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अन्तर्वासना के सभी Antarvasna Stories पाठकों को मेरा सलाम। मेरा नाम सोनू हे और मैं जमशेदपुर का रहने वाला हूँ। आज मैं आप सबको अपनी सेक्स भरी जिन्दगी की शुरुआती बात बताने जा रहा हूँ।
बचपन से ही मुझे सेक्स करने की चाहत थी। जब मैं दस्वीं में गया तो मुठ मारने लगा पर हमेशा किसी की फ़ुद्दी मारने की सोचता था। पर फुद्दी सुजाने की शुरुआत दो साल पहले हुई।
तब मैं बारहवीं में था। मेरे घर के बिल्कुल सामने एक अंकल और आँटी रहते हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक उनकी दो लड़कियाँ और एक लड़का था, लेकिन फिर एक दिन मैंने एक खूबसूरत लड़की को उनके घर पर देखा। क्या माल थी वो दोस्तो ! 5’3″ कद, गोरा रंग, घुँघराले बाल, बड़ी-बड़ी काली आँखें, लाल होंठ, बड़े-बड़े कसे हुए वक्ष, पूरी की पूरी सेक्स-पटाखा थी वो। फिर पता चला कि वो उनकी मझली लड़की है जो पहले अपनी नानी के यहाँ रहती थी पर अब यहीं रहेगी।
मैंने सोच लिया कि इसको पटाना है। उसका नाम पिंकी है। अब मैं अपने काम में लग गया। मेरी बालकोनी और उसकी बालकोनी आमने सामने है। मैं बालकोनी से उसको देखा करता। धीरे-धीरे वो मुझे देखने लगी, मुझे अच्छे परिणाम मिलने लगे।
फिर एक दिन हमारे घर में पूजा थी। शाम का वक्त था, वो भी आई। पूजा शुरु हुई तो काफी लंबी चल रही थी। मैं छ्त पर चला गया। थोड़ी देर बाद पिंकी अपनी छोटी बहन नंदिनी के साथ छ्त पर आई। मैं मोबाईल पर नेट कर रहा था। उसकी छोटी बहन मुझसे पूछने लगी- क्या कर रहे हो सोनू भईया ?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
वो दोनों कुर्सी पर बैठ गई। मैने देखा तो पिंकी मेरी ही तरफ देख रही थी। कुछ देर बात करने के बाद उसकी बहन बोली- मैं जरा घर जा रही हूँ, चलो दीदी !
मैंने कहा- तुम जाकर आओ, हम दोनों बातें करते हैं।
वो चली गई फिर हम दोनों बातें करने लगे। कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मैंने उसके सामने एकाएक अपने प्यार का इज़हार कर दिया। वो इसके लिये पहले से ही तैयार थी, सर झुकाकर उसने हाँ कर दी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।
मैने जल्दी से उसके झुके सर को उठाया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये और उसको पागलों की तरह चूमने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों इतने खो गये कि कब उसकी छोटी बहन ऊपर आ गई, पता ही नहीं चला। उस पर ध्यान जाते ही मैंने चूमना बंद कर दिया और वो पिंकी को लेकर चली गई। अब तो हम ज्यादातर समय बालकोनी में एक दूसरे को देखने में बिताते, पर मेरे मन में तो कुछ ओर ही था। मैं तो उसको चोद के अपने लन्ड की सील तोड़ना चाहता था।
एक दिन सुबह मैं बालकोनी में खड़ा था तो उसके घर में काफ़ी सन्नाटा था। ( वो लोग दूसरे तल्ले पे रहते थे तो मेरी बालकोनी से उनका घर पूरा दिखता था)
कुछ देर बाद वो छ्त पर आई और इशारे से बोली कि मुझे फोन करो। मैंने फोन किया तो उसने कहा कि घर में कोई नहीं है, सिर्फ मैं और पापा हैं। पापा दस बजे काम पर चले जायेंगे, फिर अगर चाहो तो तुम आ जाना।
मैंने पूछा- सब कहाँ गये हैं?
तो वो बोली- किसी रिश्तेदार की शादी में गये हैं और चार दिन बाद आएंगे, पापा काम की वजह से नहीं गये और मैं उनको खाना बना के देने के लिये नहीं गई।
मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं था, कितने दिनों से इसी दिन का इंतजार कर रहा था। मैं जल्दी से नहा धो कर 11 बजे उसके घर पहुँच गया। घण्टी बजाई, उसने दरवाजा खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई, मैं भी मुस्कुराया।
मैंने पूछा- पापा गये ?
वो बोली- हां !
फिर मैं तुरन्त उसके होंठों को चूमने लगा, वो भी मेरे होंठो को चूमने लगी। करीब दस मिनट की चूमा-चाटी के बाद मैने उसे अपने गोद में उठाया और बिस्तर पर ले गया। उसको लिटा कर फिर उसके होंठों को चूमने लगा और एक हाथ से उसके स्तन दबाने लगा। वो सिसकारियाँ निकालने लगी और दोनों हाथों से मेरी पीठ को सहलाने लगी, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। फिर उसने मेरी शर्ट उतार दि। अब मैने भी उसके कुर्ते को खोल दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी, सो मेरी थोड़ी सी मेहनत बच गई। फिर मैंने उसका पजामा भी उतार दिया।
उसने गुलाबी रंग की पैंटी पहनी थी, मैने वो भी उतार दी और मैं अपनी जीन्स उतारने जा रहा था तो उसने मुझे रोक दिया और बोली- तुमने मेरे कपड़े उतारे, मैं तुम्हारे उतारूंगी।
और उसने मेरी जीन्स उतारी और फिर मेरी चड्डी उतार दी। चड्डी उतारते ही मेरा 7″ का खड़ा लन्ड बाहर आ गया।
उसे देखकर वो बोली- तुम्हारा तो बहुत बड़ा है।
फिर मैने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके स्तन चूसने लगा। कुछ देर वक्ष के साथ खेलने के बाद मैं उसके पूरे बदन को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया। क्या चूत थी दोस्तो ! मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरा चोदन-कार्यक्रम ऐसी चूत से शुरु होगा। उसकी चूत पूरी साफ थी, शायद शुबह को ही की होगी।
मैंने पूछा तो बोली- हाँ ! तुम्हारे लिए ही की है।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु किया। गुलाबी फुद्दी जब मेरे मुँह में जाती तो वो जोर से सिसकारी मारने लगती और मुझे तो जैसे लग रहा था कि मैं स्वर्ग की अप्सरा के साथ हूँ।
मैं उसकी चूत में ऊंगली डालता तो वो कहती- दुखता है !
मैने कहा- अभी कहाँ दुखता है ? असली मजा तो कुछ देर बाद आएगा।
थोड़ी देर बाद वो बोली- छोड़ दो, कुछ निकल रहा है !”
मैंने कहा- निकलने दो।
फिर वो झड़ गई और मैं सारा रस चूस गया। फिर मैं उठा और बिस्तर के सामने खड़ा हो गया और उसको कहा- चूसो !
वो बिस्तर के ऊपर घोड़ी बनकर मेरे लन्ड को चूसने लगी। मैं भी उसके सर को पकड़ कर दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं झड़ गया और सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया। उसने कुछ पी लिया और कुछ थूक दिया।
फिर मैं उसको बिस्तर पर लिटा के उसके स्तन मसलने लगा। फिर उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे पूरे बदन को चूमने लगी। कुछ देर में मेरा लन्ड खड़ा हो गया। अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और अपना लन्ड उसकी चूत के मुँह में लगाया तो वो बोली,”अब चोदोगे क्या ?”
मैने कहाँ- हाँ !
तो वो बोली,”धीरे से करना ! पहली बार है !”
