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रोज की तरह मैं और Antarvasna दिव्या अपने ऑफ़िस में बैठे हुये काम रहे थे। दिव्या हमेशा अपने कम कपड़ों में मुझे उत्तेजित करने का प्रयास करती रहती थी। उसे देख कर मैं भड़क भी जाता था और फिर वो चुद भी जाती थी पर अब असमय भी चुदाई करने में मजा नहीं आता था। पर आज मुझे ताऊजी फोन आया कि विक्की और सोफिया गोआ घूमने आ रहे हैं। दिव्या विक्की को नहीं जानती थी। उसके आने की सूचना पाकर मुझे बहुत ही खुशी हुई।
ठीक समय पर मैं अपनी कार लेकर दिव्या के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच गया। ट्रेन आ चुकी थी। मैंने मोबाईल पर सोफिया को बता दिया था कि मैं और दिव्या बाहर खड़े इन्तज़ार कर रहे हैं। कुछ ही देर में एक बेहद खूबसूरत लड़की और एक सुन्दर सा हीरो जैसा लगने वाला लड़का दिखाई दिया। मेरा अनुमान सही था। वही दोनों सोफिया और विक्की थे। पहले तो वो दोनों बाहर खड़े हो कर यहाँ-वहाँ देखते रहे। दिव्या ने मुझे कहा,”शायद वो ही है … लड़का तो बड़ा मस्त है यार … “
“तुझे तो बस लण्ड ही देखता है … जा कर पता कर … ” दिव्या को तो मौका चाहिये था। कार से उतर कर सीधे उस लड़के पास गई। लड़का दिव्या को देखता ही रह गया। सोचने लगा कि ये अचानक एक जवान सी सुन्दरी उसके सामने कौन आ गई। मैं कार से उतर चुका था और उनकी तरफ़ देखा, वो आपस में कुछ बाते कर रहे थे और सोफिया का हाथ मेरी ओर लहरा उठा। आते ही सोफिया ने मुझे औपचारिक तौर पर किस किया, पर शरारत के साथ … अपनी चूचियाँ मेरी छाती से लगा कर मेरे बदन में सिरहन पैदा कर दी। मुझे तुरन्त मालूम हो गया कि ये खूबसूरत सी मेरी कजिन शरारती टाईप की है। विक्की और दिव्या साथ बैठ गये और सोफिया मेरे साथ आगे बैठ गई। मुझे लगने लगा कि कुछ समय तो बड़ा मजेदार निकलेगा।
घर पहुंचने पर शाम को हम घूमने का कार्यक्रम बनाने लगे। कुछ ही समय ने दिव्या ने विक्की से अच्छी दोस्ती कर ली। विक्की भी खुश था। इधर सोफिया भी मेरे साथ बहुत ही इनफ़ॉर्मल हो गई थी। कुछ ही समय में मुझसे खुल कर बातें करने लगी थी। दिव्या से मेरे सम्बंध के बारे में पूछने लगी थी। मैंने उसे खुलने पर स्पष्ट बता दिया था कि वो मेरी दोस्त है, आज कल वो मेरे साथ ही रह रही है, और इसमे कोई बुराई नहीं है। सोफिया भी मेरे खुलेपन से बहुत खुश थी … शायद वो अपनी इस यात्रा को मजेदार और मस्त बनाना चाहती थी। घर पहुंचने पर हमने लन्च लिया और वो दोनों आराम करने लगे। दिव्या मेरे साथ लेटी हुई सोफिया की बातें ही कर रही थी और मेरे मन की टोह ले रही थी।
शाम को हमने समुद्र के किनारे जाने का प्रोग्राम बना लिया और लगभग छः बजे हम चारों बीच की ओर रवाना हो गये। रास्ते में हमने दो-दो पेग काजू फ़ेनी के भी लिये और कुछ फ़्राई की हुई फ़िश और चिकन रख लिया था।
कुछ ही देर में हम बेनौलिम बीच पर पहुंच गये। लम्बा सा बीच था। कुछ और भी लोग वहाँ पर थे। हम लोग बीच के पास ही चादर बिछा कर बैठ गये। दिव्या तो अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ ब्रा और पेण्टी में ही समुद्र की ओर भाग ली, विक्की भी अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवियर में दिव्या के पीछे हो लिया।
सोफिया ने मुझसे कहा,”आप नहीं चलोगे क्या ?”
“आप साथ चलोगी … ?”
“मुझे शरम आती है दिव्या जैसे कपड़ों में … “
“मुझे तो नहीं आती है, ये देखो … ” मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये … बस अंडरवियर में था। पर ये भूल गया था कि मेरा लण्ड उस छोटे से अंडरवियर में साफ़ उठा हुआ नजर आ रहा था। सोफिया ने मेरे लण्ड के उभार को अच्छी तरह से निहारा और कुछ उत्तेजित हो गई।
“फिर तुम उधर देखो … मैं कपड़े उतार लेती हूँ … ” उसने भी शर्माते हुये अपने कपड़े उतार दिये। उसका गोरा बदन दमक उठा। ब्रा में से चूचियां जैसे उछल कर बाहर आने को बेताब हो रही थी। मेरा मन विचलित हो उठा। लण्ड और कड़ा हो गया।
उसकी बहुत ही छोटी सी पेण्टी में से उसके तराशे हुये चूतड़ और उसकी गोलाईयाँ मेरी जान निकाल रही थी। पतली कमर, उभरे हुये कामुक कूल्हे, तराशी हुई जांघें मुझे मदमस्त कर रही थी। जाने कब मेरे दोनों बाहें उठ गई उसे अपनी आलिंगन में लेने के लिये। और सोफिया भी मंत्र मुग्ध सी मेरी बाहों में सिमट आई। हमारे नंगे बदन आपस में छूते ही ही जैसे आग बनने लगे। सोफिया के होंठ मेरे गर्दन और होंठ के पास रगड़ खाने लगे। अपने चूतड़ों को दबा कर जैसे मेरे लण्ड का स्पर्श अपनी चूत से करने लगी। हम दोनों अब वही दरी पर लेट गये और एक दूसरे से लिपट कर जैसे लोट लगाने लगे। हम लोट लगाते हुये रेत पर आ गये हमें पता ही नहीं चला। मेरे हाथों ने ब्रा के ऊपर से ही उसकी एक चूची दबा दी … सोफिया सिसक उठी। दूसरी लोट में सोफिया मेरे ऊपर सवार थी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी थी। मुझे उसकी चूत के पास कुछ कड़ा सा लगा। शायद इसी हालत में काफ़ी देर तक आनन्द में प्यार करते रहे थे।
“बस करो भई … ये एक समुद्र का तट है … कोई कमरा नहीं ” दिव्या की खनकती हंसी सुनाई दी। हमें समय का ध्यान ही नहीं रहा … वो दोनों वापस आ चुके थे। सोफिया को तो पहले कुछ समझ में नहीं आया फिर जैसे एक दम होश में आई। इतनी देर में विक्की की उत्तेजना बढ़ गई। उसने हमारी हालत देख कर दिव्या को दबोच लिया और उसकी गीली पेण्टी उतार दी। उधर दिव्या ने भी बेशर्मी से विक्की का लण्ड पकड़ लिया। अब विक्की और दिव्या भी नीचे दरी पर एक दूसरे को दबाये हुये चोदने की कोशिश कर रहे थे। सोफिया मेरे उपर से हट चुकी थी और मैं भी उठ खड़ा हुआ था। दोनों को बड़ी मुश्किल से खींच कर अलग किया।
अरे ये सब यहां नहीं … यहां से चलो अभी … दिव्या … चलो कपड़े पहनो, गश्ती जीप आ रही है।
“घर चलो ना … तुम्हें तो बस करने की लगी है … और ये सार्वजनिक स्थल है … ” विक्की को सोफिया ने समझाया, दिव्या अपने बदन पर से रेत साफ़ कर रही थी। मैंने यहाँ-वहाँ देखा … अधिकतर लोग जा चुके थे और एक गश्ती जीप की रोशनी नजर आ रही थी, जो पास आती जा रही थी। कपड़े पहन कर हम कार में बैठे ही थे कि वो गश्ती जीप पास में आकर रुकी,”ओह जो साहब … गुड इवनिंग … कैसे हो … “
“क्या यार … गोआ में रहो तो पूरे समय … रिश्तेदारो को घुमाते ही रहो … “
“हां यार ये तो गोआ में रहने की सजा है … ” और हंसता हुआ आगे बढ़ गया।
हम लोग रेत से निकल कर बाहर आये और कार में बैठ कर वापस मडगांव रवाना हो गये।
घर पर आते ही पोर्ट वाईन का एक एक पेग बनाया और सभी सोफ़े पर बैठ कर सिप लेने लगे। दिव्या और विक्की की शरारतें बढती जा रही थी। वो सब चुपके से कर रहे थे, पर मेरी तेज निगाहें उसकी हर हरकत देख रही थी। सोफिया भी मुझे चोरी चोरी देख रही थी। मैंने सोफिया का हाथ जान कर के दबाया। पर अप्रत्याशित रूप से उसने अपना हाथ खींच लिया। मुझे झटका सा लगा।
“क्या हुआ … ?”
