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मेरा नाम सुरेश है और ये कहानी मेरी और मेरे विधवा Antarvasna भाभी की है। ये कहानी मेरी एक दम सच्ची है।
जब हमारे घर पर सिर्फ़ हम दोनों ही थे क्योँकि हमारे माता पिता का दो साल पहले ही निधन हो गया था और उस के एक साल के बाद मेरे भाई ने शादी कर ली और हम घर में दो से तीन हो गये। मेरा भाई अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था और लौटने में काफी वक्त लगता था। मेरी भाभी एक अच्छी और सुशील लड़की थी और उन का फिगर था ३८ २८ ३८ । जब वो चलती थी तो उन की गांड देख कर हर कोई यही चाहता था कि उन की गांड मारे।
शादी के ६ महीने बाद मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया और वो उस एक्सीडेंट में मर गया और उस कारण भाभी थोडी से पागल सी हो गई थी और अब घर की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। मैंने अपनी पढ़ाई छोड़ कर नौकरी करना शुरू किया और देखते ही देखते मैंने भाभी का इलाज कर लिया और वो अब ठीक हो गई थी और फिर भाभी के घर वालों ने भाभी की दूसरी शादी की बात की तो भाभी ने मना कर दिया क्योँकि वो जानती थी कि अगर उन्होंने दूसरी शादी की तो मैं अकेला रह जाउंगा और इस वजह से उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और हम लोग हसी खुशी रहने लगे।
पर एक दिन जब मैं जब काम से लौटा तो मैंने दरवाज़ा खुला पाया और जैसे मैंने अन्दर जाकर देखा तो भाभी कपड़े धो रही थी और उन की साड़ी काफ़ी ऊपर तक उठी हुई है और उन की सारे कपड़े भीग गए थे जिस से उनकी अंदर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी और जैसे ही मैंने उन की ब्रा देखी, मैंने देखा कि भाभी एक दम लो कट ब्लाउज़ पहने है और उनके बूब्स भी दिख रहे है, तो उसी वक्त मेरे लंड खड़ा हो गया
मैंने अपने रूम में जाकर उसे ठीक किया और फिर भाभी को आवाज़ लगा कर कहा कि चलो कहीं घूम कर आते है। वो राजी हो गई। हम लोग ट्रेन से गए। लौटते समय ट्रेन में काफी भीड़ थी, जिस के कारण मैंने भाभी को सामने किया और मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और कुछ देर बाद मुझे किसी ने धक्का मारा, जिस के कारण मैं उन के करीब हो गया इतना करीब कि मेरा लण्ड उनकी गांड को हौले से टच करने लगा। उन्होंने ये महसूस किया और जैसे ही मेंने पीछे हटने की कोशिश की तो वो भी पीछे हट रही थी। मेंने सोचा कि शायद भीड़ के कारण वो पीछे हटी होंगी पर जब हम लोग घर पहुंचे तो मैंने महसूस किया कि भाभी का आज रंग कुछ बदला है और उन की चाल भी कुछ बदली हुई है।
और फिर हम लोग खाना खा कर अपने अपने रूम में चले गए पर रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी जिस से मैंने टीवी रूम में बैठ कर टीवी चालू किया और टीवी देखने लगा। टीवी की आवाज़ सुनकर भाभी भी वहां आ गई और पूछा कि क्या तुम्हे नींद नहीं आ रही है जैसे ही मैंने उन को देखा तो मेरा लण्ड एक खंभे की तरह खड़ा हो गया क्योँकि उन्होंने एक दम मलमल जैसी पतली नाईटी पहन रखी थी जिसमें से उनकी ब्रा और उन की पैन्टी भी एक दम साफ़ दिखाई दे रही थी।
ये देख कर मेरा लण्ड अब फ़ड़फ़ड़ाने लगा था। जैसे ही वो मेरे पास आई और सोफे पर बैठे हुए उन्होंने कहा कि इतनी सर्दी में तुम्हें पसीने छूट रहे हैं तो मैंने डर गया और अपनी नज़र हटा ली।। हाथ मेरे लण्ड पर रख लिए और फिर कुछ नहीं कहा पर मेरी नज़र उनके बूब्स पर ही थी।
कुछ देर बाद भाभी ने मुझे कहा कि उन के सारे बदन में दर्द हो रहा है और उनको मालिश करनी है तो मुझ से पूछा कि क्या कोई है जिसे तुम जानते हो तो मैंने कहा कि नहीं पर मुझे मालिश करनी आती है तो वो पहले मुस्कुराई और कहा कि अच्छा और मेरे करीब आ गई और मुझे कहा कि क्या तुम मेरी मालिश करोगे?
तो मैंने हाँ में सर हिलाया और फिर वो मुझे अपने रूम में ले गई और लेट गई और कहा कि चलो अब मेरी मालिश करो मैंने पहले उन के पैर से शुरू किया ५ मिनट और फिर मैंने उन से कहा कि क्यों न आप अपनी गाऊन उतार दें, तो उन्होंने झट से उसे उतार दिया। अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी और मैंने उन को ऐसे पहली बार देखा था और फिर मैंने तेल की बोटेल ली और उन की पीठ पर लगाना शुरू किया कुछ देर मालिश करने के बाद मेंने भाभी से कहा कि आप की ये ब्रा मुझे चुभ रही है तो उन्होंने कहा कि इसे भी खोल दो, तो मैने उसे भी खोल दिया और फ़िर मैंने भाभी को पीठ के बल लेटने को कहा जैसे ही उन्होंने करवट ली तो उनकी नज़र मेरे तने हुए लण्ड पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि सुरेश ये क्या है तो मैने कहा कि ये मेरा हथियार है जैसा भाई के पास था बिल्कुल वैसे ही।
तो भाभी ने कहा कि चलो मैं अब अपनी पैंटी उतारती हूं और तुम अपना ये शोर्ट उतारो, तो मैंने पहले मना कर दिया पर भाभी ने कहा कि मैंने तो अपनी ब्रा और पैंटी उतारने में तो कुछ नही कहा और तुम सिर्फ़ अपना शोर्ट उतरने के लिए इतना सोच रहे हो। तो मैंने कहा की आप मेरी भाभी है तो उन्होंने कहा कि चलो आज से तुम मुझे मेरे नाम से बुलाना और उन का नाम पिंकी था और फिर उन के इतना कहने के बाद मैंने अपना शोर्ट उतार दिया।
जैसे ही मैंने अपना शोर्ट उतारा तो वो मेरे लण्ड को देख कर दंग रह गई और कहा कि तुम्हारा लण्ड तो वाकई बहुत बड़ा है उन्होंने पूछा कि ये कितना लंबा है तो मैंने कहा कि ये ९ इंच का है तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे भाई का तो सिर्फ़ ५ इंच का था उन्होंने ख़ुद कहा था।
अब भाभी और मैं एक दम नंगे थे और फिर भाभी मेरे लण्ड को घूर रही थी और मैं उन की चूत को घूर रहा था। फिर भाभी ने कहा कि अब मेरे बूब्स की मालिश करो मैं उनके बूब्स को दबाने लगा था और भाभी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में ले लिया और उस को सहलाने लगी और मुझे भी मज़ा आने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना सारा माल उन के हाथ और उन के बूब्स पर गिरा दिया। मैंने उन को सॉरी कहा पर उन्होंने कुछ नही कहा और जो मेरा माल गिरा था वो उसे चाटने लगी और बड़े मज़े से चाटने लगी। मेरे सामने ही अपनी चूत में ऊँगली डाल कर रगड़ने करने लगी और मुझे देखने लगी और वो कुछ अजीब सी आवाजें निकल ने लगी आआ ऊऊओ ईईए फिर कुछ देर बाद उन की चूत में से भी पानी निकल गया और वो शांत हो गई।
फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी! मैं सोने जा रहा हूं तो उन्होंने कहा कि मैंने तुम को कहा कि तुम मुझे नाम से बुलाना तो मेंने उनको नाम से बुलाना शुरू किया। फिर मैं अपने रूम में चला गया और जब सुबह को उठा तो मैंने देखा कि रात की उस सेक्स मसाज़ की वजह से मेरा लण्ड काफी बड़ा हो गया था मैंने सोंचा कि चलो अब पिंकी किचन में होगी तो मैंने कुछ नही पहना और किचन की ओर चला गया। देखा तो पिंकी वहीं थी।
जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो कहा कि तेरा लण्ड तो रात से भी ज्यादा बड़ा हो गया है। तो मैंने कहा कि ये सब आप ही मेहरबानी है तो वो हंसने लगी और कहा कि क्या तुम भी वही चाहते हो जो मैं चाहती हूं?
