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अहमदाबाद एक बहुत बड़ा Antarvasna Stories शहर है, साबरमती के कारण उसकी सुन्दरता और बढ़ जाती है। मैं बिजनेस के सिलसिले में यहा आया था। मेरे बिजनेस पार्टनर मोहित के यहां मैं रुका हुआ था। उनके घर में मियां बीवी के अलावा तीसरा कोई भी नहीं था। शाम को आठ बजे के बाद वह घर आ जाता था। फिर मोहित और उसकी पत्नी काफ़ी देर तक दोनों व्हिस्की पीते थे। साथ में अधिकतर वो कवाब और मुर्गा खाते थे। तो मोहित ने मुझे भी बुला लिया। हम तीनों लगभग एक ही उमर के हैं… बातों बातों में खूब हंसी ठिठोली होती थी… वेज और नॉन वेज चुटकुले भी खूब सुनाते थे। अन्त में उन दोनों की हालत यह हो जाती थी कि वे बड़ी मुश्किल से बिस्तर तक जा पाते थे।
मैंने आज दोनों की मदद करके उन्हें सुला दिया, पर कोमल को ले जाते समय उसकी चूंचियों और चूतड़ों पर मेरे हाथ पड़ ही गये। बिस्तर पर गिरते ही उसका पेटीकोट भी थोड़ा ऊपर उठ गया था। मन ललचा गया। मैंने सावधानी से उनका पेटीकोट उठा कर उनकी चूत के दर्शन कर लिये। क्लीन शेव चिकनी चूत थी… मैंने इधर उधर देखा और फिर पेटीकोट बिल्कुल ऊपर उठा दिया। मेरा लण्ड उसे देख कर सलामी देने लगा। तन कर खड़ा हो गया। दिल में शैतान उतर आया।
मैंने धीरे से उसके ब्लाऊज के हुक खोल दिये, नंगी चूंचियां चमकती हुई भरी हुई गोल गोल और उस पर से उसके भूरे भूरे निपल… मेरे मुख से आह निकल गई। हिम्मत करके मैंने उसकी एक निपल मुख में ले ली और थोड़ा सा चूस कर छोड़ दिया। तभी मोहित ने करवट ली।
मैं घबरा कर दूर हट गया। पर वो गहरे नशे में था। मैंने लाईट बंद की और कमरे से बाहर आ गया और अपने कमरे में आ गया। मेरे लण्ड का बुरा हाल था। मैं अपने लण्ड को मसले जा रहा था।
अन्त तो मुठ मार कर हुआ… अन्दर से सारा वीर्य बाहर आ गया तो शान्ति मिली। पर रात भर मै कोमल के बारे में ही सोचता रहा। उनका मद भरा जिस्म मेरी आंखो के सामने घूमता रहा।
सवेरे मोहित को बाहर जाने की तैयारी देख कर मेरा मन खुश हो गया। उसने बताया कि वो दो तीन दिन के लिये सूरत जा रहा है और घर पर उसकी पत्नी का और घर का ध्यान रखना है।
उसे मैं स्टेशन छोड़ने गया फिर अपने काम से शाम तक अपना बिजनेस का काम करता रहा।
शाम को लौटते समय मुझे ध्यान आया कि शाम को उनकी आदत कवाब और मुर्गा खाने की है सो मैंने रास्ते से ये सब पैक करा लिया।
घर पहुंच कर मैंने कोमल को वो सब थमा दिया तो वो बहुत हंसी,”अरे ये तो मै मोहित के साथ ही लेती हूं, आप तो यूं ही ले आये !”
मैं झेंप सा गया। पर उसने कहा कि अगर मुझे ये अच्छा लगता है तो वो साथ दे देगी। मैं नहा धो कर फ़्रेश हो गया, कोमल भी नहा ली और फ़्रेश हो गई।
रात को वो मेरे लिये व्हिस्की ले आई। मैं आज भी उसे पिला पिला कर मदहोश कर देना चाहता था। वही हुआ भी, मैं तो केवल दो पेग ही पीता था पर कोमल ने तो रोज़ की तरह खूब पी ली थी।
रात गहराती गई… नशा भी गहराता गया… और आखिर वो घड़ी आ ही गई जिसका मुझे इन्तजार था। उसके हाथ पांव ढीले पड़ने लगे। वो सोफ़े पर ढुलकने लगी।
जाने कब उसके ब्लाऊज का एक हुक खुल गया था और उसके सेक्सी उरोज की झलक नजर आने लगी थी। मैंने सोफ़े पर बैठते हुये उसके शरीर को सम्हाला और उसे आवाज दी, साथ में उसके ब्लाऊज का दूसरा हुक भी खोल दिया।
“कोमल जी… चलो बिस्तर पर लेटा दूँ …” पर उसकी आंखें भारी हो कर बंद हो रही थी।
“वि…वि… जय … मुझे उठा लो… और वहां… ले चलो… !” मौका था, उसका मैंने फ़ायदा उठा लिया। मैंने उसके स्तन धीरे से सहला दिये… और चूतड़ो को दबा कर उसे उठा लिया… मैंने अपना मुख नीचे करके उसकी नाभि को चूम लिया। उसके ब्लाऊज का अन्तिम हुक भी मैंने खोल दिया था।
उसकी मस्त चूंचियों पर से परदा हट चुका था। उसे गहरे नशे में देख कर मैंने उसकी एक चूंची मुख में भर ली और चूसने लगा। शायद उसे मजा आया होगा। उसकी भारी आंखें एक बार खुली फिर वापस बन्द हो गई।
मैंने उसे बिस्तर पर उसका पेटीकोट पूरा ऊँचा करके लेटा दिया। उसे आराम मिला और उसके मुख से खर्राटे निकलने लगे। मेरा लण्ड बेहद तन्ना रहा था और बेहाल हो रहा था।
मैंने अपनी पैण्ट खोल ली और उतार कर एक तरफ़ रख दिया। उसकी चूत गीली थी । मैंने उसका पेटीकोट पूरा उतार दिया।
इतने में वो बड़बड़ाई, “मुझे सू सू आ रही है… मोहित … वहाँ ले चलो…” मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और बाथरूम में ले गया। पर बाथरूम में पहुंचते ही मेरी बाहों में उसने अपनी धार छोड़ दी।
“आह… आह … मोहित… अब आराम हो गया !” उसने ढेर सारी पेशाब निकाल दी फिर उसकी बेचैनी दूर हो गई। मेरी बांहो में ही वो सो गई।
मेरी टांगें उसके मूत्र से भीग गई थी। उसे फिर से बिस्तर पर लेटा दिया और मैं अपने चूतड़ों से लेकर नीचे तक पूरा नहा लिया और उसकी तौलिया से साफ़ कर लिया।
वो नंगी ही दूसरी करवट ले कर सो गई। मेरी हालत बुरी थी, लण्ड उबल रहा था पर मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता था।
फिर मैंने एक हाथ से अपना लण्ड पर मुठ मारने लगा और दूसरे हाथ से कभी उसकी चूत मसलता और कभी उसकी चूंचियाँ … तभी वो कहने लगी,”मोहित आ जाओ ना… प्यार करो ना… !” वो नशे में मुझे अपना पति समझ रही थी।
