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Massage Girl in Jamtara: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Jamtara who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Jamtara that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Jamtara massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Jamtara who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Jamtara massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Jamtara massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Jamtara who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Jamtara employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Jamtara helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Jamtara

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Jamtara at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

चुदाई की ढेर Antarvasna सारी कहानियाँ अन्तर्वासना में पढ़ने के बाद मैंने भी सोचा कि एक सेक्सी कहानी पाठकों के साथ बाँट लूँ !

यह बात उस समय की है जब मैं भिलाई में रह कर आईटीआई की ट्रेनिंग कर रहा था।

मेरे आईटीआई का एक मित्र हमेशा अपने घर ले जाता और उसके घर वाले भी बहुत अच्छे से पेश आते थे।

घर से दूर रहने के कारण परिवार के माहौल में बहुत अच्छा लगता था। मेरे दोस्त का एक भाई था, उसके पापा अच्छी नौकरी में थे।

उनकी मम्मी भी बहुत अच्छी थी, जब भी घर जाता तो नाश्ता चाय के बगैर आने ही नहीं देती थी।

मलयाली परिवार से होने के कारण खाने में ढेर सी अच्छी चीजें मिलती थी। टीवी देखने के नाम पर ही मेरा वहाँ जाना ज्यादा होता था क्योंकि उस समय मुझे फिल्मों का बहुत शौक था।

एक बार मेरे दोस्त के भाई की नौकरी के लिए उनके पापा और भाई को चार दिनों के लिए पूना जाना पड़ा। दोस्त ने मुझे तब तक के लिए अपने घर पर ही सोने के लिए कहा।

उस रात का खाना भी दोस्त के ही घर पर हमने खाया। दस बजे दोस्त सोने अपने बेडरूम में चले गया, मैं टीवी देखने के नाम पर ड्राइंग रूम में ही सोने के लिए रूक गया।

रात के साढ़े ग्यारह बजे चैनल बदलते समय अचानक ही टीवी में ब्लू फिल्म आने लगी।

मैं बहुत ही खुश हो गया क्योंकि मुझे ब्लू फिल्म देखने में बहुत ही मजा आता है। दस मिनट बाद ही मेरा लण्ड सनसनाने लगा।

एक आदमी एक औरत की चूत को चाट रहा था और साथ ही में उसकी गाण्ड के छेद में अपनी एक उंगली डाल आगे पीछे कर रहा था।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैने चड्डी उतार दी और लंड को पकड़ के सहलाने लगा। थोड़ी ही देर में सारा माल मेज़ के ऊपर ही गिर गया।

मैं बाथरूम में गया और लंड साफ कर लिया।

तभी मेरी नजर दोस्त की मम्मी की ब्रा और पैन्टी पर पड़ी।

मुझे फिल्म का सीन याद आ गया मैंने पहले कभी दोस्त की मम्मी के बारे में ऐसा गन्दा ख्याल नहीं किया था।

ब्रा और पैन्टी को छूते ही मेरा लंड फिर से तैयार होने लगा। ब्रा को सहलाते हुए आंटी को याद कर मैं मुठ मारने लगा।

जोश में आंटी की सेक्सी तस्वीर मन में आने लगी। मलयाली आंटी की मोटी गांड और मस्त बड़े बड़े दूध को याद करके मैं जोर जोर से मुठ मार ही रहा था कि आहट सी हुई पर जोश की अधिकता में मेरा माल आने ही वाला था और मैं अपने को रोक नहीं पाया और सारा माल आंटी की पैन्टी में ही निकल गया।

तभी बाहर से बाथरूम का दरवाजा खुल गया आंटी शायद बाहर खड़ी थी अचानक ही वो अन्दर आ गई। मैं हड़बड़ा गया।

आंटी मेरा हाथ पकड़ कर बोली- यह क्या कर रहा था?

मेरी आवाज़ ही नहीं निकल पा रही थी, मैं नज़रें नीचे झुकाए थर-थर कांप रहा था। आँटी ने गुस्से में पैन्टी छीनते हुए कहा- मादरचोद, मेरी फ़ुद्दी को याद कर लौड़ा घोंट रहा था !

मैं लगभग रोते हुए बोला- मुझे माफ़ कर दो आंटी !

आंटी ने कहा- बाहर टीवी में ब्लू फिल्म तूने ही लगाई है न ? कैसेट कहाँ से मिली ?

मैं हकलाते हुए बोला- वो तो केबल पर !

और चुप हो गया।

आंटी ने ओ..ह्ह्ह… कहा और चुप हो गई। मेरा लौड़ा आंटी की बदन की गरमी को महसूस कर अब ऊपर-नीचे होने लगा था।

मैं अभी तक नंगा था और आंटी अपने पैन्टी में लगे वीर्य की बूंदों को सूंघते हुए बोली- यह तूने मेरी पैन्टी को ख़राब किया है?

मैं इसे साफ़ कर देता हूँ आंटी !

और उनके हाथ से पैन्टी ले कर मैं उसे पानी में डुबा कर धोने लगा। आंटी मेरे हाथ पकड़ कर मुझे उसे धोने में मदद करते हुए बोली- जरा सी भी गन्दगी नहीं रहनी चाहिए !

और अपने बड़े बड़े दूधों को मेरे पीठ में रगड़ने लगी। मेरा लंड अभी भी नंगा था और पूरी तरह से तन कर तैयार हो गया था।

वो मुझसे बोली- लौड़े को हिलाने में बहुत मजा आता है क्या ?

मैं अ..ह…. ही कर पाया था। आंटी के झुके होने से उनके बड़े बाटलों की झलक साफ दिख रही थी।

अब मैं भी नंगे होने के बावजूद उनके बाटलो को घूर रहा था। आंटी समझ गई और बोली- दूध को क्या घूर रहा है बे ?

मैं एक पल को सकपका गया और नजर नीचे कर ली।

तभी आंटी मेरे लौड़े को अन्डकोषों के नीचे से सहलाते हुए बोली- वाह… कितना मस्त है रे.. !