तो मैंने कहा कि इस के बारे में बाद में बात करते हैं और मैं बाथरूम में गया और कुछ देर बाद भाभी को आवाज़ लगाई। मैंने कहा कि पिंकी ज़रा साबुन देना। तो वो समझ गई और अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में आ गई और कहा कि आज हम दोनों मिल कर नहाएंगे। तो मैंने कहा कि ठीक है और उन्होंने साबुन अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू किया और मैं उनको देखने लगा। उन्होंने पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो? तो मैंने कहा कि मैं आप के…… आप के बूब्स और गाण्ड को देख रहा हूं, मुझे ये बड़े मस्त लगते है। तो उन्होंने कहा कि क्या तुम इन्हे छूना चाहते हो क्या तो मैंने हामी में सर हिलाया और वो मेरे करीब आइ और मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया और मुझे उनके बूब्स को दबाने को कहा।
और मैंने उन के बूब्स को दबाना शुरू किया और उनकी गांड को सहलाना शुरू किया। वाह दोस्तो, क्या गाण्ड एक दम सॉफ्ट। और मैंने देखा उनकी फ़ुद्दी पर एक भी बाल नही था। मेंने उन के बूब्स को मुँह में ले लिया और उन की फ़ुद्दी को अपनी हाथ से रगड़ने लगा और वो जोश में आकर आआऊऊश ह्श्श्श्श् कर ने लगी। तो मैं उन को बेडरूम में ले गया और उनको लिटा दिया और उन के बूब्स को चूसने लगा और उन की फ़ुद्दी को अपनी ऊँगली से चोदने लगा। फिर उन्होंने कहा कि सुरेश मेरी चूत को चाटो तो मैंने उनकी फुद्दी को चाटना शुरू किया, वो अभी जोश में आ गई और जोर से कराहने लगी आआऊऊ श्श्श्श्श्स ईई ऊऊ और चाटो और चाटो कह रही थी।
१० मिनट चाटने के बाद उन्होंने कहा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मैंने कहा कि मैं आप का रस पीना चाहता हूं। इतना कहा ही था कि वो झड़ गई और मैंने उनका सारा रस पी लिया और फिर मैंने उनको उठाया और मेरा लण्ड उनके मुँह में दे दिया और उनको चूसने को कहा। उन्होंने खूब चूसा और अच्छा चूसा। १० मिनट के बाद जब मैंने उनसे कहा कि मैं झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मैं भी तुम्हारा वीर्य पीना चाहती हूं और मैंने अपना सारा वीर्य उनके मुँह में झाड दिया और उन्होंने मेरा सारा वीर्य पी लिया और फिर हम एक दूसरे से लिपट कर सोये रहे।
फिर ५ मिनट के बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया और मैंने उन से कहा कि चलो अब मैं तुम्हारी चूत मारता हूं और उन को लिटा दिया और उनकी फ़ुद्दी के द्वार पर मेरा लण्ड रखा और एक धक्का मारा और मेरा आधा लण्ड उनकी फुद्दी में चला गया और वो दर्द के कारण चिल्लाई और मैंने उन से पूछा कि क्या आप को दर्द हो रहा है? तो उनहोने कहा की मेरी फ़ुद्दी ने ७ महीने से लण्ड नही खाया न इसीलिए दर्द हो रहा है। मैंने अपना काम जारी रखा और फिर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उन की चूत में घुस गया और मैंने देखा कि उन की फुद्दी में से खून निकल रहा है तो मैंने कहा कि तु्म्हारी फुद्दी में से खून निकल रहा है तो उन्होंने कहा कि तु्म्हारा लण्ड इतना बड़ा है न।
और फिर मैंने धक्के लगाना चालू किया और कुछ धक्के मरने के बाद उनको भी मजा आने लगा और वो भी अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत मरवा रही थी और फी ऊऊ श्श्श्शसह म्म्म्म्म्म और कह रही थी कि और डालो और डालो और डालो सुरेश, मेरी फुद्दी को फाड़ दो मेरी फुद्दी को फाड़ दो और हमारी ये चुदाई ४० मिनट तक चलती रही और बाद उन्होंने कहा कि अब बस करो पर मैं कहाँ मानने वाला था फिर उस के १० मिनट के बाद मेंने उन से कहा कि में झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मेरी फुद्दी में झाड दो और मैंने उन की फ़ुद्दी में झड़ गया और उन के ऊपर लेट गया. फिर हम दोनों वैसे ही लेटे रहे और फिर हमने पूरा दिन कम से कम ८ बार चुदाई की और फिर रात को भी हमने चुदाई की। अब भाभी मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है और मैंने उन से शादी कर ली.Antarvasna
मेरा तलाक हुए करीब 3 साल Antarvasna हो चुके थे। मेरी शादी जब मैं 19 साल की थी तब कर दी गई थी। मेरा पति मुझसे दस साल बड़ा था। उस समय तक मैं चुदाई और सेक्स के खेल से अनभिज्ञ थी। सुहागरात को उसने मेरी चुदाई नहीं की थी पर मुझसे मुख-मैथुन किया था। अपना लण्ड मुझसे चुसवाया था, जो मेरे लिये एक नया नया दर्दनाक अनुभव था। मुँह में लण्ड डाल कर मेरा मुख चोदता था, फिर ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में ही निकाल देता था। मुझे बहुत ही घिन आती थी और फिर मुझे उल्टियां होने लगती थी। फिर उसने मेरी गाण्ड मारी थी। यूँ तो चिकनाई भी लगाई थी, पर जाने क्यूँ मेरी गाण्ड एकदम टाईट हो जाती थी, वो मुझे तमाचे मार मार गाण्ड में लण्ड घुसेड़ देता था। मेरी गाण्ड लहूलुहान हो जाती थी। मुझे बहुत ही पीड़ा होती थी। पर पिटाई के बीच गाण्ड मारना मेरे लिये दर्द भरा हादसा था। मैं बहुत उससे बहुत डर गई थी।
डर के मारे अगले दिन मैं बीमारी का बहाना कर अपनी सास के पास सो गई थी। पर आखिर कब तक बहाना करती। फिर मैंने हिम्मत करके अपनी सास को कह ही दिया। मेरी बात सुनते ही वो चिन्तित हो उठी। सास ने मुझे वादा किया कि वो उन्हें समझा देगी। पर रात को उसने मुझे फिर से अपना लण्ड मेरे मुख में डाल कर मुख मैथुन किया और फिर बाद में मेरी गाण्ड भी मारी। मैंने बहुत सहा, लगभग एक महीना होने को आया, मेरी सास ने उसे कुछ नहीं कहा। फिर उसने मेरी चूत चोदी। चूंकि पहली बार चुदी थी तो फिर वही तकलीफ़ हुई थी। मेरे पति का लण्ड भी मोटा और लम्बा था, इस कारण रोज़ गाण्ड मरवाने में और चुदवाने में मुझे बहुत तकलीफ़ होती थी।
