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Antarvasna

प्रेषक : राहुल शर्मा Antarvasna

हाय दोस्तो !

तो दोस्तो मामला है एक सेक्स भरी रात का

किस्सा है ये चुदाई की रात का

उस रात मेरे मन में ना जाने क्या झमेला था

क्योंकि मैं घर पर एकदम अकेला था

अकेलेपन में मैं तन्हाई के गीत गुनगुना रहा था

और बीच बीच में अपने लण्ड को भी हिला रहा था

क्योंकि किसी कन्या का ख्याल आते ही ये दिल बड़ा हो जाता है

ये मासूम लण्ड भी इसकी तमन्ना समझते हुए खुद ही खड़ा हो जाता है

अब है तो खड़ा होगा ही

छोटा है तो बड़ा होगा ही

अचानक मुझे लगा कि कोई बुदबुदा रहा है

दिमाग गंदा हो तो लगता है कि कोइ चुदवा रहा है

मैने दरवाजा खोला तो वहां एक गोरी थी

उसके मम्में और गाण्ड देख कर लग रहा थी कि आज तक कोरी थी

मैने उसे अपने घर में अन्दर बुला लिया

ठंड बहुत थी सो मैंने कुन्डा लगा दिया

मैंने माज़रा पूछा तो पता चला वो रास्ता भूल गई

मेरी हिम्मत भी उसकी हालत देख के खुल गई

मैंने उसे बाहों में भर लिया था

क्योंकि उसे चोदने का पक्का इरादा कर लिया था

वो मेरी बांहों में आकर शरमा रही थी

और मेरी सांसों की गरमी से वो भी गरम हुई जा रही थी

मैंने धीरे से एक हाथ उसके मम्मों पर धर दिया

इन हाथों ने ही उसका सारा काम कर दिया

मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत पे था

और ध्यान उसके सूट पे था

आखिर उसकी जवानी को जो संवारना था

इसलिये उसका सूट भी उतारना था

मैंने उसकी कमीज़ उतार कर मम्म दबाने शुरू कर दिये

सलवार को अलग किया और शोट लगाने शुरू कर दिये

वो आहें भर कर मज़ा दे रही थी

या यूं कहें कि लड़की होने की सज़ा ले रही थी

मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर था

ये भी मज़े का एक मंजर था

वो कह रही थी कि चोदते रहो, चोदते रहो और चूत को फ़ाड़ डालो

आज अपने लण्ड से मेरी चूत में झण्डे गाड़ डालो

मैं भी पूरे दम से उसे चोदे जा रहा था

और चूत चुदाई के इस खेल में दोनों को मज़ा आ रहा था

मेरे लण्ड से पानी निकला तो वो संतुष्ट हो गई

नंगी ही वो मुझसे लिपट के सो गई

थोड़ी देर बाद उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया

मुझे कुछ समझ आता इससे पहले ही अपने होठों में जकड़ लिया

वो मेरे लण्ड को चूस रही थी इसलिये लण्ड खड़ा हो गया

एक बार फ़िर से ये लण्ड चुदाई के लिये खड़ा हो गया

अब उसे अपनी गाण्ड मुझसे मरवानी थी

उसकी चूत की तरह उसकी गाण्ड भी सुहानी थी

मैंने भी पूरी पावर से अपना लण्ड उसकी गाण्ड में डाला

और एक ही बार में उसकी गाण्ड को फ़ाड़ डाला

उसकी चीख ने मुझे झन्झोड़ दिया

साथ ही मेरे लण्ड ने एक बार फ़िर पानी छोड़ दिया

अब मुझे पता चला मैं कहां था

जिसमें मैं था वो एक दूसरा ही जहां था

मैंने गाण्ड और चूत दोनों ही मारी थी

लेकिन यारो सच जो ये है कि मैंने सपने में मुठ मारी थी

मेरा अन्डरवियर एकदम गीला हो गया था

मुठ इतनी जोर से मारी कि लण्ड भी नीला हो गया था

यारो सपना ही सही लेकिन मज़ा तो किया

अपने लण्ड को चूत के अन्दर तो किया

तो दोस्तो ! चोदो, चुदाओ और अपनी लाइफ़ को खुशहाल बनाओ Antarvasna

Hindi Sex Stories

मैं और प्रीती मेरे फ्लैट में Hindi Sex Stories दाखिल हुए और मैंने पूछा, “प्रीती फ्लैट कैसा लगा?”

“छोटा है, लेकिन अपना है, यही खुशी है”, मुझे उसने जवाब दिया।

“ठीक है! तुम आराम करो… मैं तब तक सबज़ियाँ और सामान लेकर आता हूँ”, ये कहकर मैं सामान लेने बाज़ार चला गया।

मैं वापस आया तो देखा प्रीती किचन में काम कर रही थी। “ये क्या कर रही हो?” मैंने पूछा।

“कुछ नहीं खाने की तैयारी कर रही हूँ, क्यों खाना नहीं खाना है?” उसने पूछा।

“जब इतना अच्छा खाना सामने हो तो ये खाना किसको खाने का दिल करेगा”, मैंने उसकी चूचियों को दबाते हुए कहा।

“इसके लिये रात बाकी है, पहले ये खाना खाकर अपने में ताकत लाओ, फिर इस खाने को खाना।”

“ठीक है मेरी जान! जैसा तुम कहो…” मैंने जवाब दिया।

वो खाना बनाने में लग गयी। अचानक मैंने पूछा, “प्रीती! क्या तुम कुछ पीना पसंद करोगी, मेरा मतलब कुछ बीयर या रम?”

“मैं शराब नहीं पीती, और मुझे नहीं मालूम था कि ये गंदी आदत आपको भी है”, उसने कहा।

“जान मेरी! मुझे सब गंदी आदत है, जैसे शराब पीना, सिगरेट पीना, और तीसरी गंदी आदत का तो तुम्हें मालूम ही है”, मैंने हँसते हुए कहा।

“हाँ! मुझे अपनी पहली रात को ही पता चल गया था”, उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

हम दोनों खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगे। मैं बिस्तर पर लेट चुका था, प्रीती बाथरूम में थी। थोड़ी देर बाद वो बाथरूम से बाहर आयी, एक पारदर्शी नाइटी पहने हुए। उसका गोरा बदन पूरा झलक रहा था। उसके बदन को देखते ही मेरा लंड तन गया।

“नहीं मेरी जान! तुम ये कपड़े पहन कर नहीं सो सकती, चलो जल्दी से अपनी नाइटी उतारो और नंगी होकर आ जाओ, मेरी तरह … साथ ही अपने वो सैक्सी हाई हील के गोल्डन कलर के सैंडल पहन लो जो तुमने शादी के दिन पहने थे”, ये कहकर मैंने चादर हटा कर उसे अपना तना लंड दिखाया। उसका चेहरा शरम के मारे खिल उठा और उसने अपनी नाइटी उतार दी और खुश्किस्मती से उसने बिना कुछ सवाल पूछे अपने सैंडल भी पहन लिये।

उसे अपने बाँहों में भरते हुए मैंने बिस्तर पर लिटा दिया और कहा, “डार्लिंग! ये हमारे फ्लैट पर पहली रात है, आओ खूब चुदाई करें और मज़े लें।”

मेरे हाथ उसके शरीर को सहला रहे थे। मेरे होंठ उसके होंठों पे थे और मेरी जीभ उसके मुँह में उसकी जीभ के साथ खेल रही थी। मैंने अपना मुँह उसकी छातियों के बीच छुपा दिया और उसके मम्मे चूसने लगा। एक हाथ से उसके मम्मों को जोर से भींचता तो उसके मुँह से सिस्करी निकल पड़ती, “ओहहह सुनील!!”