मेरा लंड जैसे सलामी मारता हुआ उनकी चूत के नीचे जा कर रूक गया। वो हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी और बड़बड़ाने लगी- मादरचोद, इतना मस्त लौड़ा है और तू घोंट-घोंट कर गिरा रहा है !

अब मेरे से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, मैं आंटी से लिपट गया और “अ..ह… आंटी मस्त लग रहा है” मेरे हाथ बिजली की तेजी से उनके शरीर को मसल रहे थे।

दो मिनट बाद ही आंटी अपने को कंट्रोल करते हुए मुझे खींचते हुए अपने बेडरूम की ओर ले चली।

बेडरूम अन्दर से बंद कर वो अपने कपड़े उतारने लगी। चंद पलों में ही वो पूरी नंगी मेरे सामने अपने दूध को मसल रही थी।

मैं उनकी गाण्ड से लेकर जान्घों तक पप्पियों की बरसात करने लगा।

उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूत के पास किया और गरजदार लहजे में कहा- चूस.. इसे …. !

मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।

मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।

वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।

वो सी.. अह..ह… जान और जोर से छोड़ पूरा हाथ घुसा दे जान…. मेरी जान…. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।

मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी। एक हाथ से आंटी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी …….

शेष अगले भाग में ! अभी मैं मुठ मार लेता हूँ आंटी की पहली चुदाई को याद कर ! अब रहा नहीं जा रहा है ! Antarvasna

प्रेषक : संदीप हाय दोस्तो ! कैसे हैं आप !Hindi Sex Stories

मैं एक २० साल का नौजवान और कद Hindi Sex Stories में भी ठीक हूँ ६’ १”बात ऐसी है कि मेरी कहानी अन्तर्वासना पर आने के बाद मुझे काफी सारे ईमेल आने लगे। उन सभी ईमेल में से एक मेल में मुझे किसी लड़की ने अपना फ़ोन नम्बर और पता दिया हुआ था। इतना मिलते ही सरदार यानि की मैं बहुत ही खुश हुआ। मैंने उसे कॉल किया तो वो भी दिल्ली में ही रहनी वाली एक कुंवारी कन्या का निकला उसने अपनी उम्र २१ साल बताई और उसने मुझे एक सुझाव भी दिया था। मैंने उससे पूछा कि कैसा सुझाव तो वो कहने लगी कि कॉल बॉय का सुझाव। इतना सुनते ही मेरे लण्ड ने करवट बदली और सीधा होकर खड़ा हो गया। मैंने कहा कि मुझे क्या करना होगा तो बोली- वही जो करते हो और पैसे भी मिलेंगे।

मैं समझ चुका था कि मेरे लण्ड की बोली लगने के दिन आ चुके हैं। मैं बहुत उत्तेजित था यह सुन कर !

अगले दिन फिर मैंने उस कन्या से बात की तो उसने कहा की मैं उसके घर चला जाऊँ। तो फिर क्या था मैं गया, मैंने गेट पर बेल बजाई तो देखा एक बुढ़िया मेरे सामने आकर गेट खोल रही थी। बुढ़िया देख कर मेरी भी गांड फटने लगी। मैंने झूठ से ही कह दिया कि मैडम हैं घर पर?

तो वो बोली- हाँ !

और मेरा तुक्का भी ठीक लगा वो बुढ़िया उसके यहाँ काम करती थी. मैं अन्दर गया और उस कन्या से मिला, हाथ भी मिलाया। फिर हम दोनों एक कमरे में जाने लगे।

मैं काफी बेचैन था।

उस ने बताया कि मैं दिखने में और इस लाइन में काफी ठीक रहूँगा। तो मैंने पूछा कि किस लाइन में?

उस ने हंस कर कहा कि कॉल बॉय के काम में !

मैं भी हंसा और फिर मैंने हामी भर दी। फिर उसने मुझे सभी बातें बताई पैसे की कि इस लाइन में पैसे भी मिलते हैं !

मैंने कहा ओके।

फिर साली को क्या हुआ- उसने मेरा हाथ पकड़ कर एक प्यारी सी किस दी।

जैसा मने पहले भी कहा था कि मुझे ज्यादा तजुर्बा नहीं है इन सभी में, यह मेरा दूसरा अवसर था सेक्स का।

उसने मुझे अपने पास बुलाकर किस करने को कहा। मैंने उसे किस किस में ही नंगा कर दिया और उस बहन की लोड़ी ने भी मुझे नंगा कर दिया। मैंने उसके बूब्स देखे तो मैं फिर देखता ही रह गया था उसने उन पर कुछ लगाया हुआ था। मैंने धीरे धीरे उन्हें सहलाना सुरु किया वाह क्या मजा आ रहा था साली को बहुत ही एक्सप. था इन सब बातों का। वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और आगे पीछे करने लगी। ऐसा करने से मेरे अन्दर ४४० वोल्ट का झटका लगा और मैं उस के मुह में ही झड़ गया।

फिर साली ने कहा कि अब मेरी बारी है एसा करने की !

मैंने उसकी कम बाल वाली चूत को चाटना शुरू ही किया था कि उस ने कहा- वह स्वर्ग का आनंद ले रही है।

मैंने उसे चाट चाट कर साफ कर दिया था और दो बार जान बूझकर काटा भी था।

उसके बूब्स हिल हिल कर मेरे लण्ड को मजा दे रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में पकड़ रखा था, क्या माल थी साली वो !

फिर हम दोनों ६९ की पोसिशन में होगये और किस करते रहे।

२० मिनट बाद मैंने उसकी चूत को ऊपर उठाया और लण्ड के सामने लगाकर बोली लगाई, लण्ड का जवाब था १२००/-

मैंने कहा- चलेगा?

तो वो बोली- ठीक है।

फिर क्या था ! साली में मैंने पेल दिया अपना लण्ड !

