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मेरा नाम श्रेया Hindi Porn Stories आहूजा है, चंडीगढ़ की रहने वाली हूँ ! आज मैं आपको अपनी लाइफ स्टोरी बताने जा रही हूँ !
पहले मैं अपना विवरण देना चाहूंगी : अत्यंत गोरी चिकनी हूँ कमर बहुत पतली लेकिन बुंड थोड़ी चौड़ी है !
मम्मे बिल्कुल गोल गोल हैं जब ब्रा के बिना टी-शर्ट पहनती हूँ तो मम्मो का उछाल देखकर लड़कों के छक्के छूट जाते हैं ! वैक्सिंग के बाद मेरा जिस्म और भी खिल जाता है ! बुंड के बाल मैं नहीं निकलवाती क्यूंकि सेंसिटिव हूँ !
स्कूल का आखिरी दिन था, मेरा बॉय फ्रेंड मुझे स्पोर्ट-रूम में ले गया और मुझे चूमने लगा ! पता नहीं कब मेरी पैंटी के अन्दर ऊँगली डाल कर मेरी फुद्दी में आग सुलगाने लगा …
नहीं अखिल ! रुक जाओ प्लीज़ …
श्रेया तुम भी ना ..? मज़े लो ना ! फिर कहाँ मौका मिलेगा …
उसने मेरा स्कर्ट ऊपर किया और पैंटी उतारने लगा …
नहीं अखिल ! आह ..
यह क्या … पैड ..? ओह पीरियड आ रहे हैं क्या .. ??
कह कर मेरी पैड फेंक दी …
ओह्ह नहीं… !
तभी पीटी सर अन्दर आ गए ….
यह क्या हो रहा है अखिल ??
उसने मुझे ऊपर से नीचे देखा …
मेरी पतली टाँगें और भरी हुई जाँघें … मेरी चिकनी फुद्दी और गोरी चिकनी बुंड देखकर चुप हो गया ..
अब स्कूल गर्ल का फिगर कैसा होगा आप समझ लें ..
अखिल आई विल सस्पेंड यू !! पीटी सर नाराज़ होकर बोले …
मैं इसी बीच अपने पैंटी लेकर भाग निकली।
पीटी सर मेरे घर के पास ही रहते थे …
डील डौल तो अच्छा था, लेकिन एक परेशानी थी- उसके शरीर में बाल बहुत थे ! मानो भालू जैसा …
कुछ महीने गुज़र गए …
एक दिन मैं अपने गार्डन में टेनिस खेल रही थी … छोटी सी स्कर्ट और स्पोर्ट्स ब्रा पहनकर …
मुझे पता था कि वो गेट से मुझे देख रहा था …
मैं जानकर झुकी … अपनी लाल पैंटी दिखाने के लिए …
अगले ही दिन वो मेरे घर आया …
घर में कोई नहीं था, सब शादी में गए हुए थे ..
मैं गार्डन में पौधों को पानी दी रही थी ..
श्रेया ! कालोनी में टेनिस मैच होने जा रहा है ! क्या तुम खेल रही हो ??
मैंने कहा- नहीं सर ! असल में सर … !
यह फॉर्म भरो …
मैं झुककर फॉर्म भरने लगी ..
वो मेरे अध-खुले मम्मों को देखने लगा..
क्या हुआ सर ?
कुछ नहीं चलता हूँ श्रेया …
मैंने कहा- कुछ पियेंगे ??
उसने कहा- हाँ दूध .. डेयरी फ्रेश ..
मैं समझ गई …
घर में कोई नहीं था, मैंने अपने मम्में बाहर निकाल लिए टी शर्ट से ! क्यूंकि मैं हर वक़्त ब्रा नहीं पहनती ..
वो उसे बच्चे की तरह पीने लगा …
आह्ह अहह ! मेरी सिसकियाँ निकलने लगी …
उसने मेरी पैंटी में ऊँगली डाली !
आह सर ! बस भी करो … !
क्यूँ अखिल को तो नहीं रोकती …? बता दूँ क्या घर पे ?
मैं डर गई और वहीं गार्डन में लेट गई, शाम हो रही थी घर पर कोई नहीं था ..
उसने मुझे नंगा कर दिया था …
सर बेडरूम में चलें? यहाँ नहीं.. मुझे शर्म आ रही है !
उसने एक ना सुनी और मेरी टांगें फैला दी … जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं डर गई .. ओह नहीं इतना बड़ा ? मैं मर जाउंगी !!
उसकी बालदार मोटी मोटी जांघें और उसके विशाल लंड में उभरी नसें देख मैं उठने लगी- नहीं मुझे जाने दो ..
लेकिन उसने मुझे उठने नहीं दिया और बड़े प्यार से मुझे बच्चो की तरह उठाया … तुम्हारी उम्र क्या है ?
आह अठारह ..
कितनी बार चुदवा चुकी हो इसे ? उसने मेरी फ़ुद्दी में उंगली डालते हुए पूछा।
ओह, कभी नहीं ! मेरी फुद्दी कुँवारी है ..
कहकर मैंने उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया ..
अह ! श्रेया ! आह !
उसकी सिसकियाँ सारे गार्डन में गूंजने लगी ..
उसने मेरी टांगें फैलाई …
चोदो ना जल्दी सर … अहह ! लेकिन आराम से करना !
मेरा पानी जांघों से बह रहा था !
उसने “कैसा बॉय फ्रेंड है जो इस रेशम सी कोमल लड़की को कुँवारी छोड़ा हुआ है .. कहकर अन्दर डाला !