एक दिन मैंने अपनी मां से कह कर अपने शहर वापिस आ गई। मेरी हालत देख कर मुझसे मेरी मां ने पूछ ही लिया। मैंने रो रो कर सारी बातें बता दी। मेरे पापा ने दूसरे ही दिन मेरे पति से बात की। पर उसने बहुत ही बद्तमीज़ी से बात की। अन्त में हार कर पापा ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दे डाली। मेरा पति भी मुझसे परेशान था अतः तलाक में अधिक परेशानी नहीं आई। मुझे अब उन नारकीय दुःखों से छुटकारा मिल ग़या।
लगभग तीन साल बाद मुझे अचानक एक फोन आया। कोई अशोक नाम का लड़का था। उसने कहा कि उसने बहुत मुश्किल मेरा मोबाईल नम्बर प्राप्त किया है और मुझसे शादी करने की इच्छा रखता है। उसने बताया कि वो एक पढ़ा-लिखा सरकारी अफ़सर है… उसे मेरे तलाक के बारे में पता है। मैं दिखने में बहुत सुन्दर हूँ, शरीर से दुबली पतली हूँ, लगभग 5 फ़ुट 4 इन्च की हूँ। मैंने पास में स्कूल में नौकरी कर ली थी। बस मुझमें सुन्दरता ही एक खूबी थी, जिसके कारण लड़के मुझसे दोस्ती करना पसन्द करते हैं। पर उनकी मन्शा मात्र मुझे चोदने तक की होती है। सभी को पता है कि मैं तलाकशुदा हूँ।
एक दिन वो मुझे स्कूल में मिलने आ गया।
“मेरा नाम अशोक है, मैंने ही आपको फोन किया था।”
विजिटिंग रूम में हम लोग बातें करते रहे, उसका व्यवहार अच्छा था, वो सुन्दर था और शरीर से भी लम्बा और बलिष्ठ नजर आ रहा था। उसके बाद से वो मुझसे मिलने अक्सर स्कूल आ जाता था। मेरी छुट्टी होने पर हम दोनों एक पेड़ के नीचे खड़े हो कर बाते करते थे। धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ गई। अब वो मेरे लिये गिफ़्ट भी लाता था। हम दोनों मोबाईल पर भी खूब बतियाने लग गये थे। एक दिन मेरे घर पर अशोक अपने पापा के साथ आया और उन्होने मेरा हाथ मांग लिया। मेरे पापा खुश हो गये कि मुझे मेरी ही जात वाला एक प्रतिष्ठित युवक मिल गया। उन्होने तुरन्त ही इस रिश्ते की मंजूरी दे दी। सादे तरीके से हमारी सगाई हो गई।
अब रोज ही शाम को अशोक मुझसे मिलने आता था और हम दोनों कार में घूमने निकल पड़ते थे। मै उसके प्यार में खो चुकी थी। हम दोनों बाग में अक्सर एक दुकान के आगे रुक कर पेप्सी या थम्स अप पिया करते थे।
ऐसे ही एक दिन उसने भावावेश में मुझे अपने से लिपटा लिया और मेरे होंठ चूम लिये। मैं आनन्द से भर गई। मुझे भी पुरुष का शारीरिक स्पर्श का आनन्द बहुत दिनो बाद हुआ था। सो मैं उससे लिपटी रही। इसी दौरान उसने मेरे चूचियों को हल्के से छुआ भी और सहलाया भी। मुझे एक अलग ही आनन्द आने लगा था। यूं तो मैं शारीरिक स्पर्श से डरती थी… पर यह पहले जैसी अनुभूति नहीं थी। मुझे इसमे आन्तरिक सुख मिलता था। मैंने इसका कोई विरोध नहीं किया। हम दोनों इस असीम सुख का आनन्द उठाते रहे। अब हमारा जब भी घूमने जाना होता तो हम एकान्त में कार रोक कर आपस में खूब चिपका चिपकी करते थे। फिर जाने कैसे एक दिन मैंने होश खोते हुये उसका लण्ड थाम लिया… और उसे बहुत देर तक सहलाती रही। एक अनजानी सी सुखद वासना भरी अनुभूति हुई। मेरे मन में उसके लण्ड के लिये प्रीति जाग उठी, मैं कभी कभी उसका सुपारा चूम लेती थी।
एक दिन उसका सहलाते सहलाते उसके लण्ड में से वीर्य निकल गया, उसकी पैन्ट गीली हो गई। उस दिन अशोक ने भी मेरी चूत के आस पास सहलाया था। मेरी जीन्स की जिप खोल कर मेरी चूत में अंगुली भी दबाई थी। चूत का गीलापन उसे बहुत अच्छा लगा था।
एक दिन सवेरे जब मैं स्कूल जा रही थी तो अशोक का फोन आया कि आज की छुट्टी ले लो, घर पर कोई नहीं है, दोनों घर पर बातें करेंगे। मैंने स्कूल में फोन करके छुट्टी ले ली और उसके साथ उसके घर आ गई। घर बिलकुल खाली था।
उसने अपना घर मुझे दिखाया… फिर अपना कमरा भी दिखाया… ये हमारा कमरा होगा … ये बिस्तर आपका होगा… ” उसने एक बेहद मुलायम सा बिस्तर दिखाया।
“हाय रे अशोक … कब होगी शादी…।” मैंने उतावले स्वर में कहा।
“दिल से दिल मिल जाने को ही शादी कहते हैं !” और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे चूमने लगा।
“चलो इस नरम गद्दे पर लेट कर प्यार करते हैं…” अशोक मुस्करा उठा।
उसका फ़ोम का गद्दा बहुत ही नरम था। मैं तो उस पर लोट लगाने लगी। तभी अशोक ने अपनी बाहें खोल दी। मैं लोट लगाते हुये उसकी बाहों में चली आई। हम एक दूसरे से लिपट पड़े। प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे।
उसके हाथ जाने कब मेरे टॉप के अन्दर पहुंच गये, मेरी चूचियाँ सहलाने लगा, मेरे भीतर अनन्त उमंगें जाग पड़ी, मेरे चुचूक फूल कर कड़े हो गये। वासना का ऐसा भावनात्मक प्यार भरा उन्माद पहली बार मह्सूस हुआ। मैंने उसकी कमीज के बटन खोल दिये और उसकी नंगी छातियों को चूमने लगी। अचानक मुझे अपने कपड़े तंग मह्सूस होने लगे। जीन्स मेरे शरीर पर कसने लगी। मेरी जांघें जैसे जीन्स को फ़ाड़ देना चाह रही थी, टॉप जैसे चूंचियों पर फ़ंसने लगा। मुझे कपड़े बहुत ही खराब लगने लगे। पहल अशोक ने ही की। उसने अपनी पैन्ट उतार दी। फिर उसने मेरी तरफ़ वासनायुक्त नजरों से देखा। मुझे भी कपड़े कहाँ सुहा रहे थे। अशोक ने मेरी टॉप ऊपर ही खींच दी। मेरे वक्ष छलक पड़े। मैंने अपनी जीन्स उतार डाली और बस एक तंग सी छोटी सी चड्डी रह गई। जैसे ही मेरे बदन को हवा लगी, एक सिरहन सी उठ गई।
जैसे ही मेरी नजरें अशोक के लण्ड पर गई, वही मोटा सा, लम्बा लण्ड… मैं डर गई, पर शायद वो मेरी बात जानता था। वो दूर हट गया… और अपना लण्ड देख कर बोला,”आपको देख कर इसे आप पर प्यार आ रहा है… जैसे कार में आप इसे प्यार करती थी… बस एक बार फिर से वही प्यार करके इसे मजा दो…”
मैंने डरते हुये उसके लण्ड को निहारा और उसे पकड़ लिया। जैसे ही मैंने उसे दबाया… अशोक के मुख से एक सिसकारी निकल पड़ी।
” आपको मजा आया ना, पर मुझे इससे डर लगता है … प्लीज मुझे कुछ मत करना…” मैंने उसे समझाते हुये कहा।
