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### मेरी माँ रीना के साथ वो रात मेरा नाम राहुल है, मैं 18 साल का हूँ। मेरे पापा आर्मी में हैं, दूर पोस्टेड, इसलिए घर में सिर्फ मैं और माँ रीना रहते हैं। माँ एकदम संस्कारी हिंदू औरत हैं – हमेशा साड़ी या सलवार-सूट पहनती हैं, माथे पर बड़ी बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र। उम्र 38 साल, लेकिन लगती हैं 30 की। हाइट 5'7", गोरा दूध जैसा रंग, फिगर 36-30-34, चेहरा हीरोइन सा। कॉलोनी में जो भी देखता, देखता रह जाता। हम नई डेवलपिंग कॉलोनी में रहते हैं, घर बड़ा है, आसपास ज्यादा लोग नहीं, आवाज बाहर नहीं जाती। ऊपरी मंजिल खाली पड़ी है। कॉलोनी में ज्यादातर मुस्लिम परिवार हैं। पास ही कसाई की दुकान है, जहाँ तीन भाई काम करते हैं – असलम कसाई, अमजद कसाई और सुलेमान कसाई। तीनों 28-32 साल के जवान, मजबूत बदन वाले, लंबी दाढ़ी, मुस्लिम मर्द। माँ कभी-कभी उनसे मीट मँगवाती थीं, इसलिए जान-पहचान थी। उस रात मैंने ज्यादा खाना खा लिया था, इसलिए माँ का दिया दूध नहीं पिया और 11 बजे तक सो गया। अचानक कुत्तों के भौंकने से नींद खुल गई। मैं उठा, खिड़की से देखा तो बाहर तीन आदमी दिखे – असलम, अमजद और सुलेमान। वो दरवाजा खटखटा रहे थे। माँ ने दरवाजा खोला, उन्हें अंदर बुलाया। मैं अपने कमरे में ही था, लाइट ऑफ, वो नहीं जानते थे कि मैं जाग रहा हूँ। चुपके से देखने लगा। माँ उन्हें सोफे पर बिठाकर पानी लाईं, फिर जूस। तीनों सोफे पर बैठे, माँ सामने खड़ी बात कर रही थीं। असलम (बीच वाला) ने माँ का हाथ पकड़ा और अपने पास सोफे पर बिठा लिया। माँ मुस्कुराईं, कुछ नहीं बोलीं। अब माँ के एक तरफ असलम और अमजद, दूसरी तरफ सुलेमान। 20 मिनट तक बातें होती रहीं, माँ हँस रही थीं, खुश लग रही थीं। मैं सोच रहा था रोकूँ या नहीं, लेकिन माँ खुश थीं तो रुक गया। फिर अमजद ने माँ का हाथ पकड़कर अपनी पैंट पर रख दिया। माँ ने कुछ नहीं कहा, ऊपर से सहलाने लगीं। सुलेमान ने भी अपना हाथ माँ के हाथ पर रखा। अब माँ दोनों का लंड पैंट के ऊपर से सहला रही थीं, और असलम के साथ किस कर रही थीं। गहरा किस, जीभ अंदर। मैं हैरान था, लेकिन मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर माँ उठीं, तीनों उनके पीछे बेडरूम में चले गए। मैं चुपके से माँ के कमरे के पास गया, पर्दे से झाँका। सब साफ दिख रहा था। बेडरूम में पहुँते ही उन्होंने माँ की सलवार-सूट की कमीज़ उतार दी। माँ ऊपर से पूरी नंगी – बड़े-बड़े गोरे बूब्स, गुलाबी निप्पल। असलम और अमजद बूब्स चाटने लगे, चूसने लगे। माँ आहें भर रही थीं, खुश। सुलेमान ने माँ को घुटनों पर बिठाया। माँ ने उनकी पैंट खोली। तीनों के लंड बाहर – मोटे, काले, 6-7 इंच के। सुलेमान का सबसे बड़ा, शायद 7.5 इंच। माँ बारी-बारी चूसने लगीं। असलम ने माँ का सर पकड़कर मुँह में धक्का दिया। माँ पूरा नहीं ले पा रही थीं, लेकिन कोशिश कर रही थीं। असलम बोला, "पूरा ले साली हिंदू रंडी, संस्कारी बहनचोद।" माँ खाँसीं, लेकिन मुस्कुराईं। फिर सुलेमान ने पीछे से बाजू पकड़ी, नाक बंद की, पूरा लंड मुँह में ठूँस दिया। माँ छटपटाईं, लेकिन 1 मिनट तक रखा। निकाला तो माँ साँस ले रही थीं, लेकिन ऊपर देखकर मुस्कुराईं। तीनों ने माँ के गाल पर थप्पड़ मारे, माँ बोलीं, "और मारो, जोर से।" माँ ने खुद बाजू पीछे कर लिए, फिर बारी-बारी सबका पूरा लंड मुँह में लिया, नाक बंद करके। माँ का मुँह थूक से चमक रहा था। फिर माँ को खड़ा किया, सलवार उतारी। माँ पूरी नंगी – चूत क्लीन शेव, गोरी गांड। घोड़ी बनाया। तीनों ने गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। माँ बोलीं, "और जोर से, मेरी गांड लाल कर दो।" असलम ने बेल्ट निकाली, गांड पर मारी। माँ चिल्लाईं, "आह्ह... हाँ, बेल्ट से मारो, फाड़ दो।" तीनों ने बेल्ट से गांड लाल कर दी। फिर चूत चाटने लगे, माँ की आहें पूरे कमरे में। एक ने मुँह में लंड ठूँसा ताकि आवाज न निकले। 5 मिनट बाद असलम ने चूत में लंड डाला। जोर-जोर से ठोकने लगे। माँ आहें भर रही थीं। बारी-बारी सबने चूत मारी, 30-40 मिनट तक। फिर पोजीशन बदली – माँ को बेड पर टाँगें नीचे, हाथ ऊपर। सुलेमान बोला, "अब तेरी गांड फाड़ेंगे, हिंदू रंडी।" माँ बोलीं, "धीरे डालना पहले।" थूक लगाकर डालने लगे। माँ दर्द से कराहीं, लेकिन दूसरे ने मुँह में लंड ठूँस दिया। सुलेमान ने जोर से पूरा धक्का मारा। माँ की टाँगें फैलाने की कोशिश, लेकिन पकड़ रखी थी। बारी-बारी तीनों ने घोड़ी बनाकर गांड मारी, जोर-जोर से। माँ चिल्ला रही थीं, लेकिन खुशी से। मैं सब देख रहा था, लंड पकड़कर हिला रहा था। माँ की वो हालत देखकर पहली बार ऐसा लगा। वो रात माँ की जिंदगी बदल गई, और मेरी नजरें भी। कहानी अभी खत्म नहीं हुई... अगली रात और भी कुछ हुआ।### मेरी माँ रीना के साथ वो रात: राहुल की नजर से (जारी) मैं पर्दे के पीछे छिपा सब देख रहा था, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। माँ पूरी नंगी घोड़ी बनकर बेड पर थीं, गांड ऊपर, टाँगें फैली हुईं। तीनों कसाई उनके चारों तरफ घूम रहे थे, लंड हाथ में लिए। असलम ने पहले बेल्ट से माँ की गांड पर जोर की मार मारी। "आह्ह्ह... स्स्स... हाँ असलम भाई, और जोर से मारो!" माँ चिल्लाईं, लेकिन आवाज में दर्द के साथ-साथ मजा भी था। "साली हिंदू रंडी, संस्कारी बहनचोद! तेरी ये गोरी गांड आज लाल कर देंगे हम तीनों," असलम गरजकर बोला और फिर बेल्ट से तीन-चार जोर की मारें मारीं। माँ की गांड पर लाल निशान पड़ गए। अमजद हँसते हुए बोला, "देख सुलेमान, ये हिंदू औरत कितनी भूखी है। पति आर्मी में है, लेकिन चूत और गांड की भूख इन कसाइयों से मिटवा रही है।" सुलेमान ने माँ के बाल पकड़े और सर ऊपर खींचा, "बोल रीना रंडी, किसका लंड सबसे अच्छा लग रहा है? बोल, नहीं तो तेरी गांड फाड़ दूँगा!" माँ साँस लेते हुए बोलीं, "तीनों का... तीनों के मोटे काले लंड... आह्ह... मुझे पागल कर रहे हैं। मारो मुझे, गाली दो मुझे, मैं तुम्हारी रखैल हूँ आज से।" "रखैल नहीं, हमारी सस्ती हिंदू कसाई की रंडी!" अमजद चिल्लाया और माँ की गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। "बोल, कितने मुस्लिम लंड खा चुकी है तू पहले?" माँ मुस्कुराते हुए बोलीं, "कभी नहीं... तुम तीनों पहले हो... मेरी चूत और गांड की सील तुम्हीं तोड़ रहे हो। फाड़ दो मुझे, पूरा फाड़ दो!" असलम ने थूक लगाकर अपना लंड माँ की चूत पर रगड़ा और अचानक पूरा जोर से ठूँस दिया। "ले साली, पूरा ले! आर्मी वाले पति का छोटा लंड भूल जा आज से!" "आआआह्ह्ह... हाँ असलम... फाड़ दो... जोर से ठोको... मेरी चूत तुम्हारी है!" माँ की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। असलम 10-15 जोर के धक्के मारकर निकाला, फिर अमजद की बारी। अमजद ने माँ को पीठ के बल लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और चूत में लंड पेल दिया। "देख राहुल का कमरा उस तरफ है ना? अगर तेरा बेटा देख ले तो क्या बोलेगी?" माँ की आँखें चमक उठीं, "बोलूँगी... देख बेटा... तेरी संस्कारी माँ को असली मर्द कैसे ठोकते हैं... आह्ह... अमजद भाई... और गहरा... हाँ वहीँ!" सुलेमान माँ के मुँह के पास लंड लेकर बोला, "चुप साली, चूस मेरा लंड!" और पूरा मुँह में ठूँस दिया। माँ की खाँसी निकली, लेकिन वो चूसने लगीं। "गला खोल रंडी, पूरा गले तक ले!" सुलेमान ने नाक बंद कर दी और 20 सेकंड तक लंड गले में रखा। निकाला तो माँ की लार टपक रही थी। "अब गांड की बारी," सुलेमान गरजा। माँ को फिर घोड़ी बनाया। सुलेमान ने सबसे पहले थूक लगाया और धीरे सिरा डाला। माँ कराहीं, "आह्ह... दर्द हो रहा है... धीरे..." "धीरे? साली रंडी, अब दर्द ही मजा देगा!" सुलेमान ने एक जोर का धक्का मारा, आधा लंड अंदर। माँ चीखीं, "माँ कसम... फट गई... आआह्ह्ह!" असलम ने मुँह में अपना लंड ठूँस दिया, "चुप रह, चूस! आवाज मत निकाल।" सुलेमान ने फिर पूरा धक्का मारा, पूरा लंड गांड में। माँ की आँखों में आँसू, लेकिन वो खुद पीछे धक्का मार रही थीं। "हाँ सुलेमान भाई... अब मजा आ रहा है... ठोको... मेरी गांड फाड़ दो... मैं तुम्हारी गुलाम हूँ!" माँ की आवाज काँप रही थी। तीनों बारी-बारी गांड मारते रहे, गालियाँ देते रहे: "ले हिंदू रंडी, मुस्लिम लंड की आदत डाल!" "तेरा बेटा सो रहा है, लेकिन तेरी चीखें सुन ले तो कल से तुझे माँ नहीं, रंडी बोलेगा!" "बोल, अगली बार अपने बेटे के सामने चुदवाएगी?" माँ पागलों की तरह बोलीं, "हाँ... हाँ... सबके सामने... तुम जहाँ कहो, जैसे कहो... मैं तुम्हारी रंडी हूँ... बस ठोकते रहो!" मैं दरवाजे के पास खड़ा अपना लंड हिला रहा था, माँ की ये बातें सुनकर और तेज। वो रात माँ ने तीनों से कम से कम 6-7 बार चुदवाया – चूत, गांड, मुँह, सबमें। आखिर में तीनों ने माँ के चेहरे, बूब्स और गांड पर माल गिराया। माँ सब चाटकर साफ कर रही थीं, मुस्कुराते हुए। "अब हर हफ्ते आया करेंगे, समझी रीना रंडी?" असलम बोला। माँ बोलीं, "जी मालिक... आप जब चाहें... मैं इंतजार करूँगी।" तीनों चले गए। माँ नहाकर सोने आईं, मुझे लगा वो नहीं जानतीं कि मैंने सब देखा। लेकिन सुबह उठा तो माँ की आँखों में एक नई चमक थी... और मेरी नजरें भी बदल चुकी थीं।

