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Sex Stories

मेरा नाम विक्की है। मैं राजकोट Sex Stories का रहने वाला हूँ लेकिन अभी मैं अहमदाबाद में कुछ दिनों से रह रहा हूँ। अन्तर्वासना कहानियाँ पढ़ कर मैंने भी अपनी एक रियल सेक्स स्टोरी आप लोगों के साथ बाँटना चाही।

तो बात उन दिनों की है जब मुझे सेक्स के बारे में कुछ मालूम नहीं था। मेरे सभी दोस्तों की गर्लफ्रेंड थी पर मैं एक सीधा लड़का था। मेरे दोस्तों ने मुझे कई बार कहा कि तू भी कोई लड़की क्यों नहीं पटा लेता, पर हम तो पहले से ही बहुत शर्मीले थे।

एक दिन मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड को मिलने मैं उसके साथ गया। वहाँ पर उसकी भी एक सहेली आई हुई थी। वो उम्र में मुझसे बड़ी थी पर बहुत ही सुन्दर और सेक्सी लग रही थी। मैं मन ही मन उसे हवस भरी नजरों से देखने लगा। कभी उसके टॉप में उभरे स्तनों को तो कभी उसकी टाइट जींस से उसकी चूत का आकार! उसके जिस्म का एक एक अंग बहुत ही उभार वाला था। कसम से कोई भी लड़का उसे देखने बाद एक बार तो उसके नाम के मुठ मार ही लेगा।
उसकी नज़र भी मेरी तरफ थी, वो जान गई थी कि मैं उसके सारे अंगों को बहुत ही हवस से देख रहा हूँ पर वो कुछ बोली नहीं।

थोड़ी देर में हम लोग चले आए। मैंने घर जाकर उसके जिस्म का विचार करते हुए मुठ भी मार ली।

दूसरे दिन मैंने अपने दोस्त को उसकी गर्लफ्रेंड की सहेली को मेरे साथ मिलवाने के लिए कहा। पर मुझे मालूम नहीं था कि वो तो मुझसे भी ज्यादा चुदक्कड़ निकलेगी। मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड ने मुझे उससे शाम को ही मिलवा दिया।

हमने थोड़ी बातें की और दूसरे दिन ही अकेले मिलने की योजना बनाई।

ऐसे ही हमारा रूटीन हो गया, हम रोज़ मिलते रहे पर मैं इतना शर्मीला था कि मैं उससे कुछ कह ही नहीं पाता था, सिर्फ उसके शरीर के सभी उभारों को देखता ही रहता था। उसको सब मालूम था पर मुझे कहती नहीं थी, वो मेरे मुँह से बुलवाना चाहती थी पर मैं एक महीने तक कुछ बोल ही नहीं पाया।

एक दिन अचानक उसका फ़ोन आया और मुझे उसने बाहर खाने हो कहा। मैं भी जल्दी से गया, हम दोनों खाना खाने गए, मुझे नहीं मालूम था कि उसकी हवस आज मुझे कुछ और कहना चाहती थी।

खाने के बाद उसने मुझे अपने घर साथ चलने को कहा। मैंने उसको पहले मना किया पर बाद में मान गया। हम लोग चलते चलते बातें करते हुए घर की ओर जा रहे थे, रास्ते में वो मेरे बहुत करीब चलने लगी, उसके हाथ कभी मेरी जांघ पर तो कभी मेरे लंड पर लग रहे थे। तो मैं भी थोड़ा उसके करीब चलने लगा डरते हुए।

एक बार कुछ गिरते हुए सीधे मुझ पर गिर ही पड़ी, मैंने झट से उसे संभाल तो लिया पर उसके मोटे मोटे स्तन मेरे हाथ से टकरा गए। मैंने मेरी इतनी उम्र में पहली बार किसी के वक्ष छुए थे। मैं पसीना-पसीना हो गया, दिल की धड़कन तेज हो गई। मेरे मुँह से आवाज निकलना बंद हो गई पर वो तो मुझे बार बार अपने शरीर से लगा रही थी। मैंने उस दिन जींस पहनी थी फिर भी मेरा लंड जींस में से खड़ा दिख रहा था, उसकी नज़र बार बार उस पर पड़ती थी और मैं शर्म से नीचे देखने लगता था।

इतने में उसका घर आ गया। मैं सोफे पर बैठा था, वो अन्दर गई और मुझे पानी पिलाया, फिर अपने कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद वो एक सिल्क का गाऊन पहन कर आई और मेरे पास बैठ गई। मैंने अपनी नज़र एक बार उसके शरीर को देख कर दूसरी तरफ घुमा ली। उसने हलके से अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था, तभी वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरे गालों पर फिराने लगी।

मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था, वो मेरे होठों के साथ अपने होंठ मिलाकर मुझे चूमने लगी। मेरे शरीर का एक एक रोंगटा खड़ा हो गया। मैंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। वो धीरे से अपना मुँह मेरे शर्ट के बटन खोल कर अन्दर लगाने लगी, पूरे जिस्म में आग फ़ैल गई, मेरे हाथ काम्पने लगे। फिर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके गाऊन के ऊपर ही उसके कमर पर फेरना चालू किया। वो तो मुझसे पहले की गरम ही थी, धीरे से अपना हाथ मैंने उसके वक्ष पर रखा तो जैसे मेरी जन्मों की प्यास भड़क उठी हो, वैसा मुझे आनंद मिला।

अब तो मुझसे भी रहा नहीं गया और उसके गाऊन को धीरे से निकाला और फेंक दिया। उसने मेरा शर्ट उतार दिया और मुझ पर चढ़ गई। गाऊन उतरने के बाद मैंने उसके जिस्म को देखा तो मानो उसको सिर्फ चोदने के लिए ही बनाया होगा। उसने लाल ब्रा और पैंटी पहनी थी, उसके स्तन ब्रा में से भी बाहर निकल रहे थे। धीरे से उसकी कमर पर हाथ घुमा कर मैंने उसकी ब्रा निकाल दी। वो मेरे लंड पर हाथ रख के धीरे धीरे उसको सहलाने लगी। मुझे लगा कि अभी ही मेरा वीर्य निकल जायेगा।

फिर उसने मेरी जिप खोल कर अन्दर हाथ डाला, लण्ड को छूते ही मानो एक मूर्ति में जान आ गई हो एसे लंड और खड़ा हो गया। उसने अपने कोमल हाथों से मेरे लंड को बाहर निकाला और नीचे हो कर उसको चूमा।

उसने कहा- मुझ में कब से इसे पाने की आग थी, तुमने मुझे बहुत तड़पाया है पर आज मैंने भी ठान लिया कि इसका मज़ा लेकर ही रहूंगी।

फिर वो एक हाथ मेरे सीने पर फिराने लगी और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर मुँह में ले कर ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसकी पैंटी उतार कर एक हाथ उसकी गुलाबी चूत पर रख दिया, उसकी चूत पहले से ही पानी छोड़ने लगी थी, वो बहुत ही उतावली हो रही थी चुदवाने के लिए।

मैंने उसको उठा कर अपनी गोद में बिठाया और लंड सीधा खड़ा कर दिया क्योंकि मुझे मालूम नहीं था कि कैसे करते हैं, उसने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत में डलवाने लगी। लंड का मुंड अन्दर जाते ही वो चीख उठी- हाय राम! इतना मोटा लौड़ा!

थोड़ी देर रुक कर वो धीरे से लंड पर नीचे बैठती रही, धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। दर्द के मारे उसकी आँखों से आंसू निकल आए पर वो कुछ बोली नहीं। फिर उसने ऊपर उठ कर दो-तीन बार झटका लगाया, अब मेरा लंड पूरी तरह अन्दर जा रहा था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर में उसके मुँह से ये आवाज़ें निकलने लगी- आऽऽ… आआऽऽऽ आऽअ…आ आय… अआ..ऊ… उऔऊ उ. .उ .मर गई…

आज मेरी भी जन्मों की प्यास बुझ रही थी, मैं भी अऽऽ आय… आआऽऽ आआअ ऊऊऊऊउ… कर रहा था और कह रहा था- साली अब तुझे नहीं जाने दूंगा, तू कितने दिनों से मेरे लंड को भड़का रही थी… साली आज में तेरी माँ-बहन एक कर दूंगा…

वो अभी भी चीख रही थी- माय… उ.उ.उ.उ.. ऊऊऊ… दर्द हो रहा है!

