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Massage Girl in Bhubaneswar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Bhubaneswar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Bhubaneswar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Bhubaneswar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Bhubaneswar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Bhubaneswar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Bhubaneswar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Bhubaneswar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Bhubaneswar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Bhubaneswar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Bhubaneswar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Bhubaneswar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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अन्तर्वासना के सभी पाठकों और गुरूजी को मेरा नमस्कार! Antarvasna

मैं प्रतीक, मध्यप्रदेश का Antarvasna रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का पिछले एक वर्ष से नियमित पाठक हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैं भी आप सबसे अपना अनुभव बांटना चाहता हूँ।

मैं ऍमबीए का छात्र हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं ऍमबीए करने के लिए नया-नया इंदौर आया था। इंदौर आने पर मेरी सबसे पहली समस्या यह थी कि मुझे एक अच्छे कमरे की तलाश करनी थी। मेरे कुछ दोस्त पहले से इंदौर में पढ़ाई कर रहे थे इसलिए उन्होंने मुझे जल्दी ही एक अच्छा कमरा दिलवा दिया।

मेरी जिन्दगी अच्छी तरह से चल रही थी। मैं जहाँ पर रहता था, उस कालोनी में बहुत सी सुन्दर महिलाएं और लड़कियां रहती थी। मैं कॉलेज में व्यस्त होने क कारण किसी पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देता था।

मैंने एक दिन देखा कि मेरे पास वाले कमरे में कुछ नए लोग रहने के लिए आये हैं। वो कुल मिलकर तीन लोग थे- पति, पत्नी और उन भाभी की छोटी बहन!

भाभी देखने में बहुत ही सुन्दर थी, भाभी का जिस्म 34-28-36 का होगा। उनकी नई-नई शादी हुई थी।

एक दो बार कॉलेज आते जाते हुए ऐसे ही हम दोनों ने एक दूसरे को देखा था। दो एक महीने तो ऐसे ही गुजर गए, मैं भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया।

एक दिन जब मैं अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अचानक मेरे कमरे की घंटी बजी, मैंने जब दरवाज़ा खोला तो देखा कि पास वाली भाभीजी सामने खड़ी थी।
मैंने उनको हेल्लो कहा और अन्दर आने को कहा।

उन्होंने मुझसे कहा- आज तुम्हारे भैया बाहर गए हुए हैं, मुझे बाज़ार से कुछ चीजें मंगवानी हैं, क्या आप मेरी चीजें कॉलेज से आते वक़्त ले आयेंगे?
मैंने कहा- ठीक है मैं ले आऊंगा!
क्योंकि जहाँ से मुझे उनकी चीजें लेनी थी वो मेरे कॉलेज के रास्ते में ही है।
वो मुझे धन्यवाद कहकर अपने घर चली गई…

मैं भी तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया और लौटते समय उनका सामान ले आया। मैं अपने कमरे पर नहाकर, कपड़े बदलकर भाभी के घर सामान देने गया।

भाभी ने मुझे अन्दर बुलाया, उन्होंने अपनी बहन से मेरा परिचय कराया। उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा, मेरे बारे में बहुत सी बातें पूछी जैसे कि मैं कहाँ का रहने वाला हूँ, मेरा नाम क्या है, मैं क्या करता हूँ….

कुछ देर बात करने के बाद मैं अपने कमरे पर वापिस आ गया।

कुछ दिन ऐसे ही निकल जाने के बाद मेरी और भाभी की अच्छी दोस्ती हो गई।

मैंने भाभी से भैया के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया- वो एक कंपनी में काम करते हैं और इस कारण अधिकतर घर से बाहर ही रहते हैं।

अब भाभी मेरे से पूरी तरह से खुल गई थी, मैं भी उन्हें सारी बातें बताता था।
एक बार भाभी ने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड हैं?
मैंने कहा- नहीं हैं!
उन्होंने कहा- क्यों ? तुम तो बहुत ही अच्छे और स्मार्ट लड़के हो!
तो मैंने उनसे कहा- मुझे पढ़ाई से ही समय नहीं मिलता है!
वो यह सुनकर थोड़ी खुश दिखी। मुझे उस वक़्त तक नहीं मालूम था कि क्यों!

कुछ दिन निकल जाने के बाद मैंने देखा कि भाभी उदास-उदास सी रहने लगी हैं। पहले तो मुझे लगा कि शायद अपने घर वालों की याद आ रही होगी लेकिन एक दिन मैंने देखा कि वो बहुत ज्यादा उदास हैं। वो मेरे कमरे पर यूँ ही आई थी, मैंने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं!

पर मैंने उनसे कहा- अगर आप मुझे अपना अच्छा दोस्त समझती हैं तो मुझे अपनी दिक्कत बताओ!
तो उन्होंने कहा- मुझे तुम्हारे भैया की बहुत याद आ रही है!
तो मैंने कहा- उनसे बात कर लो फ़ोन पर!
तो उन्होंने कहा- मुझे जो चाहिए वो बात करने से नहीं मिलेगा!
मैंने कहा- मैं समझा नहीं?
उन्होंने कहा- शादी के बाद मुझे तुम्हारे भैया से पूरा सुख नहीं मिला है!

