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मेरे मामा Indian Sex Stories जी की पत्नी यानि मेरी मामी का अकस्मात निधन हो गया था। मामाजी अट्ठाईस साल के खूबसूरत वयक्तित्व वाले हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी सुंदर औरत थी। निधन के समाचार से मेरी मम्मी और परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुःख हुआ था। मामाजी की एक दो साल की लड़की थी।
थोड़ा अपने बारे में बता दूँ!
मेरी उम्र 18 से कुछ ज्यादा है, बला की खूबसूरत हूँ मैं! मुझे देखते ही आदमी की आह निकल जाती है। बी.कॉम की परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मम्मी ने मामाजी की लड़की जॉली को सम्हालने के लिए मुझे इस वर्ष अकेले ही भेज दिया।
मामाजी के यहाँ पूरा परिवार छोटे मामाजी, नानी जी, नानाजी सभी जॉली को बहुत अच्छे से रखते हैं। मामाजी बिलकुल उदास और गमगीन रहते थे। वो अकसर कामकाज के सिलसिले में बाहर जाते थे, रात को देर सवेर घर पर आते थे।
एक रोज रात को मामाजी करीब साढ़े गयारह बजे घर पर आये। मैं जॉली को सुला रही थी, सोते वक्त जोली रोने लगी, मुझे बहुत दया आई और अपनी शर्ट को खोलकर जॉली को अपना चुचूक चुसाने लगी। चुसाते-पिलाते कब जाने नींद लग गई।
जब मेरी नींद उड़ी तो देखा मामाजी के हाथ मेरे स्तनों को धीमे धीमे सहला रहे थे, नींद उड़ते ही एकदम से मैं सन्नाटे में आ गई। पर सोचा कि आज चार माह हो गए मामीजी को मरे हुए, रोजाना सेक्स करने वालों की क्या हालत होती होगी। फिर सबसे बड़ी बात मेर गुलाबी चुचूकों पर मामाजी का हल्का स्पर्श पाकर मैं खुद रोमांचित हो गई। मैं नींद का बहाना करके सोई रही।
मामाजी ने धीरे धीरे शर्ट के चार बटन खोल दिए ब्रा को थोड़ा और ऊपर खिसका कर एक स्तन पर अपने होंठ रगड़ने लगे, दूसरे पर हल्का हल्का हाथ चला रहे थे। मेरे पूरे बदन में चिंगारियाँ फूटने लगी। वक्ष पर मामाजी की चलती हुई जबान से मेरी चूत कुलबुलाने लगी।
इधर मामाजी के पजामे के सामने ऐसा लगा जैसे टेंट खड़ा हो गया हो। धीरे से मामाजी का हाथ मेरी कमर से रेंगते हुए जींस तक पहुँच गया परन्तु तंग जींस होने से हाथ चूत तक नहीं पहुँच सका। फिर मामाजी जो भी हरकत कर रहे थे, बहुत डरते डरते से कर रहे थे। मैं आँख बंद कर आनंद ले रही थी पर डर मुझे भी लग रहा था। थोड़ी देर बाद मामाजी ने चुचूक चूसते चूसते पजामे में से अपना आठ-नौ इंच लम्बा लंड निकाल कर हाथ में ले लिया। वासना के वशीभूत हो के हाथ से लंड को जोर जोर से हिलाने लगे, दूसरे से मेरे स्तन दबाते रहे और मुँह में निप्पल लेकर लॉलीपॉप सरीखे चूसते रहे।
इच्छा तो मेरी भी बहुत हुई पर आंखे मींचे शर्म के मारे लेटी रही। थोड़ी देर बाद मामाजी के लंड ने पिचकारी मारी, जैसे होली पर रंग निकला हो, ढेर सारा वीर्य निकल कर बेडशीट पर जा गिरा। मामाजी जोर जोर से हांफ़ने लगे। सांसों को ठीक कर धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन लगाने लगे। सब कुछ सामान्य हो गया सिवा मेरे बदन के, आग लग गई उसमें!
एक घंटे बाद जब लगा कि मामाजी सो गए, मैं धीरे से उठकर अपने कमरे में चली गई। सीधे बाथरूम में जाकर पूरी नंगी होकर नहाई, नहाते हुए जमकर चूत में ऊँगली डाली, तब जाकर राहत मिली और सो गई।
अगले रोज मामाजी से मैं बराबर निगाह नहीं मिला पा रही थी, पर ऐसा जाहिर किया जैसे रात जो कुछ हुआ उसकी मुझे जानकारी न हो। परन्तु सारे दिन रात के वाकयात मेरी निगाहों से न निकले, रह रह कर रात वाली बात याद आती और कुदरन सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इससे पहले हल्का फुल्का वक्ष को स्पर्श करवाना, बन-ठन कर रहना, लड़कों को कुत्ते की तरह पीछे दौड़वाने तक का खेल मैंने किया था पर सेक्स के मामले में विगत रात अब तक का मेरा उच्च स्कोर थी।
जैसे-तैसे दिन कटा, रात होते ही खुद-ब-खुद मेरे कदम मामाजी के कमरे की तरफ बढ़ने लगे, परन्तु आज बहाना न रहा! जॉली नानीजी के पास जो सो गई थी। मन मार कर मैं अपने कमरे में सो रही थी।
नौ बजे के करीब मामाजी आये, उनकी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था। नानीजी ने मुझे आवाज लगाई- बेटी निशा, मामाजी के कमर पर जरा तेल लगा देना!
मुझे जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गई हो। आज मैंने नाईट-सूट पहन रखा था, वो भी बिना ब्रा और पेंटी के! मामाजी चादर ओढ़ कर लेटे थे। मैंने पूछा- मामाजी, कहाँ दर्द हो रहा है?
मामाजी ने कमर की बगल में इशारा किया वहाँ तेल लगाने के लिए मामाजी को पजामा खोलना पड़ता। उन्होंने पजामा और चड्डी खोलकर नग्न होकर चादर डाल ली। मैं चादर के अंदर हाथ डालकर आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करती गई। दस मिनट बाद मुझे कंपकपी छूटने लगी। वासना से मेरा बदन जलने लगा।
एकाएक मामाजी जो बगल में होकर लेटे हुए थे, थोड़ा सीधा हो गए। सीधा होते से ही सांप की फुफकारता उनका लंड मेरे हाथ से टकराया। रिश्ते-नाते, उम्र सब भूलकर मैंने लंड को हाथ में पकड़ लिया। मामाजी भी सिसकारियाँ भरने लगे। मुझसे और बर्दाश्त न हुआ, लंड को मुँह में ले लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मामाजी मेरी ब्रा विहीन चूचियों को कस के दबाने लगे, चूसने लगे। बेतहाशा लिपट गए, चिपट गए!
इसके आगे क्या हुआ?
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मतलब मामा ने चोदा अपनी भानजी को
मेरी सच्ची कहानी अच्छी लगी हो तो मेल करें! Indian Sex Stories
Xxx मॉम चुदाई कहानी मेरी सौतेली अम्मी की चूत मारने की है. पहले मैं अपनी बहनों को चोद कर मजा कर लेता था. उनकी शादी के बाद मेरी नजर अपनी अम्मी पर पड़ी.
दोस्तो, मेरा नाम आदिल है और मैं 23 साल का हूँ.
मेरे घर मे मेरे अलावा अम्मी, अब्बू और मेरी 2 छोटी बहनें है.
यह Xxx मॉम चुदाई कहानी है, मजा लें.
मेरे अब्बू ने कई शादियाँ की हुई हैं.
मेरी सगी अम्मी पहले ही मर गयी थी.
