Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मैं नवीन हूँ। मेरे परिवार में हम चार Hindi Sex Stories लोग हैं, मैं, मेरी दो बहनें बड़ी पूनम और छोटी राखी और मेरी माँ गीता। मेरे पापा की मौत आज से दो साल पहले हो चुकी थी। मेरी छोटी बहन मुझसे दस माह छोटी और बड़ी बहन एक साल बड़ी है। हम लोगों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। पिछले साल हमने सफारी गाड़ी ली थी जो हमारे गैराज में खड़ी रहती थी। गैराज का एक गेट मेन-गेट की तरफ और दूसरा घर के अन्दर खुलता है। हमारा घर चारों ओर से बंद है जिसकी वजह से कोई हमारे घर में नहीं देख सकता।
एक दिन माँ और बड़ी बहन को एक शादी में जाना था सो वो दोनों सुबह तैयार होकर शाम तक आने का कह कर चली गई। हमारे कॉलेज में भी खेल चल रहे थे इसलिए मैं भी शाम तक आने का कह कर अपने स्पोर्ट्स जूते पहन कर चला गया। कॉलेज में आते ही सबसे पहले हमारा ही मैच था और २ घंटे में ही हमारा मैच ख़त्म हो गया और मैं जूते बदलने के लिए घर आ गया।
जब मैं घर पहुंचा तो जैसे ही मैं घण्टी बजाने को था कि मुझे एक आह की आवाज़ सुनी जो गैराज में से आ रही थी। मैं बिना घण्टी बजाये अन्दर आ गया और गैराज की तरफ देखा तो अन्दर वाला गेट खुला था और गाड़ी खड़ी थी। जैसे ही मैं और आगे गया, मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। राखी अपनी सलवार कमीज उतारे सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही हैंड ब्रे़क के सिरे पर बैठी थी जो उसकी चूत के अन्दर था। मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगी देखा था और वो भी राखी, अपनी बहन को !
मेरा लंड खड़ा हो गया। राखी उसके ऊपर नीचे हो रही थी जिससे कभी वो उसकी चूत में जाता और कभी बाहर निकलता। तभी घण्टी बजी और मैं अपने कमरे की तरफ चला गया। राखी गाड़ी में से बाहर आई, पूछने लगी- कौन है?
तभी बाहर से आवाज आई- मैं पूनम हूँ।
राखी वैसे ही ब्रा पेंटी में ही गेट खोलने चली गई। जैसे ही पूनम अन्दर आई, राखी उससे लिपट गई और उसके होठो को चूमना शुरू कर दिया तो पूनम बोली- यह क्या कर रही है तू ?
तो राखी ने कहा- वही जो रोज रात को करते हैं नवीन के सोने के बाद।
पूनम कहने लगी- वो तो रात को करते हैं दिन में तो नहीं।
राखी- क्यों दिन में क्या होता है, आज तो घर पर कोई नहीं है, माँ भी शाम को आएगी और नवीन भी अभी नहीं आएगा, आज तो अभी करेंगे।
और वो पूनम के स्तन दबाने लगी, जिससे उसे भी मस्ती चढ़ गई और वो भी उसे चूमने लगी। मुझे पता नहीं था कि वो दोनों रात एक दूसरी की प्यास बुझाती हैं मेरे सोने के बाद ! क्यूंकि हम तीनों एक ही कमरे में सोते हैं।
पूनम- यार ! काश कोई लड़का हमारे साथ होता तो कितना मजा आता !
राखी- अरे कोई लड़का क्यों ? हमारा नवीन ही क्यों नहीं?
पूनम- अरे वो तो हमारा भाई है ! वो हमें थोड़े ही चोदेगा !
राखी- क्यों नहीं चोदेगा ? क्या उसका लंड नहीं है ? मैंने कई बार देखा है उसका बाथरूम में से ! बहुत बड़ा है !
मैं उनकी बातें सुन कर धीरे से बाथरूम की तरफ चल पड़ा क्योंकि मुझ से अब रहा नहीं जा रहा था जैसे ही मैं बाथरूम में पंहुचा, राखी पूनम से बोली- चल बाथरूम में चलते हैं, साथ नहायेंगे !
यह सुनते ही मैं बाथरूम में परदे के पीछे छुप गया और वो दोनों वहाँ आ गई, दोनों नंगी थी और एकदम गोरी चिकनी !
वो दोनों टब में बैठ गई और एक दूसरे की चूत को मसलने लग गई, कभी स्तन मसलती कभी चूत में ऊँगली करती !
राखी- अगर नवीन भी हमारे साथ मिल जाये तो हमें न तो देर रात तक जागना पड़ेगा और हमारे लंड लेने की भी जरुरत पूरी हो जायेगी। मैं तो उसे पटाने के लिए आज रात से ही कोशिश शुरू कर दूंगी। कभी नींद के बहाने उसके ऊपर हाथ रखूंगी कभी टांग, कभी उसके लंड पर हाथ रखूंगी।
पूनम- तो फिर मैं भी उसे पटाने की पूरी कोशिश करुँगी पूरी रात और दिन में भी, पर ध्यान रखना कहीं माँ को पता न चल जाये। अरे यह क्या कर रही है तू? जरा जोर से उंगली डाल चूत के अन्दर पूरी डाल दे ! आह ! बहुत मजा आ रहा है ! ओ नवीन ! मैं झड़ने वाली हूँ ! आह ! जल्दी कर !
राखी- और कैसे करूँ? पूरी तो दे दी है ! अब तो नवीन ही दे सकता है आगे ! मेरी चूत में भी पूरी डाल दे ! आह मेरा भी निकलने वाला है ! आह ! आह ! ऊउऊ डाल दे पूरी ! दो डाल दे !
मेरा भी अपने आप ही निकलने वाला हो गया था उनकी मस्त चूत देख कर और बातें सुन कर !
कुछ देर में वो दोनों चली गई और टीवी देखने लग गई। मैं भी अपना माल निकाल कर अपने कमरे में आ गया और सो गया। मुझे सपने में भी उनकी बातें सुन रही थी। मैं कुछ देर बाद बाहर चला आया और उन दोनों के बीच में बैठ गया। मेरी टाँगें उन दोनों की टांगो के साथ लग गई और मैंने पूनम से रिमोट माँगा तो उसने पूछा- नवीन तुम कब आये?
मैंने उससे कहा- मुझे आये हुए एक घंटा हो गया !
तो उन दोनों का चेहरा शर्म से लाल हो गया।
पूनम- तो अब तक कहाँ थे?
मैंने कहा- अपने कमरे में सो रहा था !
मैंने उससे दुबारा रिमोट माँगा तो वो बोली- मेरा सीरियल आ रहा है !
तो मैंने उसे छूने के लिए उसके हाथ से रिमोट छीनना चाहा पर वो थोड़ा पीछे हट गई और मेरे हाथ उसके वक्ष पर लग गए। उसने मेरी तरफ तिरछी नजर से देखा तो मैंने अपने हाथ हटा लिए और ऐसे दिखाया कि जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।और दोबारा उठ कर उसकी तरफ बढ़ा तो वो और पीछे सरक गई। जब मैंने उस पर झपटी मारी तो उसने रिमोट राखी की तरफ फ़ेंक दिया। जैसे ही में उसके ऊपर गिरा तो उसने हटने की कोई कोशिश नहीं की और मैं उसके ऊपर गिर गया। मुझे समझ में आ गया कि वो मुझे पटाना चाहती है इसलिए मैं भी उसके ऊपर से हटा नहीं तो उसने मुझे थोड़ा सा धक्का दिया जिससे मैं उसे पकड़े हुए उसके साथ ही गिर गया। वो मेरे ऊपर थी जिससे उसके स्तन मेरे सीने से टकरा रहे थे। उसने अब भी उठने की कोई कोशिश नहीं की। मैंने उसे उठाने के बहाने उसके दोनों स्तन पकड़ लिए और उसे अपने ऊपर से उठा दिया।
वाह क्या नरम गरम स्तन थे !
और खुद भी उठ कर बैठ गया।
राखी ने रिमोट अपने टॉप के नीचे ब्रा में छुपा रखा था। मैंने जब राखी से रिमोट माँगा तो उसने कहा- मेरे पास रिमोट नहीं है !
तो मैंने उससे कहा- मुझे पता है कि रिमोट कहाँ है, तू मुझे अपने आप दे दे, वरना मैं छीन लूँगा।
उसने कहा- मेरे पास नहीं है ! अगर है तो तुम छीन लो !
और अपने दोनों हाथ हवा में उठा दिए, जिससे मुझे रिमोट उसके टॉप में साफ दिख गया। मैंने भी उसके स्तन छूने थे इसलिए उससे दोबारा रिमोट नहीं माँगा और सीधा उसके पास आकर उसके टॉप में हाथ डाल दिया। राखी ने मेरी तरफ देखा पर कहा कुछ नहीं ! बस थोड़ा सी पीछे हट गई। मैंने अपना हाथ उसके टॉप के और अन्दर तक डाल दिया और मेरे हाथ उसके स्तनों पर लगे। जैसे ही मेरे हाथ उसके बूब्स पर लगे, पूनम ने पीछे से मुझे धक्का दे दिया और मेरे ऊपर गिर गई जिससे राखी मेरे नीचे और पूनम मेरे ऊपर और मेरा हाथ राखी के टॉप के अन्दर था, जिसे पूनम ने रिमोट पकड़ने के बहाने ऊपर से पकड़ लिया और मेरा हाथ राखी के बूब्स पर दब गया।
पूनम ने मेरा हाथ ढीला छोड़ कर दोबारा उसके बूब्स पर दबा दिया जिससे राखी के मुँह से सिसकारी निकल गई। जब मैंने दोबारा रिमोट पकड़ कर हाथ बाहर निकलना चाहा तो पूनम ने एकदम मेरा हाथ राखी के बूब्स पर दबा कर और साथ ही उसके टॉप को पकड़ कर बाहर खींचा तो राखी का टॉप ऊपर से फट गया और उसके बूब्स बाहर आ गए।
वो तो आँखें बंद करके लेटी थी इसलिए उसे पता नहीं चला और न ही पूनम ने उसे बताया उसके बूब्स मेरे सामने थे।
और मैंने उन्हें देखते हुए पूनम की तरफ देखा तो उसने आँखों के इशारे से पूछा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने राखी के बूब्स की तरफ हाथ कर दिया तो पूनम ने राखी के एक बोबे को पकड़ कर मसल दिया जिससे उसके मुँह से आह निकल गई। पूनम ने राखी के टॉप को पकड़ कर पूरा फाड़ दिया तो उसने आँखे खोली और उठ कर खड़ी हो गई जिससे उसका फटा टॉप नीचे गिर गया और बूब्स बाहर निकल आये।
उसने हमसे पूछा- टॉप किसने फाड़ा?
पूनम ने मेरा नाम ले लिया। राखी अपने नंगे बूब्स में ही मेरे पीछे भागी।
मैंने उससे कहा- मैंने नहीं, पूनम ने यह सब किया है।
राखी- बूब्स तो तुम ही मसल रहे थे, तो पूनम ने कैसे किया है? सीधे क्यों नहीं कहते कि तुम्हें मजा आने लगा था और तुमने मेरे बूब्स देखने और चूसने के लिए मेरा टॉप फाड़ दिया। मुझसे कह देते तो मैं उतार देती, पर फाड़ क्यों दिया ? मेरा नया टॉप था !
पूनम- हाँ राखी ! नवीन ने ही तुम्हारे बूब्स मसलने के लिए तुम्हारा टॉप फाड़ दिया। तुम मुझ से कह देते तो मैं अपना टॉप उतार देती ! तुम्हारे लिए क्या हम अपने कपड़े भी नहीं उतार सकते ! क्या तुमसे अपने बूब्स नहीं मसलवा सकते ! जिन्हें आज नहीं तो कल कोई और मसलेगा !
और यह कहते हुए पूनम ने भी अपना टॉप उतार दिया और अपने बूब्स मेरी तरफ कर के खड़ी हो कर बोली- लो तुम्हें मसलना है तो मसलो ! चूसना है तो चूसो ! पर मैं अपना टॉप नहीं फड़वाना चाहती !
राखी मेरे पास आकर बोली- डरो नहीं ! माँ शाम से पहले नहीं आएगी ! और अपना एक बूब मेरे हाथ से लगा दिया।
उन दोनों के बूब्स देख कर मैंने अपने लंड पर हाथ लगाया जो अब पैन्ट फाड़ने के लिए तैयार था।
पूनम- नहीं उसे हाथ मत लगाओ उसे हम हाथ लगायेंगे।
मैंने राखी के बूब्स मसलते हुए कहा- हाथ लगाना है तो लगाओ ! मुझे भी अपनी पैन्ट नहीं फ़ाड़नी !
और फिर वो दोनों हंस पड़ी। राखी ने आकर मेरी पैन्ट का हुक खोल दिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और चूसने लगी। मैं भी अपना लंड आगे निकल के राखी के बूब्स चूस रहा था। राखी ने मेरी शर्ट उतार दी, मेरे होंठों से अपने होंठ लगा के चूसने लगी। मैंने भी उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए। पूनम मेरा लंड छोड़ कर मुझे सोफे की तरफ खींचने लगी और हम तीनों सोफे पर आ गए। मैं राखी के होंठों और बूब्स को चूस रहा था और पूनम मेरे लण्ड को थोड़ी देर चूसने के बाद मेरे लंड के ऊपर बैठने की कोशिश करने लगी। पर लंड उसकी नई चूत होने के कारण अन्दर नहीं जा रहा था।
मैंने राखी को हटा कर पूनम की चूत पर अपना हाथ रख के उसे सीधे लेटने के लिए कहा तो वो सीधी लेट गई। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगा कर जोर से धक्का मारा तो लंड की टोपी उसकी चूत में चली गई और उसकी जोर से चीख निकल गई। पूनम पीछे हटने लगी तो मैंने आगे से उसे पकड़ते हुए राखी से पूनम को पकड़ने के लिए कहा तो उसने पीछे आकर उसे पकड़ लिया और उसके बूब्स मसलने लगी। कुछ देर बाद मैंने जब दूसरा धक्का मारा तो लंड आधा चूत में चला गया। पर इस बार पूनम की चूत में से खून निकल आया और उसके आंसू भी निकल गए।
पूनम के आंसू और खून देख कर राखी भी घबरा गई पर मैंने उसे समझाया- पहली बार ऐसा होता है !
और मैंने एक दो धक्कों में अपने पूरा लंड पूनम की चूत में डाल दिया और थोड़ी देर रुक कर धक्के लगाने लगा तो पूनम भी मस्त हो गई और मेरा साथ देने के लिए नीचे से अपनी गांड उछालने लगी। जब मैंने जोर जोर से पूनम की चूत में धक्के लगाये तो वो अपने परम आनन्द पर पहुंच गई और निढाल हो गई।
फिर राखी ने मुझ से कहा- अब इसे छोड़ दो और मेरी चूत में डालो !
तो मैंने लंड पूनम की चूत में से निकल लिया और राखी को सीधा सोफे पर लिटा कर अपने खून से भरे लंड को उसकी चूत पर रख कर धक्का लगाया तो फ़च की आवाज के साथ उसकी चीख निकल गई। मैंने तभी दूसरा धक्का भी लगा दिया और उसकी चूत से खून की धार निकल के सोफे पर पड़ने लगी। कुछ देर मैं ऐसे रुक उसके बूब्स मसलने लगा तो थोड़ी देर में ही उसका दर्द ठीक हो गया और मैं धक्के लगाने लगा। वो भी जोर जोर से मेरा साथ देने लगी। उसके निप्प्ल भी बुरी तरह से कड़े हो गए थे। मुझे लगा कि अब मेरा पानी निकलने वाला है।
तभी राखी जोर जोर से धक्के लगाने लगी और फिर कांपती हुई शांत हो गई।
मैं भी जोर जोर से धक्के मारता हुआ राखी की चूत में शांत हो गया।
फिर हम आधे घंटे तक वहीं सोफे पर पड़े रहे और जब मैं उठ कर बाथरूम की तरफ चला तो मैंने देखा कि उन दोनों से उठा भी नहीं जा रहा था। Hindi Sex Stories
प्रिय मित्रो आप सब को मेरा नमस्कार !
मैं राम,
मुझे उम्मीद है मेरी कहानी “बायलोजी की टीचर के साथ Antarvasna सेक्सोलोजी” आप सब को पसंद आई होगी, प्लीज़ आप मुजे अपनी राय भेजना मत भूलिएगा.
यह उन दिनों की बात है जब मैं बारहवी क्लास में पढता था, मैं मेरी मौसी के यहाँ रहता था क्योकि उनका घर शहर से नजदीक भी था और 2 मंजिला था.
मेरी मौसी की दो लड़कियां थी, दोनों ही बड़ी सेक्सी थी. सोनिया जो मुझसे 2 साल बड़ी थी वह कॉलेज में थी और दूसरी सिया वह दसवीं क्लास में थी, हम दोनों एक ही स्कूल में थे.
हर रोज साथ में आना-जाना, खेलना, पढाई में उसकी मदद करना, यह सब मिला के हम दोनों में अच्छी पटती थी, सिया को कभी भी बुरी नजरो से नहीं देखा, सिया मेरी बहुत इज्ज़त करती थी और मैं हमेसा उसको खुश रखता था, वो जो मांगती वो मैं उसे ला देता था तो खुशी से मेरे गले लग जाती या मुझे चूम लेती थी।
एक दिन उसने मुझे कहा भइया आप मुझे मेरी बर्थडे पर क्या गिफ्ट दोंगे ?
