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Massage Girl in Gumla: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Gumla who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Gumla that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Gumla massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Gumla who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Gumla massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Gumla massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Gumla who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Gumla employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Gumla helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Gumla

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Gumla at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

हेलो दोस्तो! मैं अपने दोस्त सूरज के Sex Stories यहाँ घूमने गया था। उसके परिवार में वो, उसकी बहन सिया और मम्मी डैडी हैं। मेरा पहला यौन-सम्बंध सिया संग हुआ था।

रात के करीब नौ बजे खाना खाने के बाद सूरज, सिया और मैं रज़ाई औढ़े अंताक्षरी खेल रहे थे। मेरी बगल में सूरज और सामने सिया बैठी थी। आध घण्टे से मेरे पैर मुड़े होने के कारण दर्द करने लगे थे तो मैंने अपने पैर सीधे कर लिए।

मुझे महसूस हुआ कि मेरा पैर किसी मुलायम चीज़ से छू रहा है। मैंने अपने पैर के अंगूठे को धीरे धीरे हिलाया तो समझ गया कि वो मुलायम चीज़ सिया की चूत है, परन्तु सिया मुझे कुछ कह नहीं रही थी, चुपचाप अन्ताक्षरी खेल रही थी। एक घण्टे बाद हम तीनों एक साथ सो गए। बीच में सूरज सोया था। मेरी आंखों से नींद गायब थी। मैं कैसे भी सिया को चोदना चाहता था।

रात के करीब दो बजे सिया बिस्तर से उठ कर बाथरूम जा रही थी, मैं भी उठा, उसके पीछे पीछे बाथरूम में घुस गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में ले लिया।
पहले तो वो घबराई, ऐसे दिखाने लगी कि रात वाली घटना से अन्जान हो, लेकिन मैं पूरे जोश में था, जैसे ही उसकी चूत पर हाथ रखा, वो चिहुंक गई और अपनी आंखें बंद कर ली- प्लीज़ रंजन भैया मत करो! मुझे कुछ होता है!’

‘क्या होता है?’
‘पता नहीं लेकिन बहुत अच्छा लगता है!’
‘अब और मज़ा आएगा मेरी प्यारी सिया! साथ दोगी?’
‘हाँ! लेकिन मैं गर्भवती तो नहीं हो जाऊँगी?’
‘नहीं’

मैंने उसकी चूची पर हाथ रखा ओर आहिस्ते से सहलाने लगा। मैं उसके कमसिन होठों का रस पीने लगा- कैसा लग रहा है?’

‘शऽऽऽ मत पूछिए बस करते रहिए आहऽऽऽ’

मैंने उसकी कमीज़ को ऊपर से खोल दिया, अन्दर उसने गंजी पहनी थी। गंजी के ऊपर से मैं सिया की चूची मसलने लगा।

सिया भी अपना हाथ मेरे लण्ड के ऊपर रख कर लण्ड को मसलने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मेरा पायज़ामा खोल दिया। मेरे लण्ड को अन्डरवीयर से निकाल कर अपने हाथ से मुठ मारने लगी। मैं भी ताव में आ गया और उसकी गंजी उतार कर उसकी चूचियों को आज़ाद कर दिया और मुंह में ले कर चूसने लगा।

‘हायऽऽऽ जरा जोर से दबाईए ना! बहुत मज़ा आ रहा है!’

‘तुमने पहले किसी से…’

‘नहीं भाई, लेकिन ब्लू फ़िल्म देखती हूं!’
‘अच्छा! ‘
‘क्या आप मेरी बुर को चूसना पसन्द करेंगे?’
‘क्यों नहीं.. लेकिन पहले तुम मेरे लण्ड को चूस लो… उसके बाद…’

सिया नीचे झुकी और मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। मैंने उसकी सलवार उतार कर उसे पूरी तरह नंगी कर दिया। मेरे शरीर पर भी कोई कपड़ा नहीं था, हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।

‘क्या हम एक दूसरे का बुर और लण्ड चूसें?’
‘हाँ बिल्कुल!’

वो जमीन पर लेट गई, मैंने अपना लण्ड उसके मुंह में डाल दिया और अपना चेहरा उसकी बुर पे ले गया। सिया की बुर की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैं अपनी जीभ से उसकी बुर का रस पीने लगा।
‘अब प्लीज़ मुझे चोदिए!’

मैं खड़ा हो गया, उसने लेटे हुए अपने पांव ऊपर किए। मैंने अपना लण्ड जैसे ही उसकी बुर पर रखा, सिया की बुर भट्टी की तरह जल रही थी। उसके चूसने से मेरा लण्ड गीला था। मैंने जोर से लण्ड को उसकी बुर में डाला- प्लीज़ निकाल लो! बहुत दर्द हो रहा है’

मैंने देखा मेरे लण्ड का आधा सुपारा उसकी बुर में है और बुर से खून निकल रहा है। मैं उसके होंठ चूसने लगा ओर जोर जोर से चूचियों को मसलने लगा, धीरे से लण्ड को भी अन्दर करता रहा।

थोड़ी देर में सिया कमर हिलाने लगी। मैं भी अब पूरे जोर से उसकी बुर को चोदने लगा.’आ आ अई आहऽऽऽ और तेज़ऽऽ…’

‘उफ़्फ़’
‘आआह्हऽऽ’
‘मेरा गिरने वाला हैऽऽऽ प्लीज़ और तेज़ऽऽ!’
सिया मुझसे चिपकने लगी। इस तरह हम दोनों एक साथ झड़ गए और काफ़ी देर तक एक दूसरे के साथ चिपके रहे।

उसके बाद हम बिस्तर पर आकर सो गए। Sex Stories

प्यारे दोस्तो Hindi Sex Stories

मैं जबलपुर का रहने वाला एक Hindi Sex Stories २६ वर्षीय युवक हूँ। एक गलत नंबर पर फोन लगने से क्या क्या हो सकता है, मैं आपको बताता हूँ।

यह बात उन दिनों की है जब कॉलर आई डी नया नया आया था। उसके बाद फोन पर लड़की पटाने में महारत हासिल कर ली। एक दिन मैंने शाम करीब ४ बजे एक ट्रेवल एजेंट को फोन लगाया, गलती से वो फोन किसी और के घर पर लग गया। एक लड़की की आवाज़ थी। मैंने पूछा- आप ट्रेवल ऐजेन्सी से बोल रही है?

उसने कहा- नहीं !

और फ़ोन रख दिया।

क्योंकि मैं कुंवारा हूँ इसलिए चुदाई की हमेशा इच्छा होती रहती है। मैंने अपने कालर आई डी पर नंबर देखा और फिर से फ़ोन किया तो उसी लड़की ने फोन उठाया। मैंने उससे कहा- नंबर गलत होने के बावजूद मैं आपसे बात करना चाहता हूँ !

तो लड़की बोली- कोई ज़रूरत नहीं ! आप अपना और मेरा समय बर्बाद ना करें !

और वो फोन रखने वाली थी कि मैंने उससे कहा कि आपकी आवाज़ बहुत अच्छी है, मैं आपके साथ कुछ देर बातें करूँगा, फिर कभी डिस्टर्ब नहीं करूंगा।

उसने कहा- बोलो ! क्या बोलना है !

मैंने कहा- मुझे आपकी आवाज बहुत अच्छी लगी, मुझे आपसे दोस्ती करनी है।

उसने पूछा- आपने मेरा नंबर फिर से कैसे लगा लिया?

मैंने कहा- रिडायल का बटन दबा दिया।

खैर थोड़ी देर यूँ ही बातें होती रही, उसकी आवाज दरअसल बहुत अच्छी और सेक्सी थी जिसे सुनकर मेरा लंड खडा हो रहा था। बातों बातों उसने कह दिया कि वो पोस्ट-ग्रेजुएट है और शादी की बातें चल रही हैं।

फिर उसने कहा- पापा ऑफिस से आने वाले हैं, मैं रखती हूँ।

मैंने कहा- अपना नंबर तो बता दो !

उसने कहा- नहीं !