पहले तो मैं समझा नहीं, पर एक दम मुझे लगा कि शायद भाभी प्यासी हैं, उनकी बहुत दिन से चुदाई नहीं हुई है।
मैंने भाभी से कहा- तो फिर आप भैया को कुछ दिन के लिए यहीं पर बुला लीजिये!
उन्होंने बताया कि भैया के ऑफिस में काम बहुत है और अगले 20-25 दिन वो घर नहीं आयेंगे।
तो मैंने भाभी को समझाया और उनके घर भेज दिया।

पर भाभी की तन की प्यास बढ़ती जा रही थी।
वो एक दिन मेरे पास आई और उन्होंने मुझसे कहा- प्रतीक तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो!
मैंने कहा- भाभी आप भी मुझे अच्छी लगती हैं!
उन्होंने एकदम से मुझे अपने गले लगा लिया।

मैंने भाभी को दूर करते हुए कहा- भाभी, यह आप क्या कर रही हैं?
भाभी ने कहा कि वो मुझे बहुत पसंद करती हैं और मुझसे प्यार करती हैं।
मैंने कहा- भाभी, यह गलत है!
तो उन्होंने कहा- कुछ गलत नहीं है! अगर उन्हें प्यार नहीं मिला तो वो मर जाएँगी!
मैंने भाभी से कहा- भाभी! आप अभी अपने घर चली जाएँ!

पर भाभी एकदम मेरे पास आ गई और उन्होने मुझे बाहों में भर लिया। पहले तो मैं उन्हें दूर करने लगा पर थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। भाभी के बड़े बड़े स्तन मेरे सीने से टकराने लगे।

मैंने भाभी को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें चूमने लगा। मैंने अपने होंठ उनके रसीले होंठों पर रख दिए, मैं ऐसे ही उनके होंठ चूसने लगा। क्या रसीले होंठ थे उनके!

10-15 मिनट उनके होंठों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ भाभी की चूचियों पर रख दिया और दूसरा उनकी गांड पर रख दिया। मैं भाभी की चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा। वो आह आह की सिसकारियाँ निकालने लगी।

मैंने धीरे से भाभी की साड़ी खोल दी और अलग फ़ेंक दी। मैंने धीरे-धीरे भाभी का ब्लाउज़ और पेटीकोट भी निकाल कर अलग कर दिए। अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। क्या गज़ब की लग रही थी- लग रहा था जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा सामने खड़ी हो!

मैं फिर से भाभी को चूमने लगा। भाभी ने मेरे कपड़े भी निकाल दिए। फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमते-चूमते बिस्तर पर आ गए। मैंने अब भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया। अचानक उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सामने आ गई। उनकी चूचियां बहुत ही गोरी थी। मैं उनकी एक चूची अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चूची दबाने लगा। भाभी अलग तरह की आवाजें निकालने लगी। मैंने इसी बीच भाभी की पैंटी भी निकाल दी और दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में घुसा दी। वो सिसकारियाँ भरने लगी।

फिर भाभी के पूरे बदन को चूसता हुआ उनकी चूत चाटने लगा। वो अजीब तरह की आवाजें निकलने लगी। मैं उनकी चूत बहुत तेजी से चाट रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसा दी। भाभी को अब बहुत मज़ा आने लगा था, वो मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में और अन्दर तक दबाने लगी।

मैं भी मज़ा ले लेकर उनकी चूत चाट रहा था। आधा घंटा चूत चाटने के बाद भाभी ने सारा पानी में मेरे मुंह में ही छोड़ दिया। मैंने उनका सारा पानी पी लिया। अब मैं भाभी की चूत में दो ऊँगलियाँ डालकर अन्दर बाहर कर रहा था। उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अपना आठ इंच का लंड उनके मुँह के पास रख दिया और उनसे कहा- आप इसे चूसो!

भाभी ने बिना संकोच किये मेरा पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक चुदक्कड़ की तरह चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रहा हूँ। कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने भाभी के मुँह में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। वो मेरा सारा का सारा वीर्य पी गई और मेरे लंड को भी चाट कर साफ़ कर दिया।

अब मैं और भाभी दोनों ही बहुत गर्म हो गये थे। मैंने भाभी को बिस्तर पर सीधा लेटाकर अपने लंड का अग्र भाग उनकी चूत के मुख पर रखा और भाभी के होंठो को चूमते हुए एक जोर का धक्का लगाया। मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ आधा उनकी चूत में घुस गया। भाभी के मुँह से एक तेज़ चीख निकली पर मैंने अपने होंठों से उनकी चीख दबा ली। भाभी की चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। शायद भैया का लंड बहुत छोटा था जिसके कारण भाभी की चूत की झिल्ली अभी तक टूटी नहीं थी।

मैंने जब भाभी से पूछा तो उन्होंने कहा- मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तुम अभी जरा भी हिलना मत!

उन्होंने मुझे साथ ही यह भी बताया कि तुम्हारे भैया का लण्ड केवल तीन इंच का है और वो भी पतला!

कुछ ही देर में भाभी का दर्द थोड़ा कम हुआ। उन्होंने मुझे इशारा करते हुए अपने चूतड़ ऊपर उठाने लगी। मैंने इशारा देखकर एक और तेज झटका मारा, इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में प्रवेश कर चुका था। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उन्होंने मुझे फिर रुकने के लिए कहा लेकिन इस बार मैंने उनकी नहीं सुनी और अपना लंड अन्दर बाहर करता रहा। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उनके आंसू तक निकल गए।

थोड़ी देर ऐसे ही करते रहने के बाद उनका दर्द कम हुआ और वो भी मज़े लेने लगी। अब मैं उनको बहुत तेजी से चोद रहा था, वो भी अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

अचानक भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपना पानी छोड़ दिया लेकिन मेरा लंड अभी भी पूरे जोश में था। मैं उनको चोदता रहा! उनको बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी को उठाकर कुतिया की तरह बनने को कहा। वो आगे की तरफ झुककर कुतिया की तरह पलंग पर बैठ गई। मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। इस बार एक ही बार में मेरा पूरा लंड उनकी चूत की अंतिम सीमा तक घुस गया। अब मैं उनको बहुत जंगली तरीके से तेज़ तेज़ चोद रहा था।

