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Sex Stoires

दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।

एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।

रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।

मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!

और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।

सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।

मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!

फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।

मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!

पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!

मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।

फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!

मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!

बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!

फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!

एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires

Antarvasna

मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर Antarvasna उसके होठों को छुआने लगा और जैसे ही वो कुछ बोलने लगी मैंने झट से उसका मुँह पकड़ कर लंड अंदर डाला और उसको बोला- प्लीज़ एक बार इसको चूसो!

और मैं निर्मला के बाल को पकड़ कर धक्का मारने लगा और मैं भी खुद आगे पीछे होने लगा. मैंने उसकी मुँह चुदाई चालू कर दी. करीब दस मिनट के बाद मैंने सारा लंडरस उसके मुँह में डाल दिया और उसके पास लेट गया.

करीब पाँच मिनट के बाद उसका एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख मैं खुद उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और उसकी चूत को मसलने और उंगली से चोदने लगा.

तो उसने कहा- भैया प्लीज़ मुझे जाने दो.
मैंने कहा- निर्मला, असली काम अब चालू होगा!
तो वो बोली- क्या?
हाँ, मैं तुझे अब चोदूँगा!
उसने कहा- नहीं आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते!

मैंने कहा- निर्मला, ऐसा हर लड़की और लड़का चोदते हैं और चुदवाते हैं जैसे कि तुम्हारी मम्मी पापा से चुदवाती है, तुम्हारी भाभी भैया से चुदवाती है, मेरी पत्नी मेरे से चुदवाती है, फिर तुम क्यों मना कर रही हो!

उसका हाथ मेरे लंड पर रखते ही मेरा लंड टाइट होने लगा था और वो भी गरम हो गई इन सब बातों से, और बोली- भैया मैंने पहले कभी भी नहीं किया है!

(दोस्तो, मैं उसकी शरम मिटाना चाहता था और मैंने कल की तरह उस टॉपिक छेड़ दिया)

मैंने उससे पूछा- कल तो तुमने इतना नाटक नहीं किया, आज अचानक इतना नाटक क्यों?
वो बोली- भैया, कल जो हुआ वो एक हादसे की तरह था!
मैंने कहा- ठीक है!
मैंने उससे पूछा- कल तुमने अपनी मम्मी-डैडी की चुदाई देखी या नहीं?
तो बोली- भैया, नहीं!
मैंने कहा- क्यों?
बोली- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ!

मैंने उसको कहा- मैंने कब कहा कि तुम ऐसी लड़की हो! मैं तो तुझे बता रहा था कि तुम सिर्फ एक बार देखो और तुमको सीखने को भी मिलेगा! खैर कल नहीं देखी तो तुम आज देखना और मुझे बताना कि कैसी है! ठीक है? और मैंने चूत में उंगली आगे पीछे करना ज़ाऱी रखा और वो मेरे लंड को हिलाने लगी.

मैं अब उसके ऊपर आया और उसकी टाँगों को थोड़ा अलग किया और उसकी गीली चूत पर लंड को और मुँह पर मुँह को रख कर दोनों हाथों को उसकी गांड के नीचे रख कर एक ज़ोऱ का धक्का मारा, उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और लंड एक इन्च अंदर चला गया. मैं दोनों हाथों को नीचे से निकाल कर उसकी दोनों चूची के चूचुक मसलने लगा, साथ में चुम्बन भी कर रहा था. लंड अंदर रखा और धीरे धीरे उसको चोदने लगा.

थोड़ी देर के बाद मैंने फिर एक ज़ोऱ का झटका मारा और लंड 3 इंच अंदर घुस गया और वो मेरी पीठ पर मारने लगी क्योंकि उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और उसकी झिल्ली भी फट गई. वो एक दम कुंवारी थी, खून निकलने लगा और वो तड़पने लगी, मेरे बालों को खींचने लगी. मैंने मुँह को हटाया और बोला- क्या हुआ?