“आओ प्यार करें … जो आप कहेंगी वही करेंगे !” मैं कुछ सावधान सी, सकुचाती हुई उसके नंगे शरीर से लिपट गई। फिर हम दोनों धीरे धीरे बिस्तर पर लेट गये। हमारे अधर एक दूसरे से मिल गये। उसका लण्ड हाथ में लिये मुझे लगा कि वो और फूल गया है। बेहद कड़क हो गया है। मेरी चूंचियाँ वो मसलने लगा। मेरे शरीर में एक सुखद मीठा सा नशा चढ़ने लगा। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। मुझे जाने क्यूँ इच्छा होने लगी थी कि लण्ड अपनी चूत में घुसेड़ लूँ। मैंने लण्ड को पकड़े हुये अपनी चूत के द्वार पर रख दिया और आंखे बंद करके मदहोशी में उस पर जोर लगा दिया। उसका लण्ड मेरी गीली चूत में अन्दर फ़िसल पड़ा। मुझे एक विचित्र सी सुखद वासना युक्त कसक भरी मिठास का अहसास हुआ और मैंने अपनी चूत उसके लण्ड पर पूरी ताकत से दबा दी। उसका लण्ड मेरी चूत के लबों को चूमता हुआ अनन्त खाई में जैसे कूद पड़ा।
मैंने अशोक को खींच कर अपने ऊपर सवार कर लिया और अपनी दोनों टांगें चीर कर उसकी कमर से लपेट ली। अशोक मेरे ऊपर आ चुका था और लण्ड मेरी चूत में पूरी गहराई तक घुसा हुआ था। हम दोनों की कमर अब धीरे धीरे चलने लगी। वो चोदने लगा और मैं चुदती चली गई। ऐसा स्वर्गीय आनन्द मुझे पहली बार मिला था। इतना प्यारा वो तो नहीं चोदता था। मुझे अचानक इच्छा हुई कि मेरा पूर्व पति मेरी गाण्ड मारता था, उसमें क्या मजा आता होगा। सो मैंने अशोक को इशारो में अपनी इच्छा बता दी। उसने मेरे सर पर बालों में प्यार से हाथ फ़ेरा और लण्ड धीरे से बाहर निकाल लिया। उसने एक मोटा तकिया नीचे लगा दिया और पास में पड़ी क्रीम मेरी गाण्ड में लगा दी। फिर मुझे चूमता हुआ मुझसे प्यार से लिपट गया। मैं अनजाने डर से सहम सी गई। मेरे गाण्ड की छेद पर उसका नरम सा गोल सुपारा चिपक गया। मुझे ताज्जुब हुआ कि उसका लण्ड एक ही बार में छेद के अन्दर बिना किसी तकलीफ़ के घुस गया था। इस बार मुझे दर्द नहीं हुआ बल्कि मजा आया।
उसने अब धीरे धीरे मेरी गाण्ड चोदना आरम्भ किया। मुझे मस्ती आने लगी और मैं उसे एन्जोय करने लगी। पर हां मुझे ये जरूर लगा कि मेरे पति जब ये सब करते थे तो मैं घबरा जाती थी, गाण्ड में से खून निकलने लगता था, यहाँ तक कि मैं बेहोश भी हो जाती थी, मजा आने की बात तो दूर रही। काफ़ी देर तक मैंने गाण्ड मराने का आनन्द लिया। थोड़ी देर के बाद मेरी चूत कुलबुलाने लगी तो मैंने अशोक को चूत मारने को कहा। उसने मेरी चूत में लण्ड घुसा कर धक्के लगाना शुरू कर दिया। मेरी उत्तेजना मेरी सहनशीलता के बाहर चुकी थी। चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी… और फिर मेरे अंग प्रत्यंग जैसे आग उगलने लगे और मैंने अपना यौवन रस छोड़ दिया, मैं झड़ने लगी।
उसका चोदना जारी रहा पर गीलापन बढ़ने से छप-छप की आवाजें आने लगी। चूत ढीली पड़ गई। उसने इशारे से कहा कि मेरा लण्ड चूस कर वीर्य निकाल दो…
उसके लण्ड को मुख में लेने के विचार से ही मेरे मन में फिर वही डर समा गया। पर मैंने हिम्मत करके उसका लण्ड मुँह में भर लिया और धीरे धीरे उसे चूसने लगी। मुझे लगा उसे बहुत ही मजा आ रहा है। मैं जोश में उसके लण्ड के रिन्ग जोर से चूसने लगी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी। उसका हाल देख कर मैं भी और जोश में आ गई और उसका लण्ड हाथ से भी दबा कर मुठ मारते हुये जोर जोर से चूसने लगी।
इतने में उसने मेरे बाल पकड़ लिये और लण्ड का मुख में जोर लगा कर झुक पड़ा और लण्ड से वीर्य निकल पड़ा। वो अपने लण्ड पर जोर लगा कर पिचकारी पर पिचकारी मुह में छोड़ने लगा। मैं भी जोश में आ कर उसका वीर्य गटागट पी गई। अब उसका लण्ड मैं दूध निकालने की तरह खींच-खींच वीर्य निकालने लगी। पूरा लण्ड साफ़ करके उसे छोड़ दिया।
आज मेरी खुशी का कोई ठिकाना ना था। मैं खूब जोर जोर से हंसी… और उसे भी अपनी खुशी में शामिल होने कहा। फिर मैंने अशोक को अपनी पूरी कहानी बताई और रो पड़ी। अशोक ने सब कुछ भूल जाने कहा और हम फिर से एक दूसरे में प्यार में खो गये। चुदाई के मनमोहक दौर की तैयारी करने लगे। मेरा मन आज जी भर कर चुदने का कर रहा था… मैं अपने पिछले गुजरे हुये तूफ़ान को भूल जाना चाहती थी… Antarvasna
कार में मैं और Indian Sex Stories रिया अन्जान थे, पर मुन्ना और बबलू अपनी गर्ल-फ़्रेन्ड्स के साथ थे। चूंकि कार रिया की थी सो उसे तो साथ आना ही था। मुझे तो मंजू ने कहा था। नैना बबलू के साथ थी। कार कच्ची सड़क पर हिचकोले खाती हुई चल रही थी। पीछे बैठे मन्जू और नैना मुन्ना और बबलू के साथ बड़ी ही बेशर्मी से अश्लील हरकतें कर रही थी। उन्हें देख कर मेरे मन में भी गुदगुदी होने लगी थी। पर मन मसोस कर चुपचाप बैक-मिरर से उनकी हरकतें देख रही थी।
तभी एक गार्डन जैसे स्थान पर रिया ने गाड़ी रोक दी। साथ में लगी हुई नदी बह रही थी। दूर दूर तक कोई नहीं था। हमने कार में से दरियां निकाल कर उस जन्गल जैसी जगह में बिछा ली। सारा सामान निकाल कर एक जगह लगा दिया। थर्मस से चाय निकाल कर पीने लगे। तभी बबलू और मुन्ना ने अपने कपड़े उतार दिये और मात्र एक छोटी सी अन्डरवियर में आ गए। दोनों ने ही नदी में छलांग मार दी…
मंजू और नैना भी पीछे पीछे हो ली। चारों पानी में उतर गये और खेलने लगे। बस मैं और रिया वहां रह गये थे। मैं तो जैसे उन सभी के बीच साधारण सी लग रही थी। ढीला ढीला कुर्ता पजामा, कहीं से कोई भी अंग बाहर नहीं झांक रहा था। इसके उलट मैना और मंजू तो अपनी छोटी छोटी स्कर्ट में अपना जैसे अंग प्रदर्शन करने ही आई थी। कुछ ही देर में नदी में छपाक छपक की आवाजें बन्द हो गई। दोनों ही जोड़े पानी के अन्दर कमर तक एक दूसरे के साथ अश्लील हरकतें करने लगे थे।
“कोमल उधर मत देखो … वो तो है ही ऐसे ! यही करने तो आए हैं यहाँ ये सब !” रिया ने मुझसे कहा।
“जी… जी हां… वो …” मेरे विचारों की श्रृंखला टूट गई थी, मेरे मन की गुदगुदी जैसे भंग हो गई।
“आओ , अपन उधर चलते हैं !”
