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मैं शहर की एक घनी आबादी में Hindi Porn Stories रहती हूँ। आस पास दुकानों के अलावा कुछ नहीं है।
मेरे पड़ोस में मेरे ऊपर वाले कमरे के सामने ही एक कॉलेज का विद्यार्थी रहता था। मैंने जब पढ़ाई के लिये ऊपर वाले कमरे में शिफ़्ट किया था तो मेरी नजर उसकी खुली हुई खिड़की पर पड़ी। मैंने अपनी खिड़की पर पर्दा लगा लिया कि जो कोई भी वहाँ रहता हो मुझे नहीं देख पाये। पर कुछ ही दिनों में मुझे पता चल गया कि उस कमरे में rahul रहता था जो मेरे ही कॉलेज में पढ़ता था। शायद उसे कमरा अभी ही किराये पर दिया था।
मैं रात को देर तक पढ़ती थी। rahul भी रात को देर तक पढ़ता था। मैं कभी कभी झांक कर खिड़की से उसे देख लेती थी।
एक बार हमारी नजरें मिल ही गई। अब हम दोनों छुप छुप कर एक दूसरे को देखा करते थे। एक बार तो rahul खिड़की पर आ कर खड़ा ही हो गया। मुझे सनसनी सी आ गई। मैंने जल्दी से पर्दा कर दिया और पर्दे के पीछे से उसे देखने लगी, मेरा पर्दे में से देखना उसे पता था। अब वो मुझ में रूचि लेने लगा था। मुझे देख कर वो मुस्कुराता भी था। एक दिन उसने मुझे हाथ भी हिला कर अभिवादन किया था। धीरे धीरे मैं भी उससे खुलने लग गई और उसे देख कर मुस्कुराती थी।
कुछ ही दिनो में हम रात को जब कभी एक दूसरे को देखते थे तो मैं भी हाथ हिला देती थी। एक बार पत्थर में लिपटा हुआ एक कागज मेरे खिड़की के अन्दर आ गिरा। मेरा दिल धक से रह गया। मैंने उसे उठाया। तो वह rahul का पत्र था। एक साधारण सा पत्र, जिसमें सिर्फ़ शुभकामनायें थी। मैंने उसे फ़ाड़ कर नीचे फ़ेंक दिया। एक दिन मैंने भी उसे पत्र लिख दिया और उसे भी शुभकामनायें दी। बस पत्रों का सिलसिला चालू हो गया। एक दिन उसकी एक फ़रमाईश आ गई।
“स्वीटी, सिर्फ़ एक हवाई किस करो!”
मैंने शरारत में उसे हवाई किस कर दिया। अब हम पत्रों में खुलने लगे। उसने एक बार लिख दिया कि वो मुझे प्यार करता है और मिलना चाहता है। मेरा दिल बस इसी चीज़ से डरता था। मैंने मना कर दिया।
एक बार उसने लिखा- मुझे अपनी चूचियाँ खिड़की से दिखा दो।
मैंने शर्माते हुए मेरा एक स्तन उसे दिखा दिया।
मैंने जवाब में लिखा- मैं भी कुछ देखना चाहूंगी, क्या दिखाओगे?
तो उसने अपना पजामा नीचे खींच कर अपना खड़ा हुआ लण्ड दिखाया।
मुझे बड़ा रोमान्च हो आया; मुझे मजा भी आया। अब जब तब हम एक दूसरे को अपने गुप्त अंग दिखा दिखा कर मनोरंजन करने लगे।
मुझे ये नहीं पता था कि मैं जो पत्र फ़ाड़ कर नीचे फ़ेंक देती थी उसे मेरा छोटा भाई उठा कर जोड़ कर पढ़ लेता था। यहाँ हमारी प्यार और सेक्स की पींगे बढ रही, वही भैया भी मुझे चोदने का प्लान बनाने लग गया था।
एक रात को मैंने पत्र rahul की खिड़की में फ़ेंका तो वो खिड़की से टकरा कर नीचे गिर गया। मैं भाग कर नीचे गई तो वो मुझे नहीं मिला, रात में कहाँ गिरा होगा मुझे पता नहीं चला। सुबह ढूँढने की सोच लेकर मैं ऊपर आ गई; देखा तो भैया मेरे कमरे में था; उसने कहा- इसे ढूँढने गई थी क्या?”
“भैया, मुझे वापस दे दो, देखो किसी को बताना नहीं!”
उधर rahul ने देखा कि कमरे में भैया है तो उसने खिड़की बन्द कर ली।
“बताऊँगा तो नहीं अगर, जो मैं कहूँ वो करेगी तो!”
हम बिस्तर के बिस्तर पर दीवार का सहारा ले कर बैठ गये।
“हाँ हाँ कर दूंगी, इसमें क्या है… फिर वो दे देगा!”
