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Massage Girl in Deoghar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Deoghar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Deoghar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Deoghar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Deoghar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Deoghar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Deoghar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Deoghar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Deoghar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Deoghar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Deoghar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Deoghar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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हाय दोस्तों Sex Stories

एक बार फिर आपके लिए Sex Stories इस साईट पर आया हूँ।

आपने इतना प्यार दिया है, तभी तो एक और कविता लिख पा रहा हूँ।

तो दोस्तों, मामला है एक सेक्स भरी रात का,

किस्सा है ये एक चुदाई की रात का।

उस रात मेरे मन में जाने क्या झमेला था,

क्योंकि मैं घर पर एकदम अकेला था।

अकेलेपन में मैं तन्हाई के गीत गुनगुना रहा था,

और बीच-बीच में अपने लंड को भी हिला रहा था।

क्योंकि किसी कन्या का ख़्याल आते ही ये दिल बड़ा हो जाता है,

यह मासूम लंड भी, उसकी तमन्ना समझते हुए ख़ुद ही खड़ा हो जाता है।

अब है तो खड़ा होगी ही,

छोटा है तो बड़ा होगा ही।

अचानक मुझे लगा कि कोई बुदबुदा रहा है,

दिमाग गन्दा हो तो लगता है कि कोई चुदवा रहा है।

मैंने दरवाज़ा खोला तो वहाँ एक गोरी थी,

उसके मम्मे और गाँड देखकर लग रहा था कि आज तक कोरी थी।

-मैंने उसे अपना घर में अन्दर बुला लिया,

ठंड बहुत थी, सो मैंने कुन्डा लगा लिया।

मैंने माज़रा पूछा तो पता चला, वो रास्ता भूल गई थी,

मेरी हिम्मत भी उसकी हालत देखकर खुल गई थी।

मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया था,

क्योंकि उसे चोदने का इरादा पक्का कर लिया था।

वो मेरी बाँहों में आकर शरमा रही थी,

और मेरी साँसों की गरमी से वो भी गरम हुई जा रही थी।

मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके मम्मों पर धर दिया,

इन हाथों ने ही उसका सारा काम कर दिया।

मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत पे था,

मेरा ध्यान उसकी सूट पे था।

आख़िर उसकी जवानी को जो सँवारना था,

इसलिए उसका सूट भी उतारना था।

मैंने उसकी कमीज़ उताकर उसके मम्मे दबाने शुरु कर दिए,

सलवार को अलग कर दिया और शॉट लगाने शुरु कर दिए।

वो आहें भर के मज़ा दे रही थी,

या यूँ कहें कि लड़की होने की सज़ा ले रही थी।

मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था,

ये भी मज़े का एक और मंज़र था।

वो कह रही थी कि चोदते रहो-चोदते रहो और चूत को फाड़ डालो,

आज अपने लंड के झंडे मेरी चूत में गाड़ डालो।

मैं भी पूरे दम से उसे चोदे जा रहा था,

और चूत-चुदाई के इस खेल में दोनों को मज़ा आ रहा था।

मेरे लंड से पानी निकला तो वह सन्तुष्ट हो गई,

नंगी ही वो मुझसे लिपट करके सो गई।

थोड़ी देर बाद उसने मेरे लंड को पकड़ लया,

मुझे कुछ समझ आता, इससे पहले ही अपने होठों से जकड़ लिया।

वो मेरे लंड को चूस रही थी इसलिए लंड बड़ा हो गया,

एक बार फिर से ये लंड चुदाई के लिए खड़ा हो गया।

अब उसे अपनी गाँड मुझसे मरवानी थी,

उसकी चूत की तरह उसकी गाँड भी सुहानी थी।

मैंने भी पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी गाँड में डाला,

और एक ही बार में उसकी गाँड को फाड़ डाला।

उसकी चीख़ ने मुझे झिंझोड़ दिया,

साथ ही मेरे लंड ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया।

अब मुझे पता चला मैं कहाँ था,

जिसमें मैं था वो एक दूसरी ही जहाँ था।

मैंने गाँड और चूत दोनों ही मारी थी,

लेकिन यारों सच तो यह है कि मैंने सपने में मुठ मारी थी।

मेरा अंडरवियार एकदम गीला हो गया था,

मुठ इतनी ज़ोर से मारी कि लंड भी नीला हो गया था।

यारों सपना ही सही लेकिन मज़ा तो किया,

अपने लंड को चूत के अन्दर तो दिया।

कोई जिए या कोई मरे,

आप कृपया मुझे टिप्पणी मेल करें।

मेरा लंड हमेशा आ*की गाँड के पीछे है,

ग़ौर से देखो मेरा मेल आईडी नीचे है Sex Stories

Hindi Sex Stories

कहते हैं कि किसी औरत Hindi Sex Stories को गैर-मर्द के साथ अकेला नहीं छोड़ना चाहिये क्योंकि मर्द उसे पकड़ कर चोदने की ही सोचेगा।
कैसे इसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ – यही ख्याल उसके मन में कुलबुलायेगा।
दोस्तो, मेरे साथ ऐसा ही हुआ।

गर्मी के दिन थे और भरी दोपहर थी।
मैं अपने घर में अकेला था क्योंकि अभी मेरी शादी नहीं हुई थी।
मैंने घर में कुछ ज़रूरी काम करने के लिये ऑफिस से छुट्टी ले रखी थी।

काम निबटा कर मैं बेडरूम में ठंडी बीयर का आनन्द ले रहा था।

करीब एक बजे दरवाजे पर हुआ टिंग-टोंग!

मैंने दरवाजा खोला तो सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी।

पैंतीस-छत्तीस साल की साँवली और गज़ब की सुंदर औरत साड़ी पहने हुए और हाथों में कागज़ और कलम लिये हुए कोयल का आवाज़ में बोली- माफ़ कीजियेगा! क्या कोई लेडी हैं घर में?
मैंने कहा- जी नहीं, मैं बेचलर हूँ और अकेला ही रहता हूँ। आप कौन हैं?

उसके माथे पर पसीने की कुछ बूंदें थी, वह बोली- ज़रा एक ग्लास पानी मिलेगा?
मैंने कहा- हाँ, क्यों नहीं?

वह ज़रा सा अंदर आयी।
मैंने पानी का ग्लास देते हुए पूछा- क्या बात है, आप हैं कौन?

पानी पी कर वह बोली- जी, मेरा नाम सना खान है और मुझे एक कनज़्यूमर कंपनी ने भेजा है सर्वे के लिये। क्या आप मेरे कुछ सवालों का जवाब दे देंगे?
मैंने कहा- जी कोशिश कर सकता हूँ। आप प्लीज़ यहाँ बैठ जाइये।

वह सोफ़े पर बैठ गयी और हमारे घर का दरवाजा अभी खुला ही था।

मैंने दूसरे सोफ़े पर बैठ कर कहा- पूछिये जो पूछना है।
वो बोली- जी आपका नाम और आपकी उम्र क्या है?
“जी मैं प्रताप सिंह हूँ और उम्र छब्बीस साल!” मैंने जवाब दिया।

“आप अपने घर की ज़रूरत की चीजें कहाँ से खरीदते हैं?”
इस तरह वो सवाल पर सवाल पूछती रही और मैं जवाब देता गया।

कुछ देर बाद मैंने पूछा- इस तरह इतनी गर्मी के मौसम में भी आप क्या सब घरों में जाकर सर्वे करती हैं?
“जी, जॉब तो जॉब ही है ना!”

“तो आप शादी शुदा होकर (उसने बड़ी सी अंगूठी पहनी हुई थी) भी जॉब कर रही हैं?”

अब वो भी थोड़ी-सी खुल सी गयी, बोली- क्यों, शादी शुदा औरत जॉब नहीं कर सकती?
“जी यह बात नहीं, घर-घर जाना, जाने किस घर में कैसे लोग मिल जायें?”

