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सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म का होना या नहीं होना व्यक्ति की व्यक्तिगत अनुभव, स्वास्थ्य, और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, और यह नॉर्मल हो सकता है।
कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म अनुभव करने में सामान्य होते हैं, जबकि दूसरे यह अनुभव नहीं कर सकते हैं। यह निर्भर करता है कि किस प्रकार की स्टिमुलेशन और सेक्स के प्रारंभ में किस प्रकार की मनोबल की आवश्यकता होती है, जिससे एक व्यक्ति ऑर्गैज्म कर सकता है।

कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म के प्राप्ति में समय लगा सकते हैं, जबकि दूसरे लोग इसे तेजी से प्राप्त कर सकते हैं। यह भी निर्भर करता है कि कितनी सारी सेक्स के प्रारंभ में स्टिमुलेशन और आनंद की दर्जीकरण हो रही है।
ऑर्गैज्म की अभाव किसी भी व्यक्ति के लिए एक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, खासकर अगर यह बार-बार हो रहा है और यह व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ डाल रहा है। इस स्थिति में बेहतर होता है कि व्यक्ति एक सेक्स थेरपिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें, जो उनकी समस्या को समझने और समाधान करने में मदद कर सकते हैं।
सार्वजनिक रूप से यह जरूरी है कि सेक्स को सुरक्षित और सहमति आधारित तरीके से किया जाए, और जब भी सेक्स के बारे में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तो सहायता और सलाह ली जानी चाहिए।
हम दोनों आमने सामने Antarvasna Sex Stories ही खड़ी थी, जिमी ने बीच में वह डंडा फंसा कर उसका एक भाग अपनी चूत पर लगा कर और दूसरा मेरी चूत से सटा दिया।
यह नज़ारा बहुत ही रोमांटिक था, हम दोनों ने अपनी अपनी पोजीशन संभाल ली और एक दूसरे की चूचियाँ मसलते हुए अपनी कमर आगे झटकी, डंडे के दोनों सिरे हमारी आँखों से ओझल हो गए, मेरी उत्तेजना का कोई ठिकाना नहीं था, बस इसी तरह हम धीरे धीरे आगे बढ़ते गए और डंडा लुप्त होता गया, कुछ देर में हम दोनों के शरीर आपस में भिड़ गए।
जिमी का अंदाजा सही था, ठीक 6-6 इंच ही हम दोनों के हिस्से आया था, एक अजीब सी मस्ती हम दोनों पर छा गई, हम एक दूसरे की चूची मसलते हुए होंठ चूमने लगी, तभी दरवाजे पर आहट हुई।
‘लगता है बाबूलाल आ गया!’ मैंने खुश होकर कहा।
‘हाँ आहट तो उसी कमीने की है!’ कहते हुए जिमी ने एक झटके के साथ मुझे अपने शरीर से जुदा कर दिया, डंडा फिसलता हुआ मेरी चूत से बाहर हो गया मगर जिमी की चूत मे आधा वैसे ही फंसा था, मेरी आंखे फटी रह गई क्योंकि वह डंडा जिमी के शरीर का ही अंग लग रहा था, जिमी उसी हालत में अपनी चुचियाँ हिलाती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ी।
जैसे ही दरवाजा खुला बाबूलाल लड़खडाता हुआ अंदर आ गया, उसकी आँखें सीधी उस डंडे पर जा टिकी- ऐसा लग रहा है यह तुम्हारा ही सामान है मैडम!
उसकी बात सुन कर मुझे हंसी आ गई।
‘अब जमाना आ गया है जब औरतों को डंडे लगवाने पड़ेंगे और तुम मर्दों को झुक कर खाने पड़ेंगे।’ जिमी ने दरवाजा बंद करते हुए कहा।
‘छोड़ो मैडम, यह जमाना अभी बहुत दूर है, आओ पहले तो हमी तुमको अपना डंडा खिलाते हैं।’ उसने अपना पजामा उतार कर एक तरफ रखते हुए कहा।
‘मैं तो बहुत बार खा चुकी हूँ, आज इसे खिलाना है, बेचारी बहुत दिनों से परेशान है।’ जिमी ने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा।
वो जैसे ही मेरी तरफ घूमा मेरा दिल जोर से धड़क उठा, उस समय उसके लंड में हल्की-हल्की उत्तेजना थी लेकिन आकार वही था जो जिमी ने बताया था। यह आदमी है या गधा, मैं यह सोचने को मजबूर हो गई।
‘यह हर परेशानी की दवा है मैडम!’ उसने अपना लंड मुझे दिखाते हुए हिलाया- अब यह आ गया है, सारी चिंता खत्म!
‘हूँ… पहले ही काफी देर हो चुकी है, चलो काम पर लगो!’ जिमी ने उसे मेरी तरफ धकेलते हुए कहा।
बाबूलाल एक ही झटके में मेरे पैरों पे आ गिरा, जिमी भी हंसती हुई मेरे पास आ खड़ी हुई, बाबूलाल औंधे मुंह गिरा था, जैसे ही उसने नजर उपर उठाई उसकी नजर सीधी मेरे चूत पर पड़ी- अरे… बाप… रे… इसमें से तो भाप निकल रही है मैडम!’
