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मेरा नाम तनय Hindi Sex Stories है, मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ। मेरी कपडे की दुकान है। र्मैं 32साल का हूँ, दिखने में आम लोगों जैसा हूँ। मेरी बीवी तृष्णा 26 साल की सांवली, सुन्दर और सेक्सी बदन की है। वो बहुत ही कामुक है, हम दोनों बहुत सेक्स करते हैं, सेक्सी बातें, ओरल सेक्स सभी प्रकार के सेक्स का मजा लेते हैं।
मैं नेट पर अश्लील वेब साइट देखता हूँ खासकर अन्तर्वासना की कहानियाँ बहुत पढ़ता हूँ। एक कहानी, जिसमें एक युगल केरल में छुट्टी मनाने जाता है, वहाँ मालिश वाले से उस युवक की बीवी मालिश के साथ साथ सेक्स भी करती है, इस प्रकरण में युवक को अपनी बीवी को किसी और के साथ सेक्स करते देखने में बहुत मजा आता है।
यह कहानी पढ़कर मेरे मन में आया कि क्या मैं भी ऐसा कर सकता हूँ? और यही सोच मुझे नये कार्य को करने के लिए प्रेरित करने लगी।
अपनी बीवी को किसी और के साथ सेक्स करने के लिए प्रेरित कैसे किया जाये, मैं यह सोचने लगा। मैंने उसे सबसे पहले अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़वाई। फिर उसे लम्बे लम्बे लंडों के फोटो दिखाए, सेक्स क्लिप, लंड चूसने वाले चित्र चलचित्र दिखाए।
15 दिनों की मेहनत के बाद एक रात अपने मोबाईल पर उसे खड़े लंड के फोटो दिखा कर सेक्सी बातें करते हुए मैंने उससे मजाक में पूछा- क्या तुम किसी दूसरे लंड के साथ सेक्स करना चाहोगी?
उसने भी मजाक करते हुए कहा- यदि तुम करने दो तो मैं कर लूँगी!
फिर क्या था, मैं उसे रोज रात को सेक्स करते हुए दूसरे के साथ सेक्स करने की बातें करते हुए उसकी प्यास बढ़ाता रहा और दिन में नेट पर अन्तर्वासना फोरम के जरिये एक ऐसे लड़के की तलाश करता रहा जो मेरी बीवी के साथ सेक्स के लिए तैयार हो और वो हमको जानता भी ना हो क्यूंकि हम एक अच्छे परिवार से हैं, यदि किसी ऐसे के साथ सेक्स किया जाये जो हमें जानता है तो इसमें हमारी इज्जत पर आंच आ सकती थी।
करीब 25 लड़कों से मैंने नेट पर बात की। इनमें से एक लड़का विक्रम राज जो इंदौर का ही रहने वाला है, मैंने उससे बात को आगे बढ़ाया। विक्रम एक कॉलेज का छात्र है, वो ऍम.बी.ए. कर रहा है, मेरे घर से लगभग 18 किलोमीटर दूर शहर के दूसरे छोर पर रहता है और हम दोनों में से किसी को भी नहीं जानता था।
मैंने सबसे पहले विक्रम से एक मुलाकात की। विक्रम दिखने में चेहरे से ज्यादा सुन्दर तो नहीं है पर वो एक गठीले शारीर का मालिक है, साथ ही वो एक समझदार लड़का है।
सेक्स करने के लिए जगह को उसी के कमरे को तय किया गया। तारीख 11 फ़रवरी, 2010 दिन गुरुवार, समय दिन के 12 बजे। इस बात को मैंने मेरी बीवी से छिपा कर रखा, मैं उसे चकित कर देना चाहता था।
बुधवार की रात मैंने तृष्णा के बदन की मालिश और नीचे के बाल साफ़ करते हुए कहा- कल सुबह जल्दी गृहकार्य निबटा लेना, मार्केट जाना है!
दूसरे दिन सुबह वह घर के सभी काम समाप्त करके मार्केट जाने के लिए तैयार हो गई। उसने काले सफ़ेद रंग का सलवार सूट पहना था, सूट में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। ऐसा नहीं लग रहा था कि उसकी शादी हो गई हो।
हम दोनों मेरी मोटरसाइकल पर नियत स्थान के लिए रवाना हुए। उसे अभी तक नहीं मालूम था कि हम कहाँ जा रहे हैं। शहर को पार करने के बाद वो मुझसे बोली- हम कहाँ जा रहे हैं? मैंने उसे बातों में टाल दिया।
विक्रम एक बहुमंजिली इमारत के तीसरे माले पर रहता है। अपार्टमेन्ट के नीचे पहुँच कर मैंने अपनी बीवी को कहा- आज तुम अपनी दूसरे लंड की प्यास को बुझा लो!
वह यह बात सुनते ही थोड़ा सहम गई, मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीढ़ियों के रास्ते हम तीसरे माले पर जाने लगे। चूंकि मेरे लिए भी यह पहला अवसर था तो डर मुझे भी लग रहा था। कमरे के सामने पहुँच कर मैंने दरवाजा खटखटाया। जैसा मुझे यकीन था कि दरवाजा खोलने वाला विक्रम ही होगा, उसने दरवाजा खोला।
मेरी बीवी ने उसे देखते ही मेरा हाथ कस के पकड़ लिया, उसका गला थोड़ा सूखने लगा, धड़कन तेज हो गई, सांसो में थोड़ी तेजी आ गई।
हम अन्दर आ गये, विक्रम ने हमारा स्वागत हाथ मिला कर किया। विक्रम ने दरवाजा बन्द कर दिया। तृष्णा दरवाजे के बगल में लगे डबलबेड पर बैठ गई। उसने पीने के लिए पानी माँगा जो विक्रम ने उसे दिया। अपने गले को पानी से तर करते हुए उसने अपने आप को थोड़ा संभाला और आगे की प्रक्रिया के लिए आपने आप को तैयार किया। मैंने इशारे से विक्रम को तृष्णा के पास बैठने को कहा।
वो धीरे से तृष्णा के पास बैठ गया, तृष्णा की सांसें और तेज हो गई। मेरे इशारा करते ही विक्रम ने एक हाथ तृष्णा की जाँघ पर रख दिया। हाथ का स्पर्श पाते ही तृष्णा की आँखें बंद हो गई, सांसें और तेज हो गई। वो अपने आप को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी पर कर नहीं पा रही थी। उसकी इस हालत को मैं और विक्रम भली प्रकार से समझ सकते थे क्यूंकि हम दोनों की भी कुछ हालत इस प्रकार थी।
विक्रम के हाथ के स्पर्श ने अब तृष्णा के सेक्स करने की चाह को और प्रबल बना दिया था। अब विक्रम को इशारे की जरुरत नहीं थी, उसने एक मंझे हुए खिलाड़ी के समान अपना काम शुरू कर दिया।
पहले उसने बड़े प्यार से तृष्णा के शरीर को छूना शुरू किया, विक्रम के हाथ तृष्णा के स्तनों पर स्पर्श करते ही तृष्णा के मन में काम वासना जागने लगी। विक्रम का हाथ अब तृष्णा के स्तनों की गोलाई नापने लगा। वो अब गर्म सांसें छोड़ने लगी, आँखे बंद, एडी से दूसरे पाँव को दबाते हुए अपने बदन की अंगड़ाई लेते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अब कामदेव तृष्णा के शरीर में समा गए हों।
अपने दोनों हाथों से विक्रम तृष्णा की कुर्ती को पकड़ कर निकालने लगा तो तृष्णा ने उसके हाथ पकड़ लिए फिर छोड़ दिए। कुर्ती जैसे ही ऊपर हुई तृष्णा की काले रंग की पारदर्शी ब्रा दिखने लगी। ब्रा के अन्दर से दोनों चूचियाँ दिखने लगी। अगले ही पल तृष्णा सलवार और ब्रा में थी। उसकी सुन्दरता देख कर मेरा लंड सख्त हो गया। जब मेरा यह हाल था तो विक्रम का क्या हाल होगा, यह विचार मेरे मन में आया।
मेरी नजर विक्रम की पैंट पर पड़ी, उसका लंड पैंट फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो रहा था। फिर विक्रम ने ज्यादा देर न करते हुए खुद के भी कपड़े बदन से अलग करके केवल अन्डरवीयर में आ गया। अन्डरवीयर से उसका खड़ा लंड अब अच्छे से दिख रहा था। उसने धीरे से मेरी बीवी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके स्तनों का रसपान करने लगा। मेरी बीवी आँखें बंद करके सेक्स का मजा लेने लगी।
दस मिनट तक दुग्धपान करने के बाद विक्रम ने तृष्णा की सलवार उतारी। सलवार के उतरते ही तृष्णा थोड़ा शरमाई पर अब शर्म कम और वासना ज्यादा लग रही थी। पारदर्शी पैंटी में मेरी बीवी अति कामुक दिख रही थी। उसकी ऐसी खूबसूरती मैंने पहले कभी ना देखी थी। वो आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी, ऐसी दिख रही थी जैसे कामदेव की पत्नी रति हो।
विक्रम ने तृष्णा की पैंटी भी निकाल दी, अब तृष्णा पूर्ण रूप से नग्न अवस्था में दो पुरुषों के सामने लेटी हुई उन्हें कामक्रीड़ा के लिए आमंत्रित कर रही थी। तृष्णा की बाल रहित चूत देख कर विक्रम एक भूखे शेर की तरह तृष्णा पर टूट पड़ा और तृष्णा की चूत को चाटने लगा।
इससे आगे की कहानी दूसरे भाग में! Hindi Sex Stories
मेरा नाम राज है। मैं भोपाल का रहने वाला हूँ। मैं आप को अपनी Hindi sex storiesबताने जा रहा हूँ।
हमारे घर मैं, मम्मी और भैया तीन लोग ही थे। भैया का नाम मोहन है, भैया बहुत ही गुस्से वाले हैं।
वो बात बात पर गुस्सा करते थे इसलिये मैं उनसे बहुत डरता था। भैया मुझसे 6 साल बड़े हैं। मम्मी मुझे बहुत प्यार करती थी।
ये उस समय की बात है जब भैया की शादी हो गयी थी। भाभी का नाम किरण था और वो अभी उम्र में छोटी ही थी।
भाभी मुझे बहुत प्यार करती थी और मेरी देखभाल भी करती थी। उनसे मुझे मम्मी और भाभी दोनो का प्यार मिलता था।
भाभी के आ जाने के कुछ दिन बाद मैंने देखा कि भैया भाभी से बहुत डरने लगे। वो उनकी हर बात, चाहे सही हो या गलत, तुरन्त ही मान लेते थे।
एक दिन भाभी ने मम्मी से कहा- अब आप रहने दो, आज से मैं ही राज को तेल लगाऊँगी और नहलाऊँगी भी!