तो मैंने कहा- मेरा नंबर ही सुन लो !

उसने यह कह कर फ़ोन रख दिया- ठीक है पर कोई फायदा नहीं है।

दो तीन दिन बीत गए, मैं इंतज़ार करता रहा। फिर एक दिन उसका मिस-कॉल आया मैंने वापस फोन नहीं किया ताकि उसको पता ना चले कि मेरे पास उसका नंबर है। दो तीन बार उसका मिस-कॉल आया तो मैंने उसे फ़ोन लगा कर कहा- बड़ी मुस्किल से बात हुई, मैंने बहुत नंबर लगाये जो पहले वाले नंबर से मिलते-जुलते हैं।

मुझे पता चल चुका था कि उसे मुझसे बात करने की इच्छा है, तो मैंने उसे कहा- तुम्हारी बहुत याद आ रही थी, मैं तुम्हारी आवाज़ सुने बगैर नहीं रह सकता हूँ।

फिर पूछा- अब तो नंबर बता दो ! कितना पैसा बर्बाद करवाओगी?

तो उसने नंबर बता ही दिया धीरे धीरे रोज बातें होने लगी। एक दिन रात को मैंने फ़ोन लगा कर कह दिया- मेरा लण्ड खड़ा है, मुझे किस करो !

वो ये सब सुनकर थोड़ा घबरा गयी और कहने लगी- कल दिन में बात करेंगे।

मैंने कहा- नहीं, मुझे अभी अपना माल निकालना है।

उसने कहा- नहीं, कोई आ जाएगा और उसे डाँट पड़ेगी !

मैंने कहा- तो कल के लिए प्रोमिस करो कि कहीं मिलोगी !

वो मान गई और हमने जगह तय की और मैं ठीक टाइम पर पहुँच गया, जैसा उसने कहा था कि वो एक्टिवा से आएगी और सफ़ेद सूट पहना होगा। मैंने उसे देखकर पहचान गया और हम एक साइबर में बैठ गए। लड़की दिखने में ठीक ठाक थी पर फिगर गजब का बड़े बड़े दूध गजब की गांड देखके लग रहा था शादी के लिए बिलकुल तैयार है। थोड़ी देर बातें की और मैंने एक गरम साईट ओपन कर दी जिसे देखकर वो पसीना पसीना होने लगी।

मैंने सीधे उसका होंट चूम लिया और एक हाथ से दूध मसलना शुरु कर दिया, वो कांपने लगी और पूरी तरह पसीने से तर-बतर हो गई। मैंने केबिन के अन्दर पंखा चला दिया और और उसका नाड़ा खोल दिया और चूत सहलाने लगा। उसकी आँखें बंद, चूत में पानी आने लगा। मैंने उसका कमीज़ उठा दिया और दूध को होंटों से पीने लगा। धीरे धीरे सलवार उतार दी और पैंटी को जांघ तक कर दिया फिर चूत को चूसा, गांड के छेद को चाटा। उसकी हालत मैं देख रहा था, वो धीरे धीरे अपना हाथ मेरे कंधो पर कस रही थी और अपनी गांड आगे पीछे करने लगी।

मैंने अपना जिप खोल दी लण्ड को बाहर निकाल लिया और उसका हाथ अपने लण्ड पर रख दिया्। शायद उसका और मेरा पहला सेक्स एक्सपेरिएंस था जिसे हम खूब एन्जॉय कर रहे थे। मुझसे रहा नहीं गया मैंने कुर्सी पर बैठ कर उसे अपने ऊपर बिठा लिया और पीछे से चूत में लण्ड डाल दिया। चूत की फिसलन में लण्ड अन्दर चला गया मेरा लण्ड मानो स्वर्ग में था। मैं गर्म गर्म महसूस हो रहा था। मैं ज्यादा कर नहीं पाया, मेरा रस उसी के अन्दर निकल गया।

खैर आज पूरे तीन साल हो गए, वो पी एच डी कर रही है, शादी अभी करना नहीं चाहती, न ही हमारा दिल का कोई सम्बन्ध है पर हर हफ्ते दो से तीन बार कहीं न कहीं हम लोग चुदाई करते हैं। अब मेरी प्रैक्टिस भी अच्छी हो गई है। बिना शादी किए शादीशुदा जैसा समय लगता है। उसे भी जब भी चुदने का मन होता है, फ़ोन करती है। कभी कभी रात में चोरी छुपे उसके घर पे जाकर उसके कमरे में रात बिताता हूँ। कभी परीक्षा देने दूसरे शहर जाती है तो मैं भी साथ चला जाता हूँ। एक ही होटल में पति पत्नी की तरह रहते हैं और खूब चुदाई करते हैं।

इन तीन सालों में मैंने ५-६ लड़कियाँ और आंटी को इसी तरह पटा चुका हूँ और चोद रहा हूँ।

दोस्तों यकीन माने, चाहे लड़का हो या लड़की, सभी को नया माल पसंद है, सभी को सेक्स पसंद है। मेरी सभी से गुजारिश है कि बातों में जल्दबाज़ी न करें, पहले हलके हलके पटायें फिर सेक्स की बातें करें।

मुझे मेल करें Hindi Sex Stories

मैं एक शानदार शरीर का मालिक हूँ. बचपन से ही बॉडी बिल्डिंग और जुडो कराटे में रूचि होने के कारण हमेशा से ही बहुत सी लड़कियों की नज़रों में चढ़ा रहा हूँ. आज कल इंजीनियरिंग कोचिंग का मालिक होने के कारण तो मेरे आस पास बहार छाई रहती है. यदि आपको नहीं पता तो बता दूं कि 52 इंजीनियरिंग कॉलेज होने के कारण भोपाल बहुत ही हॉट है. आप फैशन देख देख कर के पागल हो जायेंगे और इंजीनियरिंग हॉस्टल की लड़कियों का तो कहना ही क्या. जवानी, आजादी, पैसा और कांफिडेंस तो इनमें कूट कूट कर भरा है.

ऐसे ही तीन लड़कियों का ग्रुप मेरी कोचिंग में आया, और इंजीनियरिंग कोर्सेस के बारे में जानकारी लेने लगा. अपने चैंबर से मैंने उन्हें देखा तो एक शक्ल कुछ जानी पहचानी लगी. अपनी रिसेप्शनिस्ट (वो भी बड़ी सेक्सी है, उसकी कहानी फिर कभी) को इंटरकॉम पर बोला तो उसने उन्हें मेरे पास भेज दिया.

एक लड़की मुझे देखते ही चौंक गयी- अरे सर आप !

3 दिन पहले ही मैंने उसे स्कूटी से गिर पड़ने के कारण अपनी कार से उसके हॉस्टल छोड़ा था, और उसकी स्कूटी मेरा ड्राईवर लेकर आया था. उस वक़्त उसने मेरा कार्ड ले लिया था.

मैंने उन्हें बैठने को कहा और उससे उसकी तबियत पूछी, उसने कहा कुछ नहीं हुआ, आपकी वजह से मैं उस दिन बच गयी नहीं तो मैं तो शायद बेहोश ही हो गयी थी,

उसने अपना नाम बताया, नताशा और उसकी दोनों सहेलियां थी सिमरन, और पल्लवी.
तीनो इंजीनियरिंग की स्टूडेंट्स थी, और कोर्स करना चाहती थी.

नए बैच में तीनो ने एडमिशन ले लिया. (डिटेल मैं जानबूझ कर छुपा रहा हूँ, और नाम भी दूसरे बता रहा हूँ, क्योंकि डिग्निटी भी कोई चीज़ है, और मैं अपने किसी दोस्त का नुकसान नहीं चाहता.)

पढाते पढाते मैं कई दिनों तक देखता रहा कि नताशा एकटक मुझे देखती रहती है, अच्छे और अंग-प्रदर्शित कराने वाले कपडे पहनना, हंस कर बात करना, सट कर सवाल पूछना तो सभी लड़कियों की आदत है पर इसमें कुछ बात तो थी, मैं भी पुराना खिलाड़ी हूँ।

कुछ दिन बाद जब वो अकेले कुछ पूछने मेरे चैंबर में आई तो मैंने कहा कि कुछ पढाई पर भी ध्यान देती हो या मेरी शकल ही देखती रहती हो?

