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Massage Girl in Baleswar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Baleswar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Baleswar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Baleswar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Baleswar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Baleswar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Baleswar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Baleswar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Baleswar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Baleswar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Baleswar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Baleswar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna Stories

प्यारे दोस्तो, चंदा की Antarvasna Stories बेटी छवि की चुदाई तो उसी रात मैंने कर दी जिस रात चंदा को चोदने उसके घर गया था।

छवि की चूत चोद कर मुझे काफी संतुष्टि भी मिली लेकिन अभी भी मैं मौके की तलाश में था कि छवि की गांड कैसे मारूँ। हर समय मेरे आगे छवि का नंगा बदन घूमता रहता था। कभी-कभी सपने में भी लगता कि मैं छवि को चोद रहा हूँ। तो कभी लगता कि मैं छवि को कुतिया बना कर उसकी गांड में अपना लंड पेल रहा हूँ। मैंने सोच लिया कि अब चाहे कुछ भी हो जाये, छवि की गांड की सील तोड़नी है। इधर कुछ दिनों से चंदा का भी फोन नहीं आया कि मैं किसी तरह से छवि पर अपनी नजर गाड़ सकूँ। इसी उधेड़बुन में एक सप्ताह निकल गया और मैं छवि की गांड मारने के लिए बेकरार हो रहा था।

एक रोज रात के नौ बजे छवि के फोन से मिस कॉल मेरे फोन पर आया। मैंने तुंरत वापिस कॉल किया तो छवि ने मेरा फोन काट दिया। मैं निराश हो गया.

रात में दस बजे खाना खाकर यूँ ही गाड़ी लेकर निकल गया लेकिन बार बार छवि का चेहरा, छवि की चूत, छवि की कड़ी कड़ी चूचियाँ, छवि के चिकने चूतड़ मेरे सामने आ जाते थे। इसी तरह छवि की यादों में खोया जब मैं आई.टी.ओ. पहुंचा तो छवि की फोन दोबारा आया।

फोन उठाते ही सुरीली सी आवाज आई- हेल्लो राकेश … राकेश बोल रहो हो?
“हाँ… राकेश बोल रहा हूँ.”
“मैं छवि बोल रही हूँ… कुछ याद है या याद दिलाना होगा?”
“नहीं डार्लिंग मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ जानेमन … बताओ कब हाजिर हो जाऊँ आपकी सेवा में …”

छवि बोली- आज रात को मम्मी किसी पार्टी से मिलने बोम्बे जा रही हैं, और मैं घर पर अकेली हूँ। मूड कुछ करने का हो रहा है!
मैं कब आ सकता हूँ? मैं बोला- जब तुम बोलोगी, बन्दा हाज़िर हो जाएगा!
छवि बोली- साढ़े बजे के लगभग मम्मी निकलेंगी घर से! ग्यारह बजे के लगभग आ जाओ!

मैं आई टी ओ पर था ही! कुछ देर इंडिया-गेट के आस पास घूमता रहा और ठीक 11 बजे जा कर उसके घर पर घण्टी बजा दी।
छवि ने आकर गेट खोला, मुझे देख कर मुस्कराते हुए बोली- तुम समय के बड़े ही पक्के हो यार!
मैं भी हँसते हुए बोला- तुम्हारे जैसी सेक्सी आइटम बुलाये तो मैं तो दो घंटे पहले हाजिर हो जाऊँ!
हम दोनों एक साथ हँस पड़े…

छवि देखने में एकदम गोरी-चिट्टी तो है ही, आज उसका ड्रेस और उसे सेक्सी बना रहा था, एक हल्का पतले कपड़े का टॉप जिससे उसकी चूचियाँ एकदम तनी हुई दिख रही थी। किसी का लंड खड़ा कर दें, साले बुड्डे को भी जवान बना दें!

मैं तो 28 साल का जवान था। मेरा लंड तो उसके फोन आने के समय से खड़ा ही था। दरवाजे को बंद करके जब छवि मुड़ी तो मैंने उसे अपनी बाहों में दबोच कर एक किस कर दिया। बदले में छवि भी मुझे किस करने लगी … कभी होठों पर तो … तो कभी मेरे गालों पर, तो कभी माथे पर लगातार वो किस कर रही थी …

मैं समझ गया कि यह साली आज पूरा चुदवाने के लिए बेचैन हो रही है…

उसे बाहों में उठा कर वहीं सोफे पटक दिया और छवि के होंठ को अपने होठों से दबा कर उसका रसपान करने लगा। दस मिनट तक रसपान करने के बाद वो मेरे होंठ को अपने लाल लाल होठों से दबा कर पीती रही।

अब मैंने उसके छोटे से टॉप को निकाल कर अलग कर दिया, उसके दोनों स्तन आजाद थे, मानो जैसे कि कबूतर उड़ने को बेकरार हों! अब छवि को उठा कर अपनी जांघों पर बैठा कर उसके स्तनों को मसलने लगा और उसके मुँह से तरह-तरह की सेक्सी आवाज आने लगी… वोह… मेरे रजा आज जम कर मुझे चोदना … मेरी प्यास बुझा दो…मै कब से प्यासी हूँ … अपने लंड से मेरी प्यास बुझा दो ..

मैं अब उसकी चूचियों को चूस चूस कर पी रहा था जिससे वो और ज्यादा बेचैन ही रही थी।
अब छवि की पैंट-चड्डी को भी उससे अलग कर दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।

अब हम दोनों नंगे थे और एक दूसरे की बांहों में जवानी का पूरा मजे ले रहे थे। 69 की अवस्था में आकर छवि मेरा लंड चूस रही थी और मेरी जीभ उसकी चूत का रस चाट रही थी। बीच-बीच में अपनी ऊँगली से उसकी चूत के छेद चौड़ा कर रहा था क्योंकि आज वो दूसरी बार चुदवाने जा रही थी, चुदाई करने में शुरु के 5-6 बार दर्द तो होता ही है। यह अलग बात है कि कुछ दिन बाद चूत का छेद बड़ा हो जाने पर दर्द कम या नहीं होता है। सोच कर मैं बड़े आराम से सब कर रहा था क्योंकि आज घर पर उसकी माँ चंदा भी नहीं थी सो न डर, न जल्दबाजी! सब कुछ आराम से!
काफी देर तक एक दूसरे से खेलने के बाद अब चुदाई का समय आया।

मैंने थूक लगा कर उसकी दोनों टांगों को फैलाया और उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया जिससे उसकी बुर का मुँह खुल जाए। अब उसकी चूत पर ढेर सा थूक लगा कर अपना सात इंच का लंड पेलना शुरु किया।

वो दर्द से परेशान जरूर हुई लेकिन आराम से पूरा लंड खा गई। थोड़ी ही देर में वो कमर हिला-हिला कर मजे से चुदवाने लगी। उसे भी मजा आ रहा था और मुझे भी! और उस कमरे को भी जहाँ पर ये आवाजें गूंज रही थी- फचक…फचक… वोह… अह..जोर से… फचक… अह…मुझे तो तुम्हारा लंड चाहिए … आज जम कर पेलो… फाड़ डालो मेरी बुर को … मेरे रजा आइ लव यू …राजा…अह…
लगभग एक घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों अपनी मंजिल पर थे। दोनों का बदन अकड़ने लगा और एक झटके के साथ ही छवि की बुर मेरे रस से भर गई। 15 मिनट तक हम एक दूसरे से इसी तरह चिपके रहे।

जब वो अलग हुई तो बोली कि वो बाथ लेगी, मैं थोड़ा हैरान सा था क्योंकि माँ-बेटी की आदत काफी मिलती जुलती थी। मैं भी बाथ लेने उसके साथ ही बाथरूम में चला गया। मैं और छवि एक दूसरे से चिपक कर नहा रहे थे। कभी वो मुझे छेड़ रही थी, कभी मैं उसकी चूचियों को दबा-दबा कर छेड़ रहा था। इसी बीच वो फिर से गर्म हो गई और बाथरूम में ही चुदवाना चाह रही थी। फिर मैंने ढेर सा साबुन का झाग उसकी चूत पर लगा कर कुतिया के पोज में उसकी चूत के छिद्र में लंड को लगाकर जोर का झटका मारा जिससे मेरा लंड एक बार में ही उसकी चूत की गहराइयों को छू गया। छवि के मुँह से जोर से आवाज आई- आइ ओ माँ मर गई!

लेकिन कुछ ही देर में सामान्य हो कर मजे लेने लगी। थोड़ी देर में मैंने उसे उसकी गांड मारने की बात बताई तो उसे बड़ा ही अजीब लगा। लेकिन थोड़ी न-नुकर के बाद छवि गांड मराने को तैयार हो गई। मैं काफी खुश हुआ क्योंकि मुझे मेरे मन की तम्मना पूरी होने जा रही थी। डौगी स्टाइल में ही उसे बाथरूम की दीवार के सहारे झुकाया, छवि की गांड पर काफी सारा साबुन का झाग लगा कर लंड को पेलना चालू कर दिया। लेकिन मेरा लंड उसके गांड में घुस ही नहीं रहा था। छवि पहली बार गांड मराने जा रही थी इसलिए जाहिर था कि उसकी गांड का छेद बड़ा टाईट था। मेरा लंड घुस ही नहीं रहा था। अब साबुन के झाग के साथ उसकी गांड में ऊँगली पेल कर छेद को चौड़ा किया, साथ ही छवि को समझाया कि जब मेरे लंड का मुंड घुसेगा तो दर्द होगा, लेकिन एक बार बर्दाश्त कर लोगी तो फिर मजा ही मजा है।

छवि के हाँ करते ही फिर साबुन के झाग के साथ ही अपने लण्ड को छवि की गांड के छेद में लगाकर जोर का झटका मारा। झटके के साथ ही मेरा लंड छवि के गांड को फाड़ते हुए आधा घुस गया। बदले में दे गया- रुक साले!… तूने मेरी गांड फाड़ दी… मैं मर जाउंगी.. अपना लंड बाहर निकाल चूतिये! मुझे गांड नहीं मरानी…

इसके साथ ही छवि आगे की तरफ भागी जिसे मैं पहले ही जान चुका था। उसके कुछ करने के पहले ही उसकी कमर को जोर से पकड़ कर एक और जोर का धक्का मारा जिससे मेरा लंड उसकी गांड में पूरी तरह से फिट हो गया।

साथ ही गालियों की बौछार- हरामी… साले… कमीने… मेरी गांड फट गई…

जब धीरे धीरे वो शांत हुई तो फिर समझाया। साथ ही धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करते हुए छवि को चोदने लगा। दस मिनट आराम से चोदने के बाद उसे भी मजा आने लगा। अब छवि भी अपने मुँह से सेक्सी आवाज निकाल कर अपनी गांड में लंड पेलवा रही थी- अह वोह… हाय … मेरे राजा … खूब चोदो… म्माजा आ रहा है… आह… वोह… और जोर से…चोदो…

आधे घंटे चुदाई करने के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गांड में उडेल दिया। दोनों शांत होकर बाहर निकले, हमारे चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे। दोनों ने एक दो दो पग व्हिस्की के लगाये। फिर हमारी चुदाई का कार्यक्रम चालू हो गया।

पूरी रात में तीन बार चूत और दो बार गांड में पेला। सुबह जब चलने लगा तो मेरे हाथों में हरे हरे पत्ते थे जिससे मैं समझ गया कि छवि को मेरा प्रोफाइल किसी तरह से मालूम हो गया था।
मैं भी खुश था क्योंकि एक अच्छी चूत के साथ गांड भी चोदने को मिला था साथ हरे हरे नोट भी।

दोस्तो, यह थी छवि की गांड की चुदाई।
कृपया अपने सुझाव मुझे भेजते रहें। Antarvasna Stories

मेरी चुदाई की अन्तर्वासना कहानी पढ़ें...

