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मैं आज पहली बार अपनी आपबीती बताने जा रहा हूँ, मैं सोचता हूँ शायद आप सभी को पसंद आएगी।
मेरा नाम अभिजीत है.. मैं वेस्ट बंगाल का रहने वाला हूँ.. और मैं एक गोरे बदन और स्मार्ट दिखने वाला लड़का हूँ।
मेरा उम्र 23 साल है.. मेरा लम्बाई 5 फुट 5 इंच है.. मेरा लण्ड लगभग 6.8 इंच है।

बात उस समय की है.. जब मैं 12वीं में पढ़ता था.. तब मैं अपने चाचा के घर में रहता था.. मतलब वहीं रह कर पढ़ाई करता था।
मेरे चाचा की नई नई शादी हुई थी और वो एक प्राइवेट जॉब करते थे.. तो चाचा को ज्यादातर बाहर जाना पड़ता था जिस वजह से आरती चाची अकेली रह जाती थीं।
तो चाचा ने मुझे अपने पास बुला लिया और मैं तब से वहीं से पढ़ाई करने लगा।

चलिए मैं अब पॉइंट पर आता हूँ। मेरी जो चाची हैं.. वो बहुत खूबसूरत हैं। उनकी उम्र अभी 23 साल थी.. क्या माल थीं.. उनका फिगर 34-28-30 का था.. एकदम गोरा बदन।

मैंने जब से उन्हें देखा था.. तब से ही उन्हें चोदने का मन बना लिया था। मेरी आरती चाची बीए कर चुकी थीं। वे मुझे पढ़ाने भी लगीं और मैं उनके पास पढ़ने लगा।
पढ़ते समय मैं आरती चाची को देखता जब वो लिखतीं.. तो मैं उनके मम्मों देखता रहता था।
आरती चाची घर में नाइटी में रहती थीं तो उनके बड़े-बड़े चूचे पहाड़ की तरह खड़े रहते थे। मैं उन्हें जब भी देखता.. तो चोदने का सोचता रहता।

एक दिन चाचा को कोई काम से दस दिनों के लिए बाहर जाना पड़ा.. तो चाचा ने मुझे कहा- कहीं जाना मत.. आरती चाची का ख्याल रखना।
मैंने कहा- ठीक है..
तो उस दिन मैं स्कूल भी नहीं गया और दिन भर आरती चाची के साथ घर में रहा।

अब चूंकि मैं आरती चाची के साथ थोड़ा हँसी-मज़ाक भी करने लगा था, आरती चाची भी मुझसे काफी खुल कर बात करने लगी थीं।
आरती चाची ने एक प्लान बनाया आर मुझसे कहा- चलो आज मार्किट चलते हैं।
तो मैंने कहा- ठीक है.. चलिए।

शाम को हम दोनों मार्किट चले गए.. आरती चाची ने ढेर सारी खरीददारी की और अंत में वो एक लेडीज शॉप में गईं। उन्होंने मुझे बाहर रहने को कहा.. तो मैं बाहर रुक गया।
कुछ देर बाद आरती चाची बाहर आईं और हम दोनों घर चले आए।

घर आने के बाद हम दोनों ने मिलकर खाना खाया और मैं आरती चाची के रूम में टीवी देखने लगा।
टीवी देखते-देखते मुझे कब नींद आ गई और मैं वहीं सो गया।

अचानक मुझे कैसा महसूस हुआ कि कोई मेरे लण्ड के साथ खेल रहा है.. तो मैं झट से उठा और देखा कि आरती चाची मेरे सामने एक पारदर्शी नाइटी में बैठी है और मेरे लण्ड के साथ खेल रही हैं।

तो मैंने आरती चाची से कहा- यह क्या कर रही हैं आप?
आरती चाची ने कहा- कुछ नहीं बस सोये हुई चिड़िया को जगा रही हूँ।

मैं हंसने लगा..
तो आरती चाची ने कहा- जब मैं तुम्हें पढ़ाती थी.. तब तुम मेरे चूचों को देखते थे.. मुझे सब पता है।
मैं उनको कातिल निगाहों से घूरने लगा।
आरती चाची ने फिर कहा- आज मेरी प्यास बुझा दो अयान..

मैंने आरती चाची को अपने पास खींच लिया और उनके होंठों को चूमने लगा।
उन्होंने लिपिस्टिक लगा रखी थी और मैं जोर से उनके होंठों को चूस रहा था.. वो भी मेरा साथ दे रही थीं।

उसके बाद मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा।
हाय क्या मस्त लग रहा था.. पहली बार किसी की चूचियों को दबा रहा था।

मैंने उनकी नाइटी को खोलना शुरू किया.. तो वो अन्दर लाल रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुई थीं।
क्या मस्त बदन लग रहा था उनका.. एकदम गोरा बदन और उस पर कसी हुई लाल रंग की ब्रा।
फिर मैंने ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को सहलाया और दबाने लगा।
आरती चाची ने अपनी चूचियों को मेरी तरफ और तान दिया।

मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके सफ़ेद कबूतर बाहर निकल आए।
फिर मैंने उनकी पैन्टी को खोला.. तो देखा कि आरती चाची ने चूत की झांटों को पूरा का पूरा साफ करके रखा हुआ है..
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी चूत चाटने लगा..
अब आरती चाची मादक आवाजें निकालने लगीं- आह.. आह्ह.. आह्ह्ह.. आह्हह.. उन्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह!

फिर उन्होंने मेरा पैंट भी खोल दिया और मेरा लण्ड अपनी मुँह में लेकर चूसने लगीं।
मुझे लौड़ा चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं पहली बार किसी लड़की के साथ सेक्स कर रहा था।
हम 69 की तरह हो गए, दस मिनट तक हम दोनों इसी लण्ड-चूत की चुसाई में लगे रहे।

अचानक आरती चाची की चूत का पानी निकल गया.. मैंने जैसे ही उनके रस को चखा.. आह्ह.. दिल खुश हो गया.. क्या मस्त खुशबू थी.. पर मैंने अपना मुँह हटा लिया.. तो आरती चाची ने मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत के साथ लगा दिया।

फिर मैं भी झड़ गया और मेरा पूरा वीर्य उनके मुँह में घुस गया।
इस तरह हम दोनों झड़ कर शांत हो गए।

फिर हम लोग एक दूसरे से लिपट कर बात करने लगे। उसके बाद आरती चाची बोलीं- अब मुझे चोद दो..
मैं उठा और उनके नंगे बदन के ऊपर आकर लंड को चूत पर रखा, आरती चाची ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी फुद्दी के छेड़ पे रखा और कहा- घुसा दे!
लेकिन उनकी चूत बहुत तंग थी.. मेरा मोटा लवड़ा अन्दर नहीं घुस रहा था।

मैंने किसी तरह सुपारा उनकी चूत में फंसा कर जोर लगाया.. तो आधा अन्दर चला गया और आरती चाची जोर से चिल्ला पड़ीं- आह्ह.. ह्ह्ह्ह.. माआ..
मैं डर गया कि पता नहीं क्या हुआ फिर भी मैं उन्हें चोदता रहा।
एक बार मैंने और जोर लगाया तो पूरा का पूरा लौड़ा चूत के अन्दर चला गया। आरती चाची कराह कर रह गईं.. फिर धीरे धीरे उनकी चूत ने मेरे लवड़े को आत्मसात कर लिया।

उसके बाद मैं उन्हें धकापेल चोदने लगा था।
तो वो अजीब-अजीब सी आवाज़ निकाल रही थीं- आह्ह्ह्ह.. अह्ह्हह्ह.. उह्ह्ह्ह.. माआआअ.. चोदो अयान.. और जोर से.. बहुत मज़ा आ रहा है।

लगभग हम दोनों में 15 मिनट तक जबर्दस्त चुदाई का खेल खेलते रहे, उसके बाद आरती चाची झड़ गई थीं।

