Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Balangir Book Professional Massage Services Online

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

लेखिका : शमीम Antarvasna Stories

फ़रदीन भाई जान ने Antarvasna Stories मुझसे कहा कि आज मैं भी आप जैसा लिखूंगा, मैंने भी तो आपको चोदा है, मैं कहानी का स्वरूप लिखूंगा, बस आप उसे दिलचस्प बना देना। मेरे साथ फ़रदीन ने कैसे अपनी रंगीनियाँ बिखेरी, यह उसकी दस्तान है। वो इस तरह से अपनी आप बीती लिखते हैं…

मैं कानपुर में रहता था और अब्बू के साथ दुकान पर काम करता था। मेरे ही घर के आंगन में एक अखाड़ा भी था जहा उस्ताद उस्मान चाचा अपने पठ्ठों को पहलवानी का अभ्यास कराया करते थे। मैं तो बचपन से ही अखाड़े में बड़ा हुआ था अतः मेरा शरीर एक दम चिकना और इकहरा था। जवान होते होते तो मेरा रंग रूप और भी निखर आया था। पर उसमान चाचा हमें लड़कियों से दूर रखते थे। मेरे शरीर पर एक भी बाल नहीं था सिवाय मेरे लण्ड के आसपास नरम सी झांटों के, हां कुछ बाल मेरी बगल में भी थे। शमीम बानो के अब्बू मेरे अब्बू के बहुत पुराने दोस्त थे, उनकी दुकान पर काम करने वाला दो महीनों की छुट्टी पर चला गया था सो उन्होंने मुझे बुला लिया था। मैं वाराणसी पहुंच गया था। बानो मुझे लेने स्टेशन पर आई थी।

बानो के पति भी अपनी दुकान चलाया करते थे। उनके अब्बू ने उन्हें छत के ऊपर वाला भाग दे दिया था। उनके पति हैदराबाद से थे। मुझे भी ऊपर ही गैलरी के दूसरी तरफ़ का कमरा रहने को दे दिया था। मैं शाम को ही दुकान से फ़्री हो पाता था। फ़ारूख भाई जान और शमीम आपा शाम को रोज दारू पीते थे और पीते क्या थे, पी कर बिलकुल टुन्न हो जाते थे। कभी कभी तो वो खूब प्यार करते थे और कभी कभी तो खूब झगड़ते थे। प्यार करें या झगड़ा, उनमें गाली-गलौज का व्यव्हार बहुत होता था। यूँ तो मेरे लिये यह माहौल नया नहीं था, मेरे घर पर भी यही सब कुछ होता था। धीरे धीरे अब्दुल, फ़िरोज, अनवर आदि आपा के सभी दोस्तों से मेरा मिलना हो चुका था। तभी मुझे पता चला कि शमीम आपा तो बहुत ही रंगीन मिजाज की है, उनके दोस्तों का उनसे रिश्ता मुझे मालूम हो चुका था।

मैं आजकल काम से फ़ारिग हो कर शाम को नहा धो कर गैलरी के पास की खिड़की से शमीम आपा और उसके पति की मस्तियों को देखा करता था। आज भी मैंने उनके लिये भुना हुआ गोश्त और सलाद रख दिया था। वो भी नहा धो कर दारू पीने बैठ गये थे। पीते पीते कुछ ही देर में उन पर दारू का नशा चढ़ने लगा था और दोनों ही अश्लीलता पर उतर आये थे। फ़ारूख ने बानो को अपने ही पास सोफ़े पर बैठा लिया था और उसकी चूचियों से खेलने लगे थे।

“बानो, तेरी चूचियाँ अभी तक कड़क कैसे है, भोसड़ी की कैसी तन कर खड़ी हो जाती हैं !”

“तेरे लण्ड के लिये मैंने कुछ कहा है क्या कि इतना मस्त कैसे है, भेनचोद, कैसा इठला इठला कर मेरा दिल जीत लेता है साला !”

कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को नोचने खसोटने लगे। कमरे में आहें गूंजने लगी। उन्हें देख कर मेरा दिल भी पिघलने लगा। मेरा लण्ड फ़ूल कर फ़ड़क उठा। मैं कुंवारा, बेचारा यह सब देख कर मन मसोस कर रह गया। मेरा गोरा लण्ड बार बार कुलांचे मारने लगा। बानो आपा की गाण्ड को देख कर और फिर गाण्ड की चुदाई देख कर मेरा वीर्य उछल कर लण्ड से बाहर आ गया। मेरा पजामा गीला हो गया। हाय रे, बानो की मां की भोसड़ी… भेनचोद को मन करता है कि चोद डालूँ ! रात भर उनकी चुदाई को सोच सोच कर मेरा लण्ड पानी छोड़ता रहता था। आखिर कितनी बार मुठ मारूँ … यह तो उनकी रोज की बात थी।

दुकान का सामान लेने फ़ारूख भाई को दिल्ली जाना था। वो शाम की गाड़ी से दिल्ली चले गये थे।

रोज की तरह मैं रात को भुना हुआ गोश्त बानो के कमरे में रख आया था। दारू की बोतल भी बैठक में सजा दी थी। तभी बानो नहा धो कर सिर्फ़ पेटीकोट और एक बिना ब्रा के ब्लाऊज में बाहर आई। ओह ! मैं उसे देखता ही रह गया। वो तो सच में रूप की देवी थी, उसका भरा बदन, उसके उरोज, उसके मद भरे चूतड़ों के उभार, इतने पास से पहली बार देख रहा था। खिड़की से तो उस बड़े कमरे में दूर से तो उसका मद भरा हुस्न इतना कुछ नहीं नजर आता था। मुझे यूँ घूरता देख कर बानो ने सब कुछ भांप लिया। वो जानबूझ कर के मेरे बिल्कुल पास आ गई। उसके शरीर की खुशबू मेरे नथनों में समा गई। हाय! उसके शराबी गोल गोल स्तनों के उभार मेरे दिल को घायल कर रहे थे। मेरे शरीर में एक विचित्र सी सनसनी फ़ैलने लगी।

“यहाँ गिलास रख दे … और भेन चोद यूँ आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर क्या देख रहा है?”

“ह… हाँ … वो कुछ नहीं… मैं चलता हूँ !”

“अरे चलता हूँ …तेरी तो … यहीं बैठ भोसड़ी के …मेरे साथ दारू कौन पियेगा … तेरा बाप ?”

“पर मैं तो नहीं पीता हूँ आपा … आप लीजिये…”

“अच्छा मत पीना, बैठ तो सही, मेरे लिये पेग बनाना … और ये बोटी तो खायेगा ना !”

मैं उसके कहने के अन्दाज से चौंक गया। उसका इशारा तो उरोज की तरफ़ था, पर बात वो गोश्त की कर रही थी। मैं झेंप गया और एक टुकड़ा उठा कर खा लिया। उसका दारू का दौर शुरू हो गया। साथ में उसका गाली-गलौज और अश्लील हरकतें भी।

“ऐ फ़रदीन, तूने कभी कोई लौंडिया चोदी है…?”

“कैसी बातें करती हो आपा… ?”

“अरे बता ना … तेरी उम्र में तो मेरे कितने ही दोस्त थे… साले सब हारामी थे … मैंने तो खूब चुदाया।”

“क्या बताऊँ, उस्ताद ने कहा है कि किसी लड़की की तरफ़ देखा भी तो वो हमारी गाण्ड मार देगा।”

“अरे वो तो लड़की के लिये बोला था ना, मैं लड़की थोड़े ही हूँ, मैं तो औरत हूँ 27 साल की !”

“ओह हाँ, आपा … फिर आप तो मेरी आपा हैं ना, कोई लड़की तो हो नहीं … पर आपा…?”

“ओये होये, मेरे भाई जान, ले पास आ जा, अब तो ठीक है ना, मेरी बोटी चूसेगा?”

उसने अपना, एक चूचा पकड़ कर मुझे देख कर हिलाया और फिर दबा दिया। मैं तो अन्दर तक हिल गया। ये क्या कह रही है बानो ! मेरा मन तो पहले ही उस पर लट्टू था। मैं शरमा गया। वो मेरे पास सरक आई और उसने अपने ब्लाऊज का बटन खोल कर उसे ढीला कर लिया। उसने अपना एक चूचा बाहर निकाल लिया।

“ले तो, समझ ले अम्मी का बोबा चूस रहा है…!”

“आपा, यह क्या कह रही हैं आप…?”

उसने कुछ नशे की झोंक में, कुछ वासना के नशे में मेरे गले में हाथ डाल कर मेरा मुख अपने बोबे पर दबा दिया। हाय रे मेरी अम्मी जान ! यह क्या… मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे होंठ अनायास खुल गये और उसकी चूची पर जम गये।

“अल्लाह रे, मजा आ गया … तू तो भोसड़ी का बड़ा नमकीन है रे !”

मैं बिना पिये ही मदहोशी में था। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, पजामे में से उभर कर मेरी शोभा बढ़ा रहा था। बानो आपा, लण्ड के आकार को देख कर ही लालायित हो उठी थी। उनके हाथ लण्ड की तरफ़ बढ़ चले थे। मेरे कड़क लण्ड को पहले तो उसने अपनी अंगुली से हिला कर देखा, वो तो टनटनाता हुआ झूल कर फिर से सीधा खड़ा हो गया। मेरे तन बदन में जैसे बिजली तड़क गई।

“आपा, मुझे क्या हो रहा है…” मेरे तन में सनसनी सी होने लगी।

“मादरचोद, तेरा लण्ड मजबूत है … कितना कड़क है…!” बानो पर नशा असर कर रहा था। मैं धीरे धीरे अपना होश खोता जा रहा था। बानो भी पेग पर पेग पिये जा रही थी। इसी बीच मुझे भी उसने एक पेग पिला दिया था। गोश्त हम दोनों ने जल्दी ही साफ़ कर दिया था। मैंने बानो को धक्का दे कर सोफ़े पर लिटाने की कोशिश की और उसके होंठों को चूसने लगा।

“अरे उठ गाण्डू, साला चढ़ा ही जा रहा है… हट जा !”

