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Hindi Sex Stories

समय पीछे चला जाता है लेकिन Hindi Sex Stories उसकी कुछ खट्टी मीठी यादें जो मन पर अपना प्रभाव बनाए ही रखती हैं! और जब वे यादें बेचैन करने लगती हैं तो बस बेचैनी से बचने का एक ही मार्ग होता है वह यह कि उन्हें किसी से बांट दिया जाए! यह कुछ ऐसी ही याद है जो मैं आपसे बांटना चाहता हूँ!

मेरी बी-टेक की परीक्षा का अन्तिम से पहला सेमेस्टर बजाय दिसंबर जनवरी के अप्रैल महीने में समाप्त हुआ। तभी गोरखपुर से चाचा जी की बेटी यानि कि दीदी का फोन आ गया कि घर जाने से पहले तीन-चार दिन के लिए आ जाओ।

मैं बचपन से ही उनसे लगा था। लेकिन इधर कई साल हो गये उन्हें देखा भी नहीं था, उधर गांव से भी फोन आ गया कि गोरखपुर हो कर आना।

दीदी की शादी हुए लगभग दस साल हो गये थे। जीजा जी बिजली विभाग में क्लर्क हैं, ऊपरी आमदनी का प्रभाव घर के रखरखाव से तुरन्त ही लग गया।

स्कूल से लौटे तो मैंने देखा कि टीना और अनिकेत तो इतने बड़े हो गये कि पहचान में ही नहीं आ रहे थे, लेकिन अनुमान लगाने में को कठिनाई नहीं हुई, मगर उनके आने के कुछ देर बाद जो अजनबी लड़की में आई उसे देखकर मैं चौंका। सामान्य से अधिक लम्बी, स्कर्ट के नीचे मेरी निगाह गई तो उसकी लम्बी और पतली सुन्दर और चिकनी टांगे देख कर मन अजीब सा हुआ।

उसने ‘मामा जी नमस्ते’ कहा तो मेरी दृष्टि ऊपर गई। देखा आंखें फट सी गईं। शरीर के अनुपात से कहीं भारी, लम्बी और भारी उसकी दोनों छातियां उसके खूबसूरत प्रिन्टेड ब्लाउज फाड़कर बाहर निकलने को आतुर दिखीं। उसने संभवतः मुझे देखते हुए देख लिया।

वह शरमाई तो मैंने निगाहें नीचे कर लीं। तभी अन्दर वाले कमरे से दीदी आ गईं। मैंने तब उनको भी ध्यान से देखा। जो दीदी पहले दुबली पतली थी अब उनका शरीर भर गया था और काफी सुन्दर लगने लगी थीं।

दीदी ने बताया- यह सोनम है जेठ की बेटी। गांव से आठ पास करके साथ ही है अबकी बार बी ए के प्रथम वर्ष की परीक्षा दे रही थी और आज ही अन्तिम पेपर था।

शाम तक सोनम मुझसे काफी घुलमिल गई। वह बेहद बातूनी और चंचल थी। अब तक कई बार वह किसी न किसी बहाने अपने शरीर को मेरे शरीर से स्पर्श करा चुकी थी।

उसकी बातों के केन्द्र में गर्लफ्रेन्ड और लड़के ही अधिक थे। दोनों बच्चे भी परीक्षा देकर अगली कक्षाओं में आ गये थे, अभी पढ़ाई का दबाव भी अधिक नहीं था।

सोनम तो मेरे आने से बहुत ही प्रसन्न थी। असल में मेरा गांव और दीदी के गांव से बहुत दूर नहीं था। दो दिन बाद उसे मेरे साथ उसे भी जाना था।

जीजा जी इधर काम के कारण काफी देर से आने लगे थे इस लिए सब्जी लेने दीदी ही जातीं। शाम में वह अनिकेत को लेकर मार्केट चली गई तो घर में मैं टीना और सोनम ही थे।

टीना अभी नादान थी। फर्श पर बिछे गद्दे पर मैं लेटा था। टीना मेरे पैर की उंगलियों को चटका रही थी।
बातें करते सोनम ने कहा- लाओ मैं सर दबा दूं।

फिर मेरे बिना कुछ कहे ही मेरे सिर के पास आकर बैठ गई। और सर में अपनी उंगलियां धीरे-धीरे चलाने लगी। धीरे-धीरे उसके शरीर की सुगंध मुझे मस्त करने लगी। मैंने आंखें ऊपर उठाकर देखा तो उसकी बड़ी नुकीली चूचियां मेरे सर पर तनी थी। संभवतः वह भी उत्तेजित सी थी, क्योंकि मुझे लगा कि उसके चूचुक भी तने हैं। उसने ब्रा नहीं पहनी थी।

मैंने अंगड़ाई लेने के बहाने हाथ पीछे किया तो मेरे पंजे उसकी चूचियों से छू गये। लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया और टीना से कहा- अब बस, जाओ.

वह जाकर टीवी देखने लगी। सोनम उसी तरह मेरे बालों में उंगली किये जा रही थी। मैंने फिर सामने टीना की तरफ देखते हुए फिर हाथों को पीछे ले जाकर उसकी चूचियों से स्पर्श कराते हुए वहीं रोक दिया। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, हां हाथ अवश्य रुक गये।

एक पल रुकने के बाद मैं हौले हौले उसकी चूचियों पर हाथ फिराने लगा। कुछ क्षणों बाद उसने मेरे हाथ को वहां से हटाकर धीरे से कहा- टीना छोटी नहीं!

उसके इस उत्तर से मेरी बांछें खिल उठीं। मैंने हाथ को अंगड़ाई के बहाने ले जाकर उसकी जांघों पर रख दिया। वह चिकनी और संभवतः बरफी की तरह सफेद थीं। मैं रह-रह कर उसके पेड़ू को भी छू देता। उसने कच्छी नहीं पहन रखी थी। उसकी झांटों और मेरे हाथों के बीच उसकी सलवार का झीना कपड़ा ही था।

सामने मेरा लिंग अकड़कर खड़ा हो गया और मेरे लोअर के अन्दर बांस की तरह तनकर उसे उठा दिया। जब सोनम की दृष्टि उस पर पड़ी तो वह मुस्कुराने लगी।

मैंने अपने हाथों को फिर ऊपर लेजा कर उसकी चूचियों से स्पर्श कराया तो लगा कि उसकी घुंडियां बिल्कुल तन कर खड़ी हो गई हैं।

छुआ-छुई का यह खेल चल ही रहा था तभी टीना फिर आ गई और पास बैठ गई। हम दोनों रुक गये। मैंने झट अपनी लम्बी टी-शर्ट को नीचे खींच दिया, लेकिन हमारे महाराज जी झुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे तो मैं झट से उठ गया।

सोनम भी मेरे साथ ही उठ गई। उसने चुन्नी अपने सीने पर नहीं रखी थीं। चूचियां कपड़े के ऊपर से ही वह पूरी तनी बिल्कुल स्तूप की तरह लग रही थीं।
रसोई की तरफ जाते हुए मैंने कहा- चाय पीने का मन हो रहा है।

“चलो बना दूं।” कहते हुए वह मेरे पीछे रसोई में आ गई।

अन्दर जाते ही मैंने उसे कचकचाकर लिपटा लिया और पूरी शक्ति से उसके शरीर को जकड़ लिया। वह कसमसाकर कुछ कहती इससे पहले ही अपने ओंठ उसके ओंठों पर रखकर जबरदस्ती उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी।

ह गों-गों कर उठी तो जीभ को निकाला। तब वह कांपते स्वर में बोली- छोड़ो अभी टीना आ जाये तो!
मैंने उसे छोड़कर कहा- भगवान कसम … अभी तक मैंने इतनी कसी और सुन्दर चूचियां तो फिल्मों की हीरोइनों तक की नहीं देखी!

वह अब स्थिर हो चुकी थी, बोली- तुम तो बहुत हरामी हो मामा!
मैंने धीरे से कहा- सोनम मैं बिना तुमको लिए छोड़ूंगा नहीं!

उसने ठेंगा दिखाते हुए कहा- बड़े आये लेने वाले!
और फिर मेरे अभी तक खड़े लन्ड को ऊपर से नौच कर भाग गई।

दीदी सामान लेकर आईं और रसोई में चली गईं। दोनों बच्चे पढ़ने बैठ गये तो मैं छत पर चला गया और कुछ देर बाद सोनम को भी पुकारकर ऊपर बुला लिया। हमारी दीदी का मुहल्ला निम्न-मध्यवर्गीय मुहल्ला था। छतें एक दूसरे से सटी थीं। अंधेरा पूरी तरह से घिर आया था, इसलिए इक्का-दुक्का लोग ही अपनी छत पर थे।

“सोनम दोगी नहीं?”
“क्या?”
“बुर! या अगर हो गई हो तो चूत!”
“मतलब?”
“मतलब यह कि अगर किसी से चुदवा चुकी हो तो चूत हो गई होगी नहीं तो अभी बुर ही होगी! बताओ क्या है?”
“हट!”

“हट नहीं! नहीं प्लीज सोनम! दे दो न!” मैंने उसे पलसाने के लिए कहा।
“बहुत बड़ा पाप है। फिर तुम तो मामा हो!”
“मैं कोई सगा मामा थोड़ी न हूं?”
“चाहे जो हो, मैं यह काम नहीं करूंगी। मुझे डर लगता है!”

उसने इस अन्दाज में कहा कि मुझे लग गया कि अभी तो बात बनने वाली नहीं, तो मैंने बातो को दूसरी तरफ मोड़कर कहा- अच्छा सच बताओ किसी से करवाया है कि नहीं?
“भगवान कसम नहीं।”
“मिंजवाई हो?”
“भला कौन लड़की होगी जिसकी किसी न किसी ने कभी मींजी न हो।”

फिर उसने कहा- तुमने मामा? तुमने मींजी हैं?
“हां, तुम्हारी ही!”
“धत! पहले?”
“मींजी तो कइयों की है, और ली भी है, लेकिन पूछना नहीं किसकी। कभी बाद में बताऊंगा। अच्छा बताओ तुम इसके बारे में ठीक से जानती हो?”
उसने मुस्कुराकर कहा- किसके?”

मैंने खीजकर कहा- बुर की पेलाई या कहो चुदाई के संबंध में!
“हाय राम यह भला कौन नहीं जानती होगी? इतना तो टीना को भी पता होगा!”
“अच्छा अपनी बताओ कि तुम को कैसे पता चला?”
“क्यों बताऊं?”

मैंने अन्त में कहा-सोनम मैं बिना लिए तुम्हारी छोड़ूंगा नहीं!

और फिर इधर उधर की बातें होने लगीं। बात फिर आकर पेलने, चोदने और लन्ड, बुर पर रुक गई। अन्त में सोनम ने यह वादा किया कि ऊपर से मैं चाहे जो कर लूं, लेकिन वह किसी भी कीमत पर मेरा लन्ड अपनी बुर में डालने नहीं देगी।

बाद के दो दिनों में वह सोई तो दीदी के कमरे में क्योंकि दीदी को माहवारी आ रही थी। यह भी उसी ने बताया, लेकिन दिन में जैसे ही अवसर मिलता हम दोनो एक दूसरे को नौचने चूसने में लग जाते। एकाध बार तो वह बुरी तरह से उत्तेजित भी हो गई, लेकिन उचित अवसर ही नहीं मिला। दीदी भी न जाने क्यों हमें अकेला नहीं छोड़ रही थीं।

यद्यपि मुझे अन्त तक यह लगने लगा कि अगर अकेले मिल जाए तो करवा लेगी।

मैं तीसरे दिन के बजाय चौथे जाने के लिए तैयार हुआ। उस दिन इतवार था। शहर से हमारे गांव की दूरी अधिक नहीं थी। तीन घण्टे बस से लगते थे। बीच में बदलकर अन्त में चार किलोमीटर का पैदल या फिर अपने निजी वाहन का रास्ता है। पैंसजर ट्रेन भी जाती थी, समय थोड़ा अधिक लगता था परन्तु आराम था।

बारह बजे की गाड़ी थी। प्रोग्राम यह बना कि चार बजे के लगभग गाड़ी पास के कस्बे पहुँच जायेगी फिर वहां से बस पकड़कर एकाध घंटे में अपने गांव की सड़क पर पहुंच जायेंगे। आगे अगर फोन लग गया तो कह दिया जायेगा कोई आ जायेगा, नहीं तो किसी रिक्शा या हम लोग पैदल ही निकल जायेंगे।

हमारा क्षेत्र बहुत शांत है। किसी तरह की चोरी डकैती या दूसरी घटनाओं से मुक्त! इसलिए हम लोगों को आने जाने का भय नहीं होता अक्सर किसी कारण से देर हो जाने के बाद लोग बारह-बारह बजे रात तक में अकेले आ जाते।

यद्यपि सोनम ट्रेन से आने में घबरा रही थी, कहीं लेट न हो जाये!