अब बारी मेरी थी.. तो मैंने आरती चाची से पूछा- क्या करूँ.. अन्दर डाल दूँ या बाहर निकालूँ।
उन्होंने कहा- अन्दर ही डाल दो।

तो मैंने कुछ दमदार धक्के लगाए और अपना माल उनकी चूत के अन्दर ही डाल दिया। मैं बहुत थक गया था तो निढाल हो कर वहीं आरती चाची के शरीर के ऊपर गिर गया।

कुछ देर बाद हम दोनों उठ कर बाथरूम गए.. खुद को साफ किया।
मैं आरती चाची के चूचों को साफ करने लगा। कुछ देर बाथरूम में मस्ती करने के बाद हम दोनों बाहर आ गए।
उसके बाद चाय पी.. और सो गए।

बस अब तो रोज-रोज यही सिलसिला चलने लगा। फिर चाचा वापस आए तो ये सब बंद करना पड़ा।
फिर भी कभी-कभी मैं मौक़ा पाकर चलते फिरते उनके चूचे दबा देता था।
मैंने अपने जीवन का पहला सेक्स किया था और इसमें मुझे बहुत मज़ा आया था।

उसके बाद मेरे एग्जाम खत्म हो गए.. मैं अपने घर चला आया।
उसके बाद अभी तक किसी को नहीं चोदा है.. सोचता हूँ आरती चाची के घर से फिर से घूम आऊँ।

Antarvasna

यह मेरे पड़ोस में Antarvasna रहनी वाली विश्रांती-रेशमा की कहानी जिनको मैंने गणित सिखाने के बहाने कैसे चोदा।

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। उस दिन विश्रांती और रेशमा दोनों मेरे घर चली आई। मैं उनके लिए चाय बनाने के लिए रसोई में गया। वे दोनों गप्पे हाँक रही थीं… मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

विश्रांती- रेशमा, मैं कुछ पूछूँ तुझे?

रेशमा- हाँ विश्रांती, पूछ ना!

विश्रांती- आजकल सुहास और तू दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

रेशमा- अरे नहीं विश्रांती! वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?

विश्रांती- रेशमा, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?

रेशमा- अरे विश्रांती वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!

विश्रांती- रेशमा, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

रेशमा- तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?

विश्रांती- मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!

रेशमा मुस्कुराते हुए- अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो किसी से बोलना मत! तो तू चाहती है कि सुहास तुझे भी ऐसे ही गणित सिखाए?

विश्रांती- चाहने से क्या होगा रेशमा!

रेशमा- अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?

विश्रांती- हाँ रेशमा, दूध तो निकलता है और अब बच्ची भी नहीं पीती… सो भरा हुआ है…

रेशमा- तब तो सुहास जरूर तुम्हें गणित सिखाएगा, रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!

तभी मैं नाश्ता लेकर वहाँ आ गया। तुरंत दोनों ने विषय बदल दिया।

उसी दिन शाम को फ़िर विश्रांती मेरे घर चली आई।

विश्रांती- सुहास, रेशमा जैसे मुझे भी गणित सिखाओ ना!

मैं- विश्रांती तुझे भी गणित सीखना है…

विश्रांती- सुहास, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं…

मै- हाँ विश्रांती, रेशमा ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रहा था, हा पूछ ना!

मैं- विश्रांती तुम सलवार-कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही हो…

विश्रांती- तुझे अच्छा लगा यह ड्रेस?

मैं- हाँ विश्रांती, तू ऐसे ही ड्रेस पहना कर… बहुत अच्छी लगती है… पूछ क्या पूछना है?

विश्रांती- तू तो बस रेशमा से ही बातें करता है…

मैं- नहीं विश्रांती ऐसी कोई बात नहीं है… तू भी बहुत अच्छी है…

बात करते करते विश्रांती ने अपना दुपट्टा सरका दिया… विश्रांती के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… विश्रांती की चूचियों को देखने लगा…

विश्रांती- सुहास, मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?

मैं- विश्रांती कुछ नहीं, सच्ची में तू भी बहुत अच्छी है…

विश्रांती- तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?

मैं- कुछ नहीं विश्रांती…

विश्रांती- कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!

मैं- विश्रांती मैं साफ बोलूँ तो गुस्सा नहीं होगी ना?

विश्रांती- नहीं सुहास, तू मेरा दोस्त है उसमें क्या गुस्सा करना!

मैं- विश्रांती तेरे वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…

विश्रांती- ये तो मेरी बच्ची को दूध पिलाने के लिए हैं….

मैं- विश्रांती, तेरी बच्ची तो अब बड़ी हो गई है! उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

विश्रांती- नहीं! अब ओ नहीं पीती दूध!

मैं- विश्रांती, तेरी चूची में दूध है क्या?

विश्रांती- हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!

मैं- विश्रांती मुझे प्यास लगी है…

विश्रांती- ठहर, मैं पानी लेकर आती हूँ…

मैं- विश्रांती, पानी नहीं दूध पीना है… चूची का दूध…

विश्रांती- बदमाश! कोई ऐसे दूध पीता है भला?

मैं- क्यूँ नहीं? पीने दो न… तेरे दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…

विश्रांती- अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…

फिर विश्रांती ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब विश्रांती ब्रा में आ गई…

विश्रांती- आ जा सुहास! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…

मैंने विश्रांती की गोद में सिर रख लिया… विश्रांती ने अपनी ब्रा उतारी… और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो सुहास पी लो… अच्छे से पीना…

उसके बाद मैं दूध का प्यासा विश्रांती का दूध मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाईं चूची से तो कभी दाईं से…

साथ में चूची सहला भी रहा था।

विश्रांती- तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!

मैं- विश्रांती, तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा तेरा आभारी रहूँगा… तू जो बोलोगी वो सब करूँगा…

विश्रांती- जो बोलूंगी वो करेगा?

मैं- हाँ विश्रांती, तू एक बार बोल के तो देख…

विश्रांती- अच्छा ठीक है… सुन, मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं- नीचे कहाँ विश्रांती?

विश्रांती- तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं- बोलो ना विश्रांती! तेरी मुँह से सुनना चाहता हूँ।

विश्रांती- अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…

मैं- कैसे मिटा दूं? उंगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूँ?

विश्रांती- मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…

मैं- विश्रांती, मैं तेरी चूत का ख्याल रखूंगा…

विश्रांती- अपनी रेशमा से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… . रेशमा तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है…

मैं- तुम लोग ये सब बातें भी करती हो?

विश्रांती- तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं- विश्रांती, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

विश्रांती- अच्छा तो यह बात है? तो जितना जलवा देख चुके हो उसमें कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं- विश्रांती, इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… रेशमा की चूची में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो तू ही पिला सकती है… तब इसमें तू ही न हुई रानी… विश्रांती, अब तू अपने कुछ और जलवे भी दिखा ना!

विश्रांती- हाँ सुहास तेरी विश्रांती, आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…

और फिर विश्रांती ने अपने कपड़े खोलने शुरु किये… विश्रांती जब पेंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उसकी मदद करने लगा…

मैं- विश्रांती, लाओ अब मैं खोल दूं!

विश्रांती- हाँ सुहास! आ अपनी विश्रांती को नंगी कर दे…

विश्रांती मेरे पास आ गई… मैं विश्रांती की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा… . विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया… .पेंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

फिर विश्रांती अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी… . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. विश्रांती ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया… .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…

विश्रांती- सुहास, तेरा लंड तो काफी बड़ा है रे…

मैं- विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा… .

विश्रांती- क्या करूँ सुहास, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है… .

