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Antarvasna

अनिल उमा की गांड Antarvasna पर चुटकी काटते हुआ बोला- उमा जी, जरा तुम्हारी गांड मार ली जाय! बहुत सुंदर लग रही है और बहुत दिन से किसी लोंडिया की गांड भी नहीं मारी है! चलो रानी, जरा कुतिया बन जाओ!

उमा बोली- एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा!

अनिल ने हज़ार के 5 नोट उमा की तरफ बढ़ाये और बोला- ये लो रानी! लेकिन प्यार से गांड मरवाना!

उमा पलंग पर घोड़ी बन गई और बोली- हज़ूर, देर किस बात की! अब ठोक ही दो! पिछले 30-35 दिन से ठुकवाई भी नहीं है।

उमा अपने हाथ कोहिनी के सहारे पलंग पर रखकर घोड़ी बन गई। मेरा मुँह उमा के मुँह की तरफ था। राजू मेरे सर को अपनी गोदी में रखकर मेरे संतरों से खेल रहा था। अनिल अपना लौड़ा उमा की गांड के मुँह पर रख कर उसे घुसाने की कोशिश में लगा था। अनिल उमा से बोला- साला घुस ही नहीं रहा है! बड़ी कसी हुई है! पिछली बार तो आराम से घुस गया था!

उमा बोली- साइड में जेली क्रीम रखी है उसे लगा, तब घुसेगा।

राजू ने क्रीम निकाल कर अनिल को दे दी। उसने अपनी उंगली में ढेर सी क्रीम लगाई और उमा की गांड क्रीम से भर दी। राजू ने मुझे भी घोड़ी बना दिया और अपना लंड मेरी चूत में पीछे से घुसा दिया और धीरे धीरे मेरी चूत में धक्के मारने लगा। अब मेरा मुँह उमा की गांड की तरफ था। हम दोनों पलंग पर 90 डिग्री का कोण बना रहे थे।

अनिल बोला- थोड़ी क्रीम साली की गांड में भी लगा! इसकी गांड भी मारूंगा। साली लौड़ा नहीं चूसती है ना!

राजू ने लंड निकाल कर अपनी उंगली मेरी गांड में घुसा दी और मेरी गांड भी क्रीम से भर दी। कुछ देर उसने उंगली मेरी गांड में आगे पीछे की और दोबारा मेरी चूत में लंड घुसा कर मुझे चोदने लगा।

अनिल उमा की गांड में बड़े प्यार से उंगली घुसा कर उसकी गांड की मालिश कर रहा था। थोड़ी देर बाद उसने उमा की गांड पर अपना लंड रख दिया और एक झटका तेजी से मारा। उमा के जोर से चीखने की आवाज़ आई। उमा चीख सी रही थी- कुत्ते, छोड़! मर गई! मर गई! हरामी रंडी की औलाद लौड़ा निकाल! फट गई!

मैंने मुँह उठा कर देखा तो दंग रह गई। अनिल ने अपना आधा लंड उमा की गांड में घुसा दिया था और उसे अंदर घुसाने की कोशिश में लगा था। उमा बुरी तरह चीख रही थी। थोड़ी देर में उसका लंड पूरा उमा की गांड में फिट हो गया। अब राजू मेरी चूत और अनिल उमा की गांड पेल रहे थे। मुझे चुदने में अब बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी देर में उमा भी मीठी मीठी सिसकारियाँ और चीखें मारने लगी। अनिल का लौड़ा उसकी गांड में आगे पीछे होते हुआ मैं बड़े आराम से देख रही थी।

अनिल मेरे बाल खींचते हुआ बोला- साली, तेरी भी अभी मारूंगा! देख ले और देख ले!

उमा गांड हिला हिला कर गांड मरवाने का मजा ले रही थी। कुछ देर बाद दोनों लोगों ने अपना लंड निकाल लिया। दोनों के लंड पूरे तने हुए खड़े थे, शायद गोली का असर था। मेरी चूत में मीठा दर्द हो रहा था। अनिल ने उमा की गांड से लंड निकाल लिया और मेरे मुँह के पास लंड रखकर बोला- राजू, तू उमा की गांड में घुसा! मैंने खोल दी है!

राजू ने मेरी चूत से लंड निकाल कर उमा की गांड में घुसा दिया। राजू का लंड अनिल से पतला था इसलिए उमा की फटी गांड में आराम से घुस गया। उमा बिस्तर पर लगभग लेट सी गई थी, राजू का लंड उमा की गांड में सरपट दौड़ने लगा।

अनिल ने कंडोम निकालकर फ़ेंक दिया था और मेरे मुँह पर अपना लौड़ा रखकर मेरी चूचियाँ कस के दोनों हाथों से मसल दीं और बोला- ले कुतिया लौड़ा चूस!

लेकिन मुझे लौड़ा चूसने से चिढ़ थी, मैंने अपना मुँह बंद रखा।

अनिल बोला- हरामिन साली! रंडी नखरे करती है, अभी मजा चखाता हूँ!

उसने मेरे पीछे आकर अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। अनिल का लंड अच्छा मोटा था उसने पूरी ताकत से एक झटके में मेरी चूत में लंड पेल दिया।

मैं जोर से चिल्ला उठी- उई मर गई!

अनिल मेरी चूची कस कस कर नोच रहा था, मैं जोर जोर से चिल्लाने लगी थी- उई मर गई!

उमा भी हलकी हलकी सिसकारियाँ ले रही थी। अनिल का लंड मेरी चूत में तेजी से झटके खा रहा था। राजू का लंड झड़ चुका था, उमा चुदने के बाद बिस्तर पर एक घायल कुतिया की तरह लेट गई। अनिल ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर खींच लिया। उसका लंड अभी भी टनटना रहा था। अनिल अब मेरी मेरी गांड में अपनी उंगली घुसा रहा था और उसे गांड में अगूंठी की तरह घुमा के आगे पीछे कर रहा था, साथ ही साथ गुर्रा रहा था- रंडी साली! तेरे को तो मैं बताता हूँ! लौड़ा चूसने से मना करती है ना!

मेरी गांड में अजीब सी खुजली हो रही थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था अब यह क्या करेगा!

उसने पास में रखी जेली ट्यूब पूरी मेरी गांड में पिचका दी, राजू से बोला- कुतिया तेरा लौड़ा चूसने से मना कर रही थी? अभी साली से चुसवाता हूँ! पूरे पचास हज़ार दिए हैं! सारे छेदों में डालूँगा हरामिनो के! साली शरीफ बनती हैं! इसके मुँह पर लौड़ा रख और कस कर इसकी चूचियाँ दोनों हाथों से पकड़!

राजू मेरी चूचियाँ पकड़ कर खड़ा हो गया और अपना लंड मेरे मुँह के आगे रख दिया। मैंने अपना मुँह नहीं खोला। अनिल ने चूत में से अपना लंड निकाल कर मेरी गांड के मुँह पर रख दिया और झटके से मेरी गांड में घुसा दिया। मैं एकदम से चिल्ला उठी- उई, मर गई! मर गई!

लंड मेरी गांड में थोड़ा सा घुस चुका था और वो पूरा घुसाने की कोशिश कर रहा था। मैं चिला रही थी- उई मर गई! छोड़ कुत्ते छोड़! फट गई! फट गई!

मेरी आँखों से आंसू आ गए थे, मैं झटका दे रही थी कि मेरी चूत से लौड़ा निकल जाए लेकिन अनिल और राजू की पकड़ बड़ी मजबूत थी। अनिल बोला- कुतिया इतना क्यों चिल्ला रही है? अभी तो दो इंच भी अंदर नहीं घुसा है, साली कितनी कसी हुई गांड है तेरी? इतना दर्द हो रहा है तो चुपचाप लौड़ा चूस ले ना! नखरे क्यों करती है?

अनिल कस कर मेरी कमर पकड़े हुआ था और राजू मेरे दोनों संतरे दबाए हुए था, अनिल चिल्लाया- राजू कुतिया को छोड़ियो नहीं जब तक तेरा लौड़ा मुँह में न ले ले!

अनिल पूरी ताकत से लंड मेरी गांड में घुसाने की कोशिश कर रहा था, मैं दर्द के मारे मरी जा रही थी और रोते हुए चिल्ला रही थी।

उमा भी मुड़ कर मेरी तरफ देख रही थी, उमा बोली- अनिल जी, इसे छोड़ दो! इसने आज तक गांड नहीं मरवाई है! मर जायेगी!

अनिल बोला- साली हर कुतिया को एक न एक दिन तो खुलवानी ही पड़ती है! चूत भी तो साली की खुली होगी! आज कुतिया की गांड मैं खोल देता हूँ! हरामिन मेरे यार का लौड़ा चूसे तो इसे छोड़ सकता हूँ!

अनिल ने दम लगा के अपना लंड कुछ और अंदर तक तक मेरी गांड में ठोंक दिया था। राजू का लंड मेरे मुँह के आगे झूल रहा था। अनिल ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाला तो मुझे कुछ शांति सी लगी लेकिन अगले ही सेकंड एक तेज झटका मेरी गांड पे लगा लंड गांड में और अंदर तक घुस गया था। मेरी जोरों से चीख निकल गई।

अनिल चिल्लाया- तू साली हरामजादी लौड़ा नहीं चूसेगी तो तेरी तो गांड ही मारनी पड़ेगी।

अनिल ने लंड मेरी गांड में दौड़ाऩा शुरू कर दिया। मेरी जोरों से चीख निकल गई। .मेरा दर्द असहनीय हो रहा था, मैं बोली- छोड़ कुत्ते छोड़! ले मैं मुहं में लेती हूँ!

अनिल ने गांड से लंड निकाल लिया। मरती क्या न करती- मैंने राजू का मुरझाया हुआ लंड अपने मुंह में ले लिया। अनिल ने मेरे चूतड़ौ॑ पर हाथ मारा और बोला- शाबाश मेरी रंडी! पहले इसका चूस! फिर मेरा चूसियो!

अनिल ने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के मुँह में छुला रखा था जिसके कारण गांड के मुँह पर चुभन सी हो रही थी।

पहली बार मेरे मुँह में लंड घुसा था, मैं उसे चूसने लगी। मुझे पता था कि अगर मैंने लंड बाहर निकाला तो मेरी गांड फाड़ दी जायेगी।

थोड़ी देर में राजू का लंड दोबारा खड़ा होने लगा, लेकिन जैसे जैसे मैं लंड चूस रही थी मेरे बदन में मस्ती सी बढ़ती जा रही थी। सच, मुझे जबरदस्त मजा आ रहा था। अब मैं पूरी मस्त होकर लौड़ा चूस रही थी। मुझे पता चल गया था कि जब तक कोई चीज़ चखो नहीं, तब तक उसके मजे का पता नहीं चलता है।

राजू का लंड अब पूरा खड़ा हो गया था, उसे अब मैं बिल्कुल ब्लू फिल्म की हिरोइन की तरह चूसने लगी थी।

अनिल दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को दबाते हुए बोला- शाबाश मेरी जान! यह हुई न बात! और उसने अपना लंड मेरी चूत में फिट कर दिया।

मैं चिहुंक उठी लेकिन अगले ही क्षण पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया था और चूत में आगे पीछे दौड़ने लगा था। इस समय मुझे पता चल रहा था कि दो दो लंडों का मजा क्या होता है। मुझे मस्त मजा आने लगा था, अब मैं पूरी मस्त होकर लंड चूस रही थी, साथ ही साथ चूत भी मैंने ढीली छोड़ दी थी। मेरी चूत की चुदाई भी शुरू हो गई थी। दो लंडौं से पिलवाने का मजा क्या होता है, लिख कर नहीं बताया जा सकता। वाकई अब मैं असली कुतिया होने का मजा ले रही थी। सच! यह तो जन्नत का मजा था! मैंने सोच लिया था कि अगर अब अनिल गांड मारेगा तो कितना ही दर्द हो गांड भी एक बार मरवा लूंगी। पता तो चले गांड मरवाने में कितना मजा आता है!

थोड़ी देर बाद राजू ने मेरे मुँह में अपना नमकीन वीर्य छोड़ दिया। मैंने एक झटके में अपना मुहं खोल के सारा वीर्य बाहर थूक दिया।

अनिल बोला- रानी अमृत बाहर फेंकती हो? अभी मजा चखाता हूँ!

और उसने मेरी कमर कस के पकड़ कर पूरी ताकत से अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरी गांड में ठोंक दिया। मेरी चीख निकल पड़ी। उसने झुककर मेरे संतरे कस कर दबा लिए थे और उन्हें मसलते हुए बोला- साली बड़ी टाइट है तेरी! 3-4 इंच से ज्यादा घुसता ही नहीं है! लेकिन आज तेरी अब फाड़ कर ही चोदूंगा!

मैं दर्द के मारे जोर जोर से चीख रही थी, उमा लेटे लेटे बोली- रीता, थोड़ी गांड ढीली छोड़ दे! जब तक इनका लंड पिचकेगा नहीं, यह नहीं मानेंगे!

