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कमलिनी का Antarvasna महीना हुए चार दिन हो चुके थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि कमलिनी अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हलके से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था, मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और कमलिनी का नम्बर डायल कर दिया। घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !
मैंने पूछा- आज रात को आओगी?
तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।
रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड-कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी। मैंने कॉलबैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !
तो बोली- अभी आ रही हूँ ! ५ मिनट बाद कमलिनी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया कि छोरी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।
दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। अपनी झांटें साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा। उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया।
जमकर चोदने के बाद जब मैंने उसकी चूत में डिस्चार्ज किया तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।
अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया। मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है।
मैंने कहा- चली जाओ !
तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।
मैंने कहा- ठीक है।
दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोलीं- चाभी लेकर आ रही हूँ।
उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गई, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियां कॉलेज गई थीं। अन्दर आकर बोलीं- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।
रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी।
मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ, फ़िर खाना खाऊँगा।
भाभी वहीं कुर्सी पर बैठ गईं। मैंने उनको गरम करने के लिए जानबूझकर वहीं अपनी शर्ट उतारी और फ़िर बनियान भी उतार दी। भाभी शर्म के मारे इधर उधर ना देखें इसलिए उनसे कुछ ना कुछ बात करता रहा। मैंने कहा- दोपहर में नहा लेने से शरीर में ताजगी आ जाती है और मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अंडरवियर में से मेरा तन्नाया हुआ लंड साफ़ नज़र आ रहा था। मैंने अपना तौलिया कमर पर लपेटा और अंडरवियर उतारते उतारते बोला- भाभी जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूं?
बोलीं- कहिये !
मैंने कहा- ऐसा लगता है जैसे भगवान् जोड़ियाँ बनाते समय गलती कर गया है, मैं आप जैसी पत्नी डिजर्व करता था और रेखा को डॉक्टर साहब की पत्नी होना चाहिए था। अगर ऐसी जोड़ियाँ होतीं तो मेरी ज़िन्दगी जन्नत से कम न होती।
भाभी उठीं और बोलीं- काश ऐसा होता तो मैं हर पल तुम्हारी बाहों में ही गुजारती।
इतना सुनते ही मैंने उनका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी आंखों से इस तरह लगाया कि मैं धन्य हो गया। मैं एक कदम उनकी ओर बढ़ा और अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने करीब आने का इशारा किया, वो मेरे सीने लग गईं, मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा टांगों के पास ले जाकर उनको अपनी गोद में उठा लिया, मेरे कसरती बदन को निहारते हुए बोलीं- उतार दो दीपक ! मैं बहुत भारी हूँ !
मैंने कहा- भाभी मेरे प्यार के सामने आपका भार कुछ भी नहीं !
मैं उनको रेखा के बेडरूम में ले आया और पलंग पर लिटाकर उनसे लिपट गया। वो मेरे से लिपटी हुई छुई मुई हुई जा रहीं थीं। एक एक करके उनके सारे कपड़े मैंने उतार दिए और उनके होठों पर अपने होंठ रखकर एक हाथ से उनके मम्मे और दूसरे से उनकी चूत सहलाने लगा। थोडी देर में जब उनकी चूत गीली हो गई तो मैं उठा और अलमारी से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा तो भाभी बोलीं- दीपक जी इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं २० साल पहले नसबंदी करा चुकी हूँ।
मैं वापस पलंग पर आया, उनकी टाँगे फैला कर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुंह पर रखा और पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर कर दिया।
भाभी बोलीं- दीपक जी, एक बात पूछूं?
मैंने कहा- पूछिए !
तो बोलीं- तीन साल बाद आपका लंड किसी की चूत में जा रहा है तो कैसा लग रहा है?
मैंने कहा- आपको यह कैसे पता है?
तो बोलीं- रेखा ने मुझे बताया था कि मेरी इच्छा नहीं होती।
इस बातचीत के साथ साथ मेरा लंड अपना काम कर रहा था। उस दिन १ बजे से ४ बजे तक भाभी को दो बार चोदा।
मैंने पूछा- भाभी, सच बताना ! तुम्हारा देवर चोदने में कैसा है?
तो बोलीं- टचवुड। बहुत अच्छा !
मैंने कहा- अच्छा भाभी, एक बात और बताओ कभी गांड मराई है?
बोली- नहीं कभी नहीं ! शुरू शुरू में एक दो बार डॉक्टर साहब ने मारनी चाही थी लेकिन उनका लंड गांड में घुसा ही नहीं।
मैंने कहा- भाभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा, मराओगी ?
बोलीं- हाँ मेरे राजा जरूर मराउंगी।
फ़िर भाभी ने रोटियां सेंकी, हम दोनों ने खाना खाया और भाभी अपने घर चली गईं।
बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए… Antarvasna
सभी अंतर्वासना पढ़ने वाले पाठकों Sex Stories को और समूचे अंतर्वासना स्टाफ को नमस्कार ! अंतर्वासना से ही लोगों की बिस्तर, बाथरूम की बातें बाहर आती हैं। मैं एक-एक चुदाई के बारे पढ़ पढ़ कर मज़े लेती हूँ और आज मैं अपनी जिंदगी की एक ज़बरदस्त हकीकत अथवा अपनी मनचली जवानी के जोश में मैं होश खो बैठी थी, यह वाकया मैं मरते दम तक नहीं भूल पाऊँगी।
खैर मेरा नाम रेखा शर्मा है, मैं अठाईस साल की महिला हूँ, भगवान् ने भी गूंथ-गूंथ कर जवानी मेरे अन्दर भर दी थी और ऊपर से दिलफेंक मिजाज़ दिया, कामुक चालू किस्म का शबाब दिया है। सोलहवें साल में ही मेरा मन डोलने लगा था, मेरी उभरती हुई छाती जब मैं खुद भी आईने में देखती तो शरमा जाती, जब बाहर निकलती तो लड़कों की निगाहें वहाँ अटकती देखकर मेरे जवान होने पर मोहर लगा देतीं, छमक-छल्लो, नशे की बोतल सुन मैं कामुक हो जाती।
आखिर मैं एक लड़के को अपना दिल दे ही बैठी, पब्लिक प्लेस में मिलते हुए बात सिनेमा तक पहुंची, वहाँ वो मेरी जवानी को दिल खोल कर मसलता, क्रीम की तरह मेरी चिकनी जांघों पर हाथ लगते तो मैं सिकुड़ जाती।
सिनेमा से बात उसके घर तक पहुंची। एक दिन वो अकेला था और मुझे अपने बेडरूम तक ले गया वहां में बहक गई और अपनी जवानी लुटा बैठी। उसके बाद चुदाई का जो चस्का लगा, जो लगा कि बस फिर क्या बताऊँ ! कई लड़कों के साथ मेरा चक्कर चलने लगा और अपनी गूंथी जवानी में लुटाती रही, दबवाती रही।फिर एक दिन मेरी शादी एक बहुत बड़े घर में हुई। मेरे पति का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बहुत बड़ा कारोबार था। मैंने भी एम.कॉम कर रखी थी, जल्दी ही मैंने अपने पति के साथ उनका बिज़नस सम्भाल लिया लेकिन वो ज्यादातर घर से बाहर रहते, देश से बाहर भी जाना पड़ता, बिज़नस तो संभाल लिया लेकिन यह जवानी कैसे संभालती? चुदाई के बिना रहना मेरे लिए मुश्किल था, मर्द के बिना मैं नहीं रह पाती, शादी के बाद से वैसे ही सिर्फ एक लौड़े पर टिकी हुई थी। वो भी मुझे कभी संतुष्ट करता, कभी नहीं करता ! फिर भी ऊँगली, बैंगन से सार लेती(काम चला लेती) मेरे पति वैसे भी मुझे से बड़े उम्र के हैं। मैं एक मध्यम परिवार से उठ कर अमीर घर में आई थी।
एक दिन मैं अपने ऑफिस गई, वहां मेरी सहेली का फ़ोन आया, वो मुझे मिलने आ रही थी।
मैंने उसे कहा- ऑफिस ही आ जाओ !
