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नमस्ते दोस्तो ! मेरा Hindi Sex Stories नाम खुश है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।
अभी तो मैं मोदीनगर में रहता हूँ, लेकिन यह बात तब की है जब मैं मुज़फ्फरनगर से ग्रेजुएशन कर रहा था।
मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम कशिश है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता।
मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा खुश ?”
जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम कशिश था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।
जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक मुज़फ्फरनगर से हैं, वो सभी रामलीला ग्राउंड का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रामलीला ग्राउंड प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक ! कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।
मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रामलीला ग्राउंड गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी कशिश के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी।
फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।
वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने के लिए बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं।
फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया।
वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।
अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी।
मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।
इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से !
मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर ! दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में ! साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।
इस तरह हमने क़रीब 15 मिनट तक खूब प्यार किया।
फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।
फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैं पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी ! बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को ! उसे देखकर मुँह में पानी आ गया।
वो बोलने लगी- प्लीज़ ! अब मत तड़पाओ।
मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”
फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली- क्या कर रहे हो?
अब मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।
अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”
मैंने बोला- इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या?
फिर मैंने अपना ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैं उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा और क़रीब 25-30 झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।
इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।
अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता।
अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।
अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी।
फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा।
धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।
अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।
ऐसे ही क़रीब 15 मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो तीन बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।
मैंने उसे नीचे किया और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तब तक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए।
तो दोस्तों, कैसी लगा मेरा पहला अनुभव? Hindi Sex Stories
सेक्स शब्द मात्र से ही तन मन में रोमांच पैदा हो जाता है तो सोचिये जिसने एक बार ये स्वाद चख लिया हो तो वो इसके बिना कैसे तड़पता होगा?
मैं निशा मल्होत्रा हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर से 34 28 36 फिगर की 28 वर्षीय नटखट अल्हड़ जवान शादीशुदा उच्च शिक्षित महिला आप सभी सेक्स दीवानों का अभिवादन करती हूँ.
मेरी शादी आज से तीन वर्ष पहले एक काफी अमीर परिवार में हुई थी. मेरे पतिदेव का अपना बिज़नस है और उनका कारोबार भारत के कई प्रदेशों में फैला हुआ है. इसलिए वो अक्सर अपने बिज़नस टूर की वजह से काफी काफी दिनों तक बाहर भी रहते हैं. शादी के बाद सुहागरात पर पहली बार सेक्स का आनन्द लेने का मौका मिला था मुझे जीवन में! सुहागरात की चुदाई मेरी पहली चुदाई थी.
मेरे पतिदेव बहुत सेक्सी भी हैं और पावरफुल भी इसलिए उन्होंने मुझे सेक्स का अपार सुख दिया. मुझ में ऐसी काम वासना जागृत कर दी थी उन्होंने कि अक्सर जब वो घर नहीं होते थे तो मैं पीछे से सेक्स के लिए तड़पती हुई कभी डिल्डो से तो कभी अपनी प्यारी उंगलियों से अपनी चूत का रस निकलकर उसे शांत करती थी.
पर शादी के तीन साल बाद अब ये प्यास कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी मुझमें और दूसरी तरफ मेरे पति अपने कारोबार की तरक्की के लिए कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लगे थे.
फिर एक दिन वो हुआ दोस्तो… जिससे मुझे मेरी काम इच्छाओं को पूरी करने वाला एक नया साथी मिल गया.
उस दिन मैं हमेशा की तरह बाथरूम में नहा रही थी, मैं कभी भी कपड़े अपने साथ अन्दर लेकर नहीं जाती. नहाते वक़्त मैं अपने खूबसूरत जिस्म को निहारते हुए अपनी ही कामवासना में खोई हुई अपनी चूत को सहलाये जा रही थी.
मेरी ब्रा पैंटी और टॉवल सब बाहर मेरे बेड पर ही पड़े थे.
मेरे मामाजी का लड़का जिसके साथ बचपन से ही मैं काफी खुली हुई थी, हम दोनों भाई बहन हर तरह की बातें कर लेते थे, वो घर आया और मेरी सास ने उसे ऊपर मेरे रूम में भेज दिया मिलने!
वो मेरे बेडरूम में आकर बेड पर बैठा और मेरे अंदरूनी कपड़ों को देखकर उसका मन भी डोलने लगा शायद… वो मेरी ब्रा हो हाथ में लेकर चूमते हुए मेरे 34 साइज़ के भरे हुए बूब्स को फील करके उन्हें चूसने का अनुभव करने लगा.
इधर मैंने अपनी चूत को सहलाकर उसका रस निकाला और अच्छे से नहाकर अपने जिस्म की खूबसूरती को निहारकर मटकती हुई अपने बाथरूम का दरवाजा खोलते हुए बेडरूम में आई तो देखती हूँ कि मेरे बेड पर तरुण (मेरे मामा का लड़का) बैठा हुआ है और उसका तक़रीबन 8 इंच का एकदम कसा हुआ लंड जो काली घुंघराली झांटों से भरा हुआ था, उस पर मेरी पैंटी को रगड़ रहा था.
मैं उसे इस हालत में देखकर कुछ पल के लिए मानो मन्त्र मुग्ध सी हो गई थी. मैं ये भी भूल गई कि मैं खुद एकदम नग्न अवस्था में उसके सामने हूँ. वो भी मेरी जैसी अप्सरा को अपने सामने इस नग्न कामुक अवस्था में देख खो सा गया था.
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, वो एकदम से मेरे करीब आ गया. हम दोनों अब एक दूसरे के बिल्कुल समीप थे, दोनों एक दूजे की आँखों में खोये हुए थे कि इतने में कब उसने मेरे होंठों को अपने लबों में ले लिया, पता ही नहीं चला यारो!
मेरे अन्दर भी सेक्स की अधूरी कामनायें पूरी तरह से जाग चुकी थी और वो भी आज मुझे पूरी तरह से भोगने के लिए तैयार था. उसने फटाफट अपने सारे कपड़े निकाले और मुझे चूमते हुए बेड पर लिटा दिया, फिर मेरे कोमल पर सख्त, मुलायम पर कसे हुए बूब्स को जोरों से चूसने लगा, मेरे पेट को चूमते हुए मेरी चूत तक पहुँच गया और फिर एकदम से टूट पड़ा मेरी भीगी हुई चूत पर…
उफ अशश्स आह्ह्ह आह्ह ह्ह की आहें बरबस ही मेरे मुख से निकलने लगी.
उसने चूस चूस कर ही मेरी प्यासी चूत का कामरस निकाल दिया और फिर अपने तनतनाते हुए लंड को मेरे मुख के करीब ले आया. मैं समझ गई थी उसका इशारा और मैं खुद उसके कसे हुए लंड को चूसना चाहती थी इसलिए मैंने अपना मुंह पूरा खोलते हुए उसके लंड को गप्प से निगलना शुरू किया.
अभी कुछ ही पल हुए थे उसका लंड चूसते हुए मुझे कि इतने में उसने मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और बेड पर लेट गया. मैं उसका इशारा समझते हुए उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी भीगी प्यासी चूत में उसका लंड सेट करने लगी.
वो मेरे 34 साइज़ के रसभरे बूब्स को दबाने लगा जोर से और मैं उसके लंड पर कूदने लगी. उस वक़्त हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो चुके थे.
जल्दी ही मैं झड़ गई और थक कर नीचे उतर गई फिर वो मेरे ऊपर आ गया. उसने मेरी चूत को चूमा और फिर अपना लंड मेरी चूत में डालते हुए दस मिनट तक मेरी ज़बरदस्त चुदाई की.
हम दोनों थक कर कुछ देर यूँ ही साथ नंगे ही लेटे रहे.
वैसे पहले हमारे बीच बातें तो सभी हो जाती थी मज़ाक मजाक में… पर दोनों के बीच सेक्स का यह पहला अवसर था.
उस दिन से मुझे मेरी तनहाई को मिटाकर प्यार और सेक्स का आनन्द देने वाला साथी मिल गया.
मित्रो, यह थी मेरे पहले पर पुरुष के साथ सेक्स भाई बहन की चुदाई की कहानी.
मैं आशिक राहुल का दिल से और अपनी भीगी चूत से धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने मेरी कहानी को हिंदी में लिखा और अन्तर्वासना पर प्रकाशित करने में मेरी मदद की और साथ ही आशिक राहुल से गुजारिश भी करती हूँ कि वो जल्दी ही उनके और मेरे बीच हुए सेक्स संगम की रोचक कहानी भी आप सबके सामने पेश करें!
और साथ ही अन्तर्वासना प्लेटफ़ॉर्म को धन्यवाद करना चाहूंगी जिसकी वजह से ऐसे प्यारे दोस्त से मुलाकात हुई और अपनी सेक्स कामनाओं के पूर्ति के लिए एक विश्वसनीय दोस्त मिला.
दोस्तो! यह भाई बहन की चुदाई की कहानी थी निशा मल्होत्रा की उन्ही की जुबानी. जैसाकि निशा ने कहा है कि मैं उनके और मे
मेरी टीचर सरिता की सगाई होने Sex Stories वाली थी। सरिता दीदी पढ़ाई में मेरा पूरा ध्यान रखती थी। मैं उनसे पढ़ने के लिये उनके घर भी जाती थी। मुझे वो अपने साथ इन्दौर ले गई थी।
लड़के वाले सरिता को देखने आने वाले थे। वैसे उनके उन लोगों से पुराने सम्बन्ध भी थे, कारण कि उनके परिवारों का बिजनेस भी एक ही था। सभी लोग शाम का इन्तज़ार कर रहे थे। मैं उन इन्तज़ार करने वालों में एक थी। मुझे भी घरवालों के साथ दुल्हे और उसके घरवालों का स्वागत करना था।
घर के पोर्च में एक स्कोर्पिओ गाड़ी आ कर रुकी, उसमें से मात्र तीन लोग उतरे। हम सभी लपक कर वहां पहुंच गये। एक सजीला छ: फ़ुट का जवान, सुन्दर और हंसमुख, गोरा चिट्टा, काले सूट में बिल्कुल राजकुमार लग रहा था।
मैंने थाली से उसे तिलक लगाया, उसने मुझे देखा और मुस्कुरा दिया। मेरी आंखें उससे मिलते ही झुक गई, उसके चेहरे की सुन्दरता मेरे दिल में उतर गई। वो भी जैसे मुझे निहारता ही रह गया। मैं कहीं खो सी गई। सभी अन्दर आ चुके थे। मैं भाग कर सीधे सरिता के पास पहुंची।
“हाय दीदी! मैं तो मर गई! वो बिलकुल कहीं का राजकुमार है!”
