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Xxx मेड फक कहानी में मैं मुठ मार के गुजरा करता था. हमारी काम वाली आंटी को पता चल गया, उन्होंने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा. तो मैंने आंटी को ही मदद करने को कहा.

दोस्तो, मेरा नाम जीत है. मैं यूपी का रहने वाला हूं.
मेरी उम्र अभी 25 साल है, हाइट 5 फुट 7 इंच है और मेरा लौड़े का साइज 6 इंच है.

यह Xxx मेड फक कहानी एकदम सच्ची है.

यह बात एक साल पहले की है.

हमारे घर पर एक काम वाली आंटी काम करने आती थीं.
उन आंटी का नाम कोमल था.
उनका रंग सांवला था.
आंटी थोड़ी मोटी भी थीं, लेकिन बहुत ही सेक्सी फिगर की थीं.

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था तो हम दोनों हस्तमैथुन की बात करने लगे.

बातचीत के दौरान उसने कहा- मैं तो लंड पर कंडोम पहन कर मुठ मारता हूँ और वैसे ही अपने लौड़े को कंडोम पहनाए हुए ही सो जाता हूँ.
मैंने कहा- इसमें क्या खास बात है?

वह बोला- खास-वास कुछ नहीं है, बस उस वक्त जो नशा चढ़ता है ना तो लगता है कि कौन लंड धोने जाए … बस ऐसे ही पड़े रहो. बिस्तर के कपड़े भी खराब नहीं होते और मजा भी पूरा आआ है. तू कैसे मुठ मारता है?

मैंने कहा- मैं तो मुठ मार कर टिश्यू पेपर से लंड पौंछ लेता हूँ.
वह कुछ नहीं बोला.

फिर उसने कहा- अरे यार, मुझे तो डॉटिड कंडोम में हाथ चलाने में मजा आता है.
उसकी यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि एक बार तो कंडोम लगा कर देखना चाहिए कि कैसा लगता है.

कुछ देर बात करने के बाद उस दोस्त ने मुझे अपने पास से एक कंडोम का पैकेट दे दिया और कहा- ट्राई करके देख.
मैंने भी वह कंडोम का पैकेट अपनी जेब में रख लिया.

मैं शाम को अपने घर आया तो मैंने सोचा कि मैं इस कंडोम को यूज कर लेता हूँ.
मेरा कमरा अलग था तो अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लौड़े पर कंडोम चढ़ाने लगा.
पर लंड तो ढीला था तो मैंने सोचा कि पहले इसको कड़क करता हूँ.

मैंने अपने लौड़े पर थूक लगा कर हिलाना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मेरा लंड सख्त हो गया.
अब मैंने कंडोम का रैपर फाड़ा और उसे अपने लौड़े पर चढ़ा दिया.

उसके बाद मैंने कुछ देर तक मुठ मारी और झड़ गया.
सच में बड़ा मजा आया.
न साला हाथ धोना पड़ा और ना लंड.

फिर मैं बिना कंडोम निकाले यूं ही ही सो गया.
बड़ी गहरी नींद आई.

सुबह सुबह कोमल आंटी की आवाज आई- जीत बेटा दरवाजा खोलो.
मैं एकदम से हड़बड़ा कर उठा और अपने लंड को देख कर मैंने कहा- हां आंटी, बस अभी आया … आप एक मिनट रुको.

मैंने झट से लंड से कंडोम निकाला और बेड के गद्दे के नीचे घुसा दिया.
फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया.

कोमल आंटी ने कहा- 8 बज रहे हैं … उठना नहीं था क्या?
कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं तो मैंने कहा- आपके ही उठाने का इंतजार कर रहा था.
वे हंसने लगीं.

फिर मैं फ्रेश होने चला गया.

जब मैं अपने कमरे में आया तो देखा कि साला कंडोम तो आधा ही गद्दे के नीचे घुसा हुआ है और कोमल आंटी भी उसी के सामने पौंछा लगा रही हैं.

मैंने जैसे ही कंडोम को अन्दर घुसाने की कोशिश की, आंटी ने मुझे देख लिया.

आंटी मुझसे बोली- यह कंडोम यहां क्या कर रहा है?
जैसा कि मैंने आपको बताया कि कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं.

तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कुछ नहीं आंटी, यह गलती से रह गया था.
आंटी ने कहा- इसे तो तुरंत ही फेंक देना चाहिए था ना!

मेरी जगह कोई और होता तो शायद तुरंत उनकी बात को पकड़ लेता कि वे क्या कहना चाहती हैं.
लेकिन मैंने कहा- आंटी यह तो अभी निकाला है, इसलिए मैंने यहीं रख दिया था.

आंटी आश्चर्य से बोलीं- क्या तूने यह अभी यूज़ किया है?
मैंने कहा- नहीं, यूज़ तो रात को किया था … पर इसे लगा कर ही सो गया था. अब निकाल कर रखा था.

वह बोलीं- छी: तेरे कच्छे में तो बास भी भर गई होगी!
मैंने कहा- अरे ऐसे कैसे कच्छे में बास भर गई होगी? चाहे तो आप सूंघ लो.

आंटी हंसने लगीं और बोलीं- किसी को लेकर भी आया था … या अपने हाथ से ही काम चलाया था?
मैंने कहा- ऐसी किस्मत कहां है मेरी, जो कोई मेरे साथ सेक्स करे!

कोमल आंटी ने कहा- दिखने में तो इतने हैंडसम हो, फिर भी तुझे हाथ से काम चलाना पड़ रहा है!
मैंने कहा- क्या करूँ आंटी … आप भी तो मेरे लिए कुछ नहीं सोचतीं.

यह सुनकर आंटी ने मेरे हाथ से एकदम कंडोम छीन लिया और बोलीं- जीत, ज्यादा मत बोला करो … मैं तुम्हारी आंटी हूँ … तुम्हारे पास मेरे लायक लंड भी नहीं होगा.
मैंने उनके मुँह से लंड शब्द सुना तो समझ गया कि आंटी लंड के नीचे आने को राजी हैं.

मैंने कहा- बड़े छोटे से कुछ नहीं होता आंटी … लंबी रेस का घोड़ा होना चाहिए.

तभी आंटी ने कंडोम को सीधा किया और हैरानी से बोलीं- क्या तुम्हारा इतना बड़ा है या तुमने इसे खींच कर लंबा कर दिया?
यह कह कर वे हंसने लगीं.

इतनी सेक्सी बात सुनते सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैंने आंटी का हाथ अपने लौड़े पर रखा और कहा- खुद ही देख लो आंटी … मेरा हथियार आपकी फटी हुई चुत को मजा दे सकता है!
आंटी ने एकदम से लौड़े से हाथ हटाया और बोलीं- हट बदतमीज, कोई देख लेगा.

अब मुझ पर अपना काबू नहीं रहा.
मैंने आंटी की एक चूची पकड़ कर भींच दी.
आंटी ‘आउच.’ कह कर उचक गईं.

मैंने आंटी से कहा- आंटी, मुझे अब आपके साथ सब कुछ करना है.
वे बोलीं- कोई आ जाएगा, अभी मुझे जाने दो … मैं जा रही हूं.
आंटी मुझसे छूट कर चली गईं.

मैंने आंटी के जाने के बाद उनकी चूचियों का अहसास करते हुए मुठ मार ली.

मैं समझ गया था कि आंटी को लंड के नीचे लाना कोई बड़ी बात नहीं है. साली चुत चुदवाने के कुछ पैसे ही तो लेगी.

उस दिन आंटी चली गईं.
उसके बाद से जब भी आंटी मेरे कमरे में आतीं, मैं उनके ब्लाउज में सौ का नोट फंसा देता कि आंटी एक बार चूसने दो ना.

आंटी हँसती हुई मुझसे अपने दूध दबवा लेतीं और कभी कभी मैं उनके ब्लाउज को उठा कर निप्पल चूस भी लेता.
हर बार आंटी को सौ का नोट मिलता तो वे और ज्यादा प्यार से चूचे दबवा लेतीं.

कभी कभी मैं उनकी टांगों के बीच में भी हाथ डाल कर उनसे चुत चुदवाने की बात कर लेता तो वे कुछ नहीं कहतीं.
कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन घर के सभी लोग एक फंक्शन में दो दिन के लिए गए हुए थे.
मैं नहीं गया था.
मैंने सोच लिया था कि आज आंटी की लेना ही है.