उसने छूटते ही जवाब दिया सर आपकी शकल ही।
मैंने मुस्कुरा कर कहा- क्यों?
बोली- आप ऊपर से नीचे तक हो ही देखने लायक !
मैंने कहा- तुम्हे कैसे पता?

वो बोली- मुझे जिस दिन आपने मुझे गोद में उठा कर अपनी कार मैं बिठाया था, उसी दिन मैं आपके एक एक मस्सल को नाप चुकी हूँ।

उसकी बेबाकी से मैं तो खिल उठा, मैंने कहा- दुबारा नापने के लिए फिर मत स्कूटी से गिर पड़ना !

वो बोली- नहीं ! अब सीधे आप पर ही गिरूंगी !

मै कुछ कहता, इसके पहले ही बाकी स्टुडेंट आ गए और वो कुछ खुश कुछ प्यासी सी बाय कर के चली गयी।

दो दिन तक आँखों ही आँखों में नैन-मटक्का और कुछ शिकायत, कुछ प्यार वो छलकाती रही, और शुक्रवार को अचानक वो बोली- सर पचमढ़ी का कुछ आईडिया है आपको?

मैंने पूछा- क्यों?
बोली हम तीनों शनिवार, रविवार को पचमढ़ी घूमना चाहते हैं, सुना है बहुत सुंदर जगह है !
मैंने कहा- है तो, पहले नहीं घूमा क्या?

बोली नहीं- हम तो सब यहाँ के है ही नहीं! मैं पुणे की हूँ, सिमरन अमृतसर की और पल्लवी लखनऊ की, आप बताइए कैसी जगह है?

मैंने कहा है- तो अच्छी लेकिन हनीमून के लिए !
वो बोली- तो फिर आप भी चलिए!
मेरी तो निकल पड़ी, मैंने कहा- चलूँगा तो लेकिन फिर हनीमून मनाना पड़ेगा सोच लो !
बोली- आप चलिए तो सही !

प्रोग्राम तय हुआ, मैं और मेरा पार्टनर सनी दोनों और वो तीनों मेरी कार से निकल पड़े शनिवार की सुबह।

सनी को तो मैंने कार चलने पर लगा दिया और पल्लवी भी आगे बैठ गयी वो सबसे शर्मीली लड़की थी। मैं नताशा और सिमरन पीछे बैठ गए, नताशा ने जिद करके मुझे बीच में बिठा दिया।

दोनों ही मस्त 5 फीट 5 इंच के ऊपर लम्बाई की थी और तीनों के बूब्स बिल्कुल तने हुए थे, ऊपर से स्किन टाइट जींस पहन रखी थी। नताशा और पल्लवी ने। जबकि सिमरन स्कर्ट पहने थी पिंक रंग का।

सिमरन और कैटरिना कैफ में शायद 18-20 का फर्क होगा और सिमरन कैटरिना से दो कदम आगे ही थी, फिगर रंग और बूब्स में। घुटनों तक लम्बे बाल और चिकनी चमकती स्किन, प्राकृतिक गुलाबी होंठ और गाल।

नताशा जो कि एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी, सांवली लम्बी और बिल्कुल तराशे हुए बदन की मालकिन, लेकिन उसके बूब्स और रोम रोम बिल्कुल अलग से खिले हुए थे साथ ही उसकी बेबाक बातचीत किसी तो भी गरमाने के लिए काफी थी।

जबकि पल्लवी एक बिल्कुल मासूम सी शक्ल की कश्मीरी टाइप की लड़की थी, लम्बाई करीब पांच फ़ीट 3 इन्च, जबकि शरीर भरा हुआ लेकिन कमर तो शायद थी ही नहीं, उसके गाल इतने गुलाबी थे जैसे शरमाने पर गोरी लड़कियों के हो जाते हैं, लेकिन उसकी आँखें बताती थी कि उसने दुनिया में कुछ देखा ही नहीं है।

जबकि नताशा की आँखें और बातें साफ़ बता देती थी की उसने दुनिया का पूरा मजा लूटा है और आगे भी लूटना चाहती है।

मैं दोनों के बीच मैं बैठा उनसे बातें शुरू कर चुका था, दोनों की जांघें मेरी जाँघों से सटी हुई थी और सिमरन और नताशा दोनों के बाल उड़ उड़ कर मेरे चेहरे पर आ रहे थे, धीरे धीरे मैंने नताशा की जाँघों पर अपनी जांघें रगड़ना शुरू किया और वो भी मुस्कुराने लगी। माहौल तो मैं समझ ही चुका था, तीन जवान लड़कियां 2 दिन एक रात वो भी दो जवान अंजान लड़कों के साथ बिना किसी जान पहचान के, नताशा का खेल तो पक्का था, अब मेरा ध्यान सिमरन और पल्लवी पर भी था, साथ ही मुझे अपने दोस्त सनी को भी ऐश करवानी थी।

इसलिए मैं संभल कर खेलना चाहता था।

अब तक नताशा मेरी जांघ पर हाथ रख चुकी थी और धीरे धीरे हाथ फेर रही थी। मैंने अपना कोट उतार कर गोद में रख लिया, कोट उतारते वक़्त सिमरन के बूब पर ज़रूर कोहनी फेर दी। सिमरन ने अपना मुँह खिड़की की तरफ घुमा लिया और मैं उसकी प्रतिक्रिया नहीं देख पाया.

अब कोट के नीचे में और नताशा एक दूसरे को खुल कर सहला रहे थे, अचानक नताशा ने मेरी पैन्ट की ज़िप पर हाथ रख दिया और वो ज़िप खोलने की कोशिश करने लगी। मैंने उसका चेहरा देखा- उसके होंठ गीले और मुँह खुला हुआ था। साफ़ था कि वो गरम हो चुकी थी। मैंने धीरे से अपने आप ही अपनी ज़िप खोल दी, नताशा ने अपना हाथ अन्दर डाल कर मेरा 9 इंच लम्बा 3 इंच मोटा सूमो अपने हाथ में ले लिया।

अचानक मेरा पूरा बदन थरथरा गया पता ही नहीं चला कि कब मेरे हाथ उसके बूब्स पर और उसके टी-शर्ट के अन्दर पहुँच गए। उसके बूब्स बिल्कुल गोल और उसके निप्प्ल बिल्कुल खड़े थे, साइज़ क्रिकेट बाल से भी 1 1/2 गुना था. हम दोनों के ही बदन तने जा रहे थे और दोनों ही सातवें आसमान पर थे।

क्या नज़ारा था मेरा सूमो नर्म उँगलियों के बीच खेल रहा था, नताशा मेरे कंधे पर सर टिकाये हुए थी और मेरा हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर सहलाने में लगा था।

अचानक नताशा मेरे कान में फुसफुसाई,’ मुझे लोलीपोप खाना है !’
मेरे तो दिल की बात कर दी उसने, पर मैंने कहा,’ सिमरन देख लेगी तो?’

उसने सड़ा सा मुँह बनाया और बोली,’ इन बहनजी लोगों को सुधारना पड़ेगा, न खुद ऐश करती हैं न करने देती हैं !’

मैंने कहा,’ जो तुम्हें पीने से रोके उसे भी शराबी बना दो, हम तो यही करते हैं।’

वो बोली,’ सही कह रहे हो, इन्हें इस बार ऐश करना सिखाना ही है।’ और फिर हम दोनों अपने काम में लग गए।

अब मैंने सिमरन पर ध्यान देना शुरू किया, वो बिल्कुल ऐसे दिखा रही थी जैसे कि उसे कुछ पता ही नहीं था, इसलिए मैंने नताशा के निप्प्ल जोर जोर से दबाना और बूब्स को मसलना शुरू कर दिया तो उसकी सिसकारियां हल्के हल्के मुँह से बाहर आने लगी।

उधर सिमरन और सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी। अब मैंने उसकी जाँघों पर भी अपनी जांघ का दबाव हल्का सा बढ़ाया लेकिन वो चुप रही। अब तो मैं खुल कर नताशा के होठों को चूमने लगा।

1 घण्टा यही सब चलता रहा, फिर अचानक सिमरन बोली ‘कहीं थोड़ी देर गाड़ी रोक लें?’