“अपना हाथ दूर रखो … “
“पर वहां समुद्र के किनारे तो … “
“वो तो बस मुझे कुछ हो गया था … सॉरी … जो … ” सोफिया उठ कर चली गई। मैं निराशा से उसे देखता रह गया। दिव्या ने पलक झपकते ही सारा मामला समझ लिया। वो तुरन्त मेरे पास आ गई।
“जो … मैं तो हू ना … उससे अधिक सुन्दर … उससे अधिक मजा दूंगी … ” विक्की भी उठ कर मेरे पास आ गया।
“जो मैं दीदी को समझाता हूँ … ” विक्की को अपना कार्यक्रम भी बिगड़ता नजर आया।
“नहीं विक्की … ये दिल के सौदे है … तुम दोनों मस्ती करो … जाओ … ” मैंने उठते हुये कहा।
“चलो दिव्या … अन्दर चलते हैं … “विक्की ने दिव्या का हाथ पकड़ा … दिव्या ने उसे देखा और गुस्से में बोली,”मेरा जो दुखी है और तुम्हें … जाओ , अब सो जाओ … मैं जो के साथ रहूंगी।” दिव्या ने अपना फ़ैसला सुना दिया।
“दिव्या प्लीज … विक्की को ऐसा मत कहो … उसे खुशी दो … जाओ, दोनों मजे लो और दो !” मैंने कहा और अपने कमरे में चला आया।
मन में थोड़ी सी बैचेनी सी लगी। यूं तो मैंने कई लड़कियों को चोदा था सो आज सोफिया चुदने को नहीं मिली, तो इतना बुरा नहीं लगा। कुछ ही देर में सब कुछ भूल कर मैं गहरी नींद में सो गया। अचानक रात को मेरी नींद किसी की आहट से खुल गई। उसी समय कमरे की बत्ती भी जल गई। देखा तो सोफिया सामने खड़ी थी।
“जो … बुरा लग गया ना … मुझे माफ़ कर दो … ” नींद में अलसाया सा भी उसकी सूरत देख कर मुझे हंसी आ गई।
“अरे नहीं नहीं … ये सब कुछ नहीं … मुझे आपकी फ़ीलिंग्स का ध्यान रखना चहिये था … ” मैंने उस बात को हवा उड़ाते हुये कहा।
“नहीं … मैं सच में बीच पर आप पर मोहित हो उठी थी … और मेरे मन में भावनायें जाग उठी थी … “
“मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था … पर भूल जाईये उस बात को … “
“कैसे भूल जाऊँ … विक्की और दिव्या तो मौज कर रहे है … पर मैं अभागी … हाय रे मैं माहवारी से हूँ … क्या करती … मुझे माफ़ कर दो … ” वो मेरे बिस्तर के सिरहाने आ कर बैठ गई … और मेरे बालों से खेलने लगी।
“सोफी … ऐसे समय में ये होता है … और असमंजस की स्थिति होती है … ” मैंने उसे सामान्य करने की कोशिश की … । पर उसका चेहरा मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ता ही गया और अब उसके नरम होंठ मेरे होंठों से प्यार कर रहे थे। एक व्हिस्की का भभका मेरे नाक के नथुनों से आ टकराया। पर वो अपने पूरे होश में थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और अधरपान का आनन्द लेने लगा। मैंने धीरे धीरे उसे कमर से पकड़ कर अपने शरीर से लिपटाना आरम्भ कर दिया। बिना कोई विरोध किये वो मेरे ऊपर आकर लेट गई और अब अब हम एक दूसरे की आगोश में थे। उसकी चूत ऊपर से ही मेरे लण्ड के ऊपर जोर मार रही थी … पर अब मुझे उसके लगाये गये नेपकिन का अहसास होने लगा था। मुझे कुछ भी करते हुये डर लग रहा था कि कहीं मेरी किसी भी हरकत से नाराज ना हो जाये।
सोफिया की बैचेनी बढ़ने लगी, उसने मेरे हाथ खींच कर अपने स्तनों पर रख दिये। साधारण साईज़ के स्तन थे … पर निपल कठोर और तने हुये थे … कुछ बड़े से लग रहे थे। मैंने उसकी चूंचियाँ धीरे धीरे सहलाना और गुदगुदाना आरम्भ कर दिया। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी …
अब वो मेरे बिस्तर पर मेरी बगल में लेट गई थी। वो मुझे बहुत ही प्यार से देख रही थी … उसकी चूंचियों के सहलाने और निपल को हल्के से मलने पर उसे बहुत आनन्द आ रहा था। उसने मुझे देखा और नजरें दबा कर इशारा किया … और उसका हाथ धीरे से मेरी चड्डी के ऊपर आ गया और हौले से मेरे लण्ड को दबा दिया। कुछ अजीब सी स्थिति थी … चूत पर लाल पट्टा चढ़ा था और उसका मन चुदने को कर रहा था … या कुछ ओर ही … । उसके पतले से सफ़ेद पाजामे पर हाथ घुमाते ही मालूम हो गया कि … पट्टा लगा हुआ था। वो मेरे लण्ड को अब दबाने और सहलाने लगी थी। मेरी छोटी सी चड्डी में से अब मेरा लण्ड नहीं समा रहा था। साईड से सोफिया ने मेरा लण्ड खींच कर निकाल लिया और अब उसके साथ खेलने लगी। कभी वो मुठ मारती और कभी वो लण्ड को अपने शरीर से रगड़ती। उसके निपल और सारे उभारों को मैं सहला कर दबा रहा था। उसकी सिसकारियाँ बढ़ रही थी। मेरा लण्ड भी उत्तेजना के मारे फ़ूल रहा था। सोफिया के आंखो में वासना के गुलाबी डोरे उसकी उत्तेजना को दर्शा रहे थे।
मैंने अपनी सहन शीलता खो दी और सोफिया की चूत दबा डाली। वो एकदम से सिमट गई और एक जोर से सिसकारी भरी और झड़ने लगी। मुझे अहसास हुआ कि शायद वो यही चाह रही थी। अपनी आंखें बंद किये वो झड़ने का आनन्द लेने लगी। मैंने भी उसका शरीर को सहलाना और दबाना जारी रखा। धीरे धीरे सोफिया सामान्य होने लगी। उसका हाथ मेरे लण्ड पर कस गया। मेरे लण्ड में उसके हाथों से मीठी सी सुरसुराहट जागने लगी। मैंने सोफिया को प्यार से अपने शरीर से लिपटा लिया और प्यार करने लगा।
मुठ मारते मारते मेरा लण्ड भी कड़कने लगा … मुझे लगने लगा कि अन्दर से माल अब निकला ही चाहता है। मेरे चूतड़ हिल हिल कर उसके मुठ मारने में सहायता करने लगे … और मेरे उफ़नते हुये लण्ड ने अपनी सीमा तोड़ते हुये अपना रस उसके हाथों में निकाल दिया। उसका हाथ मेरे वीर्य से भर गया। पर उसका हाथ चलता रहा और मेरे लण्ड से रस रह रह कर छलकता रहा। मेरा पूरा लण्ड वीर्य से भर गया … सोफिया का हाथ भी मेरे लसलसे वीर्य से भर गया था। उसने मेरे नाभि के आस पास वीर्य रस को फ़ैला दिया और अपना गीला हाथ मेरे गालो पर रख कर मुझे चूम लिया। उसने जल्दी से अपना पजामा उतारा और नेपकिन को उतार दिया। मैंने तुरन्त अपना मुख दूसरी ओर कर लिया। उसने मुझे देखा और मुस्करा उठी।
“जो … अपना लण्ड तो चड्डी में छिपा लो वर्ना नजर लग जायेगी … ।” दिव्या की हंसी सुनाई दी और नया नेपकिन सोफिया की ओर उछाल दिया।
“अरे रात के दो बज रहे है … तुम सोये नहीं … ?”
“आज की रात कौन सोता है … पर जो, आखिर आपने सोफिया को पटा ही लिया ना … ” दिव्या ने कटाक्ष किया।
“नहीं सोफिया ने मुझे पटा लिया … उसे देखो, उसकी मजबूरी … उसकी सादगी … उसका अन्दाज़” मैंने सोफिया की तारीफ़ की।
“नहीं, जो बहुत समझदार और प्यारा है … उसने मेरे साथ बहुत प्यार किया , मेरी रजामन्दी से !”
दिव्या और विक्की दोनों खुश हो गये। सारा मामला ठीक हो गया था। सोफिया ने मुझे प्यार से चूमा और मुझे अकेला छोड़ कर इठलाते हुये अपने कमरे में चली गई। दिव्या भी विक्की के साथ चली गई। मैं अब ये सोचता हुआ सो गया कि जब सोफिया की माहवारी समाप्त होगी तो मैं उसे किस किस तरह से चोदूंगा। ये सोचते सोचते कुछ समय में ही मैं निंद्रा के आगोश में खो गया। Antarvasna
मैं दिल्ली में रहने वाला Hindi Sex Stories एक कॉलेज गॉय हूँ …मेरा नाम प्रेम है, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है।अब शुरू करता हूँ मैं अपनी कहानी !
उस दिन मुझसे यह यह सब कैसे हुआ, किन हालातों में हुआ, मैं इससे बिलकुल अनजान था।
बात कुछ ही दिन पुरानी है, भावना से मेरी पहली मुलाकात तब हुई थी जब मैं बी ए प्रथम में था। मैं उसे शुरू से ही पसंद करता था। शायद वो भी मुझे पसंद करती थी। उसके पापा भी मेरे पापा के अच्छे मित्र हैं इसलिए अंकल भी मुझे अच्छे से जानते थे।
पिछले महीने ही हमारी अर्धवार्षिक परीक्षा समाप्त हुई हैं
२७ नवम्बर को हम (मैं, भावना, रोहित, आशीष, अनुज, नीतिश, के के) लोगों ने पार्टी रखी थी।
हम सब लोग सही समय पर पहुच गए थे। भावना आज कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थी। उसके कसे हुए बूब्स वाकई में बहुत अच्छे लग रहे थे। मैं तो बार बार उन्हीं को देख रहा था। शायद वो समझ गयी थी कि मैं उसके बूब देख रहा हूँ।
खैर हम लोगों की पार्टी रात १० बजे तक चली। खूब मज़ा किया हम सबने !
गाड़ी सिर्फ मेरे पास ही थी इसलिए सबको घर छोड़ने मुझे ही जाना था। आखिर में सिर्फ मैं और भावना ही रह गए थे।
मैंने गाड़ी उसके घर की तरफ मोड़ दी।
जैसे ही मैंने उसको उसके घर पर उतारा तो वो बोली-अन्दर आ जाओ !
मैंने मना तो बहुत किया पर वो मुझे अन्दर ले ही गई। शायद उसका मन भी चुदने का था।
फ़िर धीरे से उसने मुझे अपने पास बिठाया और मुझसे बातें करने लगी।
सच में, मादरचोद, उसकी चूचियाँ देखकर तो मेरे मुँह में पानी आ गया। उसने मुझे देख लिया और बोली- प्रेम ! तुम मुझे पसंद करते हो ना?
मैंने भी हाँ कह दिया।
वो बोली- मैं तो कबसे तुमसे अपने को चुदवाना चाहती हूँ, पर कभी मौका ही नहीं मिला ! आज प्लीज़ !मेरी प्यास बुझा दो !
मैंने मन ही मन कहा- नेकी और पूछ पूछ !
मैंने भी ठीक पलटवार करते हुए कहा- भावना ! तुम तो ना जाने कितनी बार मेरे सपनों में चुद चुकी हो ! आज पहली बार असल में मौका मिला है, मैं इस मौके को हाथ से जाने नहीं दूंगा।
फ़िर मैंने आव देखा ना ताव ! उसकी चूचियों पर हाथ रख कर उन्हें पकड़ लिया। सच में मज़ा आ गया।
क्या स्तन थे नरम नरम !
लेकिन वो भी कम नहीं थी, उसने मेरी तीसरी टांग को पकड़ लिया था। इससे पहले मैं कुछ करता, वो मेरी ज़िप खोल चुकी थी और मेरा लण्ड चूस रही थी।
वाकई में क्या मज़ा आ रहा था !
दस मिनट तक लण्ड चुसवाने के बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल कर उसके सेक्सी बूब्स को आज़ाद कर दिया।
कैसी मासूमियत के साथ हिल रहे थे वो !