मैंने बहुत आलीशान ऑफिस बनवा लिया था, पीछे एक आराम-कक्ष और एक छोटी सी लॉबी !
वो बोली- कोमल। ठण्डी बीयर मंगवा यार ! बहुत मन है !
मैंने अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा- बिना किसी को दिखाए बीयर और कुछ खाने को लेकर आओ !
हम दोनों ने बैठ कर बीयर की चुस्कियाँ ली और फिरफिर उसको कॉल आई, उसको जाना पड़ा। मुझे सरूर सा हो चुका था। मैंने अकेले बैठने की बजाये उसको अपने सेक्रेटरी विनोद को अन्दर बुला लिया और अपने साथ बैठाया, उसको बीयर पिलाई और उसके साथ थोड़ा खुलने सी लगी।
वो बहुत मर्दानगी वाला मर्द दिखता है और अन्दर से मैं उस पर फ़िदा थी। आज मौका था, मैं उठी और उसकी गोद में बैठ गई। वो एक दम चौंक सा गया लेकिन मैं कुछ और सोच चुकी थी। उसे भी समझते देर न लगी। उसने मुझे जकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठों में डाल दिए। उसने भी अपना हाथ मेरे टॉप में घुसा दिया और मेरे चुच्चे दबाने लगा। उसका लौड़ा खड़ा हो चुका था, उसकी चुभन का एहसास होने लगा था मुझे !
उसने कहा- मैडम, थोड़ी बीयर और हो जाए ! मैं मंगवाता हूँ !
मैंने कहा- इस हालत में छोड़ कर ?
नहीं मैडम ! बाहर संजू है न ! अपना ही पट्ठा है, बहुत दमदार है वो भी !
मैं तो वासना की भूखी थी, नशे में थी ! हाँ कह दी ! उसी हालत में उसे अन्दर बुला लिया। मेरे निरावृत वक्ष देख उसकी आंखें चमक उठी।
जा चार चिल्ड-बीयर ले कर आजा !
उसके जाते ही उसने मेरी जींस भी उतार दी, खुलकर हाथ मेरी जांघों पर फिराने लगा।
वाह क्या माल हो !
उसने मुझे वहाँ से अपनी मजबूत बाँहों में उठा मेरे रेस्टरूम में बिस्तर पर फेंक दिया और मेरे ऊपर आते हुए उसने अपना मोटा लंबा लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया, मैंने हंसकर मुँह में डाल लिया। एक हाथ से वो मेरी चूत मसल रहा था और उधर लौड़ा चुसवा रहा था, उसने टाँगे खोल अपना लौड़ा चूत में डाल दिया, मुझे इतना मजा आया जब उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत के अन्दर बाहर होने लगा। कितने दिन बाद मर्द का सुख मिल रहा था।
इतने में संजू वहाँ आ पहुंचा, उसने बीयर मेज़ पर रख दी, वहीं खड़ा होकर चुदाई देखने लगा, साथ में अपना लौड़ा भी मसल रहा था।
मैंने वासना और नशे की झोंक में उसको अपने पास बुला लिया बीयर का मग मांगने के बहाने ! जैसे ही पास आया मैंने उसकी जिप खोल दी और उसका लौड़ा अब मेरी आँखों के सामने था। बहुत बढ़िया लौड़ा था उसका ! मैं घोड़ी बनी हुई थी, उसने अपनी पैंट उतार दी, मेरे सामने घुटनों के बल बैठ अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रख दिया। मैंने झट से मुँह में भर लिया। मैं नशे में पागल थी।
इसी बीच वो उठा और बीयर का मग मेरे मुँह को लगा दिया, मैंने भी पूरा खींच लिया।
अब वो मेरे बाल पकड़कर लौड़ा चुसवाने लगा- साली, कमीनी, रांड चूस इसको !
बहनचोद ! साले ! चूस रही हूँ कुत्ते !
पीछे से झटके तेज़ हो गए और आगे से लौड़ा स्वाद था। अब मुझे नशा ज्यादा हो गया। विनोद ने अपना सारा माल मेरी चूत में उतार दिया था, वह हांफते हुए बगल में गिर गया, संजू पीछे गया और चूत मारने लगा, साथ साथ ऊँगली गांड के अन्दर बाहर करने लगा। उसने काफी थूक लगाया और गांड के छेद पर अपना लौड़ा रखकर झटका दिया। मैं पहले से तैयार थी उसके इस वार के लिए- अह अह थोड़ा प्यार से करो ! गांड है राजा !
उसने जल्दी ही पूरा अन्दर डाल दिया और मेरी गांड मारने लगा।
विनोद ने अपना लौड़ा फिर से मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उसको खड़ा करने के लिए हर अदा दिखा रही थी।
संजू तेज़ और तेज़ होता गया, गांड मार रहा था, कसी हुई थी, जल्दी उसकी पिचकारियाँ छूटने लगीं।
वाह मेरे लाला ! बहुत बढ़िया गांड मारता है तू !
दोनों मेरे ऊपर लुढ़क गिरे थे, दोनों के लौड़े हाथ में ले लिए, एक पक्की रांड की तरह उनके बीच नंगी लेटी हुई थी।
एक एक ग्लास बियर डकार कर बोला- मजा आया?
मैंने कहा- पूरा नहीं !
लेकिन फिर भी बोला- साली तू मालकिन नहीं आज रांड है अपने स्टाफ के मर्दों की !
समय देखा तो काफी हो चुका था, मैंने कहा- सालो, तुम दोनों से में अच्छी तरह ठंडी नहीं हो पाई !
मैडम फिर रुक जाओ, बाकी सबको भेज देते हैं ! साब कौन सा इंडिया में हैं !
मैडम आपके लिए दो और लौड़े तैयार हैं ! पीछे देखो !! पीछे कौन खड़ा है?
और मैंने क्या देखा ? फिर पूरी रात क्या हुआ ?
जानने के लिए इसका अगला भाग ज़रूर पढ़ना ! अभी आगे काफी कुछ है ! Sex Stories
दोस्तो, यह बात उस समय की है जब मेरी पोस्टिंग कोटा में थी और विभाग में मैं नया था।
वहाँ मैं जवाहर नगर में किराए से रहता था। इत्तेफाक से दोस्तों वहीं पास में हमारे विभाग के एक अधिकारी का घर भी था जो दूसरे कार्यालय के अधिकारी थे।
मुझे पता नहीं था.. फिर भी मैं आते-जाते उनकी मैडम को देखा करता था।
वो देखने में तो कुछ खास नहीं थी.. फिर भी पता नहीं क्यों.. मेरी नज़र उनको ताकती रहती थी, क्योंकि उनका फिगर ही कुछ ही ऐसा था।
देखने में तो 34-28-36 के भरे-भरे से आम के जैसे चूचे थे.. जिन्हें देख कर मेरा मन करता था कि अभी जाकर सारा का सारा दूध निचोड़ लूँ और गांड तो ऐसे मटका कर चलती थी कि मुर्दों के लंड भी खड़े हो जाएँ।
इस बात को वो भी भांप चुकी थी कि मैं उसको देखता हूँ।
ऐसा करते-करते 5-6 महीने बीत चुके थे। गर्मी के दिनों की बात थी दोस्तों.. मेरी छुट्टी थी तो मैं ऑफिस नहीं गया था।
मैं अपने कमरे के बाहर कुर्सी लगा कर बैठा था.. तभी मैंने उनकी आवाज़ सुनी.. वो अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी।
थोड़ी देर बाद समझ आया कि वो सर से बात कर रही थी। बात पूरी होने के बाद उन्होंने मुझे देखा तो मुझे बुलाया।
मैं उनके पास गया तो वो मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा रही थी।
उन्होंने मुझसे मेरा परिचय पूछा.. तो अपने और अपनी जॉब बारे में मैंने उन्हें सब बताया।
फिर वो मुझसे बोली- हमारे बारे में जानते हो?
