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Massage Girl in East Singhbhum: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in East Singhbhum who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in East Singhbhum that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The East Singhbhum massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in East Singhbhum who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your East Singhbhum massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This East Singhbhum massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in East Singhbhum who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in East Singhbhum employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in East Singhbhum helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in East Singhbhum

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in East Singhbhum at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Sex Stories

करीब एक हफ़्ते के बाद भाभी लौट कर घर आई तो हमारे Sex Stories घर मिलने चली आई, एकान्त पाते ही मैने पूछा कि कहाँ गई थी? तो उसने कहा दोपहर में घर आना वहीं पर बातें होंगी, मैं तो तुम्हें ही बताने आई थी कि मैं लौट आई हूं। दोपहर में मैं स्कूल से ही उनके घर चला गया, बेल बजाने पर भाभी ने दरवाजा खोला, मैने देखा भाभी बहुत प्रसन्न दिख रही है मैने पूछा तो उसने कहा अन्दर तो आओ मैं अन्दर सीधे बेडरूम में चला गया बेड पर छोटू सो रहा था इसलिए मैं सोफ़े पर बैठ गया।थोड़ी देर में भाभी दो कप कोफ़ी लेकर आई और मेरे से सट कर बैठ गई उसने गुलाबी रंग की सलवार कमीज पहने थी काले रंग की ब्रा ऊपर से दिख रही थी। भाभी अक्सर काली ब्रा और काली पैंटी पहनना पसन्द करती है। मैने पूछा कहा गई थी? तो उसने कहा मैं इलाहाबाद अपनी बहन के घर गई थी वो मुझसे केवल दो साल छोटी है और वो मुझसे पूरी तरह खुली हुई है मैने उसे तुम्हारे बारे में बताया तो वो कह रही थी मैं भी मिलना चाहती हूं।कोफ़ी खत्म होने के बाद मैने भाभी को अपनी तरफ़ खींचा भाभी मेरी गोद मे गिर गई मैने उसकी चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा तो मुझे महसूस हुअ कि साइज़ में कुछ अन्तर आ गया है, मैने पूछा तो वो हसने लगी और कहा लगता है दवा का असर हो रहा है, मैने तबतक सलवार खोल दी थी भाभी जब खड़ी हुई तो सलवार नीचे सरक गई, उसने कहा लो मैं पूरा काम किए देती हूं यह कह कर उसने अपनी कमीज भी निकाल दी फ़िर से मेरे सामने उसका भरा हुआ शरीर सामने था। मेरे लंड में तनाव भरता जा रहा था, मैने भाभी को नीचे कालीन पर लिटा कर अपने होंठों को उनके होंठों से जकड़ दिया, भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।ऊऊह कितना मीठा स्वाद लग रहा था, मैने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया मैं अपने हाथों से उसके चेहरे को पकड़ रखा था उसकी लार मेरे अन्दर बह रही थी कुच देर के बाद मैने अपनी जीभ उसके अन्दर डाल दी और उसे पूरा अन्दर डाल कर चारों ओर घुमाता रहा काफ़ी देर तक हम एसा करते रहे फ़िर उसने कहा चलो ६९ करते हैं, मैने पूछा ये क्या होता है तो उसने कहा पहले अपने कपड़े उतारो तो बताती हूं। मैने अपनी पैंट और शर्ट निकाल दी और बेड के किनारे बैठ कर भाभी को कपड़े उतारते देखने लगा अब उसने अपनी ब्रा को उतार दिया और मेरे पास आ कहा चलो मैं तुम्हारी सफ़ाई कर दूं यह कह कर उन्होंने वही बोतल निकाली और उसे मेरे लंड के चारों ओर लगा दिया तो मैने कहा लाओ मैं भी तुम्हारी पूरी सफ़ाई कर दूं तो उसने कहा ये बहुत अच्छा रहेगा यह कह