शाम को आंटी आईं और बोलीं- सभी लोग कहां पर हैं?
मैंने कहा- वे सभी एक-दो दिन के लिए एक रिश्तेदार के यहां गए हैं.

आंटी मुस्कुराने लगीं.
मैंने कहा- यहां पर सिर्फ आप और मैं ही रह गए हैं.

वे बोलीं- तो क्या करूँ?
मैंने लंड सहला कर कहा- आंटी, आज आप कुछ नहीं करोगी. आज मैं आपकी चुत चुदाई करूंगा.

आंटी ने हँसते हुए झाड़ू लगाना शुरू कर दिया.
मैंने उनकी गांड को देखा तो मेरा लंड मचलने लगा था.
पीछे से उनकी गांड मुझे मदहोश कर रही थी.

मैंने एकदम से आंटी को पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे चूचे दबाने लगा.
कोमल आंटी ने कहा- जीत, यह तुम क्या कर रहे हो … ऐसा मत करो.

मैंने आंटी को बेड पर गिरा लिया और कोमल आंटी की चूची दबाते हुए उनके होंठों चूसने लगा.
आंटी ने भी मेरे लौड़े को अपने मुलायम हाथों से भींच लिया.

कुछ 5 मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे.
आंटी ने मेरे कपड़े निकाल दिए.
तो मैंने भी आंटी की साड़ी और ब्लाउज निकाल दिए.

आंटी जितनी मोटी थीं, उतनी ही बिल्कुल टाइट चूचियां थीं.
उनकी ब्रा सफेद रंग की ओर कच्छी नीले रंग की थी.

आंटी मेरे लौड़े को पकड़ कर हिलाती हुई बोलीं- आगे को आ जाओ.
उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.
अब आंटी मेरे लौड़े को चूस रही थीं.

तभी मैंने आंटी की ब्रा उतार दी.
आंटी के निप्पल काले थे.
मैं उनके निप्पल दबाने लगा.

आंटी को मेरा लंड को चूसते चूसते 15 मिनट हो गए थे.
तब आंटी ने कहा- अब तुम मेरी चाटो.

मैं आंटी की किस करते-करते नीचे आ गया.
मैंने आंटी की पैंटी निकाल दी.

आंटी की चूत पर काली झांटें थीं.
मैंने अपनी उंगली से आंटी की चूत खोली और चूत में उंगली डाल दी. फिर जीभ से चाटने लगा.

आंटी ने मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया.
मैं अपनी उंगली जोर-जोर से अन्दर बाहर कर रहा था.

आंटी की चूत पूरी तरह से गीली थी.
वे सिसकारियां भरने लगीं- उई आ अम्म चाट जीत चाट मेरे भोसड़े को.
उनकी झांटें मेरे चेहरे पर लग रही थीं.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, अपने पैर चौड़े कर लो.
आंटी ने अपने पैर चौड़े कर लिए.

फिर मैंने अपना सख्त लौड़ा उनकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लंड अन्दर घुस गया.
आंटी अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी चूची दबाने लगीं.

मैं तेज तेज धक्के मारता हुआ आंटी की चूत चोदने लगा.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आप मेरे लौड़े के ऊपर आ जाओ.

मैं बेड पर लेट गया.
अब आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी चूत में डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगीं.

आंटी थोड़ी मोटी थीं तो वे कुछ ही देर में थक गईं.
वे बोलीं- मुझसे नहीं हो पा रहा, अब तुम करो.

मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया.
आंटी की झांटें बहुत बड़ी थीं इसलिए चूत खोल कर अपना लंड पूरा एक ही बार में डाल दिया.

आंटी- उई आह थोड़ा आराम से करो.
मैंने जैसे ही धक्के देने चालू किए, आंटी के चूतड़ मेरी जांघों पर लगने लगे थे.

Xxx मेड फक करने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं झड़ने वाला था तो मैंने लौड़े को गर्म चूत से बाहर निकाला और आंटी की गांड से कमर तक अपने माल की बूंदें गिरा दीं.

फिर हम दोनों शान्त हो गए.
मैं आंटी के ऊपर ऐसे ही लेट गया.

