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मैं राज हिमाचल क रहने वाला हूं। यह बात की है जब मैं बारहवीं में Antarvasna पढ़ता था। मैं अपने मामा के यहां पेपर देने गया था।
वहां पड़ोस में एक लड़की सुन्दर सी, मस्त फ़िगर वाली रहती थी। नाम था हिना। वो मुझ पर पहले दिन से ही लाइन मारने लगी थी पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया.
एक दो दिन में वो मुझ से बात भी राजे लगी और हम लोग एक दूसरे को इशारे भी राजे लगे। एक दिन जब मामा काम पे गये थे और मामी बच्चों के साथ पड़ोस में गयी थी तो वो बाहर छोटे बच्चों के साथ खेल रही थी।
मैंने बड़ी हिम्मत कर के उसे इशारा किया और अपने पास बुलाया मगर उसने आने से मना कर दिया।
उस दिन के बाद मैंने सोच लिया कि कुछ ना कुछ तो जरुर करुंगा उसे पाने के लिये।
मेरे मामा शाम को 7:30 बजे वापिस आते थे। उस के थोड़ी देर बाद जब थोड़ा स अन्धेरा हो गया तो सब बच्चे घर चले गये और उस ने मुझे इशारा कर के मुझे बुलाया, मैं उसके पास गया मगर पड़ोस की एक औरत वहां आ गयी और उससे बात राजे लगी।
मैं बात बिना किये ही आगे चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वापिस आया तो वो अकेली खड़ी थी। मैं उससे बात राजे लगा। पहले तो हम इधर उधर की बातें करते रहे फ़िर वो बोली कि आप मुझे भूल तो नहीं जाओगे।
मैंने कहा कि भूलूंगा तो नहीं मगर चाहता हूं कि ये याद थोड़ी शानदार और हसीन हो जाये।
यह सुन कर वो शरमा गयी।
उस समय काफ़ी अन्धेरा हो गया था और उसने बाहर की रोशनी भी नहीं जला रखी थी। हम अन्धेरे में ही बातें कर रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे कैसे बढूं। उस तरफ़ भी आग बराबर लगी थी.
वो हिम्मत कर के बोली- मुझे एक किस करो.
तो मैंने पूछा- कहां पे?
तो वो बोली- गाल पे।
मैंने कहा- नहीं मेरा दिल होठों पे राजे को कर रहा है।
उसने कहा- जहां दिल करता है वहीं कर लो।
मैंने उसे अपनी बाहों में पकर लिया और एक जोरदार चुम्मी ली उसके होठों पे। उसका गदराया बदन मेरे हाथों में था। पहली बार मैंने ऐसे किसी लड़की को पकड़ा था।
हम दोनों बहुत गरम हो गये थे।
उसने कहा कि यहां कोई आ जायेगा, चलो मेरे कमरे में चलो।
मैंने पूछा- घर पे कोई नहीं है?
वो बोली- पापा मम्मी बाहर रहते हैं, यहां मैं और भैया रहते हैं। वो भी आज नहीं आयेंगे। मेरे साथ मेरी एक भतीजी है 5 साल की, उसे पहले ताई जी के पास भेज देती हूं थोड़ी देर के लिये।
उसने फ़टाफ़ट भतीजी को भेज दिया और मैं उस के कमरे में चला गया।
दरवाजा बद करके हम एक दूसरे से लिपट गये। मैंने उसे बिस्तर पे गिरा लिया और उस की कमीज उतार दी। मैं उसके मोम्मों को दबाने लगा। हम काफ़ी देर एक दूसरे को चूमते, चूसते रहे। मैंने उस के मोम्में खूब चुसे पर दिल नहीं भरा।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और हम डर गये।
हिना ने पूछा- कौन है?
तो बाहर उसकी भतीजी थी।
उसने मुझे फ़टाफ़ट छिपने के लिये कहा। मैं बिस्तर के नीचे छिप गया।
उस ने दरवाजा खोला और कुछ बात करके भतीजी को फ़िर कहीं भेज दिया। दरवाजा बद करके वो वपिस आयी तो मैं निकला। मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार उतार दी और जल्दी से उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दिया।
मगर बड़ी दिक्कत के साथ अन्दर गया और उसके आंसू निकल आये।
वो चीखी- निकालो बाहर इसे!
मगर मैं अन्दर घुसाये जा रहा था। मेरे कुछ रुकने पे वो सामान्य हुई।
अब मेरे हल्के हल्के धक्कों से उसे मजा आने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी। मैं उसे चोदता रहा वो मजे लेती रही।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे कस के पकड़ लिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- तुम धक्के लगते रहो, मजा आ रहा है।
मैं धक्के लगाता रहा और मैंने अपने लन्ड पे कुछ गरम गरम महसूस किया। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने धक्के तेज कर दिये। थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया।
हम एक दूसरे से लिपटे रहे और चूमते रहे। कुछ देर बाद हमने कपड़े पहन लिये।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
हिना ने पूछा- कौन है।
बाहर उसकी भतीजी थी.