उसके मम्मे चूसते हुए मैं नीचे की तरफ बढ़ा और अपना मुँह उसकी गोरी और बिना बालों वाली चूत पर रख दिया। अब मैं धीरे से उसकी चूत को चाट रहा था।

उसके घुटनों को मोड़ मैंने उसकी छाती पर कर दिये जिससे उसकी चूत ऊपर को उठ गयी और मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदने लगा।

“ओह राज बहुत अच्छा लगा रह है, आआहहह … किये जाओ”, कहकर वो अपनी गाँड ऊपर को उठा देती।

मैं और तेजी से उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था।
“ओहहह डार्लिंग किये जाओ … औऔऔर जोर से, मज़ाआआआ आ रहा है, हाँआँआँ ऐसे ही किये जाओ”, कहते हुए उसकी चूत ने मेरे मुँह में पानी छोड़ दिया।

उसकी चींखने की और जोरदार सिसकरियों को सुन कर मैं सकते में आ गया, पर मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रख कर एक जोर का धक्का लगाया। मेरा लंड एक ही झटके में उसकी चूत में जा घुसा। “आआआ आआहह मर गयी”, वो चिल्लायी।

अब मैं धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। जैसे-जैसे मैं रफ़्तार बढ़ाने लगा, उसकी साँसें तेज होने लगी, उसके बदन में अकड़ाव सा आने लगा।

ये देख मैं अब जोर जोर से अपने लंड को उसकी चूत में डाल रहा था। प्रीती सिसकरियाँ भर रही थी, “ओहहह राज औऔऔर जोररर से!!! आहहह हाँआंआंआंआं ऐसे ही कियो जाओ!!!! हाँ राजाआआआ आज फाड़ दो मेरी चूत को।”

मेरे लंड के पानी में भी उबाल आ रहा था और वो छूटने को तैयार था। मैंने उसे चोदने की रफ़्तार और बढ़ा दी। वो भी अपनी जाँघें उठा मेरे थाप से थाप मिला रही थी, “ओओओहहहह … येसस… ऊऊऊहहह राज और जोर से… मेरा छूटने वाला है हाआआआआ, मैं… ऐंऐंऐं तो गयी।”

जैसे ही उसकी चूत ने पानी छोड़ा, मैंने भी दो चार करारे धक्के लगा कर अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों का शरीर पसीने में चूर था, फिर भी हम एक दूसरे को उन्माद के मारे चूम रहे थे और सहला रहे थे।

उसकी पीठ को सहलाते हुए मैंने कहा, “प्रीती तुम तो कमाल की हो।”

“क्यों क्या हुआ, मैंने ऐसा क्या किया?” उसने जवाब दिया।

“तुमने किया कुछ नहीं, पर मैंने आज से पहले तुम्हें इस तरह चिल्लाते, सिसकरियाँ भरते नहीं सुना, मुझे लगा कि तुम्हें चुदाई में मज़ा नहीं आता है”, मैंने कहा।

“राज मुझे तो इतना मज़ा आता है कि मैं उस वक्त भी जोर-जोर से चिल्लाना चाहती थी जब तुमने मेरी चूत का उदघाटन किया था, पर मैंने अपने आप को रोक लिया।”

“ऐसा क्यों किया तुमने?” मैंने पूछा।

“ये सोच कर कि घर में सबको पता लग जायेगा कि उनका लड़का अपनी नयी बहू को जोरों से चोद रहा है”, उसने जवाब दिया।

“हाँ ये तुमने ठीक किया… मैंने तो ऐसा सोचा ही नहीं था”, उसकी गाँड को सहलाते हुए मैंने कहा, “प्रीती चलो अब तुम्हारे दूसरे छेद का उदघाटन करना है।”

“दूसरे छेद का…? मैं समझी नहीं?” वो चौंकी, पर जब उसने मेरी अंगुलियों को अपनी गाँड में घुसते महसूस किया तो वो बोली, “कहीं तुम मेरी गाँड तो नहीं मारना चाहते?”

“तुम सही कह रही हो मेरी जान! यही तो वो दूसरा छेद है जिसे मैं चोदना चाहता हूँ”, मैंने और जोरों से अपनी अँगुली उसकी गाँड में घुसाते हुए कहा।

“नहीं राज! गाँड में नहीं, बहुत दर्द होगा”, उसने रिक्वेस्ट करते हुए कहा।

“अब चुपचाप घुटनों के बल हो जाओ”, मैंने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा, “आज तुम्हारी गाँड को चुदवाने से कोई नहीं रोक सकता।”

मेरी बात मानते हुए वो घुटनों के बल हो गयी। मैंने उसके सिर और कंधों को तकिये पर दबाते हुए उसे अपनी गाँड को चौड़ा करने को कहा। उसने अपने दोनों हाथों से अपनी गाँड को चौड़ा कर दिया। अब मुझे उसकी गुलाबी गाँड का नज़ारा साफ दिखायी दे रहा था, साथ ही उसकी चूत भी ऊपर को उठी हुई थी। मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा और अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी।

अपनी एक अँगुली पर वेसलीन लगा कर मैं उसकी गाँड के छेद को अच्छी तरह चिकना करने लगा। जैसे ही उसकी चूत चाटते हुए मैंने अपनी अँगुली उसकी गाँड के अंदर डाली तो उसके मुँह से मीठी सी सिसकरी निकल पड़ी। “लगता है तुम्हें अब मज़ा आ रहा है”, मैंने हँसते हुए कहा।

“हाँ! अच्छा लग रहा है”, उसने कहा।

एक, दो, फिर तीन, इस तरह मैंने अपनी चारों अँगुलियाँ उसकी गाँड में डाल दी। “ओह राज निकाल लो… दर्द हो रहा है, वो दर्द के मारे छटपटायी।” मगर उसकी बात ना सुनते हुए मैंने अपनी अँगुलियाँ अंदर बाहर करनी शुरू कर दी।

अब उसे भी मज़ा आने लगा था, “हाँ राज! किये जाओ अब अच्छा लग रहा है”, वो सिसकरी भरते हुए बोली।

जैसे ही मैंने अपनी अँगुली उसकी गाँड के फ़ैले हुए छेद से बाहर निकाली तो वो तड़प के बोली, “तुम रुक क्यों गये, किये जाओ ना … बहुत मज़ा आ रहा था।”

“थोड़ा सब्र से काम लो प्रीती डार्लिंग! अब मैं अँगुली से भी ज्यादा अच्छी चीज़ तुम्हारी गाँड में डालुँगा”, ये कहकर मैं अपने लौड़े पर भी अच्छी तरह वेसलीन लगाने लगा।

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी गाँड के छेद पर रखा, वो बोली, “राज! क्या तुम्हारा इतना मोटा लंड मेरी गाँड में डालना जरूरी है, मुझे डर लग रहा है कि कहीं ये मेरी गाँड ही ना फाड़ दे और मैं दर्द के मारे मर जाऊँ।”