आंटी बोलीं- मैं इतने दिनों से काम कर रही हूं, ये काम तो तुझे पहले ही कर देना चाहिए था!
मैंने कहा- आंटी कोई बात नहीं, अब से तो शुरू हो गया!

उसके बाद मैंने कहा- आज आप यहीं रुक जाओ. रात भर चुदाई का मजा लेंगे.
वे कुछ देर सोचने के बाद राजी हो गईं।

उन्होंने अपने घर फोन कर दिया कि आज रात वे मेरे घर रुकेंगी.

बस फिर क्या था … मैं और आंटी ने सारी रात चुदाई का मजा लिया.
मैंने आंटी की चुत की झांटें साफ कीं और जबरदस्त चुदाई की.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची सेक्स कहानी है. आपको कैसी लगी प्लीज बताएं.

मेरी अभी कुछ सेक्स कहानी और भी हैं जो एकदम सच्ची हैं. उनको मैं Xxx मेड फक कहानी पर आपके कमेंट्स पढ़ने के बाद लिखूँगा.

Antarvasna

कई लोग सोचते होंगे कि Antarvasna शायद यहाँ अन्तर्वासना पर मनगढ़ंत कहानियाँ होती हैं, लेकिन दोस्तो, यह कलियुग है, घोर कलियुग! इन सभी किस्सों में सचाई सौ फ़ीसदी होती है। यह बात दुबारा इस लिए लिख रही हूँ क्यूंकि मेरी पहली कहानी छपने के बाद जब चैट पर मेरी लोगों से बात हुई सब यही पूछ रहे थे- बाई कलयुग है कलयुग! कह रहे हैं कि दुनिया ख़त्म होने वाली है, फिर सतयुग आएगा, इसीलिए मैं जवानी के सारे नज़ारे लूटना चाहती हूँ और आओ ले चलती हूँ अपनी मस्त ठुकाई पर! ज़बरदस्त चुदाई जो मुझे जीवन लाल चौकीदार ने दी!

सच में वो फौलाद था, था क्या? है! जिसने मेरी तसल्ली करवा दी!

जो कहता था वो सच करके दिखाया और मेरा पूरा-पूरा बाजा बजाया उसने! मेरा बहुत साथ दिया था उसने, मेरे लिए अपनी सरकारी नौकरी खतरे में डालता था क्यूंकि उसका काम स्कूल में रहना होता था फिर भी मेरी और अपने मास्टर दोस्तों की मदद करता, हमें मौके देता! इसलिए मैंने उसको आज रात घर बुलाया था ताकि उसको अपना जिस्म सौंप सकूँ!

पूरे ग्यारह बजे उसने मेरे घर में दस्तक दी, फिर से नौकरी खतरे में डाल दी। अपने साथ शराब की बोतल लेकर आया और गर्मी के दिन थे। रात को मैं अकेली रहती थी, आता भी था तो कोई आशिक ही! इसलिए पेंटी और ढीली शमीज़ पहनी हुई थी। वो खुद ही रसोई देख ग्लास लाया और दो पेग बना लिए।

बहुत प्यासा हूँ तेरी चूत का! मेरा लौड़ा खाएगी तो रोज़ ना बुलाया तो मेरा नाम बदल देना!

हाँ जीवन! तूने जब आज मुझे अपने लौड़े की झलक दिखलाई, उसी वक़्त जान गई थी कि तू बहुत कमीना है!

मैडम इस स्कूल में कब से नौकरी कर रहा हूँ, कई मैडमों ने मुझसे चुदवाया था लेकिन तू सबसे अलग चीज़ है!

हाँ! बहुत शौक़ीन हूँ मैं चुदाई की!

मैं तो पहले से ही लगभग नंगी थी। पेग खींचते ही मैंने पहले उसका पजामा उतारा और ऊपर से ही सहलाया पुचकारा बाकी का पजामा जीवन ने खुद उतार दिया और मैंने उसका कुरता उतार दिया उसकी छाती पर घंने बालों को देख मेरा सेक्स और भड़क उठा। मुझे बालों वाले मर्द बहुत पसंद हैं, मैंने जीवन की छाती पे न जाने कितने चुम्बन लिए! वो मेरे अनारों से खेलता रहा और मैं उसकी छाती से और एक हाथ से उसके लौड़े को मसल रही थी।

साली पेग बना और अपने हाथों से मुझे जाम पिला!