मैं- विश्रांती तुझे पता है रेशमा तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती है…

विश्रांती- वाह रे बदमाश! अपनी विश्रांती को लंड मुँह में लेने बोल रहा है… .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…

मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…

फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी… . इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा… . इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, नीचे लंड का विश्रांती से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…

मैं- विश्रांती, लंड चुसवाने में इतना मजा आज तक नहीं आया… विश्रांती मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, विश्रांती उल्टा-पुल्टा करें… .

विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा… .अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!

विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…

फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी… . इसलिए चाटने में बहुत मजा आ रहा था… मैं विश्रांती को बहुत मन से चाट रहा था… . विश्रांती भी काफी उत्तेजित हो गई थी… विश्रांती ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मजा विश्रांती ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…

मैं- विश्रांती तेरा रस कितना स्वादिष्ट है… अब मेरा रस भी निकाल दे… अब मेरी लंड तेरी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…

विश्रांती- आ न सुहास… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…

फिर विश्रांती बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो… मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत पर लगा दिया…

विश्रांती- दे धक्का!… चोद अपनी विश्रांती को… चोद…

मैं- ले विश्रांती… ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… चुद अपने सुहास से मेरी प्यारी विश्रांती…

फिर विश्रांती गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी… मैं भी विश्रांती को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर विश्रांती ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मजा आया… फिर विश्रांती मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था… करीब मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया… विश्रांती ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया… वो मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… विश्रांती बहुत खुश थी…

विश्रांती- अपनी विश्रांती को चोदने में कैसा लगा… रेशमा को चोदने में ज्यादा मजा आया था क्या?

मैं- नहीं विश्रांती तू कुछ माल है… तुझे चोदने में बहुत मजा आया… मैं अब तुझे ही चोदूंगा…

विश्रांती- अरे नहीं सुहास! दोनों को चोदना… रेशमा भी बहुत अच्छी है उसने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया… तू उसे कभी नाराज़ न करना…

फिर मैं रेशमा और विश्रांती के साथ मस्ती करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती हैं…

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दोस्तों, मेरा नाम अमन है, मैं दिल्ली Indian Sex Stories मैं नौकरी करता हूँ। मेरी उम्र २४ वर्ष है, यानि कि जवान हूँ। मैं अपने बारे में कुछ बता देना चाहता हूँ। मैं सेक्सी दिखता हूँ, ग़लती से या सही से, भगवान ने मुझ ग़रीब को अच्छे व्यक्तित्व का मालिक बनाया है। मेरा क़द ५.७ फीट है, देखने में कोई बॉडी-बिल्डर तो नहीं पर एक अच्छे बद़न का मालिक ज़रूर हूँ। मैं अन्तर्वासना में प्रकाशित हुई लगभग सारी कहानियाँ पढ़ता रहता हूँ। यह साईट मुझे काफ़ी अच्छी लगती है। आज मैं भी आप लोगों को अपनी आपबीती में शामिल करता हूँ।

बात तब की है जब मैं अपने चाचा-चाची और भाई-भाभी के पास रहने और नौकरी तलाश करने के लिए दिल्ली आया था। उस समय मेरे चाचा के घर में किरायेदार के रूप में मेरे ही गाँव का एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक लड़की रेखा, जिसकी उम्र १८ वर्ष है और दूसरी उसकी छोटी बहन जो १० साल की है और उनके एक छोटा भाई है जिसका नाम अमित है और वह ६ साल का है।

बात रेखा की है, जो मुझसे प्यार करती थी, और मुझे पता भी नहीं था, पर एक दिन क्या हुआ… यह आप ख़ुद ही जान जाएँगे।

जब मैं रहने के लिए वहाँ गया था, तो शुरू-शुरू में तो वह मुझसे बात भी नहीं करती थी, सोचती थी मैं पहल करूँ। पर मैं तो ठहरा गाँव का आदमी, भला कहाँ से पहल करूँ? वैसे तो मुझे गाँव में काफी अवसर मिले पर मैं एक बार भी कर नहीं पाया क्योंकि डर रहता था कि अगर मैं कुछ ग़लत करता हूँ तो बद़नामी मेरे घरवालों की होगी। आप को तो पता ही होगा कि गाँव में अगर कुछ ग़लत करो तो बद़नामी घरवालों के सिर आती है। वैसे तो गाँव में मेरे काफी दोस्त ये सब काम मेरे सामने भी करते थे पर मैं मना कर देता था, इसलिए गाँव में काफी कम ही दोस्त थे। जो थे मेरी ही तरह के थे जो खीर देख तो सकते थे, पर खा नहीं सकते।

अब कहानी पर आता हूँ। तो दोस्तों काफी समय तक ना तो वो मुझसे कुछ कहती, ना ही मैं उसमें दिलचस्पी लेता, क्योंकि उस समय वहाँ कुछ बनने के लिए आया था। ऐसे ही दिन-महीने गुज़रते रहे। बात तो हो ही जाती पर कभी प्यार वाली बात नहीं होती। एक दिन शाम को मैं ऑफिस से घर आया और हाथ-पैर धोकर छत पर चला गया। वहाँ पर वह, उसका भाई और मेरी २ साल की भतीजी वहाँ खेल रहे थे। इतने में वे तीनों आकर मुझे च्यूँटी काटने लगे, तो मैंने भी रेखा की चुटकी ली। मेरे चुटकी काटने से वह रोने लगी और छत से नीचे चली गई। मैंने सोचा कि कहीं उसने नीचे जाकर सब को बता दिया तो मेरा जीना हराम हो जाएगा, क्योंकि मेरा भाई बड़ा हरामी है, साले ने मेरा जीना मुश्किल कर रखा था।

थोड़ी देर बाद वह फिर से ऊपर आई और आकर मेरे साथ खड़ी हो गई, तो मेरी जान में जान आई, वरना मैं तो सोच रहा था कि बेटा अमन, आज पिटने के लिए तैयार हो जा। कुछ ही देर बाद उस के मुँह से अपना नाम सुनकर मैं चौंक गया। उसकी वह आवाज़ आज भी मुझे याद आती है। आए भी क्यों नहीं, आख़िर पहली बार मैं किसी के मुँह से ‘आई लव यू’ सुन रहा था। मेरा तो माथा ही ठनक गया। और वह यह बोलकर चली गई, फिर मैं काफी देर तक सोचता रहा कि मैं क्या करूँ। अन्त में बिना किसी निर्णय पर आए हुए मैं भी नीचे आ गया।

रात को खाना खाकर सोने के लिए अपने बिस्तर पर चला गया। मैं जहाँ सोता था वहाँ पर बर्तन धोने जाने का रास्ता था। मैं सो रहा था या यों कहें कि मैं उसी के बारे में सोच रहा था कि तब तक वह हाथ में बर्तन लेकर धोने के लिए वहाँ आकर खड़ी हो गई और मुझे देखने लगी। मैं आँखें बन्द करके सोच रहा था, तो उसने आराम से बर्तन नीचे रखे और मेरे होठों को किस कर लिया, वह मेरा किसी लड़की द्वारा किया गया पहला किस था। तो मैं उठ पड़ा और सोचा कि अगर यह एक लड़की होकर इतना कर सकती है, तो मैं लड़का होकर क्यों शान्त सोया पड़ा हूँ। मैंने भी उसी स्टाईल में लगभग १५-२० मिनट तक उसे किस किया। फिर मैंने जाना कि किस क्या होता है। फिर वह वहाँ से चली गई। अब ना तो मैं ठीक से काम कर पाता था, ना ही ठीक से पढ़ पाता था, दिन-रात उसी के बारे में सोच-सोच कर मैं ५४ से ४८ किलो का हो गया था। मेरे चाचा-चाची कहते कि द़िल लगाकर पढ़ाई कर रहा है तो बीमार हो गया है, एक काम कर यो तो तू काम कर या पढ़ाई कर, थोड़ा बोझ हल्का हो जाएगा।

