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मेरा नाम अखिल है। मैं मुम्बई Sex Stories का रहने वाला हूँ और मेरे बड़े भाई बंगलौर में एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में कार्यरत हैं। भैया की शादी आज से क़रीब २ वर्ष पूर्व हुई थी।
मुम्बई में मैं अकेला रहता था। अचानक मुझे बंगलौर जाना पड़ा क्योंकि मेरी नौकरी वहाँ लग गई थी। वहाँ पर भैया थे तो मैं उनके घर पर ही रहता था। मेरी भाभी को मैंने सिर्फ़ ३ बार देखा था। इसलिए हमारी दोस्ती कमज़ोर थी।
एक दिन भैया को विदेश जाना पड़ा। भैया मुझे कहकर गए- तुम भाभी का ध्यान रखना। घर में सिर्फ़ तुम दोनों ही हो।
मैंने कहा- ठीक है भैया।
मैं सुबह सुबह भैया को एयरपोर्ट पर छोड़ने गया।
जब आया तो भाभी नहाने चली गई थी। मैंने ज़ोरों से कई बार घण्टी बजाई, तो काफी देर बाद दरवाज़ा खुला। भाभी केवल तौलिए में थी। यह नज़ारा देखकर मेरा दिमाग़ ख़राब हो गया। मेरे मन में ख्याल आया कि मैं भाभी की प्यास बुझा दूँ। मैं अन्दर गया तो भाभी ने नाश्ता बना रखा था। नाश्ते के बाद हम ऑफिस के लिए निकल गए। जाते समय भाभी ने कहा- आज रात का खाना होटल में खाएँगे।
मैंने कहा- ठीक है।
रात को जब हम दोनों होटल जा रहे थे। मेरे पास बाईक थी। उस पर सिर्फ हम दोनों बैठे थे। भाभी की चूचियाँ मेरी पीठ से छू रहीं थीं। होटल में भाभी ने ऑर्डर दिया।
खाना खाने के बाद हम घर आए, तो भाभी अपने कमरे में चली गई। मैं टीवी देखने लग गया।
इतने में भाभी आई, बोली- तुम्हें नींद नहीं आ रही है क्या?
मैंने कहा- हाँ।
मुझे भी नहीं आ रही है।
अचानक टीवी पर ब्लू-फिल्म आने लग गई। मैंने उसी वक्त टीवी बन्द कर दिया। भाभी ने मुझे देखा और मुस्कुराई। मेरे पसीने छूट गए।
भाभी बोली- इतनी ठंडी में तुम्हारे पसीने क्यों छूट रहे हैं?
भाभी ने कहा- तुमने कभी ब्लू-फिल्म नहीं देखी क्या?
मेरी बोलती बन्द हो गई थी। भाभी मेरे पास आकर बैठ गई। मुझ पर हाथ फेरने लगी। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। भाभी की नज़र मेरे लिंग पर ही थी, कहा – ये तो तुम्हारे भैया से भी मोटा और लम्बा मालूम होता है।
भाभी ने कहा- तुमने तो मुम्बई में बहुत सी लड़कियों की ली होगी ना?
मैंने कहा- नहीं भाभी।
भाभी ने कहा- तुम मेरी प्यास बुझाओगे क्या?
मैंने कहा- भैया को मालूम हो गया तो?
वह खड़ी हो गई और कहा- तुम मुझे कमरे में लेकर जाओ।
मैं उन्हें कमरे में ले गया और बिस्तर पर लिटा दिया। भाभी ने उनका साड़ी और ब्लाऊज़ निकाल दी। उन्होंने काले रंग की ब्रा और पैन्टी भी पहन रखी थी। भाभी की फिग़र ३६-२४-३२ का है। चूचियाँ तो गोल-गोल और कठोर थे कि हाथ में नहीं आ पा रहे थे। चूत पर एक भी बाल नहीं था।
मैंने मेरी पैन्ट खोली तो मेरा लण्ड बाहर आ गया। भाभी ने लण्ड मुँह में लिया और चूसने लग गई। भाभी मेरा लंड लॉलीपॉल की तरह चूस रही थी। मैंने भाभी की चूत पर अपनी जीभ रख दी। वो मदहोश होती जा रही थी। भाभी की आँखों में अजीब सा नशा था।
भाभी बोली- अपने लंड से आज मेरी इतनी चुदाई करो, इतनी चुदाई करो कि मेरी सालों की प्यास बुझ जाए।
मैंने भाभी को लिटा कर कहा- भाभी अब आप सिर्फ आँखें बन्द कर के मज़े लो।
भाभी की चूत एकदम लाल थी। मैंने अपना मोटा लंड भाभी की चूत पर रख दिया और अन्दर डालने लगा। भाभी ने अपने होंठों को दाँतों से दबा रखा था। उनको बहुत मज़ा आ रहा था। भाभी की चूत इतनी गरम थी कि मेरा लण्ड अन्दर की गर्मी पा कर और भी मोटा हो गया था। अब मैंने पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया और धक्के मारने लगा। भाभी अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, और मेरा साथ दे रही थी।
लगभग ४० मिनट तक मैं भाभी को चोदता रहा।
भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिया और बोली- मेरा माल आने वाला है। मैं धक्का मार ही रहा था। मैंने सोचा कि भाभी झड़ने वाली है। मैं भी साथ में झड़ जाऊँ।
मगर वो बोली- बस करो।
वह हाँफ रही थी।
मैंने कहा- मैं अभी नहीं झड़ा हूँ !
तो जल्दी करो।
मैंने गति तेज़ कर दी और थोड़ी देर बाद मेरे लंड का रस भी भाभी की चूत में गिर रहा था। मुझे बहुत मज़ा आया।
थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे फिर दोनों अलग-अलग हुए। जैसे ही भाभी की चूत से मैंने अपना लंड निकाला, ढेर सारा वीर्य उनकी चूत से बाहर निकलने लगा। चूत से सफ़ेद-सफ़ेद रस बाहर निकलते पहली बार देख रहा था।
मैं और भाभी थक गए थे। वो उठी और मुझे चूम लिया फिर मेरे लंड को चूम कर बोली- थैंक्स अखिल, प्लीज़ मुझे ऐसे ही चोदते रहना, इसके लिए तुम जो भी कहोगे, मैं वो करूँगी।
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हम दोनों आमने-सामने Hindi Sex Stories बैठे थे, मैंने चुपचाप सर झुकाये खाना खाया और बेडरूम में आकर अपनी किताब ले कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद चाची भी आ गई और एक मैगज़ीन लेकर मेरे पास बैठ गई।
थोड़ी देर बाद चाची ने मस्ती शुरू कर दी, वैसे तो हम अकसर करते थे, पर जैसा मैंने कहा, उस दिन उनका मूड कुछ अलग ही था। वो मुझे गुदगुदी करने लगी।
मैंने कहा- प्लीज़ चाची, मत करो ऐसा, मैं करुंगा तो आप को पता चलेगा, फिर मत बोलना!
चाची तुरंत बोली- अच्छा तो क्या करेगा तू? हाँ? मैं भी तो देखूँ जरा?
और उनकी हरकत ज़ारी रही। मैं डर के मारे कुछ बोल नहीं पाया पर इधर मेरा लंड भी मस्ती में आ रहा था और सख्त होता जा रहा था। इस बीच चाची ने मुझे इतना परेशान किया कि मैं एकदम से उठा और उन्हें गुदगुदी करनी चालू कर दी। चाची भी खड़ी हो गई और हम दोनों मस्ती में खो गये।
तभी मैंने उनके दोनों हाथ पकड़ लिये और उन्हें धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने उनके दोनों हाथ कस कर पकड़ रखे थे वो बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी, उनका पल्लू कहीं तो ब्लाऊज़ कहीं था। उन्होंने अपने पैर हिलाने की कोशिश की पर मैंने उन्हें अपने पैरों के बीच दबोच रखा था।
चाची मेरे सामने एकदम चित्त पड़ी थी। इधर मेरा लंड पूरे जोश में आ गया था पर मन में अभी भी थोड़ा डर था, मैंने उन्हें कहा- देखा ना, मैं क्या कर सकता हूँ? अब बोलो आप?
चाची कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा कर मुझे देखती रही। फिर मैंने उन्हें छोड़ दिया पर इस हाथापाई में मेरा हाथ उनके शरीर पर कहाँ-कहाँ लगा, मुझे भी कुछ पता नहीं चला क्योंकि एकदम अचानक और इतनी जल्दी हुआ। जैसे ही मैंने चाची को छोड़ा तो उठ कर उन्होंने अपने अस्त-व्यस्त कपड़े देखे और मुस्कुरा कर बोली- तुमने दम तो बहुत है! मेरे सारे कपड़े खराब कर दिये!
यह कह कर वो दूसरे कमरे में चली गई। मैंने भी अपने कपड़े ठीक किये और फिर से अपनी किताब ले कर बैठ गया। पर अब कहाँ किसी किताब में ध्यान लगना था, मैंने उस दिन पहली बार किसी स्त्री को पकड़ा था।
मेरे दिमाग में वही दृश्य चल रहा था कि चाची वापस आई और मेरे बाजू में बैठ गई। वो अपने कपड़े बदल कर आई थी, अब वो नाईटी पहन कर आई थी। मैंने गौर से देखा तो यह वही नाईटी थी जो चाची साल में सिर्फ एक महीना पहनती थी वो भी सिर्फ रात में, जब चाचा आते थे, क्योंकि नाईटी एकदम सिल्की और सेक्सी थी, उसमें चाची और भी बिजली गिरा रही थी।
उन्हें बस तरह देख मेरा लंड तो एकदम तन गया, मेरी नज़र चोरी-चोरी उन्हें ही निहार रही थी और चाची भी मुझ पर ही नज़र रखे हुए थी।
थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- तेरा ध्यान तो किताब में है ही नहीं, क्यों पकड़ रखी है किताब? लगता है अब भी कोई परेशानी है?