अहह अह्ह्ह बस और अन्दर नहीं !
बेबी, अभी तो सिर्फ टोपा गया है … लम्बी लम्बी सांसे लो ..
अह्ह्ह बस अब्ब नहीं सहा जा रहा ..
उसने मेरी गाण्ड को एक एक हाथ में उठाया और मुझे पेलने लगा ..
आह और .. और चोदो सर ! बस थक गए क्या ?
हम दोनों स्खलित हो गए …
अहह ! मेरी सिसकियों से सारा जहाँ गूंज उठा ..
मेरी नींद आधी रात को टूटी …
सर जा चुके थे .. मेरी फुद्दी में उसके वीर्य के अलावा खून के दाग भी थे जो जांघों के नीचे लकीर की तरह बह के जम चुके थे …
मैंने गार्डन के वाटर पाइप से साफ़ कर लिया उसे ..
मैं पहली बार चुदी थी ..
बाद में कितने आये कितने गए ! लेकिन पीटी सर जैसा कोई ना था ..
आइ मिस माय फर्स्ट सेक्स …
आई मिस यू सर !
आपकी
श्रेया आहूजा Hindi Porn Stories
मेरी एक एक कहानी Antarvasna को दिल से पसंद करके मुझे अपना अपना प्यार खुले दिल से दिया, और दोगे हर कोई मुझे कह रहा है कि गांडू अपनी चुदाई ज़रा जल्दी जल्दी भेजा कर !
अब कब भेजेगा ?
अब आगे बढ़ते हुए गुरु जी और सभी पाठकों को बहुत बहुत प्यार ! आज यह सनी एक और चुदाई के बारे में लिखने जा रहा है, पढ़ना और मुझे याहू पर मेरी गाण्ड का वेबकैम पर लुत्फ उठाएँ।
हाल के ही दिनों की बात करने जा रहा हूँ, प्रेस वाले से मैने चुदवाया सो चुदवाया, हमारे घर में ऊपर की बिलडिंग डबल स्टोरी में पत्थर लग रहा है। दो बन्दे रगड़ाई करने आते हैं, दो बन्दे पत्थर लगाने !
एक दिन में याहू पर बैठ कर चेट का लुत्फ उठा रहा था कि मेरी चेट विनोद नाम के बन्दे से जो दिल्ली से है, देश की राजधानी में बैठ मुझे चोदने की योजना बना रहा था। तभी वो बोला- सनी यार ! अपना वेबकैम चला ! मुझे तेरी चिकनी गांड देख कर मुठ मारनी है। अपने गुलाबी होंठ दिखा, उनमें होंठ डालने हैं।
लेकिन मेरे लिंक्ड बाथरूम में ही रगड़ाई चल रही थी, मैंने उसको अपनी स्थिति बताई कि मैं नंगा नहीं हो पाउँगा। उसको वजह बताई तो वो बोला- साले गांडू ! मौका है उससे गांड मरवा ले ! पटा ले साले को ! तेरा दिल तो ज़रूर करता होगा ?
मैंने कहा- मेरा उनमें बिलकुल ध्यान नहीं था, मैं तो उनको अपनी आजादी में बाधा समझ रहा था।
उसकी यह बात मेरे दिमाग में घर कर गई, बस फिर क्या था, मैंने सोच लिया कि अब इसको पटाना ही है।
मैंने अपना पजामा उतार दिया और फ्रेंची में मेरे गोलमोल चिकने चूतड़ किसी का भी लौड़ा खड़ा कर सकते थे। मैंने सामने ब्लू फिल्म चला ली और बेड पर उल्टा लेट गया तकिये को बाँहों में लेकर उल्टा लेट गया जिससे मेरे चूतड़ साफ़ दिखने लगे और सामने शीशे में मेरी एक नज़र उस पर थी। वो अपने ध्यान लगा हुआ था। मैंने सोचा अब क्या करूँ यार? कैसे इसका धयान अपने पर लेकर आऊँ?
पास के मेज से मैंने एक ग्लास उठाया और उसको फर्श पर फेंक दिया, जैसे ग्लास गिरा उसने मुड़ कर देखा। मेरी साँसे तेज़ होने लगी कि अब वो क्या करेगा। चोरी-चोरी से मैं शीशे में देखता। अब उसका ध्यान मेरी तरफ था, वो ब्लू फिल्म देखता तो कभी मेरी गांड देखता।
वो अपना लंड पकड़ कर मसल रहा था, मैंने जानबूझ कर गांड थोड़ी ऊपर उठाई। उसकी मशीन बंद हो गई थी, मैंने खुद ही चूतड़ हिलाए उसको यह शो कर दिया कि मैं खुद सब कुछ कर रहा हूँ।
उसने मुझे उसकी रर शीशे में देखते हुए देख लिया। वो कमरे में आया और बाथरूम के दरवाज़े की कुण्डी चढ़ा दी। बिस्तर के करीब आते ही उसने अपना हाथ मेरे चूतड़ पर रखते हुए सहला दिया। मेरा बदन कांप उठा। वो मेरे दोनों चूतड़ मसलने लगा, मैंने आखें मूँद ली।
वो मेरी बगल में लेट गया और मेरी फ्रेंची को गांड के चीर में घुसा छेद पर ऊँगली फेरते हुए मेरे गाल को चूम लिया, अपना दूसरा हाथ मेरी कमर से लपेटते हुए शर्ट में डाल मेरे मम्मे दबाने लगा। मैं गर्म होकर अपने को रोक नहीं पाया और उसकी ओर चेहरा करके उसके साथ चिपक गया और झट से उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और मसलने लगा उसके विकराल लिंग को ! क्या लिंग था साले का ! जो मैंने पजामे के ऊपर से सोचा था उस से भी बड़ा था उसका लिंग ! हाँ, मोटा कम था ! मतलब गांड के लिए बना था समझो !
