Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Greater Noida Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

हैलो दोस्तो मैं सुरेश। आप लोग तो मुझे पहचान ही Antarvasna गये होंगे। मेरी दो कहानियों के जवाब में आप लोगों का ढेर सारा मेल आया। इसके लिये आप लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद।

अब चलते हैं कहानी की तरफ़। यह मेरी तीसरी सच्ची घटना है। यह घटना लगभग ५ साल पहले की है। एक दिन मैं अपने उस भाभी के घर गया जिसका नाम सोनू (बदला हुआ नाम) है। यह मेरी कोलोनी में ही रहती है और मुझे बचपन से जानति है। मैं बचपन से उसके घर आया जाया करता था। मैं अक्सर सोनू के मस्त जवानी के बारे में सोचा करता और मन ही मन उसको चोदा करता था। लेकिन उसके तरफ़ से कभी कोई इशारा नहीं मिला था। हां सिर्फ़ इतना था कि वो अक्सर मेरे सामने और दूसरों के सामने मेरी तारीफ़ किया करती थी। तो मैं जब उसके घर पहुंचा तो वो बहुत परेशान थी और उसके पति भी दो तीन दिनो के लिये कहीं बाहर गये हुए थे। मैने पूछा तो सोनू ने कहा कि उसके सर में बहुत दर्द हो रहा है। मैने कहा मैं आप को मेरी मोटरसाइकिल मैं डाक्टर के पास ले चलता हूं। फिर घर बंद करके मैने उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाया और होस्पीटल की तरफ़ चल पड़ा। इतने दिनो में आज पहली बार वो मेरे इतने करीब थी। उसका चूची मेरी पीठ पर पूरी तरह से चिपकी हुई थी। मैने सोनू से कहा तुम्हारे सर में दर्द है तुम्हें चक्कर भी आ सकता है इसलिये तुम मुझे अच्छे से पकड़ लो।

सोनू एक हाथ को दाहिने तरफ़ से घुमा कर मेरे दायें जांघ पर रख दिया। मेरी सांसे तेज तेज चल रही थी। मोटरसाइकिल भी तेज चल रही थी। तभी सोनू मुझसे पूछी कि दूसरे हाथ से भी किया वो मुझे पकड़ ले। मैने कहा हां पकड़ लो। अब वो दोनो हाथों से मुझे दोनो तरफ़ से पकड़े हुए थी। उसकी दोनो चूचियों को अब मैं पूरी तरह से अपनी पीठ पेर महसूस कर रहा। मोटरसाइकिल मेरी तेज चल रही थी। जिसके कारण उसकी साड़ी हवा से ऊपर उठ रही थी। मैने अपने हाथ उसके जांघ पर रख कर उसकी साड़ी को दोनो जांघों के बीच में घुसा दी। तभी उसने अपनी जांघों को दबा कर मेरे हाथ को फंसा लिया और मुझे पीछे से और जोर से पकड़ लिया। मैं पीछे मुड़ कर सोनू को देखा तो वो मुस्कुरा दी। मैने उससे कहा आप को डाक्टर के सुई की ज़रूरत नहीं है। आप को कुछ और की ज़रूरत है।/

इतना कह कर मैने अपनी गाड़ी वापस मोड़ ली। और इस बार दुगनी तेज़ी से वापस सोनू के घर पहुंचा। घर पहुंचते ही मैने घर के दरवाज़े बंद किये और सोनू की साड़ी उतार कर उसे ले जाकर सीधा बेड पर पटक दिया और उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और अपने होंठ से उसे होंठ को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। फिर मैने उसके ब्लाउज़, ब्रा और पेटीकोट को उतार कर फेंक दिया। अब वो बिल्कुल नंगी बिस्तर पर पड़ी थी। मैने कई बार उसे सपनो में चोदा था। लेकिन सोनू अन्दर से इतनी खूबसुरत है यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था। उसकी गोरी गोरी तांगें पतली कमर बड़ी बड़ी चूची और उस पर पिंक कलर का निप्पल। मेरे सामने जैसे कोई परी नंगी लेटी हो और मैं उसे चोदने जा रहा हूं। मैं सपने को सच होता देख इतना उत्तेजित था कि मैं जल्द से जल्द अपनी गरमी का अहसास उसे करा देना चाहता था। मैं अपनी पैंट और टी शर्ट उतार दी और उसके सर के पास बैठ गया और अपने लंड को उसके मुँह में डाल दिया। फिर मैं अपने मुँह से उसकी चिकनी बुर को चाटने लगा।

सोनू भी शायद मुझे इतना करीब पाकर इतनी उत्तेजित हो रही थी कि उसकी चूत से बुरी तरह से पानी निकल रहा था और वो कमर उठा उठा कर अपने बुर को चटवा रही थी। अचानक उसने अपने दोनो जांघों से और अपने हाठों से मेरे सर को पूरी ताकत से अपनी बुर पर दबाने लगी। मैं समझ गया कि उसकी चूत से पानी झड़ने वाला है। मैं भी उसके मुँह पे लंड ज़ोर ज़ोर से मारना शुरु कर दिया। और फिर अचानक लंड की गरमी और बुर की गरमी एक साथ बाहर निकलने लगी। मेरे लंड के पानी से उसका पूरा मुँह भर गया था जो उसने बड़े प्यार से पी लिया। लंड से पानी गिरने के बाद मैने सोनू को उल्टा लेटने को कहा तो वो उल्टा लेट गयी। उसकी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी। मैं पहली बार उसकी गांड देख रहा। उसकी गांड इतनी चिकनी थी कि मेरा लंड गांड दर्शन करके फिर से तैयार हो गया था चुदाई के लिये।

मैने अपने लंड को सोनू की चूत के पास ले जा कर रख दिया फिर अपने दोनो हाथों से उसकी गांड को फैला दिया। उसकी पिंक पिंक बुर और गांड मुझे चोदने के लिये आमन्त्रित कर रहे थे। मैने अपने लंड को उसकी बुर पर रक कर ज़ोर का एक धक्का मारा और पूरा को पूरा लंड सोनू की चूत में घुस गया। सोनू भी पूरे रांड की तरह मुझसे चुदवा रही थी। मैं ५ मिनट तक उसकी चूत को चोदता रहा। मैं अपने लंड को पूरा बाहर निकालता फिर अंदर करता। इससे सोनू को काफ़ी मज़ा आ रहा था वो गांड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी। फिर मैने अपना लंड निकाल कर बिस्तर पर लेट गया। अब सोनू की बारी थी। वो मेरे ऊपर आ कर मेरे लंड को अपने हाथ से अपनी बुर में डाल कर मेरे ऊपर बैठ गयी और ऊपर नीचे होने लगी। उसकी चूचियां उसके साथ साथ ऊपर नीचे हो रही थी। मेरे हाथ कभी उसकी चूचियों पर जाते तो कभी उसके पेट पर फिर अचानक वो थोड़ा आगे झुक गयी और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगी। मैं भी अब लंड का पानी उसकी चूत में छोड़ने के लिये तैयार था। मैं भी नीचे से ज़ोर ज़ोर से उसकी बुर में लंड घुसाने लगा। कमरे में लंड और बुर के टकराने की आवाज़ बिल्कुल साफ़ सुनायी दे रही थी। हम दोनो अब पूरी तेज़ी से एक दूसरे को चोद रहे थे फिर मैं उसे पटक कर उसके ऊपर आ गया और उसके दोनो पैरों को फैला कर फ़ुल स्पीड से सोनू की चुदाई शुरु कर दी। २०-२५ झटके के बाद लंड से पानी निकाल कर सोनू की बुर को भर दिया।

सोनू की आंखों में अब संतुष्टि थी। उसके सर का दर्द भी जा चुका था। फिर मैने उससे पूछा कि मैं इतने दिनो से आपके घर पे आता हू लेकिन आपने कभी बताया क्यों नहीं कि आप मुझसे चुदवाना चाहती हैं। तो उसने कहा कि उसके पति पहले उसे हफ़्ते में एक बार तो ज़रूर चोदते थे लेकिन अब महीना गुजर जाता है तो भी उनका चोदने का मूड नहीं होता है।

फिर मैने उनको पूछा आज जो कुछ हुआ वो पहले से आपने ऐसा सोच रखा था या ये जो कुछ हुआ वो अचानक हुआ। तो उसने कहा जो भी हुआ वो बिल्कुल अचानक हुआ। लेकिन जो हुआ वो अच्छा हुआ।

और दोस्तों शायद आप लोगों को यकीन न हो लेकिन आज भी मैं साल में एक दो बार जब उस कोलोनी में जाता हूं तो सोनू को चोद कर ही आता हूं। क्योंकि दिन में उनके पति ओफ़िस में होते है और अचानक कभी आ भी गये तो वो बुरा नहीं मानते कि मैं उनके घर में क्यों हूं क्योंकि मैं तो बहुत छोटे से उनके घर पे आता रहा हूं। Antarvasna

आपको एक खास बात बताऊं ! Antarvasna Sex Stories

जब मैं कुवांरी थी तब मेरी चुदने Antarvasna Sex Stories की इच्छा कम होती थी। क्यूंकि मुझे इस बारे में अधिक नहीं मालूम था। आज मेरी शादी हुये लगभग पांच साल हो चुके हैं, मैं बेशर्मी की हदें पार करके सभी तरीको से अपने पति से चुदवा चुकी हूँ।

जी हां ! बिल्कुल अनजान बन कर ! भोली बन कर ! और मासूम बन कर … ! जैसे कि मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही भोलापन, मासूमियत उनके लण्ड को खड़ा कर चोदने पर मजबूर कर देती थी। आप ही बताईये, लड़कियां जब भोली बन कर, अनजान बनकर और मासूम सा चेहरा लेकर लण्ड लेती हैं तब पति को लगता है कि मेरी बीवी सती सावित्री है …

पर वो क्या जाने, हम लोग भोली बनकर ऐसे ऐसे मोटे मोटे और लम्बे लण्ड डकार जाती हैं कि उनके फ़रिश्तों तक को पता नहीं चल पाता है।

पर अब बड़ी मुश्किल आन पड़ी है। वो छ्ह माह के लिये कनाडा चले गये हैं … मुझे यहां अकेली तड़पने के लिये। पर हां ! यह उनका उपकार है कि मेरी देखभाल करने के लिये उन्होंने अपने दोस्त के बेटे दीपू को कह दिया था कि वह मेरा ख्याल रखे।

जानते हैं आप, उसने कैसा ख्याल रखा … मुझे चोद चोद कर बेहाल कर दिया … नए नए तरीकों से ! मुझे खूब चोदा …

क्या हुआ था आप जानना चाहेंगे ना …

मेरे पति के कनाडा जाने के बाद रात को दीपू खाना खा कर मेरे यहां सोने के लिये आ जाता था।

गर्मी के दिन थे … मैं अधिकतर छत पर ही अकेली सोती थी। कारण यह था कि रात को अक्सर मेरी वासना करवटें लेने लगती थी। बदन आग हो जाता था। मैं अपना जिस्म उघाड़ कर छत पर बेचैनी के कारण मछली की तरह छटपटाने लग जाती थी। पेटीकोट ऊपर उठा कर चूत को नंगी कर लेती थी, ब्लाऊज उतार फ़ेंकती थी। ठण्डी हवा के मस्त झोंके मेरे बदन को सहलाते थे। पर बदन था कि उसमें शोले और भड़क उठते थे। मुठ मार मार कर मैं लोट लगाती थी … फिर जब मेरे शरीर से काम-रस बाहर आ जाता था तब चैन मिलता था।

आज भी आकाश में हल्के बादल थे। हवा चल रही थी … मेरे जिस्म को गुदगुदा रही थी। एक तरावट सी जिस्म में भर रही थी। मन था कि उड़ा जा रहा था। उसी मस्त समां में मेरी आंख लग गई और मैं सो गई। अचानक ऐसा लगा कि मेरे शरीर पर पानी की ठण्डी बूंदे पड़ रही हैं। मेरी आंख खुल गई। हवा बन्द थी और बरसात का सा मौसम हो रहा था। तभी टप टप पानी गिरने लगा। मुझे तेज सिरहन सी हुई। मेरा बदन भीगने लगा। जैसे तन जल उठा।

बरसात तेज होती गई … बादल गरजने लगे … बिजली तड़पने लगी … मैंने आग में जैसे जलते हुये अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया, अपना ब्लाऊज सामने से खोल लिया। बदन जैसे आग में लिपट गया …

मैंने अपने स्तन भींच लिये … और सिसकियाँ भरने लगी। मैं भीगे बिस्तर पर लोट लगाने लगी। अपनी चूत बिस्तर पर रगड़ने लगी। इस बात से अनजान कि कोई मेरे पास खड़ा हुआ ये सब देख रहा है।

“रीता भाभी … बरसात तेज है … नीचे चलो !”

