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दोस्तो Hindi sex stories, आज मैं तुम को नये साल के टाइम पर मेरी पहली चुदाई की बात बताता हूं। मैं १८ साल का था और मैं उस टाइम ६’ का था शरीर से लम्बा तगड़ा था।
मुझे १ टीचर उपासना पढ़ाती थी उस की उमर २७ – २८ साल थी पर उसको बच्चा नहीं था। उसका पति सरकारी नोकरी में था और वो काफ़ी टाइम टूर पर रहता था। उपासना का पति बाहर गया हुअ था और उसको एक नये मकान की जरुरत थी वो किराये पर रहती थी। हमारे पड़ोस में एक मकान नया बना था और काफ़ी खुला और हवादार था। जब उपासना ने पूछा तो मैंने उस मकान का बता दिया।
उसी दिन उपासना मेरे साथ घर अयी और वो मकान देखने मेरी मां के साथ चली गई। उपासना को मकान काफ़ी पसंद आया और किराया भी काफ़ी जायज था, सो उपासना ने मकान मालिक को अगले महीने की १ तारीख को आने के लिये कहा और एडवांस किराया दे दिया। अगस्त महीने की १ तारीख को उपासना अपने सामान के साथ उस मकान में शिफ़्ट कर गई।
दोस्तों यहां से असली बात शुरु होती है। उपासना ने हमारे पड़ोस में आने के बाद मेरी मां से दोस्ती कर ली और मुझे एक्स्ट्रा पढ़ाई करवाने की बात कर ली बिना कोई ट्यूशन फीस के। बस मेरी मां को क्या चहिये था। उपासना ने मुझे घर पर बुलाना शुरु कर दिया और अकेले में पढ़ाने लगी।
पहले ही दिन जब मैं उसके घर गया तो देखा कि उसने लूज़ कमीज और लंहगा पहन रखा था। उसने ब्रा नहीं पहनी थी और कमीज का गला भी खुला था।
उपासना ने मुझे पढ़ाना शुरु किया और बीच बीच मैं वो अपनी चूचियां अपने हाथ से दबा देती, उसकी बड़ी बड़ी चूचियों की गोलियां जैसे बाहर आने को हो जाती मैं उसकी इस हरकत को देख के मस्ती में भर जाता और मन कर रहा था कि मैं ही उसकी चूचियां दबा दूं पर हिम्मत नहीं हो रही थी।
मेरा कुंवारा लंड तन कर सख्त हो गया था और मेरी पैंट को फ़ाड़ के बाहर निकलने को तैयार था। पर मैं उपासना को कुछ कह नहीं पा रहा था।
कोई २ घंटे पढ़ाने के बाद उपासना ने मुझे कहा- रंजीत तुम अब घर जाओ और अपने परेंट्स से पूछ कर आना यहां सोने के लिये!
मैंने कहा- अच्छा मैडम!
जब मैं चलने लगा तो उपासना ने कहा- रंजीत तुम रहने दो, रुको यहीं पर… मैं ही पूछ आती हूं।
कह कर उपासना ने अपना कमीज मेरे सामने ही खोल दिया और बड़बड़ाने लगी- इतना करने के बाद भी कुछ नहीं किया, पता नहीं रात को क्या करेगा!
फ़िर उपासना ने अपनी ब्रा पहनी और मुझे हुक लगाने को कहा।
“आआआ आअ ह्हह् ह्हह आआआऐईई ईईइ” हुक लगते हुए मेरे मुंह से निकल ही गया।
“रंजीत अगर तुम मेरी मानोगे तो इससे भी ज्यादा मजा आयेगा तुम बस यहीं मेरा इन्तजार करो और बुक खोल के बैठ जाओ।
उपासना ने साड़ी पहनी और मेरे घर चली गई। कोई ३० मिनट के बाद वो वापस आयी और मेरा पजामा और कमीज साथ ले आयी।
“रंजीत तेरी मां तो सिर्फ़ पजामा दे रही थी, बोल रही थी कि रंजीत रात को पजामा और बनियान में सोता है पर मैं ही शर्ट भी ले आयी उनको शक नहीं होगा कि मैंने क्या किया है.”
फ़िर उपासना ने अपनी साड़ी उतार दी और सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में हो गई.
मेरा लंड काफ़ी तन गया और मैंने उपासना को हिम्मत करके कह ही दिया- मैडम एक बात कहूं… आप जब मेरे सामने कपड़े बदलती हो तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं ही आपका आदमी हूं.
उसने कहा- रंजीत तो फ़िर तुम मेरे को औरत की तरह इस्तेमाल करो!
फ़िर मैंने हिम्मत कर ही ली और टीचर की चूचियां पीछे से पकड़ ली और मेरा सात इंच का लंड उसकी कमर पर लग रहा था।
मैंने उसकी गर्दन पर किस किया, उपासना ने सिसकारी भरी- ऊऊफ़ उफ़फ़्फ़ ऊऊऊऊ आआआह्हां आआआअ रंजीत प्लीज जोर से!
मैंने टीचर की चूचियां जोर से दबाई और उसने अपनी कमर का पूरा दबाव मेरे लंड पर डाल दिया। मैंने उपासना के ब्लाउज़ को ऊपर सरका कर उसकी नंगी चूचियों को दबाया और एक हाथ उसकी सफ़ाचट चूत पर ले गया।
चूत गीली थी मेरा लंड काफ़ी जोर मार रहा था।
टीचर ने मेरे से अलग हो कर मेरा लंड पैंट से बाहर निकाल लिया, बोली- ओईईईइ माआआआअ… ये तो गधे का लौड़ा है, मेरी चूत का तो बुरा हाल कर देगा!
बस फ़िर उसने आनन फ़ानन में मेरा लौड़ा मुंह में ले लिया।
क्योंकि अब तक मैंने न ही मुठ मारी थी और न ही कभी किसी को चोदा था तो मेरा लंड उसके मुंह में ही झड़ गया, जोर की एक पिचकारी उसके मुंह में गई। मैं सिसकार रहा था, वो भी पानी पी कर खिलखिला के हंसने लगी और अपना वीर्य से भरा मुंह मेरे होंठों पर रगड़ने लगी.
मेरा लंड आधा हो गया था लेकिन वो फ़िर से खड़ा होने लगा।
अब टीचर बिल्कुल नंगी हो गई और मेरे को भी एकदम नंगा कर लिया। फ़िर उपासना मेरे को बेड पर ले गई और मैं उसके गुलाम की तरह से उसका कहना मानने लगा। बेड पर वो मेरे को बूब्स चूसने कही और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी.
दो ही मिनट में मेरा लंड खड़ा हो गया। उपासना ने मेरे को अपनी दोनों टांगें मेरे कंधे पर रखने को कहा और मेरा लंड अपनी गरम चूत में ले लिया। मेरा लंड उस की चूत में गया मेरे को ऐसा लगा कि किसी गरम भट्टी में मेरा लंड घुस गया है।
मेरे लंड के अंदर जाते ही वो चिहुंकी- आआआअह्ह हहह्ह ह्हाआआआ… रंजीत मजा आ रहा है… जोर से चोदो प्लीज!
मैं अपनी टीचर को चोदने लगा। क्योंकि मैं पहली बार ही चोद रहा था और मेरा लंड काफ़ी टाइट था. वो पसीने में भर गई और जोर से सिसकारी भरती रही।
मेरी एक चुदाई में वो दो बार झड़ गई और फ़िर मैं झड़ा।
मेरे झड़ते ही वो ढीली हो गई और वो लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी।
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इस तरह मैंने उसको रात में तीन बार चोदा. फ़िर मेरी नंगी टीचर मेरे नंगे बदन से लिपट कर सो गई।
मेरा नाम वसुंधरा है और मैं लखनऊ से हूं।
मेरी उम्र 35 साल है और फिगर 36 30 38 है।
कद 5 फुट 3 इंच और जिस्म गोरा है।
पेशे से मैं एक टीचर हूं और साथ ही साथ एक 10 वर्ष के बच्चे की मां भी!
मेरे पति एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं और समय समय पर उनका तबादला होता रहता है।
मेरी पिछली कहानी
कुंवारी गांड फाड़ दी जीजू ने
और उससे पहले की दो कहानियों में आपने जाना कि कैसे मैं अपने छोटी बहन के पति आनन्द के साथ सेक्स कर बैठी.
यह पहली बार था जब मेरे पति के अलावा किसी गैर मर्द ने मेरा जिस्म भोगा हो।
अब मैं पहले से ज्यादा उत्तेजक हो गई थी और मेरा अंदाज भी बदल गया था. अब मुझमें शर्म ओ हया जरा कम हो गई थी और अब पुरुषों की अश्लील नजरें मुझे डराने की जगह उत्तेजित करती थी।
मेरी नजरें अब पराए मर्दों की तरफ जाना शुरू हो गई थी।
महीने में एक दो बार आनन्द मेरी प्यास बुझाते थे लेकिन अब मेरा मन किसी और मर्द के नीचे आने को लालायित हो रहा था।
मेरे पति विकास मेरी अदाओं से खुश रहते थे और मैं उनके साथ ज्यादा खुलकर संभोग करती थी।
लेकिन उनको कंपनी की वजह से अक्सर बाहर ही रहना पड़ता था और कभी कभी विदेश भी जाना पड़ता था इसलिए मुझे अपनी प्यास बुझाने के लिए कुछ अलग तौर तरीके खोजने पड़े।
हमारे स्कूल में शिवम् नाम का एक लड़का था जो कि मेरी ही क्लास में था।
पढ़ाई में उसका दिल नहीं लगता था और एग्जाम में हमेशा उसके कम मार्क्स ही आते थे।
क्लास टीचर होने के नाते उनके अभिभावकों से मिलने की जिम्मेदारी मेरी थी।
हर बार की तरह शिवम् इस बार भी फेल हो गया।
इसलिए मुझे ही उसके अभिभावकों से मीटिंग करनी थी।
मीटिंग के दिन लगभग सभी बच्चों के मां बाप आते थे।
शिवम् भी अपने पिता के साथ आया हुआ था।
उसके पिता का नाम आशुतोष था।
मैंने उनको देखा तो मुझे उनकी शक्ल जानी पहचानी लगी लेकिन मैंने उन्हें कहां देखा था, यह मुझे याद नहीं आ रहा था।
आशुतोष के 2 बच्चे और थे जो उसके साथ ही आए थे।
मैंने आशुतोष को सामने कुर्सी पर बिठाया और फिर शिवम् की शिकायत की।
मैंने कहा- आशुतोष जी, आपका बेटा बहुत लापरवाही करता है, पढ़ाई में हर बार कम नंबर लाने की वजह से उसका भविष्य संकट में पड़ सकता है।
आशुतोष ने कहा- माफी चाहता हूं मास्टरनी जी, मेरे पास इतना समय नहीं होता है कि मैं इनकी पढ़ाई करवा सकूं और मेरे पास इतनी आय भी नहीं है कि मैं इनकी कोचिंग का इंतजाम कर सकूं।
मैंने कहा- अगर आपके पास समय नहीं है तो अपनी बीवी से कहिए कि वो कुछ ध्यान दे. ऐसे तो काम नहीं चलेगा।
आशुतोष ने कहा- उसी का तो रोना है मास्टरनी जी, मेरी बीवी अब इस दुनिया में नहीं है।
यह कहकर वो जरा उदास हो गए।
मैंने उनसे संवेदना जताई, मैंने कहा- आप हिम्मत रखिए, ऊपर वाला जरूर आपको कोई रास्ता दिखाएगा। वैसे आप करते क्या हैं?