कर वो बेड पर लेट गई मैने उनकी पैंटी निकाल दी उसकी फ़ूली हुई बुर पर छोटे छोटे काले बाल थे मैने उंगली डाल कर बोतल से ढेर सारी क्रीम निकाल कर उसकी चूत पर लगा दिया और धीरे धीरे मालिश करने लगा मेरा लंड हिलोरे लेने लगा, मैने उसकी चूचियों को दबाना चाहा तो उसने कहा पहले क्रीम को पोंछ लो, तभी मेरी नजर उसके बगल के बालों पर पड़ी मैने कहा इसे भी साफ़ कर दूं तो बोली नहीं ये जब कुछ बड़े हो जायेंगे तो तुम्हें अच्छे लगेंगे इसे रहने दोमैं सोफ़े पर बैठ गया और हम बातें करने लगे तो भाभी ने बताया तुम्हारे भैया तो रात में कपड़े निकाल कर अपना लंड मेरी बुर में डालने की कोशिश में लगे रहते हैं उन्हे ये भी जानने की जरुरत नहीं महसूस होती कि मेरी चूत सूखी होने के कारण कितना दर्द कर रही होती है जब तक मेरी चूत गीली होती है तब तक वो अपना पानी छोड़ चुके होते हैं इस तरह मैं असन्तुष्ट रह जाती हूं। मैने भाभी से पूछा अच्छा बताओ तो जरा लेडीज़ को क्या करना अच्छा लगता है तो भाभी ने कहा ये कोई नियम की बात नहीं है सेक्स तो महसूस करने की बात है केवल महसूस करके भी सेक्स में संतुष्टि मिल सकती है, तुम निश्चिंत रहो मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगी तो तुम शादी के बाद अपनी बीवी को पूरी तरह सन्तुष्ट कर पाओगे, मैने कहा भाभी तुम कितनी प्यारी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो, भाभी ने कहा देखो सेक्स तो एक भूख की तरह है इस तो सन्तुष्ट करना ही पड़ता है, कुछ लोग अपने हाथों से अपने आपको सन्तुष्ट कर लेते हैं तो कुछ लोग बाहर किसी को खोज लेते हैं इसमें तो कोई बुराई नहीं है केवल इस बात का ध्यान रखना है कि आस पास के लोगों में ये बात पता नहीं चले क्योंकि ये सब हमारे समज में अच्छा नहीं माना जाता।बातें करते काफ़ी देर हो गई तो भाभी ने कहा चलो बाथरूम में नहा लें, हम दोनो साथ ही बाथरूम में घुस गये शोवर चला कर हम एक दूसरे से लिपट कर देर तक भीगते रहे। मैं बीच बीच में भाभी के पीठ पर हाथ फ़िरा रहा था हम दोनो ने अच्छी तरह एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। भाभी की चूचियों पर साबुन वाला हाथ रगड़ने में बहुत अच्छा लग रहा था उसने भी मेरे लंड की अच्छी तरह से रगड़ाई की, हम दोनो बाहर आ कर टोवल से अपना बदन पोंछ लिए तो भाभी ने कहा चलो एक खेल खेलते हैं, हम दोनो बेड पर लेट गै भाभी ने पोंड्स का पाउडर निकाल कर उसे मेरे बदन पर पोत दिया और एसा ही करने को कहा मैने भी उनके बदन पर पाउडर डालकर पूरे शरीर पर लगा दिया तो भाभी ने कहा चलो मेरे ऊपर लेट जाओ मैं पूरी तरह उनके ऊपर लेट गया अब हम आपस में बदन रगड़ते रहे मेरा लंड भाभी की फ़ूली हुई चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा थाभाभी ने कहा तुम मेरी ऊपर की तरफ़ से धीरे धीरे नीचे की तरफ़ जाओ मैने भी चूत पर पहुंच कर अपनी जीभ को चूत में घुसाना चाहा तो भाभी ने कहा अभी समय नहीं हुआ है, अब मेरा मुंह भाभी के पैर की तरफ़ था और मेरा लंड भाभी के चेहरे को छू रहा था उसने मेरा लंड अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया और अपने मुंह में डाल दिया अपने आप मेरा मुंह भाभी की चूत से सट गया अब भाभी की चूत से रस बह रहा था मैने चूत में अपनी पूरी जीभ घुसा कर चूसने लगा भाभी भी मेरे लंड को अपने मुंह से चूस रही थी कि अचानक मेरे लंड का पानी छूट गया भाभी ने उसे पूरा पी लिया अब भाभी जोर जोर से सिसकियां ले रही थी यस और करो और करो और करो यह कहते हुए भाभी ने अपने दोनो पैरों से मेरे सिर को दबा लिया और अब भाभी ने पलटने की कोशिश शुरु कर दी अब मैं भाभी के नीचे था भाभी मेरे मुंह पर धक्के मार रही थी और उसकी चूत से गरम गरम कुछ निकल रहा था जो सीधे मेरे गले में जा रहा था