मेरे कान जैसे सुन्न थे, वो बार बार आवाज लगा रहा था।

जैसे ही मेरी तन्द्रा टूटी … मैं एकाएक घबरा गई।

“दीपू … तू कब आया ऊपर … ” मैंने नशे में कहा।

“राम कसम भाभी मैंने कुछ नहीं देखा … नीचे चलो” दीपू शरम से लाल हो रहा था।

“क्या नहीं देखा दीपू … चुपचाप खड़ा होकर देखता रहा और कहता है कुछ नहीं देखा” मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उसके लण्ड का उठान पजामें में से साफ़ नजर आ रहा था। अपने आप ही जैसे वह मेरी चूत मांग रहा हो। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसे दबोच लिया … कुछ ही पलों में वो मुझे चोद रहा था। अचानक मैं जैसे जाल में उलझती चली गई। मुझे जैसे किसी ने मछली की तरह से जाल में फ़ंसा लिया था, मैं तड़प उठी … तभी एक झटके में मेरी नींद खुल गई।

मेरा सुहाना सपना टूट गया था। मेरी मच्छरदानी पानी के कारण मेरे ऊपर गिरउ गई थी। दीपू उसे खींच कर एक तरफ़ कर रहा था। मेरा बदन वास्तव में आधा नंगा था। जिसे दीपू बड़े ही चाव से निहार रहा था।

“भाभी … पूरी भीग गई हो … नीचे चलो … ” उसकी ललचाई आंखे मेरे अर्धनग्न शरीर में गड़ी जा रही थी। मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार था। मैंने भीगे ब्लाऊज ठीक करने की कोशिश की … पर वो शरीर से जैसे चिपक गया था।

“दीपू जरा मदद कर … मेरा ब्लाऊज ठीक कर दे !”

दीपू मेरे पास बैठ गया और ब्लाऊज के बटन सामने से लगाने लगा … उसकी अंगुलियाँ मेरे गुदाज स्तनों को बार बार छू कर जैसे आग लगा रही थी। उसके पजामे में उसका खड़ा लण्ड जैसे मुझे निमंत्रण दे रहा था।

“भाभी , बटन नहीं लग रहा है … “

“ओह … कोशिश तो कर ना … “

वह फिर मेरे ब्लाऊज के बहाने स्तनों को दबाने लगा … जाने कब उसने मेरे ब्लाऊज को पूरा ही खोल दिया और चूंचियां सहलाने लगा। मेरी आंखे फिर से नशे में बंद हो गई। मेरा जिस्म तड़प उठा। उसने धीरे से मेरा हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया। मैंने लण्ड को थाम लिया और मेरी मुठ्ठी कसने लगी।

बरसात की फ़ुहारें तेज होने लगी। दीपू सिसक उठा। मैंने उसके भीगे बदन को देखा और जैसे मैं उस काम देवता को देख कर पिघलने लगी। चूत ने रस की दो बूंदें बाहर निकाल दी। चूंचियां का मर्दन वो बड़े प्यार से कर रहा था। मेरे चुचूक भी दो अंगुलियों के बीच में सिसकी भर रहे थे। मेरी चूत का दाना फ़ूलने लगा था। अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और दाने पर उसकी रगड़ लग गई।

मैं हाय करती हुई गीले बिस्तर पर लुढ़क गई। मेरे चेहरे पर सीधी बारिश की तेज बूंदे आ रही थी। गीला बिस्तर छप छप की आवाज करने लगा था।

“रीता भाभी … आप का जिस्म कितना गरम है … ” उसकी सांसे तेज हो गई थी।

“दीपू … आह , तू कितना अच्छा है रे … ” उसके हाथ मुझे गजब की गर्मी दे रहे थे।

“भाभी … मुझे कुछ करने दो … ” उसका अनुनय विनय भरा स्वर सुनाई दिया।

” कर ले, सब कर ले मेरे दीपू … कुछ क्यों … आजा मेरे ऊपर आ जा … हाय, मेरी जान निकाल दे … “

मेरी बुदबुदाहट उसके कानो में जैसे अमृत बन कर कर उतर गई। वो जैसे आसमान बन कर मेरे ऊपर छा गया … नीचे से धरती का बिस्तर मिल गया … मेरा बदन उसके भार से दब गया … मैं सिसकियाँ भरने लगी। कैसा मधुर अनुभव था यह … तेज वर्षा की फ़ुहारों में मेरा यह पहला अनुभव … मेरी चूत फ़ड़क उठी, चूत के दोनों लब पानी से भीगे हुये थे … तिस पर चूत का गरम पानी … बदन जैसे आग में पिघलता हुआ, तभी … एक मूसलनुमा लौड़ा मेरी चूत में उतरता सा लगा। वो दीपू का मस्त लण्ड था जो मेरे चूत के लबों को चूमता हुआ … अन्दर घुस गया था।

मेरी टांगे स्वतः ही फ़ैल गई … चौड़ा गई … लण्ड देवता का गीली चूत ने भव्य स्वागत किया, अपनी चूत के चिकने पानी से उसे नहला दिया। दीपू लाईन क्लीअर मान कर मेरे से लिपट पड़ा और चुम्मा चाटी करने लगा … मैं अपनी आंखें बंद करके और अपना मुख खोल कर जोर जोर से सांस ले रही थी … जैसे हांफ़ रही थी। मेरी चूंचियां दब उठी और लण्ड मेरी चूत की अंधेरी गहराईयों में अंधों की तरह घुसता चला गया। लगा कि जैसे मेरी चूत फ़ाड़ देगा। अन्दर शायद मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। मुझे हल्का सा दर्द जैसा हुआ। दूसरे ही क्षण जैसे दूसरा मूसल घुस पड़ा … मेरी तो जैसे हाय जान निकली जा रही थी … सीत्कार पर सीत्कार निकली जा रही थी। मैं धमाधम चुदी जा रही थी … दीपू को शायद बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली थी, सो वो पूरी तन्मयता से मन लगा कर मुझे चोद रहा था। बारिश की तेज बूंदें जैसे मेरी तन को और जहरीला बना रही थी।

दीपू मेरे तन पर फ़िसला जा रहा था। मेरा गीला बदन … और उसका भीगा काम देवता सा मोहक रूप … गीली चूत … गीला लण्ड … मैं मस्तानी हो कर लण्ड ले रही थी। मेरे

शरीर से अब जैसे शोले निकलने लगे थे … मैंने उसके चूतड़ों को कस लिया और उसे कहा,”दीपू … नीचे आ जाओ … अब मुझे भी चोदने दो !”

“पर रीता भाभी, चुदोगी तो आप ही ना … ” दीपू वर्षा का आनन्द लेता हुआ बोला।

“अरे, चल ना, नीचे आ जा … ” मैं थोड़ा सा मचली तो वो धीरे से मुझे लिपटा कर पलट गया। अब मेरी बारी थी, मैंने चूत को लण्ड पर जोर दे कर दबाया। उसका मूसल नुमा लण्ड इस बार मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ मारता हुआ सीधा जड़ तक आ गया। मेरे लटकते हुये स्तन उसके हाथ में मसले जा रहे थे। दीपू की एक अंगुली मेरे चूतड़ों की दरार में घुस पड़ी और छेद को बींधती हुई गाण्ड में उतर गई।

मैं उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को धीरे धीरे ऊपर नीचे रगड़ कर चुदने लगी। बारिश की मोटी मोटी बूंदें मेरी पीठ पर गिर रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास घुसा लिया और आंखें बन्द करके चुदाई का मजा लेने लगी। हम दोनों जोर जोर से एक दूसरे की चूत और लण्ड घिस रहे थे … मेरे आनन्द की सीमा टूटती जा रही थी। मेरा शरीर वासना भरी कसक से लहरा उठा था। मुझे लग रहा था कि मेरी रसीली चूत अब लपलपाने लगी थी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी। फिर भी हम दोनों बुरी तरह से लिपटे हुये थे। मेरी चूत लण्ड पर पूरी तरह से जोर लगा रही थी … बस … कितना आनन्द लेती, मेरी चूत पानी छोड़ने लिये लहरा उठी और अन्ततः मेरी चूत ने पानी पानी छोड़ दिया … और मैं झड़ने लगी। मैं दीपू पर अपना शरीर लहरा कर अपना रज निकाल रही थी।

मैं अब उससे अलग हो कर एक तरफ़ लुढ़क गई। दीपू उठ कर बैठ गया और अपने लण्ड को दबा कर मुठ मारने लगा … एक दो मुठ में ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया और बरसात की मूसलाधार पानी के साथ मिल कहीं घुल गया। हम दोनों बैठे बैठे ही गले मिलने लगे … मुझे अब पानी की बौछारों से ठण्ड लगने लगी थी। मैं उठ कर नीचे भागी। दीपू भी मेरे पीछे कपड़े ले कर नीचे आ गया।

मैं अपना भीगा बदन तौलिये से पोंछने लगी, पर दीपू मुझे छोड़ता भला। उसने गीले कपड़े एक तरफ़ रख दिये और भाग कर मेरे पीछे चिपक गया।

“भाभी मत पोंछो, गीली ही बहुत सेक्सी लग रही हो !”

“सुन रे दीपू, तूने अपनी भाभी को तो चोद ही दिया है , अब सो जा, मुझे भी सोने दे !”

“नहीं रीता भाभी … मेरे लण्ड पर तो तरस खाओ … देखो ना आपके चूतड़ देख कर कैसा कड़क हो रहा है … प्लीज … बस एक बार … अपनी गाण्ड का मजा दे दो … मरवा लो

प्लीज … “

“हाय ऐसा ना बोल दीपू … सच मेरी गाण्ड को लण्ड के मजे देगा … ?” मुझे उसका ये प्रेमभाव बहुत भाया और मैंने उसके लण्ड पर अपनी कोमल और नरम पोन्द दबा दिये। उसका फिर से लण्ड तन्ना उठा।

” भाभी मेरा लण्ड चूसोगी … बस एक बार … फिर मैं भी आपकी भोसड़ी को चूस कर अपको मजा दूंगा !”

“हाय मेरे राजा … तू तो मेरा काम देवता है … “मैंने अपने चूतड़ों में से उसका लण्ड बाहर निकाल लिया और नीचे झुकती चली गई। उसका लण्ड आगे से मोटा नहीं था पर पतला था, उसका सुपाड़ा भी छोटा पर तीखा सा था, पर ऊपर की ओर उसका डण्डा बहुत ही मोटा था। सच में किसी मूली या मूसल जैसा था। मैंने मुठ मारते हुये उसे अपने मुख में समा लिया और कस कस कर चूमने लगी। मुझे भी लग रहा था कि अब दीपू भी मेरी भोसड़ी को चूस कर मेरा रस निकाले। मैंने जैसे ही उसका लण्ड चूसते हुये ऊपर देखा तो एक बार में ही वो समझ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। उसकी लपलपाती हुई जीभ मेरी चूत के भीतरी भागों को सहला रही थी। जीभ की रगड़ से मेरा दाना भी कड़ा
हो गया था। मैं सुख से सराबोर हो रही थी। तभी दीपू ने तकिया लेकर कहा कि अपनी चूतड़ के नीचे ये रख लो और गाण्ड का छेद ऊपर कर लो।

पर मैंने जल्दी से करवट बदली और उल्टी हो गई और अपनी चूत को तकिये पर जमा दी। मैंने अपनी दोनों टांगे फ़ैला कर अपना फ़ूल सा भूरा गुलाब खिला कर लण्ड़ को हाज़िर कर दिया। उसका मूसल जैसा लण्ड चिकनाई की तरावट लिये हुये मेरे गुलाब जैसे नरम छेद पर दब गया। मैंने पीछे घूम कर उसे मुस्करा कर देखा। दूसरे ही क्षण लण्ड मेरी गाण्ड पर घुसने के लिये जोर लगा रहा था। मैंने अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ा और लण्ड का स्वागत किया। वो धीरे धीरे प्यार से अंधेरी गुफ़ा में रास्ता ढूंढता हुआ … आगे बढ़ चला। मेरी गाण्ड तरावट से भर उठी। मीठी मीठी सी गुदगुदी और मूसल जैसा लण्ड, पति से गाण्ड मराने से मुझे इस लण्ड में अधिक मजा आ रहा था। उसके धक्के अब बढ़ने लगे थे। मेरी गाण्ड चुदने लगी थी।

मैं उसे और गहराई में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। मेरे चूतड़ ऊपर जोर लगाने लगे थे। दीपू ने मौका देखा और थोड़ा सा जोर लगा कर एक झटके में लण्ड को पूरा बैठा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी।

“साला लण्ड है या लोहे की रॉड … चल अब गाड़ी तेज चला … “

वो मेरी पीठ पर लेट गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर चूंचियाँ दबाने के लिये अन्दर घुस पड़े … मैंने जैसे मन ही मन दीपू को धन्यवाद दिया। दोनों बोबे दबा कर उसकी कमर मेरी गाण्ड पर उछलने कूदने लगी। मैं खुशी के मारे आनन्द की किलकारियाँ मारने लगी। सिसकी फ़ूट पड़ी … । उसके सेक्सी शरीर का स्पर्श मुझे निहाल कर रहा था। मेरी चूंचियाँ दबा दबा कर उसने लाल कर दी थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड की भरपूर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत भी चूने लग गई थी। उसमें से भी पानी रिसने लगा था। मेरी गाण्ड में मनोहारी गुदगुदी उठ रही थी, अब तो मेरी चूत में भी मीठी सी सुरसराहट होने लग गई थी। मेरी चूत लण्ड की प्यासी होने लगी। हाय … कितना अच्छा होता कि अब ये लण्ड मेरी चूत की प्यास बुझाता … मैंने गाण्ड मराते हुये घूम कर दीपू को आंख से इशारा किया।

“आह्ह नहीं रीता भाभी … तंग गाण्ड का मजा ही जोर का है … पानी निकालने दो प्लीज !”