मैं रंडी की तरह उठी, गांड मटकाती हुई गई और कोठे वाली की तरहं एक जाम उसको पिलाया, एक खुद खींचा!

मैंने एक पल में उसका अंडरवीयर उतार दिया- ओह माय गॉ… यह लौड़ा है या सांप?

मैंने तभी आपको कहा था कि यह देखो, मेरा सोया हुआ लौड़ा भी खड़े लौड़े जैसा है।

वास्तव में जैसे जैसे मेरा हाथ उस पे फिरने लगा वो उतना ही भयंकर होने लगा।

साली चूस ले! जब खड़ा हो गया तुझसे चूसा नहीं जायेगा! और फिर जबड़ा तोड़ दूंगा!

ज़बरदस्ती से मैं डर सी गई और उसके लौड़े के टोपे को चूसने लगी। सही में फिर वो मुझ से मुँह में नहीं लिया जा रहा था तो मैंने उसकी एक गोटी को चूसना शुरु कर दिया और साथ साथ जुबान से उसके लौड़े को चाट रही थी। खुश भी थी, थोड़ा डर भी था। उसको शराब चढ़ती जा रही थी, पूरी बोतल डकार चुका था। मैंने चूसते हुए जब ऊपर देखा और पेग लेने की सोची तो देखा- बोतल ख़त्म थी।

चल कुतिया, मुझे तेरे साथ सुहाग रात मनानी है! मैं दारु लेकर आया अपने घर से। तब तक बन-सवंर के घूंघट लेकर बैठ जा!

मैं उठी और सुन्दर सा ब्रा-पेंटी का सेट पहना, लाल रंग की आकर्षक साड़ी पहनी, पल्लू सरका घूंघट में बिस्तर के बीच बैठ गई। जीवन अन्दर आया, कुण्डी लगा मेरे पास आया और मेरा घूंघट उठाया और मेरे होंठ चूसने लगा। मैं भी शरमा के दुल्हन की तरह बैठी रही। केले के छिलके की तरह उसने मेरा एक-एक कपड़ा उतार दिया। मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगा।

एक दो पेग मुझे लगवाए और फिर जीवन मुझ पर छाने लगा। उसका लौड़ा साधारण नहीं था, हब्शी जैसा था! वो मुझे खींच के बेड के किनारे लाया ,खुद खड़ा हुआ और मेरी टाँगें खोल ली और मोटा लौड़ा चूत पे टिका दिया और झटका मारा।

मेरी सांसें रुक गई!
जान निकल रही थी मेरी!
लेकिन वो नहीं माना!

मेरी चूत फट रही थी, उसने पूरा लौड़ा घुसा दिया जो मेरी बच्चेदानी को छूने लगा!
मैं गिड़गिड़ा रही थी, वो नशे में था। मेरी साड़ी उतार दी उसने!
वो हर बार पूरा निकालता, फिर डालता!
मैं चीखती रही- चिल्लाती रही- जीवन नहीं रुका!

और फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे कहने पर उसने वेसलीन लगाई और मुझे चोदने लगा!

वोही लौड़ा अब मुझे स्वर्ग की सैर करवाने लगा था और मेरी गांड खुद ही हिल-हिल कर चुदवाने लगी। लेकिन वो नहीं झड़ने वाला था, उसने मुझे अपने लौड़े पर बिठा फ़ुटबाल की तरह उछाला।

हाय! तौबा! क्या मर्द हो तुम! वाह मेरे जीवन लाल शेर! फाड़ दे आज! इस कुतिया को चलने लायक मत छोड़ना!

पूरी रात जीवन ने मेरा भुर्ता बना दिया। सुबह होते ही वो तो चला गया लेकिन मैं उस दिन स्कूल नहीं जा पाई, पूरा दिन कोसे पानी से चूत की टकोर करती रही, तब जाकर सूजन उतरी।

और उसके बाद तो हर रोज़ छुट्टी के बाद स्कूल के किसी न किसी कमरे में चुदवाती रही उससे!