हिना ने मुझसे कहा- तुम अभी छुप जाओ, मैं इसे कहीं और ले जाती हूं, पीछे से तुम निकल जाना। हम कल मिलेंगे।
मैं वहां से आ गया।
अगले दिन उसका भाई आ गया और हम दोबारा नहीं मिल पाये।
एक दो दिन में मैं वापिस आ गया। फ़िर 3 – 4 साल बाद वहां गया तो उसकी शादी हो चुकी थी, मगर उसने कहा था कि भूलना मत और सही में मैं उसे आज भी नहीं भुला पाया हूं. Antarvasna
आप सब को मेरा नमस्कार ! मेरा नाम करण Antarvasna कुमार है, मेरी उम्र २६ साल है, मैं अम्बाला, हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं इस समय चंडीगढ़ में नौकरी करता हूँ। मैं आपको एक सच्ची घटना के बारे में बता रहा हूँ जो आप को बहुत पसंद आएगी।
बात आज से ४ साल पहले की है, मैं किसी काम से दिल्ली गया हुआ था। तो उस दिन वो काम किसी वजह से नहीं हुआ। दिल्ली में मेरी बड़ी बहन रहती है जिस का नाम सुमन है। तो मैं रात को देर होने की वजह से उस के घर रुक गया तो मेरी दीदी के घर उसकी ननद आई हुई थी उस का नाम सोनिया था, वो अपने पति के साथ मुंबई में रहती है वो कुछ दिनों के लिए वहां आई हुई थी। वो देखने में काफी सुंदर है और उसकी चूची काफी बड़ी हैं जोकि पहले भी उस को देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था लेकिन उस दिन वो काफ़ी स्मार्ट लग रही थी।
हम रात को खाना खाते समय बात करते रहे। बात करते करते मैं उस से काफ़ी घुल-मिल गया था। खाना खाने के बाद दीदी और जीजाजी जल्दी ही सो गए और हम दूसरे कमरे में टीवी देखते रहे। मैंने यह बात नोट की कि उसका ध्यान टीवी पर कम और मेरी तरफ़ ज्यादा है। मैंने एक दो बार उसकी आंखों में आंखें डाली तो उसने अपना ध्यान टीवी की तरफ़ कर लिया। ठण्ड होने की वज़ह से हम एक ही रजाई में बैठे हुए थे क्यूंकि दूसरी रजाई दीदी अपने साथ अपने कमरे में ले गई थी।
बैठे बैठे मेरा पैर अकड़ गया तो मैंने ज्यों ही अपना पैर खोला तो मेरा पैर उस के पैर से थोड़ा सा लगा मेरे अंदर करंट सा दौड़ गया और मेरा लण्ड खड़ा हो गया लेकिन उस ने कुछ नहीं कहा तो मैंने हिम्मत कर के अपना पैर थोड़ा सा बढ़ाया और उस के पैर से थोड़ा और छुआ दिया, तो भी वो कुछ नहीं बोली। हम कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे तो मैंने फिर अपना हाथ उस के पैर पर रख दिया और धीरे धीरे उस की जांघों पर ले आया लेकिन वो फिर भी कुछ नहीं बोली और टी वी देखती रही। मैं अपना हाथ उसकी जांघों पर फिराता रहा और फिर मेरा हाथ उसकी सलवार के नाड़े तक पहुँच गया। जैसे ही मैंने उसके नाड़े को खींचना चाहा तो उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी तरफ गुस्से से देखा और बोली- यह क्या कर रहे हो?
उसकी यह बात सुन कर मैं डर गया और आराम से बैठ गया। थोड़ी देर बाद वो उठ कर अपने कमरे में सोने के लिए चली गई और उस के जाने के कुछ देर बाद मैं भी टीवी बंद करके अपने कमरे में सोने के लिए चला गया। मैं जा कर बेड पर लेट गया, मैं रात को सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में सोता हूँ। मेरा लण्ड खडा होने के वजह से बहुत देर मुझे नींद नहीं आई, काफी देर बाद मैं सो गया।
करीब रात के २ बजे मुझे लगा कि कोई मेरे पास लेटा है जो मेरे लण्ड को हाथ में लिया हुआ है और हिला रहा है। मैंने ऑंखें खोली तो वो सोनिया थी। वो बोली कि मैं बाहर तुम पर गुस्सा हुई मुझे माफ़ कर देना, मैं कब से तुम से चुदाई करवाने की सोच रही थी, मेरा सपना आज पूरा हो गया है।
फिर मैंने भी उस की चूची पकड़ ली और उन्हें दबाने लगा। फिर मैंने उसे नंगा कर दिया, उस ने मुझे नंगा कर दिया और शुरू हो गया हमारी चुदाई का कारनामा-
फिर मैं उसकी चूची चूसने लगा और उसे दबाने लगा। जब भी मैं उसकी चूची दबाता, वो आह-आह करती। फिर मैं एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था और एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था। वो मेरा लण्ड अपने दोनों हाथो में ले कर हिला रही थी और कह रही थी- उसके पति का लण्ड काफी छोटा है, उसने आज तक उसको संतुष्ट नहीं किया, आज तुम मुझे संतुष्ट जरुर करना !
यह कह कर उसने मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और उसे लोलीपोप की तरह चूसने लगी। फिर मैंने उस को सीधा लिटा दिया और उस पर सवार हो गया। जैसे ही मैंने उस की चूत पर अपना लण्ड रख कर एक धक्का दिया और मेरा थोड़ा सा लण्ड उस की चूत में गया वो चिल्लाई और कहने लगी कि इसे बाहर निकालो और मुझे धक्का मारने लगी।
लेकिन मैं उसे कहाँ छोड़ने वाला था, मैंने एक जोर से धक्का और मारा मेरा पूरा लण्ड उस की चूत में घुस गया, वो और जोर से चीखने लगी। मैंने फिर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उस का चीखना बंद हो गया। फिर मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा, उसे भी मजा आने लगा और वो कहने लगी- और जोर से ! और जोर से !
अब मैंने भी स्पीड बढा दी और जोर -जोर से धक्के मारने लगा। मैं करीब एक घंटे बाद शांत हुआ। मैंने अपना सारा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया और उसके ऊपर गिर गया। इस चुदाई के बीच वो पॉँच बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। फिर हम ऐसे ही नंगे सो गए।
करीब एक घंटे बाद मेरी नींद खुली तो मैंने देखा वो मेरा लण्ड चूस रही थी और मेरा लण्ड सीधा खडा था। फिर मैंने उस को कुतिया की तरह खड़ा किया और उसकी गांड पर थोड़ा सा थूक लगाया और उस पर अपना लण्ड रखा और एक जोर से धक्का मारा और एक बार में मेरा पूरा लण्ड उस की गांड में घुस गया। उसकी गांड काफी टाईट थी। वो दर्द के मारे जोर से चीखी। फ़िर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया। जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैं धक्के मारने लगा और करीब ४५ मिनट के बाद जब झड़ने को हुआ तो मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से निकाल कर उसे सीधा किया और अपना सारा वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया और वो मेरा सारा वीर्य अपनी जीभ से चाट कर पी गई।
फ़िर सुबह होने को थी तो उसने अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में चली गई। मैंने भी अपने कपड़े पहने और सो गया।
मैं करीब 8 बजे उठा और नहा धो कर फ़्रेश हो गया। जब मैंने सोनिया को देखा तो वो काफ़ी खुश लग रही थी।
फ़िर मैं अपना काम करने के लिए निकल गया। उस दिन काम तो हो गया पर मुझे काफ़ी देर हो गई। इसी वजह से मुझे फ़िर दीदी के घर रुकना पड़ा। जब मैं दीदी के घर आया तो मुझे पता चला कि जीजाजी अपनी कम्पनी के काम से बाहर गए हैं, अगले दिन आएँगे।
रात को हम खाना खा कर बिना टी वी देखे अपने अपने कमरे में सोने चले गए। मैं उस रात भी सोनिया की इन्तज़ार में था। थोड़ी देर बाद कोई मेरे कमरे में आया तो मुझे लगा कि सोनिया ही होगी क्योंकि कमरे की बत्ती बन्द थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे जोर जोर से चूमने लगा और उसके स्तन दबाने लगा।
वो भी मेरे लण्ड को अन्डरवीयर के ऊपर से पकडे हुए थी। फ़िर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और फ़िर उसके भी कपड़े उतार कर अपना लण्ड उसके मुंह में दे दिया। वो उसे चूसने लगी। उसे काफ़ी मज़ा आ रहा था।
फ़िर मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत पर अपना लण्ड रख कर इतनी जोर से धक्का मारा कि वो उस धक्के को सह नहीं पाई और उसने जोर से चीख मारी क्योंकि मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में जा चुका था। मुझे उसकी चुत्त आज काफ़ी टाईट लग रही थी।
इतने में किसी ने मेरे कमरे की बत्ती जला दी, मैंने पलट कर देखा तो वो सोनिया थी और जिसकी चूत में मैंने अपना लण्ड डाला हुआ था वो मेरी बहन सुमन थी। मैं उसे देख कर दंग रह गया और मेरे पसीने छूट गए तो सोनिया बोली- चोद आज अपनी बहन को ! चोद डाल ! उसके पति का लण्ड भी मेरे पति के लण्ड की तरह छोटा है। आज मेरी और उसकी दोनों की प्यास बुझा दे !
