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मेरा नाम सूरज है। यह मेरी एक Antarvasna आज तक की सबसे अच्छी गुज़री रात है। मैंने उस एक रात अपनी बीवी (रानी) और उसकी शादीशुदा सहेली (रजनी) जिसका पति मेरी दोस्त भी है, को एक ही रात चोदा।
रानी ५ फीट ४ इंच लम्बी है और उसका फ़िगर ३२-२८-३२ है। रजनी भी उतनी ही लम्बी और कद-काठी की है पर उसकी चूचियाँ और भी बड़ी और आकर्षक हैं।
मैं और रानी अक्सर ही एक-दूसरे से अलग-अलग लड़कियों या लड़कियों के साथ चुदाई करने की बात किया करते थे। एक दिन रजनी को मजबूरी में हमारे घर रूकना पड़ा, क्योंकि उसके पति को ऑफिस के काम से बाहर जाना था।
उस दिन खाना खाने के बाद हम तीनों मिलकर बेडरूम में फिल्म देख रहे थे जिसमें बहुत ही सेक्सी सीन अचानक ही आ गया। उसके बाद मुझे कुछ हो गया और मैं रानी को किस करने लगा। रजनी फिल्म देखने में व्यस्त थी। फिर मैंने रानी को प्यार करते हुए उसके कान में धीरे से कहा कि मैं उसे और रजनी को एक साथ चोदना चाहता हूँ। रानी ने मेरी तरफ देखा और फिर एकदम से रजनी के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा। उसके बाद रजनी बाहर चली गई और रानी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुमने रजनी से ऐसा क्या कहा है जो वह बाहर चली गई?
रानी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- सब्र कर लो थोड़ी देर !
उसके बाद मैं रानी को नंगा करके उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा और उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
अचानक ही दरवाज़ा खुला और रजनी एक काले रंग के गाऊन में अन्दर आई और आकर मेरे पास बैठ गई। उसके बाद मैंने रानी की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आज हम दोनों तुम्हारे हैं।
इसके बाद तो मैं झपट कर रजनी को चूमने लगा और उसका गाऊन खोल दिया। फिर मैं रजनी की चूचियों को पीने लगा तो वह तड़पने लगी और मेरे सिर को अपने सीने में ज़ोर से दबा दिया।
इधर नीचे रानी मेरे लण्ड को बड़े मज़े से चूस कर रजनी की चूत के लिए तैयार कर रही थी। उधर मैं रजनी के पूरे बदन को चूम लेने के बाद उसकी चूत को चाटने लगा तो वह सिसकने लगी, रानी ने भी उसे और उत्तेजित करने के लिए उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी।
फिर मैंने अपने गरमा-गरम लण्ड पर रजनी को बैठा दिया और उसे कुदाने लगा, और रानी इधर मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।
इस तरह मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा और वह रात हमारे लिए यादगार बन गई। उसके बाद से हम लोगों को जब भी मौक़ा मिलता है हम लोग समूह में सेक्स करते हैं। Antarvasna
मेरी भाभी की उम्र 21 Indian Sex Stories साल की थी, और मैं 18 साल का था। भाभी ने बीए फ़ाईनल की परीक्षा दी थी और मुझे रिजल्ट लेने भाभी के साथ उज्जैन जाना था। उज्जैन में ही कुछ ऐसा हुआ कि मैं और भाभी बहुत ही खुल गए।
मैं और मेरी भाभी रतलाम से सवेरे रवाना हो कर उज्जैन आ चुके थे। स्टेशन पर उतरते ही सामने एक होटल में रूम बुक करा लिया। कमरा अच्छा था। डबलबेड टेबल बाथरूम सभी कुछ साफ़सुथरा था। मैंने और भाभी ने स्नान किया और यूनिवरसिटी रवाना हो गये। वहां से हमने भाभी का रिजल्ट कार्ड लिया। दिन भर उज्जैन के पवित्र स्थलों के दर्शन किये और होटल वापस आ गये। शाम को हमारे पास कोई काम नहीं था।
अचानक भाभी बोली- चलो पास में पिक्चर हॉल है …चलते हैं, थोड़ा समय पास हो जायेगा।
हम दोनों हॉल में पहुँच गये। कोई अंग्रेजी फ़िल्म थी।
पर वह फ़िल्म बहुत सेक्सी निकली। बहुत से सीन चुदाई के थे उसमें ! थोड़ी थोड़ी देर में नंगे और चुदाई के सीन आ जाते थे। पर ये सीन ऐसे थे कि अंधेरे में फ़िल्माये गये थे, पर ये सीन इस तरह फ़िल्माये गये थे कि लण्ड और चूत के अलावा सब दिख रहा था।
जब सीन आते तो भाभी मुझे तिरछी नजर से देखने लगती। भाभी की कम उम्र थी, और उस पर इन दृष्यों का सीधा असर हो रहा था और उसकी जवानी का उबाल बेलगाम था। थोड़ी थोड़ी देर में वो मुझे छूने लगी फिर मुझ पर उसका असर देखती। मैं भी कम उम्र का ही था…
भाभी गरम होती जा रही थी। भाभी ने जब मेरी तरफ़ से कोई ऑब्जेक्शन नहीं पाया तो तो वो आगे बढ़ी और मेरे हाथ पर अपना हाथ धीरे से रख दिया। मैंने भाभी की तरफ़ देखा तो उसकी बड़ी बड़ी गोल आंखे मुझे ही देख रही थी। हम दोनों की नजरें मिली और हम आंखों ही आंखों में देखते हुए एक दूसरे में खोने लगे। उसका हाथ मेरे हाथ को दबाने लगा। मैं एक बार तो सिहर उठा। मैंने भी अब उत्तर में उसका हाथ दबा लिया।
मेरा लण्ड भी अब उठने लगा था, पर भाभी बहुत ही गरम हो चुकी थी। उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया और लण्ड की तरफ़ बढ़ने लगी और अपनी आंख से इशारा किया…
मेरा दिल धड़क उठा। उसने अचानक ही मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और अंगुलियों से उसे दबा दिया।
“हाय रे !” मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
“क्या हुआ?” उसने और जोर से दबाते हुए कहा।
सेक्सी सीन परदे पर आ जा रहे थे।
“मजा आया ना !” भाभी ने फ़ुसफ़ुसाते हुए पूछा।
मैंने भी हाथ उसकी पीठ पर से सरकाते हुए उसके बोबे थाम लिये और हौले हौले से सहलाने लगा। उसके भरे हुए मांसल बोबे और निपल उत्तेजना से कड़े हो कर तन गये थे।
“तुम्हें भी मजा आया भाभी?”