मैंने मना किया- नहीं…
उन्होंने मुझे बताया कि उनके पति आपके विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर हैं।
तो मैं तो बुरी तरह से डर गया और सोचा कि अब तो मेरी नौकरी गई, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
उन्होंने मुझे बताया कि उनका कूलर चलते-चलते ख़राब हो गया और उसे ठीक करने कोई नहीं आ रहा, क्योंकि उनकी लाइन पार्टी बिजी थी।
मैंने मन में सोचा कि आज अच्छा मौका है.. इसे मत जाने दे।
मैं बोला- मैम मैं देख लूँ कूलर को?
वो बोली- हाँ.. हाँ.. क्यों नहीं।
मैंने कूलर को अन्दर से खोल कर देखा तो उसके मेन कनेक्शन में से एक वायर निकला हुआ था.. जो मैंने जोड़ दिया और स्विच ऑन किया तो उनका कूलर चल गया।
वो बड़ी खुश हुई.. उन्होंने मुझे बिठाया और चाय बनाने चली गई।
बाद में उसने सर को भी बोल दिया कि कूलर ठीक हो गया।
जब हम चाय पी रहे थे तो मैडम मेरी ओर झुक कर बैठी हुई थी.. जिसके कारण मुझे उनके बोबे दिखाई दे रहे थे।
उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।
उस समय मैंने लोअर पहन रखा था जिसके कारण वो स्पष्ट दिख रहा था। मैंने बहुत छुपाने की कोशिश की.. मगर मैडम ने इसे भांप लिया था और मुझसे बोली- तुम मुझे क्यों देखते हो?
मैं बोला- ऐसे ही।
वो फिर मेरे पास आकर बैठी और बोली- मैं सब समझती हूँ और जानती हूँ कि इस समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है।
मैं चुप रहा।
वो आगे बोली- अंश.. आपके सर इस काबिल नहीं है जो मुझे तन का सुख दे सकें क्योंकि शादी के बाद एक एक्सीडेंट की वजह से उनकी सेक्स करने की क्षमता कम हो गई और मैं इसके लिए तरसती रहती हूँ.. क्या तुम मेरी ये इच्छा पूरी करोगे?
मैं बोला- मैडम यह सच है कि मैं आपको देखता हूँ लेकिन मैं आपके साथ ऐसा नहीं कर सकता।
मगर उन्होंने फिर दोबारा अपनी चाहत को दोहराते हुए मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।
फिर मैंने भी उनकी व्यथा को समझते हुए अपने आपको उनके आगे सरेंडर कर दिया।
मैंने भी देर न करते हुए उनके लबों को अपने लबों के आगोश में ले लिया और उनके होंठों का रसपान करने लगा।
वो भी मेरे लंड को लोअर के ऊपर से ही मसल रही थी और मैं उन्हें चूमते हुए उनके बोबों को बड़ी बेदर्दी से एक-एक करके मसल रहा था।
मैडम ने गाउन पहना हुआ था तो मैंने गाउन के अन्दर हाथ डाल दिया।
चूंकि उन्होंने गर्मी के कारण अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ था, तो मैं उनके बोबों की घुंडियों को मसलने लगा।
मेरे ऐसा करने से वो बेचैन हो उठी और मेरे लंड को लोअर से बाहर निकालकर अपने रसीले होंठों के बीच कैद करके उसे बड़े ही प्यार से लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा।
वो मेरे लंड को जिस तरीके से चूस रही थी, मुझे लगा कि वो कई दिनों की प्यासी हो।
फिर अंत में मेरे लंड ने उनके मुँह में ही अपना ‘सोमरस’ छोड़ दिया.. जिसे वो बड़े प्यार से गटक गई और चाट-चाट कर मेरे पूरे लंड साफ़ कर दिया।
फिर मैंने उसका गाउन उतारा तो अन्दर से वो पूरी नंगी थी।
जिन बोबों को मैं रोज़ देखने की तमन्ना रखता था, आज वो मेरे सामने थे।
मैंने बड़े ही प्यार से उनके एक निप्पल अपने दांतों से काटा तो उनके मुँह से एक ‘सी..सी..’ करते हुए एक सीत्कार निकली।
अब मैं उनके बोबों को दबाते.. मसलते हुए एक-एक करके उनको चूसने लगा और वो अपने मुँह से मादक सीत्कार निकालने लगी।
‘आह.. आह.. उह्ह.. उह्ह.. सी.. आह.. मर गई..’
दोस्तों जब मैं उनके बोबों को मसलते हुए चूस रहा था तो वो अपने ही दातों से अपने ही होंठों को काट रही थी और मेरे बालों में अपनी ऊँगलियाँ फेर रही थी।
उनके मस्त बोबों को चूसते हुए मैं अपने एक हाथ को उनके बदन को सहलाते हुए उनकी चूत के ऊपर ले जाकर चूत के दाने को मसलने लगा।
मेरे ऐसा करने से वो और भी मस्ती में चूर होकर ‘उह्ह उह्ह आह आह हाय मैं मर गई’ जैसी सीत्कारें निकालने लगी।
मैडम की चूत एकदम गीली होकर धीरे-धीरे अपनी चूत से पानी छोड़ रही थी और वो जल बिन मछली की भाँति तड़प रही थी और मस्ती में कह रही थी- मेरी जान.. इसी चीज़ का तो मुझे बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था.. इस निगोड़ी चूत ने बड़ा परेशान कर रखा था।
फिर मैं धीरे से नीचे गया और उनकी चूत की पंखुड़ियों को अपने होंठों से चाटने व काटने लगा.. तो जैसे वो तो पागल हो गई।
मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदते हुए चाटने लगा और मैडम अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूत को इस तरह चटवा रही थी कि जैसे मेरे मुँह में समां जाएगी।
मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था, उनको जैसे चटवाने का शौक था.. तो उसी तरह मुझे चाटने का शौक था।
फिर मैडम बोली- अंश मेरे भोसड़े में अपना लंड डाल दो.. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा…
लेकिन मैं अपनी मस्ती में ही चूत चाटने में लगा हुआ था। मैडम तो जैसे पागल हो रही थी.. अपनी मस्ती के नशे में चूर होकर वो मेरे बालों को नोचते हुए अपनी चूत को मेरे मुँह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी।
उसकी स्थिति को समझते हुए फिर मैंने अपने लंड को उसकी मुनिया(चूत) के मुँह पर लगाया और एक धीरे से धक्का लगाया।
मैडम की चूत इतनी गीली थी कि ‘गच्च’ की आवाज़ के साथ मेरा लवड़ा मैडम की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया।
फिर धीरे से मैंने अपने लंड को बाहर खींचा और वापस मैडम की चूत में पेल दिया।
फिर मैं मैडम की चूत में अन्दर-बाहर.. अन्दर-बाहर.. लंड पेलने लगा और मैडम भी हर धक्के का जवाब अपनी कमर को उचकाते हुए दे रही थी।
मैं अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ कर उसको चोद रहा था।
मैडम मस्ती के नशे में चूर होकर कह रही थी- चोद… मेरे राजा… उम्ह्ह उम्ह्ह.. आह.. आह… हाय… चोद… मेरे राजा.. आज मेरी चूत की खुजली मिटा दे.. मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.. बहुत परेशान कर रखा है इस निगोड़ी ने.. आज के बाद मैं सिर्फ तुमसे ही चुदवाऊँगी.. घुसा दे अपना पूरा लंड मेरे राजा.. आह.. आह .. हाय मेरी जान।
हर एक धक्के पर गीली चूत के कारण ‘फच्च.. फच्च.. फच्च..’ की आवाज़ आ रही थी, जिसकी वजह से में भी पूरे जोश के साथ मैडम की चुदाई कर रहा था।
उसको चोदते हुए मुझे 7-8 मिनट हो गए थे। अब मुझे भी लगने लगा था कि मैं अब झड़ने वाला हूँ।
चुदाई करते हुए मैंने मैडम से कहा- मेरा पानी छूटने वाला है.. तो अन्दर ही छोड़ दूँ या बाहर…
मैडम बोली- अन्दर ही छोड़ दो.. मेरे कोई बच्चा नहीं है।