फ़िर सुमन बोली- आज अपनी बहन को चोद डाल मेरे भाई और उसे माँ बना डाल !
फ़िर मैंने रात को जम कर दोनों की चुदाई की और हम सो गए।
फ़िर अगले दिन सुबह जीजाजी का फ़ोन आया कि वो एक सप्ताह बाद आएंगे, तब तक तू अपनी दीदी के पास रुक जाना।
फ़िर क्या था हम तीनों ने दिन-रात जम कर चुदाई की और मैं वहाँ से आ गया।
उसके बाद जब भी मैं अपनी दीदी के घर गया, मैंने दीदी की जम कर चुदाई की।
आज मेरी दीदी एक लड़के की माँ है और उसकी ननद एक लड़की की माँ है, दोनों बच्चों का बाप मैं हूँ।
आप ही बताइए, मैं अपने भांजे को भांजा कहूँ या अपना बेटा ……….Antarvasna
मैंने बताया था कि मैं जल्दी ही अपनी आगे की कहानी बताऊंगा, परन्तु अपने बिजनेस में व्यस्त होने के कारण यह कहानी लिखने में थोड़ी देरी हो गयी.
उसके लिए आपसे माफी चाहता हूँ.
वैसे आप सभी मुझसे पहले ही परिचित हैं.
नए पाठक मुझसे वाकिफ़ नहीं होंगे, तो मैं उन्हें एक बार बता देता हूं कि मैं राज शर्मा इंदौर में एक बिजनेसमैन हूं. मेरी उम्र ज्यादा नहीं है लेकिन हां मेरा अच्छा खासा काम है.
मैंने पिछली सेक्स कहानी में नहीं बताया था परंतु मेरी उम्र अभी 24 वर्ष की है और मेरी बहन की उम्र 22 वर्ष की है.
हम दोनों के बीच में जब पहली घटना हुई, तब वह 19 वर्ष की थी और उसी कहानी को अब मैं आगे बताना चाहता हूं.
मुझे उम्मीद है कि आपको यह Xxx पुसी लिक स्टोरी पसंद आएगी और मेरी यह कहानी शत-प्रतिशत सही है. इसमें किसी प्रकार का कोई झूठ नहीं है.
लंड पसंद करने वाले लड़के लड़कियों की जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि मेरे लंड का साइज अभी 7 इंच लंबा है और यह ढाई इंच मोटा है.
मेरा लंड किसी को भी पूर्ण रूप से संतुष्ट कर सकता है. यह जानकारी इसलिए बताई है ताकि कहानी में थोड़ा सा स्वाद बढ़ाया जा सके.
उस दिन जब मेरी बहन ने मुझसे कहा- भैया, अभी यहां पर कुछ नहीं करना. घर चल कर कुछ करेंगे.
हम शाम को 7:30 बजे घर पहुंच गए.
मां ने खाना तैयार रखा था, हम लोगों ने खाना खाया.
लगभग 8:30 बजे पापा भी आ गए थे.
हम सभी ने मिलकर कुछ बातें की.
मैंने देखा कि रितिका जो मेरी छोटी बहन है, बार-बार मुझे देखकर एक कटीली मुस्कान दे रही थी.
कुछ समय बात करने के बाद हम दोनों भाई बहन अपने अपने रूम में ऊपर आ गए.
वैसे मम्मी पापा के रूम नीचे ही बने थे और मेरा और मेरी छोटी बहन का रूम ऊपर मेरे रूम से अटैच था.
मेरी बहन अपने कमरे में चली गई और मैं अपने कमरे में.
मैं बहुत थक गया था तो मेरी गहरी नींद लग गई.
लेकिन 11:30 बजे मेरे मोबाइल की रिंगटोन बजी और मेरी नींद खुल गई.
मैं सोच रहा था कि इस वक्त कौन?
यह कॉल मेरी छोटी बहन रितिका का था.
मैंने तुरंत कॉल रिसीव किया और पूछा- क्या हुआ?
वह गुस्सा होकर बोली- भैया, मेरे बिना आपको नींद कैसे आ गई?
मैंने उससे सॉरी कहा.
उसने कहा- ठीक है, कोई बात नहीं. आप अभी मेरे कमरे में आ सकते हैं … या मैं आऊं?
मैंने कहा- मैं आ रहा हूं.
मैंने अपना दरवाजा खोला और जैसे ही उसके दरवाजे पर हाथ लगाया, दरवाजा खुला था.
अन्दर पिंक कलर की लाइट और मोमबत्तियां जल रही थीं.
रितिका मुझे देख कर बोली- भैया जल्दी से दरवाजा बंद कर दो.
मैंने दरवाजा बंद किया.
और जैसे ही मेरी नजर मेरी बहन पर पड़ी … मैं वह नजारा देखता ही रह गया.
मेरी बहन दुल्हन के जोड़े में मेरे सामने बिस्तर पर बैठी थी.
मैं कुछ समय के लिए बस उसे देखता ही रह गया.
उसने कहा- भैया कहां खो गए!