मैं जैसे होश में आ गया।

“जा वो दूसरी प्लेट गोश्त की ले आ … सारा तो खुद ही खा गया। ऐसा कर पूरा ही ले आ !”

मेरे पजामे का बटन खुल गया था और उसमें से लण्ड बाहर निकल आया था। मेरा गोरा और मोटा मस्त लण्ड देख कर बानो तो चकित रह गई। मैं गोश्त की पूरी डेगची ही उठा लाया।

“ऐ, फ़रदीन अपना पजामा उतार तो … इसकी तो मुठ मारूँ, भेन के लौड़े की !”

मेरा मन तो पहले ही विचलित हो चुका था। उसकी फ़रमाईश पर जैसे मेरा मन बाग बाग हो गया। मैंने तो पजामे के साथ साथ अपनी बनियान भी उतार दी।

“साला, हरामी… तू इतना मस्त है… पहले क्यों नहीं मिला रे… आ पास तो आ… जरा इसे देखूँ तो !”

उसने मेरा लण्ड अपनी आंखों के पास लाकर देखा। उसे सूंघा … और सर ऊंचा करके मन में उसकी सुगन्ध ली और अहसास लिया। मेरा खतना किया हुआ लौड़ा पूरा खुला हुआ था। बीच में पेशाब की नलिका को उसने हाथ से ठपकारा … मेरे लण्ड में एक मीठी सी जलन हुई। मेरा डन्डा पकड़ कर उसने जोर जोर से हिलाया और अपने मुख के ऊपर मार लिया। बानो की हालत एक मदहोश, वासना भरी, नशे में धुत्त औरत जैसी हो रही थी। मैंने भी धीरे से हाथ बढ़ा कर उसके ब्लाऊज को सामने से पूरा खोल दिया। मैंने भी उसके चुचूक को मसल कर अपना जवाब दिया। शायद उसे होश ही नहीं था। मेरा लण्ड उसके मुख में बड़ी मुश्किल से समा पाया था। उसने मेरे पोन्द को दबाया और लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी। मेरे सुपारे को जीभ से रगड़ने लगी। उसका एक हाथ अब मेरे लण्ड के डण्डे के पिछले सिरे पर आ गया और … और … वो उसे मसलने लगी, मुठ मारने लगी।

“आपा, बस करो … मैं मर जाऊंगा … निकालो बाहर !”

पर उसने एक ना सुनी … उसकी तेजी बढ़ती गई। मैं सिहर उठा, मेरी सहन शक्ति जवाब देने लगी।

“तेरी माँ को चोदू, गण्डमरी, छिनाल साली छोड़ मुझे, अरे … अरे… आह … मेरी तो चुद गई… “

उसे भला कहाँ होश था। वो तो जोंक की तरह मुझसे चिपट गई थी। उसने मेरा लण्ड जैसे निचोड़ डाला। मैं तड़प उठा … तभी मेरे लण्ड से ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा।

“आह … साली हरामी … मैं तो मर गया … रण्डी, मेरी तो चोद दी ना साली … अब तुझे क्या खाक चोदूँगा ?”

उसके मुख से थोड़ा सा वीर्य बाहर उबल पड़ा। थोड़ा तो वो पी गई और थोड़ा उसने बाहर निकाल दिया। मेरा लण्ड मुरझाने लगा। मैं निराश हो गया कि … साली चुदने से बच गई। मैं नंगा ही बिस्तर पर जाकर बैठ गया। बानो ने वहीं प्लेट पर अपना हाथ धोया और अपना पेटीकोट उतार कर नंगी हो गई।

वो धीरे धीरे मेरे पास आई और मुस्कुरा कर बोली,”मजा तो धीरे धीरे ही आता है ना…!”

फिर उसने मुझे एक ही झटके में बिस्तर गिरा दिया और मुझे अपने नीचे दबा लिया।

“चल मेरे राजा, अभी तो मैंने नल का पानी पिया है अब तुझे ट्यूब वेल का पानी पिलाती हूँ !” उसकी हंसी कमरे में गूंज उठी। उसकी चूत मेरे मुख से चिपक गई।

“ले … ट्यूब वेल को खोल और पानी पी …”