अनिल बोला- साली की फटेगी नहीं तब तक नखरे करेगी। आज फट गई तो अगली बार अच्छी तरह से मरवाएगी।

और उसने मेरी गांड को गोदना जारी रखा। मैंने अपनी गांड ढीली छोड़ दी, मैं एक तरह से अब गांड मरवाने को तयार थी। अनिल का लंड लगभग पूरा गांड में घुस गया था और वो अब मेरी गांड मार रहा था। मैं जोर जोर से चीख भी रही थी लेकिन मुझे अब गांड मराने में मजा भी आ रहा था। उमा खेली खाई थी, वो समझ गई कि मुझे अब गांड फटवाने में मजा आ रहा है।

उमा मुस्कराती हुई बोली- रीता, मस्ती आ रही है? ले ले मजा! फिर पता नहीं कब मौका आएगा!

थोड़ी देर बाद अनिल झड़ गया और पस्त होकर लेट गया। अब हम चारों ही पस्त थे। मेरा पूरा बदन दुःख रहा था, मैं समझ गई थी कि चुदाई क्या होती है लेकिन साथ ही साथ मुझे पता चल गया था कि लंड चूसने में कितना मजा आता है। मुझे इस बात की भी ख़ुशी हो रही थी कि मैंने गांड मरवाने का मजा भी ले लिया।

सुबह दस बजे मेरी नींद खुली। उमा की नौकरानी चाय बना कर ले आई। हम चारों बिस्तर पर नंगे पड़े हुए थे। अनिल मेरे गले में हाथ डालकर बोला- रानी, कल रात के लिए गुस्सा तो नहीं हो? थोड़ी ज्यादा ही मार ली तुम्हारी!

राजू उमा के गले में हाथ डाले था। लंड दोनों के शांत थे। अनिल बोला- उमा जी, वाकई कमाल का हुस्न है आपकी सहेली का!

चाय पीने के बाद हम लोगों ने अपने कपड़े पहन लिए। अनिल बोला- रानी ना नहीं करना! एक बार लौड़ा और चूस लो!

उमा बोली- चूस ले! इतना नखरा भी क्या!

अनिल ने अपनी पैंट खोल कर मेरे मुँह पर लौड़ा रख दिया। अब मुझे लौड़ा चूसने में कोई हिचक नहीं थी। अगले मिनट मेरे मुँह में अनिल का और उमा के मुँह में राजू का लौड़ा था। हम दोनों ने दस मिनट लगातार उनके लौड़े चूसे और इस बार उनका लंड रस भी मैंने अपने मुँह में लिया। वीर्य शुरू में मुझे थोडा अच्छा नहीं लगा लेकिन उमा ने बताया कि दो तीन बार पीयेगी तो अमृत सा लगने लगेगा और रोज़ अपने पति का जबरदस्ती पीयेगी।

मैंने उमा की बात मानते हुए पूरा वीर्य अपने मुँहं में ले लिया। इसके बाद राजू ने भी मुझे अपना लौड़ा चुसवाया।

वाकई अब मैं लौड़ा चूसने की दीवानी हो गई थी। अनिल और राजू उसके बाद उमा के घर से चले गए।

उमा बोली- यार मुझे पता नहीं था कि ये लोग इतनी बुरी तरह चोदेंगे! तेरी भाभी को भी एक बार अनिल चोद चुका है लेकिन तब इसने बड़ी शराफत से चोदा था। माफ़ कर दे यार!

मैं बोली- उमा, तूने मुझे एक रात के लिए कॉलगर्ल बना दिया लेकिन मुझे पता चल गया कि लौड़ा चूसने में कितना मजा आता है! और अनिल ने मेरी गांड भी खोल दी जो शायद अगर मैं अपने पति के साथ रहती तो कभी नहीं खुलती! मैं तेरा धन्यवाद अदा करती हूँ लेकिन अब मैं अपने पति के साथ जाकर रहूंगी क्योंकि अब मैं बिना चुदे नहीं रह सकती।

मेरे होटों पर कटे के निशान थे, मैं दो दिन उमा के पास रुकी। उमा ने बताया कि उसके दूधवाले का लंड आठ इंच लम्बा और चार इन्च मोटा है। उमा के कहने पर मैंने उसके दूधवाले का लंड चूसा। सच जन्नत का मजा आया मुझे।

दो दिन बाद मैंने अपना सामान बांध लिया और उमा से बोली- उमा, जिन्दगी का असली मजा चुदने में ही है! अब मैं अपने पति से चुदूंगी क्योंकि उन्होंने हमेशा प्यार से लंड चूसने को कहा, मैंने नहीं चूसा। अब मुझे पता चल गया है कि लौड़ा चूसने में कितनी मस्ती आती है। तेरा धन्यवाद कि तूने मुझे एक रात रंडी बनाकर मुझे सेक्स के असली मज़े का ज्ञान कराया। मैं एक रात के लिए रंडी बन गई लेकिन इसका भी अपना मजा था।

उमा ने मेरे हिस्से के 25000 रुपए मुझे दे दिए जो मैंने रख लिए क्योंकि रंडी तो मैं बनी ही थी।

आपकी उषा रांड Antarvasna

अन्तर्वासना कहानी

दोस्तो, हिंदी इंडियन सेक्स स्टोरीज में आपने अब तक पढ़ा था कि पण्डित जी रीना की जवानी को भोगने के चक्कर में उसको पूजा करवाने के लिए फंसा चुके थे. अब पण्डित जी ने उसके साथ आसन लगाने की विधि शुरू कर दे थी जिससे रीना की चुदास बढ़ने लगी थी.

अब आगे..

रीना का नंगा पेट पण्डित की नंगी पीठ से चिपका हुआ था. रीना खुद ही अपना पेट पण्डित की पीठ पे रगड़ने लगी.

पण्डित- रीना.. तुम्हारे पेट का स्पर्श ऐसे लगता है जैसे कि मैंने शनील कि रजाई ओढ़ ली हो.. और एक बात कहूँ.

रीना अब गर्म हो चली थी वो चुदास भरे स्वर में बोली- स्स.. कहिए ना पण्डित जी..

पण्डित- तुम्हारे स्तनों का स्पर्श तो..

रीना अपने मम्मों को और भी मस्ती से पण्डित की पीठ पे रगड़ने लगी.

रीना- तो क्या पण्डित जी?
पण्डित- मदहोश कर देने वाला है.. तुम्हारे स्तनों को हाथों में लेने के लिए कोई भी ललचा जाये.
रीना- स्सह्ह..
पण्डित- अब मैं सीधा लेटूंगा और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाना.. लेकिन तुम्हारा मुँह मेरे चरणों की ओर और मेरा मुँह तुम्हारे चरणों की तरफ़ होना चाहिये.

पण्डित पीठ के बल लेट गया और रीना पण्डित के ऊपर पेट के बल लेट गई.

रीना की टांगें पण्डित के चेहरे की तरफ़ थीं. रीना की नाभि पण्डित के लंड पर थी.. वह उसके सख्त लंड को गड़ता सा महसूस कर रही थी.

पण्डित रीना की संगमरमरी टांगों पे हाथ फेरने लगा.

पण्डित- रीना.. तुम्हारी टांगें कितनी अच्छी हैं.

पण्डित ने रीना का पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया और उसकी जांघें मसलने लगा.

उसने रीना की टांगें और फैला दीं. अब रीना की पेंटी साफ़ दिख रही थी.

पण्डित रीना की चूत के पास हल्के हल्के हाथ फेरने लगा.

पण्डित- रीना.. तुम्हारी जांघें कितनी गोरी और मुलायम हैं.

चूत के पास हाथ लगाने से रीना और भी गरम हो रही थी.

पण्डित- तुम्हें अब तक सबसे अच्छा आसन कौन सा लगा..?
रीना- स्स.. वो.. घुटनों के बल.. पीठ से पीठ.. नीचे से नीचे वाला.
पण्डित- चलो.. अब मैं बैठता हूँ.. और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है.. मेरा सिर तुम्हारी टांगों के बीच में होना चाहिये.
रीना- जी..

रीना ने पण्डित का सिर अपनी टांगों के बीच लिया और उसके कंधों पर बैठ गई.

इस पोजीशन में रीना की नाभि पण्डित के होंठों पर आ रही थी.

पण्डित अपनी जीभ बाहर निकाल कर रीना की नाभि में घुमाने लगा. इससे रीना को बहुत मज़ा आ रहा था.

पण्डित- रीना.. आँखें बंद करके बोलो.. स्वाहा..
रीना- स्वाहा..
पण्डित- रीना.. तुम्हारी नाभि कितनी मीठी और गहरी है.. क्या तुम्हें ये वाला आसन अच्छा लग रहा है?
रीना- हाँ.. पण्डित जी.. ये आसन बहुत अच्छा है.. बहुत ही अच्छा अह..
पण्डित- क्या किसी ने तुम्हारी नाभि में जीभ डाली है?
रीना- आह्ह.. नहीं पण्डित जी.. आप पहले हैं.

पण्डित- अब तुम मेरे कंधों पर रह कर ही पीछे की तरफ़ लेट जाओ.. अपने हाथों से ज़मीन का सहारा ले लो.

रीना पण्डित के कंधों का सहारा लेकर लेट गई.

अब पण्डित के होंठों के सामने रीना की चूत थी.

पण्डित धीरे से अपने हाथ रीना के स्तन पे ले गया.. और ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.

रीना भी यही चाह रही थी.

पण्डित- रीना.. तुम्हारे स्तन कितने भरे भरे हैं बहुत ही अच्छे हैं.
रीना- आह्ह..

रीना ने एक हाथ से अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया और अपनी चूत को पण्डित के होंठों पे लगा दिया.

पण्डित कच्छी के ऊपर से ही रीना की चूत पे जीभ मारने लगा.

पण्डित- रीना.. अब तुम मेरी झोली में आ जाओ.

रीना फ़ौरन पण्डित के लंड पे बैठ गई.. उससे लिपट गई.

पण्डित- अह्ह.. रीना.. ये आसन अच्छा है?
रीना- स्स..स..सबसे.अच्छा.. ऊओ पण्डित जी..
पण्डित- ऊह्ह.. रीना.. आज तुम बहुत कामुक लग रही हो.. क्या तुम मेरे साथ काम करना चाहती हो..?
रीना- हाँ पण्डित जी.. स्सस.. मेरी काम अग्नि को शांत कीजिये.. ह्हह्ह.. प्लीज़..पण्डित जी..

पण्डित रीना के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.. रीना बार बार अपनी चूत पण्डित के लंड पे दबाने लगी.

पण्डित ने रीना का ब्लाउज उतार कर फेंक दिया और उसके निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया.

रीना- आअह्ह.. पण्डित जी.. मेरा उद्धार करो.. मेरे साथ काम करो..
पण्डित- बहुत नहाई है मेरे दूध से.. सारा दूध पी जाऊंगा तेरी छातियों का..
रीना- आअह्ह.. पी जाओ.. मैं क्क..कब मना करती हूँ.. पी लो पण्डित जी.. पी लो..

कुछ देर तक दूध पीने के बाद अब दोनों से और नहीं सहा जा रहा था.

पण्डित ने बैठे बैठे ही अपनी लुंगी खोल के अपने कच्छे से अपना लंड निकाला.. रीना ने भी बैठे बैठे ही अपनी कच्छी थोड़ी नीचे कर दी.

पण्डित- चल जल्दी कर..

रीना पण्डित के सख्त लंड पर बैठ गई.. लंड पूरा उसकी चूत में चला गया.

रीना- आअह्हह्हह.. स्वाहा.. कर दो मेरा स्वाहा.. आ..

रीना पण्डित के लंड पे ऊपर नीचे होने लगी. चुदाई ज़ोरों पर शुरू हो गई थी.

पण्डित- आह्हह.. मेरी रानी.. मेरी पुजारन.. तेरी योनि कितनी अच्छी है.. कितनी सुखदायी.. मेरी बांसुरी को बहुत मज़ा आ रहा है.
रीना- पण्डित जी.. आपकी बांसुरी भी बड़ी सुखदायी है.. आपकी बांसुरी मेरी योनि में बड़ी मीठी धुन बजा रही है.
पण्डित- देवलिंग को छोड़.. पहले मेरे लिंग की जय कर ले.. बहुत मज़ा देगा ये तेरे को..
रीना- ऊऊआअ.. प्प.. पण्डित जी.. रात को तो आपके देवलिंग ने न जाने कहां कहां घुसने की कोशिश की!
पण्डित- मेरी रानी.. आअ.. फिकर मत कर.. स्स.. तुझे जहाँ जहाँ घुसवाना है.. मैं घुसाऊंगा.
रीना- आअह्हह्ह.. पण्डित जी.. एक विधवा को.. दिलासा नहीं.. मर्द का बदन चाहिए.. असली सुख तो इसी में है. क्यों.. आआ.. बोलिए ना पण्डित जी.. आऐई..
पण्डित- हांन..आ..

अब रीना लेट गई और पण्डित उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा.

साथ साथ वो रीना के मम्मों को भी दबा रहा था.

पण्डित- आअह्ह.. उस.. आज के लिए तेरा पति बन जाऊँ.. बोल..!
रीना- आऐए.. स्सस.. ई.. हाअन्न.. बन जाओ..
पण्डित- मेरा लिंग आज तेरी योनि को चीर देगा.. मेरी प्यारी रीना..
रीना- आअह्हह.. चीर दो.. आअह्ह.. आह्हह्ह.. चीर दो ना.. आआह्ह..
पण्डित- आअह्हह.. ऊऊऊऊ..