तब मुझे होश आया और मैंने कहा- कहीं नहीं!
मैं उसके पास गया.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी बहन मेरे लिए शादी के जोड़े में बैठी है.
परंतु मैं समझ गया था जब उसने ऑफिस में कहा था कि अभी यहां पर कुछ नहीं … घर चल कर कुछ करेंगे.
पर मुझे इतना नहीं पता था कि इतना कुछ करेंगे!
मैं उसे देख रहा था कि मैं मेरी बहन बोली- भैया दूर क्यों खड़े हो, पास आओ ना!
तो मैं पास गया और किस करने लगा.
हम दोनों के होंठ आपस में ऐसे जुड़ गए जैसे बरसों के बिछड़े हुए प्रेमी हों.
दोनों ने लगभग 20 मिनट तक एक दूसरे को इतना किस किया कि दोनों के होंठ पूरे लाल हो चुके थे.
कभी मैं उसके मुँह में मेरी जुबान दे देता तो कभी वह मेरे मुँह में अपनी जुबान दे देती.
हम दोनों ने काफी देर तक किस की.
उसके बाद मैं किस करते हुए उसकी गर्दन पर आ गया और उसको झटके से अपने आगे ले लिया.
उसके बालों को एक तरफ करके उसकी गर्दन पर … और पीछे से उसके कानों पर किस करने लगा. जिससे उसकी ‘आह … अहह …’ निकलने लगी.
धीरे धीरे मेरा हाथ उसके पेट से होते हुए उसके मम्मों पर आ गया.
उसने दुल्हन वाला लहंगा ब्लाउज पहना था, अन्दर उसने शायद गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी.
मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा और उसकी गर्दन और कान पर किस करता रहा.
मेरी बहन गर्म होती जा रही थी और पीछे से मेरा लंड भी उसकी गांड में घुसने के लिए बेताब हो रहा था.
मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और ब्लाउज को निकाल दिया.
फिर उसको मेरी तरफ घुमा कर मेरे सामने कर लिया.
इस बार उसने मुझ पर हमला बोल दिया और वह भूखी बिल्ली सी मुझ पर टूट पड़ी.
उसने मेरी टी-शर्ट निकलवाई और बनियान भी. वह मेरे पूरे सीने पर किस करने लगी और धीरे धीरे मेरी नाभि की तरफ बढ़ी.
नीचे आकर उसने पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ा और किस करने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको ऊपर की तरफ खींच कर एक झटके में उसको अपने नीचे ले गया.
अब मैं पूरे जोश के साथ उस पर टूट पड़ा.
मैंने रितिका को नीचे खींचा कर अपने एक हाथ से उसके एक दूध को दबाने लगा और दूसरे हाथ से उसके दूसरे दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
अब मेरी बहन छटपटा रही थी लेकिन मैं उसके मम्मों को चूसता ही रहा.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
लगभग 10 मिनट तक दूध पीने के बाद मैं उसकी नाभि पर आ गया और उसकी नाभि पर किस करने लगा.
मेरी बहन रितिका की सांसें बहुत तेज चल रही थीं और वह अपनी मस्ती में बोले जा रही थी- हां भैया और जोर से आहह … आहह … करते रहो उम्म … और मस्ती से … आह और करो … आज मैं आपकी बहन नहीं हूं … मैं आपकी बीवी हूं … आपको आज की रात जो भी करना है, करो … और मेरे साथ पूरी सुहागरात मनाओ उम्मम!
वह ऐसी बातें कहती हुई अपने मुँह से मादक सीत्कारें भी निकाल रही थी ‘आह …… उम्म …’
मैं उसे चुप रह कर बस चूसता जा रहा था.
वह कहने लगी- भैया, मैं तो हमेशा आपके पास ही रहने वाली हूं. पर आज जल्दी से मेरी चुदाई करो.
यह सुनते ही मैंने उसको उल्टा किया और पीछे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिया.
उसके बूब्स आजाद हो गए.
मैंने दोनों हाथों में एक एक दूध को पकड़ा और जोर जोर से मसलने लगा.
वह दर्द से तिलमिला गई और बोली- भैया, धीरे आपकी छोटी बहन हूँ, कोई रंडी नहीं … प्लीज धीरे करो ना … ऐसे क्यों दबा रहे हो! अब तो हर रोज आपको ये आम चूसने को मिलेंगे.
उसकी इस बात पर मुझे उस पर और भी प्यार आ गया.
मेरी छोटी बहन सोनाली बेंद्रे जैसे दिखने वाली इतनी हॉट सिस आज मेरे बिस्तर पर मेरी दुल्हन बनकर मेरा लंड लेने के लिए बेताब हो रही है.
अब मैंने उसको सीधा लिटा दिया, उसके लहंगे को उठाया, उसकी जांघों पर किस किया और आगे बढ़ता गया.
मैं धीरे धीरे उसकी पैंटी पर आ गया.
उसने पिंक कलर की नेट वाली पैंटी पहनी थी.
मैं उसके ऊपर से उसको किस करने लगा.
फिर मैंने उसको एक बार खड़ा किया और उसके लहंगे का नाड़ा खोल दिया जिससे उसका लहंगा नीचे गिर गया और वह मेरे सामने पैंटी में आ गई.
फिर वह नीचे बैठी और उसने मेरे लोवर को पूरा निकाल दिया.
हम दोनों भाई बहन अब एक जैसी दशा में थे … हम दोनों अपने-अपने पैंटी व निक्कर में थे.
वह घुटने के नीचे बैठ गई और मेरा निक्कर नीचे करते हुए निकाल दिया.
उसने मेरे लंड पर हमला बोल दिया और मेरा लंड चूसने लगी.
मैं उस समय स्वर्ग की अनुभूति कर रहा था.
जरा सोचिए दोस्तो, आपकी बहन सोनाली बेंद्रे जैसी हॉट हो और आपके साथ बिस्तर में हो … और आपका लंड चूस रही हो, तो आप कैसा फील करेंगे!
या फिर सोचिए बहनो … कि आपका भाई, जिसे आप बहुत चाहती हों, वह आपकी चूत के साथ ऐसा करे तो आपको कैसा लगेगा.
अभी बहुत सारी बहनें सोच रही होंगी कि काश हमारी किस्मत भी रितिका जैसी होती कि हम भी अपने भाई के लंड को चूस सकते.
तो मेरी चुदक्कड़ बहनों मैं आपको बता देना चाहता हूं कि दुनिया में किसी के साथ भी इतना सेक्स करने का मजा नहीं है, जितना भाई-बहन के बीच में है.
