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Massage Girl in Sidhi: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Sidhi who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Sidhi that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Sidhi massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Sidhi who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Sidhi massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Sidhi massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Sidhi who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Sidhi employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Sidhi helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Sidhi

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Sidhi at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi Porn Stories

मैं अन्तर्वासना पर बहुत समय Hindi Porn Stories से कहानियां पढ़ रही हूँ, सोचा कि आपको अपनी सच्ची कहानी सुना दूँ !

मैं एक ३५ वर्ष की छरहरी महिला हूँ, मेरे पति भी लम्बे और स्मार्ट व्यक्ति हैं। वो एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं पर मैं उनकी एक आदत से परेशान हूँ- वो कोई भी दूसरी महिला को देखते ही लाइन मारने लगते हैं। मैं अकसर उनके कमीज और पैंट पर लिपस्टिक के निशान देखा करती, उनके अंडरवीयर में वीर्य के निशान दिखते !

इनके एक दोस्त हमारे घर आते जाते थे। एक दिन मैंने उनसे इनके बारे में पूछा तो वो कुछ नहीं बोले, पर मेरे बहुत जोर देने पर वो मान गए कि मेरे पति का बहुत सी महिलाओं के साथ सम्बन्ध है।

मेरे आँसू बहने लगे। वो मुझे सांत्वना देने लगे और कहा- अब बहुत देर हो चुकी है, इनका ठीक होना मुश्किल है, आप ही अपना मन कहीं और लगा लें !

तो मैंने कहा- अ़ब मुझे कौन मिलेगा !

वो बोले- देखे तो सही !

मैंने कहा- क्या आप तैयार होंगे ?

तो वो बोले- कल बात करते हैं !

मैं सोचने लगी- क्या यह ठीक है?

पर कुछ अजीब सी बेचैनी होने लगी। दोपहर में उनका फोन आया और मुझे बाहर मिलने को बुलाया। हम कार में ही बात करने लगे और वो सौरी कहने लगे। मैं फिर से रोने लगी और रोते रोते उनके काँधे पर सर रख लिया। वो मुझे चुप करने लगे। अचानक उनका हाथ फिसल कर मेरे स्तन पर आ गया और मैंने उसे वहीं दबा दिया।

वो कहने लगे- आपका दिल तो बहुत जोर से चल रहा है !

मैं कुछ नहीं बोली और वो धीरे धीरे सहलाने लगे। मेरे मुँह से आह निकलने लगी। अ़ब वो दोनों हाथों से मेरे निपल चुभलाने लगे। मैं और जोर से आहें भरने लगी और मेरा हाथ उनके पैंट पर ऊपर से लंड को सहलाने लगा। उन्होंने अपनी पैंट की जिप खोल कर लंड मेरे हाथ में दे दिया। बहुत मोटा लंड था, मेरी मुट्ठी में नहीं आ रहा था। मैं खुद ही उस पर झुकती चली गई और उसे मुँह में भर कर चूसने लगी। वो भी मेरी चूची दबाते २ साड़ी को ऊपर उठा कर पैंटी के ऊपर से मेरी चूत सहलाने लगे। मेरी पैंटी पूरी भीगी हुई थी। उन्होंने उंगली मेरी चूत में घुसा दी और तेजी से अन्दर बाहर करने लगे। मैं उनका लंड दांतों से काटने लगी। वो भी आहें भरने लगे। मेरी जीभ उनके सुपारे पर तेजी से चलने लगी। उन्होंने भी तीन उंगली मेरी चूत में पेल दी और मुझे चूत से पकड़ कर ऊपर उठा दिया।

मेरा एक के बाद एक तीन बार पानी झर चुका था जो उसकी हथेली से नीचे बह रहा था। अचानक वो जोर जोर से लंड मेरे मुँह में पेलने लगा और बोला- अपना मुँह हटा लो ! मैं छुटने वाला हूँ !

पर मैंने उसका लंड और जोर से भींच लिया। उसने एक हाथ से मेरा सर अपने लंड दबा दिया और आहें भरते हुए मेरे मुँह में पानी छोड़ दिया। मैं उठ कर अपना मुँह टिशु-पेपर से साफ करने लगी पर वो मेरे होंठ उपने मुँह में लेकर चूसने लगा। तभी एक कार के हॉर्न ने हमें चौंका दिया।

आगे की कहानी अगले अंक में ! Hindi Porn Stories

Antarvasna Stories

मेरे जीजू और दीदी नासिक Antarvasna Stories में नई नौकरी लगने के कारण मेरे पास ही आ गये थे. मैंने यहाँ पर एक छोटा सा घर किराये पर ले रखा था. मेरी दीदी मुझसे कोई दो साल बड़ी थी. मेरे मामले में वो बड़ी लापरवाह थी. मेरे सामने वो कपड़े वगैरह या स्नान करने बाद यूँ आ जाती थी जैसे कि मैं कोई छोटा बच्चा या नासमझ हूँ.

शादी के बाद तो दीदी और सेक्सी लगने लगी थी. उसकी चूंचियाँ भारी हो गई थी, बदन और गुदाज सा हो गया था. चेहरे में लुनाई सी आ गई थी. उसके चूतड़ और भर कर मस्त लचीले और गोल गोल से हो गये थे जो कमर के नीचे उसके कूल्हे मटकी से लगते थे. जब वो चलती थी तो उसके यही गोल गोल चूतड़ अलग अलग ऊपर नीचे यूँ चलते थे कि मानो… हाय! लण्ड जोर मारने लगता था. जब वो झुकती थी तो बस उसकी मस्त गोलाईयाँ देख कर लण्ड टनटना जाता था. पर वो थी कि इस नामुराद भाई पर बिजलियाँ यूं गिराती रहती थी कि दिल फ़ड़फ़ड़ा कर रह जाता था.

बहन जो लगती थी ना, मन मसोस कर रह जाता था. मेरे लण्ड की तो कभी कभी यह हालत हो जाती थी कि मैं बाथरूम में जा कर उकड़ू बैठ कर लण्ड को घिस घिसकर मुठ मारता था और माल निकलने के बाद ही चैन आता था.

मैंने एक बार जाने अनजाने में दीदी से यूं ही मजाक में पूछ लिया. मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो मेरे पास ही कपड़े समेट रही थी. उसके झुकने से उसकी चूचियाँ उसके ढीले ढाले कुरते में से यूं हिल रही थी कि बस मेरा मुन्ना टन्न से खड़ा हो गया. वो तो जालिम तो थी ही, फिर से मेरे प्यासे दिल को झकझोर दिया.

‘कम्मो दीदी, मुझे मामा कब बनाओगी?’

‘अरे अभी कहाँ भैया, अभी तो मेरे खाने-खेलने के दिन हैं!’ उसने खाने शब्द पर जोर दे कर कहा और बड़े ठसके से खिलखिलाई.

‘अच्छा, भला क्या खाती हो?’ मेरा अन्दाज कुछ अलग सा था, दिल एक बार फिर आशा से भर गया. दीदी अब सेक्सी ठिठोली पर जो आ गई थी.

‘धत्त, दीदी से ऐसे कहते हैं…? अभी तो हम फ़ेमिली प्लानिंग कर रहे हैं!’ दीदी ने मुस्करा कर तिरछी नजर से देखा, फिर हम दोनों ही हंस पड़े. कैसी कन्टीली हंसी थी दीदी की.

‘फ़ेमिली प्लानिंग में क्या करते हैं?’ मैंने अनजान बनते हुये कहा. मेर दिल जैसे धड़क उठा. मैं धीरे धीरे आगे बढ़ने की कोशिश में लगा था.

‘इसमें घर की स्थिति को देखते हुये बच्चा पैदा करते हैं, इसमें कण्डोम, पिल्स वगैरह काम में लेते हैं, मैं तो पिल्स लेती हूँ… और फिर धमाधम चुद… , हाय राम!’ शब्द चुदाई अधूरा रह गया था पर दिल में मीठी सी गुदगुदी कर गया. लण्ड फ़ड़क उठा. लगता था कि वो ही मुझे लाईन पर ला रही थी.

‘हाँ… हाँ… कहो धमाधम क्या…?’ मैंने जानकर शरारत की. उसका चेहरा लाल हो उठा. दीदी ने मुझे फिर तिरछी नजर देखा और हंसने लगी.

‘बता दूँ… बुरा तो नहीं मानोगे…?’ दीदी भी शरमाती हुई शरारत पर उतर आई थी. मेरा दिल धड़क उठा. दीदी की अदायें मुझे भाने लगी थी. उसकी चूंचियाँ भी मुझे अब उत्तेजक लगने लगी थी. वो अब ग्रीन सिग्नल देने लगी थी. मैं उत्साह से भर गया.

‘दीदी बता दो ना…’ मैंने उतावलेपन से कहा. मेरे लण्ड में तरावट आने लगी थी. मेरे दिल में तीर घुसे जा रहे थे. मैं घायल की तरह जैसे कराहने लगा था.

‘तेरे जीजू मुझे फिर धमाधम चोदते हैं…’ कुछ सकुचाती हुई सी बोली. फिर एकदम शरमा गई. मेरे दिल के टांके जैसे चट चट करके टूटने लगे. घाव बहने लगा. बहना खुलने लगी थी, अब मुझे यकीन हो गया कि दीदी के भी मन में मेरे लिये भावना पैदा हो गई है.

‘कैसे चोदते हैं दीदी…?’ मेरी आवाज में कसक भर गई थी. मुझे दीदी की चूत मन में नजर आने लगी थी… लगा मेरी प्यारी बहन तो पहले से ही चालू है… बड़ी मर्द-मार… नहीं मर्द-मार नहीं… भैया मार बहना है. उसे भी अब मेरा उठा हुआ लण्ड नजर आने लगा था.

‘चल साले… अब ये भी बताना पड़ेगा?’ उसने मेरे लण्ड के उठान पर अपनी नजर डाली और वो खिलखिला कर हंस पड़ी. उसकी नजर लण्ड पर पड़ते ही मैंने उसकी बांह पकड़ पर एक झटके में मेरे ऊपर उसे गिरा लिया. उसकी सांसें जैसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई और फिर उसकी छाती धड़क उठी. वो मेरी छाती पर थी.

