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आप ने पढ़ा
खाला के अचानक हट जाने से मैं एक दम घबरा गया ऑर मुझे अहसास भी नही हुआ कि मेरा लंड अभी तक खड़ा है. और खाला मेरे लंड को ही देख रही थी जो उस टाइम तकरीबन 6 इंच का था.
इसी दौरान दरवाजे पर फिर दस्तक हुई तो खाला ने अपने कपड़े ठीक किए ऑर मुझे कहा:
अयान तुम ठीक से हो कर बैठो. मैं दरवाज़ा खोलती हूँ.
मैने जब देखा तो मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ था.
मैं जल्दी से उठ कर वॉशरूम की तरफ भागा. ऑर खाला दरवाज़ा खोलने चली गई……
अब आगे...
अंबर खाला ने डोर ओपन किया तो दरवाज़े पर उनकी फ्रेंड सोबिया आई थी.
मैं आप को बताता चलूं कि सोबिया 23 साल की एक खूबसूरत लड़की थी. जिसकी बॉडी हुश्न की शाहकार थी.
उसके मम्मे कुछ 36 के क़रीब थे ऑर गान्ड मोटी सी थी ऑर कुछ ज़्यादा ही बाहर को निकली हुई थी.
वो घर मे एंटर हो कर खाला से गले मिली ऑर अंदर आ गई. डोर की आवाज़ सुन कर मामू भी अपने रूम से बाहर आ गये थे. सोबिया ने मामू को सलाम किया ऑर मामू ने सोबिया के सलाम का जवाब दिया.
उसके बाद अंबर खाला, सोबिया को अपने रूम मे ले गई. वहाँ जा कर अंबर ने चादर उतार कर दुपट्टा ले लिया.
मैं वॉशरूम से निकल कर टी.वी लाउंज मे गया ऑर वहाँ बैठ कर वही मूवी दोबारा देखने लगा.
इतने मे मामी ऑर मामू रूम से बाहर आए ऑर मामू ने बॅग उठाया हुआ था. मामू ने हम सब को आवाज़ दी ऑर कहा कि : अच्छा हम जा रहे हैं. घर का ऑर अपना ख़याल रखना. ऑर मामू ने अंबर खाला को 20,000 रुपीज़ दिए घर के खर्चे के लिए. मामू ने मुझे कहा: "अयान तुम ने घर से बाहर नही निकलना"
ऑर घर की ज़िम्मेदारी अब तुम पर है. मामू ने मुझे भी 1000 रुपीज़ दिए खर्चे के लिए. मैं खुश हो गया.
मामू ऑर मामी चले गये तो अंबर खाला ने मेन डोर लॉक किया ऑर सोबिया से कहा: सोबिया तुम अयान के साथ टी.वी लाउंज मे बैठो. मैं झाड़ू दे दूं. फिर गॅप शॅप लगाते हैं.
सोबिया आ कर टी.वी लाउंज मे मेरे साथ सोफे पर बैठ गई. ऑर अंबर खाला हमारे सामने उसी स्टाइल मे झाड़ू लगाने लगी.. मैं अब डर रहा था क्यू कि अब तो घर मे सोबिया भी थी ऑर मुझे उसकी नेचर का नही पता था. खाला उसी तरह झुक कर झाड़ू लगा रही थी. जिसकी वजह से उसके मम्मे लटक रहे थे…. ऑर मुझे उनके पूरे मम्मे नज़र आ रहे थे… मैं खाला के मम्मो को गौर से देख रहा था. खाला ने मेरी तरफ देखा ऑर मुस्कुरा कर झाड़ू लगाने लगी.
खाला झाड़ू लगा रही थी,,, मैं उनके मम्मो को देख रहा था,,, ऑर मुझे नही पता था कि सोबिया की नज़र मेरे उपर थी. ऑर वो कभी मुझे ओर कभी अंबर खाला के मम्मो को देख रही थी…
सोबिया ने खाँसी करने के स्टाइल मे अंबर खाला को बताने का इशारा किया कि अपनी कमीज़ ठीक करे. मगर खाला ने उसको इशारा किया ऑर बाहर चली गई.
अंबर खाला बाहर गई तो सोबिया भी उसके पीछे पीछे बाहर चली गई.. वो दोनो कुछ देर तक बाहर रही ऑर फिर सोबिया आ गई..
अंबर खाला किचन मे छाए बनाने चली गई.
सोबिया मेरे पास सोफे पर बैठ कर मूवी देखने लगी ऑर इस बार सोबिया मेरे साथ क्लोज़ हो कर बैठी. उसकी थाइस मेरे थाइस के साथ टच हो रही थी.
अंबर खाला किचन मे चाय बनाने चली गई ऑर सोबिया टी.वी लाउंज मे आ कर मेरे साथ लग कर बैठ गई. उसकी थाइस मेरी थाइस से टच हो रही थी.
पता नही सोबिया ऑर अंबर खाला के बीच मे क्या बात हुई थी कि सोबिया मेरे साथ इतना क्लोज़ हो कर बैठ गई थी. सोबिया मूवी भी देख रही थी ऑर मेरे साथ साथ लेग भी रगड रही थी.
मूवी देखते देखते मूवी मे एक सीन आया समुंद्र पर नहाने का. जिस मे लड़कियाँ बिकिनी पहन कर घूम फिर रही थी. मैने वो सीन देखा ऑर सोबिया मेरे साथ बैठी हुई. मैं रिमोट ढूँढने लगा. ऑर रिमोट उठा कर मैं चॅनेल चेंज करने लगा कि
सोबिया की आवाज़ आई: अरे ये चॅनेल क्यू चेंज कर रही हो.
मैं. ये सीन ठीक नही है.
सोबिया: क्यू इस सीन मे क्या खराबी है. कपड़े तो पहने हुए हैं सब ने.
मैने कुछ नही कहा ऑर सोबिया के सामने मैं ऐसा सीन नही देखना चाहता था. मैं रूम से बाहर आ गया.
मैं खाला ऑर अपने कंबाइन रूम में चला गया. खाला ने मुझे रूम मे जाते हुए देख लिया था. जब वो चाय वाघेरा बना कर फ्री हुई तो उन्हो ने मुझे किचन से ही आवाज़ लगाई.
अंबार खाला: अयान आ जाओ चाय पी लो.
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मैं: आता हूँ 5 मिंट मे.
खाला चाय टी.वी लाउंज मे ले गई. मैं जब टी.वी लाउंज मे जाने लगा तो अंबर खाला, सोबिया के साथ बातें कर रही थी.
सोबिया: अरे अंबर जब तू झाड़ू लगा रही थी तो तेरा भांजा तो तेरे मम्मो को ही देख रहा था.
अंबार खाला: ह्म्म्म मुझे पता है,
सोबिया: अरे क्या कहा, तुझे पता था कि वो तेरे मम्मो को देख रहा है ऑर तू फिर भी उसके सामने ऐसी ही रही. मतलब तू अपने भानजे को खुद से अपना जिस्म दिखा रही थी.
अंबार खाला: हाँ. वो मेरा भांजा है ऑर बचपन से मेरे ही साथ है. मैं उस से बहुत प्यार करती हूँ.
सोबिया: मगर वो तेरा भांजा है. तू उसके साथ ऐसा केसे कर सकती है.. कल को तेरी शादी भी हो जानी है.
