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दोस्तो! Hindi Sex Stories

मेरे पति ने मेरे बारे में आप सभी Hindi Sex Stories को तो बता ही दिया है कि मैं क्या हूँ और उन्होंने सच ही बताया है। मैं सच में बहुत ही कामुक औरत हूँ! मुझे ना जाने क्यों कम उमर से ही सेक्स करने का शौक है!

और मुझे पति भी ऐसा मिला है बिल्कुल मेरे जैसा!

वह कहता है कि अगर जैसे हम ब्लू फ़िल्म देखते हैं, वैसे ही अगर हम अपने सामने अपने किसी खास को चुदते देखें तो सेक्स का मज़ा दुगना हो जाता है।

वैसे मेरा पति भी एक नंबर का चोदु है! कभी कभी तो मुझे चोद चोद कर इतना परेशान कर देता है कि मैं ‘बस’ कह उठती हूँ।

कई बार मैं उसके सामने ही दूसरे मर्दों से चुद चुकी हूँ!
जैसा मज़ा मेरे पति को मुझे चुदवाने में आता है वैसा ही मुझे भी दूसरों से चुदने में आता है।

हमारी शुरुआत कुछ इस तरह हुई:

एक बार एक इनका दोस्त हमारे घर आया।
उसका नाम अरुण है और हम सब उसे पंकज कह कर पुकारते थे।

ये दोनों शराब पी रहे थे.
मैं भी थोड़ी देर इनके साथ बैठ कर अपने कमरे में चली गई, अपने बेटे को सुलाने के लिए!

ये दोनों पीते हुए बातें करते रहे।

थोड़ी देर में मनु मुझे देखने आए कि मैं सो गई हूँ या नहीं।
मैंने भी सोने का नाटक किया और लेटी रही।

थोड़ी देर में ये दोनों फिर बात करने लगे:

“यार तेरे तो मज़े है, अभी तू कुंवारा है और जब चाहे कोई भी लड़की पटा कर बजा सकता है!”मनु ने कहा।

“खाक मज़े है! साला किसी लड़की को पटाओ तो हफ्तों बीत जाते है! साला गश्ती ले कर आओ तो उसके रेट ऊंचे होते हैं!”पंकज ने कहा।

“तो क्या हुआ यार कोई ऐसी लड़की पटा जो पहले से ही बजी हुई हो और अपनी और बजवाना चाहती हो!”

“नहीं यार ऐसी लड़कियाँ कम ही मिलती हैं, अगर मिल भी जायें तो सालियों को मज़ा देना पड़ता है बहुत कम ऐसी होंगी जो ख़ुद मज़े दें!”
“तो फिर ख़ुद मज़े देने वाली कहाँ से मिलेगी?”

“हाँ यार अगर कोई शादीशुदा औरत जिसका एक तीन या चार साल का बच्चा हो न! वो ही फुल मज़े दे सकती है।”
“मतलब? कैसे?”

“यार जिसका अभी बच्चा हुआ हो वो और छोटा हो तो उसकी चूत अभी नई नई खुली होती है उसकी चूत में खुजली भी बहुत होती है और उस खुजली को सिर्फ़ मोटा ताज़ा लंड ही बुझा सकता है!”
“अच्छा!”

मैं अन्दर से सब सुन रही थी!

“हाँ यार ऐसी औरत के साथ मज़े ही अलग आते हैं, मैंने एक बार एक गश्ती चोदी थी, साली का फिगर इतना मस्त था! क्योंकि औरत बच्चा होने के बाद थोड़ा सा भर जाती है उसके चुचे बिल्कुल पके हुए आम की तरह हो जाते हैं
एकदम रसीले मोटे मोटे!”

“साली की गांड बाहर को निकली हुई उठी उठी सी! गोल गोल मोटी मोटी जांघें आ आहा देखते ही नंगी करके चोदने को जी चाहे!

“अच्छा यार चल अब बता तो तूने उसे कैसे चोदा? मेरा तो लंड सलामी देने लगा है!”

“बस मत पूछ यार! मैंने नहीं, उस साली ने मुझे चोदा! मैं तो सिर्फ़ उस के बताए अनुसार कर रहा था। क्या पोज़ थे उस साली के, कम से कम तीन बार उसने मुझे चोदा!”

“अच्छा यार, एक बात बोलूं? तू तो अपना दोस्त है तुझसे क्या परदा! सोनिया भी यार एक बच्चे की माँ है वो भी भरे बदन की है और तू सच कह रहा है ऐसी औरतों को चुदने का बड़ा मन करता है!”

पंकज थोड़ा सा चौंका कि ये मनु क्या कह रहा है??

“ऐसे मत देख पंकज मैं सही कह रहा हूँ, सच में सोनिया के साथ मज़ा आ जाता है!”

“पंकज तुझसे एक बात पूछूँ?”मनु ने कहा!
“हाँ हाँ! पूछ न!”

“यार तुझे सोनिया का बदन कैसा लगता है?”

अब तो पंकज बिल्कुल ही चौंक गया, “ये क्या कह रहा है तू मनु?”
“सच बता यार! शरमा मत! मैं चाहता हूँ, कोई सोनिया के बदन की तारीफ करे!”
“लगता है तुझे ज्यादा हो गई है!”

मैं भी सुनना चाहती थी कि अब कोई क्या कहता है! मुझे भी सुनने में मज़े आ रहे थे।

“नहीं तू बुरा मत मान, जो कहना है कह दे आज, तू मेरा दोस्त है! मैं बुरा नहीं मानूंगा!”

पंकज को लगा अब मनु नहीं मानेगा तो उसने भी कहना शुरू कर दिया, “यार सच में न सोनिया भाभी का फिगर इतना कातिल है की कोई भी देखे तो उसका लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जाए!”

“और बता यार!”

“सच में यार तू मानेगा नहीं! मैं हफ्ते में तीन बार तो सोनिया भाभी को याद कर के मुठ मारता हूँ, रात को सोते हुए भी कभी कभी में आँखें बंद करके सोचता हूँ अगर मैं सोनिया भाभी की चुदाई करूँगा तो किस तरह करूँगा! सच में
सोनिया भाभी के 36 इंच की गोलाइयों के बीच में अपना लंड छुपाने को मन करता है। कम से कम सोनिया भाभी की कमर 27 इंच की तो होगी ही और गांड तो मत पूछ इतनी गोल और कसी हुई है की घोड़ी बना कर गांड में थूक लगा
कर लंड का पूरा सुपाड़ा अन्दर करने को मन करता है, सोनिया भाभी की जांघें इतनी गोल और चिकनी है कि मन करता है चूमता ही रहूँ!”

“मैं तुझे बताता हूँ! मनु तूने कभी ब्राजील में साम्भा डांस देखा है क्या? उनमें जो काली काली सी औरतें सिर्फ़ रंग बिरंगी पैंटी पहन कर अपने चूचों को सिर्फ़ नाम मात्र के कपड़े से ढक कर नाचती हैं, उनको देख कर मुझे हमेशा
सोनिया भाभी की याद आ जाती है!”

“हाँ यार पंकज, तूने सही कहा सोनिया बिल्कुल वैसी ही है वैसे है, मोटी गांड वैसी जांघें उतने ही मोटे चूचे कसम से तूने सही कहा!”

मैं भी आपने बदन की तारीफ सुन कर खुश हो रही थी।

“यार पंकज, अब बता, अगर तुझे सोनिया को चोदने का मौका मिले तो तू कैसे चोदेगा?”

“सच बताऊँ तो सोनिया भाभी को सबसे पहले एक टाइट सा टॉप पहनाऊंगा और नीचे एक मिनी स्कर्ट वो भी चिपकी हुई जिसमें से उनकी गोल गोल जांघों के दर्शन हो रहे हों और स्कर्ट की लम्बाई भी इतनी की सिर्फ़ उनकी पैंटी न
दिखे! अन्दर उनको एक सेक्सी सी बिकनी पहनाऊंगा जिसमे सिर्फ़ उनके चूचों की नोकें छुपें और चूत की दरार ढके! पीछे गांड के अन्दर से जाती हुई बिकनी! कसम से फिर धीरे धीरे से उनको अपने कपड़े उतरने को कहूँ, पहले टॉप!
फिर स्कर्ट धीरे धीरे! ब्रा उतरते ही उनको कहूँगा- अपने चूचे हाथ से पकड़ ले! फिर धीरे धीरे उनके चूचे उन्हीं के हाथ से चूसूंगा! फिर पैंटी को उन्हीं को उतारने को कहूँगा!”

मुझे भी ये सब ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे साथ पंकज कर रहा है।

उधर पंकज पूरे मज़े से मनु को बता रहा था, “मैं भी पूरा नंगा हो कर सोनिया भाभी के मुँह में अपना लंड दे दूंगा! चूसाता ही रहूँगा चूसाता ही रहूँगा! जब तक उनके बदन पर अपना गरम माल नहीं छोड़ देता!”

“अपना माल झाड़ते ही फिर भाभी को दुबारा चूसने को कहूँगा इस बार उनकी आंखों पर पट्टी बाँध कर बिस्तर पर उल्टा लेटा कर उनके हाथ बाँध कर पीछे से उनकी चूत मारूंगा आहा! पीछे से जब चूत मारूंगा तब झटके
पड़ते ही सोनिया भाभी की चीख निकल जाए ऐसा झटका मारूंगा! आहा! हर झटके पर उनकी गांड पर पट!पट! की आवाज़ आहा! भाभी हर झटके पर चिल्ला कर कहेगी और तेज़ पंकज और तेज़!

फिर उनको कुतिया की तरह पोज़ में लाऊंगा! इस बार गांड पर थूक लगा कर अपना लंड सीधा करके सीधा एक ही शॉट में अन्दर! सोनिया भाभी चीखती रह जाएंगी आहा मर गई! कुत्ते! आआ आआ आआआ फाड़ डाली मेरी
गांड कमीने! अआहा हरामजादे! पंकज! ये क्या कर डाला तूने! पर मैं एक नहीं सुनूंगा! और लगातार लगा रहूँगा उनके भोसड़े को फाड़ने में!

भाभी जब चुप नहीं होंगी तो मुझे भी कहना पड़ेगा “! साली कुतिया एक तो इतनी टाइट गांड कर रखी है! उस पर जब तेरी गांड का भोसड़ा बना रहा हूँ तो चिल्ला रही है! साली कल को इतना बड़ा छेद कर दूंगा के जब मर्ज़ी
दो दो लंड ले लेना आगे भी पीछे भी एक साथ! साली रांड! आज ले ले मज़े! आज तो तेरी जवानी को कुचल के रख दूंगा!

और ये पक्का है मेरा ऐसा कहते ही भाभी और मज़े से मेरे साथ लग जाएगी! बड़ी देर तक भोसड़ा चोदने के बाद सोनिया भाभी की गांड से लंड निकाल कर उसी पोज़ में चूत में लंड पेल दूंगा! सोनिया भाभी की आवाज़
आएगी! बहन चोद अब आया न असली पोज़ में साले कुत्ते अब न छोड़ियो! मुझे पेल कमीने मादरचोद! आज तो इस प्यासी चूत की चटनी बना दे!

आअहा आह साली! ले और ले! ले आज पूरा लंड तेरी चूत के हवाले! और सोनिया भाभी भी अपनी गांड हिला हिला कर पीछे को धक्के मारती रहेंगी! हाँ हाँ पंकज हाँ हाँ! ले और तेज़! और तेज़! ले फाड़ दे आज चूत को! निकाल दे सारा पानी आज तो! कमीने! मेरी गर्म चूत को मत उदास छोड़ना! आज मेरा पानी निकाल दे … मैं सारी ज़िन्दगी तेरे लंड का सलाम लेती रहूंगी!