अगर आपको बुरा लगा हो तो उसके लिए माफी चाहूंगा, परंतु मैंने यही अनुभव किया है.
रितिका मेरे पूरे लंड के ऊपर से नीचे तक जीभ घुमा रही थी. वह लंड को मुँह में लेती और जितना अन्दर तक ले पा रही थी, वह ले रही थी. लंड को चूस रही थी.
फिर उसने मेरे लंड की चमड़ी को नीचे कर दिया, जिससे ऊपर का हिस्सा खुल गया.
सुपारे पर वह प्यार से अपने गुलाबी होंठों से किस कर रही थी और जीभ घुमा रही थी.
जिसने भी अपने सुपारे पर जीभ फिरवाने का यह रंगीन अनुभव किया है, वही इस आनन्द को समझ सकता है.
मेरी बहन मेरा लंड चूस रही थी और मैं थोड़ा झुक कर उसके बूब्स को दबा रहा था.
मैं जितनी जोर से उसके बूब्स मसलता, वह मेरा लंड उतना ही मुँह के अन्दर ले रही थी.
करीब दस मिनट तक उसने मेरा लंड उसी पोजिशन में चूसा.
फिर मैंने उसे 69 में आने को कहा, तो वह लेट गयी.
मैंने भी उसके ऊपर उसके मुँह में लंड देकर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर किस किया.
इससे वह सिहर गयी.
फिर मैंने उसकी पैंटी को उसकी चूत के मुहाने से अलग किया और एक उंगली डाल दी.
उसको इस अचानक हमले की आशा नहीं थी. वह उचक गयी और उसने मेरा पूरा लंड मुँह में ले लिया.
वह कुछ कहना चाह रही थी, पर उसकी आवाज नहीं निकली.
फिर मैंने उंगली को बाहर किया और उसके ऊपर से उठ गया. मेरा लंड भी उसके मुँह से निकल गया.
मैं खड़ा हो गया. वह सवालिया नजरों से देखने लगी.
वह कुछ कहती, उसके पहले ही मैंने उसे खड़ा होने को कहा.
वह जैसे ही खड़ी हुई, मैंने उसकी पैंटी खींच कर निकाल दी और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी.
उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी, जिसका स्वाद मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता.
फिर मैंने खड़े खड़े ही उसके एक पैर को उठाया, जिससे उसकी चूत खुल गई.
मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत की फांकों के बीच घुसा दी और Xxx पुसी लिक का मजा लेने लगा.
वह मेरा सर पकड़ कर चूत पर दबाव बनाने लगी- उम्म म्म भैया … और अन्दर तक डालो … आप इतने रोमांटिक हो, मैंने सोचा भी नहीं था … आह बहुत मज़ा आ रहा है भैया … ओहह … उम्म … यस भैया मेरी जान अपनी छोटी की चूत और जोर से पियो … चूस लो इसे पूरी!
तभी मैंने अपना मुँह अचानक से हटा लिया.
वह तड़फ कर कहने लगी- आह भैया, प्लीज ऐसा मत करो … चूसो ना … मुझे यह मजा ओर लेना है … बदले में जो करना चाहो, कर लेना … पर प्लीज मेरी चूत चूसो न प्लीज.
मुझे भी जाने क्या खुराफत सूझी, मैंने बोल दिया- छोटी, मैं तेरी गांड में भी लंड डालना चाहता हूँ.
उसने कुछ सोचा और बोली- ठीक है, पर आप पहले मेरी चूत में अपनी जीभ डालो … और जब तक मेरी ये मुनिया बह ना जाए, जीभ को निकालना मत.
मैंने उसको बेड के किनारे पर लिटाया ओर उसके दोनों पैरों को खोल दिया.
खुद नीचे बैठ कर और अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत में डाल दी.
मेरा नाम राहुल है, मैं Antarvasna जयपुर में रहता हूँ। मैं दिखने में सामान्य हूँ। हर लड़की को देख कर उसे चोदने का मन करता है मेरा।
मुझे एक लड़की पसंद थी लेकिन मैं कभी उसे कह नहीं पाया।
अब काम की बात हो जाए !
मुझे अपने पड़ोस में एक लड़की पसंद है। अक्सर वो मुझे देख कर मुस्करा जाती थी, मैं भी मुस्कुरा देता था, लेकिन कभी बात नहीं हो पाई थी। बस उसका नाम शेफाली है यही जान पाया था। करीब ४ महीने पहले वो मुझे बाज़ार में दिखी। मैंने उसे हाय किया और बात करनी शुरु कर दी।
मैंने उसी मित्रता का निमन्त्रण दिया और उसने स्वीकार कर लिया। हम दोनों एक दूसरे का मोबाइल नम्बर लेकर घर चले गए। मैं रात को भी सपनों में उसी को ही देखता था। अब हम फ़ोन पर बातें करने लगे, उसे भी ये सब अच्छा लगने लगा। हम लोग हर रोज़ घंटों फ़ोन पर बातें करने लगे।
एक दिन उसने मुझे अपने घर में बुलाया। मैं उसके घर गया तब वो घर में अकेली थी और जींस-टॉप में थी। क्या सेक्सी लग रही थी- उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने अपने आप को सँभालने की कोशिश की। शेफ (शेफाली) ने मेरा लंड देख कर अनदेखा कर दिया। हम इधर उधर की बातें करने लगे।
तभी मैंने उससे उसके बॉयफ़्रेन्ड के बारे में पूछा तो बोली- उसका कोई बॉयफ़्रेन्ड नहीं है। मुझे लगा अब तो कुंवारी चूत मिल जाएगी। लेकिन मैंने सम्हालते हुए बात जारी रखी। उसके बाद हम दोनों बाइक पर घूमने चले गए। वो मेरे पीछे बैठी थी तब उसके स्तन मेरी पीठ को लगते तो बड़ा मजा आता। मेरा लंड बार बार खड़ा होने लगा। मुझे सहन नहीं हो रहा था तब मैंने तय किया शेफ को आज तो जरुर करुँगा, उसकी चुदाई के मजे लूँगा।
पहले हम एक रेस्तराँ में गए। वहाँ खाने का आर्डर देने के बाद मैंने उससे कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ !
तो बोली- बोलो !
मैंने कहा- बुरा मत मानना !
वो बोली- ठीक है ! मैं बहुत कोशिश करके बोला- शेफ ! मैं तुमसे प्यार करता हूँ ! आय लव यू !