अंबार: जब शादी होनी होगी तब हो जाएगी. मगर मैं अपने भानजे को ऐसे ही नही तर्साउन्गी कि वो किसी लड़की के लिए तरसे.
सोबिया: तो क्या तू उसके साथ चुदाई करे गी ऑर उसको अपनी चूत दे गी,,,??
अंबार: हाँ मेरे तो यही इरादा है.
सोबिया: देख ले ये ग़लत है.
अंबार: मेरी जान कुछ ग़लत नही. कल को शादी के बाद मेरे पति ने भी चूत मारनी ही है ना. क्यू ना उसके लिए अपने आप को अभी से तय्यार किया जाए.
सोबिया: मगर,,,, मगर वो बहुत छोटा है यार,
अंबार खाला: अरे वो छोटा नही है. इस उमर मे भी मेरे भानजे का लंड कम आज़ कम 6 इंच का होगा.
सोबिया: क्य्ाआआआअ?????? इस उमर मे भी 6 इंच का.
अंबार: हाँ 6 इंच का होगा…
सोबिया: तो क्या तू अपने भानजे का लंड देख चुकी है.
अंबार: हाँ मेरा भांजा मुझे बहुत अच्छा लगता है.. वो मेरे साथ ही सोता है. उसकी नींद बहुत गहरी है.. जब जब वो थका होता है. ऑर गहरी नींद सो जाता है. मैं उसका लंड पकड़ कर देखती हूँ… बहुत नरम नरम सा है सॉफ्ट सा..
मैं डोर से बाहर खड़ा हुआ उनकी बातें सुन रहा था.. अपनी खाला की बातें सुन कर मैं बहुत हैरान हुआ था कि मेरी खाला कितने अरसे से मेरे लंड के साथ खेलती है ऑर मुझे पता भी नही लगता..
मेरा लंड खाला की बातें सुन कर एक बार फिर से बिल्कुल सीधा खड़ा हो गया. इतने मे मुझे पता ही नही चला कि खाला एक दम से रूम से बाहर निकली… वो शायद मुझे बुलाने के लिए निकली थी रूम से..
खाला मुझे बाहर देख कर एक दम से घबरा गई… ऑर मेरे टाइट लंड पर उनकी नज़र पड़ी.. एक मिंट के लिए खाला सोच मे गुम हो गई.. वो समझ गई थी कि मैने उनकी बातें सुन ली हैं…
मैं घबराते हुए बोला… वो खाला मैं आ रहा था. आप क्यू आई..
खाला : मैं तुम्हे बुलाने आई थी मेरी जान.. चाय ठंडी हो रही है…
मैं अपनी खाला के साथ रूम मे एंटर हुआ. ऑर खाला ने मुझे सोफे पर बिठाया.. ऑर मेरे साथ बैठ गई.. अब की बार सोबिया भी मेरी तरफ देख रही थी.. उसकी नज़र मेरी लेग्स के बीच मे ही थी. शायद वो भी ख़यालों मे मेरे लंड के बारे मे ही सोच रही थी.
सोबिया बोली: अंबर तेरा भांजा तो बहुत बड़ा हो गया है.
खाला: खाला ने मेरे गाल पर एक किस की ऑर बोली… हाँ ना मेरा भांजा बहुत बड़ा हो गया है. ये तो मेरी जान है.
मैं आराम से चाय पीता रहा.. चाय पी कर मैं अपने रूम मे आ गया. ऑर बेड पर लेट गया.. वहाँ पर सोबिया के कपड़े एक शॉपार मे पड़े हुए थे.. मैने शॉपार को थोड़ा सा खोल कर देखा तो मुझे सोबिया का ब्रा नज़र आया..
मेरा बहुत दिल कर रहा था कि उसका ब्रा निकाल कर देखूं. मगर हिम्मत नही हो रही थी. ऑर डर भी लग रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए. फिर मैने दिल मज़बूत कर के ब्रा निकाल ही ली.. मैं ब्रा को खोल कर देखने लगा.. मैने ब्रा को स्मेल की तो मुझे उस की स्मेल बहुत अच्छी लगी..
मेरे माइंड मे एक ख़याल आया ऑर मैने ब्रा को चुपके से अपनी पॉकेट मे डाला ऑर वॉशरूम मे आ गया..
वॉशरूम मे आ कर मैने ब्रो को पॉकेट से निकाला ऑर उसको स्मेल करने लगा.. उसकी स्मेल से मैं पागल हो रहा था.. मैने ब्रा का नंबर देखा तो उस पर 36 लिखा हुआ था.. मैं समझ गया कि सोबिया के ब्रा का साइज़ 36 है… मैं ब्रा को देखता रहा ऑर मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया.
मैं ब्रा को हाथ मे लिए मूठ मारने लगा.. फिर मुझे ख़याल आया और मैने ब्रा को अपने लंड पर रखा ऑर फिर ब्रा को अपने लंड पर रगड़ने लगा…. मेरी साँसे तेज चल रही थी….
मैने 2 बार मूठ मारी ऑर ब्रा पर अपना पानी निकाल दिया.. अब जब कि मेरा पानी निकल चुका ऑर मैं रिलॅक्स हो गया तो मुझे ख़याल आया कि अब मैं ब्रा का क्या करूँ उसको तो धो कर वापस रखना पड़ेगा..
"वो कहते हैं ना कि जब इंसान की क़िस्मत ही खराब हो तो फिर कोई चीज़ साथ नही देती"
ठीक इसी तरह मेरे साथ भी उस टाइम हुआ..
मैने ब्रा को धोने के लिए पानी का नलका खोला तो पानी नही आ रहा था.. अब मैं परेशान हो गया.. मैने अपना पानी ब्रा पर रगड़ा ऑर फिर सोचा कि अब मेरा पानी सूख जाएगा ..
मैने सोचा था कि जब ब्रा सूख जाएगा तो फिर मैं उसके शोप्पर मे वापस रख दूंगा.. मगर जब मैं रूम मे गया तो अंबर खाला ऑर सोबिया रूम मे बैठे हुए थे.. सोबिया शायद कपड़े चेंज करने लगी थी..
मैं रूम मे एंटर हुआ तो अंबर खाला ने कहा: सोबिया, चल अयान वॉशरूम से निकल आया है अब तू जा कर कपड़े चेंज कर ले.. सोबिया ने अपना शोप्पर खोला तो मैं परेशान हो गया..
सोबिया गौर से शोप्पर को देख रही थी ऑर फिर उस ने सब कपड़े निकाल कर बेड पर रख दिए ऑर खाला से कहा कि : यार मेरा ब्रा नही मिल रहा है.
खाला: तू अपने साथ लाई ही नही होगी.
खाला के बिल्कुल भी माइंड में नही था कि मैं भी ऐसा कर सकता हूँ.
सोबिया: अरे यार मैं खुद ले कर आई हूँ. वो यहाँ उपर ही पड़ी थी.
खाला: नही यार देख, तेरे कपड़ों मे ही होगी..
सोबिया: नही है यार देख लिया है.. ऑर सोबिया फिर से कपड़ों मे ढूँढने लगी..