“हाँ ज़रुर दे दूंगा… तो फिर टॉप को थोड़ा ऊपर कर दे…”
“क्या कहा…मैं तेरी बहन हूँ!” मैं उछल पड़ी।
“तो क्या… पापा से बचना है तो मुझे दुद्धू दिखा दे!” उसने मुझे धमकी दी।
मैंने हिम्मत करके अपनी आंखे बन्द कर ली और टॉप ऊपर उठा लिया। मेरे दोनों स्तन बाहर छलक पड़े। भैया ने तुरन्त मेरे स्तनों को पकड़ लिया और दबा दिया।
“ना कर भैया…” पर जैसे मेरे शरीर में बिजली कड़क उठी; सारा जिस्म एक बारगी कांप गया; मीठी सी लहर दौड़ गई।
“अब अपना स्कर्ट ऊपर कर…”
“ऐसे तो मैं नंगी दिख जाऊँगी ना!”
“वही तो देखना है…rahul को तो खूब दिखाती है!”
“पर वो मेरा भाई थोड़े ही है” मैं नर्वस होती जा रही थी पर जिस्म में एक सनसनी फ़ैल रही थी; मैं भी अब वासना में बह निकली।
“दीदी, दिखा दे ना, अच्छा देख फिर मैं भी अपना तुझे दिखाऊँगा!”
“सच, तो पहले दिखा दे, कैसा है तेरा?” मेरे स्वर भी बदलने लगे।
मुझे भैया अब सेक्सी लगने लगा था। उसकी बाते मुझे रंग में लाने लगी थी। मेरा मन अब डोलने लगा था। भैया ने जल्दी से अपना पैन्ट उतार दिया दिया और उसका लण्ड बाहर निकल आया।
“मैं छू लूँ इसे?” मुझे सनसनी सी लगी।
“नहीं नहीं छूना नहीं, पकड़ ले इसे और मसल डाल!”
“हट रे!” मैंने उसके लण्ड को पकड़ लिया, गरम हो रहा था, लाल सुपाड़ा भी चमक उठा था।
“अब बता ना तू भी!”
मैंने अपनी स्कर्ट ऊपर उठा दी।
“तूने तो पेंटी ही नहीं पहनी है!”
“अभी rahul को दिखा रही थी ना…!”
“अच्छा, तो अब ये ले!” ये कह कर उसने मुझे दबोच लिया और मेरे ऊपर आ कर कुत्ते की तरह अपने चूतड़ चलाने लगा।
“क्या कर रहा है? क्या चोदेगा मुझे…? सुन ना rahul को बुला दे ना!” मैंने मौका देख कर उसे कहा।
“पहले मेरी बारी है, फिर उसे बुला लूंगा, बहन मेरी है, पहले मैं चोदूंगा!” उसने अपना हक बताया।
“तो चोद ना जल्दी, या कहता ही रहेगा!” उसने अब जोर लगाया और लण्ड चूत में घुस पड़ा।
“अरे यार, तू तो चुदी चुदाई है, किस किस से लण्ड लिया है अब तक?”
“अरे तो चोद ना, खुद भी कौन सा पहली बार चोद रहा है?”
“तुझे क्या पता? जरूर आशा ने कहा होगा!”
“नहीं तो… अरे धक्के मार ना…!”
“तो पारुल ने कहा होगा?”
“हाय रे पारुल? मेरी सहेली? नहीं यार… लगा जरा जोर से!”
“अच्छा तो दीपिका ने बताया होगा?” एक के बाद एक सारी पोल खोलता गया।
“अरे चोद ना मुझे ठीक से, तू तो मेरी सारी सहेलियों को तो चोद चुका है, पर इन्होंने नहीं कहा, वो तो तेरे लण्ड के सुपाड़े की त्वचा फ़टी हुई है इसलिये कह रही हूँ!” मैंने हंसते हुए कहा।
“धत्त तेरे की, मैंने तो सारी पोल खोल दी… साली तू तो एक नम्बर की हरामी निकली!” उसने धक्के बढ़ा दिये।
“भैया! हाय रे दम है रे तेरे लण्ड मे…मजा आ रहा है, लगाये जा रे!” मुझे मजा आने लगा था। मैं भी उसका लण्ड चूतड़ उछाल उछाल कर ले रही थी। वो मेरे बोबे मसलता जा रहा था।
“मेरी बहन कितनी प्यारी है! क्या चूत है! अब तो रोज चोदूंगा तुझे!”
“भैया, rahul को बुला देना ना, फ़िर दोनों मिल कर चोदना, आगे से भी और पीछे से भी!”
उसके धक्के तेज हो उठे थे, मेरा भी हाल अब बुरा हो चला था। मेरी चूत अब रस छोड़ने वाली थी, मैंने भैया को जकड़ लिया और अपने चूत का जोर लण्ड पर लगाने लगी। एक लम्बी सांस के साथ
मैंने आंख बन्द कर ली और अपना बदन कसने लगी, इतने में पानी छूट पड़ा और मैं झड़ने लगी। उसी समय भैया ने भी अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरे ऊपर पिचकारी छोड़ने लगा। मेरा सारा शरीर और कपड़े सभी कुछ वीर्य से गन्दे कर दिये।
“मजा आ गया स्वीटी, अब मैं रोज चोदूंगा तुझे, तू तो यार बहुत मजा देती है!”
