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Antarvasna

मैं एक पंजाबन लड़की हूँ Antarvasna और इंग्लैंड में एक साल का स्टडी और साथ दो साल के वर्क परमिट वीसा पर इंग्लैंड आई थी। दो साल के बाद मैंने अपना वीसा एक्सटेंड करवा लिया था। कुल मिला कर तीन साल से इंग्लैंड में हूँ। पहले तो सपने में भी इन्टरनेट पर बैठने की नहीं सोची, यहाँ किसी के पास फालतू समय नहीं, मैं भारत में बहुत इन्टरनेट सर्फिंग करती थी, इसके ज़रिये दो यार बना लिए थे और फिर उनके साथ खूब मस्ती की। वैसे भी कॉलेज में मेरे कई लड़कों से चक्कर थे और मैं एक चालू और जुगाड़ टाइप की लड़की कहलाती थी। लड़कों के साथ पकड़े जाने पर मैं दो बार कॉलेज से सस्पेंड हुई थी- एक बार तो केमिस्ट्री लेब में और दूसरी बार क्लास रूम में आधी छुट्टी टाइम !

मुझे और उन दोनों लड़कों की भी निकाल दिया। उसके बाद मैंने प्राइवेट स्कूल जगन ज्योति पब्लिक स्कूल से मैं हीला वसीला करके पास हुई। मैं बोर्ड की क्लास में थी कामर्स ग्रुप में।

सुपरिटेंडेन्ट लग कर आये सर को अपने हुस्न के जाल में फंसाया। वैसे तो बहुत नक़ल चल रही थी लेकिन सर मुझे अलग बिठा देते और बुक्स, नोट्स दे देते ! पेपर के बाद मुझे सर ही घर छोड़ते थे। पहला पेपर ख़त्म हुआ, उन्होंने कह दिया था कि मेरे साथ चलना ! मैं ही घर छोड़ दूंगा।

मैंने घर में कहा कि पेपर के बाद अगले पेपर की तैयारी के लिए मुझे ट्यूशन पढ़नी पड़ रही है।

किसी ने कुछ नहीं कहा। उसने कार में ही छेड़छाड़ शुरू कर दी। पूरे रास्ते में उसका हाथ में पकड़ सहलाती आई और वो भी बीच बीच में मेरे मम्मे दबाते आये।

मेरे पास समय कम था, मैं उनके घर जाते ही उनसे लिपट गई और वो मुझे बेडरूम में ले गए। जाते ही मैंने अपनी शर्ट उतार दी और फिर स्कर्ट भी उतार दी। मुझे नंगी देख उसका लौड़ा कच्छे को फाड़ने को आ रहा था तो मैंने एक पल में उतार दिया। उनका लौड़ा इतना भयंकर होगा, सोचा नहीं था।

मैं वहीं पाँव के बल बैठ गई और मुहं में ले लिया।

और फिर उन्होंने मुझे एक घंटे में दो बार चोदा। इस तरह मैंने बारहवीं के पेपर दिए और मेरे ७५% नंबर आये।

मेरी एक बहन शादी के बाद अपने पति के साथ बंगलौर चली गई और वो हमें उनके घर की साफ़ सफाई के लिए चाभी दे गई। एक दिन मैंने घर से चोरी छिपे चाभी उठाई और अपने बॉयफ्रेंड को वहीं बुला लिया।

अभी हम पहला राउंड लगा कर साँसे ले रहे थे कि कोई आ गया, झट से कपड़े पहने, दरवाज़ा खोला तो देखा- माँ थीं ! ज़बरदस्त थप्पड़ लगा ! यह तेरा स्कूल है हरामजादी?

उस मुहल्ले में भी मेरी बदनामी देख मेरी इंग्लैंड की फाइल लगा दी गई और कर-करवा कर एक यूनीवर्सिटी में दाखिल करवाया। दो साल का वर्क परमिट मिला और उड़ कर चली गई इंगलैंड।

अपने सारे आशिकों के बारे सोच-सोच मेरा मन सा भर आता ! वहाँ मेरा कोई रिश्तेदार नहीं था। यूनीवर्सिटी में क्लास ज्वाइन कर ली और हॉस्टल में रहने लगी।

एक-दो महीनों में वहां मेरा एक भारतीय लड़के से चक्कर शुरु हो गया।

उसने मुझे कहा- हॉस्टल छोड़ दे और मेरे साथ रेंट पर रह ले ! अपने हिस्से के पैसे देती रहना ! हॉस्टल से कम खर्चा है और साथ में बहुत बढ़िया काम पार्ट-टाइम मिलेगा !

वो जहाँ रहता था उसमें तीन कमरे थे रसोई, आलीशान बाथरूम, वूडन फ्लोर्स, दो कमरों में छः लड़के रहते थे और एक में तीन लड़कियाँ ! एक भारतीय, एक पाकिस्तानी और एक नाइजीरियन।

कमरे बहुत खुले थे। मैंने सोच-विचार करके हॉस्टल छोड़ दिया और मैंने रवि से कहा- आज कॉलेज बंक करके मेरा सामान मेरे साथ शिफ्ट तो करवा दे !

उसने मेरी मदद की, सभी कॉलेज गए हुए थे, हम दोनों अकेले थे, उसको अकेला देख मेरी प्यास जाग उठी। दो महीने से ज्यादा मुझे लौड़ा लिए हो चुके थे।

उसने मुझे हल्के से चूमा और बोला- आई लव यूं रूही !

मैं उठी और उसके सामने खड़ी होकर उसके होंठ चूसने लगी और बोली- आई लव यू टू रवि ! आई लव यू सो सो मच !

कहते-कहते उसके पाँव पर खड़ी हुई और उसके साथ लिपट गई। मेरी चूचियाँ बहुत शानदार हैं, कसी हुई है और मेरे चुचूक बहुत बड़े और लड़के के खींचने के लिए काफी बढ़िया हैं। जानबूझ कर मैं अपने मम्मे उसकी छाती से लगा दबाव दे रही थी, उसका कण्ट्रोल खोने लगा था। मैं उसके लौड़े में आ रहे कसाव को महसूस कर रही थी। बस वो थोड़ा सा डर रहा था कि मैं नाराज़ न हो जाऊँ !

मैंने अपना टॉप खुद उतार फेंका और नीचे से हाथ उसके लौड़े पर फेरने लगी। अब वो खुलने लगा, मैंने उसकी शर्ट उतार दी और अपने मम्मे उसकी घने बालों वाली मर्दानी छाती से घिसने लगी। मैंने अपनी स्कर्ट की साइड जिप खोल दी और बटन भी, जिससे स्कर्ट नीचे घिर गई।

मेरी गोरी जांघें देख वो आपे से बाहर होने लगा। उसके होंठ चूसते हुए साथ-साथ मैंने उसकी बेल्ट खोली, फिर उसका बटन खोला और उसकी जींस उतार फेंकी और नीचे झुकते हुए उसके अंडरवियर से उसका लौड़ा निकाल मुँह में ले लिया। उसका लौड़ा सामान्य आकार का ही था, लेकिन था बहुत दिल खींचने वाला !