बाबूलाल चिल्लाया।
‘क्या मतलब है तेरा?’ जिमी ने अपने पैर से उसका सिर ऊपर उठाते हुए कहा।
‘मतलब साफ है मैडम, इसकी गर्मी से तो मेरा लंड पिघल जाएगा।’ वह हाथ झाड़ता हुआ खड़ा हुआ।
उसकी बात सुन कर मैं दंग रह गई, मैंने झुक कर अपनी चूत देखी मुझे तो कहीं भाप नहीं दिखी।
‘क्या बक रहा है तू?’ जिमी को गुस्सा आ गया, उसने बाबूलाल का लंड पकड़ कर इतनी जोर से झटका मारा कि बेचारा बाबूलाल दर्द से तड़प उठा- मईया… रे मैं तो जा रहा हूँ!
कह कर वो अपने कपड़े उठाने लगा।
उसे जाता देख मैं तो तड़प उठी- हाय… क्यों झगड़ा कर रही हो जिमी? वो जा रहा है!
‘अरे… मैं नहीं वो साला खुद झगड़ा कर रहा है, अगर भाप निकल रही है तो इसमे डरने की क्या बात है?’
‘ज़रा ऊँगली डाल कर देखो, खुद पता चल जाएगा कि मैं क्यों डर रहा हूँ!’
‘ठीक है इसका फैसला अभी हो जाता है!’ जिमी ने बाबूलाल की तरफ देख कर दांत भींचे- अगर तू यहाँ से भागा तो तेरी मूंछे उखाड़ कर तेरे पीछे घुसेड़ दूंगी!’ कहते हुए वो उसी कमरे में गई जहाँ से वो डंडा उठा कर लाई थी जो अब तक उसकी चूत में आधा फंसा हुआ था।
जब वह लौटी तो उसके हाथ में थर्मामीटर था जिससे डॉक्टर बुखार देखते हैं, जिमी ने मुझे बैठा कर मेरी जांघें फैलाई और थर्मामीटर मेरी चूत में आधा फंसा दिया, बाबूलाल भी आँखे फाड़े हुए सामने खड़ा हो गया, तभी एक अजीब बात हो गई, थर्मामीटर मेरी चूत से बाहर उछला और उसके टुकड़े टुकड़े हो गए, हम तीनों की आंखें फटी रह गई।
‘देख… क्या हाल हुआ है थर्मामीटर का! यही हाल इसका होने वाला था!’ बाबूलाल ने अपनी मोटे लंड की तरफ इशारा किया।
‘ओह्ह्ह… अब मेरा क्या होगा जिमी, मैं तो आज बड़ी आशा लेकर यहाँ आई थी यार!’ मैंने तड़प कर कहा।
‘मैंने तुझसे पहले ही कहा था पायल, यह पागल कुतिया की तरह लार टपका रही है।’
‘अब मैं क्या करूँ? कुछ सोच यार, नहीं तो मैं रो पडूँगी!’
‘नहीं…’ वो मेरा कन्धा पकड़ते हुए बोली- आज तुझे नहीं इस पगली को रोना पड़ेगा, इसके आंसू निकलवाना बहुत जरुरी हो गया है।’
उसने बाबूलाल की तरफ देख कर कहा- क्या बोलता है तू?
‘एक गाँधी का नोट और लगेगा मैडम!’ बाबूलाल बोला।
जिमी को गुस्सा आ गया। वो कुछ करती उससे पहले मैंने जिमी से कहा- तुम पैसे दे दो।
‘ठीक है बेटा ले ले तू पैसे, आज मैं भी तुझसे एक एक पैसे का हिसाब लेकर ही रहूंगी।’ जिमी अपने पर्स से रूपए निकाल कर उसे देती हुई बोली।
‘ठीक है.. ठीक है!’ कहता हुआ वह मेरी जांघों के नीचे फर्श पर बैठता हुआ बोला। उसने एक बार कुत्ते की तरह मेरी चूत को सुंघा फ़िर लम्बी जीभ निकाल कर चाटने लगा, उसका स्पर्श बेहद उत्तेजक था। मैं बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी।
जिमी मेरे पास बैठ गई, मेरी चूची दबाने लगी और होंठ और गाल चूमने लगी। फिर तो मैं आकाश में उड़ने लगी, मेरा अंग अंग झनझना उठा, मेरी चूत तड़पने लगी, वह मेरी चूत को हाथों से फैला कर चाट रहा था, जिमी ने मेरी चूचियाँ रगड़ डाली, वह उन पर उभरे निप्पल एक बच्चे की तरह चूसने लगी।
मैं मस्ती की वादियों में ऐसा खोई कि मैं अपना नाम पता तक भूल गई। पूरे बदन में मीठी मीठी गुदगुदी उठ रही थी जिसका अहसास मुझे पागल बना रहा था।
मैंने भी कसमसा कर जिमी की छातियों को रगड़ डाला।