अचानक मुझे लगा कि मेरा पानी छुटने वाला है। तब मैंने भाभी से पूछा- मेरा वीर्य निकलने वाला है, कहाँ पर निकालूँ?
तो उन्होंने मुझे कहा- मेरी चूत के अन्दर ही छोड़ दो!
मैंने कहा- ठीक है!
और मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में ही छोड़ दिया और उनके ऊपर चूत में लंड डालकर लेट गया।

उसके थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में एक साथ चले गए और भाभी ने मेरा लंड मुँह से चाट कर साफ़ किया और मैंने उनकी चूत चाट कर साफ़ की। हम दोनों ने एक साथ शावर लिया और नहाते हुए ही हमने एक बार और सेक्स किया।

मैंने भाभी को चोदते हुए कहा- मैं आपकी गांड भी मरना चाहता हूँ!
तो भाभी ने कहा- अब तो मैं पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ! तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो!

अब मैं भाभी को जब चाहता हूँ चोद देता हूँ। वो भी मुझसे चुदने का मौका देखती रहती हैं। अब हमारे सम्बन्ध के बारे में भाभी की छोटी बहन को भी पता चल गया है।

भाभी ने मुझे एक दिन चुदाई करते वक़्त बताया- मेरी बहन को सब मालूम पड़ गया है और वो भी चुदना चाहती है तुम से!
मैं तो यह सुनकर खुश हो गया और भाभी की बहुत तेज़ चुदाई करने लगा।

मैंने भाभी की गांड भी मारी और उनकी छोटी बहन की सील भी तोड़ी, यह सब मैं अपनी अगली कहानी में बताऊंगा। Antarvasna

(Mere Sir Ne Meri Maa Ko Choda) अन्तर्वासना

अन्तर्वासना सेक्स कहानियां पढ़ने वाले मेरे सभी दोस्तों, सहेलियों, भाभियों आंटियों को मेरी हैलो, मैं गुड्डू हूँ, ये घटना करीब दो तीन साल पहले की बात है, जब मैं एक कम उम्र का लड़का था, स्कूल में पढ़ रहा था… अभी तो मैं CA की तैयारी कर रहा हूँ.

मेरे स्कूल की परीक्षा के पहले, मेरे सर का फोन मेरी माँ के पास आया था. शायद वे मेरी माँ से मेरी पढ़ाई के बारे में कुछ बात करना चाहते थे.

मेरी माँ तब होंगी करीब 38 साल की, वो बहुत सेक्सी हैं. मेरी माँ को मेरे सर ने फोन करके कहा कि आज रात तुम 6.30 पीएम पर अपने बेटे के साथ आ जाना.

माँ ने सर से कारण पूछा तो उन्होंने मेरी कमजोर पढ़ाई को लेकर कहा. मेरी माँ ने सर को पटा लिया कि इस बार मेरे लड़के को किसी भी तरह पास करा दीजिएगा. आपका बड़ा अहसान होगा.

सर ने कहा- आप आईये, फिर देखते हैं कि क्या किया जा सकता है.
माँ ने कहा- हाँ आप सब कुछ देख सकते हो मैं तैयार हूँ.
सर ने कहा- मतलब?
माँ ने कहा- आप मतलब नहीं समझते हैं.. मैं आपके पास सब कुछ दिखाने आने को गुड्डूी हूँ.
सर समझ गए और बोले- ठीक है आपका सही व्यवहार आपके लिए बड़ा फायदेमंद रहेगा.

सर की इस बात से मेरी माँ थोड़ी गरम हो गई थीं. उनको शायद सेक्स का खेल चाहिए था.

इसके बाद मेरी माँ ने सर से काफी देर तक बात की और बातों ही बातों में सर के साथ सेक्स चैट शुरू कर दी. उन दोनों ने अपने आपको बहुत गरम किया. इसके बाद मैं और मेरी माँ ठीक 6.30 पीम पर मेरे सर के यहाँ पहुँच गए. मैं अपनी माँ के बदन की गरमी को महसूस कर रहा था.

जब हम सर के यहाँ पहुँचे, सर ने हम दोनों को अन्दर बुलाया.

मेरी माँ ने करीब 4-5 मिनट सर से आँखों ही आँखों में बातें कीं.. इससे मेरे सर भी बहुत गरम हो गए थे.

उस दिन माँ भी बहुत सेक्सी लग रही थीं. मेरे सर ने सभी अन्य बच्चों को जाने के लिए कह दिया. फिर मुझे भी सर ने बोला कि तुम दूसरे कमरे में बैठ जाओ.

मैं दूसरे कमरे में जा कर बैठ गया.

कुछ पलों बाद मुझे चुल्ल हुई कि जाकर देखूं कि सर और माँ क्या कर रहे हैं, तो मैं उस कमरे की खिड़की के पास खड़ा हो गया. मैंने झिरी में से देखा कि सर मेरी माँ को धीरे धीरे किस कर रहे थे. मेरी माँ ने अपना ब्लाउज उतार दिया था. वो बड़ी कटीली माल लग रही थीं.

फिर सर ने माँ के मम्मों को अपने हाथों में लिया और उनके एक निप्पल को चूसने लगे. मेरी माँ भी सर को बड़ी मस्ती से दूध पिला रही थीं. फिर सर और माँ ऊपर के कमरे में सेक्स करने के लिए चले गए. मैं भी कुछ देर बाद ऊपर के कमरे के बाहर जाकर खिड़की से देखने लगा.