वो बोली- भैया! मुझे बहुत दर्द हो रहा है!
मैंने कहा- निर्मला, मुझे भैया मत कहो और मेरे नाम से ही पुकारो! ऐसा दर्द पहली बार करने से होता है, तुम घबराओ मत, मैं हूँ ना!

और मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह पर हाथ रखा और एक हाथ से लंड को पकड़ कर उसकी चूत पर रख और ज़ोऱ का झटका मारा, इसके साथ ही मेरा लंड 6 इंच उसकी चूत में चला गया.

मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया और चूची मसलने लगा- निर्मला, तेरी चूत तो कमाल की है!
वो बोली- भैया, प्लीज़ आप बाहर निकालो, मुझे बहुत जलन हो रही है और दर्द भी बहुत हो रहा है!
मैंने कहा- क्या निकालूँ रानी?
भैया, आप इतने गंदे हो, इधर मैं मरी जा ऱही हूँ और आप मज़ाक के मूड में हो!
मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़ एक बार कहो कि क्या निकालूँ!
वो बोली- प्लीज़ भैया! मैं नहीं कहूँगी, आप बाहर निकालो!
मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं बाहर नहीं निकालूँगा!

और इसके साथ ही उसको धीरे धीरे चोदने लगा और उससे बोला- तुम कितनी अच्छी हो, तुम्हारे बूब्स कितने प्यारे हैं, तुम्हारी चूत का कोई जवाब नहीं!

इतना कहने के बाद मैं उसकी चूची चूसने लगा साथ में धीरे धीरे चोदने लगा. थोड़ी देर के बाद उसको मजा आने लगा तो बोली- भैया प्लीज़ आप और अंदर मत डालना! नहीं तो मैं मर जाऊँगी!

मैंने कहा- क्या अंदर नहीं डालूँ?

और मैंने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा, मेरा फिर 6 इंच तक अंदर गया. निर्मला सिसकारी लेने लगी- ऊऊऊवीई ईईईई ईम्म्म्म् म्म्म्मा आआआ! मार डाला इस पागल ने! मैंने कहा था कि अंदर मत डालो! फिर डाल दिया!

मैंने कहा- क्या डाल दिया?
तो बोली- भैया, मैं सिर्फ एक बार ही कहूँगी!
मैंने कहा- ठीक है, बोलो!

इसके साथ ही मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा और वो भी पूरी गरम हो गई और बोली- भैया, आप भाभी के साथ भी ऐसे ही करते हैं?
मैंने कहा- नहीं!
तो मेरे साथ में ऐसा क्यों?
मैंने कहा- मेरी बीवी तो मेरे साथ खुलकर पेश आती है, तुम्हारे जैसे नहीं है, जब मैं चोदने के मूड में नहीं होता हूँ तो मेरे पास आकर बोलती- जी आप मुझे चोदिए ना! देखो मेरी चूत कितनी तड़प रही है तुम्हारे लंड के लिए!

भैया आप झूठ बोल रहे हैं!
मैंने कहा- तुम एक काम करो, मेरी पत्नी से कभी भी पूछ लेना!
भाभी को शरम नहीं आती?
मैंने कहा- तुमको कल ही बता दिया था- सब तेरी मम्मी ने ही सिखाया है, जब चुदाई करते हैं तो हम लोगों को गंदी भाषा बोलनी चाहिए, इससे प्रेम बढ़ता है और जीवन भर प्यार रहता है आपस में!

अब मैंने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर जोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया और मैं उसके ऊपर लेट गया.
निर्मला बोली- भैया प्लीज़ बाहर निकालो! बाहर निकालो!
मैंने कहा- जब तक तुम नहीं कहोगी मैं तुझे ऐसे ही चोदता रहूँगा और रगड़ता रहूंगा!
तो बोली- भैया, मुझे शरम आती है!
मैंने कहा- अपनी आंख बंद करके एक बार कहो- प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
तो बोली- भैया मैं नहीं कह पाऊँगी!
मैंने कहा- एक बार बोल लोगी तो टईक रहेगा, नहीं तो जिंदगी भर नहीं बोल पाओगी! और कुछ नहीं जल्दी से बोल दो!
तो बोली धीरे से- भैया प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
मैंने कहा- क्या निकालूँ?
तो बोली- लंड को!

मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा साथ में चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?
तो बोली- प्लीज़ आप मुझे मत पूछो!
मैंने उससे कहा- निर्मला, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रमोशन हुई है, तुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा है, ऐसा मजा तो मुझे कभी नहीं आया!
मैं ऐसे ही उसे गरम करके चोद रहा था और वो भी मेरा खुल्लम-खुल्ला साथ देने लगी थी.

दोस्तो मुझे इसको चोदने में इतना मजा आया कि आपको नहीं बात सकता! आप समझ लीजिए कि मुझे जन्नत मिल गई थी!
मैं उसकी चूत से धीरे धीरे लंड बाहर निकालता और अंदर चूत में डाल कर चोद रहा था, बीच बीच में ज़ोऱ से शॉट भी लगाता था और वो हर शॉट के साथ वो सिहर उठती और मुझे बोलती -भैया, मुझे कुछ हो रहा है!
मैंने उसकी चूची को रगड़ते हुए पूछा- क्या हो रहा है रानी?
तो बोली- मैं नहीं बता सकती!

मैं अब उसे ज़ोऱ ज़ोऱ से चोदने लगा और दोनों हाथों से उसकी चूची को मसलते हुए बोला- ले मेरी रानी, मेरा लंड ले! और ले! अभी तेरी चूत को भी मजा आ रहा है! तू मुझे नहीं बताएगी तो तेरी चूत बताएगी!
मेरे हर शॉट का जवाब उसकी ओओ… आआईईई! जल्दी! प्लीज़ जल्दी करो! ओओ आआआ! में था.

मैं उसे ऐसे ही चोदने लगा और पूरे कमरे में पच पच और उसकी आवाज़ें गूंज रही थी. मैंने निर्मला को करीब़ 10 मिनट और चोदा!
वो कितनी बार झड़ी, मुझे नहीं मालूम! जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा- निर्मला, मैं अब झड़ने वाला हूं, कहाँ निकालूं मेरा प्रेम रस? तेरी चूत में या फिर तेरे मुँह में?
वो बोली- भैया चूत में मत डालना! आप बाहर ही निकाल लो!

मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और उसके मुँह के पास लेकर उसको बोला- रानी मुँह खोलो!
वो ना करने लगी और अपने मुँह पर हाथ रख लिया. मैंने उसका हाथ हटाया और लंड को मुँह में डालकर मुँह चोदने लगा और कुछ ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी और मैंने उसे प्रेम-रस पिला दिया. जब मेरा लंड सिकुड़ गया तो मैंने बाहर निकाला. निर्मला के मुँह से लंड निकालते ही वो बेड पर निढाल हो गई और मैंने बाथरूम ज़ाकऱ शॉवर लिया और बाहर निकल अपने कपड़े पहनने लगा, साथ में निर्मला को आवाज़ लगाई- निर्मला, उठो!

तो वो उठ नहीं पा रही थी, मैंने उसको सहारा दिया और बाथरूम ले गया और उसको मूतने के लिए बोला. वो बैठ कर मूतने लगी और मुझसे बोली- भैया तुम बाहर बैठो!
मैंने कहा- अब मेरे से शरम कैसी! अब तो हम पति-पत्नी की तरह हैं!

कैसी लगी मेरी कहानी, अपनी राय मुझे लिखें! Antarvasna

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प्रेषक : सुरेश Antarvasna Sex Stories

मैं सुरेश, मेरे प्रिय Antarvasna Sex Stories पाठकों और पाठिकाओं को मेरे लंड का नमस्कार।

मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर लगा कि मैं भी आपके समक्ष अपनी सच्ची कहानी रखूं।

मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम गौरी है। उसका कद करीब ५.३” है । रंग थोड़ा सांवला है और उसके मम्मे करीब ३४” के होंगे और उसके गांड करीब ३८” की होगी और उसकी पतली कमर अगर उसे कोई देख ले तो उसका लण्ड कड़क हो जाए।