थोड़ी देर बाद वो उतर के कुतिया की तरह हो गई और मुझे पीछे से डालने को कहा। मैंने धीरे से लंड को चूत पे रख कर जोर दिया, मेरा लंड पूरा उसकी चूत में चला गया। फिर मैं भी आगे-पीछे हो कर लंड को अन्दर-बाहर करता रहा। हम दोनों ही जन्नत में पहुँच चुके थे, वो अपनी गांड हिला कर मानो मुझे चोद रही हो, ऐसे हिल रही थी।

थोड़ी देर में मैंने और ज्यादा गति पकड़ ली। शायद लंड पूरा उसके चूत के अन्दर से टकरा रहा हो, उसने मुझे रोक देना चाहा पर मैं रुका नहीं क्योंकि अब उसकी चरमसीमा आ रही थी। उसने झटके से पूरा पानी छोड़ दिया और मैंने भी उसकी चूत अपनी पहली चुदाई के पानी से भर दी।

उसने और मैंने एक अलग ही अनुभव किया। थोड़ी देर मैं उससे चिपक कर वैसे ही लेटा रहा!
फिर उस दिन के बाद मैंने कई बार उसको चोदा।
मानो या न मानो, जो पहले सेक्स का अनुभव होता है वो एक अलग ही होता है!

तो कैसी लगी मेरी यह घटना?
इस रियल से स्टोरी को पढ़ कर आप मुझे अपना विचार भेज सकते हैं। Sex Stories

Antarvasna

जब से मेरी बीवी को पीएसी Antarvasna के जवानों और उसके जीजा ने पेला था उसकी चुदवाने की भूख और बढ़ गई थी। इसी दौरान मेरी बदली प्रतापगढ़ हो गई थी। नीलू की बुर की आग एकदम चरम पर थी। अब चुदवाते वक़्त वो खुल के गालियों का प्रयोग करती। वो अब पूरी रंडी हो चुकी थी। उस रंडी की चुदाई जितनी भी हो, कम ही थी

मेरी ड्यूटी एक प्राइवेट कंपनी में थी। एक दिन मुझे कुछ काम से पटना जाना था। हम दोनों की ट्रेन रात के साढ़े ग्यारह बजे थी। खाना खाकर हम ऑटो से स्टेशन पर पहुंचे। स्टेशन पर बिल्कुल सन्नाटा था। बहुत कम लोग या यूँ कहें कि इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे। ट्रेन थोड़ी लेट थी। हम वहीं बैठ कर बातें कर रहे थे।

तभी न जाने कहाँ से कुछ पुलिस वाले आ गए। वो हमसे पूछताछ करने लगे। मैंने उन्हें अपना कार्ड दिखाया पर वो नहीं माने और हमें एक केस में फरार पति-पत्नी साबित करने लगे। मैं उनको समझाता रहा पर वो नहीं माने।

दरोगा बोला- साले, मादरचोद ! हमें समझाओगे? पहले तो अपने माँ-बाप का खून करते हो और भागने की प्लानिंग करते हो ! ले चलो इनको थाने फिर बात करते हैं !

इतना कहकर वो सब हम दोनों को ले जाने लगे। एक सिपाही नीलू से बोला- साली चल अपना सामान उठा ! तुझसे तो लगता है साहब ही बात करेंगे ! साली की जवानी तो देखो ! अगर साहब बोल दें तो यहीं पटक कर चोद दूं !

नीलू बोली- क्या बदतमीजी कर रहे हो? एक औरत से इस तरह बात करते हैं?

दूसरा सिपाही बोला- तब कैसे बात करते हैं बुरचोदी रंडी? ज्यादा बोल मत ! नहीं अभी तेरे मर्द के सामने साहब त्तुम्हें अपने लंड पर नचवाएंगे ! समझी?

यह सब सुनकर नीलू चुप हो गई पर उन सब की बुरी नज़र उस पर पड़ चुकी थी। वो सब हमें लेकर ड्यूटी-रूम में गए। वहाँ पर उस दरोगा ने पता नहीं किसे फ़ोन लगाया। बात करने के बाद वो मुस्कुराने लगा। उसने अपने तीनों सिपाहियों से कुछ बात की और उसके बाद वो सब हमें गाडी में स्टेशन के दूसरी ओर ले जाने लगे। तो मैंने पूछा- हमें कहाँ ले जा रहे हैं?

तो बोला- अभी पता चल जायेगा !

थोड़ी देर बाद हम एक मकाननुमा ऑफिस में पहुंचे। उन्होंने हमें उतारा और अन्दर ले गए। वहां कोई नहीं था। दरअसल यह वीआईपी गेस्ट-रूम था। वहां पहुँच कर दरोगा बोला- अब बोल साले ! छुटना चाहता है या दफा ३०२ लगवाना चाहता है? अब हम चाहें तो तुम्हें छोड़ भी सकते हैं पर इसके लिए तुझे कुछ देना होगा ! देगा?

मैं बोला- क्या?

वो बड़ी बेशर्मी से बोला- तेरी माल ! यानि तेरी बीवी !

मैं गुस्से में उससे बोला- जबान सम्हाल कर बात कर साले ! तू मुझे नहीं जानता, मैं तुम्हें जेल भिजवा सकता हूँ !

वो बोला- भिजवा दे ! पर वो तो तू तब करेगा जब तू यहाँ से बच कर जायेगा?

इतना कहकर उसने नीलू को दबोच लिया। बाकी के सिपाहियों ने मुझे दबोच कर मेरे मुँह में कपड़ा ठूंस कर मेरा मुँह बंद कर दिया और फिर मुझे रस्सी से खूब मजबूती से बांध कर एक कमरे में छोड़ दिया।

अब आगे की कहानी नीलू के शब्दों में-

उस दरोगा ने पीछे से मुझे कसकर पकड़ लिया, फिर बोला- रानी, आज तो तुझे हमारे लौड़ों पर नाचना होगा !

मैंने चिल्लाते हुए कहा- छोड़ो मुझे ! मैं तुम लोगो की बात नहीं मानूंगी किसी भी कीमत पर !

तब दरोगा बोला- फिर ठीक है, हम तेरे पति का एनकाउंटर कर देंगे, उसके बाद तुझे भी चोद कर रंडीखाने भेज देंगे। जहाँ तेरी जवानी का भुरता बन जायेगा। मान जाओ !

मैं बोली- ठीक है ! मुझे सोचने दो !

मैंने सोचा कि अगर मैं इन सब की बात मान लेती हूँ तो ज्यादा से ज्यादा ये मेरी चुदाई ही करेंगे और अगर नहीं मानी तो ये मेरे पति को जान से तो मारेंगे ही साथ में मुझे भी बर्बाद कर देंगे। यह सोचकर मैंने कहा- ठीक है, मुझे मंजूर है ! पर सुबह तुम लोगों को हमें इज्जत के साथ वापस छोड़ना होगा !

दरोगा बोला- जो तुम बोलो रानी, सब मंजूर !

अब मेरा दिमाग चुदाई की बात सोचते ही धुकधुकाने लगा।

एक सिपाही बोला- साहब क्या मस्त प्लान बनाया है, कई दिनों से किसी की मारी नहीं थी, आज सारी कसर निकालूँगा !

दूसरा बोला- अबे अब इस हरामजादी को चुदाई वाले कमरे में तो ले के चल !

यह कह कर उसने मेरी गांड सहला दिया। वो सब अब मुझे ऊपर लेकर जाने लगे। रास्ते में कोई मेरी चुचियों को सहलाता, कोई गांड पर, तो कोई गाल पर !

हाय ! मैं तो इतने लोगों से चुदने की बात सुनकर ही मस्त हो गई थी। आज फिर मुझे अपने पीएसी वाले जीजा की टक्कर का लौड़ा जो मिलने वाला था।

अन्दर पहुंचते ही दरोगा बोला- चल री मादरचोद, अपने कपड़े उतार ! कसम से साली एकदम कंटीली है ! आज तो तुझे जमकर चोदूंगा ! खोल बुरचोदी ! आज तुझे पुलिस का डंडा दिखाऊंगा। अरे तुम लोग देख क्या रहे हो? गरम करो रंडी को ! आज इसे दिखायेंगे कि पुलिस का लौड़ा जब घुसता है तो क्या होता है ! साली का गांड भी पेलूँगा !