पर उनको तो पता नहीं था कि मेरा द़िल तो कहीं और ही लगा हुआ है, तो पढ़ाई में कहाँ से लगेगा। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैं जहाँ भी उसे अकेले में देखता था या पाता तो तुरन्त ही जाकर उसके होठों को चूमने लगता। वह भी मना नहीं करती, क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था, तब तक होली भी नज़दीक आ रही थी। हमारे चाचा-चाची ने घर जाने का फैसला किया कि इस बार गाँव में ही होली मनाएँगे।

मैं तो जा नहीं सकता था। अगर मैं जाता तो मेरी कमाई, पढ़ाई, और चुदाई तीनों पर कोई और होली खेल जाता। तो वे लोग गाँव चले गए, घर में मैं रह गया, साथ में मैं मेरी भाई-भाभी और मेरी दो भतीजियाँ। और वह तो पहले से ही अपने पूरे परिवार के साथ वहाँ थी ही।

एक रात हम सब छत पर सो रहे थे कि तेज़ बारिश शुरू हो गई, सब नीचे भाग आए सोने कि लए। मौसम तो ऐसा था कि जिनकी शादी हो गई थी वो तो बीवी के साथ लगे होंगे, जिनकी नहीं हुई वह लण्ड पकड़कर सो रहे होंगे, मेरी तरह। उस रात मैं भगवान को कोस रहा था, आप को अगर पता न हो तो एक बात बता दूँ कि दिन में एक बार आप जो भी बोलते हैं, वह सच हो जाता है, शायद वही हुआ।

रात के लगभग २ बज रहे थे, मैं बरामदे में ही अकेला सो रहा था, भाई-भाभी अन्दर कमरे में कुण्डी लगाकर सो रहे थे। अचानक मुझे पायल की आवाज़ सुनाई पड़ी, मैंने आँखें खोली तो देखा कि बुलुबल आराम से नीचे उतर रही है। वह सीधा मेरे बिस्तर पर आई और मेरे साथ लेट गई। मैं तो अचानक हवा में उड़ने लगा, हे भगवान, आख़िर वह दिन आ ही गया ! मैंने उसकी तरफ मुँह किया और उसे किस करने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे सिर से लेकर पाँव तक किस किया, वह तो जाने कितने जन्मों की प्यासी लग रही थी पता नहीं।

जब मैं उसे किस कर रहा था तो इतने में उसने मेरा लण्ड पजामे में से बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी। मैं तो हैरान रह गया, ये सब इसने कहाँ से सीखा? मैंने उसके होठों को जी-भर चूसा और लाल कर दिया। फिर उसकी शमीज खोलकर मस्त हो रहीं चूचियों को जी भरकर चूसा। उसकी ओओओओओओ… उउउउउउउ… आआआआआआ आआआआआआहहहह की आवाज़ मेरे जोश भर रही थी। मैं ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूचियों को दबा व चूस रहा था। फिर मैं धीरे से एक ऊँगली उस कभी खत्म न होने वाली गहराई यानि उसकी योनि के ऊपर घुमा रहा था, अचानक वह ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे करने लगी और कुछ देर बाद शान्त हो गई। फिर मैंने अपना लण्ड उस के मुँह में दे दिया और वह दनादन चूसने लगी और मैं उसकी चूत चाट रहा था कि कहानी में ट्विस्ट आ गया।

मुझे लगा कि कोई अन्दर से कुण्डी खोल रहा है। हम शान्त हो गए। फिर धीरे-धीरे कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई तो हमारी जान ही निकल आई, वह वहाँ से उठकर सीढ़ियों से ऊपर चली गई, और मैं शान्ति से सो गया। फिर पाया कि काफी देर तक कोई अन्दर कमरे से नहीं आया फिर भी कुण्डी जैसी कुछ आवाज़ रह-रहकर आतीं, तो मैंने ध्यान दिया तो पाया कि हवा के कारण गाँधी की तस्वीर दरवाज़े में रगड़ खाकर आवाज़ पैदा कर रही थी। मैंने मन ही मन सोचा क्या यार सही में तुम गाँधी हो, अच्छी खासी चुदाई में तुमने आन्दोलन कर दिया। मैं लण्ड पकड़कर सो गया। थोड़ी ही देर में वह आई और अपना दुपट्टा लेकर जाने लगी तो मैंने उसे ज़बरदस्ती लिटा लिया, वो मना करती रही फिर भी मैं नहीं माना और उसे फिर से नंगा कर दिया, फिर से उसको चूमा-चाटा फिर कुछ देर तक ना-ना करने के बाद वह मान गई और साथ देने लगी।

फिर मैंने उस को उसकी कच्छी उतारने के लिए कहा तो वो बोली- सब तो तुमने उतार ही दिया है, अब ये मैं क्यों उतारूँ, तुम ही उतार दो।

मैंने फिर वह भी उतार दी और अपनी छोटी ऊँगली को ओ बना के घुमाने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि वह अभी मझे धक्का देकर गिरा देगी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे ही घुमाना उचित समझा और उसकी चूचियों को एक-एक करके चूसता भी रहा। फिर मैंने ऊँगली निकाल कर अँगूठा डाला और फिर ओ की तरह घुमाने लगा तो वह उछलने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी। अब ना तो मुझ से रहा जा रहा था ना ही उससे सहा जा रहा था।

मैंने उससे कहा- यार ! कब तक ये चूसते रहेंगे?

तो वह बोली- मैं तो कब से कहना चाह रही हूँ पर तुम हो कि चूस-चूस कर ही निकालते जा रहे हो।

तो मैंने कहा कि पहले बताना चाहिए था ना, मैं यह काम पहली बार कर रहा हूँ।

तो वह बोली- तो मैं कौन सी मास्टर हूँ, मेरा भी तो पहली बार ही है।

फिर मैं उसे चित लिटाकर उसके ऊपर आ गया और सारा काम अपने लण्ड के भरोसे छोड़ दिया। वह अन्दर जाने के लिए बेताब़ हो रहा था और रास्ता था कि लाख ढूंढने पर भी नज़र नहीं आ रहा था, फिर मैंने भी कोशिश की, पर बेकार। जब भी झटका मारता, लण्ड अन्दर जाने की बजाए पेट की तरफ निकल भागता।

फिर उसने कहा- कि किचन से थोड़ा तेल ले लो।

मैं किचन से तेल ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर खूब मालिश करवाई और की। फिर उसने लण्ड अपने हाथ में ले लिया और कहा- अबकी बार मैं कोशिश करती हूँ, पर धीरे-धीरे करना।

मैंने कहा- मुझे पता है जानम कि तुम और मैं दोनों ही नए हैं इस खेल में ! पर चिन्ता मत करो, मैं ख़्याल रखूँगा।

फिर उसने अपने हाथों से मेरा लण्ड अपने चूत की छेद के पास रखा और बोली- जानेमन थोड़ा रहम करना मेरे ऊपर और धीरे से धक्का लगाना !