मैंने नज़रें चुराते हुए कहा- हाँ, वो केसेट मुझे कल वापस करनी है, अगर आप को पता है कि कहाँ है तो प्लीज़ बता दो!
चाची- हाँ वो मैं सफाई कर रही थी तो मिली थी, पर वो शादी की ही है ना?
चाची ने जोर देते हुए पूछा, अब तो चाची ने खुद कबूल किया कि केसेट उनके पास है। मैं एकदम डर गया था और यह अभी यकीन होने लगा था कि चाची ने वो फिल्म देख ली है, मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था, मैंने एक बार फिर कहा- हाँ शादी की ही है।
तो चाची ने तुरंत ही फिर पूछा- सच्ची बता! तू कुछ छुपा रहा है, जो भी है बता दे, तू नहीं बतायेगा तब मुझे पता तो चल ही जायेगा!
मेरे पास कोई जवाब नहीं था, फिर उन्होंने मेरे हाथ से किताब ले ली और एक तरफ़ रख दी और एक सेक्सी मुस्कान देते हुए कहा- घबरा मत! मुझे सब पता है, मैं किसी को नहीं बताऊँगी।
चाची के मुँह से यह सुनते ही मुझे थोड़ी राहत हुई, मैंने चाची को धन्यवाद कहा और उन्हें एक टक देखता रहा।
चाची बोली- अच्छी थी वैसे फिल्म, पसन्द अच्छी है तुम्हारी!
यह सुनते ही मन तो किया कि दबोच लूं चाची को पर उस वक़्त हिम्मत नहीं हुई, वो मेरा हाथ धीरे धीरे सहला रही थी, मेरे पूरे शरीर में जैसे करंट दौड़ने लगा था।
पहली बार था इसलिये मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, मैंने अपना हाथ वापस खींच लिया, तो वो बोली- क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा? इतने प्यार से सहला रही हूँ।
मैंने कहा- अच्छा तो बहुत लगा पर!
उन्होंने तुरंत कहा- पर क्या? बोलो तो सही, डरो मत!
मैंने कहा- आप नाराज़ हो जायेंगी!
चाची- अरे ऐसा बिल्कुल नहीं है, मैं क्यों नाराज़ होऊँगी? तुम कुछ भी कहो, कुछ भी करो, तुम्हें तो छूट है!
चाची के मुँह से ये शब्द सुन कर मुझे भी थोड़ा जोश आ रहा था। चाची मुस्कुराने लगी, अब मुझे यकीन होने लागा था कि चाची को वाकई में मुझसे चुदवाने का मन है। बस इसी यकीन से मैं चाची के करीब गया और उनका हाथ पकड़ कर प्रेम से सहलाने लगा और मेरी नज़र उनके गोरे गोरे स्तनों पर थी जो सिल्की नाईटी में एकदम तने हुए नज़र आ रहे थे।
तभी चाची ने कहा- क्या देख रहे हो इतने ध्यान से? कुछ दिखा?
मुझे उनकी बातों से और आत्मविश्वास आता जा रहा था। मैंने भी उनकी तरह शब्दों के वाण छोड़ना शुरु किया और कहा- अभी तक को कुछ नहीं दिखा, और कुछ नहीं मिला! बस कोशिश जारी है, पर यकीन है कि जल्द ही सब कुछ मेरे पास होगा।
मेरे निरंतर स्पर्श से चाची मदहोश होती जा रही थी, मैंने मौका देख कर धीरे धीरे उनके वक्ष पर हाथ फेरना चालू कर दिया। तभी चाची ने कातिल अंदाज़ में मुझे देखते हुए कहा- जय, तू बड़ा छुपा-रुस्तम निकला, मैं तो तुम्हें छोटा बच्चा समझती थी पर तुम तो कुछ और ही निकले!
मैंने कहा- बस आप साथ दो तो मेरी और भी खूबी दिखाऊँ!
फिर चाची ने मेरा हाथ पकड कर अपने वक्ष पर रख दिया और एक लम्बी सांस ली।
बस फिर क्या था, मुझे तो हरी झंडी मिल गई। मैं दोनों हाथों से उनके सख्त स्तन मसलने लगा। इससे चाची एकदम मदहोश होती जा रही थी और मेरा लंड भी अंडरवीयर फाड़ रहा था।
फिर चाची ने मेरे लंड पर हाथ रखा और पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी, उनके स्पर्श से मेरे पूरे शरीर में मानो एक करन्ट सा लगा, किसी ने पहली बार मेरे लंड को छुआ था और मैंने उनके स्तनों को पूरे जोर से निचोड़ दिया जिससे उनकी चीख निकल पड़ी- अ आअ आह।
हम दोनों पूरे जोश में थे, सब कुछ भूल चुके थे कि हम कहाँ हैं, हमारा रिश्ता क्या है और समय क्या हुआ है।
मैं उनके वक्ष को सहलाते-सहलाते उन्हें चूमने लगा, उनके गोरे गालों पर, गले पर हर जगह! चाची भी मेरा पूरी तरह साथ दे रही थी, वो भी मुझे चूमने लगी। उनके मुँह से निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह.. अह. हुम्म… आह!
फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।
मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.30 बज चुके थे, चाची ने कहा- उठ, मैं देखती हूँ! बच्चे स्कूल से आ गये होंगे।
मेरा मन तो नहीं था उनको छोड़ने का, पर मजबूरी थी, मैं उठ कर एक ओर बैठ गया, चाची मुस्कुराते हुए उठी और अपने कपड़े और बाल बराबर करने लगी और जाकर दरवाजा खोला। दोनों बच्चे आ गये थे, मेरी नजर अभी चाची पर टिकी हुई थी, मैं वहीं से चाची को देख रहा था और मेरा लंड था कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक तो पहला मौका वो भी अधूरा रह गया।
चाची बच्चों के साथ दूसरे कमरे में चली गई। मैं भी उनके पीछे वहाँ पहुँच गया और दरवाजे से टिक कर खड़ा उन्हें देखता रहा। बीच-बीच में उनकी भी प्यासी नज़र मुझे देखती।
थोड़ी देर बाद चाची मेरे पास आई और मेरे पैंट में टावर को देख हाथ फेरा और बोली- अभी इसे सुला दे, थोड़ा आराम करने दे, इसे, बाद में बहुत काम करना है।
और वो रसोई में चली गई और अपने काम में लग गई। मैं भी वापस अपने कमरे में आकर बैठ गया, पर दिमाग में तो वही दोपहर वाला दृश्य चल रहा था, अब मैंने तय कर लिया था कि जो भी हो चाची को जल्द से जल्द चोदना है, क्योंकि मैं उनकी प्यास और तड़प देख चुका था।
इन्हीं ख्यालो में समय बीत गया और 8.00 बज गये। चाची ने खाना खाने को आवाज़ लगाई, हम खाना खाने बैठे पर मेरी नज़र चाची से हट ही नहीं रही थी। चाची भी मेरी तरफ देखती और हमारी नज़र एक होती तो वो नज़र घुमा लेती।
खाना खा कर मैं और दोनों बच्चे हाल में टीवी देखने बैठ गये, चाची अपना काम कर रही थी, मेरा ध्यान तो किसी और दुनिया में ही घूम रहा था। थोड़ी देर में चाची अपना काम निपटा कर मुस्कुराते हुए आई और मेरी बगल में बैठ गई और दोनों बच्चो से कहा- चलो आज हम दादा दादी के कमरे में सोयेंगे और जय अकेला सो जायेगा।
(दादा दादी के नहीं होने के कारण हम सब एक ही कमरे में सोते थे)
यह सुनकर मैं एकदम दंग रह गया, मुझे लगा कि शायद चाची मुझसे दूर रहना चाहती हैं, मुझे कुछ समझ नहीं आया कि चाची के दिमाग में क्या चल रहा था.
वो दोनों बच्चो को लेकर दूसरे कमरे में चली गई। उनके जाते ही मैंने अपने कपड़े बदल लिये .. हाफ पैंट और बनियान जो मैं अक्सर रात में पहनता हूँ। और वापस आकर बैठ गया। दिमाग अभी भी उन्हीं ख्यालों में खोया था।
रात के दस बजे होंगे, मैंने देखा कि चाची कमरे से निकली और बाहर से दरवाजा बंद कर रही थी। अब मुझे चाची की योजना समझ आने लगी थी। उन्होंने वही सिल्की नाईटी पहनी थी, बहुत सेक्सी लग रही थी। वो आकर मेरे बाजू में बैठ गई। मन तो कर रहा था कि बदोच लूँ पर सोचा- जल्दबाजी में कहीं काम ना बिगड़ जाये!
उन्होंने मुस्कुरते हुए पूछा- क्या कर रहा है? सोया नहीं अब तक?
मैंने कहा- टीवी देख रहा हूँ।
उन्होंने तुरंत रिमोट से टीवी बंद कर दिया और कहा- टीवी में ध्यान तो है नहीं तेरा!