मैंने सोचा कि इसे तो भरपूर नशा है इसे क्या पता चलेगा कि कौन चोद गया। मैं जल्दी से उसकी बगल में लेट गया और कोमल नशे में मुझसे लिपट पड़ी… मैं उसे चूमने लगा… मेरा लण्ड तड़प उठा।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया और लण्ड को उसकी चूत पर दबा दिया। लण्ड भीतर घुस गया… और मैं धक्के मारने लगा। उसे भी नशे में चुदाई बहुत प्यारी लग रही थी। उसके मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी थी। उसके चूतड़ अब नीचे से उछलने लगे थे।
मेरी हालत तो पहले ही खराब थी सो कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकल गया। मेरा लण्ड बाहर आ गया था।
वो नशे में अभी भी अपनी चूत को उछाल रही थी। मैंने अपनी तीनों अंगुलियाँ उसकी चूत में घुसेड़ दी। कुछ समय बाद वो झड़ गई । नशे और थकान में उसने करवट ली और गहरी नींद में चली गई।
मैंने अपने लण्ड को साफ़ किया और कोमल को ठीक से कपड़े पहना दिये और अपने कमरे में चला आया। मेरा काम सफ़ल हो गया था। आज कोमल को चोदने की मेरी इच्छा भी पूरी हो गई थी।
सवेरे सब कुछ सामान्य था, कोमल की वही चिरपरिचित मुस्कान, वही बातचीत…
मैं निश्चिन्त हो गया कि रात गई बात गई … उसे कुछ याद नहीं था। मैंने नाश्ता किया और उसने मुझे फिर याद दिला दिया कि शाम को आओ तो कवाब और मुर्गा के साथ काजू भी लेते आना।
मुझे थोड़ी हैरत हुई फिर सोचा कि शायद मेरे लिये ही कह रही है।
शाम को फिर हम दोनों के बीच व्हिस्की आ गई… पर आज कोमल ने कहा कि व्हिस्की नहीं पियेगी पर मुझे अपने हाथों से पिलायेगी।
उसका कहना था कि वो रोज व्हिस्की नहीं पीती है, फिर कल मोहित के आने पर उसका साथ तो देना ही होगा। मुझे आज मेरी स्कीम फ़ैल होती दिखाई दी।
फिर ये सोच कर चुप रह गया कि साकी के हाथ से पीने का लुफ़्त भी उठाया जाये।
उसने मेरा एक पेग भरा और कहा कि “पास आओ… आज मैं आपको पिलाऊंगी…” और अपने हाथों से मुझे एक सिप दिया। कोमल उठ कर किचन में चली आई।
मैंने सोचा कि अधिक ना हो जाये तो फिर से मैंने उसे बिन में डाल दिया।
अब आलम यह था कि वो बार बार मुझे पिलाये और मैं उसे किसी ना किसी बहाने इधर उधर डाल दूं। मुझे अब ध्यान आया कि इसकी तरफ़ से तो मैं पांच पेग पी चुका हूँ सो मैंने भी बहकने का नाटक आरम्भ कर दिया।
अब मुझे शक हुआ कि वो मुझे जानबूझ कर के पिला रही थी … शायद उसे कल रात की घटना याद थी… मुझे लगा कि आज वही गेम मेरे साथ खेलना चाह रही है …
सो मैंने अब सोफ़े पर लुढ़कने का नाटक किया। मेरा शक सही था। उसने मुझे दो तीन बार हिलाया और पूछा। मैंने नशे में मदहोश होने का नाटक किया और कहा,”मुझे… हिच्च… मेरे कमरे तक … हिच्च … ले चलो…!” उसने मेरी एक बांह अपने कंधे पर डाली और मुझे उठाने के जोर लगाया।
मैं खुद ही उठ गया और जानबूझ कर के उसकी चूंचियों पर हाथ लगा दिया। मैं बिस्तर के पास आते ही ही लेट गया।
कोमल ने तुरन्त मेरे पजामे का नाड़ा खींच कर खोल दिया। मुझे आनन्द आ गया…
मैंने कल जो किया था वो कोमल आज कर रही थी… मेरा पजामा उसने नीचे खींच लिया।
मैं नंगा हो गया था। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था। उसने मुझे आवाज दी… और मुझे हिलाया, मै बेसुध की भांति पड़ा रहा।
तब उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसका सुपाड़ा खींच कर बाहर कर लिया। मैं उसे बराबर उसे आंखें खोल कर चुपके से देख रहा था। बड़ी ललचाई नजर से उसने हौले से मुठ मारा और सुपाड़ा मुख में ले लिया। एक अद्भुत आनन्द … शरीर में बचैनी भरने लगी… वो मेरी गोलियों से भी खेलने लगी।
उसने मेरा लण्ड चूस कर फिर उसे अपनी चूंचियों से रगड़ने लगी। मैंने अपने आप को बहुत कंट्रोल में किया हुआ था कि कहीं वीर्य ना छूट जाये। अब उसने मेरे लण्ड पर थूक लगाया और मेरे ऊपर आकर पेटीकोट उठा कर अपनी चूतड़ों को खोल कर गाण्ड का छेद को लण्ड पर रख दिया।
उसने लण्ड पर जोर लगाया तो लण्ड सट से छेद में उतर गया। मैंने नशे में आंखे खोलने का प्रयत्न किया।
“कोमल जी… ये … आह… ये क्या कर रही हैं आप…?”
कोमल एक बार तो घबरा गई… फिर दूसरे क्षण लण्ड को गाण्ड में पा कर शरमा गई।
“विजय… हाय मैं तो मर गई… आंखे बंद कर लो ना…” लण्ड और भीतर उतर गया।
मैंने भी अपने लण्ड का जोर ऊपर लगा दिया।
“कोमल जी… … आप बहुत अच्छी हैं…” लण्ड गाण्ड में पूरा घुस चुका था।
वो इसी स्थिति में शरमा कर मुझसे लिपट गई।
“विजय … अच्छे तो आप है… हाय… मुझे ऐसे ना देखो… अब मै क्या करूं…!”
“मैं बताऊँ … अब शरम छोड़ो और जी भर कर चुद लो … शुरूआत आपने की है… वीर्य मुझे निकालने दो !”
“हाय जी… ऐसे ना कहो… आह सच है… चोद दो साजन मेरे…” कोमल मुझसे लिपटती गई। उसने अब सीधे बैठ कर ऊपर नीचे अपने चूतड़ों को धस्काते हुये गांड में लण्ड लेने लगी।
कुछ ही देर में उसने सिसकते हुये कहा,”अब मुझे नीचे दबा कर कल की तरह चोद दो…!” मुझे एक झटका सा लगा।
“तो कल का आपको सब याद है… आप बहुत शैतान हैं … मुझे तड़पा तड़पा कर मजा लिया है आपने ?”