हाय …….. आह! ऐसे मत करो ! छोड़ो मेरी चुचियों को ! आह सी… दर्द हो रहा है ! कभी चूचियां नहीं दबाई क्या? जब मैं चुदने को तैयार हूँ तब मेरे साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो?

साली रंडी ! तू ऐसी माल है कि बिना ऐसे किए चोदने का मज़ा ही नहीं आएगा ! खोल स्साली पहले अपना जलवा तो दिखा ! यह कहकर दरोगा ने साड़ी के ऊपर से ही मेरी बुर को मींज़ दिया।

हाय, क्या कर रहे हो। छोड़ो ना! मैं बोली।

तब उसने मुझे कपड़े उतारने का इशारा किया। अब मेरी समझ में आ गया था कि चाहे मेरी चूची हो या बुर या गांड सबकी बैंड बजेगी। मैं अन्दर ही अन्दर खुश भी थी। काफी दिनों के बाद मेरी जवानी की बैंड फिर से बजने वाली थी। हाय जीजू ! क्या बना दिया तूने मुझे ?

अब मैंने एक-एक करके अपने कपड़े उतार के एक तरफ रख दिए क्योंकि मैं जानती थी कि ये सब मेरी मां-बहन सब चोद सकते हैं तो मैं अपने कपड़े क्यों ख़राब करूँ !

उन सबने भी अपने कपड़े मुझसे पहले ही उतार दिए। उनके लौड़ों को दख कर तो मन किया कि उनका मुँह चूम लूँ ! सब एक से बढ़ कर एक ! दरोगा का सबसे मस्त ! मेरी बुर तो पानी देने लगी, साली कुछ देर का इन्तज़ार भी नहीं करवा सकती।

दरोगा ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और लण्ड मेरी गांड से सटाते हुए बोले- रानी तैयार हो ना ! अगर नहीं तो तेरे पति को तैयार करूँ !

मैं तो मस्त थी पर कुछ नहीं बोली। सब मेरे ऊपर टूट पड़े, मेरे दोनों 32 साइज़ की चुचियों को दबा-दबा कर लाल कर दिया।. दरोगा मेरे होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। एक मेरी बाईं और एक मेरी दांई चूची के चुचूक चूसने लगे। एक मेरे गांड के दरारों को अपने जीभ से चाटने लगा। सब तरफ से मैं फँसी थी। मेरी बुर तो रिसने लगी। करीब ५ मिनट तक ऐसा करने के बाद एक उंगली मेरी बुर को सहलाते-सहलाते अन्दर घुस गई। हाय मेरा तो बुरा हाल था।

वो उंगली दरोगा की थी। वो चीखा- सालों ! इस रंडी मादरचोद को भी मज़ा आ रहा है ! यह देखो इसकी बुर का रस !

कहकर वो अपनी उंगली चाटने लगा। सब मेरे ऊपर हंसने लगे और एक बोला- हरामजादी, तुझे तो सारी पुलिस-फ़ोर्स भी चोदे तब भी आग न बुझे !

मैं भी बेशर्मी से बोली- साले रंडी हूँ रंडी की तरह चोदोगे तभी मज़ा दूंगी ! मेरी बुर सस्ती रंडी वाली बुर नहीं है ! समझे ? पीएसी के लौड़ों पर दौड़ चुकी हूँ। देखती हूँ तुम्हारे में कितने दम है !

दरोगा ने मेरे कान के लौ को चूसते हुए धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रानी, सही कहूँ तो एकदम मस्त माल हो ! ये सब तो परम पेलू हैं पर सही में अगर तुम मज़ा लेकर यहाँ से जाना चाहती हो तब हम जैसा कहें वैसा करना होगा !

मैं भी नशीली आवाज में बोली- मेरे राजा, आज बुर का दरवाज़ा खोल तो अपने डंडे से ! मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ ! जैसे चाहो वैसे पेलो ! तुम लोगो की रंडी हूँ ना, सब तरफ से फाड़ डालो मेरी ! मेरी बुर तुम्हारे लौड़े का स्वागत ही करेगी, इतना जीभर के पेलवाउंगी कि तुम भी क्या याद करोगे।

दरोगा बोला- क्या नाम है तुम्हारा रानी?

मैं बोली- नीलू !

हाय बड़ा मस्त और रंगीन नाम है। चल रानी अब हमारे लौड़ों को अपने बुर के लिए तैयार कर ! दरोगा बोला।

मैं अब उनके मस्त खड़े लौड़ों को चाटने लगी। एक बोला,” साली मस्त है ! सब आता है इसे ! लगता है इसका पति इसे सब सिखा कर रखता है। लंड को चाट रंडी साली ! ले पी मादरचोद !

उधर मैं उनके लौड़े चूसने में मस्त थी, इधर दरोगा ने मेरी प्यारी सी चोट्टी बुर पर हाथ लगाया और फिर मुँह भी लगा दिया। फिर तो एक ने मेरी गांड में उंगली कर दी। मैं और मेरी जवानी पूरी उफ़ान पर आ चुके थे और थोड़ी देर में मेरी जवानी के रस का फव्वारा निकल गया। दरोगा पूरा का पूरा माल चाट गया और बोला- रानी तेरी बुर भी तेरी मुंह की तरह नमकीन है ! मज़ा आ गया, अब तो तुम्हारी असली तीसरी डिग्री शुरु होगी।

इतना कहकर उसने मुझे कुतिया की तरह उल्टा कर दिया। उसके बाद थूक लगा लगा कर जो उनके 9-9 इंच के लौड़ों ने मेरी पेलाई की पूरे आधे घंटे तक बिना रुके !

पेल-पेल के उन्होंने मेरी बुर में ही अपना सारा का सारा माल डाल दिया। मेरी बुर से उनका पानी टपकते हुए नीचे फर्श पर गिर रहा था। हाय मैं तो पूरी तरह मस्त हो गई थी, सभी मुझको एक-एक बार चोद चुके थे।

अब मैं दरोगा की गोद में थी। वो मेरी चुचियों से खेल रहा था। उसने मुझसे पूछा- रानी मज़ा आया?

मैं उसके लंड को सहलाते हुए बोली- पूरा राजा ! तुम लोगों ने तो मेरी बुर को एकदम मस्त कर दिया ! इस समय तो दो चार लंड और भी होते तो मैं आराम से चुदवा लेती। कसम से पहली बार पीएसी ने और इस बार पुलिस ने पेल-पेल कर मुझे पूरा रंडी बना दिया। हाय ! अगला राउंड कब शुरू करोगे राजा?

दरोगा ने पीएसी वाली चुदाई के बारे में पूछा तो मैंने सारा किस्सा बता दिया शोर्ट में। उसने मेरे जीजा का नाम पूछा तो मैंने बता दिया। जीजा का नाम सुनते ही वो हंसने लगा। दरअसल मेरे उस जीजा की ड्यूटी वहीं प्रतापगढ़ में ही लगी थी। उसने मुझसे पूछा- तू कहे तो तेरे जिज्जू को यहीं बुला दूं?

मैंने कुछ नहीं कहा। तब उसने अपने सेलफोन पर बात करके मेरे जीजा को आने को कहा- यार आओ यहाँ एक मस्त रंडी तुम्हारा इन्तज़ार कर रही है।

मैं तो जीजा के आने की बात सोच कर सिहर गई। अब उन लोगों के लंड फिर से मेरी कहानी सुनकर तैयार हो गए थे।

एक बार फिर मेरे बुर में लौड़े घुसने लगे। अबकी बार एक सिपाही ने मेरी गांड को निशाना बनाया और मेरी दोनों तरफ से जबरदस्त कुटाई हुई। मैं तो पूरा निहाल हो गई ! मेरी गांड लंड ले-ले के पूरी लाल हो गई। चारों ने जगह बदल-बदल के मुझे चोदा। हाय मेरा रंडीपन मेरे ऊपर हावी हो गया था। मैं तो मदहोश हो गई थी। याद भी न रहा कि मेरे पतिदेव बगल वाले कमरे में बंद हैं। सबने मुझे चोद-चोद कर मेरी बुर को एकदम खोल दिया। इस बार सबने एक साथ मेरे मुंह में अपना पानी दिया। मुझे न चाहते हुए भी उसे पीना पड़ा।

तभी नीचे गाड़ी रुकने की आवाज़ आई, मैं समझ गई कि जिज्जू आ गया है ! मेरी बुर जो आठ-दस बार झड़ चुकी थी, एक बार फिर पानी देने लगी।

तभी दरवाज़े पे जीजा आया, वो मुझे देखकर सन्न हो गया। मैं दौड़ कर उससे लिपट गई। वो सब समझ गया। तुंरत उसने अपने कपरे उताड़े और दरोगा से बोला- अरे यार ! इस हरामजादी रंडी को कहाँ से पकड़ लिया।

अरे नीलू रानी कैसे यहाँ?

