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सभी अन्तर्वासना पढ़ने वाले Hindi Sex Stories पाठकों को पम्मी पंजाबन का खुली योनि के साथ कोटि-कोटि प्रणाम। मेरा नाम पम्मी है। मैं पंजाब की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र २२ वर्ष है। मेरी शादी आज से ठीक २ वर्ष पहले हुई थी। शादी के पहले मैंने अपने हर आशिक के साथ जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाए।
एक बार मम्मी ने मुझे रात को अपने घर की छत पर अपने पड़ोसी से चुदवाते हुए पकड़ लिया। यहाँ मैं जिक़्र करना चाहती हूँ कि पापा के पीछे से मैंने अपनी माँ को बहुत से गैर मर्दों के साथ हम-बिस्तर होते देखा और मेरी बड़ी बहन २ बार लड़कों के साथ भाग गई। दूसरे नम्बर वाली बहन अपने आशिक़ के साथ शादी करके चली गई। एक भाई है जिसे मम्मी ने हॉस्टल में रखा है। जिस बेटी ने बचपन से अपनी माँ को ग़ैर मर्दों की बाँहों में झूलते देखा हो वो लड़की बड़ी होकर वही सब करेगी ही।
जिस दिन मेरी माँ ने मुझे पकड़ा, वो कुछ कहती, उसके पहले मैंने कहा- तुम कौन सी दूध की धुली हो?
चलो दोस्तों, इसी वज़ह से मेरी शादी कर दी गई प्रदीप शर्मा के साथ। पहली रात वो दारू के नशे में धुत्त होकर आया। उसने मुझे कुछ ही पलों में नंगी करके अपना लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया। लौड़ा देखकर मैं भी गरम हो गई। वो भी जल्दी मुझ पर सवार हो गया। उसका लंड सामान्य आकार का था।
मेरे जैसी लड़की जिसने शादी के पहले मन-मर्ज़ी के हट्ठे-कट्ठे लड़कों के साथ चुदाई के मज़े लिए हों, उसके लिए छोटा ही था। उसके नशे ने मेरी पोल नहीं खुलने दी। मैंने झूठ-मूठ दर्द का नाटक किया और अपनी चूत को साँस खींच कस सा लिया। सुहागरात के बाद भी वो बिस्तर में दारू पी कर आता।
मेरी ननद पेट से है, और सासू माँ उसका ख़्याल रखती है, और मुझे बाँझ कह कर ताने मारती। ननद की वज़ह से ननदोई जी भी रोज़ रात को अपने कार्यालय से इधर ही आते, क्योंकि वो अकेले डिनर कहाँ से करते। उनका हमारे यहाँ आना मुझे बहुत भाता। उनकी नज़र भी शुरु से ही मेरे प्रति ख़राब थी। इसी बीच मेरे पति का आबूधाबी का वीज़ा आ गया। पापा ने उसको वहाँ काम दिलवा दिया और मुझे जल्दी साथ ले जाने को कह वो दुबई चले गए।
दोस्तों चाहे वो लण्ड छोटा था, लेकिन लण्ड तो लण्ड ही है, इसके बिना औरत शान्त नहीं होती। मैं भी प्यासी रहने लगी, बिस्तर पर करवट बदलती रहती। तभी एक रोज़ सासू-माँ ननद का चेकअप करवाने के लिए ले गई। ननदोई जी को ऊपर वाला हिस्सा दिया हुआ था। जब तक उनके बच्चा नहीं होता, दीदी ऊपर नहीं जाती थी।
ननदोई जी को मैं सुबह में कॉफी दे कर आती थी। ननदोई जी का आकर्षण मेरी ओर बढ़ता जा रहा था, जिसकी वज़ह मैं भी थी और वो भी। दोनों एक-दूसरे की आँखों में कुछ-ना-कुछ तलाश से करते रहते। वासना की आग बराबर लगी ती। मैं भी अब ननदोई जी की हरक़तों को रोकती नहीं। जानबूझ कर गहरे गले की कमीज़ पहन उनको पानी वगैरह देती, और देते वक्त सामने झुक जाती। वो भी मुझे दिखाकर पैन्ट के ऊपर से ही लंड को खुजलाते। एक-दो बार रसोई में निकलते हुए मेरी चूचियाँ भी उन्होंने दबाईं।
एक शाम मम्मी ननद को चेक करवाने अस्पताल गईं थीं। इधर मैं अकेली थी। तभी ननदोई जी आए, मैं जानबूझ कर अपने बिस्तर पर लेट गई। अपनी कुर्ती को इस तरह सरका दिया, और ब्रा भी खोल दी जिससे मेरी क़हर ढाती प्यासी जवानी दिखने लगी। मेरे दोनों मम्मे साफ़ दिख रहे थे। तभी दरवाज़ा खुला और आवाज़ आई, “मम्मी !”
जब किसी ने उत्तर न दिया तो वो मेरे कमरे में पहुँचे और देखकर आवाज़ दी। मैंने सोने की ऐक्टिंग की।
वो कुण्डी चढ़ा कर मेरे बिस्तर पर बैठ गए, फिर आवाज़ दी। मैं चुप ही रही। वो आहिस्ते से मेरे पैरों की तरफ बैठ अपना हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लगे। साथ में एक हाथ से मेरा मम्मा दबोच लिया और निप्पलों को चूसने लगे। सीईईईईई मैंने आँखें खोलीं और उनको अपने ऊपर गिरा लिया। अचानक से यह देख वो हैरान रह गए।
मैंने उनकी शर्ट उतार कर उनकी घने बालों से भरी छाती पर हाथ फेरते हुए काट लिया। वो मेरे होंठों को चूसने लगे। नीचे से ऊँगली से योनि के दाने को मसलने लगा। मैं पूरी तरह गरम पड़ी हुई थी। मैंने जल्दी से पैन्ट के ऊपर से लंड पकड़ लिया। उन्होंने तुरन्त पैंट और अण्डरवियार उतार दिया।
बाप-रे-बाप, ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा साँवले रंग का लंड पकड़ते ही मेरी योनी में खुज़ली होने लगी। मैंने झट से उसका लंड बाहर निकाल और मुँह में भर कर चपड़-चपड़ करते हुए चूसने लगी। वो सीधे लेटे हुए अपने पाँव के अँगूठे से मेरी योनि मसलने लगे। फिर उन्होंने 69 में आकार बना कर अपनी पूरी ज़ुबान अन्दर डाल दी, बोले, “भाभी जी बहुत तड़पाया है आपने, आज मसल दूँगा आपके कोमल बदन को।”
मैंने कहा, “आपने भी कम नहीं तड़पाया है, दूर से इस लंड को खुज़लाते थे, वो भी इतना सॉलिड लम्ड। कितने दिनों से मेरे अन्दर कोई लण्ड नहीं गया है।”
मेरी कसी हुई गीली योनि को देख कर वह स्वयं को रोक नहीं पाए और बीच में बैठ लंड मेरी योनि पर रखते हुए धक्का मारा। थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने भी दाँतों को भींचते हुए सब सह लिया, क्योंकि मैं एक खेली-खाई लड़की थी। पता था कि मज़ा तो मोटा लंड ही देता है। एक बार दर्द के बाद जो मज़े देगा, वह मैं अच्छी तरह से जानती थी। फिर उनका पूरा लंड योनि में डलवा लिया।
आह्ह्ह ह्हहह ! दोस्तों ! इतना मोटा लौड़ा मैंने शादी से पहले नहीं लिया था। वेबसाईटों पर देखा था, क्या मर्द था वो, असली देसी घी खा-खा कर उसका सारा शरीर ही शक्तिशाली हो गया था। उनकी जाँघों में क्या दम था कि ज़ोर-ज़ोर से मुझे रौंदने लगे। दनादन मेरे मुँह से अचानक गन्दी बातें निकलने लगीं।
मैं जब चुदती थी शादी से पहले, तब इन्हीं गन्दी बातों से मुझे और गर्मी मिलती। ओह… यस्स्स बहनचोद… मार हरामी… मार हरामी… तेरी औरत पेट से है ना। मुझे अपनी रंडी समझ… आह्ह्हहह उह्ह्ह्हहह उसने लौड़ा निकाल लिया। मुँह में डाल दिया। गीला लौड़ा मैंने चाट-चाट साफ़ कर दिया और लॉलीपॉप की तरह चूस के बिल्कुल एक नंगी कुतिया बन गई।
बहुत दिनों से लौड़े की भूखी थी, भूल गई कि हमारा रिश्ता क्या है। बस दोनों के सिर पर चुदाई का भूत सवार था। थोड़ा चूसने के बाद जब मेरी योनि में लौड़े की प्यास बढ़ने लगी तो ननदोई जी को समझ में आ गया कि अब घोड़ी की तरह चुदने के लिए तैयार है।
मैं उनके सामने घुटने टेक घोड़ी बन गई और वो पीछे से मेरी योनि को फटाफट चोदने लगे। आहा… ननदोई जी फाड़ डालो आज इसको… कसम से मैं आपकी दीवानी थी। और मेरी बातें सुन-सुन कर वो और तेज़ी से लौड़ा आगे-पीछे करने लगे। वाह क्या लौड़ा था। माँ क़सम मान गई.. कई लड़कों ने मुझे चोदा था लेकिन ननदोई जी के तेज़ धक्कों से मैं पिघल चुकी थी, और मैं झड़ गई।
लेकिन ननदोई जी असली मर्द थे, उन्होंने मुझे फिर से सीधा लिटा कर दोनों टांगों के बीच आसन लगा लिया। मेरी योनि उनके लौड़े की रगड़ सहन नहीं कर पाई, पर अभी उनका काम अभी कहाँ बना था,। उन्होंने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख कर मेरी गांड के छेद पर थूक लगा कर अपना लंड पेल दिया। ईईईईईई… कमीने यह क्या किया मररररर गई… उईईईई माँआआआआ.. पूरा लौड़ा अन्दर गया और फिर तेज़ धक्कों से अब मुझे मज़ा आने लगा, और मैं नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी और वो भी मेरी इस हरक़त से झड़ने के क़रीब आए तो लंड योनि में डाल दिया और फिर उनके लौड़े ने मेरी कोख में पिचकारी मारी। उसके पानी से मैं दूसरी बार झड़ गई।
दोस्तों, उसके बाद मेरे और ननदोई जी मैं अवैध सम्बन्ध बन गए। वो जितने दिन रुके, जब भी माँ ननद के चेकअप या किसी काम से सासू-माँ अकेली जाती लेकिन ननद का पेट अधिक निकल आया, तो वह अपने कमरे में रहती, मैं और ननदोई मज़े लेते। और दोस्तों ठीक हफ़्ता पहले मेरे पैर भी भारी हो गए। सासु माँ खुश हैं। पति को फ़ोन पर उसने बताया, वह भी खुश है। लेकिन मैं और ननदोई जी जानते हैं कि बच्चा हम दोनों का है।
मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, बताना मत भूलना। मैं जल्दी अपनी चुदाई के अन्य किस्से आपके साथ बाँटूँगी, क्योंकि मुझे अपने बिस्तर की बातें लोगों तक ले जाने से अजीब सी गर्मी मिलती है।
नमस्कार Hindi Sex Stories
वर्जिन गर्लफ्रेंड सेक्स कहानी में मेरी नजर एक लड़की पर थी पर मेरी दोस्ती उसकी बहन से हो गयी. लेकिन फिर भी मैं उसी लड़की को पसंद करता था.
दोस्तो, मेरा नाम नोनू है. यह नाम मेरी जान ने रखा है.
मैं हापुड़ उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ.
मैं लॉ पोस्ट ग्रेजुएट हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 4 इंच है और रंग साफ है. देखने में भी मैं ठीक ठाक हूँ.
आज मैं आपको एक खुद की सेक्स कहानी बता रहा हूँ, यह वर्जिन गर्लफ्रेंड सेक्स कहानी बिल्कुल सच है.
दोस्तो, वैसे तो मेरा अफेयर बहुत सारी लड़कियों के साथ रहा है और मैंने कई लड़कियों के साथ सेक्स भी खूब किया है.
लेकिन आज जो मैं आपको बताने जा रहा हूं, वह उस लड़की की है … जिसे आज मैं सच्चे दिल से प्यार करता हूँ.
यह बात उन दिनों की है, जब मैं एलएलबी के पहले साल में था और वह 12वीं में थी.
उसका नाम कशिश था. नाम की तरह उसमें भी बहुत कशिश थी.
वह लगभग 5 फुट हाईट की, एकदम साफ परियों की तरह सफेद रंगत वाली लड़की है, उसकी 32-28-34 की साइज है.
कशिश के बाल बहुत लंबे हैं, जो उसके चूतड़ों से भी नीचे झूलते हैं.
वह देखने में किसी हसीना से कम नहीं लगती है.
शुरूआत में जब मैं उसको देखता था तो देखता ही रह जाता था.