मम्मी ने कहा- मैं तो इसकी छुन्नी पर भी तेल लगा कर खूब मालिश करती हूँ। तू कैसे करेगी।
भाभी ने कहा- तो क्या हुआ, मैं राज की देखभाल ठीक वैसे ही करूंगी जैसे कि आप करती हैं।
भाभी मेरी देखभाल मम्मी की तरह से करने लगी।
वो मेरे सारे कपड़े उतार देती और फिर मम्मी की तरह से मेरे सारे बदन पर तेल लगाती थी, उसके बाद मेरी छुन्नी पर भी तेल लगा कर मालिश करती थी।
फिर वो मुझे अपने साथ बाथरूम ले जाती और अपने सारे कपड़े भी उतार कर एकदम नंगी हो जाती, उसके बाद वो मुझे अपने साथ ही नहलाती थी।
भैया की शादी के 6 महीने के बाद ही मम्मी का स्वर्गवास हो गया तो मैं उदास रहने लगा।
मैं कई दिनों तक स्कूल नहीं गया।
भाभी ने मुझे प्यार से समझाया- राज, तुम घबराओ मत, मैं तुम्हारी देखभाल ठीक उसी तरह से करूंगी जैसे तुम्हारी मम्मी किया करती थी।
मैं धीरे धीरे भाभी से एकदम घुलमिल गया और मम्मी को भूल गया।
अब मुझे मम्मी कि याद नहीं सताती थी।
जब कभी मैं शरारत करता तो भैया मुझ पर गुस्सा हो जाते थे।
जैसे ही भैया मुझ पर गुस्सा होते तो भाभी उन्हें घूर कर देखती और वो तुरन्त ही चुप हो जाते।
धीरे धीरे 3 साल गुजर गये।
मेरी छुन्नी भी अब थोड़ी बड़ी हो चुकी थी। भाभी जब तेल लगने के लिये मुझे एकदम नंगा कर देती तो मुझे शरम आती थी।
फिर जब वो मेरे सारे बदन पर तेल लगने के बाद मेरी छुन्नी पर तेल लगा कर मालिश करती तो मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था, तब मैं और ज्यादा शरमा जाता था।
वो कभी कभी मेरी छुन्नी को चूम भी लेती थी।
भाभी मुझसे अकसर मजाक में कहा करती थी- तेरी छुन्नी तो जवान आदमियों की तरह हो गई है।
मुझे अब तेरी शादी करनी पड़ेगी। मुझे तेरी छुन्नी बहुत अच्छी लगती है।
उनकी बात सुनकर मैं शरमा जाता था।
मैंने भाभी से कहा- अब मैं बड़ा हो गया हूँ मैं खुद ही नहा लूंगा।
वो बोली- क्यों अब तुझे शरम आती है।
मैंने कहा- हाँ। वो बोली- बदमाश कही का, आज तक मैं तेरी छुन्नी पर तेल लगा कर मालिश करती रही और तुझे अपने साथ नहलाती रही। मुझे आज तक शरम नहीं आयी और तू अब शरमा रहा है। मैं तेरी शादी होने तक खुद ही तेरी छुन्नी कि तेल लगा कर मालिश करूंगी और नहलाऊँगी भी। अगर बदमाशी करेगा तो मैं तुझे मारूंगी भी और तेरे भैया से कह दूंगी, फिर तुझे बहुत डांट पड़ेगी।
मैं भैया से बहुत डरता था इस लिये मैं चुप हो जाता था। भाभी अभी भी मेरे लण्ड को छुन्नी ही कहती थी।
धीरे धीरे मेरी छुन्नी पूरी तरह से लण्ड बन गयी।
भाभी अभी भी मुझे भैया का डर दिखा कर मेरी छुन्नी पर तेल लगाती और मुझे नहलाती भी थी।
भाभी के हाथ लगाने पर मेरा लण्ड बहुत सख्त हो जाता था। भाभी को तेल लगाने पर और भी मस्ती आने लगी थी।
एक दिन मैंने भाभी से कहा- अब तो मैं जवान हो गया हूँ। मेरी छुन्नी भी अब लण्ड बन गयी है। जब तुम मेरे लण्ड पर तेल लगाती हो तो मुझे कुछ कुछ होने लगता है, सख्त भी हो जाता है। अब मैं खुद ही नहा लिया करुंगा।
वो मुसकुराते हुये बोली- ठीक है, अब मैं तुझे नहीं नहलाऊँगी और ना ही तेल लगाऊँगी। अब तो खुश है ना।
मैंने कहा- हाँ, अब मैं बहुत खुश हूँ।
उसके बाद मैं खुद ही अपने सारे बदन पर तेल लगने लगा और नहाने भी लगा।
धीरे धीरे 2 साल और गुजर गये। अब मेरा लण्ड पूरे शवाब पर आ चुका था और 8″ लम्बा और खूब मोटा हो गया था।
मैं अब भी एकदम नंगा ही नहाता था। मैं भाभी से ज्यादा शरमाता भी नहीं था इस लिये मैं बाथरूम का दरवज़ा खुला छोड़ कर ही नहाता था।
भाभी भी मुझसे जरा सा भी नहीं शरमाती थी। वो पहले कि तरह ही एकदम नंगी ही नहाती थी और नहाने के बाद बाथरूम से नंगी ही बाहर आ जाती थी।
एक दिन मैं नहा रहा था और भाभी बाथरूम के पास से गुजर रही थी तो उनकी निगाह मेरे लण्ड पर पड़ी।
उन्होंने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये मजाक किया और कहा- बाप रे, तेरी छुन्नी तो अब एकदम खतरनाक हो गयी है। इतनी बड़ी छुन्नी मैंने आज तक नहीं देखी है। तू जवान भी हो गया है। अब तो तेरी शादी करनी ही पड़ेगी।
मैं शरमा गया और मैं टावेल लपेटने लगा।
भाभी बोली- पहले तो खूब मज़े से अपनी छुन्नी पर तेल लगवाता था। अब शरम आ रही है।
मैंने शरमाते हुये कहा- भाभी, जाओ ना।
वो बोली- अब बाथरूम का दरवाज़ा बन्द कर के नहाया कर, नहीं तो तेरी छुन्नी को मेरी नज़र लग जायेगी।
मैंने मजाक किया और कहा- तुम हमेशा इसे छुन्नी ही कहती रहोगी। ये तो अब छुन्नी से इतना बड़ा और मोटा लण्ड बन गया है। अब इसे लण्ड ही कहा करो।
वो बोली- अच्छा बाबा, अब मैं इसे लण्ड ही कहूँगी। मैं जाती हूँ, तू नहा ले।
भाभी चली गयी।
मैं नहाने लगा।
एक दिन भाभी उदास बैठी थी, मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं।
मैंने ज़िद करते हुये कहा- बताओ ना?
वो बोली- 6 साल गुजर गये और आज तक मैं माँ नहीं बन पाई। सारा दोष तेरे भैया का ही है।
मैंने कहा- क्या किया भैया ने?
वो बोली- वो मुझे मां बनाने के लायक ही नहीं हैं।
मैंने पूछा- क्यों?
वो बोली- मुझे शरम आती है।
मैंने कहा- आज तक तो मुझसे नहीं शरमाती थी, कब से शरम आने लगी?
वो बोली- बात ही कुछ ऐसी है।
मैंने कहा- बताओ ना?
वो कहने लगी- तेरा लण्ड देख कर मैं सोचती हूँ कि काश तेरे भैया का भी ऐसा होता तो आज मेरी कोख सूनी ना रहती। मुझे उनसे मज़ा भी नहीं मिल पाता।
मैंने कहा- इसमें मैं क्या कर सकता हूँ।
वो बोली- अगर मैं तुझसे एक बात कहूँ तो तू बुरा तो नहीं मानेगा क्योंकि वो बात कुछ ठीक नहीं है और मुझे ऐसा करना भी नहीं चाहिये।
मैंने कहा- तुम मेरे लिये इतना सब कुछ करती हो, क्या मैं तुम्हारे कुछ भी नहीं कर सकता। तुम बताओ तो सही?
वो बोली- इतने साल मैंने केवल तुझे पल-पोस कर कर बड़ा करने में गुजार दिये और कभी मां बनने के बारे में सोचा ही नहीं।
मैंने कहा- तुम बताओ तो सही कि मुझे क्या करना है?
भाभी बोली- मुझे शरम आती है।
मैंने कहा- जब मैं शरमाता था तब तो तुम मुझ पर गुस्सा होती थी। अब तुम शरमा रही हो तो मुझे क्या करना चाहिये, बताओ।
मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी और बोली- मैं मां बनना चाहती हूँ और साथ ही साथ मैं चुदाई का मज़ा भी लेना चाहती हूँ। अगर तेरा कोई दोस्त हो और उसका लण्ड तेरे जैसा हो तो…
इतना कह कर वो चुप हो गई।
मैंने कहा- मैं समझ गया भाभी, लेकिन अगर भैया को पता चल गया तो?
वो बोली- वो क्या कर लेंगे। तू तो जानता ही है कि मैं जब उन्हें घूर कर देखती हूँ तो वो चुप हो जाते हैं। वो मेरी हर सही या गलत बात को मान भी लेते हैं। वो ऐसा क्यों करते हैं मैं आज तुझे बताती हूँ। तेरे भैया का लण्ड बहुत छोटा है। उनका लण्ड ठीक उतना ही बड़ा है जितना 13 साल के उमर में तेरा था। उनका चुदाई का काम भी बड़ी मुश्किल से 2 मिनट में ही खत्म हो जाता है। इसीलिये वो मुझसे डरते हैं।
मैंने कहा- अब मैं समझा कि वो तुमसे इतना डरते क्यों हैं।
भाभी ने कहा- मुझे तेरे भैया से कोई डर नहीं है।
मैंने कहा- आस पास के लोग क्या कहेंगे।
वो बोली- मैं यहाँ थोड़े ही चुदवाऊँगी। तेरे दोस्त के पास ही चलूंगी और तू मेरे साथ चलेगा।
मैंने कहा- मेरा एक दोस्त है, संजय। वो अकेले ही रहता है। मैं उससे बात कर लूँ, फिर तुम्हें उसके पास ले चलूँगा।
भाभी ने कहा- मुझे तेरे जैसा लण्ड भी चाहिये।
अब मैं भाभी से ज्यादा शरमाता भी नहीं था। मैंने तुरन्त ही अपनी लुंगी उतार दी और कहा- फिर मेरे लण्ड से ही काम चला लो। इधर उधर जाने कि क्या जरूरत है।
भाभी ने मेरे लण्ड पर अपने हाथ से हल्की सी चपत लगाते हुये कहा- तू इसे अपने पास ही रख। यह मेरे लिये पुराना हो चुका है। मुझे नया लण्ड चाहिये।
मैंने कहा- मैंने एक बार संजय का लण्ड देखा था। उसका मुझसे ज्यादा लम्बा और मोटा है।
वो बोली- फिर ठीक है। तू उस से बात कर ले लेकिन वो किसी से कहेगा तो नहीं?
मैंने कहा- नहीं वो किसी से नहीं कहेगा। फिर एक महीने के बाद ही वो अपने घर भी जाने वाला है। उसके बाद वो यहाँ वापस नहीं आयेगा। उसका घर तो यहाँ से 200 किलोमीटर दूर है।
भाभी ने कहा- फिर ठीक है।
मैं संजय के पास चला गया। मैंने संजय से बात की तो वो बहुत खुश हो गया।
एक घण्टे में मैं घर वापस आ गया।
भाभी बड़ी बेसब्री से मेरा इन्तजार कर रही थी, जैसे ही मैं घर के अन्दर पहुँचा तो वो बोली- काम हो गया?
मैंने कहा- हाँ, वो तैयार है।
भाभी ने पूछा- कब चलना है?
मैंने कहा- जब तुम चाहो।
भाभी बहुत ज्यादा जोश में आ चुकी थी और बोली- अभी चलूं?
मैंने कहा- चलो।
दोपहर के 11 बज रहे थे। भाभी ने भैया को फोन कर के बता दिया कि वो अपनी एक सहेली के यहाँ जा रही हैं, शाम के 5 बजे तक वापस आयेगी।
मैं भाभी को लेकर संजय के पास आ गया।
संजय भाभी को देख कर मुसकुराने लगा तो भाभी भी मुसकुरा दी।
संजय ने कहा- यहीं या कमरे में?
भाभी ने कहा- नहीं कमरे में।
भाभी ने मुझसे कहा- तू यहीं बैठ कर टीवी देख।
मैंने कहा- जब मुझे लाईव शूटिंग देखने का मौका मिल रहा है तो फ़िल्म क्यों देखूँ। मैं तुम्हारे साथ ही चलता हूँ।
वो बोली- मारूंगी अभी।
मैंने कहा- अच्छा बाबा जाओ।
मैंने टीवी पर एक फ़िल्म लगा दी और फ़िल्म देखने लगा।
भाभी संजय के साथ कमरे में चली गयी।
5 मिनट बाद ही कमरे से भाभी की चीखने और चिल्लाने की आवाजें आने लगी।
मैं समझ गया कि अन्दर क्या हो रहा है। संजय का लण्ड 10′ लम्बा और बहुत ही मोटा था। बहुत देर तक भाभी की चीखने और चिल्लाने की आवाज़ आती रही फिर धीरे धीरे उनकी आवाज़ आनी कम हो गई।
थोड़ी देर बाद ही भाभी की आहें और सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।
15 मिनट के बाद संजय लुंगी पहने हुये पसीने से लथपथ कमरे से बाहर आया और बोला- जा, तुझे तेरी भाभी बुला रही हैं।
मैं कमरे के अन्दर गया तो भाभी बेड पर एकदम नंगी पड़ी हुई थी, केवल एक छोटे से कपड़े से उनकी चूत ढकी हुई थी।
उनके बाल बिखरे हुये थे, वो पसीने से एकदम लथपथ थी और उनकी सांसें बहुत तेज चल रही थी।
उन्होंने अपने पैरों को मोड़ कर फैला रखा था।
मैंने पूछा- क्या है?
वो बोली- मेरे पास आ।
मैं उनके पास जा कर बैठ गया तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- तूने तो मुझे फंसा ही दिया।
मैंने पूछा- आखिर हुआ क्या?
वो बोली- मैंने तुझसे कहा था कि मुझे तेरे लण्ड के जैसा लण्ड चाहिये लेकिन तेरे दोस्त का तो बहुत ही ज्यादा लम्बा और मोटा है। मैं तो समझती थी कि थोड़ा सा फरक होगा।
मैंने पूछा, काम हो गया?
वो बोली- अभी आधा ही हुआ है।
मैंने कहा- आधा का क्या मतलब है।
वो बोली- दर्द के मारे मेरी जान निकली जा रही थी। बड़ी मुशकिल से मैं उसका आधा लण्ड ही अन्दर ले पायी हूँ। मैंने मजाक करते हुये कहा- अगर मैं होता तो एक ही बार में पूरा का पूरा अन्दर घुसा देता। वो बोली- तब तो मैं मर ही जाती।
इतना कह कर भाभी ने मेरे गालों को चूम लिया और बोली- संजय का लण्ड बहुत ही अच्छा है।
मैंने पूछा- मज़ा आया।
वो बोली- बहुत थोड़ा सा। जब वो पूरा अन्दर घुसा कर चोदेगा तब मज़ा आयेगा।
मैंने कहा- अबकि बार पूरा अन्दर ले लेना।
वो बोली- दर्द बहुत हो रहा था नहीं तो मैं पूरा अन्दर ले लेती। आज तूने मुझसे पहली बार कुछ कहा है और मैं तेरी बात टालूंगी नहीं। मैं अबकि बार पूरा का पूरा अन्दर ले लूगी भले ही कितना भी दर्द हो।
मैंने कहा- मुझे अपनी चूत तो दिखा दो।
वो बोली- बदमाश कही का, तू मेरी चूत देखेगा।
मैंने कहा- तो क्या हुआ। तुम मेरे सामने एकदम नंगी नहाती हो। तुम्हारा कुछ मुझसे छुपा है क्या।
वो बोली- अच्छा बाबा, बाद में दिखा दूंगी। पहले मुझे पूरा अन्दर तो ले लेने दे।
भाभी मुझसे बाते करती रही। अब हम दोनो में ज्यादा शरम नहीं रह गयी थी।
तभी संजय कमरे में आ गया और बोला- मैं फिर से तैयार हूँ।
भाभी ने मुझसे कहा- अब तू जा बाहर। मैंने मजाक किया, नहीं, मैं यही रहूँगा।
भाभी बोली- मुझे तेरे सामने शरम आयेगी ना।
मैंने कहा- अब काहे की शरम?