उसको कुछ करने का मैंने मौका ही नहीं दिया था, पहल खुद की थी और उसको अपनी मर्ज़ी से आगे बढ़ा भी रही थी। वो हैरान भी था लेकिन खुश भी ! ओह बेबी सक ! सक इट डार्लिंग !

उसका सात इंच का लौड़ा बहुत मज़ेदार था। उसने मुझे बिस्तर पर लेजाकर टांगें खोल पैंटी उतार दी और अपने होंठ मेरी गर्म हो रही चूत पर रख दिए, लगा चाटने !

अह उह अह उह ! मेरे मुँह से अब मस्ती की आवाजें आने लगी थी। मैंने अपनी टांगें उसके कन्धों पर टिका दीं और उसने अपना लौड़ा मेरी चूत में उतार दिया, चूत कसी थी क्यूंकि दो महीनों से भी ज्यादा से उसमे ऊँगली के इलावा कुछ नहीं घुसा था। उसने स्पीड बढ़ा दी। उसका स्टेमिना देख में बहुत खुश थी। फिर दो घंटे अलग अलग मुद्राओं में हमने चुदाई का मजा लिया।

मुझे एक स्टोर में काम मिल गया और मैं पढ़ाई भी करती थी। मेरा रवि के साथ चक्कर था, यह पूरे घर में मालूम था। लेकिन रवि के पक्के दोस्त पंजाब से थे मुझे पर लाइन मारते थे। मैं भी उनको उलझा कर मजे ले रही थी।

रवि मुझसे शादी करना चाहता था, तभी उसकी बहन की शादी पक्की हो गई थी और वो भारत चला गया। उसकी गैर मौजूदगी में मैं उन दोनों के साथ सहमत हो गई। दोनों टैक्सी चलाते थे, मैंने उन्हें कहा कि मेरा लाइसेंस बनवा दो।

इसमें चोखी कमाई थी !

चुदाई के बदले दोनों ने मुझसे लाइसेंस के लिए ड्राइविंग लर्निंग टेस्ट के लिए अप्लाई करवा दिया उसकी फीस खुद भरी। जैसे ही मेरा यह काम करवाया, मैंने उनके साथ किया वादा निभा दिया।

यह वादा कैसे निभा?

यह जानने के लिए अन्तर्वासना के साथ दिल से जुड़ जाओ क्यूंकि मेरा सफ़र कुछ लम्बा है ! एक बार में नहीं समाएगा !

मेरा इन्तज़ार करो ! Antarvasna

Antarvasna

अन्तर्वासना के प्यारे पाठको और सभी आंटियों और लड़कियों को मेरा प्यार…Antarvasnaआप लोगों को मेरी पहली कहानी मकान मालिक की बीवी को चोदा अच्छी लगी होगी ! मैं आज फिर एक नई कहानी लेकर आया हूँ…

ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए मैं कहानी शुरू करता हूँ…….

मेरी उमर २२ साल हैं.मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं बचपन से ही लड़कियों और आंटियों से शरमाता था। मेरे पड़ोस में एक नई लड़की गुंजन आई हुई थी। उसकी उमर भी १९-२० के आस पास होगी, देखने में वो एकदम मस्त थी। जब मैंने उससे पहली बार देखा था तो तभी से उसे चोदने की सोचने लगा। उसे देखते ही मेरा लण्ड खडा हो जाता था। आख़िर में भगवान ने मेरी सुन ही ली। मेरे घर के सारे लोग सर्दियों की छुट्टी में गाँव चले गए। मेरे पेपर चल रहे थे सो मैं नहीं गया। खाना खाने के लिए पड़ोस में बोल गई थी मेरी मम्मी।

एक दो दिन तो सब कुछ सामान्य रहा।

तीसरे दिन दोपहर को वो घर में अकेली थी। मैं दोपहर का खाना खाने के लिए उनके घर गया। उसने खाना लगा दिया, मैंने कहा- तुम नहीं खाओगी क्या?

तो वो बोली- मैं पहले नहा कर फिर खाना खाऊँगी ! और वो नहाने चली गई। मुझे पेट की नहीं चूत की भूख लग रही थी सो मैं भी उसके पीछे हो लिया।

मैंने बाथरूम के दरवाज़े के छेद से देखा- उसने एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए।

मेरे शरीर में अजीब सा करंट दौड़ गया। यह सब देख कर मुझे मजा आ रहा था और डर भी लग रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए। मेरा लण्ड एक दम ९० डिग्री पर सीधा खडा हो गया था और ऐसा लग रहा था कि पैन्ट को फ़ाड़ कर बाहर निकल आएगा। कुछ देर बाद गुंजन ने कपड़े पहनने शुरू कर दिए। मैं जल्दी से आकर खाने के पास बैठ गया।

नहाने के बाद गुंजन एकदम परी की तरह लग रही थी। उसने पूछा कि तुमने अभी तक खाना क्यों नहीं खाया?

मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था। उसकी निगाह उस पर पड़ गई। मैं अब उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था। मैंने बात बदलते हुए कहा कि दोनों मिलकर खाना खा लेते हैं।

पर वो मेरा लण्ड खडा देख कर मुझसे मज़े लेना चाहती थी। पर पहल मेरी तरफ से हो, इसके लिए उसने कहा कि खाना ठंडा हो गया हैं, तुम इसे गरम कर लाओ, मैं अभी नहा कर आई हूँ।

मैं अपने लण्ड को दुबका कर बिठा था। गुंजन बोली- यह क्या छुपा रहे हो?

मैं पूरी तरह झेंप गया था। मैंने कहा- कुछ नहीं !

तो वो बोली- यह छुपाने के लिए नहीं होता !

इतना कहते ही मैंने उसे पकड़ लिया और किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा।

धीरे -२ उसे भी मज़ा आने लगा। वो मेरे लण्ड को हाथ से सहलाने लगी। हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े एक-२ करके उतार दिए। मैंने जैसे ही उसकी चूत में ऊँगली की, उसके मुँह से उह आह उह्ह आह्ह्ह की आवाजें निकलने लगी। मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि जिसे मैं चोदने के सपने देखता था, आज उसे चोद रहा हूँ।

वो पूरे जोश में आ गई थी और तेज़-२ बोल रही थी- चोद दो मु्झे आज ! जी भर कर चोदो !

