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मैं एक बार फिर से आप लोगों के पास अपनी Antarvasnaअधूरी कहानी लेकर हाजिर हूं.
तो सबसे पहले पढ़ने वाली सभी बहनों की चूत पे मेरी प्यार भरी पप्पी।
हां तो आप ने पिछली कहानी में पढ़ा कि मैं किस तरह अपनी मामी की चुदाई करता हूं, अब आगे उस रात के बाद जब तक मामा जी नहीं आये, मैं मामी जी की रोज चुदाई करता रहा लेकिन मामा जी के आ जाने के बाद मुझे मामी जी की चुदाई का मौका मिलना बंद हो गया.
लेकिन यहाँ तो लंड को चूत का चस्का लग गया था तो एक दिन मौका देख कर मैं मामी जी को इशारे से कारखाने के पिछली साइड में बुलाया जिसे मेरी ममेरी बहन ने देख लिया और जब उसकी माँ कारखाने के पीछे आई तो वह भी छुप कर आ गई जिसे हम दोनों ने नहीं देखा.
कारखाने के पिछली साइड में लेबर को नहाने के लिये बाथरूम बना हुआ था जिस के अन्दर मैं मामीजी को लेकर चला गया और अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया. लेकिन दरवाजा काफी पुराना होने के कारण काफी जगह से छेद हो रखा था जहाँ मेरे मामा जी की लड़की अपनी आंख लगा कर मेरे और अपनी माँ का रास लीला देखने लगी.
जैसा कि मैं आपको पहले भी बता चुका हूं कि मेरी मामी जी एक नम्बर की छिनाल चुदक्कड़ और रंडी है; वो चुदवाते समय काफी गंदी गंदी और भद्दी गाली का प्रयोग करती हैं.
मुझे अन्दर पकड़ते ही शुरु हो गई, कहने लगी- मेरे राजा, मेरे बेटे, तेरा लंड खाने के बाद से मेरी चूत में काफी खुजली मची है. तेरे मामा से कुछ नहीं होता. चल अब जल्दी से कपड़े उतार और चोद डाल मुझे! मेरी चूत को आज बगैर फाड़े मत छोड़ना. साली हरामजादी कुतिया बगैर लंड के मानती ही नहीं और तुम भोसड़ी के मादर चोद रंडी के आज ये जगह तुझे मेरे लिये मिली इतने दिनों से क्या यहाँ अपनी बहन को यहाँ चोदता था. बोल बे कमीने बहनचोद?
इतने में तो मैं भी ताव में आ गया और उसे कुतिया बना कर पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और कस कस कर उसकी चुदाई करने लगा.
मैं भी बकने लगा- ले रंडी सम्भाल मेरे लंड को … तेरी माँ को चोदूँ रंडी साली हरामजादी! मैंने यहाँ अभी तो सिर्फ तुझे ही चोदा है. मगर मादरचोद जल्दी ही तेरी बेटी यानि मेरी बहन को भी यहीं चोदूँगा.
मेरी सब बातें मेरी ममेरी बहन सुन रही थी और हम दोनों का चुदाई लीला भी देख रही थी. जिसे वो बरदाश्त नहीं कर पा रही थी और अपने एक हाथ से अपनी चूची दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर में उंगली कर रही थी.
इधर हम दोनों इन बातों से बे-खबर चुदाई में मस्त थे।
मेरी मामी बदहवाश हो कर चिल्ला रही थी- आ आम्ममी ईई रीईई आअस्स ह्हूऊऊ ऊम्म्मीई ररीईई एरर्रा आज्आअ प्प्पह्हा आद्दूऊ ओ म्म्मीईई रर्ररीए स्सहह् हहउत क्क्कूऊ म्म्माआआ अर्र राआआ औऊउर ज्जओरर सस्सीईईए आऔ ऊउर रररर्र जओर्र स्सस्सए आआ आआअ स्सस् स्साआआ!
इस तरह करीब दस मिनट तक चुदाई चलती रही और उसके बाद मैं जैसे उसके चूत में घुस जाउंगा इस तरह से उसमें समाने लगा.
और हम शांत हो गये.
