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दोस्तो, मेरा नाम Antarvasna रवि है। मैं पुणे का रहने वाला हूँ। मैं आप लोगों को अपनी बदचलन माँ की कहानी सुना रहा हूँ। जो मैं सोच भी नहीं सकता था वो मुझे आजमाने को मिला है। क्या बताऊँ दोस्तो !
मैं एक चाल में रहने वाला लड़का हूँ, नौवीं तक ही पढ़ा हूँ ! मैं पढ़ाई में कमजोर था लेकिन सेक्स में नहीं ! अब मेरी उम्र तेईस साल है, मेरे पिताजी कुछ काम नहीं करते हैं, बस शराब पीते हैं रोज़ ! इसी वजह से शायद उनमें अब सेक्स नहीं रहा है, इसी वजह से मेरी माँ ने दूसरों के साथ सबंध बनाये हैं। मेरी माँ सुबह काम पर जाती है और दोपहर को घर आती है और शाम को जाती तो रात को आठ बजे आती है।
बात उस समय की है जब मैं थोड़ा बीमार था तो मैं काम से दोपहर को घर आया था और घर में मैंने देखा कि आज माँ घर आई नहीं थी। तो मैंने सोचा कि उसे किसी काम से देर हो गई होगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। मेरी माँ तो हमारे पड़ोसी अंकल के घर में थी। उनका दरवाजा बंद देखकर मुझे शक हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है। मैंने उनकी खिड़की के छेद से देखा कि मेरी माँ और विशाल अंकल दोनों एक दूसरे की बाहों में हैं। मेरी माँ की उम्र 45 साल और अंकल की उम्र 35 साल होगी। फिर भी वो एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे।
यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर जाकर सो गया। उस रात को मैं सो नहीं पाया। मैंने यह बात अपने दोस्त से कही कि मेरी माँ और अंकल के बीच सेक्स सम्बन्ध होता है तो उसने कहा कि हम दोनों नजर रखेंगे।
मैंने भी हाँ कर दी !
चार-पाँच दिन बाद उसने फोन कर के मुझे बताया कि मेरी माँ और अंकल मेरी ही घर में हैं और मुझे घर आने को कहा। मैं और मेरा दोस्त मेरी घर के खिड़की से देखने लगे। मेरी माँ पूरी की पूरी नंगी थी विशाल अंकल के साथ ! अंकल भी पूरा नंगा था। मुझे बहुत ही गुस्सा आया लेकिन दोस्त ने रोका और मुझे चुपचाप देखने को कहा और मैं देखता रहा।
मेरी माँ अंकल का लण्ड चूस रही थी और अंकल चुसवा रहा था। 5 मिनट बाद उसने सारा वीर्य उसके मुँह में डाल दिया और कहने लगा- ले ले जोर से चूस ले ! पी ले … तेरे मर्द में ऐसा रस नहीं मिलेगा !
माँ ने कहा- इसीलिए तेरा पीती हूँ ना मेरे जानू ! तेरा लण्ड तो लोहा है ! ऐसा मजा कही नहीं मिलता है !
फिर कुछ देर बाद वो दोनों 69 की अवस्था में आ गए। अंकल माँ की चूत चाट चाट कर पानी ला रहा था, माँ भी लण्ड को चोकोबार की तरह चूसे जा रही थी। इतने में मेरा और मेरे दोस्त का लण्ड खड़ा कब हुआ, पता ही नहीं चला !
फिर अंकल ने माँ को लिटा कर उसकी टाँगें कंधे पर लेकर अपना लण्ड चूत पर रख दिया और चूत में पेलने लगा। उसका 6 इंच का लण्ड चूत को फाड़ रहा था। साल हरामी जोर जोर के धक्के मारने लगा। दस बारह मिनट में वो भी थक गया, वो माँ को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं कर सका, यह हम जान गए थे।
उनका खेल ख़त्म हो गया और वो कपड़े पहन रहे थे। हम वहाँ से चले गए। फ़िर अंकल चले गए और माँ सो गई।
मेरे दोस्त ने कहा- हम भी अंकल की बीवी को बताकर उसे भी हम चोदते हैं।
मैंने मना किया।
फिर उसे एक मस्ती सूझी, उसने कहा- आज मैं तेरे घर सोने आता हूँ।
मैंने हाँ कर दी।
रात को नौ बजे वो खाना खाकर आया। मेरा बाप तो घर पर सोता नहीं है। हम टी वी देखकर सो गए- मैं, मेरा दोस्त और माँ !
रात को बारह बजे मेरे दोस्त ने मुझे जगाया और मुझे कहा- मैं क्या करता हूँ, तू सिर्फ देख ! और मुझे चुप रहने को कहा उसने !
वो माँ के पास जाकर लेट गया और माँ के बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। माँ सोई हुई थी और वो माँ को गर्म करने लगा था। वो माँ के मम्मों पर हाथ फेर रहा था, मैं देख रहा था। उसने माँ का ब्लाऊज खोल दिया और मम्मे चूसने लगा। मैंने भी हिम्मत की और माँ की दूसरी बाजू में जाकर दूसरा मम्मा चूसने लगा।
क्या मम्मे हैं ! वाह ! मैं पहली बार चूस रहा था।
इतने में मेरी माँ जाग गई और एकदम से घबरा गई और कहा- तुम यह क्या कर रहे हो ?
मेरे दोस्त ने कहा- हमारा भी लण्ड चूस कर देखो ! उस अंकल से बहुत अच्छा है ! उससे चुदवाती हो तो हमने क्या पाप किया है ?
माँ ने कहा- तुम्हें सब पता है तो फिर क्या डर है मुझे !
यह सुनकर मेरे तो होश ही गुल हो गए। मेरे दोस्त ने माँ की साड़ी खोली। अब माँ सिर्फ और सिर्फ पेटीकोट में थी, वो भी मैंने नाड़ा खोलकर नीचे खींच दिया। अब वो सिर्फ पैन्टी में थी। उसके ऊपर से मेरे दोस्त ने चाटना शुरु किया। उसकी चूत से पानी आने लगा। फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी। मैं और दोस्त सिर्फ अन्डरवीयर पहने थे। फिर वो चूत चाटने लगा और मैंने मुँह में लण्ड डाला। वो जोर से चूसने लगी। मैं उसके मुँह में चोदने लगा। उधर वो अन्डरवीयर उतार कर माँ की चूत में लण्ड डालने लगा था। माँ लेटे लेटे अपनी टाँगें फैलाने लगी और उसने 8 इंच का लण्ड माँ की चूत में पेल दिया।
फिर माँ ने मुझे कहा- तुम मेरी गांड में लण्ड डालो !