मैंने कहा- डरो मत ! मेरा भी पहली ही बार है। पहले थोड़ा दर्द होता है फिर बहुत मजा आता है।
फिर मैंने लन्ड पेलना शुरु किया पर लन्ड अन्दर जा ही नहीं रहा था। उसकी चूत बहुत ज्यादा टाईट थी। फिर मैंने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम ली और अपने लन्ड पर लगाई और कुछ उसकी फुद्दी में डाल दी। फिर जोर लगाकर पेलना शुरु किया तो मेरा आधा लन्ड अन्दर चला गया, वो दर्द से तड़प उठी।
मेरा भी पहली बार होने से मेरे लन्ड की त्वचा फट गई और मुझे भी दर्द हुआ।
वो कहने लगी,”निकाल लो, बहुत दुख रहा है ! निकाऽऽ लो……… निकालो ………।
मैं थोड़ी देर रुक गया पर मैंने लन्ड निकाला नहीं। कुछ देर बाद जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैं धीरे-धीरे लन्ड अन्दर पेलने लगा और कुछ ही देर में मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में था। अब मैं उसे चोदने लगा। धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा और वो सिसकारियाँ मारने लगी। फिर मैने अपने धक्के तेज कर दिये। पूरा कमरा फच्च-आह,आह,आह, ओ मा, मर गई, आह, चोदो,चोदो,जोर से,और जोर से फच्च-फच्च आह-आह-आह-आह आवाजों से गूंज रहा था। मैं एक ओर अपनी पूरी ताकत से उसे चोद रहा था और दूसरी ओर उसके स्तन चूस भी रहा था। वो अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों कूल्हों को दबा रही थी। अचानक उसने मुझे कसकर दबा लिया और फिर वो झड़ गई पर मैं अभी तक टाईट था। कभी उस पर लेटकर तो कभी उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर जोर-जोर से मैं उसे चोदने लगा। करीब बीस मिनट की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और कुछ देर उसके ऊपर पड़े रहने के बाद मैं उसकी बगल में लेट गया। मैं काफी थक चुका था। और 15 मिनट यों ही पड़े रहने के बाद मैं बाथरुम गया जहाँ पिंकी पहले से ही थी।
बाथरुम में हम दोनों एक साथ नहाने लगे। मैने उसे पूरा भिगो दिया और उसके गीले स्तनों को चूसने और दबाने लगा। इस बीच मेरा लन्ड फिर तन गया।
अब मैने गाण्ड मारने की सोची। मैंने उससे कहा- अब मैं तुम्हारी गाण्ड मारना चाहता हूँ।
वो बोली- क्या ?
यह शायद वो नहीं जानती थी।
मैंने कहा- तुम बाथ-टब को पकड़ के घोड़ी बन जाओ।
उसने वैसा ही किया। मैंने अपने लन्ड पर साबुन लगाया और उसकी गाण्ड में डालने लगा तो वो मना करने लगी। मैंने कहा- तुम मुझसे प्यार करती हो या नहीं ?
वो बोली- बहुत प्यार करती हूँ, पर दुखेगा !
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा !
फिर उसकी गाण्ड में लन्ड पेलने लगा। पहले दर्द हुआ फिर सब ठीक हो गया। 15 मिनट उसकी गाण्ड मारने के बाद मैं उसकी गाण्ड में ही झड़ गया।
और फिर नहाने के बाद मैं फिर उसे बिस्तर पे ले आया और इस बार घोड़ी बनाकर उसकी चूत मारी।
तो दोस्तो, इसके बाद तो मैंने उसकी बाकी दो बहनों को भी चोदा।
वो कहानी अगली बार अगर आपके इमेल मिले तो। Antarvasna Stories
मेरा नाम गौरव है और मैं Antarvasna आपको बताना चाहता हूँ कि मेरे यौन-जीवन की शुरुआत कैसे हुई।
मेरे घर में मेरे पापा और मम्मी रहती हैं। मुझे मस्ती करना बहुत अच्छा लगता था इसलिए मेरा पढ़ाई में उतना मन नहीं लगता था जितना लगना चाहिए। मेरे डैड ने इसीलिए मुझे होस्टल भेज दिया। वहाँ जा कर मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जो कि मेरी क्लास के थे लेकिन अच्छे परिवारों से थे। मैं भी अच्छे घर से ताल्लुक रखता हूँ लेकिन उन सब में एक बात थी कि वे सब सेक्स के मामले में काफी एडवांस थे।
उनमें से एक था गौरव ! स्लिम बॉडी का गोरा लड़का था मैं भी उसी की तरह दीखता था इसलिए मेरी और उसकी दोस्ती जल्दी हो गई। वो मेरी कक्षा में और मेरे साथ ही कमरे में था। मुझे उसे अंडरवीयर में देख कर अच्छा लगता था।
एक दिन उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए वो क्लास में नहीं गया और मुझे भी नहीं जाने दिया। मैं भी दोस्ती के नाते नहीं गया। हमारी क्लास ९ से ४ बजे तक चली थी। लगभग सभी चले गए, तब गौरव ने कहा- गौरव ! मेरे को बुखार है जरा छू के देख !
कह कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने सर पर रखा। थोड़ा गरम था उसका सर !
मुझे तो नहीं लग रहा है ! कहते हुए मैंने उसके सीने को छुआ तो मुझे लगा कि उसने शर्ट नहीं पहनी हुई है। मैंने हाथ को थोड़ा नीचे किया तो उसके निप्प्ल मेरे हाथ से छू गए। मुझे एक अजीब सा करंट सा लगा। मेरा हाथ धीरे धीर नीचे जाने लगा, मुझे पता भी नहीं चला कि मेरा हाथ कब उसके अंडरवीयर तक पहुँच गया।
तभी उसने मुझे पूछा- बुखार है या नहीं?
मैंने कहा- पता नहीं लग रहा है !
कहते हुए मेरा हाथ उसके अंडरवीयर के ऊपर से जाने लगा। इसी समय उसके लंड ने थोड़ी सी हरकत की और मुझे लगा कि कुछ है !
मैंने लंड को पकड़ कर कहा- यह क्या है?
वो बोला- कुछ नहीं !
मुझे भी नहीं मालूम था कि वह लंड है …..
मुझे लगा कि चॉकलेट है। मैंने कहा- चॉकलेट है ! और मुझसे छुपा रहे हो ! दोगे नहीं?
वो बोला- चॉकलेट नहीं है !
मैंने उसको पकड़ रखा था और मेरी पकड़ जोर से थी जिससे उसका लंड खड़ा हो गया। मैंने चादर को हटा तो देखा की उसका लंड पूरी तरह से खड़ा है। मैंने जल्दी से उसके अंडरवियर को नीचे खींचा तो देखा कि ७ इंच लंबा लंड छत की तरफ खड़ा है। मैंने उसे तुरन्त छोड़ दिया और छि छि करते हुए उससे दूर हट गया।
उसने चादर से फिर अपने आप को ढक लिया और सॉरी बोला ….
मै कमरे से बाहर चला गया, मेरे मन में सिर्फ उसके लंड का ही ख्याल आ रहा था। जिसके कारण मेरा भी लंड खड़ा हो रहा था और मेरे से रहा नहीं जा रहा था। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं !
और ३० मिनट के बाद मैं उसके पास आया तो वो सो रहा था। मैं भी उसके पास सो गया। मैं उसके अंडरवीयर में हाथ डाल कर उसके लंड को पकड़ कर महसूस करने लगा कि धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होने लगा और मेरा भी !
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका अंडरवीयर निकल दिया। उसका गोरा लंड अच्छा लग रहा था। फिर मैंने भी अपना अंडरवियर निकाल दिया और उसके लंड से खेलने लगा। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि गौरव जागा हुआ है। उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे होठों पर चूमने लगा …… मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया …….
गौरव ने मुझे ऊपर खींचा और मेरे लंड को चूमने लगा।
चूमते-चूमते मुझे पेट के बल लिटा दिया और अपने आप मेरे ऊपर लेट गया। फिर मुझे उसका लंड मेरी गांड की दरारों में जाता हुआ लगा जोकि मेरे गांड की छेद के पास आ गया। सिर्फ एक जोरदार झटका और मेरी चीख निकल गई, ऐसे लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहा मेरी गांड में जा रहा है। मै गौरव से मना कर रहा था कि निकाल ले, मुझे दर्द हो रहा है। लेकिन गौरव नहीं रुका और मेरी गांड को पेलता चला गया, मै रोता जा रहा था और गौरव पेलता जा रहा था।
चार-पाँच मिनट के बाद गौरव शान्त हुआ, मुझे लगा कि मेरी गांड में कुछ गरम चीज गौरव के लंड से गिर रही है। गौरव १० मिनट तक मेरे उपर लेटा रहा, फिर बोला- गौरव ! सॉरी यार !