“हाय रे फिर कभी गाण्ड चोद लेना, अभी तो मेरी चूत मार दे दीपू !”

“तो ये ले भोसड़ी की … हाय भाभी सॉरी … गाली मुँह से निकल ही गई !”

“नहीं रे चुदाते समय सब कुछ भला सा लगता है … ” फिर मेरे मुख से सीत्कार निकल पड़ी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में जोर से घुसेड़ दिया था … बस लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत को मिला … मेरी चूत फ़ड़क उठी। लड़कियों की चूत में लण्ड घुसा और वो सीधे स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है। मेरी चूत की कसावट बढ़ने लगी … वो मेरे पीठ पर सवार हो कर चूत चोद रहा था। उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा … शायद लण्ड को अन्दर पेलने में तकलीफ़ हो रही थी। मेरी गाण्ड ऊंची होते ही उसका लण्ड चूत में यूं घुस गया जैसे कि किसी बड़े छेद में बिना किसी तकलीफ़ सीधे सट से मोम में घुस गया हो। मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी। किसी बड़े भोसड़े की तरह चुद रही थी … उसने मेरे स्तन एक बार फिर से पकड़ते हुये अपनी ओर दबा लिये। मुझे चुचूकों को दबाने से और चूत में मूसल की रगड़ से मस्ती आने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत को तेजी से झटके मार मार कर चोद रहा था। अचानक उसका चोदने का तरीका बदल गया। करारे शॉट पड़ने लगे। मेरी चूत मे तेज आनन्द दायक खुजली उठने लगी। लगा कि चूत पानी छोड़ देगी।

“मां … मेरी … दीईईईपूऊऊऊ चोद मार रे … निकाल दे फ़ुद्दी का पानी … हाय राम जीऽऽऽऽ … मेरी तो निकल गई राजा … आह्ह्ह्ह” और मैंने अपना पानी छोड़ दिया …

उसका हाथ स्तनों पर से खींच कर हटाने लगी …

“बस छोड़ दे अब … मत कर जल रही है … ” पर उसे कहाँ होश था … मैं दर्द के मारे चीख उठी और दीपू … उसका माल छूट गया … उसकी चीख ने मेरी चीख का साथ दिया …

उसका लण्ड बाहर निकल आया और अपना वीर्य बिस्तर पर गिराने लगा। कुछ देर तक यूं ही माल निकलने का सिलसिला चलता रहा। फिर उस बिस्तर से उठे और हम दोनों दूसरे बिस्तर पर नंगे ही जाकर लेट गये … और फिर जाने कब हम दोनों ही सो गये।

मुझे लगा कि कोई मुझे बुरी तरह झकझोर रहा है … मेरी आंख खुल गई … सवेरा हो चुका था … पर ये दीपू … मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने का प्रयत्न कर रहा था … मुझे हंसी आ गई … मैंने अपने दोनों टांगें पसार दी और उसका लण्ड अपनी चूत में समेट लिया। उसे अपने से कस कर सुला लिया। मैं सुबह सवेरे फिर से चुद रही थी … मुझे अपनी सुहागरात की याद दिला रही थी … सोना नहीं … बस चुदती रहो … सुबह चुदाई, दिन को चुदाई रात को तो पूछो मत … शरीर की मां चुद जाती थी … हाय मैंने ये क्या कह दिया … Antarvasna Sex Stories

Hindi Sex Stories

एम-डी के जाने के बाद प्रीती ने देखा कि लड़कों का लंड Hindi Sex Stories फिर खड़ा हो चुका है। “लड़कों लगता है कि तुम लोगों की भूख अभी शाँत नहीं हुई है, शायद और चुदाई करना चाहते हो? तुम लड़कियों को अपने साथ कमरे में ले जाओ और चाहे जैसी चुदाई करो….. लेकिन ये ध्यान रखना कि लेट काफी हो चुका है और हमें खाना भी खाना है”, प्रीती ने कहा।

उनके जाने के बाद प्रीती ने टीना से कहा, “टीना! अब तुम्हारा अगला सबक… चुदाई के मज़े कैसे लिये जाते हैं….. रजनी! क्या तुम पहले अपनी चूत चूसवाना चाहोगी?”

“नहीं प्रीती! तुम्हारा हक पहले बनता है…. मैं बाद में चूसवा लूँगी”, रजनी ने अपने लिये नया पैग बनाते हुए जवाब दिया।

“ठीक है! अगर तुम यही चाहती हो तो! प्रीती बिस्तर पर थोड़ा आराम से लेट गयी और अपनी दोनों टाँगें एक दम फैला दी, टीना! अब तुम मेरी चूत तब तक चूसो और चाटो जब तक कि ये पानी ना छोड़ दे और एक-एक बूँद इसकी पी जाना।”

टीना शर्मा भी रही थी और झिझक भी रही थी कि कैसे करूँ। “अरे चलो चूसो! शरमाओ मत, तुम जानना चाहती थी ना कि तुम्हारी माँ और आँटी साथ-साथ क्या करेंगे, अब आया समझ में?”

टीना झिझकते हुए अपनी ज़ुबान प्रीती की चूत पर घुमा कर उसे चाटने लगी, “हाँ! सही जा रही हो, आधे मन से मत करो, दिल लगा कर चाटो और चूसो….. तुम्हें खूब मज़ा आयेगा”, प्रीती ने उसके सिर पर हाथ रख कर उसे अपनी चूत पर और दबा दिया।

टीना अब थोड़ा और अच्छी तरह चाटने लगी। “क्या अब मैं ठीक कर रही हूँ दीदी?”

“हाँ! अब सही कर रही हो। अब ऐसा करो अपनी अंगुलियों से प्रीती की चूत को फ़ैलाओ और अपनी जीभ से इसे अंदर से चाटो”, रजनी ने उसे सिखाया।

रजनी ने जैसा कहा, टीना वैसा ही करने लगी। “हाँ! अब अच्छा लग रहा है, तुम सही कर रही हो टीना”, प्रीती सिसकी। प्रीती के एक हाथ में सिगरेट थी और टीना से चूत चुसवाते हुए बीच-बीच में कश ले रही थी।        इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“टीना! क्या तुम्हें चूत के अंदर चूत का दाना दिख रहा है?” रजनी ने पूछा। टीना ने हाँ में गर्दन हिला दी।

“तो उस पर अपनी जीभ घुमाओ और जैसे अँगुली से अपनी चूत को चोदती हो वैसे ही अपनी जीभ से अब प्रीती की चूत को चोदो”, रजनी ने अपने पैग में से सिप लेते हुए कहा।

टीना अब अपनी जीभ जोर-जोर से प्रीती कि चूत में अंदर बाहर करने लगी। “ओहहहहह टीना…आआआ मज़ा आ रहा है!!!!! तुम्हारी जीभ का जवाब नहीं”, प्रीती अब मस्त हो कर बोल रही थी।

“हाँ! अब इसकी चूत की पंखुड़ी को अपने दाँतों से काटो, पर जोर से नहीं?” रजनी ने आगे सिखाया।

जैसे-जैसे रजनी सिखाती गयी वैसे-वैसे टीना करती गयी।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“हाँ आआआआआ…. जोर से अपनी जीभ डालो, ओहहहहह आआआआहहहह हाँआआआ मेरा छूटने वाला है”, प्रीती जोर से चींखी।

“टीना बहुत अच्छे! अब प्रीती की चूत का सारा पानी पी जाओ?” रजनी ने अपना पैग खत्म करते हुए कहा।

“टीना! तुम कमाल की हो”, कहकर प्रीती ने उसे बाँहों में भर लिया और चूमने लगी।

“अब किसकी बारी है?” टीना ने अपनी जीभ बाहर निकालते हुए कहा।

“आओ रजनी! अब तुम बिस्तर पर लेट जाओ!” प्रीती ने रजनी के लिये जगह बनाते हुए कहा।

कुछ देर बाद जब टीना, रजनी और बाकी सब लड़कियों की चूत चाट चुकी थी तो थक कर बोली, “बस अब और नहीं!!! मेरी जीभ दुखने लगी है।”

“तुम अब अपनी जीभ को आराम दो, अब हमारी बारी है कि हम तुम्हारी चूत को अपनी जीभ से मज़ा दें”, प्रीती हँसते हुए बोली, “इधर आओ और बिस्तर पर लेट कर अपनी टाँगें फैला दो जैसे मैंने फ़ैलायी थी।”

“आओ लड़कियों!!! अब हम टीना को ज़िंदगी का असली मज़ा दें”, इतना कहकर प्रीती ने अपनी सिगरेट को ऐशट्रे में बुझाते हुए अपना मुँह टीना कि जाँघों के बीच छुपा दिया।

“ऊऊऊऊओओओहहहह प्रीती!!!!” टीना सिसकी।

प्रीती अब टीना की चूत को अपनी जीभ घुमा-घुमा कर चाट रही थी और उसे चूस रही थी। “ओहहहहह प्रीती!!!! बहुत अच्छा लग रहा है….. हाँआआआआ चाटते जाओ….. हाँआआआआ ऐसे ही….. काट लो मेरी चूत को…… ओहहहह हे भगवान!!!! मैं तो गयीईईई”, कहते हुए टीना की चूत झड़ गयी और वो गहरी-गहरी साँसें लेने लग गयी।

प्रीती मज़े लेकर उसकी चूत से निकली एक एक बूँद को पीने लगी। जैसे ही प्रीती हटी, रजनी उसकी जगह लेकर टीना की चूत को चूसने लगी। इस तरह बारी-बारी सब लड़कियों ने टीना की चूत को चाटा और चूसा।

“मुझे नहीं मालूम कि मैं कितनी बार झड़ी हूँ, मुझे तो लग रहा है कि मेरे शरीर में जान ही नहीं है…” टीना बोली।

“मैं समझ सकती हूँ, इसलिये मेरे पास एक दवाई है! अब तुम्हें गाढ़े और मजबूत रस की जरूरत है जो तुम्हें लड़कों के लंड से ही मिलेगा”, प्रीती ने कहा।

“ठीक है! तो पहले तुम राज के लंड को चूसो और उसके पानी को पी जाओ और फिर हर लड़के के लंड का पानी पीना है…” रजनी बोली।

टीना मेरी जाँघों के बीच आकर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। “हाँ ऐसे ही…. हाँ…आआ अपना मुँह ऊपर-नीचे करो, देखना कहीं दाँत ना लगा देना”, मैं उसके सिर को अपने लंड पर दबाते हुए बोला, “ओहहहहह हाँ…आआआ जोर से…… ओहहहहह हाँ…आआआ मेरा तो छूटाआआआ”, कहते हुए मेरे लंड ने उसके मुँह में पिचकारी छोड़ दी। टीना ने सारा पानी पी कर मुँह बनाया।

“क्यों अच्छा नहीं लगा क्या?” रजनी ने पूछा।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“अच्छा था लेकिन थोड़ा नमकीन था”, टीना ने जवाब दिया।

जब टीना सभी लड़कों का लंड चूस कर उनका पानी पी चुकी थी तो रजनी बोली, “टीना! काफी देर हो चुकी है, चलो घर चलना है।”

रजनी इतने नशे में थी कि उसके लिये ड्राईव करना तो मुमकिन ही नहीं था। टीना ने अपने कपड़े पहने और मैंने रजनी को बड़ी मुश्किल से किसी तरह उसके कपड़े पहनाये और फिर उसे सहारा देकर नीचे टैक्सी तक छोड़ने गया। मैं जब रजनी और टीना को टैक्सी में बिठा कर वापस आया तो देखता हूँ कि सिमरन और साक्षी मुँह बनाये सोफ़े पर पसरी हुई थीं।

“तुम दोनों का मुँह उतरा हुआ क्यों है, क्या हुआ?” मैंने पूछा।

“देखो ना! प्रीती दीदी जय और विजय के साथ हैं, और अंजू-मंजू राम और श्याम को अपने साथ ले गयी हैं, सिर्फ़ हमारा ही खयाल रखने वाला कोई नहीं है।” सिमरन थोड़ा मुँह बनते हुए बोली। उसके स्वर से साफ ज़ाहिर था कि उसने भी बहुत शराब पी ली थी।