औरत की गांड की चुदाई की कहानी में मेरी छोटी बहन के पति ने मेरी गांड पहली बार मारी तो दर्द से मैं बेहाल हो गयी. पर बाद में मुझ मजा भी बहुत आया.

प्रिय पाठको,
आपने मेरी पिछली कहानी
जीजू ने किया मेरा अल्ट्रा साउंड
बहुत पसंद की.
धन्यवाद.

अब आगे औरत की गांड की चुदाई की कहानी:

अस्पताल में चुदाई के कुछ दिन बाद मेरे पति विकास को अमेरिका जाने का आदेश मिला और उन्हें इस बार करीब एक महीने तक अमेरिका में रहना था।
इस दौरान करवा चौथ का त्यौहार भी आ रहा था लेकिन मेरे पति इस समय मेरे साथ नहीं रह सकते थे।

उनके जाने के बाद मेरी आनन्द के साथ बातचीत चालू हो गई।
मैंने उन्हें बताया कि विकास अमेरिका गए हैं और मैं महीने भर चारु के साथ ही रहूंगी।

यह सुनकर आनन्द की खुशी का ठिकाना न रहा।
उन्होंने कहा- साली साहिबा, इस बार करवाचौथ हम आपके साथ मनाएंगे और आपको हमारे हाथों ही अपना व्रत खोलना पड़ेगा।

मैंने कहा- लेकिन रागिनी भी तो है, उसका क्या?
आनन्द- चिंता मत करो साली साहिबा, मैंने सारा प्लान बना लिया है।
मैंने उनके इरादे के लिए हामी भर दी।

हमारे यहां रस्म है कि लड़की शादी के बाद अपना पहला करवाचौथ अपने मायके में ही मानती है।
रागिनी करवाचौथ के दो दिन पहले ही मायके पहुंच गई थी।