अब माँ पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं. माँ नंगी ही बिस्तर पर लेट गई थीं.

इसके बाद सर ने माँ को थोड़ा और गरम करने के लिए माँ के पाँव से लेकर सर तक धीरे धीरे ऊपर की ओर सहलाना चालू किया.

माँ थोड़ी और गरम होने लगी थीं. माँ के मुँह से ‘स्सस्सस्स.. आह.. स्सस..’ की कामुकता भरी आवाजें आने लगी थीं.

सर ने माँ की नाभि में धीरे धीरे उंगली करना चालू किया. माँ तड़फ रही थीं. अब सर आपने हाथ को प्यार से और ऊपर की तरफ़ माँ के मम्मों पर ले जाकर हाथ में भरते हुए मसलना शुरू कर दिया था.

माँ चुदास से एकदम से मचल उठी थीं. माँ को मजा आ रहा था.

सर ने माँ की नाभि के अन्दर अपनी जीभ डाल कर घुमाई.. तो माँ एकदम से गरम हो उठी थीं.

अब माँ से रहा नहीं जा रहा था. माँ डॉगी स्टाइल में होकर सर के लंड को किस करने लगी थीं.. और सर के हाथ माँ की गांड को सहला रहे थे

फिर माँ सीधी हुईं तो सर ने बैठ कर माँ की नाभि को बड़े प्यार से किस पर किस किए जा रहे थे. माँ भी सर को गरम किस पर किस किए जा रही थीं.

अब माँ भी सर की इस हरकत से बहुत ज्यादा पागल होने लगी थीं.. मेरी माँ को भी बड़ा मजा आ रहा था.

इस वासना के खेल में माँ सर को मेरे लिए बोलना ही भूल गई थीं. फिर सर ने माँ को डॉगी स्टाइल में कर दिया और उनके पीछे से आकर माँ की चुत में अपना लंड डालना शुरू किया.

माँ बुरी तरह तड़फ उठी थीं.. क्योंकि सर का लंड बहुत बड़ा था और मेरी माँ की चुत छोटी सी थी, शायद पापा का लंड छोटा सा रहा होगा जिस वजह से माँ की चुत जयादा नहीं खुल पाई थी. और हो सकता है कि मेरी माँ की चुत पापा के लंड से संतुष्ट न हो पाती हों, जिस कारण उन्होंने सर से चुदाना ठीक समझा.

तो सर के बड़े लंड ने माँ की चुत को एक तरफ से फाड़ना शुरू कर दिया था.

मेरी माँ एक कमसिन लौंडिया की तरह चीख रही थीं जैसे उनकी सील खुल रही हो. सर ने भी बर्बरता से माँ की छोटी सी चुत के साथ घोड़े के लंड जैसे चुदाई करना चालू रखा. कुछ देर की तकलीफ के बाद मेरी माँ ने सर के लंड को पूरा खा लिया था और चुत के रस ने माँ की पीड़ा को खत्म कर दिया था.

अब माँ को भी लंड अच्छा लगने लगा था. मेरी माँ बहुत छरहरी और चंचल बदना हैं. माँ को भी अब जोर जोर से चुदवाना अच्छा लग रहा था.

सर ने माँ को हचक कर चोदा और करीब बीस मिनट बाद माँ की चुत में ही सर के लंड ने अपना वीर्य छोड़ दिया था.

इसके बाद कुछ देर के लिए दोनों निढाल हो गए. मेरी माँ सर का लंड चूसते हुए सर को फिर से गरम करने लगीं, शायद उनकी चुत को लंड की खुराक अभी और चाहिए थी.

एक घंटे में माँ ने सर के लंड से तीन बार चुत की आग बुझवाई और वे दोनों एक दूसरे से लिपट कर लेट गए.

इस दौरान चुदाई का मधुर कामुक और मादक संगीत कमरे के बाहर से ही मैं सुनता रहा था.

इसके बाद माँ साड़ी और बाकी कपड़े पहन कर बाहर आ गईं. तब सर ने मुझसे बोला कि चलो अब आज की पढ़ाई खत्म हुई, कल आना.

मैं सोच रहा था कि सर को कहना था कि आज की चुदाई खत्म हुई अब अपनी माँ को लेकर आना.

अन्तर्वासना

Sex Stories

हेल्लो दोस्तो ! आज आपका दोस्त फ़िर Sex Stories से हाजिर है चुदाई के एक नए कारनामे के साथ। मैं अब तक आपको अपने दो सेक्सी घटनाओं के बारे में बता चुका हूँ। दोस्तों आज एक ऐसी कहानी आपके सामने लेकर आ रहा हूँ जिस कहानी का हर एक मोड़ सारी लड़कियों की चूतों को मजबूर कर देगा उनकी पैंटी को गीला कर देने के लिए और हर लड़के के लंड को भड़कने के लिए।

दोस्तों गरेजुएशन कर लेने के बाद मैंने इक कंपनी में मार्केटिंग मेनेजर की जॉब जों कर ली मेरा काम होता था अपने प्रोडक्ट की प्रमोशन के लिए लोगों से मिलने का। एक बार मुझे अपने एक प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए नैनीताल जाना पड़ा। मुझे वहां पर एक डिरेक्टर को मिलना था। मैं थोड़ा सा परेशां भी था की पता नहीं कोन होगा किस मिजाज़ का बन्दा होगा। मैं तब तक मीटिंग रूम में इंतज़ार कर रहा था मेरे सामने काफी का कप रखा था।