मैं उसे बहुत पसंद करता था और उसे अपनी जीएफ बनाना चाहता था.
लेकिन मेरे दोस्त मुझे बताते थे कि वह मुझसे बहुत जलती है. वह मुझसे कभी बात ही नहीं करेगी.
मैं फिर भी उसके पीछे पड़ा रहता था.
कहानी में एक अजीब सा मोड़ तब आया, जब मेरी बात उसकी चचेरी बहन से हो गई.
वह लड़की ज्यादातर समय कशिश के साथ ही रहती थी.
अब मेरी बातें उसकी बहन से होने लगी थीं तो कशिश भी हमारी बातें सुनती थी.
मेरी बातें तो उसकी बहन से होती थीं लेकिन मेरे मन में हमेशा कशिश ही रहती थी.
मैं हमेशा सोचता था कि कैसे कशिश से अच्छे से बात हो जाए.
काफी समय गुजर गया, मेरी उससे बोलने की हिम्मत नहीं हुई.
उसकी बहन भी उसके बारे में मुझे बताती रहती थी कि कशिश तो उससे कहती है कि तुम उससे बात करो.
जब उसकी बहन मुझे कशिश के मन की बात बता दी थी तो पता नहीं क्यों मुझे अन्दर से कुछ बेताबी सी महसूस होने लगी थी कि क्यों न कशिश से जल्दी से जल्दी बात की जाए.
कशिश की बहन मुझे यह भी बताती थी कि कशिश तीन चार लड़कों से एक साथ बात करती है और सभी को पागल बनाती है.
लेकिन मेरा दिल नहीं मानता था. मैं हमेशा उसी के बारे में सोचता था.
एक दिन जब मुझे मौका मिला तो मैंने किसी तरह से कशिश से अपना नंबर शेयर किया.
मुझे लगा उसने मेरा नंबर ले लिया है.
लेकिन मेरी किस्मत खराब थी.
वह मेरे नंबर के कुछ अंक भूल गई जिस वजह से वह मुझे कॉल ना कर सकी.
जबकि मुझे उसकी कॉल का इंतजार था.
इसी बीच उसकी बहन मेरे एक फ्रेंड से बात करने लगी और उसने उसके साथ सेक्स भी किया.
जब मुझे इस बारे में पता लगा, तो मैंने उसे छोड़ने का फैसला कर लिया.
मैंने निश्चय कर लिया कि अब कुछ भी हो जाए, मुझे उससे बात नहीं करनी.
उसी दौरान मेरे पास कशिश का फोन आया.
वह बोली- अब तुम मेरी बहन से बात क्यों नहीं करते?
मैंने उसे बताया- तुम्हारी बहन फ्रॉड है. वह कई लड़कों से एक साथ बात करती है.
वह कहने लगी- ऐसा नहीं है, वह सिर्फ तुमसे बात करती है.
मैंने उससे साफ-साफ बोल दिया- मुझे तुमसे बात करनी है. अब तुम बताओ तुम मुझसे बात करोगी या नहीं?
लेकिन उसने मुझसे कहा- मैं तुमसे बात नहीं करूंगी क्योंकि मेरे इंटर के एग्जाम आने वाले हैं और मैं इस चक्कर में पड़ना नहीं चाहती.
उसकी बातों से मैं जान चुका था कि उसके मन में भी कुछ चल रहा है.
मैंने उससे कहा- मगर मुझे तुमसे ही बात करनी है.
उसने मना कर दिया.
उसका मना करने का भी एक कारण था.
वह कारण मुझे बाद में पता चला.
जब वह मुझसे बात कर रही थी तो उसकी बहन उसके पास ही बैठी थी, वह मेरे साथ ड्रामा कर रही थी.
पर वह कहते हैं ना कि कभी कभी मजाक भी हकीकत बन जाती है.
ऐसा ही मेरे साथ हुआ.
मेरी उसके साथ बात करने की जिद उस पर असर कर गई.
उसने दो दिन के बाद अपने फोन से मुझे कॉल की और वह मुझसे बात करने लगी.
अब हम दोनों रोज बात करने लगे थे.
बात करने से ऐसा मालूम होता था जैसे यह लड़की रोमांस से अनजान है. सेक्स के बारे में शायद कुछ नहीं जानती है.
वह बहुत ही साधारण तरीके से बात करती थी.
मुझे ऐसा लगता था जैसे कशिश के अन्दर सेक्स वाला हिस्सा है ही नहीं.
हम दोनों ने लगातार दो महीने तक बात की लेकिन उसने कभी भी कोई सेक्सी बात नहीं की … और ना ही मुझे करने दी.
एक बार तो मेरे साथ ऐसा भी हुआ कि रात को उसके घर पर कोई नहीं था तो उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया.
मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था कि आज तो मेरी सारी तमन्ना पूरी हो जाएगी, जो मैं चाहता था … वह मैं सब कुछ करूंगा.
लेकिन दोस्तो मेरी ये खुशी ज्यादा देर तक न टिक सकी.
मैं लगभग 4 घंटे तक उसके साथ रहा.
लेकिन उसने मुझे सेक्स करने से बिल्कुल मना कर दिया.
कशिश ने साफ बोल दिया- मैं अपनी लिमिट पार नहीं करूंगी, केवल किस ही करूंगी और करवाऊंगी.
मैंने काफी कोशिश कर ली पर कशिश टस से मस नहीं हुई.
उस रात हमने बहुत किस की लेकिन आगे कुछ नहीं किया.
उसके बाद मैं घर वापस आ गया.
हम दोनों बात करते रहे और ऐसे ही चलता रहा.
मैं उससे रोज सेक्स करने के लिए मनाता था लेकिन वह हमेशा मना कर देती थी.
ज्यादा जिद करने पर वह बोल देती थी मैं जब भी सेक्स करूंगी तो सिर्फ अपने शौहर के साथ ही करूंगी.
उसकी यह बात मुझे बहुत बुरी लगती थी.
यूं ही 2 साल गुजर गए, उसने मुझे अपने ऊपर हाथ रखने नहीं दिया.
उधर उसका यौवन दिनों दिन खिलता जा रहा था.
वह देखने में एकदम चंचल शोख हसीना लगती थी.
जब भी मैं उसे देखता था तो मेरा मन मचल जाया करता था.
मैं उसे हमेशा अपने सपनों में चोदता रहता था.
लेकिन मुझे उसे चोदने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो रहा था.
मैं हमेशा यही सोचता था कि कैसे कशिश की कशिश मिटाऊं … इसे अपनी बांहों में लाऊं और इसकी सील तोड़ी जाए.
लेकिन वह कभी भी मानने को तैयार नहीं थी.
इस बीच हम दोनों कई बार किस कर चुके थे.
जब जब मैंने उसे किस की थी, तो मैंने उसके मम्मों को भी चूमा था और पेट को भी चूमा था.
इसी वजह से मेरे अन्दर उसे चोदने की आग और ज्यादा बढ़ गई थी.
मैं हमेशा यही जुगाड़ लगाता रहता था कि कैसे भी करके कशिश को चोदना है.
मैंने भी हिम्मत नहीं हारी और उसके साथ कोशिश करता रहा.
एक दिन ना जाने कैसे, उसे मुझ पर रहम आ गया और उसने हां कर दी.
फिर मैंने उसे अपने फ्रेंड के घर पर बुलाया और उससे कहने लगा- आज हम दोनों खुल कर सेक्स करेंगे.
पहले तो उसने मना किया, वह कहने लगी कि मैं सेक्स नहीं करना चाहती हूँ.
मैंने कहा कि अगर कशिश तुम सेक्स करना नहीं चाहती, तो कोई बात नहीं लेकिन तुम मेरे पास तो आओ. हम दोनों एक किस तो कर सकते हैं!
किस करने के लिए वह राजी थी.
किस का नाम लेते ही वह मेरे पास आई और मेरी बांहों में सिमट गई.
वह मुझे हग करके बोली- जान किस तो तुम कितनी ही कर सकते हो, मैं किस के लिए तुमको कभी मना नहीं करती हूँ.
इतना कहकर कशिश ने मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए और चूमने लगी.
उस दिन वह कहने लगी- मेरी जान मेरे होंठों को तो तुम मन भरके पियो.
मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसके रस भरे होंठों को पीने लगा.
उसके होंठ गुलाब की पंखुड़ी की तरह कोमल थे, जिन्हें मैं बहुत मजे लेकर चाट रहा था और पी रहा था.
जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रखे, वह आउट ऑफ कंट्रोल हो गई और एकदम से ढह गई.
वह मादक भाव से कहने लगी- सोना, यहां किस मत करो, मुझे कुछ कुछ होता है.
अब मुझे उसकी कमजोरी पता चल गई थी.
मैं उसके होंठों जगह उसकी गर्दन को चूमने लगा और उसके अन्दर गर्मी पैदा होने लगी.
वह जल बिन मछली की मचलने लगी और मुझसे चिपकने लगी, मुझे अपने जिस्म में समाने लगी.
मुझे खुलकर खेलने का मौका मिल गया था.
मैं भी आगे बढ़ने लगा.
मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर था.
मैं उसके बूब्स को दबाने लगा तो वह और ज्यादा मचलने लगी.
मैं उसकी गर्दन पर किस किस करते करते चूचों पर भी किस करने लगा.
जैसे ही मैंने उसके मम्मों पर अपने होंठ रखे, तो वह मदहोश होकर बोलने लगी- अब कितना तड़पाओगे मेरी जान!
मैंने उसके बूब्स को बहुत पिया, उसके मम्मों को पीने मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं काफी देर तक उसके मम्मों को पीता रहा और उसे मजे देता रहा.
अब वर्जिन गर्लफ्रेंड सेक्स के लिए आउट ऑफ कंट्रोल हो रही थी.
मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सफेद रंग की सिलेक्स को अपने हाथों से उतार दिया.
उसने मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन वह खुद बहुत मदहोश ही गई थी, चाह कर भी मुझे रोक नहीं पाई.
मैंने मौका पाकर उसकी काली की पैंटी भी उतार दी.
जब मैंने उसकी चूत को पहली बार देखा तो मैं देखता ही रह गया.
यकीन मानना दोस्तों मैंने बहुत चूत देखी थीं, लेकिन मैंने ऐसी चुत आज तक नहीं देखी थी.
उसकी चूत एकदम सफाचट थी. बाल तो मानो उसकी चुत पर उगे ही नहीं थे, शायद वह वैक्स करके आई थी.
उसकी चूत किसी विदेशी लड़की के जैसी गुलाबी थी.
इससे पहले मुझे जितनी भी चुत चोदने का अवसर मिला था, वे सब कहीं न कहीं देसी चुत की तरह जामुनी रंगत वाली चुत थीं.
मैंने कशिश के जैसी चूत आज तक नहीं देखी थी.
मैं तो उसकी चूत को देखकर पगला सा गया था.
मेरा लंड अकड़ गया और उसकी चूत में जाने के लिए उतावला होने लगा था.
अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था.
उसका भी यह पहली बार का मामला था, तो मुझे कुछ संभल कर सेक्स करना था.
मुझे डर था कि कहीं कुछ उलटा सीधा ना हो जाए.
मैंने उसकी चूत को किस करने का सोचा.
तो वह शर्माने लगी और बोली- ऐसा मत करो, मुझे अच्छा नहीं लगता है.
मैंने उसकी बुर पर थोड़ी देर तक किस किया, तो कशिश तड़पने लगी और चुदासी हो गई.
मैं भी ज्यादा देर ना करते हुए उसे चोदने को तैयार हो गया.
मैंने उसको अपने सामने सही पोजीशन में सैट किया, उसकी दोनों टांगों को खोल कर अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर लगा दिया.
जब उसकी चूत पर टोपा लगा, तो वह सहम गई और बोली- थोड़ा आराम से करना!
मैंने कहा- चिंता मत करो, सब कुछ ठीक ही होगा.
वह लंड के टोपे की गर्मी से बुर को रगड़ने लगी.
मैंने देर ना करते हुए उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डालना शुरू कर दिया.
जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में घुसा तो वह एकदम से तड़फ उठी और रोने लगी.
उसकी चूत बहुत टाइट थी, मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
फिर मैंने एक जोर से धक्का लगाया तब मेरा लंड बड़ी मुश्किल से उसकी चूत में घुस तो गया लेकिन उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
वह छटपटा रही थी और बिलख सी रही थी.
मैंने मजबूरी में अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और देखा तो मेरा सारा लंड खून में लथपथ था.
उसने भी खून देखा, तो वह भी घबरा गई और बोली- ये क्या हो गया?
मैंने उसे बताया- तुम खून की चिंता ना करो, ऐसा पहली बार में होता ही है.
वह भी शायद इस बात को जानती थी कि कुंवारी बुर पहली बार की चुदाई में फटती है तो खून निकलता ही है.
मैंने अब दुबारा से उसकी बुर में अपना लंड डाला, तो वह फिर से रोने लगी.