मैं भी झड़ कर शान्त लेटी थी और भैया को देखती रही।
भैया कुछ देर तक तो बातें करता रहा फिर जाने को हुआ।
“मैं अब जाता हूँ, रात बहुत हो गई है” पर मैं कैसे जाने देती
“चले जाना ना, अभी एक बार और मजे करे?” ये सुनते ही भैया खुश हो गया और फिर से मेरे बिस्तर पर आ गया। हम दोनों फिर आपस में गुथ गये। उसका लन्ड मेरी चूत के दरवाजे पर आ टिका… और कमरे में एक बार फिर सिसकारियाँ गूंज उठी। Hindi Porn Stories
आप लोगों ने याद किया और मैं Sex Stories हाज़िर हो गया आप लोगों के लिए फिर से एक नया अनुभव लेकर!
दोस्तो, फिर एक नया अहसास, सेक्स से भरा, मज़े से भरा और साथ ही ढेर सारी मस्ती, जो मैंने महसूस की वही मस्ती लेकार आया हूँ आप सभी के लिए!
कसम खुदा की क्या वो हसीं सूरत थी,
चढ़ती उसके हुस्न पे जवानी की मस्ती थी,
छलक गया यौवन उसकी नज़र से वो कातिल,
कि जिसमें डूब गई मेरी जवानी की कश्ती थी!
दोस्तो, अबकी बार मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान घूमने गया था।
जाते वक़्त हम भरतपुर से होकर गुजरे थे तो सभी ने योजना बनाई कि भरतपुर पक्षी अभयारण्य देख कर ही आगे जायेंगे।
इसलिए हम लोगों ने टिकेट लिए और अंदर चले गए।
अभयारण्य का दायरा कई किलोमीटर में फैला हुआ था।
चलते चलते हमारा ग्रुप बिखर गया और मोबाइल से हम एक दूसरे के संपर्क में रहे।
मज़े की बात, मैं अपने ग्रुप से अकेला अलग हो गया। काफी दूर चलकर एक परिवार के कुछ लोग वहां से निकले, वो अलग साइकलों पर थे।
वहां घूमने के लिए साईकलें मिलती हैं। उन लोगों में से एक लड़की पीछे रह गई।
मैंने देखा उसकी साईकल के पैडल फ्री हो गए थे। वो थोड़ी आगे तक बढ़ी और रुक कर चेन को देखने लगी।
इतने में उसका फॅमिली परिवार आगे निकल गया।
मैं पास से गुजरा तो उसने कहा- अगर आप को बुरा न लगे तो कृपया मेरी साईकल की चेन लगा दोगे?
मैंने उसे एक नज़र भर देखा तो देखता ही रह गया! हुस्न इतना कातिल कि किसी को फनाह करने के लिए किसी और चीज़ कि जरूरत ही न पड़े!
नीली जींस उस पर लाल टॉप!
माशा अल्लाह! शरीर का हर एक अंग अलग अलग दिखाई दे रहा था। टॉप के ऊपर के खुले बटन मानो उसकी छुपती खूबसूरती को बेशर्मी से जग-जाहिर कर रहे थे। गोरे से चेहरे पर ऊपर से ढलते हुए सुनहले बाल उसके हुस्न की बिजली को मेरे अंग अंग पे गिरा रहे थे। कमर इतनी नाजुक कि अगर जोर से पकड़ लूँ तो लचक जाये, बिलकुल हल्की फुल्की! लेकिन एक उत्तम बदन की मलिका!
खैर मैंने अपनी हसरतों को काबू किया और बिना कुछ बोले उसकी चेन लगा दी हाथ चेन पर और नज़र उस हुस्न की परी पे!
और इसी गुस्ताखी में दब गई मेरी ऊँगली चेन में। ऊँगली में मामूली सी चोट लगी थी, थोड़ा सा खून निकल आया, मैंने सोचा अब फ़िल्मी स्टाइल में ये दुपट्टा फाड़ेगी और मेरी ऊँगली पर बांधेगी, लेकिन यहाँ तो सीन ही उल्टा हो गया, उंगली से खून बहता देख कर वो तो गश खाकर बेहोश हो गई। वो गिरने लगी तो मैंने सीधे ही उसे अपनी बाँहों में ले लिया।
हमने तो खुदा से माँगा कि
उसके हाथों का छूना नसीब हो जाये,
हम देख लें उसे नज़र भर के,
तेरी हम पर इतनी रहामत हो जाये,
के वो बेखौफ आ गए बाँहों में मेरी,
के न अब उनसे दूर रहा जाये!
न उनको खुद से दूर किया जाये!
वो मेरी बाँहों में बेहोश थी और मैं सर से लेकर पाँव तक उसे देखे जा रहा था। दिल में डर था कि वो होश में आते ही मुझसे दूर हो जायेगी।
लेकिन मैंने उसके गालों को छुआ और उसके चेहरे को हिला कर उसे बेहोशी से जगाया। उसने आँख खोली और मेरी बाँहों में लेटी हुई एक टक मुझे देख रही थी। उसके चेहरे पर सर्दी में भी पसीना छलक आया। मैंने अपने रूमाल से उसका चेहरा साफ़ किया। उसके गोरे गालों को छूकर मेरी उँगलियाँ मदमस्त हो रही थी।
खैर वो मेरी बाँहों से अब दूर हो गई और उसने सॉरी कहा।
उसने कहा- मेरी वजह से आप को चोट लग गई!