“हां रे…बहुत मजा आ रहा है।” फिर मेरी ओर देख कर बोली- “अभी और मजा आयेगा, देख !” उसने मेरे लण्ड को जोर से दबा दिया।
“भाभी, हाय रे… !”
“खूब मजा आ रहा है ना ऐसे, तेरा लण्ड तो मस्त है रे !” एकाएक भाभी ने देसी भाषा का प्रयोग किया और उनका स्वर सेक्सी हो उठा।
“भाभी, चलो होटल चलते हैं, यहाँ कुछ ठीक नहीं है।” मैं अब भड़क उठा था।
“नहीं विजय, अभी बोबे और मसलो ना… !” उसकी फ़ुसफ़ुसाहट से लगा कि उसे बहुत ही मजा आ रहा था। पर मैं खड़ा हो गया, मुझे देख कर वो भी खड़ी हो गई। हम बाहर निकल आये और होटल आ गये। रास्ते भर भाभी कुछ नहीं बोली।
हम कमरे में आ गये और कपड़े बदल कर मैंने पजामा और बनियान पहन ली और भाभी भी मात्र पेटीकोट और ब्लाऊज पहन कर आ गई। मेरी एक दम से कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई। पर भाभी तो वासना में झुलस रही थी। चुदने के इरादे से बोली,”विजय तुम्हे लौड़ी घोड़ी खेलना आता है?” उसने पूछा।
“नहीं तो, तुम्हें आता है?”
‘अरे हां, बहुत मजा आता है, खेलोगे?”
“कैसे खेलते है, कुछ बताओ !”
” देखो मैं तुम्हारी आंखो पर रुमाल बांध देती हूँ, फिर मैं जो कहूं तुम्हें मेरा वो अंग छूना है, अगर कोई दूसरा अंग छू लिया तो आऊट और सजा में तुम्हें घोड़ी बनाना होगा और तुम्हारी गाण्ड में अंगुली डालूंगी। अगर सही छुआ तो तुम्हारा लण्ड चूत में डालूंगी…तुम भी यही करना।”
मुझे सनसनी आने लगी। ये तो बढ़िया खेल है। मुझे तो दोनों तरफ़ से फ़ायदा है, वो हारी तो भी घोड़ी बनेगी और जीती तो चुदेगी। हां पर हारने पर मुझे घोड़ी बनना पड़ेगी। पर खेल मजेदार लगा, था चुदाई का सेक्सी खेल। भाभी तो हर हाल में चुदने को तैयार थी। ये तो जवानी का तकाजा था। भाभी बेशरम हो चली थी। उसने अपने कपड़े मेरे सामने ही उतार दिये। भाभी को नंगा देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
भाभी ने मेरा खड़ा लण्ड देख लिया। और बोली,”अपना पाजामा तो उतारो…और अपने लण्ड को तो आज़ाद करो, देखो कैसा जोर मार रहा है।”
मैं शरमा गया, पर वो नहीं शरमाई। मैंने कपड़े उतार दिये। मेरा लण्ड बाहर निकल कर फ़ुफ़कारने लगा।
मेरा लण्ड सहलाते हुए बोली,”अब बस नीचे वालों का ही काम है… चलो खेले, देखो खेलते हुए भटक मत जाना, कंट्रोल रखना !”
भाभी ने अब मेरी आँखों पर रूमाल बांध दिया …और कहा,”मेरे हाथ पकड़ो !”
मैं उसे ढूंढने लगा… भाभी तेज थी … मेरी तरफ़ गाण्ड करके बैठ गई। मैंने हाथ बढ़ाया और एक जगह अंगुली रखी…
“रख दी अंगुली।” मुझे लगा कि यह हाथ नहीं है…मैंने दूसरी जगह अंगुली रखी तो नाखून लगे।
“यही है।” और पट्टी खोल दी वो पांव की अंगुली थी। पर भाभी को नंगा देख कर मैं बेहाल होने लगा।
“अब बनो घोड़ी” मैं घोड़ी बन गया। भाभी ने अपनी एक अंगुली मेरी गाण्ड में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगी।
“मजा आया देवर जी।” भाभी का ये सब करना अच्छा लग रहा था।
“भाभी, ठीक है कर लो, मेरा नम्बर भी आयेगा !”
‘देवर जी, गाण्ड तो बड़ी मस्त है तुम्हारी” भाभी ने मेरी गाण्ड की तारीफ़ की।
मेरी गाण्ड को उसने थपथपाया और अपनी पूरी अंगुली घुसेड़ कर धीरे धीरे बाहर निकाल ली। अब मेरा नम्बर था।
मैंने भाभी की आंख में रूमाल बांध दिया और कहा,”मेरी छाती पर हाथ रखो !”