उसने जवाब दिया- वैसे तो दिन के वक्त ज्यादातर हाऊसवाइफ ही मिलती हैं। कभी-कभी ही कोई मेल मेंबर होता है।
“तो आपको डर नहीं लगता।”

“जी अभी तक तो नहीं लगा। फिर आप जैसे शरीफ इंसान मिल जायें तो क्या डर?”

‘शरीफ इंसान’ – एक बार तो सुन कर अजीब लगा।
इसे क्या मालूम कि मैं इसे किस नज़र से देख रहा था।

साड़ी और ब्लाऊज़ के नीचे उसकी चूचियाँ तनी हुई थीं और मेरे लंड में खुजली सी होने लगी।
जी चाह रहा था कि काश सिर्फ़ एक बार चूम सकता और ब्लाऊज़ के नीचे उन चूचियों को दबा सकता।

हाथों की अँगुलियाँ लंबी-लंबी मुलायम सी!
वैसे ही मुलायम से सैक्सी पैर ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में कसे हुए।
देख-देख कर लंड महाराज खड़े हो ही गये।

मन में ज़ोरों से ख्याल आ रहा था कि क्या गज़ब की अप्सरा है।
इसकी तो चूत को हाथ लगाते ही शायद हाथ जल जायेगा।

तभी वह बोली- अच्छा, थैंक्स फ़ोर एवरीथिंग। मैं चलती हूँ।

मानो पहाड़ टूट गया मेरे ऊपर!
चली जायेगी तो हाथ से निकल ही जायेगी।
अरे प्रताप, हिम्मत करो, आगे बढ़ो, कुछ बोलो ताकि रुक जये।
इसकी चूत में अपना लंड नहीं डालना है क्या? चूत में लंड? इस ख्याल ने बड़ी हिम्मत दी।

“माफ़ कीजियेगा सना जी, आप जैसी खूबसूरत औरत को थोड़ा केयरफुल रहना चाहिये।” मैंने डरते हुए कहा।
“खूबसूरत?”

मैं थोड़ा सा घबराया, लेकिन फिर हिम्मत करके बोला- जी, खूबसूरत तो आप हैं ही। बुरा मत मानियेगा। आप प्लीज़ अब तो चाय पीकर ही जाइये।
“चाय, लेकिन बनायेगा कौन?”

“मैं जो हूँ, कम से कम चाय तो बना ही सकता हूँ।”

वह हंसते हुए बोली- ठीक है… लेकिन इतनी गर्मी में चाय की बजाय कुछ ठंडा ज्यादा मुनासिब होगा!
मैंने कहा- क्यों नहीं… क्या पीना पसंद करेंगी… नींबू शर्बत या पेप्सी… वैसे मैं भी आपके आने के पहले चिल्ड बीयर ही पी रहा था!

“तो फिर अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो मैं भी बीयर ही ले लूँगी!”
मुझे उससे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी लेकिन मुझे बहुत खुशी हुई।

मैंने उसे फिर बैठने को कहा और किचन में जाकर दो ग्लास और फ्रिज में से बीयर की दो ठंडी बोतलें निकाल कर ले आया।

हम दोनों बीयर पीने लगे और इधर मेरा लंड उबल रहा था।
पहली बार किसी औरत के साथ बैठ कर बीयर पी रहा था और वो भी इतनी सुंदर औरत – और मुझे पता नहीं था कि कैसे आगे बढ़ूँ।

तभी वो बोली- आप अकेले रहते हैं… शादी क्यों नहीं कर लेते?
मैंने जवाब दिया- जी, घर वाले तो काफी ज़ोर दे रहे हैं लेकिन कोई लड़की अभी तक पसंद ही नहीं आयी!

अब और हिम्मत करके मैंने कहा- सना जी, आप वाकयी में बहुत खूबसूरत हैं और बहुत अच्छी भी! आपके हसबैंड बहुत ही खुशनसीब इंसान हैं।

“आप प्लीज़ बार-बार ऐसे ना कहिये। और मुझे सना जी क्यों कह रहे हैं। मैं उम्र में आपसे बड़ी ज़रूर हूँ लेकिन इतनी ज़्यादा भी नहीं!” वो इतराते हुए अदा से मुस्कुरा कर बोली।

दोस्तो, यह हिंट काफ़ी था मेरे लिये!
मैं समझ गया कि ये अब चुदवाने को आसानी से तैयार हो जायेगी।

हमारी बीयर भी खत्म होने आयी थी।

“ठीक है, सना जी नहीं … सना … तुम भी मुझे आप-आप ना कहो! वैसे तुम कितनी खूबसूरत हो, मैं बताऊँ?”
“कहा तो है तुमने कई बार। अब भी बताना बाकी है?”

“बाकी तो है। अपनी बीयर खत्म करके बस एक बार अपनी आँखें बन्द करो … प्लीज़!”

दो-तीन घूँट में जल्दी से बीयर खतम करके उसने आँखें बंद की।

मैंने कहा- आँखें बंद ही रखना!

अब मैंने उसे कुहनी से पकड़ कर खड़ा किया और हल्के से मैंने उसके गुलाबी-गुलाबी नर्म-नर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
एक बिजली सी दौड़ गयी मेरे शरीर में! लंड एकदम तन गया और पैंट से बाहर आने के लिये तड़पने लगा।

उसने तुरन्त आँखें खोलीं और अवाक सी मुझे देखती रही और फिर मुस्कुरा कर और शर्मा कर मेरी बाँहों में आ गयी।
मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।
कस कर मैंने उसे अपनी बाँहों में दबोच लिया।

ऐसा लग रहा था बस यूँ ही पकड़े रहूँ।
फिर मैंने सोचा कि अब समय नहीं बर्बाद करना चाहिये।
पका हुआ फल है, बस खा लो।

तुरंत अपनी बाँहों में मैंने उसे उठाया (बहुत ही हल्की थी) और बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया।

उसकी आँखों में प्यास नज़र आ रही थी।
साड़ी और सैंडल पहने हुए बिस्तर पर लेटी हुई वो प्यार भरी नज़रों से मुझे देख रही थी।

ब्लाऊज़ में से उसके बूब्स ऊपर नीचे होते हुए देख कर मैं पागल हो गया।
आहिस्ते से साड़ी को एक तरफ़ करके मैंने उसकी दाहिनी चूची को ऊपर से हल्के से दबाया।
एक सिरहन सी दौड़ गयी उसके शरीर में!

वो तड़प कर बोली- प्लीज़ प्रताप! जल्दी से! कोई आ ही ना जाये।

“घबराओ नहीं, सना डार्लिंग … बस मज़ा लेती रहो। आज मैं तुम्हे दिखला दूँगा कि प्यार किसे कहते हैं। खूब चोदूँगा मेरी रानी!” मैं एकदम फ़ोर्म में था।
यह कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को खूब दबाया और होंठों को कस-कस कर चूसने लगा।

फिर मैंने कहा- चुदवाओगी ना?
आह! गज़ब की कातिलाना मुस्कुराहट के साथ बोली- प्रताप! तुम भी… बहुत बदमाश हो… तो क्या बीयर पी कर यहाँ तुम्हारे बिस्तर पे तीन पत्ती खेलने के लिये तुम्हारे आगोश में लेटी हूँ! अब इस भरी दोपहर में दर-दर भटकने की बजाय यही अच्छा है।

“सना रानी, बदमाश तो तुम भी कम नहीं हो!” और उसके नर्म-नर्म गालों को हाथ में ले कर होंठों का खूब रसपान किया।

मैं उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर था।
चूत मुझे महसूस हो रही थी और उसकी चूचियाँ … गज़ब की तनी हुई … मेरे सीने में चुभ-चुभ कर बहुत ही आनंद दे रही थी।

दाहिने हाथ से अब मैंने उसकी बाँयी चूची को खूब दबाया और एक्साईटमेंट में ब्लाऊज़ के नीचे हाथ घुसा कर उसे पकड़ना चाहा।

“प्रताप, ब्लाऊज़ खोल दो ना!”