भाभी, बोले जा रही थी ओह ऊओह ओह ओह ओह अंत में भाभी मेरे ऊपर पसर गई हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे भाभी का चिकना बदन बहुत ही कोमल लग रहा था मेरा मन कह रहा था कि काश ये समय खत्म ही न हो। हम दोनो एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, थोड़ी देर बाद हम उठ गये तो भाभी ने कहा अब समझ में आया कि ६९ क्या होता है, मैं भाभी से लिपट गया हम दोनो काफ़ी देर तक लिपटे ही रहे तब भाभी ने मेरे माथे को चूमते हुए कहा जानते हो जब दो लोग सेक्स करते हैं तो उनका आपस में रिश्ता बहुत मजबूत हो जाता है। काफ़ी देर हो गई थी हालांकि मन नहीं हो रहा लेकिन भाभी ने कहा अब घर जाओ नहीं तो तुम्हारी मम्मी खोजेंगी, अधूरी प्यास लिए मैं अपने घर आ गया। आगे की कहानी पार्ट ५ में। Sex Stories

प्रेषक : रमेश Sex Stories

मैं रमेश हरियाणा फ़िर Sex Stories से हाज़िर हूँ आपके लिए एक रोमांच और सेक्स से भरपूर कहानी ले कर !

सभी मर्द अपने लंड को हाथ में दबा के और लड़कियाँ और औरतें अपने स्तनों को दबा के और अपनी चूत में ऊँगली दे कर बैठें …………

आज अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं पाठकों को बता दूँ कि मेरी कहानी कोई झूठी या मन से बनाई हुई नहीं है, यह उतनी ही सच्ची है जितनी कि सेक्स की जरुरत……

और एक बात ! प्लीज़, कोई भी पाठक ग़लत नाम से मुझे मेल ना भेजे !

मेरी पिछली कहानी को पढ़ के कुछ लड़कों ने लड़कियों के नाम से मुझे मेल भी भेजी, सिर्फ़ यही जानने के लिए कि मैं सच बोल रहा हूँ या झूठ?

तो दोस्तो, मैं आपको अपनी कहानी बता रहा हूँ तो इसका ग़लत मतलब नहीं निकालें …………

और सभी पाठकों को धन्यवाद !

तो कहानी ऐसे है :

अभी कुछ दिन पहले जब मेरी कहानी ‘पड़ोस की कुवांरी छोकरी’ अन्तर्वासना पर आई तो कुछ दिन बाद मुझे एक मेल आई……… मेल एक लड़की ने भेजी थी, लड़की का नाम था जसमीत कौर जो कि एक पंजाबी परिवार से थी। उसने अपनी मेल में कहा कि वो एक घरेलू लड़की है और कॉलेज में पढ़ती है। उसने मेरी कहानी पढ़ी और उसे सेक्स करने की इच्छा हुई !

यह उसका पहली बार था…..वो अपने घर वालों से भी डरती है लेकिन सब कुछ करना भी चाहती है… इस तरह हमने २-३ दिन मेल से ही बात की। उसने मुझसे मेरा सेल नम्बर लिया और फ़िर मुझे एक दिन काल किया.. उसकी आवाज में क्या जादू था दोस्तों…… मैं तो दीवाना हो गया उसकी आवाज का ही…… उसने मुझे अपने बारे में सब कुछ बताया और कहा कि उसके पास कोई जगह नहीं है और वो करना भी चाहती है। लेकिन उसकी एक शर्त थी कि सब कुछ गुप्त और सुरक्षित होना चाहिए।

तो फ़िर क्या था जैसे कि मेरे नियम है हि कि सब कुछ गुप्त और सुरक्षित होगा।

मैंने उसे विश्वास दिलाया और फ़िर उसने मुझे अपने शहर का नाम बताया, वो जालंधर सिटी की रहने वाली थी।