हुआ भी वही, बारह से एक बज गया फिर दो, तब जाकर कहीं गाड़ी आई। घर फोन से बात करने की कोशिश की लेकिन संभवतः सम्पर्क ना होने के कारण बात नहीं हो पाई। अभी हमारे यहां यह सुविधा उतनी अच्छी नहीं थी। जाते जाते चाचा कह गये कि मुहानी पर कोई आ गया तो आ गया, नहीं तो वहीं सम्पत साह के यहां सामान रख कर पैदल ही चले जाना।

हम लोग बैठे तो देर हो जाने की घबराहट थी लेकिन गाड़ी में बैठते ही हवा हो गई। सोनम खिड़की तरफ बैठी, फिर मैं। हम लोगों की यात्रा तो ऐसे कटी जैसे पति पति पत्नी हों। वह लगातार मेरे हाथों से खेलती रही। कभी-कभी अपने हाथों की कुहनियों को मेरे लंड पर पैंट के ऊपर से दबाती मेरे हाथ तो पूरी यात्रा में किसी न किसी तरह उसकी चूचियों के संपर्क में ही रहे।

अवसर देखकर कामुक बातें भी होती रहीं। मुझे उसकी जानकारियाँ सुनकर आश्चर्य हुआ। उसने बताया कि दीदी और जीजा कभी कभी गंदी फिल्म देखते हैं। जिसमे कभी दो आदमी एक की लेते हैं तो कभी एक दो की!

कहने लगी कि चाचा चाची की निरोध लगाकर ही करते हैं। उसने यह भी बताया कि उसने दरवाजे में एक छेद ऐसा कर रखा है कि जिससे वह जब चाहे उन लोगों की चुदाई देखे, मगर वह जान नहीं सकते।

ऐसे में यात्रा जब समाप्त हुई तो पता चला कि गाड़ी रास्ते और लेट हो गई। स्टेशन पर पहुंचते-पहुंचते सात बज गये। हल्का अंधेरा हो गया। सोनम डरने लगी। लेकिन बस जल्दी ही मिल गई। कुछ दूर जाने के बाद पहिया पंक्चर हो गया। और देर होती देख सोनम घबराने लगी, लेकिन मेरा मन प्रसन्नता से झूम उठा। मैंने निश्चय कर लिया अब सोनम को कुंआरी नहीं रहने दूंगा।

जब हम लोग मुहानी पर पहुंचे तो आठ का समय हो गया था। अंधेरा घिर आया था, लेकिन चांद भी निकलने की तैयारी में था। सोनम तो रोने लगी कि अब क्या होगा!

मैंने दिलासा दिया तो जाने को तैयार हुई।

सामान साह जी के यहां रखने गये तो योजना के अनुसार सोनम को थोड़ा दूर खड़ा करके कह दिया कि चाची हैं। वह अड़ गये कि सायकिल ले लो, लेकिन मैंने यह कहकर मना का दिया कि वह पैदल ही जायेंगी।

गांव में जाने का एक थोड़ा निकट का रास्ता था, लेकिन वह पलाश और कुश के छोटे से जंगल में से जाता था। मैंने वही रास्ता पकड़ा तो वह रुक गई।

क्योंकि उसे पता था कि एक सड़क भी है, लेकिन मेरे समझाने और डर समाप्त करने के बाद ही वह जाने को तैयार हुई। पगडंडियां तमाम थीं। मैंने जानबूझकर अलग पगडंडी पकड़ी। चूंकि बचपन से मैं इतनी बार इधर से गया था कि मुझे रास्ते का चप्पा चप्पा पता था। मेरे कंधे पर छोटा सा बैग था। जिसमे मेरे कपड़े थे। उसका सामान तो रख दिया था।

उसने मजबूती से मेरा हाथ पकड़ लिया था।
थोड़ी दूर जाकर मैंने कहा- हाथ छोड़ो, मैं जरा मूत लूं!
वह बोली- नहीं मुझे डर लग रहा है, यहीं मूतो!

तब तक चांदनी के प्रकाश का प्रभाव वातावरण में उभर गया था। मैं उत्तेजित होने लगा। मुतास के कारण मेरा लंड पहले से ही खड़ा था मैंने उसी के सामने लंड को पैंट से निकाला और छल छल मूतने लगा। मूतने के बाद जब लंड हिलाकर बूंदें गिराने लगा तो वह बोली- बीज गिरा रहे हो मामा?

मैंने कहा- बीज तो तुम्हारी बुर में गिराऊंगा।
“कैसे?”
“तुम्हें चोदकर और कैसे?” इतना कह कर मैं लंड को यूं ही बाहर लटकाये चल पड़ा।

और हाथ उसके कंधे पर रखकर बगल से उसकी चूचियों को सहलाने लगा। वह कड़ी होने लगीं तो और तेज मलने लगा। वह उत्तेजित होकर मुझसे चिपकने लगी। चूचियां बड़े लम्बे आम का रूप धारण करने लगीं। मैंने रुककर मुंह में सटाकर अपनी जीभ उसके मुंह में डालकर जो चूसा तो बोली- मामा लगता है कि आज तुम मुझे खराब करके ही छोड़ोगे!
“मतलब?”
“मतलब न पूछो!” कहकर वह बोली- मुझे भी मूतना है!
कहकर वह वहीं सलवार खोलकर बैठ गई।

जानवरों को चारा खिलाने वाली नाद की तरह उसके चूतड़ सामने आ गये। वह सीटी बजाती शर-शर मूतने लगी। मैं अपने खड़े लन्ड को उसकी कनपटियों से रगड़ने लगा।
मूत कर उठी तो सलवार बांधने से पहले ही मैंने उसकी झांटों से भरी चूत को मुट्ठी में पकड़ लिया वह मूत से गीली हो रही थी। उसने हल्का सा प्रतिरोध किया- छोड़ो न!

अब तक चांदनी खिल चुकी थी। चारों तरफ सन्नाटा था। मुझे याद आया कि थोड़ा अन्दर एक छोटी सी पोखर है। मैं उसी तरफ उसे लिपटाये चला गया।

पोखर में पानी तो कम था, लेकिन उसके किनारे साफ स्थान था। पास में सफेद पुष्प खिले थे। वातावरण मादक था। उसने मस्ती भरे स्वर में कहा- यहां क्यों आये?
मैंने कहा- तुम्हें लेने के लिए।
फिर उससे खड़े ही खड़े ही लिपट गया।

वह मेरे ही बराबर थी। उसके बाल खुल गये थे। उसकी कड़ी होकर पत्थर चूचियां मेरे सीने से टकराकर मेरे अन्दर आग भर रही थीं। मैंने हाथ को पीछे ले जाकर उसके उभरे चूतड़ों को पकड़ लिया और मुंह को उसके मुंह से लगाकर उसके चेहरे और होंठों को चूसने लगा। उसने भी मुझे जकड़ लिया। मेरा लंड खड़ा होकर सलवार के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
वह थोड़ी देर बाद अलग होकर बोली- अब चलो मुझे डर लग रहा है।

मैंने उसकी बात को अनसुना करते हुए बैग खोल कर अपनी लुंगी निकाल कर बिछा दी और कहा- अब न तो मैं बिना चोदे रह सकता हूं और नहीं तुम बिना चुदाये!

फिर मैंने उसे भूमि पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़कर उससे लिपट गया। उसने भी मुझे कस लिया। पांच मिनट की लिपटा-लिपटी के बाद मैं उठा और उसे उठाकर उसकी कुरती को शमीज़ सहित ऊपर खींच कर उतार दिया। वह ऊपर से नंगी हो गई। दोनों छातियां ऐसी गोरी चिकनी और फूलकर खड़ी हो गई थीं मानो उन्हें अलग से चिपका दिया गया हो। उन्हें नीचे से ऊपर मींजते सहलाते हुए कहा- सच बताओ सोनम मेरे अतिरिक्त तुम्हारे दो पपीतों को किसी और मींजा है?”

“भगवान कसम नहीं। जब मैं गांव में थी तो संध्या भाभी जरूर मींजती और कभी कभी चूसतीं भी थीं, लेकिन तब यह छोटी थीं। कामता भैया कलकत्ता रहते थे। वह अपनी चूचियां चुसाती भी थीं। यहां किसी ने कभी नहीं कुछ किया।”

“तो आज मैं सब कुछ करूंगा!”कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को चूसना आरम्भ कर दिया। उसका सीना मेरे थूक भीग गया। वह वहीं लेट गई और अकड़ने लगी।

तब मैं उठा और अपनी पैंट और चड्ढी साथ उतार दी। बल्ल से मेरा लंड सामने आ गया। वह उसे ही देखने लगीं। मेरी झांटे काफी बड़ी हो गईं थीं। नसें तनकर अकड़ गई थीं। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। वह वैसे ही पकड़े रही। उसकी खड़ी चूचियां मेरे होंठों के सामने तनी थीं। तब मैंने कहा- सहलाओ।”

वह बोली- शरम आती है।
“लो अभी मैं शरम मिटाता हूं।” कहकर मैंने उसके सलवार का नाड़ा पकड़कर खींच दिया।
सलवार खुल गई। नीचे से पकड़कर खींचा तो उतर गई। वह शरमाने लगी। उसकी भी झांटे काफी बड़ी थीं। उसकी बुर उसी में छुपी थी।

“कभी-कभी इसे साफ कर लिया करो।” कहकर मैं हथेली से उसकी बुर सहलाने लगा।
सोनम सिसियाते हुए बोली- तुम्हारी भी तो बड़ी है।
और फिर मेरे लंड पर अपनी हथेलियां चलाने लगी।

मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई, लगा कि अब मैं कही झड़ न जाऊं। उसकी बुर भी गीली हो गई थी। उसकी बुर का दाना उभर आया था। यद्यपि मैंने तो रास्ते में सोचा तो बहुत कुछ करने के लिए था, लेकिन लगा कि अब मैं कहीं बिना अन्दर डाले ही न झड़ जाऊं तो उससे कहा- टांगें फैलाकर लेटो।”
वह लेटते हुए बोली- छोड़ दो न मामा!
“पागल हूं मैं!” कहकर मैंने अपनी शर्ट उतार दी ओर उसके पूरे शरीर को सहलाया और फिर उसकी टांगों के बीच में जाकर उसकी बुर के छेद को हाथों से टटोलकर उसपर अपने लंड का सुपाड़ा रखकर औंधे मुंह उसपर लेट गया और कमर पर दबाव डाला तो भीग चुकी उसकी बुर में मेरा लंड सक से चला गया।

“हाय राम मैं मरी!” उसने कहा।
मैंने कहा- झिल्ली फट गई?
“पता नहीं!”

मैं एक पल के लिए रुका फिर कुहनियों को भूमि पर टिका कर उसकी चूचियों को मलते हुए कमर चलाते हुए सोनम को हचर-हचर चोदने लगा। सात आठ धक्के के बाद वह भी कमर चलाने लगी और अपने हाथों से मुझे कस लिया। मैं उसे चोदे ही जा रहा था। उसका शरीर महकने लगा। उसके मुंह से हों-हों का स्वर निकलने लगा।

मेरी कमर और तेज चलने लगी। उसने किचकिचाकर मुझे दबोच लिया। अन्त में मैं भल्ल से उसकी चूत में झड़ गया। मैं कुछ देर बाद उसके ऊपर से उठा। मेरा लंड बीज से सना था। उसकी चूत भी वैसे ही बीज से भरी थी। वह लम्बी लम्बी सांसे भर रही थी। मैंने पास पड़ी पैंट से रुमाल निकालकर पहले अपने गीले लंड को पौंछा फिर उसकी बुर को।

अब वह स्थिर हो गई थी। बोली- मामा अगर कहीं बच्चा ठहर गया तो?”
“पागल एक बार में बच्चा नहीं ठहरता है। उठो! बैठकर मूत दो! बीज नीचे गिर जायेगा।”

मूत कर वह उठी तो मैंने उसे अपनी टांगों को सीधे फैला लिया और उसकी टांगों को अपनी कमर के दोनो तरफ करवा कर बैठा लिया। उसकी चूत से मेरा सिकुड़ा लंड स्पर्श कर रहा था। मांसल चूचियां मेरे सीने से पिस रही थीं। उसके खुले बाल उसकी पीठ पर फैलकर वातावरण को मादक बना रहे थे।

वह बोली- अब चलो। अपनी तो कर ही ली। देर हो जायेगी।”
“देर तो हो गई। थोड़ी और सही। ऐसा सुनहरा अवसर अब तो कभी नहीं मिलेगा।”

उसने कोई उत्तर नहीं दिया इसका मतलब था कि उसकी भी मौन स्वीकृति थी। मेरे हाथ उसकी पीठ से लेकर उसके नाद जैसे भारी चूतड़ों की दरार तक चल रहे थे।

वह भी मेरे बालों में अंगुलियाँ चला रही थी। कभी कभी मेरी कनपटियों को भी सहलाने लगती।
मैंने यूं ही पूछा- सोनम कभी सोचा था कि तुम्हारी चुदाई ऐसे रोमांटिक वातावरण में होगी?
उसने कोई उत्तर नहीं दिया।

मैंने उसे खड़ा किया तो वह रोबोट की भांति खड़ी हो गई। बिल्कुल नंगी! मैं भी मनुष्य के आदिम रूप में था। हम नंगे पोखर के किनारो पर टहलने लगे। उसके चूतड़ चलते में हिल रहे थे। चिकने थे। एक भी रोयां नहीं था। जांघ और पिंडलियां भी चिकनी थी। झांटें जरूर पेड़ू तक फैली थीं। चूची हिल नहीं केवल थरथरा रही थी।

मैंने टहलते हुए बुर पर हथेली रखते हुए कहा- सोनम झांट हेयर रिमूवर से बना लिया करो। अभी लगता है एक बार नहीं किया?

