Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Cuttack Book Professional Massage Services Online

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Bahut achha
Hindi Porn Stories

हेल्लो मेरा नाम कुणाल है और उम्र 24 Hindi Porn Stories साल है। मैं करनाल (हरियाणा) मैं रहता हूँ। मैं हमेशा अन्तर्वासना पर कथाएँ पढ़ता हूँ और मज़े करता हूँ।
आज मैं आपको मेरी सच्ची कहानी सुनाता हूँ।

वैसे मैं देखने में कोई खास नहीं हूँ, कद भी कम है पर मैं बातों से हमेशा ही सबको अपना बना लेता हूँ।

यह बात तबकी है जब मैं कंप्यूटर सीखता था, वहां पर एक लड़की आती थी 25-26 साल की, उसका नाम सोनू था, उसकी शादी हो चुकी थी। उसका फिगर कमाल का था, बड़े बड़े बूब्स और उसकी गांड तो बहुत ही सेक्सी लगती थी, थी भी वो काफी अमीर घर से, धीरे धीरे मैंने उस से बातें करना शुरू कर दिया।

उसने मुझे बताया कि वो यहाँ सिर्फ़ अपना समय काटने आती है, घर में उसका मन नहीं लगता। उसके पति हमेशा काम में व्यस्त रहते थे जयादातर वो शहर से बाहर ही रहते थे।

एक दिन उसने कहा कि चलो कहीं काफ़ी पीते हैं तो मैंने कहा कि आज तो मैं आपके हाथ की काफ़ी पीना चाहता हूँ।

तो उसने कहा ठीक है फ़िर मेरे घर ही चलते हैं मेरे पति भी बाहर गए हैं। फ़िर हम दोनों उसकी कार में उस के घर चले गए, उनके नौकर ने दरवाजा खोला, हम दोनों अन्दर चले गए तो उसने अपने नौकर को जाने के लिए कह दिया फ़िर अपने नौकर के जाते ही उसने अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया।

उसके बाद वो कहने लगी कि तुमने काफ़ी पीनी थी, मैं बना के लाती हूँ। फ़िर थोड़ी ही देर में वो 2 काफ़ी बना के ले आई। हम दोनों काफ़ी पीने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे।

मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया कि आपके पति आपको भी समय देते हैं या फ़िर सिर्फ़ बिज़नस को ही?

तो वो उदास हो गई और कहने लगी कि उनके पास समय होता ही नहीं उसके लिए ! वो तो सिर्फ़ और सिर्फ़ बिज़नस को ही समय देते हैं !

फ़िर अचानक मेरे मुंह से निकल गया कि फ़िर तो आप दोनों…! इतना कहते ही मैं रुक गया।
तो वो कहने लगी- आप दोनों क्या? बोलो !
मैंने कहा कुछ नहीं !
वो बोली कि तुम यही कहना चाहते हो ना कि हम सेक्स करते हैं या नहीं !

मैंने कहा हाँ मैं यही पूछना चाहता था।

तो वो कहने लगी कि महीने में 1 या 2 बार सिर्फ़ ! कहने लगी पर मेरी इतनी इच्छा होती है कि बस पूछो मत !

यह कह कर वो चुप हो गई।
फ़िर वो बोली कि तुम्हे एक बात कहूँ तो तुम बुरा तो नहीं मानोगे?
ना ! मैंने कहा- नहीं बोलो !

वो कहने लगी कि अगर तुम मेरी इच्छा को पूरा कर दो मैं तुम्हें तुम जितना चाहोगे उतना पैसा दूंगी।

मैंने कहा कि यह तुम क्या कह रही हो? तो वो मेरे साथ आ कर बैठ गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, कहने लगी- प्लीज़ कुणाल मैं प्यार चाहती हूँ प्लीज़ ! उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने बेडरूम में ले गई वहां जाते ही हम दोनों ने किस करनी शुरू कर दी। फ़िर मैंने उसका कमीज़ निकाल दिया।

उसके बूब्स चाँदी की तरह चमक रहे थे, उसने श्वेत ब्रा डाली हुई थी, फ़िर मैंने वो भी निकाल दी और उसे बेड पर लेटा दिया और उसके एक एक अंग को चूमने लगा- उसकी आंखों को, होठों पर, उसके कानों पर, गले पर।

सोनू के मुंह से सिसकी निकल रही थी सी इ इ ई इ ई ईई अह ह हह हह !

उसके बाद मैंने उसकी सलवार उतार दी और उसकी टांगों पर हाथ फेरने लगा। फ़िर मैंने उसकी टांगों पर ऊपर से नीचे तक किस किया और उसकी पैंटी पर हाथ फेरने लगा। सोनू के मुंह से आवाजें आ रही थी अह ह ह ! उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को किस करने लगा। वो एक दम मछली कि तरह छटपटा रही थी।

फ़िर मैंने भी अपनी पैंट उतार दी और मैंने उसको अपने ऊपर 69 पोसिशन में ले लिया फ़िर वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

फ़िर उसने कहा कि कुणाल अब रहा नहीं जाता ! प्लीज़ डाल दो !

तो मैंने उसको सीधा लेटाया और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर धक्का मारा, उसकी चूत काफी टाइट थी। उसको दर्द भी हो रहा था पर फ़िर मैंने एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड पूरा उसकी चूत में चला गया।

उसके बाद वो भी चूतड उछाल उछाल के मेरा साथ दे रही थी। 5 मिनट के बाद वो झड़ गई फ़िर मैंने भी अपनी गति तेज कर दी और 10-15 झटके मारने के बाद मैं भी झड़ गया।

उसके बाद हम बहुत देर तक एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे।

उसके बाद मैंने उसकी गांड भी कोल्ड क्रीम लगा के मारी।

शाम के 7 बज चुके थे मैंने उसको कहा कि मै चलता हूँ, तो उसने मुझे 2000 रूपये दिए और कहा कि अगर तुम मेरी सहेलियों की भी इच्छा पूरी कर दो तो तुम्हें और भी पैसे मिल सकते हैं, बस अंधे को क्या चाहिए 2 आँखें ! बस तब से मैं ऐसे ही इच्छा पूरी करने में लगा हूँ। Hindi Porn Stories

दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज.
मेरी सेक्स कहानी के इस भाग में आपका पुन: स्वागत है.
हालांकि इस सेक्स कहानी का शीर्षक अलग है पर यह उसी से जुड़ी हुई कहानी है.

पिछली कहानी
बचपन के प्यार से शादी और सेक्स
में आपने पढ़ा था कि मैंने अपनी बचपन की संगिनी सौम्या से शादी कर ली थी और उसके साथ सुहागरात की चुदाई का मस्त मजा लिया था.

अब आगे वाइफ सिस्टर Xxx कहानी:

शादी के 3 दिन बाद उसकी बहन मानसी चली गई.
फिर हम दोनों भी एक महीने के बाद पुणे आ गए.

मुझे दिल्ली से एक अच्छी जॉब का अवसर मिला तो मैं दिल्ली आ गया.
सौम्या पुणे में ही थी.

मैं दिल्ली आया तो सौम्या ने कहा- आप मानसी के घर में रुक जाना. उसका दिल्ली में अपना फ्लैट है.
यह मानसी मेरी पत्नी सौम्या की चचेरी बहन थी जिसने सुहागरात की चुदाई की चीख सुनी थी.

ये दोनों बचपन से पक्की सहेली रही थीं.
मानसी के मम्मी पापा बचपन में चल बसे थे तो सौम्या के पापा ने उसे अपने बेटी ही माना था और ये दोनों भी एक दूसरे को जान से ज्यादा चाहती थीं.

मानसी भी कमाल की दिखती है, वह बिलकुल दिव्या खोसला कुमार जैसी लगती है.

मैं उसके फ्लैट पर पहुंच गया, घंटी बजाई तो दरवाजा खुला.

वह शायद मानसी की घरेलू नौकरानी थी.
उसने कहा- आप राज जी हो ना!
मैंने कहा- हां.

तो उसने कहा- मुझे मैडम ने बता दिया था. आप बैठिए. मैडम 9 बजे तक आएंगी.
उसने मुझे पानी, कोल्ड ड्रिंक थोड़ा नाश्ता सर्व किया और चली गयी.