तभी अचानक दरवाजा खुला और एक बीस बाईस साल की छत्तीस-छब्बीस-अडतीस फिगर की सेक्स बम उस रूम में आई। फुल कटिंग हाफ स्लीव शर्ट। उसके उपर ब्लैक फैशनेबल जैकेट और ब्लैक जींस में मानो कोई क़यामत मेरे सामने आके खड़ी हो गई। रंग रूप में किसी अप्सरा को भी मात दे दे। होंट बिल्कुल गुलाब की पंखुडियों के जैसे। गालों पर जैसे किसी ने गुलाबी रंग लगा दिया हो। हेयर कट तो चेहरे पर बिजली गिरा रहा था। गर्दन में व्हाइट प्लेटिनम का बना एक डायमंड नैकलेस पहना हुआ था जो झुक कर चुचियों के बीच में बने गैप स्पॉट में फंस रहा था। मानो वो मदहोश होकर उसकी चुचियों को चूम रहा था। सच मुच उसकी चूचियां उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी। लग रहा था जैसे उसने अपनी शर्ट के भीतर दो सेक्स बम्ब छुपा रखे हों और उन बोम्ब्स के बाहर आते ही चारों तरफ़ सेक्स ही सेक्स फ़ैल जाएगा।

अभी मै उसकी खूबसूरती की नदी में गोते लगा ही रहा था। तभी उसने कहा- येस मिस्टर सुनील ! वेयर अरे यू। कहाँ खो गए? हाजिर जवाबी में हम भी किसी से कम न थे, सो बिना कुछ सोचे समझे बोल दिया कि जब अचानक धूप आँखों पर पड़े तो आँखों को खुलने में थोड़ा वक्त लगता है। मेरा जवाब सुन कर वो बोली ओह्ह इट्स ग्रेट। उसने अपना नाम इशिका बताया। कुछ देर बाद हमारी मीटिंग स्टार्ट हो गई। जब मैं उसे प्रोडक्ट बता रहा था तो मेरी नज़र अचानक उसकी चुचियों पर जा अटकी शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिनमे से काले रंग की चोली से चूचियां बाहर आने की पूरी कोशिश कर रही थी। मगर वो काली चोली उन्हें अपनी गिरफ्त से आजाद नहीं होने दे रही थी। मेरी इस हरकत को वो पहचान चुकी थी।

आख़िर मैंने पूरा प्रोडक्ट ख़तम किया और मीटिंग ओवर कर दी।

इशिका ने कहा- योउर प्रोडक्ट इस वैरी गुड। बट आइ ऍम रेअली इमप्रेसेड बाय योउर प्रेजेंटेशन।

इशिका वहाँ से चली गई। मुझे अभी वहां बैठना था। इशिका वापस आई और बोली सुनील मैं घर जा रही हूँ, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे तुम्हारे होटल तक लिफ्ट दे सकती हूँ मैंने उसे बताया कि अभी मेरे पास मेरे होटल के बारे कोई मैसेज नहीं है। इशिका ने कहा जब तक तुम्हारा होटल कन्फर्म नहीं होता तुम मेरे घर पर रह सकते हो मैं घर में अकेली रहती हूँ.

हम गाड़ी में बैठ गए इशिका ड्राइव कर रही थी। बातों बातों में हम ओफिशिअल से पर्सनल हो गए और एकाएक इशिका का हाथ फिसल कर गियर लीवर से हट कर मेरे लंड पर आ गया। मुझे झटका सा लगा पर मैंने नज़र अंदाज़ कर दिया। इशिका ने सॉरी कह कर हाथ हटा लिया। हम घर पहुँच गए। घर जाकर इशिका ने नौकरानी को चाय लाने के लिए कहा। हमने चाय ली। इशिका नौकरानी से बोली तुम घर जा सकती हो क्योंकि हम खाना बाहर खायेंगे।

अब हम दोनों अकेले थे इशिका नहाने चली गई। तभी इशिका बोली- सुनील इफ यू डोंट माईंड, तुम मेरी ब्रा पैंटी मुझे बाहर से ला दोगे?

मैंने कहा- क्यों नहीं।

और ब्रा पैंटी उसे दे दी कुछ ही पलों में इशिका ने कहा- सुनील ! मुझसे ब्रा का हुक नहीं लग रहा तुम लगा दोगे?

मैं बाथरूम में गया और सोचा कि सुनील तुझे इतने ग्रीन सिग्नल मिल रहे हैं अब तो गाड़ी को आगे बढ़ा ले।

मैंने हुक लगाने के बहाने इशिका की गोरी और चिकनी कमर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।

इशिका ने कहा- सुनील, यह तुम क्या कर रहे हो?

और बाथरूम से निकल कर बाहर आ गई। मैंने उसे पकड़ कर उसकी गर्दन पर अपनी गरम साँसे छोड़ी और होंटों को अपने होंटो में लेकर चूसना शुरू किया। अब वो चाह कर भी मेरी कैद से ख़ुद को आजाद नहीं कर पा रही थी। हम दोनों अब बिल्कुल नग्न थे और दोनों एक ही टब में नहा रहे थे। मैंने इशिका की मस्त चुचियों को अपने हाथों में ले लिया। जैसे मै चुचियों को दबाता तो उसके मुंह से स ससी ईई….आ आ आह ह्ह्ह हह… ऊ ओ ऊओऊ ऊऊ ऊफ्फ फ्फ्फ्फ्फ्फ़… की सिसकियाँ निकलने लगती।