“अरे तुम दोनों ऐसा क्यों सोचती हो…..? मैं हूँ ना तुम दोनों का खयाल रखने के लिये”, कहकर मैंने दोनों को अपनी बाँहों में भर लिया।

सारी रात मैं दोनों को चोदता रहा, और आखिर में थक कर हम सब सो गये।

अगला दिन और हफ्ता मेरा काफी बिज़ी गया। टाईम ही नहीं मिला काम से कि मैं किसी और चीज़ की ओर ध्यान दे सकूँ। एक रात जब मैं और प्रीती बिस्तर में थे तो प्रीती ने कहा, “राज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।”

“हाँ! कहो क्या बात है?” मैंने कहा।

“आज दोपहर में जब मैं सुस्ता रही थी तो विजय मेरे कमरे में आकर मेरे बिस्तर में घुस गया।”

“तो इसमें हैरानी की बात क्या है, तुम उससे कितनी ही बार चुदवा चुकी हो?” मैंने कहा।

“हैरानी की बात नहीं…. मुझे दो बार चोदने के बाद वो पूछता है कि भाभी मर्द अपनी ज़िंदगी में सबसे ज्यादा खुश कब होता है? मैंने उससे कहा कि तुम मर्द हो तुम बताओ?” वो बोला कि, “भाभी! मैंने कॉलेज के दिनों में कई लड़कियों को चोदा, हमें इतना वक्त नहीं मिलता था कि हम बराबर चुदाई कर सकें पर फिर भी मैं सोचता था कि मुझसे खुशनसीब इंसान नहीं है।”

“फिर मेरी शादी मंजू से हो गयी, वो खुद इतनी चुदक्कड़ थी कि उसने मुझे कभी ना नहीं किया, फिर अंजू ने मुझे बहकाया और मैंने उसे चोदा। पता लगा कि जय भी मंजू को चोदता है। अब मेरे पास दो चूत थी चोदने के लिये।“

प्रीती अपनी बात ज़ारी रखते हुए बोली, “मैंने उससे पूछा कि मैं अभी तक समझी नहीं कि तुम कहना क्या चाहते हो? तो उसने जवाब दिया कि “मैं छुट्टियों में यहाँ आना नहीं चाहता था लेकिन ये लोग मुझे जबरदस्ती ले आये। यहाँ आने के बाद मैंने देखा कि मैं सात नयी चूत चोद चुका हूँ और उसमे आप भी शमिल हैं, क्या आपको लगता है कि मैं खुश हूँ?” विजय ने अपनी बात पूरी की।”

“मैंने उससे कहा कि इतनी छोटी सी उम्र में तुम इतनी चूतों को चोद चुके हो…. ये अपने आप में एक मिसाल है, तो विजय बोला कि नहीं “भाभी, मैं खुश नहीं हूँ, आपको पता है ना कि – दिल मांगे मोर” विजय ने हँसते हुए कहा।”

“मैंने पूछा कि इसका मतलब तुम और नये चूतों दो चोदना चाहते हो? तो वो अपने लौड़े को दबाते हुए बोला कि, “हाँ भाभी! मैं जितनी नयी चूत को चोदता हूँ मुझे उतनी ही और चाहत होने लगती है। मुझे नयी चूत चोदने में मज़ा आता है, काश राज भैया नयी चूत का इंतज़ाम कर देते।”

“मैंने कहा कि अगर ऐसी बात है तो तुम राज को क्यों नहीं कहते? विजय बोला कि “मैंने सोचा कि अगर आप उनसे बात करें तो बेहतर होगा।”

“मैंने फिर उसके लंड को दबाते हुए कहा कि, ठीक है मैं उससे बात करूँगी, लेकिन जब तक वो तुम्हारे लिये नयी चूत का इंतज़ाम करें तब तक तुम मेरी चूत की धुनाई कर दो।”

प्रीती हँसते हुए मुझसे बोली, “राज! सही में उसने मुझे इस तरह चोदा कि मेरी चूत भी पनाह माँग गयी।”

“तो तुम चाहती हो कि मैं उनके लिये चूतों का इंतज़ाम ऑफिस से करूँ?” मैंने कहा।

“हाँ राज! फ़िर से एक बार सामुहिक चुदाई का इंतज़ाम करो ना जैसे हमने टीना के जन्मदिन पर किया था”, प्रीती मेरे लंड से खेलते हुए बोली, “मैंने इतना वादा जरूर उससे किया है।”

“ठीक है जब तुमने कह दिया तो मुझे करना ही पड़ेगा”, मैंने जवाब दिया।

दूसरे दिन ऑफिस में पहुँच कर मैंने आयेशा को पार्टी में आने की दावत दी तो वो बोली, “सर, मैं खुशी से शामिल होती मगर लगता है मैं नहीं आ पाऊँगी।”

“क्यों क्या बात है?” मैंने पूछा।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“सर, मेरे अब्बू शायद नहीं आने देंगे, उन्हें मेरी बहुत चिंता रहती है”, आयेशा ने कहा।

“तुम इसकी चिंता मत करो, तुम्हारे अब्बा से मैं बात कर लूँगा।”

“तो ठीक है सर, मैं आ जाऊँगी”, आयेशा ये कहकर चली गयी।

मैंने आयेशा के अब्बू से बात कर उन्हें मना लिया।

शाम को प्रीती ने मुझसे पूछा कि पार्टी कौन से दिन रख रहा हूँ तो मैंने कहा कि, “शनिवार को! मैंने रजनी से कह दिया है कि वो टीना को साथ ले आये और मैंने एम-डी को भी दावत दे दी है। हमारी नयी साथी आयेशा होगी।”

शनिवार को मैंने आयेशा के अब्बू से इजाज़त लेकर आयेशा को उसके घर से पिक किया। “आज तो बहुत सुंदर दिख रही हो….. क्या बात है….. कहीं कहर बरसाने का इरादा है”, मैंने आयेशा दो देखते हुए कहा।

“नहीं सर! ऐसा कुछ नहीं है, बस अपने बदन पर थोड़ा पर्फ्यूम छिड़का है और ये ड्रेस अपनी सहेली से उधार ली है ताकि मैं पार्टी में तमाशा ना बन जाऊँ”, आयेशा ने जवाब दिया।

“पर ये ड्रेस ज्यादा देर तक तुम्हारे बदन पे नहीं रहेगी।”

“क्यों सर? क्या पार्टी में चुदाई भी होगी?” उसने पूछा।

“हाँ… थोड़ी नहीं, बहुत सारी होगी”, मैंने कहा।

“फिर तो मज़ा आ जायेगा सर”, ये कहकर वो मुझसे चिपट गयी।

मैंने भी उसे अपने नज़दीक कर लिया और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। मैं बीच-बीच में उसके निप्पल भींच देता था तो उसके मुँह से जोर से सिसकरी निकल पड़ती थी।

“सर, आपने तो मुझे अभी से गीला कर दिया, मैं अपनी सहेली को कपड़े पर लगे दाग के बारे में क्या बताऊँगी?”

“तुम समझदार हो! कोई ना कोई बहाना ढूँढ ही लोगी”, कहकर मैं उसकी चूत को रगड़ने लगा।

जब तक हम घर पहुँचे आयेशा एक बार झड़ चुकी थी। जब हम घर में दाखिल हुए तो आयेशा को देख कर एक दम सन्नाटा छा गया। आयेशा ने जब रजनी और टीना को वहाँ देखा तो चौंक पड़ी, “सर! मिस रजनी और मिस टीना ऐसी पार्टी में यहाँ क्या कर रही हैं?”

“डरो मत! ये हम में से ही एक है, और इनकी चूत मैंने ही फाड़ी थी”, मैंने आयेशा को बाँहों में भरते हुए कहा।

“नसीब वाली हैं ये कि आपने इनकी चूत फाड़ी”, कहकर वो मुझसे चिपक कर खड़ी हो गयी।

“दोस्तों!!! ये आयेशा है!” मैंने उसका परिचय कराते हुए कहा।

“इस परी को तो सबसे पहले मैं ही चोदूँगा”, विजय अपने लंड को सहलाते हुए बोला। आयेशा सिर्फ़ मुस्करा के रह गयी।

“आयेशा! मेरी बाँहों में आ जाओ, हमें समय नहीं गंवाना चाहिये”, विजय अपनी बाँहें फैला कर बोला।

आयेशा अपना पर्स वहीं ज़मीन पर गिरा दौड़ के उसकी बाँहों में समा गयी।

आयेशा को विजय के पास जाते देख मैं रजनी और टीना के पास गया, “अच्छा हुआ रजनी! तुम लोग आ गये।”

“हम आ तो गये पर तुम्हें नहीं मालूम जब अंकल यहाँ पहुँचे और टीना को यहाँ देखा तो हंगामा हो गया”, रजनी बोली।

“ऐसा क्या हुआ…. मुझे बताओ?”         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“अपने पापा को यहाँ देख टीना भी चौंक गयी, और जब अंकल जोर से इस पर चिल्लाये कि वो यहाँ क्या कर रही है तो एक बार मैं भी घबरा गयी, पर टीना ने शांती से उन्हें कहा कि वही… पापा जो आप कर रहे हैं, आप यहाँ चोदने आये हैं और हम चुदवाने।”

“आओ देखता हूँ कि तुमने सही जवाब दिया कि नहीं”, मैंने टीना को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

सामुहिक चुदाई का दौर शुरू हो चुका था। चारों तरफ गर्मी का माहोल था, जिसके मन में जो आये वो उसे चोद रहा था। सब पर शराब और चुदाई का नशा सवार था और चुदाई का शुमार पूरे जोर पर था। पार्टनर्स बदले जा रहे थे, पूरे घर में सिसकियों और गहरी सांसों के अलावा और कोई आवाज़ नहीं थी।

रात बारह बजे जब सब थक गये तो मैंने आयेशा को उसके घर छोड़ा और घर आकर प्रीती की बाँहों में सो गया।

दूसरे दिन मैं ऑफिस पहुँचा तो देखा आयेशा वक्त से पहले ही आ गयी थी। मेरे आते ही उसने सब रिपोट्‌र्स और एक एपलीकेशन मेरी टेबल पर रख दी।

“ये एपलीकेशन किस चीज़ की है?” मैंने पूछा।

“सर, आज मुझे आधे दिन कि छुट्टी चाहिये, जो काम पेंडिंग रह जायेगा वो मैं कल जल्दी आकर पूरा कर दूँगी”, आयेशा ने कहा।

उसके चेहरे को देख कर मुझे लगा कि वो मुझसे कुछ छुपा रही है। “आयेशा! सच-सच बताओ कि बात क्या है, तुम आधे दिन कि छुट्टी क्यों लेना चाहती हो?”

“सर, विजय का फोन आया था और वो चाहता है कि मैं दोपहर में वहाँ आऊँ। वो सब मुझे साथ में चोदना चाहते हैं। सर, कोई बहाना बना दीजिये ना!” वो हँसते हुए बोली।

“लेकिन घर में दूसरी औरतें भी तो हैं…. उनका क्या?” मैंने पूछा।

“सर! विजय ने बताया कि वो सब शॉपिंग पर जा रही हैं, और सर आप ही सोचिये कि जब चार खड़े लंड मेरे साथ होंगे, सर, सिर्फ़ इस खयाल से ही मेरी चूत से पानी टपक रहा है, सर, प्लीज़ मेरी छुट्टी मंज़ूर कर दीजिये”, आयेशा गिड़गिड़ाते हुए बोली।

“ठीक है! लेकिन एक शर्त पर कि तुम पेंडिंग काम कल पूरा कर दोगी”, मैंने हँसते हुए कहा।

मेरा इतना कहने की देर थी कि आयेशा ने जोर से मेरे होंठों पर चुंबन लिया और केबिन के बाहर दौड़ कर चली गयी।

इसके पहले कि मैं आयेशा के चुंबन के असर से बाहर आता एम-डी का इंटरकॉम पर फोन आया, “राज! आज आयेशा कहाँ है….. दिखी नहीं?”