वो बोली- शरम खत्म होने में थोड़ा समय तो लगेगा ही। अब जा ना।
मैं कमरे से बाहर चला आया।
2 मिनट में ही फिर से भाभी की चीखने और चिल्लाने कि आवाज़ आने लगी। इस बार वो कुछ ज्यादा ही जोर जोर से चीख और चिल्ला रही थी।
लगभग 10 मिनट तक उनकी चीखने और चिल्लाने कि आवाज़ आती रही, उसके बाद उनकी चीखने और चिल्लाने कि आवाज़ धीरे धीरे शान्त हो गयी।
लगभग 20 मिनट के बाद संजय बाहर आ गया तो मैं भाभी के पास चला गया।
भाभी की हालत बहुत ज्यादा खराब दिख रही थी। उनका सारा बदन पसीने से एकदम लथपथ था और उन्होंने अपने पैरो को मोड़ कर पूरी तरह से फैला रखा था। उनके बाल बिखरे हुये थे। वो एकदम नंगी पड़ी हुयी थी केवल उनकी चूत एक छोटे से कपड़े ढकी हुयी थी।
मैंने पूछा- काम हो गया।
वो बोली- हाँ, लेकिन बहुत दर्द हुअ। तेरे कहने की वजह से मैंने इस बार पूरा अन्दर ले लिया नहीं तो मुझे अभी एक बार और करवाना पड़ता। उसका लम्बा होने के साथ साथ बहुत ज्यादा मोटा भी तो है।
मैंने मजाक किया- मज़ा तो आया ना?
वो बोली- बदमाश कहीं का।
मैंने कहा- बताओ ना?
उन्होंने शरमाते हुये कहा- थोड़ा सा।
मैंने कहा- वो क्यों?
वो बोली- इस बार दर्द बहुत हो रहा था ना।
मैंने कहा- फिर तो तुम्हारी चूत की हालत एकदम खराब हो गयी होगी?
वो बोली- बहुत ही ज्यादा खराब हो गयी है। मैं तो अब शायद 2-3 दिनो तक ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी।
मैंने कहा- अब तो दिखा दो।
वो बोली- अभी नहीं।
मैंने कहा- फिर कब?
वो बोली- एक बार और करवा लेने दे तब मेरी चूत का मुँह एकदम खुल जयेगा। उसके बाद देख लेना।
मैंने कहा- ठीक है, मैं थोड़ी देर और सबर कर लेता हूँ।
लगभग 30 मिनट के बाद संजय फिर आ गया तो मैं बाहर चला आया।
इस बार भाभी की चीखने और चिल्लाने कि आवाज़ ज्यादा देर तक नहीं आयी।
थोड़ी ही देर में उनकी सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।
लगभग 20 मिनट के बाद ही संजय फिर से बाहर आ गया तो मैं कमरे में चला गया।
भाभी का चेहरा इस बार कुछ खिला हुआ था।
मैंने कहा- लगता है इस बार मज़ा आ गया।
वो बोली- हाँ, लेकिन तेरा दोस्त तो 10-15 मिनट से ज्यादा कर ही नहीं पाता नहीं तो मुझे और मज़ा आता।
मैंने कहा- अब तो दिखा दो।
वो बोली- शरम आती है।
मैंने कहा- अभी तो तुमने कहा था कि अगली बार दिखा दूंगी।
भाभी ने शरमाते हुये कहा- अच्छा बाबा, देख ले लेकिन अगर कही तुझे जोश आ गया तो।
मैंने कहा- मैं भी चोद दूंगा।
वो बोली- ठीक है, चोद देना।
मैंने भाभी कि चूत पर से कपड़ा हटा दिया। उनकी चूत कि हालत एकदम खराब हो चुकी थी। उनकी चूत का मुँह बहुत ज्यादा चौड़ा हो चुका था और उनकी चूत डबल रोटी कि तरह सूज गयी थी। उनकी चूत से ज्यूस टपक रहा था जिसमें थोड़ा सा खून भी मिला हुआ था। बेड कि चादर भी उन दोनो के ज्यूस से एकदम खराब हो चुकी थी।
मैं देर तक भाभी कि चूत को देखता रहा तो वो बोली- अब रहने भी दे। कब तक देखेगा। मैंने कहा- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वो बोली- मेरी जान ही निकल गयी और तुझे अच्छा लग रहा है।
मैंने कहा- मज़ा भी तो आया।
वो बोली- हाँ, ये तो है।
मैंने कहा- फिर देखने दो ना।
वो बोली- ठीक है, जी भर कर देख ले।
मैंने कहा- मुझे भी जोश आ रहा है।
वो बोली- अगर तेरा दिल करता है तो तू भी अपनी प्यास बुझा ले।
मैंने कहा- तुम्हारी चूत मेरे लण्ड के लायक नहीं है।
वो बोली- क्यों, क्या खराबी है मेरी चूत में।
मैंने कहा- ये तो कुछ ज्यादा ही चौड़ी हो गयी है।
भाभी कुछ नहीं बोली।
लगभग 35 मिनट के बाद संजय फिर आ गया तो मैं बाहर चला आया। इस बार भी भाभी के चीखने कि आवाज़ ज्यादा देर तक नहीं आयी।
इस बार भी संजय 20 मिनट में ही कमरे से बहर आ गया तो मैं कमरे में चला गया।
इस बार भाभी एकदम नंगी पड़ी थी। उन्होंने अपनी चूत को भी नहीं ढका था।
मैंने पूछा, अब शरम नहीं आ रही है।
वो बोली- अब कहे कि शरम। अब तो तू मेरी चूत को देख ही चुका है।
मैंने कहा- वो तो मैं बरसो से देख रहा हूँ।
मैंने भी कि चूत को देखते हुये कहा- ये तो पहले से भी ज्यादा सूज गयी है।
भाभी ने कहा- आ, बैठ जा मेरे पास।
मैं उनके पास बैठ गया। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और कहने लगी, तूने मुझे आज वो मज़ा दिलया है कि मैं सारी जीन्दगी इसे नहीं भुला पाऊँगी। मुझे अब लग रहा है कि मैं भी मा बन जाउँगी।
मैंने कहा- अब घर चलोगी या और भी चुदवाना है।
वो बोली- अब आज और नहीं।
मैंने कहा- फिर घर चलो।
वो बोली- चल।
भाभी उठने की कोशिश करने लगी तो उनके मुँह चीख निकल गयी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- बहुत दर्द हो रहा है, घर कैसे जाउँगी।
मैंने कहा- फिर क्या करोगी।
वो बोली- थोड़ा गर्म पानी ले आ, मैं अपनी चूत की सिकाई कर लेती हूँ। इस से दर्द कम हो जयेगा।
मैंने कहा- अभी लाता हूँ।
मैं थोड़ी ही देर मैं गर्म पानी ले कर भाभी के पास आ गया। मैंने कहा- पानी लाया हूँ, सिकाई कर लो। वो सिकाई करने के लिये उठना चाहती थी लेकिन उठ नहीं पा रही थी। मैंने उनकी इतनी बुरी हालत देखी तो मैंने कहा- कहो तो मैं ही सिकाई कर दूं।
वो बोली- तू मेरी चूत की सिकाई करेगा।
मैंने कहा- तो क्या हुआ।
भाभी ने शरमाते हुये कहा- ठीक है, तू ही सिकाई कर दे।
मैंने गर्म पानी से भाभी कि चूत कि सिकाई शुरु कर दी। जोश के मारे मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया।
भाभी ने मेरा लण्ड देखा तो बोली- तेरा क्यों खड़ा हो गया।
मैंने कहा- चूत पर हाथ लगने से मुझे भी थोड़ा जोश आ गया है।
वो मुसकुरते हुये बोली- गड़बड़ मत करना।
मैंने कहा- होटल का खाना खाने के बाद घर का खाना थोड़े ही अच्छा लगता है। आखिर में घर का खाना ही खाना पड़ेगा।
वो बोली- अगर मेरा मन हुआ तो मैं घर का खाना भी खा लूंगी।
लगभग 20-25 मिनट कि सिकई के बाद मैंने कहा- अब उठ कर देखो, उठ पाती हो या नहीं। भाभी उठने की कोशिश करने लगी तो उनके मुँह से हल्की सी आह निकल गयी लेकिन वो उठ गयी।
मैंने कहा- अब चलो घर।
वो बोली- थोड़ी सिकई और कर लेने दे। उन्होंने मेरे हाथ से गर्म पानी और कपड़ा ले लिया और अपनी चूत कि सिकई करने लगी। 10-15 मिनट बाद वो बोली- अब घर ले चल मुझे।
भाभी ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं भाभी को सहारा दे कर घर ले आया। अगले 2 दिनो तक भाभी संजय के पास नहीं गयी।
तीसरे दिन भाभी मुझसे कहने लगी, आज रात तेरे भैया से बात हो रही थी। मैंने उनसे बता दिया कि मैंने तेरे एक दोस्त से चुदवाया है। पहले तो वो थोड़ा नाराज़ हुये और फिर कहने लगे कि अगर तुझे चुदवाना ही था तो क्या राज बुरा था। राज का लण्ड भी तो खूब लम्बा और मोटा है। मैंने उनसे कह दिया कि मुझे राज से चुदवने में शरम आयेगी तो वो बोले फिर ठीक है तुम्हारी मरजी जीस से भी मन कहे चुदवाओ।
फिर मैंने उनसे कहा कि मैं कल से 10 दिनो के लिये संजय के पास जाउँगी तो वो बोले, चली जाओ। अब तू मुझे संजय के पास पहुचा दे। 10 दिनो के बाद मुझे लेने आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है, चलो पहुचा देता हूँ।
मैं भाभी को संजय के घर छोड़ कर आने लगा तो मैंने संजय से कहा- भाभी का ख्याल रखना।
वो बोला- तू चिंता मत कर।
मैंने भाभी से मजाक करते हुये कहा- कम से कम 50 रन जरूर बनाना।
उन्होंने मुसकुरते हुये कहा- मैं 51 रन बना दूंगी, तू चिंता मत कर। समय से मुझे लेने आ जाना।
मैंने कहा- मैं आ जाऊँगा।
10 दिन के बाद मैं भाभी को लेने संजय के घर गया। भाभी मुझे देखकर बहुत खुश हो गयी।
मैंने मुसकुराते हुये पूछा, कितने रन बने।
वो थोड़ा उदास हो कर बोली- तू मुझे घर ले चल, मैं तुझे बाद में बता दूंगी। मैं भाभी को लेकर घर चला आया।
घर पहुचने पर मैंने भाभी से पूछा, अब बताओ कि कितनी बार चुदवाया।
वो बोली- केवल 44 बार लेकिन मैं मा नहीं बन पाऊँगी।
मैंने पूछा- वो क्यों।
वो बोली- संजय कल घर जा रहा है, अब वो यहाँ नहीं आयेगा।
मैंने कहा- इतने दिन तुमने उस से चुदवाया है, अब तो उसका बच्चा भी तुम्हारे पेट में आ भी गया होगा।
वो बोली- मुझे आज सुबह ही महीना आ गया। अगर उसका बच्चा मेरे पेट में आ गया होता तो मुझे महीना थोड़े ही आता।
मैंने कहा- एक पंडित जी हैं, मैं तुम्हे उनके पास ले चलता हूँ।
वो बोली- फिर देर काहे कि, अभी चल।
मैं भाभी को लेकर पंडित के पास आ गया।
पंडित ने भाभी कि कुंडली देखी और कहा- कुंडली के हिसाब से तुम्हारी जीन्दगी में 4 मरद आयेंगे। पहले के 3 मरद तुम्हें बच्चा नहीं दे पायेंगे। चौथे मरद से ही तुम्हें बच्चा होगा। तुम्हारी कुंडली से ये भी पता चलता है कि तुम अपने देवर के बच्चे कि मां बनोगि और तुम्हें जुड़वा लड़के पैदा होंगे लेकिन सावधान रहना। जब तक तुम्हारी जीन्दगी में 3 मरद नहीं आ जाते तब तक तुम अपने देवर से बच्चा पैदा करने की कोशिश मत करना नहीं तो तुम कभी भी माँ नहीं बन पाओगी।
भाभी ने मेरी तरफ़ इशारा करते हुये कहा- लेकिन पंडित जी, मेरा तो एक ही देवर है और वो ये है। मैंने ही इसे पालपोस कर बड़ा किया है फिर मैं कैसे इससे मा बनने के बारे में सोच सकती हूँ।
पंडित जी ने कहा- बेटी जरा सोचो। अगर तुम्हारी शादी 24 साल की उमर में हुयी होति तब ये 20 साल का होता, तब तो तुम इसके बच्चे कि माँ बनने को कोशिश करती या नहीं।
भाभी ने कहा- तब तो मैं जरूर कोशिश करती।
पंडित जी ने कहा- बात तो आखिर वही हुयि, फरक केवल इतना ही है कि तुम्हारी शादी जल्दी हो गयी और उस समय ये छोटा था। अगर तुम मा बनना चाहती हो तो तुम्हें इसकी मदद ही लेनी पड़ेगी। तुम्हारी कुण्डली देखने से ये भी पता चलता है कि तुम दोनो में बहुत ही ज्यादा प्रेम होगा। अब तुम ही बताओ कि मैं सही कह रहा हूँ या गलत।
भाभी ने कहा- पंडित जी, आप एकदम सही कह रहे हैं। मैं अपने देवर को बहुत प्यार करती हूँ और वो भी मुझे बहुत प्यार करता है।
भाभी ने मेरी तरफ़ इशारा करते हुये कहा- पंडित जी, मैं इसकी कुण्डली भी लायी हूँ, देख लीजीये। पंडित जी ने बहुत देर तक मेरी कुण्डली देखी और बोले, बेटी, इसकी कुण्डली तो बहुत ही अच्छी है। इस से तो 4 जुड़वा बच्चे पैदा होंगे यानि कि कुल मिला कर 8 बच्चे।
भाभी हंसने लगी तो पंडित जी बोले- बेटी, हंसो मत, मेरी बात ध्यान से सुनो। एक जुड़वा बच्चा तो इसकी अपनी बीवी से होगा लेकिन एकदम आखिर में। बाकी के 3 जुड़वा बच्चे 3 सगी बहनो से पैदा होगे। एक जुड़वा बच्चा तो तुमसे पैदा होना है। बाकी बचे 2 जुड़वा बच्चे। क्या तुम्हारी कोई सगी बहन भी है।
भाभी ने कहा- मेरी 2 बहने और भी है। एक मुझसे 2 साल बड़ी और एक 2 साल छोति।
पंडित जी ने कहा- बेटी मेरी बात का बुरा मत मानना। तुम्हारी दोनो बहनो को भी इस से 2 जुड़वां बच्चे पैदा होगे। अगर तुम अपनी दोनो बहनो कि कुण्डली ले आओ तो मैं एकदम साफ़ साफ़ बता दूंगा।
भाभी ने कहा- मैं अभी मंगा देती हूँ।
भाभी ने मुझसे कहा- आलमारी में रीना और रोशनी कि कुण्डली रखी है, जा कर ले आ।
थोड़ी ही देर मैं घर से कुण्डली ले आया। पंडित जी ने दोनो कुण्डली देखी और बोले, अब मेरी समझ में सारी बात आ गयी।
भाभी ने कहा- बताये पंडित जी।
पंडित जी कहने लगे- तुम्हारी बड़ी बहन कि जिन्दगी में 2 मरद आयेंगे। पहला तो उसका पति होगा और दूसरा उसका देवर। उसको भी अपने देवर से ही बच्चा पैदा होगा वो भी जुड़वां। रीना की कुण्डली से ये भी पता चलता है कि उसका कोई सगा देवर नहीं होगा। क्या ये बात सही है।
भाभी ने कहा- एकदम सही है।
पंडित जी ने कहा- फिर तुम्हारे देवर से ही रीना को भी जुड़वां बच्चा पैदा होगा। अब रही रोशनी कि बात। उसकी कुण्डली से भी ठीक यही बात सामने आती है। उसे भी अपने देवर से ही जुड़वां बच्चे पैदा होगे और उसके भी कोई सगा देवर नहीं होगा। क्या मैं सही कह रहा हूँ।
भाभी ने कहा- एकदम सही कह रहे हैं आप।
पंडित जी ने कहा- फिर रोशनी को भी तुम्हारे देवर से ही जुड़वां बच्चा पैदा होगा। लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही है।
भाभी ने कहा- वो क्या पंडित जी?