उसने तड़प कर मेरे होंठ छोड़ दिये और मस्ती में कसमसा कर एक हाथ से डंडा हिलाने लगी जो बहुत देर से उसकी चूत में फंसा था।
देखते ही देखते आधे से ज्यादा डंडा उसकी चूत में घुस गया था, वह फिर भी उस डंडे को बहुत जोर जोर से हिला रही थी।
‘सी… ई… ई… क्या कर रही है पागल, ऐसे तो ये डंडा टूट जाएगा यार!’ मैंने उसके हाथों को पकड़ते हुए कहा।
‘हूँ… हाँ… छोड़ दे पायल, आज मैं इस डंडे को तोड़ कर ही दम लूंगी!’ उसने मेरा हाथ झटक दिया।
वासना का नंगा नाच शुरू हो चुका था, बाबूलाल ने मेरी चूत चाट चाट कर बहुत सारा रस निकाल दिया था, अब मुझे वहाँ कुछ ठंडक सी महसूस हो रही थी।
अब मैं चूत चटवाने से ऊब गई थी और बाबूलाल को वहाँ से हटा दिया, जब वह खड़ा हुआ तो उसका चेहरा देखने लायक था, उसके होंठ चिपचिपा रहे थे, उसकी मूंछें चूत के रस से भीग कर अकड़ गई थी।
‘हाँ… जी.. अब जरा इसका भी खयाल कर लो!’ वह अपने होंठ चाटता हुआ और अपना विकराल लंड हिलाता हुआ बोला।
‘अरे… इसे कौन छोड़ने वाला है!’ यह कह कर जिमी बेड से कूद गई, उसने इशारे से मुझे भी बुला लिया, मेरे होंठ तो पहले ही फड़फड़ा रहे थे क्योंकि मैंने तीन साल बाद लंड के दर्शन किये थे, हम दोनों पास पास बैठ गई और बाबूलाल का लंड बारी बारी से चाटने लगी।
मैं तो उसे अपने होंठ में दबा कर यह भी भूल जाती कि उसे छोड़ना भी है। जिमी जबरदस्ती खींच कर मेरे मुंह से निकालती।
पुच्च… पुच्च… की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी, बाबूलाल भी खुल कर मैदान में आ गया।
वह लंड चुसाई का भरपूर आनन्द उठा रहा था, 10 मिनट बाद वह बोला- बस करो मैडम, अब इसे छोड़ दो, इस पर रहम करो तो अच्छा है।’
मैं भी अब यही चाहती थी कि जल्द से जल्द चुदाई-लीला शुरु हो जानी चाहिए।
मैंने फर्श पर हथेलियाँ टिकाई और घुटने मोड़ कर एक पशु की तरह झुक गई, बाबूलाल मेरी गांड के पीछे आ खड़ा हुआ, वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी गांड और चूत पर रगड़ने लगा, हम दोनों की चुसाई के कारण उसका लंड एकदम चिकना हो रखा था, चूत पर लंड रगड़ने से मेरी चूत से भी चिकना रस निकलने लगा, तभी उसने एक झटका मारा कि उसका लंड मेरी चूत के छोटे से द्वार में आ फंसा, ऐसा झटका लगा कि मैं उछल पड़ी।
मैंने बाबूलाल से कहा- अरे… भैया, थोड़ा धीरे पेलो! यह जिमी की चालू मशीन नहीं है जिसमें रोज तेल जाता है, यह मशीन तीन साल से बन्द है, पहले इसे ढीला कर लो फिर जैसे मर्जी हो चलाना।
मैंने कराहते हुए कहा।
‘मैडम जी, आप की सहेली मुझे भैया कह रही है?’ बाबूलाल अपना लंड आगे पेलते हुए बोला।
‘तुझे भैया बोल रही है तो तू बन जा इसका सैयाँ! इसकी चूत में ऐसा लंड पेल कि हरामजादी चुदवाना भूल जाये, साली को बहुत खुजली होती है! मिटा दे सारी खुजली।’ जिमी ने उसे और जोश में लाने के लिए बोला।
अब तो बाबूलाल बंदर की तरह उछलने लगा, उसका लंड मेरी चूत की गहराई में उतर कर ऐसी तैसी कर रहा था, ऐसी तैसी तो कर रहा था लेकिन मजा इतना आ रहा था कि उसका बयाँ मैं यहाँ नहीं कर सकती, मेरे शरीर के साथ साथ मेरी चूचियाँ भी हवा में झूल रही थी, मेरे मुंह से ऐसे शब्द फुट रहे थे- हूँ… सा… आ… आ… ..बाश… बाबूलाल, सी… ई… सी… ई… बस ऊँ… आह… मुझे ऐसे ही झूले की तलाश थी रे…!’