मैं उसके साथ चुपचाप उठ कर चल दी। एक झाड़ी के झुरमुट के पीछे खड़े हुये ही थे कि मुन्ना और नैना नदी में उसी तरफ़ एकांत देख कर छुपे हुये थे। नैना ने मुन्ना का लण्ड पकड़ा हुआ था और उसकी स्कर्ट नैना के चूतड़ से ऊपर थे जिसे मुन्ना बेरहमी से दबा रहा था। उसे देख कर मेरा दिल जोर से धड़क उठा। रिया भी हतप्रभ सा रह गया। हम दोनों की नजरें जैसे उन पर जम गई। तभी मुझे अहसास हुआ कि रिया मेरे साथ में है। मैंने घबरा कर रिया की तरफ़ देखा। रिया अभी भी ये दृश्य देख कर सम्भला नहीं था। रिया का लण्ड जैसे अपने आप करवटें लेने लगा। रिया ने मेरी तरफ़ देखा… मेरी नजरें अपने आप झुक गई। मेरा मन भी डांवाडोल हो उठा। जवानी का तकाजा था… मेरा चेहरा लाल हो उठा। रिया की नजरों में लालिमा उभर आई। नैना और मुन्ना की अश्लील हरकतों से मेरी जान पर बन आई थी। लाज से मैं मरी जा रही थी।
“कोमल, यह तो साधारण सी बात है, दोनों जवान है, बस मस्ती कर रहे हैं !”
“ज़ी… नहीं वो बात नहीं … ” मैंने झिझकते हुये कहा। मेरे चेहरे पर पसीना उभर आया था। उसने पीछे से आकर मेरी बाह पकड़ ली। मेरा जिस्म पत्ते की तरह कांप गया। मैंने अपनी बांह उससे छुड़ाने की कोशिश की।
मेरा मन एक तरफ़ तो रिया की हरकतों से प्रफ़ुल्ल हो रहा था… तो दूसरी तरफ़ डर भी रही थी। मैंने सोचा कि अगर मैं रिया को छूट दे दूं तो वो फिर मुझे चोदने की कोशिश करेगा। बस यह बात दिल आते ही मेरा दिल धाड़ धाड़ करने लगा। उसी समय मुझे लगा कि रिया का हाथ मेरे कमर के इर्द गिर्द लिपट गया। मेरा अनछुआ शरीर पहली बार कोई अपनी बाहों में भर रहा था।
“ऐसे मत करिये जी… मैं मर जाऊंगी !”
“कोमल, यहां हमें कोई नहीं देख रहा है, बस एक बार मुझे किस कर लेने दो !”
“क्…क्…क्या कह रहे हो रिया… मेरी जान निकल जायेगी… हाय राम !”
मेरे ढीले ढाले कुर्ते पर उसके हाथ फ़िसलने लगे। उसका एक हाथ मेरे बालों को सहला रहा था। मुझे जैसे नींद सी आने लगी थी।
“मेरी मां… हटो जी… मुझे मत छुओ … ” मेरी सांसे तेज हो गई। शर्म के मारे मैं दोहरी हो गई। उसके हाथ अब मेरी छोटी छोटी चूंचियों पर आ गये थे जो पहले ही कठोर हो गई थी। निपल जैसे कड़े हो कर फ़टे जा रहे थे। उसके हाथों तक मेरे दिल की धड़कन महसूस हो रही थी। शरीर में मीठा मीठा सा जहर भरा जा रहा था। उसके अंगुली और अंगूठे के बीच मेरे निपल दब गये। उसे वो हल्के से मसल रहा था। मेरी सिसकियां मुख से अपने आप ही निकल पड़ी। मन कर रहा था कि बस मुझे ऐसा मजा मिलता ही रहे। दिल की कोयलिया पीहू पीहू कर कूक उठी थी।
उसका मैंने जरा भी विरोध नहीं किया। मैंने पास के पेड़ के तने से लिपट गई। उसका हाथ अब मेरे छोटे से चूतड़ो पर था। ढीले पजामे में मेरे चूतड़ के गोले नरम नरम से जान पड़े… कैसी मीठी सिरहन पैदा हो गई। मैं ऊपर से नीचे तक सिहर उठी।
“चलो, वहीं चल कर कर बैठते हैं … वो दोनों तो अपने आप में खोये हुये हैं। मैंने शरम से झुकी अपनी बड़ी बड़ी आंखे उठा कर रिया को देखा… उसका लण्ड बहुत जोर मार रहा था। उसके हाल पर मुझे दया भी आई… मेरी हालत भी सच में दया के काबिल थी…। हम दोनों वापस दरी पर जाकर बैठ गये। वहां कोई नहीं था, शायद वो चुदाई में लगे थे। उनकी चुदाई के बारे में सोच कर ही मुझे शर्म आने लगी थी।
रिया ने मेरा कंधा हाथ से थाम लिया और मुझे जोर लगा कर लेटा दिया। उसने मुझे अपने नीचे धीरे से दबा लिया और अपने अधर मेरे अधरों पर रख दिये। मैंने भी सोचा कि अब ज्यादा नखरे दिखाने से कोई फ़ायदा नहीं है… मेरे साथ की सहेलियां तो मस्ती से चुदवा रही है… मैं भी जवानी का मधुर मजा ले लूँ। यह सोच कर मैंने अपने आपको रिया के हवाले कर दिया। रिया को भी लगा कि अब विरोध समाप्त होता जा रहा है … और मैं चुदने के लिये मन से राजी हूं तब वो मुझ पर छाने लगा। मेरी आंखे उन्माद में बन्द होने लगी थी।
रिया ने कब अपने कपड़े उतार लिये मुझे पता ही नहीं चला। वो मेरे कपड़े भी एक एक करके उतारने लगा। जब ब्रा की बारी आई तो मैं शर्म से लाल हो गई थी। मेरे रोकते रोकते भी ब्रा उतर चुकी थी। मैंने दोनों हाथ आगे करके अपनी चूंचियां छुपा ली। पर अब मेरी पैन्टी को कौन सम्भालता। उसने उसे भी खींच कर उतार दी… मेरी चूत अब नीले गगन के तले खुली हुई थी। मैंने अपनी चूत छुपाई तो मेरी चूंचियां पहाड़ की तरह सीधी तनी हुई सामने आ गई। मेरे जवान जिस्म के कटाव और उभार रिया पर तलवार की भांति वार कर रहे थे।
मेरा कसा हुआ सुन्दर जिस्म था। चिकना और लुनाई से भरा हुआ चमकता हुआ जिस्म।
शायद दोनों से बहुत सुन्दर, उत्तेजना से भरा हुआ, कसकता हुआ शरीर।
“मर गई मेरी मां !!! मुझे बचा लो कोई…” उसका हाथ मेरी चूंचियों पर आ गया था। मैं नीचे दबी हुई शर्म से घायल हुई जा रही थी।
“कोमल जी… आपकी छाती तो बुरी तरह धड़क रही है…”
“रिया… अब बस करो ना … देखो तुमने मेरा कैसा हाल कर दिया है… छोड़ दो मुझे !”