बात उन दिनों की है जब मैं पटना(बिहार) के कोचिंग में पढ़ाया करता था, वो मेरे कोचिंग में पढ़ती थी। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी, इसीलिए छोटे छोटे और पारदर्शक कपड़े पहन कर आती थी जिससे देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। गुरु होने के कारण मैंने वैसे तो कभी उसे उस नजरिये से कभी नहीं देखा था पर उस दिन बात ही कुछ ऐसी हो गई।

मैं आपको बताना भूल गया कि उसे बार-बार बेहोश होने की बीमारी थी। वो रविवार का दिन था और कोचिंग की छुट्टी थी पर उसे गणित में कुछ प्रोबलम होने के कारण उसने मुझसे अकेले में पढ़ाने को कहा था। वो ठीक १० बजे मेरे कोचिंग में आ गई, और हमने पढ़ाई शुरू कर दी। मैं उसे पढ़ा ही रहा था कि इतने में वो बेहोश हो गई। मैं उसके मुँह पे पानी के छींटे मार रहा था उसे होश में लाने के लिए। इस बीच मेरी नज़र उसके मम्मे पर चली गई। पानी और पारदर्शक कपड़े होने के कारण उसके मम्मे गीले हो गए जिस कारण वो पूरे साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मैं न चाहते भी उसके मम्मे दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल दिया और उसे मसलने लगा और उसके होठों पे अपने होंठ रख कर चूसने लगा। इतने में वो होश में आ गई और हल्का सा मेरा विरोध करने लगी पर उसके बाद वो भी गरम हो गई।

मेरा भी लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया। करीब १० मिनट की चुम्मा-चट्टी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए और थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था। फिर मैंने उसे मेज़ पर लेटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत एकदम कसी और वह अनचुदी कलि थी। वह सिस्कारियां भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को चाट कर साफ़ कर दिया।

थोड़ी देर में वो फिर से गरम हो गई और तड़पने लगी। फिर मैंने उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी टाँगे मेज़ पर फैलाई और अपना लंड उसकी बुर पे रख दिया। लंड अन्दर नहीं जा रहा था इसलिए मैंने वैसलिन लगाया और धीरे धीरे अन्दर डालने लगा। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया और वह दर्द से तड़पने लगी। मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला और दर्द के मारे तड़पने लगी …..आआआ… ऊउम्म्म्म्म्म्म्म…. येस्स्स्स…..ये सब आवाजें निकलने लगी।

मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और नीचे से वह गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने भी तब फिर से उसे चोदना चालू कर दिया और करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एकसाथ झड़ गए।

उस दिन मैंने उसे दो बार और चोदा। अब हमें जब भी वक्त मिलता है तो हम पढ़ाई के बहाने चुदाई किया करते हैं।

मेरे प्रिय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है इसलिए जो भी गलती हुई उसके लिए माफ़ करियेगा और आपको अगर कहानी अच्छी लगी तो मुझे मेल कीजिये। आपके इ मेल्स मेरे लिए प्रेरणा-स्रोत का काम करेंगे तो मेल करने में कंजूसी न करें। Antarvasna Sex Stories

Antarvasna

सोनू सो चुकी थी। श्याम Antarvasna के सात बज चुके थे। मेरे दोस्त के आने का भी समय हो चुका था। मैंने अपने दोस्त को फ़ोन करके सब बता दिया था। वो ठीक सात बजे आ गया। सोनू नंगी ही सो रही थी।

मेरे दोस्त राहुल ने आकर उसे निहारा और उसे उठा दिया। हमने उसे बाथरूम मैं जा कर फ्रेश होने को कहा। वो फ्रेश हो कर आई और मेरे दोस्त राहुल से अपनी नंगे बदन को छुपाने लगी। हमने उसके कपड़े छुपा दिये थे। वो नंगी ही घूम रही थी। हमने उसको अपने पास बैठाया और बातें करते हुए सब चाय पीने लगे। मेरे दोस्त ने उसका मम्मा पकड़ते हुए कहा- बहुत सेक्सी हो ! अब तुम हम दोनों से चुदोगी !