अब अन्दर से मादक आवाज़ें आना बन्द हो गयीं जो मीना से बरदाश्त नहीं हुआ. मीना मेरी ममेरी बहन का नाम है. तो अन्दर क्या हुआ है जानने के लिये मीना दरवाजे पर जरा और झुकी. दरवाजा ठीक से बंद नहीं था और मीना का पैर फिसल गया. वो दरवाजे पे पूरी तरह लड़खड़ाई और दरवाजा खुल गया. वो अन्दर गिरी.
फिर क्या हुआ और मैंने उसे कैसे चोदा?
बाकी अगले भाग में!
तब तक के लिये विदा. Antarvasna
मैं किरण शर्मा जम्मू की रहने वाली हूँ। Indian Sex Storiesमैंने कभी जीवन में सोचा नहीं था कि मेरे साथ ऐसा कभी हो सकता है पर जो हुआ सिर्फ़ मैं और अंशु जानते हैं जो मेरा क्लासमेट हुआ करता था। कभी हम अच्छे दोस्त थे।
वो काफी आकर्षक, लम्बा, सुंदर लड़का था। हम अच्छे दोस्त थे।
पर एक दिन हम कॉलेज टूर के साथ हिमाचल गये। सब जगह घूमे। उसने मुझे कहा कि यहाँ मेरे एक रिश्तेदार हैं। उनसे मिल कर आते हैं।
मैंने भी हाँ कर दी।
मुझे नहीं पता था कि वो मेरे साथ सेक्स करने के लिए ले जा रहा है।
वो मुझे एक घर में ले गया। वहां कोई नहीं था, सिर्फ़ एक लड़का था, वो उसका दोस्त था।
उसने कहा- सब ठीक है, जा अन्दर।
तो अन्दर जाते ही उसका देखने का तरीका बदल गया। उसने मेरे स्तनों पर जोर से हाथ मारा।
बोला- कुछ कीड़ा चल रहा था।
मैंने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। उसने डी वी डी लगाई, टी वी चलाया और एक व्यस्क फ़िल्म लगा दी।
मैंने कहा- छी ! बंद करो !
वो मेरे पास आ गया और मेरी पैंट खोलने लगा।
मैं वहां से उठ गयी।
फिर बोला- मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ।
अचानक मेरा ध्यान टी वी पर गया। लड़की लड़के का लंड चूस रही होती है।
मैंने कहा- बंद करो !क्या गंदगी है ये !
उसने मुझे सोफ़े पर लिटा दिया और मेरी जैकेट खोल दी, बोला तुम भी ऐसा करोगी तो मजा आएगा।
मैंने कहा- नहीं ! बिल्कुल नहीं ! उसने मेरे होंठ चूसने शुरू किए। मुझे भी कुछ हो रहा था। बस फिर मेरे स्तन दबाने लगा। मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा। मेरे हाथ ख़ुद ही उसकी पीठ पर चले गये। उसने फिर मेरा टॉप उतार दिया।
मैंने आँखें बंद कर ली। फिर उसने जबरदस्ती पैंट भी खोल दी। अब मैं सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी।
उसने फटाफट अपना लौड़ा निकला और मेरे मुंह पे लगाने लगा।
मैंने मुंह पीछे करके थूक दिया।
उसने कहा- चूस तो सही ! हमेशा मांगेंगी !
जबरदस्ती डाला उसने। मुझे उलटी आ गयी।
वो मेरी योनि को सहलाने लगा। मैं साफ़ थी, उसने चाटना शुरू किया, मेरी हालत ख़राब हो गयी। मैंने अपनी टाँगें बंद कर ली।
फिर उसने लंड अन्दर डालना चाहा पर नहीं गया अन्दर।
उसने टाँगें उठा दी मेरी और जोर से पूरा डाल दिया।
मैं जोर से चिल्लाई पर वो करता रहा्।
मेरे खून भी आ गया पर उसने परवाह नहीं की।
फ़िल्म भी चल रही थी। काफी देर मैं रोती रही, उसने नहीं सुना।
वो स्खलित हो गया। फिर बोला पीछे से मारने के लिए।
मैंने साफ़ इंकार कर दिया और मैंने कपड़े पहन लिए।
उसकी इस गलती की वजह से आज मैं शादी करने से भी घबराती हूँ।
पर मेरी बद-दुआ उसको लगेगी जरूर !