दोनों एक साथ झड़ गए और पण्डित ने सारा वीर्य रीना की चूत के ऊपर झाड़ दिया.

रीना- आह्ह..

अब रीना पण्डित से आँखें नहीं मिला पा रही थी.

पण्डित रीना के साथ लेट गया और उसके गालों को चूमने लगा.

रीना- पण्डित जी.. क्या मैंने पाप कर दिया है?
पण्डित- नहीं रीना.. पण्डित के साथ काम करने से तुम्हारी शुद्धता बढ़ गई है.

कुछ देर दोनों मौन पड़े रहे और फिर रीना कपड़े पहन कर और मेकअप उतार कर घर चली आई.

आज पण्डित ने उसे देवलिंग बांधने को नहीं दिया था.

रात को सोते वक्त रीना देवलिंग को मिस कर रही थी.

उसे पण्डित के साथ हुई चुदाई याद आने लगी. वो मन ही मन में सोचने लगी कि पण्डित जी.. आप बड़े वो हैं, कब मेरे साथ क्या क्या करते चले गए..पता ही नहीं चला.. पण्डित जी.. आपका बदन कितना अच्छा है.. अपने बदन की इतनी तारीफ़ मैंने पहली बार सुनी है. आप यहाँ क्यों नहीं हैं.

रीना ने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और अपनी चूत को रगड़ने लगी.

‘पण्डित जी.. मुझे क्या हो रहा है’.. वो ये बुदबुदाते हुए सोचने लगी.

चूत से हाथ की उंगली गांड पे ले गई.. और गांड को रगड़ने लगी.

‘ये मुझे कैसा रोग लग गया है.. टांगों के बीच में भी चुभन.. हिप्स के बीच में भी चुभन.. ओह..’

अगले दिन रोज़ की तरह सुबह 5 बजे रीना मन्दिर आई.. इस वक्त मन्दिर में और कोई नहीं हुआ करता था.

पण्डित ने रीना को इशारे से मन्दिर के पीछे आने को कहा.

रीना मन्दिर के पीछे आ गई.. आते ही रीना पण्डित से लिपट गई.

रीना- ओह.. पण्डित जी..
पण्डित- ओह्ह.. रीना..

पण्डित रीना को होंठों को चूमने लगा.. रीना की गांड दबाने लगा.. रीना भी कसके पण्डित के होंठों को चूम रही थी. तभी मन्दिर का घंटा बजा.. और दोनों अलग हो गए.

मन्दिर में कोई पूजा करने आया था.. पण्डित अपनी चूमा-चाटी छोड़ कर मन्दिर में आ गया.

जब मन्दिर फिर खाली हो गया तो पण्डित रीना के पास आया.

पण्डित- रीना.. इस वक्त तो कोई ना कोई आता ही रहेगा.. तुम वही अपने पूजा के समय पर आ जाना.

रीना अपनी पूजा करके चली आई.. उसका पण्डित को छोड़ने का दिल नहीं कर रहा था.

खैर.. वो 12:45 बजे का इन्तजार करने लगी. ठीक 12:45 बजे वो पण्डित के घर पहुँची.. दरवाज़ा खुलते ही वो पण्डित से लिपट गई.

पण्डित ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और रीना को लेकर ज़मीन पर बिछी चादर पे ले आया.

रीना ने पण्डित को कस के बांहों में ले लिया.. पण्डित के चेहरे पर किस पे किस किये जा रही थी. अब दोनों लेट गए थे और पण्डित रीना के ऊपर था. दोनों एक दूसरे के होंठों को कस कस के चूमने लगे.

पण्डित रीना के होंठों पे अपनी जीभ चलाने लगा.. रीना ने भी मुँह खोल दिया.. अपनी जीभ निकाल कर पण्डित की जीभ को चाटने लगी.

पण्डित ने अपनी पूरी जीभ रीना के मुँह में डाल दी.. रीना पण्डित के दांतों पर जीभ चलाने लगी.

पण्डित- ओह.. रीना.. मेरी रानी.. तेरी जीभ.. तेरा मुँह तो मिल्क शेक जैसा मीठा है.
रीना- पण्डित जी.. आअ.. आपके होंठ बड़े रसीले हैं, आपकी जीभ शरबत है.. आआह्ह..
पण्डित- ओह्हह.. रीना..

पण्डित रीना के गले को चूमने लगा..

आज रीना सफ़ेद साड़ी-ब्लाउज में आई थी.

पण्डित रीना का पल्लू हटा कर उसके स्तनों को दबाने लगा.. रीना ने खुद ही ब्लाउज और ब्रा को निकाल फेंका.

पण्डित उसके मम्मों पर टूट पड़ा.. उसके निप्पलों को कस कस के चूसने लगा.

रीना- अह्हह्ह.. पण्डित जी.. आराम से.. मेरे स्तन आपको इतने अच्छे लगे हैं.. आऐईए..
पण्डित- हाँ.. तेरे स्तनों का जवाब नहीं रानी.. तेरा दूध कितनी मलाई वाला है.. और तेरे गुलाबी निप्पलों.. इन्हें तो मैं खा जाऊंगा.
रीना- आअह्हह्ह.. अह.. उई.. तो खा जाओ ना.. मना कौन करता है..

पण्डित रीना के निप्पलों को दाँतों के बीच में लेकर दबाने लगा.

रीना- आऐई.. इतना मत काटो.. आह्ह.. वरना अपनी इस भैंस का दूध नहीं पी पाओगे.
पण्डित- ऊओ.. मेरी भैंस.. मैं हमेशा तेरा दूदू पीता रहूँगा.

रीना- उई.. त..आआ.. तो..पी..अह्ह.. लो ना.. निकालो ना मेरा दूध.. खाली कर दो मेरे स्तनों को..

पण्डित कुछ देर तक रीना के स्तनों को चूसता, चबाता, दबाता और काटता रहा.

फिर पण्डित नीचे की तरफ़ आ गया.. उसने रीना की साड़ी और पेटीकोट उसके पेट तक चढ़ा दिए.. उसकी टांगें खोल दीं.

पण्डित- रीना.. आज कच्छी पहनने की क्या ज़रूरत थी!
रीना- पण्डित जी.. आगे से नहीं पहनूँगी.

पण्डित ने रीना की कच्छी निकाल दी.

पण्डित- मेरी रानी.. अपनी योनि द्वार का सेवन तो करा दे..

ये कह कर पण्डित रीना की चूत चाटने लगा.. रीना के बदन में करंट सा दौड़ गया. रीना पहली बार चूत चटवा रही थी.

रीना- आआह्हह्ह.. म.. म्म..म.. मेरी योनि का सेवन कर लो पण्डित जी.. तुम्हारे लिए सारे द्वार खुले हैं.. अपनी शुद्ध जीभ से मेरी योनि का भोग लगा लो.. मेरी योनि भी पवित्र हो जाएगी.. आआह्हह्हह..
पण्डित- आअह्ह.. मज़ा आ गया..
रीना- आअह.. हाँ.. हाँन.. ले लो मज़ा.. एक विधवा को तुमने गरम तो कर ही दिया है.. इसकी योनि चखने का मौका मत गंवाओ.. मेरे पण्डित जी.. आआईई..

पण्डित ने रीना को पेट के बल लिटा दिया.. उसकी साड़ी और पेटीकोट उसके हिप्स के ऊपर चढ़ा दिये. अब वो रीना के हिप्स पे किस करने लगा. रीना के हिप्स थोड़े बड़े थे.. लेकिन बहुत मुलायम थे.

पण्डित- रीना.. मैं तो तेरे चूतड़ पे मर जाऊं.
रीना- पण्डित जी.. आह्ह.. मरना ही है तो मेरे चूतड़ों के असली द्वार पर मरो.. आपने जो देवलिंग दिया था, वो मेरे चूतड़ों के द्वार पे आकर ही फंसता था.

पण्डित- तू फिक्र मत कर.. तेरे हर एक द्वार का भोग लगाऊंगा.

यह कह कर पण्डित ने रीना को घोड़ी बनाया.. और उसकी गांड चाटने लगा.

रीना को इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.. पण्डित रीना की गांड के छेद को चाटने के साथ साथ उसकी फुद्दी को रगड़ रहा था.

रीना- आअह्हह.. चलो.. पण्डित जी.. अब स्वाहा कर दो.. ऊस्सशह्ह ह्हह्ह..
पण्डित- चल.. अब मेरा प्रसाद लेने के लिए तैयार हो जा.
रीना- आह्हह.. पण्डित जी.. आज मैं प्रसाद पीछे से लूँगी.
पण्डित- चल मेरी रानी.. जैसे तेरी मर्जी.

पण्डित ने धीरे धीरे रीना की गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया.

रीना- आआअहह्ह..
पण्डित- आअह.. रीना प्यारी.. बस कुछ सब्र कर ले.. आह्ह..
रीना- आआह्हह्ह.. पण्डित जी.. मेरे पीछे.. आऐई.. के द्वार में.. आपका स्वागत है.. ऊई..
पण्डित- आअह्ह.. मेरे लंड को तेरा पिछला द्वार बहुत अच्छा लगा है.. कितना टाईट और चिकना है तेरा पीछे का द्वार..
रीना- आअह्हह.. पण्डित जी.. अपने स्कूटर की स्पीड बढ़ा दो.. रेस दो ना.. आअह..

पण्डित ने गांड में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

फिर रीना की गांड से लंड निकाल कर उसकी फुद्दी में पेल दिया.

रीना- आई माँअ.. कोई द्वार मत छोड़ना.. आआह.. आपकी बांसुरी मेरे बीच के.. आह्ह.. द्वार में क्या धुन बजा रही है..
पण्डित- मेरी रीना.. मेरी रानी.. तेरे छेदों में मैं ही बांसुरी बजाऊंगा.
रीना- आअह्हह्हह.. पण्डित जी.. मुझे योनि में बहुत.. आअह.. खुजली हो रही है.. अब अपना चाकू मेरी योनि पे चला दो.. मिटा दो मेरी खुजली.. मिटाओ ना..

पण्डित ने रीना को लिटा दिया.. और उसके ऊपर आकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया. साथ साथ उसने अपनी एक उंगली रीना की गांड में डाल दी.

रीना- आअह्हह्हह.. पण्डित जी.. प्यार करो इस विधवा लड़की को.. अपनी बांसुरी से तेज़ तेज़ धुनें निकालो.. मिटा दो मेरी खुजली.. आहहह्हह्ह.. अ.आ..ए.ए..
पण्डित- आआह्हह्ह.. मेरी रानी..
रीना- ऊऊह्ह्ह.. मेरे राज्जाअ.. और तेज़.. औऊर्रर तेज.. आआह्हह.. अन्दर.. और अन्दर आज्जजाआ.. आअह्ह.. प्पप.. स.स..स..
पण्डित- आह्हह.. ओह्हह.. रीना.. प्यारी.. मैं छूटने वाला हूँ.
रीना- आअहह्ह.. मैं भी.. आआ.. ई.. ऊऊऊ.. अन्दर ही.. गिरा.. द.. दो अपना.. प्रसाद..
पण्डित- आह्हह..
रीना- आआह्हह्हह.. अ..अह.. अह.. अह.. अह..

स्वाहा.. चुद गई चुत और हो गया कल्याण.

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Antarvasna Stories

शर्मा जी और हम पास पास ही Antarvasna Stories रहते थे। दोनों के ही सरकारी मकान थे। मेरे पति और शर्मा जी एक ही कार्यालय में कार्य करते थे। शर्मा जी का भाई पास ही में एक किराये के मकान में रहता था और एक प्राईवेट कम्पनी में काम करता था।

पति के ऑफ़िस जाते ही शर्माजी की पत्नी मेरे घर या मैं उसके घर आते जाते थे। शादी के बाद हम बीवियाँ पति से तो चुदती ही रहती हैं, पर मन तो करता है ना कि कोई नया लण्ड भी तो चूत में घुसे।

शादी यानी कि लण्ड के चूत में घुसाने का लाईसेन्स… चूत का पर्दा तो चुदते ही फ़ट जाता है फिर चाहे कोई भी लण्ड हो, उसका स्वागत कर सकते हो। यानि हम बीवियो को शादी के बाद लण्ड लेने में छूट मिल जाती है।

शर्मा जी का भाई पप्पू… शर्मा जी के जाते ही आ जाता था फिर वो काफ़ी देर तक वहीं रहता था। उसकी ड्यूटी दिन को दो बजे से चालू होती थी, सो खाना उन्हीं के यहाँ खाता था।
पप्पू मुझे बहुत ही पसन्द करता था, करेगा क्यो नहीं… मैं भरपूर जवान जो थी… दुबली पतली, लम्बी, सुन्दर सी थी। मैं अधिकतर घर पर ढीला ढाला सा पजामा पहना करती थी और ऊपर एक कुर्ता।
मेरे उत्तेजना से भरपूर दोनों गोल गोल सुन्दर चूतड़ पप्पू को बहुत ही भाते थे। पप्पू का काम था कि पीछे से मेरे उभरे हुए चूतड़ो की चाल देखना और बस मेरे कुर्ते में झांकते रहना और उसकी भरपूर कोशिश यही रहती थी कि मेरे कहीं से भी चूंचियों के दर्शन हो जाये।

मैं यह सब समझती थी और उसका मनोरंजन उसे अपनी चूंचिया दिखा कर करती थी। इससे मेरा भी मनोरंजन हो जाता था। शरम तो बहुत आती थी पर क्या करुँ यह चूत है ही ऐसी चीज़ कि कोई लण्ड जहाँ नजर आया और फ़ड़क उठी।

मुझे अब धीरे धीरे पप्पू और नीता पर शक होने लगा था कि उन दोनों के बीच चुदाई का सम्बन्ध है… पर उन्हें कैसे पकड़ें…
एक बार उन्हें पकड़ लिया तो मैं अपने आप को चुदा लूँ ।

मैं एक बार पप्पू के आते ही चुपके से उसके घर में चली आई और बेडरूम वाली खिड़की से अन्दर का जायजा लिया। मेरा शक एकदम सही निकला। दोनों आलिंगनबद्ध थे और एक दूसरे को चूम रहे थे।

मेरे जिस्म में झुरझुरी सी आ गई। दिल में वासना जागने लगी। मैं आवाज लगाती हुई अन्दर चली गई, वो दोनों ही दूसरे काम में लग गये थे। मैंने भी अब अपने जलवे दिखाने की सोची और पप्पू को अपने लिये भी पटाने था, उसकी योजना बनाने लगी। आज मैंने उसे अपने चूतड़ भी उभार कर दिखाये, चूंचियो के दर्शन भी करा दिये और बड़ी समझदारी से उसे एक इशारा भी दिया कि मुझे पटा लो। पता नहीं मेरे इशारे ने कितना काम किया?