“इस पोज़ में भी काफी देर के बाद फिर पोज़ बदलूँगा इस बार उन्हें बिस्तर पर सीधा लेटा कर ख़ुद नीचे खड़ा होकर उनकी कमर पकड़ कर! अपना लंड बिल्कुल सीधा डाल कर!

“बस बस पंकज बस?” मनु तभी बोल पड़ा!

ओहो ये क्या किया मनु तूने मैंने मन ही मन सोचा! इतना मज़ा आ रहा था लग रहा था पंकज सच में ही मुझे चोद रहा था! मेरी चूत भी कुछ गीली हो चुकी थी!

“बस यार अब मेरा काम तो हो गया!” मनु ने अपना हाथ अपने लंड से हटा कर कहा!

“ये क्या मनु! तू मुठ मार रहा था?” पंकज बोला

“हाँ यार, क्या करूं … तू बता ही इस तरह से रहा था!”

“यार बता ही तो रहा था अगर असली में करुंगा तो तेरा क्या होगा?”

“होगा क्या … जब तू सोनिया को चोदेगा तो मैं भी तेरे साथ उसको चोदने लगूंगा!

“हाँ यार मज़ा तो बहुत आएगा, एक साथ सोनिया भाभी की चुदाई करने में!”

“हाँ हम तीनों एक कमरे में एक बिस्तर पर दोनों बिल्कुल नंगे और तेरी सोनिया भाभी तेरे पहनाए हुए कपड़ों में हम दोनों यहाँ बिस्तर पर बैठ कर पैग लगते हुए उसको कपड़े उतारते हुए देखेंगे और फिर टक टका टक!”चुदाई का खेल शुरू!

“पर यार, भाभी मानेगी?”

मैं तो कब से तैयार हूँ सालो! अभी आ जाओ तो बताती हूँ कौन किसे चोदता है! मैंने सोचा।

“यार उसे तो मनाना पड़ेगा पता नहीं तैयार होती है या नहीं! चल अभी तो तू यही सो जा! रात हो गई है सोनिया भी सो गई है। मैं भी मुठ मार कर हल्का हो गया हूँ, मैं भी सोता हूँ! अगर तुझे भी रात को मुठ मारने के लिए कुछ
चाहिए तो बता? सोनिया ने काफी सेक्सी मैक्सी पहन रखी है, थोड़ा सा उसकी जांघों के दर्शन चाहिएँ तो बता!

“हाँ यार करा दे यार! आज रात मुठ मार कर ही काम चलाता हूँ, आज तक सोनिया भाभी को सोच कर मुठ मारता रहा था, अब देख कर मुठ मारता हूँ!

मैंने ये सुन लिया और मैं भी सीधी लेट गई। अब मेरी टाँगें पूरी तरह दिख रही थी!

“ये ले पंकज!” मनु ने मेरी पूरी मैक्सी ऊपर कर दी। अब सिर्फ़ मेरी पैंटी दिख रही थी और मेरी नंगी जांघें उन दोनों के सामने थी!”

“आऽह ऽआ मनु साले कसम से क्या जांघें हैं! मन कर रहा है खोल कर कच्छी खींच कर डाल दूँ अन्दर!”

तो देख क्या रहा है कुत्ते!कर न फिर! मैंने सोचा।

पंकज ने अपना लंड निकाल लिया और मेरे सामने ही मुठ मारने लगा।
मैं भी थोड़ी खुली आंखों से उसके लंड को निहार रही थी, सच में काफी बड़ा लंड था उसका!
कितनी ही लड़कियाँ उस लंड ने चोदी होंगी! सोच कर ही मेरे बदन में सिहरन हो गई!
पर ये क्या??

पंकज भी झड़ चुका था! खैर चलो! शायद कल इनका प्रोग्राम बन जाए! और मेरे मज़े आ जायें?

अगले दिन फिर जो हुआ वो सब मैं आपको अगली बार बताऊंगी!
पर इतना है कि उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा!
सोनिया Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

मैं पूना में रहता Hindi Sex Stories हूँ। आज मैं जो घटना बताने जा रहा हूँ वो मेरी जिदंगी मे घटी सची घटना है।

एक महीने पहले की बात है, मैं ऑफ़िस से निकलने के बाद बस स्टॉप पर खड़ा था। अचानक मेरे सामने एक कार आकर रूकी। मैंने देखा पर गाड़ी के शीशे काले होने के कारण अंदर का कुछ दिखाई नहीं दिया। गाड़ी के शीशे नीचे हुए तो मैं चोंक गया क्योंकि अंदर जो लड़की थी वो हमारे बाजू वाले ऑफ़िस की मालकिन नेहा थी। उसने मुझे अंदर बैठने का इशारा किया। मैं तुरंत ही अंदर बैठ गया। मैं सोच रहा था कि यह सपना है या हकीकत! क्योंकि नेहा से सिर्फ़ बात करने के लिये सब तरसते थे और मैं आज उसकी गाड़ी में उसके पास बैठा था। गाड़ी चल पड़ी। उसने शीशे बंद कर दिए।

नेहा के बारे में कुछ बता दूँ। नेहा की उमर 25 साल। मुझसे 4 साल बड़ी। रंग गोरा भूरी भूरी सी आंखें और फ़िगर के बारे में क्या बताऊँ, एकदम कयामत है, कहीं पर भी जरूरत से ज्यादा या कम नहीं है। कुल मिलाकर सोनाली बेंद्रे जैसी दिखती है। और बात रही मेरी, तो मैं एक साधारण 21 साल का लड़का हूँ। बहुत स्मार्ट नहीं पर दिखने में अच्छा हूँ। मेरा स्वभाव एकदम शांत है। शायद इसीलिए आज तक मुझसे एक भी लड़की नहीं पटी। जाने दो, अब कहानी की ओर चलते हैं।

गाडी के अंदर ए सी चालू था। मौसम भी अच्छा था। उसने अचानक पूछा- तुम्हें गाड़ी चलानी आती है?

मैंने हाँ कहा तो उसने गाड़ी साईड में रोक ली। उसने मुझे गाड़ी चलाने को कहा। मैं गाड़ी चलाने लगा। उसने कुछ रोमांटिक गाने लगाए। गाड़ी तेजी से आगे बढ़ रही थी। उसने गाड़ी धीरे चलाने को कहा। वो मुझे बार-बार देख रही थी। कोई कुछ नहीं बोल रहा था। पहल उसी ने की।

नेहा- तुम कहाँ रहते हो?
मैं- हडपसर में! आप?
नेहा- मैं चंदन नगर में।
मैं- तो फ़िर हडपसर क्यों जा रही हैं?
नेहा- बस आज तुम्हारे साथ जाने का मन हुआ!

यह सुनकर तो मैं चौंक ही गया। मेरे दिमाग में घंटी बजने लगी। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसकी आंखो में एक चमक थी और उसकी सांसें तेजी से चलने लगी थी। उसने गाड़ी साइड लेने को कहा। वहाँ पास में एक गार्डन था। नेहा ने मेरी तरफ़ देखा ओर कहा- चलो थोड़ी देर गार्डन में बैठते हैं।

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे साथ आज क्या हो रहा है। मैं बस पागलों की तरह उसकी तरफ़ देख रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और चलने लगी। मैं भी उसके साथ चलने लगा। मैं बस सोच रहा था कि आगे क्या होने वाला है।

हम एक पेड़ के नीचे बैठ गए। वो जगह काफ़ी सुनसान थी। सामने की झाड़ी में एक प्रेमी-युगल था। वो दोनों चुम्बन कर रहे थे। उन्हें शायद पता ही नहीं था कि हम वहाँ थे। वो तो बस एक दूजे में ही खोए हुए था। धीरे धीरे लड़के का हाथ लडकी के टॉप के अंदर जाकर उसके स्तन दबाने लगा था। यह देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया जो कि 6′ का है (मैं सब लोगों की तरह झूठ नहीं बोलना चाहता)। मैं यह पूरी तरह से भूल गया था कि मैंनेहा के साथ हूँ। मेरी नजर उधर जाते ही मुझे होश आया। वो मेरी तरफ़ ही देख रही थी। मेरी नजर शर्म के मारे झुक गई।

नेहा- तुम अभी क्या देख रहे थे?
मैं-?
नेहा- मैं नहीं जानती थी कि तुम ऐसे निकलोगे।

मेरी तो जैसी जान ही निकल गई। वो उठी और जाने लगी। मैंने उसे सॉरी बोला पर वो नहीं रुकी और जाकर गाड़ी में बैठ गई। मैं ड्रायविंग सीट पर आ गया। मैंने फ़िर से उसे सॉरी बोला पर वो कुछ नहीं बोली।

मैं गाड़ी चालू करने लगा, तभी मेरे लण्ड को कुछ स्पर्श हुआ। मैंने नीचे देखा तो वो नेहा का हाथ था। मैं उसकी तरफ़ देखने लगा। उसने मेरी ज़िप खोली और मेरे लण्ड को बाहर निकाला जो कि घबराहट की वजह से छोटा हो गया था। वो उसे सहला रही थी।

मैं- आप क्या कर रही हो?

नेहा- मुझे मत रोको। मैं इसके लिए तरस रही हूँ। मैं तुम्हारे साथ इसके लिए ही आई थी। मैंने जबसे तुम को देखा है तबसे तुम्हें अपने ऊपर लेने को तरस रही हूँ। इसीलिए मैं तुम्हें यहाँ लाई थी।

यह सुनकर मेरी हिम्मत बढ़ गई। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये। मैं जैसे स्वर्ग में था। मैंने भी उसे जोर से चूमना शुरु कर दिया और उसके मुँह में अपनी जबान सरका दी। इसका असर मेरे लण्ड पर होने लगा जोकि अब भी उसके हाथ में था। वो धीरे धीरे अपनी असली रूप में आने लगा। हम इतनी जोर से चूमा-चाटी कर रहे थे कि गाड़ी में चप-पच ऐसी आवाजें आ रही थी।

मैंने अपना एक हाथ उसके वक्ष पर रख दिया और उसे दबाने लगा। वो आहें भरने लगी। मेरा लण्ड भी पूरा खड़ा हो गया था। उसने मुझसे कहा कि आराम से बाद में करेंगे, अभी जल्दी से अपने लण्ड को मेरी बुर में डाल दो।

उसने जल्दी से अपने पैंट और पेंटी को निकाल दिया। मैंने सीट पीछे की और सीट को सीधा कर उस पर लेट गया। मेरा लण्ड तो उसकी चिकनी बुर को देख कर उछल रहा था। वो मेरे लण्ड के ऊपर बैठ गई और मेरे लण्ड को अपने हाथों से सही जगह लगा कर जोर से उस पर बैठ गई। मेरा लण्ड अंदर जाते ही जोर से चिल्लाई। मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।

उसने मेरे होटों पर अपने होंट रख दिये और हम फ़िर से किस करने लगे। मैं अपने हाथों से उसके दोनों स्तनों को दबा रहा था। वो जोर जोर से मेरे लण्ड के ऊपर ऊपर-नीचे हो रही थी और जोर जोर से आह आह्ह अहह अह कर रही थी। वो शायद बड़ी जल्दी में थी। वो झड़ने के करीब थी और मैं भी। वो जोर से ऊपर नीचे होने लगी। अचानक वो सिकुड़ने लगी। उसने मुझे जोर से पकड़ रखा था। मैं समझ गया कि वो झड़ चुकी थी। वो शांत हो गई पर मैं अभी तक झड़ा नहीं था।