एक बार तो वो ऐसे चिल्लाई कि जैसे गरम गरम मशाल दे दी हो चूत में और थोडी देर बाद ऐसे चुदवाने लगी कि मानो बर्फ़ वाले लण्ड पर चुद रही हो्। फिर क्या था धक्के पर धक्के लग रहे थे उसका बेड भी आवाज कर रहा कि उसे माफ कर दो।

फिर २५-३० मिनट बाद मैं झड़ा। इस बीच वो शायद कम से कम ३ या ४ बार झड़ चुकी थी।

फिर उसने मुझे पैसे दिए और धन्यवाद कहा।

मैंने कहा- यू आर वेलकम और हंस पड़ा। यह मेरी पहली बोनी हुई थी।

और तब से मैं एक काल-बॉय हूँ !

तो यारो कृपया मुझे लिखिए कि मेरी कहानी कैसी लगी Hindi Sex Stories

प्यारे दोस्तो ! Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, जी यह मेरी Sex Stories अन्तर्वासना में पहली दास्तान है।सभी अन्तर्वासना-पाठकों को मेरा सलाम और गुरूजी को मेरी तरफ़ से प्रणाम !

मैं +२ में पढ़ता हूँ, गोरा, चिकना, बड़ी-बड़ी गोल-मोल गांड ! अभी मेरे शरीर में बाल नहीं आए, चिकना चुपड़ा बदन है मेरा, मेरी चाल भी लड़कियों जैसी है। मेरे कुछ सीनियर लड़कों ने मुझ से खाली क्लासरूम में खाली समय में अपने लौड़ों की मुठ मरवाई, एक दो बार मैंने उनके लंड भी चूसे।

अकेला घर में होता तो बहन की अलमारी से उसके ब्रा, पैंटी, टॉप पहन शीशे में देखता रहता। एक रोज़ उसकी अलमारी में मैंने एक व्यस्क-पत्रिका देखी जिसमें लड़के को लड़के से गांड मरवाते देखा और लड़की को लड़की के साथ करते देख मेरा दिल भी गांड मरवाने को करने लगा।

एक दिन शाम को सब बैठ चाय वगैरा पी रहे थे कि तभी गाँव से फ़ोन आया मेरे पापा के चचेरे भाई यानि मेरे चाचा का देहांत हो गया। मेरे पेपर नज़दीक थे, मैं और दादी रुक गए, और सभी गाँव चले गए, साथ वाले अंकल को रात हमारे घर रहने को कह गए।

अंकल बहुत ठरकी थे, यह सभी लोग बताते हैं। वो अकेले घर रहते थे पीछे से वो तो कामवाली को नहीं छोड़ते। मैंने और दादी ने खाना वगैरा खाया। मैं ब्रश करने की सोच रहा था कि अंकल ने बेल बजाई। उनको अन्दर आने को कह मैं गेट लॉक करके उनके पीछे ही अन्दर गया। मैंने अंकल को कहा- आप लॉबी वाला कमरा ले लो, मैंने बिस्तर लगा दिया है।

कह मैं अपने कमरे में गया। गर्मी की वजह से मैंने निकर पहन ली और सोचा कि सोने से पहले नहा लूँ। पसीना आया था, अच्छी नींद आयेगी।

दरवाज़ा खुला ही छोड़ मैंने कपड़े उतार डाले, सिर्फ़ चड्डी पहने शावर के नीचे खड़ा नहाने लगा। पानी से मेरी चड्डी गांड से चिपक गई। तभी पीछे से किसी ने मेरी दोनों गांड के चूतड़ों को सहला डाला, पीछे से जफ्फी डाल ली।

मैंने मुड़ कर देखा तो अंकल मुझे बाँहों में लेकर पीछे मेरे साथ चिपके हुए थे।

यह क्या कर रहे हो अंकल ?

तेरे साथ नहाने का मन है, शावर एक ही है, इसलिए सोचा कि तुझसे चिपक नहा लूं ! वैसे तू बहुत चिकना है, गांड बहुत सेक्सी है, ऐसे चूतड़ तो किसी लड़की के भी न होंगे। मुझे अपनी तरफ़ घुमा के मेरी छाती देख बोले- यार ! यह तो लड़की की तरह पोली पोली है और साले यह निपल तो लड़कियों जैसे हैं।

कहते ही पानी से भीगे मेरे निपल को चूसना चालू किया। मेरी गांड में कुछ कुछ होने लगा, मुझ से रुका नहीं गया। जब अंकल मुझे गरम कर रहे थे तो मेरा हाथ भी उनके लंड पे गया, मैं सहलाने लगा।

अंकल बोले- मसल थोड़ा !

मुझे नीचे कर मेरे मुँह में लंड डाल दिया। गीला लंड, गीला बदन वो मेरे सर को पकड़ आगे पीछे करने लगे। शावर बंद कर मैंने उनके बदन पर साबुन लगते हुए उनकी चड्डी उतार डाली, लंड पे साबुन लगा दिया और ख़ुद उनके शरीर से अपने बदन को रगड़ कर साबुन लगवा लिया। वो गांड में ऊँगली करने लगे, साबुन की वजह से उनकी दो ऊँगलियाँ कब घुस गई मालूम न पड़ा।

शॉवर में साबुन उतार अंकल तौलिए से पोंछ मुझे बिस्तर पे ले आए और बोले- लंड चूस ! मुठ मार !

मेरी दोनों टाँगे कंधों पे रख लंड मेरी गांड पे रगड़ते हुए धक्का मारा, फट से लंड घुस गया मेरी गाण्ड में। अंकल ने मुझे मजबूती से पकड़ रखा था। मुझे मालूम था कि शुरू में दर्द होगा, मैंने अपने हाथ से अपना मुँह बंद कर रखा था। दूसरे धक्के में उनका आधा लंड घुस गया, मैं छटपटाने लगा दर्द से, टीस निकल रही थी कि तीसरे धक्के से लंड पूरा घुस गया।

लण्ड मेरी गाण्ड में फंस चुका था, अंकल ने निकाल के फ़िर डाला, तीन चार बार जब निकाल के डाला तो मुझे मजा आने लगा और उन्होंने मुझे छोड़ दिया। अब मैं नीचे से गांड उठा उठा उठा के चुदवाने लगा।

अंकल ने मुझे रात में तीन बार चोदा। सुबह मुझसे ठीक से चला नहीं गया, गांड पे सरसों का तेल लगाया फ़िर ठीक हुआ।

मैं स्कूल गया। शाम को पापा और अन्य लोग न लौटे तो अंकल को फ़िर रुकना था। दो रात में अंकल ने मुझे गांडू बना डाला। उसके बाद मौका मिलते में झट से उनके घर चला जाता, खूब चुदवाता, मौका रोज़ ही मिल जाता।

अंकल ने मुझे इतना चोदा कि मुझे उसके बाद गांड मरवाने का चस्का लग गया। आंटी के दुनिया से जाने के बाद ही अंकल को यह सब करना पड़ा था।

दोस्तो यह थी मेरी गांड में घुसे पहले लंड की ठुकाई !