तो वो एक बार तो मुझे घूरती रही, मैं डर गया तो अचानक मुझे गले लगा कर बोली- आय लव यू ठू !
मैं बहुत खुश हुआ। उसके बाद हम दोनों अपने अपने घर चले गए।
अगले दिन भी उसके घर कोई नहीं था, मैंने उससे कहा कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ !
वो खुश होकर बोली- मैं भी तो यही चाहती हूँ !
मैं उसे उसके कमरे में ले जाकर उसके स्तन चूमने लगा। फिर उसके वक्ष को पहले उसके टॉप फिर उसके ब्रा से आजाद किया।
क्या तो मस्त माल लग रही थी वो !
मैं उसके स्तन बहुत तेज़ दबाने लगा। वो चिल्लाने लगी- आआऽऽ आअह्ह्ह्ह्हऽऽ
मुझे भी मजा आ रहा था। वो मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी। मैं बोला- जान पहले जींस तो खोलने दो !
तो उसने एक बार में ही मेरी जींस खोल दी फ़िर मेरा बनियान उतारने लगी। अब मैं केवल अंडरवियर में था। मैंने भी उसकी जींस उतार कर फेंक दी और उसकी चूत को नंगा करने के लिए पैंटी भी उतार दी। अब वो पूर्ण-नग्न थी। उसकी चूत तो क्या मस्त थी, बाल से भरी हुई बिल्कुल नंगी चूत ! कुंवारी चूत ! जो अब चुदवाने वाली थी !
फिर उसने मेरी अंडरवियर खोल दी और मेरा ७ इंच का लौड़ा बाहर आ गया जो सिर्फ चूत को चोदना चाहता था।
मैं उसकी चूत को हाथ से चोदने लगा, वो आवाजें निकालने लगी- आऽऽ आहऽऽऽ मऽरऽ गऽऽऽऽईऽऽऽऽ रोहीईईईईईईत चोदू ऊओ !
मैं डर गया कि कहीं कोई आ न जाये तो मैंने उसको चुप कराया और चूत से हाथ निकाल लिया। थोड़ी देर बाद वो उठी और मेरा लंड पकड़ कर मुँह में लेने लगी।
मैंने कहा- अब चोदें?
तो बोली- जानू, चोदो, मगर धीरे से ! पहली बार कर रही हूँ…..
मैं बोला- अब दर्द नहीं होगा ! मैं ऐसा चोदूंगा कि कुछ पता ही नहीं चलेगा…
फिर मैं उसकी चूत में धीरे धीरे आराम से लण्ड डालने लगा, धीरे धीरे उसकी चूत फटने लगी……..
वो धीरे धीरे आवाजें निकाल रही थी….अहऽऽ ओहऽऽअ
लेकिन ज्यादा तेज़ नहीं…
कुछ देर बाद वो सामान्य होकर मेरा साथ देने लगी। अब मैंने स्पीड बढ़ा दी………….
वो बोली- राहुल फास्ट करो ! मुझे चोदो……… प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज तेज्ज करओ ऊऽऽ
मैं बोला- अभी करता हूँ मेरी जानेमन !
फिर मैं तेज़ तेज़ उसे चोदने लगा
१५ मिनट बाद वो झड़ गई लेकिन मैं तेजी से चोद रहा था ….
वो बोली- रुको !
पर मैं मानने वाला कहाँ था, मैं तेजी से करता रहा…. करीब १० मिनट बाद मैं भी झड़ गया …. फिर २० मिनट बाद हम फिर शुरू हो गए…. उस दिन ६ बार उसको चोदा !
मज़ा आ गया दोस्तो….
आप सब बतायें कि मेरी कहानी कैसी लगी आपको…… Antarvasna
सौम्या उनकी इकलौती बेटी है.
वह बचपन से ही थोड़ी समझदार टाइप की थी.
बचपन में मेरी मां कह देती थीं कि तुम दोनों शादी कर लेना.
हम दोनों ही झेंप जाते.
पर शायद उसे मैं हमेशा से पसंद था.
फिर मैं इंजीनियरिंग करने बाहर चला गया.
वह भी चली गई.
यह बात लॉकडॉउन की है.
मैं घर पर था.
मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मुझसे ब्रेकअप कर लिया था.
सौम्या मेरे घर में आती जाती रहती थी.
हम दोनों आपस में बातचीत भी करते थे.
घर पर भी लोग हमें देखने तक नहीं आते थे कि हम दोनों अकेले में क्या कर रहे हैं.
उनके विचारों में हमारे जवान होने के बाद भी किसी तरह का बदलाव नहीं आया था.
एक दिन की बात है. मैं सोया हुआ था और वह सुबह घर आई.
मम्मी ने उसे कहा- राज को जगा लो, दोनों चाय पी लेना.
वह चाय लेकर आई.
उसने चाय की ट्रे रखी और मुझे जगाने लगी.
मैं गहरी नींद में सोया हुआ था.
दो तीन बार जगाने पर भी जब मैं नहीं उठा, तो वह मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगी.
मैंने नींद में ही उसे अपने करीब खींच लिया और हग करके उसके होंठों पर किस कर दी.
दरअसल मैं नींद में उसे अपनी गर्लफ्रेंड समझ रहा था.
पर फिर अन्दर याद आया वह तो मुझे छोड़ कर जा चुकी है तो ये कौन है!
यह याद करते ही मेरी फटी और नींद खुल गई.
वह भी उठ कर बैठ गई.
मैंने देखा सौम्या कांप रही थी.
मैंने उससे सॉरी कहा और कहा मैंने तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड समझ लिया.
यह सुनकर वह उठी और चाय छोड़ कर चली गई.
मुझे लगा मेरी वजह से नाराज हो गई है.
वह तीन दिन तक घर नहीं आई.
फिर एक दिन शाम को आई.
मैंने कहा- सॉरी सौम्या, उस दिन मुझसे भारी भूल हो गई थी.
उसने हंस कर बात को टाल दिया.
फिर यूं ही हम दोनों में बातचीत होती रही.
एक दिन शाम को हम बात कर रहे थे.
तो उसने पूछा- तुम उस दिन किसके बारे में सोच रहे थे?
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
उसने कहा- मैं समझ गई कि तुमने सॉरी क्यों कहा.
मैंने पूछा- इतना गौर करती हो मेरी बातों पर?
उसने कहा- अब इतना तो हक है!
मैंने सब बता दिया.
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा- तुम्हें भी कोई खोना चाहेगी क्या?