वह बोली- मुझसे नहीं होगा बाबू, तुम मुझे छोड़ दो … मुझे घर जाने दो!
मैंने कहा- अभी रुको मेरी जान, थोड़ा साथ दो, तुम्हें भी बहुत मजा आएगा. सभी लड़कियों के साथ शुरू शुरू में कुछ देर दिक्कत होती ही है.
वह चुप हो गई.
अब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर तक पेला और उसे आगे पीछे करने लगा.
वह लंड से होने वाले दर्द से मुक्त हो गई थी तो उसने खुद से कमर को हिलाना शुरू कर दिया.
यह देख कर मैंने भी स्पीड बढ़ा दी.
अब उसे भी चुदवाने में मजा आने लगा.
वह गांड उठा कर मजे लेती हुई चुत चुदवाने लगी.
मेरा लंड भी अब उसकी चूत में आराम से अन्दर बाहर हो रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था.
करीब दस मिनट तक चोदने के बाद मेरा लंड झड़ने वाला हो गया था.
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसे जोर जोर से चोदने लगा.
उसे भी बहुत मजा आ रहा था, तो उसके मुँह से आह आह उह की आवाज निकल रही थी.
मैंने उससे कहा कि अब मैं होने वाला हूँ, तो उसने कहा कि हो जाओ, मैं तो हो गई.
मैं यह सुन कर उसे और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा और उसी दौरान मैं डिस्चार्ज हो कर उसके ऊपर ही निढाल हो गया.
मैं थक कर उसी के ऊपर गिर गया था.
उसने मुझे अपने ऊपर से उठाते हुए कहा- चलो हटो बाबू, अब मुझे जाने दो … बहुत देर हो चुकी है.
मैं हट गया.
उसने उठ कर जल्दी से कपड़े पहने और बाहर निकल कर अपने घर चली गई.
घर जाकर वह टॉयलेट गई, तो उसकी चूत से खून निकला.
वह घबरा गई और उसने मुझे कॉल करके कहा- तुमने ये क्या कर दिया, मेरी सुसू में से खून आ रहा है.
मैंने कहा कि अभी अभी तुम्हारी सील टूटी है, तो ऐसा होता है. तुम चिंता ना करो … कोई दिक्कत नहीं है.
अगले दिन से वह सामान्य हो गई.
फिर एक बार लंड का चस्का लगता है तो चुत बार बार लंड के लिए तड़फने लगती है.
कशिश के साथ भी यही हुआ.
अब हम दोनों बहुत ज्यादा सेक्स करने लगे हैं … और चुदाई के बहुत मजे लेते हैं.
समय पीछे चला जाता है लेकिन Hindi Sex Stories उसकी कुछ खट्टी मीठी यादें जो मन पर अपना प्रभाव बनाए ही रखती हैं! और जब वे यादें बेचैन करने लगती हैं तो बस बेचैनी से बचने का एक ही मार्ग होता है वह यह कि उन्हें किसी से बांट दिया जाए! यह कुछ ऐसी ही याद है जो मैं आपसे बांटना चाहता हूँ!
मेरी बी-टेक की परीक्षा का अन्तिम से पहला सेमेस्टर बजाय दिसंबर जनवरी के अप्रैल महीने में समाप्त हुआ। तभी गोरखपुर से चाचा जी की बेटी यानि कि दीदी का फोन आ गया कि घर जाने से पहले तीन-चार दिन के लिए आ जाओ।
मैं बचपन से ही उनसे लगा था। लेकिन इधर कई साल हो गये उन्हें देखा भी नहीं था, उधर गांव से भी फोन आ गया कि गोरखपुर हो कर आना।
दीदी की शादी हुए लगभग दस साल हो गये थे। जीजा जी बिजली विभाग में क्लर्क हैं, ऊपरी आमदनी का प्रभाव घर के रखरखाव से तुरन्त ही लग गया।
स्कूल से लौटे तो मैंने देखा कि टीना और अनिकेत तो इतने बड़े हो गये कि पहचान में ही नहीं आ रहे थे, लेकिन अनुमान लगाने में को कठिनाई नहीं हुई, मगर उनके आने के कुछ देर बाद जो अजनबी लड़की में आई उसे देखकर मैं चौंका। सामान्य से अधिक लम्बी, स्कर्ट के नीचे मेरी निगाह गई तो उसकी लम्बी और पतली सुन्दर और चिकनी टांगे देख कर मन अजीब सा हुआ।
उसने ‘मामा जी नमस्ते’ कहा तो मेरी दृष्टि ऊपर गई। देखा आंखें फट सी गईं। शरीर के अनुपात से कहीं भारी, लम्बी और भारी उसकी दोनों छातियां उसके खूबसूरत प्रिन्टेड ब्लाउज फाड़कर बाहर निकलने को आतुर दिखीं। उसने संभवतः मुझे देखते हुए देख लिया।
वह शरमाई तो मैंने निगाहें नीचे कर लीं। तभी अन्दर वाले कमरे से दीदी आ गईं। मैंने तब उनको भी ध्यान से देखा। जो दीदी पहले दुबली पतली थी अब उनका शरीर भर गया था और काफी सुन्दर लगने लगी थीं।
दीदी ने बताया- यह सोनम है जेठ की बेटी। गांव से आठ पास करके साथ ही है अबकी बार बी ए के प्रथम वर्ष की परीक्षा दे रही थी और आज ही अन्तिम पेपर था।
शाम तक सोनम मुझसे काफी घुलमिल गई। वह बेहद बातूनी और चंचल थी। अब तक कई बार वह किसी न किसी बहाने अपने शरीर को मेरे शरीर से स्पर्श करा चुकी थी।
उसकी बातों के केन्द्र में गर्लफ्रेन्ड और लड़के ही अधिक थे। दोनों बच्चे भी परीक्षा देकर अगली कक्षाओं में आ गये थे, अभी पढ़ाई का दबाव भी अधिक नहीं था।
सोनम तो मेरे आने से बहुत ही प्रसन्न थी। असल में मेरा गांव और दीदी के गांव से बहुत दूर नहीं था। दो दिन बाद उसे मेरे साथ उसे भी जाना था।
जीजा जी इधर काम के कारण काफी देर से आने लगे थे इस लिए सब्जी लेने दीदी ही जातीं। शाम में वह अनिकेत को लेकर मार्केट चली गई तो घर में मैं टीना और सोनम ही थे।
टीना अभी नादान थी। फर्श पर बिछे गद्दे पर मैं लेटा था। टीना मेरे पैर की उंगलियों को चटका रही थी।
बातें करते सोनम ने कहा- लाओ मैं सर दबा दूं।
फिर मेरे बिना कुछ कहे ही मेरे सिर के पास आकर बैठ गई। और सर में अपनी उंगलियां धीरे-धीरे चलाने लगी। धीरे-धीरे उसके शरीर की सुगंध मुझे मस्त करने लगी। मैंने आंखें ऊपर उठाकर देखा तो उसकी बड़ी नुकीली चूचियां मेरे सर पर तनी थी। संभवतः वह भी उत्तेजित सी थी, क्योंकि मुझे लगा कि उसके चूचुक भी तने हैं। उसने ब्रा नहीं पहनी थी।
मैंने अंगड़ाई लेने के बहाने हाथ पीछे किया तो मेरे पंजे उसकी चूचियों से छू गये। लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया और टीना से कहा- अब बस, जाओ.
वह जाकर टीवी देखने लगी। सोनम उसी तरह मेरे बालों में उंगली किये जा रही थी। मैंने फिर सामने टीना की तरफ देखते हुए फिर हाथों को पीछे ले जाकर उसकी चूचियों से स्पर्श कराते हुए वहीं रोक दिया। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, हां हाथ अवश्य रुक गये।
एक पल रुकने के बाद मैं हौले हौले उसकी चूचियों पर हाथ फिराने लगा। कुछ क्षणों बाद उसने मेरे हाथ को वहां से हटाकर धीरे से कहा- टीना छोटी नहीं!
उसके इस उत्तर से मेरी बांछें खिल उठीं। मैंने हाथ को अंगड़ाई के बहाने ले जाकर उसकी जांघों पर रख दिया। वह चिकनी और संभवतः बरफी की तरह सफेद थीं। मैं रह-रह कर उसके पेड़ू को भी छू देता। उसने कच्छी नहीं पहन रखी थी। उसकी झांटों और मेरे हाथों के बीच उसकी सलवार का झीना कपड़ा ही था।
सामने मेरा लिंग अकड़कर खड़ा हो गया और मेरे लोअर के अन्दर बांस की तरह तनकर उसे उठा दिया। जब सोनम की दृष्टि उस पर पड़ी तो वह मुस्कुराने लगी।
मैंने अपने हाथों को फिर ऊपर लेजा कर उसकी चूचियों से स्पर्श कराया तो लगा कि उसकी घुंडियां बिल्कुल तन कर खड़ी हो गई हैं।
छुआ-छुई का यह खेल चल ही रहा था तभी टीना फिर आ गई और पास बैठ गई। हम दोनों रुक गये। मैंने झट अपनी लम्बी टी-शर्ट को नीचे खींच दिया, लेकिन हमारे महाराज जी झुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे तो मैं झट से उठ गया।
सोनम भी मेरे साथ ही उठ गई। उसने चुन्नी अपने सीने पर नहीं रखी थीं। चूचियां कपड़े के ऊपर से ही वह पूरी तनी बिल्कुल स्तूप की तरह लग रही थीं।
रसोई की तरफ जाते हुए मैंने कहा- चाय पीने का मन हो रहा है।
“चलो बना दूं।” कहते हुए वह मेरे पीछे रसोई में आ गई।
अन्दर जाते ही मैंने उसे कचकचाकर लिपटा लिया और पूरी शक्ति से उसके शरीर को जकड़ लिया। वह कसमसाकर कुछ कहती इससे पहले ही अपने ओंठ उसके ओंठों पर रखकर जबरदस्ती उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी।
ह गों-गों कर उठी तो जीभ को निकाला। तब वह कांपते स्वर में बोली- छोड़ो अभी टीना आ जाये तो!
मैंने उसे छोड़कर कहा- भगवान कसम … अभी तक मैंने इतनी कसी और सुन्दर चूचियां तो फिल्मों की हीरोइनों तक की नहीं देखी!
वह अब स्थिर हो चुकी थी, बोली- तुम तो बहुत हरामी हो मामा!
मैंने धीरे से कहा- सोनम मैं बिना तुमको लिए छोड़ूंगा नहीं!
उसने ठेंगा दिखाते हुए कहा- बड़े आये लेने वाले!
और फिर मेरे अभी तक खड़े लन्ड को ऊपर से नौच कर भाग गई।
दीदी सामान लेकर आईं और रसोई में चली गईं। दोनों बच्चे पढ़ने बैठ गये तो मैं छत पर चला गया और कुछ देर बाद सोनम को भी पुकारकर ऊपर बुला लिया। हमारी दीदी का मुहल्ला निम्न-मध्यवर्गीय मुहल्ला था। छतें एक दूसरे से सटी थीं। अंधेरा पूरी तरह से घिर आया था, इसलिए इक्का-दुक्का लोग ही अपनी छत पर थे।
“सोनम दोगी नहीं?”
“क्या?”
“बुर! या अगर हो गई हो तो चूत!”
“मतलब?”
“मतलब यह कि अगर किसी से चुदवा चुकी हो तो चूत हो गई होगी नहीं तो अभी बुर ही होगी! बताओ क्या है?”
“हट!”
“हट नहीं! नहीं प्लीज सोनम! दे दो न!” मैंने उसे पलसाने के लिए कहा।
“बहुत बड़ा पाप है। फिर तुम तो मामा हो!”
“मैं कोई सगा मामा थोड़ी न हूं?”
“चाहे जो हो, मैं यह काम नहीं करूंगी। मुझे डर लगता है!”
उसने इस अन्दाज में कहा कि मुझे लग गया कि अभी तो बात बनने वाली नहीं, तो मैंने बातो को दूसरी तरफ मोड़कर कहा- अच्छा सच बताओ किसी से करवाया है कि नहीं?
“भगवान कसम नहीं।”
“मिंजवाई हो?”
“भला कौन लड़की होगी जिसकी किसी न किसी ने कभी मींजी न हो।”
फिर उसने कहा- तुमने मामा? तुमने मींजी हैं?
“हां, तुम्हारी ही!”
“धत! पहले?”
“मींजी तो कइयों की है, और ली भी है, लेकिन पूछना नहीं किसकी। कभी बाद में बताऊंगा। अच्छा बताओ तुम इसके बारे में ठीक से जानती हो?”
उसने मुस्कुराकर कहा- किसके?”
मैंने खीजकर कहा- बुर की पेलाई या कहो चुदाई के संबंध में!
“हाय राम यह भला कौन नहीं जानती होगी? इतना तो टीना को भी पता होगा!”
