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Hindi sex stories के पाठकों को मेरा नस्कार। कैसे हैं आप लोग?
मुझे आप लोगों के बहुत सारे मेल मिले जिनमें मेरी कहानियों की तरीफ़ थी। मैं आप सबका खुले दिल और खुली चूत के साथ शुक्रिया अदा करती हूँ। आप सबको पता होना चाहीये कि आज मैंने अपनी चूत के बाल साफ़ किये है और अब फ़िर से मेरी चूत तनतना गई है किसी कोरी कमसिन लड़की की तरह।
हाँ तो दोस्तो, अब मैं अपनी कहानी शुरु करती हूँ जिसमें एक बार फ़िर से अब्बु और भैया ने मुझे चोदा।
उस दिन हुआ यह था कि मैं बहुत चुदासी थी और अम्मी नानी के घर गई हुई थी। यह तो आप लोग जानते ही है कि मेरी पहली चुदाई भी अब्बु ने ही की थी और फ़िर अम्मी ने भैया से भी चुदवाया था और अब वो लोग अकसर मुझे चोदा करते थे।
मगर इधर बहुत दिन से अब्बु अम्मी की फ़ैली हुई चूत में मस्त थे और भैया ने कोई दूसरी गर्ल फ़्रेन्ड फ़ंसा ली थी और मुझ पर ध्यान देना छोड़ ही दिया था।तब आखिर अम्मी के बाहर जाते ही मैंने सबसे पहले अपनी झांटे बनाई और रात को अब्बु के कमरे में गई।
अब्बु कोई मूवी देख रहे थे और मुझे देख कर बोले- बेटी, क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई?
तब मैंने कहा- आप तो अम्मी जान की चूत में ही फ़ंसे रहते हैं अब आपको मेरा ज़रा भी खयाल नहीं ! आपने मुझे कितने दिनों से नहीं चोदा है।
तब अब्बु ने दुलार जताते हुए कहा- ऊऊओह्ह ह्ह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा, आज तुझे फिर से चोदता हूँ !
और यह कह कर उन्होंने डीवीडी बदल दी।
अब उसमें एक ब्ल्यू फ़िल्म चलने लगी। जिसमें एक छोटी सी लड़की को पाँच आदमी चोद रहे थे। जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ गई और मैंने अब्बु से कहा- अब्बा यह बच्ची इन पांचों को एक साथ झेल रही है और उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं होगी।
तब अब्बु बोले- मेरी बच्ची, ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते हैं। साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कि कैसे मज़े ले लेकर पांच पांच लण्डों का मज़ा एक साथ ले रही है। जबकि इसमें एक इसका बाप और एक भैया के अलावा तीन बाहर वाले हैं।
अब ये सब देख कर भला मेरी चूत में खाज़ क्यूं नहीं उठेगी।
तब मैंने अब्बु से कहा- अब्बु, मैं तो आप और भैया से ही चुदवाकर पनाह मांग लेती हूँ।
अब्बु ने कहा- जा बगल के कमरे से इसलाम को बुला ला। साला लण्ड हाथ में पकड़े सो रहा होगा।
तब मैं भैया के कमरे की तरफ़ बढी और देखा तो सच में वो अपने लण्ड को हाथ में लेकर सड़का मार रहा था।
मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली- हाय भैया, क्या गज़ब कर रहे हो। भला घर में इतनी खूबसूरत बहन होते हुए तुम्हें यह सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पर !
और मैंने झट से उनका लण्ड अपने कोमल हाथ में ले लिया, बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी जल्दी हाथ आगे पीछे करने लगी और फ़िर झट से मुँह में लेकर चूसने लगी और तब भैया का लण्ड पूरी औकात में आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए जोर जोर से धक्का मारने लगे और फ़िर जल्दी ही उनका पानी मेरे मुँह में गिरा जिसे मैं चपर चपर करते हुए चाट गई और भैया से बोली- चलो अब्बु बुला रहे हैं, आज फ़िर से तुम दोनों मुझे चोदकर मज़ा दो।
और भैया का लण्ड पकड़ कर अब्बु के कमरे में ले आई और भैया को देखते ही अब्बु बोले- मैंने कहा था साला मुठ मार रहा होगा।
तब मैंने कहा- अब्बु, आप बहुत तजुरबेदार हैं, सच में भैया सड़का मार रहे थे।
और फ़िर मैंने अब्बु का लण्ड अपने मुँह में ले लिया और भैया पीछे से मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते हुए अन्दर डालने की कोशिश करने लगे।
तब मैंने कहा- अब्बु जी, मैं भी ब्ल्यू फ़िल्म वाली लड़की की तरह पांच जनों से एक साथ ही चुदाना चाहती हूँ।
अब्बा ने कहा- बेटी, तू नहीं झेल पायेगी एक साथ पांच पांच को।
मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासी हो ही चुकी थी, मैंने कहा- कान खोल के सुन लो आप दोनो को मुझे पांच जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है। अगर कल आप लोग ने मुझे पांच जन से नहीं चुदवाया तो बहुत बुरा होगा।
तब अब्बु ने कहा- अच्छा अच्छा मेरी रानी बेटी, मैं तो तेरे भले के लिये ही कह रहा था। अगर तेरी चूत फ़ट गई तो परेशानी तो हमीं लोगो को होगी। मगर जब तू नहीं मान रही तो मेरे बला से। अब चल आज तो हम दोनों से चुदवा ले !