आनन्द के कहे अनुसार मैंने चारु को भी अपने मायके भेज दिया।

करवाचौथ के एक दिन पहले मेरे घर पर एक पार्सल आया।
मैंने भेजने वाले का नाम देखा तो डॉक्टर आनन्द लिखा था।

मैंने पार्सल रिसीव किया और फिर बेडरूम आकर देखा कि उसमे क्या क्या है?
उस पार्सल में एक लाल रंग की साड़ी, कंगन, एक सोने का नेकलेस, झुमके, करधनी, पायल थी।

मैंने आनन्द को कॉल किया।
मैं- हेलो जीजू, आपके गिफ्ट के लिए शुक्रिया।
आनन्द- शुक्रिया मत बोलो, बस कल इसे पहनकर तैयार रहना. लेकिन एक बात का ध्यान रखना, इस पार्सल में जो है सिर्फ वही पहनना है, उसके सिवा कुछ भी नहीं।

मैं हैरान रह गई क्यूंकि उसमें पेटीकोट, ब्लाउज और ब्रा पैंटी तो थे ही नहीं।
मैंने कहा- लेकिन इसे पहनूंगी कैसे क्यूंकि बाकी कपड़े तो हैं ही नहीं?
आनन्द- मुझे नहीं पता, तुम जानो कि क्या करना है, मैं जो कह रहा हूं उतना काम होना चाहिए बस!

मैंने बेमन से हामी भर दी।

अगले दिन करवाचौथ का व्रत था।
मैं सुबह से भूखी प्यासी थी और अपने बदन को निखारने में जुटी हुई थी, मैंने सुहागन स्त्रियों की तरह मेंहदी लगाई और फिर अपने प्राइवेट पार्ट के बाल साफ़ किए।

जैसे तैसे दिन बीत गया।

रात हुई तो आनन्द मेरे मायके गए और चांद निकलने पर उन्होंने रागिनी का व्रत खुलवाया।

फिर कुछ देर बाद वो अस्पताल जाने के बहाने से निकल गए और मेरे घर पर आ गए।
इधर मैंने अपनी कमर पर एक मोटी डोरी लपेटी और उसी के सहारे साड़ी पहन ली।
मेरे बदन पर कपड़े के नाम पर सिर्फ यही लाल साड़ी थी।

मैंने अपने वक्ष को ढका और फिर अपना शृंगार किया।

मैंने गजरा, काजल, ज्वैलरी सब कुछ पहना हुआ था और खासकर के आनन्द की दी हुई करधनी!

मैं छत पर गई और पूजा की।
मेरा गोरा बदन चांदनी में चमक रहा था, मैं अपनी साड़ी संभाल रही थी कि कहीं सरक न जाए।
पड़ोस की औरतें मुझे ही देख रही थी क्योंकि 

मैंने ब्लाउज नहीं पहना था और मेरे मोटे स्तन लटके हुए थे।

खैर किसी तरह बचते बचाते मैंने पूजा की और नीचे आ गई।
अब मैं आनन्द के आने का इंतजार करने लगी ताकि वे आकर मेरा व्रत खुलवा सकें।

दरवाजे पर घंटी बजी तो मैंने दरवाजा खोला, सामने आनन्द खड़े थे।
मैंने उन्हें अंदर बुलाया और झट से दरवाजा बंद कर दिया।

फिर मैं उनसे चिपट गई और बोली- कितनी देर लगा दी, कब से मैं प्यासी हूं, कहां थे अब तक आप?
आनन्द- आपकी बहन की प्यास बुझा रहा था, आखिर उनका पहला करवा चौथ था ना!

मैंने पानी का लोटा उठाया और कहा- लीजिए और मेरी प्यास बुझाइए।
आनन्द ने लोटा टेबल पर रख दिया और कहा- आपकी प्यास पानी से नहीं, प्रोटीन शेक से बुझाएंगे हम!
यह कहकर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।

हमारे होंठ एक दूसरे के साथ चिपक गए और अब हमारे बीच मुख रस का आदान प्रदान होने लगा।
हम दोनों एक दूसरे की जीभ के साथ खेलते हुए एक दूसरे को चूमते जा रहे थे।

उन्होंने मेरा पल्लू मेरी छाती से हटा दिया तो मेरा बदन अर्ध नग्न हो गया।
मेरे लटकते हुए स्तन अब उनकी छाती पर दबाव डाल रहे थे और मेरी कमर उनके मजबूत हाथों के कब्जे में थी।

मैं उनका इरादा भांप गई थी इसलिए मैं जमीन पर बैठ गई और फिर उनकी पैंट को सहलाने लगी।

आनन्द तो जैसे मुझे तरसाने के इरादे से आए थे इसलिए वो चुपचाप खड़े होकर मेरी हरकत का मजा ले रहे थे।
मैंने उनकी बेल्ट उतारी और फिर उनकी जिप खोल कर उनकी पैंट उतार दी।

उनके अंडरवियर को अपने दांतों से हल्के हल्के कुरेदने लगी और फिर उसे भी नीचे कर दिया।
उनका लिंग अब मेरे सामने था लेकिन आज उसका तनाव कुछ अलग ही था शायद आनन्द ने गोली ली थी।

मुझे तो ये सोचकर और खुशी हुई और मैंने उनके लिंग के सुपारे को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

आनन्द चुपचाप सावधान मुद्रा में खड़े थे और मैं अपने एक हाथ से उनके लिंग को रगड़ती जा रही थी और अपने होंठ उनके सुपारे पर टिकाए हुए थी।
पांच मिनट बाद मेरी मेहनत रंग लाई और आनन्द का लावा फूट पड़ा।
मेरा मुंह उनके वीर्य से लबालब भर गया और मैं उनके वीर्य की हर बूंद गटक गई।

उसके बाद आनन्द ने मुझे पानी पिलाया और बेडरूम में ले गए।
फिर वो किचन आए और मेरे खाने के लिए कुछ फल और दूध लेकर बेडरूम में आ गए।

आनन्द बड़े ही प्यार से मुझे फल खिला रहे थे और मैं दिनभर की भूखी बिना संकोच के उनके दिए फलों का सेवन कर रही थी।

खाने के बाद अब मेरे हलाल होने की बारी थी।
आनन्द ने कहा- साली साहिबा, आज हम आपका नाच देखना चाहते हैं, सुना है कि आप बहुत अच्छा नाचती हैं।
मैं- ठीक है जीजू, जैसा आप कहो।

मैं उठी तो आनन्द ने मेरी साड़ी का पल्लू थाम लिया और कहा- बिना साड़ी के नाचिए साली साहिबा!