उसने बिना कुछ सोचे समझे जो सामने आया, पकड़ लिया। देखा तो मेरे पेट पर हाथ था।
“भाभी, घोड़ी बनो।” भाभी के तन की आग बढ़ती जा रही थी। वो तुरंत घोड़ी बन गई। मैंने उसकी गाण्ड सहलाई और अपना तना हुआ लण्ड गाण्ड के छेद में लगा कर अन्दर घुसा दिया।
“हाय, ये क्या, तुम्हें अंगुली घुसानी है…लण्ड नहीं।” पर तब तक लण्ड जड़ तक पहुंच चुका था। भाभी ने तुरन्त पलट कर लण्ड निकाल दिया। मेरा गीला लण्ड कड़कता हुआ बाहर आ गया। मैंने अब अपनी अंगुली भाभी की गाण्ड में घुसा दी।
“अब धीरे धीरे अन्दर बाहर करो” मैं उसकी गाण्ड में अंगुली करता रहा। वह सिसकी भरती रही।
“भाभी, प्लीज, यह लौड़ी घोड़ी रहने दो ना, मेरे लण्ड का तो कुछ ख्याल करो !”
“खेल के जो नियम है उसे तो मानना पड़ेगा ना, चलो अब मेरी बारी है, अपनी आंखे बन्द करो !” मैंने आंखे बन्द कर ली।
“मेरी चूंचियां पकड़ो…” इस बार मुझे थोड़ा सा दिख रहा था। मैंने सीधे ही भाभी की चूंचिया दबा दी
“नहीं ये तो बेईमानी है…” वो कहती रही।
“नियम तो नियम है” और मैंने उसे धक्का दे कर बिस्तर पर लेटा दिया और उस पर चढ़ गया। उबलता हुआ लण्ड मैंने उसकी चूत पर रख दिया। और अन्दर पेल दिया। भाभी पिघल उठी, उसने भी मदद करते हुये अपनी चूत उछाल दी और दोनों ही सिसकारी भरते हुए एक दूसरे से चिपक गये। लण्ड चूत में घुसता चला गया। भाभी ने अपने होंठ भींच लिये और जैसे उसे जन्नत मिल गई हो।
“देवर जी, इस खेल में चुदाई से पहले जितना तड़पोगे उतना ही मजा चुदाई में आता है, इसीलिये लौड़ी घोड़ी खेल खेलते है, और चुदाई के लिये तड़पते रहते रहते हैं।”
“हां भाभी, मेरा तो खेल खेल में माल ही निकलने वाला था।”
“तेरे भैया का तो कितनी ही बार निकल जाता था।”
उसकी वासना तेजी पर थी। वो जोर जोर से उछल कर लण्ड ले रही थी। मैं उसकी नरम चूत को जम के धक्के मार रहा था। जवान चूत थी, पानी भी बहुत छोड़ रही थी, जड़ तक लौड़ा ले रही थी। उसकी मांसल चूंचिया छोटी मगर बेहद कड़ी थी। मसलने में बड़ा आनन्द आ रहा था। कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकल पड़ा। उसकी चूत भी अन्दर से लहरा रही थी, वो भी झड़ चुकी थी।
हम दोनों ने कुछ देर आराम किया फिर भाभी ने कहा,”देवर जी, हां तो आगे चले।”
“चलो खेलते हैं !” मैंने भी झट हां कर दी।
“यह दूसरा दौर है। पहले खेल में तुम जीते थे, अब मैं तो घोड़ी बनी रहूंगी… तुम मेरे शरीर के किसी भी अंग को चाट सकते हो, अपनी लौड़ी को, यानी लण्ड को किसी भी छेद में घुसा कर मजा ले सकते हो, चलो आंखें बंद करो !”
भाभी ने मेरी आंखे फिर रूमाल से बंद कर दी। अब वो बिस्तर पर झुक कर फिर से घोड़ी बन गई। मैंने जैसे ही अपना मुँह आगे बढ़ाया तो गाण्ड का स्पर्श हुआ। मैंने अपनी जीभ निकाली और जीभ उसके चूतड़ों पर फ़ेरने लगा। भाभी ने निशाना बांधा और गाण्ड का छेद सामने कर दिया। मेरी जीभ ने छेद पह्चान लिया और चाटने लगा और उसके छेद में भी जीभ डालने लगा।
जैसे ही जीभ बाहर निकाली मुझे बालों का स्पर्श लगा, मेरी जीभ अब उसकी चूत चाट रही थी।
मेरा लण्ड तन्ना रहा था। किसी भी छेद में घुस कर एक बार और अपना वीर्य निकालना चाह रहा था। मैंने अब रूमाल हटा लिया और उसे निहारा। उसके गोल गोल गोरे गोरे चूतड़ सामने उभरे हुए थे। भाभी मस्ती में अपनी आंखें बंद किये हुए थी। मैंने जल्दी से अपना लण्ड उसकी गाण्ड में घुसेड़ दिया।
भाभी बोल उठी,”देवर जी, लौड़ी घोड़ी… हाय रे…लौड़ी घोड़ी…गाण्ड चोद दो…हाय !”
भाभी ने मस्ती में गाण्ड ढीली छोड़ दी…और लण्ड गाण्ड की गहराइयों में उतरता चला गया। मुझे तेज मीठी मीठी सी लण्ड में मस्ती लगी। टाईट गाण्ड थी। पर उसे दर्द हो रहा था, फिर भी मजा ले रही थी। कुछ ही देर में उसने कराहते हुए कह ही दिया,” देवर जी, चूत की मस्ती दो ना…मेरा जी तो चूत चुदाने कर रहा है…देखो पानी भी छोड़ रही है !”