तब मैंने उसे सारी बात बताई तो वो हंसने लगा और बोला- साली कोई मर्डर नहीं हुआ है शहर में ! ये तो तू इनको भा गई होगी और ये तेरे को फंसा के यहाँ अपने लौड़ों पर नचवा रहे हैं ! चलो ठीक भी है ! तेरी जैसी मादरचोद रंडी की इसी तरह गांड मारी जानी चाहिए। अरे यार ! नीचे मेरा अर्दली होगा, उसे भी बुला ले, वो भी इसे देखेगा तो मस्त हो जायेगा। चल साली, पहले मेरा लौड़ा तो चाट !

कसम से मैं इस समय खुद को एक रंडी ही समझ रही थी और खुल कर अपनी खुजली शांत करना चाहती थी। मैं भी खुल के उनके लौड़े चाटने लगी। जीजा का अर्दली भी मुझे देख कर मस्त हो गया।

अब कमरे में केवल मैं जीजा, दरोगा और वो अर्दली थे। तीनों मुझे फिर से नोचने लगे और गन्दी गन्दी गालियां देने लगे। मुझे भी मज़ा आ रहा था।

उन तीनों के लंड चूसने के बाद मैं बोली- जीजा, राजा, मेरा मन कर रहा है कि एक साथ तुम सब के लौड़े मेरे तीनों छेद को भर दें ! कसम से पिछला चोदन याद दिला दो !

जीजा बोला- अरे हरामजादी, तू चिंता मत कर ! सुबह तक तू अपने पैरों पर नहीं जा सकेगी ! साली मैं तो तेरा गांड मरूँगा !

दरोगा बोला- मैं तो इसके मुंह को चोदूँगा !

अर्दली बोला- साहब लोग थैंक्यू ! इस साली की बुर तो एकदम ताजी लौंडिया की तरह फूली है ! मैं तो इसी में अपना डंडा डालूँगा ! आज इसे मालूम होगा कि पुलिस और पीएसी जब मिल के मारते हैं तो क्या होता है।

फिर क्या, उनके मूसल मेरी गांड, बूर और मुँह में घुस कर उधम मचाने लगे। मैं तो एकदम से मस्ता गई। हाय, क्या चुदाई थी !

जगह बदल बदल कर तीनों ने सारी रात मेरी पति की जमानत का पूरा इस्तेमाल किया। हाय रे जीजा का काला लंड ! उफ्फ ये दरोगा मुआ तो सारी रात मुझे पेलता ही रहा, कभी मुंह में, कभी बुर में तो कभी गांड में ! सारी रात सब मेरी जवानी को रौंदते रहे और मै रंडियों की तरह चुदती रही। हाय रे जवानी- उफ्फ्फ ये उफनती जवानी केवल दस इंच के लौड़ों से ही मस्त रहती है, वैसे तो मेरे पति का भी नौ इंच का है, पर वो जब भी पेलते हैं तो अकेले ! हाय, यहाँ तो कई सारे मिल के मेरी बच्चेदानी को फाड़ डालते हैं।

किसी तरह पेलवाते- पेलवाते सुबह हुई। रात भर मैं आह,उच्च, आउक्च,उफ्फ, आई, हाय,सीईईईई. उई मां और न जाने कौन सी मस्ती वाली सिस्कारें मारती रही।

मैंने अपने पूरे कपड़े पहने। जीजा जल्दी चला गया, दरोगा ने मेरे पति को सख्त ताकीद देकर कहा- अगर किसी से कहा तो जान से तो जाओगे ! तेरी बीवी की बुर में डंडा भी पेलेंगे ! Antarvasna

Sex stories

आरती मेरे छोटे भाई रौनक की वाइफ़ है। आरती काफ़ी सुंदर महिला Sex stories है। उसका बदन ऊपर वाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है।

मैं सुरेश उसका जेठ हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं।

आरती शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी।

रौनक एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था।

हां बताना तो भूल ही गया आरती का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।

आज से कोई पांच साल पहले की बात है।

हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही आरती प्रेग्नेंट हो गयी, डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी।

रौनक तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। ये तय हुआ था कि आरती की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी।

एक महीने के बाद जब आरती को वापस लाने की बात आयी तो रौनक को छुट्टी नहीं मिली।
आरती को लेने जाने के लिये रौनक ने मुझे कहा।

तो मैं आरती को लेने ट्रेन से निकला। आरती को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली आरती बेपर्दा हो गयी।

हमारी टिकट प्रथम क्लास में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रेन में चढ़ गये।

गरमी के दिन थे, जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी।

मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा- अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।

मैं उसकी बात पर हँस पड़ा- मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।

मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया।

अचानक मेरे मुंह से निकला- अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।
उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी।

आरती ने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी, ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था।

गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया।

तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई है।

उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे।

ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छातियां साफ़ दिख रही थी।
पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था।

मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी।
उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया।

हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे।

कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था।

हम वापस बात करने लगे।

कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी।

मैंने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथों से अपने ब्रेस्ट को हल्के से दबा रही है।

“कोई प्रोब्लम है क्या?” मैंने पूछा।
“ना… नहीं!”
मैंने उसे असमंजस में देखा।

कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैंने कहा- मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?

वो झिझकती हुई सी खड़ी रही, फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी, कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी।

“मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आंखें आंसुओं से छलक रही हैं।

“क्यों क्या हुआ?” मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं।
मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।

“जी, वो क्या है म्म … वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं।” वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था।

“म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नजरें नीची करते हुए कहा।
“बाथरूम जाना है?” मैंने पूछा.

“गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली आयी.” उसने कहा- और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?
“फ़िर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा.

“कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको!”

उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली- अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?
“बोलो?”

“आप इन्हें खाली कर दीजिये न!”
“मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।” मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।
“आप अगर इस दूध को पी लो…” उसने आगे कुछ नहीं कहा।

मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया- लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं?

“जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा- मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो? प्लीज़!

मैं चुपचाप बैठा रहा, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।

आरती ने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये- प्लीज़!
उसने फ़िर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।

“जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊँ।” कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गयी- आआहह!

मैंने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये।
फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया।
उसने मेरी तरफ़ देखा।

मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया।

उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया, उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे।
मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया।

मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये।

मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे।

उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया।
उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था।
मैंने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।

“ऊओफ़्फ़ फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ… प्लीज़ इनका रस चूस लो!” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया।

मैंने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा।
मीठे दूध की एक तेज़ धार से मेरा मुंह भर गया।

मैंने उसकी आंखों में देखा।
उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी।

मैंने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया।
“आआ अहह!” उसने अपने सिर को एक झटका दिया।

मैंने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया।
मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।

“ऊओह हहाआन्न हाआन्नन… जोर से चूसो और जोर से… प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ, काफ़ी खुजली हो रही है।” उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी।

मैंने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।
वो ‘ऊउईईइ…’ कर उठी, वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी।

उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये।
वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी।

फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा।
“क्या कर रही हो?” मैंने उससे पूछा।
“वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ!” उसने कहा
“क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ?” मैंने उसे छेड़ा.
“दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से!”
“काफ़ी मीठा है!”