मैंने कहा तुझे जो भी चाहिए, हर साल की तरह इस साल भी ला दूंगा. तो उसने कहा इस बार आप मुझे आप की पसंद की गिफ्ट देना,
मैंने कहा- ठीक है जैसी तेरी मर्जी।
अगले दिन जब स्कूल जाने का टाइम हो गया था लेकिन सिया दिख नहीं रही थी, तो मैंने उसे आवाज़ लगाई लेकिन कोई जवाब न मिला तो मैं उसे देखने के लिए उसके कमरे मैं गया, दरवाजा अन्दर से खुला ही था और मैंने नोक भी नहीं किया, सीधा अन्दर ही चला गया, लेकिन जो दृश्य मैंने देखा…मेरी साँस रुक गई.
सिया एकदम बे ख़बर सी बेड के उपर बैठ के उसकी ब्रा का हुक ठीक करने में मशगूल थी, उसके तन का उपरी हिस्सा बिल्कुल नंगा था, हाय का नजारा था, उसके इस रूप को देखा तो मेरे अन्दर का जानवर जग उठा, क्या मस्त बूब्स थे…जैसे मोसंबी को काट के लगा दिए हो, मुंह में पानी आ गया लेकिन क्या करे…
मैंने वहां ठहरना उचित न समझा जैसे जाने के लिए मुडा तो उसका ध्यान मेरी ओर गया, मुझे देख कर वो शर्म से कांप गई…अपने आजाद कबूतरों को हाथों से छिपाने लगी, और मेरी पीठ करके खड़ी हो गई ..पूछा यहाँ क्या कर रहे हो भइया…
मैंने कहा स्कूल के लिए देर हो रही थी…आवाज़ दी लेकिन जवाब नहीं मिला तो तुझे ढूंढते हुए यहाँ आ गया…
उसने कहा ठीक है आप यहाँ से जाओ मैं तैयार हो के 2 मिनट में आती हूं। मैं बाहर तो आ गया लेकिन दिल अन्दर ही छोड़ आया.
ऐसे भी देर हो गई थी…स्कूल बस भी चली गई होगी करके मैंने मौसाजी से उनकी बाइक मांग ली.
सिया को लेकर मैं भी स्कूल की ओर चल दिया..
स्कूल आने तक वो एक शब्द भी नहीं बोली तो मुझे लगा सिया मुझसे नाराज़ हो गई है.
पूरा दिन स्कूल में दिल नहीं लगा…बार-बार सिया के बूब्स दिखाई दे रहे थे…राम को जब घर लौट रहे तो रास्ते में मैंने पूछा तुम मुझसे नाराज़ हो तो उसने कहा नहीं तो…
तब मैंने कहा बोलती क्यों नहीं हो, तो वो कहने लगी शर्मिन्दा हूँ, मैंने कहा किस बात के लिए तो कहने लगी की सुबह वाली बात से…मेरी ही गलती थी मुझे दरवाज़ा अन्दर से बंद करना चाहिए था…
मैंने कहा उसमे कौन सी बड़ी बात है मैंने ही तो देखा है किसी और ने नहीं, और मैं थोड़े ही किसी को बताऊंगा. ऐसा कहने पर उसने मुझे पीछे से जोर से जकड लिया और बोली थेंक यू भइया.
उस रात मैंने मुठ मार के ही काम चला लिया. अब मेरा सिया को देखने का नजरिया ही बदल गया. हर बार उसे बूब्स, गांड, चूत, कोमल होंठ के बारे में सोचने लगा. अब मैं हर मौके का फायदा उठा लेता था, कभी उसे चूतड़ को हाथ लगा देता कभी बस की भीड़ में बूब्स पर भी.
दो हफ़्ते बाद उसका जन्म दिन आया तो मैं उसके लिए अच्छी घड़ी लाया जो उसे बहुत पसंद थी. जब मैं उसके रूम में गिफ्ट देने के लिए गया तो वो स्कूल का बेग रेडी कर रही थी.
मैंने उसे गिफ्ट दिया तो उसने झट से मेरे सामने ही खोला और थेंक यू कहते हुए मु्झसे लिपट गई मैंने भी उसे बाँहों में भर लिया और उसके निप्पल को अपनी छाती पर महसूस करने लगा, तब उसने कहा भइया यह तो मेरी पसंद का है और आपने मुझे आप की पसंद का गिफ्ट देने का वादा किया था, मैं इस मौके को कैसे चूकता, मैंने कहा वो भी दूंगा लेकिन तु्झे पसंद न आया तो? तो वो बोली आप की हर पसंद मेरी पसंद, मैंने कहा वादा करो पसंद न आए तो नाराज नहीं होगी और मेरा गिफ्ट मुझे वापस कर दोगी…उसने कहा ठीक है…
तो मैंने कहा- अपनीआँखे बंद करो. जैसे ही उसने आँखे बंद की मैंने उसे अपने पास खींच लिया और उसके गुलाब की कलि जैसे होठों को चूम लिया. वो एकदम पीछे हट गई और बोली यह क्या कर रहे हो…मैंने कहा यही तो गिफ्ट है…मैंने पूछा पसंद आया…उसने कहा नहीं…तो मैंने कहा ठीक है मुझे वापस कर दो…उसने पूछा कैसे…
मैंने कहा जैसा मैंने दिया…इस बार उसका रिस्पोंस अलग था…झट से मेरे लग गई और बोली भइया आप बड़े वो हो…मुझे पसंद है…मैंने कहा ठीक है और देता हूं कह के अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और धीरे धीरे चूसने लगा
…उसे भी अच्छा लगने लगा इसलिए वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी…अब हम दोनों एक दूसरे को जम के किस कर रहे थे…मेरा लंड खड़ा हो गया था और बेकाबू हो रहा था, मैंने एक हाथ से उसको अपने साथ चिपका के रखा था और दूसरा हाथ उसके कड़क बूब्स को सहलाने लगा…उसकी सांसे तेज होने लगी…तभी मैं अपना हाथ उसकी गांड पर रख के हलके से दबाने लगा और उसकी चूत के साथ अपने लंड को उपर से ही रगड़ने लगा…तभी हमने बाहर से मौसी की आवज़ सुनाई दी…हम दोनों ने अपने आप को ठीक किया और स्कूल जाने की तैयारी करने लगे.
राम को जब वापस स्कूल से आए, फ्रेश हुए…खाना खाया…सब साथ बैठ के बातें करने लगे…
करीब 8 बजे मैंने कहा मुझे एक इम्पोर्टेन्टप्रोजेक्ट पे काम करना है जो मुझे 10 दिन में स्कूल में जमा करनाहै. यह कहके उपर चला गया, मेरा कमरा दूसरे फ्लोर पर था जहाँ मेरे अलावा कोई नहीं सोता था।
दो और कमरे थे लेकिन वो गेस्ट रूम थे.
10 बजे सब सो गए, मेरा ध्यान पढ़ाई में कम और सिया के इंतजार में ज्यादा था. 11.30 को सिया कॉफी के दो कप ले के उपर आई. उसने हल्के पिंक कलर की नाइटी पहन रखी थी और कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी. हमने कोफ़ी पी और और चेक कर लिया कोई जाग तो नहीं रहा है.
अब सुबह तक हमें कोई खतरा नहीं था… मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया…
सिया चेयर पर बैठ के कुछ पढ़ने का नाटक कर रही थी, मैंने पीछे से जाके उसको दबोच लिया…
उसने कोई विरोध नहीं किया…मैं उसके दोनों बूब्स को दबाने लगा और उसकी गर्दन और कान को किस करने लगा.
वो गरम हो रही थी, मेरा लंड भी कड़क हो गया था. मैंने उसकी नाइटी उतार दी और उसकी ब्रा भी निकाल दी निकर उसने पहने नहीं थी, मैंने भी सारे कपड़े उतार दिए।
हम दोनो एकदम नंगे हो गये, मैंने धीरे से उसका मुंह अपनी ओर किया और उसके रसीले होंठ चूसने लगा.
वो भी मुझे बराबर का साथ दे रही थी, मैं कोई जल्दबाजी करना नहीं चाहता था.
एक हाथ से में उसके बूब्स को सहलाने लगा और दूसरे से उसकी गांड को दबा रहा था.
अब धीरे धीरे उसके बूब्स को चूसने लगा उसके मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज़ आ रही थी, अब मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसके बूब्स को चाटने और चूसने लगा साथ ही एक हाथ उसकी कुंवारी चूत पर रख दिया और हलके से सहलाने लगा, सिया एकदम उत्तेजित हो उठी…पहली बार किसी मर्द ने उसकी चूत को छुआ था.
अब मैं उसे फ्रेंच किस करने लगा और साथ ही उसकी चूत से खेल रहा था…जैसे ही मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली उसने मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन मैं नहीं रुका मैं उसकी चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा…
उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा साथ ही उसके निपल्स के साथ खेल रहा था.
धीरे धीरे मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में अन्दर डाली उसका वर्जिन ज्यूस पीने कान कुछ और ही मज़ा था, अब मैं जोर से उसकी चूत को चाटने लगा, उसने अपना पानी छोड़ दिया, मुझे उसका पानी चाटने में बहुत मज़ा आया, मेरा भी सब्र का बाँध टूटा जा रहा था। आधा घण्टा बीत चुका था इस चुम्मा चाटी में.
अब मैंने कहा- मेरा लंड चूसोगी?
पहले तो उसने मना किया फ़िर मान गई तो हम 69 पोसिशन में आ गए, मेरे लंड को देखते ही वो घबरा गई, मैंने कहा डरो मत धीरे धीरे जितना हो सके उतना लो और जब मेरा ज्यूस निकले तब उसे पी जाना ताकि चुदाई के वक्त तुझे ज्यादा ताकत मिलेगी…
मैं ज्यादा नहीं टिक सका क्योंकि उसको लंड चूसना नहीं आता था, 5 मिनट में मैं उसके मुंह में झङ गया, वो मेरा सारा पानी पी गई।
…अब मैंने उसकी बुर में अपनी ऊँगली डाल दी और चाटने लगा थोडी देर में मैं तैयार हो गया, मेरा ९” का मूसल सिया की चूत से मिलने को बेकरार था।
वो भी कह रही थी भइया ! डालो ना ! मुझसे रहा नहीं जाता…!
मैं उसके दो पैर के बीच आ गया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया, दोनो पैरों को फैला दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा…उसकी सिसकारी बढ़ने लगी…
मैंने अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुंह पर सेट किया और एक हलका सा धक्का मारा, मेरा सुपाडा सिया की चूत में घुस गया वो दर्द के मारे चीखने लगी…निकालो.. निकालो… .मर गई…लगी…निकालो…निकालो…मर गई…
मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया…
थोडी देर बाद उसके पैर ढीले होने लगे तो मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो गया है, एक और धक्का मारा तो मेरा लंड उसके सील तक पहुँच गया, मैंने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा, सिया को भी मज़ा आने लगा वो भी नीचे से गांड उठा के साथ देने लगी, और मौका देखते ही उसके मुंह पे अपना मुंह रख दिया और एक जोरदार झटका मारा…
उसकी सील टूट गई…कली से फ़ूल बन गई मेरी सिया…उसके मुह से चीख निकल गई…आँखों से आंसू निकलने लगे…दर्द से छटपटाने लगी, लेकिन मैंने आव देखा ना ताव, तीन चार और झटके मार के रुक गया 6″ से ज्यादा मेरा लंड उसकी बुर में जा चुका था…
थोडी देर बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो उसने गांड हिलानी चालू कर दी मैं समझ गया कि अब सब ठीक है…मैंने धीरे धीरे अपना लंड उसकी खून भरी चिकनी चूत में पेलना चालू किया
…आअह…आ.आआ.ईई.म्म्म्म्म्म्म्म्म्मर ग..गग..आआईई यस्…ओह…फ़िर मेरी स्पीड बढ़ने लगी…मेरा पिस्टन जोर से अन्दर बाहर हो रहा था…एक और झटका मारा, पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया…
वो भी गांड उठा उठा के मेरा साथ अच्छे से दे रही थी…भइया चोदों मुझे…और जोर से…आह…आह…अआः…आह…ऊईई माँ..फक मी…ओह यस्…वो अब तक तीन बार झङ चुकी थी…उसकी गांड और जांघ वीर्य से पिचपिचा रही थी…पूरे रूम में चुदाई का संगीत बज रहा था
पच..पच..फच…फचक…फचक…ओह…ओह…ओह..आ…आ..आया.इ..इ..इ..ई..ओ..ओ..ओ…मैं अब झड़ने वाला था, रफ्तार तेज हो गई…सिया मैं झड़ने वाला हूं…मैं भी झड़ने वाली हूं…ओह माय…ओह मैं गई और मैं भी…20-25 झटके मार के मैं झड़ गया उसकी चूत में ही।
थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे हम दोनो, पसीने से तर थे…लंड उसकी चूत से निकला तो पूरा खून से रंगा था पूरी चादर खून और वीर्य से भरी थी…सिया ठीक से चल नहीं पा रही थी.बाथरूम ले जा कर हम दोनो ने साफ किया, सिया को पेनकिलर दिया, ताकि दर्द थोड़ा कम हो सके।
फ़िर मैंने उसे पूछा कैसा लगा मेरा गिफ्ट…हमेशा की तरह वो मुझ्से चिपक गई और मेरे होठों को चूमते हुए बोली बेस्ट ऑफ़ द बेस्ट… आई लव यू भइया…और अपने अपने रूम में जा के सो गए… Antarvasna
मैं आज एक सच्ची कहानी Hindi Sex Stories बताने जा रहा हूं !मैं जब नौकरी कर रहा था तो एक क्रेडिट कार्ड कम्पनी से फ़ोन आया। एक लड़की बोल रही थी कि सर आप क्रेडिट कार्ड बनवा लो।
मैंने कहा- बनवा लूंगा तुम मुझ से डोक्यूमेंट ले जाओ।
जब मैं उससे मिला तो देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया क्योंकि वह बहुत खूबसूरत थी। मैंने उसे डोक्यूमेंट दे दिए और उसका मोबाईल नम्बर ले लिया। हम दोनों में आपस में बातें होने लग गई, मैं उसके घर जाने लग गया। मैंने उसका और उसकी मम्मी का दिल जीत लिया।
एक दिन जब मैं उसके घर गया तो वो घर पर अकेली थी। उसने मुझ अपने कमरे मे बैठाया और पानी लेने चली गई। उसने नीले रंग का गाऊन पहन रखा था। उसके बूब्स बड़े बड़े थे। उसे देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
मैंने उससे पूछा कि उसका कोई बोय-फ़्रेन्ड है क्या?
उसने कहा- नहीं !
तो मैंने कहा- तुम मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन जाओ ! मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- जान ! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !
वह शरमाई तो मैंने देर नहीं की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी बाहों में भर लिया।
उसने कहा- छोड़ो मुझे ! कोई आ जाएगा !
मैंने कहा- कोई नहीं आएगा ! मैं उसके बूब्स दबाने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा। मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में दे दी। मैंने उसका गाऊन उतार दिया, उसने काली ब्रा, पैन्टी पहन रखी थी। मैंने उसके बूब्स को ब्रा से आज़ाद कर दिया और उसकी छोटी छोटी चुचूक चूसने लगा। वह पागल हो गई और कहने लगी- और करो और करो !
मैंने उसकी पैन्टी उतार दी और उसे पूरा नंगा करके बेड पर लिटा दिया। अपने सारे कपड़े उतार कर मैंने अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया। वह उसे दबाने लगी। मैं उसकी चूत को चूसने लगा तो उसने कहा- और चूसो ! इसकी प्यास बुझा दो !
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली तो वो सिसकारी भरने लगी। अभी उसकी चूत की सील नहीं टूटी थी। वो बार बार कह रही थी-इसे चूत में डालो !
तो मैंने कहा- इसे क्या कहते हैं? इस डंडे को ?
तो उसने कहा- इस लण्ड को मेरी चूत में डालो !
मैंने लन्ड उसकी चूत पर रख कर जैसे ही थोड़ा धक्का दिया तो वो चिल्लाई। मैंने उसका मुँह बंद करके जोर का झटका दे कर पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। वह छटपटा रही थी। मैं धीरे धीरे लन्ड को उसकी कसी हुई चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।
अब उसे भी मज़ा आने लगा था और अब वो नीचे से अपने कूल्हों को उठा रही थी। अब मैं उसकी भोंसड़ी को जोर जोर से चोद रहा था। उसे बहुत मज़े आ रहे थे। उसकी चूत से पानी आने लगा, वो झड़ गई थी।
मैंने देखा कि उसकी चूत से खून आ रहा था। मैंने कहा- जान ! पहली बार चुदवा रही हो इसलिए खून आ रहा है।
मैं जोर जोर से झटके दे रहा था, अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लण्ड चूत से निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और झड़ गया। वो मेरा सारा वीर्य गटक गई। हम दोनों को नींद आ गई।
थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो देखा वो मज़े से नंगी सो रही है। फ़िर मैंने उसे दो बार और चोदा।
अब जब भी मौका मिलता है, मैं उसे चोद देता हूँ Hindi Sex Stories
मैं रीता हूँ मेरे पति का नाम Antarvasna अतुल है। मेरे पति चाहते हैं कि मैं उनका लौड़ा चुसूं और पूरी नंगी होकर सेक्स में तरह तरह के खेल करूँ। इस बात को लेकर अक्सर मेरी उनसे लड़ाई हो जाती थी। मुझे लौड़ा चूसने से बड़ी चिढ़ थी मुझे लौड़ा चूसना बहुत गन्दा काम लगता था।
एक बार लड़ाई तेज हो गई, अतुल बोले- कुतिया, तू लौड़ा नहीं चूस सकती तो यहाँ से भाग जा!
