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हैलो दोस्तो! Hindi Porn Stories

उस दिन मैं और काजल बहुत Hindi Porn Stories खुश थे, हमने एक दूसरे को बहुत प्यार किया। हमने रात को भी सेक्स किया और सो गए। अगले दिन सुबह मुझे कुछ अजीब सी फीलिंग हुई। मैं उठा तो मैंने देखा की काजल मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी और उसे चूस भी रही थी। मेरा लण्ड भी काफ़ी खड़ा हो रखा था।

मैंने उसको उठाया और उसे किस करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी। हम दोनों काफ़ी देर तक एक दूसरे को प्यार करते रहे। तब मैं उठा, किचन में गया और फ्रूट क्रीम ले कर आया। तब मैंने फ्रूट क्रीम उसके बूब्स पर और उसकी चूत पर गिरा दी अब मैं फ्रूट क्रीम को उसके बूब्स पर मलने लगा इस तरह करने से वो गरम होने लगी। थोडी देर बाद मैं फ्रूट क्रीम को उसकी चूत पर भी मलने लगा।

मलने के बाद मैंने उसके बूब्स पर से फ्रूट क्रीम चाटनी शुरू कर दी। मैं अच्छी तरह से उसके बूब्स चाट रहा था और हर तरफ़ से। कभी उसके चुचूक चाटता और कभी उसके बूब्स को साइड से चाटता। मैं उसके बूब्स को चाटने का मज़ा भी ले रहा था और फ्रूट क्रीम का भी। फिर काफ़ी देर तक उसके बूब्स चाटने के बाद मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत पर बाल नहीं थे इसलिए मुझे उसकी चूत चाटने का बहुत मज़ा आ रहा था। सचमुच ऐसा स्वाद मुझे आज तक कभी नहीं आया था मैं बहुत मज़े से फ्रूट क्रीम चाट रहा था और वो तड़प रही थी मैंने उसकी चूत को हर तरफ़ से चाटा।

थोडी देर के बाद उसने मुझे उठाया और कहा- अकेले अकेले ही खाओगे मुझे नहीं खाने दोगे?
मैंने कहा- इसका क्या मतलब?
उसके कहा- अभी बताती हूँ।

उसने मुझे नीचे लिटाया और बाकी बची हुई फ्रूट क्रीम मेरे लण्ड के ऊपर डाल दी। अब वो मेरे लण्ड को अच्छी तरह से मलने लगी। उसके इस तरह करने से मेरा लण्ड और भी ज़्यादा खड़ा हो गया। फिर उसने मेरे लण्ड के आस पास से क्रीम चाटनी शुरू कर दी। आस पास की क्रीम ख़त्म करने के बाद उसने मेरे लण्ड के ऊपर जो क्रीम थी उसे चाटना शुरू कर दिया। जब वो क्रीम भी ख़तम हो गई तब उसने मेरे लण्ड को अपने मुँह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया। वो काफ़ी देर तक मेरे लण्ड को चूसती रही और मैं पागलों की तरह तड़प रहा था।

थोड़ी देर के बाद मैंने उसे कहा- काजल अब मुझ से और कंट्रोल नहीं हो रहा प्लीज इसे अपनी चूत में जाने का रास्ता दिखाओ।
तब वो मेरे ऊपर बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लण्ड के आस पास घुमाने लगी।

मैंने उसको कहा- यह क्या कर रही हो? लण्ड को अपनी चूत में डालो।
तब उसने कहा- एक शर्त पर कि मेरे लण्ड से जो माल निकलेगा वो मैं उसके स्तनों पर डालूँगा!
मैंने कहा- ठीक है तुम पहले इसको अपनी चूत में तो डालो!

तब उसने अपनी चूत को मेरे लण्ड के ऊपर रख दिया मैंने एक झटका मारा तो मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। उसकी चूत और मेरे लण्ड में काफ़ी क्रीम लगी हुई थी इसलिए तब बहुत मज़ा आ रहा था। वो भी धीरे धीरे हिल रही थी और मज़े ले रही थी और मैं भी बीच बीच में उसके बूब्स को मसलता और कभी उसके निप्पल चूसता।

इस तरह हम काफ़ी देर तक करते रहे जब मुझे लगा कि मेरा झड़ने वाला हो गया है तब मैंने कहा- काजल! मैं झड़ने वाला हूँ!

उसने तभी मेरे लण्ड को निकाला और अपने बूब्स को मेरे लण्ड के नीचे कर दिया तभी मेरे लण्ड से माल निकला और उसके बूब्स पर गिर गया तब उसने पूरे माल को अपने बूब्स पर मलना शुरू कर दिया। मेरे माल को अपने स्तनों पर मलते हुए वो काफ़ी संतुष्ट लग रही थी।

फिर तो हमने कई बार ऐसा किया कभी किसी चीज के साथ और कभी किसी चीज के साथ। एक बार तो मैंने केक के ऊपर की क्रीम उसकी चूत पर मलकर उसको चाटा वैसा स्वाद भी मुझे कभी आज तक नहीं आया। आप सब को मेरा यह किस्सा कैसा लगा प्लीज़ मुझे ज़रूर बताएँ। Hindi Porn Stories

Hindi sex stories (Hamara chaukidar)

मैं गौरव, मैं 46 साल का हूँ Hindi sex stories और मेरी सेक्सी बीवी शैला (बदला हुआ नाम) 40 साल की है। हमारी शादी हुए 20 साल हो गये हैं।

अब शैला में वो पहले वाली बात नहीं रह गई थी। अब तो वो बस चुदाते समय बस लेटी रहती थी, उसमे कुछ भी सेक्स बाकी नहीं रह गया था। मैं उससे बहुत बोर हो गया था इस तरह का सेक्स करते करते।

एक दिन मैंने शैला के ड्रॉवर का ताला खोला तो उसमें एक बड़ा सा डिल्डो यानि प्लास्टिक का लण्ड रखा हुआ था।

मैं तुरन्त ही समझ गया था कि अब उसे कोई साधारण नहीं, मोटे लण्ड की आवश्यकता है, शायद उसे इस डिल्डो से बड़े लण्ड की आदत हो गई थी इसलिये उसे अब मेरे लण्ड की चुदाई में मजा नहीं आता था।

यह सब देख कर अब तो मेरा मन उसे किसी प्लास्टिक के लण्ड से नहीं, पर सच में किसी किसी मोटे और बड़े लण्ड से चुदाई होते देखने का मन हो आया था।

वैसे शैला पहले बहुत ही सेक्सी औरत थी और वो कई कई बार एक ही दिन में चुदा लेती थी, उसे डर नहीं लगता था।

वो चुदने में एक्सपर्ट थी और सब काम उसे सेक्स में करना मन्जूर था। वो चुदाते समय लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसती थी, अपनी गाण्ड में भी मस्ती से लण्ड ले लेती थी, 69 की पोजीशन में भी ओरल सेक्स के मजे लेती थी।

चुदते समय उसकी दर्द भरी आवाज में चिल्लाना, आहे भरना गर्म गर्म सांसें छोड़ना, चूतड़ों और चूत को उठा उठा कर लण्ड लेना, जीभ से लण्ड को सहलाना, उसकी वो कातिल निगाहें और मुंह से चूसने का अन्दाज और पूरा लण्ड मुंह में भर लेना, हम दोनों को बहुत ही मजा आता था।

अब कुछ सालों से वो ठण्डी हो गई थी और मुझे उसे फिर से गर्म करना था।

एक दिन मैं और शैला रात को कहीं से आ रहे थे। हम बिल्डिंग में आ गये तो देखा कि नया चौकीदार गेट पर था। वो कुछ पचास साल का होगा। वो मोटा सा लम्बा सा सांवले रंग का आदमी था।