मैंने भी बिना सोचे समझे कह दिया- अगर मुझे चोट ना लगती तो आप को बाँहों में लेने का मौका कहाँ मिलता!
वो इस बात पर नाराज़ भी हो सकती थी लेकिन वो शरमा गई और मेरी हिम्मत बढ़ गई।
तभी उसकी मम्मी का फ़ोन आ गया, उसने अपने बेहोश होने की बात छोड़ कर बाकी सब अपनी मम्मी को बता दिया।
उसने मुझसे कहा- मेरे घर वाले आगे मेरा इंतज़ार कर रहे हैं और वो आपसे भी मिलना चाहते हैं।
मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मधु बताया।
उसने मेरा नाम पूछा, मैंने भी अपना नाम बता दिया।
उसने कहा- अपनी उंगली दिखाओ!
मैंने कहा- रहने दो तुम बेहोश हो जाओगी।
तो उसने कहा- कोई बात नहीं तुम मुझे थाम लेना!
चलते चलते हम बात करते रहे और एक दूसरे को अपने नंबर दे दिए।
कुछ दूरी पर उसके परिवार वाले मिल गए।
उसके घर वाले बिल्कुल आजाद विचारों वाले थे। उनसे बात करके मैं अपने दोस्तों के पास जाने लगा।
जाते जाते मधु ने अपना रूमाल मेरी उंगली पे लपेट दिया।
वो रूमाल मैंने अपने दोस्तों से छुपाया, कह दिया- यार मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं यही बैठता हूँ, तुम घूम आओ!
वो लोग चले गए।
मैंने मधु को फ़ोन किया और काफी देर तक उससे बात की। वो लोग भरतपुर में ही होटल पार्क में ठहरे थे।
मैंने शाम को अपने दोस्तों से कहा- यार! मेरी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए मैं आज यहीं रुकना चाहता हूँ, तुम लोग जयपुर पहुँचो, मैं कल आकर तुमको मिलूँगा।
वो लोग वहाँ से निकल गए।
अब मैंने भी जाकर होटल पार्क रेज़िडेन्सी में एक कमरा बुक कराया।
मधु और उसका परिवार पहली मंज़िल पर थे और मैं दूसरी मंज़िल पर!
मैंने मधु को इसके बारे में बताया कि मैंने भी तुम्हारे होटल में ही कमरा ले लिया है, तो यह सुन कर मधु कुछ उत्साहित सी हो गई।
मुझे लगा शायद मधु भी यही चाहती थी।
एक बार फिर हमारी मुलाकात डिनर के समय पर हुई।
अब की बार मधु ने एक जामुनी रंग की साड़ी पहनी हुई थी। कसम से क्या कयामत थी वो उस वक्त!
और उस पर बैक-लैस ब्लाऊज़ उस कयामत को और भी भड़का रहा था।
भोजन के बाद उसके घर वालों ने मुझे फ़िर अपने साथ बुला लिया और हम सभी पार्क में टहलने लगे।
अब मैंने मौका देख कर टहलते टहलते मधु की नंगी कमर पर हाथ रख दिया।
चलते चलते मधु ठहर सी गई लेकिन कुछ ही पलों में मैं मधु से दूर हो गया।
फ़िर हम लोग अपने अपने कमरों में चले गए।
मैं बिस्तर पर था लेकिन कमबख्त नींद किस की सगी थी जो आ जाती।
मैं सोने की कोशिश कर रहा था लेकिन मधु की जवानी के परदे एक-एक करके मेरी आँखों पर पड़ते जा रहे थे जिन्होंने नींद को मेरी आँखों से दूर कर दिया।
रात के लगभग 11 बजे होंगे, मैंने मधु को फ़ोन किया, एक दो बार रिंग बज़ते ही उसने फ़ोन उठा लिया, ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे फ़ोन का इन्तज़ार कर रही थी।
दिन में ज्यादा घूमने के कारण उसके घर वाले थक कर सो रहे थे।
मैंने उसे अपने कमरे में बुला लिया।
मधु ने आने में जरा भी देर नहीं की।
दो तीन मिनट में वो कयामत उसी लिबास में मेरे कमरे में आ गई।
कसम से, मानो, किसी दुल्हन की तरह शरमाई सी वो बेड के पास खड़ी हो गई।
मैंने भी पहले उसका अंग अंग जी भर कर देखा फ़िर धीरे से बाहों में भर लिया। मानो कोई फ़ूल मेरी बाहों में सिमट आया हो।
मैंने उसे बिस्तर पर बैठा लिया और उसके चेहरे को साड़ी के पल्लू से ढक दिया।
उसने भी पल्लू को दुल्हन की तरह थामे रखा फिर धीरे से मैंने उस चाँद से घूँघट के बादलों को हटाया और उसके मदमाते होटों पर एक किस कर दिया तो वो एकदम ही मुझसे लिपट गई।
मैंने उसकी सांसों की गर्मी को अपने सीने पर महसूस किया।
वो बिलकुल तैयार थी, मैंने अपना हाथ धीरे धीरे उसकी साड़ी में डालना शुरू किया, वो नीचे की तरफ झुकती सी चली गई।
मैंने एक हाथ उसकी मदमस्त कर देने वाली चूचियों पे रख दिया और उन्हें दबाने लगा।
वो टूट कर अब मेरी बाँहों में बिखरने लगी थी, उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपना नरम नाज़ुक शरीर मुझे सौंप दिया।
मेरा एक हाथ अब उसकी नरम, गरम और गुलाबी चूत पर पहुँच कर उसके साथ शरारत कर रहा था।
शायद वो अब सहन नहीं कर पा रही थी।
मैंने एक एक करके उसके शरीर से सारे कपडे अलग कर दिए।
अब वो गुलाब की गुलाबी कली मेरे सामने अपनी सारी पंखुडियों से बाहर आ चुकी थी।
उसके पूरे नंगे बदन को देख कर तो कोई भी अपना आप खो दे!