मुझे लगा कि खेल तो अब आरम्भ होने वाला है।

शेष दूसरे भाग में ! Antarvasna Stories

हेलो दोस्तों कैसे है आप लोग मे आज अपनी एक सच्ची घटने के बारे मे बताने जा रहा हु जो इसी साल जून के महिने मे हुआ है। मेरा नाम अशु है और मे बिहार सिवान का रहने वाला हु। मैं अभी b. Tech कर रहा हु और मैं 2nd ईयर का स्टूडेंट हु। मेरी उम्र 20 साल है और मेरी हाईट 5 फ़ीट 5 इंच है। मे दिखने मे कुछ खाश नहीं हु लेकिन उतना बुरा भी नहीं हु। मेरे लंड का साइज 7 इंच से हल्का बड़ा है और मोटा है। ये तो रही मेरी बात अब मैं आपलोगो को अपनी बुआ की लड़की के बारे मे बताता हु। उसका नाम बबली है और वो अभी अभी 12 ख़तम की है 1st devision से वो अपने नानी के साथ यानि की मेरे बड़ी दादी के साथ मेरे घर के बगल मे ही रहती है। उसकी उम्र 18 साल है उसका फिगर 32, 28, 34 है वो दिखने मे बहुत हो भोली और प्यारी लगती है। उसकी नानी के सिर्फ 4 लड़की ही है जो अपने अपbने घर पर रहती है तो नानी के साथ रहे के लिए बबली के मम्मी पापा उसको यहाँ रख गए और बबली यही से सब स्टडी की है। मै तो ये जब से यहाँ रहने आयी थी तब से इसके पीछे पड़ा हुआ था बात करना चोरी छुपे देखना मै सुरु से ही इसकी चुदाई करने के सपने देखता था। मे अपने विलेज मे इंग्लिश मेडियम स्कूल मे पढ़ा हु तो वो मेरे से ज्यादा ही बात करती थी और हर बात पूछती थी। अभी गर्मी के छुट्टी मे मै अपने घर गया हुआ था तो रोज उस से बात हो ही जाती थी। एक दिन उसकी नानी यानि की मेरी बड़ी दादी मेरे अपनी दादी के पास आयी और कुछ बात की फिर चली गयी। शाम को मेरी दादी ने बोला की आशु तुम बबली के घर चले जाओ वो उसकी नानी कही गयी है कुछ दिन के लिए। तो मे बोला ठीक है और घर से खाना कहा के लगभग 8 बजे उसके घर चला गया। वहां गया तो देखा की बबली नाहा के आयी है और laging और tshirt पहन के टेबल पंखा के सामने बैठ के बाल रही है। तो मै गया और एक चेयर ले कर बैठ गया उसके सामने और बात करने लगा थोड़ी देर बात करने के बाद हवा अच्छा चल रहा था तो वो बोली की चलो भैया छत पर चलते है थोड़ा टहल के आयेंगे फिर सो जायेंगे। तो मैंने भी बोला चलो तो छत पर गए उसका घर 1मंजिला है और छत पर बॉउंड्री दिया हुआ है। तो 1घंटे ऊपर रहे बहुत बात किये और बात बात मे ही बबली मेरे से बोली की भैया वैसे एक बात पुछु। तो मैंने बोला हा पूछो क्या बात है?? तो वो बोली की सच्ची सच्ची बताना कॉलेज मे यों gf बनाये ही होंगे। तो मैंने बोला की नहीं यार अभी तक तो कोई लड़की मेरे से पति नहीं है और जो कोई लड़की मुझे थोड़ा भाव देती है वो मेरे टाइप की नहीं लगती। तो बबली बोली की भैया आपको कैसी लड़की पसंद है। तो मैंने भी मज़ाक मे बोला मुझे तेरे जैसी लड़की पसंद है, कुछ देर सांत रहने के बाद वो फिर सो बोली की मेरे जैसी लड़की, मेरे मे आपको क्या ऐसा लगता है की आपको मेरे जैसी लड़की पसंद है। तो मे बोला की तू भोली सी प्यारी सी लगती है और तुम दिखने मे व सेक्सी लगती हो। तो वो बोली की भैया मै दिखने मे सेक्सी लगती हु तो मैंने बोला की हां तू है। तो वो बोली की भैया मेरे मे ऐसा क्या है जो मै आपको सेक्सी लगती हु। मे बोला छोड़ ना बस मेरे को कोई तेरे जैसी लड़की नहीं मिली बस इसलिए gf नहीं बनाया। फिर हम ऐसे ही हसीं मज़ाक करते करते निचे कमरे मे आ गए और सोने के लिए बबली ने बिस्तर लगाया और खुद पलंग पर दीवाल के साइड मे सो गयी और मैंने उस से बोला की मेरा बिस्तर किधर है तो वो बोली की भैया आप यही सो जाओ ना ये तो रहा खाली पलंग। तो मै बोला ठीक है और वही सोने लगा मै फ़ोन मे बिजी हो गया और थोड़ी बहुत बात भी हो रही थी। साढ़े दस हुआ तो मे देखा की बबली सो रही है और वो मेरे तरफ मुँह कर के लेटी हुई है। मैंने ज़ब गौर से देखा तो पाया की आज बबली ब्रा नहीं पहनी है। और उसके दोनों चुचे एक दूसरे से सट रहे है। तो मैंने अपना फ़ोन साइड मे रखा और उसके चुचे tshirt के ऊपर से ही छूने लगा वो क्या ही मुलायम रुई के तरह उसके चुचे थे मेरा तो उसको छूते ही लंड खड़ा हो गया पेंट मे ही और बाहर आने के लिए तड़पने लगा। वैसे ही उसके बूब्स दबाते दबाते एक हाथ से अपना लंड सहला रहा था। फिर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसका tshirt हल्का ऊपर कर के अपना हाथ अंदर डाल के उसके बूब्स को छूने लगा और दबाने लगा उसके मौसमी से हलके बड़े बूब्स क्या ही मस्त मुलायम थे। तभी अचानक से हल्का हलचल हुआ तो मैंने अपना हाथ निकल दिया और वो मेरे तरफ अपनी गांड कर के सोने लगी अब कुछ देर बिता तो मै उसका गांड छूने लगा और तजोड़ा सा चिपक के अपना लंड उसके गांड के छेद के पास रगड़ने लगा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। 5 मिनट करने के बाद वो सीधी हो कर लेट गयी अब मेरा मन उसके चुत को छूने का करने लगा मै laging के ऊपर से ही उसके चुत को सहलाने लगा था। धीरे धीरे मैंने हिम्मत की और अपना हाथ उसके laging के अंदर डाल दिया वो अंदर चढ़ी पहनी उइ थी तो मै सीधे चढ़ी के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चुत को सहलाने लगा तो देखा की उसके चुत पर हलका लस लस कर रहा है तो मै सोचा की सायद ये जग रही है बस कुछ बोल नहीं रही है। तो मैंने क्या कोयन की एक ऊँगली उसके चुत के छेद पर लगाया और ऊँगली अंदर डालने की एक्टिंग करने लगा तभी अचानक से उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली भैया ये क्या कर रहे हो। तो मैं बोला की कुछ नहीं बस तुमको सोते हुए देखा तो मन फिसल गया तो वो बोली की बस सोते हुए देखते हो तभी मन फिसलता है तो मे बोला क्या मतलब तो बोली की ये बस तुम अकेले ही मजा लोगे या मुझे भी कुछ मजा दोगे। उसके मुँह से इतना सुनते ही मेरा लंड एकदम से टन टना गया मे उसको अपने ऊपर खींच लिया और किश करने लागा और उसका पीठ से tshirt हल्का ऊपर कर के पीठ सहलाने लगा फिर कुछ देर के बाद मै उसके बेड पर लेटाया और मस्त लिप किश फिर गर्दन पर फिर धीरे धीरे उसके बूब्स पर आ गया और उसका टीशर्ट निकल दी तो उसके बूब्स मेरे सामने नंगे हो गए और मे उनको दोनों हाथों से पकड़ के हल्का हल्का दबाने लगा और फिर एक एक कर के चूसने लगा उसको भी मजा आने लगा था। वो भी सिसकियाँ ले कर मेरा साथ दे रही थी। फिर मै उसके पेट पर किश करते हुए पेट चाटते हुए उसके चुत पर आ गया। मैंने उसके laging के साथ चढ़ी भी निकल दी एक ही बार मे। तो उसकी हलकी बालो वाली चुत मेरे सामने लाइट के चमक मे जो उसकी चुत ने हलकी सी पानी छोड़ी थी उसमे एकदम से चमकने लगा। मैंने उसके चुत पर किश किया तो वो एकदम से सिहर गयी और मेरे बालों पर अपनी हाथ से सहलाने लगी और मै उसकी चुत को चाटने लगा। 5 मिनट चाटने के बाद मैं उसको दुबारा किश करने लगा। फिर मे उसको बोला की मेरा कपड़ा कौन खोलेगा तो वो खड़ी हुई मै पहले ही खड़ा हो गया था उसने मेरी टीशर्ट निकली फिर मेरे ट्रॉउज़र का नाड़ा खोलते हुए उसको निचे सरका दिया। फिर वो मेरे को किश करते हुए मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाने लगी। फिर वो घुटनो के बल बैठ गयी और मेरा अंडरवियर निचे कर के मेरे लंड को देखि जो बिलकुल ही टाइट पड़ा हुआ था उसको अपने हाथ मे ले कर हल्का हल्का आगे पीछे करने लगी तो मै बोला की ये सब कहा से सीखा है तुमने. तो वो बोली की भैया.... तो मैंने उसको डाटा और बोला की जब कोई नहीं होगा तो तू मेरे को आशु बोलना तो फिर वो बोली की आशु मै वो सेक्स वीडियोस देख के ये सब सीखा है तो मैंने बोला की लंड चूसना भी आता होगा तो वो धीरे धीरे मेरे लंड को अपने जीभ से चाटने लगी और फिर लंड मुँह मे डाल के मस्त लॉलीपॉप के तरह चूसने लगी. मुझे तो जन्नत का मजा मिल रहा था 5 मिनट हुआ था की मुझे लगा मेरा पानी निकलने वाला है तो मै उसको बोला तो वो बोली की आशु मेरे बूब्स पर पानी निकल दो उसको मसाज करना है। तो मै उसकी मुँह से लंड निकला और 2 या 3 बार आगव पीछे किया तब तक मस्त पानी की एक धार उसके बूब्स के बीचो बिच मे गिरा और मेरा पानी निकल गया फिर उसने उसको चाट के साफ किया और फिर हम किश करने लगे। लगभग 10 मिनट के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया तो मै उसको बेड पर लेटाया फीर उसकी चुत मे एक ऊँगली डालने की कोसिस करने लगा चुत चाटते हुए ऊँगली डाल रहा था 1 ऊँगली तो चली गयी थी फिर मैंने अपने लंड पर अच्छे से ढेर सारा थूक लगाया और उसके चुत के मुँह पर सेट कर के एक धक्का दिया मेरे लंड का टोपा अंदर चला गया तो उसने एक तेज सिसकी ली फिर सांत हो गयी। उसके शांत होने के 1 मिनट के बाद मैंने एक और झटका दिया तो मेरा आधा लंड अंदर चला गया तो वो थोड़ा तेज दर्द से कराह गयी मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रखे और उसके बूब्स को हल्का हल्का मसलते हुए आगे पीछे करते करते पूरा लंड उसके चुत मे डाल दिया। थोड़ी देर रुका तो दर्द कम हो गया था तो अब धीरे धीरे मै उसको चोदने लगा। कुछ देर करने के बाद उसे भी मजा आने लगा तो वो भी अपना कमर हिला हिला के हर धके का मजा मस्त सिसकियाँ के साथ लवने लगी। कुछ देर वैसे करने के बाद मैंने उसको घोड़ी स्टाइल मे पीछे से उसके चुत मे लंड डाल के चुदाई करने लगा इसमें मे उसके उज झुक कई उसके बूब्स को पकड़ लेता और मस्त पीछे से धक्का लगता। फिर अपना लंड उसके चुत से निकला और मै बेड पे लेट गया और उसको मेरा लंड चूसने बोला तो वो मेरे लंड को मुँह मे ले कर मस्त लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी फिर मै उसको अपने लंड पर बिठाया और निचे से धक्का देना सुरु किया। रात मे रूम के लाइट मे हमारे पसीने से भीगा हुआ शरीर मस्त चमक रहा था उस समय। फिर मैंने महसूस किया की मेरा पानी निकलने वाला है तो मे उसको बताया तो बोली की मेरे मुँह मे दो मे उसका टेस्ट करना चाहती हु। फिर मै खड़ा हो गया और वो घुटने के बल बैठ के मेरा लंड चूसने लगी कुछ ही देर मे मेरे लंड से एक तेज धार निकला और उसके मुँह मे भर गया। और वो सारा पानी पी गयी फिर मेरा लंड चूस के चाट के साफ कर दी फिर हम ऐसे ही बेड पर लेट गए और उस रात लगभग 3 बजे तक 1 राउंड और किये फिर हम दोनों नंगे ही सो गए। सुबह उठा तो देखा की बबली उठ गयी है और खाना बना रही है। मै उठा तो नंगा ही था और मेरा लंड सुबह मे पूरा टाइट था वो देख के बोली की अभी फिर से खड़ा हो गया है। तो मै बोल दिया की तुम हो ही ऐसी की इसका मन कर रहा है की तुम्हारे ही अंदर पड़ा रहे। फिर हस दिया और अपने घर आ गया। फिर आगे क्या क्या हुआ कैसे हुआ मे सब बताऊंगा आपलोगो को बस आपलोग अपना प्यार और स्नेह मेरे पर बनाये रखे मिलते है अगले कहानी मे। तब तक के लिए बाय....!!
Sex stories

हाय मैं आरती फिर से Sex stories आपकी सेवा में हूँ. आपको कैसा लग रहा है.. मुझे तो मजा आ रहा है. आपको आ रहा है.. जरूर आ रहा होगा. आपको शायद यकीन नहीं होगा कि घर में आज कोई नहीं है. इसलिए यह वाली कहानी मैं बिल्कुल नंगी होकर लिख रही हूँ और इस दौरान मैं अपनी चूचियों को भींच भींच कर तथा अपनी चुत और गांड में पेन को डालकर सेक्स करूँगी. क्या करूँ शादी नहीं हुई न.. इसलिए चूत को शांत करने के लिए ऐसा करना पड़ता है. अभी तो पेन या पेन्सिल से ही काम चलाना पड़ेगा.