मैंने इस बात को नोट किया कि जब हम ऊपर जा रहे थे तो वो मेरी बीवी शैला की गाण्ड को बहुत ही घूर रहा था।

शैला ने नाईटी पहन रखी थी सो उसकी गाण्ड पीछे से मस्त बाहर निकली हुई दिख रही थी।

मुझे लगा कि क्यूं ना मैं उससे शैला को चोदने के लिये बोलूं।

पर मुझे अभी उसके लण्ड का आकार भी देखना था क्यूंकि शैला को तो मोटे लण्ड की आवश्यकता थी।

मैं चौकीदार को दूसरे दिन दारू पिलाने ले गया और जब उसे पेशाब आया तो मै भी उसके साथ में गया।

जब उसने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर लण्ड निकाला तो मैं उसका लण्ड देख कर दंग हो गया। काला सा मोटा सा लण्ड नौ इंच का था। मैं उसका लण्ड देख कर खुश हो गया।

उसका नाम रविंद्र था पर बहुत ही गर्म दिमाग का आदमी था और बहुत गाली देता था।

बातों बातों में मैंने भी थोड़ी बहुत पी ली थी फिर उससे पूछा कि तुम मेरी बीवी को घूर रहे थे।
पहले तो वो थोड़ा डरा, पर दारू के नशे में बोला- मस्त माल है… क्या गाण्ड है उसकी!

मैंने पूछा- तुम उसे चोदोगे?
इस पर वो उठ कर बोला- चलो, अभी चोद डालूंगा उसे।

अब हम घर की तरफ़ चल दिए। मैं उसे घर में ले गया और शैला से कहा- आज ये यहीं सोयेगा।

वो अब हमारे साथ सो गया।

हम बेड पर थे और वो नीचे सो रहा था।

थोड़ी देर बाद मैं उठा और मैंने जो पहनने को उसको लुंगी दी थी, उसे ऊपर कर दी।

उसने अपनी लुन्गी निकाल दी। अब उसका काला सा मोटा और बड़ा सा लण्ड खुला हुआ था। वो अब सोने की एक्टिंग करने लगा।

मैं दूसरे कमरे में चला आया और जोर से दरवाजा बन्द किया।

दरवाजे के बन्द करने की आवाज से शैला उठ गई। उसने रविंद्र के बड़े लण्ड को देखा तो उसे कुछ होने लगा।
वो सोचने लगी कि रविंद्र नशे में सो रहा है तो वो उसके लण्ड को सहलाने लगी।

इतने में मैंने दरवाजे को खोला तो शैला डर गई पर मैंने उसे कहा- मज़े कर।

अब रविंद्र भी उठ गया। उसने शैला की जम कर चुदाई की।

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Antarvasna Sex Stories

अंधेरे में एक साया एक घर Antarvasna Sex Stories के पास रुका और सावधानी से उसने यहाँ-वहाँ देखा। सामने के घर की छोटी सी दीवार को एक फ़ुर्तीले और कसरती जवान की तरह उछल कर फ़ांद गया और वहाँ लगी झाड़ियों में दुबक गया।

कमरे में रीना बिस्तर पर लेटी हुई कसमसा रही थी, उसे नींद नहीं आ रही थी। उसे अचानक लगा कि उसके घर में कोई कूदा है। वह दुविधा में रही, फिर उठ कर खिड़की के पास आ गई। उसे एक साया दिखा जो झाड़ियों के पास खड़ा था।

वो साया दबे पांव अन्दर की ओर बढ़ रहा था। उसे आश्चर्य हुआ कि मुख्य दरवाजा खुला हुआ था। वो तेजी से अन्दर आ गया और सीधे मौसी के कमरे की तरफ़ बढ़ गया। रीना का दिल धक-धक करने लगा, पर उसे ताज्जुब हुआ कि वो मौसी के कमरे में ना जाकर ऊपर सीढ़ियों पर चला गया।

उसने अंधेरे में तुरंत अपना मोबाईल निकाला और अपनी पड़ोसन शमा आण्टी को फोन किया,”आण्टी, हमारे घर में कोई चोर घुस आया है।”

” क्या… क्या … कहाँ है वो अभी ?”

“वो ऊपर गया है”

“रूपा कहाँ है…।”

“शायद सो रही है…”

“ओह्ह्… तुम सो जाओ वो चोर नहीं है ?”

“तो आण्टी ???”

“वो दिल का चोर है… तुम्हारी आन्टी भी ऊपर ही है… सो जाओ !” शमा की खनकती हंसी सुनाई दी ।

रीना ने फोन बन्द कर दिया। ओह्ह्… तो यह बात है… यह मौसी का यार है !!! अरे ये वही तो नहीं है जो सवेरे चाय पी रहा था। इसका मतलब यह रात भर मौसी के साथ रहेगा। मौसा अक्सर बिजनेस यात्रा पर चले जाते थे।

“तो क्या मौसी … छी … छी … ऐसा नहीं हो सकता। मैं ऊपर जाकर देखूँ? हाँ यह ठीक रहेगा।” रीना ने धीरे से दरवाजा खोला और नंगे पांव सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ गई। मौसी के कमरे की लाईट जल रही थी। मतलब वो अभी तक सोई नहीं थी। वो चुपचाप सीढियाँ चढ़ गई। सारी खिड़कियाँ बन्द थी। पर हां खिड़की के पास एक पत्थर की बेन्च थी, उसके ऊपर ही एक खुला रोशनदान था। रीना बेन्च पर चढ़ गई।

जैसे ही अन्दर झांका तो जैसे उसके दिल की धड़कन रुक गई। वो लड़का वही था… उसका नाम आशू था। वो बिल्कुल नंगा खड़ा था और उसका लण्ड लम्बा सा और मोटा सा था। उसका सीधा खड़ा और तन्नाया हुआ लण्ड बड़ा ही मनमोहक लग रहा था।

मौसी बस एक पेटीकोट में थी, उनका ब्लाऊज उतर चुका था। उनकी दोनों चूचियां खूबसूरत थी, गोल गोल, भूरे भूरे निपल, आशू ने मौसी को प्यार से चूम लिया और बदले में मौसी में उसके फ़डकते हुये लण्ड को अपनी मुठ्ठी की गिरफ़्त में ले लिया। उसे प्यार से सहलाते हुये उसके लण्ड अपना हाथ आगे पीछे चलाने लगी।

रीना का दिल कांप उठा। धड़कन बढ़ गई। उसके मन में वासना जाग उठी।

“आशू, मस्त लण्ड के मजे कुछ ओर ही होते हैं… हैं ना…?”

“रूपा, और मस्त चूत भी कमाल की होती है… जैसे आपकी है !”

“कल तो तू बड़ा रीना की चूत मारने की बात कर रहा था…?”

“वो तो नई चूत है ना … अभी तक चुदी नहीं होगी… आप आदेश दे तो उसे भी सेट करें?”

“अभी तो मेरी चूत कुलबुला रही है… चल अपना लौड़ा अब चूत में घुसा डाल… रीना को तो पटा ही लेंगे… अब बेचारी के पास चूत है तो लण्ड तो चाहिये ही ! है ना?”