मैंने उसकी बात समझी कि ये तो सिर्फ़ मर्दो का सुख है…औरत का सुख तो चूत में है। मैंने लण्ड निकाला और … लौड़ी घोड़ी … कहा और चूत में लण्ड घुसा डाला। अब उसे असली मजा आया। और घोड़ी बने बने ही चूत चुदवाने लगी। इस पोजिशन में लण्ड पूरा अन्दर जा रहा था। मेरे पेड़ू तक चूत से चिपक कर चोद रहा था।
चुदाई तेज हो उठी। भाभी अपने मुँह से सिसकारियोँ के साथ मां बहन, भोसड़ी, कुत्ते जैसे गालियाँ निकालने लगी। मुझे लगा कि अब वो चरमसीमा पर आकर झड़ने वाली है। और मेरा अनुमान सही निकला…
हम दोनों ही एक साथ झड़ने लगे। चूत में दोनों माल भरने लगा और माल आपस में एक हो गया। मैंने उसकी चूत से गिरते हुए माल को हाथ में लिया और चखा…फ़ीका फ़ीका सा, लसलसा सा, मुझे मजा नहीं आया। पर भाभी ने देखा तो मेरा हाथ पूरा चाट गई और चूत से माल हाथ में ले लेकर चाटने लगी।
“खबरदार, जो मेरे माल को हाथ लगाया … लौड़ी घोड़ी में सारा माल मेरा होता है।
अब तीसरा दौर… आप घोड़ी बनेगे और मैं आपकी लौड़ी यानी लण्ड नीचे से चूस चूस कर तुम्हारा शहद निकालूंगी, तुम घोड़ी की पोजिशन में चाहे मेरी चूत चाटो या कुछ भी करो।”
पर दो चुदाई करने के बाद मैं थक गया था। मैंने जैसे कुछ सुना ही नहीं और पलंग पर लेट गया। वो मुझे झकझोरती रही पर मेरी आंखे नींद में डूबती चली गई। सवेरे जब उठे तो भाभी मेरे से चिपकी हुई नंगी ही सो रही थी।
मुझे भाभी ने लौड़ी घोड़ी का खेल अच्छी तरह से सिखा दिया। कोई भी, चाहे लड़का हो या लड़की यह खेल फ़्री में खेल सकता है। मजे की गारण्टी है। Indian Sex Stories
दोस्तो, आपके बहुत सारे Sex Stories मेल मिले ! मुझे ख़ुशी हुई कि सबको मेरी कहानी पसंद आई … गुरूजी को धन्यवाद जिन्होंने मेरी कहानी आप लोगों तक पहुँचाई ….
आपका रोहित फिर से अपनी मस्त सी भाभी और उसकी बहन को एक साथ चोदने वाली कहानी अन्तर्वासना के माध्यम से लेकर आया है।
भाभी की डिलीवरी के कुछ दिन बाद उसकी बहन मीनाक्षी अपने घर चली गई।
फिर कुछ दिनों बाद मैं फिर से भाभी को चोदने लगा। मैंने भाभी को अब नए ढंग से चोदना शुरु किया, मैं रोज़ नई-नई ब्लू फिल्म लाता, जिसमें अलग-अलग स्टाइल से चुदाई होती। हम उन्हीं नए-नए स्टाइल से सेक्स किया करते …
मैंने भाभी को घोड़ी बना कर गांड मारी, उसे गोद में उठाकर फास्ट स्पीड में चुदाई की ….
एक बार मैं शहद लाया और उसे भाभी के वक्ष, गांड और चूत में लगा कर स्तनों को चूसा, चूत में जीभ डाल कर खूब मस्ती की ! इससे सेक्स का मजा दोगुना हो गया।
भाभी ने भी मेरे लंड पर बहुत सारा शहद लगा कर २० मिनट तक मुँह में लिया। क्या तो मजा आया दोस्तो ! आप भी ऐसे करके देखें ! बड़ा मजा आएगा।
जब मैं भाभी को चोदता, तब मीनाक्षी (भाभी की बहन) के बारे में सोचता क्योंकि वो बहुत मस्त थी और भाभी को चोदता-चोदता बोर हो गया था, जैसे शादीशुदा लोग अपनी बीवी से बोर हो जाते हैं …
मैं भाभी से पूछता- मीनाक्षी कब आएगी?
तो बोलती- मैं तो कभी नहीं बुलाऊँगी ! उसने मेरा रोहित मुझसे छीन लिया … तुम सिर्फ मुझे ही चोदेंगे…
मुझे बड़ा गुस्सा आया और मैं बोला- अब मैं तुझे तब ही चोदूँगा जब तू अपनी बहन को बुलाएगी…
कुछ दिन चूत में लंड नहीं डालने पर वो बहुत परेशान हो गई …
कुछ दिन बाद मेरे घर आ कर बोली- देख रोहित ! मैं मीनाक्षी को बुला दूंगी पर उसे यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि तुम मुझे भी चोदते हो …
मैं बोला- वादा करता हूँ ! मैं तो कभी नहीं बताऊँगा।
फिर चलो अभी मुझे चोदो ..
मैं बोला- अभी घर में मम्मी है ….
तो बोली- दस मिनट में मेरे घर आ जाना !
मैं बोला- ठीक है ! आ जाउगा…
फिर दस मिनट बाद मैं भाभी के घर पंहुचा और खूब चुदाई की …
काफी दिन बाद सेक्स कर रहा था ना इसलिए बहुत शक्ति के साथ चोदा … मुस्कान (भाभी) ने भी अच्छा साथ दिया … मजा आ गया दोस्तो …
भाभी ने फ़ोन करके अपनी बहन को बुला लिया …
मैं बहुत खुश हुआ…
मैंने आते ही उसे गले लगा लिया …. और चूमना शुरु कर दिया …
बड़ा मजा आया ..
