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हेल्लो दोस्तो ! मेरा नाम अमन Hindi Porn Stories है। मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं शादीशुदा आदमी हूँ। मेरी उमर ३० साल की हैं, २ बच्चे हैं। बच्चे होने के बाद से ही मेरी बीवी की सेक्स में दिलचस्पी कम हो गई थी, इस लिये मुझे बाहर लड़कियों से दोस्ती करनी पड़ी। २ साल पहले तक मेरा सिर्फ मेरी बीवी के साथ ही शारीरिक संबंध था लेकिन अब मेरी एक गर्लफ्रेंड भी बन गई है।
यह एक सच्ची कहानी है। इस कहानी को अमनित करने की पीछे मेरा इरादा उन महिलाओं को सावधान करना हैं जो अपने पति को बच्चे होने के बाद वो सुख नहीं दी पाती और वो लोग अपने जरूरतों के लिये दूसरे रास्ते अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूँ।
एक बार मैं ६ बजे शाम को अपने ऑफिस से अपनी कार मैं घर आ रहा था, तभी एक लड़की ने मुझे लिफ्ट के लिए हाथ दिया। वो काफी सुंदर थी, ३४-२४-३४ उसका साइज़ होगा, कद भी पांच फ़ुट सात इंच होगा, काफी आकर्षक थी। मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उसको लिफ्ट दे दी।
उसने अपना नाम पूजा बताया। वो भी गुड़गांव के एक कॉल सेण्टर में जॉब करती थी। बातों ही बातों में हम बहुत घुल मिल गए। ऐसा लगता था जैसे हमारी बहुत पुरानी दोस्ती हो ! उसने मुझे बताया कि उसका उसके पति से तलाक हो चुका हैं और वो अब अकेली ही रहती है। उसका एक बच्चा भी है जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है।
मैंने उससे कहा- मेरा और उसका ऑफिस टाइम एक ही है तो क्यों न वो मेरे साथ ही मेरी कार में चला करे। बस में बहुत भीड़ होती है।
उसने भी मुझे हाँ कह दिया। अब हम दोनों एक साथ ही आने जाने लगे, कभी अगर मैं लेट होता तो उसको फ़ोन कर देता, वो लेट होती तो मुझे फ़ोन कर देती।
एक दिन बारिश हो रही थी, वो रास्ते में मेरा इन्तजार कर रही थी, वो पूरी भीगी हुई थी। जैसे ही मैंने उसको देखा- मुझे एकदम करंट सा लग गया। वो बहुत ही सुंदर लग रही थी और शायद उसने भी मेरी नजरों को समझ लिया। वो कार में आ गई। वो बहुत घबराई सी लग रही थी, मेरी भी हालत ख़राब होती जा रही थी मेरा मन कर रहा था कि उसको पकड़ कर जोरदार किस कर लूँ लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं चुपचाप कार चलाने लगा। १० मिनट तक हम चुपचाप बैठे रहे, फिर वो बोली- क्या बात है, आप इतने चुप क्यों हो आज?
मैंने कहा- ऐसा तो कुछ नहीं, सब ठीक है। आज आप कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही हो ! इसलिये मेरी बोलती बंद हो गई !
और वो भी हस पड़ी, बोली- अच्छा ! इसका मतलब मैं और दिन सेक्सी नहीं लगती ?
मैंने गाड़ी रोक दी और उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा- मैंने तुम्हारी जैसी सेक्सी लड़की कभी नहीं देखी !
उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थी, वो एकदम मेरे से लिपट गई और किस करने लगी। मैंने भी रास्ते के बीच में ही उसको किस करना शुरू कर दिया। वो भी एकदम हॉट हो गई थी। तभी पीछे गाड़ियों का जाम लग गया और उनके हॉर्न की आवाज से हम दोनों एकदम अलग हो गए। मैंने गाड़ी साइड में लगा ली। बारिश और काले शीशे होने की वजह से किसी को दिखाई नहीं दे रहा था कि अंदर क्या हो रहा है।
हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे। मैंने उसको टॉप उतार दिया और उसके स्तन चूसने लगा। वो भी मस्त हो कर मुझे अपने वक्ष की तरफ़ दबाने लगी। मैंने सीट सपाट कर दी और वो उस पर लेट गई। मैंने उसकी जींस भी उतार दी, गुलाबी चड्डी भी उतार दी।
मैं भी बिलकुल नंगा हो गया और उसको चूमने लगा। तभी वो बोली- कंडोम हैं?
मैंने कहा- यार ! मैं गाडी में कंडोम सेल तो नहीं करता !
तो बोली- फिर कुछ नहीं करेंगे !
मैंने कहा- रुको ! मैं अभी खरीद कर लाता हूँ !
मैंने कपड़े पहने और थोड़ी दूर पर ही एक मेडिकल स्टोर था, मैं वहाँ से एक पैकेट कंडोम लेकर आया। मेरे कपड़े भी भीग गए थे और मैंने कपड़े उतारे और उसको फिर चूमने लगा। मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली करनी शुरू कर दी। वो भी एकदम गीली हो गई और पूरा मजा देने लगी और बोली- प्लीज़ ! मुझसे रुका नहीं जा रहा ! आप अंदर डाल दो !
मैंने भी ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और कंडोम लगा कर अपना लोड़ा उसकी गरम गरम चूत के अंदर डाल दिया और उसको जमकर चोदने लगा। वो भी चूतड़ उठा उठा कर चुदने लगी।
लगभग २० मिनट तक चोदने कई बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
उस दिन के बाद हमने कई बार सेक्स किया। ओरल सेक्स भी किया। मैंने उसकी गांड भी मारी।
अब हम दोनों एक दूसरे की यौन-आकांशाओं को पूरा करते हैं और मस्त होकर अपनी जवानी का मजा ले रहे हैं।
यह एकदम सच्ची आपबीती है जो मैंने आज आपको बताई है।
अगर पाठक अपने कोई विचार मुझे ई-मेल करना चाहें तो कर सकते हैं। मैं आपकी मेल का जवाब भी दूंगा !
मेरा ईमेल है Hindi Porn Stories
मेरी शादी हुए दस Sex Stories साल हो गये हैं और हम दोनों का यौन-जीवन बहुत बढ़िया है। पर मेरे मन में इसके अलावा भी कुछ और करने की इच्छा थी।
मैंने रात को सेक्स करते हुए बीवी को बोला- अगर तुम्हें एक ओर लंड मिले तो कैसे लगेगा?
यह सुन कर वह नाराज हो गई और बोली- तुम बस अभी चूत मारो ! मुझे इसमें मजा आ रहा है।
मैंने पूछा- अगर मेरा लंड और बड़ा होता तो कैसा लगता?
