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मैं बड़ौदा का रहने वाला Hindi Sex Stories हूँ। मैं कई दिनों से अन्तर्वासना में आप लोगों की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। तो मैंने सोचा कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के साथ शेयर करूँ।
तो बात ऐसी थी कि मैं अकेला रहता हूँ। मेरी जॉब शाम को होता था तो मैं पूरा दिन अपने घर पर खाली रहता था। मेरे घर के एकदम बाजू के घर में एक सुन्दर सी भाभी रहती है। इंसान तो वो बहुत अच्छी है और मेरे साथ बहुत दोस्ताना बात भी करती है। कभी कभी मुझे खाना भी बना देती है। ऐसे करते करते एक सामान्य सा रिश्ता बन गया था। उनका एक लड़का भी है। लड़का शायद ११-१२ साल का होगा। वो स्कूल जाता है। उनकी पति नौकरी करते हैं। लेकिन थोड़ा दुबले पतले हैं।
उनकी समस्या यह थी कि वो तीनों एक ही कमरे में रहते हैं। इसीलिए पति- पत्नी के बीच सेक्स कभी-कभार ही होता था। जब उनका लड़का कहीं बाहर होता था। ११ साल का लड़का स्कूल के अलावा कहीं जाता नहीं था। उनका कोई खास रिश्तेदार भी नहीं थे। इसलिए सेक्स की भूखी रहती थी।
उनकी फिगर मैं क्या बताऊँ दोस्तों, बहुत ही अच्छी सेक्सी है। मैं जब भी उनको देखता था मेरा तो लण्ड कन्ट्रोल से बाहर हो जाता था। मैं कई बार मेरे घर में उनको सोचते सोचते मुठी मार देता था। लेकिन मैंने एक दिन सोचा कि यह रोज रोज मुठी मारने से अच्छा है कि एक बार साहस करके उनको बोल दूँ।
तो दोस्तो, मैंने ऐसा ही किया।
एक दिन उनका लड़का स्कूल गया था, पति भी नौकरी पे ! मैं घर पर अकेला था। वो कुछ काम के लिए आई। सॉरी, काम तो नहीं था, सुबह मुझे चाय पिलाने आई, बोली- मैं चाय बना रही थी तो सोचा कि तुम्हारी लिए भी बना लूँ ! लो चाय पियो !
तो मैंने उनको थैंक्स बोला। वो जाने लगी। मैंने सोचा कि अभी उनका मूड अच्छा है तो मैं अपनी गेम खेल सकता हूँ। तो मैंने उनको बोला- भाभी, आप अपनी चाय भी लेकर यहीं आ जाओ ! साथ में बैठ के पीते हैं और कुछ बात भी करेंगे।
वो बोली- ठीक है !
और वो चाय लेकर आ गई। हम दोनों ने चाय पी और कुछ बातें करने लगे।
तो मैंने उनको पूछा- भाभी, कई दिनों से मैं देख रहा हूँ कि आप कुछ उदास उदास लगती हो ! क्या बात है? आप तो उम्र में इतनी बड़ी नहीं लगती, तो अभी से आप को क्या टेंशन है? क्यूँ उदास-उदास रहती हो?
वो बोली- नहीं ऐसा कुछ नहीं है !
तो मैंने बोला- ऐसा ही है ! आप मेरे साथ शेयर कर सकती हो !
तो थोड़ी देर के बाद वो बोली- लाइफ में अभी मजा नहीं रहा ! सुबह से लेकर शाम तक बस काम करो और सो जाओ ! और कुछ नहीं !
मैंने पूछा- तो काम बहुत करना पड़ता है? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ क्या आपकी?
पहले तो वो न बोली कि नहीं इस बात में तुम कुछ मदद नहीं कर सकते। लेकिन मैं भी जिद पकड़ के बैठ गया कि कौन सी बात में मदद नहीं कर सकता?
तो अन्त में उसने अपनी वास्तविक समस्या बताई।
मैं बोला- भाभी, मैं क्यूँ मदद नहीं कर सकता ! मैं कर सकता हूँ !
वो बोली- क्या बात करते हो ! मजाक मत करो !
मैंने बोला- मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ !
वो बोली- ठीक है !
तो मैं आगे एक भी मौका न गंवाते हुए उनको चूम लिया ! ना आगे देखा न पीछे ! बस चूम लिया।
वो भी कामुक थी तो वो भी कुछ नहीं बोली और मेरे साथ मजा लेने लगी। पहले तो वो दरवाज़ा बंद कर दिया कि कोई आ न जाए !
वो थोड़ी मोटी थी और मुझे मोटी औरत बहुत अच्छी लगती है। उनके स्तन भी बहुत बड़े थे। उनकी गांड तो इतनी कामुक थी ….
मैं पहले से ही छोटी निककर में था। पहले पाँच मिनट तो मैं उनको किस करता रहा। इतने में उनकी आंसू निकल पड़े और बोली- बहुत दिनों के बाद आज मुझे मेरी प्यास बुझाने का मौका मिलेगा।
मैंने तो उनके आँसू भी पी लिए और उनका पूरा मुंह चाट लिया। वो गाऊन में थी। धीरे धीरे मैंने उनका गाऊन निकाल फेंका। अब वो खाली ब्रा और पैंटी में थी। धीरे से मैंने उनको बेड पर लिटा दिया और उनकी ब्रा खोलने लगा। ब्रा को खोलते ही मेरे पसंद की चीज मेरे हाथों में थी। मैंने जम क उनको किस किया। जैसे जैसे मैं चूसता रहा वो भी उतेजित होने लगी।
तब तक मैं उनको होठों से ले कर नाभि तक किस करता रहा। इतने में उसने खुद ही अपने पैंटी निकाल फेंकी और बोली- अब रहा नहीं जाता, तुम अपना लण्ड उसमें डालो ! मैंने कहा- इतनी जल्दी भी क्या है, आज तो पूरा दिन पड़ा है, सालों का मजा आज ले लो अच्छी तरह से !
धीरे धीरे मैं उनकी चूत चाटने लगा तो वो और भी गर्म हो गई और तरह तरह की आवाज निकालने लगी। इसक मतलब उनको भी मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने अपना हथियार उनकी चूत में डाल दिया। मुझे भी थोड़ा जोर लगाना पड़ा क्यूँकि काफी दिनों से उनके छेग में कुछ घुसा नहीं था। और वो भी चिल्ला उठी- धीरे धीरे करो !
मैं तो नहीं रुका और अपने काम में लग गया, धक्का देने लगा। वो भी उह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह् अह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह् करने लगी- ओह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह्छ ओह्ह्ह्छ करने लगी।
ऐसे करते करते १० मिनट के बाद वो झड़ गई और थोड़ी देर में मैंने भी अपना सारा का सारा माल उनके अन्दर डाल दिया।
वो बोली- नो प्रॉब्लम ! मेडीसिन ले लूंगी !
उस दिन हम लोगों ने ५ बार चोदा-चुदाई की। वो भी बहुत खुश हो गई और उस दिन के बाद तो हम लोग सप्ताह में तीन-चार बार तो सम्भोग कर लेते थे।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे लिखिए जरूर ! Hindi Sex Stories
रोज की तरह Antarvasna मेरे पति शराब की बोतल ले कर घर आ गये थे। मैंने उनके लिये शराब के साथ मांस पका कर रख लिया था। उसका दोस्त राजेश जो अभी कुँवारा था, साथ ही आता था। राजेश मुझे अक्सर घूरता तो रहता था पर मुझे उसकी नजरें बुरी नहीं लगती थी। उसकी शराफ़त मुझे भाती भी थी। शराब पीने के दौरान मेरे साथ पति की हरकतों को वो एन्जोय करता था।
आज भी वो दोनों शराब पी रहे थे। मैं नहाने के लिए बाथरूम में चली गई थी। मेरा पति ने तब तक हल्ला मचा कर मुझे बहुत गालियां दे डाली थी।
“मादरचोद रण्डी, गोश्त तेरा बाप लायेगा क्या… ?”
“रुको ना ला तो रही हूँ… “
मैंने जल्दी से मात्र पेटीकोट पहना और ऊपर एक हल्का सा टॉप डाल कर प्लेट में भुना मांस लेकर आ गई।
“भोसड़ी की ! गाण्ड मराने गई थी क्या … इधर ला… !”
राजेश मुझे देख कर मुस्करा रहा था। मुझे बहुत शर्म आ रही थी, पर ये गालियाँ मेरे लिये कोई नई नहीं थी। राजेश को मैंने चुपके से देखा और मन ही मन मुस्करा दी।
“जा कहाँ रही है… इधर आ… नहा कर आई है … तेरी भेन की चूत मारूँ … चिक्कन लग रही है !”
“बस भी करो ना … ” राजेश के सामने गालियाँ देना मुझे और भी आनन्दित कर रहा था।
“आजा मेरे लौड़े पर बैठ जा … हिच्च … तेरी चूत मार दूँ … “
मैं शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी… जाने राजेश क्या सोच रहा होगा।
क्या वो भी मुझे चोदने की सोच रहा था या …
नशे में धुत्त सा रहमान बोलता ही जा रहा था। उसने मेरी बांह पकड़ कर मुझे खींच लिया,” तेरी मां का भोसड़ा … ये देख मेरा लण्ड … आजा तेरी चूत में घुसेड़ दूँ !”
उसने सच में अपना लण्ड पैण्ट में से बाहर निकाल लिया … राजेश ने रहमान को सम्भालने की कोशिश की और फिर मेरी तरफ़ देखा।
“मां के लौड़े … चल हट … मेरी बीवी है … साली को चोद चोद कर मस्त कर दूंगा।”
पर शराब अधिक पी जाने से वो राजेश के हाथों में झूल गया। उसने रहमान को सोफ़े पर लेटा दिया। मैं जल्दी से उसका लण्ड पैण्ट में अन्दर डालने लगी।
मैंने राजेश को देखा और मुस्करा दी।
राजेश ने कहा,”बानो, मैं डाल दूंगा … ये तो कुछ भी नहीं है… ये ले … अब ज़िप लगा दे !”
यह सुनते ही मैं शरमा गई। उसने ही लण्ड अन्दर करके ज़िप लगा दी। उसने मेरी पीठ पर हाथ फ़ेरते हुये कहा,”शमीम, इसकी शराब छुड़ानी होगी !”