उसने मुझे नंगा कर दिया, तभी दरवाजा खटका।
कौन? उसने कह दिया।
मैं राजू ! काम क्यों रोक दिया रे?
उसने बिना पूछे दरवाज़ा खोल दिया, मैंने चादर लपेट ली।
क्या कर रहे हो दोनों दरवाज़ा बंद करके?
बोला- आजा, मजे कर रहे हैं दोनों ! फिल्म देख रहे हैं और इसकी गांड से खेल रहा हूँ, साला गांडू निकला !
वो बोला- फिर तो आज पाँचों उंगलियाँ आज घी में हैं !
मैं तो था ही बेशर्म, मैंने कहा- साले देख क्या रहा है? सभी घर आ जायेंगे ! मादरचोदो, पकड़ लो मुझे !
उसने अपनी लुंगी उतार दी। उसका बम्बू घाट तम्बू की तरह तन चुका था। मैंने उसको ऊँगली के इशारे से पास बुलाया और उसके अंडरवियर में हाथ डालते हुए उसके खड़े लिंग को सहलाने लगा। उसका अंडरवियर उतार दिया, उसका लिंग इतना मस्त निकला, काले नाग जैसा लिंग देख मैं बेकाबू होने लगा। मेरे मुँह में लेते ही वो अपने उफान पर आ चुका था। वो सांस खींचता तो मेरे मुंह में ही हिलने लगता, दूसरे को पास बुलाया और उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगा। फिर कभी उसका कभी उसका !
चूस चूस कर, चाट चाट कर दोनों को इतना पागल कर दिया कि दोनों ने मुझे नंगा कर दिया।
चल लेट ! चल !
राजू ने अपना लिंग आगे से आकर मेरे मुँह में दिया और दूसरे ने थूक लगाते हुए गांड पर टिका दिया।
मैंने कहा- पहले उंगलियाँ डाल कर खोल ले इसको ! चाट !
वो मेरी गांड चाटने लगा। मेरा इशारा पाते ही उसने लिंग अन्दर डाल दिया। थोड़ी सी चुभन के बाद वो आराम से चोदने लगा। मेरा कौन सा पहला मौका था ! मुझे चुदवाने का पूरा तजुर्बा था। वो मेरी गांड की दीवारों की गर्मी सह नहीं पाया और उसने मुझे जोर से भींच लिया और अपने गर्म-गर्म लावा से मेरी खुजली ख़त्म कर दी।
राजू जल्दी से पीछे आया, टाँगें खुलवा अपने कन्धों पर टिकाते हुए अपना लिंग को प्रवेश करवा दिया और उसके झटके मुझे मजा देने लगे। तेजी से करते हुए उसने भी अपना माल निकाल दिया और मेरे ऊपर गिर गया।
दूसरे वाले का मन नहीं भरा था तो उसने फिर से मुँह में डाल दिया उसका नमकीन लिंग चूसना मुझे भी अच्छा लगा। वो तैयार हो गया और उसने मुझे बीस-पच्चीस मिनट चोदा।
और फिर जब तक पत्थर का काम पूरा नहीं हुआ, हर दोपहर उनका लंच मेरी गांड होती !
काम के बाद मैंने दोनों को मुँह लगाना छोड़ दिया।
यह मेरी एक और सच्ची कहानी है।
अन्तर्वासना के ज़रिये मैं आप लोगों को ऐसे ही मजे देता रहूँगा ! Antarvasna
प्रेषक : राहुल शर्मा Antarvasna
हाय दोस्तो !
तो दोस्तो मामला है एक सेक्स भरी रात का
किस्सा है ये चुदाई की रात का
उस रात मेरे मन में ना जाने क्या झमेला था
क्योंकि मैं घर पर एकदम अकेला था
अकेलेपन में मैं तन्हाई के गीत गुनगुना रहा था
और बीच बीच में अपने लण्ड को भी हिला रहा था
क्योंकि किसी कन्या का ख्याल आते ही ये दिल बड़ा हो जाता है
ये मासूम लण्ड भी इसकी तमन्ना समझते हुए खुद ही खड़ा हो जाता है
अब है तो खड़ा होगा ही
छोटा है तो बड़ा होगा ही
अचानक मुझे लगा कि कोई बुदबुदा रहा है
दिमाग गंदा हो तो लगता है कि कोइ चुदवा रहा है
मैने दरवाजा खोला तो वहां एक गोरी थी
उसके मम्में और गाण्ड देख कर लग रहा थी कि आज तक कोरी थी
मैने उसे अपने घर में अन्दर बुला लिया
ठंड बहुत थी सो मैंने कुन्डा लगा दिया
मैंने माज़रा पूछा तो पता चला वो रास्ता भूल गई
मेरी हिम्मत भी उसकी हालत देख के खुल गई
मैंने उसे बाहों में भर लिया था
क्योंकि उसे चोदने का पक्का इरादा कर लिया था
वो मेरी बांहों में आकर शरमा रही थी
और मेरी सांसों की गरमी से वो भी गरम हुई जा रही थी
मैंने धीरे से एक हाथ उसके मम्मों पर धर दिया
इन हाथों ने ही उसका सारा काम कर दिया
मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत पे था
और ध्यान उसके सूट पे था
आखिर उसकी जवानी को जो संवारना था
इसलिये उसका सूट भी उतारना था
मैंने उसकी कमीज़ उतार कर मम्म दबाने शुरू कर दिये