फिर मैंने देर न करते हुए अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और मैडम के दोनों पैरों को उठाते हुए अपने कन्धों पर रखा और वापस अपने लंड को उसकी चूत में पेल दिया और जोर-जोर से उसकी चूत चोदने लगा।
जैसे ही मैडम ने कहा- मेरा पानी छूटने वाला है।
उसी समय मेरा लंड भी जवाब देने वाला था तब मैंने मैडम के पैरों को पूरी तरह से उठाते हुए उनके पैरों के घुटनों को उन्हीं के कन्धों से मिला दिया।
मेरे ऐसा करने से मैडम की चूत थोड़ा और ऊपर की ओर उठ गई और मैं जोर-जोर से उसकी चूत को चोदने लगा।
फिर करीब 8-10 धक्कों के बाद हम दोनों एक साथ झड़ने लगे और मेरे लंड की एक-एक बूंद उनकी चूत में उतर गई।
उस समय मैडम ने मुझे अपने शरीर से पूरी तरह चिपका लिया।
हम दोनों के शरीर पसीने से लथ-पथ हो चुके थे।
जब हम नार्मल हुए तो मैडम ने मुझे धन्यवाद दिया और मुझसे बोली- मैं आजीवन तुम्हें नहीं भूलूंगी।
उसके बाद हम दोनों साथ-साथ नहाए और नहाते हुए एक और चुदाई का राउंड लिया।
नहाने के बाद मैडम ने मुझे बिठाया और अपने हाथों से खाना बनाया और फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया।
फिर मैडम मुझे 2000 रूपये देते हुए कहा- ये आपका इनाम और फिर जरुरत पड़े तो मांग लेना.. आज से मैं अब तुम्हारी हुई।
मैंने वो पैसे लेने से इंकार कर दिया और मैडम से बोला- मैं ये काम पैसे के लिए नहीं करता बल्कि मुझे चुदाई करने का शौक है.. इसलिए करता हूँ। आप अपने पैसे अपने पास रखिए.. हाँ.. अगर कभी मुझे इनकी जरुरत पड़ी तो आप से जरुर मांग लूँगा।
फिर उसके बाद मैं चला गया। फिर मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं उनकी चूत की भूख मिटाता।
फिर एक दिन उन्होंने मुझे अपने गर्भ से होने की बात बताई तो मैं भी बहुत खुश हुआ।
बाद में मैडम ने सारी बात सर को बताई तो उन्होंने भी परिस्थिति से समझौता करते हुए मुझे बुलाकर मेरा धन्यवाद करते हुए कहा- जीवन में जब कभी भी हमारी जरुरत पड़े तो निसंकोच आ जाना।
उसके बाद तो मेरी जैसे लाटरी निकल गई।
मैं लुधियाना से उषा, 33 Hindi Porn Stories साल, 36-32-40, एक बार फ़िर अपनी नई कहानी के साथ !
यह बात तब की है जब मैं अपनी शादी के करीब छः महीने बाद अपनी छोटी मौसी के घर कुछ दिन रहने के लिए गई थी। मेरे पति को किसी ज़रूरी बिज़नस के सिलसिले में सिंगापुर जाना पड़ गया था और वो करीब एक-डेढ़ महीने बाद आने वाले थे। पीछे से मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई और वहां से एक हफ्ते बाद ही मेरी छोटी मौसी मुझे लेने आ गई कि चल संजू कुछ दिन हमारे साथ भी रह जा ! मैं भी फ्री थी सोचा चलो मौसी के घर ही चलते हैं।
जब हम मौसी के घर पहुंचे तो मेरा स्वागत मौसी के बेटे 18 वर्षीय बिट्टू और उसकी छोटी बहन १५ साल की सुंदर सी कोमल ने किया। मैं भी सबको बड़ी गर्मजोशी से मिली, शाम को मौसा जी आये उन्होंने भी बड़ा प्यार दिया।
3 दिन बाद मौसी कपड़े धो रही थी तो उन्होंने कहा- अरे संजू ज़रा यह कपड़े छत पर सुखा आ !
मैं भी खाली बैठी थी, सोचा कि चलो थोड़ा काम ही कर लूं ! मैंने कपड़ों वाली बाल्टी उठाई और सुखाने के लिये छत पर चली गई। छत पर बिट्टू बैठा पढ़ रहा था। मैं बाल्टी से कपड़े निकाल निकाल कर लोहे की तार पर डाल रही थी। अचानक मुझे अहसास हुआ कि जैसे कोई मुझे बहुत घूर घूर के देख रहा हो।
मैंने देखा तो ये बिट्टू ही था। जब भी मैं कपड़े उठाने के लिए झुकती तो बिट्टू मेरे भरे भरे गुन्दाज स्तनों को बड़े धयान से देखता।
कपड़े सुखाते सुखाते मैंने बिट्टू से इधर उधर की बातें शुरू की तो वो भी पढ़ाई छोड़ के मुझ से दिलचस्पी लेकर बातें करने लगा। जब कपड़े सूखने के लिए डाल दिए तो मैं जानबूझ कर बिट्टू के पास जा कर बैठ गई। मैंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखा था इसलिए मेरी वक्ष-रेखा स्पष्ट रूप से दिख रही थी और बिट्टू की आँखें मेरे स्तनों पे गड़ी हुई थी। मैं भी शर्म न करते हुए उसके सामने ही चटाई पर उलटी लेट गई और उससे बातें करने लगी।
अब मेरे स्तनों को वो बड़े आराम से देख सकता था और मैं भी देख रही थी कि उसकी आँखें मेरे बूब्स से नहीं हट रही थी। फिर मैंने एक और शरारत की और बोली,” बिट्टू, तुम्हारा दिल १ मिनट में कितनी बार धड़कता है?”
वो बोला- 72 बार !
“पर मुझे लगता है जैसे मेरा दिल ज्यादा धड़कता है, कहीं मुझे हार्ट-अटैक तो नहीं आ जायेगा !” मैं बोली।
“अरे दीदी पागल हो गई हो क्या? इतनी छोटी सी उम्र में भी कहीं हार्ट-अटैक हो सकता है !” उसने जवाब दिया।
“अच्छा चलो, मुझे अपनी दिल की धड़कन सुनाओ !”
यह कह कर मैं अपना कान उसके सीने पर लगा कर उसके दिल की धड़कन सुनने का नाटक करने लगी।
एक मिनट बाद मैंने सर हटा कर कहा,” बिलकुल ठीक ! पूरे ७२ बार ! अब मेरी सुनो !”
जबकि मुझे उसके दिल की धड़कन बढ़ी हुई लगी थी। मैंने जानबूझ कर उसका सर पकड़ कर अपने सीने पर इस तरह से रखा कि उसके होंठ मेरे स्तन-रेखा को छूते रहें।
उसने कान मेरे सीने से लगा तो लिया पर मैं जानती थी कि उसकी हालत खराब हो रही थी।
उसके बाद सारा दिन कोई ख़ास बात नहीं हुई, पर बिट्टू बात-बे-बात मेरे आस पास ही मंडराता रहा।
रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले दूध लेकर जब मौसी ऊपर बिट्टू के कमरे में जाने लगी तो मैंने उन्हें कहा,”मौसी ! लाइए, दूध मैं ले जाती हूँ और हाँ मेरा गिलास भी इसके साथ ही रख दीजिये, दूध पीकर मैं भी कोमल के साथ ही सो जाउंगी।” “ओ के बेटा ! ये लो, और गुड नाईट !”
“गुड नाईट !” कह कर तीन गिलास दूध लेकर मैं ऊपर चौबारे में बिट्टू और कोमल के कमरे में चली गई। ऊपर कमरे में बैठे दोनों अपने अपने बिस्तर पर बैठे पढ़ रहे थे। मैंने जाकर ऊंची आवाज़ में कहा,”दूध पियो भाई दूध पियो !”
दोनों ने मुस्कुरा कर मेरी और देखा फिर हमने इकट्ठे बैठ कर दूध पिया और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करके लाईट बंद कर दी और सोने लगे। पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। अभी शादी को सिर्फ छः महीने ही हुए थे और पति महीने-डेढ़-महीने के लिए बाहर चले गए थे, अभी तो मेरा दिल भी नहीं भरा था।
मैं लेटी लेटी सोच रही थी और मेरे साथ लेटी कोमल तो गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि बिट्टू उठ कर बाथरूम गया है और खिड़की से अन्दर आ रही चाँद की रौशनी उसके सारे बिस्तर पर पड़ रही थी। मैं चुपके से उठी और जाकर उसके बिस्तर पर लेट गई। जब बिट्टू आया तो मुझे वहां देखकर बोला,” अरे दीदी ! आप यहाँ? कोमल के पास नींद नहीं आई क्या?”