मैं डरा हुआ था.. मैं सोबिया की तरफ देख रहा था ऑर मुझे नही पता था कि अंबर खाला मेरी तरफ देख रही है.. मैने सोबिया की तरफ देखते हुए अपनी पॉकेट के उपर हाथ रखा ऑर उसका ब्रा पॉकेट के अंदर फील कर ने लगा..
मेरी ये हरकत अंबर खाला ने नोट कर ली..
अभी वो कुछ बात करने ही लगी थी कि सोबिया का मोबाइल फोन पर रिंग आ गई… सोबिया ने मोबाइल देखा तो उसके घर से कॉल आ रही थी..
सोबिया ने कॉल रिसीव की ऑर: हेलो
हाय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम मोनु है। मेरी उम्र 25 साल है। मैंने अपनी पढ़़ाई पूरी कर ली है। मेरी लम्बाई पूरी छः फ़ुट की है, और मेरा तगड़ा लण्ड आठ इंच लम्बा है।
यह कहानी बताने में मुझे बहुत मजा आ रहा है लेकिन इसे जब मैंने अन्जाम दिया तब तो मुझे बहुत मजा आया।
मेरी चचेरी बहन काजल अभी 20 साल की है जिसको मैंने चोदा था। लंबाई उसकी ज्यादा नहीं है कोई पाँच की होगी। लेकिन उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी है। वो स्मार्ट भी है है। उसकी गाण्ड पीछे से उभरी हुई भी है।
एक दिन जब हम लोग सभी शादी में गए थे उस दिन वो घर में थी। हम लोग सब शादी में थे तभी उसकी मम्मी ने मुझे घर जाने को कहा। खाना लेकर जाना था।
मैंने गाड़ी निकाली फ़िर जब मैं घर में पहुंचा तो मैंने दखा कि घर में कोई नहीं था। फ़िर मुझे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आई। वो नहा रही थी।
फ़िर मैं बैठ गया फ़िर मैंने देखा कि उसके बाथरूम के दरवाजे में होल था। मैंने जब उस होल से अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए। काजल अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी।
यह देख कर मैं पागल हो गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। फ़िर मैंने देखा कि वो अपने हाथों से अपनी चूचियों को सहला रही थी। उसके चेहरे के भाव देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। फ़िर देखने लगा।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था यह ऐसे भी कर सकती है। फ़िर मैंने सोचा कि हर लड़की की चाहत होती है। फ़िर उसने अपने गद्दे को सहलाया। फ़िर उसमे उसने पानी डाला और फ़िर वो नहाने लगी।
मैं बाहर जाकर बैठ गया, वो कपड़े पहन कर जैसे ही बाहर आई।
मैंने अपने लण्ड को सहलाया। उसने मेरे लण्ड की तरफ़ देखा। फ़िर मैंने कहा, ‘मैं तुझे खाना देने आया हूँ।’
फ़िर वो किचन में गई। मैं भी उसके पीछे गया। फ़िर मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ लगाने लगा। वो वहाँ से चली गई। वो बाल झटकने लगी थी।
मैंने कहा- ‘मैं बाल झटक देता हूँ।’
काजल चुदने को हुई राजी
फ़िर मैं उसके बाल झटकने लगा। मैंने उसके बाल उसके बूबस के उपर रख दिए और हाथ लगाने लगा। वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ।
फ़िर मैं उसके बूबस को दबाने लगा। वो शरमाने लगी और नजरें झुकाए जाने लगी। फ़िर मैंने उसे पकड़ा और उसके स्तनों को दबाने लगा। वो मदहोश होने लगी। मैं उसके पेट पर हाथ घुमाने लगा।
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चड्डी के अन्दर डाल दिया। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा। वो गर्म हो गई थी। फ़िर मैं उसको चूमने लगा, वो मुझे इस काम में सहायता करने लगी।
उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लण्ड पर रख दिया। वो जम कर पकड़ कर दबाने लगी और फ़िर वो नीचे बैठ गई।
मेरी पैंट की जिप खोली और 8 इंच लम्बा लण्ड बाहर निकाल लिया। वो तो लण्ड को देख कर पागल हो गई।
वो बोली- ‘यह लण्ड मेरी प्यारी चूत में जाएगा तो मैं तो मर जाऊँगी।’
मैंने कहा- ‘पहले इसे मुँह में तो ले।’
वो बड़े प्यार से जुबान से चाटने लगी। मेरे मुँह से आवाज़ आने लगी- ‘पूरा मुँह में घुसेड़ ले !’
मुझे बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए। वो शरमा गई।
मैंने कहा- ‘पहले कभी सेक्स किया है?’
वो बोली- ‘नहीं।’
मैंने बोला- ‘मैं ही तेरी सील आज तोड़ूंगा, बहुत मजा आएगा।’
फ़िर मैं उसके चूचों को जम कर दबाने लगा, वो ‘आह आह्ह’ करने लगी। उसके गुलाबी गुलाबी निप्पल बहुत प्यारे दिख रहे थे। उसको मैं अपने दांतो से काटने लगा।
वो जोर से आह्ह करने लगी, बोली- ‘जम कर दबाओ मुझे आज जवान लड़की बना दो।’
मैंने अपना मुख उसके चूत पर रख दिया और चाटने लगा। चूत की खुशबू बहुत प्यारी थी। मैंने एक घण्टे तक उसकी चूत चाटी।
काजल की कुँवारी चूत चुदाई
वो मदहोश हो गई, वो बोली- ‘मेरी चूत फाआड़ दो आह आह आह् और जमम केईई।’
मैंने अपना लण्ड उसके चूत पर रख दिया। एक गर्म लोहे की सलाख की तरह जल रहा था मेरा लण्ड।
वो बोली ‘कितना गर्म है तुम्हारा लण्ड।’ मैंने होल पे रखा और पुश किया। वो चिल्लाई।
मैंने फ़िर घुसेड़ा, लेकिन मेरा लण्ड छेद से बाहर निकल गया। वो बोली ‘जा के पहले सीख कर आओ फ़िर मेरी चूत फ़ाड़ना।’
मुझे गुस्सा आया। मैंने उसकी टांगो को फ़ैलाया और लण्ड डाल दिया।
वो चिल्लाई, बोली ‘मत करो बहुत दर्द हो रहा है।’ लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था वो दर्द से चिल्ला रही थी। ‘आह्ह नहीई धीरेए प्लीलीज सीई!’
थोड़ी देर बाद वो मदमस्त हो गई और बड़े प्यार से लेने लगी और बोली, ‘मेरे राजा जरा जम के चोदो, मजा आ रहा है।’
उसकी चूत से खून निकलने लगा। वो डर गई। मैंने कहा डरना नहीं, ऐसा पहली बार होता है।
वो समझ गई और मैं फ़िर चोदने लगा बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके दोनों बूबस के बीच में लण्ड रगड़ने लगा। बहुत मजा आ रहा था।
फ़िर उसके चूत चाटने लगा। फ़िर चूत में उंगली डालने लगा। फ़िर 8 इंच लम्बा लण्ड डाल दिया।
वो बोली ‘फ़ाड़ दो राजा आह।’ 25 मिनट तक चोदने के बाद वो ठण्डी होने लगी थी।
मेरा माल भी गिरने वाला था। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके मुख में डाल दिया।
वो बड़े प्यार से चाटी और हम दोनों बाथरूम में चले गए नहाने लगे।
वो मुझे नहला रही थी, ‘बहुत मजा आ रहा था!’