चलो आगे बढ़ते है. कम्पनी के प्रेसिडेंट के यहां से चुद कर आने के बाद मैं आते ही सो गई. क्या करूँ बहुत थक जो गई थी. इतनी बार चुदी थी कि मेरी चुत और गांड दोनों में बहुत दर्द हो रहा था.

फिर मैं अगले दिन सुबह उठी और नाश्ता करने के लिए गई. अबकी बार मैंने एक छोटी सी निक्कर पहन रखी थी.. और उसके ऊपर टाईट सा टॉप डाला हुआ था, जिसमें से मेरे चूचे कहर बरपा रहे थे. नीचे मामा जी थे जिनको मैं अंकल कह कर बुलाती थी

मैं अंकल को अपनी गांड दिखाते हुए बैठ गई. मैं साफ़ देख रही थी कि अंकल का लंड खड़ा हो चुका था. हम लोग उस दिन सोफ़े पर बैठ कर नाश्ता कर रहे थे. तभी मनीष ने कहा कि वो आज दिल्ली से बाहर जा रहा है, कल तक आ पाएगा.

कुछ देर बाद मनीष चला गया. अंकल वहीं पर बैठे हुए थे और चोरी चोरी कभी मेरी तरफ़ देखते, तो कभी मेरी चूचियों की तरफ़ देख रहे थे. जो कि मेरी टी शर्ट मैं उभरी हुई थीं. मैंने मन ही मन सोचा कि चलो क्यों न आज कुछ मजे ही ले लिए जाएं. उस वक्त अंकल ने एक ढीला सा पजामा ही पहन रखा था. मैंने चुपके से अपनी निक्कर की ज़िप खोल ली और धीरे धीरे अपनी टांगें ऊपर की ओर टेबल पर इस तरह से रख लीं कि मेरी चुत हल्की से दिखने लगे. इसके बाद मैंने वहीं रखा हुआ अखबार उठा कर पढ़ने की एक्टिंग करने लगी. मैं चुपके से देखने लगी कि अंकल मेरी हल्की सी दिखती हुई चुत की तरफ़ देख कर अपना लंड मसल रहे थे. फिर थोड़ी ही देर मैं उनका पजामा गीला सा हो गया और लंड नीचे बैठ गया. मैं समझ गई कि उन्होंने माल छोड़ दिया था.

मैंने अंकल से पूछा- अंकल क्या हुआ अभी आपका पजामा एकदम से ऊपर को उठा हुआ था.. फिर गीला हुआ और फिर नीचे बैठ गया.
अंकल मेरी बात सुनकर हंसने लगे और बोले- अरे ये तो नेचुरल है.

ये कहते हुए ही अंकल ने एकदम से अपने लंड को पजामे से बाहर निकाला जो गीला था.

अंकल ने कहा- ये बेचारा भी क्या करे.. बार बार तुम्हें देख कर खड़ा होता है और पानी छोड़ कर बैठ जाता है.
मैंने हंस कर कहा- अब क्या होगा?
तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं.. इसका इलाज़ है… लेकिन अभी नहीं रात को होगा.

फिर वो उठे और मेरी गांड को दबा कर ऑफिस जाने के लिए तैयार होने चले गए. मैं समझ गई कि अंकल आज मेरी चुदाई करने के मूड में हैं.

मैंने मन में कहा कि यार जब रात को मजा लेना ही है तो क्यों न अभी से तैयारी कर ली जाए.

फिर मैं बाजार गई और वहां से एक नाईट सूट लेकर आ गई. इसी के साथ एक सेक्सी सी ब्रा पेंटी और स्विमिंग के समय पहनने वाली बिकनी भी ले आई. इन तीनों ही आइटम की ये खासियत थी कि ये सब पारदर्शी थे. नाईटी एक बेबी डॉल किस्म की थी, जो सिर्फ मेरे घुटनों तक आती थी. मैंने ब्रा की सजावटी लेस को कैंची से काट कर इतना छोटा कर लिया था कि वो अब मेरे मम्मों को हल्का सी ही ढँक पा रही थी. साथ ही पेंटी को मैंने चूतड़ की तरफ़ से काट कर एक डोरी नुमा बना दिया था. इस डोरी से बस मेरी गांड का छेद ही छुप रहा था. लेकिन मैंने चुत की तरफ़ से कुछ नहीं किया था.

फिर रात को खाने पर मैं जब इसी बिकनी में पहुँची तो अंकल मुझे देखते ही रह गए.

मैंने पूछा- कैसी लग रही हूँ?
अंकल ने मुझे घूरते हुए कहा- बहुत ही नंगी लग रही हो.. इतने कम कपड़े अगर पहन ही नहीं रखे होते तो और भी मजेदार लगती, आरती तुम इतने कम कपड़े क्यों पहनती हो.
मैंने कहा- पता नहीं अंकल जब मर्द नीचे मेरी चुत और गांड को, ऊपर मेरे मम्मों को घूरते हैं.. तो मुझे बहुत मजा आता है.

अंकल मुस्कुरा दिए. फिर हम लोग खाना खाने लगे.

अंकल बोले- आरती तुम्हें याद है कि जब तुम छोटी थीं.. तब तुम कैसे मेरी गोद मैं बैठ कर खाना खाती थीं.. आज भी वैसे ही खा ना!
मैंने कहा- अभी लो..

मैं लपक कर उनकी गोद में जा कर बैठ गई. मैं जानबूझ कर इस तरह से बैठी कि मेरी गांड का छेद उनके लंड के ठीक ऊपर आ जाए. मैं अंकल के लंड की सख्ती को फ़ील कर सकती थी कि मेरे बैठते ही कैसे अंकल के लंड का साइज़ बढ़ने लगा था.

फिर थोड़ी के बाद अंकल ने जानबूझ कर मेरे ऊपर दाल गिरा दी और कहा- अरे सॉरी.. लाओ मैं साफ़ कर देता हूँ.

फिर मेरे मम्मों के ऊपर से मेरे मम्मों को दबा दबा कर साफ़ करने लगे.

फिर मैंने अपनी नाईटी को देखते हुए कहा- अरे यह तो अभी भी गंदी है.. इसे उतार देती हूँ.

ये कह कर मैंने अपनी नाईटी को उतार दिया और मेरा गोरा बदन अंकल को साफ़ दिखने लगा.

तभी अंकल खड़े हुए और बोले- आरती तेरे कंधे पर एक तिल था.. मुझे वो याद है.. और हां एक तिल तो शायद तुम्हारे मम्मों पर भी तो था. तभी तो देख कितने बड़े मम्मे हो गए हैं. ज्योतिषी सही कहते हैं, जिस लड़की के मम्मों के ऊपर तिल होता है. उसके मम्मे जरूर पीने चाहिए, खूब दबाने चाहिए.. और चूसने चाहिए.
मैंने कहा- सॉरी अंकल.. लेकिन मेरे मम्मों पर तो कोई तिल नहीं है.
अंकल ने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता.. लाओ मुझे देखने दो

अंकल मेरे पास आए और मेरी ब्रा फाड़ कर फेंक दी. फिर अंकल मेरे मम्मों को दबा दबा कर देखने लगे. मैंने मस्ती से आँखें बंद कर लीं और अंकल के हाथों से अपने मम्मों को दबवाने का मजा लेने लगी. मेरे आँखें बंद करते ही अंकल ने चुपके से पेन से मेरे मम्मे पर एक तिल का निशान लगा दिया.

फिर अंकल बोले- देखो मैंने कहा था न.. तेरे मम्मे पर तिल का निशान है.

यह बोल कर वो मेरे मम्मों को चूसने लगे.. उन्हें भर भर के दबाने लगे.

फिर खड़े हुए और बोले- वैसे जहां तक मुझे याद है कि एक तिल तुम्हारी चुत पर भी है.
मैंने कहा- नहीं है.
उन्होंने कहा- दिखाओ.
मैंने कहा- हां देख लीजिएगा.

उन्होंने मुझे टेबल पर लिटा दिया और मेरी टांगें फैलाते हुए नीचे को कर दीं, जिससे मेरी चुत ऊपर को उठ गई. फिर अंकल ने मेरी पेंटी हटाने का कहते हुए पेंटी को फाड़ कर हटा दिया.

अब मेरी गोरी गोरी चुत उनके सामने थी. वे मेरी चुत को देखने लगे और बोले- आरती मालूम है.. जिसकी चूत में तिल होता है.. उसे हर रोज़ इसे चुसवाना चाहिए और इसके अन्दर लंड डलवाना चाहिए.

मैंने कुछ नहीं कहा बस आँख बंद करके अंकल के सामने अपनी चुत की प्रदर्शनी लगाए मजा लेती रही. अंकल ने पहले की तरह मेरी चुत पर चुपके से तिल बना दिया… और बोले- देखो मैंने कहा था कि तेरी चुत पर भी एक तिल है.
मैंने कहा- अजीब बात है.. मैंने तो कभी नहीं देखा.

अंकल ने मेरी बात को अनसुना कर दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. थोड़ी देर बाद हम फिर से खाना खाने के लिए आ गए. इस वक्त मैं बिल्कुल नंगी थी. मैं फिर से अंकल की गोद में जाकर बैठ गई.

मैंने पूछा- अंकल यह क्या है.. जो मुझे बहुत देर से चुभ रहा है.
अंकल ने मुझे गोद से हटाया और नंगे होकर कहा- देख ले ये और कुछ नहीं.. मेरा लंड है. मैंने कहा था कि मेरा लंड तुम्हारी चुत देख कर ही खड़ा हो जाता है.
मैंने कहा- प्लीज़ अंकल इसका कुछ करो न.. मैं इससे बहुत परेशान हो रही हूँ.
अंकल चेयर पर बैठ गए और बोले- अच्छा दो मिनट रुको.. तुम एक काम करो कि तुम यहां पर आओ.