अगले ही दिन मैंने नीता और पप्पू को अपने ही घर की खिड़की से उन्हें लिपटे हुए देख लिया, मैंने खिड़की के पास जाकर और गौर से देखा, पप्पू नीता के बोबे दबा रहा था। मेरी चूत एकाएक फ़ड़क गई। लगा शायद मुझे ही दिखाने के लिये ये सब किया था।

मैं उत्साहित हो गई। मुझे लगा कि मुझे वहाँ जाकर मुझे कोशिश करनी चाहिये, शायद काम बन जाये। मैंने घर का काम जल्दी से समाप्त किया और नीता के घर में आ गई।

नीता से बातचीत में मैंने उससे कहा- नीता, यार आजकल मेरा मन बहुत ही भटक रहा है, दिल को चैन नहीं आ रहा है !’ मैंने उसे अपने मन की बात खोलने की कोशिश की।

‘मुझे पता है, ऐसा जब होता है जब मन में कोई इच्छा होती है !’ नीता ने मुझे उकसाया, मैं उत्साहित हो गई।

‘हाँ, मुझे ऐसा लगता है कि कोई बस आकर मेरे ऊपर चढ़ जाये और बस मेरा कल्याण कर दे !’ उसे मैंने एक स्पष्ट इशारा दिया।

‘ओह हो… यानि नीचे की बैचेनी है… अनिल है तो सही…!’ उसने इशारा समझा और मुझे परखने लगी।

‘नहीं कोई और चाहिये… नया !’ मैंने उसे इशारा किया।

वो सब समझ चुकी थी, सीधे मेरे दिल पर चोट की- पप्पू चलेगा क्या…?’

उसने ज्यों ही पूछा, मैंने अपनी निगाहें शरमा कर झुका ली, हाँ में सर हिलाया।

‘अरी मुँह से तो बोल ना मोना… ‘ मैं शरमा कर भाग गई।

दिन को मैं वापस गई… तो सोफ़े पर पप्पू नीता की चूंचियों से खेल रहा था, उसके कुर्ते का एक भाग ऊपर करके उसे दबा रहा था। नीता का मुँह मेरी तरफ़ था।

मैं जैसे ही दरवाजे पर आई नीता में मुझे देख लिया और हाथ से इशारा कर दिया, कि बस देख लो। पप्पू को नहीं बताया कि मैं दरवाजे पर हूँ।
उसने पप्पू का सर अपनी चूंचियो पर दबा लिया और मुझे देख कर मुस्करा उठी और अपनी चूंचियाँ भचक भचक करके उसके मुँह में मारने लगी। जैसे पप्पू दूध पी रहा हो। अचानक पप्पू ने मेरी तरफ़ देखा।

‘क्या हो रहा है जनाब… ‘मैंने कटाक्ष किया।

‘ये पप्पू मुझे प्यार बहुत करता है ना, इसलिये मुझसे चिपका ही रहता है।’ नीता ने बनावटी हंसी हंस दी।

‘पप्पू जी, हमें भी तो कभी करके देखो ना… ‘मैंने पप्पू को सीधे कहा।

‘मोना जी… आप तो मजाक करती हैं !’

‘ना जी, मजाक कैसा… अच्छा एक बार और नीता को प्यार करके दिखा दो ना !’ मेरी नजरें जैसे उसे न्योता दे रही थी।

नीता मुस्करा उठी और उसने पप्पू को प्यार से चूम लिया। पप्पू ने भी नीता को चुम्मा दिया और फिर पप्पू के होंठ नीता के होंठ से मिल गये। पप्पू का एक हाथ नीता के स्तनों पर आ गया और दूसरा उसकी सेक्सी जांघ पर आ गया।

मैं यह सीन देख कर पसीने पसीने हो गई। मुझे उम्मीद नहीं थी, मुझे खोलने के लिये वो मेरे सामने ही मस्ती करने लगेगी। मेरे हाथ पांव जैसे कांपने लगे। वासना के डोरे मेरी आखो में खिंचने लगे।

नीता ने अब मेरे सामने ही पप्पू का लण्ड पेण्ट के ऊपर से थाम लिया। उसके मोटे लण्ड का शेप उसके हाथों में नजर आने लगा।

‘पप्पू , बस भई बहुत प्यार हो गया… अपनी दूसरी भाभी को भूल गया क्या…?’ मेरी आवाज वासना से भर उठी थी।

‘देख ना मोना, मुझसे कितना प्यार करता है ये… बस मुझे छोड़ता ही नहीं ‘नीता ने मुझे आंख मारी, और उसका सलोना लण्ड हाथों में कस लिया। मैं तो वैसे भी पिघलती जा रही थी।

‘मुझे भी तो एक बार प्यार कर ले ना !’ मेरे मुख से निकल पड़ा… बिल्कुल ऐसे ही…

‘मोना भाभी… आप तो बहुत ही नाजुक हैं, आओ यहाँ बैठो… प्यार करने से तो दिल खुश हो जाता है !’उसे मेरा हाल मालूम हो चुका था।

मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैं उसके पास बैठ गई। वो मेरे पास आ गया और गहरी नजरों से मुझे निहारने लगा, आंखो आंखो में सेक्सी इशारे होने लगे, मैं कभी तिरछी नजर से उसे देखती कभी लण्ड की ओर इशारा करती। कभी चूंची उभारती और कभी आंख मारती।

हमारी हालत देख कर नीता कह उठी- अच्छा मैं चाय बना कर लाती हूं… पप्पू मेरी सहेली है ये ! प्यार अच्छे से करना… !’
नीता ने मेरे हाथ दबाते हुये कहा।

यानि अब मुझे एक नया, ताज़ा लण्ड मिलने वाला था। नीता ने मुझे बहुत ही प्यार से पप्पू को मेरे लिये तैयार कर लिया था।

पप्पू की बाहें अब मेरे गले और कमर के इर्द गिर्द लिपट गई। मेरा जिस्म डोल उठा। चूंचियाँ दबने के लिये मचल उठी। मेरे और उसके होंठ चिपक गये। उसके होंठो पर प्यार करने का अन्दाज बड़ा मोहक था। कुछ क्षणो में मेरे बोबे दब गये। मेरे मुख से आह निकल गई। जिस्म में वासना का उबाल आ रहा था।

उसके हाथ मेरे कुर्ते के अन्दर पहुंच गये थे। मेरी चूंचियो के निपल को उसने अपनी अंगुलियो से मलना चालू कर दिया। मैंने उसका लण्ड पेण्ट के ऊपर से थाम लिया। उसकी पेण्ट की ज़िप खींच कर खोल दी और उसका कड़कता लण्ड खींच कर बाहर निकाल दिया। उसका सुपाड़ा को चमड़ी खींच कर बाहर निकाल दिया।

‘चाय आ गई है… चलो नाश्ता कर लो… अरे ये क्या… प्यार करने को कहा था… मोना ये क्या करने लगी… ‘ पप्पू के सुपाड़े को देख कर नीता ने अपना व्यंग का तीर छोड़ा।

मैं तुरन्त सम्भल कर बैठ गई, शरमा कर नीची नजरें कर ली, मैंने धीरे से नीता की ओर देखा और मुँह छुपा लिया।

‘बस बस , चाय मैं दे देती हूँ… ‘नीता ने हंस कर चाय दे दी।

‘पप्पू अपने छोटे पप्पू को तो भीतर कर लो…!’
पप्पू हंस पड़ा और मैं शर्म से झेंप गई।

मैंने जल्दी से शरम के मारे चाय समाप्त ही और उठ कर जाने लगी। नीता ने मुझे पकड़ लिया बोली- कहाँ चली गोरी, तेरी चूत में तो आग लगी थी ना… आजा अब मौका है तो बुझा ले… तुझे एक बात बताऊँ !’

मैंने प्रश्नवाचक निगाहो से उसे देखा।

‘तुझे जब से पप्पू ने देखा है ना, तब इसका लन्ड फ़ड़फ़ड़ा रहा है, यानि तूने मुझे कहा, उससे भी पहले !’

‘चल हट… झूठ बोलती है !’

‘हाँ री… तेरे को पटाने के लिये हम ऐसे ही एक्शन करते थे कि तुझे शक हो जाये… और तू हमें छुप छुप कर देखे !’

‘हाय रे ! मुझे तो तुम दोनों ने बेवकूफ़ बनाया… !’ मुझे उसके दिमाग की तारीफ़ करनी पड़ी।

‘जब तेरी चूत में आग लग गई तो तुझे चोदना और भी आसान हो गया और देख अब तू चुदने वाली है !’

मैंने भागने की सोची पर पर पप्पू ने मुझे दबोच लिया और बिस्तर पर पटक दिया।
मैं बिना वजह उसकी बाहों में कसमसाने लगी। दिल तो कर रहा कि हाय जालिम, इतनी देर क्यूँ लगा रहे हो? चोद डालो ना।

‘हाय पप्पू, मुझे अब चोद डालोगे…?’ मेरे मुख से दिल की बात निकल पड़ी।

‘हाँ मेरी मोना भाभी… मुझसे रहा नहीं जा रहा है…! आपकी जगह नीता भाभी को चोद चोद कर उनकी चटनी बना डाली थी… अब तुम मिल ही गई हो… तो कैसे छोड़ दूं?’ उसका शिकायती स्वर था।

नीता ने लपक कर मेरे हाथ पकड़ लिये। पप्पू ने मेरे बोबे भींच दिये, और मेरे ऊपर चढ़ गया।

‘मोना… बुझा ले अपनी प्यास मोना… नये लण्ड से… मुझे तो ये पप्पू रोज ही जम कर चोदता है !’ नीता वासना से भरे हुये स्वर में बोली। उसकी आंखो में भी गुलाबी डोरे उभर आये थे।
‘नीता… हाय रे ! मुझे बहुत शरम आ रही है… तू जा ना यहाँ से… मैं चुदा लूंगी !’ मैंने मुँह छुपाते हुये कहा।

‘ना… ना रे… मुझे भी तो चुदना है ना… पप्पू अपना लौड़ा निकाल ना… चोद डाल मेरी सहेली को !’ नीता की आवाज वासना में डूबी हुई थी।

‘हाथ छोड़, मैं निकाल लूंगी इसका लौड़ा… ‘ मैंने अपना हाथ नीता से छुड़वाया और उसकी पेण्ट का हुक खोल दिया। पप्पू ने अपनी पेण्ट उतार दी।

मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपने मुँह तक खींचा, उसने अपना कड़क लण्ड आगे आ कर मेरे मुँह में डाल दिया।
‘तू उधर देख ना नीता… मुझे मन की करने दे ना… !’

‘कर ले ना यार… लण्ड चूसना है ना, तो चूस ले… मैं तेरी चूत का मजा ले लेती हूँ…’

‘नहीं, मत कर नीता… प्लीज…!’