वो फ़िर बैठ कर मेरे लण्ड को मुँह में भर के चूसने लगी।
मेरा लण्ड फ़िर खड़ा हो गया। फ़िर मैंने उसे बाथरूम में चोदा। वो बिल्कुल मदमस्त हो गई थी। मैंने उसको कपड़ा पहनाया।
इस घटना के बाद मैं उसको दो बार और चोद चुका हूँ। यह बात अक्टूबर 2002 की है।
बस दोस्तो यह Hindi sex stories है मेरी।
तन के मिलन की Hindi Sex Stories चाह बडी नैसर्गिक है। सुन्दर स्त्री की देह से बढ़कर भ्रमित करने वाला और कुछ पदार्थ इस संसार में नहीं है। मेरे पिता ईसाई, माता हिन्दू ! मुझ पर हिन्दू संस्कारों की छाया अधिक पड़ी। मेरा विवाह मेरी मां की पसन्द के एक हिन्दू घराने में हुआ। पत्नी यौवन में नव दाम्पत्य के दिनों में सभी को बहुत भाती है और सर्वांग सुन्दरी लगती है। कालांतर में मुझे दूसरी स्त्रियां भी आकर्षित करने लगी। विवाह के बाद दूसरी स्त्रियों से बात कर लेने में कोई शक़ भी नहीं करता है।
सुजाता, मेरी साली जी, अपनी शादी के बाद भी मुझसे मज़ाक करने में चूकती नहीं। वह मुझे बहुत भाती है। उसकी बातों की शैली कसमसाहट देती है। मुझे बहुत सतर्क रहना पड़ता है कि कहीं मेरा अपना दाम्पत्य जीवन भंग न हो जाये।
पिछले रविवार उसे किसी सिलसिले में मेरे शहर आना था। मैने सोचा कि चलो हल्की फुल्की चुहल होगी ! रस रहेगा !
मैं अपने साढू भाई से तो बातें करूंगा ही ! लेकिन असली आकर्षण सुजाता होगी !
वह शनिवार सांझ को ही सिर्फ अपने बेटे के साथ चली आई। साढू जी को अनायास कोई काम आ गया था। मुझे हर्षमिश्रित आश्चर्य हुआ।
मैं अपने आफिस के काम काज़ निपटा कर जब घर पहुंचा तो मुझे निराशा हुई कि वह मेरी पत्नी के साथ बातों में तल्लीन थी। मुझे सादर प्रणाम करने के अलावा उसने कोई खुशी नहीं दी। मैंने भी उसके और अपने बेटे को गिटार सुनाया और अकेले अपने कमरे में सो गया। नज़दीक़ी दूसरे कमरे में वे दोनों बहनें खिलखिला कर चटखारे लेकर बातें कर रही थी। मुझे नींद नहीं आई। ज़ब वे सब सो गई, मैं सुजाता के ख्यालों में खो गया और निर्वस्त्र हो कर मूड्स कंडोम की चिकनाई के बीच तीव्र हस्तमैथुन करता रहा। मैने ख्यालों में उसको भरपूर भोगा। फिर एक दो घंटे की नींद के बाद जागने पर फिर से अनुभव दोहराया। रात में दो बार विसर्जन करके निढाल हो कर गहरी नींद में सो गया। सुजाता अब सिर्फ एक सपना थी।
सुबह हल्की निराशा थी। लेकिन दरस की चाह तो पूरी होनी ही थी। आज उसे दिन भर यहीं रहना है यह सोच कर मन को सांत्वना दी। लेकिन रात में जो दो बार रस गिरा दिया तो अब और कुछ तो होगा नहीं : मौका भी तो नहीं। मैंने भी दिन में अपने मित्र के पास कुछ परामर्श के लिये समय लिया था सो जाने की योजना बना डाली और पत्नी को बता भी दी।
तभी स्थिति बदली और मेरी बड़ी बहन अचानक 8 बजे ऑटो से उतरी। वह राखी के सिलसिले में आई थी। आते ही उसने मेरी पत्नी से बात की और कुछ गिफ्ट खरीदने की चाह से योजना बनाई कि वह एक घंटे बाद घर से 12 कि.मी. दूर वाले थोक मार्केट से खरीददारी करने चली जायेगी। मेरी धड़कने बढ़ गई। और सुजाता ? उत्तर मिला वह घर पर रहेगी और दोपहर का भोजन तैयार रखेगी। मुझे तो मित्र के घर जाना ही था।
साढ़े नौ बजे मेरी पत्नी, मेरा बेटा और मेरी बहन तीनों आटो रिक्शे में चल दिये, मैं भी उन्हें जाने को तैयार दिखा। तीनों के घर से निकलते ही मैं उतावला हो गया। अन्दर किचन में जाकर पूछा- सुजाता, मैं निकल रहा हूँ चाय मिलेगी ?
वह पलट कर मोहक मुस्कान से बोली- क्यों नहीं जीजू ! जो चाहोगे वही मिलेगा .. मैं तो एक्सपर्ट हूँ … लेकिन आप भी चले जाओगे तो मैं तो यहाँ अकेली रह जाउंगी।
मैने कहा- चलो कुछ देर रूक जाता हूँ ! शीनू (बेटा) उठा नहीं ?
बोली- सोने दो न उसे जीजाजी ..वह उठ जायेगा तो आपसे बात भी नहीं कर पाउंगी। अपनी बात अभी हुई ही कहाँ है ?
मैंने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया- हाँ.. ठीक कह रही हो।
मैं उसके और नज़दीक़ आ गया और दोनों हाथ दोनों कन्धों पर रख दिये। वह चाय बनाना छोड़ कर थोड़ा पीछे खिसक आई और मुझसे लगभग चिपक सी गई। मेरा हाथ बढ़ कर उसकी हथेलियों तक पहुंच गया, वे परस्पर मिली और एक हो गई। मुझे उत्तेजना बढ़ने लगी। मैने अपना चेहरा उसके कधे पर रख दिया वह तुरंत पलट कर मुझसे चिपक गई। मैंने उसे चूम लिया।
“कितनी प्यारी लग रही हो.. लगता है बहुत ही हल्की हो तुम.. “
“उठा कर देखो कितनी हल्की हूँ मैं !”
संकेत बहुत ही उत्तेजक था। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसे सामने से थाम लिया और थोड़ा उठा लिया। उत्तेजना बढ़ी तो चुहल का स्तर बढ़ाने का अनैतिक ख्याल आया। मैने उसे उतार दिया और कहा “फिर से ठीक से उठाता हूँ तुम बहुत ही हल्की हो ।”
उसने कहा “ठीक है ।”
मैंने अबकी बार बहुत झुक कर उसकी साड़ी के नीचे से पिन्डली पर हाथ रख उस पर हाथ फिसलाते हुए उठाया। हाथ साड़ी के अन्दर ही अन्दर उसकी चिकनी जंघा से फिसलता हुआ उसके नितम्ब तक पहुंच गया।
सिहरन हुई क्योंकि वह पेंटी वगैरह कुछ नहीं पहने थी।
वह भी चिहुंकी,”क्या करते हो जीजू .. आप बड़े वो हो !”
मैंने क्या किया?
आपने मेरी साड़ी पीछे से बिल्कुल उठा दी थी !