मेरी चूत जैसे लण्ड लेने के लिये बेकाबू होती जा रही थी। मेरी उलझी हुई लटें अब वो समेट रहा था। उसने जल्दी से कण्डोम निकाला और लण्ड पर पहनाने लगा। मैंने तुरन्त ही उसे छीन कर एक तरफ़ फ़ेंक दिया। वो समझ गया कि मैं अपनी चुदाई में नंगा लण्ड खाना चाहती हूं। उसका कड़क लण्ड मेरे अनछुई योनि-द्वार पर दस्तक दे रहा था। मेरी चूत पानी छोड़ छोड़ कर बेहाल हो रही थी। रिया का भार मेरे शरीर पर बढ़ चला। उसका लण्ड ने बड़ी सज्जनता से चूत में प्रवेश कर गया। मैंने अपने वासना के मारे अपने होंठ काट लिये। रिया को अपनी ओर दबा लिया। उसका लण्ड मोटा और लम्बा था। सुपाड़ा भी नरम और गद्देदार था।
“मुझे अपना लो रिया… घुसा डालो… अब ना तड़पाओ मुझे…” मेरे मुख से अस्पष्ट से शब्द फ़ूट पड़े। उसका लण्ड धीरे धीरे से अन्दर की ओर बढ़ चला। वहां वह रुक गया… फिर हल्का सा जोर लगाया। मुझे चूत में हल्का सा दर्द हुआ। फिर और आगे बढ़ा… दर्द और बढ़ा। अब वो रुक सा गया… मुझे प्यार करने लगा। मेरी चूंचियां सहलाने लगा। मुझमें उत्तेजना बढ़ती गई। उसका हल्का जोर और लगा …
थोड़ा सा दर्द और हुआ… यूं धीरे धीरे करते करते उसका लण्ड मेरी चूत में पूरा फ़िट हो गया। तभी मेरी चूत से खून की धार सी निकल पड़ी… मुझे गीलापन लगने लगा था, पर मुझे यह भी मालूम था कि मेरी झिल्ली फ़ट चुकी है, पर दर्द अधिक नहीं हुआ। शायद ये प्यार से लण्ड को भीतर उतारने के कारण था। अगला शॉट भी बहुत ही हौले से उतारा। मुझे तो पहली बार में ही चुदाई दिल को भाने वाली लगी। कली खिल चुकी थी। भंवरे ने डंक मार दिया था और अब वो कली का यौवन रस पी रहा था। फ़ूल खिलने को बेताब था। अपनी पंखुड़ियां खोले भंवरे को कैद करने के प्रयत्न में था।
तभी मुझे अपनी साथियों की तालियां और हंसी सुनाई दी। वो चारों हम दोनों के घेरे खड़े थे… पर क्या करती… रिया का लण्ड चूत में पूरा घुसा हुआ था। मैं मुस्कराती हुई शर्म से रिया को खींच कर अपना चेहरा छुपाने की कोशिश करने लगी। फिर नहीं बना तो हाथों से मैंने अपना चेहरा छिपा लिया। रिया के धक्के अब चल पड़े थे… हर धक्के पर सभी साथी ताली बजा कर मेरा और रिया का उत्साह बढ़ा रहे थे। तभी मैंने देखा बबलू ने अपने लण्ड पर, मुझे देख कर मुठ मारने लगा था। कुछ ही देर में मंजू ने उसका लण्ड थाम लिया और बबलू की मुठ मारने लगी। तभी मुन्ना का भी छोटा सा और सलोना लण्ड नैना ने पकड़ कर चलाने लगी।
मुझे ये समां बहुत प्यारा लग रहा था। सभी मेरा साथ दे रहे थे। धीरे धीरे मेरी शर्म भी समाप्त होने लगी। मैं भी सबकी ताल में ताल मिलाने लगी। नीचे से अपनी चूत उछालने की कोशिश करने लगी। पर उछाल नहीं पाई, मुझे ऐसा कोई अनुभव नहीं था। पर शरीर में वासना भरी तरंगें चलने लगी थी। मेरा जिस्म जैसे काम देवता की गिरफ़्त में आ चुका था, मुझे आसपास आती हुई आवाजें भी सुनाई देना बन्द हो गई थी। बस चुदाई का सुनहरा आलम मुझ पर छा गया था। मैं आनन्द के सुख सागर में गोते खाने लगी थी। रिया का लण्ड भचाभच मुझे चोद रहा था। तभी जैसे मेरा जिस्म जैसे तरावट से भर गया और लगा कि जैसे चूत में मिठास भर गई हो… एक सिसकी के साथ मेरा रति-रस छूट पड़ा। तभी रिया भी का लण्ड भी मेरी चूत से बाहर आ गया और वो मुठ मारने लगा। मैंने अपना मुख खोल कर ज्योहीं एक भरपूर सांस ली मेरा मुख वीर्य की पिचकारियों से नहा उठा।
रिया के साथ साथ मुन्ना और बबलू भी अपने लण्ड की पिचकारियां मेरे मुख की ओर निशाना साध कर छोड़ रहे थे। नैना और मन्जू ने जल्दी से तौलिये से मेरा मुख साफ़ कर दिया। दरी पर मेरी चूत से निकला हुआ खून भी था। दरी को नदी में धो कर सूखने को डाल दिया।
कुछ ही देर में हम सभी साथ बैठ कर हंसी मजाक कर रहे थे। लन्च समाप्त करके हम सभी फिर से नदी में मस्ती करने का कार्यक्रम बना रहे थे।
“आज तो हमारी नई दोस्त कोमल का भी उदघाटन हुआ है… आज सभी उसे खुश करेंगे !”
“तो चलो, सामने का तो उदघाटन हो चुका है, अब पिछवाड़ी का नम्बर लगाते हैं… !”
“कोमल जी, आप कहे … आप किससे उदघाटन करवायेंगी…?”
“चलो हटो जी… मुझे कुछ नहीं करवाना… वो तो ये सब अपने आप हो गया था… सारा कसूर तो नैना का है… उसी ने मुझे फ़ंसा दिया था !”
“अरे कोमल, लड़की हो तो चुदना तो पड़ेगा ही ना… आज नहीं तो कल… किसी को दोष ना दो !”
“चलो, अब नदी में चलें… नंगे हो कर नहायेंगे…” सभी हुर्रे कहते हुये कपड़े उतार कर नदी में कूद पड़े… मुझे भी मन्जू धक्का देकर ले चली। पर मैंने अपनी ब्रा और पैन्टी पहन ली थी। मंजू और नैना तो बेशर्म हो कर नंगी हो हर नाच रही थी। अचानक मुन्ना ने मुझे पानी में खींच लिया। मैं हड़बड़ा कर उसकी बाहों में सिमटती चली गई। यह देख कर मन्जू रिया से लिपट गई और नैना ने अपना साथी बबलू को बना लिया। मुन्ना ने मुझे पानी के भीतर कमर तक ले लिया और मेरे जिस्म से खेलने लगा। मुझे ये सेक्स विहार रोमांचित कर गया। आज ही पहली चुदाई और फिर अब पानी में भी चुदाई। मुन्ना ने मेरी पैन्टी उतार दी और मेरी गाण्ड से चिपक गया। उसका लण्ड रिया जैसा मोटा और लम्बा तो नहीं था, छः इन्च लम्बा तो होगा ही। उसके लण्ड के स्पर्श से मैं फिर रोमांचित हो उठी। मेरे दोनों चिकने चूतड़ के गोलों के बीच वो घुसा जा रहा था।
“मुन्ना… ऐसे नहीं कर… बस नहाते हैं…”
“अरे नहीं कोमल, आज तो तेरी गाण्ड का भी मारनी है… बिलकुल अभी… चल पानी में ही गाण्ड चुदवा ले… देखना मजा बहुत आयेगा !”