मैंने कहा- दोपहर के बाद से मेरा ध्यान कहीं और ही घूम रहा है!मैं समझ गया था कि चाची अब मुझ से चुदवा कर ही रहेंगी।
मैं वहाँ से उठ कर अपने कमरे में आ गया, मेरे पीछे ही चाची भी आ गई। दोनों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था। चाची ने अंदर आते ही बत्ती बुझा दी और आकर बिस्तर पर मेरे पास बैठ गई और कहा- मैंने कहा था तो बराबर सुलाया ना (लंड को) आराम कर लिया ना?
मैंने कहा- भूखे शेर को भला नींद कैसे आएगी, वो बिना शिकार किए कहाँ आराम करेगा?
चाची का हाथ मेरे लंड पर घूमने लगा। उनकी इस हरकत को देख मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया, अपनी बाहों में समेट लिया और उनकी चूचियाँ दबाता, चूमता तो कभी उनकी ग़ाण्ड पर हाथ फेर उसे दबाता। हम दोनों फिर पूरे जोश में आ रहे थे। चाची फिर सिसकियाँ भर रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ ईई!
फिर मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगा। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूमने लगी और उनके हाथ मेरे बालों में!
मैंने उनकी नाईटी निकलनी शुरु की, सारे बटन खोल दिये और नाईटी निकाल फेंकी। अब उनका हाथ मेरे अन्डरवीयर में था। बड़े प्यार से मेरा लंड सहला रही थी चाची!
दोनों पूरी तरह एक दूसरे में खोये हुए थे, लेकिन अंधेरे की वजह से मुझे उनके सेक्सी बदन को देखने का आनंद नहीं मिल रहा था। फिर मैंने उनकी ब्रा भी उतार फेंकी और अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उठ कर बत्ती जला दी। जैसे ही मैंने चाची के बदन को देखा, मेरे होश उड़ गये, गोरा बदन, सेक्सी फिगर, गोरे गोरे कसे हुए स्तन और खड़े चुचूक!
चाची की शादी को भले ही आठ साल हो गये थे पर उन आठ सालों में वो बहुत कम चुदी थी, इस वजह से उनका फिगर कुंवारी लड़की से कम नहीं था। चाची बिस्तर पर सिर्फ पैंटी में लेटी थी, मैंने भी अपनी बनियान और निकर उतार दिये और चाची के ऊपर आ गया और उनके गोरे बदन से खेलने लगा। कभी स्तन चूसता तो कभी तो कभी उनके पूरे बदन को चूमता।
फिर मैंने उनकी पैंटी में हाथ डाला, एक दम चिकनी और सफ़ाचट थी। मैंने अपनी ऊँगली निशाने पर रख दी और धीरे से अंदर की और धकेला। चाची तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई थी, उनकी निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ मूह्ह्ह
मेरी ऊँगली अंदर जाने लगी और उनकी सिसकियाँ भी तेज़ होने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्हा
उनकी चूत एक दम गीली थी, मेरी ऊँगली अंदर-बाहर होने लगी। तभी चाची ने मुझे कस कर अपनी बाहों में पकड़ लिया और कहा- जय प्लीज़, मुझे और मत तड़फ़ाओ, जल्दी से मेरी प्यास बुझाओ!
मैंने कहा- अब आप कभी प्यासी नहीं रहोगी! मैं आपको कभी भी प्यासा नहीं रहने दूंगा!
और मैंने उनकी पैटी उतार दी, अब मस्त टाईट चूत मेरे सामने थी। मैंने अपना अंडरवीयर भी उतार दिया और अब हम दोनों निर्वस्त्र एक दूसरे से लिपटे हुए थे। मेरी ऊँगली उनकी चूत में और उनके चुचूक मेरे मुँह में और मेरा लंड उनके हाथ में!
उनकी सिसकियाँ और तेज़ होती जा रही थी- अह्ह्ह्ह आआह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ऊऊफ्फ्फ
फिर मैंने चाची से कहा- मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चख तो लो!
और लंड उनके मुँह में रख दिया और वो बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी। अब मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने उनके बालों में हाथ डाला और पकड़ कर उनका मुँह मेरे लंड की ओर खींचने लगा। फिर मैंने उनके वक्ष को चोदना शुरु किया। दोनों हाथों से दोनों स्तनों को पकड़ा और अपना लंड बीच में डाल कर चोदने लगा।
(मैंने कई फिल्में देखी थी इसलिये थ्योरी तो पूरी आती थी आज प्रेक्टिकल करना था सो पूरा मजा ले रहा था)
और इधर चाची का बुरा हाल था- आआह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह मह्ह्ह्ह अहाआअ फिर मैंने उनकी दोनों टांगे फैलाई और बीच में आ गया। तभी चाची ने मुझे कोंडोम दिया और कहा- इसे लग लो, सावधानी रखना अच्छा है!
और मैंने उनकी बात मान ली और अपना लंड उनकी रसीली चूत पर रख दिया और धीरे धीरे अंदर डालने लगा।
उनकी सिसकियाँ और बढ़ गई- आआह्ह ओह्ह ओफ्फ्फ उम्म्म म्म्म अह्ह्ह्हाअ
उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड हर धक्के के साथ अंदर समाता जा रहा था, थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड अंदर समा गया। फिर मैं थोड़ी देर उनसे लिपट कर यों ही पड़ा रहा और उनकीचूचियों से खेलता रहा।
चाची ने मुझे कस कर पकड़ रखा था, फिर मैंने धीरे धीरे चोदना शुरु किया, दोनों टाँगों को पकड़ा और अपनी स्पीड तेज़ की। चाची सातवें आसमान में थी और पूरे जोश में भी! और लगातार सिसकियाँ भर रही थी।
मेरी गति तेज़ होती जा रही थी और चाची के सिसकियाँ भी!
अब चाची ने मुझे अपनी बाहों में कस कर जकड़ लिया पर मेरी चोदने के रफ्तार बढ़ती ही गई और कुछ ही समय में मैं झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया।
उस रात मैंने चाची को दो बार चोदा और बारह दिन घर पर कोई नहीं था तो रोज़ दिन में और रात में जब भी मन करे तब चोदता।
पर दादा-दादी के वापस आ जाने के बाद तो दिन में कोई मौका नहीं मिलता पर रात में हर दूसरे-तीसरे दिन चाची को चोदता।
और हाँ, दिन में भी अगर घर पर कोई नहीं हो तो कोई मौका नहीं छोड़ता और चाची भी मेरा पूरा साथ देती थी। यह सिलसिला करीब चार साल चला। फिर मैं अपने शहर सूरत आ गया और यहीं का होकर रह गया।
पर यहाँ आकर भी मैंने चाची जैसी दो स्त्रियों की प्यास बुझाई और आज भी जारी है।
अब मेरा कहना बस इतना है कि जो भी करो, जिसके भी साथ करो, हमेशा कोंडोम इस्तमाल करो- सुरक्षित रहो।
मेरी कहानी आपको कैसी लगी मुझे जरूर मेल करें! Hindi Sex Stories
मेरा नाम सूर्यप्रभा है, मैं Sex Stories अट्ठारह साल की हूँ और मैं असम के तिनसुकिया जिले के एक छोटे गाँव से हूँ। मेरी बड़ी बहन मानसी और मैं पिछले ५ सालों से दिल्ली में रहती हैं। हमें पापा ने वहाँ के आतंकवाद से दूर पढ़ने भेज दिया था। मैं अभी स्कूल में हूँ और दीदी कॉलेज में आ चुकी हैं। दीदी बहुत खूबसूरत है। गोरी चिट्टी, स्वस्थ शरीर, तेज़ दिमाग वाली हैं मेरी दीदी। मैं पढ़ने में ज़रा कमज़ोर हूँ पर दीदी मेरी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती हैं और किसी तरह मुझे हर बार पास करवा देती हैं। दीदी मुझे प्यार से छुटकी कहती हैं। मैं और दीदी एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। हम घर ज्यादा नहीं जा पाते। मैं बहुत भावुक हूँ, बात-बात पे रो देती हूँ जबकि दीदी काफ़ी कड़े दिल की हैं। जब भी ऐसा होता है दीदी मुझे गले से लगा लेती हैं और मुझे प्यार से समझाती हैं। फिर जब मैं हँसती हूँ तो दीदी कहती हैं कि मैं दुनिया की सबसे प्यारी बच्ची हूँ। पर दीदी ने एक दिन मुझे बड़ा बनते हुए भी देखा।
दीदी का एक दोस्त था- राजीव, जो उनके साथ स्कूल में भी था और कॉलेज में भी एक साल तक साथ था। अच्छा लड़का था। पढ़ने में दीदी से भी तेज़, दिखने में स्मार्ट। वो उदयपुर का रहने वाला है और हमारी ही तरह दिल्ली में पढ़ने आया हुआ था। कॉलेज में आते ही उसने दीदी को प्रोपोज़ भी किया था और दीदी मान भी गई थी पर तब हमारे और उसके घर वालों के डर और दबाव के कारण दीदी ने वो रिश्ता आगे नहीं बढ़ाया। बाद में राजीव ने कॉलेज बीच में छोड़ कर अपने शहर में शादी कर ली। पर जिस दौरान राजीव हमारे साथ था, तब एक घटना ने हम तीनों की ज़िन्दगी बदल दी।
दीदी और राजीव का रोमांस शुरू हुए एक हफ्ता बीता था, अक्टूबर का महीना था। दीदी एक बार रात को उसके साथ मूवी देखने गई, मैं घर पर ही पढ़ाई कर रही थी। वो लोग दस बजे वापस आये। तब तक मुझे कच्ची सी नींद आ गई थी। मेरे कमरे तक उनके बातें करने की आवाज़ आ रही थी। हमेशा तो राजीव दीदी को छोड़ कर घर लौट जाता था पर उस दिन बहुत देर तक बातों की आवाज़ आती रही, फिर उनकी आवाज़ बंद सी हो गई और मेरी नींद गहराने लगी। कुछ देर बाद दीदी की सिसकियों की आवाज़ से मेरी नींद टूट गई।
मैं जल्दी से दीदी के कमरे में गई तो देखा की बिस्तर पर राजीव गर्दन झुकाए बैठा है और दीदी पास खड़ी रो रही है। मानसी दीदी का मासूम चेहरा आंसूओं से भरा हुआ था।
मैंने पूछा- दीदी, क्या हुआ?