मेरा छः इन्च का लण्ड अब सात इन्च का हो गया था. भला कैसे छिपा रह सकता था.

‘दीदी बता दो ना…’ उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकराने लगी. हमारी सांसें तेज हो गई.

‘भैया, मुझे जाने क्या हो रहा है…!’

‘बहना… पता नहीं… पर तेरा दिल बड़ी जोर से धड़क रहा है… तू चुदाई के बारे में बता रही थी ना… एक बार कर के बता दे… ये सब कैसे करते हैं…?’

‘कैसे बताऊँ… उसके लिये तो कपड़े उतारने होंगे… फिर… हाय भैया…’ और वो मुझसे लिपट गई. उसकी दिल की धड़कन चूंचियों के रास्ते मुझे महसूस होने लगी थी.

‘दीदी… फिर… उतारें कपड़े…? चुदाई में कैसा लगता है?’ मारे तनाव के मेरा लण्ड फ़ूल उठा था. हाय… कैसे काबू में रखूँ!

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा. लण्ड उछाले मारने लगा. दीदी ने मेरे बाल पकड़ लिये और अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दी… उसकी सांसें तेज होने लगी.

मेरे माथे पर भी पसीने की बूंदें उभर आई थी. उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास आ गया. उसकी सांसों की खुशबू मेरे नथुने में समाने लगी. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर कस गये. उसका गाऊन ऊपर खींच लिया. मेरे होंठों से दीदी के होंठ चिपक गये. उसकी चूत मेरे तन्नाये हुये लण्ड पर जोर मारने लगी. उसकी चूत का दबाव मुझे बहुत ही सुकून दे रहा था.

आखिर दीदी ने मेरे मन की सुन ही ली. मैंने दीदी का गाऊन सामने से खोल दिया. उसकी बड़ी-बड़ी कठोर चूंचियाँ ब्रा में से बाहर उबल पड़ी. मेरा लण्ड कपड़ों में ही उसकी चूत पर दबाव डालने लगा. लगता था कि पैन्ट को फ़ाड़ डालेगा.

उसकी काली पेंटी में चूत का गीलापन उभर आया था. मेरी अँडरवियर और उसकी पेंटी के अन्दर ही अन्दर लण्ड और चूत टकरा उठे. एक मीठी सी लहर हम दोनों को तड़पा गई. मैंने उसकी पेंटी उतारने के लिये उसे नीचे खींचा. उसकी प्यारी सी चूत मेरे लण्ड से टकरा ही गई. उसकी चूत लप-लप कर रही थी. मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गीली चूत में अन्दर सरक गया. उसके मुख से आह्ह्ह सी निकल गई. अचानक दीदी ने अपने होंठ अलग कर लिये और तड़प कर मेरे ऊपर से धीरे से हट गई.

‘नहीं भैया ये तो पाप है… हम ये क्या करने लगे थे!’ मैं भी उठ कर बैठ गया.

जल्दबाज़ी में और वासना के बहाव में हम दोनों भटक गये थे. उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया. मुझे भी शर्म आ गई. उसके मुख की लालिमा उसकी शर्म बता रही रही थी. उसने मुँह छुपाये हुये अपनी दो अंगुलियों के बीच से मुझे निहारा और मेरी प्रतिक्रिया देखने लगी. उसके मुस्कराते ही मेरा सर नीचे झुक गया.

‘सॉरी दीदी… मुझे जाने क्या हो गया था…’ मेरा सर अभी भी झुका हुआ था.

‘आं हाँ… नहीं भैया, सॉरी मुझे कहना चहिये था!’ हम दोनों की नजरे झुकी हुई थी. दीदी ने मेरी छाती पर सर रख दिया.

‘सॉरी बहना… सॉरी…’ मैंने उसके माथे पर एक हल्का सा चुम्मा लिया और कमरे से बाहर आ गया. मैं तुरंत तैयार हो कर कॉलेज चला गया. मन ग्लानि से भर गया था. जाने दीदी के मन में क्या था. वह अब जाने क्या सोच रही होगी. दिन भर पढ़ाई में मन नहीं लगा. शाम को जीजाजी फ़ेक्टरी से घर आये, खाना खा कर उन्हें किसी स्टाफ़ के छुट्टी पर होने से नाईट शिफ़्ट में भी काम करना था. वो रात के नौ बजे वापस चले गये.

रात गहराने लगी. शैतान के साये फिर से अपने पंजे फ़ैलाने लगे. लेटे हुये मेरे दिल में वासना ने फिर करवट ली. काजल का सेक्सी बदन कांटे बन कर मेरे दिल में चुभने लगा. मेरा दिल फिर से दीदी के तन को याद करके कसकने लगा.

मेरा लण्ड दिन की घटना को याद करके खड़ा होने लगा था. सुपाड़े का चूत से मोहक स्पर्श रह रह कर लण्ड में गर्मी भर रहा था. रात गहराने लगी थी. लण्ड तन्ना कर हवा में लहरा उठा था. मैं जैसे तड़प उठा. मैंने लण्ड को थाम लिया और दबा डाला. मेरे मुख से एक वासनायुक्त सिसकारी निकल पड़ी. अचानक ही काजल ने दरवाजा खोला. मुझे नंगा देख कर वापस जाने लगी. मेरा हाथ मेरे लण्ड पर था और लाल सुपाड़ा बाहर जैसे चुनौती दे रहा था. मेरे कड़क लण्ड ने शायद बहना का दिल बींध दिया था. उसने फिर से ललचाई नजर से लण्ड को निहारा और जैसे अपने मन में कैद कर लिया.

‘क्या हुआ दीदी…?’ मैंने चादर ओढ़ ली.

‘कुछ नहीं, बस मुझे अकेले डर लग रहा था… बाहर तेज बरसात हो रही है ना!’ उसने मजबूरी में कहा. उसका मन मेरे तन्नाये हुये खूबसूरत लण्ड में अटक गया था. मैंने मौके का फ़ायदा उठाया. चादर एक तरफ़ कर दी और खड़े लण्ड के साथ एक किनारे सरक गया.

‘आजा दीदी, मेरे साथ सो जा, यहीं पर…पर पलंग छोटा है!’ मैंने उसे बताया.

मेरे मन के शैतान ने काजल को चिपक कर सोने का लालच दिया. उसे शायद मेरा लण्ड अपने जिस्म में घुसता सा लगा होगा. उसकी निगाहें मेरे कठोर लण्ड पर टिकी हुई थी. उसका मन पिघल गया… उसका दिल लण्ड लेने को जैसे मचल उठा.

‘सच… आ जाऊँ तेरे पास… तू तौलिया ही लपेट ले!’ उसकी दिल जैसे धड़क उठा. दीदी ने पास पड़ा तौलिया मुझे दे दिया. मैंने उसे एक तरफ़ रख लिया. वो मेरे पास आकर लेट गई.

‘लाईट बन्द कर दे काजल…’ मेरा मन सुलगने लगा था.

‘नहीं मुझे डर लगता है भैया…’ शायद मेरे तन की आंच उस तक पहुंच रही थी.

मैंने दूसरी तरफ़ करवट ले ली. पर अब तो और मुश्किल हो गया. मेरे मन को कैसे कंट्रोल करूँ, और यह लण्ड तो कड़क हो कर लोहा हो गया था. मेरा हाथ पर फिर से लण्ड पर आ गया था और लण्ड को हाथ से दबा लिया. तभी दीदी का तन मेरे तन से चिपक गया. मुझे महसूस हुआ कि वो नंगी थी. उसकी नंगी चूंचियाँ मेरी पीठ को गुदगुदा रही थी. उसके चूचक का स्पर्श मुझे साफ़ महसूस हो रहा था. मुझे महसूस हुआ कि वो भी अब वासना की आग में झुलस रही थी… यानी सवेरे का भैया अब सैंया बनने जा रहा था. मैंने हौले से करवट बदली… और उसकी ओर घूम गया.

काजल अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मुझे देख रही थी. उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी, पर प्यार भी उमड़ रहा था. लगता था कि उसे अब मेरा मोटा लण्ड चाहिये था. वो मुझे से चिपकने की पुरजोर कोशिश कर रही थी. मेरा कड़ा लण्ड भी उस पर न्योछावर होने के लिये मरा जा रहा था.

‘दिन को बुरा मान गये थे ना…’ उसकी आवाज में बेचैनी थी.

‘नहीं मेरी बहना… ऐसे मत बोल… हम तो हैं ही एक दूजे के लिये!’ मैंने अपना लण्ड उसके दोनों पांवों के बीच घुसा दिया था. चूत तो बस निकट ही थी.

‘तू तो मेरा प्यारा भाई है… शरमा मत रे!’ उसने अपना हाथ मेरी गरदन पर लपेट लिया. मेरा लण्ड अपनी दोनों टांगों के बीच उसने दबा लिया था और उसकी मोटाई महसूस कर रही थी. उसने अपना गाऊन का फ़ीता खोल रखा था. आह्ह… मेरी बहना अन्दर से पूरी नंगी थी. मुझे अब तो लण्ड पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था. उसने अपनी चूत मेरे लण्ड से चिपका दी. जैसे लण्ड को अब शांति मिली. मेरा मन फिर से उसे चोदने के लिये मचल उठा. मैंने भी उसे कस लिया और कुत्ते की तरह से लण्ड को सही स्थान पर घुसाने की कोशिश करने लगा.

‘भैया ये क्या कर रहे हो… ये अब नीचे चुभ रहा है!’ उसकी आवाज में वासना का तेज था. उसकी आंखें नशीली हो उठी थी. चूत का गीलापन मेरे लण्ड को भी चिकना किये जा रहा था.

‘अरे यूं ही बस… मजा आ रहा है!’ मैंने सिसकी भरते हुये कहा. चूत की पलकों को छेड़ता हुआ, लण्ड चूत को गुदगुदाने लगा.

‘देखो चोदना मत…’ उसकी आवाज में कसक बढ़ती जा रही थी, जैसे कि लण्ड घुसा लेना चाहती हो. उसका इकरार में इन्कार मुझे पागल किये दे रहा था.