आशुतोष ने कहा- मैडम, मैं कपड़े की दुकान में काम करता हूं। सुबह बच्चों को स्कूल में छोड़ता हूं और छुट्टी के वक्त उनको लेकर घर जाता हूं।
मुझे यह सुनकर जरा बुरा लगा।
अभी उसकी उम्र भी 40 के आसपास थी और इस तरह से उसकी तकलीफ देखकर मुझे बुरा लगा।
मैंने कहा- ठीक है आशुतोष जी, आप जरा ध्यान रखिए बच्चों का! और अगर कोई जरूरत हो तो मुझे जरूर बताइएगा।
मैंने अपना नंबर उसे दिया और वो मुझे नमस्ते कर के चला गया।
अब मैं छुट्टी के बाद अक्सर उनको आते जाते देखती जहां वो अपने बच्चों को लेने आता था।
मैं उसे देखती तो वो दूर से ही नमस्ते कर देता।
इस तरह हमारा परिचय बढ़ा।
कुछ दिन बाद रविवार को मैं कुछ खरीददारी करने मार्केट में निकली तो सोचा कि कुछ अंडर गारमेंट्स खरीद लूं।
मैं एक होजरी शॉप में पहुंचीं तो वहां आशुतोष जी मिल गये।
उन्होंने यह तो बताया था कि वो कपड़े की दुकान में काम करते हैं लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो इसी दुकान में काम करते हैं.
शायद इसलिए मुझे उनका चेहरा जाना पहचाना लग रहा था।
मैंने उनसे पूछा- आशुतोष भाई, ये दुकान आपकी है क्या?
आशुतोष ने कहा- अरे नहीं मैडम, हम यहां नौकर हैं, आज मालिक किसी काम से बाहर गए हैं इसलिए मैं अकेला हूं। बताइए क्या खिदमत करूं?
मैंने कहा- कुछ अच्छे ब्रा पैंटी के सेट दिखा दीजिए।
आशुतोष मुस्कुराए और बोले- मैडम, वैसे आपका साइज क्या है?
मैं उनकी मुस्कुराहट की वजह समझ रही थी।
मैंने कहा- जी ब्रा का 34 C और पैंटी 38″
आशुतोष ने मेरे सामने एक से एक बढ़िया डिजाइन की ब्रा पैंटी ला दी.
मैंने उनमें से अपनी पसंद को चुना और फिर आशुतोष ने मुझे डिस्काउंट भी दिया।
आशुतोष ने कहा- मैडम, मालिक डिस्काउंट के लिए मना करता है इसलिए उसे मत बताना कि मैंने आपको डिस्काउंट ऑफर दिया है।अगर आप होम डिलीवरी लेना चाहो तो मैं जुगाड़ कर सकता हूं, आपको सस्ती भी पड़ जाएगी और मेरी नौकरी भी बची रहेगी।
मैंने उसे अपना पता दिया और फोन नंबर भी!
उसके बाद मैं उसकी दुकान से निकल गई।
अब नंबर मिलने के बाद हमारे बीच बातें भी होने लगी और हमारी अच्छी दोस्ती हो गई।
फिर हम दोनों जरा खुलकर बातें करने लगे।
एक रात आशुतोष ने मुझसे कहा- मैडम जी, आप वो लाल नेट वाली ब्रा पैंटी पहना करिए, आपके पति तो देख कर ही मदहोश हो जायेंगे।
मैंने कहा- पहन कर दिखाऊंगी किसे, मेरे पति तो बाहर टूर पर हैं।
आशुतोष ने पूछा- आप अकेली रहती हैं, आपको डर नहीं लगता?
मैंने कहा- नहीं, बेटा रहता है यहां साथ में तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।
आखिर में आशुतोष ने कहा- मैडम जी, कभी कोई जरूरत हो और आपके पति शहर में न हों तो बताइएगा, ये आशुतोष हर तरह से आपके काम आयेगा।
मैं उसका इशारा समझ रही थी लेकिन मैंने अनजान बने रहने में ही अपनी भलाई समझी।
खैर इसी तरह हमारी बातचीत चलती रही और मैंने एक दो बार आशुतोष को अपने घर भी बुलाया.
वो मेरे लिए बड़ी ही चुनिंदा ब्रा पैंटी लाकर देता था और अब हम अच्छे दोस्त बन चुके थे।
इसी बीच करवा का त्यौहार आ गया।
मेरे पति इस दौरान टूर पर थे और कुछ दिन बाहर ही रहने वाले थे।
इस तरह मुझे करवा अकेले मनाना था।
त्यौहार के एक दिन पहले अचानक रात को मेरी डोरबेल बजी, देखा तो सामने आशुतोष भाई थे।
मैंने पूछा- आशुतोष भाई आप? वो भी इस वक्त? सब खैरियत तो है?
आशुतोष ने कहा- जी मैडम, सब खैरियत है. मैं आपके लिए कुछ लाया था, सोचा कि आपको पसन्द आयेगा, आप देख लीजिए और कॉल करके बताइएगा कि कैसा है।
यह कहकर वे चले गए।
मैंने उनका तोहफा खोला तो उसमें एक डार्क रेड रंग की ब्रा पैंटी का सेट था जिसमें गोल्डन चेन लगी हुई थी और उस पर फूल काढ़े गए थे।
ये पारदर्शी थी और हुस्न को बेहद खूबसूरत तरीके से सामने लाने वाली थी।
देखने में काफ़ी महंगी जान पड़ती थी और ऐसी ब्रा पैंटी लड़कियां अक्सर हनीमून के दौरान पहनती हैं।
मुझे उनका तोहफा पसन्द आया और मैंने उन्हें शुक्रिया का मैसेज कर दिया।
10 मिनट बाद उन्होंने कुछ तस्वीरें भेजी जिनमें एक मॉडल उसी सेट को पहनकर पोज दे रही थी।
आशुतोष भाई ने लिखा- आप इसे पहनकर बेहद खूबसूरत दिखेंगी और आपकी करवाचौथ की रात खुशनुमा रंग में रंग जाएगी।
मैंने उन्हें बताया कि इस बार मुझे त्यौहार अकेले ही मनाना होगा क्योंकि पतिदेव टूर पर हैं और मेरा बेटा भी नानी के यहां गया है।
आशुतोष भाई ने लिखा- अरे, आप खुद को अकेला मत समझिए, हम हैं ना आपकी खुशियां बांटने के लिए। कल हम आपके यहां आ जायेंगे और फिर आप अपना त्यौहार मनाइयेगा।
हमने एक दूसरे को गुड नाईट कहा और मैं अगले दिन का इंतज़ार करने लगी।
आज मेरे दिल में एक अजीब सी कश्मकश थी कि कहीं मैं गलत तो नहीं कर रही हूं.
लेकिन आशुतोष भाई के लिए मेरे दिल में भी काफ़ी कुछ था इसलिए मैंने घटनाक्रम को ऐसे ही चलने देने का फैसला किया।
मैंने खुद को अच्छे से साफ किया और फिर अपनी योनि और बगल के बाल साफ़ किए।
शाम को मैंने ख़ुद को अच्छे से सजाया और फिर वही ब्रा पैंटी पहन ली जो आशुतोष भाई ने दी थी।
ऊपर से मैंने लाल साड़ी और ज्वैलरी पहनी; साथ ही बैकलेस ब्लाउज भी।
मुझे करधनी पहनने का बहुत शौक है और मैं उसे खास मौकों पर ही पहनती हूं।
मैंने एक गजरा लगाया और खुद को दुल्हन की तरह सजा कर तैयार हो गई।
शाम को चांद निकलने से 15 मिनट पहले आशुतोष भाई आए और उनके हाथों में कुछ फल थे।
मैंने उनको अन्दर बिठाया और फिर पूजा अर्चना करने ऊपर छत पर चली गई और पूजा कर के पानी पीकर व्रत खोला।
नीचे आकर मैं आशुतोष भाई से मिली और उन्होंने खुद ही मेरे लिए कुछ फल काट कर रखे थे।
उन्होंने मुझे अपने हाथों से फल खिलाए.
बदले में मैंने भी उनको फल खिलाकर अपना फर्ज अदा किया।
आशुतोष भाई ने मेरी बहुत तारीफ की- मैडम जी, आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बिल्कुल भी अकेला न छोड़ता।
मैंने उनको थैंक्स कहा और बोली- पतिदेव पैसे छापने में लगे हैं, उनको बीवी से ज्यादा पैसा प्यारा है।
आशुतोष- आपको अपना ख्याल रखना चाहिए मैडम जी, वैसे आपने वो लौंजरी पहनी है या नहीं जो हमने आपको दी थी?
मैंने कहा- जी वही पहनी हुई है लेकिन मेरे पतिदेव तो यहां हैं नहीं जो उसे देखकर मेरी तारीफ करते। मेरे पहनने का क्या फायदा हुआ? जंगल में मोर नाचा किसने देखा?
मेरे भाव देख कर आशुतोष भाई का हौसला जरा बढ़ गया- आपके पति ने ना सही, लेकिन मोरनी को हमने तो आज देख लिया है और वो बेहद खूबसूरत लग रही है।
मैं आशुतोष की बात सुनकर मुस्कुरा दी और कहा- ठीक है ठीक है, अब रुकिए मैं आपके लिए चाय बना देती हूं।
मटकती हुई मैं किचन में चली गई तो आशुतोष भाई भी मेरे पीछे आकर खड़े हो गए।
उनकी नजरों से मेरे जिस्म का एक्सरे हो रहा था और मुझे भी मज़ा आ रहा था।
आशुतोष भाई ने कहा- मैडम, आप सच में अप्सरा लगती हो। आपकी ज्वैलरी भी बहुत उम्दा लग रही है आप पर!
यह कहकर वो मेरी करधनी को टटोलने लगे और मैंने कोई विरोध नहीं किया।
मैं बोली- ये मुझे मेरी ननद ने दी थी, मेरी मुंह दिखाई की रस्म में!
फिर उन्होंने अपने हाथ मेरे कमर पर रखे तो मेरे जिस्म में एक सनसनी दौड़ गई।
तभी उन्होंने हाथ मेरी साड़ी पर फेर कर कहा- और ये किसने दी थी मैडम जी?
मैंने कहा- ये मेरी सासू मां ने दी थी, मेरी गोद भराई की रस्म में!
आशुतोष- बड़ी रेशमी और मुलायम है, आप पर खूब फबता है ये रंग!
यह कह कर उन्होंने धीरे से मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी कमर सहलाई और फिर हाथ मेरी नाभि पर ले गये।
उसकी गोलाई में अपनी उंगली डाल कर उन्होंने मुझे गुदगुदी की तो मुझे हंसी आ गई।
मैंने कहा- भाई, ये क्या कर रहे हैं आप? मुझे गुदगुदी हो रही है।
उन्होंने कहा- आपके हुस्न को देख रहा हूं मैडम जी, ऊपर वाले ने आपको बेहद खूबसूरती से तराशा है।
ये कहकर उन्होंने मेरे दाएं कंधे पर एक चुम्बन दे दिया।
उनकी दाढ़ी की चुभन ने मुझे हैरानी में डाल दिया।
उनके हाथ मेरी कमर में लिपट गए थे और उनकी गर्म सांसे मेरी त्वचा से टकरा रही थी।
उधर गैस पर चाय उबल रही थी और इधर अंतर्मन में मेरे जज़्बात।
अचानक उन्होंने मेरी गर्दन पर हाथ रखा और कहा- मैडम जी, आपकी चेन बहुत मोटी है, ये किसने दी?
ये कहकर वो धीरे धीरे मेरी चेन को सहलाने लगे।
मैंने कहा- ये मेरे पति ने दी थी, सुहागरात पर!
आशुतोष भाई- आपके पति की पसन्द बेजोड़ है, जेवर और औरत दोनों मामलों में!
यह कहकर उन्होंने मेरे गले को चूम लिया।
क्योंकि मैं कोई विरोध नहीं कर रही थी इसलिए उन्होंने भी मौके का पूरा फायदा उठाया।
अब मुझे अपने नितम्बों के पास कुछ चुभता सा महसूस हुआ, मैं समझ गई कि ये आशुतोष भाई का लंड है।
उन्होंने कहा- मैडम जी, आप ने सबकी दी हुई चीजें तो पहन ली, लेकिन मेरा गिफ्ट पहना या नहीं?