“धत्त…” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी।

इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया।
फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दी।

मैंने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया।
वापस उसके दूध को चूसने लगा।

कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।

“अब दूसरा!” वो बोली.
मैंने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा।
उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे।

हम दोनों ही उत्तेजित हो गये थे।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।

“काफ़ी तन रहा है!” उसने शर्माते हुए कहा।
“तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।”
“म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं?” उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा.
“तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?”

उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा- देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में?

मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुई- अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती हैं इसे?
“आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।”
“धत्त मुझे नहीं देखना कुछ… आप बड़े वो हो!” उसने शरमा कर कहा लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।

“इसे एक बार किस तो करो!” मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा।
उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये।

अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था।
उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल छूट गया।

मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी।
मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया।

उसने दो तीन बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।
“ऐसे नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है!”
“हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिये!” मैंने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया।

मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके बदन से अलग कर दिया।

अब हम दोनों बिल्कुल नग्न थे।

तभी किसी ने दरवाजे पर नोक किया।
“कौन हो सकता है?” हम दोनों हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिये और आरती बर्थ पर सो गयी।

मैंने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी।

इस बीच दो बार नोक और हुआ।
मैंने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था, उसने अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा- ये दोनों सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं.
और बाहर चला गया।

मैंने दरवाजा बंद किया और आरती के बदन से चादर को हटा दिया।

आरती शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी।

मैंने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा- प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।

मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा।
इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था।

उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।

“आह सुरेश जी क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली!” उसके पैर छटपटा रहे थे।

उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी।

मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा।
मेरे हाथों ने उसकी योनि की फ़ांकों को अलग अलग कर रखा था और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी।

वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी।

काफ़ी देर तक इसी तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ खल्लास हो गये, उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था।
उसके मुंह से चू कर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था।

मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।

हम दोनों एक दम नग्न थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो।

कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।

“अब आ जाओ!” मैंने आरती को कहा।
“जेठजी थोड़ा सम्भाल कर… अभी अंदर नाजुक है, आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई जख्म न हो जाये।”
“ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।”

आरती उठकर बर्थ पर चौपाया हो गयी।

मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा, मेरे भाई की बीवी की चूत गीली तो पहले ही हो रही थी, धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस गया।

एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी।
वो दर्द से “आआह्हह” कर उठी।

मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा।

कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो आरती ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाये।
“डालो न… रुक क्यों गये।”
“मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिये।”
“इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा।

फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी।

मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा।
हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे।

मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती।

काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।
“आआह शीईव्व अम्मम आआअह तउम्म इतनए दिन कहा थीए। ऊऊ ओह्हह माआ ईईइ माअर्र र्रर जाऊऊं गीइ। मुझए माअर्रर डालओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लओ” और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी।

कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा।

“आअह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुंह खुला हुआ था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी।

मैंने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई और उसे दो घूंठ पानी पिलाया।

उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।
“चोदो सुरेश चोदो… जी भर कर चोदो मुझे।”

मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा।

काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।

“आजा मेरे ऊपर!” मैंने आरती को कहा।

आरती उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गयी।

अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी।

मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी।

मैंने उसके निप्पल को सेट कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी।

अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था।

काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी- सुरेश, मेरे निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।
हम दोनों साथ साथ झड़ गये।

काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसें लेती रही।

फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी।

हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे।
लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया. उसकी बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो रहा था।

पर उसने मुझे आश्वासन दिया- आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है।

उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया। Sex stories

न्यू वाइफ की छोटी चूत मेरे अब्बू ने कैसे फाड़ी, यह मैंने देखा उनकी पहली रात की वीडियो में! मेरे अब्बू कमसिन नई दुल्हन ब्याह के लाये तो मैंने उनकी चुदाई देखनी चाही.

मेरा नाम शरीफ़ कुरैशी है. मेरी अभी उम्र 25 साल की है.
मैं अब्बू के दूसरी बीवी की औलाद हूं.

मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है. मेरा रंग सांवला है लेकिन मैं अच्छा दिखता हूं.
मेरा घर यूपी के आजमनगर में है.

अब मैं अपनी कहानी सुनाता हूं.
बात तब की है जब मैं इंटर कॉलेज का छात्र था और तब मैं करीब 19 साल का था.

हमारी बहुत बड़ी फैमिली है. मेरे अब्बू बहुत पैसे वाले हैं और हमारे बड़े-बड़े 4 – 5 घर हैं.
फार्म हाउस के साथ ही हमारे पास 7 – 8 कार भी हैं.
हमें पैसों की भी कोई कमी नहीं है.

मेरे अब्बू का नाम मोहम्मद अली कुरैशी है.
अब्बू की उम्र 62 साल है.
उन्होंने तीन निकाह किए हैं.

मेरे बड़ी अम्मी सलमा 56 साल की हैं.
बड़ी अम्मी की 5 औलाद हैं, जिनमें दो बेटों के साथ तीन बेटियां हैं.
पहले बेटे का नाम सोहेल (38 साल) है और उनकी पत्नी जोया (35 साल), दूसरे का नाम सलीम (37 साल) उनकी पत्नी नूरजहां (33 साल) है.
तीसरी बेटी मराह (35 साल), चौथी बेटी का नाम मजिदा (34साल), पांचवीं का नाम मरीया (32 साल) है.
तीनों लड़कियों का निकाह हो चुका है.

अब्बू की दूसरी पत्नी अयासा (42) जो मेरी अम्मी हैं.
उनकी चार औलाद थीं लेकिन अब सिर्फ तीन हैं. एक की मौत बचपन में हो चुकी है.
मेरे बड़े भाई शाहिद (23 साल), जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है, उनकी पत्नी का नाम शाहनाज (21 साल) है और मेरी छोटी बहन का नाम मलिका कुरैशी है, जो 10वीं की छात्रा है.

अब्बू की तीसरी पत्नी का नाम फातिमा बीवी (20) है जिससे अब्बू की नई-नई शादी हुई है.

हम सब अलग-अलग बंगले में रहते हैं.
बड़ी अम्मी और उनकी 2 औलाद एक बंगले में, मेरी अम्मी और हम तीन भाई-बहन एक साथ अलग बंगले में रहते हैं.

अब्बू की अभी नई-नई शादी हुई थी इसलिए अब्बू और छोटी अम्मी नए वाले बंगले में रहने वाले थे.

जब अब्बू ने शादी की तब उस समय घर में किसी को यह बात पता नहीं थी.
मैं भी कॉलेज में था.
जब घर आया तो मुझे पता चला कि अब्बू ने तीसरी शादी की है.

उन पर सब नाराज़ थे लेकिन मैं नई नवेली दुल्हन को देखना चाहता था.
जब दुल्हन सामने आई तो मैं उसे देखकर हैरान रह गया.

क्या दुल्हन थी यार … मल्ला कसम … मस्त फिगर वाली गोरे बदन, लम्बे बाल, लाल-लाल होंठ, पतली कमर छोटे-छोटे बूब्स जैसे ताज़ा-ताज़ा फूल खिला हो.
छोटी अम्मी का फिगर साइज 32 – 24 – 32 होगा.

मैं तो यह सोचकर परेशान हो रहा था कि इस बुड्ढे यानि मेरे अब्बू को ऐसी माल कहाँ से मिल गई.
अब्बू के ड्राइवर से पूछा तो पता चला कि यह एक गरीब किसान की बेटी थी. अब्बू ने उनके अब्बू को पैसे देकर निकाह की बात की तो वे मना नहीं कर सके.

अब अब्बू अपनी सुहागरात के लिए अपने नए घर को सजाने के लिए मुझे कहा.

मैं घर में सबसे छोटा लड़का था.
तो अब्बू ने कहा- नए घर के बेडरूम को सज़ा-संवार दो.

जब मैं बेडरूम को सज़ा रहा था तो मन में एक ही ख्याल आ रहा था कि काश फातिमा के साथ आज मेरी सुहागरात होती!
तो इस बेड पर मैं अब्बू की न्यू वाइफ की छोटी चूत को खूब पेलता.

और यह सोच कर मेरा लौड़ा खड़ा हो रहा था.

इस बात को सोचकर मैं उसी बेड पर मुठ मारने लगा और कुछ देर बाद मेरा लौड़ा झड़ गया.