“डार्लिंग! किसी ना किसी दिन तो डालना ही है तो… आज ही क्यों नहीं? हाँ शुरू में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा ही मज़ा आयेगा”, ये कहकर मैंने अपने लंड का दबाव धीरे से बढ़ाया। जैसे ही मेरा लंड उसकी गाँड में घुसा वो दर्द के मरे चिल्ला पड़ी, “राज निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है।”

उसकी चिल्लाहट पर ध्यान ना देते हुए मैं अपने लंड को उसकी गाँड में घुसाने लगा। जैसे-जैसे मेरा लंड उसकी गाँड में घुसता, मुझे अपने लंड में एक अजीब सा तनाव महसूस होता।

“राज!!! प्लीज़ निकाल लो!!! प्लीईईज़ निकाल लो!!! बहुत दर्द हो रहा है”, वो छटपता रही थी।

मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक जोर का धक्का दिया और मेरा लंड उसकी गाँड की दीवारों को चीरता हुआ जड़ तक समा गया।

“आआआ गयीईईईईई मर गयी!!” वो जोर से चिल्लायी और रोने लगी। उसकी आँखों में आँसू आ गये।

“शशशशश डार्लिंग, रोते नहीं, जो दर्द होना था, हो गया, अब मज़ा ही आयेगा”, कहकर मैं अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा।

उसकी गाँड बहुत ही टाइट थी जिससे मुझे धक्के लगाने में तकलीफ हो रही थी। मैं उसकी गाँड में धक्के लगा रहा था और साथ ही साथ उसकी चूत को अँगुली से चोद रहा था।

“ओह प्रीती! तुम्हारी गाँड कितनी टाइट है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है”, कहकर मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। कुछ जवाब दिये बिना वो दर्द में छटपता रही थी। करीब दस मिनट की चुदाई के बाद उसे भी मज़ा आने लगा “ओहहह राज!!! अब अच्छा लग रहा है।”

मैं जोर-जोर से उसकी गाँड मार रहा था और अपनी अँगुली से उसकी चूत को चोद रहा था। मेरा पानी छूटने वाला था और उसके बदन की कंपन देख कर मुझे लगा कि वो भी अब छूटने वाली है। अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए मैंने अपना पानी उसकी गाँड में छोड़ दिया। उसका भी शरीर कंपकंपाया और उसकी चूत ने मेरे हाथों पर पानी छोड़ दिया।

मैंने अपना लंड उसकी गाँड में से निकाले बगैर पूछा, “क्यों प्रीती डार्लिंग! अपनी गाँड की पहली चुदाई कैसी लगी?”

“कुछ अच्छी नहीं, बहुत दर्द हो रहा है! अच्छा अब अपना लौड़ा मेरी गाँड से बाहर निकालो”, उसने अपनी आँखों से आँसू पौंछते हुए कहा।

“अभी नहीं मेरी जान! मैं एक बार और तुम्हारी गाँड मारना चाहता हूँ”, मैंने अपने लंड को फिर उसकी गाँड में अंदर तक घुसा दिया।

“क्या राज!!! ये करना जरूरी है क्या? मुझे तुम्हारा लंड मेरी गाँड में घुसते ही कुछ ज्यादा मोटा और लंबा होता लग रहा है”, वो छटपटायी। मैं अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। उसकी गाँड में मेरा पानी होने से इस बार इतनी तकलीफ नहीं हो रही थी और मेरा लंड आराम से उसकी गाँड की जड़ तक समा जाता।

मैं जोर-जोर से उसकी गाँड मारने लगा और अपनी अंगुलियों से फिर उसकी चूत को चोद रहा था। उसे भी मज़ा आने लगा और वो बोल पड़ी, “हाँ राज!!! जोर-जोर से… मज़ा आ रहा है।”

जब हम दोनों का पानी छूट गया तो मैंने उसे बाँहों में भरते हुए पूछा, “क्यों अबकी बार कैसा लगा?”

“पहली बार से अच्छा था”, उसने जवाब दिया।

“जैसे-जैसे चुदवाओगी… तुम्हें और मज़ा आने लगेगा। याद है तुम मेरा वीर्य पीना नहीं चाहती थी और अब तुम एक बूँद छोड़ती नहीं हो”, ये कहकर मैं उसे बाँहों में भर कर सो गया।

दूसरे दिन अपनी मोटर-साइकल पर ऑफिस जाते हुए मैं सोच रहा था कि ऑफिस में मेरी तीनों असिसटेंट और रजनी मेरी शादी की बात सुनकर क्या कहेंगी… क्या सोचेंगी।

मेरे केबिन में पहुँचते ही तीनों ने मुझे घेर लिया, “थैंक गॉड! राज तुम आ गये”, शबनम ने मुझे गले लगाते हुए कहा।

“समीना मुझे स्टोर रूम की चाबी दो, मैं तो एक सैकेंड भी अब इंतज़ार नहीं कर सकती”, गौरी ने कहा।

“नहीं!! राज से पहले मैं चुदवाऊँगी, मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है”, समीना ने अपनी चूत को सहलाते हुए कहा।

“रुको! तुम तीनों रुको! पहले मेरी बात सुनो, मेरे पास तुम लोगों के लिये एक खबर है”, उनका रियेक्शन देखने के लिये मैं थोड़ी देर रुका फिर बोला, “मैंने शादी कर ली है।”

“ओह नहीं!!” तीनों एक साथ बोली।

उनके चेहरे पर दुख देख कर मैं बोला, “सुनो हम लोगों के रिश्ते में कोई फ़र्क नहीं आने वाला। मैं तुम तीनों का यहाँ ऑफिस में ख्याल रखुँगा और अपनी बीवी का घर पर… समझी! चलो सब अपने काम पर जाओ और मुझे भी सब समझने दो, शाम को स्टोर रूम में मिलेंगे।”

वो तीनों खुश होकर चली गयी पर असली शामत तो रजनी से आने वाली थी। पता नहीं मेरी शादी की बात सुनकर वो क्या कहेगी, क्या करेगी। जो होगा देखा जायेगा।

समय गुजर रहा था। मैं अपने लंड से तीनों एसिस्टेंट्स को ऑफिस में और प्रीती को घर पर मज़े देता था।

हमारी कंपनी हर साल एक बहुत बड़ी पार्टी रखती थी जिसमें हर स्टाफ को उसके परिवार के साथ बुलाया जाता था।

इस बार की पार्टी शहर के सबसे बड़े क्लब, नेशनल क्लब में रखी गयी थी। मैं और प्रीती तैयार होकर क्लब पहुँचे। क्लब में घुसते हुए मैंने प्रीती से कहा, “प्रीती! ये इस शहर का सबसे बड़ा क्लब है और मैं एक दिन इसका मेंबर बनना चाहता हूँ, क्यों सुंदर है ना?”

“हाँ! काफी सुंदर है”, उसने जवाब दिया।

हम लोग लॉन में पहुँचे तो मैंने देखा कि काफी लोग आ चुके थे। “आओ प्रीती! मैं तुम्हें अपने साथियों और दोस्तों से मिलाता हूँ”, मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।

जब हम मेरे दोस्तों के बीच पहुँचे तो एक ने कहा, “आओ राज! अरे ये क्या, तुम्हारे हाथ में ड्रिंक नहीं है?”

