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इसके पहले की कहानी को Hindi Sex Stories आप लोगों ने बहुत सराहा तो मैंने सोचा कि अपना अगला अनुभव भी आप लोगों को बताया जाए। तो अब मेरी कहानी पढ़िये !
एक बार फिर बता दूँ, मै एक जवान लड़का हूँ। मैं जब पटना में रह कर पढ़ता था तो मेरे कमरे के नीचे एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक आरती नाम की औरत और उसके पति रहते थे। उसके दो छोटे लड़के भी थे। उसके पति सुबह छः बजे काम पर चले जाते थे, बच्चे पास के ही एक स्कूल में पढ़ने जाते थे, तो आठ बजे के बाद बच्चे भी चले जाते थे। आरती का कमरा नीचे था और मेरा कमरा ऊपर था। आरती देखने में काफी सुंदर थी, मैं उसे भाभी कहकर बुलाता था। बात करने में वो काफी माहिर थी, ऊपर मेरे कमरे में आकर बात करने लगती थी, वो छत पर कपड़े पसारने आती थी तो उसकी चूचियाँ ब्लाऊज़ को फाड़ने पर तुली रहती थी। देखने में वो दो बच्चो की माँ कभी नहीं लगती थी। मै तो बार बार उसकी चूची को ही देखता था। शाय्द उसका पति उसको मन से कभी नहीं चोदता था इसलिए वो प्यासी प्यासी निगाहों से देखती रहती थी।
मै कभी कभी उसके कमरे में टी.वी देखने चला जाता था। दिन में अकसर वो अकेली ही रहती थी। मुझे पूरा मन रहता कि उसे चोदूँ पर मैं उसे बोल नहीं पाता था, डर लगता था।
एक दिन की बात है, मैं दोपहर में उसके कमरे में गया तो दरवाजा से आवाज दी तो कोई नहीं बोला। तो मैंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो देखा कि दरवाजा नहीं लगा हुआ है।
मैं अन्दर घुस गया और सीधे भाभी के टी.वी. वाले कमरे में चला गया।
जब वहाँ पहुँचा तो देखा कि भाभी पलंग पर सोई हुई हैं और टीवी चल रहा है।
वो उस समय साड़ी में थी, उनकी साड़ी उनके घुटने तक आई हुई थी। यह देखकर मेरी नीयत खराब हो गई। अब मुझे लगा कि मैं उनकी बुर में सीधे लंड पेल दूँ पर मुझे डर लग रहा था कि भाभी जग जायेगी तो शोर न मचाने लगे !
मैं बहुत हिम्मत करके उनके पास गया और उनकी साड़ी को ऊपर सरकाया। जैसे ही साड़ी को ऊपर किया, उनकी काली काली झांट नजर आने लगी। मै तो उनकी लम्बी-लम्बी झांटों को देखकर दंग रह गया।
धीरे-धीरे मैंने उनकी साड़ी को और ऊपर कर दिया, फिर उनके चेहरे पर देखा तो वो आराम से सो रही थी। मेरा साहस बढ़ गया। उनकी बुर को देख कर ऐसा लग रहा था कि काले जंगल में कोई घाटी हो। अब मुझसे रहा नहीं गया, मैं झट से अपना लंड सहलाने लगा।
इतने में भाभी जग गई और मेरे लंड को पकड़कर बोली- लाओ इसको मेरे हवाले कर दो ! कब से इस साले को मैं खोज रही थी, तुमने इसे कहाँ छुपा रखा था।
जब भाभी ने ऐसा कहा तो मेरा सब डर दूर भाग गया।
भाभी ने कहा- मैं सोई थोड़े ही थी, सब देख रही थी कि तुम क्या करने वाले हो !
भाभी ने कहा- साला मेरा पति मुझे चोदता ही नहीं है, वो बहुत थका रहता है।
भाभी मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर मैंने भाभी को जमकर चोदा।
तब से दो साल लगातार मैंने भाभी को चोदा, हर रोज़ दिन में उनको चोद कर मस्त कर देता।
एक बार भाभी की छोटी बहन उनके घर आई थी। भाभी ने उसको चोनने में मेरी मदद की।
इस बात को मैं अपनी अगली कहानी में लिखूंगा।
यह कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरुर लिखिएगा। Hindi Sex Stories
रात को खाना खाने के बाद मैं घूमने के बहाने छत चला गया और पिंकी का इंतजार करने लगा, मगर काफी देर तक इन्तजार करने के बाद भी पिंकी छत पर नहीं आई। आखिरकार थक कर मैं वापस नीचे आकर सो गया।
अगले दिन दोपहर को भी पिंकी पढ़ने के लिये नहीं आई, इससे अब तो मेरे दिल में कुछ शंका व भय सा हो गया… मैं सोच रहा था कि कहीं कल जल्दबाजी में ज्यादा आगे बढ़कर मैंने कुछ गलती तो नहीं कर दी!?!
रात को भी खाना खाने के बाद मैं फिर से छत पर चला गया और ऐसे ही घूमने लगा…
कुछ देर तक ऐसे ही छत पर घूमने के बाद मैं वापस जाने ही लगा था कि तभी मुझे पिंकी के घर की तरफ से सीढ़ियों पर किसी के चढ़ने की आवाज सुनाई दी… आवाज सुनकर मैं वहीं पर रूक गया।
फिर कुछ ही देर बाद एक साया छत पर आया और तार पर से सूख रहे कपड़े उतारने लगा, वो साया बार बार मेरी तरफ ही देख रहा था।
छत पर अन्धेरा तो था मगर कद काठी और कपड़ों के पहनावे से मैं पहचान गया कि वो पिंकी ही है।
मैं हमारे घर व पिंकी के घर के बीच बनी दीवार पर से कूद कर तुरन्त पिंकी के घर की छत पर चला गया जिससे पिंकी घबरा सी गई और जल्दी जल्दी कपड़े उतारने लगी।
मैंने उससे पूछा कि वो आज पढ़ने के लिये क्यों नहीं आई तो उसने बताया कि उसे घर में ही कुछ काम थे।
तब तक पिंकी ने तार पर से कपड़े उतार लिये थे और वो वापस जाने के लिये मुड़ने ही वाली थी, तभी मैंने उसे पीछे से पकड़कर अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन व गालों को चूमने लगा जिससे पिंकी कसमसाते हुए कहने लगी- इईई…श्शशश… क्या कर रहा है…? छोड़ मुझे…! कोई आ जायेगा…!
मगर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसकी छोटी छोटी चुची को मुट्ठी में भर लिया और उसकी गर्दन व गालों को चूमते हुए धीरे धीरे उसके रसीले होंठों की तरफ बढ़ने लगा।
मेरे इस हमले से पिंकी एक तो बुरी तरह से घबरा गई थी और दूसरा उसने दोनों हाथों में कपड़े पकड़ रखे थे इसलिये वो मुझसे छुड़ाने का इतना अधिक प्रयास नहीं कर पा रही थी, बस कसमसाते हुए घबराई सी आवाज में धीरे धीर कह रही थी- कोई… देख लेगा…! क्या क…कर…रहा है…? छोड़ मुझे…! प्ली..ईज…!’