“अरे पीने दे, पी पी के साला मर जायेगा।”
तभी मुझे लगा कि उसका हाथ मेरी पीठ पर आ गया है। साले को नीचे आग लग रही है, पर कैसे कहूँ आग तो मेरी फ़ुद्दी में भी लगी हुई थी। उसके पीठ पर हाथ फ़ेरने से मुझे झुरझुरी सी होने लगी। मैंने तिरछी निगाहों से उसकी तरफ़ देखा। उसका लण्ड उठान पर था।
मैं समझ गई थी कि वो हाथ यूँ ही नही फ़ेर रहा है।
“भैया, ये तो देखो ना, मुझे कितनी गालियाँ देते हैं… “
“सच कहती हो भाभी, तुम हो ही इतनी प्यारी … दो जाम उतरते ही आपके लिये दिल में … “
मैंने उसके होंठो पर अंगुली रख दी,”धत्त भैया, ऐसा मत कहो, मुझे शर्म आती है … आप तो इनके जैसा मत कहो।”
उसके हाथ अब मेरे चूतड़ों की गोलाईयों तक पहुंच चुके थे। उसने एक बार नशे में धुत्त रहमान को देखा और मेरी तरफ़ बड़ी आस से देखा। मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उसने धीरे से मेरा एक चूतड़ का गोला दबा दिया। उसका लण्ड अब पूरा तन गया था। मैंने कोई विरोध नही किया। उसके हाथ मेरे दूसरे गोले पर भी पहुंच कर सहलाने लगे थे। मैंने धीरे से उसका हाथ हटा दिया।
अचानक उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं घबरा सी गई। पर मेरा जादू उस पर चल गया था।
“भैया … छोड़ो मुझे … यह क्या कर रहे हो… “
“ओह… सॉरी … तुम्हें देख कर मुझे भी नशा हो गया था … ” उसने मुझे छोड़ दिया।
मुझे बहुत ही बुरा लगा, मुझे लगा था कि वो मेरे साथ जोर जबरदस्ती करेगा और फिर मैं अपने आप को उसको सौंप दूगी। इस तरह मुझे एक ताजे नये लण्ड का मजा मिल जायेगा। पर ये तो बुद्धू निकला। हाय … पर मेरा अनुमान गलत निकला… कैसे भला … वो बुद्धू नहीं निकला ? मेरे बेडरूम में घुसते ही वो भी पीछे-पीछे आ गया और उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर पीछे से अपने से चिपका लिया।
“बानो … तू तो बहुत चिकनी है रे … मां कसम … चुदा ले एक बार… !”
“देखो राजेश … रहमान को पता चल गया ना तो तेरी गाण्ड मार देगा !”
उसने मेरे सीने के उभार अपनी हथेलियों में भींच लिये। मैं तड़प कर परे हट गई। उसने भी यूं तो शराब पी रखी थी पर नशा उसे शराब का नहीं, मेरा चढा हुआ था। उसने झपट कर मुझे अपने से चिपका लिया।
“अरे छोड़ ना, बड़ा मर्द बनता है … मुझे चोदना है तो ऐसे करेगा क्या ?”
“सच कहता हू बानो, तेरी आस तो मुझे कब से है … तेरे नाम की मैं तो रोज मुठ मारता हूँ … एक बार चुदा ले बस… मेरे दिल की हसरत निकल जाये !”
मैंने उसे अपने से फिर दूर किया और कहा,”चल ठीक है, मेरी बात मानेगा… पहले इस रहमान की गाण्ड मार … हरामी मुझे बहुत गालियाँ देता है !”
“बस , इतनी सी बात… ये तो मुझसे अक्सर गाण्ड मराता है … तू कहे तो इसकी मां को ही चोद दूँ !”
“चल उठा इसे, नीचे दरी पर सुला दे… “
राजेश ने उसे खींच कर नीचे दरी पर उल्टा लेटा दिया। मैंने तो सिर्फ़ पेटीकोट ही पहन रखा था, सो उसे उठा कर मैंने राजेश को अपनी चिकनी चूत दिखा दी…
“ये देख, है ना मस्त चूत … पर अब इसकी गाण्ड मार दे, तुझे ये चूत फ़्री में दूंगी।”
मैं जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी। उसे भी हंसी आ गई। मैंने और राजेश ने मिलकर उसकी पैण्ट खींच के उतार दिया और चड्डी भी उतार कर गाण्ड खोल दी। वो नशे में कुछ बड़बड़ा रहा था।
“बानो इसे देख कर तो लौड़ा खड़ा तक नहीं हो रहा है !”
“धत्त तेरे की, फिर क्या दम है तेरे में… ला तेरा लौड़ा मसल कर खड़ा कर दूँ।”
मेरा हाथ लगते ही उसका लौड़ा फ़ूल कर बड़ा होने लगा। जैसे जादू हो गया था। कुछ पलों में उसका लौड़ा सात आठ इन्च का हो गया। लण्ड खासा मोटा था पर थोड़ा टेढ़ा था। मैंने उसकी चमड़ी पीछे खींच कर सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। लण्ड की फ़ूली हुई नसें और चमकदार गुलाबी सुपाड़ा मुझे भी भा गया।
“चल सेट कर इसकी गाण्ड में लौड़ा… !” मैंने झुक कर रहमान के चूतड़ों के पट खोल दिये। बीच में काला-भूरा छेद नजर आने लगा था। मैंने एक थूक का लौंदा उस पर टपका दिया। फिर मैं अपनी चूची खोल कर उसके सामने मसलने लगी। मुझे देख कर उसका लण्ड और कड़क हो चला था। उसने रहमान की गाण्ड में अपना लण्ड घुसा दिया। रहमान थोड़ा सा बेचैन हुआ, पर नशे में बड़बड़ा कर रह गया। वो पूरा नशे में धुत्त हो चुका था।
मैंने राजेश की बनियान भी ऊपर खींच ली और अपनी कठोर चूचियाँ उसकी पीठ से रगड़ने लगी। वो और उत्साह से रहमान की गाण्ड मारने लगा। मैं भी उत्तेजना से भर गई। मैंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया। राजेश के सामने मैं नंगी हो कर खड़ी हो कर उसे अपनी चूत हिला कर दिखाने लगी।
“तेरी कसम बानो, मेरा निकल जायेगा … अब चूत मारने दे प्लीज !”
“अरे राजेश, मेरी चूत तो अब तेरी है … मस्ती से इसे चोद डालना … पर पहले इसकी गाण्ड तो पूरी मार … और अपना माल निकाल दे… !”
“आह्ह् … साले की गाण्ड अन्दर से गरम है … !” उसने जल्दी जल्दी लण्ड चलाना आरम्भ कर दिया। कुछ देर में गाण्ड के अन्दर ही उसका वीर्य निकल पड़ा।
“ले … हो गया ना … अब चूत मरा ले… !”
“जा ठीक से लण्ड धो कर आ … फिर आजा मेरे राजा… देख यह सब देख कर मेरी चूत क्या, चूतड़ भी लण्ड खाने को तैयार हैं… देख तबियत से चोदना मेरे राजा !”
फिर से उत्तेजित करने के लिये मैं उसे रिझाने लगी। उसने वहीं पर पानी के गिलास से अपना लण्ड धो लिया और कुछ ही क्षणों में वो फिर से तैयार था। मैं सीधे अपने बेडरूम में भागी। वो भी अपने खड़े लण्ड के साथ मेरे पीछे पीछे आ गया।
“बानो … तेरी कसम … तू तो चिक्कन माल है रे… अब तो खूब मजा आयेगा ना… “
“अभी नंगी खड़ी हूँ तेरे सामने, इसलिये ना … साला चूत देख कर मुँह में पानी आ रहा है, जब चोद देगा तो कहेगा, कौन बानो … कैसी बानो… !”
वो मुझसे लिपट पड़ा और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसाने लगा। मुझे भी उसके लण्ड के चुभन की मीठी मीठी सी टीस उठने लगी। वह बड़ी कोमलता से मेरी चूचियाँ सहलाने लगा, उसके हाथों स्पर्श मेरी चूत में गुदगुदी करने लगा। मैं अपने आप घोड़ी बनने लिये के लिये बेताब हो उठी, मैंने अपनी टांगें फ़ैला कर खूबसूरत गाण्ड पीछे उभार दी।
“राजेश, कुछ चिकनाई लगा दे रे … वर्ना गाण्ड फ़ट जायेगी !”
“वो तो पहले ही इतनी चिकनी है … फिर भी तेरी कोल्ड क्रीम क्या काम आयेगी।”
उसने कोल्ड क्रीम मेरे छेद पर लगा दिया और अंगुली को छेद में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा।
“हाय मेरे अल्लाह, बहुत मजा आ रहा है … और कर … पर जरा प्यार से … “
“तो मेरे लण्ड का क्या होगा… ?”
“उसके लिये तो चूत है ना… आह्ह्ह जल्दी जल्दी कर … यह तो मेरी चूत को झड़ा देगा रे … उफ़्फ़, इतना मजा … तेरी अंगुली है या … जरा और अन्दर घुसेड़ ना… “
“बानो, मेरा लौड़ा झड़ जायेगा ना… चोदने दे अब… “
“तो अंगुली को मेरी गाण्ड में डाले रख और ये ले मेरी चूत … “
उसने मेरा इशारा समझा और अपना लण्ड थोड़ा सा नीचे झुकाते हुये मेरी चूत पर रख दिया। उसके सुपाड़े का स्पर्श से लगा कि मेरी चूत के लायक वो बहुत मोटा है। फिर भी लगा कि चूत तो लण्ड के साईज़ के हिसाब से फ़ैल जाती है। सो मैंने उसके सुपाड़े पर जोर लगाया। उसका जोर भी लगा … पर लण्ड के घुसते ही जैसे मेरी चीख निकलने को हुई। वो तो बहुत मोटा था … रहमान का तो उसके सामने पतला और छोटा था। उसने अपने चूतड़ों का और जोर लगाया और बहुत ही कसता हुआ आधा लण्ड अन्दर उतर गया। मेरी आंखें दर्द से उबल पड़ी… ।
“मादरचोद फ़ाड़ ही डालेगा क्या ? … साला क्या लोहे का है… ?”