मैंने उसे अपनी जगह लिटा दिया मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी बुर में डाल दिया और जोर जोर से झटके मारने लगा। मेरा भी समय करिब आ गया था। 5-7 झटके मारने के बाद मैं उसकी बुर में झड़ गया। तकरीबन 30 मिनट तक हमारी चुदाई चली होगी।

उस दिन के बाद जब भी हमें चोदने का मन हो तो मैं उसके घर जाकर उसको रात भर खूब चोदता हूँ। हफ़्ते एक बार तो मैं उसके घर जरूर जाता हूँ। और जब हम ऑफ़िस में हों तो वहाँ पर भी हमारा मन हुआ तो मैं टेरेस पर उसे चोदता हूँ! वो कैसे! मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगा। पर आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताइए। Hindi Sex Stories

Antarvasna

मेरा नाम गौरी सिंह है। मैं एक Antarvasna शादी शुदा औरत हूँ। गुजरात में सूरत के पास एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में मेरे पति अशोक सिंह इंजीनियर की पोस्ट पे काम करते हैं। उनके टेक्सटाइल मिल में हमेशा लेबर का मसला रहता है ।
मजदूरों का नेता भोगी भाई बहुत ही काइयाँ किस्म का आदमी है। ऑफिसर लोगों को उस आदमी को हमेशा पटा कर रखना पड़ता है। मेरे पति की उससे बहुत पटती थी। मुझे उनकी दोस्ती फूटी आँख भी नहीं सुहाती थी।

शादी के बाद मैं जब नई-नई आई थी, वह पति के साथ अक्सर आने लगा। उसकी आँखें मेरे जिस्म पर फिरती रहती थी। मेरा जिस्म वैसे भी काफी सैक्सी था। वो पूरे जिस्म पर नजरें फ़ेरता रहता था। ऐसा लगता था मानो वो ख्यालों में मुझे नंगा कर रहा हो। निकाह के बाद मुझे किसी को यह बताने में बहुत शर्म आती थी। फिर भी मैंने बृज को समझाया कि ऐसे आदमियों से दोस्ती छोड़ दे मगर वो कहता था कि प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने पर थोड़ा बहुत ऐसे लोगों से बना कर रखना पड़ता ही है।

उनकी इस बात के आगे मैं चुप हो जाती थी। मैंने कहा भी कि वह आदमी मुझे बुरी नज़रों से घूरता रहता है। मगर वो मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं देते थे। भोगी भाई कोई 45 साल का भैंसे की तरह काला आदमी था। उसका काम हर वक्त कोई ना कोई खुराफ़ात करना रहता था, उसकी पहुँच ऊपर तक थी, उसका दबदबा आस पास की कईं कंपनियों में चलता था।

बाज़ार के नुक्कड़ पर उसकी कोठी थी जिसमें वो अकेला ही रहता था। कोई परिवार नहीं था मगर लोग बताते थे कि वो बहुत ही रंगीला एय्याश आदमी था और अक्सर उसके घर में लड़कियाँ भेजी जाती थी। हर वक्त कईं चमचों से घिरा रहता था। वो सब देखने में गुंडे से लगते थे। सूरत और इसके आसपास काफी टेक्सटाइल की छोटी मोटी फैक्ट्रियाँ हैं। इन सब में भोगी भाई की आज्ञा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता था। उसकी पहुँच यहाँ के मंत्री से भी ज्यादा थी।

बृज के सामने ही कईं बार मेरे साथ गंदे मजाक भी करता था। मैं गुस्से से लाल हो जाती थी मगर बृज हंस कर टाल देता था।
बाद में मेरे शिकायत करने पर मुझे बांहों में लेकर मेरे होंठों को चूम कर कहता- गौरी तुम हो ही ऐसी कि किसी का भी मन डोल जाये तुम पर। अगर कोई तुम्हें देख कर ही खुश हो जाता हो तो हमें क्या फर्क पड़ता है।

होली से दो दिन पहले एक दिन किसी काम से भोगी भाई हमारे घर पहुँचा। दिन का वक्त था। मैं उस समय बाथरूम में नहा रही थी। बाहर से काफी आवाज लगाने पर भी मुझे सुनाई नहीं दिया था। शायद उसने घंटी भी बजाई होगी मगर अंदर पानी की आवाज में मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दिया।

मैं अपनी धुन में गुनगुनाती हुई नहा रही थी। घर के मुख्य दरवाज़े की चिटकनी में कोई नुक्स था। दरवाजे को जोर से धक्का देने पर चिटकनी अपने आप गिर जाती थी। उसने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया तो दरवाजे की चिटकनी गिर गई और दरवाजा खुल गया।
भोगी भाई ने बाहर से आवाज लगाई मगर कोई जवाब ना पाकर दरवाजा खोल कर झाँका, कमरा खाली पाकर वो अंदर दाखिल हो गया। उसे शायद बाथरूम से पानी गिरने कि और मेरे गुनगुनाने की आवाज आई तो पहले तो वो वापस जाने के लिये मुड़ा मगर फ़िर कुछ सोच कर धीरे से दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया और मुड़ कर बेडरूम में दाखिल हो गया।

मैंने घर में अकेले होने के कारण कपड़े बाहर बेड पर ही रख रखे थे। उन पर उसकी नजर पड़ते ही आँखों में चमक आ गई। उसने सारे कपड़े समेट कर अपने पास रख लिये। मैं इन सब से अन्जान गुनगुनाती हुई नहा रही थी।
नहाना खत्म कर के जिस्म तौलिये से पोंछ कर पूरी तरह नंगी बाहर निकली। वो दरवाजे के पीछे छुपा हुआ था इसलिए उस पर नजर नहीं पड़ी। मैंने पहले ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर अपने हुस्न को निहारा। फिर जिस्म पर पाऊडर छिड़क कर कपड़ों की तरफ हाथ बढ़ाये। मगर कपड़ों को बिस्तर पर ना पाकर चौंक गई। तभी दरवाजे के पीछे से भोगी भाई लपक कर मेरे पीछे आया और मेरे नंगे जिस्म को अपनी बांहों की गिरफ़्त में ले लिया।

मैं एकदम घबरा गई, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। उसके हाथ मेरे जिस्म पर फ़िर रहे थे। मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथों से मसल रहा था। एक हाथ मेरी चूत पर फ़िर रहा था।
अचानक उसकी दो अँगुलियाँ मेरी चूत में घुस गई। मैं एकदम से चिहुँक उठी और उसे एक जोर से झटका दिया और उसकी बांहों से निकल गई। मैं चीखते हुए दरवाजे की तरफ़ दौड़ी मगर कुंडी खोलने से पहले फ़िर उसकी गिरफ़्त में आ गई। वो मेरे मम्मों को बुरी तरह मसल रहा था।

‘छोड़ कमीने नहीं तो मैं शोर मचाऊँगी.’ मैंने चीखते हुए कहा। तभी हाथ चिटकनी तक पहुँच गये और दरवाजा खोल दिया। मेरी इस हर्कत की उसे शायद उम्मीद नहीं थी। मैंने एक जोरदार झापड़ उसके गाल पर लगाया और अपनी नंगी हालत की परवाह ना करते हुए मैंने दरवाजे को खोल दिया।

मैं शेरनी की तरह चीखी- निकल जा मेरे घर से…
और उसे धक्के मार कर घर से निकाल दिया।
उसकी हालत चोट खाये शेर की तरह हो रही थी, चेहरा गुस्से से लाल सुर्ख हो रहा था, उसने फुफकारते हुए कहा- साली बड़ी सती सावित्री बन रही है… अगर तुझे अपने नीचे ना लिटाया तो मेरा नाम भी भोगी भाई नहीं। देखना एक दिन तू आयेगी मेरे पास मेरे लंड को लेने। उस समय अगर तुझे अपने इस लंड पर ना कुदवाया तो देखना।
मैंने भड़ाक से उसके मुँह पर दरवाजा बंद कर दिया, मैं वहीं दरवाजे से लग कर रोने लगी।

शाम को जब बृज आया तो उस पर भी फ़ट पड़ी। मैंने उसे सारी बात बताई और ऐसे दोस्त रखने के लिये उसे भी खूब खरी खोटी सुनाई। पहले तो बृज ने मुझे मनाने की काफी कोशिश की, कहा कि ऐसे बुरे आदमी से क्या मुँह लगना।
मगर मैं तो आज उसकी बातों में आने वाली नहीं थी, आखिर वो उस से भिड़ने निकला।
भोगी भाई से झगड़ा करने पर भोगी भाई ने भी खूब गालियाँ दी, उसने कहा- तेरी बीवी नंगी होकर दरवाजा खोल कर नहाये तो इसमें सामने वाले की क्या गलती है। अगर इतनी ही सती सावित्री है तो बोला कर कि बुर्के में रहे।
उसके आदमियों ने धक्के देकर बृज को बाहर निकाल दिया। पुलिस में कंपलेंट लिखाने गये मगर पुलिस ने कंपलेंट लिखने से मना कर दिया, सब उससे घबराते थे।

खैर खून का घूँट पीकर चुप हो जाना पड़ा। बदनामी का भी डर था और बृज की नौकरी का भी सवाल था।
धीरे-धीरे समय गुजरने लगा। चौराहे पर अक्सर भोगी भाई अपने चेले चपाटों के साथ बैठा रहता था। मैं कभी वहाँ से गुजरती तो मुझे देख कर अपने साथियों से कहता- बृज की बीवी बड़ी कंटीली चीज है… उसकी चूचियों को मसल-मसल कर मैंने लाल कर दिया था। चूत में भी अँगुली डाली थी। नहीं मानते हो तो पूछ लो।
‘क्यों गौरी जान याद है ना मेरे हाथों का स्पर्श’
‘कब आ रही है मेरे बिस्तर पर?’
मैं ये सब सुन कर चुपचाप सिर झुकाये वहाँ से गुजर जाती थी।

दो महीने बाद की बात है। बृज के साथ शाम को बाहर घुमने जाने का प्रोग्राम था और मैं उसका ऑफिस से वापिस आने का इंतज़ार कर रही थी। मैंने एक कीमती साड़ी पहनी और अच्छे से बन-सँवर के अपने गोरे पैरों में नई सैंडल पहनी। अचानक बृज की फैक्ट्री से फोने आया- मैडम, आप मिसेज सिंह बोल रही हैं?
‘हाँ बोलिये’ मैंने कहा।
‘मैडम पुलिस फैक्ट्री आई थी और सिंह साहब को गिरफतार कर ले गई।’
‘क्या? क्यों?’ मेरी समझ में ही नहीं आया कि सामने वाला क्या बोल रहा है।
‘मैडम कुछ ठीक से समझ में नहीं आ रहा है। आप तुरंत यहाँ आ जाइये।’
मैं जैसी थी वैसी ही दौड़ी गई बृज के ऑफिस।

वहाँ के मालिक कामदार साहब से मिली तो उन्होंने बताया कि दो दिन पहले उनकी फैक्ट्री में कोई एक्सीडेंट हुआ था जिसे पुलिस ने मर्डर का केस बना कर बृज के खिलाफ़ चार्जशीट दायर कर दी थी।
मैं एकदम हैरान रह गई, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।
‘लेकिन आप तो जानते हैं कि बृज ऐसा आदमी नहीं है। वो आपके के पास पिछले कईं सालों से काम कर रहा है। कभी आपको उनके खिलाफ़ कोई भी शिकायत मिली है क्या?’ मैंने मिस्टर कामदार से पूछा।
‘देखिये मिसेज सिंह! मैं भी जानता हूँ कि इसमें बृज का कोई भी हाथ नहीं है मगर मैं कुछ भी कहने में असमर्थ हूँ।’
‘आखिर क्यों?’
‘क्योंकि उसका एक चश्मदीद गवाह है… भोगी भाई’ मेरे सिर पर जैसे बम फ़ट पड़ा। मेरी आँखों के सामने सारी बातें साफ़ होती चली गई।
‘वो कहता है कि उसने बृज को जान बूझ कर उस आदमी को मशीन में धक्का देते देखा था।’
‘ये सब सरासर झूठ है… वो कमीना जान बूझ कर बृज को फँसा रहा है’ मैंने लगभग रोते हुए कहा।