तो उसने आंसू पौंछे और मुझे कहा- छुटकी, तू सो जा !
मैं कमरे से बाहर निकल गई लेकिन गई नहीं और कान लगा कर सुनने लगी। राजीव कह रहा था,”मनु, तुम ज़रा सी बात पर क्यूं रो रही हो?”
दीदी ने कहा,”तुमसे मैं बहुत प्यार करती हूँ, पर शादी से पहले मैं कुछ नहीं कर सकती !”
राजीव कहने लगा,”जान, ऐसा कुछ नहीं है, तुमको भी खुश रहने का पूरा हक है।”
मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन तभी दीदी ने कहा,”मुझसे गलती हो गई राजीव, मुझे तुमको चूमना नहीं चाहिए था।”
राजीव बोला,”नहीं मनु, गलती मेरी है !”
दीदी बोली,”तुम्हारी कोई गलती नहीं है, चुम्बन तो मैंने शुरू किया था।”
और इतना कह कर दीदी सुबक सुबक कर रोने लगी। तब मुझे कुछ समझ में आने लगा था, आखिर मैं इतनी भी छोटी नहीं थी। पर दीदी का रोना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।
तब दीदी के रोने की आवाज़ ज़रा कम हो गई और राजीव धीरे धीरे बोलने लगा,”मनु, तुम मुझे बहुत प्यारी हो, मैं तुम्हें रोते हुए नहीं देख सकता।”
फिर ऐसी आवाज़ आई जैसे किसी को किसी ने चूमा हो। फिर अचानक दीदी के रोने आवाज़ फिर से आने लगी। उनके रोने को सुन कर मुझे भी रोना आ गया। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं वापस उनके कमरे में चली गई और रोते रोते बोली,”दीदी, आप रोइए मत न प्लीज़ !”
और इतना कह कर मेरा रोना और तेज़ हो गया, और मैं छोटे बच्चे की तरह रोने लगी। दीदी मेरे पास आई, दीदी ने मेरे आंसू पौंछे और मुझे गले लगा कर मेरे गालों पर चूमने लगी। मैं चुप हो गई और दीदी ने कहा,”मेरी छुटकी बेटा, अब दीदी नहीं रोएगी !”
“देखो न राजीव हमारी छुटकी कितनी प्यारी है और अब मैं समझ गई हूँ कि खुश रहना सबसे ज्यादा ज़रूरी है।”
इतना कह कर दीदी ने राजीव को देखा और दोनों के होटों पर मीठी सी मुस्कान तैर गई। तब दीदी ने मुझे सो जाने को कहा। मैंने उनको फिर पूछा कि वो अब रोएगी तो नहीं?
दीदी ने कहा- मेरी जान, मैं अब नहीं रोऊंगी।
दीदी ने मुझे चूमा और मैं अपने कमरे में जा कर सो गई। सुबह देखा कि दीदी ने राजीव का शर्ट पहना हुआ है, और राजीव जो शायद नंगा था, बिस्तर में सो रहा था।
मैंने दीदी से पूछा- राजीव रात को घर नहीं गया?
दीदी ने कहा- नहीं !
और रसोई में जा कर काफ़ी बनाने लगी। मुझे पता चल गया कि रात को क्या हुआ होगा पर अब जो हुआ उसके लिए मैं तैयार नहीं थी।
राजीव उठ चुका था और मुझे देख रहा था। उसने मुझे बुला लिया और कुछ इधर उधर की बात करने लगा। बातों बातों में उसने मेरे पैर पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे से सहलाने लगा। मुझे ज्यादा अजीब नहीं लगा, लेकिन मन में कुछ अजीब सा लगा। दीदी तब तक कमरे में आ चुकी थी और राजीव को घूर के देख रही थी। राजीव ने हाथ हटा लिया।
मैंने कहा- मैं स्कूल के लिए तैयार होती हूँ !
और बाथरूम में चली गई। वहां मुझे उनकी धीमी धीमी आवाज़ आ रही थी। लग रहा था जैसे राजीव दीदी को कुछ सलाह दे रहा है और दीदी पहले गुस्सा कर रही हैं, और बाद में मान गई हों।
मैं स्कूल ड्रेस का स्कर्ट-टॉप पहन कर बाहर की तरफ जा रही थी, तभी दीदी ने आवाज़ दी। मैं गई तो मुझे कहा- आज स्कूल मत जा, यहीं बैठ कर हमसे बातें कर !
मैंने कहा- ओके !
राजीव ने पूछा,” छुटकी ! तू अपनी दीदी से कितना प्यार करती है?”
मैंने कहा,”ढेर सारा”
उसने कहा कि वो भी उनसे बहुत प्यार करता है और उनसे शादी भी करेगा।
फिर दीदी ने पूछा,”तुझे पता है कि हम लोग रात में क्या कर रहे थे?”
मैं समझ नहीं पाई कि क्या बोलूं, बस गर्दन झुकाए बैठी रही।
दीदी बोली- शरमा मत !
तो मैंने हाँ में सर हिला दिया। तब दीदी बोली- देखा राजीव, मेरी छुटकी थोड़ी सयानी भी है !
राजीव बोला,”हाँ, और बहुत सुन्दर भी !”
मैं शर्म के मारे लाल होने लगी थी। तब दीदी ने पूछा कि क्या मैं भी कुछ मज़ा करना चाहती हूँ? तो मैंने हाँ में सर हिला दिया।
यह सुन कर राजीव मेरे पास आया और मेरे गालों को चूमने लगा। तब दीदी ने उसको रोका और कहा- राजीव ध्यान से ! मेरी बहन अभी इतनी बड़ी नहीं है !
राजीव ने कहा कि वो जानता है कि मैं दीदी से भी ज्यादा नाज़ुक हूँ । फिर उसने बिस्तर पर चादर के अन्दर बैठे बैठे ही मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे गाल, होटों और गले पर चुम्बनों की बौछार कर दी। मेरी आँखें बंद हो गई और मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया। उसने मेरा शर्ट उतार दिया और मेरे वक्ष को ब्रा के ऊपर से चाटने लगा। मेरे मुँह से ऊम्म्म्ह्छ आःह्ह् की आवाजें निकलने लगी।
दीदी मेरे पास आ गई और मेरी ब्रा खोल दी। मेरे दो छोटे से संतरे नंगे हो गए। मुझे बहुत शर्म आई। राजीव ने मुझे शर्माते देख फिर से मुझे गालों और होटों पे चूम लिया, साथ में मेरे स्तन भी दबाने लगा। मुझे अब बहुत मज़ा आने लगा था। ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था। तब तक दीदी मेरी पीठ और कमर को चूम रही थी। फिर दीदी ने मेरा स्कर्ट उतार दिया, मेरी पैंटी पे कुछ गीलापन आ गया था।
अब राजीव ने मेरी पैंटी पर हाथ से सहलाया और फिर हाथ अन्दर डाल दिया। मुझे तो जैसे झटका लग गया। मेरा मुँह खुल गया और आह निकल गई। अब दीदी ने मुझे होटों पर चूमा तो मैंने जोश जोश में उनके बाल पकड़ लिए। तब तक राजीव मेरे पेट पर चूम रहा था। मेरी हालत ख़राब हो गई थी। मैं अब बिस्तर पर चित्त लेटी थी और वो दोनों मुझसे खेल रहे थे।
तभी मेरी पैंटी राजीव ने अलग कर दी, वो मेरी चूत पे उगे छोटे बालों में गुदगुदी करने लगा। मेरा पूरा शरीर कांप रहा था। उसने मेरे दाने पर हाथ रखा तो लगा जैसे मैं जन्नत में हूँ। फिर वो उसको रगड़ने लगा और मेरी ऊओह् आःह् की आवाजें शुरू हो गई। मेरे छोटे गुलाबी चुचूक पहले ही कड़क हो गए थे। दीदी उनको काट और चूम रही थी।
अब दीदी ने अपना शर्ट उतार दिया और एकदम नंगी हो गई। दीदी के बूब्स भी मेरी तरह थे, बस ज़रा से बड़े थे। तब तक मैं चीख चीख कर बिस्तर पर कूदने लगी थी, चादर को पकड़ कर पूरा शरीर मोड़-तोड़ रही थी। तभी मेरे अन्दर तूफ़ान सा आया और मैं पहली बार झड़ गई।
मैं ओह दीदी कह कर उनसे लिपट गई और दीदी ने मुझे प्यार से ढेर सारे चुम्मे दिए।
तब राजीव ने अपना ९ इंच का लिंग मुझे दिखाया और छूने को कहा। मैंने छुआ तो राजीव ने हलकी सी आह भरी। राजीव ने दीदी को देखा तो दीदी ने हाँ में सर हिलाया और मुझे फिर से चूम के कहा,”छुटकी, थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर मज़ा आएगा !”