“मैं अभी तो आया हूँ, जल्दी क्या है आ जायेगी”, मैंने जवाब दिया।

“अरे ये वेटर सब आलसी हैं, जाओ… तुम खुद बार पर से ड्रिंक क्यों नहीं ले आते”, उसने जवाब दिया।

मैं प्रीती को वहीं छोड़ कर बार की तरफ ड्रिंक लेने के लिये बढ़ा तो देखा कि रजनी सेल्स मैनेजर से बात कर रही थी। उससे नज़रें बचाते हुए मैं अपनी ड्रिंक ले कर एक भीड़ में जा कर खड़ा हो गया जिससे वो कोई तमाशा ना खड़ा कर सके।

अचानक मैंने अपने कंधों पर किसी का हाथ महसूस किया। पलट कर देखा तो रजनी खड़ी थी। “हाय राज! कैसे हो?” उसकी आवज़ में दर्द था।

“हाय रजनी! मैं ठीक हूँ, तुम कैसी हो?” मैंने जवाब दिया।

“मुबारक हो”, शबनम कह रही थी कि, “तुमने शादी कर ली”, उसने अपने हाथों से अपने आँसू पौंछते हुए कहा।

“ऑय एम सॉरी रजनी! प्लीज़ शाँत हो जाओ, अपने आप को संभालो”, मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा।

“डरो मत! मैं कोई तमाशा नहीं खड़ा करूँगी। क्या तुम अपनी पत्नी से नहीं मिलवाओगे?” उसने हँसते हुए अपने रूमाल से अपने आँसू पौंछे।

“मेरा विश्वास करो रजनी! मैं लाचार था, पिताजी ने शादी पक्की कर दी और मैं उन्हें ना नहीं कर सका”, मैंने कहा।

“मैं समझती हूँ! शायद यही तकदीर को मंजूर था”, उसने जवाब दिया।

मैं रजनी को लेकर प्रीती के पास आ गया।

“प्रीती इनसे मिलो! ये रजनी है, अपने एम-डी की भतीजी!!”

“और रजनी ये प्रीती है, मेरी पत्नी।”

“मममम तुम्हारी बीवी काफी सुंदर है, इसलिये तुमने फटाफट शादी कर ली”, उसने हँसते हुए कहा। हम तीनों बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं बोला, “तुम लोग बातें करो, मैं एम-डी से मिलकर आता हूँ।”

मैं अपने एम-डी और मिस्टर महेश के पास पहुँचा तो देखा कि वो लोग कुछ डिसकशन कर रहे थे। इतने में एम-डी मुझसे बोले, “हे राज! वहाँ खड़े मत रहो, एक कुर्सी खींचो और यहाँ बैठ जाओ।”

मैं कुर्सी खींच कर बैठ गया।

“सर!! आपने उस औरत को देखा?” महेश ने एम-डी से पूछा।

“किसे??” एम-डी ने नज़रें घुमाते हुए कहा।

“वो जो सफ़ेद साड़ी और सफ़ेद सैंडल पहने खड़ी है, वो जिसका अंग-अंग मचल रहा है”, महेश ने अपने होंठों पर जीभ घोमाते हुए कहा।

“हाँ देखा! काफी सुंदर है!” एम-डी ने जवाब दिया।

“सर!! आपने उसके मम्मे देखे, उसके लो कट ब्लाऊज़ से ऐसा लगता है कि अभी बाहर उछाल कर गिर पड़ेंगे …” महेश ने ललचायी नज़रों से देखते हुए कहा।

“हाँ महेश!!! देख कर ही मेरे लंड से तो पानी छूट रहा है …” एम-डी ने कहा।

“सर! मेरा तो छूट चुका है और अंडरवीयर भी गीली हो चुकी है …” महेश ने कहा।

“महेश! क्या तुम जानते हो वो कौन है?” एम-डी ने पूछा।

“नहीं सर! मैं उसे आज पहली बार देख रहा हूँ”, महेश ने जवाब दिया।

“हमें पता लगाना होगा कि वो कौन है … राज! जरा पता तो लगाओ कि ये महिला कौन है और किसके साथ आयी है?” एम-डी ने कहा।

“किसका सर?” मैंने घूमते हुए पूछा।

“वो जो सफ़ेद साड़ी और सफ़ेद हाई-हील के सैंडल पहने खड़ी है … और मेरी भतीजी रजनी से बातें कर रही है।” एम-डी ने कहा।

“वो??? सर! वो मेरी वाइफ प्रीती है”, मैंने हँसते हुए जवाब दिया।

“तुमने हमें बताया नहीं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है”, एम-डी ने शिकायत की।

“सर बस… मौका नहीं मिला”, मैंने जवाब दिया।

“क्या तुम हमारा उससे परिचय नहीं कराओगे?” एम-डी ने कहा।

“जरूर सर!” इतना कह मैं प्रीती को ले आया।

“प्रीती इनसे मिलो! ये हमारी कंपनी के एम-डी, मिस्टर रजनीश हैं और ये मिस्टर महेश हैं।”

“सर! ये मेरी वाइफ प्रीती है”, मैंने उनका परिचय कराया।

“नमस्ते!!!” प्रीती ने कहा।

“तुम बहुत सुंदर हो प्रीती! आओ यहाँ बैठो, हमारे पास…” एम-डी ने प्रीती को कहा।

“नहीं सर! मैं यहीं ठीक हूँ”, कहकर वो सामने की कुर्सी पर बैठ गयी।

थोड़ी देर में रजनी आ गयी, “चलो राज और प्रीती! खाना लग गया है।”

“एक्सक्यूज़ मी सर!!” ये कहते हुए मैं और प्रीती, रजनी के साथ चले गये।

रात को हम घर पहुँचे तो प्रीती ने कहा, “राज! तुम्हारे बॉस अच्छे लोग नहीं हैं, कैसे मुझे घूर रहे थे, लग रहा था कि मुझे नज़रों से ही चोद देंगे।”

“ऐसा कुछ नहीं है जान! तुम हो ही इतनी सुंदर कि जो भी तुम्हें देखे उसकी नियत डोल जायेगी.” मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

अगले दिन जब मैं ऑफिस पहुँचा तो मुझे महेश ने कहा कि एम-डी ने मुझे रात आठ बजे होटल शेराटन में उनके सूईट में बुलाया है, कोई मीटिंग है।

कहानी जारी रहेगी. Hindi Sex Stories

Hii doston ye meri pehli kahani hai..mera name Kabir hai aur main bihar ke seohar jile se belong krta hu ye kahani 9 may 2025 ki hai jab mere ghar ke sare log ek sath bengal gye the ek shadi attend krne..mere ghar se 100 meter ki duri pe ek manisha name ki ladki jiski umar 16 saal hai aur gaon ke rishte me manisha meri behen lagegi..manisha ke papa delhi me guard ka kaam krte hai aur bada bhai (19 yrs)loan leke bahar engineering padhne gya hai aur uski ek choti behen bhi hai jo lagbhag 10 saal ki hai aur wo apne nani ke ghar hi rhti hai..manisha apne mummy aur dada ji ke sath gaon me rhti hai aur chuki gaon me log mujhe padha likha aur acha ladka samjhte hai to meri ijjat bhi krte hai aur main ye bhi bata du ki mere pita ji peechle 8 saal se avi tk gaon ke mukhiya hai . 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सबसे पहले तो मैं गुरूजी का Hindi Porn Stories आभार मानता हूँ कि उन्होंने मेरी सही अनुभव वाली दो कहानियाँ ‘स्वर्ग का अनुभव-१’ और ‘स्वर्ग का अनुभव-२’ प्रस्तुत की ! इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है इसलिए जिसको काल्पनिक कहानी में ही मजा आता हो वो यह कहानी नहीं पढ़े ! मेरी पहली दो कहानी के बाद मुझे बहुत सारे मेल मिले ! इसलिए आज मैं मेरी तीसरी सही अनुभव वाली कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ!