नीता ने मेरी एक नहीं सुनी और जल्दी ही मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। मैंने अपने पांव चौड़ा दिये और चूत खोल दी। मेरी छाती पर पप्पू बैठा था और मेरे मुँह में उसका लण्ड घुसा था।
उधर मेरी चूत नीता के कब्जे में आ चुकी थी। वो मेरे चूत के दाने को जीभ से चाट चाट कर मुझे मदहोश कर रही थी।

अचानक नीता ने अपनी एक अंगुली मेरी गान्ड में घुसेड़ दी। मुझे असीम आनन्द आने लगा।

पप्पू के लण्ड के सुपाड़े के छल्ले को मैंने कस के चूस लिया और वो एक बारगी तो तड़प उठा। सुपाड़ा फूल कर लाल टमाटर की तरह हो गया था। उसने नीता को हटाया और स्वयं मेरे ऊपर लेट गया। उसका फ़ूला हुआ सुपाड़ा मेरी चूत पर रेंगने लगा था। मेरी चूत ऊपर उठ कर लण्ड को लीलना चाह रही थी।

ज्यादा इन्तज़ार नहीं करना पड़ा मुझे… वो अपने आप निशाने पर मेरी चिकनी चूत से टकरा गया… और हाय रेऽऽऽऽऽ… उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में घुस पड़ा। मैं सिसक उठी। चूत और ऊपर उठ गई। मेरा बदन कसक उठा। शरीर में एक मीठी सी लहर दौड़ गई।

‘मेरे भगवान… आह… कितना मजा आ रहा है… और मैंने भी अपनी चूत को ऊपर उठा कर पूरा जोर लगा दिया। लण्ड सभी हदों को पार करता हुआ… मेरे चूत की तलहटी तक पहुंच गया था। लण्ड को मेरी चूत ने पूरा लील लिया था।

अब मैं कुछ देर तक इसी तरह रह कर लौड़े का पूरा आनन्द लेना चाहती थी। सो मैंने उसे उसकी कमर को कस कर जकड़ लिया। लण्ड ने एक ठोकर और मारी और मेरी आंखे मस्ती में बंद हो गई। वो अपने लण्ड को जोर से चूत की गहराई में गड़ाने लगा था।

मेरी चूत अपने आप अब थोड़ी थोड़ी लण्ड को घिसने लगी थी। तेज मीठी जलन होने लगी थी। जैसे चूत में आग लग गई हो। मेरी सिसकारियाँ उभरने लगी। मुझे गाण्ड में कुछ मोटा मोटा सा लण्ड जैसा लगा,… आह रे ये क्या… नीता ने मेरी गाण्ड में तेल लगा डिल्डो घुसा दिया था।

‘रानी अब पूरा मजा ले… ये तेरी गाण्ड में सुरसुरी करेगा… चूत में लण्ड मजा देगा !’नीता ने मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था।

‘हाय मेरी नीता… तूने तो आज मेरा दिल जीत लिया है… तेरी जो मर्जी हो वो कर… मुझे चाहे मार डाल… !’ मैं स्वर्गीय आनन्द से विभोर हो उठी, मेरी चूत जल उठी, बदन वासना की तेज तरंगों में नहा उठा। जिस्म का कोना कोना मीठी सी वासना से जल उठा।

मेरी गाण्ड में नीता बड़ी मेहनत के साथ डिल्डो पेल रही थी। मुझे दोनों ही पूरा शारीरिक वासना का सुख देने की कोशिश कर रहे थे। अब मैंने अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया और धक्कों का मजा लेना चाहती थी।

पप्पू की कमर को छोड़ते ही उसके चूतड़ उछल पड़े और मेरी ढीली चूत पर जम कर लण्ड को ठोकने लगा। साला लण्ड पूरी गहराई तक घुसता और बाहर आ जाता था। सुख से मैंने आंखें कस कर बंद कर ली।

मेरी चूत भी फ़्री स्टाईल में उछल उछल कर उसका साथ देने लगी। जितनी जोर से वो धक्के मारता, मैं भी जवाब उतने ही जोश से तेज धक्का मार देती। इसी चक्कर में मेरे नसें खिंचने लगी… जिस्म ऐंठने लगा… सभी कुछ जैसे चूत से बाहर आ जाना चाहता हो… मीठी सी जलन अब आग सी हो गई… मैं झुलसने लगी… जैसे जल गई…

‘आह पप्पू… हरामी साला… चुद गई ! हे मेरे मालिक… गई मैं तो… जोर लगा रे…!’

उसके एक झटने ने अब मेरी आखिरी सांस भी निकाल दी… ‘ईईई… आह्ह्ह्ह्… निकला मेरा… ऊईईईई… पप्पू… बस ऐसे ही चोदता रह… मेरा पूरा निकल जाने दे…!’

पर कहाँ… वो तो धक्के मारते मारते… खुद ही ढेर हो गया। और उसका माल निकल पड़ा। उसका वीर्य मेरी चूत में भरने लगा।

नीता ने डिल्डो मेरी गान्ड से बाहर निकाल लिया। मैंने दोनों हाथ बिस्तर पर फ़ैला लिये और जोर जोर से अपनी फ़ूली हुई सांसो को नियंत्रित करने लगी।

पप्पू मेरे ऊपर से हट गया और नीता अब मुझे प्यार करने लगी… ‘मोना मेरी… नये लण्ड का पूरा मजा आया ना… मेरे पप्पू ने तुझे आनन्द दिया ना… ‘नीता मुस्कराने लगी।

‘नहीं नीता… तेरा नहीं नहीं, अब तो वो मेरा भी पप्पू है’ मैंने भी अपनापन दिखाया।

पप्पू अब नीता के कपड़े उतारने में लगा था।
‘हाय, मोना अब ये मुझे भी नहीं छोड़ने वाला है… अब मैं चुदीऽऽऽऽ… हाय !’ नीता के मुँह से वासनाभरी आह निकल गई।

मैंने पप्पू की गाण्ड सहलाते हुये उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया। वो नीता की चूंचियाँ मसलने में लगा था।

मेरी इच्छा अभी बाकी थी… मेरी गाण्ड उदास हो चली थी कि अब ये नीता को चोदेगा तो वो दो बार झड़ जायेगा, फिर मेरी गाण्ड मारने जैस उसके लौड़े में दम रहेगा या नहीं।

कुछ ही देर में पप्पू का लण्ड चूसने से वो फिर से तन्ना उठा, जैसे पप्पू मेरे मन की बात जान गया गया था। बोला- नीता भाभी, मोना जी का काम तो निकल गया अब तो चली जायेगी, मेरा काम तो हुआ ही नहीं !’

‘अच्छा, चल तू अपना काम पूरा कर ले… फिर बाद में मुझे चोद देना… बस..!’

‘क्या बात है? कौन सा काम नीता…?’ मैंने जैसे अनजान बनते हुये कहा।

‘बात ये है कि तेरे चूतड़ इसे बहुत पसन्द हैं… तू जैसे ही मुड़ती है इसका लण्ड खड़ा हो जाता है…!’
‘हाय राम… ऐसा मत कहो…’

‘हाँ सच… अब ये तेरी गाण्ड मारना चाहता है… प्लीज, चुदवा ले अपनी गाण्ड… ‘नीता ने पप्पू की तरफ़ से कहा।

‘मैं कैसे मानूं कि सच बोल रही है… पप्पू ने तो कुछ कहा ही नहीं !’ मैंने शिकायत की।

‘सच, मोना जी… देखना मेरा लण्ड देखना आपकी गाण्ड में घुस कर कैसा खुश हो जायेगा।’

‘तो चल खुश हो कर बता…’

‘आप कुतिया की तरह झुक जाईये फिर देखिये मैं कुत्ते की तरह आपकी गाण्ड मारूंगा !’

‘हाय राम… अच्छा ये देखो… !’ मैं कुत्ते की तरह बिस्तर पर झुक गई। मेरे दोनों चूतड़ कमल की तरह खिल गये।
मेरी गोरी गोरी गाण्ड देखते ही उसके लण्ड ने सलामी मारी। दरार के बीच मेरे गाण्ड का कोमल फूल चमक उठा। जो पहले ही लण्ड खाने की लालसा में अन्दर बाहर सिकुड़ रहा था।

पास पड़ी तेल की बोतल से पप्पू ने मेरे दरार के बीच नरम फ़ूल पर तेल की बूंदे टपका दी। उसका लाल सुपाड़ा गाण्ड के फ़ूल पर टिक गया और हल्के से जोर से ही गप से अन्दर घुस पड़ा।

‘साली क्या गाण्ड है…! घुसते ही लण्ड पानी छोड़ने लगता है !’ पप्पू ने एक आह भरी।

‘नीता, हाय कितना नरम और प्यारा लण्ड है। तूने मुझे काश पहले बताया होता तो मैं इतना तो ना तरसती…!’

‘मोना, मेरी सहेली… अब लण्ड खा ले… देर ही सही, चुदी तो सही… मजा आया ना !’नीता भी चुदासी सी मुझे देख रही थी। उसे भी चुदाने की लग रही थी।

अब पप्पू का सब्र का बांध टूट चुका था, वो मेरी चूतड़ों पर मरता था… उसका डण्डा मेरी गाण्ड को कस कर पीटना चाहता था, सो उसने अपनी कलाबाज़ी दिखानी चालू कर दी। उसका लम्बा लण्ड गाण्ड की गहराईयों को नापने लगा।

मेरी गाण्ड में जबरदस्त झटके मारने लगा। मुझे तरावट आने लग गई। हल्की सी मीठी सी गुदगुदी एक बार फिर मुझे रंगीनियों की ओर ले चली। मेरे बोबे मसले जाने लगे।

नीता चुदाई की प्यास की मारी अपनी चूत को मेरे सामने ले आई और कातर नजरों से विनती की। मैंने उसकी टांगें मेरे मुँह के पास खींच ली और अपना मुँह उसकी चूत से चिपका लिया। मैं उसके बोबे पकड़ कर मसलने लगी।

आलम ये था कि तीनो एक दूसरे पर दुश्मन की तरह जुटे हुये वो सब कुछ कर रहे थे कि किसी का माल बाहर निकल जाये। मेरी गण्ड पर लण्ड ऐसे मार रहा था कि जैसे उसका लण्ड किसी मोरी में सफ़ाई कर रहा हो। लण्ड जोर जोर से घुसेड़ कर वो मेरी गाण्ड चोद रहा था। गाण्ड में सुरसुरी से मीठी मीठी असहनीय सी गुदगुदी चलने लगी थी, अगर मेरी गाण्ड चूत की तरह झड़ जाती तो कितना मजा आता।

पर हुआ उल्टा ही… मुझे पकड़ कर वो वासना भरी सीत्कार भरता हुआ गाण्ड के भीतर ही झड़ने लगा। मुझे निराशा सी होने लगी, शायद समझी थी कि ऐसे ही जिन्दगी भर गाण्ड चुदती रहे और मैं मस्ताती रहूँ।

उधर नीता भी वासना की मारी झड़ने लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। पप्पू ने अपनी सारी मलाई मेरी गाण्ड में निकाल दी। उसका लण्ड सिकुड़ कर स्वत: ही बाहर निकल आया। वो वहीं बैठ गया और मैं चित्त पांव पसार कर औंधी लेट गई।

पप्पू भी अपनी बिखरी हुई सांसे समेटने लगा और सोफ़े पर जाकर धम से बैठ गया। मेरा काम हो चुका था। मैं आगे और पीछे से चुद चुकी थी। मैंने अपनी गाण्ड के छेद को तंग कर सिकोड़ लिया और झट से पजामा और टॉप पहन कर अपने घर भाग आई। नीता मुझे आवाज देती ही रह गई।

घर आकर मैं लेट गई और उसका वीर्य गाण्ड में रहे इसलिये उल्टी लेट गई। मेरे पजामें में वीर्य के धब्बे उभर आये थे। गाण्ड चिकनी और लसलसी हो गई थी पर मुझे एक अनोखा आनन्द आ रहा था। इसी आनन्द का लुफ़्त लेते हुये मेरी आंख जाने कब लग गई। पर नीता ने मुझे जगा दिया।

‘ये क्या, जरा तेरा पजामा तो देख नीचे से पूरा गीला हो रहा है…’

‘ये पप्पू का वीर्य है रे… जरा मजा तो लेने दे…’

‘उनके आने का समय हो रहा है… मरना है क्या…?

मैं चौंक गई, देखा तो पांच बज रहे थे… ना तो खाना बनाया था और ना ही चाय… नहाया धोया भी नहीं था… सब कुछ छोड़ कर मैं नहाने भागी… सोचा चुद तो कल लेंगे

… ये आनन्द तो रोज ले सकते हैं। पर कहीं उनको इसकी भनक भी लग गई तो फिर… Antarvasna Stories

मम्मी की दमदार चुदाई

मम्मी की भड़कते जिस्म को देख मेरा मन उत्तेजित हो हरेक रात उनकी दमदार चुदाई के सपने देखने लगा हालांकि उससे दोगुना मजा उनकी असल चुदाई करके मैंने महसूस किया।

मम्मी की दमदार चुदाई की कल्पना
हैलो दोस्तो, मेरा नाम मनोज है और मैं स्लिम मिड हाईट 5’8″ का और वजन करीब 54-55 किलो है। मैं 26 साल का हूँ, इन दिनों मैं देहरादून में रहता हूँ।

आज मैं आपको मेरे और मेरे मम्मी के सेक्स की कहानी सुनाता हूँ। यह बात आज से करीब 6-7 साल पहले की है जब मेरी उम्र 20 साल की थी और मेरी मम्मी 32 की थीं।

मेरी जवानी शुरु हुई थी और उनकी जवानी के शोले भड़कते थे। मेरी मम्मी बहुत सेक्सी और सुन्दर है। शी हेज गोट ए ब्यूटीफुल बॉडी शेप 36-28-36! शी हेज गॉड मेड बूब्स एज वेल एज बटक्स!

