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दोस्तो, मैं संजू आप के Hindi Sex Stories लिए लेकर आया हूँ अपनी ज़िन्दगी की एक सच्ची कहानी ! सबसे पहले मैं अपना परिचय करवा दूँ !मैं हरियाणा के जींद शहर का रहने वाला हूँ, कद 5’11” देखने में अच्छा दीखता हूँ।
यह मेरी पहली कहानी है अन्तर्वासना डॉट कॉम पर ! उम्मीद है आपको पसंद आएगी। तो अब कहानी पर आते हैं।
बात उन दिनों की है जब मैं नया नया कॉलेज जाने लगा था। हमारे घर के सामने एक परिवार रहता था, उस परिवार में पति पत्नी उनकी चार लड़कियां व दो लड़के थे।
बड़ी लड़की सिमरन (बदला हुआ नाम) मेरे साथ हमारे ही कॉलेज में पढ़ती थी, मैं बी.ए में और वो एम ए में थी। हां दोस्तो, वो मुझसे बड़ी थी, पर वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं बहुत ही शर्मीला था और उससे दिल के बात कहने में डरता था। बस मैं उसकी तरफ प्यार से देखता रहता छुप-छुप कर ! कभी कभी बात हो जाती थी पर एक पड़ोसी के नाते !
उसकी फिगर बड़ी मस्त थी बड़ी बड़ी चूचियाँ और मोटे मोटे चूतड़, वो दिखने में भी काफी सेक्सी थी। कॉलेज के कई लड़के उस पर लाइन मरते थे इसलिए मेरी उससे बात करने के हिम्मत ही नहीं होती थी, कहीं वो मना ना कर दे।
और एक दिन की घटना ने तो मेरा रहा सहा हौंसला भी तोड़ दिया। एक बार वो अपनी छत पर चिड़ी-बल्ला खेल रही थी और मैं नीचे गली में बैठा था। उनकी चिड़ी नीचे गली में गिर गई।
सिमरन छत से बोली- भइया, वो चिड़ी फेंकना ऊपर !
मैंने गुस्से से उसकी ओर देखा और चिड़ी फेंक कर अंदर चला गया। मुझे बड़ा गुस्सा आया और मैंने उससे कभी बात न करने की ठान ली। उस दिन से मैं उसकी तरफ न देखता, न बात करता। थोड़े दिन तो ऐसे ही चलता रहा फिर एक दिन जब मैं कॉलेज से लौटा तो वो अपनी मम्मी के साथ मेरी मम्मी के पास बैठी थी। मैं भी सीधा वहीं जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसका मामा आ गया और उसकी मम्मी उठ कर चली गई और कुछ देर बाद मेरी मम्मी भी अंदर चली गई।
कुछ देर हम ऐसे ही बैठे रहे फिर उसने पूछा- क्या बात है संजू ! आज कल मुझसे बात नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं ! बस वैसे ही !
तो उसने कहा- कुछ तो बात है, प्लीज़ बताओ ना !
तो मैंने कहा- मैं तुमसे नाराज़ हूँ !
वो बोली- किस बात पर ?
तो मैंने कहा- उस दिन तुमने मुझे भैया कहा था।
तो वो हंस पड़ी और बोली- बुद्धू ! उस दिन मम्मी छत पर थी, वरना ऐसी कोई बात नहीं है।
इतने में उसकी मम्मी ने उसको बुला लिया। उस दिन मैं बड़ा खुश हुआ, सोचा, चलो थोड़ा सिग्नल तो मिला। फिर तो हम छत से एक दूसरे को देख के मुस्कुराते रहते ! कुछ दिन ऐसे ही चला, फिर हमारे यहाँ और उनके यहाँ एक साथ ही फ़ोन कनेक्शन लगा और मैंने उसकी बहन से उनका नंबर भी ले लिया। एक दो बार फ़ोन मिलाया भी पर कोई और ही उठाता था।
फिर एक दिन मैं अपने कमरे में रात को टीवी देख रहा था, केबल पर कोई फिल्म आ रही थी, तो फ़िल्म की क्वालिटी ख़राब होने की वजह से टीवी की आवाज़ कुछ ज्यादा ही थी। रात को करीब 11 बजे हमारा फ़ोन बजा और फ़ोन मेरे कमरे में ही था, मैंने फ़ोन उठाया तो उधर से एक लड़की बोल रही थी।
मैंने पूछा- कौन बोल रहा है ?
तो उसने कहा- मैं सिमरन बोल रही हूँ।
मेरा दिल एकदम धड़कना बंद हो गया, मैं पहली बार उससे फ़ोन पर बात कर रहा था, वो बोली- टीवी की आवाज़ इतनी क्यों कर रखी है? हमारे कमरे तक आ रही है !
मैंने बोला- वो केबल पर फिल्म आ रही है न, इसलिए आवाज़ इतनी हो गई।
फिर मैंने पूछा- तुम इतनी रात तक जाग कर क्या कर रही हो?
वो बोली- तुम सोने दो तब न !
फिर थोड़ी इधर उधर की बातें हुई और उसने फ़ोन रख दिया। इसी दोरान मैंने उससे यह भी पूछ लिया- अगर तुमसे बात करनी हो तो किस समय फ़ोन करूँ?
तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और गुड नाईट कह कर फ़ोन रख दिया!
उस रात मुझे बहुत देर में नींद आई और मुठ भी मारनी पड़ी।
फिर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा पर अब वो थोड़ा बदल गई थी। अब वो मुझे देखकर मुस्कुरा भी देती थी।
फिर एक दिन मैंने हिम्मत कर के छत से उसे इशारों में चार बजे फ़ोन करने के लिए कहा। मैंने ठीक चार बजे उसके घर फ़ोन किया तो संयोग से उसने ही उठाया और बोली- तुम मुझे मरवा दोगे !
और बोली- बोलो, क्या बोलना है !
मैं बहुत घबरा रहा था, मैंने उससे कहा- मुझे तुमसे एक बात कहनी है पर तुम वादा करो कि अगर तुम्हें बुरी लगी तो तुम नाराज़ नहीं होगी !
वो बोली- ठीक है !
तो मैंने कहा- आई लव यू !
वो थोड़ी देर तो चुप रही, फ़िर बोली- यह ठीक नहीं है ! मैं तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचती !
तो मैंने कहा- मैं तो तुमसे प्यार करता हूँ और मैं कल ठीक इसी समय फ़ोन करूंगा। तुम्हारा जवाब हाँ हो तो फ़ोन तुम ही उठाना, अगर किसी और ने फ़ोन उठाया तो मैं तुम्हारा जवाब न समझूंगा !
और मैंने फ़ोन रख दिया। फ़ोन रखने के बाद मैंने सोचा- साले यह बोल तो दिया है पर अगर उसने फ़ोन न उठाया तो ?
यह सोच कर मेरी तो गांड ही फट गई, फिर सोचा जो बोल दिया सो बोल दिया, कल की कल देखेंगे।
और मैं अगले दिन चार बजने का इन्तज़ार करने लगा।
अगले दिन ठीक चार बजे जब मैं फ़ोन करने गया तो देखा वह पर मेरे मामा मेरे पापा के साथ बैठे थे। मैं उनके पास ही बैठ गया और भगवन से दुआ करने लगा कि जल्दी से ये लोग उठ जाएँ !