सलवार को अलग किया और शोट लगाने शुरू कर दिये
वो आहें भर कर मज़ा दे रही थी
या यूं कहें कि लड़की होने की सज़ा ले रही थी
मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर था
ये भी मज़े का एक मंजर था
वो कह रही थी कि चोदते रहो, चोदते रहो और चूत को फ़ाड़ डालो
आज अपने लण्ड से मेरी चूत में झण्डे गाड़ डालो
मैं भी पूरे दम से उसे चोदे जा रहा था
और चूत चुदाई के इस खेल में दोनों को मज़ा आ रहा था
मेरे लण्ड से पानी निकला तो वो संतुष्ट हो गई
नंगी ही वो मुझसे लिपट के सो गई
थोड़ी देर बाद उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया
मुझे कुछ समझ आता इससे पहले ही अपने होठों में जकड़ लिया
वो मेरे लण्ड को चूस रही थी इसलिये लण्ड खड़ा हो गया
एक बार फ़िर से ये लण्ड चुदाई के लिये खड़ा हो गया
अब उसे अपनी गाण्ड मुझसे मरवानी थी
उसकी चूत की तरह उसकी गाण्ड भी सुहानी थी
मैंने भी पूरी पावर से अपना लण्ड उसकी गाण्ड में डाला
और एक ही बार में उसकी गाण्ड को फ़ाड़ डाला
उसकी चीख ने मुझे झन्झोड़ दिया
साथ ही मेरे लण्ड ने एक बार फ़िर पानी छोड़ दिया
अब मुझे पता चला मैं कहां था
जिसमें मैं था वो एक दूसरा ही जहां था
मैंने गाण्ड और चूत दोनों ही मारी थी
लेकिन यारो सच जो ये है कि मैंने सपने में मुठ मारी थी
मेरा अन्डरवियर एकदम गीला हो गया था
मुठ इतनी जोर से मारी कि लण्ड भी नीला हो गया था
यारो सपना ही सही लेकिन मज़ा तो किया
अपने लण्ड को चूत के अन्दर तो किया
तो दोस्तो ! चोदो, चुदाओ और अपनी लाइफ़ को खुशहाल बनाओ Antarvasna
यह आज से एक साल पुरानी Hindi Sex Stories बात है, मुझे चेटिंग करने का बहुत शोक है और मैं चेटिंग पर लड़कियों और शादीशुदा औरतों से सेक्स की बातें किया करता था। उनको चेट के जरिये चोदा करता था, मजा आता था इस सब में। मुझे पर फ़िर धीरे धीरे वस्तविक सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इसलिए मैंने चेटिंग पर असंतुष्ट महिला की तलाश शुरू कर दी।
एक दिन मैं चेट करने के लिए किसी को ढूंढ रहा था, तभी मुझे एक प्राइवेट मैसेज मिला, वो एक औरत का मैसेज था। वो अपने पति से असंतुष्ट थी, उसका नाम रचना था, उसकी उमर ३२ साल थी। उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और शाम को फ़ोन करने के लिए बोला। मैंने जब शाम को उसको फ़ोन किया थो उसने मुझसे ज्यादा बात ना करते हुए सिर्फ़ अपना पता दिया और २ दिन बाद आने के लिए कहा।
मैं जब उसके घर गया तो वो अकेली थी। वो एक बहुत ही सुंदर महिला थी उसको देख कर लगता नहीं था कि वो ३२ साल ही की है। हम दोनों सोफे पर बैठ गए और बात करने लगे। मैंने उससे पूछा- आपके पति क्या करते हैं?
तो वो कहने लगी कि वो एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता है और ज्यादातर बाहर ही रहता है इसीलिए उसको समय नहीं दे पाता और वो तड़पती रहती है। उसकी शादी को ५ साल हो गए लेकिन उनके कोई बच्चा भी नहीं है। फ़िर वोह रोने लगी। मुझे उस पर बहुत दया आई और मैं उठकर उसके पास गया और उसको चुप करने लगा।
वो एकदम से मुझसे चिपट कर रोने लगी। मुझे उसकी चुचियों का दबाव अच्छा लगने लगा और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मैंने उसकी कमर पर हाथ फिराना शुरू कर दिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा। अब उसकी रोने की सिसकी मस्ती की सिसकी में बदल गई। मैं धीरे धीरे उसकी चुचियों को दबाने लगा। उसकी चूची एकदम टाइट हो गई। अब वो पूरी तरह मस्ती में आ चुकी थी।
मैंने उसका ब्लाउज़ उतार दिया और ब्रा भी। मैं तो उसकी चूची देख कर हैरान रह गया, क्या मस्त एक दम सीधी खड़ी थी !
मैंने उनको जोर जोर से दबाना और चूसना शुरू कर दिया। उसने भी मेरी पैंट खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया और उसको सहलाने लगी। वो मेरा लण्ड देख कर बहुत खुश हो गई, कहने लगी कि उसके पति का तो बहुत छोटा है !