“अरे … तू ठीक तो है ना, किसकी बात कर रही है?” सरिता ने कुछ आश्चर्य से मुझे देखा।
“दीदी … एक दम गोरा चिट्टा, लम्बा, सुन्दर सा! हाय दीदी …! क्या कहूं …! दूल्हा है या राजकुमार!”
“मैं जानती हूँ उसे, देखा है मैंने … हां सुन्दर तो है … पर तुझे वो राजकुमार लग रहा है?” मेरी बात को दीदी ने ज्यादा तूल नहीं दिया तो मेरा जोश भी ठण्डा पड़ गया। कुछ ही देर के बाद दीदी सज धज कर कमरे से निकल कर हॉल में आई। दीदी भी आंखे नीची किये धीरे धीरे चलती हुई सोफ़े के नजदीक आ गई। मैंने पहली बार दीदी को इतनी नज़ाकत के साथ चलते हुए देखा। पर दीदी हूर की परी सी लग रही थी। मन में सोचा- देखो तो क्या एक्टिंग करती है!
इसी समय दूल्हे ने मुस्करा कर मुझे देखा। मैं शरमा गई। बातचीत चलने लगी। बातचीत में पता चला कि दूल्हे का नाम राहुल है और वो एक भू वैज्ञानिक है। हम लोग खाने पीने का सामान सजाने लगे, पर किसी ने कुछ खाया पिया नहीं, बस औपचारिकता ही निभा दी। राहुल और दीदी को अकेले में बात करने की आज्ञा मिल गई। उन्हें दूसरे कमरे में ले जाया गया। मैं दरवाजे के पीछे छिप गई, पर राहुल ने मुझे देख लिया था।
“ सरिता … आप बहुत सुन्दर हैं, पर आपकी सहेली भी आपसे कम नहीं!”
मैं बाहर खड़ी कांप गई। मैंने छिप कर अन्दर देखा, राहुल दीदी को किस कर रहा था। दीदी अपना सुन्दर सा चाँद सा मुखड़ा ऊपर किये उनके चुम्बन का आनन्द ले रही थी।
“ राहुल मेरा सपना पूरा हो रहा है, आप मेरे मालिक हो गये हो, अब मैं आपकी दासी हूँ!” दीदी ने झुक कर राहुल के पांव छू लिये। राहुल ने दीदी को उठा कर गले लगा लिया। दीदी रटे रटाये डायलोग बोल रही थी और एक्टिन्ग कर रही थी, जैसा वो मुझे करके दिखाती थी, बिलकुल फ़िल्मी डायलोग लग रहे थे, पर प्यार के शब्द हमेशा नये ही होते हैं, उसमें हमेशा नई ताजगी ही रहती है। मेरे मन में भी तंरगे फ़ूटने लगी और मुख से हाय निकल पड़ी।
वो दोनों प्यार में खोने लगे … यानी वो पहले से एक दूसरे को जानते थे … और बात पक्की ही थी … इतने में राहुल की नजर मुझ पर पड़ ही गई। दीदी को बाहों में लिए-लिए उसने मुझे पीछे से हाथ हिला दिया …
मैं शरम से पानी पानी हो गई … पर हिम्मत करके मैंने बोल ही दिया,”पापा बुला रहे हैं … ” फिर धीरे से बोली … “बाकी सगाई के बाद …!”
दीदी झेंप गई और राहुल से अलग हो गई।
“कामिनी … प्लीज … किसी को मत कहना … ” दीदी के कातर नजरों मुझे देखा।
“दीदी … जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी …!” मैंने शरारत की … राहुल मेरी तरफ़ मीठी निगाहों से मुझे देखता रह गया।
दूसरे दिन शाम को राहुल घर आ गया और बाज़ार जाने का प्रोग्राम बना लिया। मुझे भी दीदी ने साथ ले लिया। थोड़ा आगे चलते ही राहुल ने एटीएम बूथ के सामने कार रोक दी। दीदी को बूथ से पैसे निकालने थे।
“जीजू, आप कहाँ रहते हैं?”
” यहीं पास में राजेंद्र नगर में … लो चॉकलेट लो!” उसने एक फ़ाइव स्टार चॉकलेट निकाली।
पर ये क्या … मेरे बढ़े हुए हाथ को पकड़ कर राहुल ने खींच लिया। मैं पिछली सीट से थोड़ा ऊंचा उठ गई। इतने में सब कुछ तेजी से घट गया। राहुल ने एकदम से मुड़ कर मुझे चूम लिया। और फिर ड्राईविंग सीट पर बैठ गया। मैं घबरा गई, मेरे चेहरे पर पसीना छलक आया। पर मुझे बहुत अच्छा लगा।
“जीजू … ये क्या … दीदी ने देख लिया तो मुझे घर ही नहीं आने देगी … ”
“कामिनी तुम हो ही इतनी प्यारी और मासूम … कि बस दिल ने कहा कि प्यार तो कर ही लो … ” सुनिल बड़ा दिलफ़ेंक निकला …
“धत्त … जीजू … आप तो बस!” मेरे दिल में एक मीठी सी हूक उठी।
“कल यहीं बूथ पर दिन को ठीक ११ बजे मिलना, नहीं तो मैं घर पर आ जाऊंगा!”
मैं घबरा उठी … ये क्या?
“नही … नहीं … ”
इतने में दीदी आती दिख गई- अच्छा … अच्छा ठीक है!
मेरा बदन पसीने से भीग गया।
“क्या हुआ … तेरी तबियत ठीक तो है ना?” दीदी ने मुझे देखते कहा।
“हां हां … चलो, ठीक है!” मैं अपने आपको कंट्रोल करने लगी। शीशे में राहुल अपनी मीठी मुस्कान बिखेर रहा था। मेरी तरफ़ देखकर मुस्कराना मुझे और नर्वस कर रहा था। मुझे लगा कि दीदी मुझ पर इतना विश्वास करती है, ये तो धोखा होगा। पर राहुल का मुझ पर लाईन मारना बन्द नहीं हुआ। सच तो ये था कि मुझे भी ये सब अच्छा लगने लगा था।
मैं ठीक ११ बजे दिन को एटीएम पर आ गई पर कोई कार आती दिखाई नहीं दी।
“हाय!” राहुल ने पीछे से मुझे पुकारा।
मैं उछल पड़ी- “आप …! पर कार?
वो मुस्कुरा उठा और इशारा किया।
“ओह … ” मेरा दिल धक धक कर रहा था।
राहुल ने कार का दरवाजा खोला और मुझे आदर सहित अन्दर बैठाया।
“आपके आने का शुक्रिया!” दूसरी ओर से ड्राइविंग सीट पर आ गया। आते ही कार के शीशे ऊपर दिये और मुझे खींच कर अपने पास चिपका लिया। उसने अपने होंठो से मेरे कांपते होंठ मिला दिये। मुझे किसी लड़के ने जिन्दगी में पहली बार किस किया था। मुझे जाने कैसा लगने लगा। मैं बिना किसी विरोध के उसे किस करने दिया। उसके हाथ मेरे उरोजो पर आकर जम गये और हौले हौले उसे दबाने लगे, मैं बैचेन हो उठी, कसमसा उठी, मेरा मन कर रहा था कि मेरी छातियों के गोले वो मसलता ही जाये।
“ राहुल क्या कर रहे हो … यहाँ मत हाथ लगाओ!” मुझे ये सब अजीब सा, लेकिन कशिश भरा लग रहा था … जाने कैसा एक मीठा मीठा सा वासनायुक्त आनन्द भी आ रहा था। तभी सामने से कोई गाड़ी आ गई।
“अरे भई …! ये सब घर जा कर करना!” साथ बैठी हुई औरत भी मुस्करा उठी। राहुल झेंप गया और जल्दी से उसने मुझे छोड़ दिया। मैंने उस कार वाली को हाथ हिला दिया, उसने भी मुस्कुरा कर हाथ हिला कर उत्तर दिया।
राहुल ने कार स्टार्ट की और चल दिया।
मेरे बाल उलझ गये थे, सारा कुछ अस्त व्यस्त हो गया था। मैंने बैग में से सामान निकल कर अपने आपको फिर से ठीक किया। मैं बार बार राहुल को देख रही थी। विश्वास नहीं हो रहा था कि ये सब मेरे साथ हो रहा है?