मैंने दोस्त को गांड मारने को कहा, मैं तो चूत मारूँगा ! माँ की गांड भी मस्त है
फिर उसने माँ को उठा कर बिस्तर पर ऐसे लिटाया कि मैं चूत के सामने था तो वो गांड के पीछे !
मुझे उसने कहा- सोच मत ! मार हथोड़ा !
फिर मैंने भी नंगा होकर मेरा सात इंच का लण्ड माँ की चूत पर टिका दिया। मैं मम्मे चूस कर चूत में लण्ड घुसाने की कोशिश रहा था, वो आह आहा अह अ करने लगी।
मैंने तो अभी लण्ड भी डाला नहीं फिर कैसे ?
मेरे दोस्त ने गांड भी मार दी थी। उसने तो पूरा का पूरा लण्ड गांड में घुसा डाला था ….
वो कहने लगी- जोर जोर से चोदो मुझे ! मैं बहुत प्यासी हूँ लण्ड की !
मैंने भी जोर लगाना शुरु किया और जोर से चूत में पेल दिया। उसे इतना खुश कभी नहीं देखा मैंने !
उस रात हमने उसकी खूब चुदाई की। मैंने सिर्फ चूत मारी, मेरे दोस्त ने उसके मुँह में, चूत और गांड को चार-पाँच बार चुदाई की। फिर मैं तो रात के तीन बजे ही सो गया लेकिन मेरे दोस्त ने माँ की पाँच बजे तक चुदाई की। इससे माँ भी खुश थी।
इस तरह मेरा दोस्त जब भी मौका मिलता है माँ की चुदाई करता है। मेरी माँ अब उस विशाल से नहीं चुदती है बल्कि मेरे दोस्त विकी से चुदती रहती है !
यह मेरी बुरी मगर सच्ची कहानी आप लोगों को कैसे लगी, मुझे मेल करें और बताये ! Antarvasna
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लेखक: मोहित शर्मा
हैलो दोस्तो एक बार फ़िर मैं Antarvasnaआप के सामने अपनी एक नई और अनोखी कहानी के साथ जिसमे मैने अपनी बड़ी भाभी के साथ दोबारा फ़िर से पूरे ५ साल बाद बंद हुए सम्बन्ध फ़िर कायम किये। मैने अपनी बड़ी भाभी को पहली बार चोदा था जब मैं केवल १९ साल का था और वो मेरी ज़िंदगी की पहली चुदाई थी।
मैने अपनी छोटी भाभी की कसी हुई गुलाबी चूत को जमकर चोदा था तब तक मैं काफ़ी बड़ा और अनभवी हो चुका था और मैं आप को बता दूं कि मेरे छोटी भाभी के साथ सम्बंध बनते ही बड़ी भाभी मुझ से नाराज़ हो गयी थी और सम्बन्ध तोड़ लिये थे। और आज मेरी उमर २४ है और इन ५ सालों में मैने अपनी छोटी भाभी को भरपूर प्यार दिया और अभी तक मैं अपनी छोटी भाभी को चोदता आ रहा हूं।
इन ५ सालो के अपनी छोटी भाभी के साथ हुए अनुभव भी मैं आप के साथ बाटूंगा लेकिन पहले मैं आप को ये मजेदार स्टोरी सुनाना चाहता हूं अपनी बड़ी भाभी की और ये बात केवल ३ महीने पहले की है जब मेरे लंड को पहले वाली चूत फ़िर से खाने को मिली जिसे मेरे लंड ने अपनी ज़िंदगी में पहली बार चोदा था।
तो अब में आप का वक्त ज़ाया न करते हुए अपनी कहानी पर आता हूं, बात जून २००७ की है भयंकर गर्मी के दिन थे उन दिनो मेरी वाइफ़ का ९ वा महीना चल रहा था और डिलेवरी होने वाली थी। तभी मैने अपनी बड़ी भाभी को मेरी वाइफ़ की मदद के लिये गांव से शहर बुलाया।
मैं ग्वालियर, मध्यप्रदेश मे रहता हूं और मेरा पूरा परिवार गांव में तो भाभी मेरे साथ आ गयी। मेरी वाइफ़ भाभी को देखकर बहुत खुश हुई हम दो कमरों का हिस्सा लेकर रह रहे है एक कमरे में हम तीनो सोते थे और दूसरे कमरे में मेरे डैडी और भाभी के बच्चे सोते थे गर्मी होने के कारण हम सभी ज़मीन पर सोते थे ताकी थोड़ी ठंडक मिल सके भाभी बीच में सोती थी और हम दोनो पति पत्नी भाभी के दोनो तरफ़।
दो तीन दिन तो आराम से गुजरे। लेकिन बाद में मेरे मन में उथल-पुथल होने लगी कि मैं कब भाभी कि मक्खन जैसी चूत को चोदू। मैं आप को बता दूं कि मेरी बड़ी भाभी मेरी छोटी भाभी से भी सेक्सी और चुदासी है उनकी चूत हमेशा लंड खाने को बेकरार रहती है। क्योंकि ऐसा एक भी दिन नहीं जाता जब वो भैया से न चुदें क्योंकि मैं कई बार उनकी चुदाई देख चुका था और उनके कमरे के बाहर से उनकी चुदाई की आवाज़ें सुनी थी।
इसलिये मैं जानता था कि भाभी मुझसे जरूर चुदेगी वो बगैर लंड के नहीं रह सकती इसलिये मुझे सिर्फ़ उनको भड़काने की ज़रूरत थी और ऐसा ही हुआ। एक दिन भाभी बहुत गहरी नींद में सो रही थी एक दम चित सीधी लेटी थी वो क्या लग रही थी चूची एक दम ऊपर की ओर तनी हुई टांगे फ़ैली हुई।
भाभी को ऐसे पोज में देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया। फ़िर मैने अपना एक हाथ भाभी के सीने पर रख दिया और उनकी चूची दबाने लगा फ़िर मैने अपना एक हाथ भाभी की चूत पर रखा हाय! चूत में से एक दम गरम गरम भाप जैसी निकल रही थी और चूत एक दम फ़ूली हुई पाव रोटी की तरह मुलायम गद्देदार, मुझ से रहा नहीं गया और मैं भाभी की साड़ी ऊपर को खिसकाने लगा और उनकी जांघो पर हाथ फेरने लगा भाभी थोड़ी कसमसाई और अपनी एक टांग मोड़ ली जिससे उनकी चूत और फ़ैल गयी शीईईए हैईईई मैने जैसे ही अपना हाथ चूत पर रखा लेकिन भाभी ने पैंटी पहनी हुई थी मैने पैंटी एक साइड में कर के एक उंगली चूत में डाल दी और एक हाथ से चूची दबाने लगा।
हाय! लंड फ़टा जा रहा था चूत में जाने को। पूरे ५ साल बाद मेरे हाथ में वो चूत थी जिसे मैने पहली बार चोदा था। मैने अपनी उंगली आगे पीछे करनी शुरु कर दी उंगली चूत के अंदर बाहर होने लगी फ़िर भाभी ने कसमसाकर अपनी दोनो टांगे फ़ैला दी और दोनो हाथ बिल्कुल ऊपर उठा लिये। जिससे उनकी चूची और तन गयी और चूत तो जैसे बिल्कुल मुंह फ़ाड़कर लंद को निमंत्रण देने लगी कि आजा मेरे राजा मुझ में समा जा।
सच कहु तो उस पोसीशन में भाभी किसी मल्लिका या बिपाशा से कम नहीं लग रही थी हाय मेरी रानी। मैने अपनी एक उंगली और भाभी की चूत में घुसा दी अब भाभी की चूत से ढेर सारा पानी निकल रहा था मैं एक दम जोश में आ गया और दोनो उंगलियां तेज़ी से चूत में चलानी शुरु कर दी.