मेरी उम्र जब जवानी की अठखेलियाँ लेने लगी तब पहली बार मैंने अपने पापा को मम्मी की चुदाई करते देखा तब मेरे मन में अपने ही पापा से चुदवाने की इच्छा जाग उठी.

दोस्तो, मेरा नाम शिवानी है और मैं पूरी 20 साल की हो चुकी हूँ और मैं औरत मर्द के रिश्ते को समझती थी.

मैं मेरे घर में सबके साथ चुदाई कर चुकी हूँ.


मैं मेरे घर में और ससुराल में भी सबसे बहुत चुद चुकी हूँ.

एक बार मैंने पापा को मम्मी को चोदते देखा तो इतना मज़ा आया कि रोज़ देखने लगी.

मैं पापा की चुदाई देख इतनी मस्त हुई थी कि अपने पापा को फंसाने का जाल बुनने लगी और आख़िर एक दिन कामयाबी मिल ही गई.

पापा को मैंने फंसा ही लिया. अब जब भी मौक़ा मिलता, पापा की गोद में बैठ उनसे चूचियाँ दबवा दबवा मज़ा लेती.
पर अभी तक केवल चूचियों को ही दबवा पाई थी, पूरा मज़ा नही लिया था.

मेरे मामा की शादी थी इसलिए मम्मी अपने मायके जा रही थी. रात में पापा ने मुझे अपनी गोद में खड़े लण्ड पे बिठाकर कहा था- बेटी कल तेरी मम्मी चली जाएगी फिर तुझे कल पूरा मज़ा देकर जवान होने का मतलब बताएँगे.

मैं पापा की बात सुन ख़ुश हो गई थी.
पापा अब अपने बेडरूम की कोई ना कोई विंडो खुली रखते थे जिससे मैं पापा को मम्मी को चोदते देख सकूँ. ऐसा मैंने ही कहा था.

फिर उस रात पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बिठाकर उनकी चूत को चाटकर दो बार झाड़ा और फिर 3 बार हचक कर चोदा फिर दोनो सो गए.

अगले दिन मम्मी को जाना था. आज मम्मी जा रही थी. पापा ने मेरे कमरे में आ मेरी चूचियों को पकड़कर दो तीन बार मेरे होंठ चूमे और लण्ड से चूत दबा कर कहा- तुम्हारी मम्मी को स्टेशन छोड़कर आता हूँ, फिर आज रात तुमको पूरा मज़ा दूंगा.
मैं बड़ी ख़ुश थी.

पापा चले गए तो मैं घर में अकेली रह गई.
मैं अपनी चड्डी उतार पापा की वापसी का इंतज़ार कर रही थी.

मैंने सोचा कि जब तक पापा नही आते अपनी चूत को पापा के लण्ड के लिए उँगली से फैला लूँ.

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया.
मैंने चूत में उँगली पेलते हुए पूछा- कौन है?

‘मैं हूँ रमेश.’ रमेश का नाम सुन मैं गुदगुदी से भर गई.

रमेश मेरा 20 साल का पड़ोसी था.
वो मुझे बड़े दिनों से फांसना चाह रहा था पर मैं उसे लाइन नही दे रही थी.

वह रोज़ मुझे गंदे गंदे इशारे करता था और पास आ कभी कभी चूची दबा देता और कभी गांड पर हाथ फेर कहता- रानी, बस एक बार चखा दो.

आज अपनी चूत में उँगली पेल मैं बेताब हो गई थी. आज उसके आने पर इतनी मस्ती छाई कि बिना चड्डी पहने ही दरवाज़ा खोल दिया.

मुझे उसके इशारों से पता चल चुका था कि वो मुझे चोदना चाहता है.
आज मैं उससे चुदवाने को तैयार थी.

रमेश के आने पर सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक क्यों ना इसी से एक बार चुदवाकर मजा लिया जाए.
यही सोचकर दरवाजा खोल दिया.

मैंने जैसे ही दरवाजा खोला रमेश फ़ौरन अन्दर आया और मुझे देखकर खुश हो मेरी चूचियों को पकड़कर बोला- हाय रानी बड़ा अच्छा मौका है.

मैं उसकी हरकत पर सनसना गई.

उसने मेरी चूचियों को छोड़कर पलटकर दरवाजा बंद कर दिया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे होंठों को चूसने लगा और बोला- हाय रानी, तुम्हारी चूचियाँ तो बहुत टाइट हैं. हाय बहुत तड़पाया है तुमने, आज जरूर चोदूंगा.

‘हाय भगवान, छोड़ो पापा आ जाएंगे.’
‘डरो नहीं मेरी जान, बहुत जल्दी से चोद लूँगा. मेरा लण्ड मोटा नहीं है दर्द नहीं होगा.’
वो मेरी गांड सहला बोला- हाय, चड्डी नहीं पहनी है, यह तो बहुत अच्छा है.

मैं तो अपने पापा से चुदवाने के जुगाड़ में ही नंगी बैठी थी पर यह तो एक सुनहरा मौका मिला गया था.

मैं पापा से चुदवाने के लिए पहले से ही गर्म थी.

जब रमेश मेरी चूचियों और गालों को मसलने लगा तो मैं पापा से पहले रमेश से मजा लेने को तैयार हो गई.
उसकी छेड़छाड़ में मजा आ रहा था. मेरी चूत लण्ड खाने को बेताब हो गई थी.

अपनी कमर लचकाती मैं बोली- हाय रमेश, जो करना हो जल्दी से कर लो, कहीं पापा ना आ जाएँ!
मैं पागल होती बोली.

तो रमेश मेरा इशारा पा कर मुझे बेड पर लिटा अपना पैंट उतारने लगा, नंगा हो बोला- रानी बड़ा मजा आएगा.

‘तुम एकदम तैयार माल हो. देखो मेरा लण्ड छोटा है ना!’

उसने मेरा हाथ अपने लण्ड पर रखा तो मैं उसके 4 इंच के खड़े लण्ड को पकड़ मस्त हो गई.
इसका तो पापा से आधा था.

मैं उसका लण्ड सहलाती बोली- हाय राम, जो करना है जल्दी से कर लो.

रमेश के लण्ड पकड़ते ही मेरा बदन तड़पने लगा.
पहले मैं डर रही थी पर लण्ड पकड़ मचल उठी.

मेरे कहने पर वो मेरी टांगों के बीच आया और मेरी कसी कुंवारी चूत पर अपना छोटा लण्ड रख धक्का मारा, सुपारा कुछ अन्दर गया. फिर 3-4 धक्के मारकर पूरा अन्दर पेल दिया.

कुछ देर बाद उसने धीरे धीरे चोदते हुए पूछा- मेरी जान दर्द तो नहीं हो रहा है. मजा आ रहा है ना?
‘हाय, मारो धक्के, मजा आ रहा है.’

मेरी बात सुन वो तेज़ी से धक्के मारने लगा.

मैं उससे चुदवाते हुए मस्त हो रही थी, उसकी चुदाई मुझे जन्नत की सैर करा रही थी.

नीचे से गांड उचकाती मैं सिसयाते हुए बोली- हाय रमेश, जोर जोर से चोदो, तुम्हारा लण्ड छोटा है. जरा ताक़त से चोदो राजा.

मेरी बात सुन रमेश जोर जोर से चोदने लगा.
उसका छोटा लण्ड सटासट मेरी चूत में आ जा रहा था.

मैं पहली बार चुद रही थी इसलिए रमेश के छोटे लण्ड से भी बहुत मजा आ रहा था.

वो इसी तरह चोदते हुए मुझे जन्नत का मजा देने लगा.

15 मिनट के बाद वो मेरी चूचियों पर लुढ़क गया और कुत्ते की तरह हांफने लगा.
उसके लण्ड से गरम-गरम पानी मेरी चूत में गिरने लगा.

मैं पहली बार चुदी थी और पहली बार चूत में लण्ड की मलाई गिरी थी इसलिए मजे से भर मैं उससे चिपक गई.
मेरी चूत भी टपकने लगी.

कुछ देर हम लोग अलग हुए.
वो कपड़े पहन कर चला गया.

मेरी चूत चिपचिपा गई थी.

रमेश मुझे चोद कर चला गया पर उसकी इस हिम्मत भरी हरकत से मैं मस्त थी.
उसने चोदकर बता दिया कि चुदवाने में बहुत मजा है.

रमेश ठीक से चोद नहीं पाया था, बस ऊपर से चूत को रगड़ कर चला गया था पर मैं जान गई थी कि चुदाई में अनोखा मजा है.

उसके जाने पर मैंने चड्डी पहन ली थी.
मैं सोच रही थी कि जब रमेश के छोटे लण्ड से इतना मज़ा आया है तो पापा अपना मोटा तगड़ा लण्ड पेलेंगे तो कितना मजा आएगा.

रमेश के जाने के 6-7 मिनट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गए.

अन्दर आते ही वे मेरी कड़ी कड़ी चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ते हुए बोले- आओ बेटी, अब हम तुमको जवान होने का मतलब बताएँगे.