मैं उनकी शरारत समझ गई।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- अभी बताया तो … सबसे पहले आपका ही दिया हुआ गिफ्ट पहना है आशुतोष भाई!
आशुतोष भाई ये सुनकर और खुश हो गए- फिर तो मेरा उस गिफ्ट को देखना बनता है मैडम जी!
यह कहकर उन्होंने मेरे ब्लाउज की डोरी खोल दी तो मेरा ब्लाउज ढीला पड़ गया और मेरी पीठ नंगी हो गई।
मेरी पीठ पर उनकी दी हुई ब्रा की स्ट्रैप साफ दिख रही थी।
आशुतोष भाई ने उस स्ट्रैप पर हाथ फेरा और कहा- ये लाल ब्रा आपके ऊपर बहुत सैक्सी लग रही है मैडम जी।
अब चाय उबल पड़ी लेकिन किसी को फुर्सत नहीं थी उसे पीने की।
उन्होंने कहा- मैडम जी, आपके गहने बहुत महंगे हैं, आप इनको उतार दीजिए वरना गुम हो गए तो बड़ा नुकसान हो जायेगा। आप इनको रख दीजिए तब तक हम कुछ खाने का इंतजाम करते हैं।
मुझे भी उनकी बात सही लगी।
मैंने हामी भरी और बेडरूम की तरफ चल दी।
अपने सारे जेवर मैंने निकाल दिए मंगलसूत्र को छोड़कर!
अभी मैंने अलमारी लॉक की ही थी कि तभी पीछे से आशुतोष भाई आ गए।
आते ही उन्होंने दरवाजे की चिटकनी लगाई, उनका इरादा साफ था।
मेरे ब्लाउज की डोरी अभी भी खुली हुई थी और वो ढीला पड़ गया था।
आशुतोष भाई मेरे पास आए और उन्होंने कहा- मैडम जी, सारे जेवर निकाल दिए ना?
मैंने हामी भरी तो उन्होंने कहा- ये मंगलसूत्र आपके गले में क्या कर रहा है?
मैंने कहा- इसे मैं नहीं उतार सकती आशुतोष भाई, ये मेरे सुहागन होने की निशानी है।
आशुतोष भाई मुस्कुराए और फिर बोले- जैसी आपकी मर्जी मैडम जी, मुझे लगा था कि आप अपने पति से प्यार नहीं करती।
फिर मुझे उन्होंने आईने के सामने खड़ा किया, वो आइना मेरी ही लम्बाई का था।
फिर वो मेरे पीछे आए और कहा- आपने मेरा दिया हुआ तोहफा भी पहना है ना?
मैंने कहा- जी आशुतोष भाई, ये आपका ही दिया हुआ तोहफा है। कितनी बार पूछेंगे आप?
आशुतोष ने शरारती अंदाज में कहा- मैं कैसे मान लूं?
मैंने भी पलट कर कहा- तो देख कर तसल्ली कर लीजिए।
उन्होंने पीछे से ही मेरा पल्लू नीचे गिरा दिया और फ़िर मेरे ब्लाउज को सरका कर मेरे जिस्म से अलग कर दिया।
मैंने भी उनका साथ बखूबी दिया और ब्लाउज उतारने में उनकी मदद की ओर उसे शृंगारदान पर रख दिया।
अब मैं उनके सामने ब्रा और साड़ी में खड़ी थी और वो मेरे पीछे खड़े हुए थे।
उन्होंने मेरी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- ये ब्रा तो वही है मैडम जी, आपके पति अगर आपको इस तरह ब्रा में देख लेते तो वो दुनियादारी भूलकर आपको खुश करने में लगे रहते।
यह कहकर उन्होंने खुद को मेरे बदन से सटा दिया और मेरे पेट पर अपना बायां हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया।
उनका हथियार बहुत तना हुआ था।
धीरे धीरे उन्होंने मेरे गले पर चुम्बन देना शुरू कर दिया और उनकी पकड़ कड़ी होती चली गई।
उन्होंने फिर मेरे क्लीवेज पर हाथ फेरा और कहा- मैडम, आपके लिए चुनिंदा ब्रा लाया था, आखिर कार मेरी मेहनत सफल रही।
यह कहकर उन्होंने अपनी एक उंगली ब्रा की दरार में घुसा दी और मेरे क्लीवेज सहलाने लगे।
उनके होंठ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे और मैं बेसुध सी खड़ी अपने लुटने का इंतज़ार कर रही थी।
मेरा मंगलसूत्र उनकी उंगलियों से उलझ रहा था और वो लगातार मेरी दरार को गहरा करने में लगे थे।
उन्होंने मेरा गजरा खोल दिया और फिर मेरी चोटी भी, मेरे खुले बालों को उन्होंने पोनी टेल की तरह समेटा और फिर उन्हे पकड़ कर मेरे सर को अपने काबू में कर लिया।
अब उन्होंने मेरे कानों को धीरे धीरे अपने दांत से कुरेदना शुरू किया और मुझे उत्तेजित करने लगे।
मैं खड़ी आंखें बंद किए आहें भरती जा रही थी।
उन्होंने अपना कुर्ता उतार दिया और मेरे सामने नंगा सीना लेकर खड़े हो गए।
उनकी छाती पर बाल थे जो उनके पेट से होकर नीचे तक पहुंच रहे थे।
उन्होंने मुझे ड्रेसिंग टेबल पर बिठा दिया और आकर मेरे सामने खड़े हो गए।
मेरी सांसें तेज हो चली थी और मेरे माथे से पसीना बहा जा रहा था।
आशुतोष भाई ने मेरे हाथों की चूड़ियां उतार दी और फिर मेरी कलाइयां पकड़ कर अपने काबू में की।
मैं अब उनके रसभरे होंठों का स्पर्श पाने का इंतज़ार कर रही थी लेकिन उन्हे मुझे तरसाने में मजा आ रहा था।
मैंने खुद पर से काबू खो दिया और अपने अधरों को उनके होंठों के सुपुर्द कर दिया।
उउम्मझ
ऊम्म्ह्ह
आशुतोष ऊऊम्म
इस तरह की आवाज़ें गूंजने लगीं।
उन्होंने मेरी कलाइयां छोड़ी और फिर मेरी टांगें फैला दी और आकार बीच में खड़े हो गए।
मैंने कैंची की तरह अपनी टांगें उनकी कमर से लपेट ली।
आशुतोष भाई ने मेरी साड़ी ऊपर सरकानी शुरू कर दी और फिर मेरी जांघों पर लाकर मेरी जांघें मसलने लगे।
मैं बहुत उत्तेजना में थी और अपने होंठों को उनके होंठों से सटा कर उनका रस पी रही थी।
काफ़ी देर तक आशुतोष भाई मुझे यूं ही उत्तेजित करते रहे।
मैं भी अब शर्म लाज भूल चुकी थी।
उन्होंने कहा- मैडम जी, आपने ब्रा तो दिखा दी, पैंटी नहीं दिखाएंगी क्या?
मैंने आशुतोष भाई की बात सुनकर खुद को खड़ा किया और अपनी साड़ी उतार दी।
आशुतोष ने मेरी साड़ी पर कोई दया नहीं दिखाई और उसे वहीं जमीन पर छोड़ दिया।
फिर अपने हाथ उसने मेरे नितम्बों पर रखे और फिर मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।
मेरा पेटीकोट शाख से छूटे पत्ते की तरह नीचे जमीन में सरक गया।
मेरी पैंटी उनकी आंखों के सामने आई तो उन्होंने झट से मेरे गोल नितम्बों को मुट्ठी में भर लिया और एक चपत लगाई।
सटाक!
मेरे मुंह से आह निकल पड़ी- आशुतोष भाई, ये क्या कर रहे हैं आप? दर्द होता है।
आशुतोष भाई हंसे और बोले- कपड़े की क्वालिटी चेक कर रहा था मैडम, कहीं कमजोर तो नहीं है।
मैंने कहा- क्वालिटी घर जाकर चेक कर लीजिएगा, जाते वक्त मैं इसे आपको वापस लौटा दूंगी।
वे हँसे और बोले- अरे मैडम इतनी भी क्या जल्दी है? अभी तो पूरी रात बाकी है।
आशुतोष भाई नीचे घुटनों पर बैठ गए और मेरी पैंटी का मुआयना करने लगे।
उस जालीदार पैंटी से मेरी गोरी चूत की चमक झलक रही थी।
उन्होंने उसे सूंघा और कहा- बड़ी मदहोश कर देने वाली खुशबू आती है आपकी पैंटी से मैडम!
फिर वो खड़े हो गए।
उनके इस तरह बार बार मेरी काम वासना जागने के बाद पीछे हट जाना मुझे रास नहीं आ रहा था।
मैं उनकी छाती से चिपक गई और खुद को उनके सुपुर्द कर दिया।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
उन्होंने मेरी पीठ सहलाई और एक झटके में ही मेरा हुक खोल दिया।
मैंने भी बखूबी उनका साथ निभाया और अपनी ब्रा को अलग कर के वहीं रख दिया।
अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी और मेरा गोरा बदन एलईडी लाइट में बेहद खूबसूरत लग रहा था।
बाहर पटाखों का शोर जारी था और इधर मेरे मन में मस्ती की लहरें उछल रही थी।
आशुतोष भाई ने बिना देरी किए मेरे स्तनों को अपने काबू में किया और अपने होंठों से उनका रसपान करने लगे।
वे मेरे निप्पलों को दांतों से भींचते और जब मैं आह करती तो उसे छोड़कर दूसरे से चिपट जाते।
इस तरह कई मिनट उनका स्तनपान चला।
मेरे स्तनों को जी भर कर पीने के बाद उन्होंने मुझे छोड़ा और मुझे सोफे पे बैठने को कहा।
मैंने वैसा ही किया।
उन्होंने मेरे बेड की चादर हटा दी और उसके गद्दे लेकर जमीन पर डाल दिया।
एक के ऊपर एक गद्दा बिछा कर उन्होंने उसकी ऊंचाई काफ़ी बढ़ा दी।
फिर उन्होंने मुझे बुलाया और इस गद्दे पर बिठा दिया और मेरे चेहरे के पास आकर खड़े हो गए।
उनका संकेत समझते मुझे देर न लगी।
मैंने अपने दांतों से उनके नाड़े को खींच दिया और उनका पजामा उतार दिया।
फिर उनके अंडर वियर पर हाथ फेरा और उसे कुतिया जैसे सूंघा।
आशुतोष भाई जमीन पर खड़े हो गए और मैं कुतिया जैसी घुटनों पर बैठ गई।
उन्होंने दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़ लिए और अपने लिंग पर मेरा मुंह सटा दिया।
उनके अंडर वियर में उनका लिंग फुफकार रहा था और मैं उसे उसे अपने मुंह से सहलाती जा रही थी।
आखिर मैंने खुद ही उसको अंडरवियर से आजाद कर दिया और अपने होंठों को उस पर रख दिया।
उनका लिंग काफी लम्बा और मोटा था।
आशुतोष भाई ने अपना लंड मेरे गले तक धंसा दिया और जब मैं छटपटाई तो निकाल कर हंसने लगे।
फिर उन्होंने यही क्रिया कई बार की।
जब मैं उनके इस काम के साथ तालमेल बिठा चुकी तो उन्होंने मुझे आजाद कर दिया और मुझे गद्दे पर लेटा दिया।
गद्दे पर लेटते ही उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी और अब मैं उनके सामने पूर्ण नग्न लेटी हुई थी।
मुझे चूमते हुए आशुतोष भाई नीचे की तरफ आए और उन्होंने मेरी योनि पर अपने होंठ टिका दिए।
उनकी जीभ मेरी योनि पर थिरक रही थी और उससे लगातार रस टपक रहा था जिसे आशुतोष भाई बड़े मजे से पी रहे थे।
उन्होंने अपने हाथ से मेरे चूत का द्वार खोला और फिर अपनी जीभ उसके अन्दर डालने लगे।
उनकी जीभ मेरी चूत के दाने को मसल रही थी और मेरी चूत से रस लगातार बह रहा था।
आशुतोष भाई सिप सिप कर के उसे पिए जा रहे थे।
मैं लगातार अपने नाखूनों में गद्दे को नोच रही थी।
मेरी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थी और मैं मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी।
उसने भी साथ देते हुए तुरंत हाथ उठाकर मेरे स्तनों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया.