मैं फ्रेश होकर टीवी देखने लगा.
थकान के कारण मेरी आंख लग गई.

मेरी नींद तब खुली जब एक मीठी आवाज कानों में पड़ी- उठिए जीजा जी!

मैं उठा और आंख खोली तो सामने मानसी किसी अप्सरा के जैसी खड़ी थी.

सामने से पहली बार उसे गाउन में देखा था. वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी.

उसने एक घुटने तक आने वाला काले रंग का रेशमी गाउन पहना हुआ था जिसका गला काफी खुला हुआ था और उसकी चूचियों के उभार एक पतली सी ब्रा में कैद थे.

पतली सी ब्रा इसलिए लिखा क्योंकि मानसी के मम्मों के कड़क निप्पल उसके रेशमी गाउन के बाहर से ही नुमाया हो रहे थे.

शायद वह खुद ही अपने दूध दिखाने को उतावली लग रही थी इसलिए मेरे उठ जाने के बाद भी वह मेरे सामने झुकी हुई थी ताकि मैं उसके मम्मों का दीदार कर लूं.

मैं उसके मम्मों को ललचाई नजरों से देखते हुए उठा और फ्रेश हुआ.
फिर हॉल में बैठ गया.

वह प्लेट में मेरी फेवरेट पनीर चिली, वेज पुलाव और सलाद लेकर आई.
उसके हाथ में एक व्हिस्की की बोतल थी.

मैंने मादक भाव से उसे देखते हुए कहा- क्या बात है! शवाब के हाथ में शराब!
उसने हंस कर आंख दबाते हुए कहा- जब शवाब और शराब सामने है, तो आओ अब जश्न मनाते हैं.

मैं भी झट से मान गया.

मानसी ने दारू की बोतल खोली और दोनों का पहला पैग बनाया.
हम दोनों ने चियर्स किया और पहला पैग पी गए.

ऐसे ही हम दोनों ने धीरे धीरे 4-4 पैग पी लिए और अब मानसी को नशा चढ़ रहा था.

जब वह पांचवां पैग पी रही थी तो उसका ग्लास गिर गया और दारू उसके टॉप पर गिर गई.

वह तो इतने नशे में थी कि उसको कुछ पता ही नहीं चल रहा था.
लड़खड़ाती हुई आवाज में वह मुझसे बोली- प्लीज मुझे साफ कर दो.

मैंने उसकी तरफ देखा.
मैं भी नशे में आ चुका था.

गाउन में से उसकी छाती पर तनी हुई मोटी मोटी चूचियों की नोकें साफ नजर आ रही थीं.

उसकी फिगर 36-30-38 की थी.
पूरी कयामत लग रही थी.

जैसा कि मैंने आपको बताया कि वह दिव्या खोसला कुमार की तरह दिखती है.
मैं तो उसको देखता ही रह गया और जब वह उठ कर बाथरूम की तरफ अन्दर जाने लगी तो उसकी फूली हुई गांड को देख कर मेरा फौलादी लंड खड़ा हो गया.

मैंने उससे कहा- मैं नहीं कर सकता … क्योंकि उसके लिए मुझे तुम्हारा गाउन भी खोलना पड़ेगा.

वह बोली- प्लीज यार, तुम कुछ भी मत सोचो और तुम जैसे चाहो इसे बस साफ कर दो.
मैंने उसका गाउन उतारा और उसके गाउन को खोलते ही मुझे उसकी लाल रंग की ब्रा के अन्दर उसके बहुत बड़े बड़े मुलायम स्तन नजर आए.

उन्हें देखकर मेरा मन उन्हें पकड़ कर चूसने का हो रहा था.

वह हंसी और बोली- कैसे हैं?
मैंने कहा- बहुत मस्त हैं.

अब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था.

मैंने तौलिये से उसके गोरे गोरे जिस्म को बहुत हल्के हाथों से साफ कर दिया.
मैं उसके मम्मों को देखता रहा.

तभी वह बोली- क्या अब घूरते ही रहोगे या कुछ करोगे भी? प्लीज मेरी ब्रा भी उतार दो न!

उसी समय मुझे सौम्या का भोला चेहरा याद आ गया.
मैंने उससे कहा- ये गलत है. मैं सौम्या को प्यार करता हूँ.

उसने कहा- जीजा जी, सौम्या को सब पता है. आपको प्यार करने वाली वह अकेली नहीं है. वह नाराज़ नहीं होगी.
मैं भी नशे में था, वासना मुझ पर हावी हो रही थी.

मैंने कहा- तुम मुझसे पाप करवा रही हो.
वह हंसी और बोली- मुझे चोदने से तुम पापी नहीं बनोगे, यह बात पक्की है.

जब उसने चुदाई की बात साफ साफ शब्दों में कही तो मेरा लंड भड़क गया.
मैंने धीरे धीरे एक एक करके उसके सभी कपड़े उतार दिए.

जब मैंने उसकी पैंटी को छुआ तो वह चूत रस में एकदम गीली थी.
मैं समझ गया कि इसको भी मेरे छूने से जोश आ रहा है.

लेकिन उसके पूरे कपड़े उतारते ही मेरा तो जैसे दारू का नशा ही उतर गया था.
मैंने धीरे से अपने भी सारे कपड़े उतार दिए.

फिर मैं अपने लंड को शराब से नहला कर उसके मुँह के पास ले गया और उससे बोला- लो लॉलीपॉप चूस लो.

वह भी नशे की हालत में मेरे एक बार कहने से ही मान गई और मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं बोतल से बूंद बूंद करके शराब अपने लंड पर टपकाता गया और वह मेरे लौड़े को चूसती हुई शराब को भी पीती गई.

नीचे से मैं उसकी गीली एकदम व गर्म चूत में उंगली कर रहा था.
धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो उसको बहुत दर्द होने लगा और वह ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी.

मैं समझ गया कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी है और आज में पहली बार उसकी चूत का भेदन करूँगा.

उसके लंड चूसने से जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य एक ग्लास में निकाल दिया.
फिर उसी ग्लास में एक और पैग बनाकर मानसी को पिला दिया.

वह बड़े मज़े लेकर पी गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा.

थोड़ी ही देर में पूरी गर्म हो गई और उसकी चूत से पानी भी निकल रहा था.
उसको जरा सा भी होश नहीं था कि उसके साथ क्या क्या हो रहा है.

मैंने थोड़ी देर बाद उसे एक पैग बनाकर और पिला दिया और उसे अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले आया, उसे बेड पर लेटा दिया.

उसकी कमर के नीचे मैंने एक तकिया रख दिया.
इससे उसकी चूत का मुँह थोड़ा खुल गया और मुझे उसकी चूत का दाना साफ साफ दिखने लगा.

फिर मैंने अपना लंड उसकी गर्म चूत पर रखा और अन्दर डालने लगा.
लेकिन मेरा लंड उसकी टाईट चूत के अन्दर नहीं जा रहा था.

मैंने उसकी कमर को अच्छी तरह कसकर पकड़ा और लंड को चूत के मुँह पर रखकर एक ज़ोर का धक्का दे मारा.

मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिसलता हुआ अन्दर चला गया और मानसी के मुँह से एकदम ज़ोर से चिल्लाने की आवाज बाहर आ गई.
उसका भी दारू का सारा नशा उतर गया.

जब मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था.
मानसी की आंखों से आंसू निकल रहे थे, सांसें ज़ोर ज़ोर से चल रही थीं.

वह पूरी पसीने से गीली हो चुकी थी और अब उसके मुँह से गाली भी निकलने लगी थी.

मानसी बोली- मादरचोद धीरे पेल साले … लुगाई हूँ तेरी … कोई रंडी नहीं हूँ.

उसकी गाली से मुझे और जोश आ गया और मैंने उसकी एक चूची को जोर से भींच दिया.
‘साली है तू मेरी. अभी बीवी नहीं हुई है.’

मानसी- आज से मैं भी आपकी हुई. अब हम दोनों आपकी पत्नी हैं और आप भी हम दोनों को एक जैसे ही चाहेंगे.
मैंने भगवान से कहा- एक छोड़ कर गई तो आपने दो दो प्यार करने वाली दे दीं.