तो वो बोली- तब तो मेरी चूत को मजा आ जाता और मैं आसमान में पहुँच जाती।
मैंने पूछा- अगर एक और लंड का इन्तजाम हो जाये जैसे कि डिल्डो?
वो बोली- मजा आ जायेगा।
मैंने बोला- अगर इस डिल्डो की जगह अगर एक आदमी बड़े लौड़े वाला हो तो? हम दोनों मिल कर तुम्हें जम कर चोदेंगे।
तो वह इसे सुन कर हल्का मुस्कराने लगी।
मैंने बोला- तुम्हारा भी मन है !
अब वह खुल कर बोली- हाँ !
वह पूछने लगी- तुम्हारा मन भी किसी और चूत के लिये करता है क्या?
मैं तो इस भी ज्यादा चाहता हूँ !
वह बोली- तो और क्या?
मैंने बोला- दो लण्ड पहले तुम्हें चोदेगे और फिर वही लण्ड मुझे चोदेगा।
यह सुन कर वह बोली- तुम अपनी गाण्ड में लण्ड लोगे?
मैं बोला- हाँ मेरी जान ! दोनों एक लण्ड को चूसेंगे ओर मजे लेंगे।
उसकी आँखों में एक चमक आ ग़ई। अब हम दोनों सेक्स करते हुए यही बात करते और सेक्स का मजा लेते। अब मुझे एक ऐसे आदमी की ख़ोज थी जो मुझे और मेरी बीवी दोनों को चोद सके। हमारी यह ख़ोज भी जल्दी पूरी हो ग़ई। वह तो हमारा पुराना पड़ोसी ही था जिसे मेरी बीवी भी पसंद करती थी। एक दिन मेरी बीवी ने उसे मूतते हुए देखा था जब वह छत पर घूम रही थी। सामान्य अवस्था में भी उसका लण्ड 5 इन्च का था। अब बस उसे पटाना था और घर तक लाना था।
एक दिन मैंने उसे बोला- कभी बैठ कर पैग लगाते हैं।
वो बोला- इस शनिवार को बैठते हैं।
मेरे मन की और मेरी बीवी की इच्छा अब बस पूरी होने वाली थी। अब हम दोनों शनिवार का इन्तज़ार करने लगे।
शनिवार को सुबह ही मेरी बीवी ने मुझे बोला- आज तबीयत से तैयार होने वाली हूँ और मुझे काफ़ी समय लगेगा।
उसने पूरी वैक्सिंग करी और चूत को हेयर रिमूवर से साफ़ किया। मैंने भी अपने सारे झान्ट साफ़ किये और अपनी गाण्ड के बालों को हेयर रिमूवर से साफ़ किया।
शीशे में अपनी गाण्ड देख कर मुझे कुछ होने लगा। फिर मैंने अपनी गाण्ड में खूब तेल लगाया। जिससे कि मेरी गाण्ड चिकनी हो जाये। शाम को वह हमारा पड़ोसी आ गयाँ और हम दोनों इसके लिये पहले से तैयार थे। मैंने एक शॉर्ट और टीशर्ट पहनी थी ओर मेरी बीवी ने एक टॉप जिसका गला बहुत खुला था और इसके साथ उसने एक टाईट कैप्री पहनी थी जिसमें उसके कूल्हे एक दम गोल-गोल नजर आ रहे थे। टॉप के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उस के 38-सी कप के स्तन एक दम मस्त लग रहे थे और तने हुए चुचूक गजब ढा रहे थे।
जब वह कोल्ड ड्रिंक देने आई तो हम दोनों उसे देख़ते ही रह गये। जैसे ही उसने झुक कर सामान रखा हमारा पड़ोसी मेरी पत्नी के वक्ष देख़ने लगा। यह देख़ कर हम दोनों मुस्करा दिये क्योंकि आज रात वह हम दोनों को खुश करने वाला था। फिर मैंने ड्रिन्क ग्लास में डाला और उसे दिया। मैंने जानबूझ कर उसके पैग बड़े बनाए ओर दो पैग में वह सुरुर में आ गया।
अब हम दोनों अश्लील चुटकले सुनाने लगे।
इतने में रितु (मेरी बीवी) भी वहीं आ गई और हमारे साथ बैठ कर बातें करने लगी। रितु बोली- मुझे भी चुटकले सुनने हैं।
तो मैंने एक चुटकला सुनायाँ जो इस तरह से था :
राम लाल : ठाकुर साहब, ग़ब्बर ने बहू की इज्जत लूट ली है।
ठाकुर : तो मैं क्या करुँ?
रामलाल : बहूरानी पूछ रही है कि बब्बर से बदला लेना है या पेमेन्ट?
इस दौरान जब हम सब हंस रहे थे तो चौधरी (हमारा पड़ोसी) रितु के स्तन और चुचूक देख रह था।
और इस तरह से हमारी अश्लील बातचीत आगे चलने लगी। हम धीरे धीरे पूरी तरह से व्यस्क चुटकले सुनाने लगे।
मैंने चौधरी से पूछा- क्या कभी तुमने भाभी के अलावा किसी और से सेक्स कियाँ है?
वो बोला- मन तो बहुत करता है पर कियाँ नहीं है।
मैंने पूछा- किसी पर तुम्हारा दिल आयाँ है?
तो वो बोला- आप नाराज नहीं होना ! मुझे रितु भाभी बहुत सैक्सी लगती है।
मैंने बोला- तुम्हारी नजरें ही बता रही हैं क्योंकि तुम इसके स्तनों को ही घूरते जा रहे हो।
वो बोला- इनकी गाण्ड तो और भी सेक्सी है। मै तो अपनी बीवी को चोदते हुए भी इनके बारे में सोचते हुए चोदता हूँ।
यह सुन कर रितु हंसने लगी और बोली- तो क्या मैं इतनी सेक्सी हूँ?
तो हम दोनों एक साथ बोले- हाँ।
मैंने पूछा- चौधरी सच में इसे चोदना चाहते हो क्या?
वो बोला- अगर मौका मिले तो जरुर चोदूंगा।
मैंने बोला- आज तुम मेरे सामने ही चोद लो ! बाद में कुछ और हरकत मत कर बैठना।
वो बोला- तुम अपने सामने चोदने दोगे?