फिर मैने सोचा कि आज तो फातिमा बीवी को पूरा नंगी देखना है.
इसके लिए मैंने अपना फोन को ऑन करके छुपा दिया और अपने पुराने घर आ गया.

रात के 10 बज चुके थे, अब्बू और फातिमा बीवी नए घर में सुहागरात के लिए चले गए.

अब सब सो गए थे लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी.
सारी रात फातिमा के बारे मे सोचता रहा और फातिमा की यादों में कब सुबह हो गई मुझे पता ही नहीं चला.

अब मैं अपना फोन लेने नए वाले घर गया.
लेकिन दरवाज़ा बंद था.

मैंने टाइम देखा तो सुबह के 5 बजे थे और सुहागरात के बाद कौन इतनी जल्दी उठता है.
यह सोचकर मैं वापस घर आ गया.

अब तो समय जैसे थम सा गया था.
मैं सिर्फ घड़ी को देख रहा था 5 से 6, 6 से 7, 7 से 8, 10 से 11 बज चुके थे और अब्बू अभी तक सोए हुए थे.

अब मेरा दिमाग खराब होने लगा था.
फिर अब्बू 12:30 बजे में बाहर आए लेकिन छोटी अम्मी (फातिमा) नहीं आईं.

अब फोन वापस कैसे लूं … यह सोच ही रहा था कि अब्बू ने कहा- बेटा शरीफ़, जाकर देख ना छोटी अम्मी को कुछ चाहिए तो हेल्प कर देना. अभी वह नई है न इसलिए!

अब्बू की बात सुनकर जब मैं छोटी अम्मी के रूम में गया तो देखा वे बैड पर बैठी हैं और उनकी आंखें लाल थीं.
वे काफी थकी- थकी सी लग रही थीं.
देखकर लग रहा था कि अब्बू ने न्यू वाइफ की छोटी चूत को खूब पेला होगा.

फिर मैंने कहा- छोटी अम्मी, आपको कुछ चाहिए तो बोलिए. अब्बू ने मुझे भेजा है.
छोटी अम्मी- नहीं, कुछ नहीं चाहिए. ये बताइए कि आप उनके बेटे हैं. क्या नाम है आपका?

मैं- हां, आपके शौहर मेरे अब्बू हैं और मेरा नाम है शरीफ़!
छोटी अम्मी- वह तो दिख रहा है आप कितने शरीफ़ हैं.
यह बोलकर छोटी अम्मी हंसने लगीं.

मैं- छोटी अम्मी, आप हंस क्यूं रही हैं, मैं कुछ समझा नहीं?
छोटी अम्मी- यह बात फिर कभी बोलूंगी, पहले आप मुझे अम्मी न कहिए. मैं आपसे थोड़ी ही बड़ी हूं तो मुझे आप फातिमा ही कहें.

मैंने कहा- आप तो मेरे रिश्ते में अम्मी ही हुईं ना और घर वाले भी क्या कहेंगे.
छोटी अम्मी- ठीक है, आप सबके सामने मुझे छोटी अम्मी बोलिएगा और जब कोई नहीं हो, तो फातिमा … ठीक है?
मैं- ठीक है. पर आप भी मुझे तुम ही कहिएगा या फिर शरीफ़ कह कर बुलाइयेगा.

छोटी अम्मी- ठीक है. अच्छा शरीफ़, बाथरूम कहां है बताओगे? मुझे नहाना है.
मैं- आगे से दाएं के बाद वाला.

फिर छोटी अम्मी नहाने चली गईं.

मौका देखकर मैंने अपना फोन निकाला और चालू किया.
लेकिन मेरा फोन चालू नहीं हुआ.
शायद फोन की बैटरी खत्म हो गई थी.

मैं अपने कमरे में आया और फोन चार्ज में लगाकर उसे ऑन करने वाला ही था कि इतने में मेरी अम्मी आईं और बोली- बेटा, हमें रहमान भाईजान के घर चलना है.
मैंने अम्मी से कहा- मेरा फोन अभी चार्ज नहीं है और मैं वहां बोर हो जाऊंगा. वहां अभी रुखसाना भी नहीं है, वह अभी दिल्ली में है.

अम्मी- बेटा चल ना … जल्दी आ जाऊंगी. फोन को चार्ज में लगा दे.
मैं अम्मी को लेकर रहमान चाचू के घर चला गया.

रहमान चाचू और मेरी अम्मी की बातें तो मानो जैसे खत्म ही नहीं हो रही थी.
रात 9 बजे हम उनके घर से खाना खाने के बाद अपने घर आए.

मैंने देखा कि बड़ी अम्मी घर आई हुई थीं.
फिर अम्मी और बड़ी अम्मी बातें करने लगीं.

तो मैंने अम्मी से कहा- अम्मी, मैं सोने जा रहा हूं.
यह बोलकर मैं अपने कमरे में गया और दरवाज़े को बंद कर दिया.

मैंने बिना देर किए हुए फोन को ऑन करके वीडियो को चालू किया.
मैंने देखा कि बेड पर छोटी अम्मी बैठी हुई हैं लेकिन उनका चेहरा नहीं दिख रहा है.
उन्होंने साड़ी से चेहरे को छुपा रखा है.

फिर अब्बू आए और दरवाज़े को बंद कर दिया.

इसके बाद अब्बू बैड के पास आए और छोटी अम्मी से बातें करने लगे.
अब वहां क्या बातें हो रही थीं, मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा था क्योंकि फोन बहुत दूर था.

मैंने वीडियो देखते हुए कहा कि अबे बुड्ढे, इतनी खूबसूरत लड़की के साथ क्या बात कर रहा है. लड़की सामने है और तू बात करके टाइम पास कर रहा है.
इसके बाद मैंने वीडियो को थोड़ा आगे किया.

अब अब्बू छोटी अम्मी के चेहरे से साड़ी हटाते हैं और छोटी अम्मी को चूमते हैं और फिर जल्दी-जल्दी से सारे कपड़े उतार देते हैं और फिर उन्हें बेड पर लेटाकर ऊपर चढ़कर घपाघप करना शुरू कर देते हैं.

ये सब कुछ देखने में मुझे मजा नहीं आ रहा था.
शायद मैंने फोन को काफी दूर पर रख दिया था इसलिए साफ-साफ छोटी अम्मी का कोई भी सामान नहीं दिख रहा था.

छोटी अम्मी अब्बू को धीरे-धीरे करने को कह रही थीं लेकिन अब्बू तो उन पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े थे.

अब्बू अपनी गांड आगे-पीछे, आगे-पीछे कर करके चोद रहे थे. मानो कि छोटी अम्मी की चूत को जैसे आज फाड़ ही देंगे.

मेरा फोन इतना दूर होने के बाद भी छोटी अम्मी की आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी.
छोटी अम्मी जोर-जोर से आ उफ़ उफ़ आह की आवाज़ें निकाल रही थीं

मेरे अब्बू बहुत मोटे हैं उनका वजन करीब 125-130 किलो होगा.
तो वहीं छोटी अम्मी यही 50 -55 किलो की होंगी.

लेकिन अब्बू इस छोटी सी कली को मसले जा रहे थे.

अब अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स दबाने लगे और मुंह से छोटी अम्मी के बूब्स चूसने लगे.
अब्बू बूब्स को इतना जोर-जोर से दबा और चूस रहे थे जैसे बूब्स को वे खा ही जाएंगे.

अब्बू ने छोटी अम्मी के बूब्स को दांत से काट लिया जिस पर छोटी अम्मी जोर से चिल्लाई- याल्ला आह मर गई.
छोटी अम्मी- क्या कर रहे हैं … धीरे-धीरे से करिए ना …बहुत दर्द हो रहा है.

अब्बू- चुप साली, तेरे बाप को पैसे तेरा मुंह देखने के लिए नहीं दिया है. तुझसे शादी की है सिर्फ तुझे चोदने के लिए.

इसके बाद अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स को और जोर-जोर से दबाने लगते हैं.

छोटी अम्मी- आ आह ओह … अम्मी मर गई … आ उफ्फ उफ आह ओह याल्ला रहम करें मुझे पर … आ आआआ आऊऊ ऊऊऊ ऊफ आ आह!
वे दर्द से सिसक रही थी.