…….मै अभी रो रहा था …..
गौरव ने मुझे चुप करने के लिए बोला कि मेरी गांड ले ले !
पहले तो मैं मना करता रहा लेकिन बदले की भावना के कारण मैंने हाँ कर दी। गौरव नीचे लेटा, मैं ऊपर था। गौरव अपने हाथों से अपनी गांड फैला कर छेद दिखा रहा था। मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रख कर एक जोरदार झटका दिया, गौरव चिल्लाने लगा। मेरा लंड गौरव के लंड से ज्यादा मोटा था। मैंने एक ही बार में अपना पूरा लंड गौरव की गांड में पेल दिया और जैसे गौरव झटके ले रहा था, उससे भी तेज मैं कर रहा था क्योंकि मुझे गौरव से बदला लेना था।
२० मिनट के बाद मेरा माल गौरव की गांड में गिर गया और मैं गौरव के ऊपर से ५ मिनट के बाद उठा तो देखा कि गौरव की गांड से खून निकल रहा है।
मैं डर गया, गौरव बेहोश हो गया था !
मैं पानी ले कर आया, गौरव पर डाला तो उसे होश आया। रात में गौरव की तबीयत काफी ख़राब हो गई थी …… यह मेरे ही कारण हुआ था .. ४ दिन के बाद गौरव ठीक हुआ। मैं उसके पास गया और बोला- सॉरी गौरव ! उस दिन ज्यादा हो गया था !
गौरव बोला- नहीं यार …… यह तो शुरुआत है ! धीरे- धीरे अच्छा लगने लगेगा …..
उसके बाद से मैं और गौरव रोज रात एक दूसरे की गांड मारते थे …… Antarvasna
मैं पुलिस स्टेशन से बाहर Hindi Sex Stories आया और अपनी मोटर साईकल उठा कर सीधे राहुल के घर आ गया। अभी सवेरे के साढ़े आठ ही बजे थे…हमेशा की तरह राहुल घर पर नहीं था। उसे शायद यह मालूम नहीं था कि आज उसका इस घर में अन्तिम दिन है। घर में सरोज नहीं थी…दिव्या ही मिली।
‘आज तो जल्दी आ गये… क्या हुआ रात को नींद नहीं आई क्या…?’ उसकी चुलबुली हरकत मेरे मन को बहुत अच्छी लगी।
‘दिव्या…बस रात को तो मैं तुम्हारे ही सपने देखता रहा… तुम्हारे जैसी कमसिन और जवान लड़की जिसे मिल जाये…उसकी तो किस्मत ही खुल जाये…’ मेरी बात सुन कर वो और इठलाने लगी।
‘अब अन्दर भी चलो… ‘ मुझे वो धक्का देते हुए बोली…’बोलो अब क्या इरादा है…!’
‘बस एक मीठा सा चुम्मा…’ मैंने शरारत से कहा।
‘है हिम्मत तो ले लो…!’ उसने हंस कर कहा।
‘ऐसे नहीं… पहले अपनी आँखें बंद करो…फिर देखो मेरा कमाल…’
उसने अपनी आँखें बन्द कर ली और अपना गोरा और चिकना चेहरा आगे कर दिया… मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिये… उसके कांपते होंठो का स्पर्श मुझे रोमांचित कर गया। एकदम नरम होंठ…गुलाब की पंखुड़ियों की तरह… हम दोनों एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे… दोनों ही मदहोश होने लगे। कुछ देर बाद अलग हुए तो दोनों के चेहरे की रंगत बदली हुई थी। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। उसकी आंखों में भी गुलाबी डोरे खिंच चुके थे।
दिव्या ने थोड़ा सा शर्माते हुए और फिर से आँखें बन्द करके कहा,’जो…मेरी छातियों को पकड़ लो…हाय… मसल डालो…’ उसने अपनी छाती आगे को उभार दी, उसके तने हुए उरोज बाहर को उभर आये। मैंने उसकी चूंचियो पर अपना हाथ रख दिया। और हौले हौले से दबाने लगा। उसके मुख से सिसकारी निकलने लगी। वो भी मेरे हाथों पर ज्यादा दबाने के लिये और दबाव डालने लगी।
मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर एक हाथ से उसके उभारों को मसलना शुरू कर दिया और अब मेरी कमर वाला हाथ चूतड़ों के ऊपर आ कर थम गया। मेरे हाथ उसके बोबे और चूतड़ दबा रहे थे और दिव्या अपने जिस्म को मेरे जिस्म से बल खा कर रगड़ रही थी। उसके मुँह से आह… हाय… मां री… जैसी सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने उसे दीवार से सटा कर उसकी चूत को पकड़ कर दबा दी। वो चिहुंक उठी…
‘हाय छोड़ दे जोऽऽऽ… मैं मर गई…’ वो मदहोश सी झूम गई। मैंने उसकी चूत नहीं छोड़ी… स्कर्ट के बाहर से ही उसकी चूत मसलता रहा… उसकी चूत पानी छोड़ रही थी… मेरे हाथ को गीलापन लगने लगा था।
वो मस्ती में झुकने लगी… पर उसने मेरा हाथ नहीं छुड़ाया… ‘क्या कर रहे हो जोऽऽऽ… मुझे मार डालोगे क्या???… अब बस अब…नहीं रहा जा रहा है…’ उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी… बेहाल हुई जा रही थी…
मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और प्यार से उसे बिस्तर पर लेटा दिया। उसकी आँखें बंद थी। मैंने उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया… उसकी पानी छोड़ती हुई गीली चूत सामने थी। गुलाबी रंग… हल्की भूरी भूरी झांटे… चूत के दोनों लब फ़ड़फ़ड़ा रहे थे… मैंने अपनी पैन्ट उतार दी… और अपना मोटा और तन्नाया हुआ लण्ड उसकी पनीली चूत पर रख दिया। चिकनापन इतना था कि रखते ही सुपाड़ा अन्दर घुस पड़ा और छेद में उतर गया।
‘घुसा दे रे… हाय… जरा जोर लगा दे…जो…’ उसकी बैचेनी बढ़ रही थी… पूरा लण्ड लेने को उतावली हो रही थी… मैं उस पर झुक पड़ा… और जोर लगा कर लण्ड अन्दर सरकाने लगा। वो भी अपनी चूत का पूरा जोर लगा रही थी। जब दोनों और बेकरारी बराबर हो तब भला तेजी को कौन रोक सकता था। वो भरपूर जवान… खिलती हुई कली… पूरा जोश… नतीजा ये कि धक्का पर धक्का… गजब की तेजी… चूत का उछाल… लण्ड को सटासट चला रहा था। मैंने उसके बोबे भींच लिये…
‘और जोर से भींचो… मेरे राजा… चोद दो आज मुझे…!’ उसकी वासना बढ़ती जा रही थी… मेरा लण्ड पूरी गहराई तक पहुंच रहा था… उसकी चूत जवान थी…कोई भी लण्ड पूरा ले सकती थी। मेरा लण्ड भी मानो कम लम्बा लग रहा था।