‘नहीं रे… साथ सोने का बस थोड़ा सा मजा आ रहा है!’ मैं अपना लण्ड का जोर उसकी चूत के आसपास लगा कर रगड़ रहा था. अचानक लण्ड को रास्ता मिल गया और सुपाड़ा उसकी रस भरी चूत के द्वार पर आ गया. हमारे नंगे बदन जैसे आग उगलने लगे.

‘हाय रे, देखो ये अन्दर ना घुस जाये…बड़ा जोर मार रहा है रे!’ चुदने की तड़प उसके चेहरे पर आ गई थी. अब लण्ड के बाहर रहने पर जैसे चूत को भी एतराज़ था.

‘दीदी… आह्ह्ह… नहीं जायेगा…’ पर लण्ड भी क्या करे… उसकी चूत भी तो उसे अपनी तरफ़ दबा रही थी, खींच रही थी. सुपाड़ा फ़क से अन्दर उतर गया.

‘हाय भैया, उफ़्फ़्फ़्फ़… मैं चुद जाऊँगी… रोको ना!’ उसका स्वर वासना में भीगा हुआ था. इन्कार बढ़ता जा रहा था, साथ में उसकी चूत ने अपना मुख फ़ाड़ कर सुपाड़े का स्वागत किया.

‘नहीं बहना नहीं… नहीं चुदेगी… आह्ह्ह… ‘

काजल ने अपने अधरों से अपने अधर मिला दिये और जीभ मेरे मुख में ठेल दी. साथ ही उसका दबाव चूत पर बढ़ गया. मेरे लण्ड में अब एक मीठी सी लहर उठने लगी. लण्ड और भीतर घुस गया.

‘भैया ना करो… यह तो घुसा ही जा रहा है… देखो ना… मैं तो चुद जाऊँगी!’

उसका भीगा सा इन्कार भरा स्वर जैसे मुझे धन्यवाद दे रहा था. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें मेरी आंखों को एक टक निहार रही थी. मुझसे रहा नहीं गया, मैंने जोर लगा कर लण्ड़ पूरा ही उतार दिया. वो सिसक उठी.

‘दीदी, ये तो मान ही नहीं रहा है… हाय… कितना मजा आ रहा है…!’ मैंने दीदी को दबाते हुये कहा. मैंने अपने दांत भींच लिये थे.

‘अपनी बहन को चोदेगा भैया… बस अब ना कर… देख ना मेरी चूत की हालत कैसी हो गई है… तूने तो फ़ोड़ ही दिया इसे!’ मेरा पूरा लण्ड अपनी चूत में समेटती हुई बोली.

‘नहीं रे… ये तो तेरी प्यारी चूत ही अपना मुह फ़ाड़ कर लण्ड मांग रही है, हाय रे बहना तेरी रसीली चूत…कितना मजा आ रहा है… सुन ना… अब चुदा ले… फ़ुड़वा ले अपनी फ़ुद्दी…!’ मैंने उसे अपनी बाहों में ओर जोर से कस लिया.

‘आह ना बोल ऐसे… मेरे भैया रे… उफ़्फ़्फ़्फ़’ उसने साईड से ही चूत उछाल कर लण्ड अपनी चूत में पूरा घुसा लिया. मैं उसके ऊपर आ गया. ऊपर से उसे मैं भली प्रकार से चोद सकता था. हम दोनों एक होने की कोशिश करने लगे. दीदी अपनी टांगें फ़ैला कर खोलने लगी. चूत का मुख पूरा खुल गया था. मैं मदहोश हो चला.

मेरा लण्ड दे दनादन मस्ती से चूत को चोद रहा था. दीदी की सिसकारियाँ मुख से फ़ूट उठी. उसकी वासना भरी सिसकियाँ मुझे उत्तेजित कर रही थी. मेरा लण्ड दीदी की चूत का भरपूर आनन्द ले रहा था. मुझे मालूम था दीदी मेरे पास चुदवाने ही आई थी… डर तो एक बहाना था. बाहर बरसात और तेज होने लगी थी.

हवा में ठण्डक बढ़ गई थी. पर हमारे जिस्म तो शोलों में लिपटे हुये थे. दीदी मेरे शरीर के नीचे दबी हुई थी और सिसकियाँ भर रही थी. मेरा लण्ड उसकी चूत में भचाभच घुसे जा रहा था. उसकी चूत भी उछाले मार मार कर चुद रही थी.

तभी उसने अपना पोज बदलने के लिये कहा और वो पलट कर मेरे ऊपर आ गई. उसके गुदाज स्तन मेरे सामने झूल गये. मेरे हाथ स्वतः ही उसकी चूंचियाँ मसलने को बेताब हो उठे… उसने मेरे तने हुए लण्ड पर अपनी चूत को सेट किया और कहा- भैया, बहना की भोसड़ी तैयार है… शुरु करें?’ उसने शरारत भरी वासनायुक्त स्वर में हरी झण्डी दिखाई.

‘रुक जा दीदी… तेरी कठोर चूंचियाँ तो दाब लू, फिर…’ मैं अपनी बात पूरी करता, उसने बेताबी में मेरे खड़े लण्ड को अपनी चूत में समा लिया और उसकी चूंचियाँ मेरे हाथों में दब गई. फिर उसने अपनी चूत का पूरा जोर लगा दिया और लण्ड को जड़ तक बैठा दिया.

‘भैया रे… आह पूरा ही बैठ गया… मजा आ गया!’ नशे में जैसे झूमती हुई बोली.
‘तू तो ऐसे कह रही है कि पहले कभी चुदी ही नहीं…!’ मुझे हंसी आ गई.
‘वो तो बहुत सीधे हैं… चुदाई को तो कहते हैं ये तो गन्दी बात है… एक बार उन्हें उत्तेजित किया तो…’ अपने पति की शिकायत करती हुई बोल रही थी.
‘तो क्या…?’ मुझे आश्चर्य सा हुआ, जीजाजी की ये नादानी, भरी जवानी तो चुदेगी ही, उसे कौन रोक सकता है.
‘जोश ही जोश में मुझे चोद दिया… पर फिर मुझे हज़ार बार कसमें दिलाये कि किसी मत कहना कि हमने ऐसा किया है… बस फिर मैं नहीं चुदी इनसे…’
‘अच्छा… फिर… किसी और ने चोदा…’

‘और फिर क्या करती मैं… आज तक मुझे कसमें दिलाते रहते है और कहते हैं कि हमने इतना गन्दा काम कर दिया है… लोग क्या कहेंगे… फिर उनके दोस्त को मैंने पटा लिया… और अब भैया तुम तो पटे पटाये ही हो.’

मुझे हंसी आ गई. तभी मेरी बहना प्यासी की प्यासी रह गई और शरम के मारे कुछ ना कह सकी… ये पति पत्नी का रिश्ता ही ऐसा होता है. यदि मस्ती में चूत अधिक उछाल दी तो पति सोचेगा कि ये चुद्दक्कड़ रांड है, वगैरह.

‘सब भूल जाओ काजल… लगाओ धक्के… मेरे साथ खूब निकालो पानी…’

‘मेरे अच्छे भैया…मैंने तो तेरा खड़ा लण्ड पहले ही देख लिया था… मुझे लगा था कि तू मेरी जरूर बजायेगा एक दिन…!’ और मेरे से लिपट कर अपनी चूत बिजली की तेजी से चलाने लगी. मेरा लण्ड रगड़ खा कर मस्त हो उठा और कड़कने लगा. मेरे लण्ड में उत्तेजना फ़ूटने लगी. बहुत दिनों के बाद कोई चोदने को मिली थी, लग़ा कि मेरा निकल ही जायेगा. मेरा जिस्म कंपकपाने लगा… उसके बोबे मसलते हुये भींचने लगा. मेरा प्यासा लण्ड रसीला हो उठा. तभी मेरे लण्ड से वीर्य स्खलित होने लगा. दीदी रुक गई और मेरे वीर्य को चूत में भरती रही. जब मैं पूरा झड़ गया और लण्ड सिकुड़ कर अपने आप बाहर आ गया तो उसने बैठ कर अपनी चूत देखी, मेरा वीर्य उसकि चूत में से बह निकला था. मेरा तौलिया उसने अपनी चूत पर लगा लिया और एक तरफ़ बैठ गई. मैं उठा और कमरे से बाहर आ गया.

पानी से लण्ड साफ़ किया और मूत्र त्यागा. तभी मुझे ठण्ड से झुरझुरी आ गई. बरसाती ठण्डी हवा ने मौसम को और भी ठण्डा कर दिया था. मैं कमरे में वापस आ गया. देखा तो काजल भी ठण्ड से सिकुड़ी जा रही थी. मैंने तुरंत ही कम्बल निकाला और उसे औढ़ा दिया और खुद भी अन्दर घुस गया. मैं उसकी पीठ से चिपक गया. दो नंगे बदन आपस में चिपक गये और ठण्ड जैसे वापस दूर हो गई.

उसके मधुर, सुहाने गोल गोल चूतड़ मेरे शरीर में फिर से ऊर्जा भरने लगे. मेरा लण्ड एक बार फिर कड़कने लगा. और उसके चूतड़ों की दरार में घुस पड़ा. दीदी फिर से कुलबुलाने लगी. अपनी गान्ड को मेरे लण्ड से चिपकाने लगी.

‘दीदी… ये तो फिर से भड़क उठा है…’ मैंने जैसे मजबूरी में कहा.
‘हाँ भैया… ये लण्ड बहुत बेशर्म होता है… बस मौका मिला और घुसा…’ उसकी मधुर सी हंसी सुनाई दी.
‘क्या करूँ दीदी…’ मैंने कड़कते लण्ड को एक बार फिर खुला छोड़ दिया. अभी वो मेरी दीदी नहीं बल्कि एक सुन्दर सी नार थी… जो एक रसीली चूत और सुडौल चूतड़ों वाली एक कामुक कन्या थी… जिसे विधाता ने सिर्फ़ चुदने के लिये बनाई थी.

‘सो जा ना, उसे करने दे जो कर रहा है… कब तक खेलेगा… थक कर सो ही जायेगा ना!’ उसकी शरारत भरी हंसी बता रही कि वो अपनी गाण्ड अब चुदाने को तैयार है.
‘दीदी, तेरा माल तो बाकी है ना…?’ मैं जानता था कि वो झड़ी नहीं थी.
‘ओफ़ोह्ह्ह्ह… अच्छा चल माल निकालें… तू मस्त चुदाई करता है रे!’ हंसती हुई बोली.