पंडित जी ने कहा- रोशनी कि जीन्दगी में कुल 21 मरद आयेगे। पहला मरद तो उसका पति होगा और आखिरी मरद तुम्हारा देवर। लेकिन उसकी जिन्दगी में बाकि के 19 मरद कहाँ से आयेगे ये मैं नहीं बता सकता। खैर छोड़ो जाने दो। भविष्य में क्या होने वाला है वो तो केवल ईश्वर ही जानता है।
मैं भाभी के साथ घर आ गया।
भाभी ने कहा- तेरे भैया ठीक ही कह रहे थे कि मुझे तुझ से ही चुदवा लेना चाहिये था। मैं तो अब तुझसे ही चुदवा कर बच्चा पैदा करूंगी।
मैंने कहा- वो तो ठीक है भाभी लेकिन अभी तो तुम्हारी जिन्दगी में केवल 2 मरद ही आये हैं, पहले तीसरा तो आ जाने दो।
वो बोली- देखा जायेगा लेकिन अब तो तू खुश हो जा।
मैंने कहा- वो किस लिये। भाभी ने कहा- तुझे मेरी और मेरी दोनो बहनो कि चुदयी करने का मौका जो मिलने वाला है।
मैंने कहा- आने दो सालियों को, उन्हें भी चोद दूंगा।
भाभी हसने लगी और बोली- तू मेरी बहनो को गाली दे रहा है।
मैंने कहा- मेरी ये जुर्रत कि मैं तुम्हारी बहनो को गाली दूंगा।
भाभी ने कहा- अभी तुमने कहा ना कि आने दो सालियों को उन्हें भी चोद दूंगा।
मैंने कहा- मैंने कोई गलत बात थोड़े ही कही है, आखिर वो दोनो मेरी सालियाँ ही तो हैं।
मेरी बात सुनकर भाभी जोर जोर से हसने लगी।
5 दिन बाद भाभी ने नहाया। उसके बाद वो एकदम नंगी ही बेड रूम में आयी और श्रृंगार करने लगी। उन्होंने बहुत प्यारी सी खुशबू भी लगायी।
मैंने कहा- तुम्हारा इरादा तो आज खतरनाक लग रहा है। आज किस का कतल करने का इरादा है।
वो बोली- तेरा।
मैंने कहा- अभी तो 2 ही हुये हैं, तीसरा तो आ जाने दो।
इतना सुनते ही वो मुझसे लिपट कर रोने लगी।
मैंने पूछा, क्या हुआ, रो क्यों रही हो।
वो बोली- मुझे तुझसे बच्चा चाहिये।
मैंने कहा- वो तो ठीक है लेकिन पंडित जी कि बात याद है ना।
वो रोते हुये कहने लगी- मेरी जीन्दगी में तीसरा मरद पहले ही आ चुका है। जब तू मुझे संजय के पास छोड़ कर घर चला आया तो दूसरे दिन उसका एक दोस्त महमूद आ गया था। मैं लाख मना करती रही लेकिन महमूद ने भी मुझे जबरदस्ती चोद दिया। मैं चिल्लती रही लेकिन उन दोनो ने मेरी एक ना सुनी। उसके बाद मैंने संजय से कहा कि मैं घर जा रही हूँ। संजय ने महमूद को घर भेज दिया। उसके बाद ही मैंने उस से इतने दिनो चुदवया।
भाभी की बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कहा- जब मैं तुम्हें लेने गया था तब ही बताना चाहिये था। मैं संजय कि अच्छी तरह से खबर लेता। भाभी ने कहा- मैं कोई बखेड़ा नहीं खड़ा करना चाहति थी। अब जो होना था वो तो हो ही चुका है। मुझे माफ़ कर दे। इतना कह कर वो मेरे कनधे पर सिर रख कर रोने लगी। मैंने उन्हें समझा बुझा कर चुप कराया। थोड़ी देर बाद वो नोरमल हो गयी।
मैंने पूछा- मुझे अपनी चूत नहीं दिखाओगी?
वो मुसकुरा कर बोली- सारा का सारा बदन तो तेरे सामने एकदम खुला पड़ा है। आज से मैं खुद को तेरे हवाले कर रही हूँ। अब तू मेरे बदन का जैसे भी चहे इस्तेमाल कर और मुझे मा बना दे।
मैंने कहा- मैं एक बात कहना चाहता हूँ।
वो बोली- अब क्या है।
मैंने कहा- जब तुम्हारे पेट में बच्चा आ जयेगा तब तुम नहीं चुदवाओगि। मैं चहता हूँ कि पहले हम दोनो खूब जी भर के जवानी का मज़ा उठा ले। उसके बाद बच्चा पैदा करेंगे।
वो बोली- ये तो बहुत ही अच्छा रहेगा। मैं आज से ही पिल्स लेना शुरु कर दूंगी।
मैंने कहा- फिर मैं कहाँ से शुरु करूं।
वो बोली- जहाँ से तेरा मन कहे। मैंने कहा- तुमने मेरे लण्ड पर तेल लगा कर बहुत मालिश की है और इसे चूमा भी है। लेकिन आज तक तुमने कभी मेरा लण्ड नहीं चूसा, चूसोगी इसे।
वो बोली- क्यों नहीं चूसुन्गी।
भाभी ने तुरन्त ही मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
मैंने पूछा- मज़ा आ रहा है?
वो बोली- बहुत ज्यादा क्यों कि आज तक मैंने किसी का लण्ड नहीं चूसा है और आज पहली बार लण्ड चूस रही हूँ वो भी अपने प्यारे देवर का।
मैंने कहा- मैं तुम्हारी चूत को चाटना चहता हूँ।
वो बोली- तो फिर चाट जल्दी से। आज तक किसी ने मेरी चूत भी नहीं चाटी है।
मैंने कहा- क्या कह रही हो।
वो बोली- एकदम सही कह रही हूँ। आज तक तेरे भैया कभी मेरी चूत ही नहीं चाटी।
मैंने पूछा- और संजय ने?
वो बोली- उसने भी कभी मेरी चूत नहीं चाटी। वो तो लण्ड खड़ा होने के बाद सीधे जुट जाता था और झड़ने के फौरन बाद हट जाता था। उसे केवल मेरी चुदायी करने से मतलब था और वो ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट ही चुदायी कर पाता था।
मैं भाभी के उपर 69 कि पोजीशन में हो गया। वो मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं उनकी चूत चाटने लगा। मैंने पूछा, ठीक से चाट रहा हूँ ना?
वो बोली- तू तो बहुत ही अच्छी तरह से चाट रहा है। और तेजी से चाट, बहुत मज़ा आ रहा है।
मैंने भाभी कि चूत को और ज्यादा तेजी से चाटना शुरु कर दिया। 2 मिनट में ही भाभी कि चूत से ज्यूस निकल आया तो मैंने कहा- लगता है बहुत जोश में हो।
वो बोली- आज अपने देवर का लण्ड जो अन्दर लेने वाली हूँ।
मैंने कहा- तुम्हारी चूत का ज्यूस चाट लूं। वो बोली- जैसी तेरी मरजी। मैं भाभी कि चूत का ज्यूस चाटने लगा तो वो सिसकारी लेने लगी।
थोड़ी देर बाद मेरे लण्ड का ज्यूस भी उनके मुँह में निकलने लगा। उन्होंने सारा ज्यूस निगल लिया और बोली- जिन्दगी में आज मुझे पहली बार लण्ड के अमृत का स्वाद चखने को मिला है।
मैंने पूछा- अच्छा लगा?
वो बोली- बहुत ही अच्छा था।
मैंने फिर से भाभी कि चूत को चाटना शुरु कर दिया और वो मेरा लण्ड चूसने लगी। 5 मिनट के बाद ही भाभी फिर से झड़ गयी तो मैंने उनकी चूत का सारा ज्यूस चाट लिया।
वो बोली- आज तक मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं मिला, तू तो एकदम पक्का खिलाड़ी लग रहा है।
मैंने कहा- तुमने ही तो बनाया है।
तभी मुझे बदमाशी सूझी। मैंने अपनी एक अंगुली भाभी की गाण्ड के छेद पर रख दी और कहा- मैं इसका मज़ा भी लेना चाहता हूँ। वो बोली- फिर तू यहीं से शुरु कर दे। मुझे भी आज तक इसका मज़ा नहीं मिला है। मैंने कहा- इसका मज़ा भी लूंगा लेकिन बाद में। वो बोली- अभी क्यों नहीं। मैंने कहा- पहले तुम्हारी चूत का मज़ा तो ले लूं।
हम दोनो ऐसे ही बातें करते रहे। थोड़ी देर बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो भाभी ने कहा- अब बरदाश्त नहीं हो रहा है, शुरु हो जा।
मैंने कहा- मैं नहीं चोदूंगा।
वो बोली- क्यों। मैंने कहा- तुम ही चोदो।
वो बोली- मैं ही चोद देती हूँ लेकिन चिल्लाना मत।
मैंने कहा- मैं कोई औरत थोड़े ही हूँ कि मुझे दर्द होगा और मैं चिल्लाऊँगा।
वो बोली- मैं अपने देवर को चोदूंगी तो पूरि मस्ती से चोदूंगी। ऐसा धक्का लगाऊँगी कि तुझे तेरी नानी याद आ जायेगी।
मैंने कहा- कसम से, तब तो बहुत मज़ा आयेगा।
इतना कह कर मैं बेड पर लेत गया। भाभी मेरे ऊपर आ गयी। मैं पूछा, किसी को चोदा है कभी?
वो बोली- कभी नहीं लेकिन आज तुझे पहली बार चोदने जा रही हूँ।
मैंने कहा- चोदने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
वो बोली- अभी पता चल जायेगा।
भाभी ने मेरा लण्ड अपनी चूत में डाल लिया और जोर जोर के धक्के लगने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था क्यों कि आज पहली बार मेरे लण्ड ने चूत को टच किया था और कोई औरत मुझे चोद रही थी।
थोड़ी देर बाद भाभी ने कहा- कैसा चोद रही हूँ?
मैंने कहा- बहुत ही अच्छी तरह से।
वो बोली- तू जानता नहीं है कि मैं कितनी सेक्सी हूँ।
मैंने कहा- तुम कब से सेक्सी बन गयी।
वो बोली- जब से मैं तेरे लण्ड की मालिश कर रही हूँ।
मैंने कहा- तो फिर पहले क्यों नहीं चुदवाया।
वो बोली- शरम आती थी।
वो जोर के धक्के लगाती रही और थोड़ी देर बाद ही झड़ गयी।
उसके बाद वो मेरे ऊपर लेट गयी और मेरे होठों को चूमते हुये बोली- देखा मैं तेरी नानी याद करा दी।
मैंने कहा- मुझे तो कुछ भी नहीं हुआ।
वो बोली- मैंने तेरे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर डाल के और धक्का लगा लगा के अपनी चूत का पानी निकल दिया।
मैंने कहा- मेरा पानी निकलो तब पता चलेगा।
वो बोली- वो मेरा काम नहीं है। मुझे मज़ा लेना था मैंने ले लिया। तुझे मज़ा लेना है तो मेहनत तो तुझे ही करनी पड़ेगी।
मैंने कहा- वो तो है। अब देखो मैं तुम्हें कैसे तुम्हारी नानी याद दिलाता हूँ।
मैं भाभी के ऊपर आ गया। मैंने उनके पैरो को मोड़ कर उनके कन्धे के पास सटा दिया और दबा कर जोर से पकड़ लिया। वो एकदम दोहरी हो गयी और उनकी चूत एकदम उपर उठ गयी। उसके बाद मैंने उनकी चुदायी शुरु कर दी। मैंने बहुत जोर जोर के धक्के लगने शुरु किये तो भाभी बोली- मेरी सारी हड्डियाँ तोड़ दलेगा क्या।
मैंने कहा- अभी तो ये शुरुआत है। आगे आगे देखो मैं क्या करता हूँ।
मैंने पूरे ताकत से साथ बहुत जोर जोर के धक्के लगते हुये भाभी को चोदना शुरु किया तो वो बोली- उयीईई… मां… तू तो बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा है।
मैंने कहा- अभी तो तुमने मा को ही याद किया है, थोड़ी ही देर में नानी को भी याद करोगी।
वो हंसने लगी।
मैंने पूछा, मज़ा आ रहा है?