मैं बोली,”नहीं, पर मुझे चांदनी में सोना अच्छा लगता है।”
तो वो बोला,”ठीक है ! आप यहाँ सो जाओ, मैं वहां सो जाता हूँ।”
मैंने तभी पलट कर कहा,”अरे नहीं ! तुम भी यहीं आ जाओ मेरे पास !”
तो बिट्टू भी उसी बेड पर मेरे साथ लेट गया पर कुछ फासला बना कर !
मैंने जो नाईटी पहन रखी थी उसका गला बहुत गहरा था और नाईटी के नीचे मैंने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहन रखी थी। गहरे गले के कारण मेरे स्तनों का ज्यादातर हिस्सा दिख रहा था, यहाँ तक कि मेरी आधी ब्रा भी गले से बाहर झांक रही थी और मैं जानती थी कि चांदनी में नहाया हुआ मेरा बदन बिट्टू को अपनी तरफ खींच रहा था।
थोड़ी देर हम दोनों फुसफुसा कर इधर उधर की बातें करते रहे ताकि कहीं कोमल की नींद न खुल जाये। फिर मैंने जान बूझ कर बहाना बनाया,”बड़ी गर्मी सी लग रही है ! क्या तुम्हें नहीं लग रही?”
“नहीं दीदी, मुझे तो मौसम ठीक लग रहा है।” बिट्टू बोला।
पर मैं तो बहाना बना रही थी इसलिए मैं उठ कर बाथरूम में गई और एक मिनट बाद अपनी ब्रा उतार कर और अपनी सारी नाईटी आगे की तरफ खींच कर वापिस आकर बिस्तर पर लेट गई।
“अब ठीक है, असल में मेरी ब्रा बहुत कसी थी, शायद इसीलिए मुझे घुटन महसूस हो रही थी !” कह कर मैं फिर बिट्टू की तरफ मुंह कर के लेट गई। अब ब्रा न होने की वजह से बिट्टू मेरे बूब्स के कट्स ज्यादा अच्छी तरह देख सकता था क्योंकि सिर्फ मेरे चूचुक को छोड़ के तकरीबन मेरा दायाँ स्तन उसे सारा का सारा दिख रहा था।
मैंने फिर उसकी गर्लफ्रेंड की और आलतू फालतू की सेक्सी बातें करनी शुरू की ताकि उसमे थोड़ी गर्मी आये और उसका हाथ पकड़ कर अपने बूब्स के साथ लगा कर रख लिया। पहले तो वो थोड़ा डर रहा था पर मैं महसूस कर सकती थी कि उसकी मर्दानगी जागने लगी थी। मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया पर उसने अपना हाथ अब भी मेरे वक्ष से सटा रखा था वो हल्के हल्के हाथ हिलाने के बहाने मेरे बूब्स को दबा कर देख रहा था।
मैंने सोचा कि अब ज्यादा औपचारिकता की ज़रुरत नहीं, सीधा मुद्दे पे आ जाना चाहिए, तो मैंने सीधे-सीधे ही बिट्टू से पूछ डाला- बिट्टू क्या तुम्हें इन्हें दबाना अच्छा लग रहा है?
उसने नज़र उठा कर मेरी तरफ देखा और बोला,” हाँ दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है !”
मैंने अपनी नाईटी का गला एक तरफ से हटा कर अपना दायाँ स्तन पूरा बाहर निकाल कर उसके सामने कर दिया और बोली,”लो, अब आराम से इसे दबा कर देखो।”
वो हिचकिचाया तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर खुद ही अपने बूब पर रख दिया। उसने धीरे से दो एक बार मेरा बूब दबाया पर शायद यही उसके सब्र की आखरी हद थी, उसने बिना कुछ कहे अपना मुंह आगे किया और मेरा निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगा। मैंने भी समझ लिया कि गाड़ी अब पटरी पर चल पड़ी है। मैंने अपना दूसरा स्तन भी नाईटी से बाहर निकाला और हाथ उसके पायजामे के ऊपर से उसके लण्ड पे फेरने लगी जो पहले से ही अकड़ा हुआ था।
“दीदी, सीधी होकर लेटो !” बिट्टू बोला।
जब मैं सीधी होकर लेटी तो बिट्टू ने उठ कर मेरी दोनों छातियाँ अपने हाथों में पकड़ी और बारी बारी से चूसने लगा और मैं उसकी पीठ सहलाने लगी। थोड़ी देर बूब्स चूसने के बाद बिट्टू ने मेरे गालों और होंटों को चूमना शुरू किया, मैंने भी मज़े लेते हुए उसका भरपूर साथ दिया। हम दोनों बारी बारी से अपनी जीभें एक दूसरे के मुंह में डाल कर चूस रहे थे।
फिर मैंने उससे कहा,”बिट्टू, पजामा उतारो !”
बिट्टू ने अपने पायजामा और अंडरवियर उतारा और अपना लण्ड लाकर मेरे मुंह के पास कर दिया और मैंने भी उसका इशारा समझते हुए उसका पत्थर जैसा अकड़ा हुआ लण्ड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। लण्ड चूसते-२ बिट्टू ने अपनी शर्ट और मेरी नाईटी भी उतार कर फ़ेंक दी। कुछ देर लण्ड चुसवाने के बाद बिट्टू टेढा होकर लेट गया और अपने हाथों के दोनों अंगूठों से मेरी पेंटी उतार दी। अब उसने मेरे पेट, कमर और जांघों को चूमना-चाटना शुरू किया और धीरे-२ मेरी टाँगें चौड़ी करके अपनी जीभ मेरी चूत में फिराने लगा। मैं भी चूत से टप-टप पानी छोड़ रही थी और उसका लण्ड चूस रही थी।
फिर मैंने कहा,”बिट्टू, अब ऊपर आ जाओ !”
यह सुन कर बिट्टू मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गया और अपना लण्ड मेरी चूत के होठों में फिराने लगा, जिससे मेरी चूत के पानी से उसके लण्ड का सुपाड़ा गीला और चिकना हो गया। जब उसने अपना लण्ड अन्दर डालना चाहा तो उसके मुंह से हल्की सी “ऊऽऽऊऽऽहऽऽ” करके चीख सी निकल गई। मैं समझ गई कि संजू तुझे तो कच्चा कुँवारा लौड़ा मिल गया। उसने ३-४ बार कोशिश की पर हर बार तकलीफ के साथ उसे अपना लण्ड बाहर निकालना पड़ा।
वो बोला,”दीदी मुश्किल है, ये अन्दर ही नहीं जा रहा, और डालता हूँ तो दर्द होता है !”
मैंने कहा,”ऐसे नहीं जायेगा, मैं तुम्हें तरीका बताती हूँ !”
मुझे पता था कि अगर इससे ना डाला गया तो मैं तो प्यासी रह जाउंगी, इसलिए मैंने उसको अपने ऊपर लिटाया, अपनी टांगों का घेरा उसकी कमर के चारों तरफ बना कर अपनी एडियाँ उसके चूतडों पे रखीं, फिर अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ा और उससे बोली,” अब धीरे धीरे से घस्से मारते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करो और अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दो ताकि मैं उसे चूस सकूं !”
उसने ऐसा ही किया और धीरे धीरे लण्ड चूत में डालने की कोशिश करने लगा, पर तकलीफ उसे अब भी हो रही थी। मैं भी मौक़ा देख रही थी, जब उसने कमर थोड़ी ढीली की तो मैंने पूरा जोर लगा अपने पांव से उसके चूतड़ और हाथों से उसकी कमर अपनी ओर खींची जिससे एक ही झटके में उसका लण्ड मेरी चूत में आधे से ज्यादा घुस गया।
अपने होंठों से मैंने उसके होंठ पकड़ रखे थे जिस वजह से वो चीख भी ना सका और उसकी चीख मेरे मुंह में ही दब गई। मुझसे अपने होंठ छुड़वा कर बोला,”दीदी प्लीज़ ! बाहर निकलने दो, बहुत दर्द हो रहा है, मुझे लगता है शायद खून निकल रहा है !”