उसका यह कहना था और मैंने तुरन्त ब्लाऊज़ के बटन खोले और उसे घुमा कर साथ ही साथ ब्रा का हुक खोला और पीछे से ही उसके बूब्स को पूरा समेट लिया।

आहा … क्या फ़ीलिंग थी, सख्त और नर्म दोनों, गर्म मानो आग हो।
निप्पल एकदम तने हुए।

जल्दी-जल्दी मैंने ब्लाऊज़ और ब्रा को हटाया; साड़ी को परे किया और पेटीकोट के नाड़े को खोल कर उसे हटाया।

पिंक पैंटी और सफेद हाई-हील के सैंडल पहने हुए सना को नंगी लेटी हुई देख कर तो मैं बर्दाश्त ही नहीं कर सका।
मैंने अब अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतारे।

लंड तन कर बाहर आ गया और ऊपर की तरफ़ हो कर तड़पने लगा।

उसका एक हाथ लेकर मैंने अपने फड़कते हुए लंड पर रख दिया।

“उफ हायल्ला कितना बड़ा और मोटा है!” वह बोली और आहिस्ता-आहिस्ता लंड को आगे पीछे हिलाने लगी।

शादीशुदा औरत को चोदने का यही मज़ा है; कुछ सिखाना नहीं पड़ता।
वो सब जानती है और आमतौर पर शादी शुदा औरतें फैमली प्लैनिंग के लिये पिल्स या कोई और इंतज़ाम करती हैं तो कंडोम की भी ज़रूरत नहीं।

मैंने आखिर पूछ ही लिया- सना डार्लिंग, कंडोम लगाऊँ?
वो मुँह हिलाते हुए मना करते हुए खिलखिलायी- सब ठीक है। मैं पिल्स लेती हूँ।

मैंने अब उसके बदन से उस पिंक पैंटी को हटाया और इत्मीनान से उसकी चूत को निहारा।
एकदम साफ चिकनी सुंदर सी चूत थी। कुछ फूली हुई थी।

मैंने उसके ऊपर हाथ रखा और हल्के से दबाया।
अँगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।
रस बह रहा था और चूत एकदम गीली थी।

मैं जैसे सब कुछ एक साथ कर रहा था। कभी उसके होंठों को चूसता, चूचियों को दबाता – कभी एक हाथ से कभी दोनों से!
एकदम टाइट गोल और तनी हुई चूचियाँ।

उसके सोने जैसे बदन पर कभी हाथ फिराता।

फिर मैंने उसकी चूचियों को खूब चूसा और अँगुलियों से उसकी बूर में खूब अंदर बाहर करके हिलाया।

“सना, अब मैं नहीं रह सकता, अब तो चोदना ही पड़ेगा। कस-कस कर चोदूँगा मेरी रानी।”
पहली बार उसके मुँह से अब सुना- चोद दो ना प्रताप, बस अब चोद दो।

मज़ा लेते हुए मैंने पूछा- क्या चोदूँ जानेमन? एक बार फिर से कहो ना! तुम्हारे मुँह से सुनने में कितना अच्छा लग रहा है।
“अब चोदो ना … इस … इस चूत को!”

“अब मैं तेरी गर्म-गर्म और गुलाबी-गुलाबी बूर में अपना ये लंड घुसाऊँगा और कस-कस कर चोदूँगा।”

मैंने अपना लंड उसकी बूर के मुँह पर रखा और हल्के से धक्का दिया।
उसने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और गाईड करते हुए अपनी चूत में डाल दिया।

दोस्तो, मानो मैं जन्नत में आ गया।
मैं बोल ही उठा- उफ़, क्या चूत है सना … मज़ा आ गया।
उसने भी उत्तेजित होकर कहा- चोद दो प्रताप … बस अब इस चूत को खूब चोदो।

दोस्तो … चूचियाँ दबाते हुए, होंठ चूसते हुए ज़ोर-ज़ोर से चोद-चोद कर ऐसा मज़ा मिल रहा था कि पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गया।
झड़ते-झड़ते भी मैं उसे बस चोदता ही रहा और चोदता ही रहा।

“सना … बहुत मजेदार चुदाई थी यार! तुम तो गज़ब की चीज़ हो।”
“मुझे भी बेहद मज़ा आया, प्रताप।” वो कसकर मुझे पकड़ते हुए बोली।

उसकी चूचियाँ मेरे सीने से लग कर एक अलग ही आनंद दे रही थी।

दोस्तो, फिर बीस मिनट बाद पहले तो मैंने उसकी बूर को चाटा और उसने मेरे लंड को चूसा, हल्के-हल्के!
फिर हमने कस-कस कर चुदाई की और इस बार झड़ने में काफी समय लगा।

मैंने शायद उसकी चूचियाँ और चूत और होंठ और गाल के किसी भी अंग को चूसे बगैर नहीं छोड़ा।
इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था।
बस गज़ब की चीज़ थी वो औरत!

कपड़े पहनने के बाद मैंने पूछा- सना, अब तो तुम्हें और कई बार चोदना पड़ेगा। अपनी इस प्यारी सी चूत और प्यारी-प्यारी चूचियों और प्यारे-प्यारे होंठों और प्यारी-प्यारी सना डार्लिंग के दर्शन करवाओगी ना?

मैंने उसका फोन नंबर ले लिया और कह दिया कि मैं बता दूँगा जिस दिन मैं दिन में घर पे होऊँगा!

अब वह मुझसे फ़्री हो गयी थी और बोली- प्रताप, डोंट वरी, जब भी मुनासिब मौका मिलेगा खूब चुदाई करेंगे!

उसकी यह बात सुनते ही मैंने उसे एक बार और बाँहों में भींच लिया और उसके होंठों का एक तगड़ा चुंबन लिया।
फिर वो मेरे बंधन से आज़ाद होकर दरवाजे से बाहर निकल गयी।
कुछ दूर जाकर पीछे मुड़ी और एक मुस्कान बिखेर कर धीरे-धीरे मेरी आँखों से ओझल हो गयी। Hindi Sex Stories

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मेरा नाम मोहित है। मैं इन्दौर में Hindi Sex Storiesरहता हूँ। मेरी उमर अभी ५२ वर्ष है। मैं एक सरकारी नौकरी में हूँ। मैने कुछ ही दिनों से अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। मुझे भी अपनी आप बीती लिखने की इच्छा हुई। मुझे ये बताने में जरा भी संकोच नहीं है कि ये सब मैने नेहा वर्मा के कहने पर उसे बताया। और उसी ने मेरी आप बीती आप लोगों को बताने को कहा और आप तक पहुंचाया।

यूं तो मेरी आप बीती आप लोंगो को बहुत साधारण सी लगेगी… क्योंकि ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है। सच तो यह है कि नेहा की कहानी “अंकल की प्यास” कुछ कुछ मुझे अपनी सी लगी।

मैने अदिति से लव मेरिज की थी। वो बहुत ही सेक्सी लड़की थी। हमने अपनी जिन्दगी में बहुत सेक्स का लुफ़्त उठाया, जैसा कि सभी लुफ़्त उठाते है। मेरी बचपन की गलत आदतों से मेरा लण्ड पिछले कई साल से कुछ ढीला पड़ गया था। अब धीरे धीरे रही सही कसावट भी जाती रही। बाज़ार में मिलने वाली सभी दवाईयों को मैं आजमा चुका था।

मेरा डाक्टर दोस्त ने भी खासे एक्सपेरिमेंट मेरे ऊपर किये…पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। एक बार तो मैने क्रीम का भी उपयोग किया …. पर उसका तो और ही उल्टा प्रभाव हुआ। नीम हकीमों के पास भी गया…कई बार तो मेरी तबियत भी इतनी खराब हो गई कि मुझे होस्पिटल में भरती होना पड़ा। इसलिये मेरा आपसे भी ये अनुरोध है कि आप भी अगर ऐसी कोई समस्या से पीड़ित हो तो कृपया नीम हकीम के चक्करों में ना पड़े।