मैं दीदी की गाण्ड में लण्ड को और दबाव दिये जा रहा था. वो मुझे मदद कर रही थी. उसने धीरे से अपनी गाण्ड ढीली की और अपने पैर चौड़ा दिये. मैंने उसकी चूंचियाँ एक बार से थाम ली और उसके चूंचक खींच कर दबाने लगा.

‘सुन रे थोड़ी सी क्रीम लगा कर चिकना कर दे, फिर मुझे लगेगी नहीं!’

मैंने हाथ बढ़ा कर मेज़ से क्रीम ले कर उसके छेद में और मेरे लण्ड पर लगा दी. लण्ड का सुपाड़ा चूतड़ों के बीच घुस कर छेद तक आ पहुंचा और छेद में फ़क से घुस गया. उसे थोड़ी सी गुदगुदी हुई और वो चिहुंक उठी. मैंने पीछे से ही उसके गाल को चूम लिया और जोर लगा कर अन्दर लण्ड को घुसेड़ता चला गया. वो आराम से करवट पर लेटी हुई थी. शरीर में गर्मी का संचार होने लगा था.

क्रीम की वजह से लण्ड सरकता हुआ जड़ तक बैठ गया. काजल ने मुझे देखा और मुस्करा दी.

‘तकिया दे तो मुझे…’ उसने तकिया ले कर अपनी चूत के नीचे लगा लिया.
‘अब बिना लण्ड निकाले मेरी पीठ पर चढ़ जा और मस्ती से चोद दे!’

मैं बड़ी सफ़ाई से लण्ड भीतर ही डाले उसकी गाण्ड पर सवार हो गया. वो अपने दोनों पांव खोल कर उल्टी लेटी हुई थी… मैंने अपने शरीर का बोझ अपने दोनों हाथों पर डाला और अपनी छाती उठा ली. फिर अपने लण्ड को उसकी चूतड़ों पर दबा दिया. अब धीरे धीरे मेरा लण्ड अन्दर बाहर आने जाने लगा. उसकी गाण्ड चुदने लगी. वो अपनी आंखें बन्द किये हुये इस मोहक पल का आनन्द ले रही थी. मेरा कड़क लण्ड अब तेजी से चलने लग गया था. अब मैं उसके ऊपर लेट गया था और उसके बोबे पकड़ कर मसल रहा था. उसके मुख से मस्ती की किलकारियाँ फ़ूट रही थी…

काफ़ी देर तक उसकी गाण्ड चोदता रहा फिर अचानक ही मुझे ध्यान आया कि उसकी चूत तो चुदना बाकी है.

मैंने पीछे से ही उसकी गाण्ड से लण्ड निकाल कर काजल को चूत चोदने के कहा.

वो तुरन्त सीधी लेट गई और मैंने उसके चूतड़ों के नीचे तकिया सेट कर दिया. उसकी मोहक चूत अब उभर कर चोदने का न्यौता दे रही थी. उसकी भीगी चिकनी चूत खुली जा रही थी. मेरा मोटा लण्ड उसकी गुलाबी भूरी सी धार में घुस पड़ा.

उसके मुख से उफ़्फ़्फ़ निकल गई. अब मैं उसकी चूत चोद रहा था. लण्ड गहराई में उसकी बच्चे दानी तक पहुंच गया. वो एक बार तो कराह उठी.

मेरे लण्ड में जैसे पानी उतरने लगा था. उसकी तकिये के कारण उभरी हुई चूत गहराई तक चुद रही थी. उसे दर्द हो रहा था पर मजा अधिक आ रहा था. मेरा लण्ड अब उसकी चूत को जैसे ठोक रहा था. जोर की शॉट लग रहे थे. उसकी चूत जैसे पिघलने लगी थी. वो आनन्द में आंखे बंद करके मस्ती की सीत्कार भरने लगी थी. मुख से आह्ह्ह उफ़्फ़्फ़्फ़ और शायद गालियाँ भी निकल रही थी. चुदाई जोरों पर थी… अब चूत और लण्ड के टकराने से फ़च फ़च की आवाजें भी आ रही थी.

अचानक दीदी की चूत में जैसे पानी उतर आया. वो चीख सी उठी और उसका रतिरस छलक पड़ा. उसकी चूत में लहर सी चलने लगी. तभी मेरा वीर्य भी छूट गया… उसका रतिरस और मेरा वीर्य आपस में मिल गये और चिकनाई बढ़ गई. हम दोनों के शरीर अपना अपना माल निकालते रहे और एक दूसरे से चिपट से गये. अन्त में मेरा लण्ड सिकुड़ कर धीरे से बाहर निकलने लगा और उसकी चूत से रस की धार बाहर निकल कर चूतड़ की ओर बह चली. मैं एक तरफ़ लुढ़क गया और हाँफ़ने लगा. दीदी भी लम्बी लम्बी सांसें भर रही थी… हम लेटे लेटे थकान से जाने कब सो गये. हमें चुदाई का भरपूर आनन्द मिल चुका था.

अचानक मेरी नींद खुल गई. दीदी मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी.

‘भैया, बस एक बार और… ‘ बहना की विनती थी, भला कैसे मना करता. फिर मुझे भी तो फिर से अपना यौवन रस निकालना था. फिर जाने दीदी की नजरें इनायत कब तक इस भाई पर रहें.

मैंने अपनी अंगुली उसके होंठों पर रख दी और तन्मयता से सुख भोगने लगा. मेरे लण्ड ने उसकी चूत को गुडमोर्निंग कहा और फिर लण्ड और चूत दोनों आपस में फ़ंस गये… दीदी फिर से मन लगा कर चुदने लगी… हमारे शरीर फिर एक हो गये… कमरा फ़च फ़च की आवाज से गूंजने लगा… और स्वर्ग जैसे आनन्द में विचरण करने लगे…

बारिश बन्द हो चुकी थी… सवेरे की मन्द मन्द बयार चल रही थी… पर यहाँ हम दोनों एक बन्द कमरे में गदराई हुई जवानी का आनन्द भोग रहे थे. लग रहा था कि समय रुक जाये… तन एक ही रहे… वीर्य कभी भी स्खलित ना हो… मीठी मीठी सी शरीर में लहर चलती ही रहे…

पाठको, जैसा कि आपको मालूम है कि यह एक काल्पनिक कहानी है, वास्तविकता से इसका कोई लेना देना नहीं है… और यह मात्र आपके मनोरंजन की दृष्टि से लिखी गई है. यदि आपको लगता है कि यह कहानी मनोरंजन करती है तो प्लीज, एक बार लण्ड को कस कर पकड़ कर मुठ जरूर मार लें.

धन्यवाद! Antarvasna Stories

प्रेषक : उमेश Hindi Porn Stories

गुरूजी आपने मेरी सही Hindi Porn Stories अनुभव वाली कहानी स्वर्ग का अनुभव प्रस्तुत की, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था किमुझे इतने सारे मेल आयेंगे, खास करके लड़कियों और औरतो के मुझे बहुत मेल आए। आपका इतना प्यार देखकर मुझे एक और सही अनुभव वाली कहानी प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिली है। इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है बल्कि मेरे साथ जो हो चुका है वो ही मैं आपको बता रहा हूँ।कहानी को रसदार बनाने के लिए मैंने इसमें कोई बात भी अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ी है।

कहानी प्रस्तुत करने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मैं अहमदाबाद में रहने वाला लड़का हूँ, मेरी उम्र ३५ साल की है। दिखने में स्मार्ट हूँ। मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट एक्जीक्यूटिव की जॉब करता हूँ। मैं जिस कंपनी में काम करता हूँ, उसकी मैडम के साथ मेरा सम्बंध है। उसकी उम्र ४५ साल है। वो दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसको मेरे पर बहुत भरोसा है और वो भरोसा मैं कभी नहीं तोडूंगा। यह उसी की कहानी है।

एक दिन छुट्टी से पहले वाले दिन हमने छुट्टी के दिन कहीं पर मिलने का नक्की किया(कार्यक्रम बनाया)।

उसने कहा- घर मे मिलने से कोई न कोई आता जाता रहता है, इसलिए हम किसी होटल में मिलते हैं। तुम कोई अच्छा सा ए सी कमरा बुक करना।

फ़िर दूसरे दिन मैं सुबह होटल का कमरा खोजने निकल गया। मैंने एक अच्छे होटल में ए सी कमरे का रेट पूछा, उसने मुझे ४ घंटे के ७०० रूपए बताये, मैंने कमरा बुक कर लिया फ़िर मैंने मैडम को बताया के मैंने एसी कमरा बुक कर लिया है। मैंने होटल का पता मैडम को दे दिया और कहा- मैंने यहाँ पर अपने नाम बदल कर कमरा बुक किया है। आप यहाँ आ कर अपना नाम पूजा बताना और कहना कि मुझे अनिल से मिलना है जो २०३ नम्बर के कमरा में ठहरे हैं। तो उसने सब बात समझ ली और मुझे दोपहर को २ बजे वहाँ आने का बोल दिया।

मैंने तो १ बजे कमरे में जा कर स्नान कर लिया।

अब वो करीब २ बजे मेरे कमरे में आ गई। उसने भी ‘मैं फ्रेश होकर आती हूँ’ कह के स्नान कर लिया, क्योकि जब हम स्नान कर के सेक्स करते हैं तो मजा दुगना हो जाता है। फ़िर वो स्नान कर के सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। मैं तो उसको देख कर देखता ही रह गया। वो तौलिये में बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैं तो पहले से ही तौलिये में था।

फ़िर हम दोनों पलंग पर आ गए। हमने कुछ बीते हुए पलों के बारे में बात की। फ़िर मैंने उसके गाल पर और होठों पर किस किया, उसका तौलिया निकाला, उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। मैंने उसे एक बार कहा था कि तुम पर लाल रंग की ब्रा और पैंटी खूब जमती है। उसने वो याद रख लिया था और ऐसा ही किया था। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