मैं बोली- रुको ! ऐसे नहीं निकालते ! तुम्हें और ज्यादा दर्द होगा, मैं बताती हूँ, धीरे धीरे आगे पीछे करके निकालना !
वो जब दर्द से तड़पता हुआ आगे पीछे हो रहा था तो मैंने उसे दूसरा झटका मारा जिससे उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में समां गया और वो दर्द से तड़प उठा,”नहीं दीदी, अब नहीं सहा जाता, प्लीज़ निकाल दो !” बिट्टू बोला।
“बेवकूफ, मर्द बन ! ज़रा से दर्द से डर गया? सिर्फ आज ये दर्द होगा उसके बाद सारी उम्र का आराम है, मुझे भी पहली बार में बहुत दर्द हुआ था मैं लड़की हो कर सह गई और तू लड़का हो कर रोता है? डर मत ! चुपचाप चोदता रह !”
मेरे कहने पे वो धीरे-२ लगा रहा। मैंने उसके साथ पूरा सहयोग करके उससे सम्भोग करवाया और उसे अपने बूब्स और चूमा-चाटी से बांध के रखा। सेक्स करते-करते वो मेरे होंट और चूचियां चूसता रहा। मैं जानती थी कि उसे दर्द हो रहा है पर मर्द का बच्चा लगा रहा ! पीछे नहीं हटा ! और फिर तो स्पीड बढ़ा कर मुझे चोदने लगा।
जब उसे मज़ा आने लगा तो वो भी दर्द भुला के मुझे चोदने का स्वाद लेने लगा और ५-६ मिनट बाद हम दोनों बारी बारी से झड़ गए। मैं तृप्त हो कर सो गई और वो बाथरूम में अपना लण्ड धोने चला गया। अक्सर मर्द अपनी छाती फुला कर कहते हैं,”अरे मैंने तो कच्ची कली फाड़ दी !” आज मैं भी अपनी छातियाँ फुला कर कह सकती हूँ,”अरे मैंने तो कच्चा केला छील दिया !
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तुम्हारी सेक्सी मेल्स पढ़कर मुझे इतना मज़ा Antarvasna आता है कि मैं बता नहीं सकती। जितना मज़ा तुम्हारी मेल ने दिया है उतना शायद ही कभी मुझे मिला हो। जैसा कि तुम मुझे कह रहे थे, मैं भी तुमको यह सेक्सी मेल लिख रही हूँ। होप यू एन्जॉय।
जहाँ तुमने छोड़ा था उसके आगे से लिख रही हूँ।
तुम मेरे पास आगरा आए थे और होटल के रूम में बुला कर तुमने मुझे खूब चोदा।
(हाय मैं इतना गन्दा सोच रही हूँ )
तीन बार करने के बाद तुम पूरी तरह निढाल होकर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मेरे ऊपर ही सो गए। सुबह उठकर तुम वापिस चले गए।
एक हफ़्ते बाद तुम वापिस आए इस एक हफ़्ते में मैं तुम्हारी याद में हस्त मैथुन करती रही।
तुम सुबह 10 बजे मेरे रूम पे आए, तुमने दरवाज़ा खटखटाया, मैं सन्डे होने के कारण थोड़ी देर पहले ही सो के उठी थी। मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला, तुम अन्दर आ गए, पीछे से दरवाज़ा बंद करके मुझे अपनी बाहों में भर लिया और बेतहाशा चुम्बन करने लगे।
तुमने कहा- मैं पूरे एक हफ्ते से प्यासा था, आज मेरी प्यास बुझा दो !
मैंने मजाक में कहा- लो पानी पी लो, फिर कोल्ड ड्रिंक भी देती हूँ।
तुमने हँसते हुए पानी पी लिया और कहा- कोल्ड ड्रिंक मैं गिलास से नहीं पियूँगा।
मैंने पूछा- फ़िर कैसे?
तुमने आगे आकर मुझे किस किया और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- नए स्टाइल में पियूँगा !!!
मैंने पूछा- कौन सा नया स्टाइल?
तुमने कहा- अभी बताता हूँ।
मैंने क्रीम रंग की नाईटी पहनी थी, नीचे काली ब्रा और पैंटी !
“तुम बैठो मैं अभी नहा कर आती हूँ !”
तुम- चलो, मैं तुम्हें नहलाता हूँ !
मैं- धत्त ! बेशर्म ! मुझे शर्म आती है।
तुम- जब मैं तुम्हारी मारता हूँ तब तो शर्म नहीं आती?
“अरे नहीं ! आती तो है पर उस समय मैं इतनी गर्म होती हूँ कि मुझे होश ही नहीं रहता।”
” तो चलो ठीक है, मैं तुम्हें गरम करके नहलाता हूँ और कोल्ड ड्रिंक पीने का नया तरीका भी तो बताना है तुम्हें। सच्ची तुम्हें बहुत मज़ा आएगा !”
“ऐसा है तो चलो।”
और हम दोनों बाथरूम में घुस जाते हैं।
बाथरूम में घुसते ही तुम मुझे पकड़ के कस के चूमते हो और मेरे मम्मे और मेरे गान्ड पर हाथ फ़ेरते हो। मुझे मज़ा आने लगता है। तुम शावर खोल देते हो और मैं भीगने लगती हूं। तुमने टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी हैं। भीगने से मेरी नाईटी मेरे शरीर से चिपक जाती है और मेरे मस्त मम्मे ब्रा में ढके हुए और मेरी पैन्टी साफ़ दिखने लगती है। यह देख कर तुम गरम हो जाते हो और मुझे अपनी तरफ़ खींचते हो। नीचे घुटनों के बल बैठ कर मेरी नाईटी ऊपर उठा कर मेरी टांगों और जांघों को चूमते हुए मेरी पैन्टी तक पहुँच जाते हो !!
“स्स्स्स्स्स्स श्ह्ही अआया आआः मज़ा आआया आया आ आ रहा है !”
तुम दोनों हाथ मेरी पैन्टी के अन्दर डाल देते हो और दाएं हाथ से मेरी गान्ड को और बाएं हाथ से मेरी चूत को सहलाने लगते हो !
“आआया आया अआया आआअह्ह्ह मज़ा आ आ आआया आआया रहा है।”
यह करते हुए तुम मुँह से मेरी पैन्टी का एलास्टिक पकड़ कर उसको धीरे धीरे नीचे उतारते हो।
मेरी गरम चूत देखते ही तुम्हारे मुँह में पानी आ जाता है और तुम मेरी क्लिटोरिस को चूमने और चाटने लगते हो, मैं आ आया आ आआ अआय आ आआया अह आ आआया आआ अआः करती हूँ, तुम्हारा सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबाती हूं, तुम्हारे हाथ मेरे गान्ड के छेद पे होते हैं।
इस तरह से मैं पहली बार ओर्गास्म हो जाआआताआ है, “आआअह मैं मर गई !”
तुम कहते हो यह तो शुरुआत है। मेरे चूत का जूस अपने होठों पे लेकर मेरी नाईटी और ऊपर उठाते हो और मेरी ब्रा को खोल कर मेरे मम्मे ज़ोर ज़ोर से दबाते हो और मेरे सख्त निप्प्ल पर मेरी चूत का जूस मेरे होठों से लगा देते हो। मेरी ब्रा खुल कर नीचे गिर जाती है, मैं नाईटी उतार देती हूं और पैन्टी से पैर निकाल कर बाहर आ जाती हूं।
मैं तुम्हारे लन्ड की तरफ़ देखती हूं जो एकदम टाईट हो रहा है और तुम्हारी जींस फाड़ कर बाहर आने को बेताब है।
“अरे जान इसको क्यूँ सज़ा दे रहे हो, इसको तो बाहर आने दो !”
“हाँ यह तो बाहर आएगा ही वरना मज़ा क्या आएगा।”
और हम दोनों हँसते हैं।
तुम- अच्छा तुम जाओ ज़रा चिल्ड कोल्ड ड्रिंक लेकर आओ !