मेरी गांड में दूसरा लंड किसका घुसा वो अगली बार लिखूंगा !

कभी अलविदा न कहना !

चलते चलते कोई लंड मिल जाए तो उसे गांड में डलवाना। Sex Stories

Hindi Sex Stories

इस वक्त मेरी उम्र पच्चीस Hindi Sex Stories साल है, मैं विवाहित और एक बच्चे की माँ हूँ। मेरे पति एक फेक्ट्री में सुपरवाइजर हैं।

जब मेरी शादी हुई तब मेरी उम्र बीस साल थी, मैं यह शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उस समय अपने एक दोस्त के साथ मेरा लव अफेयर चल रहा था, वो बहुत रोमांटिक और दिलफेंक युवक था, कभी कभी तो उसकी इस आदत का मुझ पर गहरा असर पड़ता, जहां भी किसी लड़की को अपने करीब पाता उसे वो अपनी मीठी मीठी बातों से फंसाने की कोशिश करता।

बस मैं उसकी इसी बात का बुरा मान जाती, कई कई दिन तक मैं उससे बात नहीं करती थी, वो तरह तरह से मुझे मनाने की कोशिश करता तो मैं मान भी जाती थी।

उसका और मेरा प्यार अभी तक शारीरिक सम्बंधों के बन्धन से दूर था, ऐसा नहीं था कि उसने अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी, वो कई बार मुझे चोदने की कोशिश कर चुका था, उसने कई बार मुझे सहला सहला कर गर्म भी कर दिया था, चूचियाँ दबा दबा कर उनमें आग भी भर दी थी मगर मैं अपनी मर्यादाओं की सीमा नहीं लांघना चाहती थी, मेरा इस बात पर अटूट विश्वास था कि चूत की सील सिर्फ पति तोड़ सकता है क्योंकि उस पर उसी का हक होता है।

ऐसा भी नहीं था कि मेरा प्रेमी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था, सब कुछ ठीक था मगर मैं शादी से पहले चुदवा कर सुहागरात का मजा फीका नहीं करना चाहती थी, मेरा प्रेमी कई बार गुस्से से कहता कि मैं उससे प्यार नहीं करती। उसने शादी का वादा किया, कसमें खाई, मगर मेरा एक ही जवाब था कि अगर कुछ होगा तो शादी के बाद ही होगा। मैंने उसे साफ साफ जवाब दे दिया कि मैं शादी से पहले वो चीज हरगिज नहीं दे सकती जिसकी वो जिद कर रहा है।

मगर वो चालू था, उसने कई बार चाहा कि मैं बहक जाऊं और बहक कर उसकी बात मान लूँ।

एक दिन वो मुझे एकांत में ले गया, वहाँ ले जाकर उसने मुझे सहलाना शुरू कर दिया, वो ऐसा कई बार कर चुका था इसलिए इस ओर मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वो जब भी ऐसा करता तो मैं काफी गर्म हो जाती थी मगर संयम का दामन मेरे हाथ से नहीं छूटता था, मगर उस दिन मैं अपने आप को नहीं रोक सकी।

वो मेरी दोनों चूचियों पर हथेली चला रहा था और मैं हमेशा की तरह आँखें मूंदे उसकी इस हरकत का मजा ले रही थी। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने खड़े लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
उसका लंड काफी लंबा और मोटा था, इतना ही नहीं, वो आग की तरह जल भी रहा था। जब मैंने आँखें खोल कर अपने हाथ की तरफ देखा तो मैं चौंक पड़ी,” उफ क्या है यह?”

मैंने उसका लंड हाथ से छोड़ दिया तो वो सांप के फन की तरह फुंफकार उठा, मेरा रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो गया था उस समय। मैं अच्छी तरह जानती थी कि यह लंड है मगर मैंने हर लड़की की तरह मासूमियत दिखाते हुए यह सवाल पूछा था।

हाथ से छूटते ही लंड एक तोप की तरह उपर उठा और सीधा हो गया, मैं अपनी पलकें झपका झपका कर उसे देख रही थी। मेरी मासूमियत देख कर मेरे प्रेमी के होंठों की मुस्कान गहरी हो गई।

इसे नहीं जानती, क्या है यह? उसने अपना अकड़ता हुआ लंड अपने हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।

नहीं … क्या है यह? मैंने कहा।

हाय तुम्हारी इसी मासूमियत पर तो हम फ़िदा हैं! वो फिर से मेरी चूचियाँ दबाता हुए बोला- खैर अब मैं ही बता देता हूँ कि यह क्या चीज है!

फिर वो अपने खड़े लंड को हाथ से इधर उधर घुमा कर देखता हुआ बोला- वैसे तो इसे कई नामों से पुकारा जाता है, मगर मैं इसे कुछ और ही समझता हूँ।

क्या समझते हो तुम इसे? उसके मोटे और लम्बे लंड का सम्मोहन मेरे दिलो-दिमाग पर छाता जा रहा था, उसने अपना लंड क्या दिखाया कि उस पर से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी।

मैं यहाँ झूठ नहीं लिखूंगी, प्रेमी का कठोर विशाल, फुंफकारता लंड देख कर मेरी तबियत ऐसी फिसली कि मेरी चूत के मुँह में पानी भर आया, मेरी चूत पूरी गीली हो गई और लगा कि अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं। मेरी चूचियों में भी कुलबुलाहट शुरू हो गई थी, मेरा मन यही चाह रहा था कि वो मेरी चूचियों को हाथ से पकड़-पकड़ कर खूब मसले और दबाये।

उस समय मेरी मस्ती परवान चढ़ी हुई थी, मैंने आँखें मूंद ली थी और वो कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाये जा रहा था। उस समय सी … सी के सिवा मेरे मुँह से कुछ और नहीं निकल पा रहा था।

सच कहती हूँ, उस दिन मैं मर्यादाओं को भुला बैठी, मेरा सुहागरात वाला इरादा तो ताश के पतों की तरह बिखर गया। बस सब कुछ भूल कर दिल चाह रहा था कि लंड को अपने होंठों के बीच दबा कर खूब चूसूँ!