आशू हंस पड़ा और रूपा से लिपट गया। कुछ देर तक तो वो कुत्ते की तरह लण्ड चूत पर मारता रहा फिर चूत के द्वार पर अपने आप ही सेट हो गया और चूत के पट खोलता हुआ अन्दर घुस गया। रूपा आशू से लिपट गई और एक टांग उठा कर आशू की कमर में डाल दी और लण्ड को अपनी चूत में सेट कर लिया।

रीना का बदन पसीने से भीग गया, सांस फ़ूलने लगी। उसकी चूत भी रिसने लगी और गीली हो उठी। अपने चुदने की बात से उसे अपनी पहली चुदाई याद हो आई। दोनों की कमर धीरे हिलने लगी और रूपा चुदने लगी। दोनों के मुख से वासना भरी सिसकारियाँ निकलने लगी।

“हाय रे आशू, भगवान ने भी क्य मस्त चीज़ें बनाई हैं… धरती पर ही स्वर्ग का आनन्द ले लो !”

“हां देखो ना आपके अधर रस से भरे, आंखों में जैसे शराब भरी हुई है, गुलाबी गाल को सेब की तरह काटने को मन करता है… चल बिस्तर पर चुदाई करते हैं !”

” नहीं रे अभी नहीं … अभी थोड़ा सा गाण्ड को भी तो मस्ती दे यार !” और उसका लण्ड बाहर निकाल कर पीछे घूम गई और घोड़ी बन कर चूतड़ उभार दिये…

जैसे ही आशू का लण्ड गाण्ड के छेद रखा… रीना सिहर गई। रीना का मन उनकी पूरी चुदाई देखने को हो रहा था, और अब तो ये हालत थी कि उसकी चूत भी फ़डफ़डा उठी थी। उसने अपनी चूत को अपने हाथ से हौले से दबा दी। उसकी चड्डी बाहर तक गीली हो गई थी और चिपचिपापन बाहर से ही लग रहा था। उसके सारे शरीर में एक वासना भरी कसक भर उठी थी। रूपा की ग़ाण्ड के दोनों गोल गोल उभरे हुये चूतड़ किसी का भी लण्ड खड़ा कर सकते थे।

आशू ने हल्का सा ही जोर लगाया और उसका लोहे जैसा डण्डा उसकी गाण्ड के छेद में उतर गया। दोनों ही एक साथ सिसक उठे। उन दोनों का रोज का ही गाण्ड मराने का और फिर चुदाने का दौर चलता था।

सो रूपा की गाण्ड तो लण्ड ले ले कर मस्त हो चुकी थी। उसे दोनों ही छोर से चुदाने में मजा आता था। आशू ने रूपा के मस्त बोबे पकड़े और मसलने लगा। साथ ही साथ जोश में लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा। दोनों मस्ती के माहौल में डूबे हुये थे … हौले हौले सिसकी भरते हुये रूपा चुद रही थी। रीना की आंखें मदहोशी में डूबने लगी थी। उसका सारा शरीर पसीने से भीग उठा था। उसकी आंखों के कटोरे नशे से भर गये थे, नयन बोझिल हो गये थे। उसका बदन जैसे आग में जलने लगा था। उसकी नस नस में वासना की कसक भर चुकी थी। ऐसे में उसे यदि कोई मिल जये तो उसको जी भर के चोद सकता था। रूपा की गाण्ड चुद रही थी। आशू का लण्ड भी फ़ूलता जा रहा था।

उसे भी स्वर्ग का आनन्द आ रहा था। दोनों ही दीन दुनिया से बेखर जन्नत में विचरण कर रहे थे। रीना का मन सकता जा रहा था। उसकी चूत भी चुदाई करने जैसी हालत में आगे पीछे चलने लगी थी। जाने कब उसकी एक अंगुली उसने अपनी चूत में घुसा ली और चूत को शान्त करने की कोशिश करने लगी।

तभी आशू ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और रूपा झट से बिस्तर पर आ गई और उसने अपनी टांगें लेटे हुये ऊपर की ओर उठा ली। अपनी चूत को लण्ड को घुसेड़ने के लिये खोल दी। आशू भी उछल कर रूपा पर सवार हो गया। उसे अपने बदन के नीचे दबा लिया।

उसका लण्ड उसके मुख्य द्वार में घुस गया और अन्दर उतरता चला गया। दोनों ही एक बार फिर से सिसक उठे। दोनों के होंठ मिल गये और फिर दोनों के चूतड़ एक दूसरे दबाते हुये लण्ड को घुसाने लगे। दोनों एक लय में, एक ताल में चलने लगे और चुदाई आरम्भ हो गई। दोनों की वासना भरी चीखें कमरे में गूंजने लगी।

उस कामुकता भरे वातावरण में रीना का मन डोल उठा और उसने चुदाने की सोच ली।

पर अभी चुदाई चल ही चल ही रही थी… उसे देखने का लोभ वो छोड़ ना सकी। रुपा की चुदाई के बाद वो भी कमरे में घुस कर चुदवाना चाहती थी। रीना की चूत मारे गुदगुदी के बेहाल हो रही थी। बार बार अपनी अंगुली चूत में घुसा लेती थी।

तभी रूपा की चीख निकल पड़ी और वो झड़ने लगी। आशू भी साण्ड की तरह अपना मुँह ऊपर करके जोर लगा कर झड़ने की तैयारी में ही था। कुछ ही क्षणों में उसने अपना चेहरा ऊपर करके हुन्कार भरी और लण्ड बाहर निकाल कर वीर्य उसकी उसके बदन पर बिखेरने लगा। रीना ने देखा कि मामला तो अब शान्त हो चुका है, बड़े बेमन से वो पत्थर की बेंच पर से उतरी और दबे पांवो से सीढ़ियाँ उतर गई।

उसकी चूत की हालत यह थी कि उसकी चड्डी सामने से गीली हो चुकी थी। कमरे में घुसते ही उसने मोमबत्ती ली और बिस्तर पर लुढ़क गई। अपनी चूत को मोमबत्ती से शान्त किया, फिर वो निद्रा में लीन हो गई। सुबह तक उसकी चड्डी सूख कर कड़क हो गई थी। उसकी चूत का पानी भी यहां वहां फ़ैल कर जांघ से चिपक गया था। उसने अपनी फ़्रॉक को नीचे खींचा और कमरे से बाहर निकल आई। उसने अपने खुले टॉप की तरफ़ भी ध्यान नहीं दिया। उसने बाहर आकर दोनों हाथों को उठाकर और आंखे बंद करके एक मदमस्त अंगड़ाई ली, पर आँखें खुलते ही उसने देखा कि आशू सामने खड़ा था। वो उसे आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर यूं घूर रहा था जैसे उसने कोई अजूबा देख लिया हो।

रीना ने उसे देखा और घबरा कर वापस अपने कमरे में आ गई। आशू भी मुस्कुरा पड़ा और रीना भी कमरे में मुस्कुरा उठी।

वो तुरंत बाथरूम में जाकर नहा धो कर फ़्रेश हो गई। उसने रूपा के कमरे में जैसे ही कदम रखा तो उसे आशू वहाँ नहीं मिला। वो जा चुका था।

रात को खाना खाने के बाद रूपा अपने कमरे में आराम करने लगी, तभी रीना भी वहाँ पर आ गई।

“मौसी, मैं भी आपके पास लेट जाऊं?”

मौसी एक तरफ़ खिसक गई। रीना उनके पास लेट गई।

“मौसी, एक बात पूछूँ… ये आशू क्या करता है…?” रीना ने धीरे से पूछा।

रूपा ने उसकी तरफ़ करवट ली और कहा,”क्यूं क्या बात है … है ना सुन्दर लड़का…?”