मन में यह बोलते हुए मैं धीरे धीरे लंड को धक्के देकर उसे चोदने लगा.

वह कुछ बोलना चाह रही थी लेकिन अपनी चुदाई के दर्द के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी.

मानसी बोल रही थी- अह्ह्ह उह्ह्हह्ह बाहर मत निकालो इसे प्लीज … अह्ह्ह अब से मैं आपकी ही हूँ मेरे पतिदेव प्लीज मिसेज राज समझ कर ही मुझे चोदिए … अह्ह्ह्ह.
वह मादक सिसकारियां ले रही थी और मैं लगातार ताबड़तोड़ धक्के दिए जा रहा था.

मेरे लंड के चूत के अन्दर बाहर होने से पूरे कमरे में फच फच की आवाजें आ रही थीं.
कुछ मिनट के धक्कों के बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी.

मैं- क्यों मिसेज राज, अब तो आपको मेरे लंड से चुदाई करने में मज़ा आ रहा है ना?
मानसी- हां पतिदेव अह्ह उह्ह और चोदो मुझे और चोदो … पूरी फाड़ दो आज मेरी चूत को … अह्ह हां और ज़ोर से … भोसड़ा बना दो मेरी चूत का.

मैं तो जैसे उसकी कामुक आवाजों को सुनकर पागल सा हुआ जा रहा था.
मैंने हचक कर चुदाई चालू कर दी.

‘आईईइ अह्ह्ह हां और तेज चोदो मुझे जानेमन चोदो … और तेज़ चोदो … मुझे आज चोदकर एक औरत बना दो.’

मैंने पास में रखी दारू की बोतल से एक लंबा घूंट नीट दारू का लिया और अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी.

इसी बीच वह झड़ चुकी थी.

दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने पूछा- वीर्य कहां पर निकालूँ?
मानसी- मेरी प्यासी चूत में ही डाल दो और आज इसकी आग बुझा दो.

मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया और थककर बेड पर लेट गया.
हमने उस रात को खूब दारू पी और एक बार चुदाई की.
फिर थककर ऐसे ही नंगे सो गए.

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर मैंने एक बार और उसकी चूत में लंड डाला और उसे चोदा.

अब वह बड़े आराम से पड़ी रही और मेरे लंड का मज़ा लेती रही क्योंकि रात भर चुदाई से उसकी चूत फट चुकी थी जिसकी वजह से मेरा लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था.

उस दिन हम दोनों कहीं भी नहीं गए और पूरे दिन नंगे ही पड़े रहे.

दोस्तो, अब मानसी और सौम्या हम तीनों पति पत्नी की तरह रहते हैं.

मेरा नाम वसुंधरा है और मैं लखनऊ से हूं।
मेरी उम्र 35 साल है और फिगर 36 30 38 है।
कद 5 फुट 3 इंच और जिस्म गोरा है।

पेशे से मैं एक टीचर हूं और साथ ही साथ एक 10 वर्ष के बच्चे की मां भी!
मेरे पति एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं और समय समय पर उनका तबादला होता रहता है।

मेरी पिछली कहानी
कुंवारी गांड फाड़ दी जीजू ने
और उससे पहले की दो कहानियों में आपने जाना कि कैसे मैं अपने छोटी बहन के पति आनन्द के साथ सेक्स कर बैठी.
यह पहली बार था जब मेरे पति के अलावा किसी गैर मर्द ने मेरा जिस्म भोगा हो।

अब मैं पहले से ज्यादा उत्तेजक हो गई थी और मेरा अंदाज भी बदल गया था. अब मुझमें शर्म ओ हया जरा कम हो गई थी और अब पुरुषों की अश्लील नजरें मुझे डराने की जगह उत्तेजित करती थी।
मेरी नजरें अब पराए मर्दों की तरफ जाना शुरू हो गई थी।
महीने में एक दो बार आनन्द मेरी प्यास बुझाते थे लेकिन अब मेरा मन किसी और मर्द के नीचे आने को लालायित हो रहा था।

मेरे पति विकास मेरी अदाओं से खुश रहते थे और मैं उनके साथ ज्यादा खुलकर संभोग करती थी।
लेकिन उनको कंपनी की वजह से अक्सर बाहर ही रहना पड़ता था और कभी कभी विदेश भी जाना पड़ता था इसलिए मुझे अपनी प्यास बुझाने के लिए कुछ अलग तौर तरीके खोजने पड़े।

हमारे स्कूल में शिवम् नाम का एक लड़का था जो कि मेरी ही क्लास में था।
पढ़ाई में उसका दिल नहीं लगता था और एग्जाम में हमेशा उसके कम मार्क्स ही आते थे।

क्लास टीचर होने के नाते उनके अभिभावकों से मिलने की जिम्मेदारी मेरी थी।

हर बार की तरह शिवम् इस बार भी फेल हो गया।
इसलिए मुझे ही उसके अभिभावकों से मीटिंग करनी थी।

मीटिंग के दिन लगभग सभी बच्चों के मां बाप आते थे।
शिवम् भी अपने पिता के साथ आया हुआ था।

उसके पिता का नाम आशुतोष था।
मैंने उनको देखा तो मुझे उनकी शक्ल जानी पहचानी लगी लेकिन मैंने उन्हें कहां देखा था, यह मुझे याद नहीं आ रहा था।
आशुतोष के 2 बच्चे और थे जो उसके साथ ही आए थे।

मैंने आशुतोष को सामने कुर्सी पर बिठाया और फिर शिवम् की शिकायत की।
मैंने कहा- आशुतोष जी, आपका बेटा बहुत लापरवाही करता है, पढ़ाई में हर बार कम नंबर लाने की वजह से उसका भविष्य संकट में पड़ सकता है।

आशुतोष ने कहा- माफी चाहता हूं मास्टरनी जी, मेरे पास इतना समय नहीं होता है कि मैं इनकी पढ़ाई करवा सकूं और मेरे पास इतनी आय भी नहीं है कि मैं इनकी कोचिंग का इंतजाम कर सकूं।

मैंने कहा- अगर आपके पास समय नहीं है तो अपनी बीवी से कहिए कि वो कुछ ध्यान दे. ऐसे तो काम नहीं चलेगा।

आशुतोष ने कहा- उसी का तो रोना है मास्टरनी जी, मेरी बीवी अब इस दुनिया में नहीं है।
यह कहकर वो जरा उदास हो गए।

मैंने उनसे संवेदना जताई, मैंने कहा- आप हिम्मत रखिए, ऊपर वाला जरूर आपको कोई रास्ता दिखाएगा। वैसे आप करते क्या हैं?
आशुतोष ने कहा- मैडम, मैं कपड़े की दुकान में काम करता हूं। सुबह बच्चों को स्कूल में छोड़ता हूं और छुट्टी के वक्त उनको लेकर घर जाता हूं।

मुझे यह सुनकर जरा बुरा लगा।
अभी उसकी उम्र भी 40 के आसपास थी और इस तरह से उसकी तकलीफ देखकर मुझे बुरा लगा।

मैंने कहा- ठीक है आशुतोष जी, आप जरा ध्यान रखिए बच्चों का! और अगर कोई जरूरत हो तो मुझे जरूर बताइएगा।
मैंने अपना नंबर उसे दिया और वो मुझे नमस्ते कर के चला गया।

अब मैं छुट्टी के बाद अक्सर उनको आते जाते देखती जहां वो अपने बच्चों को लेने आता था।

मैं उसे देखती तो वो दूर से ही नमस्ते कर देता।
इस तरह हमारा परिचय बढ़ा।

कुछ दिन बाद रविवार को मैं कुछ खरीददारी करने मार्केट में निकली तो सोचा कि कुछ अंडर गारमेंट्स खरीद लूं।

मैं एक होजरी शॉप में पहुंचीं तो वहां आशुतोष जी मिल गये।
उन्होंने यह तो बताया था कि वो कपड़े की दुकान में काम करते हैं लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो इसी दुकान में काम करते हैं.
शायद इसलिए मुझे उनका चेहरा जाना पहचाना लग रहा था।

मैंने उनसे पूछा- आशुतोष भाई, ये दुकान आपकी है क्या?
आशुतोष ने कहा- अरे नहीं मैडम, हम यहां नौकर हैं, आज मालिक किसी काम से बाहर गए हैं इसलिए मैं अकेला हूं। बताइए क्या खिदमत करूं?