इस वक्त जो अम्मी मेरे साथ रह रही है, वो मेरी नहीं … पर मेरी दो छोटी बहनों की अम्मी है.
अपनी दोनों बहनों की चूत की सील मैंने पहले ही तोड़ दी थी. मैं मजे से उन दोनों के चुचों के साथ खेलता था.
पिछले साल उन दोनों का निकाह हो गया और अब वो दोनों अपने शौहरों के लंड की सेवा में लगी हुई हैं.
मेरी अम्मी का नाम नगमा (43) है. वो बेहद खूबसूरत बदन की मल्लिका हैं, जिनके 36D के गोल और तने हुए बोबे, किसी भी लंड को खड़ा करने का दम रखते हैं. तीस की कमर है, जिसको मैंने कई बार ख्वाब में पकड़कर उन्हें चोदा है.
अम्मी की 38 इंच की उठी हुई गांड है, जो चलते हुए इतनी मस्त हिलती है कि बस मन करता है कि अभी के अभी साली की सलवार खोलकर गांड मार दूँ.
मेरे अब्बू का नाम नासिर है, वो 51 साल के हैं.
अब्बू छह साल पहले उस्मान चाचा के साथ कोलकाता काम करने गए और वहां जाकर अपने से 20 साल छोटी औरत 31 साल की शब्बो से शादी कर ली.
शब्बो हल्की सी सांवली पर बेहद दिलकश कटाव वाले भरे हुए बदन वाली औरत थी. उसे देखकर कई बार मैंने सोचा कि एक बार तो कम से कम शब्बो के गुलाबी होंठों से अपने लंड की सेवा करवानी चाहिए.
मैं कई बार अपने बाप की किस्मत को लेकर सोचता था कि क्या किस्मत है साले की … एक तरफ मेरी सौतेली अम्मी नगमा, जैसे साउथ फिल्मों की अभिनेत्री नयनतारा … तो दूसरी तरफ शब्बो जैसे श्रुति हसन को अपने लंड की सेवा के लिए सैट किया हुआ है.
अब अब्बू कभी कभार ही घर आते थे और घर खर्च भेज देते.
उनके घर न आने से घर पर कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि मैं इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों को रिपेयर करने का काम करता हूँ, जिससे घर का खर्चा भी निकल जाता है और थोड़ी बहुत बचत हो जाती है.
मैं और मेरी अम्मी नगमा अजमेर के छोटे से इलाके में एक छोटे से घर मे रहते हैं, जो पुराने जमाने के खंडहर जैसा ही है.
एक के ऊपर एक घर बिल्कुल पैक, ना कोई आवाज सुन सकता है और ना ही कोई घर के अन्दर झांक सकता है.
मुझे कई साल से अपनी अम्मी की जवानी चखने का मन था पर मेरी बहनों ने कभी मुझे चूत की कमी नहीं होने दी.
उन दोनों ने टाइम टाइम पर मेरे लंड की खूब देखभाल की और मैंने भी उनके सारे ख़र्चे और जरूरत पूरी की.
बहनों की शादी के कुछ दिन बाद ही मुझे चुदाई की भयंकर तलब लगी तो सामने अम्मी थी.
मेरा पुराना ख्वाब फिर से जवान हो गया और मैंने सोचा क्यों ना इन्हें ही अपने बिस्तर पर खींच लूँ.
वैसे भी अम्मी कई साल से नहीं चुदी थी तो चूत टाइट होगी … और साली का फिगर तो कमाल है ही.
अपनी अम्मी के बारे में इस तरह की सोच कोई मादरचोद ही रख सकता है, जो कि मैं तभी बन गया था, जब अम्मी को दूर के मामा के आगे घोड़ी बनते देखा था.
ख़ैर ये बात 8 साल पुरानी है, पर याद अभी तक ताज़ा है कि कैसे मामू मेरी अम्मी को लुल्ली पर बैठा कर उछालने की कोशिश कर रहा था और अम्मी कह रही थी कि साले तू भी नासिर की तरह 4 इंच का ढीला हथियार लेकर आ गया है. पता नहीं कब मेरी चूत को मोटे और लंबे लौड़े मिलेगें.
अम्मी की इच्छा सुनकर अब तो बस चाहत थी कि अम्मी को अपने 8 इंच के लंड का जायका चखाया जाए और उसकी चूत का रस पिया जाए.
अम्मी को लंड पर बैठाकर गंदी गंदी गालियां देते हुए उछालने की, मेरे लंड से चुदते वक़्त अम्मी के चहरे पर कामुक भाव देखने की, जिसके लिए मैं रोज़ कुछ न कुछ नया तरीका अपनाता.
अब मैं रोज़ अम्मी की ब्रा और पैंटी पर अम्मी को याद करके मुठ मारकर माल निकालता और अम्मी को गले लगाता या उनके गाल चूमता तो पूरा ठरक से काम लेता.
पहले तो अम्मी ने इन सब चीज़ों को नज़रअंदाज़ किया और खुलकर मुझसे गले लग कर चूम लेतीं.
पर जब मैं हद से ज्यादा आगे जाकर उसके बोबे और गांड पर हाथ लगाकर ये सब करता, तो अम्मी कहतीं कि अब तुम्हारा भी निकाह करना पड़ेगा.
और मुस्कुरा कर चली जातीं.
अम्मी की इन बातों से मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गयी.
मैं अम्मी के सामने जाता तो लंड खड़ा करके ही जाता और डबल मीनिंग बात करता.
जैसे अम्मी आज तो दे दो …
अम्मी कहतीं- क्या?
तो बोल देता- चूत ओ … सॉरी सॉरी दूध.
या अम्मी के बूब्स देखते हुए बोल देता- आज तुम्हारे बहुत मोटे लग रहे हैं.
अम्मी बोलतीं- शर्म नहीं है क्या?
तो कहता- अम्मी, मैं तो आपके होंठों की बात कर रहा था.
यही सब कुछ दिनों तक चलता रहा.
फिर मैंने अम्मी की जितनी भी ब्रा और पैंटी थीं, एक बैग में भरकर फेंक दीं.
अम्मी को जब ब्रा और पैंटी नहीं मिलीं, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तूने मेरी ब्रा पैंटी देखी हैं क्या?
मैंने अम्मी से कहा- अम्मी, तुम्हारे निप्पल्स कितने काले और मस्त हैं. तुम्हारी छाती बिना ब्रा के कितनी खूबसूरत दिखती है. तुम आज से ब्रा मत पहना करो.
अम्मी ने कहा- साले सुअर … चुप कर वर्ना थप्पड़ खाएगा.
मैंने भी जवाब दे दिया- अम्मी, तुम्हारे थप्पड़ से डर नहीं लगता, जब तुम्हारी छाती के तरबूज हिलते हैं तब डर लगता है कि कहीं ये बम मुझ पर गिरें, तो मैं मर ना जाऊं.
अम्मी अपना दुप्पटा छाती पर लेकर ये कहती हुई अन्दर चली गईं कि आने दे तेरे अब्बू को वापस … बताती हूँ कि तू कितना बेशर्म हो गया है. अगर तेरी खाल नहीं खिंचवाई तो कहना. अपनी अम्मी को छेड़ता है कमीना.
मैंने जवाब में कहा कि अब्बू तो शब्बो को घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करते हुए बाल खींचने में बिजी होंगे.
अम्मी ने मेरी इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.
मेरे इस बदले हुए रवैये से अम्मी हैरान भी थीं और परेशान भी.
अम्मी में वैसे तो हवस की कोई कमी नहीं थी, किसी और की बात होती तो वो खुद ही चटाई की तरह बिछ जातीं और बोलतीं- लगा दे लंड, बना ले अपनी रांड … पर अपनी ही बेटे से चुदवाना कैसे हो, शायद यही बात उसे परेशान कर रही थी.