थोड़ी देर में वो उठ गए तो मैंने देखा कि 4.35 हुए हैं। मैंने जल्दी से फ़ोन मिलाया तो उधर से उसने ही उठाया तो मैंने कहा- आई लव यू ! बोलो !
तो वो बोली- अभी नहीं ! मम्मी पास में ही हैं !
दोस्तो, मैं क्या बताऊँ ! उस दिन मैं जैसे हवा में उड़ रहा था !
तो दोस्तों अभी बस इतना ही !
आगे और भी बहुत कुछ है ! आप को मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर लिखना ! Hindi Sex Stories
हैलो फ्रेंड्स, आज मैं आपको जो चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी एक पाठिका और मेरी चुदाई की कहानी है. पहले मैं आपको मेरा परिचय दे देता हूँ. मैं दिल्ली से हूँ मेरी हाईट 5 फुट 9 इंच है.
मेरी सेक्स स्टोरी पढ़ कर एक दिन मेरे पास एक ईमेल आया, जिसमें लिखा था मुझे आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी. मैं आपसे सम्पर्क करना चाहती हूँ.
उसने मुझे अपना कांटेक्ट नम्बर दे दिया. मैंने उस कांटेक्ट नम्बर पे कांटेक्ट किया तो कुछ इस तरह से बात हुई.
विशाल- हैलो
पाठिका- हाय आप कौन बोल रहे हैं?
विशाल- मैं विशाल बोल रहा हूँ क्या आपने मुझे ईमेल किया था?
पाठिका- ओह यस आप विशाल बोल रहे हैं, मुझे आपकी स्टोरी बहुत अच्छी लगी. मैं आपसे मिलना चाहती हूँ. मैं 38 साल की हूँ और मेरा नाम वनिता है.
विशाल- अच्छा तो मुझे आपका एड्रेस और टाइम दे दो.
बाद में उसने मुझे अपना एड्रेस दिया वो भी दिल्ली से ही थी. उसने मुझे डेट और टाइम दे दिया.
मैं उसके बताई हुई डेट, टाइम और एड्रेस पर पहुँच गया. मैंने डोरबेल बजाई तो दरवाजा खुला और सामने 38 साल की खूबसूरत आंटी खड़ी थी. उसे मालूम था कि मैं आने वाला था इसलिए उसने नई साड़ी पहनी थी और मेकअप भी किया था. उसके बदन से खुशबू आ रही थी शायद उसने परफ्यूम लगाया था. उसके मम्मे बहुत बड़े और तने हुए थे. उसके होंठ बहुत गुलाबी थे. उसके मस्त रूप को मैं थोड़ी देर तक यूं ही एकटक देखता रह गया.
फिर उसने मुझे अन्दर आने को कहा तो मैं उसके घर के अन्दर चला गया. अन्दर कोई नहीं था. वनिता ने मुझे पानी दिया, मैंने गिलास लेते वक्त उसकी उंगली को छू लिया. वो मुस्कुराई फ़िर मेरे पास सोफ़े पर बैठ गई. मेरा लंड तो पहले से ही टाईट हो गया था.
वनिता ने मुझसे कहा- मैं तो समझ रही थी कि आप बड़ी उम्र के होंगे लेकिन आप तो बहुत हैंडसम हैं.
मैंने पूछा- आपके घर में कौन कौन रहता है?
वनिता ने कहा- मैं और मेरे पति, लेकिन अभी वो बाहर गए हुए हैं. तुम तब तक मेरे साथ जो चाहे कर सकते हो.
मैं उसके थोड़ा करीब हो गया और उसके हाथों को पकड़ लिया.. वो चुपचाप थी.
धीरे धीरे मैंने उसके हाथों को मसलना शुरू किया. फिर धीरे धीरे मैं ऊपर को बढ़ रहा था, मेरा हाथ उसके पेट पर फिरने लगा और ब्लाउज के ऊपर से उसके मम्मों पर हाथ फ़िराया. उसने नशे से आँखें भर कर मेरी तरफ देखा तो मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. उसकी साँसें जोर से चल रही थीं और आँखें मस्ती से बंद हो गई थीं.
मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलना शुरू किए और ब्लाउज को निकाल दिया. अब मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके तने हुए मम्मों को मसल रहा था.
फिर उसकी साड़ी निकाल दी और उसका पेटीकोट ऊपर उठाकर उसकी जांघ पर हाथ फिराया. इसके बाद उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चुत पर हाथ फ़िराने लगा. अब उसके मुँह से आवाज आने लगी थी.
‘अह्हह्हह उहहह्हह..’
मैंने उसका पेटीकोट निकाल दिया, अब वो सिर्फ पेंटी और ब्रा में ही थी.
कुछ पल बाद उसने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरी चौड़ी छाती पर हाथ फ़िराने लगी.
उसने कहा- तुम्हारी बॉडी तो बहुत स्ट्रोंग है.
मैंने उसके होंठों को चूम लिया. फ़िर उसने मेरी पेंट भी उतार दी. मेरा लंड तो निक्कर फाड़ कर बाहर आने की कोशिश कर रहा था. निक्कर टेंट की तरह फूल गया था. उसने मेरा लंड निक्कर में से निकाला तो उसकी आँखें फ़ट गई. पूरा 8” इंच का खड़ा लंड था, शायद इतना बड़ा लंड उसने पहली बार देखा था. अब वो मेरे लंड को चूसने लगी.
इसी समय मैंने भी उसकी ब्रा निकाल दी और उसके बड़े बड़े मम्मों को चूसने लगा. उसके निप्पल बहुत कड़क थे.
कुछ ही देर में मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसकी पेंटी उतार दी. उसकी चुत एकदम चिकनी थी. मुझे बड़ी मस्त चुत लग रही थी.
मैंने अपना 8” इंच का लंड उसकी चुत की फांकों में लगा दिया. मैं लंड डालने की पोजीशन में आ गया था.
वो बोली- धीरे पेलना.. मेरी चुत फ़ट जाएगी. मैंने लंड को उसकी चुत में धीरे धीरे पेलना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों में मैं पूरे जोश में आ गया था. मैं उसे जोर जोर से धक्के देने लगा.
वो भी कुछ देर की पीड़ा के बाद मेरा साथ देने लगी.
करीब आधे घंटे की चुदाई में वो दो बार झड़ चुकी थी. अब मेरी स्पीड बहुत तेज हो गई थी, थोड़ी देर बाद मेरे लंड से भी सफ़ेद दही निकल गया.
थोड़ी देर बाद जब हम दोनों शांत हो गए तो मैंने उससे कहा- हम जब तक साथ हैं. हम कपड़े नहीं पहनेंगे, पूरे नंगे ही रहेंगे.
वो बोली- जो तुम कहो मैं वैसा ही करूँगी. एक दिन के लिए मैं तुम्हारी बीवी हूँ.. तुम जो चाहे करो.
हम शाम तक एक दूसरे की बांहों में नंगे पड़े रहे और एक दूसरे के बदन से खेलते रहे.
करीब 8 बजे वो खड़ी हुई और खाना बनाने चली गई. इस वक्त मुझे उसकी गांड बहुत मस्त लग रही थी. उसकी गांड चलते वक्त ऊपर नीचे हो रही थी. वो बिल्कुल नंगी खाना बना रही थी.