उसने मुझसे अगले ही दिन आने को कहा।

मैं भी उसके कहे अनुसार सुबह ६ बजे ही वहाँ पहुँच गया और पहुँच कर मैंने एक होटल में कमरा बुक किया, उसे फ़ोन से सम्पर्क किया।

उसने मुझे कहा कि वो कॉलेज टाइम में मेरे पास आएगी। उसने मुझे १० बजे का टाइम दिया, मैं फ्रेश हुआ और कुछ देर आराम किया।

उसने मुझे १० बजे कॉल की और एक पार्क में आने को कहा। मैं उसके बताये हुए स्थान पर गया। वो एक पार्क में एक बेंच पर अकेली बैठी थी, उसने जींस और टॉप पहना हुआ था, उसका कद ५’४” होगा और उसके बाल बहुत लंबे और काले नागिन की तरह, आँखे काली काली और बड़ी बड़ी, गाल कश्मीर के सेब की तरह लाल लाल, लिप्स गुलाब की पंखुडियों की तरह पिंक पिंक और उसके बूब्स पुरे भरे हुए टॉप फाड़ कर बहार आने को थे……..अगर ठीक से कहू तो उसका फिगर कुछ ३६-३०-३६ रहा होगा…..

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मैं तो देखते ही उसे फ्लैट हो गया और काफी देर तक उसे देखता ही रहा……. फ़िर मैं उसके पास गया, बैठ कर हमने कुछ देर बात की और उसके बाद हम दोनों होटल की तरफ़ चल दिए। होटल पहुँच कर हम दोनों कमरे में गए। वहाँ हमने कुछ देर बात की और धीरे धीरे मैं उसकी आँखों में मदहोश हो गया। फ़िर मैंने उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और काफी देर तक उसे समूच किया।

इसी दौरान मेरे हाथ उसके बड़े बड़े और नर्म नर्म स्तनों पर चले गए। मैं उसके वक्ष बड़ी ही आराम से दबा रहा था और उसकी आँखों में मदहोशी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी। मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाला और उसके कबूतरों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया। अब मेरे हाथ उसके आजाद कबूतरों को बड़ी ही जोरों से दबा रहे थे। फ़िर मैंने देर ना करते हुए उसके टॉप को उतार दिया……व्वाऊऊ ऽऽ ऊऊऊ उसके स्तन जितने कोमल थे उतने ही तने हुए भी थे और उसके चुचूक भी कड़े और हल्के गुलाबी थे।

फ़िर मैंने उसके एक वक्ष को मुँह में लिया और छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा। वो बहुत ही मदहोश हो चुकी थी और सेक्सी सेक्सी आवाजें निकाल रही थी …….ऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् म्म्म्म्म्म्म्म्म्मूऊऊउस्स्स्स् !

इतने में मुझे अपने लंड पर कुछ महसूस हुआ, उसका हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था। मैंने अपनी जींस उतार दी और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया। फ़िर उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और नीचे झुक कर मेरे लंड को चूम लिया और उसे मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपॉप को चूसता है।

मुझे बहुत ही मजा आ रहा था।

काफी देर तक उसने मेरा लंड चूसा, जब तक मेरा वीर्य नहीं निकल गया।

उसके बाद मेरी बारी आई, मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी जींस को उतारा। उसने अपने पूरे बदन की वैक्सिंग की हुई थी, शायद आज के दिन के लिए खासतौर से !

उसने अन्दर एक काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी, मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया। वाह क्या सेक्सी और मधुर चूत थी ! उसकी चूत को देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसके चूत के लब भी गुलाबी थे। मैंने जैसे ही उसकी चूत को छुआ, वो एक दम से सिसक उठी। मैंने धीरे से उसकी चूत में ऊँगली डाली और उसके लबों को रगड़ा, उसकी चूत तो बहुत टाइट थी, वो सही थी कि वो अभी तक कुंवारी है।

फ़िर मैंने उसकी चूत को चूम लिया, मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसकी चूत को चूसने लगा।

वो पागलों की तरह आवाजें निकालने लगी, पूरा कमरा सेक्सी आवाजों से गूंज रहा था कुछ इस तरह- ऊऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ मम्मम्म्म्म्स्स्स्स्स प्ल्ज्ज्ज्ज्जज्ज्ज्ज़ धिरेऽऽए !