‘ओह पापा आपने तो कहा था कि रात को बताएँगे.’
‘अरे अब तो मम्मी चली गई हैं अब हर समय रात ही है. मम्मी के कमरे में ही आओ. क्रीम लेती आना.’ पापा मेरी चूचियों को मसलते हुए बोले.

मैं रमेश से चुदकर जान ही चुकी थी. मैं जान गई कि क्रीम का क्या होगा पर अंजान बन बोली- पापा क्रीम क्यों?
‘अरे लेकर आओ तो बताएँगे.’ पापा मेरी चूचियों को इतनी कसकर मसल रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे.

मैं क्रीम और तौलिया ले मम्मी के बैडरूम में पहुँची. मैं बहुत खुश थी, जानती थी कि क्रीम क्यों मंगाई है. रमेश से चुदने के बाद क्रीम का मतलब समझ गई थी. पापा मुझे लड़की से औरत बनाने के लिए बेकरार थे. मैं भी पापा का मोटा केला खाने को तड़प रही थी.

कमरे में पहुँची तो पापा बोले- बेटी, क्रीम टेबल पर रखकर बैठ जाओ.
मैं गुदगुदाते मन से कुर्सी पर बैठ गई तो पापा मेरे पीछे आये और अपने दोनों हाथ मेरी कड़ी चूचियों पर लाये और दोनों को प्यार से दबाने लगे.

पापा के हाथ से चूचियों को दबवाने में बड़ा मजा आ रहा था.

तभी पापा ने अपने हाथ को गले की ऊपर से फ्रॉक के अन्दर डाल दिया और नंगी चूचियों को दबाने लगे.
मैं फ्रॉक के नीचे कुछ नहीं पहनी थी.
पापा मेरी कड़ी कड़ी चूचियों को मुट्ठी में भरकर दबा रहे थे साथ ही दोनों घुन्डियाँ को भी मसल रहे थे.
मैं मस्ती से भरी मजे ले रही थी.

तभी पापा ने पूछा- क्यों बेटी तुमको अच्छा लग रहा है?
‘हाय पापा, बहुत मजा आ रहा है.’

‘इसी तरह कुछ देर बैठो, आज तुमको शादी वाला मजा देंगे. अब तुम जवान हो गई हो.’
‘हाय तुम लेने लायक हो गई हो. आज तुमको खूब मजा देंगे.’

‘आहह्ह् ऊऊह्ह् पापाआआ.’
‘जब मैं इस तरह से तुम्हारी चूचियों को दबाता हूँ तो तुमको कैसा लगता है?’

पापा मेरी कड़ी चूचियों को निचोड़कर बोले तो मैं उतावली हो बोली- हाय पापा, उह्ह ससीए इस तरह तो मुझे और भी अच्छा लगता है.
‘जब तुम कपड़े उतारकर नंगी होकर मजा लोगी तो और ज्यादा मजा आएगा. हाय तुम्हारी चूचियाँ छोटी हैं.’

‘पापा मेरी चूचियाँ छोटी क्यों हैं. मम्मी की तो बड़ी हैं.’
‘घबराओ मत बेटी. तुम्हारी चूचियाँ को भी मम्मी की तरह बड़ी कर दूंगा.’

‘हाय बेटी कपड़े उतारकर नंगी होकर बैठो तो बड़ा मजा आएगा.’
‘पापा चड्डी भी उतार दूँ.’ मैं अनजान बनी थी.
‘हाँ बेटी चड्डी भी उतार दो.’
‘लड़कियों का असली मजा तो चड्डी में ही होता है.’

‘आज तुमको सारी बात बताएँगे. जब तक तुम्हारी शादी नहीं होती तब मैं ही तुमको शादी का मजा दूंगा. तुम्हारे साथ में ही सुहागरात मनाऊँगा.’
‘तुम्हारी चूचियाँ बहुत टाइट हैं.’
‘बेटी नंगी हो जाओ.’ पापा फ्रॉक के अन्दर हाथ डाल दोनों को दबाते बोले.

जब पापा ने मेरी चूचियाँ को मसलते हुए कपड़े उतारने को कहा तो यकीन हो गया कि आज पापा के लण्ड का मजा मिलेगा.

मैं उनके लण्ड को खाने की सोच गुदगुदा गई थी. मैं मम्मी की रंगीन चुदाई को याद करती कुर्सी से नीचे उतरी और कपड़े उतारने लगी.
कपड़े उतार नंगी हो मम्मी की तरह ही पैर फैला कुर्सी पर बैठ गई.
मेरी छोटी छोटी चूचियाँ तनी थी और मुझे जरा भी शरम नहीं लग रही थी.

मेरी जाँघों के बीच रोएंदार चूत पापा को साफ़ दिख रहे थे.
पापा मेरी गदराई चूत को गौर से देख रहे थे.
चूत का गुलाबी छेद मस्त था.

पापा एक हाथ से मेरी गुलाबी कली को सहलाते बोले- हाय राम, बेटी तुम्हारी चूत तो जवान हो गई है.

‘अरे बेटी तुम्हारी चूत.’ पापा ने चूत को दबाया.
पापा के हाथ से चूत दबाये जाने पर मैं सनसना गई.
मैं मस्ती से भरी अपनी चूत को देख रही थी.

तभी पापा ने अपने अंगूठे को क्रीम से चुपड़ मेरी चूत में डाला.
वो मेरी चूत क्रीम से चिकनी कर रहे थे.

अंगूठा जाते ही मेरा बदन गनगना गया.

तभी पापा ने चूत से अंगूठा बाहर किया तो उस पर लगे चूत के रस को देख बोले- हाय बेटी यह क्या है, क्या किसी से चुदकर मजा लिया है?

मैं पापा के अनुभव से धक्क से रह गई.
मैं घबराकर अनजान बनती बोली- कैसा मजा पापा?
‘बेटी यहाँ कोई आया था?’
‘नहीं पापा यहाँ तो कोई नहीं आया था.’

‘तो फिर तुम्हारी चूत में यह गाढ़ा रस कैसा?’
‘मुझे क्या पता? पापा जब आप मेरी चूचियाँ मसल रहे थे तब कुछ गिरा था शायद.’ मैं बहाना बनाती बोली.

‘लगता है तुम्हारी चूत ने एक पानी छोड़ दिया है. लो तौलिया से साफ़ कर लो.’
पापा मुझे तौलिया दे चूचियों को मसलते हुए बोले.

पापा से तौलिया ले चूत को रगड़ रगड़कर साफ़ किया.
पापा को रमेश वाली बात पता नहीं चलने दी.

मैं चूचियाँ मसलवाते हुए पापा से खुलकर गन्दी बाते रही थी ताकि सभी कुछ जान सकूं.
‘बेटी जब तुम्हारी चूचियों को दबाता हूँ तो कैसा लगता है?’
‘हाय पापा, तब जन्नत जैसा मजा मिलता है.’

‘बेटी तुम्हारी चूत में भी कुछ होता है?’
‘हाँ पापा गुदगुदी हो रही है.’ मैं बेशर्म हो बोली.

‘जरा तुम्हारी चूचियाँ और दबा लूँ तो फिर तुम्हारी चूत को भी मजा दूँ.’
‘बेटी किसी को बताना नहीं.’
‘नहीं पापा बहुत मजा है, किसी को नहीं पता चलेगा.’

पापा मेरी चूचियों को मसलते रहे और मैं जन्नत का मजा लेती रही.

कुछ देर बाद मैं तड़प कर बोली- ऊओह्हछ पापा अब बंद करो चूचियाँ दबाना और अब अपनी बेटी की चूत का मजा लो.’

अब मैं भी पापा के साथ खुलकर बात कर रही थी. इस समय हम दोनों नहीं बाप-बेटी थे. पापा मेरी चूचियों को छोड़कर मेरे सामने आये. पापा का खड़ा लंड मोटा होकर मेरी आँखों के सामने फुदकने लगा.

लण्ड तो पापा का पहले भी देखा था पर इतनी पास से आज देख रही थी. मेरा मन उसे पकड़ने को ललचाया तो मैंने उसे पकड़ लिया और दबाने लगी. चूत पापा के मस्त लण्ड को देख कर लार टपकाने लगी.

मैं पापा के केले को पकड़कर बोली- शश पापा आपका लण्ड बहुत मोटा है. इतना मोटा मेरी चूत में कैसे जाएगा?
‘अरे पगली मर्द का लण्ड ऐसा ही होता है. मोटे से ही तो मजा आता है.’

‘पर पापा मेरी चूत तो छोटी है.’
‘कोई बात नहीं बेटी. देखना पूरा जाएगा.’
‘पर पापा मेरी फ़ट जाएगी.’
‘अरे बेटी नहीं फटेगी. एक बार चुद जाओगी तो रोज चुदवाने के लिए तड़पोगी.’

‘अपने पैर फैलाकर चूत खोलो पहले अपनी बेटी की चूत चाट लूँ फिर चोदूँगा.’

मैं समझ गई कि पापा मम्मी की तरह मेरी चूत को चाटना चाहते हैं.
मैंने जब मम्मी को चूत चटवाते देखा था तभी से तरस रही थी कि काश पापा मेरी चूत भी चाटे.

अब जब पापा ने चूत फैलाने के लिए दोनों हाथ से चूत की दरार को छेड़कर खोल दिया.

पापा घुटने के बल नीचे बैठ गए और मेरी रोएंदार चूत पर अपने होंठ रख कर चूमने लगे.

पापा के चूमने पर मैं गनगना गई.

दो चार बार चूमने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत के चारो ओर चलाते हुए चाटना शुरू किया. वो मेरे हलके हलके बाल भी चाट रहे थे. मुझे गज़ब का मजा आ रहा था.

पापा चूत चाटते हुए तीत (क्लिट) भी चाट रहे थे.
मैं मस्त थी.

रमेश तो बस जल्दी से चोदकर चला गया था, चूची भी नहीं दबाया था मजा नहीं आया था.
लेकिन पापा तो चालाक खिलाड़ी की तरह पूरा मजा दे रहे थे.
पापा ने चूत चाटकर गीला कर दिया था. अब पापा चूत की दरार में जीभ चला रहे थे.