“बस हो गया बानो … ” वो मेरी गाण्ड में अंगुली घुमा कर मुझे आनन्द देने की कोशिश कर रहा था। पर अब मुझे बस जोर का दर्द हो रहा था। उसने गाण्ड में से अंगुली निकाल ली। मेरे कूल्हों को कस कर पकड़ कर उसने जोर का धक्का दे ही दिया। मेरी चूत को चीरता हुआ लण्ड पैंदे में बैठ गया। मेरे मुख से एक चीख फिर से निकल पड़ी।
“अल्लाह रे … ये क्या कर रहा है … लगता है तूने तो रहमान की गाण्ड की तो मां चोद कर रख दी होगी।”
“अरे नहीं … उसकी तो मैं अक्सर मारता रहता हूँ… उसकी तो आदत है।”
“अम्मी रे … मेरे तो भोसड़े में नहीं ही घुसता है तो … गाण्ड तो … अरे ये क्या… चिकना चिकना क्या है ” उस समय मुझे पता नही चला, पर खून निकल आया था।
“अरे कुछ नहीं … चल अब मस्त हो जा… ” उसका लण्ड मेरी चूत में पीछे से धीरे-धीरे अन्दर बाहर होने लगा … मेरा दर्द भी शनैः शैनेः कम होने लगा। कुछ ही देर में मेरी चूत का साईज़ लण्ड जैसा हो गया और वो आसानी से मुझे पेलने लगा। अब मुझे भी आनन्द आने लगा था। उसके मोटे लण्ड ने मेरे शरीर में तेज उत्तेजना भर दी। सच में मोटे लण्ड का तो मजा ही कुछ और ही है… ।
मैं झुकी हुई थी, मेरे हाथ पलंग पर टिके हुये थे। मेरी चूचियाँ नीचे झूल रही थी, वो तो बस कभी कभी मेरे चुचूकों को अपने अंगूठे और अंगुलियों से मसल डालता था और एक मीठी सी टीस शरीर में उभर आती थी। उसकी लण्ड को अन्दर बाहर करने की गति तेज होने लगी। मेरे जिस्म में तेज मीठी सी तरावट भरने लगी। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में कसता हुआ चल रहा था। रगड़ की मधुर आग तेज होने लगी थी।
चुदाई का असली मजा मुझे आने लगा था। रहमान का लण्ड अब मुझे नूनी सा लग रहा था। बस वो तो चूत में गुदगुदी ही कर पाता था, इतना मोटा लौड़ा खाने के बाद रहमान की चुदाई को तो मैं चुदाई अब कह ही नहीं सकती थी।
अब मुझे चुदाई की उत्तेजना चरम बिन्दु तक ले जा रही थी। मुझे तो बहुत आनन्द आ रहा था। अति उत्तेजना के कारण मेरे जिस्म में लहरें उठने लगी। चूत फ़ड़कने लगी। मेरी आंखें बन्द होने लगी। तभी मेरा सारा शरीर जैसे ऐंठ गया और चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं झड़ने लगी… मेरा चूत में लसलसापन बढ गया, इस पर सोने पर सुहागा … जैसे चूत के अन्दर बाढ़ सी आ गई। राजेश का वीर्य तेजी से छूट गया और मेरी चूत में भरने लगा। मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर ली। वो अन्दर वीर्य भरता रहा और फिर उसकी बूंदें मेरी चूत से अब चू पड़ी- टप टप करके वो जमीन को गीली करने लगी। वो अपना लण्ड चूत में घुसेड़े हुये हांफ़ने लगा। तभी उसका लण्ड सिकुड़ कर धीरे धीरे चूत के बाहर आ गया। मैं भी सीधी खड़ी हो गई। तभी मैं चौंक गई, वीर्य के साथ मेरी चूत में से खून भी टपक रहा था। शायद अन्दर चोट लग गई थी या लण्ड ने चूत को अपने साईज़ में लाने के लिये उसे रगड़ मारा था। मैं जल्दी से बाथ रूम में गई और साफ़ पानी से चूत को धो लिया। अब मेरी चूत में दर्द होने लगा था।
राजेश मुझे चोद कर जा चुका था। मैं बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी कि अब तक मैं इस छोटे से लण्ड साथ चुदा कर बहुत खुश थी, पर अब मैं खुश थी मोटे लण्ड से चुद कर। रहमान के चूतड़ पर राजेश का वीर्य पड़ा हुआ चमक रहा था … सोच में अब थी कि क्या ये रहमान सच में गाण्ड मराता था … साला गाण्डू निकला ये तो ! उसे ही निहारते हुये मेरी आंखें सपनों में खो गई … मुझ पर गहरी नींद छाने लगी … शायद सपने में वो दूर खड़ा राजेश ही था जो अपना मोटा लण्ड हिला हिला कर मुझे अपनी ओर बुला रहा था … Antarvasna
मैं एक बार फिर हाज़िर हूं Sex Stories आपकी सेवा में अपनी कहानी ले कर !
उम्मीद है कि आपको मज़ा आएगा। अगर कोई सुझाव हो तो वो अवश्य दें।
यार लड़कियाँ क्यों इतना शरमाती हैं मेल करने में?
कहानी पढ़ने में तो मज़ा आता होगा। बहुत सी तो अपनी चूत में कहानी पढ़ते-पढ़ते सचमुच में ऊँगली कर लेंगी लेकिन अगर कोई उन्हें अपना लण्ड देना चाहे तो वो इतने नखरे करेंगी कि उनका मन ही नहीं है चुदाई का !
मेरी आज की कहानी में भी कुछ इसी बात का ज़िक्र है।
हाँ तो दोस्तो ! जैसा कि मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया कि मैंने अपनी गर्लफ़्रेन्ड और उसकी सहेली की चुदाई की और मज़े किए। उसके बाद तो बस मुझे बस चुदाई का नशा ही छा गया था। छुट्टी के बाद स्कूल में मैंने सुधा जो कि मेरी गर्लफ़्रेन्ड है उससे मिलने के लिए कहा तो उसने कहा कि करिश्मा (जो कि उसकी दोस्त है) से पूछ के बताएगी।
उसने बताया कि करिश्मा की मम्मी अभी घर पे है और वो कही बाहर ही नहीं जाने वाले हैं, इसलिए जगह का इन्तजाम भी नहीं हो पा रहा है। करिश्मा का भी चुदाई का बहुत मूड था तो अब कमरे का इन्तजाम करने की सारी जिम्मेदारी मुझ पे आ पड़ी थी।
मेरा एक दोस्त, जिसका नाम रवि था, वो जम्मू का रहने वाला था और कमरा ले कर अकेले रहता था। मैंने उससे अपने चुदाई के किस्से बताये थे और उसका भी दोनों को चोदने का बहुत मन था, उससे कमरे के लिए कहा तो वो दोनों को अपने कमरे पे लाने के लिए कहने लगा।
हम लोग की परीक्षा भी करीब थी। लेकिन चुदाई का नशा भी ऐसा है कि बस और कुछ सूझता ही नहीं।
फिर मैंने सुधा से बताया कि कमरे का इन्तज़ाम हो गया है तो उसने पूछा- कहाँ?
तो मैंने उससे बता दिया कि रवि के कमरे पे. तब उसने वहाँ जाने से मना कर दिया और कहा कि नहीं मुझे नहीं जाना वहाँ ! वो बहुत रिस्की है ! और ना-नुकर करने लगी। लेकिन बाद में वो मान गई।
रविवार को मिलने का प्रोग्राम बना।
मैंने रवि से उसके कमरे की चाबी ले ले थी। सुधा ने घर पर ट्यूशन जाने का बहाना किया, हम लोग एक जगह मिले और रवि के कमरे पर आ गए। उसके कमरे पे कोई नहीं था। हम कमरे के अन्दर थे और आते ही सुधा मुझे पकड़कर चूमने लगी।
क्या मस्ती चढ़ी थी साली पर !
आज उसने जींस टॉप पहना था और कसम से क्या माल लग रही थी !
उसकी चुचियाँ अभी छोटी थी लेकिन अब मैं था ना उनको बड़ा करने के लिए !
साली चुचियो को जैसे ही छुआ, मुझको करंट लग गया। तनी, कड़ी और नुकीली चुचियों का मज़ा आ गया। हमने पहले आपस में खूब फ़ोर-प्ले किया। मैंने उसको खूब चूसा, चाटा और खूब उसका दूध पिया। मैंने उससे अपने लण्ड को चूसने के लिए कहा फिर हम ६९ पोसिशन में हो गए और मैंने उसका पानी निकल दिया। सुधा तड़प रही थी और उसको तड़पाने में मुझको मज़ा आ रहा था।
वो बार बार मेरे लण्ड को अपनी बुर में डालने के लिए कह रही थी। फिर मैंने उसको घोड़ी बनने को कहा और उसकी चूत चोदने लगा।
वो अह्ह्ह्ह्ह् ! ह्ह्छ उ ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्छ ! जैसी मस्त सेक्सी सेक्सी आवाज़ निकल रही थी। फिर मैं नीचे लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। अब उसने मेरे लण्ड को पूरा अपनी बुर में ले लिया और कूदने लगी।
आह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह् ! कितना मज़ा आ रहा था ! लग रहा था कि अन्दर लण्ड से कुछ टकरा रहा है। लण्ड पूरा अन्दर तक चला गया था। वो भी ऊह आह करके खूब उछल रही थी। तभी मैंने उसे नीचे उतार दिया और ऊपर मैं आ गया और २०-२५ धक्के लगाने के बाद में झड़ गया, लण्ड उसकी चूत के ही अन्दर था।
क्योंकि मैंने कंडोम पहना था ही। फिर हम वही लेट गए, तब वो कहने लगी कि आते समय उसने करिश्मा को बता दिया था कि वो मुझसे मिलने आ रही है तो वो भी जिद्द कर रही थी। तो मैंने उससे कहा कि मैं वहाँ पहुँच के कॉल करुँगी। फिर उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं उसे बुला लूँ?
मुझे और क्या चाहिए था !
मैंने कहा- बुला लो उसे !
मैं जाता हूँ और जहाँ मैं तुम्हें मिला था वहीं से उससे ले आता हूँ क्योकि उसने यह कमरा नहीं देखा है।
उसने कहा- ठीक है। फिर उसने करिश्मा को कॉल किया तो करिश्मा ने आधे घंटे में आने के लिए कहा।
तो मैंने उससे कहा- कह दो कि राहुल तुम्हें लेने जा रहा है।
तब तक मैंने सोचा कि अब सुधा की गाण्ड मार ली जाए !
फिर मैंने सुधा से कहा- तुमने मुझसे गाण्ड मरवाने का वादा किया था !
तो उसने कहा कि करिश्मा आ जाए तो उसकी भी साथ में मार लेना !
मैंने कहा- वो भी हो जाएगा ! लेकिन पहले तुम्हारी गाण्ड तो जरूर मारूंगा !
और मैंने उसको कुतिया स्टाइल में कर दिया, कमरे में पड़ी कोल्ड क्रीम उसके छेद पे और अपने लण्ड पे लगा दी और उससे कहा- थोड़ा दर्द होगा ! रोना नहीं ! बाद में मज़ा आ जाएगा !
और उसके छेद पर अपना लण्ड रख कर घुसाने लगा। लण्ड जैसे ही थोड़ा अन्दर गया वो दर्द से चिल्लाने लगी और गाण्ड मराने से मना करने लगी।
पर अब मैं कहाँ रुकने वाला था ! थोड़ा और अन्दर डाल दिया तो वो खूब जोर जोर से चिल्लाने और रोने लगी। मैं डर गया कि कोई आ ना जाए ! और तुंरत अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया।
फिर क्या ! उसने मुझसे गाण्ड नहीं मरवाई। मैं उसको चुप कराने लगा और कुछ देर बाद सब कुछ सामान्य हुआ। फिर उसने जा कर करिश्मा को लाने के लिए कहा। मैं करिश्मा को लेने चला गया। जब मैं और करिश्मा आए तो दरवाज़ा बंद था तो मैं उसको खुलवाने के लिए आगे बढ़ा तो अन्दर से चूमने-चाटने की आवाज़ आ रही थी।
मैं चौंक गया !