कोमल हंस पड़ी। अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाते हुए बोली,”लो जी अब तो लण्ड फ़ंसा दो अपना और चोद दो मुझे… मुझे तो परसों ही मालूम हो गया था जब आपने मेरी चूत की पप्पी ली थी… मेरी चूंची सहलाई थी…आज मन की निकाल लो मेरे सजना !”
“धत्त… साली… मुझे चूतिया बना दिया …” और लण्ड एक ही झटके में पूरा अन्दर तक पहुंचा दिया। मेरे लण्ड को सुकून मिल गया।
उसकी गरम गरम चूत मुझे बहुत भा रही थी। दोनों ने मस्ती से चुदाई का मजा लेना आरम्भ कर दिया… दोनों की कमर एक साथ चल रही थी। शरीर में मीठी सी कसक बढ़ने लगी थी।
कोमल के बोबे कड़क हो उठे थे। चूचक कड़े हो कर इठला रहे थे… बार बार मेरे मुख में चूचक लण्ड की तरह से घुस रहे थे। मेरी जीभ उसे जोर से रगड़ मार रही थी। धक्कों में तेजी आ गई थी। कोमल तो शादी शुदा और चुदी चुदाई थी… उसे बहुत मजा आ रहा था। शायद नये लण्ड के कारण।
मुझे तो बस हर धक्के में ऐसा ही लगता था कि अब झड़ा… और उसकी चुदाई चूत ने पूरी कर ली… एक दो झटकों की मार से वो चित्त हो गई और उसकी चूत ने मुह फ़ाड़ कर पानी उगल दिया।
वो मुझसे बेतहाशा लिपटने लगी। उसकी चूत में लहरें उठने लगी … तभी इसी सुहाने आनन्द को उठाते हुये मेरा वीर्य भी उसकी चूत में भरने लगा…।
मैं अपना लण्ड दबा दबा कर अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में निकाल रहा था। कोमल भी चारों खाने पसरी हुई थी… मैं भी उसके ऊपर उसे चूमता हुया लिपट गया। वो मुझे अब अलग करने लिये झटके मार रही थी… मैं पूरा झड़ने के बाद उठ गया।
“तो आपको नशा ही नहीं हुआ था… वैसे ही जैसे कल मुझे नहीं हुआ था…” और वो खिलखिला कर हंस पड़ी।
“हटो कोमल जी… आप ने तो मुझे बेवकूफ़ बना ही दिया !” पर मुझे तो कल भी चूत मिल गई थी और आज भी… भले ही बेवकूफ़ बन कर मिली।
“विजय… कल तो मोहित आ ही जायेंगे… अब देर ना करो … फ़टाफ़ट अपनी इच्छायें पूरी कर लें !”
“अरे तो फिर मोहित से कैसे चुदवाओगी?”
“वो मुझे चोदता ही कब है… बस दारू पिया और लुढ़क जाता है…!” उसके मन का दर्द उभर आया। मुझे इससे कोई मतलब नहीं था कि उसका पति उसके साथ क्या करता है… बस मेरा लण्ड खड़ा था और उसे वही एक रसीला खड्डा नजर आ रहा था। मन कर रहा था कि उसे चोद चोद कर सारी खुमारी एक बार में ही उतार लूँ।
अभी तो मुझे अर्जुन की तरह मछली की आंख ही नजर आ रही थी… हम दोनों एक दूसरे को चूमते हुये फिर से अपना यौवन रस निकालने की तैयारी में लग गये … Antarvasna Stories
मैं कोटा, राजस्थान का रहने वाला हूँ। मैं Hindi Porn Stories कोटा में अकेला रहता हूँ।मैं एक भाभी की चुदाई की हकीकत बात बता रहा हूँ।मेरा लंड ६ इन्च का है। मेरा चुदाई करने मन करता है।
चूंकि मैं कोटा में अकेला रहता हूँ इसलिए मैंने भानु भाभी के यहाँ खाने-रहने का इंतजाम कर लिया था।नेहा भाभी ३३ साल की है, साली बहुत ही सेक्सी है। उसके बोबे बहुत मोटे हैं।
उसे देख मेरा लंड एकदम खड़ा हो जाता था। तो मैं मुठ मार कर अपने लण्ड को शान्त कर लेता था।
उसका पति ५५ साल का था और हमेशा बाहर काम से जाता रहता था। मैं जब घर आता ऑफिस से और तब वो अकेली होती तो मेरे साथ खुल कर बातें करती।
एक दिन मैंने पूछा- आपके पति आपसे कितना प्यार करते हैं?
तो वो रोने लगी और मेरे सीने से लिपट गई। मैं उसे शांत करने लगा। मेरा हाथ उसके बोबे पर चला गया। वो कुछ बोली नहीं !
मेरी हिम्मत बढ़ गई।
उस दिन मेरे दिल के अरमान पूरे होते लगे।
मैं धीरे-धीरे उसके बोबे दबाने लगा, वो एकदम मस्त हो गई और बोली- देखो, मैं तुम्हें अपना सब कुछ दूंगी लेकिन एक वादा करना पड़ेगा !
क्या?
जब तक यहाँ रहोगे, तब तक कम से कम दिन एक बार मेरी चुदाई करने पड़ेगी !
मैंने हामी भर दी !
फ़िर उसने मेरे लंड पे हाथ रख दिया, पैंट की जिप खोल दी और अन्दर हाथ डाल कर मेरे लंड को आजाद कर दिया।
मैं उसके बोबे चूसने लगा।
वो एकदम गर्म हो गई और बोली- यार आज अभी पहले तेरा मोटा लंड मेरी चूत डाल दे, फ़िर दुबारा आराम से चोदना !