मैं भी लड़ कर अपने घर आ गई। मैंने अपनी माँ को बता दिया कि अब मैं घर नहीं जाऊँगी। मेरी माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा। मेरे भैया 3-4 दिन के लिए घर से बाहर थे इसलिए रात में मैं भाभी के कमरे में सोने चली गई।
मैं और भाभी रात को दस बजे बिस्तर पर आ गई। भाभी ने साड़ी उतार दी। वो अब पेटीकोट और ब्लाउज़ में थीं। उन्होंने पेटीकोट उठा कर अपनी चड्डी भी उतार दी। ब्रा वो पहने नहीं थीं। मैं एक मैक्सी और चड्डी पहने थी।
भाभी ने मुझसे पूछा- ब्लू फिल्म देखोगी क्या?
मैं पिछले दस दिन से नहीं चुदी थी, मेरी चूत में खुजली हो रही थी।
मैं बोली- देख लूंगी!
भाभी ने एक सेक्सी हिंदी ब्लू फिल्म लगा दी। फिल्म में कुछ देर बाद लड़कियों ने लड़कों के लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिए।
मैं बोली- भाभी यह काम तो केवल रंडियाँ ही कर सकती हैं!
भाभी मुस्करा कर बोली- शुरू शुरू में तो गन्दा लगता है लेकिन एक बार चूस लो तो फिर बार बार लंड चूसने का मन करता है! तेरे भैया तो दिन में एक बार लंड चुसवाते ही हैं।
मैं बोली- ऊहं! मैं तो कभी नहीं चूस सकती!
कुछ देर बाद लड़की की चूत में लौड़ा घुसा कर लड़के चोदने लगे। कमरे में फिल्म की सेक्सी आवाज़ गूँज रही थी। भाभी पेटीकोट उठा कर अपनी चूत सहलाने लगीं। मेरा हाथ बार बार मेरी चूत पर जा रहा था लेकिन मैं हटा लेती थी।
भाभी मुस्करा कर मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- शरमा क्यों रही है? खुजली हो रही है तो खुजा ले! ला, मैं तेरी खुजा देती हूँ और तू मेरी खुजा दे!
भाभी ने मेरी मैक्सी खोल कर मेरी चड्डी में उंगली डाल दी और मेरी चूत खुजानी शुरू कर दी। मेरा हाथ उन्होंने अपनी चूत पर रख दिया। मैं भी उनकी चूत खुजलाने लगी। ब्लू फिल्म अपनी चरम सीमा पर थी। अब दो लड़कियों की चूत उन्हें सीधा लेटाकर 2 लड़के मार रहे थे और एक लड़का उनमें से एक लड़की को अपना लंड चुसवा रहा था। उनकी उहं उहं ओह ओह की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
मैं और भाभी बहुत गरम हो रहे थे, भाभी ने अपना पेटीकोट, ब्लाउज़ उतार दिया था। मैं भी सेक्स की गर्मी में नहा रही थी और पूरी नंगी हो गई थी। भाभी की चूत पूरी चिकनी थी। मेरी चूत पर झांटों का जंगल उग रहा था।
भाभी बोली- ननदजी, लगता है रमेश जी को जंगल में घुस कर चोदना अच्छा लगता है!
उन्होंने मेरी चूत में उंगली घुसा दी। मैंने भी उनके चूत के होटों को रगड़ना जारी रखा।
फिल्म ख़त्म हो गई थी। हम दोनों पूरी नंगी एक दूसरे से बुरी तरह से चिपकी हुई थी। मेरी चूत भाभी की चूत से पूरी छुल रही थी और चूचियाँ रगड़ खा रही थीं। हम दोनों ने एक दूसरे के होंठ चूसे और चूचुक उमेठे। थोड़ी देर बाद भाभी और मैंने एक साथ पानी छोड़ दिया उसके बाद हम दोनों सो गए।
अगली रात को हम लोग फिर साथ सोये। आज भाभी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई थीं, बोली- तेरे भैया के साथ तो मैं पूरी नंगी ही सोती हूँ! अब कल तो हम लोगों ने मौज की ही थी, आज और मौज करते हैं!
और उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा करा दिया। मेरी झांटों के जंगल पर हाथ फिरा कर भाभी बोलीं- चल, इसे साफ कर ले! फिर मजा चखाती हूँ!
और उन्होंने क्रीम लगाकर मेरी चूत पूरी चिकनी कर दी। भाभी बोलीं- आज मैं तुझे असली लंड जैसा मजा देती हूँ!
भाभी अपनी अलमारी की तरफ गईं, उन्होंने एक नकली लंड अपनी अलमारी से निकाला और बोली- यह नकली लंड है! बिल्कुल असली जैसा मजा देता है! तेरे भैया ने अमेरिका से लाकर दिया है। इसे चूत में फिट करके लड़कों की तरह औरतों को चोदा जा सकता है और अपने हाथ से भी चूत में डाल कर मजा ले सकते हैं। अब बता मैं तुझे चोदूँ या तू मुझे चोदेगी?
मैं बुरी तरह शरमा रही थी, भाभी बोली- बहुत शर्माती है? चल लेट! पहले मैं ही तुझे चोदती हूँ!
और उन्होंने अपनी चूत में लंड फिक्स कर लिया। भाभी नकली लंड लगा कर ऐसी लग रहीं थीं जैसे कोई गोरे लंड वाला चिकना लौंडा मुझे चोदने को खड़ा है। मुझे गिरा कर भाभी मेरे ऊपर लेट गईं और मेरी चूत में अपना नकली लौड़ा हाथ से पकड़ कर घुसा दिया। नकली लंड मेरे पति से मोटा था, मेरे मुँह से ऊहऽऽ मर गई! मर गई! की आवाज़ निकल गई, लेकिन मुझे साथ ही साथ मजा भी आया था।
भाभी ने मेरी चूचियाँ मलते हुए करीब दस मिनट तक नकली लंड से मुझे चोदा। उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में लंड फिक्स कर दिया और बोली- चल अब तू मुझे चोद!
मैं चोदने में शरमा रही थी, भाभी बोली- साली शरमाती बहुत है!
और वो मेरे ऊपर उछ्ल कर बैठ गईं और ऊपर उछ्ल उछ्ल कर चुदने लगीं। उन्होंने मेरे हाथ अपने बड़े बड़े संतरों पर रख लिए और बोलीं- कुतिया, इन्हें तो दबा दे!
मुझे उनके मोटे मोटे चूचे मसलने में बड़ा मजा आने लगा। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गई। उसके बाद हम दोनों पहले की तरह चिपक कर सो गई।
रात के 3-4 बजे घर में घंटी बजी, भैया बाहर से आ गए थे। मैं भी जाग गई। भाभी, मैं और भैया बातें करने लगे। थोड़ी देर में मैं सोने लगी। तभी मुझे ऐसा लगा जैसे भाभी उठकर बाथरूम में गई हों। कुछ देर बाद मैंने बाथरूम में झाँककर देखा तो मैं दंग रह गई- भाभी भैया का लंड पैंट से निकाल कर लपालप चूसे जा रही थीं। उसके बाद इंग्लिश टॉयलेट पर बैठकर भैया ने अपने लौड़े पर भाभी को बिठा लिया और कस कस कर उनकी चूचियों को मसलने लगे। भाभी धीरे धीरे चिल्ला रही थी- कुत्ते! चूत में डाल इस लौड़े को! 15 दिन से बिना चुदे पड़ी हूँ! कोई और होती तो रंडी बन गई होती! भैया ने एक झटके में लंड भाभी की चूत में घुसा दिया और भाभी चिल्ला उठीं- उईऽऽ! मर गई! फट गई! मजा आ गया! क्या घुसाया है!
भैया भाभी की घुन्डियाँ मसलते हुए बोले- रंडी, नकली लंड नहीं डाला अपनी चूत में? तुझे अमेरिका से लाकर दिया था!
लौड़े पर उछ्लती हुई भाभी बोली- अरे कुत्ते! तेरे जैसे लंड का मजा नकली में कहाँ! साले को जब तक नहीं चखा था तब तक तो कोई बात नहीं लेकिन अब तो तीन दिन नहीं चुदुं तो मन करने लगता है कि सब्जी वाले को बुलाकर चुदवा लूँ! मेरे कुत्ते, ज्यादा दिन को मत जाया कर! अगर रंडी बन गई तो तू जिम्मेदार होगा..
भाभी उनके लौड़े पर धीरे धीरे उछ्ल रहीं थीं, भैया उनकी चूचियों की घुन्डियाँ मसल रहे थे। भैया बोले- चल जरा हट थोड़ा! तेरे को पीछे से ठोकता हूँ!
भैया ने भाभी को उठा दिया। भैया उठते, इससे पहले ही भाभी ने उन्हें रोका और बोलीं- तेरा शेर बहुत सुंदर लग रहा है! इसको थोड़ा चूस लूं!
यह कह कर उन्होंने भैया का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और तेजी से आगे पीछे करके चूसने लगी। मैं हैरान थी कि मेरी भाभी इतना मस्त होकर लौड़ा चूसती हैं। भाभी इस समय ब्लू फिल्म की हिरोइन लग रही थीं। भैया का सुपाड़ा ऐसे चाट रही थीं जैसे कोई आइसक्रीम चाट रहा हो। भैया भाभी की गांड में उंगली कर रहे थे।
भैया बोले- चल कुतिया लौड़ा छोड़ और अब जरा चूत बजाने दे।
भाभी टॉयलेट की सीट पर हाथ रखकर घोड़ी बन गईं। भैया ने पीछे से उनकी चूत में लंड छुला दिया और धीरे धीरे से उनके संतरे मसलते हुऐ लंड उनकी चूत में घुसा दिया और भाभी को चोदने लगे। भाभी की ऊहं ऊह की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थीं। भैया बीच बीच में जोर से हाथ उनके चूतड़ों पर मार देते थे। कुछ देर बाद भैया ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड झड़ चुका था। भाभी खड़ी होकर भैया से चिपक गईं और उन्हें चूमती हुई बोलीं- सच, आज बहुत मजा आया!
इसके बाद मैं बिस्तर पर आकर लेट गई थोड़ी देर में भाभी भी मेरे पास आकर सो गईं। मैं सोच रही थी कि भाभी तो बहुत बदमाश हैं, लंड लपालप ऐसे चूसती हैं जैसे आइसक्रीम खा रही हों! छीः छीः कितना गन्दा काम है लंड चूसना! चुदने में तो मजा आता है लेकिन लंड चूसना? छीः छीः. मैं तो कभी नहीं चूस सकती..
शेष कहानी अगले भाग में!
आपकी उषा रांड
साथियो, कहानी कैसी लगी? Antarvasna
सुहागरात स्त्री-पुरुष के Antarvasna जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है। यह वह रात है जब कोई अपने वैवाहिक जीवन की सुन्दर इमारत खड़ी कर सकता है या अपनी नादानी से वैवाहिक जीवन को सदा के लिए नष्ट कर सकता है। यह बात उस स्थिति में पूरी तरह से सही बैठती है, जहाँ पर स्त्री को सम्भोग क्रिया के बारे में बिल्कुल अनुभव नहीं होता है।
बहुत से वृद्ध व्यक्तियों के भी दिल में एक मीठी गुदगुदी होने लगती है और पुरानी यादें एकदम से ताजी हो जाती हैं। मन में एक रोमांच सा लगने लगता है।
सेक्स से सम्बन्धित किताबों को कोई भी पुरुष या स्त्री पढ़़ते हैं तो उनका भी शरीर गुदगुदाने लगता है। कुछ युवक तो ऐसे होते हैं जिनको किताब पढ़़ने के बाद मन में यह ख्याल आता है कि सुहागरात क्या होता है? इस दिन क्या करना चाहिए? कैसे करना चाहिए? ऐसी किताबें पढ़़ने से शरीर में कामवासना की उत्तेजना भी बढ़ने लगती है। इस प्रकार की किताबें पढ़़कर स्त्री-पुरुष के मन में भविष्य के रंगीन सपने आने लगते हैं, इन सपनों में सुहागरात का भी सपना जुड़ा होता है।
विवाह के बाद जब दुल्हन को अपने घर लाते हैं तो वह उस समय अपने घर परिवार को छोड़कर आती है और पति के घर पर उसके लिए सभी व्यक्ति अपरिचित होते हैं इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि वह पहली रात पति के अलावा किसी को भी ठीक तरह से नहीं समझ पाती।
लेकिन यह भी सच है कि उस रात पति-पत्नी भी एक-दूसरे के लिए अपरिचित ही होते हैं फिर भी दुल्हन पति को इसलिए अपना समझती है क्योंकि उसके संग उसका विवाह हुआ है। जब उन्हें पहली बार एक दूसरे के करीब आने का मौका मिलता है तो वे एक-दूसरे को न केवल समझ परख लेते हैं बल्कि एक-दूसरे के प्रति मन से समर्पित भी हो जाते हैं।
हमारे देश में दुल्हा-दुल्हन की पहली रात के मिलन को अधिकतर एकांत में करवाया जाता है, इसको ही सुहागरात कहते हैं।
पति-पत्नी की यह पहली रात उनके वैवाहित जीवन के भविष्य का निर्णय कर देता है। सुहागरात में पति-पत्नी का यह पहला मिलन उतना शारीरिक न होकर मानसिक और आत्मिक होता है। इस अवसर पर दो अनजान व्यक्तियों के शरीरों का ही नहीं बल्कि आत्माओं भी मिलन होता है। जो दो आत्माएँ अब तक अलग थीं, इस रात को पहली बार एक हो जाती हैं।
सुहागरात का महत्व
सुहागरात में पुरुष को चाहिए कि वह इस बात को गांठ मार कर गुरुमंत्र की तरह याद रखें कि शादी की रात कभी भी महत्वहीन नहीं होती, छोटी से छोटी बात सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित कर सकती है। शादी की रात को पुरुष किस प्रकार व्यवहार करे, यह अधिकार उसी के निर्णय पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि प्रत्येक दूल्हे-दुल्हन के लिए इस अवसर की परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न होती हैं।
सुहागरात को लेकर पुरुषों में चिंता, भय और सोच
विवाह के दिन नजदीक आते ही कुछ युवा स्त्री-पुरुष परेशान होने लगते हैं। बहुत से पुरुष तो अपने मन में यह सोचते हैं कि सुहागरात को मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट कर पाऊँगा या नहीं? मैं अपनी पत्नी को अच्छा लगूंगा या नहीं? क्या वह मुझे पूरी तरह से अपना पायेगी या नहीं? वे यह भी सोचकर परेशान होते हैं कि यदि मैं सुहागरात को अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाया तो उसे जिंदगी भर पत्नी के ताने सुनने पड़ सकते हैं। यदि इस रात को मेरे लिंग में उत्थान नहीं आया या मैं जल्दी ही स्खलित हो गया तो पत्नी से सिर उठाकर बात नहीं कर पाऊँगा।
वह यह भी सोच-सोचकर भयभीत रहता है कि यदि पत्नी इस कारण से मुझे छोड़कर चली गई तो मैं घर वालों तथा समाज के सामने क्या मुँह दिखाऊँगा। इस प्रकार के लक्षण सिर्फ अनपढ़़ों में ही नहीं, पढ़़े-लिखे पुरुषों में भी दिखाई देते हैं। इस रात को लेकर केवल पुरुष ही नहीं परेशान रहते बल्कि स्त्री भी इससे भयभीत रहती है।
सुहागरात से पहले पुरुषों के मन में भी कई प्रकार की बातें चलती रहती हैं लेकिन उसके मन में स्त्री की अपेक्षा कुछ कम संकोच तथा भावनाएँ होती हैं क्योंकि उसके लिए सभी परिवार वाले जाने पहचाने होते हैं जबकि स्त्री सभी से अनजान होती है।
बहुत से पुरुष तो यह भी सोचते हैं कि हमारे द्वारा की गई सेक्स क्रिया से हमें शारीरिक संतुष्टि तो हो जाती है, इसलिए स्त्री को भी अवश्य ही संतुष्टि मिल जाती होगी। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि इस प्रकार के विचार बिल्कुल गलत होते हैं, क्योंकि बहुत से पुरुष सेक्स के मामले में अज्ञानी होते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि वे इस रात को अपनी पत्नी को सम्भोग करने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं कर पाते हैं। जब स्त्री में स्वयं को आनन्द देने वाला उन्माद नहीं उत्पन्न होता तब तक वह सेक्स के लिए तैयार नहीं हो सकती। उसमें सेक्स उत्तेजना जगाने के लिए पुरुष फॉर प्ले की क्रिया उसके साथ कर सकता है।
बहुत से पुरुष तो यह सोचते हैं कि यदि स्त्री सेक्स की दृष्टि से ठंडी तथा स्वभाव से ही उत्साहहीन है अथवा उसमें पुरुष के प्रति प्रेम का अभाव है तो वह उसमें उत्तेजना उत्पन्न नहीं हो सकती है। कुछ मूर्ख पति तो यह भी कल्पना कर लेते हैं कि विवाह से पहले इसका किसी के साथ सम्बन्ध बन चुका है तभी यह मुझसे सम्भोग क्रिया ठीक से नहीं कर पा रही है। ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है क्योंकि जब आप ही उन्हें ठीक प्रकार से सेक्स करने के लिए तैयार नहीं कर पा रहे हैं तो उसमें उनका क्या दोष।
बहुत से पुरुष अपनी सेक्स अज्ञानता के कारण से सुहागरात में जब वह बलपूर्वक वैवाहिक अधिकार प्राप्त करना चाहता है तो स्त्री उसके इस व्यवहार से मन ही मन दुःखी हो जाती है, बल्कि सम्भोग करते हुए भी सम्भोग का वास्तविक आनन्द नहीं उठा पाती।
सम्भोग क्रिया में स्त्री की दशा, सोच तथा भावना
लोग प्रत्यक्ष रूप से कहें या न कहें लेकिन यह सत्य है कि कम से कम 50 प्रतिशत लड़कियों को शादी से पहले ही सेक्स क्रिया के बारे में पता नहीं रहता है। लेकिन हम आपको यह बताना चाहते हैं कि माना कुछ लड़कियों को सेक्स क्रिया के बारे में अपने सहेलियों से, किताबों से, फिल्मों से तथा कई प्रकार के संचार माध्यमों से इसके बारे में पता अवश्य लग जाता है। लेकिन इसके बारे में उसे पूर्ण रूप से तभी जानकारी मिल पाती है जब वह खुद सेक्स करके देखती है। जब विवाह हो जाने के बाद स्त्री के साथ पति सम्भोग क्रिया करने की कोशिश करता है तभी स्त्री इसके बारे में ठीक प्रकार से जान पाती है कि यह क्या चीज होती है।
जब पति अपनी पत्नी से छेड़छाड़ करता है तो उसे अस्वाभाविक प्रतीत होता है क्योंकि चाहे उसकी कामवासना तेज भी हो जाए तभी वह इस रात को अपनी उत्तेजना को रोकने की पूरी कोशिश करती है, वह सोचती है कि मैं जिसे अब तक सुरक्षित रख पाई हूँ उसे मैं पहली रात ही किसी को कैसे सौंप सकती हूँ। इसलिए वह अपने पति को दो-चार बार मना करती है लेकिन जब पति पूरी कोशिश करता है तो वह उत्तेजित इसलिए हो जाती है कि यह भूख ही ऐसी है जो कुछ देर तो बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन ज्यादा देर तक नहीं।