“अच्छा अपनी बताओ कि तुम को कैसे पता चला?”
“क्यों बताऊं?”
मैंने अन्त में कहा-सोनम मैं बिना लिए तुम्हारी छोड़ूंगा नहीं!
और फिर इधर उधर की बातें होने लगीं। बात फिर आकर पेलने, चोदने और लन्ड, बुर पर रुक गई। अन्त में सोनम ने यह वादा किया कि ऊपर से मैं चाहे जो कर लूं, लेकिन वह किसी भी कीमत पर मेरा लन्ड अपनी बुर में डालने नहीं देगी।
बाद के दो दिनों में वह सोई तो दीदी के कमरे में क्योंकि दीदी को माहवारी आ रही थी। यह भी उसी ने बताया, लेकिन दिन में जैसे ही अवसर मिलता हम दोनो एक दूसरे को नौचने चूसने में लग जाते। एकाध बार तो वह बुरी तरह से उत्तेजित भी हो गई, लेकिन उचित अवसर ही नहीं मिला। दीदी भी न जाने क्यों हमें अकेला नहीं छोड़ रही थीं।
यद्यपि मुझे अन्त तक यह लगने लगा कि अगर अकेले मिल जाए तो करवा लेगी।
मैं तीसरे दिन के बजाय चौथे जाने के लिए तैयार हुआ। उस दिन इतवार था। शहर से हमारे गांव की दूरी अधिक नहीं थी। तीन घण्टे बस से लगते थे। बीच में बदलकर अन्त में चार किलोमीटर का पैदल या फिर अपने निजी वाहन का रास्ता है। पैंसजर ट्रेन भी जाती थी, समय थोड़ा अधिक लगता था परन्तु आराम था।
बारह बजे की गाड़ी थी। प्रोग्राम यह बना कि चार बजे के लगभग गाड़ी पास के कस्बे पहुँच जायेगी फिर वहां से बस पकड़कर एकाध घंटे में अपने गांव की सड़क पर पहुंच जायेंगे। आगे अगर फोन लग गया तो कह दिया जायेगा कोई आ जायेगा, नहीं तो किसी रिक्शा या हम लोग पैदल ही निकल जायेंगे।
हमारा क्षेत्र बहुत शांत है। किसी तरह की चोरी डकैती या दूसरी घटनाओं से मुक्त! इसलिए हम लोगों को आने जाने का भय नहीं होता अक्सर किसी कारण से देर हो जाने के बाद लोग बारह-बारह बजे रात तक में अकेले आ जाते।
यद्यपि सोनम ट्रेन से आने में घबरा रही थी, कहीं लेट न हो जाये!
हुआ भी वही, बारह से एक बज गया फिर दो, तब जाकर कहीं गाड़ी आई। घर फोन से बात करने की कोशिश की लेकिन संभवतः सम्पर्क ना होने के कारण बात नहीं हो पाई। अभी हमारे यहां यह सुविधा उतनी अच्छी नहीं थी। जाते जाते चाचा कह गये कि मुहानी पर कोई आ गया तो आ गया, नहीं तो वहीं सम्पत साह के यहां सामान रख कर पैदल ही चले जाना।
हम लोग बैठे तो देर हो जाने की घबराहट थी लेकिन गाड़ी में बैठते ही हवा हो गई। सोनम खिड़की तरफ बैठी, फिर मैं। हम लोगों की यात्रा तो ऐसे कटी जैसे पति पति पत्नी हों। वह लगातार मेरे हाथों से खेलती रही। कभी-कभी अपने हाथों की कुहनियों को मेरे लंड पर पैंट के ऊपर से दबाती मेरे हाथ तो पूरी यात्रा में किसी न किसी तरह उसकी चूचियों के संपर्क में ही रहे।
अवसर देखकर कामुक बातें भी होती रहीं। मुझे उसकी जानकारियाँ सुनकर आश्चर्य हुआ। उसने बताया कि दीदी और जीजा कभी कभी गंदी फिल्म देखते हैं। जिसमे कभी दो आदमी एक की लेते हैं तो कभी एक दो की!
कहने लगी कि चाचा चाची की निरोध लगाकर ही करते हैं। उसने यह भी बताया कि उसने दरवाजे में एक छेद ऐसा कर रखा है कि जिससे वह जब चाहे उन लोगों की चुदाई देखे, मगर वह जान नहीं सकते।
ऐसे में यात्रा जब समाप्त हुई तो पता चला कि गाड़ी रास्ते और लेट हो गई। स्टेशन पर पहुंचते-पहुंचते सात बज गये। हल्का अंधेरा हो गया। सोनम डरने लगी। लेकिन बस जल्दी ही मिल गई। कुछ दूर जाने के बाद पहिया पंक्चर हो गया। और देर होती देख सोनम घबराने लगी, लेकिन मेरा मन प्रसन्नता से झूम उठा। मैंने निश्चय कर लिया अब सोनम को कुंआरी नहीं रहने दूंगा।
जब हम लोग मुहानी पर पहुंचे तो आठ का समय हो गया था। अंधेरा घिर आया था, लेकिन चांद भी निकलने की तैयारी में था। सोनम तो रोने लगी कि अब क्या होगा!
मैंने दिलासा दिया तो जाने को तैयार हुई।
सामान साह जी के यहां रखने गये तो योजना के अनुसार सोनम को थोड़ा दूर खड़ा करके कह दिया कि चाची हैं। वह अड़ गये कि सायकिल ले लो, लेकिन मैंने यह कहकर मना का दिया कि वह पैदल ही जायेंगी।
गांव में जाने का एक थोड़ा निकट का रास्ता था, लेकिन वह पलाश और कुश के छोटे से जंगल में से जाता था। मैंने वही रास्ता पकड़ा तो वह रुक गई।
क्योंकि उसे पता था कि एक सड़क भी है, लेकिन मेरे समझाने और डर समाप्त करने के बाद ही वह जाने को तैयार हुई। पगडंडियां तमाम थीं। मैंने जानबूझकर अलग पगडंडी पकड़ी। चूंकि बचपन से मैं इतनी बार इधर से गया था कि मुझे रास्ते का चप्पा चप्पा पता था। मेरे कंधे पर छोटा सा बैग था। जिसमे मेरे कपड़े थे। उसका सामान तो रख दिया था।
उसने मजबूती से मेरा हाथ पकड़ लिया था।
थोड़ी दूर जाकर मैंने कहा- हाथ छोड़ो, मैं जरा मूत लूं!
वह बोली- नहीं मुझे डर लग रहा है, यहीं मूतो!
तब तक चांदनी के प्रकाश का प्रभाव वातावरण में उभर गया था। मैं उत्तेजित होने लगा। मुतास के कारण मेरा लंड पहले से ही खड़ा था मैंने उसी के सामने लंड को पैंट से निकाला और छल छल मूतने लगा। मूतने के बाद जब लंड हिलाकर बूंदें गिराने लगा तो वह बोली- बीज गिरा रहे हो मामा?
मैंने कहा- बीज तो तुम्हारी बुर में गिराऊंगा।
“कैसे?”
“तुम्हें चोदकर और कैसे?” इतना कह कर मैं लंड को यूं ही बाहर लटकाये चल पड़ा।
और हाथ उसके कंधे पर रखकर बगल से उसकी चूचियों को सहलाने लगा। वह कड़ी होने लगीं तो और तेज मलने लगा। वह उत्तेजित होकर मुझसे चिपकने लगी। चूचियां बड़े लम्बे आम का रूप धारण करने लगीं। मैंने रुककर मुंह में सटाकर अपनी जीभ उसके मुंह में डालकर जो चूसा तो बोली- मामा लगता है कि आज तुम मुझे खराब करके ही छोड़ोगे!
“मतलब?”
“मतलब न पूछो!” कहकर वह बोली- मुझे भी मूतना है!
कहकर वह वहीं सलवार खोलकर बैठ गई।
जानवरों को चारा खिलाने वाली नाद की तरह उसके चूतड़ सामने आ गये। वह सीटी बजाती शर-शर मूतने लगी। मैं अपने खड़े लन्ड को उसकी कनपटियों से रगड़ने लगा।
मूत कर उठी तो सलवार बांधने से पहले ही मैंने उसकी झांटों से भरी चूत को मुट्ठी में पकड़ लिया वह मूत से गीली हो रही थी। उसने हल्का सा प्रतिरोध किया- छोड़ो न!
अब तक चांदनी खिल चुकी थी। चारों तरफ सन्नाटा था। मुझे याद आया कि थोड़ा अन्दर एक छोटी सी पोखर है। मैं उसी तरफ उसे लिपटाये चला गया।
पोखर में पानी तो कम था, लेकिन उसके किनारे साफ स्थान था। पास में सफेद पुष्प खिले थे। वातावरण मादक था। उसने मस्ती भरे स्वर में कहा- यहां क्यों आये?
मैंने कहा- तुम्हें लेने के लिए।
फिर उससे खड़े ही खड़े ही लिपट गया।
वह मेरे ही बराबर थी। उसके बाल खुल गये थे। उसकी कड़ी होकर पत्थर चूचियां मेरे सीने से टकराकर मेरे अन्दर आग भर रही थीं। मैंने हाथ को पीछे ले जाकर उसके उभरे चूतड़ों को पकड़ लिया और मुंह को उसके मुंह से लगाकर उसके चेहरे और होंठों को चूसने लगा। उसने भी मुझे जकड़ लिया। मेरा लंड खड़ा होकर सलवार के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
वह थोड़ी देर बाद अलग होकर बोली- अब चलो मुझे डर लग रहा है।
मैंने उसकी बात को अनसुना करते हुए बैग खोल कर अपनी लुंगी निकाल कर बिछा दी और कहा- अब न तो मैं बिना चोदे रह सकता हूं और नहीं तुम बिना चुदाये!
फिर मैंने उसे भूमि पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़कर उससे लिपट गया। उसने भी मुझे कस लिया। पांच मिनट की लिपटा-लिपटी के बाद मैं उठा और उसे उठाकर उसकी कुरती को शमीज़ सहित ऊपर खींच कर उतार दिया। वह ऊपर से नंगी हो गई। दोनों छातियां ऐसी गोरी चिकनी और फूलकर खड़ी हो गई थीं मानो उन्हें अलग से चिपका दिया गया हो। उन्हें नीचे से ऊपर मींजते सहलाते हुए कहा- सच बताओ सोनम मेरे अतिरिक्त तुम्हारे दो पपीतों को किसी और मींजा है?”
“भगवान कसम नहीं। जब मैं गांव में थी तो संध्या भाभी जरूर मींजती और कभी कभी चूसतीं भी थीं, लेकिन तब यह छोटी थीं। कामता भैया कलकत्ता रहते थे। वह अपनी चूचियां चुसाती भी थीं। यहां किसी ने कभी नहीं कुछ किया।”
“तो आज मैं सब कुछ करूंगा!”कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को चूसना आरम्भ कर दिया। उसका सीना मेरे थूक भीग गया। वह वहीं लेट गई और अकड़ने लगी।
तब मैं उठा और अपनी पैंट और चड्ढी साथ उतार दी। बल्ल से मेरा लंड सामने आ गया। वह उसे ही देखने लगीं। मेरी झांटे काफी बड़ी हो गईं थीं। नसें तनकर अकड़ गई थीं। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। वह वैसे ही पकड़े रही। उसकी खड़ी चूचियां मेरे होंठों के सामने तनी थीं। तब मैंने कहा- सहलाओ।”
वह बोली- शरम आती है।
“लो अभी मैं शरम मिटाता हूं।” कहकर मैंने उसके सलवार का नाड़ा पकड़कर खींच दिया।
सलवार खुल गई। नीचे से पकड़कर खींचा तो उतर गई। वह शरमाने लगी। उसकी भी झांटे काफी बड़ी थीं। उसकी बुर उसी में छुपी थी।
“कभी-कभी इसे साफ कर लिया करो।” कहकर मैं हथेली से उसकी बुर सहलाने लगा।
सोनम सिसियाते हुए बोली- तुम्हारी भी तो बड़ी है।
और फिर मेरे लंड पर अपनी हथेलियां चलाने लगी।
मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई, लगा कि अब मैं कही झड़ न जाऊं। उसकी बुर भी गीली हो गई थी। उसकी बुर का दाना उभर आया था। यद्यपि मैंने तो रास्ते में सोचा तो बहुत कुछ करने के लिए था, लेकिन लगा कि अब मैं कहीं बिना अन्दर डाले ही न झड़ जाऊं तो उससे कहा- टांगें फैलाकर लेटो।”
वह लेटते हुए बोली- छोड़ दो न मामा!
“पागल हूं मैं!” कहकर मैंने अपनी शर्ट उतार दी ओर उसके पूरे शरीर को सहलाया और फिर उसकी टांगों के बीच में जाकर उसकी बुर के छेद को हाथों से टटोलकर उसपर अपने लंड का सुपाड़ा रखकर औंधे मुंह उसपर लेट गया और कमर पर दबाव डाला तो भीग चुकी उसकी बुर में मेरा लंड सक से चला गया।
“हाय राम मैं मरी!” उसने कहा।
मैंने कहा- झिल्ली फट गई?