मेरी जिन्दगी उसने खराब की है ! आप लोग ऐसा मत करना किसी के साथ !
यह मेरी निजी और सच्ची बात है न कि कोई कहानी है।
….और आप लोग मन-घड़ंत बेकार की कहानी मत लिखो….!
जो लोग अपनी माँ बहिन को बख्शते कहानियों में, उनको ज़हर खा कर मर जाना चाहिए !
….यह मेरा पहली और आखिरी बात है आप लोगों से !
नमस्कार ! Indian Sex Stories
रिया का सबको और गुरुजी Sex Stories के साथ साथ अन्तर्वासना चलाने वाले एक एक कर्मचारी को गीली गांड से घोड़ी बन कर प्रणाम ! अन्तर्वासना ने मेरी हर चुदाई को अपनी वेबसाइट में जगह देकर मुझे विश्वास दिलाया कि यहाँ हर किसी की सुनवाई होती है। आज एक बार फिर से मैं अपनी नवीनतम चुदाई को लिख कर बयान करने जा रहाँ हूँ। उम्मीद है कि पहले की तरह ही मेरे दोस्तों की सूची में बढ़ौतरी होगी। दोस्तो, उम्मीद है कि पिछली सभी ठुकाइयों की तरह यह ठुकाई भी आप सबको गर्म कर देगी और सभी के लौड़े खड़े हो जायेंगे और किसी न किसी की गांड मारने के लिए बेताब हो जायेंगे।
दोस्तो, चुदाई के लिए जगह पता करना मेरी हॉबी में शामिल हो चुका है। आज जिस जगह के बारे में लिख रहा हूँ यह भी मेरे एक ऐसे दोस्त ने बताई है जिसके साथ आज तक सिर्फ याहू पर चैट हुई है या फिर मोबाइल पर रात को चुदाई ! उस बन्दे की उम्र ५९ साल की है। साठ के करीब पहुँच चुके मेरे इस दोस्त ने मुझे मेरे अपने ही शहर की ऐसी ऐसी जगहें बताई हैं जिनके बारे में शहर में रहकर भी नहीं जानता। वो बरसों पहले मेरे शहर में रह चुका है। उसने मुझे बताया कि शहर के बीचों बीच एक ऐसी जगह है जहाँ तुझे लौड़ा क्या लौड़े मिल जायेंगे एक फिल्म-टाकी जो थिएटर जितनी बड़ी तो नहीं है लेकिन वो एक ऐसे काम्प्लेक्स में है जहाँ रहने के लिए गेस्ट हाउस भी है और उस टाकी में सिर्फ ब्लू फिल्में लगतीं हैं सो उसकी बताई हुई इस जगह पर मैंने जाने की सोची।
बस-स्टैंड से मैंने रिक्शा वाले को अमृत-टाकी नाम की इस मिन्नी थिएटर जाने को कहा। उसने मुझे वहाँ उतार दिया। मैं उस कम्प्लेक्स में घुसा। गेस्ट हाउस ऊपर है और टाकी बेसमेंट में थी। पास में चाइनीज़ फ़ूड का रेस्तौराँ भी था। मैं बेसमेंट की सीढ़ियाँ उतरा, वहाँ ब्लू फिल्म के पोस्टर लगे हुए थे। फिल्म थी- वन लेडी-थ्री मैन
सामने टिकट-काउंटर था जिसपे अभी कोई नहीं था। फिल्म को शुरू होने में काफी समय था। वहाँ फिल्म देखने आने वाले लोग आने लगे। अभी तक सभी निम्न-वर्ग के लोग ही थे जिनमें रिक्शा चालक और पंजाब में बाहर से आकर बसे प्रवासी लोग जो मेहनत मजदूरी करते और हफ्ते में एक-आध बार मनोरंजन करने वहाँ फिल्म देखने आते क्यूंकि टिकट के दाम बहुत कम थे।
मेरे जैसा गोरा चिट्टा चिकना वहाँ कोई नहीं था। जब भी मैं चलकर इधर-उधर जाता, उनकी नज़र मेरी गोल मोल गांड पर टिकती। वहाँ खड़े लोगों में से दो मर्द ऐसे थे जो मेरे बारे में अपना अंदाजा लगाने की फिराक में थे। जब उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मैंने होंठ चबा दिया और होंठों पर जुबां फेर उनको उकसाने की पहली कोशिश की और कुछ हद तक मैं कामयाब भी हुआ। मुझे देख एक ने अपना लुंड खुजलाया, जिसे देख मैं शरमाया झूठ-मूठ में, लेकिन हंस के होंठों पर जुबां फेरते हुए उनके लौड़े की ओर हवा में चुम्मा फेंका। वो चलते हुए टाकी के पीछे साइकिल स्टैंड में बने शौचालय में घुस गए। जब वो वापस न आये तो मैं टहलते हुए वहीं जा पहुंचा। कोई आसपास न देख मैं उनके पास खड़ा हो गया, कुछ नहीं बोला, न कुछ किया,
उनकी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया। उनको समझ ना आया कि अब करें क्या !