यह कह कर उन्होंने फ़िर से अपना मूसल जैसा लण्ड मेरे मुँह में जोरदार धक्के के साथ अन्दर धकेल दिया और तभी भैया ने पीछे से मेरी गाण्ड फ़ैलाकर इतनी जोर से धक्का मारा कि मुझे नानी याद आ गई ऊऊउईई माआआ मर गई आआह्हहह भैया जरा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद दिला रहा है।
तब अब्बु ने कहा- बेटी, चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना ले।
तब मैंने कहा- क्यूं?
तब अब्बु बोले- तेरी नानी की चूत मैंने मारी थी और कई साल तक मैं उसकी चूत चोदता रहा था।
तब मेरे साथ साथ भैया का मुँह भी खुला रह गया, तब भैया ने कहा- अब्बु, क्या आपने नानी को चोदा है?
अब्बु ने कहा- हां यार, साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी। तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी की कम उमर में शादी हुई थी। जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी अम्मी 18 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 34 साल की थी। मगर मेरे ससुर की उमर करीब 42 साल थी, वो तुम्हारी नानी को खुश भी नहीं कर पाता था। जाने भी दो इन बातों को, अभी तो फ़िलहाल चुदाई का मज़ा लो। उसकी चुदाई के बारे में फ़िर कभी बताऊँगा।
और तब भैया पीछे से मेरी गाण्ड मार रहे थे और अब्बु आगे से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धक्के लगा रहे थे।
अब मुझे भी मस्ती आने लगी और मैं अपने मुँह और गाण्ड को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब भैया झड़ गये थे। मगर अब्बु जी अभी भी नहीं झड़े थे और उन्होंने मुझे बेड पर खड़ा होने को कहा।
मैं खड़ी हो गई और तब अब्बु ने मेरे दोनों पैर अपने कन्धे के दायें बायें किए और मेरी चूत को मुँह में भर कर चूसने लगे। मैं बुरी तरह तप रही थी और अपने अब्बु का मुँह जोर जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी। तब ही अब्बु खड़े होने की कोशिश करने लगे और मेरा बैलेन्स बिगड़ने लग।
तब मैंने घबरा कर कहा- आआअह्हह अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाऊँगी !
मगर अब्बु नहीं माने और वो मुझे अपने कंधे पर बैठा कर खड़े हो गये। अब मैं अपनी दोनों टांगें उनकी गरदन में कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके मुँह से दबाते हुए उनके सिर को भी जोर जोर से दबा रही थी और भैया आंख फ़ाड़े हुए अब्बु के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमें भी बहुत आ रहा था।
इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद ही मैं ऊऊओहह्ह ऊओह्ह आह्हह आआअह्ह करते हुए झड़ गई और अब्बु का रस भी नीचे से पिचकारी की तरह बहने लगा और तब अब्बु मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लेटकर तुरंत अपने झड़े हुए लण्ड को मेरी दोनों चूचियों के बीच में रगड़ने लगे और मैं उनके नोक की तरह लण्ड की टोपी को मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी। पर अब्बु जल्दी जल्दी आगे पीछे कर रहे थे।
तब मैंने कहा- अब्बु, अपना लण्ड मेरे मुँह में दीजिये। आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है।
तब अब्बु ने अपने लण्ड को दोनों चूची के बीच से हटा कर मेरे मुँह में डाल दिया और मेरी चूची दबाने लगे और इस तरह से उनके लण्ड से थोड़ा सा रस और निकला, जिसे मैं चाट गई और फ़िर अब्बु ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में ठूंस दिया और उस दिन अब्बु और भैया दोनो ने मेरी गाण्ड ही मारी थी। मेरी बुर के साथ कोई हरकत नहीं की थी और फ़िर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गाण्ड एक एक बार और मारी अब मेरी गाण्ड फ़ड़फ़ड़ा रही थी।
सुबह अब्बु ने कहा- क्यों रानी बेटी, क्या खयाल है? क्या अब भी पांच जन से चुदवाओगी?
मैंने गुस्से से कहा- साला बेटीचोद भोसड़ी वाले, कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना है।
तब अब्बु मुस्कुरा कर बोले- कोई बात नहीं, आज रात तैयार रहना, आज पांच लोगों को लेकर आऊँगा !
और फ़िर मुझे अब्बु से नानी की चुदाई की बात भी जाननी थी। आज रात मुझे पांच जन से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर मुझे अफ़सोस है कि अन्तर्वासना बहुत सी पाठिकाओं को शायद आज भी कोई लण्ड नसीब नहीं हुआ होगा और उन्हें मोमबत्ती से काम चलाना पड़ता होगा क्योंकि हर लड़की मेरी तरह बाप और भैया से नहीं चुदवा सकती।
खैर मैं पांच जन की Hindi sex stories आज रात चुदाने के बाद अगली बार आप सबको बताऊँगी। तब तक सभी लड़कियाँ मोमबत्ती और लड़के जो भी चीज़ उनको आसान लगे उससे काम चला लेवें।
मैं और कोमल एक ही ऑफ़िस में Hindi Sex Stories काम करते थे। कोमल ने कस्ट्मर केयर में अभी अभी नया ही जॉइन किया था और मैं अकाऊँटेंट था। वो एक सरल स्वभाव की चुप सी रहने वाली लड़की थी। ऑफ़िस में किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी। ऑफ़िस में वेतन का भुगतान मैं ही करता था इसलिये हमारी बात कभी कभी हो जाया करती थी।
धीरे धीरे कोमल मुझसे थोड़ा खुलने लगी और हम दोनों लन्च एक साथ करने लगे। लेकिन अभी वो चुप चुप सी ही रहती थी, मैं जब भी थोड़ा सा मजाक करता तो वो सिर्फ़ हल्का सा मुस्कुरा देती थी बस।
मुझे लगा कि ज़रूर उसके मन में कुछ बात है जो वो किसी को नहीं बताती।
खैर समय बीतता चला गया।
एक दिन वो मेरे पास आई और कहने लगी कि उसको कुछ रुपयों की ज़रूरत है इसलिये मैं उसे कुछ एडवांस दे दूँ और उसके वेतन में से काट लूँ। मैंने उसे एडवांस दे दिया। अगले दिन वो ऑफ़िस नहीं आई, मैंने भी सोचा कि शायद घर में कुछ काम होगा, लेकिन उसके दो दिन बाद भी वो ऑफ़िस नहीं आई, मैंने उसके घर पर फोन किया लेकिन वहाँ किसी ने भी फ़ोन नहीं उठाया।
शाम को मैं अपनी बाइक से घर जा रहा था कि मुझे बस स्टाप पर कमिनी दिखाई दी, मैंने बाइक रोकी, कोमल ने मुझे देखा और मेरे पास आ गई।
मैंने उससे पूछा कि तुम ऑफ़िस क्यों नहीं आ रही?