थोड़ी देर बाद मैं अम्मी के पास आया और अम्मी का नाम लेकर बोला- नगमा, तुम मेरी बात का बुरा मत मानो … मैं तुमको बहुत प्यार करता हूँ और खुश देखना चाहता हूँ. मैं जानता हूँ कि रात में तुम बाथरूम में इतनी देर क्यों रहती हो? तू अगर चाहे तो हम-दोनों एक दूसरे की मदद कर सकते हैं.
ये कहते हुए मैंने अम्मी के दोनों हाथों को अपने हाथ से पकड़ लिया.
अम्मी ने अपने हाथ से मेरे गाल को छुआ और बोली- बेटा, तू अभी इतना बड़ा नहीं हुआ कि ये सब बात समझ सके.
मैंने अम्मी की कमर पकड़कर अम्मी की आंखों में देखते हुए कहा- नगमा, मैं और मेरा हथियार इतना बड़ा हो गया है कि बिस्तर पर रात भर तेरी चीखें निकलवा सके.
ये सुनते ही अम्मी ने थप्पड़ मारना चाहा, पर मैंने हाथ पकड़कर उनके बाल पकड़े और अम्मी के होंठों को अपने होंठों से लगा लिया.
मेरे दिल की धड़कन इतनी बढ़ गयी कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ.
कुछ देर बाद अम्मी के होंठों को हल्का सा काटते हुए छोड़ा तो अम्मी की लिपस्टिक मेरे होंठों पर भी लग गयी थी.
अम्मी ने कहा- बेटा अम्मी हूँ तेरी … ये सब मेरे साथ करेगा … तू कहे तो तेरे लिए तेरी ममेरी बहन हिना को बुला लेती हूँ. वो अपनी जवानी की दहलीज पर है अभी, तेरा पूरा ख्याल रखेगी.
मैंने अम्मी की सलवार में हाथ डाल कर एक उंगली चूत में डाल दी और हिलाने लगा.
मैं बोला- नगमा, तेरी जवानी पर हिना जैसी कई कलियां कुर्बान कर दूँगा मैं … जान आज मना मत करना … तूने मर्द पैदा किया है, अब तेरी चूत से निकले हुए मर्द की मर्दानगी देख बस.
अम्मी- अहह ओह्ह हहह … मादरचोद … अम्मी हूँ तेरी.
मैंने अम्मी के कपड़े उतारते हुए कहा- नगमा, आज से तू मेरी अम्मी नहीं, बेगम है समझी साली छिनाल.
अम्मी- अहह … आदिल … मैं तेरी अम्मी हूँ … कोई अपनी अम्मी के साथ ऐसा नहीं करता.
मैं- नगमा जान, जब भाई के साथ कर सकती हो तो बेटे के साथ क्यों नहीं? कोई गलत बात नहीं है इसमें मेरी जान … देखो तुम कितनी मस्त बदन वाली हो और मेरे पास कितना मस्त लंड है.
मैंने अपने अपने 8 इंच के लंड को बाहर निकालते हुए अम्मी को दिखाया और कहा- क्यों न अब से हम दोनों एक-दूसरे के बदन का भी ख्याल रखें?
अम्मी मेरे लंड को देखती हुई बोलीं- हायल्ला … आदिल तुझे ज़रा भी शर्म-लिहाज़ नहीं रह गया है … मेरे सामने लंड निकल के खड़ा हो गया? वैसे तेरा लंड बहुत बड़ा है. मजा खूब देगा.
मैं- नगमा, आज तो तेरी चूत से निकले इस मर्द के लंड में आग लग चुकी है. आज तो तुझे मुझसे चुदना ही पड़ेगा.
मैंने अम्मी को दोनों हाथों से उठाया और उसी बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया, जहां अब्बू और अम्मी सोते थे.
अम्मी- बेटा, मैं तेरी अम्मी हूँ!
मैं- नगमा देख अब इतने नाटक मत कर, मैं जानता हूँ तू कितनी प्यासी है. आज तेरी सारी प्यास बुझा दूंगा बस ये फालतू की बात करने की बजाए कुछ मूड बना जान.
मैं अम्मी की चूत को फैला कर सीधा बिना कुछ कहे उसकी चूत चाटने लगा और जोर जोर से अम्मी की चूत को चूसकर गीला करने में लग गया.
कुछ देर बाद अम्मी की चूत से पानी निकला गया, तो मैंने अम्मी से पूछा- अम्मी, कुछ मज़ा आया?
अम्मी- उउममम … आह … आदिल अहह बेटा … आह …
अम्मी की चूत गीली होने पर मैंने बिना थूक लगाए ही मेरा 8 इंच का लंड अम्मी की चूत के मुँह पर सैट किया और एक जोर का झटका देते हुए कहा- लव यू अम्मी जान.
अम्मी की चूत में आज तक 4-5 इंच की लुल्ली ही गयी थी और इतने साल से वो चुदी भी नहीं थी, मेरा 8 इंच का मोटा लंबा लंड कैसे सहन कर पाती?
मेरे लंड के आधा अन्दर जाते ही वो कराह उठीं- हायल्ला मर गई!
अम्मी के मुँह से इतनी मादक आवाज से लंड में अकड़न और बदन की जकड़न दोनों और बढ़ गई.
अम्मी की चूत से हल्का सा खून भी निकला, जो अलग नशा दे रहा था.
इतना मज़ा बहनों की चुदाई में भी कभी नहीं आया, जितना आज अपनी मां चोदने में आ रहा था.
मैं बिना रुके झटके देने लगा और उसकी चूचियों से प्यासे की तरह दूध पीने लगा.
अम्मी अब मदहोश हो चुकी थीं और मुझे किसी भी तरह की कोई हरकत करने से मना नहीं कर रही थीं बल्कि अब तो सिर्फ सिसकारियां ही भर रही थीं.
मैं लगातार अम्मी की चूत का रस निकालने में लगा हुआ था.
चूत के चुदते-चुदते अम्मी की शर्म खुलने लगी थी.
वो भी अपने हाथों से मेरी पीठ को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं और ‘आह … उफ्फ्फ … हाय … उम्म …’ जैसी आवाज निकालती हुई मुझे अपनी तरफ समेट रही थीं.
मैं- नगमा मेरी बेगम … सुहागरात मुबारक़ हो.
अम्मी अपनी आधी खुली हुई आंखों से देखती हुई बोलीं- आह … आदिल … अन्दर मत झाड़ना बेटा … मेरा ऑपरेशन नहीं हुआ है.
अम्मी से ऐसी बात सुनकर मेरे अन्दर का वहशी और हवस से भर गया.
मैंने लंड निकालकर सीधा अम्मी के मुँह में डाल दिया और रस झाड़ दिया.
आह … क्या मज़ेदार लम्हा था वो … जब मैंने अपनी अम्मी को लंड के नीचे लेकर चोद डाला था.
उस रात मैंने कंडोम लाकर Xxx मॉम के साथ रात भर 4 बार संभोग किया और उसकी गांड के छेद की सील भी तोड़ डाली.
पिछले एक साल में मैंने अम्मी की सारी शर्म उतार दी. अब वो किसी गर्ल फ्रेंड की तरह ही मेरे साथ रहती हैं.
उस रात के बाद अम्मी ने कभी मुझे मेरे नाम आदिल से नहीं बुलाया बल्कि सुनो, जान, जानू बेबी, बाबू, हनी, राजा जैसे लफ़्ज़ों से आवाज देने लगीं और मेरे लंड की जरूरत का ख्याल मेरी बहनों से भी ज्यादा अच्छे से रखने लगीं.