तब तक राजीव ने लंड को मेरी छोटी सी नाज़ुक चूत पे सहलाना शुरू कर दिया। मुझे सिरहन सी होने लगी और मैंने दीदी को पकड़ लिया।
राजीव ने लंड को थोड़ा चूत के अन्दर डाला तो इतना दर्द हुआ कि मेरा मुँह खुला रह गया, चीख भी नहीं निकली, बस गले से हलकी सी तीखी आवाज़ और आँखों से आंसू निकल आये। दीदी मेरे सर पे हाथ फेरने लगी। राजीव ने एक झटके से और भी अन्दर डाल दिया, तो मैं बिलखने लगी।
मुझे रोता देख दीदी के भी आंसू आ गए थे। दीदी मुझे चूमती जा रही थी और कह रही थी,”बस बेटा थोड़ा और !”
अब राजीव ने एक आखिरी झटके के साथ पूरा लण्ड अन्दर डाल दिया। मेरा रोना जारी रहा और मैंने जब नीचे देखा तो चादर पर खून था, जिसे देख कर मेरी और हालत ख़राब हो गई। दीदी ने कहा- कोई बात नहीं ! ऐसा होता है पहली बार में !
अब राजीव झटके मार रहा था और लण्ड अन्दर बाहर कर रहा था। वो बीच बीच में मेरे स्तन भी चूस रहा था। मेरी थोड़ी देर तक दर्द से हालत ख़राब रही। तब मेरे मुँह से रोने और दीदी- दीदी के अलावा और कुछ नहीं निकल रहा था।
फिर दर्द ज़रा कम होने लगा और मैं मज़ा लेने लगी। अब मैं ऊऊउम्म्म्म्म, ऊऊह्ह्, आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जैसी आवाजें निकाल रही थी। दीदी भी बहुत गर्म हो चुकी थी। राजीव की तरफ उन्होंने कामुक नज़रों से देखा और राजीव ने मुझे चोदते हुए ही उनको चूम लिया।
फिर राजीव बोला- चलो, अब अपनी छुटकी को ओरल सिखा दो !
तो दीदी ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रखी और कहा- चाट न छुटकी !
उनकी चूत पर बाल नहीं थे, मैंने चाटना शुरू कर दिया और दीदी अपने दाने को ऊँगली से रगड़ रही थी। ये काम मैंने दीदी से ले लिया और जीभ अन्दर बाहर करने के साथ उनका दाना भी रगड़ने लगी। दीदी ने कहा,”ऊह छुटकी, आई लव यू मेरी बच्ची !”
फिर वो आह ऊऊऊउम्म्म्म्ह जैसी आवाजें जोर जोर से निकालने लगी। उधर राजीव के ज़ोरदार झटकों की वजह से मैं दो बार झड़ चुकी थी।
अब राजीव का शरीर अकड़ने लगा और उसने लंड मेरी चूत से निकाल लिया और मेरे स्तनों के बीच रख कर रगड़ने लगा। थोड़ी देर में वो झड़ गया और उसका वीर्य मेरी गर्दन और मुंह पे फैल गया। दीदी को भी काफी वीर्य लगा क्यूंकि वो मेरे मुँह पर थी। दीदी राजीव को चूमने लगी। उसके बाद उनकी आह चीखों में बदल गई और ऊऊम्म्म्म्म्ह्ह्ह की मीठी आवाज़ के साथ वो मेरे मुँह पर झड़ गई।
फिर वो नीचे उतर कर मुझ पर लगे वीर्य को चाटने लगी और मुझे साफ़ कर दिया। दीदी और राजीव ने मुझे कई बार चूमा, फिर उन्होंने आपस में चूमा चाटी की और एक दूसरे से लिपट गए। राजीव नीचे लेटा और दीदी ने उसका लंड अपनी चूत में डाल लिया। फिर वो ऊपर नीचे होने लगी। राजीव कभी दीदी के स्तन दबाता था और कभी उनकी कमर सहलाता था।
मेरा शरीर टूट रहा था पर मैं फिर से गर्म हो गई उनको देख कर !
मैंने ऊँगली अपनी चूत में डाल ली। यह देख राजीव ने मुझे पास बुलाया और मुझे कहा कि मैं उसके मुँह पर आ जाऊं जैसे दीदी मेरे मुँह पर आई थी। मैंने ऐसा ही किया तो राजीव ने अपनी जीभ से मुझे चोदना शुरू कर दिया। मैं थोड़ी देर में जोश में आकर राजीव के मुँह पर कूदने लगी। दीदी और मैंने अपने हाथ मिला लिए और मिल कर कूद रहे थे। थोड़ी देर में दीदी झड़ गई, फिर राजीव झड़ गया। फिर उन दोनों ने मुझे चूमते हुए, चाटते हुए बहुत मज़े से चरम सीमा पर पहुँचाया।मैंने इतना मज़ा ज़िन्दगी में कभी नहीं किया था। मैंने राजीव को चूमा और बोली,”मज़ा आ गया जीजू !”
फिर मैं दीदी से लिपट गई, दीदी ने मुझे ढेर सारा प्यार किया और मैं उनकी बाहों में ही सो गई।
राजीव बाद में दीदी की और मेरी ज़िन्दगी से दूर चला गया, पर वो हसीं लम्हें, अक्टूबर की वो एक रात जब दीदी का और दिन जब मेरा कौमार्य भंग हुआ, मुझे कभी नहीं भूलता। मैं नहीं भूल सकती कि कैसे उस प्यारे ने हम कलियों को तोड़ दिया।
राजीव को गए ज्यादा समय नहीं हुआ है पर मेरी दीदी सम्भल गई हैं, बस एक अंतर आया है हमारे जीवन में, हम दोनों अब अन्य ज़रूरतों के साथ साथ एक दूसरे के शरीर की भूख भी शांत करती हैं। Sex Stories
लॉकडाउन लगने पर मेरी बुआ की अविवाहित बेटी जो कॉलेज में पढ़ रही थी, मेरे किराए के फ्लैट में मेरे साथ रहने आ रही थी. मैं उसकी जवानी की ओर आकर्षित हुआ जा रहा था.
अब आगे सेक्सी कॉलेज गर्ल की कहानी:
मोनी ने सामान निकालते हुए, चहकते हुए कहा- अरे नीलू! तू इतना लम्बा है यार … बाप रे बाप! पाँच साल छोटा होकर भी मेरा बड़ा भाई लग रहा है!
“हे हे दीदी … आप न … बिल्कुल नहीं बदली!” मैंने झेंपते हुए कहा.
कहते हुए मैं सामान लेने मोनी के पास पंहुचा.
हम गले मिले, हमें गले लगते हुए टावर के गार्ड ने भी देखा.
“अरे वाह भाई … इतना हैंडसम हो गया है तू … और इतनी तगड़ी बॉडी शॉडी भी बना रखी है … सारी दिल्ली की लड़कियाँ पटाने का इरादा है क्या?” मोनी ने फिर मज़े से भरपूर लहजे में कहा.
“बस बस … बाकी की टांग ऊपर फ्लैट चलकर खींचना दीदी!” मैंने भी हँसते हुए जवाब दिया.
मोनी 3 बड़े सूटकेस में अपना सारा सामान पैक कर लायी थी.
हम दोनों ने मिलकर सामान खींचना शुरू किया और लिफ्ट की तरफ चल दिए.
मैंने कनखियों से देखा, टावर के गार्ड ने मोनी को नज़रें छुपकर ऊपर से नीचे तक पूरा चेक आउट किया.
खैर, हम सामान लेकर उन्नीसवीं मंजिल पर पहुंचे.
आलीशान कॉरिडोर से चलते हुए मोनी की आँखें बड़ी हो रही थी.
कुछ ही सेकंड में हम मेरे फ्लैट के सामने थे.
मैंने फ्लैट खोला और हमने अंदर कदम रखा.
मोनी के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो फ्लैट के अंदर घुसते हुए चौगुनी हो गयी.
ऐसा लग रहा था किसी बच्चे के हाथ उसका फेवरेट खिलौना लग गया हो. मोनी ने घूम घूम कर पूरे फ्लैट का जायज़ा लिया, खासकर बालकनी और वहां से मिल रहा व्यू देखकर तो वो मुग्ध हो गयी.
“वाह नीलू!! तू तो राजा की तरह रहता है, इतनी महंगी जगह पर … पहले कभी बुलाया क्यों नहीं मुझे? इतना सेक्सी फ्लैट हो तो मैं 3 घंटे भी सफर करके आती!”
मैंने ध्यान दिया, दीदी की भाषा में मॉडर्न शब्द बेपरवाह रूप से आये जा रहे थे.
“दीदी ये सब छोड़ो … ये बताओ क्या लोगी आप? चाय, कॉफ़ी, ठंडा?”
“बियर मिलेगी?”
“व्हाट!?”
मोनी ने एक ठहाका लगाया और बोली- तूने आज तक कुछ ट्राई नहीं किया? मुझे बेवकूफ मत समझ बेटा … तेरी बड़ी बहन हूँ मैं … इतने सालों से दिल्ली एन सी आर में रह रहा तू … संस्कारी किसी और के सामने बनना!
“हे हे दीदी … ट्राई तो बहुत कुछ किया है … बस आप मुँह मत खोल देना किसी के भी सामने इन सब बातों को लेकर … आप जानती ही हो कुछ चुगलखोर हैं हमारे खानदान में … काना-फूसी में सब बातें फैला देते हैं … फिर आपको पता ही है हमारी साइड की कम्युनिटी … काफी ऑर्थोडॉक्स और कन्सेर्वटिव है … तिल का ताड़ बन जाएगा.”