हम दोनों पूरे नंगे हो कर बेड पर चले गए।
उसने अपनी टांगें फ़ैला दी, मैंने उसके ऊपर आकर उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया और जोर से धक्का दिया, मेरा पूरा लण्ड अंदर चला गया।
फ़िर मैं धक्के मारने लगा। तब भाभी ने एक आह सी भरी और बोली- आह ! क्या शान्ति मिली ! तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर। यह अच्छा हुआ, मुझे बहुत दिन से इच्छा थी कि किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई। नहीं तो मेरी इच्छा पूरी नहीं होती।
अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उसने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद उसके पति का लण्ड छोटा होगा, उसे कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उसकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा।
भाभी मेरी चुदाई से मस्त होकर बड़बड़ा रही थी,” हाय मेरे राजा ! मेरे राजा और पेलो, और पेलो अपनी भाभी की चूत में अपना मोटा लण्ड, तुम्हारी भाभी की चूत तुम्हारा लण्ड खाकर निहाल हो रही है। हाय ! लम्बे और मोटे लण्ड की चुदाई का मज़ा कुछ और ही होता है, बस मज़ा आ गया, हां ! हां ! तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत में अपना लण्ड आने दो। मेरी चूत की चिन्ता मत करो, फ़ट जाने दो इसको आज ! इसको भी बहुत दिनों से शौक था मोटा और लम्बा लण्ड खाने का। इसको और जोर से खिलाओ अपना मोटा और लम्बा लण्ड।”
हम लोग चुदाई का मज़ा लेते रहे और मेरी चुदाई से भाभी दो बार झड़ चुकी थी। फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के अन्दर तक डाल कर उसके अन्दर झड़ गया। फ़िर मैं उसके ऊपर ही सो गया। कुछ देर बाद भाभी ने बेड से उठ कर अपने कपड़े पहन लिए, मुझे गाल पे किस दिया और अपने चली गई।
दोस्तो आपको मेरी कहानी कैसे लगी प्लीज़ मुझे मेल करें मैं आपको बताऊँगा कि कैसे मैने दूसरी बार भाभी की चुदाई की। Hindi Porn Stories
कई सालों के बाद मैं Hindi Porn Stories अपने मामा के पास गया था। मेरे मामा एक दबंग ठेकेदार थे और पूरे इलाके में उनकी बहुत धाक थी, 50 साल पार करने के बाद, भी उनके पहलवान शरीर पर बुढ़ापे के कोई लक्ष्ण नहीं थे। मामा की हवेली की शान देखते ही बनती थी। इकलौता भांजा होने की वजह से मामा मुझे प्यार भी बहुत करते थे।
शहर से पहली बार मैं गाँव की गया था। मेरे लिए एक अलग कमरा और नौकर था, मगर यह नहीं मालूम था कि एक नौकरानी भी रख रखी थी मेरे लिए। शाम होते ही नौकरानी मेरे लिए चाय और नाश्ता लेकर कमरे में पहुँच गई।
मैं उसी समय नहा कर निकला था और तौलिये में लिपटा मेरा गठीला बदन देखने लायक था। होता क्यों नहीं, जिम जा कर और कसरत करके मैंने अपनी बदन को गठीला और मजबूत बना रखा था।
तौलिया लपेट कर मैं आईने में बाल संवारता जा रहा थी कि मेरी नजर अचानक अपने पीछे किसी पर पड़ी। चोली और लहंगे में लिपटी एक छरहरी काया वाली कंटीली कन्या मेरे पीछे चाय की तश्तरी लिए मेरे गठीले बदन को निहार रही थी।
पीछे मुड़ कर देखा तो वो शरमा गई। उसकी कसी हुई चोली और नाभि के नीचे तक कसा हुआ लहंगा वाकई में गजब ढा रहा था।
‘छोटे मालिक, नाश्ता!’ उसने कहा।
‘रख दो! और सुनो, आगे से पूछ कर कमरे में आना!’
‘जी, गलती हो गई!’ उसने कहा और मुड़ कर जाने लगी।
कुछ सोच कर मैंने उसे रोका और कहा- अच्छा, तुम्हारा नाम क्या है?
‘रानी!’ उसने जवाब दिया।
‘हम्म! नाम तो अच्छा है, कब से काम करती हो?’
‘साहब, मैं तो हूँ ही आप लोगों की सेवा के लिए… और बड़े मालिक ने कहा है कि आपका खास ख्याल रखूं.. अगर किसी चीज़ की जरूरत हो तो संकोच मत कीजियेगा…’
सच में, रानी कर भरा-पूरा शरीर देख कर कोई भी संकोच नहीं करना चाहेगा…
‘साहब मैं रात में फिर से आऊँगी!’ कह कर रानी अपने मांसल नितम्बों को सेक्सी अदा से मटकाती हुई कमरे से चल दी।
रानी क्या गई मेरे तन बदन में आग लगा गई… मेरा 8 इंच का लंड एकदम से फनफ़ना उठा… दिल कर रहा था कि उसी समय उसे अपनी बाँहों में दबोच लूँ और उसकी मादक जवानी का रस पी लूँ…
खैर रात होने का इन्तज़ार करने लगा। इतने में मामा जी आ गए और कहने लगे- क्यों भांजे, कैसा लगा हमारा इन्तजाम… कोई कसर तो नहीं रह गई?
‘नहीं मामा जी, सब बहुत बढ़िया है!’
‘और कैसी लगी, तीखी मिर्ची?’ मामा जी ने कहा.
‘जरा संभल कर! शहर की मालों से अलग है, खास तुम्हारे लिए ही है…जी भर के मजे करना…और कोई कसर मत रखना…’
मैं समझ गया कि उस कंटाप को मामा जी ने मेरे लिए ही रखा है…
अब तो मैं भी पूरे जोश में था कि कैसे अपनी प्यास बुझाई जाये और रात का इन्तज़ार करने लगा।
रात का भोजन तो हो गया और मैं अपने कमरे में लौट गया और रानी का इन्तज़ार करने लगा।
नौ बजे के बाद कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला और सजी-धजी रानी मेरे कमरे में आई…
‘साहब आ सकती हूँ?’ उसने आवाज लगाई…
‘आ जाओ,’ मैंने कहा।
वो आई और बिस्तर पर मेरे बगल में बैठ गई… उसने कसी हुई चोली और कमर के बहुत नीचे से लहंगा पहन रखा था, उसके बालों में मोगरे और चमेली की माला सजी हुई थी, माथे पर बिंदी, आँखों में काजल और होंठों में गजब की लाली थी।
मैंने उसके कमर पर हाथ रखा और तुंरत अपनी बाहों में भींच लिया…
‘ज्यादा उतावले मत होईये साहब, रात तो अभी बाकी है और मैं तो आपकी ही हूँ!’ रानी ने कहा।
‘मुझे साहब मत कहो, मनोज कहो!’ मैंने कहा।
वो मेरी बाँहों में लिपट गई और उसके सीने के दो उन्नत उभर मेरे सीने में धँसने लगे।
यूँ तो मैंने शहर में बहुत लड़कियों को चोदा था मगर गाँव की किसी हसीना के साथ ये मेरा पहला मौका था।
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। गजब का स्वाद था! मेरे हाथ उसकी चिकनी पीठ पर फिसल रहे थे और मेरा 8 इंच का लंड धीरे-धीरे अपने शबाब पर आ रहा था। मगर मैं यह पारी बहुत देर तक खेलना चाहता था और उस नशीली रात का पूरा मजा लेना चाहता था, आखिर मुझे उस गाँव की कली को मसल कर जो रख देना था। रानी की कमर पर हाथ डाल कर मैंने उसे पूरा भींच लिया था। रानी भी अपने रसीले होंठों को मेरे होंठों पर घुमा रही थी जैसे कहना चाहती हो कि चूसो और चूसो मेरे रसीले होंठों को!