बाबूलाल भी मेरी तरह पागल आदमी था, उसने तो मेरा एक एक पुर्जा खोल कर रख दिया, वह बुरी तरह हाँफता हुआ मुझे मस्ती का झूला झुला रहा था, बेचारी जिमी सामने बैठी अपनी चूत मे फंसा डंडा हिला रही थी, अचानक वह उठी और बाबूलाल के पीछे जा खड़ी हुई।
‘ठहर जा बेटा!’ उसने यह कह कर ढेर सारा थूक अपने डंडे पर लगाया और बाबूलाल की थिरकती गांड से सटा दिया- मैं भी अभी तेरी ऐसी तैसी करती हूँ साले…!’
‘आ… आई… मार… दिया बेचारे पापड़ वाले को साली!’
बाबूलाल की दर्द भरी चीख सुन कर मुझे पूरा अंदाजा हो गया कि जिमी ने बाबूलाल के साथ क्या हरकत की है। यह तमाशा सारी रात चलता रहा।
पता नहीं उस बुड्ढे में क्या जादू है। हर रात मैं उसके पास खिंची चली आती हूँ, जिमी भी हमारे साथ होती है, अब मेरी जिन्दगी बड़े आराम से चुदवाते हुए गुजर रही है। Antarvasna Sex Stories
आपको हमने बहुत से किस्से Hindi Porn Stories पहले भी सुनाये हैंआप शायद हमें भूल गए, लेकिन हम भूल नहीं पाये हैं
आपने इतना प्यार हमको दिया कि हम आप के लिए एक बार फ़िर से आए है
तो एक बार फ़िर से आता हूँ असली बात पे
अपनी औकात पे
बात है उस कमसिन की, गर्मी के एक दिन की
मैं बैठा था उदास, क्यूंकि लंड को लगी थी बड़ी ज़ोर की प्यास
मेरा लंड भी तो दशहरा मनाना चाहता था
और किसी की चूत में ठिकाना चाहता था
एक चुलबुली लड़की को देख कर मेरा मन बहक गया
लंड का चेहरा खिल गया और चहक गया
आख़िर उस लड़की ने मेरी तरफ़ देख लिया
मैंने भी उस लड़की की तरफ़ देखते हुए एक स्माइल को फेंक दिया
वो हँसने लगी, मुझे लगा कि फंसने लगी
मैंने हिम्मत की उसके पास जाने की
उसे चुदाई के लिए मनाने की
मैंने कहा की आप बहुत सुंदर हो
सुन्दरता का समुन्दर हो
वो बोली कि सब यही कहते हैं
और बस मुझे ही देखते रहते हैं
मैंने कहा चलो कहीं चलते हैं
आपको ले जाने के लिए दिल में अरमान मचलते हैं
वो मान गई,
मेरी तो जैसे कि जान गई
मैं उसे ले के अपने रूम पे आ गया
उसे चोदने का मेरे दिल पे जैसे जूनून छ गया
मैंने उसे अपने बिस्तर पे लिटा दिया
और घर का दरवाज़ा बंद कर दिया
उसने कुरता और ब्रा उतार के अपने मोम्मो को मेरे सामने धर दिया
उसके मोम्मे देख के मुंह में पानी आ गया
और मैंने उसके मोम्मों को अपने हाथ में जल्दी से धर लिया
वो बोली इन्हे पकड़ोगे ही या मुंह में भी लोगे
बस बिठाने के लिए ही लाये हो या चुदाई का सुख भी दोगे
उसकी ये बात सुन के मेरा हौसला बढ़ गया
और अपने कपड़े उतार के मैं उस के ऊपर चढ़ गया
मैंने उसकी चूत को पहले ऊँगली से और फ़िर अपने लंड से चोद डाला
एक या दो बार नहीं चार बार उसका पानी निकाला
फ़िर मैंने उसे उल्टा किया और उसकी गांड मारने की सोच रहा था
वो बोर न हो इस लिए उसके मोम्मे भी नोच रहा था
मैंने उसे कहा कि मेरा लंड चूस लो
गला सूख रहा होगा इसलिए थोड़ा लंड का जूस लो
वो बोली इसके पैसे अलग लूंगी
और पहले पिछले पैसे का हिसाब कर लो तभी और चुदाई करने दूँगी
मैंने कहा कि पैसे कि क्या बात करती हो
तुम जल्दी बता दो मुझे तुम्हारी गांड भी लेनी है
पैसे की बात मत करो मुझे बहुत बेचैनी है
वो बोली कि तुमने मुझे चार बार चोदा है तो ५०००० दे दो
मैंने कहा ये तो बहुत ज़्यादा हैं
सब तो ५०० लेती हैं, तुम भी ले लो
वो बोली मेरा रेट यही है
और मैंने अपनी भाई से भी कही है
अगर तुमने पैसे नहीं दिए तो वो आता ही होगा
और अपने साथ ४ -५ गुंडे लाता ही होगा
ये सुन के मेरी तो फट ही गई
मैंने कहा इस वक्त मेरे पास १०००० हैं सो ले जाओ
लेकिन कृपया अपने भाई को मत बुलाओ
वो बोली कि ठीक है लेकिन तुमने अभी मेरी गांड भी तो लेनी है
और उसकी पेमेंट एक्स्ट्रा देनी है
मैंने कहा कि बस बहुत हो गया है
अब मुझे कुछ भी नहीं चाहिए, आप जा सकती हो