मैंने बोला- मैं भी तो चोदूंगा।
यह सब सुन कर रितु भी जोश में आ गई थी। अब हम तीनों अपने बैडरूम की तरफ़ चल दिए। रितु ऐसे मटक कर चल रही थी कि हम दोनों के लण्ड ख़ड़े हो गये। जैसे ही हम बैडरूम में पहुँचे, रितु ने बैड पर लेट कर एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसके स्तन एक दम ख़ड़े हो ग़ये। मैंने आगे बढ़कर दोनों कबूतरों को पकड़ लिया और मसलने लगा। वह जोर से आह आह करने लगी और चौधरी अपने लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगा।
मैंने रितु का टॉप उतार दिया और दोनों कबूतर बाहर आ गये। चौधरी ने आगे बढ़कर एक चूची को पकड़ लिया और मसलने लगा। मैंने चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब हम दोनों के बीच में रितु थी और हम दोनों उसके स्तनों से ख़ेल रहे थे। उसने हमारे लण्ड पकड़ लिये और हिलाने लगी। अब हमने मिल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गये। अब कमरे में एक चूत और दो लण्ड थे जो कि धमाल मचाने वाले थे।
चौधरी ने बोला- मैं तो रितु की चूत को चूसूंगा।
और रितु ने टांगें खोल कर उसे बुलाया। वो उसकी टांगें उठा कर चूत को चाटने लगा और रितु की सिसकारियां निकलने लगी। वह भी उसे जोर से चूसने को कह रही थी और क्यों ना कहे, उसे आज मनचाहा दिलदार मिला था जो उसे चोदने वाला था।
चौधरी भी पूरी जोर से चूत चाटे जा रहा था। उसने दोनों हाथों से चूत को फ़ैला रख़ा था और पूरी जीभ अन्दर पेल रहा था। रितु ने उस के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबा दिया और वो बोल रही थी- चूसो मेरे जानू और जोर से चूसो !
और इसको सुनकर चौधरी भी पूरा दम लगा कर चूसे जा रहा था। अब चूत में से पानी टपकने लगा था और चपर-चपर की आवाज भी आने लगी थी। मैं बड़े गौर से रितु को चूत चटवाते हुए देख रहा था। वह बहुत सैक्सी लग रही थी।
अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपना लण्ड पकड़ा दिया और उसे चूसने को बोला। उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब कमरे में हमारी सिसकारियाँ निकल रही थी। रितु ने अचानक मेरे लण्ड को चूसना बन्द करके जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और चौधरी के सर को जोर से चूत पर दबा दिया। वोह बोलने लगी- चूस जा इस चूत को ! चूस जा ! निकाल दे मेरा पानी ! मजा आ रहा है ! आ रहा है ! और जोर से चूस ! और जोर से।
चौधरी को भी जोश आ गया और पूरी जीभ अन्दर डाल कर चूसने लगा। इतने में रितु ने चूत को उछालना शूरु कर दिया और आअह्ह्ह, औह्हह, आआअह्ह्ह् करने लगी। और फिर थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया। चौधरी मजे ले ले कर चूत का पानी पीने लग़ा। रितु की भी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी और फिर वह प्यार से चौधरी के सर पर हाथ फेरने लगी। अब
मैंने चौधरी को बोला- बहुत हो गया चूसना ! अब जरा इस चूत को चोदना शुरु करो।
वह बोला- इसके लिए तो मैं कब से तड़प रहा हूँ।
फिर वह रितु की टांगों के बीच आ गया और अपने लण्ड को रितु की चूत पर फ़ेरने लगा। रितु ने भी दोनों टांगें फैला दी ताकि वह आराम से उसे चोद सके। अब चौधरी ने लण्ड को चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो उस का आठ इन्च का लण्ड पूरा अन्दर तक घुस गया और रितु जोर से बोली- फ़ाड दी मेरी भैन चोद !
यह सुन कर चौधरी को और जोश आ गया और उसने एक बार फिर लण्ड को बाहर निकाल कर पूरे जोर से पूरा लण्ड अन्दर पेल दिया। इस बार रितु ने बोला- मजा आ गया मेरी जान ! और पेलो जोर से पेलो।
मैं रितु को इस तरह से चुदते देख कर जोश से भर गया और बोला- आज इसकी चूत को फ़ाड दो और खूब दम लगा कर चोदो।
मैंने फिर से अपने लण्ड को रितु के मुँह में डाल दिया।
अब वह मेरे लण्ड को चूस रही थी और उधर से उसकी चूत में चौधरी लण्ड पेले जा रहा था। मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था।।
थोड़ी देर जब चौधरी ने चोद लिया तो मैंने बोला- तुम इसे अपना लण्ड चुसाओ, मैं तब तक चूत का स्वाद लेता हूँ।
अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। मैंने चूत में अपना लण्ड डाल दिया और चौधरी ने अपना लण्ड रितु के मुँह में दे दिया। बड़ा लण्ड देख कर वह भी उसे जोश से चाटने लगी। चौधरी का लण्ड किसी ने पहली बार चूसा था और वह हवा में उड़ने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- वाह मेरी जान, आज पहली बार इस लण्ड को किसी ने चूसा है, मेरी बीवी तो चूसती ही नहीं है, आह्ह्ह्ह, आह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह्ह, हो हो !
और रितु ने उसे और जोर से चूसना शुरु कर दिया। यह सब देख कर मैंने भी चूत को जोर से चोदना शुरु कर दिया। इधर रितु की चूत से पानी निकलने लगा और चूत में चिकनाई और बढ़ गई, इसके साथ ही फच फच की आवाज भी आनी शुरु हो गई। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और चोदे जा रहा था। जबकि चौधरी ने उसके सिर को पकड़ कर मुँह को चोदना शुरु कर दिया।
मैंने चौधरी को बोला- तुम इसकी चूत में आ जाओ और मैं थोड़ी देर तुम लोगों को देखता हूँ।
चौधरी ने फिर से चूत पर मोर्चा जमा लिया और उसकी दोनों टागों को कन्धे पर रख लिया। दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा। रितु भी नीचे से गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी।
अब दोनों के मुँह से आवाजें आने लगी- आऽऽ चोदो ! और जोर से चोदो ! फाड़ दो इस चूत को ! वह भी बोल रहा था- आज इस चूत का तो मैं बैन्ड बजा दूंगा।
और फिर रितु बोलने लगी- मैं झड़ने वाली हूँ, आईईईई, आह्ह्ह्ह्ह, और और और आह्ह्ह्ह्ह आईईईईई !
