Find Related Category Ads
दोस्तो ! मै २३ साल क अविवाहित युवक आगरा का रहने वाला Antarvasna हूं, आपको एक सत्य घटना बताता हूं
करीब चार साल पहले की बात है जब मै दिल्ली में एक बड़े शोरूम मे नौकरी करता था। एक दिन एक औरत आई और कहने लगी कि मुझे अपने १ साल के बच्चे के लिये जुराबें लेनी हैं। मैने कहा- मैडम किडस सेक्शन उपर है। वो बोली कि मै भी उसके साथ उपर चलूं तो मै भी उपर आ गया। जब उसने अपना काम खत्म कर लिया तो वो बोली कि क्या मै उसके साथ उसके घर तक चल सकता हूं?
मैने कहा कि काम के समय मुझे कहीं भी जाने की इजाजत नहीं है तो वो बोली कि ठीक है तुम मुझे अपना फ़ोन नम्बर दे दो और मैने दे दिया। उसी रात उसका फ़ोन आया कि वो मुझसे मिलना चाहती है। मुझे भी उससे मिलने की इच्छा थी तो हमने मंगलवार का कार्यक्रम तय किया।
मै मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे उसके घर पहुंचा और डोर बेल बजाई। थोड़ी देर में दरवाजा खुला और वो मेरे सामने थी। मै उसको देखता ही रह गया। वो काले रंग की साड़ी में थी और उसका हुस्न मुझ पर कयामत ढा रहा था। मै उसके साथ अन्दर आया तो उसने पूछा- क्या लोगे? ठन्डा या गर्म? मैने कहा दोनो। उसने कहा ऐसे तो तुम्हारी तबीयत खराब हो जायेगी। मैने कहा- यही तो मै चाहता हूं। यह सुनकर वो धीरे से मुस्कराई और बोली-उसके लिये तो तुम्हें मेरे बेडरूम में चलना होगा। मैने कहा ठीक है, चलो, और हम उसके बेडरूम में आ गये।
काफ़ी देर हम बातें करते रहे। बात करते करते उसने अपना पल्लू गिरा दिया। उसकी चूचियां ब्लाउज से बाहर झांक रही थी। मैने उसे बेड पर लिटा लियाऔर उसके होठों को चूमने लगा। करीब १५ मिनट के बाद मै उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही मैने उसका ब्लाउज उतारा, आगे का नज़ारा देख मै पागल हो गया और ब्रा के उपर से ही जोर जोर से उसकी चूची दबाने लगा। फ़िर ब्रा उतार कर चूचियां चूसने लगा. अब वो भी गर्म हो गयी थी। मैने उसकी साड़ी और फ़िर पेटिकोट उतार दिया। वो सिर्फ़ पैन्टी में बहुत मादक दिख रही थी। उसने मेरे कपड़े भी उतार दिये। हम पूरे नंगे हो गये। उसने मेर 8” लम्बा लन्ड मुंह मे ले लिया और मै ६९ कि पोजिशन मे उसको मजा देने लगा। वो एकदम पागल हो चुकी थी।
अब मै उसके उपर लेट कर अप्ना लन्ड उसकी चूत में घुसाने को तैयार हो गया। टांगें फ़ैला कर उसने मेर स्वागत किया। चूंकि वो एक बच्चे की मां थी इसलिये काफ़ी अनुभवी थी। जैसे हि मैने अपना लन्ड उसकी चूत पे रखा, वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी। लन्ड अन्दर जाते ही वो सिसकारियां लेने लगी। थोड़ी देर झटके देने के बाद मै उसका दूध पीने लगा। अब दूध पीने में ज्यादा मजा आ रहा था। फ़िर मै झटके देने लगा और थोड़ी देर में मैं झड़ने लगा। अब तक वो भी झड़ चुकी थी। उसके बाद हम दोनो काफ़ी देर लिपटे ही रहे।
अब तक मै उसको कम से कम दस बार चोद चुका हूं। Antarvasna
बात उस समय की Indian Sex Stories है जब मैं अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रहा था। मैं उसी समय एक स्कूल में टीचर के रूप में भी काम करता था। मैं दसवीं तक के बच्चों को पढ़ाता था। उसमें लड़के और लड़कियाँ दोनों ही थी। दसवीं क्लास की लड़कियों को मैं हमेशा पटाने की कोशिश में रहता था। उनकी चूचियों को देख कर मेरे मुँह में पानी आ जाता था।
उसी समय दसवीं की एक लड़की मेरे से पट गई। वो बहुत ही सुंदर थी, उसकी चूची देख कर तो मैं पागल ही ही जाता था। वो उस समय ब्रा नहीं पहनती थी, केवल टॉप पहनती थी और ऊपर से शर्ट ! जब वो चलती थी तो उसकी चूचियाँ इस तरह से उछलती थी जैसे कि दो गेंदें उछल रही हों।
एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था तो मैंने स्कूल से छुट्टी ले ली और उसको भी बहाने से घर पर ही बुला लिया। वो सलवार कमीज़ पहन कर आई थी। उसके आते ही मैंने सारे दरवाजे बंद कर दिए और उसको अपनी गोद में उठा लिया। मैं उसको होठों को चूसने लगा और वो मुझसे लिपटने लगी।
मैंने उसके टॉप को उतार दिया और उसकी शमीज भी उतार दी और अब मेरे सामने उसके दो बड़े बड़े संतरे जैसी चूचियाँ थी। मैंने एक को अपने हाथ में लिया और एक को अपने मुँह में !हाथ वाली को मैं बेदर्दी से मसलने लगा और मुँह वाली को मैं जोर से दांत से काट रहा था। वो बुरी तरह से तड़प रही थी पर मैं तो पागल हो गया था और उसकी कोई बात नहीं सुन रहा था।
फिर मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके सलवार को भी उतार दिया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया और उसकी बुर को देखने लगा। बुर पर पूरा पानी पानी हो रहा था और झांटों से भरी थी। उसकी बुर पर एक छोटा सा दाना था।
मैंने उसकी बुर में सीधे एक ऊँगली पेल दी।
बाप रे !
उसकी बुर तो भट्टी की तरह गरम थी। उसने मस्ती में अपनी आँखें बंद कर ली। मैंने अपनी ऊँगली को अंदर-बाहर करना शुरु किया और वो सिसकियाँ भरने लगी। मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वो उसको चूसने लगी। शुरु में तो कुछ नखरा दिखाया पर बाद में तो वो लंड को मुँह से छोड़ने को तैयार नहीं थी, मैंने किसी तरह से उसके मुँह से अपना लंड निकला और उसकी टांगों को फैला कर बुर के छेद पर अपने लौड़ा को टिकाया और उसके कमर के नीचे एक तकिया दिया जिससे कि उसकी बुर ऊंची उठ जाये और मुझे बुर पूरी खुली हुई मिले।
अब मुझे बुर का छेद पूरा खुला हुआ दिख रहा था और मैंने अपने लंड को छेद पर रख कर दबाना शुरु किया, वो तड़पने लगी। लेकिन मुझे पहले से पता था कि वो कुंवारी है इसी लिए मैंने उसको इस तरह से जकड़ लिया था कि वो मेरे चुंगल से निकल नहीं सके। मैंने अपने होठों से उसके होंठ दबा रखे थे जिससे कि वो चीख भी नहीं सकती थी।
अब मैंने एक बार पूरी ताकत लगा कर धक्का मारा और अपने लंड को उसकी बुर के जड़ तक पेल दिया। वो पूरी ताकत लगा कर चीखना चाहती थी पर ऐसा हो न सका। वो दर्द की अधिकता से अर्ध- बेहोशी के हाल में पहुच गई क्यूंकि उस समय उसकी उमर केवल 18 साल थी और वो पहली बार चुद रही थी। मैंने बिना रुके उसी हालत में धक्के लगाने शुरु किये और जब देखा कि कोई प्रतिरोध नहीं हो रहा है तो और जोर जोर से धक्के लगाने लगा और अपने लंड को बुर के अंत तक पहुँचाने लगा।
दस मिनट तक मैं उसको बेदर्दी से चोदता रहा और वो अर्ध बेहोशी की हालत में रही। फिर उसे होश आया और उसने लंड को अपनी बुर में महसूस किया। अब शायद उसे भी मजा आने लगा था। अचानक ही उसने अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछालना शुरु किया और अब वो मेरे लंड को अपने बुर की अंतिम गहराई तक लेने की कोशिश करने लगी। यह देख कर मैंने भी अपना स्पीड बढ़ा दी और पूरी ताकत से उसको चोदने लगा।
जल्दी ही मैंने महसूस किया कि उसके बुर से कुछ रिस रहा है और उसने अपने आंखें बंद कर ली हैं। अचानक ही उसने मुझे इस कदर जकड़ा कि मुझे अपनी हड्डियाँ टूटती हुई महसूस हुई और उसने जोर से मेरे कंधे पर अपने दाँत गड़ा दिए। उसकी बुर से पानी साफ़ निकलता हुआ महसूस होने लगा।
मैं भी रुका नहीं और धक्के लगाता रहा और मैंने भी अपना सारा माल उसकी बुर में ही डाल दिया और निढाल हो कर उसके ऊपर गिर पड़ा। थोड़ी देर के बाद हम दोनों को होश आया कि यह हमने क्या किया ! क्यूंकि हमने कंडोम का इस्तेमाल ही नहीं किया और मैंने सारा माल उसकी बुर में ही छोड़ दिया था।
वो रोने लगी- अब मै प्रेगनंट हो जाउंगी !