मैं तो आपको यही बताना चाहूंगा कि सेक्स क्रिया का मजा तो तभी आता है, जब आग दोनों तरफ से लगी हो। यदि स्त्री सेक्स के लिए तैयार न हो तो उसके शरीर के अंदर सेक्स की उत्तेजना भरने की पूरी कोशिश करो और जब वह उत्तेजित हो जाए तभी उसके साथ सेक्स सम्बन्ध बनाएँ। जब आप उसे पूरी तरह से सेक्स के लिए तैयार कर लेंगे तो वह खुद ही अपने जिस्म को आपके हवाले कर देगी कि जो करना है मेरे साथ कर लो, मैं तो आपके लिए ही बनी हूँ।
जब पहली बार सेक्स क्रिया के दौरान पुरुष स्त्री की योनि में अपने लिंग को प्रवेश करता है तो उसे कुछ दर्द होता है लेकिन यह दर्द कुछ देर बाद उसी तरह से गायब हो जाता है जिस तरह से फूल को प्राप्त कर लेने पर कांटे का दर्द दूर हो जाता है। इसके बाद वह प्यार के साथ सहवास का सुख प्राप्त करने लगती है।
वैसे देखा जाए तो सुहागरात के दिन स्त्री के मन में भावनाओं का काफी ज्वर उठाता रहता है। वह अपने मन में होश संभालने से लेकर कोमल मृदुल भावनाओं को संजोती रहती है।
सुहागरात में सभी स्त्रियों में लज्जा की भावाना अधिक होती है। जिस कारण सेक्स क्रिया की बात तो दूर की बात है, आलिंगन, चुम्बन तथा स्तन आदि के स्पर्श में भी वह बाधक बनकर खड़ी हो जाती है।
उदाहारण के लिए कुछ स्त्रियाँ तो ऐसी होती हैं कि पति को प्रसन्नता से चुम्बन देती हैं तथा चुम्बन लेती हैं और खुशी से राजी-राजी पुरुष को अपने शरीर का स्पर्श ही नहीं करने देती बल्कि सारे शरीर को टटोलने की अनुमति भी दे देती हैं। कुछ स्त्रियाँ तो यह सोचकर अधिक भयभीत रहती हैं कि उसे अपने पति के सामने बिल्कुल नंगी होना पड़ेगा। स्त्री को कभी ऐसा नहीं करना चाहिए कि शुरू में ही अपने पति के सामने नंगी हो जाए क्योंकि ऐसा करने से पति के सामने ऐसी स्थिति हो जाएगी कि वह समझेगा कि यह तो बेशर्म औरत है।
कुछ स्त्रियाँ इस बात को भी पसन्द नहीं करती हैं कि पति उसके सामने एकदम से नंगा हो जाए। यदि किसी पुरुष के मन में यह चल रहा हो कि मैं एकदम से नंगा होकर पत्नी के योनि में लिंग डालकर घर्षण करूं तो ऐसा न करें क्योंकि ऐसा करने से हो सकता है कि आपके पत्नी को यह सब बुरा लगे। वह ऐसा इसलिए कर सकती है क्योंकि स्त्री कभी भी एकाएक उत्तेजित नहीं होती, उसे उत्तेजित करना पड़ता है।
बहुत से तो ऐसे भी पुरुष देखे गए हैं जिनको शादी करने से पहले यह भय लगा रहता है कि मैं विधिपूर्वक शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर पाऊँगा या नहीं? देखा जाए तो यह होना स्वाभावविक ही है क्योंकि बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सम्भोग से अद्वितीय और पूर्ण आनन्द प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए।
सुखमय वैवाहिक जीवन धन से, यौनांग की पुष्टता से या स्वास्थ्य से कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। यह वह अनमोल आनन्द होता है, जो केवल ज्ञान से ही प्राप्त किया जा सकता है।
हिंदुओं में पहले विवाह रात के समय कराया जाता था। अब भी भारत में बहुत जगह पर रात में ही विवाह कराया जाता है जिसके कारण से पति-पत्नी दोनों ही पहली रात को बहुत ज्यादा थक जाते हैं। इसके साथ ही वधू को अपने मां-बाप तथा परिवार वालों से बिछुड़ने का दुःख भी होता है। पति के घर पर उसे सभी लोग अन्जान लगते हैं क्योंकि वह अपना घर छोड़कर एक अजनबी परिवार में आई होती है। इस प्रकार के मानसिक विचारों से केवल ससुराल वाले ही मुक्ति दिला सकते हैं।
इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि मेहमानों की भीड़-भाड़ के कारण अन्य कार्यक्रम चाहे सारी रात चलते रहे, लेकिन परिवार वालों को यह ख्याल रखना चाहिए कि वर-वधू को अधिक से अधिक दस से ग्यारह बजे रात तक एकांत कमरे में भेज देना चाहिए।
परिवार वाले को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस कमरे में वर-वधू की सुहागरात हो, उस कमरे का चुनाव ठीक से करना चाहिए तथा उस कमरे को ठीक प्रकार से साफ-सुथरा रखना चाहिए। उनके कमरे को अधिकतर फूलों तथा रोमांटिक चित्रों से सजाना चाहिए।
सुहागरात के कमरे में अधिक सामान नहीं होना चाहिए। पलंग पर मुलायम बिस्तर बिछा होना चाहिए। उनके बिस्तर का चादर साफ सुथरी, बिना सिलवटों की बिछी हो, कम से कम दो तकिये हों तथा बिस्तर पर ताजे फूल बिखेर देना चाहिए। पलंग के पास ही छोटी टेबल पर ट्रे में मिठाई, इलायची तथा मेवा आदि सजाकर रख दें। इसके अतिरिक्त पानी और गिलास की व्यवस्था भी कर दें। कमरे में तेज रोशनी के साथ ही साथ हल्की रोशनी का प्रबंध करना चाहिए। वर तथा वधू के सभी प्रकार की जरूरत के समान तथा कपड़े उसी कमरे में रख देने चाहिए। यदि विवाह गर्मी के दिनों में हो तो कमरे में हवा तथा रोशनदान की व्यवस्था कर देनी चाहिए।
दुल्हन की सजावट
सुहागरात के कमरे की सजावट के अतिरिक्त दुल्हन तथा दूल्हे का भी इस दिन विशेष श्रृंगार करना चाहिए ताकि उनके मिलन में यौन सम्बन्ध ठीक प्रकार से हो। कभी-कभी तो बहुत से वर-वधू स्वयं की सजावट या तैयारी करने में लज्जा अनुभव करते हैं। हालांकि बाद में यह सम्बन्ध कार्य पति-पत्नी अपने आप करते हैं लेकिन पहली मिलन के रात को इन दोनों को एक तरह से जबर्दस्ती सुहागकक्ष में धकेलना पड़ता है।
इस दिन दिन दुल्हन की ननदों तथा जेठानियों को प्रथम मिलन के लिए सुहागकक्ष में पहुँचाने से पूर्व दुल्हन को स्नान कराएँ। श्रृंगार के बाद वधू को अवसर दें कि वह मेकअप में अपने विचारों के अनुसार थोड़ा बहुत संशोधन कर सके और अपनी सुन्दरता में चार चांद लगाएँ।
वधू को अपने वस्त्र खुद चुनने का मौका दें। आमतौर पर नववधुएँ शादी का जोड़ा पहनना ही अधिक पसन्द करती हैं तथा आवश्यक समझती हैं। उसे अपने मनपसन्द आभूषणों का प्रयोग भी करना चाहिए।
इस दिन पत्नी को चाहिए कि पति का आकर्षण प्राप्त करने के लिए कृत्रिम सुगंध का प्रयोग करें। सौन्दर्य प्रसाधनों के आभूषणों के बाद जो सबसे कीमती वस्तु होती है, वह इत्र है। रुई के छोटे से फोहे को इत्र में जरा सा भिगोकर शरीर के उन अंगों पर अवश्य लगा देना चाहिए, जैसे- जहाँ पति होठों से स्पर्श करता है, दोनों स्तनों का मध्यस्थल, ठोडी, नाभि, हथेलियों के आगे के भाग, गला, गाल, नाक के ऊपर का भाग, कमर तथा योनि के बाहरी भगोष्ठों तथा उसके आस-पास का भाग आदि।
दुल्हन को अपना श्रृंगार करते समय एक बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वह यह है कि अपने भगोष्ठों और उसके आस-पास के बाल तथा बगल के बालों को साफ कर देना चाहिए ताकि पति को कोई भी परेशानी न हो। वैसे तो लड़कियों को चाहिए कि यह काम शादी के एक दो दिन पहले ही मायके में कर लें।
जब वधू का श्रृंगार हो जाए तो उसका सारा सामान सुहागरात के कमरे में रख देना चाहिए और इसके बाद दुल्हन की ननद और जेठानी को नई दुल्हन से मजाक करते हुए उसे सुहागरात के कमरे में ले जाना चाहिए तथा उसे सुहाग की सेज पर बैठा दें और खुद भी तब तक वहाँ पर रुककर बातें करते रहें जब तक वर उस कमरे में न आ जाए।
वर का श्रृंगार
विवाह में दुल्हन का श्रृंगार जिस तरह से महत्वपूर्ण होता है ठीक उसी प्रकार से दूल्हे का भी श्रृंगार करना जरूरी होता है। दूल्हे को सजाने का यह कार्य अधिकतर दूल्हे का जीजा या दोस्त आदि करते हैं। वर को स्नान करके तथा भोजन कराने के बाद ही उसे सजाना चाहिए।
दूल्हे को सजाने से पहले उसके चेहरे को साफ सुथरा बनाने वाला क्रीम पाउडर आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके बाद बालों को अच्छे तरीके से संवारना चाहिए। दूल्हे को सजाने से पहले उसके दाढ़ी को साफ करना चाहिए। यदि दुल्हा मूँछ न रखना चाहता हो तो उसके मूँछ साफ कर देना चाहिए।
वर को सुहागरात के सेज पर ले जाने से पहले अच्छा सा कुर्ता या नाईट सूट पहन लेना चाहिए क्योंकि वधू की तरह शादी का जोड़ा इस समय आवश्यक नहीं होता, दूल्हे को सुहागरात के कमरे में ले जाते समय उसमें आत्मविश्वास जगाने वाली बातें करनी चाहिए जैसे कि वह बहुत सुन्दर और आकर्षक युवक लग रहा है।
दूल्हे के शरीर के भी कई भागों पर सुगंधित इत्र लगा देना चाहिए ताकि नई वधू उसके शरीर की महक से मंत्र-मुग्ध हो जाए। हो सके तो दूल्हे को माउथ फ्रेशनर का उपयोग कर लेना चाहिए। दूल्हे को सुहाग के कमरे में पहुँचाने की जिम्मेदारी भाभियों की होती है।
बहुत से दूल्हे को तो यह भी देखा गया है कि वह लज्जा के कारण से पहली मिलन के लिए आसानी से तैयार नहीं होता लेकिन उसके मन में दुल्हन से मिलने के लिए उत्सुक रहती है। कभी-कभी तो दूल्हे को अपने दोस्तों से बचकर भी सुहाग कमरे में जाते हुए देखा गया है।
इस समय में दुल्हन के साथ बैठी हुई स्त्रियों को जल्द ही कमरे से निकल जाना चाहिए क्योंकि दूल्हे को कमरे में प्रवेश करने के बाद भाभियों को दरवाजा बन्द करके बाहर से कुंडी लगा देनी चाहिए। ध्यान रहे कि कुंडी को कुछ देर बाद खोल देना चाहिए।
सुहागरात में पति-पत्नी की प्रतिक्रिया
आप स्त्री हो या पुरुष सुहागरात की पहली मुलाकात के समय एकांत कमरे में एक-दूसरे के सामने प्रस्तुत होते समय परेशानी होती है। इस समय में दुल्हा-दुल्हन को क्या करना होता है, इसके लिए उन्हें इसके बारे में अच्छी तरह से जानकारी ले लेना चाहिए ताकि अपने को एक-दूसरे के सामने प्रस्तुत होने पर परेशानी न हो।
जब सुहागरात के दिन दुल्हन कमरे में बैठी होती है उस समय जब दूल्हे को कमरे में भेजकर भाभियाँ बाहर से कुंडी लगा देती हैं तो दूल्हे को चाहिए कि कुंडी खुलवाने के लिए थोड़ा सा निवेदन करने के बाद स्वयं अंदर से दरवाजे का कुंडी अंदर से लगा दें।
अब दूल्हे को चाहिए कि वह अपने सुहागसेज की तरफ आगे बढ़े। इसके बाद दुल्हन का कर्तव्य बनता है कि वह अपने पति का अभिवादन करने के लिए सेज से उतरने की कोशिश करे। इसके बाद दूल्हे को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को बैठे रहने के लिए सहमति दें तथा इसके साथ ही थोड़े से फासले पर बैठ जाए।
इस समय में दुल्हन को चाहिए कि वह अपने मुखड़े को छिपाये लज्जा की प्रतिमूर्ति के सामान बैठी रहे क्योंकि लज्जा ही तो स्त्री की मान मर्यादा होती है। इस समय में दुल्हन के अंदर यह गुण होने आवश्यक है, जैसे- अदा, नखरे, भाव खाना तथा शर्मोहया आदि। हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि स्त्री के नाज तथा नखरे पर पुरुष दीवाना हो जाता है।
लेकिन स्त्रियों को इस समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पुरुष नखरों से निराश होकर उदास हो, उससे पूर्व ही समर्थन और सहमति स्वीकार कर लेना चाहिए अन्यथा नाज नखरों का आनन्द दुःख में बदल जाएगा। जब कोई स्त्री स्थायी रूप से नाज तथा नखरे करती है तो उसका पति उससे सेक्स करने के लिए कुछ हद तक विमुख हो जाता है।
अब दूल्हे को चाहिए कि वह दुल्हन का घूंघट धीरे-धीरे उठाए तथा मुँह दिखाई की रस्म को पूरा करते हुए कोई उपहार जैसे अंगूठी, चेन, हार आदि दुल्हन को देना चाहिए। इसके बाद पति को चाहिए कि वह पत्नी के साथ कुछ मीठी-मीठी बातें करते हुए परिचय बढ़ाए।
इसके बाद पति को चाहिए कि वह मेज पर पड़ी हुई जलपान सामग्री पलंग के पास ले आये। वैसे देखा जाए दाम्पत्य जीवन में खाना बनाना, खिलाना या परोसने का कर्तव्य पत्नी का बनता है लेकिन पहली रात के समय में पति को ही यह कर्तव्य करना चाहिए क्योंकि उस समय पत्नी बिल्कुल अनजान रहती है। इसलिए पति ही मिष्ठान आदि परोसता है।
पति को एक बात का ध्यान रखना चहिए कि पत्नी को मिष्ठान आदि का भोग कराते समय पत्नी को अपना परिचय दें तथा बढ़ाने की चेष्ठा बराबर करते रहनी चाहिए। पति को अपने परिवार के सदस्यों, रस्मों तथा रिवाजों को बताना चाहिए।
इसके बाद पति को चाहिए कि यदि अपना परिचय दुल्हन देने लगे तो उसकी बात को ध्यान से सुने या वह ऐसा न करें तो खुद ही उसे पूछना शुरू करना चाहिए और यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि वह अपने बारे में कुछ न बताना चाहे तो उसे मजबूर न करें और प्यार से बातें करें। इस समय में पत्नी का कर्तव्य यह बनता है कि वह लज्जा अनुभव न करके बराबर हिस्सा ले।
इस समय में पति को चाहिए कि पहली रात में अपनी पत्नी के हाथों को स्पर्श करे, इसके बाद उसके रूप की प्रशंसा करे, उसे अपने हंसमुख चेहरे तथा बातों से हंसाने की कोशिश करे। इसके बाद धीरे-धीरे जब पत्नी की शर्म कम होती जाये तो उसे आलिंगन तथा चुम्बन करे। यदि स्त्री प्रकाश के कारण संकोच कर रही है तो प्रकाश बन्द कर दे या बहुत हल्का प्रकाश कर दे।
वैसे देखा जाए तो विवाह के बाद पुरुष की लालसा रहती है कि जल्दी ही अपने जीवन साथी से मिलने का अवसर मिल जाए तो सेक्स क्रिया का आनन्द उठाये, यह उतावलापन तथा कल्पना हर पुरुष के मन में होता है।
पुरुष को ध्यान रखना चाहिए कि सुहागरात के दौरान जब तक स्त्री सेक्स क्रिया के लिए तैयार और सहमत न हो तो सम्भोग क्रिया सम्पन्न नहीं होती और यदि होती भी हो तो सेक्स क्रिया का आनन्द एक तरफा होता है। इसलिए पुरुष पहले स्त्री के साथ फॉर प्ले (पूर्व-क्रीड़ा) करे ताकि वह सेक्स के लिए तैयार हो जाए, तभी आपका मिलन ठीक प्रकार से हो सकता है।
यदि पत्नी आपके साथ आलिंगन-चुम्बन में सहयोग देने लगे तो पुरुष को चाहिए कि वह उसके शरीर के कई उत्तेजक अंगों को छूने का प्रयास करे जैसे- स्तनों का स्पर्श करें, धीरे-धीरे उनको सहलाएँ तथा बाद में धीरे-धीरे दबाएँ।
इसके बाद आपको चाहिए कि उसकी कमर, जांघ तथा नितंब आदि की तारीफ करें और धीरे-धीरे अपने हाथों से उसके कपड़े को उठाकर, हाथों को अंदर डालकर जंघाओं को सहलाएँ।
इसके बाद धीरे-धीरे अपने हाथों से उसकी योनि को स्पर्श करें तथा छेड़खानी करें। भगोष्ठों पर भी धीरे-धीरे हाथ फेरे और स्पर्श को भंगाकुर तक पहुँचाये, साथ ही साथ उससे कामोत्तेजित बातें भी करते रहें ताकि उसके अंदर सेक्स की आग भड़कने लगे।
इस प्रकार से फॉर प्ले का उपयोग करके पत्नी को कामोत्तेजाना के मार्ग पर ले जाए ताकि उसके मन से किसी भी प्रकार का संकोच खत्म हो जाए। ऐसा करने से पत्नी का संकोच खत्म हो जाता है जिसके कारण से वह खुद ही पति को आलिंगन तथा स्तनों को दबवाने लगती है। अपने योनि का स्पर्श पति से करवाने लगती है। इस क्रिया के समय में उसकी सांसे भी तेज चलने लगेंगी और कांपने लगेंगी।
जब इस प्रकार की क्रिया पत्नी करने लगे तो पुरुष को समझ लेना चाहिए कि वह अब सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। अब पुरुष को चाहिए कि अपने पत्नी के माथे को होठों से चूमे, इसके बाद उसके होठों को भी अपने होठों से चूमे तथा इसके साथ ही साथ उसके चेहरे के इधर-उधर तथा स्तन के पास के भागों को भी चूमते रहें। ऐसा करने से उसके अंदर की सेक्स उत्तेजना और भी बढ़ने लगेगी।
अब पति को चाहिए कि वह पत्नी को धीरे फॉर प्ले करने के साथ-साथ पलंग की तरफ ले जाकर लिटाने की कोशिश करे और उसके स्तनों पर के सारे कपड़े को उतार दें। फिर इसके बाद अपने हाथों से स्तनों को सहलाते हुए दबाएँ। इस प्रकार से क्रिया करते समय पत्नी के मुँह से कई प्रकार की आवाजें निकलती हैं। इसके बाद पत्नी के शरीर के नीचे के कपड़े भी पूरी तरह से उतार देना चाहिए। उसके
कपड़े को उतारने के लिए सबसे पहले उसके नाड़े को ढीला करें। इसके बाद जब वह केवल पेंटी पर रह जाये तो कुछ देर तक उसे इसी अवस्था में रहने दे तथा साथ ही साथ उसके पूरे शरीर को दबाना तथा सहलाना चाहिए। इसके बाद अपने लिंग को उसके तन से स्पर्श कराना चाहिए।