तभी भाभी जाग गयी और मुझे हैरानी से देख ने लगी लेकिन मैं मुस्कराने लगा। फ़िर वो सो गयी और मैं भी लंड हिलाकर सो गया फ़िर अगले दिन भी वही कहानी दोहराई इस बार मैने अपनी ३ उंगलियां चूत में डाली थी ३-४ दिन तक ऐसे ही चलता रहा लेकिन भाभी ने मुझे चुदने का सिग्नल नहीं दिया। लेकिन मैने फ़िर भी भाभी को नहीं बक्शा मैं उन्हे चोद कर ही माना ये सब मैने कैसे किया ये आप को अगले भाग में बताउंगा. Antarvasna
ये कहानी आज से 6 महीने पहले की Antarvasna है जब हम अपनी दूसरी साली की शादी में गये थे बड़ौदा, मेरी पहली साली की शादी को 6 महीने हुए थे।
वो भी अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिये आई थी।
मेरी साली का नाम है सोनू, हम सब शादी से 1 हफ़्ते पहले गये थे।
उसका पति नहीं आया था।
वो करीबन होगी 24 की।
वो भी मेरी बीवी की तरह ही बहुत सेक्सी थी, वैसे साली का फ़ीगर होगा 36-29-38 उसके बूब तो बहुत ही सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे ये देख कर कोई भी आदमी मचल जाये।
उसके पति की अक्सर नाइट ड्युटी रहती थी।
मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने के बारे में सोचा करता के काश इस को चोद सकूँ।
एक दिन जब रात को सोने गये तो एक रूम में पूरा सामान पड़ा था इस लिये हम सब एक साथ ही सो गये। पहले मेरे बगल मे मेरी वाइफ़ तब साली।
रात को जब मैं पानी पीने उठा तो वापस आकर देखा तो मरी जगह पर मेरी वाइफ़ थी।
इसलिये में साली और मेरी वाइफ़ के बीच में सो गया।
मुझे नींद नहीं आ रही थी।
थोड़ी देर के बाद मेरी साली ने अपने पैर मेरे पैरों पर रख दिया।
उसने नाइटी पहनी थी और वो उसके घुटने तक ऊपर हो गयी थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया और पूरा टेंट बन गया।
फिर मैंने भी अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया।
थोड़ी देर के बाद जब वो कुछ न बोली तब मैंने अपने हाथ को थोड़ा ऊपर लेके उसके एक बूब पर रख दिया और धीरे से दबाने लगा।
वो धीरे से मेरे पास आ गई तो मुझे लगा रेस्पोंस मिल रहा है।
ओर मैंने फिर दूसरे बूब को दबाने लगा।
फिर वो मेरी तरफ़ घूम गई तो मैंने अपने हाथ उसके नाइटी में ऊपर से डाल कर उसके टिट्स को दबाने लगा।
वो मचलने लगी और मुझे कान में कहा स्टोर रूम में चलते हैं।
फिर वो उठके दूसरे रूम मे चली गई और मैं भी उसके पीछे चला गया और स्टोर रूम का दरवाजा बंद कर दिया।
उसको मैंने पीछे से पकड़ कर उसके बूब्स दबाने लगा।
उसने कहा- आहिस्ता, आहिस्ता।
फिर मैंने उसकी नाइटी को ऊपर उठा कर पूरा निकाल दिया और उसको किस करने लगा।
मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके टिट्स को हाथ से दबाने लगा।
उसकी सांसे तेज हो रही थी।
उसने मुझे बूब्स चूसने को कहा और मैंने उसका दायाँ बूब्स चूसने लगा और पूरा चाटने लगा।
थोड़ी देर के बाद दूसरा बूब्स भी चूसा।
अब मैंने धीरे से उसका पेटीकोट को ऊपर कर के अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया और बूब्स भी चूसता रहा।
उसकी चूत पर बाल नहीं थे और पूरी गीली हो गई थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और वो मचल गई।
अब वो सिसकियाँ ले रही थी और मैंने उसका पेटीकोट और पैंटी निकाल दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।
उसके पानी का स्वाद बहुत अच्छा था। उसने मेरे पैजामे का नाड़ा खोल दिया और पैजामा और अंडरवियर उतार दिये।
वो मेरा लंड को देखती ही रह गयी और बोली ये तो उसके पति से बहुत बड़ा है और उस पर हाथ फ़ेरने लगी।
मैंने फिर से उसकी चूत को चाटने लगा और हम 69 कि पोजिशन में आ गये।
वहां पे कोई बिस्तर नहीं था इसलिये टाइल्स पर ही लेट गये।
मैंने उसके स्लिट को दांतो से थोड़ा सा दबाया और वो जोर से मचल पड़ी और फिर मैंने अपनी जीभ को उसके अंदर डाल कर अंदर बाहर हिलाने लगा।
वो सिसकिया भरने लगी और बहुत गर्म हो गई।
फिर वो मेरी बाहों में आ कर लिपट गई और धीरे से कहा कि अब मत तड़पाओ, अब मेरे अंदर जल्दी से डालो, मैं मर रही हूं।
तो मैं एक कुरसी पर बैठ गया और उसको आगे की तरफ़ झुका कर अपने लंड पर बिठा दिया और जोर से एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
वो दर्द के मारे अपने होंठों को दबाये मुझे पीछे पकड़ लिया।
थोड़ी देर उसको ऐसे ही बिठाये मैं भी बैठा रहा।