कुछ देर तक इसी तरह करने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी गुलाबी चूत के लस लसाए छेद में पेल दिया.
जीभ छेद में गई तो मेरी हालत खराब हो गई. मैं मस्ती से तड़प उठी.
पहली बार चूत चाटी जा रही थी. इतना मज़ा आया कि मैं नीचे से चूतड़ उछालने लगी.

कुछ देर बाद पापा चाटकर अलग हुए और मेरी चूत पर लगे लण्ड से चूत रगड़ने लगे.

चूत की चटाई के बाद लण्ड की रगड़ाई ने मुझे पागल बना दिया और मैं उतावलेपन में पापा से बोली- पापा अब पेल भी दो मेरी चूत में … आह हहह ऊऊहह!

पापा ने मेरी तड़पती आवाज़ पर मेरी चूचियों को पकड़कर कमर को ऊठाकर धक्का मारा तो करारा शॉट लगने पर पापा का आधा लण्ड मेरी चूत में समा गया.

पापा का मोटा और लम्बा लण्ड मेरी छोटी चूत को ककड़ी की तरह चीरकर घुसा था.
आधा जाते ही मैं दर्द से तड़पकर बोली- आआ हहह ऊऊईई ममआ मररर!! गई पापा. धीरे धीरे पापा बहुत मोटा है पापा … चूत फट गई.

पापा का मोटा और लम्बा लण्ड मेरी चूत में कसा था. मेरे कराहने पर पापा ने धक्के मारना बंदकर मेरी चूचियों को मसलना शुरू किया.
अब मजा आने लगा.
6-7 मिनट बाद दर्द ख़त्म हो गया.

अब पापा बिना रुके धक्के लगा रहे थे. धीरे धीरे पापा का पूरा लण्ड चूत की झिल्ली फाड़ता हुआ घुस गया.
मैं दर्द से छटपटाने लगी. ऐसा लगा जैसे चूत में चाकू धंसा है.

मैं कमर झटकती हुई बोली- हाय पापा मेरी चूत फ़टट गई. निकालो मुझे नहीं चुदवाना.

पापा अपना लण्ड पेलते हुए मेरे गाल चाट रहे थे. पापा मेरे गाल चाट बोले- बेटी रो मत अब तो पूरा चला गया. हर लड़की को पहली बार दर्द होता है फिर मजा आता है.

कुछ देर बाद मेरा कराहना बंद हुआ तो पापा धीरे धीरे चोदने लगे. पापा का कसा कसा लण्ड आ जा रहा था. अब सच ही मजा आ रहा था. अब जब पापा ऊपर से धक्का लगाते तो मैं नीचे से गांड उछालती. रमेश तो केवल ऊपर से रगड़ कर चोदकर चला गया था. असली चुदाई तो पापा कर रहे थे.

पापा ने लण्ड पूरा अन्दर तक पेल दिया था. पापा का लण्ड रमेश से बहुत मजेदार था. जब पापा शॉट लगाते तो सुपाड़ा मेरी बच्चेदानी तक जाता. मुझे जन्नत के मजे से भी अधिक मजा मिल रहा था.

तभी पापा ने पूछा- बेटी, अब दर्द तो नहीं हो रही है.’
‘हाय पापा अब तो बहुत मजा आ रहा है. आहहहछ पापा और जोर जोर से चोदिये पापा.’

इसी तरह 30 मिनट बाद पापा के लण्ड से गरम गरम मलाईदार पानी मेरी चूत में गिरने लगा. जब पापा का पानी मेरी चूत में गिरा तो मैं पापा से चिपक गई और मेरी चूत भी फलफलाकर झड़ने लगी. हम दोनों साथ ही झड़ रहे थे.

पापा ने फिर मुझे रात भर चोदा.

सुबह 10 बजे सोकर उठे तो मैंने पापा से कहा- पापा आज फिर चोदेंगे?
‘अरे मेरी जान अब मैं बेटीचोद बन गया हूँ. अब तो रोज ही चोदूँगा.’
‘अब तू मेरी दूसरी बीवी है पर पापा जब मम्मी आ जाएंगी तो?’

‘मेरी जान उसे तो बस एक बार चोद दूंगा और वो ठंडी हो जाएगी फिर तेरे कमरे में आ जाया करूंगा.’
मैं फिर पापा के साथ रोज सुहागरात मनाने लगी.

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(Maa aur Tau Ji Ki Khet Me Chudai) Sex stories

मैं इस साईट की लगभग सारी Sex stories पढ़़ता हूँ। मुझे सारी कहानियाँ बेहद ही अच्छी लगी। उनको पढ़ने के बाद मैं आपके लिये एक ऐसी कहानी लाया हूँ जिसे मैंने अपनी आँखों के सामने होते हुये देखा था। इससे पहले कि मैं अपनी कहानी को शुरु करूँ, सबसे पहले मैं उन दोनों लोगों का परिचय आपसे करा दूँ।

इस कहानी में दो लोग- कोई और नहीं एक मेरी माँ और दूसरा एक इन्सान मेरे ताऊ जी जिसकी उमर साठ साल की है। यह कहानी वैसे तो कुछ पुरानी है लेकिन मेरे सामने जब भी वो दिन याद आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। मेरा नाम मनीष है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।

वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे ताऊ जी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम नवरात्रि में गाँव जाने वाले थे। पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा।

माँ ने कहा- ठीक है।

तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ ताऊ जी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और ताऊ जी भी खुश हुए, उन्होंने पूछा- प्रवीण नहीं आया?

माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे।

और ताऊ जी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया…

हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और ताऊ जी ने मुझे कहा- तुम चलाओ।
मैंने कहा- ठीक है।

माँ और ताऊ जी पीछे बैठ गये। थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने माँ की आवाज़ सुनी, पीछे देखा तो ताऊ जी का पैर माँ के साये में था और माँ ने मुझ से कहा कि सामने देख कर चलो।

हमें लोग घर पहुंचे तब माँ बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई…

ताऊ जी ने कहा- चलो, तुमको खेत में ले चलता हूँ।
माँ मुस्कुराते हुए बोली- हाँ चलिये।

मैं भी साथ था। हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने ताऊ को जी माँ की गाण्ड पर हाथ फिराते हुए देखा।

तब माँ ने कहा- लड़का इधर है, वो देख लेगा।
उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था।

तब ताऊ जी ने मुझसे कहा- बेटा, तुम दूर जा कर खेलो। मुझे तुम्हारी माँ से बातें करनी हैं।

तो मैंने माँ को देखा तो माँ ताऊ जी के सामने देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझे कहा कि तुम यहाँ से जाओ…

मैं वहाँ से चलने लगा और माँ-ताऊ जी भी खेत के अन्दर दूर जाने लगे। मुझे दाल में काला नज़र आया। मैं भी उनके पीछे पीछे गया तो देखा कि ताऊ जी माँ की दोनों एक पेड़ की आड़ में चले गये और माँ पेड़ से लग कर खड़ी हो गई। अब ताऊ जी अपना हाथ माँ के साये में डालने लगे और माँ भी अपना साया उठा कर उनका साथ देने लगी। लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी, इसलिये मैं और नज़दीक गया और सुनने लगा। तब वो दोनों पापा की बातें कर रहे थे।

माँ कह रही थी- कितने दिन बाद मुझे यह तगड़ा लौड़ा मिल रहा है, वरना प्रवीण का लौड़ा तो बेकार है।

अब माँ के बुर को दोनों हाथ से फैलाया। माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थी लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रहा थी। इसके बाद ताऊ जी माँ के बुर पर लण्ड सटा कर हलका सा कमर को धक्का लगाया। माँ के मुँह से अह्हहह की आवाज निकल गई।

मैं समझ गया कि माँ के बुर में ताऊ जी का लण्ड चला गया है। ताऊ जी ने कमर को झटका देना शुरू किया। ताऊ जी जब जब जोर से झटका लगाते थे माँ के मुँह से आआअहह की आवाज सुनाई पड़ती थी। कुछ देर के बाद जब ताऊ जी ने माँ की चूचियों को मसलना शुरु किया तो उनका जोश और भी बढ़ गया। एक तरफ़ ताऊ जी बुर में जोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को जोर जोर से मसलने लगे।

अब माँ की बुर में लण्ड जब आधे से ज्यादा चला गया तो माँ के मुंह से आआहह्ह नहीं आआ आह्हह की आवाज आने लगी। ताऊ जी ने माँ के होठों को चूसना शुरु कर दिया। लगभग आधे घण्टे चोदने के बाद ताऊ जी का बीज माँ की चूत में गिरा। माँ भी बहुत ही खुश थी। कुछ देर के बाद ताऊ जी ने लण्ड निकल लिया। माँ पांच मिनट तक लेटी रही।

माँ तब उठ कर जाना चाहती थी। ताऊ जी ने उनको रोक लिया, उन्होंने माँ से कहा- कहाँ जा रही हो?
तब माँ ने कहा- आज के लिये इतना बस!
ताऊ जी ने कहा- अभी तो और चुदाई बाकी है, रुक जाओ तुम।

तब ताऊ जी ने माँ के पीछे जा कर माँ की गाण्ड पर लण्ड रखा और कमर को पकड़ कर एक जोरदार झटका मारा। माँ के मुँह से आआ आअह्हह हह्ह की आवाज निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में लण्ड चला गया। अब ताऊ जी ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लण्ड को माँ के गाण्ड में घुसा दिया। ताऊ जी माँ के गाण्ड को लगभद दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे धीरे शान्त पड़ गये तो मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में बीज गिर गया है।

ताऊ जी ने लण्ड को निकाल लिया तब माँ के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ ने दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। ताऊ जी ने माँ की बुर को देखा, माँ से पूछा- पेशाब नहीं करोगी?