“हां मौसी, सुन्दर तो है, पर मेरे से वो बात ही नहीं करता है…” रीना अपनी चूंचियां रूपा की बांह से दबाती हुई बोली। रुपा को रीना की बैचेनी का अहसास हो गया था। उसने अपनी बांह को उसकी चूंचियों पर और दबाते हुए कहा,”अरे, वो तो तुम्हारी ही बात करता है … कहो तो उससे दोस्ती करा दूँ…!”

रीना को अपनी चूंची पर दबाव महसूस हुआ तो उसके मन में तरगें फ़ूट पड़ी।

“सच मौसी, मान जायेगा वो…आप कितनी अच्छी हैं…!” रीना ने अपनी चूची को उनकी बांह पर पूरा दबाते हुये उन्हें चूम लिया।

“लगता है तेरा मन भटक रहा है… अब तेरी शादी करा देनी चाहिये !” मौसी ने मन की बात पढ़ ली थी।

“मौसी, शादी तो करा देना… पर मन को तो हल्का कर दो… !” रीना की आवाज में कसक थी। रूपा ने उसकी बैचेनी को देखते हुये अपने हाथों में रीना की दोनों चूंचियां भर ली।

“मेरी रीना, अभी तो ये ले … फिर समय आने दे… आशू भी मिल जायेगा…!”

रीना सिसक उठी और रूपा से लिपट गई। रूपा ने भी मौके का पूरा फ़ायदा उठाया और अपनी एक चूंची उसके मुँह से रगड़ दी। रीना ने भी रूपा को पटाना उचित समझा और उसके ब्लाऊज को ऊपर खींच कर उसकी चूंची को अपने मुँह में भर लिया। रुपा भावना में बह चली। दोनों ही वासना में लिप्त हो कर एक दूसरे के बदन से खेलने लगी थी। अंधेरा बढ़ चला था। तभी आशू ने हौले से कमरे के भीतर कदम रखा। रीना चौंक गई, वो भूल गई थी कि आशू के आने समय हो चुका है।

रूपा तो रीना को बहला कर बस आशू के आने का ही इन्तज़ार कर रही थी। रीना तो लगभग नंगी ही थी, पर रुपा ने अभी भी पेटीकोट पहना हुआ तो था पर वो पूरा ही ऊपर उठा हुआ था।

“रीना, देख आशू आया है…”

” मौ… मौसी, मैं तो मर गई, कुछ दो ना… मुझे शरम लग रही है !” रीना हड़बड़ा गई।

“शरमा मत … ये तो मुझे रोज रात को चोदता है… चल आज तू चुदवा ले …” रूपा ने उसे धीरज बंधाते हुये कहा।

” रूपा जी आपने तो अपना वादा पूरा कर दिया … वाह … रीना जी यदि कहेंगी तो ही कुछ करने का मजा आयेगा… “

“आशू जी, आप तो अपने कपड़े उतारो … रीना आपका स्वागत करेगी… रीना कुछ तो कहो !”

“जी मैं क्या कहूँ… मुझे तो बहुत लज्जा आ रही है…” रीना ने मुँह छुपा रखा था। आशू रीना के और नजदीक आ गया था।

” आपके मुख के पास कुछ है… रीना जी… मुख खोलो तो…” आशू ने कहा।

रीना ने अपना मुख खोल दिया… और आशू ने अपना कोमल, नरम चमड़ी वाला कठोर लण्ड उसके होंठो से सहला दिया। रीना के शरीर में सनसनी फ़ैल गई। उसने धीरे से हाथ बढ़ा कर उसका लण्ड पकड़ लिया,”हाय राम… इतना बड़ा…?” रीना की भारी आंखे आशू की ओर उठ गई और उसे प्यार से निहारने लगी। वो एक दम नंगा उसके सामने खड़ा था। रूपा रीना की ओर देख-देख कर मुस्करा रही थी। उसने प्यार से रीना के सर पर हाथ फ़ेरा और आशू के लण्ड को उसके सर को दबा कर रीना के मुँह में प्रवेश करा दिया। रीना ने सारी शरम छोड़ कर आशू के चूतड़ पकड़ लिये और अपने मुँह में उसे भींच लिया।

रूपा ने आशू को चूम लिया और उसकी गाण्ड में अंगुली डालने लगी। आशू झुक कर रीना के सर को पकड़ कर अपना लण्ड उसके मुँह में अन्दर बाहर करने लगा।

आशू को रूपा की अंगुली अपनी गाण्ड में बहुत भली लग रही थी। आशू जैसे रीना का मुख चोद रहा था। अब आशू ने रीना को लेटा दिया और उसकी चूंचियों को दबाने और मसलने लगा। उसके चुचूक जो बेहद कड़े हो चुके थे, उन्हें हौले हौले से सहलाने और अंगुलियों से खींचने लगा।

“आह मौसी, ऐसा मजा तो कभी नहीं आया… आशू जी, अब नहीं रहा जाता … प्लीज आ जाओ ना…”

“अभी से कहाँ रीना जी… जवानी का मजा तो लो अभी …” अब आशू के हाथ उसकी चूत की पंखुड़ियो के आस पास सहला रहे थे। बीच बीच में चूत के ऊपर रीना की यौवन-कलिका को भी सहला देता था। उसे हिला हिला कर रीना को असीम आनन्द दे रहा था। रीना की दोनों टांगें ऊपर उठने लगी थी। नतीजा यह हुआ कि उसकी गाण्ड का भूरा-भूरा कमल भी नजर आने लग गया था। आशू पंजों के बल बैठा था, सो रूपा भी आशू का आनन्द ले रही थी। कभी वो उसके लण्ड को मसल देती थी, कभी उसकी गोलियों को सहला देती थी, तो कभी उसकी गाण्ड में अपनी एक अंगुली घुसा देती थी। आशू भी थूक लगा कर रीना की गाण्ड में अंगुली घुसाने लगा था। उसकी गाण्ड के छेद को बड़ा कर रहा था, पर इस क्रिया में रीना मस्ती में बेहाल हुई जा रही थी। उसके मुख से सिसकारियाँ जोर से निकल रही थी, कभी कभी तो मस्ती में चीख भी उठती थी। आशू की अंगुलियाँ चूत में भी कमाल कर रही थी।

रूपा का दिल भी मचल उठा और जान करके उसने आशू का कड़कता लण्ड रीना की गाण्ड में रख दिया और आशू को कुछ कहा।

आशू मुस्कुरा उठा और उसने लण्ड का जोर गाण्ड के छेद पर लगा दिया। लण्ड रीना की गाण्ड में घुसता चला गया। रीना की गाण्ड तो कितनी बार उसके दोस्तो ने चोद रखी थी, सो लण्ड सरकता हुआ भीतर बैठने लगा। रीना ने भी अपनी गाण्ड थोड़ी ऊपर उठा दी। रूपा ने जल्दी से तकिया नीचे लगा दिया। रूपा ने आशू की गाण्ड में अपनी अंगुली फ़ंसाते हुये कहा,”आशू चोद दे साली को, ये तो पहले से ही खुली हुई है… लगा धक्के साली की गाण्ड में…”

“आह्ह्ह, आशू जी, जोर से चोद दो ना इसे … बहुत दिन हो गये इसे चुदवाये … आह्ह… लगा और जोर से…” रीना सीत्कार भरने लगी।