इधर मैं नंगा पड़ा टीवी देख रहा था. मैं बार बार उसकी तरफ़ भी हसरत भरी निगाहों से देख रहा था. उसके गोरे कूल्हे बहुत खूबसूरत लग रहे थे. जैसे ही वो कुछ लेने आगे बढ़ती उसके कूल्हे और चूचे ऊपर नीचे डोलने लगते थे.
मेरा लंड फ़िर से एकदम टाईट हो गया. मैं खड़ा हुआ और उसके पीछे जाकर उसकी गांड में अपना लंड रगड़ने लगा. साथ ही उसे अपनी बांहों में भर लिया.
वो मुस्कुराने लगी. वो रोटी बना रही थी और मैं उसके मम्मों को पीछे से मसल रहा था.
क्या सॉफ्ट चूचे थे.
फ़िर मैंने उसके मम्मों पर तेल लगाया और उसकी चूचियों की मसाज करने लगा. उसके चूचे चमकने लगे थे.
फ़िर मैंने उसकी गांड पर तेल लगाया. कुछ देर तक मैं उसकी गांड के छेद में तेल लगाता रहा और उसे मसलता जा रहा था. फ़िर उसकी पीठ पर, उसकी जाँघों पर.. व उसके पूरे बदन पर तेल लगा दिया.
अब वो भी पूरी कामुक हो उठी थी. उसने गैस को बंद किया और पलटकर मुझे बांहों में लेकर मेरे होंठों को चूसने लगी. उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. शायद हम दोनों 10 मिनट तक दूसरे के होंठों को चूसते रहे. फ़िर उसने मेरे लंड पर तेल लगाना शुरू किया. वो मेरे पूरे बदन पर तेल लगाने लगी और मसाज करने लगी. हम दोनों का बदन पूरा चिकना हो गया था.
अब मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसको उठाकर बाथरूम में ले गया. मेरा लंड तो पहले से ही पूरा तना हुआ था.
वनिता लंड हिलाते हुए बोली- इसको अभी तो खाना खिलाया था, फ़िर से भूखा हो गया.
मैंने कहा- इसकी भूख तो एक दिन के बाद ही मिटेगी.
वो मेरी गोदी में बैठ गई. मैं उसके मम्मों पर पीछे से साबुन लगा रहा था और मेरा लंड उसकी गांड के छेद को छू रहा था
कुछ देर बाद वो खड़ी हो गई और उसने मेरे लंड को हाथ में ले लिया. मेरे लंड का का सुपारा बाहर निकाल कर उस पर साबुन लगाने लगी और उसको आगे पीछे करने लगी.
मैं उसके गोरे गोरे मम्मों पर साबुन लगा रहा था और उन्हें मसल रहा था.
फिर मैं उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. उसके मुँह से आवाज निकालने लगी- उह्हह्ह.. अह्हह्ह.. चूसो मेरे राजा पूरा चूस लो.
मैं उसके निप्पल पर अपनी जीभ रगड़ रहा था. अब उसने मेरे पूरे बदन पर साबुन लगाया. मैंने भी उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और फोम के गुच्छे से रगड़ा ताकि झाग ज्यादा हो जाए.
इसके बाद मैंने उसको बाथरूम में लेटा दिया. बाथरूम काफी बड़ा था.
मैंने अपना लंड उसके मम्मों पे रगड़ने लगा. वो मादक आवाज निकाल रही थी- उईईईमा.. अब मुझसे नहीं रहा जाता.. डाल दे पूरा लंड मेरी चुत में..
मैंने अपना खड़ा लंड उसकी चुत पर रख दिया. लंड में साबुन लगा हुआ था इसलिए फ़टाक से चुत के अन्दर चला गया.
साबुन लगाकर चुत चुदाई करने का मजा ही कुछ और होता है.
मैं उसको धकापेल धक्के दे रहा था और वनिता आँखें बंद करके लंड का पूरा मजा ले रही थी.
करीब एक घंटे तक चुदाई चलती रही.
फ़िर वो झड़ गई और बोली- बहुत मज़ा आया..
उसने मेरे गाल पर चुम्मी ले ली.
रात का डिनर भी हम दोनों ने नंगे ही किया. वो मेरी गोद में नंगी बैठी थी और मैं भी नंगा ही डाइनिंग टेबल पर बैठा था. हम दोनों एक दूसरे को खिला रहे थे.
मेरा लंड इस वक्त ढीला था.. लंड ने दो बार जो मजा ले लिया था.
खाना खाने के बाद उसने बरतन भी नंगे हो कर ही धोये. मैं ये सब देख रहा था. अब मेरा लंड धीरे धीरे फ़िर टाईट हो रहा था. वो बरतन धोकर मेरे पास बेड पर आई और लेट कर टीवी देखने लगी.
अचानक वो खड़ी हुई और अल्मारी में से सीडी निकाली और सीडी प्लेयर में लगा दी. वो नंगी पिक्चर की सीडी थी.
अब हम वैसा ही करने लगे जैसे उस ब्लू फिल्म में आ रहा था.
मैंने वनिता की चुत में उंगली डाली और अन्दर बाहर करने लगा. इसके साथ साथ मैं उसकी चुत को चाट भी रहा था. वनिता को बहुत मजा आ रहा था.
फिर उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और टीवी में जैसा आ रहा था, वैसे ही उसने अपना थूक मेरे लंड पे लगाया और अन्दर बाहर करने लगी.
फ़िर मैं सीधा हो गया और वो मेरे ऊपर घुटनों के बल चढ़ गई और मेरा लंड अपनी चुत में डाल लिया. वो ऊपर नीचे होने लगी.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैं उसके थिरकते हुए मम्मों को दबा रहा था.
करीब 15 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा फ़िर वो कुतिया की तरह हो गई और मैं पीछे से उसकी चुदाई करने लगा. पहले मैंने उसकी चुत में लंड पेला और बाद में उसकी गांड में डाल दिया.
वो चिल्ला पड़ी- उईईमा मेरी गांड फट गई अह्हह्हह.. उह्हह्ह..
जैसे पिक्चर में आवाज़ आ रही थी, वो भी वैसे ही आवाज निकाल रही थी.
अब मैं जोर जोर से उसकी गांड की चुदाई करने लगा. वो भी मज़े में आ गई थी. करीब एक घंटे बाद चरम आ गया और मैं झड़ गया.
फ़िर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे को बांहों में लेकर सो गए.
दूसरे दिन हम करीब 10 बजे उठे, दोनों ने एक साथ स्नान किया और वो नंगी ही नाश्ता लाने चली गई.
उसने कहा- आज करीब 3 बजे मेरा पति आ जाएगा, तुम 12 बजे चले जाना.
मैंने कहा- ठीक है..
नाश्ता में ब्रेड और बटर था. अब वो मेरी गोद में आकर बैठ गई. मैंने चाकू में मक्खन लिया और उसके मम्मों पर लगाने लगा, उसके निप्पल पर लगाया. अब वो घूम गई और मेरी गोद में मेरे सामने मुँह करके बैठ गई. मैंने उसके निप्पल से और मम्मों से मक्खन चूसना शुरू किया. वो पूरी मदहोश हो रही थी.