मोनी मुझे काटते हुए बोली- अरे पागल है क्या … मेरे मुँह से तो सपने में भी ये सब नहीं निकल सकता कानपुर में … भाई तू मत बोल देना गलती से भी कहीं भी … तू तो फिर भी लड़का है, बच जाएगा … मैं तो लड़की हूँ … तेरे बुआ फूफा कितने खतरनाक है तू भी जानता है … हिंट भी लगा तो मेरी लंका लग जाएगी … पी.एच.डी. वगैरह सब छोड़कर घर बिठा देंगे … क्या पता गुस्से में शादी ही करा दें!
मोनी एक सांस में बोलती चली गयी.
“अरे अरे … रिलैक्स रिलैक्स … कोई किसी को नहीं बोल रहा दीदी … मैं तो थोड़ा सतर्क था बस आपसे पहली बार बात हो रही इस बारे में इसलिए!”
मोनी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी- हाँ भाई, जानती हूँ. तुझ पर अंधा विश्वास कर सकती हूँ मैं. बचपन से सारे भाई बहनों में हम दोनों की खूब पटती थी … पता नहीं क्यों मिलना जुलना काम हो गया … मेरी पढ़ाई तेरी पढ़ाई और पता नहीं क्या क्या … चल कोई नहीं, अब तो अच्छे से टाइम मिला है … दोनों भाई बहन खूब गप्पें मारेंगे!”
मैं कुछ बोलता इसके पहले मोनी सोफे से उठी- तू बैठ नीलू, चाय मैं बनाकर लाती हूँ. कड़क अदरक वाली मसाला चाय, अपनी बहन के हाथ की चाय पीकर देख आज, मज़ा न आये तो बोलना!
यह कहकर मोनी सीधे किचन में चली गयी, पीछे पीछे मैं भी.
किचन व्यवस्थित था तो कोई भी सामग्री ढूंढने में दिक्कत नहीं हुई.
मैं किचन में प्लेटफार्म पर ही बैठ गया.
मोनी ने गैस पर चाय चढ़ाई और हम दोनों गपशप करने लगे.
काफी बातें करने के बाद चाय बनने को थी ही तभी मोनी बोली- देख नीलू, अब मैं आ गयी हूँ तो किचन का दारोमदार तू मुझ पर छोड़ दे. तू बस आर्डर कर, जो भी तुझे खाना है वो गर्मागर्म मिलेगा, वो भी ऐसे ज़ायके का कि अपनी उंगलियाँ चाटता रह जाएगा.
“ऑब्वियस्ली दीदी, आपके हाथ के लज़ीज़ खाने का तो मैं कानपुर से ही दीवाना हूँ!”
बातें करने के बीच में भी रह रह कर मेरी नज़रें छुप -छुप कर मोनी के बदन का मुआयना कर रही थीं.
आखिर मर्द तो मर्द ही ठहरा, गदराया जिस्म देखकर तो ईमान डगमगाता ही है.
चाहे वो जिस्म बहन का ही क्यों न हो.
चाय के कप लेकर हम दोनों वापस लिविंग एरिया में आये और सोफे पर बैठे.
अब तक हम इतना सहज हो चुके थे कि मानो कॉलेज के दो दोस्त हों.
एक अनकहा भरोसा हो गया था आपस में … कि आपस की बातें आपस में ही रहेंगी.
मोनी ने कहा- देख नीलू, अब जब हम दोनों को साथ ही रहना है तो छुपने छुपाने का कोई फायदा नहीं … देख, मैं खुद 8 महीने से दिल्ली रह रही, मैं समझती हूँ मेट्रो सिटी में रहते हुए अपनी ही एक मॉडर्न लाइफस्टाइल की आदत हो जाती है.
अब तक मैं भी काफी सहज हो चुका था, मैंने चुटकी लेते हुए कहा- दीदी, बियर फिलहाल तो नहीं है. लेकिन आपको पसंद है तो ठेका (वाइन शॉप) ज़्यादा दूर नहीं. शाम को चल के ला सकते हैं!
सेक्सी कॉलेज गर्ल मोनी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी- वाह भाई वाह … एक शर्त पर … अगर तू साथ देगा मेरा … तभी पियूँगी!
मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ?
हम दोनों ने ठहाका लगाया.
मैंने कहा- चलो दीदी, आपने शुरुआत करी तो मैं भी बताता हूँ. मुझे चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत है … आपको अजीब न लगे तो जला लूँ एक?
मोनी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ धीरे से अपने पर्स की तरफ हाथ बढ़ाया, उसमें से क्लासिक माइल्ड सिगरेट की एक डिब्बी निकली और मुस्कुराते हुए कहा- नीलू, तूने मेरे मुँह की बात छीन ली … तू तो पूरा मेरा ही भाई है रे … आदतें भी हम दोनों की एक सी हैं … लाइटर दे मुझे, मेरा वाला ब्रांड पियेगा?
मैंने पास के एक दराज़ से मार्लबोरो गोल्ड एडवांस सिगरेट की डिब्बी और साथ में एक चमचमाता हुआ स्टील का लाइटर निकाला।
एक सिगरेट निकाल कर मैंने जलाई और लाइटर मोनी को पास किया.
मोनी ने अपनी सिगरेट जलाई और चहकी- वाह भाई, एडवांस पीता है तू? कितनी हार्ड होती है ये. पूरी मर्दाना सिगरेट है. तेरी पर्सनालिटी को भी सूट करती है … मैं तो अल्ट्रा-माइल्ड या माइल्ड ही पीती हूँ!
सिगरेट की इतनी नॉलेज के साथ साथ अब तक मुझे भी समझ आ रहा था कि मोनी भी मेरे पूरे कसरती जिस्म को अपनी आँखों से तोल रही थी.
कुछ भी बात अजीब न लगे इसलिए हम हंसी-ठिठोली में सारी बातों को हल्का कर दे रहे थे.
चाय के साथ जिस तरह से मोनी सिगरेट के कश पर कश ले रही थी, उससे साफ़ दिख रहा था कि दिल्ली की मॉडर्न हवा सर उसके अंदर तक बस चुकी थी.
हम दोनों ने चाय ख़त्म की और मोनी दूसरे खाली पड़े कमरे में अपना सामान ज़माने में लग गयी.
मैं भी ऑफिस में व्यस्त हो गया.
ऑफिस का काम करते हुए मैं उस दिन एक अलग ही जोन में था.
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनी एक बड़ी बहन के साथ मैं सिगरेट पीकर आ रहा हूँ.
शाम को लगभग पांच बजे मैं अपने ऑफिस रूम से उठा और मोनी के कमरे में झाँका तो पाया कि वह सो रही है. दूर से आयी है थक गयी होगी समझकर मैं मोनी को नींद में छोड़कर मार्केट चला गया.
मैंने अंग्रेजी शराब के ठेके से एक पेटी स्ट्रांग बियर कैन की खरीदी, साथ में व्हिस्की, वोडका और रेड वाइन की भी बोतलें खरीदीं, कुछ और खरीददारी करी.
कुछ देर के लिए देवेश के फ्लैट गया, गप्पबाज़ी करी.
वापस आते आते साढ़े आठ बज गए.
आया तो देखा कि मोनी किचन में डिनर बनाने की तैयारी कर रही है.
मैंने शराब की बोतलें लिविंग रूम की एक अलमारी में रख दीं; बियर की पेटी लेकर किचन में गया और फ्रिज में सजा दीं.
रात्रि 10 बजे हमने भोजन किया.
भोजन के पश्चात बियर का एक-एक कैन पीते हुए हमने गप्पें मारी, साथ में सिगरेट के कश लगाए.
मोनी ने शॉर्ट्स और टॉप पहन रखा था.
अब तक हम दोनों के बीच पूर्ण रूप से सहजता आ चुकी थी.
हमारी भाषा में भी वह सहजता आ चुकी थी, दिल्ली की रेगुलर छोटी मोटी गालियां भी हमारी बातचीत का हिस्सा बन गयी थी.
हर बीतते पल के साथ हम और ज़्यादा दोस्ताना होते जा रहे थे.
और मित्रो, सच कहूं तो मोनी जैसी बड़ी बहन के साथ बियर पीने का मज़ा ही कुछ था.
बियर के सुरूर में हम गप्पें मार ही रहे थे, तब तक मैंने फ़ोन पर ख़बर देखी.
प्रधानमंत्री ने बाइस मार्च, रविवार को पूरे दिन के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ की घोषणा कर दी थी.
साथ में ‘ताली बजाओ-थाली बजाओ’ के मीम भी आ रहे थे.
मैंने मोनी को भी वह खबर दिखाई और फिर हम दोनों ने कुछ प्लानिंग करी.
अगले दिन मैंने अखिल की कार निकाली और हम दोनों ने जाकर 3-4 महीने का राशन, किचन का सामान, आवश्यक दवाएं और फ्लैट के लिए अन्य आवश्यक सामान स्टॉक कर लिया.
शराब और बियर की पेटियां, और साथ में सिगरेट के 2-3 बड़े क्रैट का भी स्टॉक ले लिया.
यह आईडिया मेरा था, यह सोचकर कि सामान महंगा न हो और कालाबाज़ारी न होने लगे, इससे पहले स्टॉक कर लेते हैं.
लेकिन जो होने वाला था वह तो मैंने दूर दूर तक न सोचा था.
बाइस तारीख को ‘जनता कर्फ्यू’ लगा, और बहुत हद तक पूरा देश थम गया.
अगले दिन, तेइस मार्च, सोमवार को शाम पाँच बजे खबर आयी कि प्रधानमंत्री रात आठ बजे एक महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं.