छोटी अम्मी- खुदा के लिए मुझे अब छोड़ दें बहुत दर्द हो रहा है.
अब्बू- नई चूत में पहली बार लौड़ा घुसने पर दर्द होता है फातिमा!

छोटी अम्मी- जी चूत में नहीं जा रहा है. आप का वजन बहुत है मेरे शरीर में दर्द हो रहा है.
अब्बू- रंडी चुपचाप चोदने दे!

इसके बाद अब्बू अपना लौड़ा न्यू वाइफ की छोटी चूत में रगड़ने लगते हैं.
इसके बाद अपने मुंह से थूक लगा कर चूत मे डालकर छोटी अम्मी के ऊपर चढ़कर चोदने लगते हैं.

छोटी अम्मी- आ नहीं आ … उफ उफ उफ … आह ओह उफ़ उफ़!

नए घर में सिर्फ अब्बू और छोटी अम्मी ही थी इसलिए अब्बू छोटी अम्मी को जवानों की तरह चोद रहे थे, दोनों की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूंज रही थी.

अब्बू के हांफने की आवाज़ और छोटी अम्मी की आ उफ उफ आह ओह की आवाज़ के साथ-साथ एक आवाज़ और थी जो फच फच फच की थी.

छोटी अम्मी- अब हमें छोड़ दें. मेरा बदन बहुत दर्द कर रहा है.
अब अब्बू दो तीन शॉट लगाने के बाद रुके.

छोटी अम्मी को लगा कि अब अब्बू का हो गया है. जिस पर उन्होंने थोड़ी सांस ली.

लेकिन अब्बू कहा रुकने वाले थे … अब्बू ने छोटी अम्मी की चूत में अपनी उंगली डालकर जोर-जोर से आगे-पीछे आगे-पीछे करके चोदना शुरू कर दिया.
शायद अब्बू का लौड़ा काम नहीं कर रहा था तो अब्बू उंगली से ही काम चला रहे थे.

छोटी अम्मी- आ आह उफ़ … आह आह … ओह ओह मर गई! नहीं नहीं … आआ आआ ईईई … आआआ ईईई ऊयाल्ला मदद आ … उफ आ आ आह ओह ओह माई.

छोटी अम्मी अपना सिर दाएं और बाएं कर रही थीं.
शायद उन्हें बहुत दर्द हो रहा था.
लेकिन अब्बू रुके नहीं, वे उंगली डाले जा रहे थे.

अब अब्बू, छोटी अम्मी को उलटा लेटाकर उनके ऊपर चढ़कर चोदने लगे.
छोटी अम्मी की आवाज और तेज हो गई.

अब्बू ने छोटी अम्मी के मुंह को अपने हाथों से दबा दिया और चोदने लगे.
वे दो-तीन शॉट मारने के बाद रुके और अब छोटी अम्मी को घोड़ी बनाया और घापाघप शुरू कर दिया.

अभी घोड़ी बनाकर शुरू ही किया था कि वे अचानक रुक गए और छोटी अम्मी की गांड को चाटने लगे.
अपनी जीभ से कभी चूत तो कभी गांड को चाटने के बाद फिर उंगली डालकर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

मैं समझ गया कि अब अब्बू के लौड़े में दम नहीं रहा.

छोटी अम्मी- आआ आआआ उफ आ … ओह ओह … आह आह आआऊऊ ऊऊऊ!

उन्होंने अपना मुंह तकिए से दबा लिया और घोड़ी वाली पोज में गांड को रखा.
अब्बू भी उंगली करते रहे.

थोड़ी देर के बाद अब्बू रुके.

वे इतने पर ही नहीं रुके … उन्होंने छोटी अम्मी को अपना लौड़ा चुसवाया.

एक यही पोज था जिसमें अब्बू के साथ छोटी अम्मी भी मजे ले रही थीं.

छोटी अम्मी तो लौड़ा ऐसे चूस रही थीं जैसे किसी छोटी बच्ची को लॉलीपॉप मिल गया हो. वे उह लच पूच लप लप चप लप कर लौड़ा चूसे जा रही थीं.

अब्बू का लौड़ा बार-बार झड़ कर गिर जाता था.
लेकिन छोटी अम्मी उसे बार-बार खड़ा करके और चूस रही थीं.

दो बार झड़ने के बाद अब्बू ने छोटी अम्मी को रोका और धक्का लगा कर बेड पर गिरा दिया और ऊपर चढ़ गए.

छोटी अम्मी को लगा कि अब्बू फिर चोदेंगे. वे गिड़गिड़ाई- नहीं, अब और नहीं खुदा के वास्ते अब रहने दें.

अब्बू ने इस बार रहम करते हुए छोटी अम्मी के बूब्स को दबाना और चूसना शुरू कर दिया.
वीडियो में दिख रहा था कि अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स को बहुत जोर-जोर से दबा रहे थे.

छोटी अम्मी- आ आह ओह … माई उफ उफ … आआआ आई ईऊ उफ आआ आह… याल्ला आह ओह ओह!

कुछ देर के बाद अब छोटी अम्मी की आवाजें धीरे-धीरे कम होने लगीं.
फिर छोटी अम्मी ने अब्बू को अपने से नीचे गिराया.
शायद अब्बू थककर सो गए थे.

छोटी अम्मी ने उठकर एक कपड़े से अपनी चूत को साफ किया.
वे बेड से उतरीं.

लेकिन जैसे ही छोटी अम्मी का वह हिस्सा दिखने वाला था कि वीडियो बंद हो गया.
शायद यहीं पर फोन की बैटरी खत्म हो गई थी.

मेरा सारा मूड खराब हो गया.
मैं छोटी अम्मी का नंगे बदन को देखना चाहता था लेकिन मैं देख नहीं पाया.

लेकिन अब्बू और छोटी अम्मी की चुदाई वाले वीडियो को देखकर मेरे अंदर का शैतान जाग गया.
चुदाई तो मैंने पहले भी बहुत देखी थी.

आपको बता दूं कि जब मैंने पहली बार सेक्स किया था तो करते हुए अम्मी ने मुझे देख लिया था.
फिर क्या था … मेरी पिटाई भी बहुत हुई थी.
उस पिटाई के बाद मैंने फिर कभी चुदाई के बारे में नहीं सोचा.

लेकिन आज मेरा लौड़ा सिर्फ चूत के बारे में ही सोच रहा है और यही सोच रहा था कि किसको चोदूं.

छोटी अम्मी को सोचते-सोचते मैं कब सो गया, पता ही नहीं चला.

आंख खुली तो कोई दरवाजा खटखटा रहा था.
मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरी भाभी थीं.
शाहिद भाई जान की बीवी … वही मेरा शाहिद भाई जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है.
उनकी बीवी शहनाज.

भाभी घर को साफ करने आई थीं.

मैं वापस बैड पर आकर बैठ गया और भाभी घर साफ करने लगीं.

न जाने क्यों आज भाभी को देखकर मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा.
जबकि आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था.

मेरे भाईजान की शादी के 3 साल हो गए थे.
लेकिन आज भाभी के बदन को देखकर मेरी आंखें एक-एक इंच नाप रही थीं.
भाभी के बड़े-बड़े मम्मे दिख रहे थे जब वे झुक कर घर साफ़ कर रही थीं.

मैंने भी सोच लिया कि इस शहनाज का नाजायज पति तो बन कर ही रहूंगा.