मैं अत्यंत मजे में थी.
और कुछ ही पलों में मैंने हिचकी लेने की तरह 10-12 झटके लिए और पतली चिपचिपी सी धार उसके मुंह में भरते हुए झड़ गयी।
आखिर कब तक मेरी मुनिया ये सहती!
वे मजे से सारे रस को पी गए।
मेरी सांसें तेज हो गई थी और तेजी से चल रही थी।
मैं जरा ठंडी हुई तो आशुतोष भाई ने मुझे अपने ऊपर 69 पोजीशन में बिठा लिया।
उनके मजबूत हाथ मेरे नितम्बों को मसल रहे थे।
उन्होंने मुझे अपने मुंह पर बिठा लिया और फिर मेरी योनि के साथ साथ मेरी गांड पर भी जीभ फिराने लगे।
मैं भी कुछ देर तक इस हरकत का मजा लेती रही और फिर मैंने अपने होंठ उनके लंड पर रख दिए।
‘उउम्म्ह्ह’
एक गहरा चुम्बन लेकर मैंने उनके लिंग को गीला किया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
उनके भूरे से लंड को चूसते हुए उसके आसपास के बाल मुझे चुभने लगे लेकिन मुझे उनका गुदगुदाना पसन्द आ रहा था।
उधर उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत से हटा कर मेरी गांड पर ले आए।
उन्होंने अपनी जीभ मेरी गांड की दरार पर चलानी शुरू की और इससे मुझे उत्तेजना के साथ साथ आनन्द का अहसास भी हो रहा था।
अब आशुतोष भाई ने मुझे सीधी किया और अपने ऊपर लिटा लिया और फिर मेरा चुम्बन लिया।
वो बैठ गए और मैं उनकी गोद में आ गई।
मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पर लपेट ली और मेरी योनि अब उनके लिंग से सटी हुई थी।
आशुतोष भाई ने अपना लंड सीधा किया और उसे एडजस्ट कर के मेरी योनि के दरवाजे से लगा दिया।
मैंने अपनी बांहों में उन्हे कस लिया और अब वो लम्हा आ गया जिसके लिए हम दोनों ने इतनी मेहनत की थी।
उन्होंने धक्का लगा कर अपना लिंग मेरी योनि में उतार दिया।
आह, इस आवाज के साथ मेरी योनि में एक गर्म रॉड सा लंड उतर गया और मेरे चेहरे पर संतोष के भाव आ गए।
मैं और आशुतोष भाई दोनों एक दूसरे को हिलाने लगे ताकि लिंग की रगड़ योनि में अच्छी तरह से हो।
मैं उनकी गोद में बैठ कर अपनी योनि का मर्दन करवा रही थी और आशुतोष भाई मेरे होंठों को चूस कर उनका रस पी रहे थे।
धीरे धीरे हमारे धक्के तेज होने लगे और आशुतोष भाई ने मुझे गद्दे पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गए।
उन्होंने अब अपने धक्के तेज कर दिए और जोर जोर से मेरी योनि को चोदने लगे।
मेरी चूत से पानी फव्वारे की तरह बह रहा था और कुछ देर बाद उन्होंने भी आह भरी और फिर मेरी चूत में ही झड़ गए।
उनका गाढ़ा वीर्य मेरी योनि के रस से बहकर बाहर आ गया तो उन्होंने अपनी उंगली डाल दी और फिर मुझे चटाई।
उनके गाढ़े वीर्य का स्वाद मुझे बहुत मजेदार लगा।
मैंने एक टिशू पेपर उठाया और अपनी योनि साफ की और आशुतोष भाई की तरफ़ शिकायत से देखा।
और मैंने कहा- ये क्या किया आपने? मैं प्रेगनेंट हो गई तो?
उन्होंने मुझे चूमा और बोले- गोली खा लेना मैडम जी, मैं ला दूंगा।
उनकी बात ने मुझे निरुत्तर कर दिया।
मैं बॉथरूम गई और पेशाब करके खुद को हल्का किया।
वो मेरे घर के साथ वाले घर में ही रहती हैं और काफी सुंदर हैं. उनके मम्मे भी काफी मोटे हैं और उनकी गांड का तो कहना ही क्या है. वो भी काफी मस्त माल हैं.
आंटी की कमर काफी पतली सी है. वो खुद भी पतली हैं, पर उनका फिगर काफी सेक्सी है.
मेरा दिल उनको देखकर काफी मचल उठता है.
आंटी का पति मोटा सा है जो उन्हें किसी प्रकार का सुख नहीं दे सकता है.
वो ना तो उन्हें सेक्स से संतुष्ट कर पाता है और न ही वो प्यार करता है.
उसका पेट काफी बाहर को निकला हुआ है और उसका लंड भी छोटा सा है, ये आपको पोर्न वाइफ फक कहानी में आगे मालूम हो जाएगा.
एक बार मेरे घर पर केबल टीवी साफ नहीं आ रही थी. मैंने सोचा छत पर केबल का जोड़ है, वो खराब हो गया होगा.
यह तार मेरी पड़ोस वाली आंटी की छत पर था.
तो पहले मैं छत पर तार सही करने के लिए आंटी के घर से छत पर जाने की सोचने लगा था.
फिर मन में आया कि चलो, अपनी छत से सीधा ही चला जाऊं.
मैं उनकी छत पर चला गया.
जैसे ही मैं उनकी छत पर गया, तो नीचे से कुछ आवाजें आ रही थीं.
मैं छत पर लगे जाल के पास गया और सुनने लगा कि क्या बात हो रही है.
तो आंटी चिल्ला रही थीं- नहीं, आज नहीं … कल ही तो किया था. आजकल तुम रोज परेशान करने लग लगे हो. छोड़ो मेरे को!
फिर आंटी जोर से कराहने लगीं.
उनके साथ कुछ और आवाजें भी आ रही थीं जैसे ब्लू-फिल्म चल रही हो.
उसके बाद कुछ थप्पड़ की आवाजें आने लगी थीं.
तभी आंटी बोलीं- आज फाड़ ही डालोगे क्या … आ आआ आह आराम से.
मैंने सोचा कि ये क्या हो रहा.
मैं धीरे से सीढ़ियों के दरवाजे के पास गया और देखा कि सीढ़ियों का दरवाजा तो खुला है.
मैं नीचे चला गया और देखा कि एक कमरे में लाइट जल रही है और दरवाजा बंद है.
बरामदे में काफी अंधेरा था और कमरे के पर्दे हटे हुए थे. वहां से अंकल आंटी साफ नजर आ रहे थे.
अंकल ने आंटी को गोद में बैठा रखा था और उनके मम्मे मसल रहे थे.
आंटी चीख रही थीं और कह रही थीं- आह और जोर से!
अंकल दूसरे हाथ से सलवार के ऊपर से आंटी की फुद्दी को मसल रहे थे.
वो काफी आवाज कर रही थीं.
तभी अंकल ने आंटी को गोद में उठाकर खड़ा किया और अपने सारे कपड़े खोल दिए.
वो सिर्फ अंडरवियर में रह गए.
मैं यह देखकर कर काफी खुश हो गया. मैंने सोचा कि आज तक मैंने काफी ब्लू फिल्म तो देखी हैं, पर आज रियल का सेक्स देख लेता हूं.
यह देखकर मैंने अपने आपको उनके कमरे के पास छुपा लिया और उनका सेक्स देखने लगा.
अंकल आंटी को कुछ मिनट तक तो ऐसे ही किस करते रहे, फिर उनकी फुद्दी पर हाथ फेरने लगे.
आंटी ने भी अब टांगें खोल दी थीं और वो मादक आवाजें भर रही थीं.
मेरा भी पूरा मूड बन गया. लंड खड़ा हो गया था.
अंकल ने आंटी को किस किया.
आंटी अंकल के अंडरवियर पर हाथ फेरने लगीं.
तभी आंटी ने अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और अंकल कराहे- आह.
अंकल ने खींच कर आंटी की गांड पर थप्पड़ मारा.
तभी आंटी हंस कर बेड के दूसरी तरफ चली गईं.
अंकल ने कहा- रुक साली, जाती किधर है … इधर आ.
आंटी ने कहा- क्यों जोर से खड़ा हो गया क्या?
अंकल ने कहा- पास तो आ, तेरी मां की चूत में लंड दे दूँगा.
आंटी ने कहा- मेरी में तो लंड दे दो, फिर मेरी मां की भी मार लेना. वो भी तुझे खुश कर देगी.
ये सुन कर मैं हैरान रह गया कि अंकल और आंटी गंदी बातें भी करते हैं.
अंकल आंटी के पास गए, उन्हें पकड़ कर किस किया और बोले- मेरी रांड, आज मेरे को खुश कर दे.
आंटी ने कहा- रोज ही तो करती हूं, तो आज क्यों नहीं करूंगी.
अंकल ने किस किया और मम्मों को कस कर पकड़ लिया.
आंटी चीखने लगीं.
अंकल- साली मेरे लंड को दबाती है, अब पता लगा कि दर्द क्या होता है?
आंटी ने कहा- आह छोड़ो … दर्द हो रहा है.
अंकल ने आंटी को गोद में उठाया और और बेड पर लुड़का दिया.
वो फिर से चीख उठीं.
अंकल उन पर कूद पड़े और किस करने लगे.
वो एक हाथ से आंटी के मम्मे दबा रहे थे, दूसरे हाथ से उनकी फुद्दी को मसल रहे थे.
आंटी ने भी पूरी टांगें खोल रखी थीं.
तभी आंटी ने कसमसाते हुए कहा- रूको छोड़ो … रूको ना.
आंटी ने अंकल को धक्का दिया और कहा- आज मेरी एक ना सुनना तुम …. मेरी फाड़ ही डालना.
मैंने सोचा कि आंटी ये क्या कह रही हैं अभी तक चुदाई नहीं हुई क्या आंटी जैसे माल की!
अंकल ने कहा- तेरी क्या, आज तो तेरी मां की भी फाड़ दूंगा. तेरी मां के भोसड़े में भी दर्द हो जाएगा.
आंटी ने कहा- मेरे मां के भोसड़े में दर्द हो ना हो, मेरी फुद्दी में कल तक तो दर्द होना चाहिए.
अंकल ने आंटी की कमीज को उतार दिया.
आंटी ने नीचे लेस वाली लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी.
अंकल ने आंटी को लिटाया और उनके मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही खाने लगे.
आंटी ने कहा- आह … ये माल तुम्हारा ही तो है राजा … आराम से करो ना!
फिर अंकल ने आंटी की सलवार का नाड़ा खोला और आटी ने अपनी गांड ऊंची कर दी.
अंकल ने सलवार खींच कर उतार दी.
आंटी अब केवल ब्रा और पैंटी में ही थीं. आंटी ने लाल रंग की वैसी लेसदार पैंटी पहनी हुई थी. आंटी का बदन काफी चमक रहा था. उनका बदन बहुत ज्यादा रसीला लग रहा था.
ब्रा और पैंटी आंटी की फुद्दी और मम्मों को छुपाने की कोशिश कर रहे थे पर वो छुप नहीं पा रहे थे.
तभी अंकल ने आंटी की टांगों को चौड़ा किया और उनकी फुद्दी को उसकी पैंटी से ही चूसने लगे.
आंटी तड़फने लगीं- बस अब नहीं रहा जाता. अब पेल दो.
अंकल ने कहा- मेरी रांड, अब तक तूने मेरे लंड को तो चूसा ही नहीं है.