उसके बाद में सिर्फ जीवन से चुदवाने लगी वो मुझ से बहुत प्यार करने लगा। मैं जीवन से शादी करना चाहती थी, वो अपनी बीवी को छोड़ देता पर उसके सालों ने उसकी जमकर पिटाई करवा दी। मैं जीवन के बच्चे की माँ बनने वाली हो गई तो वो अपनी बीवी को छोड़ मेरे साथ रहने लगा।

लेकिन मैंने समय रहते बच्चा गिरवा दिया और जीवन को उसके घर जाने को कहा। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी तरह उसका परिवार बिखरे। मैंने उससे पूरा नाता तोड़ लिया ताकि उसका जीवन बर्बाद न हो!

दोस्तो, यह थी मेरी एक और चुदाई!

स्कूल के बाद अकेलापन दूर करने के लिए ट्यूशन पढ़ाने लगी और उनसे कैसे चुदी, यह जानने के लिए अगली कड़ी की प्रतीक्षा करें! Antarvasna

गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.

मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.

वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।

मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।

ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।

मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।

मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।

शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!

मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।

मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.

लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।

उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।

वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।

बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।

तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।

बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।

मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.

फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।

जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!

मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।

मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।

मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।

मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।

मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।

मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।

एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।

अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।

मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।

वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!

फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।

फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।

मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।

मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।

मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।

मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।

इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।

मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.

वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।

उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।

दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!

मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।

आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।

अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।

इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।

फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।

उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.

फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।

मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।

मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.

मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।

उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।

वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।

वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!

वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।

फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।

मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।

मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।

उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।

वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।

मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।

फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।

मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।

सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।

मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!

तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।

मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.

मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।

बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।

मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।

उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।

मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।

मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!

वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।

अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।

सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।

मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।

इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।

सुबह उठ कर वे चले गये।

हेलो मेरा नाम राहुल है Antarvasna

मैं गुरुजी का शुक्रिया करना चाहता हूँ Antarvasna मैंने अन्तर्वासना में कितनी सारी कहानियाँ पढ़ी हैं।अब मैं चाहता हूँ कि आप मेरा अनुभव पढ़ें !यह कहानी मेरे सामने ही रहती एक भाभीजी की है जिन्हें मैं देखते हुए भी मुठ मार लिया करता था। उनकी बरफ़ बनाने की फ़ैक्टरी है। वोह रोज झाड़ू लगाती तो उसकी श्वेत दूधियाँ रोज़ मुझे दिखती थी।

एक दिन उसका पति किसी काम से बाहर गया था तो मैं उसके घर गया और बोला- भाभीजी ! आपके पास चार किनारे वाला स्क्रु ड्राईवर है?

तो उसने बोला- वोह तो आपके पास है !

मैं उसकी भाषा नहीं समझ पाया।

फ़िर भाभीजी बोली- आप रोज़ इस तरह मुझे क्यों घूरते हो?

मैं बोला- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो इसलिये मैं आपको देखता हूँ।

फ़िर भाभी बोली- तू भी मुझे बहुत अच्छा लगता है !

और थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे ऐसे पकड़ा और मैं भी उनको चूमने लगा। मैंने गाल से चालू किया चूमना।

धीरे धीरे मैंने उनके होंठ के साथ अपने होंठों से किस किया। उनकी जीभ मेरे मुँह में ऐसे चल रही थी कि बहुत मज़ा आ रहा था।

फ़िर मैंने उनकी गर्दन पर अपनी जीभ चलानी शुरू की और वो थोड़ी गर्म होने लगी। फ़िर मैंने उसे दिवार की और उल्टा कर दिया। उनकी गान्ड मेरे लन्ड को छू रही थी और उनके मुँह से आवाज़ निकल रही थी- आ औ औइ अं अह …

और फ़िर मैंने उनका ब्लोउज़ निकाला। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। पहली बार उनके बड़े बड़े स्तनों के पूर्ण नग्न दर्शन हुये। मेरा लन्ड भी अंगड़ाई ले रहा था और उनके चुचूक मैंने अपने मुँह में लिए।

अरे यारो ! उनके निपल इतने बड़े थे कि कैसे बताऊँ आपको ! मैंने इतने मोटे निपल पहले कभी नहीं देखे थे। और फिर मैंने उनके पेटिकोट का नाड़ा खोला और पेटिकोट निकाल दिया और उसने काले रंग की कच्छी पहनी थी।

अब वो सिर्फ़ कच्छी में थी और नीचे बैठ गई और मेरा लन्ड चूसने लगी। अब मेरे मुँह से आवाज़ निकल रही थी- श ऽऽह श ले मेरी रानी मेरा लन्ड चूस और चूस मेरी रानी !