अचानक मेरे चूतड़ पीछे से किसी ने दबा दिये… मैंने देखा तो सरोज थी…चुदाई के जोश में वो कब आई पता ही नहीं चला। उसने मुझे इशारा किया। मैंने समझ गया… मैंने तुरन्त ही दिव्या के बोबे जोर जोर से मसलने और खींचने लगा। उसने भी मेरे चूतड़ दबाना चालू रखा।
‘जो मत करो… मैं झड जाऊंगी… हाऽऽऽय ना करो…’ पर मैंने बेरहमी से दिव्या के बोबे मसलना जारी रखा… और धक्के चूत में गड़ा कर मारने लगा। उसे जबर्दस्त चुदाई चाहिये थी।
‘मैं मर गई… राम रे… चुद गई… मेरी फ़ाड़ डाल जो… हाय मैं गई…’ उसके जिस्म में उबाल आ गया था। उसे नहीं पता था कि उसकी मां उसके पास खड़ी है। मेरी उत्तेजना भी बहुत बढ़ गई थी… पर अब दिव्या का शरीर ऐंठने लग गया था। वो मुझे अपनी ओर जोर से खींचने लगी थी। अचानक उसने पूरी ताकत से मुझे चिपका लिया और उसकी चूत लहरा उठी।
वो झड़ने लगी थी।
सरोज ने दिव्या का जिस्म जोर जोर से सहलाना शुरु कर दिया था। उसकी चूत का कसना और ढीला होना…उसका पानी छोड़ना मुझे बहुत सुहाना लग रहा था। सरोज बराबर उसका जिस्म सहलाये जा रही थी।
‘झड़ जा बेटी… निकाल दे पूरा पानी…’ सरोज उसे प्यार से कह रही थी।
‘मांऽऽऽ… हाय मेरी मां ऽऽऽ… तेरी बेटी तो चुद गई… जो ने तो मेरा दम निकाल दिया…’ दिव्या हांफ़ते हुए बोली। मैंने अपना लण्ड दिव्या की चूत से बाहर निकाल दिया।
‘लेकिन मेरा लण्ड तो देखो ना…अभी तक ये फ़ुफ़कार रहा है… सरोज तुम ही शान्त कर दो…’ मैंने अपनी बात भी कही… दिव्या भी अब बिस्तर से उठ चुकी थी।
‘जो…मम्मी की गाण्ड मार दो… मां की गाण्ड बहुत नरम है…!’ अचानक दिव्या ने मुझे सुझाया।
सरोज ने शरम से अपना मुख छिपा लिया। मैंने सरोज को तुरन्त घोड़ी बना दिया। और साड़ी खींच दी। सरोज की गोरे गोरे चूतड़ों की दोनों फ़ांके सामने आ गई। सरोज ने अपनी दोनों टांगें फ़ैला कर अपने गाण्ड का छेद खोल दिया। फिर मुझसे शर्माते हुए बोली,’हाय… मत करो जो… मैं मर जाऊंगी…’ फिर दिव्या की तरफ़ देखा -‘ दिव्या तू जा ना यहाँ से…’
‘मां, मेरे सामने ही गाण्ड चुदवा लो ना…! मुझे भी तो एक इसका एक्स्पीरीएन्स चाहिये ना…!’
‘चल हट… बेशरम… तेरे सामने चुदूंगी तो शरम नहीं आयेगी?’
‘मैं भी तो आपके सामने चुदी थी ना… जो लग जाओ ना अब…’ दिव्या ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल मां की गाण्ड में लगा दिया… ‘अब चोद दो मां की गाण्ड को…!’
मुझे लगा कि बस स्वर्ग है तो यहीं है… मां बेटी मुझसे इतने उत्साह से चुदवा रही थी…मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने अपना लण्ड सरोज की गाण्ड के छेद पर लगा दिया और जोर लगाया, छेद में तेल भरा हुआ था मेरा सुपाड़ा फ़क की आवाज करता हुआ छेद में फ़ंस गया।
‘उईऽऽ…मां… हाय रे…घुस गया…!’ सरोज सिसक उठी। दिव्या अपनी मां के बोबे पकड़ कर धीरे धीरे मलने लगी और प्यार करने लगी।
‘जो… मेरी प्यारी मां को तबियत से चोदो… मां को आनन्द से भर दो… देखो ना मां को कितना अच्छा लग रहा है…’ दिव्या मां की ओर प्यार से देख रही थी। सरोज ने अपनी आँखें बन्द कर ली थी।
मैं अब अपना लण्ड जोर लगा कर अन्दर सरकाने लगा। मेरे लण्ड को छोटे से छेद में घुसने के कारण तेज मीठा सा सा मजा आने लगा। पर सरोज ने अपने दांत भींच लिये। उसे हल्का सा दर्द हो रहा था।
दिव्या मां को मजा देने के लिये उसके बोबे मसल रही थी। मेरा लण्ड गाण्ड में पूरा घुस चुका था। सरोज ने मुझे मुड़ कर देखा और आंख मार दी…
‘लण्ड है या लोहा… मेरी तो फ़ाड़ के रख दी… अब मारो ना जोर से गाण्ड को…’
मैंने हरी झण्डी पाते ही स्पीड बढ़ा दी। वो सिसक उठी। मजे में उसकी फिर आँखें बन्द होने लगी।
‘चोद दे मेरी मां को… प्यार से भर दो मां को… मेरी प्यारी मां…’ अब दिव्या सरोज को चूमने लगी थी। बोबे पर तो दिव्या ने कब्जा जमा रखा था। मैंने कमर में हाथ डाल कर उसकी चूत में अपनी अंगुली डाल दी। और डबल चुदाई करने लगा। उसका दाना मसलने लगा। उसे तेज मजा आने लगा।
‘हाय रे छोड़ दे अब रे… लगा…जोर से लगा… मेरी मांऽऽऽ… मार दी रे मेरी…’ सरोज ना जाने क्या क्या कहती रही। उसकी गाण्ड अब मक्खन की तरह चिकनी हो गई थी। लण्ड सटासट चल रहा था। अति उत्तेजना से उसका दाना अचानक ही फ़ड़फ़ड़ा उठा और सरोज झड़ने लगी। ये देख कर कर दिव्या ने भी मां को कस लिया।
मैंने भी झड़ने के चक्कर में स्पीड बढ़ा दी। मेरा सुपाड़ा फ़ूल कर कुप्पा हो रहा था। सहनशीलता सीमाएं पार करती जा रही थी और आखिर अन्तिम पड़ाव आ ही गया। मैंने तुरन्त अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। दिव्या ने देखते ही देखते मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर लिया और कस कर दबा कर मुठ मार दिया। मेरे लण्ड ने पिचकारी लम्बी और दूर तक उछाल दी।
‘हाय मम्मी… देखो तो… माल तो फ़व्वारे की तरह निकल रहा है…’
सरोज ने बिना समय गवांये झट से मेरा लण्ड मुख में भर लिया… अब वीर्य सरोज के मुख में भर रहा था… और वो उसे एक ही घूंट में पी गई। अब वह बचे खुचे वीर्य को भी निचोड़ रही थी… दिव्या अपनी मां की इस हरकत को ध्यान से देख रही थी…
‘मम्मी… ये क्या गन्दापना कर रही हो… इसे भी कोई पीता है क्या?’
मैंने दिव्या को समझाया कि ये तो पौष्टिक होता है और आनन्ददायक होता है… दिव्या ने कपड़े से मां की गाण्ड का तेल पोंछ दिया फिर मेरा लण्ड भी साफ़ कर दिया। सरोज ने दिव्या को गले लगा लिया। और चूमने लगी…
‘देखा जो…माँ को तुमने मस्त कर दिया… मुझे बहुत अच्छा लगा…मेरी प्यारी मांऽऽ…’ कह कर सरोज से अलग हो गई।
मैंने सरोज से बात पलटते हुए कहा- ‘आज राहुल नहीं दिख रहा है…?’