कहा जाता है कि ‘बीवियों की अदला बदली’ का खेल यानि ‘Wife Swapping’ पश्चिमी देशों में बहुत होता है, हमारे देश में बहुत कम होता है लेकिन ऐसा नहीं है।
हमारे देश में भी यह खेल होता था और आज भी होता है लेकिन हां … खुले आम नहीं होता, चुपके चुपके छिप छिप कर होता है।
लोग इस खेल का मज़ा लेते हैं और खूब लेते हैं.
हमारे यहाँ अधिकतर बीवियां पहले तैयार नहीं होतीं।
उनको मनाना पड़ता है लेकिन जब मान जाती है, तैयार हो जाती हैं तो फिर कभी पीछे नहीं हटतीं।
फिर तो उन्हें इस खेल में इतना आनंद आता है कि वो इसे हर रोज़ खेलना चाहती है।
यह भी ऎसी ही न्यूड इंडियन वाइफ हॉट स्टोरी है. मजा लीजिये.
एक समय ऐसा था जब हम तीन पक्के दोस्त थे।
मैं आकाश, मेरा एक दोस्त अरुण और दूसरा मेरा दोस्त आनंद।
हम तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और एक साथ पढ़ते थे।
बड़ी गहरी दोस्ती थी हम तीनों की!
कुछ ऐसा संयोग हुआ कि हम तीनों की नौकरी दिल्ली में लग गयी और हम लोग एक कॉलोनी में एक एक फ्लैट में रहने लगे।
हम लोग रोज़ शाम को मिलते, दारू पीते, हंसी मजाक करते, गप्पबाजी और खूब मजे से एन्जॉय करते।
ज़िन्दगी अच्छी तरह गुज़रने लगी थी।
एक एक करके हम तीनों की शादियां भी हो गयी।
मेरी शादी रेखा नाम की लड़की से हो गयी. रेखा बहुत खूबसूरत थी हसीन थी। मैं उससे शादी करके बहुत खुश था।
अरुण की शादी सरीना से हो गयी।
मैं उसकी शादी में गया था। मैं तो सरीना भाभी को देख कर मस्त हो गया था।
फिर कुछ दिन बाद आनंद की भी शादी नेहा से हो गयी।
इस शादी में हम सब शामिल हुए।
नेहा भाभी तो अपनी शादी में बहुत जम रहीं थीं; एकदम फ़िल्मी हीरोइन लग रहीं थीं।
आगे चल कर हम लोग अपनी अपनी बीवी के साथ अपने अपने फ्लैट में रहने लगे और एक दूसरे के घर आने जाने लगे।
हमारी नजदीकियां और बढ़ने लगीं।
अच्छाई यह थी कि हमारी बीवियां भी आपस में मिलने जुलने लगी।
उनकी भी आपस में वही दोस्ती हो गयी … शायद उसी तरह की दोस्ती जैसे की हम तीनों के बीच थी।
हमारी ज़िन्दगी हंसी ख़ुशी गुज़रने लगी।
मैंने यह देखा कि ये तीनों बीवियां जब भी मिलती हैं तो खूब हंस हंस कर बातें करती हैं।
बातें क्या होतीं हैं यह तो पता नहीं पर होतीं जरूर मजेदार हैं यह बात उनके चेहरे से मालूम हो जाती थी।
एक दिन रात में मैं नंगा नंगा अपनी बीवी रेखा के साथ लेटा था और वह भी नंगी थी।
वह बड़े प्यार से मेरा लण्ड सहला रही थी और मैं उसका नंगा बदन!
हम दोनों वासना में डूबे थे।
मैंने पूछा- यार रेखा, ये बताओ की तुम तीनों बीवियां आपस में कौन सी बातें किया करती हो?
वह बोली- क्यों क्या हो गया? क्यों हमारी बातें जानना चाहते हो? हम लोग तो बस ऐसे ही हंसी मजाक किया करती हैं। अब हम सब जवान हैं तो मस्ती तो करेंगी ही?
“नहीं नहीं … चूतिया मत बनाओ मुझे! खुल कर बताओ न क्या बातें होतीं हैं तुम लोगों के बीच?”
“क्यों बताऊँ … तुम लोग जब बातें करते हो तो क्या हमें बताते हो? तुमको औरतों की बातें जानने की क्या जरूरत है? ऐसे साल मत पूछो!”
“कुछ तो बताओ यार? किसके बारे में बातें करती हो और क्या बातें करती हो?”
“हमारी बातें बड़ी गुप्त होती हैं, किसी को बताई नहीं जाती!”
“अच्छा तो क्या तुम लोग गन्दी गन्दी बातें भी करती हो? लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा की भी बातें करती हो?”
“ये तो सब छोटी छोटी बातें हैं, इससे भी आगे करती हैं।”
“कोई बात नहीं … मत बताओ मुझे … लेकिन मैं तुम्हें बताता हूँ कि मुझे सरीना भाभी और नेहा भाभी बहुत अच्छी लगती हैं। बड़ा मज़ा आता है उनसे बात करने में!”
“इसमें भी कोई खास बात नहीं है। हर मर्द को परायी बीवी अच्छी लगती है और हर बीवी को पराया मर्द अच्छा लगता है। ये तो सब कुदरती है, इसमें कोई नयापन नहीं है।”
“तो इसका मतलब तुमको भी अरुण और आनंद अच्छे लगते हैं?”
“हां हां बिल्कुल अच्छे लगते हैं। सही बात है।”
“अगर तुमको मौका मिले तो क्या तुम उन दोनों के लण्ड पकड़ोगी?”
“तुम पकड़ने दोगे तो पकड़ लूंगी। मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है.”
“तो क्या उन दोनों से चुदवा भी लोगी?”
“तुम कहोगे तो चुदवा भी लूंगी. जब पति अपनी बीवी चुदवाने के लिए तैयार हो बीवी तो चुदवा ही लेगी।”
“मेरे कहने पर चुदवा लोगी या तुम अपने मन से चुदवाना चाहोगी?”
“चुदवाना तो चाहती हूँ पर बिना तुम्हारे अनुमति के नहीं चुदवा सकती और न कभी चुदवाऊंगी।”
“अच्छा अगर मैं उन दोनों की बीवियां चोदूँ तो तुम मुझे चोदने दोगी?”
“क्यों नहीं चोदने दूँगी? बिल्कुल चोदने दूँगी। जब कोई तुम्हारी बीवी चोदेगा तो तुम भी उसकी बीवी चोदोगे, मैं मना नहीं करूंगी। अपनी बीवी चुदाओ तो उनकी बीवी चोदो।”
“वादा खिलाफी तो नहीं करोगी? मैं तेरे सामने ही उनकी बीवियां चोदूंगा।”
“नहीं करूंगी वादा खिलाफी … पर मैं भी तेरे सामने उन लोगों से चुदवाऊंगी। तुम भी वादा खिलाफी न करना!”
“ठीक है।”
अगले दिन जब हम लोग बैठ कर दारू पी रहे थे तो मैंने खुलकर अरुण और आनंद को बताया- यार मेरी बीवी तो ‘वाइफ स्वैपिंग’ के लिए एकदम तैयार है। अब तुम लोग अपनी अपनी बीवी से पूछ लो। अगर वो दोनों राज़ी हों तो फिर मज़ा लिया जाए।
हमारी बातें होने लगीं।
दारू खत्म होने के बाद हम सब अपने अपने घर चले गए।
अगले दिन दोनों ने कहा- यार हमने अपनी अपनी बीवी से पूछ लिया है।
अरुण ने कहा- मेरी बीवी भी राज़ी है.