फ़िर हम दोनों ६९ की पोसिशन में हो गए और एक दूसरे को चूस रहे थे। वो २ बार झड़ चुकी थी…..फ़िर उसने मुझसे कहा- रमेश प्लीज़, अब बर्दाश्त नहीं होता ! मुझे चोद दो जोर से ……… अपना लंड मेरी प्यासी चूत में घुसा दो …….. !

अब मेरा लंड उसकी चूत में घुसने के लिए तैयार था। मैंने एक तकिया उठा कर उसकी गांड के नीचे रखा और अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगा कर जोर से धक्का दिया। मेरा लंड अभी थोड़ा सी ही अन्दर गया था कि वो चिल्लाने लगी।

मैंने उसके अधरों को अपने लबों में दबा लिया और फ़िर से एक धक्का दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत में से शायद खून निकल रहा था, वो चिल्ला नहीं पा रही थी। थोड़ी देर तक मैं उसके बूब्स के साथ खेलता रहा, कुछ देर में वो शांत हुई तो मैं फ़िर एक जोर से धक्का दिया और पूरा लंड उसकी चूत में। था इस बार वो थोड़ा सा तड़पी लेकिन सब कुछ ठीक ही था। फ़िर मैंने अपना खेल शुरू किया …… मेरे लंड के धक्को से पूरे कमरे में फ़्फ़्फ़्फ़्कक्क्क्क्कह्ह फ़्फ़्फ़्फ़्क्क्क्क्क्कक्क्ह्ह्ह्ह् की आवाजें आ रहे थी और वो अपनी गांड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी, साथ में कह रही थी- रमेश डार्लिंग ! चोदो ! मेरी चूत की प्यास बुझा दो …….. जोर लगा कर चोदो मुझे !

कुछ देर तक चोदने क बाद वो एक झटके क साथ मेरे से चिपक गई, शायद वो झड़ चुकी थी और ४-५ झटकों के बाद मैं भी झड़ गया। फ़िर हम कुछ देर तक बेड पर एक दूसरे के साथ चिपक कर लेटे रहे। उसके बाद उसने मुझे एक जोर से किस किया और कहा- आज मैं बहुत खुश हूँ …. लेकिन अभी कुछ और करो…..!

फ़िर मैं उसे अपने गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और वहाँ शॉवर के नीचे हमने एक बार और यौनानन्द लिया।

उस दिन हमने ३ बार चुदाई की। शाम को जब वो जाने लगी तो मेरे को कस के लिपट कर के बोली- रमेश डार्लिंग ! यू आर सो स्वीट… ! टुडे आई ऍम वैरी हैप्पी…. ! मैं तो वैसे ही डरती थी………इसमें तो बहुत मजा आया….. !

उसने मेरी फीस मुझे दी और अपने घर चली गई। मैं भी कुछ देर आराम कर के अपने घर के लिए निकल लिया।

तो दोस्तों यह थी मेरी जालंधर सिटी की दास्ताँ.. ! अब आप इसे सच समझे या झूठ ! यह तो आप पर है …… लेकिन मेरे एक एक लफ्ज में सच्चाई है …….. Sex Stories

Sex Stories

मैं रेलगाडी में मुंबई से हावडा जा रहा Sex Storiesथा. मेरे सामने वाली सीट पर एक सुंदर महिला बैठी थी. उसने नीली साडी पहनी हुई थी, वो पतली दुबली थी मगर उसके दूध बड़े बड़े थे, ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज़ फाड़ कर बाहर आने को बेताब हैं। उसका रंग भी बिल्कुल दूध की तरह सफ़ेद था। उसकी उमर कोई 28 साल की होगी।

मैंने ध्यान दिया कि वो मुझे बहुत देर से देख रही है तो मैंने भी उसकी तरफ़ देख कर थोड़ा मुस्करा दिया।