मैं समझा नहीं.
वह चली गई.
फिर दीवाली आई.
हम सब मिल कर घर पेंट कर रहे थे.
वह भी काम में हाथ बंटाती थी.
मेरे कमरे में पेंट की बारी आई, तो उसने रंग पसंद करके बताया. मैंने भी वही रंग सोचा था. मुझे सौम्या और ज्यादा अच्छी लगने लगी.
फिर वह कमरे में आई तो मैं पेंट कर रहा था.
वह मेरे लिए चाय लेकर आई थी.
मैं चाय पीने लगा तो वह खुद ब्रश उठा कर पेंट करने लगी थी.
उस वक्त मुझे उसको देखने में बड़ा सुखद लग रहा था, मुझे उस पर प्यार आ रहा था.
आज मैं उसका फिगर देखने लगा था.
उसकी काया मुझे बड़ी ही कमनीय लग रही थी.
मैं आपको भी उसकी फिगर बता दूँ.
वह 34-30-36 की थी.
उसकी आखें एकदम गहरी मानो कोई नेचर का पोर्ट्रेट देख रहे हों.
दूसरे दिन बाहर की ओर पेंट चल रहा था.
वह मुझे चाय देकर खुद सीढ़ी के ऊपर चढ़ कर पेंट कर रही थी.
मैं उसे देखते हुए चाय पीने लगा.
पेंट का ब्रश डिब्बे में डुबोने के चक्कर में वह एकदम से फिसल गई.
मैंने चाय का कप छोड़ा और उसे लपक लिया.
वह आह करती हुई मेरे एकदम करीब हो गई थी.
मैं उसकी आंखों में खो गया.
चाय का कप गिरने की आवाज हुई.
तो मम्मी की आवाज आई- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … कप गिर गया मेरे हाथ से.
फिर वह संभली और मुझे देख कर स्माइल करके बोली- हमेशा बचाओगे क्या?
मैंने भी उस अहसास को पहली बार महसूस किया था.
मैंने पता नहीं कैसे बस कह दिया- हां.
वह मेरे पास आई और बोली- सच में?
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उसे अपने गले से लगा लिया और कहा- हां हमेशा.
वह भी मेरी बांहों में कटी हुई डाली की तरह गिर सी गई.
मैंने उसका चेहरा उठाया और कहा- आई लव यू.
उसने कुछ भी नहीं कहा और चली गई.
मैं फिर उसका इंतजार करने लगा.
दीवाली के दिन वह फिर से आई.
मैंने कहा- प्रपोज किया था, घर नहीं आने के लिए नहीं कहा था.
उसने कहा- अच्छा जी, मिस कर रहे थे अपनी मिसेज को!
मैंने उसकी आंखों में देखा तो वह शर्मा गई.
तो मैंने कोहनी मारते हुए कहा- हां, मिसेज राज.
उसने सर झुका लिया और मुस्कुरा दी.
फिर हम सब दीवाली मनाने लगे.
दीवाली के अगली सुबह वह सुबह सुबह आई और मम्मी और मेरे लिए चाय बना कर लाई.
मम्मी को देने के बाद वह मेरे कमरे में आई और मुझे उठाने लगी.
मैं उठ गया था पर मैंने जानबूझ कर उसे फिर से खींच लिया और किस कर दिया.
उसने मुझे धक्का दिया और कहा- बचपन से तुम्हें प्यार किया है. क्या तुम भी करते हो?
मैंने कहा- देख लो.
उसने कहा- ठीक है.
फिर उस दिन के बाद हम दोनों नहीं मिले.
मैं जॉब पर वापस आ गया और वह भी.
6 महीने बाद मैं अपने घर गया.
वह भी आई हुई थी या शायद उसे पता था कि मैं आऊंगा.
अगले दिन फिर से मेरी पत्नी की तरह चाय लेकर आ गई.
मैं जाग कर बैठा हुआ था.
वह देख कर ऐसे मुस्कुराई जैसे जानती हो कि मैं उसका इंतजार कर रहा था.
चाय लेते हुए मैंने एक सिप ली और उससे पूछा- पूरी लाइफ केयर करोगी?
उसने कहा- तुम्हें पता नहीं क्या?
फिर मैंने अपना कप उसकी तरफ बढ़ा दिया.
उसने बेहिचक मेरी जूठी चाय से एक सिप ले लिया और अपने हाथ से में खुद मुझे पिलाने के लिए आगे झुकी.
मैंने भी पी ली.
उसने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- गुड ब्वॉय.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा- किस्सी चाहिए मेरे बाबू को!
यह कह कर वह मेरे चेहरे पर झुकी और एक जोरदार किस दे दिया.
फिर कहा- सो स्वीट.
मैंने उसकी आंखों में प्यार से देखा.
उसने कहा- ये रोजाना चाहिए है तो सोच लो.
मैंने कहा- सोच कर ही आया था.
उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- अभी देख लेना.
वह चली गई.
मैं उसकी मम्मी के पास गया और अपने और उसके बारे में बात की.
उन्होंने कहा- वह मेरी बेटी है और खुद समझदार है. वह जॉब भी करती है, उसे ही अपना फैसला लेना है. हम उसके साथ हैं.
फिर ये बात हमारे घर वालों ने की और हमारी शादी हो गई.
पहली रात को वह पहले से ही कपड़े चेंज करके बैठी थी.
मैं अन्दर आया तो उसने कहा- आप भी चेंज कर लो पतिदेव.
यह सुन कर मुझे अच्छा लगा.
मैं चेंज करके आया तो उसने हमारे लिए वाइन के दो ग्लास तैयार करके रखे थे.
मैंने कहा- वाह दूध की जगह सोमरस!
उसने मुझे ताना मारते हुए कहा- पुराने ख्यालों की नहीं हूँ मैं!
मैं उसके पास गया और उसके बालों में पीछे से साथ डाल कर उसे अपने चेहरे के पास लाकर कहा- तुम बचपन से इंतजार कर सकती हो … और मैं तुम्हारे दिल की बात नहीं समझता तो फिर प्यार किस बात का?
वह मेरी आंखों में देखने लगी और फिर उसने कांपते होंठों से मुझे चूम लिया.
मैंने भी उसे चूम लिया.
हम दोनों अलग हुए और हमने वाइन का पैग लिया.
कुछ देर बात करते हुए हम दोनों बिना कुछ किए वैसे ही सो गए.
सुबह 4.30 पर आंख खुली.
हल्की हल्की रोशनी आ रही थी.