वो डर गई।

मैंने कहा- घर फ़ोन कर दो कि आज रात तुम अपनी सहेली के यहाँ रुक रही हो।

वो कहने लगी- मुझे घर जाने दो ! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ !

मैंने कहा- साली ! तुम्हारे कपडे तो हमारे पास हैं नंगी जाना हैं तो जा !

मैंने सोनू की सोते वक्त नंगी फोटो निकाल ली थी। मैंने जब उसकी फोटो दिखाई तो वो डर गई और रात भर हमारे साथ सोने तैयार हो गई। उसने अपनी बहन सुनयना को फ़ोन कर दिया कि वो रात को घर नहीं आएगी, अपनी सहेली के यहाँ रुक कर टेस्ट की तैयारी करेगी।

जब वो सुनयना को फ़ोन कर रही थी तो मैंने अपने दोस्त को कहा कि सोनू के बाद इसकी बहन सुनयना को चोदना है।

मेरे दोस्त ने कहा- पहले इसे तो ठंडा कर दे, फिर इसकी बहन को भी देख लेंगे और हम हँस पड़े। मेरे दोस्त ने सोनू की ओर देखा और लण्ड पर हाथ लगाया और उसको आंख मारी। वो शरमा गई और चेहरा नीचे कर लिया।

मेरे दोस्त ने उसको पकड़ा और बेड पर लेटा दिया। मैं भी उसके साथ लेट गया। हम दोनों ने उसका एक एक मम्मा संभाल लिया और चूसने लगे।

वो सिसकियाँ ले रही थी और बोल रही थी- सोरी ! थैंक्यू ! मुझे माफ़ कर दो ! शाबाश ! स्स्स्स् !

मैं अपनी जीभ से उसके मम्मे की डोडी चूस रहा था। एक हाथ से मैंने मम्मा पकड़ा था तो दूसरे हाथ से उसका पेट सहला रहा था।

मेरे दोस्त ने भी एक हाथ से उसका मम्मा पकडा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत सहला रहा था। वो आहें भरती जा रही थी। आधा घंटा हम उसका जिस्म सहलाते रहे। बाद में मेरा दोस्त उठा और हमने अपने कपडे उतार दिये। हमने अपने अंडरवियर उतारे और अपने कड़क लोडों से उसको सलामी दी। फिर हमने उसका कसा हुआ बदन हाथो में लिया और सहलाने लगे।

मैं उसकी चूत चाटने लगा और मेरा दोस्त उसे चूमने लगा। वो बुरी तरह तड़प रही थी और पागल हो रही थी। मेरा दोस्त कभी अपनी जीभ उसके मुंह में डाल देता तो कभी उसकी जीभ मुँह में लेकर चूसता। मैं उसकी जांघों पेट पर हाथ और मुँह फिरा रहा था।

अब वो कहने लगी- प्लीज़ ! मुझे और न तड़पाओ और मुझे चोदो।

हम हँस पडे और उसको छोड़ दिया और चल पड़े।

वो कहने लगी- कहाँ जा रहे हो?

मैंने कहा- सोने जा रहे है !!

वो चिल्ला रही थी- मुझे अधूरा मत छोड़ो !

हमने ध्यान नहीं दिया। वो रो रही थी और हमसे लंड की भीख मांग रही थी।

मैंने कहा- एक शर्त पर तुझे चोदेगे ! तू हमारे लौड़े चूसेगी और उनका पानी भी पीयेगी ! और आज तुझे ब्लू फ़िल्म भी बनवानी पड़ेगी।

वो पहले तो नहीं मानी पर बाद में लंड की प्यास ने उससे हां करवा ली। हम अपनी कामयाबी पर खुश थे।

मैंने दोस्त का डिज़ी-कैम सेट किया। उसको दोबारा कपड़े पहनाए और सेक्स शुरू किया। मैंने और मेरे दोस्त ने फिर वो सब किया जो पहले किया था। अब वो नग्न थी और हम भी नग्न थे। वो लंड को भू्खी शेरनी की तरह तरस रही थी। मेरे दोस्त ने अपना लौड़ा उसके मुँह में डाल दिया। वो पन्दरह मिनट उसे चूसती रही। कभी सुपारा मुंह में डालती तो कभी पूरा लंड लॉलीपोप की तरह चूसती।

मेरे दोस्त ने कहा- बस कर मेरी कुतिया ! अब साली ! रण्डी ! मादरचोद ! तेरे को चोदेगे।

वो कहने लगी- गालियाँ मत दो मुझे !