तो मैंने पहला धक्का धीरे से लगाया, मुझे पूरा महसूस हो रहा था कि मेरे लण्ड का कितना हिस्सा बाहर है, और कितना अन्दर जा चुका है। मैंने अपने पहले ही झटके में अपना पूरा सुपाड़ा अन्दर पेल दिया तो वह तिलमिला उठी और अपने दाँतों को ज़ोर-जो़र से चबाने लगी फिर बोली- मुँह में कुछ दो नहीं तो मैं चिल्ला उठूँगी।

फिर मैंने अपनी जीभ उसे चूसने के लिए दी और वह चूसने लगी। इस बार मैंने एक और ज़ोरदार झटका मारा और मेरा आधा लण्ड अन्दर समा गया और वह इतनी ज़ोर से छटपटाई कि मैं घबरा गया, कि कहीं कुछ हो तो नहीं गया। उसने लाख़ छूटने का प्रयास किया पर मैंने छूटने नहीं दिया और फिर मैं वहीं रूक गया। उसकी जुबान को चूसने लगा, जब उसे थोड़ा आराम मिला तब उसने खुद ही कहा कि अब क्या चूस रहे हो, अब तो पूरा ही डाल दो, तो मैंने एक आख़िरी ज़ोरदार झटका मारा और वह उछल कर शान्त हो गई, फिर मैंने उसे हर कोण से चोदा और वह आ आआआआ आइ…. आआआआआ… आआआआआ उउउउउउ आआआहहह… उउउउभभभ… आआआआहहहह आआआआआ करती रही।

मैंने उसे अपने ऊपर आने के लिए कहा। यारों अगर आप चुदाई का असली मज़ा लेना चाहते हैं तो फिर आप ख़ुद लेट जाइए और उसे करने के लिए बोलें, फिर देखेंगे कि चुदाई क्या चीज़ होती है। और फिर वह मेरे ऊपर आकर पहले तो धीरे-धीरे फिर ज़ोर-ज़ोर से आटे की चक्की चलाने लगी। मेरा तो मत पूछिए, मैं तो जैसे हवाओं में था। तभी वह बोली- अब ज़रा ज़ोर-ज़ोर से कर दो, मैं आने वाली हूँ।

फिर मैंने उसे लिटा के जो झटके मारे, १०-१५ में ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे भी एक ऐसी सुखदायक कँपकँपी लगी जैसे कोई मुझे स्वर्ग की सैर करवा रहा हो। फिर शुरू से लेकर अन्त तक कर मैंने उसके एक पल का भी मज़ा खराब न करके वो मुझमें और मैं उसमें समाने की कोशिश करते रहे और वह मेरा हौसला बढ़ाती रही। मैंने ज़ोरदार शाट्स मारे, फिर हम शान्त होकर वहीं पड़े रहे। १५ मिनट बाद हम उठे, बाथरूम में साथ-साथ गए, एक-दूसरे को साफ़ किया। उसने मुझे गुडनाईट किस दिया और चली गई।

१५ दिन बाद मेरी नौकरी फ़रीदाबाद में डेवेलपमेन्ट में एक कैड ऑपरेटर के रूप में लग गई और मैंने दिल्ली छोड़ दी।

उसके बाद आज तक कभी सेक्स करने का दुबारा मौका नहीं मिला, उसके बाद ना तो उसने कभी मुझे फोन किया, ना मैंने उसे ही। उसकी शादी हो चुकी है, और वह काफी खुश है। Indian Sex Stories

 मेरे शौहर ने मुझे कैसे लंड की भूखी रंडी बनाया.
मेरा नाम सबा है, मैं उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 24 साल है, मेरी शादी हो चुकी है. मेरे बदन का साइज़ 34 28 38 है, मेरे बूब्स बड़े और टाइट हैं मेरी गांड काफी बाहर निकली हुई है जिसे देख कर सबका लंड खड़ा हो जाता है.
मैं अपने शौहर से चुदाई रोज़ करती हूँ, वो भी मुझे खूब जम कर चोदते हैं लेकिन कुछ दिनों से मुझे अपने शौहर के लंड से मज़ा नहीं मिल रहा था लेकिन मैंने कभी कुछ नहीं कहा.
पर वो समझ गए, एक दिन चुदाई के वक़्त कहने लगे- लगता है अब तुम्हें बड़े लंड की ज़रूरत है?
मैंने कुछ नहीं कहा.
उसके बाद हम लोग चुदाई करके सो गए.

अगले दिन चुदाई के वक़्त फिर वही बात कहने लगे, तब मैंने कहा- मुझे सिर्फ आपके साथ ये सब करना है और अब कभी ये सब मत कहना!
लेकिन वो नहीं माने, कहने लगे- मेरा एक दोस्त है, वो जिगोलो है, उसके ग्रुप में पांच लड़के हैं, सबके लंड बड़े बड़े हैं और वो यही काम करते हैं. तुम कहो तो बात करूँ?
मैंने मना कर दिया लेकिन अब रोज़ चुदाई के वक़्त वो ये सब कहते और मैं कुछ नहीं कहती.

एक दिन उन्होंने कहा- आज अपने दोस्त से मैंने बात की है और उसने तुम्हारी फ़ोटो मांगी है नंगी!
मैंने कहा- मुझे ये सब पसंद नहीं है!
लेकिन वो ज़बरदस्ती करने लगे कि सिर्फ तुम्हारी चूत और बूब्स का फोटो भेजूंगा.

काफी ना नुकुर के बाद मैं भी मान गई और उन्होंने मेरी फ़ोटो उन लोगों को भेज दी.
तब मैंने पूछा- आपके दोस्त का नाम क्या है?
उन्होंने बताया- संजय… और उसी का लंड सबसे बड़ा है. उसने अपने लंड की फ़ोटो भी भेजी है, देखोगी?
मैंने मना कर दिया लेकिन वो ज़बरदस्ती मुझे दिखाने लगे.

तभी मेरी नज़र मोबाइल पर पड़ी, मेरे तो होश ही उड़ गए कि इतना बड़ा लंड भी होता है. मेरे शौहर का मुश्किल से पांच इंच का होगा लेकिन ये तो उसका डबल से भी ज़्यादा है और बहुत मोटा भी!
मैंने कहा- कौन चुदवाती होगी इससे?
कहने लगे- पसंद आया?
मैंने कहा- नहीं, मुझे नहीं करना है!

उन्होंने कहा- एक बार चलो, तुम्हारी चूत की सारी गर्मी निकल जायेगी या तुम चुदाई छोड़ दोगी या फिर रंडी बन जाओगी. मुझे तुम्हें देखना है तुम कैसे दूसरे मर्द से चुदवाती हो!
मैंने कहा- आप बर्दाश्त कर लेंगे जब कोई आपके सामने आपकी बीवी को चोदेगा?
उन्होंने कहा- उस दिन का मुझे बहुत दिनों से इंतज़ार है!
मैंने कहा- जब आपकी यही तमन्ना है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है!

सच कहूँ तो मैंने जब से वो लंड देखा था, मेरी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. उस रात मैंने खूब चुदवाया.

कुछ दिन बाद मेरे शौहर ने कहा- कल चलना है!
मैंने कहा- कहाँ?
तो बताया- संजय के पास… मेरी बात हुई है, मैंने कह दिया है अपने दोस्तों को बुला लेना!
मैंने कहा- क्या मुझे रंडी बनाने का इरादा है?
तो बोले- बन जाओ रंडी!
मैंने कहा- ठीक है. अब मुझे सबा मत कहना, रंडी कहना! आज से मैं एक रंडी हूँ!
उन्होंने कहा- ठीक है!

अगले दिन मैंने अपनी चूत को अच्छी तरह साफ किया और चल पड़ी. हम लोग एक घर में पहुंचे, वहाँ पर 6 लोग हमारा इंतज़ार कर रहे थे.
इतने लोगों को देख कर मैं डर गई, मैंने कहा- चलिए, मुझे मरना नहीं है!
तब एक आदमी आया और कहने लगा- कुछ नहीं होगा, हम ज़बरदस्ती नहीं करेंगे, अगर आपको कोई दिक्कत होगी तो आप चली जाना!
मेरे शौहर ने कहा- एक बार ट्राई कर लो, अच्छा नहीं लगेगा तो मत करना!

मैंने हाँ में अपना सर हिला दिया.

तभी एक दूसरा आदमी मेरे पास आया और मेरा नकाब निकलने लगा.
मैंने कुछ नहीं कहा और अपना नकाब उतार दिया.