मैंने अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों एक दूसरे की बाँहों की गिरफ्त में जाने के लिए बेताब थे।
मैंने बिस्तर पर जाकर मधु को कस के अपनी बाँहों में ले लिया।
उसके जिस्म का अंग अंग सेक्स की आग में जल रहा था।
अब इस सावन को मधु के जिस्म पर बरस कर उसके जिस्म की प्यास को बुझाना था।
मैंने मधु की खामोशी तोड़ी और उससे पूछा कि क्या कभी पहले सेक्स किया है तो उसने चेहरे को हाथों से ढक लिया और इन्कार में सर हिला दिया।
यानि कि मधु बिल्कुल अनछुई थी।
अब मुझे उसके साथ थोड़ी ऐहतियात बरतनी थी क्योंकि उसकी चूत बिल्कुल कोमल थी।
मैंने ऊँगली से उसकी चूत को धीरे धीरे से सहलाया तो मधु कि सिसकियाँ सी छूटने लगी।
उस कमरे का माहौल आऽऽ आहऽहऽहऽ ऊऽउऽ उफ़ऽफ अऽअऽ आ स ओऽऽऊहऽ नऽऽनाऽ सावन करोऽ हम्मऽ … ऊऽऽऊफ ओ ओह येसऽस स से और भी सेक्सी हो गया।
मैंने उसके शरीर पर हर जगह चूमा, उस कली को हर तरफ से चूमा।
अब मैंने उसकी हालत को समझते हुए धीरे से अपना लण्ड उसकी चिकनी और मुलायम चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उसके अंदर लण्ड को डालने लगा।
मधु अपने पैरों को भींचने लगी और कहा- दर्द हो रहा है!
मैंने उस से कहा- अगर टांगें भींचोगी तो दर्द होगा!
अब उसने अपने पैर खोल लिए।
मैंने एक झटके से जोर से लण्ड चूत के अंदर डाला तो मधु की चीख निकल गई और लण्ड चूत के अंदर था।
मधु बेहाल सी हो गई, मैंने उसे थोड़ा शांत किया, उसका चेहरा पसीने से भीग गया।
अब मैंने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाला तो लण्ड पर खून लगा था, उसे देख कर मधु बोली- कुछ होगा तो नहीं?
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा!
मैंने धीरे धीरे लण्ड को हिलाना शुरू किया तो मधु सिसकियाँ अब सेक्स की आवाजों में बदलने लगी थी और उसका चेहरे का डर एक चमक में बदल गया था।
फिर तो उल्टा मधु सेक्स करने में मेरा साथ देने लगी।
मैंने उसे धीरे से चोदा, अपने लण्ड को उसकी गहराइयों तक उतारा, जितना गहरा लण्ड चूत में जाता, उतनी ही मधु मुझसे चिपक जाती और उतनी ही जोर से उसकी सिसकी आती थी।
उसके बाद तो पता नहीं हम दोनों इतना समय खींच गए कि इतने गरम होने के बावजूद हम लगभग 25 मिनट तक सेक्स करते रहे।
काफी देर बाद मैं मधु के ऊपर निढाल सा हो गया और साथ ही साथ मधु ने भी खुद को मुझसे जकड़ लिया।
अरे! यानि कि यारो उसका भी सेक्स पूरा हो गया था।
अब हम दोनों काफी देर एक दूजे पर निढाल लेटे रहे और आधे घंटे बाद दोबारा से एक बार फिर एक दूजे में समां गए।
और फिर मधु अपनी साड़ी पहन कर थके से कदमों से वहां से अपने कमरे में चली गई। खैर एक दूजे की कुछ मिठास दिल में लिए नींद के आगोश में समां गए।
अगली सुबह जब हम उठे और नाश्ते के लिए नीचे आए तो मैंने मधु की आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर एक मुस्कान देखी।
सुबह 11 बजे तक मुझे होटल से चेक आउट करना था।
मैंने मधु को यह बताया तो वो बोलने लगी- हम शाम 4 बजे यहाँ से चेक आउट करेंगे!
सुबह मधु के घर वाले भरतपुर घुमने के लिए निकलने लगे तो मधु ने उनसे बहाना कर दिया कि उसके सर में बहुत दर्द है।
मधु की मम्मी उसके पास रुकने लगी लेकिन मधु ने कहा कि मैं थोड़ा सोना चाहती हूँ, फिर आप मेरे पास अकेली बैठी बोर हो जाओगी, इसलिए आप भी थोड़ी देर घूम आइये!