“नहीं साफ तो किया है, लेकिन मुझे शरम आती है। जब चाची को याद आता है तब लाकर देती हैं तो करती हैं, स्वयं तो एकदम चिकना किए रहती हैं।”

फिर दोनों हाथों की अंगुली और अंगूठे को मिलाकर चूत का आकार देते हुए कहा- भोंसड़ा हो गई है, फिर भी!

मैंने कहा- उन्हें चुदना जो होता है, जब तुम लगातार चुदोगी तो अपने आप साफ रखोगी।
“तुम तो चोदते हो तब भी जंगल उगा लिया है।”
कहकर वह मेरे लंड को पकड़ कर खेलने लगी और पेलड़ की गोलियों से खेलने लगी।

मुझे न जाने क्या सूझी कि मैंने उसे उठाकर सामने से उसे अपने कंधे पर बैठा लिया। उसकी टांगें पीठ की तरफ हो गईं। उसकी चूत मेरे मुंह के सामने आ गई और मन में आया कि लाओ चूम लूं, लेकिन सोचा पता नहीं क्या सोचे तो अपनी ठुड्डी उसकी बुर से रगड़ने लगा। उसकी झांट के बालों का स्पर्श चेहरे को अजब आनन्द दे रहा था।

इसी के साथ मैंने अपने हाथों को ऊपर उठाकर उसके दोनों दूधों को मसलने लगा। बुर चूत की बातें होती रहीं और हम फिर उत्तेजित हो गये। मेरा लंड दुबारा कील की तरह खड़ा होकर ऊपर उठ गया। इसी तरह पोखर का तीन चक्कर लगाते-लगाते वह उत्तेजित हो गई । तो बोली- मामा चलो फिर चोदो मगर दूसरी तरह से।”

मैं उसके इस खुले आमन्त्रण से हिल गया। कंधे से उतार कर ले जाकर लुंगी पर उसे झुका दिया और हथेली पर अपने और उसके मुंह से थूक लेकर अपने लण्ड पर मला और चूत को ढके झांटों को इधर-उधर करके छेद पर रखकर कसा तो एकदम अन्दर चला गया। फिर कमर हिलाहिलाकर उसे चोदने लगा।

कुछ पल बाद लंड निकाला तो देख कि उसकी बुर का छेद खुल चुका था। उसका चना भी फूल गया था। फिर मैं भूमि पर लेट गया। मेरा लंड हवा में तना था।

मैंने उससे कहा- सोनम आओ! इसपर टांगें फैलाकर बैठो।
वह बोली- नहीं! पूरा अन्दर चला जायेगा! दर्द होगा!
“यह सब कहने की बात है, और मजा आयेगा। बैठकर तो देखो!”

वह दोनों टांगों को इधर उधर करके बुर के छेद को लंड के निशाने पर लेकर बैठी तो एकाएक कमर को पकड़कर दबा दिया। वह घप्प से गिर गई। सट से लंड अन्दर पूरा उसकी बुर की जड़ तक चला गया। पहले मैंने नीचे से अपनी कमर को हिलाया फिर वह भी हचर-हचर अपनी कमर चलाने लगी। मैं सामने उसकी स्तूप की तरह हिल रही चूचियों को सहलाने लगा। बढ़ती उत्तेजना के साथ मेरी और उसकी गति तेज हो गई। अन्त में मैं फल्ल-फल्ल झड़ने लगा। वह अजब अजब स्वर निकालने लगी और औंधे मुंह मेरे ऊपर गिर पड़ी।

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बाबू लाल जी बीकानेर से १२० किलो Hindi Sex Stories मीटर दूर बिहार के राजपुर गाँव के हाई स्कूल में हेडमास्टर थे, पढाने में बड़े तेज थे और उन्हें गोल्ड मैडल मिला था। वो कहीं भी और अच्छी नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्हें अपने गाँव से बहुत प्यार था, और वहीं वो कुछ करना चाहते थे। २२ साल की उमर में उनकी शादी १७ साल की एक बड़ी सुंदर लड़की कमला से हुई।

उन दोनों की जोड़ी बड़ी अच्छी लगी सबको। बाबू लाल जी कद के थोड़े छोटे थे- ५ फीट ३ इंच के, लेकिन कमला शादी के समय उनसे १ इंच छोटी थी। कमला का बदन शादी के समय तक भरा नहीं था। शादी के बाद भी उसका कद बढ़ता गया और साल भर में अपने बेटे राहुल को जन्म देने के समय तक वो करीब ५ फीट ४ इंच की हो गई और उसका बदन भी गदरा गया। उनकी दूसरी संतान दीपा राहुल के ८ साल बाद पैदा हुई, लेकिन उसके जन्म के समय कमला को शारीरिक समस्या हो गई और उसका ऑपरेशन करना पड़ा, जिसकी वजह से वो फिर कभी माँ नहीं बन सकती थी।

तो फिलहाल अभी बाबू लाल जी ४४ साल के थे और कमला ३ महीने में ४० की होने वाली थी। बाबू लाल जी जैसे तेज थे, उनका बेटा राहुल भी उतना ही तेज निकला और २१ साल की उमर मे आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस के आखिरी साल में था उनकी १३ साल की बेटी दीपा बड़ी सुंदर मासूम कली थी।

हर इन्सान की कोई न कोई कमजोरी होती है। बाबू लाल जी को हाई स्कूल में ही बीड़ी सिगेरेट की लत लग गई थी, जो कभी नहीं गई। कॉलेज में पीते रहे क्योंकि उससे वो रात भर जग कर पढ़ाई करने में मदद मिलती थी। खैर ! ४ साल पहले बाबू लाल जी को काफी तेज़ दमा शुरू हुआ। दमे ने उन्हें अशक्त कर दिया, लेकिन कम से कम जान लेवा नहीं था। लेकिन अभी ३ महीने पहले डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टी बी भी हो गई है और उन्हें किसी सैनेटोरियम में दाखिल कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर में सभी आस लगाये बैठे थे कि जब राहुल को नौकरी मिलेगी तो सब ठीक हो जाएगा।

बाबू लाल जी ने अपने ख़राब सेहत की वजह से स्कूल जाना भी बंद कर दिया था, लेकिन सरकार ने कुछ मदद की जिससे घर का काम काज चलता था। पति, पत्नी और बेटी, तीनों बाबू लाल जी के घर के पहले मंजिल पर रहते थे और ऊपर के मंजिल पर सिर्फ़ १ कमरा था जो स्टोर के जैसे इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन पैसे की तंगी की वजह से बाबू लाल जी उसे अब खाली कर के किराये पर लगाने की सोच रहे थे।

जब राहुल आखिरी परीक्षा देकर आया तो उसने ऊपर के कमरे को खाली किया और जब तक वो किराये पे नहीं लगता तब तक उसे अपना कमरा बना लिया। रिजल्ट निकलने से पहले ही राहुल को कई नौकरियों के प्रस्ताव आए थे, जिसमे कई बहु-राष्ट्रीय कम्पनियाँ और अच्छी कम्पनियाँ थी। राहुल ने एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी की नौकरी स्वीकार कर ली थी, क्योंकि उसे यहाँ २ हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद उस कंपनी के ऑफिस में काम करने का मौका मिलेगा। कंपनी ने राहुल को सिर्फ़ २ हफ्ते का समय दिया काम पर आने के लिए। राहुल के लिए भी अच्छा था कि जल्दी नौकरी मिलने से जल्दी पैसा भी आना शुरू हो जाएगा।

पहली सुबह राहुल की नींद पानी के हैन्ड-पम्प की आवाज़ से खुली। उसने खिड़की से नीचे जो देखा, वो दृष्य देखकर अवाक रह गया।

आंगन के एक कोने में हैन्ड-पम्प एक हौज़ में था और उसके तीन ओर दीवार डाल कर एक बाथरूम जैसा बनाया हुआ था और बाथरूम के दरवाज़े पर एक कपड़े का पर्दा था। लेकिन बाथरूम के ऊपर कोई छत नहीं थी।

राहुल ने देखा कि उसकी माँ बिल्कुल मादर जात नंगी पानी का हैण्ड पम्प चला रही थी। गेहुआं गदराया बदन और उसके उठे हुए मांसल चूतड़ हैण्ड-पम्प चलने से थिरक रहे थे और उसकी बड़ी बड़ी आजाद चूचियां भी पेंग मार रही थी। राहुल यह दृश्य एक टक देखता ही रह गया, जैसे उसकी आँखें पथरा गई हों।

इसके पहले राहुल ने कई बार माँ को नहाने के बाद देखा था लेकिन कमला हमेशा पेटीकोट को अपनी चूची के ऊपर बाँध कर नहाने जाती थी या फिर नहा के निकलती थी लेकिन आज की तरह बिल्कुल नंगी कभी नहीं देखा था।

कमला को शायद इस बात की ख़बर नहीं थी कि ऊपर के कमरे में राहुल है और वहां से सब कुछ दिख सकता है। हौज में पानी भरने के बाद वो मग से पानी लेकर नहाने लगी। नहाना क्या, ज्यादा पानी वो अपनी खड़ी चूचियों की घुंडी पर डालती थी। आज कल उसका सारा बदन जैसे हमेशा जलता रहता था। उसने लेडी डॉक्टर को बताया, तो लेडी डॉक्टर ने कहा कि इस उम्र में ऐसा ही होता है, इसे हॉट फ्लैश कहते हैं।

लेडी डॉक्टर ने ही बताया कि जब ज्यादा जलन हो तो ठंडे पानी से नहा लो। लेडी डॉक्टर को भी बाबू लाल जी के सेहत के बारे में मालूम था, इसलिए उसने हिचकिचाते हुए कमला को बताया कि जब ज्यादा गर्मी लगे तो ऊँगली से अपने को शांत कर लिया करो। कमला अब हर रोज तीन बार नहाने लगी और लेडी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जब भी वो नहाती, वो ऊँगली से अपने को झाड़ लेती। उसे कुछ रहत तो मिलती थी, लेकिन कहाँ ऊँगली और कहाँ एक मुस्टंड लंड। कोई तुलना नहीं।

खैर, सारी दुनिया से बेख़बर, ठंडे पानी से नहाने के बाद कमला ने अपनी ऊँगली से अपनी चूत पर साबुन लगा के दाने को मसलना शुरू किया। उसकी आँखें बंद हो गई और वो अपने होंठ काटने लगी। यह देख कर राहुल का लण्ड भी खड़ा हो गया, और वो हलके हलके मूठ मारने लगा। जिस एंगल से राहुल देख रहा था, माँ की काले काले घुंघराले बाल से ढकी चूत देखने में कोई मुश्किल नहीं हुई। ५-७ मिनट के बाद उसकी माँ के बदन में कम्पन हुई, और वो शांत हो गई। राहुल समझ गया कि उसकी माँ झड़ गई, और यह सब देख कर मूठ मारते हुए राहुल का भी निकल गया।

जब तक राहुल वहां रहा, २ हफ्ते उसने दिन में तीन बार यही दृश्य देखा और मूठ मारा। वास्तव में वो दिन में भी इंतज़ार में रहता था कि उसकी माँ कब नहाने जायेगी। जब भी उसकी माँ घर में चलती, वो उसके चूतड़ और चूचियों कि थिरकन देखता ही रह जाता। कई बार तो राहुल ने माँ को सुबह मैं जबरदस्ती चोदने की भी ठानी। एक बार तो वो बाथरूम के पास जा कर लौट आया, यह सोच कर कि उसे इतना गरम करूँगा कि ख़ुद चुदाने आ जाएगी तब उसे कोई ग्लानि नहीं होगी।

२ हफ्ते के बाद राहुल अपनी नौकरी पे चला गया, और फिर वहां से अमेरिका। लेकिन वह मन से माँ का नंगा रूप कभी नहीं भूल पाया। राहुल को अपनी माँ की इस दशा पर तरस भी आता था, कि ऐसी मस्त औरत को ऐसे कम उमर में पूरी चुदाई का सुख नहीं मिल पाया।