“सर! आज वो छुट्टी पर है”, मैंने जवाब दिया।

एम-डी ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और नसरीन को कॉफी लाने को कहा। कॉफी की घूँट भरते हुए एम-डी ने कहा, “राज! लगता है आयेशा पर काम का बोझ कुछ ज्यादा ही है, इसलिये मैं नसरीन को अपनी पर्सनल सेक्रेटरी बनाना चाहता हूँ।”

“सर, आपका खयाल तो अच्छा है, लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि उसे नियुक्त करने से पहले हमें उसकी काबिलियत को जान लेना चाहिये…..” मैंने थोड़ा हँसते हुए कहा।

“हाँ! तुम सही कह रहे हो!” एम-डी ने जोर से हँसते हुए कहा।

एम-डी ने नसरीन को अपने केबिन में बुलकर कहा, “नसरीन मैंने फैसला किया है कि मैं तुम्हें अपना पर्सनल सेक्रेटरी एपॉयंट कर दूँ…. लेकिन उसके पहले राज ने बताया कि हम तुम्हारी काबिलियत जाँच लें।”

“सर, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है।” नसरीन ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए कहा। मैं आयेशा के ख्यालों में खोया हुआ था कि वो चार मुस्टंडे लंडों के साथ क्या कर रही होगी। इतने में मैंने देखा कि नसरीन बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और इस समय हमेशा की तरह चुदने के पहले कोकेन की डोज़ अपनी नाक में खींच रही थी। फिर दो बार नसरीन की काबिलियत जाँचने के बाद मैंने एम-डी से जाने की विदा माँगी।

“तुम जा सकते हो….. यहाँ सब ठीक है, ओहहहहह नसरीन! हाँ जोर से चूसो……., हाँआआआआ अब ठीक है!!!! ओहहहहह मेरा छूटने वाला है!!!!” एम-डी कामुक्ता भरे स्वर में कह रहा था।

जब मैं घर पहुँचा तो देखता हूँ कि तीन लड़के अपने मुर्झाये लंड को हाथ में पकड़े बैठे थे। “आयेशा कहाँ है और उसका क्या हाल है?”

“आयेशा तो सही कमाल की है, जब से आयी अपनी टाँगें पसारे चुदवा रही है, हमारे ही लंड में अब ताकत नहीं रही”, विजय बोला।

“जय कहाँ है?” मैंने पूछा।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“जय इस समय आयेशा की चुदाई कर रहा है, पर हमें नहीं लगता कि इस बार झड़ने के बाद वो दोबारा उसे चोद सकेगा”, राम ने कहा।

“राज, तुम ही अब जा कर आयेशा को चोदो!” श्याम ने कहा।

मैंने बेडरूम में झाँक कर देखा कि विजय धीरे-धीरे आयेशा की चुदाई कर रहा है। “हाँ चोदो मुझे!!!!! ओहहहहह हाँआआआआआ आआआआहहहह मेरा छूटने वाला है”, आयेशा सिसकरियाँ ले रही थी। उसका स्वर शराब के नशे के कारण भारी और अस्पष्ट सा था। विजय भी दो तीन धक्के और मार कर उसकी चूत में झड़ गया।

जैसे ही विजय उससे अलग हुआ, मैंने अपने कपड़े उतार कर अपना लंड आयेशा की चूत में डाल दिया, “ओह सर!!! आप कब आये।”

कोई जवाब दिये बिना मैं जमकर उसकी चुदाई करने लगा। जब मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया और उससे अलग होने लगा तो वो मुझे बाँहों में जकड़ते हुए हकलाते हुए स्वर में बोली, “स….सर! प्लीज़ एक… एक बार और…. चो…चोदो ना।”

“नहीं अब और नहीं…. तुम्हें घर जाना है…. और तुमने इतनी शराब क्यों पी?” मैंने बिस्तर पर से उठते हुए कहा।

“सर…. आप..आपने सारा मज़… किरकिरा कर…कर दिया”, उसने उठते हुए कहा।

“मैंने मज़ा किरकिरा नहीं किया…. बल्कि तुम्हें तुम्हारे अब्बू से बचा रहा हूँ, अगर तुम्हें ढूँढते हुए वो ऑफिस पहुँच गये और पता चला कि तुम दोपहर में ही चली गयी हो तो तुम्हारी शामत आ जायेगी।”

“हाँ सर… ये…. ये बात तो सही है”, आयेशा बोली। फिर मैंने उसके परों में से उसके ऊँची हील के सैंडल निकाल कर उसे बाथरूम में शॉवर के नीचे बिठा दिया ताकि उसका नशा कुछ कम हो। नहाने के बाद उसने आधा घंटा आराम किया और फिर अपने कपड़े पहन कर जाते हुए चारों लड़कों से बोली, “सही में तुम लोगों के साथ बहुत मज़ा आया….. ऐसा ही कार्यक्रम दोबारा फ़िर रखेंगे।”

“हाँ जरूर!” चारों ने साथ में कहा।

अब अक्सर आयेशा दिन में छुट्टी ले मेरे फ्लैट पर चली जाती और चारों लड़कों से दिल खोल कर चुदवाती।

करीब दस दिन के बाद एक शाम रजनी अपनी एक फ्रैंड फातिमा को ले ऑफिस पहुँची। “राज! ये मेरी कॉलेज की फ्रैंड फातिमा है”, रजनी ने मेरा उससे परिचय कराया।

फातिमा बहुत ही सुंदर थी। पतला बदन, गुलाबी होंठ…… मन करा कि बढ़कर चूस लूँ। उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी नहीं थीं पर बनाव अच्छा था। उसने लाइट ब्लू कलर की सलवार कमीज़ और सफ़ेद कलर के बहुत ही ऊँची हील के सैंडल पहन रखे थे। उसकी सुंदरता देखने लायक थी। वो किसी भी टॉप की मॉडल को मात कर सकती थी।

“राज! फातिमा का कहना है कि इसके अंकल चुदाई में तुमसे ज्यादा निपुण हैं और मैं कहती हूँ कि तुम हो…… हमने इसी बात पर शर्त लगायी है”, रजनी ने कहा।

तो मुझे इस सुंदर हूर को चोदने का मौका मिलने वाला है, यही सोच कर मेरा लंड तनने लगा।

“मैं तुम्हें समझाती हूँ कि क्या करना है, सही में मैं जिनकी बात कर रही हूँ वो मेरे अंकल नहीं हैं…. बल्कि वो मेरी अम्मी के प्रेमी हैं और उन्होंने ही मुझे पहली बार चोदा था”, फातिमा बोली। “वो एक हफ़्ते की छुट्टी पर इस शनिवार को आ रहे हैं और मैं चाहती हूँ कि आप भी उसी रोज़ पहुँचें।”

“ठीक है हम लोग पहुँच जायेंगे….. पर मेरी बीवी मेरे साथ होगी”, मैंने कहा।

“बहुत अच्छा, और रजनी ने मुझे बताया कि तुम भी फ़्री सैक्स में विश्वास रखते हो?” फातिमा बोली।

“हाँ! रजनी ने सही कहा है, मैं शनिवार की टिकटों का इंतज़ाम कर लूँगा।”

“एक आखिरी बात! हमारे घर में तुम्हें कईंयों को चोदने को मिलेगा….. जैसे मेरी अम्मी, मैं खुद और हमारी दो नौकरानियाँ। इस हिसाब से तुम चार नई चूतों को चोदोगे और तुम सिर्फ़ प्रीती और रजनी को साथ लेकर आओगे!”

फातिमा थोड़ा हँसते हुए बोली, “इस हिसाब से तुम्हें दो लड़कियों को और साथ लाना होगा…. मेरे अंकल के लिये, जो तुम्हारे लिये कोई मुश्किल काम नहीं होगा।” फातिमा एक दम व्यापारी रीत में बोली।

“ठीक है!!! मैं इंतज़ाम कर लूँगा”, मैंने कहा।

“तो ठीक है….. हम लोग शनिवार को स्टेशन पर मिलेंगे, मैं तुम लोगों के साथ ही चलूँगी”, कहकर फातिमा चली गयी।

रजनी ने पूछा, “किसे साथ लेकर जाने की सोच रहे हो?”

“आयेशा तो पक्की है, और अगर तुम इंतज़ाम कर पाओ तो टीना को लेकर जाना चाहुँगा”, मैंने रजनी की तरफ देखते हुए कहा।

“ठीक है, मैं कोशिश करूँगी”, ये कहकर रजनी भी चली गयी।

बाद में घर पर मैंने प्रीती से बात की तो प्रीती ने घर में सब को हमारे प्रोग्राम के बारे में बताया। “अगर आप इजाज़त दें तो हम सब भी चलना चाहेंगे”, राम ने हमारी बात सुनकर कहा, “इसी बहाने थोड़ा घूमना भी हो जायेगा, जब से आये हैं, घर में ही घुसे हुए हैं।”

“अगर फातिमा को आपत्ति नहीं है तो मैं तैयार हूँ।” मैंने जवाब दिया।

प्रीती ने तुरंत रजनी को फोन लगाकर फातिमा से बात कराने को कहा।

करीब एक घंटे बाद रजनी टीना को लिये घर में दाखिल हुई। टीना की आँखें एक दम सुर्ख लाल हो रही थी।

“ये टीना को क्या हुआ… और ये रो क्यों रही है?” मैंने पूछा।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“राज तुमसे बात होने के बाद मैंने घर पहुँच कर टीना को सब बताया तो वो खुशी से उछल पड़ी और अपने पापा से इजाज़त लेने गयी, पर अंकल ने एक दम साफ मना कर दिया।” रजनी बोली।

“जब टीना ने पूछा कि पर क्यों पापा!…. तो…. अंकल ने ये कहकर साफ मना कर दिया कि तुम जानना चाहती हो कि मैं क्यों ना बोल रहा हूँ….. जब राज ने तुम्हारी चूत और गाँड मारी तो मैं कुछ नहीं कर पाया और अब तुम चाहती हो कि राज के दोस्त भी तुम्हें चोदें…… नहीं! ये मैं कभी नहीं होने दूँगा।”

“ये सुन टीना बहुत उदास थी और रो रही थी…. इसी लिये मैं इसे यहाँ ले आयी कि कम से कम जाने से पहले एक बार राज से चुदवा लेगी तो इसके मन को ठंडक पड़ जायेगी”, रजनी ने कहा।

“ये तो तुमने ठीक किया पर क्या फातिमा से तुम्हारी बात हो गयी है?” मैंने रजनी से पूछा।

“हाँ! मेरी फातिमा से बात हो गयी है, उसका कहना है कि उनका बंगला काफी बड़ा है और उसे या उसकी अम्मी को कोई परेशानी नहीं होगी”, रजनी ने जवाब दिया।

“रजनी, एक बात बताओ! फातिमा इतनी सुंदर है पर बात करते वक्त इतने ठंडे लहज़े में क्यों बात करती है?” मैंने पूछा।

“ऐसा कुछ नहीं है, बस जब थोड़ा चिंतित होती है तो उसका व्यवहार ऐसा हो जाता है।”

“तब तो ठीक है, नहीं तो मैं तो सोच रहा था कि मुझे बर्फ की सिल्ली के समान चूत में ही अपना लंड पेलना पड़ेगा”, मैंने कहा।

“बर्फ की सिल्ली… मेरी जूती! जब तुम्हारा लंड उसकी चूत में घुसेगा तो तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा लंड किसी जलती हुई भट्टी में घुस गया है”, रजनी थोड़ा जोर देती हुई बोली।

उसके बाद मैंने दो बार टीना की जम कर चुदाई की और फिर खाना खाकर वो दोनों चली गयीं।

दूसरे दिन मैंने अनिता को अपने प्रोग्राम के बारे में बताया कि मैं आयेशा और वो नयी लड़की ज़ुबैदा को साथ ले जाना चाहता हूँ, तो उसने कहा, “सर! आप फ़िक्र ना करें, आप जायें और इंजॉय करें, मैं पीछे सब संभल लूँगी।”

हम शनिवार की दोपहर को फातिमा के घर पहुँचे। वो तीन मंज़िला बंगला था। फातिमा ने हमारा परिचय उसकी अम्मी, मिसेज रूही, से कराया। मिसेज रूही सही में बहुत ही सुंदर थीं। उनकी उम्र ४५ के आस पास थी पर वो देखने में फातिमा की बड़ी बहन से ज्यादा नहीं लगती थी। अगर मुझसे कोई उन माँ-बेटी में से एक को चुनने को कहता तो मैं माँ को ही चुनता, उसकी सुंदरता देखने काबिल थी।

“आप सब का हमारे घर में वेलकम है”, रूही हमारा स्वागत करते हुए बोली, “और ये…..” उसने अपने पीछे खड़ी हुई दो लड़कियों कि ओर इशारा किया, “ये आबिदा और सलमा हैं, जो आप लोगों का हर तरह से खयाल रखेंगी।” आबिदा और सलमा को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि वो नौकरानियाँ हैं बल्कि वो दोनों किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थीं। उनका पहनावा और शृंगार, फतिमा और मिसेज रुही से कम नहीं था।

हम सबने दोपहर का खाना खाकर आराम किया। शाम को फातिमा के अंकल कहो या रूही के प्रेमी, मिस्टर रवि आ गये। रवि देखने में अच्छे थे, लंबा कद, चौड़े बाज़ू और सुंदर चेहरा। कोई भी औरत उनकी तरफ आकर्षित हो सकती थी।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

सब हॉल में इकट्ठे हो जाओ! “ड्रिंक्स पंद्रह मिनट में सर्व की जायेंगी”, रूही आदेश देती हुई बोली, “रवि! बार की कमान तुम संभालो।”