अंकल लेट गए.
आंटी ने अंकल का अंडरवियर उतारा और लंड बाहर निकाल लिया.
ये क्या … अंकल का लंड तो काफी छोटा सा था.
फिर मैंने सोचा कि नहीं यार अंकल का लंड अभी बैठा होगा. क्योंकि मेरा लंड भी बैठने पर इतना ही होता है. उनका मुझसे तो बड़ा ही होगा.
आंटी ने लंड चूसा और लेट गईं.
अंकल ऊपर आ गए.
पहले ब्रा पैंटी को उतारा और आंटी को किस करने लगे.
वो उनकी फुद्दी को चूसते, तो कभी मम्मों को चूसने लगते.
अंकल उस वक्त किसी बन्दर जैसी हरकत कर रहे थे.
तभी आंटी ने कहा- बस करो, अब नहीं रहा जा रहा है.
अंकल ने कहा- ओके.
अब अंकल खड़े हो गए और आंटी की टांगों को फैला कर पोजीशन में आ गए और चूत में लंड लगा दिया.
मैं अंकल का लंड देखकर हैरान रह गया कि ये क्या … इतना छोटा सा अन्दर कैसे जाएगा?
जैसे ही अंकल आंटी के ऊपर लेटे, तो उनका पेट अड़ गया.
फिर भी अंकल ने आंटी की फुद्दी पर अपना दो इंच का लंड लगा दिया.
आंटी आह आह करने लगीं.
मैंने सोचा कि आंटी इतने से टुन्नू से ऐसे आवाज कर रही हैं. अगर आंटी ने मेरा लंड देख लिया, तो वो देखने से ही मर जाएंगी. ये मेरा लंड अपनी फुद्दी में नहीं ले सकेंगी.
आंटी आवाज निकाल रही थीं- आह आह … पेल दो मेरी फाड़ दो. आज मुझे खुश कर दो.
अंकल अभी ऊपर ही लेटे हुए थे और अब वो घस्से मारने लगे थे.
अंकल ने कुछ ही घस्से लगाए और चीखने लगे.
इधर से आंटी भी हल्का सा कराहीं.
तभी अंकल शांत हो गए.
अंकल आंटी के ऊपर कुछ देर तक लेटे रहे, फिर अलग हो गए.
वो पास में ही लुढ़क गए और कुछ मिनट तक लेट कर सांसें लेते रहे.
आंटी बैठ गईं और मैंने देखा कि उनके चेहरे पर वो खुशी नहीं थी, जो औरत को चुदने के बाद आती है.
ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें मजा ही ना आया हो.
अंकल का लंड काफी छोटा था, शायद इसलिए ऐसा था.
अंकल ने किया भी कुछ भी नहीं था. पोर्न वाइफ फक में बस पुल्ल पुल्ल करके ठंडे हो गए थे.
फिर आंटी ने अंकल के लंड पर हाथ फेरा.
अंकल ने कहा- क्यों दुबारा चुदाई करनी है क्या?
आंटी ने कहा- हां, मुझको दुबारा चुदना है.
तभी मैं समझ गया कि आंटी को अंकल खुश नहीं कर पाए हैं, नहीं तो औरत दुबारा चुदाई के लिए कभी नहीं कहती है.
मैंने सोचा कि यदि मैं कोशिश करूं, तो शायद मेरी दाल गल जाए और मैं आंटी को चोद सकूं. क्योंकि वो चुदाई में अभी प्यासी हैं.
फिर आंटी बोलीं- मेरा तो अभी छूटा भी नहीं है.
अंकल ने कहा- तू साली पता नहीं क्या खाती है कि मेरा तो तेरे ऊपर चढ़ते ही छूट जाता है … और तेरे होता भी नहीं है.
आंटी ने कहा कि मैं मस्त हूँ ना … काफी गर्मी है मेरे अन्दर!
ये कह कर वो हंसने लगीं.
तब अंकल उनके ऊपर चढ़ गए और आंटी को किस करने लगे.
अंकल का लंड बैठा हुआ था.
आंटी के मम्मों को अंकल ने मसला और फुद्दी को चूसने लगे.
तभी आंटी ने कहा- आज मेरी फुद्दी चूस चूस कर मेरी चूत ठंडी कर दो.
अंकल ने कहा- अच्छा … जब तेरे पास लंड है, तो तेरे को मेरे मुँह से मुठ मरवाने में ज्यादा मजा आता है क्या?
उन्होंने कहा- मुँह से करो ना यार … मुझको अच्छा लगता है. तुम फुद्दी बहुत अच्छे से चूसते हो. साथ में इतनी देर में आपका लंड भी तैयार हो जाएगा.
अंकल ने कहा- ठीक है, पर कल की तरह मत करना, मुकर मत जाना फुद्दी देने से!
आंटी ने कहा- मैं नहीं मुकरूंगी. एक बार मेरी मुठ मार दो, फिर जो चाहे मर्जी कर लेना.
अंकल ने कहा- ठीक है.
आंटी ने अपनी टांगें खोल दीं और अंकल आंटी की फुद्दी को जीभ से चोदने लगे.
आंटी आह आह करके कराहने लगीं.
वो अंकल का सिर अपनी फुद्दी पर दबा रही थीं.
पांच मिनट बाद आंटी जोर से चीखने लगीं- उह उह और करो … आह.
उन्होंने अंकल का सिर जोर से फुद्दी में दबा दिया.
आंटी का काम हो गया था.
अंकल आंटी का सारा माल पी गए.
आंटी अब खुश लग रही थीं.
अंकल फिर से उन्हें किस करने लगे.
वो दोनों बैठ गए.
अंकल ने कहा- मेरी रांड खुश हो गयी ना!
आंटी ने कहा- हां.
अंकल ने उनकी फुद्दी पर हाथ फेरा और कहा- चल अब लेट जा.
आंटी ने कहा- आह … दर्द हो रहा है.
अंकल ने आंटी को धक्का देकर लिटा लिया और उनके ऊपर लेट गए.
आंटी ने कहा- छोड़ो यार, अभी दर्द हो रहा है. कुछ देर बाद में चोद लेना.
अंकल ने कहा- मेरी रांड, मेरा लंड तो अभी तैयार है. इसे छेदा चाहिए.
आंटी ने कहा- नहीं.
अंकल ने आंटी के गाल पर थप्पड़ मारा और उसके बाल खींच दिए.
आंटी चीखने लगीं.
अंकल ने उनके मुँह में लंड डाल दिया और कहा- चूस साली, अब मेरी मुठ मार.
आंटी अंकल का लंड चूसने लगीं और मजे से चूसने लगीं.
अंकल ने भी उनके बाल छोड़ दिए थे.
आंटी अपने आप उनका लंड चूस रही थीं.
अंकल उनके सिर पर हाथ रखकर खड़े थे, उनके बालों को सहला रहे थे.
तभी अंकल ने आंटी का सिर पकड़ा और वहीं रोक दिया.
अंकल का भी रस छूट गया था.
पोर्न वाइफ भी हसबैंड का सारा माल पी गयी थीं.
अंकल और आंटी पास में ही लेट गए.
आंटी अंकल के ऊपर लेट सी गयी थीं.
कुछ देर लेटने के बाद अंकल ने कहा- अब कुछ मूड है?
आंटी ने कहा- बस अब नहीं.
अंकल ने कहा- एक बार करते हैं, फिर सो जाएंगे.
आंटी ने कहा- नहीं, अब कल करेंगे. अगर अब किया, तो मेरी फुद्दी पहले की तरह छिल जाएगी, फिर कल मेरी मां को चोदोगे?
अंकल ने कहा- हां, तेरी मां को चोद लूँगा.
वो हंसने लगे.
आंटी ने कहा- अब सो जाओ, सुबह जल्दी उठना है.
अंकल ने कहा- ठीक है, पेशाब करने चलते हैं, फिर सोते हैं.
आंटी बोलीं- तुम हो आओ.
अंकल खड़े हुए और बाहर आने लगे.
मैं वहां से छत पर आ गया.
अब अगली कहानी में मैं लिखूंगा कि कैसे मैंने आंटी को सैट करके उन्हें चोदा.
यह मेरी पहचान के एक लड़के Hindi Porn Stories की कहानी है, उसकी उम्र २० साल हुई ही थी, नाम राहुल, कद पाँच फुट दस इंच, आकर्षक।
जैसा कि होता है सबसे पहले जवानी के लक्षण आते ही सेक्स के बारे में उत्सुकता जागती है कि
सेक्स कैसा होता है ?
मजे आते हैं ?
दर्द होता है ?
लड़का और लड़की दोनों को मजे आते हैं ?
बच्चे कैसे होते हैं ?
आदि आदि
ये सब उसके मन में भी उठते थे
उसका संपर्क मेरे से हुआ, वो कंप्यूटर कोर्स के लिए मेरे पास आया था। धीरे धीरे घनिष्टता बढ़ी तो हम लोगों में सेक्स से सम्बंधित बातें भी होने लगी। वो मुझसे अपनी उत्सुकता को लेकर कई सवाल करता था। जब भी हम लोग फ्री होते तो हम सवाल जवाब करते रहते थे। राहुल के अपने भी कुछ दोस्त थे, उनमें भी स्वाभाविक रूप से ऐसी बातें होती रहती थी।
एक दिन राहुल ने मुझसे पूछा कि मेरे लंड के सुपाडे की खाल पीछे नहीं होती है जबकि मेरे दोस्त की तो हो जाती है?
मैंने उस से पूछा कि तुम मुठ मारते हो क्या?
उस ने पूछा कि कैसे मारते हैं?
मैंने उसको समझाया कि कैसे मुठ मारी जाती है।
तो उसने जवाब दिया कि बहुत कभी दो चार बार मारी है।
तो फ़िर मैंने उसको समझाया कि सुपाड़े की खाल तो सुपाडे से ही चिपकी हुई होती है, लेकिन जैसे जैसे जवानी आती है वैसे वैसे ये खाल अपने आप सुपाड़े से छूटती जाती है वरना जब सेक्स किया जाता है तो भी अपने आप धीरे धीरे छूट जाती है और या फ़िर मुठ मरोगे तो भी। लेकिन बहुत ज्यादा जोर लगा कर इसको पीछे करने कि कोशिश मत करना वरना घाव कर बैठोगे।
फ़िर राहुल ने पूछा कि यदि सेक्स किया जाए तो क्या फर्क पड़ेगा ?
तो मैंने पूछा कि कोई लड़की दोस्त है क्या ?
तो राहुल ने हिचकते हुए जवाब दिया हाँ है तो सही।
मैं : दोस्ती गहरी हुई क्या?
राहुल : हाँ धीरे धीरे गहरी हो रही है
मैं : क्या सेक्स की बातें होने लगी हैं?
राहुल : हाँ थोड़ी थोड़ी !
मैं : देखो, यदि खाल पीछे नहीं होती है तो लंड को चूत के अन्दर डालने में थोड़ी दिक्कत होती है, जोर से झटका मारोगे तो ख़ुद लंड पर भी घाव कर सकते हो और लड़की को यदि वो पहली बार कर रही है तो दर्द होगा।
राहुल : तो क्या मैं सेक्स नहीं कर सकता?
मैं: क्यों नहीं कर सकता भाई, मैंने मना थोड़े ही किया है, ऐसे समय सेक्स करने से पहले तैयारी करो – अपने हाथ साबुन से धो लेना, वेसलिन की डिब्बी ले लो, अपनी पहली ऊँगली पर वेसलिन लगा कर लड़की की चूत में ऊँगली करना। फ़िर उंगली को कुछ बार आगे पीछे करना। अब उंगली को ओ के आकर में धीरे धीरे घुमाना। ये सब करने में लड़की को दर्द हो तो रुकना फ़िर शुरू करना, अब अपने अंगूठे से भी इसी तरह करना। इस से लड़की की चूत का छेद थोड़ा खुल जाएगा और लंड डालते समय उसको दर्द कम होगा।
राहुल : लोग तो कहते हैं कि लंड को जोर से धक्का मारकर अन्दर डालना चाहिए। सील तोड़ना इसी को कहते हैं?