उसने जब अमेरिका से पैसे भेजने शुरू किए तो घर की हालत भी ठीक होने लगी। राहुल ने माँ को एक सेल फ़ोन लेने को भी कहा, और वो अपनी माँ से हर हफ्ते बात करता था। फिर एक दिन उसने एक योजना बनाई और माँ से राय मांगी। योजना यह थी कि राहुल ६ महीने के बाद भारत आकर पिताजी को सैनेटोरियम में भरती करा देगा, और दीपा को कुरसेओंग के पब्लिक स्कूल में, और माँ को अमेरिका ले आएगा जिससे उसके खाने पीने का हिसाब भी ठीक हो जाएगा।

माँ क्या करती, घर का सब कुछ तो राहुल की वजह से ही चल रहा था, लेकिन वो बोली कि इस सब में तो बहुत खर्च होगा। राहुल ने कहा कि माँ मुझे जितना मिलता है उसमें कोई मुश्किल नहीं होगी। माँ ने पूछा, घर का क्या करेंगे ? राहुल ने कहा, अभी किसी को किराये पर दे देंगे, और जब कोई खरीद डर मिल जाए तो बेच देंगे। बाबू लाल जी का सारा परिवार राहुल की सलाह से बहुत खुश हुआ। बेटा हो तो ऐसा – श्रवण कुमार के जैसा।

६ महीने के बाद राहुल भारत आया, और योजना के मुताबिक पिता जी को सैनेटोरियम में और दीपा को बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया। इत्तेफाक से स्कूल के नए हेडमास्टर ने उनका घर किराये पर ले लिया तो वो भी समस्या हल हो गई। यह सब काम करने के बाद राहुल ट्रेन से माँ को लेकर दिल्ली चला। कार्यक्रम ऐसा था कि दिल्ली में वीसा के लिए १ हफ्ता लगेगा, और तब तक वो माँ को दिल्ली भी घुमा देगा। बेचारी कमला दिल्ली तो क्या, सिर्फ़ १ बार बीकानेर गई थी जब बाबू लाल जी को राज्य के सबसे अच्छे हेडमास्टर का इनाम मिला था। कमला थोड़ी घबरा रही थी कि वो जब बीकानेर और दिल्ली से डरती है तो अमेरिका में कैसे काम चलाएगी। राहुल ने उसे समझाया कि माँ तुम बड़ी तेज हो, सब कर लोगी, और मैं जो हूँ।

राहुल ने ट्रेन में वातानुकूलित श्रेणी में आरक्षण करवाया था, और उसकी माँ ट्रेन की सफाई देख कर अवाक् हो गई। राहुल और उसकी माँ को दोनों नीचे के बर्थ मिले थे, और ऊपर सिर्फ़ एक आदमी था, और चौथा बर्थ अलाहाबाद के कोटे में था। जब वो तीसरा आदमी शाम को बाथरूम गया तो राहुल ने माँ को एक नाईट गाऊन दिया, और बोला कि ये सोने के लिए है, पहन लो। माँ को समझ नहीं आया कि उसे पहने कैसे, तो राहुल ने कहा कि वो बाहर जाएगा तब सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ नाईट गाऊन इस तरह पहन लो, राहुल ने माँ को उसकी साड़ी ब्लाउज के ऊपर से ही नाईट गाऊन पहना कर दिखाया।

फिर राहुल बाहर चला गया, और २ मिनट के बाद आया तो देखा कि उसकी माँ राहुल की ओर पीठ कर के खड़ी थी। माँ ने कहा कि इसमे तो सामने से बिल्कुल खुला है, तो राहुल ने बताया कि इसमें बेल्ट है ना बांधने के लिए। राहुल ने बेल्ट के दोनों छोर पकड़ के पीछे से ही बेल्ट को बांधा और माँ को घूम कर सामने से दिखाने को कहा।

राहुल ने जान बूझ कर ही ऐसा नाईट गाऊन ख़रीदा था जिसका गला काफ़ी नीचे तक कटा था, और वह घुटने से ४ इंच ऊपर तक ही था। कमला ऐसे कपड़े पहन कर बड़े पशोपेश में थी, और राहुल ने यह भाँपते हुए कहा कि माँ तुम अमेरिका में लोगों को जैसा कपड़ा पहनते देखोगी उसके मुकाबले ये कुछ नहीं है। घबराओ नहीं, तुम इन सबकी आदि हो जाओगी। अब सो जाओ। कमला ने एक हाथ से गाऊन से अपनी चूची को ढकने की कोशिश की और दूसरे से जाँघों के पास के खुले हुए गाऊन को साथ कर के पकड़ा, और कम्बल में घुस कर सो गई। राहुल भी अपने बर्थ पर सो गया।

सुबह ट्रेन दिल्ली पहुँची और राहुल और कमला एक होटल पहुंचे जहाँ राहुल ने पहले से आरक्षण करवा रखा था, लेकिन उसने १ हफ्ते का सिर्फ़ १ बेड का आरक्षण करवाया था कि तब उन दोनों को साथ सोने और करीब आने का मौका भी मिलेगा।

होटल देख कर माँ की आँखें चौंधिया गई। लेकिन सबसे पहले वो नहाना चाहती थी, सिर्फ़ नहाना ही नहीं, अपने जलते बदन को ठंडा करना चाहती थी। गाँव से चले उसे पूरा १ दिन हो गया था और उसके बदन में जैसे आग लगी थी। राहुल को सब मालूम था, इसलिए उसने अपना कैमरा फ़ोन बाथरूम के सिंक के नीचे लगा कर चालू कर दिया और माँ को नहाने जाने को बोला, उसने फव्वारे को चला के दिखाया। बाथरूम का दरवाजा बंद करते ही कमला ने फव्वारे से ठंडा पानी चला कर पूरे बदन पर साबुन लगाया और चूत मल कर अपने को झाड़ा।

इसके बाद राहुल नहाने गया और कैमरा फ़ोन की रिकॉर्डिंग देख कर मन ही मन मुस्कुराया – क्या मस्त चुदासी चीज़ है ?

राहुल ने माँ को कहा कि सबसे पहले वो उसे एक सैलून ले जा कर उसकी ऐसी काया पलट करवा देगा कि वो ख़ुद को पहचान नहीं पायेगी। और उसके बाद उसके लिए कुछ कपड़े भी खरीदेगा क्योंकि वो कपड़े यहाँ सस्ते मिलेंगे। उसने एक माँ का साइज़ नापने के लिए एक टेप निकला और माँ को सामने खड़ी होने को बोला और नापने लगा। चूतड़-४१, सीना-४०, कमर-३४। नापने के बहाने उसने कई बार माँ की चूची, चूतड़ और नंगी कमर को भी हलके से छू लिया।

इसके बाद उसने माँ को टैक्सी में सैलून ले जा कर उसके बाल ठीक कराये, और फेशियल करवा के उसका चेहरा और चमकने लगा। वापस टैक्सी में बैठते ही राहुल ने माँ को बाँहों में भर कर उसके गाल चूम लिए और बोला- माँ तू तो क्या मस्त सुंदर लग रही है !

कमला को राहुल का इस तरह करना अच्छा ही लगा, लेकिन उसने राहुल को इशारा किया कि टैक्सी वाला शीशे में देख रहा है। फ़िर टैक्सी से वो माँ को एक मॉल ले गया और माँ के लिए १ सलवार-कमीज़, १ स्कर्ट -ब्लाउज, और २ जींस-टॉप माँ के आकार के ख़रीदे। इसके बाद उसने माँ के लिए २ ऊंची ऐड़ी के सैंडल, और कई नकली सोने के माडर्न दिखने वाले कानों की बालियाँ, गले के हार और चूड़ियाँ आदि बहुत कुछ खरीदा और दोनों लौट कर होटल आ गए।

अपने ऊपर इतना खर्च करते देख कर कमला अपने बेटे के ऐहसान में डूबती गई। टैक्सी में एक बार माँ ने राहुल को कहा भी कि उस पर इतना खर्च करने की क्या जरूरत है तो राहुल ने माँ की जांघ पर हाथ मार कर कहा- माँ तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ मैं !

राहुल हमेशा माँ को छूने या पकड़ने का मौका कभी नहीं चूकता था, गाड़ी से उतरते, या किसी सीढ़ी पर चढ़ते, उतरते वो कभी माँ का हाथ तो कभी बांह पकड़ लेता था। कभी उसकी कमर पर हाथ रख देता था तो कभी हल्के से माँ के चूतड़ पर इस तरह से छू लेता था जैसे अनजाने में हाथ लग गया हो।

होटल आ कर उसने माँ को कपड़े पहन कर देखने के लिए कहा। शुरूआत हुई सलवार-कुर्ते से, और फ़िर स्कर्ट-ब्लाऊज़। दोनों बिल्कुल ठीक थे। जब कमला जींस पहन कर आई तो उसकी सेक्सी फ़िटिन्ग देख कर राहुल के लण्ड में हरकत होने लगी, लेकिन कमला ने कहा कि वो बड़ा कसा लग रहा है उसे।

राहुल ने समझाया कि माँ यह जींस ऐसी ही होती है कि उभार ठीक से दिख सकें, और तुम्हारे तो हैं भी इतने सुन्दर !

यह कहते हुए उसने कमला के चूतड़ों पर हाथ रख कर उसकी गोलाइयों को एक बार सहला दिया और कहा कि पहनने लगोगी तो अच्छा लगने लगेगा। राहुल के इस तरह करने पर कमला थोड़ी चौंकी, लेकिन जब तक वो कुछ सोचती, राहुल ने उसकी कमर पकड़ कर अपने सामने कर उसकी चूत की ओर नज़र डाली और कहा- वाह ! क्या फ़िट बैठी है यहाँ सामने भी ! राहुल ने जानबूझ कर माँ के लिए पैंटी नहीं खरीदी और कमला ने कभी पैंटी कभी पहनी भी नहीं थी तो उसे यह मालूम नहीं था कि पैंटी पहनना जरूरी है।

हाँ ! मॉल में उसने अच्छी अच्छी ब्रा देखी थी लेकिन शर्म के मारे वो राहुल से ब्रा के लिए कह नहीं पाई।

कमला ने राहुल से पूछा- आज कितना खर्चा हुआ?

तो राहुल ने जब सारा खर्च बताया तो कमला ने कहा कि टैक्सी की जगह हम लोग बस में नहीं ज सकते क्या?

राहुल ने कहा कि हाँ, पैसे तो बचेंगे, लेकिन भीड़ में थोड़ी परेशानी होगी तुम्हें।

कमला ने कहा कि जैसे इतने सारे लोग बस लेते हैं, हम भी ले लेंगे।

इसके बाद कमला और राहुल सोने की तैयारी करने लगे। कमला ने अपना नाईट-गाऊन पहना और राहुल पायज़ामा-बनियान में।

लेकिन आज़ कमला नाईट-गाऊन पहनने में नहीं शरमा रही थी जबकि उसकी चूचियों उभार और उसकी नंगी जांघें राहुल को दिख रही थी। यही नहीं, जब वो बाथरूम से नाईट-गाऊन पहन कर निकली तो पीछे से रोशनी होने की वज़ह से उसका शरीर राहुल को करीब करीब नंगा ही लग रहा था। रात भर माँ बेटे होटल में साथ सोए और राहुल ने माँ के ऊपर कई बार हाथ भी रखा, लेकिन इसके अलावा और कुछ नहीं हुआ।

दूसरे दिन राहुल और कमला बस से दिल्ली घूमने निकले। कमला ने सलवार-कुर्ता पहना था। पहली बार ही बस में चढ़ते हुए वो समझ गई कि राहुल क्यों बोल रहा था कि भीड़ भाड़ में मुश्किल होती है बस में। वो चारों ओर से मर्दों से घिरी हुई थी। कई लोगों के हाथ उसने अपने स्तनों और चूतड़ों पर महसूस किए। कुछ लोगों ने कमला के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड रगड़ा। कई तो सिर्फ़ एक दो बार छू या दबा कर वहाँ से खिसक जाते थे, लेकिन कई तो ऐसे निडर थे कि हाथ हटाने का नाम नहीं लेते थे।

एक ने जब ऐसा किया तो कमला पूरा घूम गई, लेकिन तब उसने कमला की जांघों के बीच उसकी चूत पर ही हाथ रख दिया। कमला थोड़ा घबरा गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे।

राहुल पास ही खड़ायह सब देख रहा था। उसने एक सीट के पास थोड़ी जगह बनाई और कमला को कहा- आप यहाँ बगल में आ जाओ। कमला को अब थोड़ी राहत मिली। कम से कम वो चारों ओर से लोगों से घिरी नहीं थी। उसने एक हाथ से ऊपर का डण्डा पकड़ा और दूसरे हाथ से सीट को। अब भी उसके पीछे खड़े और आते जाते लोगों का हाथ वो कभी कभी अपने चूतड़ों पर महसूस कर रही थी। अब उसे डर या इतना बुरा नहीं लग रहा था।

लेकिन तभी उसे लगा कि सामने से कोई हाथ बड़े हल्के से सलवार के ऊपर से उसकी जांघ सहला रहा है। उसे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि वो हाथ किनारे वाली सीट पर बैठे एक लड़के का था।

हे भगवान ! आजकल इस उम्र के लड़के भी ऐसे बेधड़क हो गए हैं ! कमला ने सोचा कि देखें यह लड़का किस हद तक बढ़ता है और वो उसकी उंगलियों की हरकत को अपनी जांघों पर महसूस कर रही थी लेकिन बस की खिड़की के बाहर ऐसे देख रही थी जैसे बिल्कुल बेखबर हो। उस लड़के की उँगलियाँ कमला की जाँघों पर सलवार के ऊपर धीरे धीरे ऊपर रेंगने लगी और कमला को ऐसे लगा जैसे उसकी दोनों जाँघों से उसकी चूत तक कोई करंट मार रहा हो और उसकी चूत गीली होने लगी। उस हिम्मती लड़के ने आख़िर कमला की चूत पर अपनी हथेली रख दी और धीरे धीरे मसलने लगा। कमला ने अपनी टांगों को और थोड़ा खोल लिया जिससे लड़के को अपना काम करने में आसानी हो। उसका सर हल्का होने लगा, वो झड़ना चाहती थी, इसी बस में लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बस रुकी और वो लड़का सीट से उठा, उसका स्टाप आ गया था। लेकिन जाते हुए उसने कमला से कहा- आंटी ! मेरा नाम अनिल है, कल सलवार की सिलाई खोल कर आना तो और मजा दूँगा !