“पता नहीं!”
मैं एक पल के लिए रुका फिर कुहनियों को भूमि पर टिका कर उसकी चूचियों को मलते हुए कमर चलाते हुए सोनम को हचर-हचर चोदने लगा। सात आठ धक्के के बाद वह भी कमर चलाने लगी और अपने हाथों से मुझे कस लिया। मैं उसे चोदे ही जा रहा था। उसका शरीर महकने लगा। उसके मुंह से हों-हों का स्वर निकलने लगा।
मेरी कमर और तेज चलने लगी। उसने किचकिचाकर मुझे दबोच लिया। अन्त में मैं भल्ल से उसकी चूत में झड़ गया। मैं कुछ देर बाद उसके ऊपर से उठा। मेरा लंड बीज से सना था। उसकी चूत भी वैसे ही बीज से भरी थी। वह लम्बी लम्बी सांसे भर रही थी। मैंने पास पड़ी पैंट से रुमाल निकालकर पहले अपने गीले लंड को पौंछा फिर उसकी बुर को।
अब वह स्थिर हो गई थी। बोली- मामा अगर कहीं बच्चा ठहर गया तो?”
“पागल एक बार में बच्चा नहीं ठहरता है। उठो! बैठकर मूत दो! बीज नीचे गिर जायेगा।”
मूत कर वह उठी तो मैंने उसे अपनी टांगों को सीधे फैला लिया और उसकी टांगों को अपनी कमर के दोनो तरफ करवा कर बैठा लिया। उसकी चूत से मेरा सिकुड़ा लंड स्पर्श कर रहा था। मांसल चूचियां मेरे सीने से पिस रही थीं। उसके खुले बाल उसकी पीठ पर फैलकर वातावरण को मादक बना रहे थे।
वह बोली- अब चलो। अपनी तो कर ही ली। देर हो जायेगी।”
“देर तो हो गई। थोड़ी और सही। ऐसा सुनहरा अवसर अब तो कभी नहीं मिलेगा।”
उसने कोई उत्तर नहीं दिया इसका मतलब था कि उसकी भी मौन स्वीकृति थी। मेरे हाथ उसकी पीठ से लेकर उसके नाद जैसे भारी चूतड़ों की दरार तक चल रहे थे।
वह भी मेरे बालों में अंगुलियाँ चला रही थी। कभी कभी मेरी कनपटियों को भी सहलाने लगती।
मैंने यूं ही पूछा- सोनम कभी सोचा था कि तुम्हारी चुदाई ऐसे रोमांटिक वातावरण में होगी?
उसने कोई उत्तर नहीं दिया।
मैंने उसे खड़ा किया तो वह रोबोट की भांति खड़ी हो गई। बिल्कुल नंगी! मैं भी मनुष्य के आदिम रूप में था। हम नंगे पोखर के किनारो पर टहलने लगे। उसके चूतड़ चलते में हिल रहे थे। चिकने थे। एक भी रोयां नहीं था। जांघ और पिंडलियां भी चिकनी थी। झांटें जरूर पेड़ू तक फैली थीं। चूची हिल नहीं केवल थरथरा रही थी।
मैंने टहलते हुए बुर पर हथेली रखते हुए कहा- सोनम झांट हेयर रिमूवर से बना लिया करो। अभी लगता है एक बार नहीं किया?
“नहीं साफ तो किया है, लेकिन मुझे शरम आती है। जब चाची को याद आता है तब लाकर देती हैं तो करती हैं, स्वयं तो एकदम चिकना किए रहती हैं।”
फिर दोनों हाथों की अंगुली और अंगूठे को मिलाकर चूत का आकार देते हुए कहा- भोंसड़ा हो गई है, फिर भी!
मैंने कहा- उन्हें चुदना जो होता है, जब तुम लगातार चुदोगी तो अपने आप साफ रखोगी।
“तुम तो चोदते हो तब भी जंगल उगा लिया है।”
कहकर वह मेरे लंड को पकड़ कर खेलने लगी और पेलड़ की गोलियों से खेलने लगी।
मुझे न जाने क्या सूझी कि मैंने उसे उठाकर सामने से उसे अपने कंधे पर बैठा लिया। उसकी टांगें पीठ की तरफ हो गईं। उसकी चूत मेरे मुंह के सामने आ गई और मन में आया कि लाओ चूम लूं, लेकिन सोचा पता नहीं क्या सोचे तो अपनी ठुड्डी उसकी बुर से रगड़ने लगा। उसकी झांट के बालों का स्पर्श चेहरे को अजब आनन्द दे रहा था।
इसी के साथ मैंने अपने हाथों को ऊपर उठाकर उसके दोनों दूधों को मसलने लगा। बुर चूत की बातें होती रहीं और हम फिर उत्तेजित हो गये। मेरा लंड दुबारा कील की तरह खड़ा होकर ऊपर उठ गया। इसी तरह पोखर का तीन चक्कर लगाते-लगाते वह उत्तेजित हो गई । तो बोली- मामा चलो फिर चोदो मगर दूसरी तरह से।”
मैं उसके इस खुले आमन्त्रण से हिल गया। कंधे से उतार कर ले जाकर लुंगी पर उसे झुका दिया और हथेली पर अपने और उसके मुंह से थूक लेकर अपने लण्ड पर मला और चूत को ढके झांटों को इधर-उधर करके छेद पर रखकर कसा तो एकदम अन्दर चला गया। फिर कमर हिलाहिलाकर उसे चोदने लगा।
कुछ पल बाद लंड निकाला तो देख कि उसकी बुर का छेद खुल चुका था। उसका चना भी फूल गया था। फिर मैं भूमि पर लेट गया। मेरा लंड हवा में तना था।
मैंने उससे कहा- सोनम आओ! इसपर टांगें फैलाकर बैठो।
वह बोली- नहीं! पूरा अन्दर चला जायेगा! दर्द होगा!
“यह सब कहने की बात है, और मजा आयेगा। बैठकर तो देखो!”
वह दोनों टांगों को इधर उधर करके बुर के छेद को लंड के निशाने पर लेकर बैठी तो एकाएक कमर को पकड़कर दबा दिया। वह घप्प से गिर गई। सट से लंड अन्दर पूरा उसकी बुर की जड़ तक चला गया। पहले मैंने नीचे से अपनी कमर को हिलाया फिर वह भी हचर-हचर अपनी कमर चलाने लगी। मैं सामने उसकी स्तूप की तरह हिल रही चूचियों को सहलाने लगा। बढ़ती उत्तेजना के साथ मेरी और उसकी गति तेज हो गई। अन्त में मैं फल्ल-फल्ल झड़ने लगा। वह अजब अजब स्वर निकालने लगी और औंधे मुंह मेरे ऊपर गिर पड़ी।
तो मित्रो मेरा यह अनुभव या अगर चाहें तो कहानी कहें कैसा लगा? मेल करें. Hindi Sex Stories
हाय मैं सीमा, आप लोगो को मेरी पहली कहानी Antarvasnaअच्छी लगी जानकर खुशी हुई.
आज मैं जो कहानी आप लोगो को सुनाने जा रही हूं वो 2-3 साल पहले की घटना है. तब मैं एक फ़्लैट में रहती थी. और मेरे बगल वाले फ़्लैट में एक बंगाली फ़ैमिली रहती थी. उनकी फ़ैमिली में चार मेम्बर थे. हस्बेंड, वाइफ़ उनकी एक 14 साल का लड़का सुनील और 18 साल की एक लड़कीसीता. मैं उन दोनों को भैया भाभी बुलाती थी. भैया और भाभी दोनों ही काम करते थे.
भाभी दिखने में बहुत खूबसूरत थी. 36सी साइज़ का बूब्स सुराहीदार गर्दन. ऊपर से उन्होंने अपनी नाभि को छिदवा कर उसमें एक रिंग पहना करती थी. मैंने कई बार उनकी साथ लेस्बियन सेक्स करनी की बात सोची थी. मैंने कई बार भाभी के बूब्स को उनकी नाइटी के ऊपर से देखा है. वो घर में कोई ब्रा नहीं पहनती थी और उनकी नाइट ड्रेस भी बहुत पारदर्शी है जिसमें से उनकी भूरे निप्पल टाइट बूब्स दिखाई देते थे. मैंने कई बार भाभी से बात करते हुए उनके मुलायम पेट को छुआ भी है.
एक बार भैया और भाभी किसी रिश्तेदार को दिखने के लिये बाहर जा रहे थे और मेरे पास आके बोले कि ‘नमिता और सुनील एक दिन के लिये अपने पास रखना सीमा’.
मैंने कहा ‘कोई बात नहीं.
वो लोग शाम कोसीता और सुनील को मेरे पास छोड़ कर निकल गये.
मेरे फ़्लैट में दो कमरे हैं एक में मैं सोती हूं. दूसरे कमरे में मैंनेसीता और सुनील का सोने का इन्तेजाम कर दिया. घर में मैं सिर्फ़ शोर्ट्स और एक टी-शर्ट पहनती हूं, खास करके गर्मियों में.
रात का खाना खाने के बाद हम तीनो टीवी देखने बैठे.सीता मेरी बगल में बैथी थी, थोड़ी देर बाद वो मेरी गोद में सर रख के सो गयी. मेरी टी-शर्ट थोड़ी ऊपर की तरफ़ उठ गयी थी और मेरा पेट उसे साफ़ नजर आ रहा था.
नमिता ने अचानक मुझसे पूछी- आंटी आप मम्मी की तरह नाभि में छल्ला क्यों नहीं पहनती, आपको बहुत सूट करेगी. आपकी नाभि कितनी सुन्दर है.
उसने फिर मुझसे पूछि क्या मैं आपकी नाभि में एक किस कर सकती हूं.
मैंने कहा- ठीक है.
उसने मेरी नाभि में एक किस किया.
फिर उसने मेरा हाथ अपने पेट के ऊपर रख दिया. उसने एक पिंक कलर का टोप और नीला शोर्ट स्कर्ट पहना हुआ था. मेरा हाथ उसके पेट के ऊपर रखते ही उसने अपना तोप थोड़ा और ऊपर उठा लिया.
मैंने अपना हाथ उसके पेट पे फिराते हुए उसको बोली ‘तुम्हारी नाभि भी तो बहुत अच्छी है तुम क्यों कोई रिंग नहीं पहनती’.
उसने कहा ‘मम्मी ने कहा है अगले साल मेरी नाभि छिदवा देंगी फिर मैं उसमे रिंग पहनुंगी’.
थोड़ी देर बाद मुझे ख्याल आया सुनील क्या कर रहा. मैं मुड़ के सोफ़े पे देखा तो देखा कि सुनील गहरी नींद में है. मैं उठी और सुनील को गोद में उठा दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया. और वापस आ गयीसीता के पास जो कि तब भी टीवी देख रही थी. मैं जब उसके पास आयी तो देखा के उसने इतने में अपनी स्कर्ट उतार कर सिर्फ़ पेंटी पहन के बैठी थी. पिंक रंग की टोप और पिंक रंग की पेंटी में बहुत सुन्दर लग रही थी. मेरे बैठते ही उसने फिर से मेरी गोद पे सर रख कर सो गयी.
थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा- आंटी आप मेरे बदन पे थोड़ा सा हाथ फिरा देंगी?
मैंने कहा- क्यों नहीं.
तो उसने उठ कर अपनी टोप भी उतार दी. उसने अन्दर और कुछ नहीं पहना था. उसके स्तन (बूब्स) निम्बु जैसे थे और निप्पल हल्के गुलाबी रंग के थे.
मैं उसके बदन पर आहिस्ता आहिस्ता हाथ फिराने लगी. उसने अचानक मुझसे पूछा ‘आंटी क्या आप ऐसे ही सोती हैं मतलब पूरे कपड़े पहन कर.
मैंने कहा- क्यों तुम कैसे सोती हो?
उसने कहा मैं तो सिर्फ़ पेंटी पहन के कभी कभी तो ज्यादा गर्मी में बिल्कुल नंगी सोती हूं.
मैंने कहा तुम अपने भाई के साथ नंगी सो जाती हो.
उसने कहा तो क्या वो भी तो नंगा ही सोता है. और वैसे भी बचपन से हम कितनी बार एक दूसरे को नंगे देख चुके हैं.
मैंने कहा बचपन की बात अलग है, लेकिन आब तुम बड़ी हो गयी हो. क्या भैया भाभी कुछ नहीं कहते.
नमिता ने कहा नहीं वैसे भी वो लोग खुद अपने कमरे में नंगे ही सोते है. मैंने दो तीन बार देखा है. और आप भी तो घर में कभी कभी नंगी ही रहती हैं.
मैंने कहा तुम कैसे जानती हो.