फ़िर मैंने उसके सारे कपड़े उतार कर फ़ेंक दिए।
उसकी हल्के बालों वाली बुर देख कर तो मैं उस पर टूट पड़ा।
वो अब सिसकियाँ ले रही थी और गर्म हो रही थी।
फ़िर मैंने अपना ७.६ इन्च लम्बा लण्ड उसकी बुर में डाल दिया। शुरूआत में थोड़ा खून जरूर निकला पर ५ मिनट बाद सब ठीक हो गया।
उसको कुतिया बना कर मैं चोदे जा रहा था। १५ मिनट तक उसकी बुर मार मार कर उसकी फ़ाड़ डाली मैंने। फ़िर उसने पानी छोड़ दिया।
लेकिन मैंने उसकी गाण्ड को फ़िर मारा और १० मिनट के बाद अपना लावा उसके बूब्ज़ पर डाल दिया। फ़िर मैंने उसको एक लम्बा चुम्बन दिया और मैं अपने घर लौट आया। Hindi Sex Stories
मेरा नाम अमन है। मैं गुड़गाँव, हरियाणा का Hindi Antarvasna Stories रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 37 साल है। मेरी शादी को लगभग 12 साल हो गए। मेरा एक बेटा है जो लगभग 10 साल का है। वो देहरादून बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। मैंने बी. एस. सी. (जीवविज्ञान) और फिर बी. फार्मेसी किया। अपनी इस लम्बी पढ़ाई और कॉलेज-जीवन में मैंने अपनी कई गर्लफ्रेण्ड के साथ सम्भोग का आनन्द लिया। बड़े मज़े के दिन थे वो…
अब मैं आपको अपनी अगली सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। जल्दी ही मेरी अन्य कहानियाँ भी आप के सामने आने वालीं हैं। तो मित्रों, आनन्द लें। पर पढ़ने के बाद मुझे प्रतिक्रिया-स्वरूप मेल अवश्य करें।
मेरी यह कहानी शत-प्रतिशत सत्य है जो आप लोगों को एकदम अपने क़रीब लगेगी। उस समय मैं और सपना सिर्फ 18 वर्ष के थे। ख़ैर अब आगे…
मेरा अगला सम्भोगानुभव सपना के साथ था। सपना छोटे क़द की, भरे जिस्म की और बड़ी-बड़ी चूचियों वाली सुन्दर लड़की थी।
हमने अपना मकान दोमंज़िला बना लिया। हम लोग ऊपर वाले नए मंजिले में आ गए। नीचे की मंजिल किराए पर दे दिया। सपना के पापा ने मकान किराए पर लिया। सपना मेरे मक़ान में अपने माता-पिता, एक बड़ी बहन, और एक छोटे भाई के साथ किराए में रहती थी। सपना के पिता टेलीफोन ऑफिसर थे। सपना दिल्ली में श्रीराम कॉलेज से वाणिज्य- प्रथम वर्ष की छात्रा थी। सपना की बड़ी बहन दिल्ली में नौकरी कर रही थी। उसका छोटा भाई गुड़गाँव में स्कूल से दसवीं कर रहा था। मैं उस समय गुड़गाँव में कॉलेज से बी. एस. सी. प्रथम वर्ष में था। सपना और मैं एक ही मक़ान में होने के कारण हम अक्सर ही मिलते तथा कम ही बात कर पाते थे।
कुछ दिनों के बाद सपना की बहन का रिश्ता तय हो गया। सपना की बहन की सगाई से शादी तक लगभग तीन महीने में कई आयोजन हुए और सारे आयोजनों में मैंने और मेरे घरवालों ने सपना के घरवालों की पूरी मदद की। इसी सब के कारण मैं और सपना काफ़ी क़रीब आ गए। मैं और सपना कभी-कभी किसी ना किसी बहाने से अक्सर एक-दूसरे के यहाँ आने-जाने लगे थे। सपना की मुझ से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैं और सपना एक-दूसरे को दिल से चाहने भी लगे थे। शादी के बाद सपना की बहन अपनी ससुराल चली गई। जिस वज़ह से सपना बहुत उदास रहने लगी। मैं अक्सर उसे खुश करने की कोशिश करता। उसका ध्यान बँटे इसलिए मैं उसे कैसेट में रोमांटिक गाने रिकॉर्ड करवा देता। सपना को मेरी गानों की पसन्द बहुत पसन्द आती।
मैं और सपना एक-दूसरे के काफी क़रीब आते जा रहे थे। अब मैं कभी-कभी सपना के साथ बस में दिल्ली उसके कॉलेज जाता और उसे कॉलेज छोड़कर वापिस आ जाता। कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज में अनुपस्थित होकर दिल्ली में बुद्धा गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते।
कभी-कभी मैं और सपना दिल्ली में कनॉट प्लेस में ओडियन या प्लाज़ा सिनेमा में कोई रोमांटिक फिल्म देखते। कभी-कभी जब मेरा कॉलेज जल्दी छूट जाता तो मैं दिल्ली सपना के कॉलेज चला जाता और फिर हम दोनों कुछ देर किसी रेस्तराँ में बैठ कर कोल्ड-ड्रिंक पीते या आईसक्रीम खाते और साथ-साथ गुड़गाँव वापस आ जाते। फिर बस-स्टॉप से हम अलग-अलग थोड़ी-थोड़ी देर में घर वापस आ जाते। बड़े मज़ेदार दिन थे वो।
फिर गर्मियों की छुट्टियों में कॉलेज बन्द हो गए। मैं और सपना घर पर ही मिलने लगे। मैं अक्सर घर पर अकेला होता था। मम्मी-पापा तो पहले से ही स्कूल में थे। दीदी ने भी बी. एड. करने के साथ-साथ एक जगह काम भी करना शुरु कर दिया। मैं सारा दिन लगभग 4 बजे तक अकेला घर में रहता। इसलिए अक्सर सपना ही किसी बहाने से ऊपर मेरे यहाँ आती और फिर हम दोनों एक-दूसरे से लिपट-चिपट कर एक-दूसरे को चूमते। फिर एक-दूसरे को बाँहों में भर कर चूमने से बात आगे बढ़ कर एक-दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। सपना अधिकतर स्कर्ट-टॉप पहनती थी। इसलिए मैं सपना के टॉप या टीशर्ट के ऊपर से ऊसकी चूचियों को दबाने और फिर स्कर्ट के ऊपर से उसकी चूत को दबाने और फिर स्कर्ट के नीचे से अन्दर से हाथ डाल कर उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया।
मैं अधिकतर टीशर्ट और लोअर पहनता था। मैं अपने लोअर की ज़िप या जिन लोअर में ज़िप नहीं होती थी उन्हें ज़रा सा नीचे सरका कर अपना लण्ड निकाल कर सपना के हाथ में थमा देता। सपना भी मेरे लण्ड को बेझिझक अपने हाथ में थाम लेती और हल्के-हल्के दबाती या मुट्ठी में भर कर हिलाती और आगे-पीछे करती। कुछ दिन बाद तो वो ख़ुद ही मेरे लोअर की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।
ये सारी बातें लगभग 10-15 मिनट तक चलती। हम दोनों बेहद गरम हो जाते और मेरे लण्ड और सपना की चूत से पानी निकल आता। लेकिन फिर भी हम एक नहीं हो पाते और ना ही कोशिश भी करते, क्योंकि सपना की मम्मी बड़ी शक्की थी और जैसे ही सपना को ऊपर आए हुए 10-15 मिनट हो जाते तो वो नीचे से आवाज़ लगानी शुरु कर देती या सपना के भाई को ऊपर भेज देती। फिर भी हम दोनों ये सब लगभग एक महीना तक करते रहे। मगर चाहते हुए भी सहवास न कर सके।
एक दिन तो हम दीवार से लग कर खड़े हो गए और मैंने सपना की स्कर्ट के नीचे से अन्दर हाथ डाल कर उसकी पैन्टी को उतार कर नीचे उसके पैरों में गिरा दिया। फिर मैंने उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने के बाद उसकी चूत के भग्नों को रगड़ना शुरु कर दिया।
जब उसकी चूत से चिकना-चिकना सा निकलने लग गया तो मैंने खड़े-खड़े अपना लण्ड उसकी चूत की फाँकों के बीच में फँसा कर ऊपर-ऊपर से धक्के मारने शुरु कर दिए। मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर तो नहीं जा सका, सिर्फ ऊपर से उसकी चूत के भग्नों को रगड़ता रहा। लेकिन उस दिन हम दोनों ख़ूब झड़े।
उस दिन ये सब करके बहुत मज़ा आया और हम एकांत में मिलने का बहाना ढूँढ़ने लगे। उसके बाद वो दिन आया जब हमने जम कर सेक्स के मज़े लूटे। सपना की दीदी और जीजाजी घर आए और वो उसकी मम्मी को लेकर मार्केट चले गए। वो लोग सपना को भी ले जाना चाहते थे लेकिन उसने सिर दर्द का और सोने का बहाना कर दिया।
उसका भाई पिछले कई दिनों से दिल्ली अपने मौसी के यहाँ गया हुआ था। उनके जाते ही उसने मुझे फोन कर दिया। मैंने उसे ही ऊपर आने को कहा, लेकिन उसने मुझे ही नीचे आने की ज़िद की। मैं नीचे आ गया। फिर मुख्य-द्वार बन्द करके मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके माथे को और फिर उसके गालों को चूमने लगा। सपना ने सफेद गाउन पहना हुआ था।
सपना बोली ‘बड़े बेसब्र हो रहे हो। रुको पहले मैंगोशेक पिएँगे। मैंने बना रखा है। ओह प्लीज़ छोड़ो मुझे।’
मैंने सपना को छोड़ने की बजाय उसे और ज़ोर से पकड़ लिया और गाउन के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाता हुआ बोला ‘सपना मेरी जान, आज मैंगोशेक नहीं, मुझे तो इनका शेक पीना है।’
सपना बोली ‘बड़े बेसब्रे हो। अच्छा चलो बेडरूम में चलते हैं।’
मैंने सपना को छोड़ दिया। सपना भागकर बेडरूम में घुस गई और दरवाज़े के पीछे छिपने का नाटक करने लगी। मैं अन्दर आ गया और फ़िर मैंने बेडरूम का भी दरवाज़ा बन्द कर दिया।
अब मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपने जलते हुए होंठ सपना के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना ने भी मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।
मैं बोला ‘ओह सपना, कितने दिनों के बाद आज मौक़ा मिला है, तुम्हें अपनी बाँहों में भरने का। आई लव यू, आई लव यू सो मच।’
सपना बोली ‘हाँ अमन, सच कितने दिन हो गए, तुम्हारी बाँहों में आए हुए। मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।’
फिर मैं सपना का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर के पास लाया और उसे धकेल कर बिस्तर पर गिरा दिया। फिर उसके ऊपर लेट कर उसके गालों को चूमने लगा। फिर मैं उसके बगल में लेटकर उसके गाउन के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। उसकी फूली हुई चूत उसके गाउन के ऊपर से भी महसूस हो रही थी। फिर मैं उसके गाउन के ऊपर से पावरोटी की तरह उभरी और फूली हुई उसकी चूत को दबाने लगा। फिर मैं बिना देर किए उसके गाउन को उतारने लगा।
सपना बोली, ‘ये क्या कर रहे हो? प्लीज़ इसे मत उतारो। प्लीज़ छोड़ो मुझे। मुझे डर लगता है।’
मैंने सपना से कहा ‘सपना, मेरे होते हुए डरने की क्या बात है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। देखो सपना, मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ। तुम्हें दिल से चाहता हूँ। तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ। आज मुझे तु्म्हें जी भरकर प्यार करने दो। अगर कोई आ गया तो मेरा मूड बहुत ख़राब हो जाएगा। इसलिए पहले हम एक दूसरे को जी भरकर प्यार करेंगे। फिर आगे कोई बातें करेंगे और तुम्हारा बनाया मैंगोशेक पीएँगे।’
यह कह मैंने कुछ हद तक ज़बर्दस्ती ही उसका गाउन उतार कर फेंक दिया। सपना ने गाउन के नीचे लाल रंग की पारभासी ब्रा और पैन्टी का सेट पहना हुआ था। इस सेट में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
पारभासी ब्रा में से उसकी गोरी-गोरी चूचियाँ आधे से अधिक नज़र आ रहीं थीं और लाल पारभासी पैन्टी में से उसकी चूत के बाल तक नज़र आ रहे थे। सपना को इस तरह से देख कर मैं पागल हो गया और मैंने उठ कर अपने सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए और फिर मैं मुख्य बत्ती बन्द करके सिर्फ चड्डी में सपना से लिपट गया। कमरे में खिड़की के परदों से हल्की रोशनी आ रही थी।
मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपनी टाँगें सपना की टाँगों पर रख दीं और अपने जलते हुए होंठो उसके होंठों पर रख दिए। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा। सपना ने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।
मेरे हाथ सपना के भरे-पूर जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने सपना को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना के मुँह से आह निकलने लगी। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डालकर उसकी सख्त हो चुकी चुचियों को दबाने लगा।
फिर मैंने उसे अपनी ओर करवट दिला कर अपनी बाँहों में कस लिया और उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। उसकी पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और फिर आराम से उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपना हाथ उसकी चड्डी में घुसा दिया और उसके बड़े-बड़े चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा। सपना मेरे से लिपटी हुई थी। उसने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भरा हुआ था।
कुछ देर बाद मैंने उसे अपने से अलग करके बिस्तर पर सीधा लिटा दिया औऱ फिर मैंने उसकी ब्रा भी खींच कर उसके तन से जुदा कर दी। सपना ने कोई विरोध तो नहीं किया पर अपनी चूचियाँ अपने हाथों से ढक ली।
मैं ज़ोर लगा उसके हाथों को उसकी चूचियों से हटा कर उसकी गोरी-गोरी और बड़ी-बड़ी सख्त चूचियों को दबाने लगा। साथ-साथ उसकी भूरी घुण्डियों को भी हल्के-हल्के मसलने लगा।
फिर मैं उसकी नरम-नरम गोरी-गोरी चूचियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सपना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। फिर मैं उसकी चूचियों को चूसता हुआ उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को सहलाने और दबाने लगा। सपना ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं।
फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर उसकी बड़ी-बड़ी झाँटों के भँवर में अपना हाथ फिराने के बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगा।
सपना ने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ‘क्या करते हो! प्लीज़ इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।’
मैंने कहा ‘सपना मेरी जान, डरने वाली क्या बात है। ये तो प्यार है। आज सारे कपड़े उतार कर लिपट-चिपट कर ख़ूब प्यार करेंगे।’ यह कह कर मैं फिर उसकी पैन्टी को उतारने लगा।
सपना ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली ‘प्लीज़ इसे मत उतारो। क्या कर रहे हो? मुझे बहुत शरम आ रही है।’
मैंने कहा ‘अपनी आँखें बन्द कर लो। नहीं आएगी।’
सपना ने सचमुच अपनी आँखों पर अपना हाथ रख लिया और मैंने उसकी पैन्टी उतार कर अलग कर दी। सपना का कुँवारा नंगा बदन कमरे की हल्की-हल्की रोशनी में चमकने लगा।
मैं उसे निहारने लगा। उसके हाथ उसकी आँखों पर थे। उसके फूले हुए गुलाबी होंठ, तनी हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ, सपाट चिकना पेट, पेट के बीच गहरी नाभी, टाँगों के बीच में पावरोटी की तरह फूली हुई उसकी चूत, चूत के ऊपर काले घने घुँघराले बाल, केले के पत्ते की तरह चिकनी-चिकनी उसकी टाँगें। मैं एकटक उसे देखता ही रह गया।
कुछ देर बाद उसने अपनी आँखों पर से अपना हाथ हटा लिया और पूछा ‘क्या देख रहे हो?’