रीना की गाण्ड चुदने लगी … रीना को आनन्द आने लगा।

अब रुपा रीना के पास आ गई और उसके स्तन मुँह में भर कर चूसने लगी, कभी कभी वो उसके मुख को भी जोर से चूस लेती थी। कुछ देर तक यही दौर चलता रहा, फिर आशू ने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर चूत में घुसा दिया। रीना के मुख से आनन्द की जोर से आह निकल गई। तभी आशू ने रूपा की चूत में भी अपनी अंगुली प्रवेश करा दी। वो भी चिहुंक उठी। अब आशू का लण्ड रीना की चूत में घुस चुका था। रीना को लगा कि हाय, स्वर्ग है तो बस चूत में ही है…

रुपा भी अपनी चूतड़ आशू की तरफ़ उठाये थी और वो उसमें अपनी अंगुली फ़ंसाये हुये था। अब तो रीना की कमर और आशू की कमर बराबरी से चल रही थी। मस्त चुदाई का माहौल बना हुआ था। तीनों नशे में झूम रहे थे।

रीना तो जबरदस्त चुदाई मांग रही थी,”आशू, प्लीज ! मुझे जोर से चोदो ना… जल्दी जल्दी करो ना … मेल इंजन की तरह …”

आशू ने रुपा को एक तरफ़ किया और अपनी पोजिशन को फिर से सेट की और उसके पांव खींच कर पलंग के किनारे कर दिया और खुद खड़े हो कर पोजीशन बना ली। अब उसका लण्ड उसकी चूत के बिल्कुल सामने था।

“तो रीना रानी, चूत फ़ाड़ चुदाई के लिये तैयार हो…?”

“हां जी… अब देर ना लगाओ … मेरी तो अब फ़ाड़ दो आशू राजा !”

“लगता है पहले से मस्त चुदी चुदाई हो…!”

“आशू जी। आप भी तो मस्त चोदते हो ना… पुराने खिलाड़ी हो ना।”

तीनों ही हंस दिये। आशू ने अपना लण्ड पहले तो अपना लण्ड भीतर घुसा कर सेट कर लिया, फिर बोला,”हां जी… तैयार हो जाओ…” और कहते हुए उसने पूरा लण्ड निकाल कर पूरा ही जोर से धक्के के साथ घुसा डाला। रीना के मुख से खुशी की एक तेज चीख निकल गई। जल्दी ही दूसरा धक्का लगा जो जड़ तक चीर गया। फिर धक्के पर धक्के भीतर तक, चूत को फ़ाड़ देने वाले धक्के चलने लगे। रीना तेज धक्कों से प्रसन्न हो उठी। और उसे और तेज धक्कों के लिये प्रोत्साहित करने लगी। उसके मुख से आनन्द भरी चीखें वातावरण को और वासनामय बना रही थी। अब तो रीना के चूतड़ भी उछल उछल कर लण्ड भीतर तक लेकर चुदवा रहे थे। दोनों के दिल की धड़कनें तेज हो गई थी। पसीना छलक उठा था। रूपा दोनों का इस प्रकार का रूप देख कर विचलित हो रही थी और सोच रही थी कि आशू ने मेरी चुदाई तो कभी भी इस तरह से नहीं की थी। वो मन ही मन जल उठी।

तभी एक तेज चीख ने रूपा का ध्यान भंग कर दिया। रीना झड़ रही थी। उसका यौवन रस निकल पड़ा था। रीना अपना यौवन रस अपनी चूत लण्ड पर दबा कर निकाल रही थी। आशू को लगा जैसे कि रीना की चूत ढीली पड़ गई थी, उसमें पानी भरा हुआ था और लण्ड अब फ़च फ़च की आवाज कर रहा था। तभी रूपा ने अपने आप को आशू के सामने पेश कर दिया…

“उसका काम तो हो गया, आशू जी, मेरी ओर तो देखो, यहाँ तो आपको फिर से बेकरार एक चूत मिलेगी… उठो और मेरे से चिपक जाओ !” रूपा ने आशू को अपनी ओर खींचा। आशू का कड़कता लण्ड रीना की चूत से बाहर गया जो कि रस से नहाया हुआ था। रीना बिस्तर पर ही लोट लगा कर एक किनारे हो गई और रूपा को चुदने के लिये जगह दे दी। कुछ ही पलों में आशू का लण्ड रूपा की चूत में घुस चुका था। इस बार रुपा की बारी थी सिसकारी भरने की। पर आशू तो रीना को ही चोद कर झड़ने के करीब आ चुका था, सो रुपा को चोदते हुये कुछ देर में अपने आप को सम्हाल ना पाया और अपना वीर्य छोड़ने लगा। दोनों ही अब आशू से लिपट पड़ी और उसे अपने चुम्बनों से बेहाल कर दिया। रीना तो आशू का लण्ड मुँह में भर कर बचा खुचा वीर्य भी चट गई। रूपा और रीना भी आपस में लिपट कर एक दूसरे को प्यार करने लगी……

शेष दूसरे भाग में ! Antarvasna Sex Stories

न्यू दुल्हन सेक्स कहानी में दुल्हन अपने पति के साथ सेक्स के लिए मान नहीं रही थी तो पति ने अपने दोस्त की बीवी को उसे मनाने के लिए कहा. लेकिन दोस्त कि बीवी ने उसे अपने शौहर से ही चुदवा दिया.

दोस्तो, आपने मेरी कहानी के पिछले भाग
कुंवारी दुल्हन को सेक्स के लिए मनाया
में पढ़ा कि तबस्सुम ने सानिया के मन से सेक्स का डर निकालने के लिए उसे अपने शौहर से सेक्स करने को कहा.
तीनों एक बेड पर लेट गए.

तबस्सुम बोली- ये तो सो गयी, चलो हम भी सो जाते हैं.
जुनैद ने तबस्सुम को अपने से चिपटा लिया.

अब आगे न्यू दुल्हन सेक्स कहानी:

तबस्सुम बोली- अभी रुको, इसे सो जाने दो पूरी तरह!
पर जुनैद माना नहीं. उसने तबस्सुम को चूमना चाटना शुरू कर दिया.

तबस्सुम भी गर्म हो गयी थी.
वह भी जुनैद के होंठों से होंठ भिड़ाये उसका साथ दे रही थी.

सानिया दम साधे उनकी आवाजें सुन रही थी.

जुनैद तबस्सुम से नाईटी उतारने की जिद कर रहा था.
पर तबस्सुम ने उतारी तो नहीं पर ऊपर कर दी.

जुनैद ने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू की, तबस्सुम की आह निकल गयी.

तब जुनैद 69 हो गया और अपना लंड तबस्सुम के मुंह में दे दिया.
तबस्सुम ने उसे लपक लिया और लपर लपर चूसने लगी.

जुनैद बिल्कुल नंगा हो गया था.
उसने तबस्सुम की भी नाईटी उतार ही दी और तबस्सुम के मम्मे चूसने लगा.

तबस्सुम भी अब बेकाबू हो रही थी पर उसने अपने को काबू किया और फुसफुसा कर जुनैद से कहा- रुको, मुझे ऊपर आकर चोदना है तुम्हें! पर अभी दो मिनट रुको.

कहकर तबस्सुम सानिया से चिपटी और उसके मम्मे दबा लिए.
सानिया जगी हुई तो थी ही, वह पलटी और उसने अपने होंठ ताबस्स्सुम के होंठों से भिड़ा दिए.

तबस्सुम ने उसकी नाईटी ऊपर की और उसकी चूत में उंगली घुसा दी.
सानिया की चूत तो पहले से ही पानी पानी हो रही थी.

तबस्सुम ने सानिया की नाईटी उतारने की कोशिश की तो सानिया हिचकती रही, पर गर्म वह भी हो चुकी थी.
तब तबस्सुम ने जबरदस्ती उसकी नाईटी उतार ही दी और उससे चिपट गयी.