फ़िर मैंने उसके सारे बदन पे चुम्मी ली। उसकी पैंटी के साथ में ही उसके चूतड़ को भी चूमा, उसके पैर के अंगूठे को भी चूमा, उसके कान को भी चूमा। उसका कोई अंग ऐसा नहीं रहा था कि मैंने उसे वहाँ चूमा न हो। फ़िर मैंने उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया। हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूसरे के मुँह में मुँह रख कर चूमते रहे। उसकी जीभ से अपनी जीभ लगा कर हम दोनों ने एक दूसरे का रसपान किया। हम दोनों दो नहीं बल्कि एक ही हैं ऐसा हमको महसूस होता था।

फ़िर मैंने उसकी ब्रा को निकाला। उसके स्तन बहुत बड़े और रसीले थे। मैं करीब ५ मिनट तक उनको चूसता रहा। मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ ऐसा मुझे महसूस होने लगा। अब वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। फ़िर उसने मेरे तौलिए को निकाला और मेरी छाती को चूसने लगी। फ़िर उसने मेरे होठों को चूमा, वो चूमते चूमते नीचे तक आई। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था, वो उसने निकाल दिया।

मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुका था, उसने मेरे ७” लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह वो तो उसे चूसने लगी। अब मैं आपे में नहीं रह पाया। वो करीब ५ मिनट तक मेरा लंड चूसती रही। उसके ऐसा करने से मैं झड़ गया। मैंने बाथरूम में जा कर साफ़ कर लिया। फ़िर मैं वापिस आ गया, मैंने उसे बोला- अभी तो शुरूआत है, अब मेरा सेक्स लम्बी देर तक चलता रहेगा।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी को निकाला, उसने अपनी चूत के सारे बाल हटा के रखे थे। फ़िर मैंने उसकी चूत को चाटने का शुरू किया, उसकी चूत में से अजीब सा पानी निकल रहा था, मैं वो सारा पानी निगल गया। वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और लम्बी लम्बी आहें भरने लगी थी। हम दोनों कहीं स्वर्ग में पहुँच गए हो और आनंद लूट रहे हों, ऐसा हम दोनों को महसूस हो रहा था। मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में बहुत अन्दर तक ले जाता था।

फ़िर मैंने अपना ७” का लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। फ़िर मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा. करीब २० मिनट तक मैं ऐसे ही पेलता रहा। मैं एक बार झड़ चुका था इसलिए दूसरी बार जल्दी झड़ जाने की कोई गुन्जायिश नहीं थी। अब मैं बहुत जोरों से धक्के देने लगा। वो भी उसमें धक्के दे कर मुझे साथ देने लगी। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फ़िर हम दोनों साथ में ही झड़ चुके।

फ़िर थोड़ी बात हमने की और हम दोबारा शुरू हो गए। मैंने उसके साथ फ़ोर-प्ले शुरू कर दिया इसलिए वो दुबारा तैयार हो गई। मैंने उसकी चूतड़ को बहुत चाटा और फ़िर मैंने अपना लण्ड उसमें डाल दिया। फ़िर हम दोनों साथ में झड़ गए। यह झड़ना मेरा तीसरी बार का और उसका दूसरी बार का था। वो तो सोचते ही रह गई कि मैं एक ही साथ में तीन बार सेक्स कर सकते हूँ। उसने मुझे कहा- तुम्हारी पत्नी बहुत खुशकिस्मत है जिसे तुम जैसा पति मिला है। मेरे हसबंड बिज़नस के टेंशन में ही रहते हैं। और ६ महीने में एक बार सेक्स करते है और उसमें भी मुझे तो मजा नहीं आता। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ सकती।

फ़िर मैंने भी उसे ऐसा वादा करके अपने गले से लगा लिया। हमने करीब ३ घंटे तक सेक्स किया। उसने कहा कि तुम्हारे साथ तो पूरी रात हो तो भी कम है। ऐसा स्वर्ग का अनुभव हम दोनों ने कभी नहीं किया. मैं अपने बारे में कम और उसके बारे में ज्यादा सोचता हूँ कि उसको ज्यादा से ज्यादा आनंद कैसे मिल पाये।

हम ऐसे ही होटल में एक ही बार नहीं बल्कि बहुत बार मिल चुके हैं।

ऑफिस से निकलते हैं तो रात को उसकी गाड़ी में भी अंधेरे में मिलते रहते हैं।

मैं कोई कथाकार नहीं हूँ, पर यह मेरे सही अनुभव की कहानी है इसीलिए मैं कहानी में जान डाल सकता हूँ।

मेरी सही अनुभव वाली दूसरी कहानी मैं बाद में बताऊंगा अगर तुम्हारे मेल मुझको आते रहेंगे तो ! ख़ास करके लड़की और औरत के। Hindi Porn Stories

Antarvasna

मेरा नाम राहुल है, मैं Antarvasna जयपुर में रहता हूँ। मैं दिखने में सामान्य हूँ। हर लड़की को देख कर उसे चोदने का मन करता है मेरा।

मुझे एक लड़की पसंद थी लेकिन मैं कभी उसे कह नहीं पाया।

अब काम की बात हो जाए !

मुझे अपने पड़ोस में एक लड़की पसंद है। अक्सर वो मुझे देख कर मुस्करा जाती थी, मैं भी मुस्कुरा देता था, लेकिन कभी बात नहीं हो पाई थी। बस उसका नाम शेफाली है यही जान पाया था। करीब ४ महीने पहले वो मुझे बाज़ार में दिखी। मैंने उसे हाय किया और बात करनी शुरु कर दी।

मैंने उसी मित्रता का निमन्त्रण दिया और उसने स्वीकार कर लिया। हम दोनों एक दूसरे का मोबाइल नम्बर लेकर घर चले गए। मैं रात को भी सपनों में उसी को ही देखता था। अब हम फ़ोन पर बातें करने लगे, उसे भी ये सब अच्छा लगने लगा। हम लोग हर रोज़ घंटों फ़ोन पर बातें करने लगे।

एक दिन उसने मुझे अपने घर में बुलाया। मैं उसके घर गया तब वो घर में अकेली थी और जींस-टॉप में थी। क्या सेक्सी लग रही थी- उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने अपने आप को सँभालने की कोशिश की। शेफ (शेफाली) ने मेरा लंड देख कर अनदेखा कर दिया। हम इधर उधर की बातें करने लगे।

तभी मैंने उससे उसके बॉयफ़्रेन्ड के बारे में पूछा तो बोली- उसका कोई बॉयफ़्रेन्ड नहीं है। मुझे लगा अब तो कुंवारी चूत मिल जाएगी। लेकिन मैंने सम्हालते हुए बात जारी रखी। उसके बाद हम दोनों बाइक पर घूमने चले गए। वो मेरे पीछे बैठी थी तब उसके स्तन मेरी पीठ को लगते तो बड़ा मजा आता। मेरा लंड बार बार खड़ा होने लगा। मुझे सहन नहीं हो रहा था तब मैंने तय किया शेफ को आज तो जरुर करुँगा, उसकी चुदाई के मजे लूँगा।

पहले हम एक रेस्तराँ में गए। वहाँ खाने का आर्डर देने के बाद मैंने उससे कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ !

तो बोली- बोलो !

मैंने कहा- बुरा मत मानना !

वो बोली- ठीक है ! मैं बहुत कोशिश करके बोला- शेफ ! मैं तुमसे प्यार करता हूँ ! आय लव यू !

तो वो एक बार तो मुझे घूरती रही, मैं डर गया तो अचानक मुझे गले लगा कर बोली- आय लव यू ठू !

मैं बहुत खुश हुआ। उसके बाद हम दोनों अपने अपने घर चले गए।

अगले दिन भी उसके घर कोई नहीं था, मैंने उससे कहा कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ !

वो खुश होकर बोली- मैं भी तो यही चाहती हूँ !

मैं उसे उसके कमरे में ले जाकर उसके स्तन चूमने लगा। फिर उसके वक्ष को पहले उसके टॉप फिर उसके ब्रा से आजाद किया।

क्या तो मस्त माल लग रही थी वो !

मैं उसके स्तन बहुत तेज़ दबाने लगा। वो चिल्लाने लगी- आआऽऽ आअह्ह्ह्ह्हऽऽ

मुझे भी मजा आ रहा था। वो मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी। मैं बोला- जान पहले जींस तो खोलने दो !

तो उसने एक बार में ही मेरी जींस खोल दी फ़िर मेरा बनियान उतारने लगी। अब मैं केवल अंडरवियर में था। मैंने भी उसकी जींस उतार कर फेंक दी और उसकी चूत को नंगा करने के लिए पैंटी भी उतार दी। अब वो पूर्ण-नग्न थी। उसकी चूत तो क्या मस्त थी, बाल से भरी हुई बिल्कुल नंगी चूत ! कुंवारी चूत ! जो अब चुदवाने वाली थी !

फिर उसने मेरी अंडरवियर खोल दी और मेरा ७ इंच का लौड़ा बाहर आ गया जो सिर्फ चूत को चोदना चाहता था।

मैं उसकी चूत को हाथ से चोदने लगा, वो आवाजें निकालने लगी- आऽऽ आहऽऽऽ मऽरऽ गऽऽऽऽईऽऽऽऽ रोहीईईईईईईत चोदू ऊओ !

मैं डर गया कि कहीं कोई आ न जाये तो मैंने उसको चुप कराया और चूत से हाथ निकाल लिया। थोड़ी देर बाद वो उठी और मेरा लंड पकड़ कर मुँह में लेने लगी।

मैंने कहा- अब चोदें?

तो बोली- जानू, चोदो, मगर धीरे से ! पहली बार कर रही हूँ…..

मैं बोला- अब दर्द नहीं होगा ! मैं ऐसा चोदूंगा कि कुछ पता ही नहीं चलेगा…

फिर मैं उसकी चूत में धीरे धीरे आराम से लण्ड डालने लगा, धीरे धीरे उसकी चूत फटने लगी……..

वो धीरे धीरे आवाजें निकाल रही थी….अहऽऽ ओहऽऽअ

लेकिन ज्यादा तेज़ नहीं…

कुछ देर बाद वो सामान्य होकर मेरा साथ देने लगी। अब मैंने स्पीड बढ़ा दी………….

वो बोली- राहुल फास्ट करो ! मुझे चोदो……… प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज तेज्ज करओ ऊऽऽ

मैं बोला- अभी करता हूँ मेरी जानेमन !