मैंने कहा ‘ओह सपना, तुम कितनी सुन्दर हो। तुम्हारी ख़ूबसूरती को अपनी आँखों में क़ैद कर रहा हूँ।’ यह सुनकर सपना शरमा गई और पलट कर पेट के बल लेट गई और अपना चेहरा बिस्तर में छुपा लिया। उसके ऐसा करने से उसके बड़े-बड़े चूतड़ उभर कर आ गए। उसे इस तरह से देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।
मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और चड्डी फाड़ कर आने को हो रहा था। मैंने चड्डी उतार कर फेंक दी। फिर मैं सपना के ऊपर आकर लेट गया। मेरा लण्ड तन कर सपना के दोनों चूतड़ों के बीच टाँगों में घुस गया। मैं सपना के ऊपर आकर लेट कर उसकसे कन्धों को और गर्दन को चूमने लगा। फिर धीरे-धीरे अपनी कमर उठा कर अपना लण्ड सपना के चूतड़ों से रगड़ने लगा।
थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हट कर बगल में लेट गया और मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और एक हाथ उसकी चूचियों पर रख उसे दबाने लगा।
वो गरम होने लगी थी, मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगा। फिर मैंने सपना को अपने साथ-साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड उसकी झाँटों से टकरा रहा था। मैं सपना की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और मुझसे ज़ोर से लिपट गई। मैं भी उससे लिपट गया।
फिर मैंने उसको ख़ुद से अलग करके बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया और चूमना शुरु कर दिया। कुछ मिनटों तक मैं उसे चूमता रहा। मेरा हाथ सपना के जिस्म पर फिर रहे थे। फिर मैं थोड़ा नीचे सरका।
मेरे नीचे सरकते ही उसकी दूध सी चूचियाँ उछल कर मेरे नीचे से बाहर आ गए। मैं उन गोरी-गोरी सख्त चूचियों को दबाने लगा। उसकी घुण्डियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगा। फिर मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए साथ-साथ उसकी गुलाबी घुण्डियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।
सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। वो हल्के हल्के आह अमन… ओओओहहहहह… आआहहह… सिस्स्स… आह्ह्ह्ह… आआआह्हह्हा…… आआआहह्ह… कर रही थी। मैं उसकी चूचियों को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूसता रहा।
फिर मैं उसकी पावरोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। सपना ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं। मैं उसके चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत के बालों को अपने मुँह में भर लिया। वो सिसकारी भर रही थी।
उसके मुँह से ‘आआह्ह ओअहाआह्ह्ह अस्सशहस आअह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस अहहह ह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह’ निकल रहा था।
फिर मैंने सपना का हाथ पकड़ कर अपने खड़े हुए लण्ड पर रख दिया। सपना ने बिना झिझक मेरे लण्ड को अपने हाथ में थाम लिया और उसे हल्के-हल्के दबाने लगी। फिर वो मेरे लण्ड को मुट्ठी में भरकर हिलाने और आगे-पीछे करने लगी। वो मेरे लण्ड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लण्ड को ठीक तरह से पकड़ सके। वो मुझसे पूरी तरह से सटे हुए मेरे लण्ड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।
मैं सपना की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं सपना की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराता-फिराते मैंने अपनी ऊँगलियाँ सपना की चूत के अन्दर डाल दीं। फिर मैं ऊँगलियों से सपना की चूत के दोनों फाँकों को खोलने और बन्द करने लगा। सपना ने मेरा लण्ड छोड़ कर अपनी आँखें बन्द कर लीं। फिर मैं अपनी एक ऊँगली से सपना की चूत के भग्नों को रगड़ने लगा। सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था। अब मैं सपना की चूत मारने को बेताब हो रहा था।
मैं रनू के ऊपर आकर लेट गया। सपना का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दब गया। फिर मैंने सपना की टाँगें खोलकर अलग कर दी। सपना की टाँगें खोलने से उसकी चूत की पंखुड़ियाँ खुल गईं और उनके बीच से उसकी गुलाबी चूत दिखने लगी। फिर मैंने अपने आप को सपना की टाँगों के बीच में सेट किया और अपने लण्ड को मुट्ठी में भर कर सपना की गुलाबी चूत के गुलाबी भग्न को ऊपर-नीचे करके रगड़ने लगा। सपना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं।
कुछ देर बाद सपना की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। सपना ने मस्त होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं थीं और हाथों से बेडशीट को पकड़ रखा था। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए अपने लण्ड को मुट्ठी में भर उसकी चूत के भग्न को ऊपर-नीचे रगड़ता रहा। सपना की चूत में से कुछ चिकना सा निकलने की वज़ह से मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत के भग्नों के ऊपर-नीचे फिसल रहा था।
कुछ देर बाद मैंने यह सोचकर कि कहीं सपना ऐसे ही ना झड़ जाए, अपने हाथ से लण्ड को पकड़ॉ कर उसकी चूत के ठीक निशाने पर लगा दिया और एक हल्का सा धक्का दिया। पहले ही धक्के में मेरे लण्ड का सुपाड़ा सपना की चूत के अन्दर चला गया। सपना के मुँह से आह निकली और उसने हाथों से बेडशीट को कस कर पकड़ लिया और अपना मुँह दूसरी ओर घुमा कर फिर से अपनी आँखें भी कसकर बन्द कर लीं। मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड सपना की चूत में समा गया। सपना के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
इससे पहले कि सपना सम्भले या करवट बदले, मैंने तीसरा और आख़िरी धक्का लगाया और मेरा पूरा का पूरा लण्ड सपना की मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। सपना के मुँह से एक ज़ोर की आह सी निकली और उसने बेडशीट को छोड़कर मुझे अपनी बाँहों में पूरी ताक़त से कस लिया। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से समा गए।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही सपना के अन्दर समाए हुए उसके ऊपर लेटा रहा। फिर मैंने भी सपना को अपनी बांहों में भर लिया। फिर मैंने अपने जलते हुए होंठ सपना के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठो में भर कर चूसने लगा ताकि वह अपना दर्द भूल जाए और सामान्य हो जाए।
सपना को वाक़ई इससे कुछ राहत मिली और उसने भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूमना शुरु कर दिया और अपनी कमर भी हल्के-हल्के हिलानी शुरु कर दी।
मेरा पूरा लण्ड उसकी चिकनी चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। हम दोनों ने एक-दूसरे को इस क़दर अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से ना निकल सके।
सपना का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था।
मेरी टाँगें सपना की टाँगों के बीच फँसी हुई थीं। मैं सपना के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गोरे और नरम-नरम गालों को चूमने लगा। सपना भी मेरे गालों को अपने नरम-नरम होंठों से चूमने लगी।
कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे।
फिर मैंने सपना से पूछा ‘ठीक लग रहा है? कोई दिक्क़त तो नहीं हो रही है?’
सपना बोली ‘नहीं, ठीक लग रहा है। कोई दिक्क़त नहीं है। आई लव यू अमन।’
मैंने कहा ‘मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ सपना। तुम मेरी जान हो। तो फिर करें क्या?’
सपना ने कहा ‘हाँ अमन, मगर थोड़ा धीरे-धीरे करो।’
यह सुनकर मैंने अपने लण्ड को धीरे से सपना की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर धीरे से वापस अन्दर घुसा दिया। सपना ने कोई ऐतराज़ नहीं किया। इसलिए मैं अब धीरे-धीरे अपने लण्ड को सपना की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ देर तो मैं ऐसे ही सपना को धीरे-धीरे चोदता रहा। बाद में मैंने उसकी टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ लीं और अपनी कमर के दोनों ओर लपेट लीं। मैंने फिर से अपने लण्ड को धीरे-धीरे सपना की चूत के अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।
सपना की टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ने की वजह से अब मेरा लण्ड सपना की चूत की गहराई तक आ जा रहा था। मैं आराम से अपना पूरा लण्ड सपना की चूत से बाहर खींचता और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा देता। इस तरह कुछ देर तो मैं ऐसे ही उसे धीरे-धीरे चोदता रहा। फिर सपना ने मुझसे अपनी रफ्तार बढ़ाने को कहा। मैंने रफ्तार बढ़ा दी और तेज़ी से उसकी चूत में लण्ड पेलने लगा।
अब सपना को भी पूरी मस्ती आ रही थी और वो भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर झटके का जवाब देने लगी। सपना की चूत में मेरा लण्ड समाए हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मुझे लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ।
कमरे में हमारी चुदाई की फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँज रहीं थीं। सपना ने अपनी टाँगों को मेरी कमर के ऊपर रख कर मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदाई में मेरा साथ देने लगी। मैं भी अब सपना की चूचियों को मसलते हुए ठका-ठक शॉट पर शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था। मैं सपना के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा।
सपना अपनी कमर हिला-हिला कर, चूतड़ उठा-उठा कर चुदवा रही थी और बोले जा रही थी ‘अह्हह आअह्हह उनह्ह्ह ऊओह्ह ऊऊहह्हह हाआआन हाआऐ मेरे रारअमन्जज्जजा, आआह्ह्ह तेज़-तेज़। आआयीई रीईई तेज़-तेज़ करो, और-ज़ोर से करो मुझे। मेरे अमन्जज्जा’ और वो अपने चूतड़ों को हिलाने लगी।
मैंने लगातार थोड़ा-थोड़ा रुक-रुक कर लगभग 30 मिनट तक उसे चोदा। जब मुझे लगा कि मैं अब डिस्चार्ज होने वाला हूँ। तो मैं रुक कर सपना के ऊपर लेट कर उसे अपनी बाँहों में भर लेता। पिर मैं अपने होंठ सपना के होंठों पर रखकर चूसने लगा। ताकि वह भी सामान्य हो जाए और जल्दी से डिस्चार्ज ना हो। सपना को भी वाक़ई इससे राहत मिलती और वो भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूसना शुरु कर देती। मेरा पूरा लण्ड सपना की चिकनी चूत के अन्दर तक समाया रहता। हम दोनों एक-दूसरे को अपनी बाँहों में जकड़ लेते। दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक जाते।
सपना अपनी टाँगों को बिस्तर पर फैला लेती क्योंकि शायद अधिक देर तकत अपनी टाँगों को ऊपर उठ कर रखने के कारण वह थक जाती थी। कुछ देर बाद मैं सपना के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गालों पर चूमने लगता। सपना भी मेरे गालों को नरम-नरम होंठों से चूमने लगती। फिर जब सपना अपनी कमर को हिला कर मुझे फिर से उसे चोदने का इशारा करती तो मैं फिर से उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदना शुरु कर देता।
पहले तो मैं सपना को धीरे-धीरे से चोदता। फिर जब सपना मुझे अपनी गति बढ़ाने को कहती तो मैं अपनी गति बढ़ा देता और तेज़ी से उसकी चूत में अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करने लगता।
सपना भी पूरी मस्ती में आकर नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर शॉट का उत्तर देने लगती। सपना की चूत के अन्दर की चिकनाई के कारण मेरा लण्ड उसकी चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर होने लगता। मुझे लगता कि जैसे में स्वर्ग में पहुँच गया हूँ। सपना अपनी टाँगों को मेरी कमर के ऊपर रख कर मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लेती और ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ ऊपर उठा-उठा कर चुदाई में मेरा साथ देने लगती। कमरे में हमारी चुदाई की फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँजने लगती।
मैं भी चुदाई के नशे में मस्त होकर बोलने लगता ‘ओह सपना, मेरीईईइइ जानन्न। बड़ाआअ तड़पयययया है तुमनेएएए मुझेएएए। सपनाउउउह्ह मेरीईइ जाननन ये सब करना कितना अच्छा लग रहा है। सच, बहुत ही मज़ा आ रहा है। आज जितना मज़ा कभी नहीं आया। सपना सच बताना, क्या तुम्हें भी मज़ा आ रहा है?’