मगर तब तक मेरे होंठ उसके होंठों तक पहुँच गये और मैंने उसके रसीले होंठों को धीरे धीरे चूसना शुरु कर दिया.
अब तो पिंकी और भी जोर से कसमसाने लगी, उसने जो कपड़े हाथों में पकड़ रखे थे उन्हें नीचे गिरा दिया और मुझे हटाने के लिये हाथ पैर चलाने लगी। पिंकी के होंठों को अपने मुँह में भर कर मैंने उसका मुँह तो बन्द कर दिया था लेकिन अब भी वो मुझसे छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, इसलिये मैंने पिंकी को घुमा कर दीवार के साथ लगा लिया, साथ ही अपना एक हाथ भी उसकी टीशर्ट में भी घुसा दिया और उसकी छोटी छोटी नंगी चुची को सहलाने लगा।
पिंकी अब मुझे हटाने के लिये बस मेरे हाथों को ही पकड़ने का प्रयास कर पा रही थी क्योंकि मैंने उसे दीवार से लगा कर अपने शरीर के पूरे भार से दबा लिया था।
मैंने भी अब मेरा हाथ जो पिंकी की चुची सहला रहा था, उसे धीरे से उसकी योनि की तरफ बढ़ा दिया जिससे पिंकी जोर से कसमसाते हुए ‘अअओ.. ओइईई… वहाँ नहीं… वहाँ नहीं… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर… रहा.. है… अ..आआआ… ह्ह्हहह…’ कह कर चिल्लाई मगर पिंकी ने नीचे लोवर पहन रखा जिसमें इलास्टिक लगा हुआ था, जब तक वो मेरा हाथ पकड़ती, तब तक बहुत देर हो गई थी… और बिना तकलीफ के ही मेरा हाथ सीधा उसके लोवर व पेंटी में उतर गया.
पिंकी ने अपनी जाँघों को भी सिकोड़ने की कोशिश की मगर मेरा एक पैर उसकी दोनों जाँघों के बीच फंसा हुआ था इसलिये वो असफल हो गई. और अब मेरा हाथ पिंकी की छोटी सी नंगी योनि पर था जो हल्की सी गीली हो रही थी।
पिंकी की योनि बिल्कुल छोटी सी ही तो थी जो मुश्किल से मेरी दो उंगलियों के ही बराबर की होगी इसलिये मैंने उसे अपनी उंगलियों से ही दबा लिया। पिंकी ने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया था और अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश करते हुए वो अब भी यही दोहरा रही थी- अअओ.. ओइईई… क्या क…कर… रहा है…? मरवायेगा…? छोड़ मुझे…! प्ली..ईज…! कोई… देख लेगा…!
मगर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने अब उसकी नंगी योनि को धीरे धीरे उंगलियों से ही रगड़ना शुरू कर दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और मेरे हाथ को अपने लोवर से बाहर निकालने के लिये छटपटाने सी लगी। अभी तक मेरी उंगलियाँ पिंकी की योनि को ऊपर से ही रगड़ रही थी मगर पिंकी के छटपटाने से मेरी उंगलियाँ योनि की दोनों फांकों के बीच चली गई.
मैंने भी अब उसकी योनि की छोटी छोटी फांकों को उंगलियों से हल्का सा फैला दिया और बीच की एक उंगली से योनि की फांकों के बीच, योनि की दरार में सहालाना शुरू कर दिया.
जिससे कुछ ही देर में उसकी सांसें तेज व गहरी हो गई और मेरी उंगलियाँ भी योनिरस से गीली होने लगी.
पिंकी का विरोध अब कुछ हल्का पड़ने लगा था क्योंकि उसे भी अब मजा आ रहा था। उसने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ तो रखा था, मगर उसे अब वो बाहर निकालने की इतना अधिक कोशिश नहीं कर रही थी।
मैं भी ऐसे ही पिंकी की योनि को रगड़ता मसलता रहा जिससे कुछ ही देर में मेरा हाथ योनिरस से भीग कर तर हो गया और पिंकी का विरोध भी अब काफूर हो गया, पिंकी के मुँह से अब हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गई थी वो झूठ मूठ में दिखाने के लिये ही ‘छ..ओ…ड़..अ.. म्ममुऊ… झ..ऐ… क..य..आ… कर… रहा..है… अ..आआआ… छ..ओ…ड़..अ…’ कहते हुए मेरा विरोध कर रही थी मगर मेरे हाथ को अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश नहीं कर रही थी।
मैं भी सही मौका देखकर धीरे से नीचे बैठ गया और साथ ही पिंकी की पेंटी व लोवर को भी एक झटके में मैंने नीचे खींच लिया जिससे पिंकी जोर से ‘अअओ..ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर… रहा..है… अ.. आआआ… ह्ह्हहह…’ करके चिहुँक पड़ी और दोनों हाथों से अपने लोवर पेंटी को पकड़ने की कोशिश करने लगी, मगर तब तक वो उसके घुटनों तक उतर चुके थे.
मेरा दिल तो बहुत कर रहा था कि एक बार पिंकी की इस छोटी सी कच्ची कुवाँरी योनि के दीदार हो जाये मगर अन्धेरे में कुछ साफ नहीं दिखाई दे रहा था बस उसकी गोरी नंगी जांघें ही चमक रही थी।
पिंकी ने दोबारा से अपने लोवर व पेंटी को पहने की कोशिश तो करनी चाही मगर तब तक मैंने अपना सिर उसकी दोनों जाँघों के बीच घुसा दिया और अपने प्यासे होंठों को उसकी नंगी, केले के तने सी चिकनी, नर्म मुलायम जाँघों पर लगा दिया.
मेरे प्यासे होंठों का अपनी नंगी जाँघों पर स्पर्श पाते ही पिंकी का पूरा बदन एक बार तो जोर से सिहर सा गया और उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया.
मैंने भी अब देर ना करते हुए धीरे धीरे उसकी नंगी जाँघों को चूमते हुए ऊपर उसकी योनि की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया जिससे पिंकी के पूरे बदन में सिहरन व झुरझुरी की लहर सी दौड़ने लगी जिसे मैं भी साफ महसूस कर पा रहा था।
पिंकी जब कुछ नहीं कर सकी तो वो मुझे हटाने के लिये दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मुझे धकेलने लगी मगर मैंने पीछे से दोनों हाथों में उसके नितम्बों को बांहों में भर लिया और धीरे धीरे उसकी जाँघों को चूमते हुए ऊपर उसकी योनि की तरफ बढ़ता रहा.