मेरे जिस्म पर कपड़े के नाम पर एक यही वस्त्र था।
मैंने साड़ी उतार दी तो मैं पूर्ण नग्न अवस्था में आ गई।

मेरे गले में हार, बालों में गजरा, कमर मे करधनी, हाथों में कंगन, पैरों में पायल जरूर थे लेकिन बदन पर कपड़े के नाम पर चीथड़ा तक न था।

खैर जब इज्जत नीलाम ही हो चुकी हो तो शर्माना कैसा?
मैंने गाना लगाया
‘मुन्नी बदनाम हुई’
और उस पर थिरकना शुरू कर दिया।

मेरे लटके झटके देखकर आंनद भी जोश में आ गए और अपने कपड़े उतार कर नग्न होकर अपना लिंग सहलाने लगे।

गाना खत्म होते होते उनका लिंग पूरी तरह तन्नाया हुआ था।
मेरा मटकना अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि आनन्द मेरे पास आए और उन्होंने मेरी पीठ पर हाथ रख कर मुझे अपने निकट किया और खड़े खड़े ही अपना लिंग मेरी चूत में डाल दिया।

अब हम दोनों की कमर लय में एक दूसरे के साथ थिरकती जा रही थी और मेरे मुंह से काम वासना की आहें निकल रही थी।

मैंने अपनी एक टांग उठा कर उनकी कमर पर लपेट ली तो आनन्द ने सहारा देकर मेरी टांग को धर लिया।
अब मैंने अपनी बाहों को आनन्द के गले में डाल कर सहारा लिया और खुद को संतुलित किया।

आनन्द ने मेरे होंठों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
नीचे उनका औजार मेरी मुनिया की खुदाई करता जा रहा था।

आज आनन्द का लिंग अलग ही तरह का तनाव और आकार लिए हुए था।
गोली की वजह से उनका सुपारा टमाटर जैसा फूला हुआ था और उसकी नसें खुरदरापन लिए फूली हुई थी जिसकी वजह से मेरी योनि में रगड़ बढ़ गई थी.
उनका सुपारा जब मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मारता तो मुझे मीठा मीठा दर्द होता।

मेरी योनि तो अब झरना बन चुकी थी जिससे लगातार योनि रस बहता जा रहा था.

उनके लिंग की रगड़ और धक्के की स्पीड इतनी ज्यादा थी कि मैं ज्यादा समय तक इस आनन्द को झेल नहीं पाई और मेरी योनि से फव्वारा फूट पड़ा।

झड़ने के बाद मेरी योनि ढीली पड़ गई लेकिन आनन्द अभी भी धक्के बखूबी तरीके से लगाते जा रहे थे।
मैंने अपनी दोनों टांगे कैंची की तरह उनकी कमर पर लपेट ली और फिर खुद को उनको हवाले कर दिया।

आनन्द ने मेरे नितम्बों पर हाथ लगाया और उनके सहारे मुझे उठा उठा कर धक्के लगाने लगे।
उनके हर धक्के से मेरे बदन में कम्पन पैदा हो जाता और मेरे कंगन और पायल आवाज करने लगते।

आनन्द मुझे उठाकर बेडरूम में ले आए और मेरे बेड के पास बने ड्रेसिंग टेबल पर बिठा दिया।
उन्होंने मुझे शीशे से सटा दिया और फिर मेरी चुदाई करने लगे।

मेरी आंखें आनन्द के मारे बंद हो गई थी और मुंह से जोर जोर की आवाजें आ रही थी।

करीब आधा घंटा चोदने और मुझे दो बार स्खलित करने के बाद आनन्द की जवानी अपने चरम पर पहुंच गई और उन्होंने मेरी चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर दिया।

वे किसी जोंक की तरह मुझसे चिपक गए और अपने लिंग का एक एक हिस्सा मेरी योनि की गहराई में उतार दिया।
मेरी योनि उनके लिंग का गर्मागर्म वीर्य पाकर सिकुड़ गई.

जब उन्होंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया तो उनका वीर्य मेरे कामरस के साथ मिक्स होकर चूत के दरवाजे से बहता जा रहा था।
मैंने उंगली से उनके गाढ़े वीर्य को उठाया और मजे से चाट गई, फिर टिशू पेपर से खुद को साफ किया।

अब तक मैं दो बार झड़ी थी इसीलिए मेरी भी सांसें आनन्द की तरह ही तेज हो गई थी।
मैं बेड पे लेट गई और खुद को संभालने लगी।
मेरे बदन से पसीना बहा जा रहा था और दिनभर से भूखी होने की वजह से मुझे कमजोरी सी लग रही थी।

आनन्द आकर मेरे बगल में लेट गए और मेरे स्तनों और योनि को सहलाने लगे।
मैं सिसकी भरती हुई उनके साथ इस खेल का मजा ले रही थी।

आनन्द ने एक एक कर के मेरे जिस्म से जेवर उतार दिए और अब मैं पूर्ण रूप से नग्न अवस्था को प्राप्त कर चुकी थी।

10 मिनट बाद जब मेरा जिस्म जरा संभल गया तब मैं उठकर बाथरूम की तरफ चल दी तो आनन्द भी मेरे साथ आ गए।
मैं कमोड पर बैठ गई और मुत्ती करने लगी।

उधर आनन्द ने शॉवर चालू कर दिया।
मैं उठकर आनन्द के पास आई तो उन्होंने मेरे हाथ दुपट्टे से बांध दिए और एक पाइप में फंसा दिया।
उन्होंने मुझे चूमना शुरू कर दिया और फिर मुझे घुमाकर मेरी पीठ अपनी और और मेरा मुंह दीवार की ओर कर दिया।

इस दौरान शॉवर खुला हुआ था और उसकी बूंदें मेरे बदन को भीगा रही थी।

आनन्द ने मेरे बाल पकड़ कर उनको पोनीटेल की तरह से बांध दिया और फिर मेरे नितम्बों पर चपत लगाई।
मैं मदहोशी में इस दर्द का मजा लेने लगी।

आनन्द ने अपने हाथ मेरे नितम्ब पर फेरने शुरू कर दिए और फिर मेरे नितम्बों की दरार से अपनी उंगलियां गुजारने लगे।
उनका यह अहसास मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था।

उनकी उंगली मेरी गांड पर हलचल मचाने लगी, इसका अहसास मुझे बहुत उत्तेजक लगा और मैं तनिक तनिक देर में अपनी गांड को अंदर की तरफ भींचने लगी।

अचानक वो हुआ जिसकी मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी।

आनन्द की उंगली मेरी गांड में घुसने लगी तो मैं चीखी- आआह आनन्द … ये क्या कर रहे हो, दर्द होता है मुझे, प्लीज ये मत करो!

लेकिन आनन्द ने मेरी एक नहीं सुनी और अपनी बीच की पूरी उंगली मेरी गांड में घुसा दी।

मैं दर्द और जलन से सिसकी लेने लगी- आनन्द, प्लीज निकाल लो इसे, बहुत दर्द हो रहा है! जीजू प्लीज मान जाइए, मैं ये नहीं कर पाऊंगी।
आनन्द- डरो मत साली साहिबा, मैं इतनी आराम से करूंगा की दर्द नहीं बल्कि मजा आयेगा।

आनन्द आज मेरी गांड मारने के इरादे से आए थे।
उन्होंने कंडीशनर की शीशी उठाई और उससे कंडीशनर निकालकर मेरी गांड पर मलने लगे और फिर अपने लिंग पर भी लेपन लिया।

अब उनका लिंग इतना चिकना हो गया था जैसे मोबिल आयल डालने के बाद इंजन का पिस्टन।
उन्होंने मुझे 60 डिग्री पर झुका दिया और मेरी कमर को बाहर की तरफ निकाला।
फिर वो अपना लिंग मेरी कुंवारी गांड में डालने लगे।

पहले तो वो कुछ फिसला लेकिन किसी तरह वो अपना सुपाड़ा मेरी गांड के छल्ले में उतारने में सफल हो गए।
मेरे चेहरे पर दर्द के भाव थे।
मैं होंठों को भींचे किसी तरह अपनी सिसकी रोक कर खड़ी थी।

आनन्द ने एक हाथ से मेरी चोटी पकड़ी और फिर धीरे धीरे मेरी पीठ पर किस करने लगे।
उनके चुम्बन ने मेरा दर्द कम कर दिया और फिर मैं भी तैयार हो गई, अपनी आबरू लुटवाने के लिए।
आनन्द ने अचानक से एक धक्का लगाया और उनका आधा लिंग मेरी आंत में जा घुसा- हाय दईया … मर गई मैं!