मैं उनके करीब चली गई. अंकल ने मेरी गांड को दोनों हाथों से खोला और मेरे छेद को चौड़ा करके अपने लंड पर रखते हुए कहा- अब तू झटके से लंड पर बैठ जा.

मैं अपने छेद को अंकल के लंड पर टिकाते हुए बैठ गई. बस देखते ही देखते उनका आठ इंच लम्बा लंड मेरी चुत में घुस गया. लंड बहुत ही मोटा था, मेरी चूत सहन नहीं कर पाई और मैं चिल्ला उठी. मैंने बोला- बहुत दर्द हो रहा है अंकल.

तो अंकल ने लंड घुसेड़ते हुए कहा- चुप हो जा साली कुतिया.. अभी दो मिनट बाद बहुत मजा आएगा.

फिर उन्होंने मेरे मम्मे अपने हाथों में थामे और बैठे बैठे ही नीचे से मेरी चुत में अपने लंड से धक्के लगाने शुरू कर दिए. कुछ ही पलों बाद मैं भी अपनी गांड उछालने लगी.

फिर उन्होंने अपना मूसल मेरी चूत मैं पूरा ठोक दिया.

इसके बाद अंकल खड़े हुए और मुझे गोद में उठा कर मुझे यूं ही लंड फंसाए हुए कमरे में ले गए.
अंकल ने मुझे बिस्तर पर पटक कर चोदना शुरू कर दिया. मैंने भी अपनी चूत की पूरी खुजली मिटवा कर ही दम लिया.
जब अंकल झड़ने को हुए तो मैंने उनसे कहा- मुझे मम्मी न बना देना.
अंकल ने हंसते हुए लंड को चूत से खींचा और मेरे मुँह में लगा दिया. मैंने अंकल के लंड का पूरा माल चूस लिया.
अब हम दोनों नंगे चित्त पड़े थे. बड़ी थकान हो गई थी. हम दोनों ही एक दूसरे से बाते करने लगे.

अंकल ने कहा- चल आरती मेरे पूरे बदन पर तेल से मालिश कर दे.
मैंने कहा- क्यों?
अंकल बोले- इस तरह से ही तो मेरे लंड का इलाज होगा.
मैंने- अंकल क्या इलाज होना है इस लंड का.. अच्छा ख़ासा तो चुदाई कर लेता है.
अंकल बोले- अरे यार इलाज का मतलब ये है कि अब तुम मालिश करोगी तभी तो ये दुबारा से खड़ा होकर चूत की चुदाई कर पाएगा.

मैंने अंकल के लंड की मालिश करनी शुरू कर दी. फिर अंकल मुझे अपने चूतड़ दिखाए और बोले- यहां पर भी कर.

मैं अंकल के चूतड़ों पर मालिश करने लगी.

फिर अंकल ने एक दूसरा तेल निकाला और बोले- इस तेल को मेरे लंड पर मल दो.
मैंने कहा- अंकल मेरी चूत का भी ख्याल करो.
अंकल बोले- हम्म.. ऐसा करो अपनी गांड को मेरे मुँह के पास लेकर आराम से लेट कर मालिश करो, मैं तेरी गांड को भी मजा दे दूंगा. लेकिन प्लीज़ मुझे आधे रास्ते में मत छोड़ देना.
मैंने हंस कर कहा- ओके डार्लिंग..

फिर मैं बैठ कर उसी तरह से मालिश करने लगी और लंड को बड़ा होते हुए देखने लगी.

अंकल के लंड ने खड़ा होने में कुछ देर लगाई.. इसके बाद क्या हुआ मेरी गांड का कचूमर निकला या चुत का भोसड़ा बना.. Sex stories

Antarvasna

मैं अमृतसर से मनीष, यह Antarvasna बात तीन महीने पुरानी है जब मैं गर्मी की छुट्टी में अपने नाना नानी के घर गया था वहां मेरे मामा मामी रहते थे.

मेरी मामी मस्त माल थी हमेशा बड़े गले का कुरता पहना करती थी उनको देख कर मेरा मन डगमगाता था ऐसा लगता था जैसे वो मुझे अपनी ओर आकर्षित करती थी मैं बार बार उनके झुकने का इन्तज़ार करता रहता था। मेरी मामी का नाम सोनिया है।

मुझे जब भी लगता था कि वो झुकने वाली है तो मैं सामने जाकर खड़ा हो जाता था और तिरछी नज़र से उनके बड़े बड़े गोरे गोरे और चिकने चिकने बूब्स को देखा करता था मुझे उनके बूब्स बेहद पसन्द थे, मुझे उन्हे छूने का बेहद मन करता था कभी कभी जान बूझ कर मैं उनसे सामने से जाकर टकरा जाता था और बड़ी होशियारी से उनके बूब्स को छू लिया करता था।

लेकिन इतने में मेरा मन नहीं भरता था। मैं उन्हे सहलाना चाहता था वो बहुत गोरी है। उनको देख कर मुझे उनको चोदने का मन करता था।
वो बहुत गदराई हुई बदन की है मैं भी वैसा ही हूं।

एक दिन मेरे मामा को कुछ काम से 6 दिन के लिये दुबई जाना पड़ा।

मैं घर के हाल में बैठा ही था तब मेरी मामी हाल में आयी और उन्होने मुझे एक चिट्ठी दी.

उस चिट्ठी में लिखा था “मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं मुझे तुम्हे देखते ही कुछ कुछ होता है मैं तुम्हारे साथ अकेले में कुछ वक्त गुज़ारना चाहती हूं ये बात मैं ने चिट्ठी में इसलिये कहीं क्योंकि मुझे शरम आ रही थी अगर तुम मुझसे मिलोगे तो आज रात ११.०० बजे मेरे कमरे में आ जाना और तुम्हारी ओर से हां है तो चिट्ठी मुझे वापस लौटा देना मैं तुम्हारा इन्तज़ार करुंगी.”

ये पढ़ कर तो मेरा मन ही उछल पड़ा, मैं ने तुरन्त वो चिट्ठी उनको वापस लौटा दी और ११ बजने का इन्तज़ार करने लगा।

रात हो चुकी है ११ बज रहे है मैं कमरे में चला गया कमरे के अन्दर घुसते ही मैं ने देखा कि मेरी मामी काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी उन्हे देख कर ऐसा लग रहा था कि उन्होने अंदर कुछ भी नहीं पहना है। उनके बड़े बड़े बूब्स मुझे दिख रहे थे।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं शुरुआत कहां से करुं। तभी अचानक मेरी मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया ये उस हसीन रात की शुरुआत थी।
मैने भी मामी की कमर को पकड़ के अपनी ओर खींच लिया और उन्हे चूमने लगा। उनके गालों को चूमते चूमते मैं उनके होंठों तक पहुंच गया।

जब मैने देखा कि मेरी मामी मेरे चुम्मो का आनंद ले रही है तो मैने अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया। मेरे हाथों ने जैसे ही उनकी चूचियों को छुआ वो कांप सी गयी मुझे उनके बूब्स छूने में बहुत मज़ा आ रहा था। वो बहुत नरम थे तभी मैने उनकी नाइटी को उनके कंधे से नीचे उतार दिया उनके चिकने बूब्स अब पुरी तरह से मेरे हाथ में थे मैने अपनी उंगलियों से उनके गुलाबी निप्पल को रगड़ना शुरु किया तो वो काफ़ी उत्सुक हो गयी और मेरे लंड को कस कर पकड़ लिया।

मैं अपना चेहरा उनके बूब्स के पास ले गया और अपने गालो और जीभ से उनके बूब्स को सहलाने लगा। मैने अपने हाथ से उनके बूब को पकड़ लिया और छूने लगा ऐसा करते ही मेरी मामी पागल सी हो गयी उन्होने मेरा लंड और कस कर पकड़ लिया और सहलाने लगी फिर मैने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अनपे छोटु को निकाल के उनके हाथ में दे दिया।

मेरी मामी बहुत अच्छी तरह से मेरे छोटु को सहला रही थी तभी मैने उन्हे पलंग पर बैठा दिया और उनके सामने जाकर खड़ा हो गया। वो समझ गयी कि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड को चूसे उन्होने मेरे लंड को कस कर पकड़ा और चूमने लगी।

मैने उन्हे अपने लंड को मुंह में लेने को कहा उन्होने मेरे छोटु के सामने वाले हिस्से को जिसे हम सुपाड़ा कहते हैं उसे मुंह में ले लिया मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था मैं और मज़ा लेना चाहता था मैने अपनी मामी के सिर को पकड़ा और अपना लंड को और अन्दर घुसाता चला गया देखते ही देखते मेरा पूरा का पूरा लंड उनके मुंह के अन्दर था मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था मुझे लगा कि मेरा लस कहीं उनके मुंह में ही न गिर जाये इसलिये मैने अपने छोटु को निकाल लिया।

उसके बाद पता नहीं मामी को क्या हुआ मामी ने फिर से मेरा लंड चूसना शुरु कर दिया मेरा लंड फ़ुलसाइज़ का हो गया था फिर मैं पूरा नंगा हो गया मामी की नाइटी भी पूरी उतार दी.