उसने कहा- घर पर कुछ काम था।
मैंने उसको कहा- कहाँ जाना है। चलो मैं छोड़ देता हूँ।
वो बाइक पर बैठ गई। रास्ते में मौसम कुछ खराब होने लगा तो मैंने बाइक एक रेस्तराँ के पास रोक दी और कहा- जब तक मौसम थोड़ा ठीक नहीं होता, तब तक रेस्तराँ में एक एक कप कॉफ़ी पी लेते हैं!
कॉफ़ी पीते पीते मैंने उसको पूछा- क्या बात है?
उसने कहा- कुछ नहीं!
लेकिन मेरे थोड़ा कुरेदने पर वो रो पड़ी और बात बताने लगी। उसकी बात सुन कर मेरी आँखें भर आई, उसने बताया कि वो एक शादी शुदा औरत है और एक बच्ची की माँ है, शादी के एक साल बाद ही उसके पति की मौत हो गई। यह बच्ची पति की मौत के पाँच महीने बाद हुई। पति की मौत के बाद उसके ससुराल वाले उसको मारने पीटने लगे और उसकी बच्ची को भी किसी और की बताने लगे। एक बार उसके देवर ने भी उसके साथ देह शोषण करने की कोशिश की। तंग आकर वो ससुराल से अपने घर आ गई और अपने माँ बाप के साथ रहने लगी।
उसके पिता भी यह सदमा सह नहीं पाये और उनकी भी मौत हो गई। अब वो अपनी माँ और बेटी के साथ ही रहती है, इस समय उसकी माँ बीमार है और अस्पताल में है इसीलिये उसने एडवांस लिया था।
उसकी दर्द भरी दास्तान सुन कर मैं भी काफ़ी भावुक हो गया था। मौसम अब ठीक हो गया था इस लिये हम दोनों कॉफ़ी पी कर वहाँ से चल दिये। रास्ते में मैंने कोमल को अस्पताल छोडा, उसकी माँ के भी हालचाल पूछा और घर पर आ गया।
उस रात मैं सो नहीं सका और सारी रात कोमल और उसके परिवार के बारे में सोचता रहा।
अगले दिन मैं ऑफ़िस पहुँचा, कोमल आज ऑफ़िस आई हुई थी, मैंने उसे अपने केबिन में बुलाया और उसकी माँ का हाल पूछा।
उसने कहा कि डाक्टर ने अभी कुछ दिन अस्पताल में रखने के लिये बोला है।
मैंने उसको कहा कि अगर रुपयों की जरूरत हो तो मुझे बोल देना। शाम को मैं उसे अपनी बाइक पर ही अस्पताल ले गया, वहाँ डाक्टर ने कुछ दवाइयाँ मँगवाई जो मैंने अपने पैसों से ही खरीद दी। बाद में मैं ही उसे घर पर छोड़ने गया तो काफ़ी रात हो चुकी थी।
उसने मुझे कहा- आज रात को आप यहीं पर रुक जायें।
मैं भी घर पर अकेला रहता था तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी।
उसने मुझे कहा- मैं खाना बनाती हूँ, तब तक आप फ़्रेश हो जायें।
मैं फ़्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि कोमल ने भी अपने कपड़े बदल कर गाउन पहन लिया था। हम दोनों ने खाना खाया, खाना खाने के बाद मैं टीवी देखने लगा, कोमल भी अपनी बेटी को सुला कर मेरे पास ही बैठ कर टीवी देखने लगी। टीवी देखते देखते कमिनी की आँख लग गई और वो मेरे कन्धे पर सर रख कर सो गई, धीरे धीरे उसका सर फ़िसल कर मेरी जांघों पर आ गया और उसका मुँह मेरे लन्ड के ऊपर था।
धीरे धीरे मेरा लन्ड खड़ा होने लगा मैं आपे से बाहर होने लगा था, लेकिन मैंने अपने आपको कन्ट्रोल किया, मेरे हाथ कोमल की कमर पर आ गये, शायद कोमल को भी मेरे लन्ड के कडकपन का अह्सास हो गया था लेकिन उसने अपना मुँह मेरे लन्ड पर से नहीं हटाया और ऊपर से ही मेरे लन्ड पर अपने होंठों को फ़ेरने लगी शायद उसके मन में भी सालों से सोई हुई अन्तर्वासना जाग गई थी मेरे भी हाथ उसके जिस्म पर चलने लगे।
उसने करवट ली और पीठ के बल मेरी जांघों पर सर रख कर लेट गई और वासना भरी आँखों से मेरी तरफ़ देखने लगी। मैंने भी उसकी आँखो का इशारा पा कर उसके जलते हुए होन्ठों पर अपने होंठ रख दिये और उन्हें चूसने लगा और अपने हाथों से उसके स्तनों को दबाने लगा। उसके स्तन एकदम टाइट थे, शायद काफ़ी समय से उसके वक्ष किसी ने दबाये नहीं थे। मैंने धीरे धीरे उसके गाउन को ऊपर उठाया और उसकी टांगों पर हाथ फ़ेरने लगा।
क्या गोरी टांगें थी उसकी!