हमने कहा- ठीक है कहीं चाय वगैरह पीते हैं !

इस चक्कर में करीब 1/2 घंटा और निकल गया इस बीच वो 3 बार बोल चुकी थी गाड़ी रोकने को !
अचानक वो चिल्ला पड़ी,’ गाड़ी रोकते क्यों नहीं?’
हमने तुंरत गाड़ी रुकवा दी. गाड़ी रुकते ही वो तुंरत उतरी और सड़क किनारे झाड़ियों की ओर दौड़ गई।
मैंने नताशा से पुछा,’ इसे क्या हुआ?’

सिमरन लौट कर आई और शरमाते हुए चुपचाप आकर बैठ गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ था?

वो और शरमा कर लाल हो गई और सर हिलाया कि कुछ नहीं !

नताशा ने उसका चेहरा उठाया और बोली- कहती क्यों नहीं कि जोर की सु-सु आई थी !’

मारे शर्म के सिमरन और लाल हो गई।

और हम सब खिलखिला कर हंस दिए, अब सिमरन भी शर्माती हुई हंस दी।

पहली बार मैंने देखा कि शर्म की लाली कैसी होती हैं, उसके कान, नाक, गाल सब लाल हो चुके थे, और हंसने की वजह से उसकी आँखों में अजीब सा पानी चमक रहा था।
मैंने कहा,’मेरी ओर देखो !’

उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर नज़रें चुरा कर मुस्कुरा दी।
मैंने कहा- 1/2 घंटे से तुम परेशान हो तो बोला क्यों नहीं?’
वो चुप रही।

मैंने फिर कहा- यदि हम दोस्त हैं, तो तुम अब किसी भी चीज़ के लिए परेशान नहीं होंगी हमसे नहीं तो कम से कम नताशा से तो कह सकती हैं’ वो चुप रही।
इस सब से माहौल और हल्का हो गया।

हाँ ! जितनी देर सिमरन कार से बाहर थी, इतनी देर में नताशा की जींस की ज़िप और बटन भी खुल चुकी थी, और वो मेरा सूमो भी मुँह में लेकर जीभ फिरा चुकी थी। साथ ही एक बार मैं भी उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी पिंकी को किस कर चुका था। अब सिमरन के आने के बाद मेरा एक हाथ उसकी पिंकी और उसकी कड़ी कड़ी फेंसिंग से और कभी उसके बूब्स से खेल रहा था. और उसकी सिसकारियां फिर गूंजने लगी थीं। सिमरन फिर खिड़की के बाहर देख रही थी और पल्लवी और सनी के लिए हमारे पास टाइम ही नहीं था।

अब तक खाते पीते ऊँगली करते, बूब्स मसलते हम लोग पिपरिया पहुँच चुके थे। इसके आगे पचमढ़ी की घाटियाँ शुरू हो जाती हैं। सनी की ड्राइविंग बहुत अच्छी है। ऐसी जगह पर भी वो 50 की स्पीड पर गाड़ी चला रहा था. अब घुमाव पर गाड़ी में हम पूरे के पूरे दायें या बाएँ झुक जाते थे, मेरी तो ऐश थी, नताशा के साथ साथ अब मुझे सिमरन के बूब्स भी कोहनी से सहलाने का मौका मिल रहा था। अक्सर मैं उसकी तरफ गाड़ी मुड़ने पर उसकी जाँघों पर हाथ रख देता था और कोहनी खड़ी करके उसके बूब्स पर टिका देता था कभी वो संभलने के लिए मेरी जांघ पर।

अब नताशा तो पूरी तरह से तैयार थी अब मैं सिमरन पर पूरा ध्यान दे रहा था। उसके गालों की रंगत लाल होती जा रही थी, उसके होंठों पर एक अजीब सी नमी छाने लगी थी, अब मैंने नींद आने का बहाना कर के उसकी जाँघों पर हाथ रख दिया था, उसके चेहरे के पास अपना चेहरा टिका कर अपनी सांसें उसके कान के पीछे और गर्दन पर छोड़ रहा था।

मैंने नींद का बहाना करके अपनी हथेली को उसकी पिंकी के ऊपर रख दिया, और अचानक उसकी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे रह गयी। मुझे अचानक उसकी स्किन लाल और गरम महसूस होने लगी. उसका पूरा बदन थरथरा रहा था। पक्का था कि यह पहली बार थी जो किसी लड़के ने उसे छुआ भी था।

मैंने अचानक नींद से उठने का बहाना किया और सीधा उससे पूछा,’क्या हुआ?’

उसने आँखें उठाकर देखा उसकी हालत ऐसी कार की तरह हो रही थी जिसका ब्रेक और एक्सीलेटर एक साथ दबा कर रखा गया हो. उसका चेहरा तमतमाया हुआ था, उसके होंठ नम हो रहे थे, उसके बूब्स साँसों की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे, उसकी आँखें साफ़ कह रही थी कि वो अपने होशोहवास खो चुकी थी, और उसकी आँखें एकटक मुझे देख रही थी।

मैंने धीरे से उसके सर के पीछे हाथ रख कर उसके होंठों से होंठ सटा दिए, कैसे मुझे भी नहीं पता? दो मिनट बाद जब हम अलग हुए तो उसकी आंखों में आंसू थे, मैंने उसके कंधे से हाथ डाल कर उसे अपने सीने पर टिका लिया।

ऐसा लगा काश दुनिया ख़त्म हो जाए। बीच में मैं एक शानदार शरीर का मालिक, मेरे दायें हाथ में एक सांवली सलोनी लड़की जो ख़ुद मेरे सूमो को सहला रही थी और मेरा दायाँ हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर एप्पल जूस निकलने में लगा था। बाएँ हाथ में मेरे एक सरदारनी थी, अनछुई, कच्ची, गुलाबी और नाज़ुक लेकिन तैयार जो कैटरिना कैफ से भी शानदार थी। अचानक मैंने झुक कर सिमरन के गाल पर अपने होंठ सटा दिए. मेरे होंठ और आँखें दोनों भीग गयी, खुशी और किस्मत की देन पर।

धीरे से मैंने अपना हाथ सिमरन के एक बूब पर टी शर्ट के ऊपर ही टिका दिया। वो फिर थरथरा उठी और कस कर मेरे सीने से चिपक गई, मैंने हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसके बूब्स तो बिल्कुल कड़क थे और नताशा के बूब्स से दोगुने थे. फेरते फेरते मैंने हाथ टी शर्ट के अन्दर डाल दिया।

मैंने उसके निप्प्ल को उँगलियों से दबाया तो उसके मुँह से सिसकारी निकल गई, और उसने अपने होंठ मेरे गाल पर सटा कर फुसफुसाई,’ प्लीज़ ! मत करो !’