‘देखिये मुझे आपसे हमदर्दी है मगर मैं आपकी कोई भी मदद नहीं कर पा रहा हूँ… इंसपेक्टर गावलेकर की भी भोगी भाई से अच्छी दोस्ती है। सारे वर्कर बृज के खिलाफ़ हो रहे हैं… मेरी मानो तो आप भोगी भाई से मिल लो… वो अगर अपना बयान बदल ले तो ही बृज बच सकता है।’
‘थूकती हूँ मैं उस कमीने पर’ कहकर मैं वहाँ से पैर पटकती हुई निकल गई। मगर मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। मैं पुलिस स्टेशन पहुँची।

वहाँ काफ़ी देर बाद बृज से मिलने दिया गया। उसकी हालत देख कर तो मुझे रोना आ गया। बाल बिखरे हुए थे। आँखों के नीचे कुछ सूजन थी। शायद पुलिस वालों ने मारपीट भी की होगी।
मैंने उससे बात करने की कोशिश की मगर वो कुछ ज्यादा नहीं बोल पाया। उसने बस इतना ही कहा- अब कुछ नहीं हो सकता। अब तो भोगी भाई ही कुछ कर सकता है।’

मुझे किसी ओर से उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही थी, आखिरकार मैंने भोगी भाई से मिलने का फैसला किया।
शायद उसे मुझ पर रहम आ जाये। शाम के लगभग आठ बज गये थे। मैं भोगी भाई के घर पहुँची।

गेट पर दर्बान ने रोका तो मैंने कहा- साहब को कहना मिसेज सिंह आई हैं।’
गार्ड अंदर चला गया। कुछ देर बाद बाहर अकर कहा- अभी साहब बिज़ी हैं, कुछ देर इंतज़ार कीजिये।
पंद्रह मिनट बाद मुझे अंदर जाने दिया। मकान काफी बड़ा था। अंदर ड्राईंग रूम में भोगी भाई दिवान पर आधा लेटा हुआ था। उसके तीन चमचे कुर्सियों पर बैठे हुए थे। सबके हाथों में शराब के ग्लास थे। सामने टेबल पर एक बोतल खुली हुई थी। मैं कमरे की हालत देखते हुए झिझकते हुए अंदर घुसी।

‘आ बैठ’ भोगी भाई ने अपने सामने एक खाली कुर्सी की तरफ़ इशारा किया।
‘वो… वो मैं आपसे बृज के बारे में बात करना चाहती थी।’ मैं जल्दी वहाँ से भागना चाहती थी।
‘ये अपने सुदर्शन कपड़ा मिल के इंजीनियर की बीवी है… बड़ी सैक्सी चीज है।’ उसने अपने ग्लास से एक घूँट लेते हुए कहा।
सारे मुझे वासना भरी नज़रों से देखने लगे। उनकी आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे।
‘हाँ बोल क्या चाहिये?’
‘बृज ने कुछ भी नहीं किया’ मैंने उससे मिन्नत की।
‘मुझे मालूम है..’
‘पुलिस कहती है कि आप अपना बयान बदल लेंगे तो वो छूट जायेंगे’
‘क्यों? क्यों बदलूँ मैं अपना बयान?’
‘प्लीज़, हम पर…?’
‘सड़ने दो साले को बीस साल जेल में… आया था मुझसे लड़ने।’
‘प्लीज़, आप ही एक आखिरी उम्मीद हो।’

‘लेकिन क्यों? क्यों बदलूँ मैं अपना बयान? मुझे क्या मिलेगा’ भोगी भाई ने अपने होंठों पर मोटी जीभ फ़ेरते हुए कहा।
‘आप कहिये आपको क्या चाहिए… अगर बस में हुआ तो हम जरूर देंगे।’ कहते हुए मैंने अपनी आँखें झुका ली। मुझे पता था कि अब क्या होने वाला है। भोगी भाई अपनी जगह से उठा। अपना ग्लास टेबल पर रख कर चलता हुआ मेरे पीछे आ गया।
मैं सख्ती से आँखें बंद कर उसके पैरों की पदचाप सुन रही थी। मेरी हालत उस खरगोश की तरह हो गई थी जो अपना सिर झाड़ियों में डाल कर सोचता है कि भेड़िये से वो बच जायेगा। उसने मेरे पीछे आकर साड़ी के आँचल को पकड़ा और उसे छातियों पर से हटा दिया। फिर उसके हाथ आगे आये और सख्ती से मेरी चूचियों को मसलने लगे।

‘मुझे तुम्हारा जिस्म चाहिए पूरे एक दिन के लिये’ उसने मेरे कानों के पास धीरे से कहा। मैंने रज़ामंदी में अपना सिर झुका लिया।
‘ऐसे नहीं अपने मुँह से बोल’ वो मेरे ब्लाऊज़ के अंदर अपने हाथ डाल कर सख्ती से चूचियों को निचोड़ने लगा। इतने लोगों के सामने मैं शरम से गड़ी जा रही थी। मैंने सिर हिलाया।
‘मुँह से बो…’
‘हाँ’ मैं धीरे से बुदबुदाई।
‘जोर से बोल… कुछ सुनाई नहीं दिया! तुझे सुनाई दिया रे चपलू?’ उसने एक से पूछा।
‘नहीं’ जवाब आया।
‘मुझे मंजूर है!’ मैंने इस बार कुछ जोर से कहा।

‘क्यों फूलनदेवी जी, मैंने कहा था ना कि तू खुद आयेगी मेरे घर और कहेगी कि प्लीज़ मुझे चोदो। कहाँ गई तेरी अकड़? तू पूरे 24 घंटों के लिये मेरे कब्जे में रहेगी। मैं जैसा चाहूँगा, तुझे वैसा ही करना होगा। तुझे अगले 24 घंटे बस अपनी चूत खोल कर रंडियों की तरह चुदवाना है। उसके बाद तू और तेरा मर्द दोनो आज़ाद हो जाओगे।

उसने कहा- और नहीं तो तेरा मर्द तो 20 साल के लिये अंदर होगा ही तुझे भी रंडीबाज़ी के लिये अंदर करवा दूँगा। फिर तो तू वैसे ही वहाँ से पूरी रंडी बन कर ही बाहर निकलेगी।
‘मुझे मंजूर है।’ मैंने अपने आँसुओं पर काबू पाते हुए कहा।
वो जाकर वापस अपनी जगह बैठ गया।

‘चल शुरू हो जा… आपने सारे कपड़े उतार… मुझे औरतों के जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लगते!’ उसने ग्लास अपने होंठों से लगाया। ‘अब ये कपड़े कल शाम के दस बजे के बाद ही मिलेंगे। चल इनको भी दिखा तो सही कि तुझे अपने किस हुस्न पर इतना गरूर है। वैसे आई तो तू काफी सज-धज कर है!’
मैंने कांपते हाथों से ब्लाऊज़ के बटन खोलना शुरू कर दिया। सारे बटन खोलकर ब्लाऊज़ के दोनों हिस्सों को अपनी चूचियों के ऊपर से हटाया तो ब्रा में कसे हुए मेरे दोनों मम्मे उन भूखी आँखों के सामने आ गये।

मैंने ब्लाऊज़ को अपने जिस्म से अलग कर दिया। चारों की आँखें चमक उठी। मैंने जिस्म से साड़ी हटा दी। फिर मैंने झिझकते हुए पेटीकोट की डोरी खींच दी। पेटीकोट सरसराता हुआ पैरों पर ढेर हो गया।
चारों की आँखों में वासना के सुर्ख डोरे तैर रहे थे।

मैं उनके सामने ब्रा, पैंटी और हाई हील के सैंडल में खड़ी हो गई।
‘मैंने कहा था सारे कपड़े उतारने को !’ भोगी भाई ने गुर्राते हुए कहा।
‘प्लीज़ मुझे और जलील मत करो।’ मैंने उससे मिन्नतें की।
‘अबे राजे फोन लगा गोवलेकर को। बोल साले बृज को रात भर हवाई जहाज बना कर डंडे मारे और इस रंडी को भी अंदर कर दे।’

‘नहीं नहीं, ऐसा मत करना। आप जैसा कहोगे मैं वैसा ही करूँगी।’ कहते हुए मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को आहिस्ता से जिस्म से अलग कर दिया।
अब मैंने पूरी तरह से तसलीम का फ़ैसला कर लिया। ब्रा के हटते ही मेरी दूधिया चूचियाँ रोशनी में चमक उठी। चारों अपनी-अपनी जगह पर कसमसाने लगे। वो लोग गर्म हो चुके थे और बाकी तीनों की पैंट पर उभार साफ़ नजर आ रहा था।
भोगी भाई लूँगी के ऊपर से ही अपने लंड पर हाथ फ़ेर रहा था। लूँगी के ऊपर से ही उसके उभार को देख कर लग रहा था कि अब मेरी खैर नहीं।

मैंने अपनी अंगुलियाँ पैंटी की इलास्टिक में फंसाईं तो भोगी भाई बोल उठा- ठहर जा… यहाँ आ मेरे पास।
मैं उसके पास आकर खड़ी हो गई। उसने अपने हाथों से मेरी चूत को कुछ देर तक मसला और फ़िर पैंटी को नीचे करता चला गया।
अब मैं पूरी तरह नंगी हो कर सिर्फ सैंडल पहने उसके सामने खड़ी थी।
‘राजे! जा और मेरा कैमरा उठा ला।’
मैं घबरा गई- आपने जो चाहा, मैं दे रही हूँ फ़िर ये सब क्यों?
‘तुझे मुँह खोलने के लिये मना किया था ना?’