तभी मुझे पीछे मुझे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ, मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक आदमी मेरे गांड में अपना लंड रगड़ रहा है और तीन लोग नंगे खड़े अपना लंड हिला रहे थे, सबके लंड लगभग बहुत लम्बे लम्बे और मेरी कलाई इतने मोटे थे.
मेरी तो हलक़ ही सूख गई उनके लंड देख कर… मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा, जिससे मेरी चूचियाँ ऊपर नीचे होने लगी.

तभी संजय ने कहा- क्या नाम है आपका?
मैं कुछ बोलने ही वाली थी कि मेरे शौहर ने कहा- सबा!
फिर पूछा- क्या करने आई हो, पता है?
मेरे शौहर ने कहा- इसे रंडी बनाना है, इसे आज अपनी रंडी समझ कर इतना चोदो कि इसकी चूत और गांड दोनों खुल जायें!

गांड का नाम सुनते ही मैं चौंक गई क्योंकि मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई थी. मेरे शौहर कहते थे लेकिन मैं मना कर देती… लेकिन यहां तो आज मेरी गांड और चूत दोनों फटने वाली थी.
मैं यही सब सोच रही थी कि पीछे से किसी ने मेरी गांड को दबा दिया, मुझे बहुत डर लग रहा था.

तभी संजय ने कहा- सबा रंडी… अपने कपड़े उतारो, आज तुम्हें असली चुदाई का मज़ा मिलने वाला है!
मुझे शर्म आ रही थी.
तभी मेरे शौहर ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए. मैंने भी दिल में ये सोच लिया कि जो होगा देखा जाएगा… आज मज़ा ले लिया जाए!

मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए. तब मैंने संजय से कहा- सब तो नंगे हैं, आपने क्यूँ नहीं कपड़े उतारे?
तो उन्होंने कहा- मैं बाद में उतारूंगा, तुम लोग शुरू हो जाओ!

तभी पांच आदमी मेरे पास आ गए और मुझे अपना अपना लंड पकड़ाने लगे. मैंने झिझकते हुए एक का लंड पकड़ा, मुझे लगा जैसे कोई मोटा बेलन हो… मेरे हाथ में नहीं आ रहा था और काफी गर्म भी था.
एक ने इशारा किया उसका लंड चूसने के लिए… मैंने झुक कर उसका लंड अपने मुँह में ले लिया सिर्फ उसका टोपा ही मेरे मुंह में जा पा रहा था.
तभी एक पीछे से मेरी चूत को चाटने लगा और दूसरा मेरे बूब्स को पीने लगा. मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगी, उसकी चटाई ऐसी थी कि मैं एक मिनट भी नहीं टिक पाई और झर गई, मेरी चूत से बहुत पानी निकलता है, लगभग आधा गिलास… और वो सारा पानी पी गया.

मेरा अब मुंह भी दर्द करने लगा था, मैं खड़ी हो गई. तभी संजय मेरे पास आया. वो भी नंगा हो गया था, उसका लंड सबसे बड़ा था.
मैं सोचने लगी कि आज पता नहीं ज़िंदा बचूंगी भी या नहीं!
मैं सोच ही रही थी कि सबने मुझे बेड पर चलने को कहा.

तो मैं सीधे चल दी आगे आगे… पीछे से सबकी नज़र मेरी गांड पर थी जो ऊपर नीचे हो रही थी. बेड पर पहुंचते ही सबसे पहले संजय ने मुझे किस करना स्टार्ट किया और एक हाथ से मेरी चूत को और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स को मसलने लगा.
उसके हाथ में जादू था, मैं हवा में उड़ने लगी, मेरी चूत से रस टपकने लगा, मैंने कहा- जल्दी करो, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है!

तब संजय ने कहा- अब बताओ तुम कौन हो?
मैंने कहा- मैं तुम सब की रंडी हूँ, मुझे चोदो… तड़पाओ मत… मुझे इतना चोदो… अपनी रंडी समझ कर चोदो… मैं कितना भी चिल्लाऊं, मुझे छोड़ना मत!

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तभी किसी ने मेरी चूत को चाटना शुरू किया, मेरी आग और भड़क गई, मैंने कहा- प्लीज मुझे जल्दी से चोदो, नहीं तो मैं मर जाऊँगी.
तब संजय ने मुझे लिटा कर मेरी चूत में अपना लंड रखा, मैंने अपनी आंखें बंद कर ली लेकिन वो सिर्फ मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ता रहा, मैं तड़पने लगी, मेरी चूत से ढेर सारा पानी बह कर मेरी जांघों पर पहुँच गया. मैंने कहा- मेरी जान, मत तड़पाओ… जल्दी से चोदो!

तभी उसने एक तेज़ झटका मारा और मैं बहुत ज़ोर से चिल्लाई, मुझे लगा जैसे कोई गर्म सरिया मेरी चूत को चीर गया है और मेरी चूत फ़ट गई है.
मैंने कहा- प्लीज, निकाल लो, मुझे नहीं करवाना, मैं मर जाऊँगी.
उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख कर उन्हें चूसना चालू कर दिया और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स दबाने लगा.

थोड़ी देर बाद मुझे कुछ दर्द कम हुआ तो नीचे से मैंने अपनी गांड उचकाना शुरू किया. तभी एक जोरदार झटका लगा और मेरे मुँह से भयानक चीख निकली, मेरी तो जैसे जान ही निकल गई, मैं छटपटाने लगी और छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन नाकाम रही. उसने मुझे कस कर दबाये रखा और मेरे निप्पल को चूसता गया.

थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हुआ तब उसने कहा- मुबारक हो, तुम्हारी चूत ने मेरा पूरा लंड अपने अन्दर ले लिया, अब तुम किसी से भी चुदवा सकती हो!
मेरा भी अब दर्द कम हो गया था, तब मैं अपनी गांड को हिलाने लगी.
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संजय ने अपना आधा लंड बाहर निकाला और एक झटके में अंदर कर दिया. मुझे बहुत तेज जलन महसूस हो रही थी, मैंने कहा- प्लीज, थोड़ा धीरे करो… बहुत जलन हो रही है.
लेकिन वो लगातार मुझे चोदता गया. कुछ देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं भी उसका साथ देने लगी. उसका लंड जब मेरी बच्चेदानी में जाकर ठोकर मारता, मुझे इतना मजा आता कि मैं बता नहीं सकती.

मैं झड़ने के करीब पहुँच गई और चिल्लाने लगी- और कस कर चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत को… बना दो मुझे बाजारू रंडी! मैं अब तुमसे हमेशा चुदवाऊंगी! मुझे ऐसे ही हमेशा चोदना!
उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
तभी मैं झड़ गई लेकिन वो मुझे लगातार चोदता रहा.
उसके बाद वो भी मेरी चूत में झड़ गया, मैं बहुत खुश थी.

तभी दूसरे ने आकर अपना लंड मुझे चूसने के लिए कहा. मेरा मन अभी भरा नहीं था तो मैं जल्दी से उसे चूसने लगी. सब एक साथ मेरे ऊपर टूट पड़े, एक मेरी चूत को चाट रहा था, दूसरा मेरी गांड को चाट रहा था, तीसरा मेरे बूब्स को चूस रहा था, चौथा अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ाए था.

मुझे गांड चटवाने में बहुत अच्छा लग रहा था, मैं दोनों का सर पकड़ कर अपनी चूत और गांड पर दबाने लगी.

तभी सब हट गए, मैंने पूछा- क्या हुआ?
एक ने कहा- अब तुहारी असली चुदाई होगी!
मैंने कहा- जल्दी करो, चोदो इस रंडी को!

तभी एक आदमी नीचे लेट गया और मुझे अपने लंड पर बैठने का इशारा किया.
मैंने जल्दी से उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगाया और धीरे धीरे बैठने लगी. उसका लंड भी संजय के जितना था, थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन मैंने सहते हुए पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया जो सीधे जाकर मेरी बच्चेदानी में लगा.