थोड़ी ही देर में सब ड्रिंक्स और माहोल का आनंद ले रहे थे।

“अच्छी भीड़ जमा कर रखी है इस वक्त?” मैंने रवि को रूही से कहते हुए सुना।

“ये सब फातिमा के दोस्त हैं, लेकिन अफ़सोस कि इस बार तुम्हारे लिये कोई कोरी चूत नहीं है”, रूही हँसते हुए बोली।

“इस बार मेरी जान…. मैं तुमसे मिलने आया हूँ ना कि कुँवारी चूत की उम्मीद में”, रवि ने अपने ग्लास से घूँट भरते हुए कहा।

खाने की टेबल पर फातिमा ने रवि को अपनी शर्त की बात बतायी। “तुम्हें नहीं लगता कि तुम बचकाना हरकत कर रही हो?” रवि ने कहा।

“यही बात अम्मी और राज ने भी कहीं थी, लेकिन मैंने फैसला कर लिया है कि मैं जान कर रहुँगी! इसलिये प्लीज़… आप हाँ कर दें”, फातिमा ने कहा।

“रवि! हाँ कर दो ना! तुम्हारा क्या जाने वाला है?” रूही चौथा पैग खतम करती हुई बीच में बोली।

“ठीक है! अगर तुम्हारी अम्मी कह रही है तो मैं तैयार हूँ”, रवि ने कहा, “बताओ कैसे आजमाना चाहोगी।”

“अंकल! आज रात आप रजनी के साथ सोयेंगे और मैं राज के साथ”, फातिमा ने बताया, “रजनी राज के साथ सो चुकी है और मैं आपके साथ…. सो हम दोनों का बयान ही फैसला करेगा।”

जिस तरह उस घर का दस्तूर था, रूही ने फैसला किया कि कौन किसके साथ सोयेगा। रूही ने जोड़ों की घोशना की, “राम, आयेशा और अंजू को चोदेगा, श्याम, मंजू और सलमा को, विजय, सिमरन और आबिदा को, और जय, ज़ुबैदा और साक्षी को।”

“पर आपका और प्रीती का क्या होगा?” फातिमा ने पूछा।

“कुछ नहीं! हम लोग एक दिन बिना मर्द के रह लेंगे, एक दूसरे को सैटिसफायी करने के लिये हम ही काफी हैं”, रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

उस रात जब मैंने अपना लंड फातिमा की चूत में घुसाया तो वो बोली, “राज! तुम्हारा लंड कितना लंबा और मोटा है, मुझे लगता है कि मेरी चूत तुम्हारे लंड से पूरी भर गयी है।”

उसकी बातों को नज़र अंदाज़ करते हुए मैं उसे धीरे-धीरे चोदने लगा। कभी मैं अपनी रफतार तेज कर देता और कभी धीरे से पेल देता और कभी अचानक ही पूरा लंड एक ही झटके में जड़ तक डाल देता। थोड़ी देर में ही उसे भी पूरा जोश आ गया था, और वो अब अपने कुल्हे उठा कर मेरे धक्कों का साथ दे रही थी।

“हाँआआआआ राज!!! इसी तरह चोदो!!!, हाय अल्लाह…. कितना अच्छा लग रहा है!!!!, हाँ और जोर से चोदो!!!! हाँआआआआ ओहहहहह”, उसका शरीर अकड़ रहा था और मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है, “हाँआआआआ राज!!! और जोर से!!! हाँ ओहहह मेरा छूटाआआ”, और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

दो तीन जोर के धक्के और मारने के बाद मेरे लंड ने भी उसकी चूत में पिचकारी छोड़ दी।

उस रात मैंने फातिमा को चार बार चोदा और सुबह फातिमा ने मेरे लंड को ऐसे चूसा कि आज तक मैंने ये अनुभव नहीं किया था।

सुबह नाश्ते की टेबल पर सब इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि फैसला किसके हक में जाता है। “राज भी चुदाई कला में माहिर है, मैं फैसला नहीं कर पा रही कि कौन बेहतर है”, फातिमा ने कहा।

“और यही राय मेरी है, मेरे हिसाब से दोनों ही माहिर हैं”, रजनी ने कहा।         इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

उस दिन हम सब शहर में घूमने गये और देर शाम तक ही लौटे। खाने के बाद फिर ड्रिंक्स का दौर चला और फ़िर रूही ने तय किया कि कौन किसके साथ सोयेगा। रवि के हिस्से में प्रीती और सिमरन आयी, आयेशा और मंजू जय के साथ, विजय को मिली साक्षी और ज़ुबैदा, फातिमा और रजनी राम के साथ, श्याम के साथ अंजू और रूही और मेरे हिस्से में आयी आबिदा और सलमा।

जब हम अपने अपने कमरे में जाने की तैयारी कर रहे थे तो रवि बोला, “राज इनसे मसाज करवाना नहीं भूलना!”

“मसाज क्यों? मैं तो जमकर इनकी चुदाई करना चाहता हूँ!” मैंने कहा।

“चुदाई तो तुम जब चाहो कर सकते हो, पर मसाज कराकर देखो, तुम्हारी जन्नत की सैर हो जायेगी, इनका मसाज करने का तरीका कुछ अलग ही है”, रवि ने कहा।

“ठीक है! मैं आजमाना चाहुँगा”, मैंने कहा, “लेकिन इसके लिये मुझे क्या करना होगा।”

“कुछ नहीं! बाकी मैं इन्हें समझा दूँगा”, रवि ने जवाब दिया।

रात को बिस्तर पर लेटे हुए मैंने देखा कि आबिदा और सलमा, दोनों, सिर्फ हाई पेन्सिल हील के सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी मेरे कमरे में दाखिल हुईं। उनके हाथों में एक मोमबत्ती थी और एक कटोरी तेल की थी। उन्होंने मेरे कपड़े उतारे और मुझे पेट के बल लेट जाने को कहा।

आबिदा मेरी जाँघों को मसल रही थी और सलमा थोड़ा सा तेल मेरी पीठ पर डाल कर उसे मसल रही थी। उनके हाथ इस अंदाज़ में चल रहे थे कि वो मुर्दे के शरीर में भी जान फूँक सकते थे।

“ओहहहह कितना अच्छा लग रहा है!” मैं सिसका। उन्होंने मुझे फिर पलट कर पीठ के बल कर दिया। तब तक मेरा लंड आधा तन ही चुका था।

बिना कुछ कहे वो मेरी छाती पर झुक गयीं और मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी। ऐसा मेरे साथ पहले किसी ने नहीं किया था।

“ओहहहहहह”, मेरे मुँह से सिसकरी निकली। मेरा लंड भी अब तन कर खड़ा हो चुका था।

आबिदा मेरे निप्पल को चूसते हुए नीचे की ओर बढ़ी और वहीं सलमा ने गरम तेल मेरे निप्पल पर डाल दिया। “ओहहह जल रहा है, तेल गरम है, थोड़ा ध्यान रखो!” मैंने कहा।

आबिदा नीचे होती हुए मेरी जाँघों के भीतरी भाग पर अपनी ज़ुबान से चाट रही थी और वहीं सलमा अपने नाज़ुक हाथों से मेरी छाती की मालिश कर रही थी।

एक की ज़ुबान और दूसरे के हाथ ऐसा मज़ा दे रहे थे कि बयान नहीं कर सकता। थोड़ी देर में सलमा भी मेरी जाँघों के बीच आ कर मेरे लंड के सुपाड़े पर अपनी ज़ुबान घुमाने लगी। वहीं आबिदा मेरी जाँघों के अंदरूनी भाग को चूमे जा रही थी।

वो थोड़ी-थोड़ी देर में अपनी जगह बदल लेतीं। अब सलमा मेरे लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में ले चूस रही थी और वहीं आबिदा मेरे अंडवों को मुँह में ले चूस रही थी।

“ओहहहहहह सलमाआआआआ चूसती जाओ!!!! ओहहहहह आआआआहहहहह मेरा छूटने वाला है!!!!!” मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था और मैंने अपना वीर्य सलमा के मुँह में छोड़ दिया।

उस रात मैंने कई बार आबिदा और सलमा को चोदा और जब मेरे लंड में ताकत नहीं रही तो हम एक दूसरे की बाँहों में सो गये।

सुबह मैंने प्रीती से रवि के बारे मैं पूछा, “कैसा रहा?”

“रवि का लंड वाकय में बहुत लंबा और मोटा है और वो चोदता भी तरीके से है, लेकिन मेरे लिये तुम और तुम्हारा लंड सब से ज्यादा अच्छा है”, प्रीती ने जवाब दिया।

“तुमने इतना कह दिया…. मेरे लिये इतना ही बहुत है”, मैंने प्रीती को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा। Hindi Sex Stories

मेरा नाम निखिल है दोस्तो.
मैं 28 साल का एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ।
मेरा चेहरा मेरा गोल है, बाल घुंघराले हैं और माथा चौड़ा है।

मैं हंसमुख स्वभाव का हूँ, बिंदास हूँ और बोल्ड हूँ।
कसरत करना और अपनी बॉडी बनाना मेरा शौक है इसलिए मैं हर रोज़ जिम जाता हूँ।

मेरी शादी अभी दो साल पहले एक नेहा नाम की लड़की से हो गयी है।
नेहा भी बहुत खूबसूरत, सेक्सी और बोल्ड है, गोरी है, छरहरे बदन की है और 5′ 4″ कद वाली है।
उसके मम्मे बड़े बड़े भी हैं और सुडौल भी।

बातें करने में वह बड़ी स्मार्ट है, खुल कर बोलती है और हँसी मजाक करने में भी बड़ी तेज है।
हाज़िर जवाबी उसका बहुत बड़ा गुण है।

अच्छी बात यह है कि हम दोनों को सेक्स बहुत ज्यादा ही पसंद है।
उसे चुदाने का बड़ा शौक है तो मुझे चोदने का! उसे लण्ड पकड़ने का बड़ा शौक है तो मुझे लण्ड पकड़ाने का।
मुझे चूचियाँ मसलने का बड़ा शौक है तो उसे चूचियाँ मसलवाने का!

कुल मिलाकर हम दोनों की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही है।

दिन भर मैं ऑफिस में काम करता हूँ और मेरी बीवी घर में काम करती है.
लेकिन रात में हम दोनों नंगे नंगे सेक्स का खूब मज़ा लेते हैं।
मैं उसके नंगे बदन का मज़ा लेता हूँ और वह मेरे नंगे बदन का मज़ा लेती है।

इस तरह हम दोनों की लाइफ मस्त से गुज़र रही है।

एक दिन रात में वह बड़ी मस्ती से मेरे लण्ड से खेल रही थी; लण्ड पर बार बार बड़े प्यार से थप्पड़ मार रही थी; थप्पड़ मार मार कर लण्ड को चूम रही थी, उसे पुचकार रही थी।

मैंने पूछा- यह क्या कर रही हो मेरे लण्ड के साथ?
उसने एक थप्पड़ और जड़ दिया मेरे लण्ड पर फिर बोली- ये तेरा लण्ड नहीं है। ये तेरे दोस्त का लण्ड है यार … मुझे तेरे दोस्त के लण्ड से प्यार हो गया है। मैं तेरे दोस्त के लण्ड को चाहने लगी हूँ।

मैंने पूछा- यह मेरे कौन से दोस्त का लण्ड है?
वह तपाक से बोली- ये तेरे दोस्त आशीष का लण्ड है, रोहन का लण्ड है, प्रकाश का लण्ड है।

यहीं से वाइफ चेंज Xxx कहानी की शुरुआत हो गयी.