और फिर उसने कस कर चौधरी को पकड़ लिया। चौधरी अभी भी उसे पूरा जोर लगा कर चोदे जा रहा था। इतने में चौधरी की आवाज भी आने लगी- मैं खाली हो रहा हूँ, मेरा छुटने वाला है।
और रितु ने उसे और कस कर पकड़ लिया और फिर चौधरी भी उस से चिपक गया और हांफने लगा। उसके लण्ड ने रितु की चूत में अपना माल छोड़ दिया जो चूत से रिस कर बिस्तर पर गिरने लगा। अब तक मैं अपने लण्ड को सहला रहा था और ख़डा हो गया और बोला- अब इस चूत का पानी मैं निकालता हूँ।
चौधरी बोला- मैं इन मस्त चूचियों से दूध निकालता हूँ।
अब चौधरी ने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसलने लगा। रितु ने एक हाथ से उसके लण्ड को हिलाना शुरु कर दिया।मैंने रितु की चूत में अपना लण्ड डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। फिर से कमरे में चूत से फच फच की आवाज आने लगी और माहौल और सैक्सी हो गया। कुछ ही देर में चौधरी का लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
मैं जोर जोर से रितु को चोद रहा था पर मेरा ध्यान चौधरी के लण्ड पर था क्योंकि आज मुझे भी तो अपनी गाण्ड का उदघाटन करवाना था। चौधरी से अपने लण्ड का ताव सहा नहीं जा रहा था और मेरी चिकनी गाण्ड देख कर वो भी उत्तेजित हो रहा था जिसे मैंने सुबह ही साफ किया था और उसका परिणाम आने ही वाला था।
अब चौधरी ने उठ कर मेरी गाण्ड पर हाथ फेरना शुरु कर दिया जो कि मुझे भी उत्तेजित कर रहा था। इतने में वह मेरे पीछे आ गया और अपनी दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में पेल दी। मेरी गाण्ड में जोर से दर्द हुआ, मैं बोला- भैन्चोद ! तेल तो लगा ले।
यह सुन कर चौधरी ने ड्रैसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और बहुत सा तेल लेकर मेरी गाण्ड में लगाने लगा। अब उसने दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में डालनी शुरु कर दी और मुझे अजीब सा मजा आने लगा। इधर चूत मारने का और उधर गाण्ड में अन्गुलियाँ, इससे ऊपर की थोड़ी ही देर में एक आठ इन्च लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने वाला है।
अब रितु फिर से उह आह करने लगी थी।
अब चौधरी ने बोला- मैं तुम्हारी ग़ान्ड मारने वाला हूँ, तैयार हो जाओ।
उसने मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ने लगा। मैंने रितु को चोदना बन्द कर दिया ताकि वह अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाल सके। उसने फिर से बहुत सा तेल अपने लण्ड पर लगाया और मेरी कमर पकड़ कर लण्ड को गाण्ड के छेद पर लगाया। मेरी गाण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब उसने एक जोर का धक्का लगाया और उसका दो इन्च लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया।
मेरी गाण्ड में लण्ड घुसते ही दर्द हुआ पर मै आगे का मजा सोच कर और उत्तेजित हो गया और इतनी ही देर में दूसरा झटका लगा और उसका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और मेरा पूरा लण्ड रितु की चूत में। और इस के साथ ही हम तीनों की आवाज आई।
अब मै सैन्डविच की तरह से था। मैं रितु की चूत मार रहा था और चौधरी मेरी गाण्ड मार रहा था। पहले चौधरी मुझे धक्का मारता और मैं रितु की चूत में लण्ड पेलता।
इधर रितु कह रही थी- चोदो !
और उधर मै कह रहा था- चोदो।
चौधरी तो मेरी गाण्ड मारते हुए मजे से दीवाना हुआ जा रहा था और कह रहा था- क्या टाइट गाण्ड है !
मेरे को भी मजा आने लगा था और फिर चौधरी ने एक दम रफ़्तार बढ़ा दी। लगता था कि टाइट गाण्ड की वजह से वह जल्दी ही खाली होने वाला था। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। अब रितु, मैं और चौधरी एक साथ ही झड़ने वाले थे और वह क्षण शीघ्र ही आ गया जब हम तीनों ने बोलना शुरु किया- मैं झड़ने वाला हूँ ! और तीनों कि रफ़्तार तेज हो गई।
इसके साथ ही चौधरी ने मेरी गाण्ड में अपना वीर्य छोड दिया और उसके गर्म गर्म वीर्य को महसूस करते ही मैंने भी रितु की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। रितु पहले ही झड़ना शुरू हो चुकी थी। मैंने कस कर रितु को पकड लिया और चौधरी ने मुझे।
तीनो ही हांफ़ रहे थे और एक जोरदार चुदाई से तीनों के चेहरे चमक रहे थे।
थोड़ी देर बाद ही हम तीनों फिर से एक और चुदाई के लिये तैयार थे। अब मै नीचे लेटा और मेरे लण्ड पर रितु मेरी तरफ मुँह करके अपनी चूत ख़ोल कर बैठ गई। फिर मैंने उसे अपनी तरफ झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की तरफ निकल आई। चौधरी ने फिर से अपने लण्ड को रितु की गाण्ड में डालने की तैयारी कर ली।
उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और अपनी अन्गुलियों पर तेल लगा कर रितु की गाण्ड में पेल दी और वह जैसे ही आगे हुई, मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा घुस गया। चौधरी ने अपने लण्ड को रितु की गाण्ड पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड आधे तक गाण्ड में घुस गया और वह चिल्लाने लगी।
चौधरी ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों स्तन पकड़ लिये और मसलने लगा। मैं उसके होठों को चूस रहा था। अब चौधरी ने एक और जोर से धक्का मारा और इसके साथ ही पूरा लण्ड अन्दर तक पेल दिया।
अब हमने मिल कर चोदना शुरु कर दिया और एक बार फिर से रितु की सुख भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी। इस बार हमने पाँच मिनट तक ऐसे ही चोदा और फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली।
अब चौधरी चूत में लण्ड घुसा रहा था तो मै गाण्ड की मरम्मत कर रहा था।
और फिर कुछ ही देर में रितु ने बोलना शुरु किया- आज चोद डालो इस चूत को और गाण्ड को ! मजे आ गये ! जोर से चोदो ! और जोर से !
इतना सुनते ही हम दोनों की स्पीड बढ़ गई। और हम जोर जोर से चोदने लगे।
रितु की सिसकारियाँ निकलने लगी और वह और बोलने लगी- और तेज ! तेज-तेज !
इधर चूत और गाण्ड दोनों से ही आवाज आ रही थी- फ़्च, फ़च, फ़च !
और इसके साथ ही रितु ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और हमने अपने धक्को की रफ्तार और तेज कर दी ताकि हम भी एक साथ ही खाली हो जायें। अब मेरे चिल्लाने की बारी थी, आह निकला, आह निकला !
इतने में चौधरी की भी आवाज आई- मेरा भी निकला !