मैंने भी लण्ड उसके छेद पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया !

लण्ड का सुपारा अंदर जाते ही वो ज़ोर से चिल्लाई और बोली- थोड़ा धीर करो !

मैंने उसकी एक ना सुनी और एक और जोरदार धक्का लगते हुए लण्ड को पूरा घुसेड़ दिया उसकी चूत में।

फिर धीरे-२ धक्के लगाने शुरू किए। अब वो भी गांड हिला कर मेरा साथ दे रही थी।

२०-३० धक्कों के बाद वो और मैं दोनों झड़ गए।

मुझे पहली बार एहसास हुआ कि पृथ्वी पर स्वर्ग सिर्फ़ चूत मारने में हैं।

आगे भी मैंने कई बार गुंजन को चोदा !

वो कहानी बाद में !

आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर मेल करें.. Antarvasna

अध्याय 1 रात के 9 बज रहे हैं। अभिषेक होटल के कमरे में बिस्तर पर बैठा है। वो बहुत उत्सुक है और उत्तेजित भी। वह बार-बार कमरे से बाहर निकलता, फर्स्ट फ्लोर की बालकनी में जाता, नीचे झाँकता और निराश होकर लौट आता। फिर कुछ देर बिस्तर पर बैठता, आईने में देखकर अपने बाल सँवारता, शर्ट की कॉलर और बाहों की फोल्डिंग ठीक करता, बार-बार शर्टइन को निकालता और फिर से शर्ट इन करके बाहर जाता बालकनी में झाँकने। वह करीब सात बजे से यही क्रम दोहरा रहा है। आधा घंटा और बीत गया है। अब वह निराश होकर बिस्तर पर सीधे लेट गया है। उसकी आँखें लगभग रुआँसी होकर लगातार सीलिंग को देख रही है। वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उसने दो लोगों का खाना मँगाकर रखा हुआ है। उसे भूख भी लगी है। क्योंकि उसने सुबह ट्रैन में केवल 2 इडली खाई थी। उसके बाद से कुछ नहीं खाया। उसने अब सोचा है कि उसे खाना खा लेना चाहिए। उसे खाना खाने के लिए एक प्लेट और बाउल चाहिए। ये ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी वाले भी न, खाना तो थैली में भरकर पहुँचा देते हैं लेकिन खाने के लिए एक डिस्पोजेबल प्लेट या बाउल भी नहीं रखते। जबकि इन्हें पता होता है कि इनसे खाना मँगाने वाले अधिकतर लोग वो होते हैं, जो खुद घर पर खाना बना नहीं सकते या कहीं फँसे होते हैं। अभिषेक के मन में यहीं विचार चल रहा था। अभिषेक ने सोचा कि रूम में रखे फोन से रूम सर्विस को कॉल करके बोले। लेकिन उसे रूम सर्विस का नंबर हीं नहीं पता। ना वहाँ कहीं कुछ लिखा है। फ़ोन की दायीं तरफ एक मेनू कार्ड रखा है जिसपर खाने के आइटम्स और उनके सामने उनकी कीमत लिखी हुई है। कीमत इतनी है कि जैसे यह दुनिया का आखिरी खाना बचा हो। अगर यह दुनिया का आखिरी खाना भी होता तो अभिषेक इसके इतने पैसे न देता। फिर चाहे उसे भूखा हीं क्यों न मरना पड़ता। खैर, अभिषेक उठा "की कार्ड" निकाला और रूम लॉक करके रिसेप्शन की और चल पड़ा। रिसेप्शन पर पहुँच कर उसने कहा - "कैन आई गेट, वन प्लेट एंड वन बाउल" रिसेप्शन पर बैठे लड़के ने प्रश्नवाचक आवाज़ में कहा - "आँ?" अभिषेक ने दोहराया - "आई हैव सम फ़ूड, सो आई नीड सम प्लेट एंड बाउल, फॉर ईटिंग" रिसेप्शनिस्ट इस बार समझ गया कि उसे क्या चाहिए। उसने पूछा - "सर, हाउ मेनी प्लेट्स, यु नीड" अभिषेक ने मुस्कुराकर कहा - "सर, ओनली वन प्लेट एंड वन बाउल।" रिसेप्शनिस्ट - "ओके सर, आई अम सेंडिंग समवन टू योर रूम, रूम नंबर वन ज़ीरो नाइन ना" अभिषेक - "यस सर" रिसेप्शनिस्ट - "ओके सर, गिव मी टू मिनट्स ओनली"ई अभिषेक- "ओके सर, थैंक यू" फिर रिसेप्शनिस्ट से ध्यान हटाकर, दरवाजे के पास कुर्सी पर बैठे गार्ड को देखा, वह मुस्कुरा रहा था, अभिषेक भी उसे देखकर मुस्कुराया और अपने रूम की और जाने लगा। अभिषेक वैसे इंग्लिश स्पीकिंग आदमी नहीं है। लेकिन उसे आज मजबूरी में बोलना पड़ रहा है। क्योंकि वह चेन्नई में है। यहाँ ज्यादातर लोगों को सिर्फ तमिल आती है और अभिषेक को हिंदी। ऐसे में अंग्रेजी ही उसका एक मात्र सहारा है, जिसमें वो यहाँ के लोगों के साथ बात कर सकता है। थोड़ी अभिषेक बोल लेता है, थोड़ी वो समझ लेते हैं, कुल मिलाकर काम चल जाता है। अभिषेक जैसे ही रूम के सामने पहुँचा। उसके फ़ोन पर एक व्हाट्सएप्प मैसेज आया - "आई एम रीचिंग देअर इन फाइव मिनट्स।" अभिषेक मानों खुशी से उछल पड़ा। उसका हाथ अपने आप हीं उठा और हवा में मुक्का मारते हुए उसकी कमर के पीछे जाकर रुक गया। जैसे वह कोई गेंदबाज़ हो और अभी अभी उसने कोई विकेट ले ली हो। उसके पीछे प्लेट और बाउल लेकर आता हुआ लड़का उसे देखकर चौंक गया। लड़के ने पीछे से कहा - "सर।" अभिषेक ने उसे पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराया। लड़का भी मुस्कुरा दिया। अभिषेक ने कमरे का दरवाजा खोला और लड़के को सामान टेबल पर रखने का ईशारा किया। लड़के ने सामान टेबल पर रखा और वापस जाने लगा। अभिषेक ने उससे कहा - "कैन यु ब्रिंग मी वन मोर प्लेट?" लड़के ने जवाब दिया - "आँ?" अभिषेक समझ गया कि उसे अंग्रेजी नहीं आती। अभिषेक ने अपनी गर्दन को दाँए और बाएँ हिलाते हुए