और आनन्द ने कहा- यार मेरी बीवी तो ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गयी। वह तो शायद खुद ही यह बात मुझसे कहना चाहती थी।
दरअसल दो दिन पहले जब हम तीनों आपस में बैठ कर दारू पी रहे थे तो ख्याल आया की क्यों न हम लोग ‘वाइफ स्वैपिंग’ करें और एन्जॉय करें?
सबने हां कह दी थी.
पर सवाल यह था कि क्या हमारी बीवियां तैयार होंगीं?
जब हमने अपनी अपनी बीवी से बात की तो मालूम हुआ कि वे भी पतियों की अदला बदली करना चाहती हैं।
अब तो मज़ा ही मज़ा आएगा।
बस अगले दिन मैंने अपने घर में ही एक डिनर पार्टी रख ली।
मैंने जब यह बात अपनी बीवी रेखा को बताई तो वह ख़ुशी के मारे उछल पड़ी और फ़टाफ़ट सारा इंतज़ाम करने लगी।
उसने कहा- डिनर का आर्डर तुम कर देना और ड्रिंक्स का इंतज़ाम मैं कर लूंगी. और सुनो चुदाई का भी सारा इंतज़ाम कर लूंगी मैं!
उसने हंस कर मजाक करते हुए कहा- कल तुम मेरे सामने दोनों बीवियों की चूत का बाजा खूब बजाना।
मैंने कहा- और तुम भी कल उन दोनों के लण्ड अपनी चूत में डाल कर भून डालना। उनके लण्ड की चटनी बना देना। तेरी चूत बड़ी दमदार है।
वह बोली- वो तो मैं करूंगी ही! उनके लण्ड भुने हुए बैंगन की तरह निकालूंगी मैं अपनी चूत से, तुम देखते रहना।
अगले दिन अरुण अपनी बीवी सरीना के साथ और आनंद अपनी बीवी नेहा के साथ आ गए।
सरीना भाभी ने साड़ी पहनी थी और उसके नीचे एक छोटी सी ब्रा जिसके अंदर से उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहीं थीं।
नेहा भाभी ने जींस और टॉप पहना था. ब्रा तो थी ही नहीं … टॉप का गला इतना गहरा था कि एक बटन खुल जाए तो चूचियाँ पूरी नंगी हो जायेंगी।
उसकी भी चूचियाँ बड़ी भी थी और सुडौल भी।
जींस उसकी बहुत ही लो वेस्ट की थी अगर बटन खुल जाए तो चूत की झांटें दिखाई पड़ने लगेंगी।
उसकी गांड बड़ी मस्त लग रही थी।
फिर मेरी बीवी ने ड्रिंक्स चालू कर दी और हम सब लोग दारू पीने लगे.
तीनों मर्द एक दूसरे की बीवी ललचायी नज़रों से देखने लगे।
हमारी बीवियां भी एक दूसरे के पति को ललचायी नज़रों से निहारने लगीं।
उनके टांगों के बीच का उभार देखने लगीं।
एक दूसरे के पति के लण्ड के साइज का आईडिया लगाने लगीं।
नशा चढ़ने लगा तो बातें भी ज्यादा खुल कर होने लगीं, अश्लील होने लगीं.
और बीच बीच में प्यार से गालियां भी निकलने लगीं।
जोश बढ़ने लगा और उत्तेजना भी बढ़ने लगी।
दूसरा पैग चालू हो गया।
फिर मैंने कहा- सरीना भाभी आप कोई नॉन वेज चुटकुला सुनाइये।
सबने जोर डाला तो वह बोली- अच्छा सुनाती हूँ।
एक बार पति जब शाम को घर आया तो देखा कि उसकी बीवी पड़ोसन से लड़ रही है।
दोनों में खूब जोर जोर से लड़ाई हो रही थी।
पति अपनी बीवी से बोला- यार, तुम चाय वगैरह बनाओ मैं पड़ोसन से निपट लेता हूँ।
पत्नी चाय बनाने लगी।
लेकिन उसका मन तो लड़ाई में लगा हुआ था।
तब तक पति अपनी लुंगी खोल कर एकदम नंगा नंगा अपना लण्ड खोले हुए पड़ोसन के आगे खड़ा हो गया।
पड़ोसन उसका लण्ड देख कर और भड़क गयी. गन्दी गन्दी गालियां बकने लगी।
तो इसकी बीवी किचेन से बोली- अरे तुम कुछ बोलते क्यों नहीं? पड़ोसन देखो कितनी गालियां दे रही है?
पति बोली- तुम चिंता न करो, मेरा वकील लड़ रहा है।
सबने खूब तालियां बजाईं।
फिर नेहा भाभी ने सुनाया:
एक बार तीन लड़के बात कर रहे थे।
पहला बोला- देखो, मैं पानी से भरी तीन बाल्टी उठा सकता हूँ। एक दाहिने हाथ से, एक बाएं हाथ से और एक अपने लण्ड पर टांग लूँगा।
दूसरा बोला- मैं चार बाल्टी पानी उठा सकता हूँ। एक इस हाथ से, एक उस हाथ से, तीसरी अपने लण्ड पर और चौथी अपने दांत से उठा लूंगा।
तीसरा बोला- मैं सात बाल्टी पानी उठा लूँगा।
सब लोग बड़ी हैरान हो गए इस बात पर!
तब उसने बताया- एक इस हाथ से एक उस हाथ से … तीसरी बाल्टी अपने दांत से और फिर अपना लण्ड इसकी गांड में घुसा कर इसे उठा दूंगा इसके पास तो चार बाल्टी हैं ही!
सबने खूब एन्जॉय किया और तालियां बजाई।
फिर मेरी बीवी रेखा ने भी सुनाया:
एक बार लण्ड और टट्टे आपस में बात कर रहे थे।
टट्टे बोले- चलो आज मैं तुम्हें एक फिल्म दिखाता हूँ।
लंड- अरे यार ब्लू फिल्म मत दिखाना!
टट्टे- क्यों?
लण्ड- मुझे खड़े खड़े देखना पड़ेगा।
सब लोग खूब ठहाका लगा कर हंस पड़े।
बीवियों के मुंह से सबने लण्ड के चुटकुले सुने तो सबको खूब मज़ा आया और सबने खूब एन्जॉय किया।
अब किसी को भी किसी से कोई शर्म नहीं रही।
जोश सबको आ गया और उत्तेजना सबकी बढ़ गयी।
मेरी बीवी ने पहल की और वह उठी और अरुण के गले में बाहें डाल दी और उसके गाल चूम लिए.
वो बोली- हाय मेरे राजा, तुम मुझे बड़े अच्छे लगते हो। बड़े हैंडसम लगते हो।
वह भी मेरी बीवी के बदन पर हाथ फेरने लगा और बोला- रेखा भाभी, तुम बहुत सुन्दर हो हॉट हो।
इतने में अरुण की बीवी सरीना आनंद से चिपक गयी और दोनों एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे।
दोनों ऐसे एक दूसरे को चिपका कर मज़ा लेने लगे जैसे वो मियां बीवी हों!
आनंद की बीवी नेहा मुझसे लिपट गयी और मेरा लण्ड टटोलने लगी, बोली- तेरा लण्ड भोसड़ी का बड़ा मोटा लग रहा है यार आकाश!
मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
फिर धीरे धीरे सबके कपड़े उतरने लगे, नंगे बदन सबके दिखाई पड़ने लगे।
बस 5 मिनट तीनों बीवियां मादरचोद एकदम नंगी हो गयीं और और तीनों मर्द भी बहनचोद नंगे हो गए।
तीन तीन पैग शराब का नशा ये सब बड़ी मस्ती से करवा रहा था।
किसी को न कोई झिझक, न कोई डर, न कोई संकोच।
सब कुछ बिंदास अपने आप ही होने लगा।
मेरी बीवी ने फर्श पर ही चुदाई का सारा इंतज़ाम किया था।
गद्दे मसनद लगे थे चादरें बिछीं थीं नैपकीन रखे थे कंडोम काफी मात्रा के रखे थे।
बाकी सारा इंतज़ाम था यहाँ तक कि झांट बनाने का भी प्रबंध था।
लेकिन इत्तिफाक से किसी की झांटें नहीं थीं। तीनों लण्ड एकदम चिकने थे और चूत भी नेहा भाभी की एकदम चिकनी थी।
मेरी बीवी और सरीना भाभी की चूत पर छोटी छोटी झांटें थीं जो बहुत ही सेक्सी लग रहीं थीं।
सब लोग गोल बनाकर कर बैठे थे।
फिर सब लेट कर मज़ा लेने लगे।
नेहा भाभी मेरा लण्ड चाटने लगी और मैं सरीना भाभी की बुर चाटने लगा.
सरीना भाभी आनंद का लण्ड चाटने लगी और आनंद मेरी बीवी रेखा की बुर चाटने लगा.
मेरी बीवी अरुण का लण्ड चाटने लगी और अरुण नेहा की बुर चाटने लगा।
इस तरह सबको डबल मज़ा मिलने लगा।
हर एक बीवी एक पराये मरद का लण्ड चाटने लगी और दूसरे पराये मरद से अपनी बुर चटवाने लगी।
इसी तरह हर एक मर्द एक परायी बीवी से लण्ड चटवाने लगा और दूसरी परायी बीवी की बुर चाटने लगा।
इतनी मस्ती तो बस वाइफ स्वैपिंग के खेल में आ सकता है और कहीं नहीं!
मेरी बीवी बोली- यार सरीना, तेरे पति अरुण का लण्ड तो बड़ा मोटा और सख्त है यार! ये बहनचोद आज ही मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा। और देखो न नेहा का पति कितनी मस्त से मेरी बुर चाट रहा है। चाट क्या अपनी जबान से चोद रहा है मेरी बुर! आज वह सब सच हो रहा है जो मैं सोचा करती थी।
सरीना बोली- हां यार, मुझे भी नेहा के पति का लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है। पराये मरद का लण्ड तो मजेदार होता ही है। आज मैं पहली बार अपने पति के आगे किसी और के पति का लण्ड चूस रही हूँ। मैं सच में बड़ी खुश हूँ बड़ा मज़ा आ रहा है मेरी बुर किसी और का मरद चाट रहा है। वाह क्या बात है कितनी अय्याशी हो रही है आज!
नेहा बोली- आज तो वाकयी बड़ा मज़ा आ रहा है. दो दो पराये मर्दों को नंगा देख रही हूँ, उनके लण्ड देख रही हूँ, उनके लण्ड चाट रही हूँ, उनसे अपनी बुर चटवा रही हूँ। और क्या चाहिए एक बुर चोदी बीवी को? आज मैं बिल्कुल रंडी बनकर इन दोनों लण्ड का मज़ा लूंगी।
इन सब बातों से माहौल में और ज्यादा गर्मी हो गयी।
मैंने आनंद की बीवी नेहा की बुर में पेल दिया और चोदने लगा.
लण्ड पूरा घुस गया तो वह बोली- हाय दईया बड़ा मोटा लण्ड है तेरा! मेरी चूत कहीं फट न जाए बहनचोद! आज मैं पहली बार किसी पराये मर्द से चुदवा रही हूँ।
मैंने कहा- नेहा भाभी, इस समय मैं ही तेरा मर्द हूँ। तुम मेरी बीवी हो। मैं तुमको अपनी बीवी समझ कर चोद रहा हूँ।
वह बोली- हां हां यार, मैं तेरी ही बीवी हूँ, मुझे चोदो खूब चोदो। बड़ा मज़ा आ रहा है। आज मैं तुमसे चुदने ही आयी हूँ। आज ही नहीं … आगे भी मुझे इसी तरह चोदते रहना।
तब तक आनंद अरुण की बीवी चोदने लगा।
आनंद को भी सरीना की बुर बड़ी अच्छी लग रही थी। वह पूरा लण्ड पेले हुए बड़ी मस्ती से चोद रहा था और उतनी ही मस्ती से सरीना भाभी चुदवा भी रही थी।
ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि सरीना किसी और मरद से चुदवा रही है।
उधर हमारे सामने ही अरुण मेरी बीवी चोदने लगा।
मेरी बीवी तो जाने कबसे इंतज़ार कर रही थी कि उसे कोई पराया आदमी चोदे; उसकी बुर में कोई ग़ैर आदमी अपना लण्ड पेले।
वह तो लण्ड पलवाने के लिए एकदम तैयार बैठी थी। उसकी बातों से लग गया था की वह पराये मरद के लण्ड की दीवानी है।
मेरी बीवी अरुण के लण्ड से जितनी मस्ती से चुदवा रही थी, उतनी मस्ती से उसने कभी मुझसे नहीं चुदवाया।
मैं उसकी ख़ुशी देख कर खुश हो रहा था।
इस तरह हम तीनों एक दूसरे की बीवी चोदने लगे और मज़ा लूटने लगे।
दूसरे की बीवी चोदने में कितना मज़ा आता है इसका अनुभव आज हम सबको हो रहा था।
माहौल भी बड़ा आशिकाना बन गया था।
अरुण बोला- यार आकाश, अपनी बीवी के सामने किसी और की बीवी चोदना कितना मजेदार होता है।
आनंद बोला- हां बात तेरी सही है। मुझे तो जितना मज़ा दूसरे की बीवी चोदने में आ रहा है उतना ही मज़ा अपनी बीवी किसी और से चुदवाने में आ रहा है। मैं आज पहली बार अपनी बीवी को किसी और से चुदते हुए देख रहा हूँ और मुझे अच्छा लग रहा है.
इस तरह हम तीनों खूब मस्ती से दूसरे की बीवी की बुर का बाजा बजने लगे।
दूसरी पारी में मैंने अरुण की बीवी चोदी, अरुण ने आनंद की बीवी चोदी और आनंद ने मेरी बीवी चोदी।
अगली सुबह जब सब लोग चले गए तो मेरी बीवी ने कहा- देखो जी, अब मुझे पराये मरद से चुदवाने का चस्का लग गया है। मुझे पराये मरद का लण्ड अच्छा लगने लगा है। अब तो मैं पराये मर्दों से ही चुदवाऊंगी इसलिए अब और भी कपल ढूंढों जो हमारे साथ बीवियों की अदला बदली कर सकें।
मैंने कहा- हां यार, मुझे भी थोड़ा थोड़ा चस्का लग गया है दूसरे की बीवी चोदने का। अब तो मैं अपनी बीवी चुदाने में भी कोई झिझक नहीं करूंगा।
वह बोली- मैं भी तुम्हें दूसरे की बीवियां चोदने दूँगी।
कहते हैं ना कि जहाँ चाह है वहां राह है।
मैं भी नए कपल ढूंढने में लग गया और मेरी बीवी भी!