फिर वो मुझसे अपनी टिकट दिखाते हुए पूछी कि ज़रा देखो मेरा रिज़र्वेशन है कि नहीं?
मैंने देखा उनका वेटिंग टिकेट था।
मैंने कहा कोई बात नहीं आप मेरे सीट में सो जाना।

फिर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम रूपा है।

रूपा की खूबसूरती देख कर मेरे मुंह और लंड दोनों ही जगह से पानी निकल रहा था।

मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान बनाने लगा। ये सरदी की रात थी इसलिये सभी लोग कम्बल ढक कर सो रहे थे।

रात को हम खाना खाने के बाद मैंने रूपा से कहा के आप सो जाओ मैं बैठता हूं।

उसने कहा नहीं तुम भी कम्बल ओढ कर सो जाओ। और फिर वो ट्रेन की उस छोटी सी सीट पर इस तरह से लेट गये कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थी और चेहरा दूसरी तरफ़।

फिर मैं उसके सर की तरफ़ पैर को रख कर लेट गया और मैं उसकी गांड की तरफ़ मुंह घुमा कर सो गया। अब लंड बिल्कुल उसकी गांड की दरार में था उसकी गोल गोल गांड और मेरा लंड एक दूसरे से चिपके हुए थे।

रूपा के गोरे गोरे पैर भी बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने थे।
मेरे लंड को समझाना अब मुश्किल हो रहा था।

मैंने अपने हाथ उसके पैरों पर रख कर थोड़ा सहलाना शुरु किया और गर्म गर्म सांसो के साथ उसके पैरों को चूमने लगा।

थोड़ी देर बाद वो मेरी तरफ़ मुड़ गयी। अब उसका चेहरा भी मेरे पैरों की ओर था।
उसने मेरे पैरों को ज़ोर से पकड़ का अपने बूब्स से रब करना शुरु कर दिया।

फिर मैंने भी उसके पैरों को सहलाते हुए जांघ तक जा पहुंचा और जब मैं उसकी चूत पर हाथ रखा तो ऐसा लगा मेरा हाथ जल गया। उसकी चूत भट्टी की तरह गर्म हो रही थी और गर्म गर्म चूत बिल्कुल गीली हो रही थी।

मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँडालनी शुरु कर दी, उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे जिनको मैं अपनी ऊँगलियों से सहला रहा था।
फिर धीरे धीरे कम्बल के अन्दर ही मैं अपना मुंह उसके चूत तक लेकर गया और उसकी चूत को पीने की कोशिश करने लगा।

उसने अपने एक पैर को उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया। अब उसकी बुर बिल्कुल मेरे मुंह में थी मैं अपनी जीभ को उसके बुर के चारों तरफ़ घुमाना शुरु कर दिया वो भी अपनी कमर धीरे धीरे हिलाना शुरु कर दी।

मैंने भी अपने पैर को उठा कर अपना लंड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया।
वो बड़े प्यार से लंड को चूसने लगी।

हम अब बिल्कुल 69 की पोजिशन में थे लेकिन ऊपर नीचे नहीं थे बल्कि साइड बाइ साइड थे और हम जो भी कर रहे थे धीरे धीरे कर रहे थे क्योंकि ट्रेन में किसी को पता न चले।

वो अब कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपने कमर को उठा का अपने बुर को मेरे मुंह में रगड़वा रही थी।
अचानक उसने मेरे सर को अपने हाथ से अपनी बुर में ज़ोर से दबा दिया और कमर को मेरे मुंह में दबा दिया और ढीली पर गयी।

मैं उसके बुर की गर्मी धीरे धीरे अपने मुंह से चाट चाट कर साफ़ किया। वो अब भी मेरे लंड को चूस रही थी। मैं भी अब जोर जोर से अपने लंड को उसके मुंह में घुसा रहा।

मेरे लंड का पानी भी अब बाहर निकलने वाला था मैंने ज़ोर से उसके बुर में अपना मुंह घुसा दिया और मेरे लंड से पानी निकलना शुरु हुआ तो 8-10 झटके तक निकलता ही रहा।
उसने मेरे लंड के पानी को पूरा अपनी मुंह में लेकर पी गयी।