मैं अहमदाबाद में रहने वाला ३६ साल का लड़का हूँ! मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट मेनेजर की जॉब करता हूँ! आज मैं जो कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूँ वो उन्हीं में से एक लड़की की है जिसने मुझे मेल किया था ! उसका नाम कविता हे ! उसी की इच्छा थी कि मैं हम दोनों की कहानी लिखूँ ! उसी की इच्छा को मान देते हुए मैं यह कहानी लिख रहा हूँ ! वो भी अहमदाबाद में रहती है! उसने मेरी कहानी पढ़कर मुझसे मिलने का प्रस्ताव रखा था ! तो लीजिये अब आप सुनिए उसी की कहानी !

मेरी एक फ़ैन थी कविता ! मुझे भी उसमे बहुत दिलचस्पी होने लगी थी ! मैं भी उसको मिलने के लिए बेकरार था ! उसका मेल आते ही मैंने अपना सेल नंबर उसको भेजा था ! और एक दिन उसका फ़ोन मेरे मोबाइल पर आया ! पहले उसने मेरे बारे में जानकारी ली और फिर उसने मुझसे मिलने के लिए बोला !

मैं भी एक दिन ऑफिस में से आधी छुट्टी लेकर उसको मिलने के लिए चला गया ! हम रास्ते में कहीं मिले फिर हमने होटल में जाने का तय किया ! हम दोनों होटल में चले गए ! मैंने पहले स्नान कर लिया ! फिर मैं कमरे में आ गया ! तो अचानक उसने बोला कि मैं तुमसे नहीं मिल पाऊँगी ! वो कुछ घबराई हुई मुझे लगी ! क्योंकि पहली ही मुलाकात में हम होटल में पहुँच गए थे ! मेरी इच्छा उसे मिलने की बहुत थी ! मैं सोचता था कि काश वो मेरी लाइफ में होती तो मजा आ जाता ! वो दिखने में भी काफी खूबसूरत थी ! उसने बोला कि मैं तुमको छू भी नहीं पाऊँगी !

हमने थोड़ी देर बातें की फिर मैंने उसकी इच्छा को मानते हुए उसे जाने दिया ! मैं उस दिन तड़पता ही रह गया !

उसकी याद मेरे दिल से नहीं गई थी ! इस लिए मैंने उसे एक दिन मेल कर दिया ! तो उसका भी साथ ही फ़ोन आया कि हम युगल-कमरे में मिलते हैं! मुझे लगा कि युगल-कमरे में भी वो मुझे छूने नहीं देगी !

उस दिन हम दोनों युगल-कमरे में पहुँच गए ! मैं सोच रहा था कि उसको छू लूं या नहीं !

उसने अचानक मेरे हाथ को अपने चूचियों पर रख दिए ! मुझे तो लग रहा था कि मैं कोई सपना देख रहा हूँ ! पर यह हकीकत थी ! फिर मैंने उसके चूचियाँ उसके शर्ट से बाहर निकाल दी ! उसकी चूचियाँ क़यामत थीं ! बिल्कुल तनी हुईं। उसके निप्पल बहुत ही ख़ूबसूरत थे।। मैंने उसकी चूचियों को हाथों से मसलना शुरु कर दिया और फिर दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा। हम दोनों को काफी मज़ा आ रहा था ! फिर मैंने उसकी पैंटी में अपना हाथ डाल दिया ! उसने अपनी पैंटी नीचे कर दी !

फिर मैं अपनी ऊँगली से उसकी चूत को सहलाने लगा ! उसके चूत में एक अजीब सी महक थी ! वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी ! फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में मेरी पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया और मसलने लगी ! मैंने अपना ७’’ के लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे दिया ! उसको मेरा लंड बहुत पसंद आया ! फिर उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया ! मैं अब आपे में नहीं रह पाया ! फिर वो मेज़ पर आ गई ! मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया ! मैं काफी अन्दर तक अपनी जीभ ले जा कर उसकी चूत को चाटता था ! वो अब मदहोश होने लगी थी ! उसे बहुत मजा आने लगा ! मैं उसकी चूत का सारा पानी निगल गया ! वो अब बहुत उत्तेजित हो चुकी थी ! फिर मैंने खड़े हो कर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया ! फिर मैं उसकी चुदाई करने लगा ! मैं बहुत जोर से धक्का देकर चुदाई करने लगा ! उसको भी उसमें बहुत मजा आने लगा ! ऐसा करने से आवाज भी बाहर जाने लगी थी ! पर हम तो अपने में ही मस्त हो चुके थे ! हम दोनों उस वक्त सेक्स में पूरे खो चुके थे ! फिर मैंने अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया ! वो भी झड़ चुकी थी ! उस दिन स्वर्ग का अनुभव क्या होता है वो हमने महसूस कर लिया !

उस दिन के बाद हम दो बार और कमरे में मिले थे !

अगर आपको मेरी सही अनुभव वाली कहानी पसंद आई हो तो मुझे मेल करे ! Hindi Porn Stories

भाई और बहन की चुदाई का मजा मेरी मौसी की जवान बेटी ने मुझे दिया. हम शुरू से दोस्तों की तरह थे, खुल कर बात करते थे. हम दोनों के बीच सेक्स सम्बन्ध कैसे बने?

नमस्ते, मैं राज आज आपके सामने अपने साथ घटी इस भाई और बहन की चुदाई कहानी को पेश करने जा रहा हूँ.

मैं एक साधारण तौर तरीके से रहने वाला लड़का था.
पर मेरी लाइफ में ऐसे उतार-चढ़ाव आए कि क्या बताऊं.

मैं उस वक्त तक सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानता था.

जब मैं पॉर्न देख कर व सेक्स कहानी पढ़ कर सेक्स को समझने लगा तो उसको महसूस करने लगा.
तब मेरा ब्लूफिल्म देखने से ज़्यादा पढ़ने में इंटरेस्ट था.

इसी रूचि ने मुझे इन्सेस्ट की तरफ मोड़ा और अन्तर्वासना से मिलवाया.

बस फिर क्या था अन्तर्वासना को पढ़ना मेरी जीवन में एक आवश्यक हिस्सा बन गया.
अन्तर्वासना को मुझे पढ़ते हुए कई साल हो गए.
मैं इन्सेस्ट को जान ही चुका था.

जब मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, तब मेरे साथ मेरी मौसी की बेटी भी पढ़ रही थी.
हमारी उम्र बराबर की है.

मैं उसके बारे में आपको अभी जानकारी नहीं दूंगा, सेक्स कहानी को आप आगे पढ़ोगे, तब आप खुद ही समझ जाओगे कि वो देखने में कैसी थी.