शेष आगे के भाग में….Sex Stories
पायल!’ मेरे सम्पादक की आवाज सुनते Hindi Porn Stories ही मैं सम्भल गई।‘हाँ बोलिए!’ मैंने अपनी जुबान में मिठास घोलते हुए कहा। मेरे सम्पादक रजनीश से मेरा वैसे भी छत्तीस का आंकड़ा है। वो बुरी तरह चीखता है मुझपर।
‘तुम्हें किशनपुरा जाना है, अभी इसी वक़्त!’ उसके आदेश करने वाले लहजे को सुन कर दिल में आया कि सामने हो तो दो चार गालियाँ जरूर सुनाती।
क्यों?’ उसे शायद मुझसे इस तरह के सवाल की ही उम्मीद थी।
‘तुम्हें किशनपुरा के गुरू अचलानन्द का सम्पूर्ण-साक्षात्कार लेना है!’
‘क्या?’ मैं ख़ुशी से उछल पडी। काफ़ी दिनों से गुरूजी का साक्षात्कार लेना चाहती थी। बहुत सुन रखा था उनके बारे में। बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व के आदमी थे। किशनपुरा जो कि हमारे यहाँ से कोई बीस-बाईस किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है। वहाँ काफी लम्बी-चौड़ी जगह में उनका आश्रम था। काफी भक्त भी थे उनके। बीच बीच में दबी जुबान में कभी कभी उनके रंगीले स्वभाव के बारे में भी अफवाह फ़ैल जाती थी।
‘उनके बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करनी है तुम्हें!’ रजनीश ने आगे कहा- कम से कम चार-पाँच सप्ताह की सामग्री हो जिसे हम हर रविवार विशेष बुलेटिन में जगह देंगे. इसके लिये तुम्हें कई दिन मन लगा कर काम करना होगा। यह तुम्हारी इच्छा है कि तुम वहीं रहो या प्रतिदिन वहाँ जाओ, लेकिन हमें सम्पूर्ण सूचनाएँ चाहिएँ, सुबह से शाम तक, गुरूजी के बारे में हर तरह की बातें, कुछ प्रवचन में भी ध्यान करना। सुन रही हो ना मेरी बातें?’
‘हाँ… हाँ सर! मैं आज से ही काम पर लग जाती हूँ!’
‘आज से ही नहीं अभी से!’ कह कर उसने फ़ोन रख दिया।
जरूर बुड्ढा गाली निकाल रहा होगा! लेकिन मैं तो काफ़ी दिनों से किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए तरस रही थी। मुझे ख़ुशी से चहकते देख मेरे पति जीवन ने मुझे बाँहों में भर कर चूम लिया। मैंने उन्हें सारी बात बताई, वो भी मेरी ख़ुशी में शरीक हो गए।
मैं अपने बारे में बताना तो भूल ही गई. मैं पायल, पायल लाल, 26 साल की एक सेक्सी महिला हूँ। मेरी शादी जीवन लाल से आज से चार साल पहले हुई थी। हम दोनों यहाँ लखनऊ स्टेशन के पास ही रहते हैं। मैं एक समाचारपत्र में वरिष्ठ सम्वाददाता के पद पर हूँ. हमारे समाचारपत्र की बहुत अच्छी प्रसार-संख्या है. मैं वैसे तो किसी विशेष केस को ही अपने हाथ में लेती हूँ. वरना आजकल सम्पादन का काम ही देख रही हूँ जो कि बड़ा ही बोरिंग काम है. घूमना-फिरना और नए-नए लोगों से मिलना मेरा शुरू से ही मनभावन कार्य रहा है।
हम दोनों के अलावा हमारे साथ मेरी सास रहती हैं, मेरे एक बच्चा है जो अभी एक साल का ही हुआ है। कामकाजी महिला होने के बावजूद मैं अपने बच्चे को जब भी मैं घर पर होती हूँ तो बच्चे को स्तनपान ही कराती हूँ लेकिन इससे मैं बहुत उत्तेज़ित हो जाती हूँ और फ़िर तो आप समझ ही गए होंगे कि जीवन साहब का क्या हाल होता होगा!
मेरे स्तन 38 आकार के हैं और दूध भरे होने के कारण एकदम तने रहते हैं। मेरे पति जीवन शादी के बाद से ही मुझे अंग-प्रदर्शन के लिए जोर देते थे। उन्हें किसी को मेरे बदन को घूरना बहुत अच्छा लगता है। इसके लिए मुझे हमेशा कसे हुए, बदन से चिपके हुए कपडे पहनने के लिए कहते हैं और ब्लाऊज़ का गला और पीठ तो इतनी गहरे होते हैं कि आधे वक्ष बाहर दिखें!. कभी कभी तो उनके कहने पर अर्ध-पारदर्शी कपडे पहन कर या बिना ब्रा के ब्लाऊज़ पहन कर भी बाहर जाती हूँ।
खैर अब उस बात पर लौटते हैं।
मैंने एक काफ़ी लो-कट कसी हुई टी-शर्ट पहनी और एक टांगों से चिपकी हुई जींस। गरमी का मौसम था इसलिए नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। मेरे चूचुक बाहर से साफ दिख रहे थे।
‘कैसी लग रही हूँ?’ मैंने पूछा।
‘ह्म्म्म! हमेशा की तरह सेक्सी!’
‘अनीष का ख्याल रखना! हो सकता है लौटने में देर हो जाये, मैं कार ले जा रही हूँ।’
मैं अपनी कार पर किशनपुरा के लिए निकल गई। गरमी का मौसम था, कुछ ही देर में गर्म हवाएँ चलने लगी। मैं दस बजे तक किशनपुरा पहुंच गई।
गुरूजी का आश्रम बहुत ही विशाल था। अन्दर की सजावट देख कर मेरा मुँह तो खुला का खुला रह गया। मैं वहाँ गुरूजी से मिली। गुरूजी बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व के आदमी थे। उनके चेहरे में एक चमक थी, घनी दाढ़ी में चेहरा और भरा-भरा लग रहा था। कोई 6’2′ या 3′ कद होगा, चौड़ा बालों से भरा सीना किसी भी महिला को पागल करने के लिए काफ़ी था। उसने नंगे बदन पर एक लाल तहमद बाँध रखी थी और एक लाल दुपट्टा कंधे पर रख रखा था।
उन्होंने बिना कुछ बोले मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। मेरे स्तनों को देखते हुये मुझे लगा कि उनकी आँखों में क्षण भर के लिए एक चमक सी आई फ़िर ओझल हो गई। मुझे हाथ से बैठने का इशारा किया। वो तब किसी पत्रिका के पन्ने पलट रहे थे। मैंने उनको अपने आने का मकसद बताया। उन्होंने मुझे बैठने को इशारा किया। मैंने अपना पहचान-पत्र उनके सामने कर दिया। उनके चहरे पर एक बहुत ही प्यारी सी मुस्कान सदा ही बनी रही थी. मेरे बारे में औपचारिक पूछताछ के बाद उन्होंने अपने एक शिष्य को बुलाया- इनको मेरे बगल वाला कमरा दिखा दो। कुछ सामान हो तो वो भी पहुँचा देना, ये हमारी खास अतिथि हैं, इनका पूरा ध्यान रखा जाए। मोनिका जी को इनके साथ रहने को कह देना, वो हमारे बारे में इनकी सारी जिज्ञासा शांत कर देंगी।’
धीरे-धीरे और मृदु स्वर में उन्होंने कहा, स्वर बहुत धीर और गम्भीर था।
‘गुरूजी अपके पाठ का समय हो गया है!’ उस आदमी ने उनसे कहा।
गुरूजी उठते हुये मेरे सिर पर हाथ फेरा तो लगा मानो एक चुम्बकीय शक्ति उनके हाथों से मेरे बदन में प्रवेश कर गई।
‘तुम आराम करो और चाहो तो आश्रम में घूम फ़िर कर देख भी सकती हो, मोनी तुम्हें सब जगह दिखा देगी।’ कह कर वो चले गए।
मोनी नाम की लड़की कुछ ही देर में आ गई। उसने लाल रंग का एक किमोनो जैसा वस्त्र पहन रखा था, जैसा पहाड़ी इलाके में लडकियाँ पहनती हैं, वो बहुत ही ख़ूबसूरत थी और बदन भी सेक्सी था। उसने मुझे एक कमरा दिखाया, कमरा काफ़ी खूबसूरती से सजा हुआ था, मानो कोई फाइव स्टार होटल का कमरा हो।
तभी एक युवती कोई शरबत लेकर आई. उसका स्वाद थोड़ा अजीब था, मगर उसे पीने के बाद तन-बदन में एक स्फूर्ति सी छा गई। मोनी ने पूरा आश्रम घुमाया, बहुत ही शानदार बना हुआ था। उसने फ़िर सबसे मेरी मुलाक़ात कराई। वहाँ 12 आदमी और 5 महिलाएं रहती थी। महिलाएं सारी की सारी खूबसूरत और सेक्सी थी। सबने एक जैसा ही गाऊन पहन रखा था, जो क़मर पर डोरी से बंधा था। उन्होंने शायद अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था क्योंकि चलने फिरने से उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ हिलती डुलती थी। आदमी सब क़मर पर एक लाल लुंगी बाँधे थे।
दोपहर को खाना खाने के बाद गुरूजी कुछ देर विश्राम करने चले गए। शाम को उनका हॉल में प्रवचन था। मैं उनके संग रहने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही थी, बहुत ही अच्छा बोलते थे, मैं तो मंत्रमुग्ध हो गई।
शाम की आरती के बाद आठ बजे मुझे उन्होंने वार्तालाप के लिए बुलाया। मैं उनसे तरह तरह के सवाल पूछने लगी। वो बिना झिझक उनके जवाब दे रहे थे। उनके जवाब मैं वॉकमैन में रेकॉर्ड कर रही थी मैं उनके जवाब रेकॉर्ड करने के लिए उनकी तरफ झुक कर बैठी थी जिसके कारण मेरे टी-शर्ट के गले से बिना ब्रा के मेरे स्तन और चूचुक साफ दिख रहे थे। गुरूजी की नजरें उनको सहला रही थी। अचानक मेरी नजरें उनके ऊपर पड़ी, उनकी आँखों का पीछा किया तो पता चला कि वो कहाँ घूम रही हैं, मैं शरमा गई लेकिन मैंने अपने दूध की बोतलें छिपाने की कोई कोशिश नहीं की। मैंने अपने बातों की दिशा थोड़ी बदली- गुरूजी अपके बारे में तरह तरह की अफवाह भी सुनने को मिलती हैं?’ मैंने पूछा लेकिन उनके चेहरे पर खिली मुस्कराहट में कोई बदलाव नज़र नहीं आया।
‘जब भी कोई लोगों की भलाई के लिए अपना सब कुछ लगा देता है तो कुछ आदमी उस से जलने लगते हैं, अच्छे मनुष्य का काम होता है की बगुले की तरह सिर्फ मोती चुन ले और कंकड़ को वहीँ पडे रहने दे!’ उन्होंने बड़ी ही मधुर आवाज में मेरे प्रश्न का जवाब दिया। इसी तरह काफ़ी देर तक बातें होती रही।
उन्होंने बातों-बातों में मुझे कई बार उनके आश्रम से जुड़ने के लिए कहा।
रात के साढ़े नौ बजे मैंने उनसे अब घर जाने की इजाजत मांगी।
लेकिन तभी उनके एक शिष्य ने आकर बताया कि बाहर काफ़ी तेज़ बरसात शुरू हो गई है। मैं बाहर आई तो देखा बरसात काफ़ी तेज हो रही है। मैं अकेली और बाईस किलोमीटर का सुनसान रास्ता! कुछ देर तक मैं बरसात के रुकने का इंतज़ार करती रही मगर बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैं अन्दर आ गई। अचलानन्द जी मुझे वापस आता देख खिल उठे। उन्होंने फौरन मोनी को बुलाया- इनके भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर दो!’