उसने कहा एकबार मैं घर में सुबह दूध के बारे में पूछने आयी थी. आपका दरवाज़ा बंद नहीं था अन्दर आके देखा तो आप नंगे ही किचन में नाश्ता बना रही थीं.
मैंने कहा तुमने मुझे आवाज क्यों नहीं दि.
उसने कहा तब मैंने सोचा के आप मुझे डातोगी.
मैंने कहा क्यों डातुंगी क्या तुमने कोई गुनाह किया था.
नमिता ने कहा अगर आप नाराज़ न हों तो क्या आप मुझे अपने स्तनो दिखाएंगी.
मैं हंस पड़ी अपनी छोटी लेस्बियन को देख कर. और अपनी टी-शर्ट और शोर्ट उतार कर बिल्कुल नंगी होकर बैठ गयी. उसने भी अपनी पेंटी उतार दी उसकी बिना बालों वाली चूत एकदम चमक रही थी. मेरी चूत भी एकदम साफ़ थी.
उसने मेरी चूत पे एक प्यारी सी किस की. मेरे बदन में करेंट सा दौर रहा था, वो जैसे रियेक्ट कर रही थी मुझे लग रहा था वो इस तरह का सेक्स पहले कर चुकी है.
मैंने उससे पूछा क्या तुम ऐसे प्यार के बारे में जानती हो.
उसने कहा हाँ इसे लेस्बियन सेक्स कहते हैं.
मैं चौंक गयी और पूछा तुम्हे कैसे पता.
उसने कहा मेरी एक दोस्त है शालिनी एकबार मैं जब उसके घर गयी थी तब उसकी बड़ी दीदी, शालिनी और मैं हम तीनो ने ऐसे किया था. तब उसकी दीदी ने मुझे बताया था. और एकबार शालिनी जब हमारे घर में आयी थी तब भी हमने ऐसे सेक्स किया था और वो भी रजा के सामने.
मैंने कहा मतलब सुनील भी तुम्हारे इस सेक्स के बारे में जानता है.
हाँ लेकिन आंटी सुनील सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानता. अच्छा आंटी सुनील तो सेक्स के बारे में अभी कुछ नहीं जानता फिर भी जब भी मैं जब भी उसके लंड के साथ खेलती हूं तो उसका लंड एकदम टाइट और खड़ा हो जाता है.
मैंने पूछा क्या तुम सुनील के लंड के साथ खेलती हो?
उसने कहा हाँ रात में सोते वक्त कभी कभी मैं उसके लंड को और वो मेरी चूत को सहलाता है. और उसके लंड से कभी कभी कुछ चिपचिपा सा लिक्विड निकल आता है.
मैंने उससे कहा ये लड़कों के लंड का धर्म है. और वो चिपचिपा सा जो निकल आता है उसे सीमेन कहा जाता है.
मैन एक टीनऐज लड़की की बातें सुनकर हैरान भी हो रही थी और खुश भी हो रही थी एक टीनऐज लेस्बियन पार्टनर पा कर.
रात भी बहुत हो चुकी थी मैंनेसीता से कहासीता अब चलो सो जाओ कल मेरी छुट्टी है कल सुबह हम बात करेंगे.
उसने कहा आंटी आप भी हमारे साथ सो जाइये न.
मैंने कहा ठीक है.
हम तीनो एक ही कमरे में सो गये.
सुबह मैं जब उठी तबसीता और सुनील सो रहे थे. दिन के उजाले मेंसीता के गोरे नंगे बदन एकदम एंजल की तरह लग रही थी.
मैं फ़्रेश हो कर नाश्ता बनायी, इतने में सुनील औरसीता भी जग गये थे. मैं एक टी-शर्ट और पेंटी पहनी हुई थी.
मैंनेसीता से कहा ‘तुम भी फ़्रेश हो कर कुछ कपड़े पहन लो.
तो उसने कहा क्यों यहाँ कौन आने वाला है, मैन आज नंगी ही रहूंगी. और आप भी. मुझे आपका नंगा बदन बहुत अच्छा लगता है.
तब सुनील ने कहा दीदी आज क्या तुम और आंटी वैसा खेल खेलोगी जैसे शालिनी दीदी के साथ खेलती थी.
नमिता ने कहा हाँ.
सुनील ने कहा तब तो बड़ा मजा आयेगा. लेकिन दीदी आज मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगा.
नमिता ने कहा ठीक है.
मैं भीसीता के साथ लेस्बियन सेक्स के लिये तड़प रही थी. हम तीनो नंगे हो कर मेरे बेडरूम चले गये. मैंनेसीता से कहा तुम अपनी टांग फैला कर बिस्तर में बैठो और सुनील का लंड को चूसो. मैं अपना मुंहसीता की चूत पे लगा कर उसे चाट चाट कर गीली की और दोनों हाथों से उसकी छोटी छोटी बूब्स को मसलती रही. फिर अपने एक हाथ से उसकी चूत को और फैलाई और दूसरे हाथ की दो ऊँगलियाँ उसकी चूत के अंदर धीरे धीरे घुसाने लगी.
शुरु शुरु में उसकी चूत टाइट होने के कारण घुसाने में तकलीफ़ हुई वो मुंह से आवाज़ भी निकल रही थी बाद में मैंने अपनी उंगली उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगी और वो जोर जोर से सुनील के लंड को चूसने लगी. थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा. मैंने अपना मुंह उसकी चूत पे लगा कर उसे चाटना शुरु कर दिया.
इधर सुनील के लंड से भी सीमेन निकलना शुरु हो गया था वो अपनी दीदी के मुंह में ही अपना पूरा सीमेन झड़ दिया. अब मैंनेसीता सा कहा तुम अब मेरी चूत को इसी तरह सहलाओ. उसने मेरी चूत में अपनी उंगली घुसा कर अन्दर बाहर करने लगी. बीच बीच में अपना मुंह मेरी चूत पे लगा कर चाटने भी लगी. कुछ समय बाद मेरी चूत से भी पानी निकलना शुरु हो गया तोसीता और सुनील दोनों ने मिलकर मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा.
हुम तीनो थक कर लेट गये.सीता ने कहा आंटी आज हम लोगों ने जो मजा किया वो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे.
उस दिन पूरा समय हम तीनो नंगे रहे. जब तक भैया भाभी आकरसीता और सुनील को घर न ले गये. उस दिन के बाद जब कभी भीसीता मेरे पास आती थी तब हम ऐसे सेक्स करते थे.
एक बार शालिनी भी उसके साथ अयी थी. वो दूसरि घटना है जो मैं आप लोगों को बाद में बताऊँगी. Antarvasna
एक बहुत पुराने गाने कि तलाश थी मुझे। इसे मुकेश Hindi Porn Storiesऔर लता ने गाया था। फ़िल्म का नाम मुझे याद नहीं था। सिर्फ़ गाने के बोल ही याद थे। कुछ इस तरह था वो गाना—छोड़ गये बालम, मिझे हय अकेला छोड़ गये। सीडी, कैसेटों की दुकानों मे काफ़ी ढूंढा, पर नहीं मिला। किसी ने कहा कि शायद लैमिन्ग्टन रोड पर मिल जाये।
मैं लैमिन्ग्टन रोड गया। इत्त्फ़ाक से पहली ही दुकान से यह गाना मिल गया, पर वहाँ क्या हुआ, ये बताता हूं।
मैंने दुकान मे देखा कि कैश काउन्टर पर एक आदमी को छोड़ कर बाकी सब लड़कियां हैं। मैं सीडी के काउन्टर पर गया तो लड़की ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया और बोली-यस सर ! वट कैन आई डू फ़ोर यू?
ये मेरी बुरी आदत है कि जब भी मैं किसी लड़की को देखता हूं तो न चाहते हुए भी मेरी नज़र सबसे पहले उसकी छाती पर पड़ती है। यहाँ भी ऐसा ही हुआ, मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी पर मैं सम्भल गया। उसने भी मेरी इस हरकत को भाम्प लिया और अपने दुपटटे से दिलकश कबूतरों को ढकते हुए फ़िर बोली-कैन आई हेल्प यू?
जी तो चाहा कि कह दूं- इन कबूतरों को पालना चाहता हूं, लेकिन कहा- जी, मैं एक बहुत पुराना गाना तलाश रहा हूं, अगर यहाँ मिल जाये?
वो झट से बोली- गाने के बोल बताइये।
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये,
कुछ सोचते हुए वो बोली- मुझे तो ऐसा कोइ गाना याद नहीं आ रहा है- ठहरिये, मैं सर से पूछती हूं।
यह कह कर वो उस अधेर आदमी के पास गई जो कैश काउंटर पर बैठा था। थोड़ी देर बाद वो वापस आकर बोली- है हमारे पास- ये फ़िल्म बरसात का गाना है- आप रुकिये, मैं यह सीडी लाती हूं। वो उपर गई और एक सीडी लाई, बोली- पर आपको इस गाने के लिये पूरी सीडी खरीदनी पड़ेगी-इसमें कुछ और पुरा्नी फ़िल्मों के गाने भी हैं।
कोइ बात नहीं लेकिन देखिये इसमें वो गाना है य नहीं
जरूर होगा– इस सीडी में बरसात फ़िल्म के गाने भी हैं
हाँ, लेकिन देखो वो पर्टिकुलर गाना है भी या नहीं
वो सीडी के कवर पर लिखे गानो कि लिस्ट देखने लगी और बोली- क्या बोल बताये थे आपने?
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये–
वो एक एक गाना पढने लगी–दुम– नही–दम भर जो इधर मुंह फ़ेरे–बरसात में हमसे मिले… हवा मे उड़ता जाये– चोद गये–ओह सारी– छोड़–
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये– ये लीजिये। वो जल्दी से सीडी मेरे हाथ मे देते हुए बोली और फ़िर दूसरी और देखने लगी।
मैं अपनी हंसी रोक ना सका–वो शर्म से लाल हो गई और बोली- सारी।
मैंने कहा- कोइ बात नही- मुझे दोबारा हंसी आ गई।
वो नर्वस होते हुए बोली- देखो ना छोड़ की स्पेलिन्ग ऐसी होती है क्या-? सी डबल एच लिखना चाहिये ना- यहाँ सिन्गल एच ही है
हाँ सच कहा आपने– आपने तो चोद पढा– कई लोग तो इसे चोद– मैं कहते कहते रुक गया।
वो कैश काउंटर की तरफ़ और फ़िर अपनी साथी लड़कियों की ओर देखते हुए बोली- और कुछ?
जी बस — इतना काफ़ी है– अच्छा लगा।
व्हाट?
अच्छा लगा कि इतना ढूंढने के बाद आखिर यह गाना मिल ही गया।
और कुछ?
नहीं बस-कितने पैसे हुए?
मैं बिल बना देती हूं आप काउंटर पे पेमेंट कर दें।
जब मैं घर आया तो सोचने लगा-उसके बूब्स तो ईरानी होटल की डबल रोटियों जैसे थे- होंठ भी कम सेक्सी ना थे॥ अगर ये होंठ मेरे लन्ड को कोमलता से दबा लें तो क्या हो? मेरे शरीर में झुरझुरी सी आ गई।
रात को सपने में मैं उसे लेकर किसी हिल स्टेशन चला गया। मैंने देखा-हम दोनों नंगे ही पहाड़ियों की सैर कर रहे है। मैं कभी उसके कन्धे पर हाथ रख कर चलता तो कभी उसकी कमर मे बाहें डाल कर्। मेरा हाथ फ़िसल कर उसकी गान्ड पर रुक जाता। उसकी छातियां तजमहल के गुम्बद लग रहे थी पीछे से उसके गोल गोल कोमल चूतड़ यूं उपर नीचे हो रहे थे जैसे कोइ सी-सा ऊपर नीचे झूल रहा हो। मैं अपना लन्ड उसकी गांड की दरार में घुसाना चाहता था लेकिन घुस नहीं पा रहा था मैंने खूब जोर लगाया तो वो चिल्लाई- पागल हो गये हो क्या? मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी और एक बार फ़िर जोर से झटका दिया, ताकि लन्ड अपनी मन्जिल तक पहुंच जाये। झटके से वो गिर पड़ी और मैं भी उसी के साथ चारों खाने चित्त हो गया। लन्ड पथरीली जमीन से टकराया और मैं चीख पड़ा– बहनचोद !!!