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मेरा नाम राहुल है Hindi Porn Stories और मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी और माँ।

बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे और मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था।

अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था।

एक दिन की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई और कहा- दीदी आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है।

मैं चलने को तैयार हो गया और उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे और घर पर बस वही दोनों थी।

अंशु ने मुझे एक सोफे पर बैठाया और पानी लेने चली गई। तब तक सीमा अपनी किताब लेकर मेरे पास आ गई। उसने आसमानी रंग की एकदम पतली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसकी काली रंग की ब्रा-पैंटी साफ़ झलक रही थी।

पहले तो मैं थोड़ा शरमाया पर सब सही हो गया। वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और सवाल पूछने लगी। सवाल पूछते-2 वो कुछ ऐसा कर रही थी कि उसके स्तन मुझे दिख जाएँ। मेरी नजरें उसके वक्ष पर अटक गई। वह अपनी सफलता पर थोड़ा मुस्कुराई और फिर आगे पूछने लगी।

तब तक अंशु पानी लेकर आ गई। वह आगे बढ़ी और एक कुर्सी से टकरा गई और पानी मेरी पैंट पर गिर गया। मैं घबरा गया। सीमा के स्तन देखते हुए मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था।

अंशु ने मुझसे माफ़ी मांगी और एक तौलिया दे दिया। मैं बाथरूम में चला गया। तभी सीमा वहाँ आ गई और मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं काफी डर गया और अपना हाथ खींच लिया।

वो अंशु को बुलाते हुए बोली- देख रे कैसा शरमा रहा है, जैसे कभी लड़की ही नहीं देखी।

अंशु भी आ गई और वो दोनों मुझे बेडरूम में ले गई।

मैं सिर्फ अंडरवियर और शर्ट में था।

मुझे देख कर सीमा बोली- हाय रे ! कातिल कहाँ छुपा था अब तक?

अब उन दोनों ने मुझ पर सेक्सी कमेंट्स करने शुरु कर दिए।

मैं बेचैन हो गया और उनसे कहा- मुझे जाने दो !

पर वो भला कहाँ मानने वाली थी।

अंशु ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और मेरे शर्ट के बटन खोल दिए। सीमा भी आगे से मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने स्तनों को मेरे सीने पर दबाने लगी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डाला और मेरे लिंग को दबाने लगी।

तभी अंशु ने पीछे से एक ब्लू फिल्म चला दी और कहा- तुम तो काफी ठंडे लगते हो, क्या पहले तुमने ये सब नहीं किया?

मैंने ना में जवाब दिया।

ब्लू फिल्म देख कर मुझे भी जोश आने लगा और मेरा लिंग तनकर 8 इंच का हो गया।

मैंने सीमा की नाइटी उतार दी और ब्रा के बाहर से ही उसके उरोजों को दबाने लगा। क्या सॉलिड बूब्स थे उसके ! मन तो कर रहा था कि काटकर खा लो।

मैंने उसकी पैंटी में ऊँगली डाली और उसकी योनि में ऊँगली करने लगा। उसकी चूत में से पानी आने लगा।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और पैंटी भी उतार दी, उसने भी मेरा अंडरवियर उतार दिया। अब दोनों एकदूसरे के सामने नंगे खड़े थे। मैंने पहली बार चूत के दर्शन किए थे। उसकी गुलाबी रंग की चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसके बड़े-2 चूतड़ उसको और हसीं बना रहे थे।

मेरे लिंग को देखते ही वो बोली-कितने गंदे हो तुम ! कभी अपनी झांटें भी साफ़ कर लिया करो !

मैंने कहा- डर लगता है ! कहीं कट गया तो?

उसने अपनी बहन अंशु से ब्लेड मंगाया और कहा- आओ, मैं तुम्हारी झांटें बना देती हूँ।

वो मुझे बाथरूम में ले गई और झांटे साफ़ करने लगी और इस बीच मैं उसके स्तन दबाता रहा।

इसके बाद उसने शॉवर चला दिया और हम दोनों उसके नीचे भीगने लगे। एक तरफ पानी और दूसरी तरफ आग, पर आज पानी भी आग को नहीं बुझा पाया।

उसने मेरा लिंग मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को चूसता रहा और चूत में ऊँगली करता रहा।

उसका बदन जलने लगा और कहने लगी- अब और न तड़पाओ मुझे। चोद दो इस चूत को। फाड़ दो इसे अपने फौलादी लंड से।

मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने उसकी कमर पर हाथ लगाया और उसकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपना लंड आगे दिया। पर मेरा लंड किनारे हो गया। उसकी योनि काफी कसी थी। उसकी गुलाबी चूत शायद अभी तक कुंवारी थी। मैंने २-३ बार कोशिश की पर सफल नहीं हुआ।

फिर उसने मेरे लंड पर शैंपू लगाया और अपनी योनि पर भी। अब धीरे से उसने मेरे लंड को योनि के मुख पर टिकाया और मुझसे धक्का लगाने को कहा, वो खुद भी धक्का लगाने लगी। शैंपू की चिकनाहट के कारण लिंग योनि में सरकता चला गया।

आधा अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाईई और बाहर निकालने के लिए कहने लगी।

मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसके स्तन दबाने लगा। धीरे-2 उसका दर्द कम हुआ, तभी मैंने लिंग को थोड़ा बाहर खींच कर पूरी ताकत से पेल दिया। वो तड़प उठी।

मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा। धीरे-2 वो जोश में आने लगी और अपने चूतड़ उछाल-2 कर मजे लेने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी।

करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया पर मैं अभी भी लगा रहा।

पाँच मिनट बाद मैंने भी वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी और उसके ऊपर लेट गया।

तभी उसकी बहन अंशु वहाँ आ गई और कहने लगी- अब मेरी प्यास भी मिटा दो।

मैंने देखा सीमा वहीं शॉवर के नीचे पड़ी है और उसकी चूत से पानी और खून निकल रहा है।

मैंने सीमा को वहीं छोड़ा और अंशु के पास पहुँच गया।

जैसा मैंने पहले ही बताया था कि अंशु सीमा से भी ज्यादा सेक्सी माल थी और ऊपर से उसका गोरा रंग और गजब ढा रहा था।

मुझे ऐसा लगा की कोई परी मेरे सामने खडी है और कह रही है- आओ, मुझे चोद दो, मेरी चूत की प्यास बुझा दो।

मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और उसकी चूचियों का नरम-2 एहसास मुझे अपने सीने पर होने लगा।

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा, धीरे से मैंने उसके होंठों को थोड़ा काट लिया। उसके पूरे बदन में आग लग गई, उसने भी मुझे चूमना शुरु कर दिया।

फिर मैंने उसे थोड़ा अलग किया और उसके स्तन दबाने लगा। वो भी मेरा लिंग दबाने लगी और लिंग को चूसना शुरु कर दिया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा और उसके स्तनों को चूसने लगा।

अंशु की योनि तो सीमा से भी मस्त और कसी थी। उसको देख कर ऐसा लगता था मानो भगवान् ने फुर्सत में उसे बनाया है।

तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैंने भी अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, उसने पूरा वीर्य पी लिया और लिंग को चाट-2 कर साफ़ करने लगी।

मेरा लिंग एक बार फिर मैदान में आ गया और इस बार उसका निशाना सिर्फ अंशु की चूत थी। अंशु भी गरम हो गई थी और बार-2 मुझे छोड़ने का निमंत्रण दे रही थी।

मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। मुझे पता था कि अंशु की चूत भी अभी कुंवारी है इसलिए मैंने धीरे से उसकी योनि का मुँह फैलाया और उस पर लंड का सुपारा टिका दिया।

मैं उसके होंठों को चूमता रहा और एक उसके पुष्ट उरोजों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया और मेरा लंड आधा अंशु की चूत में पंहुच गया।

वो दर्द से चीख पड़ी पर मैंने उसे ज्यादा मौका नहीं दिया और उसके होंठों को चूसता रहा। उसकी झिल्ली फट चुकी थी, मैंने उसका कौमार्य भंग कर दिया था।

मैंने थोड़ा पीछे होते हुए पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में डाल दिया।

वो तड़प उठी पर थोड़ी ही देर में उसे मजा आने लगा और वो चूतड़ उछाल-2 कर साथ देने लगी।

करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे कुतिया की पोजिशन में कर दिया और फिर उसी तरह करीब आधे घंटे चलता रहा।

तभी उसने कहा- राहुल, अब मैं झड़ने वाली हूँ।

मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए। वो मुझसे चिपक गई और निढाल हो गई।

उस रात हम तीनों ने चुदाई के कई राउंड चलाये। जिसमें दो बार मैंने उन दोनों की गांड मारी और चूत को फाड़ कर भोंसड़ा कर दिया।

उसके बाद भी हमे जब भी मौका मिलता हम पूरा फायदा उठाते।

अंशु की चूत तो अब भी वैसी ही टाइट लगती है। कई बार मैंने उनकी सहेलियों के साथ भी सम्बंध बनाए।

पर यह अगली बार।

यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, जरूर बतायें, मुझे ईमेल करें ! Hindi Porn Stories

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