अचानक मुझे अपने सूमो पर एक चिकोटी का एहसास हुआ, नताशा जिसे मैं भूल चुका था, चहक रही थी,’ सिमरन तू भी?’ ज़माने भर की खुशी और शरारत उसके चेहरे पर थी।

वो कोट उठा कर अलग कर चुकी थी और मेरा सूमो खुली हवा में साँस ले रहा था। नताशा की जींस खुली हुई थी और उसकी पिंकी के ऊपर की सुनहरी फेंसिंग (बाल) साफ़ दिख रहे थे, यह सब देख कर सिमरन का मुँह खुला रह गया वो सन्न रह गई, मानो काटो तो खून नहीं।
अचानक मैंने उसके निप्प्ल ज़ोर से उमेठ दिए, वो कराह उठी फिर शरमा गई और मेरे सीने में घुस गई. मेरा ध्यान आगे गया तो पल्लवी मुँह खोले आँखें फाड़े मेरे सूमो और नताशा की पिंकी को देख रही थी, उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे भूत देख लिया हो। नताशा ने उससे पूछ ही लिया ‘पल्लवी क्या देख रही हो?’ वो बेचारी चुपचाप सामने मुड गई।

अब तो खुल कर खेल रहे थे हम सब, सिमरन की स्कर्ट घुटनों के ऊपर आ चुकी थी, मेरा हाथ कभी उसके शानदार कड़क बूब्स को मसलता कभी चूचुकों को उमेठता, कभी उसकी जाँघों पर सहलाता, वो भी मदमस्त हो चुकी थी, इतना गरम हो चुकी थी कि वो अपनी गर्दन मेरे होंठों पर रगड़ रही थी, उधर नताशा मेरे सूमो को झुक कर मुँह में ले चुकी थी और दूसरे हाथ से भी मैंने सिमरन के दूसरे बूब को भी थाम लिया था।

अब सिर्फ़ पूरी कार में हम तीनों की सिसकारियां गूँज रही थी। नताशा ने सिमरन का हाथ खींच कर उसे भी मेरा सूमो थमा दिया था, सिमरन अब होश में नहीं थी और मुझ पर पूरी तरह टिक कर मेरे सूमो को ज़बरदस्त तरीके से ऊपर नीचे कर रही थी। यह सब करते करते कब सनी ने गाड़ी रोक दी पता ही नहीं चला। अब गाड़ी खड़ी थी और सनी आराम से पलट कर हम तीनो को देख रहा था।अचानक मैंने आँखें खोली तो पाया कि सनी एकटक मुझे देख रहा है और गाड़ी जंगल के अन्दर सुनसान में खड़ी है।

अब मैंने आजू बाजू देखा तो नताशा की जींस और काली पैंटी उसके घुटनों के नीचे थी और उसकी टी-शर्ट ऊपर चढ़ी हुई थी घुटनों से लेकर सीने तक वो पूरी नग्न थी, और वो पूरी तरह से मेरे सूमो पर झुकी हुई थी।

उधर सिमरन तो मेरे सीने पर पूरी तरह टिकी हुई थी पीठ के बल और मेरा एक हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर और पैंटी के अन्दर डाला था और दूसरा हाथ उसके टी शर्ट के अन्दर बूब्स मसल रहा था। उसकी चिकनी मार्बल की तरह चमकती सुडौल जांघें ट्यूब लाइट की तरह दमक रही थी और उसकी स्कर्ट जाँघों के ऊपर चढ़ी हुई थी।

सनी का बस चलता तो जलन के मारे मेरा खून पी जाता।

मैंने उसे आँख मारी और पल्लवी कि तरफ़ इशारा किया। उसने पल्लवी की बाहँ पकड़ कर पीछे देखने को कहा, पल्लवी ने पीछे देखा तो मैंने उसे आँख मार दी।

वो बेचारी बैठे बैठे काँप रही थी, इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वो कुछ देखे।

चाची ने टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे। मुझे साफ दिख रहा था कि उन्होंने ना ब्रा पहनी थी, ना ही पैंटी। उनके बड़े-बड़े मम्मे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। मैं बड़ी कामुकता से उन्हें देख रहा था। बाद में मुझे नींद आ गई। मुझे सपना आया कि मैं उनके मम्मों को अपने हाथों से पकड़कर चूस रहा हूँ। इसी सपने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैं आज तक उस सपने का आभारी हूँ क्योंकि इसके बाद जो हुआ, वो आपको सुनकर मज़ा आएगा। मुझे अब लगा कि मुझे चाची को चोदना शुरू करना चाहिए। मुझे थोड़ा-थोड़ा यकीन था कि चाची मना नहीं करेंगी क्योंकि मैंने कई बार उनके कमरे में उन्हें नकली लंड के साथ खेलते देखा था और कई बार वाइब्रेटर की आवाज़ भी सुनी थी। मुझमें हिम्मत आई और मैंने ऊपर से मेरे घर में मम्मी-पापा, मेरी एक बड़ी बहन, जिसकी शादी हो चुकी है और एक छोटी बहन है, जो पिछले तीन सालों से हॉस्टल में रहती है. मेरी मम्मी सिलाई का काम करती हैं, क्योंकि उन्हें ये काम पसंद है, न कि पैसे की वजह से. हमारा घर ज्यादा बड़ा नहीं है. बस तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, बाथरूम और टॉयलेट ही है. ये नंगी चूत की चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी मम्मी अभी भी मुझे छोटा समझती थीं, पर उन्हें क्या पता था कि मैं बड़ा हो गया था और मुझे सब समझ आने लगा था. घर में बहनों के न होने की वजह से मम्मी मुझसे कई काम करवा लेती थीं, जैसे उन्हें बाथरूम में तौलिया देना, उनकी ब्रा का हुक बंद करना वगैरह वगैरह. मम्मी बिना किसी शर्म के मेरे सामने नंगी होकर कपड़े बदल लेती थीं. कई बार तो वे बिना शर्ट के ही घर में घूम लेती थीं, क्योंकि घर में सिर्फ हम दो ही रहते थे. पापा तो जॉब पर चले जाते थे.चाची ने टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे। मुझे साफ दिख रहा था कि उन्होंने ना ब्रा पहनी थी, ना ही पैंटी। उनके बड़े-बड़े मम्मे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। मैं बड़ी कामुकता से उन्हें देख रहा था। बाद में मुझे नींद आ गई। मुझे सपना आया कि मैं उनके मम्मों को अपने हाथों से पकड़कर चूस रहा हूँ। इसी सपने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैं आज तक उस सपने का आभारी हूँ क्योंकि इसके बाद जो हुआ, वो आपको सुनकर मज़ा आएगा। मुझे अब लगा कि मुझे चाची को चोदना शुरू करना चाहिए। मुझे थोड़ा-थोड़ा यकीन था कि चाची मना नहीं करेंगी क्योंकि मैंने कई बार उनके कमरे में उन्हें नकली लंड के साथ खेलते देखा था और कई बार वाइब्रेटर की आवाज़ भी सुनी थी। मुझमें हिम्मत आई और मैंने ऊपर से मेरे घर में मम्मी-पापा, मेरी एक बड़ी बहन, जिसकी शादी हो चुकी है और एक छोटी बहन है, जो पिछले तीन सालों से हॉस्टल में रहती है. मेरी मम्मी सिलाई का काम करती हैं, क्योंकि उन्हें ये काम पसंद है, न कि पैसे की वजह से. हमारा घर ज्यादा बड़ा नहीं है. बस तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, बाथरूम और टॉयलेट ही है. ये नंगी चूत की चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी मम्मी अभी भी मुझे छोटा समझती थीं, पर उन्हें क्या पता था कि मैं बड़ा हो गया था और मुझे सब समझ आने लगा था. घर में बहनों के न होने की वजह से मम्मी मुझसे कई काम करवा लेती थीं, जैसे उन्हें बाथरूम में तौलिया देना, उनकी ब्रा का हुक बंद करना वगैरह वगैरह. मम्मी बिना किसी शर्म के मेरे सामने नंगी होकर कपड़े बदल लेती थीं. कई बार तो वे बिना शर्ट के ही घर में घूम लेती थीं, क्योंकि घर में सिर्फ हम दो ही रहते थे. पापा तो जॉब पर चले जाते थे.चाची ने टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे। मुझे साफ दिख रहा था कि उन्होंने ना ब्रा पहनी थी, ना ही पैंटी। उनके बड़े-बड़े मम्मे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। मैं बड़ी कामुकता से उन्हें देख रहा था। बाद में मुझे नींद आ गई। मुझे सपना आया कि मैं उनके मम्मों को अपने हाथों से पकड़कर चूस रहा हूँ। इसी सपने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैं आज तक उस सपने का आभारी हूँ क्योंकि इसके बाद जो हुआ, वो आपको सुनकर मज़ा आएगा। मुझे अब लगा कि मुझे चाची को चोदना शुरू करना चाहिए। मुझे थोड़ा-थोड़ा यकीन था कि चाची मना नहीं करेंगी क्योंकि मैंने कई बार उनके कमरे में उन्हें नकली लंड के साथ खेलते देखा था और कई बार वाइब्रेटर की आवाज़ भी सुनी थी। मुझमें हिम्मत आई और मैंने ऊपर से मेरे घर में मम्मी-पापा, मेरी एक बड़ी बहन, जिसकी शादी हो चुकी है और एक छोटी बहन है, जो पिछले तीन सालों से हॉस्टल में रहती है. मेरी मम्मी सिलाई का काम करती हैं, क्योंकि उन्हें ये काम पसंद है, न कि पैसे की वजह से. हमारा घर ज्यादा बड़ा नहीं है. बस तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, बाथरूम और टॉयलेट ही है. ये नंगी चूत की चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी मम्मी अभी भी मुझे छोटा समझती थीं, पर उन्हें क्या पता था कि मैं बड़ा हो गया था और 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नींद आ गई। मुझे सपना आया कि मैं उनके मम्मों को अपने हाथों से पकड़कर चूस रहा हूँ। इसी सपने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैं आज तक उस सपने का आभारी हूँ क्योंकि इसके बाद जो हुआ, वो आपको सुनकर मज़ा आएगा। मुझे अब लगा कि मुझे चाची को चोदना शुरू करना चाहिए। मुझे थोड़ा-थोड़ा यकीन था कि चाची मना नहीं करेंगी क्योंकि मैंने कई बार उनके कमरे में उन्हें नकली लंड के साथ खेलते देखा था और कई बार वाइब्रेटर की आवाज़ भी सुनी थी। मुझमें हिम्मत आई और मैंने ऊपर से मेरे घर में मम्मी-पापा, मेरी एक बड़ी बहन, जिसकी शादी हो चुकी है और एक छोटी बहन है, जो पिछले तीन सालों से हॉस्टल में रहती है. मेरी मम्मी सिलाई का काम करती हैं, क्योंकि उन्हें ये काम पसंद है, न कि पैसे की वजह से. हमारा घर ज्यादा बड़ा नहीं है. बस तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, बाथरूम और टॉयलेट ही है. ये नंगी चूत की चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी मम्मी अभी भी मुझे छोटा समझती थीं, पर उन्हें क्या पता था कि मैं बड़ा हो गया था और मुझे सब समझ आने लगा था. घर में बहनों के न होने की वजह से मम्मी मुझसे कई काम करवा लेती थीं, जैसे उन्हें 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से. हमारा घर ज्यादा बड़ा नहीं है. बस तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, बाथरूम और टॉयलेट ही है. ये नंगी चूत की चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था. मेरी मम्मी अभी भी मुझे छोटा समझती थीं, पर उन्हें क्या पता था कि मैं बड़ा हो गया था और मुझे सब समझ आने लगा था. घर में बहनों के न होने की वजह से मम्मी मुझसे कई काम करवा लेती थीं, जैसे उन्हें बाथरूम में तौलिया देना, उनकी ब्रा का हुक बंद करना वगैरह वगैरह. मम्मी बिना किसी शर्म के मेरे सामने नंगी होकर कपड़े बदल लेती थीं. कई बार तो वे बिना शर्ट के ही घर में घूम लेती थीं, क्योंकि घर में सिर्फ हम दो ही रहते थे. पापा तो जॉब पर चले जाते थे.चाची ने टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे। मुझे साफ दिख रहा था कि उन्होंने ना ब्रा पहनी थी, ना ही पैंटी। उनके बड़े-बड़े मम्मे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। मैं बड़ी कामुकता से उन्हें देख रहा था। बाद में मुझे नींद आ गई। मुझे सपना आया कि मैं उनके मम्मों को अपने हाथों से पकड़कर चूस रहा हूँ। इसी सपने की वजह से मेरी नींद खुल गई। मैं आज तक उस सपने का आभारी हूँ क्योंकि इसके बाद जो हुआ, वो आपको सुनकर मज़ा आएगा। मुझे 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अब आगे-Hindi Porn Stories