कोमल भी अब उत्तेजना में भर गई थी और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। मैंने उसे खड़ा किया और उसका गाउन उतार दिया।
उफ़!! क्या जिस्म था! भगवान ने शायद उसको फ़ुर्सत से तराशा था। ब्रा और पेंटी में वो एकदम एश्वर्या राय लग रही थी। उसने मेरे सारे कपड़े उतारे और मेरे लन्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी उसका सर दबा कर अपना पूरा लन्ड उसके मुँह में दे दिया। वो अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को भींचने लगी।
उत्तेजना के कारण मेरा वीर्य उसके मुँह में ही झड़ गया। अब मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बैडरूम में ले गया। बैड पर लिटा कर मैंने उसकी ब्रा और पेंटी उतार दी।
उफ़! क्या चूत थी उसकी! बिना बालों की और एक दम गुलाबी!
मैं उसकी चूत को चाटने लगा और अपने दोनों हाथों से उसके स्तन दबाने लगा। उसने मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया और कहने लगी- और जोर से चाटो!
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दी और अन्दर ही गोलाई में घुमाने लगा, जिससे वो एकदम झड़ गई।
एक बार फ़िर से वो मेरे लन्ड को चूसने लगी जिससे मेरा लन्ड फ़िर से खड़ा हो गया। अब हम दोनों 69 की पोजिशन में आ गये और वो मेरे लन्ड को और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। क्या गोल और भारी चूतड़ थे उसके! एक दम गोरे!
काफ़ी देर तक चाटने के बाद मैंने उसको उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और अपना लन्ड उसकी चूत के दरवाजे रख कर धीरे से एक धक्का दिया। काफ़ी दिनों से उसकी चुदाई नहीं हुई थी इसलिये उसकी चूत काफ़ी टाइट थी। मैंने धक्का दिया तो मेरा लन्ड उसकी चूत में थोड़ा सा घुस गया। उसको भी काफ़ी दर्द हुआ लेकिन उसने कहा- निकालना मत, पूरा घुसा दो।
मैंने जोर से एक धक्का लगाया और अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में घुसा दिया। कोमल को काफ़ी दर्द हुआ लेकिन उसने उस दर्द को अपने दांतों से अपने होंठों को दबा कर सह लिया। उसकी आँखों से आन्सू निकलने लगे। धीरे धीरे उसको भी मजा आने लगा और वो भी अपने चूतड़ों को उठा उठा कर मेरा लन्ड अपनी चूत के अन्दर लेने लगी। उसने अपनी दोनों टांगों से मुझे कस लिया और अपने हाथों से मेरे चूतड़ों को खींचने लगी। पूरे कमरे में धप-धप, घचा घच की आवाजें आ रही थी।
मेरे भी धक्के बढ़ते जा रहे थे और मैं पागलों की तरह उसको पूरी जान लगा कर उसको चोद रहा था, उसके बूब्स को चूस रहा था। कोमल के मुँह से सी… सी… हाय… आह… की आवाजें निकल रही थी।
कुछ देर उसे चोदने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर लिया और नीचे से अपना लन्ड उसकी चूत में घुसा दिया थोड़े से दर्द के साथ कोमल ने मेरा लन्ड अपनी चूत में ले लिया और ऊपर से धक्के लगाने लगी। मैं उसके चूतड़ों को अपने हाथों से भींचने लगा और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। उत्तेजना के कारण उसने अपने नाखून मेरे सीने पर गड़ा दिये। हम दोनों की आँखों में वासना के लाल लाल डोरे नज़र आ रहे थे।
कोमल कहने लगी- समीर मैं बहुत सालों से प्यासी हूँ, आज मेरी सारी प्यास बुझा दो!
हम दोनों के मुँह से सी…सी… आह… आह… की आवाजें निकल रही थी। कोमल जोर से आह… आह… की आवाज करती हुई झड़ गई लेकिन मेरा जोश कम नहीं हुआ था और मैं उसे और चोदना चाहता था।
मैंने उसे अपने नीचे लिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। करीब दस मिनट लगातार धक्के लगाने के बाद मेरा लन्ड टाइट होने लगा। मैंने कोमल को कहा- मैं अब झडने वाला हूँ! उसने कहा- चूत में ही झड़ जाओ!
मेरे धक्के तेज होने लगे और मैं झड़ने लगा और अपना सारा वीर्य कोमल की चूत में छोड़ दिया। कोमल के चेहरे पर सन्तुष्टि झलक रही थी। उसने जोर से मेरे होंठों को चूमा और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी। मैं भी उसकी जीभ को चूसने लगा और वो मेरी जीभ को चूसने लगी। लम्बी चुदाई के बाद हम दोनों काफ़ी थक चुके थे इसलिये एक दूसरे के आगोश में नंगे ही सो गये।
अगले दिन हम सो कर उठे तो सुबह के पांच बज चुके थे। कोमल की बेटी अभी सो रही थी। कोमल ने चाय के लिये पूछा तो मैंने हाँ कर दी। कोमल नंगे ही रसोई घर में चली गई। उसके ऊपर नीचे उठते हुए चूतड़ों ने मेरे लन्ड को फिर खडा कर दिया, मैं पीछे से रसोई में गया और कोमल को पीछे से पकड़ लिया। मैंने अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मेरा लन्ड उसकी गान्ड की घाटियों में सैर करने लगा। मैंने उसकी चूत को धीरे से दबा दिया तो उसके मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई।
मैं नीचे बैठ गया और उसके चूतड़ों पर धीरे धीरे अपने दाँत गड़ाने लगा। कोमल भी अब उत्तेजित हो चुकी थी।
मैं अपनी उंगली से उसकी गान्ड के छेद को सहलाने लगा तो कोमल बोली- साहब के ख्याल नेक तो हैं?