पिंकी की जाँघों को चूमते हुए मैं घुटनों से थोड़ा ऊपर बढ़ा ही था कि पिंकी के पैर कंपकपाने शुरू हो गये और वो मेरे होंठों की छुवन से अपने को बचाने के लिये पीछे होने की कोशिश करने लगी.
मगर उसके पीछे एक तो दीवार थी और दूसरा मैं उसके नितम्बों को पकड़े हुए था इसलिये वो पीछे नहीं हट सकी.
मैं जाँघों को अन्दर की तरफ से चूमता हुआ ऊपर बढ़ रहा था इसलिये थोड़ा सा ऊपर बढ़ते ही मेरे होंठ चिपचिपे व नमकीन से होने लगे. यह पिंकी का प्रेमरस था जो उसकी गीली पेंटी के कारण उसकी जाँघों पर लग गया था।
मैं जैसे जैसे ऊपर पिंकी की योनि की तरफ बढ़ रहा था वैसे वैसे मेरे होंठ ज्यादा गीले व चिपचिपे होते जा रहे थे, साथ ही पिंकी के पैरों की कंपकपाहट भी बढ़ती जा रही थी। पिंकी एक कुँवारी व अनछुई लड़की थी उसके साथ ये सब पहली बार हो रहा था जो उसकी बर्दाश्त के बाहर था इसलिये मुझे आगे बढ़ने से रोकने के लिये पिंकी ने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया मगर अब मैं उसकी कमसिन कुंवारी योनि का स्वाद चखे बिना कहाँ मानने वाला था, पिंकी के पकड़ने के बावजूद भी मैं ऐसे ही धीरे धीरे जाँघों को चूमते हुए उसकी नंगी योनि तक पहुँच गया जहाँ से उसके कौमर्य की भीनी भीनी मादक महक फूट रही थी।
पिंकी की उस कच्ची कुँवारी छोटी सी योनि की मादक महक पाकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे एक बार जोर से चूम लिया जिससे पिंकी ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्शशश… अह.. आआ… ह्ह्हहहहह…’ कहकर चीख पड़ी और कंपकपा कर उसकी दोनों जांघें आपस में मिलकर बंद हो गई।
पिंकी का ये पहला और बड़ा ही अनोखा व अदभुत अनुभव था इसलिये उसका झिझकना वाजिब ही था।
मैंने भी पिंकी की जाँघों के साथ अब कोई जबरदस्ती नहीं की, बल्कि ऐसे ही उसकी बन्द जाँघों को व योनि का ऊपरी भाग, यानि की नाभि के निचले हिस्से पर चूमता चाटता रहा, साथ ही मेरे हाथ जो की पिंकी के नितम्बों को पकड़े हुए थे उनसे धीरे धीरे पिंकी के नितम्बों को भी सहलाना शुरु कर दिया जिससे कुछ ही देर में पिंकी की जाँघों की पकड़ कुछ हल्की हो गई और वो अब एक दूसरे से धीरे धीरे जुदा होने लगी।
पिंकी के पैर अब भी हल्के हल्के कंपकपां रहे थे और वो कंपकपांती सी आवाज में अब भी यही दोहरा रही थी ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर…रहा..है… अ..आआआ.. .ह्ह्हहहहह… छ..ओ…ड़.. अ… म्ममुऊ.. झ..ऐ… क..य..आ…कर…रहा..है… अ..आआआ… छ..ओ…ड़..अ…’ मगर अब मुझे हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी
मैंने भी कोई जल्दबाजी नहीं की बल्की ऐसे ही पिंकी जाँघों को चूमता चाटता रहा…
मगर हाँ, बीच बीच में मैं अपने हाथों को पिंकी के नितम्बों पर से सहलाते हुए पीछे से ही उसकी जाँघों पर जरूर ला रहा था.
और इस बार जब मेरे हाथ पिंकी की जाँघों पर आये तो मैंने उनके बीच अपना हाथ घुसाने के लिये हल्का सा, बहुत ही हल्का सा दबाव डाला ही था कि पिंकी की जांघें अपने आप ही खुलकर फिर से अलग हो गई और अब मेरा मुँह फिर से पिंकी की दोनों जाँघों के बीच था।
मैंने भी एक बार पिंकी की योनि को ऊपर से हल्का सा चूमा और फिर प्रेमरस सी भीगी योनि की छोटी छोटी कोमल फांकों को ऊपरी छोर से चूमता हुआ धीरे धीरे नीचे प्रेमद्वार की तरफ बढ़ गया.
पिंकी के मुँह से अब हल्की हल्की कराहें निकलना शुरू हो गई और अपने आप ही धीरे धीरे उसकी जांघें फैलने लगी, जैसे जैसे मेरे होंठ योनि की कोमल फांकों को चूमते हुए नीचे योनिद्वार की तरफ बढ़ रहे थे वैसे वैसे पिंकी की जांघें भी फैलती जा रही थी।
थोड़ा सा नीचे बढ़ते ही मेरे होंठ पूरी तरह योनिरस से भीगकर तर हो गये और मुँह का स्वाद बिल्कुल नमकीन हो गया क्योंकि मेरे होंठों अब योनि के अन्तिम छोर पर थे जहाँ से योनिरस का झरना फूट रहा था। मैंने भी उस यौवन झरने के उद्धगम स्थल को अपनी पूरी जीभ निकाल कर चाट लिया जिससे पिंकी ने जोरो से थरथराती आवाज में ‘अअओ.. ओह ईई… इईई… श्श्श्शश… अ..आआआ… ह्ह्हहह… क..य..आ… कर.. रहा..ह्ह्हह… है’ कह कर फिर से अपनी जाँघों को भींच लिया मगर इस बार वो अपनेआप खुल भी गई।
मैं पिंकी के उस यौवन झरने को अपनी जुबान से चाटकर साफ करने की कोशिश करने लगा, मगर जितना मैं अपनी जुबान से चाटकर उसे साफ कर रहा था वो उतना ही ज्यादा और ज्यादा प्रेमरस उगल रहा था।
अभी तक मैं पिंकी के उस कुवांरे खजाने की पहरेदार उन कोमल फांकों को ऊपर से ही चूम रहा था अभी तो खजाने तक पहुँचना बाकी था इसलिये धीरे से मैंने योनि की कोमल फांकों को कुरेद कर अपनी जीभ को योनि की दरार के बीच घुसाई और जीभ से योनि की दरार में धीरे धीरे अन्दर की तरफ से चाटना शुरू कर दिया जिससे पिंकी की मुँह से अब सिसकारियाँ निकलनी शुरु हो गई।
प्रेमरस से भीग कर पिंकी की योनि बिल्कुल चिकनी हो चुकी थी इसलिये अपने आप ही मेरी जीभ योनि में ऊपर से नीचे तक फिसल रही थी, मैं भी अपनी पूरी जीभ निकाल कर योनि की फांकों के बीच अन्दर की तरफ से पूरी योनि को चूम चाट रहा था.