मैं: तू रोटी खाता है तो रोटी को तेरे मुँह में ठूंस ठूंस कर खिलाया जाय तो तुझको मजा आएगा क्या?
राहुल: मैं समझ गया, लड़की को दर्द होगा तो वो उतना मजा नहीं ले पायेगी।
मैं: हाँ ठीक समझा, वो ही क्या तुझको भी उतना मजा नहीं आएगा क्यूंकि दर्द के मारे वो उतना साथ नहीं देगी। अब अपने लंड पर वेसलिन लगा कर हलके धक्के लगाते हुए उसको भी चूत में धीरे से सरकते हुए अन्दर डालना, वेसलिन, क्रीम या नारियल का तेल लगाने से लंड आराम से अन्दर जाता है। बहुत जोर का घर्षण नहीं होता। समझा…? दर्द नहीं होने या कम होने से मजा बहुत आता है, सिर्फ़ सेक्स का असली मजा आता है। और जब मजा आने लगे और चूत पानी छोड़ने लगे तो तेरे में दम हो जितना जोर से लगाना, धक्के जोर से मारने हों तो मारना !
राहुल: लड़की को भी सेक्स का मजा आता है क्या?
मैं: क्यूँ भाई, लड़के ही ठेकेदारी लिखवा कर लाये हैं क्या मजे लेने के लिए। लड़कियों को भी मजा आता है। और जैसे कि अलग अलग लड़कों में सेक्स की रूचि अलग अलग होती है वैसे ही लड़कियों में भी, किसी लड़की को सेक्स में रूचि ज्यादा और किसी में बहुत कम या न के बराबर होती है। लेकिन एक बात याद रखना कि यदि सेक्स का मजा लेना हो तो लड़की को ओर्गास्म पहले आ जाए ये याद रखना ताकि उसका इंटरेस्ट बना रहे। अन्यथा पहले तुमको ओर्गास्म आ गया तो तुम्हारे दुबारा तैयार होने तक लड़की उत्तेजना से परेशान हो जायेगी और उसको हो सकता है तुमसे या सेक्स से नफरत हो जाए। यदि किसी कारण वश एसा हो भी जाए तो लड़की के साथ लगातार खेलते रहो। ताकि उसकी उत्तेजना बनी रहे।
और लड़की को पहले ओर्गास्म हो तो एक फायदा और होता है कि तुम्हारे को ओर्गास्म होने तक लड़की को और भी ओर्गास्म हो जाए। भगवन ने लड़की को ही वरदान दिया है कि सेक्स के एक राउंड में लड़की को कई ओर्गास्म हो सकते हैं जबकि लड़के को एक बार में एक ही ओर्गास्म होता है। उसके बाद लड़के को दुबारा ओर्गास्म हो इसके लिए उसको थोड़ा इंतजार करना होता है।
राहुल: सर बस एक बात और बता दीजिये कि लड़की को ज्यादा मजा कैसे आता है।
मैं: देखो लंड को चूत में डालने से पहले गेम खेलना चाहिए। इस गेम खेलने को फोरप्ले कहते है। इसमे होटों से होंट मिला कर चूसना, एक दूसरे की जीभ चूसना, कान की लटकन चूसना, लटकन के नीचे की गर्दन चूसना, बोबे दबाना और चूसना, नाभि चूसना और हो सके तो एक दूसरे के सेक्स ओरगन (लंड या चूत) चूसना शामिल हैं। शरीर की मालिश करना और सहलाना भी फोरप्ले में ही आता है। अब यह बात भी ध्यान रखना कि जिससे उसको उत्तेजना ज्यादा हो वो ही काम ज्यादा करना। जिसके लिए वो मना करे वो मत करना। ये अच्छा रहेगा, उसके मन में तेरे लिए विश्वास और प्यार पैदा होगा। जब लड़की को सेक्स खूब चढ़ जाए तो लंड को चूत में डालना। शुरू में बिल्कुल धीरे धीरे धक्के लगाना।
अब एक बात मैं और बता देता हूँ, देख लड़की के साथ सेफ सेक्स खेलना, या तो कंडोम प्रयोग में लेना या मासिक के चक्र को ध्यान में रखना। मासिक शुरू हो उस दिन को पहला गिनो। आम तौर पर ३० दिन का मासिक होता है। इस के अनुसार १५ वां दिन सबसे खतरनाक होता है। इस दिन तो बच्चा होने के सबसे ज्यादा चांस होते हैं। इस से तीन दिन पहले तक क्यूंकि तीन दिन वीर्य के शुक्राणु जिन्दा रह सकते हैं और तीन दिन बाद तक क्यूंकि लड़कियों में अंडाणु तीन दिन जिन्दा रहता है, अर्थात मासिक शुरू होने के १२ वें दिन से १८ वें दिन तक सीधा सम्भोग नहीं करना। वरना बच्चे होने का खतरा उठाना होगा। इसमे भी २ दिन और सेफ कर लो। ११ से १९ दिन तक। लेकिन यदि मासिक चक्र काफी ऊपर नीचे होता रहता है तो रिस्क मत लेना। कंडोम ही काम लेना।
राहुल: ठीक है सर।
मैं: अब तू मुझसे सुन, मैं सब कुछ समझता हूँ लल्लू, लड़की लगभग तैयार होगी। है न।
राहुल: एसा ही लगता है सर।
मैं: जा मजे कर, और सेक्स हो जाए तो बाकी सारी बातें बताना।
राहुल: बिल्कुल सर, ऐसा ही होगा।
अगले चार दिन राहुल नहीं आया, उसका फोन आया कि सर मैं छुट्टी पर रहूँगा। मैं समझ गया।
उसके बाद जब वो मेरे पास पढने आया तो मैंने उसको सारी बात बताने को कहा। अब आगे की कहानी राहुल की जुबानी सुनिए।
यहाँ से जाने के अगले दिन मैं उषा से मिला। मैंने बातों बातों में उस से पूछा कि कहीं घूमने चल रही हो?
उषा: किधर चलोगे?
राहुल: शहर से १० किलोमीटर दूर जो स्मृति वन है। ( इस स्पॉट में कम ही लोग आते जाते हैं)
उषा: जरूर, कल चलेंगे, खाना भी उधर ही खायेंगे। ठीक है?
राहुल: बिल्कुल ठीक है, जान।
मेरे इस नए संबोधन से उषा शरमाई सी आश्चर्य चकित मुझको देखने लगी। मैंने उसका हाथ धीरे से दबा कर बोला तुमने मेरा मन रखा उसके लिए धन्यवाद। तो उषा बोली इसमे धन्यवाद कैसा, मेरा तो ख़ुद घूमने का मन था। उल्टा धन्यवाद तो मुझसे लो। ये सुन कर मेरे मन में उमंगों ने लहर मारना शुरू कर दिया। मुझको उसकी साफगोई बहुत अच्छी लगी और मेरे मन में उसके लिए प्यार हिलोरे लेने लगा।
कोलेज पढने के बाद मैंने उस को अपनी मोटर साइकिल से उस के घर के पास छोड़ा। अगले दिन इसी जगह से दिन के बारह बजे स्मृति वन जाना निश्चित हुआ। दूसरे दिन वो मुझे उसी जगह पौने बारह बजे मिली और हम दोनों अपने घर से लाये खाने और पानी की बोतल के साथ स्मृति वन २० मिनिट में जा पहुंचे। मोटर साइकिल को स्टैंड पर लगा कर हम अपने खाने पीने के सामान के साथ पिकनिक स्पॉट में दाखिल हुए।
ये कई बीघा में बना हुआ पिकनिक स्पॉट है जहाँ कि बीच बीच में छायादार बड़े पेड़, झोंपडी टाइप गुमटियां और टीनशेड आदि दूर दूर लगे हुए हैं। बीच बीच में पानी के गढ़े, फ़व्वारे, डांसिंग लाइट आदि लगी हैं। काम काज का दिन होने से भीड़ कम थी। और हम बहुत आराम में थे। धीरे धीरे हम आपस में बात करते हुए अन्दर घुसे जा रहे थे। उसका सामान भी मैंने ले रखा था। हम साथ साथ चल रहे थे। और उसका हाथ मेरे हाथ से बार बार छू जाता था। मुझको अच्छा लग रहा था। और उषा इस बात पर ध्यान नहीं दे रही थी। बहुत अन्दर जाने पर जब आसानी से आसपास कोई दिखाई नहीं दे रहा था तो एक गुमटी में हम लोगों ने अपना डेरा जमा लिया।
हम एक दूसरे के पड़ोस में बैठे पढ़ाई से दूर की, अपने घर और परिवार की बातें करने लगे। बहुत देर तक बातें होती रही। हम एक दूसरे की बातों में रुचि लेते रहे। फ़िर हम एक दूसरे को चुटकुले सुनाने लगे। इस दौरान हँसी हँसी में हम एक दूसरे के हाथ पर हाथ मारने लगे। उषा ने कोई आपत्ति नहीं की। प्यास लगने पर एक ही बोतल के मुँह लगा कर पानी पिया। फ़िर किसी इसी ही मनभावन बात पर मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में ले लिया। उषा ने एक बार मुझको देखा फ़िर नोर्मल ही वैसी ही बातें करने लगी। मैंने भी उसकी आँखों से आँखें मिलायी।
२ घंटे बाद हम लोग खाना खाने को हुए। हाथ धोये, उषा ने दोनों के घर से लाया खाना एक ही जगह बहुत अच्छी तरह सजाया। सलाद काटा फ़िर एक दूसरे के पास पास बैठ कर हम एक दूसरे को खाना खिलाने लगे। उषा मेरे बाएं साइड बैठी थी। फ़िर धीरे से मैंने अपना बायाँ हाथ उसके कंधे पर रख दिया। उषा ने मेरी और देखा तो मेरा दिल जोर से धड़का। लेकिन उषा धीरे से खिसक कर मेरे थोड़ा और पास हो गई। मुझको बहुत आराम आया। फ़िर हम दोनों ने किसी को भी ख़ुद के हाथ से खाना नहीं खाने दिया, एक दूसरे को खिलाते रहे। खाने के दौरान उषा बातों के बीच में अपना सर मेरे कंधे के बाजु पर लगा देती थी। हम दोनों ने बहुत एन्जॉय करते हुए १ घंटे में खाना ख़तम किया। उषा के व्यवहार से लग रहा था कि उसको मेरा साथ पसंद आया है।
दिन के तीन बज रहे थे। अब हम चद्दर बिछा कर अधलेटे से सुस्ताने लगे। अब असली बात मेरे मुँह से निकल नहीं पा रही थी। कि कैसे मैं उषा से कहूँ कि मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। जबकि उसके व्यवहार से लगता था कि वो भी राजी है। लेकिन यदि उसने बुरा माना तो मैं एक बहुत अच्छे दोस्त से भी हाथ धो बैठूंगा।
उषा ने मुझसे पूछा कि मेशु तुम बहुत विचार मग्न दिख रहे हो। क्या बात है?
मैंने कहा कि नहीं कुछ भी नही। तो उषा ने जोर दिया कि यार लगभग आधा घंटा हो गया मैं तुमको इसी स्थिति में देख रही हूँ। खाना खाने तक तो बहुत ठीक से सब कुछ चल रहा था। बताओ तो क्या बात है।
मैं हिचकिचाया तो उषा ने बोला कि तुम लड़के होकर नहीं बता रहे। क्या बात है बोलो।
मैं बोला उषा मैं बता तो दूँ लेकिन यदि बात तुमको पसंद नहीं आई तो?