फिर हमने बातें करना शुरू कर दिया ..
मैंने बाते करते हुए उसके हाथ में मोबाइल देखा और बोला- मोबाइल भी ले लिया और नंबर भी नहीं दिया…?
बोली- सॉरी यार …
अब तो दो नंबर…
बोली नोट करो- 98********
अब तो हम रोज़ मोबाइल पर भी बात किया करेंगे ….
दो दिन बाद हमारे घर पर कोई नहीं था, हमने चुदाई की योजना बनाई …
वो उस दिन कपड़ों के अन्दर बिना पैंटी-ब्रा के आई …
उसे देखते ही लंड खड़ा हो गया …
फिर हमने चूमा-चाटी करना शुरू किया…
मैंने चूमते-चूमते ही उसकी जींस खोल दी …
और पैंटी नहीं होने से चूत में ऊँगली डाल कर घुमाने लगा … चुम्बन के साथ चूत में ऊँगली होने से मीनाक्षी सीसकारने लगी- अऽऽ आहऽऽ रोहितऽऽ बड़ा मजा आ रहा है ! ऐसे ही करो…
फिर मैंने उसकी गांड पर हाथ लगा कर हाथों में उठा लिया, नंगी गांड को मसलने लगा, उसकी नंगी चूत मेरे जींस के अन्दर खड़े लंड से अड़ रही थी, बड़ा मजा आ रहा था …. जब उसकी चूत से छू जाता ….
अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था… मैं बोला- यार, अब चुचियों को भी मुँह में लेने दो…
बोली- जानू ! मैंने कब मना किया ! मेरा पूरा शरीर अब तुम्हारा ही तो है ! जैसा चाहो, वैसा करो ! मैं नहीं रोकूँगी…
मैंने कहा- अच्छी बात है ..
फिर मैंने उसे पूरा नंगा किया और स्तनों को दबाने लगा, वो आहे भरने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह ! मजा आ गया रोहित ! यार, तुम्हारे हाथों में सच में कुछ जादू है… मैंने तीन लड़कों से चुदाई की लेकिन तुम ही सबसे मस्त लगे…
मैं बोला- जान, अभी देखना ! पिछली बार से भी ज्यादा मजा आएगा … बस तुम मेरा साथ दो !
फिर मैं रसोई में गया और शहद लेकर आया, जिस तरह मैंने भाभी के वक्ष, गांड और चूत पर लगा कर चाटा था, वैसे ही इसके साथ किया….
इसके साथ तो भाभी से भी ज्यादा मजा आया …
मैंने बारी-बारी से पहले स्तनों पर शहद लगा कर चूसा, फिर चूत में ढेर सारा शहद डाला और अपने मुँह से चाटने लगा। क्या मजा आया दोस्तो ! वाह … मीठी मीठी चूत का स्वाद ही अलग लगता है… तुम भी करके देखना…
फिर उसने मेरे लंड पर शहद लगाया और चाटने लगी। क्या तो मस्त लग रहा था…
मीनाक्षी बोली- यार तुम तो नए-नए तरीकों से सेक्स करते हो ! बड़ा मजा आ रहा है …
फिर मैंने उसकी चूत में अपना 7.5 इंच लम्बा लंड बड़ी तेजी से घुसाया …
उसने एक बार आह किया …. फिर सामान्य हो गई… फिर मैंने स्पीड से उसे चोदना शुरू कर दिया वो भी मेरा साथ दे रही थी…. अपनी गांड को हिला-हिला कर चुदाई को और मस्त कर रही थी …
मैं बीच बीच में उसके स्तनों को दबा देता, मुँह में ले लेता….साथ में चूमा-चाटी भी कर रहा था …
चोदते हुए चुम्बन में बड़ा मजा आया … सच में लग रहा थे जैसे जन्नत में पहुँच गया हूँ …
हमने उस दिन जी भर चुदाई की…
हर नये स्टाइल से चोदा उसे …
दो घंटे में तीन बार चुदाई करने के बाद हम कपड़े पहन कर लॉन्ग-ड्राइव पर निकल गए …
फिर हमने कई बार चुदाई की…
भाभी को भी चुदाने का मन करता … लेकिन मीनाक्षी हमेशा घर में रहती, जिस कारण वो नहीं चुदा पाती थी ….
एक दिन मीनाक्षी किसी काम से बाहर गई तो मैंने भाभी की बीस दिन की सेक्स की भूख शांत की…
बड़ा मजा आया बीस दिन बाद भाभी को चोदने में..
फिर कुछ दिन बाद भाभी को फिर चुदवाने की इच्छा होने लगी..
मैंने मना कर दिया- मीनाक्षी घर पर है….
शाम को जब मीनाक्षी रसोई में खाना बना रही थी, तब भाभी मुझे अपने बेडरूम में ले गई और बोली- रोहित, यार आज तो चोदो मुझे ..
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मैं बोला- मीनाक्षी ?
बोली- वो तो रसोई में है ! 20-25 मिनट में आयेगी, तब तक हमारा काम हो जायेगा …
भाभी ने दरवाज़े की कुण्डी लगाई और मेरे ऊपर लिपट गई …
मैंने चूमना शुरू किया तो बोली- रंडवे, पहले मेरी चूत की प्यास बुझा ! बाकी काम बाद में करना…
मैंने सीधे भाभी की साड़ी को उतारा और पेटीकोट को ऊपर करके अपना लंड चूत में घुसाने लगा … मेरा लंड उसकी चूत में आसानी से जा घुसा … बहुत फास्ट स्पीड में चुदाई कर रहा था कि अचानक गेट पर मीनाक्षी की आवाज आई- दीदी क्या कर रही हो…? और रोहित कहाँ गया बिना बताये …? हम दोनों डर गए ..