मेरी इस हालत का असर मेरी पत्नी पर भी हुआ। अब वो मेरे से दूर रहने लगी। सेक्स की बात तक नहीं करती थी। मेरे हाथ भी लगाने से उसे अच्छा नहीं लगता था। धीरे धीरे मेरे सुनने में भी आने लगा कि अदिति के किसी दूसरे के साथ लग गई है। घर में इस बात को लेकर मैं उलझ भी पड़ता था। कइ बार मैने पत्नी से विनती भी की कि मुझे भी बहुत इच्छा होती है…. मुझे ऊपर से सहला कर या मुठ मार कर….या लण्ड चूस कर मेरा वीर्य निकाल दिया करो। पर उसका कहना था कि ऐसे करने से उसके तन बदन में आग लग जाती है….उसे कौन चोदेगा फिर। मेरा कहना था कि फिर मैं कहां जाऊं। किससे कहूं…. किसके साथ अपनी प्यास बुझाऊं।

अब तो ये हाल है कि मेरी पत्नी मुझसे ज्यादा बात ही नहीं करती। अब अलग कमरे में सोता हूँ…. बस देर रात तक मैं पोर्न साईट देखता रहता हूँ और मुठ मार कर अपना माल निकाल देता हूँ। अब तो इसकी मुझे आदत सी हो गई है।

इन्हीं दिनों मेरी मुलाकात नेहा से हुई। वो किसी समय में अदिति की छात्रा थी। उसमें मुझे कोई बात अलग सी लगी। उसके बात करने का अन्दाज़ और उसकी सहानुभूति का अन्दाज़ भी अलग था ….कहा जाये तो बहुत मधुर स्वभाव की जान पड़ी। हालांकि वो तो मेरे से बहुत छोटी थी। करीब २५ साल की होगी। फ़िगर और सेक्स अपील उसमे बहुत थी। मुझे वो सुन्दर भी बहुत लगती थी।

एक दिन बातों बातों में उसने मुझे पूछ ही लिया “अंकल…. आप अलग क्यो रहते हैं…. ये कमरा तो शायद बैठक है….” ये सीधे मेरे दिल पर चोट थी।

“ऐसी कोई बात नहीं है…. बस मैं लिखता पढ़ता बहुत हूँ….इसलिये मुझे डिस्टर्बेन्स नहीं चाहिये….”

“पर आन्टी तो आपको बुरा भला कहती है….कि बुढ्ढा तो किसी काम का नहीं है…. बस परेशान करता रहता है….” नेहा ने मुझसे हंसी में कहा। फिर एक चोट दिल पर लगी। मेरी आंखे कब गीली हो गई मुझे पता ही नहीं चला। पर मेरे छलकते आंसू नेहा की नजरों से नहीं छुप सके।

मै ऊपर से मुस्कराते हुए बोला….”अदिति….बहुत प्यारी है….वो तो मजाक में कहती है….देख मैं बुढ्ढा लगता हूँ….” अपनी लड़खड़ाती आवाज को मैं खुद भी नहीं छिपा सका।

“सॉरी अंकल…. मेरा मतलब ये नहीं था….सच में सॉरी….” उसने मेरा हाथ थाम लिया। मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया पर दो बून्दें टपक ही पड़ी। नेहा को शायद दुख हुआ।

मेरे माथे को चूमती हुई बोली,”आप तो मेरे पिता समान है…. पर मैं तो आपको बोय फ़्रेंड मानती हूँ ना….” मैने माहौल को हल्का बनाने की कोशिश की। मैने भी हालात को सम्हालने की कोशिश की।

“हाय….मेरी गर्लफ़्रेन्ड…. ” मैने उसके उसके गाल चूम लिये।

“अंकल…. कैसी भी बात हो ….प्लीज़ मुझे बताईये ना….”

“अरे छोड़ ना….जख्मो को कुरेदेगी तो फिर से घाव रिसने लगेगा….”

“एक अन्दर की बात बताऊं….आप को शक है ना कि मैं कामुक कहानियाँ लिखती हूँ….हां अंकल मैं ही वो नेहा हूँ….”

“सच…. देखा मेरा आईडिया सही था ना…. तब मै तुम्हे सब बता सकता हूँ।” मैने उसे धीरज से पूरी कहानी बताई…. नेहा ने मेरी इज़ाज़त लेकर उसे अपने छोटे से रेकोर्डर में रेकॉर्ड कर लिया।

“अंकल बुरा ना माने तो मैं एक बात कहू….”

” हां….हां….कहो मेरी गर्ल फ़्रेन्ड….” मैने उसे हल्का सा मजाक करते हुए कहा।

“आपने बताया कि आप में कमजोरी आ गई है…. मुझे लगता है आप इन्टरकोर्स कर सकते है…. बस आंटी का रूखापन आपको मार गया है….”

” हो सकता है…. आज कल उसके और आनन्द के चर्चे भी हो रहे है…. शायद वो उससे खुश भी है….” मैने अदिति की एक तरह से शिकायत की। पर नेहा का इरादा कुछ और ही था। उसने सीधा मुझ पर वार किया -“मैं कुछ आप पर ट्राई करूं….” उसने मेरी पेन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ रखते हुए कहा।

मैं एकदम से शरमा सा गया….असंमजस की स्थिति में हो गया कि अचानक ये क्या….। पर दिमाग ने सोचा कि इससे मेरा क्या लेना देना…. करने दो….ज्यादा से ज्यादा मुझे गाली दे कर चली जायेगी और क्या होगा। मेरी सोच कुछ अलग होने लगी। शायद कुछ स्वार्थ समाने लगा था या मैं मजे का मौका नहीं छोड़ना चाह रहा था।

“क्या…. जैसे…. ” उसका हाथ मेरे लण्ड पर कसता जा रहा था। मुझे तेज सिरहन आने लगी थी। मैने उसे निराशा से कहा -“नेहा…. छोड़ो ना…. कोई फ़ायदा नहीं है….”

जवाब में उसने मुस्कराते हुए अपने होंठ मेरे होंटो पर चिपका दिये…. मुझे धकेल कर सोफ़े पर लेटाने लगी। मेरे हाथों को उसने अपनी छातियों पर रख दिया। मेरी इच्छायें बलवती होने लगी। अन्दर का मर्द जाग उठा। मेरा ठन्डा खून एकाएक उबल पड़ा। मैंने उसे कस लिया। नेहा ने भी ऐसा दिखाया कि जैसे उसे नशा सा आ गया हो।

“मैं आपको खुश कर रही हूँ….कुछ इनाम दोगे….?”

“हाय….नेहा…. तुम कितनी अच्छी हो….”

“अंकल…. अपना पजामा उतारो ना….” नेहा ने भी अपनी जीन्स उतार दी…. आश्चर्य ….मेरा लंड खड़ा हो चुका था….

नेहा बिस्तर पर लेट गई और अपने दोनों पांव ऊपर उठा लिये। उसकी गोल गोल गाण्ड और चूत रोशनी में चमक उठी। उसकी जवानी और नीचे के कटाव गजब के थे…. फूल जैसी चूत की दो पन्खुड़ियां खिल उठी।

“अंकल ….आओ न….” नेहा ने मुझे चोदने का न्योता दिया। मैं लपक कर उसके दोनो पांवो के बीच आ गया…. मेरे अन्दर नई उत्तेजना थी….लण्ड को खड़ा देख कर और जवान लड़की को देख कर मेरी उत्तेजना फ़ूटी पड़ रही थी। मेरा सुपाड़ा भी फूल कर लाल हो गया। पर उसी समय मुझे अपना कोन्फ़ीडेन्स डगमगाता हुआ दिखाई दिया और मेरा लण्ड मुझे ठन्डा होता जान पड़ा। मैने अपना लण्ड नेहा की चूत में लगाया और धक्का दिया। पर हाय…. वो अन्दर नहीं गया और फ़िसल कर नीचे आ गया। मैने फिर से ट्राई किया पर नहीं घुसा।

मैं घोर निराशा में डूब गया। मैं धीरे से उठा और बिस्तर से नीचे आ गया। मेरा मुँह उतर गया था। नेहा तुरन्त बिस्तर से उतर आई और अपनी जीन्स पहन ली।

“अंकल …. आप बिलकुल ठीक है….इतना कठोर था…. बस आप कोन्फ़ीडेन्स छोड़ देते है….”