और ठीक रात आठ बजे, प्रधानमंत्री ने पूरे भारत में इक्कीस दिन का सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा करी.
साथ में सभी प्रदेशों की सीमाएं भी सील होनी थी और आवागमन को कम से कम करना था ताकि कोरोना वायरस का फैलाव कम करने का प्रयास किया जा सके.
प्रचुर संख्या में पुलिस भी जगह जगह तैनात कर दी गयी.
लोगों को सख्ती से लॉकडाउन का पालन करने के निर्देश दिए.
लॉकडाउन में केवल आवश्यक सेवाएं ही चालू थीं, खान-पान की सामग्री, दवाइयाँ, दूध,फल, सब्ज़ी इत्यादि.
हम खबर देख रहे थे मेरे फ्लैट पर टीवी स्क्रीन के सामने!
मेरे और मोनी के साथ देवेश और सुमित भी मौजूद थे.
मोनी का मेरे दोनों मित्रों से परिचय उसी शाम को पहली बार हुआ.
उन दोनों ने भी मोनी को बड़ी बहन का सम्मान देते हुए दीदी कहकर ही सम्बोधित किया.
खबर देखने के पश्चात दोनों फटाफट भागे कि जल्दी से कुछ आवश्यकता की चीज़ें जाकर स्टॉक कर ली जायें.
मेरे दोस्तों के जाते ही मोनी ने फिर से टीवी पर चल रही न्यूज़ को देखा और उसके मुँह से निकला- फ़क बहनचोद!! क्या बाल बाल बची मैं!!
मैं बोला- दीदी, कितनों के तो लौड़े लग गए होंगे इस वक़्त!
“सच में यार नीलू … मेरी तो गांड फट गई ये न्यूज़ सुनकर!! थैंक गॉड मैं कानपुर नहीं गई यार!”
“आप सही टाइम पर आ गयी दीदी … इस टाइम अगर आप दिल्ली में होतीं तो यहाँ गुरुग्राम पहुंचना भी नामुमकिन होता. स्टेट बॉर्डर ही बंद हो रहा!!” मैंने सामने से कहा.
“नीलू, थैंक्स मेरे भाई, तूने एकदम सही टाइम पर प्लान बना कर सब सामान भी स्टॉक कर लिया. तू टेंशन मत ले अब किसी और चीज़ की. तू अपने ऑफिस पर फोकस कर, फ्लैट मेन्टेन करने, खाने पीने की पूरी ज़िम्मेदारी मेरी … वैसे भी कोई किराया तो दे नहीं रही मैं तुझे!”
“अरे यार मोनी दी, रिलैक्स ना … इतना फॉर्मेलिटी क्यों? भाई बहन के बीच सब चलता है!”
सुनकर मोनी ने मुझे एक स्माइल दी.
हमने डिनर किया, सुट्टा मारा और सो गए.
झांसी एक एतिहासिक नगर Antarvasna Sex Stories है, वहां के रहने वाले लोग भी बहुत अच्छे हैं … दूसरों की सहायता तहे दिल से करते है। मेरे पति के साथ मैं झांसी आई थी।
मेरे पति की नौकरी झांसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर बी एच ई एल में थी, हम भोपाल से स्थानान्तरित होकर झांसी आये तो सबसे पहले हमने वहां किराये का मकान ढूंढा और जल्दी ही हमें कॉलोनी में मकान मिल भी गया। मकान मालिक ने अपने लड़के सुनील को हमारी सहायता के लिये लगा दिया था।
पहले दिन तो खाना वगैरह का इन्तजाम तो उसने ही कर दिया था। बड़ा ही हंसमुख था वो।
यह बात अलग है कि उसका इरादा आरम्भ से ही बहुत नेक था। एक जवान लड़की सामने हो तो उन्हें अपना मतलब पहले दिखने लगता था। मैं उसकी नजरें तो समझ चुकी थी पर वो ही तो एक हमारा मदद करने वाला था, उसे मैं छोड़ती कैसे भला।
एक-दो दिन में उसने हमारी घर की सेटिंग करवा दी थी और शायद वो भी अपने आप की सेटिंग मुझसे कर रहा था। उसे देख कर मुझे बड़ा ही रोमांच सा हो रहा था।
ललितपुर से सामान भी शिफ़्ट करना था। नई जगह थी सो मेरे पति ने सुनील को दो तीन दिन रात को घर पर सोने के लिये कह दिया था। उसकी तो जैसे बांछें खिल गई …
उसे मेरे समीप रहने का मौका मिल गया था। शाम को सुनील उन्हें अपनी मोटर बाईक पर बस स्टेण्ड छोड़ आया था। शाम ढल चुकी थी। जब वो लौट कर आया तो साथ में झांसी के सैयर गेट के मशहूर नॉन-वेज कवाब और बिरयानी भी ले आया था। सुनील का व्यवहार बहुत ही अच्छा था।
नये मकान में मैं घर पर अकेली थी और सुनील की नजरें मुझे आसक्ति से भरी हुई बदली हुई लग रही थी। मुझे भी अपने अकेले होने का रोमांच होने लगा था कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाये, जिसकी वजह से मेरा दिल भी धड़क रहा था।
जब दो भरी जवानियां अकेली हों और वो प्यासी भी हों तो मूड अपने आप बनने लगता है। मेरे दिल में भी बेईमानी भरने लगी थी, दिल में चोर था, सो मैं उससे आंखें नहीं मिला पा रही थी। उसकी तरफ़ से तो सारी तरकीबें आजमाई जा रही थी, बस मेरे फ़िसलने की देर थी।
पर मैंने मन को कठोर कर रखा था कि मैं नहीं फ़िसलूंगी। उसका लण्ड भी जाने क्या सोच सोच कर खड़ा हो रहा था जिसे मैं उसके पतले झीने पजामें में से उभार लिये हुये देख सकती थी। उसका प्यारा सा लण्ड बार बार मेरा मन विचलित किये दे रहा था। मेरा मन डोलने लगा था, मैंने अपनी रात के सोने वाली ड्रेस यानि ढीला सा गुलाबी पजामा और उस पर एक ढीला ऊंचा सा टॉप … अन्दर मैंने जानबूझ कर कोई पेण्टी या ब्रा नहीं पहनी थी। मतलब मात्र उसे मेरे स्तनों को हिला हिला कर रिझाना था, ताकि वो खुद ही बेसब्री में पहल करे। यूँ तो मेरा दिल यह सब करने को नहीं मान रहा था पर जवान जिस्म एक जवान लड़के को देख कर पिघल ही जाता है, फिर जब दोनों अकेले हों तो, और किसी का डर ना हो तो मन में यह आ ही जाता है कि मौके का फ़ायदा उठा लो … जाने ऐसा मौका फिर मिले ना मिले। आग और पेट्रोल को पास पास रख दो और यह उम्मीद करो कि कुछ ना हो।
सुनील भी मेरे पास पास ही मण्डरा रहा था। कभी तो मेरे चूतड़ों पर हाथ छुला देता था या फिर मेरे हाथों को किसी ना किसी बहाने छू लेता था। मेरे दिल में भी इन सब बातों से आग सी सुलगने लगी थी। वासना की शुरूआत होने लगी थी।
खाना भी ठीक से नहीं खाया गया। वो तो बस मेरे टॉप में से मेरे स्तनों को बार बार देखने की कोशिश कर रहा था। अब मुझे भी लग रहा था कि नीचे गले का टॉप क्यूँ पहना, पर दूसरी ओर लग रहा था कि इस टॉप को उतार फ़ेंक दूँ और अपनी नंगी चूचियाँ उसके हाथों में थमा दूँ।
रह रह कर मेरे बदन में एक वासना भरी सिरहन दौड़ जाती थी।
रात को वो मेरे कमरे में बातें करने के बहाने आ गया था, पर उसके चेहरे के नक्शे को मुझे समझने में जरा भी मुश्किल नहीं आई। वासना उसके चेहरे पर चढ़ी हुई थी। मैं बार बार नजरें चुरा कर उसके मोहक लण्ड के उभार को निहार लेती थी। बातों बातों में वो मुझे लपेटने लगा, और मैं उसकी बातों में फ़िसलने लगी।
मेरे झुकने के कारण मेरे मेरे टॉप में से स्तन भी बाहर छलके पड़ रहे थे। उसकी नजरें मेरे स्तन का जैसे नाप ले रही हो। मेरा दिल अब काबू में नहीं लग रहा था। बदन में झुरझुरी सी उठ रही थी।
“भाभी, लड़कों को लड़कियाँ इतनी अच्छी क्यूँ लगती हैं? चाहे वो शादीशुदा ही क्यूँ ना हो?”