वो चली गई तो मैं सोचता रहा
कि ५०००० में तो मैं उमर भर चुदाई का मज़ा ले सकता था
और ये बहन की लौड़ी १०००० तो ले गई
और ४०००० और मांगती है
जाने दो ये पैसा तो हाथ की मैल है
और इसी के लिए ही तो हर एक खेल है
तो दोस्तों चोदो-चुदाओ और लाइफ को खुशहाल बनाओ
लेकिन किसी अनजान को चोदते हुए कंडोम ज़रूर लगाओ
मुझे आपकी चूत और मेल का इंतज़ार रहेगा Hindi Porn Stories
हाय दोस्तो, मैं राजेश दिल्ली से। मै आप Hindi Sex Stories को एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ। मेरे दिल्ली वाले फ्लैट में एक नौकरानी काम करती थी। उसका नाम पूनम था। उमर करीब २२ साल होगी, फिगर ३२-२८-३४। उसके बूब्स बड़े बड़े थे। जब वो चलती थी तो उसके दोनों चूतड़ काफ़ी सेक्सी लगते थे उसका नज़रें मिलाकर मुस्कुराना भी मुझे बड़ा कामातुर कर देता था
आख़िर एक दिन मुझे मस्ती करने का और उसके कामातुर होने का मज़ा मिल गया। एक दिन मैं अपने ऑफिस से फ्लैट पर आया तो मैंने पूनम को आवाज़ दी, कोई जवाब ना पा कर मैंने सोचा कि वो फ्लैट पर नहीं है। मैं थका हुआ था इस लिए अपने कपड़े उतार कर मै नहाने के लिए स्नानघर में घुसा, घुसते ही मैंने देखा कि पूनम नहा रही थी, उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, वो पूरी नंगी होकर नहा रही थी, उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी इसलिए उसने मुझे नहीं देखा।
शायद सोचा होगा कि इस वक्त कौन आएगा इस लिए शायद बाथरूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया, मैंने सोच लिया आज तो इसे जरूर चोदुंगा, मैंने चुपके से उसके सारे कपड़े उठाये और बाहर आ गया और ड्राइंग रूम में बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसका चेहरा दरवाज़े से झांकता दिखाई दिया, वो बोली राजू (पहले सर बोलती थी मैंने ही बोला मुझे नाम से बुलाया करो, नहीं तो मुझसे बात मत करना, तभी से वो काफ़ी खुलकर बात करती थी ) मेरे कपड़े दे दीजिए”
मैंने कहा “ख़ुद आ कर ले लो”
वो अपने बूब्स को दोनों हाथों से ढक कर बाहर आयी, मेरे सामने एक लड़की बगैर कपड़ों के खड़ी थी यह देख कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया।
मैंने कहा तुम बहुत सुंदर हो पूनम, वो शरमा गयी, मेरी हिम्मत बढ़ी और मैं खड़ा हो गया, खड़े होते ही मेरा लंड और तन गया और मेरा ७” का लंड देख कर उसकी आखें फैल गयी। मैं उसके पास गया और उसके होठों को चूमने लगा। पहले तो उसने विरोध किया लेकिन फिर वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी। फिर मैंने लिप्स को छोड़ा और नीचे आ कर उसके बूब्स को चूसने लगा।
फिर मैंने उसे बाँहों में उठाया और बेड रूम में ले गया। बेड पर लिटा कर मैंने उसकी टांगें फैलाई और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत मक्खन की तरह चिकनी थी.मैंने उसकी चूत में अपनी दो उँगलियाँ घुसाई और अन्दर बाहर करने लगा। वो गरम हो रही थी।
वो बेताबी में अपने हाथों से अपने चुचिओं को मसलने लगी। उसके मुंह से आह ओह और करो सुन कर मेरा जोश बढ़ गया मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो उसे लोलीपोप की तरह चूसने लगी और मैंने उसकी चूत को जी भर कर चूसा। अब हम ६९ पोसिशन में थे।
फिर मैंने उससे कहा पूनम अब मैं तुम्हारी चूत का मजा लूँगा। वो तो पहले से तैयार थी उसने कहा हाँ अब और रहा नहीं जाता। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और धक्का दिया। लंड थोड़ा अन्दर गया ही था कि वो चीख उठी- आह धीरे करो दर्द होता है। लेकिन मैंने उसकी बात अनसुनी कर अपना काम जारी रखा।