देवर ने मेरी चूत Hindi Porn Stories के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…
“स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा. जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआ आआ निकलता. मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊँगी.

अपना लण्ड बाहर निकालकर… “क्या बात है भाभी इतनी जल्दी…?” देवर ने कहा.

मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं.
“फ़िर तो आज सच में मजा आयेगा!” देवर ने कहा.
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है.
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा.
“स्स्स्शाआआ आआआ देवर जी… मत चूऊसो स्सीईईई.”

देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतर कर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो…

मैं पलट कर उसके ऊपर आ गई. दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई. उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरक कर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता. फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मजा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा.

दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटा कर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा.
“आआआ स्स्सीईईई… ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईई…”
देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
“हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईई ईईईई!” मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई.

देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतार कर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा. दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा.
देवर ने पूछा- मजा आ रहा है भाभी…?
“कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है!” मैंने कहा.

देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बना कर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया.
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था. इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर ही चोदा था. दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया. एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागों में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईई हाआआ निकल जाता.

हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी. लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा… इतना जबरदस्त मजा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं.
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा. देवर ने मेरी मैक्सी निकाल कर मुझे नंगी कर बेड से उतार कर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुका कर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठा कर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकाल कर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा. मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ दस बार मेरी चूत को चाटा…

शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था. फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुका कर मेरी कमर पकड़ कर सटासट सटासट चोदने लगा.
ओ मां… कितना मजा आ रहा था मैं यहाँ बयान नहीं कर सकती…

जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता.. इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता… मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी. मैं झड़ने वाली थी… मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती… आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो… स्सीईईई हो… आआस्स्सीईई हो… गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽ.

मेरे दोनों पैर काम्पने लगे. देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनों पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़ कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा. मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था.

देवर हूं… हूं… हूं की आवाज निकालते हुये जोर जोर के धक्के मार रहा था.. मेरी चूत के दाने पर दर्द होने लगा… इससे पहले कि मैं उसको बताती उसने ओ ओ ओ करते हुये इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे हाथ फ़िसल गये मैं छाती के बल जोर से बक्से के ऊपर पसर गई… मेरी चूत से एक-दो इंच ऊपर हड्डी का हिस्सा बख्से के कोने से टकराया… मैं दर्द के मारे चिल्लाई- उईईई मां मर गई… देवर ने तीन चार और धक्के उसी अवस्था में मारे और पच पच पच पच पच करके अपने वीर्य की पिचकारियाँ मेरी चूत के अन्दर मार दी. जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकल कर फ़र्श पर गिर गया.

बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी… मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था. देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा. चुदाई का असल मजा मैंने आज लिया था… भले ही अब चूत में भयंकर दर्द हो रहा था.

मैंने बेड के ऊपर पड़ी मैक्सी से पहले अपनी चूत साफ़ की फ़िर देवर की वीर्य से सनी झांटों और लण्ड को तथा उसके बाद फ़र्श पर टपके वीर्य को साफ़ करने के बाद अलमारी से अपनी दूसरी मैक्सी निकाल कर पहनी.
देवर ने अपनी बनियान पहन कर नीचे लुन्गी लपेटी और बेड पर बैठते हुये मुझे अपनी गोद में लेकर मेरे गालों और होंठों को चूमते हुये बोला- भाभी, यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा… पहली बार मैंने असली मजा लिया है. रात को भैया से मशवरा लेने के बाद मैं कल सुबह सुबह निकल जाऊँगा. फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…

मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.
“सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई.

दूसरे दिन मेरा बेटा साढ़े सात बजे स्कूल चला गया और नौ बजे पति ऑफ़िस. देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीद कर दोपहर को निकल जायेगा.