आंख खुली तो मैं पलंग से गिर कर जमीन पर पड़ा था। घरी मे टाइम देखा तो सुबह के साढे छह बजे थे। लन्ड जबरदस्त अंदाज में खड़ा था और किसी चूत की फ़िराक मे धीरे धीरे हाँफ़ रहा था। मुझे हाथ से ही लन्ड को शांत करना पड़ा। नहा धो कर कमरे से निकला तो घर वालों को काफ़ी हैरानी हुई कि नौ बजे उठने वाला लड़का आज इतनी जल्दी कैसे उठ गया।
” क्या आज कालेज जल्दी जाना है?” बड़े भाई ने पुछा।
” हाँ आज एक्स्टरा क्लास है-” और मैं क्या कहता। जब कह दिया तो घर से बाहर निकलना भी था। मेरे कदम फ़िर लैमिन्ग्टन रोड की तरफ़ उठ गये।
दुकान बंद थी। बाजू के पान वाले से पूछा तो वो बोला-‘दस बजे खुलती है दुकान” मैंने घड़ी देखी। अभी साढे नौ ही बजे थे। मैं दूर जाकर खड़ा हो गया। जैसे तैसे दस बजे। दुकान खुली, वो लगभग सवा दस आई। जब वो दुकान मे घुस रही थी तो मैंने देखा कि उसकी गान्ड के उभार बिलकुल सपने मे देखी हुई गान्ड कि तरह ही थे। मैं सोचने लगा कि सुबह का सपना वाकैई सच होता है !
थोड़ी देर में मैं दुकान के अन्दर गया। उसकी नज़र मुझ पर पड़ी औए उसके भाव देख कर मुझे यह अंदाजा हुआ कि उसने मुझे पहचान लिया है।
मैं सीधे उसके पास गया। वो जबरन मुस्करा के बोली- यस सर?
”मुझे एक और सीडी चाहिये”
कौन सी?
एक पुरानी फ़िल्म की॰॰॰अगर आपके पास हो तो॰॰॰
फ़िल्म का नाम?
राजा हरिशचंद्र
उसने सिर हिलाया और बोली- सर को पूछती हूं।
आज वो मुझे कुछ खूबसूरत भी नज़र आयी। बड़े बूब्स तो मेरी कमजोरी हैं ही।
जल्दी ही वो वापिस आयी और बोली-ईतनी पुरानी फ़िल्म के गाने नहीं हैं
ओह ! बैड लक, मैं निराश हो कर बोला।
और कुछ?
नहीं॰॰॰यही चाहिये था॰॰॰खैर थोड़ी देर बाद आउंगा।
क्यों? उसने पूछा।
क्यों मतलब? आपकी दुकान में कोइ क्यों आता है?
अच्छा, सोरी सर ! यू आर मोस्ट वेलकम!
कालेज के बाद फ़िर उसी दुकान में पहुंचा। अबकी बार वो दूर से ही मुस्काई। जब मैं उसके पास पहुंचा तो वो खुद बोली- कोइ और पुरानी फ़िल्म?
हाँ॰॰॰फ़िल्म चुदाई की सीडी चहिये।
व्हाट???॰॰॰ वो ऐसे बोली जैसे बिजली का करंट लग गया हो।
क्या हुआ? मैंने भी हैरानी जताई।
क्या कह रहे हैं?
कोइ अजीब बात कह दी मैंने?
किस फ़िल्म की सीडी चाहिये आपको?
जुदाई फ़िल्म की !
जुदाई ?
हाँ ! ॰॰॰आपने क्या सुना?
नहीं नहीं ठीक है॰॰॰जुदाई की सीडी होगी ही॰॰॰
लेकिन मुझे पुरानी चुदाई की सीडी चाहिये॰॰॰
वो फ़िर चौंक गई और मुझे शक भरी नज़रों से देखने लगी॰॰॰
मैंने पूछा- अब क्या हुआ?
कुछ नहीं॰॰॰पुरानी मतलब्॰॰॰? उसमे एक्टर कौन थे?
जितेन्द्र और शयद रेखा॰॰॰ मैंने युं ही कह दिया।
वो उपर की मन्जिल पर गई, थोड़ी देर बाद नीचे आयी, कैश काउंटर पर गई, दो तीन मिनट बाद आयी और बोली-सोरी सर्॰॰॰नई जुदाई कि सीडी है॰॰॰ पुरानी नहीं।
मैं फ़िर अपने को निराश जताने लगा॰॰॰वो मुझे धयान से देखने लगी।
फ़िर मैंने अपने दोस्त करण का नम्बर मिलाया और बोला॰॰॰
हाँ भैया॰॰॰जुदाई कि सीडी तो नहीं मिली॰॰॰क्या करूं?
उधर से करण बोला- अबे क्या बोल रहा है तू?
अच्छा दूसरी दुकान में देखूं ओके ओके जी जी॰॰॰
करण फ़िर हैरानी से बोला- कहाँ है तू॰॰॰क्या बोल रहा है?
कौन सी? ॰॰॰लन्ड्॰॰॰लन्डन्॰॰॰ कौन सा लन्दन?
मैंने चोर नज़रो से देखा, उसका चेहरा लाल हो गया था
जी ॰॰॰ नाईट इन लन्डन्॰॰॰ अच्छा॰॰॰पुछता हूं भैया॰॰॰
मैंने फ़ोन काटा और लड़की से पूछा- नाईट इन लन्डन् की सीडी या कैसेट होगी आपके पास?
उसने सीडी तलाश कर मुझे दे दी और आदत के अनुसार बोली- और कुछ?
नहीं बस्॰॰ बिल बना दीजिये।
वो सर झुका कर बिल बनाने लगी।
अगले दिन मैं फ़िर उसकी दुकान में पहुंच गया। आज उसने गुलाबी साड़ी पहनी थी। होठों पर हल्के रंग की लिप्स्टिक भी थी। वो उम्र में मुझ से कुछ बड़ी शायद तीस बत्तीस की लग रही थी। ब्लाउज का गला सामान्य से कुछ बड़ा ही था, जिसमे से उसकी बड़ी बड़ी छातियां गजब ढा रही थी।
यस सर ! उसने मुस्कुराते हुए पुछा- सीडी?
हाँ पुरानि फ़िल्म की सीडी या कैस्सेट जो भी हो!
फ़िल्म का नाम ?
गांड है तो जहान है॰॰॰ मैंने जानबूझ कर गांड शब्द का इस्तेमाल किया।
वो घूर कर मुझे देखने लगी।
है तो दे दीजिये।
क्या नाम बताया आपने?
जान है तो जहान है॰॰॰
इस नाम की तो कोई फ़िल्म नहीं आई।
आप सर से पूछिये।
ठीक है॰॰ वो कैश काउंटर तक गई। थोरी देर बाद आ कर बोली- सर आपसे बात करना चाह्ते हैं
मैं थोड़ा घबरा गया कि कहीं साले को शक तो नहीं हो गया। मैं उस तक गया तो उसने पूछा- इतना पुराना पुराना गाना कयको मांगता तुमको?
मेरेको नाइ मेरा भाई को मांगता॰॰॰ वो कोइ रिसर्च कर रहा है।
आप एच एम वी में जाके पूछो ना॰॰॰
फ़िर मैंने पूछा- अच्छा आपके पास वो गाना है॰॰॰चूतक चूतक चूतिया॰॰॰?
वो हंसने लगा॰॰॰अरे! ये क्या बोलता॰॰चूतक चूतक नही तूतक तूतक्॰॰॰
लेकिन ये तो नया गाना है तुम्हारा भाई क्या करेगा इसका?
भाई को नही॰॰ ये तो मुझे चाहिये।
अच्छा उधर सोना से पूछ लो।
सोना कौन?
अरे वही सेल गर्ल्॰॰॰
अच्छा तो उसका नाम सोना है॰॰
मैं उसके पास पहुंचा- सोना॰॰वो पोप भन्ग्ड़ा है आपके पास्॰॰॰तूतक तूतक तूतिया॰॰॰
वो मेरी तरफ़ देख कर बोली- मेरा नाम किसने बताया आपको?
चन्दू साब ने॰॰॰
कौन चंदू साब?
वो जो काउंटर पे बैठे हैं
अरे वो तो मेहता साब हैं
अच्छा मुझे मालूम नही था।
चूतक चूतक चूतिया है आपके पास?
वो सपाट नज़रों से मुझे देखते हुए बोली॰॰ अब मैं समझ गई॰॰तुम जानबूझ कर गलत बोल रहे थे अब तक
नही है ये गाना॰॰॰ वो नाक फ़ुला कर बोली और दूसरी तरफ़ मुंह कर लिया।
उस दिन मैंने सोच लिया कि आज इसे रास्ते मे पकड़ूंगा।
शाम को सात बजे दुकान बंद हो गई और वो बाहर निकली।
मैं उसके पीछे हो लिया।
थोड़ी देर पीछा करने के बाद ग्रांट रोड स्टेशन आने से पहले ही उसके पास पहुंच कर धीरे से कहा॰॰॰हाय !
वो चौंक कर मुझे देखने लगी। थोड़ी घबरा भी गई।
मैंने फ़िर हाय कहा।
वो बोली-क्या बात है, क्या काम है?
सोरी, मैं जरा लेट हो गया, आपकी दुकान तो बंद हो गई।
हाँ, अब उसके कदम तेज़ हो गये थे।
अरे ! आप दौड़ क्यों लगा रही हैं?
मुझे जल्दी है। सात बीस की टरेन पकड़नी हैकहाँ रहती हैं आप ?
कहाँ रहती हैं आप ?
उसने जवाब नही दिया
दरअसल मुझे एक और पुरानी फ़िल्म की सीडी चाहिए थी अर्जेंट
अब कल आइये
हाँ वो तो अब कल ही
यहाँ दूसरी दुकाने भी हैं वहाँ ट्राई कीजिये
हाँ, मगर वहाँ आप तो नही मिलेंगी ना
व्हाट? क्या मतलब ?
मैंने हिम्मत करके कहा…देखिये सच कहता हूँ… अब तक जितनी भी शोपिंग मैंने आपकी दुकान से की है सिर्फ़ आपसे मिलने के लिए…
वो रुक गई और मेरी आँखों में देख कर बोली…तुम्हारे इरादे अच्छे नही लगते.
हाँ वो तो है…
क्या मतलब ?
अब मतलब तो आप समझ ही गई होंगी .. मैं आपको डिनर मतलब लंच पर ले जाना चाहता हूँ
…
…काफी पापड़ बेलने पड़े उसे पटाने के लिए। आख़िर वो रास्ते पर आ ही गई. .. पता चला कि उसका तलाक हो चुका है.
ससुराल वालों ने निकल दिया है घर से. मायका दिल्ली में है और वो अपने माँ बाप के पास रहना नही चाहती। यहाँ बोरिविली में एक चल में किराये पर रहती है.
काफी कोशिशों के बाद मैंने उसे अपने साथ सोने के लिए राजी कर लिया. अब वो काफी खुल चुकी थी. बोली-कहाँ ले जाओगे?..अपने घर ?
नही वहाँ तो मेरी फॅमिली रहती है.
फ़िर?
किसी होटल में.
मैंने एक अच्छे होटल में कमरा बुक कर लिया. उस दिन उसने काम से छुटी ले ली थी। मुझे ये सोच कर मजा आ रहा था की मैं सारा दिन उसे चोदूंगा। उसकी चूत चाटुन्गा, वो मेरा लंड अपने कोमल होठों से मसलेगी.
तयशुदा दिन हम होटल में पहुंचे। कमरा पहले से ही बुक था. दोपहर के दो बज रहे थे. हमने बियर पी और खाना खाया .फ़िर मेरे सब्र का पैमाना भर गया.मैंने उसे कहा…सोना, हर रात को मैं तुम्हे सपने में चोदता हूँ आज वो दिन आ ही गया जब सचमुच…
वो बोली..मैं भी बिना मर्द के कई दिनों से प्यासी हूँ अभी तक बैंगन ,लोकी से काम चला रही थी, आज मर्द का लंड मिलेगा.. पर
पर क्या?
अभी तो तुम इतने मर्द नही लगते। कितना बड़ा है तुम्हारा?
देखोगी?
हाँ दिखाओ…
मैंने झट से कपडे उतारे लंड तमतमा कर फडफडा रहा था वो बड़े गोर से मेरे लंड को देखने लगी और फ़िर कहा…चलेगा !
अरे 6 इन्च के लोडे को देख कर कह रही हो… चलेगा… दोडेगा बोलो ना…
6 इंच का लोडा क्या खाक दोडेगा ? दोड़ने के लिए तो कम से कम 8 इंच का घोड़ा चाहिए!
मुझे गुस्सा आ गया और मैं बोला-पहले आजमा तो लो,इस 6 इंच के टट्टू को क्या सरपट दोड़ता है.
अच्छा?
ये कह कर वो आगे झुक गई और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ किया, उसका पकड़ना था की मेरा फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लंड आधा इंच और लम्बा हो गया. वो धीरे धीरे लंड के सुपाड़े को सहलाने लगी। मुझे हल्का हल्का नशा आने लगा था।
उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरि दोनों टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया मे हूं। मेरे जिस्म मे चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर मे लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया। लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था। वो उठ कर बोली- क्यो मर्द?… बस क्या?… और कुछ करना है?
जानेमन्… अभी तो पूरा दिन बाकी है… बस एक मिनट्… अभी तैयार हो जाता हूं… ये कह कर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैं उसे घूम घूम के चारों ओर से देखने लगा। वो हन्स कर बोली… ऐसे क्या देख रहे हो ?