माँ ने गरदन हिला कर कहा- नहीं।

अब ताऊ जी ने जैसे ही लण्ड को माँ की बुर के ऊपर सटाया माँ ने अपने दोनों हाथों से अपनी बुर को फैला दिया। ताऊ जी ने लण्ड के अगले भाग को माँ की बुर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लण्ड को अन्दर घुसा दिया।

माँ मुँह से आआह्ह फ़्फ़फ़ईई रीईई धीईई आआह्हह्स इस्सस्स स्सस्हह्हह कर रही थी। ताऊ जी पर उनके इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार पांच छोटे झटके के बाद एक जोर का झटका दे रहे थे। उनका लण्ड जब आधे से ज्यादा अन्दर चला गया तो माँ ने ताऊ जी से कहा- अब और अन्दर नहीं डालियेगा वरना मेरी बुर फट जायेगी।

ताऊ जी ने कहा- अभी तो आधा बाहर ही है।

माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए ताऊ जी माँ के चूत में अपने लण्ड को अन्दर ले जा रहे थे। माँ ने जब देखा कि अब बरदाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने ताऊ जी से कहा- मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आआह पल्लीईज़ आआह्हह… नहीईई उई आआअह्ह्ह ह्हह…

ताऊ जी ने लगातार कई जोरदार झटके मार कर पूरे लण्ड को माँ के बुर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसला। अब माँ को भी मजा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इन्तजार था। ताऊ जी ने अपने झांट को माँ की झाँट में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उन्होंने पूरे बीस मिनट तक माँ की चुदाई की। इसके बाद माँ और ताऊ जी शान्त पड़ गये तब मैं समझ गया कि माँ की बुर में ताऊ जी का बीज गिर गया है। वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे। अब ताऊ जी ने लण्ड को निकाल दिया और माँ की बगल में लेट गये। फ़िर दोनों ने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। तब मैं भी वहाँ से हट गया ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देख लिया है। हम तीनों घर वापस आ गये।

ताऊ जी माँ को देख कर मुस्कुराने लगे कि तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं पता चला। लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है। Sex stories

प्रेषक : अमन Hindi Sex Stories

मैं अमन इलाहबाद से हूँ। मेरी Hindi Sex Stories उम्र २४ साल है मेरा लंड ७ लम्बा है ३ चौड़ा है। मैं आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ।

बात ६ साल पुरानी है। तब मैं १२वीं में था और हम लोग जहाँ रहते हैं उसके सामने वाली बिल्डिंग में एक औरत रहने आई थी। उसके पति दुबई में जॉब पर थे और उसकी एक लड़की थी, वो लड़की १८ साल की थी।

जब मैंने उस लड़की को पहली बार बिल्डिंग के नीचे देखा तो मेरे होश ही उड़ गए। वो दुकान में कैडबरी लेने आई थी और मैं भी उसी दुकान में रेज़र लेने आया था। मैंने उसे देखा तो मैं देखता ही रह गया।

उसने नीली रंग का स्कर्ट पहना था जोकि घुटनों तक ही था और पीले रंग की शर्ट पहनी थी। शर्ट के ऊपर से उसके छोटे छोटे दो मुसम्बी साफ साफ दिखाई दे रहे थे। वो कमाल की थी।

मै सोचने लगा अगर यह लड़की मुझे चोदने को मिले तो बहुत ही मज़ा आएगा और मैंने उससे दोस्ती करने का फैसला किया।

मैंने उसको बोला,”हई !

उसने सामने से उत्तर देते हुए ‘हय’ कहा फिर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उसको नाम पूछा तो उसने बताया “फ़िज़ा”

मैंने फिर उसे अपना नाम बताया और कहा कि मैं उस सामने वाली बिल्डिंग में रहता हूं ! तो उसने भी कहा कि मैं तुम्हारे सामने वाली बिल्डिंग में रहती हूँ।

फिर मैंने उसको पूछा,”फ़्रेंड्स ?”

वो हाथ सामने करती हुई बोली,”फ़्रेंड्स !”

फिर हम दोनों अपने अपने घर गये। उसके बाद वो मुझसे मिलती रही और कभी कभी मैं उसके घर भी जाता था। इस बीच मुझे एक बात का पता चल गया कि उसकी कमजोरी कैडबरी है और मैं जब भी उससे मिलने जाता तो उसे कैडबरी ले कर जाता।

उस दिन रविवार था। मैं उसके घर गया, देखा तो उसकी माँ एक रिश्तेदार के पास गई हुई थी और फ़िज़ा घर में अकेली थी। मैं सोफे में बैठ के टी.वी. देख रहा था और वो मेरे साथ मजाक करने लगी, मुझे चिड़ाने लगी और मारने लगी। तो मैं भी उसे मारने लगा। ऐसे ही उसने एक बार मेरी छाती पर मारा तो मैंने भी जानबूझ कर उसकी छाती पर मारा। फिर उसने मेरे पेट पर मारा तो मैंने भी उसके पेट पर मारा। फिर उसने मेरे लंड पर मारा तो मैंने भी उसकी चूत पर मारा।

उस वक़्त मैंने पहली बार किसी लड़की के दूध और चूत को छुआ था।

मैं समझ गया कि फ़िज़ा को क्या चाहिए।

जब उसने फिर से मेरी छाती पर मारा तो मैंने उसके दूध को पकड़ लिया और दबाने लगा।

तो वो पूछने लगी- तुम क्या कर रहे हो?

मैं उसकी दूध दबाते हुए बोला- जो तुझे चाहिए !

और वो कुछ नहीं बोली, चुपचाप बैठी रही। उसने लाल रंग का स्कर्ट और पीले रंग का टी-शर्ट पहना था। मै उसके वक्ष दबाते दबाते उसके होंठों को चूसने लगा।

मैंने उसको पूछा- कभी किसी से दबवाया है क्या ?

तो उसने शरमाते हुए न कहा तो मैं समझ गया कि फ़िज़ा अभी तक कुंवारी है। उसके स्तन एकदम मस्त थे। मैं फिर उसके दूध की घुंडी दो उंगलियों से मसलने लगा तो वो सिसक उठी- अ अ ह ह ह

फिर मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया और बेड पे लिटा दिया। फिर मैंने अपना शर्ट उतार दिया और पैन्ट की जिप खोल कर पैन्ट उतार दी। मैं अब बस अंडरवियर में था और मेरा लण्ड लोहे की तरह सख्त हो गया था, मेरे अंडरवियर का तम्बू (टेंट) बना हुआ था। मैं उसके पास लेट गया और उसे नजदीक लेते हुए उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मैंने अपने दोनों हाथ उसकी मुसम्बी पर रखे और धीरे धीरे सहलाने लगा।

कुछ देर बाद मैं अपना एक हाथ उसकी टी-शर्ट में ले जाकर उसके बूब्स दबाने लगा। उसने ब्रा पहनी थी। फिर मैं उसका टी-शर्ट उतारने लगा तो उसने हाथ ऊपर करते हुए मेरी मदद की। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। फिर मैं ब्रा के ऊपर से ही वक्ष दबाने लगा। कुछ देर के बाद मैं अपना एक हाथ उसके पीछे लेते हुए उसकी ब्रा का हूक खोल दिया और उसकी ब्रा निकाल के बेड पर फेंक दी। अब वो मेरे सामने नंगी बैठी थी। मैं उसे फिर लिटाते हुए उसके ऊपर लेट गया और उसके दूध चूसने लगा।

कभी कभी मैं उसके निप्प्ल दाँत के बीच ले कर उसे काटता तो वो चिल्लाती थी। मैं एकदम मदहोश हो गया था क्योंकि मैं आज पहली बार किसी लड़की को चोदने जा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए उसकी स्कर्ट में डाल दिया। मेरे हाथ को उसकी नरम नरम चड्डी लगी। मैं उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसके चूत पे लगा, वो सिसक उठी- अ अ अ ह ह ह ह ह ह ह !

फिर मैंने उसकी स्कर्ट का हूक खोल दिया और उसकी स्कर्ट निकाल दी। उसने पीले रंग की चड्डी पहनी थी और चड्डी गीली हुई थी। मैं उसकी चूत चड्डी के ऊपर से ही सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद मैं बैठ गया और उसकी चड्डी निकालने लगा। तभी वो इंकार करने लगी तो मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- मुझे शर्म आती है !

तो मैं बोला- अभी तो मेरे सामने नंगी हो ! अब काहे की शर्म और वैसे भी तेर पति के सामने तुझे नंगा होना ही है तो अभी क्यों नहीं !

ऐसा कहते हुए मैंने उसकी चड्डी निकाल दी। अब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी थी। वो शरमा रही थी और उसने अपने दोनों पैर एक के ऊपर एक रख लिए। मैंने उसके पैर अलग कर के फैला दिए और उसकी बुर देखने लगा। वाह क्या बुर थी उसकी ! एकदम कुंवारी !

मै तो पागल हो उठा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूची और चूत देख रहा था। वो शरमा रही थी। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी बुर में डालने लगा। उसकी बुर एकदम कसी थी, मैं जोर लगा के अपनी ऊँगली उसकी बुर में घुसाने लगा।

तभी वो- ह ई इ ई ई इ र इ इ इ इ सो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ कर के सिसक उठी।

फिर मै घुसाने की कोशिश करने लगा। कुछ देर के बाद मेरी दो उंगलियां उसकी बुर में गई। अब मैं उंगलियाँ उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। उसको मज़ा आने लगा और वो मस्त होकर सिसक उठी- अ अ अ अ ह ह ह ह ह ह ह अअह !

कुछ देर बाद मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया। तभी मेरा ७” लम्बा और ३” मोटा लण्ड स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर आ गया। वो मेरा लण्ड देख के हैरान हो गई और अपनी बुर को देखती हुई बोली “अमन, इतना बड़ा तेरा लण्ड मेरी चूत में कैसे घुसेगा? मेरी चूत का छेद तो इसके सामने काफी छोटा है ! यह मेरी चूत में गया तो मैं तो मर जाउंगी !”

तभी मैं बोला,”टेंशन मत लो ! यह तो तेरे छेद में आराम से जायेगा ! पहले पहले दर्द होगा लेकिन फिर मज़ा आएगा और फिर जब बच्चा होता है तो इसी छोटे से छेद से निकलता है न “

ऐसा कहते हुए मैंने उसको मेरा लण्ड चूसने को कहा तो वो मना करते हुए बोली,”चीईई, मैं नहीं चूसुंगी इसे !”

मैंने पूछा,”क्यों ?”

तो उसने बोला,”मुझे गन्दा लगता है !”

तब मुझे याद आया, मैं उसके लिए एक कैडबरी लाया था और उसे देना ही भूल गया था। मैंने झट से अपनी पॉकेट से कैडबरी निकाली और उसे खोल दी। वो कैडबरी थोड़ी सी पिघल गई थी। मैंने वो कैडबरी अपने लण्ड पे लगाई और उसके मुँह में मेरा लण्ड घुसाते हुए बोला,”कैडबरी तो चाट सकती हो ना ?”