हमारे कॉलेज पास में ही थे. पर मैं कभी उससे मिलने नहीं जाता था.
हम दोनों भाई बहन कम, दोस्त ज़्यादा थे.

उसने मुझे अपनी एक सहेली को गर्लफ्रेंड बनाने में मदद भी की थी लेकिन उसकी सहेली से मेरा रिश्ता ज़्यादा समय तक नहीं चला था.

जब मैं उसके घर गया था, तब थोड़ा कॉलेज में जाने के बाद जो परिपक्क्वता आती है ना, उसकी वजह से मैं खुद में ही मस्त रहने लगा था.

उसके साथ पहले जैसी बातें भी नहीं कर रहा था तो उसने मुझसे पूछ लिया- क्या हुआ है तुम्हें, तुम पहले जैसे नहीं रहे?

मैंने उसे यूं ही बता दिया कि कॉलेज की टेंशन की वजह ऐसा हो रहा है.
उस वक्त मैंने उसकी आंखों में कुछ अलग सी चमक देखी थी.

दरअसल उस सुबह उसने मेरे मोबाइल में क्रोम की हिस्टरी पर अन्तर्वासना साइट को देखा था.
वो मुझ पर नज़र रख रही थी और दोपहर में उसने मुझे लंड हिलाते हुए भी देख लिया था.
यह बात उसने मुझे बाद में बताई थी.

उसके बाद मैंने नोटिस किया कि वो दुपट्टा इस्तेमाल नहीं कर रही है और बार बार किसी ना किसी वजह से मेरे पास आ रही है.
झाड़ू लगाने से खाना परोसने तक उसने मुझे अपना बदन दिखाया था.

खाना परोसते हुए जब वो झुकी, तो मुझे उसके मम्मे लगभग 60% दिख गए थे.
वो देख कर तो मैं पागल हो गया था.
पर तब मुझे वो सब ग़लत लगा था.

फिर बाद में जब मैं अपने घर गया तो बार बार मुझे उसकी चूचियों की ही याद आ रही थी.
वो देख कर और उसे याद करके मैं बहुत ज्यादा गर्म हुआ था उअर मैंने कई बार मुठ मारी.

कुछ ही समय में मैं अपनी बहन को पाने के लिए पागल हो गया था.
हर बार मैं उसी की याद में लंड हिलाने लगा था.

कुछ दिन बीतने के बाद जब हम कॉलेज गए, वहां में उससे दोबारा मिलने लगा; हमेशा कुछ ना कुछ बहाना बनाकर साथ रहने लगा, उसके बूब्स को देखने लगा.

पर इतनी मेहनत के बावजूद भी कुछ ख़ास फर्क नहीं हुआ, ना ही उसने कुछ सिग्नल दिया.
मैं कुछ नहीं कर पाया.

फिर एक दिन मैंने उसे घूमने के लिए मना लिया.
हम दोनों मेरी बाइक पर चले गए.

मैं बार बार ब्रेक इस्तेमाल करने लगा ताकि उसके बूब्स मेरी पीठ को टच करें.

शायद वो भी मेरी हरकत को नोटिस कर रही थी मगर उसने कुछ नहीं कहा.

हम दोनों ने पिज़्ज़ा खाया और एक फेमस होटल में कॉफी पीने चले गए.

वहां जब मैं अपनी बहन के सामने बैठा था तो वो कुछ झुक कर मोबाइल में देख रही थी.
मैं बार बार उसके बूब्स को देखने लगा.
उसने भी मेरी नजरों का पीछा किया, पर वो कुछ नहीं बोली.

फिर जब मैं घर पर था तो उसके साथ चैट करने लगा व्हाट्सैप पर!
दरअसल हमारे यहां एक प्रोग्राम था, मैं उसे उसी के बारे में बता रहा था.

मैं- यार, उस दिन के बारे में थोड़ी बात करनी थी.
जिया- कौन सी बात, बोल ना!

मैं- हम घूमने गए थे न, उस दिन वाली बात.
जिया- अच्छा, क्या बात?

मैं- मुझे माफ़ कर दे यार!
जिया- किस बारे में बोल रहा है तू?

मैं- यार मैं पागल हो गया था जो बार बार तेरे उन्हें देख रहा था.
जिया- मतलब?

मैं- यार प्लीज़ सॉरी यार मुझे माफ़ कर दे, मैं तेरे पैर पड़ता हूँ.
जिया- तुम क्या बोल रहे हो?

मैं- यार वही जो कॉफ़ी पीते वक़्त देख रहा था, प्लीज़ यार आई एम रियली सॉरी यार.
जिया- हम्म … वो!
मैं- प्लीज़ यार माफ़ कर दे प्लीज़.

नो रिप्लाई.

मैं- प्लीज़ यार ई’म रियली सॉरी यार.
जिया- हां ठीक है.

मैं- यार प्लीज़ प्लीज़ सॉरी सॉरी.
जिया- हां कहा ना, ठीक है. पर पता है, उस दिन मुझे बहुत डर लग रहा था.

मैं- मैं मर जाऊंगा यार, ऐसा कुछ मत बोल … ग़लती हो गयी थी मुझसे प्लीज़ माफ़ कर दे.
जिया- ओके.

ब्लॉक्ड …

मैं शॉक्ड.

दो महीने तक मैं ब्लॉक रहा था.
फिर एक दिन उसी का कॉल आया.

जिया- कॉलेज आई हूँ कब से मिलने नहीं आया तू … आ जा मेडिकल के सामने खड़ी हूँ.
मैंने कहा- ओके.

मैं उससे मिलने गया और हम दोनों ने करीब एक घंटा तक बातें की. पर मुश्क़िल से मैं उससे नज़र मिला पा रहा था.
बाद में ऐसे ही दो महीने निकल गए.

फिर एक दिन उसी ने कॉल किया और कहा कि घूमने चलते हैं.
बारिश का मौसम था.

मैंने पूछा- कहां जाना है?
तो बोली- कहीं बाहर चलते हैं वॉटरफॉल वगैरह देखने के लिए.

मैंने कहा- ठीक है.

मैं पहले वाली बात को अभी तक नहीं भूला था, पर पता नहीं वो क्यों इतना फ्री होकर बात कर रही थी.
फिर अगले दिन हम दोनों चल दिए.

हम चार लोग थे. वो, उसके 2 दोस्त और मैं.
मैं और वो एक बाइक पर थे.

हमें निकले हुए अभी आधा घंटा ही हुआ था कि बारिश शुरू हो गयी.

मैंने पूछा- रुकना है क्या?
वो बोली- नहीं, आज भीगना है मुझे … चलो.

उसके दोस्त तो रुक गए, हम आगे चल दिए.

थोड़ा आगे जाने के बाद मुझे महसूस हुआ कि वो मुझसे चिपक कर बैठी है.
मैं थोड़ा आगे को हो गया.
वो और आगे हो गयी.

फिर मैं थोड़ा और आगे हुआ, वो फिर से आगे आने लगी.

मैंने कहा- थोड़ा पीछे को हो जा!
वो कुछ नहीं बोली. दस मिनट तक चुप थी.

बाद में वो फिर से चिपक गयी.
इस बार मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया.
मैं वैसे ही बैठा रहा.