वो बोली- बहुत मज़ा आ रहा है। तेरे दोस्त का लण्ड भले ही तुझसे ज्यादा लम्बा और मोटा था लेकिन उसने कभी भी उसने मुझे इतनी अच्छी तरह से नहीं चोदा।
मैंने कहा- मुझसे चुदवाने के बाद तुम उसे भूल जओगी।
वो बोली- मैं तो इतनी देर की चुदायी में ही उसे भूल गयी।
मैं भाभी को पहली पहली बार में ही इतनी अच्छी तरह से चोद देना चाहता था कि वो उन दोनो को एकदम भूल जाये। तभी भाभी के मुँह से जोर जोर कि सिसकरी निकलने लगी, रज्जज्ज… मैं… तो… गयीईईह्ह्ह्ह…… इसके साथ ही भाभी कि चूत से ज्यूस निकलने लगा। उनकी चूत से इस बार बहुत ढेर सारा ज्यूस निकला।
मैं रुका नहीं, मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी। भाभी का सारा बदन पसीने से लथपथ हो गया। मेरा सारा बदन भी पसीने से नहा गया। मेरे चेहरे का पसीना भाभी के चेहरे पर टपा टप गिरने लगा।
मैं जोर जोर के धक्के लगता हुअ भाभी को चोदता रहा। 5 मिन्ट भी नहीं बीते थे कि वो फिर से झड़ गयी और बोली- उस दिन तू कह रहा था ना कि अगर मैं होता तो एक ही बार में पूरा अन्दर घुसा देता।
मैंने कहा- हाँ, कहा तो था। भाभी ने कहा- आज मैं समझ गयी कि तू एकदम सही कह रहा था।
मुझे भाभी कि चुदायी करते हुये लगभग 10 मिनट और बीते थे कि वो फिर से झड़ गयी। जब उनकी चूत का सारा ज्यूस निकल गया तो मैंने कहा- मैं उस दिन एकदम सही कह रहा था, कहो तो कर के दिखा दूं।
भाभी ने कहा- वो कैसे, तेरा तो पूरा अन्दर घुस ही चुका है।
मैंने कहा- कभी गाण्ड मरवायी है।
वो बोली- कभी नहीं।
मैंने कहा- गाण्ड मरवाने के लिये तैयार हो।
वो बोली- एकदम तैयार हूँ।
मैंने कहा- कहो तो एक ही बार में पूरा का पूरा लण्ड तुम्हारी गाण्ड में घुसा कर दिखा दूं।
वो बोली- दिखा दे।
मैंने कहा- बहुत चिल्लाओगी।
वो बोली- चिल्लाने दे ना।
मैंने कहा- बहुत दर्द होगा।
वो बोली- होने दे ना।
मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से बाहर निकाला। मेरा लण्ड भाभी कि चूत के ज्यूस एकदम भीगा हुअ था। मैंने भाभी कि चूत पर से थोड़ा सा ज्यूस उनकी गाण्ड के छेद पर लगा दिया। उसके बाद मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड के छेद पर रख दिया और कहा- तैयार हो जाओ।
वो बोली- मैं तैयार हूँ।
मैंने एक धक्का मारा तो वो जोर से चीखी। मेरे लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड में घुस गया था। मैंने दूसरा धक्का मारा तो मेरा लण्ड उनकी गाण्ड को चीरता हुआ 3′ तक अन्दर घुस गया। वो जोर जोर से चिल्लाने लगी। मैंने तीसरा धक्का मारा तो उनकी गाण्ड से खून निकल आया और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में 5′ अन्दर घुस गया।
मैं रुका नहीं। मैंने बहुत जोरदर 2 धक्के और लगा दिये तो पूरा का पूरा लण्ड उनकी गाण्ड में समा गया। वो जोर जोर से चिल्ला रही थी और उनकी आंखो से आंसू निकल आये। दर्द के मारे उनका बुरा हाल हो रहा था। मैंने उनकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी।
थोड़ी देर तक वो चिल्लाती रही फिर धीरे धीरे शान्त हो गयी। 5 मिनट में ही भाभी को मज़ा भी आने लगा। मैंने पूछा, अब क्या ख्याल है।
वो बोली- तू तो बहुत ही खराब आदमी है।
मैंने कहा- क्यों, मज़ा नहीं आया?
वो बोली- मज़ा तो आया लेकिन दर्द भी तो हुआ।
मैंने कहा- वो तो होना ही था लेकिन जितना होना चाहीये था उतना तो नहीं हुआ होगा।
वो बोली- और जोर जोर से धक्के लगा। मैंने कहा- वो तो लगाऊँगा ही।
मैंने और ज्यादा जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये। थोड़ी ही देर में भाभी एकदम मस्त हो गयी। 10 मिनट तक उनकी गाण्ड मारने के बाद मैंने अपना लण्ड उनकी गाण्ड से निकल कर उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चुदायी शुरु कर दी।
5 मिनट में ही भाभी फिर से झड़ गयी और बोली- कितनी बार मेरी चूत का पानी निकलेगा।
मैंने कहा- तुम देखती जाओ।
मैंने उनकी चूत से अपना लण्ड निकल कर उनकी गाण्ड में डाल दिया। 5 मिनट गानद मरने के बाद मैंने फिर से उनकी चुदायी शुरु कर दी। 10 मिनट कि चुदायी में ही वो फिर से झड़ गयी तो मैंने उनकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी।
भाभी बोली- लगता है कि तू आज मेरी चूत का भुरता बना देगा। मैंने कहा- इसी को तो असली चुदायी कहते हैं। वो बोली- वो तो मैं आज समझ ही गयी क्यों कि तेरा दोस्त ने तो मुझे ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट तक ही चोदा था। मैंने कहा- देखती जाओ, अभी तो मैं बहुत देर तक चोदने वाला हूँ।
5 मिनट तक उनकी गाण्ड मारने के बाद मैंने फिर से उनकी चुदायी शुरु कर दी। 10 मिनट में ही भाभी फिर से झद गयी और बोली- अब रहने दे, मैं एकदम थक गयी हूँ।
मैंने पूछा, नानी याद आयी या नहीं।
वो बोली- नानी की बात कर रहा है तू, मुझे तो नानी कि मम्मी भी याद आ गयी, अब रहने दे।
मैंने कहा- अभी मेरे लण्ड का पानी कहाँ निकला है।
वो बोली- फिर जल्दी से निकाल।
मैंने कहा- वो मेरे बस में नहीं है।
वो बोली- फिर किस के बस में है।
मैंने कहा- तुम्हारे।
वो बोली- मैं क्या कर सकती हूँ।
मैंने कहा- तुम भी नीचे से धक्का लगओ।
वो बोली- तूने तो मेरा पैर जोर से पकड़ रखा है। मेरा पैर छोड़ेगा तब ही तो धक्के लगाऊँगी।
मैंने भाभी के पैर छोड़ दिये तो उन्होंने भी अपना चूतड़ उठा उठा कर चुदवाना शुरु कर दिया। मैंने और ज्यादा जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये।
10 मिनट की चुदायी के बाद मैं झड़ गया। वो भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गयी। मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से बहर निकला और हट गया। वो बोली- तेरा लण्ड तो बहुत ही खतरनाक है।
मैंने कहा- तुमने ही तो इसे तेल लगा लगा कर इतना खतरनाक बनया है। मैं तुम्हारी दोनो बहनो को भी ऐसे ही चोदुंगा।
वो बोली- जरूर चोदना लेकिन मुझे आज चुदवाने में जो मज़ा आया है ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था। मैं तो आज दोबारा चुदवाने के लायक ही नहीं रही।
मैंने कहा- मैं तो आज कम से कम 2 बार और चोदुंगा।
वो बोली- अच्छा बाबा, चोद लेना। लेकिन तू ये तो बता कि तुझे झड़ने में इतनी देर क्यों लगती है।
मैंने कहा- किसी से कहोगी तो नहीं।
वो बोली- बिल्कुल नहीं।
मैंने कहा- तुम मेरे लण्ड पर तेल लगा कर कितनी देर मालिश करती थी।
वो बोली- 15-20 मिनट।
मैंने कहा- जब मैं तुम्हें चोद रहा था तो 15-20 मिन तक तो मुझे यही लग रहा था कि मेरे लण्ड कि मालिश हो रही है। उसके बाद मुझे धीरे धीरे जोश आना शुरु हुआ। लगभग 15 मिन के बाद मैं पूरे जोश में आ गया। जोश में आने के बाद मैंने 20-25 मिनट तक ही तो तुम्हारी चुदायी की।
वो बोली- अब मैं समझी कि तू इतनी देर तक कैसे चोद पाता है।
मैंने उस दिन भाभी को 2 बार और चोदा। अगले 3 महीने तक मैं भाभी की चुदायी करता रहा और उनकी गाण्ड भी मारता रहा।
एक दिन भाभी बोली- बच्चा नहीं पैदा करना है।
मैंने कहा- करना क्यों नहीं है।
वो बोली- अगर तुझे पूरा मज़ा मिल गया हो तो मैं पिल्स लेना बन्द कर दून।
मैंने कहा- ठीक है, बन्द कर दो।
भाभी ने पिल्स लेनी बन्द कर दी। लगभग 40 दिन गुजर गये लेकिन उनको महीना नहीं आया। दोस्तों के पास जाने पर पता चला कि वो मां बनने वाली है। भाभी बहुत खुश हो गयी।
उन्होंने घर आ कर ये बात भैया को बतायी तो भैया बहुत ही खुश हो गये और बोले, मैं कहता था ना कि राज से काम चला लो, बाहर जाने की कोई जरूरत नहीं है।
भाभी ने कहा- सोरी, मुझे माफ़ कर दो। मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी। भैया ने कहा- जब बच्चा पैदा हो जायेगा तब ही मैं तुम्हें माफ़ करुंगा
भाभी ने घर का काम करने के लिये एक नौकरानी रख ली। उसका नाम मधु था और उसकी उमर लगभग 35 साल की थी। मैंने भाभी से कहा- तुमने ये क्या किया। जवान नौकरानी रखती तो मेरा काम भी हो जाता।
भाभी बोली- अब कुछ दिन आराम कर लो वरना सेहत खराब हो जायेगी। समय पूरा हो जाने के बाद भाभी को जुड़वां बच्चे पैदा हुये। उन दोनो कि शकल मेरे जैसी ही थी। भैया बहुत खुश हो गये।
भाभी ने भैया के पैर पकड़ लिये और कहा- अब तो मुझे माफ़ कर दो। भैया ने भाभी के माथे को चूम लिया और कहा- मैंने आज तुम्हारी सारी गलती माफ़ कर दी। अब तो खुश हो जाओ।
भाभी ने कहा- अब तो मैं बहुत खुश हूँ।
भैया ने कहा- एक बात और है।
भाभी ने कहा- कहिये।
भैया ने कहा- जब घर में ही अच्छा खाना मिल रहा हो तो होटल जाने की क्या जरूरत है। समझ रही हो ना मेरी बात।
भाभी ने मेरी तरफ़ देखा और मुसकुराने लगी। मैं शरमा गया। भैया जब कमरे से बाहर जाने लगे तो बड़े प्यार से मेरे गाल पर हलकी सी चपत लगा गये। आज जिन्दगी में पहली बार भैया मेरे साथ प्यार से पेश आये थे।
1 महीने के बाद बच्चे की खुशी में घर पर दावत थी। भाभी की दोनो बहने रीना और रोशनी भी आयी थी। उस दिन तो मेहमानो कि धूम रही। दूसरे दिन रीना और तीना को छोड़ कर सारे मेहमान चले गये। दोपहर में हम सब आपस में हंसी मजाक कर रहे थे। तभी भैया बोले, मैं मारकेट जा रहा हूँ, कुछ काम है। शाम तक आ जाऊँगा।
भैया मारकेट चले गये। उनके जाने के बाद मैं भाभी के बगल में बैठ गया। रीना और रोशनी मुझसे हंसी मजाक करने लगी। तभी भाभी उन दोनो को पंडित जी कि कही हुयी बात बताने लगी। मैं तुरन्त उठ कर खड़ा हो गया और भाभी से कहा- तुम लोग बातें करो मैं बाहर जा रहा हूँ। भाभी ने शरारत भरे अन्दाज़ मैं कहा- मेरे प्यारे प्यारे बच्चो के पापा जी, चुपचाप बैठ जाओ, वरना…… मैंने कहा- वरना क्या।
वो बोली- वरना बहुत मारूंगी।
मैंने कहा- एक तरफ़ तो अपने बच्चो का पापा कहती हो और दूसरी तरफ़ मारने की धमकी भी देती हो। ये बहुत गलत बात है।
भाभी ने कहा- मेरी दोनो बात सही है। तू मेरे बच्चो का पापा भी है और मेरा देवर भी। मैं तुझे भाभी के हक से मारूंगी भी। चुपचाप बैठ जा। मैं भाभी के पास बैठ गया।
भाभी ने पंडित जी कि सारी बात रीना और रोशनी को बता दी। उन्होंने संजय और महमूद के बारे में भी उन दोनो को बता दिया। भाभी बोली- लेकिन पंडित जी कि ये बात मेरी समझ में नहीं आयी कि रोशनी की जिन्दगी में 19 मरद और कहाँ से आयेंगे। मुझे तो पंडित जी कि ये बात सही नहीं लगती। तभी रोशनी भाभी से लिपट कर रोने लगी। भाभी ने पूछा, तुझे क्या हुआ। वो रोते हुये कहने लगी कि पंडित जी कि बात एकदम सही है।