मैं- अरे कोल्ड ड्रिंक का क्या करोगे अभी?
तुम- जाओ न, मुझे प्यास लगी है मुझे पीना है !
“अच्छा बाबा लाती हूँ पर तुम कपड़े तो उतारो।”
“नहीं कपड़े तुम उतरना मेरे, तब असली मज़ा आएगा।”
अच्छा !
मैं जल्दी से पूरी नंगी हालत में भाग के गई और फ्रीज से सुपर-चिल्ड कोल्ड ड्रिंक-फ़ैंटा निकाल के ले आई।
भाग के जाने से मेरी साँस फूलने लगी और मेरे मम्मे ऊपर नीचे होने लगे।
तुम- जान तुम्हारे मम्मे कितने अच्छे हैं ! अच्छा अब मैं थोडी देर बाद कोल्ड ड्रिंक पियूँगा और तुम लोलीपोप चूसना।
मैं- लोलीपोप? मैं कोई बच्ची तो नहीं हूँ जो लोलीपोप चूसूंगी !
“मना ना करो, तुम्हारे लिए बहुत टेस्टी लोलीपोप लाया हूँ।”
“अच्छा ! कहाँ है दो।”
“पहले तुम अपनी आँखें बंद करो।”
“मैं अपनी आँखें बंद करती हूं।”
अब तुम अपना लन्ड निकाल कर उस पर थोड़ा सा कोल्ड ड्रिंक गिरा के मुझसे कहते हो- जानू अपना मुँह खोलो !
मैं अपना मुँह खोलती हूं और तुम अपना लन्ड मेरे मुँह में दे देते हो।
मैं जीभ से टेस्ट करती हूँ- अरे यह तो ओरंज फ्लेवर लोलीपोप है।
तुम्हें अच्छी लगी !
“हाँ !”
तुम- तो आंखें खोलो और चूसो !
मैं आँखें खोलती हूं और तुम्हारा लन्ड देखती हूं- तो यह लोलीपोप है?
हाँ, अब चूसो !
मैं तुम्हारा जींस का बटन खोल कर अंडरवीअर नीचे करके घुटने तक तुम्हारा लन्ड चूसने लगती हूं।
तुम मेरे सर के पीछे से पकड़कर कस के चुसवाने लगते हो। तुम्हारा लंबा मोटा लन्ड मेरे मुँह में पूरा नहीं जा पा रहा होता है, तुम मुझे पकड़कर अपने लन्ड को ज़ोर से मेरे मुँह में डाल देते हो। मुझे दर्द होता है लेकिन अब तक तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों को दबाने लगते हैं और मुझे मज़ा आने लगता है। मैं तुम्हारा पूरा लन्ड लोलीपोप की तरह चूसने लगती हूं।
तुम आ आआया आआह्ह हह्ह्ह्छ ओऊ ऊऊ ऊऊओ ऊह ऊऊ ऊऊ उफ ! करते हो।
“बस रुक जाआआओ ! वरना मैं झर जाऊँगा।”
“तो झर जाओ !”
तुम- नहीं ! मुझे अभी तुम्हारी चूत और तुम्हारी गान्ड मारनी है।
मैं हँसते हुए हट जाती हूं। अब तुम अपने कपड़े उतार के आ जाते हो और बोलते हो कि अब मुझे कोल्ड ड्रिंक पीनी है
मैं- वो कैसे?
तुम मुझे अपने सामने खड़़ा करते हो और मेरे नंगे शरीर को देख कर कहते हो- यह है न ग्लास।
मैं- मतलब?
तुम कोल्ड ड्रिंक की बोतल लेकर अपने होठों से शुरू करके अपने मम्मों, अपनी नाभि अपनी चूत, अपनी गांड जांघों और टांगों पर कोल्ड ड्रिंक डालो धीरे धीरे और मैं पीता जाऊँगा !
“वाओ, यह तो बहुत बढ़िया तरीका है।” है न?
और मैं अपने होठों से कोल्ड ड्रिंक गिरा कर धीरे धीरे नीचे बढती जाती हूं। ठंडी कोल्ड ड्रिंक से बदन में सिहरन उठती है लेकिन तुम्हारे चाटने से मज़ा आऽऽऽऽ हऽऽ आऽऽऽ रहा है। तुम ऐसे ही चूसते और कोल्ड ड्रिन्क पीते जाते हो, मेरे मम्मों पर, चूत में से, गान्ड में से नीचे तक।
मैं- अब मेरी बारी !
अब तुम खड़े हो जाते हो और मैं घुटनों के बल तुम्हारे आगे बैठ जाती हूं और तुम्हारे लन्ड पर कोल्ड ड्रिन्क डाल डाल कर पीती रहती हूं और साथ ही तुम्हारा लन्ड, तुम्हारे टट्टे भी चूसती जाती हूं। अब तुम बिल्कुल गर्म हो जाते हो। मैं जैसे ही कोल्ड ड्रिन्क की बोतल रखने के लिये पलटती हूं, तुम मुझे पीछे से पकड़ कर मेरे मम्मे नोच लेते हो।
मेरी चीख निकल जाती है। इस समय तुम्हारा लन्ड मेरी गान्ड के छेद के पास गड़ रहा होता है। तुम मुझे ऐसे अपनी बाहों में उठा लेते हो कि तुम्हारा लन्ड मेरी गान्ड से रगड़ रहा होता है और उठा के मुझे बेड के पास ले जाते हो।
वहाँ पहुंच कर तुम मुझे बेड पे दोनों हाथ और पैर पे बैठने को कहते हो और वैसलीन की शीशी उठा लाते हो। मेरी गान्ड के छेद को खूब चूसते हो और उस पर वैसलीन लगाते हो, और अपने लन्ड पर भी !
मैं- आज क्या पहले गान्ड मारोगे?
“हाँ !”
“तो ठीक है ऐसे मारना मेरी गान्ड फ़ाड़ देना ! ठीक है?”
तुम पहले दो उंगलियों से मेरी गान्ड का छेद बड़ा करते हो, फ़िर धीरे से अपना सख्त लन्ड मेरी गान्ड पर लगाते हो और धीरे से मेरी गान्ड मारना शुरू करते हो। धीरे धीरे धक्के देते जाते हो, तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों पर आ जाते हैं और तुम उन्हें दबाने लगते हो, बीच बीच में दो उंगलियों से मेरे चूत में भी फ़िन्गरिन्ग करते हो आऽऽऽहऽऽ आआऽऽ मज़ा आऽऽ रहाऽऽ है… और जोर से और जोर से
” मुझे धीरे में मज़ा नहीं आ रहा, जोर से मारो मेरी गान्ड फ़ड़ दो आज” मैं हवस के बहाव में बोलने लगती हूं।
तुम जोश में आ जाते हो, मेरी जांघें पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचते हो और एक झटके में अपना पूरा लन्ड मेरी गान्ड में डाल देते हो।
मेरी चीख निकल जाती है- आऽऽऽऽह ऽऽआअऽऽऽऽ अऽऽऽऽ मर गई !
इससे पहले कि मैं सम्भल पाती, तुम मेरी गान्ड जोर जोर से मारने लगते हो, पूरा लन्ड बाहर निकाल कर जोर से एक झटके में अन्दर बाहर करने लगते हो।
“मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन मज़ा भी आ रहा है !”
तुम अपनी स्पीड बढ़ाते जाते हो !
मैं कहती हूं- रुक जाओ प्लीज बस !
तुम- नहीं आज सचमुच में तुम्हारी गांऽऽऽऽड फ़ाड़ के रहूंगाऽऽऽ”
“मज़ाऽऽऽ आऽऽऽ रहाऽऽऽ है नाऽऽऽ.?”
“हाँऽऽऽऽऽ!
तुम फ़िर मेरी गान्ड के पट्टों पर थप्पड़ मारते हो सटाक सटाक !
मुझे बहुत मज़ाऽऽऽ आऽऽऽ रहा है, मेरे चूतड़ बिल्कुल लाल हो गये और मेरी गांड का बुरा हाल हो गया, लेकिन तुम रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हो !