थोड़ी देर के बाद मैं उठा और टोइलेट गया।

मैंने अपनी पैंट उतार दी फिर अपनी चड्ढी भी उतार दी। अपने लंड को अच्छी तरह से साफ़ किया और पैंट पहन ली।

वापस आकर मैंने अपनी चड्ढी बैग में डाल दी। फिर वो भी टोइलेट जाकर आयी।

और मेरी तरफ़ मुंह करके सो गयी और कम्बल ढक ली। अब उसके बूब्स मेरी छाती से लग रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। वो ब्रा नहीं पहनी थी। ब्रा को शायद टोइलेट में ही उतार कर आयी थी।

मैं उसके गोल गोल बूब्स को अपने हाथ से दबाने लगा और उसके निप्पल को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा।
उसने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को उठा कर कमर के ऊपर रख लिया।

अब उसकी कमर के नीचे कुछ भी नहीं था, मेरा हाथ उसके मक्खन जैसी जांघों को तो कभी उसके बुर को प्यार से सहला रहा था और रुपा अपने हाथों से मेरे लंड को सहला रही थी।
ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा।

मेरा लंड एक बार फिर से उसकी बुर की गहराई को नापने के लिये मचलने लगा था। मैंने धीरे से रूपा से पलट कर सोने को कहा। रुपा धीरे से पलट गयी। अब उसकी नंगी गांड की दरार मेरे लंड से चिपकी हुई थी।
मैंने धीरे से अपने लंड को हाथ से पकड़ कर पीछे से उसकी गांड के छेद में रखा और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी।लेकिन वो चीखी नहीं। वो जानती थी कि ट्रेन में सब सो रहे लोगों को शक न हो जाये।

मैंने धीरे से एक और धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अन्दर घुस गया। फिर मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा। रूपा की चिकनी चिकनी गांड मेरे पेट से रगड़ खा रही थी। और मैं उसे चोदे जा रहा था।

फिर चार पांच मिनट के बाद मैंने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। और जोर जोर से रूपा को चोदने लगा।
रूपा भी अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।

अचानक रूपा अपनी गांड को मेरे लंड पे जोर से दबा कर रुक गयी। मेरा लंड भी पिचकारी की तरह पानी छोड़ना शुरु कर दिया। लंड और बुर दोनों का पानी गिर जाने के बाद दोनों शान्त हो गये।
लेकिन हमारी चुदाई सुबह तक चलती रही। हमने रात भर में सात बार चुदाई की। और किसी को पता भी नहीं चला।

फिर सुबह मेरा स्टेशन आ गया। और मैं उतर गया। उसे आगे जाना था तो वो चली गयी और जाते जाते अपना फोन नम्बर भी दे गयी। Sex Stories

प्रेषक – ए बी सी Indian Sex Stories

आज मैं आपके लिए कोई कहानी Indian Sex Storiesनहीं लाया, बल्कि मैं आपसे केवल दो बातें करने आया हूँ।

और ये दो बातें केवल लड़कियों के लिए हैं।

तो लेडीज़ – ग़ौर फरमाएँ।

आप या तो कुँवारी होंगी या फिर शादीशुदा

शादीशुदा तो ठीक है, कुँवारी होंगी तो २ बातें होंगी,

या तो आप शादी करेंगी या नहीं।

शादी नहीं की तो ठीक लेकिन अगर की तो २ बातें होंगी,

या तो आपका पति ठरकी होगा या नहीं

ठरकी हुआ तो आपको चुदाई का मज़ा आएगा, लेकिन अगर ठरकी नहीं हुआ तो २ बातें होंगी

या तो आप एक ही बिस्तर पर सोएँगे या अलग-अलग,

अलग से सोने का तो सवाल ही नहीं उठता और अगर एक ही बिस्तर पर होंगे तो २ बातें होंगी।

या तो आप बिना चुदे ही सो जाएँगी या फिर पति को गालियाँ देंगी।

बिना चुदे तो नींद आएगी नहीं और अगर मन में पति को गालियाँ देंगी तो २ बातें होंगी।

या तो आप अपने पति को छोड़ने की सोचेंगी या फिर किसी और से अपनी चूत मरवाने की

एक साल से पहले तो तलाक़ तो होगा नहीं और अगर किसी और से चुदवाना हो तो २ बातें होंगी।