फिर उसे मजा आने लगा और वो आगे पीछे होने लगी।
मैंने भी पीछे से धक्के देने शुरु कर दिये।
10 मिनट बाद उसकी रफ़्तार तेज हो गई और मेरा भी निकलने वाला था इसलिये मैंने भी जोर से धक्का लगाना शुरु कर दिया।
थोड़ी देर के बाद वो मुझे पर बैठ गई और मैंने भी उसके दोनो बूब्स को जोर सो दबाने लगा और हम दोनो ने एक साथ अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहे।
फिर हम दोनो ने अपने कपड़े पहन कर एक लम्बी किस कर के वापस अपनी जगह पर आके सो गये।
हम दोनो पूरी रात नहीं सोये।
मैं भी उसके बगल में लेटे उसकी पैंटी में हाथ डाल कर चूत पर अपना हाथ फेरता रहा।
वो भी चादर में हाथ डाल कर मेरे लंड को पूरी रात पकड़ कर सोयी रही।
जब तक हम वहां पर साथ रहे रोज कुछ बहाना निकाल कर बाहर चले जाते और कोई फ़र्म और खाली जगह पर जाके अपनी मोटर साइकल पर बैठ कर ही मजे लूटते रहे।अब वो प्रेग्नेंट हो गई है और मेरे ही बच्चे की मां बनेगी। Antarvasna
दूसरी साली को भी कैसे चोदा वो अगली कहानी में
पाठको, आपके साथ-साथ Antarvasna मैं भी अन्तर्वासना की कहानियों का लुत्फ़ उठाता हूँ। एक कहानी मेरी ओर से भी आपको अर्पित है। इसकी प्रेरणा एक काल्पनिक पात्र ‘रति कन्या’ पर आधारित है। कहानी एक माला के सामान है, जिसके फूल सदियों से चले आ रही ‘नारी-पुरुष वासना’ या काम-मय सृष्टि की वास्तविकता है। बस नाम वगैरह बदल दिए जाते हैं। आशा है, अर्पित दो भाग, जो अपने आप में भी पूरी कहानी है, आपका मन बहलायेगें। यदि आपने इन्हें पसंद किया, तो आगे और शृंखला-बद्ध कहानियाँ भेजूंगा।
भोलेनाथ शांत हैं, फिर भला क्यों विश्व में युद्ध के बादल मंडराने लगे। उनका पिछला तांडव हुए अब पूरे सौ वर्ष हो गए हैं। उस बार, द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने जम कर नर-संहार किया था। इस बार तो सृष्टि लुप्त होती नजर आती है, लेकिन ऐसा होगा नहीं। अन्तर्वासना के पात्र जीवित रहेंगे। सदियों से चले आ रही मानव-शृंखला की प्रारंभिक आवश्यकताओं को, या यूँ कहें कि उस शृंखला के बीज को, युद्ध उपरांत युग तक पहुँचायेंगे। फिर एक बार कोमल अंकुरों की हरियाली छायेगी, नए-नए पंख निकल आएंगे।
सन 2050 के आधुनिक युग में भी, जब सिंगल-मॉम होना आम बात हो चली है, रति अभी भी अपनी माँ के कड़े अनुशासन में रह रही है यहाँ तक की जींस-टॉप मत पहनो, हाई हील्स मत पहनो, गहरी लिपिस्टिक मत लगाओ। लड़कों से बात करना तो दूर की बात है, नजरें मिला कर भी वह किसी पुरुष से बात नहीं कर सकती।
जूनियर कालेज में आकर उसने माँ से कहा- मम्मी मेरी सारी फ्रेंड्स के पास पता नहीं कब से ब्लैक-बैरी हैं, कम से कम अब तो मुझे भी एक दिला दो।
बस इतनी सी बात पर माँ गुस्सा झाड़ने लगी- अभी से मोबाइल का तू क्या करेगी, तेरा कोई बॉय-फ्रेंड है जो तुझे अब यह खिलौना चाहिए? ख़बरदार जो कभी लड़कों को मुँह लगाया। हमारे घराने की लड़कियाँ शादी तक किसी अनजाने लड़के को हाथ नहीं लगाने देती।
इन्हीं लताड़नाओं के साथ उसकी माँ जल्दी जल्दी तैयार हो कर काम के लिए निकल गई। उसकी माँ स्वयं, स्वछन्द विचारों वाली, अविवाहित सिंगल-मॉम थी और अपेक्षा करती थी कि बेटी लड़कों से मित्रता भी न करे।
रति उदास होकर कालेज जाने के लिए तैयार होने लगी। वह व उसकी सहेलियाँ लगभग सभी साथ-साथ बालिग हो गई थी। उसकी सहेलियों के पास एक से एक बढ़ कर, पता नहीं क्या क्या सेक्स-खिलोने थे। बालिग होते ही उन सबके ‘पर’ निकल आये थे। सब लड़कियाँ टाईट ड्रेस पहनती, अपने कामुक फिगर की नुमाइश में लगी रहती। वह केवल रति ही थी, जिसकी ड्रेस ढीला-ढाला ब्लाउस और घुटनों तक की स्कर्ट होती।
आज जूनियर कालेज में फ्री-डे था। अर्थात, रति की कई सहेलियाँ रंग बिरंगी, मिनी-वस्त्रों में आने वाली थी। सबको अपनी नुमाइश में सेक्सी-किक मिलता था। इस मामले में रति इतनी भोली थी, जैसे सहेली न होकर, वह उनकी छोटी बहन हो।
रति के वार्डरोब में कोई भड़काऊ ड्रेस थी ही नहीं। मन ममोस कर उसने पिछले साल का, स्कूल के दिनों का, एक टू-पीस सूट निकाला। इस बीच रति के स्तन तेजी से बढ़ गए थे। ब्लाउस थोड़ा तंग हो गया था और प्लेट-दार स्कर्ट लम्बाई में थोड़ी छोटी भी। चोली की जगह उसने पारदर्शी-सिल्क की हाफ-शमीज डाल ली, जो केवल नाभि के ऊपर तक पहुँच पाई।