सानिया उसे कस के भींचे थी.

तबस्सुम के पीछे से जुनैद चिपटा और अपना लंड उसकी गांड की दरार से टकराने लगा.
जुनैद उसकी पीठ चूम रहा था.

तबस्सुम ने जुनैद का हाथ पकड़ा और आगे सानिया के मम्मों पर रख दिया.

सानिया सन्न …
जुनैद के हाथ उसके नाज़ुक मम्मों पर मचलने लगे.

तबस्सुम से सानिया से पूछा- लंड पकड़ेगी जीजू का?
सानिया कुछ नहीं बोली.

तबस्सुम ने उसका हाथ पकड़ा और उसे थमा दिया जुनैद का टनटनानाता हुआ लंड.

सानिया ने एक बार तो उसे मजबूती से पकड़ा पर शर्मा कर छोड़ दिया.
वह तबस्सुम से बोली- दीदी, मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो सहा, मैं जा रही हूँ.

तबस्सुम ने उसे रोका और उसके कान में फुसफुसा कर कहा- अब मैं जुनैद के साथ चुदाई करने जा रही हूँ, तू सब देखना और मन करे तो तू भी आ जाना.

तब तबस्सुम सानिया को छोड़ जुनैद की और पलटी और उसे चूमते हुए उसके ऊपर चढ़ गयी.

जुनैद उसके मम्मे मसलने लगा और तबस्सुम ने उसे चूमते हुए उसका लंड पकड़ लिया और अपनी चूत में कर दिया.
एक धक्का नीचे से जुनैद ने मारा, तबस्सुम की आह निकली.
पर तब्सस्सुम लगी उछलने और जोर जोर से जुनैद को चोदने लगी.

जुनैद और तबस्सुम दोनों ही अश्लील भाषा पर उतर आये.

उस समय जुनैद बोल रहा था- आज तो तेरी चूत को फाड़ कर ही रख दूँगा. बहुत मज़ा दे रही हो आज तुम!
तबस्सुम बोली- बड़े आये फाड़ने वाले, आज तो मैं तुम्हें निचोड़ दूंगी. फिर सानिया भी तो है. आज तो हम दोनों मिलकर आपका कचूमर निकाल देंगी.

तबस्सुम पर चुदाई का भूत सवार था; वह बहुत मजे ले लेकर चल रही थी.

सानिया उन दोनों की चुदाई बड़े ध्यान से देख रही थी, उसके हाथ अपने मम्मे मसल रहे थे.

तब सानिया ने तबस्सुम की टांग पर चिकोटी काटी.
तबस्सुम ने देखा और मुस्कुरा कर बोली- जुनैद, यह तो हमारी गलत बात है कि हम मजे ले रहे हैं और बेचारी सानिया अकेली है. इसे भी थोड़ा मजे दो, पर बहुत आराम से और जब ये रोके, तब रुक जाना.

कहकर तबस्सुम ऊपर से उतर गयी और सानिया को बीचे में करके उसके पीछे लेट गयी.

जुनैद ने बहुत अहिस्ता से सानिया को चूमा.
पीछे से तबस्सुम उसकी पीठ और गर्दन पर चूम रही थी.

सानिया भी अब मचल उठी; वह जुनैद से चिपट गयी.
दोनों के होंठ भिड़ गए.

जुनैद बहुत आहिस्ता अहिस्ता आगे बढ़ रहा था.
उसे सब तबस्सुम ने पहले ही बता दिया था.

जुनैद ने अब सानिया को सीधे किया और उसके मम्मे चूमने लगा.
सानिया के हाथ में उसका लंड था, सानिया उसे मसल रही थी.

तबस्सुम नीचे झुककर उसकी चूत को चूमने लगी.
सानिया की चूत पानी बहा रही थी.

तबस्सुम अब वहां से हटते हुए बोली- जुनैद, सानिया का बहुत ध्यान रखना, नाज़ुक कली है. मैं अभी वाशरूम से आती हूँ.

कहकर तबस्सुम बेड से नीचे उतरी.
सानिया एक बार तो बुदबुदाई- दीदी … तुम कहाँ जा रही हो?
पर जुनैद ने उसके होंठों से अपने होंठ भिड़ा दिए.
दोनों फिर लिपट गए.

जुनैद ने अपनी उंगली सानिया की चूत में कर के उसकी मालिश शुरू की, वह उसका दाना मसल रहा था.

अब जुनैद ने सानिया को अपने ऊपर लिटा लिया.
दोनों के होंठ भिड़े थी, जीभ आपस में टकरा रही थीं.

जुनैद ने अपना लंड सानिया की चूत के मुहाने पर रखा और उसे नीचे से ऊपर उठाने लगा.

अब सानिया का डर कम हो रहा था.
उसने भी अपनी चूत ढीली छोड़ दी तो जुनैद का लंड थोड़ा अंदर दरक गया.

सानिया को दर्द हुआ, वह ऊपर से उतर गयी और बोली- अंदर मत करो, दर्द होता है.

जुनैद ने हँसते हुए सानिया की चूत चाटनी शुरू की और ढेर सारा थूक उसमें भर दिया.

अब जुनैद सानिया के मना करने के बाद भी ऊपर लेटा और उसके मम्मे और होंठ चूमते चूमते हल्के से फिर अपना लंड उसकी चूत में कर दिया.

सानिया फिर कसमसाई, उसने कोशिश की उठने की.
पर जुनैद ने उसके चेहरे को कस के पकड़ा था और चूमते हुए अपना लंड और अंदर कर दिया.

अब जुनैद ने फिर एक धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर कर दिया.
सानिया चीखी, बोली- दर्द हो रहा है, मुझे छोड़ो. दीदी तुम कहाँ हो, जीजू को हटाओ, मैं मर गयी.

पर जुनैद ने अपने धक्के शुरू कर दिए.
जल्दी ही सानिया को दर्द में मज़ा आने लगा; वह भी जुनैद का साथ देने लगी.

तबस्सुम आ गयी थी उसने सानिया के गालों को सहलाते हुए उसे चूमना जारी रखा.
अब तो जुनैद उसे ताबड़तोड़ चोद रहा था, सानिया भी उसका भरपूर साथ दे रही थी.

जुनैद को सेक्स के लिए न्यू दुलहन की नयी नयी चूत मिली थी, पूरी कसी हुई.

अब उसका होने वाला था.
उसने तबस्सुम से पूछा- मेरा होने वाला है, कहाँ निकालूं?
तबस्सुम बोली- बाहर निकलो जल्दी, अंदर मत कर देना.

जुनैद ने अपना लंड बाहर निकाला और सानिया के मम्मों पर खाली कर दिया.
सानिया के मम्मों और पेट पर जुनैद का वीर्य फ़ैल गया.
उसमें खून के छींटे भी थे.

सानिया की झिल्ली फट गयी थी.
चादर पर भी खून के धब्बे थे.
सानिया को दर्द भी हो रहा था.

तबस्सुम ने पहले ही गर्म पानी लाकर रख लिया था.
उसने तौलिया भिगो भिगो कर सानिया की चूत और पेट साफ़ किया और उसकी गर्म पानी से सिकाई करी.

सानिया जब कुछ नार्मल हुई तो तबस्सुम ने पूछा- कैसा रहा?
तो सानिया शर्मा कर बोली- दर्द तो बहुत हुआ पर मज़ा भी बहुत आया.
कहकर सानिया ने तबस्सुम को चूम लिया.