एक आदमी एक मूवी कैमरा ले आया। उन्होंने बीच की टेबल से सारा सामान हटा दिया। भोगी भाई मेरी चिकनी चूत पर हाथ फ़िरा रहा था।
‘चल बैठ यहाँ…’ उसने बीच की टेबल की ओर इशारा किया।
मैं उस टेबल पर बैठ गई, उसने मेरी टाँगों को जमीन से उठा कर टेबल पर रखने को कहा।
मैं अपने सैंडल खोलने लगी तो उसने मना कर दिया- इन ऊँची ऐड़ी की सैंडलों में अच्छी लग रही है तू।’
मैंने वैसा ही पैर टेबल पर रख लिये।
‘अब टाँगें चौड़ी कर…’
मैं शर्म से दोहरी हो गई मगर मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था। मैंने अपनी टाँगों को थोड़ा फ़ैलाया।
‘और फ़ैला…’
मैंने टाँगों को उनके सामने पूरी तरह फ़ैला दिया। मेरी चूत उनकी आँखों के सामने बेपर्दा थी। चूत के दोनों लब खुल गये थे। मैं चारों के सामने चूत फ़ैला कर बैठी हुई थी, उनमें से एक मेरी चूत की तस्वीरें ले रहा था।
‘अपनी चूत में अँगुली डाल कर उसको चौड़ा कर !’ भोगी भाई ने कहा।

वो अब अपनी तहमद खोल कर अपने काले मूसल जैसे लंड पर हाथ फ़ेर रहा था, मैं तो उसके लंड को देख कर ही सिहर गई, गधे जैसा इतना मोटा और लंबा लंड मैंने पहली बार देखा था। लंड भी पूरा काला था।
मैंने अपनी चूत में अँगुली डाल कर उसे सबके सामने फ़ैल दिया। चारों हंसने लगे।
‘देखा, मुझसे पंगा लेने का अंजाम? बड़ा गरूर था इसको अपने रूप पर। देख आज मेरे सामने कैसे नंगी अपनी चूत फ़ैला कर बैठी हुई है।’ भोगी भाई ने अपनी दो मोटी-मोटी अंगुलियाँ मेरी चूत में घुसा दी।

मैं एकदम से सिहर उठी, मैं भी अब गर्म होने लगी थी, मेरा दिल तो नहीं चाह रहा था मगर जिस्म उसकी बात नहीं सुन रहा था। उसकी अंगुलियाँ कुछ देर तक अंदर खलबली मचाने के बाद बाहर निकली तो चूत रस से चुपड़ी हुई थी। उसने अपनी अंगुलियों को अपनी नाक तक ले जाकर सूंघा और फ़िर सब को दिखा कर कहा- अब यह भी गर्म होने लगी है।
फिर मेरे होंठों पर अपनी अंगुलियाँ छुआ कर कहा- ले चाट इसे।
मैंने अपनी जीभ निकाल कर अपने चूत-रस को पहली बार चखा।

सब एकदम से मेरे जिस्म पर टूट पड़े। कोई मेरी चूचियों को मसल रहा था तो कोई मेरी चूत में अँगुली डाल रहा था। मैं उनके बीच में छटपटा रही थी। भोगी भाई ने सबको रुकने का इशारा किया। मैंने देखा उसकी कमर से तहमद हटी हुई है और काला भुजंग सा लंड तना हुआ खड़ा है। उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपने लंड पर दाब दिया।
‘इसे ले अपने मुँह में !’ उसने कहा- मुँह खोल।
मैंने झिझकते हुए अपना मुँह खोला तो उसका लंड अंदर घुसता चला गया।

बड़ी मुश्किल से ही उसके लंड के ऊपर के हिस्से को मुँह में ले पा रही थी। वो मेरे सिर को अपने लंड पर दाब रहा था। उसका लंड गले के दर पर जाकर फ़ंस गया।
मेरा दम घुटने लगा और मैं छटपटा रही थी, उसने अपने हाथों का जोर मेरे सिर से हटाया, कुछ पलों के लिये कुछ राहत मिली तो मैंने अपना सिर ऊपर खींचा।
लंड के कुछ इंच बाहर निकलते ही उसने वापस मेरा सिर दबा दिया।

इस तरह वो मेरे मुँह में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। मैंने कभी लंड-चुसाई नहीं की थी इसलिए मुझे शुरू-शुरू में काफी दिक्कत हुई, उबकाई सी आ रही थी। धीरे-धीरे मैं उसके लंड की आदी हो गई।
अब मेरा जिस्म भी गर्म हो गया था। मेरी चूत गीली होने लगी।

बाकी तीनों मेरे जिस्म को मसल रहे थे। मुख मैथुन करते-कर मुँह दर्द करने लगा था मगर वो था कि छोड़ ही नहीं रहा था। कोई बीस मिनट तक मेरे मुँह को चोदने के बाद उसका लंड झटके खाने लगा। उसने अपना लंड बाहर निकाला।
‘मुँह खोल कर रख !’ उसने कहा।

मैंने मुँह खोल दिया। ढेर सारा वीर्य उसके लंड से तेज धार सा निकल कर मेरे मुँह में जा रहा था। एक आदमी मूवी कैमरे में सब कुछ कैद कर रहा था।
जब मुँह में और आ नहीं पाया तो काफी सारा वीर्य मुँह से चूचियों पर टपकने लगा। उसने कुछ वीर्य मेरे चेहरे पर भी टपका दिया।
‘बॉस का एक बूंद वीर्य भी बेकार नहीं जाये…’ एक चमचे ने कहा।
उसने अपनी अंगुलियों से मेरी चूचियों और मेरे चेहरे पर लगे वीर्य को समेट कर मेरे मुँह में डाल दिया। मुझे मन मार कर भी सारा गटकना पड़ा।
‘इस रंडी को बेडरूम में ले चल…’ भोगी भाई ने कहा।

दो आदमी मुझे उठाकर लगभग खींचते हुए बेडरूम में ले गये। बेडरूम में एक बड़ा सा पलंग बिछा था। मुझे पलंग पर पटक दिया गया। भोगी भाई अपने हाथों में ग्लास लेकर बिस्तर के पास एक कुर्सी पर बैठ गया।
‘चलो शुरू हो जाओ !’ उसने अपने चमचों से कहा।

तीनों मुझ पर टूट पड़े। मेरी टाँगें फ़ैला कर एक ने अपना मुँह मेरी चूत पर चिपका दिया। अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत को चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे अंदर गर्मी फ़ैला रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर जोर से दबा रख था।

मैं छटपटाने लगी, मुँह से ‘आहह ऊऊहहह ओफफ आहहह उईईई’ जैसी आवाजें निकल रही थी। अपने ऊपर काबू रखने के लिये मैं अपना सिर झटक रही थी मगर मेरा जिस्म था कि बेकाबू होता जा रहा था।
बाकी दोनों में से एक मेरे निप्पलों पर दाँत गड़ा रहा था तो एक ने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया। ग्रुप में चुदाई का नज़ारा था और भोगी भाई पास बैठ मुझे नुचते हुए देख रहा था।
भोगी भाई का लंड लेने के बाद इस आदमी का लंड तो बच्चे जैसा लग रहा था, वो बहुत जल्दी झड़ गया।

अब जो आदमी मेरी चूत चूस रहा था वो मेरी चूत से अलग हो गया। मैंने अपनी चूत को जितना हो सकता था ऊँचा किया कि वो वापस अपनी जीभ अंदर डाल दे। मगर उसका इरादा कुछ और ही था।
उसने मेरी टाँगों को मोड़ कर अपने कंधे पर रख दिया और एक झटके में अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। इस अचानक हुए हमले से मैं छटपटा गई।
अब वो मेरी चूत में तेज-तेज झटके मारने लगा। दूसरा जो मेरी चूचियों को मसल रहा था, मेरी छाती पर सवार हो गया और मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया। फिर मेरे मुँह को चूत कि तरह चोदने लगा। उसके टट्टे मेरी ठुड्डी से रगड़ खा रहे थे।
दोनों जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी। मैं चीखना चाह रही थी मगर मुँह से सिर्फ़ ‘उम्म्म्म उम्फ’ जैसी आवाज ही निकल रही थी। दोनों एक साथ वीर्य निकाल कर मेरे जिस्म पर लुढ़क गये।

मैं जोर जोर से सांसें ले रही थी। बुरी तरह थक गई थी मगर आज मेरे नसीब में आराम नहीं लिखा था। उनके हटते ही भोगी भाई उठा और मेरे पास अकर मुझे खींच कर उठाया और बिस्तर के कोने पर चौपाया बना दिया। फिर उसने बिस्तर के पास खड़े होकर अपना लंड मेरी टपकती चूत पर लगाया और एक झटके से अंदर डाल दिया।
चूत गीली होने की वजह से उसका मूसल जैसा लंड लेते हुए भी कोई दर्द नहीं महसूस हुआ। मगर ऐसा लग रहा था मानो वो मेरे पूरे जिस्म को चीरता हुआ मुँह से निकल जायेगा।
फिर वो धक्के देने लगा, मजबूत पलंग भी उसके धक्कों से चरमराने लगा। फिर मेरी क्या हालत हो रही होगी इसका तो सिर्फ अंदज़ा ही लगाया जा सकता है!
मैं चीख रही थी- आहहह ओओओहहह प्लीज़ज़। प्लीज़ज़ मुझे छोड़ दो। आआआह आआआह नहींईंईंईं प्लीज़ज़ज़।’ मैं तड़प रही थी मगर वो था कि अपनी रफ़्तार बढ़ाता ही जा रहा था।
पूरे कमरे में ‘फच फच’ की आवाजें गूँज रही थी। बाकी तीनों उठ कर मेरे करीब आ गये थे और मेरी चुदाई का नज़ारा देख रहे थे।
मैं बस दुआ कर रही थी कि उसका लंड जल्दी पानी छोड़ दे। मगर पता नहीं वो किस चीज़ का बना हुआ था कि उसकी रफ़्तार में कोई कमी नहीं आ रही थी। कोई आधे घंटे तक मुझे चोदने के बाद उसने अपना वीर्य मेरी चूत में डाल दिया। मैं मुँह के बल बिस्तर पर गिर गई। मेरा पूरा जिस्म बुरी तरह टूट रहा था और गला सूख रहा था।
‘पानी…’ मैंने पानी माँगा तो एक ने पानी का ग्लास मेरे होंठों से लगा दिया। मेरे होंठ वीर्य से लिसड़े हुए थे। उन्हें पोंछ कर मैंने गटागट पूरा पानी पी लिया।
पानी पीने के बाद जिस्म में कुछ जान आई। तीनों वापस मेरे जिस्म से चिपक गये। अब मैं बिस्तर के किनारे पैर लटका के बैठ गई। एक का लंड मैंने अपनी दोनो चूचियों के बीच ले रखा था और बाकी दोनों के लंड को बारी-बारी से मुँह में लेकर चूस रही थी। वो मेरी चूचियों को चोद रहा था।

मैं अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को उसके लंड पर दोनों तरफ से दबा रखा था। उसने मेरी चूचियों पर वीर्य गिरा दिया। फिर बाकी दोनों ने मुझे बारी-बारी से कुत्तिया बना कर चोदा। उनके वीर्य पट हो जाने के बाद वो चले गये।
मैं बिस्तर पर चित्त पड़ी हुई थी। दोनों पैर फ़ैले हुए थे और अभी भी मेरे पैरों में ऊँची हील के सैंडल कसे थे। मेरी चूत से वीर्य चूकर बिस्तर पर गिर रहा था। मेरे बाल, चेहरा, चूचियाँ, सब पर वीर्य फ़ैला हुआ था। चूचियों पर दाँतों के लाल-नीले निशान नजर आ रहे थे।

भोगी भाई पास खड़ा मेरे जिस्म की तस्वीरें खींच रहा था मगर मैं उसे मना करने की स्थिति में नहीं थी। गला भी दर्द कर रहा था। भोगी भाई ने बिस्तर के पास आकर मेरे निप्पलों को पकड़ कर उन्हें उमेठते हुए अपनी ओर खींचा। मैं दर्द के मारे उठती चली गई और उसके जिस्म से सट गई।
‘जा किचन में… भीमा ने खाना बना लिया होगा। टेबल पर खाना लगा… और हाँ तू इसी तरह रहेगी।’ मुझे कमरे के दरवाजे की तरफ़ ढकेल कर मेरे नंगे नितंब पर एक चपत लगाई।
मैं अपने जिस्म को सिकोड़ते हुए और एक हाथ से अपने मम्मों को और एक हाथ से अपनी टाँगों को जोड़ कर ढकने की असफ़ल कोशिश करती हुई रसोई में पहुँची।