जन्म-दिन पर शरारत करते हुए कुछ दिन पहले एक सहेली ने उसे लाल रंग की, उत्तेजक पेंटी भेंट की थी। आज पहली बार रति ने वो वाली पेंटी पहन ली। सामने दर्पण में आपने आप को निहारा तो एक शर्म भरी मुस्कराहट के साथ आँखें नीची हो गईं। सोचने लगी, पता नहीं वह किसके सामने रेशमी शमीज व सेक्सी पेंटी में यूँ खड़ी होकर अपना लुभावन अंग दिखा पायेगी।
बचपन से ही, रति को अपने अंग प्रदर्शन से मीठी-मीठी गुलगुली होती थी। शायद उसे पुरुषों की वासना भरी नजरों से कोई किक मिलता था। लेकिन घर के कड़े अंकुश की वजह से उसकी प्यास दबी की दबी रह गई थी।
कसे ब्लाउज़ में रति के बी-कप मम्मे, एक लचक लिए कैद हो गए। उसी तरह तंग-स्कर्ट में उसके अर्ध-गोलार्ध भी उभर आये। स्कर्ट, या यों कहें, मिनी-लहंगे का छोर रति की जांघों के मध्य तक ही पहुँचा। पीछे से लहंगा और ऊपर को उठ गया था। अपने आपको शीशे में देख कर रति को सेक्स और लज्जा की मिली-जुली अनुभूति हुई। वह अपनी उम्र से काफी कम की लग रही थी। फिर हल्का सा मेक-अप, श्रृंगार किया। उसके अधर, रसीले चेरी की तरह लाल थे। उन्हें किसी लिपस्टिक की जरूरत थी नहीं। फिर भी, ग्लॉस लगा कर वह कोई स्वर्ग से आई अप्सरा-कन्या लग रही थी।
पर्स लेकर वह निकलने ही वाली थी कि सामने दरवाजे की घंटी बजी। रति घबरा गई। सोचने लगी कि इस वक्त कौन आया है, और इन भड़काऊ वस्त्रों में उसे देख, क्या सोचेगा। दरवाजे तक पहुँचने में उसे सामान्य से ज्यादा वक्त लग गया।
तनिक कांपती हुई आवाज में उसने पूछा- कौन है?
‘रति, मैं हूँ!’ जानी पहचानी आवाज आई।
रति ने राहत की साँस ली। रोहित, उसकी माँ से काफी छोटा, दूर का रिश्तेदार था; जिससे रति की अच्छी पटती थी। माँ ने केवल ‘रोहित मामा’ से मिलने जुलने की छूट दे रखी थी। तनिक संकोच करके, रति ने दरवाजा खोल दिया, लेकिन स्वयं थोड़ा आड़ में छुप गई।
रोहित अंदर आ गया।
‘दीदी कहाँ है?’ पूछते हुए उसकी नजर रति पर पड़ी।
मामा की नजरों से रति जान गई कि वे उसे ताक रहे हैं। कुछ घबरा कर, कुछ शरमा कर उसने कहा- मम्मी आज जल्दी निकल गई। कुछ काम था क्या?
रोहित बोला- हाँ, काम तो था, लेकिन वो फिर हो जायेगा!
वह अब रति को ऊपर से नीचे ऐसे देख रहा था मानो स्कैनिंग कर रहा हो। रति लज्जा से सिमट रही थी।
बाहर हवा के झोंके चल रहे थे। अधखुला दरवाजा रह रह कर फ्रेम से ठोकर खा रहा था। कुछ सोच कर रोहित ने दरवाजा बंद नहीं किया, बस भिड़ा कर छोड़ दिया।
‘तू कहीं जा रही थी क्या?’ रोहित ने पूछा।
‘जी मामाजी, आज कालेज में फ्री डे है’। मामा के चेहरे में एक मुस्कराहट खिल आई।
सकपका कर रति ने सफाई देनी चाही- आज सब लड़कियाँ तनिक माडर्न ड्रेस में आयेंगी।
मामा की चुप्पी उसे खल रही थी। वह आगे बोली- मेरे पास कोई नई ड्रेस तो थी नहीं, इसलिए स्कूल की.., मेरा मतलब, इसलिए पिछले साल की ही पहन ली।
उदासी, लज्जा व ग्लानि से रति के चहरे पर ऐसे भाव छा गए, मानो किसी बच्ची को रसोई से लोली चोरी करते हुए मामा ने पकड़ लिया हो।
उधर रोहित की स्थिति खराब हो रही थी। उसने रति को सदैव अपनी छोटी सी भांजी ही समझा था, लेकिन आज वो मानो अचानक बड़ी हो गई थी। ढीले-ढाले कपड़ों में रति की कामुक तनाकृति पर कभी उसका ध्यान ही नहीं गया था। आज उसके कसे ब्लाउज़, आम के आकार वाली चूचियाँ और मिनी-स्कर्ट से उभरे चूतड़ देख कर रोहित का लंड खड़ा हो रहा था।
रोहित के होंठ सुर्ख हो उठे, उसने जीभ फिरा कर उन्हें गीला किया। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि आगे क्या बोले। रोहित की आँखों में शुद्ध-अशुद्ध भाव आ जा रहे थे।
रति, मामा की आँखों के भाव समझ न सकी। आज वे खिलखिला नहीं रहे थे, तनिक गंभीर थे। कहीं नाराज तो नहीं हैं, मम्मी को शिकायत तो नहीं कर देंगे। किसी जाल में फंसी हिरणी की नजरों से मामा को ताका।
गंभीर आवाज में मामा ने पूछा- तूने अपने आप को शीशे में देखा कि कैसी लग रही है?
बस इतना सुनना था, रति रुआंसी हो गई। आँखों की कोर पर आंसू आ आये- अंदर जाकर मैं कपड़े बदल लेती हूँ।’
इसी के साथ सिसकते हुए बोली- प्लीज़! मम्मी से कुछ मत कहना!
डर भरा, अबोध चेहरा देख कर रोहित के कठोर होते लिंग पर सनसनाहट हुई। रति की परवाह न करके, उसने एक हाथ पैन्ट के अंदर डाल, मुन्ने-राम को व्यवस्थित किया और दो तीन झटके भी दे दिए।
फिर कहा- पहले जरा घूम कर दिखा, मैं भी तो देखूं कैसी लग रही है!