फ़िर उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मैंने उसके। उसका खूबसूरत नंगा जिस्म देख कर मैं तो पागल हो गया। मैंने उसको वहीं ज़मीन पर लिटाया और उसके पूरे शरीर पर किस करना शुरू कर दिया। वो जोर जोर से आआआआअह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊमम्म्म्म्म करने लगी।
फ़िर मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी और चोदने लगा। उसकी चूत बहुत कसी लग रही थी। उसको बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसको चाटने लगा। उसके दाने को जीभ से सहलाने लगा। वोह जोर जोर से अपनी गांड उठाने लगी और चिल्लाने लगी- जोर जोर से करो ! मैं झड़ने वाली हूँ ! आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊस्स्स्स्स्स्स्म्म्म्म्म करने लगी।
तभी उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया और झड़ने लगी। मैं उसका सारा पानी पी गया। फ़िर वो खड़ी हो गई और मुझसे लिपट गई और कहने लगी- बिट्टू आज तक मैं प्यासी थी, तुमने आज मुझे संतुष्ट कर दिया !
मैंने कहा- जान ! अभी तो आधा काम हुआ है !
और फ़िर मैं उसको अपनी गोद में उठा कर बेडरूम में ले गया और बेड पर लिटा कर उसकी चूची को चूसना शुरू कर दिया। वो दोबारा गरम होने लगी। मैंने उसके ड्रेसिंग से तेल उठाया और उसके पूरे बदन पर डाल कर मालिश करने लगा। वो मस्ती में जोर जोर से चिल्लाने लगी- येस्स ! स्स्स्स्स आआआआअ ऊऊ !
मैं धीरे धीरे उसकी गांड में ऊँगली डालने लगा। वो एक दम से उछल पड़ी और मुझे देख कर मुस्कराने लगी। उसकी आँखों में वासना थी। फ़िर मैंने उसको उल्टा किया और उसकी गांड चाटने लगा। वो मस्ती से बोलने लगी। मैंने उसकी गांड में अपनी दो ऊँगलियाँ घुसा दी और उसको चोदने लगा।
फ़िर मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी गांड पर लण्ड रखा। वो कहने लगी कि धीरे करना ! मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई !
मैंने धीरे से अपना लण्ड गांड में दबाया और एक झटका दिया। जैसे ही गांड में लण्ड का टोपा घुसा, वो चिल्ला पड़ी।
मैं रुक गया और उसकी चूची दबाने लगा। उसको मजा आने लगा। फ़िर मैंने एक झटका जोर से लगा दिया पूरा का पूरा लण्ड तेल की वजह से गांड को चीरता हुआ अंदर घुस गया। वो जोर से चिल्ला पड़ी और रोने लगी। फ़िर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसको सीधा करके उसकी चूत मे लण्ड घुसाने लगा।
मैंने धीरे से लण्ड चूत मे डाला तो चूत के पानी की वजह से लण्ड जाने लगा और धीरे धीरे मैंने पूरा लण्ड उसकी चूत मे घुसा दिया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, शायद उसके पति ने उसे ज्यादा नहीं चोदा था उसको, जैसे कि उसने बताया था।
खैर जैसे ही मैंने एक झटका दिया, वो जोर से बोली- बिट्टू प्लीज़ ! धीरे ! मैं मर जाऊंगी ! तुम्हारा लण्ड बहुत मोटा है, आराम से करो !
मैंने धीरे धीरे झटके देने शुरू कर दिए और अपना पूरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में उतारने लगा। उसको अब मजा आने लगा और वो अपनी गांड उठाने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ाई और तेज तेज चोदने लगा।
तभी उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए और चिल्लाते हुए झड़ने लगी। फ़िर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड में लण्ड डाल दिया और उसको चोदने लगा। अब वो मस्ती में थी। मैं कभी उसकी चूत में लण्ड डाल कर चोदता तो कभी गांड में। वो फ़िर से झड़ गई। अब मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाला और जोर जोर से चोदने लगा।
मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके पैर उसके कंधो तक मोड़ कर उठा दिए। इससे मेरा लण्ड सीधा उसकी बच्चेदानी तक पहुँचने लगा। अब मैं झड़ने ही वाला था कि वो भी झड़ गई और मैं भी !
मैं इतनी जोर से पहले कभी नहीं झड़ा था। मैं १५ मिनट तक उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसकी और मेरी आँख लग गई। करीब १ घंटे बाद मेरी आँख खुली तो वो सो रही थी। मैं धीरे से उठा और उसको देखने लगा। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला, मैं उसके गोरे बदन को सहलाने लगा। इससे वो भी उठ गई और मेरा लण्ड पकड़ कर सहलाते हुई कहने लगी- बिट्टू तुमने आज मुझे पूरी औरत बना दिया है !
और मेरा लण्ड चूसने लगी। उसके मुँह में लण्ड जाते ही मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा हो गया चोदने के लिए। मैंने फ़िर उसको कुतिया की तरह और कई प्रकार से चोदा और फ़िर उसकी चूत मे ही झड़ गया।
घड़ी में समय देखा तो शाम के ५ बज रहे थे। मैं उठा और अपनी कपड़े पहनने लगा। यह देख कर वो मुझसे लिपट गई और कहने लगी- आज की रात मत जाओ ! कल चले जाना !
दोस्तों उसकी इतनी प्यार से की गई प्रार्थना की वजह से मैं रुक गया और रात भर मैंने उसको ४-५ बार चोदा अलग अलग तरीके से।
सुबह उसके चेहरे पर एक चमक थी और संतुष्टि भी। मैंने अपनी कपड़े पहने और जाने लगा तो उसने मुझे ५००० रुपए दिए। मैंने मना कर दिया तो भी उसने मुझे जबरदस्ती ३००० तो दे ही दिए।
और मैं फ़िर मिलने का वादा करके वापस आ गया। उसके बाद उसने मुझे ३-४ बार बुलाया और अपनी एक फ्रेंड से भी मिलवाया।
यह कहानी फ़िर अगली बार !