डर तो मै भी गया था पर मैंने शो नहीं किया और एक केमिस्ट की दुकान पर जाकर एक गोली लाकर उसको खिला दी।
उसके बाद हमारा एक महीना कैसे बीता, यह हम ही जानते हैं क्यूँकि उसकी अगली माहवारी तक हमारी फटी रही !
लेकिन जब सही समय पर उसकी माहवारी हुई तब जाकर मैंने चैन की सांस ली। इस बीच लगभग एक सप्ताह तक वो सही रूप से चल नहीं पाई क्यूँकि जब भी वो चलती थी, उसकी बुर में बहुत जोरों का दर्द होता था।
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी? Indian Sex Stories
अब मैं एक और कहानी आपके सामने प्रस्तुत Hindi Sex Stories कर रहा हूँ. कृपया अपने विचार लिखते रहें. मैं किस तरह का आदमी हूँ ये मेरी कहानी ” डॉक्टर मेरी गुरुआनी” पढने के बाद जान चुके होंगे.
डॉक्टर से मिलना कम हो गया था, डॉक्टर साब का ट्रान्सफर अलका के साथ ही हो गया, डॉक्टर साहब और अलका साथ रहने लगे थे और अब खुश भी थे. हम भी खुश हैं, हमारी दोस्ती बिगड़ी नही लेकिन अब मेरी भी शादी हो चुकी थी और हमारी दोस्ती में सेक्स का वो मतलब भी वैसे ही पूरा हो रहा था. फ़िर भी हम खुश हैं क्यूंकि हम बेवफा नही हैं.
कुछ साल निकल गए. धीरे धीरे मेरी पत्नी का सेक्स के प्रति लगाव थोड़ा कम हो गया और आश्चर्य कि वो पहले नही शरमाती थी अब कई बातों में शरमाने लगी या यूँ कह लें कि हिचकने लगी. मेरे सेक्स की चाहत अधूरी हो गई.
ये बहुत पुरानी बात नही है।
मेरा परिचय मेरे खास दोस्त के ऑफिस में इंटरव्यू देने आई एक लड़की से हुआ. मैं ही इंटरव्यू ले रहा था. वो लड़की नमस्ते कर के सामने कुर्सी पर बैठ गई. साधारण शक्ल सूरत की लड़की ५ फुट ६ इंच कद की थी. लेकिन उसका बदन बहुत आकर्षक है. एकदम सुता हुआ. उसने मुझे बहुत इम्प्रेस किया. मैंने उसको जाने के लिए बोला और कहा कि आपके फ़ोन पर कॉल करके आपको बुला लिया जाएगा.
मैंने अपने दोस्त को उस लड़की रीना को बुलाने को कह कर आगे के सारे इंटरव्यू कैंसल कर दिए और अपने ऑफिस में चला आया. मेरे दोस्त ने उस लड़की रीना को कॉल करके बधाई दी और ऑफिस जोइन करने के लिए कह दिया. जाने रीना ने मुझमे क्या देखा कि हम दोनों में धीरे धीरे बातचीत शुरू हुई फोन पर और फ़िर वो अपने ऑफिस के बाद मेरे ऑफिस में आने लगी. हम दोनों साथ में ही खाना खाते, नाश्ता करते और शाम को ७ बजे बाद मैं उसको उसके घर के बाहर मेन रोड पर छोड़ भी आता. फ़िर तो हम एक दूसरे से खुलते गए. मैं लगभग रोज ही उसको घर तक छोड़ने लगा. आश्चर्य की बात थी कि आज के जमाने में कोई ऐसी भी लड़की थी जिसको सेक्स की कोई जानकारी नही थी.