इस समय यदि पत्नी पति के इस प्रयास में साथ देती रहे तो पति को चाहिए कि वह पत्नी के स्तनों को और भी जोर से सहलाए। जब पति पत्नी के स्तनों को इस तरह से सहलाता है तो स्त्री को बहुत अधिक सुख तथा आनन्द मिलने लगता है। इस समय पत्नी के मन में कई प्रकार के विचार भी आते हैं जैसे- मेरा पति सबसे बलवान है, मेरी किस्मत इतनी अच्छी है जो मुझे ये मिले, मेरी आज रात सारी ख्वाहिशें पूरी हो जायेंगी और यह भी सोचती है कि यह मेरे साथ क्या-क्या कर रहे हैं।
इस अवस्था में कुछ स्त्रियाँ तो ऐसी भी होती हैं जो पति द्वारा पेटीकोट खोलने के प्रयास को रोकने का प्रयास करती हैं। लेकिन धीरे-धीरे वह अपने प्रयास को स्वयं ही खत्म कर देती हैं और निर्वस्त्र हो जाती हैं। फिर दोनों आपस में एक-दूसरे को बाहों में लेकर आलिंगन करने लगते हैं। वे दोनों कुछ समय तक इसी अवस्था में रहते हैं तथा इसके बाद पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी के माथे, स्तन, छाती तथा कानों के पास के भागों को चूमे। इस अवस्था में ही उसके नितंबों को सहलाते रहे। इसके बाद उसके स्तनों को दबाएँ तथा सहलाएँ और उसकी जांघों के बीच में हाथ फेरते रहें।
ऐसी स्त्रियाँ अपने पति से अधिक शर्माती हैं क्योंकि यह पति-पत्नी दोनों के लिए पहली मिलन की रात होती है। वह अपने हाथों से स्तनों को छिपाने तथा दोनों जांघों को सटाकर अपनी योनि को छिपाने का प्रयास करेगी तथा अपनी आँखों को बन्द कर लेगी। ऐसी स्थिति में पति को धैर्य से काम लेना चाहिए और किसी भी प्रकार का उतावलापन नहीं दिखाना चाहिए। उसे यह समझना चाहिए कि वह यहाँ पर सभी से अनजान है और इसलिए ऐसा कर रही है।
इसके बाद पति को चाहिए कि वह प्यार से पत्नी की सभी चिंता तथा फिक्र को दूर करे। इसके साथ ही साथ फोर प्ले करते रहें। ऐसा करने से कुछ ही देर में स्त्री की योनि गीली होने लगती है और उसमें भी सम्भोग की कामना होने लगती है। इस प्रकार से सेक्स क्रिया करने से दोनों की कामवासना अधिक तेज होने लगती है तथा कुछ देर में स्त्री भी अपनी जांघों को खोलने लगती है।
यदि किसी कारण से पत्नी में कामवासना न जाग रही हो तो पुरुष को चाहिए कि पत्नी के भंगाकुर को अच्छी तरह से सहलाए। इसके बाद अपनी तीन-चार ऊँगलियों को मिलाकर योनि में प्रवेश करके अंदर-बाहर, ऊपर-नीचे करना चाहिए। इस प्रकार क्रिया करने से ठंडी से ठंडी स्त्री भी कामोत्तेजित होकर सेक्स क्रिया करने के लिए उतावली हो जाती है।
यह बताना जरूरी है कि स्त्री की योनिद्वार अत्यधिक सिकुड़ी हुई होती है। इसमें पहली बार लिंग का प्रवेश करना आसान नहीं होता, बल्कि इसे आसान बनाना पड़ता है। इस काम के लिए पुरुष को पहले से ही कहीं क्रीम, वैसलीन या तेल जैसा कोई भी चिकना पदार्थ रखना चाहिए ताकि लिंग को योनि में प्रवेश कराने से पहले उस पर चिकना पदार्थ लगा लें। वैसे तो इस समय में स्त्री की योनि और पुरुष का लिंग अपने आप ही पूर्व रस से भीग जाते हैं लेकिन चिकनाहट के लिए कभी-कभी पर्याप्त नहीं साबित हो पाता।
अब पुरुष को चाहिए कि स्त्री की जांघों को फैलाकर दोनों पैरों को धीरे से उठाकर लिंग को योनि के मुख पर रख धीरे-धीरे दबाव डाले ताकि लिंग योनि के अंदर घुस जाए, इसके बाद धीरे-धीरे घर्षण करे, जिससे योनि पूरी तरह तरल पदार्थ से भीग जाएगी। अब पुरुष को स्त्री की जंघाओं को थोड़ा और फैलाकर लिंग को योनि में प्रवेश करवाएँ तथा धीरे-धीरे धक्का लगा-लगाकर घर्षण करें।
मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि यदि स्त्री की योनि अक्षत हो तो भी लिंग का दबाव पड़ने से योनि का आवरण फट जाएगा तथा लिंग आराम से आगे की ओर अग्रसरित होगा।
कभी-कभी योनि आवरण पहले से भी फटा होता है। इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नहीं है कि स्त्री का शादी से पहले ही किसी के साथ सम्भोग हो चुका है। ऐसा संदेह पुरुष को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि स्त्री का योनिपटल तो किसी भी कारण से फट सकता है जैसे- अधिक मेहनत का कार्य करने, अधिक व्यायाम करने, साईकल चलाने, दौड़ने, खेल-कूद करने, सवारी करने आदि।
इस तरह से सेक्स क्रिया करने के दौरान थोड़ा-सा आराम कर लेना चाहिए। इस बीच में स्त्री से प्यार भरी बातें करें। इसके बाद फिर से योनि में लिंग को प्रवेश करा के धीरे-धीरे घर्षण चालू करते हुए ज्यों-ज्यों उद्वेग बढ़ता जाए, घर्षण की गति को बढ़ाते जाना चाहिए। जब स्खलन होने लगे तो भी लिंग को योनि में रहने दें क्योंकि स्खलन के बाद भी लिंग का योनि में रखना स्त्री को सुखानुभूति प्रदान करता है।
अधिकतर सुहागरात के दिन पुरुष अपनी कामोत्तेजना को शांत करने के बाद यह नहीं देखता है कि मेरी पत्नी भी संतुष्ट हुई है या नहीं। हम आपको यह बताना चाहेंगे कि यदि स्त्री संतुष्ट हो जाती है तो उसका शरीर ढीला पड़ जाता है, पसीना आने लगता है, आंखे बन्द हो जाती हैं और लज्जा उसके चेहरे पर दुबारा से दिखाई देने लगती है।
जब इस प्रकार से सम्भोग क्रिया खत्म हो जाती है तो स्त्री-पुरुष दोनों को अपने-अपने अंगों को साफ करके दूध या शक्तिदायक और जल्दी से पचने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इसके बाद प्रेमालाप करते हुए आलिंगबद्ध होकर सो जाएँ। निश्चय ही यदि कोई पति अपनी पत्नी का हृदय सेक्स क्रिया के समय ही जीत लेता है और यह जीत जोर जबर्दस्ती से नहीं बल्कि पत्नी का विश्वास अर्जित करने के बाद करता है, तो दोनों के लिए मिलन की यह रात यादगार हो जाती है।
सम्भोग वाली रात को यह क्रिया पत्नी के सहमति से हो तो इसके बाद स्त्री अपने जीवन में यह पहली सम्भोग हमेशा के लिए याद रखती है और अपने पति पर जीवन भर विश्वात करती है। इससे पति भी जीवनभर के लिए पत्नी का विश्वास जीत ही लेता है, दम्पत्ति का पूरा जीवन सरसता के सागर में क्राड़ा करते हुए ही गुजरता है।
आज के समय में परिस्थितियाँ इतनी अधिक बदल चुकी हैं कि पहले की तरह शादी के बाद दस रात्रि तक बिना सेक्स क्रिया के रहना सहज ही संभव नहीं रहा है फिर भी पहली मिलन की रात या सुहागरात को पत्नी के सहयोग से ही यह क्रिया पूर्ण कीजिए बलपूर्वक नहीं, क्योंकि इससे आपका वैवाहिक जीवन तबाह हो सकता है।
पहली रात
आज के समय में बहुत-सी स्त्री बुरी सोसाइटी, चकला, कुसंगति, सिनेमा के प्रभाव से, लड़कियों की स्वतंत्रता की बाढ़ से, दर्शन-मेले के अनेकों अवसरों के कारण से, कामोत्तेजतना बढ़ाने वाले अश्लील उपन्यासों के पढ़़ने से, खटाई, अचार, अंडे और चूर्ण आदि गर्म पदार्थों का सेवन से जल्दी ही कामोत्तेजना के चक्कर में पड़ जाते हैं। आजकल तो लड़के भी युवावस्था में पैर रखते ही स्त्री के साथ सेक्स करने की इच्छा करने करने लग जाते हैं।
स्त्री-पुरुष को सेक्स सम्बन्ध शादी से पहले बनाना अच्छा नहीं रहता है क्योंकि इससे कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे- इसके कारण से स्त्री को बदनामियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि हमारे समाज में शादी से पहले यौन सम्बन्ध बनाना एक पाप माना जाता है। ऐसा नहीं कि केवल बदनामी का बोझ स्त्री को ही झेलना पड़ता है यह पुरुष को भी झेलना पड़ सकता है क्योंकि यदि यह स्त्री के सगे सम्बन्धी को पता लगता है तो वह उसके जान के दुश्मन बन जाते हैं।
इसलिए मेरी राय स्त्री-पुरुषों के लिए इतना ही है कि यदि आप शादी से पहले यौन सम्बन्ध बनाना चाहते हैं तो इसका अंजाम पहले से सोच लें।
सुहागरात को लेकर स्त्री-पुरुष की गलतफहमी
कुछ पति-पत्नी सुहागरात को लेकर इतना अधिक तनाव में रहते हैं कि वे इस रात को सही तरीके से यौन सम्बन्ध बना ही नहीं पाते। यदि इस रात में पति को शीघ्रपतन हो जाता है तो पुरुष स्वयं को नपुंसक मानने लगता है और स्त्री अपने किस्मत को कोसने लगती है। दोनों एक-दूसरे से नाराज रहते हैं।
सुहागरात में एक दूसरे का हो जाना
पति-पत्नी को मैं यह बताना चाहता हूँ कि सुहागरात के दिन एकदम से सम्भोग क्रिया शुरू न करें, बल्कि पहले एक-दूसरे का नाम आदि तथा कुछ परिचय जानना चाहिए। इस रात को एक-दूसरे के मन की बात को भी जानना चाहिए। सभी स्त्री-पुरुष यह जान लें कि सम्भोग केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक और कलात्मक क्रिया है जिसे अपने जीवन-साथ मिलकर सीखना पड़ता है।
पहली रात को यह जरूरी नहीं है कि सेक्स सम्बन्ध बनाएँ। इस रात तो जहाँ तक हो सके एक-दूसरे की दिल की बात को जानने की कोशिश करें, एक-दूसरे की रुचि, स्वभाव को जान सकते हैं। इस रात को चाहिए कि पति अपनी पत्नी की खूबसूरती की तारीफ करें। ऐसा करने से दोनों का संकोच और घबराहट दूर हो जाएगी। यदि इच्छा हो तो ही सम्भोग करें, एक-दूसरे पर जोर जबरदस्ती करके सेक्स सम्बन्ध न बनाएँ।
सुहागरात के समय में ध्यान रखने योग्य बातें
सुहागरात में दुल्हा-दुल्हन को सेक्स सम्बन्ध बनाने के लिए जल्दी न करें।
सेक्स क्रिया करने से पहले पति-पत्नी को एक-दूसरे को समझने का प्रयास करना चाहिए।
सेक्स क्रिया करने के लिए जल्दी न करें बल्कि धीरे-धीरे इस ओर कदम बढ़ाएँ।
पत्नी से प्यार भरी बातें करें और उसे कुछ मिठाई या अन्य चीजें खिलाने का प्रयत्न करें।
स्त्री से बातचीत करते-करते उसे सेक्स क्रिया की ओर ले जाएँ और पहले फॉर प्ले करें। इस समय हो सकता है कि वह आपको रोकें। ऐसी स्थिति में अपने मन में शंका न लाएँ क्योंकि हो सकता है कि वह यह भय या शर्म के मारे ऐसा कर रही हो।
इस रात में जब तक स्त्री के तरफ से आज्ञा न मिल जाए तब तक जबर्दस्ती सेक्स सम्बन्ध बनाने की कोशिश न करें।
यदि स्त्री किसी कारण, भय, लज्जा या मानसिक रूप से सेक्स क्रिया करने के लिए तैयार न हो तो आप अपने पर काबू रखें, उसे इसके लिए मजबूर न करें।
किसी भी दूसरे पुरुष या दोस्त आदि के बहकावे में आकर शराब, कोकीन, चरस, अफीम या नशीले पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि इससे सेक्स शक्ति कभी नहीं बढ़ती। बल्कि नशे की स्थिति में आप तो सेक्स क्रिया का आनन्द ठीक प्रकार से नहीं ले पाएंगे और अपनी पत्नी को भी इसका आनन्द नहीं मिल पाएगा।
पहली रात को कभी भी पत्नी को निर्वस्त्र होने के लिए मजबूर न करें और न ही उसका चीर-हरण करें।
पत्नी को मुखमैथुन के लिए मजबूर न करें और न ही मुखमैथुन करें।
पहली रात को स्त्री के योनि में लिंग को प्रवेश करने में थोड़ी सी परेशानी हो सकती है। ऐसा कभी-कभी इसलिए होता है कि स्त्री तनाव या भय में रहती है जिसकी वजह से वह योनि को सिकोड़ लेती है जिसके कारण से योनि में लिंग प्रवेश कराना मुश्किल होता है।
सभी स्त्रियाँ अपनी प्रशंसा सुनना बहुत अधिक पसन्द करती हैं, विशेष करके खूबसूरती की तारीफ उसे बहुत पसन्द होती है। इसलिए उसकी खूबसूरती की प्रंशसा करें। वह जल्द ही खुद को आपके हवाले कर देगी।
पहली रात को पत्नी की भावनाओं से खेलकर उसके अतीत के बारे में जानने की कोशिश न करें।
पहली रात को खुद भी अपने अतीत में आई किसी लड़की के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर न बताएँ। इससे पत्नी के दिल को आघात पहुँच सकता है।
पति कभी भी पत्नी पर लम्बी-लम्बी बात फेंकने लगते हैं जैसे- मेरी जिंदगी में तुमसे भी खूबसूरत लड़की आई थी। वह मुझसे इतना अधिक प्रेम करती थी कि मेरे लिए जान देने को तैयार थी। तुम तो इसके सामने कुछ भी नहीं है वगैरह…वगैरह.. ऐसी बातें पत्नी पर इंप्रेशन नहीं डालती। ये बातें उसके मन को अघात पहुँचा सकती है। इसलिए प्रत्येक स्त्री-पुरुष को चाहिए कि शादी के बाद नई जिंदगी की शुरुआत करें। अतीत की जिंदगी को गड़े मुर्दे की तरह ढका रहने दें।
सुहागरात के लिए कुछ लोगों के विचार
मैंने सुहागरात के बारे में कुछ लोगों से बातचीत की और उन्होंने इस बारे में कुछ इस तरह से बातें बताई
अरुण युवावस्था से ही सेक्स की तरफ बहुत अधिक ध्यान देता था। वह युवा लड़कियों और उनके उभरे स्तनों को देखकर उत्तेजित हो उठता था। वह यह सोचता था कि बिना वस्त्रों की लड़की कैसी लगती है और उसके शरीर के अंदरुनी भाग कैसे हैं। लेकिन बिना शादी के उसको यह जवाब मिलना संभव नहीं था।
उसके मित्र जब भी उससे यह पूछते थे कि सुहागरात को आप अपनी पत्नी का नाम कैसे पूछोगे? इस पर वह मजाकिये टाइप से यह जवाब देता था कि आपको इससे क्या लेना, यह बात तो मुझसे उस दिन पूछना जब मैं सुहागरात मना लूंगा। अरूण को कभी भी यह मालूम नहीं था कि इस मजाक का उसकी जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ने वाला था।
कुछ ही वर्षों बाद उसकी शादी तय हो गई। उनके परिवार में यह चलन था कि शादी तय होने पर लड़का लड़की की एक-दूसरे से बात करा दी जाए। इसलिए उसे लड़की से बातचीत करने के लिए जगह तय किया गया।
जब वह लड़की से मिला तो उसे देखकर उसके मन में यह ख्याल आया कि वाह कितनी सुन्दर लड़की है। वह पहले से अपने मन में जो-जो खूबियाँ सोच रखा था, वह सभी उसकी होने वाली पत्नी मीनू में दिखाई दे रही थी। वह तो उस समय उसके उभरे हुए स्तनों को देखकर ही चकित हो उठा था। इसके कुछ दिन बाद ही उसका विवाह मीनू से हो गया।
अब मैं इनकी सुहागरात की बात बताने जा रहा हूँ। जैसे ही अरुण सुहागरात के कमरे में गया तो उसने अपने कमरे की कुंडी लगा दी। इसके बाद उसने देखा कि उसकी पत्नी लाल लहंगा-चुन्नी पहनी हुई पलंग पर उसी का इंतजार कर रही थी। इसे देखकर उसके शरीर में अधिक उत्तेजना हो उठी, कुछ उत्तेजना तो उसके शरीर में सुहागरात के कमरे में आने से पहले ही थी। उसका अपने आप पर नियंत्रण खोता जा रहा था, उसकी उत्तेजना सीमा चरम को छूने लगी थी।
वह पलंग की तरफ गया और पलंग पर बैठकर मीनू को अपने से लिपटा लिया। उसके कपड़े को बिना उतारे ही उसे नोचने तथा मसलने लगा। शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए उसने उसके कपड़ों का भी ध्यान नहीं रखा। उसने मीनू की उत्तेजना की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और उससे पूरी तरह से सेक्स क्रिया करने लगा, लेकिन कुछ ही देर में उसकी उत्तेजना सीमा समाप्त हो गई और वह सुस्त पड़ गया।
उसके इस व्यवहार से मीनू इस प्रकार से छटपटा कर रह गई जैसे बिना पानी की मछली तड़पती है। वह उसके इस व्यवहार को बिल्कुल भी समझ नहीं पा रही थी।
मीनू के मन में सुहागरात को लेकर कई सारे सपने थे जो एक ही पल में इस तरह से बिखर गये जैसे माला के टूटने पर मोतियाँ बिखर जाती हैं। वह यह भी समझ नहीं पा रही थी कि क्या इसी को सुहागरात कहते हैं? यदि यह सुहागरात तो जबरन चोदन कैसा होगा।
यह सब सोचते-सोचते उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। उसके सीने के ऊपर से मसला हुआ ब्लाउज तथा बिखरे हुए बाल एक कुचले हुए फूल के समान अपनी कहानी बयान कर रही थी। इसके बाद उसने रोते हुए अपने स्तनों को ब्रा में धकेला और अपने कपड़ों को ठीक किया। अरुण को देखा तो वह पीठ के बल लेटा आपने आंखों को बन्द करके चुपचाप लेटा हुआ था।
मीनू के मन में इस घटना की वजह से अरुण के प्रति नफरत की भावना पैदा हो गई। वह यह समझ नहीं पा रही थी कि यदि इन्हें जबरन चोदन ही करना था तो शादी ही क्यों की और शादी ही की थी तो इस तरह जबरन चोदन करने क्या जरूरी था?