“नही….नेहा सॉरी…. तुम बेकार ही ये सब कर रही हो….”

“नहीं अंकल…. बस आप मुझे अच्छे लगते है…. मेरा तो मन आप पर आ गया है….” नेहा ने मुझे प्यार करते हुए कहा।

“क्याऽऽऽ….तुम्हारा दिमाग तो सही है न…. मै बुढ्ढा ५२ साल का और अभी तो तुम ….”

“आपकी गर्लफ़्रेन्ड…….. अच्छा अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊन्गी…. आंटी तो स्कूल जाती है ना इस टाईम….” नेहा इठलाते हुए चली गई।

मैं सोचता रहा कि क्या कुछ जादू हो गया…. नेहा एक दम से मुझसे कैसे प्यार करने लगी…. हुहं मरने दो…….. साली चालू होगी….। वरना कोई क्या ऐसे ही चुदने को तैयार हो जायेगी ??

अगले दिन ठीक उसी समय नेहा आ गई। मैने सोच लिया था कि आज ये जितना मजा देगी उसका मैं उसे पेमेंट कर दूंगा। आते उसने सवधानी से सभी ओर देखा….

“कोई नहीं है…. ” मैने हंस कर कहा। और वो मुझसे लिपट गई…. उसने फिर से मुझे उत्तेजित करना चालू कर दिया। इस बार मैने सोच लिया था कि मजे करूंगा और उसे कुछ रूपये दे दूंगा। मैने भी उसके बोबे मसलने शुरु कर दिये। उसने मेरा पायजामा खोल दिया।

आज वो साड़ी पहन कर आई थी। उसने साड़ी समेत अपना पेटिकोट ऊंचा कर लिया और बिस्तर पर लेट गई। मुझे ख्याल ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। बस मैं उसके ऊपर चढ गया और लण्ड नेहा की चूत में घुसा डाला।

“हाय अंकल…. मैं तो चुद गई…. कस के चोद दो….प्लीज….धक्के लगाओ…. हाय रे….”

मैं उसकी नंगी भाषा से और उत्तेजित हो उठा। और मस्त हो कर उसे चोदने लगा। मुझे लगा कि सारी जन्नत मेरे नीचे है…. सारी नसें खिंच कर लण्ड में भरने लगी। शरीर में फ़ुरहरी छूट गई…. और…. मेरे लण्ड ने फ़ुहार छोड़ दी। नेहा ने मुझे कस कर पकड़ लिया…. मै झड़ता रहा …. लगा मेरे शरीर की एक एक बूंद निकल गई है…. मैं हांफ़ उठा था।

अचानक मुझे मह्सूस हुआ….अरे ये कैसे हो गया….क्या मैने अभी अभी चुदाई की थी। नेहा अपनी साड़ी ठीक कर रही थी।

“थेंक यू माय बॉय फ़्रेंड…. फ़ोर ए नाईस फ़क….” नेहा ने मुस्करा कर कहा।

“नेहा….पर ये सब…. हो गया ना….”

“आप मर्द है….अभी आप सब कुछ कर सकते हो…. पर कल मैं फिर आ रही हूँ…. कल जरा और जोरदार फ़क….थोड़ा ज्यादा देर तक…. ठीक है ना….।”

मैं नेहा से लिपट पड़ा। मैने जेब से उसे १००० रु का नोट निकाल कर दिया….

“नेहा प्लीज मना मत करना…. अपने लिये मेरी तरफ़ से कोई गिफ़्ट ले लेना….”

” बस अंकल…. मेरी बोली लगा दी ना आपने….”

“नेहा नहीं….नहीं…. क्या मैं अपनी गर्लफ़्रेन्ड को कोई गिफ़्ट नहीं कर सकता….?” मैने अपनी नजरे शर्म से झुका ली….जिसमे गलती का अहसास भी था और ग्लानी भी थी….शायद पकड़े जाने की….

“अंकल लाओ ये रुपये अब मेरे…. पर देखा आप कहते थे ना…. आंटी आपको बुढ्ढा कह्ती थी…. अरे अपनी मर्दानगी बता दो उसे…. “

“नेहा …. पर ये अचानक ही कैसे हो गया….”

“एक जैसे लाईफ़…….. एक जैसी रोज की चुदाई…. ज़िन्दगी में एकरसता…. कोई नयापन नही…. नया आसन नही…. वगैरह….ना तो आपमे कोई कमी है और ना ही आंटी में….”

मैं उसे देखता ही रह गया। इतनी सी उमर मे….इतना ज्ञान…. फिर क्या नेहा ने सिर्फ़ मेरा आत्मविश्वास उठाने के लिये ये सब किया।

“अब मैं जाती हूँ…. अंकल कल मैं इसी समय फिर आऊंगी…. याद रहे…. कल कस के चुदाई करना…. कि मुझे नानी याद आ जाये….”

वो लहराती हुई चली गई…. मैं दरवाजे पर खड़ा उसे देखता रह गया…. जिसे मैं शुरु से अपनी बेटी की तरह प्यार करता था उसने मुझे ये सब करके मेरी ज़िन्दगी में फिर से एक आत्मविश्वास जगाया। मुझे अपना बॉय फ़्रेन्ड बना कर मुझे बता दिया कि मैं अभी भी सब कुछ कर सकता हूँ।

ये थी मोहित की आप बीती सच्ची कहानी…. जिसमे मैने अपने आपको हिरोइन के रूप में रखा है। इन दोनो चरित्रों के नाम बदले हुए है। ये आप बीती मुझे एक मेल द्वारा प्राप्त हुई थी। पर मेरा मानना है कि ये एक अस्थाई वासना का रूप है…. जो कि एक जवान लड़की को देख कर आग की तरह भड़क जाती है….तो जल्दी बुझ भी जाती है। एक नयापन जिन्दगी में आता है…. । नसों में नया जोश….नया खून दौड़ पड़ता है…. लण्ड एक बारगी तो फ़ड़फ़ड़ा उठता है…. और आगे….Hindi Sex Stories

सेक्स शब्द मात्र से ही तन मन में रोमांच पैदा हो जाता है तो सोचिये जिसने एक बार ये स्वाद चख लिया हो तो वो इसके बिना कैसे तड़पता होगा?
मैं निशा मल्होत्रा हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर से 34 28 36 फिगर की 28 वर्षीय नटखट अल्हड़ जवान शादीशुदा उच्च शिक्षित महिला आप सभी सेक्स दीवानों का अभिवादन करती हूँ.

मेरी शादी आज से तीन वर्ष पहले एक काफी अमीर परिवार में हुई थी. मेरे पतिदेव का अपना बिज़नस है और उनका कारोबार भारत के कई प्रदेशों में फैला हुआ है. इसलिए वो अक्सर अपने बिज़नस टूर की वजह से काफी काफी दिनों तक बाहर भी रहते हैं. शादी के बाद सुहागरात पर पहली बार सेक्स का आनन्द लेने का मौका मिला था मुझे जीवन में! सुहागरात की चुदाई मेरी पहली चुदाई थी.
मेरे पतिदेव बहुत सेक्सी भी हैं और पावरफुल भी इसलिए उन्होंने मुझे सेक्स का अपार सुख दिया. मुझ में ऐसी काम वासना जागृत कर दी थी उन्होंने कि अक्सर जब वो घर नहीं होते थे तो मैं पीछे से सेक्स के लिए तड़पती हुई कभी डिल्डो से तो कभी अपनी प्यारी उंगलियों से अपनी चूत का रस निकलकर उसे शांत करती थी.