मैंने कहा- कुछ अच्छे ब्रा पैंटी के सेट दिखा दीजिए।
आशुतोष मुस्कुराए और बोले- मैडम, वैसे आपका साइज क्या है?

मैं उनकी मुस्कुराहट की वजह समझ रही थी।
मैंने कहा- जी ब्रा का 34 C और पैंटी 38″

आशुतोष ने मेरे सामने एक से एक बढ़िया डिजाइन की ब्रा पैंटी ला दी.
मैंने उनमें से अपनी पसंद को चुना और फिर आशुतोष ने मुझे डिस्काउंट भी दिया।

आशुतोष ने कहा- मैडम, मालिक डिस्काउंट के लिए मना करता है इसलिए उसे मत बताना कि मैंने आपको डिस्काउंट ऑफर दिया है।अगर आप होम डिलीवरी लेना चाहो तो मैं जुगाड़ कर सकता हूं, आपको सस्ती भी पड़ जाएगी और मेरी नौकरी भी बची रहेगी।

मैंने उसे अपना पता दिया और फोन नंबर भी!
उसके बाद मैं उसकी दुकान से निकल गई।

अब नंबर मिलने के बाद हमारे बीच बातें भी होने लगी और हमारी अच्छी दोस्ती हो गई।
फिर हम दोनों जरा खुलकर बातें करने लगे।

एक रात आशुतोष ने मुझसे कहा- मैडम जी, आप वो लाल नेट वाली ब्रा पैंटी पहना करिए, आपके पति तो देख कर ही मदहोश हो जायेंगे।
मैंने कहा- पहन कर दिखाऊंगी किसे, मेरे पति तो बाहर टूर पर हैं।

आशुतोष ने पूछा- आप अकेली रहती हैं, आपको डर नहीं लगता?
मैंने कहा- नहीं, बेटा रहता है यहां साथ में तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।

आखिर में आशुतोष ने कहा- मैडम जी, कभी कोई जरूरत हो और आपके पति शहर में न हों तो बताइएगा, ये आशुतोष हर तरह से आपके काम आयेगा।

मैं उसका इशारा समझ रही थी लेकिन मैंने अनजान बने रहने में ही अपनी भलाई समझी।

खैर इसी तरह हमारी बातचीत चलती रही और मैंने एक दो बार आशुतोष को अपने घर भी बुलाया.
वो मेरे लिए बड़ी ही चुनिंदा ब्रा पैंटी लाकर देता था और अब हम अच्छे दोस्त बन चुके थे।

इसी बीच करवा का त्यौहार आ गया।
मेरे पति इस दौरान टूर पर थे और कुछ दिन बाहर ही रहने वाले थे।
इस तरह मुझे करवा अकेले मनाना था।

त्यौहार के एक दिन पहले अचानक रात को मेरी डोरबेल बजी, देखा तो सामने आशुतोष भाई थे।

मैंने पूछा- आशुतोष भाई आप? वो भी इस वक्त? सब खैरियत तो है?

आशुतोष ने कहा- जी मैडम, सब खैरियत है. मैं आपके लिए कुछ लाया था, सोचा कि आपको पसन्द आयेगा, आप देख लीजिए और कॉल करके बताइएगा कि कैसा है।
यह कहकर वे चले गए।

मैंने उनका तोहफा खोला तो उसमें एक डार्क रेड रंग की ब्रा पैंटी का सेट था जिसमें गोल्डन चेन लगी हुई थी और उस पर फूल काढ़े गए थे।
ये पारदर्शी थी और हुस्न को बेहद खूबसूरत तरीके से सामने लाने वाली थी।

देखने में काफ़ी महंगी जान पड़ती थी और ऐसी ब्रा पैंटी लड़कियां अक्सर हनीमून के दौरान पहनती हैं।

मुझे उनका तोहफा पसन्द आया और मैंने उन्हें शुक्रिया का मैसेज कर दिया।

10 मिनट बाद उन्होंने कुछ तस्वीरें भेजी जिनमें एक मॉडल उसी सेट को पहनकर पोज दे रही थी।

आशुतोष भाई ने लिखा- आप इसे पहनकर बेहद खूबसूरत दिखेंगी और आपकी करवाचौथ की रात खुशनुमा रंग में रंग जाएगी।

मैंने उन्हें बताया कि इस बार मुझे त्यौहार अकेले ही मनाना होगा क्योंकि पतिदेव टूर पर हैं और मेरा बेटा भी नानी के यहां गया है।
आशुतोष भाई ने लिखा- अरे, आप खुद को अकेला मत समझिए, हम हैं ना आपकी खुशियां बांटने के लिए। कल हम आपके यहां आ जायेंगे और फिर आप अपना त्यौहार मनाइयेगा।

हमने एक दूसरे को गुड नाईट कहा और मैं अगले दिन का इंतज़ार करने लगी।

आज मेरे दिल में एक अजीब सी कश्मकश थी कि कहीं मैं गलत तो नहीं कर रही हूं.

लेकिन आशुतोष भाई के लिए मेरे दिल में भी काफ़ी कुछ था इसलिए मैंने घटनाक्रम को ऐसे ही चलने देने का फैसला किया।

मैंने खुद को अच्छे से साफ किया और फिर अपनी योनि और बगल के बाल साफ़ किए।

शाम को मैंने ख़ुद को अच्छे से सजाया और फिर वही ब्रा पैंटी पहन ली जो आशुतोष भाई ने दी थी।
ऊपर से मैंने लाल साड़ी और ज्वैलरी पहनी; साथ ही बैकलेस ब्लाउज भी।

मुझे करधनी पहनने का बहुत शौक है और मैं उसे खास मौकों पर ही पहनती हूं।
मैंने एक गजरा लगाया और खुद को दुल्हन की तरह सजा कर तैयार हो गई।

शाम को चांद निकलने से 15 मिनट पहले आशुतोष भाई आए और उनके हाथों में कुछ फल थे।
मैंने उनको अन्दर बिठाया और फिर पूजा अर्चना करने ऊपर छत पर चली गई और पूजा कर के पानी पीकर व्रत खोला।

नीचे आकर मैं आशुतोष भाई से मिली और उन्होंने खुद ही मेरे लिए कुछ फल काट कर रखे थे।
उन्होंने मुझे अपने हाथों से फल खिलाए.
बदले में मैंने भी उनको फल खिलाकर अपना फर्ज अदा किया।

आशुतोष भाई ने मेरी बहुत तारीफ की- मैडम जी, आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बिल्कुल भी अकेला न छोड़ता।

मैंने उनको थैंक्स कहा और बोली- पतिदेव पैसे छापने में लगे हैं, उनको बीवी से ज्यादा पैसा प्यारा है।

आशुतोष- आपको अपना ख्याल रखना चाहिए मैडम जी, वैसे आपने वो लौंजरी पहनी है या नहीं जो हमने आपको दी थी?

मैंने कहा- जी वही पहनी हुई है लेकिन मेरे पतिदेव तो यहां हैं नहीं जो उसे देखकर मेरी तारीफ करते। मेरे पहनने का क्या फायदा हुआ? जंगल में मोर नाचा किसने देखा?

मेरे भाव देख कर आशुतोष भाई का हौसला जरा बढ़ गया- आपके पति ने ना सही, लेकिन मोरनी को हमने तो आज देख लिया है और वो बेहद खूबसूरत लग रही है।

मैं आशुतोष की बात सुनकर मुस्कुरा दी और कहा- ठीक है ठीक है, अब रुकिए मैं आपके लिए चाय बना देती हूं।

मटकती हुई मैं किचन में चली गई तो आशुतोष भाई भी मेरे पीछे आकर खड़े हो गए।
उनकी नजरों से मेरे जिस्म का एक्सरे हो रहा था और मुझे भी मज़ा आ रहा था।

आशुतोष भाई ने कहा- मैडम, आप सच में अप्सरा लगती हो। आपकी ज्वैलरी भी बहुत उम्दा लग रही है आप पर!
यह कहकर वो मेरी करधनी को टटोलने लगे और मैंने कोई विरोध नहीं किया।

मैं बोली- ये मुझे मेरी ननद ने दी थी, मेरी मुंह दिखाई की रस्म में!