उसका लंड सचमुच मुझे बहुत अलबेला लग रहा था, जैसा वो खुद गोरा था वैसा ही गोरा उसका बमपिलाट हथियार भी था। ताज्जुब की बात तो यह थी कि ऐसा ना तो मैंने सोचा था और ना ही कभी किया था, हाँ मगर सुहागरात वाले सपने की यह एक कड़ी जरूर थी।

उस समय मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, लंड मेरी आँखों के सामने बार बार फुंफकार मार रहा था, तभी उसने मेरी बात का जवाब दिया तो मेरी चेतना लौटी।

इसे मैं अपना छोटा भाई समझता हूँ! वो अपना लंड बड़ी मस्ती और कामुकता से सहलाता हुआ बोला।

मेरी नजरें अब भी उसके उछलते लंड पर अटकी हुई थी।

तुम इसे बहुत गौर से देख रही हो? वो मुझे अपने लंड को देखता पाकर बोला।

हूँ! शायद इसलिए कि इसे मैंने पहली बार देखा है! मैंने अपने सूखे गले को थूक से तर करते हुए कहा।

इससे तो मैं तुम्हारी पहचान बहुत पहले ही करवा देता मगर तुम तैयार ही कहाँ होती थी? उसने अपनी चमकदार आँखों से मेरी तरफ देख कर कहा।

मैंने इसकी कोई खास जरूरत नहीं समझी थी- मैंने दिल की बात छुपाते हुए कहा।

तुम्हें कैसा दीखता है यह? उसने पूछा।

उसकी बात सुन कर मुझे मजाक सूझा तो मैंने कहा- हूँ … देख रही हूँ कि इसकी सूरत तुमसे बहुत मिल रही है इसमें कोई शक नहीं कि यह तुम्हारा छोटा भाई है!

मेरी बात सुन कर वो बड़ी जोर से हंसा, वो समझ गया कि मैं मजाक में लंड और उसकी सूरत में तालमेल बिठा रही हूँ।

इसका जादू निराला है। वो बोला और अपने हाथों से लंड को सहलाने लगा।

अच्छा तो क्या यह जादूगर भी है? मैंने हैरान होकर पूछा।

इसका जादू देखना चाहती हो? उसने पूछा।

हूँ! मगर उलटी सीधी बात नहीं होनी चाहिए।

नहीं तुम्हारी मरजी के बिना यह कोई भी उलटी सीधी बात नहीं करेगा।

ठीक है, तब तो मैं इसका जादू जरूर देखना चाहूंगी। अब मेरी चूत में बुरी तरह कुलबुलाहट होने लगी थी।

मेरे प्रेमी ने मचल कर मुझसे कहा- मधु, यह कमीज अपने बदन से उतार दो!

मोहन डीयर! तुम्हीं क्यों नहीं उतार देते? मैंने मचल कर कहा।

बटन खोलना है, तुम खोल दो फिर मैं ही उतार दूंगा। वो हंसते हुए बोला।

बस क्या था, मुझ पर तो अब वासना का भूत सवार हो चुका था, मैं धीरे धीरे मदहोश होती जा रही थी, चूत अन्दर से पूरी तरह रसीली हो गई थी, मैंने तुंरत अपनी कमीज के बटनों को एक एक कर खोल दिया और बोली- लो खोल दिए बटन! तुम इसे मेरे बदन से निकाल दो!

बांह में से तो तुम्हीं को निकालना है!

मैं बांह से निकाल दूंगी तो तुम क्या करोगे?

यही तो जादू है, देखना कैसा जादू करता हूँ।

और जैसे ही मैं अपनी कमीज को हाथ ऊपर कर निकालने लगी उसने तुंरत मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया, मेरी दोनों चूचियाँ नंगी हो गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी नंगी चूचियों को पकड़ कर कस कर मसला तो मैं सिसकारने लगी।

जीवन में पहली बार किसी युवक ने मेरी नंगी चूचियों को हाथ में लिया था, मेरा गनगना उठना स्वाभाविक था, सारे बदन का रोम-रोम मरमरा उठा।

मेरी दोनों चूचियां हमेशा की तरह अपनी औकात से ज्यादा फ़ूल उठी थी, उस समय मेरी चूत भी गीली हो रही थी। ऐसा तभी होता था जब मोहन मेरी भावनाओं से खेलता था, वैसे सुबह सुबह भी चूचियाँ फ़ूल जाती थी, पहले तो उसने मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझसे बोला- जैसा दिल चाहे इस लंड के साथ वैसा ही व्यव्हार करो!