मैंने कहा- कोमल तुम्हारी गान्ड मुझे बहुत अच्छी लगती है और मुझे आज तुम्हारी गान्ड भी मारनी है!
कोमल हँस पड़ी और बोली- समीर मैंने अपना सारा शरीर तुम्हें सौंप दिया है तो ये गान्ड भी तुम्हारी है!
ऐसा कह कर कोमल आगे की तरफ़ झुक गई उसके गोल गोल चूतड मेरी तरफ़ उभर गये और चूत और गान्ड के छेद बाहर झांकने लगे। मैंने उसकी गान्ड के छेद पर अपना थूक लगाया और लन्ड का टोपा उस पर रखा तो कोमल ने कहा- समीर, मैंने अभी तक गान्ड नहीं मरवाई है, ज़रा धीरे धीरे करना!
मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लन्ड का टोपा उसके अन्दर घुस गया। कोमल ने हल्की सी सिसकारी भरी। मैंने फिर से थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाया तो मेरा आधा लन्ड उसकी गान्ड में घुस गया। कोमल बोली- धीरे… समीर…!!
मैं थोड़ा रुक गया। जब कोमल थोड़ी सामान्य हुई तो मैंने अचानक ज़ोर से धक्का लगाया, जिससे मेरा सारा लन्ड कोमल की गान्ड में समां गया। कोमल इस धक्के के लिये तैयार नहीं थी, उसके मुँह से ज़ोर से आवाज़ निकली जिसे मैंने उसके मुँह पर हाथ रख कर दबा दिया।
थोड़ी देर बाद कोमल सामान्य हुई तो मैंने धक्के लगाने शुरु किये। अब कोमल को भी मजा आने लगा था और अब वो भी साथ देने लगी और अपने चूतड़ों को पीछे की तरफ़ धकलने लगी। मैंने भी उसकी चूचियों को पकड़ा और तेजी से धक्के लगाने लगा। मैंने उसकी एक टांग को रसोई की स्लैब रखा जिससे उसकी गान्ड का छेद थोड़ा खुल गया। अब मेरे धक्को में काफ़ी तेजी आ गई थी और मैं पागलों की तरह उसकी गान्ड को चोद रहा था।
कोमल के मुँह से भी कामुक आवाज़ें निकल रही थी जो मेरी वासना को और भड़का रही थी मेरा लन्ड एक दम टाइट हो चुका था और कोमल की गान्ड का बाजा बजा रहा था। मेरी जांघ कोमल के चूतड़ों से टकरा कर रसोई के अन्दर तबला बजा रही थी।
आह… आह… सी… सी… की आवाजों से पूरी रसोई गूँज रही थी।
कोमल… मेरी जान… कहते हुए मैं उसकी गान्ड में ही झड़ गया मेरे लन्ड के लावे ने कोमल की गान्ड की बन्जर ज़मीन को फिर से हरा भरा कर दिया। कोमल की गान्ड मारने के बाद मुझे भी अजीब सी सन्तुष्टि मिल रही थी और मैं एक दम हल्का महसूस कर रहा था।
उसके बाद हमने चाय पी और अपने अपने कपड़े पहन लिये। तब तक कोमल की बेटी भी उठ चुकी थी, कोमल ने उसको स्कूल के लिये तैयार किया और घर के बाहर उसको स्कूल बस में बैठा कर वापस आ गई। मैंने कोमल से कहा- अब हम भी तैयार हो जाते है, मैं तुम्हें अस्पताल छोड़ते हुए ऑफ़िस चला जाउँगा।
कोमल अपने कपड़े ले कर बाथरूम की तरफ़ चल दी। बाथरूम में जा कर उसने अपने कपड़े उतार दिये और नंगी हो गई। उसने बाथरूम का दरवाज़ा बन्द नहीं किया और मेरे सामने ही नहाने लगी। उसको नहाते हुए देख कर मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और मैं भी अपने कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया। कोमल मुझे देख कर मुस्कुरा दी, शायद वो भी यही चाहती थी।
शावर के नीचे हम दोनों नहाने लगे। धीरे धीरे हम दोनों के हाथ एक दूसरे के जिस्मों पर चलने लगे और आग एक बार फिर भड़क गई। मैं कोमल की चूचियों को चूसने लगा और उसके चूतड़ों को भींचने लगा। कोमल के हाथ भी मेरी गान्ड पर चलने लगे। अब उसने मेरा लन्ड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। ऊपर से पानी हमारे जिस्मों पर गिर रहा था जिस के कारण हमारी वासना और भड़क रही थी। कोमल मेरे लन्ड को मुँह में भर कर जबर्दस्त तरीके से चूस रही थी, उसकी जीभ का मेरे लन्ड के टोपे पर घर्षण मुझे अजीब सी उत्तेजना दे रहा था।
अब हम 69 की पोजीशन में आ गये और एक दूसरे को चूसने लगे। मैंने कोमल की गान्ड में अपनी उन्गली दे दी और उसकी चूत को चाटने लगा। जवाब में कोमल ने भी मेरी गान्ड में उन्गली दे दी और मेरे लन्ड को बेहताशा चूसने लगी। थोड़ी देर के बाद मैंने कोमल को अपने ऊपर लिया और नीचे से अपना लन्ड उसकी चूत में डाल दिया। कोमल अब मेरे लन्ड की सवारी करने लगी और मेरे होंठों को चूसने लगी। होंठ चूसते हुए उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में दे दी और मैं उसकी जीभ को चूसने लगा और उसके चूतड़ों को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
थोड़ी देर के बाद मैंने उसे अपने नीचे लिया और अपना लन्ड उसकी चूत में डाल कर ज़ोर ज़ोर उसे चोदने लगा। हाय… मेरे समीर… चोद दो मुझे… सी…सी… की आवाज़ कोमल के मुंह से निकल रही थी और मुझे और भड़का रही थी। मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे।
आह… आह… की आवाज से मैं कोमल की चूत में ही झड़ने लगा और हम दोनों के जिस्म एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे। थोड़ी देर हम दोनों उसी अवस्था में पड़े रहे, फिर दोनों एक साथ नहाये। नहाने के बाद मैंने कोमल को अपनी गोद में उठाया और बाहर आ गया। फिर हम तैयार होकर नाश्ता करने लगे।
नाश्ता करते हुए मैंने कोमल को कहा- कोमल मुझसे शादी करोगी?