मेरी उस से कोई ग़लत फायदा उठाने की नीयत नही थी. डॉक्टर की तरह ही उस से भी अच्छी दोस्ती रखना चाहता था. इसलिए मैंने उसको सेक्स की जानकारी देना शुरू किया. हम और एक दूसरे के करीब आते गए इसके बावजूद कि वो जानती थी कि मैं शादी शुदा हूँ हम एक दूसरे को चाहने लगे. हम ने एक दूसरे को वादा किया कि हम एक दूसरे के साथ तब तक बंधे रहेंगे जब तक कि हमारे कोई और रिश्ते इस कारण ही बिगड़ने न लगें. हम एक दूसरे से चिपक कर बैठने लगे. उसको सेक्स चढ़ने लगा. शाम को मेरे ऑफिस में हम दोनों को छोड़ कर कोई नही होता था.
एक दिन एकांत पाकर मैंने ऑफिस में ही उसको होटों पर किस किया. हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा. फ़िर मैंने उसके बोबों पर हाथ रखा तो उसने कसकर मेरे हाथों को पकड़ लिया. उसकी हालत ख़राब होने लगी. थोडी देर रुक कर जब रीना थोड़ा सामान्य हुई तो मैं उसको उसके घर छोड़ आया.
फ़िर एक दिन हम कुछ ज्यादा ही फ्री हुए तो मैंने ऑफिस के दरवाजे में चाभी लगा कर बंद किया और वापस कुर्सी पर आकर उसका पायजामा नाड़ा खोल कर थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी जांघें सहलाने लगा. रीना को सेक्स चढ़ने लगा. उसकी आँखें मुंदने लगी. मैंने पैंटी में हाथ डालना चाहा तो रीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया बोली प्लीज नही. तो मैंने उसकी पैंटी की साइड से ऊँगली उसकी चूत पर छुआई. वो तो जैसे पागल हो गई. उसका सर मेरे सीने से लग गया. मेरा एक हाथ उसकी गर्दन पर लिपट गया और दूसरे हाथ से उसकी चूत साइड से सहलाता रहा. वो सेक्स में पिघलने लगी. फ़िर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में दे दिया. वो थोड़ा कसमसाई लेकिन मैंने हाथ नही हटाया. वो लम्बी साँसे लेने लगी. मैंने उसकी चूत सहलाना शुरू किया. और साथ में लिप किस भी शुरू कर दिया. मेरी इच्छा थी उस से आज ही सेक्स करने की. मैंने उसकी चूत में ऊँगली की. मुझे एक झटका सा लगा. वो अभी तक अनछुई थी. मैंने सोच लिया कि कोई बात नही, इस लड़की को लंड अंदर डाल कर नही करूँगा.
मैं खडा हो गया. और उसको भी कुर्सी से खडा कर लिया और हम एक दूसरे से होंट मिलाते हुए एक दूसरे की बाँहों में बंध गए. मैंने भी अपने पैंट और अंडरवीयर उतार कर लंड उसको खेलने को दे दिया. उसने लंड अपने हाथों में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू कर दिए.
फ़िर थोडी देर में उसका कुरता ऊँचा करके मैंने उसके बोबे ब्रा से बाहर कर लिए और उनको चूसना शुरू कर दिया वो जल उठी. उसने कस कर मुझको बाँहों में ले लिया. मैंने उसकी हिप्स को टेबल टॉप के साथ लगाया और अपने लंड को उसकी चूत की दरार में लगा दिया और जोर से दबा कर धीरे धीरे चूतड़ चला कर उसके कलाईटोरिस को लंड से रगड़ देने लगा. हम एक दूसरे के होंट और जीभ को खूब चूसने लगे. रीना को भी मजा आने लगा. वो भी अपनी गांड चलाने लगी. अब मैंने अपना बायाँ हाथ उसके चूतड़ों के पीछे करके अपनी और भींच रखा था और दायें हाथ से उसके बोबे दबा रहा था. मुँह से मुह मिले हुए थे. उसके हाथ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे. धीरे धीरे हमारी मंजिल करीब आती गई फ़िर वो और उसके बाद हम दोनों ही झड़ गए. कुर्सी पर बैठ कर एक दूसरे को बाँहों में ले कर सहलाने लगे. फ़िर थोडी देर बाद कपड़े पहन कर सामान्य हो गए.
आज कई महीने हो गए. हम एक दूसरे के साथ सुखी और संतुष्ट है. वो सेक्स जान चुकी है लेकिन अब भी हम इसी तरीके से करते हैं. Hindi Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.