तभी अचानक से पिंकी का पूरा बदन जोर से ऐसे थरथरा गया जैसे की उसे कोई करंट का झटका लगा हो, और उसने जोर से ‘अ.. उ्ऊऊ..इईईई… इईई…श्श्शश… अ..आआआ… ह्हहहह…’ कह कर मेरे सिर को दूर झटकने की कोशिश की.
अन्धेरे में कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था मगर फिर भी मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरी जीभ ने योनि के अनारदाने को छू लिया था जो किसी भी औरत या लड़की का बेहद ही संवेदनशील अंग होता है इसलिये पिंकी इतनी जोर से चीख पड़ी थी।
मगर मैं रुका नहीं और बस एक दो बार ही योनि के उस छोटे से चुचक के साथ खिलवाड़ करने के बाद मैं नीचे प्रेमद्वार की तरफ बढ़ गया.
और अब मेरी जीभ प्रेमद्वार की रक्षा करने वाली उन नाजुक कलियों को कुरेद कर प्रेमद्वार पर दस्तक दे रही थी.
और जैसे ही मेरी जीभ पिंकी के योनिद्वार पर लगी, पिंकी ने ‘अअओ.. ओइईई… इईई…श्श्श्शशश… अ..आआआ… हाहहह…’ की एक मीठी सीत्कार भर कर दोनों हाथों से मेरे सिर को जोर से अपनी योनि पर दबा लिया.
मैंने भी पिंकी को ज्यादा नहीं तड़पाया और धीरे से अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी छोटी सी योनि के संकरे योनिद्वार में पेवस्त कर दिया जिससे एक बार फिर पिंकी ‘अह अओ.. इईई…
उम्म… इईई… अह ..आआआ… ह्हह…’ कह कर उचक गई. मगर इस बार उसने मुझे हटाने की कोशिश नहीं की बल्कि खुद ही मेरे सिर को अपनी योनि पर दबा लिया।
मैंने भी धीरे धीरे अपनी जुबान को योनिद्वार की संकरी सी गुफा में घिसना शुरु कर दिया.
पिंकी का अब बुरा हाल हो गया, ये सब उसकी छोटी सी योनि के साथ पहली बार हो रहा था जो उसकी बर्दाश्त के बाहर था, उसने मेरे सिर के बालों को कस कर पकड़ लिया था और जोर से
‘अअओ.. ओइईई… इईई…श्श्स्स… अ..आआ आह्हह… अब…ब…स्सस… इईई…श्श्श्शशश… अ..आआआ…ह्ह्हहहहह… अब…बस्सस…’ कहते हुए कभी मुझ पर झुक जा रही थी तो कभी सीधा दीवार के साथ तनकर खड़ी हो रही थी. मगर मुझे हटाने का प्रयास या फिर मेरा विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी।
धीरे धीरे मैंने भी अपनी जीभ की हरकत को थोड़ा तेज कर दिया… और अब मेरी जीभ पिंकी के संकरे प्रेमद्वार की दीवारों पर घिसने के साथ साथ कभी कभी थोड़ा सा नीचे उसकी गुदाद्वार तक भी जा रही थी जिससे पिंकी की सिसकारियाँ भी बढ़ गई और उसने भी मेरी जीभ के साथ साथ धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया.
पिंकी की योनिद्वार से इतना अधिक प्रेमरश का स्राव हो रहा था कि अपने आप की मेरे होंठ व जीभ उसमें फिसल रहे थे। यौवन रस से भीगी पिंकी की योनि में मेरी जीभ व होंठ अब अपनी पूरी चपलता से चल रहे थे।
धीरे धीरे अब पिंकी की सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थी और उसने खुद ही कमर हिला कर अपनी योनि को मेरे चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया था।
मैं भी अपनी पूरी कुशलता व तेजी से पिंकी की योनि में जीभ चला रहा था.
मेरी जीभ अब पिंकी के प्रेमद्वार में तो कभी योनि की दोनों फांकों के भीच योनि के ऊपरी छोर से लेकर नीचे उसकी गुदाद्वार तक का सफर कर रही थी साथ ही बीच बीच में मेरी जीभ योनि के उस अनारदाने को भी कुरेद दे रही थी।
पिंकी अपनी कुँवारी योनि पर इस तीन तरफा मिश्रित हमले को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकी… जल्द ही उसका बदन कमान तरह तनने लगा और उसकी पकड़ मेरे सिर पर कसती चली गई… उसने मेरे सिर को पूरी ताकत से अपनी योनि पर दबा लिया और जोर से ‘इईईई… श्श्शश अआआ…ह्हहह… इईईई… श्श्श्शश अहा आआ… ह्ह्हहह… इईईई…श्श्श्शश अआआ…ह्हहहह… इईईई…श्श्शश अआआ…ह्हहहह…’ कहते हुए अपनी योनि से रह रह कर मेरे चेहरे पर प्रेमरश की बौछार करना शुरू कर दिया।
चार पाँच किश्तों में अपना योनिरस मेरे चेहरे पर उगल कर पिंकी निढाल हो गई, वो तो शायद मुझ पर गिर ही जाती मगर मैंने हाथों से उसे सम्भाल लिया, पिंकी के सारे बदन का भार अब मेरे हाथों पर था, मैं भी अब पिंकी को अपनी बांहों में थामे हुए ही धीरे धीरे उठकर खड़ा हो गया और धीरे धीरे फिर से उसके मखमली गालों को चूमना शुरू कर दिया।
पिंकी भी अब इस मूर्छा से जागने लगी थी मगर उसका बदन अब भी कंपकपा रहा था। धीरे धीरे मैं पिंकी के गालों पर से चूमता हुआ उसके कोमल होंठों पर आ गया मगर जैसे ही मैंने उसके होंठों को मुँह में भरा पिंकी ने अपना चेहरा घुमा लिया और मुझसे छुड़वाकर जल्दी से अपने कपड़े सही करने लगी।
पिंकी ने अपने लोवर व पेंटी को पहना ही था कि मैंने फिर से उसको पीछे से पकड़ लिया और उसके गर्दन व गालों को चूमते हुए कहा- यार, तुम्हारा तो हो गया अब मेरा भी तो कुछ कर दो…!
इस पर पिंकी ने कहा- क्या?
मैंने उसके गालों पर एक जोरदार चुम्बन करते हुए बताया- यही जो मैंने किया है.
और अपना एक हाथ उसकी लोवर में डाल दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… अ..आआ…हहह… बस…छोड़…मुझे… अ..आआआ… ह्हह… क..य..आ… कर…रहा.. है… अ..आआआ… ह्ह्ह… अब…बस्स… बहुत.. देर… हो..गई… जाने..दे… मुझे… अ..आआआ… ह्हहह…’ कहते हुए मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी.