इसी बीच मैंने कई लोगों से बात की, कई लोगों की इच्छा जानने की कोशिश की।
मुझे यह पता चला कि लोग वाइफ स्वैपिंग करना तो चाहते हैं पर उनके मन में थोड़ा हिचक है।
मैं वो हिचक दूर करने लगा, तभी हमें दो कपल एक ही हफ्ते में मिल गए।
पहला पवन और उसकी बीवी प्रेमा और दूसरा सूरज और उसकी बीवी सीमा।
दोनों कपल की उम्र हमारी उम्र के बराबर ही थी।
मैंने सबको अपने घर बुलाया और एक बड़ी सी सेक्स पार्टी रखी।
उसमें मैं मेरी बीवी रेखा, पवन और पवन की बीवी प्रेमा, सूरज और उसकी बीवी सीमा को शामिल किया।
ड्रिंक्स शुरू हो गयी और खुल कर बातें भी होने लगीं.
पवन की बीवी ने बताया- हम लोग एक बार पहले भी दिल्ली के दो कपल के साथ बीवियों की अदला बदली कर चुके हैं। मुझे तो पहली ही पार्टी में पराये मर्द से चुदवाने में मज़ा आ गया था। मेरे पति को भी दूसरे की बीवी चोदने में बड़ा मज़ा आया था। तब से हम लोग वाइफ स्वैपिंग के लिए कपल की तलाश में रहते हैं। आज आप लोग मिल गए तो मज़ा आ गया।
सूरज ने भी यही कहा- हां हम लोग 2 / 3 बार वाइफ स्वैपिंग कर चुके हैं। मुझसे ज्यादा मेरी बीवी सीमा को मज़ा आया था। वह तो अब हर रोज़ इसी तरह की पार्टी करना चाहती है।
ड्रिंक्स का नशा चढने लगा, बातें और खुल कर होने लगी और फिर पहले मैंने पवन की बीवी चोदी और सूरज की बीवी चोदी।
पवन ने मेरी बीवी चोदी और सूरज की बीवी चोदी।
सूरज ने मेरी बीवी चोदी और पवन की बीवी चोदी।
हमने एक दूसरे की बीवी चोद चोद कर खूब एन्जॉय किया।
फिर हमारा एक बड़ा सा ग्रुप बन गया।
आज हमारे पास 8 / 10 कपल हैं और हम हर शनिवार और इतवार को एक ही जगह आमने सामने एक दूसरे की बीवियां चोदते हैं।
हमारी बीवियां भी एक दूसरे के पतियों से चुदवातीं हैं और खूब मज़ा लूटतीं हैं।
वैसे तो मेरे कई सारे सुखद अनुभव रहे हैं और आज मैं आपके सामने उनमें से ही एक सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ।
इस यूनिवर्सिटी प्रोफेसर सेक्स कहानी को मैं अपनी एक प्रशंसिका ऋतु नामक लड़की के आग्रह पर लिख रहा हूँ।
कहानी शुरू करने से पहले मै अपने बारे में आपको बता दूं, मेरा नाम अमित (बदला हुआ) है और मैं एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हूं।
मैं 29 वर्ष का अविवाहित युवक हूँ और मेरे लंड का साइज़ भी इतना मस्त है कि ये किसी भी लड़की या भाबी को चुदाई का पूरा मज़ा देता है।
मैं वाराणसी, उत्तर प्रदेश मैं रहता हूं और मेरी यह हॉट टीचर फक़ स्टोरी भी यहीं की है।
मुझे लड़कियों से ज्यादा भाभियों और शादी-शुदा महिलाओं की चुदाई करनें में ज्यादा मजा आता है।
मेरा आपसे यह अनुरोध है कि कृपया कोई भी पाठक मुझसे किसी भाभी या लड़की का नंबर या आइडी ना मांगे।
किसी भी भाभी या लड़की के लिए उसकी प्राइवेसी और गोपनीयता बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है और मैं हमेशा ऐसा ही करता हूं।
इसलिए ये देखते हुए मैंने कहानी में नाम बदल दिए हैं।
पहले मैं आपको अपनी कहानी की नायिका यानि कि उस खूबसूरत प्रोफेसर के बारे में बता देता हूं.
वे इसी शहर की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं,
मेरी उनसे मुलाकात एक प्रोग्राम के दौरान हुई जिसमें मैं अतिथि बनकर गया हुआ था।
हालांकि उस दिन मेरा ध्यान उन पर ज्यादा नहीं गया लेकिन उनका ध्यान मुझ पर ही था.
और यह मुझे प्रोग्राम खत्म होने के बाद मिले उनके पर्सनल व्हाट्सएप से पता चला जिसमें उन्होंने मेरी स्पीच के साथ-साथ मेरी भी तारीफ की थी।
उसके बाद से जब भी मैं यूनिवर्सिटी में जाता तो उनसे जरूर मिलता था.
और वे भी मुझसे उतनी ही खुशी के साथ मिलती थी.
धीरे-धीरे हमारी बात व्हाट्सएप पर होने लगी.
और कई बार मैं बिना काम के भी उनसे बातें करने लगा.
वे भी मुझसे सहर्ष बातें करती थी.
जिससे मुझे यह समझ में आने लगा कि वे भी मुझ में रूचि ले रही हैं।
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे बताया था कि यहां पर स्टाफ क्वार्टर में वे अकेली ही रहती हैं. उनके पति और बच्चे दूसरे शहर में रहते हैं।
तो बस मैंने एक योजना बनाई और फिर एक दिन बातों ही बातों में मैंने उनसे कहा- कभी अपने घर चाय पर बुलाइए!
पहले तो उन्होंने मना किया.
लेकिन फिर मैंने कहा- यूनिवर्सिटी में तो साथ में चाय नहीं पी सकते. तो अच्छा होगा कि आपके घर पर ही चाय पी जाए!
इस पर वे मान गईं … शायद उनका भी मन मुझसे मिलने का था।
लेकिन अब अगली समस्या यह थी कि उनके घर किस समय जाया जाए क्योंकि स्टाफ क्वार्टर की बिल्डिंग में और भी लोग रहते थे.
और वे नहीं चाहती थी कि मुझे उनके यहां आते हुए लोग देखें.
नहीं तो बातें बनना शुरू हो जाएंगी।
गर्मी का मौसम का और सभी लोग सुबह 9:00 बजे तक अपने ऑफिस चले जाते थे.
इसलिए उन्होंने मुझे अपने घर 9:15 बजे तक बुलाया क्योंकि वे 11:00 बजे तक अपने ऑफिस जाती थी.
बस फिर क्या था … मुझसे भी इंतजार नहीं हो रहा था और मैं सुबह 9:00 बजे ही उनकी कॉलोनी के बाहर पहुंच गया.
फिर उनका फोन आया तो उन्होंने बताया कि दरवाजा खुला रहेगा.
9:15 बजते ही तुरंत मैं उनकी बिल्डिंग में दाखिल हुआ और उनके घर में घुस कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.
पहले तो उन्होंने मुझे पानी, फिर चाय ऑफर की.
फिर हम बैठकर बातें करने लगे.
अब क्योंकि हम इस तरह पहली बार मिल रहे थे तो दोनों ही थोड़ा शर्मा रहे थे.
लेकिन मेरी नजर उनके मस्त गोरे बदन और चूचों पर थी.
उनके मस्त फिगर की बात करूं तो गोरा कसा हुआ बदन, चूचे 32″, कमर 30″, और गांड 32″ रही होगी.
उन्होंने स्लीवलेस टॉप पहना हुआ था जिसमें से झांकती उनकी ब्रा मेरा तापमान बढ़ा रही थी.
उनको देखकर बातों ही बातों में मैं उन्हें चोद चुका था.
लेकिन अब असल में चुदाई होनी थी।
जब घड़ी में 10:00 बजे तो मैंने उनसे कहा- मुझे थोड़ा पानी चाहिए.
जिसके लिए वे रसोई में गई.