मेरे हाथ फिसलते हुए उसके मांसल नितम्बों पर जा पहुंचे और मैंने उसके मांसल नितम्बों को कस-कस के दबाना शुरू कर दिया। रानी जैसे पागल हुई जा रही थी। मैंने उसका लहँगा खींच कर सीधे उसकी कमर तक उठा दिया और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चिकनी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया। अब रानी भी पागल हो गई और मेरी कमीज को उतारना शुरू कर दिया। मैंने अपनी कमीज उतार दी और पैंट भी! अब मैं सिर्फ अपनी चड्डी में था और चड्डी में 8 इंच का लंड हिलौरें मार रहा था।
मैंने सीधे रानी को बाँहों में भर और पलंग पर पटक दिया, उसकी चोली को उतारा और उसके उन्नत उरोजों को सहलाना शुरू कर दिया, चुचूकों को मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसना शुरू किया। एक चुचूक को चूसता रहा और हाथ से उसकी दूसरी चुची को दबाना शुरू किया.
रानी के मुँह से उह.. उफ़. आह की आवाजें आने लगी और मैं बेहद उत्तेजित हो गया।
मैंने उसकी चुची को और जोर से दबाना शुरू कर दिया। रानी अपनी चिकनी जांघें मेरी जाँघों से रगड़ने लगी और अपनी कमर को मेरी कमर से सटाना शुरू कर दिया। मैंने रानी के मम्मे छोड़े और उसके पेट को सहलाते हुए उसके लहंगे में अपना हाथ घुसा दिया और उसकी चिकनी चूत को अपनी बीच की उंगली से हल्के-हल्के रगड़ना शुरू कर दिया। रानी की तो मस्ती का ठिकाना ही नहीं था..
‘मेरे राजा… मुझे चोदो . जल्दी चोदो… और मत तड़पाओ…’ कहते हुए मुझ पर हावी होने की कोशिश करने लगी.. मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी.
हाय… उसकी जवान.. कोमल चूत… थोड़ी सी पनिया गई थी…उसकी चूत पूरी तरह साफ़ थी…शायद मेरी लिए ही अपनी कोमल चूत को साफ़ करके आई थी।
मैंने अपनी जीभ से उसकी रसीली चिकनी चूत को चाटना शुरू किया तो रानी जोर से चिल्ला उठी- उफ़ ऽऽ… हाय… मर गई… इतना मत तड़पाओ न राजा… अब डाल दो अपना लंड मेरी बुर में…और मिटा दो इसकी खुजली…
मगर मैं कहाँ मानने वाला था… उसकी चूत को चूसना और चाटना मैंने नहीं छोड़ा… गाँव की छोरी की चूत का स्वाद कुछ अलग ही होता है… करारा…!
मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में और अन्दर तक डाला और उसके रस को पीने लगा.
रानी बार-बार अपने चूतड़ उछाल कर मेरे मुँह पर धकेलती और मैं अपनी जीभ उसकी चूत में और अन्दर तक डालता।
मजा आ गया उसकी चूत का स्वाद ले कर.. ऐसा मजा पहले नहीं आया था.. शहर की लड़कियों की चूत रानी की चूत के सामने कुछ नहीं थी.
बहुत देर तक रानी की चूत का मजा ले कर मैंने सोचा और रानी को अपने मूसल लंड का मजा भी दे दिया जाये…
मैं पलटा और अपने लंड को रानी के मुँह के सामने ले गया… बस फिर क्या था, खूंखार शेरनी की तरह रानी ने फ़ौरन मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी..
मैंने भी अपने लंड को उसके मुँह में पूरा अन्दर तक डाल दिया। रानी बहुत बेकरार थी और मेरे लंड के स्वाद ने उसको और भी बेकरार कर दिया था। वो पूरी तरह पनिया चुकी थी मगर मेरे लंड को बहुत मजे से चूस रही थी।
‘रानी! कैसा लगा मेरा लंड?’
‘मस्त है मेरे राजा! आज तक ऐसा तगड़ा लंड मैंने नहीं चखा है… आज तो लगता है मुझे बहुत मजा आने वाला है!’ रानी ने कहा।
रानी मेरा लंड चूसती जा रही थी और मैं उस एहसास का मजा ले रहा था।
मैंने फैसला कर रखा था कि आज रानी की चूत और गांड दोनों को फाड़ दिया जाये और रानी को ऐसा मजा दिया जाये कि साली सारी जिंदगी याद रखे…
इधर रानी मेरे लंड को अपनी जीभ से सहला रही थी और मैं उसकी गांड को जोर से मसल रहा था… उसकी चूचियों को तो मैं मसल-मसल कर लाल कर ही चुका था, अब बारी उसकी गांड की थी…
बहुत देर तक अपने लंड की चुसवा कर मैंने रानी को पीठ के बल लिटाया और सीधा उसकी केले के तने जैसे चिकनी जाँघों के बीच में आ गया। आज बहुत दिनों के बाद अपने मूसल से लंड को चूत का स्वाद चखाना था। मगर मैं रानी को थोड़ा और तड़पाना चाहता था, मैंने अपना आठ इंच के लंड तो रानी की चूत पर रखा और धीरे धीरे अपने लंड से उसकी पनियायी चूत को रगड़ने लगा..
रानी और भी उत्तेजित हो गई…और मेरी गाण्ड में अपने नाखून गड़ा दिए… मैंने मगर अपना लंड उसकी चूत में नहीं डाला… और फिर से लंड उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा… मैं रानी को और भी गर्म करना चाहता था ताकि उसको रगड़ कर चोद सकूँ… पता नहीं मेरा मूसल सा लंड झेल भी पायेगी या नहीं…
लंड को उसकी चूत में रगरते-रगड़ते मैंने एक झटके से अपना आठ इंच उसके अन्दर डाल दिया…
‘आऽऽऽहऽऽ…’ की जोर से आवाज़ आई और रानी एकदम तिलमिला उठी… मैंने रानी को कस के पकड़ा और अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दिया। रानी तड़फ़ती रही और मैंने उसको चोदना जारी रखा… सचमुच बहुत मजा आ रहा था।
रानी यूँ तो पहले चुद चुकी थी मगर उसकी चूत एकदम कसी हुई थी और मेरे जैसा मूसल लंड उसमें कभी नहीं गया था… मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड़ा और जोर से शॉट मारने लगा… उसकी चिकनी चूत की गर्मी मेरे लंड को और भी मोटा और कड़ बना रही थी.. एक तो कंटाप माल और उसकी कसी चूत… ऊपर से मेरा मूसल सा लंड…फिर दबा कर चुदाई होनी ही थी… मैं चोदता रहा और रानी चिल्लाती रही.