मैंने कहा- तेरे हाथ में सिर्फ मेरा लण्ड है। पागल हो गई हो क्या तुम? ये सब मेरे अच्छे दोस्त हैं।
वह बोली- हां मैं पागल हो गई हूँ. मैं तेरे दोस्तों के लण्ड पाकर ख़ुशी से पागल हो गई हूँ।

यह सब सुनकर मेरे भी लण्ड में जबरदस्त तनाव आ गया।
वह और ज्यादा तन कर झूमने लगा।
नेहा मेरे लण्ड पर थूक थूक कर चाटने लगी।

कोई औरत लण्ड की इतनी दीवानी हो सकती है, यह मुझे उस दिन साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था।

लेकिन एक बात है उसका मेरे दोस्तों का नाम लेने से मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था.
तो मैंने फिर लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और बड़ी मस्ती से चोदने लगा।

वह बोली- हाय मेरे राजा, आज तो मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा है। आज तुम्हारे लण्ड में बड़ी ताकत आ गईं है. आज तुम्हारा लण्ड बड़ा खूंखार हो गया है. लगता है आज मेरी चूत फट जाएगी। आज मुझे खूब जम कर चोदो।

फिर उसके मुंह से निकला- हाय दईया, तुम क्या बोल रहे हो यार निखिल? किसकी बीवी चोद रहे हो तुम?
मैंने कहा- मैं आशीष की बीवी चोद रहा हूँ।

मैंने फिर 4 / 6 धक्के मारे और कहा- अब मैं रोहन की बीवी चोद रहा हूँ।
फिर उसी स्पीड में 4 / 5 और धक्के मारे, फिर कहा- अब तो यह लण्ड प्रकाश की बीवी की बुर में पेल दिया है मैंने! मुझे प्रकाश की बीवी चोदने में ज्यादा मज़ा आ रहा है।

वह बोली- तुम अपने मन से अपने दोस्तों की बीवियां चोदते जाओ लेकिन मज़ा तो मेरी ही बुर को मिल रहा है। एन्जॉय तो मैं ही कर रही हूँ।

यह सच है कि अगर मन में पराई बीवियों का नाम लो तो अपनी बीवी चोदने में ज्यादा मज़ा आता है।
इसी तरह बीवी अगर सोचे कि वह किसी पराये मरद से चुदवा रही है तो उसे भी अपने पति से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।

हम दोनों की चुदाई में रूचि दिन पर दिन बढ़ने लगी।
ऐसा करते करते दिसंबर का महीना आ गया।

25 दिसंबर की रात को जब वह मेरा लण्ड बड़े प्यार से चूम चाट रही थी तो मैंने पूछा- नेहा इस बार नया साल किस तरह मनाओगी?
वह बोली- जैसे पिछली बार मनाया था, वैसे ही मना लेंगे।

मैंने कहा- नहीं यार इस बार कुछ नया होना चाहिए. कुछ नया सोचो न प्लीज?
वह बोली- जो तुम चाहो कर लो, मैं तो तुम्हारे साथ हूँ।

मैंने कहा- वो तो ठीक है … पर बताओ न कुछ नायाब आईडिया?
वह बोली- तो फिर तुम लोग एक दूसरे की बीवी चोद कर मनाओ नया साल। एक ही कमरे में एक दूसरे के सामने एक दूसरे की बीवी चोदो। लण्ड दूसरे की बीवी की चूत में 2021 में पेलो और 2022 में निकालो। फिर किसी और की बीवी की बुर में पेल दो। इस तरह एक दूसरे की बीवियां लण्ड पेल पेल कर रात भर चोदो। मैं तो तुम्हारे दोस्तों से चुदवाने के लिए तैयार हूँ।

मैंने कहा- मैं भी अपने दोस्तों की बीवियां चोदने के लिए तैयार हूँ।

वह बोली- फिर देर किस बात की … कल से काम पर जुट जाओ। अपने दोस्तों से बात करो, उन्हें राज़ी करो।

आशीष, रोहन, प्रकाश तीनों मेरे दोस्त हैं।

हमारा फैमिली सहित तीनोंके घर में आना जाना है।
तीनों फैमिली एक दूसरे को अच्छी तरह जानतीं हैं; कोई अपरिचित नहीं हैं और तीनों से खुल कर बात करने में भी कोई संकोच नहीं है।

इसलिए शाम को मैं और आशीष एक होटल में ड्रिंक्स पर बैठ गए और खुल कर बात करने लगे।
बातों का सिलसिला नया साल मनाने पर टिक गया।

थोड़ा इधर उधर की बातें की, बाद में मैंने उसके सामने अपना नये साल के मौके पर बीवियों की अदला बदली का सुझाव रखा.
तो वह उछल पड़ा।
वह बोला- यार, यही तो मैं भी कहने वाला था। मेरी बीवी रोज़ मुझसे पूछती है कि आज तुमने निखिल से बात की या नहीं? वह तो वाइफ स्वैपिंग में मुझसे ज्यादा इंटरेस्टेड है। उसी ने मुझसे कहा था कि तुम निखिल से बात करो वह मुझे पसंद है, मान जाएगा। ये तो बहुत बढ़िया रहेगा मैं भी तैयार हूँ और मेरी बीवी भी तैयार है।

मैं ख़ुशी ख़ुशी घर लौट आया।

घर में आकर मैंने अपनी बीवी नेहा को पूरी बात बताई तो खुश हो गई।
उसने कहा- अब मैं तुमको बता रही हूँ कि मैंने क्या किया.

जब तुम ऑफिस में थे तो मैं पहले आशीष के घर गई और उसकी बीवी आरती से मिली।
औरतें आपस में खुल कर खूब गन्दी गन्दी बातें कर लेतीं हैं; मरद उतना नहीं कर पाते।
मैंने तो कह दिया- यार आरती, मैं तेरे पति से चुदवाना चाहती हूँ. बदले में तुम मेरे पति से चुदवा लो।
वह बोली- अच्छा तो तुम हसबैंड स्वैपिंग करवाना चाहती हो।
मैंने कहा- हां, नया साल हसबैंड / वाइफ स्वैपिंग के साथ मनाना चाहती हूँ।
वह बोली- हां ठीक है, मैं तैयार हूँ।
मैंने पूछ लिया- तेरा पति मान जाएगा?
वह बोली- क्यों नहीं मानेगा भोसड़ी वाला? मैं बोलूंगी तो उसे मानना ही पड़ेगा।
फिर मैं रोहन की बीवी के घर चली गई, उससे भी खुल कर बात हुई।
वह तो साफ़ साफ बोली- एक बात बताऊँ नेहा? किस भोसड़ी वाली को पराये मरद का लण्ड अच्छा नहीं लगता? सबकी सब बीवियां पराये मरद के लण्ड के लिए उतावली रहतीं हैं. और मैं भी! एक सच्चाई और सुन ले नेहा, कोई माने चाहे न माने … पर यह सच है कि बीवियां बुरचोदी सब अंदर से रंडियां होतीं हैं। कई मर्दों से चुदवाने की चाहत सबमें होती है, मुझे में भी है।

उसकी बातें सुनकर मैं तो ख़ुशी से पागल हो गया।

मैंने मन में कहा कि अभी तक मैंने वाइफ स्वैपिंग के बारे में पढ़ा और सुना बहुत है पर अब तो हम सब वही करने जा रहे हैं। कितना मज़ा आएगा!

अगले दिन यानि शनिवार को मैंने दोनों कपल आकाश आरती और रोहन रूचि को ड्रिंक्स एंड डिनर पर आमंत्रित कर लिया।

अगली शाम को सही टाइम पर सब लोग आ गए।
हमने उनका स्वागत किया और बड़े आदर सत्कार से बैठाया।

आकाश की बीवी आरती साड़ी और ब्रा में थी।
ब्रा उसकी इतनी तंग थी कि उसके अंदर से उसके बड़े बड़े मम्मे बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहे थे।
मेरी नज़र बस वहीं टिक गयी।

उधर रोहन की बीवी रूचि लो वेस्ट जींस और डीप नेक का स्लीवलेस टॉप पहन कर आयी थी।

टॉप तो बहनचोद एक छोटी सी ब्रा जैसी ही थी।
उसकी भी बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ मुझे विचलित कर रहीं थीं।

इधर मेरी बीवी नेहा ने एक घाघरा पहना था और ऊपर वह बिल्कुल नंगी थी।
वह अपने लम्बे लम्बे बालों को आगे करके अपने मम्मे छिपाये हुए थी.
लेकिन इधर उधर घूमने फिरने में उसके बड़े बड़े मम्मे सबको दिख जाते थे; निप्पल भी दिख जाते थे।
आकाश और रोहन दोनों मेरी बीवी की चूचियाँ देखने के लिए आँखें गड़ाए हुए बैठे थे।

इतने में मेरी बीवी ने सबको ड्रिंक्स का गिलास पकड़ा दिया।
सबने एक स्वर में चियर्स कहा और दारू पीने लगे।

सबको दूसरे की बीवियों के साथ दारू पीना बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं सोचने लगा कि जब ये दोनों मेरा लण्ड अपने होंठों से लगायेंगी तो मुझे कितना मज़ा आएगा?

रूचि ने पूछा- बीवियों की अदला बदली करके नया साल मनाने का आईडिया कहा से आया निखिल?
मैंने कहा- यह आईडिया मेरा नहीं, मेरी बीवी नेहा का है।

आरती बोली- बड़ी रोमांटक है तेरी बीवी बहनचोद … क्या मस्त आईडिया है. मैंने कई बार अपने पति से कहा कि तुम निखिल से इस विषय पर बात करो। पर चलो आज मेरे मन का होने जा रहा है।

रूचि ने कहा- अब दुनिया बदल चुकी है। अब तो लोग अपनी सुहागरात भी बीवियां अदल बदल कर मनाते हैं। मेरी एक पक्की सहेली है नीरजा। वह सुहागरात मनाने गोवा गयी थी. वहां से अपने पति के अलावा तो और मर्दों से चुद कर आई थी.

मेरी बीवी ने कहा- दूसरे का पति सबको अच्छा लगता है और दूसरे की बीवी सबको अच्छी लगती है। तभी तो मेरे मन में आईडिया आया।

इन बातों से माहौल गर्म और रोमांटिक हो गया।

मैंने आरती भाभी की पीठ पर हाथ रख दिया तो उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।
उसे मैंने अपनी तरफ खींचा तो उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं, मेरी चुम्मी ले ली।
मैंने भी उसके होंठ चूमे।

तब मैंने देखा कि आकाश रोहन की बीवी रूचि को अपनी तरफ खींच कर उससे प्यार करने लगा है।

रोहन ने मेरी बीवी नेहा को अपनी बाहों में भर लिया और उसने गाल चूमने लगा, उसकी चूचियाँ दबाने लगा.
उसके मम्मे तो एकदम खुले हुए थे।

इस तरह हम तीनों ने अपने अपने पार्टनर चुन लिया।

इतने में मेरी बीवी बोली- यार रूचि और आरती, तुम चाहो तो अलग अलग कमरे में अपने अपने पार्टनर के साथ चली जाओ।
रूचि ने कहा- क्यों चली जाऊं? मैं देखूंगी कि तू मेरे पति का लण्ड कैसे चूसती है.
आरती बोली- मैं भी देखूंगी कि रूचि मेरे पति का लण्ड कैसे चूसती है. इसलिए कोई यहाँ से कहीं नहीं जाएगी। यहीं आमने सामने ही होगी पतियों की अदला बदली और बीवियों की अदला बदली। हम सब एक दूसरे चुदाई देख देख कर मज़ा लेंगी। जब हमें कोई शर्म नहीं, कोई झिझक नहीं, तो फिर अलग अलग क्यों? एक साथ क्यों नहीं? हम कोई 20 / 21 के साल कपल नहीं है। मेच्योर कपल हैं. अब हमें शर्माना नहीं आता.

इस तरह की गरमागरम बातें भी हो रहीं थीं और साथ ही साथ सबके कपड़े भी एक एक करके उतर रहे थे।

मेरी बीवी नेहा ने फटाक से अपने बालों को पीछे धकेला और हाथ उठाकर उनका जूड़ा बना लिया.
उसका ऐसा करने से उसके बड़े बड़े मम्मे सबको दिख गए।
सबने खूब मज़ा लिया.

फिर आरती ने अपनी साड़ी उतार कर रख दी और हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।
हुक खुलते ही उसकी बड़े बड़े दूध छलक पड़े।

मेरा तो लण्ड साला उछल पड़ा और रोहन का लौड़ा भी कुलबुलाने लगा।

इसी तरह जब रूचि भाभी ने अपना टॉप उतारा तो उसकी मादक चूचियाँ देख कर सारे मर्द मस्त हो गए।
रूचि सच में बड़ी हॉट लग रही थी।
मेरा मन हुआ कि अगर उसकी जींस भी थोड़ा खुल जाए तो सबको उसकी झांटें दिख जाएँगी।
लेकिन वह जींस पहने बैठी रही।

मैं आरती भाभी की चूचियाँ सहलाने लगा.
आशीष ने रूचि भाभी की चूचियों की चुम्मी ले ली और निप्पल मसलने लगा।

रोहन मेरी बीवी नेहा के बूब्स हौले हौले दबाकर मस्ती करने लगा।
हम तीनों को एक दूसरे की बीवी के मम्मे बड़े प्यारे लग रहे थे।

मैं तो जोश में आकर आरती भाभी के स्तन चाटने लगा, निप्पल मुंह में भर कर चभुलाने लगा।
आरती मेरा लण्ड ऊपर से ही दबाने लगी।

रूचि आशीष का लण्ड ऊपर से ही टटोलने लगी और मेरी बीवी ने रोहन की पैंट की जिप खोल कर अपना हाथ अंदर घुसेड़ दिया।
वह जल्दी से रोहन का लण्ड निकाल कर देखना चाहती थी।

मजे की बात यह थी कि सब कुछ आमने सामने ही एक ही जगह हो रहा था।
न किसी को कोई शर्म थी और न कोई डर!