अब आपको समझ में आ गया होगा कि सुहागरात में ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन तबाह हो जाता है। जैसाकि इस कहानी में आपने पढ़़ा कि इस घटना की वजह से मीनू के मन में अरुण के प्रति नफरत पैदा हो गई।
हम सभी को पता है कि यदि पति-पत्नी में किसी तरह से नफरत की भावना पैदा हो जाए तो फिर वैवाहिक जीवन को तबाह होने से कोई भी नहीं रोक सकता है।
कविता बहुत ही उत्तेजनशील लड़की थी। वह एक सामान्य परिवार की थी। जब उसका विवाह घर वालों ने प्रवीण नाम के लड़के के साथ तय कर दिया तो उसके दिल में गुदगुदी और घबराहट दोनों ही एक साथ होने लगी। उसको इस बात का भय लग रहा था कि सुहागरात को क्या होता है? पति मेरे साथ-साथ क्या-क्या करेगा? यह सब कैसे होगा? मैं इस सब का सामना कैसे कर पाऊँगी।
अधिकतर बहुत सारी लड़कियों को यह डर सताता है कि सुहागरात को जरूर ऐसा कुछ होता है जिसे सहन कर पाना बड़ा मुश्किल होता है।
जब उसे पति का फोटो देखने के लिए दिया गया तो वह शर्मा गई लेकिन एकांत जगह पर जाकर ध्यान से देखा और मन में सोचने लगी कि यह तो बहुत सुन्दर है। कुछ ही महीनों बाद शादी हो गई। जब वह पति के घर आ गई तो दिन भर शोर-शराबे के साथ बीता। रात को जेठानी तथा ननद ने उसका श्रृंगार करके सुहागरात के लिए कमरे में सेज पर बैठा दिया।
इसी समय प्रवीण की भाभी ने कविता के कान में धीरे से कहा कि बिल्कुल घबराना मत, प्रवीण जो कहेगा कर देना, मना बिल्कुल मत करना और उसे धकेलते हुए दिल से सहमति दे दी और वहाँ से चली गई।
अब कविता मन ही मन बहुत अधिक घबरा रही थी, उसकी घबराहट चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी। वह सोच रही थी कि अगर वह कमरे में आयेंगे तो मेरे साथ क्या-क्या करेंगे और क्या-क्या बात करेंगे?
इसके बाद प्रवीण की भाभियों ने उसे कमरे में धक्का दे करके बाहर से कुंडी लगा दी। प्रवीण तो मन ही मन यही सोच रहा था कि कोई मुझे जल्दी से सुहागरात के कमरे तक ले जाए। अब उसने धीरे से कमरे को अंदर से बन्द कर दिया और धीरे-धीरे चलता हुआ कविता के पास आकर पलंग के किनारे पर बैठ गया।
इसके बाद उसने कविता से ऐसे बात करने की कोशिश की जैसे वह उसे पहले से ही जानता हो। थोड़ी देर बाद कविता भी उससे घुल मिल गई और बोलने तथा जवाब देने लगी। उसके मन के अंदर जो डर बैठ चुका था वह अब धीरे-धीरे खुलने लगा था। कुछ देर तक तो वे एक-दूसरे से बिल्कुल दोस्तों की तरह बातें करते रहें। इस बीच प्रवीण ने उसके शरीर के साथ किसी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं किया, उसे हाथ तक नहीं लगाया। बस आमने-सामने बैठ कर बातें ही करते रहे।
इन बातों में उन्होंने भविष्य के सुनहरे सपने संजोये। कितने बच्चे पैदा करेंगे, कब करेंगे, घर कैसे चलायेंगे। इस तरह से बात सुन सुन कर कविता को मन ही मन गुस्सा आ रहा था। वह चाहती थी कि इनसे कह दूं कि अब बात बहुत हो चुकी, चलो सेक्स क्रिया करते हैं। लेकिन वह एक लड़की थी इसलिए अपने दिल का अरमान कह न पाई।
इस तरह से बातचीत करते करते 1 बज गया। कविता के शरीर में कामवासना की उत्तेजना हो रही थी और उसका पति ऐसा था कि वह घर की बातें किये जा रहा था।
इसके बाद कविता ने देखा कि उसने कुछ मेवे खाये और दूध पी कर सो गया। कविता उसके इस व्यवहार को देखकर दुःखी हो गई और रातभर कामवासना से तड़पती रही। वह मन ही मन यह सोच रही थी उन्होंने मुझसे इतनी बात की और सो गये, थोड़ी देर तक यदि मेरे साथ सेक्स क्रिया कर लेते तो उनका क्या जाता। फिर भी उसने सोचा कि चलो वह दिन भर के काम से थक गये होंगे इसलिए सो गये। अतः वह भी आराम से पति से चिपटकर सो गई।
कुछ दिन तक प्रवीण इसी तरह से कविता से बात करके सोता रहा। इस पर कविता ने कहा कि आप कुछ करते क्यों नहीं हो, क्या आपके अंदर उत्तेजना नहीं है? इस पर प्रवीण का दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच गया और उसने जवाब दिया कि मैं तुम्हें अपनी सहनशीलता दिखा रहा था।
लेकिन सच तो यह है कि उसे शीघ्रपतन की शिकायत थी। इसलिए वह कविता से सेक्स नहीं कर रहा था ताकि पोल न खुल जाए। लेकिन इस समय प्रवीण गुस्से के कारण आग बबूला हो चुका था और अपने मन को तसल्ली देने के लिए मन ही मन सोच रहा था कि आज इसको दिखाता हूँ कि सेक्स किसे कहते हैं।
ऐसा सोचने के साथ ही वह कविता से जबर्दस्ती करने लगा लेकिन इस समय कविता को जबर्दस्ती नहीं लग रहा था क्योंकि उसके अंदर कामवासना बहुत अधिक थी। अब दोनों ही सेक्स क्रिया करने लगे, कविता को कुछ सेक्स का आनन्द आने लगा था लेकिन कुछ देर बाद ही उसके दिल में जोर का झटका लगा और देखा कि उसका पति स्खलित होकर एकदम चित पड़ गया, इस समय प्रवीण एकदम निश्चेष्ट देह के समान लग रहा था।
पति के इस व्यवहार से वह दुःखी हो गई और उसको मन ही मन कोसने लगी और विचार करने लगी कि मेरे भाग्य ही फूट गये थे जो मुझे ऐसा पति मिला। इसके बाद तो दोनों में इस बात को लेकर तू-तू मैं-मैं होने लगी। उनके वैवाहिक जीवन में तनाव पैदा हो गया।
अब कविता इस ताक में रहने लगी कि शायद कोई लड़का उससे दोस्ती कर ले और मेरी कामवासना को शांत कर दे। कुछ महीने तो वह लोक लाज के कारण से घर से बाहर नहीं गई लेकिन बाद में वह बाजार आदि जाने लगी। अब तो उसका घर से बाहर आना जाना हो गया।
उसने अपने दिन को काटने के लिए एक ऑफिस में जॉब कर लिया। वहाँ पर उसकी मुलाकात एक लड़के से हुई, जिसका नाम जतिन था। धीरे-धीरे उनका आपस में प्यार पनपने लगा। अब कविता की प्यास जो उसके पति ने नहीं बुझाई थी, वह जतिन से अपनी प्यास बुझा सकती थी और इसलिए उसने उससे सेक्स सम्बन्ध बना लिया।
कुछ दिनों बाद ही प्रवीण को यह बात पता चली तो उसे बहुत गुस्सा आ गया और कविता से लड़ाई झगड़ा करने लगा, बात तलाक तक पहुँच चुकी थी। इस तरह से उनका वैवाहिक जीवन तबाह हो गया। अतः हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कविता को कभी भी पराए मर्द से सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए था बल्कि पति से प्यार से बात करके इस समस्या का हल निकालना चाहिए था क्योंकि कोई भी ऐसी समस्या नहीं होती जिसका हल न हो सके।
रणबीर स्कूल के समय से ही यह सुनता हुआ आ रहा था कि सेक्स क्या होता है? वह दोस्तों से अधिकतर सेक्स की बातें किया करता था। वह उसी समय से अपने मन में कल्पना करने लगा था कि पत्नी के साथ मनाने वाला सुहागरात कैसा होता है?
उसके मन में यह गलत भावना बैठ चुकी थी कि सुहागरात को बहुत से पति अपने पत्नी के सामने ठंडे पड़ जाते हैं, इस बारे में उसने काफी कुछ दोस्तों से सुन रखा था। लेकिन उसने किसी के साथ सेक्स करके नहीं देखा था कि ऐसा होता है या नहीं।
सेक्स के बारे में उसे कुछ ज्यादा ज्ञान प्राप्त नहीं था इसलिए वह सुहागरात की बात को सुनकर डरता था और यह सोचता है कि सुहागरात के दिन क्या होता है? कैसे होते हैं? कैसे करना है?