और मैंने उसका सर पकड़ के रखा। पहले वो छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन छुड़ा न पाई। फिर मैं अपनी कमर आगे पीछे करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो मेरा लण्ड पकड़ के खुद ही चूसने लगी। मैंने हाथ उसके सर से हटाते हुए कहा,”कैसी लगी कैडबरी ?”

उसने लण्ड को मुंह से निकालते हुए कहा,”ये कैडबरी तो तेरे लण्ड के सामने कुछ भी नहीं है !” और वो मेरा लण्ड फिर से मुंह में लेकर चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे पैर फैला के लेटने को कहा। वो पैर फैला के लेट गई। उसकी गीली चूत मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी।

मैंने उसे पूछा,”घर में मक्खन है?”

उसने कहा,”हाँ फ्रीज़ में रखा है !”

और मैं मक्खन ले के आया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं मक्खन क्यों लाया।

फिर मैंने खूब सारा मक्खन उसकी चूत के अन्दर डाला और अपना लण्ड उसकी बुर के मुंह पर रखा। जैसे ही मैंने लण्ड उसकी बुर पे रखा, वो सिसक उठी, “आह्ह आः जल्दी करूऊऊ नहीं तो माँ मर जाउंगी !”

मैंने एक धक्का देते हुए अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी चूत से खून निकलने लगा और वो चिल्लाने लगी,”ऊउईईई मा आ या मैं मर गई आआअह्ह्ह्ह्ह्ह !”

मैं थोड़ी देर शान्त हो कर लेट गया। थोड़ी देर रुकने के बाद दूसरा धक्का लगाया और वो फिर से चिल्ला उठी,”प्लीज़ अमन ! लण्ड बाहर निकालो ! नहीं तो मैं मर जाउंगी !”

मैंने कहा,”कुछ नहीं होगा, बस थोड़ी देर और सहन कर लो !”

और उसको किस करते हुए और एक धक्का लगाया इस वक्त मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था और वो चिल्लाने वाली थी पर उसका मुँह मैंने अपने मुंह में ले के बंद किया था। उसकी सील टूट चुकी थी और वो रो रही थी और मछली की तरह तड़प रही थी। थोड़ी देर तक ऐसे ही रहा। फ़िर मैं अपनी कमर धीरे धीरे हिलाने लगा। तब तक उसको भी मज़ा आने लगा था और वो भी अपनी कमर ऊपर नीचे करती मुझे सहयोग दे रही थी।

फिर मैंने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई और जोर जोर से कमर हिलाने लगा। इस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी। करीब १५ मिनट बाद मैं भी झड़ गया और उसके चूत में ही अपना वीर्य डाल दिया। कुछ देर तक ऐसे ही सोने के बाद वो उठी और अपने कपड़े उठाने लगी।

तभी मैंने देखा उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी। उसकी चूत में मेरा वीर्य, उसका पानी और बहुत सा खून भी था। वो उठ के बाथरूम गई और पेशाब करने के बाद उसने अपनी चूत साफ की और अपनी चड्डी पहन ली और बाद में अपनी ब्रा पहनी और फिर टी शर्ट पहन के उसने स्कर्ट कमर पे चढ़ाई और बाहर आ गई।

उस दिन के बाद मैंने उसे बहुत बार चोदा। Hindi Sex Stories

यह कहानी 1964 की गर्मियों की है. Hindi Sex Stories

हमारे परिवार के सभी सदस्य एक Hindi Sex Stories विवाह में शरीक होने अपने गांव गये थे, हम तीन भाई-बहन और मां-बाबूजी.

मैंने 12वीं की बोर्ड की परीक्षा दी थी और परिणाम का इंतज़ार कर रहा था.

मैं तीनों भाई बहन में सबसे बड़ा हूं. उस समय मैं 19वें साल में था और अन्य लड़कों की तरह मुझे भी चूची और चूत की तलाश थी.
लेकिन उस समय तक एक भी औरत या लड़की का मजा नहीं लिया था. बस माल को देखकर तरसता रहता था और लंड हिलाकर पानी निकाल कर संतुष्ट हो जाता था.

दोस्तों के साथ हमेशा चूची और चूत की बातें होती थी.

मुझसे छोटी बहन, माला है और उससे छोटा एक भाई.

मां का नाम मीना है और उस समय वो 34-35 साल की भरपूर जवान औरत थी. बाबूजी 40 साल के मजबूत कद-काठी के मर्द थे जो किसी भी औरत की जवानी की प्यास को बुझा सकते थे.

बाबूजी की तरह मैं भी लम्बा और तगड़ा था लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शरम आती थी, यहाँ तक कि मैं अपनी मस्त जवान बहन के साथ भी ठीक से बात नहीं करता था.

गांव में शादी में बहुत से लोग आये थे. चचेरी बहन की शादी थी, खूब धूमधाम से विवाह सम्पन्न हुआ.

विवाह के बाद धीरे-धीरे सभी मेहमान चले गये. मेहमानों के जाने के बाद सिर्फ घरवाले ही रह गये थे.

पांच भाइयों में से सिर्फ मेरे बाबूजी गांव के बाहर काम करते थे, बाकी चारों भाई गांव में ही खेती-बाड़ी देखते थे. गांव की आधी से ज्यादा जमीन हमारी थी.

बाबूजी की छुट्टी खत्म होने को थी, हम लोग भी एक दिन बाद जाने वाले थे.

हम वहाँ 17-18 दिन रहे. बहुत लड़कियों को चोदने का मन किया, बहुत औरतों की चूची मसलना चाहा लेकिन मैं कोरा का कोरा ही रहा.
मेरा लन्ड चूत के लिये तरसता ही रह गया.

लेकिन कहते हैं कि ‘देर है लेकिन अन्धेर नहीं है’

उस दिन भी ऐसा ही हुआ. उस समय दिन के 11 बजे थे. औरतें घर के काम में व्यस्त थीं, कम उम्र के बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे और आंगन में कुछ नौकर सफाई कर रहे थे.

मेरे बाबूजी अपने भाइयों के साथ खेत पर गये थे. मैं चौकी पर बैठ कर आराम कर रहा था.

तभी माँ मेरे पास आई और बगल में बैठ गई.

मेरी माँ मीना ने मेरा हाथ पकड़ कर एक लड़के की तरफ इशारा करके पूछा- वो कौन है?

वो लड़का आंखें नीची करके अनाज को बोरे में डाल रहा था. उसने सिर्फ हाफ-पैंट पहन रखा था.

‘हाँ, मैं जानता हूँ, वो गोपाल है.. कंटीर का भाई!’ मैंने माँ को जवाब दिया.

कंटीर हमारा पुराना नौकर था और हमारे यहा पिछले 8-9 सालों से काम कर रहा था.
माँ उसको जानती थी.

मैंने पूछा- क्यों, क्या काम है उस लड़के से?’

मां ने इधर उधर देखा और बगल के कमरे में चली गई.

एक दो मिनट के बाद उसने मुझे इशारे से अन्दर बुलाया.
मैं अन्दर गया और मीना ने झट से मेरा हाथ पकड़ कर कहा- बेटा, मेरा एक काम कर दे…’

‘कौन सा काम माँ!’

फिर उसने जो कहा वो सुनकर मैं हक्का बक्का रह गया.

‘बेटा, मुझे गोपाल से चुदवाना है, उसे बोल कि मुझे चोदे…!’

मैं मीना को देखता रह गया. उसने कितनी आसानी से बेटे के उम्र के लड़के से चुदवाने की बात कह दी.

‘क्या कह रही हो…ऐसा कैसे हो सकता है…’ मैंने कहा.

‘मैं कुछ नहीं जानती, मैं तीन दिन से अपने को रोक रही हूँ, उसको देखते ही मेरी बुर गरम हो जाती है, मेरा मन करता है की नंगी होकर सबके सामने उसे अपने अन्दर ले लूँ!’
माँ ने मेरे सामने अपनी चूची को मसलते हुए कहा- कुछ भी करो, बेटा गोपाल का लन्ड मुझे अभी चूत के अन्दर चाहिए!’

मीना की बातें सुनकर मेरा माथा चकराने लगा था.
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मां, बेटे के सामने इतनी आसानी से लण्ड और बुर की बात करेगी.

मुझे यह जानकर अचम्भा हुआ कि मैं 18 साल का होकर भी किसी को अब तक चोद नहीं पाया हूँ तो वो गोपाल अपने से 20-22 साल बडी, तीन बच्चे की माँ को कैसे चोदेगा.
मुझे लगा कि गोपाल का लन्ड अब तक चुदाई के लिये तैयार नहीं हुआ होगा.

‘मां, वो गोपाल तो अभी छोटा है.. वो तुम्हें नहीं चोद पायेगा…’
मैंने माँ की चूची पर हाथ फेरते हुए कहा- चल तुझे बहुत मन कर रहा है तो मैं तुम्हें चोद दूंगा ..!’

मैं चूची मसल रहा था, माँ ने मेरा हाथ अलग नहीं किया.
यह पहला मौका था कि मेरे हाथ किसी चूची को दबा रहा था और वो भी एक मस्त गुदाज़ औरत की, जो लोगों की नजर में बहुत सुन्दर और मालदार थी.

‘बेटा, तू भी चोद लेना, लेकिन पहले गोपाल से मुझे चुदवा दे…अब देर मत कर…बदले में तू जो बोलेगा वो सब करुंगी… तू किसी और लड़की या औरत को चोदना चाहता है तो मैं उसका भी इंतज़ाम कर दूंगी, लेकिन तू अभी अपनी माँ को गोपाल से चुदवा दे.. मेरी बुर एकदम गीली हो गई है.’

मीना ने सामने से चुदाई की पेशकश की है तो कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा.

मैंने जोर जोर से 3-4 बार दोनों मस्त मांसल चूचियों को दबाया और कहा- तू थोड़ा इन्तज़ार कर…मैं कुछ करता हूँ!
यह कहकर मैंने माँ को अपनी बांहों में लेकर उसके गालों को चूसा और बाहर निकल कर आ गया.

दिन का समय था, सब लोग जाग रहे थे, किसी सुनसान जगह का मिलना आसान नहीं था.

मैं वहाँ से निकल कर ‘कैटल-फार्म’ में आ गया जो आंगन से थोड़ी ही दूर पर सड़क के उस पार था.
वहाँ उस समय जानवरों के अलावा और कोई नहीं था. वहाँ एक कमरा भी था नौकरों के रहने के लिये. उस कमरे में भी कोई नहीं था. मैंने सोचा क्यों ना आज माँ की चुदाई इसी कमरे में की जाये.