रति घूम कर रोहित की ओर पीठ कर खड़ी हो गई। पीछे से उठा हुआ मिनी-लहंगा ऐसा लग रहा था कि मानो नग्न चूतड़ दिखाने का निमंत्रण दे रहा हो। रोहित की नजरें रति की पीठ पर अन्वेषण कर कुछ खोज रही थी। उसे ब्रा-स्ट्रेप नहीं दिखा।
‘तूने ब्रा भी नहीं पहनी है क्या?’ यह कहते हुए रोहित ने रति की पीठ पर हाथ फेरा, मानो स्ट्रेप ढूंढ रहा हो।
मामा का हाथ पीठ पर सरकते ही रति की रुलाई फ़ूट गई। सिसकती आवाज में उसने उत्तर दिया- जी मैं अभी तक शमीज ही पहनती आई हूँ।
फिर कहा- आप कहेंगे तो अब से ब्रा पहन लिया करुँगी।
रोहित अब रति के पीछे चिपक गया। मानो कुछ समझाना चाहता हो- जरा देखें तो सही, तेरी चूचियों को अभी सहारे की जरूरत है भी या नहीं?
इन्ही शब्दों के साथ रोहित के हाथ रति की बाँहों के नीचे से निकल कर सामने पहुँच गए।
रति घबराई हुई थी, जल्दबाजी से वह बिदक सकती थी। यह सोच रोहित ने पहले रति की संकरी कमर घेरते हुए उसके पेट पर हाथ फिराया। इस आलिंगन में वह पूरा का पूरा रति के पीछे चिपक गया। उसका चेहरा रति के घुंघराले बालों के इर्द गिर्द मचलते हुए, नव-बालिग, कमसिन, कोमल त्वचा को सूंघने लगा। उसका पैंट में तना हुआ टट्टू, मिनी-लहंगे से छुपी गाण्ड की दरार में जा लगा।
रोहित ने अपने सीने को थोड़ा आगे कर दबाव डाला। रति को कुछ सामने झुकना पड़ा। उसके अर्थ-गोलार्ध पीछे हुए तो आभास हुआ कि एक अनजाना, गुदगुदा, तंतु उसकी पृष्ठ-घाटी में रगड़ रहा है।
इसी बीच रोहित ने हाथ ऊपर सरकाते हुए रति की अम्बियों को नीचे से तौल लिया। नई-नई पनपी अम्बियों में कोई लटकन नहीं था, केवल कामुक लचक थी। रोहित आगे-पीछे होकर अम्बियों की लचक तोलता रहा।
वह बोला- सच में, तुझे अभी कोई चोली की जरूरत नहीं।
यह सुन कर रति को थोड़ी राहत मिली। कम से कम मामा इस बात से तो नाराज नहीं होंगे कि उसने ब्रा क्यों नहीं पहनी। रोहित का हाथ और ऊपर खिसक आया, मानो वह अब रति के उभरते मम्मों के आकार का अनुमान लगा रहा हो।
अचानक रति की दाईं गर्दन में एक गहरा चुम्बन देकर वह बोला- तेरे स्तन आम के समान बन रहे हैं। बहुत कम लड़कियों के होते हैं ऐसे!
फिर जैसे मजाक कर रहा हो, बोला- कालेज में लड़कों की नजरों से इन्हें छुपाये रखना, नहीं तो कोई उन्हें चूस खायेगा।
यह कहते हुए, रोहित ने रति के चुचूक टटोल लिए। चुचूकों पर रोहित की अंगुलियाँ ऐसे फिरने लगी मानो कोई निपुण सितारवादक टंकार दे रहा हो।
रति के शरीर में बिजली का करेंट सा दौड़ गया। गले में गीला चुम्बन, गांड की दरार में किसी अनजाने अंग का स्पर्श और कुंवारी चूचियों पर पहला-पहला पुरुष-मर्दन!
इतना सब इतने कम समय में सहन कर पाना मुश्किल था। नव-युवाकांशाओं को प्राप्त करने को अग्रसित हो रहे, वासना से ओत-प्रोत, कामुक-शारीर को रोहित का आलिंगन मनमोहक लग रहा था। लेकिन माँ के अंकुशों की याद ताजा थी। उसकी अंतरात्मा कचोट रही थी कि वह कहीं कुछ गलत तो नहीं कर रही।
वह जन्म से अपने अंग-प्रदर्शन की प्यासी थी। मन की गहराई में यह कामना थी कि हर पुरुष उसे भूखी नजरों से ताके। रोहित के माध्यम से उसकी यह तृष्णा संतुष्ट हो रही थी। उसकी अंतरात्मा में मिश्रित रंग बदल-बदल कर आ जा रहे थे। वह भयभीत थी और लज्जित भी कि मामा उसका उपभोग कर रहे हैं। साथ ही साथ उसके शरीर से मीठी-मीठी धाराएं बह रही थी, जिनका उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। उसकी वर्षों की दबी ज्वाला प्रज्वलित हो रही थी।
हिम्मत करके कोमल हाथ रोहित के हाथों पर भींच कर रति बोली- अब मुझे छोड़िये, यह सब ठीक नहीं है।
कुछ रुक कर बोली- माँ को पता चल गया तो बहुत नाराज होगी।
यह सुन रोहित की उत्तेजना बढ़ गई। पुरूष की काम-वासना आलिंगन में फंसी नारी की विवशता देखकर भड़क जाती है। उसने रति की गरदन पर दूसरी तरफ भी गहरा चुम्मा दे दिया। साथ ही साथ उसके कठोर होते चुचूकों को अपनी अंगुली व अंगूठे में भींच कर मसल दिया।
रति के शरीर से काम-उत्तेजना का दूसरा करेंट गुजरा। उसके कंठ से वासना भरी कराह निकली, मानो आलिंगन में फंसी नारी अपनी विवशता से प्रज्वलित हो रही हो। वक्ष और गर्दन का भाग पीछे को मुड़ गया। लज्जा एवं आनन्द से आंखें मुंद गई। उसकी दशा देख रोहित का वज्र सामान लिंग, चूतड़-खाई के अंदर ही अंदर उचकने लगा।
शेष अगले भाग में! Antarvasna
ये हिंदी में चुदाई की कहानी उस समय की है.. जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। उस वक्त मेरी उम्र 20 साल की थी जबकि मेरी सौतेली माँ 35 साल की थीं।
मेरी मॉम एक बहुत ही सेक्सी महिला थीं.. उनके जिस्म का एक-एक हिस्सा बिल्कुल तराशा हुआ था और अंग-अंग से मादकता टपकती थी। मैं कई बार उन्हें बाथरूम में सम्पूर्ण नग्नावस्था में देख चुका था। एक बार तो पापा उन्हें पूरा नंगा करके चोद रहे थे, तब भी उनकी मचलती जवानी को देखा था। जिस दिन पापा मॉम को चोद रहे थे, उसी दिन मेरा मन मॉम को चोदने के लिए मचल उठा था।
एक रात पापा शहर से बाहर गए हुए थे, मैं अपने बेडरूम में था। लेकिन मन में उत्तेजना के कारण मुझे नींद नहीं आ रही थी, सो मैंने मॉम की चूचियों को याद करते हुए मुठ मारनी चालू कर दी। कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना और अधिक बढ़ गई तो मैंने गोल तकिया को अपनी टांगों में फंसा लिया और उसे ही मॉम समझ कर चोदना शुरू कर दिया।
उसी समय मेरी मॉम ने मेरे बेडरूम का दरवाजा खोला और मेरे कमरे में आ गईं।
दरवाजा खुलने की आवाज़ से मैं घबराकर रुक गया लेकिन मैं तकिए के ऊपर था। फिर मैंने मॉम को देखा तो मैं तकिए के बगल में लेट गया।
मॉम ने पूछा- क्या हुआ.. क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- नींद नहीं आ रही है, कुछ बेचैनी सी है।
फिर मैंने मॉम से पूछा- क्या आपको भी नींद नहीं आ रही है?