मैंने टब के अंदर ही इशिका की गुलाबी चूत में ऊँगली डाल दी। इशिका पानी में होते हुए भी गरम लग रही थी। हम पानी से बाहर आ गए बाहर आते ही इशिका मुझ से लिपट गई और कहने लगी सुनील अब और नहीं सहा जाता अपना ये मस्त लंड मेरी चूत में डालो और मुझे आज जन्नत की सैर करा दो। अब हम दोनों एक दम मजबूर हो चुके थे क्योंकि किसी में भी ख़ुद को रोक पाने की ताकत नहीं थी। मैं इशिका को अपनी बांहों में उठा कर बेडरूम में ले गया। ले जाकर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। ऐसा लग रहा था जैसे बेड पर सजी रेशमी चादर बड़ी बेसब्री से हमारा इंतज़ार कर रही थी। मैंने उसके बदन के हर एक मदमाते और महकते अंग को अपनी नज़र से चूमा और फ़िर सीधे ही अपने होंट उसके नरम नाज़ुक होंटो पर रख दिए।

मैंने उसके माथे से लेकर उसके कदमो तक हर जगह पर बिंदास किस किए। मेरे किस करने से वो बेबस होती जा रही थी और मैं उस पर हावी हो रहा था। मुझे महसूस हुआ के इशिका अपनी गरम नरम और गुलाबी चूत को धीरे धीरे मेरे लंड से रगड़ने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसकी चूत को हाथ से सहलाया उसकी चूत पर बाल तो क्या बाल के रोएँ भी नहीं थे। उसने अपनी चूत पर बालो के लिए लेजर ट्रीटमेंट कराया हुआ था।

ऊँगली से सहलाते सहलाते मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया लेकिन तभी इशिका साथ के साथ पलट गई और मुझे नीचे लेकर ख़ुद मेरे ऊपर आ गई और अपनी चूत को मेरे कड़क लंड पर रखा और पूरे ज़ोर से मुझ से लिपट गई मुझे महसूस हो रहा था जब धीरे धीरे मेरा लंड इशिका के अंदर जा रहा था। इशिका की गरम सांसे अब सिसकियों आ अह हह… आ आःह्ह्छ….. ओ ऊ ऊह ह्ह्ह हस सावान फक मी फ्रॉम माय डेप्थ … ओ ऊ उष श्श्श्श… आ आया हह में बदलने लगी और उस वक्त हम दोनों एक दूसरे में खो गए। जितनी गहराई से मेरा लंड उसकी चूत को चूमता उतनी ज्यादा वो सेक्सी होती जाती वो मेरे ऊपर से ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने लगी.

थोड़ी देर में ही वो मेरे ऊपर ठहर गई मैने सोचा शायद इशिका का सेक्स पूरा हो गया। मैंने इशिका को कहा कि बस इतना ही !

तो वो बड़ी अदा से बोली- नहीं मेरी जान ! लेकिन मैं थक गई।

मैंने भी पलट कर उसे नीचे कर लिया और अपना लंड चूत में डालते हुए बोला- माय सेक्सी डोल ! लड़कियों को सिर्फ़ लड़कियों के ही काम करने चाहिए। उसके बाद मैंने इशिका को काफी देर तक चोदा। और हम दोनों का सेक्स साथ साथ पूरा हुआ। हम दोनों एक दूजे पर काफी देर तक लेटे रहे।

हम दोनों की जिस्म की प्यास तो फिलहाल ठंडी हो गई लेकिन पेट की आग सताने लगी क्योंकि रात के दस बज चुके थे। सर्वेंट को भी इशिका ने जल्दी भेज दिया था और हम दोनों थक चुके थे। लेकिन हमने पिजा आर्डर कर दिया थोड़े ही टाइम में पिजा आ गया हम दोनों ने पिजा खाया। और तब तक हमारा दोबारा कपड़े उतारने का दिल हो गया। खैर दोस्तों रात अपनी थी उस वक्त इशिका अपनी थी लेकिन उस रात कमबख्त आँखों की नींद अपनी नहीं थी।

एक हफ्ते तक में इशिका के ही घर में रहा और हमारी हर एक रात सुहाग रात रही। लेकिन सोने पे सुहागा की कंपनी ने हमारे हनी-मून का भी अरेंजमेंट कर दिया मतलब कंपनी ने मुझे इशिका के साथ उनके हेड ऑफिस प्रोडक्ट ट्रायल के लिए भेज दिया। और वहां फाइव स्टार होटल में हनी-मून एक दम मस्त और बिंदास। तो वहां पर भी इशिका की चूत का मस्त मस्त मज़ा लिया आपके सुनील ने। तो दोस्तों ज़रूर लिखना कि आपको मेरा एक्सपेरिएंस कैसा लगा। Sex Stories

Antarvasna

कमलिनी का Antarvasna महीना हुए चार दिन हो चुके थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि कमलिनी अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हलके से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था, मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और कमलिनी का नम्बर डायल कर दिया। घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !

मैंने पूछा- आज रात को आओगी?

तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।

रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड-कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी। मैंने कॉलबैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !

तो बोली- अभी आ रही हूँ ! ५ मिनट बाद कमलिनी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया कि छोरी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।

दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। अपनी झांटें साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा। उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया।

जमकर चोदने के बाद जब मैंने उसकी चूत में डिस्चार्ज किया तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।

अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया। मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है।

मैंने कहा- चली जाओ !

तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।

मैंने कहा- ठीक है।

दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोलीं- चाभी लेकर आ रही हूँ।

उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गई, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियां कॉलेज गई थीं। अन्दर आकर बोलीं- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।

रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी।

मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ, फ़िर खाना खाऊँगा।

भाभी वहीं कुर्सी पर बैठ गईं। मैंने उनको गरम करने के लिए जानबूझकर वहीं अपनी शर्ट उतारी और फ़िर बनियान भी उतार दी। भाभी शर्म के मारे इधर उधर ना देखें इसलिए उनसे कुछ ना कुछ बात करता रहा। मैंने कहा- दोपहर में नहा लेने से शरीर में ताजगी आ जाती है और मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अंडरवियर में से मेरा तन्नाया हुआ लंड साफ़ नज़र आ रहा था। मैंने अपना तौलिया कमर पर लपेटा और अंडरवियर उतारते उतारते बोला- भाभी जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूं?