उनका सुडौल गोरा बदन बहुत हसीन है। वैसे वो मेरी रियल मम्मी नहीं हैं वह मेरे डैड की सेक्रेटरी थी, बाद में पापा ने माता जी के कोंन्सेंट से उससे अनओफियसली शादी कर ली।

मैं पहले उनको संध्या आंटी कहता था, पर अब मम्मी ही कहता हूँ।

मैं मम्मी को जब भी देखता तो मुझे उनका सेक्सी फिगर देखकर मन मे गुदगुदी होती थी।

मैंने उनको एक दो बार डैड के ऑफिस में आधा नंगा (जैसे जब वह स्कर्ट पहनती थी तो उनकी थाईज बड़ी जबरदस्त होती थी तब वह मेरे पापा की सेक्रेटरी थी।

एक दो बार मैंने मम्मी को डैड के ऑफिस के प्राइवेट रूम में जो चेंजिंग रूम कम रेस्ट रूम था। मैं छुप कर कपड़े चेंज करते भी देखा था, और मैं उनके चूचे और चड्डी के नीचे के एरिया को छोड़कर पूरा नंगा देख चुका था।

मम्मी की बॉडी एकदम संगमरमर की तरह चिकनी थी। उनकी जांघें ऐसी लगती थी जैसे दो केले का जोड़ा हो। उनके होंठ एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे और गाल एकदम कश्मीरी सेब जैसे पिंक।

मम्मी एकदम टाईट फिटिंग के कपड़े पहनती थी और मैं उनको बहुत नज़दीक से देखकर अपनी आँखों को सुकुन दिया करता था।

मतलब जब से मेरा लण्ड खड़ा होना शुरू हुआ वो बस संध्या (मम्मी) को ही तलाशता और सोचता था। मैं उनकी बॉडी को देखकर अपने मन और आँखों की प्यास बुझाया करता था।

लेकिन पहले जब तक वह संध्या आंटी थी मुझे उनसे नफरत थी और मैं सोचता था कि एक दिन इनको तसल्ली से चोदकर अपनी भड़ास निकालूँगा।

पर बाद में उनके लिए मेरे पापा के प्यार ने और उनके अच्छे व्यवहार ने मुझे चेंज कर दिया।

अब वो हमारे घर पर फर्स्ट फ्लोर में रहती थी। डैड और उनका बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पर था और हुम लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।

डैड संध्या(मम्मी) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर ही सोते हैं बेड रूम के साथ ही एक और रूम है जो एज ए कॉमन रूम यूज़ होता है। धीरे धीरे मैं मम्मी के और करीब आने लगा।

वह शायद मेरा इरादा नहीं समझ पा रही थीं। वह मुझको वही बच्चा समझती थी पर अब मैं जवान हो गया था।

जैसे ही मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया तो डैड ने ऑफिस का वर्क भी मुझको सिखाना शुरू कर दिया और मैं भी फ्री टाइम में रेगुलरली ऑफिस का काम देखने लगा।

मोस्टली मैं एसोसिएट्स का काम देखता हूँ क्योंकि मैं समवेयर स्टूडेंट था।

कॉलेज में भी मुझे कोई भी लड़की मम्मी से ज्यादा सेक्सी नहीं लगती थी।

अब मझे जब मौका मिले मोन्स को टच करके, जैसे उनकी जाँघों पर हाथ फ़ेर के, उनके चूतड़ पर रब करके या कभी जानबुझकर उनके बूब्स छु लिया करता।

मम्मी पता नहीं जानबूझकर या अनजाने में अनदेखा कर देती थी, या वह मेरा उद्देश्य नहीं समझ पाती थी।

कभी डैड रात को मुझे अपने बेड रूम में बुलाते थे और ऑफिस के बारे में मम्मी और मेरे साथ डिसकस करते। क्योंकि मम्मी अक्सर नाईट गाऊन में होती थी और मैं पूरी तसल्ली से उनके बदन का मुआयना करता था।

उनके बूब्स बिल्कुल पके हुए आम जैसे मुझे बड़ा ललचाते थे, कई बार मम्मी को भी मेरा इरादा पता चल जता था पर वो कुछ नहीं कहती थी।

अब तो मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी और मैंने मम्मी की चुदाई का पक्का इरादा कर लिया और मौके की तलाश करने लगा।

एक दिन जब डैड ने मुझे फर्स्ट फ्लोर पर रात को 11 बजे बुलाया तो मैं ऊपर गया तो डैड ने बताया कि उनको रात 1 बजे की फ्लाइट से 1 सप्ताह के लिये अर्जेंट बाहर जाना है और वो मुझे और मम्मी (संध्या) को जरूरी बातें ब्रीफ करने लगे।

मम्मी थोड़ा घबरा रही थीं तो डैड ने कहा- सैंडी डार्लिंग, यू डोंट वरी! तुम और मनोज सब सम्भाल लोगे, मनोज तुम्हारी मदद करेगा। कोई प्रॉब्लम हो तो, मुझे कॉल करना! वैसे यू विल मैनेज, देयर विल बी नो प्रॉब्लम!

मम्मी और पापा का फोरप्ले
उसके बाद डैड ने मुझसे कहा- सैंडी थोड़ी नर्वस है, तुम जरा बाहर जाओ मैं उसको समझाता हूँ।

मैं बाहर आ गया तो डैड ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया, लेकिन मुझको शक हुआ कि डैड मेरी अनुपस्थिति में संध्या(मम्मी) को क्या समझाते हैं?

मैं की-होल से चुपके से देखने लगा। लोजिकली डोर पर कर्टेन नहीं चढ़ा था और लाईट भी जल रही थी। लेकिन मैंने जो देखा तो मैं स्तब्ध रह गया।

डैड मम्मी को बाहों में लेकर किश कर रहे थे और मम्मी क्राई कर रही थी। फिर डैड ने मम्मी के होंठ अपने होंठों पर लेकर डीप किश लिया तो मम्मी भी जवाब देने लगी। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से खोल दिया और पीठ पर रब करने लगे।

मम्मी और डैड अभी भी एक दुसरे को किश कर रहे थे और दोनों लम्बी सांसें ले रहे थे कि मैं सुन सकता था। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से उठाया और उनकी चड्डी भी नीचे करके मम्मी के चूतड़ पर रब करने लगे।

मम्मी के चूतड़ के दर्शन
मम्मी की पीठ दरवाजे के तरफ थी जिस कारण मुझे मम्मी की गांड और चूतड़ के दर्शन पहली बार करने का मौका मिला।

मम्मी के चूतड़ एकदम संगमरमर से मुलायम और चिकने नजर आ रहे थे। मम्मी क्राई भी कर रही थीं और मस्ती में लम्बी सांसें भी ले रही थीं।

फिर अचानक डैड ने मम्मी का गाऊन आगे से ऊपर किया और उनकी चूत पर उंगलियाँ फिराने लगे पर मैं कुछ देख नहीं पाया क्योंकि वो दूसरी साइड थीं।

फिर डैड दूसरी तरफ़ पलटे तो मम्मी की चूत वाली साइड मेरे तरफ़ हो गई और अब मैं मम्मी की चूत थोड़ी बहुत देख सकता था।

पर डोर से कुछ नज़र साफ नहीं आ रहा था। मम्मी की चूत का मैं अन्दाज लगा सकता था क्योंकि डैड वहाँ पर उंगलियाँ फिरा रहे थे और मम्मी के खड़े होने के कारण चूत पूरी नजर नहीं आ रही थी।

वो बस एक छोटी लाइन से दिख रही थी जहाँ डैड उंगली फिरा रहे थे। उसके बाद डैड नीचे झुके और मम्मी की चूत पर अपने होंठ रख दिए।

यह मुझे साफ़ नहीं दिख रहा था पर मैं गेस कर सकता था कि मम्मी अब जोर जोर से सिसकारियाँ लेकर मजे ले रही थी और डैड भी मस्ती में थे।

लेकिन अचानक जाने क्या हुआ कि डैड रुक गए और उन्होंने मम्मी को छोड़ दिया और मम्मी को लिप्स पर किश करते हुए बोले- डार्लिंग आई ऍम सॉरी! आई कांट गो बियॉन्ड लेट आई कम बिकॉज़? मनोज इज आल्सो आउट, एंड आई ऍम गेटिंग लेट आई ऍम वैरी सॉरी!

मम्मी भी तब तक शांत हो चुकी थी पर वो असन्तुष्ट लग रही थी। वो सामान्य होते हुए बोली, इट्स ओके!
और उन्होंने अपना गाऊन ठीक किया।

उसके बाद डैड ने मुझको आवाज़ लगाते हुए कहा- मनोज, आर यू देयर बेटा?

मैं चौकन्ना हो गया और अपने को नार्मल करने लगा क्योंकि मेरा लण्ड एकदम खंभे के माफिक खड़ा हो गया था और मेरी धड़कन भी नार्मल नहीं थी। लेकिन जब तक डैड डोर खोलते मैं नार्मल हो गया था।

फिर डैड ने दरवाजा खोला और बोले- ड्राईवर को बुलाओ और मेरे सामान गाड़ी में रखो। रात काफी हो गई है, यू डोंट नीड टू कम एयरपोर्ट आई विल मेनेज एंड प्लीज! सी द ऑफिस एंड फोर वन वीक टेक लीव फ्रॉम द कॉलेज एंड असिस्ट सैंडी।

मैं और मम्मी डैड को ड्रॉप करने जाना चाहते थे पर डैड ने स्ट्रिक्टली मना कर दिया। डैड को हमने गुड बाय कहा और डैड ने हुमको बेस्ट ऑफ़ लक कहते हुए किश किया।

जब डैड चले गए तो मम्मी ने मुझसे कहा- मनोज आज तुम ऊपर वाले कमरे में ही सो जाओ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।
मैं तो ऐसे मौके की तलाश में ही था। मैं एकदम से थोड़ा झिझकने का नाटक करते हुए हाँ! कह दिया।

मम्मी और मैं फर्स्ट फ्लोर पर आ गए और मम्मी बेडरूम में चली गई उनहोने मुझे पुछा कि, आर यू कोम्फरटेबल ना?
मैंने कहा, यस!

वो बोली- एक्टचुअली आई ऍम नॉट फीलिंग वेल इसलिए तुमको परेशान किया!

मैंने कहा, इट्स ओके! मम्मी, फिर मम्मी अन्दर चली गई और मैं बाहर कॉमन रूम में लाइट ऑफ करके सो गया।

मम्मी थोड़ा घबरा रही थी, इसलिए उनहोने दरवाजा बन्द तो किया पर लॉक नहीं किया और नाईट लैंप ऑफ नहीं किया।

अब मेरे को तो नींद कहाँ आनी थी?, मैं तो मम्मी के साथ सपनो की दुनिया सजा रहा था और मेरी नज़र मम्मी की एक्टिविटीज पर थी।

करीब आधे घंटे बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और जैसे ही उन्होंने लाइट ओन की तो देखा कि, मैं भी लेटा हुआ जग रहा हूँ।

मम्मी बोली- राजु लगता है, तुमको भी नींद नहीं आ रही है, 2:00 बज गए हैं!

तुम भी शायद, अपने डैड के बारे में और कल ऑफिस के बारे में सोच रहा हो।

मैंने कहा- बात तो आप ठीक कर रही हैं, पर पता नहीं क्यों? मुझे ऐसी कोई चिंता नहीं है, पर नींद नहीं आ रही है! आप सो जाओ, मैं भी सो जाता हूँ थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।

मम्मी बोली- ओके! राजु पर मैं थोड़ा कम्फ़र्टेबल नहीं फील कर रही हूँ।

तुम सो जाओ, मैं लाइट ऑफ कर देती हूँ।

तब मैं मम्मी से कहा कि, मम्मी अगर आप बुरा ना माने तो ऐसा करते हैं कि, अन्दर ही मैं भी आपके पास बैठता हूँ बातें करते हुए शायद नींद आ जाए!

वो बोली- गुड आईडिया! चलो, अन्दर आ जाओ, और मैं और मम्मी अन्दर बेड रूम में चले गए।

मैं अन्दर चेयर पर बैठ गया और मम्मी बेड पर बैठ गईं। फिर मम्मी बोली, राजु ठण्ड ज्यादा है! तुम भी बेड पर ही बैठ जाओ।

मैंने मना करने का बहाना बनाया पर मम्मी ने जब दुबारा बोला तो, मैं उनके सामने बेड पर बैठ गया और रजाई से आधा कभर कर लिया।

अब मैं मम्मी को तसल्ली से बात कर रहा था और रजाई के अन्दर मैं पायजामे का नादा थोड़ा ढीला कर लिया था। फिर मैंने मम्मी से कहा कि, ऑफिस की बात नहीं करेंगे कुछ गप शप करतें हैं।

मम्मी नंगी जिस्म दिखाने को हुई राजी
फिर मम्मी बोली, ओके! तो मैंने कहा, मम्मी तुम बुरा ना मानो तो तुमसे एक प्राइवेट बात कहनी थी!

मम्मी बोली- कम ओन डोंट कंफ्यूज खुल कर कहो।

मैंने कहा- मम्मी यू आर मोस्ट ब्यूटीफुल लेडी आई इवर मेट!

आई रियली मीन इट मैं गप शप नहीं कर रहा हूँ।

मैं आज से नहीं जब से तुमको देखा है, तुमको अपनी कल्पना, अपना प्यार और सब कुछ मानता हूँ!