तभी किसी ने पीछे से आकर मेरी गांड की गोलाइयों पर हाथ फेरना शुरु किया। मुझे बहुत मस्ती छाई लेकिन चुपचाप खड़ा रहा। उसने आगे हाथ बढ़ा मेरी पैंट खोलने की कोशिश की तो मैंने रोकते हुए उनकी ओर घूम कर देखा। तभी दूसरे ने घूम मेरे पीछे जा गांड पर हाथ फेरना चालू रखा। मैंने आगे वाले की जिप खोल हाथ डालते हुए उसको मसल दिया और घुटनों के बल होते हुए उसको निकाल मुँह में ले लिया। तभी किसी कि आने की आहट सुन हम रुक गए कपड़े सही किये। उस आदमी ने मुझे उसकी जिप बंद करते देख लिया। हम वहां से निकल आये। वो भी कुछ मिनट बाद वापस आ गया।
मेरे आशिक बोले- चल सिगरेट, चाय वगैरा पी कर आते हैं !
अभी चालीस मिनट थे फ़िल्म शुरु होने में ! वो भी सब मेरे जैसा कोई गांडू भालने कोशिश में ही थे। मैं वहीं रुक गया तो वो तीसरा बन्दा मेरे सामने खड़ा हो गया और लौड़े को बार बार खुजलाने लगा। मैंने थोड़ा मुस्कुरा सा दिया, आंख के एक इशारे से मुझे वहीं चलने को कहा जहाँ मैं उन दोनों के साथ गया था। उसने जाते ही लौड़ा निकाल लिया और सीधा मेरे हाथ में थमा दिया। मैंने प्यार से सर से लेकर जड़ तक सहलाया और झुकते हुए मुँह में डाल लिया। उसने मुझे बताया कि वो उसी काम्प्लेक्स के गेस्ट हाउस में रुका था। उसने अपना कार्ड दिया कुछ देर चुसवा उसने मुझे छोड़ दिया।
मैं वहीं जाकर खड़ा हो गया, दोनों आये, मुझे टाकी में ले गए और एक खाली कोना देख मुझे बिठा लिया। वहाँ सोफा-सीट्स थीं, बाहर से टिकट सस्ती थी लेकिन अन्दर हर तरह की सुविधा थी। कोई किसी को परेशान नहीं करता, बस पैसे लेते थे। अन्दर लाइट बंद हुई, मेरी पैंट घुटनों तक खिसका दी गई और उनके लौड़े तने हुए मुझे पुकार रहे थे। दोनों के बीच बैठ बारी-बारी मेरे मुँह में डालते। एक ने ऊँगली घुसा दी, फिर सोफा पर ही मेरी टाँगें चौड़ी करवा दीं और बीच में आकर आसन लगाकर लौड़ा गांड पर रखने लगा। मैंने अपनी जेब में से कंडोम निकाले उसके लौड़े पर डाल दिया और उसने अपना लौड़ा घुसा दिया। थोड़ी सी तकलीफ के बाद मुझे मजा आने लगा। दूसरा मेरे मुँह में चूपे लगवाने लगा।
अह… उह… मार मेरी और कर… हाय और कर…
मेरी गांड की गर्मी में वो जल्दी पिघल गया। उसने अपना माल कंडोम में छोड़ दिया। दूसरे ने कंडोम डाला और घुसा दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था कि दो-दो लौड़ों में खेल रहा था। तभी किसी ने हम पर टॉर्च मारी मुझे चुदवाते देख वो उसी तरफ आया। जल्दी से लौड़े बंद किये और सीधे बैठ गए। उसके जाने के बाद हमने इस बार सोफा की बजाये नीचे लेटना सही समझा। दूसरे ने मुझे दबा कर चोदा। तो पहले वाले का मैंने चूस कर फिर खड़ा करवा दिया। दो घंटे की फिल्म में दोनों ने दो दो बार मेरी ठुकाई की। पहली बार तो मेरी जवानी से पल में पिघल गए दूसरी बार जम कर ठोका। उन दोनों ने अपना नंबर दिया वो तीसरे बन्दे की नज़र मेरे ऊपर रही। मैं जैसे ही बालकनी से निकला, उनको विदा किया।