उनको नंगा देखकर मेरा लौड़ा पूरा सनसना उठा अब मेरे लौड़े को कुछ चाहिये था तो वो थी मामी की चूत मैं ने मामी को बिस्तर में लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड से उनकी चूत को सहलाने लगा फ़िर थोड़ी देर बाद जैसे ही अपना लंड उनकी चूत में डाला तो मेरी मामी के मुंह से आवाज़ निकली “आऊउ छह्हह” ऐसा लगा जैसे मामा ने उन्हे कभी चोदा ही नहीं।

मैंने कन्डोम भी नहीं लगाया था मैं ने अपनी मामी को कस के पकड़ लिया और अपना लंड और अन्दर घुसाता चला गया मेरी मामी दर्द से सिमट सी गयी थी।

थोड़ी देर बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा मैने जब चोदते हुए अपनी मामी के चेहरे की तरफ़ देखा तो वह आंखें बंद कर के मुस्करा रही थी उन्हे काफ़ी आनंद आ रहा था। फिर मैने अपनी मामी को घोड़ी बनने को कहा वो दोनो घुटनो और हाथो के बल अपनी गांड मेरी तरफ़ करके लेट गयी।

मैने अपने हाथो से उनकी गांड को पकड़ कर पहला दिया मुझे उनकी गांड का छेद नजर आ रहा था। मेरा लौड़ा उसमे घुसने को बिल्कुल तैयार था मैने अपना लौड़ा जैसे उनकी गांड में टिकाया तो मेरी मामी ने मना कर दिया कहने लगी कि गांड में घुसाने में बहुत दर्द करता है।

लेकिन लौड़ा है कि मानता नहीं मैं ज़िद करने लगा तो मामी मान गयी और कहा कि धीरे धीरे घुसाना मैं अपना लौड़ा ले कर तैयार हो गया और घुसाने लगा मैं जानता था कि मामी को दर्द हो रहा है लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था उनकी गांड का छेद बहुत छोटा और टाइत था बहुत मुश्किल से अन्दर घुस रहा था मैने भी पूरा ज़ोर लगा दिया।

धीरे धीरे जगह बनती गयी और छेद फैलने लगा मेरा लंड और अन्दर घुसता चला गया। मैं अपने लंड को अन्दर बाहर करता गया मामी की चिकनी चिकनी गांड में मेरा लंड मज़े कर रहा था फिर मैने अपना लंड उनकी गांड से निकाल लिया और मामी को लिटा दिया और उनके पेट पर बैठ गया और अपने लंड को दोनो बूब्स के बीच सहलाने लगा मैने अपनी मामी से कहा कि क्या चिकनी चूची है तो मामी शरमाने लगी।

मैने अपनी मामी से कहा कि मेरे लंड को चूसो न तो मामी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपने गालों से सहलाने लगी और मुझसे पूछा कि कैसा लग रहा है मैने कहा पहले चूसो तो। तब मामी मेरे लंड को अपनी जीभ से चूसने लगी और दातों से काटने लगी मैं तो मज़े में पागल हो रहा था मुझसे सहा नहीं गया और मैने उनके मुंह में ही गिरा दिया मामी मेरे लस को चाटने लगी।

मेरी मामी ने कहा कि ये तूने क्या किया मैं समझ गया कि मामी अभी और चुदवाना चाहती है। मैने कहा कि घबराओ नहीं अभी मैं तुम्हे और चोदुंगा। लेकिन मेरा लंड मुरझा गया था।

मैं अपनी मामी के बूब्स को पकड़ के चूसने लगा और अपनी मामी की चूत को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा मामी में अभी भी बहुत जोश बाकी था। उन्होने भी मेरे लंड को सहलाना शुरु कर दिया।

धीरे धीरे मेरा लंड फिर से तनने लगा था जैसे ही मेरा लंड थोड़ा कड़ा हुआ मेरी मामी ने उसे अपने मुंह में ले लिया और कस कस के चूसने लगी वो मुझसे किसी भी हाल में और चुदवाना चाहती थी मेरे लंड को बार बार अपने मुंह में घुसाती और निकालती।
वो मेरे लंड को इतनी जोर से चूस रही थी कि उनके चूसने की आवाज़ आने लगी मेरा लंड भी अब तैयार हो गया था मैं भी उनके चेहरे को हाथ में लेके अपने लंड को अन्दर ठेलने लगी, क्या मज़ा आ रहा था।

मामी ने कहा कि मुझे और चोदो न तभी मैने अपनी मामी को लिटा दिया और उनकी जांघ को चाटने लगा चाटते चाटते मैं उनकी कमर तक पहुंचा तो देखा कि मेरी मामी मज़े में तिलमिला उठी तभी मैने उनकी १ टांग को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को उनकी चूत में टिका दिया और अन्दर घुसा दिया और फ़िर इतनी रफ़्तार से चोदा उनको मामी बोल रही थी थोड़ा धीरे धीरे करो!

मामी की चूत गीली हो गयी थी चोदने में और मज़ा आ रहा था मेरा लंड चूत में आसानी से फ़िसल रहा था मैं ने मामी की चूत ढीली कर दी थी मुझे डर था कि मामा को पता न चल जाये क्योंकि मामी की चूत बहुत टाइट थी।

और मैंने चोद चोद कर उसे ढीली कर दी थी फिर मैंने मामी को कहा कि चलो कोई और स्टेप करते है.

मामी ने मुझे पलंग में लेटने को कहा और मेरे ऊपर चढ़ गयी वो अपने बूब्स के निप्पल को मेरे होंठों के पास लाने लगी मैं उनके निप्पल काटने लगा फ़िर वो मेरे लंड को पकड़ के मेरे लंड से अपने चूत को सहलाने लगी फ़िर धीरे धीरे अन्दर घुसाने लगी मामी मेरे लंड के ऊपर बैठ गयी और हिलने लगी.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था जब वो मेरे ऊपर बैठ कर हिल रही थी तब उनके बड़े बड़े बूब्स हिल रहे थे वो नाज़ारा मैं कभी नहीं भूल सकता मामी के गोरे गोरे दूध और गुलाबी गुलाबी निप्पल मामी अपने हाथ से अपने बूब्स को सहला रही थी और अपने निप्पल को दबा रही थी

मैने फ़िर मामी की गांड को कस कर पकड़ा और निकोटने लगा फ़िर मैं ने मामी को नीचे लिटा दिया और मेंढक की तरह चढ़ गया फ़िर मैं मामी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा मामी अपने दोनो हाथो से मेरी गांड को पकड़ने और मारने लगी मैने चोदना और तेज़ कर दिया मामी की चूत से पानी छूट गया और मैं ने भी अपना लस अन्दर ही गिरा दिया मामी ने कहा कि मुझे ऐसा कभी किसी ने नहीं चोदा है मैं एकदम ही लस्त पड़ गया था कुछ करने की हालत में ही नहीं था।

घड़ी की तरफ़ देखा तो ४ बज रहा था।

ये चुदाई मैं ने पूरे 6 दिन की और जब भी मैं वहां जाता हूं तब तब मामी को किसी न किसी बहाने से होटल ले जा कर चोदता हूं। Antarvasna

Sex Stories

ये मेरी अपनी आपबीती है, ये कोई कहानी नही है और Sex Stories इसमे कुछ ऐसा भी नही है जो मैंने कल्पना से लिखा हो.

बचपन में जब मैं पांच साल का था तब मेरी ताईजी का देहाँत होने के कारण उनकी लड़की जो मुझसे सात साल बड़ी हैं हमारे साथ रहती थी. उनका नाम गीता है. मेरे पिताजी सरकारी ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर काम करते थे. हमें सरकारी मकान मिला हुआ था. मकान बहुत बड़ा था और उसके कमरे भी बहुत बड़े थे. चार बैडरूम, रसोई और बैठक थे उस मकान में. जबकि उस समय मैं अमन, मेरा छोटा भाई छोटा और छोटी बहिन मुन्नी, मां, बाबूजी और गीता जीजी कुल छः लोग ही उस मकान में रहते थे.

जैसे जैसे बड़ा हुआ एक्सरसाइज़ ठीक होने से लंड का साइज़ भी सात इंच का हो गया. पिताजी का तबादला राजस्थान के अलग अलग शहरों में होता हुआ जयपुर में कुछ समय रुका तो पिताजी ने यहाँ घर बनवा लिया. अब स्कूल में उसके बाद लड़को के कोलेज में पढ़ा लेकिन लड़कियों से बात करने में गांड फटती थी इसलिए हमारी गली में आठ लड़कियां होते हुए भी खूब इच्छा होने पर भी मैं उनमे से एक को भी पटा नही पाया. इच्छा बहुत होती थी चोदने कि लेकिन मुट्ठ मारकर ही काम चलाना पड़ता था. साइंस का छात्र था इसलिए पढ़ा सबकुछ लेकिन प्रैक्टिकल हो नही पाया. बाईस साल का होने पर मेरा कद छः फुट आ गया रंग साफ़ और चेहरा आकर्षक.

मैंने इलेक्ट्रॉनिक आइटम की रिपेरिंग की दुकान खोली. ठीक ठाक चलने लग गई. दुकान के बहार से कुछ लड़कियां मुझे देख कर चक्कर लगाती, लेकिन बात करने में अब भी मेरी गांड फटती थी. अब मुझे देखने लड़की वाले आने लग गए. एक लड़की, जो की आज मेरी पत्नी है, ठीक ठाक लगी तो जुलाइ में सगाई हो गई. सगाई छः महीने तक रही. हमने ढेरों फोन किए लेकिन लंड चूत की कोई बात करने की हिम्मत नही होती थी तो शादी होने तक उसको भी नही चोद पाया. मन में लड्डू फूटते थे कि अब मेरी कहने को भी कोई है. सगाई होने के बाद मैंने मुठ मरना बंद कर दिया.