मोनी ने मुझे अपने साथ आने का इशारा किया। मैं उसके साथ अपने कमरे में आ गई। उसने एक किमोनो मुझे लाकर दिया। वो मुझे लेकर बाथरूम में आ गई। बाथरूम की एक दीवार पर लम्बा चौड़ा आइना लगा हुआ था। वो तो बाद में पता चला कि वो एक एक-तरफ़ा शीशा था जिसके दूसरी तरफ से बाथरूम के अन्दर का सारा दृश्य साफ दिखता था।
‘अपने कपडे उतार कर इसे पहन लो!’ मेरा चेहरा उसकी ओर था और आइना मेरे पीछे की ओर था. मैंने अपने टी-शर्ट को पकड़ कर अपने बदन से अलग कर दिया। मेरे गोरे बदन पर तने हुये 38 आकार के स्तन देख कर उसकी आँखों में एक चमक आ गई- तुम बहुत ख़ूबसूरत हो’ उसने मेरे स्तन को हल्के से छूते हुये कहा।
मैंने अपनी जींस को खोल कर अपने पैरों के नीचे सरका दी, उसे अपने बदन से अलग कर के मोनी को थमा दिया। फ़िर मैंने उसके हाथ में थामे किमोनो को लेने की कोशिश की तो उसने अपने हाथ को दूर कर लिया- नहीं मैंने कहा था कि सारे वस्त्र खोल दीजिये, इसे पहनते समय शरीर पर और कोई अपवित्र वस्त्र नहीं होना चाहिए’ उसने मेरे बदन पर मौजूद एक मात्र पैन्टी के इलास्टिक की तरफ हाथ बढाया- अपनी पैन्टी को धीरे धीरे नीच करते हुये पीछे घूमो!’ कह कर वो आइने वाली दीवार की तरफ चली गई। मुझे तो समझ में नहीं आया कि वो ऐसा करने को क्यों कह रही है। लेकिन मुझे क्या पता था कि इस तरह से दीवार के उस तरफ मौजूद लोगों के लिए मैं अनावृत होकर गर्मागर्म अंग-प्रदर्शन कर रही थी। मैंने आइने की तरफ घूम कर नीचे झुकते हुये अपने पैरों से अपनी पैन्टी को निकाल दिया।
‘अब सीधी खड़ी हो जाओ!’
मैं सीधी हो गई, बिल्कुल नग्न!
‘वाह! क्या शानदार बदन है आपका!’ कह कर उसने मेरी योनि के ऊपर अपना हाथ फेरा।
मैं उसकी हरकतों से मुस्कुरा उठी, फ़िर मैंने उसके हाथों से वो किमोनो लेकर बदन पर पहन लिया।
फ़िर हम बाहर आ गए।
रात का भोजन करके मैंने जीवन को फ़ोन किया कि मुझे रात को यहाँ रुकना पड़ रहा है इसलिए बच्चे का ख्याल रखे।
फ़िर मैं अपने कमरे में आ गई। कमरा बहुत शानदार था, नर्म बिस्तर पर सफ़ेद रेशमी चादर माहौल को और अनुपम बना रही थी। एक दरवाज़ा बगल में भी था जो दूसरी तरफ से बंद था और उसमें मेरे कमरे की तरफ से बंद करने के लिए कोई कुण्डी नहीं थी। मैं बिस्तर पर लेट गई। भोजन के बाद मुझे एक ग्लास भर कर कोई जूस दिया था, पता नहीं उसकी वजह से या वहाँ के माहौल से मेरा बदन गर्म होने लगा।
मैं उठी और उस किमोनो को अपने बदन से अलग कर पूरी तरह नग्न बिस्तर पर लेट गई और एक रेशमी चादर अपने बदन पर ओढ़ ली। कुछ देर में मेरा बदन कसमसाने लगा, मेरी अन्तर्वासना जागृत होने लगी, कान-पिपासा से वशीभूत हो मैंने अपने हाथ अपनी योनि पर रख दिया और उसे ऊपर से दबाने लगी। मन कर रहा था कि कोई आ कर मुझे मसल कर रख दे। मेरे स्तनाग्र विराट रूप धारण करने लगे थे, मैं अपनी उँगलियों के पौरों से उन्हें मसलने लगी। मैं अपनी दो उँगलियाँ अपनी योनि के अन्दर-बाहर करने लगी।
मगर मेरी भूख थी कि बढ़ती ही जा रही थी। कोई आधे घंटे बाद हल्की सी आवाज आई। मैंने देखा- बिना आवाज के बगल वाला दरवाजा खुल रहा है। मैं चुपचाप चित्त हो कर लेट गई। हल्की सी आँखें खोल कर देखा कि कोई कमरे में आ रहा है, वो धीरे धीरे चलता हुआ मेरे बिस्तर के पास आया, उसने अपना हाथ उठा कर मेरे एक उभार पर रखा, उसे मेरी एक छाती पर रख कर दबाया बहुत धीरे से। फ़िर उसने चादर के किनारे को पकड़ कर मेरे बदन से हटाना शुरू किया, रेशमी चादर मेरे नाज़ुक चिकने बदन से सरकती रही और मैं पूर्ण अनावृत हो गई।
अब एक हाथ ने मेरे नग्न हो चुके चूचुक को धीरे से छुआ। उसने मुझे सोया हुआ जान कर अपना हाथ मेरे सिर पर रख कर धीरे धीरे नीचे सरकाना शुरू किया, इतना हल्का स्पर्श था मानो बदन पर कोई मोर-पंख फिरा रहा हो। हाथ धीरे धीरे सरकता हुआ जब योनि के ऊपर पहुँचा तो मेरा चुपचाप पड़े रहना मुश्किल हो गया, मेरे होंठों से एक दबी सी सिसकारी निकल गई, उसने अपना हाथ चौंक कर हटा लिया।
मैंने मानो नींद से जागते हुये कहा- कौन… कौन है?
मैं बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई।
‘मैं!’ एक हलकी सी आवाज आई और उसने मुझे खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया। मैं भी किसी बेल की तरह उसके बदन से लिपट गई। मैं समझ गई कि आगंतुक गुरूजी ही हैं। उनका बदन भी पूरी तरह नग्न था, वे मेरे चहरे को अपने हथेलियों के बीच लेकर चूमने लगे। मेरा शरीर तो पहले से ही कामाग्नि में तप था, मैं भी उसके चुम्बनो का जवाब देने लगी। मैं उसके चहरे को बेतहाशा चूमने लगी। मैं एक शादीशुदा महिला, अपने पति, बच्चे सब भूल गई थी। याद रही तो एक आदिम भूख जो मेरे पूरे अस्तित्व पर हावी हो चुकी थी।
उसके होंठ मेरे होंठों को मथ रहे थे, मेरे निचले होंठ को उसने अपने दांतों के बीच दबा कर धीरे धीरे काटना शुरू किया। फ़िर उसने अपनी जीभ मेरे होंठों से बीच से सरका कर मेरे मुँह में डाल दी। मैं उनकी जीभ को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई रसीला फल हो। कुछ देर तक हम यूँही एक दूसरे को चूमते रहे।
उसके बाद उनके होंठ फिसलते हुये मेरे एक चूचुक पर आकर रुके और अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगे। मेरे सारे बदन में एक सिहरन सी दौड़ने लगी और मेरे स्तनों से निकल कर उन फलों का रस गुरूजी के मुँह में जाने लगा। वो एक स्तन को अपने मुँह में लेकर उससे दूध पी रहे थे और दूसरे को अपनी उँगलियों में लेकर खेल रहे थे। मैं अपने सिर को उत्तेजना में झटकने लगी और उनके सिर को अपनी छाती पर जोर से दबाने लगी। एक स्तन का सारा रस पीने के बाद उन्होंने दूसरे स्तनाग्र को अपने मुँह में ले लिया और उसे भी चूसने लगे। मैंने देखा कि पहला चूचुक काफ़ी देर तक चूसने के कारण काफ़ी फूल गया है।
मैंने उत्तेजनावश अपना हाथ बढ़ा कर उनके लिंग को अपनी मुट्ठी में ले लिया। उनका लिंग तना हुआ था. काफ़ी बड़ा लिंग था. इतना बड़ा लिंग मैंने तो कभी किसी का नहीं देखा था, कोई 7-8″ लम्बा होगा।
गुरूजी ने दूसरे वक्ष का भी सारा दूध पीने के बाद मुझे अपने से अलग किया और एक हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास लगे बेड लैंप को रोशन कर दिया। हल्की सी रौशनी कमरे में फ़ैल गई। सारे कमरे में अँधेरा था सिर्फ़ हम दोनों के नग्न बदन चमक रहे थे। उस रौशनी मुझे अपने से अलग कर गुरूजी ने मेरे नग्न बदन को निहारा, मैंने भी उनके गठीले बदन को भूखी नजरों से देखा।
‘बहुत खूबसूरत हो!’ गुरूजी ने मेरे बदन की तारीफ़ की तो मैं एक दम किसी कमसिन लड़की की तरह शरमा गई. फ़िर उन्होंने मुझे कन्धों से पकड़ कर नीचे की ओर झुकाया। मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। मैंने लैंप की रौशनी में पहली बार उनके लिंग को देखा। उसे देख कर मेरे मुँह से हाय निकल गई।
‘काफ़ी बड़ा है गुरुजी! मैं इसे नहीं ले पाऊँगी! फट जायेगी मेरी!!!’