मैंने उसके बमापिलाट लंड को दबाना और सहलाना शरू कर दिया, शरीर में उसको छूने के कारण गुदगुदी हो रही थी।

जब मैंने उसका लंड पकड़ा तो मेरी चूत पहले से ज्यादा फ़ूल कर फुदफ़ुदाने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो परदे से बाहर निकल कर लंड से पहली मुलाक़ात कर लेना चाहती हो। सलवार के अन्दर वो पिंजरे में बन्द चिड़िया की तरह फुदकने लगी, मैं अपने प्रेमी मोहन का एकदम बमपिलाट कड़ा लंड उत्साह के साथ सहलाने लगी, मेरा सारा शरीर कसमसाने लगा।

फिर मेरा प्रेमी मेरी चूचियों के निप्पल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, उसकी इस नई हरकत से मेरा सारा शरीर मस्ती से काँपने लगा, मुझ पर वासना पूरी तरह सवार हो गई। उसने अपने होंठों के जादू से मेरी चूचियों के निप्पल नुकीले बना दिये।

कैसा लग रहा है? उसने पूछा।

सी … पता नहीं है … पता नहीं मुझे क्या हो रहा है … एक अजीब सा नशा मुझ पर छाता जा रहा है …

अभी मैं नया जादू शुरू करता हूँ … तुम नीचे अपने घुटनों पर खड़ी हो जाओ, इससे तुम्हें एक नया अनुभव मिलेगा! मोहन ने मुझसे कहा।

मैं नीचे घुटनों पर खड़ी हो गई, मोहन ने अपना लंड पकडा और मेरी चूचियों पर अपने लंड का सुपारा रगड़ना शुरू कर दिया, उसने सच कहा था कि उसके लंड में अजीब सा जादू भरा था, मेरा सारा शरीर झनझना उठा, पहली बार दिल में एक इच्छा जागी कि उसके लंड की छाँव तले सो जाऊं और सारी उम्र नहीं जागूँ। मैं एक अजीब सी दुनिया में खो चुकी थी जहां हर तरफ मस्ती और खुशी का बोल-बाला था।

अब कैसा लग रहा है? उसने एक बार फिर पूछा।

सी … कुछ ना कहो … कुछ ना पूछो … ! मैंने कसमसा कर कहा- बस इसे ऐसे ही मेरे दिल से रगड़ते रहो।

फिर उसने अपना लंड ठीक मेरी चूचियों के बीच में रख कर उन्हें आपस में सटा दिया, चूचियों के आपस में सट जाने से बीच में एक पतली सी गली बन गई थी, उसी गली में लंड फंसा था, बड़ा ही मजेदार नजारा था, मैंने उसे पूरा सहयोग करने का मन बना लिया था, फिर वो मेरी चूचियों पर धक्के लगाने लगा, उसके लंड के सुपारे से कोई चिकनी सी चीज रिस रही थी, जिसकी वजह से चूचियों के बीच बनी उस पतली गली का रास्ता चिकना हो गया था। मोहन अब उस पतली गली में आसानी से अपने लंड को घुमा रहा था, वो अपने लंड को ऊपर-नीचे कर धक्के लगा रहा था और उसका लंड चूचियों के बीच से अपनी मुंडी निकाल कर बार बार मुझे देख रहा था। उस समय मैं पूरी तरह बावली सी हो गई, इधर चूत के अन्दर गर्मी कुछ इस तरह बढ़ी कि मैंने हथियार डाल दिये।

सी … बस … बस … मैं हार गई! मैंने तड़प कर कहा- अब तुम इसका जादू यहाँ पर दिखाओ।

मैंने अपनी चूत की तरफ इशारा किया और उठ कर जल्दी से अपनी सलवार खोल डाली।

ठीक है! वो मेरी जाँघों के बिच देखते हुए बोला- यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो अपना काम तो सेवा करना ही है।

मैं सलवार उतार कर लेट गई, उसने मेरी जांघें फैला दी और मुस्कुराता हुआ बड़े प्यार से मेरी चूत को सहलाने लगा, इससे मैं और भी ज्यादा खौल उठी।

सीऽऽ जल्दी आओ ना! मैंने अपने हाथ से अपनी चूत को रगड़ते हुए कहा- यहाँ … यहाँ … कोई चीज खौल रही है! सी … ई … हाय … माँ …

फिर वो थोड़ा सा झुका और एक लम्बा मस्त चुम्बन मेरी चूत पर धर दिया, चूत उसके होंठों का स्पर्श पा कर सरसरा उठी, फिर उसने ढेर सारा थूक मेरी चूत के ठीक बीच में टपका दिया और उसे अंगुली से अच्छी तरह रगड़ा और वहाँ अपना लंड सटा कर मेरी तरफ देखा और बोला- अब आ रहा है!

आऽऽ आने दो सइयां … मैंने कसमसा कर कहा- इतनी देर क्यों लगा रहे हो! बुद्धू इसे देख कर तो मैंने अपनी कसम तोड़ दी है!

इसका फायदा भी तुम्हें मिलेगा! इतना कह कर उसने मेरे दोनों संतरों को अपने हाथों में ले लिया। उसका फुंफकार मारता बमपीलाट लंड बहुत जबरदस्त और कठोर था और पूरी मुस्तैदी के साथ चूत की खास जगह से सटा हुआ था, मेरी चूत उसे इतना करीब पा कर बौखला रही थी, वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि जल्द से जल्द लंड से तालमेल बिठा कर उसे हजम कर जाना चाहती थी।

आ रहा है! मोहन ने एक जोरदार आवाज में कहा।

आने दो! मैं भी बुलंद आवाज में बोली।

बस फिर एक जोर का झटका मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, ऐसा लगा कि मैंने बिजली का नंगा तार छू लिया हो, जैसे किसी ने एक चूहे को दुम से पकड़ कर जमीन पर एक जोरदार पटखनी लगाई हो। एक तीखी टीस सी पीड़ा चूत से उठी और सीधा मेरे दिमाग से टकराई, मेरे मुँह से चीख निकली- ऊई … माँ … ये सी … ये क्या हुआ? मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत देखी तो उसका मुँह एक फटे हुए जूते की तरह खुला हुआ था और एक भारी भरकम पैर की तरह उसका लंड मेरी चूत में फंसा दिख रहा था।

ओफ्फो … क्या हुआ? मेरी चीख पर मेरे प्रेमी ने बौखला कर पूछा।

ऊं … हूँ … तुम्हें दिख नहीं रहा है क्या? मैंने उसे आँखों के इशारे से अपनी चूत दिखाई- देखो … सी … देखो तुम्हारा … सी … ई … छोटा भाई … छोटी सी जगह पर किस तरह फंसा पडा है, ऊई … ऊई माँ … मर … गई … आह … मुझे दर्द हो रहा है!