उषा ने बीच में बात काट कर कहा – क्या क्या, यदि बात मुझको पसंद नहीं आई तो, चलो अभयदान दिया, कुछ नहीं होगा। फ़िर मैंने उषा को कहा कि देखो उषा तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो और मैं तुमको खोना नहीं चाहता। अबसे पहले मेरी कोई भी फिमेल दोस्त नहीं रही इसलिए प्लीज यदि बुरा न मानो और अपना सम्बन्ध इसी तरह बना रहे तो मैं बता दूँ वरना जाने दो।
उषा ने जवाब दिया जनाब मैं तो तुमको अभयदान दे चुकी बोलो इस से ज्यादा तो कुछ नहीं हो सकता। अब भी न बताओ तो तुम्हारी इच्छा। तुम्हारी ऐसी शकल देखने से तो अच्छा है कि घर ही चलें।
अब मुझको हिम्मत आ गई और उषा को मैंने कहा। कि उषा तुम मेरी पहली फिमेल दोस्त हो और हो सकता है कि आखिरी भी तुम ही रहो।
उषा: फ़िर
राहुल: बात ऐसी है !!
उषा: कैसे है यार, क्या लड़कियों की तरह शरमाते हो। लड़की होकर मैं इंतना नहीं शरमा रही, बेशर्म होकर तुमसे खोद खोद कर पूछ रही हूँ, क्या मैं रोटी नही घास खाती हूँ। मुझको भी कुछ अंदाजा है कि तुम क्या कहना चाहते हो लेकिन तुम ही बोलो ! चलो ! मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहती हूँ !
मैं तो जड़ हो गया। फ़िर उसकी नजरें मुझ पर टिकी रही। मुझसे कुछ भी बोलते नहीं बन पा रहा था। तो उषा बोली चलो फ़िर घर चलते हैं।
लेकिन मैं नहीं उठा। उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा लिया। उसके कन्धों पर हाथ रख दिया।
उसने मेरी ठुड्डी पर हाथ रखकर मेरा मुँह अपनी और किया और मेरी आंखों में देखने लगी।
मेरे पसीने छूट गए। फ़िर बोला उषा प्लीज समझोगी न मुझको !
उसने हाँ में गर्दन हिलाई।
मैंने दूसरे हाथ से उसका हाथ अपने हाथ में लिया। और उसकी और देखते हुए बोला उषा प्लीज ! उषा मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो। उषा मुस्कुराई। उसने आँख मार दी। मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने कंधे वाला हाथ उसको लिए अपनी और खींचा और उसके गाल पर एक पप्पी ली। उसने कुछ नही कहा। और अपने हाथ से मेरा पकड़ा वाला हाथ दबा दिया। कुछ देर हम एक दूसरे को देखते हुए बैठे रहे। उषा फ़िर बोली बस ये ही कहना था आगे बोलो !
मैंने फ़िर कहा कि उषा ! प्लीज समझना यार, बुरा मत मानना।
उषा ने दूसरे हाथ से अपना माथा ठोक लिया।
उसने अपना हाथ छुडाया, अपने दोनों हाथों में मेरा चेहरा थामकर मेरी आँखों में देखती हुई बोली हाँ अब बोलो!
मैंने उसके दोनों कन्धों पर अपने दोनों हाथ जमा दिए फ़िर हिचकते हुए कहना शुरू किया- मुझको सेक्स के बारे में बहुत उत्सुकता है !
उषा: फ़िर ! ?
राहुल: तुमको भी है?
उषा: यार मेरा भी एक ही बॉय फ्रेंड है…। तुम, और ये तो सभी को होती है। इसमे ग़लत क्या है? लड़का लड़की एक दूसरे के बारे में जानना चाह्ते हैं। तुम क्या जानना चाह्ते हो?
अब मैंने अपना दिल कठोर कर लिया और सोचा कि जो होगा देखा जाएगा। उषा इतना सपोर्ट कर रही है।।।
राहुल: मुझसे सेक्स करोगी !?
उषा अपने हाथों में मेरा चेहरा पकड़े कुछ देर मुझे देखती रही मैं भी उसको देखता रहा। उसके गाल लाल हो गए। मेरा दिल धक् धक् कर रहा था। सारा शरीर कम्पन कर रहा था कि जाने क्या होगा, फ़िर !
उषा: मेशु मुझको तुम पर विश्वास है। इच्छा तो यार होती है लेकिन डर भी बहुत लगता है। कहीं कुछ ऊँच नीच हो गया तो जमाने को क्या मुँह दिखायेंगे?
राहुल:यदि ऐसा हो गया तो फ़िर हम शादी कर लेंगे।
उषा: क्याआआआआअ।
मेरे मुँह को चूम कर, उसने अपना चेहरा मेरे सीने में लगा दिया !
हम बहुत देर तक ऐसे ही बैठे रहे। कभी कभी एक दूसरे को चूम लेते। फ़िर मैंने अपना एक हाथ उसके बोबे पर रखा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा, नहीं मेशु आज नहीं कल, फ़िर नजरें नीची करके कहा – जब सेक्स करेंगे तब।
यह सुन कर मेरा फ्यूज उड़ गया।
मुझको अपने को वश में करना मुश्किल हो गया। मैं तुंरत उठ कर बोला उषा ५ बज रहे हैं चलो घर चलें। उषा भी बोली हाँ ठीक है चलो।
हमने अपना सामान समेटा और एक दूसरे का एक हाथ पकड़े मोटर साइकिल पर आए और घर की ओर रवाना हुए। उषा मुझसे चिपक कर बैठी हुई थी। मैंने पूछा उषा मासिक कितने दिन के हो गए। उषा बोली २५-२६ दिन हो गए ४-५ दिन में आ जायेगी। तो मैंने सोचा कि सीधे एंट्री हो सकती है बिना किसी डर के।
उषा को घर के पास उतारते समय उषा बोली कि वो कल १२ बजे मेरे कमरे पर आ जायेगी। लेकिन दर्द होगा ना ?
मैंने कहा कि यार नहीं होने दूँगा। उषा बोली मेरी सहेलियां तो बोलती हैं कि बहुत दर्द होता है पहली बार में। मैं बोला जय गुरूजी की विश्वास रखो नहीं होने दूँगा।
उसके बाद न तो मेरा मन किसी काम में लगा, न मुझको खाना खाने कि इच्छा हुई और न ही रात को ठीक से नींद आई। उषा का स्पर्श मुझको तरंगित किए था और मैं सातवें आसमान पर उड़ रहा था। बड़ी मुश्किल से वो दिन बीता और सुबह ७ बजे तक मैं नहा धो कर तैयार था। मेरे दिल की धड़कन बदल चुकी थी और उषा उषा आवाज आ रही थी। जैसे तैसे टाइम कट रहा था। ११ बजे जाकर होटल से खाना पैक करवाया। कमरे पर आकर उषा का इंतजार करने लगा। पता नहीं उषा आएगी भी या नही। सेक्स कोई ऐसी वेसी छोटी मोटी चीज तो थी नहीं जो वो मुझको देने वाली है और लड़की बिंदास है ये उसका व्यवहार बता रहा है। ठीक १० मिनिट पहले दरवाजे पर दस्तक हुई। मेरा दिल उछल कर गले मैं आ गया। दरवाजे पर उषा खड़ी थी।
राहुल: आओ आओ उषा अन्दर आओ।
मैंने दरवाजा बंद किया और बाहें बढाई कि उषा मेरे बाँहों में समा गई मेरे हाथ उसकी पीठ पर और उसके हाथ मेरी गर्दन के पीछे कस गए। हमारे होंट एक दूसरे से चिपक गए। १५-२० मिनिट हो गए, होंट थे कि हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। हम एक दूसरे के होंट चूस रहे थे और इतना तन्मय हो गए थे जैसे किसी मधुर संगीत में खो गए हो।
जिन्दगी में पहला किस था किसी जवान लड़की को मेरा और उषा का भी।
उसके होटों का रस मेरे पेट में और मेरे होंटों का रस उसके पेट में जा रहा था। दोनों तृप्त हो रहे थे। दुनिया का कोई होश नहीं था !! हम खड़े खड़े ही एक दूसरे में खोये हुए थे। उषा की जीभ मेरे होटों पर फिरने लगी तो मैंने उसकी जीभ को अपने होटों से सक करके अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। उषा के मुँह से जोर की सिसकारी निकली और वो जोर से मुझसे चिपक गई।
मैं अधमुंदी आंखों से उषा को देख रहा था, उसकी आँखें मुंदी हुई थी। धीरे धीरे वो होश खो कर मेरी बाँहों में लटकती जा रही थी। जैसे ही ये अहसास मुझे हुआ तो मैंने उसको दोनों बाँहों में उठा कर अपने बिस्तर पर हौले से लिटा दिया। वो पस्त निढाल लेटी हुई थी। मैं भी समझ गया कि अब उसको सेक्स की बहुत जरूरत है। मैं भी उसके साथ लेट गया और उषा को बाँहों में लेकर उसके बोबे दबाने लगा और उसके कान की लटकन चूसने लगा। उसने अपनी बाहें मेरी पीठ पर कस दी। थोडी देर बाद मैं उसकी गर्दन चूसने लगा। मेरे पसीने आने लगे। जैसे भट्टी जल रही हो। और मेरी बाँहों में तो साक्षात् आग लेटी थी। हम दोनों ही लस्त पस्त हो रहे थे। बिजली की चिंगारियां शरीर में भर रही थी। मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं स्थिति को कैसे सम्भालूँ। मैंने धैर्य रखना उचित समझा। वरना मेरी हालत ख़राब होने को थी। बड़ी मुश्किलों से अपने को काबू किया।
मैंने उषा से पूछा- उषा कपड़े हटा दूँ। तो उसने सहमति से गर्दन हिला दी। मैं २ मिनिट के लिए उषा से हटा और उषा के शरीर से कुरता हटाया। जैसे जैसे उसका शरीर दीखता गया मेरे शरीर में भाप बनने लगी। जैसे तैसे उसका कुरता हटाया, ब्रा में उसके बोबे ऐसे दिख रहे थे जैसे ताजी, चमकदार और रसभरी दो मोस्मियाँ उसके शरीर पर चिपकी हों, मैं होश खो बैठा और ब्रा को ऊपर सरका कर एक हाथ से उसका एक बोबा दबाने लगा और दूसरे को अपने मुँह में भर लिया। आधा बोबा मेरे मुँह में आ गया। मैं चूसने लगा। उषा के मुँह से सिसकारियां छूटने लगी, वो तड़पने लगी। आहें कमरे में गर्मी भर रही थी। मैं बिल्कुल बेकाबू हो गया था। उषा मेरे सर को पकड़ कर अपने बोबों पर दबा कर पकड़ रखी थी। मैं कंट्रोल करने की कोशिश में लगा था। बड़ी मुश्किल से मैंने बोबे पर अपने दांत गड़ने से बचाए।
फ़िर मैं उषा की पकड़ से छूट कर पहले अपने कपड़े उतारने लगा। अब उषा ने ज़रा सी आँख खोल कर देखा फ़िर शर्मा कर मुस्कुरा कर वापस अपनी आँख बंद करके इंतजार करने लगी। अपने को जन्म जात अवस्था में लाकर मैंने उषा की ब्रा के हूक खोलकर उसको अलग किया। फ़िर सलवार का नाड़ा खोला। सलवार का जोड़ गीला हो चुका था। मैंने सलवार नीचे सरकाई। उसकी पैंटी दिखने लगी पूरी गीली। सलवार और नीचे सरकी तो उसकी जांघे मखमल जैसे, चिकनी पूरे शरीर पर एक भी बाल नही। क्या बदन है उसका मैं सोचने लगा। फ़िर मैं होश खोने लगा तो मैंने फ़टाफ़ट से उसकी सलवार टांगों में से निकाल दी और उसके पूरे शरीर पर छाते हुए उसकी गर्दन से नीचे से लेकर पूरे शरीर को जीभ से चाट गया। उषा फ़िर तड़पने लगी। सिसकारी और आहें कमरे में फैलने लगी जैसे कोई मधुर संगीत मन को तृप्त और उद्दीप्त करता है ऐसे ही वो आहें और सिसकारी काम कर रही थी।