सपना बोलती ‘अह्हह्ह अमन्ज्ज्ज! उह्हहह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ आ रहा है। बस करते रहो। आज अपनी जान को ख़ूब प्यार दो। आई लव यू अमन। आई लव यू सो मय। प्लीज़ तेज़-तेज़ करो। अब बस मैं होने वाली हूँ। तुम जब होने लगो तो इसे बाहर निकाल देना और प्लीज़ बाहर ही झड़ना। अब करो। तेज़-तेज़ करो।’
अब सपना पूरे जोश के साथ अपनी गाँड को उछाल-उछाल कर मेरा लण्ड अपनी चूत में ले रही थी। मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल-मसल कर उसे चोदे जा रहा था। अब मेरा लण्ड सपना की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था।
मैं सपना की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। हम दोनों ही सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। सपना को भी भरपूर मज़ा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।
उसने मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में थाम लिया। अब वह नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वह अपनी चूतड़ों को पीछे खींच लेती। मैं तेज़ी से धक्के मार कर उसे चोदने लगा।
मैं बिस्तर पर हाथ रख कर सपना के ऊपर झुक कर तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। सपना भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर
आनन्द ले रही थी। मैं उसे पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं अपनी पूरी रफ्तार पर था और कूद-कूद कर उसे चोदे जा रहा था। सपना इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।
मैंने रुक कर सपना से पूछा ‘सपना, अच्छा लग रहा है क्या?’
सपना बोली, ‘हाँ बहुत ही अच्छा लग रहा है। पर प्लीज़ रुको मत। तेज़-तेज़ करते रहो।’
सपना के मुँह से यह सुनकर मैंने अपनी गति और बढ़ा दी। मैंने उसके चूतड़ों को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज़ शॉट मार कर उसे चोदने लगा।
सपना के मुँह से मस्ती में ‘ओह्ह्हहोहोह सिस्स्सह्ह्ह्ह हाहाह्हआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ अमन, तेज़-तेज़ करो ना।’
मैं सपना के ऊपर लेट गया और मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे और तेज़ी से चोदने लगा। सपना ने भी अपने हाथों से मेरी कमर को जकड़ लिया और अपनी टाँगें ऊपर की तरफ करके मोड़ लीं और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट भी लीं। अब मैं सपना के होंठ अपने होंठों से चूसते हुए उसे और भी तेज़ी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट सपना की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं सपना की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। सपना भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मज़े से चुदाई का मज़ा ले रही थी। मैं सपना को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा।
लगभग 5 मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठों को चूसते हुए चुदाई का मज़ा लेते रहे। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक ज़ोर की आह भरी और बोली ‘अह्ह अमन! उह्ह बस ऐसे ही तेज़-तेज़ करते रहो। ओह अमन, प्लीज़ तेज़ करों। मैंने होने वाली हूँ। करो-करो। और तेज़-तेज़ करो। ज़ोर-ज़ोर से, और ज़ोर से आईएएएए मेरे अमन्जजा। रुको मत, रुको मत। आहहहह… मैं हो गई हाहह्हह्हह।’
फिर अचानक सपना ने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भर लिया। मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है। मैंने रुक कर उससे पूछा ‘मेरी जान, तुम हो गई क्या?’
सपना ने कहा ‘हाँ अमन, मैं तो हो गई। तुम नहीं हुए क्या?’
मैंने कहा ‘मेरी जान मैं भी होने वाला हूँ। मैं तो बस तुम्हारे होने की प्रतीक्षा कर रहा था। लो बस दो मिनटों में हो जाऊँगा।
सपना बोली ‘प्लीज़ तुम भी जल्दी से हो जाओ और प्लीज़ जब होने लगो तो इसे बाहर निकाल लेना और बाहर ही होना। प्लीज़ मेरे अन्दर मत होना। मुझे डर लगता है।’
मैंने कहा ‘ठीक है मेरी जान। तुम चिन्ता मत करो। मैं बाहर ही होऊँगा।’ और यह कह मैंने फिर से उसकी चूत में अपने लण्ड के ज़ोरदार प्रहार शुरु कर दिए।
मैं भी छूटने वाला ही था, इसलिए मैं लगातार ज़ोरदार प्रहार करके उसकी चूत मारने लगा था। अब मेरा लण्ड उसकी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। वह निढाल हो चुकी थी और अपनी आँखें बन्द करके मेरे झड़ने की प्रतीक्षा कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक उसे काफ़ी तेज़-तेज़ चोदने के बाद जब मैं छूटने लगा तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के बाहर झड़ गया।
मेरा गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लण्ड से ज़ोरों से छूट कर सपना की झाँटों और पेट पर गिर गया। फिर मैं हाँफते हुए उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। सपना चुपचाप आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा बदन, झाँट और उस पर गिरा मेरा रस चमक रहे थे।
कुछ देर तक मैं उसके साथ लेटा रहा और अपनी तेज़ चल रही साँसों को क़ाबू में इन्तज़ार करता रहा। सपना भी चुपचाप मेरे साथ आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। मेरा वीर्य सपना के शरीर पर चिपक गया था।
कुछ देर बाद मैंने उठकर अपने अण्डरवियर से सपना की झाँटों और उसके पेट पर गिरे मेरे वीर्य, व साथ ही अपने लण्ड को साफ किया और उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही चुपचाप लेटे-लेटे अपनी-अपनी साँसों पर नियंत्रण में आने की प्रतीक्षा करते रहे।
कुछ देर बाद मैंने सपना को अपनी बाँहों में भर लिया और कहा ‘मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ सपना। तुमने मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ ही खुशियाँ भर दीं हैं। तुम बहुत ही लाजवाब हो। मैं चाहता हूँ कि हम दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे के लिए होकर रह जाएँ। मुझे इस प्रेम-क्रीड़ा का अत्यंत आनन्द आया और तुम्हें भी आया ही होगा। जब भी हमे मौक़ा मिलेगा तो क्या तुम मेरे साथ यह पुनः करना पसन्द करोगी?’
सपना बोली ‘ओह अमन हाँ। मुझे तो बहुत ही मज़ा आया और जब भी मौक़ा मिलेगा तो हम फिर करेंगे। लेकिन अमन अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। अब तुम कृपा करके जाओ।’
मैंने कहा ‘ठीक है मैं जा रहा हूँ।’
यह कह कर मैं सपना के माथे पर, फिर आँखों पर, तथा फिर गालों पर चूमने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। कुछ देर तक मैं इसी तरह से उसको चूमता-चूसता रहा और उसके बालों पर हाथ फिरा कर उसे सहलाता रहा। फिर कुछ देर बाद सपना ने भी अपनी बाँहें मेरी गर्दन में डाल दीं। मैंने भी सपना को अपनी बाँहों में कस लिया। कुछ देर तक हम दोनों एक-दूसरे को इसी क़दर अपनी बाँहों में भरे रहे।
फिर सपना बोली ‘प्लीज़ अमन, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। प्लीज़ उठो।’
अब मैंने कोई नख़रा नहीं किया और सपना के यह कहते ही मैंने उठकर अपने कपड़े पहन लिए। सपना ने भी उठकर अपने कपड़े पहन लिए। मैंने कपड़े पहन कर अपनी बाँहें उसकी ओर फैला दीं। सपना भाग कर मेरी बाँहों में समा गई। मैं कुछ देर उसे अपनी बाँहों में भरे हुए उसके बालों पर हाथ पिरा कर उसके सहलाता रहा। सपना कुछ देर तक मेरे सीने से चिपकी रही।
फिर कुछ देर बाद सपना बोली ‘प्लीज़ अमन, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे।’ मैंने कहा, ‘ठीक है, बाय सपना। मैं जा रहा हूँ।’ कह कर मैं ऊपर अपने यहाँ चला आया।
सपना और उसके घरवाले हमारे यहाँ लगभग डेढ़ साल किराए पर रहे। लेकिन सपना के साथ इस सम्भोगानुभव के लगभग छः माह उपरांत ही वे दिल्ली चले गए। इन छः माहों में मैंने और सपना लगभग 14 बार सम्भोग किया।
फिर सपना के पिता का सोनीपत में स्थानांतरण हो गया और वे सपरिवार दिल्ली चले गए। हमारी बातें अक्सर फोन पर होती रहती। फोन पर ही हम अपने पुराने अनुभवों के बारे में बातें करते।
फोन पर ही कार्यक्रम बन जाता और फिर कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज से भाग कर दिल्ली में बुद्धा-गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते और एक-दूसरे के अंगों को छूकर, दबा कर स्पर्श सुख लिया करते।
कभी-कभी मैं और सपना कॉलेज छोड़ करके दिल्ली में कनॉट प्लेस में ओडियन या प्लाज़ा सिनेमा में कोई रोमांटिक फिल्म देखते। कभी-कभी मेरा कॉलेज जल्दी छूट जाता तो मैं दिल्ली सपना के कॉलेज चला जाता और फिर हम दोनों कुछ देर किसी रेस्तराँ में बैठ कर कोल्ड-ड्रिंक पीते या आईसक्रीम खाते।
पर ये सब केवल साल भर ही चल पाया। फिर कुछ अवधि के बाद पता चला कि वह बैंगलोर चली गई। कभी-कभी फोन पर बातें ही हो पातीं थीं। फिर वह भी खत्म हो गईं। बाद में मैं भी बी. फार्मेसी करने के लिए बनारस चला गया और हम चाहते हुए भी दुबारा न मिल सके, और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।
सपना, आज तुम कहाँ हो? अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो ज़रुर मुझे पहचान लोगी। और अगर पहचान लिया है तो कृपा करके मुझे मेल करो।
कैसी लगी आपको मेरी यह कहानी, कृपया अपनी प्रतिक्रिया मुझे मेल करें। Hindi Antarvasna Stories
आज मैं भी आपको Sex Stories अपनी कहानी सुनाना चाहती हूँ। इस समय मेरी उम्र लगभग २० वर्ष हो चुकी है। मैं बी.ए. द्वितीय वर्ष में पढ़ती हूँ। हमारा कालेज को-एड है। साथ की सभी लड़कियों/सहेलियों के बॉय-फ्रैण्डस थे सिवाय मेरे।
एक बार की बात है कि मेरे ग्रुप के सभी लड़के-लड़कियों का झील पर पिकनिक मनाने का प्रोग्राम बना। मेरा भी उनके साथ जाने को बहुत मन था, सो मैं भी उनके साथ चली गई। झील पर जाकर सब ग्रुप में नहाने लगे। मैं भी अपनी सहेलियों के साथ थीं। झील के चारों ओर घना जंगल था। सब एक-दूसरे से छेड़खानी और बहुत मजा कर रहे थे।
पहले तो लड़के लड़कियाँ अलग-अलग ग्रुप में थे पर जल्दी ही हम लोग आपस में मजे करने लगे थे। मेरी सहेलियों के साथी भी उन्हें आकर छेड़ने लगे थे।
