मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।
फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!
मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!
उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!
बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!
फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!
एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires
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