पर शादी के तीन साल बाद अब ये प्यास कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी मुझमें और दूसरी तरफ मेरे पति अपने कारोबार की तरक्की के लिए कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लगे थे.

फिर एक दिन वो हुआ दोस्तो… जिससे मुझे मेरी काम इच्छाओं को पूरी करने वाला एक नया साथी मिल गया.

उस दिन मैं हमेशा की तरह बाथरूम में नहा रही थी, मैं कभी भी कपड़े अपने साथ अन्दर लेकर नहीं जाती. नहाते वक़्त मैं अपने खूबसूरत जिस्म को निहारते हुए अपनी ही कामवासना में खोई हुई अपनी चूत को सहलाये जा रही थी.
मेरी ब्रा पैंटी और टॉवल सब बाहर मेरे बेड पर ही पड़े थे.

मेरे मामाजी का लड़का जिसके साथ बचपन से ही मैं काफी खुली हुई थी, हम दोनों भाई बहन हर तरह की बातें कर लेते थे, वो घर आया और मेरी सास ने उसे ऊपर मेरे रूम में भेज दिया मिलने!

वो मेरे बेडरूम में आकर बेड पर बैठा और मेरे अंदरूनी कपड़ों को देखकर उसका मन भी डोलने लगा शायद… वो मेरी ब्रा हो हाथ में लेकर चूमते हुए मेरे 34 साइज़ के भरे हुए बूब्स को फील करके उन्हें चूसने का अनुभव करने लगा.

इधर मैंने अपनी चूत को सहलाकर उसका रस निकाला और अच्छे से नहाकर अपने जिस्म की खूबसूरती को निहारकर मटकती हुई अपने बाथरूम का दरवाजा खोलते हुए बेडरूम में आई तो देखती हूँ कि मेरे बेड पर तरुण (मेरे मामा का लड़का) बैठा हुआ है और उसका तक़रीबन 8 इंच का एकदम कसा हुआ लंड जो काली घुंघराली झांटों से भरा हुआ था, उस पर मेरी पैंटी को रगड़ रहा था.

मैं उसे इस हालत में देखकर कुछ पल के लिए मानो मन्त्र मुग्ध सी हो गई थी. मैं ये भी भूल गई कि मैं खुद एकदम नग्न अवस्था में उसके सामने हूँ. वो भी मेरी जैसी अप्सरा को अपने सामने इस नग्न कामुक अवस्था में देख खो सा गया था.
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, वो एकदम से मेरे करीब आ गया. हम दोनों अब एक दूसरे के बिल्कुल समीप थे, दोनों एक दूजे की आँखों में खोये हुए थे कि इतने में कब उसने मेरे होंठों को अपने लबों में ले लिया, पता ही नहीं चला यारो!

मेरे अन्दर भी सेक्स की अधूरी कामनायें पूरी तरह से जाग चुकी थी और वो भी आज मुझे पूरी तरह से भोगने के लिए तैयार था. उसने फटाफट अपने सारे कपड़े निकाले और मुझे चूमते हुए बेड पर लिटा दिया, फिर मेरे कोमल पर सख्त, मुलायम पर कसे हुए बूब्स को जोरों से चूसने लगा, मेरे पेट को चूमते हुए मेरी चूत तक पहुँच गया और फिर एकदम से टूट पड़ा मेरी भीगी हुई चूत पर…

उफ अशश्स आह्ह्ह आह्ह ह्ह की आहें बरबस ही मेरे मुख से निकलने लगी.

उसने चूस चूस कर ही मेरी प्यासी चूत का कामरस निकाल दिया और फिर अपने तनतनाते हुए लंड को मेरे मुख के करीब ले आया. मैं समझ गई थी उसका इशारा और मैं खुद उसके कसे हुए लंड को चूसना चाहती थी इसलिए मैंने अपना मुंह पूरा खोलते हुए उसके लंड को गप्प से निगलना शुरू किया.

अभी कुछ ही पल हुए थे उसका लंड चूसते हुए मुझे कि इतने में उसने मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और बेड पर लेट गया. मैं उसका इशारा समझते हुए उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी भीगी प्यासी चूत में उसका लंड सेट करने लगी.
वो मेरे 34 साइज़ के रसभरे बूब्स को दबाने लगा जोर से और मैं उसके लंड पर कूदने लगी. उस वक़्त हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो चुके थे.

जल्दी ही मैं झड़ गई और थक कर नीचे उतर गई फिर वो मेरे ऊपर आ गया. उसने मेरी चूत को चूमा और फिर अपना लंड मेरी चूत में डालते हुए दस मिनट तक मेरी ज़बरदस्त चुदाई की.

हम दोनों थक कर कुछ देर यूँ ही साथ नंगे ही लेटे रहे.

वैसे पहले हमारे बीच बातें तो सभी हो जाती थी मज़ाक मजाक में… पर दोनों के बीच सेक्स का यह पहला अवसर था.

उस दिन से मुझे मेरी तनहाई को मिटाकर प्यार और सेक्स का आनन्द देने वाला साथी मिल गया.

मित्रो, यह थी मेरे पहले पर पुरुष के साथ सेक्स भाई बहन की चुदाई की कहानी.
मैं आशिक राहुल का दिल से और अपनी भीगी चूत से धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने मेरी कहानी को हिंदी में लिखा और अन्तर्वासना पर प्रकाशित करने में मेरी मदद की और साथ ही आशिक राहुल से गुजारिश भी करती हूँ कि वो जल्दी ही उनके और मेरे बीच हुए सेक्स संगम की रोचक कहानी भी आप सबके सामने पेश करें!
और साथ ही अन्तर्वासना प्लेटफ़ॉर्म को धन्यवाद करना चाहूंगी जिसकी वजह से ऐसे प्यारे दोस्त से मुलाकात हुई और अपनी सेक्स कामनाओं के पूर्ति के लिए एक विश्वसनीय दोस्त मिला.

दोस्तो! यह भाई बहन की चुदाई की कहानी थी निशा मल्होत्रा की उन्ही की जुबानी. जैसाकि निशा ने कहा है कि मैं उनके और मे

फर्स्ट ओरल सक का मजा मैंने तब लिया था जब मैं कॉलेज टूर में गयी थी. वहां मैंने लड़के लड़कियों के ग्रुप को सेक्स का मजा लेते देखा. उन्होंने मुझे भी खींच लिया और मैंने पहली बार लंड चूसा.

कहानी के दूसरे भाग
बेटी को यौन शिक्षा की शुरुआत
में आपने पढ़ा कि मेरी बेटी सेक्स के बारे में जानती तो थी पर उतना नहीं जितना उसे उस उम्र में जानना चाहिए तो मैंने उसे बताना शुरू किया, उसे कंडोम, लंड और चूत के बारे में बताया. उसके साथ लेस्बियन सेक्स करके उसे मजा दिया.