मगर मैं कहाँ रुकने वाला था, मेरा हाथ अब पिंकी की नंगी योनि पर था जो प्रेमरस से भीगी हुई थी और उसके योनिद्वार से अब भी हल्का सा प्रेमरस रिस ही रहा था।
पिंकी मेरा हाथ अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी मगर मैंने पिंकी के होंठों को मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया और उसकी नंगी योनि को फिर से मसलना शुरु कर दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और मुझसे छुटने के लिये हाथ पैर चलाने लगी।
मैंने पिंकी को फिर से दीवार से सटा लिया और धीरे धीरे उसकी योनि की फांकों को रगड़ता मसलता रहा जिससे कुछ ही देर में उसकी योनि में फिर से तरावट आ गई और पिंकी फिर से उत्तेजित होने लगी।
मैं कुछ आगे करता कि तभी हमारे घर की तरफ से मेरी भाभी की आवाज सुनाई दी, वो मुझे नीचे बुला रही थी।
भाभी की आवाज सुनते ही पिंकी तुरंत मुझसे छुड़वा कर अलग हो गई और जल्दी से नीचे छत पर गिरे हुए सूखे कपड़े उठाने लगी।
मैं भी हमारे घर की छत पर आ गया और ऊपर से ही भाभी को आवाज देकर बता दिया- थोड़ी देर में आ रहा हूँ।
इसके बाद मैं वापस पिंकी के घर की छत पर आ गया मगर तब तक पिंकी कपड़े उठाकर नीचे जा चुकी थी।
सच कह रहा हूँ, उस समय मुझे अपनी भाभी पर बहुत गुस्सा आ रहा था… पर कर भी क्या सकता था इसलिये मन मसोस कर नीचे आ गया।
नीचे भाभी ने जब मुझसे पूछा कि ‘क्या चल रहा है’ तो मैंने भी भाभी को सारी बात बता दी।
भाभी ने कहा- मुझे पता था तुम यही सब कर रहे होगे, इसलिये तो बुला लिया, ऊपर छत पर कोई देख लेगा तो क्या होगा, थोड़ा इन्तजार कर लो, जब मम्मी पापा शहर जायेंगे तब मौका मिल जायेगा।
मुझे उत्तेजना भी चढ़ी हुई थी और भाभी पर गुस्सा भी आ रहा था इसलिये उस रात मैंने सारा गुस्सा भाभी को बुरी तरह से चोद कर उतारा जिससे भाभी को मजा तो आया पर सुबह उसकी हालत खराब हो गई।
दोस्तों, मेरा नाम कोमल है। मैं Antarvasna उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र तेईस साल है, ख़ूबसूरत और एक कसे हुए बद़न की मल्लिका हूँ। शादी से पहले मैंने कई लड़कों से चुदवाया था, पर शादी अपने घरवालों की मर्ज़ी से की। कहते हैं ना कि यह सच्चाई है कि एक लल्लू को ख़ूबसूरत और ख़ूबसूरत को बद़सूरत जीवनसाथी मिलता है। मेरा पति बद़सूरत तो नहीं था, पर हाँ माँ का पिल्ला था। मेरे ससुर फौज में रह चुके थे।
मैं शादी की पहली रात ही निराश हुई, जब पति का लंड मेरे अनुमान से कम निकला। ऊपर से वह ख़ुद तक ही सीमित रहता। पाँच-छः मिनटों तक चोदता और अपना मतलब निकाल, पासा पलट कर सो जाता, और मैं सारी रात मछली की तरह तड़पती रह जाती।
शादी को छः महीने हो गए। सास मुझसे कहती रहती कि तुम लोग बेबी कब करने वाले हो? मुझे जल्दी पोते-पोती का मुँह देखना है। मैं उनसे क्या कहती कि आपका बेटा किसी लायक़ ही नहीं है! बच्चा क्या आसमान से पेट में डलवा लूँ! पति भी कहता कि मैं तो तुम्हें रोज़ चोदता हूँ, फिर तेरे अन्दर ही कोई कसर है।
मैंने कहा, “कभी मेरा पानी निकलवाया है, जिससे बच्चा हो जाए।” इस बात को लेकर बन्द कमरे में हमारी तक़रार होने लगी।
उधर मेरी जवानी देख-देख कर मेरा फौजी ससुर मुझे दूसरी नज़र से देखने लगा। फौजी होते ही ऐसे हैं। एक रात हम दोनों के अलावा घर में ससुर जी ही थे। पति को पहली बार नशे में देखा था, वह बहुत मूड में था। उसने मुझे रोज़ की तरह नंगी कर दिया। मुझे चूम-चाट कर गरम कर डाला।
मैंने भी सोचा कि नशे के कारण शायद उसका आज देर से झड़े, क्योंकि मेरा आशिक दारू पी कर मुझे पूरी रात चोदता था। मैंने जितने भी लड़के फाँसे थे, सभी यह राय रखते थे। पहली बार नशे में पति को बिस्तर मे मूड में देखा, चूमा-चाटी के बाद उसने अन्दर डाला, पहले से कुछ अधिक समय तक टिका, लेकिन वह कुछ अधिक ही उत्तेजना के मारे, रोज़ की तरह मुझे फिर से प्यासी छोड़ कर लुढ़क गया। मैंने ख़ूब खरी-खोटी सुनाई और मेरे मुँह से नामर्द निकल गया। उसने साथ लाई बोतल में से और पी कर मुझे खूब मारा-पीटा और मुझे कमरे से निकाल दिया।
मैंने अभी सलवार पहनी थी, ब्रा हाथ में था कि उसने मुझे बाहर निकाल कर कमरा अन्दर से बन्द कर सो गया। मेरे और सारे कपड़े अन्दर ही थे। मैं ब्रा डाल कर सोफे पर बैठ कर रोने लगी, तभी ससुर जी अपने कमरे से बाहर आ गए। मैं घबरा गई। पास में पड़ी सोफे की गद्दी पकड़ ख़ुद को छुपाने लगी।
“बहू, क्या हुआ? बाहर बैठी हो, वो भी इस तरह? मेरे पास बैठते हुए मुझसे उन्होंने पूछा।
“मुझसे क्या शर्म, क्यों छुपा रही रही हो अपनी जवानी मुझसे? क्या बात है? फिर प्यासी छोड़ दिया बेवकूफ़ ने?”