छेड़छाड़ धीरे-धीरे बढ़ रही थी और कपड़ों के उतरने तक पहुँचने लगी थी। लड़के मेरी सहेलियों की चुचियाँ दबाने लगे थे और लड़कियाँ उनके लन्ड दबाकर मजे ले रही थीं। धीरे-धीरे वे अपने-अपने जोड़े बनाकर जंगल में जाने लगे। और मैं शायद अकेली रह गई थी। लेकिन सबको देखकर मेरी जवानी में भी आग लग रही थी।
तभी अचानक मेरे टाँगों पर मैंने किसी की पकड़ महसूस की। मेरी साँस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। अचानक नीचे ही नीचे उस अजनबी हाथ की उँगलियाँ मेरी पैंटी को हटाकर मेरी चूत में तेजी से घुस गई थीं। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में किसी ने कोई चाकू डाल दिया हो। तभी वह अजनबी साया खड़ा हुआ। उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी चुचियाँ दबाने लगा। मैने देखा तो मेरी ही क्लास का एक लड़का था। मैं विरोध करने की स्थिति में नहीं रह गई थी। मेरे सांसे भारी होती जा रहीं थीं। तभी उस लड़के की पूर्णतः नंगी गर्ल फ्रैण्ड़ वहां पर आ गई और उसे आवाज देकर कहने लगी कि अगर मुझे चोदना छोड़कर यहीं रहना हो तो मैं जा रही हूँ। तुम इसी के साथ रहो, यह सुनकर वह लड़का मुझे छोड़कर तुरन्त चला गया जैसे मेरी कोई अहमियत ही न हो।
मैं अपनी प्यासी जवानी के साथ फिर अकेली खड़ी रह गई। पर तब मुझे महसूस हुआ कि मेरी चूत में दर्द हो रहा है। मैने नीचे देखा तो हल्का सा खून दिखाई दिया। मैं डर कर सोच ही रही थी कि क्या किया जाये। कि तभी एक अजनबी आवाज ने मेरा ध्यान भंग कर दिया। मैने देखा कि एक छः फुट के लगभग एक जवान मेरे सामने खड़ा है। यद्यपि वो मेरे साथ बड़े अदब से बात कर रहा था। लेकिन मुझे एक तो उस लड़के और दूसरे अपनी कुंवारी चूत से होते दर्द के कारण बहुत गुस्सा आ रहा था सो मैं उस लड़के से बहुत बेरूखी से पेश आई।
तो वह बोला कि उसका पास ही में एक काटेज है और वो वहीं से मेरे साथ हुये एक-एक वाकये को देख रहा था। और जब उसने उस लड़के के जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की तो मुझे वो भी उस समय अपना दोस्त ही लगने लगा। उसने मुझसे कहा कि आपके निचले हिस्से से खून ज्यादा ही बह रहा है, आइये मेरे काटेज पर कुछ दवा लगा लीजिये, जब तक बाकी लोग फ्री हों आप आराम कर लीजियेगा।
मैं कुछ भी सोच नहीं पा रही थी सो वहीं खड़ी रह गई। उसने शायद मेरी स्थिति जान ली और अपने आप ही पानी में आकर मुझे अपनी गोदी में उठा लिया। कोई और मौका होता तो इस हरकत के लिये मैं उसे दो-चार तमाचे मार ही देती पर मेरी हालत आप समझ सकते हैं। जब वो मुझे कसकर पकड़कर अपने काटेज की ओर ले जा रहा था तो मेरी चुचियाँ उसके सीने पर और उसके हाथ मेरे चूतड़ों के नीचे थे।
खैर उसने रास्ते भर कोई गलत हरकत नहीं की। और गीले बदन ही मुझे काटेज में लेकर आ गया। जब उसने मुझे सोफे पर धीरे से लिटाया तो एक बुजुर्गवार से बोला कि बाबा, मेमसाहब कुछ देर आराम करेंगी, आप बाहर देखभाल करो कि कोई डिस्टर्ब न करे ! और अपना काम ध्यान से करना। वो बूढ़ा व्यक्ति तुरन्त ही वहाँ से चला गया। तभी उसने ध्यान दिलाया तो मैंने देखा कि चूत से खून कुछ ज्यादा ही तेजी से निकल रहा है। उसने तुरन्त पानी गर्म किया और मेरा नेकर और चड्डी उतारने लगा तो मैंने आपत्ति की पर वह बोला- मुझे डॉक्टर समझो और करने दो जो मैं कर रहा हूँ।
मैं चुप हो गई। उसने रूई के गरम फोहे से धीरे धीरे सारा खून साफ कर दिया पर मेरी आग को बहुत भड़का दिया। अब मेरी चूत चुदास की आग से जल रही थी। मुझे अन्दर से लग रहा था कि उस लड़के से आज पहली बार जी भर चुदवाना चाहिये। लेकिन मेरी हिचक अभी भी बाकी थी। वह शायद मेरी स्थिति भांप गया था, बोला- डरो नहीं इसे अपना ही घर समझो।
यह कहकर वह पीछे कुर्सी पर बैठ गया, लेकिन कभी मेरी चूचियों और कभी मेरी चूत को देखने लगा।
इतने में उसने उठकर टीवी और डीवीडी प्लेयर ऑन कर दिया। उस पर एक इंग्लिश ब्लू फिल्म चल रही थी। हम उस पिक्चर को देखने लगे। वह साथ में कोई इंग्लिश मैग्जीन भी पढ़ रहा था। उसके कवर पेज पर भी लड़कियों के नंगे चित्र छपे थे। एक कोने पर तो एक लड़की एक लड़के का लण्ड चूस रही थी तो दूसरे कोने पर चुदने-चोदने का सीन था। कुछ ऐसे ही सीन टी.वी. पर भी लगातार जारी थे।
ऐसे में मुझसे खुद पर काबू रखना असम्भव हो गया। मैं उठकर खुद ही उसके पास जाकर उसकी गोदी में बैठ गई। नीचे से तो मैं नंगी थी ही, बैठते ही चूत और गाँड के छेदों के बीच में कुछ सख्त डण्डा सा चुभता हुआ महसूस हुआ। मैं समझ गई कि यह उसका वही मस्ताना लण्ड है जो मेरी चूत का पहली बार उदघाटन करने वाला है। वह भी उत्तेजित हो चुका था। उसने मेरे होठों को अपने होठों से दबा लिया और लम्बा सा किस करने के साथ ही मेरे होठों को चूसने लगा। साथ ही मैने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी चुचियों की तरफ बढ़ रहा था, वो भी उपर से नहीं, पठ्ठा सीधा अन्दर ही चला आ रहा था। मुझे वैसे तो गुदगुदी ही लगी लेकिन जैसे ही उसने तेजी से दबाना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दोनो चुचियों में जबरदस्त दर्द हो रहा हो। मैं उससे और जोर जोर से दबाने को कहने लगी। पता नहीं क्यों मेरी सांसे भारी होती जा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत की सैर कर रही हूँ।
तभी उसने अपना हाथ बाहर निकाला और मुझे पूरा नंगा करने लगा। बदले में मैने भी उत्तेजना में उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिये। उसने मेरे कपड़े उतारने के बाद अपने कपड़े उतारने में भी मेरी मदद ही की। अब हम दोनों पूर्णतया नंगे थे। अब उसने मुझे नीचे लिटाकर मेरी चुचियों को चूसना शुरू कर दिया। मेरी लिये तो ये एक बहुत बैचेनी भरा अनुभव था। जब वो एक चूसता तो लगता कि दूसरी चूसे और जब दूसरी चूसता तो लगता कि पहली वाली को और जोर से चूसना शुरू कर दे।
अचानक उसने चुचियों को चूसना बन्द कर दिया। मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरा पता नहीं क्या छीनकर ले जा रहा है। लेकिन अगले ही मिनट उसने अपना मुंह जब मेरी चूत के मुँह के बीच में टिकाया और चाटा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरी पूरी जान जैसे केवल चूत में सिमटकर रह गई हो। मेरी पूरी काया झनझना उठी। ये तो बिल्कुल जन्नत का नजारा था। वो तल्लीनता से मेरी चूत के रास्ते मेरी जान खींचने में लगा था और मैं बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी।
अब मैं पूरी तरह से चुदवाने के लिये तैयार थी पर मेरे बार बार कहने पर भी वो चूत छोड़ने को तैयार नहीं था। अचानक मुझे एक रास्ता सूझा उससे अपनी चूत को मुक्ति दिलाने का। मैने उससे कहा- पिक्चर वाली लड़की की तरह मैं भी तुम्हारा लण्ड चूसना चाहती हूँ।
मेरी तरकीब काम कर गई, वो खड़ा हो गया और मैं उकड़ू बैठकर उसका लण्ड जोरों से चूसने लगी। वो मेरे सिर को पकड़कर ऐसे आगे पीछे करने लगा जैसे मुझे मुँह के रास्ते चोद रहा हो। अब मैने उससे कहा- मुझे जल्दी से चोदकर इस चुदास के दर्द से मुक्ति दिला दो।
इस पर उसने मुझे अपने ऊपर लिटाया और बोला कि लण्ड को चूत के छेद पर लगा कर के जोर लगाओ, चला जायेगा।
मैंने पूरा प्रयास किया लेकिन शायद अन्दर लेने की जल्दी में वो बार-बार फिसल जाता और दर्द दे जाता। तीन-चार बार असफल होने के बाद मैने उसकी तरफ तरसी निगाहों से देखा तो उसने मुझे नीचे लिटाकर लण्ड डालने का शायद नाटक किया। यह तो मुझे बाद में पता चला। उस वक्त तो उसने कहा- तुम्हारी चूत ज्यादा टाईट है इसिलिये अन्दर नहीं जा पा रहा। कई तरह से ट्राई करने के बाद उसने मुझसे कुतिया की तरह बैठने को कहा। तब तक मेरी हालत वाकई कुतिया से भी बदतर हो चुकी थी। सो उसने जैसे कहा मैने वैसे ही कर दिया। अब वो मेरे पीछे से ऊपर था और मैं कुतिया बनी उसके नीचे।
मेरे मुँह से तेजी से गर्म सांसे निकल रहीं थीं, मैं जैसे बुरी तरह हांफ रही थी। अब वो मेरे पीछे घुटनों के बल आकर बैठ गया। और अपना लन्ड मेरी चूत के मुँह पर रख दिया। उसका लण्ड गर्म सरिये की तरह गर्म हो रहा था। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत किसी गर्म तवे से छू हो गई हो। मैं अभी यह सोच रही थी कि उसने अचानक पीछे से मेरी चूत में अपने टाइट लण्ड का जोरदार झटका दिया और शायद उसका आधा लण्ड पहली ही बार में मेरी कुंवारी चूत में चला गया।
मैं दर्द से बिलबिला उठी। ऐसा लगा कि कोई खंजर मेरी चूत के रास्ते मेरे अन्दर उतर गया। मेरी सारी चुदास उस दर्द के एक ही झटके में उतर गई। मैने उससे बचने को आगे भागने ही थी कि उसने मेरा इरादा भांप लिया और मुझे मेरी गाण्ड से पकड़कर नीचे गिरा लिया। अब मैं दर्द से बिलबिला रही थी लेकिन वो मुझे छोड़ने के बिल्कुल भी मूड़ में नहीं लग रहा था। मैंने रो-रोकर उससे छोड़ने की गुजारिश की लेकिन वो जालिम मुझे छोड़ नहीं रहा था।
मैं अभी पहले झटके से ही नहीं उबरी थी कि उसने मेरी कमर पकड़कर मुझे उठाया और दूसरा करारा झटका दे दिया। इस बार उसका पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में उतर गया। मेरे चूतड़ उसकी जांघो से जा टकराये। अब तो दर्द बिल्कुल ही बर्दाश्त के बाहर हो गया। अब उसने पहली बार प्यार से मुझे पुचकारा और मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और उसकी इस चूचियों को जोर से दबाने और कमर चाटने की हरकत ने मेरा दर्द आश्चर्यजनक रूप से कम करना शुरू कर दिया।
उसका लण्ड यद्यपि मेरी चूत के अन्दर ही था पर अब उतना दर्द महसूस नहीं हो रहा था। अब उसने धीरे-धीरे अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मुझे भी तीखे दर्द के बावजूद मजा सा आने लगा। अब मैं उसे तेजी से धक्के लगाने को कहने लगी। उसने मेरा ध्यान रखते हुये धक्के तेजी से लगाने शुरू कर दिये। करीब १५-२० मिनट तक उसने अलग-अलग कोणों से मुझे चोदा और मुझे बहुत मजा दिया। तभी मुझे लगा जैसे मेरी चूत में से कुछ निकल रहा है। मैं डिस्चार्ज हो रही थी। कुछ धक्के लगाने के बाद वो भी डिस्चार्ज हो गया। लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मुझे बाद में पता चला कि ये तो केवल शुरूआत भर थी।
आगे ……………………….