जब रणबीर की शादी की बात घर वालों ने चलाई तो यह सुनकर वह घबरा गया और अपने दोस्तों से सलाह मांगी। एक तो वह पहले से डरा हुआ था और डर गया। विवाह की तारीख नजदीक आती जा रही थी।
एक दिन दोस्तों ने उसे सलाह दी कि सुहागरात का डर निकालना है तो कमरे में जाने से पहले शराब के दो पैग चढ़ा लेना, सारा डर निकल जाएगा। इसके साथ ही साथ दूसरे दोस्तों ने भी सलाह दी कि शराब पीने से शरीर में सेक्स करने की ताकत आ जाती है। इसके फलस्वरूप आदमी कम से कम एक घंटे तक सेक्स आराम से कर सकता है। औरत तो फिर खुद ही कहने लगती है कि मैं थक चुकी हूँ, अब मैं सेक्स नहीं कर सकती है आदि अनेक प्रकार की बातों द्वारा न केवल उसे गलत राय दी बल्कि गलत करने को उकसाया भी गया।
उसने इस गलत भावना को मन में सच मन लिया। अब उसकी कुछ दिनों बाद ही शादी होने लगी और इस रात दोस्तों के साथ मिलकर इसने खाना खाया और शाम को खाने के साथ-साथ पीने की भी व्यवस्था की गई।
रणबीर शराब नहीं पीता था लेकिन दोस्तों के बहकावे में आकर उसने दो पैग चढ़ा लिए। दोस्तों ने भी उसको जाने बगैर पैग में पानी कम और शराब ज्यादा डालकर दे दिया। पीने के बाद उसे सुहागरात के लिए कमरे में छोड़कर दोस्त चले गये।
उसने महसूस किया कि वह ठीक से चल भी नहीं सकता है। घर वालों ने भी यह देखा तो समझ गये कि उसने पी रखी है लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। सबने सोचा कि ऐसे मौकों पर यह सब थोड़ा बहुत पीना-खाना चलता है। अब रणबीर सुहागरात के कमरे में नशे के हालत में ही गया। उस पर शराब का असर पूरी तरह से दिखाई पड़ रहा था। वह इतने नशे में था कि ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।
जब उसकी नवविवाहिता पत्नी सविता ने देखा तो सब समझ गई कि इन्होंने शराब पी रखी है। वह शराब और शराब पीने वालों से बहुत चिढ़ती थी। रणबीर को आज रात पीकर आया देखकर उसे अच्छा नहीं लगा। वह एक पढ़़ी-लिखी और आत्मनिर्भर लड़की थी, फिर भी उस रात उसने कुछ कहना ठीक नहीं समझा।
रणबीर नशे में इतना चूर हो चुका था कि ठीक से सेक्स करना तो दूर की बात है, ठीक तरह से उससे बात भी नहीं कर पा रहा था, वह लुढ़ककर सो गया। पत्नी से प्यार भरी बातें भी नहीं की और कपड़े पहने ही सो गया।
दूसरे दिन जब वह सविता से मिला तो ठीक तरह से आंखें भी नहीं मिला पा रहा था। वह समझ रहा था कि सविता उससे नाराज थी। उसने अपनी गलती स्वीकार की और साफ-साफ बता दिया कि दोस्तों ने उसे कैसे गलत सलाह दे दी थी। उसने यह भी वायदा किया कि किसी भी स्थिति में वह शराब को हाथ भी नहीं लगायेगा।
उसकी सच्चाई और सादगी को देखकर सविता का क्रोध गायब हो गया। उसने गुस्सा थूक दिया और उसे वायदा किया कि स्थिति चाहे भी कैसी हो, शराब नहीं पीऊँगा। उसने यह वायदा पूरा भी किया। भविष्य में सविता को सेक्स के मामले में उससे कोई परेशानी नहीं हुई। वह उससे काफी खुश थी।
अतः इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सुहागरात एक-एक क्षण के रोमांच और आनन्द को आत्मसात करने वाली रात होती है। इस रात को नशे की भेंट चढ़ाने का कोई औचित्य नहीं हैं। इसलिए कि यह रात जीवन में दुबारा लौटकर नहीं आती है। सुहागरात में नशे से दूर रहें। इस रात के आनन्द को पत्नी के साथ पूरे होश और उल्लास के साथ बांटे। यह रात ही आपके वैवाहिक जीवन का भविष्य तय करता है इसलिए इसे शराब तथा अन्य नशा करके खराब न करें।
बहुत सी स्त्रियों को ठेस तब लगती है जब उसका पति सुहागरात के दिन उसे ठीक प्रकार से सेक्स के लिए उत्तेजित नहीं कर पाता और इसके विपरीत उससे जोर-जबरदस्ती करके सेक्स क्रिया करके सो जाता है। इस कारण से कुछ स्त्रियाँ तो ऐसी होती हैं कि इस अवस्था में बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगती हैं।
इस स्थिति में स्त्री यही सोचती है कि शायद उनमें सेक्स की कमी है तभी तो उन्होंने ऐसा रवैया मेरे साथ अपनाया जबकि वास्तविकता यह है कि सुहागरात को पुरुष द्वारा किए गए इस प्रकार के आघातों के कारण से वह कई प्रकार के मानसिक कष्टों से पीड़ित हो जाती है। कई बार तो ऐसे व्यवहार के कारण से बनते-बनते घर उजड़ जाते हैं।
उदाहारण के लिए मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूँ।
हरीश नाम का लड़का था जो अधिक डींगे हाँका करता था। वह अपने दोस्तों से कहता था कि आपको पता है, मैं अपनी सुहागरात में पत्नी पर ऐसा इम्प्रेशन जमाऊँगा कि वह जिंदगी भर मेरे आगे जुबान नहीं खोलेगी। वह यह भी कहता था कि आज जानते हो कि फर्स्ट इम्प्रेशन इच द लास्ट इम्प्रेशन होता है।
दोस्त उसे कई बार समझाते थे कि किसी अन्य मामलों में तो यह ठीक है लेकिन सुहागरात को पत्नी के साथ ऐसा व्यवहार मत कर बैठना कि लेने के देने पड़ जाएँ। वह ऐसा लड़का है जो दोस्तों पर अधिक रोब जमाता था और इसलिए ही वह दोस्तों की सही बात पर ध्यान देने की भी आवश्यकता नहीं समझता और अपने विचारों में ही उलझा रहता था।
जब उसकी शादी हुई तो उसने वह किया जो अपने दोस्तों को बताया करता था। उसने पत्नी से प्यार से बात तक नहीं की और उस पर ऐसे झपट पड़ा जैसे वह उसकी पत्नी नहीं कोई खाने की चीज हो। उसके इस व्यवहार से पत्नी हकबका गई और विरोध करने लगी।
उसके इस विरोध ने हरीश की भावनाओं को भड़का दिया और उसने पत्नी को जोरदार थप्पड़ मार दिया। हरीश ने पहले तो पत्नी के बाल खींचे, ब्लाउज के बटन तोड़ डाले और एक प्रकार से देह शोषण करने में सफल रहा।
इस घटना ने उसकी पत्नी के मन में यह भावना पैदा कर दी कि यह पति नहीं जानवर है। उसके दिल में पहली रात को ही अपने पति के प्रति नफरत पैदा हो गई। दूसरे दिन उसके पत्नी के पीहर वाले लेने आ गये। वह पति से बात किये बिना ही चली गई। उसने अपनी भाभी से सारी बात बता दी और कहा कि वह उसके साथ नहीं जायेगी।
भाभी ने उसकी बात सुनकर उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह किसी प्रकार मानने को तैयार नहीं थी। घर में जब यह बात खुली तो हड़कम्प मच गया। जब यह बात हरीश को पता चली तो वह डर गया और एक दिन अपने ससुराल चला गया। उसने सबके सामने अपने किये की माफी मांगी। बड़ी ही मुश्किल से मामला सुलझा अन्यथा उसके सम्बंध समाप्त होने की कगार पर आ गये थे।
अतः इस कहानी से यह पता चलता है कि सुहागरात को पति को अत्यन्त सुलझा हुआ और संतुलित व्यवहार करना चाहिए। इस रात को जोर जबर्दस्ती वाले व्यवहार की कोई आवश्यकता नहीं होती है। पत्नी कोई शत्रु नहीं होती जिस पर जोर आजमाकर जीवन भर गुलाम बनाकर रखें। सुहागरात की पूरी रात आपसी प्रेम-प्यार के साथ बितानी चाहिए।
आज के समय में बहुत से युवक तथा युवती किसी के प्रेम तथा प्यार के चक्कर में पड़ चुके होते हैं। आज के समय में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है। कुछ युवक तथा युवतियाँ जवानी के जोश में भटकने से अपने आपको रोक नहीं पाते और किसी से प्रेम कर बैठते हैं।
इस बात को कभी भी सुहागरात के दिन भूलकर भी पत्नी को न बताएँ और न ही उससे उसके प्रेम प्रंसंग होने का शक करके उससे पूछें।
आज अधिकतर यह भी देखने को मिलता है कि सुहागरात को पति अपने पत्नी से अपने पुराने प्रेम की कहानी बयान करता है और इसके बाद जोर देकर पत्नी से भी कहता है कि तुम भी पहले प्यार के बारे में कुछ बताओ। वह यह भी पूछने की कोशिश करता है कि क्या तुम पहले किसी से प्यार करती थी? किससे करती थी? उसका नाम तो बताओ? तुम्हारी पहली मुलाकात कहाँ हुई थी? उससे प्यार का चक्कर कितने दिन तक चला? इस बीच क्या तुम्हारा उसके साथ सेक्स सम्बन्ध भी स्थापित हुआ या नहीं? हुए भी तो कितने बार?
इतना होने पर कई पत्नी तो कुछ भी इसके बारे में नहीं बताती लेकिन कुछ पति के ज्यादा उकसाने और उसके द्वारा स्वयं के बारे में बताने से पत्नी भी उत्साहित होकर अपने प्रेम सम्बन्धों के बारे में बता बैठाती हैं। यह बात पत्नी और पति दोनों के लिए घातक है।
पत्नी तो पति के विवाहपूर्व के प्रेम सम्बन्धों को सुनकर भूल जाती है लेकिन पति के लिए इनको भूल पाना आसान नहीं होता। पुरुष कभी भी अपनी पत्नी के पहले के सम्बन्ध को बर्दाश्त नहीं कर पाता।
सुहागरात के दिन तो इस प्रकार की हुई हल्की-फुल्की बात को उस समय व्यक्ति महत्व नहीं देता लेकिन बाद में यह बात उसके दिल में गांठ बन जाती है। उसे यह लगने लगता है कि मेरी पत्नी का चरित्र ठीक नहीं है। यह भविष्य में भी दूसरे पुरुषों की तरफ आकर्षित हो सकती है। इस प्रकार से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में क्लेश का वातावरण छा जाता है।
इस बात की पुष्टि के लिए मैं आपको एक कहानी बता रहा हूँ।
कुलजीत नाम के एक लड़के का विवाह सोनम नाम की लड़की के साथ हो गया। वह सुहागरात को अपने पत्नी से बात करने का प्रयास कर रहा था। वह चाहता था कि उसकी पत्नी उससे थोड़ा और खुले, शर्म के आवरण से बाहर निकले। सोनम पर उसके व्यवहार का असर भी हुआ था। वह धीरे-धीरे खुल रही थी।
तभी अचानक से कुलजीत ने विषय बदला और बोला कि आपको तो पता ही होगा कि शादी से पहले अधिकतर लड़के-लड़कियाँ किसी न किसी से दिल लगा बैठते हैं और प्यार करने लग जाते हैं। कभी-कभी उनका प्यार इतना आगे बढ़ जाता है कि शारीरिक सम्बन्ध भी हो जाता है। खासकर कालेज में पढ़़ने वाले लड़के-लड़कियाँ तो इस मामले में आगे होते ही हैं।
मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ यदि आप बुरा न मानो तो मैं बताऊँ?
सोनम ने उससे कहा कि मैं बिल्कुल भी बुरा नहीं मानूंगी।
फिर कुलजीत ने कहा कि कालेज मेरा अनेक लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहा है। मैं अपने कालेज में मॉनीटर रह चुका हूँ और इसलिए बहुत सी लड़कियाँ मेरे पास चक्कर लगाती रहती थी। बहुत सी लड़कियाँ मेरे प्यार में पागल थी। मैंने तो कई लड़कियों के साथ सेक्स का मजा भी ले लिया था।
इसके बाद कुलजीत ने पूछा कि अब आप बताओ कि क्या तुम भी किसी लड़के से प्यार करती थी? तुम तो इतनी खूबसूरत हो की कई लड़कों ने तुम पर लाईन मारी होगी। लड़कों की तो तुम्हारे पीछे लाइन लगी रहती होगी?
यह सुनते ही सोनम पहले तो चकित हो गई और सुगबुगा गई। उसके मन में ऐसा लगा जैसे बिजली चमक पड़ी हो। कुलजीत के ज्यादा जोर देने पर सेक्स करने की बात को लेकर उसे झटका लगा था लेकिन उसने किसी प्रकार का प्रतिवाद नहीं किया।
फिर भी कुलजीत ने उसे बार-बार अपनी बात कहने के लिए उकसाया। तब न चाहते हुए भी वह बोली कि मेरा सम्बन्ध भी एक लड़के के साथ रहा था। हम दोनों हो एक-दूसरे से बहुत अधिक प्यार करते थे लेकिन हमारे बीच शारीरिक सम्बन्ध कभी भी नहीं बना था। इसके बाद ही पिताजी ने आप से शादी तय कर दी तभी मेरे उससे सारे सम्बन्ध समाप्त हो गये। अब मेरे लिये आपके अलावा अन्य कोई नहीं है।
कुलजीत को उसकी बात सुनकर करारा झटका लगा। उसका उत्साह अचानक कम हो गया। उसे यह जानकर धक्का लगा कि वह किसी दूसरे लड़के से प्यार करती थी। इसके बाद वह अधिक बात नहीं कर सका। कुछ देर बाद उसने बुझे मन से उससे कहा चलो कोई बात नहीं। इसके साथ ही वह धीरे-धीरे उसके शरीर से छेड़खानी करते हुए सेक्स क्रिया करने लगा। इसके बाद वह बिना कुछ बोले ही करवट बदल कर सो गया।
इस समय उसको अहसास हुआ कि उसने यह बात कुलजीत को बताकर बहुत बड़ी गलती कर दी। मुझे यह बात बिल्कुल भी नहीं कहना चाहिए था। वह पूरी रात यह सोचती रही। उसके दिल में डर बैठ गया कि कहीं इस बात को लेकर उसका वैवाहिक जीवन बर्बाद न हो जाए। उसे किसी भी सूरत में इस प्रकार की बात नहीं सुनानी चाहिए थी। कुलजीत के दिल में कई दिनों तक शक बना रहा।
अतः हम आपको बताना चाहते हैं कि किसी भी सूरत में सुहागरात या किसी भी दिन अपने पत्नी को कुछ शादी से पहले के प्यार की बात न बताएँ और न ही उससे कुछ पूछें। हम सबको सुहागरात को बीते हुए बात को भूलकर नये जीवन की शुरुआत करनी चाहिए।
सुहागरात को कभी भी अपनी पत्नी के साथ अधिक छेड़छाड़ न करें। बहुत सी स्त्री ऐसी होती है जो पुरुषों के लिए बहुत उत्सुकता का केंद्र बनी रहती हैं। किसी भी युवती को देखकर व्यक्ति कल्पना में क्या से क्या कर जाता है, यह वही पुरुष जानता है जिसके अंदर कामोत्तेजना होती है।
इसलिए जब पत्नी के रूप में कोई स्त्री मिल जाती है तो वह स्त्री शरीर के रहस्य को जानने को उत्सुक हो जाती है और जब स्त्री को अकेले में पाता हो तो उसके कपड़े को शरीर से अलग करने लगता है अर्थात वह चीर हरण करने पर उतारू हो जाता है। वह इतना अधिक उत्तेजना में आ जाता है कि स्त्री के होठों, गालों को चूमने के साथ-साथ उसके उठे स्तनों से भी छेड़छाड़ करने लगता है। उसमें इतनी अधिक कामवासना जाग जाती है जितना कि उसकी पत्नी को भी नहीं होता है।
इसलिए कुछ करने से पहले ही स्त्री के साथ इतना छेड़छाड़ न करें कि कुछ करने की स्थिति पर पहुँच कर कुछ भी करने लायक न रहें। बहुत से व्यक्ति तो ऐसे होते हैं जो स्त्री के शरीर से छेड़छाड़ करते ही सोचते हैं कि स्त्री भी उसके लिंग को हाथ में लेकर सहलाए।
कुछ स्थितियों में तो कुछ करने की तैयारी के पहले ही स्त्री के हाथों में लिंग आते ही वह स्खलित हो जाता है।
इस चीज को समझने के लिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ।
बिहार का रहने वाला एक लड़का था जिसका नाम रमेश था। वह बहुत ही उत्तेजनशील स्वभाव का था। स्त्री के शरीर के बारे में वह ऐसी कल्पना के सागर में डूब जाता था कि बात-बात में अपने दोस्तों के सामने स्त्री के शरीर की अंदरुनी चीजों को बयान करने लगता था। वह यह सोचता था कि जब स्त्री पूरी तरह से निर्वस्त्र हो जायेगी तो देखने में कैसी लगेगी? उसके उभरे हुए स्तन कैसे लगेंगे? उसके होठों पर चुम्बन लेने से कैसा महसूस होगा? उसके शरीर के उत्तेजनशील अंगों को छूकर देखने से कैसा लगेगा?