उषा की पैंटी के नीचे चद्दर तक गीली हो गई। जैसे एक गिलास पानी गिर गया हो। मुझमें हजारों वाट की भट्टी दहकने लगी। इससे पहले कि मैं अपने होश खो बैठूं, मैंने पैंटी के दोनों और अपने हाथ रखे और ३ सेकंड में नीचे खीचंते हुए उषा की टांगो से बाहर किया और उषा पर आ गया। उसका कद ५ फुट ६ इंच का होगा क्योंकि मेरा लंड उसकी चूत पर अड़ रहा था और उसके मुँह से मेरा मुँह मिला हुआ था। उसका गोल चेहरा बिल्कुल निर्मल प्यारा लग रहा था। उससे मुझको प्यार हुए जा रहा था। अब उषा मेरी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
मैं उसके मोसमी जैसे बोबे दबाने लगा। और लंड को उसकी चूत पर रखकर दबा दिया। उषा के होंट ढीले पड़े और उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी। वो मुझसे ऐसे चिपक गई जैसे मुझ में घुस जायेगी। फ़िर तो वो मुझको जगह जगह से चाट गई जहाँ जहाँ वो बाँहों में बंधे हुए चाट सकती थी। मेरी हालत ऐसे थी कि काबू करने की कोशिश के बाद भी नहीं हो रहा था। मैं ने करवट ले कर अपने को उषा के साइड में कर लिया। और अब दबाने चूसने का कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के चलने लगा।
उषा से मैंने कहा- उषा अब बर्दाश्त नहीं होता यार।
उषा फुसफुसाई तो मैं क्या करुँ यार। मैं तो तुम्हारे हवाले हूँ और मुझ से तो कुछ भी किया नहीं जा रहा। मैं तो उड़ रही हूँ जाने किधर आ गई आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह।
मैंने भी जय गुरूजी की बोलकर बेड के पास रखी वेसलीन की डिब्बी को उठा कर ऊँगली घुसा कर वेसलीन निकाली और हाथ नीचे ले जाकर उषा की चूत में ऊँगली सरकाई। उषा ज़रा सी कसमसाई लेकिन जैसे ही मैं ने ऊँगली गहरी डाली तो उषा के चेहरे पर दर्द कि लकीरें दिखने लगी। उंगली टाईट से अन्दर जा रही थी। मै उसी स्थिति में ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा। उषा उत्तेजना के मरे मुझसे चिपक कर आहें भरने लगी। मैंने अपनी जीभ फ़िर उषा के मुँह में दे दी। वो चूसने लगी। मेरा लंड कठोर हो चुका था। अब मैंने ऊँगली को ओ के आकार में घुमाना शुरू किया फ़िर उषा के चेहरे पर दर्द उठने लगा। मैंने हाथ की स्पीड को कम किया। फ़िर उषा मचलने लग गई। उसके कूल्हे धीरे धीरे चलने लगे। अब मैंने अपनी ऊँगली निकाल कर अंगूठा उसकी चूत में डाल दिया। उषा थोड़ा सा कसमसाई और फ़िर एडजस्ट हो गई। अब जब मैंने अंगूठा ओ के आकार में घुमाने लगा तो स्पीड बिल्कुल कम रखी। फ़िर भी उषा आह आह करने लगी धीरे धीरे। मैंने पूछा तो वो बोली कि हल्का दर्द है और मजे भी बहुत आ रहे हैं। फ़िर मेरा मुँह चूम कर बोली राज्जा तुम बहुत अच्छे हो यार, मेरे दर्द का कितना ख़याल रखते हो। मैंने मन में सोचा कि सब गुरूजी की कृपा है
२ मिनिट बाद मैंने उषा से पूछा कि लंड को अन्दर डाल दूँ क्या। तो वो जरा सी आँखें खोलकर फुसफुसाते हुए बोली बोली जो करना है, करो मुझको क्या पता कि कैसे क्या होता है। बस थोड़ा इधर उधर से सहेलियों से सुना ही तो है। मैंने भी सोचा कि उषा बिल्कुल सही कह रही है।
फ़िर मैंने अपना लंड उषा के हाथ में दिया और फ़िर ऊँगली घुसेड़ कर वेसलीन निकली और लंड पर लगा दी और उषा को बोला कि बस अब इतना तो कर दो कि वेसलीन मेरे लंड पर लगा दो। उसने गर्दन हिला कर सहमति दी और आहें भरती हुई धीरे धीरे वेसलीन लंड पर रगड़ने लगी। पूरी स्थिति अब काबू बाहर होने लगी तो वेसलीन फैलते ही मैं उषा की टांगो के बीच में आ गया और उषा को बोला उषा अपने को कंट्रोल करना यार मुझको हेल्प करना यदि दर्द हो तो उसको थोड़ा सहन करना !
फ़िर मैंने अपने ६ इंच लंबे और २ इंच मोटे लंड को उषा की चूत के मुँह पर रखा फ़िर अपने हाथ उषा की कमर के दोनों साइड में रखकर धीरे से लंड पर दबाव डाला तो लंड का सुपाडा चूत के मुँह पर फिट हो गया फ़िर हल्का झटका दिया तो उषा के मुँह से आह निकली और मेरे मुँह से सिसकारी। लंड लगभग दो इंच अन्दर हो गया था। लंड चूत में जाने के एहसास से कड़क एकदम कड़क हो गया था और मेरे शरीर को जाने कौन आसमान में ले उड़ रहा था। मैंने अपने आपको सम्हालने कि कोशिश करते हुए उषा से पूछा कि दर्द?
तो वो बोली- थोड़ा है लेकिन चलेगा और मेरे शेर मैंने अपने आपको सही हाथों में दिया है ये मैं महसूस कर रही हूँ। करते जाओ।
तो मैंने धीरे धीरे दबाव डालते हुए हलके हलके धक्के से लगाते हुए अपना लंड जड़ तक उषा की चूत में डाल दिया। लंड के सुपाड़े की खाल चिपकी होने से थोड़ा तकलीफ तो मुझको भी हुई। उषा ने अपने होंट भीच रखे थे और अपनी गर्दन को हाँ आने दो की मुद्रा में हिला रही थी। जैसे ही पूरा लंड अन्दर गया कि मैं अपने हाथों को आगे करता हुआ उषा के ऊपर आ गया कोहनी बिस्तर पर थी और घुटने भी मेरे शरीर का वजन सम्हाले हुए थे। उषा ने अपने हाथों से मेरी गर्दन को अपनी और भीचा और अपने होटों से मेरी गर्दन चूसने लगी, मैंने अपनी हथेलियाँ उसके बोबों पर रख दी।
गर्दन से कैसे बिजली शरीर में आती है ये मैंने जाना उषा के होटों की हर हरकत लाखों वोल्ट के झटके मुझे दे रहे थे मेरा पूरा शरीर कांप रहा था। कंट्रोल कैसे होता है ये ना मैं जानता था और ना ही उषा। बस हम तो किए जा रहे थे जो मन में आ रहा था वो सब। लेकिन बस काम हो रहा था।
थोडी देर बाद मैंने उषा को रोका और कहा यार उषा ऊपर आ जाओ। और ऊपर से करो तो उषा ने बमुश्किल अपनी आँखें खोली और मेरे हटने के बाद जब मैं साइड में सोया तो वो ऊपर आ गई। अब मैंने एक बदमाशी की, उषा ने जब लंड को चूत में डालने को कहा तो मैंने कहा कि अब ये अपने आप अपनी चूत में डालो। अब तो तुमको पता है कि लंड को कैसे और कहाँ अन्दर जाना है।
उषा ने आँखें तरेरी लेकिन मैंने चेहरा दयनीय बनाते हुए कहा प्लीज तो वो मेरे ऊपर लेट गई और अपने कूल्हे थोड़ा ऊपर करके मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया और बोली कि अब तो थोड़ा सा सहयोग कर दो न !
तो मैंने उसके कूल्हों पर हाथ रखकर नीचे से अपने कूल्हे ऊपर उठाने शुरू किए तो फ़िर हम दोनों के मुँह से सीसाहट निकलने लगी तो उषा ने मेरे होंटों पर अपने होंट चिपका कर चूसना शुरू कर दिया। फ़िर तो मैंने उषा को कस कर भीच लिया। उषा आहें भरने लगी। और मेरे सीने से लग कर थोडी देर पड़ी रही। फ़िर मैंने अपने एक हाथ को नीचे फंसा कर उसके चूत पर लाकर हलके से उँगलियाँ उसकी चूत में फसें लंड के चारों और की चूत की दीवारों पर फेरने लगा। उषा मचलने लगी।
वो मेरा मुँह चाट गई और कूल्हों के हलके झटके देने लगी। मैंने दूसरे हाथ को उसके कूल्हों पर फेरने लगा। उषा पूरी तरह छटपटाने लगी और लम्बी लम्बी साँसों के साथ सिसकारी लेने लगी। अब मैंने अपने कूल्हे नीचे से धीरे धीरे चलाने शुरू किए। उषा भी अपने कूल्हों को चलाने लगी। मैंने उषा को कहा कि जान अपनी चूत को चक्की की तरह रगड़ते हुए चलाओ। पहले तो उस से अच्छे से नहीं हुआ लेकिन मैंने हाथों से उसके कूल्हों को रगड़ कर चलाने को बताता रहा तो वो चलाने लगी। कुछ ही देर में लम्बी आह भरकर उसका शरीर अकड़ गया मैंने नीचे से जोर जोर से धक्के लगाने शुरू किए अपने हाथ उषा की पीठ पर बाँध दिए और टांगों को उषा की टांगो पर दबा लिया। नीचे से जोर जोर से धक्के लगाता रहा तो उषा के मुँह से सिसकी के बाद फ़िर सिसकी निकलने लगी ज़रा देर में ही मैं भी पिचकारी मार कर निढाल हो गया। उषा अपने हाथ मेरे चेहरे के चारो और किए थी और मैं उसको पीठ पर से मेरे हाथ बांधे था। हम सो गए पता भी नहीं चला। लगभग आधे घंटे बाद उषा कि आँखें खुली। उसने ऊपर से मुझे हलके हलके गाल थपथपा कर जगाया। हम एक दूसरे के साइड में आ गए। अब तक मेरा लंड उषा की चूत में घुसा हुआ था। कड़क।
अब उषा मुझसे चिपकते हुए बोली राजा मैं कमरे में आई थी तो कमरे में ताजा खाने की खुशबू थी। खाना खिलाओ ना।
मैंने कहा कि हाँ उषा कल दोपहर के बाद अब भूख लगी है। ठीक है खाना लगाओ। हमने अपने अंडरवियर पहने और बिस्तर पर अखबार बिछा कर उषा ने खाना सजाया। उषा को मैंने अपनी गोद में बिठा लिया और कल के जैसे ही एक दूसरे को खाना खिलाते रहे।
उषा को मैंने कहा – जान ट्रिप कैसा रहा। तो उषा बोली जय तुम्हारे गुरूजी की मजा आ गया और वो भी ऐसा कि अब एक राउंड और करेंगे। मान गई राजा हल्का सा दर्द हुआ और मजा तो ट्रक भरकर आया। आखिर में तो जब तुमने मुझको बाँहों में कस कर धक्के मारे तो मुझको तो जाने कितनी बार हो गया। फ़िर कल भी ४ घंटे मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी……
मैंने राहुल से उसकी मंशा जानी कि लड़की का क्या करोगे।
तो बोला यदि उसकी इच्छा होगी तो शादी कर लेंगे। देखेंगे…।। वो बोले तो सही…।
और सर मैं जानता हूँ कि उस से अच्छी लड़की मुझको ढूंढे से मिलनी मुश्किल ही है, वैसे अगर वो ना भी बोली तो मैं लड़का होने के नाते पहल करूँगा और मुझको पूरा विश्वास है कि वो मना नहीं करेगी…………।।
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