फ़िर उसने भी मेरी छाती पर मक्खन लगाया, मेरे निप्पल पे मक्खन लगाया और निप्पल चूसने लगी.
इसके बाद उसने मेरे लंड पे मक्खन लगाकर पूरा लंड अपने मुँह में डाल दिया और चूसने लगी.
मैं उसकी चुत को चाटने लगा. अब उसकी चुत पूरी मुलायम हो गई थी. उसने बैठे बैठे ही मेरा लंड अपनी चुत में डाल दिया. मक्खन लगा होने से उसकी चुत चिकनी हो गई थी. मेरा लंड झट से अन्दर घुस गया. वो धक्के देने लगी.. मैं उसके होंठों को चूसने लगा. फिर उसने मेरे लंड को बाहर निकाला और लंड का सुपारा मुँह में डाल लिया.
मैंने प्लेट से केला लिया और उसकी चुत पर रगड़ने लगा. फ़िर केले को उसके मुँह पर रखा तो वो केले को लंड जैसे चूसने लगी.. उसको मजा आ रहा था तो वो ऊपर से नीचे की तरफ़ पूरे केले को चूसने लगी.
केला काफी बड़ा था करीब 9 इंच का होगा. मैंने केले को कंडोम पहनाया और उसकी चुत में डाल दिया.
उसके मुँह से आवाज निकल गई- उईईईईईएमा…
उसकी आँखें फटने को हो गईं.
मैं केले को चुत में अन्दर बाहर करने लगा. उसने कहा- इसमें मजा नहीं आ रहा है.. मुझे तो तुम्हारा केला पसंद है.
मैंने अपना पूरा लंड उसकी चुत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा. करीब एक घंटे बाद वो झड़ गई.
फ़िर मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया.. वो मेरे लंड को चूसने लगी. मैंने पूरा लंड मुँह में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.
थोड़ी देर बाद मेरे सफ़ेद दही निकल गया वो सारा दही पी गई.
कुछ देर बाद हम दोनों ने कपड़े पहन लिए. उसने मुझसे कहा- तुमने मुझे जन्नत के मजे करा दिए.. मुझे ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया. अब हम कभी एक दूसरे को कांटेक्ट करने की भी कोशिश नहीं करेंगे. हम दोनों एक दूसरे को भूल जाएंगे.
मैंने कहा- ठीक है, मैं तुम्हें कभी कांटेक्ट नहीं करूँगा.
वो जोर से मेरे गले लग गई और हम दोनों ने लिप किस किया. एक दूसरे के होंठों को मुँह में भर लिया और जीभ को चाटने लगे.
फ़िर मैं वहाँ से चला आया. इसके बाद मैंने कभी उससे कांटेक्ट करने की कोशिश नहीं की. मैंने उसका मोबाइल नम्बर भी मेरे मोबाइल से डिलीट कर दिया.
प्रिय साथियो, आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक Hindi Sex Stories हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी यौन-क्रीड़ा के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के मुठ मारने लगेंगे और लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को लण्ड की प्यास लग जाएगी।
मेरा नाम सुरेश है, उम्र 23 साल, कद 5’9’खिलाड़ियों जैसी सुगठित काया, लण्ड का आकार 6′ है।
बात लगभग दो साल पहले की है, उस समय मैं एक मार्केटिंग कम्पनी में सम्मलित हुआ था जिसमें लोगों को जोड़ने का काम था और उस हिसाब से कमीशन मिलता था।
एक बार मैं अपने एक दूर के भाई को इस कम्पनी से जोड़ने के उद्देश्य से उनके यहाँ कुछ दिन रहने के लिए गया। भैया मध्य प्रदेश पुलिस में काम करते थे। उनकी उम्र 28 साल थी, दो साल पहले उनकी शादी हो चुकी थी पर उनकी शादी में मैं नहीं जा पाया था, इस कारण मैंने उनकी पत्नी को नहीं देखा था। ना ही भाभी ने मुझे देखा था।
जब मैंने भैया के घर की घण्टी बजाई तो एक 25 साल की औरत एक छोटे बच्चे को पकड़े दरवाज़ा खोला और कुछ पल तक तक वो मुझे और मैं उसे देखता रहा। उसे देख कर मेरा लण्ड 145 डिगरी की सलामी मारने लगा। मैंने उसे अपना परिचय दिया, मेरा नाम सुनते ही उसके चेहरे पर एक चमक आ गई और उसने मुझे अंदर आने को कहा और बोली- तुम्हारे भैया अभी थाने गए हैं शाम तक आएंगे तब तक तुम नहा वहा लो मैं खाना बना लेती हूँ।
नहाने के बाद मैं सोनू (भाभी का बच्चा) को खिलाने लगा, तभी वो रोने लगा। भाभी ने कहा- शायद इसको भूख लगी होगी! और मेरे सामने ही उसे अपने स्तन से दूध पिलाने लगी। मैं चोर नज़र से उनके बड़े बड़े स्तनों को देख रहा था और मेरा लण्ड खडा होने लगा। मैं वहाँ से उठा और बाथरूम में जाकर मूठ मारने लगा।
शाम को भैया थाने से आये और हम सबने साथ खाना खाया। खाने के बाद मैं भैया भाभी को कंपनी के बारे में बताने लगा। भैया मेरे बगल में और भाभी मेरे सामने थोड़ा झुक कर बैठी थी जिस कारण उनके स्तन मुझे दिख रहे थे। मैंने गौर किया कि भैया से ज्यादा भाभी मेरी बातों में रूचि ले रही थी।
एक बात भाभी को थोड़े समझ में नहीं आई और उन्होंने मेरी तरफ झुककर अपना शक पूछा, झुकने के कारण मुझे उनके स्तनों के निप्पल भी दिखने लगे थे। एक पल के लिए मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया पर जल्दी ही मैंने अपने को सम्भाल लिया और जैसे तैसे अपनी बात को पूरा किया। भाभी को मेरा प्रजेंटेशन अच्छा लगा और वो जुड़ने के लिए तैयार हो गई।
रात हो चुकी थी, मेरे सोने के लिए दूसरे कमरे में भैया ने पलंग लगा दिया था। मैं जाकर लेट गया और भैया भाभी अपने बेडरूम में सोने चले गए।पर मुझे नींद कहाँ आने वाली थी, मेरी नींद तो भाभी के बूब्स ने उड़ा दी थी। एक दो घंटे तो ऐसे ही बीत गए।
तभी अंदर के कमरे से भाभी की सिस्कारियाँ आने लगी। वो आह ऊ आह की आवाज़ कर रही थी।
अंदर का माज़रा समझते मुझे देर ना लगी। मैं धीरे से उठा और दबे पांव उनके बेडरूम तक चला गया। उनके कमरे में नाइट बल्ब जल रहा था, जिस कारण कमरे का सारा नज़ारा साफ साफ दिख रहा था।
भैया नीचे लटे थे और भाभी उनके ऊपर थी और आ आ अ आ अह ह हा आ आह हा सिस्कारियाँ भर रही थी। भैया बोले- धीरे चिल्ला! वरना नन्द सुन लेगा!
भाभी बोली- वो मादरचोद तो सपने में अपनी गर्लफ्रेंड को चोद रहा होगा!