कमला को अब तक लग नहीं रहा था कि वो इस दुनिया में थी, लेकिन लड़के की ऐसी बात सुन कर एकाएक चौंक कर फिर वापिस इस दुनिया में आ गई और उस लड़के की खाली की हुई सीट पर बैठ गई। कमला को ये नहीं मालूम था कि राहुल बस में दूर था लेकिन वो कमला के साथ की सारी हरकतें गौर से देख रहा था।

थोड़ी देर के बाद राहुल उसके पास आया और बोला कि उनका भी स्टाप आ गया है। वो दोनों होटल के पास बस से उतर गए। बस में इतने लोगों के उसके अंग अंग के साथ खेलने से कमला के बदन में आग लग गई थी। उसे सिर्फ़ लण्ड चाहिए था, किसी का लण्ड।

होटल आते ही वो नहाने के बहाने बाथरूम भागी और ऊँगली से अपने को झाड़ा और आकर बिस्तर पर राहुल की ओर अपने चूतड़ कर के सो गई। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। राहुल भी कमला की हरकतों से बेखबर नहीं था और उसके अन्दर मन में एक गुदगुदी सी हो रही थी। वो चित्त लेटा था, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अपनी माँ की ओर घूम कर माँ से सट गया और अपना एक हाथ माँ के ऊपर इस तरह रखा कि उसकी उंगलियाँ कमला की चूची को छूने लगी। राहुल ने इस हरकत को इस तरह किया जैसे वो नींद में हो।

कमला ने नाईट-गाऊन की बेल्ट नहीं बांधी थी इसलिए वो सामने से बिल्कुल नंगी ही थी। राहुल का सीना कमला की पीठ से सटा हुआ था और उसकी जांघ अपनी मां के चूतड़ से। राहुल से हाथ में नींद में फ़िर हरकत हुई और कमला की चूची की घुण्डियों को हल्के से रगड़ते हुए उसका हाथ कमला की नाभि और चूत के ऊपर आकर ठहर गया। लेकिन उसके बाद राहुल के हाथों में कोई हरकत नहीं हुई तो कमला ने सोचा कि राहुल ने सोचा की राहुल नींद में ऐसा कर रहा है।

राहुल ने ऐसा करने के साथ अपनी जांघें माँ के चूतड़ से इतनी सटा दी कि उसका लण्ड कमला के चूतड़ को छू गया। कमला को फिर अपनी चूत में ऊँगली डाल कर झड़ने की इच्छा हुई, लेकिन उसके दोनों जांघ सटे हुए थे और राहुल का हाथ उसके पेट पर इस तरह था कि वो अभी ऐसा नहीं कर सकती थी। वो अगर चित्त हो जाए तो दोनों टांग खोल कर वो ऊँगली कर सकती थी। लेकिन जब वो चित्त हुई तो राहुल के हाथ खिसक कर उसकी नंगी चूत के ऊपर बाल पर आ गए।

अपने चूत की जलन चुदासी माँ नहीं सहन कर पाई और सारी लाज और शर्म छोड़ कर, दोनों टांग फैला कर अपनी ऊँगली से चूत के दाने को सहलाने लगी, और कभी कभी ऊँगली को चूत के अन्दर बाहर करने लगी। राहुल से भी नहीं रहा गया। अपनी माँ को ऊँगली करते देख वोह चित्त हो गया और बेधड़क एक हाथ से अपनी माँ का हाथ उसकी चूत से हटा कर अपने लण्ड खड़े फनफनाते लण्ड पर रखा, और दूसरे हाथ की हथेली को माँ की चूत पर रखा।

दोनों अब समझ गए कि वो एक दूसरे के साथ क्या करना चाहते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। एक ओर राहुल कमला की गीली चूत के दाने को सहलाने लगा, साथ ही कमला धीरे धीरे राहुल के लण्ड को जड़ से टोपी तक सहला कर उसके लण्ड की लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने लगी।

हे भगवन, क्या लण्ड दिया तूने मेरे बेटे को, ७ से ८ इंच का लगा उसे। कमला ने सिर्फ़ बाबू लाल जी का ५ इंच के लण्ड का स्वाद लिया था और उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि लण्ड इतना लंबा मोटा भी होता है।

राहुल ने सोचा कि अब लोहा गरम हो चुका है और वो घड़ी आ गई है जिसका इंतज़ार था। वो उठा और पजामे को उतार फेंका और नीचे से बिल्कुल नंगा हो कर अपनी माँ की टांगों को बेड के किनारे तक इस तरह खींचा कि उसकी माँ की गांड बेड के किनारे आ गई। इसके जवाब में कमला ने अपनी टांगें जितनी खुल सकती थी खोल कर फैला दी। अब राहुल ने माँ की गरम और रसीली चूत की दरार में अपना सुपाड़ा रख कर हलके से दबाया। उसका लण्ड २ इंच माँ की चूत के अन्दर घुस गया। तब उसने माँ के दोनों मांसल चूतड़ के नीचे दोनों हाथ रख एक जोर दार धक्का लगाया। घच की आवाज के साथ राहुल का पूरा लण्ड जड़ तक अपनी माँ की चूत में चला गया, और कमला के मुंह से एक आह निकल पड़ी। अब राहुल ने घच घच अपनी माँ की चूत को चोदना शुरू किया और आनंद से उसकी माँ बड़बड़ा रही थी– चोदो मेरे लाल, मेरे श्रवण कुमार, चोदो आज अपनी चुदासी माँ को ! कई साल से भूखी है तुम्हारी माँ ! आज सारी भूख मिटा दो !

राहुल माँ को घच घच चोदते हुए बोल रहा था- ये ले, और ले माँ। तुम्हारी सालों की चुदाई की कसर अब पूरी हो जायेगी। चोदने के साथ राहुल माँ की चूचियां बेरहमी से मसल रहा था और माँ के मुंह और गले को चूम रहा था। कमला भी अब नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर राहुल के धक्के का जवाब देने लगी। लगता था कि कमरे में भूचाल आ गया हो।

कमला के मुंह से अजब गजब की आवाज निकलने लगी, और एक बार तो उसके मुंह से चीख जैसी निकल पड़ी तो राहुल ने उसका मुंह दबा दिया ताकि होटल वाले ये सब सुन कर कहीं वहां न आ जाएँ। तभी कमला के बदन में बड़ी जोर की सिहरन हुई, और राहुल समझ गया की उसकी माँ अब झड़ने वाली है। उसने कमला के मुंह को तकिये से ढक दिया ताकि वोह चीखे तो उसकी आवाज कम हो जाए, और उसके ५ -७ करारे धक्के लगाते ही उसकी माँ झड़ने लगी। राहुल और कमला दोनों ने एक दूसरे के चूतड पकड़ कर अपने लण्ड और चूत को इस तरह एक दूसरे से दबाया कि लगा कि उनकी हड्डी टूट जायेगी। तभी राहुल के लण्ड से उसके रस की १०-१२ पिचकारी छूटी और कमला की चूत के हर कोने को रसदार कर दिया .राहुल अपनी माँ की चूत में लण्ड डाले हुए उसके ऊपर पड़ा रहा।

कमला को बड़ा आश्चर्य हुआ कि झड़ने के बाद भी राहुल का लण्ड पूरा ढीला नही हुआ। वास्तव में १५ मिनट के बाद उसे लगा कि राहुल का लण्ड उसकी चूत में धीरे धीरे फड़क रहा है और फिर से लोहे की तरह कड़ा होता जा रहा है। कमला भी फिर से चुदाने के लिए तैयार थी, लेकिन राहुल ने बिस्तर से उठ कर बिजली जलाई और अपनी मस्त नंगी माँ का हाथ पकड़ बिस्तर से उठाया और कहा – अभी तो शुरुआत हुई है, अभी देखो रात भर क्या करता हूँ।

वो अपनी माँ को बाथरूम ले गया और साबुन लगा कर उसकी चूत और बगल के बाल को साफ़ कर के चिकना कर दिया और फिर माँ बेटे नंगे बिस्तर पर आए। राहुल ने अपनी माँ को बिस्तर पर चित्त लिटा कर उसकी चिकनी चूत चाटते हुए उसे झाड़ा और फिर अपना लण्ड माँ के मुंह में डाल कर उसे सिखाया कि लण्ड कैसे चूसते हैं।

रात की तीसरी चुदाई में राहुल ने माँ को कुटिया जैसी बना कर पीछे से चोदा। कमला आज तक कभी पीछे से ऐसे नहीं चुदी थी, लेकिन उसे लगा कि ऐसे में लण्ड और गहराई तक जाता है।

राहुल ने माँ को कहा कि कल दिन में वे साइबर कैफे चलेंगे और वहां तरह तरह की चुदाई की फ़िल्म देखेंगे !

अगले दिन क्या हुआ? कहानी के दूसरे भाग में शीघ्र ही… Hindi Sex Stories

सोनाली वर्मा Antarvasna

मेरी नई नई नौकरी लगी एक साल हो Antarvasna गया था. मेरे ऑफिस में एक ही लड़की मैं थी. मेरी टेबल के पास सुनील की टेबल थी. मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी. बाद में मेरी दोस्ती सुनील से हो गयी थी. मैंने उस से कहा कि वो अपनी सेक्स के पल अन्तर्वासना के पाठकों को भी बताये …जिस से सभी उन बातों का मजा ले सकें. सुनील होमो का शौकीन भी था. उसी की लेखनी से प्रस्तुत है यह कहानी.

हाय मेरा नाम सुनील है. मेरी नौकरी लगे हुए २ साल हो चुके हैं. मुझे कंपनी की तरफ़ से मकान मिला हुआ है. मेरे साथ वाला मकान कामिनी का है. ये मकान दो मकानों के जोड़े में है. जिसकी एक ही चारदीवारी है. और पीछे एक चौक है जो दोनों मकानों को एक दरवाजे के द्वारा जोड़ता भी है.

इन दिनों मेरा ऑफिस का एक दोस्त टूर पर आया हुआ था. मेरी ही उमर का था और कुछ कुछ मेरे ही तरह गोरा और लंबा था. उसका नाम रोहित था. रोहित दिन भर टूर पर रहता था शाम को ६ बजे तक वो लौट आता था .फिर हम रात को थोडी सी व्हिस्की भी पीते थे और सो जाते थे. उस दिन रोहित शाम को आया और नहा कर हम चाय पीने लगे. हम दोनों आपस में बात कर रहे थे. बातों बातों में उसने बताया कि आज वो एक हिन्दी में ब्लू सीडी लाया है. मैंने कभी ब्लू फ़िल्म नहीं देखी थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि इसमे बूब्स चूसना, चुदाई करना, वगेरह खुला दिखाया जाता है. मेरे मन में भी बहुत इच्छा थी कि में ब्लू फ़िल्म देखूं. शाम को करीब ८ कबजे उसने सीडी लगाई. हमने एक एक जाम बनाया और पीते हुए देखने लगे. थोड़ी ही देर में स्क्रीन पर गरम गरम बातें होने लगी.

“रोहित …ये तो लंड ..चूत की भाषा बोल रहे हैं ..”

” हाँ इस में सब कुछ खुला ही बोलते हैं ..”