मैंने कहा,”चलो बदला ले लो, तुम भी मुझे इसी तरह उठा लो .. “
वह बोली,”ऐसे तो नहीं उठा पाउंगी !”
मैंने पूछा,”फिर ?”
उसने कहा,”मेरी स्टाइल से !”
मैने कहा,” ठीक है ! जैसी तुम्हारी मर्ज़ी !”
उसने मेरी दोनों टांगों के बीच अपने दोनों हाथों की पालकी बनाई और उठाने की कोशिश जैसे करने लगी। मैं पतला पायज़ामा पहने था और उसके नाज़ुक हाथ मेरे इलेक्ट्रोड को सहला से रहे थे। देर तक ऐसे ही कोशिश सी करती रही फिर बोली- आप भारी हो ! मुझसे नहीं बनता, आप ही उठाओ।
मैंने कहा- मैं भी ऐसे ही उठाता हूँ ! और अपने दोनों हाथों की पालकी बना कर उसकी दोनों टांगों के बीच में डाल दिये। आगे रतिमुख तक मेरा हाथ छू गया। वहाँ बालों का अहसास हुआ।
तेज़ सांसों के बीच मैने पूछा- क्यों सुजी ये बाल इतने क्यों बढ़ा रखे हैं?
सुजाता का चेहरा शर्म से लाल हो गया और बोली,” जीजू ! मैं आपको जान से मार दूंगी !
तेरे बाल साफ कर दूँ ? हेयर रिमूवर से ? (मैं अब तू पर आ गया था )
बोली- आप बहुत बदमाश हो जिज्जू ! ठीक है ! कहाँ करोगे ?
मैने कहा- मेरे बेडरूम में !
बोली- ठीक है, लेकिन ज़ल्दी करना।
मैंने उसे थामा और लगभग गोद में उठाते हुए अपने कमरे में ले गया।
मैं बोला- ज़ल्दी क्या है .. अभी तेरी दीदी नहीं आने वाली.. देर लगाती है वह तो.. !
उसके कपड़े ऊपर उठाने में अब दोनों में से किसी को संकोच नहीं हुआ।
मैंने कहा- तू मेरे भी साफ कर देना यार !
वह बोली- क्यों ! दीदी नहीं करती है ? कितने बढ़ चुके हैं? दिखाओ तो ज़रा !
मैंने अब तक उसे पूरा उघाड़ दिया था।
मैंने कहा- तू खुद खोल कर देख ले..हेयर रिमूवर हाथ में लिये मैं सामने खड़ा था, उसने कहा- नहीं, आप ही दिखा दो..
मैं धीरे-धीरे निर्वस्त्र हो गया, उसने कहा- ठीक तो है… हेयर रिमूवर की ज़रूरत नहीं ! रख दो.. !
मैं उसकी सहस्त्रधारा को सहलाने लगा .. उसने झटके से उठ कर मुझे चूम लिया। और पीछे से हाथ डाल खींच लिया। मै उसके ऊपर लुढ़क गया उसके हाथ मेरे लिंग को सहला रहे थे जिसे मैं अपना राजकुमार कहता हूँ।
मैंने कहा- तेरी राजकुमारी तो बडी प्यारी है !
उसने कहा- तेरा राजकुमार भी तो ! … बांका.. ! गबरू !!
अब वह भी “तू” पर आ गई थी।
मैंने कहा- दोनों की दोस्ती करवा दें ?
वह बोली- ज़ल्दी करवाओ .. राजकुमारी बैचैन है..
मैंने कहा- रुको ! राजकुमार सेहरा बांध कर आयेगा !
और सिरहाने की ड्रावर में से मूड्स कंडोम निकाला और चढ़ा लिया। सेहरे में राजकुमार को देख राजकुमारी ने अपने किले के द्वार खोल दिये। और राजकुमार ने अन्दर जा हलचल मचा दी। कुछ ही पल में हमारे सारे वस्त्र कमरे में यहाँ-वहाँ बिखर गये।
इतनी आज़ादी दोनों को शायद ही कभी मिली हो।
दोनों गुत्थमगुत्था .. पुराने प्रेमी पहलवानों की तरह… पूरी शैया पर लोटते रहे.. रात ही हस्तमैथुन किया था बल्कि दो बार किया था तो अभी की मिलन-क्रिया का कोई छोर ही नहीं आ रहा था। राजकुमार ज़बर्दस्त तना हुआ था। मुझे संतोष हुआ कि रात के कर्म से हानि के बज़ाय सुख में बढ़ोत्तरी ही हुई है। लगभग 35 मिनट की लम्बी सुखदाई मस्ती के दौरान हम चूत, लंड, भोसड़ी, चुदाई जैसे वर्जित शब्द उच्चारते रहे और जितना एक दूसरे को काट खा सकते थे, काटा खाया। जितना अन्दर उथल पुथल मचा सकते थे, मचाई।
वह मेरे ऊपर बैठी भी और अपनी चूत की भीतरी मालिश/पालिश करती रही।
मैने उसे औरत, घोड़ी, कुतिया, नागिन सभी कुछ बना डाला। लगभग 35 मिनट बाद मेरा रस निकला .. देर तक निकलता रहा .. दोनों सराबोर हो गये.. कंडोम काफी भारी हो गया। उसने चिपके हुए ही मेरी पीठ ठोंकी .. मैं भी देर तक उसे चूमता रहा। फिर हम प्रेम से एक दूसरे की ओर देखते हुए नहाने के लिये उठे।
मैंने अपनी पत्नी को फोन करके पूछा- खाना बन गया क्या ?
वह बोली- आप घर पहुंच जाना ! मै सुजाता को फोन कर देती हूँ, वह आपको खाना खिला देगी। हमें अभी देर लगेगी क्योंकि अब हम सुरुचि नगर में चाची को देख कर ही आयेंगे।
तभी सुजाता के मोबाइल पर भी फोन आया कि जीजाजी आ जायें तो खाना खिला देना ! अभी शायद आने में दो घंटे लग सकते हैं।
सुजाता फिर भी बोली- अरे दीदी, मुझे तो किचन में छिपकली का डर लग रहा है, मैं तो टीवी ही देखती रही। अब जीजाजी के आने के बाद ही खाना बनाउंगी।
पत्नी ने सहमति दे दी। इस वार्तालाप से हम दोनों गद-गद हो गये। अब इत्मीनान से नहा धो खा सकते हैं और लाड-प्यार कर सकते हैं।
हम दोनों अलफ नंगे बाथ रूम में साथ नहाए ! खुद कोई नहीं नहाया। एक दूसरे को ही नहलाते रहे। राजकुमार और राज कुमारी को भी किस कराते हुए शावर दिया। एक दूसरे के अंगों पर भरपूर लाड़ किया, अन्दर तक सफाई की गुलाब, नीबूं वगैरह निचोड़ कर खुशबू से तर-बतर हो कर एक दूसरे को नहलाया, यूं ही निर्वस्त्र बाहर आये और चिपके चिपके बेडरूम मे कपड़े पहनने पहुंचे।
मैने कहा- तुम मुझे ठीक से पौंछ दो !