तब तक आप सब लड़कियां, भाभी और आंटियाँ अपनी चूत में ऊँगली डाल कर अपना पानी निकालो !
तो कैसी लगी मेरी कहानी मुझे मेल करें ! Hindi Sex Stories
मैं लुधियाना से उषा, 33 Hindi Porn Stories साल, 36-32-40, एक बार फ़िर अपनी नई कहानी के साथ !
यह बात तब की है जब मैं अपनी शादी के करीब छः महीने बाद अपनी छोटी मौसी के घर कुछ दिन रहने के लिए गई थी। मेरे पति को किसी ज़रूरी बिज़नस के सिलसिले में सिंगापुर जाना पड़ गया था और वो करीब एक-डेढ़ महीने बाद आने वाले थे। पीछे से मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई और वहां से एक हफ्ते बाद ही मेरी छोटी मौसी मुझे लेने आ गई कि चल संजू कुछ दिन हमारे साथ भी रह जा ! मैं भी फ्री थी सोचा चलो मौसी के घर ही चलते हैं।
जब हम मौसी के घर पहुंचे तो मेरा स्वागत मौसी के बेटे 18 वर्षीय बिट्टू और उसकी छोटी बहन १५ साल की सुंदर सी कोमल ने किया। मैं भी सबको बड़ी गर्मजोशी से मिली, शाम को मौसा जी आये उन्होंने भी बड़ा प्यार दिया।
3 दिन बाद मौसी कपड़े धो रही थी तो उन्होंने कहा- अरे संजू ज़रा यह कपड़े छत पर सुखा आ !
मैं भी खाली बैठी थी, सोचा कि चलो थोड़ा काम ही कर लूं ! मैंने कपड़ों वाली बाल्टी उठाई और सुखाने के लिये छत पर चली गई। छत पर बिट्टू बैठा पढ़ रहा था। मैं बाल्टी से कपड़े निकाल निकाल कर लोहे की तार पर डाल रही थी। अचानक मुझे अहसास हुआ कि जैसे कोई मुझे बहुत घूर घूर के देख रहा हो।
मैंने देखा तो ये बिट्टू ही था। जब भी मैं कपड़े उठाने के लिए झुकती तो बिट्टू मेरे भरे भरे गुन्दाज स्तनों को बड़े धयान से देखता।
कपड़े सुखाते सुखाते मैंने बिट्टू से इधर उधर की बातें शुरू की तो वो भी पढ़ाई छोड़ के मुझ से दिलचस्पी लेकर बातें करने लगा। जब कपड़े सूखने के लिए डाल दिए तो मैं जानबूझ कर बिट्टू के पास जा कर बैठ गई। मैंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखा था इसलिए मेरी वक्ष-रेखा स्पष्ट रूप से दिख रही थी और बिट्टू की आँखें मेरे स्तनों पे गड़ी हुई थी। मैं भी शर्म न करते हुए उसके सामने ही चटाई पर उलटी लेट गई और उससे बातें करने लगी।
अब मेरे स्तनों को वो बड़े आराम से देख सकता था और मैं भी देख रही थी कि उसकी आँखें मेरे बूब्स से नहीं हट रही थी। फिर मैंने एक और शरारत की और बोली,” बिट्टू, तुम्हारा दिल १ मिनट में कितनी बार धड़कता है?”
वो बोला- 72 बार !
“पर मुझे लगता है जैसे मेरा दिल ज्यादा धड़कता है, कहीं मुझे हार्ट-अटैक तो नहीं आ जायेगा !” मैं बोली।
“अरे दीदी पागल हो गई हो क्या? इतनी छोटी सी उम्र में भी कहीं हार्ट-अटैक हो सकता है !” उसने जवाब दिया।
“अच्छा चलो, मुझे अपनी दिल की धड़कन सुनाओ !”
यह कह कर मैं अपना कान उसके सीने पर लगा कर उसके दिल की धड़कन सुनने का नाटक करने लगी।
एक मिनट बाद मैंने सर हटा कर कहा,” बिलकुल ठीक ! पूरे ७२ बार ! अब मेरी सुनो !”
जबकि मुझे उसके दिल की धड़कन बढ़ी हुई लगी थी। मैंने जानबूझ कर उसका सर पकड़ कर अपने सीने पर इस तरह से रखा कि उसके होंठ मेरे स्तन-रेखा को छूते रहें।
उसने कान मेरे सीने से लगा तो लिया पर मैं जानती थी कि उसकी हालत खराब हो रही थी।
उसके बाद सारा दिन कोई ख़ास बात नहीं हुई, पर बिट्टू बात-बे-बात मेरे आस पास ही मंडराता रहा।
रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले दूध लेकर जब मौसी ऊपर बिट्टू के कमरे में जाने लगी तो मैंने उन्हें कहा,”मौसी ! लाइए, दूध मैं ले जाती हूँ और हाँ मेरा गिलास भी इसके साथ ही रख दीजिये, दूध पीकर मैं भी कोमल के साथ ही सो जाउंगी।” “ओ के बेटा ! ये लो, और गुड नाईट !”
“गुड नाईट !” कह कर तीन गिलास दूध लेकर मैं ऊपर चौबारे में बिट्टू और कोमल के कमरे में चली गई। ऊपर कमरे में बैठे दोनों अपने अपने बिस्तर पर बैठे पढ़ रहे थे। मैंने जाकर ऊंची आवाज़ में कहा,”दूध पियो भाई दूध पियो !”