मेरे पति के जाने के बाद देवर ने मुझे किचन से खींच कर बेडरूम में लेजा कर अपनी बगल में लिटाया और मुझे चूमते चाटते, मेरी चूचियों को मैक्सी के बाहर से ही भींचते हुये अपनी और देवरानी के सेक्स के बारे में बताने लगा. उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया.
उसके पूछने पर मैंने भी बताया कि मेरे पति सेक्स के मामले में हर तरह से सक्षम हैं… पूरी तरह सन्तुष्ट करते हैं लेकिन देवर की तरह चूत चाट कर, घोड़ी बनाकर अलग अलग तरह से नहीं करते हैं.
बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई. हड़बड़ाहट में भाग कर मैंने बाहर जा कर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देख कर मैं दंग रह गई.
दरवाजे पर खड़े खड़े मैंने पूछा- क्या हुआ..? स्कूल नहीं गया क्या…?
बबलू झुंझला कर बोला- अन्दर भी आने दोगी कि नहीं मम्मी, मेरे सिर में जोर का दर्द हो रहा है!
बोलते हुये वो अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया.

मैंने जाकर उसके सिर पर हाथ रखा… सिर तो ठंडा था.
बबलू बोला- मम्मी, कोई दवाई हो तो दे दो और दरवाजा बन्द कर दो, मैं सोऊँगा.
मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया.

मेरा मन खराब हो गया गया… मैं देवर के साथ जबरदस्ती वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी. मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मजा आता है… पर बबलू तो सारा मजा ही किरकिरा कर दिया.
मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है…
तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई. उसके पूछने पर मैंने उसको अब अपनी योजना के बारे में बताया तो वो हंसने लगा और बोला- क्या भाभी… यह तो अब भी हो सकता है ना.
मैंने पूछा- कैसे?
देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं. बेटे के कमरे तक वहाँ से कोई आवाज भी नहीं आयेगी लेकिन हमें दोपहर के खाने के बाद बेटे के सोने तक इन्तजार करना पड़ेगा. देवर चाबी लेकर गेस्ट रूम में ठीक ठाक करने चले गये और मैं रसोई का काम निपटाने.

काम निपटाकर मैं बेटे को देखने गई…वो सो रहा था. मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं. सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिश की और उसको ये बोल कर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौट कर खाना बनाऊँगी…
उसके कमरे दरवाजा खींच कर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई. दरवाजे की कुन्डी बन्दकर देवर से बोली- तुमने अपनी माँ का दूध पिया तो करके दिखाओ?
देवर बेड पर लेटा था, वो उठकर बैठ गया और मेरी तरफ़ हैरानी से देखने लगा.
मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो? गांड में दम है तो आओ.
देवर झटके से उठकर मेरी तरफ़ लपका.

मैं भागकर बेड की दूसरी तरफ़ भाग गई. थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव.
काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया. हंसते हुये अपनी कामयाबी पर गर्व करते हुये उसने मेरी चूत पर लण्ड रख कर जैसे ही धक्का मारा मैंने जोर लगा कर चूत को भींच लिया. पता नहीं उसने कितनी कोशिश की पर लण्ड चूत के अन्दर नहीं कर पाया. दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे.
देवर ने एक बार फ़िर मेरी चूत पर अपना लण्ड सटाया और मेरी चूची को मुँह में भर कर जोर से दांत गड़ा दिये… मैं दर्द के मारे उचक गई… और चूत ढीली पड़ते ही सटट्टाक से लण्ड एक ही बार में पूरा अन्दर घुस गया.
देवर बोला- अब क्या करोगी मेरी जान…
मैंने शांत रहते हुये कहा- अब मैं क्या कर सकती हूँ… जो कुछ करोगे तुम ही करोगे…

मेरे ऐसा बोलते ही वो धीरे धीरे हिलने लगा और मौका पाकर मैं नीचे से एक तरफ़ सरक गई और बेचारा फ़िर से लण्ड अन्दर डालने की कोशिश में लग गया.
यहाँ पर मैं संक्षेप में बता दूँ कि तीन घन्टे तक हमने चुदाई की. पहली बार तो दैहिक शोषण के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में.

देवर की इन तीन बार की चुदाई में मैं शायद सात-आठ बार झड़ी. बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया.

खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई… उसका चेहरा लाल हो रहा था… उसकी आँखें भी सूजी हुई थी… घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया. देवर ने खाना खाकर उसको डाक्टर के पास ले चलने को कहा. खाना खाते खाते बबलू का चेहरा ठीक हो गया. थोड़ी देर आराम करने के बाद बबलू अपने चाचा को बस स्टाप तक छोड़कर लौटा.
सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी.

मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.
मैंने उसको समझाया कि ऐसी बातें किसी को नहीं बताया करते… अच्छी बात नहीं होती है. जा अब अपने कमरे में जा.
“मम्मी प्लीज… एक बार चाचा की तरह करने दो ना… सिर्फ़ एक बार!”
“कर तो लिया था तूने शादी वाली रात… बस अब नहीं…” मैंने कहा.
“नहीं मम्मी वैसे नहीं…बक्से के पास जैसे चाचा ने किया था.”

मेरे लाख डराने और समझाने पर भी वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उससे वादा लिया कि इसके बाद वो इस बारे में कभी सोचेगा भी नहीं और चाचा या अपने बारे में किसी को भी कुछ नहीं बतायेगा… राजू को भी नहीं.

उसके बाद मैं उसके साथ बक्से के पास उसी अवस्था में जाकर खड़ी हो गई. बबलू ने मेरा पेटिकोट ऊपर सरकाया, नीचे बैठकर अपने चाचा की नकल उतारते हुये मेरी चूत को चाटा फ़िर पीछे से कमर पकड़कर चोदने लगा.
थोड़ी देर बाद बोला- मम्मी चिल्लाओ ना जैसे चाचा के साथ चिल्ला रही थी.

अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मजा आ रहा था… मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है.
मैंने उससे कहा- बेटे जल्दी कर… बेटे के साथ वैसे नहीं चिल्ला सकते और मैंने जान बूझ कर अपनी चूत को भींच लिया जिस वजह से उसके लण्ड पर दबाव पड़ा और तीन चार धक्कों में ही हा आआ आआआआ करते हुये वो मेरे से चिपक गया.

उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.
मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है. देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…
“स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा. जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआ आआ निकलता. मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊँगी.

अपना लण्ड बाहर निकालकर… “क्या बात है भाभी इतनी जल्दी…?” देवर ने कहा.

मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं.
“फ़िर तो आज सच में मजा आयेगा!” देवर ने कहा.
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है.
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा.
“स्स्स्शाआआ आआआ देवर जी… मत चूऊसो स्सीईईई.”

देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतर कर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो…

मैं पलट कर उसके ऊपर आ गई. दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई. उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरक कर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता. फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मजा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा.

दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटा कर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा.
“आआआ स्स्सीईईई… ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईई…”
देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
“हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईई ईईईई!” मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई.

देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतार कर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा. दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा.
देवर ने पूछा- मजा आ रहा है भाभी…?
“कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है!” मैंने कहा.

देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बना कर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया.
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था. इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर ही चोदा था. दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया. एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागों में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईई हाआआ निकल जाता.

हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी. लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा… इतना जबरदस्त मजा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं.
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा. देवर ने मेरी मैक्सी निकाल कर मुझे नंगी कर बेड से उतार कर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुका कर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठा कर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकाल कर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा. मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ दस बार मेरी चूत को चाटा…

शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था. फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुका कर मेरी कमर पकड़ कर सटासट सटासट चोदने लगा.
ओ मां… कितना मजा आ रहा था मैं यहाँ बयान नहीं कर सकती…

जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता.. इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता… मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी. मैं झड़ने वाली थी… मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती… आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो… स्सीईईई हो… आआस्स्सीईई हो… गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽ.

मेरे दोनों पैर काम्पने लगे. देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनों पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़ कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा. मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था.