फिर उन्होंने अपने हाथ मेरे कमर पर रखे तो मेरे जिस्म में एक सनसनी दौड़ गई।

तभी उन्होंने हाथ मेरी साड़ी पर फेर कर कहा- और ये किसने दी थी मैडम जी?
मैंने कहा- ये मेरी सासू मां ने दी थी, मेरी गोद भराई की रस्म में!

आशुतोष- बड़ी रेशमी और मुलायम है, आप पर खूब फबता है ये रंग!

यह कह कर उन्होंने धीरे से मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी कमर सहलाई और फिर हाथ मेरी नाभि पर ले गये।
उसकी गोलाई में अपनी उंगली डाल कर उन्होंने मुझे गुदगुदी की तो मुझे हंसी आ गई।

मैंने कहा- भाई, ये क्या कर रहे हैं आप? मुझे गुदगुदी हो रही है।
उन्होंने कहा- आपके हुस्न को देख रहा हूं मैडम जी, ऊपर वाले ने आपको बेहद खूबसूरती से तराशा है।
ये कहकर उन्होंने मेरे दाएं कंधे पर एक चुम्बन दे दिया।

उनकी दाढ़ी की चुभन ने मुझे हैरानी में डाल दिया।
उनके हाथ मेरी कमर में लिपट गए थे और उनकी गर्म सांसे मेरी त्वचा से टकरा रही थी।

उधर गैस पर चाय उबल रही थी और इधर अंतर्मन में मेरे जज़्बात।

अचानक उन्होंने मेरी गर्दन पर हाथ रखा और कहा- मैडम जी, आपकी चेन बहुत मोटी है, ये किसने दी?
ये कहकर वो धीरे धीरे मेरी चेन को सहलाने लगे।

मैंने कहा- ये मेरे पति ने दी थी, सुहागरात पर!
आशुतोष भाई- आपके पति की पसन्द बेजोड़ है, जेवर और औरत दोनों मामलों में!
यह कहकर उन्होंने मेरे गले को चूम लिया।

क्योंकि मैं कोई विरोध नहीं कर रही थी इसलिए उन्होंने भी मौके का पूरा फायदा उठाया।

अब मुझे अपने नितम्बों के पास कुछ चुभता सा महसूस हुआ, मैं समझ गई कि ये आशुतोष भाई का लंड है।

उन्होंने कहा- मैडम जी, आप ने सबकी दी हुई चीजें तो पहन ली, लेकिन मेरा गिफ्ट पहना या नहीं?
मैं उनकी शरारत समझ गई।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- अभी बताया तो … सबसे पहले आपका ही दिया हुआ गिफ्ट पहना है आशुतोष भाई!
आशुतोष भाई ये सुनकर और खुश हो गए- फिर तो मेरा उस गिफ्ट को देखना बनता है मैडम जी!

यह कहकर उन्होंने मेरे ब्लाउज की डोरी खोल दी तो मेरा ब्लाउज ढीला पड़ गया और मेरी पीठ नंगी हो गई।

मेरी पीठ पर उनकी दी हुई ब्रा की स्ट्रैप साफ दिख रही थी।
आशुतोष भाई ने उस स्ट्रैप पर हाथ फेरा और कहा- ये लाल ब्रा आपके ऊपर बहुत सैक्सी लग रही है मैडम जी।

अब चाय उबल पड़ी लेकिन किसी को फुर्सत नहीं थी उसे पीने की।

उन्होंने कहा- मैडम जी, आपके गहने बहुत महंगे हैं, आप इनको उतार दीजिए वरना गुम हो गए तो बड़ा नुकसान हो जायेगा। आप इनको रख दीजिए तब तक हम कुछ खाने का इंतजाम करते हैं।
मुझे भी उनकी बात सही लगी।

मैंने हामी भरी और बेडरूम की तरफ चल दी।
अपने सारे जेवर मैंने निकाल दिए मंगलसूत्र को छोड़कर!

अभी मैंने अलमारी लॉक की ही थी कि तभी पीछे से आशुतोष भाई आ गए।
आते ही उन्होंने दरवाजे की चिटकनी लगाई, उनका इरादा साफ था।

मेरे ब्लाउज की डोरी अभी भी खुली हुई थी और वो ढीला पड़ गया था।
आशुतोष भाई मेरे पास आए और उन्होंने कहा- मैडम जी, सारे जेवर निकाल दिए ना?

मैंने हामी भरी तो उन्होंने कहा- ये मंगलसूत्र आपके गले में क्या कर रहा है?
मैंने कहा- इसे मैं नहीं उतार सकती आशुतोष भाई, ये मेरे सुहागन होने की निशानी है।
आशुतोष भाई मुस्कुराए और फिर बोले- जैसी आपकी मर्जी मैडम जी, मुझे लगा था कि आप अपने पति से प्यार नहीं करती।

फिर मुझे उन्होंने आईने के सामने खड़ा किया, वो आइना मेरी ही लम्बाई का था।

फिर वो मेरे पीछे आए और कहा- आपने मेरा दिया हुआ तोहफा भी पहना है ना?
मैंने कहा- जी आशुतोष भाई, ये आपका ही दिया हुआ तोहफा है। कितनी बार पूछेंगे आप?

आशुतोष ने शरारती अंदाज में कहा- मैं कैसे मान लूं?
मैंने भी पलट कर कहा- तो देख कर तसल्ली कर लीजिए।
उन्होंने पीछे से ही मेरा पल्लू नीचे गिरा दिया और फ़िर मेरे ब्लाउज को सरका कर मेरे जिस्म से अलग कर दिया।

मैंने भी उनका साथ बखूबी दिया और ब्लाउज उतारने में उनकी मदद की ओर उसे शृंगारदान पर रख दिया।

अब मैं उनके सामने ब्रा और साड़ी में खड़ी थी और वो मेरे पीछे खड़े हुए थे।

उन्होंने मेरी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- ये ब्रा तो वही है मैडम जी, आपके पति अगर आपको इस तरह ब्रा में देख लेते तो वो दुनियादारी भूलकर आपको खुश करने में लगे रहते।
यह कहकर उन्होंने खुद को मेरे बदन से सटा दिया और मेरे पेट पर अपना बायां हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया।
उनका हथियार बहुत तना हुआ था।

धीरे धीरे उन्होंने मेरे गले पर चुम्बन देना शुरू कर दिया और उनकी पकड़ कड़ी होती चली गई।

उन्होंने फिर मेरे क्लीवेज पर हाथ फेरा और कहा- मैडम, आपके लिए चुनिंदा ब्रा लाया था, आखिर कार मेरी मेहनत सफल रही।
यह कहकर उन्होंने अपनी एक उंगली ब्रा की दरार में घुसा दी और मेरे क्लीवेज सहलाने लगे।

उनके होंठ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे और मैं बेसुध सी खड़ी अपने लुटने का इंतज़ार कर रही थी।
मेरा मंगलसूत्र उनकी उंगलियों से उलझ रहा था और वो लगातार मेरी दरार को गहरा करने में लगे थे।

उन्होंने मेरा गजरा खोल दिया और फिर मेरी चोटी भी, मेरे खुले बालों को उन्होंने पोनी टेल की तरह समेटा और फिर उन्हे पकड़ कर मेरे सर को अपने काबू में कर लिया।

अब उन्होंने मेरे कानों को धीरे धीरे अपने दांत से कुरेदना शुरू किया और मुझे उत्तेजित करने लगे।
मैं खड़ी आंखें बंद किए आहें भरती जा रही थी।

उन्होंने अपना कुर्ता उतार दिया और मेरे सामने नंगा सीना लेकर खड़े हो गए।
उनकी छाती पर बाल थे जो उनके पेट से होकर नीचे तक पहुंच रहे थे।