अंदर 45 साल का एक रसोइया था। उसने मुझे देख कर एक सीटी बजाई और मेरे पास आकर मुझे सीधा खड़ा कर दिया। मैं झुकी जा रही थी मगर उसने मेरी नहीं चलने दी, जबरदस्ती मेरे सीने पर से हाथ हटा दिया।
‘शानदार’ उसने कहा। मैं शर्म से दोहरी हो रही थी। एक निचले स्तर के गंवार के सामने मैं अपनी इज्जत बचाने में नाकाबिल थी।
उसने फ़िर खींच कर चूत पर से दूसरा हाथ हटाया, मैंने टाँगें सिकोड़ ली।
यह देख कर उसने मेरी चूचियों को मसल दिया। चूचियों को उससे बचाने के लिये नीचे की ओर झुकी तो उसने अपनी दो अंगुलियाँ मेरी चूत में पीछे की तरफ़ से डाल दी। मेरी चूत वीर्य से गीली हो रही थी।
‘खुब चुदी हो… लगता है।’ उसने कहा।
‘शेर खुद खाने के बाद कुछ बोटियाँ गीदड़ों के लिये भी छोड़ देता है। एक-आध मौका साहब मुझे भी देंगे। तब तेरी खबर लुँगा’ कहकर उसने मुझे अपने जिस्म से लपेट लिया।
‘भोगी भाई जी ने खाना लगाने के लिये कहा है।’ मैंने उसे धक्का देते हुए कहा। उसने मुझसे अलग होने से पहले मेरे होंठों को एक बार कस कर चूम लिया।
‘चल तुझे तो तसल्ली से चोदेंगे… पहले साहब को जी भर के मसल लेने दो।’ उसने कहा, फिर मुझे खाने का सामान पकड़ाने लगा।
मैंने टेबल पर खाना लगाया। फिर डिनर भोगी भाई की गोद में बैठ कर लेना पड़ा।
वो भी नंगा ही बैठा था। उसका लंड सिकुड़ा हुआ था, मेरी चूत उसके नरम पड़े लंड को चूम रही थी। खाते हुए कभी मुझे मसलता, कभी चूमता जा रहा था।
उसके मुँह से शराब की बदबू आ रही थी। वो जब भी मुझे चूमता, मुझे उस पर गुस्सा आ जाता। खाते-खाते ही उसने मोबाइल पर कहीं रिंग किया।
‘हलो, कौन… गावलेकर?’
‘क्या कर रहा है?’
‘अबे इधर आ जा। घर पर बोल देना कि रात में कहीं गश्त पर जाना है। यहीं रात गुजारेंगे… हमारे बृज साहब की जमानत यहीं है मेरी गोद में !’ कहकर उसने मेरे एक निप्पल को जोर से उमेठा।
दोनों निप्पल बुरी तरह दर्द कर रहे थे। नहीं चाहते हुए भी मैं चीख उठी।
‘सुना? अब झटाझट आ जा सारे काम छोड़ कर !’ रात भर अपन दोनों इसकी जाँच पड़ताल करेंगे।’
मैं समझ गई कि भोगी भाई ने इंसपैक्टर गावलेकर को रात में अपने घर बुलाया है और दोनों रात भर मुझे चोदेंगे। खाना खाने के बाद मुझे बांहों में समेटे हुए ड्राईंग रूम में आ गया। मुझे अपनी बांहों में लेकर मेरे होंठों पर अपने मोटे-मोटे भद्दे होंठ रख कर चूमने लगा। फिर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मेरे मुँह का अपनी जीभ से मोआयना करने लगा। फिर वो सोफ़े पर बैठ गया और मुझे जमीन पर अपने कदमों पर बिठाया। टाँगें खोल कर मुझे अपनी टाँगों के जोड़ पर खींच लिया।

मैं उसका इशारा समझ कर उसके लंड को चूमने लगी। वो मेरे बालों पर हाथ फ़िरा रहा था। फिर मैंने उसके लंड को मुँह में ले लिया और उसके लंड को चूसने लगी और जीभ निकाल कर उसके लंड के ऊपर फ़िराने लगी। धीरे-धीरे उसका लंड हर्कत में आता जा रहा था। वो मेरे मुँह में फ़ूलने लगा। मैं और तेजी से उसके लंड पर अपना मुँह चलाने लगी।

कुछ ही देर में लंड फ़िर से पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया था। वापस उसे चूत में लेने की सोच कर ही झुरझुरी सी आ रही थी। चूत का तो बुरा हाल था। ऐसा लग रहा था मानो अंदर से छिल गई हो। मैं इसलिए उसके लंड पर और तेजी से मुँह ऊपर नीचे करने लगी जिससे उसका मुँह में ही निकल जाये। मगर वो तो पूरा साँड कि तरह स्टैमिना रखता था। मेरी बहुत कोशिशों के बाद उसके लंड से हल्का सा रस निकलने लगा। मैं थक गई मगर उसके लंड से वीर्य निकला ही नहीं। तभी दरबान ने आकर गावलेकर के आने की इत्तला दी।

‘उसे यहीं भेज दे।’ मैं उठने लगी तो उसने कंधे पर जोर लगा कर कहा- तू कहाँ उठ रही है… चल अपना काम करती रह।’ कहकर उसने वापस मेरे मुँह से अपना लंड सटा दिया।
मैंने भी मुँह खोल कर उसके लंड को वापस अपने मुँह में ले लिया।
तभी गावलेकर अंदर आया। वो कोई छ: फ़ीट का लंबा कद्दावर जिस्म वाला आदमी था। मेरे ऊपर नजर पड़ते ही उसका मुँह खुला का खुला रह गया। मैंने कातर नज़रों से उसकी तरफ़ देखा।
‘आह भोगी भाई क्या नजारा है! इस हूर को कैसे वश में किया।’ गावलेकर ने हंसते हुए कहा।

‘आ बैठ… बड़ी शानदार चीज है… मक्खन की तरह मुलायम और भट्टी की तरह गरम।’ भोगी भाई ने मेरे सिर को पकड़ कर उसकी तरफ़ घुमाया- ये है गौरी सिंह! अपने बृज की बीवी! इसने कहा मेरे पति को छोड़ दो… मैंने कहा रात भर के लिए मेरे लंड पर बैठक लगा, फ़िर देखेंगे। समझदार औरत है… मान गई। अब ये रात भर तेरे पहलू को गर्म करेगी… जितनी चाहे ठोको।’

गावलेकर आकर पास में बैठ गया। भोगी भाई ने मुझे उसकी ओर ढकेल दिया। गावलेकर ने मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और मुझे चूमने लगा। मुझे तो अब अपने ऊपर घिन्न सी आने लगी थी। मगर इनकी बात तो माननी ही थी वरना ये तो मुर्दे को भी नोच लेते थे। मेरे जिस्म को भोगी भाई ने साफ़ करने नहीं दिया था। इसलिए जगह-जगह वीर्य सूख कर सफ़ेद पपड़ी की तरह दिख रहा था। दोनों चूचियों पर लाल-लाल दाग देख कर गावलेकर ने कहा- तू तो लगता है काफी जमानत वसूल कर चुका है।’
‘हँ सोचा पहले देखूँ तो सही कि अपने स्टैंडर्ड की है या नहीं’ भोगी भाई ने कहा।
‘प्लीज़ साहब मुझे छोड़ दीजिये… सुबह तक मैं मर जाऊँगी।’ मैंने गावलेकर से मिन्नतें की।
‘घबरा मत… सुबह तक तो तुझे वैसे ही छोड़ देंगे। ज़िंदगी भर तुझे अपने पास थोड़े ही रखना है।’ गावलेकर ने मेरे निप्प्लों को दो अंगुलियों के बीच मसलते हुए कहा।

‘तूने अगर अब और बकवास की ना तो तेरा टेंटुआ दबा दूँगा।’ भोगी भाई ने गुर्राते हुए कहा- तेरी अकड़ पूरी तरह गई नहीं है शायद’ कहकर उसने मेरी दोनों चूचियों को पकड़ कर ऐसा उमेठा कि मेरी तो जान ही निकल गई।
‘ओओओऊऊऊईईईई माँआँआँ मर गईईई’ मैं पूरी ताकत से चीख उठी।

‘जा जाकर गावलेकर के लिये शराब का एक पैग बना ला और टेबल तक घुटनों के बल जायेगी समझी।’ भोगी भाई ने तेज आवाज में कहा। इतनी जलालत तो शायद किसी को नहीं मिली होगी। मैं हाथों और घुटनों के बल डायनिंग टेबल तक गई। मेरी चूचियाँ पके अनारों की तरह झूल रही थीं। मैं उसके लिये एक पैग बना कर लौट आई।
‘गुड अब कुछ पालतू होती लग रही है’ गावलेकर ने मेरे हाथ से ग्लास लेकर मुझे खींच कर वापस अपनी गोद में बिठा लिया। फिर मेरे होंठों से ग्लास को छुआते हुए बोला- ले एक सिप कर।’

मैंने अपना चेहरा मोड़ लिया, मैंने ज़िंदगी में कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया था। हमारे घरों में ये सब चलता था मगर मेरे बृज ने भी कभी शराब को नहीं छुआ था।
उसने वापस ग्लास मेरे होंठों से लगाया। मैंने साँस रोक कर थोड़ा सा अपने मुँह में लिया। बदबू इतनी थी कि उबकाई आने लगी। वे नाराज़ हो जायेंगे, ये सोच कर जैसे तैसे उसे पी लिया।
‘और नहीं… प्लीज़, मैं आप लोगों को कुछ भी करने से नहीं रोक रही। ये काम मुझसे नहीं होगा’
पता नहीं दोनों को क्या सूझा कि फ़िर उन्होंने मुझे पीने के लिये जोर नहीं दिया।

गावलेकर मेरे जिस्म पर हाथ फ़ेर रहा था और मेरी चूचियों को चूमते हुए अपना ग्लास खाली कर रहा था। मुझे फ़िर अपनी गोद से उतार कर जमीन पर बिठा दिया। मैंने उसके पैंट की ज़िप खोली और उसके लंड को निकाल कर उसे मुँह में ले लिया। अपने एक हाथ से भोगी भाई के लंड को सहला रही थी। बारी-बारी से दोनों लंड को मुँह में भर कर कुछ देर तक चूसती और दूसरे के लंड को मुट्ठी में भर कर आगे पीछे करती। फ़िर यही काम दूसरे के साथ करती।

काफ़ी देर तक दोनों शराब पीते रहे। फ़िर गावलेकर ने उठ कर मुझे एक झटके से गोद में उठा लिया और बेड रूम में ले गया। बेडरूम में आकर मुझे बिस्तर पर पटक दिया। भोगी भाई भी साथ-साथ आ गया था। वो तो पहले से ही नंगा था। गावलेकर भी अपने कपड़े उतारने लगा।

मैं बिस्तर पर लेटी उसको कपड़े उतारते देख रही थी। मैंने उनके अगले कदम के बारे में सोच कर अपने आप अपने पैर फ़ैला दिये। मेरी चूत बाहर दिखने लगी। गावलेकर का लंड भोगी भाई की तरह ही मोटा और काफी लंबा था। वो अपने कपड़े वहीं फ़ेंक कर बिस्तर पर चढ़ गया। मैंने उसके लंड को हाथ में लेकर अपनी चूत की ओर खींचा मगर वो आगे नहीं बढ़ा। उसने मुझे बांहों से पकड़ कर उल्टी कर दिया और मेरे चूतड़ों से चिपक गया। अपने हाथों से दोनों चूतड़ों को अलग करके छेद पर अँगुली फ़िराने लगा। मैं उसका इरादा समझ गई कि वो मेरे गाँड को फाड़ने का इरादा बनाये हुए था।

मैं डर से चिहुँक उठी क्योंकि इस गैर-कुदरती चुदाई से मैं अभी तक अन्जान थी। सुना था कि गाँड मरवाने में बहुत दर्द होता है और गावलेकर का इतना मोटा लंड कैसे जायेगा ये भी सोच रही थी।
भोगी भाई ने उसकी ओर क्रीम का एक डिब्बा बढ़ाया। उसने ढेर सारी क्रीम लेकर मेरे पिछले छेद पर लगा दी और फ़िर एक अँगुली से उसको छेद के अंदर तक लगा दिया। अँगुली के अंदर जाते ही मैं उछल पड़ी।