कुछ ही देर में हम एक फार्म-हाउस में थे। मैं डर रही थी कि ना जाने अब क्या होगा? ये राहुल क्या करेगा, पर यदि कुछ नहीं करेगा तो मैं उससे कभी बात नहीं करुंगी। अन्दर जाने पर उसने अपना फार्म-हाऊस दिखाया और कुछ ही देर में एक अन्धेरा कमरा पा कर मेरे से लिपट पड़ा। मैंने राहुल को पूरा मौका दिया कि वो इसका पूरा फ़ायदा उठा ले।
“नहीं राहुल! … प्लीज … नही …!” मैं उससे विनती करने लगी … पर उसने मुझे प्यार से पास पड़े बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर धीरे से लेट गया, उसका कठोर लण्ड मेरी चूत पर आ लगा। मैं कसमसा कर उल्टी लेट गई। पर उसने मुझे कब्जे में कर लिया और लण्ड मेरी गाण्ड में गड़ा दिया। मेरे दोनो स्तन अब उसके हाथो में थे सभी कुछ वो बड़े प्यार से कर रहा था। मैंने घबरा कर रोने का नाटक करने लगी।
“अरे … रे … रो मत कामिनी, मुझे माफ़ कर दो … प्लीज!” और वो जल्दी से अलग हो गया। मैंने अपने आप को सयंत किया और लगा कि जैसे मस्ती छिन गई हो।
“ राहुल … तुम क्या दीदी के साथ भी इसी तरह जबर्दस्ती करोगे?” मैंने उसकी और देखा तो वो मुझे बहुत ही मायूस लगा, पर मैं उसे उदास नहीं करना चाह रही थी।
“सॉरी कहा ना …! तुम हो ही इतनी प्यारी कि तुम्हें देखते ही कोई भी होश खो बैठे!” उसने मेरे कपड़े ठीक किये और हम कमरे से बाहर निकल पड़े।
वहां खड़े हो कर वो बताता रहा कि कहा क्या क्या है। पर मेरी नजरें उसके चेहरे पर लगी रही, सुन्दर सा चेहरा, मासूम सा … ही-मैन जैसा, मेरा दिल पिघलने लगा। मुझे लगा कि वो मुझे प्यार करता है। मेरा क्या बिगड़ जाता अगर वो मेरे अंग मसल देता तो? उसे खुशी मिल जाती … और क्या। इस बार मैं उसे जो वो करेगा करने दूंगी, यह सोच कर मैं उसके पास खिसक आई और धीरे से उसकी कमर में हाथ डाल दिया।
वो बोलते बोलते अचानक रुक गया … “क्या कर रही हो कामिनी?”
“मुझे माफ़ कर दो राहुल … मैंने तुम्हारा दिल दुखाया!” मैंने उसकी चौड़ी छाती पर अपना सर रख दिया।
“नहीं कामिनी, मैं गलत था … मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था! पर दिल भी क्या चीज़ है … है ना?”
पर मैं अब कुछ नहीं सुन पा रही थी। मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर कसने लगे थे। राहुल भी एक बार फिर बहक उठा … उसके हाथ मेरे शरीर पर फ़िसलने लगे थे।
मुझे अब सबकुछ भला लग रहा था। मेरे चूतड़ दबाते ही मेरे अंग अंग फ़ड़कने लगे, छाती मसलते ही नीचे गीलापन आने लगा। वो मेरे से लिपट पड़ा। मेरे हाथ उसके लण्ड की तरफ़ ना चाहते हुए भी बढ़ने लगे और पैन्ट के बाहर ही मेरे हाथों की गिरफ़्त में आ गया। हाय … इतना मोटा और लम्बा … लण्ड इतना बड़ा होता है क्या? लड़कियाँ क्या इतने मोटे लण्ड से चुदती हैं?
“कामिनी प्लीज इसे मत छेड़ो, नहीं तो फिर कुछ करना पड़ जायेगा … ” उसका लण्ड मस्त हो उठा। कड़क होकर फ़ुफ़कारने लगा।
“मेरे राहुल, हाय … ये इतना मोटा? क्या लण्ड है?” मैंने जवान लण्ड का पहली बार स्पर्श किया था।
“चुप!” मेरे होठों पर उसने गाली सुनते ही अंगुली रख दी, मेरा कुर्ता राहुल ने ऊंचा उठा दिया और पजामा नीचे फ़र्श पर गिरा दिया। मैं नीचे से नंगी हो गई। मेरे दिल में चुदाई का नशा चढ़ने लगा। मुझे अपने नंगेपन का अहसास रोमंचित करने लगा। उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरी चूत से सटा दिया। लण्ड का स्पर्श पाते ही मेरी चूत फ़ड़क उठी।
मेरा मन कर रहा था कि राहुल चूत में घुसा दे! हाय रे लण्ड …! उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ रखा और जोर लगाने लगा। चूत गीली और चिकनी हो रही थी। लण्ड फ़च से जरा सा अन्दर घुस पड़ा। मेरे मुख से हाय निकल पड़ी।
“बाबू जी … खाना तैयार है …!” मुझे एक आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही मेरा सारा नशा उड़ता नजर आने लगा। मैं छिटक कर दूर हो गई।
“ये क्या कर रहे थे, अभी तो मांऽऽऽ रीऽऽऽ अन्दर ही घुसा देते!” मुझे भी एकदम से शरम आ गई। मैंने तुरन्त कपड़े ठीक से पहने और राहुल भी सम्भल गया। अब वो अपनी रोज की मुस्कान के साथ नीचे चल पड़ा। मैं भी शर्म से सर झुका कर सीढ़यां उतरने लगी। मन में सोचने लगी कि हाय मैं कितनी बेशरम हो गई थी।
रात की बस से मैं भोपाल वापस आ गई।
इन्दौर से आने के बाद मैं अनमनी सी रहने लगी। ये सब मेरे साथ पहली बार हुआ था। किसी लड़के ने मुझे पहली बार छुआ था। मैं पहली बार बह गई थी। पहली बार जवानी का उबाल सर पर चढ़ कर बोला था।
धीरे धीरे दिन बीतने लगे। दिल भी धीरे धीरे शान्त हो गया। पर एक दिल में चुभन, एक कसक रह गई थी। मुझे कभी कभी ये लगता कि काश राहुल ने मुझे चोद दिया होता। उसका लण्ड एक बार तो मेरी चूत में घुस ही चुका था। बस मन करता था कि पूरा ही घुस जाये। रात को मैं उत्तेजित होकर कभी बैंगन तो कभी उंगली का सहारा लेकर अपनी सारी गर्मी बाहर निकाल देती थी।
सरिता की शादी का दिन भी आ गया। उसने भोपाल की नौकरी छोड़ दी थी।
मुझे एक बार फिर से इन्दौर जाना पड़ गया। दिसम्बर के पहले सप्ताह में शादी थी। मैं राहुल से मिलना तो चाहती थी पर इस बार मैं राहुल से बचती रही। पर सरिता के साथ रहने से मैं उसकी नजरों में आ ही जाती थी। मन कसक बढ़ती ही जा रही थी। शादी के कारण राहुल को भी समय नहीं मिल पाया। पर अन्दर ही अन्दर मैं उसे देखने और मिलने को तड़पती रही। पर मन को कठोर बना कर उनके बीच में नहीं आई। मन तो मिलने को तड़प गया था।
शादी के कार्यक्रम समाप्त होते ही मैं तुरन्त फिर से भोपाल आ गई। शायद राहुल की नजरें भी मुझे तलाशती रह गई होगी।
जनवरी में मुझे इन्दौर आना हुआ। मन में दुआ कर कर रही थी कि राहुल मुझे इन्दौर में मिल जाये और बस एक बार मैं जी भर कर प्यार कर लूं और हो सके तो चुदा लूं। सरिता ने मुझे अपने घर में ही ठहरा लिया। मुझे नहीं पता था कि राहुल उन दिनो इन्दौर आया हुआ था, बस राहुल के बारे में मैं ये जानकर मैं खुशी से पागल हो गई।
मैं सरिता के गेस्ट रूम में ठहरी थी। मुझे बेसबरी से राहुल का इन्तज़ार था। शाम को राहुल घर आ चुका था। मुझे देख कर गेस्ट रूम में आ गया। उसे देखते ही मैं पिघल गई। मेरा मन कर रहा था कि उसके गले लग जाऊं और वो मेरा शरीर भींच डाले। खुदा मेरी सुन ली और सब कुछ अपने आप ही होने लगा।
हाय … कामिनी! कैसी हो, कब आई?
आज ही, आप तो आसाम गए हुए थे ना?
“हां छुट्टी पर आया हूँ.” और कहते हुए राहुल ने अपनी बाहें खोल दी, मैंने अपना सर झुका लिया। उसने आगे बढ़ कर मुझे बाहों में कस लिया … और एक गहरा चुम्मा ले लिया। मेरे मन में फिर से भावनाये तड़पने लगी और जागने लगी। इस बार मैंने भी शरम छोड़ कर प्रत्युत्तर में उसे गहराई से चूम लिया।
– लव यू डियर। राहुल ने अपने प्यार का इजहार किया।
– लव यू टू। मैंने भी इकरार कर लिया।
उसने मेरे उरोज दबा दिये और धीरे धीरे सहलाने लगा। मेरे चूचक कड़े होने लगे, शरीर में गुदगुदी सी भरने लगी। मैंने भी प्रति-उत्तर में अपनी छातियां उसके हाथों में दबा दी और सिसक उठी। मैंने उसके चूतड़ों को दबा कर सहलाना आरम्भ कर दिया था। उसका लण्ड कठोर होने लगा और मेरी चूत पर गड़ने लगा था।
मैंने उसका लण्ड हाथ में भर लिया। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी। वो प्यार से मुझे देखने लगा।
-कामिनी आज की रात अपनी रिजर्व रही?
– कर ही क्या सकते हैं? सरिता है ना!
– चुपके से, ठीक है ना!
मैं मुस्कुरा उठी, मेरे मन में चुदने की चाह उठने लगी, सोच कर ही चूत पनीली होने लगी। पर मन नहीं माना। कैसे होगा? राहुल जैसे ही बाहर गया। इतने में मैंने कुछ सोच लिया था। मैंने सरिता को सबकुछ बताने की ठान ली थी और फिर रात की बस से भोपाल चले जाने का फ़ैसला कर लिया। मन से मैं सरिता को धोखा नहीं देना चाहती थी। उसका मुझपर गहरा विश्वास था। मैंने वासना को मन में पीछे धकेला।
मैं सरिता के पास गई- दीदी, मुझे कुछ कहना है!
-हां कहो, क्या बात है?
– आप नाराज हो जायेंगी!