वह ज़बरदस्ती करने लगे। मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन एक फौजी जितनी जान नहीं थी मुझमें। उनकी फौलाद सी बाँहें देखकर मैं दंग रह गई। उनका पाजाम फूल चुका था। मतलब उनका लंड खड़ा हो चुका था। बेटे से दुगुना दम देखकर अधिक विरोध न कर पाई। वह मुझे बाँहों में उठाकर अपने बिस्तर पर ले गए और पटक दिया।
मेरी सलवार उतार कर बोले, इतनी पटाका बीवी मिली हो तो आदमी कैसे सो जाए? वह मेरी गोरी जाँघों को चूमने लगे। मैंने उनका पाजामा उतार दिया। नीचे कुछ नहीं था, लंड फनफना कर बाहर निकल आया। मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं लिया था। उनकी चौड़ी की छाती से अपने मम्मों पर रगड़ खाकर मेरी चूत गीली हो गई। मैंने उनका लंड मुँह में लिया और भूखी सी लंड पर टूट पड़ी।
ससुर जी ने मुझे सीधा लिटा, बीच में आकर पहले मेरी चूत सूँघी, “कितनी मस्त चूत है! कहते हुए उन्होंने अपने होंठ लगा दिए और मैं पागल हो गई। बेटा लल्लू, बाप फौलादी।
“बहू बहुत गरम माल है तू, कितने लौड़े खाए हुए हैं अभी तक?”
मैं शरमा गई, हाय छोड़ो… चोद दो मुझे अभी बस – मैंने सोचा
टाँगे खोलते हुए वह बीच में बैठ गए। लंड को चूत के होंठों पर रगड़ने लगे। मैं जल उठी। नीचे से कूल्हे उठाकर लंड डलवाने की नाकाम कोशिश की। मैं कह रही थी, अब तड़पाओ मत। लेकिन वह जानता था कि किस तरह एक आग जैसी गर्म औरत को ठंडी कैसे करते हैं। उसने धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर डाल दिया। मोटा लंड काफी दिनों के बाद डलवाया, मज़ा आ गया।
ज़बरदस्त झटके लगने लगे। “हाय…. हाय… चोद… ज़ोर से… ज़ोर से… हाय फाड़ डालो पापा… आज अपनी बहू को चित्त कर दो। देखो अपनी बहू को नंगी अपने नीचे लिटा कर चोद रहे हो…”
“साली ठंडी कर दूँगा, सारा माल तेरी कोख में डाल दूँगा…”
“हाय पापा अपना बीज मेरी कोख में डाल दो… सासू माँ ताने देतीं हैं…”
यह सुनकर वह और गरम हो गया।
“पापा अपनी रंडी बहू की चूत आज फाड़ दो। हाय, कुतिया हूँ मैं… मुझे कुत्ते की तरह चोदो… मुझे घोड़ी बना कर पेलो…”
उसके दम के सामने कितने दिनों बाद आज ऊँगली की बजाय लंड से झड़ी थी मैं। मुझे झड़ता देख उसने सीधा लिटा कर ऊपर से आते हुए टांगे कंधों पर रख कर तेज़ झटका दिया। तेज़-तेज़ झटकों से एक दम वो अकड़ने लगे और मेरे शरीर को मज़बूती से थाम अपना सारा पानी निकाल दिया।
“हाय ससुर जी, मज़ा आ गया।”
“बहू तुम बहुत ही सेक्सी माल हो।”
दोस्तों, फिर हम मौक़ा देखकर हमबिस्तर होने लगे। ससुर जी ने अपने दूसरे बेटे के लिए एक और फ्लैट ले रखा था जो पढ़ाई करता था। ससुर से आज्ञा लेकर मैंने एक कम्प्यूटर-क्लास में दाखिला ले लिया। लेकिन वह एक बहाना था। मैं सीधा फ्लैट पर जाती, जहाँ ससुर जी भी आ जाते, और हमारी रोज़ चुदाई के दौर चलते। मुझे अगली माहवारी नहीं आई। स्ट्रिप से जाँच किया तो मैं गर्भवती निकली। सासु माँ बहुत खुश हुईं।
ससुर जी भी जब उस दिन फ्लैट में मिले तो बहुत खुश हुए। पापा और दादा दोनों ने उस दिन मुझे और जोश से ठोंका। पर एक दिन उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह अब घर में रहते हैं, कमज़ोर हो गए हैं। मैं फिर से प्यासी रहने लगी।
एक दिन ननद और ननदोई पापा को मिलने आए। अब वो लगभग रोज़ आने लगे। वह मुझ पर फिदा थे, यह मैं भी जानती थी। एक दिन घर में अकेली थी, ननदोई जी आए, मुझे बाँहों में लेकर बोले, बहुत प्यार करता हूँ आपसे। हमारी बन जाओ रानी। मैं भी उनके आगोश में ढीली पड़ गई और… आगे क्या हुआ… यह अगली बार लिखूँगी… Antarvasna
सबसे पहले तो मैं अन्तर्वासना Hindi Sex Stories का धन्यवाद करना चाहता हूँ मेरी नियमित रूप से कहानी छापने के लिये!
मैं कहानियाँ लिखता भी रहा हूँ और पढ़ता भी रहा हूँ पर नेहा वर्मा की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगती है।
मैंने अपको अपनी पिछली कहानी
लव स्टोरी 2008
में बताया कि किस तरह से उस लड़की ने मुझे मिलने के लिये तड़पाया और मुझे बाद में छोड़ के भी चली गई उसे भुला तो मैं नहीं पाया था लेकिन जिन्दगी जीना सिखा ही देती है।
उसके बाद मैं कई दिनों तक चूत की तलाश में बेचैन रहा और किसी को पाना चाहता था।
ऐसे में मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि आजकल तो लड़कियाँ पैसे देकर करवाती हैं और तू ऐसे तड़प रहा है!
तो मैं उसके सुझाव को सही मान कर उसकी बातों में आ गया और लौट गया मस्ती की दुनिया में फिर से!
उसने मुझे एक शादीशुदा अमीरजादी का नम्बर दिया जो पैसे देकर करवाती थी।
मैंने भी हिम्मत कर के उससे फोन पे बात की।
उसने मुझे अपने घर पर मौज-मस्ती के लिये बुला लिया।
वो दिल्ली के एकदम पॉश इलाके में रहती थी, शानदार गाड़ी उसके घर के बाहर देख कर मैंने सोचा कि बहुत ही मालदार और सेक्सी होगी।
खैर मालदार तो थी लेकिन सेक्सी के नाम पर धब्बा! देखने में एकदम लटकी हुई काया उसकी!
मेरा तो मुंह जैसे एकदम से उतर ही गया कि चूत की तलाश में मैं कहाँ फंस गया.
मैंने मन ही मन अपने दोस्त को बहुत ही गालियाँ दी- साले ने कहाँ फँसा दिया!
उसने मुझे बहुत ही प्यार से अन्दर बुलाया।
उसका घर बहुत शानदार था, देख के मैंने उसके घर की तारीफ की।
इस पर उसने मुझे अजीब से तरीके से देखा जैसे वो कुछ और चाहती थी और मैने बोल दिया कुछ और!