देख रहा हूं, सपने मे जो हसीना देखी थी, वही अब सामने है… वही रंग रूप, वही उतार चढाव, वही चूत्… वही गांड वही चूची वही जांघ…
तुम सचमुच माल हो यार !
कमाल है यार माल देख के भी धमाल नही कर रहे हो… वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया। कमरे मे म्युजिक बज रहा था हम अपने आप धीरे धीरे नाचने लगे। मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। वो बहुत भावुक हो रही थी।
मैंने उसे बेद पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गई। उसकी चूत देख कर लग रहा था कि उसके पति ने उसे ज्यादा नहीं चोदा था। गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। मेरे मुंह मे पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत कि पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी। तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा। उसकी सिसकियां चीखों मे बदल गई।
मैंने उसे उल्टा किया। पीछे का नज़ारा और भी मज़ेदार था। पतली कमर के नीचे सुंदर सी गोल गान्ड्। मैंने उसकी चूत से बहुत सारा रस निकाला और उसकी गान्ड मे मल दिया। गान्ड चिकनी हो गई और चमकने लगी। मैं धीरे धीरे उसकी गान्ड की मसाज करने लगा। कभी मेरी उन्गलियां उसकी गान्ड मे तो कभी उसकी चूत में।
चूत का रस था कि निकला ही जा रहा था और मैं उसी के रस से उसके सारे शरीर की मालिश कर रहा था। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। मैं उसकी गांड मे अपनी बीच की उंगली घुसाने लगा। दो तीन मिनट में पूरी उन्गली अन्दर घुस गई और मैं बड़े आराम से अपनी उंगली से उसकी गांड की चुदाई करने लगा।
उसकी सिसकारी बद नही हो रही थी। गांड मे उंगली का मज़ा शायद वो पहली बार ले रही थी। आखिर उससे रहा नही गया और वो बोली… अपना लन्ड डाल दो मेरी गांड मे… पेल दो… खूब जोर जोर से… रुको नही एक भी पल्…
मैं तुरन्त पीछे से उसके उपर चढ गया। उसकी कमर के नीचे हाथ डाल कर थोड़ा उपर उठाया। उसकी गांड ऊँट की पीठ की तरह ऊपर हो गई। गांड का छेद साफ़ दिखाई दे रहा था। धीरे सेमैंने अपना लन्ड उसकी गांड के छेद पर रखा तो अपने आप ही अन्दर जाने लगा। मैंने बस थोड़ी ही मेहनत की और हल्का सा धक्का दिया, लन्ड गांड के अन्दर यूं गया जैसे सांप बिल मे फ़ुर्र से घुस जाता है। मुझे अपना सपना याद आ गया जिसमे मैंने लाख कोशिश की थी गांड मे लन्ड घुसाने की, मगर सफ़ल ना हो सका था। वो हल्के से चीखी भी… मगर फ़िर चुप हो गई। मैं अपना लन्ड उसकी गांड मे अन्दर बाहर करने लगा। वो सी सी की आवाज़ निकालने लगी। फ़िर ये आवाज कुछ ऊँची हो गई। मेरी नस नस को मज़ा मिल रहा था और शायद उसे भी, क्योंकि वि भी हाय्… उफ़्… मर गई कहती जा रही थी।
मक्खन की तरह कोमल गांड मे मेरा लोहे का सा लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था। जब वो अपनी गांड के दोनों पाटों से दबाती तो मैं अन्दर बाहर नही कर पाता। जब वो अपनी पकड़ ढीली कर देती तो मैं तुरन्त अपने लन्ड को उसकी गांड से बाहर निकालता और फ़िर फ़चाक से अन्दर डाल देता। ये खेल उसे बहुत अच्छा लग रहा था। वो अपनी गांड उचका उचका कर मेरी हिम्मत बढा रही थी
यह खेल 10 -15 मिनट ही चला। तब मेरे लन्द ने अपना सारा रस उसकी गांड मे उतार दिया। पूरा रस निकलने तक मैं उसकी गांड मे धक्के मारता रहा। जब अन्तिम बूंद भी निकल गई तो मैंने अपना लन्ड उसकी गांड से बाहर निकाला, जो उस वक्त भी लाल लाल और तमतमाया हुआ था।
वो सीधे लेट कर जोर जोर से सांस लेने लगी। यही मेरी हालत थी। कुछ देर हम यूं ही पड़े रहे। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। सोना नंगी ही बाथरूम भागी। मैंने जल्दी से कपड़े पहने, बलों को सीधा किया और दरवाजा खोला। दरवाजे पर रूम बोय कम वेटर खड़ा था।
क्या बात है? मैंने पूछा।
साहब, कुछ नाश्ता वाश्ता…॥
यार कुछ चाहिये होगा तो इन्टरकोम से बोल देन्गे।
सोरी सर ! मगर आपकी तरफ़ से कोइ मैसेज नही आया तो मैंनेजर ने भेजा कि… शायद आपको कुछ चाहिये हो ?
मैंने घड़ी देखी… शाम के 5 बज रहे थे. मुझे हैरानी हुई कि इतनी जल्दी 5 कैसे बज गये। खैर मैंने उसे बीयर और चिकन पकौड़ा लाने को कहा। वो आधे घंटे बाद नाश्ता लाया। तब तक हमने इन्तजार करना ही मुनासिब समझा।
भरपेट नाश्ता करने के बाद मैंने वेटर से खाली डिशेज ले जाने को कहा और उसके जाते ही मैंने फ़िर दरवाजा बंद कर लिया।सोना भी उसी इन्तजार मे थी। उसने फ़टाफ़ट कपड़े उतारे और मैंने भी।
एक बार फ़िर उसने मेरे लन्ड को अपने भीगे मुंह मे ले लिया। बीयर और पकौड़े से तरबतर जीभ ने मेरे लन्ड मे आग सी लगा दी।
वो अपनी जीभ से मेरे लन्ड को सराबोर करने लगी। छह इन्च के लन्ड का यही फ़ायदा है कि वो किसी से भी मुंह मे पूरी तरह समा जाता है। अपने मुंह के अन्तिम सिरे तक वो मेरे लन्ड को लीलती रही और बाहर निकालती रही। मेरे लन्ड को यह वरदान पहले नही मिला था। वैसे तो तीन चार लड़कियों ने सकिन्ग की थी मेरी… पर आज जो अनुभव मिल रहा था वो किसी अनुभवी नारी का ही काम था। लड़कियों ने तो मेरे लन्द को ऐसे चूसा था जैसे लोलीपोप चूस कर फ़ेंक देती हैं। उन्हें तो पानी निकालना भी नही आता था। कई बार उन्होने अपने हाथों से ही मेरे लन्ड को तृप्ति दी थी।
सोना अपने हलक तक मेरा लन्ड ले रही थी।
मैंने उसे दोबारा उल्टा लिटाया और कमर के नीचे से हाथ डाल कर घोड़ी बनने पर मजबूर किया। मैंने उसे ऐसे ऐडजस्ट किया कि चूत बिल्कुल सीध मे आ जाये। उसकी टांगो को और फ़ैलाया। गुलाबी चूत दिखाई देने लगी हल्की हल्की झांटे चूत के आस पास ऐसे खड़ी थी जैसे किसी खजाने की रखवाली के लिये सुरक्षा कर्मी खड़े हों। घुटनों के बल खड़े हो कर उसकी गोरी जांघों पर हाथ फ़ेर कर मैंने उसकी चूत मे अपने लन्द को लगाया और धक्का दिया। आशा के विपरीत मेरा लन्ड उसकी चूत मे फ़ंसने लगा। चूत काफ़ी टाईट थी। ये सोच कर मुझे बहुत मज़ा आया। मैं धीरे धीरे धक्के मार कर अपने लन्ड को उसकी चूत मे पूरी तरह घुसाने की कोशिश करने लगा। इसके लिये मुझे उसकी कमर को पकड़ कर आगे पीछे भी करना पड़ा। थोड़ी कोशिश मे ही मेर लोड़ा टाईट चूत मे अन्दर बाहर होने लगा। दोगी स्टाईल मेरा फ़ेवरेट आसन है। इसमे जो मज़ा आता है वो करने वाले को ही मालूम है। तना हुआ लन्ड चिकनी चूत मे जा रहा था, आ रहा था। चूत के अन्दर की नर्म हडडी मेरे लन्ड के निचले भाग की मालिश कर रही थी। मेरे मुंह से लगातार आह आह की आवाजें आ रही थी। सोना का भी यही हाल था। मैं उसकी गांड को पकड़ कर आगे पीछे कर रहा था। लन्ड को ऐसी सेवा कभी कभी ही मिलती है… और शायद चूत को भी।
अब मैंने वैसे ही उसे डोगी स्टाईल में थामा। उसकी गान्ड को मजबूती से पकड़ कर मैं धीरे से पीठ के बल लेट गया। लन्ड उसकी चूत में ही था। वो मेरा लन्ड लिये उसी तरह धीरे से मेरी जांघों पर बैठ गई। उसने अपनी दोनों टांगें मेरी जांघों के आसपास रख दीं और सम्भल कर बैठ गई। अपने आप को एडजस्ट किया और फ़िर उपर नीचे होने लगी। मेरा लन्ड उसकी चूत में जाकर बाहर निकल रहा था। वो बराबर उपर नीचे हो रही थी। उसका स्टेमिना अच्छा था। यह आसन उसके लिये शायद काफ़ी मज़ेदार साबित हुआ। उसकी चूत से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा और मेरी जांघों और लन्ड को तर करने लगा। उसने अपनी रफ़्तार बढा दी। अब वो चीखने लगी थी।
चकाचक धकाधक छकाछक्… लन्ड चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और वो उसी गति से चीख रही थी। अचानक वो धम्म से मेरी लांघों पे बैठ गई और उसके मुंह से बड़ी जोर से आ…ह निकला। वो पूरी तरह झड़ चुकी थी मगर मैं बाकी था।
उसने अपनी चूत से मेरे लन्ड को निकालने की कोशिश की, मगर मैंने ऐसा नही होने दिया। मैंने मजबूती से उसकी गान्ड को पकड़ा और आगे पीछे करके उसे हिलाने लगा। मेरा लन्ड उसकी चूत में ही था। मुझे उसका सहयोग नहीं मिल रहा था। इसलिये मेरा लन्ड उसकी चूत से बाहर आ गया और वो झट से बेड पे उलटी लेट गई। मेरा पानी निकलना अभी बाकी था। मैं भला उसे ऐसे कैसे छोड़ देता।
मैं फ़ौरन पीछे से उसके उपर चढ गया। पहले तो वो कसमसाई, मगर फ़िर ढीली पड़ गई। मैंने अपने तने हुए चिकने लन्ड को उसकी गान्ड में उतारना चाहा। इसके लिये मुझे उसकी गान्ड को ऊपर उठाना था, मगर वो उठने के लिये राज़ी नहीं हो रही थी। मैं उसकी मजबूरी समझ रहा था। आखिर मैंने दोनों तकिये उठाये और उसके पेट के नीचेए रख दिये। इससे उसकी गान्ड कुछ ऊपर हो गई।
मैंने उसकी गान्ड के दोनों पाटों को अपने अंगूठों से हटाया तो भूरे रंग का छेद नज़र आने लगा।
बस यही थी मेरी- मेरी लन्ड की मन्जिल्…॥
अपने तमतमाए लन्ड को मैंने उसकी गान्ड के संकरे छेद पर रखा। अंगूठे से दोनों फ़ांकों को फ़ैलाए रखा, ताकि छेद छुप ना जाये।
लन्ड बिल्कुल गान्द के छेद पर था। गीला और चिकना तो वो था ही। धीरे से थोड़ा सा लन्ड अन्दर को किया। हल्के हल्के धक्के मार के मैंने अपना पूरा का पूरा लन्ड उसकी गान्ड में उतार ही दिया। पूरा लन्ड कभी कभी ही गान्ड में समाता है, वरना आधे लन्ड की चुदाई से ही काम चलाना पड़ता है। उसे तकलीफ़ जरूर हुई पर उसने प्रोटेस्ट नहीं किया। बीस पच्चीस धक्कों से ही मेरा काम बन गया। उसकी पूरी गान्ड मार कर मैं निहाल हो गया। सारा बचा खुचा पानी निकल गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया।
रात को लगभग दस बजे घर आकर मैंने हिसाब लगाया तो पता चला कि पांच हज़ार खर्च हो गये हैं। ये पैसे मैंनें अपने जेब खर्च से बचा कर रखे थे।
सोना से दोबारा मिलने का वादा तो कर लिया था, पर दोबारा पांच हज़ार जमा करने के लिये मुझे क्य क्य पापड़ बेलने पड़ेंगे, वो मुझे ही मालूम है… सोना को नहीं Hindi Porn Stories
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