6 महीने पहले कि बात है। एक दिन मैं शहर से जा रही थी। रास्ते में अचानक मेरी तबियत खराब हो गयी। अन्धेरा होने लगा तो मैं एकदम परेशान हो गयी। तभी मुझे एक बस आती दिखायी दी। मैंने बस वाले को रुकने का इशारा किया तो बस रुक गयी। मैं बस में चढ गयी। उस बस में फ़ुटबॉल के 16 खिलाड़ी थे। उन खिलाड़ियों के साथ उनका कोच भी था। बुस में एक क्लीनर भी था। वो कुल मिलकर 19 लोग थे। लगभग 30 मिनट के बाद एकदम अन्धेरा हो गया तो उन्होंने एक सुनसान जगह पर बस रोक दी। उसके बाद उन सब ने मेरे साथ एक एक कर के…… इतना कह कर रोशनी जोर जोर से रोने लगी।
रीना और भाभी ने तीना को समझा बुझा कर चुप कराया।
उसके बाद हम इधर उधर कि बातें करने लगे। एक घन्टे में रोशनी एकदम नोरमल हो गयी। वो फिर से हंसी मजाक करने लगी। रोशनी और रीना मुझसे पहले से ही एकदम खुल कर बात करती थी और मुझसे छेड़छाड़ करती रहती थी। थोड़ी देर बाद रोशनी मेरी तरफ़ इशारा करते हुये बोली- मेरी जिन्दगी में 20 मरद तो आ गये, आज इसका नम्बर है। मेरी शादी को भी इतने साल गुजर गये लेकिन मैं मां नहीं बन पायी। दीदी, तुम इस से कह दो कि ये मुझे भी मां बना दे।
भाभी ने कहा- तू तो कल घर चली जायेगी। एक दिन में ही ये तुझे कैसे मा बनायेगा।
रोशनी बोली- फिर मैं एक महीने तक यहीं रुक जाती हूँ। क्यों कि जब मैं यहाँ आयी थी उसके 3 दिन पहले ही मैंने नहाया था और तब से मैं उनके साथ सोयी नहीं।
मैंने मजाक करते हुये कहा- तुम तो बहुत ही गन्दी औरत हो। इतने दिन हो गये और तुमने नहाया ही नहीं। रोशनी ने मेरे गाल जोर से काट लिये और बोली- बुद्धू, मैं रोज रोज नहाने वाली बात थोड़े ही कर रही हूँ। भाभी और रीना हसने लगे।
भाभी ने रीना से पूछा, मां बनने के बारे में तेरा क्या ख्याल है।
रीना बोली- तेरे पति कि तरह से ही मेरे पति का लण्ड भी एकदम छोटा है और वो भी 2 मिनट में ही झड़ जाते हैं। तूने अभी बताया था कि इसका लण्ड बहुत ही लम्बा और मोटा है। अगर मैंने इस से कराया तो मेरे पति को पता चल जायेगा, फिर मैं उन्हें क्या जवाब दूंगी। मुझे तू ऐसे ही रहने दे।
भाभी ने कहा- पंडित जी बात गलत नहीं हो सकती। आज ना सही देर सबेर तू भी इसके बच्चे कि ही मा बनेगी। रीना बोली- देखा जायेगा। रोशनी बोली- दीदी, तुमने बताया था कि ये बहुत ही अच्छी तरह से चोदता है। मैं तो पूरे जोश में आ गयी हूँ और मेरी चूत भी गीली हो चुकी है। इसके पहले कि जीजू बाजार से वापस आ जायेन मैं इसे दूसरे कमरे में ले जाती हूँ और कम से कम एक बार तो मज़ा ले ही लेती हूँ।
मैंने मजाक किया, क्यों, अपनी दीदी के सामने शरम आती है। वो बोली- भला मुझे क्यों शरम आने लगी। अगर तेरे में हिम्मत है तो मुझे चोद कर दिखा दीदी के सामने।
भाभी ने कहा- रोशनी, इसे चैलेन्ज मत कर, ये बहुत ही खराब आदमी है। ये तुझे हमारे सामने भी चोद सकता है।
रोशनी बोली- मैं इसे बरसों से जानती हूँ। इसमें इतनी हिम्मत नहीं है। दीदी, तुम्हें याद है ना जब तुम्हारे कहने पर मैंने एक बार इसके लण्ड पर तेल लगाया था ये कितना शरमा रहा था। ये मुझे तुम सब के सामने नहीं चोद सकता। मैंने भाभी से कहा- इसे समझा दो, नहीं तो मैं इसे यहीन पर चोद दूनगा।
तीना ने मुझे चिधते हुये कहा- रहने दे, रहने दे। मैंने भाभी से कहा- समझाओ इसे, नहीं तो गड़बड़ हो जायेगी। रोशनी बोली- क्या गड़बड़ करेगा तू। मैंने कहा- मैं अभी बताता हूँ इसे।
मैं पहले से ही जोश में आ चुका था और मेरा लण्ड भी खड़ा हो चुका था। मैंने अपनी लुन्गी उतार कर फेक दी और भाभी और रीना के सामने ही रोशनी को पटक दिया। उसके बाद मैंने रीना का पेटीकोट उठा कर एक ही धक्के में अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। रीना शरमा गयी और उसने अपना मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया लेकिन भाभी मुझे देखती रही। उन्होंने मुझे इशारा कर दिया कि मैं अपना काम जारी रखूं।
मैंने रोशनी की चुदायी शुरु कर दी। 2 मिनट में ही रोशनी पूरी मस्ती में आ गयी। उसने मुझसे चूतड़ उठा उठा कर चुदवाना शुरु कर दिया। मैंने भी उसे पूरे जोश और ताकत के साथ खूब जोर जोर के धक्के लगाते हुये चोदना शुरु कर दिया।
20-25 मिनट कि चुदायी के बाद रोशनी बोली- ओह राज, तुमने तो मुझे इतनी देर में ही एकदम पागल कर दिया है। मैं 2 बार झड़ भी चुकी हूँ, अब रहने भी दो। मैंने कहा- रोशनी रानी, ये तो शुरुआत है, अभी तो बहुत देर लगेगी।
भाभी बोली- मैं कह रही थी ना कि इसे चैलेन्ज मत कर लेकिन तू नहीं मानी, अब भुगतो।
हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी में पढ़ें कि तीन सगी बहनें चुदाई के लिए तड़प रही थी. आखिर वे पढ़ाई के बहाने अपने प्रोफेसर के घर गयी. वहां वे तीन सिस्टर्स कैसे चुदी?
दोस्तो, तीन बहनों की चुदाई की कहानी के पहले भाग
चुदाई की प्यासी तीन सगी बहनें
में मैंने अब तक आपको बताया था कि प्रोफेसर आलोक ने सोनम की चुत को उसकी पैंटी के ऊपर से ही सूंघना शुरू कर दिया था. सोनम भी आलोक के लंड को चाट रही थी.
अब आगे हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई कहानी:
जैसे ही सोनम आलोक का लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, आलोक ने सोनम की पैंटी को भी उतार दिया और सोनम को पूरी तरह से नंगी कर दिया.
सोनम नंगी होने से शर्मा रही थी और उसने अपना चेहरा आलोक के सीने में छिपा लिया.
इसी दौरान आलोक ने सोनम की चूचियों को चूसना फिर से चालू कर दिया.
सोनम की चूची अब पत्थर के समान कड़ी हो गई थीं.
तब आलोक ने सोनम को फिर बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटने लगा; अपनी जीभ सोनम की बुर के अन्दर बाहर फिराने लगा.
अपनी बुर में आलोक की जीभ घुसते ही सोनम को बहुत मजा आने लगा. वो जोर से आलोक का सिर अपने बुर के ऊपर पकड़ दबाने लगी और थोड़ी देर के बाद अपनी कमर ऊपर नीचे करने लगी.
आलोक चुदाई के मामले में बहुत माहिर खिलाड़ी था, वो सोनम की कसमसाहट से समझ गया कि अब सोनम की बुर में लंड पेलने का समय आ गया है.
उसने सोनम का मुँह चूम कर धीरे से उसके कान पर मुँह रख कर पूछा- सोनम रानी, अपनी कमर क्यों उछाल रही हो? क्या तुम्हारी चूत में कुछ कुछ हो रहा है?
सोनम बोली- हां मेरे डियर सर, कुछ कुछ नहीं … मेरी बुर में चींटियां सी रेंग रही हैं … मेरा सारा बदन तप रहा है, अब तुम ही जल्दी से कुछ करो.
आलोक ने पूछा- क्या तुम अपनी चूत को मेरे लंड से चुदवना चाहती हो?
सोनम ने झुंझला कर कहा- अरे यार, आपने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी कपड़े भी उतार दिए और अब भी पूछ रहे हो कि क्या चुदाई करवानी है … मुझे जल्दी से आपका लंड मेरी चुत में चाहिए.
आलोक ने ये सुना तो उसने सोनम से बोला- ठीक है मेरी जान, अब मैं तुमको चोदूंगा, लेकिन तुमको पहले पहल थोड़ा दर्द होगा, पर मैं तुम्हें बहुत ही प्यार से और धीरे धीरे चोदूंगा … मैं कोशिश करूंगा कि तुमको दर्द महसूस न हो.
अब आलोक उठा और सोनम के दोनों पैर उठा कर घुटनों से मोड़ दिए.
उसने सोनम के दोनों पैरों को अपने हाथों से फैला दिया.
इसके बाद उसने ढेर सारा थूक अपने हाथ में लेकर पहले अपने लंड में लगाया, फिर सोनम की बुर पर लगाया.
थूक से सनी बुर के छेद पर आलोक ने अपने खड़े लंड को रखा और धीरे से कमर को आगे बढ़ा कर अपना सुपारा सोनम की बुर में घुसा दिया और सोनम के ऊपर लेटा रहा.
अनचुदी बुर में लंड घुसा तो सोनम की चुत परपराने लगी.
मगर अभी लंड ने चुत को चीरा नहीं था तो सोनम को ख़ास दर्द नहीं हो रहा था.
थोड़ी देर के बाद जब सोनम नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो आलोक ने धीरे धीरे अपना लंड सोनम की बुर में पेलना शुरू किया.
इससे सोनम का बदन दर्द से कांपने लगा और वो चिल्लाने लगी- आह बाहर निकाल लो सर … आह मेरी बुर फटी जा रही है. हाय मैं मर गई … मेरी बुर फटी जा रही है. आप तो कह रहे थे कि थोड़ा सा दर्द होगा और आप आराम आराम से चोदोगे. मुझे नहीं चुदवाना है, आह … आप अपना लंड बाहर निकालो.
आलोक ने सोनम के मुँह में अपना हाथ रख कर कहा- बस मेरी रानी बस, अभी तुम्हारा सारा दर्द खत्म हो जाएगा और तुम्हें मज़ा आने लगेगा. बस थोड़ी सी देर और बर्दाश्त करो.
सोनम - आह उई … मेरी बुर फटी जा रही है … और आप कह रहे हो कि थोड़ी देर और बर्दाश्त करो. अरे मुझे नहीं चुदवानी है अपनी बुर, आप अपना लौड़ा मेरी बुर से बाहर निकालो!
सोनम की आंखों से आंसू आ गए.
इतनी देर में आलोक अपनी कमर उठा कर एक जोरदार धक्का मारा और उसने महसूस किया कि उसका सारा का सारा लंड सोनम की बुर में घुस गया है और सोनम की बुर से खून निकल रहा है.
सोनम दर्द के मारे तड़पने लगी और आलोक को अपने हाथों से अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी.
आलोक सोनम को मज़बूती से पकड़े हुए था और उसका हाथ सोनम के मुँह के ऊपर था इसलिए सोनम कुछ ना कर सकी .. वो बस छटपटा कर रह गयी.
आलोक ने अपना लंड सोनम की बुर के अन्दर ही थोड़ी देर के लिए रहने दिया.
उसने सोनम की एक चूची को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाना शुरू कर दिया और दूसरी चूची को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर बाद सोनम की चुत का दर्द गायब हो गया और अब उसे मज़ा आने लगा. उसने नीचे से अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.
आलोक भी धीरे धीरे अपनी कमर हिला हिला कर अपना लौड़ा सोनम की बुर में अन्दर-बाहर करने लगा.
कुछ ही देर में सोनम ने भी अपनी गांड उठा कर जोरदार धक्के देना शुरू कर दिए.
जब आलोक का लंड उसकी बुर में अन्दर घुसा होता तो सोनम उसे कस कर जकड़ लेती और अपनी बुर को सिकोड़ लेती थी.
इससे चुदाई की रगड़ उसे भरपूर मजा दे रही थी.
यह महसूस करके आलोक भी समझ गया कि सोनम को चुदाई का मज़ा आने लगा है.
ये समझते ही आलोक ने अपनी कमर को ऊपर खींच कर अपना पूरा का पूरा लंड सोनम की बुर से बाहर निकाला … उसने सिर्फ लंड का सुपारा ही फांकों में फंसा छोड़ा था.
फिर उसने एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड सोनम की बुर में पेल दिया.
इस झटके से सोनम बुरी तरह से कलप उठी और आलोक से लिपट गई.
उसने आलोक को अपने हाथ और पैर से जकड़ लिया था. सारे कमरे में सोनम और आलोक की सिसकारियां और उनकी चुदाई की ‘फच … फच .. फट फट …’ की आवाज ही गूंज रही थी.
सोनम अपने मुँह से सीत्कार रही थी- अह अह … ओह हां और जोर से आह और जोर से … हां ऐसे ही अपना लंड मेरी बुर में पेलते रहो … मजा आ गया सर.
आलोक भी पूरी गति से सोनम की बुर में अपना लंड अन्दर-बाहर करके उसको चोद रहा था.
सोनम बुरी तरह से आलोक से चिपकी हुई थी.