अब आगे फर्स्ट ओरल सक का मजा:

चारू झड़ने के बाद मुझ पर गुस्सा करने लगी- मौसी, आपने जो उंगली डाली थी अभी भी बहुत जलन हो रही है मुझे!
मैंने कंडोम चढ़ा खीरा उठाया और चारू को दिया- लो, तुम अब मेरी चूत मार लो।

चारू की आंखों में चमक आ गई।
उसने झट से खीरा मेरी चूत पर लगाया और एक ही झटके में पेल दिया।

मैं तो बस चिल्ला कर रह गई।
खीरा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया था और उसमे ऐसा दर्द उठा कि मेरा बदन ऐंठ गया।

6 इंच तक खीरा मेरी चूत में घुसा मेरी चूत को गहरा करने में लगा था।
चारू बेहद शैतानी अंदाज में मेरी चूत को खीरे से चोद रही थी।

डॉट वाला कंडोम होने की वजह से खुरदरापन इतना ज्यादा था कि मेरी चूत का हर कोना रगड़ खाकर झनझना रहा था।

चारू इतने जोर से मेरी चूत मार रही थी कि मुझे झड़ने में 5 मिनट भी न लगे।

मेरी चूत से झरना निकला तो चारू ने खीरा निकाल लिया.
लेकिन धार इतनी तेज थी कि चारू का बदन भीग गया।

मेरी चूत से कामरस के फव्वारे छूट रहे थे और वह झरने जैसे बह रही थी।
तब मैंने अपनी जीभ से उसका जिस्म चाट कर साफ किया।

इसके बाद हम दोनों ही ठण्डी हो गई थी।

चारू अब मुझसे लिपट गई और हमने चारू की बनियान से ही अपना बदन साफ किया।

फिर नंगे बदन ही एक दूसरे से लिपट कर लेट गई।
मां बेटी के बीच आज सारी दीवारें खत्म हो गई थी।

चारू- मौसी, आज के पहले आपने कभी किसी लड़की के साथ सेक्स किया है?
मैं- लड़की नहीं, लड़कियों के साथ किया है, ग्रुप में, मेरी चारों सहेलियों ने मिलकर मेरी ली थी।

चारू- इसीलिए आप सेक्स में इतनी एक्सपर्ट हो. अगर कोई मर्द आपको आज मिले तो क्या आप उसके साथ मजा करोगी?
मैं- ऐसा क्यों पूछ रही है तू?
चारू- मुझे आपको सेक्स करते हुए देखना है।

मैं- कोई तेरे सामने मेरी लेगा तो तुझे बुरा नहीं लगेगा?
चारू- नहीं, मुझे मजा आयेगा क्यूंकि आप उस मर्द को भी मेरी तरह निचोड़ कर रख दोगी।

मैं- अगर तेरे पापा को पता चला तो वे मुझे घर से निकाल देंगे।
चारू- आप परेशान मत हो मौसी, मैं उनसे कुछ नहीं कहूंगी बल्कि मैं तो चाहती हूं कि आपके साथ साथ मैं भी किसी लड़के को निचोड़ कर अपनी प्यास बुझाऊं!

उसकी बात सुनकर मुझे हंसी आ गई।
मैं- चारू अभी तुम छोटी हो, अगर इस उम्र में सेक्स करोगी तो बहुत सी परेशानियां सामने आ जायेंगी, जैसे वजन बढ़ना, इन्फेक्शन, योनि का ढीलापन, मुंहासे वगैरह। तुम थोड़ा और सब्र कर लो फिर जी भर के जिंदगी के मजे लेना।

चारू ने कहा- ठीक है मौसी … लेकिन याद रखियेगा, आपने आज मुझे निचोड़ दिया है, अब मैं आपकी बेटी के साथ साथ लौड़ी भी हूं, इसलिए मैं आपके दूध निचोड़ूंगी भी और चूसूंगी भी!
यह कहकर उसने मेरे निप्पल पर काट लिया।

मैं आह भरी सिसकी लेकर उसका मुलायम बदन सहलाने लगी।
उसके नितम्बों के बीच के छेद पर उंगली फेर कर मैंने उसे आराम दिया.

और फिर चारू मेरे ऊपर चिपक कर लेट गई।

उसका नंगा बदन इतना मुलायम और रसभरा था कि कोई भी उसे छूकर उत्तेजित हो जाता, उसके गोलाकार नितंब मेरी हथेलियों से मालिश का मजा ले रहे थे।

चारू- वासू मौसी, आपने पहली बार सेक्स किसके साथ किया था?
मैं- एक लड़का था मेरे कॉलेज के पास का, उसके साथ प्रेम शुरू किया था, उसने ही मेरी सील तोड़ी थी। लेकिन तुम्हारे पापा से मुझे शादी करनी पड़ी और हम दोनों अलग हो गए।
चारू- सच! लेकिन सब कैसे हुआ, प्लीज बताइए।

मैंने उसे अपनी आप बीती सुनानी शुरू की।

चारू, बात तब की है जब मैं 12वीं में स्कूल में थी।
तब मैं तेरे जैसी थी, इतनी की उम्र की जितनी कि तुम अब हो.

मैं पढ़ाई में ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन मार्क्स ठीक आ जाते थे।
देखने में तो मैं बला की खूबसूरत हूँ ही।

मेरे हल्के नींबू जैसे स्तन अभी विकसित होना शुरू ही हुए थे, मेरे शरीर पर मांस पर्याप्त मात्रा में था और मेरे नितम्ब गोलाई लिए हुए मेरे रूप को आकर्षक बनाते थे।

बोर्ड एग्जाम हो चुके थे और सभी लोग छुट्टियां काट रहे थे।

एक दिन स्कूल की तरफ से टूर पर जाने की योजना बनाई गई।
टूर में हमें सिर्फ राजनगर के किले और जंगल में जाना था और टूर एक ही दिन का था।
मुझे भी जाने का अवसर मिला।

अगले दिन मैं अपने कपड़े और बाकी समान लेकर स्कूल के लिए निकल गई।

धीरज सर और मोनिका मैम को छात्रों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई।
हमारे साथ हमारे सीनियर क्लास के लड़के लड़की भी आए थे।
कुल 30 बच्चों का ग्रुप था।

धीरज सर और मोनिका मैम का चक्कर पूरे कॉलेज को पता था।

हमारे ग्रुप में कुछ तेज तर्रार लड़कियां थीं।
उनमें से एक लड़की थी रचना जो सबसे हॉट और सेक्सी थी।

उसकी दो सहेलियां थी रुचि और नेहा।
वे भी उसी के जैसी थी और उन तीनों के पीछे लड़कों की लाइन लगी रहती थी।

हम सभी बस में सवार हो गए।
फिर बस राजनगर के किले की तरफ़ चल दी।

बस में मेरी ही क्लास का एक लड़का भी था, रोहित जो चोरी छुपे मुझे देखता था लेकिन कुछ कहता नहीं था।

टूर एक दिन और एक रात का था।

बस राजनगर के किले के पास पहुंच गई तो हम सब लोग अपनी अपनी टीम में बंट गए।

लड़के धीरज सर के साथ थे और मेरी टीम मोनिका मैडम के साथ थी।
हम सखियां रचना को ही देख रहे थे।

उसका लम्बा गोरा मांसल जिस्म बहुत आकर्षक लग रहा था।
इंटर के लड़के उसी को ताड़ रहे थे, रचना भी उनको खूब लाइन दे रही थी।

घूमते घूमते शाम हो गई और हम लोग राजनगर के जंगल में आ गए।

धीरज सर और मोनिका मैम के बीच कुछ इशारा हुआ तो धीरज सर बोले- बच्चो, मोनिका मैम की तबीयत ठीक नहीं है, मैं इनको दवा दिलाकर लाता हूं, तब तक आप लोग यहीं रहिएगा और मेरे आने तक इधर उधर मत जाइएगा।

यह कहकर वह मोनिका मैम के साथ चले गए।

अब टीचर थे नहीं इसलिए सबको खुलकर नैन मटक्का करने का मौका मिल गया।
रचना ने कुछ लड़कों को इशारा किया और फिर पहले 5 लड़के और फिर कुछ देर बाद रचना और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी जंगल में अंदर की तरफ चली गई।

मैंने अपनी सखियों से कहा- चलो हम लोग भी चलते हैं जंगल में, देखो रचना गई है। बहुत मजा आयेगा।
लेकिन मेरी सहेलियों ने मना कर दिया।