वह लगी मुझे पोंछने .. मैं भी दूसरे तौलिये से उसे पोंछ्ने लगा। हमारे गुप्तांग अब एक दूसरे की सम्पत्ति हो चुके थे। हमने अपनी अपनी सम्पत्ति को भली प्रकार पोंछा।
फिर मैंने कहा- इस पर तेल भी लगा दो.. फिर परस्पर तेल लगाने में फिर से उत्तेजित होने लगे..
वह बोली- जीजू .. अबकी बार बिना कंडोम के..
मैं उसकी बात टाल नहीं सका। अबकी बार सीढ़ी पर खड़े होकर देर तक लता और पेड़ की तरह एक हो गये। फिर से हमें 20 मिनट लगे। इस बीच हमने आइने के सामने अपने आपको मस्ताते हुए प्रकृति में समाते हुए देखा।
इस बार भी लिंग भरपूर चुस्त और कड़क था। सुजाता पहले से अधिक मुलायम और रेशम रेशम थी। अबकी बार मैंने उसे अपने ऊपर लिटा लिया और उसे क्रिया करने को उकसाया। उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
अपनी उत्तेजना की चरम अवस्था में मुझसे बोली- जीजू याद रखना ! मैने तुझे चोद दिया है।
मैंने कहा- हाँ सुजी .. हमेशा याद रखूंगा कि तू जीती ..।
बोली- जीजू ! एक बार बोल कि मैं सुजी से चुदवा रहा हूँ।
मैंने सुर में सुर मिलाया .. हाँ सुजी .. मैं चुद गया .. तू मेरा रस ले जा..
वो बोली- तू भी मेरा ले..
और हम दोनों पल भर में उत्तेजना के चरम क्षण भोगकर फिर एक बार निढाल हो गये।
मैंने उतर कर कपड़े पहने शू, टाई व पसन्दीदा सेंट से सज्जित हो ड्राइंग रूम मे आगंतुक की तरह बैठ गया। और.. वह भी परी सी सज़ गई और गुनगुनाते हुए किचन में व्यस्त हो गई।
यह घटनाक्रम अनूठा था और अविस्मरणीय भी।
हैरानी मुझे अब यह हो रही थी कि उसका नन्हा बालक इतनी देर तक सोता रहा। Hindi Sex Stories
मेरा भाई पांच दिन के Antarvasna लिए आया था, मेरे पति को दो दिन के बाद फिर टूअर पर जाना पड़ा था.
हम तीनों अब काफी बोल्ड हो गए थे, घर के अन्दर किसी भी तरह के कपड़े पहनना या न पहनना या यूँ कहिये कपड़े का तो कोई महत्त्व ही नहीं गया था.
मेरे पति जब दो दिन के बाद घर से विदा होने लगे तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- डार्लिंग अब तुम तो हमारे बिना प्यासी नहीं रहोगी, लेकिन हम प्यासे मर जायेंगे.
रास्ते में तलाश कर लेना कोई…! मैंने अपनी बाईं आँख दबाते हुए हंस कर कहा.
चलो इस बार यह भी कोशिश करते हैं! यह कह कर उन्होंने मेरे ब्रा में कैद स्तनों पर दो चुंबन और एक चुंबन मेरे अधरों पर रख कर मेरे भाई को गुड लक कह कर विदा ली.
जब वे गए थे तब सुबह के नौ बजे थे. मैं नहाई भी नहीं थी और न ही मेरा भाई नहाया था, क्योंकि सुबह जल्दी उठ कर ही हम लोगों को मेरे पति के सफ़र के लिये आवश्यक पैकिंग व रास्ते के लिये कुछ खाना बनाना था.
भई मैं तो नहाने जा रही हूँ! तुम्हें नहाना है तो साथ ही चलो…! मैंने दरवाजे को लाक करके अपने भाई से कहा था.
ठीक है मैं भी चल रहा हूँ…! वह बोला और मेरे साथ ही बाथरूम की तरफ चल पड़ा.
हम दोनों बाथरूम में पहुँच गए, बाथरूम का द्वार खुले रहने से या बंद रहने से कोई फर्क नहीं पड़ना था अतः मैंने द्वार की ओर ध्यान दिए बिना ही शावर के नीचे खडे हो कर शावर खोल दिया. मैंने ब्रा और पेटीकोट पहना हुआ था.
जरा हुक खोलना ब्रा का! मैंने अपने सिर पर हाथों से पानी फेरते हुए कहा.
उसने मेरे पीछे खड़े होकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को मेरे शरीर से निकाल दिया. मेरे गुलाबी सुपुष्ट स्तन नग्न हो गए, वह मेरे पीछे सट कर अपने हाथों को बगलों से निकाल कर मेरे स्तनों पर नाभि पर और गले आदि पर साबुन लगाने लगा. मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी, मैं उसके स्पर्श का आनन्द ले रही थी.
उसने आहिस्ते से मेरी पेटीकोट को भी खोल कर नीचे सरका दिया था, वह अब नीचे बैठ कर मेरी जाँघों और नितंबों पर भी साबुन मलने लगा.
मैं सुलगने लगी थी!
कैसी प्यास होती है यौवन की जो कभी बुझती ही नहीं!
मैं उत्तेजना में कामुक सिसकारियाँ छोड़ने लगी थी.
वह अब मेरे आगे की ओर आ गया था. उसनें मेरे नितंबों से मेरी पेंटी पहले ही नीचे सरका कर उसे मेरी टांगों से भी अलग कर दिया था. मेरी नर्म रोयों वाली योनि पर उसने पहले साबुन लगाया फिर हेंड शावर की धार योनि पर मारने लगा.
मैंने उत्तेजना के वशीभूत होकर अपनी अँगुलियों से योनि को जरा खोल दिया तो गुनगुने पानी की तेज़ धार मेरी योनि के मुहाने पर पड़ने लगी.
मैं सिसक उठी- बस… बस…
यह कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ कर योनि पर झुका दिया तो वह योनि को चाटने लगा.
तभी काल बेल बजी!
हम दोनों ही चौंक पड़े!
दोनों की कामुकता भंग हो गई, मैंने उसकी आँखों में देखा उसने मेरी आँखों में देखा.
तुम नहाओ… मैं जाकर देखती हूँ कौन है! मैंने टावल अपने शरीर पर लपेटते हुए कहा.
वह प्यासे भंवरे की भांति मुझे बाथरूम से निकलते देखता रह गया.
मैंने जल्दी जल्दी अंतर्वस्त्र पहने, पेटीकोट और ब्लाउज पहने और साड़ी को लपेटते हुए दरवाजे की ओर चली गई.
दरवाजा खोला तो सामने अपनी ननद को मुस्कुराते पाया- क्या भाभी…? कितनी देर से खड़ी हूँ!
उसने अन्दर आते हुए कहा.
मैंने दरवाजा फिर बन्द कर दिया.
“मैं नहा कर कपड़े बदल रही थी, इसलिए देर हो गई!” मैंने साड़ी के पल्लू को कंधे पर डाल कर कहा.
“तभी मैं कहूँ कि इतनी सुहानी खुशबू कहाँ से आ रही है! अब पता चला भाभी के गीले बाल खुले हुए हैं, वैसे यह बात तो पक्की है न भाभी कि भईया इस समय यहाँ नहीं हैं!” मेरी ननद सोफे पर पसर कर बोली.
हाँ! लेकिन इस बात से तुम्हारा क्या मतलब है? मैं उसके पास बैठ कर बोली.