उन्होंने मुझे ड्रेसिंग टेबल पर बिठा दिया और आकर मेरे सामने खड़े हो गए।
मेरी सांसें तेज हो चली थी और मेरे माथे से पसीना बहा जा रहा था।

आशुतोष भाई ने मेरे हाथों की चूड़ियां उतार दी और फिर मेरी कलाइयां पकड़ कर अपने काबू में की।
मैं अब उनके रसभरे होंठों का स्पर्श पाने का इंतज़ार कर रही थी लेकिन उन्हे मुझे तरसाने में मजा आ रहा था।

मैंने खुद पर से काबू खो दिया और अपने अधरों को उनके होंठों के सुपुर्द कर दिया।

उउम्मझ
ऊम्म्ह्ह
आशुतोष ऊऊम्म
इस तरह की आवाज़ें गूंजने लगीं।

उन्होंने मेरी कलाइयां छोड़ी और फिर मेरी टांगें फैला दी और आकार बीच में खड़े हो गए।
मैंने कैंची की तरह अपनी टांगें उनकी कमर से लपेट ली।

आशुतोष भाई ने मेरी साड़ी ऊपर सरकानी शुरू कर दी और फिर मेरी जांघों पर लाकर मेरी जांघें मसलने लगे।
मैं बहुत उत्तेजना में थी और अपने होंठों को उनके होंठों से सटा कर उनका रस पी रही थी।
काफ़ी देर तक आशुतोष भाई मुझे यूं ही उत्तेजित करते रहे।

मैं भी अब शर्म लाज भूल चुकी थी।
उन्होंने कहा- मैडम जी, आपने ब्रा तो दिखा दी, पैंटी नहीं दिखाएंगी क्या?

मैंने आशुतोष भाई की बात सुनकर खुद को खड़ा किया और अपनी साड़ी उतार दी।
आशुतोष ने मेरी साड़ी पर कोई दया नहीं दिखाई और उसे वहीं जमीन पर छोड़ दिया।

फिर अपने हाथ उसने मेरे नितम्बों पर रखे और फिर मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।
मेरा पेटीकोट शाख से छूटे पत्ते की तरह नीचे जमीन में सरक गया।

मेरी पैंटी उनकी आंखों के सामने आई तो उन्होंने झट से मेरे गोल नितम्बों को मुट्ठी में भर लिया और एक चपत लगाई।
सटाक!

मेरे मुंह से आह निकल पड़ी- आशुतोष भाई, ये क्या कर रहे हैं आप? दर्द होता है।
आशुतोष भाई हंसे और बोले- कपड़े की क्वालिटी चेक कर रहा था मैडम, कहीं कमजोर तो नहीं है।

मैंने कहा- क्वालिटी घर जाकर चेक कर लीजिएगा, जाते वक्त मैं इसे आपको वापस लौटा दूंगी।
वे हँसे और बोले- अरे मैडम इतनी भी क्या जल्दी है? अभी तो पूरी रात बाकी है।

आशुतोष भाई नीचे घुटनों पर बैठ गए और मेरी पैंटी का मुआयना करने लगे।
उस जालीदार पैंटी से मेरी गोरी चूत की चमक झलक रही थी।
उन्होंने उसे सूंघा और कहा- बड़ी मदहोश कर देने वाली खुशबू आती है आपकी पैंटी से मैडम!

फिर वो खड़े हो गए।
उनके इस तरह बार बार मेरी काम वासना जागने के बाद पीछे हट जाना मुझे रास नहीं आ रहा था।

मैं उनकी छाती से चिपक गई और खुद को उनके सुपुर्द कर दिया।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

उन्होंने मेरी पीठ सहलाई और एक झटके में ही मेरा हुक खोल दिया।
मैंने भी बखूबी उनका साथ निभाया और अपनी ब्रा को अलग कर के वहीं रख दिया।

अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी और मेरा गोरा बदन एलईडी लाइट में बेहद खूबसूरत लग रहा था।

बाहर पटाखों का शोर जारी था और इधर मेरे मन में मस्ती की लहरें उछल रही थी।
आशुतोष भाई ने बिना देरी किए मेरे स्तनों को अपने काबू में किया और अपने होंठों से उनका रसपान करने लगे।

वे मेरे निप्पलों को दांतों से भींचते और जब मैं आह करती तो उसे छोड़कर दूसरे से चिपट जाते।
इस तरह कई मिनट उनका स्तनपान चला।

मेरे स्तनों को जी भर कर पीने के बाद उन्होंने मुझे छोड़ा और मुझे सोफे पे बैठने को कहा।
मैंने वैसा ही किया।

उन्होंने मेरे बेड की चादर हटा दी और उसके गद्दे लेकर जमीन पर डाल दिया।
एक के ऊपर एक गद्दा बिछा कर उन्होंने उसकी ऊंचाई काफ़ी बढ़ा दी।

फिर उन्होंने मुझे बुलाया और इस गद्दे पर बिठा दिया और मेरे चेहरे के पास आकर खड़े हो गए।
उनका संकेत समझते मुझे देर न लगी।

मैंने अपने दांतों से उनके नाड़े को खींच दिया और उनका पजामा उतार दिया।
फिर उनके अंडर वियर पर हाथ फेरा और उसे कुतिया जैसे सूंघा।

आशुतोष भाई जमीन पर खड़े हो गए और मैं कुतिया जैसी घुटनों पर बैठ गई।
उन्होंने दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़ लिए और अपने लिंग पर मेरा मुंह सटा दिया।

उनके अंडर वियर में उनका लिंग फुफकार रहा था और मैं उसे उसे अपने मुंह से सहलाती जा रही थी।

आखिर मैंने खुद ही उसको अंडरवियर से आजाद कर दिया और अपने होंठों को उस पर रख दिया।
उनका लिंग काफी लम्बा और मोटा था।

आशुतोष भाई ने अपना लंड मेरे गले तक धंसा दिया और जब मैं छटपटाई तो निकाल कर हंसने लगे।
फिर उन्होंने यही क्रिया कई बार की।

जब मैं उनके इस काम के साथ तालमेल बिठा चुकी तो उन्होंने मुझे आजाद कर दिया और मुझे गद्दे पर लेटा दिया।

गद्दे पर लेटते ही उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी और अब मैं उनके सामने पूर्ण नग्न लेटी हुई थी।

मुझे चूमते हुए आशुतोष भाई नीचे की तरफ आए और उन्होंने मेरी योनि पर अपने होंठ टिका दिए।

उनकी जीभ मेरी योनि पर थिरक रही थी और उससे लगातार रस टपक रहा था जिसे आशुतोष भाई बड़े मजे से पी रहे थे।
उन्होंने अपने हाथ से मेरे चूत का द्वार खोला और फिर अपनी जीभ उसके अन्दर डालने लगे।

उनकी जीभ मेरी चूत के दाने को मसल रही थी और मेरी चूत से रस लगातार बह रहा था।
आशुतोष भाई सिप सिप कर के उसे पिए जा रहे थे।
मैं लगातार अपने नाखूनों में गद्दे को नोच रही थी।

मेरी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थी और मैं मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी।
उसने भी साथ देते हुए तुरंत हाथ उठाकर मेरे स्तनों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया.

मैं अत्यंत मजे में थी.
और कुछ ही पलों में मैंने हिचकी लेने की तरह 10-12 झटके लिए और पतली चिपचिपी सी धार उसके मुंह में भरते हुए झड़ गयी।
आखिर कब तक मेरी मुनिया ये सहती!