काफी देर तक सोनम की बुर चोद रहे आलोक का लंड अब झड़ने वाला हो गया था.
उसने 8-10 धक्के काफी जोरदार लगाए और उसके लंड से ढेर सारा पानी सोनम की बुर में गिर कर समा गया.
आलोक के झड़ जाने के साथ ही साथ सोनम की बुर ने भी पानी छोड़ दिया.
उसने अपने हाथ पैर से आलोक को जकड़ लिया.
आलोक हांफ़ते हुए सोनम के ऊपर गिर गया और थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.
फिर सोनम उठ कर अपनी बुर में हाथ लगाए हुए बाथरूम की तरफ़ चली गयी.
आलोक इस समय बुरी तरह से थक चुका था और वो बेड पर पड़ा रहा लेकिन उसका लंड अभी भी खड़ा था.
उधर मीनाक्षी और डिंपल दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से चूम चाट रही थीं.
पांच मिनट बाद आलोक ने आंखें खोलीं और उन दोनों को इस तरह से खेलते देखा तो वो अपनी जगह से उठ कर उन दोनों के पस चला गया.
वो मीनाक्षी की चिकनी जांघ पर अपना हाथ फेरने लगा.
मीनाक्षी जो पहले ही मदहोश थी, अपने पैर पर आलोक का हाथ लगते ही अपने आप पर काबू नहीं रख सकी.
उसने डिंपल को छोड़ दिया और वो आलोक की तरफ़ मुड़ गयी.
उसके सामने आलोक बिल्कुल नंगा अपना खड़ा लंड लिए खड़ा था.
आलोक एक बार फिर से चुत चोदने के मूड में आ गया था.
मीनाक्षी ने आलोक के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपना मुँह उसके लंड पर रगड़ने लगी.
आलोक का लंड अब भी सोनम की चूत के खून और रस से भीगा हुआ था.
उसने मीनाक्षी को अपने दोनों हाथों में बांधा और उसे चूमने लगा.
आलोक का हाथ मीनाक्षी की नंगी सेक्सी जवानी पर घूमने लगा था. उसका हाथ मीनाक्षी की चूचियों पर गया और वो उसकी दोनों कड़क चूचियों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा.
मीनाक्षी अपनी चूचियों पर आलोक का हाथ पाते ही और जोश में आ गयी और उसने अपना हाथ आलोक के खड़े लौड़े पर रख दिया.
आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की मुट्ठी में पाते ही उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.
वो दूसरी चूची को अपने हाथ में लेकर उसका निप्पल मसलने लगा.
कुछ ही देर में मीनाक्षी ने आलोक के लंड को अपने हाथों में पूरा ले लिया और उसके सुपारे को एक बार खोल कर बंद किया.
उसे लंड देख कर गर्मी चढ़ गई और एकाएक मीनाक्षी ने आलोक के लंड के सुपारे को अपने मुँह में भर लिया.
वो लंड चाटने लगी.
जैसे ही मीनाक्षी ने आलोक का लंड अपने मुँह में लिया, वैसे ही आलोक ने अपनी कमर को हिला कर अपना लंड मीनाक्षी के मुँह के अन्दर पेल दिया.
वो बोला- ले ले मेरी रानी … मेरा लंड अपने मुँह में लेकर इसको खूब चूस … इसके बाद मैं इसको तुम्हारी चूत में डाल का इसे चूत चुसाऊंगा.
मीनाक्षी ने अपने मुँह से आलोक का लंड निकाल कर कहा- बस सिर्फ मेरी चूत से ही अपना लंड चुसवाओगे, गांड से नहीं? मैं तो तुम्हारा लंड अपनी चूत और गांड दोनों से खाऊंगी. क्या तुम मुझको अपना लंड दोनों छेदों में खिलाओगे?
आलोक की तो मानो लॉटरी निकल आई थी. वो तो अब तक तीन छेद ही समझ रहा था, जबकि उसे अब छह सील बंद छेदों की जुगाड़ दिखाई देने लगी थी.
थोड़ी देर के बाद आलोक ने मीनाक्षी को पलंग पर ले जाकर चित करके लेटा दिया और उसके पैरों के पास बैठ कर उसकी सलवार को खोलने लगा.
सलवार खोलने में मीनाक्षी ने भी आलोक को मदद की और नाड़ा खुलते ही उसने अपनी गांड उठा कर सलवार को नीचे सरका दी, फिर अपनी टांगों से उसे अलग कर दिया.
सलवार उतरने के बाद आलोक ने मीनाक्षी की पैंटी को भी इसी तरह खींचते हुए उतार दिया.
अब मीनाक्षी की गुलाबी कुंवारी चूत उसकी संगमरमर सी चिकनी जांघों के बीच चमकने लगी.
आलोक मीनाक्षी की गुलाबी चूत को अपनी दम साधे देखने लगा और अपनी जीभ होंठों में फेरने लगा.
मीनाक्षी ने आलोक को वासना भरी नजरों से देखा और अपनी चुत को हल्की सी जुम्बिश दी तो आलोक ने झुक कर मीनाक्षी की चूत पर चुम्मा धर दिया और अपना जीभ निकाल कर उसकी चूत की घुंडी को तीन-चार बार चाट दिया.
इससे मीनाक्षी की मादक आह निकल गई; उसकी चुत को मानो जन्नत का सुख मिल गया था.
अब आलोक ने मीनाक्षी की टांगों को फ़ैलाया और ऊपर उठा कर घुटनों से मोड़ दिया.
मीनाक्षी को इस वक्त लंड का इंतजार था.
आलोक ने भी देर नहीं की … उसने अपना लंड मीनाक्षी के चूत के मुहाने पर रख दिया.
इतना करने के बाद आलोक मीनाक्षी के ऊपर झुक गया और उसकी चूचियों को चूसने लगा, भंभोड़ने लगा.
मीनाक्षी मस्त होने लगी.
नीचे उसकी चुत पर लंड की गर्मी मजा दे रही थी और ऊपर चूचियों को चुसवाने का सुख मिल रहा था.
उसके मुँह से हल्के स्वर में कामुक आहें निकलने लगीं.
थोड़ी देर के बाद आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की चूत की फांकों में टच किया और चुत में लंड रगड़ने लगा.
लंड के स्पर्श से मीनाक्षी चुदास से भर उठी और अपनी कमर उठा उठा कर आलोक का लंड अपने चूत में लेने की कोशिश करने लगी.
जब मीनाक्षी से नहीं रहा गया तो वो बोली- अब क्यों तड़पाते हो, कब से आपका लंड अन्दर लेने की लिए मेरी चूत बेकरार है और आप अपना लंड सिर्फ मेरी चूत के ऊपर ऊपर ही रगड़ रहे हो. अब जल्दी करो और मुझको चोदो, फाड़ दो मेरी कुंवारी चूत को. आज मैं लड़की से औरत बनना चाहती हूँ, अब ज्यादा परेशन मत करो. जल्दी से मुझे चोदो और मेरी चूत की आग को बुझा दो.
मीनाक्षी की इतनी सेक्सी मिन्नत सुनते ही आलोक एक तकिया बेड से उठा कर मीनाक्षी के चूतड़ों के नीचे लगा दिया, जिससे मीनाक्षी की चुत और ऊपर को उठ गई और खुल गयी.
लंड ने भी चुत की फांकों में से काफी रस निकाल दिया था. चुत एकदम रसीली हुई पड़ी थी.
आलोक ने अपने लंड से एक जोरदार धक्का मीनाक्षी की चूत में दे मारा.
चिकनाई के कारण उसका पूरा लंड सरसराता हुआ मीनाक्षी की चूत में जड़ तक घुस गया.
मीनाक्षी के मुँह से चीख निकल गयी और उसकी चूत से खून निकलने लगा.
लेकिन उसे इस बात का पता ही नहीं चला कि खूनाखच्ची हो गई है.
उसे तो भयंकर वाला दर्द हो रहा था इसलिए मीनाक्षी ने आलोक को जोरों से जकड़ लिया और अपनी टांगें आलोक की कमर पर कस दीं.
लंड चुत की जड़ में ठोकने के बाद आलोक ने लंड की पोजीशन को स्थिर कर दिया और वो मीनाक्षी की एक चूची चूसते हुए एक हाथ से दूसरी चूची की घुंडी को मसलने लगा.
धीरे धीरे मीनाक्षी का दर्द कम होने लगा और उसकी गर्मी फिर से बढ़ने लगी.
कोई दो मिनट बाद मीनाक्षी खुद अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी.
आलोक ने भी अब अपनी कमर चलानी चालू कर दी और वो मीनाक्षी की चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा.
मीनाक्षी की चुत मोटे लंड के कारण काफी परपरा रही थी और इसी कारण से वो छटपटा रही थी. मगर उसे अपनी बहनों के जैसे चुत फड़वाने की बेचैनी थी इसलिए वो दांत भींच कर दर्द को सहन करने लगी.
हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी के अगले हिस्से में मीनाक्षी की आगे की चुदाई लिखूंगा … आप मेरी इस सेक्स कहानी के लिए अपने कमेंट्स करना न भूलें.
सोनाली की चुदाई के बाद हम लोग बहुत Sex Stories थक गए थे. इसलिए सभी सो गए. जब नींद खुली तो शाम के 4 बजने वाले थे. सबको भूख लगी थी. हमने रूम सर्विस को लंच आर्डर किया लंच आने के बाद हमने खाया. शाम के करीब 5.30 बजे बाहर निकलने का प्रोग्राम हुआ. जिस रिसॉर्ट में हम ठहरे थे वो समुद्र के किनारे पर था. लड़को ने शोर्ट्स और टी शर्ट और लड़कियों ने लॉन्ग स्कर्ट पहनी थी.
होटल से निकलने के समय मेरी नजर नीतू के पिछवाडे पर गई तो मुझे लगा कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी. खैर हम समुद्र के किनारे धीरे-धीरे टहलने लगे. ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी. कुछ देर टहलने के बाद हम एक जगह गोलाई में बैठ गए. ऑफ़ सीजन होने के कारण बीच पर ज्यादा भीड़ नहीं थी. रात होने लगी थी. मेरे दायें तरफ़ नीतू बैठी थी, बाएं सोनाली. हम सेक्स के बारे में बातें कर रहे थे.
पहले नीतू ने अपनी सेक्स की काल्पनिक इच्छा के बारे में बताया कि मेरी इच्छा है की 3 मर्द मुझे एक साथ चोदे. हमने कहा कि तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी आज रात को.
मनु ने कहा की मेरी इच्छा है कि मेरी सोनाली नए-नए मर्द से चुदवाये कभी मेरे सामने तो कभी अकेले में.
तो मैंने कहा कि मेरी भी इच्छा कुछ ऐसी ही है, एक लड़की को कम से कम दो मर्द मिलकर चोदें.
हम जहाँ बैठे थे वहाँ अंधकार था क्योंकि उस जगह की लाईट ख़राब थी. चुदाई की बातें सुनकर हम धीरे-धीरे उत्तेजित हो रहे थे. सोनाली ने कहा कि तुम तीनो मिलकर नीतू को चोदोगे तो मुझे क्या रिसॉर्ट के वेटर चोदेंगे?
सन्नी ने कहा की नहीं मेरी जान तुम्हारी भी चुदाई होगी, सारी रात पड़ी है और चुदाने के लिए तो केवल तुम दोनों ही हो.
उस समय शाम के 7.30 बजे थे अँधेरा छा गया था. मैंने अपना हाथ नीतू के पीठ पर रख दिया. नीतू ने मेरे हाथ को सामने ले जाकर अपनी चुचियों पर रख दिया और दबाने लगी. मैं धीरे-धीरे उसकी कठोर छोटी चूचियों को दबाने लगा. उधर सन्नी सोनाली को किस कर रहा था और अपना एक हाथ उसकी स्कर्ट के भीतर घुसा कर न जाने क्या कर रहा था. मनु इधर- उधर नजर रख रहा था कि कोई आ न जाए.
समुद्र के किनारे खुले बीच पर इस तरह की हरकतें करने का ये मेरा पहला मौका था. मैंने नीतू के टॉप के भीतर हाथ घुसाकर उसकी ब्रा को ऊपर कर नंगी चुचियों पर हाथ फिराने लगा. उसके नीपल खड़े हो गए थे. मैं उन्हें चुटकियों से मसलने लगा. नीतू ने अपना मुंह मेरी तरफ़ बढ़ा दिया. मैं उसके होठों को चूसने लगा. मैंने उसके टॉप को और ऊँचा उठा दिया और उसकी निप्प्लें चूसने लगा बारी-बारी से.
फ़िर मैंने एक हाथ उसके स्कर्ट के भीतर घुसाया. मेरा अनुमान सच था! उसने भीतर पेंटी नहीं पहनी थी. मैं अपना हाथ उसके बुर पर फिराने लगा. बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. मैंने अपनी एक अंगुली उसकी बुर में घुसा दी उसके मुंह से आह… निकली. भीतर पूरा गर्म था. मैं उसे अंगुली से चोदने लगा. एक हाथ उसकी चुचियों को दबा रहा था.
नीतू गर्म होने पर चिल्लाने लगती है. सन्नी ने सोनाली को छोड़कर नीतू का होठ अपने होठों में दबा लिया और चूसने लगा. हम सब धीरे-धीरे उत्तेजना के शिखर पर पहुँच रहे थे. नीतू की बुर में मैंने अब दो अंगुलियाँ घुसा दी थी. उसने मेरे शोर्टस के भीतर हाथ डालकर मेरा तना हुआ करीब 5” का लंड पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी. नीतू ने मेरे कान में कहा की अब मेरी बुर को भी थोड़ा चूसो तुम बहुत अच्छा चूसते हो. मैंने अपनी अँगुलियों को बहर निकालकर अपना मुंह उसकी स्कर्ट में घुसा दिया. और अपना मुंह उसकी बुर पर लगा दिया. बुर के ऊपर जीभ फिराने लगा. जीभ को सारी बुर पर फिराने के बाद उसकी बु्र के मुहाने पर लेकर जाता घुसाने की एक्टिंग करता फ़िर हटा लेता. नीतू ने आख़िर में उत्तेजित होकर मेरा सर पकड़कर बुर के मुहाने पर टिका दिया.