मैंने पहली बार ब्लू फ़िल्म देखी थी इस लिए मुझे मजा आने लगा. मेरा लंड भी धीरे धीरे कब खड़ा हो गया मुझे पता ही नहीं चला. अचानक मुझे लगा रोहित मेरे लंड की और देख रहा है. मैंने संभलते हुए ऊपर एक कपड़ा डाल लिया. में रात के हिसाब से पजामा पहना था, अंडरवियर सोते समय नहीं पहनता था. मेरी नजर उस पर गयी तो उसका लंड भी सीधा खड़ा था, पर वो उसे छुपा नहीं रहा था. बल्कि उसे धीरे धीरे मसल रहा था .
“क्या मस्त चुदाई चल रही है …”

“हाँ यार … उसकी चूत तो देख …” मैं बोला।

“और उसका लंड … क्या मोटा है …”

उसने मेरी जांघ पर हाथ रख कर दबाया. मेरे मन के तार झनझना गए.

मैंने कहा – “यार रोज ही एक सीडी ले आया कर … ये तो मस्त चीज है …”

उसने मेरे ऊपर से कपड़ा खींच लिया ..

“यार तू तो लड़कियों की तरह शरमा रहा है …”

“अरे … मत कर …न ”

“मर्द है तो खड़ा तो होगा ही … ये तो साधारण सी बात है …”

मैंने देखा कि उसका लंड भी जोर मार रहा था .. उसने सीधे ही मेरा लंड पकड़ लिया ..

“..ये तो बहुत कड़क हो गया है. .”

” इस को छोड़ यार … हाथ हटा …” मैंने उसका हाथ पकड़ लिया पर लंड छुडाया नहीं. वो समझ गया कि मुझे मजा आ रहा है. सच में उसने मेरा लंड पकड़ा तो में आनंद से भर गया था. मेरे मन में भी अब उत्तेजना भर गयी थी. मुझे लग रहा था कि वो मेरी मुठ मार दे ..बस. मैंने भी हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया.

“हाय संजू … अब जरा दबा दे …”

मैंने उसे दबा दिया. उसने तुंरत अपना पजामा उतर दिया. उसके पजामा उतारते ही मैंने उसके लंड कि सुपारी खोल दी. और सुपारी को उँगलियों से दबाने लगा.

“हाँ संजू …घिस डाल … अपना पजामा भी तो उतार दे …”

मैंने अपना पजामा उतार दिया. उसने तुंरत ही मेरे लंड को मसलना चालू कर दिया.

मेरे मुंह से भी सिसकारी निकल गयी … मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था.

“और जोर से पकड़ कर मुठ मार …ओ ऊ ऊई ईई ”

“संजू तुम्हारा लंड तो बहुत प्यारा है …मेरी गांड में घुसाओगे क्या …”

“तुम बताओ … कैसे घुसाते हैं ..”

वो बिस्तर पर घोडी बन गया. मेरे से कहा – “अपना लंड मेरी गांड में घुसा दो …” मैंने अपना लंड उसकी गांड में रखा और दबाने लगा पर वो नहीं जा रहा था. उसने कहा “थोड़ा थूक लगा कर चिकना कर दो …”

मैंने थूक लगा कर जोर लगाया तो मेरे लंड की सुपारी अन्दर घुस गयी. पर मेरे लंड में जलन होने लगी।सुपारी के नीचे वाली झिल्ली फट गयी थी. और लंड की चमड़ी पूरी तरह से ऊपर चढ़ गयी. मैंने घबरा कर लंड बाहर निकाल लिया.

“मुझसे नहीं होता है …ये सब ..”

“अच्छा तो तुम घोडी बन जाओ …”

उसने मुझे घोडी बनाया और कहा -“देखो मैं बताता हूँ …”

रोहित एक्सपर्ट था. उसने मेरी गांड में थूक लगाया और लंड गांड के छेद पर रख कर जोर लगाया तो उसकी सुपारी मेरी गांड के अन्दर घुस गयी. उसने मेरा लंड नीचे से पकड़ लिया. ये सब करने से मैं बहुत उत्तेजित हो उठा था. मेरा लंड कड़ा हो कर फटा जा रहा था .उसने धक्का लगा कर अपना लंड पूरा गांड में घुसा दिया.

“क्या चिकनी गांड है संजू ” … उसने मेरा लंड मसलते हुए कहा. बीच बीच में मुठ भी मारता जा रहा था .मुझे गांड मराने में मजा आने लगा. गांड का छेद टाइट होने से वो ज्यादा देर नही टिक सका. और धक्के मारते मारते वो झड़ गया.उसने लंड गांड में ही रहने दिया. और कस कस कर मेरे लंड की हाथ से मुठ मारने लगा. कुछ ही देर में मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है. मैं मस्ती में आँखें बंद किए था. मेरे लंड को मुठ मारने से अब कुछ कुछ होने लगा था. निकलने जैसा होने लगा था. अचानक अन्दर से लावा बाहर आने लगा.

“अरे …आ आह ह्ह्ह …आ अहह हह … ये क्या …अरे छोड़ मेरा लंड … ” कहते हुए मेरी धार अपने आप ही निकल पड़ी. उसने अब अपनी उँगलियों से लंड को हलके हलके खीचने लगा. मेरी पिचकारी रुक रुक कर निकलती रही. मुझे लगा मेरी गांड में से भी उसका वीर्य निकल रहा है. मैं बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया और तोलिये से मेरे लंड और गांड को पोंछने लगा.

रोहित मुस्कराया ..”मजा आया न …”

“हाँ ये मेरा पहला एक्सपेरिएंस था …”

“इसमे कोई बदनामी का कोई खतरा नही … अपने मजे करो … और अपना पानी निकाल दो …”

हम दोनों हंसने लगे।

देखा आपने, ये सुनील है. ये लड़के कितनी मस्ती मारते हैं. सुनील की होमो की कहानी आगे भी चलती रही.

पर मैं इसमे कहाँ थी … जी हाँ मैं इस कहानी मैं ही हूँ.

जानते हैं आप …अब मेरी कहानी सुने …

संजू की बैठक और मेरी बैठक आमने सामने है. मेरा बेड रूम और मेरा किचेन भी आमने सामने है. जब संजू बैठक में रहता है तो रात को लाइट बंद करके खिड़की पर बैठ कर उसे देखती रहती हूँ. कभी कभी वो कपड़े बदलता है तो नंगा भी हो जाता है. सभी कुछ साफ़ दिकता है. वो कोई सीडी देखता है तो उसके हाव भाव और हरकतें देखती रहती हूँ.

… पर यही नही, बदले में मैं भी बेडरूम में उसको दिखाने के लिए अपने स्तनों को दबाती हूँ. अंगडाई लेती हूँ. सोने से पहले अपने कपड़े पूरे उतार कर सकर्ट और टॉप पहनती हूँ. पर वो देखता है या नहीं मैं नहीं जानती हूँ.

मुझे वाइरल ज्वर हो गया था. मैं ऑफिस नहीं गयी थी. शाम को सुनील मिलने आया. मुझे देख कर बोला -“तुम्हे बुखार हो रहा है …चलो मै डॉक्टर को दिखा दूँ ” वो मुझे जबरदस्ती क्लीनिक पर ले गया. डॉक्टर ने ५ दिन की दवाइयाँ दे दी. हम वापस घर आ गए।

मैं तो ख़ुद अपना खाना पकाती थी. पर सुनील का टिफिन आता था. सुनील सामने अपने घर चला गया. थोडी ही देर में सुनील ने फिर दरवाजा खटखटाया – मैंने उसे अन्दर बुला लिया. वो अपना टिफिन लेकर आया था. उसने मुझे खाना खिलाया और फिर बचा हुआ ख़ुद उसने खाया और चला गया. मैं उसे देखती रह गयी. अब सुनील मुझे सुबह, दिन और शाम को देखने आता था … मेरी पूरी देख रेख करता था. पॉँच दिनों में मैं बिल्कुल ठीक हो गयी. मैं उसके अहसान से दब गयी. पर इस बारे में न वो कुछ कहता … ना मैं ही कुछ कहती. जब मैं खाना बनाती तो उसको जरुर भेजती थी. बाद मैं मैंने उसका टिफिन बंद करवा दिया. अब वो मेरे घर पर ही खाता था. वो जब किचेन की खिड़की पर होता तो मैं उसे हाथ हिलती और जो भी बनाती उसे बताती. हम दोनों अब बहुत घुल मिल गए थे. बल्कि ऐसा लगता था कि हमें एक दूसरे से प्यार हो गया है.

एक बार शाम को मैं बाज़ार से लौटी और कमरे में घुसी तो सामने खिड़की में से सुनील दिखा. वो अपना हाथ से अपने पजामे के ऊपर से लंड को दबा रहा था. मैंने बत्ती नहीं जलाई और देखती रही और रोमांचित हो उठी. वो बेखबर हो कर कभी लंड को सीधा करता और अपनी मुट्ठी में भर लेता और दबाता. कभी उगलियों से लंड दबा कर ऊपर नीचे करता. उसने अब अपने पजामे का नाडा खोला और अपने लंड को बाहर निकाला. और देखता रहा. फिर उसने अपने लंड की चमड़ी ऊपर कर दी. उसका एक तो इतना मोटा लंड फिर लाल लाल मोटी सुपारी … मैं तो सिहर उठी … मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगी. मैं उत्तेजित हो उठी. मेरे स्तनों में कड़ापन आने लगा. चुंचियां कड़ी होने लगी … उसने तभी अपना रिमोट उठाया और कोई बटन दबाया …

ओह ! तो सुनील कोई फ़िल्म देख रहा था … पर कैसी फ़िल्म?

मैं किचेन में गयी …और आइस की केन उठाई. पीछे के दरवाजे से मैंने उसका दरवाजा खटखटाया. उसने तुंरत ही उठ कर दरवाजा खोल दिया. पर अपने खड़े हुए लंड को नहीं छुपा सका. मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी. खड़ा लंड देख कर मैं शरमा गयी वो भी झट से हाथ से छिपाने की कोशिश करने लगा. मैं अन्दर आ गयी. इतने में सुनील लपक कर आया – “रुक जाओ कामिनी ..”

पर मैं अन्दर आ चुकी थी … उसने सीडी का मैं स्विच ही बंद कर दिया. मैंने ब्लू फ़िल्म की झलक देख चुकी थी. अनजाने बनते हुए पूछा -“कोई अच्छी फ़िल्म थी …बंद क्यूँ कर दी …”

“कुछ नहीं … ऐसे ही …” वो हडबडा गया “कोई काम था क्या …”

“हाँ बर्फ लेने ई थी …”

उसने अपना फ्रीज खोला और ट्रे खाली कर दी. मैंने इतनी देर में उसे छेड़ने के लिए सीडी का स्विच ओन कर दिया. फ़िल्म फिर से चलने लगी. सुनील ने जल्दी से आकर फिर से बंद करदी.

“कामिनी मत देखो …ये बडों की फ़िल्म है …”

“अच्छा नहीं देखती ..बस … पर खिड़की तो बंद कर लिया करो … फ़िल्म से अच्छा तो वो सीन था ..”

सुनील घबरा गया. मैं उसे देखती रही.

“मुझे भी दिखा दो ..बड़ों की ये फ़िल्म ..” मैंने फिर से सीडी ओन कर दी …चुदाई के सीन चल रहे थे … मैंने पहली बार ब्लू फ़िल्म देखी थी … मेरे रोंगटे खड़े हो गए … मेरी टांगे काम्पने लगी … मैं वहीं कुर्सी पर बैठ गयी …

“सुनील .. ये क्या … हाय रे. …”

“बस देख तो लिया …बंद कर दो प्लीज़ ..”

” प्लीज़ सुनील …देखने दो न …” मैंने रिक्वेस्ट की. सुनील पास ही खड़ा था. मैंने उसकी टांग पकड़ ली. और अपनी तरफ़ खीच ली.

“सुनील ये बड़ों की फ़िल्म नही है …ये तो हम जैसे जवानों के लिए है …देखो तो सही ..”

मैंने पजामे से हाथ ऊपर बढ़ा कर उसके चूतडों को पकड़ लिया .और जोश में अपनी तरफ खींचने लगी. मैं सब कुछ भूलती जा रही थी. जाने कब उसका लंड मेरे मुंह के करीब आ गया. और मेरे मुंह अपने आप खुलते गए. एक मोटा मोटा नंगा लंड मेरे मुंह में घुसता चला गया. सुनील भी सब कुछ भूल कर अपना लंड बाहर निकल कर मेरे मुंह से सटा दिया. मैंने उसके लंड को चूसना चालू कर दिया. मैं मस्त हो उठी. सुनील भी मेरे मुंह में धक्के मरने लगा. मैं कुर्सी से उठी और उस से लिपट गयी …

“सुनील …अब रहा नही जाता है. .प्लीज़ अब कुछ करो न …” मैं बहुत उत्तेजना से भर उठी.