मेरे दोस्त ने कहा- और क्या तेरी पूजा करें रांड ! साली रंडी बन कर तू ही हमारे से चुदवाने आई थी और उसे बेड पर पटक दिया। मेरे दोस्त ने मुझे इशारा किया और मैं उसके मुँह की तरफ़ जा कर बैठ गया। मेरे दोस्त ने उसकी चूत पर हाथ फेरा और अपना लंड उसकी चूत पर लगाया। उसका लंड मेरे से भी कही ज्यादा लंबा और मोटा था।

उसने जैसे ही लंड उसकी चूत में डाला, वो चिल्लाई जैसे ही उसका मुँह खुला मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और उसकी छाती पर बैठ गया। मैं उसके मुंह को चोद रहा था और दोस्त उसकी चूत ठोक रहा था। मुँह में लंड होने की वज़ह से वो चिल्ला नहीं पा रही थी, केवल गु गु ही कर रही थी।

१५ मिनट बाद मेरा उसके मुँह में ही छुट गया। वो सारा जब तक उसके गले में नहीं उतर गया तब तक मैंने अपना लंड बाहर नहीं निकाला। अब मैं जैसे ही नीचे उतरा, वो चिल्लाने लगी- मुझे माफ़ कर दो ! मुझे छोड़ दो ! जाने दो।

मेरा दोस्त बोला- रांड ! चुप अभी तो शुरूआत है ! पूरी रात तेरे को चोदेंगे ! मुश्किल से इतना गोरा और सेक्सी माल हाथ लगा है !

मेरा दोस्त आधे घंटे बाद शान्त हुआ।

अब मैं फ़िर तैयार हो गया।

वो माफ़ी मांग रही थी और सोना चाहती थी। मैंने कहा- रांड ! कुतिया ! तेरे को सोने के लिए नहीं रखा है ! चल अभी तो तेरी गांड भी मारनी है ! फिर हमने उसे बारी बारी ५-५ बार चोदा। सुबह चार बजे हमने कुछ आराम किया, फिर हम गांड मारने को तेयार हो गए। वो थक चुकी थी, पर हम कहाँ मानने वाले थे।

मेरे दोस्त ने उसे घोड़ी बनाया और अपना लंड तेल लगा कर उसकी गाण्ड के अन्दर डालना चालू किया। सोनू चिल्ला रही थी और नहीं ! नही ! बोल रही थी। दोस्त दनादन चोद रहा था और बोल रहा था- चल मेरी रांड ! लम्बी रेस की घोड़ी !

बाद में मैंने उसकी गांड मारी। ६ बजे हम सो गए।

९ बजे हम सब उठ कर नहाए धोए। फ़िर सोनू को उसकी फ़िल्म दिखायी। बहुत ही बढ़िया मूवी बनी थी। मेरे दोस्त ने कहा- अब तू है हमारी ! हम जब भी तेरे को बुलाएँगे, चुप करके आ जाना ! नहीं तो सारे मुहल्ले में तेरी फ़िल्म दिखा देंगे और अगली बार अपनी बहन सुनयना को भी लेकर आना, उसे भी अपनी रांड बनाएँगे ! नहीं तो हम से बुरा कोई नहीं होगा।

वो हमारी मिन्नतें करने लगी और अगली बार बहन और ख़ुद हमेशा आने का वादा करके इजाजत मांगने लगी। हमने उसे बारी बारी चूम, चाट, भींच, दबा कर उसे भेज दिया।

सुनयना की पिटाई और चुदाई और सोनू की चाचा जी से चुदाई और समूह में दोनों बहनों की चुदाई दोस्तों अगली बार लिखूँगा।

मेरी कहानी कैसी लगी ? Antarvasna

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