“विपरीत सेक्स के कारण … लड़का और लड़की प्रकृति की ओर से भी एक दूसरे के लिये पूरक माने जाते हैं।” मैंने उसे उसी के तरीके से समझाया, ताकि वो मुझे ही अपना पूरक माने।
“भाभी, फिर भी लड़कियों के हाथ, पांव और जिस्म में बड़ा ही आकर्षण होता है, जैसे ये आपके ये पांव … ” सुनील ने अपना हाथ मेरे चिकने पांव पर फ़ेरते हुए कहा।
मेरा मन लरज उठा, जैसे किसी ने करण्ट लगा दिया हो। मेरी योनि में जैसे एक अजीब कुलबुलाहट सी हुई।
“अरे छू मत … मुझे कुछ होता है … !” मैंने अपने हाथ से उसका हाथ हटा दिया।
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे बड़ा भला सा लगा। उसके हाथ ने मेरे कोमल हाथों को हल्के से इशारा देते हुये दबा दिया।
“आपके ये हाथ कितने चिकने हैं … ! “
‘ तू क्या कर रहा है सुनील … कोई देख लेगा तो बड़ी बदनामी हो जायेगी … “
अन्दर ही अन्दर मैं पिघलने सी लगी … मैंने कोई विरोध नहीं किया।
“भाभी हम तुम तो अकेले हैं ना … कौन देखेगा … बस आप इतनी सुन्दर है तो, बदन इतना चिकना हो तो … बस एक बार हाथ से छूने दो प्लीज … !” उसका हाथ मेरे कंधे तक आ गया।
“नहीं कर ना … हाय रे … उनको पता चलेगा, मैं तो मर ही जाऊंगी … !” मैंने अपने जवाब को लगभग हां में बदलते हुये कहा, जिसे कोई भी समझ जाता। यानि कुछ भी करो पर पता नहीं चलना चाहिये।
“भाभी, भाई साहब तो ललित पुर चले गये हैं … कैसे पता चलेगा !” वो अब मेरे और पास आ गया था उसकी सांसे तेज हो उठी थी। मेरा दिल भी धाड़ धाड़ करके धड़कने लगा था।
“देख, बस हाथ ही लगाना … ” उसे मन्जूरी देते हुये कहा … मन में तो मैं अब चाह रही थी कि बस मुझे छोड़ना मत … बस चोद चोद कर मुझे निहाल कर देना।
“भाभी किसी लड़की को मैं पहली बार हाथ लगा रहा हूँ … कुछ गलती से हो जाये तो बुरा मत मानना !”
“हाय तू ये क्या कह रहा है … हाय रे ! मैं मर गई … सुनील गुदगुदी हो रही है …! ” मुझे उसके हाथ लगाते ही झटका सा लगा, पर मर्द का हाथ था … मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी … निपल कठोर हो गये … उसका हाथ मेरी चिकनी पीठ को सहला रहा था। उसने मेरा ढीला टॉप नीचे से उठा दिया था। उसका हाथ मेरी पीठ पर फ़िसलते हुये मेरी चूंचियों को छूने लगा था। धीरे धीरे मुझे लगने लगा कि वो मेरी चूंचियाँ मसल डाले। वो अपना हाथ तो चूंचियों पर लगाता और झटका चूत पर पड़ता था, वो गीली होने लगी थी। जो पहले चुद चुकी हो उसे तो सीधे चुदने की ही लगती है ना … इतना करना तो खुलने के लिये बहुत होता है … बस यही हाल मेरा हो रहा था। उसके हाथ अब मेरी चूचियों को सहलाने में लगे थे। अब मेरा मन जल्दी से चुद जाने को कर रहा था।
“सुनील, एक बात कहूँ … ” मैंने झिझकते हुये कहा, मेरे मन उसका लण्ड पकड़ने का कर रहा था।
“जरूर कहो … बस ये सब करने के लिये मना मत करना … “
“नहीं, इसमें तो मुझे भी मजा आ रहा है … पर आपका वो … मुझे भा रहा है … क्या उसे छू लूँ … ” कह कर मैंने अपना चेहरा नीचे कर लिया। वो पहले तो समझा नहीं …
पर जब मैंने हाथ बढ़ा कर धीरे से लण्ड पकड़ लिया तो उसके मुख से आनन्द के मारे सिसकी निकल पड़ी। पर हाय रे … लण्ड तो गजब का लम्बा था। सात इन्च तो होगा ही … और मोटा … हां, उनसे ज्यादा मोटा था। उसे हाथ लगाते ही, उसकी मोटाई और लम्बाई का अहसास होने लगा। मेरा दिल धड़क उठा। मेरे मन में आया कि इतना मोटा लण्ड मेरी चूत या गाण्ड में समा जायेगा क्या ? फिर भी मेरा दिल मचल उठा उसे अपनी चूत में उसे लेने के लिये।
मैंने उसका लण्ड दबाकर ज्योंही मुठ मारी, सुनील तड़प उठा। मुझे अपने पति का लण्ड याद आ गया, सुनील का लण्ड मेरे पति के लण्ड से मोटा और लंबा था। पर वो चोदते बहुत प्यार से थे … अपना माल समझ कर … ।
अब उसने मेरी टॉप को ऊपर से खींच कर उतार दिया। पंखे की ठण्डी हवा से मेरा जिस्म सिहर उठा। मेरे कड़े निपल उसकी अंगुलियो में भिंच गये और वो उसे दबा दबा कर घुमाने लगा। मेरी चूत में उत्तेजना भरती जा रही थी। तभी मुझे ख्याल आया कि दरवाजा खुला है।
“हटो तो … दरवाजा खुला है … !” मैं लपक कर गई और दरवाजा बंद कर दिया।
“अरे कौन आयेगा … !” और उठ कर मुझे पीछे से कमर पकड़ कर भींच लिया। इसी के बीच में मुझे अहसास हुआ कि उसका लम्बा लण्ड मेरी चूतड़ों की दरारों के बीच जोर लगा रहा था, जैसे गाण्ड में घुसना चाह रहा हो। मुझे उसके अपने चूतड़ों के बीच लण्ड की मोटाई का अनुभव होने लगा था।
“अरे ये क्या कर रहे हो … बात तो बस छूने की थी … !” मैंने आनन्द लेते हुये कहा … उसके ऐसा करने से मेरे पति जब मेरी गाण्ड मारते थे, उसके आनन्द की याद ताजा हो गई थी। तभी सुनील ने मेरा पजामा नीचे जांघो तक खींच दिया और खुद का भी पाजामा नीचे खींच कर लण्ड बाहर निकाल लिया।
“हाये रे … सुनील … बस हटो … ये मत करना … !” अपने नंगे होने से मुझे बेहद आनन्द आया। किसी दूसरे मर्द के सामने नंगा होने का मजा बहुत ही प्यारा होता है।
“भाभी, प्लीज अब मत रोको मुझे … मुझसे नहीं रहा जा रहा है !” और वो अपना लण्ड मेरी चूतड़ों की चिकनी दरारों के बीचों बीच समाने लगा। चूतड़ों के पट के बीच लण्ड चीरता हुआ गाण्ड के छेद से जा टकराया।
“हाय रे, सुनील, तुम तो मेरी इज़्ज़त लूट लोगे …! ” मैंने हाथ बढ़ा कर उसके चूतड़ों को थाम कर अपनी गाण्ड की ओर दबा लिया। मुझे गाण्ड के छेद में गुदगुदी सी होने लगी … । गाण्ड के चुदने की याद से ही मेरा बदन आग होने लगा।
“इज्जत लूटने में मजा है … हाय रे भाभी … वो किसी ओर में कहां ?”
“आह्ह्ह्ह , घुस गया रे अन्दर … उईईईईईई … मेरी इज्जत लूट ली रे … !” लण्ड गाण्ड में घुस चला था।
“नहीं मेरी इज्जत लुटी है … भाभी … मुझे आपने लूट लिया … मेरा लण्ड भी ले लिया !” लण्ड का नाम सुनते ही मुझे बहुत अच्छा लगा।
“सुनील … लूट ले रे … मुझे पूरा ही लूट ले … लुटने में मजा आ रहा है !” उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था, वो अपना थूक लगाता जा रहा था और गाण्ड में लण्ड अन्दर घुसेड़ता जा रहा था। मुझे तो जैसे सारा जहां मिल गया था।
अभी गाण्ड चुद रही है तो फिर चूत भी चुदेगी, मेरे शरीर को मसल मसल मस्त कर देगा … मेरा सारा पानी निकाल देगा … हाय रे तीन दिनों तक चुदा चुदाकर मुझे तो स्वर्ग ही मिल जायेगा। मुझमें जोश भरता गया। मैं बेसुध हो कर गाण्ड मरवाने लगी … मेरी चूत में आग लगी हुई थी। मेरी चूचियां मसल मसल कर बेहाल हो गई थी, उसके कठोर हाथों ने उसे लाल कर दिया था। उसके लण्ड ने गति पकड़ ली थी। मेरी गाण्ड तबियत से चुदी जा रही थी। मैंने भी अपने चूतड़ हिला हिला कर उसे चोदने में सहायता की। मेरी चूतड़ों के गोल गोल चिकनी गोलाईयों से उसके लण्ड के नीचे पेड़ू टकरा रहे थे … जो मुझे और उत्तेजित कर रहे थे। उसे मेरी तंग गांड चोदने में बड़ा आनन्द आ रहा था पर मेरी तंग गाण्ड ने उसको जल्दी ही चरम सीमा पर पहुंचा दिया और उसका माल छूट गया।
पर मेरी चूत चुदने की राह में पानी छोड़ रही थी। वो मेरी चूतड़ों पर अपना वीर्य मारने लगा और उसे पूरी गीला कर दिया। उसका लण्ड अब सिकुड़ कर छोटा हो गया था। वो पास में पड़ी कुर्सी पर हांफ़ता हुआ सा बैठ गया। मैंने जल्दी से अपना पजामा ऊपर किया और टॉप पहन लिया। थोड़ी ही देर मैंने दूध गरम करके उसे पिला दिया। नई जवानी थी … कुछ ही देर में वो फिर से तरोताज़ा था।
मेरी चूत को अब उसका लंबा और मोटा लौड़ा चाहिये था। उसके लिये मुझे अधिक इन्तज़ार नहीं करना पड़ा।
वह सब अगले भाग में ! Antarvasna Sex Stories
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