‘इतना जोर से मत चोदो.. मैं मर जाऊँगी… उफ़्फ़ऽऽऽ… आऽऽऽहऽऽ… ऊई…माँ…’ ये सब रानी के मुँह से निकलता रहा और मैं उसको कस-कस कर चोदता रहा… मैंने अपने दांत उसके चुचूकों पर गड़ा दिए और चुदाई चालू रखी…मुझे लगा शायद मेरा लंड पूरा अन्दर नहीं जा रहा है, एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे रखा और फिर शुरू हुई- रगड़म चुदाई…
मैं उसकी चूत के अन्दर तक अपना पूरा लंड पेल रहा था और रानी मजे ले रही थी…
रानी ने मेरी कमर पर नाखूनों के बहुत निशान बना दिए और मेरा लंड उसके चूत में और अन्दर तक जाता रहा…
काफी देर की चुदाई के बाद मैंने आसन बदला और ..रानी को अपने ऊपर ले आया…
ले रानी, अब तू मुझको चोद! देखता हूँ तुझमें कितना दम है…
अब रानी मेरे ऊपर थी… और इस अवस्था में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एकदम अन्दर तक जा रहा था.. मैंने उसके दोनों झूलते हुए स्तनों को दबाना शुरू किया और रानी मेरे ऊपर अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत से मेरे लंड को चोदती रही… मगर इस आसन में रानी को ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी.. मैंने फ़ौरन उसकी गाण्ड को अपने हाथों से पकड़ा और जोर से उसकी चूत को अपने लंड पर दबाना शुरू किया… रानी की तो हालत ख़राब होने लगी…
मैंने कहा- क्यों रानी? अभी तो पूरी रात बाकी है! अभी तो मुझे सुबह तक तुझे चोदना है… तेरी कसी चूत और गाण्ड का भोंसड़ा न बना दिया तो कहना…
रानी बस अपनी गाण्ड हिलाती रही और मुझे चूमती रही…
थोड़ी देर बाद मैंने रानी को फिर से पीठ के बल लिटाया और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया… तुंरत एक दानेदार कण्डोम लिया और अपने लंड महाराज़ को पहना दिया। देखता हूँ अब ये मेरी चुदाई कैसे सहन करती है…
बस जो मैंने उसे चोदना शुरू किया तो पूरा कमरा उसकी सिसकियों से गूंज उठा- उह.. आह .. माँ… मर गई… धीरे चोद… मैं मर जाऊँगी…
मगर मैं कहाँ मानने वाला था… उसे कस कर चोदा.
देर तक मैं उसे चोदता रहा… मगर अब थोड़ा थक गया था… मैंने सोचा थोड़ा आराम करते हैं… फिर रानी की गाण्ड मारेंगे…
मैं कस कर उससे लिपट गया… रानी तब तक तीन बार झड़ चुकी थी… और लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी… मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो देखा- कण्डोम फ़ट चुका था.
थोड़ा आराम करने के बाद… मैंने बोरोलीन क्रीम ली, अपने लंड पर और रानी की गाण्ड पर खूब अच्छे से लगाई… रानी को पेट के बल लिटाया और धीरे से अपना लंड उसकी गाण्ड के छेद में टिका दिया… उसकी गाण्ड कुंवारी थी.. पहले कभी नहीं चुदी थी… रानी भी थक कर बेहाल हो चुकी थी पर मेरा विरोध नहीं कर सकती थी.
मैंने धीरे से उसकी गाण्ड में लंड का सुपाड़ा डाला और अन्दर धकेलने की कोशिश करने लगा.. मगर बहुत कसी थी उसकी गाण्ड.. लंड अन्दर जा ही नहीं रहा था… आखिर मेरा सयंम जवाब दे गया… मैंने उसके नितम्बों को पकड़ा और एक झटके में अपना लंड उसकी गाण्ड में घुसा दिया.
उसकी गाण्ड से खून छलक गया… उसकी गाण्ड का छेद फ़ट चुका था… रानी इतनी थक गई थी कि चिल्ला भी नहीं सकती थी.. मगर मुझे परवाह किसकी थी… उसकी कसी गाण्ड में मैंने अपना लंड डालना चालू रखा और पूरा अन्दर तक डाल दिया… फिर धीरे से बाहर निकाला और एक झटके से अन्दर डाला। उसकी गाण्ड को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था… एकदम कसी हुई गाण्ड और मेरा मोटा लंड… मैं तब तक उसकी गाण्ड को चोदता रहा जब तक कि वो ढीली नहीं पड़ गई.
रानी एकदम बेदम थी… यही तो मैं चाहता था…
मगर इतनी देर चुदाई के बाद मेरा लंड भी गर्म हो गया था और चूत में झड़ना चाहता था.
मैंने उसके गाण्ड से अपना लंड निकाला और उसे अच्छे से पौंछा…थोड़ा सा तेल लगाया और रानी की चूत में फिर से डाल दिया .. अब रानी एकदम बेसुध थी… मैंने उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लगाया और उसे बाँहों में भर कर अब धीरे से चोदना शुरू किया…
बस करीब दस मिनट के बाद मैंने अपने वीर्य की पहली बूंद उसकी चूत में टपका दी… फिर तो एक पिचकारी सी छूटी और उसकी चूत को मैंने अपने वीर्य से भर दिया… बहुत सुख का अनुभव हो रहा था… गाँव की एक सेक्सी माल को मैंने इतनी देर तक चोदा… कि वो बेसुध हो गई…मैं रानी को चूमता रहा और अपना वीर्य गिराता रहा.
थोड़ी देर में शान्त होकर मैं रानी के बदन से लिपट गया.. मैं भी थक गया था .. और ऐसे ही अपना लंड रानी की चूत में डाले-डाले सो गया…
सुबह हुई तो पहले मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि रानी वैसे ही बेदम नंगी पड़ी थी और बिस्तर पर थोडा सा खून लगा था… मैं समझ गया यह खून उसकी कोरी गांड की चुदाई के कारण लगा है।
मैं उठा और रानी का एक चुम्मा लिया…मेरा लंड इतनी चुदाई कर के एकदम झन झन कर रहा था. मैंने रानी को कपड़े से ढक दिया और बाथरूम की ओर चल दिया।
अगले हिस्से में.. मामा और रानी की चुदाई का किस्सा बयान करूँगा.
जरूर लिखें कि आपको मेरी और रानी की चुदाई पसंद आई या नहीं! Hindi Porn Stories
मेरे पतिदेव का एक Hindi Sex Stories तथाकथित भाई जो उन दिनों मेरे परिवार का हिस्सा बना हुआ था… मेरा भी दोस्त बन गया था, बल्कि काफ़ी अन्तरंग हो गया था। उसने मुझसे एक बार सेक्स करने का वादा ले लिया था, मैंने शर्त रखी थी कि अपने शहर से बाहर ही उसके साथ सेक्स करूँगी। मैं करूँ या न करूँ का फ़ैसला नहीं कर पा रही थी। वह हमेशा मौके की तलाश में रहता, एक बार दूसरे शहर में मौका मिला भी तो मैंने खुद को बचा लिया था।
अब वह जब भी अकेले मिलता या फ़ोन पर बातें करता तो शिकायत जरूर करता कि आपने वादा करके उसे निभाया नहीं !