अभी थिएटर से निकला ही था कि तीसरे ने मुझे बाथरूम में फिर से आने का एक गरम इशारा किया वहां आने के लिए ! मेरे पहुँचते ही वो मुझ पर टूट पड़ा। उसने अपना लौड़ा हाथ में दिया, मैं बैठ कर चूसने लगा। उसने मेरे से मुठ मरवाई और लौड़ा भी खुल कर चुसवाया। उसके झड़ने का वक्त आते देख मैंने उसका माल घोड़ी सा बन अपने छेद पर गिरवा लिया। उसने अपना माल मेरी गांड पर मल दिया। उसने मुझे शाम ५ बजे अपने कमरे पर बुलाया और मैं सही समय पर वहां चला गया। उसने काफी पी रखी थी, बिलकुल नंगा था सिर्फ कच्छा डाला था। मुझे अन्दर घुसाते ही उसने जल्दी से दरवाजा बंद किया। वो बेड की ओट लेकर टांगें फैला कर बैठ गया। मैंने बीच में आते हुए उसला लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और खूब दबा कर चूसा। उसने भी ६९ में हो मेरी गांड चाटी दबा कर मेरे मम्मे मसले। उसने मुझे दीवार को पकड़ थोड़ा झुककर खड़े होने को कहा और एक खिलाड़ी की तरह मुझे चोदा। बहुत मजा दे रहा था, पूरे ३ घंटे उसने मुझे दबा कर अपने लौडे पर उछाला, मुझे पूरी संतुष्टि दी। एक ही दिन में तीन लौड़े पाकर मैं खुश था।
उसके घर से प्यास बुझाकर निकला !
यह थी एक मस्त ठुकाई !
अपनी अगली चुदाई लेकर चुदक्कड़ गांडू जल्दी वापिस आयेगा। Sex Stories
अंतर्वासना के नियमित पाठको Antarvasna फड़कती हुई चूतों और मोटे मोटे लंडो को मेरा सलाम !
मैं सुनील अलवर से फिर एक बार हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
पिछली कहानी के लिए मुझे बहुत सी मेल आई। मुझे बहुत अच्छा लगा।
शायद आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं कि मैं एक स्मार्ट और क्यूट लड़का हूँ। जो कहानी मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ यह एक विवाहित लेकिन असंतुष्ट पत्नी की जो अपने पति के लण्ड से अपनी चूत की प्यास ना बुझा पाई और उसने मुझे याद किया।
पिछले महीने मैं अपने कम्प्यूटर पर काम कर रहा था कि मुझे एक काल आई। वहाँ से एक औरत की आवाज़ आई उसने मुझसे मेरे बारे में पूछा ओर मुझे कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती है. उस वक्त मैं व्यस्त था तो मैने उस से बाद में बात करने को कहा. उसी रात उसका फिर से फोन आया. तब उसने मुझे बताया कि उसकी शादी को ३ साल हो गये है लेकिन वो अपने पति से खुश नही है और वो मुझसे मिलना चाहती है. फिर हमने मिलने की जगह तय की और मैं २ दिन बाद उस से मिलने उसके घर पहुचा.