“मतलब यह है कि अगर वे यहाँ होते तो मुझे दरवाजे पर आधे घंटे तक खड़े रहना पड़ता! कोई दरवाजा खोलने नहीं आता!” मेरी ननद ने अपने स्वर में संशय का पुट देते हुए कहा.
वो क्यों? मैंने उलझन पूर्ण स्वर में पूछा.
“वो इसलिए कि तुम्हारे धुले धुले यौवन से उठती महक भईया को पागल बना डालती और वे तुम्हारे साथ किसी और काम में आधे एक घंटे के लिए व्यस्त हो जाते!” मेरी ननद ने अपनी बाईं आँख दबा कर कहा, मेरी जांघ में शरारत पूर्ण ढंग से चिकोटी काटी.
“अच्छा! कुछ ज्यादा ही हवा लग गई है तुम्हें जवानी की!””
“क्यों…? जवानी में जवानी की हवा नहीं लगनी चाहिए? अब तो अठारहवीं सीढ़ी पर पहुँचने का समय आ गया है…” मेरी ननद ने गर्व पूर्ण स्वर में कहा.
“वो तो देख ही रही हूँ! ये गहरे गले के टाप में कसमसाते दो गुंबज जिनकी गोलाई सहज ही दिख रही है और घुटनों तक की स्कर्ट की चुस्ती से बाहर को उभरते नितंब और पतली कमर! जरूर दो चार को बेहोश करके आ रही हो! अच्छा यह बताओ कि क्या पियोगी?” मैंने विषय बदलते हुए कहा.
“अब वह तो मुझे पीने को मिल नहीं सकता जो आप पीती हो! इसलिए कुछ और ही पिया जा सकता है!” उसने फिर एक अशलील मजाक किया.
“मैं क्या पीती हूँ?” मैंने नादान बनते हुए पूछा.
“तुम मेरे ही मुँह से सुनना चाहती हो! समझ तो गई हो! फिर भी मैं बताती हूँ! तुम पीती हो लिंग रस!” उसने इतना कहा और हंस पड़ी.
“हटो बदमाश… कितनी मुंह फट हो गई हो! चलो रसोई में चलते हैं!” मैंने उठते हुए कहा.
वह मेरे साथ खड़ी हो गई, उसने अपना हैंड बैग सोफे पर ही छोड़ दिया, वह मुझे आज पूरे रंगीन मूड में लग रही थी, इससे पूर्व भी मैंने उसके मजाक तो सुने थे लेकिन ऐसे हाव-भाव नहीं देखे थे.
रसोई में पहुंचते पहुंचते उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे कपोलों को चूम कर बोली- काश भाभी… मैं आपकी ननद नहीं बल्कि देवर होती… तुम्हारे यौवन की कसम! इन दोनों कठोर
पहाड़ों को पीस डालती और तुम्हारी जाँघों के भीतर अपने लिंग को तुम्हारी पसलियों तक पहुंचा कर ही दम लेती! मेरी ननद के इन शब्दों को सुन कर मेरे दिमाग ने एक योजना को जन्म दे डाला.
मैंने गैस पर चाय का पानी चढ़ाते हुए कहा- इन पहाड़ों को तो तुम अब भी पीस रही हो! वैसे एक बात बताओ! क्या तुम्हारा कोई बॉय फ्रैंड नहीं है?
मेरी ननद अपने भाई की ही भांति ही जरूरत से ज्यादा कामुक हो रही थी इस समय, शायद इसलिए और ज्यादा क्योंकि उसे ये भ्रम था कि सिर्फ मैं और वो ही हैं,
“नहीं… कई लड़के कोशिश करते हैं लेकिन मैं ही उन्हें लिफ्ट नहीं देती हूँ…” मेरी ननद ने मेरी ब्लाउज के दो तीन बटन खोल कर कहा.
“यह क्या कर रही हो तुम?” मैंने उसकी क्रिया को देख कर प्रश्न किया.
“करने दो ना भाभी…! मुझे बहुत मजा आता है स्तन पान में..! मैं एक सहेली के साथ ऐसा करती हूँ… हम दोनों लेस्बियन लवर हैं…! अब आपके ऐसे भरे भरे यौवन को देख कर मेरा जी मचल उठा है… यह ही सोच लो कि भैया हैं मेरी जगह…!” उसने कुनकुनाते स्वर में कहा और मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर मेरी ब्रा को सहलाने लगी, उसका दूसरा हाथ मेरे सपाट पेट पर रेंग रहा था.
क्या तुमने अभी तक किसी लिंग को नहीं देखा… मैंने उसकी क्रिया से आनन्दित हो कर पूछा.
मैंने चाय छानने के लिए तीन कप उतार लिये थे, मुझे बाथरूम के दरवाजे के बंद होने की हल्की सी आवाज सुनाई दे गई थी, मैं समझ चुकी थी कि मेरा छोटा भाई नहा चुका है और अब इधर ही आयेगा क्योंकि उसे भी जिज्ञासा होगी यह जानने की कि कौन आया है.
“कहाँ देखा है भाभी… कभी कभी इत्तेफाक से उस पहलवान की एक आध झलक देखने को मिलती है लेकिन उस झलक का क्या फायदा…” वह मेरे ब्लाउज का एक बटन और खोल कर बोली.
मैंने तीन कपों में चाय डाल दी.
“चलो आज दिखा देंगे…” मैंने कहा.
“तुम दिखा दोगी…? वो कैसे…?” उसने चौंक कर मेरी आँखों में देखा.
उसकी दृष्टि उन तीन कपों पर पड़ी जिनमें मैं चाय डाल चुकी थी.
“हैं!!!… यह तीसरा कप किसके लिए है…?” उसने हैरत जताई.
“यह तीसरा कप मेरे लिए है…” मेरे भाई ने रसोई में प्रवेश करते हुए कहा.
मेरी ननद उसे देखते ही मुझसे दूर छिटक गई, उसकी आँखों में असमंजस के भाव आ गये.
“यह मेरा छोटा भाई है…” मैंने अपनी ननद से कहा, फिर अपने भाई से बोली- यह मेरी ननद है… यह ही आई थी… जब हम बाथरूम में थे!
मेरे भाई ने मेरे ब्लाउज के खुले तीन चार बटन देखे तो मुस्कुरा कर बोला- यह भी अपने भाई की तरह आपके स्तनों की प्यासी हैं?
“जी?” मेरी ननद सकपकाई.
मेरी ननद का नाम शिल्पा है, मैंने स्थिति संभाली- डोंट वरी शिल्पा… आज तुम्हारी हसरत पूरी हो जायेगी… मेरे भाई से मैं ही कोई पर्दा नहीं करती… तुम्हारे भईया भी पर्दा नहीं करवाते हैं. बल्कि उन्होंने हम दोनों के साथ मिल कर काम सुख प्राप्त किया है… ना मैं इस चीज को बुरा मानती हूँ और ना तुम्हारे भईया! क्योंकि हैं तो हम स्त्री-पुरुष ही बाकी रिश्ते-विश्ते तो लोगों ने अपने फायदे के लिए बनाये हुए हैं… मुझे तो इतना आनन्द आया है अपने भाई के साथ कि मत पूछो, जब तुम आई थी तो हम दोनों साथ ही तो नहा रहे थे.