भैया भाभी को खाट-कबड्डी खेलते देख मैं वहीं मुठ मारने लगा। तभी मैंने देखा- भैया भाभी को गोद में उठा कर चोद रहे हैं और भाभी का चेहरा दरवाज़े की तरफ ही था, पर उन्होंने मुझे देखा नहीं था। भाभी और जोर जोर से आवाज़ करने लगी। मैं भी जोर जोर से मुठ मारने लगा। उधर भैया भाभी शांत हुए इधर मैं।
फिर मैं चुपचाप अपने कमरे में आकर सो गया। सुबह भाभी ने आकर मुझे उठाया। जैसे ही मैंने अपना चादर उठाया, भाभी हलके से मुस्कुराने लगी और अपनी ऊँगली से मेरे लोअर की तरफ इशारा किया। जब मैंने नीचे देखा तो लोअर में मेरे वीर्य के निशान पड़े थे।
भाभी ने कहा- जल्दी से उतार कर मुझे दे दो, मैं धो दूंगी, अभी तुम्हारे भैया बाहर गए हैं।
मैंने तुंरत अपना लोअर उतार दिया पर मेरी सफेद फ़्रेन्ची अंडरवीयर की हालत तो और ख़राब थी, उसका रंग पूरा क्रीम कलर का हो गया था। भाभी बोली- इसे नहाने के बाद तुम मत धोना, मैं धो दूंगी!
ठीक है, मैंने कहा और अपना दूसरा लोअर पहन लिया। थोड़ी देर में भैया भी आ गए और नहा धो कर, खाना खाकर थाने चले गए। पूरे दिन भाभी और मैं बातें करते रहे।
तभी भाभी बोली- मैं रसोई से चाय बना कर लाती हूँ। और उठ कर रसोई की ओर जाने लगी, तभी भाभी का पैर लचक गया और वो वहीं गिर पड़ी। उन्होंने उठने की कोशिश की पर उनसे उठा भी नहीं जा रहा था। फ़िर मैंने उन्हें उठाया, उनका एक हाथ अपना कंधे पर रखा और दूसरा हाथ उनकी कमर के थोड़ा ऊपर उनके स्तनों के एकदम नीचे और उन्हें बेडरूम में ले जाकर बेड पर बिठा दिया भाभी से पूछ कर आयोडेक्स लिया और उनकी साड़ी को घुटने के ऊपर करके आयोडेक्स लगा दिया।
उतने में भाभी ने अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा और खोल दिया। नीचे बैठे होने के कारण मुझे उनकी लाल चड्डी साफ साफ दिखने लगी। मेरा ध्यान मोच से हट गया और आयोडेक्स लगाते लगाते मेरा हाथ भाभी की जांघ तक पहुँच गया। तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर सीधे अपनी चूत पर रख दिया, एक पल के लिए मैं हक्का बक्का रह गया।
तभी दरवाज़े की घंटी बजी, मैं तुंरत उठ कर दरवाज़ा खोलने के लिए गया। दरवाज़ा खोला तो सामने भैया थे। जैसे ही उनको भाभी की मोच के बारे में बताने वाला था तभी भाभी अंदर से चल के आ गई। मैं तभी भाभी की नीयत भांप गया कि भाभी के क्या इरादे हैं।
तभी भैया ने भाभी से कहा कि आज रात को मुझे गश्त पर जाना है, जल्दी खाना बना देना, मैं खा कर जाऊँगा।
इतना सुनते ही भाभी और मेरे चेहरे पर एक चमक आ गई और हमारी नज़र एक दूसरे से टकरा गई। रात की योजना बन गई। रात को खाना खा कर मैं भैया को उनके थाने तक बाईक पर छोड़ने गया और लौटते समय मेडीकल की दुकान से कामसूत्र कंडम के 2 पैकेट खरीद के ले आया।
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खटखटाया, भाभी ने दरवाज़ा खोला। मैंने देखा कि भाभी काले रंग की पारदर्शी साड़ी पहने हुए थी। अन्दर आते ही गेट बन्द करके मैं भाभी पर अन्तर्वासना के भूखे शेर की तरह झपट पड़ा और भाभी की नाभि को बेतहाशा चूमने लगा।
भाभी बोली- इतनी भी क्या बेसब्री! अब तो पूरी रात हमारी है देवर जी!
मैंने कहा- आप तो रोज़ भैया से चुदवाती होंगी! मैं तो पहली बार किसी औरत को चूम रहा हूँ!
यह कहते हुए मैं भाभी के लाल होंठों को चूमने लगा और भाभी की गाण्ड पर हाथ डाल कर उठा लिया। भाभी ने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर लपेट दिए अब भाभी का पूरा वजन मेरे ऊपर था।
भाभी बोली- अब चूमते चूमते बेडरूम तक मुझे ले चलो।
मैंने वही किया। चूमते चूमते भाभी को बेड पर लेटाया और एक हाथ भाभी के सर पर रखा और एक हाथ से भाभी के स्तन ऊपर से दबाने लगा भाभी का हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लण्ड को दबा रहा था। मैंने भाभी के ब्लाउज को खोल दिया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा, दबाते चूमते हुए मैंने भाभी की साड़ी खोल दी, फिर भाभी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और पेटीकोट को उतार दिया। अब भाभी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा।
तभी भाभी बोली- मेरे कपड़े तुमने उतारे थे अब मैं तुम्हारे कपड़े उतारूंगी।
भाभी ने पहले मेरी टी-शर्ट उतारी और मेरी छाती को चूमने लगी। फिर मेरी जींस का बटन खोला और एक झटके से जींस के साथ मेरा अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा 6’इंच का खड़ा लण्ड देख कर भाभी चौंक गई और बोली आज रात इससे चुद कर मेरी चूत का आज चबोतरा बना देना और मेरे लण्ड को पकड़ कर जैसे ही पीछे किया मेरा लण्ड का लाल सुपाड़ा बाहर आ गया।
अपने लण्ड का ऐसा रूप आज तक मैंने भी नहीं देखा था और मेरे लण्ड को मुंह में लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी। मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैंने अपना सारा माल भाभी के मुंह में छोड़ दिया, भाभी ने सारा माल पी लिया। अब मैं भाभी की चूत चाटने लगा, चूत में एक गुलाबी रंग का दाना था, भाभी बोली कि इसे चाटो!
भाभी सिसकारियाँ भरने लगी। कभी अऽऽआऽ अऽऽअ तो कभी ओऽऽऊऽऽ ऊहऽहहऽह करती। थोड़ी देर में उसका शरीर अकड़ने लगा और एक झटके से उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में छोड़ दिया। मैं भी सारा माल पी गया।
भाभी बोली- अब में बर्दाश्त नहीं कर सकती! अपने लण्ड से मेरी चूत की प्यास बुझा दो!
‘अभी लो! प्यारी भाभी तुम्हारी चूत की आग को मेरा लण्ड शांत कर देगा!’
मैंने अपने लण्ड को पकड़ा और भाभी की चूत पर थपथपाने लगा।
भाभी बोली- ऐसे मत तड़पाओ अपना लण्ड मेरी प्यासी चूत में डाल दो!
सबसे पहले मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा एक हल्के से झटके से भाभी की चूत में डाल दिया।
भाभी कराहने लगी- आह ओ ओ ऊ ओऊ ओ ऊह ह हह!