मेरा अचानक किया हुआ सवाल सुन कर कोमल दो मिनट के लिये खामोश हो गई और उसकी आँखें भर आई। उसने सवाल भरी नज़रों से मुझे देखा, शायद उसकी नज़रें पूछ रही थी कि मैं झूठ तो नहीं बोल रहा!
मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और फिर से वोही सवाल किया जवाब में वो मेरे सीने से लग कर रो पड़ी।
फिर हम अस्पताल गये और मैंने कोमल की माँ से कोमल का हाथ माँगा। कोमल की माँ इसके लिये सहर्ष तैयार हो गई। फिर कोमल की माँ के अस्पताल से आने के बाद कोमल और मैंने शादी कर ली। आज हमारे दो बच्चे हैं और हम सब बहुत खुश हैं। Hindi Sex Stories
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक Hindi Sex Stories हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी यौन-क्रीड़ा के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के मुठ मारने लगेंगे और लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को लण्ड की प्यास लग जाएगी।
मेरा नाम सुरेश है, उम्र 23 साल, कद 5’9’खिलाड़ियों जैसी सुगठित काया, लण्ड का आकार 6′ है।
बात लगभग दो साल पहले की है, उस समय मैं एक मार्केटिंग कम्पनी में सम्मलित हुआ था जिसमें लोगों को जोड़ने का काम था और उस हिसाब से कमीशन मिलता था।
एक बार मैं अपने एक दूर के भाई को इस कम्पनी से जोड़ने के उद्देश्य से उनके यहाँ कुछ दिन रहने के लिए गया। भैया मध्य प्रदेश पुलिस में काम करते थे। उनकी उम्र 28 साल थी, दो साल पहले उनकी शादी हो चुकी थी पर उनकी शादी में मैं नहीं जा पाया था, इस कारण मैंने उनकी पत्नी को नहीं देखा था। ना ही भाभी ने मुझे देखा था।
जब मैंने भैया के घर की घण्टी बजाई तो एक 25 साल की औरत एक छोटे बच्चे को पकड़े दरवाज़ा खोला और कुछ पल तक तक वो मुझे और मैं उसे देखता रहा। उसे देख कर मेरा लण्ड 145 डिगरी की सलामी मारने लगा। मैंने उसे अपना परिचय दिया, मेरा नाम सुनते ही उसके चेहरे पर एक चमक आ गई और उसने मुझे अंदर आने को कहा और बोली- तुम्हारे भैया अभी थाने गए हैं शाम तक आएंगे तब तक तुम नहा वहा लो मैं खाना बना लेती हूँ।
नहाने के बाद मैं सोनू (भाभी का बच्चा) को खिलाने लगा, तभी वो रोने लगा। भाभी ने कहा- शायद इसको भूख लगी होगी! और मेरे सामने ही उसे अपने स्तन से दूध पिलाने लगी। मैं चोर नज़र से उनके बड़े बड़े स्तनों को देख रहा था और मेरा लण्ड खडा होने लगा। मैं वहाँ से उठा और बाथरूम में जाकर मूठ मारने लगा।
शाम को भैया थाने से आये और हम सबने साथ खाना खाया। खाने के बाद मैं भैया भाभी को कंपनी के बारे में बताने लगा। भैया मेरे बगल में और भाभी मेरे सामने थोड़ा झुक कर बैठी थी जिस कारण उनके स्तन मुझे दिख रहे थे। मैंने गौर किया कि भैया से ज्यादा भाभी मेरी बातों में रूचि ले रही थी।
एक बात भाभी को थोड़े समझ में नहीं आई और उन्होंने मेरी तरफ झुककर अपना शक पूछा, झुकने के कारण मुझे उनके स्तनों के निप्पल भी दिखने लगे थे। एक पल के लिए मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया पर जल्दी ही मैंने अपने को सम्भाल लिया और जैसे तैसे अपनी बात को पूरा किया। भाभी को मेरा प्रजेंटेशन अच्छा लगा और वो जुड़ने के लिए तैयार हो गई।
रात हो चुकी थी, मेरे सोने के लिए दूसरे कमरे में भैया ने पलंग लगा दिया था। मैं जाकर लेट गया और भैया भाभी अपने बेडरूम में सोने चले गए।पर मुझे नींद कहाँ आने वाली थी, मेरी नींद तो भाभी के बूब्स ने उड़ा दी थी। एक दो घंटे तो ऐसे ही बीत गए।
तभी अंदर के कमरे से भाभी की सिस्कारियाँ आने लगी। वो आह ऊ आह की आवाज़ कर रही थी।
अंदर का माज़रा समझते मुझे देर ना लगी। मैं धीरे से उठा और दबे पांव उनके बेडरूम तक चला गया। उनके कमरे में नाइट बल्ब जल रहा था, जिस कारण कमरे का सारा नज़ारा साफ साफ दिख रहा था।
भैया नीचे लटे थे और भाभी उनके ऊपर थी और आ आ अ आ अह ह हा आ आह हा सिस्कारियाँ भर रही थी। भैया बोले- धीरे चिल्ला! वरना नन्द सुन लेगा!