शिल्पा धीरे धीरे सामान्य होने लगी, मैंने एक चाय का कप उसकी ओर बढ़ा दिया, दूसरा कप अपने भाई की ओर बढ़ा दिया, उसने अपना कप ले लिया, मैंने अपना कप लिया फिर हम तीनों रसोई से बैडरूम में आ गये. मेरे भाई ने मात्र अंडरवीयर पहन रखा था, जिसमें से उसके सख्त होते लिंग का आभास सहज ही हो रहा था.
हम तीनों बेड पर बैठ गये, शिल्पा बार बार मेरे भाई के शरीर के आकर्षण में बंध रही थी, उसकी नजर बार बार मेरे भाई की पुष्ट जाँघों के जोड़ पर जाकर ठहरती थी.
मैं उसकी स्कर्ट को उसकी फैली टांगों से जरा ऊपर सरका कर उसकी जांघ पर चिकोटी काट कर बोली- तुम्हारे लिए आज का दिन बहुत अच्छा है… अगर यहाँ तुम्हारे भईया होते तब तो और भी ज्यादा मजा रहता, फिर भी मेरा भाई तुम्हें संतुष्ट करने में सक्षम है… .हमने इसे पूरी तरह ट्रेंड कर दिया है!
मैंने अपने भाई के अंडरवीयर की झिरी में से उसके लिंग को बाहर निकाल कर शिल्पा के हाथ में थमा कर कहा- इसे धीरे धीरे सहलाओ! तब देखना यह कैसा कठोर और लंबा हो जाता है!…भभकने लगेगा यह!
मैंने चाय का खाली कप बेड की पुश्त पर रखा और अपने हाथों से शिल्पा के टॉप की जिप खोलने लगी.
मेरे भाई ने भी चाय का खाली कप तिपाई पर रख कर मेरे ब्लाउज को मेरी बाजूओं से निकाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल कर उसके जालीदार कप को स्तनों से नीचे सरका कर मेरे स्तनों को सहलाना और चूसना शुरु कर दिया था, मैं उत्तेजित होने लगी थी, उत्तेजना में मेरा शरीर बेड पर फैलने लगा था.
“भाभी पहले मैं आपके स्तन को चूसूंगी.” शिल्पा ने मेरे भाई के लिंग को छोड़ कर मेरे स्तनों पर आते हुए कहा.
“ठीक है…” मैंने उससे कहा और फिर अपने भाई से कहा- तुम शिल्पा के स्तनों को चूसो… मगर आहिस्ता आहिस्ता… और इसकी स्कर्ट भी निकाल दो!
इतना कह कर मैं उसके लिंग को सहलाने लगी.
शिल्पा ने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया, मेरे भाई ने शिल्पा के टॉप के नीचे की शमीज उसके गोरे गुदाज स्तनों से ऊपर कर उसके निप्पल चूसने शुरू कर दिये. हम तीनों ही की साँसें तीव्र हो उठी थी, बैडरूम का दृश्य उन्मुक्त यौवन के रस में डूबता जा रहा था.
शिल्पा द्बारा निरंतर होते स्तनपान ने मुझे उत्तेजित कर डाला था, अब मैं चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ चली थी, मुझे मालूम था कि मेरा भाई लगातार दो बार स्खलित हो सकता है, इसलिए मैंने पहले शिल्पा को उसके द्बारा आनन्द दिलवाना ठीक समझा और यही सोच कर अपने भाई से कहा- तुम शिल्पा की योनि में लिंग प्रवेश करो… .लेकिन पहले कुछ थूक या क्रीम लगा लेना… लो तेल ही लगा लो… मैंने बेड की पुश्त पर रखी तेल की कटोरी उसकी ओर बढ़ाई.
वह शिल्पा की स्कर्ट को खोल चुका था और उसके नितंबों को व चिकनी जाँघों को सहला रहा था. उसने अपने तपते लिंग के मोटे से मुंड पर तेल चुपड़ा फिर जरा सा तेल शिल्पा की अनछुई नर्म रोयों से सज्जित योनि पर लगाया और अपने लिंग को उसके टाइट मुख में फंसा कर उसकी जांघ को हाथ से ऊपर उठा कर जोर का धक्का मारा, लिंग मुंड शिल्पा की योनि में उतर गया.
शिल्पा जोरों से चीखी, उसका यह पहला अनुभव था, मैंने उसकी पीठ को सहलाया और उसके होंठ अपने होंठ से बंद कर दिये, उसकी गर्म साँसे मेरी गर्म साँसों से उलझने लगी थी, उसके हाथों को मैंने अपनी साड़ी के नीचे प्रवेश दे दिया था, वह उत्तेजना और दर्द के चक्रवात में फंसती जा रही थी, उसके हाथ मेरी चिकनी जाँघों को सहलाने मसलने लगे थे, मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी.
मेरे भाई ने शिल्पा की जाँघों को पकड़ कर एक और धक्का मारा तो शिल्पा तड़पते हुए कह उठी- तुम्हारे भाई तो मुझसे कोई दुश्मनी निकाल रहे हैं… उफ… आह… कितना दर्द हो रहा है उफ… इनसे कहो जो करे आराम से करें उफ…
वह और कुछ कहती उससे पहले ही मैंने उसके मुँह में अपने एक स्तन का निप्पल दे दिया, वह उसे चूसने लगी, मेरे भाई ने थोड़ा पीछे होकर और जोर का धक्का मारा, इस बार उसका सात आठ इंच का लिंग जड़ तक शिल्पा की योनि में समां गया, शिल्पा की बड़ी तेज़ चीख निकली, मेरे भाई ने लिंग फ़ौरन बाहर खींचा तो शिल्पा ने ठंडी सांस ली और तड़पती हुई बोली- उफ… भाभी तुमने तो कुछ ज्यादा ही ट्रेंड कर दिया है इन्हें… उफ कैसे स्पेशल शॉट खेलते हैं उफ… आप रुक क्यों गए महाशय… इसे आगे पीछे करते रहो… अभी तो मजा आना शुरू हुआ है उफ…
शिल्पा ने मेरे भाई से इतना कहा और मेरे स्तन का निप्पल मुंह में ले लिया, वह निप्पल को किसी भूखे की भांति चूसने लगी.
मेरा भाई उसकी योनि में अपने लिंग से घर्षण करने लगा था और मैं अपने हाथों से शिल्पा के हाथों को पकड़ कर उनसे अपनी पेंटी का वह हिस्सा रगड़ने लगी थी जिसके नीचे मेरी योनि थी, मेरा भाई मुद्रा बदल बदल कर शिल्पा को आनन्द दे रहा था, शिल्पा का शरीर उत्तेजना से काँपने लगा था, वह कराह भी रही थी और मेरे भाई का सहयोग भी कर रही थी.
अंततः थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ चरम पर पहुँच कर स्खलित हो गये, फिर मेरे भाई ने मेरी भी प्यास बुझाई.
शिल्पा ने मेरे स्तनों को जिस तरह चूस चूस कर मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल कर दिया था वैसे ही मैंने भी उसके स्तनों को चूस चूस कर उसे कंपकंपा डाला था.
हम तीनों की काम-क्रीड़ा तब तक चलती रही जब तक हम थक न गये.
कहानी आगे भी है! Antarvasna
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