लेकिन मैं नहीं मानी और 10 मिनट बाद मैं भी जंगल में चली गई।

जंगल में बड़ी चट्टाने थी और मुझे कुछ आहट मिली तो मैं उन्ही की ओट में छिपकर सब देखने लगी।

देखा तो आंखें फटी रह गई।
रचना 3 लड़कों के साथ चुम्मा चाटी कर रही थी और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी यही कर रही थी।

नेहा अपनी टांगें खोल कर चट्टान पर बैठी हुई थी और एक लड़का उसकी योनि को चाट रहा था।
रुचि भी एक लड़के को किस कर रही थी और वह लड़का रुचि के नितम्ब सहला रहा था।

सबसे ज्यादा तो रचना लगी थी इन सब कामों में!
उसने अपनी शर्ट के बटन खोल रखे थे और उसकी ब्रा नीचे सरकी हुई थी।
एक लड़का पीछे से उसके दोनों संतरे जैसे स्तनों को मसल रहा था और दो लड़के अगल बगल खड़े हो कर उसे किस कर रहे थे।

रचना के दोनों हाथों में दोनों लड़कों के लंड थे और वह उन्हें सहला रही थी।

वहां बिलकुल कामसूत्र का लाइव टेलीकास्ट चल रहा था।
तभी एक लड़के ने रचना और रुचि की पैंटी निकाल दी।
स्कर्ट पहने हुए वह लड़कियां अपनी ब्रा नीचे किए लड़कों से मजे ले रही थी।

तभी एक लड़के ने रचना को छोड़ा और जाकर नेहा के पास खड़ा हो गया।
नेहा इशारा समझ गई।
उसने लपक कर उस लड़के का लिंग अपने मुंह में भर लिया।
चारू, ये सीन देखकर तो मेरे तन बदन में आग लग गई।
मेरी सांसें तेज हो गई और मैं अब गीली होने लगी।

तभी एक और करतब हुआ।
एक लड़के ने रचना को उठा लिया और सर के बल कर दिया।
रचना का सर उस लड़के के लिंग के सामने आ गया।

तभी एक और लड़के ने रचना को सहारा दिया और फिर दोनों ने रचना के गुप्तांगों पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी।

रचना भी एक एक कर के उस दोनो का लिंग चूस रही थी।

उधर एक लड़का रुचि के स्तन पी रहा था और उसकी योनि सहला रहा था.
वहीं दूसरी तरफ दो लड़के नेहा पर लगे थे।

उनमें से एक नेहा का मुंह चोदन कर रहा था और एक लड़का नेहा की योनि को चूस रहा था।

इन गर्मागर्म नजारों को देखकर मुझे भी गर्मी लगने लगी।
हाथ पांव कांपने लगे और दिल की धड़कन आसमान छूने लगी।

तभी मुझे छींक आ गई और लोगों की नजर मुझपे गई।

मैं वहां जड़ खड़ी थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

सबने मुझे देखा तो मुस्कुरा कर एक दूसरे से धीरे धीरे कुछ कहने लगे।

फिर रचना, नेहा और रुचि मेरे पास आई।
उनके स्तन अभी भी खुले हुए थे।

जब रचना मेरे पास आई तो अहसास हुआ कि उसके स्तन कितने रस भरे हैं।

रचना- यहां क्या कर रही है वासु?
मैं हकलाती हुई बोली- मुझे माफ कर दो दीदी, मैं बस यहां से गुजर रही थी।
रचना- अच्छा, आ फिर तुझे सैर कराती हूं।

ये कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने साथ उस चट्टान के पास ले आई।

सारे लड़के मुझे देखकर आनन्दित थे।

अभी कच्ची कली थी मैं इसलिए शरीर ज्यादा विकसित नहीं हुआ था।

रचना ने मेरी शर्ट खोली तो बनियान में मेरे स्तन आधे नींबू की तरह उभार लिए सामने आ गए।

एक लड़का बोला- इसकी तो चूचियां भी नहीं निकली अभी, इसमें मजा नहीं आयेगा।
तो रचना बोली- रुक जाओ जानेमन, चूत तो है ही, चलो देखते हैं।

यह कहकर उसने मेरी पैंटी सहलाई तो मुझे करंट सा लगा।

नेहा उन लड़कियों ने मेरी पैंटी निकाल दी और मैं कुछ न कह सकी।

मेरी योनि पर हल्के हल्के बाल आ गए थे।

रचना ने मेरी चूत का मुआयना किया और कहा- अभी सील पैक माल है ये!
यह बोलकर उसने जीभ निकाली और मेरी चूत को चाटने लगी।

उफ्फ पहली बार किसी की जुबान मेरी चूत से टकराई थी।
मैं आँखें बंद कर के इस लम्हे का मजा लेने लगी।

अब नेहा ने मेरी बनियान भी उठा दी और मेरे स्तन को बाहर कर दिया।

लड़कों ने मेरे नींबू दबा दिए तो मुझे दर्द हुआ।
मैं चिल्लाई- आह दीदी, दर्द हो रहा है।

रचना ने मेरी चूत छोड़ी और अपने होंठ मेरे होंठों से टिका दिए।
पहली बार किसी ने मुझे किस किया था वह भी एक लड़की ने!
मैं भी मजे लेकर उसे चूसने लगी।

सच कहूं तो वह चुम्बन मुझे आज भी याद है चारू!

इसके बाद नेहा और रुचि नीचे बैठ गई।

एक एक लड़का उन दोनों के पास गया और दोनों ने उनके लंड अपने मुंह में भर लिए।

उधर रचना दो लड़कों का लंड चूस रही थी।
यह नजारा ही ऐसा था कि कोई भी गीला हो जाए।

इसके बाद एक लड़का मेरे पास आया और बोला- तू भी चूस मेरा!
मैं डर के बोली- नहीं, मैं नहीं कर पाऊंगी।

तो उस लड़के ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया।
उसका गर्म लिंग पकड़ कर मुझे बेहद झटका सा लगा।

मैंने धीरे धीरे उसे सहलाना शुरु किया और फिर उसने मुझे भी घुटनों के बल बिठा दिया।

मेरे बाल पकड़ कर उसने अपना लिंग मेरे मुंह में डाल दिया।
उसका नमकीन स्वाद मेरे मुंह में घुल गया।

वह अब धीरे धीरे मेरे मुंह का चोदन करने लगा।
मेरे मुंह पर धक्के लगाते हुए उसने गले तक अपना लिंग मेरे मुंह में घुसेड़ना शुरू कर दिया।

उसका 5 इंच का काला लिंग मेरे मुंह में घुसता और निकालकर दोबारा अंदर घुस जाता।
उसका लिंग मेरी लार से अच्छी तरह भीग गया।

फर्स्ट ओरल सक का ये क्रम 5 मिनट तक चला फिर उसका बदन अकड़ने लगा।
उसने मेरे सर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और फिर मेरे मुंह में झड़ गया।

एक गर्म तेल सा मेरे मुंह में गिरा और मुझे उसका नमकीन स्वाद मिल गया।

उस लड़के ने मेरा सर ऊपर उठा दिया और मेरे मुंह का वीर्य मेरे गले से अंदर उतर गया।

झड़ने के बाद वह लड़का ढीला हो कर मुझसे अलग हो गया।

मैंने देखा तो दोनों लड़के रचना के मुंह पर लंड रगड़ रहे थे और कुछ ही देर बाद झटकों के साथ उनका वीर्य रचना के चेहरे पर जा गिरा।

उधर नेहा और रुचि भी लंड को चूस चूस कर खाली कर चुकी थी।

रचना मेरे पास आई और अपने चेहरे पर लगा वीर्य मेरे स्तनों पर मल दिया और कहा- इसे लगा रहने देना बेबी, तुझे बहुत मजा आयेगा।

लड़के झड़ कर ठंडे हो गए थे इसलिए अब हमने चलने का फैसला किया।
अपने कपड़े पहनकर हम सब वापस बस में आ गए।

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