मैं बोला- अब हमे इसे सब कुछ बता देना चाहिए …
भाभी कुछ देर सोच कर बोली- ठीक है ! इस तरह मैं कभी भी चुदा तो सकूँगी…
फिर हम दोनों चूत में लंड डाले ही गेट खोलने चल पड़े…
गेट खोलते ही मीनाक्षी चौंक पड़ी, बोली- रोहित ! दीदी ! तुम दोनों एक साथ चुदाई करते हो…?
मैं बोला- मैं तो तुम्हारी दीदी को शादी के बाद से ही चोद रहा हूँ क्योंकि तेरा जीजा को नामर्द है…
वो बोली- क्या जीजू ने आज तक तुम्हें नहीं चोदा ? और ये बच्चा भी रोहित, तुम्हारा है…?
भाभी बोली- हाँ, यह रोहित का ही बच्चा है…
मीनाक्षी बोली- तुम धोखेबाज़ हो…
भाभी बोली- नहीं रे ! ये तो मेरे कहने पर ही मुझे चोदता है … मेरी भी तो चुदाने की इच्छा होती है ना…
वो बोली- ठीक है ! लेकिन ये अब हम दोनों को एक साथ चोदेगा…
मैं बोला- तब तो बड़ा मजा आयेगा ! दो दो चूत के साथ ..
फिर मैं मीनाक्षी को चूमने लगा और भाभी मेरा लंड मुँह में लेने लगी … मैंने मीनाक्षी के पूरे कपड़े उतार दिए। अब हम तीनों नंगे थे, मैं मीनाक्षी की चूत चाट रहा था, मीनाक्षी भाभी की चूत चाट रही थी और भाभी के मुँह में मेरा लंड था …
बड़ा मजा आ रहा था इस तरह करने में !
फिर हमने जगह बदल ली ! मैं भाभी की चूत चाटने लगा ! भाभी मीनाक्षी की चूत और … मीनाक्षी ने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया..
दस मिनट बाद भाभी मेरे मुँह में झड़ गई ..मुझे भाभी की चूत का पानी बड़ा मस्त लगा….
फिर मैंने पहले मीनाक्षी को चोदना शुरू किया….
जब मैं चोद रहा था, तब भाभी मीनाक्षी को चुचूक चूस रही थी और मैं भाभी के चूसने लगा …
मीनाक्षी बोली- आज तो बड़ा मजा आ गया जान .. तुम स्पीड और तेज़ करो !
फिर मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…
करीब बीस मिनट बाद मीनाक्षी झड़ गई…
लेकिन मैं नहीं झड़ा। फिर मैंने भाभी की चूत में अपना 7.5 इंच लम्बा लौड़ा डाल दिया … क्या मजा आया दोस्तो ! दोनों को एक साथ चोदने में…
जब मैं भाभी को चोद रहा था तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी..
15 मिनट बाद मैं झड़ गया तो दोनों लड़ने लगी कि मेरे मुँह में पानी डालो… मैंने पहले मीनाक्षी के मुँह में लंड डाल कर पानी डाला … भाभी अब भी उत्तेजित थी, बोली- रोहित यार चोदो ना …
मैं बोला- पाँच मिनट रुको ..
तब तक तुम दोनों आपस में मस्ती करो…
फिर दोनों बहनें आपस में एक दूसरे की चूत में हाथ डालने लगी…
मैं पाँच मिनट बाद फिर से चोदने आ गया … फिर भाभी को झड़वा कर मीनाक्षी को मस्त चुदाई की.. उस दिन चुदाई में जितना मजा आया उतना फिर कभी नहीं आया … हमने कई बार साथ चुदाई की …. कई बार अलग अलग …
मुझे मेल करके जरुर बताएँ कि आप लोगों को मेरी कहानी कैसी लगी ! मैं इन्तज़ार करुँगा … Sex Stories
जब मैं 18 साल का Antarvasna था, मेरे पिताजी ट्रांसपोर्ट में काम करते थे। उनकी आमदनी बहुत कम थी। तब हमारा खुद का घर भी नहीं था, हम किराये के मकान में रहते थे।
वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरे भाई थे। उनकी एक लड़की थी, क्या बताऊँ आपको, वो इतनी सेक्सी थी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी।
हमारे उनके सम्बन्ध बहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठ कर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता था क्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुत ही नर्म थे।
एक दिन की बात है, मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई के साथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आंटी को कहकर गई थी कि मेरा खाना बनाकर घर भिजवा दें।
दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर आ गई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जो सफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।
मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।
वो बोली- तुम खाना खा लो!
मैंने कहा- आप प्यार से खिलाओ!
वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वो बोली- गर्मी ज्यादा है, पंखा चला दो!
मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और आंटी के सामने बैठ गया। तभी उनका आँचल पंखे की हवा से उड़ा और आंटी के दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझे साफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा।
वो मुझे खिलाती गई और मेरी नजर उनके वक्ष पर टिक गई।
अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझ गई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरा तन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी, वो हंसने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानी लेकर वापस आई तो मैंने पूछा- आप क्यों हंस रही थी?
तो वो बोली- तेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया!
मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है, मैंने आंटी से कहा- क्या मैं आपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?
तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी, मुझसे कहा- बाकी ब्लाऊज़ और ब्रा तू निकाल ले।
मैं झट से उनके बोबे दबाने लगा- अआह… क्या मुलायम बोबे थे!
मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंने उनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में!
मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।
वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ… जैसी आवाजें निकालने लगी। 5 मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह! क्या बोबे थे! जैसे दूध की डेयरी!
मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबू के बाहर हो गया था।
अचानक आंटी बोली- बस! अब मेरी बारी!
मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दी, फिर पैंट ही निकाल दी, मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली- वाह, क्या लण्ड है! कम से कम सात इंच का होगा!
और उसे पकड़ कर हिलाने लगी।
मुझे अच्छा लगने लगा।
अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती ही रही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहा- छुट रहा है!
वो बोली- छोड़ दे मेरे मुँह में!
और मैं झड़ गया।
वो बोली- क्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का!
मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोली- चल एक काम कर! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।
मैंने पूछा- कैसे?
तो बोली- तू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है?
मैंने कहा- नहीं!
तो बोली- चल मैं तुझे बताती हूँ!
और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तो देखता ही रह गया।
वो बोली- अब नीचे मेरी चूत में ऊँगली डाल!
मैंने वैसा ही किया।
वो चिल्लाने लगी- एक नहीं तीन ऊँगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर कर!
मैंने वैसा ही किया।
वो आहें भरने लगी- आह्ह्ह… ऊऊ ऊऊउह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ… चु हूउदूऊ ऊउ…
मैंने लगभग 15 मिनट तक ऊँगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत से पानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर से तन गया था तो मैंने भी आंटी से कहा- आंटी, अब मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो! वो फिर से तन गया है!
वो बोली- चोदू! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा?
मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाई, उनकी चूत पर अपना लण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।
आंटी चिल्ला उठी- लौड़े! धीरे से डाल! बेनचोद! 6 महीने के बाद इतना बाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है?
मैं उनके बोबे दबाने लगा, फिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी की चूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगी- निकाल बाहर! फाड़ दी मेरी चूत! निकाल बाहर!
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगा कि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।
उनको मजा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थी- आः ह ह्ह्ह्ह! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़! आऽऽ आऽ ई ईऽऽए चोद…जोर से! मज़ा आ गया! जैसी आवाजें निकाल रही थी।
मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा है, तो मैं आंटी से बोला- आंटी मेरा निकलने वाला है!
तो वो बोली- अंदर ही निकाल दे!
और मैं अंदर ही झड़ गया।
उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेरा खाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।
मैंने उसको भी चोदने का कार्यक्रम बना लिया जो मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगा। Antarvasna
जब मेरा ट्रान्सफर Antarvasna जयपुर से जालन्धर हुआ तो अपने एक दोस्त की वजह से मुझे एक कर्नल साहब की कोठी में पेइंग-गेस्ट के रूप में रहने का ठिकाना मिल गया। कर्नल साहब करीब १० साल पहले भगवान को प्यारे हो गए थे, घर में उनकी ७० वर्षीया पत्नी, ४० वर्षीय पुत्र तथा ३६ वर्षीया बहू कुल जमा तीन प्राणी रहते थे। रहने के लिहाज से घर और घर वाले बहुत अच्छे थे। कर्नल साहब की पत्नी का नाम रणवीर कौर था, वो एक बहुत ही शिष्ट, सौम्य, गंभीर और आकर्षक महिला थीं, उनको देखकर बार बार मन में एक ही बात आती थी कि काश ये मेरी माँ होतीं। उनके पुत्र का नाम महिंदर सिंह था, वह सुंदर, लम्बा और योग्य आदमी था। महिंदर की पत्नी का नाम मंजीत कौर था, वह गोरी, सुंदर और सेक्स से भरपूर महिला थी। दुर्भाग्य से इनके कोई संतान नहीं थी।
यहाँ रहते हुए मुझे २ महीने हो गए तो मैं मंजीत का दीवाना हो चुका था, जब वो चलती तो उसके भारी भारी चूतड़ मेरे लंड को खड़ा कर देते। ४-६ दिन में एक बार मुठ मार कर अपनी गर्मी निकालने के अलावा और कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था।
एक दिन पता चला कि दिल्ली में मंजीत के भाई की शादी है और वो अपने पति के साथ १५ दिन के लिए दिल्ली जा रही है। मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी जान निकाल ली हो।
जिस दिन ये लोग दिल्ली गए, मैं शाम को घर आया तो माँ जी अकेली थी, माँ जी को वो लोग बीजी कहते थे, इसलिए मैं भी बीजी कहने लगा। मैंने कहा- बीजी, जो काम मेरे लायक हो बता दीजिएगा, मैं कर दूंगा।
मैंने खाना बनाने में बीजी की मदद की, दोनों ने खाना खाया और मैं अपने कमरे में चला गया। मेरा और बीजी का कमरा अगल-बगल था और दोनों के बीच एक कॉमन बाथरूम था जिसका दरवाजा दोनों कमरों में खुलता था।
मैं अभी लेटा ही था कि जोर से कुछ गिरने की आवाज आई, मैं बाहर आया तो देखा किचन में बीजी गिर गई हैं, मैंने जल्दी से उन्हें उठाया और सहारा देकर उनके कमरे में लाकर बेड पर लिटा दिया। बीजी लगभग ५’६” लम्बी और टीवी / फिल्म स्टार रीमा लागू की तरह भरे बदन की थीं। लेटने के बाद भी बीजी का कराहना कम नहीं हो रहा था, मेरे पूछने पर बताया कि बांह और कूल्हे पर बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने देखा कि उनकी दाहिनी बांह कुहनी के पास काफी लाल थी।
बीजी ने कहा- पुत्तर, सम्मने बारी विच मूव पई ऐ, कड से ल्या !
मैंने मूव निकाली और बीजी से कहा- लाइए, मैं लगा देता हूँ।
बांह पर मूव लगाने के बाद मैंने कहा- बीजी, आप उल्टे लेटो, मैं हिप पर भी लगा दूं !