फिर कभी। Sex Stories
हेल्लो Antarvasna । मैं आप सब के सामने पहली बार एक स्टोरी पेश करने जा रहा हूं। उम्मीद है यह स्टोरी मेरे सभी पढ़ने वालों को बेहद पसंद आयेगी।
और खास कर लड़कियों और आंटियों को।
तो सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूं। मैं संजू कोलकाता , बंगाल . मुझे क्लास १० से ही सेक्स करने की इच्छा बहुत ज़ोर की थी। मैं हमेशा एक शादी शुदा औरत के साथ ही पहली बार सेक्स करना चाहता था क्योंकि वो बहुत एक्सपेरिएंस और सहयोगी होतीं हैं।
बात उस समय की है जब मैं १२वीं में पढ़ा करता था। मैं अंगरेजी के ट्युशन के लिये एक सर के घर जाता था। हम लोग ५ दोस्त एक साथ जाते थे। टीचर हम सब को दोपहर ३ बजे बुलाते थे और ५ बजे छोड़ते थे। हम लोग रोज ट्युशन जाते थे। सर भी शादी शुदा थे और सर की बीवी एक दम मस्त थी और बहुत ही खूबसुरत थी। जिस दिन से मैने उसे देखा था, मैं बस उसी के बारे में सोचता था। उसका नाम रेखा था। वो एक बंगाली टीचर था। मैं आपको बता दूं कि रेखा हर दोपहर अपने बेडरूम में सोती थी और सर हमें होल मे पढ़ाते थे। उसके उठने का समय ४.३० शाम था। वो हर रोज ४.३० के लगभग सो कर उठती थी और गाउन पहन कर बाथरूम के लिये जाती थी जो एक कोमन बाथरूम था, होल में। हम जहां पढ़ते थे वो प्लेस बाथरूम के जस्ट पास ही था। और वो टोइलेट करती थी तो उसका मूत इतना प्रेसर के साथ निकलता था कि उसकी आवाज़ हमारे कानों तक जाती थी। बस यही तमन्ना मन में होती थी कि एक बार उसके साथ सेक्स करने को मिल जाये तो ज़िंदगी हसीन हो जाये।
ऐसे ही दिन गुज़रते गये, और कुछ दिन बाद हमारे सर जो वहां के एक स्कूल में टीचर थे, उनका ट्रांसफ़र हो गया। तभी सर ने हमें कहा कि उनका ट्रांसफ़र हो गया है इस लिये हम किसी और टीचर का बंदोबस्त कर लें। फ़िर सर ने एक ओप्शन और रखा कि उनकी बीवी भी वोही सब्जेक्ट पढ़ाती है, अगर हम चाहे तो उनसे ट्युशन ले सकते हैं। क्योंकि सर का ट्रान्सफर टैमपरेरी बसिस पर हुआ था और उन्हें अभी फ़ैमिली ले जाने का ओर्डर और फ़्लैट नहीं मिला था। इस लिये सर अकेले जा रहे थे।
मेरे सभी दोस्तों ने मना कर दिया और दूसरे टीचर को ज्वोइन कर लिये। मगर मैं रेखा मैडम से ट्युशन लेने को राजी हो गया। सर ने भी मुझे थेंक्स कहा। जब सर जाने लगे तो उन्होने मुझे कुछ बाते बताईं कि मैं अपनी टीचर का ध्यान रखुं, अगर उन्हे कोई चीज़ चाहिये तो उन्हे ला दूं,। और मैने सर को भरोसा दिलाया कि मैं ऐसा ही करुंगा। फ़िर सर चले गये। मैडम घर में एक दम अकेली। उनको कोई बच्चा भी नहीं था। फ़िर मैं मैडम से ट्युशन लेना शुरु कर दिया और कुछ ही दिन में मैं मैडम का दोस्त भी बन गया और मैडम मेरी दोस्त बन गयी। मैं मैडम का बहुत ख्याल रखता था और मैडम मुझे एक स्टुडेंट की तरह बहुत प्यार भी करती थी। धीरे धीरे १ महीना बीत गया। फ़िर एक दिन मैने मैडम से कहा मैडम आपको सर की याद नहीं आती, मैडम ने कहा याद तो बहुत आती है मगर कोई और रास्ता भी तो नहीं है। फ़िर मैने मैडम को हिम्मत करके कहा मैडम एक बात पूछूं तो मैडम ने कहा तुम मुझसे कुछ बोलो उससे पहले मैं तुम्हे एक बात बोलना चाहती हूं। तो मैडम ने कहा कि “जब हम दोनो एक दूसरे का इतना ख्याल रखते हैं और दोस्त भी हैं तो फ़िर आजसे तुम मुझे मैडम नहीं बल्कि रेखा बोलोगे। और वैसे भी तुम पूरे दिन मेरे घर में ही तो रहते हो इसलिये मुझे मैडम सुनना अच्छा नहीं लगता।” मैं राज़ी हो गया।
फ़िर रेखा ने कहा कि तुम कुछ पूछ रहे थे तो मैने बहुत हिम्मत कर के कहा कि रेखा …। फ़िर मैं चुप हो गया और आधी बात में ही रुक गया। तो रेखा बोली क्या बात है और मैने कुछ नहीं कहा। फ़िर उसने मुझे अपनी कसम दी और बोली कहो ना नहीं तो मुझसे बात मत करना और मुझसे ट्युशन भी मत पढ़ने आना। मैने फ़िर कहा कि तुम बुरा तो नहीं मानोगी तो उसने कहा नहीं फ़िर मैं बोला कि तुम्हे क्या सेक्स करने का मन नहीं करता। ऐसा केहने पर रेखा चुप हो गयी और मेरी तरफ़ आश्चर्य से देखी। मैं डर गया था और मैने उसे सोरी कहा तो उसने कहा कि तुम्हे सोरी नहीं बल्कि मुझे तुम्हे थैंक्स कहना चाहिये। तुम्हे मेरा कितना ख्याल है और मेरे पति को मेरा ज़रा सा भी ख्याल नहीं। और उसने मुझे मेरे गाल पर एक किस दिया। फ़िर हमने साथ में डिनर किया और मैं अपने घर चला गया।
फ़िर कुछ दिन बाद, मैं एक दिन रेखा के घर गया मगर वो घर में दिखाई नहीं दे रही थी। मैं हर एक रूम देख रहा था मगर वो कहीं नहीं थी फ़िर मैने एक बाथरूम का गेट खोला और मैने वो देखा जो मैने कभी सोचा भी नहीं था। बाथरूम का गेट लोक नहीं था और जैसे ही मैने गेट खोला तो देखा कि रेखा अपने बाथरूम के कमोड पेन में बैठी थी। उसका गाउन, ब्रा और पेंटी पास ही में रखी थी। वो एक दम न्युड थी और उसने अपने लेफ़्ट हैंड की तीन उंगलियां अपनी चूत में घुसा रखी थी और राइट हैंड से अपनी चूची को दबा रही थी। उसकी आंखें बंद थी और वो मज़ा ले रही थी। मैं करीब ५ मिनट तक बिना कुछ कहे उसे देखता रहा। मेरा लंड पूरा खड़ा और हार्ड हो गया था और मेरा मन कर रहा था कि अभी उसे चोद दूं। मगर मैने अपने आप को सम्भाल कर रखा। कुछ देर बाद मैने कहा “रेखा – यह क्या!” रेखा बिल्कुल डर गई और अपनी उंगली बाहर निकाल कर अपने गाउन से अपने जिस्म को ढकने लगी और मेरी तरफ़ देखती हुई अपने रूम में चली गयी। मैं होल में एक सोफ़े पर बैठ गया।
कुछ देर बाद वो कपड़े पहन कर बाहर आयी और मेरे पास बैठ गयी और कहने लगी “तुम्हे क्या पता एक शादी शुदा औरत इतने दिन अपने पति के बगैर कैसे रह सकती है। सेक्स तो हर एक को चाहिये” और ऐसा कह कर मुझ से लिपट कर रोने लगी। फ़िर मैने उसे सम्भाला। फ़िर उसने मुझे यह बात किसी से नहीं कहने को कहा, उसके पति से भी नहीं। मैं राज़ी हो गया। फ़िर मैने कहा कि अगर तुम्हे सेक्स कि इतनी ही चाहत है तो मैं तुम्हारी यह चाहत पूरी कर सकता हूं। ऐसा कहने पर वो और ज़ोर से मुझसे लिपट गयी और मुझे फ़िर से एक चुम्मी दी और कहा “सच? क्या तुम मुझे प्यार करोगे। और मेरे पति को भी नहीं बताओगे। तुम कितने अच्छे हो”। ऐसा कह कर वो मुझे चूमने लगी और मैं भी उसे कस कर अपनी बाहों में दबाने लगा। और कुछ देर तक हम वैसे ही रहे। फ़िर मैं जाने की लिये उठने लगा तो उसने कहा कहां जा रहे और। मुझे कब प्यार करोगे। मैने कहा मैं शाम को ८ बजे आउंगा। और फ़िर चला गया।
मैं शाम को उसके घर पहुंचा और अंदर गया तो देखा कि उसने एक बहुत ही सुंदर ट्रांसपेरेंट साड़ी पहन रखी है। उसकी बड़ी बड़ी चूची उसके ब्लाउज से बाहर आने को तड़प रही थी। उसका पेट पूरा दिखाई दे रहा था। क्योंकि वो शादी शुदा थी, उसका जिस्म पूरा हरा भरा था। और मुझे ऐसी ही औरत अच्छी लगती थी। उसकी कमर बड़ी बड़ी थी और गोल भी थी। वो पूरी गोरी नहीं थी पर उसका रंग बहुत ही मस्त था। वो बहुत ही सुंदर और गरम औरत थी। उसका होंठ बड़े बड़े और आंख मोटी मोटी थी। उसकी उंगली लम्बी लम्बी थी। वो सर से पैर तक चोदने लायक थी। उसे देख कर ऐसा लगता था जैसे वो चुदवाने के लिये बिल्कुल तैयार है।
वो मुझे अपने कमरे में ले गयी और अपना बेडरूम लोक कर लिया। उसके बाल खुले थे। मैने उसे कहा, कि आज मैं उसे हर तरह से खुश और उसकी सेक्स की गरमी को थंडा कर दूंगा। वो मुस्कुरा कर बोली चलो देखते हैं। उसके ऐसा कहने पर मेरा लंड और गरम हो गया। और मैने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों को चूमने लगा। फ़िर मैने उसे बेड पर बिठाया और उसके पेट पर अपना हाथ फ़ेरने लगा। वो भी फ़िर जोश में आने लगी और मेरे सिर के बाल को सहलाने लगी। मैने उसकी चूंचियों को अपने एक हाथ से जोर से पकड़ लिया और दबाने लगा। वो पहले तो थोड़ा दर्द से कंराहने लगी फ़िर शांत हो गयी और मैं उन्हे दबाता रहा और ऐसा करते करते उसके साड़ी के पल्लू को ऊपर से गिरा दिया। और धीरे धीरे उसकी साड़ी खोल दी। वो अपने लहंगे में और ब्लाउज में थी। फ़िर उसने मेरे शर्ट और पैंट को उतार दिया। मैं सिर्फ़ अंडरपैंट में था। उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर सो गयी और मेरी छाती को चूमने और चाटने लगी। उसके ऐसा करने पर मुझे लगा कि ये पूरी अनुभवी है।
और मुझे फ़िर उसके चूत की गर्मी का भी अंदाजा हो गया। वो मुझे कुछ देर तक चूमती रही और कहा कि तुम मेरी चूची का मज़ा नहीं लेना चाहते और ऐसा कहते कहते उसने अपना ब्लाउज उतार दिया। उसकी दोनो बड़ी बड़ी चूची को देख कर मैं हैरान रह गया। उसके निप्पल ब्राउन रंग की थे और उसकी चूची का रंग बिल्कुल गोरा था। मैने उसे एकबार में बेड पर लिटा दिया और उसके उपर चढ़ कर उसकी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा। वो ज़ोर से आहैं भरने लगी और मुझे और ज़ोर से दबाने को कहा। मैने ऐसा ही किया। उसने मेरे सिर को पीची से पकड़ कर जोर से अपनी चूची पर रगड़ने लगी। ऐसा लगता था जैसे वो अपनी पूरी चूची मेरे मुंह में भर देना चाहती हो। कुछ देर बाद मैने उसके लहंगे का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार कर फ़ेंक दिया।