लंड पूरा घुसते ही वो छिपकली की तरह मेरे सीने से चिपक गयी। फिर मैं अपना लंड तेज़ी से उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा। मैंने उसे कस कस कर चोदा। वो भी गांड उछाल उछाल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। अब मैंने उसे कुतिया स्टाइल में बिठाया और कहा पूनम अब मैं तुम्हारी पीछे से लूँगा।
वो डर गई, बोली- नहीं राजू मेरी गांड मत लो, बहुत दर्द होगा, आपका लंड बहुत मोटा है। मैंने उसे समझाया कि मैं गांड नहीं चूत ही मारूंगा और तुम्हें भी मज़ा आयेगा।
वो तैयार हो गयी। मैं उसकी चूत में लंड घुसाने लगा। लंड थोड़ा अन्दर गया कि वो दर्द से छटपटाने लगी और छूटने की कोशिश करने लगी पर मैंने उसकी चूचियां कस के पकड़े रखी थी और धक्के लगाता रहा। वो भी थोड़ी देर के बाद जब उसकी चूत पूरी गीली हो गई और मेरा लण्ड उसकी चूत की दीवारों पर रगड़ रहा था तो अपने चूतड़ पीछे ले जा कर पूरा का पूरा लंड लेने लगी और जब भी मैं रुकता या धीरे होता तो बोलती कि राजेश प्लीज़ रुकना नहीं करते रहो, बहुत मज़ा आ रहा है।
थोड़ी देर के बाद मैं नीचे कमर के बल लेट गया और मेरा लंड सीधा ९० डिग्री पर था, मैंने पूनम को अपने ऊपर बुलाया और बोला कि अब तुम्हारी बारी है चलो घुड़सवारी का मजा लो।
वो पहले तो शरमाई लेकिन मस्ती की वजह से फौरन मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को पकड़ा और उसपर बैठने की कोशिश करने लगी। जैसे जैसे लंड चूत में घुस रहा था उसके मुंह पर एक मस्ती भरी मुस्कान छा रही थी, खुले बाल उसके चेहरे को और भी सुंदर बना रहे थे और उसकी आखों में ना जाने कितनी मधुशाला की मस्ती छा रही थी वो मैं बता नहीं सकता।
उसकी एक एक सीत्कार और अपने होंठों को हलके से काटना और फिर अपनी चूचियों के चुचुकों को सहलाना बड़ा ही कामुक दृश्य बन गया था, मुझे उसके धक्के बड़े भारी पड़ रहे थे क्योंकि इस मुद्रा में चूत की कसावट और ज्यादा हो गई थी और मस्ती में वो भी पूरे कस कस के मेरे लंड को पूरा का पूरा लिए जा रही थी।
थोड़ी देर बाद ही वो मेरी छाती पर चूचियां रगड़ते हुए बिल्कुल सामने आ चुकी थी दोनों आपस में एक दूसरे की जीभ को चूस रहे थे, तभी मैंने देखा कि उसने अपनी रफ्तार अचानक से तेज कर दी और मेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर मुंह के रस को ले रही थी मुझसे नियंत्रण नहीं हो पा रहा था और लगता था कि मैं कभी भी वीर्य की बौछार कर दूँगा वो भी अपने चरमोत्कर्ष पर थी और अपने पूरे शरीर को झकजोरते हुए ज़बरदस्त धक्के लगा रही थी ..ओ ओ ओह्ह ह्ह्छ राजू ऊ ओ ओह ह्ह्ह मेरे सोना सोना …ओह ह्ह्ह्छ जानू मेरी जान न निकल जाए मुझे कस के पकड़ लो।
मैंने उसको कस के पकड़ लिया और अपनी टांगे उसकी टांगों में कैंची की तरह फंसा ली। वो ऐसी छुटी कि उसकी चूत का रस मेरी जांघों पर भी महसूस हो रहा था और करीब चार पाँच धीरे धीरे उसने धक्को के साथ अपना आपा खो दिया और पागलों की तरह मेरे कंधे पर काट लिया, उसने मुझे इतनी जोर से पकड़ा था कि जैसे कोई बहुत बड़ा करंट लग गया हो करीब पाँच मिनुटे बाद वो उठी तो शरमाती हुई हंसने लगी और बड़े ही अचरज से मेरे लंड पर गिरा हुआ अपना रस देखने लगी, बोली- राजू ये पहली बार है जो मुझे पूरी तरह संतुष्टि मिली है और मैंने पानी छोड़ा है वरना अब तक जो भी मैं ३-४ बार चुदी हूँ उसमें मैंने दूसरो के झाडे हुए पानी को देखा था। आज तुमने मुझे अहसास दिलाया है कि एक औरत की ज़िन्दगी में सबसे बेशकीमती चीज़ है औरत का पानी झड़ना। मुझे नहीं पता ये अहसान मैं कैसे उतारूंगी पर जब तक जिंदा हूँ इस बेशकीमती आनंद से और संतुष्टि से भरे हुए पल कभी नहीं भूलूंगी…।
मेरा पेशाब आ रहा था तो मैंने हँसता हुआ बोला अभी आता हूँ मेरा भी काम बाकी है। मैं टॉयलेट की तरफ़ मुड़ा तो वो बोली तुम्हारी पीठ पर खून कैसा?