कहा – "नथिंग।" लड़का रूम से चला गया। अभिषेक भी बाहर निकला, दरवाजा बंद किया और बालकनी में जाकर खड़ा हो गया। उसका कमरा पहली मंजिल पर बिल्कुल सीढ़ियों के बगल में था। सीढ़ियों के सामने बालकनी थी। दिसंबर का पहला हफ्ता चल रहा था। सर्दी थोड़ी बढ़ गयी थी। शाम के वक़्त हल्की बारिश भी हुई। लेकिन अभी मौसम साफ था। बस, हवा चल रही थी। अभिषेक अपने दोनों हाथ वहाँ लगी स्टील की रैलिंग के पाइप पर रखकर सोच रहा था कि- "अब क्या होगा?" उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसने अभी तक उस संदेश का जवाब भी नहीं दिया था। वह बस व्हाट्सएप्प खोल के चैट्स में लिखे ऊपर के नाम को घूरे जा रहा था। "निवेदिता" यहीं नाम लिखा था वहाँ। कभी वह नाम पर क्लिक करके उस सन्देश को दोबारा पढ़ता, तो कभी उसकी डीपी पर क्लिक करके उसे ज़ूम करके देखता। निवेदिता अभिषेक को दो हफ़्तों पहले लूडो पर मिली थी। जी हाँ, फेसबुक, इंस्टाग्राम या टिंडर नहीं, लूडो पर। अगर लूडो पर चैट का विकल्प ना होता तो ये संभव नहीं था। अभिषेक ने इस विकल्प का फायदा उठाकर कईं लड़कियों से बातें की। दोस्ती हुई, इंस्टाग्राम आईडी और फ़ोन नंबर भी एक्सचेंज किया। मगर उसके आगे बात नहीं बनी। लड़कियाँ कभी फ़ोटो देखकर दिलचस्पी खो देती थीं, तो कभी दूर होने के कारण। हालांकि अभिषेक को ऐसी भी लड़कियाँ मिलीं जो उसकी अच्छी दोस्त बनीं, मगर कुछ दिन बात करने के बाद दिलचस्पी ना रही। कुछ लड़कियों ने तो चैट पर हीं सेक्स भी कर लिया, मगर मिलने की बात पर ब्लॉक करके चली जाती। निवेदिता से भी अभिषेक एक दिन ऐसे हीं लूडो पर मिला था। पहले हीं दिन इतनी बातें हुईं दोनों के बीच की छः गेम हो गये और पता हीं न चला। फिर निवेदिता ने हीं अभिषेक से व्हाट्सएप्प नंबर माँगा और अभिषेक को व्हाट्सएप्प पर मैसेज किया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप्प पर बात हुई पूरी रात इसी में निकल गयी। फ़ोटो एक्सचेंज हुए, दोनों ने एक दूसरे की बहुत तारीफ की। फिर बातें करते-करते, निवेदिता ने बताया वो 28 साल की है और शादीशुदा है। उसका पति सऊदी अरब में कहीं नौकरी करता है। वह अपने पति से बहुत प्यार करती है। वह दो साल में एक बार मिलने आता है। अभिषेक उसे पहले हीं बता चुका था की वो 23 साल का है और फिलहाल भोपाल में रहकर थिएटर करता है। उसे एक फ़िल्म एक्टर बनना है और वो एक-दो साल में मुंबई शिफ्ट होने की सोच रहा है। फिर निवेदिता ने उससे पूछा - "क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड है?" अभिषेक ने कहा - "नहीं।" निवेदिता ने कहा - "ऐसा हो हीं नहीं सकता।" अभिषेक ने कहा - "हर लड़की का रिएक्शन यहीं होता है, जब कोई लड़का उससे कहता है कि वह सिंगल है।" निवेदिता ने अभिषेक से शादी के बारे में पूछा। अभिषेक ने कहा "मुझे शादी अभी नहीं करनी, मैं पहले फाइनेंसियल स्टेबिलिटी चाहता हूँ, फिर शादी, फिर तीन चार साल अपनी सेक्स लाइफ एन्जॉय करना चाहता हूँ, उसके बाद बच्चे।" यह सुनकर निवेदिता ने कहा तुम्हे बच्चे जल्दी कर लेने चाहिए। क्योंकि आजकल लड़को में इनफर्टिलिटी रेट ज्यादा बढ़ गया है। लड़कियों में भी बच्चा कंसीव करने में दिक्कत आती है और यहीं से उनकी बातें शुरू हुई सेक्स को लेकर। निवेदिता ने बताया उसे भी यही दिक्कत हुई थी। उसके पति का भी स्पर्मकॉउंट कम था। उसे खुद हीं अपनी पहली प्रेगनेंसी के पहले डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ी थी और उसे अपना दूसरा बच्चा गिराना पड़ा था। निवेदिता ने उसे बताया कि किस तरह आजकल की माँए अपना फिगर खराब ना हो इस डर से ब्रैस्टफीडिंग से बचती हैं। लेकिन उसने अपनी बच्ची को खूब दूध पिलाया है, क्योंकि उसे दूध ज्यादा आता था। उसने अपनी बच्ची को तीन साल तक दूध पिलाया है। बीच-बीच में अभिषेक उससे कुछ ठरक भरे सवाल भी पूछ लेता था। जैसे जब वो प्रेग्नेंट थी तो क्या उस बीच उसने अपने पति के साथ सेक्स किया या नहीं? या जब उसे इतना ज्यादा दूध आता था तो क्या उसने अपने पति को कभी दूध पिलाया या नहीं? निवेदिता हर सवाल का खुलकर जवाब देती थी। की हाँ मेरे पति ने मुझसे प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स नहीं किया, लेकिन उन्होंने आठवें महीने में मेरा दूध ज़रूर पिया क्योंकि उसे डिलीवरी के पहले हीं दूध आने लगा था। उसने ये भी बताया कि उसके डिलीवरी के तुरंत बाद उसका पति सऊदी अरब चला गया था। अभिषेक को यह सब सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था। क्योंकि इससे पहले उसने कभी किसी शादीशुदा औरत से इस तरह की बातें नहीं कि थी। उसने कईं लड़कियों के स्टेज सेक्स चैट की लेकिन यह कुछ अलग था। निवेदिता ने भी अभिषेक से उसकी गर्लफ्रैंड और सेक्स लाइफ के बारे में पूछा। अभिषेक ने बताया कि उसकी एक गर्लफ्रेंड थी। जिसके