– समझ गई, जरूर राहुल ने कुछ गड़बड़ किया होगा, है ना? मैंने सर हिला कर हां कह दिया।
– पर दीदी, वो मुझ से प्यार करने लगे है, मैं आपको ये बताना चाह रही थी कि … मेरी बात काटते हुए वो बोली- अच्छा तो बात यहां तक पहुंच गई? अच्छा अब क्या करोगी? सरिता ने मुझे तिरछी नजरों से देखा।
– उन्होंने मुझे रात के लिए कहा है! उन्हें मना करो ना। मैंने झिझकते हुये दिल कड़ा करके कह ही दिया।
– चल तो क्या हुआ? एक ही रात की तो बात है। उसने शरारत भरी हंसी सुनाई दी।
– जी? दीदी आप ये कह रही हैं? मैं विस्मित हो उठी, और उसका मजाक समझ में नहीं आया।
– मुझे सब पता है, तुम दोनों की आशिकी के बारे में, अब बनो मत। मुझे राहुल सब बता देता है – सरिता प्यार से मुझे देखने लगी।
– तो क्या राहुल रात को मेरे साथ …
– तुम्हारा मन सच्चा और साफ़ है, तुमने आगे हो कर मुझे बताया है, तुम मेरी प्यारी सहेली हो। सरिता मेरी बात से खुशी से भर गई।
-दीदी, पर वो तो तुम्हारे सब कुछ है ना … फिर?
– सब कुछ में से तुम भी कुछ ले लो … बस। उसी ने तुम्हें यहाँ रुकने के लिये कहा था, और मन की बात बताई थी, अब तुम तो गई काम से, ये रात कामिनी की चुदाई के नाम! – वो हंस पड़ी।
मैं शर्म से दीदी से लिपट गई। डिनर के बाद मैं अपने कमरे में आ गई और ड्रेस बदल ली और पजामा और टॉप पहन लिया। डिनर के बाद राहुल और सरिता मेरे कमरे में आ गये … “तो मेरी प्यारी सहेली, चुदने को तैयार हो? मेरी शुभकामनायें तुम दोनों के साथ हैं! आज की रात राहुल को कामिनी और कामिनी को राहुल दिया तोहफ़े में सरिता ने!”
-तुम्हारी दीदी ने तुम्हें चोदने की आज्ञा दे दी है, अब अपने चूत के द्वार खोल भी दो!” राहुल बेशर्मी से नेहा के सामने ही कहने लगा।
– धत्त, ये क्या कहते हो! और मैं उसे घूंसे मारने लगी … उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बिस्तर पर गिरा दिया। मैं आज पूरी तैयारी में थी और चुदने का मूड बना लिया था। मेरा रोम रोम वासना में झुलस रहा था। उसका लण्ड पजामें में से उभर कर बाहर दिखने लगा था।
-कामिनी! इसे देख! लगता है पजामा फ़ाड़ देगा, पकड़ ले इसे!” सरिता ने राहुल के लण्ड पर हाथ रख कर कहा।
-दीदी, नहीं शरम आती है!” पर मैंने दीदी के सामने हिम्मत करके लण्ड पकड़ ही लिया। दीदी मुस्करा उठी।
– दीदी का दिल कितना बड़ा है! मेरे मुंह से निकल पड़ा।
– उसका तो दिल, बोबे, चूतड़ सब बड़े हैं। मेरा तो बस लण्ड ही बड़ा है। राहुल ने हंसते हुए माहौल हल्का कर दिया।
राहुल के हाथ मेरी कमर से होते हुए टॉप के अन्दर सरकते हुए मेरे बोबे की तरफ़ बढ़ने लगे। दीदी ने देखा कि मामला गरम हो रहा है तो गुडनाईट कह कर वहां से जाने लगी, मैं सरिता को देखती रह गई। दीदी मुड़ कर बाहर निकल गई और दरवाजा बन्द कर दिया।
मेरे बोबे राहुल के हाथों में खेल रहे थे। मैं पसीने में नहा गई।
उसने मेरा टॉप उतार डाला और मेरे स्तन नंगे हो गये। मैंने तुरन्त अपने दोनों हाथो से उन्हें छुपा लिया और पास में पड़ा कपड़ा छाती पर डाल लिया।
राहुल ने अपना पजामा उतार दिया। उसका फ़ड़कता हुआ लण्ड बाहर निकल कर झूमने लगा। उसने बाहर से ही मेरी चूत को सहला दिया।
उसका लण्ड देख कर मैं तो पगला गई। उसने मुझे बाहों में भर लिया और अपनी कमर मेरी चूत की तरफ़ दबा दी। उसका लौड़ा जोर मार रहा था और मेरी चूत पर रगड़ मार रहा था। मैं भी अपनी चूत को उभार कर उसके लण्ड से घिसने लगी … जिस्म पिघलने लगे … दिलो में प्यार उमड़ पड़ा।
मेरा पजामा भी जाने कब उतर गया। पूरा कमरा आहों से गूंज उठा। वासनायुक्त सिसकारियाँ हम दोनों के मुख से निकलने लगी। चूत के द्वार पर ठोकर मारते हुए उसका लण्ड मेरी चूत में उतरने लगा।
जिसका मुझे इन्तज़ार था वो पल आ गया था। उसका लण्ड मेरे चूत की प्यास बुझाने को आतुर था। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई थी। चूत की दीवारों पर राहुल के लौड़े की रगड़ से मेरे तन मन में उत्तेजना की मिठास भरने लगी। मैं राहुल को अपने में खींच कर समाने का प्रयत्न करने लगी।
लगता था कि लण्ड और गहराई तक चोद दे … राहुल मुझे प्यार से जड़ तक चोद रहा था। उसकी आंखें बन्द थी। मैं भी खुमारी में झूम रही थी। राहुल की कमर आगे पीछे चल रही थी। उसकी मर्दानगी मुझे पानी पानी किये दे रही थी। मुझ पर खुशियों की बरसात हो रही थी … मेरा तन रह रह कर वासनायुक्त मिठास से भर उठता था।
पलंग भी चरमरा उठा। मेरी टांगे ऊपर उठी हुई थी। उसका लण्ड मेरी दोनो टांगो के बीच चूत में फ़िट था। दो जिस्म एक होने की जी तोड़ कोशिश कर रहे थे। जबरदस्त धक्के दोनो तरफ़ से लग रहे थे। चूत लण्ड को पूरा निगलना चाह रही थी और लण्ड चूत को फ़ाड़ कर अपना हक जमाना चाहता था। और … और … लगा कि जैसे एक बिजली हम पर गिर पड़ी!
और मैं जैसे चीखते हुए निचुड़ सी गई, मेरा सारा रस निकलने लगा। तभी राहुल भी ऐंठ कर और लण्ड का जोर लगा कर अपना वीर्य उगलने लगा। हम दोनों तरावट में डूब गये और अपना रस चूत में मिलाने लगे। दोनों का मिला जुला रस चूत से बाहर निकलने लगा। अधखुली आंखों से हमने एक दूसरे को देखा और फिर से प्यार की दुनिया में खो गये …
हम बहुत खुश थे। हमारे जिस्म एक हो चुके थे। अब हम दोनों प्यार की कसमें खाने लगे … जान न्यौछावर करने की बातें होने लगी और … राहुल का लण्ड एक बार फिर से कठोर होने लगा … मेरी चूत में भी कुलबुलाहट होने लगी। बिना किसी इन्तज़ार के हमारा दूसरा दौर चालू हो गया …
पर इस बार निशाना गोल गोल चूतड़ थे … मेरी ग़ाण्ड में लण्ड जाना सुई में धागा पिरोने जैसा था। मेरी ग़ाण्ड भी पहली बार चुदने जा रही थी। टाईट छोटा सा छेद और लण्ड उसके सामने मोटा और भारी भरकम था … पर जानकार धागा पिरोना जानते थे … दर्द भरी चीख के साथ मैं चुदने लगी, चुदती रही और मेरी गाण्ड भी चुद गई।
सवेरे सरिता चाय लेकर रूम में आ गई। मैं बाथरूम में थी। राहुल शान्त पड़ा सो रहा था और अभी भी नंगा था।
मैं बाथरूम से बाहर आई तो सरिता को देख कर चौंक गई और एकदम से शरमा गई। मैंने अपना चेहरा हाथो में छुपा लिया। भाग कर डाइनिंग रूम में आ गई।
कुछ देर बाद सरिता वहाँ आई,”कामिनी, मजा रहा ना?” शरारत से उसने पूछा।
“दीदी!! कुछ मत कहो!! चुप हो जाओ!” मैं फिर से शरमा गई।
“रात भर चुदी हो ना, अच्छा बताओ! क्या क्या किया?”
“बता दूँ? – जीजाजी बहुत प्यारा चोदते हैं … लण्ड भी बहुत प्यारा और गोरा है।”
“हाँ हाँ, ये तो मुझे पता है। और क्या?”
“तीन बार चुद गई और एक बार … !!!”
“क्या एक बार? समझ गई! राहुल ने तेरी गाण्ड मार दी ना!” मैंने शरमा कर दीदी के सीने में सर छुपा लिया। सरिता ने मेरे बोबे मसल दिये और मेरे होठों पर एक गहरा चुम्मा ले लिया।
“दीदी” मैं सिसक उठी।
मेरे चूतड़ों को दबा कर सहला दिया … पर हाय! ये तो मर्दों वाले हाथ थे.
मैं समझ गई कि अब फिर मैं जन्नत की सैर पर जाने वाली हूँ. Sex Stories
पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ.
मेरा नाम हार्दिक है और मैं 20 साल का थोड़ा सीधा और थोड़ा टेड़ा किस का लड़का हूँ.
मैं उत्तर प्रदेश में रहने वाली एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ.
मेरा रंग हल्का सांवला सा है और मेरी हाइट 5 फीट 11 इंच है. लड़कियों को खास तौर पर बताना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य से बड़ा है.
बनाने वाले का मैं बस इसी चीज़ के लिए शुक्रिया करता हूँ कि उन्होंने मुझे एक अच्छा ख़ासा लंड दिया है.
मैं बी.कॉम. के अंतिम वर्ष का छात्र हूँ. मैं रोजाना जिम जाता हूँ तो मेरी बॉडी भी फिट है और मुझ पर एक दो लड़कियां भी मरती हैं, पर मैं फिर भी सबको यही बताता हूँ कि मैं सिंगल हूँ.