मेरे मुंह से यही आह निकली तो आनन्द ने मेरी चोटी अपनी तरफ खींच ली और फिर से एक धक्का लगाया.
इस बार मैं दर्द से चीख उठी और इसी के साथ उनका लिंग पूरा मेरी आंत में उतर गया।

मेरी आंखें दर्द के मारे भर आई और मेरे होंठ कांपने लगे।
मेरे मुंह से एक घुटी हुई आह निकली- जीजू….. दर्द हो रहा है।

लेकिन मर्द अपनी हवस मिटाने के लिए औरत को हमेशा दर्द देता आया है।
आनन्द पर मेरी सिसकी का कोई असर नहीं पड़ा।

मेरी गांड अंदर की तरफ सिकुड़ गई और आनन्द के लिंग को पूरी ताकत से भींच लिया।
मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मोटा गर्म लोहे का रॉड मेरी आंत में घुसा हुआ हो।

आनन्द को मेरी गांड की कसावट की वजह से धक्के लगाने में दिक्कत पेश आ रही थी- साली साहिबा, अपनी गांड को ढीला करो वरना धक्के कैसे लगाऊंगा।
मैं सुबकती हुई बोली- मुझसे नहीं हो पाएगा जीजू, प्लीज बाहर निकाल लीजिए।
आनन्द- ठीक है निकाल लूंगा लेकिन इसे ढीला करो तभी तो निकलेगा।

मैंने उनकी बात सुनकर अपनी गांड को ढीला छोड़ दिया।

आनन्द ने अपना लिंग बाहर खींचना शुरू किया और जैसे ही उनका सुपारा मेरी गांड के छल्ले के पास पहुंचा, उन्होंने पूरे जोर से मेरी गांड में अपना लिंग दोबारा उतार दिया।

मेरे मुंह से दर्द भरी चीख निकल पड़ी।

अब आनन्द को मेरी गांड मारने का तरीका पता चल गया था।
वो धीरे धीरे कर के मेरी गांड को चोदने लगे और अपना एक अंगूठा मेरे मुंह में और अपनी उंगली से मेरी योनि को सहलाने लगे।

अब मुझे दर्द में कुछ कमी जान पड़ी तो मैं भी आनन्द के साथ अपनी चुदाई का मजा लेने लगी।
आनन्द का हर धक्का अब मेरे जिस्म में दर्द के साथ साथ मजे की लहर भी उत्पन्न करने लगा।

मेरी गांड को पहली बार लंड का स्वाद मिला था।
आनन्द मेरी कसी कुंवारी गांड को चौड़ा करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे और हर धक्के के साथ ही बाथरूम में थप थप का संगीत गूंज उठता।

मेरी गांड का दबाव इतना ज्यादा था कि आनन्द ज्यादा देर तक कायम न रह सके और करीब 15 मिनट बाद ही उनका वीर्य फूट पड़ा।
मुझे मेरी गांड में बहा उनका गर्मागर्म वीर्य एक अनोखा अहसास दे रहा था।

यह पहला मौका था जब किसी ने मेरी गांड मारी थी.
लेकिन आखिरी नहीं … इसके बाद तो जैसे एक सिलसिला ही शुरू हो गया।
औरत की गांड की चुदाई के बारे में मैं आपको आगे की कहानियों में बताऊंगी।

खैर झड़ने के बाद आनन्द ने मुझे आजाद किया और फिर शॉवर तले नहला धुला कर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया।
मेरे बदन में बहुत तेज दर्द हो रहा था इसलिए आनन्द ने मुझे पेन किलर दी और फिर हम दोनों एक दूसरे के साथ नग्नावस्था में ही सो गए।

तो दोस्तो, कैसी लगी आपको ये औरत की गांड की चुदाई की कहानी?
अपने विचार कॉमेंट बॉक्स में जरूर दीजिए।
आपके प्यारे प्यारे कमेंट्स का इंतजार रहेगा।
पढ़ने के लिए शुक्रिया।

प्रेषक : सुरेश Antarvasna Sex Stories

मैं सुरेश, मेरे प्रिय Antarvasna Sex Stories पाठकों और पाठिकाओं को मेरे लंड का नमस्कार।

मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर लगा कि मैं भी आपके समक्ष अपनी सच्ची कहानी रखूं।

मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम गौरी है। उसका कद करीब ५.३” है । रंग थोड़ा सांवला है और उसके मम्मे करीब ३४” के होंगे और उसके गांड करीब ३८” की होगी और उसकी पतली कमर अगर उसे कोई देख ले तो उसका लण्ड कड़क हो जाए।

बात उन दिनों की है जब मैं पटना(बिहार) के कोचिंग में पढ़ाया करता था, वो मेरे कोचिंग में पढ़ती थी। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी, इसीलिए छोटे छोटे और पारदर्शक कपड़े पहन कर आती थी जिससे देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। गुरु होने के कारण मैंने वैसे तो कभी उसे उस नजरिये से कभी नहीं देखा था पर उस दिन बात ही कुछ ऐसी हो गई।

मैं आपको बताना भूल गया कि उसे बार-बार बेहोश होने की बीमारी थी। वो रविवार का दिन था और कोचिंग की छुट्टी थी पर उसे गणित में कुछ प्रोबलम होने के कारण उसने मुझसे अकेले में पढ़ाने को कहा था। वो ठीक १० बजे मेरे कोचिंग में आ गई, और हमने पढ़ाई शुरू कर दी। मैं उसे पढ़ा ही रहा था कि इतने में वो बेहोश हो गई। मैं उसके मुँह पे पानी के छींटे मार रहा था उसे होश में लाने के लिए। इस बीच मेरी नज़र उसके मम्मे पर चली गई। पानी और पारदर्शक कपड़े होने के कारण उसके मम्मे गीले हो गए जिस कारण वो पूरे साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मैं न चाहते भी उसके मम्मे दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल दिया और उसे मसलने लगा और उसके होठों पे अपने होंठ रख कर चूसने लगा। इतने में वो होश में आ गई और हल्का सा मेरा विरोध करने लगी पर उसके बाद वो भी गरम हो गई।

मेरा भी लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया। करीब १० मिनट की चुम्मा-चट्टी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए और थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था। फिर मैंने उसे मेज़ पर लेटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत एकदम कसी और वह अनचुदी कलि थी। वह सिस्कारियां भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को चाट कर साफ़ कर दिया।