तबस्सुम किचन से उसके लिए हल्दी का गर्म दूध लायी और एक पेन किलर उसको दी और बोली- कल सब ठीक हो जाएगा, अब तू आराम से नीचे गद्दे पर सो! मैं भी ज़रा अपनी चुदाई पूरी कर लूं.
कहकर वह जुनैद से लिपट गयी.
जुनैद भी बहुत खुश था.

सानिया सुबह जल्दी उठकर अपने कमरे में जाकर सो गयी.

जुनैद के काम पर जाने के बाद तबस्सुम ने सानिया को जाकर देखा तो वह सो ही रही थी.
तबस्सुम ने उसे सोने दिया.

थोड़ी देर में सानिया उठी तो बोली- मेरे को नीचे पेट में दर्द अभी भी है.
तबस्सुम बोली- कोई बात नहीं, अभी नहाते में गर्म पानी की सिकाई कर लेना और नाश्ता करके दवाई ले लेना. और आज तुम आराम ही करो. उमेश आयेगा तो मैं कह दूंगी कि तुम्हें कल बुखार था.

दोपहर को उमेश का फोन आया कि वह वापिस तो आ गया है पर फैक्ट्री में ही है और शाम को ही आएगा.

शाम तक सानिया काफी ठीक थी.

रात को सबने साथ साथ खाना खाया.

तबस्सुम ने उमेश और सानिया को एक साथ ही सुलाया पर उमेश से कह दिया कि चूमा चाटी के अलावा कुछ न करे. एक दो दिन में उनकी अधूरी सुहागरात पूरी हो जाएगी.
उमेश ने वादा किया कि वह सानिया का ध्यान रखेगा.

तबस्सुम के कहने पर उमेश ने बेड पर सानिया के पैरों की मालिश की जबकि सानिया बार बार मना कर रही थी.
पर यह सानिया को बहुत अच्छा लगा. बाद में उसने उमेश को शायद पहली बार कस के चूम कर थैंक्स कहा.
रात को सानिया उमेश की बाहों में ही सोयी.

अगले दिन सानिया बिल्कुल नार्मल थी.

दोपहर को तबस्सुम ने सानिया से कहा कि आज रात वह उमेश को उसका हक दे दे. दोनों अपनी सुहागरात पूरी करके मनाएं.

सानिया डर तो रही थी कि फिर दर्द होगा.
तबस्सुम ने हंस कर कहा- अब दर्द कम होगा और धीरे धीरे ये दर्द मज़े में बदल जाएगा.

सानिया बोली- कभी उमेश को पता चल गया तो?
इस पर तबस्सुम बोली- चूत तो चुदने के लिए ही बनी और लंड चोदने के लिए! तू घबरा मत उमेश मुझे भी चोद चुका है. बस आपस में चारों की शर्म बाकी है.

तबस्सुम ने सानिया को समझाया कि अभी कुछ दिनों तो वह और उमेश ही चुदाई के मजे लें और फिर जब सबकी सहमति हो तो चारों एक साथ सेक्स किया करेंगे बदल बदल कर!

सानिया शर्मा गयी और बोली- दीदी, तुम तो बहुत बदमाश हो. पर अभी उमेश को कभी मत बताना कि मैं जीजू से चुदी हूँ.
तबस्सुम ने उससे वादा किया.
तभी तबस्सुम ने जुनैद को भी फोन करके कह दिया कि भूल से भी उमेश को रात की बात मत बताना.

दोपहर को तबस्सुम ने सानिया के हाथ परों पर मेहंदी लगवाई और शाम को उसे खूब सजाकर अपने कमरे में बिठा दिया.
तबस्सुम ने जुनैद को फोन कर दिया कि कमरे की सजावट के कुछ गुलाब की फूल माला और पंखुड़ी लेते आये, आज उमेश सानिया की सुहागरात है.

रात को जब जुनैद और उमेश आये तो तबस्सुम ने उमेश से कहा- तुम जाकर नहा लो, तैयार हो जाओ. तुम्हारी दुल्हन तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

जब तक उमेश नहाया तबस्सुम और जुनैद ने उसका कमरा सजा दिया.

उमेश नहाकर आया और बोला- सानिया कहाँ है?
तबस्सुम ने कहा- मेरे कमरे में तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

उमेश उनके कमरे में गया तो दुल्हन के लिबास में सानिया उसका इंतज़ार कर रही थी.
दोनों लिपट गए, दोनों के होंठ मिल गए.

उमेश बहुत खुश था सानिया को खुश देखकर.

तभी दरवाजे पर खड़े तबस्सुम और जुनैद बोले- बाक़ी का काम बेड पर कर लेना, पहले चलो खाना खा लें.

सबने खाना खाया और फिर उमेश सानिया का हाथ पकड़कर उसे अपने कमरे में ले गया और दरवाज़ा बंद कर लिया.

सानिया उमेश से चिपट गयी और बोली- तुम बहुत अच्छे हो, मैंने तुम्हें बहुत तड़पाया, मेरी गलती थी. मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ, बस डर गयी थी.

उमेश ने उसे बाँहों में भर कर कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो, मैं अपने पर काबू नहीं रख पाया. एक दिन में ही तुम्हें पूरा पाना चाहता था. मैं वैसे ही करूँगा, जैसे तुम्हें अच्छा लगेगा.

सानिया ने अपनी बाहें फैला दीं- मैं पूरी तुम्हारी हूँ, जैसे मर्जी करो, बस मुझे ढेर सारा प्यार दो.
कहकर सानिया ने धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू किये.

उसने उमेश से आँख बंद करने को कहा.
सारे कपड़े उतार कर वह नंगी ही नेड पर चादर के अंदर घुस गयी और फिर उमेश से कहा- अब तुम भी कपड़े उतार कर आ जाओ.

उमेश ने फटाफट कपड़े उतार फेंके और घुस गया चादर के अंदर!
उसे बहुत आश्चर्य हुआ सानिया को बिना कपड़ों के देख कर.

सानिया बोली- लाईट बंद करो, मुझे शर्म आती है.
उमेश ने लाईट बंद करके एक छोटी लाईट जला दी.

सानिया ने उसे कस के चिपटा लिया अपने से.
उमेश सानिया की खूबसूरती पर फ़िदा था. उसके मम्मे ज्यादा भारी तो नहीं थे पर नुकीले थे.

सानिया ने महसूस किया कि उमेश का लंड जुनैद के मुकाबले ज्यादा मजबूत था.
उसे घबराहट तो हुई पर फिर वह मन ही मन मुस्कुराई कि ये मज़ा भी तो ज्यादा देगा.

उमेश सानिया के मम्मे चूमता हुआ नीचे झुका और उसकी चूत में अपना मुंह लगा दिया.

सानिया ने बनावटी बात कही- ये क्या कर रहे हो?
उमेश हंस कर बोला- जन्न्नत की गुफा को घुसने से पहले चूम रहा हूँ.

उमेश ने खूब देर तक उसकी चूत को चूमा चाटा, अपनी जीभ को उसने जितनी गहराई तक पहुंचा सकता था, पहुंचाया.

जब उमेश ने सानिया से अपना लंड चूसने को कहा तो सानिया बोली- नहीं, मुझे नहीं चूसना.
उसने कभी जिन्दगी में किसी का लंड चूसा भी नहीं था.

पर उमेश के बार बार कहने पर सानिया ने थोड़ी देर के लिए उमेश का मूसल चूस ही लिया जो उसके मुंह में मुश्किल से आ रहा था.

अब उमेश ने तबस्सुम की राय पर वेसलीन अपने लंड पर पोती और सानिया को चूमते हुए उसकी टाँगें फिलाई और धीरे से अपना लंड सानिया की चूत में दरकाया.
सानिया कसमसाई पर उसने हिम्मत बनाए रखी.