पता नहीं आज मेरी क्या हालत होने वाली थी। इन आदमखोरों से रहम की उम्मीद करना बेवकूफ़ी थी। भोगी भाई मेरे चेहरे के सामने आकर मेरा मुँह जोर से अपने लंड पर दाब दिया। मैं छटपटा रही थी तो उसने मुझे सख्ती से पकड़ रखा था। मुँह से गूँ- गूँ की आवाज ही निकल पा रही थी। गावलेकर ने मेरे नितम्बों को फ़ैला कर मेरी गाँड के छेद पर अपना लंड सटाया। फिर आगे कि ओर एक तेज धक्का लगाया। उसके लंड के आगे का हिस्सा मेरी गाँड में जगह बनाते हुए धंस गया। मेरी हालत खराब हो रही थी। आँखें बाहर की ओर उबल कर आ रही थी।

वो कुछ देर उसी पोज़िशन में रुका रहा। दर्द हल्का सा कम हुआ तो उसने दुगने जोश से एक और धक्का लगाया। मुझे लगा मानो कोई मोटा मूसल मेरे अंदर डाल दिया गया हो। वो इसी तरह कुछ देर तक रुका रहा। फिर उसने अपने लंड को हर्कत दे दी। मेरी जान निकली जा रही थी। वो दोनों आगे और पीछे से अपने-अपने डंडों से मेरी कुटाई किये जा रहे थे।
धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा। फिर तो दोनों तेज-तेज धक्के मारने लगे। दोनों में मानो होड़ हो रही थी कि कौन देर तक रुकता है। मगर मेरी हालत कि किसी को चिंता नहीं थी। भोगी भाई के स्टैमिना की तो मैं लोहा मानने लगी। करीब घंटे भर बाद दोनों ने अपने-अपने लंड से पिचकारी छोड़ दी। मेरे दोनों छेद टपकने लगे।

फिर तो रात भर ना तो खुद सोये और ना मुझे सोने दिया। सुबह तक तो मैं बेहोशी हालत में हो गई थी। सुबह दोनों मेरे जिस्म को जी भर कर नोचने के बाद चले गये। जाते-जाते भोगी भाई अपने नौकर से कह गया- इसे गर्म-गर्म दूध पिला। इसकी हालत थोड़ा ठीक हो तो घर पर छुड़वा देना और तू भी कुछ देर चाहे तो मुँह मार ले।’
मैं बिस्तर पर बिना किसी हलचल के पड़ी थी। टाँगें दोनों फ़ैली हुई थी और पैरों में अभी तक सैंडल पहने हुए थे। तीनों छेदों पर वीर्य के निशान थे। पूरे जिस्म पर अनगिनत दाँतों के और वीर्य के निशान पड़े हुए थे। चूचियाँ और निप्पल सुजे हुए थे। कुछ यही हालत मेरी चूत की भी हो रही थी। मैं फटी-फटी आँखों से दोनों को देख रही थी।

“तू घर जा… तेरे पति को दो एक घंटों में रिहा कर दूँगा” गावलेकर ने पैंट पहनते हुए कहा- भोगी भाई मजा आ गया। क्या पटाखा ढूँढा है। तबियत खुश हो गई। हम अपनी बातों से फ़िरने वाले नहीं हैं। तुझे कभी भी मेरी जरूरत पड़े तो जान हाजिर है।’
भोगी भाई मुस्कुरा दिया। फिर दोनों तैयार होकर निकल गये। मैं वैसी ही नंगी पड़ी रही बिस्तर पर।
तभी भीमा दूध का ग्लास लेकर आया और मुझे सहारा देकर उठाया। मैंने उसके हाथों से दूध का ग्लास ले लिया। उसने मुझे एक पेन-किलर भी दिया।
मैंने दूध का ग्लास खाली कर दिया। उसने खाली ग्लास हाथ से लेकर मेरे होंठों पर लगे दूध को अपनी जीभ से चाट कर साफ़ कर दिया।
वो कुछ देर तक मेरे होंठों को चूमता रहा और मेरे जिस्म पर आहिस्ता से हाथ फ़ेरता रहा। फिर वो उठा और डिटॉल ला कर मेरे जख्मों पर लगा दिया। अब मैं जिस्म में कुछ जान महसूस कर रही थी। फिर कुछ देर बाद आकर उसने मुझे सहारा देकर उठाया और मेरे जिस्म को बांहों में भर कर मुझे उसी हालत में बाथरूम में ले गया।
वहाँ काफी देर तक उसने मुझे गर्म पानी से नहलाया। जिस्म पोंछ कर मुझे बिस्तर पर ले गया और मुझे मेरे कपड़े लाकर दिए। वो जैसे ही जाने लगा, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। मेरी आँखों में उसके लिये एहसानमंदी के भाव थे। मैं उसके करीब आकर उसके जिस्म से लिपट गई।

मैं तब बहुत हल्का महसूस कर रही थी। मैं खुद ही उसका हाथ पकड़ कर बिस्तर पर ले गई। मैंने उससे लिपटते हुए ही उसकी पैंट की तरफ हाथ बढ़ाया। मैं उसके अहसान का बदला चुका देना चाहती थी। वो मेरे होंठों को, मेरी गर्दन को, मेरे गालों को चूमने लगा। फिर मेरी चूचियों पर हल्के से हाथ फ़िराने लगा।
‘प्लीज़ मुझे प्यार करो… इतना प्यार करो कि कल रात की घटनायें मेरे दिमाग से हमेशा के लिये उतर जायें।’ मैं बेहताशा रोने लगी।
वो मेरे एक-एक अंग को चूम रहा था। वो मेरे एक-एक अंग को सहलाता और प्यार करता। मैं उसके होंठ फ़ूलों की पंखुड़ियों की तरह पूरे जिस्म पर महसूस कर रही थी। अब मैं खुद ही गर्म होने लगी और मैं खुद ही उससे लिपटने और उसे चूमने लगी। उसका हाथ मैंने अपने हाथों में लेकर अपनी चूत पर रख दिया।

वो मेरी चूत को सहलाने लगा। फिर उसने मुझे बिस्तर के कोने पर बिठा कर मेरे सामने घुटनों के बल मुड़ गया। मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर चढ़ा कर मेरी चूत पर अपने होंठ चिपका दिए।

उसकी जीभ साँप की तरह सरसराती हुई उसकी मुँह से निकल कर मेरी चूत में घुस गई। मैंने उसके सिर को अपने हाथों में ले रखा था। उत्तेजना में मैं उसके बालों को सहला रही थी और उसके सिर को चूत पर दाब रही थी।
मेरे मुँह से सिस्करियाँ निकल रही थी। कुछ देर में मैं अपनी कमर उचकाने लगी और उसके मुँह पर ही ढेर हो गई। मेरे जिस्म से मेरा सारा विसाद मेरे रस के रूप में निकलने लगा। वो मेरे चूत-रस को अपने मुँह में खींचता जा रहा था। कल से इतनी बार मेरे साथ चुदाई हुई थी कि मैं गिनती ही भुल गई थी मगर आज भीमा की हरकतों से अब मेरा खुल कर मेरी चूत ने रस छोड़ा।
भीमा के साथ मैं पूरे दिल से चुदाई कर रही थी। इसलिए अच्छा भी लग रहा था। मैंने उसे बिस्तर पर पटका और उसके ऊपर सवार हो गई। उसके जिस्म से मैंने कपड़ों को नोच कर हटा दिया। उसका मोटा ताज़ा लंड तना हुआ खड़ा था। काफी तगड़ा जिस्म था। मैं उसके जिस्म को चूमने लगी।
उसने उठने की कोशिश की तो मैंने गुर्राते हुए कहा, “चुप चाप पड़ा रह। मेरे जिस्म को भोगना चाहता था ना तो फ़िर भाग क्यों रहा है? ले भोग मेरे जिस्म को।
मैंने उसे चित्त लिटा दिया और उसके लंड के ऊपर अपनी चूत रखी। अपने हाथों से उसके लंड को सेट किया और उसके लंड पर बैठ गई। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को चूमता हुआ अंदर चला गया। फिर तो मैं उसके लंड पर उठने-बैठने लगी। मैंने सिर पीछे की ओर झटक दिया और अपने हाथों को उसके सीने पर फ़िराने लगी। वो मेरे मम्मों को सहला रहा था और मेरे निप्पलों को अंगुलियों से इधर-उधर घुमा रहा था। निप्पल भी उत्तेजना में खड़े हो गये थे।

काफी देर तक इस पोज़िशन में चुदाई करने के बाद मुझे वापस नीचे लिटा कर मेरी टाँगों को अपने कंधे पर रख दिया। इससे चूत ऊपर की ओर हो गई। अब लंड चूत में जाता हुआ साफ़ दिख रहा था। हम दोनों उत्तेजित हो कर एक साथ झड़ गये। वो मेरे जिस्म पर ही लुढ़क गया और तेज तेज साँसें लेने लगा। मैंने उसके होंठों पर एक प्यार भरा चुंबन दिया। फिर नीचे उतर कर तैयार हो गई।

भीमा मुझे घर तक छोड़ आया। दोपहर तक मेरे पति रिहा होकर घर आ गये। भोगी भाई ने अपना बयान बदल लिया था। मैंने उन्हें उनकी जमानत की कीमत नहीं बताई मगर अगले दिन ही उस कंपनी को छोड़ कर वहाँ से वापस जाने का मैंने ऐलान कर दिया। बृज ने भले ही कुछ नहीं पूछा मगर शायद उसे भी उसकी रिहाई की कीमत की भनक पड़ गई थी। इसलिए उसने भी मुझे ना नहीं किया और हम कुछ ही दिनों में अपना थोड़ा बहुत सामान पैक करके वो शहर छोड़ कर वापस आगरा आ गये। Antarvasna

Antarvasna

आपकी कुसुम का Antarvasna चौड़ी टांगों, मदहोश जवानी से अंतर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से प्यार एंड नमस्कार ! अपने बारे में ज्यादा न बताती हुई क्यूंकि अपनी कहानी के पहले भाग में मैंने अपना पूरा ब्यौरा दे दिया था।

सो दोस्तो, पति के ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद किस तरह मेरा रिश्ता अपने ससुर जी से बन गया, यह आपने पढ़ लिया। अब तो मानो मैं उनकी दूसरी बीवी की तरह रहती ! हैरानी वाली बात थी कि ससुर जी में इस उम्र में एक जवान लड़के से ज्यादा जोर, दम था कि उन्होंने एक कमसिन, कामुक, आग जैसी जवान बहू को संभाल रखा था।

दोस्तो, जेठ जी को भनक पड़ गई और फिर उनकी मेरे ऊपर निगाहें टिक चुकी थी। ऊपर से जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा ! लेकिन मुझे तो ससुर जी ही नहीं छोड़ते थे लेकिन मेरा झुकाव अब जेठ जी की तरफ भी था, चाहती थी कि उनकी प्यास बुझाऊँ ! आखिर मौका मिल गया !

एक दिन ऐसा जरूरी काम पड़ा कि ससुर जी को सासू माँ के साथ बाहर जाना ही पड़ा और दोपहर को मैं घर में अकेली थी। लेकिन जेठ जी सुबह से घर नहीं थे, शायद उन्हें मालूम नहीं था कि मैं अकेली हूँ, वरना वो मौका कहाँ छोड़ते ! कोशिश ज़रूर करते !