मैं उठने लगा तो उठ नहीं पाया.
उसने मुझे जकड़ रखा था.
मेरे हिलने से वह भी उठ गई.
उसने ऐसे ही मुझे अपनी ओर खींच लिया और एक लंबा किस हुआ.
उसके बाद उसने कहा- ये तो हुआ मेरे हक का … अब आप कुछ पियेंगे?
मैंने उसकी तरफ देखा.
वह मुस्कुरा रही थी.
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा.
वह घूम कर मेरी गोद में सीने से सीना लगा ऐसे बैठ गई जैसे चंदन से लिपटा सांप.
मैंने उसकी गर्दन पर एक छोटा सा किस किया.
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, फिर अपनी ओर खींच कर किस कर लिया.
मैंने पीछे से उसके गाउन का स्ट्रैप खोल दिया और दोनों हाथ आगे ले आया.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने एक मम्मे पर रख दिया.
मेरा दूसरा हाथ सरकते हुए उसके पेट और नाभि से खेलने लगा.
अब उसकी काम वासना से भरी हुई सिसकारी निकल गई.
मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को निचोड़ रहा था.
हमें दस मिनट हो चुके थे.
अब वह गोद से उतरी और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे खाने लगी.
वह किस करते करते मेरी चड्डी तक पहुंच गई.
मैं उसकी चूचियों से खेल रहा था.
उसने सीधे ही मेरी चड्डी खींच दी.
मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड उसके सामने था.
उसने उसे अपने हाथों में भरा और लौड़े की मुठ मारती हुई बोली- बचपन से एक ही सपना था कि तुम्हारी होना है. मेरी सहेलियों ने मुझसे कहा भी कि मजे कर ले, पर मुझे तुम्हारी होना था. तुम तो कर चुके हो!
मैंने उसके मुँह पर हाथ डाला और उसे अपने पास खींचते हुए कहा- अब बस तुम्हारा ही तो हूँ.
उसने कहा- यदि भरोसा ऐसा था तो बचपन में कहते … एक बार भी तुम्हें छोड़ कर नहीं गई होती.
मैंने कहा- फिर तुमसे प्यार कैसे होता?
वह मुस्कुरा दी.
उसने मेरे लंड को पकड़ा और मुँह में भर कर चूसने लगी.
फिर जब मुझे लगा कि अब रुक पाना मुश्किल है, तो मैंने उसे सीधा उठाया और बेड पर गिरा दिया.
उसने मेरी तरफ देख कर मुझे उंगली से इशारा करके चूत का रास्ता दिखाया.
मैंने कहा- ऐसे नहीं.
उसने मेरी तरफ देखा.
मैंने उसे उठाया और उसके शरीर पर कसे हुए ब्रा पैंटी को उतार दिया.
फिर दीवार से चिपका कर उसके दूध पीने लगा.
मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसका गला दबा रखा था.
थोड़ी ही देर में वह मचलने लगी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर दबाने लगी.
उसने कहा- बस पतिदेव, अब चोद दीजिए ना!
मैंने कहा- ठीक है.
मैं भी खड़ा खड़ा थक गया था.
मैंने उसे बेड पर लिटाया और चूत चाटने लगा.
उसने कहा- कल भी यहीं रहूँगी और मेरी चूत भी … अभी पहले चोद दो ना प्लीज!
मुझे उसकी मासूमियत भरे चेहरे पर प्यार आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया.
काफी गीली चूत थी.
थोड़ा इधर उधर करने पर लंड का सुपारा अन्दर फंस गया.
उसे हल्का सा दर्द हुआ.
वह उछली.
मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने दर्द भरे भाव से कहा- कुछ भी नहीं … बस रुकना मत, डाल दो तुम.
मैंने एक ही बार में पूरा लंड जड़ तक पेल दिया.
उसकी बहुत जोर से चीख निकली, जिसे सुन कर उसकी चचेरी बहन मानसी जो दिल्ली में डॉक्टर थी और शादी में आई थी, वह हमारे ही बाजू वाले कमरे में रुकी हुई थी.
मानसी जाग गई और अपने कमरे से उठ कर आकर दरवाजा खटखटाने लगी.
पर मेरी बीवी जो अपने नाखून मेरे पीठ में चुभो चुकी थी, अब चुप थी.
फिर उसकी बहन चली गई.
इधर मैंने भी उसे प्यार से सहलाते सहलाते उसका दर्द कम किया.
उसने मेरी आंखों में ऐसे देखा मानो उसने मुझे जीत लिया हो.
अपने आंसू पौंछते हुए आंखों से ऑर्डर दिया- आगे बढ़ो.
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए चोदना शुरू किया और 15 मिनट चोदने के बाद वह झड़ गई.
मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसकी चूत में लंड पेल दिया.
इस आसन में मेरा लौड़ा सीधा उसकी बच्चेदानी में ठोकर मारकर वापस आ गया.
वह चिहुंक उठी और उसने कराहते हुए कहा- पतिदेव मर गई.
मैं खड़ा हुआ और उसे दीवार से लगा दिया.
एक तरह से वह हवा में लटकी हुई थी.
मेरा लंड उसकी चुत में फंसा था.
मैं उसे चोदने लगा.
वह मेरी ताकत की कायल हो गई थी और चुदाई का मजा लेने लगी थी.
काफी देर बाद मैं थक गया तो मैं उसे वैसे ही लेकर लेट गया.
वह मेरे ऊपर आ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चूत में लंड लेने लगी.
इधर मैं उसकी चूचियों को निचोड़ रहा था.
वह पागलों की तरह आह आह कर रही थी.
फिर हम दोनों एक साथ आह आह करते हुए झड़ गए.
मैं उसे उठा कर बाथरूम में लेकर जाने लगा तो उसने मेरे चेहरे को अपने चेहरे से ढक दिया और होंठ चूसने लगी.
लेकिन मुझे गेट बंद होने की आवाज आई.
मुझे लगा बाथकमरे में कोई है.
मेरा और मेरे बगल वाले कमरे का साझा बाथरूम है.
मैं रुक गया.
फिर मैं आगे बढ़ा.
दरवाजा हल्का सा खुला था.
पर उस टाइम मैंने गौर भी नहीं किया, बस बाथरूम में आ गया.
उधर भी साफ सफाई के बाद हमारी चुदाई होने लगी और बहुत देर तक हुई.
चुदाई की आवाज़ शायद मानसी ने सुनी ही होगी, जो उस टाइम हम दोनों के ध्यान में नहीं आई.
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