मैंने बेल बजाई तो एक काम वाली ने दरवाजा खोला. उसने मुझे ड्रॉयिंग रूम में बिठाया और अपनी मालकिन को बुलाने चली गयी। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक २५-२६ साल की औरत गुलाबी रंग की साड़ी में आ रही है. वो देखने में बला की खूबसूरत थी. उसका फिगर ३६-२६-३६ था. मैंने मन ही मन अपनी किस्मत पर गर्व किया कि इतनी खूबसूरत अप्सरा ने मुझे बुलाया है और कुछ ही देर में वो मेरी बाहों में होगी.
उसने आकर मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम रेखा बताया. वो मेरे पास बैठ गयी और हम दोनो बातें करने लगे. कुछ देर बाद उसकी काम वाली चली गयी. फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी. वहाँ हम दोनो ने ड्रिंक्स ली और उसके बाद वो नहाने क लिए बाथरूम में चली गयी.
इतनी देर में तो मेरे लण्ड ने मेरे जीन्स को फ़ाड़ना शुरू कर दिया. वो तो बाहर निकलने को तैयार था. १५ मिनट के बाद जब वो बाथरूम से बाहर निकली तो मेरे होश ही उड़ गये. उसने एक हल्के गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहनी थी और अंदर कुछ भी नहीं था. उसके मोटे मोटे बूब्स और गुलाबी निपल्स साफ दिखाई दे रहे थे. उसकी प्यारी सी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था जैसे वो अभी साफ करके आई हो, दिखाई दे रही थी. वो मेरे पास आई, मुझे मेरे होठों पे हल्के से किस किया और मेरे पास बैठ गयी. मैने उसे अपनी बाहों में समेट लिया. ओर उसके गुलाबी होठों को अपने होठों में दबा लिया. उसके बाद मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। वो भी पूरा सहयोग दे रही थी. वो बहुत ही गर्म लग रही थी जैसे काफ़ी समय से उसने सेक्स ना किया हो. फिर मैने उसकी नाईटी को उतार दिया और उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया. उसके दोनो कबूतर अब मेरे हाथो में थे. जिन्हें मैं कस कस के दबा रहा था. कमरे में बड़ी ही सेक्सी आवाज़ें गूँज रही थी… वो मदहोश हो गयी थी.
मैने उसके एक चूचे को मुँह मे ले लिया और पीने लगा। वो ज़ोर ज़ोर से उउऊहह आआहह करने लगी. पूरा कमरा उसकी आवाज़ो से गूंजने लगा. अब मैंने जैसे ही उसकी चूत को छुआ, वो तड़प उठी और मुझसे ज़ोर से लिपट गयी. फिर उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया ओर उसे ज़ोर से चूसने लगी. थोड़ी देर बाद हम दोनों ६९ की पोज़िशन में थे ओर वो मेरे लण्ड को और मैं उसकी चूत को चूस रहा था. थोड़ी देर बार वो फ्री हो गयी ओर मैंने उसका सारा रस पी लिया और ५ मिनट बाद मैं भी फ्री हो गया, उसने भी मेरा सारा रस भी लिया।
अब मैं उसके बूब्स क साथ खेलने लगा। वो भी मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी। कुछ देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। अब वो तड़प रही थी और मुझे भी नहीं बर्दाश्त हो रहा था। मैने अपने लण्ड उसकी चूत पे रखा और एक ही बार में पूरा का पूरा घुसा दिया. वो एक दम से चिल्ला पड़ी उसकी चूत बड़ी टाइट थी. फिर मैने ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू किया. उसने अपनी दोनो टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट ली एक नागिन की तरह. अब कमरे में फुउऊउउस्स्स् फुस स्स्स्स की आवाज़ें गूँज रही थी. कुछ देर में हम दोनों फ्री हो गये. ओर एक दूसरे क साथ लेट गये. फिर मैं उसे उठा के उसके बाथरूम में ले गया और शावर क नीचे हमने फिर से एक बार सेक्स किया उस दिन मैं उसके साथ पूरा दिन रहा और हमने ५-६ बार सेक्स किया. अलग अलग स्टाइल्स में. वो बहुत ही खुश हुई. उसके बाद मैं वापिस चला गया. कुछ दिनों बाद उसने मुझे फिर से बुलाया और इस बार उसकी एक फ्रेंड भी उसके साथ थी…
इस बारे में आपको अगली बार बताउंगा…
सो अलविदा दोस्तो और प्यारी प्यारी सेक्सी सेक्सी यौनियो !