मेरे बहुत कहने पर तुम रुके पर एक शर्त पर कि मैं तुम्हारे लन्ड पर बैठ कर कूदूंगी क्योंकि तुम्हें अभी मेरी गान्ड और भी मारनी है !
मैं अच्छा बाबा ! अच्छा ! कह्ती हूं और तुम नीचे लेट जाते हो मैं तुम्हारे लन्ड पर तुम्हारी तरफ़ मुंह करके बैठ जाती हूं और कूदना शुरू कर देती हूं। अब तुम्हें बहुत मज़ा आने लगता है।
आऽऽहऽऽ आऽऽऽऽऽआअ, मेरे लन्ड पर ऐसे ही कूदती रहो !
इस पोजीशन में तुम्हारा लन्ड बहुत अन्दर तक जा रहा होता है। एक हाथ से तुम बारी बारी मेरे मम्मों को मसल रहे होते हो और दूसरे से मेरी चूत को !
मेर क्लाईमैक्स आ रहा होता है आऽऽहऽऽ आऽऽऽऽ आअ आऽऽऽहऽऽ आअऽऽ अऽऽऽऽ मर गई।
उफ़्फ़्फ़्फ़ ! मेरी चूत के जूस तुम्हारे हाथ पर और तुम्हारे पेट पर फ़ैल जाते हैं.’ मैं थक गई कूद कूद के”
“अच्छा तो हट जाओ !”
तुम मेरी चूत क जूस मेरे मम्मों पे लगा देते हो और जोर जोर से चूसते हो। मेरे मम्मों के बीच टिशु पेपर लगाकर अपना लन्ड रगड़ते हो और साफ़ कर लेते हो”
तुम मुझे पेट के बल लेटने को कहते हो और तीन तकिये मेरे पेट के नीचे रख देते हो।
मैं डर जाती हूं- क्या अभी और गान्ड मारने का इरादा है?
“नहीं जान, अब तुम्हारी चूत की बारी है।”
“अरे चूत तो आगे से मारी जाती है।”
“यह नया स्टाईल है !”
“अच्छा कैसे?”
तुम तकिये मेरे पेट के नीचे रखकर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हो और मेरी टांगें फ़ैला देते हो। फ़िर एक झटके में अपना लन्ड मेरी चूत में डाल देते हो।
मेरी फ़िर से चीख निकल जाती है- हाऽऽऽऽय आऽऽज क्या जान निकालने का इरादा है?
“नहीं, लेकिन जब दर्द होता है तभी तो मज़ा आता है !”
“हाँ, वो तो है।”
और तुम जोर जोर से मेरी चूत मारने लगते हो। तुम दोनों हाथों की उन्गलियों के बीच में मेरे सख्त चूचकों को दबा दबा के खींच रहे हो और जीभ से चाट और चूस भी रहे हो। मैं मुँह नीचे कर के देखती हूं। तुम्हारा लन्ड पिस्टन की तरह मेरी चूत में जा रहा होता है।
यह देख कर मेरा फ़िर से पानी निकल जाता है, मैं पूछती हूं, तुम्हारा एक बार भी नहीं झड़ा?
तुम कहते हो- नहीं ! आज जी भर चोदने के बाद ही झड़ूंगा।
फ़िर तुम मुझे घसीट के बेड के किनारे पर ले आते हो, खुद जमीन पर खड़े हो जाते हो और मेरी टांगें चौड़ी करके अपने कन्धों पे रख लेते हो और पूरी गति में चोदने लगते हो। इस स्थिति में तुम्हारा लन्ड पूरा मेरी चूत में बहुत अन्दर तक जा रहा है। तुम जोर से झटका मारते हो और मेरी चूत में कुछ गरम गरम लगता है।
मैं पूछती हूं- ये क्या है, क्या तुम्हारा निकल गया?
तुम- नहीं, मैंने तुम्हारी चूत में मूत दिया है, तुम्हें मज़ा आ रहा है ना?
मुझे इतना मज़ाऽऽऽ आऽऽ रहाऽ है कि मेरा एक बार और निकल जाता है। 10 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद तुम मुझे उठा के मेज़ के किनारे पर बैठा देते हो और मेरी टांगें अपनी पीठ में गोल घेरे के रूप में बांध लेते हो और जोर के झटकों के साथ मुझे चोदने लगते हो।
“पूरी ताकत से पूरी ताकत से चोदो ! फाड़ दो मेरी चूत को भी !”
और तुम वास्तव में राजधानी एक्सप्रेस की तरह फुल स्पीड में मेरी चूत की बेदर्दी से चुदाई करते जा रहे हो और मेरे मम्मों से खेल रहे हो।
अब तुम्हारी साँसें तेज़ होने लगती हैं।
तुम आ आआअह उफ़ फ्फ्फ्फ़ फ्फ्फफ्फ़ मर गया आआअ मेरा निकलने वाला है चिल्लाने लगते हो !
मैं अपनी टांगों का घेरा बना कर तुम्हें अपनी तरफ़ ज़ोर ज़ोर से खीच रही हूं। तुम अचानक मुझे अपनी बाहों में उठा लेते हो इस तरह की मेरी चूत मैं तुम्हारा लन्ड घुसा हुआ है और मेरे मम्मे बुरी तरह उछल रहे हैं।
5 मिनट मुझे हिलने को कहते हो और मुझे ज़ोर ज़ोर से इसी पोजिशन में उछालते जाते हो। तुम्हारी स्पीड बढ़ती जाती है और मुँह से आ आआह आया आय आआअह ईईइ ईई आआ आआ ऊऊह्ह्ह्ह्ह की आवाजें आती जाती हैं।
मुझे ऐसे ही उछलाते तुम एक ज़ोर का झटका मारते हो और तुम्हारा गर्म सफ़ेद जूस तुम्हारे मोटे सख्त लन्ड से निकल कर सीधा मेरी चूत की आग को शांत करते हुए गिर जाता है। मेरी चूत में से एक बार और जूस निकलता है।
तुम मुझे लेकर बेड पर पास आ जाते हो और मेरे और तुम्हारे जूस बेड पर टपकते हैं।
हम कुछ देर इसी तरह पड़े रहते हैं।
फ़िर उठ कर मैं तुम्हारे और अपने लिए खाना बनाती हूँ।
और हम खाना खाते हैं।
इस पूरे दौरान मैं और तुम पूरे नंगे रहते हैं।
खाना खाकर हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो जाते हैं, दो घंटे बाद उठके फ़िर अलग अलग जगह और पोज में खूब चुदाई करते हैं।
रात को भी एक बार चुदाई का दौर चलता है और तुम अपना लन्ड मेरी चूत में डाल कर ही मुझे अपनी बाहों में भर कर सो जाते हो।
सुबह उठकर हम लोग एक दूसरे को 69 पोसिशन में ओरल सेक्स करते हैं।
तुम कहते हो- एक दिन में इतना मज़ा मैंने ज़िन्दगी में कभी नहीं किया और शायद तुम्हारे बिना कर भी नहीं पाता।
मैं भी कहती हूं- हाँ, वास्तव में जितने प्यार से और मज़े से तुमने मेरी चूत और गान्ड मारी है शायद ही कोई और मारता।
आई लव यू जानू !
तुम तैयार होते हो जाने के लिए तो मैं उदास हो जाती हूं।
तुम कहते हो- चिंता मत करो, मैं जल्दी ही आऊँगा और अपने साथ एक दोस्त को भी लाऊँगा, हम दोनों मिलकर तुम्हारी मारेंगे। सोचो एक लन्ड तुम्हारी चूत में और एक तुम्हारी गान्ड में एक साथ हो तो कितना मज़ा आएगा।
मैंने कहा- हाँ ! फ़िर मैं अपनी सहेली को भी बुला लूंगी और हम सब मिलकर ग्रुप सेक्स करेंगे।
इसी वादे के साथ तुम चले जाते हो !
जानू यह तुम्हारी मेल और तुम्हारी चैट का नतीजा है जो मैंने यह मेल लिखी है, तुम्हें कैसी लगी?
अब तुम इससे भी सेक्सी और लम्बी मेल मुझे लिखना !
तुम्हारे लंड की प्यासी Antarvasna
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