फिर मैं तेज़ तेज़ उसे चोदने लगा

१५ मिनट बाद वो झड़ गई लेकिन मैं तेजी से चोद रहा था ….

वो बोली- रुको !

पर मैं मानने वाला कहाँ था, मैं तेजी से करता रहा…. करीब १० मिनट बाद मैं भी झड़ गया …. फिर २० मिनट बाद हम फिर शुरू हो गए…. उस दिन ६ बार उसको चोदा !

मज़ा आ गया दोस्तो….

आप सब बतायें कि मेरी कहानी कैसी लगी आपको…… Antarvasna

प्रेषक : रेखा शर्मा Hindi Sex Stories

हाय, मैं रेखा, फिर से आपके Hindi Sex Stories लिये अपनी जिंदगी का एक हसीन पल लेकर उपस्थित हुई हूँ, मेरी प्रथम कहानी के लिये मुझे आपका बहुत ढेर सारा प्यारा मिला, सभी को अलग अलग जवाब देने के लिये मेरे पास समय भी कम पड़ गया। आप सभी को को मेरा दिल से प्यार और धन्यवाद।

आइए, आपको अभी ही 3 अक्टूबर की सच्ची बात बताती हूँ।

2 अक्टूबर को मेरे पति के ऑफ़िस की गांधी जयन्ती की छुट्टी थी, पर काम के सिलसिले में उन्हें आज बाहर जाना था ताकि अगले दिन वो बैठक में भाग ले सकें। आप जानते ही हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, मेरे सेक्सी दिमाग ने एक दम से ही एक योजना बना डाली। मैंने अपने बॉय-फ़्रेण्ड कुलदीप को फोन कर दिया। मैंने नीता से भी कहा, पर डर के मारे उसने कुछ नहीं कहा।

कुलदीप समय पर आ गया था। हम दोनों शाम को बाज़ार घूमने निकल पड़े। वहां कुलदीप ने मेरे लिये ब्रा और एक छोटी सी प्यारी पेण्टी ली। मैंने भी उसके लिये एक बढ़िया सा अंडरवियर लिया। इसका सीधा सा मतलब था कि हमें रात की चुदाई में ये सब ही पहनना है। यही हमारी दिवाली का तोहफ़ा भी था।

रात ढलते ढलते हम घर आ चुके थे।

रात को जब मैं खाना बना रही थी तो कुलदीप अपने घर जाकर जाने कब लौट आया। नीता को उसके आने के बारे में पता नहीं था। नीता मुझसे कुलदीप के बारे में ही पूछ रही थी कि हम दोनों ने क्या क्या मजे किये ?

मुझे लगा कि उसकी चूत भी यह सोच सोच कर गीली हो रही थी कि मैंने लण्ड कैसे लेती हूँ, वगैरह।

मैंने उसे बताया कि यदि मैं बताऊंगी तो फिर अपने आप को रोक नहीं पाऊंगी।

“अरे वाह, ऐसा क्या किया था तुम दोनों ने ? बता ना दीदी?”

“अच्छा तू अपना काम खतम कर फिर बताऊंगी तुझे !”

हम दोनों ने फ़टाफ़ट अपना अपना काम समाप्त किया … तभी मेरे मन एक प्यारा सा ख्याल आया कि क्यों ना नीता मेरे साथ मिलकर रात को चुदाई का मजा ले। मैंने नीता को कहा,”देख बात तो बहुत लम्बी है … रात को मेरे साथ ही सो जाना … मैं पूरी कहानी बता दूंगी !”

“हाय नहीं रे दीदी, तू कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर करेगी, मुझे तो शरम आयेगी !”

“तुझे सुनना है तो बोल वरना तेरी मर्जी …”

ये सब बातें कुलदीप सुन रहा था, उसे लगा कि आज रात की चुदाई तो गई, पर उसे क्या पता था था कि मैं उसी के लिये तो नई चूत का इन्तज़ाम कर रही हूँ ! और नीता के लिये एक सोलिड नया लण्ड तैयार कर रही हूँ। नीता ने कुछ सोच कर कहा कि मुझे पूछना पड़ेगा उन्होने हां कह दी तो मैं अभी आ जाती हूँ।

जैसे ही नीता जाने लगी तो मैंने उसे पीछे से आ कर उसकी कमर को पकड़ कर अपने से चिपका लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ दबा दी … और उत्तेजना में मसल दी …

“उफ़्फ़्फ़्फ़, दीदी … हाय रे …” और वो हंस पड़ी

“सॉरी, नीता … जल्दी आना … मैं इन्तज़ार करूंगी” और हंस कर आंख मार दी।

“दीदी … अब तो बड़ी बेशरम हो गई है तू … अभी आती हूँ …” नीता चली गई।

बैचेन सा कुल्दीप बाहर आया और असमन्जस में बोला,”अक्षी, आज की चुदाई का क्या होगा …?”

“क्यों … क्या हुआ … तेरा लण्ड तो मस्त है ना … या कुछ …?”

“ओह्ह हो … तुमने नीता को बुलाया है ना …?”

“मेरे जानू, आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगी कि हमेशा याद करोगे, बस अब देखते जाओ !”

कुलदीप के मुख पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट तैरने लगी, शायद उसे कुछ अंदाज़ा हो गया था। खाना बनाने के बाद मैं बैठक में आ गई। कुलदीप नहाने चला गया … कुछ ही देर में बाथरूम से उसने आवाज दी,”अक्सू, जरा यहाँ आना …!”

मैं बाथरूम के पास गई और दरवाजा खोला। उसे देखकर मैं सन्न रह गई, वो पूरा नंगा था … उसका मोटा और भारी लण्ड कड़क होकर सीधा तना हुआ था। मेरे मन में हलचल होने लगी। दिल धड़क उठा। उसे मैंने यों पहली बार देखा था। उसका नंगा और चिकना बदन, उस पर पानी की बूंदें उसे बला का सेक्सी बना रहा था। मेरे मन में वासना का उबाल आने लगा। मेरे चुचूक अकड़ गये, चूत से पानी रिसने लगा। वो खड़े खड़े अपना लण्ड हिला रहा था, उसका लाल सुपारा गजब ढा रहा था। मैं शर्माती हुई अन्दर चली आई, उसने मुझे आँख मार दी, मेरी नजरें झुक गई और मैंने धीरे से उसका फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लौड़ा अपने हाथों में भर लिया।

“मेरी पीठ पर साबुन लगा दे … जरा रगड़ कर …” मैं उसकी पीठ पर साबुन मलने लगी, साथ ही साथ अपना हाथ उसके कड़े चूतड़ो पर भी फ़िसलने लगा।

उसके चूतड़ों की गहराई में हाथ घुस कर उसे मजे दे रहा था। दूसरे हाथ से मैंने उसकी चौड़ी छाती पर उसके जरा से निपल को मसलने लगी। मैंने उसकी छाती पर अपना सर रख दिया और साबुन वाले हाथ नीचे लण्ड पर उतर आये। उसके लण्ड पर साबुन मलते हुये उसका जैसे मुठ ही मारने लगी। कुलदीप ने अपनी आंखें बन्द कर ली … और उसके गीले हाथ मेरे उन्नत वक्ष पर आ गये। कुछ ही देर में उसने मेरी चूचियाँ बाहर निकाल ली और एक दूसरे को मसला-मसली का दौर चल पड़ा। उसका पूरा शरीर साबुन के झाग से ढक गया था। जाने कब हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ गये … सच में बहुत आनन्द आ रहा था … स्वर्ग जैसा आनन्द … ।

लण्ड की घिसाई से वो बहुत आनन्दित हो रहा था। तभी उसने मुझे खींच कर शॉवर के नीचे कर लिया और पानी बरसा दिया। मेरे कपड़े भीग उठे, मेरे चिकने स्तन पानी से भीगे हुये थे। एकदम फ़ूल कर कड़े हो गये थे। मेरे गीले बदन को भोगने की नजर से देखने लगा … मैं समझ गई थी कि अब उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार है। मेरे हाथ उसके लण्ड पर तेजी से मुठ मार रहे थे। उसने मेरे रहे सहे कपड़े भी उतार दिये। मेरी आंखों में नशा सा छा गया। वो मुझे बेहद सेक्सी लगने लगा था। चुदने को चूत लपलपाने लगी थी। मुझे एक झुरझुरी सी आई और मैं उससे एक दम चिपक गई। हमारे अधर एक दूसरे को पी रहे थे …

चूसने की आवाज यूं आ रही थी मानो आम चूस रहे हों … क्या रस भरा महौल था …

मेरा अंग अंग मसले जाने को बेताब हो रहा था। उसका लण्ड अब भी मेरी मुठ्ठी में था। उसने मेरे निपल को दांतो से काट सा लिया … मेरी चूत पर जैसे आग में घी के जैसा असर होने लगा। चूत में आग सी लग गई,”दीपूऽऽऽऽ अह्ह्ह् … मार डाला रे तूने तो …”

“मेरी रानी … तेरे अंग बहुत मद भरे हैं … आह्ह्ह्ह”

मुझसे रहा नहीं जा रहा था। इसका सुन्दर, मोहक लण्ड मेरे दिल को पिघला रहा था। अनजाने में मैं नीचे बैठती गई और अब उसका मनमोहना सुन्दर लण्ड मेरे होंठो के पास था। मैंने उसका लाल तड़पता हुआ सुपारा अपने मुख में भर लिया और चूसने और काटने लगी।

“हाय रे … मेरा लण्ड काट कर खा मत जाना … श्स्स्स्स्स्स्स् … निकल जायेगा रानी” उसकी सिसकी फ़ूट पड़ी। मैं अब जल्दी जल्दी उसके लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी, उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़फ़ड़ा रहा था। वो भी झुक कर मेरे स्तनों को मरोड़ने और खींचने लगा। उसने मुझे अब प्यार से उठाया और खड़ा कर दिया। उसने मेरे मस्तक पर चूमा, फिर मेरे होंठो को, मेरे कंधे पर, फिर मेरे उरोज पर, नाभी पर … हाय राम …