और हम दोनों ने अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने रितु की गाण्ड में सारा वीर्य छोड़ दिया और चौधरी ने चूत में।
तीनों के चेहरे पर सन्तोष झलक रहा था और इस तरह हम सबकी इच्छा पूरी हो गई। Sex Stories
मेरा नाम अभिनव है, मैं गुजरात का रहने Hindi Sex Stories वाला हूँ और मैं अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो काफ़ी दिलच़स्प है।
अब मैं मुख्य बात पर आ रहा हूँ। स्कूल के दिनों में मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था जिसका नाम राहुल था। हमारे स्कूल में हमने एक समूह बना रखा था जो मौज-मस्ती करता था और साथ-साथ खेलते-कूदते भी थे। एक दिन राहुल आया और उसने हमसे पूछा कि मैं भी तुम्हारे समूह में सम्मिलित होना चाहता हूँ। पर हमने उसे मना कर दिया और वह वहाँ से चला गया।
उसने लगातार दस दिनों तक प्रयास किया कि वह हमारे साथ शामिल हो जाए पर उसे निराशा ही हाथ लगी। एक दिन राहुल ने मुझसे कहा कि तुमसे मेरी माँ मिलना चाहती है, तुम्हें बुलाया है। तो मैंने उसे टालने के लिए कह दिया कि ठीक है, मैं मिलकर आ जाऊँगा, पर मैं गया ही नहीं।
एक दिन मैं रास्ते पर जा रहा था कि सामने राहुल की मम्मी आती दिखीं, उन्होंने मुझसे कहा- मैंने तुम्हें बुलाया था, आते क्यों नहीं?
मैंने कहा- ठीक है, आज आ जाऊँगा।
और मैं चला गया।
उसके बाद मैं दोपहर को उसके घर गया तो राहुल घर पर नहीं था, उसकी मम्मी थी। उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया और कहा कि तुम मेरे बेटे को अपने समूह में शामिल क्यों नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही।
तो आंटी ने कहा- ऐसा नहीं करते, तुम उसे शामिल कर लो।
मैंने हामी भर दी।
फिर उसने मुझसे पूछा कि थम्स अप पीओगे?
तो मैंने हाँ कहा।
उसने उस समय क्रीम रंग की साड़ी और उसी रंग की ब्लाऊज़ भी पहन रखी थी। अन्दर काली ब्रा पहनी थी, वो भी साफ़ दिख रही थी और उसकी गांड इतनी मोटी और गोल-मटोल थी कि कोई देख ले तो पागल हो जाए।
वह किचन में चली गई, थम्सअप लाने के लिए।
जब वह थम्सअप लेकर आई तो मैं हैरान हो गया कि उसने साड़ी उतारकर सफेद पारदर्शी गाऊन पहना हुआ था और अन्दर काली ब्रा और काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी, और भरा हुआ बदन जैसे संगमरमर का ताज़महल हो।
वह थम्सअप के दो गिलास लेकर मेरे पास बैठ गई और एक गिलास मुझे दिया और एक ख़ुद पीने लगी।
पीते-पीते मेरे जाँघों पर हाथ रख कर घुमा रही थी, मुझे गुदगुदी हो रही थी, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, इसलिए कुछ नहीं बोला।
धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई और पकड़ के मसलने लगी तो मैं खड़ा हो गया और कहा- मैं जा रहा हूँ।
तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया, पूछा- क्या हुआ।
मैंने कहा- गुदगुदी हो रही है।
तो उसने कहा- आज तुझे कुछ सिखाऊँगी जो तेरे बहुत काम आएगा।
फिर मैं बैठ गया।
पहले तो उसने मुझे गाल पर किस किया और मेरी शर्ट उतार दी।
मैंने मना किया तो वह बोली- कुछ नहीं होगा, तुझे बहुत मज़ा आएगा।
फिर मैंने विरोध करना छोड़ दिया, उसने मेरी पैन्ट की चेन खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल कर उसे किस्स किया और मुँह में लेकर कैण्डी की तरह चूसने लगी और मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।
मेरे दोस्त की मम्मी 15 मिनट तक मेरा लंड चूसती रही, इसी दौरान मेरे सारे कपड़े भी उतार दिए। उसने मुझसे कहा कि मेरा गाऊन उतार दो!
तो मैंने उसका गाऊन उतार दिया और काली ब्रा-पैन्टी में जैसा आगरा का ताज़महल मेरे सामने आ खड़ा हुआ।
उसने कहा मेरी ब्रा भी उतार दो, तो मैंने वैसा ही किया।
ब्रा खोलते ही जैसे दो कबूतर आज़ाद होकर उछलकर बाहर आ गए।
उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चूचियों पर रख कर मुझे चूसने को कहा तो मैं जीभ घुमाने लगा और चूसने लगा। तब उसके मुँह से आआआ आआ… हहह हहह… निकने लगी। वह मेरा लण्ड पकड़कर दबाने लगी।
थोड़ी देर में वह काफ़ी गरम हो गई और मुझे नोचने-खसोटने लगी, उसने कहा- तुम्हारा लण्ड तो बहुत बड़ा है और मेरे पति का तो इसका आधा ही है।
मैं तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वह जैसा कह रही थी मैं वैसे ही करता जा रहा था। मेरे अन्दर इतनी समझ नहीं थी मैं कुछ कर सकूँ।
फिर वह बिस्तर पर लेट गई और बोली- तुम मेरी भोस को चाटो!
तो मैं उसकी पाँवों के बीच में बैठ कर जीभ घुमा-घुमा कर चाटने लगा। वह मेरा मुँह दबा कर जोर से चिल्ला रही थी… चाटो… चाटो… चाटो… मुझे खत्म कर दे, खत्म कर दे।
उसी समय उसकी भोस से कुछ चिकना-चिकना क्रीम निकलने लगा वो मैं पी गया वह मुझे काफी मज़ेदार लगा, तो मैंने पूरा चाट लिया।
अब उसने कहा- अब उठो और मेरी भोस में डालो!
तब मैं पोज़ीशन लेकर उसकी पाँवों के बीच बैठ गया और लण्ड पकड़कर उसकी भोस पर रख कर थोड़ा धक्का दिया। चिकनाई की वज़ह से मेरा लण्ड सटाक से अन्दर चला गया।
उसने कहा- शाबास बेटे तुमने सिक्सर लगाया, चालू रख!
मैं तो धक्के पर धक्का लगा रहा था, वो खुशी से पागल हो रही थी, नीचे से गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद वह उठकर खड़ी हो गई और मुझसे कहा- मेरी गांड में डाल और फाड़ दे।
उसने मुझे क्रीम दी और कहा- पहली बार गांड में डलवा रही हूँ इलसिए मेरी गांड पर ये थोड़ा लगा, और थोड़ा अपने लण्ड पर भी लगाकर पेल दे।
मैंने ऐसा ही किया और उसकी गांड पर रख कर धक्का दिया तो उसकी एक लम्बी चीख निकल गई, और बोली, बाहर निकाल नहीं तो मैं मर जाऊँगी। लेकिन मैंने कुछ नहीं सुना और धक्के जारी रखे, उसकी गांड से थोड़ा सा खून भी निकला, मैं घबरा गया तो उसने कहा कि डार्लिंग, कुछ भी नहीं, तू चालू रख, ये खुशी का खून है।
कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वह मेरा लण्ड चूसने लगी और मेरा क्रीम सारा उसके मुँह में चला गया और उसने पूरा पी लिया। फिर चाटकर मेरा लण्ड साफ कर दिया.