यह टीचर लव की कहानी की घटना उस साल की है जब मैं अपने स्नातक के दूसरे साल में था.
जब मैंने कॉलेज में बी.कॉम. में एड्मिशन लिया था तो उस समय कॉलेज में मेरा एक भी दोस्त नहीं था.
फिर मेरा कॉलेज शुरू हुआ, तो मैं पहले दिन क्लास में गया.
हमारे लेक्चर शुरू हुए.
मेरी क्लास में कुछ स्टूडेंट्स से बात भी हुई. उस दिन अपने आखिरी लेक्चर से मुझे कॉलेज से प्यार सा हो गया.
वो हमारा अकाउंट्स का लेक्चर था और हम सब सोच रहे थे कि पता नहीं अब कौन सा खड़ूस टीचर आएगा.
लेकिन जब लेक्चर शुरू हुआ तो हमारी क्लास में एक सुंदर, गोरी चिट्टी, नैन नक्स … एकदम झकास माल जैसी एक लेडी आईं … या यूं बोलूँ कि लड़की आई.
वे हसीन लड़की हमारी अकाउंट्स की टीचर थीं, जिनको देख कर मैं तो हक्का-बक्का रह गया क्योंकि इतना मस्त माल मैंने शायद ही कभी देखा था.
एक तो वो बिल्कुल दूध सी गोरी चिट्टी, ऊपर से उनके नैन नक्श इतने मस्त कि क्या ही खून.
उनकी उम्र भी 28 साल की थी, जो मुझे बाद में पता लगी थी.
मेम का 34-30-36 का साइज़ एकदम पर्फेक्ट था.
उनके तने हुए दूध और उठी हुई गांड देखते ही बन रही थी.
जब मैम क्लास में चल रही थीं तो उनकी हाई हील के कारण उनके मम्मे और चूतड़ कहर ढा रहे थे.
उस दिन उन्होंने क्रीम कलर की साड़ी एकदम चुस्त सी बांधी हुई थी जिसमें उनके बूब्स की झलक और कमर साफ दिख रही थी.
जब वो क्लास में आईं तो उन्हें देख कर मेरा तो मुँह खुला ही रह गया था.
फिर वो अन्दर आईं और ये नसीब की बात थी कि उनकी पहली नजर मेरे ऊपर ही पड़ी और उन्होंने मेरे खुले हुए मुँह और पथराई हुई आंखों को देख कर एक बहुत ही छिपी हुई कातिलाना मुस्कान दी और सामान्य हो गईं.
मैंने उनको आफ्टरनून विश किया.
उनका नाम पल्लवी था.
उन्होंने लेक्चर लिया और चली गईं, पर मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आया.
मुझे क्या, पूरी क्लास के लड़कों को कुछ समझ नहीं आया.
क्योंकि किसी का ध्यान उनके रूप सौन्दर्य से हटा ही नहीं. सबके लौड़े अकड़े हुए थे.
अब हालत ये हो गई थी कि पल्लवी नामक उस शै का सारी क्लास को इंतजार रहने लगा था.
ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और एक दिन हमारी फ्रेशर पार्टी हुई, जिसमें मुझे कुछ टैलेंट दिखाने या कुछ करने को बोला गया.
मैंने अपनी बॉडी शो की, क्योंकि जिम जाने का भी तो कुछ फायदा उठना चाहिए ना!
मेरे बॉडी शो पर काफ़ी लड़कियों को मैं पसंद आया और मुझे मिस्टर फ्रेशर बना दिया गया.
उस दिन से कॉलेज में लड़कियों के झुंडों में मेरी बातें होने लगीं.
खैर … मेरा दिल तो मैम पर आ गया था या ये कहूँ कि मुझे उनको चोदना था.
मेरी लड़कियों से ज़्यादा टाइम तक नहीं बनती थी क्योंकि मैं उन पर पैसे खर्च नहीं कर सकता था … और मुझे कोई ऐसी मिली नहीं, जो कि मुझे समझे.
फ्रेशर पार्टी के अगले दिन मैम क्लास में आईं और वो लेक्चर लेने लगीं.
उस दिन उनसे मेरी थोड़ी बातें हुईं, कुछ पढ़ाई से संबंधित थीं और थोड़ी सी ऐसे ही मज़ाक वाली.
उन्होंने भी मेरे बॉडी शो को लेकर मुझसे एक दो बातें कहीं.
उन बातों से मैं सीधा सा ये मतलब निकाल सकता था कि उनके दिल ओ दिमाग में मेरी बॉडी बस गई थी.
अब उन्होंने बॉडी के किस पार्ट को ज्यादा तवज्जो दी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी.
ऐसे ही दिन निकलते गए और मेरी मैम से बातें होने लगीं.
मैं रात को अक्सर टीचर लव के कारण उनके नाम की मुट्ठ मार कर सोने लगा था.
एक दिन एक लड़के ने लेक्चर के बाद मैम से उनका नंबर मांगा, पर मैम ने बहाना बना कर कि कॉलेज वाला नंबर तो है तो पर्सनल नंबर का क्या करना, उसे मना कर दिया.
वैसे एक बात बताऊं कि हमारे कॉलेज में जो स्थायी प्रोफेसर्स हैं, उन सभी को एक नंबर दिया गया है, जो वो अपने स्टूडेंट्स को दे देते थे.
लेकिन वे उस पर रेस्पॉन्स बहुत कम करते थे, तो स्टूडेंट्स उन फोन्स पर बात ही नहीं करते थे.
फिर ऐसे ही कुछ दिनों बाद मुझे भी कुछ प्राब्लम थी.
मैंने अपनी समस्या को लेकर पहले भी मैम को काफ़ी बार मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कभी तो रिप्लाई किया, कभी नहीं.
अब मैंने थोड़ी हिम्मत की.
मेम के लेक्चर के बाद जब सब चले गए, उस वक्त मैंने मैम से उनका नंबर मांगा.
उन्होंने कहा कि नंबर है तो तुम्हारे पास!
मैंने कहा- मेम, आप उस नंबर पर रेस्पॉन्स तो बहुत कम करती हैं … इसलिए अगर आप गलत न समझें तो …
तभी उन्होंने मेरी बात काटी और हंस कर कहा- हां तुम्हारी ये बात सही है. लो ये मेरा पर्सनल नंबर.
उन्होंने अपना नंबर मुझे दे दिया और कहा- प्लीज़ किसी और को नंबर मत देना, मुझे पसंद नहीं है कि कोई मुझे बिना मतलब के पर्सनली फोन करे.
मैंने उनको ओके बोला और साथ ही थैंक्स भी कहा और अपने घर आ गया.
मैंने उनको एक दो दिन बाद एक सवाल पूछने के लिए मैसेज किया.
उन्होंने तुरंत जबाव दिया.
उसके बाद से मैम से मेरी लगातार बात होने लगी.
अब तो क्लास में भी मेरी उनसे थोड़ी ज़्यादा बातें होने लगी थीं और वो क्लास में मेरे अलावा किसी ओर से इतनी बातें नहीं करती थीं.
मैं तो उनकी क्लास में अब कभी कभी फोन भी चला लेता था, पर वो मुझे कुछ नहीं बोलती थीं.
ऐसे ही मैंने उनको एक दिन व्हाट्सैप पर कुछ जोक सेंड किए.
तभी उनका मैसेज आया- थोड़ा पढ़ लो हार्दिक … ये नंबर मैंने तुम्हें क्वेस्चन पूछने के लिए दिया था और ये सब क्या है?
मैंने उनको सॉरी लिखा.
उन्होंने रिप्लाई किया- अरे बुद्धू, मज़ाक कर रही हूँ.
अब मेरी उनसे पढ़ाई से अलग भी बातें होने लगीं.
एक दिन उन्होंने मुझे कुछ काम बताया.
मैंने उसी समय उनका वो काम कर दिया.
उनको मुझ पर थोड़ा ज़्यादा ट्रस्ट हो गया था.
कुछ दिनों बाद हमारे एग्जाम आ गए.
इंटर्नल एग्जाम तो हो गए थे, अब फर्स्ट ईयर के फाइनल एग्जाम थे.
वैसे मैं पढ़ाई में एक सामान्य स्टूडेंट वर्ग से ही हूँ, जिनके 65-70% ही नंबर आते हैं.
फिर मेरे एग्जाम खत्म हुए और कॉलेज की भी छुट्टियां हो गईं.
उस वक्त बड़ा कठिन हो गया.
अब मेरा मन घर पर तो लगता नहीं था इसलिए मैं बाहर ही घूमता फिरता रहता या अपने रूम में सोता रहता.
जब तब मैं पल्लवी मैम से भी मैसेज पर बात कर लिया करता.
मैंने अब तक उनसे एक दो बार ही कॉल पर भी बात की थी, वो भी ये बहाना बना कर कि मुझे थोड़ी रिज़ल्ट की टेंशन हो रही है.
उन्होंने मुझे थोड़ा समझाया.
फिर रिज़ल्ट भी आ गया और मेरे 70% नंबर आए.
मेरी फैमिली मुझसे पढ़ाई को लेकर नाराज़ रहती थी कि तू कुछ पढ़ ले और अच्छा आदमी बन जा, जिससे हमारी कंडीशन जैसी है … तेरी तो ना रहे.
मैं भी काफ़ी कोशिश करता लेकिन मेरा मन पढ़ाई में ज़्यादा नहीं लगता था क्योंकि मुझे इंजीनियरिंग करनी थी लेकिन पैसों की वजह से मेरा एड्मिशन नहीं हुआ था तो मैंने बी.कॉम कर ली.
जबकि मुझे अकाउंट्स कुछ ख़ास पसंद नहीं है.
मैं तो बस मैम की वजह से अकाउंट्स के लेक्चर अटेंड करता था.
अब हमारी दोबारा क्लास शुरू हुई और मैंने फिर से कॉलेज जाना शुरू किया.