देवर हूं… हूं… हूं की आवाज निकालते हुये जोर जोर के धक्के मार रहा था.. मेरी चूत के दाने पर दर्द होने लगा… इससे पहले कि मैं उसको बताती उसने ओ ओ ओ करते हुये इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे हाथ फ़िसल गये मैं छाती के बल जोर से बक्से के ऊपर पसर गई… मेरी चूत से एक-दो इंच ऊपर हड्डी का हिस्सा बख्से के कोने से टकराया… मैं दर्द के मारे चिल्लाई- उईईई मां मर गई… देवर ने तीन चार और धक्के उसी अवस्था में मारे और पच पच पच पच पच करके अपने वीर्य की पिचकारियाँ मेरी चूत के अन्दर मार दी. जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकल कर फ़र्श पर गिर गया.

बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी… मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था. देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा. चुदाई का असल मजा मैंने आज लिया था… भले ही अब चूत में भयंकर दर्द हो रहा था.

मैंने बेड के ऊपर पड़ी मैक्सी से पहले अपनी चूत साफ़ की फ़िर देवर की वीर्य से सनी झांटों और लण्ड को तथा उसके बाद फ़र्श पर टपके वीर्य को साफ़ करने के बाद अलमारी से अपनी दूसरी मैक्सी निकाल कर पहनी.
देवर ने अपनी बनियान पहन कर नीचे लुन्गी लपेटी और बेड पर बैठते हुये मुझे अपनी गोद में लेकर मेरे गालों और होंठों को चूमते हुये बोला- भाभी, यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा… पहली बार मैंने असली मजा लिया है. रात को भैया से मशवरा लेने के बाद मैं कल सुबह सुबह निकल जाऊँगा. फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…

मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.
“सच भाभी…” कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझा कर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्द कर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई.

दूसरे दिन मेरा बेटा साढ़े सात बजे स्कूल चला गया और नौ बजे पति ऑफ़िस. देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीद कर दोपहर को निकल जायेगा.

मेरे पति के जाने के बाद देवर ने मुझे किचन से खींच कर बेडरूम में लेजा कर अपनी बगल में लिटाया और मुझे चूमते चाटते, मेरी चूचियों को मैक्सी के बाहर से ही भींचते हुये अपनी और देवरानी के सेक्स के बारे में बताने लगा. उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया.
उसके पूछने पर मैंने भी बताया कि मेरे पति सेक्स के मामले में हर तरह से सक्षम हैं… पूरी तरह सन्तुष्ट करते हैं लेकिन देवर की तरह चूत चाट कर, घोड़ी बनाकर अलग अलग तरह से नहीं करते हैं.
बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई. हड़बड़ाहट में भाग कर मैंने बाहर जा कर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देख कर मैं दंग रह गई.
दरवाजे पर खड़े खड़े मैंने पूछा- क्या हुआ..? स्कूल नहीं गया क्या…?
बबलू झुंझला कर बोला- अन्दर भी आने दोगी कि नहीं मम्मी, मेरे सिर में जोर का दर्द हो रहा है!
बोलते हुये वो अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया.

मैंने जाकर उसके सिर पर हाथ रखा… सिर तो ठंडा था.
बबलू बोला- मम्मी, कोई दवाई हो तो दे दो और दरवाजा बन्द कर दो, मैं सोऊँगा.
मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया.

मेरा मन खराब हो गया गया… मैं देवर के साथ जबरदस्ती वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी. मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मजा आता है… पर बबलू तो सारा मजा ही किरकिरा कर दिया.
मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है…
तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई. उसके पूछने पर मैंने उसको अब अपनी योजना के बारे में बताया तो वो हंसने लगा और बोला- क्या भाभी… यह तो अब भी हो सकता है ना.
मैंने पूछा- कैसे?
देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं. बेटे के कमरे तक वहाँ से कोई आवाज भी नहीं आयेगी लेकिन हमें दोपहर के खाने के बाद बेटे के सोने तक इन्तजार करना पड़ेगा. देवर चाबी लेकर गेस्ट रूम में ठीक ठाक करने चले गये और मैं रसोई का काम निपटाने.

काम निपटाकर मैं बेटे को देखने गई…वो सो रहा था. मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं. सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिश की और उसको ये बोल कर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौट कर खाना बनाऊँगी…
उसके कमरे दरवाजा खींच कर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई. दरवाजे की कुन्डी बन्दकर देवर से बोली- तुमने अपनी माँ का दूध पिया तो करके दिखाओ?
देवर बेड पर लेटा था, वो उठकर बैठ गया और मेरी तरफ़ हैरानी से देखने लगा.
मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो? गांड में दम है तो आओ.
देवर झटके से उठकर मेरी तरफ़ लपका.

मैं भागकर बेड की दूसरी तरफ़ भाग गई. थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव.
काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया. हंसते हुये अपनी कामयाबी पर गर्व करते हुये उसने मेरी चूत पर लण्ड रख कर जैसे ही धक्का मारा मैंने जोर लगा कर चूत को भींच लिया. पता नहीं उसने कितनी कोशिश की पर लण्ड चूत के अन्दर नहीं कर पाया. दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे.
देवर ने एक बार फ़िर मेरी चूत पर अपना लण्ड सटाया और मेरी चूची को मुँह में भर कर जोर से दांत गड़ा दिये… मैं दर्द के मारे उचक गई… और चूत ढीली पड़ते ही सटट्टाक से लण्ड एक ही बार में पूरा अन्दर घुस गया.
देवर बोला- अब क्या करोगी मेरी जान…
मैंने शांत रहते हुये कहा- अब मैं क्या कर सकती हूँ… जो कुछ करोगे तुम ही करोगे…

मेरे ऐसा बोलते ही वो धीरे धीरे हिलने लगा और मौका पाकर मैं नीचे से एक तरफ़ सरक गई और बेचारा फ़िर से लण्ड अन्दर डालने की कोशिश में लग गया.
यहाँ पर मैं संक्षेप में बता दूँ कि तीन घन्टे तक हमने चुदाई की. पहली बार तो दैहिक शोषण के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में.

देवर की इन तीन बार की चुदाई में मैं शायद सात-आठ बार झड़ी. बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया.

खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई… उसका चेहरा लाल हो रहा था… उसकी आँखें भी सूजी हुई थी… घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया. देवर ने खाना खाकर उसको डाक्टर के पास ले चलने को कहा. खाना खाते खाते बबलू का चेहरा ठीक हो गया. थोड़ी देर आराम करने के बाद बबलू अपने चाचा को बस स्टाप तक छोड़कर लौटा.
सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी.

मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.
मैंने उसको समझाया कि ऐसी बातें किसी को नहीं बताया करते… अच्छी बात नहीं होती है. जा अब अपने कमरे में जा.
“मम्मी प्लीज… एक बार चाचा की तरह करने दो ना… सिर्फ़ एक बार!”
“कर तो लिया था तूने शादी वाली रात… बस अब नहीं…” मैंने कहा.
“नहीं मम्मी वैसे नहीं…बक्से के पास जैसे चाचा ने किया था.”

मेरे लाख डराने और समझाने पर भी वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उससे वादा लिया कि इसके बाद वो इस बारे में कभी सोचेगा भी नहीं और चाचा या अपने बारे में किसी को भी कुछ नहीं बतायेगा… राजू को भी नहीं.

उसके बाद मैं उसके साथ बक्से के पास उसी अवस्था में जाकर खड़ी हो गई. बबलू ने मेरा पेटिकोट ऊपर सरकाया, नीचे बैठकर अपने चाचा की नकल उतारते हुये मेरी चूत को चाटा फ़िर पीछे से कमर पकड़कर चोदने लगा.
थोड़ी देर बाद बोला- मम्मी चिल्लाओ ना जैसे चाचा के साथ चिल्ला रही थी.

अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मजा आ रहा था… मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है.
मैंने उससे कहा- बेटे जल्दी कर… बेटे के साथ वैसे नहीं चिल्ला सकते और मैंने जान बूझ कर अपनी चूत को भींच लिया जिस वजह से उसके लण्ड पर दबाव पड़ा और तीन चार धक्कों में ही हा आआ आआआआ करते हुये वो मेरे से चिपक गया.

उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.
मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है. Hindi Porn Stories

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