पहले अपने मुंह से मैंने उसकी बुर की चोंच को पकड़ कर चूसने लगा. लड़कियों का सबसे संवेदनशील पार्ट येही होता है. चोंच को रगडो या चुसो तो उनकी उत्तेजना चरमोत्कर्ष पर पंहुच जाती हैं. फ़िर मैं अपनी जीभ उसकी बुर के भीतर घुसाकर चूसने लगा नीतू ने मेरा सर पकड़कर जोर से हिलाकर जीभ से ही चोदने का इशारा किया. मैं जोर-जोर से जीभ बाहर-भीतर करने लगा. धीरे-धीरे उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई. मैंने अपना सर उसकी स्कर्ट से बाहर निकल लिया.
अब सन्नी ने कहा कि राजू इसे यहीं पर चोदते हैं. मैंने कहा कि नहीं रूम के भीतर चलते हैं वहीँ पर इसे बारी-बारी से चोदेंगे. सोनाली ने फ़िर कहा कि मुझे मत भूल जाना. उठकर हमने अपने कपड़े ठीक किए. रिसॉर्ट के भीतर आकर हमने बेल बॉय को बुलाकर डिनर के लिए मना कर दिया और रूम में घुस गए. घुसने के साथ ही नीतू ने अपना टॉप, ब्रा और स्कर्ट उतार कर फ़ेंक दिया और पूरी तरह से नंगी होकर बेड पर टाँगे फैलाकर लेट गई. पहले सन्नी उसे चोदने के लिए गया. कंडोम निकालने लगा तो नीतू ने कहा की आज मुझे बिना कंडोम के सब चोदो मेरे पर्स में अनवांटेड 72 है उसे ले लूंगी. हम लोगों ने भी अपने कपड़े उतार दिए. सन्नी ने पूछा कि मैं नीतू को देर तक चोदना चाहता हूँ. तो मैंने कहा कि चोदो और झड़ने के पहले तुम हट जाना फ़िर उसे मैं या मनु चोदेंगे ऐसे ही बदल- बदल कर थोडी-थोडी देर तक चोदेंगे. ऐसा करने से हम नीतू को बहुत देर तक चोद सकेंगे. सबने कहा कि ठीक है. नीतू ने कहा कि एक मर्द मुझे चोदेगा उस समय दो मर्द मेरे बगल में रहेंगे . मेरे होंठ चूसेंगे चुचियों के साथ खेलेंगे. कभी-कभी- अपने लंड को मेरे मुंह में डालेंगे. आज मेरा सपना पुरा होने वाला है
सोनाली ये सब सुन रही थी. मैंने कहा कि जब तक नीतू की चुदाई होगी तब तक सोनाली को कोई नहीं चोदेगा. नीतू के बाद सोनाली की चुदाई होगी.
सन्नी ने अपना लंड एक ही बार में नीतू के बुर में घुसा दिया. नीतू के दायीं तरफ़ मैं और बांयी तरफ़ मनु था. सोनाली मेरी बगल में थी. उसने मेरे कान में कहा कि नीतू को चोदो लेकिन मेरी बुर में भी अंगुली डालना और चूचियाँदबाना. सन्नी एक बार लंड को पूरा बाहर निकालकर एक ही धक्के में जोर से घुसा रहा था. मनु नीतू के होठ चूस रहा था, मेरा एक हाथ नीतू की चूची पर था और दूसरा सोनाली के बुर में. अब सन्नी उसे जोर-जोर से चोद रहा था.
मैंने उसे हटने को कहा और मनु को इशारा किया. मनु ने अपना लंड उसके बुर में डाला और जोर-जोर से चोदने लगा. नीतू के मुंह से आवाजें निकल रही थी…आह…आह…ओह…ओह…और जोर से… हे भगवान…चोदो… राजू…मेरी चुचियों को…और…जोर…से दबाव…सन्नी… अपना लंड मेरे मुंह में डालो…
फ़िर मनु भी हट गया और मेरी बारी आई. मैंने उसे डौगी स्टाइल में उल्टा किया यानि घुटनों पर और पीछे से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया. सामने सन्नी चला गया और अपना लंड नीतू के मुंह में डाल दिया. मैं जितने जोर से धक्का मारता नीतू उतनी जोर से सन्नी के लंड को मुंह में ले लेती. सोनाली ने नीतू की चुदाई देखकर कहा कि क्या चुद रही है नीतू की बुर? मेरी भी चुदाने के लिए बेकरार है.
फ़िर उल्टा बेड पर लेट गया और नीतू मुझे ऊपर से आकर चोदने लगी. उसकी आँखें बंद थी. चेहरे पर जैसे भाव थे कि चोदो मुझे…और चोदो…चोदते ही रहो…फ़िर नीतू ने कहा कि मुझे थोड़ा रेस्ट दो और सोनाली को चोदो.
मैंने नजर घुमाई तो देखा सोनाली की चुदाई चालू हो गई थी सन्नी उसकी चिकनी बुर के धुर्रे उड़ा रहा था. पास में लेटा मनु बोल रहा था कि चोद इसे, साली का चुदाई से पेट ही नहीं भरता. पता नहीं कितनी जन्मो से नहीं चुदाई है.
मैंने नीतू से पूछा कि अनवांटेड 72 कितना है तुम्हारे पास तो नीतू ने कहा कि है तो एक ही . तुम लोग ऐसा करो कि सोनाली को चोद कर झड़ने के समय मेरी बुर में झडो, मैं भी सोनाली की बगल में लेट जाती हूँ.
सन्नी अब झड़ने वाला था. सोनाली अपनी दोनों टांगे फैलाकर चुदवा रही थी. सन्नी ने उसके ऊपर से हटकर अपना लंड नीतू के बुर में डाला और 8-10 धक्के लगाकर झड़ गया.
उस समय सोनाली को मनु चोद रहा था. सोनाली की आँखें बंद थीं. केवल बुदबुदा रही थी…चोदो…और जोर से…मनु तुम्हारा लंड थोड़ा छोटा है…इसीलिए मैं दूसरो से चुदवाना चाहती हूँ…शादी से पहले मुझे मुहल्ले के तीन लड़के चोदते थे…उसी समय से मैं पक्की चुदक्कड हूँ… राजू का लंड लंबा है…उससे ज्यादा मजा आताहै… चोदते रहो…
मनु भी हट गया और नीतू की बुर में जाकर झडा.
उसके बाद मैंने सोनाली के बुर को उसी की पेंटी से पोंछकर अपना लंड घुसा दिया. सोनाली ने कहा कि हाँ…ये लंड है मेरी पसंद का…मैंने उसकी दोनों टांगो को उठाकर अपने कंधो पर रखी और जोर से धक्के लगाने लगा. सोनाली उत्तेजना से चिल्लाने लगी…चोदो…मुझे…बुर को फाड़ दो…तुमसे चुदवाने के बाद मुझे अब किसी से चुदवाने की ख्वाहिश नहीं है…
मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था…मेरा भी झड़ने का समय आ गया था. सोनाली के ऊपर से हट कर डस्टबिन यानी नीतू के बुर में घुसा दिया और -7 जोर से धक्का लगाकर झड़ गया. फ़िर बगल में लेटकर लम्बी साँसे लेने लगा. नीतू और सोनाली के चेहरों पर असीम तृप्ति का भाव था. ये सब करीब 4 घंटे तक चला था.
अंततः हम सब थक गए थे. हमलोग सो गए और अगले दिन सुबह अपने-अपने घर चले आए. बहुत मजा आया था उस दिन.
कुछ दिन के बाद मनु ने एक नया अपना अनुभव बताया उसे मैं अगली कहानी में लिखूंगा.
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पल्लव जानू हाय ! मेरी Antarvasna भावना जैसी सभी चुद्दकड़ भाभियों को मेरे लण्ड का सलाम !दोस्तो ! मैं अपनी एक हकीकत बताता हूँ !
मेरी एक विधवा भाभी भावना है जो दो बच्चों की माँ होने के बावजूद अपने पति के मरने के तीन साल बाद मुझे सेक्सी निगाहों से देखती थी और हुआ ऐसा कि उसका टैस्ट लेने के ख्याल से एक रात मैं उसके कमरे में गया जब सारे लोग सो गए थे। वो जाग रही थी। बातों ही बातों में मैंने उसे अपना लण्ड चुसवा दिया। वह छिणाल भी मेरा लण्ड चूस कर गरम हो गई।
फ़िर क्या था, अगले दिन से तो वो मुझे ऐसे देखने लगी जैसे मेरे लण्ड से अपना मुंह, गाण्ड और बुर चुदवा कर मेरे लण्ड को भी खा जाएगी। वो मुझ से रात में मिलने की योजना बनाने लगी।
एक रात उस छिणाल ने अपना दरवाजा खुला रखा और पेट में दर्द के बहने मुझे बुलाया। मैं उसके कमरे में गया तो देखा कि नीचे बिछावन तैयार है। मैंने पूछा कि कहाँ है दर्द तो बोली कि लेट कर दिखाती हूँ पर पहले दरवाजा तो बंद कर दूँ कोई आ जायेगा। उसने दरवाजा बंद किया और लेट कर मुझे बुलाया।
जब मैं नजदीक गया तो उसने मुझे पकड़ लिया और कहा कि देवरजी कल रात से से आप मेरे भरतार (पति ) हो गए हैं। जो आपके भइया बाकी छोड़ गए हैं उसे आप पूरा करो। अभी मेरी उमर तो 32 ही है। भला ये भी कोई बिना चुदवाए रहने की उमर है। आपने कल अपना लंड चुसवा कर मुझे गर्म कर दिया है। अब तो मुझे अपना बुर चोदवाना ही होगा। तुम नहीं तो कोई और सही। पर इससे तुझे गुस्सा होगा सो तुम ही मुझे चोदते रहो अब सारी उमर। जब जी चाहे।
उसकी ये सारी बातें सुन कर मेरे लंड में भी ताव आ गया था। वह तन कर रोड जैसा हो गया था। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने कहा- तुम भी खोल दो ना। और मेरे सारे कपड़े खोल दिए। मैंने कहा कि भाभी जान आज मैं तेरे भोंसडे जैसी बुर को चोद कर और भोंसडा बनाऊंगा पर पहले तेरे मुंह में पेलूँगा फ़िर गांड मरूँगा, तब तेरी बुर को।
उसने कहा कि मालिक जो करना है करना पर पहले एक बार इसे चोद दो। देखो ना साली तेरे लंड को देख कर कैसे पानी छोड़ रही है। अब आ जाओ ना। यह कह कर मुझे अपने ऊपर ले लिया। और मेरे लंड को अपनी बुर में घुसाने लगी और से धक्का देने लगी।
साली के बुर में मेरे लंड को घुसने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि 3 की माँ जो थी। पर भोंसड़ी की एक्सपर्ट थी। लंड के भीतर घुसते ही पैर पर पैर चढा लिया। अब उसकी बुर के सिकुड़ने के कारण उसे और मुझे मज़ा आने लगा।
वो पागलों की तरह बकने लगी- आ… ओह। मेरे राजा। मेरे प्यारे देवर राजा। आज तुम मेरे भरतार बने हो। जोर जोर से चोदो। साली मेरी बुर बहुत दिनों से प्यासी है। आह। ओह। ओह मेरे मालिक घुसा दो अपना सारा लंड इसमें। इसका कचूमर निकल दो। आह जरा टॉर्च से देखो इस बुर को। कैसे टपटप तेरे लंड को निगल रही है।
मैंने भी देखा मेरा लंड तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था। मैंने कहा कि साली आज से तुम मेरी भाभी तो रही नहीं, तुझे कुतिया बनाकर चोदुंगा।
उसने कहा- हाँ, मुझे कुतिया बना दो। जैसे जैसे चाहो तुम इस हरामजादी बुर को चोदो। तेरे भाई ने ऐसे कभी नहीं चोदा। वो तो साला फुच फुच कर चोदता था मुझे। सिर्फ़ बच्चा पैदा करना जानता था। ओह। आह। आह। मज़ा। मज़ा आ रहा है। राजा मैं तो गई…एई।
मैंने कहा कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। तो उसने मुझसे 2-4 तेज़ झटके लगवाए और झट से मेरा लंड निकाल कर मुंह में ले लिया और कहा कि देवर जी आप अब मेरे मुंह की चुदाई करें, और टपटप मेरा लंड खाने लगी क्योकि वह जानती थी कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। वह मेरे लंड से निकले धात (वीर्य) को पीकर उसका भी स्वाद लेना चाहती थी।
मैंने कहा ओह। मेरी प्यारी चुदक्कड़ भाभी मैं झड़ने वाला हूँ तो उसने कहा कि राजा अपना धात बर्बाद मत करना। इसे मेरे मुंह में ही रहने दो। मैं अपने यार का रसपान करना चाहती हूँ।
इतने में मेरे लंड ने उजला गाढा द्रव छोड़ दिया। इसे मेरी छिनाल भावना भाभी ने अन्तिम बूंद तक पी लिया। और कहा कि देवरजी अब तो तुम मेरे भरतार (पति) हो गए हो। जब मैं बुलाऊँ आ जाना। मैं खांस कर तुझे इशारा करुँगी। आज तो तुमने मुझे धन्य कर दिया।
तो दोस्तों, भाभियों, कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी। इसके बाद मैंने फ़िर नए नए स्टाइल से कैसे कैसे चोदा यह बताने कि उत्सुकता है मुझ में पर सोचता हूँ कि पता नहीं कैसी लगी मेरी यह कहानी। सो मुझे उत्साहित करने के लिए मुझे मेल करें ! Antarvasna
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