पल्लवी मैम अब हमारा दूसरा लेक्चर लेती थीं.
अब यह हो गया था कि क्लास में मैं मैम से मज़ाक कर लेता था और वे भी मुझसे मज़ाक कर लिया करती थीं.
वे मुझे कभी भी अपने काम से भेज दिया करती थीं.
एक दिन मैम ने सुबह सुबह मुझे कॉल किया और उन्होंने कहा- हार्दिक अगर तुमको कोई प्राब्लम ना हो, तो तुम मुझे घर से पिक कर सकते हो. वो आज मेरी स्कूटी खराब हो गई है.
मैंने उनको झट से कहा- ओके मैम, मैं आ जाता हूँ.
उन्होंने मुझे घर की लोकेशन भेजी और मैं वहां चला गया.
उनका घर एक बड़ी सोसाइटी में था जहां से रिक्शे मिलने मुश्किल रहते थे और उनकी कार भी काफ़ी दिनों से बंद पड़ी थी.
जब मैं उनके घर पहुंचा, तो देखा कि उनका घर बाहर से काफ़ी अच्छा और सुंदर है. उससे ये पता चल रहा था कि वो काफ़ी धनी हैं.
हों भी क्यों ना यार … आखिर वो एक प्रोफेसर हैं. उनकी सैलरी अच्छी खासी है.
मैंने उनको कॉल की.
वे बाहर आईं.
आज उन्होंने कुर्ती पहनी हुई थी.
वे मेरे पीछे बैठ गईं.
यहां से कॉलेज भी अच्छा ख़ासा दूर था.
तभी मैंने उनसे बातें करनी शुरू कर दीं.
बातों ही बातों में मैंने कहा- मैम आप तो काफ़ी रिच हैं!
वो बोलीं- अच्छा जी … तुमको ऐसा क्यों लगता है?
मैंने कहा- सब दिखता है मेम, आपका इतना बड़ा घर है … और आप प्रोफेसर हो, तो आपकी सेलरी भी अच्छी ख़ासी आती होगी!
उन्होंने कहा- हां, बात तो तुम्हारी सही है.
मैंने पूछा कि मैम आप बुरा ना माने, तो एक बात पूछ सकता हूँ?
वो बोलीं- हां जी बोलिए.
मैंने पूछा कि आपकी सेलरी कितनी है?
उन्होंने पूछा- क्यों, इसका क्या मतलब है?
मैंने कहा- मुझे बिना मतलब की बातें पूछना अच्छा लगता है. मुझे ये जानना है कि प्रोफेसर्स कितना कमाते हैं.
वो बोलीं- ओके मुझे लगभग 2 लाख रूपए महीने मिलते हैं.
मैं सोच में पड़ गया कि वाउ ये कितना ज्यादा कमाती हैं.
मैंने कहा- मगर मैम आप तो बिल्कुल सिंपल रहती हैं.
उन्होंने कहा- हां तो क्या हुआ हार्दिक, मुझे सिंपल रहना पसंद है … और वैसे भी सिंपल रहने में कोई बुराई थोड़े ही है.
मैंने उनसे पूछा- मैम और आपके हज़्बेंड मेरा मतलब सर क्या करते हैं?
वो बोलीं- वे एक कंपनी में जॉब करते हैं और उधर वे काफ़ी अच्छी पोस्ट पर हैं.
मैं बोला- मैम, आपकी लाइफ इतनी अच्छी है. आप इतनी रिच हो.
इस पर उन्होंने कहा कि रिच होना ही सब कुछ नहीं होता … तुम मेरा दुख नहीं समझोगे.
ये कह कर वो थोड़ा दुखी हो गईं.
उनका मूड ऑफ हो गया और उनकी आंखों में पानी आ गया था.
मैं अभी कुछ और बोलता कि तब तक हमारा कॉलेज आ गया और वे चुपचाप बाइक से उतर कर अन्दर चली गईं.
और मैं भी अपनी क्लास में चला गया.
मैं यही सोचता रहा कि मेरी वजह से मैम दुखी हो गईं.
मगर ऐसी क्या बात है, जिससे उन्हें दुख है.
मैं सोचता रहा और कुछ भी न जान सका.
फिर मैंने मैम का लेक्चर अटेंड किया.
उस वक्त वे कुछ ठीक लग रही थीं. उनका मूड भी सही था.
लेक्चर खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुम चले जाना, मैं खुद चली जाऊँगी, मुझको थोड़ा टाइम लगेगा.
मैंने कहा- तो क्या हुआ मेम, मैं वेट कर लूँगा आपका.
वो बोलीं- मुझे आधा घंटा लगेगा!
मैंने कहा- हां कोई दिक्कत नहीं है मेम, मैं बाहर आपका वेट कर रहा हूँ. आप मुझे कॉल कर देना.
उन्होंने हम्म कह कर सर हिला दिया और मैं क्लास के अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया.
मैं पार्किंग एरिया में रुक गया और मेरे दोस्त चले गए.
करीब चालीस मिनट बाद मैम की कॉल आई कि वे बाहर आ रही हैं.
मैंने पार्किंग से बाइक निकाली और उनको पिक किया.
उन्होंने मुझसे कहा- थोड़ा ज्यादा देरी हो गई … सॉरी.
मैंने उनसे कहा- तो क्या हुआ मेम. वैसे तो सॉरी मुझे बोलना चाहिए आपको.
वो बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि मैम आपका सुबह मेरी वजह से मूड ऑफ हो गया था, उसके लिए सॉरी!
वो बोलीं- नहीं कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.
मैं फिर से बोला- अगर आपको बुरा ना लगे, तो आप मुझसे अपनी बात शेयर कर सकती हैं. वैसे आपका मूड एकदम से क्यों ऑफ हो गया था?
उन्होंने मुझे बताया कि तुम सुबह बोल रहे थे ना कि मैं रिच हूँ. चलो तुमको बताती हूँ.
मैं उनकी बात सुनने के लिए कान उनकी तरफ लगाने लगा.
वे बोलीं- केवल रिच होने से कुछ नहीं होता. मैं एक प्रोफेसर हूँ और अभी तो 28 साल की हूँ. अभी तो पूरी लाइफ सामने पड़ी है. सोचो मैं कितने रुपए कमा सकती हूँ. मेरी अभी की सेलरी ही 2 लाख+ है … और साथ ही मैंने काफ़ी सारी इनवेस्टमेंट कर रखी है, जिससे मेरी हर महीने की टोटल इनकम मतलब सेलरी और इनवेस्टमेंट आदि मिला कर 3 लाख से ज़्यादा हो जाती है.
मैम बोली- और तुम सर के बारे में पूछ रहे थे ना. मैंने तुमको बताया था कि वे एक कंपनी में काम करते हैं. वे यहां से काफ़ी दूर रहते हैं … मुंबई में! और उनकी सेलरी ही 7-8 लाख रुपए महीने की है, जिसमें से वो 2 लाख रुपए हर महीने मुझे भेजते हैं. उनको लगता है कि मैं अकेली लाइफ में कुछ नहीं कर सकती हूँ. इसीलिए मैंने उनको नहीं बताया कि मैं प्रोफेसर बन गई हूँ. इसी बात को लेकर हमारी काफ़ी लड़ाई भी हुई क्योंकि उनको मेरा जॉब करना पसंद नहीं आया है. उनको उनकी बॉस मुझसे ज़्यादा पसंद हैं और यह बात मुझे पता लग गई थी. तभी मुझे तुम्हारे कॉलेज से ऑफर आया था तो मैं यहां शिफ्ट हो गई.
वे आगे बोलती रही- अब तुम ही बताओ कि मेरे पास हर महीने 5 लाख रुपए हो जाते हैं … पर मैं उन रुपयों का क्या करूँ! रहती तो अकेली ही हूँ ना, यहां तो कोई नहीं है मेरा … और अब तो मेरा उनके पास जाने का भी मन नहीं करता. पहले सोचा था कि वहीं शिफ्ट हो जाऊँ, पर फिर पता चला कि उनका उनकी बॉस से भी कुछ चक्कर है और उनको हमेशा यही लगता है कि मैं कुछ नहीं कर सकती, तो मैं वहां नहीं गई. मैंने उनको पैसे भेजने को भी मना कर दिया था कि मैं अपना खुद खर्चा उठा सकती हूँ. तभी वो बोले कि मैं सक्षम के लिए (उनका 5 साल का बेटा) के लिए भेज रहा हूँ. इनको रख लो. अब तुम ही बताओ कि इतने पैसों का मैं क्या करूँ … जब खुशी ही ना हो.
ये सब बता कर मैम फिर से अपसैट हो गईं.
मैंने उनसे कहा- सॉरी मैम मुझे ये सब नहीं पता था … लेकिन आप टेंशन मत लो, मैं हूँ ना. आपको कभी भी कुछ भी काम हो, मुझको याद करना, मैं फट से वैसे हाजिर हो जाऊंगा, जैसे चिराग से जिन निकलता है.
वे मेरी इस बात पर हंस पड़ीं.
उसी वक्त मैंने अचानक से बाइक रोकी, जिससे वो मेरी पीठ पर गिर गईं और उनका एक मम्मा मुझे मेरी पीठ पर अच्छे से रगड़ता हुआ सा महसूस हुआ.
मेरे दिल में उसी वक्त मैम के उस दूध को पकड़ कर मींजने का दिल किया मगर ये जल्दबाजी होती.