बोलीं- कहिये !

मैंने कहा- ऐसा लगता है जैसे भगवान् जोड़ियाँ बनाते समय गलती कर गया है, मैं आप जैसी पत्नी डिजर्व करता था और रेखा को डॉक्टर साहब की पत्नी होना चाहिए था। अगर ऐसी जोड़ियाँ होतीं तो मेरी ज़िन्दगी जन्नत से कम न होती।

भाभी उठीं और बोलीं- काश ऐसा होता तो मैं हर पल तुम्हारी बाहों में ही गुजारती।

इतना सुनते ही मैंने उनका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी आंखों से इस तरह लगाया कि मैं धन्य हो गया। मैं एक कदम उनकी ओर बढ़ा और अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने करीब आने का इशारा किया, वो मेरे सीने लग गईं, मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा टांगों के पास ले जाकर उनको अपनी गोद में उठा लिया, मेरे कसरती बदन को निहारते हुए बोलीं- उतार दो दीपक ! मैं बहुत भारी हूँ !

मैंने कहा- भाभी मेरे प्यार के सामने आपका भार कुछ भी नहीं !

मैं उनको रेखा के बेडरूम में ले आया और पलंग पर लिटाकर उनसे लिपट गया। वो मेरे से लिपटी हुई छुई मुई हुई जा रहीं थीं। एक एक करके उनके सारे कपड़े मैंने उतार दिए और उनके होठों पर अपने होंठ रखकर एक हाथ से उनके मम्मे और दूसरे से उनकी चूत सहलाने लगा। थोडी देर में जब उनकी चूत गीली हो गई तो मैं उठा और अलमारी से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा तो भाभी बोलीं- दीपक जी इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं २० साल पहले नसबंदी करा चुकी हूँ।

मैं वापस पलंग पर आया, उनकी टाँगे फैला कर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुंह पर रखा और पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर कर दिया।

भाभी बोलीं- दीपक जी, एक बात पूछूं?

मैंने कहा- पूछिए !

तो बोलीं- तीन साल बाद आपका लंड किसी की चूत में जा रहा है तो कैसा लग रहा है?

मैंने कहा- आपको यह कैसे पता है?

तो बोलीं- रेखा ने मुझे बताया था कि मेरी इच्छा नहीं होती।

इस बातचीत के साथ साथ मेरा लंड अपना काम कर रहा था। उस दिन १ बजे से ४ बजे तक भाभी को दो बार चोदा।

मैंने पूछा- भाभी, सच बताना ! तुम्हारा देवर चोदने में कैसा है?

तो बोलीं- टचवुड। बहुत अच्छा !

मैंने कहा- अच्छा भाभी, एक बात और बताओ कभी गांड मराई है?

बोली- नहीं कभी नहीं ! शुरू शुरू में एक दो बार डॉक्टर साहब ने मारनी चाही थी लेकिन उनका लंड गांड में घुसा ही नहीं।

मैंने कहा- भाभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा, मराओगी ?

बोलीं- हाँ मेरे राजा जरूर मराउंगी।

फ़िर भाभी ने रोटियां सेंकी, हम दोनों ने खाना खाया और भाभी अपने घर चली गईं।

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए… Antarvasna

मेरा नाम सुजाता है, मैं राजकोट के एक गाँव से हूँ। मेरे पति लखनऊ में सरकारी पद पर कार्यरत हैं इसलिए साल में मुश्किल से 25-30 दिन हम साथ गुजारते हैं।
हमारे दो बच्चे हैं एक लड़का और एक लड़की, दोनों ही दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।

दोस्तो, मैं बाकी लड़कियों या औरतों की तरह नही कहूँगी कि मेरा फिगर ऐसा है वैसा है।
मेरे जिस्म का सही आकार इस तरह से है- मेरे मम्मे 34″ हैं, कमर 38″ और मेरे चूतड़ 42″ के हैं, मेरे मम्मे थोड़े ढीले से ही हैं।

मेरे पति मुझे शुरू से ही संतुष्ट नहीं कर पाते थे, उनका दो मिनट में ही वीर्यपात हो जाता था किन्तु शुरू में मैं इसे ही अपना नसीब मानकर अपनी जिंदगी बिता रही थी।

बात उन दिनों की है जब मेरे पति का लखनऊ तबादला हुआ। तब हम एम पी के एक शहर में रहते थे किन्तु इनका ट्रान्सफर हो जाने के बाद मैं अकेली रह गई थी घर पर।
तब मेरे पति ने मुझे मेरे पति के पिताजी यानि कि मेरे ससुर के पास रहने का सुझाव दिया।
वो एक गाँव में रहते हैं, वहाँ हमारी कुछ पुश्तैनी ज़मीन भी थी। ससुर जी अकेले ही घर रहते थे, सासू माँ की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। ससुर जी की आँखों की रोशनी और सुनने की क्षमता भी अब कम सी हो गई थी।