तब मुझे एकाएक याद आई कि किसी भी औरत के सामने उसके अलावा और किसी भी चीज की तारीफ नहीं करनी चाहिए।
मुझे उस लड़की के प्यार ने जैसे पागल ही बना दिया था (लव स्टोरी २००८ वाली) कि मैं उसकी तारीफ ही करना भूल गया।
तो मैंने बात को सम्भालते हुए कहा- लेकिन आपकी साड़ी से कम!
तो इस पर वो हँस पड़ी।
पता नहीं- पहली बार मुझे सेक्स करने का मन नहीं कर रहा था मगर सेक्स मेरी जरुरत भी बन गया था।
लेकिन उसके बेडौल शरीर के बावजूद गजब की अदाएँ थी उसकी।
वो बहुत बल खा के चल रही थी और बहुत ही हंसमुख भी थी, बात बात पर हंसती थी और मेरी तो चुटकुले छोड़ने की तो आदत है ही बात बात पर चुटकुले!
उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जो मुझे बेचैन कर रही थी। मैं ये सब सोच ही रहा था कि वो मेरे लिए शेक बना लाई।
मैंने जान कर खुश होकर शेक उसके हाथ से पीने की इच्छा जाहिर की।
वो झट से मान गई, जैसे वो तो यही चाहती हो और अब तक उसके हाथों में थोड़ी सी हलचल भी होने लगी थी।
मेरा जबरदस्त शरीर देख कर वो बहुत ही लालयित हो गई थी और शायद थी बहुत बेचैन कुछ पाने के लिये!
मैंने झट से शेक खत्म किया और उसके गुंदाज बदन को ध्यान से देखा तो लगा कि शायद यह मेरा एक अनमोल अनुभव रहने वाला है।
उसे देख कर मैं एक दम से जंगली हो गया।
मैं उसे नीचे बैठा कर उसके बाल पकड़ कर एकाएक उसके उभारों को दबाने लगा।
उसकी आँखों में गजब की प्यास थी, एकदम भूखी शेरनी की तरह!
अब मुझे कुछ महसूस हो रहा था कि जैसे अब मैं तैयार हो गया हूँ कुछ करने के लिये! मेरे अंदर एक वहशीयत सी आ गई है, मैं उसे रौंदना चाहता हूँ अपने पूरे जोर से, ताकत से, मस्ती से!
यह एक नये एहसास जैसा था कि मैं एक अपने से बड़ी उमर की औरत के साथ अपनी हवस पूरी करने जा रहा हूँ।
पर मैं यह सब सोच ही रहा था कि मेरी पैंट की जिप खुल चुकी थी।
मैंने यह सब करने से पहले उसे उठा कर अपनी ओर खींचा और उसके होठों को चूमना शुरु कर दिया और उसका बालों को खोल दिया।
मुझे उसके साथ खेलने में मजा आ रहा था।
उसके स्तन क्या बताऊँ, एकदम कप साइज के थे।
मुझे यह सब महसूस करके अच्छा लग रहा था।
वो अब तक मेरे लण्ड पर कब्जा बना चुकी थी उसकी साड़ी देख कर मेरे अन्दर का दुःशासन जाग गया और मैंने एकाएक उसकी साड़ी खींचनी शुरु कर दी।
हा हा हा वो एक दम सविता भाभी डॉट काम की हीरोइन लग रही थी सिर्फ़ चड्डी में!
मुझे यह देख कर एक मस्ती सूझी, मैंने उसकी लिपस्टिक पौंछ दी और अपने लण्ड पे लिपस्टिक लगा कर उसे चूसने के लिये कहा।
मैंने देखा कि वो भी इन सब चीजों का मजा ले रही है और बहुत हंस भी रही है।
तुम अज़ीब दीवाने तो हो ही, मूडी भी हो! अभी थोड़ी देर पहले तक मूड खराब सा लग रहा था और अब मस्ती सूझ रही है?
मैंने चुपके से उसकी पैंटी खींच दी … हहह हहह हहहह! मस्त चिकनी चूत थी उसकी एकदम! मक्खन जैसी नाजुक!
उसे मैंने हल्के से चिकोटी काटी, वो झट से मेरी गोद में आकर बैठ गई।
अब मुझे भी मस्ती छाने लगी थी। मैंने पास में रखा हुआ बनाना-शेक उसके ऊपर थोड़ा उलटा दिया और उसे बेतहाशा चूमने चाटने लगा। उसे मेरा ये स्टाइल अच्छा लगा और उसने भी अपनी आह उह से मेरा स्वागत किया। मुझे इस बात पर जोश छाया और मैंने उसे औंधा लेटा दिया और उसके ऊपर सारा बनाना-शेक पलट दिया उसे ठंडक का एहसास होने लगा और वो मेरी बाहों में आकर लिपट गई। मैं अब उसके सांसों की गरमी महसूस कर सकता था।
मैंने अब उसे धक्का देकर बेड पर लेटा दिया वो अब मेरे इरादे समझ चुकी थी तो उसने भी देर ना करते हुए अपनी टांगें फैला दी.
मैं सीधा आकर उसकी टांगों के बीच बैठ गया और कुछ करने से पहले उसकी गांड में उंगली घुसा दी।
वो सिहर उठी।
अब मैंने देर ना करते हुए जल्दी से काँडम चढ़ा लिया और उसके यौन-मंडल पर अपना लिंग रख दिया और धीरे से अंदर सरका दिया।
उसके मुख-मंडल पर नशे की लहर दौड़ उठी।
मैं थोड़ी देर वैसे ही रहा और उसके मुँह में उँगली घुसा दी वो मेरी उँगली को चूसने लगी।
मुझे और उसे दोनों को मजा आने लगा।
मैंने उँगली उसके मुंह से निकाल कर फिर से उसकी गाँड में डाल दी और धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा।
वो अब एकदम मदहोश हो गई।
मैंने एक हाथ उसकी गरदन के नीचे लगा दिया और जोर से धक्के लगाने लगा। वो जल्दी ही झड़ गई। थोड़ी देर में मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी और झड़ गया।
अब मैं उसके साइड में आकर लेट गया, वो काफी खुश लग रही थी।
मुझे नहीं पता था कि एक औरत मुझे इतना मजा दे सकती है।
उसकी कोमलता एक लड़की से ज्यादा थी और गरमी एक आग की भट्टी से ज्यादा!
मैंने उसके अंदर अपने प्यार को तलाशना चाहा और आशिकों की तरह ही उसे प्यार किया लेकिन बावजूद इसके, उसने मुझे पैसो में तोलना चाहा। पर क्या प्यार का कोई मोल हो सकता है?
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें मजा आया?
उसने हामी भर दी तो मैंने कहा- सपनों में आकर तो सब चोद जाते है, हम तो वो है जो खुली आँखों में चुदने के सपने छोड़ जाते हैं। अगर खुशी हुई है तुझे तो पैसो में ना तोल मेरी मुहब्बत को! हम वो नहीं जो नोटों के लिये पैमाने छोड़ जाते हैं।
बस यह कह कर मैं वहाँ से चला आया फिर से नई चाह में, नये साथी की तलाश में!