इसमें इतना रोने पीटने की जरूरत नहीं है! वो मेरी चरमराती चूत को सहलाते हुए बोला- यह जगह बनी ही इसके लिये है, यहाँ अब तुम्हें मेरा छोटा भाई फंसा दिख रहा है, इसमें हैरानी की क्या बात है, आज नहीं तो कल यहाँ किसी ना किसी का छोटा भाई फँसना ही था!

उफ … दर्द हो रहा है! मैंने दर्द से नाक सिकोड़ कर कहा- क्या अब यह बाहर नहीं निकल सकता? हूँ … मुझसे इसकी जलन बर्दास्त नहीं हो रही … सी … सी …

अब तो ये आगे जाएगा! इतना कह कर उसने एक और वैसा ही झटका आगे की ओर मारा, चूत से एक अजीब सी आवाज निकली, जैसा कपड़ा फटते समय निकलती है, फिर उसका लंड चूत में समाधी रमा बैठा, अब मैं उछल रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपारा मेरे गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था, सुपारे की रगड़ से गर्भाशय के मुँह पर मीठी मीठी गुदगुदी हो रही थी- ऊई … अब तो … हाय … अब तो मैं उछल भी रही हूँ …

ऐसा ही होता है! वो मुस्कुरा कर बोला, वो मेरी चूचियों को दबाने लगा। एक बार फिर मैंने अपनी जाँघों के बीच देखा तो वहाँ गहरे लाल रंग का खून बूंद बूंद होकर टपक रहा था।

हाय … सी … वही हुआ … जो मैं सुहागरात से पहले नहीं चाहती थी, तुमने इसका खून कर ही दिया, हटो … तुम … बड़े वो हो … मैं तुमसे नहीं बोलती!

तुम्हें बोलने को कौन कह रहा है मेरी जान! वो मुझे चूम कर बोला- अब तो तुम देखती रहो … तुम्हें मैं कैसे कैसे जलवे दिखाता हूँ!

उसने चूत पर ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैं आह … ऊई … सी … के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी, चूत की कच्ची दीवारें काँप रही थी, मुझे अच्छी तरह याद है की दसवां धक्का मेरी जवानी को ठंडा कर गया था.

फिर जब तक मेरी शादी नहीं हो गई वो इसी तरह मेरी चूत पर कहर ढाता रहा था, मुझे चुदाई से बहुत सुख मिलता था, इसलिए मैं बिना डोर उसकी ओर खिंची चली जाती थी, उसने चूत पर पूरा अधिकार जमा कर उसका नक्शा ही बदल डाला था, अब पेशाब करते समय चूत से तेज सीटी की आवाज निकलने लगी थी, किसी कारणवश उसका और मेरा जीवन भर का साथ नहीं हो सका था, यह बात बहुत लम्बी है, यहाँ लिख कर मैं आप सबका समय खराब नहीं करना चाहती। Hindi Sex Stories

Antarvasna

घर में हम तीन लोग Antarvasna ही रहते थे- मैं, मेरी भाभी और भैया। मेरा अधिकतर समय कॉलेज में या खेलने कूदने में ही निकलता था।

मेरा एक दोस्त उस समय एक छोटी सी दुकान से अश्लील पुस्तकें लाया करता था। वो किताब उसने मुझे भी पढ़ने दी। धीरे धीरे मुझे सेक्स की उन अश्लील किताबों को पढ़ने मे मजा आने लगा था। उस मित्र ने उस दुकान वाले से मेरी जान पहचान करवा दी थी। अब मैं भी, जब पैसे होते थे, तब पढ़ने को पुस्तक ले आया करता था। पढ़ते समय ज्यादातर मेरा लण्ड खड़ा हो जाया करता था।

एक बार रात को जब मैं पुस्तक पढ़ रहा था तब मेरा लण्ड खड़ा हुआ था। अनजाने में मेरा हाथ लण्ड पर आ गया और मैंने उसे दबा डाला। फिर मुझे उसे ऊपर नीचे करने में मजा आने लगा। तभी मेरे लण्ड में से जोर से कुछ गाढ़ा सा सफ़ेद लसलसा सा छूट पड़ा। मैं हैरान रह गया… पर पुस्तक में पढ़ा था कि जब जोर की मस्ती चढ जाती है तो वीर्य स्खलित हो जाता है। यह मेरा प्रथम स्खलन था। मैंने जल्दी से जाकर अपनी चड्डी बदल ली। पर भूल गया कि भाभी इसे कपड़े धोते समय धोएंगी। भाभी ने उसे अवश्य देखा होगा धोते समय क्योंकि अब भाभी मुझ पर नजर रखने लग गई थी।

एक दिन भाभी ने झिझकते हुये मुझसे कह ही दिया,”भैया, आजकल आप बिगड़ते जा रहे हो।”

“न…न… नहीं तो भाभी … क्या हो गया ?”

“आजकल आप चड्डी बहुत बदलते हो…”

मैं बुरी तरह से हड़बड़ा गया,”वो भाभी, आजकल जाने कैसे, कुछ हो जाता है और…!”

“चड्डी बदलनी पड़ती है, है ना? ऐसी पुस्तकें पढ़ोगे तो यह सब होगा ही…”

इसका मतलब भाभी ने मेरी अनुपस्थिति में मेरे बिस्तर के नीचे से वो अश्लील पुस्तकें ढूंढ ली थी और उसे पढ़ा था।

“वो … मेरा दोस्त है ना … उसने पढ़ने को दी थी।”

“अब नहीं लाते हो क्या?”

“जी… मेरे पास पैसे नही रहते ना…” मुझे भाभी का यह पूछना कुछ सकारात्मक सा लगा।

“ओह हो … बस पैसे की बात थी … मेरे से ले जाया करो… मुझे भी ये पुस्तकें अच्छी लगती हैं।”

यह सुनते ही मेरी तो बांछें खिल गई,”आप पढ़ेंगी ? भैया को मत बता देना… !”