भाभी बोली- वो मादरचोद तो सपने में अपनी गर्लफ्रेंड को चोद रहा होगा!
भैया भाभी को खाट-कबड्डी खेलते देख मैं वहीं मुठ मारने लगा। तभी मैंने देखा- भैया भाभी को गोद में उठा कर चोद रहे हैं और भाभी का चेहरा दरवाज़े की तरफ ही था, पर उन्होंने मुझे देखा नहीं था। भाभी और जोर जोर से आवाज़ करने लगी। मैं भी जोर जोर से मुठ मारने लगा। उधर भैया भाभी शांत हुए इधर मैं।
फिर मैं चुपचाप अपने कमरे में आकर सो गया। सुबह भाभी ने आकर मुझे उठाया। जैसे ही मैंने अपना चादर उठाया, भाभी हलके से मुस्कुराने लगी और अपनी ऊँगली से मेरे लोअर की तरफ इशारा किया। जब मैंने नीचे देखा तो लोअर में मेरे वीर्य के निशान पड़े थे।
भाभी ने कहा- जल्दी से उतार कर मुझे दे दो, मैं धो दूंगी, अभी तुम्हारे भैया बाहर गए हैं।
मैंने तुंरत अपना लोअर उतार दिया पर मेरी सफेद फ़्रेन्ची अंडरवीयर की हालत तो और ख़राब थी, उसका रंग पूरा क्रीम कलर का हो गया था। भाभी बोली- इसे नहाने के बाद तुम मत धोना, मैं धो दूंगी!
ठीक है, मैंने कहा और अपना दूसरा लोअर पहन लिया। थोड़ी देर में भैया भी आ गए और नहा धो कर, खाना खाकर थाने चले गए। पूरे दिन भाभी और मैं बातें करते रहे।
तभी भाभी बोली- मैं रसोई से चाय बना कर लाती हूँ। और उठ कर रसोई की ओर जाने लगी, तभी भाभी का पैर लचक गया और वो वहीं गिर पड़ी। उन्होंने उठने की कोशिश की पर उनसे उठा भी नहीं जा रहा था। फ़िर मैंने उन्हें उठाया, उनका एक हाथ अपना कंधे पर रखा और दूसरा हाथ उनकी कमर के थोड़ा ऊपर उनके स्तनों के एकदम नीचे और उन्हें बेडरूम में ले जाकर बेड पर बिठा दिया भाभी से पूछ कर आयोडेक्स लिया और उनकी साड़ी को घुटने के ऊपर करके आयोडेक्स लगा दिया।
उतने में भाभी ने अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा और खोल दिया। नीचे बैठे होने के कारण मुझे उनकी लाल चड्डी साफ साफ दिखने लगी। मेरा ध्यान मोच से हट गया और आयोडेक्स लगाते लगाते मेरा हाथ भाभी की जांघ तक पहुँच गया। तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर सीधे अपनी चूत पर रख दिया, एक पल के लिए मैं हक्का बक्का रह गया।
तभी दरवाज़े की घंटी बजी, मैं तुंरत उठ कर दरवाज़ा खोलने के लिए गया। दरवाज़ा खोला तो सामने भैया थे। जैसे ही उनको भाभी की मोच के बारे में बताने वाला था तभी भाभी अंदर से चल के आ गई। मैं तभी भाभी की नीयत भांप गया कि भाभी के क्या इरादे हैं।
तभी भैया ने भाभी से कहा कि आज रात को मुझे गश्त पर जाना है, जल्दी खाना बना देना, मैं खा कर जाऊँगा।
इतना सुनते ही भाभी और मेरे चेहरे पर एक चमक आ गई और हमारी नज़र एक दूसरे से टकरा गई। रात की योजना बन गई। रात को खाना खा कर मैं भैया को उनके थाने तक बाईक पर छोड़ने गया और लौटते समय मेडीकल की दुकान से कामसूत्र कंडम के 2 पैकेट खरीद के ले आया।
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खटखटाया, भाभी ने दरवाज़ा खोला। मैंने देखा कि भाभी काले रंग की पारदर्शी साड़ी पहने हुए थी। अन्दर आते ही गेट बन्द करके मैं भाभी पर अन्तर्वासना के भूखे शेर की तरह झपट पड़ा और भाभी की नाभि को बेतहाशा चूमने लगा।
भाभी बोली- इतनी भी क्या बेसब्री! अब तो पूरी रात हमारी है देवर जी!
मैंने कहा- आप तो रोज़ भैया से चुदवाती होंगी! मैं तो पहली बार किसी औरत को चूम रहा हूँ!