अब मैंने भी ठान लिया है कि तेरे हसीन चेहरे को दूसरों में खोजता रहूंगा और अगर ना मिली तू तो तेरी चाह में दूसरी को चोदता रहूँगा।
तू इस जहाँ में नहीं तो उस जहाँ में मुझे मिलेगी और ना मिली तो तेरी बातें सोचता रहूँगा। Hindi Sex Stories
मेरा नाम आर्यन है, मैं मोरादाबाद Antarvasna में रहता हूँ। मेरी कहानी एक सच्ची कहानी है। मेरी कहानी सुनकर लड़कों को मुठ ज़रूर मारना पड़ेगा और लड़कियों को अपनी चूत में उंगली करे बगैर चैन नहीं मिल पायेगा।
मैं इंजीनियरिंग का छात्र हूँ और मैं कमरा लेकर रह रहा हूँ। मेरे साथ मेरा दोस्त भी रहता है, हम दोनों एक साथ पढ़ते हैं। हम दोनों की गर्लफ्रेंड भी हैं, मेरी गर्लफ्रेंड का नाम श्वेता है और मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड का नाम हनी है।
एक दिन हम हनी के घर गए थे। वहाँ उसकी मामी की लड़की निकली वो अपनी जवानी की देहलीज़ को पार कर रही थी, उसकी उम्र करीब 18 वर्ष की होगी। उसकी चूचियों को देखकर तो हम दोनों के होश उड़ गए और हम दोनों का लंड सांप के फन की तरह फनफना के खड़ा हो गया। उसी दिन जब हम लौट रहे थे तो हमने उसे चोदने की योजना बनाई और योजना के मुताबिक जब उसके घर में कोई नहीं था, तब हम गए और घण्टी बजाई, वो बाहर निकली।
हमने अनजान बनकर पूछा- हनी है?
तो उसने कहा- नहीं है!
हमने कहा- अन्दर आकर थोड़ा इन्तज़ार कर लेते हैं।
तो उसने कहा- ठीक है, आओ!
जब हम अन्दर गए तो उसने कहा- मैं चाय लेकर आती हूँ!
जब वो चाय लेने जा रही थी तो उसके चूतड़ों की चाल को देखकर मेरे दोस्त का लंड खड़ा हो गया और वो सोफे पड़ी उसकी ब्रा को लेकर उसके कमरे में मुठ मारने चला गया जहाँ पहले से ब्लू फिल्म की सीडी लगी हुई थी। तो वो उसको देखने में मस्त हो गया और मैं आगे जाकर बैठ गया। वो आई तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका एक चुम्बन ले लिया तो वो हंसकर बोली- तुम बहुत शैतान हो!मैं समझ गया कि रास्ता साफ़ है। तो मैंने कहा- यार, तुम तो बड़ी सेक्सी हो! आज से पहले कभी चुदवाया है?
तो उसने कहा- नहीं, कभी तुम्हारे जैसा चोदू मिला ही नहीं!
मैंने उसकी एक चूची को कसकर पकड़ लिया, उसकी सिसकी निकल गई।
मैंने कहा- आज तुमको तो चोदकर रहूँगा!
उसने कहा- कोई आ जायेगा!
मैंने कहा- तब की तब देखेंगे!
और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी, उसकी चूचियों को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया।
उसने कहा- मैं तुम्हारे लंड के दर्शन करना चाहती हूँ!
मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरे लंड को देखकर वो बोली- मेरी चूत में पसीना आ रहा है! अब मुझे चोदो!
तो मैंने कहा- इतनी भी क्या जल्दी है, अभी तो सिर्फ पसीना ही निकला है! बाद में तो रसमलाई भी निकलेगी, जिसको खाए बगैर मैं तुमको नहीं चोदूंगा।
इतना कहकर मैं उसकी दोनों चूचियों को पकड़कर कस के मसलने लगा।
तब उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- अह्ह्ह्ह ह्ह्हह अओउच प्लीस बस करो! मैं मर जाऊँगी!
फिर मैं उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। फिर वो अपने आप ही अपनी जींस उतारने लगी। मैं उसकी चिकनी और कुंवारी चूत को देखकर बोला- क्या मस्त चूत है! देख मैं कैसे इसे रौंदता हूँ!
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी डालो! मुझसे रहा नहीं जा रहा है!
मैंने कहा- पहले मेरे लंड को मुँह में लेकर इसे मजा दो!
उसने मेरा लंड अपने मुँह में लिया तो कहा- यह तो बहुत गरम है!
और वो अन्दर-बाहर करने लगी।
मैंने कहा- यह अब तैयार है।फिर मैंने उसकी टांगों को उठा कर उसकी चूत पर ढेर सारा थूक डाला और अपना लंड उसकी चूत पर रखकर जोर से धक्का मारा तो उसके मुँह से जोर से आवाज निकली- मर ग़ाय़ीईईई ईई ईईई अह्ह्ह् श्र्श्रीईईईई बस करो!
मैंने कहा- अभी तो बस आधा ही गया है।
उसने कहा- रहने दो, मेरी चूत फटी जा रही है और बहुत दर्द हो रहा है।
लेकिन मैंने उसकी टांगों को कस के पकड़कर फिर से एक जोर का धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।
वो फिर से चिल्लाई- आआआआ ईईईईई! आर्यन तुम तो बहुत बेदर्द हो।
मैंने कहा- जान, इसी दर्द के बाद ही तो स्वर्ग का मजा आएगा।
उसने अपना सर उठा कर नीचे देखा तो पूरी चादर खून से लथपथ थी, वो डरकर बोली- यह क्या है?
मैंने कहा- यह तो मजा आने की निशानी है।
और फिर मैंने उसकी चूचियों को चूसना चालू कर दिया जिससे वो अपने दर्द को भूलकर मजा लेकर मस्ती के साथ आआह्ह आआआआआह्ह्ह्हह्ह करने लगी और बोली- मेरी इस चूत को चोदो! यह तो चुदवाने के लिए फ़ैल चुकी है।
फिर मैंने जोर-जोर से धक्के मारना चालू कर दिया, उसे मजा आने लगा और मुझे भी मजा आने लगा। थोड़ी देर बाद वो मुझसे कस के चिपक गई और झड़ गई। फिर मैं भी दो चार धक्के मारने के बाद झड़ने लगा। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में प्रवेश करने लगा।
उसने कहा- बड़ा अच्छा लगा!
फिर मैंने उसी दिन बहुत सारे आसनों से उसे चोदा। फिर हमें जब भी मौका मिलता है तो हम चुदाई करते हैं।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी प्लीज़ मुझे बताये। Antarvasna
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