सुनील ने मुझे लिपटा लिया और बेतहाशा चूमने लगा.

मैंने अपने आप को सुनील के हवाले करते हुए कहा – “प्लीज़ संजू मुझे चोद दो … देखो मैं कैसी तड़प रही हूँ .”

उसने प्यार से मेरे चेहरे को ऊपर उठाया … और किस करते हुए बोला – “हाँ मेरी कामिनी … अब तुम जरूर चुदोगी .. मेरा लंड …देखो तो फूल कर फट जाएगा .”

उसने मुझे बाँहों में उठाया और धीरे से बिस्तर पर लेटा दिया. उसने मेरी साड़ी उतर दी. फिर प्यार से ब्लाउज उतर दिया, पेटीकोट भी खोल डाला …अब में बिल्कुल नंगी सुनील के सामने चुदने के लिए लेटी थी .वो मेरे हुस्न को निहार रहा था. वो भी नंगा था. उसका लंड देखते मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया. मैं चुदने के लिए बेकरार हो उठी थी. मेरी चूत पानी से तर हो चुकी थी. वो मेरे ऊपर सवार हो गया. तभी मेरी चूत में कुछ चीरता हुआ अन्दर घुस गया. मैं तड़प उठी. चूत को ऊपर उठाते हुए बोली – राजा लो …और अन्दर घुसेड दो …” उसने दूसरे झटके में पूरा लंड जड़ तक घुसा दिया. मैं निहाल हो उठी. अब वो मेरी पूरी जवानी को मसल रहा था. मेरे उभरे हुए स्तनों को भींच भींच कर मसल रहा था. उसकी जवानी और मेरी जवानी टकरा उठी … आग जल उठी … दोनों ऐसे चिपक कर जवानी का मजा ले रहे थे जैसे एक जिस्म हो. चेहरा से चेहरा रगड़ खा रहे थे .फच फच की आवाजें बढती जा रही थी. मस्ती की चीखें जोर पकडती जा रही थी. मेरे चूतड नीचे से तेजी से उछल उछल कर लंड को ले रहे थे. मैं सिस्कारियां …आहें भर रही थी … जाने क्या क्या बोलती जा रही थी. .. “चोद ऐ रे संजू …आ आह्ह … फाड़ दे मेरी चूत … … दे लंड …और दे लंड आ अह्ह्छ मेरे राजा … हाय ..रे …चुद गयी …राजा …”

मेरी उत्तेजना हदें पर कर गयी. और अचानक जैसे ठंडी फुहार बरसने लगी … सुनील का मस्ती भरा रस बरसात की तरह फुहारे छोड़ रहा था. रुक रुक कर मेरे स्तनों पर बरसात कर रहा था. मैं भी अपना रस छोड़ चुकी थी …दोनों का ज्वार उतरने लगा. मैं निढाल हो गयी. सुनील को मैंने जोर से छाती पर भींच लिया. और उसे साइड में करवट लेकर चिपक कर लेट गयी. हमारी सांसे अब सामान्य होने लगी थी.

सुनील ने उठ कर …”कामिनी खाना खा कर सोना …उठो ..”

मैं हंस पड़ी …”अरे …सोता कौन है … अभी तो सारी रात पड़ी है …” Antarvasna

Antarvasna

आसाम की हरी भरी वादियां और जवान Antarvasna दिलों का संगम … किसको लुभा नहीं लेगा।
ऐसे ही आसाम की हरी भरी जगह पर मेरे पति का पदस्थापन हुआ।

हम दोनों ऐसी जगह पर बहुत खुश थे। हमें कम्पनी की तरफ़ से कोई घर नहीं मिला था इसलिये हमने थोड़ी ही दूर पर एक मकान किराये पर ले लिया था … उसका किराया हमें कम्पनी की तरफ़ से ही मिलता था।

मेरे पति मोहित की ड्यूटी शिफ़्ट में लगती थी।

घर में काम करने के लिये हमने एक नौकरानी रख ली थी। उसका नाम काजल था।

उसकी उम्र लगभग 20 साल होगी। भरपूर जवान, सुन्दर, सेक्सी फ़िगर … बदन पर जवानी की लुनाई … चिकनापन … झलकता था।

मोहित तो पहले दिन से ही उस पर फ़िदा था। मुझसे अक्सर वो उसकी तारीफ़ करता रहता था।
मैं उसके दिल की बात अच्छी तरह समझती थी।
मोहित की नजरें अक्सर उसके बदन का मुआयना करती रहती थी … शायद अन्दर तक का अहसास करती थी।

मैं भी उसकी जवानी देख कर चकित थी। उसके उभार छोटे छोटे पर नुकीले थे। उसके होंठ पतले लेकिन फ़ूल की पन्खुडियों जैसे थे।

एक दिन मोहित ने रात को चुदाई के समय मुझे अपने दिल की बात बता ही दी।
उसने कहा-नेहा … काजल कितनी सेक्सी है ना!

“हं आ … हां … है तो … जवान लडकियां तो सेक्सी होती ही है …” मैं उसका मतलब समझ रही थी।

“उसका बदन देखा … उसे देख कर तो… यार मन मचल जाता है.” मोहित ने कुछ अपना मतलब साधते हुए कहा।

“अच्छा जी … बता भी दो जानू … जी क्या करता है.” मैं हंस पड़ी … मुझे पता था वो क्या कहेगा.
“सुनो नेहा … उसे पटाओ ना … उसे चोदने का मन करता है.”

“हाय … नौकरानी को चोदोगे … पर हां …वो चीज़ तो चोदने जैसी तो है.”
“तो बोलो … मेरी मदद करोगी ना?”

“चलो यार …तुम भी क्या याद करोगे … कल से ही उसे पानी पानी करती हूं.”

फिर मैं सोच में पड़ गयी कि क्या तरीका निकाला जाये।
सेक्स तो सभी की कमजोरी होती ही है।
मुझे एक तरकीब समझ में आयी।

दूसरे दिन काजल के आने का समय हो रहा था … मैंने अपने टीवी पर एक ब्ल्यू हिन्दी फ़िल्म लगा दी।
उस फ़िल्म में चुदाई के साथ हिन्दी डायलोग भी थे।

काजल कमरे में सफ़ाई करने आयी तो मैं बाथरूम में चली गयी।

सफ़ाई करने के लिये जैसे ही वो कमरे के अन्दर आयी तो उसकी नजर टीवी पर पडी … चुदाई के सीन देख कर वो खड़ी रह गयी और सीन देखती रही।

मैं बाथरूम से सब देख रही थी।
उसे मेरा वीडियो प्लेयर नजर नहीं आया क्योंकि वह लकड़ी के केस में था।

वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गयी।
उसे पिक्चर देख कर मजा आने लग गया था।
चूत में लन्ड जाता देख कर उसे और भी अधिक मजा आ रहा था।

धीरे धीरे उसका हाथ अब उसके स्तनो पर आ गया था … वह गर्म हो रही थी।
मेरी तरकीब सटीक बैठी।

मैंने मौका उचित समझा और बथरूम से बाहर आ गयी.

“अरे … टीवी पर ये क्या आने लगा है?”
“दीदी … साब तो है नहीं …चलने दो ना …अपन ही तो है.”
“अरे नहीं काजल … इसे देख कर दिल में कुछ होने लगता है.” मैं मुस्करा कर बोली.

मैंने चैनल बदल दिया.
काजल के दिल में हलचल मच गयी थी … उसके जवान जिस्म में वासना ने जन्म ले लिया था।

“दीदी … ये किस चेनल से आता है?” उसकी उत्सुकता बढ़ रही थी।

“अरे तुझे देखना है ना तो दिन को फ़्री हो कर आना … फिर अपन दोनों देखेंगे … ठीक है ना.”

“हां दीदी …तुम कितनी अच्छी हो.” उसने मुझे जोश में आकर प्यार कर लिया।
मैं रोमांचित हो उठी … आज उसके चुम्बन में सेक्स था।

उसने अपना काम जल्दी से निपटा लिया और चली गयी।
तीर निशाने पर लग चुका था।

करीब दिन को एक बजे काजल वापस आ गयी।
मैंने उसे प्यार से बिस्तर पर बैठाया और नीचे से केस खोल कर प्लेयर में सीडी लगा दी और मैं भी बिस्तर पर बैठ गयी।

ये दूसरी फ़िल्म थी।
फ़िल्म शुरू हो चुकी थी।

मैं काजल के चेहरे का रंग बदलते देख रही थी। उसकी आंखो में वासना के डोरे आ रहे थे।

मैंने थोड़ा और इन्तजार किया … चुदाई के सीन चल रहे थे।

मेरे शरीर में भी वासना जाग उठी थी।
काजल का बदन भी रह रह कर सिहर उठता था।

मैंने अब धीरे से उसकी पीठ पर हाथ रखा। उसकी धड़कन तक महसूस हो रही थी। मैंने उसकी पीठ सहलानी चालू कर दी।

उसे मैंने हल्के से अपनी ओर खींचने की कोशिश की … तो वो मेरे से सट गयी।
उसका कसा हुआ बदन …उसकी बदन की खुशबू … मुझे महसूस होने लगी थी।

टीवी पर शानदार चुदाई का सीन चल रहा था।
काजल का पल्लू उसके सीने से नीचे गिर चुका था … मैंने धीरे से उसके स्तनों पर हाथ रख दिया.
उसने मेरा हाथ स्तनों के ऊपर ही दबा दिया और सिसक पडी।

“काजल … कैसा लग रहा है?”
“दीदी … बहुत ही अच्छा लग रहा है …कितना मजा आ रहा है.” कहते हुए उसने मेरी तरफ़ देखा.

मैंने उसकी चूचियां सहलानी शुरू कर दी … उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
“बस दीदी … अब नहीं …”

“अरे मजे ले ले … ऐसे मौके बार बार नहीं आते.” मैंने उसके थरथराते होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
काजल उत्तेजना से भरी हुयी थी। काजल ने मेरे स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे दबाने लगी।

मैंने उसका लहंगा ऊपर उठा दिया … और उसकी चिकनी जांघों पर हाथ से सहलाने लगी.
अब मेरे हाथ उसकी चूत पर आ चुके थे।
चूत चिकनाई और पानी छोड़ रही थी।

मेरे हाथ लगाते ही काजल मेरे से लिपट गयी।
मुझे लगा मेरा काम हो गया।

“दीदी … हाय … नहीं करो ना … मां …री … कैसा लग रहा है.”

मैंने उसकी चूत के दाने को हल्के हल्के से हिलाने लगी।
वो नीचे झुकती जा रही थी … उसकी आंखे नशे में बन्द हो रही थी।

उधर मोहित लन्च पर आ चुका था।
उसने अन्दर कमरे में झांक कर देखा।
मैंने उसे इशारा किया कि अभी रुको। मैंने काजल को और उत्तेजित करने के लिये उससे कहा- काजल … आ मैं तेरा बदन सहला दूं … कपड़े उतार दे!

“दीदी … ऊपर से ही मेर बदन दबा दो ना!” वो बिस्तर पर लेट गयी।
मैं उसके उभारों को दबाती रही … उसकी सिसकियां बढ़ती रही.

मैंने अब उसकी उत्तेजना देख कर उसका ब्लाऊज उतार दिया.
उसने कुछ नहीं कहा.

मैंने भी यह देख कर अपने कपड़े तुरन्त उतार दिये।
अब मैं उसकी चूत पर अपनी उंगली से दबा कर सहलाने लगी और धीरे से एक उंगली उसकी चूत में डाल दी।

उसके मुख से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी.
“काजल … हाय कितना मजा आ रहा है … है ना?”
“हां दीदी … हाय रे … मैं मर गयी.”

“लन्ड से चुदोगी काजल … मजा आयेगा.”
“कैसे दीदी … लन्ड कहां से लाओगी?”

“कहो तो मोहित को बुला दूं … तुम्हें चोद कर मस्त कर देगा.”
“नहीं …नहीं … साब से नहीं …”

“अच्छा उल्टी लेट जाओ … अब पीछे से तुम्हारे चूतड़ भी मसल दूं.”