मैंने उनके मोबाइल पर मिस-कॉल दे दी। उसके बाद वो फ़ोन पर फ़ोन करने लगे लेकिन मैंने नहीं उठाया। आधे घंटे के अंदर मेरा अंदाजा और तीर सही जगह लगा और वो घर आ पहुंचे। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी सर्फिंग कर रही थी, बारीक सफ़ेद नाइटी अंदर काली ब्रा-पेंटी पहन रखी थी।
कुसुम ! तुमने कॉल की थी?
मैं पलटी- नहीं तो ! वो गलती से पॉकेट में बटन दब गया होगा !
ठीक है ! कहाँ हैं सब? अकेली हो आज?
जी हाँ अकेली हूँ ! बैठो ! अभी चाय लेकर आती हूँ !
नहीं भाभी !

उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली, खींच कर मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे गुलाबी होंठों का रसपान करने लगे। मेरी और से ज़रा सा विरोध ना देख उनकी हिम्मत बढ़ चुकी थी।

बहुत सुन्दर हो भाभी जान ! बहुत आग है आप में ! बहुत तड़पाया है आपने अपनी जवानी से मुझे ! हर पल गोली मारती रहती हो !

मैं भी तो आपकी वासना आपकी आँखों में पढ़ती रही हूँ, लेकिन पहल नहीं कर पा रही थी !

ओह मेरी जान ! मुझे भी सब मालूम था ! मैं भी थोड़ा सा झिझक रहा था ! मुझे मालूम है तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे मिस-कॉल दी थी !

और यह कहते ही वो मुझ पर सवार होने लगे। मैंने एक पल में उनके बटन खोल उनकी कमीज़ अलग कर दी और उन्होंने मेरी नाईटी उतार फेंकी और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं अश अश कर रही थी। मैंने उनकी बेल्ट भी खोल दी, अपने हाथों से जींस का बकल खोल नीचे कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उनके लौड़े को मसलने लगी। उनकी आग बढ़ने लगी, लौड़ा तन कर डण्डा बन चुका था, कितना बड़ा हथियार था !

मेरी चूत में कुछ-कुछ होने लगा। सिहरन सी उठने लगी, जवानी बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा उतार मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी खूब चूसा। मैं नीचे बैठ गई, उनकी पूरी जींस शरीर से अलग कर उनके लौड़े को आराम से चूसने लगी।

कितना बड़ा है जेठ जी !
हां रानी ! इसको तेरे जैसी रांड पसंद है ! तेरी जेठानी तो ठंडी औरत है !

वो मेरे चूसने के अंदाज़ से बहुत खुश थे, मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर डाल लिया और मेरी टाँगें चौड़ी करवा ली। बीच में बैठ कर पहले प्यार से मेरी पूरी चूत पर हाथ फेरा, फिर मेरे दाने से थोड़ी छेड़छाड़ करने लगे। मैं बेकाबू हो रही थी, जल्दी ही उन्होंने लगाम लगा ली और अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में डालकर मुझे चोदने लगे।

अह अह और तेज़ करो जेठ जी ! जोर जोर से मारो ! अपनी जवान भाभी की जवान जवानी लूट लो !

यह ले यह यह साली कुतिया कब से तेरा आशिक हूँ ! तू है कि मेरे बाप से चुदवाती है !

क्या करूँ ! वो नहीं छोड़ते मुझे ! तेरे बाप में तेरे जितना दम ही है !

यह ले कमीनी ! अब से मुझे भी दिया करेगी?
हाँ दूंगी ! लो मेरी और मजे से लो !
चल घोड़ी बन ! तेरी फाड़ता हूँ गांड !

घोड़ी बना मेरी गांड मारने लगे !
हाय दुखती है !

तब फिर से चूत में डाल मेरी लेने लगे। पच्चीस मिनट की लम्बी चुदाई के बाद उनका घोड़ा छूट गया और हांफने लगा।

पूरी दोपहर जेठ से चुदवाया और फिर दोनों के साथ में अपनी जवानी लूटने लगी। अगले बार मुझे मासिक-धर्म नहीं हुआ। ससुर जी ने मुझे पेट से कर दिया।
सासू माँ बहुत खुश हैं !

उसके बाद मेरे अपने पड़ोसी के लड़के से संबंध बने !
वो अगली बार बताउंगी। Antarvasna

Antarvasna

सभी पाठकों और आँटियों Antarvasna को राजू के लण्ड का सलाम। अन्तर्वासना में यह मेरी पहली कहानी है। मैं बचपन से ही सेक्स के लिए उतावला रहा हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं बी. कॉम प्रथम वर्ष में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक दम्पत्ति रहने आया। उनकी शादी हुए चार-पाँच साल ही हुए थे। मेरा उनसे मेल-जोल होने लगा। मैं उनको भैया और भाभी कहता था। मेरा उनके घर आना-जाना शुरू हो गया

एक बार भैया ने रात को दस बजे मुझे फोन किया कि मैं उनके घर आउँ। मैं तुरन्त उनके घर गया तो भैया ने कहा उनको बस-स्टैण्ड जाना है, उनको रात को किसी ज़रूरी काम से दिल्ली जाना था। भैया ने कहा कि तुम्हारी भाभी को डर लगता है इसलिए हो सके तो तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना।

मैंने कहा – ठीक है।

मैं आधे घण्टे में उनको बस-स्टैण्ड पहुँचा कर वापस भाभी के पास आ गया। भैया की माँ भी उस दिन बाहर गई हुईं थीं।

भाभी को मैंने कहा कि वो अन्दर बेडरूम में सो जाये, मैं बाहर ड्राईंगरूम में सो जाता हूँ। भाभी ने कहा कि ठीक है। भाभी ने मुझे जान-बूझकर पतली सी चादर दी ताकि मुझे ठंड लग जाए। करीब आधे घण्टे में वो पानी पीने के लिए बाहर आई तो मैं ठण्ड से सिकुड़ रहा था। भाभी ने कहा कि ठण्ड लग रही है तो अन्दर सो जाओ। मैं तैयार हो गया। अन्दर केवल एक डबल बेड पलंग था। भाभी ने कहा कि यहीं सो जाओ। मैं थोड़ा सकुचाया। फिर मैं भी वहीं सो गया। करीब आधे घण्टे बाद मैंने पाया कि भाभी की एक टाँग मेरी टाँगों पर आकर लगी। टाँग पर से साड़ी ऊपर हो गई थी और भाभी की गोरी-गोरी मादक जाँघें मुझे मखमल की तरह लग रही थीं। मैंने भी धीरे से अपनी टाँग भाभी की टाँगों पर रख दीं। मेरे आठ इंच का मूसल खड़ा होने लगा। मैंने धीरे-धीरे टाँगों को रगड़ना शुरू किया तो भाभी ने भी जवाब दिया। मुझे हरी झंडी मिल गई।

फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के पास आता गया और मैंने भाभी की चूचियों पर अपना हाथ रख दिया तो भाभी सोने का नाटक करने लगी। अब मैंने भाभी की मादक, रसीली और भरी-भरी चूचियों को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया। अचानक भाभी जाग गईं और कहने लगीं कि ये तुम क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि मुझे नींद में पता नहीं चला, सॉरी। मैं उठकर बाहर सोने के लिए जाने लगा तो भाभी ने कहा नहीं यहीं सोना है।

भाभी ने मुझे एक भद्दी सी गाली मादरचोद कहा और कहा कि लण्ड खड़ा करने की हिम्मत है पर डालने की नहीं। मैंने भाभी से कहा कि लण्ड तो आपने ही खड़ा किया था। भाभी हँसने लगीं। भाभी उठीं और रसोई से जाकर गरमा-गरम दूध लेकर आईं, फिर हमने दूध पिया। फिर कहा कि सर्दी बहुत है, मैंने कहा कि अभी सर्दी भगा देता हूँ।

भाभी बोली- तो देर क्यो कर रहे हो।

मैंने भाभी को पलंग पर ही पटक दिया और उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और उनकी पैण्टी में हाथ डाल दिया। अचानक मुझे लगा कि जैसे कि मैंने कोई भट्ठी में हाथ डाल दिया है। मैंने भाभी की फूली हुई ब्रेड की माफ़िक रसीली चूत को मसलना शुरू किया। भाभी आआआआआ… आआआआ… श्श्श्श्शस्स्स्स्ससी श्सस्स्स्सी… करने लगी। फिर मैंने भाभी की ब्लाउज़ खोल दी और उसकी चूचियों को दबाना शुरू किया। मैंने भाभी के पूरे बदन को अपनी जीभ और होठों से चूमा। फिर मैंने बाभी की चूत पर अपनी जीभ फेरनी शुरू की। भाभी का पूरा शरीर अकड़ने लगा और अचानक ही उनकी चूत से कुछ रस बहने लगा।

मैंने भाभी से पूछा- ये क्या है?

भाभी ने कहा- मादरचोद, गाण्डू, चाट इसको।

मैंने रस को चाटा तो काफी गरम और टेस्टी था। भाभी ने अब मेरे मूसल को हाथ में लेकर मुट्ठ मारनी शुरू कर दी, थोड़ी देर में मुझे लगा कि अब मेरा रस निकलने वाला है तो मैंने भाभी को कहा कि मेरा निकलने वाला है तो भाभी ने उसको अपने मुँह में लिया और सारा रस पी गई।

१५ मिनट के बाद लण्ड फिर से खड़ा होने लगा क्योंकि भाभी अपनी चूत के बाल साफ कर रही थीं, और मैं उनको देख रहा था, मैंने भाभी से पूछा – कि भाभी आप तैयार हो? तो भाभी ने कहा- मेरे चोदू, आ जा ! चोद दे !

मैं सीधे ही भाभी के ऊपर चढ़ गया और अपना ८ इंच का मूसल उसकी चूत में डाल दिया, मूसल जाते ही भाभी दर्द के मारे छटपटाने लगी और बोली, भड़वे, लण्ड है कि मूसल है। भाभी की चूत काफी टाईट थी, मुझे अन्दर-बाहर करने में मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी से इसका राज पूछा तो वह बोली कि जब तक किसी चीज़ को काम में नहीं लाओ तो वह नई-नई ही रहती है। मैं सारा माज़रा समझ गया।

मैंने भाभी की चूत को और तेज़ी से चोदने लगा, फिर १५ मिनट बाद में, मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और भाभी की चूत में पीछे से लण्ड डाल दिया और चोदने लगा, बाभी का माँसल बदन और मेरे शरीर की टकराहट से कमरे में फच्च फच्च फच्च… की आवाज़ें आने लगीं।

भाभी लगातार शस्स्स्स्सी…. श्स्स्स्सी…. उई… उई… अह्ह्ह्हहा…. अह्ह्ह्हाहा की आवाज़ें निकाल रही थी। भाभी अब ज़ोर ज़ोर से धक्के लेने लगी, मैंने भी गति बढ़ा दी। भाभी बोली- साले, बहनचोद, और ज़ोर से चोद, मेरी चूत फाड़ डाल !

मैंने भाभी को कहा, हरामज़ादी, साली, कुत्ती, तेरी चूत का तो मैं औज फौलाद बना ही डालूँगा। यह कहते-कहते भाभी का रस निकल गया और थोड़ी देर बाद में मेरा भी। हमने एक दूसरे को साफ किया और सो गये। सुबह ६ बजे में मैंने भाभी को एक बार फिर से चोदा। चुदाई के बाद भाभी ने चाय बनाई, मैंने चाय पीकर भाभी को किस किया और पूछा- “रात को सर्दी तो नहीं लगी?” तो भाभी मुस्कुराने लगी।

उसके बाद से मैं भाभी को लगातार चोद रहा हूँ…. Antarvasna

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