बीवियां इस खेल में उन्मुक्त होकर भाग ले रहीं थीं।
तीनों बीवियां खुद एक दूसरे के पति का लण्ड पकड़ने के लिए व्याकुल हो रहीं थीं। तीनों बीवियां बड़ी निडर, साहसी और बोल्ड थीं।

रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे।
अब नया साल आने में बस आधे घंटे का समय ही बाकी था।

देखते ही देखते तीनों बीवियां एकदम नंगी हो गईं।
उनको नंगी देख कर मर्दों के लण्ड में गज़ब का करंट लग गया।

तब बीवियों ने एक दूसरे के पति को फटाफट नंगा कर दिया।
सबके लण्ड टनटना खड़े हो गए।

आशीष की बीवी नंगी नंगी मेरा लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी, बोली- बाप रे बाप … क्या मस्त लौड़ा है नेहा तेरे पति का?

उधर मेरी बीवी नंगी नंगी रोहन का लण्ड पकड़ कर बोली- हाय मेरी बुर चोदी रूचि, तेरे पति का लण्ड तो भोसड़ा भी फाड़ डालेगा.

रूचि तब तक खुद नंगी होकर आशीष का लण्ड पकड़ कर चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी थी।
वह बोली- अरे यार आरती, तेरे पति का मादरचोद लण्ड आज ही मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा।

इन तीनों की मस्त मस्त बातों से सबके लण्ड बड़े ताव में आ गए।

मेरी बीवी रोहन का लण्ड चाटने लगी, रोहन की बीवी आशीष का लण्ड चाटने लगी और आशीष की बीवी मेरा लण्ड चाटने लगी।

यह सीन देख कर हम सब मस्त होने लगे।

बीवियां बड़ी शिद्दत से एक दूसरे के पति का लण्ड चाट चाट कर मज़ा लेने लगीं।

सबकी नज़र घड़ी पर थी क्योंकि सबको अपना लण्ड दूसरे की बीवी की बुर में 2021 में पेलना था और 2022 में निकालना था।

मुझे आरती भाभी का नंगा जिस्म बड़ा मज़ा दे रहा था।
फिर मुझसे रहा न गया और मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी दोनों टांगें फैला दीं।

उसकी मस्तानी चूत मेरे सामने खुल गई तो मैंने लण्ड उसी पर रख दिया।

मैंने एक धक्का मारा तो लण्ड सरसराता हुआ पूरा अंदर घुस गया।

तब मैंने देखा कि रोहन भी मेरी बीवी नेहा की बुर में अपना पूरा लण्ड घुसा चुका है।
यह देख कर मैं और उत्तेजित हो गया।

फिर मेरे बगल में, आशीष एकदम नंगा नंगा रोहन की बीवी रूचि के ऊपर चढ़ बैठा, अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और गचर गचर चोदने लगा।

इस तरह हम तीनों लोग आमने सामने एक दूसरे की बीवी बिंदास चोदने लगे।

अपनी बीवी को दूसरे से चुदवाते हुए देख कर किसी और की बीवी चोदने का सुख सच में बड़ा अच्छा होता है.
यही सुख हम तीनों लेने लगे।

अपनी बीवी को किसी और से चुदते हुए देखने में भी बड़ा मज़ा आता है।
मुझे यह अहसास हो गया कि हर एक बीवी पराये मर्द के लण्ड से ज्यादा मस्ती से चुदवाती है।

आरती भाभी मस्ती में बोली- हाय मेरे निखिल राजा, तेरा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है। आज मुझे सबसे ज्यादा मज़ा आ रहा है, मुझे खूब चोदो। मेरे पति के सामने फाड़ डालो मेरी फुद्दी … क्या मस्त लौड़ा है तेरा! ऐसा ही लौड़ा मेरी चूत का बाजा बजा सकता है। मैं ऐसे ही लण्ड के लिए तरस रही थी।

उधर से रूचि बोल पड़ी- हाय मेरी बुरचोदी आरती, तेरा पति का लौड़ा मेरी चूत के चीथड़े उड़ा रहा है। बड़ा अच्छा लग रहा है यार! तूने अपने पति से मेरी चूत पहले क्यों नहीं चुदवाई? हाय आशीष … चोदे जाओ मेरी चूत। पूरा लौड़ा घुसा घुसा के चोद … पटक पटक के चोद मुझे!

मेरी बीवी नेहा भी पूरी मस्ती में थी।
वह भी कुछ न कुछ बोले चली जा रही थी- हाय रोहन, हाय मेरे राजा, तेरा लण्ड मेरी तमन्ना पूरी कर रहा है। मुझे पराये मरद से चुदवाने की बड़ी इच्छा थी, देखो आज चुदवा रही हूँ। पूरा मज़ा ले रही हूँ। आज रोहन मुझे मेरे पति के आगे चोद रहा है। कितना मज़ा आ रहा है. मुझे तो अपने पति को आशीष की बीवी चोदते हुए देखने में भी आ रहा है। मैं यही तो कह रही थी अपने पति से की कभी किसी और बीवी चोद कर देखो. कभी अपनी बीवी किसी और से चुदवा कर देखो. मेरा पति मेरी बात मान गया और आज देखो वह आशीष की बीवी चोद रहा है और मुझे रूचि के पति रोहन से चुदवा रहा है। पति हो तो मेरे पति जैसा! लण्ड हो तो रोहन के लण्ड जैसा!

इन सब बातों से चुदाई का मज़ा दुगुना हो गया।

अब बस 2 / 3 मिनट ही बाकी थे नया साल आने में!

सबकी नज़रें टी वी पर लगीं थीं।
इधर हम तीनों ने चोदने की स्पीड बढ़ा दी।

इतने में टी वी से आवाज़ आयी- HAPPY NEW YEAR.
हम सबने भी कहा ‘HAPPY NEW YEAR’

हमारे लण्ड अभी भी चूत में घुसे हुए थे।

हम सब एक दूसरे की बीवी अपनी तरफ खींच कर पूरे जोश में चोदने लगे।

जैसा ही 5 मिनट हुए तो हमारे लण्ड झड़ने लगे।

आशीष की बीवी ने मेरा झड़ता हुआ लण्ड चाटा, रोहन बीवी ने आशीष का झड़ता हुआ लण्ड चाटा और मेरी बीवी ने रोहन का झड़ता हुआ लण्ड चाटा।

इस तरह लण्ड चूत में 2021 को घुसा और 2022 में चूत से बाहर निकला और फिर हमने अंदर पेल दिया।

कुछ देर तक हम सब नए साल में भी एक दूसरे की बीवी चोदते रहे।
बीवियां भी बड़े मजे से चुदवातीं रहीं।
उनको शायद हमारे से ज्यादा मज़ा आ रहा था।

आखिर में एक एक करके लण्ड झड़ने लगे और सबने झड़ते हुए लण्ड चाटे।

उसके बाद नए साल का केक काटा गया; केक सबको बांटा गया।

मर्दों ने बीवियों की चूत पर, चूतड़ों पर और चूचियों पर केक लगाया और खूब प्यार से चाटा।
बीवियों ने भी सबके लण्ड पर, पेल्हड़ पर केक लगाया और मस्ती से चाटा।

वाइफ चेंज Xxx का सबने खूब एन्जॉय किया।

फिर बाथरूम से नहा धोकर सब लोग वापस आ गए।

खूब बातें होने लगीं.
सबके चेहरे खिले हुए थे, सभी चुदाई के नशे में थे।

धीरे धीरे फिर चुदाई का माहौल बनने लगा।

इस बार मेरी बीवी नेहा ने आशीष का लण्ड पकड़ लिया.
आशीष की बीवी आरती ने रोहन का लण्ड पकड़ लिया.
और रोहन की बीवी रूचि ने मेरा लण्ड पकड़ लिया।

फिर क्या … मैंने बड़े मजे से रोहन की बीवी चोदा।
रोहन ने आशीष की बीवी चोदी.
और आशीष ने मेरी बीवी चोदी।

यह चुदाई अब पूरी तरह 2022 की चुदाई थी।
नए साल का पहला ही दिन था।

शाम को मेरा दोस्त प्रकाश अपनी बीवी मिहिका के साथ आ गया।
मिहिका को देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

उधर मेरी बीवी भी प्रकाश पर मोहित हो गई।
वह मुझे अंदर ले जाकर बोली- अब आज तो मैं प्रकाश से चुदवाऊंगी। तुम उसकी बीवी चोद लो।

मैं तो उसकी बीवी चोदना चाहता ही था।

फिर क्या … मेरी बीवी ने मिहिका से खुल कर बात की और मैंने भी प्रकाश से खुल कर कहा।
दोनों राज़ी हो गए।

फिर मैंने रात भर प्रकाश की बीवी प्रकाश के सामने चोदी।
प्रकाश ने मेरी बीवी मेरे सामने चोदी।

सवाल: मैं एक 26 वर्षीय collagge student हूं। मैं तीन साल से अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव इन रिलेशनशिप में हूं और हम लगातार सेक्स करते रहते हैं। हालांकि हम हमेशा सेफ सेक्स करते हैं। फिर भी मुझे सेक्स संबंधी कुछ आम धारणाओं को लेकर उलझन रहती है। इसलिए कृपया मुझे सेफ सेक्स के बारे में समुचित जानकारी दें।

जवाब: सुरक्षित तरीके से किया जाने वाला सेक्स न सिर्फ आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ (sexually transmitted diseases) से बचाता है, बल्कि आप अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से भी सुरक्षित रहती हैं। मैं आपको सेफ सेक्स के कुछ तरीके बता रही हूं, इन्हें आजमाकर आप हैप्पीली सेक्स को एन्जॉय कर सकती हैं।

सेफ सेक्स (Safe Sex) का मतलब है कि आप सेक्स करते समय गर्भावस्था प्राप्ति और सेक्स संबंधित बीमारियों से सुरक्षित रहें। सेफ सेक्स के माध्यम से, आप खुद को और अपने साथी को नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं। यहां कुछ सेफ सेक्स के तरीके और सुझाव दिए गए हैं:

  1. सेफ सेक्स के लिए कंडोम को सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है। इसलिए अपने बॉयफ्रेंड को कंडोम का इस्तेमाल करने को कहें। कंडोम न सिर्फ अनवांटेड प्रेग्नेंसी से बचाता है, बल्कि इंफेक्शन, एचआईवी/एड्स या अन्य सेक्सुअल डिजीज से भी आपका बचाव करता है।

2. सेक्स के दौरान लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल करें, तो ज़्यादा अच्छा है। लुब्रिकेशन न केवल कंडोम को फटने से बचाता है, बल्कि इसे इस्तेमाल करना भी आसान होता है।

3. प्रजनन नियंत्रण के औषधियां: यदि आप गर्भावस्था से बचना चाहते हैं, तो आप प्रजनन नियंत्रण के औषधियों का उपयोग कर सकते हैं। डॉक्टर से सलाह लें और उनके सुझाव का पालन करें।

4. सेक्सुअल रिलेशनशिप में अपने पार्टनर के साथ ईमानदार रहकर न केवल आप अपनी सेक्सुअल लाइफ अच्छी तरह से एंजॉय कर सकते हैं, बल्कि सेक्सुअल डिजीज के ख़तरों को भी कम कर सकते हैं।

5. पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सेफ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कंसीव करने के चांस कम होते हैं। लेकिन इसके लिए अपने पीरियड्स सायकल को समझते हुए दिनों को कैलकुलेट करके सेक्स करने से ही अनवांटेड प्रेग्नेंसी से सुरक्षित रह सकती हैं।

6. इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल का सेवन केवल इमरजेंसी में ही करें, क्योंकि इनका नियमित रूप से इस्तेमाल करना नुक़सानदायक हो सकता है। असुरक्षित सेक्स के 72 घंटों यानी 3 दिनों के अंदर तक इसका इस्तेमाल प्रभावकारी होता है। वैसे आप जितनी जल्दी इसका इस्तेमाल करेंगी, फ़ायदा उतना ही जल्दी होगा।

7. सेफ सेक्स करने के लिए पुरुष एक ऐसा भी तरीका अपनाते हैं, जिसमें मेल पार्टनर ऑर्गेज़्म के समय बाहर ही स्पर्म को डिस्चार्ज कर देता है। लेकिन यह तरीक़ा ज्यादा सुरक्षित नहीं है। इसमें पुरुष को इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि वीर्य योनि के अंदर न गिरे, अन्यथा प्रेग्नेंसी हो सकती है।

8. हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल कर सकती हैं, यह 3 महीने में एक बार लगाया जाता है।

9. यदि आप गर्भनिरोधक के रूप में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही हैं, तो इसे कभी भी लेना न भूलें। प्रतिदिन इसे नियत समय पर लें। यदि कभी एक दिन पिल्स लेना भूल जाएं, तो दूसरे दिन दो पिल्स एक साथ ले लें। फिर दोबारा नियमित रूप से पिल्स लेती रहें।

10. ओरल सेक्स से बचें, क्योंकि इससे कई तरह के इंफेक्शन्स होने का ख़तरा रहता है। कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जब ओरल सेक्स से व्यक्ति को कैंसर व सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज हुई हैं।

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