या तो आप अपने किसी पुराने यार से चुदवाएँ या किसी और से।

किसी और को तो ढूंढना पड़ेगा लेकिन अगर यार से चुदवाना होगा तो २ बातें होंगी।

या तो उसकी शादी हो गई होगी या नहीं,

कुँवारा होगा तो ठीक लेकिन अगर शादी-शुदा होगा तो २ बातें होंगी।

या तो वह आपको चोदेगा या नहीं।

चोद देगा तो आप खुश लेकिन अगर नहीं चोदेगा तो २ बातें होंगी।

आपको या तो अपनी जवानी ऐसे ही गुज़ारनी होगी या फिर किसी को ढूंढना पड़ेगा जो आपको चोद सके।

ऐसे जवानी बिताना मुश्किल है अगर किसी को ढूंढना हो तो २ बातें होंगी।

या तो वह आपको चोद कर खुश पाएगा या नहीं।

खुश किया तो ठीक लेकिन अगर खुश नहीं किया तो २ बातें होंगी।

या तो आपको वो जैसे भी चोदे खुश रहना होगा या फिर किसी दूसरे के लंड को ट्राई करना होगा।

उससे चुदवा के ही खुश रहना है तो पति के लण्ड में क्या बुराई है,

लेकिन अगर दूसरा लण्ड ट्राई किया तो २ बातें होंगी।

या तो दूसरा लण्ड मस्त होगा या फिस्स,

मस्त हुआ इसकी क्या गारण्टी लेकिन अगर फिस्स हुआ तो फिर एक और लण्ड ढ़ूँढ़ो।

अरे तो मेरी बात समझ में क्यों नहीं आती है…

बार-बार लण्ड ढ़ूँढ़ रही हो और हर एक लण्ड फिसड्डी निकल रहे हैं।

दुनिया से कितना चुदवाओगी।

मुझे मेल क्यों नहीं करती हो।

तो दोस्तों चोदो-चुदाओ और लाइफ़ को खुशहाल बनाओ। Indian Sex Stories

मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.

दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं 2011 से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
मुझे अन्तर्वासना वेबसाइट के बारे में मेरी सहेली ने बताया था, तभी से मैं यहां पर कहानिया पढ़ती आई हूँ.

यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.

शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.

इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.

कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मेरी क्लास में ही संजय भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती संजय से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.

संजय और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.

छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.

मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.

संजय देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.

उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स संजय के बर्थडे पर उसके घर गए थे.

संजय के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर संजय ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.

संजय और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.

उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.

कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.

उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.

वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.

फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.

संजय चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.

बस इसी तरह चल रहा था.

संजय सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.

कुछ दिन बाद संजय ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.

मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.

मैं छवि को बोल कर आई थी कि संजय के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.

मैंने संजय से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.

वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.

तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.

संजय ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.

वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.

वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.

थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.

भीड़ कम होती गयी.

संजय ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?

पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.

थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.

फिर संजय ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.

मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.

वहां जाने के बाद संजय मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.

इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.

मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.

संजय की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.

उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.

उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.

वह मुझे चूमने लगा.

करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.

तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.

उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.

उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.

मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो संजय बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.

मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.

वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.

मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.

फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.

उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.

मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.

अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.

संजय ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.

मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.

उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.

उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.

उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.

उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.

मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.

फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.

पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.

वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.

मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.

उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.

उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.

उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.

इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और संजय ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.

फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.

अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय संजय ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.

संजय अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.

मैंने संजय से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.

उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.

दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.

संजय ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.

ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.

उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.

वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.

फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.

वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.

मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.

मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.

उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.

वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.

मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और संजय के लंड को पहना दिया.

बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.

फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.

मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.

उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.

उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.

उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.

उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.

उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!

फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.

वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.

वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.

कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.

मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.

तभी संजय आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.

मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा संजय मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.

उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.

मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
संजय बोला- अनु मजा आया?

मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.

मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
संजय ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?

उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.

उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.

वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.

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