मैं उसे यह कह कर टालती कि मैं कोई मरी या भागी जा रही हूँ आगे और भी मौके आयेंगे। यूँ वह घर में मुझे अकेले पाकर भी कभी छेड़ता नहीं था बस मीठी-2 बातें करके मुझे पटाने की कोशिश करता और इस तरह वह मेरा विश्वास ही जीत रहा था।
उस घटना के करीब दो माह बाद मेरे पति 3-4 दिनों के लिये बाहर गये हुए थे, उस दौरान वह रोज ही मुझे अपना वादा पूरा करने की याद दिलाता। मेरे यह कहने पर कि शहर से बाहर का वादा है मेरा, तो वह कहता कि तब तो मिल चुका मुझे आपका संसर्ग……… जब भैया शहर से बाहर हैं यानि कि आपका पोल तो खुलने से रहा, और कोई समस्या तो है नहीं। चूँकि वह तकरीबन रोज ही आता था अतः पड़ोसियों को भी कोइ शक नहीं होता। अन्ततः उनके लौटने से एक दिन पहले उसके लगातार मनुहार करने पर मैं पिघल गई, और रात में देने का वादा इस शर्त पर किया कि आज के बाद वह फ़िर कभी मुझसे सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं करेगा अन्यथा मैं पति को सब कुछ बता दूँगी।
उसने मुझसे वादा किया कि ऐसा ही होगा। उस शाम वह सात बजे ही आ गया और बच्चों के साथ टी वी देखता और बातें करता रहा। डिनर के बाद तीनों बच्चे मेरे बेडरूम में सो गये क्योंकि उसी में ए सी था, पति के बाहर जाने पर हम चारों उसी में सोते थे। दस बजे तक नौकर भी बालकनी में चला गया, हम दोनों बैठक में टी वी देखते बैठे रहे, मेरा तो घबराहट के कारण दिल धक-धक कर रहा था, जब नौकर भी सो गया तो उसने धीरे से दरवाजा बन्द कर दिया और बैठक के कमरे की लाइट बुझा कर मुझे पकड़ कर दीवान पर ले गया।
मैं उस दिन एक टू-पीस-नाइटी पहने थी। अंधेरे में वह मुझे बेतहाशा चूमने लगा और अपनी बाहों में लेकर दीवान पर लोट-पोट होने लगा……… वह अत्यन्त ही उत्तेजित था और मेरी भी हालत बुरी थी……… डर, घबराहट और शायद कुछ हद तक उत्तेजित भी हो चुकी थी मैं !……… शायद मानसिक रूप से मैं उसके साथ सम्भोग के लिये तैयार हो चुकी थी………
उसने ज्यादा देर न करके मेरी नाइटी और साया ऊपर करके अपने पैण्ट की जिप खोल कर अपना लिंग निकाल कर मेरी योनि में डाल ही दिया ………
मुझे तो कुछ होश ही नहीं रहा कि आगे क्या-क्या हुआ और कैसे-कैसे उसने किया………
बस इतना याद था कि उसका लिंग मेरे पति की तुलना में बहुत बड़ा और मोटा था। शायद पूरा गया भी नहीं था और मैं चिल्लाई भी थी आहिस्ता से ……… शायद मैं भी सहयोग करने लगी थी, उसका जल्दी ही पतन हो गया जिसका मुझे अन्दाज नहीं हुआ ……… फ़िर पता नहीं मैं या वह मुझे खींचकर बच्चों के खाली बेडरूम में ले गया और दरवाजा अन्दर से बन्द करके हम दोनों फ़िर गुत्थम-गुत्था हो गये………
शायद उसने अपनी पैण्ट उतार दी थी पर मैं नाइटी में ही थी, चूँकि मासिक के दिनो के अलावा मैं पैण्टी नहीं पहनती इसलिये मेरी योनि तक पहुँचने में उसे कोई रुकावट नहीं हुई। मुझे इतना ही याद है कि वह बहुत ही जोर-जोर से मुझे मुझे चोद रहा था और मस्ती में मैं उसके ऊपर चढ़ कर अपनी बुर उसके पोल जैसे लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगी थी। सचमुच मुझे भी काफ़ी अनन्द आ रहा था और उस समय कोई अपराध-बोध नहीं हो रहा था, बस एक आदिम-तृप्ति की चाह बच रही थी ………… मुझे और कुछ याद नहीं कितनी देर तक उसने मुझे किया ……… मैं स्खलित हुई या नहीं ……… वह कब स्खलित हुआ !
उसने बाद में बताया कि मेरा अत्यन्त उत्तेजित और रौद्र रूप देखकर (महसूस कर क्योंकि अंधेरा था न) वह अन्दर ही अन्दर डर गया कि मुझे कुछ हो न जाये।
अच्छा, एक बात और …… हमेशा चटर-पटर करने वाली उसकी जुबान उस सारे क्रिया-कलाप के दौरान एक बार भी नहीं खुली। बस चुपचाप वह मुझे लिये जा रहा था …… और ज्वार शान्त होने पर रात ही में बारह-एक बजे के बीच चला गया। हमारे काम्प्लेक्स में उस वक्त तक लोगों का आना जाना लगा रहता था अतः कोई बदनामी का डर नहीं था। मैं उसी कमरे में सो गई।
सुबह मेरा तेरह वर्षीय बड़ा बेटा पूछने लगा- मम्मी चाचा और आप रात में हम लोगों के कमरे में सोये थे क्या? मैं रात में पेशाब करने उठा तो आप दोनों के चप्पल दरवाजे के बाहर देखे थे?
मुझे काटो तो खून नहीं, पर मैं अपने धड़कते दिल को सामान्य रखने का यत्न करते हुए बोली- तुम्हें नींद में गलतफ़हमी हुई होगी क्योंकि चाचा तो साढ़े दस तक चले गये थे। मुझे तुम तीनों के साथ सोने में दिक्कत हो रही थी तो मैं उस कमरे में चली गई। खैर उस दिन के बाद मुझे कुछ अपराध-बोध भी हुआ और मन को तसल्ली भी देती कि अब ऐसा नहीं करूँगी, एक अनुभव ही काफ़ी है। वरना पाँव फ़िसला तो इज्जत जाते देर नहीं लगनी। Hindi Sex Stories
अन्तर्वासना पढ़ने Antarvasna वाले पाठकों को मेरी तरफ से यानी ॠचा सिंह की तरफ से एक बार फिर से बहुत बहुत प्यार ! सब के लौड़े खड़े रहें, हर औरत को उसका मर्द रात को रोज़ चोद कर संतुष्ट करे, किसी की चूत प्यासी न रहे !