“पर मुझे लाज आती है … फिर कभी !” मैंने शर्माते हुये कहा। मन तो गाण्ड चुदवाने का कर रहा था, पहला मौका जो था, लग रहा था … पूरे मजे ले लो, पता नहीं जिन्दगी में कभी नसीब हो ना हो। पर मेरा शरमाना काम नहीं आया… उसका लिन्ग मेरी गाण्ड के छेद पर चिपक चुका था, पर एक हल्के जोर की आवश्यकता थी।
मेरी गाण्ड में गुदगुदी सी हुई। मैं पानी में झुकती चली गई।
“मुन्ना, प्यार से लण्ड घुसाना, नया माल है… देख मजा आना चाहिये…” रिया ने हांक लगाई।
“अरे मरने दो ना… चुद चुद कर वो अपने आप हमारी जैसी हो जायेगी…” मंजू ने रिया को टोक दिया।
मुन्ना ने कहा,”मैंने लाल निशान देख लिया था।… प्यार से उदघाटन करूंगा !” मुन्ना हंस कर बोला। मेरा मन विचलित हो उठा। मुन्ना के लण्ड का जोर पर गाण्ड पर बढ़ता गया। मैंने भी अपनी गाण्ड का छेद ढीला छोड़ दिया। मुन्ना का लण्ड फ़ुफ़कारता हुआ अपनी विजय पताका फ़हराता हुआ अन्दर जा घुसा। मेरे बदन में एक दर्द भरी मीठी सी लहर दौड़ गई। सभी साथियों ने लण्ड प्रवेश पर तालियाँ बजा कर मेरा अभिवादन किया। मैं शर्म से जैसे मर गई। पर फिर भी इतनी तसल्ली तो थी ना ! पहले की तरह खुली चुदाई नहीं थी, बल्कि पानी के अन्दर थी। सो मैंने भी धीरे से हाथ लहरा कर सभी की बधाई स्वीकार की… सभी साथी अपने काम धन्धे पर लग गए। अब उन सबका ध्यान स्वयं की चुदाईयों पर था। बबलू और रिया का ने अपना ध्यान मन्जू और नैना को चोदने में केंद्रित कर लिया था। उसका दुबला पतला सा लण्ड मेरी गाण्ड में गजब की मिठास भर रहा था। मेरी चूत गाण्ड मराने की गर्मी से फिर लण्ड मांगने लग गई थी। लण्ड पतला होने से मुझे गाण्ड में बिल्कुल नहीं लग रही थी, वो तो सटासट चल रहा था। मैंने रिया की तरफ़ देखा और उसे इशारा किया…।
रिया मंजू को छोड़ कर मेरे पास आ गया। वो समझ गया था कि चूत में सोलिड वाला लण्ड चाहिये था। मुन्ना लपक कर मंजू को चोदने चला गया। रिया ने अपना मोटा और लम्बा लण्ड पीछे से ही मेरी चूत में प्रवेश करा दिया। मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा। फिर एक बार और रसभरी चुदाई चल पड़ी। पानी के अन्दर छप-छप का शोर हमें और भी मस्त किये दे रहा था। कुछ ही देर में मैं झड़ गई। पर रिया अभी भी टनाटन था। रिया के मोटे लण्ड ने मेरी चूत दो बार चोद दी थी। उसकी चुदाई बहुत ही सुन्दर थी। इधर मुन्ना झड़ चुका था और रिया अपना वीर्य निकालने के लिये फिर से मंजू के पास आ गया था।
हम सभी अब अपने अपने कपड़े पहन रही थी और मेक-अप कर रही थी। सारा सामान वो कार में साथ लेकर आई थी। उन्हें इन सभी चीजों का पुराना अनुभव जो था। कुछ ही समय में हम सभी बहुत ही सभ्य और गरिमामय लोग लग रहे थे। कार घर की तरफ़ लौट पड़ी। रास्ते में हमने कोल्ड ड्रिन्क भी पी… और आज की रंगीन पिकनिक के बारे में बतियाते रहे। उनका मुख्य बिन्दु मेरी चुदाई ही थी। सभी ने आज की मेरी सफ़ल चुदाई पर रात को होटल में डिनर का आमंत्रण दिया… मैं बहुत ही खुश थी आज की चुदाई को लेकर… Indian Sex Stories
आज तक मैं अन्तरवासना Sex Stories पर यही पढ़ते आया हूँ कि दोस्तों मैं अगली कहानी लेकर हाजिर हूँ। इसका मतलब पाठक काल्पनिक कहानी भी भेजते हैं।
परन्तु मेरे पास ऐसी काल्पनिक नहीं अपितु सत्य घटना है जो मेरे साथ घटी है।
बात कुछ साल पहले की है मेरे एक दूर के रिश्ते के मामा जी एक बड़े शहर में उच्च अधिकारी हैं। मेरी मम्मी ने गर्मी की छुटिटयों में मुझे उनके घर भेज दिया कि जाओ घूम कर आ जाओ।
घर में मामा, मामी, व उनकी बेटी गीता जो उस समय १८ वर्ष की थी । वह बहुत सुन्दर है।
एक दिन मामी जी ने कहा- राज ,तुम गीता को स्कूटी चलाना सिखा दो !
हालाँकि मैं दीदी से छोटा था फिर भी मैं गाड़ी चलाना जानता था।
मैं दीदी को आगे बिठाता था और मैं पीछे बैठता था । यूँ तो मेरा लंड रोज ही अकड़ जाता था लेकिन एक दिन दीदी ने अपने पिछवाड़े पर कुछ दबाब महसूस किया। घर आकर गाड़ी खड़ी करते ही गुस्सा करने लगी और कहने लगी- अभी मम्मी को बताती हूँ।
शायद उसने अपनी मम्मी को कुछ बताया भी क्योंकि मामी जी ने एक दो बार मेरे अंग की तरफ गौर से देखा, जब मैं लन्च के लिए नेकर पहन कर टेबल पर आता था।
फिर दो दिन के बाद दीदी ने फिर गाड़ी निकाली। लेकिन इस बार भी उसमें तनाव आ गया, परन्तु गीता दीदी ने घर आकर मुझे डांटा नहीं बल्कि दूसरी मंजिल में अपने कमरे में ले गई और वहाँ जाकर उन्होंने मुझसे कहा- जरा दिखाओ पैंट खोलकर ! मैं भी तो देखूं क्या चुभता है मुझे ।
मैं शरमा गया और दीदी का कहना टाल दिया ।
फिर अगले दिन मामा जी व मामी जी को अचानक दो दिन के लिए गाँव जाना पड़ा तो मामी जी बोलकर गईं कि डरना नहीं, दोनो भाई बहन नीचे ही सोना और कोई बात होने से तृप्ति आँटी को फोन करके बुला लेना।
आज देखा कि गीता दीदी बहुत खुश थीं। रात को खाना खाने के बाद दीदी ने जल्दी टी वी बन्द कर दिया और ताश ले आई और कहा- जो हारेगा उसे दूसरे की पीठ मालिश करनी पड़ेगी।
मैं पहले से ही डरा था इसलिए समहत हो गया। अब मैं जीत गया तो भी मैं मालिश कराना नहीं चाहता था लेकिन दीदी ने कमर पर ऐसे ही हाथ फिराते हुए एक बार हाथ को लन्ड से छू दिया जो अपने पूरे आकार में था।
फिर इस बार दीदी जीत गई। जब मैंने मालिश शुरू की तो दीदी ने उल्टी होकर धीरे धीरे अपना पजामा और कच्छा नीचे कर दिया। दीदी की दूध जैसी सफेद गाण्ड देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे लन्ड से कुछ चिपचिपा पदार्थ रिसने लगा।
अचानक दीदी ने पलटकर कहा- राजू, तुम क्या देख रहे हो? मम्मी से कह दूंगी और अगर कुछ नहीं देख रहे हो तो यह क्या है दिखाओ पैन्ट खोलकर !
आज मैंने पैन्ट खोलकर दिखा ही दिया।
दीदी तो जैसे पागल हो गई, कहने लगी- बाप रे ! इतना बड़ा और मोटा !
मैंने कहा- अब क्या तुम भी दिखा सकती हो?
गीता दीदी तैयार हो गई और उन्होंने नीचे के सारे कपड़े उतार दिये। अब उनकी गुलाबी चूत की फ़ांके काली छोटी छोटी झांटों से ढकी दिख रही थीं।
दीदी ने कहा- राजू देखो, जो मैं करती हूं, मुझे करने दो।
और दीदी ने मेरा ८ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लन्ड चूसना शुरू कर दिया।
मैंने कहा- दीदी, यह गन्दी बात है।
दीदी ने बताया- मैंने एक दिन अपने मम्मी पापा को रात में ऐसा करते देखा है।
कुछ देर चूसने के बाद दीदी ने डॉगी पोज़िशन बना ली और कहा- राजू पकड़ कर धीरे से लगाना, क्योंकि बहुत मोटा है !
इससे पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था इसलिए बहुत देर के बाद दीदी ने खुद पकड़ कर लगाया। लेकिन ६-७ धक्के मारने के बाद ही मेरी पिचकारी छूट पड़ी।
उस रात को दीदी ने चार बार चुदवाया, परन्तु मेरी इच्छा थी कि एक बार दीदी गोरी गाण्ड में लन्ड डालने दे।
दीदी ने कहा- ना बाबा ! गाण्ड फड़वानी है क्या !
दोस्तो और सहेलियो ! अभी दीदी की शादी हो गई है।
मैंने एक दिन मौका मिलने पर गुजारिश की तो दीदी ने मना कर दिया परन्तु थोड़ी देर बाद उन्होंने कुछ सोचकर मुझे अपने घर बुलाया और उस दिन कहा- तुझे मेरी गाण्ड मारने की बहुत इच्छा थी ना?
मैंने पूछा- यह खयाल कैसे आया?