उसके बाद मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उनकी कच्छी को निकाल दिया और उनकी चूत चाटने लगा। मैंने पूरी जीभ उसकी चूत में डाल दी और वो आहें भरने लगी- ऊऽऽ ऊऽ ऊ ऊऽआ आ आ आ औ इऽऽ … और अन्दर डाल कर जीभ हिलाओ मेरे राज़ा ! आज तू मुझे जी भर के चोदना ! मैं भी तेरे लन्ड की प्यासी हूँ !

मैं उल्टा हो गया, अब उनकी चूत मेरे मुँह में और मेरा लन्ड उनके मुँह में ! हम दोनों इतने मशगूल हो गये और फ़िर दोनों ने खूब चाटा।

फ़िर भाभी बोली- अब मुझसे नहीं रहा जा रहा ! तुम मुझे चोदो !

फ़िर मैंने मेरा लन्ड 6″ का उनकी चूत में डाला और थोड़ा गया तो भाभी बोली- धीरे से डालो ना !

फ़िर भाभी की बात ना सुनते हुए मैंने पूरा लन्ड ही उनकी चूत में डाल दिया।

भाभी बोली- मर गई मैं ! आऽऽऽऔ चोद डाला तूने जालिम मुझे ! मेरी चूत की थोड़ी तो चिन्ता कर !

फ़िर 15-20 धक्कों के बाद भाभी मुझे चोदने लगी। वो मुझे धक्के देने लगी। अब भाभी को मज़ा आने लगा था ऊऽऽआऽऽऔऽअऊ आ औ अ ऽऽऽ अ ऊ आ औ अ और जोर से चोद ! मेरी चूत फ़ाड डाल आज ! जोर से चोदो मुझे !

और मेरी स्पीड इतनी बढ़ गई थी कि भाभी इतनी देर में कई बार झड़ चुकी थी और उनकी चूत भी एक दम चिकनी हो गई थी। भाभी अब कुछ भी बोल नहीं पा रही थी, सिर्फ़ आवाज़ निकाल रही थी- आ आ औ औ औ ऊ ओ !

और करीब एक घंटे तक चुदाई चलती रही। फ़िर मैं भी झड़ने वाला था। मैंने भाभी को बोला- मैं झड़ने वाला हूँ, कर दूँ अन्दर ?

भाभी बोली- अन्दर नहीं करना, बाहर निकालो, उसको मुझे पीना है।

फिर मैंने भाभी को हाथ में दे दिया और भाभी मेरा लन्ड हिलाने लगी और जैसे ही मैं झड़ा तो भाभी ने मेरा सारा वीर्य अपने मुँह में समा लिया और सब पी गई।

अगर आप लोगों को मेरी कहानी पसन्द आई हो तो मुझे मेल कीजियेगा।

अगर न पसन्द आई हो तो भी कृपया मुझे मेल कीजियेगा Antarvasna

(Padosan Ladki Ki Chut Chudai) Antarvasna stories

मेरा नाम करण है। Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं। मेरी उमर १९ साल है। मैं पढ़ता हूं और मुझे लड़कियों को पटाने में बहुत मजा आता है। मैने लड़कियों को पटाना 18 साल की उमर से शुरु किया था और मुझे लड़कियों के साथ सेक्स करने में बहुत मजा आता है। ये मेरी पहली कहानी है।

जब मैं 12वीं में था तो हमारे क्लास में एक लड़की पढ़ती थी उसका नाम कणिका था हाल फ़िलहाल वो कनाडा में है लेकिन जब वो यहां पर थी तब मैं और मेरे क्लास मेट सब उस पर लाइन मारते थे लेकिन वो किसी को भाव नहीं देती थी लेकिन हम फिर भी उसको कन्विंस करने की कोशिश करते थे। लेकिन मुझे एक फायदा था कि वो मेरी पड़ोसी थी जिससे मैं उसके घर जा कर कभी-कभी उससे बात करने की कोशिश करता था किसी ना किसी बहाने से