वे मजे से सारे रस को पी गए।

मेरी सांसें तेज हो गई थी और तेजी से चल रही थी।

मैं जरा ठंडी हुई तो आशुतोष भाई ने मुझे अपने ऊपर 69 पोजीशन में बिठा लिया।
उनके मजबूत हाथ मेरे नितम्बों को मसल रहे थे।

उन्होंने मुझे अपने मुंह पर बिठा लिया और फिर मेरी योनि के साथ साथ मेरी गांड पर भी जीभ फिराने लगे।

मैं भी कुछ देर तक इस हरकत का मजा लेती रही और फिर मैंने अपने होंठ उनके लंड पर रख दिए।
‘उउम्म्ह्ह’
एक गहरा चुम्बन लेकर मैंने उनके लिंग को गीला किया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

उनके भूरे से लंड को चूसते हुए उसके आसपास के बाल मुझे चुभने लगे लेकिन मुझे उनका गुदगुदाना पसन्द आ रहा था।

उधर उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत से हटा कर मेरी गांड पर ले आए।
उन्होंने अपनी जीभ मेरी गांड की दरार पर चलानी शुरू की और इससे मुझे उत्तेजना के साथ साथ आनन्द का अहसास भी हो रहा था।

अब आशुतोष भाई ने मुझे सीधी किया और अपने ऊपर लिटा लिया और फिर मेरा चुम्बन लिया।
वो बैठ गए और मैं उनकी गोद में आ गई।

मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पर लपेट ली और मेरी योनि अब उनके लिंग से सटी हुई थी।

आशुतोष भाई ने अपना लंड सीधा किया और उसे एडजस्ट कर के मेरी योनि के दरवाजे से लगा दिया।
मैंने अपनी बांहों में उन्हे कस लिया और अब वो लम्हा आ गया जिसके लिए हम दोनों ने इतनी मेहनत की थी।

उन्होंने धक्का लगा कर अपना लिंग मेरी योनि में उतार दिया।
आह, इस आवाज के साथ मेरी योनि में एक गर्म रॉड सा लंड उतर गया और मेरे चेहरे पर संतोष के भाव आ गए।

मैं और आशुतोष भाई दोनों एक दूसरे को हिलाने लगे ताकि लिंग की रगड़ योनि में अच्छी तरह से हो।
मैं उनकी गोद में बैठ कर अपनी योनि का मर्दन करवा रही थी और आशुतोष भाई मेरे होंठों को चूस कर उनका रस पी रहे थे।

धीरे धीरे हमारे धक्के तेज होने लगे और आशुतोष भाई ने मुझे गद्दे पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गए।

उन्होंने अब अपने धक्के तेज कर दिए और जोर जोर से मेरी योनि को चोदने लगे।
मेरी चूत से पानी फव्वारे की तरह बह रहा था और कुछ देर बाद उन्होंने भी आह भरी और फिर मेरी चूत में ही झड़ गए।

उनका गाढ़ा वीर्य मेरी योनि के रस से बहकर बाहर आ गया तो उन्होंने अपनी उंगली डाल दी और फिर मुझे चटाई।
उनके गाढ़े वीर्य का स्वाद मुझे बहुत मजेदार लगा।

मैंने एक टिशू पेपर उठाया और अपनी योनि साफ की और आशुतोष भाई की तरफ़ शिकायत से देखा।
और मैंने कहा- ये क्या किया आपने? मैं प्रेगनेंट हो गई तो?
उन्होंने मुझे चूमा और बोले- गोली खा लेना मैडम जी, मैं ला दूंगा।

उनकी बात ने मुझे निरुत्तर कर दिया।
मैं बॉथरूम गई और पेशाब करके खुद को हल्का किया।

प्रेषक : ललित Hindi Sex Stories

मेरा नाम ललित है, दिल्ली Hindi Sex Stories का रहने वाला हूँ। मैंने अंतर्वासना में बहुत कहानियाँ पढ़ी और आज मन किया कि मैं अपनी भी कहानी लिखूँ !

बात उन दिनों की है जब मैं अपने ऑफिस से घर जा रहा था रास्ते में एक आदमी पड़ा हुआ था। मैं हिम्मत कर के उसके पास गया। उसको दमा का दौरा पड़ा था! वो अपनी जेब से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा था! मैंने उसकी जेब से इन्हेलर निकलने में मदद की। इन्हेलर को मुँह में पम्प करने के कुछ देर बाद वो थोड़ा ठीक हुए और मुझे धन्यवाद कहा।

मैंने पूछा- अगर आपको कहीं जाना है तो मैं छोड़ दूँ, आपकी तबियत ठीक नहीं है, कहीं दोबारा से दौरा पड़ा तो कौन संभालेगा !

वो मेरी बात मान गए और मेरे साथ बाइक पर बैठ गए ! कुछ देर में मैं उनको लेकर उनके घर पर पहुंच गया। उन्होंने मुझे घर के अन्दर आने के लिए कहा, अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। उनके परिवार वालों ने भी मुझे धन्यवाद कहा। फिर उन्होंने मुझे चाय पिलाई!

चाय उनकी बेटी ले कर आई थी। क्या बला की खूबसूरत थी, जो भी देख ले, बस देखता ही रह जाये ! फिगर 36 28 36 ! कसम से खुदा ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा ! जैसे ही वो मेरी तरफ चाय बढ़ाने के लिए झुकी, मुझे उसके दो बड़े बड़े खरबूजों के दर्शन हुए! मन कर रहा था कि अभी पकड़ कर दबा दूँ ! पर मजबूर था !

अचानक उसके पापा के किसी दोस्त का फ़ोन आ गया, वो फ़ोन पर बात करने के लिए साथ वाले कमरे में चले गए। मुझे भी मौका मिल गया उनकी बेटी से बात करने का !

मैंने उससे पहले उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम पूनम बताया, जैसा रूप-रंग वैसा नाम ! एकदम पूनम का चाँद !

बातों का सिलसिला चल निकला, मैंने उससे उसका मोबाइल नंबर माँगा तो उसने फ़ौरन अपना नंबर मुझे दे दिया और मैंने भी अपना नंबर उसको दे दिया। इतने में उसकी मम्मी ने अन्दर से उसको आवाज दी।

मैंने उसको कहा- मैं तुम्हें कल फ़ोन करूंगा !

फिर मैंने अंकल को कहा- अब मुझे चलना चाहिए, बहुत देर हो गई है। फिर मैं वहाँ से चला आया। सारे रास्ते मैं पूनम के बारे में सोचता रहा कि काश एक बार पूनम की चूत मिल जाये तो मैं निहाल हो जाऊंगा।

घर पर पहुंच कर खाना खाया और सोने चला गया। लेकिन मेरी आँखों में नींद कहाँ ! मुझे तो हर तरफ सिर्फ वो ही नज़र आ रही थी। ख़ैर किसी तरह रात कटी, मैं सुबह जल्दी ऑफिस के लिए निकल गया। ऑफिस से मैंने उसको फ़ोन किया। जैसे ही मैंने हेल्लो कहा, उसने मेरी आवाज़ पहचान ली और कहा- मैं तुम्हारे फ़ोन का ही इंतजार कर रही थी, मुझे पता था कि तुम मुझे आज फ़ोन जरुर करोगे।

उसने कल जो मैंने उसके पापा की मदद की थी उसके लिए मेरा धन्यवाद किया और कहा कि वो अपने पापा से बहुत प्यार करती है।

फिर मैंने भी पूनम से कहा- पूनम, मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ अगर तुम मुझे गलत ना समझो तो कहूँ !

तो वो बोली- ललित जी, आप जो कहना चाहते हो, कह दो !

जैसे कि उसको पता था कि मैं क्या कहना चाहता हूँ !

मैंने कहा- मुझे तुमसे पहली नज़र में प्यार हो गया है, कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई, सारी रात तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा !

उसने मेरी सचाई की कदर करते हुए कहा- ललित, जो हाल तुम्हारा था रात को, वही मेरा था, मैं भी सारी रात सो नहीं सकी, बस तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी! मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है।

मेरे प्यार को जब उसने कबूल किया तो थोड़ी हिम्मत आई मुझमें, वरना उसको अपने प्यार का इज़हार करते वक़्त मेरी गांड फट रही थी। लेकिन अब कोई डर नही था, दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी ! अब तो रोज़ हम दोनों फ़ोन पर बातें करते और जब भी ऑफिस की छुट्टी होती तो मैं उससे मिलने उसको कॉलेज चला जाता ! कभी पिक्चर देखने तो कभी किसी रेस्टोरेंट जाने लगे ! रविवार के दिन हम दोनों ने कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बनाया।

तय वक्त पर मैं उसको अपनी बाइक पर ले कर लवर्स पार्क में (यानि बुद्धा गार्डन) पहुंचा और एक सुनसान से जगह पर, जहाँ कोई हमें तंग करने वाला नहीं था, बैठ कर बातें करने लगे ! बातों-बातों में मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ गई! धीरे धीरे मैंने उसकी जांघों पर अपना हाथ फेरना शुरू किया। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की जिससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई !

मैंने उससे पूछा- पूनम, क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ ?

तो उसने मुझे कहा- मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है ललित ! जिसको प्यार करते हैं उससे इजाजत की कोई जरुरत नहीं ! मैं तुम्हें और तुम मुझे प्यार करते हो और अगर तुम्हारा मुझे चूमने का दिल कर रहा है तो कर लो !

फिर क्या था ! हरी झंडी पा कर मैं खुश हो गया और पूनम को चूमने लगा। थोड़ी देर तक उसके होंटों को चूमता रहा और धीरे धीरे उसके स्तन दबाने लगा। फ़िर उसके कुरते में हाथ डालकर, फिर धीरे से उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके चुचूक मसलने लगा। उसका कुरता ऊपर करके उसके पेट पर चूमने लगा। उसने मुझे रोकते हुए कहा- ललित यहाँ नहीं ! यह जगह सुनसान जरुर है पर सुरक्षित नहीं ! किसी ऐसी जगह चलो जहाँ पर तुम्हारे और मेरे अलावा कोई और न हो !

तो मैं उसको अपने ऑफिस ले कर चला आया। रविवार होने की वजह से ऑफिस की छुट्टी थी। मेरे केबिन की चाबी मेरे ही पास थी। ऑफिस जाकर मैंने गार्ड को कहा कि मुझे कुछ जरुरी काम है इसलिए ऑफिस आया हूँ और अन्दर चला गया पीछे के दवाजे से पूनम को भी अन्दर बुला लिया। अपने केबिन को अन्दर से लॉक कर लिया। फिर पूनम को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा, उसके बड़े बड़े दूध दबाने लगा। वो भी पूरी मस्ती में मेरा साथ देने लगी। कभी मेरे होंटों को चूसती तो कभी मेरी जीभ को ! लगता था कि जैसे मुझसे ज्यादा वो प्यासी हो ! मैंने उसको कुरते को उसके शरीर से अलग कर दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे भी उसके जिस्म से जुदा कर दिया। अब वो केवल ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी। मैं उसको चूमता रहा, गर्दन से होते हुए उसकी पीठ पर चूमते हुए मैंने उसकी ब्रा खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दी और उसके दोनों कबूतर आजाद हो कर बाहर निकल आये !

क्या मस्त स्तन थे उसके ! मैं बता नहीं सकता ! गोरे गोरे स्तनों उस पर गुलाबी चुचूक मुझे पागल बना रहे थे।

उसने मुझे कहा- ललित, तुमने मेरे तो सब कपड़े उतार दिए ! क्या अपने कपड़े नहीं उतारोगे ? या मुझसे उतरवाने का इरादा है?

मैंने कहा- अगर तुम उतारना चाहो तो उतार दो ! फिर उसने भी मेरे सब कपड़े उतार कर बगल में अपने कपड़ों के साथ रख दिए। फिर मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी भी उतार दी। उसका एक चूचा मेरे मुँह में था और दूसरे को हाथ में ले कर दबा रहा था। उसकी चूची चूसते हुए मैंने उसको फर्श पर लिटा दिया और उसके पेट पर अपनी जीभ फिरने लगा। फिर मैंने उसकी बालों वाली चूत पर अपना हाथ रख दिया, उसकी चूत से पानी निकल रहा था !

मैंने अपने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी, वो सिसक उठी और पागलों की तरह मेरे बालों को नोचने लगी। मैं अपनी ऊँगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से निकाल कर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसने मेरे सर को उसने अपनी चूत पर कस कर दबा लिया और अपने पैरों को मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट लिया और कुछ देर में वो झड़ गई !

मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसके ऐसे मुँह में लिया जैसे कोई आइसक्रीम खा रहा हो। बड़ी मस्ती में वो मेरे लंड को चूस रही थी।

कुछ देर बाद उसने कहा- ललित, अब बर्दाश्त नहीं होता ! फाड़ दो मेरी चूत को !

मैंने उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर मोड़ कर लंड को निशाने पर लगाकर एक धक्का दिया। लंड करीब एक चौथाई तक उसकी चूत में घुस गया था। वो दर्द से तड़प रही थी। मैं लंड उसकी चूत में डाले उस पर पड़ा रहा। जब उसका दर्द कम हुआ तो एक और धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में समा चुका था। उसकी चूत से खून निकलने लगा। 15 मिनट तक मैंने धक्के नहीं लगाये, सिर्फ उसके वक्ष को ही मसलता रहा। जब दर्द ख़त्म होने लगा तो लंड महाराज को एक जोरदार धक्के के साथ चूत की जड़ तक पहुंचा दिया। वो दर्द से तड़पने लगी, मुझे लंड बाहर निकलने के लिए बोलने लगी, कहने लगी- बाहर निकालो ! दर्द बहुत हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !

करीब दस मिनट बाद उसका दर्द कम हो गया ओर वो नीचे से अपने चूतड़ हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी। अब मैं और वो पूरे जोश में थे।

वो बोल रही थी- जोर से चोदो मेरे राजा ! निकाल दो कचूमर मेरी चूत का ! बहुत तंग किया है इसने मुझे ! पी जाओ मेरी जवानी का रस ! खूब जोर लगा कर चोदो! जूऊऊऊऊऊ सीईई मीईरीईईए राआअजाआआअ औररररररर जोर सीई मीएरीईई माआआआआआ मैं तो डिसचार्ज होने वाली हूँ !

ये कहते हुए वो झड़ गई लेकिन मैं अभी इतनी जल्दी डिस्चार्ज नहीं होने वाला था। लंड निकाल कर उसकी चूत से मैंने उसके मुँह में दे दिया! वो लंड को चाट-चाट कर मजे ले रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसके मुँह से लंड निकाल कर उसको घोड़ी बना कर उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा। उसको तो पता नहीं पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था! वो भी मजे से अपने चूतड़ आगे पीछे कर के मेरा लंड अपनी चूत में डलवाने लगी।

क्या मस्त चुदाई चल रही थी ! पूरा केबिन फच फच की आवाज से गूंज रहा था। अब मैं भी अपनी चरमसीमा पर आने वाला था तो मैंने उसको सीधा लिटाया और लंड उसकी चूत में डाल कर धक्के लगाने लगा।

उससे मैंने कहा- पूनम, मेरा निकलने वाला है !

तो उसने कहा- आज तो अपनी चूत में तुम्हारा अमृत रस डलवाना है ! अन्दर ही डिस्चार्ज होना ! भर दो अपने अमृत से मेरी चूत को !

और 5-7 धक्कों के बाद मैंने अपने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और कुछ देर उसके ऊपर ही पड़ा रहा ! थोड़ी देर बाद मैं उस पर से हटा तो देखा कि उसकी चूत की सील टूटने से उसकी चूत से खून और वीर्य बह रहा था। हम दोनों सीधे बाथरूम में गए और खुद को साफ़ किया। इसके बाद बाहर आकर मैं उसको और वो मुझे चूमने लगी। किस करते करते हम दोनों में फिर से जोश आ गया और फिर से उसकी चुदाई शुरू कर दी मैंने !

वो मेरा लंड चूस रही थी, मैं उसकी चूत चाटने लगा। 69 की पोजीशन में थे हम दोनों ! अपनी जीभ मैंने उसकी चूत में अन्दर तक डाल दी। वो लंड को बड़े आनंद लेकर चूसती रही, कभी अंडों को चूसती, कभी लंड ! मैंने उसको खड़ा किया और नीचे झुका। उसकी चूत में पीछे से लंड डाल कर चोदने लगा। उस दिन मैंने उसको चर बार चोदा। फिर करीब दो साल तक उसकी चुदाई की उसी के घर पर।

अब उसकी शादी हो चुकी है, शादी के बाद भी मैंने उसको कई बार चोदा ! Hindi Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