उसकी मम्मी मान गई।
अब मधु अकेली ही कमरे में थी।
कुछ देर बाद मैं मधु के कमरे में गया।
मेरे वहां जाते ही मधु भागकर मुझसे लिपट गई और नज़रें नीचे करके कहने लगी- सावन! क्या रात वाला अहसास तुम मुझे अभी करा सकते हो?
उसने मेरे दिल की बात कह दी।
फिर क्या था हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर बैठ गए।
मैंने मधु के तन के हर हिस्से को किस किया। जैसे मैं उसे किस करता तो मधु उतनी ही उत्तेजित होती जाती।
फिर हमने आधे घंटे तक एक दूसरे को वो अहसास कराया, जिस अहसास को आप मेरे इस अनुभव को पढ़ने के बाद करना और पाना चाहते हो।
उसके बाद मैंने मधु को कपड़े पहनाये और उसके नरम नाज़ुक होटों पे एक प्यारा सा “गुड बाय किस” किया और मैं होटल से चेक आउट कर गया।
दोस्तो, ये थे मधु के साथ बिताये कुछ हसीं पल!
आपको मेरा ये अनुभव कैसा लगा?
मुझे मेल कर के जरूर बताना! Sex Stories
बात आज से करीब दो साल Antarvasna पहले की है, मैं अपने चाचा के यहाँ पर पढ़ाई करने के लिए गया हुआ था! तब मैं सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। मुझे यह तो पता था कि सेक्स करते हैं पर कैसे करते हैं, मैं नहीं जानता था!
मेरे चाची की एक भतीजी थी जो देखने में बहुत ही सुंदर थी। वो इतनी सुंदर थी कि मानो कोई परी हो! मैं जब भी उसे देखता तो सोचता कि काश यह मेरी गर्ल-फ्रेंड होती तो कितना अच्छा होता!
देखते ही देखते वो और बड़ी हो गई और मैं भी बड़ा हो गया और अब मैं सब समझने लग गया था क्योंकि मेरी उम्र 21 साल की हो गई थी और वो मुझसे बड़ी थी इसलिए उसकी उम्र 23 साल हो गई थी।
समय के साथ-साथ उसका फीगर और भी ज्यादा सेक्सी हो गया था, उसकी चूची इतनी बड़ी हो गई थी कि जैसे दो मोसम्म्बी हों रस से भरी हुई! और उसकी गांड तो इतनी सुन्दर लग रही थी कि जो भी देखे बस यही सोचने लगे कि बस एक बार इसे मसल दूँ! उसे देखकर कोई भी उसे मन में ही चोद दे इतनी सुन्दर थी वो!
समय बीतता चला गया। फ़िर एक बार हुआ यूँ कि हमारे घर पर एक कार्यक्रम था जिसमें सभी को बुलाया था, सो वह भी आई थी। उसे देखकर मैं तो जैसे ख़ुशी के मारे पागल ही हो गया था। मैंने बिना कुछ सोचे समझे बस उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने कमरे में ले गया! हम दोनों बचपन से ही खूब बाते करते थे इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा!
फ़िर मैंने उससे उसके हाल चाल पूछे और इधर की ढेर सारी बात करी लेकिन मेरे मन में तो कुछ और ही चल रहा था सो मैंने उससे पूछ लिया कि इतनी बड़ी हो गई हो, कोई दोस्त बनाया या नहीं?
तो उसने नहीं में जवाब दिया। मुझे यह सुनकर और भी ख़ुशी हुई और मैंने उसे एक आँख मार दी तो उसने कहा- तेरा इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा है?
फिर मैंने उसे कहा- मैं तुझे बहुत चाहता हूँ और बहुत पसंद करता हूँ। लेकिन तुझे मैं कैसा लगता हूँ? क्या तू मुझे पसंद करती है?
तो उसने कुछ जवाब नहीं दिया और बस मेरी तरफ आँख मार के चली गई! फ़िर मैंने उससे थोड़ी देर बाद यही पूछा तो कहने लगी- तू यह सब क्यों पूछ रहा है? तू मुझे अच्छा लगता है और इसीलिये ही मैं तुझसे बात करती हूँ।
तो फिर मैंने उसे ‘आई लव यू’ कह दिया और उसके गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया। जवाब में उसने भी चुम्मा दे दिया। फ़िर हम दोनों कमरे से बाहर आ गए और वो अन्य लोगों से बातें करने लग गई और मैं घर के काम में लग गया।
फ़िर जब शाम हुई तो मैंने उसको अपने कमरे में आने का इशारा किया। जब वो कमरे में आई तो मैंने उसे जोर से पकड़ लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये और उसके होठों का रस पीने लगा।
क्या होंठ थे! उसके एकदम शहद से भरे!
मैंने उसके अधर इतनी जोर से चूसे कि वो गुलाबी से लाल हो गए।
और फ़िर वो भाग गई बाहर!