फिर उठकर कपड़े पहनने लगा तो उसने कहा- कल आना, मैं तुझे दूसरा मज़ा दूँगी जो तेरी शादी के बाद तुझे काम आएगा और तुझे तक़लीफ नहीं होगी और बहुत मज़ा आएगा।
अगली कहानी दूसरी बार। Hindi Sex Stories
जैसे ही मामी ने मेरे होंठों पर अपने कोमल होंठों को रखा, मैं तो जैसा खो सा गया.
मैंने भी उन्हें किस करना शुरू कर दिया.
हम दोनों ने बड़ी बेताबी से एक दूसरे को करीब दस मिनट तक किस किया.
जब हम अलग हुए तो मैंने कहा- वाह जी … मुझे तो स्वर्ग जैसा लगा.
मामी- रुको … अभी तो और भी बहुत कुछ है. चलो बेडरूम में चलते हैं.
मामी मेरे आगे आगे चलने लगीं.
और मैं उनके पीछे चलने लगा.
मामी की गांड को देखते हुए मैं उसे ही पाने की कल्पना करने लगा कि कुछ ही पलों में मैं इनकी गांड पर जोर जोर से चमाट मार कर इसे लाल कर दूंगा.
हम दोनों जल्दी ही बेडरूम में आ गए.
मैंने उन्हें पीछे से ही अपने गले से लगा लिया और उनकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया.
वे भी मेरे सीने पर ढह सी गईं और अपने चूतड़ों को मेरे लौड़े से रगड़ कर उसे कड़क करने लगीं.
मैंने भी अपने हाथ से उनके मम्मों को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया.
बीच बीच में मैं उनके निप्पल को अपनी दो उंगलियों में पकड़ कर मींजने लगता तो वे मादक सिसकारियां भरने लगतीं.
धीरे-धीरे मैंने उसके कंधों से कुर्ती हटाकर उनके नग्न हो चुके कंधों पर चूमना शुरू कर दिया.
वे इससे एकदम पागल सी हो गईं और तड़पने लगीं.
मैं उन्हें बहुत धीरे धीरे प्यार कर रहा था. मैं चाह रहा था कि वे अपने शरीर के हर इंच को महसूस करें.
इस बीच मेरा लंड सख्त हो गया और उनकी गांड पर वार करने लगा था.
वे अपने शरीर पर मेरे हर चुंबन का आनन्द ले रही थीं.
मैंने उनकी कुर्ती को उतार दिया और उनकी नंगी पीठ को चूमने लगा.
उनकी नंगी पीठ को किस करते हुए बीच में लाल ब्रा की पट्टी आ रही थी.
मैंने ब्रा के हुक को अपने दाँतों से खोल दिया और अब उनकी नंगी हो चुकी पीठ पर मेरे निर्बाध चुंबन जारी हो गए.
मामी की कामुक आहें मेरे मन को मदमस्त कर रही थीं और मैं बड़े ही मनोयोग से मानो किसी पेंटिंग को बनाने के लिए अपनी जीभ से कूची का काम ले रहा था.
धीरे-धीरे मैं मामी की पीठ को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ा.
जैसे ही मैंने उनकी पीठ के निचले हिस्से को चूमना शुरू किया, वे अचानक से घूम गईं और मुझे बिस्तर की ओर धकेल दिया.
मेरे बिस्तर पर गिरते ही वे मेरे ऊपर चढ़ गईं.
मेरे ऊपर चढ़ने से पहले मामी जी ने अपनी ब्रा को ठीक से उतार दिया और अपने मम्मों को थिरकाती हुई मेरे सीने पर सवार हो गईं.
मैं मामी के अनावृत हो चुके बड़े-बड़े मम्मों को देखकर मदहोश हो गया और उनके एक बूब्स को अपने मुँह से पकड़ने के लिए खुद को उठाने लगा.
वे हंसती हुई खुद को मेरे ऊपर उठाती हुई मानो कहने लगीं कि अब मुँह से दूध पकड़ कर दिखाओ.
मैं उनके इस चैलेंज से डरा नहीं बल्कि मुँह की जगह अपने हाथ को आगे बढ़ाने से रोक ही नहीं पाया.
वे पुन: मेरे ऊपर झुक गईं और मेरी गर्दन और मेरे चेहरे को बुरी तरह से चूमने लगीं.
मामी ऐसा व्यवहार कर रही थीं, जैसे कोई कुंवारी लड़की अपने पहले सेक्स संबंध बनाने के दौरान व्यवहार करती है.
उन्होंने जल्द ही मेरी कमीज उतार दी और अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चुभलाते हुए काटने लगीं.
धीरे-धीरे वे नीचे को सरकती चली गईं और मेरी पैंट खोलने लगीं.
मामी ने मेरे लंड को मेरे अंडरवियर के ऊपर से पकड़ लिया.
अचानक से उन्होंने मेरे अंडरवियर से मेरा लंड निकाला और उसकी सख्ती को देख कर उनके चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कान आ गई.
मैं- क्या हुआ?
मामी- मर्द का लंड तो मैं आज देख रही हूं. आज से पहले तो जो था, वह एक उंगली के समान कुछ था.
मैं- तो फिर आज लंड के साथ जो करना चाहो, वह करो. अब से ये आपका ही है.
मामी मेरे लंड पर अपने हाथ को कहलाती हुई उसका हस्तमैथुन करने लगीं और कुछ ही मिनटों के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया.
‘आह’ मेरे मुँह से एक मदमस्त कराह निकल गई और वे गप गपा गप करती हुई मेरा लंड चूसने लगीं.
मैं उस पल का आनन्द ले रहा था और कराहने लगा था- आह्ह्ह मामी … इस तरह का आनन्द मुझे किसी लड़की से भी नहीं मिला. प्लीज चूसती रहें … आआह्ह्ह क्या चूस रही हैं आप … आह!
उनके सिर को मैं अपने लंड की ओर दबाते हुए लंड को उनके गले के अंतिम छोर तक पेलने की कोशिश करने लगा.
वे भी पूरा मुँह खोल कर मेरे लंड को अन्दर तक लीलने लगी थीं.
उस वक्त सच में मेरा लंड उनके गले को छूने लगा था.
फिर मामी ने लंड को बाहर निकाला तो वह उनकी लार से सन गया था.