‘वो चारों आज शाम को गांव जा रहे हैं न… देर से आयेगा…’ सुनते ही मैं चौकन्ना हो गया।
‘अब तो वो तुम दोनों को पीटता तो नहीं है ना…’
‘वो जंगली है… कल देखो मुझे कितना मारा… दिव्या के तो बोबे तक नोच डाले… साला मरता भी तो नहीं है…हमारी जिन्दगी नर्क बना रखी है’ कह कर सरोज ने मेरे सीने पर सर रख दिया। दिव्या भी मां की पीठ से चिपक कर रोने लगी। तो सच में वो इतना निर्दयी और क्रूर है।
मैंने उन्हें अलग करते हुए कहा…’मुझे अब चलना चाहिये…शाम को आऊंगा।’ मैं मुड़ कर बाहर आ गया। वो दोनों मुझे प्यार से निहारते रही।
मैं तुरन्त पुलिस स्टेशन गया और अंकल से मिला… उन्हें सब कुछ बताया… कि वो सभी गांव जाने की तैयारी में है।
‘शायद उन्हें भनक लग गई है… चलो…’ उन्होंने जीप तैयार की और सभी सिपाहियो को आज्ञा दी। मैंने अपनी बाईक उठाई और उनके आगे आगे चला। पान-वाले की दुकान पर पहला छापा मारा।
मैंने भाग कर टूसीटर पर बैठे मौन्टी और सुरजीत को जा दबोचा। मौन्टी ने मुझे पीछे धक्का दे दिया और मौके की नजाकत देख कर भागने लगा। मैंने उछल कर एक फ़्लाईंग किक मार कर उसे गिरा दिया।
इतने में दो पुलिस वालों ने उन्हें धर दबोचा। हैप्पी का पीछ करके अंकल ने उसे हथकड़ी पहना दी। पान की दुकान को सील कर दी। जीप वहां से कॉलेज पहुंची। मुझे राहुल पर नजर रखने को कहा और साथ में दो पुलिस वालों को भी हिदायत दी। अंकल प्रिन्सिपल से मिलने ओफ़िस में चले गये। कुछ ही समय में अंकल और प्रिन्सिपल राहुल की क्लास के सामने थे।
राहुल देखते ही समझ गया और खिड़की से कूद कर भागने लगा। पर खिड़की के बाहर मुझे देखते ही उसके होश उड गये। उसे हथकड़ी डाल दी गई। समय पर पूरा अभियान निपट गया। चारों दोस्तों को और पान वाले को हवालात में बंद कर दिया गया। अब चला तलाशी अभियान ।
पुलिस मेरे साथ सबसे पहले राहुल के यहाँ पहुंची। राहुल भी साथ था। दिव्या और सरोज ने मुझे और राहुल को पुलिस के साथ देखा तो घबरा गई।
‘साब इसने कुछ नहीं किया… जो तो अच्छा लड़का है…’ अंकल ने मेरी तरफ़ देखा।
‘क्या बात है जो… बड़ी तरफ़दारी हो रही है… ये लो… अब इसका ध्यान रखना वरना साले की थाने में इसकी टांगें तोड दूंगा…’ अंकल में मेरी तरफ़ गुस्से में देखा और मुझे सरोज की तरफ़ धक्का दे दिया।
‘जी… जी… मैं ध्यान रखूंगी…’ घबराई सी सरोज मेरा हाथ पकड़ कर खड़ी हो गई।
‘साली… हरामजादी… जो के साथ खड़ी है… आने तो दे मुझे… तुम दोनों मां बेटी के हाथ पांव ना तोड़े तो देखना !’
मैंने राहुल के कान में कहा…’तू फ़िकर मत कर यार… मैं तेरी मां और बहन को रोज़ चोदूंगा… मस्त चीज़ें है दोनों…’
‘भड़वे… तेरी तो मैं… ‘ उसी समय अंकल का एक हाथ उसके मुँह पर पड़ा… उसके होंठो से खून छलक पड़ा।
मैंने राहुल की तरफ़ मुस्करा कर देखा… ‘तू क्या समझा था… कामिनी के साथ तूने जो किया था… वो चुपचाप बैठती…’ अब उसकी नजरें ऊपर उठी… वो समझ चुका था… कि ये सब क्यों हुआ है… उसका सर एक बार फिर झुक गया।
‘आगे से अगर ये जो… राहुल के साथ दिखा तो साला जेल जायेगा…’ अंकल अपने डायलोग बोले जा रहे थे। सरोज और दिव्या को अब भी कुछ समझ में नहीं आया। उनकी नजर में बस राहुल एक अपराधी था।
कामिनी का बदला उन दोनों के समझ में नहीं आया था। इतने में पुलिस वाले सारे घर की तलाशी ले कर कुछ समान ले कर आ गये। उसे वहीं पर सील कर दिया और हम तीनों के उस पर हस्ताक्षर करवा लिये।
वो मुझे छोड़ कर आगे तलाशी अभियान में निकल गये। मैं अंकल की अदाओं पर मुसकरा उठा। सरोज और दिव्या मुझसे प्यार करके लिपट कर रोने लगे। मैंने उन्हें समझाया
‘मैं कोई चोर थोड़े ही हूँ… मुझे तो बस इन्होंने यहां से निकलते देखा तो पकड़ लिया… हां राहुल ड्रग्स बेचने के चक्कर में पकड़ा गया है जाने कितने सालों के लिये अन्दर जायेगा।
उन दोनों ने राहुल से पीछा छूटने पर चैन की सांस ली… उनकी नजर में मैं पुलिस से बच गया और मुझे प्यार से बिस्तर पर सुला दिया। दोनों एक एक करके मुझे प्यार करने लगी… अचानक मुझे कामिनी का ख्याल आया।
‘मैं शाम को आऊंगा… रात भर मजे करेंगे… बाय…’ मैं सीधा वहां से कामिनी के पास आया। उसे सारी बात बताई… कामिनी खुश थी… उसने मुझे प्यार से चूम लिया…
‘बात कहां तक पहुंची… कार्यक्रम चालू है…?’ कामिनी और नेहा ने मुस्करा कर पूछा्।
‘दोनों ही बहुत सेक्सी है… खूब मजा आता है और अब तो दोनों ही मेरी फ़ेन है… क्यों जल गई ना…’ मैंने शरारत की नजरो से देखा।
दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मेरी पिटाई शुरू कर दी… Hindi Sex Stories
दोस्तों मैं अन्तर्वासना का Antarvasna Sex Stories एक नियमित पाठक हूँ। मैं इसकी सारी कहानियाँ बहुत मज़े से पढता हूँ। आज मेरे दिल में भी यह ख्याल आया कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के समक्ष पेश करुँ। मेरा मकसद सिर्फ वोट पाना नहीं है अपितु आप सब के समक्ष अपने दिल की बात व्यक्त करने का है। यह एक ऐसी कहानी है जिसे मैं सब के साथ शेयर नहीं कर सकता हूँ पर मेरी इच्छा थी कि लोग यह जाने कि इस दुनिया में हर किसी के नसीब में एक चूत होती है।
तो अब आप सबका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी आपके सामने रखना चाहता हूँ, यह कहानी सच्ची है या नहीं यह आप ही फ़ैसला करें तो बेहतर होगा।
तो कहानी शुरू होती है मेरे परिचय से:- मैं बिहार का रहने वाला एक सीधा सादा बीस साल का हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और दिल्ली में आई आई टी से इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। मैं द्वीतीय वर्ष का छात्र हूँ और पढ़ाई लिखाई में ठीक ठाक हूँ। बचपन से ही मैं अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर था सो कभी भी पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं सोचता था। मैं पुरुष और नारी सम्बन्ध के बारे में बस किताबी ज्ञान ही रखता था, हालांकि थोड़ा बहुत व्यावहारिक ज्ञान भी था मुझे पर मैं चूंकि सीधा सादा था सो मैं आज तक कुंवारा ही था पर मैंने आपको पहले ही बताया कि हर किसी के नसीब में एक चूत होती है सो आखिरकार मुझे भी एक दिन चूत मिल ही गई। हाँ दोस्तो, एक बात और जो मैं बताना भूल गया था वो यह कि मैं पियानो अच्छा बजता हूँ और इसीलिए मैं अपने कॉलेज के बैंड में पियानो बजाता हूँ और यही बात मेरे किस्मत की चाबी बनी।
दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा के बाद मेरे इंस्टिट्यूट में डेढ़ महीने की छुट्टी हुई और मैं अपने घर आ गया जो पटना में राजेंद्र नगर में है। अभी मुझे घर आये एक महीना ही हुआ था कि मुझे खबर आई कि मेरे इंस्टिट्यूट के बैंड का एक कंसर्ट है जो पाँच दिन के बाद होना है और मुझे तुंरत वहां पहुंचना है। अब आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में कितनी भीड़ होती है सो मुझे किसी भी आम ट्रेन में रिज़र्वेशन नहीं मिल पा रहा था।