थोड़ी देर में वो फिर से गरम हो गई और तड़पने लगी। फिर मैंने उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी टाँगे मेज़ पर फैलाई और अपना लंड उसकी बुर पे रख दिया। लंड अन्दर नहीं जा रहा था इसलिए मैंने वैसलिन लगाया और धीरे धीरे अन्दर डालने लगा। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया और वह दर्द से तड़पने लगी। मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला और दर्द के मारे तड़पने लगी …..आआआ… ऊउम्म्म्म्म्म्म्म…. येस्स्स्स…..ये सब आवाजें निकलने लगी।

मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और नीचे से वह गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने भी तब फिर से उसे चोदना चालू कर दिया और करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एकसाथ झड़ गए।

उस दिन मैंने उसे दो बार और चोदा। अब हमें जब भी वक्त मिलता है तो हम पढ़ाई के बहाने चुदाई किया करते हैं।

मेरे प्रिय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है इसलिए जो भी गलती हुई उसके लिए माफ़ करियेगा और आपको अगर कहानी अच्छी लगी तो मुझे मेल कीजिये। आपके इ मेल्स मेरे लिए प्रेरणा-स्रोत का काम करेंगे तो मेल करने में कंजूसी न करें। Antarvasna Sex Stories

Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, मैं Sex Stories द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। मैं आपको जो कहानी बताने जा रहा हूँ वह गत वर्ष ग्रीष्मकाल की है।

मैं गर्मी की छुट्टियों में मुम्बई गया था। मुम्बई में मेरी चाची रहती हैं। वह वहाँ पर चेम्बुर में रहती हैं। मैं जब मुम्बई गया था तब चाची के पास मेरी चचेरी बहन भी आई हुई थी। उसका नाम रीना है। उसकी शादी हो चुकी है। उसकी उम्र चौबीस वर्ष की है। वो दिखने में बहुत ही सेक्सी है। उसके कपड़े पहनने के ढंग और रहन-सहन भी बहुत सेक्सी हैं। उसे कोई भी देखे तो उसका लण्ड खड़ा होना ही होना है।

एक दिन चाची को गाँव जाना पड़ा। वह गाँव चली गई। घर पर मैं और रीना दीदी दोनों ही थे। उस दिन शाम को मैं बोर हो गया था, इसलिए मैंने दीदी से कहा- क्यों ना फिल्म देखने चलते हैं।’

वह भी राजी हो गई, और हम फिल्म देखने चले गए। उस दिन हमने मर्डर फिल्म देखी। फिल्म में काफी गरम दृश्य थे। फिल्म देखने के बाद हम घर आए। हमने रात का खाना खाया। रात काफ़ी हो चुकी थी।

आपको तो पता ही होगा, मुम्बई में घर बहुत छोटे होते हैं। उस पर मेरी चाची एक कमरे के घर में रहती हैं। वहाँ सिर्फ एक ही बिस्तर के बाद, थोड़ी और जगह बचती थी। अब हमें सोना था। सो मैंने अपनी लुँगी ली और दीदी के सामने ही अपने कपड़े बदलने लगा।

मैंने मेरी शर्ट खोली, बाद में पैन्ट भी। मेरे सामने अब भी मर्डर फिल्म के दृश्य घूम रहे थे, इसलिए मेरे लंड खड़ा था। वो अण्डरवियर में तम्बू बना रहा था।

मेरे पैन्ट निकालने के बाद मेरे लण्ड की तरफ़ दीदी की नज़र गई, वह यह देखकर मुस्कुराई। मैंने नीचे देखा तो मेरे अण्डरवियर में बहुत बड़ा टेन्ट बना हुआ था। मैं शरमाया और मैंने मेरा मुँह दूसरी ओर घुमा लिया, फिर लुँगी बाँध ली।

पर लुँगी के बावज़ूद मेरे लंड का आकार नज़र आ रहा था। उस हालत में मैं कुछ भी नहीं कर सकता था। फिर मैंने यह भी सोचा कि दीदी यह सब देखकर मुस्कुरा रही है, उसे शर्म नहीं आ रही है, तो फिर मैं क्यों शरमाऊँ?

मैं बिस्तर पर जाकर सो गया। फिर दीदी ने आलमारी से अपनी नाईटी निकाली और कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया, उसने साड़ी उतारी। वाऊ… क्या बद़न था। वह देखकर तो मैं पागल ही हो गया और मेरा लंड उछाल मारने लगा। उसने अपनी ब्लाऊज़ निकाली और बाद में अपनी पेटीकोट भी निकाल दी। वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी।

उसे उस हालत में देखकर तो मैं पागल ही हो रहा था। लेकिन वह मेरी दीदी थी, इसलिए नियंत्रण कर रहा था। मुझे डर भी लग रहा था कि मैं कुछ कर ना बैठूँ और दीदी को गुस्सा आ गया तो मेरी तो शामत आ जाएगी। उसने नाईटी पहन ली। उसकी नाईटी पारदर्शी थी, जिसमें से उसका सारा जिस्म नज़र आ रहा था।

वह मेरे पास आकर सो गई। हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोए थे। लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे सामने उसका नंगा जिस्म घूम रहा था। और उसके मेरे पास सोने के कारण मेरा तनाव और बढ़ा हुआ था। लेकिन कुछ करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।

आधे घंटे तक तो मैं वैसे ही तड़पता रहा। लेकिन बाद में मैंने सोचा कि ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आने वाला। अगर तूने कुछ नहीं किया तो हाथ से निकल जाएगा। मैंने सोच लिया थोड़ा रिस्क लेने में क्या हर्ज़ है। और मैं थोड़ा सा दीदी की ओर सरक गया।

दीदी मेरी विपरीत दिशा में मुँह करके सोई थी। मैंने मेरा हाथ उनके बदन पर डाला। मेरा हाथ दीदी के पेट पर था। मैंने धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके पेट पर घुमाना चालू किया। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उनकी चूचियों पर रखा। उसकी चूचियाँ काफ़ी बड़ी और नरम थीं।
मैंने उसकी चूचियाँ धीरे-धीरे दबानी चालू कीं। उसने कुछ भी नहीं कहा, ना ही कोई हरक़त की। मेरी हिम्मत काफ़ी बढ़ गई। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ पर दबाया और उसे अपनी ओर खींचा और फिर धीरे-धीरे मैं अपना लंड उसके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार में दबाने लगा। वह मेरी ओर घूम गई। मेरी तो डर के मारे गाँड ही फट गई।

लेकिन वह भी मेरी ओर सरकी, तो मेरा लंड उसकी चूत पर दब रहा था और उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर। मैं समझ गया कि वह सो नहीं रही थी, बस सोने का नाटक कर रही थी और वह भी चुदवाना चाहती है। अब तो मेरे जोश की कोई सीमा ही नहीं थी। मैंने उसे मेरी ओर फिर से खींचा, तो वह मुझसे थोड़ा दूर सरक गई। मैं डर गया, और चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा।

थोड़ी ही देर बाद उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और मसलने लगी। मैं बहुत खुश हुआ।

उसने अपने हाथों से मेरी लुंगी निकाल दी और अण्डरवियर भी, और मेरे लंड को मसलने लगी, फिर उसने मेरे कान में कहा- वीजू, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। तुम्हारे जीजू का तो बहुत छोटा है।’