मैं अपने ससुर जी के पास रहने आ गई। वहीं मेरी मुलाकात संजू जी से हुई।
हुआ यूँ कि अगले दिन मैं छत पर कपड़े सुखाने गई तो मेरी नज़र सामने वाली छत पर पड़ी।
उस वक़्त संजू जी कसरत कर रहे थे, उन्होंने ऊपर कुछ नहीं पहना था, उनका कसरती जिस्म देखकर तो जैसे मैं मंत्रमुग्ध सी हो गई थी।
5’10” का कद, चौड़ा सीना, उठे हुए चौड़े कंधे, सुंदर चेहरा और उनके कोई तोंद भी नहीं थी, उनको देखकर दिल में कुछ कुछ सा होने लगा था… जब नज़रें मिली तो हम दोनों मुस्करा दिए।

फिर थोड़ी देर बाद वो घर पर आ गये और ससुर जी से बात करने लगे, तब ससुर जी ने हमें मिलवाया।
संजू भी घर पर अकेले रहते हैं, उनकी बीवी 5 साल पहले गुजर चुकी है, दोनों लड़के एम पी से बाहर कहीं जॉब करते हैं।

अब उनका हमारे घर आना जाना काफी ज्यादा हो गया, जल्दी ही हम दोनों की नजदीकियाँ भी बढ़ने लगी।
एक तरफ मैं थी जिसके पति ने कभी न तो पूरी तरह संतुष्ट किया था न ही साथ रहते हैं। दूसरी तरफ संजू जी जिनकी बीवी भी 5 साल पहले उन्हें छोड़ कर जा चुकी थी।
आग दोनों तरफ लगी थी दोस्तों।

एक दिन मैं रसोई में खाना बना रही थी, ससुर जी खेतों में घूमने गये थे, संजू जी रसोई में आये और मेरी कमर मे पीछे से हाथ डाल दिया। मैंने भी थोड़ा शरमाने का एहसास कराया।
किन्तु संजू जी भी जानते थे कि अभी कोई नहीं है घर पर… मैं बाहर जाने लगी तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी और खींच लिया और मैं सीधे उनके सीने से जा लगी।

उन्होंने बिना एक पल गँवाए अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
मैं भी जन्मों से प्यार की प्यासी की तरह उनके होंठों को चूमने लगी।
करीब दस मिनट तक हम यों ही एक दूसरे को चूमते रहे।

इतने में ससुर जी के कदमों की आहट हुई तो हम अलग हुए, तब मैंने उन्हें आज रात हमारे स्टोररूम में आने को कहा।
हमारे घर का स्टोर रूम करीब दो कमरों की जगह में बना है जिसमें आराम करने की सारी सुविधाएँ मौजूद हैं।

रात में ससुर जी को खाना खिलाकर अब तो बस उनके आने का इंतजार था।
थोड़ी देर में संजू जी चुपचाप स्टोररूम में आये, आते ही उन्होंने रूम का दरवाजा बंद किया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में कस के जकड़ लिया।
मेरी रूह को तो जैसे इसी पल का इंतजार था।
उन्होंने अपने होंठों में मेरे होंठों को ले लिया और दस मिनट तक मुझे चूमते चूसते रहे।
फिर उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरा ब्लाउज भी उतार दिया। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे 34 साइज़ के मम्मे उनके सामने झूलने लगे।

उन्होंने मेरा एक मम्मा अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगे, साथ ही दूसरे मम्मे को अपने हाथ से मसलने लगे।
मेरी एक लम्बे अरसे की प्यास आज बुझ रही थी तो मेरे मुँह से अपनेआप मादक सिसकारियाँ निकलने लगी- ऊम्म्म उम्म्म आहाह्ह आह्ह ऊम्म।
फिर उन्होंने मुझे पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया और अपने कपड़े भी उतार दिए।
जैसा उनका शरीर बलवान और मजबूत था, वैसा ही उनका लिंग भी करीब 8″ लम्बा और 3″ मोटा, मेरे पति से डेढ़ गुना।
उसे देखते ही मेरी आँखों में चमक आ गई।

तब उनका इशारा पाकर मैंने उनके लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरु किया।
उसके बाद उन्होंने मुझे लिटाया और अपना बलवान लिंग मेरी चूत पर सेट किया, एक धक्के में ही आधा लिंग चूत में प्रवेश करा दिया। मेरी तो एकदम चीख ही निकल गई।

फिर उन्होंने समझते हुए मेरे मम्मों को सहलाया, मेरे होंठों को चूसा और फिर धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लिंग डालने लगे।
दो मिनट बाद मैं भी अपने चूतड़ों को उठाकर उनका साथ देने लगी।

तब उन्होंने तेज़ तेज़ धक्के मारने शुरू किये, करीब 15 मिनट तक ऐसे ही मेरी जमकर चुदाई की। इस बीच मेरा तो एक बार पानी भी निकल चुका था पर अभी तक उनका लिंग एकदम तना हुआ था।

फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से मेरी चूत में अपना बलिष्ठ लिंग डालकर मेरी चुदाई शुरू की, वो तेज़ तेज़ धक्के मारते रहे।
ऐसे ही बीस मिनट तक मेरी धुआंधार चुदाई की, इसके बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर बैठाकर भी चोदा, करीब 45 मिनट तक मेरी जमकर चुदाई करने के बाद उनके लिंग ने अपना कामरस बाहर निकाला।

उस रात मुझे पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि किसी ने मेरी चूत की संतुष्टि की है, मैं तीन बार झड़ी थी, मेरी हालत तो ऐसी हो गई थी कि मैं उठकर वाशरूम तक भी नहीं जा सकती थी।

उस रात हमने एक बार और चुदाई की थी। सुबह ससुर जी के उठने से पहले संजू जी अपने घर चले गये।
तब से आज तक संजू जी और मैं एक दूसरे की काम वासना की तृप्ति करते हैं।
संजू जी मेरे पति के न होने पर मेरा हर तरह से ख्याल रखते हैं।

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