वे उसे अपने हाथ से सहलाती हुई कहने लगीं- आह … धीरे-धीरे करो मेरी जान … इतनी जल्दी किस बात की है?
कुछ देर लंड चुसवाने के बाद मैंने मामी को बिस्तर पर धकेला और अपने सारे कपड़े हटाकर उनके पास आ गया.
मैंने उनकी सिलेक्स खींच कर उतार दी. अन्दर उन्होंने एक लाल थॉंग पैंटी पहनी हुई थी.
वाह … क्या सीन था!
मेरी मामी उस थॉंग पैंटी में मस्त माल दिख रही थीं.
उनकी छोटी सी पैंटी को हटाने के बाद मैंने वह देखा जो मैं लंबे समय से देखना चाहता था.
छोटे छोटे रेशमी बालों वाली उनकी खूबसूरत सी लाल चूत!
मैं अपने आपको नियंत्रित ही नहीं कर पाया और एक पल की प्रतीक्षा किए बिना मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मामी के लिए यह आश्चर्य की बात थी.
क्योंकि उन्होंने किसी से इसकी उम्मीद ही नहीं की थी कि कोई उनकी चूत को इस तरह से चाटेगा.
जल्दी ही मामी इतनी जोर से कराहने लगीं कि क्या ही कहूँ.
‘आह आह्ह आरव … खा जाओ इस चूत को …’
उत्तेजना में उन्होंने अपने पति को गाली देना शुरू कर दिया- साला चूतिया मेरा पति … किसी काम का नहीं … आह्ह्ह आरव तुम अपनी जीभ को अन्दर कर लो. मैं तुम्हारी जीभ को अपने अन्दर महसूस करना चाहती हूं.
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के अन्दर रखी और उनका पानी महसूस किया, जिसका स्वाद और गंध मुझे और अधिक आकर्षक बना रहा था.
कुछ देर तक चूत चाटने के बाद अचानक से वे कांपने लगीं और अगले ही पल उन्होंने अपना सारा पानी मेरे मुँह के अन्दर छोड़ना शुरू कर दिया.
मामी सेक्स ओर्गास्म में बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थीं, मैं उनका पूरा पानी मुँह में लेकर उनके ऊपर चढ़ गया और मामी के होंठों से अपने होंठ लगा कर उन्हें लिप टू लिप किस करने लगा.
कुछ ही पल बाद मैंने उनकी चूत का सारा पानी उनके मुँह में ही डाल दिया.
मामी मदहोश पड़ी बोल रही थीं- आह आरव … मेरा ऐसा स्खलन आज तक नहीं हुआ. मैं चाहती थी कि मैं तुमसे चुद कर ही अपना पानी छोड़ूँ … लेकिन मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ!
मैं- कोई बात नहीं मेरी जान, अभी तो यह शुरुआत है.
यह कहकर मैंने उनके एक स्तन को एक हाथ में … और दूसरे स्तन को अपने दांतों में पकड़ लिया.
मुँह में भरे हुए उनके दूध के निप्पल को मैंने चूसना शुरू कर दिया.
उन्हें फिर से गर्म होने में ज्यादा समय नहीं लगा.
मैं अभी उन्हें और अच्छे से तड़पता देखना चाहता था इसलिए मैं उनके शरीर को चूमता और चूसता रहा.
कुछ समय बाद जब वे और अधिक गर्म हो गईं तो बड़बड़ाने लगीं- आह आरव, प्लीज अब डाल दे अपने मोटे लंड को मेरी चूत में आह फाड़ दे मेरी चूत को आह!
लेकिन मैं अभी उन्हें और तड़पाने के मूड में था.
मैंने लंड की जगह अपनी दो उंगलियों को उनकी चूत में इकट्ठी डाल दीं और अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
मेरी इस हरकत से मामी पागल होती जा रही थीं.
उन्होंने गाली बकना शुरू कर दिया- साले, अब अपना लंड मेरी चूत के अन्दर डाल न मादरचोद … अब मुझे और ना तड़पा कुत्ते!
मैं- ऐसे कैसे साली रंडी … अभी तो बहुत कुछ बाकी है … इसे बीच में नहीं छोड़ा जा सकता.
मामी- बहन के लौड़े, तू जानबूझ कर ऐसा कर रहा है न …मत तरसा मुझे कमीने … अच्छा नहीं होगा.
यह कहती हुई वे मेरे बाल खींचने लगीं.
मैं- आज जो भी करना हो, कर लेना जान … लेकिन मैं तो तेरी जैसी माल को ऐसे ही चोदूंगा.
यह कहते हुए मैं खड़ा हो गया और अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया.
मैंने अपने लंड को वापस मामी के मुँह के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
वे भी लंड को चूसने लगीं.
मैं भी बहुत जोर जोर से मामी का मुँह चोदने लगा.
जल्दी ही मामी की आंखों में आंसू आ गए और वे मेरे लंड को अपने मुँह से निकालने के लिए भीख माँगने लगीं.
जैसे ही मैंने अपना लंड उनके मुँह से निकाला, वे मुझे अपनी ओर खींचती हुई आईं और मुझे अपने ऊपर ले लिया.
उन्होंने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के पास रख दिया और कहा- प्लीज, मुझे चोदना शुरू करो.
मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अन्दर धकेलने की कोशिश की लेकिन यह बहुत तंग छेद था.
मैंने उनकी ओर देखा.
उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ उंगलियों से ही काम हुआ है … लंड तो पहली बार अन्दर जा रहा है.
मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और पुनः प्रयास किया.
शुरुआत में तो सिर्फ आधा लंड ही उनकी चूत में प्रवेश कर पाया और अधिक कोशिश करने के बाद मेरा पूरा लंड मामी की चूत में घुस गया.
अब ज्यादा कोशिश करने पर मेरा पूरा लंड उनकी चूत को फाड़ने लगा था.
अचानक से हमला हुआ था तो मामी बहुत जोर से चिल्लाईं.
मुझे डर लगा कि कहीं कुछ गलत तो नहीं हो गया.
मैंने झट से अपना लंड बाहर निकाल लिया.
उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर अपने दर्द को सहन करते हुए कहा- इसे अन्दर रखो प्लीज … इसे बाहर मत निकालो.
मैंने फिर से धक्का दे दिया.
जब वे कुछ सामान्य हो गईं, तो मैंने उन्हें चोदना शुरू कर दिया.
मैंने उन्हें 15 मिनट तक धकापेल चोदा, जिसमें उन्होंने अपना पानी पहले ही निकाल दिया था.
मैंने भी अपने लंड का पानी उनकी चूत में ही निकाल दिया.
कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे को बांहों में लिए बिना कुछ बोले ऐसे ही नंगे लेटे रहे.