खैर शादी हो गई और अब बहुत साल प्रतीक्षा के बाद आया सुहागरात का समय. शाम को ससुराल आनीजानी रस्म थी सो पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर छोटे सगे व रिश्ते के भाई बहिनों को साथ लेकर ससुराल गया. रात को साडे दस बज गये रस्मो रिवाज निबटाते हुए. जैसे ही फ्री हुए मैंने सभी भाई बहिनों को ऑटो रिक्शा में घर भेज दिया और पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर उसका हाथ अपनी कमर पर कस कर सटे चिपके से घर के लिए रवाना हुए.

लंड महाराज आज अपनी पूरी जवानी में तने खड़े थे लग रहा था कि सूट फाड़ कर अभी बाहर आ जायेंगे. इच्छा तो बहुत हो रही थी कि इस जनवरी की ठण्ड में घर से सात किलोमीटर दूर कहीं सुनसान में रोक कर चोद चाद दूँ. साला लंड फेरे में हाथ पकड़ते ही कंट्रोल से बाहर था. लेकिन अपने को ये सोचकर कंट्रोल किया की माल अपना है और जरा देर बाद घर पहुँचते ही मेरा ही होने वाला है. साडे ग्यारह बजे घर पहुंचे तो चाचाजी के बेटे, मेरे बड़े भाई की पत्नी मेरी भाभी ने रस्म निभाई की ये मेरी देवरानी आज तुम्हारे साथ सोएगी. दिल उछल कर गले में आ गया. कमरे में आकर एक दूसरे की ओर पीठ करके हमने कपड़े बदले. कंडोम का पैकेट मेरे दोस्त ने पहले ही इंतजाम कर दिया था.

पत्नी ने जेवर भी उतारे और मैंने सजे धजे पलंग पर पत्नी को बिठाया. कमरे में पन्द्रह वाट का बल्ब जल रहा था. कैमरे से चार छः फोटो लिए और उसकी बगल में बैठ गया. फोन पर ढेरो बात करने वाली मेरी पत्नी के जबान पर ताला लग गया और वो नीची नजर किए बैठी थी, उसके होंट सूख रहे थे. मैंने इधर उधर की दो चार बातें करने के बाद कहा कि किस करूँ तो उसने नजरें नीचे किए धीरे से गर्दन हिला दी. लंड बैठने का नाम नही ले रहा था. मैंने उसके गाल पर किस किया जो मेरी जिन्दगी का किसी जवान लड़की का पहला किस था. फ़िर मैंने उसको बोला किस करने को तो उसने भी मेरे गाल पर धीरे से किस किया अब मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा, वो सिहर गई लेकिन हाथ नही हटाया. अब धीरे धीरे मैंने बूब्स दबाना शुरू किया मुझे वैसे ही बहुत चढी हुई थी, जिन्दगी में पहली बार बूबू दबा रहा था, मजा बहुत आ रहा था, धीरे धीरे उसका ब्लाउज खोल दिया. ब्रा भी हटा दी. सेब के साइज़ से थोड़े बड़े उसके गोरे स्पंज की बोल की तरह सख्त नरम बूबू बाहर आ गए.

पत्नी निढाल सी मेरे सीने से चिपकी पड़ी थी धीरे धीरे किस चल रहा था. अब मैंने उसके पेटीकोट को ऊपर सरकाना शुरू किया. एक बात माननी पड़ेगी की उसने किसी भी बात के लिए रोका नही. बस निढाल सी चिपकी रही. आज एक जवान नंगी लड़की मेरे बिस्तर पर थी और उसके गोरे सवा पाँच फुट के बदन पर एक बाल भी नही था और उबटन लगने से पूरा बदन मक्खन जैसा चिकना हो गया था. झांटे थी इसका मुझे ज़रा भी बुरा नही लगा. क्यूंकि झांटों से मुझे जवानी का एहसास होता है न की नादानी का. उसका बदन देखकर कोई भी फख्र कर सकता था. हालाँकि कद में हमारे नौ इंच का फर्क था.

मैंने उसे धीरे से लिटाया अपने कपड़े उतारे, तन्नाया फन्नाया लंड इतना तन चुका था की टंकार तक नही मार रहा था. लंड पर कंडोम चढाया, उत्तेजना इतनी ज्यादा थी की कभी भी क्रीम बाहर आ सकती थी. पत्नी के ऊपर आया तो उसकी टाँगे मेरी टांगों पर आ गई, मेरा माथा ठनक गया कि इसका कोई चक्कर तो नही चल चुका. उसी वक्त मुझे एक परिचित की बात याद आ गई की कुंवारी लड़की के ऊपर लड़का आते ही लड़की की टाँगे अपने आप लड़के की टांगों पर आ जाती है. और कहीं किसी किताब मैं पढ़ा था कि अच्छा चोदक वो है जो अपना वजन अपने घुटनों और कोहनी पर रखता है. अब हालत ये थी कि यदि अपना वजन घुटनों और कोहनी पर रखता तो लंड अपनी जगह से हिल जाता और यदि लंड को गीले छेद पर सेट करता तो एक कोहनी से दम नही लग रहा था. इतने में उत्तेजना इतनी ज्यादा हुई कि लंड से छः महीने का स्टॉक क्रीम बह निकला. लंड अपनी अकड़ खो चुका था. मैंने बहुत कोशिश की कि लंड दोबारा खड़़ा हो जाए लेकिन वो सारी रात खड़़ा नही हुआ. कंडोम निकाल कर मैंने पलंग से नीचे डाल दिया.

पत्नी को हलकी सिहरन हो रही थी. मैं समझ रहा था, उत्तेजना से उसकी तबियत बिगड़ रही थी और मैं कुछ भी कर नही पा रहा था. उसको अपनी बाँहों में लेकर पडा रहा. उसने एक बार कहा कि करो लेकिन मेरा लंड सिकुड़ चुका था.

सुबह चार बजे माँ ने आवाज लगाई तो मेरी बीवी चली गई, कोई घंटे भर सोया हूँगा. नींद नही आई, सुबह साडे छः बजे बाहर निकलने कि हिम्मत नही हो रही थी. कोई सामने आएगा तो क्या होगा. जैसे तैसे हिम्मत करके कमरे से बहार आया. बुआ की लड़की सामने थी जो मुझसे दो साल छोटी थी और कुंवारी थी, हम दोनों में अच्छी पटती थी. वो गहरी नजरों से देख रही थी, मैंने पूछा क्या है. तो वो बोली “कुछ नही”. पिताजी सामने आए मैंने नजरें घुमा ली. अब मैं गुसलखाने में गया. अपने दिमाग को ठिकाने पर लाने की कोशिश करने लगा. लंड को हाथ में लिया. धीरे धीरे सहलाने लगा, दिमाग को केंद्रित किया. लगभग पाँच मिनट में लंड खड़़ा होने लगा, मैंने हाथो को तेज चलाना शुरू किया. मुठ मारने में जरुरत से ज्यादा समय लगा. लेकिन सब कुछ सही हो गया. मैंने छः महीने मुठ नही मारकर अपनी उत्तेजना ख़ुद बढ़ा ली थी.

अब मुझको रात का इंतजार था. खैर धीरे धीरे रात पास आती गई. रात के साडे दस ग्यारह के करीब मेरी जान कमरे में आई, मैंने कमरे की सांकल बंद की, जान को अपनी आगोश में लिया. किस किया. लंड अब अपनी दस्तक देने लग गया. दो मिनट बीते होंगे की पत्नी दूर हो गई. मैंने कहा कि क्या हुआ. वो बोली एमसी हो गई. उसने अपनी अभी तक कुंवारी चूत पे हाथ लगा कर देखा. बोली मम्मी को बोलती हूं. मैंने कहा “क्यूँ ” तो बोली कि नीचे सौउंगी. वो मेरी माँ को बोलके आई तो साथ में कम्बल और रजाई लेके आई.

उसने बिस्तर बेड से नीचे किए. कमरा बंद किया. अब तक मैं कुछ नही बोला था. मन लेकिन थोड़ा उदास हो गया था. आज मेरा लंड तैयार था तो उसकी चूत ने धोखा दे दिया. जैसे ही वो नीचे लेटने को हुई तो मैंने उसे अपने पलंग पे खींच लिया. पत्नी बोली कि मम्मी को पता चल गया तो? मैंने कहा कौन बताएगा ? तुम या मैं. वो समझ गई और मेरे साथ पलंग पर आ गई. उसने चूत पर कपड़ा लगा लिया था. आज दिनभर में वो घरवालो के साथ घुलमिल गई थी, शर्म भी बहुत कम हो गई थी.

अब मैंने उसके होटों को अपने होटों से चिपका के किस करना शुरू किया. होंट थे कि अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू किए. मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के लिपट चुके थे. मेरे हाथ उसके बोबों को मसल रहे थे. धीरे धीरे ब्लाउज और ब्रा अलग हो गई. फ़िर थोडी देर में पेटीकोट भी खींच कर अलग कर दी. जल्दी से मैंने भी अपने कपड़े उतार फैके, मैंने बीवी को अपने ऊपर ले लिया और घमासान चालू हो गया वो ऊपर से अपनी गांड को चला रही थी और मैं नीचे से लंड को उसकी कपड़ा लगी चूत पे दबा के घिस रहा था.