कैसे हो दोस्तो…मैं हसीना जयपुर से
आदमी की नीयत औरत के प्रति हमेशा खराब रहती है… आपने सुना ही होगा कि एक औरत आदमी से बहुत कुछ चाहती है पर आदमी हर औरत से सिर्फ एक ही चीज चाहता है और वो है चुदाई। पर अगर औरत को एक से ज्यादा लण्ड का मज़ा मिल जाए तो फिर औरत का मन भी हमेशा नए नए लण्ड को देखने को करने लगता है। जैसे लड़के आती लड़की की चूचियाँ और जाती लड़की की गांड पर नजर गड़ाए रहते हैं वैसे ही औरत भी आदमी की पैंट में छुपे लण्ड को मापने की कोशिश में रहती है।
तीन लण्ड अब तक मेरी चूत और गांड का भेदन कर चुके थे। इन तीन लन्डों से चुद चुद कर मैं अब पूरी चुदक्कड़ बन चुकी थी। मेरी नजर भी अब पैंट में छुपे लन्डों का जायजा लेने लगी थी। लगभग हर समय मैं चुदास से भरी रहती थी।
इसी दौरान मैं गर्भवती हो गई। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। पहली बार माँ बनने का एहसास क्या होता है यह लिख कर बताना बहुत मुश्किल है। अभी गर्भ तीन महीने का ही था कि मुझे कुछ तकलीफ हुई तो मैं एक डॉक्टर के पास अपना चेक-अप करवाने के लिए गई। पति देव भी साथ में ही थे।
डॉक्टर ने चेक-अप करने के बाद कहा कि अब मुझे सेक्स नहीं करना चाहिए नहीं तो होने वाले बच्चे के लिए ठीक नहीं होगा।
और फिर उसी दिन से मेरी चुदाई बंद हो गई। कोई भी माँ अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर सकती है।
चुदाई बंद हो गई पर चुदवाने की तमन्ना तो कम नहीं हुई थी। मैं अक्सर चुदाई के लिए बेचैन हो उठती थी पर कुछ कर नहीं सकती थी। पति देव भी अब मुझ से दूर दूर ही रहते क्यूंकि पास आने पर चुदाई से अपने आप को रोक पाना शायद दोनों के लिए मुश्किल होता। पति देव मेरा पूरा ख्याल रखते थे। महीने में दो बार डॉक्टर ने चेक-अप के लिए कहा था तो वो मुझे याद से डॉक्टर के पास ले जाते थे। लगभग तीन महीने और बीत गए। मेरा पेट दिखने लगा था अब।
एक दिन की बात है…
पति देव किसी काम से शहर से बाहर थे और मुझे डॉक्टर के पास चेक-अप के लिए जाना था। पति देव नहीं थे तो मैं पड़ोस की एक लड़की को साथ लेकर डॉक्टर के पास चली गई। डॉक्टर ने करीब आधे घंटे बाद मुझे केबिन में बुलाया। मैं अकेली ही अंदर चली गई। हर बार डॉक्टर मेरा बी.पी. वगैरा ही चेक करता था पर आज उसने मुझे स्ट्रेचर पर लेटने के लिए बोला और फिर पर्दा लगा कर मेरा पेट जांचने लगा।
“हसीना जी… अगर आपको ऐतराज ना हो तो मुझे आपके कपड़ो के अंदर के हिस्से को चेक करना पड़ेगा। मेरा मतलब समझ रही हैं ना आप?”
मैं थोड़ा घबराई पर फिर सोचा कि यह कौन सा मुझे चोद देगा इस हालत में और मैंने हाँ कर दी।
मेरी हाँ मिलते ही डॉक्टर ने मेरी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा कर मेरे पेट पर कर दिया। मैंने पैंटी नहीं पहनी हुई थी तो मेरी नंगी चूत अब डॉक्टर के सामने थी। डॉक्टर मेरी टांगों के बीच आ गया और अपने औजारों से मेरी चूत को फैला कर अन्दर से चेक करने लगा।
डॉक्टर के बारे में थोड़ा बता दूँ। वो करीब चालीस-पैंतालीस साल का तंदरुस्त शरीर वाला इंसान था। यह सोच कर ही मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी कि मैं बहुत दिनों के आज फिर से एक पराये मर्द के सामने अपनी चूत नंगी किये पड़ी थी। पर आज कुछ हो नहीं सकता था। डॉक्टर पहले तो अपने औजारों से चेक-अप करता रहा और फिर उसने पहली बार अपनी उंगली से मेरी चूत को छुआ तो मेरी आह निकल गई। डॉक्टर ने भी मेरी आह सुन ली थी तभी तो वो अब थोड़ा दबाव के साथ उंगली से मेरी चूत को सहला रहा था।
कुछ देर ऐसे ही सहलाने के बाद उसने अपनी पहले एक और फिर दो उँगलियाँ मेरी चूत की गहराई में उतार दी। मैं तो मस्ती के मारे तड़प उठी थी। मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। करीब दस मिनट तक डॉक्टर मेरी चूत को अपनी उँगलियों से सहलाता रहा और फिर अपने औजार उठा कर अपनी मेरी तरफ आया और मुझ से बात करने लगा।
“हसीना जी… मैंने आपका चेक-अप कर लिया है, सब कुछ ठीक है और आगे भी अगर सब ठीक रहा तो आप निश्चित रूप से एक स्वस्थ और सुन्दर बच्चे को जन्म देंगी।”
मेरी साड़ी अभी भी वैसे ही मेरे पेट पर पड़ी थी तो डॉक्टर ने मेरी साड़ी को पकड़ कर नीचे कर दिया और मेरे पेट को सहलाने लगा। मैंने स्ट्रेचर को दोनों हाथ से पकड़ा हुआ था और जब डॉक्टर मेरे पेट का निरीक्षण करने लगा तो डॉक्टर का लण्ड मेरे हाथ से टकराया। तभी मेरी नजर डॉक्टर की पैंट पर गई तो मेरे दिल में गुदगुदी सी होने लगी। पैंट का अगला भाग बिल्कुल कसा हुआ था, उसमें से मोटे से लण्ड का स्पष्ट अहसास हो रहा था। मेरे दिल की धड़कन राजधानी एक्सप्रेस हो गई थी।
मुझे लगा कि शायद डॉक्टर जानबूझ कर अपना लण्ड मेरे हाथ से रगड़ रहा है। चूत में उंगली से मैं तो पहले ही बेचैन थी और अब लण्ड के स्पर्श से मेरी हालत खराब होने लगी थी। डॉक्टर करीब दो तीन मिनट तक लण्ड को मेरे हाथ पर रगड़ता रहा। अब मुझ से सब्र नहीं हो रहा था। दिल कर रहा था कि लण्ड को अपने हाथ में पकड़ कर मसल डालूँ, उसको पकड़ कर अपने मुँह में लेकर चूस डालूँ।
डॉक्टर का लण्ड भी अब पूरा तन चुका था।
तभी डॉक्टर ने मेरे पेट को एक जगह से दबाया तो मुझे दर्द हुआ। मैंने दर्द भरी आह भरते हुए स्ट्रेचर को छोड़ कर डॉक्टर का लण्ड अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया और फिर डॉक्टर की भी आह निकल गई।

डॉक्टर ने अब मेरी चूचियों को दबा कर देखा। मेरी चूचियाँ तन चुकी थी और डॉक्टर का हाथ अब मेरे अंदर मस्ती भर रहा था। अब मैंने शर्म छोड़ कर डॉक्टर का लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया था और उसको मसलने लगी। डॉक्टर मेरी चूचियाँ दबा रहा था और मैं डॉक्टर का लण्ड। दोनों मस्ती के आगोश में खो से गए थे।
कुछ देर ऐसे ही मज़े लेने के बाद मैं अपने आप को नहीं रोक पाई और मैंने पैंट की ज़िप खोल कर डॉक्टर का लण्ड बाहर निकाल लिया।डॉक्टर का लण्ड फटने को हो रहा था। मोटे मूसल जैसा लण्ड देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया था। मैं चुदवा तो नहीं सकती थी पर चूत में आग लग चुकी थी। डॉक्टर ने लण्ड मुँह की तरफ किया तो मैंने ना चाहते हुए भी लण्ड को मुँह में ले लिया। पांच मिनट ही चूस पाई थी कि डॉक्टर के लण्ड से गर्म गर्म मलाई निकल कर मेरे मुँह में भर गई। बहुत दिनों के बाद वीर्य का स्वादिष्ट स्वाद मेरी जीभ को मिला था तो मैं सारा चाट गई।
वीर्य निकलने के बाद डॉक्टर ठंडा हो गया और जाकर अपनी सीट पर बैठ गया। मैं कुछ देर तो लेटी रही पर फिर उठ कर डॉक्टर के पास आई और अपने होंठ डॉक्टर के होंठों पर रख दिए। मेरे रसीले होंठों का स्वाद और डॉक्टर के लण्ड से निकले वीर्य का मिलाजुला स्वाद डॉक्टर के मुँह में भी घुल गया।
ऐसा मजेदार चेक-अप करवाने के बाद मैं घर आई तो सारा दिन डॉक्टर का लण्ड ही आँखों के सामने घूमता रहा। रात को पतिदेव ने आकर चेक-अप का पूछा तो मैंने झूठ बोल दिया कि डॉक्टर ने हर हफ्ते चेक-अप करवाने के लिए कहा है। पतिदेव भला कैसे मना कर सकते थे।
और फिर उसके बाद तो मैं हर हफ्ते डॉक्टर के पास जाने लगी। पतिदेव साथ चलने को कहते तो किसी ना किसी बहाने टाल देती और अकेली ही जाकर डॉक्टर के लण्ड को चूस आती। इसमें अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा था।
और फिर ठीक समय पर मैंने अपनी गुड़िया यानि पिया को जन्म दिया। अगले चालीस दिन मुझे सम्पूर्ण आराम करने की हिदायत दी गई थी। किसी तरह मैंने ये दिन काटे।
अब मैं डॉक्टर से मिल कर उसके मोटे लण्ड को अपनी चूत में महसूस करने को बेताब थी। पर पतिदेव ने अपनी एक रिश्तेदार को मेरी देखभाल के लिए बुला रखा था तो मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। और ऐसे ही दो महीने निकल गए।
फिर मैंने एक दिन पति को बोल दिया कि रिश्तेदार को वापिस भेज दो अब सब ठीक है और मैं सब संभाल सकती हूँ।