कमरे में एक चौकी थी और उस पर एक बिछौना भी था.
मैं तुरंत आंगन वापस आया.

मीना अभी भी बाहर ही बैठी थी और गोपाल को घूर रही थी. मैं उसके बगल में बैठ गया और कहा कि वो दस मिनट के बाद उस नौकर वाले कमरे में आ जाये.

वहाँ से उठ कर मैं ग़ोपाल के पास आया और उसकी पीठ थप-थपा कर मेरे साथ आने को कहा.
वो बिना कुछ बोले मेरे साथ आ गया.
मैंने देखा कि मां के चेहरे पर मुस्कान आ गई है.

गोपाल को लेकर मैं उस कमरे में आया और दरवाज़ा खुला रहने दिया.
मैं आकर बिछौने पर लेट गया और गोपाल से कहा कि मेर पैर दर्द कर रहा है, दबा दे.. यह कहते हुये मैंने अपना पजामा बाहर निकाल दिया.

नीचे मैंने जांघिया पहना था.

ग़ोपाल पांव दबाने लगा और मैं उससे उसके घर की बातें करने लगा.

वैसे तो गोपाल के घरवाले हमारे घर में सालों से काम करते हैं फिर भी मैं कभी उसके घर नहीं गया था.

गोपाल की दादी को भी मैंने अपने घर में काम करते देखा था और अभी उसकी माँ और भैया काम करते हैं.
तभी गोपाल ने बताया कि उसकी एक बहन है और उसकी शादी की बात चल रही है.
वो बोला कि उसकी भाभी बहुत अच्छी है और उसे बहुत प्यार करती है.

अचानक मैंने उससे पूछा कि उसने अपनी भाभी को चोदा है कि नहीं.
ग़ोपाल शरमा गया और जब मैंने दोबारा पूछा तो जैसा मैंने सोचा था, उसने कहा कि उसने अब तक किसी को चोदा नहीं है.

मैंने फिर पूछा कि चोदने का मन करता है या नहीं?

तो उसने शरमाते हुये कहा कि जब वो कभी अपनी माँ को अपने बाप से चुदवाते देखता है तो उसका भी मन चोदने को करता है.
ग़ोपाल ने कहा कि रात में वो अपनी माँ के साथ एक ही कमरे में सोता है . लेकिन पिछले एक साल से माँ की चुदाई देख कर उसका भी लन्ड टाईट हो जाता है.

‘फिर तुम अपनी माँ को क्यों नहीं चोदते हो…’ मैंने पूछा.
लेकिन गोपाल के जबाब देने के पहले मीना कमरे में आ गई और उसने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया.

ग़ोपाल उठकर जाने लगा तो मैंने उसे रोक लिया.
गोपाल ने एक बार मीना के तरफ देखा और फिर मेरा पैर दबाने लगा.

‘क्या हुआ मां?’

‘अरे बेटा, मेरा पैर भी बहुत दर्द कर रहा है, थोड़ा दबा दे!’ मीना बोलते बोलते मेरे बगल में लेट गई.

मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा, डर से या माँ को चोदने के खयाल से, मालूम नहीं. मैं उठ कर बैठ गया और माँ को बिछौने के बीचोंबीच लेटने को कहा.

मैं एक पैर दबाने लगा . ग़ोपाल चुपचाप खड़ा था.

‘अरे ग़ोपाल, तुम क्यों खड़े हो, दूसरा पांव तुम दबाओ!’ मैंने ग़ोपल से कहा लेकिन वो खड़ा ही रहा.

मेरे दो-तीन बार कहने के बाद गोपाल दूसरे पांव को दबाने लगा. मैंने माँ को आंख मारी और वो मुस्कुरा दी.

‘मां, कहाँ दर्द कर रहा है?’
‘अरे पूछ मत बेटा, पूरा पाव और छाती दर्द कर रहा है, खूब जोर से पैर और छाती को दबाओ.’

मां ने खुल कर बुर और चूची दबाने का निमंत्रण दे दिया था.

मैं पाँव से लेकर कमर तक एक पर को मसल मसल कर मजा ले रहा था जब कि गोपाल सिर्फ घुटनों तक ही दबा रहा था.

मैंने गोपाल का एक हाथ पकड़ा और माँ की जांघों के ऊपर सहलाया और कहा कि तुम भी नीचे से ऊपर तक दबाओ.
वो हिचका लेकिन मुझे देख देख कर वो भी मीना लम्बी लम्बी टांगों को नीचे से ऊपर तक मसलने लगा.

2-3 मिनट तक इस तरह से मजा लेने के बाद मैंने कहा- मां साड़ी उतार दो … तो और अच्छा लगेगा.

‘हाँ, बेटा, उतार दो!’
‘गोपाल, साड़ी खोल दो.’ मैंने गोपाल से कहा.
उसने हमारी ओर देखा लेकिन साड़ी खोलने के लिये हाथ आगे नहीं बढ़ाया.

‘गोपाल, शरमाते क्यों हो, तुमने तो कई बार अपनी माँ को नंगी चुदवाते देखा है…यहाँ तो सिर्फ साड़ी उतारनी है, चल खोल दे.’ और मैंने गोपाल का हाथ पकड़ कर साड़ी की गांठ पर रखा.

उसने शरमाते हुये गांठ खोली और मैंने साड़ी माँ के बदन से अलग कर दी. काले रंग के ब्लाऊज़ और साया में गजब की माल लग रही थी.

‘मालकिन, आप बहुत सुन्दर हैं…’ अचानक गोपाल ने कहा और प्यार से जांघों को सहलाया.

‘तू भी बहुत प्यारा है..’ मीना ने जबाब दिया और हौले से साया को अपनी घुटनों से ऊपर खींच लिया.

माँ के सुडौल पैर और पिंडली किसी भी मर्द को गर्म करने के लिये खाफी थे.

हम दोनों पैर दबा रहे थे लेकिन हमारी नजर मीना की मस्त, गोल-गोल, मांसल चूचियों पर थी. लग रहा था जैसे कि चूचियाँ ब्लाऊज़ को फाड़ कर बाहर निकल जायेंगी.

मेरा मन कर रहा था कि फटाफट माँ को नंगा कर बूर में लन्ड पेल दूं. मेरा लंड भी चोदने के लिये तैयार हो चुका था.

और इस बार घुटनों के ऊपर हाथ बढ़ा कर मैंने हाथ साया के अन्दर घुसेड़ दिया और अन्दरुनी जांघों को सहलाते हुये जिन्दगी में पहली बार बुर को मसला.
एक नहीं, दो नहीं, कई बार बुर मसला लेकिन माँ ने एक बार भी मना नहीं किया.

माँ साया पहने थी और बुर दिखाई नहीं पर रही थी. साया ऊपर नाभि तक बंधा हुआ था.
मैं बुर को देखना चाहता था. एक दो बार बुर को फिर से मसला और हाथ बाहर निकाल लिया.

‘मां, साया बहुत कसा बंधा हुआ है, थोड़ा ढीला कर लो.. ‘

मैंने देखा कि गोपाल अब आराम से मीना की जांघों को मसल रहा था.
तो मैंने गोपाल से कहा कि वो साया का नाड़ा खोल दे.

तीन चार बार बोलने के बाद भी उसने नाड़ा नहीं खोला तो मैंने ही नाड़ा खींच दिया और साया ऊपर से ढीला हो गया.

मैं पांव दबाना छोड़कर माँ की कमर के पास आकर बैठ गया और साया को नीचे की तरफ ठेला.

पहले तो उसका चिकना पेट दिखाई दिया और फिर नाभि. कुछ पल तो मैंने नाभि को सहलाया और साया को और नीचे की ओर ठेला.

अब उसकी कमर और बुर के ऊपर का चिकना चिकना भाग दिखाई पड़ने लगा. अगर एक इंच और नीचे करता तो बुर दिखने लगती.

‘आह बेटा, छाती बहुत दर्द कर रहा है..’ मीना ने धीरे से कहा . साया को वैसा ही छोड़कर मैंने अपने दोनों हाथ माँ की मस्त और गुदाज चूचियों पर रखे और दबाया.

गोपाल के दोनों हाथ अब सिर्फ जांघो के ऊपरी हिस्से पर चल रहा था और वो आंखे फाड़ कर देख रहा था कि एक बेटा कैसे माँ की चूचियाँ मसल रहा है.

‘मां, ब्लाउज खोल दो तो और अच्छा लगेगा.’ मैंने दबाते हुए कहा.

‘खोल दे!’ उसने जवाब दिया और मैंने झटपट ब्लाउज के सारे बटन खोल डाले और ब्लाउज को चूची से अलग कर दिया.

मां की गोल-गोल, उठी हुई और मांसल चूची देख कर माथा झनझना गया.
मुझे याद नहीं था कि मैंने आखरी बार कब माँ की नंगी चूची देखी थी. मैं जम कर चूची दबाने लगा.

‘कितना टाईट है, लगता है जैसे किसी ने फ़ुटबाल में कस कर हवा भर दी है.’ मैंने घुन्डी को कस कर मसला और ग़ोपाल से कहा- क्यों गोपाल कैसा लग रहा है?’ मैं जोर जोर से चूची को दबाता रहा.

अचानक मैंने देखा कि गोपाल का एक हाथ माँ की दोनों जांघों के बीच साया के ऊपर घूम रहा है. एक हाथ से चूची दबाते हुए मैंने गोपाल का वो हाथ पकड़ा और उसे माँ की नाभि के ऊपर रख कर दबाया.

‘देख, चिकना है कि नहीं?’ मैं उसके हाथ को दोनों जांघों के बीच बुर की तरफ धकेलने लगा. दूसरे हाथ से मैं लगातार चूचियों का मजा ले रहा था. मुझे याद आया कि बचपन में इन चूचियों से ही दूध पीता था. मैं माँ के ऊपर झुका और घुन्डी को चूसने लगा.

तभी माँ ने फुसफुसाकर कान में कहा- बेटा, तू थोड़ी देर के लिये बाहर जा और देख कोई इधर ना आये..’

मैं दूध पीते पीते गोपाल के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर साया के अन्दर ठेला और गोपाल का हाथ माँ के बुर पर आ गया. मैंने गोपाल के हाथों को दबाया और गोपाल बुर को मसलने लगा . कुछ देर तक हम दोनों ने एक साथ बुर को मसला और फिर मैं खड़ा हो गया. ग़ोपाल का हाथ अभी भी माँ की बुर पर था लेकिन साया के नीचे. बुर दिख नहीं रही थी.