वो तो मेरी चूत तक पहुंच गया। उसके होंठ मेरी गीली और चिकनी चूत के लबों में पहुंच कर उस रस का स्वाद लेने लगे … मेरी चूत की चिकनाई में वासना से भरे बुलबुले भी उभर आये थे, जैसे चूत में रस का मन्थन हो रहा हो। मेरा वो पहला प्यार था, उसके लिये मैं सब कुछ कर सकती थी … मेरे मन भी चूत चुसवाने को मचल रहा था। दिल को दिल से रहत होती है … वो मेरी अदायें समझता था। मेरी टांग अपने आप एक तरफ़ उठ गई और मेरी चूत का मुख खुल गया उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर तक चाट रही थी। दाना फूल कर लाल हो गया था। बार बार होंठो से चुसने के कारण मेरे तन की आग भड़कने लगी थी।

मैंने उससे कहा,”कुलदीप मुझे तेरा लण्ड चूसना है … बड़ा ही मस्त है रे …”

वो मुस्करा उठा और वहीं बाथरूम में सीधा लेट गया। वो जब मेरी चूत चूसता है तो मेरा मन करता है कि मैं अलादीन का चिराग बन जाऊँ और जो वो मांगे दे दूं।

मैं कुलदीप पर उल्टा लेट गई। हम अब 69 पोजीशन में थे। वो मेरी चूत के रस का स्वाद ले रहा था और मैं उसके मोटे और सुन्दर लण्ड को बड़े प्यार से चूस रही थी, कभी कभी काट भी लेती थी और फिर उसके सुपारे के छल्ले को कस कर और खींच कर चूस लेती थी। मेरे अंगों में तरावट सी आने लगी … जिस्म कंपकंपाने सा लगा … एक मीठी सी लहर उठने लगी …

“दीपू … मेरा पानी निकल जायेगा … हे मेरी मां … कैसा कैसा हो रहा है …”

“मेरी प्यारी अक्सू … निकाल दे पानी … तू मेरा रस पी सकती है तो क्या मैं तेरा रसपान नहीं कर सकता …?”

मैं अपनी उच्चतम सीमा को पार करने ही वाली थी … कि उसने चूसने की स्पीड बढ़ा दी और अपनी जीभ और दो अंगुलियाँ मेरी चूत में समा दी। मैं लहरा उठी और मेरी चूत उसके मुँह से भिंच गई और आग उगलने लगी … पानी छूट गया … मैं झड़ने लगी …।

अब मेरी बारी थी, मैंने उससे कहा कि अब अपना वीर्य भी मुझ पिलाओ …

उसने प्यार से मुझे सहला कर मुझे बैठा दिया और स्वयं अपना लण्ड मेरे सामने ले कर खड़ा हो गया।

“जानू आज अपने चेहरे को मेरे वीर्य से भिगा दो … मैं अपना ही माल चाट कर देखूंगा !”

मैंने उसका लण्ड मुख में भर लिया और अपने हाथों की ताकत का इस्तमाल किया, कस-कस के मुठ मारने लगी। वो तड़प सा गया। उसका जिस्म लहराने लगा, उसके अंगों में बिजलियाँ दौड़ने लगी। उसने छटपटा कर मेरे मुख से लण्ड निकाल लिया और एक भरपूर मुठ मार कर निशाना बांध लिया। एक तेज वीर्य की धार निकल पड़ी और निकलती ही गई … मेरा पूरा चेहरा जैसे नहा लिया हो … कुछ तो मैंने अपने मुँह में भर लिया पर दूसरे ही पल में कुलदीप मेरे चेहरे पर लपक कर आ गया और अपना ही वीर्य चाटने लगा। उसकी जीभ मेरे चेहरे को गुदगुदाने लगी, मुझे बहुत ही आनन्द आया। मैं खड़ी हो गई, कुलदीप को मेरे चेहरे को भरपूर चाटने को मिल गया था। अभी भी वो मुझे चाट कम रहा था चुम्मा अधिक ले रहा था।

मैंने प्यार में भर कर उसे चिपका लिया और उसकी गर्दन में बाहें डाल कर झूल गई।

कुछ ही देर हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गये और मैं अपने कपड़े उठाने लगी।

कुलदीप ने मुझे रोक लिया और कहा,”जानू हमरे बीच में कोई परदा तो नहीं है फिर कपड़ों की क्या जरूरत है, आज ऐसे ही , नंगे ही हम केन्डल लाईट डिनर करेंगे !”

मैं शरमा गई, हाय ऐसे कैसे नंगे होकर हम खाना खायेंगे। अपना गीला बदन लिये हुये मैं अपने बेड रूम में आ गई और आईने के सामने अपने आपको निहारने लगी। मैंने ऊपर एक झीना सा गाऊन डाल लिया। मैं आईने में अपना ही अक्स देख कर शर्माने लगी। सच में बहुत सेक्सी बदन थ मेरा … मेरी उभरी हुई चूचियाँ फिर उस पर पानी बूंदें … कोई भी मुझे चोदने को लालायित हो सकता था।

मैंने अपना गाऊन अपने शरीर पर कस कर लपेट लिया। बदन गीला होने से मेरी गीली चूचियाँ बाहर से ही अपना नजारा दिखाने लग गई थी। मैंने अपना सर झटका …

हाय मैं ये क्या सोचने लग गई। मेरे गीले बदन से गाऊन चिपक गया था। मैंने गाऊन उतारा और नंगी ही बैठक में आ गई। कुलदीप सोफ़े पर लेटा सुस्ता रहा था … उसका लण्ड मुरझाया हुआ था। मुझे देखते ही उसने मुझे अपनी तरफ़ बुलाया।

मैं जैसे ही उसके पास गई उसने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया। उसका लण्ड फिर से खड़ा होने के लिये फ़ुफ़कार उठा। मैंने नजाकत देखते हुये उसके लण्ड को थाम लिया और उसके होंठो से होंठ मिला दिये। मुझे इस तरह नंगी घूमते देख कर वो एक बार फिर से भड़क गया।

“चलो हटो ना … अब खाना खा लें …”

कुलदीप ने मुझे छोड़ दिया।

तभी दरवाजे की घण्टी बजी। हम दोनों घबरा से गए।

“कौन है …?”

“मैं नीता …”

रात बहुत हो चुकी थी।

“रुको जरा मैं आई …”

मैंने तुरंत ही कुछ सोच लिया और कुलदीप को बाथरूम में भेज दिया। मुझे नीता को हीट में जो लाना था।

“नीता साथ में और कौन है? रात में रुकेगी ना?”

“अरे बाबा, दरवाजा तो खोल, मेरे साथ कोई नहीं है … तेरे पास ही तो आई हूँ !”

मैंने धीरे से दरवाजा खोला और यहाँ-वहाँ झांक कर देखा। कोई भी नहीं था, तब मैंने उसे अन्दर खींच लिया। मुझे पूरी नंगी देख कर वो चौंक गई। उसने पहली बार मुझे नंगी देखा था।

“ये क्या अक्सू …”

“अभी नहा कर निकली थी कि तू आ गई … इसलिये ऐसे ही आ गई !”

“आह्ह रे अक्सू … तू भी ना ऽऽ”

“देख मैं अच्छी लगती हूँ ना, मेरे ये सब देख … और बता …”

वो झेंप गई और शरमा गई …

“दीदी …बस है ना … ओह दीदी … आप तो बला की सुन्दर हैं !”

“चल, आज मौका है … तुझे एक सेक्सी बात जाननी थी ना … आज तुझे लाईव दिखा दूँ !”

“मैं समझी नहीं दीदी … क्या दिखाओगी …?”

“सब कुछ समझ जाओगी … देखो शर्माओ मत … बता भी दो अब …”

वो शर्मा उठी और मुस्कराते हुये धीरे से हां में सर हिला दिया। वो सब कुछ समझ चुकी थी कि मैं उसके साथ कुछ करने वाली हूँ। वो कुछ ऐसे ही विचार में डूबने सी लगी उसके मन में वासना का गुबार उठने लगा।

मैंने उसे कहा कि वो मेरे बेडरुम में चली जाये और चुपके से बिना आवाज के दरवाजे से झांक कर देखते रहना। वो कुछ असमन्जस में उठी और बेडरूम में चली गई।

मैंने कुलदीप को बाथ से बुला लिया … वो कुछ आश्चर्य से बोला,”तुम ऐसे ही उसके सामने चली गई … नंगी … वो गई क्या?”

“अरे वो मेरी पड़ोसन है … गई वो तो … चलो खाना खा लें …”

हम नंगे ही खाना खाने बैठ गये। खाना खाते समय वो मेरे स्तन दबा देता था, चुचूकों को ऐंठ देता था। मैं भी उसका लण्ड सहला देती थी। उसका भी खड़े लण्ड के साथ खाना मुश्किल हो रहा था। हमारी ये सब मस्ती नीता देख रही थी। मैं नीता को बार बार आँख मार रही थी। नीता भी ये सब देख कर उत्तेजित हो रही थी। कुलदीप ने एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी निकाली और उसे लगा दी। पहले ही सीन में दो लड़कियां एक लड़के से चुदवा रही थी।

“कुलदीप, तुम्हारा मन एक साथ दो चूतों को चोदने का नहीं करता ?”

वो शरमा गया “अरे नहीं, तू ये क्या कह रही है …”

“अरे बता ना … बेचारा लण्ड तो कुछ कहेगा नहीं …”

“देख बुरा मत मान लेना … दो चूत चोदने का किसका मन नहीं करेगा … फिर एक साथ दो लड़कियाँ क्युँ चुदवायेगी, खैर ! मेरे ऐसे नसीब कहाँ …”

“अच्छा … मेरे साथ तुम्हें चोदने को दो चूत मिल जायें तो …?”