पति ने भी मेरी बात मान ली और फिर आया मेरी आज़ादी का दिन।
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पतिदेव उस रिश्तेदार को छोड़ने उसके साथ चले गए। पति के जाते ही मैं भी पिया को लेकर सीधा डॉक्टर के पास पहुँच गई। डॉक्टर मुझे देखते ही मुस्कुरा दिया। क्लिनिक में दो तीन ही मरीज थे तो डॉक्टर ने जल्दी से सब को निपटाया और फिर सबसे अंत में मुझे बुलाया। केबिन में घुसते ही डॉक्टर ने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे।
मैंने पिया को वही एक चेक-अप बेड पर लेटाया और डॉक्टर से लिपट गई।
डॉक्टर मेरे होंठ चूसने लगा और मेरी चूचियाँ जो दूध भर जाने से और भी बड़ी बड़ी हो गई थी को सहलाने लगा। बहुत दिन तड़पने के बाद आज डॉक्टर के हाथ का एहसास अपनी चूचियों पर हुआ था। मैं तो हाथ लगते ही चुदास से भर उठी और मैंने बिना देर किये डॉक्टर का मोटा लण्ड अपने हाथ में लेकर मसल दिया। डॉक्टर और मैं दोनों ही मस्ती में भर कर वासना के सागर में गोते लगाने लगे।
पांच मिनट होंठ चूसने के बाद मैंने पहल करते हुए डॉक्टर का लण्ड बाहर निकाला और मसलने लगी। डॉक्टर की आँखें मस्ती के मारे बंद हो गई थी।
तभी डॉक्टर का इंटरकॉम फोन बजा और बाहर से कंपाउंडर ने बताया कि कोई मरीज आया है। कोई एमरजेंसी थी तो डॉक्टर ने मुझे बाहर इंतज़ार करने को कहा पर मैंने इंतज़ार करने से मना कर दिया और डॉक्टर को कहा कि वो फ्री होने के बाद मेरे घर आ जाए। डॉक्टर राजी हो गया और मैं पिया को लेकर घर आ गई।
करीब एक बजे डॉक्टर का फोन आया और मुझ से पूछा की क्या वो आ जाए तो मैंने झट से हाँ कर दी क्यूंकि मेरी चूत भी अब लण्ड लेने को मचल रही थी। डॉक्टर पन्द्रह मिनट तक आने वाला था तो मैं तैयार होने के लिए बाथरूम में घुस गई। मैं नहाई और अपनी चूत रगड़ रगड़ कर साफ़ की।
अभी मैं बाथरूम से निकली ही थी कि दरवाजे पर घंटी बज उठी। कहीं कोई और ही तो नहीं आ गया। इसी डर में मैंने दरवाजा खोला पर यह तो वही था जिसका मैं और मेरी चूत दोनों ही इंतज़ार कर रहे थे।
डॉक्टर को अन्दर बिठा कर मैंने उसको चाय कोल्डड्रिंक के लिए पूछा पर डॉक्टर ने मुझे अपनी बांहों में खींच लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। अब मैं अपनी चूत को और नहीं तड़पाना चाहती थी। मैंने बिना देर किये डॉक्टर के कपड़े खोलने शुरू कर दिए। डॉक्टर ने भी मेरे कपड़े खोलने शुरू कर दिए।
मैंने, सही कहूँ तो कुछ पहना ही नहीं था, ब्लाउज और पेटीकोट ही था। पैंटी और ब्रा मैंने पहनी ही नहीं थी और साड़ी पहनने का समय ही नहीं मिला था कि डॉक्टर आ गया था।
अगले एक मिनट के बाद ही डॉक्टर और मैं दोनों नंगे थे और दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे हुए थे। डॉक्टर मेरे दूध से भरे चूचों को मुँह में लेकर चूस रहा था और उसकी एक उंगली मेरी चूत में उछल-कूद मचा रही थी। मैं मस्ती के मारे सिसकारियाँ भर रही थी और मेरी आहें… शायद चीखें कहूँ तो ज्यादा ठीक होगा… कमरे में गूंज रही थी।
कुछ देर ऐसे ही मज़ा देने के बाद डॉक्टर ने मुझे सोफे पर लेटा दिया और खुद मेरी टांगों के बीच में बैठ कर मेरी चूत को सहलाने लगा और फिर अचानक ही अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया। मैं अपने आपको रोक नहीं पाई और मेरी चूत ने गर्म गर्म पानी डॉक्टर की जीभ पर फेंक दिया।
डॉक्टर पूरी मस्ती के साथ मेरी चूत चाट रहा था। मैं अपने पाँव के अंगूठे के साथ डॉक्टर का लण्ड सहला रही थी। डॉक्टर का लण्ड पूरी तरह से तन कर अकड़ गया था। मैंने डॉक्टर को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया। डॉक्टर ने मेरा सर सोफे की बाजू पर सेट किया और खड़े होकर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूंस दिया। मैं भी मस्ती में लण्ड को चूसने लगी पर अब चूत में ज्वालामुखी फटने को था तो मैंने डॉक्टर को चुदाई करने को कहा।
डॉक्टर ने भी मेरी बेचैनी को समझा और मेरे कूल्हों को सोफे की बाजू पर सेट करके लण्ड मेरी चूत के मुहाने पर टिका दिया। बहुत दिन बाद चूत को लण्ड की गर्मी मिली थी। मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी। डॉक्टर ने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखी और एक लण्ड को मेरी चूत पर दबा दिया।
चूत पानी पानी होकर चिकनी हो चुकी थी। डॉक्टर ने एक जोरदार धक्का लगाया तो आधा लण्ड चूत में समा गया और फिर डॉक्टर ने बिना इंतज़ार किये एक और जोरदार धक्का लगा कर पूरा लण्ड चूत में घुसा दिया।
मैं बहुत दिन बाद चुद रही थी तो जल बिन मछली की तरह तडपते हुए मेरे मुँह से चीख निकल गई।
क्या लण्ड था डॉक्टर का… बिल्कुल लोहे की रोड की तरह कठोर।
फिर तो डॉक्टर ने ताबड़तोड़ धक्के लगाकर मेरी चूत का भुरता बनाना शुरू कर दिया। कुछ देर तो मुझे दर्द महसूस हुआ पर फिर तो मेरे बदन में भी मस्ती की लहरें दौड़ने लगी। डॉक्टर सच में बहुत मस्त चुदाई कर रहा था। वो चुदाई में पूरी तरह से निपुण था। बहुत ही सटीक धक्के लगा लगा कर चुदाई कर रहा था। हर धक्के में मेरी आह निकल रही थी।
“आह्ह्ह… चोद डॉक्टर… चोद… आह्हह्ह… बहुत तड़पी हूँ तेरे लण्ड से चुदने के लिए… उम्म्म्म… फाड़ डाल आज…मार जोर से जोर से धक्के लगा…”
मैं बड़बड़ाये जा रही थी और डॉक्टर भी मस्ती में मेरी चूत का भुरता बना रहा था।
कुछ देर बाद डॉक्टर ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से लण्ड चूत में उतार दिया। डॉक्टर जरूर कोई दवाई खा कर आया था तभी तो वो इस उम्र में भी किसी जवान पठ्ठे की तरह हुमच हुमच कर मेरी चूत का बाजा बजा रहा था।
करीब दस मिनट के बाद डॉक्टर ने मुझे अपनी गोदी में उठाया और लण्ड पर बैठा कर मेरी चुदाई करने लगा। कुछ देर चोदने के बाद डॉक्टर ने मुझे डाइनिंग टेबल पर लेटाया और फिर से लण्ड चूत में डाल दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
यहाँ मैं आपको बता दूँ कि मैं अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी। चूत भी फच्च फच्च करने लगी थी।
डॉक्टर अभी भी मस्त धक्के लगा रहा था। डॉक्टर करीब चालीस मिनट तक मुझे चोदता रहा। डॉक्टर का लण्ड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।
मैं अब चुदवाते चुदवाते थक गई थी। जब डॉक्टर नहीं झड़ा तो मैंने हाथ नीचे ले जाकर डॉक्टर की गोटियाँ दबा दी और फिर डॉक्टर अपने ऊपर कण्ट्रोल नहीं कर पाया और जबरदस्त ढंग से मेरी चूत के अन्दर ही झड़ने लगा।
गर्म गर्म वीर्य से मेरी चूत भरने लगी थी। डॉक्टर बहुत देर तक झड़ता रहा और मेरी चूत अपने वीर्य से लबालब भर दी। झड़ने के बाद डॉक्टर बुरी तरह से थक गया था और वो मेरे बदन पर ही लेट गया। मैंने भी टाँगें उसकी कमर पर लपेट ली और उससे चिपक गई।
इतनी जबरदस्त और लंबी चुदाई किसी ने भी नहीं की थी मेरी चूत की। मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट महसूस कर रही थी।
दस मिनट के बाद डॉक्टर उठा और सोफे पर लेट गया। मैं रसोई में जाकर दूध गर्म करके लाई। दूध पीते ही डॉक्टर ने फिर से मुझे अपने साथ चिपका लिया। मैं भी डॉक्टर का लण्ड सहलाने लगी। कुछ तो गर्म दूध का असर और कुछ मेरे हाथों की करामात थी कि लण्ड फिर से अपने शवाब पर आ गया।
डॉक्टर ने इस बार मुझे कमरे में बिछे कालीन पर नीचे ही लेटाया और अपना मोटा मूसल एक बार फिर से मेरी चूत की गहराई में उतार दिया। इस बार डॉक्टर ने करीब पच्चीस मिनट तक मुझे चोदा और मेरी चूत की सारी गर्मी ठंडी कर दी।
जब डॉक्टर मेरे घर से गया तो मैं अधनंगी बेड पर बेसुध सी पड़ी थी। मेरी आँख तब खुली जब पिया के रोने की आवाज मेरे कानों में पड़ी।
उसके बाद भी डॉक्टर बहुत बार मेरे घर पर मेरी चुदाई करने आया और मेरी चूत की गर्मी को ठंडा करता रहा।
आपको मेरी चूत की यह चुदाई कैसी लगी मुझे जरूर बताना..
आपकी हसीना
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