मैंने अपना पजामा पहना और गोपाल से कहा- जब तक मैं वापस नहीं आता, तू इसी तरह मालकिन को दबाते रहना. दोनों चूचियों को भी खूब दबाना.

मैं दरवाजा खोल कर बाहर आ गया और पल्ला खींच दिया. आस पास कोई भी नहीं था. मैं इधर उधर देखने लगा और अन्दर का नजारा देखने का जगह ढूंढने लगा. जैसा हर घर में होता है, दरवाजे के बगल में एक खिड़की थी. उसके दोनों पल्ले बन्द थे. मैंने हलके से धक्का दिया और पल्ला खुल गया. बिस्तर साफ साफ दिख रहा था.

मीना ने गोपाल से कुछ कहा तो वो शरमा कर गर्दन हिलाने लगा. मीना ने फिर कुछ कहा और गोपाल सीधा बगल में खड़ा हो गया. मीना ने उसके लन्ड पर पैंट के ऊपर से सहलाया और ग़ोपाल झुक कर साया के ऊपर से बुर को मसलने लगा. एक दो मिनट तक लंड के ऊपर हाथ फेरने के बाद मीना ने पैंट के बटन खोल डाले और गोपाल नंगा हो गया. मीना ने झट से उसका टनटनाया हुआ लंड पकड लिया और उसे दबाने लगी.

मां को मालूम था कि मैं जरूर देख रहा हूँ, उसने खिड़की के तरफ देखा. मुझसे नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दी और लंड को दोनों हाथों से हिलाने लगी. गोपाल का लंड देख कर वो खुश थी.

उधर गोपाल ने भी बुर के ऊपर से साया को हटा दिया था और मैंने भी पहली बार एक बुर देखी वो भी अपनी माँ की, जिसे मेरी आंखों के सामने एक लड़का मसल रहा था.

मीना ने कुछ कहा तो गोपाल ने साया को बाहर निकाल दिया.
वो पूरी नंगी थी. उसकी गठी हुई और लम्बी टांगें और जांघ बहुत मस्त लग रही थी. बुर पर बहुत छोटे छोटे बाल थे, शायद 6-7 दिन पहले झांट साफ किया था.

मीना लंड की टोपी खोलने की कोशिश कर रही थी. उसने गोपाल से फिर कुछ पूछा और गोपाल ने ना में गर्दन हिलाई. शायद पूछा हो कि पहले किसी को चोदा है या नहीं. मीना ने गोपाल को अपनी ओर खींचा और खूब जोर जोर से चूमने लगी और चूमते-चूमते उसे अपने ऊपर ले लिया.

अब मुझे मीना की बुर नहीं दिख रहा था. मीना ने हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अपने हाथ से लंड को बुर के छेद पर रखा.
मीना ने गोपाल से कुछ कहा और वो दोनों चूची पकड़ कर धीरे धीरे धक्का लगा कर चुदाई करने लगा.

गोपाल अपने से 20 साल बड़ी गांव की सबसे मस्त और सुन्दर माल की चुदाई कर रहा था.

मैं अपने लंड की हालत को भूल गया और उन दोनों की चुदाई देखने लगा.
गोपाल जोर जोर से धक्का मार रहा था और मीना भी चूतड़ उछाल उछाल अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई का मजा ले रही थी.

यूँ तो गोपाल के लिये चुदाई का पहला मौका था लेकिन वो पिछले साल से हर रात अपनी माँ को नंगी देखता था, बाप से चुदवाते.

मैं देखता रहा और गोपाल जम कर मेरी माँ को चोदता रहा और करीब 15 मिनट के बाद वो माँ के ऊपर ढीला हो गया. मैं 2-3 मिनट तक बाहर खड़ा रहा और फिर दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.

मुझे देखते ही गोपाल हड़बड़ा कर नीचे उतरा और अपने हाथ से लंड को ढक लिया. लेकिन मीना ने उसका हाथ अलग किया और मेरे सामने गोपाल के लंड को सहलाने लगी.

मां बिल्कुल नंगी थी. उसने दोनों टांगों को फैला रख्खा था और मुझे बुर का फांक साफ साफ दिख रहा था.

लंड को सहलाते हुये मीना बोली- बेटा, गोपाल में बहुत दम है … मेरा सारा दर्द खत्म हो गया.
फिर उसने गोपाल से पूछा- क्यों, कैसा लगा?

मैं उसकी कमर के पास बैठ कर बुर को सहलाने लगा.
बुर गोपाल के रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी.

‘बेटा, साया से साफ कर दे.’

मैं साया लेकर बुर के अन्दर बाहर साफ करने लगा और उसने गोपाल से कहा कि वो गोपाल को बहुत पसन्द करती है और उसने चुदाई भी बहुत अच्छी की. उसने गोपाल को धमकाया कि अगर वो किसी से भी इसके बारे में बात करेगा तो वो बड़े मालिक (मेरे बड़े काका) से बोल देगी और अगर चुप रहेगा तो हमेशा गोपाल का लंड बुर में लेती रहेगी.

गोपाल ने कसम खाई कि वो किसी से कभी मीना मालकिन के बारे में कुछ नहीं कहेगा. मीना ने उसे चूमा और कपड़े पहन कर बाहर जाने को कहा.

ग़ोपाल बहुत खुश हुआ जब माँ ने उससे कहा कि वो जल्दी फिर उससे चुदवायेगी.

मैंने गोपाल से कहा कि वो आंगन जाकर अपना काम करे. गोपाल के जाते ही मैंने दरवाजा अन्दर से बन्द किया और फटाफट नंगा हो गया. मेरा लन्ड चोदने के लिये बेकरार था.

माँ ने मुझे नजदीक बुलाया और मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी.

‘हाय बेटा, तेरा लौड़ा तो बाप से भी लम्बा और मोटा है…, लेकिन अपनी माँ को मत चोद. तू घर की जिस किसी भी लड़की को चोदना चहता है, मैं चुदवा दूंगी.. लेकिन मादरचोद मत बन.’

मैंने अपना लंड अलग किया और माँ के ऊपर लेट गया. लंड को बुर के छेद से सटाया और जम कर धक्का मारा…

‘आह्ह…’

मैं माँ के कन्धों को पकड़ कर चोदने लगा.

‘साली, अगर मुझे मालूम होता कि तू इतनी चुदासी है तो मैं तुझे 4-5 साल पहले ही चोद डालता, बेकार का हत्तू मार कर लौड़े को तकलीफ नहीं देता.’ कहते हुये मैंने जम कर धक्का मारा.. ‘आअह्ह … मजा आआआअ ग… याआअ..’

मां ने कमर उठा कर नीचे से धक्का मारा और मेरा माथा पकड़ कर बोली- बेटा, वो तो गोपाल से चुदवाने के लालच में आज तेरे सामने नंगी हो गई, वरना कभी मुझे हाथ लगाता तो एक थप्पड़ लगा देती.

मैंने धक्का मारते मारते माँ को चूमा और चूची को मसला.

‘साली, सच बोल, गोपाल के साथ चुदाई में मजा आया क्या?’ मेरा लौड़ा अब आराम से अपनी जन्मभूमि में अन्दर-बाहर हो रहा था.

‘सच बोलूं बेटा, पहले तो मैं भी घबरा रही थी कि मैं मुन्ना के उम्र के लड़के के सामने रन्डी जैसी नंगी हो गई हूँ लेकिन अगर वो नहीं चोद पाया तो!’ माँ ने गोपाल को याद कर चूतड़ उछाले और कहा- गोपाल ने खूब जम कर चोदा, लगा ही नहीं कि वो पहली बार चुदाई कर रहा है.. मैं तो खुश हो गई और अब फिर उससे चुदवाऊँगी.’

‘और मैं कैसा चोद रहा हूँ मेरी जान?’ मैंने उसके गालों को चूसते हुये पूछा.

‘बेटा, तेरा लौड़ा भी मस्त है और तेरे में गोपाल से ज्यादा दम भी है … मजा आ रहा है.’

और उसके बाद हम जम कर चुदाई करते रहे और आखिर में मेरे लंड ने माँ के बुर में पानी छोड़ दिया. हम दोनों हाँफ रहे थे. कुछ देर के बाद जब ठण्डे हो गये तो हमने अपने कपड़े पहने और बिस्तर ठीक किया.

‘बाप रे, सब पूछेंगे कि मैं इतनी देर कहा थी, तो क्या बोलूंगी…’ माँ अब दो दो लंड खाने के बाद डर रही थी.

मैंने उसे बांहों में जकड़ कर कहा- रानी, तुम डरो मत. मैं साथ हूँ ना… किसी को कभी पता नहीं चलेगा तुमने बेटे और नौकर से चुदवाया है.’ मैंने माँ के गालों को चूमा और उससे खुशामद किया कि वो दो-ढाई घंटे के बाद फिर इस कमरे में आ जाये जिसमें से कि मैं उसे दुबारा चोद सकूँ.

‘एक बार में मन नहीं भरा क्या..?’ उसने पूछा..
‘नहीं साली, तुमको रात दिन चोदता रहूँगा फिर भी मन नहीं भरेगा… जरूर आना..’
‘आऊँगी..लेकिन एक शर्त पर…!’ माँ ने मेरा हाथ अपनी चूची पर रखा.
‘क्या शर्त?’ मैंने चूची जोर से मसला…
‘गोपाल भी रहेगा…’ माँ फिर गोपाल का लौड़ा चाहती थी.
‘साली, तू गोपाल की कुतिया बन गई है… ठीक है, इस बार मैं अपनी गोदी में लिटा कर गोपाल से चुदवाऊँगा.
‘तो ठीक है, मैं आऊँगी…’

आंगन के रास्ते में मैंने उससे पूछा कि वो पहले कितने लौड़े खा चुकी है.. तो उसने कहा कि बाद में बतायेगी.
आंगन में पहुंचते ही बड़ी काकी ने पूछा- माँ को लेकर कहाँ गया था. सब खाने के लिये इंतजार कर रहे हैं.
मैंने जबाब दिया कि मैं माँ को गाछी (फार्म हाउस) दिखाने ले गया था. फिर किसी ने कुछ नहीं पूछा Hindi Sex Stories

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