साथ उसने कई बार सेक्स किया। लेकिन फिर उसकी शादी हो गयी। पहे दिन यहीं सब बातें हुई। अगले दिन फिर रात नौ बजे से व्हाट्सएप्प पर अभिषेक, निवेदिता का इंतज़ार कर रहा था। करीब साढ़े दस बजे निवेदिता का "हाई" आया और दोनों में फिर बातें शुरू हो गयी। दोनों ने बातें फिर वहीं से शुरू की अभिषेक ने उससे अंग्रेजी में कहा कि - "मैं तुम्हारे बूब्स के बारे में सोच रहा था, क्या वे बहुत बड़े हैं जो तुम्हें इतना दूध आता है?" निवेदिता ने कहा- "यस।" अभिषेक- "क्या मैं जान सकता हूँ, उनका साइज क्या है।" निवेदिता - "इट्स 34" अभिषेक- "कप साइज?" निवेदिता - "डी।" अभिषेक- "ओह्ह कैन आई सी देम?" निवेदिता - "शट" अभिषेक- "सॉरी" निवेदिता - "इट्स ओके" रात की बात के बाद अभिषेक और निवेदिता के बीच की शर्म और झिझक खत्म हो चुकी थी। कुछ देर के सन्नाटे के बाद निवेदिता ने फिर एक मैसेज किया - "व्हाट वुड यु डू? इफ यु आर अलोन विथ योर गर्लफ्रैंड इन अ रूम?" अभिषेक ने जवाब दिया - "व्हाई नॉट विथ यू?" निवेदिता ने कहा - "ओके, टेल, बट इट विल बी ओनली वन टाइम थिंग।" अभिषेक ने कहा – "ओके।" और फिर अभिषेक ने बताना शुरू किया की वो उसे पहले किस करेगा, फिर हग करेगा, निवेदिता बीच-बीच में, इमोजीस के साथ आह, यस, उम्म जैसे मैसेज लिख कर भेज रही थी। अभिषेक ने वो सब बताया जो वो उसके साथ करना चाहता था या कहें कि जो-जो उसने पोर्न फिल्मों में देख रखा था। निवेदिता भी उसे बीच- बीच में बता रही थी कि ऐसे नहीं ऐसे करना। दोनों के बीच ये सेक्स चैट लगभग एक घंटा चली। फिर निवेदिता ने मैसेज किया - "आई विल शो यु माय बूब्स एंड यु शो मी योर डिक।" अभिषेक- "नाउ?" निवेदिता - "यस, आई एम कॉलिंग यु।" अभिषेक– "ओके।" निवेदिता - "बट, नो फेस।" निवेदिता ने अभिषेक को वीडियो कॉल किया। अभिषेक ने जैसे हीं वीडियो वाला बटन ऊपर खींचा, उसके फ़ोन पर मैक्सी पहनी हुई एक औरत की छाती नज़र आने लगी। अभिषेक ने तुरंत कैमरा स्विच वाले बटन पर क्लिक किया और फ़ोन के पीछे वाले कैमरे को अपने पैंट पर ले गया। उसके फोन की स्क्रीन पर मैक्सी के बटन खुलने लगे और उसे एक लाल ब्रा नज़र आने लगी। कुछ हीं देर में मैक्सी सामने से पेट तक खुल गयी और दो हाथों ने लाल ब्रा के अंदर से दो दूध की तरह सफेद स्तनों को बाहर निकाला और मसलना शुरू किया। अभिषेक भी अपने पैंट को नीचे करके अपने उत्सुकताओं को मुट्ठी में भींच कर मसलने लगा। कुछ देर के बाद कॉल कट गया। अभिषेक के पास मैसेज आया - "नाउ इट्स एनफ।" अभिषेक- "ओके।" निवेदिता - "गुड नाईट।" अभिषेक- "गुड नाईट।" और फिर दोनों ने एक दूसरे को किसिंग इमोजी भेजे। अभिषेक ने समय देखा तो रात के दो बज रहे थे। उसने बाजू में पड़े चार्जिंग केबल का सीरा पकड़ा और फ़ोन में घुसाया और फिर सो गया। अगले दिन करीब 11 बजे अभिषेक की आँख खुली। उसने सबसे पहले अपना फ़ोन चेक किया। उसमें चार-पाँच नंबर्स और ग्रुप्स के मैसेज थे। एक मैसेज थिएटर ग्रुप का था। एक मैसेज उसके कॉलेज ग्रुप का था। एक मेसेज उसके कजिन भाई का था, जो हर सुबह उसे एक लंबा-चौड़ा पैराग्राफ भेजता था। जिसके सबसे ऊपर चेतावनी की तरह लिखा होता था "हिजड़े इस मैसेज से दूर रहें" जिसके अंदर धर्म या राजनीति से जुड़ी कोई कांस्पीरेसी थ्योरी को विस्तार में बताया गया होता था। और अंत में उसे फॉरवर्ड करने की बात के साथ एक और चेतावनी लिखी होती थी जिसका मतलब ये होता था कि अगर आपने फ़ॉरवर्ड किया तो आप सच्चे देशभक्त या सच्चे हिन्दू या कम से कम असली मर्द तो साबित हो ही जायेंगे। अभिषेक के पास यह मैसेज हर रोज़ आता था। उसने आजतक वो मैसेज नही पढ़ा। ना अभिषेक कभी उसके इन मैसेजेस का जवाब देता था। दो लड़कियों के मैसेज भी थे। उनमें से एक निवेदिता भी थी। उसका मैसेज था - "गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट" के साथ एक लाल दिल वाला इमोजी। अभिषेक ने रिप्लाई किया - "गुड मॉर्निंग।" के साथ एक स्माइली। मैसेज सीन नहीं हुआ। फिर अभिषेक ने थिएटर ग्रुप का मैसेज देखा। लिखा था - "आज 23/11/20 से रिहर्सल कंटिन्यू रहेगी अपने कैरेक्टर की पूरी तैयारी करके आएं, 05 दिसंबर को शो है, समय काफी कम है।" अभिषेक यह नाटक पहले भी कर चुका था। उसका एक छोटा सा रोल था और साथ हीं उसे बैकस्टेज का काम संभालना होता था। जैसे सेट तैयार करना, कॉस्ट्यूम की धुलाई और प्रेस करवा कर लाना। संबंधित आर्टिस्ट को उसके करैक्टर के हिसाब से कॉस्ट्यूम देना और शो के बाद सबको इकट्ठा करके घड़ी करके बैग में रखना। साथ हीं प्रॉपर्टीज का ध्यान रखना, शो में हर सीन के बाद जब अंधेरा हो जाये तो दूसरा सीन शुरू होने से पहले जल्दी से जाकर सेट चेंज करना। और बाकी समय में म्यूजिक टीम के साथ बैठकर कोरस गाना। अभिषेक यह सब करने वाला अकेला नहीं था। उसके साथ पाँच छः लड़के और भी