अब तो रोज मैं अश्लील कहानी की पुस्तकें लाने लगा। भाभी उसे दिन में पढ़ती थी और मैं रात को पढ़ता था। अब भाभी मुझे भैया से छुपा कर ज्यादा जेब खर्च देने लगी थी।

उन्हीं दिनों मेरे उसी मित्र ने मुझे बताया कि अब पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है, ये तो कम्प्यूटर में अन्तरवासना में फ़्री में पढ़ने को मिल जाया करती हैं। तब मैं ये कहानियाँ अन्तर्वासना पर पढ़ने लगा। भाभी को भी मैंने अन्तर्वासना के बारे में बता दिया। इसमें कहानी पुस्तकों से बहुत अच्छी पढ़ने को मिलती थी, मजा भी खूब आता था। अब तो बस जब इच्छा हुई, कहानी पढ़ ली। बस मजे की बात यह हुई कि भाभी को कहानियाँ पढ़ने के लिये मेरे कमरे में आना पड़ता था। फिर कहानी पढ़ते समय उसकी हालत देखने योग्य हो जाती थी। उसकी छातियां यूं ऊपर नीचे होने लगती थी कि बस मन करता था कि दबा दूँ जाकर।

इन दिनों मुझ में बहुत बदलाव आता जा रहा था। मेरी नजर भाभी पर पड़ने लगी थी। मुझे उसके स्तन उत्तेजक लगने लगे थे। मेरी नजरें हमेशा उसके पेटीकोट में कुछ ढूंढती रहती थी। मुझे लगता था कि भाभी जानकर के मेरे सामने कम कपड़ों में आती है। ना तो चूंचियां छिपाती है और ना ही अपने अन्य अंग।

एक दिन ऐसे ही मेरे दोस्त ने मुझे ब्ल्यू सीडी लाकर दी। मैंने यह शुभ सूचना भाभी को दी और देखने के लिये बीस रुपये भी किराये का बहाना कर के ले लिये। पर अब वो फ़िल्म अपने टीवी पर देखा करती थी। यहां से आरम्भ होता है भाभी के साथ मेरा अंतरंग प्रसंग…।

भाभी अश्लील मूवी देख रही थी। मेरे कमरे में आने का उस पर कोई प्रभाव नही पड़ा, बस मुझे एक बार देखा और फिर से फ़िल्म देखने में तल्लीन हो गई। मैं भी एक तरफ़ सोफ़े में बैठ गया और फ़िल्म देखने लगा। कुछ ही देर में मेरा लण्ड पजामे में से फ़ुफ़कारने लगा। मैंने अपना लण्ड थाम लिया। मैंने अपने आप को बहुत रोका पर मन बावला हो गया था। मैं धीरे से उठा और भाभी के पीछे आ गया। बहुत साहस जुटा कर मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रख दिये। भाभी का शरीर गर्म था, मेरे हाथ रखने उसने कुछ नहीं कहा। मेरा साहस और बढ़ गया, तब मैने अपना हाथ नीचे सरका कर भाभी के कठोर और उन्नत उरोजों पर रख दिया।

मैंने हिम्मत करके स्तनों को धीरे से सहला कर दबा दिया। भाभी के मुख से एक प्यारी सी सिसकी निकल पड़ी, पर उसने मुझे कुछ नहीं कहा। मुझे उसने पीछे मुड़ कर देखा और अपनी नशीली आंखों से आंखें मिला दी। मैंने कुछ नही कहा, बस हौले हौले कठोर पत्थरों को सहलाता रहा। उसने मेरा हाथ थाम लिया और अपने पास बैठने का इशारा किया। मैं घूम कर वापस उसके पास आ गया और साथ में बैठ गया। उसकी पीठ की तरफ़ से हाथ डाल कर फिर से भाभी की चूचियाँ दबाने लगा।

मेरे मन में विचित्र सा आभास होने लगा था। भाभी की दिल की धड़कनें मुझे अब महसूस होने लगी थी। मेरे सफ़ेद पतले से पजामे मे मेरे लण्ड का उभार देख कर उसे पकड़ लिया। भाभी का मुख मेरी ओर बढ़ चला … अधरों से अधर मिल गये। चुम्बन और मर्दन का काम एक साथ चलने लगा था। मैंने टीवी बन्द कर दिया। बस कमरे में अब तेज सांसो की आवाज आ रही थी, बीच बीच में भाभी सिसक उठती थी। लण्ड मसलने से मुझे बहुत ही मजा आने लगा था, मेरे शरीर में जैसे आग सी लग गई थी। मैंने अपना हाथ भाभी की चूत की तरफ़ बढ़ा दिया। उसने अपना पेट पिचका कर मुझे हाथ पेटीकोट के अन्दर घुसाने दिया और धीरे से अपनी टांगें फ़ैला कर आमन्त्रित किया। जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत तक पहुंचा वो तड़प सी गई।

मेरा हाथ उसकी चूत को सहलाने लगा। भाभी भी अपनी चूत को ऊपर कर के मेरी अंगुली को उसमें घुसवाने का प्रयत्न करने लगी। मेरे पजामे का नाड़ा उसने खोल दिया था और मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया था। उसने मेरा सुपाड़ा चमड़ी खींच कर बाहर निकाल लिया। ट्यूब लाईट में लाल टमाटर जैसा चमकदार सुपाड़ा जैसे उसके मन को भा गया। वो मेरे लण्ड पर मुठ मारने लगी। दोनों के शरीर वासना की मीठी अग्नि में जल उठे। कुछ ही समय में मेरा वीर्य छूट गया, शायद भाभी का भी रस निकल गया था, उसकी चूत में भी बहुत सा गीलापन आ गया था। भाभी ने अपना हाथ कपड़े से साफ़ कर लिया और अपने कपड़े ठीक से पहन कर चली गई। रात के दस बज रहे थे, भैया के आने का समय हो गया था। मैंने सीडी छुपा कर रख दी।

कुछ ही देर में भैया आ गये थे। सभी ने साथ भोजन किया और अपने अपने कक्ष मे चले गये।

कहानी के अगले भाग में भाभी और मैंने क्या क्या गुल खिलाये, जरा लण्ड थाम कर पढ़िये। Antarvasna

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