यह सब सोचते-सोचते उसकी उत्तेजना चरम पर पहुँच जाती थी और कभी-कभी तो वह स्खलित भी हो जाता था।
जब वह 21 वर्ष का हो गया तो उसका विवाह रजनी नाम की लड़की से हो गया। जब वह सुहागरात के कमरे में गया तो उसने देखा कि रजनी पत्नी के रूप में पलंग पर उसका इंतजार कर रही थी।
अब उसके मन में उत्तेजना के लड्डू फूटने लगे थे। वह अपने दिल को थामे पलंग की तरफ गया और रजनी के पास बैठ गया। इस समय उसके शरीर में उत्तेजना होने लगी थी। अब उसने पत्नी का घूंघट उठाकर अलग कर दिया।
इस समय उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो कमरे में चांद निकल आया हो। रजनी के लिपिस्टिक से रंगे सुर्ख होठों को देखकर उसकी उत्तेजना और भी बढ़ने लगी। इस समय तो वह उत्तेजना में इतना अधिक पागल हो गया था कि वह मन ही मन कल्पना कर रहा था कि इसके तो स्तन मेरी कल्पना से भी अधिक उठे तथा सुन्दर है।
इसके बाद उसके दिमाग पर हैवानियत सवार हो गया कि तुरंत ही अपने होंठों को रजनी के होंठों पर रखकर चूसने लगा। यह सब रजनी को बिल्कुल भी अच्छा न लग रहा था क्योंकि वह अचानक ही कमरे में बिना कुछ बात किये सीधे सेक्स क्रिया करने लगा था, रजनी को जरा सी भी उत्तेजना नहीं थी।
रमेश हैवानों के तरीके से उसको चूसता रहा तथा अपने हाथों से उसके कपड़े को भी उतार फैंका और उसके स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगा। रजनी ने विरोध तो करना चाहा लेकिन वह नहीं कर पाई। क्योंकि कोई भी लड़की चाहे कितनी ही मजबूत दिल वाली क्यो न हो सुहागरात को तो अनजान ही रहती है।
रमेश ने कुछ देर बाद अपना तमतमाया चेहरा पीछे किया। उसकी सांसों की गति उत्तेजना के कारण से बहुत अधिक बढ़ चुकी थी। इसके बाद धीरे-धीरे रजनी ने सारे कपड़े उतार दिये। जल्दी ही वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई, वह स्त्री को इसी रूप में देखने की कल्पना करता रहता था।
रजनी को बहुत अधिक लज्जा आ रही थी इसलिए उसने रमेश से कहा कि लाइट बन्द कर दे, लेकिन वह माना नहीं और धीरे-धीरे अपने हाथों को उसके शरीर पर फेरता रहा। थोड़ी देर बाद रमेश ने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिये।
अब तो उत्तेजना उसकी चरम सीमा पर थी। उसने तुरंत ही सेक्स सम्बन्ध बनाने का प्रयास किया लेकिन जैसे ही अपने लिंग को रजनी की योनि में प्रवेश किया वैसे ही स्खलित हो गया। कुछ ही देर में उसका सारा जोश बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया और एक तरफ बेजान शरीर की तरह लेट गया।
कुछ देर बाद उसने अपने कपड़े पहने और लेट गई। यह रात रजनी पर बहुत भारी गुजरी, वह पूरी रात तड़पती तथा रोती रही। रमेश थोड़ी देर बाद जाग गया फिर भी उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह दुबारा रजनी को हाथ लगाये।
इसके बाद अनेक बार ऐसा ही हुआ कि वह जैसे ही वह सेक्स क्रिया करने को होती वह स्खलित हो जाता। वह चिंता में पड़ गया कि मुझे कोई गुप्त रोग तो नहीं हो गया है या शीघ्रपतन का रोग तो नहीं हुआ। वह इतना अधिक चिंतित हो गया कि दिन रात इसी को सोचता रहता था। वह कई चिकित्सकों से मिला लेकिन वह संतुष्ट नहीं हुआ।
एक दिन उसे एक सेक्स के बारे में जानने वाला चिकित्सक मिला जिसकी बातें उसको अच्छी लगी और इससे उसे काफी लाभ मिला। अब वह जान गया कि सेक्स क्रिया करने के समय में मैं जिस प्रकार से पत्नी के शरीर से छेड़खानी कर रहा था, सारा दोष उसी का है।
अगली रात ही जब रजनी से सेक्स सम्बन्ध बनाने लगा तो उसने शारीरिक छेड़छाड़ कम की। जिसके बाद वह ठीक से सम्बन्ध बनाने में सफल रहा और धीरे-धीरे उसकी समस्याँ पूरी तरह से खत्म हो गई। इस तरह से इनका वैवाहिक जीवन तबाह होने से बच गया। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि यदि कोई भी समस्या हो तो उससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका हल निकालना चाहिए।
जैसे ही लड़के-लड़की की शादी तय होती है वैसे ही दोनों आने वाले पलों की कल्पनाओं में खो जाते हैं। लड़कियाँ तो अधिकतर यह सोचती हैं कि मेरा घर, परिवार कैसा होगा, मेरे पति कैसे होंगे, क्या मेरा वैवाहिक जीवन सफल रहेगा। लड़के अधिकतर यह सोचते हैं कि मेरी पत्नी कैसी होगी तथा मेरा जीवन रोमांटिक होगा तथा इन कल्पनाओं में सेक्स की बातें अधिक जुड़ी होती हैं।
जैसे-जैसे शादी के दिन नजदीक आते हैं वैसे-वैसे वे कल्पनाओं में खोने लगते हैं- जैसे सुहागरात में क्या-क्या होता है? इस रात पति पत्नी की क्या-क्या बातचीत होती है। सम्बन्धों के समय पत्नी की स्थिति कैसी होती है? इस प्रकार की बहुत सारी बातों को जानने की उत्सुकता भी बनी रहती है। इसके बारे में वे जानने के लिए अपने दोस्तों तथा सम्बन्धियों से बात करते हैं या फिर सेक्स की पुस्तकें और पत्रिकाओं को पढ़़ते हैं।
इन सभी प्रकार की बातों को जानने के लिए मैं आपको एक कहानी बता रहा हूँ। सोनू की शादी होने को कुछ दिन ही बाकी बचे तो उसके मन में कई प्रकार के विचार आने लगे। उसने इन बातों को जानने के लिए कुछ पुस्तकें बाजार से जाकर खरीद ली, लेकिन उसको इससे कोई विशेष लाभ नहीं मिला।
तब एक दिन उसके कमरे में चार-पांच मित्र इकट्ठा हुए तो वे उसे समझाने लगे कि शादी के दिन क्या-क्या करना चाहिए? तभी एक दोस्त ने मजाकिये स्टाईल में कहा कि आजकल बहुत कम ही देखने को मिलता है कि जिनको सुहागरात में लड़की पूरी तरह से कुंआरी मिलती है। वरना तो आजकल ज्यादातर लड़कियाँ शादी से पहले ही किसी ओर के साथ सम्बंध बना चुकी होती हैं।
ऐसा सुनते ही सोनू के कान खड़े हो गये और पुछा कि यह कैसे पता लगेगा कि पत्नी कुंआरी है या नहीं? उसके ऐसा कहते ही दोस्त ने अपना अधूरा ज्ञान सुनाने लगा। उसने कहा कि स्त्री की योनि पर एक झिल्ली होती है जो पहली बार सेक्स सम्बन्ध बनाते समय फटती है जिसके कारण से कुछ मात्रा में योनि से खून निकलने लगता है, यही कुंआरेपन की निशानी होती है। यदि सुहागरात को सेक्स सम्बन्ध बनाने पर स्त्री के योनि से खून न निकले तो यह समझ लो कि मामला गड़बड़ है और पत्नी का पहले भी किसी से सेक्स सम्बन्ध बन चुका है।
यह बात देर रात तक दोस्तों के बीच चलता रही।
इसके बाद सोनू ने इस बात को मन में गांठ बांध लिया और सोच लिया कि मैं भी पता करके रहूंगा कि पत्नी कुंआरी है या नहीं। कुछ दिन बाद ही सोनू की शादी वीणा नाम की लड़की से हो गई। सुहागरात को जब पत्नी वीणा से सम्बन्ध बनाये तो उसने यह देखा कि खून नहीं निकला। इस पर उसे शक हुआ कि कही वीणा ने पहले ही किसी अन्य से सम्बन्ध तो नहीं बनाये हैं। इस शक के कारण से उसने वीणा पर गुस्सा दिखाना शुरू कर दिया और उसे चरित्रहीन भी कह दिया।
इस पर वीणा कसम खाने लगी कि नहीं मेरा शादी से पहले किसी से भी सम्बन्ध नहीं बना। किसी से सम्बन्ध बनाना तो दूर की बात है मैंने तो किसी लड़के के बारे में भी आज तक नहीं सोचा और न ही किसी के बारे में कभी विचार किया। आप मेरे पर विश्वास तो कीजिए, मेरी बात तो सुनिये। मैंने किसी से भी सम्बन्ध नहीं बनाया।
लेकिन सोनू ने कुछ भी नहीं सुना और गुस्सा होने लगा। उसने तुरंत ही निश्चय किया कि मैं इसको अपने साथ नहीं रखूंगा।
तीसरे दिन ही वीणा को मायका से वाले लेने आ गये और उसे अपने साथ ले गये। घर जाते ही उसने रोते हुए सारी बात अपनी भाभी को बता दी।
सोनू के इस व्यवहार के कारण से भाभी को बहुत गुस्सा आ गया। उसे अच्छी प्रकार से मालूम था कि वीणा ऐसा नहीं कर सकती है। घर के संस्कार ऐसा व्यवहार करने किसी को इजाजत नहीं देते थे। उसने इस बारे में सोनू से बात करने के बारे में सोचा लेकिन कुछ समय तक वह खामोश ही रही।
उधर सोनू ने अपने दोस्त जो कि वकील था उससे अपने और वीणा के बीच तलाक लेने की बात की। मित्र को बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने सोनू से कारण पूछा।
जब यह बात सोनू मित्र से कह रहा था तभी उसका एक और दोस्त जो डॉक्टर था वह भी वहाँ पर मौजूद था। जब सोनू अपनी पत्नी के बारे में बता रहा था तब डॉक्टर ने कहा की सोनू तुम गलतफहमी का शिकार हो गये हो। यह जरूरी नहीं कि सुहागरात को जिस स्त्री से सम्बन्ध बनाते समय खून नहीं आये, वह चरित्रहीन है। यह भी तो हो सकता है कि शायद उसकी कुंआरीच्छत किसी प्रकार की दुर्घटना के कारण, खेल-कूद या साईकिल चलने के कारण से फट गई हो।
इसके बाद उसने सारी बात ठीक-ठीक से समझा दी और कहा कि अपनी पत्नी के प्रति अविश्वास बनाने से तुम्हारा वैवाहिक जीवन तबाह हो सकता है। इसलिए तुम तुरंत ही अपनी गलती को मानकर पत्नी को घर ले आओ, वरना बहुत देर हो जाएगी।
अब सोनू अपनी गलती को ठीक-ठीक से समझ चुका था और उसे अपनी गलती पर पछतावा हुआ।
दूसरे दिन वह बिना किसी को बताये ससुराल चला गया। फिर उसने वीणा से बात करना चाहा तो वीणा ने बात करने से मना कर दिया। इसके बाद सोनू से वीणा की भाभी से बात की और कहा कि तुमने वीणा जैसी सीधी-सादी लड़की पर कितना गंदा आरोप लगाया था। तुम्हें यह आरोप अपनी पत्नी पर लगाते हुए शर्म नहीं आई।
इसके बाद सोनू ने भाभी से माफी मांगी और कहा कि मुझे वीणा से किसी भी तरह से बात करा दो, मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा है, मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए था।
अब भाभी वीणा से उसकी मुलाकात करने के लिए तैयार हो गई। फिर भाभी ने वीणा को समझाया और सोनू से उसकी मुलाकात करा दी। उसने वीणा से अपनी गलती की माफी मांगी और कहा कि मैं भविष्य में अब कभी भी ऐसी गलती नहीं करूंगा। इसके बाद वीणा ने सोनू को माफ कर दिया।
अतः सुहागरात में यदि स्त्री के योनि से खून न निकले तो यह नहीं सोच लेना चाहिए कि वह चरित्रहीन है। क्योंकि किसी भी लड़की के जिंदगी में शादी से पहले उसकी योनि की झिल्ली कई कारणों से फट सकती है जैसे- खेल-कूद करने, चोट लगने, साईकिल चलाने तथा अधिक व्यायाम करने आदि।
इसलिए सभी युवकों को मेरी यह सलाह है कि जिनकी शादी होने वाली है वे इस प्रकार की अधकचरी जानकारी के कारण अपने भविष्य को आग न लगायें। ऐसी गलतफहमी के कारण से अनेकों का घर बसने से पहले ही उजड़ गए है।
कभी-कभी शादी जैसे शुभ कार्यों पर कुछ अमंगल भी घट जाता है। अमंगल होने के कई कारण हो सकते हैं। आज के समय में दहेज को लेकर कई प्रकार की समस्याएँ होते हुए देखी गई हैं। कभी-कभी तो शादी में अमंगल होने का कारण दहेज प्रथा भी हो सकती है। क्योंकि जितना दहेज लेने की बात घर वालों ने की होती है, उतना न मिल पाने के कारण से घर वाले लड़की को सताने लगते हैं। इसके कारण से जो वैवाहिक जीवन शुरू होने वाला होता है वह तबाह हो जाता है।
कई बार तो यह भी देखने को मिलता है कि दहेज के कारण से ऐसी भी स्थिति पैदी हो जाती है कि लड़की वाले जितना कुछ देने के लिए कहते हैं वे उसे दे पाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में लड़के को या उसके माता-पिता को यह जिम्मेदारी आ जाती है कि किसी भी कारण से पैदी हुई कटुता का क्रोध पत्नी पर न उतारें। इस प्रकार के किसी भी कारण में पत्नी का कोई दोष नहीं होता है।
अगर सुहागरात को उसे इस वजह से परेशान नहीं करना चाहिए यह खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। कई लोग तो इसका गुस्सा सुहागरात को पत्नी पर उतार देते हैं, लड़की के माता-पिता को कोसा जाता है तो ऐसी स्थिति में तो लड़की कुछ नहीं करती लेकिन मन ही मन दुःखी बहुत होती है।
इस स्थिति को ठीक प्रकार से समझने के लिए मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूँ।
पंकज मध्यम परिवार का लड़का था। उसका विवाह रुचि नाम की लड़की से तय हुआ। पंकज के परिवार वालों ने रुचि के पिताजी से एक कार तथा 2 लाख रुपये की मांग की, जो उसके पिताजी देने के लिए तैयार हो गये। रुचि के पिता जी ने तिलक के दिन ही 2 लाख रुपये दे दियें। शादी के सारे रस्म ठीक-ठाक हो रहे थे।
अब रुचि के पिताजी कार खरीदने के लिए बैंक से रुपये लेने गये। उन्हें रुपये तो बैंक से मिल गये लेकिन जैसे ही वह बैंक से निकले कुछ गुंडों ने सुनसान जगह पर उन्हें घेर लिया और उनके रुपये छीन लिये। जब वह घर लौटे तो अपने परिवार वालों को सारा अपना हाल बयान किये।
लेकिन शादी के सारे रस्म पूरे हो चुके थे इसलिए वे शादी को रोक भी नहीं सकते थे। उन्होंने सोचा की अब तो शादी रुक नहीं सकती है और यह बात अगर लड़के वालों को बता भी देंगे तो वह इसे झूठ ही समझेंगे। इसलिए कार तो हम कुछ दिनों बाद दे देंगे। चलो अभी तो उन्हें यह कह देंगे कि किसी कारण से हम आपको अभी कार देने में असमर्थ है, हम कुछ दिन बाद कार जरूर दे देंगे। इतना कहने पर तो वह मान ही जाएंगे।
उधर बारात निकलने की तैयारी हो चुकी थी शादी तो धूम-धाम से हो गई। लेकिन जब पंकज के पिताजी ने रुचि के पिताजी से कार की बात की तो रुचि के पिताजी ने इसे देने के लिए कुछ दिन का समय मांगा और उन्हें अपना सारा हाल बता दिया। पंकज के पिताजी समझदार थे जो वे इस बात को समझ गये और रुचि के पिताजी से कहा कि कोई बात नहीं।
अब शादी होकर बारात लौट आई। जब पंकज को इस बात का पता चला तो उसका दिमाग खराब हो गया और उसे गुस्सा बहुत आया लेकिन वह अपने पिताजी से कुछ कह नहीं सकता था।
जैसे तैसे घर वालों के समझाने पर वह सुहागरात के कमरे में गया। उसका दिमाग तो पहले से खराब था। उसने कमरे में देखा कि उसकी पत्नी लाल जोड़े पहने आराम से बैठी है।
गुस्से के मारे उसने पूरे रात रुचि से बात तक न कि और पलंग पर मुँह फेर कर सो गया। इस पर रुचि ने कम से कम तीन घंटे तक तो कुछ नहीं कहा फिर पछताकर खुद ही उससे बोली की आखिर क्या बात है जो आप मुँह फेरकर सो गये।
फिर वह उठा और रुचि से कहा कि पिताजी से बात कार देने की हुई थी जो उन्होंने नहीं दी। इस पर रुचि ने कहा कि आपको हमारे घर के हालात पता नहीं है। मैं आपको अपने घर की हालात बताती हूँ। अब रुचि ने अपने पिताजी पर घटी घटना को विस्तार से बता दी लेकिन वह कुछ भी मानने को तैयार नहीं था।
इस तरह से बात करते-करते पंकज ने एक जोरदार थपड़ रुचि को लगा दिया। रुचि रोने लगी और उसे भी बुरा भला कहने लगी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे से अलग-अलग सो गये। कुछ दिन तक दोनों में ही यह नाटक चलता रहा।
इस दिन से ही रुचि के मन में पंकज के लिए नफरत हो गई। कुछ दिन के बाद ही रुचि के पिताजी ने पंकज के लिए कार खरीद दी। इसके बाद को पंकज ने रुचि से खुश-खुशी रहने के लिए वादा किया लेकिन रुचि के मन में जो पंकज के लिए नफरत भरी थी वह जीवन भर उसे चुभता रहा और इससे उनके वैवाहिक जीवन में काफी क्लेश होने लगा।
सुहागरात में ध्यान देने वाली आवश्यक बातें
सुहागरात को अधिकतर स्त्रियों की योनि शुष्क रहती है। इसलिए पुरुषों को चाहिए कि लिंग को योनि में प्रवेश करने से पहले लिंग पर किसी प्रकार की चिकनाई लगा लें ताकि प्रवेश आसानी से हो सकें।
पहली रात में यदि पति दुबारा सेक्स करना चाहे और स्त्री न करना चाहे तो पति को चाहिए कि वह उसका सम्मान करें। कभी भी सेक्स करने के लिए जबर्दस्ती और पत्नी की अनिच्छा के विरुद्ध सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
सुहागरात को सुहागकक्ष में न तो पूरी ट्यूब लाइट या बल्ब जलाएँ और न पूरा अंधेरा रखें। आसमानी या हरे रंग का बल्ब जलाना लाभदायक होता है।
इस रात को कभी भी पत्नी के साथ न तो अप्राकृतिक सेक्स करें और न उल्टे-सीधे आसनों का प्रयोग करें। सुहागरात को पत्नी नीचे हो तथा पुरुष को ऊपर रहकर सेक्स करना चाहिए।
सुहागरात को शारीरिक सम्बन्धों के समय में न तो स्वयं अश्लील संवाद बोलें और न पत्नी को बोलने के लिए आग्रह करें। शारीरिक सम्बन्धों में भी शालीनता का होना आवश्यक है।
सुहागरात को स्त्री को कभी भी अपने मन में डर का भाव नहीं लाना चाहिए। लेकिन बहुत सी लड़की जब ससुराल आती है तो उसके बाद उसमें घबराहट और डर बना रहता है जो स्वाभाविक है लेकिन इस डर को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।
सुहागरात को यदि पति पत्नी से कुछ पूछना चाहे तो पत्नी को इसका उत्तर देने का प्रयास करते रहना चाहिए। कभी भी गठरी की तरह चुप-चाप बैठी न रहें। जहाँ तक सम्भव हो पति की बातों का समुचित उत्तर दें।
इस रात को पति चुम्बन, आलिंगन या स्तन दबाना चाहे तो उसके हाथों को न रोकें। यदि आप पर कुछ भी सेक्स उत्तेजना न हो तो भी अपने पति को ऐसा करने से न रोके क्योंकि यह उसका हक होता है।
यदि पत्नी को पति की कोई हरकत अच्छी न लगती हो तो शालीनता दिखाते हुए संयम से काम लें और अधिक परेशानी हो रही हो तो प्यार से समझाकर मना करें।
यदि पत्नी का शादी से पहले प्रेम प्रंसग रहा है तो उसको यह बात जुबान पर नहीं लानी चाहिए और सब कुछ भूलकर पति के प्रति समर्पित होने का प्रयास करें।
यदि पति अपनी उत्तेजना के कारण से आपको चुम्बन तथा आलिंगन कर रहा हो तो आप भी इसके बदले में पति को चूम सकती है। आप ऐसा करेंगी तो पति का आपके प्रति प्रेम तथा लगाव अधिक बढ़ेगा।
यदि इस रात को पति दुबारा से सेक्स सम्बन्ध बनाना चाहे लेकिन पत्नी को इसकी इच्छा न हो तो उसे चाहिए कि पति को प्यार से समझाए और पति को भी पत्नी की बात का सम्मान करना चाहिए। Antarvasna
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.