यू आर रियली ग्रेट! मम्मी, एंड योर फिगर इज मारवलस एंड इवन मोस्ट गॉर्जियस गर्ल ऑफ 16 कांट बीट योर ब्यूटी एंड सेंसुअलिटी।

मैं ये सब एक ही साथ कह गया कुछ तो मैं कहा कुछ मैं कहता चला गया पता नहीं मुझे क्या हो गया था।

मम्मी मुझे देखती रही और हँसने लगीं! बोली, तुम पागल हो एक बुढ़िया के दीवाने हो गए हो।

मैंने कहा- नो मम्मी यू आर मारवलस! कोई भी जवान लड़की, तुम्हारा मुकबला नहीं कर सकती!

मम्मी प्लीज अगर तुम मेरी एक बात मान लो तो मैं तुमसे जिन्दगी में कुछ नहीं माँगूंगा।

मम्मी बोली- अरे बुद्धु कुछ बोलो भी, ये शायरों की तरह शायरी मत करो!

मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकती हूँ?

मैंने कहा- मम्मी प्लीज! बुरा मत मानना पर मैं तुमको सबसे खूबसुरत मानता हूँ, इसलिए अपनी सबसे खूबसूरत लेडी की खूबसूरती को एक बार पूरी तरह देख लेना चाहता हूँ!

मम्मी प्लीज! मना मत करना, नहीं तो मैं सचमुच मर जाऊँगा और अगर जिंदा भी रहा तो मारा जैसा ही समझो।

मम्मी एकदम चुप हो गई और सोचने लगी फिर धीरे से बोली- राजु, तुम सचमुच दीवाने हो गए हो, वह भी अपनी मम्मी के!

अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ओके! बट प्रॉमिस, मेरे साथ कोई शरारत नहीं करना नहीं तो, तुम्हारे डैड को बोल दूँगी और आँख मारते हुए बोली तुम्हारी पिटाई भी करूंगी!

मैंने कहा- ओके! पर एक शर्त है कि, मैं अपने आप देखूँगा आप शान्त बैठी रहो।

मम्मी बोली- ओके! मैं मम्मी के नज़दीक गया और मम्मी का गाऊन के पीछे का बटन खोलकर गाऊन को डाउन कर दिया फिर उसको उनकी कमर से नीचे लाया। इसके बाद मैंने रजाई हटाई।

अब मम्मी मेरे सामने ऊपर से सेमी न्यूड हो गई थी उनके ऊपर केवल ब्रा ही रह गई थी।

मम्मी बिल्कुल बुत की तरह शांत थी। मैं नहीं समझ पा रहा था कि उनको क्या हुआ है। मुझे लगता है कि वह बड़े कन्फ्जयून में थी पर?

मैं बड़ा खुश था और एक्साईटमेंट में मेरी खुशी को और बढ़ा दिया था। फिर मैंने मम्मी का गाऊन उनकी टाँगों से होते हुए अलग कर दिया।

अब मम्मी केवल पैन्टी और ब्रा में बेड पर लेटी थी। फिर मैंने मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।

मम्मी की एक चीख सी निकली पर फिर वह चुप हो गई। फिर मैं मम्मी की ब्रा को उनके शरीर से अलग कर दिया।

मम्मी की चूचियों को चूमा
उनके बूब्स देखकर मैं पागल हो गया और एक्साईटमेंट में मैंने उनके बूब्स को चूम लिया।

मम्मी की सिसकारी निकल गई, पर नेक्स्ट मोमेन्ट वो क्रीटिसाईट होती हुई बोली- राजु बिहेव योरसेल्फ तुमने वादा किया था?

मैंने कहा- मम्मी, तुम इतनी मस्त चीज़ हो! कि मैं अपना वादा भूल गया।

फिर मैंने मम्मी की पैन्टी को निकालने लगा और मम्मी ने भी इसमें मेरी मदद की पर, वो एक बूत सी बनी थी।
उनकी इस हरकत से मैं भी थोड़ा नर्वस हो गया, पर मैंने अपना काम नहीं रोका, और पैन्टी के निकलते ही मेरे कल्पनाएँ साकार हो गई थी!

मम्मी की चूत का अनोखा एहसास
मैंने मम्मी की चूत पहली बार देखी थी, एकदम चिकनी मखमल जैसी! और एकदम बन्द, ऐसा लगती थी जैसे संतरे की दो फांकें हों!

मैंने ब्लू फिल्मों में बहुत सी चूतें देखी थी। वो एकदम चौड़ी और मरकस वाली होती हैं, पर मम्मी की चूत को देखकर यह लगता ही नहीं था कि, वो एक 32 साल की औरत की चूत है।

सबसे बड़ी बात यह थी कि, उनकी चूत एक दम क्लीन शेवड थी और गोरी ऐसी कि, ताजमहल का टुकड़ा! अब मेरे सामने एक 32 साल की लड़की नंगी लेटी थी।

आप खुद सोचो! ऐसे में एक 20 साल के लड़के का क्या हाल हो रहा होगा?

फिर मैंने कहा, मम्मी प्लीज! मैं एक बार तुम्हारी बॉडी को महसूस करना चाहता हूँ कि, एक औरत की बॉडी के रियल टच का क्या एहसास होता है?

मम्मी बोली- तुम अपना वादा याद रखो, सोच लो वादा खिलाफी नहीं होनी चाहिए!

मैं उनका सही मतलब नहीं समझ पाया पर उनकी नंगी काया देखकर मैं पहले ही बेशुध हो चुका था, अगर कोई कमी थी तो मम्मी के रेस्पोंस की और मेरे पहले एक्स्पेक्ट की वजह से झिझकी।

मम्मी के चूचियों का छुवन का आनन्द
फिर मैं मम्मी के ल्पिस का एक डीप किश लिया और उनको उनकी पीठ से बाहों में ले लिया, और उनकी पीठ पर रब करने लगा।

मम्मी का कोई रेस्पोंस नहीं आया पर, उनके बूब्स का टच मुझे पागल कर रहा था। ऐसा टच मुझे पहली बार हुआ था!

मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो बूब्स थे या, मार्बल और वेल्लेट का मिक्स! आअह!! फ्रेंड्स, इट वाज अ रियली ग्रेट फीलिंग। उसके बाद मैंने मम्मी को पलटा और अब उनकी पीठ पर किश करने लगा और उनके बूब्स को मसलने लगा।

ऊह!! आई वाज इन 7थ स्काई! फ्रेंड्स, आई कान्ट टेल यू क्या मजा आ रहा था।

मम्मी भी अब कोई विरोध नहीं कर रही थी पर, उनका रेस्पोंस बहुत पॉजिटिव नहीं था, पर मुझे अब इस बात का कोई एहसास नहीं था कि मम्मी क्या सोच रही है?

मैं तो सचमुच! जन्नत के दरवाजे की तरफ बढ़ रहा था और मम्मी की बॉडी का टेस्ट ले रहा था।

मम्मी को चुदने के लिए राजी किया
मम्मी के बूब्स का रस सचमुच बड़ा रसीला था। मैंने अब उनके निप्पल्स पर दांतों से काटना शुरू किया तो मम्मी पहली बार चीखी! और बोली, अरे काट डालेगा क्या? आराम से कर हरामी।

मैं समझ गया कि अब मम्मी भी मस्त हो चुकी हैं। मैंने अपना पायजामा उतार दिया और बनियान भी उतार दी।

अब मैं केवल अंडरवियर में था। कुछ देर मम्मी के बूब्स चूसने के बाद मैंने मम्मी की नेवेल पर किश करना शुरू कर दिया तो, मम्मी बेड पर उछलने लगीं और सिसकारियाँ लेने लगीं।

मैं हाथों से उनके बूब्स दबा रहा था और होंठों से उन नेवेल को चुम रहा था, फिर मैं और नीचे गया और मम्मी के अब्डोमन के पास और पुबिक्स एरियाज में किश करने लगा।

दोस्तों, मैं बता नहीं सकता और, आप भी केवल मस्सुस कर सकते हैं कि क्या मजा! आ रहा था?

इसके बाद मैंने मम्मी की टागों पर भी हाथ फिराना शुरु कर दिया। उनकी टांगें बड़ी मुलायम और स्मूथ थी!

मुझे लगता है कि, मम्मी अपनी बॉडी का बहुत ख्याल रखती हैं और डैड भी तो उनकी इस लाजवाब! बॉडी के गुलाम हो गए थे। बट शी इज ग्रेट लेडी रियली इन आल रिस्पेक्ट! और इस टाइम तो वो मेरी क्लिओपेट्रा बनी हुई थी।

अब मैं मम्मी की टाँगों और जाँघों पर अपना कमाल! दिखाना शुरु कर दिया और मैं कभी उनको चूमता कभी दबाता और कभी रब करता।

मम्मी भी अब तक मस्त हो चुकी थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी पर, मैंने अब तक एन्ट्री गेट पर दस्तक नहीं दी थी।

मैं मम्मी को पूरा मस्त कर देना चाहता था और मैंने अपने लण्ड को फुल कन्ट्रोल में रखा था। मैं मम्मी की बॉडी को अभी भी अपने होंठों और उंगलियों और हाथों से ही रौंद रहा था।

अब तो मम्मी भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और वादे वाली बात भुलकर मस्ती में पूरे जोर से मेरा साथ दे रही थीं, और चीखने लगी- अरे मनोज, अब आ भी जा यार प्लीज! मत तड़पा जालिम जल्दी से मेरे ऊपर आ जा!

मैंने कहा- बस मम्मी, जस्ट वेट मैं तैयार हो रहा हूँ बस एक मिनट रूक जाओ मैं भी आता हूँ।

मम्मी की धक्कापेल चुदाई
तभी मम्मी ने मेरा अंडरवियर नीचे खिसका दिया और वो बोली- अबे मादरचोद अपनी मम्मी की बात नहीं मानेगा?

इतना कहकर उन्होंने अब मेरा लण्ड पकड़ कर जोर से दबा दिया।

मेरी तो चीख निकल गई और अब तक जो मेरा लण्ड तैयार था बिल्कुल बेताब हो गया।

मैंने मम्मी की दोनों टाँगों को दूर करते हुए उनकी राईट थाई पर बैठ गया, और उनके चूतड़ को दोनों हाथों से धकेलते हुए अपना लण्ड उनकी चूत के पास ले गया, और पूरे जोर का धक्का दिया तो मेरा आधा लण्ड उनके चूत में समा गया।

मेरी तो चीख निकल गई लेकिन मम्मी को कुछ तसल्ली हुई और वो मेरे अगले एक्शन का इंतज़ार करने लगी।

मैंने एक और ज़ोरदार धक्का लगाया तो पूरा लण्ड अन्दर चला गया। अब मैंने धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया और मम्मी की दूसरी जाँघ को अपने कंधे की तरफ़ रख दिया। राईट थाई पर बैठ कर अपना चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया।

अब तो मम्मी पूरे मज़े में आ गई और मेरा पूरा सहयोग करने लगीं।पूरे कमरे में मेरे और मम्मी के चुदाई प्रोग्राम का म्यूजिक शुरू हो गया।

मम्मी भी शश!! अह्ह!! करने लगीं और बोली- अन्दर तक घुसेड़ दे अपना लण्ड, मैं भी जोर से अन्दर बाहर करने लगा।

बोलीं- मस्ती आ रही है, तुझे भी मज़ा आ गया! आज बहुत दिन बाद जवानी का मज़ा पाया है। कसम से आज तूने मुझे अपनी जवानी के दिन याद दिला दिए! अयीई ईस्स!

मैं भी बहुत जोश के साथ चुदाई कर रहा था।
मैं बोला- आज तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा दूँगा। अब तू डैड से चुदवाना भूल जाएगी, हर वक्त मेरा ही लण्ड अपनी चूत मे डलवाने को तड़पा करेगी।

मम्मी- आह्ह!! आयीई!! क्या मज़ा आ रहा है, फ़क मी हार्डर रआजु कम ऑन और फर्स्ट यू आर माई डार्लिंग।
मैं भी बोला- यस माई फेयर लेडी स्योर!

मम्मी बोली- मुझको संध्या के नाम से बुलाओ, कहो संध्या मेरी जान!

मैंने कहा- ओके संध्या डार्लिंग ये ले मजा आअ रहा है ना! आज मैं भी अपने लण्ड से तेरी चूत को फाड़ के रख देता हूँ।

वह चिल्ला रही थी- आअह गुड। म्मम!! आह!! उह!! म्म!!

फिर अचानक जब मुझे कुछ दबाव सा महसूस होने लगा तो मम्मी बोली- मनोज अब बस एक बार अब धीरे धीरे कर दे … मेरा तो पानी निकाल दिया तूने।

मैंने स्पीड थोड़ी कम कर दी और अब मम्मी और मैं थकने भी लगे थे।
अचानक मेरा सारा दबाव मेरे लण्ड के रास्ते मम्मी की चूत की घाटी में समा गया और मम्मी भी शान्त हो गई और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए।

मेरा लण्ड मम्मी की चूत के अन्दर ही था।

एक दूसरे से बिना कुछ बोले ही हम दोनों वैसे ही सो गए।

सुबह जब नींद खुली तो 6:00 बज गए थे और मेरा लण्ड मम्मी की चूत में वैसे पड़ा था।

मैंने मम्मी को जगाया तो वह शरमाने सा लगीं फिर बोली- मनोज तुम तो एकदम जवान हो गए हो!