उसके बाद अगले दिन वो जब भी मुझे देखती अपने होठों को काटने लगती। फ़िर शाम हो गई और घर पर कार्यक्रम चालू हो गया। सभी लोग बाहर थे, मैं भी बाहर था लेकिन घर का सारा काम मुझे ही करना था इसलिए मैं घर के अंदर गया और उसे भी इशारा कर दिया।
फ़िर हम दोनों घर में अकेले ही रह गए और हमने खूब चूमा-चाटी की। फ़िर मैंने अपना एक हाथ उसकी चूची पर रख दिया, जिससे वो सिहर गई और मेरा हाथ हटाने लगी। तब मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी दूसरी चूची पर भी हाथ रख दिया।
वो उत्तेजित हो गई और अपने होठों को काटने लगी और मुझसे कहने लगी- मैं पागल हो जाऊँगी, मुझसे अब रहा नहीं जाता! तू मुझे बस मसल दे यार! ऐसे से ही करता रह!
मैं भी उसकी चूचियों को मसल रहा था प्यार से!
फ़िर मैंने देखा कि वो अब गरम हो गई है तो मैंने उसकी कमीज को ऊपर करके अंदर से हाथ डाल दिया और उसके स्तन मसलने लगा। फ़िर मैंने उसके होठों से अपने मुँह को हटाया और उसकी चूची पर लगा दिया और जोर से चूसने लगा।
इतने में मेरी चाची भी घर में आ गई और हम दोनों अलग हो गए। मैं कुछ सामान लेने का नाटक करने लगा और हम दोनों बाहर आ गए।
जब रात हुई तो मैंने उसे कहा कि वो मेरे कमरे में ही सो जाये तो इस पर वो नहीं मानी और मैं रात भर सो नहीं सका और उसके ही बारे में सोचता रहा, सुबह होने का इंतजार करने लगा।
जब वो सुबह दिखी तो मैं तो उसे देखता ही रह गया, उसने काले रंग का सूट पहना था और उसमें वो एक दम माल लग रही थी। उसने मुझे देखा और एक आंख मार के चली गई रसोई में।
मैंने उसे अपने पास आने का इशारा किया और वो जल्दी से आ गई। उसके आते ही मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा।
फ़िर वो वापस चली गई और जब हम दोपहर को मिले तब मैंने फ़िर से उसके स्तन दबाये और खूब मसला, चूसा और उसके चुचूकों को सुर्ख लाल कर दिया। वो भी सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी- आहह ह ह ह उ उ उह उह हा हा हाहा जोर से और और पी लो… बस स स छोड़ दो ओ.ओ. जाने दो.. फ़िर मैंने उसे छोड़ दिया और रात को मिलने की योजना बनाई।
रात हुई तो वो अपनी नाइटी पहन कर रात के करीब दो बजे मेरे कमरे में आई, मुझे जगाया। मैंने अपने कमरे के दरवाजे को अटका दिया और उसे अपनी बाहों के आगोश में ले लिया वो भी बिना कुछ बोले मुझसे लिपट गई और मुझे चूमने लगी।
थोड़ी देर रुक कर वो रोने लगी और कहने लगी- अब हम नहीं मिल सकेंगे क्योंकि मैं कल जा रही हूँ अपने घर! और कहने लगी कि आज की रात ही है हमारे पास! बस जो भी करना है कर लो जी भर कर!
तो मैंने भी उसे कहा- जानू, ऐसा मत कहो! तुम तो हमेशा मेरे साथ ही रहोगी मेरे दिल में बसकर!
वो फ़िर से हंसने लगी और मुझसे लिपट गई, मुझे चूमने लगी और कहने लगी- ओह मेरे राहुल! मैं तुम्हें कभी भुला नहीं पाऊँगी, मैं जब तक जीयूँगी तुम्हारी ही रहूंगी! मेरे तन-मन-धन पर अब सिर्फ तुम्हारा ही अधिकार होगा! मैं किसी और की नहीं हो सकती हूँ!
फ़िर से उसकी आँखों से मोती बहने लगे। मैंने भी उन मोतियों को अपनी जबान से पी लिया और हम फ़िर चूमा-चाटी करने लग गए। उसने मेरी जबान को पूरा चूस लिया और मैंने भी! फ़िर मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा वो सीहरने और कराहने लगी- मसल दो आज इन्हें! चूस लो! सारा रस निकाल दो इनका!
और मैंने अपना हाथ धीरे धीरे नीचे सरकाना चालू किया। मैंने उसकी नाभि पर जैसे ही अपनी जबान लगाई, वो सिमटने लगी और उसकी साँसें चढ़ने लगी। वो जोर जोर से साँस लेने लगी, वो इतनी गरम हो गई थी कि अपना हाथ खुद ही योनि पर फेरने लगी।
मैंने भी अब देर न करते हुए उसकी कुर्ती को ऊपर उठाया और अब उसे पूरा ही निकाल दिया। फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसकी सलवार को उतारने लगा। लेकिन जैसे ही सलवार उतारने लगा, मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी। मैंने बाहर देखा तो मेरे चाचा बाथरूम करने के लिए उठे थे।
इतने में जानू भी डर गई और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगी। फिर जब चाचा चले गए तो मैंने वापस उसके कपड़े निकाले और उसके ऊपर लेट कर उसे चूमने लगा। वो थोड़ा नार्मल हुई और हम फिर हमारे काम में जुट गए।
मैंने उसकी पैंटी जो गुलाबी रंग की थी, वो उसके ऊपर इतनी अच्छी लग रही थी कि क्या बताऊँ! उसको जैसे ही मैंने उतारा, मेरे सामने जन्नत का द्वार खुल गया था। क्या चूत थी उसकी! एकदम गुलाबी! जैसे गुलाब की पंखुड़ियों को शहद के रस में भिगोया हो!