‘अभी से घबरा गई! इसीलिए तो मैं कह रह था कि हमारे आश्रम की सदस्य हो जाओ। जो भी एक बार मेरे सम्पर्क में आती है वो मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती और किसी लिंग से योनि नहीं फटती, योनि होती ही ऐसी है कि लिंग के हिसाब से अपना आकार बदल ले!’
मैं घुटनों के बल बैठ कर कुछ देर तक अपने चेहरे के सामने उनके लिंग को पकड़ कर आगे पीछे करती रही। जब हाथ को पीछे करती तो लिंग का मोटा सुपाड़ा अपने बिल से बाहर निकाल आता। उनके लिंग के छेद पर एक बूँद प्री-कम चमक रही थी. मैंने अपनी जीभ निकाल कर लिंगाग्र पर चमकते हुये उस प्री-कम को अपनी जिव्हाग्र पर ले लिया और मुख में लेकर उसका स्वाद लिया जो मुझे बहुत भाया। फ़िर मैंने अपनी जीभ उनके लिंग के सुपाड़े पर फिरानी शुरू कर दी।
वो आ आआ अह ऊ ओ ह्ह्ह करते हुये मेरे सिर को दोनों हाथों से थाम कर अपने लिंग पर दबाने लगे।
‘इसे पूरा मुँह में ले लो!!’ गुरूजी ने कहा।
मैंने अपने होंठों को हल्के से अलग किया तो उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी जीभ को रगड़ता हुआ अन्दर चला गया। मैंने उनके लिंग को हाथों से पकड़ कर और अन्दर तक जाने से रोका मगर उन्होंने मेरे हाथों को अपने लिंग पर से हटा कर मेरे मुँह में एक जोर का धक्का दिया, मुझे लगा आज यह एक फ़ुट लम्बा लिंग मेरे गले को फाड़ता हुआ पेट तक जा कर मानेगा। मैं दर्द से छटपटा उठी, मेरा दम घुटने लगा था। तभी उन्होंने अपने लिंग को कुछ बाहर निकाला और फ़िर वापस उसे गले तक धकेल दिया. वो मेरे मुँह में अपने लिंग से धक्के लगाने लगे।
कुछ ही देर में मैं उनकी हरकतों की अभ्यस्त हो गई और अब मुझे यह अच्छा लगने लगा। कुछ ही देर में मेरा बदन अकड़ने लगा और मेरे चूचुक एकदम तन गए, गुरूजी ने मेरी हालत को समझ कर अपने लिंग की रफ़्तार बढ़ा दी।
इधर मेरा रस योनि से बाहर निकलता हुआ जांघों को भिगोता हुआ घुटनों तक जा बहा, उधर उसका ढ़ेर सारा गाढ़ा रस मेरे मुँह में भर गया। मैं इतने वीर्य को एक बार में सम्भाल नहीं पाई और मुँह खोलते ही कुछ वीर्य मेरे होंठों से मेरी छातियों पर और नीचे जमीन पर गिर पड़ा। जितना मुँह में था उतना मैं पी गई।
तभी कहीं से एक मधुर आवाज आई- नहीं लड़की! इनके प्रसाद का इस तरह अपमान मत करो!’
मैंने चौंक कर सिर घुमाया तो देखा कि मोनी अँधेरे से निकल कर आ रही थी। उसने वही लबादा ओढ़ रखा था। उसने मेरे पास आकर मेरे होंठों पर लगे वीर्य को अपनी जीभ से साफ किया, अपनी उँगलियों से मेरे स्तनों पर लगे वीर्य को उठा कर मुझे ही चटा दिया। फ़िर उसने मुझे झुका कर जमीन पर गिरी वीर्य की बूंदों को चटवा कर साफ कराया। Hindi Porn Stories
सभी दोस्तों को मेरा सादर प्रणाम और प्यारी भाभियों Sex Stories और कुंवारी चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम!
मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ। दोस्तो, मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ। मेरी उमर 38 साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और 6″4″ लम्बा हूँ। मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।
जैसा कि अक्सर कहानियों में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कहीं अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।
हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है। यह एक बहुत ही सुंदर लेक है और यहाँ के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं। पर यहाँ की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंने बहुत बाद में जाना। मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपने एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होने के कारण हैंडसम भी दीखता था। लेकिन मुझे अपने लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे।
मेरे घर के सामने ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने सभी सपने सन्जोए।
एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामने से आती हुई 3 लड़कियों पर नज़र पड़ी। उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती हैं। तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी। हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुँचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई। मैं सिर्फ़ बनियान और नेकर में था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसने भी मुझे भरपूर नज़र देखा।
मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होने से मैं नीचे पत्थर नहीं देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनों लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई। मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मैं कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नहीं जा पाया.
ठंड का मौसम चल रहा था, हमारे मोहल्ले में एक शादी थी। मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे। उस शादी में मैं अपने ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था। और मैं ज्यादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदने या दर्शन करने के। पर किस्मत ख़राब … कोई नहीं मिली।
तभी मुझसे किसी खनकती आवाज ने कहा- सुनिए, आप तो बहुत अच्छे लग रहे हैं आप और बहुत मेहनत भी कर रहे हैं यहाँ!
मैंने जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मैं गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमें 3 टाँके लगे हुए थे और घुटने का भी हाल कुछ अच्छा नहीं था. मैंने देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी।
मैंने कहा- आ आप … आपने मेरे से कुछ कहा?
“यहाँ ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे!” वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली।
“आप लोग तो हंस कर भाग गई … मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी।” मैंने कहा।
मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की कुसुम जिसे मैं पहले पटाने की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लड़ाई हो गई थी.
कुसुम ने मेरे से मुँह चिड़ाते हुए कहा इनको- च्च्च च्च छक … अरे!! अरे!! बेचारा … देव भैया अभी तक कोई मिली नहीं तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरने लगे!
और खिलखिला कर हंस दी.
मैंने कुसुम के कई सपने देखे मैं कुसुम को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कहीं ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छू रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है, उसके बूब्स टच होने से मेरा लंड खड़़ा हो जाता है तो मैं धामोनी रोड के जंगल मैं गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपने गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया (बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मैं उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपड़ों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटने लगा कुसुम भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो … मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है … कह रही है और मैं कुसुम को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदने लगता हूं। पहले कुसुम का पानी छूटता है फिर मेरा। जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारने से लंड लाल हो गया है.
मुझे बहुत बुरा लगा कुसुम के तानों से मेरी बेइज्ज़ती हुई थी वहाँ से मैंने इन दोनों को सबक सिखाने का ठान लिया। मैंने गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठने वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहने यहाँ वहाँ घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे। पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था। मैंने कुसुम को उसके हाल पर छोड़ कर अपने टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करना उचित समझा.
मैं उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था। मेरा तकिये के कोने मेरे स्पर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे। पर कोई लड़की अभी तक पटी नहीं थी।
इस बार मैंने हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया। जहाँ वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा- आप क्या लेंगी और … कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए…
भीड़ बहुत थी उस शादी में … वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खाने लगी।
मैंने उसको पूछा- आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही हैं। मेरा नाम देव है आपका नाम जान सकता हूँ?
फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा, हल्के से मुस्कुराते हुए बोली- अभी नहीं, सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया!
मैंने उसका नाम वहीं उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था। उसका नाम मीनू था। वो मेरे घर के ही पास रहती थी। पंजाबी फॅमिली की लड़की थी। सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी। उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे 32 के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके। वो मेरे मन को बहुत भा गई थी। शादी से लौट के मैंने उस रात मीनू के नाम के कई बार मुट्ठ मारी। मैं उसको पटाने का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामने से रोज निकलती थी पर हम बात नहीं कर पाते थे। ऐसा होते होते करीबन 1 साल बीत गया.
एक बार मैं दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से। स्टेशन पर गाड़ी आने मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी। मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था। तभी मुझे मीनू दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बर्स भी थे। उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करने लगे।
मैंने पूछा- कहाँ जा रहे हो?
तो बोले- मौसी के यहाँ शादी है दिल्ली में, वहीं जा रहे हैं।
मुझसे पूछा- देव जी आप कहाँ जा रहे हो?
मैंने कहा- दिल्ली जा रहा हूँ, थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है.
इतने में ट्रेन आने का अनाउंसमेंट हो चुका था। उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंने मेरे से सामान गाड़ी में चढ़ाने की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी।
मीनू के भाई ने बताया कि इसी कोच में चढ़ना है तो हम फटाफट उनका सामान चढ़ाने मैं बीजी हो गए। उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करने लगा मैंने अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जाने की कोई हड़बड़ी नहीं थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है। क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मैं उनका सामान एडजस्ट करता रहा।
गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी। मैं पसीने मैं तरबतर हो गया था। अब तक गाड़ी ने अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी। मीनू की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी। गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना में जुड़ कर दिल्ली जाती थी। इसलिए बीना में भीड़ कम हो जाती है। मैं सबका सामान सेट करके थोड़ा चैन की साँस लेने कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा- यह कौन सा कोच है?
उसने घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा- एस 4 … तुम्हें कौन सो छाने ( आपको कौन सा कोच चाहिए)”
“अरे गुरु जोई चाने थो … जौन मैं हम ठाडे है … (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)”
मैंने अपनी टिकट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे मीनू थी, बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी। बीना में मैंने हल्का सा नाश्ता किया और घूमने फिरने लगा। मुझे अपने बैग का बिल्कुल भी ख्याल नहीं था। बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ़ गई थी मुझे अपने बैग का ख्याल आया। मैं उनकी सीट के पास गया तो मैंने “पूछा मेरा बैग कहा रख दिया.”
मीनू की कजिन बोली- आप यहाँ कोई बैग नहीं छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढ़वा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नहीं था.
जबकि मुझे ख्याल था कि मैंने बैग मीनू की सीट पर रखा था।
वो लोग बोली- आपका बैग सागर में ही छूट गया लगता है।
मैंने कहा- कोई बात नहीं।
उन्होंने पूछा- आपकी कौन सी बर्थ है?
मैंने कहा- इसी कोच मैं लास्ट वाली।
मीनू की मम्मी बोली- बेटा अब जो हो गया तो हो गया जाने दो ठण्ड बहुत हो रही है. ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो!
मैंने कहा- जी कोई बात नहीं मैं मैनेज कर लूँगा!
“ऐसे कैसे मनेज कर लोगे यहाँ कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो!” मीनू की मम्मी ने कहा।
“मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी..” मैंने मीनू की ऑर देखते हुए कहा। मीनू बुरा सा मुँह बना के दूसरे तरफ़ देखने लगी.
ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौड़ी जा रही थी। मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला। रुको मम्मी मैं अपना कम्बल दे देती हूँ और मैं वो वाला ओढ लूंगी। मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी … मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी। मैं फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया.
… मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था। मैं मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी। मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.। मीनू और मैं एक ही कम्बल मैं नंगे लेटे हुए है मैं मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है। मेरा लंड मैं जवानी आने लगी थी जिसको मैं अपने हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ मीनू के शरीर को महसूस कर रहा था.
जैसे जैसे मेरे लंड मैं उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मैं मीनू के शरीर को अपने कम्बल मैं अपने साथ महसूस कर रहा था। इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मैं मीनू के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दाने) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ मीनू के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.। इधर मीनू भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मैं बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ देव … जबसे तुमको देखा है मैं रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से … चोदती हूं…उम् म … आ अ अ अ … तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा देव … उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नहीं हो रहा उ मम म आया अ अ अ !
मैं एक झटके में मीनू की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारने लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के … फटाफट जैसे मीनू झड़ रही हो उम् मम् देव…मेरी बुर र … सी पेशाब … निकलने वाली ही तुम्हारे लंड ने मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही मीनू झडी मैं भी झड़ने लगा मैं भूल गया की मैं ट्रेन मैं हूँ और सपने मैं मीनू को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया … हा ह मीनू … ऊऊ मजा आ गया मैं कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़ने लगा और बहुत सारा पानी अपने रुमाल मैं निकाल कुछ मीनू के चादर मैं भी गिर गया.
जब मैं शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंने देखा कि मैं तो अकेला ट्रेन मैं सफर कर रहा हूँ.। शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी। ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जाने के लिए उठाना था मैं हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई.। अब तक रात के 1.30 बज चुके थे मैं जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे मीनू की सीट से किसी ने मुझे रुकने का संकेत किया हो मीनू की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मैं सो रहे थे और ट्रेन अभी 1 घंटे कही रुकने वाली नहीं थी। मैंने देखा मीनू हाथ मैं कुछ लिए आ रही है.। मेरे पास आकर बोली “बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे” ठंड मैं ठिठुरते हो…”
मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया उसने क्या मेसेज दे दिया मैं रिप्लाई दिया ” मैं तुम्हारे कम्बल मैं तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था” मैं अपने लंड के पानी से भरा रुमाल अपने हाथ मैं लिए था। जिसको देख कर वो बोली “यह क्या है” मैंने कहा ” रुमाल है”।
“यह गीला क्यों है” मीनू ने पूछा ” ऐसे ही … तुम्हारे कारण … कह कर मैंने टाल दिया …
मीनू ने पूछा “मेरे कारण कैसे…” फिर मुझे ध्यान आया कि अभी अभी मीनू ने मुझे कुछ मेसेज दिया है…
मैंने मीनू को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मैं देखते हुए उसको कहा मीनू आई लव यू और उसके लिप्स अपने लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरने लगा। मीनू भी मेरा किस का जवाब दे रही थी …
मैं मीनू के दूधों की दरार मैं चूसने लगा था और बूब्स को दबा रहा था … मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरने लगा और उसके पेट से टकराने लगा.। मीनू मेरे से बोली आई लव यू टू.। इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेक्ट कोच की और इशारा कर के कहने लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो…
हम दोनों टॉयलेट में घुस गए … टॉयलेट को लाक करते ही मैं उसको अपने से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमने लगा.। मीनू मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ…
हाँ! मेरे राजा देव मैं भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी … जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जाने का…मेरे आने का मैं तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.। तो उन्होंने बताया की देव को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नहीं जा सकती उनके साथ। तब मैंने भी मम्मी को प्रोग्राम बनने को कह दिया मैंने कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो
मैंने उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपड़ों के ऊपर से ही चूसने चूमने लगा … मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा वो “सी ई ईई आई वहाँ नहीं वहाँ कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहाँ नही” ऐसा कहने लगी
मैंने कहा “मुझे विश्वास नहीं होता मुझे दिखाओ ” ऐसा कहकर मैं सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करने लगा
” हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है ” मीनू बोली
मैंने मीनू के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदने लगा और कहा ” ठीक है जैसा तुम कहो पर मैं कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा”” मीनू भी अब गरमाने लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होने लगी थी। वो अपने दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचने से रोक रही थी … ” प्लीज़ वहाँ नहीं मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपने आप, को कुछ हो जायेगा … मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंने। यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जाने दो अब…”
मैंने मीनू के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपने मुँह में ले लिया … उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था …
मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया।
मीनू कहे जा रही थी- प्लीज़ नो! मुझे जाने दो उई मा … मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जाने दो … और जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है मीनू के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मैं हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था मीनू मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी … उम्म मैं मीनू की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था।
मीनू अपने दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी मीनू की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी मीनू हलके हलके से करह रही थी ” उम्म्म आआ मर गई” मैं मीनू की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दाने को चाट और चूस रहा था.। सलवार पहने होने के कारण चूत चाटने मैं बहुत दिक्कत हो रही थी।
मीनू की चूत झड़ने के कगार पर थी” आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नहीं हुआ मेरी पेशाब निकलने वाली ही अपना मुँह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ। उई माँ आअ अ … उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुँह को अपने चूत के अमृत से भरने लगी … मीनू के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर 32 से 34 होगये मालूम होते थे … इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी … मैंने मीनू को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेने दो मीनू ने कहा ‘ अभी नहीं राजा मैं तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवाने को.। उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है ”
मैंने कहा “अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है ” “मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई” और वो खड़ी होने लगी मैं कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया.
“हाय राम … ममम म इतना बड़ा और मोटा… तो मैंने कभी किसी का नहीं देखा.
मैंने पूछा “किसका देखा है तुमने … बताओ ”
मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मैं अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.। भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मैं तो मेरा क्या हाल करेगी … मैं कभी नहीं घुसवाउंगी”
मैंने कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”
“मैं कैसे शांत करू” मीनू ने कहा।
मैंने कहा “टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो” मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया। पहले तो मीनू थोड़ा हिचकी फिर बोली ” तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होने लगी है…हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क ” एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसने किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मैं जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंने उसके मुँह में धक्के मारे मैंने कहा मेरा पानी निकलने वाला है।
” मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ…” मीनू सिसकारियां भर रही थी मैंने मीनू को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुँह मैं भर दिया … जिससे लंड घुसने पर वो चिल्लाये नहीं मैंने उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .। मैंने उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मैं भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी। मीनू कसमसा रही थी ” हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.। मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जाने क्या हो गया है” मीनू ने कुर्ती मुँह से निकाल कर कहा.
मैंने अपने लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मैं भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे … मैंने लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा मीनू की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा। मीनू अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नहीं रह सकती थी
उसने मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंने पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया … मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो। इतनी टाइट बुर थी मीनू की मैंने थोडी और लंड अंदर पेला मीनू की मुँह मैं यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते … मीनू मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है … मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे मीनू की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया मीनू की तो हालत ख़राब हो गई थी.। मैंने थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारने लगा.
मीनू की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मैं उबाल आना शुरू हो गया था.। मैंने मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और मीनू के मुँह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मैं हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.
मैं अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था…” मीनू की बुर पानी छोड़ने वाली थी क्योंकि उसने अपनी कुर्ती वापिस अपने मुँह में डाल ली थी और मीनू की बुर मेरे लौडे को कसने लगी थे मैं मीनू के 32 से 34 साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.। मीनू बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड ने भी आखिरी सांसे ली तो मैंने मीनू के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा मीनू की टाइट बुर मैं आखिरी जड़ तक पेल दिया और मीनू की बूर को मैंने पहला वीर्य का स्वाद दिया मीनू भी बहुत खुश हो गई थी। जब साँस थमी तो मैंने लन्ड मीनू की बुर से बाहर निकाल जिससे मीनू की बुर से मेरे वीर्य के साथ मीनू की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.
मैंने मीनू को हटाया और कमोड में पेशाब करी मीनू बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसने मुँह भी लगा दिया। उसका पूरा मुँह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुँह में जा पाया मैंने अपना लंड धोया नहीं उस पर मीनू की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहने दिया और नेक्कर के अंदर किया मीनू की बुर मैं सुजन आ गई थी मैं इंतज़ार कर रहा था की अब मीनू भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसने मुझे बाहर जाने को बोला। मैं उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया। मैंने अपनी घड़ी मैं टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में … शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नहीं जागा था और ट्रेन भी नहीं रुकी थी। थोडी देर बाद मीनू अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंने पूछा क्या हाल है जानेमन तुम्हारी बुर के ” सुजन आ गई है पर चुदवाने मैं बहुत मजा आया फ़िर से चुदवाने का मन कर रहा है
” ये लो यह रूमाल तुम वहाँ छोड़ आए थे। स फक्स…इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा” यह वोही रुमाल था जिसमे मैंने मीनू के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देने लगी। “इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मैं मेरे लंड ने उडेला है … और तुम क्या लिए हो” मैंने मीनू को कहा … उसने पहले सूंघा फूले कहने लगी ” ये मेरी पैंटी ही … ख़राब हो गई थी तो मैंने निकाल ली.। और तुम्हारा रुमाल मैं ले जा रही हूँ इसे अपने साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.। तुम दिल्ली में कहाँ रुकोगे.। और किस काम से जा रहे हो” मीनू ने मेरे से पूछा। तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंने मीनू से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहाँ और क्यों जा रहा हूँ। पहले तो मीनू मुझे घुड़की “तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का” मैंने कहा ” वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मैं तुम्हारी पैंटी अपने लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा” उसने मेरे को चुम्मा देते हुए कहा “पागल” और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंने वहाँ जहाँ उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो मीनू शर्मा गई
मैंने मीनू को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई।
मैंने कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मैं बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे।
मीनू मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मैं अपनी सीट पर। अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंने बैग मैं से एयर पिल्लो निकाल और अपने सिराहने रख कर मीनू को याद करने लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खड़ा होने लगा सो मैंने सीट पर लेटकर मीनू की पैंटी सूंघने लगा उसमे से मीनू की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी। उस स्मेल ने कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंने मीनू की पैंटी का वो हिस्सा जो
कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंने फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेक्कर के अंदर मैंने मीनू को सपने में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारने लगा मैंने अपना सारा पानी मीनू की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मैं निकाल दिया 3 बार झड़ने के कारण पता ही नहीं चला की कब मैं सो गया”
सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है। तो मैंने आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है … मुझे जगाने वाला मेरा साला मीनू का भाई था बोला ” देव जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले 15 मिनट से सभी आपने घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ” मैं फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया। वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेमन मीनू पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी। उसके चेहरे से कतई ऐसा नहीं लग रहा थी कल रात को मैंने इसी ट्रेन मैं मीनू की बुर का अपने हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी
प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी। सुनहरी धूप खिली थी मैं टीशर्ट और नेक्कर मैं खड़़ा था। मैंने मीनू का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मैं अपने एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे मीनू के दूध दबा रहा हूँ और यह मीनू को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.