थे। जो लगभग उसी की उम्र के थे, कुछ एक दो साल छोटे तो कुछ एक दो साल बड़े। अभिषेक को इंजीनियरिंग के आखिरी साल में ही ये समझ आया कि उसको अभिनेता बनना है। साल भर पहले कॉलेज ख़त्म होते ही वह थिएटर ग्रुप से जुड़ा। उससे पहले वो अपने कैरियर को लेकर कुछ सोचता ही नहीं था। उसे लगता था कॉलेज खत्म होते ही कोई उसे नौकरी के लिए हाथ में जॉइनिंग लेटर थमा कर चला जायेगा। हालाँकि उसके कईं दोस्तों को हाथ में जॉइनिंग लेटर भी थमाए गये, कईं कंपनियां कॉलेज कैंपस में आती और उसके दोस्तों के इंटरव्यू लेकर उन्हें नौकरियाँ देकर चली जाती। लेकिन जब नौकरियां बँट रही थी तब अभिषेक होस्टल में अपने रूम में गांजे के नशे में सो रहा था। उसे तो चार साल की इंजीनियरिंग में सेमेस्टर एग्जाम देने के लिए भी किसी को जगाने आना पड़ता था। उसने क्लासेज भी तभी अटेंड की है, जब वह कोई फिल्म या वेबसीरीज देखने के चक्कर में रात भर सोया न हो। या सेमेस्टर के आखिरी दिनों में एग्जाम में बैठने के लिए अटेंडेंस पूरी करनी हो। कई बार उसकी अटेंडेंस पूरी नहीं हो पाती थी तब वह एग्जामिनर के हाथ पाँव जोड़कर परीक्षा में बैठने की भीख माँगता था। कभी एग्जामिनर तरस खा के पेपर लिखने की अनुमति दे देता था, तो कभी दुत्कार कर भगा देता था। फिर या तो एच.ओ.डी. के सामने दादाजी की मौत का बहाना बनाकर रो देना या अगले सेम रेगुलर आने का वादा करना। अभिषेक ने पढ़ाई को कभी सीरियसली नहीं लिया और ना हीं उसे पढ़ाई ने सीरियसली लिया। उसे बस वो मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री चाहिए थी। क्यों चाहिए थी? यह भी उसने कभी नहीं सोचा था। वह फर्स्ट इयर में पूरी ईमानदारी के साथ क्लास जाता था। फर्स्ट इयर में उसके पॉइंटर भी अच्छे थे और आदतें भी। तब हीं उसने सारे प्रोफेसर्स से अच्छी पहचान बना ली थी। यहीं वजह थी की सब उसके बहाने और झूठी कहानियां मान लेते थे। कई प्रोफेसर्स तो उसे किसी दोस्त की तरह समझाते भी थे। अभिषेक कोशिश भी करता था की वह पढाई को लेकर सीरियस हो जाये। लेकिन वह कभी नहीं हो पाया। करीब पंद्रह मिनट बाद निवेदिता का दूसरा मैसेज आया। "नाउ फ्री?" "जस्ट वोक उप।" निवेदिता ने अपनी एक फोटो भेजी। गीले बालों में साड़ी पहनी हुई एक जवान औरत, दूध की तरह सफेद रंग, आँखे भूरी, बड़े वक्ष और हल्का सा बाहर निकला हुआ पेट और उस पर गहरी नाभि, जो कि उसकी पतली साड़ी से साफ नजर आ रही थी। अभिषेक ने ऐसी औरतें अभी तक ऑल्ट बालाजी की वेबसीरीज़ में हीं देखी थी। उसने कभी सोचा नहीं था, कि ऐसी दिखने वाली कोई औरत उससे बात करेगी। निवेदिता ने पहले भी अपने फोटो भेजे थे। लेकिन वो ऐसी तो कभी नहीं लगी। अभिषेक ने दो दिल वाले इमोजी के साथ तुरंत रिप्लाई किया - "वॉव, यु आर सो ब्यूटीफुल।" "थैंक यू।" "इट्स माय फैंटेसी टू मेक अ गर्लफ्रैंड लाइक यु।" "आह? रियली?" "यस।" "ओके बेबी, आई एम योर गर्लफ्रैंड फ्रॉम नाउ।" "रियली?" "यस बेबी।" "आई वांट टू मीट यु।" "कम टू चेन्नई, वी कैन मीट हेअर।" "रियली?" "यस।" "ओके, आई विल कम आफ्टर फाइव दिसंबर।" "ओके, आई एम वेटिंग।" अभिषेक ने दो तीन हग वाले इमोजी भेजे। निवेदिता - "ओके बेबी, आई हेव सम वर्क टुडे, आई विल टेक्स्ट यु इन इवनिंग।" "ओके, बाय।" "बाय।" फिर अभिषेक बिस्तर से उठा। स्टडी टेबल पर रखी बोतल से दो घुट पानी पिया, जिसका ढक्कन हफ़्तों से गुम था। टेबल पर कुछ कविता संग्रह और उपन्यास की किताबें रखी थीं, जिन्हें अभिषेक पढ़ता था। उनमें से एक किताब थी, धर्मवीर भारती की "अंधायुग"। उसी से लगी हुई एक सिगरेट पड़ी थी। अभिषेक ने सिगरेट उठाकर होंठों के बीच दबाई। फिर टेबल के पीछे खड़ी अलमारी के शीशे में खुद को देखा। पाँच फुट, सात इंच का एक दुबला सा आधा नंगा लड़का। जिसके बाल बिखरे हुए थे, दाढ़ी बढ़ी हुई थी, सांवली देह, छाती पर घने बाल, पेट कमर से चिपका हुआ, जिसने कपड़ों के नाम पर जाँघों तक का एक चड्ढा पहना हुआ था, मुँह में सिगरेट लिए, गर्दन टेढ़ी करके खड़ा था। उसने पंखे का बटन बंद किया। टेबल से माचिस उठाई और उसे हिला कर चेक किया। उसमें दो तीन तीलियों की खनखनाहट सुनाई दे रही थी। उसने एक तीली निकालकर जलाई और खड़ी करके उसे सिगरेट के मुँह तक लाया। फिर एक कश अंदर खींचा थोड़ा धुँआ बाहर छोड़ा फिर दूसरा कश खींचा। फिर मचीस की तीली को हिलाकर बुझाया और टेबल पर हीं रखे एक चीनी के मग में डाल दी। जिसपर अभिषेक की फ़ोटो बनी थी। वो मग उसकी ऐश ट्रे था। पूरा मग बुझे हुए सिगरेट के फ़िल्टर और मचीस की जली हुई तीलियों से भर गया था। अभिषेक ने आईने में देखते हुए धुँआ छोड़ा और फिर अगला कश लेते हुए अपने बालों में हाथ घुमाते हुए आँख पर आ रहे बालों को हटाया फिर काँच की तरफ देखकर धुआँ छोड़ा और बाथरूम में चला गया।
(Padosan Ladki Ki Chut Chudai) Antarvasna stories