मैंने भी दीदी की नाईटी निकाल दी और उनको पूरा नंगा कर दिया। फिर मैं उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगा। मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था। वह सिसकियाँ भर रही थी। मैं उसे चूमते-चूमते उसकी चूत तक चला गया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए। उसके मुँह से सीत्कार निकल गई। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डालनी शुरु की, वह अपने चूतड़ उठाकर मुझे प्रतिक्रिया दे रही थी।

मेरा लंड अब लोहे जैसा गरम हो गया था। मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और मैंने लंड उसके मुँह में डाल दिया। वह भी मेरा लंड बड़े मज़े से चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने बाद में अपना लण्ड उसकी दोनों चूचियों के बीच में डाला और उसे आगे-पीछे करने लगा। वाऊ… क्या चूचियाँ थीं उसकी, मैं तो पागल हुआ जा रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने कहा- वीजू, प्लीज़, अब रहा नहीं जाता, लंड मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोदो।

मैं उसके ऊपर फिर से लेट गया और मैंने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर उसकी चूत के ऊपर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

मैंने दीदी से पूछा- दीदी, तुम तो कह रही थी कि जीजू का लण्ड मेरे लण्ड से काफी छोटा है, तो तुम्हारी चूत इतनी ढीली? एक ही झटके में आधा लण्ड अन्दर चला गया।’

इस पर वह मुस्कुराई और बोली- अरे वीजू, तुम्हारे जीजू का लण्ड छोटा तो है, पर मेरी चूत ने अब तक बहुत से लण्ड का पानी चखा है।’

फिर मैंने दूसरा झटका दिया और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। फिर मैंने उसकी चुदाई शुरु कर दी।

वह भी अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी. उसके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, वह कह रही थी- वीजू… चोदोओओओ… और ज़ोर से चोदोओओओओ… अपनी दीदी की चूत आज फाआआआड़ डालो… ओह.. वीजू… डालो और ज़ोर से और अन्दर डालो… बहुत मज़ा आ रहा है।’

उसकी ये बातें सुनकर मेरा जोश और भी बढ़ जाता और मेरी रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी। फिर मैं झड़ गया और वैसे ही उसके बदन पर सो गया और उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा। उस रात मैंने दीदी की ख़ूब चुदाई की। Sex Stories

पहले भाग से आगे : Sex Stories

अंकल उठकर Sex Stories पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।

मौसी मुस्कराई और अंकल से बोली- यह जानी है ! विदेशी हथियार की स्मगलिंग करता है, तुम्हारे साथ धंधा करना चाहता है ! क्यों पसंद है?

मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था। मैं लंगड़ाते हुए चल रही थी। मैंने तीन ग्लास में दारू की बोतल से दारू डाली और एक एक अंकल मौसी और जानी की तरफ बढ़ा दिए। जानी कामुक नज़रों से मुझे देखे जा रहा था। उसने मेरे चूतड़ों पर दो तीन बार हाथ भी फेर दिया था। मौसी ने हम दोनों रंडियों को आँख मारी। मौसी ने मेरे को जानी की सेवा करने का इशारा किया। मोंटी अंकल नंगे थे ही ! शोभा मोंटी साहब का लंड चूसने लगी। मैंने पैंट खोल कर जानी का लंड निकाल लिया और चूसने लगी। जानी और मोंटी कुछ कोड भाषा में बातें करने लगे। कुछ देर बाद दोनों काफी खुश नज़र आ रहे थे, उनकी धंधे की बातें ख़त्म हो गई थीं जानी ने एक पांच की गद्दी मौसी को दी और बोला- मौसी तुम्हारा इनाम।

दोनों के लंड चूसने से खड़े हो गए थे।

मोंटी और जानी में कुछ इशारों इशारों में बात हुई। अंकल ने शोभा को उठा दिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं कुतिया बनी बिस्तर पर बैठे जानी का लंड चूस रही थी और अंकल मेरी पीछे से चूत मार रहे थे। मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, मौसी मुस्करा रही थी और चिल्ला रही थी- अंकल, साली को आज इतना चोदना कि ये दस दस लंड आगे से एक रात में खा सके। टॉप की रंडी बनाना है मुझे इसको। कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया। अंकल का लंड लोहे की राड की तरह खड़ा हुआ था। जानी ने भी अपना लंड निकाल लिया था। जानी ने मुझे उठाया और पलंग पर उल्टा करके मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया अंकल ने मेरी गांड पहले ही फाड़ रखी थी इसलिए एक झटके में जानी का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था।

मैं चिल्ला रही थी, जानी ने मेरी गांड में जोर के 10-15 शोट मारे उसके बाद जानी नीचे था और मैं उसके ऊपर सीधी लेटी थी उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा रखा था। उसने मेरी टाँगें फ़ैला दी और नीचे से धीरे धीरे गांड में धक्के मारने लगा। अंकल अपना लंड पकड़े सामने मुस्करा रहे थे। उन्होंने मेरी चौड़ी टांगों के बीच अपना सुपारा रख दिया और मेरी चूत में ऊपर से अपना लंड पेल दिया। अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड घुसे हुए थे, मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी।

मौसी ताली बजा रही थी और बोल रही थी- अंकल, मज़ा आ गया ! वाकई साली कुतिया लग रही है ! चोद साली को ! याद रखेगी कि मौसी के कोठे पर चुदी थी !

मेरी गाड़ी बनी हुई थी, मेरे दोनों छेदों में लंड सरपट दौड़ रहे थे। अब मुझे पता चल रहा था कि कोठे की चुदाई क्या होती है। मैं अब पूरी तरह से कोठे की कुतिया बनी हुई थी। दस मिनट दोनों ने एक साथ मेरी चूत और गांड बजाई उसके बाद जानी ने मेरी चूत में और अंकल ने मेरी गांड में लंड घुसा कर मुझे सैंडविच बनाया और दुबारा मुझे दस मिनट तक चोदा। मौसी मेरी चुदाई का आनंद सिगरेट पीते हुए ले रही थी। इसके बाद दोनों ने एक एक करके पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं बिस्तर पर लुढ़क गई थी, मेरी चूत अब बुरी तरह से सूज रही थी और गांड भी बहुत दुःख रही थी।

रात के चार बज़ रहे थे। मौसी, जानी और मोंटी दारू पीने लगे, थोड़ी देर बाद दोनों नशे में झूम रहे थे। जानी मौसी से बोला- मौसी, साली की चूत कितनी सुंदर है, सूजी हुई तो और सुंदर लग रही है, एक चुम्मा लेकर आता हूँ !

जानी उठा और उसने मेरी चूत पे एक चुम्मा लिया और बोला- मोंटी साले, चुम्मा ले ! क्या स्वाद आता है !

मोंटी ने भी उठ कर एक चुम्मा मेरी चूत पर लिया। दोनों फिर मौसी के पास जाकर बैठ गए, इस तरह 10-12 बार उन्होंने कभी मेरी चूत पर कभी चुचकों पर चुम्मे लिए। कुछ देर बाद दोनों बोले- मौसी बजा तो बहुत लिया पर बजते हुए नहीं देखा। कुछ ब्लू सीन बनवाओ और जानी ने एक 100 की गडी मौसी के हाथ में दे दी। अंकल और जानी मेरे गले में हाथ डालकर बिस्तर पर बैठ गए। मौसी ने सोफा बिस्तर के पास खींच लिया। दोनों मेरी एक एक चूची पकड़े हुए थे और मसल रहे थे।

मौसी ने कमरे की घंटी बजा दी और राजू को कुछ कहा। थोड़ी देर में राजू, कालू, भूरा और टीनू कमरे में थे। मौसी उठी और शोभा से बोली- चल नंगी हो ! तेरी चुदाई का मुजरा कराती हूँ !