फिर मैंने चुप्पी तोड़ी और मामी से पूछा- कैसा लगा?
मामी- सही मायने में तो मैं आज पहली बार चुदी हूँ. आज ही मेरी पहली सुहागरात हुई है. तुझे क्या लगता है बाथरूम का दरवाजा गलती से खुला रह गया था क्या?
मैं- इसका मतलब है मामी कि मैं इस परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ हूं!
मामी- सबसे पहले मुझे मामी कहना बंद करो. आज से मैं तुम्हारी कीर्ति हूँ. अब तुम मेरे असली पति हो. मैंने आज से तुम्हें अपने सारे अधिकार दे दिए हैं.
मैं- कीर्ति, मैं उत्सुकता से आपकी फैंटेसी के बारे में जानना चाहता हूं. प्लीज मुझे बताओ ताकि मैं उन सभी को पूरा करने की योजना बना सकूं.
इसके बाद मेरी मामी ने मुझे अपनी कल्पनाएं बताईं और हम दोनों एक-एक करके उन सभी को पूरा करने लगे.
वे कल्पनाएं क्या थीं और हम दोनों ने उन्हें कैसे पूरा किया था, यह मैं आपको अगले भाग में बताऊंगा.
आज मेरे लण्ड में Indian Sex Stories वही खुजली हो रही थी … न जाने आज उसके मुंह में पानी क्यूँ रिस रहा था।
मेरे घर में एक जवान लड़की काम करने आती है आज कल…
माँ बीमार है ! छोटे साहब डॉक्टर ने आराम करने को कहा है … कहकर वो काम में जुट गई।
घर में आज कल कोई नहीं रहता … पापा का टूरिंग चल रहा था और मम्मी मामाजी के घर में रहती थी।
मेरी परीक्षा नजदीक आ रही थी इसलिए पढ़ाई की चिन्ता थी।
उसका नाम रचना था .. पास ही झोंपड़ी में रहती थी।
बाबूजी ये कपड़े धोने के है? .. यह पूछ कर मेरी चड्डी उठा ली उसने !
रात में मैंने उसमें मुठ मारा था, उसका गीलापन और महक अभी भी थी।
मैंने कहा- अरी रहने दे ! मैं धो लूँगा उसे ! छोड़ दे ..
वो चले गई और बाकी के कपड़े धोने लगी… उसकी काली ब्रा पीछे से दिख रही थी .. उसकी मांसल जांघें और उसके उरोजों के बारे में सोचने लगा।
मेरा लण्ड खड़ा हो गया .. मैंने अपने चड्डी में मुठ मारा और फिर उसे धोने को कहा।
क्या बाबूजी ! कितना गन्दा हो गया … ख्याल नहीं रखते क्या ?? हँसकर वो चड्डी धोने लगी ..
उसके कमसीन उरोजो को मैं छुप कर देख रहा था …
वो हँसने लगी …
कभी देखा नहीं है क्या बाबूजी ? .. आपकी तो बहुत गर्लफ्रेंड होगी ना??
मुस्कुरा कर मेरे मुठ वाली चड्डी को रगड़ने लगी … ओह्ह हो यही मिली थी माल निकलने के लिए …
मैं डर गया मेरा लण्ड सिकुड़कर मूंगफली बन गया … इतनी तेज़ चीज़ ..इतनी तेज़ तो अंजू भी नहीं है ??
मैं जल्दी से अपने कमरे घुस गया … रात भर नींद नहीं आई … मैंने सोचा- अगर मुठ मार लिया तो कल चोदना पड़ गया फिर … ना ना नौकरानी को नहीं चोदूंगा .. पापा को पता चल गया, फिर ?
अगले दिन वो नहीं आई उसकी माँ आई थी।
मेरे खड़े लण्ड पर डंडा हो गया ! मैं सोचने लगा कल ही मौका था … फिर एक सेक्सी आवाज़ आई … माँ ! रहुआ फिर आ गयी .. जहियो ! मैं हूँ ना ! घर जहियो…
मेरा लण्ड खड़ा हो गया .. रचना मेरे कमरे की सफाई करने लगी। मैंने उसे बांहों में भर लिया और चुम्मियाँ लेने लगा …
अरे बाबूजी ! बस भी करो ! कहकर वोह बेड पैर गिर पड़ी.. ओह्ह इतना आरामदेह बेड ! इसमें चुदवाने का मज़ा ही कुछ और होगा !
उसने समय का सदुपयोग करके अपना आवरण त्याग दिया, उसकी सांवली देह पर फटे पुराने पैंटी और ब्रा थी।
मैं उसके और पास आया और पूछा- तुम पहले भी चुदवाई हो क्या ?
वो हंसी और पूछा- क्यों ? शादी करने का इरादा है क्या बाबूजी ?
मैं शरमा गया !
मैंने भी अब तक सिर्फ दो बार ही अंजू को चोदा था। पर कहाँ उसकी पतली सुखी हुई काया और कहाँ इसका चरमरा हुआ .. भरा हुआ मांसल बदन … मैंने अपने कपड़े खोल दिए और उसकी पैंटी खोलकर उसी को चाटने लगा।
उसने कहा- अरे बाबूजी ! आपकी जगह वहां नहीं है !
कहकर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।
आह आह आराम से .. आज तक अंजू ने भी मुझे मुँह से मुठ नहीं मारी !
उसे यह गन्दा लगता है ..
मैंने उसकी टांगो को अलग किया और अपना भाला घोंप दिया ..
आह बाबूजी ! चोद दो इस रांड को .. और दम लगाओ आह आह और घस्से मारो ..
मैं पूरे जोर से अन्दर बाहर कर रहा था- आह अहह अंजू !
ओह्ह तो उसका नाम अंजू है साहब.. क्या वो मुझसे भी मस्त है क्या ?
नहीं जानेमन यू आर तो सेक्सी ?? आह सच में साहब आप भी बहुत सेक्सी हो …
उसने मेरी गांड कस ली और मैं स्खलित हो गया …. आह अ अआहा
ओह्ह साहब ! आज इस गरीब को आपने वीर्य से नहाकर शुद्ध कर दिया !
थैंक्यू साहब ! कहकर वो पीछे घूम गई …
मैंने उसकी गांड मारी ! क्यूंकि अंजू की सूखी गांड क्या मारता !
उस दिन मैंने उसको पॉँच बार पेला !
आह रचना ! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !
मैंने अपने तिजोरी से गर्भ निरोधक गोली दी और और उसे खिला दिया।
जाते वक़्त मैंने उसकी पोटली में मम्मी के नए ब्रा और पैंटी डाल दी थी ..
बाय बाय ! छोटे साहब फिर मिलूंगी …. Indian Sex Stories
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