यह कहते हुए मैं भाभी के लाल होंठों को चूमने लगा और भाभी की गाण्ड पर हाथ डाल कर उठा लिया। भाभी ने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर लपेट दिए अब भाभी का पूरा वजन मेरे ऊपर था।
भाभी बोली- अब चूमते चूमते बेडरूम तक मुझे ले चलो।
मैंने वही किया। चूमते चूमते भाभी को बेड पर लेटाया और एक हाथ भाभी के सर पर रखा और एक हाथ से भाभी के स्तन ऊपर से दबाने लगा भाभी का हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लण्ड को दबा रहा था। मैंने भाभी के ब्लाउज को खोल दिया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा, दबाते चूमते हुए मैंने भाभी की साड़ी खोल दी, फिर भाभी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और पेटीकोट को उतार दिया। अब भाभी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा।
तभी भाभी बोली- मेरे कपड़े तुमने उतारे थे अब मैं तुम्हारे कपड़े उतारूंगी।
भाभी ने पहले मेरी टी-शर्ट उतारी और मेरी छाती को चूमने लगी। फिर मेरी जींस का बटन खोला और एक झटके से जींस के साथ मेरा अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा 6’इंच का खड़ा लण्ड देख कर भाभी चौंक गई और बोली आज रात इससे चुद कर मेरी चूत का आज चबोतरा बना देना और मेरे लण्ड को पकड़ कर जैसे ही पीछे किया मेरा लण्ड का लाल सुपाड़ा बाहर आ गया।
अपने लण्ड का ऐसा रूप आज तक मैंने भी नहीं देखा था और मेरे लण्ड को मुंह में लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी। मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैंने अपना सारा माल भाभी के मुंह में छोड़ दिया, भाभी ने सारा माल पी लिया। अब मैं भाभी की चूत चाटने लगा, चूत में एक गुलाबी रंग का दाना था, भाभी बोली कि इसे चाटो!
भाभी सिसकारियाँ भरने लगी। कभी अऽऽआऽ अऽऽअ तो कभी ओऽऽऊऽऽ ऊहऽहहऽह करती। थोड़ी देर में उसका शरीर अकड़ने लगा और एक झटके से उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में छोड़ दिया। मैं भी सारा माल पी गया।
भाभी बोली- अब में बर्दाश्त नहीं कर सकती! अपने लण्ड से मेरी चूत की प्यास बुझा दो!
‘अभी लो! प्यारी भाभी तुम्हारी चूत की आग को मेरा लण्ड शांत कर देगा!’
मैंने अपने लण्ड को पकड़ा और भाभी की चूत पर थपथपाने लगा।
भाभी बोली- ऐसे मत तड़पाओ अपना लण्ड मेरी प्यासी चूत में डाल दो!
सबसे पहले मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा एक हल्के से झटके से भाभी की चूत में डाल दिया।
भाभी कराहने लगी- आह ओ ओ ऊ ओऊ ओ ऊह ह हह!
दूसरे झटके में पूरा लण्ड ही चूत की गहराई नाप रहा था और भाभी जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी- हाँ देवरजी! मेरी चूत को ऐसे ही रौंदो! इसको आज ज़न्नत का मज़ा दो!
मैंने लण्ड को चूत में डाले डाले ही भाभी को उठा लिया और सोफे पर ले गया और भाभी को अपने ऊपर बिठा लिया। अब भाभी मुझे चोद रही थी। इस हालत में मैं भाभी के होंठ और बूब्स को भी चूस रहा था। 20 मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद मैंने भाभी को कुतिया की तरह खड़ा करके भी चोदा। कुछ देर बाद भाभी का शरीर अकड़ने लगा, मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली हैं।
तभी मेरे लण्ड ने भाभी का बांध तोड़ दिया और वो झड़ गई, पर मेरी मंजिल अभी दूर थी। मैंने चुदाई चालू रखी और 30 मिनट बाद मैं भी झड़ गया। तब तक भाभी तीन बार झड़ चुकी थी और उस रात भर हमने 6 बार सेक्स किया। फिर सुबह 5:30 पर मैं अपने कमरे में जाकर सो गया।
दोपहर 10 बजे भाभी ने आकर मुझे जगाया। आज उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। मैं वहाँ 5 दिन रहा और भाभी और मुझे जब मौका मिला, हमने ज़िन्दगी के मज़े लिए! Hindi Sex Stories
सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म का होना या नहीं होना व्यक्ति की व्यक्तिगत अनुभव, स्वास्थ्य, और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, और यह नॉर्मल हो सकता है।
कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म अनुभव करने में सामान्य होते हैं, जबकि दूसरे यह अनुभव नहीं कर सकते हैं। यह निर्भर करता है कि किस प्रकार की स्टिमुलेशन और सेक्स के प्रारंभ में किस प्रकार की मनोबल की आवश्यकता होती है, जिससे एक व्यक्ति ऑर्गैज्म कर सकता है।

कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म के प्राप्ति में समय लगा सकते हैं, जबकि दूसरे लोग इसे तेजी से प्राप्त कर सकते हैं। यह भी निर्भर करता है कि कितनी सारी सेक्स के प्रारंभ में स्टिमुलेशन और आनंद की दर्जीकरण हो रही है।
ऑर्गैज्म की अभाव किसी भी व्यक्ति के लिए एक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, खासकर अगर यह बार-बार हो रहा है और यह व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ डाल रहा है। इस स्थिति में बेहतर होता है कि व्यक्ति एक सेक्स थेरपिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें, जो उनकी समस्या को समझने और समाधान करने में मदद कर सकते हैं।
सार्वजनिक रूप से यह जरूरी है कि सेक्स को सुरक्षित और सहमति आधारित तरीके से किया जाए, और जब भी सेक्स के बारे में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तो सहायता और सलाह ली जानी चाहिए।
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