तुमने आज, इस 38 साल की बुढ़िया को, 18 साल की गुड़िया बना दिया!

तब मैंने कहा- अब तू मुझे बुलाएगी क्या बोल?
उसने मुझे अलग करके दूर करते हुए कहा- जरुर मेरी जान!
मम्मी ने अपने उपर लिटाया मुझे किश किया।

मैंने भी फिर से मम्मी के माथे पर, बूब्स पर, नाभि पर किश कर बगल में ही लेट गया और सुबह तक एक साथ लिपट कर चिपक कर सोए रहे।

7:00 बजे मम्मी ने उठाया और मुस्कुराईं, बोली- याद रखना इसको राज रखना!
मैं भी बोला- ऐसे ही इनटरटेनमेंट कर रहना!

तो दोस्तो, ये तो थी मेरी और मम्मी की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी?
यह तो शुरूआत है अभी तो कई कहानियाँ हैं बस आप मेरी स्टोरी पढते रहें

सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूं.
मैं 50 वर्षीया एक कामुक हाउस वाइफ हूं और पति के साथ अपने सेक्स जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हूं।
मेरा जिस्म गदराया हुआ है।
मेरा कामुक बदन आज भी मर्दों को आकर्षित करता है।

मैं हर तरह की ड्रेस पहनती हूं पर देखने वाले मन ही मन मेरे कपड़े उतार के मुझे नंगी देखते हैं, मुझे ऐसा लगता है।

जैसा कि मैंने बताया मैं अपने पति की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट हूं लेकिन जिस व्यक्ति को रसगुल्ला पसंद हो, वो भी रोज रसगुल्लों से पेट नहीं भर सकता तो फिर कामुक मन तो नए स्वाद के लिए भटकता ही है।
इसलिए मेरा भी मन भटका और शादी के पच्चीस साल बाद भटका.

जब मैं बच्चों की जिम्मेदारियों से फ्री हो गई, तब मेरी दबी हसरतें मेरे जिस्म को मेरे दिमाग को नए नए मर्दों को देख के ये कल्पना करने पर मजबूर करने लगी कि इसका लंड कितना लंबा होगा, कितना मोटा होगा?

मेरा अनुभव कहता है कि कई कहानियों में बहुत बढ़ा चढ़ा के लंड का आकार बताया जाता है।
मैंने जो पहला पराया लंड लिया न तो वो पति के लंड से लंबा था न मोटा, किंतु फिर भी चुदने में बहुत मजा आया क्यों कि आखिर मेरा पहला नया स्वाद था।
वास्तव में नए लंड की सनसनी का कोई जवाब नहीं।

एक बात और बताती चलूं, मेरे पति ने ही मेरी कामुकता को बढ़ावा दिया.
हमने आपस में खूब कहानियां पढ़ीं, हजारों पोर्न वीडियो देखे, बहुत एंजॉय किया।

इस प्रकार उन्होंने ही मेरी लालसाओं को जगाया, मेरी कामाग्नि को भड़काया, मैं उनके सामने या उनकी अनुपस्थिति में किसी भी पराए मर्द के साथ चुदाई करूं उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
उनका मानना है कि कुदरत ने तो इंसान को पृथ्वी पर आनन्द लेने भेजा है, उसने कोई नियम कायदे नहीं बनाए।
समाज में सारी बंदिशें इंसानों ने ही बनाई हैं।

दुनिया में जितने भी सुख हैं उनमें सबसे अनूठा है ‘कामसुख’ जो पूरी दुनिया में एक समान है।
पूरी दुनिया में खाने की, कपड़ों की विविधता है. पर चुदाई, उसकी प्रक्रिया, चरम सुख, स्खलन, जिस्म को दिमाग को राहत एक जैसी होती है।

मेरे पति का बस इतना कहना है कि जो भी हो, मेरी जानकारी में हो।
मैंने भी उनकी इस बात को ध्यान में रखते हुए उनके साथ भी और अकेले भी कई मर्दों के साथ शारीरिक सुख के मजे लिए।

हमने थ्रीसम, फोरसम, स्वैपिंग सारे खेल खेले हैं बस ग्रुप सेक्स का मजा लेना बाकी है।

मेरी इस कहानी में पेश है मेरी पहली गैर मर्द से चुदाई की दास्तान।

एक बार की बात है कि मेरे पति पंद्रह दिन के लिए बैंक द्वारा आयोजित एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए दिल्ली गए थे।
हम आज भी एक दिन छोड़ के चुदाई करते हैं।

उनके जाने के एक हफ्ते बाद मेरे जिस्म को चुदाई याद आने लगी।
मेरी कामुकता मुझे बेचैन करने लगी.

ऐसे में मेरा ध्यान गया हमारे 28 वर्षीय किरायेदार रवि की तरफ!
उसकी पत्नी भी मायके गई हुई थी और रात डेढ़ बजे की ट्रेन से ही लौटने वाली थी।

मैंने मन ही मन उसका लंड लेने की सोची क्योंकि कई बार मैंने उसे मेरे भरे भरे स्तनों को निहारते पकड़ा था।
मुझे लगा कि वह आसानी से मुझे चोदने के लिए तैयार हो जाएगा.
और पति को पता लगने का डर तो वैसे भी था नहीं!

यह सोचते सोचते मेरी रवि से चुदने की इच्छा ज़ोर पकड़ने लगी और रात में मैं रवि के यहां अपने पहले गैर मर्द के लंड से चुदवाने पहुंची।

मैंने एक झीना गाउन पहन रखा था. अंदर न ब्रा थी न पैंटी!

उसके कमरे में दरवाजे पर मैं थी और सामने ट्यूब लाइट जल रही थी.
उसकी रोशनी में न केवल मेरा पूरा बदन दिख रहा था बल्कि रवि ने ये अंदाजा भी लगा लिया कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना है क्योंकि उसकी शॉर्ट्स में उसकी मर्दानगी करवट लेती हुई दिख रही थी, वो चोरी चोरी अपने तन रहे लंड को सेट कर रहा था।

मैं कनखियों से उसकी इस हरकत को देख चुकी थी.

उसने पूछा- आओ आंटी, कैसे आना हुआ?
मैंने कहा- यार, अकेले में तो आंटी मत बोल! क्या मैं बूढ़ी दिखती हूं?

उसने लंड को दबाते हुए कहा- फिर क्या बोलूं?
मैंने कहा- माधुरी नाम बुरा है क्या? तू मधु या मधु जी भी बोल सकता है।

उसने कहा- ठीक है मधु … जी!

मैं तो चुदाने के मूड से ही गई थी पर अब उसका भी मूड पूरा तन मेरा मतलब बन गया था।

मैंने कहा- यार रवि, मेरा एक जरूरी काम है, कर देगा क्या?
उसने कहा- हां, बोलो न मधु जी!

मैंने कहा- तेरे अंकल को गए पूरा हफ्ता हो गया है!
वो हैरानी से मुझे देखने लगा कि मैं ऐसा क्यों बोल रही हूं.

उसने कहा- तो?
मैंने कहा- और सपना (उसकी पत्नी) को भी मायके गए 4 – 5 दिन हो गए हैं!
वो बोला- हां, वो आज रात को ही आ रही है।

मैंने कहा- अच्छा, तुम्हारी शादी को कितने साल हुए हैं?
वो बोला- पांचवां चल रहा है. आप कुछ काम का बोल रही थी?

मैं समझ गई कि अब वो नहीं, उसका लंड बोल रहा है।

मैंने कहा- यार, तुम घर की दाल रोटी से उकता जाते हो तो क्या करते हो?
वो बोला- बाजार में जाके कोई भी मसालेदार नई डिश खा लेता हूं।

मैंने कहा- एक मसालेदार नई डिश खुद चल के तुम्हारे पास आई है, इसको चखोगे नहीं?

इतना कहना था कि वो ‘ओह मधु’ कहते हुए मेरे होठों को चूसने लगा.
उसका हाथ मेरे स्तन पर और मेरा उसके लंड पर पहुंच चुका था।

मैंने गाउन उतारा और बिछ गई उसके सामने!
वो भी नंगा हुआ और लंड मेरे मुंह के सामने लेकर आया.

मैंने उसे एक गाली बकी- मादरचोद, पहले मेरी चूत में डाल के चोद अच्छे से!
उसने भी थूक लगाया और चूत में डालते हुए कहा- ले भेनचोद, अब वो भी जी लगाना भूल गया था।

मेरी चूत तो बहुत प्यासी थी ही … लेकिन वो जवान लौंडा, उसका लंड भी 4-5 दिन से सेक्स का भूखा था.
बीच बीच में रुक के वो उफान को नियंत्रित कर रहा था।

वह मेरे स्तनों को पागलों की तरह चूस रहा था.
मेरे शरीर में काम लहरा रहा था, मैंने कहा- यार रवि, एक बार कस के रगड़ दे, डिस्चार्ज होने लगे तब भी रुकना मत!

उस ने पेलना शुरू किया, दे दनादन, 10-15 धक्कों के बाद उसका वीर्य उछलने लगा.
मेरी चूत पूरी भर गई थी पर वो रुका नहीं … मेरी वीर्य भरी चूत को लगातार चोदता रहा.

मेरा भी क्लाइमैक्स नजदीक था, उसने 25-30 धक्के ही लगाए होंगे कि मैं भी झड़ गई.
मेरी चूत बहुत देर तक फड़कती रही।

मेरी सांसें भारी हो गई थी.
कई मिनट तक मैं इस मस्ती को आंखें बंद करके अनुभव करती रही।

अभी साढ़े ग्यारह बजे थे, उसकी बीवी के आने में दो घंटे बाकी थे.
हम दोनों अभी चुदाई के एक और दौर के लिए तैयार थे।

तो हम दोनों बाथरूम में अपने चूत और लंड को धोकर आए.
दोनों पूरे नंगे तो थे ही, मैं उसका धुला धुलाया, लटका हुआ, नर्म लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं पति का भी ऐसा लंड तकरीबन रोज चूसती हूं, जब वो नहा कर आते हैं.

उसका लंड दो मिनट में ही फूलने लगा, उसके हाथ मेरे स्तन से खेल रहे थे.

इससे पहले कि उसका लंड पूरी तरह से तन्नाता, मैंने उसके कंधों को दबा के नीचे झुकाया और उसका मुंह अपनी चूत पे लगा दिया।

उसकी जुबान के स्ट्रोक मेरी चूत पर चलने लगे, उसके मुंह में मेरी चूत और उसके वीर्य का मिला जुला नशीला रस घुलने लगा।

मैंने चूत केवल बाहर से धोई थी।
यह सोच सोच कर मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी कि एक मर्द मेरी चूत से अपना ही वीर्य सुड़क रहा है।

मेरे पति कहते हैं कि तू किसी से चुद के आए और तेरी चूत में उसका वीर्य भरा हो तो मैं चाट सकता हूं. लेकिन लंड खड़ा हो तब … डिस्चार्ज होने के बाद वीर्य चाटने का बिल्कुल मन नहीं करता।
मैं देख रही थी कि कितना सच बोल रहे थे वो!

मेरी चूत चाटते चाटते उसका 6 इंच का लंड पूरी तरह अकड़ गया.

इस बार मैंने उसको चित लिटाया और उसके लंड पर सवार हो गई.
रवि का पूरा लंड मेरी लपलपाती चूत में समा गया।

उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी मकान मालकिन आंटी उसके लंड की सवारी कर रही है.

वो पूछ बैठा- मधु यार, आज मेरे लन्ड की लॉटरी कैसे लग गई? तुम्हारी आज चुदाने की इच्छा कैसे हो गई, ऐसे मौके तो पहले भी आए हैं!
तो मैंने कहा- यार, आज चुदना लिखा था तो आज ही ध्यान आया.

मैंने कमर हिलाना शुरू किया, बहुत देर तक मैं लंड को चोदती रही.
फिर जब लगा कि झड़ने का समय नजदीक है, तब मैं फ़िर चित लेट गई और रवि को बोली- फिर से रगड़ दे मादरचोद, मेरी इस प्यासी चूत की प्यास बुझा दे।

रवि ने भी कस के धक्के लगाने शुरू किए- ले भेनचोद, ले भोसड़ी वाली, देख मेरा लंड कैसे रगड़ रहा है तेरी गर्म चूत को!

इस बार भी रवि के लंड से वीर्य विस्फोट हो गया.
पर वो रुका नहीं, मेरी चूत जोर जोर से फड़कती रही और वो रगड़ता रहा।

इस बार करीब आधा घंटा तक सेक्सी लेडी Xxx चुदाई चली.
रवि निढाल होकर मुझ पर पड़ा था, उसका पूरा बदन पसीने में लथपथ था।

मैंने पूछा- अभी तुम्हारी बीवी भी आकर लंड मांगेगी तो क्या करोगे?
वो बोला- इतनी लजीज बिरयानी खाकर दाल चावल खाने की बिल्कुल इच्छा नहीं है। लंड में भी दम नहीं बचा है, सिरदर्द का बहाना बना दूंगा, पर कुछ भी हो जाए आज तो सपना को नहीं चोदूंगा।

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