मैंने कहा- जब तुम सातवें आसमान की सैर कर रही थी तो इतना कस के जकड़ा कि तुम्हारे नाखून से मेरी पीठ पर खरोंच आ गई।
वोह बोली- मैं आज के बाद ये नाखून काट दूंगी और मुझे माफ़ करदो।
मैंने कहा- पागल ये तो मैं चाहता था, तुम्हें मेरी कसम जो नाखून काटे। जब कोई भी इंसान पहली बार झड़ता है तो उसको नहीं पता होता उससे क्या क्या हो रहा है। ये देखो कंधे पर कितनी ज़ोर का काटा है !
वोह बोली- ये तो मुझे पता है चलो अब जल्दी से अपना काम भी कर लो।
मैंने फिर से उसको घोड़ी बनाया और उसके कूल्हों को पकड़कर अपनी रफ्तार बढ़ा दी। पूनम से सहा नहीं जा रहा था और जोर जोर से अओउच। …उई ई ओ ऊ ओह हह कर रही थी कुछ धक्कों के साथ ही मेरे अन्दर से सुनामी की तरह तूफ़ान आया और पूनम की चूत को भरता हुआ बाहर तक आ गया।
हम दोनों उसी अवस्था में बेड पर जा गिरे और पता नहीं कितनी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। वो मुझ पर फ़िदा हो चुकी थी और उसकी आंखों में मेरे लिए एक प्रेमिका का प्यार साफ़ झलक रहा था मैंने उसके होंठों को चूमा और बोला कि मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा करता हूँ जो समय तुमने दिया वो मुझे भी याद रहेगा, मैंने भी तुम्हारे जितनी सेक्स मैं बिल्कुल पागल होकर चाहने वाली लड़की नहीं देखी। आइ लव यू पूनम। दिल से !
फिर मैंने पूछा पूनम मज़ा आया ?
वो बोली- हाँ बहुत मज़ा आया। आप बहुत अच्छा चोदते हैं। अब मैं रोज़ ! ! आपसे ही चुदवाउंगी। फिर तो हम रोज़ ही चुदाई का मज़ा लेने लगे। ये सब तब तक चला जब तक उसकी शादी नहीं हो गई।
अगली कहानी में पूनम की बड़ी बहन के बारे में बताऊंगा तब तक इस कहानी का मजा उठायें।
आशा करता हूँ ये कहानी आपको कुछ हद तक पसंद आएगी। मैं आप सभी कहानी पढने वालों की राय जानना चाहता हूँ कि मेरी कहानी कैसी लगी। ताकि मैं और कहानी लिखूं या नहीं। ..तो मुझे इ-मेल करके बता दें। मुझे किसी भी तरह की राय अच्छी लगेगी बेशक वो मेरी कहानी को कमज़ोर कहें लेकिन एक बात जरूर बताना चाहूँगा कि केवल नाम बदला है कहानी एक दम सच्ची है। ….कृपया मुझे इ-पत्र करें Hindi Sex Stories
मेरा नाम मयंक पूनिया है, मैं वैसे तो हरियाणा का निवासी था लेकिन अब दिल्ली में रहता हूँ, मेरी छोटी बहन 20 साल की है और मैं 25 का हूँ. मेरी sex stories...
एक बार की बात है मैं और मेरी बहन अपनी मौसी के घर हरियाणा के एक गाँव में गए थे. मौसी के घर पर मौसी और उनकी बेटी रिया थी. रिया अभी 19 साल की थी.
मेरी मौसी गाँव में रह कर खेती का काम देखती थीं और मौसा उनके साथ नहीं रहते थे. वे शहर में नौकरी करते थे. उनका मौसी के पास करीब चार साल से आना नहीं हुआ था. शायद मौसा और मौसी के बीच कोई अनबन हो गई थी.
मेरी मौसी बेहद खूबसूरत हैं, उन की जवानी बहुत ही नशीली है. उन की फिगर 36-28-38 की है. मौसी के उठे हुए चूतड़ों को और तने हुए मम्मों को देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता था. पर गाँव में बंदिश अधिक होने के कारण मौसी लाज के चलते किसी से ज्यादा नहीं खुलती थीं.
मैं मौसी के पास पहुंचा तो मौसी को बड़ी ख़ुशी हुई. दूसरे दिन मौसी सुबह ही खेतों में चली गईं और मेरी बहन भी उनके साथ चली गई. उन्होंने अपनी बेटी से कहा कि वो खाना खेत में मेरे हाथों भेज दे.
मैं बाद में खाना लेकर गया.
मौसी काम करने के बाद थक गई थीं.. उन्होंने खाना खाया और आराम करने के लिए लेट गईं. मैं उनकी बगल में लेट गया और मेरी बहन भी मेरे पास लेट गई.
मेरी आंख लग गई, जब आंख खुली तो मैंने देखा कि मौसी के चुचे ब्लाउज से बाहर निकल रहे थे और वो खुद ही उनको दबा रही थीं. मैंने आँखें बंद कर लीं. लेकिन एक पल बाद मैंने धीरे से एक आँख खोल कर देखा तो पाया कि मौसी एक मोटी सी मूली से अपनी चुत की खुजली मिटाने में लगी थीं.