फिर से ये राहुल आपकी सेवा में हाज़िर होगा…
राहुल आपकी सेवा में तत्पर है…
आपका प्यार ही मुझे आपके पास लाया है. म्म्म्म मम्मूऊऊ उऊहहाआआ Antarvasna
मैं एक बार फिर हाज़िर हूं Sex Stories आपकी सेवा में अपनी कहानी ले कर !
उम्मीद है कि आपको मज़ा आएगा। अगर कोई सुझाव हो तो वो अवश्य दें।
यार लड़कियाँ क्यों इतना शरमाती हैं मेल करने में?
कहानी पढ़ने में तो मज़ा आता होगा। बहुत सी तो अपनी चूत में कहानी पढ़ते-पढ़ते सचमुच में ऊँगली कर लेंगी लेकिन अगर कोई उन्हें अपना लण्ड देना चाहे तो वो इतने नखरे करेंगी कि उनका मन ही नहीं है चुदाई का !
मेरी आज की कहानी में भी कुछ इसी बात का ज़िक्र है।
हाँ तो दोस्तो ! जैसा कि मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया कि मैंने अपनी गर्लफ़्रेन्ड और उसकी सहेली की चुदाई की और मज़े किए। उसके बाद तो बस मुझे बस चुदाई का नशा ही छा गया था। छुट्टी के बाद स्कूल में मैंने सुधा जो कि मेरी गर्लफ़्रेन्ड है उससे मिलने के लिए कहा तो उसने कहा कि करिश्मा (जो कि उसकी दोस्त है) से पूछ के बताएगी।
उसने बताया कि करिश्मा की मम्मी अभी घर पे है और वो कही बाहर ही नहीं जाने वाले हैं, इसलिए जगह का इन्तजाम भी नहीं हो पा रहा है। करिश्मा का भी चुदाई का बहुत मूड था तो अब कमरे का इन्तजाम करने की सारी जिम्मेदारी मुझ पे आ पड़ी थी।
मेरा एक दोस्त, जिसका नाम रवि था, वो जम्मू का रहने वाला था और कमरा ले कर अकेले रहता था। मैंने उससे अपने चुदाई के किस्से बताये थे और उसका भी दोनों को चोदने का बहुत मन था, उससे कमरे के लिए कहा तो वो दोनों को अपने कमरे पे लाने के लिए कहने लगा।
हम लोग की परीक्षा भी करीब थी। लेकिन चुदाई का नशा भी ऐसा है कि बस और कुछ सूझता ही नहीं।
फिर मैंने सुधा से बताया कि कमरे का इन्तज़ाम हो गया है तो उसने पूछा- कहाँ?
तो मैंने उससे बता दिया कि रवि के कमरे पे. तब उसने वहाँ जाने से मना कर दिया और कहा कि नहीं मुझे नहीं जाना वहाँ ! वो बहुत रिस्की है ! और ना-नुकर करने लगी। लेकिन बाद में वो मान गई।
रविवार को मिलने का प्रोग्राम बना।
मैंने रवि से उसके कमरे की चाबी ले ले थी। सुधा ने घर पर ट्यूशन जाने का बहाना किया, हम लोग एक जगह मिले और रवि के कमरे पर आ गए। उसके कमरे पे कोई नहीं था। हम कमरे के अन्दर थे और आते ही सुधा मुझे पकड़कर चूमने लगी।
क्या मस्ती चढ़ी थी साली पर !
आज उसने जींस टॉप पहना था और कसम से क्या माल लग रही थी !
उसकी चुचियाँ अभी छोटी थी लेकिन अब मैं था ना उनको बड़ा करने के लिए !