वो उल्टी लेट गयी।
मैंने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया और उसकी गान्ड ऊपर कर दी।

अब मैंने उसके दोनों पैर चौड़ा दिये और उसके गान्ड के छेद पर और उसके आस पास सहलाने लगी।
वो आनन्द से सिसकारियां भरने लगी।

मोहित दरवाजे के पास खड़ा हुआ सब देख रहा था।
उसने अपने कपड़े भी उतार लिये।

ये सब कुछ देख कर मोहित का लन्ड टाईट हो चुका था।
वह अपना लन्ड पर उंगलियों से चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगा।

मैं काजल की गान्ड और चूतडों को प्यार से सहला रही थी।
उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ चुकी थी।

मैंने मोहित को इशारा कर दिया कि लोहा गर्म है … आ जाओ।

मोहित दबे पांव अन्दर आ गया।
मैंने इशारा किया कि अब चोद डालो इसे।

उसके फ़ैले हुये पांव और खुली हुयी चूत मोहित को नजर आ रही थी।
ये देख कर उसका लन्ड और भी तन्नाने लगा।
मोहित उसकी पैरों के बीच में आ गया।

मैं काजल के पीछे आ गयी.
मोहित ने काजल के चूतड़ों के पास आकर लन्ड को उसकी चूत पर रख दिया।

काजल को तुरन्त ही होश आया … पर तब तक देर हो चुकी थी।
मोहित ने उस काबू पा लिया था।
वो उसके चूतड़ों से नीचे लन्ड चूत पर अड़ा चुका था।
उसके हाथों और शरीर को अपने हाथों में कस चुका था।

काजल चीख उठी … पर तब तक मोहित का हाथ उसका मुँह दबा चुका था।
मैंने तुरन्त ही मोहित का लन्ड का निशाना उसकी चूत पर साध दिया।

मोहित हरकत में आ गया।
उसका लन्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया।
चूत गीली थी … चिकनी थी पर अभी तक चुदी नहीं थी।

दूसरे ही धक्के में लन्ड गहराई में उतरता चला गया।

काजल की आंखें फ़टी पड़ रही थी, घू घू की आवाजें निकल रही थी।

उसने अपने हाथों से जोर लगा कर मेरा हाथ अपने मुख से हटा लिया और जोर से रो पड़ी.
उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे … चूत से खून टपकने लगा था।

“बाबूजी … बहुत दर्द हो रहा है … धीरे धीरे करो!” उसने विनती भरे स्वर में रोते हुये कहा।
पर लन्ड अपना काम कर चुका था।

“बस …बस … अभी सब ठीक हो जायेगा … रो मत!” मैंने उसे प्यार से समझाया।

वो नीचे दबी हुयी छटपटाती रही।
हम दोनों ने मिलकर उसे दबोच लिया।
दबी चीखें उसके मुह से निकलती रही। मोहित ने लन्ड को धीरे धीरे से अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया।

मोहित ने अब उसकी चूचियां भी भींच ली। वो नीचे से अपने बदन को छटपटाकर कर हिलाती कर निकलने की कोशिश करती रही।
लेकिन वो मोहित के शरीर और हाथों में बुरी तरह से दबी थी।

मोहित ने अपनी चुदाई अब तेज कर दी … उसका कुंवारापन देख कर मोहित और भी उत्तेजित होता जा रहा था।
धक्के तेजी पर आ गये थे। कुछ ही देर में काजल को अन्दर ही अन्दर शायद उसे मस्ती चढ़ने लगी.

“हाय मैं … मर गयी!” बस आंखें बन्द करके यही बोलती जा रही थी … नीचे तकिया खून से सन गया था।
अब मोहित ने उसकी चूचियां फिर से पकड़ ली और उन्हें दबा दबा कर चोदने लगा।

काजल अब चुप हो गयी थी … शायद वो समझ चुकी थी कि उसकी झिल्ली फ़ट चुकी है और अब ज्यादा दर्द नहीं होने वाला है।
अब उसके चेहरे से लग लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है।
मैंने भी चैन की सांस ली।

मैंने देखा कि मोहित का लन्ड खून से लाल हो चुका था।

काजल की कुँवारी चूत पहली बार चुद रही थी।
उसकी टाईट चूत का असर ये हुआ कि मोहित जल्दी ही चरमसीमा पर पहुंच गया।
अचानक नीचे से काजल की सिसकारी निकल पड़ी और वो झड़ने लगी।

मोहित को लगा कि काजल को अन्तत: मजा आने लगा था और वो उसी कारण वो झड़ गयी थी।

अब मोहित ने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और अपनी पिचकारी छोड़ दी।
सारा वीर्य काजल के चूतडों पर फ़ैलने लगा।
मैंने जल्दी से सारा वीर्य काजल की चूतड़ों पर फ़ैला दिया।

मोहित अब शान्त हो चुका था। मोहित बिस्तर से नीचे उतर आया।

काजल को भी चुदने के बाद अब होश आया … वो वैसी ही लेटी हुई थी।

“बस अब तो हो गया … देख तेरी इच्छा भी तो पूरी हो गयी ना!”

उसने अपने कपडे उठाये और पहनने लगी … मोहित भी कपड़े पहन चुका था।

मैंने मोहित को तुरन्त इशारा किया … वो समझ चुका था … जैसे ही काजल जाने को मुड़ी मैंने उसे रोक लिया- सुनो काजल … मोहित क्या कह रहा है!

“काजल … मुझे माफ़ कर दो … देखो मुझसे रहा नहीं गया तुम्हे उस हालत में देख कर … प्लीज!”

मोहित ने अपनी जेब से सौ सौ के दो नोट निकाल कर उसे दिये.
उसने देख कर कोई खुशी नहीं दिखाई.

मोहित ने फिर और सौ सौ के पाँच नोट निकाल दिये.
उसकी आंखो में एकबारगी चमक आ गयी … मैंने तुरन्त उसे पहचान लिया।

मैंने मोहित के हाथ से नोट लिये और अपने पर्स से सौ सौ के कुल एक हज़ार रुपये निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिये।
उसका चेहरा खिल उठा।

“देख … ये साब ने जो किया, ये उसका हरज़ाना है … हां अगर साब से और करवाना हो तो इतने ही नोट और मिलेंगे!”
“दीदी … मैं आपकी आज से बहन हूं … पैसों की जरूरत किसे नहीं होती है!”

मैंने उसे काजल को गले लगा लिया- काजल … तू सच में आज से मेरी बहन है … तेरी इच्छा हो … तभी ये करना!
काजल खुश हो कर जाने लगी … दरवाजे से उसने एक बार फिर मुड़ कर देखा … फिर भाग कर आयी … और मेरे से लिपट गयी … और मेरे कान में कहा- दीदी … साब से कहना … धन्यवाद!

“अब साब नहीं, जीजाजी बोल! और धन्यवाद किस लिये … पैसों के लिये?”
” नहीं … मेरी चुदाई के लिये!”

वो मुड़ी और बाहर भाग गयी.
मैं उसे देखती रह गयी.
तो क्या ये सब खेल खेल रही थी।
मेरी नजर ज्योंही मेज़ पर पड़ी तो देखा कि सारे नोट वहीं पड़े हुए थे.
मोहित असमंजस में था. Antarvasna

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जीजाजी के जंगल Hindi Porn Stories की ओर जाते ही राहुल और बंटी ऊपर कमरे में आ गए।आते ही बंटी बोला – ‘ तुम तो साहब की औरत के भाई हो, उनसे यह क्या करवाते हो? ‘

‘क्या …? ‘ मैं हड़बड़ाया।

‘ बनो मत … हमें सब मालूम है कि तुमने साहब से क्या क्या करवाया है। ‘

‘ क्या करवाया है? ‘ मैं डरते हुए बोला।

‘ अभी हम बताते है… ‘ बंटी ने मेरे हाथ पकड़ लिए और राहुल ने मेरी नेक्कर नीचे खींच दी। मैं पूरी तरह नंगा हो गया। जीजाजी ने रात में चार बार गाण्ड मारी थी इसी कारण मैंने अंडरवियर पहना ही नहीं था।

‘ यह क्या कर रहे हो? ‘ मैं चिल्लाया।

‘ वही जो तुमने रात भर अपने जीजा से कराया है ! ‘ कहते हुए राहुल ने मेरे पोंड के छेद में अपनी बड़ी वाली उंगली घुसा दी। मेरी गाण्ड का छेद वैसे भी फूला हुआ था इसलिए मुझे बहुत तकलीफ हुई।

‘ इसके हाथ बाँध दो ! यह ऐसे नहीं मानेगा ! ‘ बंटी ने कहा।

राहुल ने रूमाल से मेरे हाथ बाँध दिए। मैं नंगा तो पहले ही हो चुका था, उन्होंने मेरी शर्ट भी उतार दी।

राहुल मेरी मुत्तु सहलाने लगा तथा बंटी मेरे पोंड फैला कर गाण्ड के छेद को देखने लगा।

‘ इसकी गाण्ड तो बहुत फूली हुई है ! साहब ने बड़ी बेरहमी से इसकी गाण्ड मारी है ! ‘ बंटी बोला – ‘हम इसे राहत पहुंचाएंगे !’

बंटी मेरे पीछे नीचे बैठ गया तथा मेरे पोंड पकड़ कर सहलाने लगा, राहुल मेरी मुत्तु से खेलने लगा। मेरी मुत्तु धीरे धीरे खड़ी होने लगी। जैसे ही मुत्तु बड़ी हुई, राहुल ने लपक कर उसे अपने मुंह में ले लिया और लालीपॉप सा चूसने लगा। बंटी मेरे पीछे बैठ कर मेरे पोंड के छेद में अपनी जीभ फिराने लगा। पोंड के छेद में बंटी अपनी जीभ थोड़ा अन्दर तक डालने की कोशिश कर रहा था। सामने से राहुल मेरी मुत्तु को चूस रहा था।

मुझे बड़ा आनंद आने लगा। गाण्ड का दर्द भी कम हो गया। पहली बार किसी ने मेरी मुत्तु को चूसा था। मुझे बड़ा ही मजा आया। लगभग १५ मिनट बाद मेरी मुत्तु से कुछ रस सा निकालने लगा। मैं डर गया क्योंकि पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था।

राहुल ने तब मुझे समझाया – गाण्ड तो मराते हो पर लण्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसमें से यह निकलता ही है, इसके निकल जाने के बाद ही पूरा मजा आता है।

मेरी गाण्ड को चाटते चाटते बंटी का लण्ड खड़ा हो गया। उसने जल्दी से अपनी नेक्कर उतारी और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। हालाँकि उसका लण्ड जीजाजी से काफी छोटा था पर मुझे काफी दर्द हुआ। वह खड़े खड़े ही मेरी गाण्ड के छेद में लण्ड घुसा कर धक्के लगा रहा था पर वह ठीक से नहीं लगा पा रहा था। उसने मुझे आधा पलंग पर और आधा नीचे लटका कर लिटा दिया।

अब उसका लण्ड अच्छी तरह से मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर हो रहा था। मेरी गाण्ड फूली हुई थी फिर भी मुझे आनंद आ रहा था। थोड़ी देर में वह झड़ गया लेकिन मेरा लण्ड अब तन्ना गया था।मैने राहुल की गाण्ड मारने की इच्छा जताई, वह तैयार हो गया।

मैने भी उसे घोड़ी बन जाने को कहा, ऐसी पोसिशन में उसकी गाण्ड का छेद काफी खुल गया। मैने अपना लण्ड धीरे से उसकी गाण्ड के छेद में घुसाया, फिर एक धक्का मारा, मेरा लण्ड पूरी तरह अन्दर घुस गया। उसकी गाण्ड का छेद काफी बड़ा था। जब मैने पूछा तो उसने बताया कि तुम्हारे जीजाजी ने उसकी गाण्ड मार मार कर उसका भुरता बना दिया है।

अब मैं भी अपना लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में अन्दर बाहर करने लगा। मेरे लिए किसी की गाण्ड मारने का यह पहला मौका था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मानो मैं ज़न्नत में पहुँच गया हूँ। थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया पर मुझे गाण्ड मारने में बहुत ही आनन्द आया।

दोनों के साथ मैंने तीन नए अनुभव लिए। मैंने पहली बार किसी से अपना लण्ड चुसवाया था, किसी ने पहली बार मेरी गाण्ड में जीभ फ़ेरी थी और मैंने पहली बार किसी की गाण्ड मारी थी।

जीजाजी शाम तक के लिए गए थे अतैव हम तीनों ने बारी बारी से एक दूसरे की गाण्ड मारी।

उस दिन सही मायनों में मैंने गाण्ड मारने और मराने का मजा लिया। वो दोनों मेरे दोस्त बन गए। उन्होंने बताया कि जब भी साहब यहाँ आते हैं तो वह हम दोनों की कई कई बार गाण्ड मारते हैं। हम दोनों भी आपस में एक दूसरे की गाण्ड मारते रहते हैं, बहुत मजा आता है।

उस दिन हम तीनों ने दो बार एक दूसरे की गाण्ड मारी तथा मराई, मेरी गाण्ड का दर्द भी गायब हो गया।

इसी बीच जीजाजी कब आ गए और हमारा खेल देखते रहे, हमें पता ही नहीं लगा। उन्होंने मुझे बंटी की गाण्ड मारते देख लिया था पर वह बोले कुछ नहीं। वह अनजान बने कमरे में आए और चाय बना कर लाने का आर्डर देकर लेट गए। लेकिन बाद में क्या हुआ जानने के लिए इन्तजार करें अगली कहानी का …. Hindi Porn Stories

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