एक दिन वो कंप्यूटर पर गेम खेल रही थी शायद पूल गेम खेल रही थी अचानक मैं उसके रूम में पहुंचा था और उसे पीछे से डरा दिया। वो घबरा गई और चीख पड़ी उसके बाद उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मैं बेड पर गिर गया अब उसने पूछा कि क्यों डराया मुझे, मैं हंसने लगा उसके बाद उसने पूछा क्या हुआ मैने जवाब नहीं दिया।

अगले दिन मैने उसे हिम्मत करके फोन किया आज मैने मन बना लिया था कि आज उसे परपोज करना है फिर मैने उसे फोन किया २-३ बार फोन करने के बाद में उसे कह नहीं पाया। फिर मैने पूरा दम लगाकर उसे फोन किया और उसे मैने बोल दिया कणिका आई लाइक यु फिर उसके बाद उसने कुछ जवाब नहीं दिया उसके बाद वो मैने उससे पूछा क्या हुआ उसने जवाब नहीं दिया फोन रख दिया.

उसके बाद अगले दिन स्कूल में आई मैं उसके सामने नहीं जा पाया उसके बाद फ्री पीरियड में सब बाहर चले गये थे फिर वो क्लास रूम में आई और उसने अपनी एक दोस्त जिसका नाम सोनल है उसने उससे बोला उसे क्लास रूम में बुलाओ तब मुझे डर लग रहा था फिर भी में गया फिर उसने पूछा क्या हुआ कल शाम को मुझे परपोज किया था तुमने।

मैने कहा किया तो था लेकिन लगता है तुम्हे अच्छा नहीं लगा इसलिये मैने तुमसे पूछा नहीं दुबारा फिर उसने बोला ओके मैं तुम्हारे परपोज को स्वीकार करती हूं

फिर तो मैं खुश हो गया उसके बाद उस शाम को उसके घर पर गया और उसके रूम में गया और उससे पूछा में आई किस यु? उसने कहा नो ! लेकिन उसके बातों से लग रहा था वो यस बोल रही है।

उसके बाद मैने उससे बोला -आई वांट अ किस नाउ उसने कहा ओके तब मैं उसे किस किया और उसके बूब्स प्रेस करने लगा वो बोली अभी नहीं मैं बोला बस एक बार तो वो बोली बस एक बार. तब मैने उसके बूब्स को ज़ोर से दबाया मुझे उसके निप्पल फ़ील हो रहे थे उसके बूब्स प्रेस करने में मुझे मजा आ रहा था उसके बाद उसे बेड पर बैठा दिया लेकिन उसके परेंट्स घर पर थे सो मैने कुछ किया नहीं

उसके बाद अगले दिन संडे था हमने मूवी देखने का प्लान बनाया फिर मूवी देखने हम गये वहां पर मैं उसके बूब्स को छू रहा था।फिर शाम को गार्डन गये रात होने लगी थी गार्डन में बहुत से जोड़े थे हम भी एक जगह पर बैठ गये और उसे किस किया फिर अंधेरा होने के कारण कोई देख नहीं रहा था.

मैने उसका टोप खोल दिया और किस किया और जीन्स का ज़िप खोल कर अंदर उंगली कर रहा था फिर वो सिसकी ले रही थी मैने जींस खोला और उसकी पैंटी को उतार दिया उसके बाद मैने अपना जींस खोला मैने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया शायद उसे दर्द होने लगा था इसलिये बोलने लगी अभी नहीं लेकिन मैं नहीं माना और उसके चूत में उंगली डाली और किस कर रहा था और फिर उसकी चूत में मैने अपना लंड डाल दिया उसके आंसू आ गये।

फिर क्या था बस मैने उसे उसके घर तक छोड़ दिया और मैं अपने घर पर चला गया और नहा धो कर बस मैं उसके सपने देखने लगा और मैने उसे फिर फोन में बात करके उसे फिर से बुलाया इस बार और कहीं नहीं मेरे घर में मैने बुलाया था क्योंकि मेरे घर में कोई भी नहीं था सब लोग बाहर घूमने जाने वाले थे। अब दोस्तो मुझे दीजिये इजाजत। मैं ये कणिका की अधूरी कहानी आप को अगले भाग में सुनाउंगा। ANtarvasna

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