दोनों ने मुस्कुरा कर मेरी और देखा फिर हमने इकट्ठे बैठ कर दूध पिया और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करके लाईट बंद कर दी और सोने लगे। पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। अभी शादी को सिर्फ छः महीने ही हुए थे और पति महीने-डेढ़-महीने के लिए बाहर चले गए थे, अभी तो मेरा दिल भी नहीं भरा था।
मैं लेटी लेटी सोच रही थी और मेरे साथ लेटी कोमल तो गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि बिट्टू उठ कर बाथरूम गया है और खिड़की से अन्दर आ रही चाँद की रौशनी उसके सारे बिस्तर पर पड़ रही थी। मैं चुपके से उठी और जाकर उसके बिस्तर पर लेट गई। जब बिट्टू आया तो मुझे वहां देखकर बोला,” अरे दीदी ! आप यहाँ? कोमल के पास नींद नहीं आई क्या?”
मैं बोली,”नहीं, पर मुझे चांदनी में सोना अच्छा लगता है।”
तो वो बोला,”ठीक है ! आप यहाँ सो जाओ, मैं वहां सो जाता हूँ।”
मैंने तभी पलट कर कहा,”अरे नहीं ! तुम भी यहीं आ जाओ मेरे पास !”
तो बिट्टू भी उसी बेड पर मेरे साथ लेट गया पर कुछ फासला बना कर !
मैंने जो नाईटी पहन रखी थी उसका गला बहुत गहरा था और नाईटी के नीचे मैंने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहन रखी थी। गहरे गले के कारण मेरे स्तनों का ज्यादातर हिस्सा दिख रहा था, यहाँ तक कि मेरी आधी ब्रा भी गले से बाहर झांक रही थी और मैं जानती थी कि चांदनी में नहाया हुआ मेरा बदन बिट्टू को अपनी तरफ खींच रहा था।
थोड़ी देर हम दोनों फुसफुसा कर इधर उधर की बातें करते रहे ताकि कहीं कोमल की नींद न खुल जाये। फिर मैंने जान बूझ कर बहाना बनाया,”बड़ी गर्मी सी लग रही है ! क्या तुम्हें नहीं लग रही?”
“नहीं दीदी, मुझे तो मौसम ठीक लग रहा है।” बिट्टू बोला।
पर मैं तो बहाना बना रही थी इसलिए मैं उठ कर बाथरूम में गई और एक मिनट बाद अपनी ब्रा उतार कर और अपनी सारी नाईटी आगे की तरफ खींच कर वापिस आकर बिस्तर पर लेट गई।
“अब ठीक है, असल में मेरी ब्रा बहुत कसी थी, शायद इसीलिए मुझे घुटन महसूस हो रही थी !” कह कर मैं फिर बिट्टू की तरफ मुंह कर के लेट गई। अब ब्रा न होने की वजह से बिट्टू मेरे बूब्स के कट्स ज्यादा अच्छी तरह देख सकता था क्योंकि सिर्फ मेरे चूचुक को छोड़ के तकरीबन मेरा दायाँ स्तन उसे सारा का सारा दिख रहा था।
मैंने फिर उसकी गर्लफ्रेंड की और आलतू फालतू की सेक्सी बातें करनी शुरू की ताकि उसमे थोड़ी गर्मी आये और उसका हाथ पकड़ कर अपने बूब्स के साथ लगा कर रख लिया। पहले तो वो थोड़ा डर रहा था पर मैं महसूस कर सकती थी कि उसकी मर्दानगी जागने लगी थी। मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया पर उसने अपना हाथ अब भी मेरे वक्ष से सटा रखा था वो हल्के हल्के हाथ हिलाने के बहाने मेरे बूब्स को दबा कर देख रहा था।
मैंने सोचा कि अब ज्यादा औपचारिकता की ज़रुरत नहीं, सीधा मुद्दे पे आ जाना चाहिए, तो मैंने सीधे-सीधे ही बिट्टू से पूछ डाला- बिट्टू क्या तुम्हें इन्हें दबाना अच्छा लग रहा है?
उसने नज़र उठा कर मेरी तरफ देखा और बोला,” हाँ दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है !”
मैंने अपनी नाईटी का गला एक तरफ से हटा कर अपना दायाँ स्तन पूरा बाहर निकाल कर उसके सामने कर दिया और बोली,”लो, अब आराम से इसे दबा कर देखो।”
वो हिचकिचाया तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर खुद ही अपने बूब पर रख दिया। उसने धीरे से दो एक बार मेरा बूब दबाया पर शायद यही उसके सब्र की आखरी हद थी, उसने बिना कुछ कहे अपना मुंह आगे किया और मेरा निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगा। मैंने भी समझ लिया कि गाड़ी अब पटरी पर चल पड़ी है। मैंने अपना दूसरा स्तन भी नाईटी से बाहर निकाला और हाथ उसके पायजामे के ऊपर से उसके लण्ड पे फेरने लगी जो पहले से ही अकड़ा हुआ था।
“दीदी, सीधी होकर लेटो !” बिट्टू बोला।
जब मैं सीधी होकर लेटी तो बिट्टू ने उठ कर मेरी दोनों छातियाँ अपने हाथों में पकड़ी और बारी बारी से चूसने लगा और मैं उसकी पीठ सहलाने लगी। थोड़ी देर बूब्स चूसने के बाद बिट्टू ने मेरे गालों और होंटों को चूमना शुरू किया, मैंने भी मज़े लेते हुए उसका भरपूर साथ दिया। हम दोनों बारी बारी से अपनी जीभें एक दूसरे के मुंह में डाल कर चूस रहे थे।
फिर मैंने उससे कहा,”बिट्टू, पजामा उतारो !”