तो उन्होंने कहा- आजकल सीडी देखकर सब मर्द बिगड़ गये हैं, मेरे श्रीमान भी हफ़्ते में एक बार मेरी पिछली मारते हैं और अब मुझे भी मजा आने लगा है।
और फिर दीदी ने उस दिन गाण्ड भी दो बार मरवाई।
मेरे दोस्तो और कन्याओं ! अब आप ही बताये कि इस वास्तविक घटना में क्या मेरा कोई दोष है?
हाँ, जब से गीता दीदी को चोदा है मुझे एहसास हुआ कि सचमुच मेरा काफी बड़ा है।
मेरी सच्ची कहानी पसन्द आने पर मेल करें। Sex Stories
मेरा नाम Hindi Sex Stories रेशमा है। मैं इस्लामाबाद पाकिस्तान से हूँ। मैं विवाहित हूँ। मेरी उम्र 26 वर्ष है।
यह बात तब की है जब मैं कालेज में थी।
मुझे अपने क्लास के एक लड़के मोइन से प्यार हो गया।
हम दोनों अकसर कालेज से घूमने के लिये निकल जाते थे।
फिर दोनों पिक्चर देखने के लिये भी जाने लगे।
हम दोनों धीरे धीरे बहुत करीब आते गये।
मोइन मुझे हमेशा हाथों पर और फिर धीरे धीरे गालों पर चूम लेता था।
एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया। अब वह थोड़ा निडर हो गया था।
एक दिन उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होठों को चूम लिया, फिर उसने मेरे कन्धों पर, फिर मेरी गर्दन को चूम लिया।
उसने मेरे उरोजों को छू लिया।
पहली बार किसी ने मेरे वक्ष को छुआ था मुझे बहुत अच्छा लगा था।
धीमे धीमे वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने हाथों से मेरी जांघों को, कभी कभी वह अपने हाथों से मुझे पीछे से कमर के नीचे के भाग को दबा देता था।
मुझे बहुत मजा आता था, मैंने कभी विरोध नहीं किया।
एक दिन हम दोनों पिक्चर देखने गये। हम सबसे पीछे की सीट पर बैठे थे।
हॉल में भीड़ बहुत कम थी और हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था।
पिक्चर शुरू होने के 10 या 15 मिनट बाद मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धों पर रखा और अपनी तरफ खींचा।
थियेटर में काफी अन्धेरा था।
वह मेरे गालों पर चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये उसकी सांसें बहुत गर्म थी।
हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत बेताबी से चूमना शुरू कर दिया।
तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के नीचे महसूस किया। उसका हाथ मेरे उरोजों को कमीज के ऊपर से दबाने लगा।
इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था।
मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था।
अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल चुका था।
उसका हाथ मेरी ब्रा के कोनों के अन्दर मेरे स्तनों को सहला रहे थे।
धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चुचूकों को अंगुलियों से छेड़ने लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये।
मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ।
मेरे पूरे शरीर में अजीब सी तरंगें दौड़ रही थी जो कि मेरी जिन्दगी में पहली बार हुआ था।
उसने अपने हाथ को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट पर रखा और इधर उधर घुमाता रहा।
फिर उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगा।
मेरे अन्दर अजीब सी फीलिंग हो रही थी।
उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया।
उसने मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के ऊपर से ही छूआ।
मेरे मुँह से उॅहह हहह करके आवाज निकली, मेरे पैर फैल गये और उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया।
अपनी अंगुलियों से वह मेरे प्राइवेट अंग को रगड़ रहा था।
उसका ऐसा करना मुझे पागल बना रहा था।
मेरा बदन मेरे वश में नहीं था, मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी।
अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज के बटन बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने को कहा।
मैंने वैसा ही किया।
हमने टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पड़े।
शाम हो गई थी, कॉलेज बन्द हो चुका था केवल एक-दो बच्चे थे।
हम दोनों कॉलेज के पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये।
कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर आने की उम्मीद नहीं थी।
हमने ऐसी जगह चुनी जहाँ से हमें कोई देख नहीं पाये।
हम दोनों दीवार के सहारे खड़े हो गये और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया।
उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया। मेरी कमीज के सारे बटन खोल डाले और अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे उरोजों को हाथ में ले लिया।
उसने इतनी जल्दी में यह सब किया कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ पाया।
उसके इस तरह से छूने से मुझे करंट सा लगा।
उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और बड़ी बेदर्दी से मेरे स्तनों को मसलने लगा।
मेरे स्तन एकदम सख्त हो गये।
वह अब मेरे उरोजों को चूमने लगा और मेरे एक चुचूक को मुँह में ले लिया और बड़ी सख्ती से उन्हें चूसने लगा।
उसका एक हाथ मेरे चूतड़ को मसल रहा था।
उसने मुझे पीछे से अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे वक्ष को दबाने लगा।
उसका सख्त हो चुका अंग मेरे पीछे चूतड़ों में चुभने लगा। उसका हाथ मेरी कमीज के नीचे मेरे पेट पर टहल रहा था।
शलवार के ऊपर से ही वह मेरे प्राइवेट भाग को रगड़ रहा था। मेरी शलवार का वह हिस्सा गीला हो गया जहाँ उसने अपना हाथ रखा था और मेरी चूत को रगड़ रहा था।
मोइन ने मेरी शलवार खोल दी और मैंने उसे नीचे गिर जाने दिया।
उसकी अंगुलियाँ सीधे मेरी पैंटी के अन्दर पहुँच गई और अगले ही पल उसकी अंगुलियाँ मेरी चूत के अन्दर पहुँच गई, वह उन्हें वह अन्दर बाहर करने लगा।
मैंने महसूस किया कि उसका सख्त लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और धक्के लगा रहा था।
उसने मेरी पैंटी को नीचे खींच दिया।
मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने पलट कर उसकी पैंट खोल डाली और उसके अन्डरवियर में हाथ डालकर मैंने उसके अंग को हाथों में ले लिया।
उसने अपना पैंट नीचे गिरा दिया और मेरी पैंटी को उतार दिया। उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया।
मैंने अपनी टांगों को उसकी कमर में लपेट लिया।
उसका कठोर अंग मेरी चूत के मुँह को ढूंढने लगा।
मैंने उसे अपने हाथ से पकड़ा और अपनी चूत का रास्ता दिखाया और एक झटके से उसका मोटा और कठोर लण्ड मेरे अन्दर प्रवेश कर चुका था।
मुझे लगा कि कोई जलती हुई चीज मेरे अन्दर घुस गई।
मैं दर्द से तड़प उठी।
उसने मेरे मुँह को एक हाथ से दबाया और मेरी कमर को एक हाथ से थाम लिया।
अगले ही पल मेरे चुचूक उसके मुँह में थे। वह उन्हें जोर से चूसने लगा।
उसका लण्ड अभी भी मेरे अन्दर ही था। उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ रखा था जिससे मैं ऊपर ही नहीं उठ पा रही थी।
धीरे धीरे मुझे मजा आने लगा मेरा दर्द जाने कहाँ चला गया। मैं अपने आप को ऊपर नीचे करने लगी।
फ़िर उसने वहीं जमीन पर मुझे लिटाया और मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड अगले ही पल मेरी चूत में था।
उसका पूरा लण्ड मेरे अन्दर तक समा रहा था।
उसने मेरी कमर को हाथों से पकड़ा और जोरों से धक्के देने लगा।
इस बीच मेरी चूत से पानी निकल गया।
उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसके लण्ड का ऊपर का सिरा मेरे अन्दर तक पहुँच रहा था। उसका लण्ड मेरे अन्दर और कठोर और सख्त होता जा रहा था।
हम दोनों एक दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे थे।
अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उसने अपनी स्पीड चालू रखी और अगले ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर गया, तभी मैं भी एक बार फिर झर गई।
वह मेरे ऊपर ही निढाल हो कर गिर गया।
हम दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे।
हम दोनों ने कपड़े पहने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये। हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह से सन्तुष्ट थे। Hindi Sex Stories
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