मेरा नाम करण है। Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं। मेरी उमर १९ साल है। मैं पढ़ता हूं और मुझे लड़कियों को पटाने में बहुत मजा आता है। मैने लड़कियों को पटाना 18 साल की उमर से शुरु किया था और मुझे लड़कियों के साथ सेक्स करने में बहुत मजा आता है। ये मेरी पहली कहानी है।

जब मैं 12वीं में था तो हमारे क्लास में एक लड़की पढ़ती थी उसका नाम कणिका था हाल फ़िलहाल वो कनाडा में है लेकिन जब वो यहां पर थी तब मैं और मेरे क्लास मेट सब उस पर लाइन मारते थे लेकिन वो किसी को भाव नहीं देती थी लेकिन हम फिर भी उसको कन्विंस करने की कोशिश करते थे। लेकिन मुझे एक फायदा था कि वो मेरी पड़ोसी थी जिससे मैं उसके घर जा कर कभी-कभी उससे बात करने की कोशिश करता था किसी ना किसी बहाने से

एक दिन वो कंप्यूटर पर गेम खेल रही थी शायद पूल गेम खेल रही थी अचानक मैं उसके रूम में पहुंचा था और उसे पीछे से डरा दिया। वो घबरा गई और चीख पड़ी उसके बाद उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मैं बेड पर गिर गया अब उसने पूछा कि क्यों डराया मुझे, मैं हंसने लगा उसके बाद उसने पूछा क्या हुआ मैने जवाब नहीं दिया।

अगले दिन मैने उसे हिम्मत करके फोन किया आज मैने मन बना लिया था कि आज उसे परपोज करना है फिर मैने उसे फोन किया २-३ बार फोन करने के बाद में उसे कह नहीं पाया। फिर मैने पूरा दम लगाकर उसे फोन किया और उसे मैने बोल दिया कणिका आई लाइक यु फिर उसके बाद उसने कुछ जवाब नहीं दिया उसके बाद वो मैने उससे पूछा क्या हुआ उसने जवाब नहीं दिया फोन रख दिया.

उसके बाद अगले दिन स्कूल में आई मैं उसके सामने नहीं जा पाया उसके बाद फ्री पीरियड में सब बाहर चले गये थे फिर वो क्लास रूम में आई और उसने अपनी एक दोस्त जिसका नाम सोनल है उसने उससे बोला उसे क्लास रूम में बुलाओ तब मुझे डर लग रहा था फिर भी में गया फिर उसने पूछा क्या हुआ कल शाम को मुझे परपोज किया था तुमने।

मैने कहा किया तो था लेकिन लगता है तुम्हे अच्छा नहीं लगा इसलिये मैने तुमसे पूछा नहीं दुबारा फिर उसने बोला ओके मैं तुम्हारे परपोज को स्वीकार करती हूं

फिर तो मैं खुश हो गया उसके बाद उस शाम को उसके घर पर गया और उसके रूम में गया और उससे पूछा में आई किस यु? उसने कहा नो ! लेकिन उसके बातों से लग रहा था वो यस बोल रही है।

उसके बाद मैने उससे बोला -आई वांट अ किस नाउ उसने कहा ओके तब मैं उसे किस किया और उसके बूब्स प्रेस करने लगा वो बोली अभी नहीं मैं बोला बस एक बार तो वो बोली बस एक बार. तब मैने उसके बूब्स को ज़ोर से दबाया मुझे उसके निप्पल फ़ील हो रहे थे उसके बूब्स प्रेस करने में मुझे मजा आ रहा था उसके बाद उसे बेड पर बैठा दिया लेकिन उसके परेंट्स घर पर थे सो मैने कुछ किया नहीं

उसके बाद अगले दिन संडे था हमने मूवी देखने का प्लान बनाया फिर मूवी देखने हम गये वहां पर मैं उसके बूब्स को छू रहा था।फिर शाम को गार्डन गये रात होने लगी थी गार्डन में बहुत से जोड़े थे हम भी एक जगह पर बैठ गये और उसे किस किया फिर अंधेरा होने के कारण कोई देख नहीं रहा था.

मैने उसका टोप खोल दिया और किस किया और जीन्स का ज़िप खोल कर अंदर उंगली कर रहा था फिर वो सिसकी ले रही थी मैने जींस खोला और उसकी पैंटी को उतार दिया उसके बाद मैने अपना जींस खोला मैने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया शायद उसे दर्द होने लगा था इसलिये बोलने लगी अभी नहीं लेकिन मैं नहीं माना और उसके चूत में उंगली डाली और किस कर रहा था और फिर उसकी चूत में मैने अपना लंड डाल दिया उसके आंसू आ गये।

फिर क्या था बस मैने उसे उसके घर तक छोड़ दिया और मैं अपने घर पर चला गया और नहा धो कर बस मैं उसके सपने देखने लगा और मैने उसे फिर फोन में बात करके उसे फिर से बुलाया इस बार और कहीं नहीं मेरे घर में मैने बुलाया था क्योंकि मेरे घर में कोई भी नहीं था सब लोग बाहर घूमने जाने वाले थे। अब दोस्तो मुझे दीजिये इजाजत। मैं ये कणिका की अधूरी कहानी आप को अगले भाग में सुनाउंगा। ANtarvasna

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बात कुछ साल पुरानी है पर है बिल्कुल Hindi Sex Stories सच्ची। उस समय मैं सेक्स के बारे में बिल्कुल अंजान था। मैंने कभी मुठ भी नहीं मारी थी। गर्मियों की छुट्टियों में मुझे अपनी दीदी की ससुराल में जाने का मौका मिला। दो माह की छुट्टियाँ बिताने मैं और मेरा छोटा भाई दीदी की ससुराल में पहुंचे। उनका घर काफी बड़ा था लगभग १०-१२ कमरे का। कुछ कमरे तो उपयोग में ही नहीं आते थे। उनके घर में दीदी और जीजाजी के साथ ही उनके चाचा-चाची तथा बड़े भाई और उनका परिवार रहता था। जीजाजी के बड़े भाई को हम बड़े जीजाजी कहकर बुलाते थे, वह फॉरेस्ट रेंजर थे तथा एक सप्ताह में दो तीन दिनों तक बाहर जंगल में रहते थे। उनके दो बच्चे थे उनका बड़ा बेटा मुझसे छोटा था।