मैंने अपने बैंड के लीडर को अपनी असमर्थता बताई तो उसने कहा “भाई तेरा आना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि अगर पियानो बजाने वाला नहीं होगा तो फिर हमारा बैंड अधूरा ही है। “
फिर मैंने तय किया कि अब मैं तत्काल में रिज़र्वेशन करा कर जाऊंगा पर अब चार दिन ही बाकी बचे थे सो तत्काल में भी वही हालत थी और मुझे कंसर्ट से एक दो दिन पहले ही पहुंचना था सो आखिरकार मैंने राजधानी एक्सप्रेस में अपना रिज़र्वेशन कराया वो भी सेकंड एसी में। मेरे जेब से पैसे लगे थे सो मैं परेशान था पर दिल में एक तसल्ली थी कि चलो सेकंड एसी में कभी गया नहीं हूँ तो अच्छा ही अनुभव रहेगा। मैं नियत दिन, नियत समय पर ट्रेन पकड़ने राजेंद्र नगर जंक्शन चला गया। ट्रेन वहां पहले से लगी होती है इसलिए मैं सीधा अपने सीट पर चला गया पर राजेंद्र नगर में ज्यादा लोग नहीं चढ़ते हैं इसलिए ज्यादा भीड़ नहीं थी।
ट्रेन अपने समय पर खुली और ट्रेन के खुलने के बाद मुझे ख्याल आया कि इतना लम्बा सफ़र कैसे कटेगा, तो मैंने सोचा कि पटना जंक्शन पर कोई नोवल खरीद लूँगा। पटना जंक्शन पर ट्रेन रुकी तो मैं ट्रेन से नीचे उतर गया और प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े एक व्हीलर के पास गया वहां पर सामने एक नोवल रखी थी जिसका नाम था फाइव पॉइंट समवन ! मैं काफ़ी दिन से वो नोवल पढ़ना चाहता था और उस नोवल का लेखक एक आईआईटीअन था इसलिए मैंने कुछ सोचे बिना वह नोवल खरीद ली।
और फिर ट्रेन खुलने से पहले मैं वापस अपने कंपार्टमेंट में पहुंचा तो देखा कि मेरे सामने वाली सीट पर एक चौबीस-पच्चीस साल की लड़की बैठी थी और वह फ़ोन पर किसी से बात कर रही थी। मैं चुप चाप आकर अपनी सीट पर बैठ गया और नोवल के पन्ने पलटने लगा और पढ़ने में तल्लीन हो गया कि अचानक उसने मुझसे पूछा- क्या आप भी दिल्ली जा रहे हो?
मैंने कहा- हाँ।
तो उसने मुझसे पूछा- क्या आप वहां जॉब करते हो?
मैंने उसे बताया- नहीं, मैं तो आई आई टी दिल्ली में पढ़ता हूँ और मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा हूँ।
तो उसने बताया कि उसका भाई भी पुणे के किसी इंस्टिट्यूट से मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा है और वो अभी सेकंड इयर में गया है।
मैंने उससे कहा- मैं भी सेकंड इयर में ही हूँ।
फिर उसने मुझसे पूछा- क्या तुम चेतन भगत के फैन हो?
तो मैंने कहा- नहीं मैं तो बस इसीलिए यह नोवल लेकर आया क्यूंकि चेतन भगत भी आई आई टी का ही छात्र था।
इसी तरह हमारी बात-चीत का सिलसिला चल पड़ा। पर मैंने आपको पहले ही बताया कि मैं एक निहायती शरीफ और सीधा सादा बन्दा हूँ इसीलिए मैं उसके साथ कोई काम की बात नहीं कर रहा था मेरे सवाल कुछ इस तरह के थे : आप क्या करती हो? जिसका जवाब था मैं एक आकिर्टेक्ट हूँ।
मैंने पूछा- दिल्ली में ही?
जिसका जवाब था- नहीं, मेरा पटना में ही एक ऑफिस है जहाँ मैं क्लिएंट्स के साथ डील करती हूँ।
फिर मैंने पूछा- आप दिल्ली क्यूँ जा रही हो?
जिसका जवाब था- मैं अपने दोस्तों के साथ बर्थडे मनाने जा रही हूँ और हम लोग मौज मस्ती करेंगे।
फिर मेरे इन सवालों से परेशान हो कर उसने कहा- तुम कोई काम का सवाल क्यूँ नहीं पूछ रहे हो?
मैंने कहा- मतलब?
तो उसने कहा- छोड़ो ! तुम अभी बच्चे हो।
मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम श्रेया बताया।
हम बातचीत कर ही रहे थे कि तभी हमारा खाना आ गया और मैं खाना खाने लगा। खाना खा कर मैंने अपने बर्थ पर अपना बिस्तर लगाया और सोने की कोशिश करने लगा पर हर आईआईटीअन की आदत देर तक जागने की होती है सो नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी। धीरे धीरे पूरी बोगी की रोशनी बन्द हो गई और खर्राटों की आवाज़ पूरी बोगी में गूंजने लगी। अब तो सोना और भी मुश्किल हो गया। पर फिर भी मैं सोने की कोशिश करने लगा। मुझे लगा कि अब तक तो श्रेया भी सो गई होगी पर शायद मैं गलत था। अभी मुझे नींद का पहला ही झोंका आया था कि मुझे लगा कि मेरे बर्थ पर कोई और आ गया है और वो पर्दा खींच रहा है पर नींद से मेरी आँखें बोझिल थी सो मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया और मैंने नज़रंदाज़ कर दिया।
पर थोड़ी ही देर में मेरी आँखों से नींद गायब हो गई जब मुझे मेरे लंड पर किसी का हाथ होने का एहसास हुआ मैंने आँखें खोली तो देखा- श्रेया मेरे बगल में सोई हुई है और उसका हाथ मेरे लंड पर हरकतें कर रहा है।
मुझे जागता देख कर उसने मुझे चुप रहने का इशारा किया। अब मैं इन सब चीज़ों के बारे में इतना भी अनजान तो नहीं था सो मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा और मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। मेरा लंड बिल्कुल तन गया और मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आने की कोशिश में लग गया जिसकी वजह से मुझे हलके दर्द का एहसास होने लगा। पर आज मैं भी उस आनंद की अनुभूति लेना चाहता था जिसके पीछे सारी दुनिया दीवानी है।
मैं आँखें बंद कर के लेटा रहा और मज़ा लेटा रहा क्यूंकि मुझे पता ही नहीं था कि आगे करना क्या है?
तभी उसने मेरे पैंट की जिप खोल दी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया और अपने हाथों से उसे सहलाने लगी।
अब तक मेरा लंड पूरी तरह से कड़ा हो गया था और ६-१/२ इंच लम्बा और २ इंच मोटा हो गया था। फिर उसने मेरा हाथ अपने मम्मों पर रख दिया और मुझे उसे दबाने को कहा। मैंने जब उसके मम्मे दबाये तो वो बिल्कुल नर्म थे रुई के फाहे जैसे और बिल्कुल गोल और बड़े बड़े।
मुझे मज़ा आने लगा। मैंने उसकी टॉप उतारी और ब्रा उतारी और उसके मम्मों को चूमने चाटने लगा। उसके चूचुक सख्त हो गए बिलकुल मटर के दानों की तरह। मैं अभी उसके मम्मों में खोया हुआ था और उन्हें चूमता जा रहा था, तभी उसने मुझसे कहा- सिर्फ इन्हीं से खेलते रहोगे या असली खेल भी खेलना है?
तो मैंने कहा- यह असली खेल कैसे खेलते हैं?
उसने मेरी तरफ देखा और कहा- धत्त ऽऽ ! कैसे मर्द हो तुम ? अब तुम्हें यह भी सिखाना पड़ेगा? चलो अब जब इतना कुछ सिखा ही दिया है तो यह भी सिखा देती हूँ ताकि आगे से तुम किसी लड़की के सामने अनाड़ी न रहो।
फिर उसने अपने और मेरे सारे कपड़े उतार दिए। हम दोनों बिल्कुल ही नग्न अवस्था में आ गये। फिर उसने मेरा हाथ अपनी चूत के ऊपर रख दिया और कहा- यही तो है वो स्टेडियम जहाँ असली खेल खेलते हैं। फिर उसने अपने रति द्वार के ऊपर मेरी ऊँगली रख दी जो कि काफी गीला लग रहा था। मैंने उसकी योनि में अपनी ऊँगली घुसा दी और अपनी ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा तो उसने मुझे कहा- रुको मैं तुम्हें एक नया एहसास दिलाती हूँ !