तभी नीचे से धक्का लगना स्टार्ट हुआ, मैं भी अपनी गांड हिला कर उसका साथ दे रही थी.
अब तीन लोग सामने आए और एक ने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया और दो ने मेरे हाथों में पकड़ा दिया.
मैं मजे में लंड चूसते हुए दिल खोल कर चुदवा रही थी कि तभी मेरी नज़र मेरे शौहर पर पड़ी, वो संजय से कुछ कह रहे थे, मुझे देख कर हँसने लगे.

उनको देख कर मैं और ज़ोर से लंड चूसने लगी, अपनी गांड को लंड पर पटकने लगी.
मैं झड़ने ही वाली थी कि उसने अपना लंड बाहर निकल लिया और हट गया. तभी दूसरा नीचे लेट गया, मैं उसके लंड की सवारी करने लगी लेकिन चार पाँच झटकों के बाद वो रुक गया और मुझे अपने ऊपर झुका कर मेरे होंठ को चूसने लगा.

तभी कोई मेरी गांड में उंगली डाल कर तेल लगाने लगा.
मैं उठना चाहती थी लेकिन उसने मुझे कस कर जकड़ा था, मैं चिल्लाने लगी- मुझे गांड नहीं मरवानी है… प्लीज, मेरी गांड मत मारो, मेरी गांड फट जाएगी!
लेकिन तभी मेरी गांड पर मुझे लंड महसूस हुआ, मैंने कहा- प्लीज, धीरे करना!

उसने थोड़ा ज़ोर लगाया और उसका टोपा मेरी गांड में घुस गया, मैं चिल्लाने ही वाली थी कि दूसरे ने मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया. मैं रोने लगी.
मेरे शौहर ने कहा- रुकना मत, पूरा एक बार में डाल दो!
उसने एक झटका इतना ज़ोर मारा कि पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया.
मैं बेहोश होते होते बची.

तभी उसने अपना लंड आधा बाहर निकाला और फिर पूरा मेरी गांड में घुसा दिया. मेरी आंखों से आँसू बहने लगे लेकिन उसने मेरी गांड मारना चालू रखा. थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ तो नीचे वाले ने अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू किया. मेरी दोनों तरफ से चुदाई हो रही थी, अब मुझे भी मज़ा आने लगा था, मैं अब मज़े से चुदवा रही थी, मुझे इतना मज़ा कभी नहीं मिला था मुझे चूत से ज़्यादा अब गांड मरवाना अच्छा लग रहा था.
मैं चिल्ला रही थी- चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत और गांड को!

वो फुल स्पीड से मुझे चोद रहे थे, उनके लम्बे लंड मेरी गांड और चूत की साथ में चुदाई कर रहे थे. लगातार काफी देर तक चोदने के बाद वो मेरी गांड और चूत में झड़ गए, उनका माल मेरी गांड और चूत से बाहर बह रहा था.

उसके बाद बाकी दो लोगों ने जगह संभाल ली, एक चूत में, एक गांड में… फिर मेरी चुदाई स्टार्ट हुई. इन दोनों ने भी लगभग आधा घंटा मुझे खूब रगड़ कर चोदा, वो भी मेरी गांड और चूत में झड़ गए.
इस दौरान मैं लगभग बहुर बार झड़ी थी.

उनके हटने के बाद मैंने अपनी चूत को देख तो वो एकदम फूल गई थी. मुझसे चला भी नहीं जा रहा था.
मैंने अपनी गांड को हाथ लगाया तो लगा जैसे किसी ने बाँस डाल कर फैला दिया है.

उन लोगों ने मुझे मेरी गांड का फोटो खींच कर दिखाया, एकदम खुल गई थी.

मेरे शौहर ने मुझे कपड़े पहनाए, नक़ाब, बुर्का पहनाया.

उसके बाद उन्होंने मेरे शौहर को एक मेमोरी कार्ड दिया और मैं सबसे गले मिलने लगी. सबने मेरे बूब्स और गांड को दबा कर मुझे छेड़ा.

आते हुए संजय ने कहा- सबा, एक बात पूछूँ?
मैंने कहा- कहो?
उसने कहा- फिर कब आओगी? मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!
मैंने कहा- मैं सबा नहीं हूँ, मैं तुम लोगों की पर्सनल रंडी हूँ, जब चाहो मुझे चोदो, मेरी गांड मारो… अब तुम लोग मेरे घर पर आकर मुझे जब दिल चाहे चोदना… यह रंडी हमेशा अपनी चूत और गांड तुम लोगों के लिए तैयार रखेगी. लेकिन मेरी एक शर्त है मेरी चूत और गांड की चुदाई साथ में होनी चाहिए!

सब हँसने लगे.

मेरे शौहर ने कहा- एक बार में इतनी बड़ी रंडी बन गई हो?
मैंने कहा- अब देखना मेरा रंडीपना…
फिर हम घर चले आये.

घर आकर पता चला कि मेरी चुदाई की वीडियो बनी है, अब सब लोग आते हैं और मुझे रात भर मेरी गांड और चूत की चुदाई करते हैं. मेरी गांड अब और भी बड़ी हो गई है, मैं पक्की रंडी बन गई हूं.

Antarvasna

Antarvasna पर कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने भी एक कहानी लिखने की कोशिश की। यह एक सच्ची कहानी है। मेरी कहानी में एक नया अनुभव है

जो मेरा एक सबक है और मेरा पहला सेक्स है।

यह बात करीब छः साल पुरानी है जब मैं अपनी टी वी की दुकान पर बैठता था। मेरी दुकान पर एक औरत टीवी सुधरवाने आई। वो करीब बाईस साल की थी। मैंने उसे देखा तो वो गाँव से आई लगती थी। उसके टीवी में कुछ समस्या थी इसलिए वो टी वी शहर में लेकर आई। मैंने टीवी को देखा तो लगभग ठीक है बस बिजली सप्लाई में थोड़ी खराबी थी। मैंने उसे सौ रुपए का खर्चा बताया।

उसने कहा- मेरे पास रुपए कम हैं, आप इसे ठीक करके रखो। मैं इसे मंगल को ले जाउँगी।

मैंने फिर उसकी तरफ देखा तो वो मुझे कुछ परेशान लगी। अचानक उसने कहा- आप टीवी रविवार को मेरे घर पर ले आना ! मैं रुपए वहीं पर दे दूंगी ! मेरा घर ग्राम ……… सिहोर में है। और उसने फिर अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।

फिर मैंने उसको ऊपर से नीचे तक देखा, वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उसके स्तन लगभग अमरुद के बराबर थे रंग थोड़ा सांवला और होंट गुलाबी न होकर कुछ गहरे रंग के थे पर एक सेक्स की अपील उसमें कूट कूट कर भरी थी। मैंने सोचा कि अब तक इसे मैं क्यों नहीं देख रहा था। इतने में चाय वाला चाय लेकर आ गया तो मैंने उससे चाय के लिए पूछा। पहले तो वो मना करने लगी पर मेरे ज्यादा जोर देने पर मान गई। फिर हम चाय पीने लगे। मैं चाय पीते पीते उसको ही देख रहा था। शायद उसको भी पता लग गया था कि मैं उसमें दिलचस्पी ले रहा हूँ तो वो भी थोड़ी सी खुल गई।

मैंने उससे पूछा- घर में कौन कौन है?

तो उसने कहा- मेरी सास और मेरे पति हैं, पति ड्राईवर है जो अक्सर बाहर रहता है, सास काम पर जाती है, मैं घर पर रह कर घर का काम करती हूँ।

उसने कहा- रविवार को आप ग्यारह बजे तक आना ! बिजली साढ़े दस तक आती है।

मैंने कहा- समय मिला तो आ पाउंगा और घर पर आने के लिए 50 रुपए अलग से देने होंगे।

इस पर वो कहने लगी- मेरे पास इतने रुपए तो नहीं हो पाएँगे, आप ही कोई रास्ता सोचो !