होंट एक दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं थे, मेरा एक हाथ उसके बोबे दाब रहा था जो मेरे सीने से चिपके पड़े थे और दूसरा हाथ मेरी बीवी का मखमली शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रहा था, मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के नीचे कसे थे. हम दोनों अपनी मंजिलों कि तरफ़ बढ़ रहे थे कि मेरी बीवी अकडी और ढीली पड़ गई. उसके होंट खुल गए, हाथ ढीले हो गए, मैं रुक गया, उसकी आँखें मुंदी हुई थी. दो मिनट बाद मैंने उसके बोबे वापस दबाने शुरू किए, उसका मुह अपनी और किया उसके होंट चूसने लगा, मेरी बीवी में जान आने लगी, उसके होंट मेरे होटों से चिपक गए, हाथ मेरी गर्दन पर कसते गए. अब वो अपनी गांड धीरे धीरे हिलाने लगी, मैं भी नीचे से उसकी चूत को लंड से दबाते हुए रगड़ने लगा, एक बार फ़िर घमासान होने लगा और लगा जैसे पलंग पर भूचाल आ गया हो. हम दोनों अपनी अपनी मंजिल कि और बढ़ने लगे फ़िर मेरी बीवी को ओर्गास्म हो गया।

लेकिन अबके मैं रुका नही. ढीली पड़ी बीवी को अपनी बाँहों में कसे नीचे से उसकी चूत को अपने लंड से रगड जा रहा था. अब मुझे भी ओर्गास्म आने लगा. मैं फ़िर भी रगड़ता गया और मुझे खूब जोर का ओर्गास्म आया. मैं भी ढीला पड़ गया. दोनों पसीने में लथपथ थे उस जनवरी कि ठंडी रात में भी. मैं ने अपने पैरों से रजाई धीरे से मेरे ऊपर पड़ी बीवी के कूल्हों तक ऊपर कर ली ताकि पसीना सूखने के बाद कोई गड़बड़ न हो. हम दोनों की एमसी की चार रातें ऐसे ही एक रात में चार चार पांच पाँच राउंड लगाते निकली. हम रात को सिर्फ़ दो घंटे मुश्किल से सो पाते थे. सुबह वो साडे चार बजे कमरा छोड़ देती थी. चारों दिन वो बिस्तर नीचे लगाती रही और मेरे पास सोती रही.

अब पांचवी रात को उसको पलंग पर लेकर कपड़े उतारने के बाद किस शुरू किया, बोबे दबाने शुरू किए, धीरे धीरे वो गरमाने लगी, उसके हाथ मैंने अपने लंड पर रख दिए आज उसकी पैंटी भी उतार फेंकी. उसकी चूत पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा, गर्मी बढ़ने लगी, उसके हाथ मेरे लंड पर कसने लगे, आज उसको एमसी में ब्लड भी जरा सा आया था. उसकी चूत से पानी बाहर आने लगा. मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में सरकानी शुरू की, करीब डेढ़ इंच अन्दर जाने के बाद उंगली अड़ गई, छेद छोटा था, मैंने बड़ी लाइट जलाई, उसकी टांगो को चोडा करके उसकी चूत को फैला कर अन्दर देखा तो हाईमन साफ़ नजर आया, छेद बहुत छोटा था, वापस छोटी लाइट जलाई, दोनों वापस पहले वाली पोजीशन में आ गए. अब मेरे दिमाग में ये बात आई की यदि ऐसे ही मैंने अपना सात इंच का रोड अन्दर डालने की कोशिश की तो इसको बहुत दर्द होगा, ये सोचकर मैं अपनी अंगुली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

शुरू में थोड़ा सा दर्द हुआ फ़िर उसको अच्छा लगने लगा. अब मैंने उसको सारी बात समझाते हुए कहा कि या तो तुम ज्यादा दर्द सहो या कम. वो बोली कि कम दर्द करो. फ़िर मैंने कहा कि अब मैं तुम्हारी चूत में दो उंगली करूंगा, सहयोग करो, ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन की शीशी निकाल कर दोनों बड़ी उँगलियों पर अच्छी तरह वैसलीन लगाई, अब धीरे से उसकी चूत फैला कर दो उंगली उसकी चूत में डालना शुरू किया, हाईमन को चीरने पर उसको दर्द हुआ मैंने अपनी उंगली को रोका. मैं उसको दर्द नही करना चाहता था क्यूंकि फ़िर आनंद की चरम सीमा एकदम से कम हो जाती है, फ़िर एक बात और भी है, यदि अपने भी ऐसा ही दर्द हो तो क्या अपन भी मजा ले पाएंगे. धीरे धीरे करके मैंने उसके हाईमन को थोड़ा चोडा कर दिया, अब अंगूठा उसकी चूत में जाने पर दर्द नही हुआ.

मैंने सोच लिया के अब मेरी बीवी लंड ले सकती है, इतना दर्द तो वो सहन कर ही लेगी, मैं उसके ऊपर आ गया, लेकिन प्रैक्टिकल प्रॉब्लम वोही थी, की एक हाथ से लंड सही जगह पर लगाता तो लंड को घुसाने में जोर नही लगा पा रहा था, उस रात को फ़िर पिछली चार रातों जैसे ही रगड़ना पडा, समझ नही आ रहा था की अन्दर कैसे डालना है,

मेरे एक दोस्त की शादी एक महीने पहले हुई थी, उस से मिला, उसने बताया की पत्नी की गांड के नीचे तकिया रख ले, उसकी टांगो के बीच में बैठ कर लंड को उसकी चूत पर सेट कर ले, घुटने मोड़ दे, फ़िर बैठे बैठे ही उसकी दोनों जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर धक्का लगा कर लंड चूत में पेल दे. सील टूटने दे. इसी को सील टूटना कहते हैं. मैंने उसको नही बताया कि उसकी सील मैं ढीली कर चुका हूँ.

अब टाइम निकलने लगा, रात आई, मेरी बीवी वोही ग्यारह बजे कमरे में आई, धीरे धीरे कपड़े उतारते गए, हम एक दूसरे से चिपकते गए, पसीना चुहचुहाने लगा, उसकी चूत गीली हो चुकी थी, अब वो समय आ गया, जिसके लिए मेरा लंड बाइस साल से तरस रहा था, मैंने वैसलीन कि शीशी का ढक्कन खोला, बीवी कि चूत पर खूब सारी वैसलीन अन्दर तक लगाई, गांड के नीचे तकिया लगाया, उसकी टांगो को फैला कर उनके बीच में बैठ गया, लंड को उसकी चूत पर सेट किया, टांगो को घुटने से मोड़ दिया, आज मेरे लंड उसकी चूत पर एकदम सही सेट हुआ, उसकी जाँघों पर अपना हाथ जकडा, धीर से दमदार धक्का लगाया, मेरा लंड उसके हाईमन को तोड़ता हुआ डेढ़ इंच अन्दर चला गया।

बीवी बोली कि जलन होने लग रही है, मैंने अपने आपको रोका और बीवी को पूछा कि इतना तो सहन कर सकती हो न, बोली हाँ इतना तो सहन कर लुंगी, अन्दर जाने के अहसास से मेरे लंड में एक नया कड़कपॅन महसूस हो रहा था, मैंने डेढ़ इंच में ही बीवी कि चूत को अपने लंड से सम्भोग किया, धीरे धीरे आसानी से. पहली बार मेरी क्रीम किसी चूत में छूटी थी. पास में से नेपकिन उठा कर उसकी चूत साफ़ की, सिर्फ़ दो बूँद खून और थोडी क्रीम.

अब वापस वो ऊपर और मैं नीचे, अब बिना घुसाए फ़िर घमासान चालू हुआ और जब रुका तो पन्द्रह बीस मिनट शांत पड़े रहे, धीरे धीरे फ़िर दोनों के शरीर में गर्मी आने लगी, अबके जो किस और दबाने का कार्यक्रम चला तो बेधड़क, बिना किसी दर्द के डर के, बिना नयेपन के एहसास के. मुझे पता था कि लंड को अन्दर कैसे जाना है, जीभें एक दूसरे को चाट रही थी, उसकी चूत से पानी टपकने लगा, मैं उसकी टांगो को चौडी करके बीच में बैठ गया, लंड को चूत के छेद पर सेट किया, हलके से धीरे धीरे धक्का लगाते हुए बीवी के मुंह को दर्द के लिए देखते हुए अपने लंड को अन्दर देता चला गया।

क्या अहसास था लंड के चूत में अन्दर तक जाने का. लंड स्टील की रोड के माफिक सख्त हो गया था, थोड़ा सा कसमसाने के बाद सब कुछ ठीक हो गया, अब मैं पहली बार, लंड बीवी की चूत में दिए उसके ऊपर आ गया, हमारी जीभें एक दूसरे पर फिरने लगी, फ़िर मैं उसके बोबे चूसने लगा, उसकी चूत गीली हो गई, हमारे होंट एक दूसरे के चिपक गए और हमने एक दूसरे को बाँहों में जकड कर जो चक्की चलाई की उसके मुकाबले में क्या कोई भूकंप होगा, सच में आज पूरा मजा आ रहा था, आज पता चल रहा था की क्यूँ अप्सराएं ऋषि मुनियों की तपस्या भंग कर देती थी. दोनों ने अपना अपना काम बखूबी निबटाया. फ़िर पस्त से एक दूजे पर यूँ ही पड़े रहे, इस तरह से सातवें दिन पूरा सम्भोग हुआ.

एक महीने तक हम लोगों का कार्यक्रम रोज रात चार पाँच बार होता था, हम कई बार एक दूर पर ही सो जाते थे, लंड जब देखो खड़़ा ही मिलता था, आज इस बात को सत्ताईस साल हो गए हैं, मेरी बीवी को अब मैं जो कर लूँ वो अपनी तरफ़ से पहल नहीं करती है, मुझे आज भी चार पांच बार डेली मुठ मारनी पड़ती है, मेरे पहले साल एक बेटी और उसके दो साल बाद एक बेटा हुआ लेकिन आज मैं प्यासा हूँ, मुझे कोई साथी चाहिए, बिल्कुल अपनापन सा, प्यारा सा, एक दूसरे को साथ देने वाला,… Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