मैं यही चाहता था। मैं भी उनके पीछे किचन में गया और जाकर उनको पीछे से पकड़ लिया.
पहले तो वह थोड़ा शर्माई और मना करने लगी.
लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी और पीछे से ही उनकी गर्दन और गालों पर किस करने लगा और मेरे हाथ उतनी ही तेजी से उनके मम्मों और पेट पर चलने लगे।
मैंने उनके कानों पर किस किया और धीरे से अपनी गर्म सांस उनके कानों में छोड़ी जिससे वे और उत्तेजित हो गई और मेरी तरफ को घूम कर मुझे किस करने लगी.
किचन का तापमान अब हमारी गर्मी से बढ़ने लगा था.
वे मेरे होठों को चूसती और मैं उसके चूचों को दबाता.
इसी बीच मैंने अपना हाथ उनकी पैंटी में डाला तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि उन्होंने पहले से अपनी चूत के बाल साफ कर रखे थे.
मेरा हाथ एक नर्म मुलायम सी चूत पर चलने लगा.
फिर धीरे से मैंने अपनी एक उंगली उनकी चूत में डाली तो वे अचानक से सिहर उठी और मेरे होठों को और जोर जोर से चूसने लगी.
उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और हाथ रखते ही बोली- हाय राम, कितना बड़ा है … तुम्हारा जल्दी से दिखाओ मुझे!
कहते ही कहते मेरी बेल्ट खोलकर मेरी पैंट भी खोल दी और फिर मेरा अंडरवियर निकालकर मेरा लंड अपने हाथ में लेकर खेलने लगी।
अब हम किचन से निकलकर ड्राइंग रूम में आ गए थे.
रूम में चल रहा AC मानो कह रहा था कि कमरे का तापमान थोड़ा बढ़ाया जाए और हमने भी वैसा ही किया.
अब मैंने उनकी ब्रा उतार कर उनके चूचों को अपने हाथों में ले लिया और आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगा.
उनके चूचुक सहलाने से वे और उत्तेजित हो उठी.
उसकी उत्तेजना मेरे होठों पर साफ पता चलती।
देर ना करते हुए मैंने तुरंत उनके चूचों को चूसना शुरू कर दिया; कभी बायां तो कभी दायां!
एक अलग ही मजा था उनके चूचों को चूसने में!
और फिर बेड पर बैठ कर मैंने उनके सर को अपने लंड के ऊपर रखा और उसे इशारे से उसे चूसने को कहा.
पहले तो वे थोड़ा डरी कि कैसे मैं इतना बड़ा लंड चूस पाऊंगी.
लेकिन फिर अपने अनुभव का प्रयोग करते हुए उन्होंने चूसना शुरू किया.
और सच बताऊं दोस्तो, ऐसा लंड चूसा उम्होंने कि मुझे लगा जैसे मैं जन्नत में हूं.
10 मिनट के बाद वे बेड पर लेट गई और अपने पैर फैला कर कहने लगी- डाल दो अंदर, अब रहा नहीं जाता, जल्दी से डालो जान!
मैंने भी लंड पर थोड़ा सा थूक लगा कर उसे गीला किया क्योंकि वह कॉन्डम इस्तेमाल नहीं करना चाहती थी.
फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा.
पर वे उतनी ही तेज मचल रही थी- जल्दी से डालो मेरी चूत में!
फिर मैंने झटका दिया तो लंड थोड़ा साइड में हो गया.
उसने अपने हाथ से पकड़ कर लंड सेट किया और धक्का लगाने को कहा.
मैंने भी उसकी हां मिलते ही पहले अपने होंठ उसके होंठों पर रखे क्योंकि मुझे पता था कि वे चिल्लायेंगी.
फिर पूरी ताकत से मैंने उनकी चूत में अपना लंड पेल दिया.
वे बहुत जोर से चिल्लाई.
लेकिन उसके होंठ मेरे होंठो से दबे हुए थे जिससे उनकी आवाज बाहर नहीं आई।
वे मुझे नाखून गड़ाने लगी और गालियां देने लगी.
मैं भी और तेज उसे चोदता गया और कोई 5 मिनट बाद वो थोड़ा नॉर्मल हुई और कहने लगी- तुमने तो फाड़ दी पूरी चूत मेरी! बहुत बड़ा है तुम्हारा!
वे यही सब बोले जा रही थी और मैं मस्त चुदाई में व्यस्त था।
अब थोड़ी देर बाद हमने पोजिशन बदली और अब वे मेरे ऊपर आ कर बैठ गई.
उन्हें लंड पर बैठ कर चुदना बहुत पसंद था तो मैंने उन्हें इस तरह भी खूब चोदा।
और फिर थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें लेटा कर जोर जोर से चोदना शुरू किया.
चुदाई के दौरान वे गंदी गालियां भी देती जा रही थी.
बातों ही बातों में उन्होंने बोला- और किसे चोदना चाहते हो?
तो मैंने उनकी पड़ोसन रश्मि ( बदला हुआ नाम) का नाम बताया.
वे बोली- उसकी तो चूत ही फट जायेगी तुम्हारे लंड से!
रश्मि की बातें करते करते मैं उन्हें चोदता रहा और इस बीच वो दो बार अपने चूत का पानी निकल चुकी थी और उसका तीसरी बार निकलने वाला था.
अब मेरा माल भी निकलने वाला था तो मैंने पूछा उनसे- कहां निकालूं?
तो बोली- अंदर नहीं!
मैं मान गया.
फिर उन्होंने कहा- पहले मेरा पानी निकल जाए तो फिर तुम निकालना!
मैंने कहा- ठीक है.
और फिर वे दोबारा से मेरे ऊपर आकर मुझे पेलने लगी.
यह उनकी फेवरेट पोजिशन थी।
फिर मैंने अपने दिमाग को थोड़ा इधर उधर किया ताकि मेरा माल तुरंत न निकल जाए.
दोस्तो, यह ट्रिक होती है जल्दी झड़ने से रोकने की।
फिर अचानक से उन्होंने बहुत जोर से मुझे पकड़ा और चिल्लाते हुए 5-6 जोरदार झटके मारते हुए मेरे ऊपर ही लेट गई.
तो मैं समझ गया कि इन्होंने अपने चरम सुख को प्राप्त कर लिया है.
अब बारी मेरी थी।
मैंने तुरंत उनकी गांड को हाथ लगा कर हल्के से उठाया और उनकी पोजिशन में जोर जोर से पेलने लगा.
वे बोली- बस करो!
लेकिन मैं कहां रुकने वाला था, मैंने पेलना जारी रखा और कुछ मिनटों में मेरा माल बाहर आ गया जो मैंने उसके बिस्तर पर गिरा दिया.
और फिर उसे अपने ऊपर ही लिटाए हुए धीरे धीरे चूमता रहा।
ऐसा लग रहा था मानो मेरे शरीर से पूरा मैं खुद बाहर आ गया हूं.
हॉट टीचर फक़ के बाद मैं एकदम निढाल हो चुका था.
हमारी यह चुदाई का खेल लगभग 40 मिनट चला था जिसके बाद हम दोनों ही एकदम से ढीले हो चुके थे.
लेकिन फिर भी उसकी चूचियों को देख कर मेरा मन नहीं माना, मैं उन्हें पीने लगा.
वे मेरा सर सहलाने लगी.
फिर उन्होंने मुझसे वादा किया- अगली बार मैं रश्मि की चुदाई का भी जुगाड़ करने की कोशिश करूंगी जिससे हम तीनों ही चुदाई का मजा ले पाएं।
दोस्तो, यह तो थी मेरी और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर की चुदाई की कहानी.
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