दूसरे झटके में पूरा लण्ड ही चूत की गहराई नाप रहा था और भाभी जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी- हाँ देवरजी! मेरी चूत को ऐसे ही रौंदो! इसको आज ज़न्नत का मज़ा दो!
मैंने लण्ड को चूत में डाले डाले ही भाभी को उठा लिया और सोफे पर ले गया और भाभी को अपने ऊपर बिठा लिया। अब भाभी मुझे चोद रही थी। इस हालत में मैं भाभी के होंठ और बूब्स को भी चूस रहा था। 20 मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद मैंने भाभी को कुतिया की तरह खड़ा करके भी चोदा। कुछ देर बाद भाभी का शरीर अकड़ने लगा, मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली हैं।
तभी मेरे लण्ड ने भाभी का बांध तोड़ दिया और वो झड़ गई, पर मेरी मंजिल अभी दूर थी। मैंने चुदाई चालू रखी और 30 मिनट बाद मैं भी झड़ गया। तब तक भाभी तीन बार झड़ चुकी थी और उस रात भर हमने 6 बार सेक्स किया। फिर सुबह 5:30 पर मैं अपने कमरे में जाकर सो गया।
दोपहर 10 बजे भाभी ने आकर मुझे जगाया। आज उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। मैं वहाँ 5 दिन रहा और भाभी और मुझे जब मौका मिला, हमने ज़िन्दगी के मज़े लिए! Hindi Sex Stories
वैसे तो मेरा नाम ही संजू है Antarvasna गुजरात की औरतों की चूत में हलचल पैदा करने के लिये वैसे आप सभी दोस्त मुझे जानते ही हो।
एक दिन एक मेल आया और मुझसे कहा- कोन्टक्ट मी।
तो मैंने जवाब दिया और ऑनलाइन टाइम दिया।
दोस्तो, आप यकीन नहीं करोगे, उसने मेरे रिप्लाई के लिये 6 घंटे ऑनलाइन वेट किया था, उसने बाद में बताया था।
और मैं उसे मेल करके अपना पीसी बंद ही कर रहा था कि उसका रिप्लाई मेल ओन थिस स्पॉट आया और उसी वक्त हम ओन-लाइन मिले, मैंने उससे पूछा तुम कोन हो?
उसने बताया- मैं 24 साल की विवाहित औरत हूँ और आपकी कहानी मुझे बहुत पसंद आई।
मैंने पूछा- मैंने तो बहुत कहानियाँ लिखी हैं, आपको कौन सी पसंद आई?
उसने कहा- वो सुहागरात वाली।
मैंने उसे कहा- बोलिये, मैं आप के लिये क्या कर सकता हूँ?
उसने कहा- आप जानते ही हो।
मैंने कहा- सॉरी, मुझे नहीं पता कि तुम क्या कहना चाहती हो?
उसने कहा- मुझे बताने में शर्म आती है।
मैंने कहा- आपके और मेरे बीच जो बात होगी वो किसी तीसरे को पता नहीं चलेगी।
उसने कहा- आई वांट टू मीट यू एंड एन्जॉय विद यू !
मैंने कहा- आपका मतलब क्या है?
उसने कहा- तुम बड़े फ़ास्ट हो… ओ के… मैं तुम्हारे साथ सेक्स एन्जोय करना चाहती हूँ।
मैंने कहा- ठीक है, बताओ कब, कहाँ मिलना है?
उसने कहा- मुझे नहीं पता, तुम ही बताओ।
मैंने कहा- बताओ तुम्हारा नाम क्या है और कहाँ रहती हो?
उसने कहा- मेरा नाम पायल है और मैं गुजरात में रहती हूँ।
आप समझ ही गये होंगे कि यह नाम बदला हुआ है।
मैंने कहा- आपके घर में कौन कौन है?
उसने कहा- मैं और मेरे पति।
मैंने कहा- तो क्या प्रोब्लम है? तुम्हारे घर पर ही मिलते हैं।
उसने कहा- नहीं, मुझे बहुत डर लगता है, किसी होटल में मिलें?
मैंने कहा- देखो, होटल से घर ज्यादा सेफ़ रहता है।
कुछ देर बाद उसने कहा- ओ के ! मेरे पति अगले मंगलवार को बिजनेस के काम से बाहर जाने वाले हैं। तुम मुझे अपना फ़ोन नम्बर दे दो, मैं तुम्हें काल करुंगी। मैंने कहा- ठीक है।
मंगलवार को उसने मुझे फोन किया उसकी आवाज़ बहुत ही सेक्सी थी उसके बात करने का अंदाज भी संजू सेक्सी था;
उसने कहा- मेरे हबी 12 बजे बाहर जाने वाले हैं, तुम एक बजे आ जाओ !
और अपना पता दिया।
मैं ठीक उसके दिये हुये टाइम पर उसके घर पर पहुंचा और डोरबेल बजाई तो उसने दरवाजा खोला।
मैं तो उसे देखता ही रह गया क्या लुक था उसका 5’6′ हाईट, गोरा रंग और सेक्स बम दिख रही थी।
मैं तो उसे देखता ही रह गया।
उसने पूछा- क्या है?
‘पायल?’
उसने हाँ में सर हिलाया, मैंने कहा- मैं सुनील हूँ।
तो उसने मुझे वेलकम किया और हम अंदर गये और उसने दरवाजा बंद कर दिया।
उसका फ़्लैट संजू शानदार था। उसने मुझे बैठने को कहा और वो पानी लेने किचन में चली गई।
उसने साड़ी नाभि के नीचे से बांध रखी थी और जब वो चल रही थी तो उसकी बैक साइड बैकलेस ब्लाउज़ होने की वजह से क्या कयामत ढा रही थी्।
वो पानी लेकर आई और पूछा- घर ढूंढने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?
मैंने कहा- डियर, मैं इसी शहर में रहता हूँ, क्या परेशानी होती।
फिर उसने कहा- वेल, क्या पियोगे चाय, कोफ़ी या कुछ कोल्डड्रिंक्स?
मैंने कहा- डियर, आज मैं तुमको पीने के मूड में हूँ।
तो उसने एक मीठी सी मुस्कान के साथ अपनी आँखें बंद की और अपने होंठ आगे किये और कहा- लो डियर, पी लो, संजू गर्म हैं।
मैंने कहा- श्योर !
और हम फ़्रेंच किस करने लगे, मैं एक हाथ से उसके बालों, गर्दन और कमर को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसकी जांघें सहलाने लगा।
और हमारे लब और जीभ एक दूसरे में समा गये।
15 मिनट किस करने के बाद उसने कहा- सुनील, यहाँ नहीं, बेडरूम में चलो।
मैंने कहा- चलो जान !
वो मुझे बेडरूम में ले गई, वो आगे चल रही थी और मैं उसके पीछे !