वो अपने बूब्स मेरी पीठ पर दबा रही थी, ये मुझे साफ़ महसूस हो रहा था.
पर मैं कुछ कर नहीं पा रहा था.
उन्हें पाने की चाहत तो मुझमें भी थी, पर मन में डर बहुत था इसलिए चुप था और कुछ कर नहीं पा रहा था.

फिर कुछ ही मिनट के बाद मैं बोल पड़ा- यार जिया, ये क्या कर रही है? इतना क्यों चिपक कर बैठी है?
उसने कहा- अरे थोड़ी ठंड लग रही है.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है.

मुझे उसके बूब्स बहुत अच्छे से महसूस हो रहे थे और करेंट सा दौड़ रहा था तो बॉडी में हलचल तो होनी ही थी.
पर मैंने कुछ नहीं किया.

हम दोनों घूम कर वापस आ गए.
उसने मुझे उसी होटल पर ले जाने के लिए कहा जहां हम पिछली बार गए थे और वो सब दूध देखने की घटना घटी थी.

उस दिन इससे ज्यादा कुछ ख़ास नहीं हुआ.
दस दिन बाद उसका बर्थडे था तो मैंने रूम पर ही सेलीब्रेट करने का प्लान बनाया था.

मेरा भाई और वो ऐसे हम 3 लोग थे.
सेलिब्रेशन हुआ.
भाई को कॉल आया तो वो केक खिला कर बाहर चला गया.

मैंने भी उसे केक खिलाया और भाई ने पहले ही जिया के चेहरे पर केक लगाया था.
जिया वो सब साफ़ करके वॉशरूम से बाहर आ गयी.

तब मैंने देखा कि अभी ठीक से साफ़ नहीं हुआ है.
मैंने उसे बताया कि अभी ठीक से साफ़ नहीं हुआ है.
उसने कहा- तू ही साफ़ कर दे.

मैं साफ़ करने लगा.
उसके बालों में और कान के पीछे भी थोड़ा लगा था तो मैंने हटा दिया.

पर पता नहीं क्या हुआ, जैसे ही कान के पीछे का निकालने लगा, वो मेरी तरफ नशीली आंखों से ऐसे देख रही थी मानो अभी किस कर दे.
लेकिन पहल कौन करे, इसी में मामला रह गया और तभी भाई आ गया.

आग दोनों तरफ लगी थी बस चिंगारी किसकी तरफ से होगी, ये पता नहीं था.
कुछ दिन बाद हम दोनों फिर से घूमने चले गए.

इस बार हम 8-10 लोग थे.
उसके और मेरे भाई के कुछ दोस्त थे.

इस बार भी वो मेरे साथ ही मेरी बाइक पर बैठ गयी.
बारिश तो पहले से ही हो रही थी तो सबने भीगते हुए जाने का फ़ैसला किया था.

सब चल दिए.

मैंने पहले थोड़ा पीछे रहने की कोशिश की लेकिन हमारे साथ कुछ जी एफ, बी एफ वाले बंदे थे तो वो हमारे भी पीछे रहने लगे.
मैंने बाद में बाइक तेज़ चलाना चालू कर दिया.

जैसे ही हम थोड़ा आगे निकल गए, जिया ने अपना जादू चालू कर दिया.
वो मुझसे चिपक कर बैठ गयी.

इस बार मैं भी थोड़ा हंस पड़ा और अच्छा महसूस करने लगा.
थोड़े समय बाद मैंने उसका हाथ थोड़ा नीचे खिसका दिया.
मतलब सीधा लंड पर रख दिया.

पहले तो उसने गुस्से में हाथ उठा लिया, मेरी गांड फट गयी और वो पीछे को होकर बैठ गयी.
इससे मेरी तो बत्ती गुल हो गयी.

मैंने बाइक स्लो की और डरते हुए कहा- तुम दूसरी बाइक पर बैठ जाओ.
उसने कुछ नहीं कहा, बस गुस्से में बोल दिया- चलते रहो.

कुछ देर बाद वो फिर से चिपक गयी और मेरे निप्पल के साथ खेलने लगी.
मैं ऐसी दुविधा में था कि मैं क्या करूं. मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था.

तभी …
जिया- कैसा लगा मेरा मज़ाक?
मैं एकदम शॉक था.

जिया- अरे बाबा, मैं मज़ाक कर रही थी. यार सॉरी.
मैं- अरे जिया, ये कोई मज़ाक होता है. आज तो मैं गया था काम से!

जिया- अरे नहीं यार, ये सब उसी दिन हो जाता.
मैं- कब किस दिन?

जिया- मेरे बर्थडे के दिन अगर भाई अन्दर ना आता तो मैं तुझे किस करने ही वाली थी.

मैं एकदम से खुश हो गया और बोला- कोई बात नहीं, इंतज़ार का फल मीठा होता है.
वो मेरे निप्पलों के साथ उंगली से खेले जा रही थी.

मैं- मुझसे अच्छे तो तेरे निप्पल हैं.
जिया- अच्छा तूने कब देखे?

मैं- अभी इतना चिपक कर बैठेगी तो उसकी पूरी जियोग्राफी समझ आ जाएगी.

जिया- अच्छा … सुन ना, मुझे अभी किस करना है, चलती बाइक पर!
मैं- चलती बाइक पर कैसे करेंगे? पागल है क्या?

जिया- मैं कुछ नहीं जानती, मुझे करना है मतलब करना है.
मैं- अच्छा ठीक है. रुक जरा सोचने दे.

मैंने बाइक स्लो की और कहा कि धीरे से आगे को आ जा.
जिया- कैसे?

मैंने उसे एक साइड से थोड़ा आगे किया और कहा- धीरे से तेरा लेफ्ट पैर साइलेंसर पर रख ले.
उसने वैसे ही किया, जिसकी वजह से वो एक साइड में खड़ी सी हो गयी.

मैंने बस इतना ध्यान में रखा कि बाइक की रफ्तार एक सीमा के ऊपर नहीं जानी चाहिए और वो फिसलने ना पाए.
फिर मैंने उससे कहा.

मैं- अब तुम अपना एक पैर मेरे सामने से मेरी एक बाजू में डाल ले.
जिया- पागल तो बोल देता ना कि हृतिक और कटरीना ने जो एक फिल्म में बाइक पर सीन किया था, वैसे करना है.
वो सामने बैठती हुई बोली.

मैं- मुझे क्या मालूम था कि तुझे …

तभी एकदम से उसने किस किया.
जिया- मुहहाआ …

किस हुआ और उसने मेरे लंड पर हाथ रख दिया.
जिया- साले पूरा गर्लफ्रेंड की तरह ट्रीट कर रहा है मुझे.

तभी पीछे दूर उसे बाइक्स आती दिखीं, तो उसने मुझसे कहा.
मैंने झट से अपनी बाइक रोकी और उतर गए.

हमारे दोस्त हमारे पास आ गए तो उन्हें बताया कि मुझे वॉशरूम जाना था, इसलिए रूके थे.

जब वो सब आगे चल दिए तो जिया बोली- सुन भाई, मुझे यार अब रहा नहीं जा रहा, मुझे सेक्स करना है.
मैं- पगली, ये तो कब से सलामी देने के लिए खड़ा है.
जिया- अच्छा.

उसने लंड पर हाथ रखते हुए पीछे से मेरे कान में कहा- एक बात बता?
मैं- जी पूछिए जानेमन.
जिया- इसका साइज़ कितना है?