अब उमेश ने धीरे से पूरा लंड ही घुसेड़ दिया.
सानिया की चीख निकल गयी पर वह उमेश को कस के भींची रही.

अब उमेश ने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया.
जल्दी ही सानिया भी उसका साथ देने लगी.

अब उमेश पूरी मस्ती से पेलमपेल करने लगा.

सानिया की वासना का वेग भी पूरे उफान पर था.
आखिर सुहागरात थी उसकी.

उमेश ने मसल मसल कर सानिया के मम्मे लाल कर दिए थे.
सानिया के चेहरे पर लिपस्टिक फ़ैल गयी थी. उसका सिंदूर माथे पर फ़ैल कर गवाही दे रहा था कि सुहागरात कामयाबी की ओर बढ़ रही है.

सानिया के नाखूनों की धारें उमेश की पीठ पर अपने निशाँ अंकित कर चुकी थी.

उमेश ने एक झटके में अपना सारा माल सानिया की चूत में भर दिया और निढाल होकर सानिया के पेट पर ही पड़ गया.
सानिया ने उसके कस के भींच लिया.

दोनों के होंठ फिर चिपक गए. न्यू दुल्हन सेक्स करके दोनों दोनों बहुत खुश थे.

उमेश सानिया की बगल में लेट गया.
सानिया की चूत से उमेश का गर्म लावा बाहर आकर बेड पर फ़ैल गया था.

उसने पास रखे तौलिये से अपने को और उमेश को पौंछा.
अभी दोनों का मन नहीं भरा था.

थोड़ी देर आराम करने के बाद एक और राउंड लगाने की बात कर के दोनों चिपक गये.
अगले दिन तबस्सुम के दरवाज़ा खटखटाने पर ही उनकी आंख खुली.

सानिया ने कपड़े पहने और दिर खोला और तबस्सुम से चिपट गयी.
उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे.

उमेश भी बाहर आया, वह जुनैद के गले लगा और तबस्सुम को गले लगाकर कहा- तुमने मेरी सानिया मुझे दे दी.

चारों बहुत खुश थे.

यह तय हुआ कि आज रात सब लोग बाहर खाना खायेंगे और मूवी देखेंगे.

तबस्सुम हंस कर बोली- हाँ भाई, दावत-ए-वलीमा तो बनती ही है.

Sex Stories

मेरा नाम मुकेश है, मैं पहली Sex Stories बार अपनी ए़क कहानी आपको बताने जा रहा हूँ. यह कहानी एक सच्ची कहानी है.

मैं जब 18 साल का था तब गयारहवीं कक्षा में पढ़ रहा था. मेरा एक सुशील नाम का दोस्त (बदला हुआ नाम) दोस्त था. हम एक ही कक्षा में पढ़ते थे. मैं हर रोज उसके घर पढ़ाई करने जाता था.
सुशील की माँ बहुत ही सेक्सी थी, उसका फिगर 36/32/36 था. वो चलती तो क्या वाह… वाह क्या कहूं मैं! शब्द ही नहीं हैं.
गोरा रंग और काले बाल! जी करता उसकी जुल्फों में खो जाऊँ! क्या बताऊँ यारो कि कैसी थी वो!
जाने दो…

जब उसे मैं देखता था तब मेरा 6 इंच का लौड़ा खड़ा हो जाता था. रोज वो हमें पढ़ाती थी.

एक दिन मैंने स्कूल को दांडी मार दी क्योंकि मेरा सर बहुत दर्द कर रहा था. लेकिन मैं पढ़ाई करने के लिए आंटी के घर चला गया. आंटी घर में अकेली थी. अंकल काम पर गए थे और सुशील स्कूल में था.

मैं अन्दर घर में आया और अपना होम वर्क करने बैठा. तभी आंटी ने पूछा- आज स्कूल क्यों नहीं गए?
तो मैंने कहा- मेरा सर बहुत दर्द कर रहा था आंटी!
तभी आंटी बोली- चलो! मैं दबा देती हूँ!
मैंने कहा- जाने दो आंटी अब! कुछ नहीं, ठीक हो जाएगा.

आंटी मान ही नहीं रही थी तो उन्होंने टाइगर बाम निकला और मेरे माथे लगाया.
मैंने कहा- बस करो आंटी! अब दर्द नहीं है.
फिर भी आंटी ने बाम लगाया उनका हाथ लगते ही मैं रोमांचित हो उठा, मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. आंटी ने उसे देख लिया और मेरे तरफ देखती हुई हंसती रही.
आंटी ने मुझसे कहा- कल हम गाँव गए थे तो बहुत घूमे तो उसकी वजह से मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा है.
तो मैंने उनसे पूछा- मैं आपका बदन दबा दूँ?
तो आंटी ने कहा- बड़ी मेहरबानी होगी!
तो आंटी ने कहा- यहाँ नहीं, चलो बेडरूम में चलते हैं!
मैं उनके पीछे उनके बेडरूम में चला गया.

तभी आंटी ने कहा- जरा रसोई से तेल तो लाना!

मैं तेल लेने रसोई घर में गया और तेल ले के कमरे में आया तो मैंने देखा कि आंटी केवल पेटोकोट और ब्लाउज में सोफे पर लेटी हुई थी.उन्होंने कहा- शरमाओ मत! अंदर आओ!
मैं अन्दर गया, उन्होंने उनके पास बैठने को बोला, मैं उनके पास बैठा, मुझे शर्म आ रही थी. मेरा लौड़ा पूरा खड़ा हो चुका था. अब मुझसे रहा जा नहीं था.

आंटी ने अपना पेटोकोट घुटने तक ऊपर किया, फिर मैंने धीरे धीरे उनकी जांघ पर तेल लगाना शुरू किया.
मेरा हाथ लगते ही आंटी भी उत्तेजित हो गई, उन्होंने पेटोकोट और ऊपर किया, मेरा हाथ और ऊपर गया. थोडी देर बाद मुझे पता ही नहीं चला कि मेरा हाथ आंटी की पेंटी के पास पहुंच गया.
तभी आंटी ने पूछा- किसी लड़की को अब तक चोदा है क्या?
मैंने कहा- नहीं! अब तक नहीं!
तो उन्होंने मुझे कहा- चलो, आज मैं तुझे चुदाई सिखाती हूँ!
मुझे अब भी शर्म आ रही थी.

फिर उन्होंने अपना ब्लाउज निकाला, मैं उनकी चूचियों की तरफ देखता ही रहा- हाय इतनी बड़ी बड़ी उनकी चूची!

फिर आंटी ने मेरे कपड़े उतारने के लिए कहा. मैंने अपने कपड़े उतारे. फिर आंटी ने अपनी जांघें फैलाई और मुझे उनकी गाण्ड चाटने को कहा. मैं बड़ी उत्तेजना से उनकी गाण्ड चाटने लगा. आंटी के मुँह से आवाज निकलने लगी- इ…स ..आ आ जरा धीरे!

मुझे बड़ा मजा आ रहा था. फिर आंटी मेरा लंड चूसने लगी. क्या बताऊँ यारों- क्या मजा आ रहा था!
फिर आंटी ने मेरा लौड़ा ले के अपनी गांड में डाला. फिर मैंने जोर से आंटी की चुदाई की.

अब 4 साल हो गए, जब भी आंटी मुझे फोन करके बुलाती हैं तब तब मैं आंटी की चुदाई करने जाता हूँ. सुशील को यह बात अब तक मालूम नहीं है. Sex Stories

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