एक पल की हिचक के बाद बीजी पलटीं और बोलीं- ला दे पुत्तर, रब्ब तेरा भला करे, तैन्नू सुखी रखे, जे आज्ज तूं नां हुंदा ते मैं ताँ उठ के कमरे विच बी नई आ पादीं।
बीजी पेट के बल लेट गईं तो मैंने उनके गाऊन को कमर तक उठा दिया, उनकी केले के तने जैसी चिकनी, सुडौल और गोरी गोरी टाँगे देखकर मेरा मन मचल गया। मरून कलर की पैंटी उनके जिस्म की शान में चार चाँद लगा रही थी। मैंने तुंरत अपने आप को कोसा, खुद को काबू में किया कि ये तो माँ है।
बीजी की कमर पर कुछ नहीं दिखा तो मैंने पूछा कहाँ दर्द है बीजी ?
बीजी ने अपने दाहिने चूतड़ पर हाथ रखकर कहा- ऐत्थे !
मैंने बीजी की पैंटी थोड़ी नीचे खिसकाई तो देखा मेरी हथेली के बराबर जगह एकदम लाल थी, मैंने छुआ तो बीजी कराह उठीं। मैंने पैंटी थोड़ा और और नीचे खिसकाई ताकि मूव अच्छे से लग सके। हलके हलके हाथों से मूव लगाई और पैंटी ऊपर करके गाऊन नीचे कर दिया। मैंने बीजी से कहा- मैं आपके लिए हल्दी डालकर दूध लाता हूँ, आप पियोगे तो सारा दर्द चला जाएगा।
किचन में जाकर दो गिलास दूध गरम किया, एक गिलास खुद पी लिया और दूसरे में हल्दी डालकर बीजी के लिए ले आया। बीजी को सहारा देकर उठाया और वो धीरे धीरे दूध पीने लगीं। बीजी दूध पी रही थीं और मेरी आँखों के सामने बार बार उनकी गोरी टाँगें और चूतड़ आ रहे थे। मैंने तय कर लिया कि आज बीजी की बजानी है। बीजी के दूध पीने के बाद उनसे खाली गिलास लेकर किचन में रखा और आकर बीजी से पूछा- अब दर्द कैसा है?
तो बोली- अज्जे ते औंवे ई हैगा पुत्तर।
मैंने कहा- बीजी, एक बार मूव फिर लगवा लो, सुबह तक आराम आ जाएगा।
हाथ का सहारा देते हुए बीजी को उल्टा किया और उनका गाऊन कमर से और थोड़ा ऊपर तक उठा दिया। मूव की ट्यूब उठाई और अपने पास रखकर बीजी की पैंटी नीचे खिसकाने लगा। पैंटी नीचे खिसकाते खिसकाते उनके घुटनों तक कर दी। अपनी हथेली पर मूव ली और उनके चूतड़ों पर मलने लगा। मेरा ध्यान मूव मलने में कम और चूतड़ सहलाने में ज्यादा था। इस बीच मेरा लंड ७० साल की औरत को चोदकर एक नया अनुभव करने के लिए तैयार हो चुका था और लुंगी के अन्दर फड़फड़ा रहा था।
जब मैं काफी देर तक सहलाता रहा तो बीजी ने कहा- पुत्तर ! तेरे अंकल जी नू गए १० साल हो गे ने, आज्ज तूं मैंन्नू ओन्ना दी याद ल्या दित्ती ऐ ! ओ वी ऐन्जे ई सहलांदे रहंदे सी ! मैंन्नू बौह्त चान्हदे सी, रोज जैतून दे तेल नाल मेरियां लत्तां दी मालश करदे सी ! फ़ेर लत्तां से विच ई वड़ जांदे सी। मैं ओन्ना नूँ प्यार नाल पुच्चु कहंदी सी ते ओ वी मैंन्नू प्यार नाल पुच्चु कहंदे सी।
मैंने कहा- बीजी, क्या मैं आपको पुच्चु कह सकता हूँ ?
कहने लगी- आहो पुच्चु ! तूं मैंनू पुच्चु कह सकना ऐ।
मेरा काम लगभग बन चुका था।
मैंने कहा- पुच्चु ! वो जैतून का तेल कहाँ रखा है ?
बीजी ने अलमारी के ऊपर वाले खाने की ओर इशारा कर दिया। मैं उठा बाथरूम गया, पेशाब किया और अपना अंडरवियर उतार कर रख आया। जैतून के तेल का डिब्बा निकाला, बीजी यानि अपनी पुच्चु की पैंटी उतार दी और टांगों पर जैतून के तेल से मालिश करने लगा।
कुछ देर बाद मैंने कहा- पुच्चु, आप सीधे हो जाओ तो आगे भी कर दूं।
वो सीधी होकर पीठ के बल लेट गईं। मैं उनकी टांगों के बीच बैठ गया और हल्के हल्के हाथों से उनकी जांघो को सहलाने लगा, धीरे धीरे मैं थोड़ा सा आगे खिसक गया और लुंगी में से अपना लंड बाहर निकाल कर पुच्चु की चूत से छुआया तो बड़ी सेक्सी आवाज में बोलीं- की कर रहया ऐ पुच्चु ?
मैंने लंड को अन्दर सरकाते हुए कहा- कुछ नहीं पुच्चु।
मेरा पूरा लंड ७० साल की बीजी की चूत में चला गया था, ताज्जुब यह था कि बीजी की चूत किसी २० साल की कुंवारी चूत से कम नहीं थी।
उस रात बीजी को दो बार चोदा, हम दोनों संतुष्ट होकर सोये। उस दिन से आज तक हमें जब भी इच्छा होती है रात को बाथरूम के रास्ते एक कमरे में आ जाते हैं और मजे लेते हैं। Antarvasna
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