मैं- क्या?
एकदम से ऐसे सवाल का मुझे अंदाज़ा नहीं था.

जिया- सच बता न … क्या साइज़ है? वैसे भी आज रूम पर जा कर देखने ही वाली हूँ.
मैं- यार कभी साइज़ चैक ही नहीं किया, पर मेरे ख़याल से होगा 6-6.5 के बीच.

जिया- अच्छा … अरे वाहह आज तो बहुत मज़ा आने वाला है.
मैं- लगता है तेरी चूत के जंगल में पूरी आग लग चुकी है.

जिया- हां यार.
मैं- एक बात बता, तेरे बूब्स का साइज़ क्या है?

जिया- शायद 32 होगा.
मैं- साला इतनी उम्र में भी तेरे बूब्स ऐसे लगते हैं, जैसे 2-3 बच्चों को दूध पिला कर आई हो.

जिया- हां यार, बहुत बड़ा साइज़ है न!
मैं- कोई ना, मुझे बड़े अच्छे लगते हैं.

हमारी इतनी गर्म बातों से मेरा लंड खड़ा हो गया और वो ऊपर से लौड़े को सहला भी रही थी.
मैं- अरे पागल इतना सहलाएगी तो मेरा निकल जाएगा. मैंने कभी औरत का टच नहीं फील किया, प्री-कम तो कब का आ चुका होगा.

जिया- मैं उसे बाहर निकाल रही हूँ.
ऐसा कहते हुए उसने ज़िप खोली और लंड बाहर निकाल लिया.

जैसे ही हाथ में लंड पकड़ा मेरा माल निकल गया.

जिया- तेरा साढ़े छह इंच से ज़्यादा बड़ा है और साले हिलाने तो देता, पकड़ते ही झड़ गया.
मैं- कहा था ना कि कभी टच नहीं फील किया.

हम ऐसे ही घूम कर वापस आ गए.
मेरे और मेरे भाई के कहने पर वो हमारे फ्लैट पर आ गयी.

पर भाई को कुछ अर्जेंट काम आ गया और वो तुरंत चला गया.

वैसे भी हम भीग कर आए थे.
मुझे गर्म पानी से नहाना था तो मैं बाथरूम में चला गया और जानबूझकर दरवाजा खुला रखा.

वो पीछे से आ गयी.
उसने लंड पकड़ा और हिलाने लगी.

एक बार मैं पहले ही झड़ चुका था, पर फिर भी तुरंत से दोबारा झड़ गया.

मैं मुड़ गया और बहन को किस करने लगा.
वो भी साथ देने लगी तो बहुत तेज़ किस करने लगा.

फ्रेंच किस टाइप किस करने लगा.
उसने बीच में रोका और कहा- साले, सांस तो लेने दे!
मैं- बेब आज कुछ मत बोल!

मैं उसके कपड़े उतारने लगा.

सलवार कुरती और बाद में मैंने जैसे ही ब्रा उतारी, मैं अपनी बहन के एक दूध को चूसने लगा और पागलों की तरह दूसरे को दबाने लगा.
वो भी मज़े ले रही थी.

फिर उसकी पैंटी में हाथ डाल कर चूत के साथ खेलने लगा.

कुछ ही पलों में मैंने उसकी पैंटी उतारी और नीचे बैठ गया.
मैंने उसकी चूत में उंगली डाल रखी थी.

फिर मैं जीभ लगा कर चूत के साथ खेलने लगा और चूत चाटने लगा.

पूरा बाथरूम उसकी सिसकारियों से गूँज उठा- अहह आह साले बहनचोद मर गई आह!
जब मैं रुका, तो उसने गुस्से से कहा- क्यों रुका भोसड़ी के.

ये कह कर उसने मेरा सिर वापस चूत में दबा दिया.
जिया- कर मादरचोद आआह मजा आ रहा है … आआहह मेरा निकलने वाला है … चूस साले.

बस उसका रस निकल गया, पूरा माल मेरे मुँह में आ गया.
फिर हम नहा कर बाहर आ गए.

उसने मेरा लंड सहलाना चालू किया और मुँह में ले लिया.
भाईसाहब क्या करेंट आ गया और मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा.

मैंने उसे उठाया और बेड पर ले जाकर लेटा दिया.
मैं उसकी चूत को चाटने लगा, उंगली डालने लगा.

वो फिर से गर्म सिसकारियां लेने लगी.
उसने कहा- बहन के लौड़े अब रहा नहीं जा रहा … दाग दे बंदूक अन्दर पेल दे कंडोम लगा जल्दी से मां के लौड़े.

मैं कंडोम लगा कर लंड चूत में डालने लगा.
जब थोड़ा सा अन्दर गया तो मुझे बहुत दर्द हुआ, मैंने तुरंत बाहर निकाल लिया.

जिया- चूतिए, बाहर क्यों निकाला … वापस डाल.
इस बार जब थोड़ा अन्दर गया तो पहले से ज़्यादा दर्द हुआ और मैं चिल्ला दिया ‘आआह …’
जिया को लगा कि मैं फिर से बाहर निकालूँगा.

उसने अपने पैरों को मेरी गांड पर दबा दिया.
मैं एकदम से चीख उठा.

‘आआह भोसड़ी की पहले बता तो देती.’
जिया- थोड़ी देर ऐसे ही रहने दे.

दर्द थोड़ा ठंडा हुआ तो मैंने झटके देना चालू कर दिया.
पर पहली बार होने की वजह से मेरा जल्दी झड़ गया.

जिया- साले, तुझे कहीं जाना है क्या … इतनी जल्दबाज़ी क्यों कर रहा है?
मैं- पहली बार है इसलिए दर्द भी बहुत हुआ और जल्दी झड़ गया.

जिया- ठीक है, आ जा मेरे बगल में.

मैं उसके बगल में लेट गया और उसकी चूचियों और चूत के साथ खेलने लगा.
उसे किस करने लगा.

कुछ ही मिनट में मेरा लंड वापस खड़ा हो गया.
इस बार वो बोली- तू लेट जा, मैं ऊपर से आऊंगी.

मेरे लंड में कंडोम लगा कर थोड़ा थूक लगाया और साली चढ़ गयी.
जैसे ही वो लंड पर बैठ गयी, बोल पड़ी- साले, मेरा ये पहली बार नहीं है, पर दर्द पहली बार से भी ज़्यादा हो रहा है. तेरा लंड है या गर्म किया हुआ सरिया है … आआह हह ऊहह.

हमारे बीच दर्द से शुरू होकर मजे वाला खेल होने लगा.

कुछ देर बाद …
जिया- मैं आ रही हूँ राज आह.
मैं- आह आ जा. मैं भी आ गया बस.

भाई और बहन की चुदाई में हम दोनों एक साथ झड़ गए और वैसे ही लिपट कर सो गए.

थोड़ी देर बाद जब मैं बाथरूम में गया तो वो भी पीछे से आ गयी और वापस दोनों साथ में नहा लिए.

कुछ समय बाद भाई आ गया.

फिर जब भी हमारा मन होता और रूम पर कोई नहीं होता तो रूम में सिर्फ़ ‘ऊओ इसस्स ऑश याअहह बेबी …’ यही आवाज़ें होतीं.

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