बेडरूम में जाकर मैंने उसे पीछे से पकड़ कर अपने से जकड़ लिया और उसके उरोज दबाने लगा और उसकी गर्दन और कंधे पर चुम्बन करने लगा।
धीरे से उसके कान पर लव बाइट किया तो तिलमिला उठी और घूम कर मेरे सीने से लिपट गई।
मैं उसकी पीठ और हिप्स को सहलाता रहा और वो मुझे कसके पकड़े खड़ी रही।
फिर मैंने उसका चेहरा जो मेरे सीने में उसने छुपा लिये थे वो ऊपर किया और हम किस करने लगे।
मैंने उसके बूब्स सहलाते सहलाते उसकी साड़ी उतार दी और ब्लाउज़ के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा।
वो आआअह्हह्ह आआअह्ह करने लगी।
फिर मैंने एक हाथ उसके पेटीकोट के ऊपर से उसकी चूत पर रखा तो वो पहले से ही गीली हो गई थी, मैंने चूत को थोड़ा सहलाया फिर उसके ब्लाउज़ और पेटीकोट को उतार दिया और वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। खुले रेशमी बाल ऐसा लगता था कि कोई मार्बल का स्टेच्यु हो वो किसी फिल्म में।
पायल को मैंने उसे सर से लेकर पांव तक उसके बदन के हर एक अंग को चूमा वो मेरे हर एक किस पर सिसकती जाती थी।फिर वो बोली- मुझे और मत तड़पाओ डियर… अब मुझसे सब्र नहीं होता।
उसने मेरे सारे कपड़े फ़टाफ़ट निकाल दिये और मेरी बदन को अपने हाथों से सहला के मेरे लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी और नीचे घुटनों के बल बैठ के मेरे लौड़े को मुंह में लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी।
मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था दोस्तो, पूरी बोतल का नशा छा रहा था, मैं मदहोश हुआ जा रहा था, क्या बताऊं क्या हालत हुई थी मेरी उसके लंड चूसने से।
फिर मैंने उसे उठाया और हम बेड पे गये।
मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतार दी और उसको लिटा कर उसे किस किया फिर उसके बूब्स क्या कयामत थे, उन्हें दबाया और उसकी निप्पल को चूसा।
जब मैं उसकी निप्पल पे अपनी जीभ घुमाता था तब वो आअह्हह स्सस्सहुसूऊऊओ और दबवूऊऊओ आआअ मज़ा आआअ रह्हह्हह आआअहे डियर !
सच कहूँ दोस्तो वो इतनी गोरी थी कि जब मैंने उसके चूचे दबाये तो वो एकदम लाल हो गये।
फिर थोड़ा नीचे होकर मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई तो वो मेरे बालों को पकड़ कर मुझे हटाने लगी।
फिर मैं थोड़ा और नीचे हुआ और उसके दोनो पैरों को खोल कर उसकी चूत पर मैंने अपने होंठ रखे और किस किया।
वो बोली- कितना तड़पा रहे हो सुनील, प्लीज़ जल्दी से खा जाओ इसे !
मैं उसकी क्लीन शेव चूत को बड़े मज़े लेकर चाटने लगा। मेरी जीभ से ही वो दो बार झड़ गई, उसकी आवाजें सुन कर तो मुझे ऐसा लगा कि वो जिंदगी मैं पहली बार चुदवा रही हो, ऐसा रियेक्ट कर रही थी।
उसने कहा- तुमने तो मुझे चाट कर ही ढीला कर दिया।
मैंने कहा- मेरी जान, तुमने एंजोय ही तो करना था न, बोलो हुआ कि नहीं एंजोय?
उसने कहा- हाँ बहुत…
फिर मैं साइड में लेट गया और वो मेरे लंड को थोड़ी देर चूसने के बाद मेरे लंड के उपर सवार हो गई।
क्या स्ट्रोक लगा रही थी वो।
दोस्तो जब वो मेरा लंड अपनी चूत में लिये आगे पीछे हो रही थी और आह्ह्हाअह कम ओन आह्ह्हाअह आआ अह आह कर रही थी, उसके बूब्स जो उछल रहे थे उसे देख कर मेरा सेक्स पावर और बढ़ गया वो मेरे सीने को सहलाते हुए स्ट्रोक कर रही थी और साथ साथ में किस भी कर रही थी और में उसके गोरे गोरे बूब्स भी दबा रहा था।
वो तो आह्ह्हाअह आह्ह्हाअह आआ अह आह कम ओन मी चोदो चोदो मुझे फ़क मी ! कर रही थी।
समझ में नहीं आ रहा था कि वो मुझे चोद रही है या मैं उसे चोद रहा हूँ।
वो ऐसे ही दो बार झड़ गई और बोली- बस अब और नहीं !
तो मैंने कहा- डियर, अभी तो तुम्हारा ही हुआ है, मेरा तो कुछ एंजोयमेंट करो !
तो वो साइड में लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी लाल लाल चूत में लंड डालकर उसे चोदने लगा।
थोड़ी देर में मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने कहा- आई एम कमिन्ग।
उसने कहा- डोंट वरी, अंदर ही डाल दो, मैं गोली ले चुकी हूँ।
और मैं उसे चोदते चोदते उसकी चूत में ही झड़ गया, मेरे माल से उसकी चूत चिकनी हो गई।
हम रिलेक्स होकर बेड पे लेट गये एक दूसरे को चिपक कर।
मैंने उससे पूछा- डियर, तुम क्या अपने पति से संतुष्ट नहीं हो क्या?
तो उसने कहा- मैं अपने पति से बहुत संतुष्ट हूँ।
तो मैंने पूछा- तो तुम मेरे साथ एंजोय करना क्यों चाहती थी?
उसने कहा- रोज एक ही तरीके के सेक्स से बोर हो गई थी, तो सोचा कुछ अलग करुं।
मैंने कहा- तो कैसा रहा?
बोली- आई एम वैरी हैपी!
तो मैंने कहा- जिसको जो चाहिये वो मिल ही जाता है।
तो बोली- लेकिन हम ये सब दोबारा नहीं करेंगे।
मैंने उसे कहा- डियर जो तुम्हारी मर्जी !
फिर हम बाथरूम में जाकर फ़्रेश हुए और फिर मैं कपड़े पहन अपनी फ़ीस लेकर वापस चला आया और फिर हम एक दूसरे को भूल गये, न ही कभी उसने मुझे सम्पर्क किया न ही मैंने कभी। Antarvasna
दोस्तो, मेरा नाम Antarvasna रवि है। मैं पुणे का रहने वाला हूँ। मैं आप लोगों को अपनी बदचलन माँ की कहानी सुना रहा हूँ। जो मैं सोच भी नहीं सकता था वो मुझे आजमाने को मिला है। क्या बताऊँ दोस्तो !
मैं एक चाल में रहने वाला लड़का हूँ, नौवीं तक ही पढ़ा हूँ ! मैं पढ़ाई में कमजोर था लेकिन सेक्स में नहीं ! अब मेरी उम्र तेईस साल है, मेरे पिताजी कुछ काम नहीं करते हैं, बस शराब पीते हैं रोज़ ! इसी वजह से शायद उनमें अब सेक्स नहीं रहा है, इसी वजह से मेरी माँ ने दूसरों के साथ सबंध बनाये हैं। मेरी माँ सुबह काम पर जाती है और दोपहर को घर आती है और शाम को जाती तो रात को आठ बजे आती है।
बात उस समय की है जब मैं थोड़ा बीमार था तो मैं काम से दोपहर को घर आया था और घर में मैंने देखा कि आज माँ घर आई नहीं थी। तो मैंने सोचा कि उसे किसी काम से देर हो गई होगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। मेरी माँ तो हमारे पड़ोसी अंकल के घर में थी। उनका दरवाजा बंद देखकर मुझे शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है। मैंने उनकी खिड़की के छेद से देखा कि मेरी माँ और विशाल अंकल दोनों एक दूसरे की बाहों में हैं। मेरी माँ की उम्र 45 साल और अंकल की उम्र 35 साल होगी। फिर भी वो एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे।
यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर जाकर सो गया। उस रात को मैं सो नहीं पाया। मैंने यह बात अपने दोस्त से कही कि मेरी माँ और अंकल के बीच सेक्स सम्बन्ध होता है तो उसने कहा कि हम दोनों नजर रखेंगे।
मैंने भी हाँ कर दी !