नीता सब सुन रही थी और उसे शायद ये मालूम हो गया था कि दूसरी चूत उसी की होगी।

पहले तो वो मना करता रहा पर मैंने उसे मना ही लिया। नीता अपने होंठों पर जीभ फ़िरा रही थी और अब अपने होंठ काटने लगी थी। उसकी चूत में रस चूने लग गया था।

मैं नीता को उत्तेजित करने के लिये कुलदीप का लण्ड पकड़ कर उसे हिलाने लगी। उसका लण्ड मस्ती से झूमने लगा। कड़क हो उठा … नीता अपनी बड़ी बड़ी आंखों से उसे बड़े मोहक तरीके से निहार रही थी। मैं नीता को आंख मार कर मुस्करा रही थी। मैंने उसकी आंखों में उत्तेजना देखी और उसे इशारा किया लण्ड पकड़ने के लिये। उसने जल्दी से सर हिला कर मना किया। फिर मैंने उसे लण्ड मुँह में लेने का इशारा किया। वो शरमा कर हंस दी … यानी कि हंसी और फ़ंसी। मैं समझ गई उसे ये सब पसन्द है। मैंने कुलदीप का लण्ड मुँह में लिया और चूसने लगी और उसे देखने लगी। फिर मैं अपनी अंगुली अपनी चूत में डाल कर हिलाने लगी।

वो उत्तेजना से बेहाल थी। मैंने उसे फिर इशारा किया कि वो बाहर आ जाये।

उसने शर्म के मारे फिर ना कर दिया। मुझे लगा कि उसे समझाना पड़ेगा। मैं अन्दर गई और उससे कहा तो बोली कि शर्म आती है। मैंने उसके बोबे दबाये और कहा,”क्यूँ ! मन चुदने का नहीं हो रहा है क्या ?”

उसका शर्माना उसकी हां कह रहा था। वो शरमा कर नीचे देखने लगी। उसने धीरे से सर हिला कर हां कहा। पर फिर कहा कि वो मुझे देख लेगा तो। मैंने उसे स्कीम बताई, मैं लाईट बन्द करके अंधेरा कर दूंगी फिर जब मैं घोड़ी बनूं तो मैं उसे तेरे पास ले आऊंगी वो तुझे चोद देगा।

कुछ भी ना बोलना और हां वो लण्ड मेरा है, उसे हाथ भी मत लगाना। यह कह कर दोनों ही हंस पड़ी।

मैं वापस आकर उसके लण्ड से खेलने लगी और वो मेरे चुचूकों से खेलने लगा। फिर एक हाथ मेरी चूत पर रख कर उसे रगड़ने लगा। फिर चूत में अंगुली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा। उसका लण्ड मेरी चूत को मिसकॉल मारने लगा। मैं सोफ़े पर झुक गई और वो मेरी चूत खोलकर उसे चाटने लगा। मैं सिसकियाँ भरने लगी।

नीता सिसक उठी, मेरी नजरें उसी पर थी। कुलदीप ने अपना पूरा लण्ड चूत में घुसा दिया। मेरे मुख से उफ़्फ़्फ़्फ़ निकल गई। उसके लण्ड को चूत में से निकाल कर मैंने उसे अपने मुख में भर लिया और चूसने लगी। वो तड़प उठा और बोला,”अक्सू … आज तो अपनी गाण्ड प्यारी के दर्शन करा दे …”

मुझे भी बहुत समय हो गया था गाण्ड मरवाये सो मैंने भी लण्ड को गाण्ड का रास्ता दिखा दिया।

गाण्ड गीली होने से उसका लण्ड सट से छेद में घुस पड़ा। कुलदीप बोला,”अरे चूत इतनी टाईट कैसे हो गई?”

मैं हंस पड़ी। उसे मालूम था या वो अन्जान बन रहा था।

“सुनो जनाब, आपका लौड़ा मेरी गाण्ड में है, तुम्हें पता ही नहीं चला कि लौड़ा तुमने किस छेद में डाला?”

यह सुन कर वो खुश हो गया। मैं गाण्ड चुदाने के नशे में डूब गई। तभी मुझे नीता का ध्यान आया। मैंने घूम कर उसे देखा तो वो अपनी चूत दबा कर सिसकियाँ भर रही थी।

मैंने कुलदीप को देखा वो मस्ती में मेरी गाण्ड चोदे जा रहा था।

“सुनो बेड रूम में चलो, तुम्हें एक सरप्राईज देना है !”

” हाय, वो सब बाद में ! पहले पानी तो निकाल दूं !”

“नहीं, पहले आओ तो … चलो …!” मैं उसे धकेलते हुये बेडरूम में ले आई। तभी उसे नीता की एक झलक मिली, नीता तुरन्त ही परदे के पीछे छिप गई। उसे लगा कि शायद उसे भ्रम हुआ है। वो बिस्तर पर लेट गया। मैं उसके ऊपर लेट गई और उसकी आंखों पर अपनी चुन्नी बांध दी।

“अब रुको, मैं अभी आई …” मैंने लाईट बन्द कर दी। मैंने नीता को बुलाया और उसे सब समझा दिया। नीता ने उसके खड़े लण्ड को धीरे से अपने मुँह में ले लिया। पर उसकी स्टाईल अलग थी … उसका तरीका अलग था।

“जल्दी कस कर चूसो ना …” मैंने नीता को इशारा किया। उसने लण्ड मसलते हुए जोर से चूसने लगी। फिर भी उसमे मेरी वाली बात नहीं आ रही थी। पर नीता को तो मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी आंखें बंद हो चली थी। यह देख कर मैंने लाईट जला दी। लाईट जलते ही नीता ने मेरी तरफ़ देखा। मैंने इशारा किया … चूसे जाओ …

मैंने नीता के पूरे कपड़े उतार दिये और उसे पूरी नंगी कर दिया। मैंने जोश में उसकी चिकनी चूत में अंगुली डाल दी, वाह क्या चूत थी उसकी …बहुत ही प्यारी सी, चिकनी … गुलाबी उसमें काम-रस भरा हुआ। मैंने उसकी उसकी चूत में अपने होंठ चिपका दिए और उसकी रस भरी चूत का पान करने लगी।

“बस, अक्सू … अब चूत में लण्ड डाल दो …” मैंने नीता को इशारा किया तो वो उठ कर उसके लण्ड पर बैठ गई। उसका लण्ड नीता की चूत में घूत में घुसने लगा।

“आज क्या हो गया है … तुम्हारी चूत तो अलग सी लग रही है ?”

नीता के चेहरे पर शर्म की लालिमा तैर गई। मैंने जवाब दिया,”अच्छा मजाक कर लेते हो … जरा लौड़े का कमाल तो दिखाओ !”

नीता शरमाते हुये अपनी चूत ऊपर नीचे करने लगी और बड़े प्यार से चुदने लगी।

मैं भी कुलदीप के दोनों और टांगें करके खड़ी हो गई और अपनी चूत नीता के मुख से सटा दी। नीता चुदते हुये मेरी चूत चूसने लगी। बड़ी खूबसूरत चुदाई चल रही थी। नीता अब सम्पूर्णता की ओर बढ़ने लगी थी। उसने धीरे से कहा,”दीदी, मैं तो आह्ह्ह गई …”

“रुक जा तू धीरे से उठ जा ” मैं अब कुलदीप के लण्ड पर चढ़ गई और लण्ड पूरा घुसा लिया। नीता को सामने खड़ी कर लिया और उसकी चूत में दो अंगुलियाँ डाल कर उसकी चूत चोदने लगी। वो झड़ने लगी … उसका पानी निकल गया। वो शांत हो गई। अब नीता धीरे से वहां से हट गई। मैं घोड़ी बन गई और कुल्दीप मेरी चूत चोदने लगा। मेरी चूत अब रिसने लगी थी। मैं आनन्द से सराबोर हो चुकी थी।

मैं भी अब झड़ने के कगार पर थी। मजे लेते लेते मन कर रहा था कि कभी ना झड़ूँ …

पर आखिर में मेरा पानी छूट ही गया। मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत कुलदीप के मुख से सटा दी … उसने मेरे रस का स्वाद लिया और जोर से चूत को चूसने लगा। मैं चूत चुसाने के बाद उल्टी हो कर उसके खड़े लण्ड का वीर्य निकालने के लिए उसे चूसने लगी। नीता की जीभ भी लपालपा उठी, मैंने नीता को पूरा मौका दिया चूसने का। कुलदीप कुछ ही देर में नीता के मुख में ही झड़ गया। नीता को थोड़ा अजीब लगा पर मैंने उसे पूरा पी जाने कहा। उसने पूरा लण्ड साफ़ किया और उठ कर बाहर चली गई। मैंने कुलदीप से कहा कि मैं अभी मुँह साफ़ करके आती हूँ …

उसकी आंखों से मैंने अपनी चुन्नी खोल दी। कुलदीप मन्द-मन्द मुस्करा रहा था।

मैं बाहर आई तो नीता का चिकना सुघड़ शरीर देख कर दंग रह गई। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी चूत में अंगुली डाल दी। वो हंस पड़ी। फिर उसे हटते ही मैंने अपना मुख भी साफ़ कर लिया। नीता सोफ़े पर चादर डाल कर सो गई। मैं भी भीतर जाकर कुलदीप का लण्ड पकड़ कर सो गई।

सवेरे उठते ही मुझे झटका लगा। कुलदीप मेरे साथ नहीं था। मैंने धीरे से उठ कर परदे से झांका तो वो नंगा खड़ा था और नीता के नंगे बदन को देख कर मुठ मार रहा था। नीता की चादर नीचे गिर गई थी। मैंने धीरे से जाकर कुलदीप का हाथ लण्ड से छुड़ाया और बताया कि वो रात उससे चुद चुकी है। उसे कहा कि अब देर किस बात की है … अब खुल कर चोद डालो …

कुलदीप ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से उसके पास आ गया और उसकी चूत पर अपना लण्ड लगा दिया। थोड़ा सा जोर लगाते ही वो अन्दर उतर गया।

नीता जाग गई … और कुलदीप को अपने ऊपर पा कर जैसे धन्य हो गई। उसके हाथ कुलदीप की कमर पर लिपट गये, दोनों एक होने के लिये मचल पड़े। उसकी नजर ज्योंही मुझ पर पड़ी … वो सब कुछ समझ गई। मुझे आंखों ही आंखों में धन्यवाद कहा और अपनी आंखें बंद कर ली … नीता की शरम अब जा चुकी थी … उसने अपनी टांगें ऊपर कर ली और कुलदीप का एक नया सफ़र आरम्भ हो गया।

मैंने ईश्वर को अपनी इस सफ़लता पर धन्यवाद किया। और रोज़मर्रा के कार्य पर लग गई। आज तो चुदाई का आगाज था … आगे जो चुदाई होनी थी, उसे सोच सोच कर नीता बेहाल हुई जा रही थी। Hindi Sex Stories

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