वो पलट गई और अपनी चूत मेरे मुँह के पास और मेरा लंड अपने मुँह के पास ले गई। फिर उसने मुझे कहा- अब तुम मेरी फुद्दी चूसो !
मैं तो बस जैसे उसका गुलाम ही बन गया था। खुद मुझे तो कुछ आता नहीं था सो वो जो कह रही थी मैं वही करता जा रहा था। मैंने उसकी फुद्दी चाटनी और चूसनी शुरू की और उसका नमकीन रस मुझे मजेदार लगने लगा। मैंने चूसता रहा चाटता रहा। तभी अचानक मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगा और मैं झड़ गया उसके मुह में ही ! उसने मेरा सारा कामरस पी लिया। तभी उसका बदन ऐंठने लगा और वो भी झड़ गई। पहले तो मुझे अच्छा नहीं लगा पर फिर मुझे उसकी चूत का नमकीन पानी स्वादिष्ट लगने लगा और मैं सारा पानी पी गया।
मैंने उससे पूछा- क्या यही था असली खेल?
तो उसने कहा- नहीं ! अभी तो असली खेल बाकी है ! यह तो पूर्व-क्रीड़ा थी, या यह समझ लो कि यह तो डिनर के पहले लिया गया सूप है।
मैंने कहा- तो फिर असली खेल खेलो ना !
उसने कहा- उसके लिए तुम्हारे लंड को फिर से तैयार करना पड़ेगा !
और उसने फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से तन गया। अब मैं फिर से तैयार था और मुझे वाकई बड़ा मज़ा आया था। मैंने सोचा कि अगर यह असली खेल नहीं था तो फिर असली खेल में कितना मज़ा आएगा !
उसने मुझसे पूछा- क्या यह तुम्हारा पहली बार है ?
तो मैंने कहा- हाँ ! क्यूँ ? तुम्हें क्या लगता है?
तो उसने कहा- मुझे भी तुम्हारा पहली बार ही लगता है।
फिर मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारा भी पहली बार ही है?
तो उसने कहा- नहीं ! मैंने तो कई बार मज़ा लिया है इसका।
फिर उसने अपने पर्स से निवेया क्रीम की डिब्बी निकली और उसमें से क्रीम निकाल कर मेरे लंड पर लगा दी।
फिर उसने कहा- अब असली खेल के लिए तैयार हो जाओ।
मैं तो तैयार ही था क्यूंकि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बर्थ पर लेट गई और मुझे अपने ऊपर आने को कहा। मैं उसकी टांगों के बीच में बैठ गया और फिर उसने मेरा लंड अपनी फुद्दी के मुहाने पर रख दिया और कहा- अब जोर लगाओ।
मैंने जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी फुद्दी में आराम से चला गया यह उसकी क्रीम का असर था। अब वो गांड उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। उसकी देखा-देखी मैंने भी अपने कमर के जोर से धक्के लगाने शुरू किये तकरीबन पांच मिनट की चुदाई के बाद उसका शरीर ऐंठने लगा और वो झड़ गई मेरे लंड को बहुत ही गरम एहसास हुआ और फिर दो मिनट के बाद मैं भी उसकी फुद्दी में ही झड़ गया। और उसके ऊपर ही लेट गया। धीरे धीरे मेरा लंड अपने आप उसकी चूत से बाहर आ गया।
इस तरह मैंने अपनी ज़िन्दगी की पहली चुदाई पूर्ण की और वो राजधानी एक्सप्रेस मेरे लिए राजधानी सेक्स्प्रेस बन गया।
फिर तो उस रात हमने दो बार और चुदाई की। सुबह उठा तो मैं बिलकुल फ्रेश महसूस कर रहा था। उसने उतरने से पहले मेरा नंबर लिया और मुझसे वादा लिया कि आज मैं उसकी दोस्त के फ्लैट में उसका जन्मदिन मनाने ज़रूर आऊँ !
मैंने उस रात उसकी दोस्त के फ्लैट में उसको और उसकी दोस्त को भी चोदा जोकि अगली बार मैं आप लोगों को बताऊंगा।
मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल ज़रूर करें।
मेरा ईमेल आई डी है : Antarvasna Sex Stories
यह तब की बात है Antarvasna जब एक दिन मेरा दोस्त राकेश अपनी पत्नी के साथ मेरे घर आया। राकेश और मैं साथ साथ काम करते हैं, राकेश की पत्नी प्रिया टीचर है।
उस दिन राकेश ने बताया कि उसका प्रिंटर और यू पी एस खराब हो गया है और प्रिया को स्कूल के कुछ पेपर सेट करके स्कूल में जमा करने हैं। इसलिये वो मेरी मदद चाहता था, मेरे पास प्रिंटर और पी सी दोनों हैं।
वह जब शाम को करीब 8:00 बजे आया तो मैं थोड़ा घबरा गया था कि अचानक दोनों कैसे आ गये।
राकेश को थोड़ा ड्रिंक लेने की आदत है और उस दिन शायद शनिवार था तो उस समय वह थोड़ा ड्रिंक किये हुये था।
उससे मैंने कहा- कोई बात नहीं, मैं टाइप कर देता हूँ, तुम बोलती रहो!
तो प्रिया ने कहा- कोई बात नहीं, मैं बोल देती हूं, यह मैंने ही बनाया है तो गल्तियाँनहीं होंगी!