वो इतनी गरम हो चुकी थी कि उसकी योनि से रस टपक रहा था और जांघे गीली हो गई थी। मैंने भी जबान से उस अमृत को पूरा चाट कर साफ़ कर दिया। वो इतने में ही पहली बार स्खलित हो गई।
मैंने उसके योनि-अमृत को पूरा पी लिया फिर उसकी योनि के अंदर एक ऊँगली धीरे धीरे घुमाना चालू किया। वो आवाजें निकालने लगी तो मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने मेरे होठों को काट लिया।
मैंने उसे अपना लोअर उतारने को कहा तो वो शरमाने लगी। मैंने भी उसका हाथ पकड़ा और उसी के हाथों से अपना लोअर निकलवाया। फिर उससे ही चड्डी भी उतरवाई और उसने जैसे ही मेरे लण्ड को छुआ मेरे तो जैसे रोंगटे ही खड़े हो गए। मेरे पूरे जिस्म में एक आग लग गई और मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा।
फिर मैंने उसके योनि-द्वार को चूसकर थोड़ा नरम किया और फिर उस पर अपने लण्ड का शीर्ष-भाग रखा और जोर लगाने लगा। लेकिन जानू की चूत इतनी टाइट थी कि उसमें घुसने की बजाए लण्ड फिसल जाता।
फिर मैंने थोड़ा तेल लिया और उसकी योनि में लगाने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंने एक बार और कोशिश की तो इस बार तेल के कारण मेरे लण्ड जो छः इंच का है, करीब दो इंच तक अंदर चला गया और उसकी चीख निकल गई। लेकिन किसी के सुन लेने के डर से उसने अपनी चीख को दबा लिया।
मैंने अपने लण्ड पर कुछ तरल पदार्थ महसूस किया, हाथ लगाकर देखा तो वो खून था जो उसकी योनि से निकल रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे। मैंने फिर उसे चोदना रोककर उसके स्तन सहलाए और उसे चूमने लगा।
वो जब थोड़ी नार्मल हुई तब मैंने फिर से एक झटका लगाया और करीब चार इन्च तक लण्ड अन्दर चला गया। वो फिर से चीख पड़ी। मैंने भी थोड़ा रुक कर फिर एक धक्का लगाया और पूरा लण्ड पेल दिया उसकी चूत में!
अब वो थोड़ा नार्मल हो चुकी थी और फिर मैंने धक्के तेज करना चालू कर दिया जिससे उसके मुँह से चीखें निकलने लगी और वो आवाजें करनेलगी- आ.. अ.सी.. आ .सी..स. सी.. हा.. हा. हहह . नि.. नी.. अह.. आह… आह..
मुझे भी मज़ा आने लगा और हम दोनों चरम सीमा पर पहुँचने लगे। वो अब तक एक बार झड़ चुकी थी और अब फिर स्खलित होने वाली थी। वो कहने लगी- मैं जाने वाली हूँ!
मैंने भी कहा- मैं भी जाने वाला हूँ!
और हम दोनों ही एक साथ झड़ गए और मैंने अपना सारा रस उसकी चूत की गहराइयों में डाल दिया। हम दोनों का रस उसकी चूत से निकलने लगा, मैंने उसे साफ किया और उससे कहा- क्या एक बार और हो जाए?
तो उसने भी शरमाते हुए हामी भरी और हमने एक बार फिर चुदाई की। इस बार उसे पहले ज्यादा मज़ा आया और करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद हम फिर से झड़ गए। इतने में सुबह के पाँच बज गए और अगली सुबह वो उसके घर वालों के साथ उसके घर रतलाम चली गई। मैं उसकी प्यास में तड़पता रह गया। लेकिन हम दोनों फ़ोन पर खूब बातें करते और मज़ा लेते।
छः महीनों के बाद उसने कहा कि उसके घरवालों ने उसकी शादी कहीं राजस्थान में तय कर दी है, कुछ ही दिनों में उसकी शादी होने वाली है। और वो जोर जोर से रोने लगी, कहने लगी- राहुल मैं तुम्हारे अलावा और किसी की नहीं हो सकती हूँ, मेरे शरीर और आत्मा पर सिर्फ तुम्हारा ही अधिकार है।
उसकी इस बात से मेरी भी पलकें नम हो गई और फिर खबर आई कि उसकी शादी होने वाली है, उसमें मुझे भी जाना है।
फिर देखते ही देखते उसकी शादी हो गई और आज उसकी शादी को तीन साल हो गए हैं लेकिन मैंने कभी उसके बारे में तलाश नहीं की और मैं एक बार फिर प्यासा ही अपनी जिंदगी बिता रहा हूँ!
दोस्तो, कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी?
मुझे मेल करके जरुर बताना!
मेरी अगली कहानी में आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने मेरी दूसरी गर्ल फ्रेंड सोनू को कैसे चोदा! Antarvasna
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