वो बोलीं- हाँ मुझे भी नींद नहीं आ रही है।
मैंने कहा- आप भी यहीं लेट जाओ न।
फिर वो मेरे पास बैठ गईं।
मैंने फिर कहा- यहीं सो जाओ ना, मेरे पास।
वो सीधी लेट गईं। कुछ देर बाद मैंने पूछा- नींद नहीं आ रही है.. तो कोई कहानी पढ़ लेते हैं।
उन्होंने सर हिला कर हामी भरी तो मैंने पापा की किताब की रेक से एक सेक्सी कहानी की बुक निकाली और कहा- इसको पढ़ते हैं।
मॉम बोलीं- ये कौन सी किताब है?
मैंने कहा- कहानी की किताब है, इसकी कहानी पढ़ने में बहुत मजा आएगा, इसको पढ़ने से बहुत गुदगुदी भी होती है।
फिर मैंने किताब को हम दोनों के बीच में रखकर पढ़ने लगा। ऐसे में मॉम को पढ़ने में जरा दिक्कत हो रही थी तो मैंने कहा- चलो मैं पढ़कर सुनाता हूँ..
मैं उनको सेक्सी कहानी पढ़कर सुनाने लगा। इसमें एक लड़की का दूसरे मर्द के साथ सेक्स का किस्सा था। ये सेक्स स्टोरी बहुत डिटेल में थी।
मॉम बोलीं- ये सब क्या है?
मैंने कहा- अल्मारी में रखी थी।
वो बोलीं- इसमें बड़ों की गन्दी बातें लिखी हैं। तुमको इसे नहीं पढ़ना चाहिए।
मैंने कहा- फिर आपकी और डैड की अल्मारी में क्यों रखी है? एक बार पढ़ते हैं, सुनो ना!
फिर मॉम को भी मज़ा आने लगा। वो भी गरम होने लगीं। मॉम बीच-बीच में अपनी बुर खुजला रही थीं।
मैंने कहा- कहो गुदगुदी हो रही है ना।
मॉम ने स्माइल दे दी।
मैंने अपने लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मेरे भी इसमें और सारे बदन में बहुत गुदगुदी हो रही।
फिर मैंने कहा- अब आप पढ़िए।
अब वो पढ़ने लगीं.. वो बहुत गरम हो गई थीं। तभी मॉम ने किताब बंद करके रख दी और बिस्तर पर अपने पैर पसार कर चित्त लेट गईं।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोलीं- बहुत बेचैनी हो रही है, नीचे बदन में कुछ खुजली भी हो रही है।
मैंने पूछा- शायद पावडर बदन पर लगाने से आराम मिल जाएगा।
वो बोलीं- हाँ ठीक है.. तुम पावडर ही लगा दो।
मैं बगल वाले रूम से पावडर लेकर आया।
मैंने देखा कि मॉम पेट के बल लेट गई थीं।
मॉम बोलीं- कमर में लगा दो।
मैंने देखा उन्होंने अपने ब्लाउज के बटन खोले हुए थे और ब्रा भी खोल दी थी।
मैं पावडर कमर पर लगाते हुए ब्लाउज के अन्दर हाथ डालकर मलने लगा। उनका कोई विरोध नहीं हुआ तो फिर मैं आहिस्ता-आहिस्ता पूरी कमर पर पावडर मलते हुए सीधे ही उनके मम्मों को मसलने लगा। मॉम को मम्मे मिंजवाने में मजा आ रहा था। वे मजा लेने लगीं तो मैंने सीधे ही उनके मम्मों पर पावडर लगाया और मम्मों को मसलने लगा।
अब उनको मजा आ रहा था।
फिर मैंने कहा- मॉम जरा आपकी गर्दन के पास भी पाउडर लगा देता हूँ।
वो घूमीं तो ब्लाउज के बटन खुले हुए थे और बूबस- पूरे नंगे दिखने लगे थे।
मॉम के बड़े-बड़े चूचे बहुत सेक्सी लग रहे थे।
मैंने उनकी गर्दन पर पावडर लगाने लगा। अब तो मैं सामने से मॉम के मम्मों को मसल रहा था और वो कुछ नहीं बोल रही थीं।
फिर मैंने मम्मे मसलते हुए हाथ नीचे पेट पर फिराया और नाभि को मसला। मॉम की आह निकली तो मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ अन्दर डालकर जांघ पर फेरते हुए उनकी बुर पर भी पावडर लगाने लगा।
वो कामुक आवाज में बोलीं- उह.. ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- ठीक से लगा देता हूँ.. फिर नींद भी ठीक से आ जाएगी।
मॉम कुछ नहीं बोलीं तो मैं अपने हाथ को उनके गोल-गोल चूतड़ों पर फेरने लगा। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
मैंने पूछा- मॉम क्या मज़ा आ रहा है.. आराम मिल रहा है?