उसने बताया कि उसको अच्छी टाइपिंग नहीं आती तो वह टाइप नहीं कर पायेगी।
प्रिया मेरे बगल में कुरसी लगाकर बैठ गई, वह इतना नज़दीक थी कि मैं उसकी सांसें महसूस कर सकता था।
कई बार उसके बोडी से मेरी बोडी छू रही थी और उसके लिप्स बिल्कुल मेरे करीब थे उसके गोरा रंग और स्लिम फिगर मुझे डिस्टर्ब कर रहा था।
राकेश भी पीछे बैठा था और मैं अपने पर किसी तरह कंट्रोल किये हुये था। पर प्रिया एकदम नोर्मल थी, उसे शायद ही मेरे बुरे इरादों का अहसास हो रहा हो।
मैं थोड़ा नर्वस सा भी हो रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी एक पप्पी ले लूं और उसकी थाईस पर हाथ फ़ेरूं। उसके मीडियम साइज़ के टाइट बूब्स पर अपने लिप्स से चूमूं।
पर ये सब उस समय सम्भव नहीं था, इस चक्कर में, मैं एक दो बार टाइपिंग करना ही भूल गया। कभी कभी मैं उसके पूरे बदन को ही देखते रह जाता।
थोड़ी देर में राकेश को फ़िर ड्रिंक की जरूरत महसूस हुई, तो वह बोला- प्रिया मैं 10 मिनट में आया।
हम दोनों समझ गये थे कि वह कहाँ जा रहा है। दोनों ही उसकी आदत जानते थे। राकेश के जाने के बाद प्रिया और मैं अपना काम करते रहे और मैं बीच बीच में प्रिया के पूरे बदन पर नज़र मार लेता तो प्रिया भी मुझे देखकर मुस्करा देती।
फ़िर जब पेपर पूरा हो गया तो मैंने एक प्रिंट आउट चेकिंग के लिये प्रिया को दे दिया। प्रिया ने कुछ कोर्रेक्शन के बाद मुझे प्रिंट आउट दिया तो मैं कोररेक्शन करके दुबारा फ़ेयर प्रिंट आउट निकालकर प्रिया को दे दिया।
इस तरह हमारा टाइपिंग का काम पूरा हो गया तो मैंने प्रिया को बोला कि काम तो पूरा हो गया पर राकेश नहीं आया। मैं ऐसा करता हूं थोड़ी चाय बनाता हूं तब तक शायद राकेश आ जाये फ़िर तीनो चाय पीयेंगे।
प्रिया बोली- नहीं चाय में बनाऊँगी, मुझे कल भी तुमको तकलीफ़ देनी है। यह तो एक ही पेपर हुआ है अभी तीन पेपर और हैं, प्रिंटर और यु पी एस शायद दो-तीन दिन में ठीक होंगे और मुझे पेपर परसों तक जमा करना है।
मैं कुछ कहता इससे पहले ही प्रिया किचन में चली गई मैं मना नहीं कर पाया। उसे किचन में कोई परेशानी नहीं हुई और उसने चाय बनाने को भी रख दी। पाँच मिनट के बाद प्रिया दो कप में चाय लेकर आ गई तो मैंने कहा कि राकेश को भी आने दो।
तो वह बोली- राज तुम क्या बात कर रहे हो, इस टाइम वह चाय पीने की हालत में होंगे कहाँ। उनके लिये चाय मैंने नहीं बनाई है उनको जो चाहिये वो उसके लिये ही गये हैं।
मैं तो राकेश के ड्रिंक के बारे में जानता था पर किसी की बुराई और वह भी उसकी बीवी से करना बड़ी बेवकूफ़ी होती है आखिर पति परमेश्वर जो होता है।
फ़िर अचानक वह मुझसे बोली राज तुम भी अब शादी कर ही लो, ऐसे कब तक चलेगा तो मैंने कहा हाँ राकेश को देखकर मेरा भी मन करता है और उसके मज़े देखकर कभी जलन भी होती है।
प्रिया बोली- क्यों जलन किस बात की, अरे वह तो तुम्हारी बचोलर लाइफ को अच्छा बताते हैं और कहते है कि वह गलत फ़ंस गये।
मैंने कहा- मैं सच कहूं तो एक बात की जलन बड़ी होती है कि उसकी (राकेश) की बीवी बड़ी खूबसूरत है।
मेरा ऐसा कहने पर प्रिया पहले तो शरमा सा गई फ़िर बोली- अच्छा जी तो तुम मुंह में जबान भी रखते हो। मैं तो तुमको बड़ा सीधा साधा समझती थी, पर तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में। दूसरे की हरी हरी दिखती है, मेरी भी कुछ परेशानियाँहैं।
मैंने कहा- क्यों आपका एक अच्छा परिवार है बच्चा है। ऐसी कोई प्रोब्लम तो नहीं लगती आप दोनों ठीक ठाक कमाते हो।
प्रिया बोली हाँ वह सब तो है पर। बहुत कुछ मिस करती हूं, फ़िर भी ठीक ही है। राकेश अभी तक भी नहीं आया तो मैंने कहा पता नहीं क्या बात है?
तो प्रिया बोली- यही तो बात है अगर ड्रिंक कर लिया तो इन्हे किसी बात का कोई ध्यान नहीं रहता। अब घर जाकर न ढंग से खायेंगे न कुछ करेंगे और सो जायेंगे, कभी कभी तो रोज़ ही ऐसा होता है। मुझे ऐसे पियक्कड़ से नफ़रत होती है और फ़िर हम दोनों कई दिनो तक एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं। बच्चा तो बस इस बात का सबूत है कि हम पति पत्नि हैं पर शायद एक पति पत्नि की तरह प्यार किये हमें सालों गुजर गये।
प्रिया एकदम इमोशनल हो गई थी, मैंने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा- सब ठीक हो जायेगा तुम उसे प्यार से समझाओ वह समझेगा। वह तुमसे डरता तो है पर शायद अपनी आदत भी नहीं छोड़ पाता और इसका कारण भी शायद उसकी कम आमदनी है, तुम उस से ज्यादा मांगें ना किया करो।
प्रिया ने अपना कंधा मेरी गोद में रख दिया और बोली- राजू, तुम्हारी भी तो प्रोब्लम्स होंगी तो क्या ड्रिंक में ही सब प्रोब्लम का हल है?
वह मेरी गोद में आ गई थी, मैं उसकी बाहों पर हाथ फ़ेरने लगा, वैसे मैं ये कन्सोल करने के लिये कर रहा था पर मेरा सेक्सी मन पूरा मज़ा ले रहा था।
प्रिया को भी मेरा टच पसंद आया था और वह कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे और ऊपर खींच कर अपनी बाहों में ले लिया। प्रिया ने कुछ नहीं कहा और अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया।
मैं उसे कमर से पकड़ कर सोफ़े की तरफ़ ले गया तो वह मेरे साथ चल दी।
प्रिया दिखने में एकदम पटाखा है, गोरा रंग और चमकदार चिकनी त्वचा, पतली कमर, कद 5’3″ उसका फ़िगर 34-26-36 होगा। प्रिया शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया।
मैं अब तक प्रिया के बदन को देखकर मस्त हो चुका था और मैंने सोचा बेटा इससे बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था।
प्रिया को क्या फ़र्क पड़ता अगर मैं वहाँ नहीं होता तो राकेश तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता। मैं उमर में बड़ा और उसको अपनी बाहों में लेकर बोला सब ठीक हो जायेगा तुम चिंता मत करो बस मस्त रहो, अभी तो मैं तुमको निराश नहीं करुंगा, राकेश से ज्यादा मज़ा दूंगा!
और इतना कह कर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखकर उसके लिप्स को बंद कर दिया। प्रिया सकपका गई और कुछ बोल नहीं पाई, मैंने उसके लिप्स जो बंद कर दिये थे। जैसे ही मैं अपने लिप्स हटाये वह बोली राज आप बहुत गंदे हो, आप ने ऐसी गंदी बात कैसे सोची।
मैंने कहा जो राकेश नहीं करता वह मैं करता हूं तो तुम क्यों परेशान हो, मैं कौन हूं भूल जाओ थोड़ी देर के लिये। मैं भी तुम्हारा नज़दीक का हूं और सोचो मैं वह सब तुमको दे रहा हूं जो तुम राकेश से इस समय चाहती हो, फ़िर मैं ड्रिंक भी नहीं करता।
मेरी इस बात का प्रिया पर असर हुआ, वह बोली- पर मुझे डर लग रहा है, मैं उनके साथ कोई गलत तो नहीं कर रही।
मैंने कहा- सोच लो यह तुम्हारे ऊपर है और मैं उसे चूमता और उसके जांघों और बैक पर मसाज भी करता रहा।
प्रिया बोली- प्लीज़ जैसा तुम चाहो पर प्लीज़ मेरे कपड़े मत उतारना आप बाहर से जो चाहे कर लो मुझे बड़ी शरम आ रही है।
मेरा तीर सही निशाने पर लग गया था और मैंने प्रिया को अपनी बाहों में ले लिया। फ़िर मैंने बिना समय गवाये किये हुए प्रिया के बूब्स पर उसकी कमीज़ के बाहर से ही हल्का हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया।
दोस्तो ये सब कैसे हो रहा था मुझे नहीं मालूम, मैं इतना हिम्मत वाला नहीं हूं। प्रिया मेरे छूने से मस्त हो रही थी, इसी बीच मैंने मौका देखकर प्रिया की सलवार का नाड़ा चुपके से खोल दिया और उसे पता नहीं चला।
मैं उसकी चिकनी जांघों पर हाथ फ़ेरना चाहता था पर जैसे मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच हुआ वह एकदम से नाराज़ होते हुए बोली- राज, नो चीटिंग!
और उसने अपनी सलवार एक हाथ से पकड़ ली, पर ऊपर से वह मस्त हो चुकी थी पर अभी भी मुझसे चुदवाने में वह संकोच कर रही थी पर मेरे टच से उसे मज़ा आ रहा था। उसकी सलवार अभी तक खुली हुई थी, जिसको उसने एक हाथ से पकड़ रखा था।
जैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो उसके हाथों से उसकी सलवार नीचे सरक गई और मैंने ऊपर से उसकी कमीज़ की ज़िप पीछे से खोल दी और उसने अंदर से काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैं तो उसके गोरे बदन पर काली ब्रा देखकर मस्त हो गया।
आगे की कहानी अगले भाग में…Antarvasna
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