खैर दोस्तो, अपने बारे में मैं पिछली लिखत में बता चुकी हूँ कि किस तरह पैसे के पीछे भागते हुए मैंने बड़ी उम्र के बंदे से अपना गर्भ छुपाने के लिए शादी की।
उस दिन ऑफिस में जब मैं ननद के जेठ के लौड़े के साथ खेल रही थी तो पति का फ़ोन आने से हमारा सारा काम खराब हो गया और पहली बार एक दूसरे के कुछ ही दिनों में बने दीवानों को सिर्फ चुम्मा-चाटी करके अलग होना पड़ा।
उसके बाद उसका जेठ एक ही मिशन में लग गया, मुझे चोदने के लिए सुरक्षित जगह और आखिर उसको अपने दोस्त के घर का सहारा लेना ही पड़ा और मुझे वहाँ ले गया। हम दोनों एक दूसरे के इतने दीवाने बन चुके थे कि कमरे में घुसते ही बिना देखे भूखे की तरह एक दूसरे के जिस्मों से लिपटने लगे। दोस्त के सामने ही एक दूसरे को नंगा करके खेलने लगे।
तभी पीछे चूत पर जब किसी का स्पर्श पाया तो देखा उसका दोस्त जिसका लौड़ा कोई कम नहीं था, मेरी चूत चाटने लगा।
दो हब्शी जैसे लौड़े मेरी आँखों के सामने थे। तभी जेठ जी ने मुझे अपने नीचे लिटा कर मेरे गोल-मोल मम्मों से खेलने लगे। इतने में उसका दोस्त अपना लौड़ा मेरे मुँह के पास लाया तो मैं रोक ना पाई और पक्की रंडी की तरह उसके साथ खेलने लगी। जल्दी ही उसने मेरे मुँह में घुसा दिया।
उसका इतना मोटा था कि चूसने में तकलीफ होने लगी। लौड़े को चाट-चाट कर उसको मजे देने लगी। जेठ जी मेरे मम्मों में इस कदर उलझे, इतने दीवाने हुए कि मानो खा ही जायेंगे।
तभी उनका दोस्त मुझे चूत चुदवाने के लिए कहने लगा। लेकिन तभी जेठ जी को होश आया और बोले- साले, मेरा माल है ! पहले मैं चोदँगा ! तब तक दारु और चिकन का इंतजाम करवा !
उसने अपनी जिप बंद की और दारु लेने चला गया। मैं अब उसका लौड़ा चूसने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना लौड़ा रख दिया और झटके से अन्दर किया। थोड़ी सी चुभन हुई, सह गई। लेकिन जब दूसरा झटका लगा तो मेरी सांस अटक गई गले में !
कितना ज़बरदस्त लौड़ा होगा जो एक खेली-खाई को भी तकलीफ दे रहा था !
चीरता हुआ पूरा लौड़ा मेरी चूत में था, वो दोनों टाँगे कन्धों पर रख मेरा भरता बनाने लगा। मैं हाय हाय करके दर्द सहती हुई उसको भड़का रही थी।
कुछ देर सीधा चोदने के बाद उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से चूत में घुसा दिया और घुसता गया। उसकी हर चोट से जब उसके टट्टे मेरे दाने पर लगता तो मुझे स्वर्ग दिखता। काफी देर ऐसे चोदा !
क्या बंदा था, झड़ने का नाम नहीं था !
मैं एक बार छुट चुकी थी। तभी फिर से उसने मुझे अपने नीचे लिटाया और मुझ पर छाने लगा। तेज़ तेज़ झटके मारता हुआ आखिर उसने अपना गाढ़ा गर्म-गर्म माल मेरी चूत में छोड़ा तो मैं भी उसके साथ दुबारा झड़ गई और उसको कस लिया। दोनों टांगों का नाग बल उसकी कमर के चुफेरे(चारों ओर) डाल दिया ताकि एक एक बूँद चूत में निकले।
दोस्तो, यह सुख मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सुख था, अब तक का सबसे बड़ा लौड़ा मेरी चूत में था।
उसका दोस्त दारु लेकर आया और मेरी ननद का जेठ उठ कर पेग बनाने लगा तो उसका दोस्त मुझ पर छाने लगा। उसने अपना मोटा लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया और फिर मैंने उसका मुँह में लेकर खूब चूसा। खड़ा होते ही फिर से तकलीफ देने लगा और चाटने लगी।
दोनों मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगे। एक पेग अन्दर जाते मैं और गन्दी औरत बन चुकी थी। कभी एक का चुप्पा मारती तो कभी दूसरे का !
मैंने पर्स से कंडोम निकाल कर उसके दोस्त को दिया। उसने कंडोम डाल मेरी चूत में घुसा दिया। कुछ देर पहले झड़ी थी, थोड़ा चुभ रहा था।
मैंने कहा- एक-दो पेग लगा लो ! तब तक मेरी चूत इसको सह लेगी !
उसने गांड के नीचे तकिया लगा दिया जिससे मेरी गांड का छेद साफ़ दिखने लगा। उसने पहले थूक लगा ऊँगली गांड में डाली। फ़िर उसने बिना तैयार करवाए एक दम से झटका देकर गाण्ड में पेल दिया। मेरी चीखें निकलने लगीं।
उसने म्यूजिक सिस्टम लगा आवाज़ तेज की, जेठ ने मेरी दोनों बाहें पकड़ ली और उसके दोस्त ने मेरी गांड चीर दी, फट गई मेरी गाण्ड ! मैं रोने लगी। वो पूरा डालकर रुका, खून से लथपथ उसका लौड़ा जब उसको निकाल साफ़ करते देखा तो मैं और रोने लगी। उसने नया कंडोम डाला और फिर से घुसा दिया।
अब जेठ का लौड़ा फिर से शबाब पर था। दो हब्शियों में फंसी पड़ी थी मैं ! लेकिन तीन पेग जाते ही मैं रंडी बन गई और उसकी ओर पीठ करके उसके लौड़े पर बैठ कर गांड मरवाने लगी। जेठ बीच में आया और एक साथ ही मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा और घुसा ही दिया।
दोनों खुल कर फाड़ रहे थे मुझे !
कमीनो, मुझे चलने लायक छोड़ोगे या नहीं?
हट बहन की लौड़ी ! कुतिया ! रांड साली ! इतने लौड़े लिए हैं, फिर भी नाटक करती है?
पूरा दिन मुझे चोदते रहे ! सच में चलने लायक नहीं छोड़ा मुझे ! नशा भी पूरा !
किस्मत से पति उस रात घर नहीं आने वाले थे, दो दिन के लिए मुंबई गए हुए थे।
फिर एक रात पति ने मुझे उससे चुदवाते हुए पकड़ लिया। खूब पीटा, मारा कमीने ने !
यह घर मेरा है ! मेरे नाम में ! मैं नहीं रहना चाहती तेरे साथ !
उसने अपना बेटा लिया और चला गया, तलाक ले लिया।
ननद की जेठानी को भी जब पति की करतूत का पता चला तो वो भी उसको छोड़ चली गई।
उसके बाद इन्टरनेट पर मेरी दोस्ती एक असली अमेरिकन हब्शी से हुई। वो मुझे बहुत पसंद करने लगा। वेबकैम पर उसका लौड़ा देख में भी फ़िदा हो गई। उसने मुझे शादी के लिए कहा, मैंने हाँ कर दी उसने मुझे स्पोंसर किया और मैं अमेरिका गई, जहाँ उसने मेरे साथ कोर्ट मैरिज़ कर ली।
फ़िर क्या हुआ, वो अगली कड़ी में लिखूंगी ! Antarvasna
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