चार-पाँच दिन बाद उसने फोन कर के मुझे बताया कि मेरी माँ और अंकल मेरी ही घर में हैं और मुझे घर आने को कहा। मैं और मेरा दोस्त मेरी घर के खिड़की से देखने लगे। मेरी माँ पूरी की पूरी नंगी थी विशाल अंकल के साथ ! अंकल भी पूरा नंगा था। मुझे बहुत ही गुस्सा आया लेकिन दोस्त ने रोका और मुझे चुपचाप देखने को कहा और मैं देखता रहा।
मेरी माँ अंकल का लण्ड चूस रही थी और अंकल चुसवा रहा था। 5 मिनट बाद उसने सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया और कहने लगा- ले ले जोर से चूस ले ! पी ले … तेरे मर्द में ऐसा रस नहीं मिलेगा !
माँ ने कहा- इसीलिए तेरा पीती हूँ ना मेरे जानू ! तेरा लण्ड तो लोहा है ! ऐसा मजा कही नहीं मिलता है !
फिर कुछ देर बाद वो दोनों 69 की अवस्था में आ गए। अंकल माँ की चूत चाट चाट कर पानी ला रहा था, माँ भी लण्ड को चोकोबार की तरह चूसे जा रही थी। इतने में मेरा और मेरे दोस्त का लण्ड खड़ा कब हुआ, पता ही नहीं चला !
फिर अंकल ने माँ को लिटा कर उसकी टाँगें कंधे पर लेकर अपना लण्ड चूत पर रख दिया और चूत में पेलने लगा। उसका 6 इंच का लण्ड चूत को फाड़ रहा था। साल हरामी जोर जोर के धक्के मारने लगा। दस बारह मिनट में वो भी थक गया, वो माँ को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं कर सका, यह हम जान गए थे।
उनका खेल ख़त्म हो गया और वो कपड़े पहन रहे थे। हम वहाँ से चले गए। फ़िर अंकल चले गए और माँ सो गई।
मेरे दोस्त ने कहा- हम भी अंकल की बीवी को बताकर उसे भी हम चोदते हैं।
मैंने मना किया।
फिर उसे एक मस्ती सूझी, उसने कहा- आज मैं तेरे घर सोने आता हूँ।
मैंने हाँ कर दी।
रात को नौ बजे वो खाना खाकर आया। मेरा बाप तो घर पर सोता नहीं है। हम टी वी देखकर सो गए- मैं, मेरा दोस्त और माँ !
रात को बारह बजे मेरे दोस्त ने मुझे जगाया और मुझे कहा- मैं क्या करता हूँ, तू सिर्फ देख ! और मुझे चुप रहने को कहा उसने !
वो माँ के पास जाकर लेट गया और माँ के बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। माँ सोई हुई थी और वो माँ को गर्म करने लगा था। वो माँ के मम्मों पर हाथ फेर रहा था, मैं देख रहा था। उसने माँ का ब्लाऊज खोल दिया और मम्मे चूसने लगा। मैंने भी हिम्मत की और माँ की दूसरी बाजू में जाकर दूसरा मम्मा चूसने लगा।
क्या मम्मे हैं ! वाह ! मैं पहली बार चूस रहा था।
इतने में मेरी माँ जाग गई और एकदम से घबरा गई और कहा- तुम यह क्या कर रहे हो ?
मेरे दोस्त ने कहा- हमारा भी लण्ड चूस कर देखो ! उस अंकल से बहुत अच्छा है ! उससे चुदवाती हो तो हमने क्या पाप किया है ?
माँ ने कहा- तुम्हें सब पता है तो फिर क्या डर है मुझे !
यह सुनकर मेरे तो होश ही गुल हो गए। मेरे दोस्त ने माँ की साड़ी खोली। अब माँ सिर्फ और सिर्फ पेटीकोट में थी, वो भी मैंने नाड़ा खोलकर नीचे खींच दिया। अब वो सिर्फ पैन्टी में थी। उसके ऊपर से मेरे दोस्त ने चाटना शुरु किया। उसकी चूत से पानी आने लगा। फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी। मैं और दोस्त सिर्फ अन्डरवीयर पहने थे। फिर वो चूत चाटने लगा और मैंने मुँह में लण्ड डाला। वो जोर से चूसने लगी। मैं उसके मुँह में चोदने लगा। उधर वो अन्डरवीयर उतार कर माँ की चूत में लण्ड डालने लगा था। माँ लेटे लेटे अपनी टाँगें फैलाने लगी और उसने 8 इंच का लण्ड माँ की चूत में पेल दिया।
फिर माँ ने मुझे कहा- तुम मेरी गांड में लण्ड डालो !
मैंने दोस्त को गांड मारने को कहा, मैं तो चूत मारूँगा ! माँ की गांड भी मस्त है
फिर उसने माँ को उठा कर बिस्तर पर ऐसे लिटाया कि मैं चूत के सामने था तो वो गांड के पीछे !
मुझे उसने कहा- सोच मत ! मार हथोड़ा !
फिर मैंने भी नंगा होकर मेरा सात इंच का लण्ड माँ की चूत पर टिका दिया। मैं मम्मे चूस कर चूत में लण्ड घुसाने की कोशिश रहा था, वो आह आहा अह अ करने लगी।
मैंने तो अभी लण्ड भी डाला नहीं फिर कैसे ?
मेरे दोस्त ने गांड भी मार दी थी। उसने तो पूरा का पूरा लण्ड गांड में घुसा डाला था ….
वो कहने लगी- जोर जोर से चोदो मुझे ! मैं बहुत प्यासी हूँ लण्ड की !
मैंने भी जोर लगाना शुरु किया और जोर से चूत में पेल दिया। उसे इतना खुश कभी नहीं देखा मैंने !
उस रात हमने उसकी खूब चुदाई की। मैंने सिर्फ चूत मारी, मेरे दोस्त ने उसके मुँह में, चूत और गांड को चार-पाँच बार चुदाई की। फिर मैं तो रात के तीन बजे ही सो गया लेकिन मेरे दोस्त ने माँ की पाँच बजे तक चुदाई की। इससे माँ भी खुश थी।
इस तरह मेरा दोस्त जब भी मौका मिलता है माँ की चुदाई करता है। मेरी माँ अब उस विशाल से नहीं चुदती है बल्कि मेरे दोस्त विकी से चुदती रहती है !
यह मेरी बुरी मगर सच्ची कहानी आप लोगों को कैसे लगी, मुझे मेल करें और बताये ! Antarvasna
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