बड़े जीजाजी बड़े कामुक प्रवृति के इन्सान थे हालाँकि मैं उस समय इस शब्द के बारे में नहीं जानता था। जब भी वे मुझे अकेला पाते, मेरे गाल पर चिकोटी काट देते। कुछ दिनों बाद वे मेरे गालों और ओंठों को चूमने लगे।

एक दिन जब मैं छत पर अकेला खड़ा उड़ती हुई पतंगों को देख रहा था तो वो भी छत पर आ पहुंचे। उन्होंने मुझे पकड़ कर मेरे कूल्हों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मुझे काफी अटपटा लगा। जैसे तैसे मैं हाथ छुड़ा कर भाग आया। अब मुझे उनके सामने जाने में भी डर लगने लगा, पर वे मौका ताड़ कर मुझसे छेड़-छाड़ करते रहते। अभी तक वह मेरे कूल्हे कपडों के ऊपर से सहलाते थे एक दिन उन्होंने मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डालकर कूल्हे सहलाये। मुझे अच्छा तो लगा पर डर भी लगा। मैं उनके इरादों को कुछ कुछ समझने लगा। पर वो क्या करने वाले हैं यह मैं अब भी पूरी तरह नहीं समझ पाया था। मैं उनसे बच कर रहने लगा और उनके सामने ना आने का प्रयास करता।

एक दिन दोपहर को वह अपने कमरे में लेटे कोई किताब पढ़ रहे थे कि दीदी ने मुझे उनको पानी दे आने को कहा। मैं डरते हुए उनके कमरे में गया। उन्होंने पानी लेकर मुझे अपने पास जबरन बिठा लिया तथा मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगे। फिर झटके से मुझे बगल में लिटा कर अपनी टांगों के बीच में दबोच लिया। थोड़ी देर तक शांत रहने के बाद वह मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डाल कर मेरी जांघ को दबाते हुए मेरे कूल्हे भी दबाने लगे। उन्होंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर अपना लंड मेरी शोर्ट्स के अन्दर जांघ पर रख दिया। मैं सिहर उठा। मेरी सांसे तेज तेज चलने लगी। उन्होंने तभी एक झटका देकर मुझे थोड़ा तिरछा कर दिया। अब मेरी पीठ उनकी और थी। उन्होंने मेरी शोर्ट्स को थोड़ा ऊपर कर मेरे कूल्हे जोर जोर से मसलने शुरू कर दिए तथा अपना लंड मेरे कूल्हों की फ़ांकों में टिका दिया। मैं कसमसा रहा था पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। तभी बाहर कुछ शोर सा हुआ, वह थोड़ा अचकचाए और मैं उनकी पकड़ से भाग निकला। उनको बहुत गुस्सा आया तथा वह अगला मौका तलाशने लगे।

उन्हें अगला मौका शीघ्र ही मिल गया। पड़ोस में एक शादी थी जिसकी बारात इलाहाबाद जानी थी। वह मुझे भी जिद करके अपने साथ बारात में ले गए। सबको उन्होंने मुझे इलाहाबाद घुमाने के बहाने राजी कर लिया था। मैं किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था। मुझे उनके साथ जाना पड़ा। बारात एक होटल में रुकी थी। उन्होंने सबसे अलग एक कमरा ले लिया। बारात लगने के तुंरत बाद ही वह मुझे लेकर होटल के कमरे में आ गए।

उस समय रात के १२ बजे थे। मुझे लेटते ही नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि जीजाजी ने मेरी पैंट और चड्डी उतार दी है तथा वह मेरे लंड से खेल रहे हैं। मै अनजान बना लेटा रहा। उन्होंने मुझे तिरछा कर दिया तथा मेरे कूल्हे दबाने लगे। फिर उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी गांड में डाल दी। मुझे दर्द हुआ पर मैं चुपचाप लेटा रहा। अब जीजाजी ने अपना लंड निकल कर मेरे चूतड़ों से रगड़ना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक वह ऐसा ही करते रहे। फिर उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड के छेद में घुसाने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहे। मेरी गांड का छेद काफी टाइट था। दोबारा कोशिश में भी वह अपना लंड छेद में नहीं घुसा सके।

अब उन्होंने मुझे पकड़ कर उल्टा कर दिया तथा वह मेरी टांगों को फैला कर बीच में बैठ गए। उन्होंने मेरे चूतडों की दोनों फांको को पकड़ कर फैलाया और अपना लंड एक जोर का झटका देते हुए मेरी गांड में पेल दिया। मैं दर्द से बिलबिला गया पर डर के कारण मेरी चीख भी नहीं निकली। अब उनका पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर था और वह धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे। शुरू में तो मुझे काफी दर्द हुआ पर बाद में मजा आने लगा। १५ -२० मिनट के बाद उन्होंने पिचकारी मेरी गांड में ही छोड़ दी और वह मेरे ऊपर से उठ कर बगल में लेट गए। मेरी गांड में लंड पेलने के कारण पेट में काफी गैस बनने लगी थी तथा मुझे लगा कि खून भी मेरी गांड से निकल रहा है, यह अहसास भी मुझे हुआ। पर में बिल्कुल अंजान बना लेटा रहा।

थोड़ी देर में जीजाजी उठे और उन्होंने रुमाल में पानी लगाकर मेरी गांड पोंछी तथा मेरे चूतड सहलाये। मुझे राहत महसूस हुई। जीजाजी का लंड शायद फिर से खड़ा हो गया था। वह फिर से मेरी टांगों के बीच में बैठ गए लेकिन इस बार उन्होंने मुझे कमर में हाथ डाल कर घोड़े जैसी की अवस्था में कर लिया।

अब मेरी गांड का छेद ज्यादा खुल गया था। उन्होंने मेरे दोनों चूतड पकड़ कर फैला दिए तथा अपना लंड एक बार फिर से मेरी गांड में पेल दिया। इस बार मैंने भी अपनी गांड मराई का मजा लिया तथा कूल्हे हिला हिला कर जीजाजी का पूरा लंड गांड के भीतर जाने दिया। जीजाजी ने पूरे जोश से मेरी गांड मारी। उस रात सुबह होने से पहले जीजाजी ने तीसरी बार मेरी गांड मारी। इस बार उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगा कर मेरी गांड पिलाई की।

दोस्तों यह कहानी बिल्कुल सच्ची है। जीजाजी से गांड मराने के बाद कई दिनों तक मैं उनके सामने आने में शरमाता रहा पर वह अब भी मौका मिलते ही मुझसे छेड़-छाड़ अवश्य करते रहते थे। लेकिन उन्हें दोबारा मेरी गांड मरने का मौका घर में नहीं मिल सका। पर वह चूकने वालो में से नहीं थे।

उन्हें अगला मौका कब और कैसे मिला, पढिये अगली कहानी Hindi Sex Stories

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