साली चुचियो को जैसे ही छुआ, मुझको करंट लग गया। तनी, कड़ी और नुकीली चुचियों का मज़ा आ गया। हमने पहले आपस में खूब फ़ोर-प्ले किया। मैंने उसको खूब चूसा, चाटा और खूब उसका दूध पिया। मैंने उससे अपने लण्ड को चूसने के लिए कहा फिर हम ६९ पोसिशन में हो गए और मैंने उसका पानी निकल दिया। सुधा तड़प रही थी और उसको तड़पाने में मुझको मज़ा आ रहा था।
वो बार बार मेरे लण्ड को अपनी बुर में डालने के लिए कह रही थी। फिर मैंने उसको घोड़ी बनने को कहा और उसकी चूत चोदने लगा।
वो अह्ह्ह्ह्ह् ! ह्ह्छ उ ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्छ ! जैसी मस्त सेक्सी सेक्सी आवाज़ निकल रही थी। फिर मैं नीचे लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। अब उसने मेरे लण्ड को पूरा अपनी बुर में ले लिया और कूदने लगी।
आह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह् ! कितना मज़ा आ रहा था ! लग रहा था कि अन्दर लण्ड से कुछ टकरा रहा है। लण्ड पूरा अन्दर तक चला गया था। वो भी ऊह आह करके खूब उछल रही थी। तभी मैंने उसे नीचे उतार दिया और ऊपर मैं आ गया और २०-२५ धक्के लगाने के बाद में झड़ गया, लण्ड उसकी चूत के ही अन्दर था।
क्योंकि मैंने कंडोम पहना था ही। फिर हम वही लेट गए, तब वो कहने लगी कि आते समय उसने करिश्मा को बता दिया था कि वो मुझसे मिलने आ रही है तो वो भी जिद्द कर रही थी। तो मैंने उससे कहा कि मैं वहाँ पहुँच के कॉल करुँगी। फिर उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं उसे बुला लूँ?
मुझे और क्या चाहिए था !
मैंने कहा- बुला लो उसे !
मैं जाता हूँ और जहाँ मैं तुम्हें मिला था वहीं से उससे ले आता हूँ क्योकि उसने यह कमरा नहीं देखा है।
उसने कहा- ठीक है। फिर उसने करिश्मा को कॉल किया तो करिश्मा ने आधे घंटे में आने के लिए कहा।
तो मैंने उससे कहा- कह दो कि राहुल तुम्हें लेने जा रहा है।
तब तक मैंने सोचा कि अब सुधा की गाण्ड मार ली जाए !
फिर मैंने सुधा से कहा- तुमने मुझसे गाण्ड मरवाने का वादा किया था !
तो उसने कहा कि करिश्मा आ जाए तो उसकी भी साथ में मार लेना !
मैंने कहा- वो भी हो जाएगा ! लेकिन पहले तुम्हारी गाण्ड तो जरूर मारूंगा !
और मैंने उसको कुतिया स्टाइल में कर दिया, कमरे में पड़ी कोल्ड क्रीम उसके छेद पे और अपने लण्ड पे लगा दी और उससे कहा- थोड़ा दर्द होगा ! रोना नहीं ! बाद में मज़ा आ जाएगा !
और उसके छेद पर अपना लण्ड रख कर घुसाने लगा। लण्ड जैसे ही थोड़ा अन्दर गया वो दर्द से चिल्लाने लगी और गाण्ड मराने से मना करने लगी।
पर अब मैं कहाँ रुकने वाला था ! थोड़ा और अन्दर डाल दिया तो वो खूब जोर जोर से चिल्लाने और रोने लगी। मैं डर गया कि कोई आ ना जाए ! और तुंरत अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया।
फिर क्या ! उसने मुझसे गाण्ड नहीं मरवाई। मैं उसको चुप कराने लगा और कुछ देर बाद सब कुछ सामान्य हुआ। फिर उसने जा कर करिश्मा को लाने के लिए कहा। मैं करिश्मा को लेने चला गया। जब मैं और करिश्मा आए तो दरवाज़ा बंद था तो मैं उसको खुलवाने के लिए आगे बढ़ा तो अन्दर से चूमने-चाटने की आवाज़ आ रही थी।
मैं चौंक गया !
शेष आगे के भाग में….Sex Stories
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