मैं उस वक्त दुकान पर था तो मैंने कहा- आपके घर पर आकर ही बात करेंगे !

मेरे ऐसा कहने पर वो मेरा मोबाइल नम्बर मांगने लगी तो मैंने मना कर दिया। पर वो बहुत ही जिद करने लगी तो मैंने अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।

इसके बाद वो चली गई और मैं अपने काम में लग गया और बात मेरे दिमाग से उतर गई। पर रविवार को लगभग साढ़े ग्यारह बजे एक फोन आया- आप आ रहे हैं क्या ?

मैंने पूछा- आप कौन बोल रही हैं?

तो वो कहने लगी- मैं नीतू बोल रही हूँ !

मैं नीतू नाम से किसी को नहीं जानता था, मैंने कहा- मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हूँ !

तो उसने कहा- आप टीवी लेकर आने वाले थे ना !

तब ध्यान आया कि यह वही औरत है। फिर मैंने कहा- आज तो मैं शायद नहीं आ पाउँगा क्यूंकि मैं आज भोपाल जा रहा हूँ।

तो वह कहने लगी- आपके रास्ते में ही तो पड़ेगा, आप थोड़ा समय निकाल कर आ जाओ !

तो मैंने जबाब दिया- मैं देखता हूँ !

फिर मैंने सोचा कि जाना ठीक रहेगा या नहीं !

इसी तरह सोचते हुए लगभग बीस मिनट हो गए। फिर सोचा- होकर तो आते हैं, जो होगा देखा जाएगा। इस तरह मैं उसके घर पहुँच गया। वो वहाँ पर बिल्कुल अकेली थी। मैं अकेला था तो टीवी तो नहीं ले गया तो उसने पूछा- टीवी कहाँ पर है?

मैंने कहा- मेरे साथ कोई नहीं था इसलिए टीवी तो नहीं ला पाया, वैसे टीवी तो सुधार दिया है, आप उसे ले आना !

तो वो मुझे पैसे देने लगी तो मैंने कहा- दुकान पर दे देना !

तो वो कहने लगी- मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं, आप अभी इतने ही रख लीजिये, मैं बाकी आपको दे दूंगी।

फिर वो चाय बनाने लगी, मैं वहीं पर बैठ गया और उससे बातें करने लगा। बात ही बात में चर्चा निकली- आपके पति तो बहुत दिनों में आ पाते होंगे ?

तो वो थोड़ी सी भावुक हो गई और कहने लगी- वो हमेशा ही बाहर रहते हैं और मैं जैसे तैसे घर का खर्चा चलाती हूँ, सारी तनख्वाह भी शराब में उड़ा देते हैं। अभी भी वो दो महीने से घर नहीं आये हैं।

यह कह कर वो रोने लगी तो मैं उसे चुप करने की कोशिश करने के लिये उसके पास गया और चुप कराने लगा तो वो मुझसे ही चिपक गई और और जोर जोर से सुबकने लगी।

यह सब अचानक हुआ, मैं तो एकदम ही उसके करीब था और वो मुझसे चिपक कर खड़ी थी। मैं उसे शान्त करने के लिये उसके बालों में हाथ फ़िराने लगा तो वो मुझसे और ज्यादा चिपक गई। अब तो मैं भी अपने को रोक नहीं कर पा रहा था, मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना शुरु कर दिया। उसने भी कोई विरोध नहीं किया। मैंने धीरे से उसके होटों को चूम लिया, उसने भी मुझे जोरदार चुम्बन किया।

फिर तो मैंने कोई देर नहीं की और उसके कपड़ों को धीरे धीरे निकलना शुरु कर दिया। वो धीरे धीरे नारी सुलभ लज्जा के मारे सिमटी जा रही थी पर उसको भी मैं शायद पसंद आ गया था, इसी कारण वो भी धीरे से कोई शरारत कर देती थी जिससे मै और ज्यादा जोश में आ रहा था। मैंने उसके चुचूक को मुँह में ले लिया तो वो मारे उत्तेजना के सिसक उठी और मेरे कपड़ों को निकालना शुरु कर दिया।

फ़िर तो हमारे ऊपर कोई सीमा, कोई बन्धन नहीं रहा। मैंने उसके वस्ति-क्षेत्र पर एक जोरदार चुबन ले लिया और वो तो बहुत ही जोश में आ गई और मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपने योनिद्वार पर रगड़ना शुरु कर दिया। उसकी योनि से सम्पर्क होते ही मेरे अंदर एक जवालामुखी सा धधकने लगा और मैंने उसकी योनि के पास एक जोरदार चुम्बन ले लिया। इतना करने से तो उसने एकदम से ही मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपनी योनि के अन्दर डाल लिया और मुझसे चिपक गई, टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया और नीचे से अपनी कमर को हिलाने लगी। फिर तो मैंने भी देर न करते हुए अपने आपको पूरा उसके समर्पित कर दिया और जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिए। हर शॉट के साथ वह और ज्यादा उग्र होने लगी।

मैंने भी इस काम को अब अपने तरीके से करने की कोशिश करते हुए अपने धक्के एक लयबद्ध तरीके से लगाने शुरू किए। मैं धक्के लगाते लगाते अचानक रुक जाता और उसके बदन से खेलने लगता। इसी तरह हमारी कामातुर आवाजों से कमरा गूंजने लगा। मैं उसके कभी इस चुचूक को तो कभी दूसरे चुचूक को चूस रहा था। इस बीच में वह दो बार चरमोत्कर्ष से झड़ चुकी थी मगर मैं अभी भी नहीं झड़ा था।

इसके पहले उसके पति ने कभी उसे इतना संतुष्ट नहीं किया था। मैं भी अब तेजी लाया, वो मारे उत्तेजना के सिसकारी पे सिसकारी भर रही थी।मैंने उसे अब अपने ऊपर ले लिया और उसके दूध पकड़ के उसे अपने लिंग पर ऊपर-नीचे होने का कहा। वह सेक्स का पूरा मजा ले रही थी। मैं भी अब उत्तेजना के मारे चरमसीमा पर था। अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ लिया और हम दोनों एक ही साथ स्खलित हो गए। वो मेरे ऊपर ही लेटकर मेरे होंठों को चूसती रही और बोली- आज मैं पहली बार तीन बार झड़ी हूँ, यह दिन मुझे हमेशा याद रहेगा।

उसके बाद हमारी चुदाई का एक राउंड और चला, वो पूरी तरह से थक चुकी थी। हमने उठकर कपड़े पहने। उसने एक बार और चाय बनाई। चाय पीते पीते वो बोली- मन तो नहीं कर रहा है आपको वापस भेजने का ! मगर मेरी सास काम से आने वाली है।

मैं भी लेट हो रहा था तो मैं भी उससे अगली बार मिलने का कहते हुए वापस घर आने लगा तो वो बोली- जाने से पहले मुझे एक बार चूमने तो दो !

फिर उसने मुझे बाहों में लेकर मेरे होंठों पर अपने मद भरे होंठ रख दिए।मगर समय का ध्यान रखते हुए मैंने उससे कहा- इस तरीके से तो तुम परेशानी में पड़ जाउंगी क्योंकि तुम्हारी सास भी तो आने वाली है।

मैंने उससे फिर किसी दिन आने का कहते हुए वापिस घर का रुख किया और उससे कहा- तुम मोबाइल से बता देना !

इसके बाद मैंने उसे उसी के घर पर पूरी रात कैसे उसके साथ चुदाई के नए नए आसनों के साथ गुजारी जबकि उसकी सास घर पर ही बगल वाले कमरे में थी।

वो मेरी अगली धड़कती फड़कती चुदाई की Antarvasna कहानी में !

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