अब मैं मॉम के चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते उनके ऊपर चढ़ गया और बोला- इससे आपका बदन भी दब जाएगा।
मॉम भी मेरे मजे लेने लगीं।
मैंने कमर के नीचे से मॉम के चूचे पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा।
अब तो मॉम पूरी तरह से चुदास से तड़फ रही थीं।
मैंने कहा- किताब वाला सीन करते हैं।
मेरे बदन में जोर-जोर से गुदगुदी हो रही है।
फिर अचानक से मॉम को कुछ याद आया और वे बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- दरवाजा बंद है, किसी को पता नहीं चलेगा, मैं भी किसी से नहीं कहूँगा, तुम्हारी कसम मॉम आपको मज़ा भी आ जाएगा, प्लीज़ मना मत करो।
मॉम ने कुछ नहीं कहा।
मैंने फिर से उनसे कहा- कहानी की तरह मज़ा करते हैं मॉम।
मैंने अपना पजामा खोल दिया और उनकी जाँघों पर बैठ गया।
अब मॉम ने मेरा लंड पकड़ कर लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मुझसे वादा करो कि तुम किसी से कभी भी नहीं कहोगे।
मैंने कहा- वादा।
और फिर क्या था.. उन्होंने अपने सारे कपड़े बदन से अलग कर दिए।
मैंने कहा- आप जैसे बोलेंगी.. मैं वैसे ही करूँगा।
उन्होंने कहा- हाँ जैसा कहानी में पढ़ा था.. वैसे ही करते रहो। मैंने उनके एक चुचे को चूसना शुरू किया.. दूसरे चूचे को दबा भी रहा था।
फिर वो भी मेरे लंड पर हाथ फेरने लगीं। मैंने भी एक हाथ की उंगली से मॉम की बुर को दबाने लगा और उंगली चुत के अन्दर कर दी।
फिर वो मुँह से ‘शह्ह.. उह्हह..’ आवाज निकालने लगीं।
मैंने उनसे किताब के सीन की तरह उनसे डॉगी स्टाइल में बैठने को कहा। जैसे ही मेरी मॉम कुतिया के जैसे बनीं मैंने अपने लंड को पीछे से उनकी बुर के छेद के पास ले जाकर सुपारे को फेरने लगा। साथ ही मैं दोनों हाथों से मम्मों भी दबा रहा था। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
अचानक ही लंड फिसला और झटके के साथ बुर में घुस गया, क्योंकि उनकी बुर का छेद चुदवाते चुदवाते कुछ तो बड़ा हो गया था।
उनके मुँह से भी और मेरे मुँह से भी जोर की ‘शह्हह.. आह..’ की आवाज निकलने लगी।
मैंने अब धक्का लगाना शुरू किया, धीरे-धीरे धक्के की स्पीड भी बढ़ा रहा था। सच में क्या मस्त मज़ा आ रहा था।
मॉम भी बोलीं- और जोर से चोद.. और जोर से पेल.. आह मजा आ रहा है।
मैंने मॉम के मम्मों को जोर से दबाकर निप्पलों को खींचा और धक्के लगाने लगा।
‘अह.. उह.. ओह.. सुपरब.. श्शश.. और और जोर से.. क्या बात है और झटका दूँ मॉम?’
‘हाँ पेलता रह..’
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और वो बेड पर सीधी लेट गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके कामुक बदन पर हाथ फेरा, फिर बुर में उंगली घुसेड़ कर भीतर के पॉइंट को सहलाने लगा।
ये उनका जी-स्पॉटस था, वो बहुत जोर से हिल गईं और उनकी जोर से ‘आअ.. आअ.. श्शश.. उह..’ की आवाज निकल गई।
मैंने अब लंड को उनके मम्मों पर फिराना शुरू किया और ऊपर से नीचे की तरफ़ लंड लाने लगा। फिर उन्होंने मेरा मुँह अपने मुँह के पास खींचकर जोर से किस किया। मैं भी जोर-जोर से किस करने लगा और अपनी जीभ भी उनके मुँह पर फेरने लगा। उनकी जीभ को चूसने में मज़ा आ रहा था। वो साथ-साथ मेरे लंड को एक हाथ से जोर-जोर से सहला रही थीं।
मैं भी बोला- बहुत मज़ा दे रही हो।
फिर उन्होंने मेरे को जोर से अपनी तरफ़ खींचकर बांहों में जकड़ लिया। मैंने भी उनको भींच लिया, उनके चूचे मेरी छाती से चिपक कर दब रहे थे।
आह क्या रगड़ सुख मिल रहा था।
फिर उन्होंने अपनी जांघें फैलाईं और कहा- अब जल्दी-जल्दी जोर से यहाँ लंड ले आओ।
मैंने लंड को उनकी बुर में घुसेड़कर धीरे-धीरे हिलने लगा।
फिर वो बोलीं- आअह ऐसे नहीं चलेगा.. जोर-जोर से झटके लगाओ।
मैंने जोर से चोदना शुरू कर दिया।
क्या मस्त चुदाई का आनन्द आ रहा था। मॉम भी चुदाई का मजा ले रही थीं- शह.. शह आ.. क्या बात है आह.. आ.. शह.. अह्हह.. ओह्हह.. और जोर जोर से धक्के लगाओ.. बहुत मज़ा आ रहा है।
मैं भी पूरी ताकत से लंड को भीतर तक ठोकने लगा। चुदाई पूरी स्पीड पर थी और अब मैं झड़ने लगा था। मेरा रस झड़ने लगा और मैं ढीला होकर उनके नंगे बदन से जोर से लिपट गया। मॉम के गुदगुदे बदन पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर वो बोलीं- चलो हटो.. बहुत देर हो गई है.. अब सोते हैं।
वो अपने कपड़े पहनने लगीं। फिर बोलीं- ये राज ही रखना, किसी से कभी मत कहना।
मैंने हाँ कहते हुए उनके मम्मों को दबाकर किस कर लिया और बुर को दबाते हुए कहा- फिर कभी गुदगुदी होगी तो..?
वो हंसने लगीं.. मैं भी समझ गया।
मॉम बोलीं- बदमाश हो गए हो, चलो अब सो जाओ।
वो अपने कमरे में सोने चली गईं।
मैं अपनी मॉम के साथ चुदाई की इस कहानी को कभी नहीं लिखना चाहता था.. पर अब मुझे अच्छा लग रहा है।
इस चुदाई की कहानी पर आपके कमेंट्स का इन्तजार है।
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