ये गरम सीन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और लंड से पानी निकलने लगा. मैं मौसी की मुठ मारने की गतिविधि को हल्की मुंदी आँख से देखने लगा.
कुछ देर बाद शायद मौसी झड़ गई थीं उन्होंने अपने कपड़े ठीक किये और निढाल सी होकर लेटी रहीं.
मैं इस बात पर गौर नहीं कर पाया था कि जिस तरह से मैंने मौसी को ये सब करते देखा था, उसी तरह मौसी ने भी मुझे देखते हुए देख लिया था. कुछ देर बाद मौसी उठ गईं और फिर से खेत में काम करने लगीं. काम खत्म होने के बाद रात तक हम सब घर आ गए.
अब मेरी मौसी को देखने का नजरिया बदल गया था. मौसा के चार साल से न होने के कारण मौसी मुझे एक माल दिखने लगी थीं.
खाना खाने के बाद जब सोने गए तो मौसी ने कहा- मयंक तू मेरे पास आना, मुझे तुम से बातें करनी हैं.
मैं मौसी के पास गया तो मौसी ने मेरी माँ के बारे में बात की और यहाँ वहाँ की बात करने लगीं. मैंने देखा कि मौसी का हाथ मेरे लंड के बिल्कुल पास था. मैं उनके व्यवहार को कुछ समझ नहीं पा रहा था और इतने में मौसी का हाथ मेरे लंड को छूने लगा. अब मुझे लगने लगा था कि मौसी मुझ से कुछ चाहती हैं. उन की उंगलियां बार बार बहाने से मेरे लंड को छूने लगीं तो मैंने भी मजा लेना शुरू किया. उन की उंगलियों के लगातार लंड छूने से जब मैंने कुछ नहीं कहा तो वो हल्के से मेरे लंड को रगड़ने लगीं.
अब मेरे लंड में भी कसाव आना शुरू हो गया. मैंने एक बारी वहाँ से हटने की कोशिश की तो मौसी ने मेरे लंड को पकड़ लिया.
मौसी ने कहा- अपनी मौसी की एक बात मानेगा?
तो मैंने कहा- मौसी मैंने आज तक आपकी कोई बात टाली है क्या?
‘नहीं.. तो सुन बेटा, तेरी मौसी को बहुत प्यास है.. अपनी मौसी की प्यास मिटा दे बेटा.. तेरा लंड बहुत मोटा है. जब तू सो रहा था तो मैं तेरा लंड देख रही थी. सच में वो बहुत मोटा है.. आ मेरी प्यास बुझा दे.’
ये कह कर मौसी ने लंड को तेजी से दबाया, मैंने हल्का सा विरोध किया तो मौसी मुझ से लिपट गईं और मेरे होंठों को चूमने लगीं. मौसी अपनी चुचियों को मेरी छाती पर रगड़ने लगीं.
इस सब से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने अपना हाथ मौसी की गांड पर लगा दिया और मौसी की मदमस्त गांड दबाने लगा.
मौसी के मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.
मैंने मौसी के मम्मों को दबाना शुरू किया. उनके मम्मे बहुत मोटे थे. अब चुदास की गर्मी बढ़ गई थी तो मैंने मौसी का सूट निकाला और उन्हें लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया.
मौसी ने मुझे चूमते हुए कहा- बेटा मेरे मम्मों का सारा दूध पी ले.. पूरे 4 साल हो गए.. किसी ने इनको नहीं पिया है.
मैं मौसी के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से पीने लगा. मौसी के चूचे एकदम से कड़क होने लगे थे. फिर मैंने मौसी की चुत पर हाथ रख कर ज़ोर से दबा दिया.
मौसी- आआ ऊऊओ और ज़ोर से दबा दे.. फाड़ डाल इसको..
मैंने अपनी उंगली उनकी चुत में पेल दी. मौसी के मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मौसी बोलीं- बेटा जल्दी कर..
मैं बोला- जल्दी क्या है सारी रात हमारी ही तो है.
मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया.
मैंने कहा- मौसी, तू मेरा लंड मुँह में ले ले.
मौसी लंड चूसने और चाटने लगीं. मैं लंड चुसाई से बहुत गर्म हो गया और मैंने लंड उनके मुँह से निकाल कर सीधे मौसी की चुत में पेल दिया.
एकदम से लंड पेलने से मौसी के मुँह से चीखने की आवाज़ आई- आआईई ईई मममम ममम्म्मीईईओ.. ओह हः!
मैंने मौसी के मम्मों को मसलना शुरू किया. कुछ देर बाद मौसी नॉर्मल हो गईं. अब मैं मस्ती से मौसी को पेले जा रहा था और करीब दस मिनट बाद मैंने मौसी की चुत में लंड का पानी छोड़ दिया.
मौसी ने कहा- तू तो बहुत बड़ा उतावला है मौसी की चूत में एक बार में ही पूरा बाड़ दिया.(पूरा घुसा दिया)
यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था दोस्तो.. आप को मेरा ये हिन्दी sex stories कैसी लगी?
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