वो एक सुंदर फूलों वाली गुलाबी रंग की पेंटी पहनी हुई थी। उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि अभी अपना गरम लंड उसकी चूत में घुसा दूं। उसकी गोरी जांघे मोटी मोटी और अच्छी शेप में थी। मैने उससे पूछा कि तुम अपने पति के साथ सेक्स कैसे करती हो, तो उसने कहा कि वो मुझे ज्यादा मज़ा नहीं देते। मेरी चूची को कुछ देर चूसते हैं और अपना लंड मेरी चूत में डाल देते हैं और कुछ ही देर में झड़ जाते हैं। मुझे तो झड़ने का मौका ही नहीं मिलता। तुमने मुझे जिस दिन बाथरूम में उंगली करते देखा था वो तो मैं उनके होते हुए भी करती हूं। मैने कहा और कुछ नहीं करती हो। उसने कहा और होता ही क्या है। तो मैने उसे कहा कि तुम्हे तो अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। उसने कहा सच, अगर ऐसा है तो जल्दी करो न।
और ऐसा कहने पर मैने उसकी पेंटी को धीरे धीरे उतार दिया। मैने उसे बिल्कुल नंगी कर दिया था। मैने पहलि बार किसी औरत की चूत को ऐसे देखा था। उसकी चूत बिल्कुल कड़ी थी। उसपर हल्के हल्के ब्राउन रंग के बाल चारों तरफ़ थे। मैने फ़िर अपना अंडरपैंट उतारा तो मेरा भी मोटा और ७” लम्बा लंड देख कर वो बोली कि ऐसे लंड से चुदवाने का मज़ा मुझे पहली बार आयेगा। मैने कहा इसे टेस्ट करना चाहोगी। उसने कहा मुझे घिन आयेगी। तो मैने कहा कर के तो देखो। फ़िर मैने उसे बिना कुछ कहे उसके दोनो पैर को चौड़ा किया और उसके पैरों के बीच बैठ कर उसकी चूत में एक चुम्मी दे दी। ऐसा करने पर उसने कहा, तुम ऐसा मत करो। तुम्हे घिन आयेगी। मैने कहा, इसी में तो सारा मज़ा है।
फ़िर मैने उसे अपनी जीभ से चाटना शुरु किया और उंगली से उसको फ़ैलाने लगा। ऐसा करने पर उसे बहुत दर्द हो रहा था। उसने मुझे ऐसा नहीं करने को कहा मगर मैं कहां सुनने वाला था। वो जोर जोर से सिसकियां भर रही थी। और मैं पूरे जोर से उसके चूत को चूस रहा था। उसके चूत में एक बहुत ही सुंदर खुशबू आ रही थी। उसकी चूत बहुत गरम थी। मैं करीब १५ मिनट तक उसकी चूत को चूसता रहा। कुछ देर बाद उसे अच्छा लगने लगा। मैने उससे पूछा अब कैसा लग रहा है तो उसने कहा अब कुछ अच्छा लग रहा है। मैने फ़िर अपनी दो उंगली उसके गरम चूत में घुसा दी मगर उसकी चूत इतनी कड़ी थी कि वो अंदर नहीं जा रही थी। मैं आप सब को एक बात बता दूं। मैं बहुत सारी ब्लु फ़िल्म देखता हूं और मुझे मालूम है कि किस लड़की को किस तरह चोदना चाहिये। तो चूंकि उसकी चूत में मेरी उंगली नहीं जा रही थी तो मैने उसकी चूत पर अपना थोड़ा सा मूत गिरा दिया। उसने पूछा ये क्यों तो मैने कहा ये इसलिये ताकि तुम्हे दर्द नहीं हो। और ऐसा करने पर उसकी सूखी चूत गीली हो गयी और मेरी उंगली आसानी से अंदर चली गयी और मैं उसे जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा। ऐसा करते करते उसका जिस्म काँपने लगा और उसने कहा कि तुम अपना मुंह और उंगली वहां से हटा लो, मैं अब झड़ने वाली हूं। मैने कहा मैं उसे पीना चाहता हूं इतना कहते कहते वो झड़ गयी और मैं उसके पूरे रस को पी गया और एक बूंद भी नहीं गिराया।
उसने कहा तुमने मुझे बहुत संतुष्ट किया है और मैं भी अब तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूं। उसने भी मेरा लंड अपने मुंह में लिया और उसकी चमड़ी को पीछे करके उसके अंदर वाले सेंसिटिव पार्ट को अपने जीभ से रगड़ने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। वो मेरा पूरा ७” लम्बा लंड अपने मुंह में लेना चाहती थी। उसके चूसते कुछ देर बाद मैं भी झड़ने वाला था इस लिये मैने अपना लंड उसके मुंह से निकालना चाहा मगर वो भी वही करना चाहती थी जो मैने किया मगर मेरे थोड़ा तनने से मेरा लंड उसके मुंह से बाहर निकल गया और मैं वहीं झड़ गया और मेरा सारा रस उसके पूरे मुंह में पिचकारी की तरह छिटक गया, कुछ उसके होठों पर, कुछ उसके गाल पर और चारों तरफ़। वो उस पूरे रस को अपने होठों और उंगली से चाटने लगी और उसका पूरा मज़ा लेने लगी।। फ़िर उसने मुझे थेंक्स कहा और मेरे लंड को अपने होठों से चाट कर साफ़ कर दिया। और अब मुझे अपना लंड चूत में घुसाने को कहा। मैने ऐसा ही किया।
मैने धीरे धीरे अपने लंड को उसके चूत में घुसाने लगा मगर उसके घुसने से पहले ही वो चीख पड़ी। फ़िर मैने थोड़ा और जोर लगाया और ४” उसके चूत में डाला। उसका दर्द और बढ़ गया। वो और जोर से छटपटाने लगी और मुझे बस करने को कहा। उसने कहा “मेरे पति का लंड तो सिर्फ़ ५” का ही है और अब मैं तुम्हारा ९” लम्बा लंड कैसे घुसाउंगी।” मैने कहा तुम उसकी चिंता मत करो और एक और झटका लगाया और मेरा ७” लंड उसकी चूत में समा गया। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े मगर मैं रुका नहीं और धीरे धीरे पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत बहुत गरम थी। मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा। कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। वो अपनी कमर को मेरे साथ साथ आगे पीछे करने लगी।
चूंकि हम दोनो अभी अभी झड़े थे इसलिये दोबारा इतनी जल्दी झड़ना मुम्किन नहीं था। इस लिये मज़ा और ज्यादा आने लगा। ऐसा करते करते कुछ देर बाद वो झड़ गयी। उसकी गरम चूत गीली हो गयी। और वो शांत पड़ गयी। मगर मैं रुका नहीं और मैं उसे चोदता रहा। उसने मुझे अब रुकने को कहा मगर मैं रुका नहीं और अपना काम करता रहा। लगभग १० मिनट के बाद मैं भी झड़ गया और मैने अपना पूरा माल उसकी चूत में गिरा कर शांत हो कर उसकी बाहों में सो गया। वोह मुझे चूमती रही और मेरे ऊपर लेट गयी। कुछ देर बाद मैने उसे कहा, अभी तो और एक मज़ा बाकी है। उसने कहा वो क्या। तो मैने कहा, अभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा जिसमे तुम्हे बहुत मज़ा आयेगा। उसे उसके बारे में कुछ नहीं मालुम था। उसे लगा इसमे भी बहुत मज़ा आयेगा और वो राज़ी हो गयी।
फ़िर मैने उसे उसके बेड के एक कोने मे कुत्ते की तरह खड़े होने को कहा और उसके दोनो हाथ बेड के ऊपर रख दिये। उसका पैर ज़मीन पर और उसकी कमर बीच में। फ़िर मैने उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया ताकि वो कुछ गीली हो जाये। फ़िर मैं अपने होठों से उसकी गांड चाटने लगा और उसे पूरी तरह गीली कर दिया। उसे अच्छा लग रहा था। फ़िर मैने अपना लंड अपने हाथों में लेकर उसके गांड के छेद पर लगाया और अपने हाथों से पकड़ कर एक धक्का मारा। मेरे धक्के मारते ही वो चीख पड़ी और कहा मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैने कहा थोड़ा सहन करो। पहली बार है ना। और फ़िर बार बार धक्का लगाता रहा, बार बार वो चीखती रही और बार बार मेरा लंड कुछ अंदर जाता रहा। ऐसा करते करते मेरा लंड ४” अंदर चला गया। उसने मुझसे रोते हुए उसे छोड़ देने को कहा। मगर मैने उसे समझाया कि बस कुछ देर बाद है उसे मज़ा आयेगा।
ऐसा कहने पर वो मान गयी और मैने फ़िर एक जोरदार धक्का लगा कर अपना लंड १.५” और अंदर ठेला। ऐसा करते करते मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया और वो जोर जोर से सिसकियां भरने लगी। फ़िर मैने अपना लंड अंदर बाहर करना शुरु किया और कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा। फ़िर मैने उसकी चूची को पीछे से पकड़ कर दबाने लगा और उसकी गांड भी मारने लगा। ऐसा करते करते मैं फ़िर से झड़ गया और अपना पूरा रस उसकी गांड में दाल दिया। और फ़िर उसे बेड में लेकर लेट गया और उसकी चूची चूसने लगा।
फ़िर मैं बेड पर लेट गया और उसे मैने अपने लंड पर बैठाया और रेखा ने धीरे धीरे मेरा सारा लंड अपनी गांड में घुसवा लिया। वो मेरे लंड पर नाचने लगी और मज़ा लेने लगी। उसने फ़िर अपनी लम्बी उंगली की बड़े बड़े नैल्स से मेरे गांड के आस पास के एरिया को खरोंचने लगी। ऐसा करने पर मुझे बहुत आराम लग रहा था। फ़िर उसने मेरी गांड के छेद पर अपने मुंह का थूक गिराया और अपनी उंगली मेरे मुंह से गीली कर के मेरी गांड में अपनी उंगली घुसाने लगी। मुझे पहली बार बहुत दर्द हुआ और कुछ देर बाद मज़ा आने लगा और वो करीब १५ मिनट तक ऐसा करती रही।
ऐसा करते करते हम दोनो कब सो गये हमे मालूम ही नहीं चला। फ़िर सुबह हुई और हम दोनो एक दूसरे के जिस्म से लिपटे हुए उठे। और जब भी मौका मिलता मैं उसे दिन में भी चोदने लगता। हम दोनो फ़िर हर रोज़ एक साथ सोने लगे और मैने उसे हर एक पोस मे चोदा और मज़ा दिया। हम ब्लुफ़िल्म भी साथ देखते और उस स्टाइल में एक दूसरे को चोदते। मैने उसकी गांड मार मार कर उसकी कमर को चौड़ा कर दिया था जिससे वो और भी सुंदर लगती थी।
मैने अपनी एक पुरानी ख्वाइस भी पूरी करनी चाही। मैने उसे कहा कि जब मैं सर से पढ़ता था और जब तुम दोपहर को सोने के बाद टोइलेट करने जाती थी तो तुम्हारा प्रेसर सुनकर मुझे तुम्हारे चूत को चाटने का मन करता था। तब उसने कहा कि तुम अपनी इच्छा अभी पूरी कर लो। और फ़िर वो बाथरूम में गयी, उसने मूतना शुरु किया उसी प्रेसर के साथ और मैने उसके मूतते हुए अपना मुंह उसके चूत से सटाया। उसका सारा मूत मेरे मुंह पर गिरने लगा और मैं उसका मज़ा लेने लगा।
Antarvasna
इस तरह जब मेरा मन करता मैं रेखा को चोदने लगता और वो भी पूरी चाहत के साथ मुझसे चुदवाती।
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