मैंने उन लोगों से पूछा कि आप कहाँ जायेंगे?
मीनू का भाई बोला- हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहाँ जाना है?
मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था, वहाँ पर मेरे दोस्त की शादी है … मैंने उन लोगों को जवाब दिया.
मैंने कहा- मेरे साथ चलिए … मुझे लेने गाड़ी आई होगी बाहर…
वो लोग बोले नहीं नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है…
मैंने कहा- इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नहीं हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होने लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नहीं लगेगा।
मीनू की कजिन धीमे से बोली- रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है … और मुझे मीनू को देखकर हलके से मुस्कुरा पड़ी।
हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंने मीनू के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त ने भी बड़ी गाड़ी भेजी है। इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.
गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंने गाड़ी साइड मैं रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपने दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या … उसने पूछा क्यों … मैंने कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मैं अपने लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ … रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नहीं आया। तसल्ली से मारना चाहता हूँ।
मेरा दोस्त बोला ” देव भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नहीं थी यह एक ही रात में तुमने कैसे तीर मार लिए और तुमने उसे चोद भी डाला!
मैंने कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नहीं तो मैं होटल जा रहा हूं। मुझे मेरे दोस्त ने आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.
मैं फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मैं बैठा और इंतज़ार कराने के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलने का हुकुम दिया…मैंने पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मैं किसके यहाँ जायेंगे…मीनू की मम्मी बोली ” बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है … कल की मिस्टर कपूर … रोहन कपूर…
“ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई” मैं उछलता हुआ बोला.। सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मैं आगे बोला ” वो.। वो.। क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मैं जाना है.।
बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नहीं चला … पर मैं सुमित से आँख नहीं मिला पा रहा था.। जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंने ड्राईवर को रुकने को बोला और अपना बैग गाड़ी मैं छोड़ कर सुमित को बुलाने उसके घर मैं गया … सुमित आकर मेरे से लिपट गया.। बहुत खुश था सुमित पर मैं उससे आँख नहीं मिला पा रहा था मैंने सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला ” देख यारा बुरा मत मानियो .। तुम्हारे यहाँ मेहमान बहुत है मैं ऐसा करता हूँ कि मैं और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मैं रुक जाते है..”
मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.। सुमित ने कहा ” देख भाई देव मैं जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नहीं तुमने सोना(मीनू की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.। यदि तुम मीनू को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नहीं थी मैं भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नहीं मिला या मेरी हिम्मत नहीं हुई.। इसे दिल पे मत ले यार” मौज कर यारा मैंने तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में।
यह सुनकर मेरी जान में जान आई। मैं सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मैं सोनानहीं मीनू को चोदना चाहता हूँ.” सो मैंने कहा मैंने मीनू को चोदा है ट्रेन में … और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं.।
सुमित बोला ” सेक्सी तो सोनाथी पर तुमने मीनू को कैसे चोद लिया.। वो बधाई हो माई बोय…तभी मीनू थोड़ा लंगडा के चल रही थी। तुमने तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो 2 दिन चल फ़िर भी नहीं सकी थी”
“तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो! कैसे हो देव बेटा” कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे …
मैंने उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी। फ़िर सुमीत मेरे को अपने रूम मैं ले गया.। सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे। बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत ने मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ 3 ही कमरे थे और मीनू वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.। रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था।
सुमित बोला ” क्यों देव कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- मीनू की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसने मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहाँ से मीनू के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहाँ से उसके रूम मे। अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..
मैं सुमित को बोला ” सुमित तो मीनू की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?”
सुमित ने कहा कैसे मैंने मीनू की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघने को दे दिया.। मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे देव मीनू की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुने मेरे लन्ड का बदला ले लिया.। यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी … सुमित मेरे रूम से चला गया
घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंने रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होने और नहाने बाथरूम मैं घुस गया। बढ़िया गर्म पानी से नहाने लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकराने की आवाज आई। मैंने शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ मीनू नहा रही लगता महसूस हो रही थी … मैंने…धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरने लगा मैंने आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुँह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.
मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नहीं पाई मैंने शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरने लगा उसने अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंने कहा यह जगह साबुन रखने की नहीं लन्ड रखवाने की है और मैं उसके चूत के दाने को मसलने लगा.
पहले तो उसने टाँगे सिकोडी पर दाने को मसलने से वो गरमा गई थी उसने अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंने अभी तक उसका मुँह ताकत से बंद कर रखा था मैंने कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी … बहुत गरम और टाइट चूत थी.। मैंने अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदने लगा था, वो मस्ताने लगी थी थी और उसकी बुर पनियाने लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी।
मैंने अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.। तभी उसने अपने एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लौडे को छूने के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी
बहुत गरम और टाइट चूत थी.। तभी वो अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ अपने मुँह से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी। मुझे उसकी यह हरकत ठीक नहीं लगी तो मैं उसे बाथरूम से खीच कर अपने बेडरूम मैं ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो सोनाथी …
मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और अपने टीवी की आवाज थोडी और बढा दी। सोनाका बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार 36 साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, 2 इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग। सोनाकी चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी सोनाने अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मैं तो सोनाको नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था
सोनाअपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहने लगी प्लीज़ मुझे जाने दो .। मीनू नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.। मैंने पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.। बोली हाँ है मैंने कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहाने मैं टाइम तो लगेगा ही। सोनातुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मैं सोनाके ऊपर टूट पड़ा।
सोनाके होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंने उसके होंठों को अपने ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसने लगा मैं एक हाथ से सोनाकी मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो सोनाछटपटाती रही पर जैसे ही मैंने उसके शरीर पर अपने शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़ने लगी। अब सोनाने अपनी चूत से अपने हाथ हटा लिए थे मैंने सोनाके शरीर को सहलाना शुरू किया मैं उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.
सोनाभी अब जवाब देने लगी थी और सिसियानी लगी थी सोनाका बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मैं अब सोनाके निप्प्ल को चूसने के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा सोनाबहुत जोरो से सिसियाने लगी थी … मैंने जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया सोनाछटपटाने लगी मैं एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था
सोनाको सोनाको भी अब मजा आने लगा था उसने नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय देव मीनू की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमने उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंने देखा मीनू लंगडाकर चल रही थी मैंने तुम दोनों की चुदाई के सपने देखते हुए 3 बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली। हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है …
मैंने कहा सोनातुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मैं तेजी से उसके निप्प्ल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलने लगा सोनाबहुत गरमा गई थी सोनाकहने लगी अब कंट्रोल नहीं होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नहीं रह सकती.। और जिसने एक बार चुदवा लिया उसके तो कहने ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी
मुझे जब मीनू ने तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया मैं समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नहीं जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होने का मौका मिल जायेगा…हाय अब सहन नहीं हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो …
मैं सोनाके मम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और सोनाका तना चूत का दाना मसल रहा था सोनाकी चूत बहुत पनियाई हुई थी सोनाबहुत चुदासी हो रही थी सोनाकी बुर पर करीने से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी सोनाकी पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मैं पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसने और चोदने में बहुत मजा आता है। मैं सोनाकी बुर को उसकी लम्बाई मैं कुरेद रहा था और बीच बीच मैं एक ऊँगली उसकी बुर मैं घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता सोनाकी बुर मैं लिसलिसा सा पानी था मैंने ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत
मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ सोनाकी बुर को चूसने के लिए तड़प उठी मैंने सोनाके पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मैं सोनाकी काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरने लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटने में बहुत मजा आ रहा था सोनासे रहा नहीं जा रहा था.। हाय देव यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ सोनाने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुँह पर रगड़ रही थी
मैंने सोनाकी दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया। सी हाई मर गईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंने सोनाकी पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है देव उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी ने ऐसा मजा नहीं दिया ओम्म्म मेरी चूत झरने वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो। मैंने अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी
सोनाअपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंने अपनी जीभ सोनाकी गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर ने तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मैं तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया सोनामेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसने मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों 6९ में हो गए
सोनामेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की सोनापहली बार नहीं चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मैं सोनाकी बुर के दाने को तेज़ी से चूस रहा था सोनामेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मैं जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से सोनाभी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंने अपना लंड यदि जल्दी सोनाके मुँह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मैं सोनाके मुँह से लंड निकाल कर सोनाकी बुर को और गहराई से चूसने लगा।
सोनाफ़िर से तैयार थी। हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी। मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपने जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है। आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा … मैंने सोनाकी गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मैं और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नहीं हुआ तो मैंने फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.। अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़ने से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मैं उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था।
सोनाअपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मैं घुसाने के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मैं मीनू नहीं सोनाहूँ मैं चूत की खुजली से मर जाऊँगी मेरी बुर को चोदो … फाड़ो…
उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और सोनाके मुँह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई। उई मीनू मेरी बुर में पहली बार किसी ने जलता हुआ लोहा डाला। हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंने सोनासे कहा सोनाजानेमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए। तुम्हारी चूत की तो मैं आज बैन्ड बजा दूँगा
और मैंने सोनाके दोनों मम्मे अपने हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलने के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में सोनाकी बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा सोनाकी पाव रोटी वाली बुर मैं धस चुका था
मैं कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहने दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया। इस बार मेरा लन्ड सोनाकी बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो। उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मैं सोनाको हलके हलके धक्के देकर चोदने लगा सोनाको अब मजा आ रहा था
वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदने के इनाम में मैं तुम्हारी मीनू के साथ सुहागरात मनवाऊँगी। बहुत मजा आ रहा है पहले किसी ने ऐसे नहीं चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई। अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरने वाली हूँ मैं जाने वाली हूँ सो मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी सोनाने मेरे से कहा देव तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करने दो
मैं तुंरत लेट गया सोनाने लौड़ा को ठिकाने पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकने लगी सोनाके 36 साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे। सोनाबहुत तेजी से झड़ी पर मैं अभी नहीं झरने वाला था क्योंकि पीछे 6-8 घंटो में 3 बार झर चुका था सो मैंने सोनाको कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा। सोनाकहने लगी देव बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर। मैं फ़िर मैंने और तेज़ी से धक्के मारे और सोनाकी बुर की गहराई में झड़ गया सोनाने मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवाने के वादे के साथ विदा हो गई …
मैंने दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में मीनू के साथ भी सुहाग रात मनाई और सोनाऔर मीनू दोनों को चोदा पर यह सब बाद में Sex Stories
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