थोड़ी देर में शोभा पूरी नंगी थी।

मौसी गुंडों से बोली- अब तुम सब सोफे पर इसकी गाड़ी चलाओ !

राजू सोफे पर जाकर बैठ गया। उसका लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हुआ था, शोभा उसके लौड़े के ऊपर जाकर बैठ गई और पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लिया। राजू सोफे पर उछल उछल कर उसकी चूत चोदने लगा और उसकी गांड का छेद दोनों ऊँगली से चौड़ा कर दिया, जिसमें पीछे से भूरा ने अपना लंड घुसा दिया।

अब शोभा को राजू और भूरा साथ साथ चोद रहे थे। शोभा की ऊहं आह से कमरा गूंज रहा। शोभा पुरानी रांड थी, मज़े ले ले कर चुद रही थी और ऊहं आह की आवाज़ निकाल रही थी। शोभा का मुँह सोफे से बाहर निकल रहा था। टीनू ने पीछे जाकर अपना लौड़ा शोभा के मुँह में डाल दिया और उसे चुसवाने लगा। शोभा की चूत गांड और मुँह में धक्के जोरों से चल रहे थे। कालू अपना लंड निकाल कर सहला रहा था।मौसी ने शोभा का एक हाथ खींच कर कालू का लंड शोभा के हाथ में पकड़ा दिया दिया। चार चार लौड़ों से शोभा खेल रही थी। जानी ने मुझे पलंग पर अपने लौड़े पर बैठा लिया। अंकल ने मेरे हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा दिया। मैं बेहोशी की सी हालत में थी और अंकल का लौड़ा धीरे धीरे मसल रही थी। अंकल ने पलंग पर खड़े होकर मेरे बाल जोर से खींच डाले और चिल्लाये भोसड़ी की, तुझे बड़ी नींद आ रही है? साली अभी तुझे भी इस रांड की जगह बैठाता हूँ ! ले पहले मेरा लौड़ा चूस।

उन्होंने मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूंस दिया। शोभा की गाड़ी जोरों से चल रही थी, गुंडे बार बार जगह बदल कर शोभा को चोद रहे थे। शोभा की चुदाई देखकर अंकल और जानी गरम हो रहे थे, उनके लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। कमरे की सारी लाइट जल रही थी और कमरा रौशनी से भरा हुआ था।

थोड़ी देर बाद अंकल और जानी ने अपने रस एक एक करके मेरे मुँह में उतार दिए और नशे में झूमते हुए कोठे से बाहर चले गए।

सुबह के पाँच बज़ रहे थे लेकिन मेरी तो अभी गाड़ी और बजनी थी। मौसी जाते जाते राजू से बोली- मैं तो सोने जा रही हूँ राजू, कालू को बुला ला और इसे बजाना हो तो तुम दोनों बजा लो ! जब से यह नई रांड आई है अपने लंड सहला रहे हो। जितना मन हो उतना चोदो कुतिया को, रांड तो अब यह बन ही गई है लेकिन नीचे मेरे पास वाले कमरे में चोदना।

राजू मुझे गोद में उठाकर नीचे कमरे में ले आया, जहाँ जमीन पर पुराने गद्दे पड़े हुए थे। थोड़ी देर में कालू भी उधर आ गया, राजू ने पीछे से मेरी फटी गांड में लंड घुसा दिया और कालू ने आगे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। मैं अधमरी हालत में दोनों से चुदने लगी सुबह सात बजे तक दोनों ने मुझे बुरी तरह से नोचा और चोदा, उसके बाद मैं गहरी नींद में सो गई।

अगले दिन रात को नौ बजे मेरे चूतड़ों पर मौसी ने जोर से हाथ मारा और बोली- रंडी रानी ! उठ जाओ और कितनी देर तक लेटोगी।

मैं घबरा कर उठ गई। मौसी बोली- थोड़े कपड़े पहन लो और खाना खा लो।

मुझसे उठा नहीं जा रहा था, किसी तरह मैं उठी और मौसी से बोली- मौसी, मुझे वापस भेज दो !

मौसी मुस्कराई और बोली- वापस जाकर क्या करोगी? अभी तो तुम चल भी नहीं पा रही हो, ऊपर से तुम्हारी चूत और सूज रही है ! थोड़ी ठीक हो जाओ तब जाना। चल अच्छा फ्रेश हो, फिर बात करती हूँ।

किसी तरह मैं उठी और खाना खाया। उसके बाद दुबारा सो गई। मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। खा पीकर मुझे नींद आ गई। अगले दिन सुबह दस बजे मौसी आई उनके साथ छोटा खलील भी था। मौसी बोली- क्यों, बॉम्बे नहीं जाना है। ये छोटा खलील बॉम्बे जा रहा इसकी गाड़ी में चली जा। तुझे अपनी चंपा बार में नचवाएगा। नाच भी करियो और धंधा भी बहुत मज़ा आएगा। साले ने तुझे 5 लाख में खरीदा है।

छोटा खलील मुस्करा रहा था, मौसी से बोला- मौसी, दो घंटे साली को चोद लूँ फिर डालकर ले जाऊंगा।

मौसी मुस्कराई और बोली- लोंडी अब तेरी है दो क्या दस घंटे चोद ! तेरे गुरु मोंटी ने कल इसकी गांड और चूत दोनों सुजा दी हैं।

खलील मुस्कराया और उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। खलील ने दो बार मेरी चूत और दो बार मेरी गांड मारी। साथ ही साथ बोला- हरामजादी मौसी ने भी एक दिन में अच्छी खासी चूत का भोंसड़ा बना दिया है, डांस शो में कितना मज़ा आ रहा था तेरी मारने में और आज तेरी भोंसड़ी बनी हुई है।

बारह बजे तक उसने चोद चोद कर मुझे अधमरा कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे गाड़ी में बांधकर डाला और मुंबई लेकर चल गया।

खलील ने मुझे चंपा बार में नाचने के लिए छोड़ दिया। मजबूर होकर मुझे यहाँ नाचना पड़ा। रात बारह बजे तक नाचती थी। उसके बाद एक-एक घंटे की मेरी चार बुकिंग होती थीं और सुबह छः बजे तक मैं चुदवाई जाती थी।

चार दिन बाद खलील और उसका एक साथी मुझे और दो लड़कियों को मस्ती के लिए खंडाला ले जा रहे थे, रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सब लोग दारू पीने लगे और हम लड़कियों से अपने लंड चुसवाने लगे। थोड़ी देर बाद दूसरी पार्टी के लोग आ गये और गोलीबारी शुरू हो गई। खलील और उसके साथी को गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गए। मैं गाडी के नीचे छुप गई। मेरे साथ वाली लड़की को दूसरी पार्टी के लोग उठा के ले गए। थोड़ी देर बाद मैं बाहर निकल कर आ गई और बस पकड़ के वापस अपने गाँव चली गई। आज मैं एक खुशहाल जिन्दगी जी रही हूँ। मेरी आप सबसे यह प्रार्थना है

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