बिट्टू ने अपने पायजामा और अंडरवियर उतारा और अपना लण्ड लाकर मेरे मुंह के पास कर दिया और मैंने भी उसका इशारा समझते हुए उसका पत्थर जैसा अकड़ा हुआ लण्ड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। लण्ड चूसते-२ बिट्टू ने अपनी शर्ट और मेरी नाईटी भी उतार कर फ़ेंक दी। कुछ देर लण्ड चुसवाने के बाद बिट्टू टेढा होकर लेट गया और अपने हाथों के दोनों अंगूठों से मेरी पेंटी उतार दी। अब उसने मेरे पेट, कमर और जांघों को चूमना-चाटना शुरू किया और धीरे-२ मेरी टाँगें चौड़ी करके अपनी जीभ मेरी चूत में फिराने लगा। मैं भी चूत से टप-टप पानी छोड़ रही थी और उसका लण्ड चूस रही थी।
फिर मैंने कहा,”बिट्टू, अब ऊपर आ जाओ !”
यह सुन कर बिट्टू मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गया और अपना लण्ड मेरी चूत के होठों में फिराने लगा, जिससे मेरी चूत के पानी से उसके लण्ड का सुपाड़ा गीला और चिकना हो गया। जब उसने अपना लण्ड अन्दर डालना चाहा तो उसके मुंह से हल्की सी “ऊऽऽऊऽऽहऽऽ” करके चीख सी निकल गई। मैं समझ गई कि संजू तुझे तो कच्चा कुँवारा लौड़ा मिल गया। उसने ३-४ बार कोशिश की पर हर बार तकलीफ के साथ उसे अपना लण्ड बाहर निकालना पड़ा।
वो बोला,”दीदी मुश्किल है, ये अन्दर ही नहीं जा रहा, और डालता हूँ तो दर्द होता है !”
मैंने कहा,”ऐसे नहीं जायेगा, मैं तुम्हें तरीका बताती हूँ !”
मुझे पता था कि अगर इससे ना डाला गया तो मैं तो प्यासी रह जाउंगी, इसलिए मैंने उसको अपने ऊपर लिटाया, अपनी टांगों का घेरा उसकी कमर के चारों तरफ बना कर अपनी एडियाँ उसके चूतडों पे रखीं, फिर अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ा और उससे बोली,” अब धीरे धीरे से घस्से मारते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करो और अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दो ताकि मैं उसे चूस सकूं !”
उसने ऐसा ही किया और धीरे धीरे लण्ड चूत में डालने की कोशिश करने लगा, पर तकलीफ उसे अब भी हो रही थी। मैं भी मौक़ा देख रही थी, जब उसने कमर थोड़ी ढीली की तो मैंने पूरा जोर लगा अपने पांव से उसके चूतड़ और हाथों से उसकी कमर अपनी ओर खींची जिससे एक ही झटके में उसका लण्ड मेरी चूत में आधे से ज्यादा घुस गया।
अपने होंठों से मैंने उसके होंठ पकड़ रखे थे जिस वजह से वो चीख भी ना सका और उसकी चीख मेरे मुंह में ही दब गई। मुझसे अपने होंठ छुड़वा कर बोला,”दीदी प्लीज़ ! बाहर निकलने दो, बहुत दर्द हो रहा है, मुझे लगता है शायद खून निकल रहा है !”
मैं बोली- रुको ! ऐसे नहीं निकालते ! तुम्हें और ज्यादा दर्द होगा, मैं बताती हूँ, धीरे धीरे आगे पीछे करके निकालना !
वो जब दर्द से तड़पता हुआ आगे पीछे हो रहा था तो मैंने उसे दूसरा झटका मारा जिससे उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में समां गया और वो दर्द से तड़प उठा,”नहीं दीदी, अब नहीं सहा जाता, प्लीज़ निकाल दो !” बिट्टू बोला।
“बेवकूफ, मर्द बन ! ज़रा से दर्द से डर गया? सिर्फ आज ये दर्द होगा उसके बाद सारी उम्र का आराम है, मुझे भी पहली बार में बहुत दर्द हुआ था मैं लड़की हो कर सह गई और तू लड़का हो कर रोता है? डर मत ! चुपचाप चोदता रह !”
मेरे कहने पे वो धीरे-२ लगा रहा। मैंने उसके साथ पूरा सहयोग करके उससे सम्भोग करवाया और उसे अपने बूब्स और चूमा-चाटी से बांध के रखा। सेक्स करते-करते वो मेरे होंट और चूचियां चूसता रहा। मैं जानती थी कि उसे दर्द हो रहा है पर मर्द का बच्चा लगा रहा ! पीछे नहीं हटा ! और फिर तो स्पीड बढ़ा कर मुझे चोदने लगा।
जब उसे मज़ा आने लगा तो वो भी दर्द भुला के मुझे चोदने का स्वाद लेने लगा और ५-६ मिनट बाद हम दोनों बारी बारी से झड़ गए। मैं तृप्त हो कर सो गई और वो बाथरूम में अपना लण्ड धोने चला गया। अक्सर मर्द अपनी छाती फुला कर कहते हैं,”अरे मैंने तो कच्ची कली फाड़ दी !” आज मैं भी अपनी छातियाँ फुला कर कह सकती हूँ,”अरे मैंने तो कच्चा केला छील दिया !
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